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काला साया – रात का सूपर हीरो(Completed)

Story Hindi 206 pages 7 months ago

{UPDATE-01}
ऊन दीनों बंगाल में सावन का तगड़ा मौसम शुरू हुआ था….फाटक के नज़दीक हॉएँ से इस छोटे शहर इतर में बाढ़ का प्रकोप तरफ गया था…और रोज़ मुसलसल बारिश चल रही थी….फसल गाँव के घर सब तूफान से या फिर बाढ़ में तबाह हो जाते…कुछ लोग इस तूफान से बचने के लिए टाउन में चलते आते और फिर सब सामान्या हो जाने के बाद वापिस अपने गाँव लौट आते…ऊन दीनों बाँध टूटने का अलर्ट हो गया था…और इस वजह से गाँव सब खाली करवा दिए गये थे…लेकिन शहर से बाज़ार का रास्ता सुनसान जंगल और वीरान छोढ़े गये बस्तियो से होकर गुजरता था इस शहर में रात गये औरत बूढ़ी वृढ को भी बदमाश लोग उठाकर रेप करके ऊन्हें जंगलों में मरने के लिए फैक देते थे….कोई भी औरत अकेले ज्यादा सुरक्षित नहीं होती थी…औरत पे हो रहे यौन सोशण का मामला बढ़ता जा रहा था….पर पुलिस ऊन बदमाशो का कुछ पता नहीं लगा पाई थी

आधी रात का वक्त हो चुका था और ऊस सुनसान कीचड़ बारे रास्ते पे वो औरत फिसल फिसल के तेजी से चल रही थी 30 साल की उमर कसा हुआ बदन छाती पेंट और गान्ड बाहर निकले हुए थे….अपनी मैली गीली सारी को अपने चेहरे के लगे पसीने से पोंछते पोंछते वो बाज़ार से शहर के रास्ते की ओर जा रही थी उसे डर भी लग रहा हां की इतनी सुनसान सड़क पे वो अकेले चल रही रास्ता भी काफी फिसलन भरा ऐसे में कोई साँप और उससे भी कई ज़्ीडा वीरान बस्ती के भूतों की मुसीबत गाँव में ये बात फैली हुई थी की वीरान इन बस्तियो में आत्मा वास करती है ऐसे में ऊस देहाती औरत कंचन का डरना लाज़मी था…कंचन शादी शुदा औरत थी और वो घरो में काम किया करती थी…उसे शहर से अपने बच्चों के लिए कुछ दवाइयाँ लानी थी पति शराबी उससे तो कोई उम्मीद नहीं थी इसलिए वो खुद पे ये ज़िंमेरदारी उठाकर अकेले हिम्मत करके शहर चली गयी लेकिन मुसलसल बारिश में वो ऐसी फँसी की रात काफी गहरी हो गयी और सड़क और भी खराब और सुनसान अपने मन में अल्लाह अल्लाह का नाम लेकर वो आगे बार रही थी इतने में उसे दो बाइक सवार आते दिखे

वो सहेमी डरी बस आंखें झुकाए आगे बढ़ती रही लेकिन वो लोग उसके करीब आने लगे…वो दौड़ भी नहीं सकती थी…फिसलने का डर था….

और ऊपर से ऊन बदमाशो के हँसी को सुनकर उसे पक्का लग चुका था की आज तो वो गयी काम से आज उसका भी बाकी औरतों की तरह गान्ड और चुत में लंड डाल डालकर ये लोग उसका बलात्कार करेंगे और अपना पानी छोढ़ने के बाद उसे भी लावारिस लाश बनकर चोद देंगे अचानक एक बाइक सवार उसके करीब आकर बाइक उसके सामने रोक देता है

कंचन – आर…रही क्या बदत्तमीज़ी है छोढ़ूओ जाननने दम तुम मुझहहे जानते नहीं आहह छोड्धूओ
बाइक सवार – ज्यादा चिल्लाई तो मुँह में लंड डाल दूँगा क्या रे? हाथ पकड़ रे इसका साली को वही ऊस खेत के भीतर ले जाकर चोदते है
कंचन – आह भगवान के लिए चोद दो मेरे दो छोटे छोटे बच्चे है…अल्लाह से डर
बाइक सवार – चुप साली (इतना कहकर वो लोग कंचन को ज़ब्रन हाथ पाओ से पकड़कर रास्ते से नीचे के ढलान में ले जाने लगे)

कंचन को तो लगने लगा जैसे आज उसे इन शैतानो के हाथ से कोई नहीं बच्चा पाएगा….अभी वो लोग ढलान से नीचे उतरे ही थे…की कंचन एक को धक्का मारा और फिसलते हुए दो बार गिर पड़ी फिर वो पूरी ताक़त से अपने मोटापे का फायदा उठाकर एक बदमाश के सीने पे लात जमा देती है वो वही गिर परता है..कंचन पूरी ताक़त लगाकर उठके जैसे ही सड़क पे दौड़ने वाली होती है उसका गुंडे फिर रास्ता चैक लेते है इस बार उसे वही सड़क पे गिराके ऊसपे सवार होने लगते है…

लेकिन तभी एक जोरदार रोशनी ऊन लोगों के चेहरे पे पार्टी है….बाइक सवार हड़बड़ाकर उठ खड़े हो जाते है…”अययएए कौन है आबे? किसने हेडलाइट ऑन किया”…..सब बाइक सवार भौक्लाए ऊस हेडलाइट के सामने खड़े अक्स को घूर्रने लगते है….वो अक्स धीरे धीरे काली परछाई बनकर उनके सामने खड़ा हो जाते है वो लोग बारे गौर से उसका चेहरा पहचानने की कोशिश करते है लेकिन उसके चेहरे पे एक कृष जैसा मास्क होता है और पूरे चेहरे पे काला रंग लगा होता है…सिर्फ़ उसके होंठ और उसके गुस्से भारी निगाहों को ही वो लोग देख सकते है

एक बदमाश चाकू फहत से निकल लेता है..एक उसे हिदायत देता है शायद उसके पास हत्यार हो “क्या रे? कौन है आबे तू?”….वो साया कोई जवाब नहीं देता बस ऊस्की एक भारी आवाज़ बादल के गारज़ते ही निकलती है “काला साया”……वो लोग एकदम से चुप्पी सांधके सहम उठते है ये काला साया वही था जिसने एक करप्ट ऑफिसर को इतना मारा की ऊस्की दोनों टाँगें ही तोड़ दी थी…बदमाश लोग सावधान हो गये और फिर कंचन को वही छोढ़के उसके करीब आने लगे

ऊन लोगों ने अभी उसे घैरना ही चाहा था..की इतने में उसके बाए कमर से निकलती एक फुर्रत से हत्यार उनके जिस्मो को छू गया दो बदमाश वही चट्टक चटक की आवाज़क ए साथ चीखके गिर परे….काला साया के हाथ में एक नानचाकू था….

ऊसने फौरन दूसरे गुंडे ए गले में उसे लपटा और उसके ठुड्डी पे एक लात मारा वो सीधे पीछे के जंगली धंस में जा गिरा…दूसरा बदमाश तीनों के अचानक पीटने के बाद सामने आया ऊसने चाकू ऊसपे चलना चाहा पर ऊस साए से आर पार जैसे चाकू होता उसका बचाव इतना तेज था ऊसने क़ास्सके ऊस गुंडे का हाथ पकड़ा और उसके हाथ ही को तोड़ डाला…और फिर उसके चेहरे पे इतने घुसों की बौछार की वो और उठ ना पाया

चारों के चारों बाइक सवार बुरी तरीके से मर खाए परे हुए थे…लेकिन काला साया ने एक एक करके ऊन सभी के गर्दन को मोड़ माड़ोध के तोड़ डाला अब वहां सिर्फ़ लाशें थी और बदल की खौफनाक गारज़ान….काला साया फौरन कंचन के करीब आया जो सुबकते हुए रो रही थी जब ऊसने अपनी नज़र ऊपर उठाई तो वो सहेंटे हुए मुस्करा उठी “काला साया आप बाबू आपने हमारी जान बच्चा ली अल्लाह का शुक्र है की आप जैसा फरिश्ता उन्होंने भेज दिया”…..काला साया मुस्कुराकर कंचन को उठाने लगता है

बारिश तेज हो जाती है…काला साया पास में परे एक दवाई की शीशी जो कंचन के हाथ से चुत गयी थी ऊस पॉलयथीन को कंचन को देता है…”चलो बारिश तेज हो चुकी है तुम्हें तुम्हारे घर तक चोद दम”…..कंचन ऊन लाशों को देखकर खौफ से भर जाती है

कंचन – बाबू ये लोग मर गये क्या?
काला साया – हाँ मैंने इन हरामजादो को मर दिया
कंचन – बहुत ठीक किया अपने बाबू थूकती हूँ इनपे इन नमर्दो पे जिन्होंने हम औरतों का जीना हराम कर रखा था (कंचन ने पास जाकर उनके चेहरों पे थूक डाला देखकर साफ था जैसे वो ना तो काला साया से डर रही थी और ना ही उसे डर था की काला साया ने ऊँका खून कर डाला)
काला साया – इनकी लाशें यही चोद दो पुलिस शिनाख्त करके इन्हें ले जाएगी तुम बस यही कहना की मैंने तुम्हारी जान बचाई वैसे तुम इन लफडो में नहीं परोगी
कंचन – आप फिक्र ना करो साहेब मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगी और मैं जानती हूँ जबसे आप इस शहर में आए हो तबसे हमारा खौफ कितना कम हुआ है
काला साया – अच्छा चलो वरना यहां पानी भर जाएगा ये तूफानी बारिश नहीं रुकेगी मैं तुम्हें शहर तक चोद देता हूँ

UPDATE-02}
इतना कहकर कंचन अपने गीले सारी से खिकध को झधते हुए बाइक में काला साया के साथ सवार हो जाती है….बाइक काफी तेजी से कक़ची सड़क और बगल के खेत जंगलों से होते हुए चलने लगता है….

अचानक काला साया की बाइक फिसल जाती है और उसे बीच में ही बाइक रोकनी पढ़ती है “अफ हो लगता है ये सड़क बंद हो चुकी है यहां दलदल का भी खतरा हो सकता है”…काला साया की बात सुनकर कंचन घबरा जाती है की अब वो घर कैसे जाएगी? उसके बच्चों की दवाई खत्म हो गयी थी…कंचन ने जब काला साया को अपना कारण बताया तो वो भी सोच में डूब गया की करे तो करे क्या? एक तो ये ना थमने वाली बारिश ऊपर से बढ़ता तूफान…”देखो कंचन ये मौसम शायद सुबह 4 बजे तक चल सकता है तब्टलाक़ तुम्हें कही आज तो तहेरना ही पड़ेगा वरना ऐसी हालत में अपने बस्ती जाओगी कैसे?”…..कंचन भी कही हड़त्ाक मायूस होकर काला साए की बात पे हामी भरने लगी

“ये लो तुम अपने घर पे फोन कर दो”……काला साया ने तुरंत मोबाइल कंचन को पकड़ाया…कंचन ने अपने घर पे फोन करा और मालूम किया की उसके बच्चे कैसे है? ऊसने अपने एक सहेली को फोन करके अपना हाल बताया ऊस्क इपदोस वाली थी ऊसने कंचन को समझाया की वो कहीं तहेर जाए आज की रात कहीं कांट ले…कंचन को भी यही ठीक लगा वक्त के हाथों वो मज़बूर हो गयी लेकिन उसे काला साया पर पूरा भरोसा था काला साया ने इससे पहले भी उसे एक बार बचाया था उसके पति के ज़ुल्मो से और तबसे वो काला साया को अपना गार्डियन मानती थी…

काला साया अपने चेहरे पे मुकोता लिए शहर का गश्त लगता था…और बढ़ते वारदटो को रोकता था…लेकिन आज वो भी इस मुसलाधार बारिश में फ़ासस चुका था…अचानक उसे दूर की वो वीरान बस्ती दिखी…काला साया को एक सुझाव मिला..”कंचन आज रात हमको यही काटनी पड़ेगी तुम परेशान मत हो मैं तुम्हारे साथ हूँ”….इतना कहकर काला साया बाइक को घस्सीटते हुए ऊस वीरान बस्ती के पास आया…”हम दूर दूर तक कोई नहीं और ऐसी बरसाती रात में होगा भी कौन? चलो जल्दी से अंदर चलते है”……काला साया की बात सुनकर एकपल के लिए कंचन सहम उठी उसे वही आत्माओं वाली बात पे डर था पर वो जानती थी काला साया जब साथ है तो उसे वो कुछ होने तो नहीं देगा
वो बिना कुछ कहें काला साया के साथ ऊस सबसे उचे वाले झोपरे में घुस गयी…बरसात काफी तेज हो गयी और बरसात का पानी काफी ज्यादा तेज हो गया….एक झोपड़ी में बाइक घुसाके काला साया कंचन के संग उक्चे वाले झोंपड़े में घुस गया….

अंदर आते ही लोहे का एक दरवाजा जो बेहद पुराना था उससे काला साया ने झोपड़ी को बंद कर डाला…कंचन ठंड से कनपने लगी

काला साया ने लाइटर जलाया और उससे इकहट्टा करी बड़ी मुश्किल से सुखी घससो पे आग लगाई अब पूरे कमरे चकाचोँद रोशनी थी एक छेद से बाहर के बिजली की रोशनी बीच बीच में पार जाती…इस बार कंचन ने बड़ी ही गौर से काला साया को देखा जो अपने चेहरे को हार्वक़्त एक मुकोते से धक्कें रहता है और उसके पूरे चेहरे पे कालिक जैसा कुछ लगा है बस उसके गुलाबी होंठ दिख सकते थे बाकी उसके बदन पे एक लंबा सा ब्लैक कोट और एक क़ास्सी जीन्स जिसकी चाँदी वाले काँटे बने लोहे का बेल्ट चमक रहा है…काला साया कहरा होकर पास से एक बंदूक निकलकर पास रखता है और फिर एक लंबा 8इंच का चाकू

कंचन थोड़ी सहम उठी फिर ऊसने बारे ही गौर से ऊस बंदूक की ओर देखा इतने में काला साया ने कंचन की चुप्पी तोड़ी “अरे तुम तो पूरी भीग गयी हो लो मेरा कोट ढक लो इतना कहकर काला साया अपने बदन से कोट उतार देता है उसके बदन पे सिर्फ़ एक काली बनियान होती है…”आपको ठंड लग जाएँगी”…कंचन ने अपने बाल झधते हुए कहा…”मेरे अंदर इतने बदले की आग है की मुझे हरपल गरम महसूस होता है”…..कंचन मुस्कुराकर उसके हौसले की तारीफ करती है

कंचन इस बार अपने गीले सारी और आधे गीले ब्लाउज और पेटीकोट को पल्लू से साफ करने लगती है….अचानक काला साया की निगाह उसके छातियो के काटव पे पार्टी है ऊस्की गोल गहरी नाभी के नीचे से निकले पेंट पर कितने स्ट्रेच मार्क्स थे जो शाया उसके बच्चा पैदा होनेके बाद उसे परे होंगे….कंचन मुस्कराए काला साया का कोट पहन लेती है….काला साया का लंड अकड़ने लगता है जिसे कंचन देख लेती है वो इस बात को भाँपके मन ही मन मुस्कराने लगती है वो जानती है काला साया कभी भी अपने ज्यादती जिंदगी के बार्िएन में नहीं बताता

काला साया बार बार कंचन के मोटे पिछवाड़े को पेटीकोट के बाहर से ही देख सकता है की वो कितनी बड़ी है वो बीच बीच में अपने लंड को दबा देता है जीन्स के ऊपर से पर उसका उभर खंभक्त कम हो ही नहीं रहा….अचानक बदल बड़ी ज़ोर से गारज़ता है कंचन फिर धीरे धीरे काला साया से बात करने लगती है की वो उसे तो कम से कम अपन चेहरा दिखा सकता है वो कौन है?…काला साया मुस्कुराकर मना कर देता है की वो ये बात सबसे छुपाके रखता है..उसके दिल में लगी जो आग है वो इस शहर जुड़ी हुई है…और वो सिर्फ़ काला साया एक परिवार से बदला लेने के लिए बना है….ये सब सुनकर कंचन बारे ही दिलचस्पी से ऊस्की बात सुनती है अचानक…कंचन ठंड से बहुत ज्यादा तिठुरने लगती है..काला साया ये बात जानके उसे आग के पास बैठने बोलता है..

कंचन धीरे धीरे आग के पास बैठ जाती है

काला साया – थोड़ी गरमहत मिलेगी तुम्हें अब ठीक लग रहा है
कंचन – बहुत ज्यादा ठंडा लग रहा है ऊन खंभक्तो की वजह से पूरे सारी पे कीचड़ लग गया आज अगर आप ना आते साहेब तो
काला साया – अब तुम्हें डरने की जरूरत नहीं कंचन वो लोग अब कोई नुकसान पहुंचने के लायक नहीं रहेंगे और तुम फिक्र मत करो मैं हूँ ना

काला साया धीरे धीरे कंचन से बात करने लगा अपने मन को समझाने लगा जो निगाहें ऊस्की कंचन के बदन पे गाड़ी सी हुई थी….”तुम इतनी खूबसूरत हो फिर भी तुम्हारा नामर्द पति तुम्हें कैसे चोद रखा है”….मेरी बात सुनकर उसके गाल गुलाबी हो गये “खैर जिंदगी में पहली बार किसी ने मेरी खूबसूरती की तारीफ की और वो भी आपके मुँह से साहेब”…..कंचन बेहद खुश हुई वो अपने घर और अपनी शादी के बार्िएन में बताने लगी..लेकिन काला साया तो बार बार उसके भारी चुचियों को देखने लगा…कंचन इसको भाँपने लगी वो घबरा भी रही थी पर ओस्से पता था की काला साया उसके साथ कोई गलत काम नहीं करेगा

कंचन – साहेब अब आप शादी कर ही लो
काला साया – मुझ जैसे खतरनाक आदमी से कौन शादी करेगी जो हरपल ख़तरो से खेलता है हाहाहा
कंचन – आप जैसा मर्द अगर मेरा पति होता मैं सबसे खुशनसीब होती
काला साया – अच्छा ग वैसे कंचन तुमेहीं ग्रहस्ति से बाहर भी दोस्ती करनी चाहिए ताकि तुम्हारा मन बहले तुम भी किसी से तालुक़ात रखकर जिंदगी के मजे लो
कंचन – हम जैसी गरीब औरत से कौन प्यार करेगा सहाएब जो पति के जुल्म की मारी है…सिवाय दुख दर्द तक़लीफ़ के मिलता ही क्या है? एक आप ही हो जो हमें समझते हो और मेरे बच्चे
काला साया – फिर भी तुम इतनी जवान हो तुम्हें सोचना चाहिए
कंचन – क्या करे हमारा मोहल्ले में किसी को पता चला तो गुनाह की बात करने लगेंगे और शायद मेरी बदनामी हो जाए

{UPDATE-03}
अचानक कंचन का ठंड बहुत ज्यादा बिगड़ने लगा और वो खाषने लगी उसे बेहद तिठुरती ठंड लगने लगी…कंचन का बुरा हाल देखकर काला साया ने उसे पास ही के एक टूटे खतिए पे लाइत्न्े को कहा….कंचन को ऊसने विश्वास दिया की वो रात भर पहरा देगा और जैसे ही बारिश थामेगी वो लोग वहां से निकल जाएँगे….थोड़े देर में कंचन काँपने लगी उसका पूरा बदन ठंडा पड़ने लगा…काला साया इसे देखकर समझ चुका था की शायद कंचन को जबरदस्त ठंड लगी है और ऐसे मौसम में बीमार होना मतलब साक्षात मौत…काला साया जनता था उसके पास कंचन को बचाने का एक ही उपाय है बेरेहाल वो संकोच करते हुए हिम्मत जुटाकर अपने जीन्स की ज़िप और बेल्ट उतारने लगा…फिर ऊसने धीरे से कंचन को हिलाया पर कंचन ने कोई जवाब नहीं दिया…वो ठंड में बेशुड बस तिठुर रही थी उसके दाँत कटकता रहे थे….

काला साया ने अब ज्यादा देर नहीं की ऊसने धीरे से कंचन के ब्लाउज और पेटीकोट को किसी तरह खोल डाला

और कुछ ही देर में कामवाली कंचन उनके सामने एकदम नंगी थी उसके मोटी चुचियां उसके कड़े निपल्स को देखकर काला साया बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके ऊपर धीरे से सवार हो गया दोनों पूरी तरीके से एक दूसरे से चिपके बिलकुल नंगे थे…धीरे से कंचन की पेटीकोट का नारा खोल के काला साया ने टांगों तक उसे खींच दी अब मांसल मोटी जांघें और झाँतें डर चुत काला साया के सामने थी…ऊसने फिर ब्लाउज से बाहर निकले ऊन तरबूज जैसे साइज के छातियो को काश क़ास्सके दबाना शुरू कर दिया और वैसे ही उसके शरीर के ऊपर चढ़के ऊपर नीचे होने लगा उसका सख्त लंड चुत पे रगड़ खाने लगा

“आहह आहह”…..कस्मती कंचन की बेशुड आहें मंडी आँखें देखकर काला साया समझ चुका था की उसे भी शायद सेक्स चढ़ रहा है हूँ धीरे धीरे नीचे होने लगा और फिर ऊसने अपने घुटनों को मोधके खतिए के किनारे बैठकर दो उंगली कंचन की चुत में डाल दिया..अंगुल करने से ही कंचन को कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन जब उंगली की रफ्तार तेज हुई तो कंचन खुद ही आहें भरने लगी

काला साया समझ चुका था अब कंचन को मजा आने लगा है ऊसने फौरन अपनी जीभ कंचन के चुत पे लगा दी..ऊस्की ऐसी हालत थी की हूँ बिना झातेंदार कंचन की मांसल जांघों की बीच की चुत को चाँतें बिना रही नहीं पा रहा था ऊसने उसके पसीने भरे बदबूदार चुत में मुँह डाल ही दिया और फिर बारे ही चाव से उसके चुत के फहाँको में मुँह डाले उसके छेद को जुबान से टटोलता रहा इस मुख मैथुन के असर जल्द ही कंचन पे हुआ और हूँ बहुत ज़ोर से साँस छोढ़ने लगी वो कसमसाने लगी..उसका तिठुरता बदन थाम गया और वो अब लंबी लंबी आहें भरने लगी

इधर काला साया ने भी चुत में उंगली करते हुए उसके दाने और चुत में जबान लगाए रखी कंचना अब आंखें मुंडें सर इधर उधर मारने लगी “आहह उफ़फ्फ़ सस्स औरर्र ज़ोर से हाीइ अल्ल्लह”……हूँ कसमसाए जा रही थी अब बहुत ही तेज तेज काला साया ऊस्की चुत में जुबान डालने लगा अब धीरे धीरे चुत से सफेद रस बाहर आने लगा जिसका नमकीन स्वादड चक्कर काला साया भधकने लगा…ऊसने फौरन बिना डायरी किए फिर कंचन से लिपट गया और ऊस्की फहुली रेशम झाँतें डर बालों के गुकचे में लंड फहीराते हुए चुत के मुआने में रखकर थोड़ा पुश किया…इस बार लंड अंदर धीरे धीरे सरकने लगा….साली का पति उसे खूब चोदता है ये बात काला साया अच्छे से भाप चुका था…लेकिन लंड की मोटाई दुगुनी थी इसलिए चुत का द्वार के चीरने से कंचन भी बीच बीच सेकेंड में चीखने लगी….

लेकिन अब रुकना किसके हाथ में था

अपना चेहरा कंचन के मुँह के ऊपर रखकर हूँ नीचे जोरदार धक्के मारने लगा…अपने आप ही कंचन की चुत का द्वार हाथ गया और ऊसने लंड को समा लिया अब धक्के बहुत तेज तेज चल रहे थे ठप्प ठप्प करते हुए दोनों के जाँघ एक दूसरे से लग्के आवाज़ कर रहे थे अंडकोष चुत के मुआने पे तालियो की तरह बज रहे थे..इतने में काला साया ने फिर ऊन दोनों छातियो को खूब ज़ोर ज़ोर से छूसा और उसका रसपान करने लगा इतनी मस्त कामुक औरत अपनी जिंदगी में शायद काला साया ने कभी चोदा नहीं था..अब खुद पे खुद कंचन ने अपने टाँगें चौड़ी कर लिट ही और हवा में आधा टाँग था…और मुट्ठी काससे अपनी पूरी मर्दानगी ताक़त से काला साया ऊस्की चुत मारने लगा दिन भर के घशट की थकान कामवाली की चुत में खत्म होने जा रही थी

काला साया ने बिना डायरी किए और तेज धक्के लगा डालें इस बार कंचन होश में आ चुकी थी दोनों पसीने से तरबतर होने लगे आग की लपटें घर को और गरम करने लगी…लग ही नहीं रहा था की अभी दोनों कपकपटि ठंड में तिठुर रहे थे जबकि बाहर बारिश तेज हो चुका था और भारी तूफान चल रहा था….इतने में काला साया थकने लगा और ऊसने फच्छ फछ की आवाज़ को संक एक बार लंड को चुत से बाहर खींचा…जैसे आत्म कार्ड मशीन से बाहर निकलता है ठीक ऊटने ही माखन की तरह लंड चुत से बाहर निकल आया और फिर फहूट फहूट के प्री-कम की लहरें बहने लगी इधर कंचन की चुत भी पूरी गीली हो चुकी थी उसके रस हूँ कब दो बार झड़ गयी पता ना चला ऊस्की चीखें इस बात की गवाह थी

कंचन अब भी हाँफ रही थी मानो जैसे उसका सेक्स अभी खत्म नहीं हुआ था…ऊसने क़ास्सके काला साया को पकड़ लिये और उसके चेहरे के इर्द गिर्द चूमने लगी…”आहह से आहह एम्म”….काला साया ने क़ास्सके कंचन के होंठ चुस्सा डालें कंचन के हाथ काला साया के पीठ पे जैसे साँप की तरह रैंग रहे थे…काला साया बारे ही फुर्सत से उसके गले कान और गाल पर चुम्मा लेता गया फिर उसके बालों पे हाथ फहरट एहुए उसे उल्टा लेटने लगा…कंचन का जैसा नशा टूट गया मानो वैसे ही ऊस्की आँखें अधखुली दिखी कंचन को जाने में डायरी तो नहीं लगी की काला साया ने उसके साथ क्या किया? पर अब करने को और बच्चा ही क्या था? पहले काला साया रुका पर ऊसने मुस्कुराकर ऊस्की थोड़ी तारीफ कर दी और बिना ऊस्की इजाज़त लिए उसके गान्ड में लंड घिसता हुआ ऊस्की काली गान्ड के छेद में लंड घुसाने लगा…खटिया को दोनों ओर कंचन ने पकड़ लिया…लेकिन ठीक ऊटने ही मिनट में काला साया अपनी थूक से लंड को गीला करके गान्ड की दरार में लंड डाल चुका था…लंड धीरे धीरे जाने लगा…”आहह आहह आहिस्स्ट्टी से आहह आहिस्ते काररो साहिब आहह”….

कंचन पेंट के बाल लेटी आंखों में दर्द के भाव दिखाते हुए ज़ोर से बोली ऊस्क इयवाज़ घूँट गयी और फिर खतिए को दोनों ओर से पकड़कर काला साया उसके ऊपर चढ़के लंड को अंदर बाहर करने लगा…कंचन ने दाँतों पे दाँत रख दिया…काफी जोरदार चुदाई चल रही थी…ठप्प ठप्प आवाज़ फिर हसुरू हो गयी…बारिश सामान्या हो गया था इसलिए दोनों की चीखें पूरे वातावरण में न्गूँज़ रही थी…काला साया काफी जोरदार तरीके से कंचन की गान्ड मारने लगा कंचन का एक तंग अपने तंग के ऊपर रखकर उल्टा उसे खूब ज़ोर से चोदने लगा

कंचन काफी देर तक खतिए के ऊपर पीसती रही ऊस्की छातिया खतिए के बीच में दब गयी थी दोनों पसीने पसीने होने लगे…”आहह सहीब्बब बहुत दर्रद्द हो रहा है आराम से मारो आहह मुझे तक़लीफ़ हो रही हे आहह”…..काला साया मौका चोदना नहीं चाहता था ऊसने धीरे से कंचन को कुल्हा से उचकाया और उसके चेहरे को नीचे कर दिया अब हूँ पूरी कुतिया के भट्टी मुद्रा में थी…और पीछे किसी सांड़ की तरह काला साया ऊस्की गान्ड मारता रहा…उसके छेद से कभी बाहर कभी अंदर कभी बाहर कभी अंदर लंड आ रहा ताज आ रहा था…इन देसी औरतों में झेलने की ताक़त बहुत होती है…काला साया काफी ज्यादा पागल होने लगा और काफी बेदर्दी से ऊस्की गान्ड मारता रहा..उसके तुरंत बाद जब उसे लगा की हूँ अब बस निकल जाएगा तो ऊसने लंड बाहर खींच लिया कंचन के मुख पे रख दिया कंचन ने पहले मना किया पर काला साया के मज़बूती से चेहरे पे पकड़े होने से ऊसने एक दो बार मुँह में लेकर चोद दिया…पर काला साया मना नहीं ऊसने उसके मुँह में लंड घुसा दिया कंचन को मज़बूरन चूसना ही पड़ा…पहले तो उसे अच्छा नहीं लगा पर धीरे धीरे उसके चाँदी को पीछे खिसकाके उसके सुपाडे का स्वाद लेने में कंचन की छूते के बार फिर पानी चोद गयी हूँ वैसे ही बैठी खड़े काला साया के लंड को चुस्ती रही और फिर कुछ ही देर में काला साया ने उसके चेहरे को पकड़कर लंड का पानी उसके पूरे चेहरे पे चोद दिया

काला साया कसमसाते हुए काँपते हुए पष्ट पार गया…और वही नंगी कंचन के साथ बगल में बैठ गाया उसका रस अब भी लंड से उगल रहा था…एकटक कंचन ख़स्ते हुए काला साया का बदन और फिर उसके लंड को देखने लगी..

पसीना पसीना हो गया था काला साया लेकिन कंचन थोड़ी मायूस भी थी

काला साया – मुझे मांफ करना कंचन मैंने तुम्हारे साथ सेक्स किया असल में हालत ही कुछ ऐसे थे अगर मैं ऐसा नहीं करता तो लेकिन तुमविश्वास रखो तुम्हें जब मदद चाहिए होंगी तब तुम याद करना मैं हाज़िर हो जाऊंगा
कंचन – बुरा तो लग रहा है एक शादी शुदा औरत हूँ साहिब कभी पराए मर्द के साथ ऐसा कुछ नहीं करा…पर आपके साथ जो हुआ मैं उसे भूल जाऊंगी आप भी भूल जाओ साहेब आपको मेरी वजह से
काला साया – क्या बात करती हो कंचन? तुममें हूँ नमकीन स्वाद है जो क्सिी और में नहीं

{UPDATE-04}
“सच”…..कंचन मुस्करा पड़ी उसके चेहरे की खुशी लौट आई…काला साया ने मुस्कुराकर सर ऊपर नीचे किया..ऊसने कंचन को एक बार फिर गले लगाया डॉन वन अपने इस छुपे रिश्ते को इस वीरान झोंपड़े में ही दफ़न कर दिया…और सुबह चार बजते बजते तक सेक्स करते रहे…काला साया उसके पति की तरह उसके बदन को छूने लगा और कंचन भी इस पे कोई विरोध नहीं जताया काला साया 2 बार झड़ चुका था ऊसने कंचन को बहुत तक दिया था…फिर दोनों ने जब देखा की बारिश थाम चुकी है तो कीचड़ बारे रास्तो से निकलकर बाइक को किसी तरह ऑन करके किसी साए की तरह काला साया अपनी ब्लैक बाइक से कंचन को उसके बस्ती चोद देता है और फिर वहां से फिर शहर का रुख कर लेता है और उसके बाद अंधेरी गलियों से गुजरते हुए स्ट्रीट लाइट की रोशनी में वो एक काला साया बनकर गायब हो जाता है…

किसी बाबा आदम युग की वो सुनहेरी रंग की पुरानी सी अलार्म इतने ज़ोर से बज उठी…की बगल में बिस्तर पे लेटा वो लड़का जो बेशुड घोड़े बेचके सोया हुआ था अपने कान के परदों को दबाते हुए तकिये से इधर उधर ऐतने लगा…”उफ़फ्फ़ हो बहेनचोड़ड़ अबबेययय चुप्प”…..देवश ने फौरन उठके एक तकिया ऊस अलार्म के मारा…वो अलार्म सीधे गरगरते हुए फर्श पे जाकर टूट गयी

“आ हाहाहा फाइनली मां का यह अलार्म जो क़ब्रिस्तान के मुर्दे को भी जगा दे उसे फाइनली तोड़ ही दिया एस्स”….भाई साहेब अभी अंगड़ाई लेकर अपने प्यज़ामे से लंड को ठीक करते हुए आंखें मुंडे ही थे की तभी एक बहुत ही तीखी आवाज़ बज उठी

देवश फिर चीखके उठ बैठा “आबेययय याअरर”…..वो पूरा झल्ला गया..

ऊसने उठके फौरन ऊस टूटे अलार्म की तरफ देखा जो अब भी बज रही थी…ऊसने अलार्म को उठाया और उसे बंद करना चाहा पर साला बंद नहीं हुआ अचानक उसे याद आया और फिर ऊसने ज़ोर से एक ताली आवाज़ बंद हो गया

अब तो नींद टूट चुकी थी अब मिया सोते भी कैसे?…देवश 22 साल का नौजवान जो यहां पुलिस की दफ्तर में इंस्पेक्टर की पोस्टिंग पे आया था…घूस अमीरो से लेना सेक्सी औरतों को पटना और अपने फर्ज के प्रति ढीला होने का स्वभाव तो था ही दिल्ली पुलिस में 2 साल काम करने के बाद देवश को वहां से तबादला कर दिया गया और वो इस शहर में आकर और भी आलसी हो गया…लेकिन मां का जो तोहफा था उसे वो बेहद प्यार करता था क्योंकि मां की यह आखिरी निशानी थी

ऊसने बारे ही प्यार से टूटे अलार्म को मेज़ पे रखा और अभी चाय बनाने किचन की तरफ मुड़ा ही था अचानक घंटी बज उठी….”अफ लगता है कामवाली कंचन आ गयी”…..जैसे ही देवश ने दरवाजा खोला कंचन के चेहरे के खुशी के भाव देखकर वो अंदर आई

आज कंचन ने पर्पल रंग की सारी पहनी हुई थी…धोती जैसा पेटीकोट और बॅकलेस पीठ…उसके चलते ही ऊस्की माटतकी गान्ड और चाल दोनों को देखकर देवश मिया की नींद गायब हो गयी

देवश : क्या रे कंचन सुबह सुबह बड़ी खुश है क्या बात है?
कंचन : अब खुश नहीं होंगे तो क्या रोज़ की तरह दुखी होंगे बाबू?
देवश : अच्छा चल जल्दी से छैीइ ला…थाना भी निकलना है

देवश अंगड़ाई लेता हुआ ब्रश करने लगता है कंचन उसके सामने चाय चढ़ाके झाड़ू लगाने लगती है..देवश मिया दाँत को ब्रश से घीसते हुए कंचन के चुचियों के कटाव को निहारने लगता है “क्या माल है?”….अचानक देवश ने के मंसुदे में ऐसा बुरष लगा की वो दर्द से बिलबिला उठा

“आहह साला गया रे”…होंठ के बीच उंगली लगाए वो खून थूकने लगा “क्या हुआ साहेब?”…..कामवाली कंचन उठके उसे देखने लगी

देवश : अरे कुछ नहीं बस वो घिस्स गया आहहह सस्स दाँत के नीचे ब्रश गलती से लग गया

कंचन : बाबू दवाई है आपके पास

देवश : हाँ है ना वो अलमारी से निकाल ले

कंचन दवाई लिए मंसुदे में दवाई लागने लगी…कंचन देवश के सामने खड़ी थी इसलिए देवश की निगाह उसके पसीने भरे ब्लाउज के बगल पे गयी…अफ ऊस्की भीनी खूबशु सूँघके देवश का लंड अंगड़ाई लेने लगा लेकिन दवाई के जलन से आहह आ करते हुए देवश का ध्यान हटा कंचन देवश के चेहरे को हाथों से छोढ़के फिर चाय लेकर आई….चाय की चुस्किया लेकर बिना कंचन की तारीफ किए देवश बोला

देवश : अच्छा तू कुछ बता रही थी खुशी का कारण ज़रा बताना
कंचन : और क्या बताए बाबू? कल रात को काला साया मिला था

UPDATE-05)

Devesh masude pe ek baar fir chai lagte hi gaand faad chilaya, kanchan has padi usey bhi sust chutiya devesh ke heiran hone pe khusi huyi.

"Aap thik to hai na?" Devesh ne haami bharke chai firse pite huye kaha.

Devesh- aur bata fir kya hua?

Kanchan- kya hoga babu? Hamare mard ko to hamari itni si bhi chinta nhi hai, seher se gaav jaa rahe they ki achanak se barish tez ho gayi aur fir kuch balatkari humari gaand ke piche lag gaye.

Devesh- Acha fir tune kaale saaye ko dekha

Kanchan- Arey unki badollat hi to hum bach paye hai, warna hamare sath allah ka sukar hi tha ki unhone sahi waqt pe aake hume bacha liya.

Devesh- Ohh ye to bhut hi acha hua re kanchan, sahi me jo bade-2 police wale nhi kar paa rhe hai, wo ye kaala saaya karke dikha deta hai, waise fir kya hua tu itni ghani barish me wapis ghar kaise aayi

Kanchan- arey baabu kisi ko bataiyega nhi hum poori raat us kaale saaye ke sath hi they, humey to jaane dijiye humko saram aati hai

Devesh- kya re pagli tu bhi na? Hum sab samjh rahe hai aajkal tere aur us kaale saaye ke kisse sune, us raat bhi usne tere mard ki kya gaand todi thi. Hahaha kahi uska tujhpe dil to nhi aa gya hai jo baar baar tujhe hi bachata firta hai.

Kanchan- Arey babu aapko to samjhna chaiye uske jaisa nayak aurat ki ijjat karne wala thodi na koi ho sakta hai. Unhone jo baar-2 humpe ehsaan kiye uske liye to hum unki jindgi bhar sewa karenge.

Devesh- Haa haa badi aayi chal bartan dho de kal ke bartan pade hai.

Kanchan- Acha babu. (Apne hi khayalo me jisme wo kaale saye se chudayi ki yaad karte huye gaane gungunate huye chali gayi)

Devesh mann me jalne laga ek to usko uski wajah se kayi dino se commissioner se Calcutta jaakar daant khani padi aur uske baad uake farz aur ab uski nigaah me rakhi huyi aurto ke upper hath rakhne se usey mann hi mann gussa bhi bhut aaya. Mann hi mann bola-"huhh dekh lunga saale ko ek baar pata to chal jaaye saala hai kon?" Devesh janta tha wo kuch kar to sakta nhi lekin apni wardi ka robb dikha ke garaz to sakta hi hai..

Kanchan behad khus thi jo kaam wo ek ghante me karti thi aaj wo 30 minute me chali gayi aur aaj usne baksis ke liye muh bhi nhi padi... Ab to devesh ko lagne laga kahi aurat ke sath-2 wo kaala saaya teri wardi bhi na cheen le, ek to waise hi is seher ka incharge liya tha..

Police station pahuch ke salaam lene ke baad roz ki tarah wardi nikal ke files ko padhne lagta hai .. kaam chod ke apne hawaldar ko chai laane ko bolta hai..
Chor aa chuke sabhi salaakho ke peeche se devesh ko salaam karte hai
Devesh files padh hi raha tha ki achanak ek newspaper gira uske saamne, hamesha chai ke sath newspaper padhna uski purani adat thi

Usne jaise hi newspaper uthaya" Lo hamare super hero ka ek aur tareefo bhara story "- kal raat idhar seher me toofan aya aur ek toofan wo aaya jisne seher ke most wanted rapist raka ko maar giraya hahahaha.

Ye sab badbadate huye devesh gaand faad has raha tha chutiyo ki tarah, achank Constable ne salute marte huye bola kal raat rapist raka ki laash jhadiyo me kisi ne buri tarah se maar ke fek di hai ye andaja lagana koi badi baat nhi hai, lekin minister ko maarne ke baad ye kaala saaya hi hoga jisne fir apne haatho se insaaf kiya hai..

Devesh ko chinta satayi aur doctor ki suchna paate hi postmartam ghar me Constable ko leke ravana ho gaya..
Laasho ke test ke baad jo jo doctor ne bataya usey sunke devesh ki to gaand fat ke 4 ho gayi , badi hi berehmi se maara tha un gundo ko jin gundo ko police pakdne ne din raat ek kar di thi devesh ko samajh mein a gaya tha ki commissioner ko is baat ka yah pata lagne ke bad kahin usey fir unke gusse ko jhelna padega
Behrhaal aisa nahin hua kyunki commissioner kuchh dinon ke liye apni biwi ke sath ghumne ke liye out of state Gaya hua tha devesh apni kismat per khush hue Bina Rah nahin paya, Chalo dant se a bachne ka kuchh dinon ka extension to Mila..

Devesh Thane aakar chai ki ki chuski le raha tha, jab constable ne Kale saaye ke bare mein fir baat chhedi, do hi raaton mein uska Karishma sach mein nayab tha. Pahle local politician ko coma me bhej diya vajah Saaf thi wo nabalik ladkiyon ka shoshan karta tha usi ki banai recording video ko press me publish karke police ka jina haram karva diya tha aur aaj is rapist raka ki gand Mar li

Devesh is kasmakas me duba hua bola" dekh bhai vo kon hai? Kya hai? Kyu hai? Bhai hamara kaam to usey pakadne ka hai, ab ek tarah se usne is rapist ko maarke hamara aur government dono ki neend ko bacha liya, lekin agar kisi din hath aa gaya to saale ki gaand me danda ghused dunga, sasura apne hi saaye ko pehchan nhi paayega" ye bol ke dono hi has pade.

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"Kalmuhi chinaal kahi ki chal nikal yaha se"- us aurat ne chata chat ek 20 saal ki ladki ke kayi saare thappad maare aur usey ghar ke darwaze se bahar fek diya. " Chachi aaah maaf kardo aah"- us ladki ne gidgidate huye kaha, sab log dekh rahe they par koi aage nhi aa rha tha...

Aurat- Chup kar beshram kalmuhi mere bete pe dore dalti hai tujhe kaam pe rakhna teri garibi pe taras khake rakha meri majboori thi meri akal maari gayi thi, tujhe to marungi me randi kahi ki..

Ladki- aaah chod do mujhe aaah

Achanak doosre hath jaise hi doosri ladki pe jama paati,
Achanak ek bhari bharkam hath ne uska hath pakad liya,
Jab us aurat ne uski taraf bagal me dekha to uski gaand fatke hath me aa gayi, uske muh se itna hi nikla"k kaala saaya" aur wo kuch nhi bol paayi.

Wo ladki bhi uthke subkane lagi " ek bebas lachar garib ko tune kya samjh rakha hai?" Achanak us aurat ke piche se ek ladka bahar aaya jiski umar us maar khayi ladki ki umar ki thi

Ladka- aaye chod meri maa ko bhenchod teri maa cho....

Uske muh pe ek punch pada aur uske muh se khoon nikalne laga

"Mera bacha aaah" uski kalayi ko chodte hi apne bete ko pakad ke baith gayi, aur royi nigaho ki taraf se kaale saaye ki taraf dekhne lagi...

(UPDATE-06)

"Jab apne bache pe aayi chot to kaisa laga? Aur jo tere bete ne dar-2 takleef di hai uska kya? Kachi umar me isey aurat kisne banaya tere bete ne tu ne in gareeboo ko apne bete ka khillona samjh rakha hai, aaj to isey chod ke jaa rha hu, ainda isne kisi masoom ko tang kiya ya fir is ladki ko agar dhamkaya to thik nhi hoga"- itna kehker hi kala saaya sach me kisi saaye ki tarah ladki ko lekar apni kaali bike pe nikal gya

Vo aurat bokhlai, sehmi apne bete ko apne kaleje se lagaye rahi, achanak jab aurat ka pati jab samane aaya to uski maa ne bataya ki kya-2 hua? "Na jaane usey kaise pata? Ki hum aisa kuch karte hai? Jo bhi rahe kaale saaye ka saaya hum pe lag gya hai. Apne bete ko bolo ki kuch din ghar se bhar na nikle"- us admi ke jehen bhi ek yahi baat thi ki akhir ye kaala saya hai kon?

Jaldi hi is veeran khandar pe dono baithe huye they, ladki ka naam DIVYA tha vo ** saal ki umer se hi us ghar me kaam karti aayi thi. Pehle usne apni gareebi ke chalte kaafi zulum saha, lekin jawani pe aate hi 19 saal ki umar me uski malkin ke bete ne usey apne pyar ke jaal me fasaya, ek baar usne tablet bhi khayi thi, usey dar satane laga tha ki usey ultiya ho rahi hai. To foran us ladke ne usey gali-galoch deke marna suru kar diya, is baat pe koi yakeen nhi ki lekin vo janti thi ki vo ladka usey kbhi nhi apnane wala kisi bhi surat me...

"Abhi tumhare paas sirf do hi raaste hai ek nayi Zindagi suru karo aur apne hone wale bache ko gira do", pehle to wo jid pe ad gayi par kaala saya ne jab usey samjhaya to wo khud be khud majbooran maan gayi, usne foran uske baare me pata kiya , pata chala wo doosre seher se hai aur bhut hi gareeb hai, agar uske ghar me pata chala to uski maa to heart-attack se hi mar jayegi, ab wo kisi ke paas jaa bhi nhi sakti itna keh ke wo rone lagi

"Dheeraj rakho sabar karo sab theek ho jayega" kaala saaya chupchap khada hua aur usne usey foran wahi tehrne ko kaha kuch der baad wo bike se vapis aaya fir usne usey pregnancy card diya, pehle to wo samjh na paayi fir kaale saaye ne jo usey bataya to wo maan gayi

Aur paas hi ke doosre aur jakae mootne ki position me jabran khol ke baith gayi, usne khud ke suit ko kaafi uper utha liya pajama bhi uper kiya aur uski jhaante bhaari baalo ke guche me se hi andhere me pisab ki dhar nikali, andhere me kaala saya sirf pisab ki awaz sun sakta tha kuch der baad wo pregnancy card usne kaale saaye ko diya, kaale saaye ne jab ye dekha to uski khusi ka thikana hi nhi rha aur divya ko bataya ki wo ab pregnant nahi hai, sayad vo bimaar ho jis vajah se ulti huyi ho, ye sunkar divya muh pe hath rakhe bhagwan ko thanks kehne lagi aur man hi man us akhil naam ke ladke ki maa- behen ek karne lagi lekin usey udasi bhi thi ki ab apne gaon kis muh se jayegi....

Kala saya - dekho ek kaam karo tum mere sath chalo, mein tumhe kaam dunga.

Divya- apka itna ehsaan hai mujhpar apka bahut dhanyawad.

Kala saaya- un logo ne waise hi bahuto pe julam kiya hai, tum fikar mat karo un sab ko sabak me sikhaunga, tum bas chupchap mere sath chalo..

Divya ne sirf kala saya ka naam suna tha wo janti nhi thi ki wo kitna diler aur dayawan hai. Vo usse bhut parbhawit ho gayi thi, raat kafi ho chuki thi kaala saya jald hi apni bike se divya ke sath utrta hai aur fir ek band ghar ke samne aata hai aur lock ko key se kholta hai aur fir dono ander ghuste hai, ghar behad bada tha chaaro aur sofa, alishan table sabkuch tha, ye sab dekhke divya maano charo aur ghum si gayi...

"Aaoo mere sath" kaala saya apna mask thik karte huye us sofe pe baithta hai, aur us bag ko jo us aurat ne ghar se bahar fek diya tha usey sofe pe rakh deta hai, kala usey fresh hone ko bolta hai aur fir andhere kamre ki lights on kar deta hai aur bathroom chala jata hai..

Aur bahar aata hai to vo dekhta hai ki divya ab ek safed suit me baithi huyi hai, vo freeze se rice, daal aur kuch sabzi nikal ke usey paas hi ke chule pe hi garam karta hai
Kamara dekhte huye muskrakar divya baat chesti hai.

Divya-aapke baare me bhut suna tha kya aap yahi rehte ho ?

Kala saya- hmmm raat ke round ke baad me yahi rukta hu, lekin ye baat tum ab kisi ko mat batana.

Divya- Thik hai ab aap mere bhagwan jaise hai

Kala saya - Aisa kuch nhi hai mein sirf ek insaan hu

Divya - lekin fir aaj unhone mujhe ghar se nikal diya tha agar apki saran me na aati to.

Kala saya - lekin tum fisli kyu? Tumhe ek ladki ke sath sath tumhe khudko rokna bhi chaiye tha

Divya saram se laal ho gayi lekin fir mayusi se boli-"khud pe bas nhi rha us kameene ne mujhe itna uksaya ki mein behak gayi aur apna kuwarapan kho diya"- itna kehkar wo rone lagi

Kala saya- koi baat nhi tum fikr na karo me hu na.

Kala saya usi waqt phone lagata hai, aur fis haske kisi se baat karne lagta hai divya sab kuch samjh rhi thi par wo chupchap thi, phone cut hone ke baad." Tum fikar na karo vo office ka mera dost gaurav ke yaha tum naukari kar sakti ho, tumhe koi hunar aata hai"

Kaale saaye ki baat pe usne chekte huye haan me sir hilaya, aur bataya usey silayi ka kaam aata hai..

UPDATE-07)

“ठीक है समझ जाओ तुम्हारी नौकरी लग गयी और तुम फिक्र ना करो अबसे तुम यही रहोगी मेरे साथ”….

