शरम की क्या बात
प्रेषक – अंकित सिंह
मेरा नाम अंकित है। सबसे पहले मैं सभी लंडों और प्यारी चूतों को सलाम कहता हूँ।
यह बात तब की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मेरी कक्षा की एक लड़की जिसका नाम शिवानी था, दिखने में बहुत सुन्दर थी। उसे देखकर किसी भी लड़के का लण्ड खड़ा हो सकता था।
हम दोनों में अच्छी दोस्ती थी। हम लोग कक्षा में आगे-पीछे ही बैठते थे। हम दोनों एक-दूसरे को खूब चिढ़ाते थे। मैंने कभी भी उसे उस नज़र से नहीं देखा था, पर एक दिन ऐसा कुछ हुआ कि…
हुआ यह कि उसकी तबीयत ख़राब हो गई थी। डॉक्टर ने उसे २ हफ्ते तक आराम करने की सलाह दी थी। इसी कारण उसका स्कूल का काम छूट गया था। लगभग २ हफ्तों के बाद जब वह स्कूल आई तो उसने मुझसे कहा कि मेरा काम अधूरा है और उसे मेरी मदद चाहिए, क्योंकि मैं अपनी कक्षा का सर्वश्रेष्ठ पढ़ाकू भी था, साथ ही उसका घर मेरे घर के समीप भी था। मैंने भी उससे कह दिया कि आज स्कूल के बाद साथ में ही चलेंगे मेरे घर, वहीं तुम काम कर लेना।
छुट्टी के बाद हम दोनों घर जा रहे थे। चूँकि वह जुलाई का महीना था, अचानक बारिश शुरु हो गई। उसके सारे कपड़े गीले हो गए, जिससे उसकी चूचियाँ साफ दिख रहीं थीं।
ज़्यादा भीग जाने के कारण मैंने उससे कहा- जाओ अपने घर जाकर कपड़े बदल लो।
पर उसने कहा- मेरे घर पर आज कोई नहीं होगा और ताला लगा होगा।
मैंने कहा, ठीक है, चलो फिर मेरे घर।
मैं पहले बता दूँ कि मैं लगभग रात के ८ बजे तक अकेले रहता हूँ, क्योंकि मेरे मम्मी, पापा और दीदी तीनों ही नौकरी पर चले जाते हैं।
घर पहुँच मैंने उसे अपनी बहन के कपड़े दे दिए। चूँकि दोनों लगभग बराबर ही थीं उसे मेरी बहन के कपड़े ठीक-ठाक आ गए। उसने मुझसे कहा कि अपना मोबाईल दे दो, मैं अपनी मम्मी को बता दूँ कि मैं तुम्हारे घर पर हूँ। मैंने उसे मोबाईल दे दिया और ख़ुद कपड़े बदलने चला गया।
मैं जब १५ मिनटों के बाद आया तो मैंने देखा कि वह मेरे मोबाईल में ब्लू-फिल्म की क्लिप देख रही है। मैं डर गया कि कहीं वह गुस्सा ना हो जाए।
मुझे देखकर उसने जल्दी से वीडियो बन्द कर दी। मैंने उससे पूछा कि क्या देख रही थी, तो वह शरमा गई।
मैंने हिम्मत से काम लेते हुए उससे कहा- इसमें शरम की क्या बात। ब्लू-फिल्म देखकने में कोई बुराई नहीं।
मैं उससे पूछा – “मज़ा आया?”
तो उसने धीरे से हाँ कहा।
मैंने कहा- चलो साथ में देखते हैं। मोबाईल पे तो छोटी है, चलो कम्प्यूटर पर दिखाता हूँ।
मैंने कम्प्यूटर चालू करके उसपर एक ब्लू-फिल्म चालू कर दी। हम लोग साथ में लेट कर ब्लू-फिल्म देखने लगे।
वह गरम होने लगी। उसकी चूचियाँ एकदम कड़ी हो गईं थीं, मैं ग़ौर कर रहा था। मैंने धीरे से उसके पैरों पर हाथ रख दिया और वह कुछ ना बोली।
यह देख मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने उसकी चूचियाँ दबा दीं, और उसके होठों पर चुम्बन ले लिया।