जमशेदपुर की गर्मी-1
प्रेमशीर्ष द्वारा लिखित एवम् प्रेम गुरु द्वारा संशोधित और संपादित
मैं प्रेमशीर्ष अपनी पहली कहानी लेकर हाज़िर हूँ। मैं जमशेदपुर शहर में रहता हूँ और मेरा कद 5 फीट 10 इंच है और मेरी उम्र 24 वर्ष है। मैं आपको एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ जो कुछ दिन पहले ही हुई है :
मेरे पापा के करीबी दोस्त गुप्ता अंकल को ट्रेनिंग के लिए यूरोप जाना पड़ा तो वो अपने साथ अपने परिवार को भी घुमाने ले गए पर उनकी 19 साल की बेटी कोमल अपनी स्नातक की परीक्षा के कारण नहीं जा पाई। इसलिए उसकी देखभाल के लिए उन्होंने उसे हमारे घर पर छोड़ दिया। कोमल दिखने में बहुत ही ज्यादा सुन्दर है, 5 फीट 7 इंच शानदार कद, दूधिया गोरा रंग, नीली आँखें, लंबे बाल, गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नरम मादक होंठ, संगमरमर जैसा बदन। अपने नाम के अनुरूप एकदम कोमल ! जो भी उसे देखता है देखता रह जाता है।
उसके प्रति मेरे मन में आकर्षण तो बहुत था पर कभी उससे बहुत ज्यादा बात नहीं हो पाती थी। यह पहला मौका था जब हमारे पास साथ बिताने के लिए इतना समय था। जाने कितने सालों से कोमल रानी को अपनी कल्पनाओं में महसूस करके मैं अपनी काम-ज्वाला अपने हाथों से आहूत करता रहा था पर पहली बार मुझे उम्मीद जगी थी कि मेरी वर्षों की इच्छा पूरी हो सकती है।
अब आपको उस हसीन पल के बारे में बताता हूँ। जब वो आई !
उस समय यहाँ बहुत ही ज्यादा गर्मी पड़ रही थी, घर में सिर्फ एक कमरे में ए.सी। है, तो वो कमरा हमने उसे दिया तो उसने यह कह कर मना कर दिया कि मम्मी-पापा को उस कमरे की ज्यादा जरूरत है क्योंकि उनकी तबियत ठीक नहीं थी। वो दूसरे कमरे में सो गई और मैं अपने कमरे में आकर सोने की कोशिश करने लगा।
पर आँखों में नींद कहाँ थी ! कोमल का नाजुक बदन ! मदमस्त जवानी ! सब मुझे बहुत उत्तेजित कर रहे थे। मैं उठ कर अपने बाथरूम में चला आया और नंगा होकर नहाने लगा और अपने व्याकुल लंड महाराज को सांत्वना देने लगा। मैं मन की कल्पना में कोमल का चूत मर्दन करने लगा और हाथों से लंड की ज्वाला शांत करने लगा : आह कोमल….. मेरी रानी… तेरी मदमस्त जवानी…. अब चूत चूस रहा हूँ… तेरे कठोर स्तन… आह … ओह ..। ये गया मेरा सुपारा तेरी चूत के अंदर ! वाह क्या मजा है ! अन्दर बाहर…. और तेज… और तेज ! फच्च फच फच….
और लंड ने झूठी कल्पना पर ही अपना लावा उगल दिया। मैं तौलिया लपेट कर अपने कमरे में आया तो देखा जाने कब से यहाँ कोमल खड़ी थी। एक बार तो मैं बुरी तरह से डर गया कि कहीं इसने कुछ देखा तो नहीं? क्योंकि मैंने दरवाजा ठीक से बंद नहीं किया था, पर दूसरे ही पल लगा- अगर देखा होगा तो ठीक ही है।
“अरे कोमल इस वक्त यहाँ ?”
“प्रेम, गर्मी इतनी ज्यादा है कि मुझे बिलकुल भी नींद नहीं आ रही है, प्लीज़ कुछ करो न…. ”
मैंने कहा- चलो, छत पर सोते हैं !
और वो मान गई।