पहले दिव्या संकोच करने लगी…फिर काला साय ने ऊस्की संकोच को थोड़ा और उसे समझाया की हूँ चाहे तो उसे कहीं किराए के घर में रखवा सकता है पर वो रही नहीं सकती थी इसलिए ऊसने हामी भर दी की…काला साय ने उसे बताया की हूँ चाहे तो कभी कभी गाँव भी जा सकती है

इतना कहकर ऊसने अपनी जेब से दिव्या को कुछ रुपया दिया…दिव्या ने पहले मना किया…लेकिन काला साया ने उसे समझाया की ये रुपया उसके बूढ़े मां के लिए हूँ ले ले ताकि जो तनख़्वाह ऊस्की मालकिन ने मर ली कम से कम इससे तो गुजारा कर सकती है..उसे खाने पीने की कोई प्राब्लम नहीं होगी यहां हूँ बीच बीच में गाँव भी जा सकती है

इतना सुख अगर किसी औरत को मिले..तो हूँ औरत अपने आप ऊसपे सबकुछ न्योछावर कर देती है…दिव्या काला साए के स्ाअए में रहने के लिए तैयार हो गयी…और दिल ही दिल में उसे दुआयं देने लगी…काला साया ने उसे सिर्फ़ इतना कहा की भूल से भी कभी भी हूँ उसके मुखहोते और ऊस्की जिंदगी के बार्िएन में ना पूछे बाकी हूँ हर तरह की बातें शेयर कर सकती है…उसे भी क्या प्राब्लम थी? एक छत्त दो वक्त की रोती और गुजारा करने के लिए उसे काफी रुपया मिला था हूँ चुपचाप बस हाँ में जवाब देती रही

और फिर बिना वक्त गुज़ारे काला साया ने उसे घर का दरवाजा लगाने की हिदायत दी और कोई भी चीज़ के लिए फोन करने को कहा…जरूरत पढ़ने पे हूँ आ जाएगा…इस रहस्मयी इंसान को जानना दिव्या के बस की बात नहीं थी ऊस एक रात ने ऊस्की जिंदगी को बदल दिया…काला साया फिर अपनी बाइक पर बैठे अंधेरे रास्तों से होकर गुजरते हुए चला गया…और एक गहरी सोच दिव्या के मन में छोढ़ता हुआ चला गया उसके भी मन में यही था की रहमसय मुकोते के पीछे हूँ कौनसा दयावान इंसान है जो मसीहा बनकर आता है…

लगभग पाँच दिन हो गये…और इन पाँच दीनों में दिव्या काला साया के शरण में रहते हुए काफी खुद को बदल चुकी थी…काला साया ने गुप्त रूप से गौरव से दिव्या को मिलवाया पता चला की गौरव गरीब विधवा और नाबालिक लड़कियों पे होते सोशण का करा विरोध करता आया है और काला साया की वो मदद भी करता है सिलाई बुनाई का उसे काम मिल गया और वो गौरव के ऑफिस दिन भर काम करके जल्दी से घर आकर बंद हो जा करती थी…दूसरी तरफ काला साया रोज़ रात को आ जा करता था और फिर भोर होने से पहले ही चला जाता था उसके इस रहस्मयी व्यवहार से दिव्या काफी हैरान थी पर उसके दिल में काला साया किसी फरिश्ते से और उससे भी ज्यादा अपने से कम नहीं था वो अब घर की साफ सफाई कर लेती और काला साया के लिए खाना भी बनकर रखने लगी एक तरह से वो काला साया की सेविका बन गयी

दूसरी ओर देवश का तरकपन फिर सर चढ़ने लगा और ऊसने मौका ना ज्यादा गावते हुए ठान लिया की वो अब औरत का जुगाड़ करके ही रहेगा…कंचन पे हाथ तॉहवो साफ नहीं कर सकता था पर दूसरी ओर रणदिपारा जाना भी बेकार ही था

क्योंकि ऊसने कुछ महीने पहले ही शांता नाम की अपनी प्राइवेट रंडी के साथ जब सेक्स किया तो उत्सुकता में धदढ़ ऐसे चुदाई की ऊस्की चुत बुरी तरह चील गयी और शांता के नखरे वो और सहने वाला नहीं था वो उसे लंड चुत में तो डालने रत्तीभार भी नहीं देगी

इसी कशमकश में देवश खिजला गया और उसका व्यवहार चिड़चिड़ा होने लगा…शादी वो कर नहीं सकता था…और किसी के साथ ज़बरदस्ती करना मतलब काला साया को वो दावत देना वैसे भी दिल ही दिल में वो काला साया से बहुत दरर्ता था जबसे उसके किससे और उसके विक्टिम्स को देखा था की ऊँका क्या हश्र हुआ था

ऊस दिन मौसम काफी बिगड़ गया…और देवश अपनी गाड़ी को खूब रफ्तार से चलाए जा रहा था..अचानक बाज़ार से शहर के रास्ते में उसे एक औरत दिखी जो गान्ड मटकते हुए मटका लेकर जा रही थी उमर यही कोई 46 साल तो होगी बदन में काफी चर्वी था….देवश ने रफ्तार तेज कर दी और ठीक उनके करीब गाड़ी खड़ी की और उतरके उसे आवाज़ दी शकल जानी पहचानी लगी वो औरत भी एकटक देवश को देखते हुए उसके करीब आई

देवश बात छेड़ता ऊसने खुद ही टपक से बोला “तुम अंजुम के बेटे हो ना”….ये सुनते ही देवश एकदम से उसे घूर्रने लगा कहीं ये ऊस्की मां की सहेली अपर्णा तो नहीं थी…”अरे काकी मां आप?”…..बिना पैर छुए देवश तहेर ना पाया

अपर्णा : ओह मां तू तो काफी बड़ा हो गया मेरा बच्चा कैसा है? (ऊन्होने देवश के माथे को चूमा और उसके गाल पे हाथ रखकर उसके जवानी की तारीफ करनी लगी)
देवश : बस काकी मां आप सुनाए आपके बच्चे?

देवश जनता था अपर्णा मां के बुरे दीनों में ऊँक इकाफी मदद करती थी…ऊँका पड़ोस में घर था खास अमीर तो नहीं थी पर मां के पेंट में जब देवश था वही उनकी मसाज वगैरह करती आई थी और देवश के जन्म के बाद भी अपर्णा ही उसके पूरे बदन की मालिश किया करती थी…अपर्णा के दो बच्चे थे जो अब गुंडे और लफंगे बनकर कहीं शहर छोढ़के जा चुके थे…उनके पति की भी मृत्यु हो गयी थी अब वो अकेले पढ़ सी गयी और दोआबारा शहर में आ गयी देवश करीब 20 साल बाद अपर्णा को देख सकता था आखिरी बार जब वो पाँच साल का था तब अपर्णा ऊनसे अलग हुई थी

अपर्णा का बदन काफी भरा पूरा था किसी मल्लू आक्ट्रेस की शकीला को बिता लो और इसके उठा लो रंग रूप सब वैसा…”और बेटा बहुत दुख हुआ सुनकर तेरी मां के साथ?”…..

देवश ने आगे कुछ कहने नहीं दिया

देवश : बस काकी मां अब रहने दो ऊन बातें लम्हो में सिर्फ़ दर्द है
अपर्णा : सच बेटा तुझे देखे अरसा हो गया तुझसे मिलने की बड़ी ख्वाहिश थी पर तुझे ऐसे हालत में मिलूंगी सोचा नहीं तू तो बड़ा ज़िम्मेदारर हो गया है
देवश : बस आपकी दुआ है
अपर्णा : तेरा घर कहाँ है? किसके साथ रहता है?
देवश : चलिए में घर
अपर्णा : बेटा वो तेरी बहन घर में अकेली है
देवश : मेरी बहन मतलब आपकी एक बेटी हो गयी कितनी बड़ी है?
अपर्णा : बस ऊस कमीने ने मुझे पेंट करके इस दुनिया से चला गया मुझे बेसहारा छोढ़के 18 साल की है शीतल नाम है उसका
देवश : मेरा सारा परिवार यहां है और उजहे पता नहीं काकी मां चलिए ना मैं अपनी शीतल को देखना चाहा हूँ
अपर्णा : हाँ बाबू तुझे ऐसे थोड़ी ना जाने दूँगी चल

देवश अपनी गाड़ी में अपर्णा को सवार किए पूरे रास्ते बात करते हुए दूसरी बस्ती में घुसा…ड्रोगा को देखकर पहले तो सब चौंक गये लेकिन किसने कुछ नहीं कहा जब अपर्णा ने सबसे देवश का परिचय कराया….देवश जनता था अगर कोई प्यार करने वाली इस दुनिया में औरत है तो वो है अपर्णा

(update-08)

Aprna devesh ka hath pakad ke usey ek mitti waaale ghar pe le gayi...

Aprna bhut garib ho chuki thi, ander koi ladki pipe se chule me dhue me fuk maar rahi thi, achanak apne saamne khade uniform waale saks ko dekh ke uth khadi ho gayi- " maa ye kon hai" sheetal thoda sharmayi aur ek kinare aad me aa gayi..

Aprna:- Arey boka ye tera bhai! Batati thi na tujhe tere anjum kaaki ke baare me ye unka beta hai.

Devesh:- kaisi ho sheetal, waah jaisi kaaki maa waisi meri behen koi fark nhi..

Devesh ne sheetal ko gaur se dekha usney ek red colour ka suit pehen rakha tha, uski chaati bhi kaafi sudol thi, sheetal behad khus huyi aur devesh ko ektak dekhti rahi, devesh usko handsome laga aur devesh bhi unski nazaro ko samajh raha tha
Aprna ne devesh ko bithaya aur uske liye chai banayi
Aprna jaise hi niche baithi uska peticot uski gaand ki darar me ghus gya.
Devesh ki to darar dekh ke saase hi atak gayi, badi muskil se chai pikey wo fir se dono se baate karne laga

Devesh:- Kaki maa ye to galat baat hai aap log yaha ho aur mujhe pata bhi nhi chi chi, khair meri kaaki maa aur meri pyari behen mujhe mil gayi ab mujhe kuch nhi chaiye, ye lijiye kuch paise..

Pehle to khub naa- nakur hua par usney sheetal ke hath me paise diye ki ye uski taraf se tofa hai, sheetal ke komal haatho ko chute hi bijli ka jhatka laga devesh ko, devesh ne bhi ye bhaap liya tha ki sheetal usko kuch jada hi muskurakar dekh rahi hai, sayad usey bhi devesh ka saath pasand aaya, isliye usne bola ki kabhi aaya karo, to sheetal ne muskrakar haa kaha..

Devesh ka lund baithne ka naam nhi le rha tha, usne aprna kaki ko badi chalaki se bola ki uski kaamwali baai bhut harami hai, khana-wana dhang se nhi banati hai ab to devesh ka chut maarne ka jugaad ho gya tha wo bhi pakki wali..

Devesh:-acha kaaki maa apse kuch akele me baat karni hai..

Aprna:- haa bolo beta

Devesh:- kaaki maa mene suna tha ki apka bhoore( ek sehri ladka jisne aprna ko khub choda uska affair wala bf lekin isey dhoka de gya jisse aprna sadme me aa gayi tb meri maa ne isey sambhala tha) ke sath

Aprna:- Haa beta ( udas hoke) me janti hu tumhari maa ne tumhe sab kuch!

Devesh:-kaaki maa jaane dijiye mujhe bhut dukh hai us baat ka, khair me ab aap logo ko kahi jaane nhi dunga aur kaaki aaj to aapko mera ghar dekhne jaana padega..

Aprna:- acha mere inspector jisey mene apni gaud me khilaya wo aaj bhut bada admi ban gya ..

Devesh:- haa meri kaaki maa ab maa ke baad aap hi to sab kuch ho mere liye

Aprna:- chal beta koi baat nhi

Devesh aprna ko sath le jaane laga, aprna ne sheetal ko bol diya ki wo shaam tk ghar wapas aa jayegi, idhar devesh ke mann me to laddu foot rahe they

Devesh aprna ko jeep pe sawar karte huye gaav ki basti se bahar le aaya, ab gaadi seher ke raste pe chalne lagi.

Devesh ne raaste me hi gaadi market ki taraf mod li pehle to aprna ko kuch samjh nhi aaya, par devesh ne uska hath pakda aur usey sidha ek badhiya saadi ki dukaan pe le gya, kaafi masakat ke baad ek jodi saadi gift ke taur pe devesh se leni hi padi usey, devesh ne sheetal ke liye bhi designer suit liye, aprna bolne lagi in sabki kya jaroorat hai kyu faaltu ka kharcha karne laga hai, par devesh to janta tha jitna ghera pyar dikhayega utna hi uska lund ander gherayi me jaayega...

TO BE CONTINUED....

(UPDATE-09)

par devesh to janta tha jitna ghera pyar dikhayega utna hi uska lund ander gherayi me jaayega...

AB AAGE:-

Aprna ko laga ki devesh usse behad mohobat karta hai , uske ander apne aur apni beti ke prati itna sneh dekhkar uski aankho me aansu aa gaye..

Aprna:- Bete tere ko to chot lagi hai , tu chal fir kyu rha hai jaldi se ghar chal me pati kar dungi teri.

Devesh ko sach me jalan to thi isi karan wo thoda langda ke chal rha tha

Devesh:- Arey kaaki maa ghar hi to jaana hai aapko me chod dunga.

Devesh aprna ka hath pakad usey doosri dukan ki aur le jaane laga

Aprna:- nahi beta bas aur kuch mat le waise hi tu pareshan ho gya hai meri wajah se.

Devesh:- Kya kaaki maa apko aisi saari me dekhke kitna bura lagta hai mujhe, apka blouse bagal ke hisse se fat gya hai.

Aprna:- Beta kya karu kaha se laau itna paisa?

Devesh:- Aap paise ki fikar mat kijiye aur chaliye mere sath.

Devesh aprna ka hath pakad ke jaan bujh kar unke liye kuch bra air panty kharidne laga, aprna thodi saram karne lagi.

Aprna:- chal beshram ye sab kyu le rha hai? ( Aprna ne uske hath pe pyar bhari chutki kaat li)

Devesh:- aapke paas kitni jodi bra hai.

Aprna:- yahi koi 2 jodi!

Devesh:- kaaki maa chalo apna size batao?

Aprna:- Beta 38D hai.

Devesh ko sunkar bahut maza aaya kyuki wo jan bujhke aprna ko bra panty me dekhna bhi chata tha, size jaanke wo andaja bhi laga chuka tha ki uski kaaki maa kitni sexy hai.
Usne kuch aprna ke manpasand bra panty ke jode kharide fir sheetal ke liye uske size ke baare me pucha. Pehle to aprna khub mana karne lagi par devesh ne kha ki...

Devesh:- uski behen ke paas dhangki cheeze nhi hai, aajkal bina undergarments ke kapdo me sab kuch dikhta hai, logo ki nazar thik nahi.

Aprna bhut khush huyi ye janke aur usne bataya ki sheetal ka size 36 C hai. Jisey sunke devesh ka lund tight ho gya ki dono maa beti to maal hai ekdum.

Sabkuch kharidne ka baad aprna ne kaha ki ab jada der mat kar le chal mujhe apne ghar. Devesh to khud excited tha. Dono foran ghar pahuche, alishan ghar ko dekh ke aprna bhut khush ho gayi idhar udhar dekhne ke baad

Aprna :- tera ghar to thik se saaf nhi hai kaisi kaamwali rakhta hai tu?

Devesh ne fir kanchan ki bahut burai ki

Aprna:- tu usey naukari se nikal de me tere ghar ka kaam kar diya karungi.

Devesh to yahi chata tha, fir devesh ne natak kiya ki uski jalan bhut tez ho gayi hai.

Aprna ne foran usey late jaane ko kaha, pehle to usne jhatke se late ke apna jalan wala bhaag dikhaya, jhakam thik gaand ke kinare laga tha, aprna ne isssshhh karte huye usey foran apni pent utarne ko kaha. Devesh ne thoda natak kiya aur kaha ki ab wo thoda bada ho chuka hai usey sharam aati hai. Lekin aprna ne chidte huye kaha

Aprna:- apni maa se bhi koi sharam karta hai, tere chote se nunnu ko bhi mene malish ki hai , jaldi se pent utar le nhi to dawai nhi laga paungi.

Pehle devesh ne apna shirt utara fir apni belt dheeli karje usey bhi utar diya, wo ek frenchy me tha apni kaaki maa ke saamne, us waqt aprna ka dhyan sirf uske jhakam pe tha, wo dawai ki dabi laayi aur fir jhakam ko dekha, thoda sa khoon sukh chuka tha

Aprna :- Tu ek kaam kar pet ke bal ulta let jaa aur tere underwear ko thoda uper kar le.

Devesh ne aise hi kiya par dawai lagate time kapda niche ho jaata.

Devesh:- kaaki maa kya me apni frenchy utar du?

Pehle to aprna apne muh pe hath rakh ke hasi fir devesh ne uski saram todte huye kaha.

Devesh :- wo usey apna beta maanti hai to kaahe ki saram aap to mujhe nanga bhi dekh chuki ho na.

Devesh ki baat mante huye wo raazi ho gayi, devesh ne foran apni chadi niche khishka di tango tak, wo ab pura nanga tha, lund bistar pe dab gaya tha, uski safed baalo se bhari gaand aprna ke samne thi, aprna foran gaand pe dawai lagane lagi, aprna ke sparsh se hi devesh ka lund jhatke khaane laga, devesh to dheere-2 garam hone laga tha.

Aprna:- pehle to kitna sawla tha lekin ab kitna gora badan ho gya hai tera.

Devesh:- kaaki maa ye to massage ka jaadu hai, kaaki maa ab jaake sukun mila jalan ko

Aprna:- acha beta me chalti hu fir.

Devesh:- kaaki maa jab aapne dawai laga hi di hai to patti bhi kar do aur ho sake to sarie maalish bhi kar dijiye na.

Aprna:- par beta mujhe der ho rahi hai.

Devesh:- arey kaaki maa sheetal badi hai wo akele ghar sambhal legi, aap itne saalo baad mili hai to thodi der aur rukiye na.

Aprna maan gayi aur wo jaake tel ki katori le aayi aur devesh ki jaangh ki maalish karne lagi, usey devesh ka 8.5 inch ka lund dikh rha tha, jisey dekh ke wo ghabra rahi thi

Devesh:- Aaahh maa kya sukoon hai tumhare haatho mein aaj se aap hi meri maalish karna wo kya hai na police office me baithe-2 aur criminals ke piche daud bhaagne me bhut dard hota hai

Devesh aprna ki aankho me dekhta hua idhar udhar ki baate kar raha tha, lekin aprna nazre jhukaye bas maalish kar rhi thi

Devesh:- Kaaki maa aap itni jawan ho kaisa nikla wo kamina kutta kaas us waqt me bada hota.

Aprna:- Beta halaat se kya jhujhna jo chala gaya so chala gya...

TO BE CONTINUED....

Aprna:- beta inspector ke pass jaane ki himmat nhi thi tarah tarah ke sawal karte ek sadi suda aurat ger mard ke sath riste me hai meri to jindagi tabah ho jati. Jab usey pata chala mere do bache hai to usne saadi ke liye haa ki lekin jab mujhse mann bhar gaya to doosri saadi kar li

Aprna ki aankho me aansoo aa gaye.

Devesh uthke aprna ke kandhe ko dabaye unhe chup karane laga ki wo aise umeed usse na kare wo jindagi bhar unka sath dega aur sheetal ki bhi dhum dham se saadi karwayga. Aprna ne apne aansoo poche aur devesh ki taraf muskurakar dekha

Aprna:- waise beta tu to kaafi bada ho gya hai kab shaadi karega tu bhi.

Ye sunke devesh bhi hasne laga.

Devesh:- arey kaaki maa aap to jante ho yaha ki lobhi aurto ko sab paisa khaane wali hai.

Aprna:- to bol na tujhe kon pasand hai? Ya bol me dhundhti hu tere liye rishte, tere me koi bhi kami nhi hai.

Devesh:- nahi kaaki me shaadi nhi karunga bas aise hi.

Aprna:- hatt badmash bhut jawan ho gaya hai tu, tujhe dekhke hi lagta hai

Aprna ki nazar lund pe thi

Devesh:- shaadi to me karunga nhi lekin pata nhi dil fisal jaaye aurat to mujhe mil hi chuki hai..

Aprna:- kon hai wo khusnasib?

Devesh:- aap kaki maa.

Aprna:- hatt badmass.

Devesh janta tha aprna hasi me taal rahi hai uski bujhi hui rakh me aag lagana koi badi baat nhi hai, isliye devesh ne aaw dekha na taaw aprna ko kas ke jakad liya aprna ek dum se hadbada gayi

Aprna:- ye kya kar raha hai beta tu me teri maa jaisi hu..

Devesh:- ohh kaaki maa tum itni khubsurat ho ki me ab sambhal nhi paa raha khud ko.

Is baar aprna virodh karne lagi wo samjh chuki thi ki devesh garam hone laga hai...

Devesh ne usey aur kaske jakad liya aur usey leke bistar pe let gaya, aprna thoda gussa ho gayi is baar.

Aprna:- beta ye galat baat hai me teri maa jaisi hu tu mejhse kitna chota hai, dekh tu mere bete ki umar ka hai shona chod de mujhe.

Devesh ne naa me garden hilate huye foran uski chatiyo ko dabana suru kar diya , is baar aprna ki aankho se aansu behne lage aur devesh bade hi kaske uski chuchiyo ko dabane laga aur uske kaan se hote huye uske gale pe hoth ferne laga, aprna ek arhed umar ki aurat jaroor thi lekin kahi na kahi uske ander ki dabi huyi aurat jaag gayi, devesh usey chodne( leave) wala to nhi tha aur na hi aprna uth paa rahi thi uski halat kisi laash jaisi ho gayi thi.

Devesh ne foran usey lita diya aur uske uper chad ke uske kaan, aankh, gaal aur hontho ko chumne laga, aprna kasmasati rahi

Kuch der baad devesh ne foran uske blouse ko badi mehnat se nikal feka aur uski badi-2 chuchiyo ko azad kar diya, usne bilkul der na karte huye uske chuchiyo ko muh me thus liya aur doosre ko hath se dabane laga kabhi wo choosta kabhi daant se nipal kaatta , aprna bhi ab khud ko dhila chod chuki thi aur dabi dabi siskariya le rahi thi.

Devesh ne niche badhte huye apni jubaan aprna ki naabhi me ghusa di aur dono hatho se uski chuchi dabane laga, fir devesh ne der na karte huye peticot ko khol dala aur jaise taise khiska ke ghutno tak kar diya, aprna ne uthna chaha par devesh ne usey firse lita diya, aur uski jhaanto bhari chut me muh rakh diya ye aprna ko pagal karne ke liye kaafi tha

Devesh bhut jor se uski chut ko chuse jaa raha tha, uski pasine se mehekdar chut ki chusai se hi aprna behekne lagi.
Ek jawan mard ke samne uske dugni umer ki aurat leti huyi apni chut chuswa rahi thi, devesh ne uski moti chut me bhut sara thuk mal diya aur fir usey apni jubaan se chodne laga, aprna kaampne lagi, kuch der baad hi devesh ko apne hotho pe namkeen sawad mehsus hua, aprna buri tarah se kaamp rahi thi par devesh ne deri na karte huye apne mote lund thuk ger ke masalte huye

Jaangh ko aur faila diya aur bich me lund ko firane laga, aprna aaah aaaah karke siskariya bharti rahi, devesh ne apne lund ko chut ke muh pe set kiya aur ek jordaar dhaka maar diya, aprna ki chikh nikal gayi, par devesh ne rehem na karte huye kas kas ke lund chut ke ander pelne laga, lund ander bhar aram se ho rha tha koi jada sakth chut nhi thi par thi bhut garam, devesh ko apna dugna stamina lagana pada kyuki itne dino ki tharak ko saant karna jaroori tha

Beech beech me aprna ki chuchiyo me sir rakh ke unhe chus leta hai, aprna ke muh se siskiyo ke alawa ek sabd nhi nikal raha tha bas poore kamre me chut aur lund ke takrane se huyi awaze aa rahi thi thap thap thap.
Devesh pure tarike se aprna ko banane me laga hua tha, devesh ne chodte huye jaise aprna ke hotho ko chua usne koi virodh nhi kiya bas uska sath nhi de rahi thi devesh kabhi uski jeebh chusta kabhi uske hoth kam se kam 40 min ki chudai ke baad devesh ne apna maal aprna ki chut me bhar diya.

Thodi saanse sambhalne ke baad

Aprna:- tu ye baat na to sheetal ko batayega na hi kisi aur ko.

Devesh:- jaan ye hum dono ke andar ki baat hai, waise tune bhut maze diye re.

Devesh ne apna lund aprna ki chut se nikal liya, aprna ki chut se abhi bhi devesh ka komras nikal raha tha, aprna uthke jaane lagi to devesh ne usey fir daboch liya.
Devesh ne foran aprna ke hotho ko apne muh me bhar liya aur uske upper chad ke kiss karne laga, dono ek baar fir behekane lage, is baar devesh ne nangi aprna ko jhuka diya aur kuttiya bana diya aur khud kutta ban gaya air uski gaand ke ched me angutha daal diya aprna chonk gayi.
Aprna:- aram se beta wo bhut tight hai.

TO BE CONTINUED ??

(UPDATE-11)

Devesh ne apna lund aprna ki chut se nikal liya, aprna ki chut se abhi bhi devesh ka komras nikal raha tha, aprna uthke jaane lagi to devesh ne usey fir daboch liya.
Devesh ne foran aprna ke hotho ko apne muh me bhar liya aur uske upper chad ke kiss karne laga, dono ek baar fir behekane lage, is baar devesh ne nangi aprna ko jhuka diya aur kuttiya bana diya aur khud kutta ban gaya air uski gaand ke ched me angutha daal diya aprna chonk gayi.
Aprna:- aram se beta wo bhut tight hai.

AB AAGE:-

Devesh ne foran uski khuli gaand dekhi sach me devesh to pagla hi gya tha gaand dekhke, usne foran lund ko ched me tikaya aur apni ungli bahar nikali aur bade hi kaske ek jhatka lagaya is baar aprna chikh padi, usey behad dard hone laga, usne sidhe khade hona chaha oar devesh ne usey jhukaye rakha aur uske chutado ko kaske pakad kar 3 4 dhake kas kaske maar diye, aprna ko bhut tez dard ho rha tha wo rone ko ho gayi thi lekin wo jaanti thi mard apne kaabu me jabhi hoga jab wo apna veerya chod dega, ab devesh ne bhi kaafi achi speed pakad li thi wo kas kas ke aprna ki gaand maar raha tha, aaaah aaahahhh aahhh ki awaze pure ghar me fel rahi thi agar koi ghar me hota to ye paka pakde jaate..

Lekin is waqt devesh to bas aprna ki gaand marne me busy tha aur kas kaske dhakke marta raha aur aprna bhi apni gaand piche le jaake full sath de rahi thi, kuch der aise hi gaand maarne ke baad usne apna lund gaand se bahar nikal liya aur palag pe baith ke 60 killo ki aprna ko apne lund pe bitha diya, pehle to lund ghusa nhi lekin aprna ne khud hath se pakad ke lund pe baith gayi aur upper niche hone lagi.

Ab devesh puri takat laga ke bhari bharkam aurat ki niche se gaand maar raha tha aur apne dono hatho se uske chuche daba raha tha aur bich bich me aprna ko apne lund pe koodne ko bolta , aprna ab kaafi jyada horny hone lagi thi aur 5 6 dhako ke baad wo bhi devesh ke sath jhad gayi.
Devesh apna lund uski gaand me rakhe rakhe hi let gaya

Thodi der baad aprna uthi aur apni gaand ko aur devesh ke lund ko saaf kiya.

Aprna:- beta tune to thaka diya aise koi chodta hai, tu let me nahake aati hu.

Kuch der nahane ke baad aprna apne kapde pehen ke bahar aayi to devesh unse maafi mangne laga to aprna ne bas itna bola ki

Aprna:- beta ye baat kisi ko batana mat.

Deves:- kaaki maa aap tension na lo.

Fir aprna apne ghar nikal jaati hai aur devesh so jaata hai.

Agle din police station me betha devesh apni fir vahi khaki vardi pehen case ki files padh raha tha vo thoda tension me tha lekin ander se bhut khus tha ki usne apni kaaki maa ko chod diya ek din me.
Aur sath me ek jawan ladki ki seal pack chut bhi milegi.
Constable bhi heran tha par wo jaanta tha ki bhaisahab jab khus hote hai jab kisi ki le lete hai.

Chaae wo kisi crimnal ki leni ho ya commissioner se tarif leni ho ya kisi aurat ki chut leni ho.

Constable:- sir aaj to aap kaafi khus lag rahe hai.

Devesh:- khus kyu na hou bhala jab zindagi me aish hi aish ho.
Constable:- Haa ye to hai sir ab hume hi dekh lo sham ko thake haare ghar jaate aur ghar jaate hi 2 roti ke sath biwi ki 10 nakhre sunne ko milte hai aji ye laado aji wo kardo , gaand maar rakhi hai sahab.

Devesh:- abey lode parsad abey kisi aur ki baato me mat aaya kar, teri biwi hai wo 7 fere liye hai tune 10 bache paida ki hai tune unki jimmedari tu uthata hai to apni ko kahi se bhi chod diya kar aage se piche se muh se..

Constable:- kya bole sahab ab hamari biwi me wo baat nhi rahi.

Devesh:- kya yaar tu bhi na tujhe randi ke paas to me jaane nhi dunga apni ghar ki hi koi aur pata le.

Constable:- sahab kya bol rahe wo jo me sex kahaniyo ke baare me aunta hu insect wala.

Devesh:- Abey chodu usey incest bolte hai, dekh tu bachpan me maa ke hath ki kheer pasand karta tha na. Behen ka pyar gf ke pyar se jada acha lagta tha ya nhi.

Constable:- hahaha sir ye bhi koi kehne ki baat hai.

Devesh:- iska matlab tu apni maa ko pasand karta hai

Constable :- haa bachpane me wo thoda nahane ke time dekh liya karta tha.

Devesh:- acha beta to bachpan se hi bigde huye hai hamare hawaldar sahab.

Constable hi ek tha jisse devesh khul ke hasi mazak kar liya karta tha, thodi der me chai aayi chai ki ek chuski li hi thi ki samne se ek 40 saal ki aurat gaand matkate huye andr aati hai aur jhuk namaste karti hai..

Devesh:- aaiye bethiye.. ( ye divya ki malkin thi aur wo apne bete sahil ke sath aayi thi wo pakde baith gaya)

Devesh:- kahiye chachi ji kya madad kare aapki? Apka beta pet pakde kyu baitha hai, kisi ne pet se kar diya kya ya hazma kharab hai?

Saare kaidi thaka laga ke haste hai sahil ko bhut gussa aaya par wo chup chap baitha raha kyuki usey pata tha uski gaand me danda de diya jayega.

Devesh ne sabko saant karaya aur us aurat ki taraf dekhne laga

Aurat :- ji mera naam naina hai aur ye mera beta sahil.

Devesh :- to kis cheez ki report likhwani hai.

Naina:- ji kuch din pehle atamghati hamla kiya tha mere bete pe kaale saaye ne

Devesh ke muh ki chai bahar aa gayi, naina gheri nazro se devesh ko dekhne lagi, devesh ne maafi maangke table ko saaf karwaya.

Devesh :- kaale saaye ne kyu maara tumhare bete ko kisi aurat ko cheda tha kya?

Naina:- arey nhi sahab mera beta to bhut sarif aur bhola hai.
Fir wo devesh ko ulti sidhi patti padha ke badhkane lagti hai lekin uski baato pe koi dhyan nhi de rha tha.

Devesh:- acha madam ji hume bhut hua aapke baare me jaankar lekin aap hi bataiye jo hamare mla aur us khatarnak rapist raka ko maar diya wo to acha hai aoke bete ko jaan se nhi maara apko to khus hona chaiye.

Naina:- aap daroga hoke kaisi baate kar rahe ho?.

TO BE CONTINUED ??

(UPDATE-12)
​

Devesh:- acha madam ji hume bhut hua aapke baare me jaankar lekin aap hi bataiye jo hamare mla aur us khatarnak rapist raka ko maar diya wo to acha hai aoke bete ko jaan se nhi maara apko to khus hona chaiye.

Naina:- aap daroga hoke kaisi baate kar rahe ho?.

AB AAGE:-

Devesh:- dekhiye madam behes karne ka koi fayda nhi agar kaala saaya pakda gaya waise hi uspe kaafi mukdma chalega aap uski hi report likhwane aaye ho.

Naina:- nhi sahab me sach keh rahi hu wo jo ladki hai na divya vo kala saaya ke sath nikal gayi, yakeenan wo kaale saaye ko janti hai aap uske jariye usey pakad sakte hai.

Devesh :- Acha thik hai ab aap jaaye.

Naina sahil ko pakad ke waha se nikal gayi sahil ke pet me itna jor ka punch pada tha ki ab tak dard nhi gaya tha.
Jis bande ka punch pathar jaisa ho usse bhidna bacho ka khel to nhi, ye sochke devesh me angdaai leke is case ko taal diya.
Lekin waha wo chai wala shaks behad gaur se naina aur devesh ki baate sunkar nikal gaya.

Shaam dhalne lagi thi, kaala saaya kisi saaye ki tarah ek veeran ghar me parvesh karta hai, tbhi usey ek call aati hai...

( Yaha se me kaale saaye ko KS likhunga)

KS:- hello

Chai wala:- sahab me bol raha hu.

(Chai wala asal me KS ka khabri hai ek baar KS ne isey kuch gundo se bachaya tha tabse ye KS ka loha manta hai aur isko har baat ko khabr deta hai)

KS :- Haa bolo kya khabar laaye ho?

Chai wala :- sahab aapko jis ladki ne bachaya tha us ladki ki maalkin apne bete ke sath report likhwane aayi thi aur usne( sab kuch bata deta hai)

KS ke maathe pe shikan ki lehar daud gayi usne turant phone cut kar diya, yaani us kamini naina ne police ko sab kuch bata diya. KS badbadate huye sakthi se grill ko nikal deta hai aur ek secret door se amdar ghusta hai, vo janta hai ki koi bhi uspe nazar rakh sakta hai to wo sawdhani se apne ghar ke ander ghusta hai. Usey andar aate hi kahi bhi divya nhi dikhaye deti usey gadbad lagti hai, KS divya ke room ki aur chala jaata hai aur jaise hi ander jhakta hai uske pair wahi jam jaate hai, ander tv pe blue flim chal rahi thi ek mota hapsi ek gori ladki ki chut maar raha tha aur wo ladki moun kiye jaa rahi thi..

KS ka to dimaag hi hil gya ki sach me divya itni khuli huyi hai usne ander deam light me dekha ki divya ne apne pajame ka nada khol ke apni chut me 2 ungliya ander bahar kar rahi hai aur uski siskariya saaf bata rahi thi ki usey jabardast sex chada hua hai, usey yakeen nhi ho raha tha ki itni bholi bhali divya tharki bhi ho sakti hai. Lekin usey jaane me bilkul deri nhi lagi ki sahil ne uske sath kya kiya hai uske baad to kisi bhi ladki ko bina sex nhi ruka jata. KS divya ko dekhke bhut jada garam ho gaya tha par wo apne aap par kaabu karke apne room ki taraf chal diya.

KS apne kamre me aaya aur apni jeb se knife aur gun nikal ke drawer me rakh diye aur apne utarkar sirf underwear me aa gaya usne door thoda sa sata liya aur frenchy aur mask pehne hi kasrat karne laga.

Idhar aahat paate hi divya dheere se KS ko jhakar dekhti hai usey laga itni raat ko kon aa gaya?
Lekin jaise hi uski nigah KS pe padi vo shock ho gayi usey laga kahi uski chori na pakdi gayi ho lekin KS ko apne aap me magn dekh ke vo sochi sayad KS ko pata nhi chala fir uske dimag me pata nhi kya aaya wo khadi rahi usey laga sayad KS apna mask utarega aur wo apne hero ka face dekh payegi, vo dekhti rahi lekin KS ke six pack abs dekh ke kon aurat garam na ho To divya bhi ho gayi.

Kuch der baad KS ke dimaag me kuch der pehle ki scence chalne lage kaisi divya apni madmast jawani se khel rahi thi khelna to wo bhi chata tha par wo apna vishwas nhi todna chata tha kya pata usse koi gunah ho jaaye, kanchan ki baat alag thi. Waise bhi KS sab kuch samne wale ki marzi se hi karta hai.

Udhar divya apne bed pe leti huyi thi masturbate karke wo thak gayi thi lekin tabhi uske darwaze pe khat khat huyi, jab wo samne KS ko khada dekhti hai to uski aankhe badi ho jaati hai aur saanse atak jaati hai kyuki saamne KS bilkul nanga khada tha mask lagake.
KS nanga khada hoke apne mote lambe lund ko ragad raha hai, ye sab dekhkar divya apne muh pe hath rakh leti hai aur KS ko dekhke wo pehle hi garam thi ab khade lund ko dekhke jo sahil ke lund se doogna tha.

Is baar KS aur divya ki nazar aapas me mili, divya sharam ke maare apni mundi ghuma li, KS apne mote lund ko waise hi pakad ke khada tha.
Divya ka sharam se bura haal tha uska gora face ek dum laal ho gaya tha. Tbhi KS ne usey awaz di

KS:- divya mujhe tumse kuch baat karni hai.

Divya bas nazar jhukaye khadi rahi.

KS:- dekho divya hum dono yaha bhut dino se sath me hai aur me nhi chata tum mere se daro aur sehmo. Me samjhta hu hum sabki apni jaroorate hai, lekin hum ko ek doosre se darna nhi chaiye. Mujhe abhi ke liye maaf kar dena agar tumhe.....

TO BE CONTINUED ??

(UPDATE-12)
​

Devesh:- acha madam ji hume bhut hua aapke baare me jaankar lekin aap hi bataiye jo hamare mla aur us khatarnak rapist raka ko maar diya wo to acha hai aoke bete ko jaan se nhi maara apko to khus hona chaiye.

Naina:- aap daroga hoke kaisi baate kar rahe ho?.

AB AAGE:-

Devesh:- dekhiye madam behes karne ka koi fayda nhi agar kaala saaya pakda gaya waise hi uspe kaafi mukdma chalega aap uski hi report likhwane aaye ho.

Naina:- nhi sahab me sach keh rahi hu wo jo ladki hai na divya vo kala saaya ke sath nikal gayi, yakeenan wo kaale saaye ko janti hai aap uske jariye usey pakad sakte hai.

Devesh :- Acha thik hai ab aap jaaye.

Naina sahil ko pakad ke waha se nikal gayi sahil ke pet me itna jor ka punch pada tha ki ab tak dard nhi gaya tha.
Jis bande ka punch pathar jaisa ho usse bhidna bacho ka khel to nhi, ye sochke devesh me angdaai leke is case ko taal diya.
Lekin waha wo chai wala shaks behad gaur se naina aur devesh ki baate sunkar nikal gaya.

Shaam dhalne lagi thi, kaala saaya kisi saaye ki tarah ek veeran ghar me parvesh karta hai, tbhi usey ek call aati hai...

( Yaha se me kaale saaye ko KS likhunga)

KS:- hello

Chai wala:- sahab me bol raha hu. (Chai wala asal me KS ka khabri hai ek baar KS ne isey kuch gundo se bachaya tha tabse ye KS ka loha manta hai aur isko har baat ko khabr deta hai)

KS :- Haa bolo kya khabar laaye ho?

Chai wala :- sahab aapko jis ladki ne bachaya tha us ladki ki maalkin apne bete ke sath report likhwane aayi thi aur usne( sab kuch bata deta hai)

KS ke maathe pe shikan ki lehar daud gayi usne turant phone cut kar diya, yaani us kamini naina ne police ko sab kuch bata diya. KS badbadate huye sakthi se grill ko nikal deta hai aur ek secret door se amdar ghusta hai, vo janta hai ki koi bhi uspe nazar rakh sakta hai to wo sawdhani se apne ghar ke ander ghusta hai. Usey andar aate hi kahi bhi divya nhi dikhaye deti usey gadbad lagti hai, KS divya ke room ki aur chala jaata hai aur jaise hi ander jhakta hai uske pair wahi jam jaate hai, ander tv pe blue flim chal rahi thi ek mota hapsi ek gori ladki ki chut maar raha tha aur wo ladki moun kiye jaa rahi thi..

KS ka to dimaag hi hil gya ki sach me divya itni khuli huyi hai usne ander deam light me dekha ki divya ne apne pajame ka nada khol ke apni chut me 2 ungliya ander bahar kar rahi hai aur uski siskariya saaf bata rahi thi ki usey jabardast sex chada hua hai, usey yakeen nhi ho raha tha ki itni bholi bhali divya tharki bhi ho sakti hai. Lekin usey jaane me bilkul deri nhi lagi ki sahil ne uske sath kya kiya hai uske baad to kisi bhi ladki ko bina sex nhi ruka jata. KS divya ko dekhke bhut jada garam ho gaya tha par wo apne aap par kaabu karke apne room ki taraf chal diya.

KS apne kamre me aaya aur apni jeb se knife aur gun nikal ke drawer me rakh diye aur apne utarkar sirf underwear me aa gaya usne door thoda sa sata liya aur frenchy aur mask pehne hi kasrat karne laga.

Idhar aahat paate hi divya dheere se KS ko jhakar dekhti hai usey laga itni raat ko kon aa gaya?
Lekin jaise hi uski nigah KS pe padi vo shock ho gayi usey laga kahi uski chori na pakdi gayi ho lekin KS ko apne aap me magn dekh ke vo sochi sayad KS ko pata nhi chala fir uske dimag me pata nhi kya aaya wo khadi rahi usey laga sayad KS apna mask utarega aur wo apne hero ka face dekh payegi, vo dekhti rahi lekin KS ke six pack abs dekh ke kon aurat garam na ho To divya bhi ho gayi.

Kuch der baad KS ke dimaag me kuch der pehle ki scence chalne lage kaisi divya apni madmast jawani se khel rahi thi khelna to wo bhi chata tha par wo apna vishwas nhi todna chata tha kya pata usse koi gunah ho jaaye, kanchan ki baat alag thi. Waise bhi KS sab kuch samne wale ki marzi se hi karta hai.

Udhar divya apne bed pe leti huyi thi masturbate karke wo thak gayi thi lekin tabhi uske darwaze pe khat khat huyi, jab wo samne KS ko khada dekhti hai to uski aankhe badi ho jaati hai aur saanse atak jaati hai kyuki saamne KS bilkul nanga khada tha mask lagake.
KS nanga khada hoke apne mote lambe lund ko ragad raha hai, ye sab dekhkar divya apne muh pe hath rakh leti hai aur KS ko dekhke wo pehle hi garam thi ab khade lund ko dekhke jo sahil ke lund se doogna tha.

Is baar KS aur divya ki nazar aapas me mili, divya sharam ke maare apni mundi ghuma li, KS apne mote lund ko waise hi pakad ke khada tha.
Divya ka sharam se bura haal tha uska gora face ek dum laal ho gaya tha. Tbhi KS ne usey awaz di

KS:- divya mujhe tumse kuch baat karni hai.

Divya bas nazar jhukaye khadi rahi.

KS:- dekho divya hum dono yaha bhut dino se sath me hai aur me nhi chata tum mere se daro aur sehmo. Me samjhta hu hum sabki apni jaroorate hai, lekin hum ko ek doosre se darna nhi chaiye. Mujhe abhi ke liye maaf kar dena agar tumhe.....

TO BE CONTINUED ??

(UPDATE-14)​

KS pure tarike se divya ko apna banane me laga hua tha, KS ne chodte huye jaise divya ke hotho ko chusa usne bhi utne hi maje se chusna suru kar diya, KS kabhi uski jeebh chusta kabhi uske hoth kam se kam 40 min ki chudai ke baad KS ne apna maal divya ki chut me bhar diya
Aur dono haafne lagte hai ....

AB AAGE:-

THIK tbhi KS divya se alag ho jaata hai aur fir pith ke bal bagal me let jaata hai, divya usse waise hi lipat jaati hai uski chut se abhi pani nikal raha tha aur puri chaddar gilli kar raha tha, divya apni ek taang KS ki taang pe rakh ke apne premi ke chere ko sehlane lagti hai, air fir dheere se uske hotho ko chumne lagti hai aur fir uske face ko apne chucho me dabake so jaati hai.

Doosre din jab uski aankh khulti hai to wo nangi leti hoti hai aur bedsheet dono ke ras se gilli hoti hai. Sooraj ki roshni room me pad rahi hoti hai, achanak usey bister ke doosri aur ek mask dikhta hai, wo us mask ko apne hath me leke feel karne lagti hai. KS ka mysterious face uske hath me tha lekin KS kab saaye ki tarah gayab ho gya usko pata hi nhi chala. Doosri aur ek letter rakha tha aur usme likha tha ki uske mask ko thik karde wo thoda tight ho gaya hai.

Ek gehri angdayi lene ke baad jaise hi nind tuti saamne table pe pada alarm baja, is baar nind se devesh alaram se pehle hi uth gaya, usne alarm ko band kiya aur sidha let gya..

Thodi der baad uske saamne sheetal khadi thi uske dilaye huye laal suit me, hath me chai ka tray liye khadi thi, usne nazre jhuka li aur boli

Sheetal:- aap uth gaye..

Devesh :- tum yaha itni subah.

Usne ghadi me dekha to 12 baj chuke they mtlb wo ghode bech ke so rahe they usne jaise hi apni chadar hatana chaha

Sheetal:- aap chadaar mat hataiye wo aap

Devesh:- kya hua sheetal? Ohh teri ( jab wo apni chadar me jhaank dekhta hai to wo nanga leta hua tha)

Sheetal:- haa lagta hai aapko raat me kapde utar ke sone ki adat hai hamari galti hai. ( Sheetal ke face pe saram aa jaati hai devesh sach me sarminda ho jaata hai)

Devesh chai ki chuskiya lete huye sheetal ko baithne ka ishara karta hai aur sheetal baithte huye muskra deti hai

Devesh:- arey sheetal tum to meri behen ho aur koi bhi apne bhai se sarmata hai kya. Vo kya hai na yaha pe raat ko garmi bhut badh jati hai, waise tumne mujhe kya poora...

Sheetal:- haa humne aapko piche se pura nanga dekh liya maaf kariyega hume, hum jab kamre me aaye to door khula huwa tha..

Devesh:- ohh sayad raat ko thaka hone ki wajah door band karna bhul gaya hounga, waise tum aaj bhut sunder lag rahi ho ye suit fit to hua na tumhe?

Sheetal:- haa bhut acha hai.

Devesh:- acha kaaki maa kyu nhi aayi? Tum akele aayi ho ghar kaise dhunda?

Sheetal:- wo maa rasaan lene chali gayi thi. Unhone bola ki aapke ghar jaake khaana aur saaf safai kar du waise unhone aapka address bata diya tha aur yaha meri ek saheli bhi rehti hai aur aapko to har koi jaanta hai.

Devesh:- Arey waah ye bhut acha kiya, ab me thoda naha leta hu.

Sheetal:- aapko police station nhi jaana..

Devesh:- Arey meri sheetal ghar aayi hai aur me uske sath time spent karne ke bajay kaam karunga kya, movie dekhogi?

Sheetal:- nhi nhi! Maa ko agar.

Devesh:- chal hatt pagli kuch pata nhi lagega tu jaldi se nasta bana de..

TO BE CONTINUED ??

(UPDATE-15)​

Sheetal:- aapko police station nhi jaana..

Devesh:- Arey meri sheetal ghar aayi hai aur me uske sath time spent karne ke bajay kaam karunga kya, movie dekhogi?

Sheetal:- nhi nhi! Maa ko agar.

Devesh:- chal hatt pagli kuch pata nhi lagega tu jaldi se nasta bana de..

AB AAGE:-

Sheetal:- theek hai. ( Itna kehkar sheetal bahar chali jaati hai vo baar baar devesh ke jawan badan ko dekh kar tap rahi thi, ye baat devesh jaan chuka tha.
Usey lagne laga sheetal gaon ki gori hai aur thodi chalu type bhi to isey patana koi muskil kaam nhi hai)

Devesh kaaki maa ke baare me puchna bhul gaya ki unka kya haal hai? Lekin wo ye baat janta tha agar jyada puchega to is chaalu baaz sheeta ko pata lag jayega ki hum Dono ki chudayi ho chuki hai to baat bigad jayegi.
Devesh fatafat naha dhoke ke ekdum chaka chak ready ho gaya
Itne me sheetal bhi kamre me apne kamar lachkate huye aa gayi nashte ki thali leke.

Devesh ne sheetal ko bhi bola ki wo bhi nasta karle thodi naa nakur ke baad wo maan dono ne khaana khaya. Fir devesh ne uski thodi tarif ki

Devesh:- arey waah kya taste hai meri sheetal ko to bhut acha khaana banana aata hai.

Sheetal saram ke maare laal ho gayi, sheetal ne batayaa ki ek kanchan naam ki aurat subah aayi thi to usne usey mana karke bhaga diya. Devesh bola bhut acha kiya.

Devesh janta tha kanchan jaisi kaamwali ki kaali chut maarne se acha hai apni is gaon ki gori behen ko pata le sath me maa bhi free mil rahi hai wo bhi hasina.

Devesh sheetal ko jeep me baitha ke bazar le gaya.
Waha usne sheetal ko uski manpasand chudiya aur makeup ka mehnga saman kharid ke diya.

Sheetal:- agar maa ko pata chala to wo bhut gussa karegi.

Devesh :- darne ki koi jaroorat nhi hai me unhe sambhal lunga.

Fir devesh ne sheetal ko ache se restaurant me le jaa ke lunch karwaya.
Ladki ko aur kya chaiye koi usey ghuma raha hai shopping karwa raha hai khilla pila raha movie dikha raha hai aise me ladki ko patana easy ho jata hai. Devesh bhi thik yahi kar raha tha.

Lunch karne ke baad devesh aur sheetal theater me gaye.
Devesh janta tha aprna ghar aake sheetal ko jaroor dhundegi to usne pehle hi aprna ko phone karke bata diya ki wo sham tak sheetal ko ghar chod dega aap chinta na kare.

Bengali movie lagi thi romantic aur thriller. Movie dekhne ke baad jab ghar laute to suraj dhalne laga tha.

Devesh:- aur aaj ka din kaisa raha?

Sheetal:- bhut acha tha dada.

Devesh :- hmm waise tumhara ko boyfriend hai kya?

Sheetal:- arey dada aap bhi kaisi baat karte ho agar maa ko pata chala to mujhe jaan se maar degi.

Devesh:- arey sahi to hai. Aajkal ke kamine ladke ladki ko pregnant karke chod dete hai. Aur ladki ki jindagi barbaad kar dete hai.

Sheetal:- ye to hai dada. Waise thanks mujhe aaj tak aise kisi me khilaya pilaya nhi hai.

Devesh :- hatt pagli bhai ko thanks bolti hai me bhi to tera hu. Chal tujhe ghar chod dun.

Devesh ne sheetal ko jeep me bithake usey ghar chod diya aur usey hidayat di ki aaj ke baare me kaaki ko na bataye sheetal ne bhi haa bhari aur ghar me chali gayi. Devesh janta tha ki sheetal ko apne niche laane me jyada muskil nhi hogi. Usne constable ke paas phone karke station ki report li to usey pata chal ki kal commissioner aa rahe hai. To mann me socha beta kal to gaand maregi.

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Idhar bulb ki roshni me ghar ke bicho bich sahil aur uska baap anjar sarab pi rahe they. Ekdum se naina paas me aati hai aur ne dekh ke jor se kehti hai-

Naina:-yahi din dekhna baaki reh gya tha kamino kuch to saram karo itna bawal ho gaya aur tum dono baith ke sarab pi rahe ho..

Sahil:- kya maa tu itna kyu khijla rahi hai? Saala dard kam lagta hai.

Naina:- Haa Haa jitna hum us raand ke jhatke seh rahe hai na utna to tere baap ke lund ke jhatko me bhi dum na tha.

Anjar:- arey meri jaan chup ho jaao kyu cheekh rahi ho?
Baap beta daaru pi sakte hai to tujhe kya problem aur apne bete ke saamne apne pati ke lund ki tareef kar rahi hai saali chinaal.

Naina:- Haa haa bolo bolo aur pi lo us kamini raand divya ke chakkar me isey kitna dard sehna pada mujhe to dar hai kahi wo KS fir se hamari lene na aa jaye, me to kehti hu kuch dino ke liye hume kahi chale jaana chaiye.

Anjar:- arey jaan kyu darti hai tu? Aane de us bhsdk ke ko tune inspector ko bol diya tha na abhi thod kadki bhi chal rahi hai fasal me aur wo sala kal kisaano ka sardar saantilal riha ho rha hai jail se.

Naina :- heyy ram wo harami bhi jail se nikal raha hai usey faasi kyu nhi huyi.

Anjar :- arey meri jaan usey humne faasi me nhi fasaya tha. Ab wo kal jail se chutte hi khatam ho jayega mene aupari dedi hai uski. Aur filhal thoda chup raha kar KS ka jyada naam mat liya kar, agar bahar kisi ko hamare baare me pata chala na to ache se fategi hamari, chal ab jaa hume pine de

TO BE CONTINUED ??

​

(UPDATE-16)​

Naina :- heyy ram wo harami bhi jail se nikal raha hai usey faasi kyu nhi huyi.

Anjar :- arey meri jaan usey humne faasi me nhi fasaya tha. Ab wo kal jail se chutte hi khatam ho jayega mene aupari dedi hai uski. Aur filhal thoda chup raha kar KS ka jyada naam mat liya kar, agar bahar kisi ko hamare baare me pata chala na to ache se fategi hamari, chal ab jaa hume pine de

AB AAGE:-

Naina anjar ko gaali dete huye apne room me chali gayi, uska tension badh gaya tha.
Jab bahar aayi to dono ko ice aur soda deke wapas aa gayi.
Dono baap beto ne ek ek peg aur liya fir wahi pe so gaye ya ye kahu ki behos ho gaye.

Idhar naina divya ko man hi man gaaliya de rahi thi ki tabhi phone baja

Naina:- Hello kon?

KS:- teri chut me lund dalne wala.

Naina:- kon harami bol raha hai? Maa ne kuch sikhaya nhi hai.

KS:- Haa sikhaya hai na dushmano ki gaand maarna usne is bache ko paida kiya hai ki tere jaiso ki gaand me lund dalke ehsas ke kara sake ki dard kya hota hai.

Naina:- oyy kon bol raha hai tu?

KS:- kaala saaya.

Naina chillate huye dono baap bete ko uthane ki kosis karti hai magar wo dono to behos pade they, naina bahar aati hai ki tabhi phone pe firse awaz aati hai

Naina:- dekh tu jo koi bhi na teri humne supari de rakhi hai agat ek baap ki aulad hai to idhar aake dikha.

KS:- tera beta 2 lund se paida hua hoga randi me to ek mard ki aulad hu, waise bui mujhe us din ki bachi huyi kasar puri karni hai.

Naina:- kya chata hai tu humse us randi ke liye?

