भाई ने मेरी चूत चोद कर मेरी अन्तर्वासना जगा दी -6
हाय मैं ऋतु.. अन्तर्वासना पर मैं आपको अपनी चूत की अनेकों चुदाईयों के बारे में बताने जा रही हूँ.. आनन्द लीजिएगा।
अब तक आपने जाना..
सुधा एक हाथ में जूस लेके आई और मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहने लगी- ले ऋतु.. जूस पी ले.. बहुत थक गई है और फ्रेश हो ज़ा.. घर भी चलना है..
मैं- हाँ सुधा..
मैंने उनका हाथ पकड़ा और कहा- सुधा जो आज तुमने मेरे को सुख दिया है ना.. मुझे कभी नहीं मिला.. मन करता है कि ऐसे ही राकेश जी के नीचे जिंदगी गुज़ार दूँ।
मैंने टाइम देखा तो 4 बज रहे थे। मैं जूस पीने लगी.. मेरे से उठा भी नहीं जा रहा था.. जैसे-तैसे मैं बाथरूम में गई और तैयार होने लगी।
मैं और सुधा उनकी गाड़ी से घर आ गए। मैं बहुत थकी हुई थी और हम दोनों जल्द ही सो गए।
अब आगे..
कुछ देर बाद मेरे फोन पर कॉल आई और हम दोनों घन्टी की आवाज से उठ गए, मैंने कॉल रिसीव किया.. तो मम्मी का था, उन्होंने बताया कि वो नानी के साथ इलाज के लिए एक महीने के लिए मुंबई जा रही हैं।
मम्मी ने कहा- अब मैं एक महीने के बाद आऊँगी.. सुधा है या चली गई?
मैं- हाँ हैं.. यहीं हैं.. लो आंटी.. मम्मी का कॉल है।
सुधा- हाँ.. हैलो नीतू..
सुधा ने मेरी मम्मी से बातचीत करना शुरू की।
‘कैसी है सुधा.. और ज्यादा परेशान तो नहीं किया इसने?’
सुधा- नहीं यार.. ये तो बहुत अच्छी है.. एक बात कहूँ तेरी ऋतु बिल्कुल तेरे पर गई है.. माल बन गई है माल.. मेरा तो मन आ गया उस पर..
मम्मी- यार अभी वो बच्ची है.. तू उसके सामने ऐसे बात मत कर..
सुधा- नहीं यार.. वो तो बाथरूम में गई है।
‘बाथरूम में क्यों..?’
तभी आंटी ने मेरे दूध दबा दिए.. मेरे मुँह से हल्की सी ‘उःम्म्म्मम.. आह्ह….’ निकल गई।
सुधा आगे फोन पर बोली- गई होगी अपनी चूत में उंगली करने..
मम्मी- ठीक है.. तुम उसका ध्यान रखना.. मैं फोन रखती हूँ.. और वो राजू भी 15 दिन बाद आएगा..
मम्मी ने कॉल काट दिया।
सुधा- कहो मेरी बुलबुल.. अब तो तुम बिल्कुल फ्री हो.. जैसे चाहो.. वैसे रहो.. तो आज रात भर मजे लें?
मैं बोली- आज तुम मुझे पैसे कमवा दो..
सुधा बोली- क्या बात है.. एक ही चुदाई में रंडी बनने को तैयार है?
मैं- नहीं यार ऐसी कोई बात नहीं है.. बस पैसे खत्म हो गए हैं.. या तुम मुझे उधार दे दो।
सुधा- कमाई ही करवा दूंगी.. बस ये बता.. कि कोठे पर चुदेगी.. या अपने घर पर.. बता..? एक रंडी है मेरी जानने वाली.. उसी से बात करनी पड़ेगी।
मैं- सुधा जैसे आपका मन करे.. जहाँ चाहो.. मुझे वहाँ चुदवाओ.. जिसमें आपको ख़ुशी मिले.. तुम ही मेरी सरदार हो.. मैं तेरी गुलाम..
सुधा हँसने लगी और कहने लगी- तुझे इस शहर की टॉप की रंडी बनाऊँगी.. तू चिंता मत कर..
और सुधा ने एक कॉल किया.. बोली- हैलो.. क्या कर रही है..
सुधा ने कुछ देर बात की और किसी को मेरे घर पर बुला लिया।
कुछ देर बाद गेट पर रिंग बजी..