डेटिंग: शादी से पहले के सम्बन्ध
आम तौर पर भारत में डेटिंग का मतलब विपरीत लिंग के साथी के साथ सेक्स ले लिये कहीं जाने से लिया जाता है।
लेकिन वास्तव में शादी से पहले विपरीत लिंग के दो युवाओं के बीच उपजे सम्बन्धों को डेटिंग के रूप में जाना जाता है और दो व्यक्तियों की इच्छा से प्यार और अपनी सम्भावनाओं का पता लगाने के लिए वैवाहिक प्रतिबद्धता की जगह रखे गये सम्बन्ध के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
यह आमतौर पर विभिन्न सुसंगत मुद्दे जैसे एक दूसरे से आशाएँ और प्रेम, विश्वास, और समझौते के सवालों के साथ होता है।
शादी से पहले के सम्बन्ध जरूरी नहीं कि शादी में बदलेंगे या उसमें माता पिता का अनुमोदन रहेगा।
जानें कि शादी से पहले का रिश्ता क्या होता है।
जोड़े सही मायने में स्वतन्त्र होते हैं और एक दूसरे के हित ध्यान में रख कर अपने निर्णय लेते हैं, उनके निर्णयों में समाज को महत्व नहीं दिया जाता है।
इससे उनको, वो एक दूसरे के लिए अनुरूप हैं या नहीं, इसका पता लगाने में मदद मिलती है लेकिन कहीं ना कहीं वो समाज से दूर हो जाते हैं।
इस तरह के रिश्तों में शारीरिक सम्बन्ध भी हो सकते हैं। इसका मतलब यह है कि वो यकीन करना चाहते हैं, कि वे न केवल भावनात्मक रुप से अनुरूप है, बल्कि शारीरिक रूप से भी अनुरूप हैं।
आज अधिकतर जोड़े सेक्स को एक मौलिक सिद्धान्त मानते हैं, जो यह मानते हैं कि यह वास्तव में उनकी अनुरूपता को परिभाषित कर सकता है।
वास्तव में बन्धन में बन्धने से पहले जोखिम कारकों और अपेक्षाओं का आकलन करने के लिए शादी से पहले रिश्ता रखना यह एक अच्छा तरीका है।
शादी से पहले सम्बन्ध को माता पिता के द्वारा नियोजित नहीं किया जा सकता है फ़िर भी लड़का-लड़की अपने माता पिता को अपने सम्बन्धों के बारे में सूचित कर सकते हैं।
डेटिंग में आम तौर पर लड़का-लड़की अपने दम पर अपना साथी चुनते हैं। साथी चुनने के सम्भव तरीके हैं: सामाजिक नेटवर्किंग साइट, या अन्य स्थान जहाँ दो व्यक्ति लगातार मिलने की सम्भावना होती है या किसी दोस्त के दोस्त को डेट कर सकते हैं।
लिव-इन
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एक साथ रहने का निर्णय लेना शादी से पहले सम्बन्ध की ओर बढ़ने का एक कदम है। डेटिंग के इस उन्नत चरण में वो एक दूसरे के साथ रहने के इस प्रयोग से कितने सहज़ है यह मुख्य प्रश्न होता है।
वे एक दूसरे के साथ रह सकते है, लेकिन अभी तक सामाजिक रिश्ते में नहीं जा सकते हैं। यह कदम एक उन्नत स्तर पर आता है, जब जोड़े जानना चाहते हैं कि उनके नये रिश्ते की प्रतिबद्धता कहाँ तक है।
आमतौर पर उनको एक दूसरे से क्या अपेक्षाएँ हैं और उनके भविष्य की योजनाओं के बारे में उनको पता होता है, उन्होंने सामाजिक बन्धन में बन्धने के लिए एक समय सीमा तय किया होता है यह मान कर ही सम्बन्ध बनाए जाते हैं।