KS:- ayyy tameez se baat kar tune jin fool jaisi bachiyo ki jindagi apne baite se barbaad karwayi hai na un sabka badla lunga me. Tu janti hai na tera beta aur tera mard sarab pi ke tun pade hai janti hai mene usme kya milaya tha.

Naina ne ekdum se sarab ki bottle uthake dekha to usme kuch safed safed sa tha jo in chutiyo ko dikha nhi tha, usne darwaz khidki sabko lock kar diya.
Tabhi phone doobara baj utha.

KS:- dekh baar baar phone karne ki adat nhi hai mujhe line pe bani reh tu, aur jo tu ghar ke darwaze lock kare hai na ki me ghar me na ghus paau to me teri almirah me hu.

Naina ki to gaand fat gayi, ab to uske muh se koi lafz nhi nikal raha tha pure hath paw kaamp rahe they

KS:- arey dar mat meri randi mazak kar raha hu par isey hakikat banane me waqt nhi lagega ab dhyan se sun kal shyam 9 baje

Naina bich me baat katte huye

Naina:- me teri baat kyu maanu?

KS:- abey randi chikh mat kuch chikhe bacha le gaand marwate time kaam aayegi, apne bete aur mard ki khariyat chati hai na to thik baje tere purane kheto pe aa jana..

Naina:- me kyu aaungi tere paas? Ruk abhi bulati hu police ko.

KS:- jo MLA ko maar sakta hai usey inspector ko maarne me kitna waqt lagega tu apni khair mana aur sun akele aana mere pass tere bete ke khilaaf aise saboot hai ki tujhe aram se tod sakta hu.

Naina:- tu kitna chata hai bol aone muh se tu janta hi kya hai hamare baare me?

KS:- jitna bol raha hu sun le divya mere pass witness hai aur tu usey dhoondna chod de wo tum logo ko 10 janam me bhi nhi milegi.
Doosri cheez tere bete ne jitni ladkiyo ke sath chudayi ki hai na sabka mms hai mere paas, mere ek ishare pe tera baat badnam tumhari izzat khatam

Naina:- nhi nhi tum aisa kuch nhi karoge to jo kahoge wo me karungi..

KS:-hmmm karna to padega hi aur tune apne mard ko bataya to kal tera pati sir kata tere farmhouse pe milega.

Naina:- dekho me keh rahi hu na mujhe dhamkao mat. ( Naina ab bhut jyada darne lagi thi aur uski awaz bhi rone jaisi ho gayi thi)

KS:- hahaha ab aayi na aurat lund ke niche aur dhamka nhi raha bata raha hu meri randi, meri bhi kuch term and condition hai aur tera pati jin ladko pe uchlta hai na aur unhe palta hai unki haddiya todke Subhash chandra memorial hospital me admit karwa chuka hu.

Naina:- kyaaa? ( Ab fir se fat gayi gaand? kyuki usey laga thi KS itna nhi janta hoga par usey kya pata KS saaye ki tarah har jagah rehta hai aur apne dushman ki har nas se wakif hota hai)

KS:- Haa me tere plan ke baare me jaan chuka hu ab tu 10 ladke laa ya 100 ladke sabko hospital pahucha dunga.

Naina ab rone lagi aur KS ki baato ki haa me haa milane lagi..

TO BE CONTINUED ??

(UPDATE-17)​

काला साया : अच्छा फाइनल बात बता देता हुक अल लाल सारी पहनें आएगी समझिी और अच्छा तैयार होकर आना
कुटुम्ब : यईी तूमम्म क्या बक रहे हो?
काला साया : देखह अगर चेहरे पे मुस्कान नहीं होगी बन तान्न के नहीं आएगी तो तेरे पति को लगेगा तू खेत जा रही है फिर वॉ तेरे पीछे आएगा और फिर जानती है ना
कुटुम्ब : अच्छा ठीक आिइ मैं आ जौंगिइइ तुम प्ल्स ऐसा कुछ मत करना पर वॉ एम एम एसे मुझे
काला साया : काल साय एक बार कहता है हज़ार बार नहीं तू बस आ जाना

फोन कट हो जाता है…कुटुम्ब की तो गान्ड चुत पूरा शरीर तार्र तार्र काँपने लगता है पता नहीं काला साया क्या सुलूक करेगा उसके साथ? पर एक मां के साथ साथ वॉ एकक औरत भी थी जिसे अपने घर की इज्जत हर हाल में बचानी थी….

उधर काला साया गुस्से की आग में जल रहा होता है और फौरन एक फोन लगता हे

दूसरे दिन जेल से शांतलाल रिहा हो जाता है उसके दिल में 6 महीने की जो सजा मिली थी ऊस बात का आक्रोश होता है और अंजर को मारने का वॉ पूरा प्लान किए आगे बढ़ने को होता है इतने में कुछ गुंडे उसका रास्ता चैक लेते है

शांतलाल : क्या रे बहेनचोड़ बेटीचोड़ क्यों रास्ता रोका?

हूँ बिना कुछ बोले उसे मारने को आगे आते है शांतलाल ऊनसे भीढ़ जाता है…शांतलाल एक बेहद निर्दयी गुंडा था ऊस्की उमर 48 के आस पास थी कभी अंजर का गहरा दोस्त था दोनों मिलकर राशन उठाने वाली मज़दूर औरत या किसी की बीवी की मज़बूरी का फायदा उठाकर उनके साथ चुदाई करते थे…एक दिन शांताला की निगाह कुटुम्ब पे पार गयी इस बात पे दोनों में कहा सुनी हो गयी और शांतलाल ने राशन देना भी अंजर को बंद कर दिया उसका नुकसान होने लगा और ऊसने फौरन फ्सी ऑफिसर को इस बात का पुष्टि दिया रेप और इल्लीगली राशन ना देन एक जुर्म में उसे अरेस्ट कर लिया गया…शांतलाल का आक्रोश बढ़ता रहा…लेकिन ऊस वक्त एमएलए चाँदी प्रसाद का दबदबा था उसे सिर्फ़ 6 माह की सजा हुई एमएलए के मरने के बाद हूँ उतनी ही महीने की सजा कटता रहा और जब बाहर निकाला तो उसका पूरा आक्रोश अंजर पे और ऊस्की बीवी पेट हां

अचानक लरआई के दौरान पीछे से हूँ गुंडा शांतलाल को चाकू मारने ही वाला था की हूँ मुकोता पहना शॅक्स बीच में आ गया जाने में डायरी नहीं थी अंजर के गुंडे थे ये लोग काला साया ने सिर्फ़ कुटुम्ब को थोड़ा डराया था…लेकिन उसी हॉस्पिटल में कुछ देर बाद जाने वाले थे

काला साया ने फुरती से ऊस चाकू वाले का हाथ मोधके दूसरा लात पीछे वाले गुंडे पे मारा..और फिर शुरू हड्डी तोधने का खेल शांताला घायल होकर एक जगह बैठ गया..काला साया मारता गया…और बाकी रही गयी हड्डी टूटी कार्रहतें ज़मीन पे परे गुंडे

काला साया ने एक ही झटके में शांताला को पकड़ा शांतलाल डर गया उसे काला साय के बारे में पता था और फौरन दोनों बाइक पे बैठकर वहां से फरार हो गये पीछे पुलिस की जीप आ चुकी थी…काला साया एक खंडहर में आकर शांतलाल को बिता देता है और उसके ज़ख़्मो की पट्टी करने लगता है

शांतलाल : काला साया भी तू अपुन को क्यों बचाया?? आहह ससस्स टीटी..

तू मुझसे क्या चाहता हाीइ?
काला साया : देख तू जनता है की मैंने तुझे क्यों बचाया ये लोग अंजर के गुंडे थे (शांतलाल का गुस्सा दहेक जाता है लेकिन हूँ चुपचाप हाथ पे लगी पट्टी के दर्द से करहाने लगता है और फिर जैसे तैसे खुद को संभलता है)
शांतलाल : जनता था भोसड़ी का हरामी की बीज मुझे फसाएगा ही एकदिनन्न साले को कांट दूँगा मैं
काला साया : तेरा यही जूननून गुस्सा मुझे चाहिए
शांतलाल : पर तू मेरी मदद क्यों रहा है? मैं तो खुद तेरे निगाहों में गुंडा हूँ एक गुंडे की मदद एक जुर्म का सफ़ाया करने वाला करेगा हाहाहा
काला साया : आबे सुन अगर आज मैं ना आता तो तेरा बदला तेरी मौत के साथ इस दुनिया से रुकसट हो जाता इसलिए अगर किसी पे आक्रोश निकलना है तो हूँ है अंजर की फॅमिली
शांतलाल : लेकिन तुझे इससे क्या भैईई?
काला साया : मुझे बोलने में टाइम नहीं लगेगा की तूने कितनों का घर उजाड़ा उसके साथ मिलकर कितनी औरतों का सोशण किया मैं चाहूं तो तुझे फिर जेल भेज सकता हूँ और टुंुझे अच्छे से वक़्क़ीफ़ है

शांतलाल जनता था की काला साया को टाइम नहीं लगेगा उसे मारने में या फिर उसे वापिस जेल भेजने में एमएलए का खून ऊसने किया उसके बॉस को काला साय ने जान से मर डाला अब शांतलाल डर गया उसे कुछ सूझ नहीं रहा था

शांतलाल : भैईई मुझे मांफ कर दो ऊस मादरचोद के वजह से बहेक गया था मैंन्न साले कमीने के वजह दो दरृू की घूँट लेकर चुत के लिए पागल हो गया था मैंन्न तू मुझे बक्ष दे भी मैं तेरा गुलाम बनकर को तैयार हूओ

(UPDATE-18)

​
काला साया : ना ही मैं तेरा मालिक और ना ही तू मेरा गुलामम्म मैं सिर्फ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहता हूओ

शांतलाल : भी तू जो कहेगा अपुन तैयार (शांताला ने मुस्कुराकर हाथ मिलाया) लेकिन भाई तू चाहता क्या है?

काला साया : तू नहीं जनता अंजर के बेटे ने एक लड़की को मोलेस्ट किया है अब मैं उसे इंसाफ दिलौँगा लेकिन इसका तालूक़ उसके फॅमिली से है ऊन दोनों हरामजादो के साथ एक रांड़ भी है

शांतलाल : हाँ भैईई कुटुम्ब्ब सलाई मस्त रांड़ हाीइ मेरा दिल तो ऊसपे फिदा है पर साली के मर्द के वजह से ही आज मुझे ये दिन एक बार मिल जाए ना

काला साया : बस बॅस ये आक्रोश अपने लंड में डाल और उठने ही झटके देना तू चाहता है ना तू कुटुम्ब को चोदे वॉ अब तैयार और मेरी दोनों की रखैल बनेगिइ

शांतलाल : क्या बाहिी सच में तू मुझे ऊस्की मारने देगा मैं ऊस्की गान्ड मारने का बहुत शोकीन हूँ भाईईइ

काला साया : हाहाहा बिलकुल लेकिन अगर तूने इस बीच कुछ उल्टा सीधा किया तो मुझे मज़बूरन तेरे खिलाफ

शांतलाल : नहीं भाई गंगा माय्या की कसम अपुन तेरे साथ हे जो कहेगा करूँगा बस पुलिस से मुझे दूर रखना

काला साया : ठीक है तू बस सिर्फ़ इतना कर की एक होटल का इंतजाम कर वहां कमरा लगा होना चाहिई मैं तुम दोनों की ब्लू फिल्म

उतारूँगा

शांतलाल : लेकिन भाई हूँ मना की तो इसमें काफी रिस्क है

काला साया : काला साया के पहरा है ऊसपे हूँ कुछ नहीं कर पाएगी वो मेरी अब गुलाम हाीइ तू बस जगह और प्लान तैयार रख और अपनी चेहरे की फिक्र मत करते एरा चेहरा पूरा धक्का होगा सिवाय ऊस रांड़ के

शांतलाल : भैईई कसम्म बस तू उसे ले आ बाकी काम मुझपर चोद दे (शांतलाल तरकपन में अपने छाती को मसलता हुआ बोलता है)

काला साया : ठीक हाीइ तो आज रात से ही हम प्लान शुरू करेंगे फिर उसके बाद अंजनर

शांतलाल : भी अंजर का खून करना है मुझे उसके लिए मुझे मत रोकियो

एक पे एक चाल खुद शांतलाल काला साया के लिए आसान कर रहा था काला साया मुस्कुराकर अपने प्लान को खुद अपने आप अंजाम होते देख खुश हो रहा था…वॉ बस शांतलाल के तरकपन और उसके बदले की जुनून का खूब अच्छे से फायदा उठा रहा था…अब घोड़ा घोधी दोनों उसके हाथ में थे बस उसे चाल चलनी थी….वॉ बस अब अंजर और उसके बेटे शैल की जिंदगी को तहेस नाबूत होते देख रहा था…

“शर्म आती है मुझे तुम जैसे ऑफिसर पे जो एक छोटे से केस को भी संभाल नहीं पा रहे”….कमिशनर चिढ़ते हुए कहता हाीइ…सब कॉन्स्टेबल्स और हवलदार केबिन में खड़े है…नज़र झुकाए और सामने खड़ा है देवश भी जो अपनी टोपी हाथ में लिए बस सर झुकाए है

कमिशनर : मुझे तो आजतक ये बाद समझ नहीं आयआई की वॉ कौन है जो खुद को काला साया कहता है अंधेरे की आध में आकर सबको तोड़ के जाता है और जो काम तुम जैसे निताल्ले को करना चाहिए वॉ चुटकी बजा के करके चला जाता है

देवश : साला बीवी की गान्ड मर के भी ठंडा नहीं पड़ा (मन ही मन बधबदते हुए)

कमिशनर : हेययय यू मिस्टर इंस्पेक्टर देवश चटर्जी क्या बड़बाधा रहे है आप गाली दे रहे है हमको नहीं नहीं दे दीजिए वैसे भी आप का काम बस यही हे आपके मेजर इश्यूस को देखते हुए मुझे स्ट्रिक्ट एक्शन लेना पड़ेगा ये सब क्या हो रहा है इस शहर में पहले एमएलए का कत्ल फिर रेपिस्ट गान्ड की मौत और अब काला साया का बढ़ता दबदबा

देवश : सर आप इतना खिजलाइए मत हम अपनी तरफ से खोषिस तो कर रहे है पर ससुरा दूध में से मखिी की तरह गायब हो जाता है…जब उसे ढूंढ़ने के लिए पहरे लगते है तब वॉ ऊस रास्ते पे मिलता ही नहीं…आप मुझे बस कुछ दिन की!

कमिशनर : एक दिन तो क्या अगर एक साल की भी मुहूलट दूँगा तो यू गाइस डिड्न;त ईवन फाइंड हिज़ डिक यू ऑल जस्ट स्क्रूड उप मुझे तो शर्म आती है की तुम जैसे पुलिस डिपार्टमेंट को मैं ऋण करता हूँ ये है मेरे काबिल ऑफिसर्स में फूटत

देवश : सिररर प्लीज़ गुस्सा थूक दीजी आप प्ल्स मुझे कुछ दिन की मुहूलट दीजिए ई विल मेक यू शुरू डेठ की मैं उसे आरएस्स्ट कर सकता हूओ

कमिशनर : ठीक है सिर्फ़ कुछ दिन लेकिन अगर तुम इस बार प्रूव नहीं कर सके तो ट्रांसफर लेटर्स के लिए तैयार हो जाना

(UPDATE-19)

देवश : सी..

र्र प्लीज़ (कमिशनर बिना कुछ कहें केबिन से निकल जाता है देवश सबकी ओर देखकर झल्लाते हुए केबिन से जाने को कहता है उसका दिमाग सच में बहुत अपसेट हो जाता है)

एक तो साला नौकरी पे बात आ गयी और ऊपर से यहां से ट्रांसफर तो मतलब सारी छूटें ऊस्की हाथ से गयी ना काकी मां की चुत मिलेगी और ना ही शीतल की जो अभी उसके लिए खुली तक नहीं..देवश यक़ीनन काफी चिढ़ सा गया था काला साया से और उसने ठान लिया अब तो उसे काला साया को पकड़ना ही पड़ेगा क्योंकि बात उसके तबादले की आ चुकी थी

शाम जल्दी ढालने लगा…मौसम का मिज़ाज़ आज ठीक नहीं था…बस बदल गाराज़ रहे थे…पुराने खेत में शांतलाल बीड़ी फहुंक रहा था और कुटुम्ब का इंतजार कर रहा था इतने में उसे किसी का साया पीछे महसूस हुआ तो पाया काला साया आ चुका था….शांतलाल उसे देखकर मुस्कराया

शांतलाल : रांड़ अभीतक नहीं आई उसी का इंतजार कर रहा हूँ
काला साया : हम मैं जनता हूँ वो आएगी जरूर बात ऊस्की घर की इज्जत की है तुमने तैयारी रखी है ना सब
शांतलाल : भाई दुल्हन के लिए मंडप भी सजा दिया और सुहागरात का बिस्तर भी बस दुल्हन का इंतजार है
काला साया : हम ये लो इस दवाई को कहा लो दररो नहीं ज़हेर नहीं दे रहा सेक्स की गोली है इसे खाते ही तुम्हारे लंड में हॉर्स के लंड वाली पावर जितनी ताक़त आ जाएगी
शांतलाल : भैईई नाइकी और पुकछ पुच्छ दो तो सही

शांतलाल ने गोली कहा ली और फिर काला साया को तरक़ीब बताने लगा…अचानक उसे एक औरत लाल सारी में काफी सजी धजी आते दिख रही थी….”भा..ईई वॉ आ रही हे अब क्या करे?”…..काला साया मुस्कराया शांतलाल तो जैसे भड़क उठा वो तो जैसे घातक शेयर की तरह ऊसपे उसी वक्त टूट पढ़कर बलात्कार कर ही देता…पर काला साया ने रोका और फिर उसे झोंपड़े के अंदर आने को कहा और उसे एक मुकोता दिया कृष जैसा मास्क….

शांतलाल जनता था ऊसने फौरन मास्क पहन लिया और फिर खुद के चेहरे को ठीक करते हुए बस कुटुम्ब के पास आने का इंतजार करने लगा दोनों ने छेद से झाँका कुटुम्ब यक़ीनन आज काफी खूबसूरत लग रही थी 38 की उमर और बदन इतना भारी लाल सारी में जेवेरात के साथ क्सिी ठकुराइन की तरह आई थी…उसके माथे की शिकार ऊस्की फ़िकरमंद और डर को साफ दिखा रहा था

पास आते ही वो वही खड़ी हो गयी और ऊसने इधर उधर देखते हुए अपने छोटे से फोन को कान में लगा लिया…एकदम से काला साया का फोन बज उठा…ऊसने फौरन फोन शांतलाल को दिया…ऊसने कहा की यहां से उसे काला साया की भूमिका निभानी है ताकि बाद में वो कुटुम्ब के मन में और डर बिता सके की काला साया कोई और नहीं खुद शांतलाल है…शांतलाल बस हमको के गुलाम की तरह वही करता है…फोन उठाते ही वो बाहर निकल जाता है पहले उसे लगता है कुटुम्ब उसे पहचान लेगी लेकिन फिर अपने सामने एक मोष्टंडे आदमी को हाथ का इशारा अपने पास करते देख कटुउंब सहेंटे हुए उसके करीब आने लगती है

कुटुम्ब जैसे उसके करीब आती है काला साया पीछे से गायब हो जाता है..”आररी वाहह आज तो तू पूर्ीी धीनचक आइटम लग रही है रे”…..शांतलाल मुस्कुराकर कुटुम्ब को ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहता है…”चुप्प करो और ये बताओ एम एम एसे कहाँ है? मैं वही लेने आई हूँ”…..शांतलाल को बेहद गौर से देखते हुए कहती है उसे लग रहा था ऊसने उसे कहीं देखा है क्योंकि सिर्फ़ उसके चेहरे पे एक ही मुकोता था जबकि काला साया एक काला काप्रा के साथ एक और मुकोता लगता है

शांतलाल : हाहाहा काला साया से डर नहीं लगता तुझे यहां तुझे सिर्फ़ क्या एम एम एसे दिखाने भेजा हूओ
कुटुम्ब : देखू तूमम जो कर रहे हो ठीक नहीं हाीइ मैंन्न्न्
शांतलाल : अच्छा साली तू मुझे सिकहाएगी छल्ल मेरे साथ मैं कहा चल अगर अपने बेटे की खरयात और अपने घर की इज्जत चाहती है तो

कुटुम्ब चुपचाप शांतलाल के पीछे पीछे झोंपड़े में घुसती है….और ठीक तभी शांतलाल उसे कमर से पकड़ लेता है “ययई क्या कर रहे हो तूमम्म?”……शांतलाल उसके पेंट पे छुट्टी कांतके अपने बदन से चिपका लेता है

शांतलाल : तुझे क्या फ्री फंड में बुलाया हूँ रंडी छल्ल अब जैसा कहूँ वैसा कर वरना एम एम एसे तो तुझे नहीं मिलेगा और साथ में तेरी जान भी
कुटुम्ब : देख तुझे भगवान का वास्ता
शांतलाल : देखह मेरी बात मान जा वरना अभी तेरे गले को रंगायत दूँगा इस चाकू से (शांतलाल चाकू निकलकर कुटुम्ब के चेहरे पे लगा देता ही कुटुम्ब तार्र तार्र काँपते हुए आँसू टपकाने लगती है)
कुटुम्ब : थे.

ए…सीसी है पर जो तुममहेंन्न करना हाीइ प्लीज़ किसी को मत बताना मेरा संसार उजध जाएगा मेरा पति मुझे घर से निकाल देगा
शांतलाल : शांत हो जा और अपनी आंखें मूंद ले

कुटुम्ब ने आंखें मूंद ली…और तभी उसके आंखों पे किसी ने बारे क़ास्सके पट्टी बंद्धि वो छटपटाने लगी….उसके बाद कोई इंजेक्शन उसके गले पे किसी ने लगाई ऊस्की तेज जलन उसे बर्दाश्त नहीं हुई ऊस्की एक चीख के बाद वो बेहोश हो गयी…..काला साया पीछे खड़ा था वो बेहोश कुटुम्ब को देख रहा था ऊसने अपने हाथ के इंजेक्शन को काले पॉलयथीन में फ़ेक दिया और उसे बाँधके अपने जेब में डाल लिया ताकि सबूत ना छूते यहां…शांतलाल ने मुकोता पहने ही कुटुम्ब को अपने कंधे पे उठा लिया उसका भारी वज़न उसके पूरा बदन पे जैसे झूल रहा था….शांतलाल कुटुम्ब के पिछवाड़े की महक पेटीकोट से बाहर ही सूंघते हुए उसे गाड़ी की ओर ले जाने लगा….काला साया भी फौरन गाड़ी पे सवार हो गया

जल्द ही दोनों एक बहुत ही बदनाम होटल पहुंच गये…फिर कुटुम्ब के पट्टी को खोल दिया और ऊसको अपने कंधे पे लटकते हुए होटल में आया होटल का रिसेप्षनिस्ट उसे ही घूर्र रहे थे….काला साया अपनी मुकोते को उतारके बारे ही गुप्त तरीके से सीडियो से ऊपर चढ़के दूसरे ओर से अंदर आया….होटल वाला सब जनता था ऊसने चाबी दी सबके सामने कुटुम्ब को ऊसने अपनी पत्नी बताया..होटल वाले ने आँख मर दी दोनों ने सिग्नेचर किए झूते टूर से और फिर जल्द ही होटल के कमरे में आकर कुटुम्ब को बिस्तर पे पटक डाला…जल्द ही दरवाजे पे दस्तक हुई काला साया अंदर आया और ऊसने दरवाजा लगा दिया…ऊसने फौरन शांतलाल के हेल्प के थ्रू होटल के कैमरा को हर एंगल से ऑन कर दिया..

जल्द ही कुटुम्ब को होश आया और वो फिर चीख के उठ कहर इहुई….शांतलाल ने उसे जूस दिया…कुटुम्ब के रज़ामंदी के ना बावजूद भी ऊसने जूस पी लिया…उसे थोड़ी ताक़त आई शरीर में….”तुझे बेहोशी का एक छोटा सा इंजेक्शन मारा था यहां लाने के लिए तुझे क्या लगता है ? मैं इतना चूतिया हूँ जो तुझे वहां खेतों में ही चोदता”…..कुटुम्ब हाथ पैर जोड़के रोने लगी मिन्नटें करने लगी​

(UPDATE-20)

“देख रोने का कोई फायदा नहीं जो कर रहा हूँ कर लेने दे तेरा भी कुछ नहीं बिगड़ेगा मेरा भी नहीं यहां से भागना मत बाहर मेरे ही लोग है तुझे पकड़कर अंदर ले आएँगे जगह बदनाम है किसी के हटते चढ़ गयी तो बैच देगा चुपचाप जो करना चाहता हूँ कार्वाले और फिर तुझे फिर चोद दूँगा”……कुटुम्ब हार मान गयी ओसोका दिल बैठा जा रहा था

कुटुम्ब ने फौरन सुबकते हुए अपनी सारी खोलने लगी…”शब्बाशह”….शांतलाल तहाका लगाकर हस्सने लगा..

वो फौरन कुटुम्ब के करीब आया और ऊसने कुटुम्ब का पल्लू खींच के उतार दिया और फिर उसका ब्लाउज भी फाधने लगा कुटुम्ब उससे छुड़ाने लगी…पर फरका नहीं पड़ा कुटुम्ब के दो स्तनों टूट गये…और ऊस्की वाइट ब्रा अंदर से दिखने लगी…शांतलाल ने ऊस्की ब्रा के बीच में ही उंगली डालकर उसे इतनी ज़ोर की खींचा की ब्रा का हुक टूट गया और ब्रा फर्श पे गिर पड़ी…कुटुम्ब अपने छातियो को हाथों से छुपाने लगी

शांतलाल खुद पे काबू नहीं कर पा रहा तो उसने धीरे धीरे कुटुम्ब के हाथ हटा दिए…और उसके छातियो को देखते ही पागलों की तरह हाथों में भरके दबाने लगा और उसे चुस्सने लगा…उसके कड़े मोटे निपल्स मुँह में भरते ही कुटुम्ब सिहर उठी….शांतलाल बारे ही काश क़ास्सके दोनों चुचियों को दबाए जा रहा था…और अपना चहरा छातियो के बीच रगड़ रहा था….कुटुम्ब बस सिसक रही थी कमरा में सबकुछ रिकार्ड हो रहा था…क्‍ाअल साया हर एक एंगल को ज़ूम करके दोनों की रासलीला का वीडियो चुत कर रहा दूसरे कमरे के सी सी टी अभी के थ्रू

शांतलाल झट से कुटुम्ब के पेटीकोट के नारक होल्के उसे बारे ही बुरी तरीके से नीचे खिकच देता है कुटुम्ब के जाँघ से लेकर कमर तक लाल निशान पढ़ जाता है वो ज़ोर से चिल्लाती है पर शांतलाल रुकता नहीं और अपने हाथ ऊस्की खुली पैंटी पे फहीराने लगता है…कुटुम्ब उसका हाथ बार बार रोकती है पर कुछ फायदा नहीं होता….शांतलाल ऊस्की चड्डी को ज़ोर से खिसकाके फाड़ देता है कुटुम्ब ज़ोर से चिल्लाती है और शांतलाल पे गुस्सा होने लगती है पर शांतलाल पे जो बदला और सेक्स का जुनून चढ़ा था उससे तो ओसोका बचना नामुमकिन ही था….कुटुम्ब के मोटे सूजी चुत को मुट्ठी में भरके शांतलाल दो तीन बार दबा देता है…कुटुम्ब ज़ोर से सिहर जाती है वो खड़ी खड़ी काँपने लगती है

फिर शांतलाल मुट्ठी में कैद चिड़िया को कुछ देर दबाते हुए ऊस्की चुत में पूरा का पूरा मुँह घुसा देता है कुटुम्ब को एक बिजली का झटका लगा था वो उसे रोकने लगती है पर शांतलाल बारे ही बेरहेमी से ऊस्की चुत में मुँह घुसाए छांट रहा था ये साफ कमेरे पे शो हो रहा था….

कुछ देर बाद शांतलाल कुटुम्ब को वैसे ही बिस्तर पे लैटाके उसके जांघों को अपने कंधे पे रखकर अपना पूरा मुँह चुत पे दबाने लगता है ऊसपे घिस्सने लगता है कुटुम्ब बस सिसक रही थी बार बार मुँह पे हाथ रख रही थी

और इतने में ही उसे सांखलन हो जाता है वो झधने लगती है शांताल ऊस्की भीनी रस की खूबसू सूँघे उसे चाटने लगता है और ऊस्की चुत के ऊपर से नीचे तक जुबान से साफ करता है फिर वो कुटुम्ब अपने नीचे बैठा देता है “चलो जानेमन अपने पति का लंड मुँह में लो”……कुउत्मब मना करती है पर कुटुम्ब के चेहरे को सख्त इसे पकड़कर शांतलाल उसे अपने लंड पे रगड़ने लगता है कुटुम्ब को उबकिया आने लगती है

पर उसके गले को जब क़ास्सके दबोचता है तो कुटुम्ब की साँसें अटक जाती है तब जाकर उसे अपने शांतलाल का लंड मुँह में लेना पड़ जता है…पहले दो तीन बार मुँह से बाहर कर देता है…पर कुटुम्ब बारे ही मुश्किल से उसका मुँह में लंड लेकर बस रखे रहती है “आबे चूस ना”….शांतलाल एक करारा धक्का कुटुम्ब के मुँह पे मर देता है लंड गले तक पहुंच जाता हाीइ कुटुम्ब तड़पने लगती है

फिर शांतलाल ज़ोर ज़ोर से कुटुम्ब के मुँह में ही मुख मैथुन स्टार्ट कर डेटह आई…कुतुब अब आंखें बंद किए रोते रोते शांतलाल के लंड को चुस्सथी है…और ज़ोर से और ज़ोर से स्लूर्रप्प्प के इयवाज़ मुँह से आती है…बीच बीच में शांतलाल झुककर मुँह में लंड डाले कुटुम्ब के गान्ड पे भी छपात मारता हाीइ

कुछ देर बाद कुटुम्ब खुद ही लंड चुस्सते रहती है…और फिर शांतल्ला लंड मुँह से निकल देता है कुटुम्ब गहरी साँसें लिए बिस्तर के कॉर्नर पे बैठ जाती है…शनलाल उसे फिर उठाकर बिस्तर पे लेटा देता है और ऊस्की टाँग खोल देता है “चल अब तुझे चोदूंगा”…..कुटुम्ब के लाख मना करने के बावजूद भी शांताला लृक्ता नहीं…वो फौरन अपने पूरी बढ़हास्स्स कुटुम्ब के चुत पे टिकाए लंड से निकलता है…पर लंड अंदर घुस्सता नहीं शांतलाल अपने थूक और पॉकेट से एक लूब्रिकॅंट निकलटः आई उसे लंड पे लगतः आई और ऊस जेल को चुत के मुआने पे भी लगा देता है धायर सारा…और फिर एक ज़ोर डर धक्का पेलता है…कुटुम्ब ज़ोर से चिल्ला उठती है…इतनी ज़ोर से की स्पेअकर पे ऊस्की आवाज़ गूंज उठती है…काला साया बस मुस्करा उठता है

शांतलाल बारे ही काश क़ास्सके चुत में धक्के मारने लगता है….कुटुम्ब अब दाँत पे जुबान लगाए झटकों को सहन कर ने लगती है…और बारे ही करार धक्को को झेल रही होती है….शांतलाल जानवर की तरह उसे चोद रहा था ऊस्की चुत से फहक्च फच्छ की आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी….

कुछ करार धक्को में ही कुटुम्ब ना च्चटे हुए भी शांतल्ल को कसके रोक लेती है और वो फिर झड़ जाती है…शांतल्ल को बड़ा मजा आया और वॉ धक्के लगातार लगता रहा सेक्स की गोली का अच्छा ख़ास्सा फायदा था शांताला झड़ ही नहीं रहा था

शांतलाल ने फौरन चुत से लंड बाहर खींचा और हाँफती कुटुम्ब को अपने ऊपर ले लिया अब कुटुम्ब शांतलाल के ऊपर चधीी लंड को चुत में लेने लगती है…या यूँ कह लीजिए शांतलाल के सख्त हाथ खुद लंड को चुत के मुआने में घुसाने लगते है…..कुटुम्ब बस बारे ही ज़ोर ज़ोर से उछालने लगती है और फिर लंड पे ही गान्ड रगड़ देती है उसके मोटे पिछवाड़े के अंदर लंड ऐसे धासा था जैसे ड्रिल मशीन दीवार में छेद कर देती हो

कुछ देर बाद कुटुम्ब खुद लंड पे कूदने लगती हाीइ पूरा बाहर शांतलाल के जिस्म पे होता है वॉ बस कुटुम्ब के चूतड़ और कमर को मसलते हुए कुटुम्ब को अपने ऊपर कूदवा रहा होता है…कुटुम्ब्ब आहह आहह उहह आहह करके कूद रही होती है…बीच बीच में सेक्स उठाने के लिए शांतलाल छातियो को भी क़ास्सके दबाने लगता है….ओसॉके निपल्स को मसलने लगता है कुटुम्ब से अब और सहन नहीं होता वो और चुदने के काबिल नहीं होती लेकिन शांतलाल नहीं मानता और उसे उसी हालत में खूब चोदता है

कुछ देर बाद पोस्चर बदल जाता है कुटुम्ब किसी गाय की तरह खड़ी होती है और किसी सांड़ की तरह खड़े खड़े शांतलाल कुटुम्ब की गान्ड मारता है….कुउत्मब को बेहद सख्त दर्द हो रहा था चुत का हाल तो बुरा ही था और गान्ड का भी आज पति के अलावा एक गैर मर्द के साथ सो रही थी वो…शांतलाल बस धक्के लगाए रहता है….कुटुम्ब आहहह आहह यू म्मा आहह आस्ती बोलते बोलते चीख रही होती है…..लेकिन शांतलाल अभीतक झड़ा नहीं था….और कुछ ही पल में वो कुटुम्ब की गान्ड से लंड निकलकर उसके मुआने पे मुँह लगा देता है एक तो काली गान्ड ऊपर से शांतलाल ने उसके गान्ड के छेद पे मुँह लगा दिया….शांतलाल के छुपी हसरत आज कुटुम्ब के साथ चुदाई की कसर से निकल रही थी

“अब बॅस करूं आहह मैं और से नहीं पौँगीइ”……शांतलाल कुछ बलटा नहीं और फिर टाँगें चौदीी किए ज़मीने पे ही कुटुम्ब को पट्टक्के उसके ऊपर चढ़ जाता है दोनों चुदा का गहरा खेल खेलने लगते है…चुत से अब लंड बारे ही आराम से अंदर बाहर हो रहा था….कुटुम्ब सिसक रही थी उसे बेहद शर्मिंदगी महसूस हो रही थी शांतलाल उसके होंतोप ए होंठ लगाए उसे अभी किस कर रहा था…और ठीक उसी पल कुटुम्ब ने एक चाल चली और ऊसने फौरन शांतलाल का मास्क उतार दिया…शांतलाल एकदम कत्तुआ गया पर वो धक्के मारता रहा रुका नहीं..शांतलाल के ओदेखके कुटुम्ब की साँसें थाम गयी उसे लगा की वो फोन कॉल वो ढँक भारी बातें इसका मतलब वो काला साया नहीं बल्कि शांतलाल था…..

ये सब सोचते ही उसके रौूंगते खड़े हो गये वो मुँह पे हाथ रखक्के शांतलाल को सहमी निगाहों से देखने लगी “तेरे पतीी ने जो मेरे सहत किया उसे मैं भुला नहीं हूँ रंडी की जानी आज तुझे मैं बक्षुंगा नहीं आहह आहह आहह ले मेरा बीज़्ज़ज्ज”…..और शांतलाल 2 घंटे की इस चुदाई के बाद झधने लगता है….उसका सारा रास चुत को भेगोटे हुए पूरी गान्ड तक भिगो डालता है​

(UPDATE-21)

और फिर लंड को फहक्च से निकलकर कुटुम्ब के छातियो से लेकर नाभी तक रस को झधता रहता है…कुटुम्ब वैसे ही पड़ी रही और शांतलाल का शिकार हो गयी….शांतलाल ने जब अपना मंसूबा उसे बताया तो कुटुम्ब उसके सामें हाथ पैर जोड़ने लगी और उससे एम एम एसे माँगी….शांतलाल ने ज़ोर से तहाका लगाया और बताया की उसके बेटे का ऐसा कोई एम एम एसे था ही नहीं

ये सुनते ही कुटुम्ब की ज़मीन खिसक गयी यानि ऊसने बेमतलब में एक धमकी से शांताल्ल के आगे घुटने तक दिए वॉ ज़ोर से रोने लगी शांताल बस मुस्कुराकर एक जगह बैठकर भीड़ी फहुंकने लगा..”चल छल्ल अब ज्यादा ड्रामा मत कर”….इतना कहते हुए वॉ अपन पेंट पहने बाहर निकल गया जब वो वापिस आया तो ओसॉके हाथ में कुछ तस्वीरें थी जो एकदम गरम हो रही थी शायद अभी के अभी प्रिंट्स निकले हुए थे कमरा से

उसे कुटुम्ब के सामने बिखेरते ही कुटुम्ब एकदम से काँप उठी…ये शांतलाल और उसके बीच की चुदाई का सारा सीन था…”हाहाहा मेरा क्यः आई? अपुन तो वैसे ही बदनाम है पर गैर आदमी के साथ तालूक़ है तेरा चुदाई की है ये तो पूरी दुनिया जान जाएगी”…..कुटुम्ब एकदम से क़ास्सके शांतलाल को एक थप्पड़ मार्टी है शांतलाल का पड़ा चाहड़ज आता है और वो कुटुम्ब दो तीन थप्पड़ जधढ देता हे कुटुम्ब रोने लगती है

शांतलाल पास से गुण निकालके कुटुम्ब के सर पे लगा देता है “बहेनचोड़ रंडी बहुत पार निकल रहे है तेरे बीए तू देख तू तो मेरी रखैल बनेगी ही बनेगिइ”……कुटुम्ब काँपने लगती है और ठीक उसी पल शांतलाल मुस्कुराकर गुण बिस्तर पे फ़ेक देता है और कुटुम्ब का बाल क़ास्सके जकड़ लेता है….”अब बता तू मेरी रंडी है की नहीं? मुझपर हाथ उठाने से पहले सोच ले ये फोटोस तेरा पति अपनी आंखों से देखेगा की ऊस्की बीवी उसके कट्टर दुश्मन के सात सोई है और फिर कौन यकीन करेगा तुझपे तू खुद अपने मर्जी से यहां आयआई होटल में मिया बीवी बनकर मेरे साथ सोईइ हाहाहा”…..

कुटुम्ब के पास सही में कोई चारा नहीं था तभी एकदम से शांतलाल हिल पड़ा…उसके भेजे से खून बहाने लगा और कुछ चीटें कुटुम्ब के छाती पे परे जहां उसके लंड का पानी वैसे ही बह रहा था कुउतुंब कुछ समझ अँहि पाई की इतने कम वक्त में आख़िर क्या हुआ?

जल्द ही शांतलाल के भेजे में लगी गोली धंस गयी और शांतलाल पीछे जैसे पलटा काला साया को खड़ा पाया…शांतलाल उसे देखकर वही गिर पड़ा…कुटुम्ब नंगी थी वो अपने छाती पे हाथ रखकर काला साया को देखत इहाई और एकदम से काला साया उसे घूर्र रहा होताः आई उसके गुण से धुंआ निकल रहा है…और एकदम से वो गुण कुटुम्ब के हाथ पे फैक देता है…कुटुम्ब एकदम सहम जाती है वो अपने हाथों से वो गुण फैक्के उठ जाती है

काला साया : तू सोच रही होंगी मैं यहां कैसे? ये ज़लील इंसान तो वैसे ही कमीना था…इसने तो अपना बदला ले लिया और मर भी गया पर तू अकेले इसके साथ बंद कमरे में सोई भी और इसका क़त्ला कर डाला
कुटुम्ब : न्न्न..नहीं ये नहीं हो सकता ये झूठ हाईईइ मैंने इसे
काला साया : इसने तुझे ब्लैकमेल करके यहां बुलाया तूने अपनी और इसकी तस्वीर देखी सहएमे और डर से तूने इस पे गोली चलाई और इसे मर डाला पुलिस यहां राइड करने आ रही है तुझे देखेगी इसकी लाश देखेगी फिर तू वैसे ही बदनाममम

कुटुम्ब एकदम से हताश हो गयी…काला साया ने रूमाल से ऊस गुण को उठाया जिससे ऊसने शांतलाल का कत्ल किया था…शांतलाल के सर से खून बह रहा था ऊसने किनारे से गुण उठाया रूमाल से और बिस्तर पे पड़ी वॉ गुण का सेफ्टी लॉक खोला….”असल में ये गुण मिर है शांतलाल के पास जो गुण थी ये वही है…और ये गुण जो मेरे हाथ में थी वॉ शांतलाल की है शांतलाल का गुण इस घर में बिस्तर पे रखा है इस पे तेरे उंगलियों के निशान गुण कोएदुम से पकड़ने से पढ़ गये है अब ये सबूत तुझे फाँसी तक पहुचाएगा लपटे में तेरा हज़्बेंड और बेटा आएगा”…..कुटुम्ब अब काला साय के पैर पे गिरके रोने लगी

कुटुम्ब : मुझे मांफ कर दे काला साया मैंने कुछ नहीं किया मुझे फ़साया गया हाीइ प्लीज़ मुझे बच्चा ले मैं मररणा नहीं चाहतीई
काला साया : तूने जो सलूक दिव्या के साथ किया और ऊस्की ये सजा है सिर्फ़ उसके लिए नहीं तेरे बेटे ने लाखों की जिंदगी बर्बाद तेरे पति ने हज़ारों औरतों का घर उजाड़ दिया अब बोल मैं तुझे क्या सजा दम? ये सजा तो फिर भी कम है की मैं तुझे सीधे गोली मारा नहीं
कुटुम्ब : प्लीज़ काला साया मैंने तेरे आगे हाथ जोधती हूओ प्लीज़
काला साया : इसने तेरा वीडियो बना लिया है उसे तो मैंने अपने पास रख लिया है लेकिन मैं तुझेटबटालक नहीं बक्षुंगा जबतक तू प्रस्चीत नहीं कर लेती
कटुउंब : तू जो बोलेगा मैं करूँगी

काला साया ने फौरन कुटुम्ब को उठाया और उसे जल्दी से उसे सारी दी ब्लाउज और पेटीकोट फटा हुआ था….

ब्रा और पैंटी फॅट चुकी थी शांतलाल ने उसके साथ बहुत ज़बरदस्ती की थी…काला साया बस कुटुम्ब के शरीर को घूर्र रहा था…कुटुम्ब ने जैसे तैसे खुद को साफ करके सारी पहनी…और फिर काला साय ने ऊन फोटोग्राफेस को बंड्ल बनकर अपने जेब में रख लिया और कुटुम्ब का हाथ पकड़े उसे बाहर ले आया…काला साया ने रिसेप्षनिस्ट पे बैठे लड़के को देखा और उसे उसी पल गोली दंग दी…कसूर उसका सिर्फ़ यही था की ऊसने होटल के याध में लाखों कपल्स के अश्लील एम एम एसे स्कॅंडल किए थे सबूत वहां मौज़ूद था ऊन कैमरा में

कुटुम्ब : तुम प्ल्स वो वीडियो डेलीट कर दो मैं बदनाम नहीं होना छाती
काला साया : दररो नहीं वो सब मैं पहले ही कर चुका हूँ ऊस्की एक सीडी मेरे हाथ में हे अब चुछाप चलो

काला साया ने एक जीप पे कुटुम्ब को बिठाया और बहुत ही गुप्त रूप से वहां से फरार हो गया…कुटुम्ब पूरे रास्ते काँप रही थी अभी कुछ देर पहले जो कुछ हुआ वो उसके आंखों से गया नहीं खून का इल्जाम ऊसपे था…पूरा सबूत काला साया के पास अब उसका बचना ननूमकिन सा लग रहा था….पर यहां भी काला साय ने चाल खेली

ऊसने गाड़ी रोकी और ऊन तस्वीरों को जला डाल जो शांतलाल के साथ थी…फिर ऊसने ऊस वीडियो की सीडी को अपने पास ये कहकर रख लिया की कुटुम्ब का गुनाह अभी छुपा नहीं कुटुम्ब ने काफी मिन्नत की पर काल साया मना नहीं ऊसने कुटुम्ब को साफ बयान कर दिया…किया अब काला साया का ऊसपे पहरा है अब पुलिस उसे छू नहीं सकती लेकिन उसे जो काला साया कहिएं करना पड़ेगा….कुटुम्ब ने हार मानके हाँ में सर झुका दिया अब वो भी काला साया की गुलाम थी…काल साया ने कुटुम्ब का एक वीडियो बनाया ऊसपे कुटुम्ब से दिव्या के लिए अपॉलजी बनाई कुटुम्ब ने सुबकते हुए दिव्या से माँफी माँगी उसके बाद काला साया ने खेत में ही कटुउंब को घर जाने को कहा जो विटनेस थे उसे तो मर गिराया काल साया ने पुलिस को अब शक होना मुश्किल था

(UPDATE-22)

उधर पुलिस तफ़तीश करती है शांतलाल की लाश जो जेल से अभी छूटा था…ऊस्की मौत और बिस्तर पे लगे वीर्य को देखकर वो रिसेप्षनिस्ट को घूर्रता है….आस पड़ोस के पूछने पे कोई बता नहीं पता ई आख़िर गोली की आवाज़ कब सुनाई दी लेकिन जो भ ईशंतलाल के साथ था ऊसने गोली मारी….सी सी टी अभी फुटेज का रिकार्डिंग सिस्टम ही टूटा पड़ा था….

बस होटल पे स्कॅंडल चल रही है इस बात कप आता लगते ही पुलिस ने मैनेजर को ही गेरफ़्तार कर लिया ऊन लोगों का लगा हो ना हो शांतलाल स्कॅंडल में इणवओवला था कुटुम्ब के बार्िएन में ऊन्हें ज़रा सी भनक नहीं हुई होटल को सील कर दिया गया
गर्र्र्र गर्र्र्र करती मोटर की आवाज़ को सुन बस्ती के बाहर बैठी कुछ औरतें जो बर्तन मांझ रही थी ऊस मोटोरयस्यकले सवार को देखने लगी जो उनके पास आकर बाइक को रोकता है उसके मुकोते भरे चेहरे को देख…वो लोग आश्चर्य से उठ खड़े हो जाते है…सब अढेढ़ उमर की औरतें कुछ कमसिन लड़कियां होती है बस्ती की औरतें काला साया को अपने पास आते देखती है

“आपप यहाँ पे?”…..काला साया मुस्कुराकर ऊन सबको देखता है….”हाँ मैं यहां पे इसलिए आया हूँ क्योंकि अब आप लोगों के लिए एक खुशख़बरी है जो नाइंसाफी शांतलाल जैसे कमीने आदमी ने आपलोगो की बेटियो बहनो और आपके साथ की ऊन सबका मैंने बदला ले लिया”…….औरतें हैरान कुछ देर पहले ही वो लोग शांतलाल की मौत के ऊपर चर्चा कर रही थी और काला साया की बात सुनकर होठों पे आँचल रखकर वो लोग एक दूसरे को देखने लगी

“तो इसका मतलब्बब आपने?”….काला साया ने सर हाँ में हिलाया….ऊन औरतों खुशी से एक दूसरे को गले लगाया…उनकी खुशी साफ जाहिर थी की उनके जालिम को सजा मिल चुकी थी….दरअसल काला साया ने शांतलाल को अपने बदले के फायदे के लिए नहीं छूना था वो उससे ऊन मासूम औरतों पे हुए ज़ुलाम जो शांतलाल ने किए थे ऊन्हें राशन कार्ड के बदले ऊँका सोशण किया ऊन्हें राशन नहीं दिया अपनी मनमानी की ऊन सबका बदला काला साया ने लिया था

“हम तुम्हारे बहुत आभारी है काला साया तुम जो कोई भी हो तुमने हुंपे उपकार किया है”…..सब हाथ जोधके काला साया को धनञयवाद करती है….काला साया ऊन सबको मना अकर्ता है की वो ऊनसे उमर में बड़ी है वो उनके आंखों में दुख नहीं देखना चाहता…अगर यहां की पुलिस स्ट्रिक्ट एक्शन लेती तो आज काला साया का कोई वजूद नहीं होता….काला साया ऊसबसे विदा लेकर बाइक पे वापिस सवार हो जाता है और अँधा ढूँढ हवा के भट्टी गायब हो जाता…औरतें साफ ठान लेती है की शांतलाल का खून काला साया ने किया है वो किसको नहीं बताएंगीइ….

जल्द ही काला साया किसी साए की तरह अपने घर में दाखिल होता है…इतने में दिव्या को सामने देख काला साया मुस्कुराकर खड़ा हो जाता है…”ओह तूमम आ गये”…..दिव्या काला साया से लिपट जाती है….

अभी कुछ देर पहले किचन में खाना बनाने से उसका पूरा बदन पसीने से गीलट हां…काला साया उसके माथे को चूमता है और फिर दिव्या काला साया को पानी देती है

काला साया : तुम्हारे लिए एक तोहफा लाआया हूँ
दिव्या : कैसा तोहफा?
काला साया : लो तो सही ये वीडियो देखो

दिव्या आश्चर्य भाव से मुस्कुराकर काला साया को देखकर वो मोबाइल वीडियो क्लिप ऑन करती है…ऊसमें डरी शेमी कुटुम्ब को देख दिव्या हैरान हो जाती है एक बार काला साया को देखकर फिर वीडियो देखने लगती है…कुटुम्ब उससे हाथ जोड़के माँफी माँग रही है और अपने गुनाहो को कबूल कर रही है ये सब देखकर दिव्या के चेहरे पे मुस्कुराहट छा जाती है….काला साया फौरन गंभीरता से वीडियो लगा देता है सीडी प्लेयर में और तभी आहें भरते शांतलाल और कुटुम्ब की होटल वाली एम एम एसे चलने लगती है

“हेयी भगवान्नन् ये तो मालकिन हाईईइ तुममन्ने इन्हें हाहाहा जो भी किया बहुत अच्छा किया इसी के लायक है ये रंडी”……काला साया ने ना में जवाब दिया और फिर जो जले हुए फोटोग्राफेस थे उनके कुछ फोटोस जो ठीक थे उसे दिव्या को दिखाए…फिर दिव्या को सबकुछ शांतलाल से मिलने से लेकर कुटुम्ब से बदला लेने तक उसे होटल लाके उसका एम एम एसे बनाने तक सबकुछ बताया….तब जाकर दिव्या काला साया के गले लग गयी

दिव्या : तुमने मेरा बदला लिया ऊनसे मैं तुम्हारा ये कर्ज कभी
काला साया : हाथ पगली कैसा कर्ज? ये तो ऊन मासूमों के लिए था और तुम्हारे लिए जो आजतक इन भेड़ियो के चंगुल में पीसती रही…काला साया इंसाफ का पुजारी है…खैरर अब तो तुम समझ गई ना की हम कुटुम्ब और उसके बेटे साहिल से कैसे बदला लेंगे
दिव्या : तुमने ये सब वॉ क्या बोलते है नेट पे क्यों नहीं डाला वो औरत बदनाम हो तेरे मेरे कलेजे को ठंडक पहुंचे
काला साया : अगर इतनी आसान सजा दी तो पुलिस उसे गेरफ़्तार कर लेगी तब हम उसके बेटे और बाप से बदला कैसे लेंगे अभी तो हमने शुरूवात की है अब बच्चा उसका बाप और बेटा

दिव्या भी गंभीरता से काला साया की ओर देखने लगती है…उधर कुटुम्ब खाना बना रही थी आज सुबह जो कुछ हुआ उससे उसका पूरा हाथ पाओ काँप रहा था…बाहर अंजर उसका पति फोन पे हंस हस्सके बात कर रहा था….”हाहाहा क्या सच में मररर गया हाहाहा वॉ हरामी बहन का लौंडा शांतलाल मर गया हाहाहा”…..उसके तहाका लगती हँसी कुटुम्ब को शांतलाल से रगदाई और उसके मौत की याद दिला रही थी ऊसने बाहर आकर अपना आँचल से चेहरा पोंछके कहा की ऊस्की तबीयत ठीक नहीं वो आराम करना चाहती है….अंजर ने उसे जाने का इशारा किया….तभी अचानक दो कॉन्स्टेबल दरवाजे पे दस्तक देते है…दोनों कॉन्स्टेबल को देख अंजर हैरानी से फोन कांट देता है….

