प्रिया की नथ-3
प्रिय पाठको, यह मेरी कहानी प्रिया की नथ का तीसरा भाग है, मैंने प्रिया के साथ जब से सम्बन्ध बनाये तो मेरी तो चांदी हो गई थी, जब भी मेरा मन करता मैं उसे क्लास में रोक कर चूसता रहता, उसके मुलायम मम्मे मैं अपने हाथ में लेकर दबाता ही रहता। रोज़ मैं उसके मम्मे चूसने के लिए स्टाफ रूम में ले जाता और बहुत देर तक उसके मम्मे चूसता रहता। और वो जिस भी दिन स्कर्ट पहन कर आ जाती, उसी दिन उसकी चूत में अपना लिंग घुसा ही देता।
मैंने प्रिया के साथ वो सब काम किये जो मैंने कभी किसी ब्लू फिल्म में देखे थे। मैं उसके होंठों को एक दिन अपने होंठों से मिलाया और इस तरह रगड़ा कि उसके होंठ एकदम लाल हो गए और ऐसा लगा कि उनसे अभी खून निकल जाएगा।
और मैं उसे अक्सर दरवाज़े का सहारा लगा कर, उसकी मम्मे अपने हाथ में पकड़ कर उससे गन्दी बातें करता, मैं अक्सर उससे कहता- तू मेरी रखैल है! तेरी तो मैं रोज़ फुद्दी लूँगा!
और वो हंस-हंस कर मेरी सारी बातें सुनती रहती और मुझे मज़े देती रहती।
हमारे कॉलेज के पास एक पिक्चर हॉल था जहाँ मैं और वो अक्सर जाते और सबसे फ्लॉप पिक्चर के टिकट लेकर कोने में बैठ जाते और हमेशा वहाँ भी उसकी टी-शर्ट ऊपर करके उसके मम्मे चूसता रहता।
मुझे उसके नर्म, मुलायम मम्मों को चूसने में बड़ा मज़ा आता।
और फिर अपना लंड निकाल कर उसके हाथ में देकर उसे चूसने को कहता। पूरी पिक्चर हम ऐसे ही देखते।
अक्सर हम लोग कहीं घूमने जाते और हम होटल में रहते तो मैं उसे कभी कपड़े नहीं पहनने देता था। उसकी गाण्ड मोटी होती जा रही थी और मुम्मे भी बड़े होते जा रहे थे, और वो एक औरत बनने की ओर अग्रसर होती जा रही थी। जिसका पूरा श्रेय मुझे ही जाता है।
मैं अक्सर अपने दोस्तों के सामने भी उसे चूम लेता था और जब मन में आता उसकी चूत में हाथ डाल के उसकी चूत की महक ले लेता था।
मैं उसे अपनी गाड़ी में बिठा कर घुमाने ले जाता और हर बार गाड़ी कही खड़ी करके उसकी चूत का सेवन ज़रूर करता, मेरा मन हमेशा करता था कि मैं उसकी एक बार खुले में और बारिश में लूँ!
तो यह मौका मुझे जल्दी ही मिल गया।
मुंबई में मेरा एक दोस्त रहता था, उसका अपना फ्लैट था एक पॉश कालोनी में, जहाँ उसका अपना टैरेस-गार्डन था। मैं जब वहाँ गया तो प्रिया और मैं उसी दोस्त के फ्लैट में रुके। वहाँ मेरी उसे खुले में चोदने की तमन्ना भी पूरी हो गई। मेरा हाथ अक्सर प्रिया की चूत में ही रहता था, और जैसे ही मैं मम्मे सहलाना चालू करता तो उसके चुचूक एकदम सख्त हो जाते और मैं उनसे खेलता रहता। मुझे लड़कियों में उनके मम्मे बड़े पसंद थे, जब तक लड़की के मम्मे बड़े न हों तब तक मेरे लिए उस लड़की के साथ सेक्स करने का कोई मतलब ही नहीं था।
प्रिया ने मुझे एकदम हबशी बना दिया था, मेरा दिन और रात बस उसके जिस्म के साथ खेलने में ही चला जाता था।