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हिन्दी सेक्स स्टोरी की सबसे अच्छी साईट अन्तर्वासना डॉट कॉम के पाठक पाठिकाओं को नमस्कार..
मैं राकेश पाटिल आपकी सेवा में फिर से हाजिर हूँ।
मेरी पिछली कहानी में जयश्री की 19 साल की चूत की चुदाई की थी और खूब चूस-चूस कर उस कली के मदमाते रस का स्वाद लिया था।
अब आगे क्या हुआ.. आपकी सेवा में प्रस्तुत है।
मैंने जयश्री के पापा से कहा था कि इसको छुट्टियों में हमारे साथ रहने के लिए भेज दीजिएगा।
उन्होंने यह बात मान ली थी और जयश्री का भाई अभिषेक उसको अप्रैल के पहले हफ्ते में हमारे घर छोड़ कर चला गया।
उसके हमारे घर आने के बाद मुझे बड़ा अच्छा लगा था और हम दोनों के अरमान एक बार फिर से अंगड़ाईयाँ लेने लगे थे।
उस दिन सबके सोने के बाद मैं दस पंद्रह मिनट प्रतीक्षा करता रहा और फिर जयश्री को चोदने के लिए उसके कमरे में चला गया।
अन्दर कमरे में हम दोनों ने खूब चुदाई की और उसके बाद तो जैसे रोज का यही नियम बन गया था।
एक दिन जयश्री ने मुझे पूछा- तुमने रिश्तेदारी में कितनी चूतें चखी हैं?
मैंने झट से उसका सुन्दर मुखड़ा चूम कर कहा- रानी, रिश्तेदारी में बहुत सी चूतें चखी हैं। कुछ का तो तुझे पता ही है.. बाकियों का भी समय के साथ-साथ पता चलता जायगा.. और कमीनी तू भी तो मेरी जान-ए-बहार है..
जयश्री ने मस्ता कर मेरे लौड़े को पैंट के ऊपर से दबाते हुए हाथ फिराया।
कमबख्त अकड़ कर पैंट में फंसा हुआ था और बाहर निकलने को बिलबिला रहा था।
जयश्री ने लंड को ज़ोर से दबाया।
इतना करते ही मैंने उसको जकड़ कर एक लम्बा सा गीला सा चुम्मा लिया और ज़ोर से उसके मम्मे निचोड़ दिए।
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खैर रोज़ की तरह पहले मैंने सबको सोने दिया और थोड़ी देर में जब सब गहरी नींद में खो गए तो मैं धीरे से उठ कर जयश्री के कमरे में आ गया।
जयश्री बिस्तर के एक एक कोने में बैठी हुई थी। यूँ ही कुछ बेमतलब की किताब पढ़ रही थी.. उसको पता था कि मैं किस काम के लिए आया था..
मैं पहले जयश्री की तरफ गया और उसको बाँहों में जकड़ कर बिस्तर से उठा दिया.. फिर उसको दबोच कर उसके मस्त होंठों से अपने होंठ सटा दिए।
उसे मैंने बड़े ज़ोर से लिपटाया हुआ था और उसके होंठ भी अपने होंठों से जाम कर दिए थे।
मैंने जयश्री के मुँह से होंठ हटाकर कहा- जयश्री.. मेरी जान सुन.. तू अब जल्दी से नंगी हो जा.. तब तक मैं तेरे मस्त होंठ चूस-चूस कर मज़ा लेता हूँ। आज तुझे मस्त करके मजा दूँगा..
इससे पहले कि जयश्री कुछ कह पाती, मैंने फिर से उसका सिर भींच कर उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे हसीन होंठों से अपने होंठ चिपका दिए और उसके मुँह में जीभ घुसा दी.. जिसे जयश्री ने तुरंत ही चूसना शुरू कर दिया।
जयश्री ने तुरंत ही नाइटी के भीतर वाली कच्छी को घसीट कर उतार डाला.. नाइटी के सभी बटन खोल दिए..