कुटुम्ब का तो तार्र तार्र पूरा बदन काँपने लगता है कहीं काला साया ने सबकुछ खुलासा तो नहीं कर डाला उसके बारे में

अंजर : जी साहेब बोलिए
कॉन्स्टेबल्स : शांतलाल का कत्ल हुआ है एक होटल में उसी की छानबीन कर रहे है सुना है शांतलाल तुम्हारा कट्टर दुश्मन था….तुमने उसके पीछे गुंडे लगाए थे
अंजर : क्क्क…क्या बोल रहे हो साहेब? ऐसा कुछ नहीं (कुटुम्ब की तो सिट्टी पिटी गुम कहीं पुलिस उसे ही ना पकड़ ले)
कॉन्स्टेबल्स : देखो तुम्हारे भेजे गये बड्ढे के टट्टू ने मुँह खोल डाला है और वो साफ कह रहे है की तुमने ऊन्हें सुपारी दी थी…क्या ये सच है?
अंजर : मेरी मां की कसम साहेब ऐसा नहीं (कामेनेपन की हद थी)​

UPDATE-23)​
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कॉन्स्टेबल्स : शांतलाल की आपसे क्या दुश्मनी थी?
अंजर : बॅस वो बहुत निहायती कमीना था साहेब पारा (एरिया) की हर औरत को ऊसने मोलेस्ट किया था साहबे मैंने उससे दोस्ती तोड़ी और उसके राशन के दुकान को फ्सी से बंद करवाया तो वो मेरे जान का प्यासा बन गया है
कॉन्स्टेबल्स : हम आपका बेटा किधर है
अंजर : वो कॉलेज गया हुआ है
कॉन्स्टेबल्स : हम उसका नंबर दीजिए
अंजर : साहेब वॉ कुछ नहीं जनता
कॉन्स्टेबल्स : सबसे पूछताछ चल रही हे अभी हम कुछ कह नहीं सकते दो खून हुए है होटल के रिसेप्षनिस्ट का और शांतलाल का वहां पे धायर सारे वीडियोस जो अश्लील है रेकॉर्डेड पाए गये
अंजर : शांतलाल तो था ही कमीना साहेब लीजिए अरे कुटुम्ब इधर आना तो​
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कटुउंब भौक्ला गई वो किसी तरह करीब आई फिर ऊसने बारे ही धीमे लव्ज़ में सहिल का नंबर दिया फिर जाने लगी पर कॉन्स्टेबल ने उसे रोका उससे भी कुछ सवाल्ट किए की अगर वो कुछ जानती हो…कुटुम्ब ने ना में सर हिलाया और फिर वो लोग चले गये…अंजनर तो खुशी के मारें नाचने लगा “हाहाहा अच्छा हुआ कमीना मर गया पर एक बात बता ये मेरे गुंडेलोगो ने अगर उसे नहीं मारा तो फिर वो मारा कैसे? कॉन्स्टेबल कह रहे थे की शांतलाल किसी औरत के साथ पाया गया हो सकता है उसी ने”….कुटुम्ब का तो पसीना चुट्टने लगा वो बरफ की तरह ठंडी पढ़ गयी​
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अंजर : जाने दे हाहाहा चल तू आराम कर मैं थोड़ा साहिल को फोन करके कह देता हूँ की पुलिस को ज्यादा कुछ बोल ना दे
कुटुम्ब : त्तहेककक है (इतना कहकर कुटुम्ब फौरन कमरे में चली गयी)​
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रात हो चुकी थी…..कुटुम्ब के दिमाग में बस रही रहके वॉ खौफ भरे बातें घूम रहे थे शांतलाल उसके सामने मारा था…काला साया ने उसे मारा और कुटुम्ब पे सारे निशाने सांड़ दिए सबूत के….

काला साया के हाथों में लगाम थी वो जब चाहे उसे घोधी बनकर दौड़ा सकता था…इधर पुलिस को पता लग चुका है की काम एक औरत का है…ये सब सोचते सोचते कुटुम्ब रोने लगी की आगे उसके साथ क्या होगा?​
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कुछ दिन तक सबकुछ नॉर्मल रहा ना ही कोई धमकिभरा खत कुउत्मब को काला साय से मिला और ना ही पुलिस कोई और ज्यादा प्रोग्रेस कर सकी….शांतलाल की मौत किसी औरत ने ही की है इसका कोई पुष्टि नहीं हो पा रहा था लेकिन बिस्तर पे लगे शुक्राणु औरत के भी थे….पुलिस ने कुछ दिन कुटुम्ब के पति पे शक किया क्योंकि वो दुश्मन था शांतलाल का पर कोई खास सबूत ना मिला करीब 1 महीने में ही ये मामला ठंडा पढ़ने लगा….पुलिस ने थक्के फाइल बंद कर दी..ऊस दिन कुटुम्ब को आराम से सो रही थी उसके दिल का डर कुछ कम ही हुआ था की इतने में फोन बज उठा​
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कुटुम्ब : हेल्ल्लू? (अंजर पास ही सो रहा था)
काला साय : हेलो जानेमन क्या हुआ तुम्हारी आवाज़ को?
कुटुम्ब : उफ़फ्फ़ काला साया तूमम तुमने इतनी रात गये फोन क्यों किया पता है पोलसीए आई थी कुछ दीनों पहले
काला साया : हाहाहा मैंने क्या कहा था काला साया का साया जबतक तुमपे है पुलिस तुम्हें छू भी नहीं सकती सबूत मेरे पास है पुलिस को तुमपे एक टक्का भी शक नहीं अब तुम फौरन टट्टी करने का बहाना करके ऊपर आ जाओ
कुटुम्ब : अभिईिइ तूमम ऊपर हो
काला साया : शायद तुम्हें सुनाई दिया मैं तुम्हारे कमरे में आ जाता हूओ
कुटुम्ब्ब्ब् : नहीं नहीं प्लीज़ ऊपर ही रहनन्ना मेरे पति जगह जाएँगे
काला साया : आऊ जल्दी आऊ​
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कुटुम्ब जैसे ही फोन कट करके किसी तरह अंजर को देखती है जो गान्ड घुमाएं सो रहा है कुटुम्ब अंजर को आवाज़ देती है वो नीण्दम आइन सवाल करता है “नीचे का टॉयलेट काम नहीं कर रहा मैं थोड़ा हगके आती हूँ”..अंजर कर्राहते भरके सोने लगता है..कुटुम्ब भाँपते हुए फौरन बिस्तर से उठके दरवाजा खोलती है और ब्रांडे से होते हुए चारों ओर देखती है रात के 3 बज चुके है….और झींगुर की कीर्र कीर्र आवाज़ गूंज रही है कहीं दूर कोई कुत्ता हावव हावव करके रो रहा है….कुटुम्ब काँपते हुए किसी तरह ऊपर आती है…छत्त का ताला बारे ही आराम से खोलती है….

इतने में वो बाहर की लाइट जला देती है​
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अंधेरी रात में जैसे छत्त पे थोड़ा उजाला होता है…इतने में ढाप्प से कोई चीज़ छत्त पे कूड़ता है कुटुम्ब एकदम से चीख पढ़ती है…पर काला साया कोदेखके उसका डर थोड़ा कम हो जाता है…काला साया उसके करीब आता है पहली बार कुटुम्ब काल साया को बारे गौर से देखती है​
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काला साया : मुझे पहचानने की कोई जरूरत नहीं​
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कुटुम्ब बिना कुछ कहें उदासी निगाहों से काला साय को देखती है काला साया उसका हाथ पकड़कर उसे अपने करीब खींचता है और उसके मोटे होठों को चुस्सता है उसके मोटे होठों को बड़ी बड़ी से चुस्स चुस्सके उसे बेहाल कर देता है फिर झट से लाइट ऑफ करके ऊपर के बने टॉयलेट में ले आता है टॉयलेट सीट पे बैठकर वो अपना पेंट उतार देता है और कुटुम्ब के ब्लाउज को खोल के उसके मोटे मोटे तरबूज जैसे चुचियों को दबाने लगता है​
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कुटुम्ब कसमसाने लगती है…काल साया ऊन्हें मुँह में भरके चुस्सता है….और फिर अपने लंड को खोल के सीधे कुटुम्ब को कुतिया बनकर अपने लंड पे झुका देता है…कुटुम्ब जानती थी उसे क्या करना है वो फ़ौरना लंड को मुँह में लेकर चूसने लगत् इहाई..मुँह से अंदर बाहर करने लगती है…काला साया टाँग कुटुम्ब के पिछवाड़े पे रख देता है और उसके बालों को पकड़े उसके पीठ से सारी का पल्लू गिरा देता है​

(UPDATE-24)

कुटुम्ब उत्त्के अपने सारी का पेटीकोट और ब्लाउज उतार देती है…और फिर काला साया के लंड को झुककर चूसने लगती है…काला साया उसके छातियो को बराबर दबाने लगता है और उसके सख्त निपल्स को भी मसलता है….कुटुम्ब बड़ी बड़ी ज़ोर से लंड की मूठ मारने लगती है और उसे मुँह में भरके चूसने लगती है कुटुम्ब फिर अपने हलक से लंड निकलती है और फिर अपने पेटीकोट का नारा खोलने लगती है…काल साया कुटुम्ब के पेंट पे मुँह रखकर उसे चूमने लगता है और उसे स्ट्रेच मार्क्स के ऊपर के मोटे तोंद निकलकर नाभी के भाग को मुँह में भर लेता है उसके नाभी में जुबान डालता है कुटुम्ब सिसक रही थी…आहें भर रही थी….नीचे पति घोड़े बेचके सो रहा था…और ऊपर पत्नी किसी गैर्ड मर्द की घोधी बनकर चुदाया रही थी….कुटुम्ब धीरे से अपने पूरे शरीर का बाहर काल साया के गोद पे बैठकर देने लगती है….नीचे से काला साया धक्के पेलने लगता है

कुटुम्ब की झाँटो भारी चुत में लंड बारे अच्छे से अंदर बाहर होने लगता है….कुटुम्ब उहह आहह करके करके आवाज़ करने लगती है…वो धीमें से कर रही थी ताकि उसके पति को ना सुनाई दे ने लगे….और काला साया भी चुस्ती से कुटुम्ब के चुत में लंड पेलता रहता है….फिर कुटुम्ब खुद ही उछाल उछाल के काला साया के लंड के ऊपर कूदने लगती है..

क्‍ाअल साया उसे तुरंत उठा देता है और उसे गाय बनकर उसके पीछे कहरा होकर गान्ड में ही लंड घुसा देता है गान्ड का छेद घपप से लंड को अपने अंदर स्माआ लेता है

और फिर काला साया बारे ही काश क़ास्सके कुटुम्ब को चोदता है….कुटुम्ब ज़ोर से सिसकने लगती है….उसे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था उसके जिंदगी में किसी मर्द ने उसे इतना ज़ोर से चोदा नहीं था…काला साया गुस्से में उसे बारे ही करार धक्के पेलने लगता है और कुछ ही देर में जब उसके अंदर काबू नहीं रही पाता…वो वैसे ही हालत में कुछ धक्के लगाए कुटुम्ब की गान्ड से लंड को बाहर खींच लेता है “झुक जा”…कुटुम्ब वैसे ही करती है….और काला साया उसके होठों पे लंड मसलने लगता है और फिर मुठीी मरते हुए उसके मुँह में ही लंड का पानी चोद देता है चेहरा पूरा लंड के रस भीग जाता है बाल में भी लग जाता है कुटुम्ब बस रोई सूरत बनकर सुबकने लगती है उसे इम्तहान गीन आ रही थी इसमें कोई शक नहीं था….

कुछ देर बाद काला साया अपने आपे में नाके जल्दी से अपने कपड़ों को पहन लेता है और कुउतुंब को उठाकर उसे भीगे लंबो को चुम्म लेता है म्‍म्म्ममम अब बॅस करो….कुटुम्ब थोड़ा विरोध करती है…क्‍ाअला साया उसे अनके मर के किसी तरह चाट पे फहांडते हुए दूसरे गली में कूदके अपनी बाइक स्टार्ट के वहां से निकल जाता है…कुटुम्ब के जान में जान आती है और वॉ फौरन शीशे में खुद को नंगी और वीर्य से भीगी देखकर फ़ौरान्न्न् खिजलके चीख उठती है उसे ऊस सर्द रात को भी नहाना पढ़ता है ठंडे पानी से और फिर खुद को साफ सुथरा करके वो अपने कमरे में घुस्सके दरवाजा बंद कर लेती है

काला साया ने कुटुम्ब को अब ऐसे ही अपनी रखैल बनान शुरू कर दिया….कभी उसे पुराने खेत कभी उसे उसी के घर में ँघुस्सके पति और बेटे के ना होने पे…कभी उसे गुसलखाने में ही चोदा…धीरे धीरे खुद कुटुम्ब क्‍ाअल साया की आदि होने लगी…..और वो जब कहता है तब वो एक इशारे पे ही फलाने ठिकाने एरिया में पहुंच जाती चुदवाने….अब जानती थी काला साया उसके जीवनकाल तक उसे चोदते रहेगा…ये बात वो अंजर को कह भी नहीं सकती थी….पहले शांतलाल और अब उसका भी बाप काला साया…कुटुम्ब ने दो बार तो ई पिल खाया जो सवाल उसके पति ने भी किया तो ऊसने कहा सोते वक्त वो खुद उसे चोदता है….अंजर हँसी में टाल देता…इधर काला साय ने चाल चलनी शुरू की

और फौरन ऊस रात…साहिल ब्रांडे में दारू पी रहा था आज उसे तारक महसूस हो रही थी बाप मां घर पे नहीं थे….वॉ कंप्यूटर ऑन करके ब्लू फिल्म क्लिप लगाने को हुआ तभी उसे ज़मीन पे एक सीडी मिलती है….साहिल उसे उठाने के लिए झुकता है और उसे लगता है “अरे वाह लगता है बाबा मां ब्लूएफील्म देखते है साले बताते नहीं बारे चालू”…..

साहिल को लगा की ये सीडी उसके मां बाप देखते है जैसे ही वीडियो ऑन हुआ साहिल की मुस्कुराहट एक पल में गायब हो गयी और वॉ बहुत की तरह सफेद हो गया ऊस्की जुबान बाहर निकल गयी आँख बारे हो गये

कुटुम्ब शांतलाल के साथ चुदाया रही थी….दोनों आहह आहह करके आहें भर रहे थे…”यययय..कय्याअ बाबा का दुश्मंन मेरी मां के सतह”…..साहिल को कुछ समझ ना आया…और ऊसने क्लिप और आगे की…तभी उसे दिखता है की एक मुकोता पहना काला साया ऊस्की मां को चोरी छुपी उसी के ऊपर वाले गुसलखने में टॉयलेट में चोद रहा है दो तीन क्लिप्स को देखकर साहिल चिल्ल्ल उठा…”मां तुमने इतना बड़ा झूठ छुपाआ साली तू एक रंडी हाीइ अभी बाबा को बताता हूओ”….जैसे ही साहिल ने वो सीडी निकाली तभी उसके सर पे एक ज़ोर का वार हुआ उसके बाद वो कब बिस्तर पे ही देह गया पता नहीं

तभी किसी ने उसके मुँह पे काला काप्रा बँधा…और उसे पकड़कर सीडियो से घस्सिटता हुआ फौरन गाड़ी में लाके सवार कर देता है….चोट इतना गहरा था की साहिल पूरे दो घंटे तक बेहोश रहता है….जब ऊस्की आंखें खुलती है तो बल्ब की रोशनी से वो आँख ढक लेता है….और फिर तभी उसके सामने दिव्या खड़ी दिखती है गुस्से में एकदम लाल और ठीक उसके बगल में क्‍ाअल साया

साहिल अपने सर को झाधते हुए खुद के हाथ पाओ का बाँधा महसूस कर सकता था…ऊसने फौरन सामने दिव्या को खड़ा देखा मुस्कुराते हुए साहिल का पारा चढ़ गया

साहिल्ल : सालीइी मदारचोड़दड़ तूने मुझे ऐसे बाँधा कैसे????

साहिल की निगाह परछाई से सामने आते काला साए पे पड़ी वो थोड़ा घबरा गया मुक्के का दर्द का अहसास अब भी था…”सीसी…काला साया टीटी..तूमम दोनों”……साहिल घबराते हुए अपने रसियो बँधे हाथ को झधते हुए

काला साया : हाँ हम दोनों जिस लड़की के साथ तूने इतना नाइंसाफी किया जिसे मौत के कगार पे चोद दिया ऊस्की इज्जत आबरू सब छीन ली तूने और तेरे परिवार ने

साहिल्ल : देख काला साअया मैंने कोई गुणाहह नहीं कियाअ

काला साया : गुनाह करने वाला कभी गुनहगार खुद को नहीं कहता पर तू आज काला साया की साए में है और आज तुझपे मेरा मुक़दमा चलेगा

काला साया दिव्या के उबलते आँसुयो को देखता है….गुलाबी निगाहों से दिव्या काला साया की ओर देखती है…”मुक़दमा नंबर 1 एक मासूम लड़की जो ग़रेबे लाचार है उसे प्यार के जालने में फंसाया मुक़दमा नो.2 सेक्स सुअल हररासेमेंट यानि उसके साथ छेद चाढ़ मुक़दमा नो.3 बारे बारे वादे करके ऊसको जब चाहा तब फक किया मुक़दमा नो.4 जान से मारने की धमकी और मां का अत्याचार”…..साहिल झल्ला पारा​

(UPDATE-25)

साहहील : देख मुझे चोद दे वरना अंजाम ठीक नहीं होगाआ
काला साया : क्या कर लेगा? बोल मैं एक ही पूंछ मर के तैयार बत्तीसी निकाल सकता हूँ
साहिल : डेक्कख मेरी बात सुन मुझे चोद दे जितना बोल उतना दूँगा
काला साया : मुक़दमा नो.

5 पैसे का लालच देकर मासूमों ना इंसाफी दिलवाना
साहिल : आबे साले स्माझता क्यूउ नहीं तू?

चट्टककक…एक थप्पड़ काला साया साहिल के मुँह पे मारता है…साहिल के होंठ काट जाते है और वो रोई सूरत बनकर काला साया को देखने लगता है “तू सोच रहा होगा की तू यहां कैसे? एकदुम्से ? दिव्या मेरे साथ मिली हुई है एकदुम्से वो सीडी में जो ब्लूएफील्म्‍म्म तेरी मां का”……इतना कहकर काला साया हँसने लगा

काला साया : हाँ मैंने ही बनवाया तेरी मां को मैंने ही शांतलाल से चुदवाया और मजे की बात बताऊं तेरी मां को मैंने भी चोदा हाँ ऊसने शांतलाल का कत्ल कर डाला
साहिल : झूवतत झूटतत क्यों कर रहः आई हमारे साथ ऐसा तू?
काला साया : क्यूउ क्यूउ? जानना चाहता है ना किसी मासूम लड़की की इज़त के साथ तूने खेला जिसने तुझे इतना प्यार किया सपोर्ट किया तुझे अपना सबकुछ दिया…और तूने अरे बहन ना बना सका तो कम से कम उसे प्यार का तो धोखा मत दे तूने एक नहीं हज़ारों लड़कियों की जिंदगी तहेस-नबूत की तेरे बाप ने खेत की औरतों को शांतलाल के साथ चोदा और फिर तूने भी बहती गंगा में हाथ धोया

और तुझहहे क्यूउ का जवाब चाहिई कमीने?…..ज़ोर से गारज़ता हुआ काला साया चिल्ला उठा….साहिल सहम उठा “ड्ड..एक मेरि मां ज़बरदस्ती तेरे साथ कर रही है”…काला साया झुककर बोलता है “और टर एबाप तूने जो दूसरों की औरतों एक साथ किया कभी सोचा वो भी तो अपने बककचे के भूख के लिए महेज़ जो सरकारी राशन जो ऊन्हें दिया जाता है उसके बदले में उनकी इज्जत ली ऊँका सोशण किया क्या उनके बच्चे अपनी मां का ऐसा रूप देखेंगे अरे उनकी चोद तू बता तू तो बेटे के नाम पे गान्डू है गान्डू”…..क्‍ाअल साया काँपते साहिल के चेहरे पे चेहरा लगाए बोलता है

“तूने तो खुद कितनों का एम एम एसे बनाया तेरे पीसी में एक एक वीडियो पुलिस जब चाहे तब देख सकती है….साहिल सिहं उठा उसके मुँह से कुछ निकल नहीं पा रहा था

काला साया : दिव्या ये तुम्हारा गुनाहगार है जीतने ज़ुल्मो के सौ लाठियो का दर्द नहीं होता उतना खुदा के गज़ब में होता है ऊस्की एक लाठी में होता है आज अपनी सारी कसर इस बेल्ट से इस पे निकाल दो (काला साय दिव्या के कंधे को पकड़े उसे बेल्ट देता है साहिल काँप जाता है)

साहील्ल : न्णनू नूऊओ नहियीई आई दिव्या देख तूने अगर एक वार भी किया ना तो

काला साया : तू एक वो साँप है जिसे लोगों ने मर मर के उसका ज़ेर छीन लिया…और तू एक पागल कुत्ते की तरह सिर्फ़ चिल्ला सकता है यहां तेरी चीखें कोई नहीं सुनेगा चलो दिव्या स्टार्ट करो

दिव्या के अंदर गुस्सा तब्दील हो जाता है वो उसी गुलाबी निगाहों कहा जाने वाली नज़रो से साहिल को देखती है…साहिल काँपने लगतः आई और फिर शुरू होता है टॉर्चर का सिलसिला ….

काला साया एक एक वार अपने आंखों से देखता है…चट्टकक चटाकककक…साहिल के पूरे नंगे शरीर पे बेल्ट बेदर्दी से दिव्या अपने गुस्से की सारी कसर निकलते हुए मारिट है…करीब 72 बार वो उसे बेल्ट से मर मर के लाहुलुहन कर देइत है “हर एक कमज़ोर सौ के बराबर हो जाए तो उसे बारे से बड़ा हाहती भी नहीं हटा सकता”…..दिव्या खून से लथपथ बेल्ट फ़ेक देती है…काला साया दिव्या को देखते हुए कहता है

साहिल बेहोश हो जाता है…और फिर साहिल का बाल पकड़कर काला साया उसे ऊन ज़ख़्मो का हिसाब बताता है “ये जख्म तूने जीतनो की ली उनके थे….अब जो सबसे बड़ा धक्का है वॉ ये है की तेरी मां मुझसे चुदेगी और खूब खुशी से चुदेगी और अपने इज्जत को सरेआम वेबसाइट्स पे नीलाम करेगी”……साहिल्ल्ल काँपने लगता है….काला साया मुस्कुराकर ऊपर का टीवी ऑन करता है

साहिल सिहर जाता है मां सामने बिस्तर पे बैठी वो रोने लगता है…”ये दूसरे कमरे में है फिक्र मत कर..साउंड भी है…अब तू लाइव ब्लूएफील्म देखना काला साया कैसे तेरी मां का लुत्फ़ उठता है”…..आँख मारते हुए काला साया दूसरे कमरे की ओर जाने लगता है….साहिल्ल्ल बस चीख चीखह्के काला साया को रोक रहा था

टीवी पे दिख रहा था कुटुम्ब एक कमरे में बैठी है और काला साया का इंतजार कर रही है…काला साया अंदर आकर मुस्कुराता है उसका चहरा टीवी स्क्रीन पे दिखता है…फिर कुटुम्ब उठती है

कुटुम्ब : अफ हो तुम्हें आज इतने जल्दी क्यों बुला लिया? तुम्हें पता है मेरे पति कभी भी आते होंगे

काला साया : अरे मेरी जानेमन अभी तो रात बाकी है पूरी चलो अपने सय्या का लंड नहीं लोंगी

कुटुम्ब : अच्छा ठीक है बाबा कपड़े तो उतारने दो दूर रहो मुझसे उफ़फ्फ़ हूँ (कुटुम्ब काला साया से खुल चुकी थी हो भी क्यों ना खून के डर से वो अब काल साया का लोहा मानने लगिठी अपनी मां को अश्लील बातें और हरक़ते करते देख साहिल्ल चिल्ला रहा था और दिव्या बस आँसू पोंछे शैतानी मुस्कुराहट देते हुए टीवी स्क्रीन पे तो कभी साहिल को देख रही थी)

कुउत्मब काला साया के सामने ही अपना पल्लू गिरा देती है ऊस्की मदमस्त करा देने वाला जिस्म उभर के आ जाता है सामने काल साया हल्के से ऊस्की छातियो को दबाता है और फिर दोनों होठों से होंठ लगाने लगते हाईईइ साहिल आँख बंद करके रोने लगता है…ऊस आज अहसास होता है की ऊस्की हर एक गुनाह जब ऊसपे बीतेगी तो उसे कैसा अहसास होगा….काला साया कॅम्रा के सामने जो पूरा वीडियो तैयार कर रहा था कुटुम्ब को पास लाता है और उसे झुका देता है फिर अपने खड़े लंड के उभर पे ही उसका चेहरा रगड़ता है​

(UPDATE-26)

कुटुम्ब उसके उभर हुए लंड को मुँह में भरती है फिर जीन्स की ज़िप से ही उसे निकलकर चुस्सने लगती है….

उसे अपने च्चेरे पे रगड़ने लगती है वो खुद को पूरी तरह से काला साया के हवाले कर चुकी थी फिर वो उठके गान्ड मटकते हुए छलके अपने बाल पीठ पे फैलाए कुतिया बनकर झुककर काल साया को तिरछी निगाहों से देखती है…काला साया कमेरे की तरफ मुस्कुराकर अपना लंड बाहर निकलता है और उसे कुटुम्ब के छेद पे लगा देता है हालाँकि दिव्या को ये सब अच्छा नहीं लग रहा था…पर साहिल और कुटुम्ब की बर्बादी कुछ ऐसे ही लिखी थी

आअहह आहह अफ आहह सस्सस्स….लंड अंदर बाहर हो रहा था…कुटुम्ब सिसक रही थी वॉ चिल्ला रही थी उसका पूरा फेस ज़ूम होने के वजह से पूरा दिखाई दे रहा था साफ साफ…काला साया गान्ड मारते गया…और फिर उसके बालों को सावरते हुए दोनों एक दूसरे को किस करते है काल साया ऊसपे झुका उसके लंबो को चूसने लगता है दोनों के बीच बातें फिर शुरू हो जाती है साहिल का बस चले तो वो अपने कान में सीख घुसा ले एक एक चुबती चुबती बातें ऊस्की मां खुद बेशर्मी से चुदाया रही थी

काला साया : क्या हुआ कुटुम्ब? लगता है आज तुम में दम नहीं
कुटुम्ब : चोद चोद के भोसड़ी फाड़ दी और क्या च्चाओगे?
काला साया : हां हां हां तुम्हारे बच्चा का बाप बनूंगा सोचो जब तेरे पति और बेटे को पता लगेगा
कुटुम्ब : आहह सस्स कमीने ऊँका नाम मत ले वो सुनेगे तो मुझे जान से मर डालेंगे आहह बॅस कारर्र आअहह और ज़ोर से आअहह और्र्ररर छोड़ मुझे कमीने रस से भर दे इस कुँवारी गान्ड को
काला साय : क्यों रे तेरा पति तुझे चोद नहीं पाता?
कुटुम्ब : मेरा पति तो वो क़ब्रिस्तान का लाश है जो एक बारू त्के इंसान बनता है और फिर दारू की बोतल लगाए अपने लंबो से मर जाता है
काला साया : हाहाहा और तेरा बेटा उसके लिए ढूँढ ना कोई
कुटुम्ब : आहह अभी इस बरीयण मेंन आहह मात बात कर बस जल्दी कर वो लोग आ जाएँगे एआहह आहह
काला साया : सोच तेरा बेटा कितना मस्त है
कुटुम्ब : पूरा अपने बाप पे गया है कमीना अपने ही मां की उमर की औरत को चोदता है साला खेतन में एक बार देख ली थी मैं काफी झगड़ा किया और वॉ हरामी मुझे कहता है भोसड़ी की तैयार गान्ड मर लूँगा भला ऐसा कोई बेटा होता है मैं इन बाप बेटों के लिए इतना कुछ करती हूँ और आहह आराम से और बदले में मुझे क्या मिलता है ?
काला साया : शांत हो जाओ जानेमंन आहौर मजे लो उफ़फ्फ़

काला साया कमेरे पे आँख मरते हुए मुस्कुराता है…इधर साहिल पूरी तरह छटपटाने लगता है अफ इतनी बेज़्ज़त ऊस्की मां उसके बारे में ऐसा सोचती है…साहिल बस कहा जाने वाली निगाहों से दर्द को पीते हुए दिव्या की ओर देखता है दिव्या उसके मुँह पे एक थप्पड़ झाड़ देती है..”मुझे कमज़ोर मत समझना हरमीई”…..

साहिल के नाक से खून निकल जाता है वो थूकता हुआ बस टीवी देखने लगता है

काला साया अब कुटुम्ब के मर्जी से उसे अपने गोद में उठाए उछलवा रहा था…कुटुम्ब कूद कूद के ठप्प ठप्प आवाज़ गान्ड और अंडकोष से निकालने के साथ चिल्लाने लगती हाीइ..और काला साय उसे काश क़ास्सके चोदने लगता है कुटुम्ब तड़प उठती है…और फिर झड़ जाती है उसका बहता रस देखकर साहिल नज़रीन फहीरा लेता है…कुटुम्ब ठक्कर फिर भी कूदने लगती है लंड पे और फिर जल्द ही चुत में घुसे लंड से वीर्य बहाने लगता है काला साया आहें भरते हुए कुटुम्ब को अपने से लिपटा लेता है और उसके चुत से वीर्य उबाल उबाल के बहने लगता है

चुत लबालब वीर्य से लथपथ हुई रखी थी..और लंड बाहर फिसलके अपना बच्चा कुछ रस उगलने लगता है…कुछ देर बाद टीवी ऑफ हो जाता है…और फिर दिव्या एक दो स्तनों दबा कर ऊस सीडी को प्लेयर से बाहर निकलती है…फिर मुस्कुराकर साहिल के सामने ही पीसी ऑन करती है और हिन्दी सेक्स साइट्स पे क्लिक करती है कुटुम्ब का एक नंगी पिक्चर के साथ पूरा प्रोफाइल पेज खुल जाता है जिसमें अबतक के कुटुम्ब और काला साया के साथ हुए हर सीन का वीडियो उपलॉअडेद था…साहिल का माता घूम जाता है और फिर दिव्या ऊस वीडियो को भी उपलोआड कर देती है

कुछ ही देर में काला साया अंगड़ाई लेकर अंदर आता है और दिव्या से पूछता है…दिव्या उसे अंघुटे का इशारा करके बताती है की ऊसने ये वीडियो भी उपलोआड कर दी…साहिल बेहोश हो चुका था मर खाने से…कुछ देर बाद उसे होश आता है अब भी काला साया वहां मज़ूद था…और कंप्यूटर स्क्रीन ऑन था काला साया मुस्कुराकर अपने कौमपुटेर स्क्रीन को ज़ूम करता है…वो वीडियो के नीचे कुटुम्ब आंटी नाम से टाइटल होता है और नीचे लाइक्स और कॉमेंट्स होते है जिन्हें पढ़ते ही साहिल का दिमाग घूम जाता है और वॉ बस सुबकने लगता हे

साहील्ल्ल : कमीणू तुम लोगों को मैं छोड़डूंगा नहीं मेरी मां को फ़सा लिया तूने
काला साया : तेरी मां ने खुद ही मुझसे चुदवाया है बिना चुडवाए ठरकी हो जात इहाई..खैर तू फिक्र मत कर तेरा बाप भी जल्द ही मेरे शिकंजे में आ जाएगा
साहिल : साल्ले मदारचोड़ड़ तुऊउ हाीइ कौंन्ञन् एक बार ये मुकोता उटार्ररर एक बार खोल के देख
काला साया : जब दिया भहुजता है ऊस्की लौउ बहुत बार फड़पढ़ने लगती है…तेरा भी वही हश्र होगा तू जो सोच रहा है ना तू बच जाएगा तो भूल जा

काला साया साहिल के सामने शराब की तीन चार बोतल रख देता है…”चल अब ये शराब की बोतल को खाली कर अपने गले से उतार..अगर ये चारों की चारों बॉटल तू पी गया तो समझ जाना तेरे वारे न्यारे तू यहां से जा सकता है और अगर नहीं तो मैं तुझे जान से मर डालूँगा”….

साहिल काफी घबरा चुका था पीने के सिवाह कोई चारा नहीं था

पक्का शराबी तो था पर बिना पानी के 4 बॉटल विस्की जो 1 लीटर से थोड़ी बड़ी हो पीना नामुमकिन था..फिर भी ऊसने हाँ कह दी…काला साय ने ढक्कन खोला और उसे सही लके मुँह से लगा दिया घूंत्त घूंत्त करके साहिल आँख क़ास्सके दब्ाए पीता गया “ध्यान रहे अगर तूने उगला तो तू गया”……साहिल घबराए हालत में पीता गया पीता गया …दिव्या मुँह पे हाथ रखकर बस सुबकते हुए साहिल का अंजाम देख सकती थी….पीता गया पीता गया…और उसके गले से एक के बाद एक चारों बॉटल चली गयी…चारों बॉटल के शराब खत्म हो गयी…और ठीक तभी साहिल औक्लाने लगा

और वही खून की उल्टी उसे हो गयी…काला साया ने ने उसके रस्सिया खोल डाली…और उसे उसी हालत में उठाए गाड़ी में सवार किया पूरे रास्ते साहिल खून अपने मुँह से उगलता जा रहा था….काला साया का दिल इतना सख्त था की एक ज़रा सी आहह भी नहीं निकली उसके मुँह से और ऊसने फौरन हाथ पाओ बाँधके उसे ब्रिड्ज से नीचे फैक दिया…जल्द ही साहिल का जिस्म पानी में डूब गया

(UPDATE-27)

काला साया मुस्कुराकर ज़ोर से चिल्लाता हाीइ..और फिर अपनी बाइक पे सवार होकर अंधेरे साए में गायब हो जाता है….दो दिन बाद पुलिस को एक लाश मिलती है पता लगने पे की वॉ अंजर का बेटा साहिल है उसके घर में इकतिला करती है…घर में मातम छा जाता है अंजर अपने बेटे की मौत से गम में डूब जाता है जबकि कुटुम्ब रोए जा रही थी…पुलिस तफ़तीश करती है केस देवश को मिलता है कुछ दीनों पहले उसी ने काला साय का केस लिया था पर बाद में पता चलता है की साहिल के एन्ज़ाइम बुरी तरीके से जल चुकेते..ज्यादा मात्रा में बिना पानी के शराब पीएन से हुआ था…ये केस पूरा सूयिसाइडल लग रहा था…कोई विटनेस भी नहीं साफ पता लगा की ब्रिड्ज से कूदके साहिल ने जाँदी पर कुटुम्ब को लगा उसका बेटा नसेडी था दोस्तों के साथ मस्ती में ही ऊस्की जान गयी उसके जिस्म पे कई अनगिनत निशान थे…जो जख्म गहरे थे…कुछ लड़के डर के मार्िएन बचने के लिए ज़िला से फरार हो गये थे….देवश को लगा वही क़ातिल है और ऊन्हें क़ातिल तेहराया गया वो ल्गो पकड़े तो कभी नहीं गये मामला भी अपने आप फीरसे ठंडा पढ़ने लगा

इधर देवश भी काला साया को पकड़ने की नाकाम कोशिशें कर रहा था…लेकिन उसे कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था….वो घर में बैठा काला साया के मुकोते का स्केच तैयार कर रहा था ताकि ऊस्की आइडेंटिटी का पता लग सके तभी अचानक उसे पीछे से अपर्णा काकी आवाज़ देती है…देवश काम में मशगूल होता है इसलिए वो ध्या नहीं देता..

अचानक पएेल की खन्न् खन्न् उसे खुद पे खुद कुर्सी उठने के लिए मज़बूर कर देइत है और देवश के कदम अपने आप अपर्णा आंटी को खोजते हुए कमरे की ओर रुख करते है तभी दरवाजा बंद होता है देवश पीछे मुदके

तभी देखता है की किचन में अपर्णा काकी सारी में खड़ी है लेकिन उसके नाभी से नीचे उठते तोंद के साथ पेटीकोट अधखुला है और उससे साफ उनकी बुर् भारी झाँतें दिख रही है तो

“क्या काकी माँ आज तो बहुत ज्यादा चढ़ा है आपको”……देवश ने आँख मारते हुए काकी मां के कमर में हाथ डालते हुए कहा

“अरे बेटा अब तू ही तो है…अकेले अकेले बेटे को कोई छोढ़ता है सोचा कितना मेहनत करता है मेरा बेटा…ऊस्की सेवा तो करनी चाहिए”…..अपर्णा काकी ने बेशर्मी से कहा….

देवश ने काकी मां को अपने बाहों में उठाया और उसे पलंग पे लेटा दिया….काकी मां ने अपने ब्लाउज के स्तनों को खोल दिया..और पेटीकोट का नारा भी खोल दिया…देवश भी अपने बनियान और पजामा को उतार देता है और पास रखक्के पैकेट फड़के कॉंडम निकलता है….फिर अपर्णा के भारी भरकम शरीर पे चढ़ते हुए अपने चंदे को पीछे किए लंड पे कॉंडम चढ़ता है….

अपर्णा : आहह अर्रम से बेटा उफफफ्फ़ बस (काकी मां को अपने चुत के भीतर लंड घुसता महसूस होता है)

देवश : आहह काकी मां बस टाँग फहिलाए रखो गान्ड ढीला ही थोड़ी

अपर्णा : आहह उफ़फ्फ़ चल अब मर धक्के (देवश के कमर पे टाँग लपटे हुए)

देवश : आआहह आअहह उफ़फ्फ़ सस्सस्स आहह

अपर्णा : बेटा तू बहुत ज्यादा परेशान लग रहा है आहह

देवश : क्या बताऊं काकी मां ऊस हरामी काला साया ने दिमाग खराब कर डाला है आज फिर कमिशनर से आहह दाँत पराअ…अब बात ट्रांसफर पे आ गया है अगर उसे कुछ ही दीनों में ना पकड़ सका तो आहह सस्स काकी मां गान्ड ढीला थोड़ी

अपर्णा : अच्छा बेटा ले चोद दी उफफफ्फ़ सस्स बहुत गॅड रहा है तेरा लंड इसकी मोटाई बहुत ज्यादा है लेकिन एक बात बता काला साया तो इंसाफ का काम करता है ना

देवश : पर कानून को भी तोड़ रहा है ना काकी मां आहह ससस्स

देवश धक्के पेलता र्हाअ…लंड अंदर बाहर झांतों भारी चुत से होता रहा..काकी मां सिसक सिसक कर सोचते रही…और देवश काकी मां को बेतारीके से चोदता रहा….देवश ने अपर्णा की छातियो को दबाया और उसके सख्त निपल्स को मुँह में भर लिया…फिर अपना हाथ गीली चुत पे फहरा….और फिर चुचियों को चुस्सा…अपर्णा का चेहरा गुलाबी हो गया और ऊसने देवश के चेहरे को हाथों में थामा और के करारा चुंबन लिया उसके होठों का

देवश ने काकी मां के ऊपर झुककर नाभी में मुंह डाल दिया….काकी मां बिन पानी मछली की तरह इधर उधर सर मारने लगी और देवश भी गान्ड में ताक़त भरके चुत में लंड घिस्सता रहा….

कुछ देर बाद देवश उठ गया और ऊसने काकी मां को फर्श पे बैठ उनके मुँह में ही लंड डाल दिया

काकी मां लंड को मुँह में लेकर चुस्ती रही…उसके अंडकोषो को भी हाथों से सहलाती रही…फिर खुद पे खुद देवश ने काकी मां के मुँह में धक्के मारने शुरू कर दिए…अओउू ओओउू करके काकी मां लंड को बारे ही आराम से चुस्ती रही….बीच में देवश ने कॉंडम लंड से खींचके उतार दिया और फिर काकी मां के मुँह में डाल दिया लंड काकी मां भी चुस्ती रही अंडकोष को भी मुँह में भरके बड़ी बड़ी से छूसा….बालों पे हाथ फेरते हुए देवश सिसकता रहा

फिर कुछ देर बाद ऊसने मुँह से लंड निकाला काकी मां के..और बैठकर उनके होठों का रसपान करने लगा दोनों होठों को होंठ से मिलाए स्मूच करने लगे….फिर उसके बाद जुबान से खेलने लगे…देवश उठ गया और ऊसने काकी मां को वैसे ही लेटा दिया टाँगें फिर खोल डाली और झांतों भारी बुर् में मुँह डाल दिया…गीली चुत में जुबान लगते ही काकी मां झधने लगी….उनके झधने के कुछ देर बाद भी चुत के दाने को देवश आराम से चुस्सें जा रहा था….फिर उनकी फहानकों में मुँह घुसाए रगड़ता रहा…उनके छेद में नाक घुसाए सूंघने लगा उनकी चुत को नीचे से लेकर ऊपर तक चाँटता रहा…कुछ देर बाद देवश ने नीचे गिरे थोड़े से फटे कॉंडम को लंड पे लगाया और फिर धाधा धढ़ चुदाई शुरू कर दी….काकी मां टाँग उठाकर चुदती रही और देवश चोदता रहा लगभग 12 मिनट में ही देवश ने जवाब दे दिया​

(UPDATE-28)

और लबालब चुत को लंड के रस से भिगो दिया….चुत में लंड रस छोढ़ता रहा…और पसीने पसीने देवश फारिग होकर काकी मां से नंगा ही लिपट गया…दोनों पसीने पसीने कुछ देर तक पंखे की हवा खाते रहे…और कब नींद की आगोश में चले गये पता नहीं

अगले दिन दरवाजे पे दस्तक होती है…कोई दरवाजा ज़ोर से मर रहा था आवाज़ सुरीली थी शीतल कब से आवाज़ लगा रही थी….देवश अंगड़ाई लेकर काकी मां की तरफ देखता है उनके निवस्त्र बदन को देखकर फौरन ऊँपे चादर धकता है…काकी मां कोत्ोढहाज़ोर से जागता है पर काकी मां उठती नहीं….देवश उसी हालत में पजामा पहनकर दरवाजा खोलता है…शीतल बोलती है की दरवाजा क्यों नहीं खोल रहे थे?

और फिर ऊस्की निगाह अपनी मां पे पढ़ती है…हैरानी भाव तो थी ही…”अरे तू इतने जल्दी आ गयी?”……देवश ने बाल झधते हुए कहा….

अपनी मां को नंगा देख बस सारी से ढकी चादर में सोई शीतल कुछ और नहीं कहीं

देवश : काकी मां कल रात को यही तहेर गयी थी
शीतल : हाँ मां बोली थी मां को मैं उठा देती हूँ
देवश : नहीं नहीं सोने दे उन्हें बहुत ताकि हुई थी तू बर्तन साफ कर दे मैं तैयार होने जा रहा हूँ और हाँ नाश्ता भी तैयार कर देना
शीतल : अच्छा (शीतल मुस्कराए अंदर चली जाती है)

देवश थोड़ा घबरा जाता है पर शीतल कोई पक्साफ़ लड़की तो थी नहीं अगर जान भी गयी तो क्या ? आज नहीं तो कल जानना ही पड़ेगा उसे…देवश गुसलखाने में घुस जाता है जब बाहर निकलता है तो काकी मां हप्पी छोढ़के मेरी ओर डरी निगाहों से देखती है मैंसब समझता हूँ शीतल नाश्ता तैयार कर रही है झटपट काकी मां चादर ही ओढ़े अंदर से ब्रा और ब्लाउज का हुक लगा रही है….

देवश : क्या हुआ काकी मां ? (मैंने धीमे स्वर में कहा)
अपर्णा : ये कब आई? मैं देखकर डर गयी पूछने लगी की आप ऐसे बिस्तर में भैया के साथ सोती हो तो मैंने कह दिया हाँ तू भी कुछ ज्यादा मत कहना शक हो जाएगा उसे मैं भी इतनी ज्यादा कल तक गयी की उठा ही नहीं गया
देवश : अच्छा ठीक है नाश्ता तो कर लो
अपर्णा : नहीं बेटा दो जगह घर का काम करने जाना है तू मुझे बस चाय दे दे

शीतल तब्टलाक़ आ गयी हाथ में चाय और नाश्ता का प्लेट था…अपर्णा काकी ने जल्दी जल्दी चाय पी और गुसलखाने में पेशाब करने गयी फिर अपने अलग थलग कपड़ों को ठीक किया सारी का पल्लू ढंग से पहना और शीतल को यह कहकर चली गयी की वो जा रही है भैईई का ख्याल रखना….अपर्णा के जाते ही शीतल ने दरवाजा लगा दिये और मेरे पास आई

शीतल : क्या भैईई कल रात लगता है मां के साथ बहुत छिपक्के सोए थे?
देवश : चल रे पगली तू मजे ले रही है मुझसे तैयार मां है वॉ
शीतल : हाँ हाँ सब जानती हूँ..तभी अपनी बेटी को देखकर काँप गयी तो इसमें डर की क्या बात मैं क्या जानती नहीं की यहां क्या होता है?
देवश : अच्छा तू ऐसा क्या जानती है?
शीतल : औरत सोते वक्त अपने कपड़े उतारके सोती तभी है जब उसे गर्मी लगती है मां को लगता है यहां कुछ ज्यादा गर्मी लगी है
देवश : चल चल अपना काम कर तेरी मां मेरी मां है समझिी
शीतल : आप गुस्सा मत हो मैं तो बस मज़ाक कर रही थी मैं तो जानती हूँ भैया मेरे मुझे और मेरी मां को कितना प्यार करते है

देवश ने फौरन शीतल का हाथ पकड़ लिया शीतल खुली हुई तो थी देवश से वो नजाकत से हाथ छुड़ाने लगी..पर देवश ने उसे अपने सीने से लगा लिया और उसे गाओड़ी में उठा लिया….शीतल श मां आस मां चिल्लाने लगी…”और बोलेगी बोल?”….शीतल हस्सते हुए माँफी मागने लगी…..

तब जाकर देवश ने उसे पलंग पे लेटा दिया…

देवश : चल पगली अब मैं लेट हो जाऊंगा मुज़ेः भी निकलना है
शीतल : हाँ तो जाओ ना किसने रोका है आप तो बस अपनी बहन के साथ मस्ती करने लगे
देवश : लगता है तेरी शादी जल्दी करनी पड़ेगी
शीतल : नहीं भाई मैं मां से और आपसे दूर नहीं जाना चाहती आप जैसा भाई कहाँ मिलेगा जो इतना घूमता है फहीरता है खिलता है महेंगे महेंगे कपड़े देता है पता है मेरी सहेलिया वो ड्रेस देखकर बोली ये तो महेंगा है बाय्फ्रेंड ने दिया क्या?
देवश : तो बोल देती की बाय्फ्रेंड ने ही दिया है
शीतल : च्िी पागल हो
देवश : ज्यादा शरमाया मत कर मुझसे मैं तेरा अपना ही तो हूँ अगर बोल भी दिया तो क्या हुआ? पर हाँ ये सब बात मां को मत बताना
शीतल : पागल समझे हो क्या

देवश ने फौरन शीतल का हाथ पकड़कर उसे अपने गाओड़ी में बिता दिया…शीतल उठने लगी…देवश ने उसके गाल पे ज़ोर का एक पप्पी लिया…तो शीतल अपने गाल मलते हुए देवश को हल्की छपात मारकर भाग गयी देवश मुस्कराने लगा उसका लंड फिर खड़ा हो चुका था….

उधर कर्राहेतीं भरता हुआ अंजर एकदम से भौक्लके उठ बैठा…और सामने देखकर कनपने लगा…उसके चेहरे पे एक जोरदार थप्पड़ ऊस शॅक्स ने रसिदा था…सामने बैठा शॅक्स कोई और नहीं काला साया था “टीटी…तुऊउ यहां पे?”…..काला साया तहाका लगते हुए उठ खड़ा हुआ…”क्यों आबे डर लग गया क्या?”……अंजर हक्का बका चुपचाप गाल पकड़े बस बैठा ही है​

(UPDATE-29)

काला साया : तेरा बेटा मर गया सुनकर दुख हुआ…पर तुझे पता है शांतलाल को किसने मारा? मैंने मारा? तेरी बीवी सबकुछ जानती है
अंजर : टीटी…तू किस बारे में बात कह रहा है?
काला साया : यही की तेरा बुरा वक्त शुरू हो चला है

काला साया…एकदम से पास रखे हाँडयकाम को ऑन करके अंजर को देता…अंजर हड़बड़ाकर काँपते हुए जैसे ही वीडियो में देखता है ऊस्की गान्ड फॅट जाती है…आह आहह की आहों की आवाज़ के साथ एक ब्लूएफील्म स्टार्ट होती है…जिसमें ऊस्की बीवी कुटुम्ब नंगी मदरजात शांतलाल से चुदाया रही है…”ये उसी होटल का क्लिप है जहाँ पुलिस को शांतलाल का लाश मिला अब तेरी बीवी वहां क्यों चुदाया रही है ये तो?”…..अंजर एकदम से काला साया का गिरेबान पकड़ता है

अंजर : हारमििइ मेरी बिववी के सतह कैससीए?
काला साया : काफी लंबी चौड़ी कहानी है सुनेगा तो सुनौंगाअ

अंजर एकदम बहुत बन जाता है…और वो वीडियो देखकर ऊस्की आँखें शर्म से फॅट जाती है….रस से चुत भीग रही थी…वीडियो क्लिप के खत्म होते ही कुटुम्ब मदमस्त काला साया से चुदवाने लगती है अगले वीडियो क्लिप में भी…ये सब देखकर अंजर का पारा चढ़ जाता है और वो हाँडयकाम फैक देता है…..

हाँडयकाम टूट जाता है…काला साया मुस्कुराकर बताता है की ये सिर्फ़ तो एक कॉपी थी ना जाने कितने ऐसे ही वीडियोस वेबसाइट्स पे उपलॉअडेद है कुटुम्ब भाभी के नाम से….अंजर चिल्ला उठता हाीइ….काला साया मुस्कुराकर उसे सारी बातें बताने लगता है कैसे कुटुम्ब उसके फांसे में आई? शांतलाल ने अपना बदला ऊस्की बीवी को चुड़वके लिया? फिर शांतलाल का खून कैसे हुआ? और वॉ अभी काला साया की रांड़ बनी हुई है ये सब सुनकर अपना कलेजा पकड़ लिया अंजर ने और वही दम सांडके बैठ गया

काला साया : आबे तू ही सोच तुम्हारे कुकारम तुम्हें कहाँ से कहाँ ले जा रहे है? तेरा बेटा ऊस्की मौत कोई साधारण नहीं थी…मैंने ही मारा था उसे (अंजर एकदम से भौक्ला उठा और ऊसने फौरन पास रखकर वैसे को काला साया पे मारना चाहा पर काला साया ने उसके हाथ को ऐसा मड़ोदा की वो दर्द से बिबिला उठा)

काला साया ने उसे फिर कुर्सी पे बिता दिया….”तू मुझ..से क्या चाहतता है? मैंन्न पुलिस को सब्ब बाटा दूँगा की तूने परिवार!”……काला साय ने ऊस्की बात बीच में ही कांति क्योंकि एक टेप रेकॉर्डर हुआ…जिसमें हंस हस्सके कुटुम्ब और अंजर अपने गुनाहो का बयान कर रहे है कैसे भोली भाली औरतों का रेप खेत की औराटोको डरा धँकके उनका रेप किया उसके बेटे और ऊसने मिलकर शांतलाल से ऊस्की क्या इन्वॉल्व्मेंट थी?”……ये सब बातें खुद अंजर ने शराब के नशे में कहीं और वो भी बीवी के दबाव में जिसे काला साया ने बखूबी से धमकी के दबाव में देकर ये सब कहने को उकसाया

अंजर अपने मुँह पे हाथ रख लेता है…इतने में बाहर की घंटी बज उहतित आई…”जल्दी जाओ क्या पता? पुलिस आई हुई हो सब कुछ जानते हुए”…….अंजर एकदम से भौक्लाए बाहर दौधा काला साया कमरे में मुस्कराए बैठा रहा….जल्दी से बाहर का दरवाजा खोलते ही सामने कैरियर वाला था ऊसने एक लिफाफा दिया…अंजर ने झट से साइन किया और लिफाफा अंदर लाया उसे फड़के देखा तो उसके हाथ से लिफाफा चुट्त गया

लिफाफे में कैद ऊस्की बीवी कुटुम्ब और शांतलाल के अश्लील तस्वीरें थी जिसमें लंड मुँह में लेकर कुटुम्ब चुस्स रही है किसी में चुदाया रही है किसी में चुत से रस बह रहा है…ये सब देखकर अंजर ने फोटो को उसी वॉट उठाए काला साया के मुँह पे मारना चाहा “हरामीी तू मुझे ब्लैकमेल कर र्हाः आईईइ”…..चिल्लाते हुए

काला साया : नहीं सिर्फ़ तुझे तैयार गलती का अहसास करा रहा हूओ
अंजर : त…तू कौन्ण है?
काला साया : कौन्ण हूँ मैंन जानना चाहता है ना क्या है मेरा वज़ूद तो सुन इस घर का कभी मैं वारिस होया करता था अपना भैईई याद है तुझे मिस्टर डेपनकार चट्‍त्ेरज़ीए…मिसेज़ सूमी चटर्जी ऊँका एक हंसाता खेलता परिवार था जिसे तूने आग लगाया….तूने कइयों की जिंदगी उज़दी ऊसमें एक नाम मेरे परिवार का था….

