माँ बेटी को चोदने की इच्छा-42
अभी तक आपने पढ़ा…
मैंने पुनः तेज़ी से विनोद को बुलाते हुए खटखटाया.. तभी विनोद बोला- क्या है?
तो मैं बोला- दरवाज़ा खोलेगा या बस अन्दर से ही बोलेगा.. ये मैं बोल ही रहा था कि अचानक से रूचि ने दरवाज़ा खोल दिया और जैसे मेरी नज़र रूचि पर पड़ी.. तो मैं देखता ही रह गया।
इस समय उसने भी रात के कपड़े पहन लिए थे।
आज के कपड़े कुछ ज्यादा ही सेक्सी और बोल्ड थे.. जिसमें वो एकदम पटाखा टाइप का माल लग रही थी। उसको देख कर मेरे लौड़े में फिर से उभार आने लगा।
अब आगे..
फिर मैं अपने आपको सम्हालते हुए अपनी जेब में हाथ डालकर लौड़े को सही करने लगा.. क्योंकि उस समय मैंने सिर्फ लोअर ही पहन रखा था।
मैं जल्दबाज़ी में चड्डी पहनना ही भूल गया था.. तभी मैंने अपने लण्ड को एडजस्ट करते हुए ज्यों ही रूचि की ओर देखा.. तो उसके भी चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान छा चुकी थी.. शायद उसने भी मेरे उभार को महसूस कर लिया था।
मैंने भी उसी समय उससे पूछा- क्या हुआ.. तुम लोग क्यों झगड़ रहे हो?
तो वो बोली- आपको क्या.. आप तो आराम से सोने चले गए.. पर मुझे भाई ने अभी तक काम पर लगाए रखा है.. हद होती है किसी चीज़ की.. पहले अलमारी सही कराई.. मैंने कर दी.. अब इतनी रात को बोल रहा है कि चलो ये कपड़े भी धोओ.. तो मैं बिना कुछ कहे कपड़े मशीन में डालने लगी.. तो बोला मशीन से नहीं.. हाथ से धोओ.. ये भी कोई बात हुई क्या.?
तो मैंने भी बोला- हाँ.. कह तो सही रही हो.. मैं विनोद को समझाता हूँ।
तब तक माया भी वहाँ नाईटी में आ गई.. और मामले को रूचि से समझने लगी।
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मैं विनोद के पास बैठकर उसे समझाने में लगा हुआ था कि यार ऐसा न कर.. माना कि हम जीते हैं.. पर है तो वो तेरी बहन ही न.. आराम से काम ले.. जितना आज हो सके उससे.. आज करा.. बाकी कल छोड़कर परसों फिर से करा लियो.. अभी बहुत समय है.. क्यों इतना जल्दिया रहा है.. और वो तो कर भी रही है.. तो उसे अपने हिसाब से करने दे।
विनोद बोला- हाँ यार.. गलती मेरी ही है.. कुछ ज्यादा ही हो गया था शायद.. चल अब नहीं होगा।
तब तक माया भी आई और विनोद से कुछ कहती.. इसके पहले ही मैंने बोला- आंटी.. अब जाने दो.. जो हुआ सो हुआ.. अब कुछ नहीं होगा.. मैंने समझा दिया है।
तो रूचि बोली- अबकी ऐसा हुआ न.. तो मुझे विनोद भाई के साथ नहीं रहना..
मैंने भी बात को सम्हालने के लिए हँसते हुए रूचि से बोला- ओह्हओ.. झाँसी की रानी.. अब ज्यादा न भाव खा.. मैंने उसे समझा दिया है.. अब तंग नहीं करेगा.. जा और जाकर सो जा..
तो वो बोली- अब आप कह रहे हो.. तो कोई नहीं.. पर इससे बोल दियो कि आगे से मैं अपने हिसाब से ही काम करूँगी।
मैंने बोला- ठीक है.. जाओ अब.. तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी.. तुम सो जाओ।
तो वो बोली- ठीक है..
मैं और माया भी कमरे से निकलने लगे।
मैं तो सीधा कमरे में जा कर लेट गया..