अंजर : न…नहीं ये नहीं हो सकता इसका मतलब्बब तूमम?
काला साया : हान्णन्न् मैंन्न (उसके बाद काला साया ने अपने मुकोता उतार दिया अंजर की साँसें रुक गयी कोई पुराना शॅक्स सामने था जिसके आंखों में बदले की भावना थी)
काला साया : मैंने सिर्फ़ दिव्या के लिए तुझे नहीं थोड़ा और ना ही तेरे परिवार को मैंने ऊन हर मासूमों के साथ साथ काला साया बनने के पीछे का बदला लिया है….
अंजर :एम्म…मुझे मांफफ्फ़ कार दी तू बेटा मेरे हाथों से कोई खून
काला साया : तू ही है ना जिसने मेरे परिवार को खईई से फ़ेक दिया था गाड़ी सहित ब्रेआकफैल किया था तूने ये घर हमारे नाम होने जा रहा था पहले तूने अपनी मां को मारा आजतक उनकी लाश नहीं मिली और फिर मेरे मां बाप को

काला साया के आंखों से आँसू बहाने लगे…”लेकिन आज तू और तेरी बीवी देखेगीइ”….इतना कहते ही कमरे में काँपते हुए कुटुम्ब आती है अंजर उसे देखकर चुपचाप खड़ा रहता है शर्म से कुटुम्ब सबकुछ जानते हुए सूबक रही थी….काला साया ने उसके बालों से उसे पकड़ा और ऊस्कीसरी को खींच के उतार दिया…काला साया ने फौरन अंजर को वही गुण दिखके बिता दिया

काला साया ने अपने चाचा और चाची को एक बार मुस्कुराकर देखा और फिर अपना लंड कुटुम्ब चाची के गान्ड पे घिस्सने लगा “आओ कुटुम्ब चलो चुदाई करते है”…..कुटुम्ब शर्म से पानी पानी हो गयी

काला साया जानभुज्के मुँह फहीराए अंजर को दिखाते हुए कुटुम्ब को चोदने लगा और ऊस्की छातियो को दबाने लगा ऊस्की चुत में लंड डालने लगा…अंजर अपने कलेजे को पकड़कर ज़ोर ज़ोर से रोने लगा….और फिर उसी वक्त पीछे के रास्ते भाग कहरा हुआ वो पीछे देखता है की एक राक्षस का मुकोता पहना शॅक्स उसके पीछे दौड़ रहा है वो पुलिस स्टेशन की ओर से दूसरी ओर भागने लगता है उसके हाथ में बंदूक है याकेनान काला साया भी उसे मर देगा ये सब सोचते सोचते…वो भागता गया और भागता गया सब उसका यह हाल देखकर अचंभित थे कोई ऊस मुकोते पहने शॅक्स को नहीं देख सका और अंजर भागता हुआ जल्द ही भौक्लाए में ऐसा बीच सड़क पे भागा की ट्रक के सामने आ गया उसे ट्रक नहीं दिखी और चीखक्क्क़ीए आआअहह”…..एक बेदर्द आवाज़ उसके गले से निकली और फिर लोगों की भीढ़ इकहट्टा हो गयी

ट्रक ने एक आदमी को कुचल डाला था…उसका हाथ दूसरी ओर पाओ दूसरी ओर सर दूसरी ओर गिरा हुआ था चारों ओर खून ही खून बिखरा हुआ था…वो मुकोता पहना शॅक्स दूर से ही साए में जाकर अपना मुकोता उतरता है….ऊस मुकोते के पीछे काला साया का मुकोता होताः आई उसके लंबो की मुस्कुराहट उसके बदले की जीत को दर्शा रही थी….

ये एक प्लान था एक सोचा समझा प्लान…पुलिस आई तफ़तीश हुई और फिर देवश कुटुम्ब के घर जाकर उसे बताता है की उसका पति नहीं रहा

कुटुम्ब बेसहारा हो जाती है…ऊसको दिमागी टूर से ऐसा झटका लगा था की वो हर किसी को अपना गुनाह बता रही थी उसे बच्चा ले वाना वो उसे मर देगा…..देवश ने फौरन उसे हिरासत में ले लिया…और केस की तफ़तीश की पता चला अंजर का बेटा ब्लूएफील्म बनता था ऊस्की वीडियो पीसी में मिली दूसरी ओर अंजर ने एक लेटर में अपने गुनाहो को साफ लिख डाला था काला साया के प्लान के मुताबिक की ऊसने अपने परिवार को मर के जाएज़ाद हड़पि जिसके गुनाह को वो और सहन नहीं कर पा रहा…दिमागी टूर से वो पागल बताया गया दराज़ में कुछ पिल्स मिली…आंटी डिप्रेशन टॅब्लेट्स आस पड़ोस से पूछा गया दिल के दौरे से मौत हुई और जिसका कारण आक्सिडेंट भी हुआ तीसरी ओर चाची और शांतलाल का गैर रिश्ता था दोनों होटल में चुदाई करते थे शांतलाल ने कुटुम्ब को धमाकाया तो ऊसने उसे गोली मर के हत्या कर दी उसका वीडियोस भी वेबसाइट्स एमील गया उपलॉअडर का पता नचला और पूरे परिवार को दोषटी तेहराया गया…पोस्टेरमेर्तूम में कोई ऐसी चीज़ कोदेखके अंजर को ऐसा झटका लगा की वो अपना दिमागी संतुलन खो बैठा…ये सब जानते हुए देवश ने कुटुम्ब दिमागी टूर से पागल है ऊस की हालत देखकर उसे पागलख़ाने भेज दिया…और इस तरह काला साया ने अंजर के पूरे परिवार से बदला ले लिया

घर में एक बड़ा टाल झूल गया…जाएज़ाद के पेपर्स पे काला साया ने अपने सिगनेचर्स कुटुम्ब चाची को ब्लैकमेल करके हासिल कर लिए थे अब वॉ इस पूरे बंगले का मालिक बन चुका था पर किसी के सामने वो नहीं आया…किसी को कानों कान कभार नहीं हुई की काला साया का हाथ था इन सब में….पूरे मोहल्ले में कुटुम्ब और पति का नाम गीना गया…और इस तरह केस बंद हुआ…​

(UPDATE-30)

ऊस रात ही दिव्या और काला साया अपने चाचा के वीरान घर में प्रवेश करते है

वो रात बेहद डरावनी सी थी…कितने सवाल थे ऊस गारज़ते बिजलियो जो बादलों से निकलकर आसमान में गूंज रहे थे…हवा की हो हो करती आवाज़ आज बेहद डरावनी थी….कभी हूओ हूँ करती ऐसा लगे जैसे कितने आत्माए हवाओं में तैरती हुई मुँह से हो हो करती शब्द निकाल रही हो….मौसम का मिज़ाज़ कुछ ठीक नहीं था

जल्दी दिव्या ने मोमबत्ती जलाई और देवश के साथ आँगन में बैठ गयी…पुलिस ने बाहर के ताले को तो सील कर ही दिया था ये घर वीरान पड़ा था…इस घर के वारिस के बार्िएन में पुलिस को कुछ पता नचला इसलिए सरकार इसे अपने अंदर ले लिया है..

लेकिन काला साया खुश था ऊसने अपनी पुरानी संपत्ति और ख़ासकारके अपना पुराना घर वापिस पा लिया वॉ बस चुपचाप ऊन दीवारों आस पास के मिट्टी धूल में सनी छोढ़ी हुई चीज़ेवं को देख रहा था

“इस घर को तुमने एक ही झटके में बर्बाद कर डाला काला साया”……काला साया ने पीछे मुदके दिव्या की बात सुनता है

“ये घर तो बहुत पहले ही बर्बाद हो चुका था…इनकी एक एक एत नाइंसाफी की बनी हुई है….कैसे मेरे ही चाचा और चाची ने अपने लालच के लिए इस घर को हड़पा ऊसमें कितनी जानें गयी और तुम कहती हो की मैंने इस घर को बर्बाद कर डाला हाँ किया….बर्बाद तो महेज़ एक तूफान का झोंका ही कर देता है हम तो महेज़ इंसान है…और इस बेजान इमारात को हम क्या बर्बाद करे?”……काला साया तहाका लगते हुए लंबी साँस लेता है

दिव्या : अपने आप पे काबू करो
काला साया : तुम नहीं जानती दिव्या ये घर कभी मेरा होया करता था मुझे 20 साल तक इस घर से दूर रहना पड़ा गरीबी एमिन जो मैं डिज़र्व नहीं करता था…मेरा हक़ मुझसे छीना गया और आज मैं बेहद खुश हूँ
दिव्या : घर तो तुम्हारे नाम हो चुका है लेकिन तुम इस घर में प्रवेश कैसे करोगे? ये घर तो अब वीरान इमारत बन चुका है लोगों के दिल में एक डर पैदा हो गया है इस घर को लेकर की ये घर भुतिया है
काला साया : जहाँ सिर्फ़ अंधेरा हो वहां आम इंसान को वो डरावनी भुतिया हवेली से कम नहीं लगती लेकिन मेरे लिए ये मेरा साया है काला साया सिर्फ़ अंधेरो में ही वास करता है कितनी शांति है यहां? मानो जैसे कितने लोगों की मातम चाय हो
दिव्या : तो क्या यहां फिर कभी उजाला नहीं होगा कभी खुशी दरवाजे पे दस्तक नहीं देगी
काला साया : देगी दिव्या एक दिन जरूर देगी और तुम देख सकोगी वो दिन जरूर देख सकोगी जरूर (काला साया गंभीर हो जाता है दिव्या के मन में एक ही सवाल था की इस मुकोते के पीछे आख़िर है कौन? ताकि वो उसे देख सके उसके चेहरे को हाथों में भरके उसके होठों को चूम सके)

दिव्या ने कंधे पे काला साया के हाथ रखा और उसके मुकोते से निकलते आँसुयो को पोंछा…दोनों ऊस रात घर के बाकी हिस्सों में दिया जलके कुछ वक्त बिताते है और निर्णय लेते है की वॉ यहां हमेशा आया करेंगे रात को ताकि इस घर को भी वो इस्तेमाल कर सके

उधर गंभीरता से देवश पीसी पे काम कर रहा होता है….वो नेट पे अबतक के सूत्रो के अनुसार काला साया के नक़ाब को खोज निकलता है…उसका मुकोता कुछ ऐसा था…जिससे समझना बेहद आसान था…ना ही वो ऑनलाइन से खरीदा जा सकता है और ना ही ऐसा मास्क कोई दुकान एमिन बिकता है आस पड़ोस के शहर में भी मौूयंा करके देवश ने पूछा था पर कोई खास सुराग नहीं मिला

“दंमनित्त”…..

देवश गुस्से से पास रखकर कागज़ को हवा में उड़ा देता है…और अपने नाम आंखों से कुर्सी पे ही बैठा बस बाहर के गारज़ते बादलो की आवाज़ को सुनाने लगता है

अगले दिन वो दफ्तर पहुंचता है अचानक से उसके ज़हन में एक बात याद आती है…काला साया को पकड़ने के लिए एक तरक़ीब कुटुम्ब ने बताया था की एक लड़की है नाम दिव्या है उसका…देवश जो पहले से बहुत ध्यान दे रहा था काला साया को पकड़ने के लिए इसलिए ऊसने फौरन अपने दिमाग को भीड़ाया…हवलदार को बोलता है की वो दिव्या नाम की लड़की को ढूँढ दे जो कुटुम्ब के घर में काम करती थी..हवलदार को लगा शायद दिव्या देवश की ही कोई जुगाड़ होगी और अगर उसे पता चल जाता भैसाहेब काला साया को पकड़ने की केस को लेकर काफी ध्यान लगा रहे है तब तो उसे समझ आ जाता की जैसे भी.ए के पेपर में आदमी फैल होता है वैसे ही देवश को ये केस बंद करवाने में वक्त नहीं लगेगा

देवश उसी जगह का मुआना करता है जहाँ अंजर की मौत हुई थी…ना जाने क्यों उसे कुछ कुछ महसूस हो रहा था…ऊसको जब पॉर्न वीडियो के बार्िएन में पता चला था तो वो ऑलरेडी साइट से डेलीटेड कर दिया गया था…पर एक कॉपी अब भी साइबर क्राइम डिपार्टमेंट के पास थी….ऊसने फौरन ऊस वीडियो को चलाया वीडियो बेहद सेक्सी थी…लेकिन देवश का ध्यान मुकोते पहने शॅक्स पे गया एकदम देखने में काला साया तो क्या काला साया? हो सकता है वो शॅक्स जिसने अंजर और ऊस्की बीवी के साथ या फिर शांतलाल केस?…..ऊसने फौरन ऊस मुकोते के स्केच को उससे मिलाया…हूबहू स्केच था पर ऐसा मुकोता जो कोई भी एक कपड़े में मुँह कान छेद करके बना ले अब किसे समझ आए की वो कौन है?

देवश को कुछ समझ नहीं आया शायद ये शांतलाल ही हो…लेकिन शांतलाल की मौत के बाद भी वीडियो उपलॉअडेद हुए वॉ कैसे? यानि कोई ब्लॅकमेलर था…कोई दुश्मन दिव्या भी कुटुम्ब अंजर से जुड़ी हुई थी उसका बेटा साहिल के जिस्म पे भी बेल्ट के निशान थे हालाँकि उसके दोस्त भाग गये इसलिए कोई सबुट्ट नहीं मिल पाया शायद डर के मारें वो लोग भाग गये हो…वैसे रेप का कांड तो ऊन लोगों ने भी किया था

देवश का माता सर चढ़ रहा था…अंजर के डेत के मुआने के टाइम ही अचानक उसे करीब 10 में दूर में एक ज़मीन पे मिट्टी पे साना मुकोता मिलता है…ये मुकोता राक्षस जैसा था…काला साया के मास्क से बिलकुल हटा कर…देवश आस पास के लोगों से पूछता है…सबका एक ही कहना था की ऐसा मुकोता वाला शॅक्स किसी ने देखा नहीं…देवश को अंजर की रिपोर्ट्स से पता भी चला की उसे डाइयबिटीस के साथ दिल का दौरा पढ़ता था तो क्या ऐसे भयंकर मास्क पहने शॅक्स को देखकर वॉ भागा हो शायद खूनी ने यही मास्क पहनेके खून किए हो…मामला बहुत पैचिड़ा होने लगा….देवश ने फौरन ऊस मास्क को घर लाया

और उसे साफ किया…उसे अपने चेहरे पे फिट किया…तो वो आराम से फिट हो गया..

”वाहह यानि जिसका भी ये मास्क है उसका चेहरा मेरे जैसा है यानि किसी बच्चे का नहीं”…..मास्क को अपने हाथों में लेकर देवश टटोलता है….अचानक उसे हवलदार का फोन आता है की ऊसने दिव्या को देखा है पर वॉ कुटुम्ब का नाम सुनना भी नहीं चाहती

देवश समझता है की उसे खुद ही दिव्या से मिलना पड़ेगा….वॉ खुद पे खुद दिव्या का पीछा करता है दिव्या का गो पहले तो बहुत आपत्ति जताता है पर थोड़ा दबाव देने पे वो दिव्या से मिलवाता है दिव्या नजरें झुका रही थी ये तो पता था लेकिन ऊसने सरल से देवश का सारा जवाब दिया की कैसे ऊसपे ज़ुलाम हुए? साहिल ने ऊस्की इज्जत लूटी…देवश को कोई खास इंटेरेस्ट नहीं लगा

देवश को पता था की काला साया ने उसे बचाया है…देवश उसका पीछा करता है…और तभी देखता है की वो एक बारे बंगले में जाकर घुस जाती है…इतना वीरान बांग्ला और एक गरीब लड़की ऐसे घर में किसके साथ रहती है?….देवश ऊस वीरने घर में सीधे दस्तक नहीं देता…उसके आस पड़ोस में पूछता है तो पता चलता है वो घर तो कब से बंद पड़ा हुआ है? किसी आदमी का है जो कलकत्ता में रहते हां वो भी सुनी हुई बात है…देवश को कुछ बात खटकने लगी अभी तो वो लड़की अंदर गयी जिसका ज़िकार करते ही एक आदमी ने बताया की वॉ यहां की साफ सफाई करती है…और किसी से मिलती जुलती नहीं उसका साहेब किसी को घर में बुलाना पसंद नहीं करता..लेकिन उसका साहेब भी नहीं दिखता वो खुद कहती है ये बात

काला साया जितना रहस्मयी था ऊटना ही ये बात देवश को रहस्यमयी लग रहा था….देवश ने ऊस दिन कुछ नहीं किया घर आया और बस ऊस मुकोते को घूर्रते रहा…दिल का डुआरा…किसी चीज़ को देखकर अंजर ट्रक के नीचे आया…तो यही मुकोता पहना शॅक्स था वो ऊसने ब्लकमैइल किया कुटुम्ब को साथ में वीडियो बनाया…शांतलाल जुड़ा हुआ था कुटुंब्ौर अंजर से फिर ऊस्की डेत….कुटुम्ब किसी लायक नहीं जो उसके बारे में कुछ बयान कर सके उसका मानसिक संतुलन खो बैठा है…अचानक दरवाजे पे दस्तक हुई…शीतल ने देखा की कोई दरवाजा नहीं खोल रहा​

(UPDATE-31)

वो दरवाजा पे दस्तक दिए जा रही थी ऊसने आवाज़ लगाई पर देवश ने दरवाजा नहीं खोला….अचानक ऊसने खुद ही दरवाजे को ज़ोर से धकेला दरवाजा खुल गया…दरवाजे से अंदर जाते ही ऊस्की मुँह से चीख निकल पड़ी….एक शॅक्स मुकोता पहने उसके सामने चाकू लिए खड़ा था..

शीतल का हाथ काँपने लगा उसका पूरा बदन सिहर उठा…सामने खड़ा वो मुकोता पहना शॅक्स जिसके राक्षस जैसे भयंकर मुकोते को देखकर शीतल की सांसीएन काँप उठी वो एक एक कदम पीछे जैसे होती वो शकस आगे बढ़ने लगता है और एकदम से वो उसके इतने करीब आया अपना चाकू लिए की शीतल ने झुककर अपनी आंखें क़ास्सके बंद की और ज़ोर से चीखी

ऊस्की चीख तब शांत हुई जब ऊस शॅक्स ने उसे बाहों में काश लिया और अपने चाकू को फैक्टे हुए…अपने मुकोते को उतार फैका…”देवस्सह भैयाअ आप”…..शीतल ने चैन की साँस ली….देवश मुस्कराए बस कुछ देर वैसे ही पेंट पकड़े बिस्तर पे हस्सते रहा उसे शीतल की बेवकूफी पे बड़ा हँसी आया

शीतल : आपने तो मेरी जान ले ली होती आज (शीतल ने चिल्लाके कहा)

देवश : हाहाहा तुम डर गयी ना?

शीतल : ऐसे कोई मुकोता पहनें खड़ा होता है क्या? बाबा हमें लगा की आप हमको मर ही डालोगे

देवश : हाथ पगली आ इधर (देवश ने नखरे करती शीतला का हाथ पकड़ा और उसे अपने बगल में बिठाया उसके ज़ुल्फो पे उंगली फहीरते हुए कंधे पे हाथ रखा) अरे मेरी मां नाराज़ मत हो असल में तू तो जानती है ना तेरा भाई कितना टेन्शन में दुबला पट्तला होते जा रहा है

शीतल : हाँ लगता तो है पर आपने ये मुकोता कहाँ से लिया?

देवश : असल में ये खूनी ने पहना था जिसकी केस मैं हैंडिल कर रहा हूँ ये सबूत है मेरे पास (शीतल बारे ध्या न्स सुनती रही)

शीतल : फिर भी आपको ऐसे चीज़ें घर में नहीं रखनी चाहिए पता है मैं कितना डर गयी थी

देवश : तू भी ना अच्छा चल अपना मूंड़ मत खराब कर ये बता आज तू लेट कैसे हो गयी?

शीतल : मां के साथ बर्तन माझने गयी थी एक मालकिन के यहां इसलिए लाइट हो गया फिर वहां से खेत में मां का हाथ बताया मां बहुत तक गयी इसलिए मुझे भेज दिया

देवश : आजकल तू बड़ी समझदार हो गयी अपने भाई का इतना ख्याल रखने लगी है (देवश ने शीतल को आँख मारी शीतल का चेहरा गुलाबी हो गया [ईम्ग]फाइल:///सी:\डोकूमए~1\यूज़र\लोकल्स~1\टेंप\ंसोहटँल1\01\क्लिप_इमेज001.जिफ[/ईम्ग])

देवश ने मुकोते को दराज़ में रख दिया और फिर चाकू को किचन में ले जाकर रखा कुछ देर बाद देवश आया उसके हाथ में एक बॉक्स था….शीतल पहले तो डर गयी कहीं ये भी देवश का कोई मज़ाक ना हो उसे डरने के लिए..

पर देवश ने उसे खुद खोलने को कहा…शीतल ने जैसे ही बॉक्स खोला ऊसमें चमचमाती पएेल थी

देवश : कैसी लगी?

शीतल : श भैयाअ कितनी खूबसूरत हाीइ

देवश : तू जब पाओ पे पहन के छान चनाएगी तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा पतः आई एक ही तू ही तो है जिसे मैं इतना चाहता हूँ

शीतल : श भैया (शीतल ने खुशी के मार्िएन देवश को अपने गले लगा लिया अफ ऊस्की छातियो की सक़ती देवश के खड़े लंड को जमाने लगी)

देवश : अच्छा अब ये बता ऊस दिन तू जो आई तूने मुझे और काकी मां को एक साथ देखा तो तुझे कुछ प्राब्लम तो नहीं हुआ ना देख तू मेरी बहाना है और मैं अपनी प्यारी बहन से कुछ छुपाना नहीं चाहता

शीतल : तो क्या आप मां के साथ?

देवश : नहीं नहीं तेरी मां मेरी मां है वो मुझे कलेजे से खिलाती है सुलाती है क्योंकि ऊँका कोई बेटा नहीं (शीतल थोड़ी मायूस हो गई…देवश ने उसके उदासी चेहरे को उठाया और मुस्कराया)

शीतल : हाँ मां आपसे बहुत प्यार करती है…(देवश मन ही मन मुस्कराया इसको कहना बड़ा ही मुश्किल है की ये इसकी मां अपर्णा के साथ सोता है अगर ऐसा कह दिया तो शीतल फिर देवश से रिश्ता नहीं बनाएगी)

देवश : अच्छा शीतल मैं तुझे कैसा लगता हूँ?
देवश : अगर मैं तुझसे एक बात कहूँ तो तू मानेगी

शीतल : आप जो कहना चाहते हो मैं समझ रही हूँ (देवश की गान्ड फॅट गयी क्या इसे समझ आ गया की मैं क्या सोच रहा हूँ) आप हमसे वो वाला प्यार करना चाहते हो

देवश : मैं तो तुझहहसे हर तरीके का प्यार करना चाहता हूँ पगली [ईम्ग]फाइल:///सी:\डोकूमए~1\यूज़र\लोकल्स~1\टेंप\ंसोहटँल1\01\क्लिप_इमेज002.जिफ[/ईम्ग]तू मेरी गर्लफ्रेंड बनेगी

शीतल : मुझे डर लगता हाीइ कहीं मां ने सुन्न लिया?

देवश : तू बनाएगी मां को या मैं?

शीतल ने कुछ और नहीं कहा बस सोचती रही…देवश ने उसे थोड़ा टाइम दिया सोचने का…और फिर धीरे धीरे उसके करीब होने लगा….और ऊसने फौरन शीतल के सूट के अंदर से ही ओसॉके पेंट पे हाथ रख दिया…शीतल कसमसा उठी वॉ नजरें झुकाए काँपने लगी इधर उधर अपने च्चेरे को करने लगी…शायद वो बहुत सहम रही थी…एक कुँवारी लड़की को नीचे लाना इतना आसान नहीं उसे धीरे धीरे शराब की बोतल में ढालना पढ़ता है

देवश ने धीरे से गले पे शीतल के चूमा शीतल ने आँख बंद कर ली..फिर देवश धीरे धीरे उसे गर्दन पे होंठ फहरने लगा तो कभी उसके कान की बलियो को मुँह में लेकर चूमता…तो कभी उसके गाल को सहलाता ऊसने धीरे धीरे शीतल को अपने प्यज़ामे के ऊपर बिता लिया उसका खड़ा लंड शीतल की गान्ड पे चुभने लगा…स्शेटल महसूस कर सकती थी दोनों में कोई बात चीत नहीं हो रही थी….

और फिर धीरे से देवश ने उठती कसमसाती शीतल का हाथ पकड़ लिया….”भैया चोद दो मुझे डर लग रहा है”……शीतला ने छुड़ाने की कोशिश की “अरे नखरे मत कर..बहुत प्यार से करूँगा आज मेरे पास आ”…..

देवश ने एकदम से शीतल को अपने ऊपर खींच लिया और उसके होठों पे होंठ सटा दिए…शीतल को बिजली का झटका लगा और वो खुद पे खुद निढल पढ़ने लगी और देवश का साथ देने लगी दोनों एक दूसरे की होठों को चूसते रहे….शीतल को किस करना तो आता नहीं इसलिए थूक जुबान सब देवश के मुँह में आ गयी…शीतल के साथ वाइल्ड किस लाजवाब था

देवश ने उठके एक एक करके शीतल के सारे कपड़े ज़मीन पे फैक दिए….और उसे ब्रा और पैंटी में घूर्रने लगा…शीतल ने देवश के बीच में खड़े लंड को देखा और फिर जब देवश ने लंड को बाहर निकाला तो शीतल की साँसें अटक गयी “हें दायया इतना बड़ा”…..शीतल ने हववव की आवाज़ निकली

देवश : बेटा ये मोटा लंबा लंड तू जैसी कामसीँ काली को औरत बनता है
शीतल : पर इसमें मजा कैसे आएगा?
देवश : बस देखती जा

देवश ने एक ब्लूएफील्म ऑन कर दी पास ही के पीसी पे जिसपे वो काम कर रहा था…ऊसमें एक केरला आंटी दो काले रक्षासो जैसे आदमियों से चुद रही थी मुँह में ले रही थी शीतल को बड़ा गीन लगा…पर देवश ने कहा इसे चूसने से औरत की छातिया बढ़ती है और ऊँका यौवन खिलता ही एक गवार जाहिल लड़की को साँचे में उतारने के लिए ऐसा कहना ही पढ़ता है

देवश शीतल की ब्रा उतार देता है..और ऊस्की इतनी मोटी मोटी छातियो को देखने लगता है जो उमर के हिसाब से जरूरत से ज्यादा बड़ी थी हो भी क्यों ना मां का जो रूप था ऊसमें….देवश दोनों छातियो को क़ास्सके क़ास्सके दबाने लगता है और उसके निपल्स को मुँह में भरके चुस्सता है..शीतल के छातियो को दबाने से शीतल आहें भरने लगती है यानि उसे मजा आने लगता है….देवश को शीतल की पैंटी गीली नज़र आती है….शीतल की निगाह ब्लूएफील्म पे है और इधर देवश उसके जिस्म से लिपटा छातियो को दबाए जा रहा है…

शीतल : बहुत ही अच्छे

(UPDATE-32)

कुछ देर बाद देवश नंगा ही बिस्तर पे बैठ गया और पेंट को चूमता हुआ शीतल के नाभी से लेकर नीचे जुबान फहीरता है शीतल देवश के बालों पे हाथ फेरते है…और फिर वो झट से पैंटी नीचे खिसका देता है पहले तो शीतल काफी हस्सने लगी…पर देवश ने ज़बरदस्ती से उसे नंगा कर दिया और उसे गाओड़ी में उठाकर पलंग पे लेटा दिया…देवश ने शीतल की टाँगें चौड़ी की मज़बूती से और उसका गुलाबी भाग देखने लगा अफ कितनी चिकनी थी

देवश : तुम साफ रखती हो अपने चुत को
शीतल : हाँ बिना साफ किए खुजली होती है
देवश : हम बहुत खूब (और देवश धीरे धीरे अपने मुँह को चुत के नज़दीक लाता है…शीतल हड़बड़ा जाती है)
शीतल : भैया ये क्या कर रहे हो?
देवश : सस्शह चुप्प्प्प
शीतल : श भैया आहह उईईइ आहह सस्स (देवश जैसे ही चुत पे मुँह रखतः आई ऊस्की गंध उसके नाक में समा जाती है)

पसीने और पेशाब की गंध की मिली जुली महक…देवश शीतल की चीकनी गीली रस से भारी चुत में मुँह लगाए चाटने लगता है…और शीतल बस काँप उठती है….

वॉ चहके भी देवश को रोक नहीं पाई इस करार मजे को खुद से अलग नहीं कर पाई…वो बस सर इधर उधर घुमाने लगी…होठों पे दाँत दबाने लगी….और डीवोस के बालों पे हाथ फेरने लगी

“आहह से आहह आअहह”…..कभी कभी शीतल चीख पार्टी जब देवश उसके कोलाइटिस को मुँह में भरके चुस्स देता…शीतल कसमसाए ऐतने लगी और फिर उसके पूरे टाँग में झुझुरी सी दौड़ी और ऊसने बीच से एक फावा निकाला जो सीधे देवश के चेहरे को पूरा भीगोटा हुआ फर्श पे जा गिरा

देवश ऊस गीली रस भारी चुत को फिर चुस्सने लगा…ऊस्की फहाँको को मुँह में भर लिया…उफ़फ्फ़ क्या लज़्ज़तदार मादक खुशुबूदार स्वाद था ऊस चुत का….देवश ने धीमें से एक उंगली अंघुता सहित छेद में पुश किया…तो शीतल सिहर गयी उसे कुछ गाड़ने लगा पर वॉ उठ नहीं पाई ऊसमे नैसे जान नहीं थी…फिर देवश ने धीमें से उंगली को तेज कर दिया….शीतल उसे मना करने लगी उसे चब्ब रहा था….देवश ने चुत के कुवरेपन का मुआइना करते हुए घुटनों के बाल बैठ गया

और फिर पास रखिी सेक्स लूब्रिकेट को बारे ही अच्छे से चुत के मुआयने पे लगाया….और अंदर तक उंगली से चिकना से कर दिया ताकि सुराख में लंड आराम से घुस सके…फिर ऊसने अपने लंड पे कॉंडम छड़ाया..ये सब कार्यक्रम शीतल देख रही थी ब्लूएफील्म में सफेद सफेद गाढ़े रस से औरत भीग रही थी फिर ऊसने कुछ देर लंड को मसला और सब ने उसे वैसेह ई हालत में चोद दिया

शीतल के मन में हज़ार सवाल थे उसे ध्या नहीं रहा की कब देवश ने चुत में लंड बारे ही आराम से धकेल दिया…जब 2 इंच ही अंदर लंड प्रवेश किया बस शीतल ज़ोर से दहढ़ उठी उसे बहुत ज़ोर का दरर्द हुआ…देवश ने उसे क़ास्सके पकड़ लिया…शीतल ने देवश को धकेलना चाहा..देवश वैसे ही रुका रहा चुत में लंड थोड़ा सा घुसा था फिर ऊसने थोड़ी सी गति बधाई..शीतल को काफी दर्द होने लगा वॉ मना करने लगी देवश नहीं मना अब शायर के मुँह पे खून लग चुका था अब वो कहाँ रुकता?

ऊसने शीतल के चुत में एक बार फिर लंड को थोड़ा ज़ोर से दबाया और एक हल्का धक्का मारा…बात नहीं बनी ऊसने फिर ज़ोर लगाना शुरू किया….शीतल ने टाँग भीच ली देवश ने उसे गान्ड ढीला छोढ़ने को कहा पर वो नहीं मानी देवश ने पूरी ताक़त लगा दी और इसी ताक़त के चक्कर में लंड धस्ता चला गया चुत में शीतल की आँखें बाहर आ गयी…वो दर्द से छटपटाने लगी…जैसे कोई सुई चुबो दी हो….”आअहह हाययए दूर्गगा मां मर गयी मैंन्न आहह निकालूओ आअहह”….बहुत ज़ोर से पलंग हिल उठा

पर देवश ने शीतल के बालों पे हाथ फायरा उसके माथे पे हाथ फायरा उसे चुप कराया..पर शीतल के आंखों में दर्द के आँसू आ चुके थे….”बाबू हो गया बस अब तुम कुँवारी नहीं रही आहह सस्स बाप रे इसकी कितनी स्क़त है दर्द हो रहः आई लंड में मेरे”…..

देवश ने अपने लंड के जलन को बर्दाश्त किया और चुत में लंड घुसाए ही रखा

शीतल बस रोए जा रही थी…”आहह भैया जैसे हॅगने के वक्त दर्द होता है वैसे ही मुझे महसूस हो रहा है जैसे कोई सख्त चीज़ चुत में फ़ासस गयी”…..देवश हस्सा..और ऊसने बारे ही प्यार से नादान शीतल के गालों को चूमा…और फिर धक्के थोड़े देने शुरू किए…पर दर्द बरक़रार रहा…देवश चुदाई करता रहा….और उसी हालत में हल्का हल्का धक्का लगाने लगा…”आहह आहह आहह”….शीतल हर धक्को से चिल्ला रही थी…उसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था करीब कुछ 10 मिनट बाद ही उसे थोड़ी राहत मिली….लंड की मोटाई बहुत ज्यादा थी जिस वजह से शीतल को इतना दर्द सहना पड़ा…पर देवश खुश था उसके लंड के आख़िर बिल ढूँढ ही निकाला…देवश ने धक्के थोड़े तेज किए तो शीतल को गाड़ने लगा और वो दर्द से आहह आ के स्वर फीरसे निकालने लगी

देवश ने वैसे ही हालत में उसे कई देर तक लेटे लेटे चोदा…और फिर लंड को चुत के मुख से निकाला फकच्छ से लंड बाहर आ गया और साथ में गीली चुत से रस और थोड़ा खून बाहर निकला…देवश ने कुछ नहीं बताया शीतल को उसे लाइताय रखा और उठके एक गंदा काप्रा लाके उसके चुत को अच्छे से पोंछा और उसके चोट के अंदर भी उंगली काप्रा डालकर पोंछा…चुत से खून रिस रिस के निकल रहा था….देवश ने फौरन अपने खून लगे कॉंडम को भी निकालके फैक दिया उसे लगता था की इससे इन्फेक्षन होता है बार बार एक ही कॉंडम के उसे से…ऊसने फौरन शीतल को अपने ऊपर चढ़ाया पहले तो दर्द के मारें शीतल से उठा नहीं जा रहा पता लेकिन ऊस्की सुराख पूरी तरीके से चौड़ी हो चुकी थी

और काफी गहरी भी अब लंड जल्दी से चुत के मुआने में जा सकता त चुत का द्वार खोल के भोसड़ा बंचुकी थी…ऊसने फौरन डायरी ना करते हुए धीरे धीरे बोल बोलकर शीतल को अपने लंड पे सवार किया शीतल उठने लगी…पर देवश ने बारे ही संजीदगी से उसे हौले हौले नीचे से धक्के देने शुरू किए जाँघ गान्ड से चिपक जाई गान्ड उचक जाती शीतल की और अपनी चुत में लंड को घपप से ले लेती…चुत आराम से अंदर बाहर होने लगा पर दोनों के अंगों में इतना दर्द था की अब रहा नहीं जा रहा था….लेकिन इससे चुदाई का सारा मजा खराब हो जाता है यही सोचकर देवश बस लगा रहा

देवश ने फुरती से शीतल को अपने ऊपर लेटा दिया और ऊस्की ज़ुल्फोन को हटा कर उसके होठों को चुस्सने लगा….दोनों एक दूसरे को बेदर्दी से चूमने लगे…शीतल देवश के निपल्स से खेलने लगी देवश उसे बाज़ुओ में लिए नीचे से लंड को चुत में अंदर बाहर करने लगा….”आहह से आहह से आहह”…शीतल आहें भरने लगी…लौंडिया को मजा आ रहा था कोई शक नहीं

देवश ने धक्के अब करार और तेज कर दिए…शीतल की आहें ज़ोर से गूंजने लगी…और देवश किसी रेलवे गाड़ी की तरह बढ़ता में लंड को चुत से अंदर बाहर करने लगा…और जल्द ही देवश ने रफ्तार बड़ी ही तेज कर दी..

थोड़े देर बाद दोनों उठे और फिर देवश ने शीतल को नया पोज़िशन लेना सिखाया कुतिया बनने का

इसमें शीतल दर्द के मार्िएन ऐसे ही हाथ बिस्तर पे रखकर पेंट के बाल लाइट गयी और देवश उसके ऊपर चढ़के गान्ड के फहाँको में लंड घिस्सते रहा…फिर ऊसने चुत के मुआने पे धायर सारा लूब्रिकेट फिर लगाया और इस बार गान्ड की छेद में भी….और बड़ी ही धीमें से लंड चुत में डाल दिया लंड तो चुत में डाल गयी पर गान्ड की बात जुड़ा थी…कुछ देर तक देवश शीतल की गान्ड पकड़ा उसे हौले हौले चोदता रहा….शीतल को बेहद मजा आने लगा अब उसे चुदाई और मर्द औरत के बीच का सुख का अहसास हुआ

कुछ देर में ही देवश ने शीतल को पूरा लेटा दिया और ऊस्की गान्ड में लंड डालने लगा …..शीतल दर्द से चिल्ला उठी…पर देवश का पूरा वज़न ऊसपे आ गया…आज तो वो किसी भी सूरत में कुँवारी जाने नहीं वाली थी घर…देवश ने ऊस्की गान्ड में लंड को आधा इंच तक घुसेड़ दिया था ऊस दिन शीतल के इकाफी चीखें निकली थी उसे खूब दर्द से गुजरना पड़ा..लेकिन वहशी देवश कहाँ छोढ़ने वाला था ऊसने और भी क़ास्सके गान्ड में लंड घुसाया और हुआ यूँ की गान्ड की भीतर लंड प्रवेश आख़िर कार कर ही गया और फिर शर हुआ दोनों का संगम

देवश वैसे ही पुश उपस की तरह ऊपर नीचे लंड को घुसता रहा खुद के बदन को ऊपर नीचे करता रहा…नीचे शीतल पीसती गयी और देवश गान्ड में धक्के पेलता रहा….और फिर जब उसका गान्ड से जी भर जाए तो चुत में लंड डाल देता…इस बीच ऊओसका कॉंडम फॅट गया धक्के तेज हो गये और इसी कशमकश में लंड से रस निकलते निकलते बच्चा…देवश ने शीतल के चेहरे पे ही अपना कामरस चोद दिया…और फारिग हो गया शीतल को ऊस्की महक बर्दाश्त नहीं हुई और वो पलंग के दूसरी ओर होंठ पे लगे वीर्य को थूकने लगी

देवश पसीना पसीने बेहाल हो गया फिर भी उसे ऊस हालत में शीतल को साफ करना था उसे गंदे कपड़े से शीतल के चुत को साफ किया खुद के कॉंडम को निकलकर फैका..फिर चादर हटाई और ऐसे ही गद्दे पे दोनों सोए…देवश ने शीतल के चेहरे को अच्छे से साफ किया दूसरे कपड़े से और फिर उसे अहेतियात और कुछ बातें बताई..ताकि आगे छलके वो गर्भवती ना हो जाए….शीतल को बड़ा गुस्सा तो आया था कारण वो जब उठी तो उसे अपनी गान्ड फील नहीं हो रही थी…वो टाँगें चौड़ी चौड़ी करके चल रही थी चुत के मुआने पे अब भी दर्द था..देवश ने फटताफट थकान को चोद उसके लिए गरम पानी उबाला और उससे ऊस्की सूजी चुत की सैकाई की और फिर तब जाकर एक ट्यूब फटी चुत के जगह जगह जहाँ चील गयी वहां लगाया और फिर कॉटन से अपने लंड के सूपड़ा जो चील गया ऊसपे लगाकर फ़ौर्दर्म् लगाया तब जाकर उसे कुछ राहत महसूस हुई….

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(UPDATE-33)

ऊस दिन शीतल ने देवश से कुछ और नहीं कहा बस वो बहुत तक गयी थी जगह जगह शरीर का अंग टूट रहा था चुत चिल्लाने से जलन थोड़ी बहुत हो रही इत ओओ घबराई हुई थी पर देवश ने समझाया ऐसा होता है दोनों ने नहाया किसी तरह फिर उसे काफी समझाया की कोई प्राब्लम नहीं होगी उसे उसे चुप रहने को बोला और काकी मां को कोई भी बात ना बताए ये हिदायत दी..शीतल और देवश ने एक दूसरे को स्मूच किया

और कुछ दायरटक शीतल देवश से लिपटी रही दोनों गद्दे डर बिस्तर सोए रहे और फिर जब पूरी तरीके से शीतल की थकान गायब हुई दर्द कम हुआ तो वो खुद पे खुद उठके कपड़े पहनकर देवश के माथे को छू के शाम में ही अपने घर चली गयी….देवश ने कुण्डी लगाई और बिस्तर पे आकर चोद हो गया

जिस दिन देवश ने शीतल की सील तोड़ी और उसे जवान लड़की से औरत बनाया…उसी रात काला साया भी अपनी महबूबा दिव्या के साथ अपने नये वीरान घर में बिस्तर गरम कर रहा था….दूर दूर तक सन्नाटा अंधेरा घर के अंदर…बिजली कांट दी गयी थी…फिर भी मौसम इतना अच्छा था की बाहर का ही खिड़की खोलने से हवा कमरे में आ रही थी…काला साया का हाथ दिव्या के हाथों की उंगलियों में फ़सा हुआ था…दोनों एक दूसरे के अंगों को सहला रहे थे…बिस्तर पे एक दूसरे से लिपटे चादर ओढ़े हुए थे…इतने में दिव्या ने काला साया को सारी बात बता दी की एक पुलिसवाला उसके पीछे लग गया…ये सुनकर काला साया को अच्छा तो नहीं लगा…और वो गंभीरता से सोचने लगा…और फिर ऊसने दिव्या को एक तरक़ीब बताई जिससे वो पुलिसवालो के नजारे में ना आए वो ऊस पुलिसवाले को खुद हैंडिल कर लेगा

दिव्या ने काला साया के मुकोते पे हाथ रखते हुए उसके चेहरे को सहलाया…काला साया ने मुस्कुराकर दिव्या को अपने सीने से लगा लिया…”एक दिन जरूर मैं तुम्हें अपना चेहरा दिखाऊंगा दिव्या और वॉ दिन ज्यादा दूर नहीं”…..काला साया दिव्या से और लिपट जाता है….नीचे फर्श पे परे उनके कपड़े साफ जाहिर करते है की इस अंधेरे साए में भी दोनों ने कितनी आग लगाई है

काला साया दिव्या के ऊपर फिर से सवार हो गया और दिव्या ने भी मुस्कुराकर अपनी टांगों को बिस्तर पे फैला लिया और काला साया के पिछवाड़े पे टाँग साँप की तरह लपट ली…जल्दी पलंग चरमरने लगा..और प्यार का मीठा आहेसास दिव्या लेने लगी…

अगली दिन ही देवश की आँख खुली सुबह के 6 बज चुके थे….आजकुच ज्यादा जल्दी उठ गया हो भी क्यों ना? कल शाम से ही वॉ थोड़ा सा खाना खाके शीतल की चुदाई में लगा और उसके बाद इतना तक गया की अब उठने की हिम्मत ऊसमे नहीं थी…किसी तरह ताक़त जुटाकर वो उठा…और जल्दी से अंडा और ब्रेड का नाश्ता करने के बाद..नहाने घुस गया…बाहर आकर ऊसने पलंग के नीचे से दुम्ब्ेल्ल और रिंग निकाला और अपनी कसरत में लग गया….

कुछ तो ताक़त मिलेगी…कसरत खत्म करके सोचा क्यों ना एक बार शीतल का जायेज़ा ले लिया जाए

कल उसके साथ सेक्स करने के बाद ऊस्की क्या हालत होगी? ये जानना भी जरूरी है क्योंकि औरत्के साथ सेक्स करने के बाद देवश को हमेशा ये डर सताता है की कहीं वो गर्भवती ना हो गयी हो क्योंकि बाद में अबॉर्षन का खर्चा भी उसे ही देना पड़ेगा सेक्स होती ही ऐसी चीज़ है की जबतक करो तबतक जोश और फिर ठंडा होने के बाद टेन्शन ही टेन्शन….खैर देवश फोन करके शीतल का जायेज़ा लेता है…अपर्णा काकी फोन उठती है और बताती है की शीतल की आज हालत कुछ ठीक नहीं…उसे थोड़ा बुखार है देवश पूछता है की आख़िर उसे हुआ क्या? वो फ़िकरमंद होता है….लेकिन डरने की कोई बात नहीं थी क्योंकि वो पानी का ज़्ीडा काम करके बीमार हुई है ये अपर्णा बताती है…देवश मन ही मन मुस्कुराता है आख़िर थी तो कुँवारी ही उसे धीरे धीरे झेलने की आदत हो जाएगी

देवश पुलिस स्टेशन के लिए निकल जाता है…और फिर अपने काम में जुट जाता है…काम कुछ खास नहीं था दोपहर का ब्रेक लेकर देवश वापिस घर पहुंचता है….घर में आकर जैसे ही वो ताली निकलकर खाने के लिए फर्श पे बैठा ही था इतने में उसे एक लिफाफा दिखता है…दरवाजे के ठीक किनारे मानो जैसे किसी ने उसे दरवाजे के नीचे से फैका हो…देवश के माथे की शिकार तरफ जाती है…और वो उठके हाथ धोके लिफाफा उठता है ऊसपे ना तो कुछ लिखा है और ना कोई अड्रेस…वॉ टेबल पे लाके उसे फाड़ता है…और ऊस कागज़ को पढ़ें लगता है….जाहिर था ये धमकी थी और धमकी जिसकी थी उसे भी जाने में वक्त ना लगा काला साया

“मैं जनता हूँ तू मेरे पीछे है…और ये भी जनता हूँ की तू मेरी सक्चाई जानना चाहता है…ये जान ले की मैं किसका दुश्मन नहीं…पर ऊँका हूँ जो मेरे अपनों के और मेरे चेहरे के दुश्मन है…भलाई इसी में है की केस क्लोज़ कर दे अगर मुझे पता चला की तू मेरे पीछे अब भी है…तो सोच लेना तेरे पास दो ऑप्शन है खंडहर हाउस के पास आ जाना अगर वाक़ई तू ये चेहरा देखना चाहता है…लेकिन सोचले ऑप्शन 1 बहुत ही खतरनाक साबित होगा तेरे लिए…दूसरा ऑप्शन ये है की दिव्या का पीछा चोद वो तो एक बेसहारा लड़की है…पर हाँ उसे तो क्या किसी भी मेरे लोगों को तूने हिरासत में लिया तो सोच लियो”………लेटर को दुहराते हुए देवश कागज़ को फाड़ देता है…कानून का सिपाही होकर उसी को गुंडागर्दी का धौस

देवश मुस्कुराता है…ये बात तो साफ थी की काला साया दिव्या से जुड़ा हुआ है कहीं ना कहीं लेकिन ये भी था रहस्य जाने पे उसके जान को खतरा हो जाएगा….लेकिन देवश को ये जरूर पता चल गया की चलो इस बहाने काला साया के दिल में उसके लिए एक खौफ तो पैदा हुआ है…ऑप्शन 1 देवश को ज्यादा सूट किया…क्योंकि चुत मारना और चॅलेंज निभाना उसे बचपन से ही पसंद था

थाने में वापिस आकर…ऊसने काफी देर तक सोचा..

और फिर प्लान को अंजाम दिया…पुलिस की मदद लेना सबसे बड़ी बेवकूफी है काला साया एक ही झटके में ऊँका तमाम कर डालेगा….अगर देवश अकेला जाए तो वो कम सतर्क हो जाएगा….पूबलीच तो पता लगा तो काला साया को बचाने और पुलिस पे कीचड़ उछालने में वक्त नहीं लगेगा…सबका अन्नड़ाता जो बिना फिर रहा है

देवश ने इस मॅटर को अपने हाथ में खुद ही लेने का फैसला कर लिया…और फिर ऊसने उसी दिन जीप बीच में ही रोक दी गंभीरता उसके आंखों में सवार थी..और फिर जीप से उतरके एक बारे से दुकान में घुस गया….कुछ देर बाद वो दुकान से बाहर निकाला और अपने हाथ में उठाई ऊस बेसबॉल बात को घूर्रने लगा…देवश ने काला साया को मारने के लिए हत्यार खरीद लिया था

क्या पता घर पे भी वो अटॅक कर सकता है? ऊस्की नजरें देवश पे ही शायद टिकी हो…घर पहुंचकर ऊसने फौरन पुलिस को इकतिल्ला की वॉ ये बात गुप्त रखे की काला साया को पकड़ने का ऑपरेशन वो शुरू कर रहा है….ऊसने पाँच बारे ऑफिसर्स को इस ऑपरेशन के लिए ड्यूटी पे लगाया…ऊन्हें हमको दिया अगर काला साया की परछाई तक दिख जाए ऊसपे गोली चला देना…देवश जनता नहीं था की वो अपने चॅलेंज के चक्कर कितने बारे तूफान को चुनौती दे रहा था

पूरे दिन वो मुकोता को घर में लिए अपने हाथ में पकड़े घूमता रहा…और बेसबॉल बात को साफ करके अपने हाथों में घुमाता है…जल्द ही रात हो जाती है….रात के 12 बजते ही तंन तन्न्न की आवाज़ घारी से सुनकर देवश उठ खड़ा होता है और अपने हाथों में बाइक ग्लव्स और एक मोटा जॅकेट पहन लेता है…पास रखी बेसबॉल बात को उठता है…और उसे अपने जीप पे रखकर सवार हो जाता है पूरे रास्ते उसका दिल ढक ढक कर रहा था अपर्णा काकी शीतल किसी को पता नहीं था की वॉ क्या करने जा रहा है? ईवन पुलिस तक को नहीं…

रात गये वॉ ऊस खंडहर हाउस के पास पहुंचता है जिसकी जर्जर इमारत से फॅट फटके कई जमी हुई है और दीवारों से पादो की जड़ें निकल गयी है…ऐसी भयंकर रात में सुनसान सन्नाटे भरे वीरान खंडहर में वो अकेले ही प्रवेश करता है…साथ में एक मोबाइल है जिसे ऊसने स्विच ऑफ कर दिया…अगर क्कूह हो गया तो साला खुद ही सब संभालना पड़ेगा….पुलिस तो वैसे ही पीछे लगी है काला साया के लेकिन फिर भी दिल में एक डर तो रहता ही है​

(UPDATE-34)

देवश जनता था वॉ जल्द ही महसूस करेगा की आख़िर काला साया कौन है?…और वो पूरे वीरने खंडहर में बहुत की तरह इधर उधर टहलने लगता है…बीच बीच में टूटे कमरों में झाँकके देखता भी है सिर्फ़ टॉर्च की रोशनी…और कहीं सोए चमगढ़ हूँ हूँ करती उल्लुओ की आवाजें….

बेटा अगर या मर दिए गये तो जीवन भर आत्मा बनकर ही तहलॉगे

देवश ने अच्छा ख़ासा खतरा अपने सर पे ले लिया था…अचानक उसे किसी कदमों की आवाज़ सुनाई देती है…वॉ फौरन उल्टे पाओ सीडियो के दीवारों के पीछे चुपके दरवाजे की ओर देखने लगता है…ऊस्की आंखें तहेर गयी वॉ एकदम गंभीर हो गया किसी भी पल वो अक्स उसके सामने आने वाला था….और अचानक वो सामने आया…देवश ने अपने पास रखकर बेसबॉल बात को काफी सक़ती से पकड़ लिया उसे एक ही वार में काला साया को सुला देना था…पर इतना आसान नहीं

वो जैसे जैसे ऊस अक्स के करीब जाने को हुआ एकदम से उसके माथे की शिखर गायब हो उठी…ये अक्स काला साया का नहीं किसी लड़की का था…

“दिवव्यया तूमम्म”…..वो कंबल लपटी लड़की ने जैसे ही अपना कंबल हटाया तो ऊस अक्स को पहचानने में…देवश को डायरी ना लगी वो वैसे ही बहुत की तरह खड़ा चुपचाप हाथों में बेसबॉल बात लिए खड़ा रहा

“हाँ मैं”…दिव्या के ऊन लवज़ो के बाद ही बदल गाराज़ उठा…बिजली की हल्की हल्की रोशनी पूरे खंडहर में फैल उठी…उसके चेहरे के गंभीरता भाव को देखते ही देवश का गला सुख गया मौके को हाथ में लेते हुए ऊसने एक बार चारों ओर देखा क्या पता शायद? काला साया पीछे से वार कर दे पर वहां कोई मज़ूद नहीं था सिवाय ऊन दोनों के

देवश : टीटी..तुम यहां क्या कर रही हो? (देवश ने फौरन उसके करीब आकर भारी लव्ज़ में कहा)

दिव्या : ये सवाल मुझे बोलने की जरूरत नहीं की मुझे किसने भेजा है? और ये भी नहीं कहूँगी की मैं यहां क्या कर रही हूँ?

देवश : देखो ज्यादा भोलेपन की ऐक्टिंग मत करो चुपचाप बता दो तुम्हारा काला साया किधर है वरना मुझे मज़बूरन तुम्हें गेरफ़्तार करना पड़ेगा काला साया को छुपाने के लिए

दिव्या : तो कर लो ना इंतजार किसका है? तुममें और ऊन बाकी लोगों में फर्क क्या जो गुनाहो को पनाह देकर इंसाफ को पकड़ते हो तुम्हारी ही जैसे लोगों के चलते काला साया पैदा होता है वरना आज इसकी नौबत ही नहीं आती

देवश : ओह चुत उप मिसेज़.

पॉन एक प्यादा हो तुम ऊस्की और वो तुम्हें बखूबी उसे कर रहा है अब चुपचाप बताओ कहाँ है वॉ? ऊसने मुझे धमकिभरा खत भेजा आज ऊस्की लाश ले जाए बिना मैं चैन नहीं लूँगा

दिव्या : हां हां हां हां हां हां (दिव्या ऐसे हस्सने लगी जैसे कोई जोक सुना दिया हो उसे…साला आजतक जिसको भी धमकी दी वो साला पेशाब कर देता था पेंट में…और ये लड़की इसे तो लगता है मिर्गी की बीमारी चढ़ गयी हो)

देवश : चुपचाप बताऊं (देवश ने इस बार हॉकी को चोद पॉकेट से रिवाल्वर सीधे दिव्या के माथे पे लगा दी दिव्या की हँसी तो बंद हो गयी पर इस बार उसके आंखों में सख्त गंभीरता थी कहा जाने वाली नज़र ऐसा लग रहा था ये कोई आम लड़की नहीं कोई प्रेत आत्मा है वैसे देवश जी की फॅट तो रही थी लेकिन भाई हीरो है कहानी के डर कैसे जाते)

दिव्या : चलो मेरे साथ (पहले सवाल नहीं बताके देवश वैसे ही चिढ़ गया था और अब किसी मिस्टरी फिल्म की तरह दिव्या चलने लगी देवश ऊस गंभीर औरत के पीछे पीछे चलने लगा दिव्या उसे तिरछी निगाहों से देख रही थी मानो जैसे अभी ऊस्की गुण छीन लेगी और वही देवश को मर देगी)

देवश पूरा सतर्क था….मौका पाते ही कोई भी सामने आए चुत कर देने का…लेकिन वॉ धीरे धीरे बढ़ता गया खंडहर बिजली की गरगरहट से गूँज रहा था….पुरानी सी सीडी थी जो ऊपर जा रही थी…ऊपर के मेल पे पहुंचते ही..दिव्या ने देवश को अपने साथ एक कमरे के भीतर आने को कहा

देवश : इस अंधेरे कमरे में क्या है?

दिव्या : जिसकी तलाश में आए हो तुम?

देवश : क्या मतलब? देखो गोल गोल बातें मत घूमाओ अगर तुम्हारी ये प्लान है

दिव्या : देखो जिस काम के लिए आए हो उसी के लिए अंदर बुला रही हूँ

देवश : त..हीक हे चलो (देवश ने मन को सख्त किया और दिव्या के पीछे पीछे ऊस कमरे में घुसा)

देवश जैसे ही कमरे के अंदर आया..उसका बदन काँप गया…बेसबॉल बात जो हाथ में थी वो वही गिर पड़ी…बस दाएँ हाथ की रिवाल्वर कांपें जा रही थी हाथ के हिलने से….देवश चुपचाप दरवाजे के किनारे तेहरा हुआ था…दिव्या मुस्कराए देवश की ओर देखने लगी…और फिर ऊस बिस्तर की चादर को हटा दिया “ये रहा तुम्हारा काला साया”…..बिजली की गरगाहट तेज हो गयी​

(update-35)

न्‍न्न्नूऊऊऊऊओ….देवश ज़ोर से चीखा…और उसका इस बार गुण भी गिर पड़ा….सामने बिस्तर के ठीक ऊपर एक मुकोते की तस्वीर थी और वॉ मुखहोटा जिसके हाथ में था वो शॅक्स कोई और नहीं देवश था

बदल गाराज़ उठा…और एक बार देवश घबरा गया “य..ईए कैइससे मुम्मकिन है?”……दिव्या उसे ऐसी निगाहों से देख रही थी जैसे वो सबकुछ पढ़ चुकी हो..ऊसने उठके ऊस मुकोते की तस्वीर को देवश के करीब लाया और उसे दिखाया..

”खुद ही देखो कौन है यह? ये तस्वीर तब की है जब तुम काला साया बनकर अपने दूसरे घर से निकल रहे थे जिस वीरान घर की तुम तलाशी लेने आए थे जहाँ मैं रहती हूँ”……देवश हक्का बक्का मुँह पे हहाथ रखे हुए था

दिव्या : अब तुम जानना चाहोगे की ये तुम ही हो…और तुम कोई ऐक्टिंग कर रहे हो? दररो नहीं तुम सच में तुम ही हो ये कोई और है ये शॅक्स जो ये नक़ाब पहन रहा है ये तुम ही हो और ये तुम्हारा गुस्सा

देवश : न्न्न..नहीं पर्रर मैंन काला साया बन जाता हूँ और मुझे पता भी नहीं

दिव्या : ये पेपर्स पढ़ो…डॉक्टर नेगी रस्तोगी…इनको तो जानते होगे मनोचिकित्सक हमारी भाषा में जो दिमागी इलाज़ करते है….याद करो देवश या फिर तुम अंजान बन रहे हो

देवश : त..तूमम मेरे बारे में इतना सबकुछ कैसे जान गयी?

दिव्या : मैंने दिल तुमसे नहीं लगाया इंस्पेक्टर साहेब तुम्हारे ऊस मुकोते से लगाया ऊस इंसान से जो सबका देवता है काला साया….आज की रात मैं भूली नहीं हूँ जब तुम मेरे साथ बिस्तर पे सो रहे थे और तभी मैंने तुम्हारा ये मुकोता हटाया और वही मैं बर्फ की तरह जम गयी तुम ही हो ना जो एक क्या बोलते है उसे अँग्रेज़ी में कौररपटेड अफ़सर बनते थे और फिर रात की आध में जुर्म का सफ़ाया करते थे तुम्हारी गलती नहीं है तुम्हारे अंदर की अक्चई तुम्हें ये बना चुकी है

देवषह : पर्रर ये मैंन मैंन तूमम मुझहहे (देवश पूरा हकला गया था उसके सारें राज़ दरशाई हो चुके थे दिव्या के सामने)

दिव्या : ये फाइल देखो डॉक्टर नेगी रस्तोगी की…जब तुम्हारे मुकोते के बाद तुम्हारे चेहरे को देखा तो पाया की तुम इंस्पेक्टर देवश चट्‍त्ेर्जे हूँ टाउन के इंस्पेक्टर और तुम एक निहायती कमीने इंसान हो मैं खुद रिपोर्ट लिखने तुम्हारे पास आई थी पर तुमने मुझे भगा दिया लेकिन मैं ये नहीं जानती थी जिस देवता को मैं पूजती हूँ वो एक ऐसे इंसान में छुपा है….तुमने मुझसे हर राज़ छुपाएं रखा डॉक्टर नेगी रस्तोगी से बात करने के बाद पता चला की तुम्हें सनक चढ़ती है जो हादसे तुम होते देखते हो ऊन्को अपनी तरीके से साफ करते हो….डॉक्टर नेगी रस्तोगी को फोन करने के बाद ऊन्होने मुझे सारी बात बताई

कहानी कुछ इस तरह थी…देवश चटर्जी डॉक्टर नेगी रस्तोगी के ऑर्फनेज में रहा था…उसके मां बाप की मौत के बाद ऊस्की दादी को मारते वक्त ऊसने देख लिया था….अंजर ने ऊस छोटे से बच्चे को उसके माता पिता की मौत के बाद बीच रास्ते पे ही चोद दिया पहले तो ऊसने दो बार आक्सिडेंट की तरह देवश को मारना चाहा पर देवश बच निकाला देवश की सारी जाएज़ाद पे नाम थी…अगर वो मर जाता है तो सारी प्रॉपर्टी उसके चचेरे भाई जो घर का दूसरा वारिस है साहिल के नाम हो जाएगी….

देवश महेज़ 5 साल का था…और फिर उसे बीच रास्ते पे छोढ़ने के बाद उसे अनाथ घोषित कर दिया ऊन कामीनो ने…रास्ते से उठाकर किसी नूं ने देवश को ऑर्फनेज में डाल दिया वहां डर डर तक़लीफ़ सहने के बाद देवश बड़ा हुआ और उसे सरकारी पढ़ाई कराई गयी…देवश अफ़सर में भरती होता है और फिर काबिल अफ़सर बनता है लेकिन कहीं ना कहीं ओसॉके अंदर का गुस्सा अपने माता पिता को मारने की साज़िश और खुद को बेढाकाल करवाने से एक क्रोध पलटा है उसके अंदर

सनकी होने के कारण ऑर्फनेज से ही उसके व्यवहार को लेकर सब चिंतित थे उसका इलाज किया गया हालत तो बदले गये पर बीमारी उसके अंदर रही गयी…अफ़सर के बावजूद भी जब भी कीिस के साथ कुछ बुरा होता है तो देवश के अंदर एक सनक चढ़ती है वॉ दुनिया से बैईमानी करता है लेकिन दूसरे ही पल उसे अपने गुनाहो का दर्द भी होता है और फिर अपने इस सनक को छुपाने के लिए एक मुकोता धारण कर लेता हे दिव्या को दराज़ से ही काला साया के मुकोते का कई स्केचस मिलते है…जिसपे वो अलग अलग तरीकों से खुद के आइडेंटिटी को हाइड करने के लिए मुकोते बनता है…और उसी स्केच से एक काला कपड़े का मुकोता पहनकर और अपने ऑफिसर की ट्रेनिंग में ही मार्षल आर्ट पे ज्यादा ध्यान देकर खुद को एक नया अवतार बना लेता है काला साया

बदल के गारज़ते ही सारी दास्तान खुद पे खुद देवश के सामने पेश हो जाती है…और वो सख्त निगाओ से दिव्या को देखता है “जिसे मैं हर जगह खोजते आई वो मुझे कुछ इस तरह मिलेगा सोचा नहीं था काला साया”….दिव्या के आंखों में आँसू थे उसे देवश का दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ था

देवश अब वो देवश नहीं दिख रहा था…रात ढाल चुकी थी…उसके अंदर का सनक ओसॉके चेहरे पे साफ झलक रहा था ऊस्की खौलती ऊन अंगार भारी आंखों में…उसके होठों पे एक काटी ल्मुस्कुराहट..वो पीछे पलटके दिव्या को देखता है “हाँ मैं ही हूँ काला साया लेकिन सिर्फ़ और सिर्फ़ तबतक जबतक मेरे मंसूबो में मुझे कामयाबी नहीं हासिल होती”……..देवश मुस्कुराकर दिव्या की ओर देखता है

दिव्या : ये तुमने क्या किया काला साया अपने लिए पुलिस का खतरा बढ़ा लिया

देवश : नहीं दिव्या ये जरूरी था…मुझे दो जिंदगी जीने पे मेरे किस्मत ने मुझे मज़बूर किया था…मैं तो बदले के लिए काला साया बना पर मुझे लगता है सिर्फ़ अपने लिए नहीं दूसरों के लिए भी मुझे लड़ना चाहिईए

दिव्या : लेकिन तुम अब क्या करोगे जो पुलिसवाले तुमने खुद हीरे किए है ऊँका क्या होगा?

देवश : काला साया को गायब होना होगा…ताकि उसे ये दुनियावाले कभी पहचाना ना सके

दिव्या : क्या लेकिन इसमें तो बहुत खतरा है तू.एमेम कहना क्या चाहते हो?

देवश अपनी जॅकेट और चेहरे पे मुकोते को पहनते हुए दिव्या के हाथ से लेकर..

”यही की देवश और काला साया का राज़ तुम्हारे सामने आ सके मैंने जब तुम्हें तरक़ीब समझाईी तो ये भी बताया की अगर मैं रहूं या ना रहूं मेरा साय हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा तुम फिक्र मत करना दिव्या मैं हमेशा रहूँगा तुम्हारे साथ”……..इतना कहकर काला साया दिव्या को ये कहकर निकल जाता है की उसके दुश्मन उसके इंतजार में है

दिव्या उसे रोकती है पर वो जानती है वो देवश को तो रोक सकती थी पर काला साया को नहीं…काला साया हवा की तरह खंडहर की खिड़की से छलाँग लगाकर ऊस जीप पे सवार हो जाता है दिव्या उसके संग बैठ जाती है…जीप चल पार्टी है….और जल्द ही काला साया उसे घर के पास उतारके उससे विदा ले लेता है

जल्द ही वो पुलिस की नजारे में आता है…पुलिस के काबिल अफ़सर्स जो मौत बनकर ऊसको तलाश रहे थे उसके पीछे लग जाते है “वो जा रहा है उसे हॉर्न मारो आज हमें उसे किसी भी तरह मर गिरना है”…….काला साया मुस्कुराकर अपनी शीशे से पीछे की गाड़ी की हॉर्न को सुनता है और ठीक ओसोई पल गाड़ी को रोक देता है..और किसी फुरती के साथ ब्रिड्ज के नीचे कूद जाता है…बारिश तेज हो जाती है….पुलिसवाले भी गोली लिए पहाड़ी से नीचे उतरते है

काला साया अंधेरे की आगोश में चुप जाता है और पास आते अफ़सर्स पे छलाँग मारता है….धधढ धधह…काला साया पे ताबड़टोध गोलियां चल पढ़ती है पर वो हवा के भात इजब कूड़ता है दोनों लाटीएन ऊन दोनों अफसरों पे मर के ऊन्हें गिरा देता है…”य्ाआआअ”…….देवश पीछे के पुलिस वाले के हाथ को माड़ोध देता है और फिर हवा अपने टांगों को लगभग उठाते हुए सीधे पास खड़े दोनों पुलिसवाले पे लातों की बरसात कर देता है..पुलिसवालो के देते ही

तीसरा ऊसपे गोली चला देता है गोली जॅकेट को छू निकलती है….”परछाई को कभी पकड़ पाओगे भला”….काल साया फुरती से अपने नूंच्ौको को हवा में लहराने लगता है और ठीक उसके बाज़ू पे उतार देता है तीसरा हमला होते ही वो अपना सर पकड़े गिर जाता है

ऊसपे इस बार गोलियों की बौछार शुरू हो जाती है…क्योंकि उसे बिना गोलियों के पकड़ना आसान नहीं…काला साया भागता है…धधह धधह पूरे रास्ते गोलियों की शोर्र सुनाई देती है..काला साया दौधते ही जाता है…और ठीक तभी एक ओवरब्रिड्ज के काग्गर पे खड़ा हो जाता है इस बार काला साया काँपने की ऐक्टिंग करता है जैसे अब कोई रास्ता नहीं है बचने का…”रुक्क जाओ काला साया हम तुमपे गोली चला देंगे”……..एक अफ़सर ज़ोर से चिलाके बाकी अफसरों के साथ उसे घैर लेता है “बचना चाहते हो तो फौरन अपने आपको हमारे हवाले कर दो और अपना मुकोता उतार फाक्ो”………काला साया मुस्कुराता है और फिर ऊन्हें ललकार्ने लगता है….ऊन्हें तो वैसे ही गोली चलाने के आर्डर थे और ऊन्होने संकोच भी नहीं किया..धढ़ धढ़ करके गोली शुरू कर दी​

UPDATE -36)

काला साया नदी में कूद पड़ा..

गोली उसके बाए कंधे पे पीछे के भाग में जा लगी…”आआआआआआआआहह”…..काला साया दर्द से दहद्ध उठा…और नदी में गिर पड़ा..अफसरों इन पानी पे दो तीन बार फाइरिंग की “तहरो बरसात तेज है तूफान भी शुरू हो चुकी है यक़ीनन वो पानी में डूब गया है…ऊस्की लास हे ढूँढनी है हमें फौरन”……….पानी इतना गहरा था की लाश तो क्या काला साया के मुकोते भी ऊन लोगों के हाथ में नहीं आ पाए

बात को दबा दिया गया ये एलान नहीं किया की काला साया मर चुका….ऊस रात पानी में खूब गोताखोरो ने पता किया पर पानी का बहाव इतना तेज था की शायद नदी काला साया की लाश कहीं और ले जा चुकी हो या फिर गहराइयों में…आख़िरकार हार मानके अफसरों ने ये कोशिश भी चोद दी…

धधढह धड़धह….दरवाजा कोई ज़ोर से पीट रहा था….दिव्या ने जल्दी से दरवाजा खोलाआ “आअहह सस्स दिवव्या आअहह”…….दिव्या भौक्ला गयी….ऊसने फथटफट काला साया को बिस्तर पे सुला दिया उसके गीले कपड़ों को फौरन उतार फाका

“आहह आहह दिवव्या”….देवश बधबदाता जा रहा था…दिव्या ने झट से उसके मुकोते को उतार फैका और उसके चेहरे को देखकर दंग रही गयी उसके चेहरे पे इर्द गिर्द चोटें थी…”टीटी..तुममनी ये क्या कर लिया आस नहीं इसस्शह हे भागगवान तूमम्म..हेन्न गोलीी लगी है”…….दिव्या चीख उठी

“दिववववया फ़ौरान्न्न आअहह सस्स एक दवा तैयार करो मेरे पास के आअहह दराज़ में कुछ दवाइयाअ है और साथ मेंन एक गरम चाकू भी ले आना”………दिव्या ने ठीक वैसा ही किया उसके हाथ बहुत कांपें जा रहे थे

ऊसने ताली ली…और उसके घाव पे गरम चाकू को जैसे लगाया देवश दर्द से चिल्ला उठा…”कोशिष्ह करूं आहह मेरी चीखों की परवाह मत करो फौरन वक्त नहीं है”…….इतना कहते ही…दिव्या ने आंखें बंद कर ली और बहुत ही क़ास्सके ऊस चाकू में गरम चाकू को रखा…….देवश ऊस रात काफी ज़ोर से चीख रहा था…गोली प्लेट पे गिर पड़ी साथ में खून भी टपकने लगा घाव के माँस के जख्म एकदम ताज़ें थे गोली को किसी तरह से निकलकर दिव्या ने उसे निढल देवश के एक एक बताए दवाई को लगाकर ड्रेसिंग कर दी…तब जाकर देवश को शांति मिली और वो निढल पढ़कर सो गया

दिव्या को एकदम से उल्टी आई और ऊसने वॉशबेसिन जाकर उल्टी की और ऊस खून भरे प्लेट गोल आइक सहित फ्लश करके बहाआ दी…..देवश के कंधे से लेकर छाती तक पट्टी बँधी थी…वॉ बेहद गहरी नींद में सो चुका था…बीच बीच में दिव्या ऊस जगा देती…ताकि ओसोे ये ना लगे की देवश ने अपनी आंखें हमेशा के लिए बंद कर ली है…पर उसे कामयाबी मिली थी वो गोली के वार से बच निकाला था…दिव्या ने पास रखकी नक़ाब को उठाया वो जानती थी उसे क्या करना है?

और ऊसने फौरन ऊस मुकोते को कैची से फाड़ फाड़ के जला डाला…काला साया पुलिस वालो की नजारे में मर चुका था पर इसी श्हहेर को कहीं ना कहीं ऊस्की जरूरत थी पर ये जरूरी था..

क्योंकि देवश का मंसूबा पूरा हो चुका था…और अब वो अपनी ज़िमीडारी मुकोते के बिना ही करना चाहता था

दिव्या देवश की सेवा करती रही…और ऊसने पुलिसवालो के फोन पे ये बताया की वो देवश की बहन है और वॉ घर आए हुए है दो दिन बाद वो आ जाएँगे…ये सुनकर सब शांत पर गये…दिव्या ने देवश की बाइक को किसी तरह घ के अंदर दाखिल करके झाड़ी और घससों से ढक दिया….और देवश के सिरहाने आकर लाइट गयी ऊसने अपना सर देवश के छाती पे रख दिया और उसके आंखों से आँसू गिरने लगे वो सुबकने लगी…उसे यकीन्ना काला साया खोया था पर अब एक नया प्रेमी पाया भी था…आख़िरकार दिव्या की मेहनत भारी सेवा और प्यार और देवश के खुद के विश्वास से आख़िरकार उसे कामयाबी मिल ही गयी और उसका शरीर स्वस्था हो गया…देवश पहले से ज्यादा तन्डरस्ट खुद को महसूस करने लगा उसके बाए कंधे के पीछे लगी गोली के घाव काफी हड़त्ाक सामान्या हो चुके थे….लेकिन दर्द थोड़ा बहुत तो था ही..देवश ने इन कुछ दीनों में खुद को काफी ज्यादा ठीक करने की कोशिश की…हाँ वो कसरत तो नहीं कर पा रहा था पर उसे अपने शरीर को स्वस्था बनाए रखान जरूरी था ताकि पुलिस वालो को ऊसपे कोई शक ना हो उधर थाने में क्या रिपोर्ट आई होंगी ये भी जानना बेहद जरूरी था

देवश ने उसी दिन पुलिस स्टेशन फोन करके अपने अफसरों से पूछा तो जो जानकारी मिली उसे ये साफ था की काला साया को मारा हुआ घोषित कर दिया है दरअसल जिस नदी में देवश कूड़ा था प्लान के मुताबिक वो नदी फाटक से जुड़ी हुई थी अगर ऊसमें गिरा भी था तो वो घयाल ऊपर से ना तैयार पाने से ऊस्की मौत हुई होगी ये सुनकर देवश को मन ही मन खुशी हुई साथ में नदी में गिरके फिर वहां किस तरह तैरके देवश किसी तरह ज़मीन पे पहुंचा था ये स्टोरी तो वही जनता है अगर ऊस रात वो पत्थर का सपोर्ट उसे किनारे पे ना मिला होता तो आज ऊस्की लाश बांग्लादेश तो जरूर पहुंच गयी होती

देवश ने कुछ देर तक बातें की और फिर कमिशनर से मिलने की पर्मिशन ली…देवश फौरन उसी दिन किसी तरह नाश्ता वष्ता और अपने वर्दी को पहनें दिव्या से विदा लेता है दिव्या काफी डर जाती है पर वो दिव्या के बालों पे हाथ फायरके उसे शांत रहने की सलाहियत देता है…ऊन लोगों की तरक़ीब कामयाब हो चुकी है अब उसे डरने की जरूरत नहीं…देवश फौरन थाने जाता है और वहाँ का काम निपटता है हवलदार उससे पूछता है की वो कहाँ गये थे? देवश भी उसे बारे ही संजीदगी से जवाब देता है जैसे की कुछ हुआ ही नहीं था

उसके जख्म अब भी भरे नहीं थे इसलिए कंधे में हल्का हल्का पेन शुरू हो जाता चलने से बारे ही संभलके देवश वर्दी से खुद के बदन को धक्के ताकि पत्तियां ना दिखे चलतः आई….कंधे की गोली के बारे में किसी को पता लगा तब तो फिर साज़िश लगेगी सबको….

देवश अपने वर्दी वाले आम किरदार में फीरसे अभिनय करने लगता है वो पानी चबाना फिर हप्पी छोढ़के टाँग टेबल पे रखना….तभी हवलदार कान में फुसफुसता है की आपके अफसरों ने काला साया को मर गिराया कहीं इससे ज़िल्ला वाले ना भड़क जाए…देवश सिर्फ़ इतना कहता है की काला साया मर गया है ये बहुत ही अच्छी खबर है पर अगर लोगों के लगने लगा की वो नहीं आया तो फिर बात बिगड़ते डायरी नहीं लगेगी फिर तो कमिशनर को जवाब देना पड़ेगा क्योंकि ऑर्डर्स तो ऊन्होने ही दिए थे हवलदार और देवश एक दूसरे को ताली मर के खूब तहाका लगाकर हस्सते है

शांतक देवश घर पहुंचता है…अपने काला साया वाले घर पे….दिव्या उसका पलके बिछाए इंतजार कर ही रही थी दरवाजा खटखटते ही दिव्या दरवाजा खोल के उसे गले से लिपाततित है…देवश उसे अपने सीने से लगाए कंधे पे हाथ रखकर अंदर आता है फिर दिव्या उसे बात करते हुए उसके सारे शर्ट को आराम से उतरती है उसके कंधे पे लगी पट्टी को टटोलती है और फिर ऊस जख्म कोदेखती है…देवश ऊस्की ये सेवा देखकर उसके गाल को चूम लेता है..और उसे अपने गोद में बिता लेता है

दिव्या : किसी ने शक तो नहीं किया ना तुमपे

देवश : नहीं मेरी दिव्या किसी ने कोई शक नहीं किया…वो लोग तो काला साया के मौत पे हँसी उड़ा रहेः आई…वैसे कमिशनर का फोन आएगा मिलने के लिए फिर ऊनसे बात करके पता चलेगा

(UPDATE-37)

दिव्या : कैसे लोग है? अपने इज्जत के लिए किसी भी भायंट चढ़ा देते है ये भी नहीं समझते वो कोई मुजरिम तो था नहीं अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो क्या बिट्टी ? क्या जरूरत थी इतना बड़ा रिस्क लेने की

देवश : अगर मैं ऐसी ही गायब हो जाता तो हल्ला होने में डायरी नहीं लगती….पुलिसवाले तब भी मेरी टल्लश करते रहते और तुम नहीं जानती बढ़ता शक हुंपे ही आता है काला साया के मरने से काम बहुत हड़त्ाक आसान हो गया है

दिव्या : लेकिन ज़िल्ला वालो का क्या होगा? ऊँका जो विश्वास है की काला साया उनके लिए इंसाफ करेगा

देवश : अगर हर कोई काला साया की ही जरूरत अपना ले तो फिर इंसाफ की देवी अदलात और पुलिस का क्या रोल? हर इंसान को अपनी लरआई खुद लर्णि पार्टी है…जहाँ तक मेरा सवाल है मैं अपने असल अओदे पे उनकी जितनी हो सकता मदद करूँगा

दिव्या : काश ये सब कभी ना होता?

देवश : हाहाहा खैर जाने दो अरे यार कुछ खाने को दो मुझे भूख लगी है…

दिव्या : अच्छा अभी लाई

दिव्या किचन में चली गयी इतने में मेरा फोन बज उठा…कमिशनर का था…मैंने फोन उठाया तो पहले ऊन्होने मुझे बधाई दी और मेरी तारीफ की फिर उसके बाद मुझे कल कलकत्ता आने को बुलाआ पुलिस हेडक्वॉर्टर में..

फिर फोन कट हो गया…अचानक फिर दूसरा कॉल आया इस बार अपर्णा काकी का था…फोन उठाते ही वो मुझपर बरस पड़ी

अपर्णा : बेटा कहांन हो तुम? ना कॉल किया ना कुछ घर से कहाँ चले गये तुम्हारे थाने गयी बोले साहेब तो घर चले गये यहां आई तो तालाल आगा देखा करीब कुछ दीनों से तुम कहाँ थे?

देवश : काकी मां आप तो जानती हो मेरी थोड़ी तबीयत ठीक नहीं थी थोड़ा बाहर आउट ऑफ स्टेशन निकाला हूँ कल तक आ जाऊंगा घर

अपर्णा : पता है मैं कितना डर गयी थी? तुम जबसे गये हो शीतल कितना तुम्हें याद करती है बोलती है भाई कब आएँगे बहुत मिलने का मन है (शीतल की इंतजार को मैं बखूबी समझता था आप मर्दों को एक बात कहूँगा यहाँ जब भी किसी की औरत की चुत मारोगे खासकरके अपनी लवर की तो वॉ बार्ब आर मिलने मिलाने की बात बहुत करेगी चस्का जो चढ़ जाता है )

देवश : अच्छा मेरी काकी मां मैं आ जाऊंगा आप फिक्र ना करे

अपर्णा : ठीक है बेटा ऐसे मत जा कर और जाए भी तो बोलकर जा पता है मैं कितना तुझे मिस कर रही हूँ

देवश : अरे मेरी रसगुल्ला मैं आता हूँ ना फिर मां बेटा जमकर प्यार करेंगे

अपर्णा : शैतान कहीं का चल जल्दी आना

कुछ देर तक अपर्णा काकी से बात की…अपर्णा काकी भी कम ठरकी नहीं हो गयी थी अभी से ही लंड लेने की इतनी उतालवली…उधर शीतल के बार्िएन में पूछा तो पता लगा की मेमसाहेब आजकल काफी खुश रहने लगी और मेरी दी हुई पएेल पहनकर खन्न् खन्न् की आवाज़ निकाले खेतों से गाँव जाती है…बस डर लगता था कहीं साला कोई लौंडा ना उसके पीछे पढ़ जाए…क्योंकि ऊसपे सिर्फ़ मेरा हक़ है और उसके होने वाले पति का खैर फोन कट करके देखा दिव्या खाने का प्लेट लाई मुस्करा रही थी

दिव्या : किससे बात कर रहे थे?

देवश : बस अपनी काकी मां से काला साया के जिंदगी में सिर्फ़ दिव्या थी लेकिन देवश के जिंदगी में अपर्णा काकी ऊस्की मां जैसी है और ऊस्की एक प्यारी जवान बहन शीतल

दिव्या : अच्छा ग तो अभी से हमारे से दिल भर गया आपका

देवश : अरे पगली वो तो मेरे अपने है

दिव्या : और मैं क्या गैर हूँ?

देवश ने फौरन दिव्या को अपने ओर खींच लिया दिव्या ने सक़ती से देवश के छाती उसे धकेलना चाहा पर देवश ने सक़ती से उसे थाम लिया “खाना ठंडा हो जाएगा”…..दिव्या ने शरमाते हुए कहा…..”पेंट पूजा बाद में पहले इस गरमा गरम माँस को खाना है मुझे”……..मैंने दिव्या के नाभी पे अपना मुँह लगा दिया…दिव्या कसमसाने लगी अब क्या खाना? पहले एक राउंड चुदाई तो करनी ही पड़ेगी

दिव्या के नाभी को मैंने बारे ज़ोर से जीभ से कुरेदना शुरू किया…और फिर उसके पूरे पेंट पे जबान फहीरयाई…दिव्या पूरी तरह कसमसाए जा रही थी…उसके ठीक बाद दिव्या को टाँग से उठाया और उसे लेटा दिया..इस बीच बड़ा ही क़ास्सके जख्म वाले जगह में दर्द उठा….

मैंने दिव्या को नहीं बताया क्या पता बना बनाया मूंड़ खराब हो जाए

देवश ने दिव्या के जंपर और सलवार को उतार फ़ैक्हा….और उसके गान्ड की फहाँको में अपनी उंगलियां फहीराने लगा और दो उंगली ऊस्की गान्ड की छेद में डाल दी…अंगुल करते ही दिव्या कसमसा उठी और बिना पानी मछली की तरह बिस्तर पे छटपटाने लगी….देवश ने दिव्या की छेद में दो उंगली बारे ही ज़ोर किया…और उसके ब्रा के ऊपर से ही छातियो को दबा दिया
दिव्या कुछ देर तक मॉआंन करती रही…और फिर ऊसने झट से देवश को अपने ऊपर खींच लिया….देवश ने फौरन अपने खड़े लंड को निकाला और दिव्या की ब्रा भी उतार फैक्ी….दिव्या ने झुककर देवश का लंड मुँह में भर लिया…अब उसे धीरे धीरे देवश का लंड चूसने की आदत सी पढ़ चुकी थी..वो बारे ही प्यार से देवश के लंड को चुस्ती रही ऊसपे अपनी जबान फहीराती रही…उसके मुख मैथुन से ही देवश झड़ जाता लेकिन वो रुका नहीं ऊसने दिव्या के मुँह में ही सक़ती से लंड मुँह से अंदर बाहर किया…स्लूर्रप्प्प म्‍म्म्मम की आवाजें निकलते हुए दिव्या बारे ही चाव से लंड को चुस्ती रही

फिर देवश ने कुछ देर तक दिव्या को अपना लंड चुस्वता रहा..और फिर उसे गोद में उठाए बिस्तर पे लेटा दिया इस बार मुँह का धायर सारा थूक उसके योनि के छेद पे लगा दिया…और ऊस्की टाँगें अपने कंधे पे रख ली…टाँगें और चुत दोनों जैसे ही चौड़ी हुई…देवश ने लंड चुत के मुआने पे कसके टिकाया और एक करारा धक्का मारा…सस्स्सस्स आआआआआआः…दिव्या चीख उठी…फक्चाक्क से जैसे कोई जिस चीरने की आवाज़ आती है वैसे ही लंड दिव्या के चुत में धंस गया

उसी हालत में देवश दिव्या की चुत में लंड अंदर बाहर करता था…चुत ने घपप से लंड अपनी योनि में भर लिया और देवश भी दोनों पलंग पे मज़बूती से हाथ टिकाए धाधा धढ़ धक्के मारते रहा…चुत से फकच फकच की आवाज़ आने लगी…बीच बीच में दिव्या लरखरा जाती कारण देवश ऐसे तेजी से धक्के पेल रहा था की लंड चुत से बाहर निकालने को हो जाता फिर टाँग को कंधे पे सेट करके फिर करारा शॉट देवश उसके चुत पे मारने लगता

कुछ देर तक हालत ऐसे ही चलते रहे फिर देवश ने लंड को बाहर खींच लिया और ऊस्की योनि पे मुँह लगा दिया ऊपर भीनी झांतों से आती खुशबू ऊसपे रखी नाक अपनी और पूरा मुँह चुत के फहाँको में लगाए देवश खुद को सांत्वे आसमान पे महसूस कर रहा था….मर्द जितना भी टेन्शन में हो जब एक बार चुदाई कर लेता है तो ऊस्की सारी थकान और टेन्शन चली जाती है उसे सब अच्छा लगने लगता है….

खैर देवश भी चुत पे ज़ाबान फहीराएज आ रहा था उसके गीली चुत से बहते रस को चत्टता रहा उसका स्वाद बेहद नमकीन था

देवश ने उठके फौरन कांपति दिव्या को अपने से लिपटा लिया ऊस्की एक टाँग उठाई उसके पीछे लेटा…टाँग को अपने टाँग पे चढ़ाया और हाथों में धायर सारा थूक गान्ड की छेद पे लगाया और फिर लंड को छेद के मुआने पे घिस्सने लगा..दिव्या सिहर उठी देवश का एक हाथ बारे ही ज़ोर से छातियो को मसल रहा था…दिव्या को भी तारक चढ़ चुकी थी….एक ही शॉट में लंड छेद में घुसेड़ दिया दिव्या चौंक उठी….ऊस्की गान्ड में कुछ गाड़ने लगा…देवश भी गांडम आइन बारे ही हल्के हल्के धक्के लगाने लगा…लंड गान्ड के भीतर घुसता और फिर बारे ही धीमे से बाहर निकल जाता फिर देवश को लंड छेद पे एडजस्ट करना परता

कुछ देर तक देवश ऐसे ही तरीके से दिव्या की गान्ड मारता रहा…ठप्प्प ठप्प करके धक्को की रफ्तार बढ़ी गान्ड से अंडकोष टकराए और शुरू हुआ आहों का सिलसिला…गान्ड के बजने से आवाज़ आने लगी….दिव्या बारे ही मीठी मीठी आहें भरने लगी….और देवश उसके गले पे होठों को घिस्सने लगा…और उसके कान को चबा जाता…दिव्या आंखें मुंडें देवश के छाती पे सर रखक्के जैसे बेहोश हो गयी..और देवश धक्के लगातार लगता रहा…कुछ देर में ही देवश के लंड में अकड़न होने लगी…और ऊसने झट से छेद से लंड को बाहर निकाला

और उसे दिव्या के गान्ड ऊपर ही झाधने लगा…देवश फारिग हो गया और अपना सारा रस दिव्या की गांदपे छोढ़के उसके दूसरी ओर निढल पढ़ गया….पसीने पसीने हो गया था देवश हांफते हुए कुछ देर तक लेटा रहा..फिर ऊसने झाब उठके देखा दिव्या सो चुकी थी..और ऊसने उठाकर गंदे कपड़े से दिव्या की फूली गान्ड के ऊपर लगे रस को साफ किया और फिर खुद भी बाथरूम जाकर नहाया धोया

फिर बाहर आकर खाने को गरम किया और फिर बिस्तर पे ही बैठकर नंगी दिव्या को देखते हुए खाने लगा….इसी तरह वो दिन भी ढाल गया….अब देवश ने अपने जिम्मेदारी को समझते हुए केस पे ध्यान देने लगा..अब ऊसमे ंवो ब्रष्ट वाली बात नहीं रही थी….क्राइम थोड़ा तरफ गया जाहिर था काला साया अब किसी को दिख नहीं रहा था…पर अब सब पुलिस पे ही डिपेंड थे​

UPDATE-38)

दूसरे दिन कलकत्ता पहुंचकर कमिशनर के केबिन में घुसते ही देवश ने सलाम ठोंका…कमिशनर ने मुस्कराए देवश के कंधे पे हाथ रखा..

और उसे शाबाशी दी

कमिशनर : वेरी वाले डन इंस्पेक्टर देवश चटर्जी मुझे तुमसे यही उम्मीद थी तुमने प्रूव करके दिखा दिया की पुलिस डिपार्टमेंट किसी से कम नहीं आस फर आस ई में कन्सर्न्ड और ट्रांसफर आर्डर इस कॅन्सल्ड ऐसे ही मन लगाकर ध्यान देते रहो

देवश : सर मैंने वही किया जो कानून के लिए शाइ हो…पर आप इसे मेरा फायदा मत समझिए मैंने कोई भी काम सिर्फ़ अपने फाएेदे के लिए नहीं किया…बस इस बात का कहीं ना कहीं डुक हें सर की काला साया कोई मुजरिम नहीं था वो बस पुलिस की मदद कर रहा था भले ही उसके आक्षन्स ठीक ना हो वो कानून के खिलाफ काम करता है ऊसने खून किए पर किसके मर्डरर्स के क्रिमिनल्स के जो मासूमों की जिंदगी से खेलना चाह रहे थे

कमिशनर : वॉट दो यू मीन? काला साया इस अगेन्स्ट थे लॉ

देवश : लेकिन अभी स्टिल डॉन;त नो वेदर अभी स्टॉप थे क्राइम वितऊथ हिं…सॉरी सर मुझसे कोई लव्ज़ गलत निकला हो मांफ कीजिएगा बस मैं यही कहूँगा सर कहीं ना कहीं हमने क्राइम को गताया नहीं बढ़ाया पर आप फिक्र ना कीजिए जब तक इंस्पेक्टर देवश ज़िंदा है तबतक लॉ कोई हाथ में नहीं ले पाएगा

कोँमिससिओने : आस और विश सन ई आम रियली प्राउड ऑफ यू (मुस्कराए कमिशनर ने बात को स्मझा…देवश सल्यूट मार्टाः आह बाहर निकल गया)

घर पहुंचकर ऊसने सबसे पहले अपने घर जो की चाचा चाची ने पहले से धखल किए हुए थे उसे बारे ही सहेजता से खरीदने की उक्सुकता जाहिर की ऊसने जिसके नाम घर था उसका सिग्नेचर कोर्ट को पेश किया इस पे ऊसने बारे ही सहेजता से चाल चली और अपने दाँव पैच से वो घर ख़ैरीड लिया जो ऑलरेडी उसी के नाम था….दिव्या को अपना वीरना घर ही पसंद था पर देवश चाहता था की वो अब चुपके ना रहे….बेरहेआल वो दिव्या के साथ अपने नये घर में आ गया….दिव्या जिस घर की कभी नौकरानी होया करती आज वो ऊस घर की मालकिन खुद को महसूस कर रही थी….इधर देवश को अपने दूसरे घर में जाना भी था

और उसी दिन वो अपने पुराने घर आकर….घर में ही कुछ देर तक आराम करता है क्या पता ? अपर्णा काकी और शीतल आ जाए उससे मिलने अकेले अकेले
काफी देर तक मां-बेटी का इंतजार करने का बाद…देवश को जैसे उम्मीद थी वही हुआ…मां-बेटी दोनों साथ ही आई….अपर्णा काकी ने हल्के लाल रंग की बनारसी सारी पहनी थी आसिफ़ के तोहफे की दी हुई…तो दूसरी ओर गुलाबी रंग की मॅचिंग एआरिंग के साथ सूट शीतल ने पहनी हुई थी..दोनों मां-बेटी ही कहर ढा रही थी….डबल ऑफर तो मिला था…पर देवश ना तो मां को बेटी के सामने चोद सकता था…और ना ही बेटी को मां के सामने चोद सकता था…

बहरेहाल ऊसने फैसला किया की दोनों को अलग-अलग ही चोदना पड़ेगा….

अपर्णा काकी मुस्कराए डीओॉश के सर पे हाथ फेरने लगी और उससे उसका हाल पूछा…देवश इन भी बारे सहेजता से जवाब दिया इतने में शीतल की चोरी चोरी निगाहों को वो पढ़ भी लेता…जो ठीक अपर्णा काकी के पीछे खड़ी मांडमास्त मुस्करा रही थी

“अरे शीतल बैठो ना”…..देवश ने शीतल को अपने बगल में पलंग पर बैठने को कहा

“अच्छा बेटा कुछ खाया मैं तेरे लिए कुछ बनती हूँ….साग की सब्ज़ी लाई उसे गरम कर देती हूँ और रोती बना देती हूँ”…..अपर्णा काकी ने मुस्कराए कहा और किचन की ओर चली गयी

इस बार देवश शीतल की ओर मूधके उससे बातचीत शुरू करता है…शीतल को तो बस अकेलापन ही चाहिए था मां जैसे ही गयी बस छुपी छुपी ऊसने बातें शुरू कर दी

शीतल : उफ़फ्फ़ हो कहाँ चले गये थे तुम?

देवश : बस चला गया था काम के सिसीले में

शीतल : श पता है मैं कितना मिस कर रही थी

देवश : अरे मेरी जानं सस्सह धीरे बोल मां सुन लेगी अकेले क्यों नहीं आई?

शीतल : मां को भी आना था सोचा लगे हाथों आपसे मिल्लू

देवश : त..एक है और सब ठीक तो है ना

शीतल : हाँ अभी अभी तो मासिक खत्म हुए मेरे

देवश : अरे वाह रानी यानि मेरी बहन पूरी औरत बन चुकी है

शीतल : बहुत मन कर रहा है भैया कुछ करो ना

देवश : एक..हां ठीक है मैं जनता हूँ तुम बेसवार मत हो कुछ टाइम दे

इतने में अपर्णा काकी दबे पाओ आ गयी मैं थोड़ा हड़बड़ा गया शीतल भी…”और क्या फुसुर फुसुर चल रहा है भाई बहनों में?”….अपर्णा काकी ने गरमा गरम खाना प्लेट से पलंग पे दस्तर्खान बिछके लगाया

देवश : कुछ नहीं काकी मां बस आजकल हमारी शीतल बड़ी समझदार हो गयी है

अपर्णा : कहाँ बेटा? ये और समझदार अकल घास चरने जाती है इसकी कोई भी काम बोलो तो बस ऐतने लगती है

शीतल : हाँ हाँ और कर लो भैया से शिकायत

हम सब हस्सने लगते है….फिर खाना खाने लगते है मैं अपने हाथों से अपनी औरतों को खाना खिलता हूँ…फिर अपर्णा काकी भी मुझे अपने हाथों से खिलती है…शीतल ये सब देखकर मुस्करा रही थी..

इतने में अपर्णा काकी ने बात छेड़ी जिससे मेरी मुस्कान कुछ पल के लिए गायब हो गई

अपर्णा : बेटा सुना की तूने वॉ तेरे चाचा अंजर!

देवश : ऊस हरामी का नाम मत लो काकी मां

अपर्णा : देख बेटा मैं समझती हूँ हालत बहुत बुरे थे ठीक ही हुआ जो वो लोग कुत्ते की मौत मारे जिसपे तेरा हक़ था उसे तूने वापिस पा लिया अच्छा है लेकिन ये बात मैं ही जानती हूँ की तेरा उनके साथ क्या रिश्ता है? वो तो ऊस दिन बाज़ार में कुटुम्ब मिल गयी थी खूब परेशान थी बोल रही थी की उसका घर संसार उजध सा गया है मैं तो कुछ समझी नहीं

देवश रोती का नीवाला खाए बस अपनी आंखें इधर उधर कर रहा था…”जाने दो ना काकी मां जाने दो जिस इंसान ने हमारा घर उजड़ा हो ऊस्की क्या दुनिया उजदेगी अच्छा हुआ मर गये”……काकी मां ने कुछ नहीं कहा बल्कि मेरे ऊन लवज़ो में हामी भारी

अपर्णा : हाँ बेटा मुझे नहीं पता था की वो कमीने लोग यही है बेटा मर गया देख कुदरत का कहर अंजर गाड़ी के नीचे आ गया…और कुटुम्ब तो पागलख़ाने चली गयी उसका तो ब्लूएफीलंताक बन गया था और शांतलाल गुंडे के साथ उसके संबंध भी थे

शीतल : अरे मां क्यों इधर उधर की बात लेकर बैठी हो? भाई का इतना अच्छा मूंड़ बना है उसे खराब तो मत करो

अपर्णा : अरे बाबा भाई की बड़ी चिंता है तुझे चल अच्छा है लेकिन सुन अपने भाई को ज्यादा तंग मत करना (इस बात को सुनकर कुछ पल के लिए ही सही मुस्कान वापिस लौट आयआई मेरे चेहरे पे)

देवश : अच्छा काकी मां आप दोनों आज इधर ही रुक जाओ वजह ये है की मैं कहीं जाऊंगा तो नहीं तक भी गया हूँ

अपर्णा : लेकिन बेटा शीतल को भेज देती हूँ दो घर का काम पारा हुआ है

शीतल : मां आप ही चली जाओ ना

देवश : एक काम कर ना शीतल तू ही चली जा आजना थोड़े देर में हम लोग कहाँ भागे जा रहे है?

शीतल : पर भी (मैं जनता था शीतल क्यों चिढ़ रही है?)

देवश : पर वॉर कुछ नहीं अभी जा तो अभी जा

शीतला ना नुकुर करके ऐत्ते हुए मां को मन ही मन गाली देते हुए निकल गयी…अपर्णा काकी भी मुझे मुस्कुराकर देखते हुए किचन में बर्तन माझने लगी…अब मैं घर में अकेला चलो पहले मां से ही शुरू करता हूँ

उसी वक्त बाहर का एक बार नज़ारा देखा….और दरवाजा कूडनी भेड़ लिया..शीतल को आनें आइन कम से कम 2 घंटे तो लग जाएँगे इतने देर में….काकी मां की भूखी सुखी चुत मर लूँगा ताकि वो थक्के पष्ट हो जाए फिर शीतल आए और वो भी मुझसे चुदाया ले…मां बेटी को एक ही दिन में चोदने का प्लान बना लिया था मैंने

फौरन कपड़े उतारे और किचन में चला गया…काकी मां एकदम से जैसे पीछे मुदिी तो शर्मा गयी…मैंने फौरन किचन की खिड़की लगाई और क्काई मां को अपने सीने से लगा लिया काकी मां मुझसे छुड़ाने लगी पर अब कहाँ छुड़ाना चुड़ानी..

ऊन्हें निवस्त्र करने में वक्त नहीं लगा

वही ऊन्हें कुतिया की मुद्रा में झुकाया और अपना खड़ा लंड उनके चर्वी डर पिछवाड़े में घुस्सेद दिया…अफ क्या मस्त गान्ड थी? पर ढीली थी…लंड पे थोड़ा सा थूक माला और फिर लंड को छेद में टिटके एक करारा शॉट मारा…आआहह काकी मां के मुँह से मीठा स्वर निकाला और वॉ भी मदमस्त चुदवाने लगी….

देवश : आस ककीिई मां क्या सौंड्रा है तुम्हारा? क्या गान्ड है तुम्हारी?

अपर्णा : बीता…आहह कितने सालों से दबाई रखी थी अपनी इच्छा आहह (काकी मां ने दोनों हाथ सेल्फ़ पे रख दिया…और पीछे से मेरे करार धक्को को अपनी गान्ड के भीतर झेलने लगी)

मैंने काकी मां को बहुत ही क़ास्सके चोदना शुरू कर दिया…उनकी ढीली गान्ड में लंड प्री-कम भीगोने लगा…और उनकी गान्ड में भी सनसनी उठने लगी ऊन्होने थोड़ा उठके अपना मुख मेरी तरफ किया और अपने जवान बेटे को होठों में होंठ तुसाए किस शुरू कर दी…हम दोनों एक दूसरे का गहरा चुंबन लेने लगे…काफी मजा आ रहा था नीचे से धक्के लगता और ऊपर मोटे मोटे होठों को चूसता काकी के

अपर्णा आहें भरती रही…फिर मैंने लंड को गान्ड से बाहर खींचा…और इस बार अपनी तरफ किया…इस बार काकी मां सेल्फ़ पे बैठ गयी और ऊसने टाँग हवा में उठा ली….काकी मां की सूजी डबल रोती जैसी चुत में लंड एक ही बार में पे लडिया और उनके मोटे मोटे चुचियों को हाथों में लेकर मसलने लगा अफ कितने सख्त निपल्स थे उनके एक बार तो चूसना बनता था अपर्णा काकी को बैठे बैठे ही चोदने लगा…उनकी निपल्स को मुँह में लेकर किसी बच्चे की तरह चूसने लगा…ऊसपे अपनी जबान फहीरने लगा…काकी मां भी चुत को ढीली चोद चुकी थी..और मेरा लंड आसानी से प्रवेश कर रहा था

कुछ ही देर में काकी मां ने अपने हाथ मेरे कंधे पे मोड़ दया और फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करते हुए झधने लगे…चुत में फकच फकच्छ आवाज़ आने लगी…और मेरा रस चुत से बहता हुआ सेल्फ़ से नीचे टपकने लगा

हांफते हुए हम दोनों एक दूसरे के चुंबन लेते रहे…उसके बाद अलग हुए….

काकी मां ने फटाफट सेल्फ़ पोंछा फर्श पे लगे वीर्य को पोंछा…और फिर मोटी गान्ड मटकते हुए बाथरूम में घुस्सके नहाने लगी…लेकिन जी सच में दोस्तों भरा नहीं थी एक राउंड और पेल दिया इस बार काकी मां को सीधे गुसलखाने में ही चोद डाला वो पेशाब कर रही थी…और मैंने उनके कुल्हो को दबाते हुए उनके नितंबों के बीच में ही लंड घुसेड़ दिया काकी मां ने बहुत जोरदार आहें भारी और उनकी एक मांसल टाँग को अपने हाथों में उठाए वैसे ही मुद्रा में चोद दिया…और फिर अपना रसभरा लंड उनके मुँह में डाला…उसके बाद काकी मां ने चुस्स चुस्सके मेरे लंड से सारा पानी निकल दिया अब मैं पूरी तरीके से ठंडा पढ़ चुका था

काकी मां भी सुसताने लगी…और बिस्तर पे ही कुछ देर के लिए सो गयी उनके सोने से मुझे बेहद वक्त मिल गया इतनें आइन घंटी बाजी…दरवाजा खोला देखता हूँ शीतल आई है ताकि हारी पसीने से लथपथ काम खत्म करके…”अरे शीतल तू आ गयी आजा अंदर तेरी मां सो रही है”….शीतल ने मां को सोते देखकर काफी गुस्सा किया थक्के काम ऊसने की और मां यहाँ अंगड़ाई ले रही है लेकिन ये नहीं जानती की उनकी तारक की प्यास बुझी इसलिए वो सो गयी है​

UPDATE-39)

उसी वक्त शीतल को बोला जाकर तू फ्रेश हो जा..वो गुसलखाने में जाकर अपने कपड़े उतारके नहाने लगी…मैंने भी फौरन कपड़े उतार लिए एक बार काकी मां की ओर देखा जो गहरी नींद में थी..फिर जल्दी से गुसलखाने में घुसके दरवाजा लगा दिया…शीतल डर गयी मैंने फौरन उसके मुँह पे हाथ रखा…वॉ भी समझ गयी मेरे दिल में क्या है? और मेरे सामने ही दीवार पे टैक्के खड़ी हो गयी

मैंने फौरन उसके ज़ुल्फो को हटाया और उसके होठों से होंठ भीड़ा दिए..हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे..और फिर शीतल को गान्ड से उठाते हुए उसके नंगे बदन को चूमने लगा उसके छोटे छोटे निपल्स को चुस्सने लगा उसके छातियो को दबाने लगा उसके गले में होंठ फहीराने लगा…शीतल पूरी तरह से तारक में आहें भरने लगी

उसके टांगों को थोड़ा फैलाया और ग्ोअडी में उठाए ही अपना लंड उसके छेद में टीका दिया…पहले तो ऊसने मुझे क़ास्सके पकड़ लिया लेकिन अचानक उसका हाथ मेरे पट्टी पे लगा…काकी मां तो चुदवाने में इतनी मशगूल थी की उसे पता ही नहीं चला पर इसे अगर पता चला तो हुआ भी वही ऊसने पूछ डाला मैंने बताया की लोहे से खरॉच लग गयी सेपटिक पकड़ लेता इसलिए इलाज कराया तो पट्टी लग गयी फिर ऊसने कुछ नहीं कहा बस ख्याल रखने की हिदायत दी

फौरन ऊस्की चुत की फहाँको में लंड घिस्सते हुए एक ही शॉट मारा…उफ़फ्फ़ कितनी सख्त चुत थी….

शीतल काँप उठी ऊसने अपने नाखून मेरे पीठ पे गढ़ा दिए और मैं भी फुरती से उसे उछाल उछाल के अपने लंड पे चोदने लगा मेरे हाथ सक़ती से ऊस्की गान्ड को दबोचे हुए थे जबकि पूरा छाती और पेंट मेरे सीने और पेंट से जुड़ा हुआता…मैं बारे ही आराम आराम से धक्के देने लगा

देवश : दर्द तो नहीं हो रहा ना

शीतल : नहीं बिलकुल भी नहीं

देवश : चल मजे ले फिर

शीतल आहह आहह करके बारे ही अहेतियात से आहें भर रही थी ऊस्की मां को पता ना चल जाए…मैं शीतल को उसी हालत में चोदता रहा…वो एम्म्म एम्म्म करते हुए झड़ गयी और मुझसे लिपट गयी…मैंने उसे नहीं छोडा और उसे वही फर्श पे लिटा दिया कारण वो बहुत कमज़ोर पढ़ चुकी थी…मैंने फौरन उसे लािटाए मिशनरी पोज़िशन एमिन दोनों टांगों को अपने कंधे पे रखा और दान दाना दान चुत में लंड घुसाए अंदर बाहर करने लगा

शीतल लज़्ज़त में अपने दाँतों में दाँत रखक्के चुदवाती रही..और मैं उससे चोदता रहा…ऊस्की बीच बीच में ज़ोरर्र से आहह निकल जाती….और मैं अपनी गांड में ताक़त भरके जितना हो सके उसे चोदता रहा…लंड से थोड़ा प्री-कम आने लगता जिसे मैं बीच बीच में उठके पानी और उसी के ब्रा से साफ कर देता….नल खोल दिया था जिससे पानी की आवाज़ से काकी मां को पता ना लगे की मैं गुसलखाने में ऊस्की बेटी को चोद रहा हूँ

कुछ देर में ही शीतल फिर झड़ गयी…इस बार साली कुछ ज्यादा ही ज़ोर से चिल्ला उठी..मैंने फौरन लंड चुत के मुआने से बाहर खिंचा और फिर उसे पेंट से उठाकर दीवार पे टैका दिया उसका वज़न यही कोई 40 किलो तो होगा ही बस छाती और गांड भारी हुई थी…कहाँ हम मर्दों का वज़न औरतों से तीन गुना दुगुना हम मर्दों को औरतों को उठाने में कोई ज्यादा प्राब्लम नहीं होती

ऊस्की पतली कमर पे हाथ रखा और उसके नाभी को अंगुल करते हुए उसके टाँग को कमर पे फ़सा दिया अब वो मुझपर पीठ के बाल चड्डी हुई और मैं नीचे से उसे धक्के पेलता जा रहा था…वो चुड्द्वाए जा रही थी लंड बारे ही आसानी से ऊस्की चुत से निकल रहा था घुस रहा था…कुँवारी चुत अब पहली की तरह टाइट नहीं थी मेरा अब पारा चढ़ गया और मेरी कामशक्ति जवाब देने लगी…और मैंने फौरन धक्के तेज कर डाल्ली…और उसी बीच मैंने उसके कमर से उसे ऊपर उचका दिया…जिससे चुत से लंड फ़च से निकाला और रस लबालब छोढ़ने लगा…लंड रस बहा रहा था जो नाली के अंदर जा राई थी

फिर उसी बीच मैंने शीतल को खड़ा किया और साबुन से जल्दी जल्दी उसके बगल गान्ड चुत छाती साबप्पे साबुन रगड़ा पेंट पे भी रगड़ा फिर ऊसने भी मुझे कुछ साबुन लगाया और हम दोनों ने शवर के नीचे नहाया…ये तीसरी बार मैं झड़ा था काफी तक गया था मैं….

फिर मैंने उसे कहा की पहले मैं नियालकता हूँ बाद में तू निकल लियो वो पहले सावधानी से निकली फिर मैं…गनीमत ही काकी मां उठी नहीं

ऊस दिन चुदाई का प्रोग्राम बहुत ही अच्छा ही चला…मैंने इतना सेक्स किया की हाथ पाओ में जान नहीं थी…साला दुम्ब्बेल्ल भी नहीं उठा पाया था…काला साया की मौत के बाद तो जैसे अब मैं पूरा देवश बन चुका था….एक तरह से छुट्टी मिल सी गयी थी अययाशी करने के लिए…साथ ही साथ थाने का कामकाज भी बेटर चल रहा था

लेकिन खुशी पलों को लगते काली नज़र डायरी नहीं लगती….अच्छी खाासी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया…जिसने मुझे फीरसे जुर्म की इस लरआई में पाओ रखने के लिए शामिल करवा ही दिया….अब वो क्या वजह थी ये तो मैं अगले अपडेट में ही बताऊंगा
ऊन दीनों टाउन के आसपास बहुत ज्यादा ही क्राइम तरफ गया था…पुलिस की गश्त के बावजूद सुनसान इलाक़ो में अंधेरी रातों में ही सुपारी किलैंग्स हो जा करती थी…जिनकी लाशें बाद में फाटक के पानी में तैरती दिखती थी…बहुत कल्प्रिट्स और सस्पेक्ट्स को गेरफ़्तार किया गया..खूनियो को भी धार दबोचा पर अब पहली वाली बात नहीं रही थी जो काला साया के टाइम थी लेकिन अगर क्राइम को ओस्से डर था तो पुलिसवालो से ऊन्हें दुगुना डर होना चाहिए था सबके जुबान पे एक ही बात थी आख़िर काला साया आ क्यों नहीं रहा ? पर कोई कुछ ज्यादा कर ना सका…उसे खोजते भी कहा…जिसके चेहरा किसी ने आजतक नहीं देखा

ऊन दीनों टाउन में लगातार 3 महीनों से चोरी हो रही थी सुराग ना के बराबर ना ही कोई दायकात और ना ही कोई प्रोफेशनल तेइफ़ दिन दहाड़े ही बारे बारे सेठो के घर से पैसा जेवराहट सबकुछ चोरी हो जाता….और बाद में शिकायत और दिमाग खाने सेठ लोग पुलिस स्टेशन पे दस्तक देते…कब पकड़ेंगे क्या पुलिस कर रही है? ब्लाह ब्लाह बोलकर चले जाते..

बस ऊन्हें आश्वासन ही देना परता…शायद एक फैसला लेकर मैंने अपनी बाकी जिंदगी को जैसे मुस्किलो में डाल दिया था

उसी दिन पुलिस की गश्त मैंने बरहा दी थी पर साला रात को उसका एक परछाई भी नहीं मिला गुंडे नहीं थे ना कोई बड़ी गान्ड थी…सिर्फ़ एक अक्स दिखता काले कपड़ों में और धक्का नक़ाब पॉश घर में घुसता सब पर स्प्रे मरता और फहरी जीतने चीज़ें है लूट लाटके भाग खड़ा होता

ऊस रात भी दिमाग पूरे दिन की थकान से चोद था…टीवी पे फेव मूवी रेसलिंग देख रहा था…मेरी खूबसूरत रेस्लर लड़कियां पेज और निक्की बेला का दमदार एक्शन सीन चल रहा था…साला बाप जन्म में तो कभी मिलेगी नहीं बस यूँ ही आँख सैक ले बेटा…अभी अपने असल घर आया था दिव्या मेरे नयी मकान में रही रही थी…रात करीब 11 बज चुके थे…आराम से अभी टीवी देख ही रहा था इतने में फोन बज उठा…लो कर लो बात साला अभी आंखों से सैका नहीं लंड झड़ा भी नहीं और ये लो फोन कॉल

जल्दी से फोन उठाया तो पाया कमिशनर की आवाज़ थी…ऊन्होने बढ़ते अपराध को देखते हुए सूचित किया की ऐसा मामला कलकत्ता में भी हुआ था पर जब ज्यादा इन्वेस्टिगेशन बड़ी तो वॉ चोर गायब हो गया…शायद उंड़रगरौद्ण के बाद वॉ हमारे ही टाउन में आया हो बिकॉज़ बंगाल का सबसे अमीर सेठ लोग यही रहते है बारे बारे मॅजिस्ट्रेट्स और एमएलए का भी यही घर है…जिनके पास धारो दौलत है… कमिशनर ने मुझे बताया की एक पुलिस मीटिंग कल बिताई जा रही है मैं आ जाओ…मैंने भी हाँ कहा और फिर फोन रख दिया​

(UPDATE-40)

लो अभी तो आराम मिला था और अब फीरसे मुसीबत…मैंने उठके अंगड़ाई मारी और फिर खड़े खड़े ही टॉयलेट में पेशाब करते हुए टीवी पे रेसलिंग देखने लगा..इतने में फिर साला फोन बज उठा….मैंने जल्दी से कक्चा पहना और फोन को उठाया

“सिररर आप प्ल्स जल्दी आ जइईए बहुत जरूरी है”………मेरे लाख कहने पे भी मैं और सवाल पूछ ना सका जाना ही जरूरी था…मौका-ए-वारदात पे पहुंचकर ही पता चलेगा बात क्या है? साला मन मर के पेज के जीत के साथ ही टीवी ऑफ किया और जीप पकरी और निकल पड़ा इतनी रात गये कुत्ते इतने भौंक रहे थे की साला जो नींद उड़ गयी थी ऊसपे भी चार चाँद लगा दिया

जल्दी से मौका-ए-वारदात पे पहुंचा तो देखता हूँ…चार पुलिसवालो की हड्डिया टूटी है और सब एक साथ कराह रहे है उनकी ये हालत देखकर बेज़्ज़ती और हँसी दोनों एक साथ महसूस हुई…”क्या हुआ इन्हें?”…..एक कॉन्स्टेबल के पास जाकर मैंने कहा जो सर पकड़ा अपने माथे से निकलते खून की ड्रेसिंग करा रहा था…चारों तरफ लोग जमा थे कुछ वरडबोयस भी शामिल थे हॉस्पिटल के एक दो को तो आंब्युलेन्स में डाला जा रहा था

“सा.आ.

हेब आहह एकक लौंडिया मैंने उसे पुरड़ेखा ऊस्की चाल धाल्ल आहह…ऊसने हम पांचों को इतना पिता और ऊस घर की सारे जेवरात और पैसे लेकर भाग गयी आहह उनके ही कंप्लेंट पे हम आए देखा मिया बीवी दोनों ही बुरी तरीके से बेहोश थे”…….सारी बातों को सुनकर मैं हाँ हूँ की आवाज़ निकल रहा था

खैर जल्द ही बाकी पुलिसवालो को भी हॉस्पिटल ले जा गया…एक लौंडिया और पाँच हटते काटते हत्यारों से लेंस पुलिसवालो को मर के भाग गयी…कैसी चोर है रे?…सबके होठों पे यही बात थी की बरती वारदात हो रही है और क्‍ाअल साया कहाँ है? लेकिन कोई नहीं जनता था वॉ अब वापिस नहीं आने वाला खैर ये मामला मुझे खुद ही सलटना था…ऊस रात तो नींद हुई छानबीन और गश्त के बावजूद ऊस रांड़ का कोई सुराग ही नहीं मिला

पूरी रात थाने में ही गुजर गयी सुबह 5 बजे घर की ओर रवाना लिया…हप्पी छोढ़ते हुए नींद इतनी लग रही थी की गाड़ी भी नहीं चला पा रहा था…कलकत्ता भी जान था और इस बढ़ते वारदात के इसूचना कमिशनर को भी देनी थी….रास्ते में अपना नया खरीदा हुआ घर मिल गया सोचा वहाँ तो दिव्या है ही चल वही चलता हूँ…गाड़ी को दो तीन बार हॉर्न बजाई पर शायद दिव्या सो रही होगी….अंगड़ाई ली मैं दरवाजा भी लॉक्ड दिव्या को बोलता ही हूँ सावधानी से सबकुछ बंद करके सोया करे…यहां तो काला साया की फुरती और दिमाग चाहिए

फौरन पास के पेड़ पे चढ़ा नींद में अवंगता हुआ और टहनी से ही ब्रांडे पे छलाँग मर दी…साला लूड़क के सीधे दीवार से जा टकराया नींद बहुत ज़ोर की आ रही थी और साला कंधा में ऐसा दर्द हुआ की आहह हनिकल गयी…अब बेटा काला साय तो रहे नहीं जो कूदोगे और प्रेक्टिस बरक़रार रहेगी

खैर दरवाजे पे दस्तक देने के बजाय पास ही की खिड़की पे चोर की तरह घुसा…पास ही की मिसेज़ शर्मा जॉगिंग कर रही थी साली मुझे देखकर चिल्ला ना दे बोले चोर्र चोर्र…लेकिन गनीमत थी की ऊस्की आँखें कमज़ोर थी जब सामने का माक्चर नहीं दिखता तो अपने से 30 में दूर के आदमी को क्या पहचानेगी? बिना चश्मा लगाई घूम रही थी…एक बार ऊसने गौर किया मैं ँततिहक गया फिर आँख बारीक़ करते हुए अंदर चली गयी उसे लगा शायद मेरे खाकके वर्दी से की मैं कोई जंगली बिल्ली हूँ

खैर घर के अंदर घुसा…बहुत सन्नाटा और अंधेरा था…सूरज की रोशनी की नयी नयी चाव दिखी…तभी देखता हूँ की दिव्या बिस्तर पे पेंट के बाल मुँह तकिये में घुसाए सो रही है…ऊस्की गहरी साँसों की आवाज़ को सुनते ही मैं भी फौरन अपना काप्रा उतारे..कक्चा पहने ही बिस्तर पे चढ़के धीरे से उसके गर्दन पे हाथ देकर लाइट गया…वॉ कसमसाई मैंने उसके कान में धीरे से अपना लिया..

तो वो घबरके उठती ही पर नींद में होने से मैं उसे ज़ब्रन अपने बाज़ूयो में कैद किया और अपने खड़े लंड उसके नाइटी को ऊपर उठाए गान्ड की दरार से चिपका दिया और फौरन उसके चेहरे पे अपना चेहरा रखकर सो गया

जब नींद खुली तो दोपहर 12 बज चुके थे एकदम से हड़बके उठा तो पाया टेबल पे नाश्ता पारा हुआ है…दिव्या शायद नहा रही थी…नाश्ता एकदम गरम था परांठे और आलू की भाजी फौरन कहा पीक..जूस को गटक के शेविंग की और ब्रश करके जैसे ही बाथरूम की तरफ आया दिव्या टावल लपटे बाहर निकली अफ क्या सौंधी खूबशु आ रही थी निकलते भाप के साथ महक की…बाथरूम से मैंने दिव्या को आँख मारी…और फिर जल्दी से नहाने घुस गया

जब बाहर निकाला तो वॉ सूट पहन चुकी थी…घर काफ इसाफ सुथरा लग रहा था हो ना हो सुबह जल्दी उठके ऊसने कामकाज घर का सारा निपटा लिया था…मुझे वर्दी पहनते देखकर बोली

दिव्या : तुम कब आए थे वॉ भी इतनी सुबह सुबह पता है तुम आते के साथ सो गये

देवश : और नहीं तो क्या करूं? एक तो खंभक्त काम और ऊपर से कमिशनर की मीटिंज्ग मां चोद के रख दी है

दिव्या : छी छी कभी तो अच्छे से बोला करो

देवश : मैं चिढ़ गया हूँ यार अच्छा नहीं लग रहा खैर मैं निकलता हूँ सॉरी आज तुम्हारी नींद खराब की

दिव्या : ना तो मैं 7 बजे उठी तुम बहुत ज्यादा थके हुए थे…तुम घर के अंदर घुसे कैसे? पता है मैं कितना डर गयी कौन मेरे साथ लेटा हुआ है

देवश : बाबू हमेशा याद रखना तुम्हारे संग सिर्फ़ एक ही मर्द के सो सकता है वॉ हूँ मैं और दूसरी बात आज जी नहीं किया घर जाने को अकेले अकेले क्या अब और सोयुंगा बचपन से ही तो अकेला था अब जब एक जवान औरत हो साथ में तो क्या मजा?? वैसे तुम्हारा मुँह क्यों लटका हुआ है?

दिव्या : कुछ नहीं वो आस पड़ोस के लोग पूछताछ करते है जब बाज़ार में मिलते है की तुम्हारा क्या रीलेशन?

देवश : पर डर के मारें नहीं बोलते जानते है मां चोद के रख दूँगा मैं उनकी कोई बात नहीं तुम टेन्शन मत लो मैं समझता हूँ एक जवान औरत एक आदमी के साथ रहती है तो ऊसपे लोग कितना शक करते है जाने दो हमें क्या हमारी दुनिया है

दिव्या केचेहरे पे हल्की मुस्कान आई…मैंने फौरन गाड़ी पकरी..

और निकल पड़ा बेचारी ने बहुत रोका लेकिन कलकत्ता 2 घंटे में पहुचना है…दिल में दुख भी था की दिव्या को मैं यूँ मैं अकेला चोद देता हूँ…क्या सोचती होगी? मैं उसके साथ फरेब कर रहा हूँ अकेले अकेले बस अपनी मन की आग शांत करता हूँ लेकिन अभीतक हम दोनों के बीच शादी का रिश्ता बना भी नहीं…उफ़फ्फ़ कितना टेन्शन है य्यार

जल्द ही मीटिंग पे पहुंचा…मीटिंग शुरू भी हो चुकिति मैं अंदर दाखिल हुआ पहले तो कमिशनर से माँफी की रिकवेस्ट की इशारो में ही और फिर अपनी कुर्सी पे बैठ गया…आज काफी बारे बारे अफ़सर आए हुए थे…प्रोजेक्टर स्टार्ट हुआ और फिर एक नक़ाब पॉश लड़की जिसने कृष जैसा मास्क हुआ पहना हुआ था स्क्रीन पे आई उसका चेहरे पहचान नहीं पाया पर बाला की खूबसूरत तो गोरी चिट्ठी और शायद ब्लॉंड उनके सुनहेरे बाल से ही लग रहा था

“ध्यान दीजिए ऑफिसर्स आज हमारी ये बैठक इसलिए हुई है क्योंकि हम इस शख्सियत के खिलाफ एक्शन लेने जा रहे है यक़ीनन ये आप लोगों के डिस्ट्रिक्ट्स में बढ़ती चोरी के मामलों में रही है…और इसके यूँ मुकोता से साफ जाहिर हो रहा है की अभी हाल ही में एक मिडनाइट विगिलियांते क्राइम फाइटर खुद को कहने वाला शॅक्स काला साया और इसमें कोई फर्क नहीं…आप लोग के डिस्कृतस इतर से पास ही है और चोरी की वारदातें पहले सिलगाओं सिलिगुरी मालदा कलकत्ता के पौष ईयालके और इतर में आजकल सुनाने को मिल रही है….इस लड़की का फुटेज हमें सी सी टी अभी कमरा से आत्म मशीन को तोधने के वक्त मिला हम इसके चेहरे को तो नहीं पकड़ पाए पर इससे साफ है की ये चालबाज़ चोर या यूँ कह लीजिए ये औरत काफी शातिर है ये आपको अपने हुस्न से दीवाना बना दे फिर आफ़ि के जेब में हाथ डाले और आप ये सोचे की ये आपका लंड पकड़ रही है बतौर ये आपके जेब को फड़के आपका माल लेकर चंपत हो जाने में माहिर है”………..सबकी हँसी निकल गयी फिर मामले को समझते हुए सब गहरी सोच में आ गये

“इसलिए आप लोगों को मैं बता देता हूँ की ये लड़की फिलहाल तो बढ़ते इन्वेस्टिगेशन के कारण कलकत्ता चोद चुकी है और फिलहाल इतर के नज़दीक उसके चोरियो को सुना जा रहा है इसने हमारे पुलिस की टीम को इंजूर्ड कर डाला अब ये लड़की कौन है? ये पता लगाना और इसे अरेस्ट करना आपका काम इनाम भी गोशित किए गये पर सब बेकार सो प्लीज़ गुयज़ लीव और पोज़िशन और कॉन्सेंट्रेट ऑन और न्यू केस डिसमिस”……सब अफ़सर उठके बातचीत करते हुए केबिन से जाने लगे

मैं कमिशनर के करीब आया “सॉरी सर पर मुझे लगता है की इतर में बढ़ती अपराधो में इसी लड़की का हाथ हो सकता है बिकॉज़ जैसे आपको इनफॉर्म किया था हमारी टीम को इसी ने एक झटके में मर के घायल कर दिया”…..कोँमिससिओने रछाश्मे को ठीक इए मेरी बात पे गौर करने लगा

कमिशनर – ऑलराइट तो मिस्टर.

देवश चटर्जी यू आर ऑन बिकॉज़ ई आम असाइंड यू तो अरेस्ट दीज़ तेइफ़ आस सुन आस यू कॅन वैसे भी आपनेजब से काला साया को मारा है तबसे आपकी प्रश्नासा मेरे एनिगाहो और भी उक्चि है

देवश – मानता हूँ सर जिंदगी की एक भूल तो की है उसे मर के लेकिन अगर यहां वो होता तो ये नहीं होती गुस्तकी मांफ सर (इतना कहकर मैं नजरें झुकाए केबिन से निकल गया)

पूरे रास्ते में बस सोच की कशमकश में डूबा हुआ था…इतर में ऊस रांड़ के आने का मतलब साफ है की मेरी जिम्मेदारी साली और तरफ गयी…अब बेटा चैन कहा…फौरन थाने पहुंचा पहले तो सब केस पे एक बार जाँच की…ऊन्हें निपटाने के बाद जहाँ जहाँ चोरी चोरी हुई थी वहां वहां गया…सब जगहों पे एक ही नाम की नक़ाबपोश लड़की जैसी चोर आई..और सबकुछ लूटके चली गयी उसके चेहरे पे बस एक मुखहोटा था…

पूरे टाउन का लगभग डेढ़ घंटा गश्त लगाया…लेकिन कोई खास रिपोर्ट नहीं वॉकी टॉकी ऑन थी..कोई रिपोर्ट नहीं आई थी..और ना ही किसी घर से कोई सूचना…ऊस रात मैं काफी तक गया था…और जैसे ही घर लौटने को हुआ…तभी देखा एक आदमी चोर्र चोर्र कहकर गाड़ी के बाहर चिल्ला रहा है

मैं उसके करीब आया ऊसने मेरा हाथ पकड़ते हुए बोला की एक लड़की बाइक से पूरी रफ्तार से भागी है…और उसका आत्म से निकले सूटकेस के पैसों को छींके भागी है ज्यादा दूर नहीं गई…साला आनंफनन में गाड़ी उसी रास्ते मोड़ दी….खूब तेजी से बढ़ता बढ़ा दी….रास्ता एक ही था रंडी बचके जाएगी कहाँ साइरन नहीं बजाया यहां दिमाग चलना था

मेरा पूरा ध्यान ऊस रंडी पे था….अचानक देखता हूँ एक लड़की नक़ाबपोश पहनी बाइक पे सवार है और फुरती से किसी स्टंट मान की तरह चला रही है ऊस्की निगाह जैसे मुझपर हुई मैंने फौरन बढ़ता तेज कर ली…कुछ मीटर दूर थी मुझसे…वॉ बार बार पीछे पलटके मुझे देख रही थी उसके बाइक पे एक सूटकेस फ़साआ था…मैंने फौरन रिवाल्वर निकाली लेकिन ऊसने बाइक सीधे दूसरी ओर पलट ईदया…गुस्सा तो काफी आया मैंने भी गाड़ी उसी ओर मोड़ दी…साला रास्ता इतना खराब था की सर पे चोट लग गया ऊस्की भी बढ़ता थोड़ी धीमी हो गयी

(UPDATE-41)

थॅंक्स तो और करप्ट एमएलए’से जिनके सिर्फ़ नाम बारे और दर्शन छोटे…रास्ता कभी ठीक ही नहीं कराया …..मैंने फौरन हाथ में गुण ली….और गाड़ी से थोड़ा बाहर निकाला और ऊसपे चलाई अफ ऊसने ऊस हालत में भी बढ़ता थोड़ी बढ़ा ली निशाना चूक गया दूसरीई गोली चली ढेययी..

और इस बार उसके बाइक पे लगा सूटकेस फहत से गिर पड़ा…काला साया तो बन नहीं सकता था अब सबकुछ एक काबिल ऑफिसर कीतारह करना था…मैंने फौरन गाड़ी को चलना ही मुनासिब समझा बिकॉज़ के पल की चूक और मेरी पूरी जीप लूड़क जाती इस गड्धेदार रास्तों पे

जैसे ही रास्ता ठीक हुआ ऊसने एकदम बढ़ता बधाई और भाग गयी…वॉ पीछे पलट के देख रही थी और मन में गालिया दे रही होगी पर मुझे तो बार ईशांति मिली ऊस्की नाकामयाबी से अब खिजलके अपनी खुजली मिटाने के लिए मेरे पास तो जरूर आएगी अरे भैईई हमला करने तब मैं उसे धार दबोचूँगा यहां से उसके दिल में मेरे लिए जो नफरत उमड़ी वो होना भी जरूरी था ताकि वॉ अब मुझे आत्ंघाती वार कर सके ऊसने मुझे पहचान लिया था

मैंने फौरन जीप रोकी..और फिर पीछे गिरी सूटकेस उठाई उसके अंदर रुपया था धायर सारा…वापिस जैसे जीप को हुआ देखा लो तैयार पुंकुत्रेड खराब रास्ते पे तेजी से चलाने की वाज से…मैं वही खड़ा रहा…और फिर बाकी टीम को सूचित किया की मुझे आए और रिसीव करे…तब्टलाक़ वही खड़ा हावव हावव करते जंगली जानवरों की आवाज़ के साथ किशोरे दा का गाना गाता रहा

सुबह के 11 बज चुके थे…और हाथों में चाय की प्याली लिए एक एक चुस्की मर के देवश की निगाह सूटकेस में भरे पैसे पे थी…जल्द ही सेठ आ गया और ऊसने खूबी धनञयवाद जताते हुए अपना सूटकेस लिया और फिर कुछ दस्तक्त करके चला गया ये सूटकेस कल रात को देवश ने ऊस चोर से चीनी थी…लेकिन कहीं ना कहीं अपने लिए एक मुसीबत जरूर बढ़ा ली थी…अब कैसे भी करके ऊस चोर का पता तो चलना ही था

काम काज खत्म करते करते…12 बज चुका था…जल्दी से दोपहर के लंच के लिए थाने से अपने घर आया…दिव्या वाले घर नहीं गया जब भी जाता हूँ तो अकेले में मन बहेक जाता है और फिर बिना सेक्स किए मन मानता नहीं..दूसरी ओर दिव्या के लिए फिक्र हो रही थी मुझे जैसे जैसे ऊस्की उदास चेहरे को देखता हमारे हिन्दुस्तान एक बात नायाब है जितना भी लड़की खुली हुई हो फ्रॅंक्ली हो लेकिन जब उसके साथ आप दस बार सेक्स कर लो तो बात शादी और प्यार पे आ ही जाती है…लेकिन सच कहिए तो मेरा ऐसा कुछ इंटेन्शन नहीं था उसके प्रति ई मीन मैं उससे शादी नहीं करना चाहता था

लेकिन उसे चोदना साहिल से भी बड़ा धोखा देने के लायक था उसके भी दिल में क्या उठेगा? खून तो एक ही भाई ने धोखा दिया और इसने भी..साला इसी कशमकश में नींद भी उड़ गया…बिस्तर से उठा खाना खाया…और फिर मुँह हाथ धोखे सो गया…शाम को दफ्तर पहुंचकर काम पे फिर ध्यान फही कुछ चौकसी और फाइल्स के लिए बाहर गया इन सब में रात हो गयी

और वही से गश्त लगते हुए घर की ओर फिर रवाना दिया…दिव्या को फोन करके बोल दिया की मैं घर आ रहा हूँ दरवाजा ना लगाए…और फिर पूरी रफ्तार से जीप चलाने लगा..

ऊस वक्त साथ में कोई नहीं था बहुत सुनसान व्यवान जंगल से गुजर रहा था हालाँकि शहर के कुछ रास्तों पे जंगल पढ़ जाता है…इस वजह से सुनसांसियत का अंदेशा फैल जाता है

अभी रोड क्रॉस ही करने वाला था देखता हूँ की सड़क पे कुछ पत्थरे गिरी हुई है..ओह लो अब ये क्या नया चक्कर? अभी जीप रोकके उतरना ही था एकदम से माता ठनक गया बेटा रुक जा…जगह सुनसान यहां कोई आता जाता नहीं…साँप को छोढ़के यहां कोई रहता नहीं…और सड़क के बीचो बीच पत्थर बिछी हुई है पक्का किसी दुश्मन का काम है…या तो कोई कैदी फरार होकर अब मुझे मारने के लिए आया है या फिर वॉ लड़की चोर

साला काला साया होता तो अपने स्किल्स से कुछ तो कर सकता..चल फिर भी एक पुलिसवाला हूँ डर किसका…निकाला रिवाल्वर हाथ में लिया और फहतक से जीप से उतरा…फिर धीरे धीरे चलते हुए सड़क के पत्थर को टटोलते हुए दो को हटा ही रहा था इतने में..कोई साया पीछे से गुजारा

मैं एकदम हड़बड़ाकर गुण उसी ओर मोड़ ली “आबे कौन है?”….मैंने चिल्लाया…कहीं दुश्मन के चक्कर में कोई बहुत प्रेत से सामना हो जाए…ऊस वक्त वो मूवी याद आ गयी जिसमें ऋषि कपूर की गाड़ी खराब हो जाती है और फिर स्राइडीवी एक साँप होती है इंसान बनकर गाती है भूली बिसरी एक प्रेम कहानी…फिर आए एक याद पुरानी….साला पूरा जिस्म सिहर गया…बेटा गान्ड फहटने लगी आबे कोई आत्मा तो नहीं क्या पता गश्त के चक्कर में किसी साँप को कुचल दिया हो और अब ऊस्की नागिन बीवी मेरी गान्ड डसने के लिए ही इंसानी रूप ली हो

एकदम से तिठके के जीप के पास आया चारों ओर देखा घना अंधेरा एक तो रात इतनी गहरी ऊपर से जीप की हेडलाइट ऑन है जिससे सामने का रास्ते पे गिरे पत्थर दिख रहे है…मैंने अपना टॉर्च लाया और इस बार जल्दी जल्दी पत्थर हटाने लगा इतने में क़ास्सके किसी ने गान्ड पे एक डंडा मारा..आअहह मैं एकदम से भौक्लके दर्द के मारें गिर पड़ा…अपने गान्ड को सहलाते हुए सामने देखा तो लाइट के सामने एक लड़की खड़ी थी…कोई और नहीं वही जानी पेचानी चेहरा मुकोता पहनी वो चोर जिसके हाथ में हॉकी का एक मोटा डंडा था

मैं अभी उठता ऊसने झाड़ के एक हॉकी डंडा मेरे घुटने पे और मेरे हाथ पे दे मारा….मैं गिर पड़ा दर्द बहुत ज़ोर से हुआ साला रोने रोने पे हालत हो गयी….लेकिन तीसरे वार के लिए ना उसे मौका मिलने वाला था और ना मुझे मर खाने का शौक साला एक ही वार में उसका डंडा पकड़ा और अपने काला साया के हुनर तरीकों से उठके उसके पेंट पे ही एक लात जमा दी

वो पेंट पकड़े गिर पड़ी इतने में मैंने उसके दोनों गले को कसके हाथों से जकड़ लिया “साली बहेनचोड़ड़ रुक्क तू”…….ऊसने मौका हाथ में लेते हुए अपनी औरतपाना दिखा दिया जब मेरे अंडकोष पे ही लात झाड़ दी..

मैं अपना पाँत के बीच को पकड़ा झुक गया ऊसने तब्टलाक़ जैसे ही हॉकी स्टिक उतनी चाही मैंने फौरन उसे कमर से उठाकर सीधे एक पेड़ पे जा पटका…ऊस्की करहाहत निकली लड़की की आवाज़ पर इस बार उसका जोश जगह गया और ऊसने मेरे मुँह पे घुसों की बौछार कर दी…साला बॉक्सर थी पता नहीं बहुत काश क़ास्सके गुस्सा झाड़ रही थी

साली को वही फैक दिया और पास रखी रिवाल्वर उठा ली और सीधे उसके छाती एप लगा दी…”बस बहुत हो गया यू आर अंदर अरेस्ट क्यों आबे साली? एक पुलिसवाले पे जानलेवा हमला करती है कमीनी”…….ऊस्की निगाह दिख रही थी कितनी हिंसक कितनी गुस्से में कहा जाने वाली निगाहों से मुझे देख रही थी

(UPDATE-42)

देवश : अब साली बनाएगी भी और ये चेहरे से मास्क हटा मास्क्क हटा रनडीी (मैं जैसे ही मास्क हटाने को हुआ ऊसने क़ास्सके मुझे एक धक्का मारा पर मेरी रिवाल्वर साला अंधेरे में कहाँ गिरी शितत)

वो लड़की भागी मैं भी भागा उसके पीछे…”आबेयी रुक्क”……वो कुछ नहीं कह रही थी यक़ीनन वो अपनी आइडेंटिटी छुपाने के लिए भागें जा रही त…मैं लंगड़ा लंगड़ा के उसके पीछे भाग रहा था…अचानक वो जंगल के भीतर घुसी…मैं भी घुस गया ना परवाह की जानवर की और ना ही साँप मिया की

सुना था इस जंगल में काफी ज़हरीले साँप होते है…वो भागें जा रही थी शायद वॉ डर गयी हो उसे लगा हो की मेरे हाथ में अब भी पिस्तौल है…मैंने भी झूठ बोलते हुए चिल्लाया “रुक जा वरना गोली मर दूँगा रुक्क जा”….मेरी आवाज़ पूरे जंगल में गूंज रही थी इतने में अचानक वो एक खंडहर के ऊपर चढ़ गयी

“मां की चुत साला इतना पुराना भुतिया खंडहर…कभी यहां मैंने काला साया बनकर शरण ली थी…मुझे एक चप्पा चप्पा पता था ऊस जगह का मैं भी उसके पीछे भागा….अचानक वो छत्त वाले हिस्से पे चढ़ गई…ये पुराना मंदिर होया करता था…लेकिन इंडो-बांग्लादेश वॉर के चक्कर में यहां के लोग सबकुछ चोद चाढ़ के भाग गये और जगह ऐसी जगह में मंदिर है डर से लोग बहुत प्रेत का नाम लगाकर नहीं आते…”आबेयी रुक्क जा अंदर साँप है”……मैंने चिल्लाया मैं उसके भले के लिए ही कह तो रहा था

अचानक देखता हूँ वो ठिठक गयी है चारों ओर खुला छत्त अब कूदेगी तो मरेगी..”मैं उसे सीडियो पे ही खड़ा होकर मना करने लगा की वापिस आ जाए और कानून को अपने हवाले कर दे…पर वो मेरी बात मानने के बजाय कूदने की फिराक में थी…अचानक देखा एक चीज़ रैंग्ता हुआ उसके करीब चल रहा है..”आबेयी पीछे देखह साँप हाीइ बचके साँप हाीइ”…..ऊसने सुना नहीं और अचानक से ऊस साँप ने उसके पाओ पे कांट लिया…वॉ बहुत ज़ोर से चीखी और फिर वही गिर पड़ी

मैं फौरन ऊपर आया…साँप तब्टलाक़ भाग चुका था…बाप रे ये तो काला साँप है गनीमत थी किसी कोब्रा ने नहीं दसा था…मैंने फौरन उसे उठाया और सीडियो से नीचे ले जाने लगा..

अचंकक गरर गरर करके बारिश शुरू हो गयी…ठंड तरफ गयी…फौरन उसे खंडहर के अंदर ले आया एक सुरक्षित उक्चे जगह पे उसे लाइटाया चारों ओर पत्ते परे हुए थे…ऊन्हें साफ किया फिर उसके कपड़े को हटाया उफ़फ्फ़ दो दाँत के निशान थे…लड़की पूरी तरीके से काँप रही थी…मैंने सोचा इसका मुकोता उतार ही देता हूँ

पर ऊस्की हालत ठीक नहीं थी…ज़हेर फैल जाएगा इतने देर में तो…ना जाने किस तरह का साँप था…चाहता तो ओसॉके हालत पे उसे चोद देता..पर इंसानियत भी कोई चीज़ थी…मेरी जगह काला साया होता तो वो भी यही करता मैंने फौरन ना आँव देखा ना ताँव और उसके ज़ख़्मो पे मुँह लगाकर उसका ज़हेर खीचने लगा..और उसे थूकते हुए हुए उसे चूसने लगा….बदल गाराज़ रहे थे बारिश ज़ोर से हो रही थी…कुछ देर बाद मैंने जल्दी से उसी हालत में भीगते हुए जीप से एक वॉटर बॉटल लाई…और कुल्हा किया…कुछ नुस्खे आते थे जब ऑर्फनेज में था तो एक गुरु थे जो योगा के साथ साथ ओझा भी थे…साँप का झाढ़ पता था ऊन्होने हमें कुछ चीज़ें भी बताई…

मैं उसी जड़ी बूटी को ढूंढ़ने लगा कारण बांग्लादेश से सटे होने पे यहां कुछ ऐसी जाडिया पत्तो के भैईस में पाई जाती है जिससे ज़हरीले सानपो का ज़हेर भी कट जाता है…मैंने फौरन ऊस पौडे को खोजने लगा करीब पास ही वो लत्तड़ो में मिला उसे उखाड़ा और उसके पत्तो को सहित ज़ोर से निचोड़ा उससे निकलता रस सीधे जख्म पे टपका तो लड़की ज़ोर से चीख उठी उसे दर्द हो रहा था…उसे ज़हेर पे मलने के बाद मैंने भी थोड़ा सा मुँह में ऊस रस को चुस्स लिया…भगवान का शुक्र था की मुझे कुछ हुआ नहीं पर मैं थोड़ा कमज़ोर सा महसूस कर रहा था

इतने में देखता हूँ की लड़की को होश नहीं आ रहा…लगता है की इसकी साँसें धीमी हो गयी है…शायद दर्द के मारें बेहोश हो गयी हो…अब क्या करूं?..साला बड़ा चक्कर बहुत गुस्सा तो आया था ऊसपे पर ऊस्की जवानी को देखकर गुस्सा भी पिघल गया…मैंने फुरती से उसके मुकोते का निचला भाग जो खुला था उसके होठों पे होंठ रख दिए….उफ़ कितना नरम गरम होंठ..कितना मुलायम मैं उसे मौत तो मौत साँस देने लगा ऊस्की मुँह के अंदर साँस देने लगा…दोस्तों मैं ऊस्की किस लेने में मजा आ रहा था पर गणीनात थी वो अभीतक उठी नहीं…अचानक दूसरी बार जब उसे किस किया…और उसके होंठ जैसे ही छोढ़के सीने पे दो हाथ रखकर दबाया वो खांसने लगी ऊस्की निगाह एकदम से मुझपर हुई और ेकूडम से घबरौ त बैठीी

देवश : ठीक हो? अरे दररो मत मैं तुम्हें कुछ नहीं करूँगा खमोकः ऊपर चली गयी थी साँप ने कांट लिया था तुम्हें तुम्हारा ज़हेर निकालके फैका तुम्हें साँस दी अब कैसा महसूस कर रही हो

लड़की : टीटी..तुंन्ने मेरी जान बचाइइ?

देवश : क्यों गलत किया? या अब भी बदला लेना है मुझसी बोलो

लड़की : देखो एमेम..

मुझे जाने दो

देवश : अच्छा जाने दूँगा पर एक वादा करना होगा की चोरी चोद डोगी

लड़की : मैंने कह दिया ना मुझे जाने दो

देवश : एक तो चोर ऊपर से सीना जोड़ी एक तो तुमको बचाया और ऊपर से तुम भाव कहा रही हो अगर चाहता तो तुम्हारा मुकोता उतरके चेहरा देख लेता लेकिन कुछ सेल्फ़-रिस्पेक्ट है दिल में (खांसने लगा और अचानक वही पष्ट पार गया साला लगता है जैसे हालत अब भी सही नहीं है वो मेरी हालत को गौर करने लगी)

मैं वही निढल सा पढ़ने लगा फिर किसी तरह उठा पर तब्टलाक़ वो मेरी हालत को गौर करते हुए एक एक कदम पीछे होने लगी…और मैं वही लरखरके गिर पड़ा…वो मेरे हालत को घूर्रती रही…फिर एक दो कदम करते हुए खंडहर से भाग गयी..और मैं वही लाचार निढल मज़बूर पड़ा रहा सही में मुझ जैसा चूतिया कोई नहीं कोई बात नहीं बचपन में धोखा मिला बारे में भी कौन सा प्यार मिलेगा? काश दिव्या यहां होती..अभी बर्बराह ई रहा था इतने में

देखता हूँ वो वापिस आई और ऊसने मुझे एक बार घूरा फिर मेरे पास रखी बंदूक ली और मुझे उठाया मेरी हालत बहुत ज्यादा खराब थी बहुत कमज़ोर हो गया था ज़हेर चूसने के चक्कर में…शायद कुछ रिएक्शन हो गया हो…ऊसने मुझे उसी हालत में उठाया और मैं बर्बरते हे उसके कंधे पे सर रखकर निढल हो गया

ऊसने कब मुझे किस तरह मज़बूती से जीप पे सवार किया और फिर खुद जीप पे बैठकर जीप स्टार्ट करके चलाने लगी कुछ पता नहीं…जब आँख खुली तो पता चला की मैं हॉस्पिटल में हूँ…डॉक्टर और हवलदार खड़े है…वो सब मुझे चेक कर रहे है खैर होश आया..तो पता चला की एक अंजान शॅक्स ने मुझे बाइक से हॉस्पिटल के पेशेंट वाले सीट पे लाइटाया और भाग गयी…मुझे पहचानते हुए डॉक्टर ने तुरंत एडमीशन किया असल में ज़हेर का कुछ कान मैंने पी लिया जिस वजह से मैं मौत के मुँह से बच्चा था…अब ज़हेर मैंने कैसे पिया इस बात का एक्सप्लनेशन देने के बजाय मैंने बारे ही सहेजता डॉक्टर को मुँह बंद रखने की ज्यादा हिदायत दी पुलिसवाला था ज्यादा कुछ हुआ नहीं ना ही ऊस रांड़ का कोई सुराग पुलिसवालो को बताया ताकि उसके पीछे वो लोग छानबीन ना करे

UPDATE-43)

आख़िर वो ऐसा क्यों की? चाहती तो मरर्ने के लिए मुझे चोर देती तो क्या वो आहेसन के बदले आहेसन जाता रही थी नहीं पता?…रात का एडमीशन सुबह जब ठीक हो गया तो हवलदारो ने ही मुझे किसी तरह जीप तक लाया मैनब चल सकता था खुद को सवास्त महसूस कर रहा था..कल रात के वाक़ये ने मुझे हिला सा दिया था वो मुझे मारने आई और हालत कहाँ से कहाँ पहुंच गई?

अचानक जीप पे अभी सवार ही हुआ था…की एक खत मिला..

ऊसमें कुछ लिखा था…यक़ीनन ये खत ऊस लौंडिया ने ही मेरे जेब में छोडा था मैं उसे सबकी नजारे से बचाए पढ़ने लगा

“तुमने मेरी जान बचाई उसी का ये इंसानियत के नाते एक वास्ता रहा…तुमचहते तो मुझे गेरफ़्तार कर देते…कल रात को तुम अगर मुझे ना बचाते तो शायद मैं कभी नहीं उठती..और अगर ना उठती तो मेरे जिम्मेदारी अधूरे रही जाते…मैं कौन हूँ क्या हूँ? ये मैं तुम्हें नहीं बता सकती पर मैं जो कुछ कर रही हूँ? वो मेरी जरूरत है? मैंने कभी भी इतना कुछ एक पुलिसवाले को बयान नहीं किया यक़ीनन मैं पुलिस वालो को अपना दुश्मन मानी हूँ दो बार गोली भी कहा चुकी हूँ पर तुम जैसा पुलिसवाला जिसके अंदर इतनी इंसानियत थी पहली बार देखा मेरा दो ही सवाल है तुमने मुझे मरने के लिए क्यों नहीं छोडा? अगर बचना चाहते तो मुझे अरेस्ट क्यों नहीं किया? मैं एक मुज़रिम हूँ तुम्हारी निगाहों में? प्रमोशन मिल जाता बंगाल की आधे से ज्यादा पुलिस मुझे मोस्ट वांटेड क्रिमिनल मानती थी फिर भी तुमने मुझे अरेस्ट क्यों नहीं किया? ये आहेसन हमेशा याद रखूँगी लेकिन इस बार अगर तुम मेरे रास्ते में आए तो गोली मर दूंगीइ सोच लेना”………….उसके खत को पढ़ते पढ़ते मैं कब गुम सा हो गया मुझे पता नहीं

क्या क्या लव्ज़ थे उसके मन के? उसके मन के सवालों का जवाब सच में मैं दे नहीं पा रहा था…काश उसका कोई ई-मैल आइडी होता काश कोई फेसबुक होती तो चाट में बताता काश वो मुझसे फिर मुलाकात करती तो उसे बयान करता की ना जाने क्यों? उसे देखकर मेरा मन बदल गया…साली ने अच्छा खत चोद दिया मेरे लिए…लेकिन मिलेगी तो जरूर और मैं ऊस मिलन के लिए ही बेचैन उठा…चाहे वो मुझे सामने गोली क्यों ना मर दे जैसे ऊसने कहा? लेकिन इस बार उसके बारे में बिना जाने उसे जाने नहीं दूँगा

मैंने ऊस खत को पॉकेट में भर लिया…तब्टलाक़ दिव्या का फोन आ चुका था देखा 4 मिस्ड कॉल है…फटाफट उससे बात करके उसे शांताना देने लगा की मैं कहीं फ़ासस गया था इसलिए कल रात आ नहीं पाया…लेकिन सच पूछो तो दिल-ओ-दिमाग में बस वही लड़की बसी हुई ऊस्की बातें घूम रही थी

काश मैं उसका नाम जान पाता…क्या कहती है वो खुद को क्या नाम है उसका? मैंने खुद ही उसका एक नाम रख दिया काली साया अब काली साया से मिलने का प्रोग्राम बनाना बेहद ही जरूरी था..और ये प्रोग्राम किसी के घर में रातों रात चोरी की वारदात से शुरू होगी मुझे पता था लेकिन वो किस मज़बूरी का नाम ले रही थी…ये मेरी समझ नहीं आया शायद वो कोई गरीब हो हाला तो की मज़बूर अक्सर चोर तो ऐसे ही होते है…क्या पता उसका बच्चा हो? या फिर कोई परिवार मेरी कशमकश तब खत्म हुई जब ब्रांडे में खड़ी दिव्या को देखा मेरी जीप देखते हुए

“आहह हाहह सस्स आहह प्लीज़ आहह आअहह ओह टेररीि की”……..

अचानक से देवश की नींद खुली तो एक झटके में शीतल ने उसे धकेल दिया

शीतल उठके अपने होठों पे लगे थूक को पोंछते हुए होंठ सहलाने लगी उंगलियों से “पागल हो गये क्या भैया चबा ही जाते इतना कोई क़ास्सके चुम्मा लेता है”…….देवश अंगड़ाई लेकर अपने बेवकूफी पे हस्सता है

शीतल : आप तो मुझपर टूट ही परे…नींद में भी पता नहीं काली साया काली साया कर रहे थे मैं क्या आपको बाला लगती हूँ (शीतल नाराज़ होकर अपने नंगी छातियो पे चढ़र धक्के मुँह फहर लेती है)

डीओॉश को लगा की वो शीतल के नहीं बल्कि काली साया को किस रहा था उसके साथ सेक्स कर रहा था दिलों दिमाग पे तो चाय थी अब साला नींद में भी उसी को तस्सावार करने लगा था डीओॉश उसे बेहद गुस्सा आया और साथ में शीतल के कटे होंठ को देखकर अफ़सोस भी हुआ

देवश : अच्छा मेरी सफेद रसगुल्ला चल भाई को मांफ कर दे

शीतल : नहीं करूँगी पता है आपको आपने कितने ज़ोर से मेरे साथ सेक्स किया

देवश : अच्छा मेरी मां ई आम सोररय्ी कान पकड़ लिए ठीक (शीतल तभी मायूस थी..देवश ने मुस्कुराकर फ्रीज से एक बड़ा सा कितकट का चॉकलेट शीतल के हाथों में थमा दिया)

शीतल खुशी से पागल हो गयी चॉकलेट की दीवानी थी वो….और देवश मिया को औरत को खुश करने के छोटे छोटे चीज़ें पता है..शीतल का घुसा पलभर में प्यार में बदल गया…”श भैया आप कितने अच्छे हो”…..शीतल फिर देवश के गले लग गयी

देवश ने प्यार उसके गाल पे हल्का चुम्मा लिया और फिर उसके होंठ को प्यार से सहलाया..दोनों कुछ देर तक प्यार भारी बातें करते रहे और फिर देवश अपनी वर्दी पहनें तैयार होने लगा…शीतल भी उठके बर्तन ढोने चली गयी नंगी ही…देवश की नियत फिर नहीं बिगड़ी क्योंकि उसे इसकी आदत थी अब तो एक और सुररूर सा चढ़ चुका था काली साया के नाम की

देवश जल्दी से थाने पहुंचा…अचानक टेलीफोन बज उठा…”हेलो इंस्पेक्टर डीओॉश चटर्जी स्पीकिंग”……..पास ही एक सेठ की मरियल रोई आवाज़ सुनाई दी…पता चला की उनके घर में कोई लड़की घुस गयी है नक़ाब पहनें डकैती कर रही है…और अभी ही फरार हुई है…जगह का नाम सुनकर फौरन मैंने मुस्कुराकर दिल ही दिल में खुश हुआ

पुलिस की जीप भी तीन चार ऊस चोर को पकड़ने के लिए मेरे साथ निकल गयी…साइरन से पूरा रास्ता गूंज उठा…”हवलदार रामू तुम उतार जाओ मैं अकेले ही ऊस लौंडिया को देख ल्टा हूँ तुम बाकी जीप में बैठ जाओ ताकि मैं जब फोन करूं तब पहुंच जाना”……..हवलदार ठीक है साहेब बोलकर उतार गया उसे लगा शायद काला साया की तरह इसे भी मैं मर सकता हूँ

पर वो बंदर क्या जनता था की आद्रक का स्वाद क्या है?….मैंने जीप दूसरी रास्ते मोड़ दी….

जल्द ही बाकी पुलिसवाले सेठ के घर पहुंचे…गुण से लेंस पुलिसवालो ने जगह को घैर लिया एक एक कमरा सबकुछ चेक किया चोर तो फरार थी ही साथ में तिजोरी का सामान भी गायब था

जैसे ही हवलदार ने मुझे बताया फौरन मैं दूसरी लोकेशन की ओर मुड़ा…दिमाग कह ही रहा था की वो ज्यादा दूर नहीं गयी है और तभी मैं हाइवे पे ही लौंडिया दिख गयी कैसे मस्तानी अपनी गान्ड बाइक सीट पे रखकर पूरी बढ़ता में बाइक चला रही थी….मैंने उसके पीछे हुआ…..वो काफी दूर थी मेरी जीप भी ठीक उसके पीछे थी…लड़की ने फौरन गाड़ी को फुरती से दूसरे रास्ते मोड़ दिया….वहां नाकाबंदी लगी थी…अब यहां मुझे फीरसे चाल खेलनी थी…”ये लड़की तो गयी अगर पकड़ी गयी तो फिर मेरा क्या होगा?”…..मैं बड़बड़ाते हुए फौरन ऊस रास्ते की ओर मुड़ा

(UPDATE-44)

तभी नाकाबंदी चौंक पे लगे पुलिसवालो ने फाइरिंग स्टार्ट कर दी…वो लड़की पूरी तरह से घबरा गयी पर हार नहीं मानी…और ऊसने पूरी रफ्तार से अपनी प्रोफेशनल हुनर के बदौलत सामने बाइक के पोज़िशन को हवा मैंने उठाकर दूसरे हाथ से गोली चलानी शुरू कर दी…कुछ पुलिसवाले घायल हुए और ऊसने फौरन स्किट कहा ली…बाइक तिरछी होकर ऐसे फिसलते हुए चेक पोस्ट के नीचे घिस्सती हुई बढ़ता में दूसरी ओर निकल गयी की बचे कुचे पुलिस ऑफिसर्स बस गोलीचलते रहे…लेकिन तभी ऊस्की बाइक गाड़ी के सामने टकरा गयी…और वो सीधे गुलाटी खाते हुए सड़क पे गिरी…ऊस्की आहह सुनते ही मैंने फौरन जीप सामने रोक दी…जिस गाड़ी से टकराई थी ऊसमें बैठा शॅक्स उसे पकड़ने को हुआ पर बेचारा अपनी हड्डिया तुड़वाने के चक्कर में ही निकाला था घायल लड़की ने उसके मुँह पे एक बक्ककीकक ही इसे जागी की वो बेचारा वही गर्दन पकड़े गिर पड़ा…पुलिस आई नहीं तक इस रास्ते…वो आदमी बेहोश हो गया था मुआना करते ही मैंने जीप उसके सामने रोक दी वो मुझे देखकर चौक गयी

इससे पहले हुममें से कोई कुछ समझ पता..मैंने उसका हाथ पकड़ा और सीधे उसे अंदर खींच लिया..और उसके ऊपर मोटा गंदा सा कंबल उड़ा दिया प्लान के मुताबिक…तब्टलाक़ पुलिसवाले आ गये और मेरी जीप को देखकर बोल उठे “साहेब ऊस्की बाइक गिरी हुई है आपने उसे देखा”……मैंने ऊन बेवकुफो को बोला की वो जंगल के रास्ते भागी है पुलिस की एक टुकड़ी जंगल के रास्ते भागी किसी को शक नहीं था की मेरी ही जीप में वो चुप्पी हुई थी…जो शॅक्स गिरा था वो कुछ देख नहीं पाया वो बेहोश पड़ा था मर खाके

“तुम लोग इसी रास्ते पे चेक करो वो ज्यादा दूर नहीं गयी होंगी मैं दूसरे रास्ते जाकर पता करता हूँ”……..”ठीक है साहेब”……पुलिसवालो को समझाके मैं उल्टे रास्ते ऊस रास्ते से बेहद दूर निकल गया…..

कुछ देर बाद ऊसने मुँह से कंबल हटा कर ख़ास्ते हुए पीछे की ओर देखा चारों ओर बेहद सन्नाटा भरा रास्ता था वो एकदम से उठ बैठी

देवश : में साहेब आप ठीक तो होआप?

लड़की : तुम पूरे पागल हो मेरी वजह से तुम भी साज़िश के नाम पे फ़ासस जाते क्यों बच्चा रहे हो मुझे? एक पुलिसवाले होकर मेरी मदद क्यों कर रहे हो?

देवश : अब ये मत कहना मैंने फिर आहेसां किया…तुम्हारे पास वो बैग है जो तुमने अभी चोरी की

लड़की : हे..हाँ ये रही

देवश : फौरन मुझे दो अब ये मैं ज़ब्त कर रहा हूँ

लड़की : दीखू मेरे के..आम में आड़.छान मत डालू मुझे पैसों की जरूरत है यही तो मेरा काम हाीइ प्लीज़ मुझे वो पैसे दे दो वरना मैं

देवश : वरना क्या? आप हुम्हें भी बाकियो की तरह हाड़िया तोड़के बेहाल चोद देंगी ऊस रात का वाक्य अब भी याद है साँप का ज़हेर तो मैंने निकाला जान भी आपकी बचाई पर शायद आपने हमें अकेला नहीं छोडा अपने तब सोचा नहीं आप एक पुलिसवाले की मदद

लड़की : गलती हो गयी मुझसे मांफ कर दो प्लीज़ (ऊसने हाथ जोधते हुए रोई सूरत बनाई) मैं नहीं जानती थी तुम इतने चिपकू निकलोगे पुलिसवाले होकर छिछोरे भी हो तुम

देवश : श मिस काली साया मैं सिर्फ़ आपकी मदद करना चाहता हूँ ताकि आप को इस दलदल से निकल सुकून इसमें मेरा कोई लाभ नहीं बस मैं आपकी मदद चाहता हूँ…

लड़की : पता नहीं तुम मुझसे क्या चाहते हो? देखो अगर मेरी मज़बूरी का फायदा उठा रहे हो तो अच्छा नहीं होगा तुम मुझे नहीं जानते

देवश : और अगर मैं कहूँ की आप मुझे नहीं जानती तब क्या करेंगी आप?

लड़की : क्या मतलब?

देवश ने फौरन और कुछ नहीं बोला बस ऊस लड़की को वापिस लाइत्न्े को कहा और उसके ऊपर कंबल ओढ़ दी दो चेक पोस्ट से गुजारा फिर अलर्ट किया की ऐसी लड़की को ऊसने देखा तक नहीं…पुलिस भी दूसरी रास्ते की ओर जा चुकी थी अब लड़की पूरी तरह से सेफ है…देवश ने मुस्कराए गाड़ी रोक दी…और फिर मैं दरवाजा को खोल के जीप को फिर अंदर लाया

ये काला साया वाला ख़ुफ़िया घर था जहाँ वो दिव्या को लेकर आया था….लड़की एकदम से उठ बैठी और फिर चारों ओर देखने लगी…दोनों अंदर आए…और फिर अंदर आकर…ऊसने फौरन मैं स्विच ऑन किया…घर के अंदर आकर एक रूम का दरवाजा खुल गया…लड़की चारों ओर हैरत से देख रही थी इतने जल्दी एक पुलिसवाले पे भरोसा करके वो खुद के लिए खतरा भी पैदा कर रही थी पर शायद उसे कहीं ना कहीं यकीन था

जल्द ही रूम के खुलते ही वर्दी के दो स्तनों खोल के देवश ने मुस्कुराकर एक तरफ के कपड़े को हटाया दराज़ में दो मुखहोते परे हुए थे और हॅंगर में काला साया के कपड़े…और उसके कुछ हत्यार एक तरफ..ये सब देखकर लड़की कभी हैरत से डीओॉश को तो कभी ऊन दराज़ में रखकर चीज़ों को देख रही थी

लड़की : त…आस क्या त..

तूमम्म्म ही वो हो?? जो बहुत मशहूर हाीइ जो जुर्म के खिलाफ लधता है

डीओॉश : जी हाँ में साहेब हम ही वो नाचेज़ है मैं ही हूँ काला साया

लड़की : टीटी…अब तो तुम मुझे भी पकड़ने आए हो है ना पुलिस के हाथों दे दोगे

डीओॉश : जो इंसान सिर्फ़ अपने ईमान और अपने कानून से दुनिया की भलाई कर रहा था उसे इन्हीं पुलिसवालो ने मर डाला तो फिर तुम क्यों फिक्र कर रही हो? मैं तुम्हें क्यों उनके सुपुत्र कर दूँगा

लड़की : मुझे यकीन नहीं हो रहा की तुम काला साया थे…पर तुम मर कुछ समझी नहीं

फिर देवश बताता चला गया उसे अपनी जिंदगी का कड़वा सच कैसा बना वो एक काला साया? कैसे जिंदगी ने उसे ऐसे कटघरे में लाके खड़ा कर दिया जहाँ एक तरफ कानून की मदद तो दूसरी ओर कानून तोड़के वॉ इंसाफ करता आया था…अपनी नयी जिंदगी के चलते ऊसने काला साया को खत्म कर दिया था….सबकुछ जानके लड़की एकदम ठिठक गयी

डीओॉश : मैं नहीं चाहता तुम मुझसे भी बड़ा गुनाह करो…ना ही मैं तुम्हारी जिंदगी खतरे में डालना चाहता हूँ तुम्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे अपने अक्स को देख रहा हूँ

लड़की : तुम मुझसे क्या चाहते हो?

UPDATE-45)

डीओॉश : पहले तो ये बताओ ये सब क्यों करती हो? हालत मज़बूरी या फिर गरीबी

लड़की : अगर वादा करोगे की तुम कभी ये बात किसी को ना कहो तो यक़ीनन कहूँगीइ एक एक चीज़ बतौँगिइइ कितना दर्द है मेरी जिंदगी में सबकुछ

डीओॉश : मैं सुनाने को बेताब हूँ पर क्या ऊन सब के बावजूद अपना मास्क उतारके मुझे अपना चेहरा दिखावगी

लड़की : यहां आई जरूर हूँ पर भरोसा अभी पूरा नहीं हुआ…

डीओॉश : तुमने मेरे दोनों चेहरे को देख लिया है इसलिए मैं तुमसे कुछ छुआपाया नहीं हूँ अब चुप्पने को बाकी क्या है? मैं तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हूँ

फिर ऊस नक़ाबपोश लड़की के आंखों में आँसू घुल गये और इसकी आवाज़ भारी हो गयी वो रो रही थी दिल ही दिल में कहीं…ऊसने बताया की वो आंजेला नाम की नूं की बेटी है..जिसकी मां आंग्लो इंडियन थी…पर उसके बाप ने उसे इंडिया लाया था…यहां आकर उसका बाप का सारा पैसा कारोबार सब बंद हो गया….बाद में उसका बाप शराबी बन गया…मां इधर उधर फूल बैचके पैसे इकहट्टे करके घर का गुजारा करती थी….

ऊस्की खूबसूरती और बढ़ती उमर से ऊस्की जवानी पे हर किसी की हवस भारी निगाहें थी कोई भी भेड़िया उसका शिकार करने को बेताब था बस मौका ढूंढता था

और एक दिन कोहराम सा आ गया उसका बाप शराब की लत्त से मारा गया ऊस्की टड़िया और लंग्ज़ जल गये थे…घर का गुजारा बहुत गरीबी से चल रहा था…और फिर अचानक आंजेला जिसने अपनी प्यार के लिए नूं को भी चोद दिया था इतनी बड़ी क़ुर्बानी दी थी…सदमें घिरर सी गयी…और ठीक एक दिन ऊस्की भी मौत हो गयी ऊसने ज़हेर कहा लिया था…कर्ज वाले दरवाजे पे दस्तक देते थे ये भी एक वजह थी…इधर उधर की फूल बैचते बैचते एक दिन ऊसपे कुछ लोगों की निया खराब हो गयी वो भागी भागती रही और इसी भागा दौड़ी और चुप्पा छुपी में उसके पास रखकर पत्थर से ऊसने एक बदमाश को जान से मर डाला

पुलिस उसके पीछे लग गयी…और वो कलकत्ता भाग गयी…वहां जाकर पहले तो ऊसने किसी तरह इधर अपना वक्त काँटा और फिर गरीबी से झुंझते झूंते किसी बारे पठान के हाथों में बिक गयी पठान का खून करने के बाद कोई चारा नहीं था…और फिर वही से वो क़ातिल बन गयी और ऊसने अपने चेहरे को गुप्त रूप से छिपाते छिपाते खुद को एक नक़ाबपोश चोर बना लिए जिसका पेशा चोरी और क़ातिलाना हमला था…पुलिस उसका कोई सुराग आजतक नहीं लगा पाई थी

मेरे निगाहों में उसके प्रति बहुत दुख था…हालाँकि ऊस्की कहानी भी मेरी कहानी से मिलती जुलती थी…लेकिन जितना दर्द ऊस लड़की के जिंदगी में था वो मुझमें कहा मैंने धीरे से उसके कंधे पे हाथ रखा

देवश : हालत तो मैं बदल नहीं सकता तुम कहीं भी जा नहीं सकती पुलिस मौके पे ही तुमको गोली से उड़ा देगी

लड़की : मेरे पास कोई भी चारा नहीं है मैं कुछ नहीं कर सकती इन कमीने सेठ लोगों के चलते ही आज मेरी जिंदगी नरक बनी जिन जिन को मैंने लूटा वो लोग पेशेवर सेठ है या फिर इनकम टॅक्स ऑफिसर जो लोगों को लूटते है और फिर खुद के जेब को भरते है ऐसे लोगों से मुझे चिढ़ है

देवश : मैंने भी कई खून किए है लेकिन कभी इसे अपनी मज़बूरी नहीं समझी कभी हावी नहीं होने दिया…अगर तुम कहो तो मैं तुम्हें सपोर्ट करूँगा वही काम तुम अच्छे के लिए करो तो शायद मैं तुम्हें इंसाफ दिला पौ

लड़की : यहां का लॉ इतना अँधा है ये मेरी काहं सुनेगा? जल्दी ही पकड़ी गयी तो उमर कैद होगी

देवश : और अगर मैं कहूँ की चैन से लड़ने की आज़ादी तो (लड़की बारे ही गौर से मेरी बातों को गौर करके चुप हो गयी)

लड़की : मुझे वक्त चाहिए मेरी बाइक भी ऊन लोगों के हाथ लग गयी दूसरी का इंतजाम करना होगा

देवश : चोरी करके

लड़की ने मेरी ओर तीखी नज़रो से देखा “ये लो पैसे”….उसे गिनाते ही उसके होश उड़ गये करीब 20000 थे…”इन चाँद रुपयों के लिए जो गुनाह तुम अपने सर ले रही हो वो कानून कभी ना कभी नजरअंदाज कर देगा पर ऊपरवाला कभी नहीं”….

मेरी बात को सुनकर चुप सी हो गई “बस मुझे सोचने का कुछ वक्त दो”….चुपचाप वो बस गुमसूँ रही

“ओह हेलो जा रही हो शायद फिर ना मियालने की बात कहो क्या नाम से पुकार उतूम्हें?”…….मैंने मुस्कराए उसके जाते कदमों को रोकते हुए कहा

“जो तुम कहते हो मुझे काली साया ब्लैक शॅडो”……..ऊसने मुझे आँख मारी और मुस्कुराईइ “कलेजे को ठंडक पहुँची तुम जैसे शॅक्स से मिलकर जो लोगों के लिए इतना कुछ करता है खुद को मुरज़रीम आज महसूस कर रही हूँ चाहती तो मैं भी कर सकती थी लेकिन ये मुलाकात हमेशा याद रखूँगी अलविदा”…….इतना कहकर वो मुस्कराए बाहर भाग गयी

अब किस तरफ गयी पता नहीं अंधेरा हो गया था…जब बाहर निकाला तो पाया की उसका मुकोता गिरा हुआ था…हूबहू मेरे मुखहोते जैसा…और उसके पीछे लिपस्टिक से लिखा हुआ था “काली साया”………मैं मुस्कुराकर ऊस मुकोते को चूम के चार और देखने लगा यक़ीनन किसी के नज़रो में वो नक़ाबपोश सहित ना आ जाए इसलिए ऊसने खुद के कपड़े और नक़ाब को उतार डाला था

उसका असल चेहरा बेहद खूबसूरत होगा या मैं अंदाज़ा लगाने लगा..

वो रात काफी यादगार थी मेरे लिए…काली साया से मिलने के बाद तो जैसे दिल पे ऊसने एक लकीर चोद दी थी…मैंने आजतक कभी किसी को अपना सच नहीं बताया लेकिन ना जाने क्यों उसके दुख और गम ने मुझे ऐसा मज़बूर किया की मैं बिना अपना पर्दाफाश करे रही नहीं पाया उसे यह कह डाला की मैं ही काला साया हूँ…अगर बयचाँसे वो ये बात मेरे दुश्मनों को कह दे या फिर ये एक चाल हो महेज़ दो पल की कशिश ने मुझे ऊस्की तरफ यूँ खींच डाला और मैं सबकुछ भूलके उसे एकदम अपना मानने लगा

इन सब कशमकशो के बीच फौरन काली साया को बचाने का इंतजाम करना था..पहले तो चोरी किए गये सेठ के घर से चुराए पैसों की गठरी को पुलिस स्टेशन में सुपुर्द किया और ऐसा जताया की छानबीन में चोर ने गठरी भागते वक्त फैक दी जो जंगल में पाई गयी…ताकि इससे शक कम हो….लेकिन साला ऊस्की बाइक पुलिस ऑफिसर्स के हाथ लग चुकी थी और ऊस्की जाँच पर्ताल हो रही थी किससे ली गयी या चोरी की है? सारा दाता पुलिस ऑफिसर्स ने छानबीन करना शुरू किया

लेकिन काली साया भी कोई कम नहीं थी मुझसे…शातिरो की रानी थी…ऊसने बेहद सरल तरीके से चोरी की थी वो बाइक…और जब इन्वेस्टिगेशन हुआ…तो किसी अमीर सेठ अंबानी के बेटे की चोरी हुई बाइक थी जो अबतक नहीं मिली थी….हां हां हां पुलिस फिर खाक छानते रही गयी और काली साया का कोई सबूत नहीं मिला सब हाथ मलते रही गये…खैर ऐसे दो दिन बीत गये

उसके ऊपर का खतरा तो जैसे तैसे टाल गया था…लेकिन क्या मेरा राज़ जानके? वो चोरी का लाइन छोढ़के मेरे संग जुर्म के खिलाफ लारेगी?…इस बात की मुझे कम ही उम्मीद लग रही थी भला चोरी का काम छोढ़के वो मेरा साथ क्यों देगी? उसे पुलिस की गोली खाने का तो शौक नहीं होगा..

खैर मैंने भी उसके संग बिताए लम्हो को भुलाया नहीं..लेकिन मैं इन दो दीनों में ही उसे मिस करने लगा ना जाने क्यों उसके हाँ का इंतजार था बस उसके मुकोते को लिए सहलाता रहता

दिव्या भी आजकल मेरे नये बर्ताव से थोड़ी अचरज थी…मैं बिस्तर पे आंखें मुंडें लेटा हुआ था…और फिर ऊसने मेरे सीने पे हाथ फिराया…”क्या हुआ बारे ही गौर से देख रहे हो इस मुखहोते को”…….ऊसने धीमे लव्ज़ में कान में फुसफुसाया…उसे पता नहीं था की मेरी मुलाकात किससे हुई थी

देवश : बस ऐसे ही
दिव्या : आजकल तुम पहले जैसे रहे नहीं बहुत सोच में डूबे रहते हो अब तो सब नॉर्मल हो चुका फिर किस बात का तुम्हें गम?
देवश : देखो दिव्या कुछ बातें बताई नहीं जाती
दिव्या : अच्छा ग

दिव्या ने जब देखा की मैं एकदम उसे इग्नोर कर रहा हूँ..तो वो खुद करवट बदलके सोने लगी…मैं भी अपनी सोच से जागा और मुखहोते को दराज़ के अंदर रखकर वापिस बिस्तर पे आया..पहले दिव्या को जगाना चाहा लेकिन मन नहीं ताना..मेरे दिलों दिमाग में ऐसी वो हावी हुई थी की मैं दिव्या को ही इग्नोर करने लगा…क्यों? क्या सिर्फ़ मेरे अंदर बाकियो तरह वासना है?…जबकि दिव्या ने मेरे लिए इतना कुछ किया है..मैंने फौरन दिव्या के बगल में लायतके उसके ज़ुल्फो को सहलाया..दिव्या फौरन ही मुझसे लिपट गई

मैंने दिव्या की प्यज़ामे के अंदर ही हाथ डाले पैंटी के भीतर झांतों पे उंगली फहीराई और फिर दो उंगली किसी तरह चुत में करनी शुरू की…दिव्या कसमसा उठी..मैं उसके टांगों पे टाँग रखकर खूब ज़ोर से अंगुल करने लगा दिव्या कसमसाए जा रही थी…और फिर ऊसने बेतहाशा मेरे मुँह पे चूमना शुरू कर दिया…मैंने उसे सीधा लिटाया और चुत में उंगली करता रहा..फिर उसके सलवार को भी खोल डाला पैंटी भी उतार फैक्ी…जंपर भी उतार फ़ैक्हा….और उसके चुत के मुआने में ही मुँह डाल दिया

उम्म्म आहह आअहह..वो खुद ही मेरे सर को अपने चुत पे रगड़ने लगी..हालाँकि उसके सपोर्ट के लिए ही मैं उसे प्यार कर रहा था ताकि वो खुद को अकेला ना महसूस करे….लेकिन दिल-ओ-दिमाग पे तो कोई और ही चाय थी..कुछ देर तक ऊस्की चुत को चाटने के बाद मैं ऊसपे चढ़ बैठा….और फिर लगाने लगा धक्के…दिव्या भी पूरा साथ दे रही थी कुछ ही देर में ही मेरे धक्के तेज हुए दिव्या के टाँगें मेरे कमर में खिस्स गयी ऊसने क़ास्सके अपने गान्ड को मेरे लंड से दबा लिया और फिर मेरे अंदर का सारा तूफान पानी बनकर उसके चुत में ही झड़ गया

कुछ देर में ही मैंने अपना लंड ऊस्की गीली लबालब चुत से बाहर खींचा और पष्ट परे ही बगल में लाइट गया…एक हल्की चादर ओढ़ दी दिव्या को और वो सोने लगी..मैं भी उठके वॉशबेसिन पे ब्रश करने लगा…बार बार काली साया का ख्याल आ रहा था दिमाग में कब आएगी वो कब मिलेगी? कही फिर किसी मुसीबत में…

त्रृिंगगग त्रिंगगग..

करीब 3 दिन बाद थाने में एक सीरीयस केस मिला…”हेलो इंस्पेक्टर देवश चटरर्ज़ी स्पीकिंग”….फोन रिसीवर उठाते के साथ

“हे..हेल्लू सर मैं आप..काक हब्बरी बोल रहा हूँ”…..खबरी की आवाज़ थी

UPDATE-46)

डीओॉश : पहले तो ये बताओ ये सब क्यों करती हो? हालत मज़बूरी या फिर गरीबी

लड़की : अगर वादा करोगे की तुम कभी ये बात किसी को ना कहो तो यक़ीनन कहूँगीइ एक एक चीज़ बतौँगिइइ कितना दर्द है मेरी जिंदगी में सबकुछ

डीओॉश : मैं सुनाने को बेताब हूँ पर क्या ऊन सब के बावजूद अपना मास्क उतारके मुझे अपना चेहरा दिखावगी

लड़की : यहां आई जरूर हूँ पर भरोसा अभी पूरा नहीं हुआ…

डीओॉश : तुमने मेरे दोनों चेहरे को देख लिया है इसलिए मैं तुमसे कुछ छुआपाया नहीं हूँ अब चुप्पने को बाकी क्या है? मैं तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हूँ

फिर ऊस नक़ाबपोश लड़की के आंखों में आँसू घुल गये और इसकी आवाज़ भारी हो गयी वो रो रही थी दिल ही दिल में कहीं…ऊसने बताया की वो आंजेला नाम की नूं की बेटी है..जिसकी मां आंग्लो इंडियन थी…पर उसके बाप ने उसे इंडिया लाया था…यहां आकर उसका बाप का सारा पैसा कारोबार सब बंद हो गया….बाद में उसका बाप शराबी बन गया…मां इधर उधर फूल बैचके पैसे इकहट्टे करके घर का गुजारा करती थी….ऊस्की खूबसूरती और बढ़ती उमर से ऊस्की जवानी पे हर किसी की हवस भारी निगाहें थी कोई भी भेड़िया उसका शिकार करने को बेताब था बस मौका ढूंढता था

और एक दिन कोहराम सा आ गया उसका बाप शराब की लत्त से मारा गया ऊस्की टड़िया और लंग्ज़ जल गये थे…घर का गुजारा बहुत गरीबी से चल रहा था…और फिर अचानक आंजेला जिसने अपनी प्यार के लिए नूं को भी चोद दिया था इतनी बड़ी क़ुर्बानी दी थी…सदमें घिरर सी गयी…और ठीक एक दिन ऊस्की भी मौत हो गयी ऊसने ज़हेर कहा लिया था…कर्ज वाले दरवाजे पे दस्तक देते थे ये भी एक वजह थी…इधर उधर की फूल बैचते बैचते एक दिन ऊसपे कुछ लोगों की निया खराब हो गयी वो भागी भागती रही और इसी भागा दौड़ी और चुप्पा छुपी में उसके पास रखकर पत्थर से ऊसने एक बदमाश को जान से मर डाला

पुलिस उसके पीछे लग गयी…और वो कलकत्ता भाग गयी…वहां जाकर पहले तो ऊसने किसी तरह इधर अपना वक्त काँटा और फिर गरीबी से झुंझते झूंते किसी बारे पठान के हाथों में बिक गयी पठान का खून करने के बाद कोई चारा नहीं था…और फिर वही से वो क़ातिल बन गयी और ऊसने अपने चेहरे को गुप्त रूप से छिपाते छिपाते खुद को एक नक़ाबपोश चोर बना लिए जिसका पेशा चोरी और क़ातिलाना हमला था…पुलिस उसका कोई सुराग आजतक नहीं लगा पाई थी

मेरे निगाहों में उसके प्रति बहुत दुख था…हालाँकि ऊस्की कहानी भी मेरी कहानी से मिलती जुलती थी…लेकिन जितना दर्द ऊस लड़की के जिंदगी में था वो मुझमें कहा मैंने धीरे से उसके कंधे पे हाथ रखा

देवश : हालत तो मैं बदल नहीं सकता तुम

कहीं भी जा नहीं सकती पुलिस मौके पे ही तुमको गोली से उड़ा देगी

लड़की : मेरे पास कोई भी चारा नहीं है मैं कुछ नहीं कर सकती इन कमीने सेठ लोगों के चलते ही आज मेरी जिंदगी नरक बनी जिन जिन को मैंने लूटा वो लोग पेशेवर सेठ है या फिर इनकम टॅक्स ऑफिसर जो लोगों को लूटते है और फिर खुद के जेब को भरते है ऐसे लोगों से मुझे चिढ़ है

देवश : मैंने भी कई खून किए है लेकिन कभी इसे अपनी मज़बूरी नहीं समझी कभी हावी नहीं होने दिया…अगर तुम कहो तो मैं तुम्हें सपोर्ट करूँगा वही काम तुम अच्छे के लिए करो तो शायद मैं तुम्हें इंसाफ दिला पौ

लड़की : यहां का लॉ इतना अँधा है ये मेरी काहं सुनेगा? जल्दी ही पकड़ी गयी तो उमर कैद होगी

देवश : और अगर मैं कहूँ की चैन से लड़ने की आज़ादी तो (लड़की बारे ही गौर से मेरी बातों को गौर करके चुप हो गयी)

लड़की : मुझे वक्त चाहिए मेरी बाइक भी ऊन लोगों के हाथ लग गयी दूसरी का इंतजाम करना होगा

देवश : चोरी करके

लड़की ने मेरी ओर तीखी नज़रो से देखा “ये लो पैसे”….उसे गिनाते ही उसके होश उड़ गये करीब 20000 थे…”इन चाँद रुपयों के लिए जो गुनाह तुम अपने सर ले रही हो वो कानून कभी ना कभी नजरअंदाज कर देगा पर ऊपरवाला कभी नहीं”….मेरी बात को सुनकर चुप सी हो गई “बस मुझे सोचने का कुछ वक्त दो”….चुपचाप वो बस गुमसूँ रही

“ओह हेलो जा रही हो शायद फिर ना मियालने की बात कहो क्या नाम से पुकार उतूम्हें?”…….मैंने मुस्कराए उसके जाते कदमों को रोकते हुए कहा

“जो तुम कहते हो मुझे काली साया ब्लैक शॅडो”……..ऊसने मुझे आँख मारी और मुस्कुराईइ “कलेजे को ठंडक पहुँची तुम जैसे शॅक्स से मिलकर जो लोगों के लिए इतना कुछ करता है खुद को मुरज़रीम आज महसूस कर रही हूँ चाहती तो मैं भी कर सकती थी लेकिन ये मुलाकात हमेशा याद रखूँगी अलविदा”…….इतना कहकर वो मुस्कराए बाहर भाग गयी

अब किस तरफ गयी पता नहीं अंधेरा हो गया था…जब बाहर निकाला तो पाया की उसका मुकोता गिरा हुआ था…हूबहू मेरे मुखहोते जैसा…और उसके पीछे लिपस्टिक से लिखा हुआ था “काली साया”………मैं मुस्कुराकर ऊस मुकोते को चूम के चार और देखने लगा यक़ीनन किसी के नज़रो में वो नक़ाबपोश सहित ना आ जाए इसलिए ऊसने खुद के कपड़े और नक़ाब को उतार डाला था

उसका असल चेहरा बेहद खूबसूरत होगा या मैं अंदाज़ा लगाने लगा..

वो रात काफी यादगार थी मेरे लिए…काली साया से मिलने के बाद तो जैसे दिल पे ऊसने एक लकीर चोद दी थी…मैंने आजतक कभी किसी को अपना सच नहीं बताया लेकिन ना जाने क्यों उसके दुख और गम ने मुझे ऐसा मज़बूर किया की मैं बिना अपना पर्दाफाश करे रही नहीं पाया उसे यह कह डाला की मैं ही काला साया हूँ…अगर बयचाँसे वो ये बात मेरे दुश्मनों को कह दे या फिर ये एक चाल हो महेज़ दो पल की कशिश ने मुझे ऊस्की तरफ यूँ खींच डाला और मैं सबकुछ भूलके उसे एकदम अपना मानने लगा

इन सब कशमकशो के बीच फौरन काली साया को बचाने का इंतजाम करना था..पहले तो चोरी किए गये सेठ के घर से चुराए पैसों की गठरी को पुलिस स्टेशन में सुपुर्द किया और ऐसा जताया की छानबीन में चोर ने गठरी भागते वक्त फैक दी जो जंगल में पाई गयी…ताकि इससे शक कम हो….लेकिन साला ऊस्की बाइक पुलिस ऑफिसर्स के हाथ लग चुकी थी और ऊस्की जाँच पर्ताल हो रही थी किससे ली गयी या चोरी की है? सारा दाता पुलिस ऑफिसर्स ने छानबीन करना शुरू किया

लेकिन काली साया भी कोई कम नहीं थी मुझसे…शातिरो की रानी थी…ऊसने बेहद सरल तरीके से चोरी की थी वो बाइक…और जब इन्वेस्टिगेशन हुआ…तो किसी अमीर सेठ अंबानी के बेटे की चोरी हुई बाइक थी जो अबतक नहीं मिली थी….हां हां हां पुलिस फिर खाक छानते रही गयी और काली साया का कोई सबूत नहीं मिला सब हाथ मलते रही गये…खैर ऐसे दो दिन बीत गये

उसके ऊपर का खतरा तो जैसे तैसे टाल गया था…लेकिन क्या मेरा राज़ जानके? वो चोरी का लाइन छोढ़के मेरे संग जुर्म के खिलाफ लारेगी?…इस बात की मुझे कम ही उम्मीद लग रही थी भला चोरी का काम छोढ़के वो मेरा साथ क्यों देगी? उसे पुलिस की गोली खाने का तो शौक नहीं होगा..खैर मैंने भी उसके संग बिताए लम्हो को भुलाया नहीं..लेकिन मैं इन दो दीनों में ही उसे मिस करने लगा ना जाने क्यों उसके हाँ का इंतजार था बस उसके मुकोते को लिए सहलाता रहता

दिव्या भी आजकल मेरे नये बर्ताव से थोड़ी अचरज थी…मैं बिस्तर पे आंखें मुंडें लेटा हुआ था…और फिर ऊसने मेरे सीने पे हाथ फिराया…”क्या हुआ बारे ही गौर से देख रहे हो इस मुखहोते को”…….ऊसने धीमे लव्ज़ में कान में फुसफुसाया…उसे पता नहीं था की मेरी मुलाकात किससे हुई थी

देवश : बस ऐसे ही
दिव्या : आजकल तुम पहले जैसे रहे नहीं बहुत सोच में डूबे रहते हो अब तो सब नॉर्मल हो चुका फिर किस बात का तुम्हें गम?
देवश : देखो दिव्या कुछ बातें बताई नहीं जाती
दिव्या : अच्छा ग

दिव्या ने जब देखा की मैं एकदम उसे इग्नोर कर रहा हूँ..तो वो खुद करवट बदलके सोने लगी…मैं भी अपनी सोच से जागा और मुखहोते को दराज़ के अंदर रखकर वापिस बिस्तर पे आया..पहले दिव्या को जगाना चाहा लेकिन मन नहीं ताना..

मेरे दिलों दिमाग में ऐसी वो हावी हुई थी की मैं दिव्या को ही इग्नोर करने लगा…क्यों? क्या सिर्फ़ मेरे अंदर बाकियो तरह वासना है?…जबकि दिव्या ने मेरे लिए इतना कुछ किया है..मैंने फौरन दिव्या के बगल में लायतके उसके ज़ुल्फो को सहलाया..दिव्या फौरन ही मुझसे लिपट गई

मैंने दिव्या की प्यज़ामे के अंदर ही हाथ डाले पैंटी के भीतर झांतों पे उंगली फहीराई और फिर दो उंगली किसी तरह चुत में करनी शुरू की…दिव्या कसमसा उठी..मैं उसके टांगों पे टाँग रखकर खूब ज़ोर से अंगुल करने लगा दिव्या कसमसाए जा रही थी…और फिर ऊसने बेतहाशा मेरे मुँह पे चूमना शुरू कर दिया…मैंने उसे सीधा लिटाया और चुत में उंगली करता रहा..फिर उसके सलवार को भी खोल डाला पैंटी भी उतार फैक्ी…जंपर भी उतार फ़ैक्हा….और उसके चुत के मुआने में ही मुँह डाल दिया

उम्म्म आहह आअहह..वो खुद ही मेरे सर को अपने चुत पे रगड़ने लगी..हालाँकि उसके सपोर्ट के लिए ही मैं उसे प्यार कर रहा था ताकि वो खुद को अकेला ना महसूस करे….लेकिन दिल-ओ-दिमाग पे तो कोई और ही चाय थी..कुछ देर तक ऊस्की चुत को चाटने के बाद मैं ऊसपे चढ़ बैठा….और फिर लगाने लगा धक्के…दिव्या भी पूरा साथ दे रही थी कुछ ही देर में ही मेरे धक्के तेज हुए दिव्या के टाँगें मेरे कमर में खिस्स गयी ऊसने क़ास्सके अपने गान्ड को मेरे लंड से दबा लिया और फिर मेरे अंदर का सारा तूफान पानी बनकर उसके चुत में ही झड़ गया

कुछ देर में ही मैंने अपना लंड ऊस्की गीली लबालब चुत से बाहर खींचा और पष्ट परे ही बगल में लाइट गया…एक हल्की चादर ओढ़ दी दिव्या को और वो सोने लगी..मैं भी उठके वॉशबेसिन पे ब्रश करने लगा…बार बार काली साया का ख्याल आ रहा था दिमाग में कब आएगी वो कब मिलेगी? कही फिर किसी मुसीबत में…

त्रृिंगगग त्रिंगगग..करीब 3 दिन बाद थाने में एक सीरीयस केस मिला…”हेलो इंस्पेक्टर देवश चटरर्ज़ी स्पीकिंग”….फोन रिसीवर उठाते के साथ

“हे..हेल्लू सर मैं आप..काक हब्बरी बोल रहा हूँ”…..

खबरी की आवाज़ थी

UPDATE-47)

देवश : क्या अरे वाहह ये तो बहुत खुशी की बात है?

शीतल : भैया क्या बात कर रहे हो आप? जानते भी हो की मैं किसी को पसंद नहीं करती सिवाय आपके और मैं किसी से शादी नहीं करना चाहती

देवश : देखो शीतल तुम अभी पूरी तरीके से समझदार नहीं हुई हो…सील टूटने से पूरी तरह से औरत नहीं बनी हो जब तुम शादी कर लाओगी ज़िम्मेदारिया संभालॉगी तब तुम एक संपपोर्ना औरत बनोगी देखो मानता हूँ तुम मुझसे प्यार करती हो पर मैं तुम्हारा भैईई हूँ तुम्हारी मां की नजारे में तुम्हें पता है अगर तुम्हारी मां को पता चला की ऊन्ही का बेटा अपनी ही बहन के साथ सोता है तो ऊन्हें हेअरटत्टकक हो जाएगा तुम चाहती हो ऐसा? की ऊन्हें हमारे रीलेशन ?

शीतल : नहीं भैया पार मैं आपसे ही शादी करना चाहती थी

देवश : ये मुमकिन तो नहीं है ना अब तुम मेरी मुँह बोली बहन हो दुनिया की नजारे में पर हमारा प्यार दुनिया नहीं मानेगी समझा करो जो हो गया वो सिर्फ़ तुम्हारा मेरे प्रति प्यार और मेरा तुम्हारे प्रति प्यार था

शीतल : लेकिन भैया फिर भी आप समझाओ ना मां को की आप मुझसे शादी!

ये तो गले पढ़ने वाली बात हो गयी साला एक तो इतना टेन्शन सबको शादी की ही पड़ी है…किस किस से शादी करूं? दिव्या से? इससे? लेकिन गलती मेरी भी थी शीतल को बहन भी मना और उससे चुदा भी कर ली ये भी तो पाप ही था लेकिन अब जो हो गया सो हो गया अगर अपर्णा क्काई की पता लगा तो हमारे संबंध में बवाल खड़ा हो जाएगा…और मुझे ना अपरा काकी को खोना था ना शीतल को और ना ऊन्हें बदनामी के डर में फसाना था मैंने फौरन शीतल को खूब समझना शुरू किया…और उससे कहा की मैं उसे ऐसा संपूर्ण मर्द दूँगा जो वो पसंद कर लेंगी मुझसे भी अच्छा होगा और उसे खूब खुश रखेगा पर शीतल नहीं मानी…और ऊसने उदास होकर फोन कांट दिया

अब यहां मुझे अपर्णा काकी से बात करनी थी पर आज नहीं कल ही हो पाएगा?…पूरा दिन मैं सोचता रहा…फीरसे दिव्या का कॉल आया…दिव्या को भी समझा भुजाके कहा की काम में फ़सा हुआ हूँ…फिर शाम के ढलते ही मैं अपने वीरान ख़ुफ़िया घर पहुंचा….वहां का सारा काम निपटना शुरू किया

जल्द ही..कोई दीवार से तदपके आए..जैसे मैंने दरवाजा खोला सामने मुकोता पहनी रोज़ खड़ी थी..अफ आज उसके बदन से खुशबू आ रही थी ऊसने मुस्कुर्या उसे लाल होठों की लाली ने मेरे पूरे दिन के दुख को जैसे गायब कर डाला

देवश : अर्र..

ए वाह तुम आ गयी आओ अंदर?

रोज़ : हम आती कैसे नहीं? जब एक दोस्त से हाथ मिलाया है

देवश : अच्छा ग तो हब मैं आपका दोस्त बन गया मुझे तो लगा मैं आपका

रोज़ : थोड़ी काम की बात बताओ कहाँ से शुरू करना है ? क्या सेट-उप किया?

मैंने रोज़ को मुस्कुराकर देखा और फौरन हॉल की लाइट्स ऑन की धढ़ धढ़ करके पूरे हॉल में उजाला छा गया चारों ओर काफी अच्छे से मैंने अपने ख़ुफ़िया एजेन्सी को बनाया था…एक तरफ पीसी जिसमें सारे क्रिमिनल्स देता ट्रेसिंग डिवाइस रोज़ के लिए हर बचाव का इंतेज़मत था ऊसमें लोकेशन जीपीयेस सिस्टम सबकुछ दूसरी ओर स्कॅनिंग डिवाइसस थे जिसमें फिंगरप्रिंट्स प्रिनटाउट्स दी इन ए डिवाइसस भी परे हुए थे इन सब चीज़ों को मैंने बारे ही मुस्किलो से खरीदा था…हालाकी काला साया में मुझे इन चीज़ों की जरूरत नहीं पड़ी पर मैं काफी बरेक़्क़ी से जाँच पढ़ताल करके किसी सूपरहीरो की तरह ही दिमाग चला रहा था

दूसरी ओर दो बाइक्स खड़ी थी…जिससे मॉडिफाइ करवाया था मैंने ये भी इल्लेगली तीसरी तरफ काला साया का सारा मेरा काप्रा मौज़ूद था साथ ही साथ रोज़ के मुखहोते और उसके कपड़े मज़ूउद थे..इतने इंतेज़मत को देखें के बाद रोज़ के मुँह से वाहह निकली

रोज़ : वेरयय वेल्ल्ल डन

देवश : थॅंक्स सोचा आजसे हम जब पार्ट्नर्स है तो काम शुरू किया जाए सारें इंतेज़ांत है (मैं रोज़ को सब चेज़ों के बारे में बताने लगा वो कंप्यूटर एक्सपर्ट थी ऊसने सारे रेकॉर्ड्स चेक करने हसुरू किए…हर डिवाइस को चेक किया एक प्रोफेशनल चोर थी वॉ और मैं नपोलिसेवला तेहरा इसलिए मेरी भी छानबीन और डेवीसेस्क ए आड़हर् में मैं भी प्रोफेशनल था)

रोज़ : जब तुम्हारे पास इतना इंतेज़मत है तो फिर तुम काला साया क्यों बन गये?

देवश : कुछ चीज़ें आईस होती है जो बताई नहीं जाती…पुलिस वालो के लिए मैं डेड ओर अलाइव वाला पर्सन बन गया था मैंने कई खून किए इसलिए उनकी नजारे में मर गया पर तुम अब मेरी पोज़िशन को सम्भालो तो बेहतर रहेगा

रोज़ : तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया है मैं कैसे भूल जाओ (कोमिससिओनेर वाली सायर बात उसे बता डाली वो बस चुप रही)

देवश : अच्छा तो फिर तुम तैयार हो

रोज़ : मुझे तैयार नहीं करोगे (ऊस्की आंखों में चमक सी थी मैंने मुस्कुराकर उसे जॅकेट दी ऊसने मेरे सामने ही अपनी हुक खोल के एक मोटा बुलेटप्रूफ जॅकेट के ऊपर लेदर जॅकेट पहना उसके क्लीवेज दिख रहे थे)

मैंने रोज़ के बदन पे हाथ रख रखकर उसे तैयार कर रहा था बीच बीच में ऊस्किसांसें मेरी साँसों से टकराए…बार बार रोज़ मेरी नजारे में झांटकी जब मैं उसे बेल्ट पहना रहा था क्योंकि मैं काला साया हूँ और उससे ज्यादा प्रोफेशनल…तैयार करने के बाद ऊसने अपने मुखहोते को ठीक करते हुए पास ही के टेबल पे अनगिनत वेपन्स में से नानचाकू के बजाय हॉकी का डंडा ले लिया….

मैंने उसे ट्रेनिंग सेशन में पनचिंग बॅग्स और हेंड तो हेंड कंबेट्स के साथ साथ वर्काउट के लिए दुम्ब्ेल्लस और कुछेक्शेरसीसे एक्विपमेंट्स दिखाए…पर ऊसने मुझे आँख मरते हुए कहा की वो पहले से तैयार है

फिर ऊओसने बाइक स्टार्ट की और तीवर्ता से हॉल के ख़ुफ़िया दरवाजे से निकल गयी…मैं उसके लिए बेहद डर भी रहा था पर जनता था वो कौन सी काला साया से कम है?…मैंने फौरन हेडफोन लगाया और पीसी पे बैठकर उसी लोकेशन ट्रेस की…वो पूरे शहर का गश्त लगा रही थी बिना पुलिस के नजारे में आए
जैसे जैसे रात के साए में रोज़ निकलती…सन्नाटे को चीरती जुर्म पे ऊस्की दस्तक होती….अबतक तो टाउन के हिस्से लेकर पूरे डिस्ट्रिक्ट तक ये बात फैल चुकी थी…की हूबहू काला साया की तरह एक शॅक्स बाइक पे आता है हेलमेट और अंधेरे के वजह से उसके मुखहोते पहने चेहरे को देख नहीं पाता है…और फिर कहीं पे हो रहे अपराध पे रोक पे अपनी ही मोहर लगा देता है

सबकी नजारे में बस ऊस शॅक्स का नाम था….”रोज़”….वो अंधेरे साए में आती है…और गुंडे मवालीयो से अकेले ही भीढ़ जाती है उससे तरकने की तो दूर उससे भागने की भी ताक़त किसी के हाथों में नहीं होती…अपराधियों को मर के ऊन्हें पुलिस के आने से पहले उनके हाथों में सुपुर्द करके निकल जाती है और साथ ही साथ अपने हर दुश्मन के पॉकेट में एक लाल गुलाब चोद देती है

रोज़ के साथ ऐसा टीमवर्क भरा काम करते हुए 2 महीने बीत गये..इन 2 महीनों में शहर में ऐसी रोज़ के नाम की आग लगी…की सबके जुबान पे काला साया के बॅया दब रोज़ का नाम था…कोई कहता काला साया ही है..और कोई कहता नहीं ये कोई और है? पुलिस जानती थी की ये लड़की वही चोर है जिसने पूरे बंगाल स्टेट को हिला डाला था…पुलिस आजतक उसका पीछा ना कर पाई हूँ कौन थी ? कहाँ से आती थी?…इधर मेरा मूवमेंट और ऑपरेशन दोनों बखूबी रोज़ के संग चल रहा था उसके गुलाबी महक नेट ओह मुझे उसका दीवाना बना दिया साथ ही साथ उसके काबिल-ए-तारीफ हौसले और हिम्मत की दास्तान को रोज़ थाने में सुनकर दिल बैग बैग हो जाता गुलाब के फूलो से

पुलिस कभी कभी ट्रॅप बिछाके रोज़ को पकड़ने की कोशिश करती थी..

लेकिन मैं अपने वर्दी के फायदे से कभी पुलिस को रॉंग वे में भेज देता या फिर कभी पुलिस के सामने अड़चन बनकर सामने आ जाता…जैसे रोज़ अगर बाइक लेकर जिस रास्ते से गुजरती और हूँ रास्ता दो रहा…तो उसके निकलते ही मैं भी उसी के भैईस में दूसरे रास्ते निकल जाता…पुलिस इससे चकमा कहा जाती…कभी रास्ते में पुलिस के पत्थरे बिछा देता…तो कभी रोज़ को झूते मूओते नाम पे पकड़ने के साथ साथ अपने हेडफोन से उसे डाइरेक्षन और लोकेशन दोनों बताते रहता…रोज़ के हर हरकत और उसके हर सिचुयेशन पे मेरी निगाह होती अनॅलिसिस ऑफिस से…रोज़ जल्द ही अपने पाप की दुनिया से निकलकर अक्चाई की लड़ाई में खुद को काफी तृप्त महसूस करती थी

(UPDATE-48)

और धीरे धीरे मेरे अंदर भी रोज़ के प्रति कुछ कुछ होने लगा था…कमिशनर की मुझे कभी कभी बेहद दाँत सुन्नी पढ़ती…लेकिन उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं था रोज़ के खिलाफ इसी लिए उसे कभी गेरफ़्तार करने की नौबत ही नहीं आई…मैं कमिशनर की दाँत को खाके बस मुस्कराए केबिन से निकल जाता…और फिर रोज़ के साथ काम शुरू करता…जल्द ही रोज़ अपने नये नाम से प्रचलित हो गई सबको हैरानी थी आख़िर काला साया कहाँ गायब हो गया? और ऊस्की जगह रोज़ कहाँ से आ गयी? पुलिस का भांडा फहूट जाए इस बात का मैं पूरा ख्याल रखता था पुलिस निकाला साया को जान से मर डाला ये बात अगर पब्लिक को पता चली तो शायद बवाल हो जाए…सबकुछ सही जा रहा था…और मेरे दिल ही दिल में रोज़ को लेकर प्यार उमाधने लगा था

ऊस रात रोज़ गश्त लगाकर वापिस आयआई…ऊसने गॅंग्स्टर्स को आज पुलिस के हाथों अरेस्ट करवाया था..ऊसको थोड़ी चोटें आई थी….बाइक से उतरके मैंने फौरन उसे लाइट जाने को बोला….उसके पीठ में बहुत दर्द था…

देवश : के..क्या हुआ? रोज़ तुम ठीक हो?

रोज़ : पीठ पे गुंडों ने चाबुक बरसा दिया था..वो तो गनीमत थी की आहह मैंने तुम्हारे सिखाए रस्सी को काटने का हुनर सिख रखा था

देवश : श में गोद ई आम सॉरी मैं तुम्हारी ऊस वक्त मदद नहीं कर सका..ठीक है तुम एक काम करो पेंट के बाल लाइट जाओ मुझे एक इलाज आता है ला कर..इन तुम्हें अपना काप्रा उतारना पड़ेगा तुम्हारी पीठ के ज़ख़्मो को देखते ही मैंन्न

रोज़ : टीटी..हीक हे दर्द बहुत ज्यादा लग रहा है जो कुछ करना है कर दो…(मैंने मौके को समझते हुएफओुरन पास रखिी काली पट्टी अपने आंखों में बाँध ली)

रोज़ : ईए क्या कर रहे हो?

देवश : हाहाहा तुम्हारी झिझक दूर कर रहा हूँ मैं एक मर्द हूँ और तुम एक औरत इसलिए समझ रही हो ना (रोज़ ने मुस्कुराकर अपने लंबो पे लगी लाली दिखाई)

और फिर मेरे सामने पीठ कर ली….भैईलॉग आँख में पट्टी बँधी थी पर साली ट्रॅन्स्परेंट थी ..धीरे धीरे मेरे तरफ पीठ करके रोज़ ने अपना जॅकेट उटा फैका..

और उसके बाद अंदर एक और बुलेटप्रूफ जॅकेट अफ उसके बड़ना के पीठ पे कितने लाल लाल निशान परे हुए थे…काश मैं ऊस वक्त मौज़ूद होता तो हूँ कुत्तों को जान से मर देता…रोज़ ने एक बार मुदके मेरी ओर देखा

और अपनी ब्रा जैसी पहनी डोरी को खोलने लगी बीच बीच में ओर देखती..मैं अंधेपण का नाटक करने लगा…दिख तो सब रहा था…फिर रोज़ ने मुस्कुराकर अपनी डोरी खोल डाली अब हूँ ब्रा में थी काली ब्रा में…हूँ वैसे ही छलके सोफे पे लाइट गयी…मैंने आवाज़ दी “हो गया क्या मैं लगौन?”….ऊसने भी जवाब दिया और अपने पास आने कहा मैं उसके पास आया

रोज़ : अब पट्टी खोल दो तुम वरना पीठ के बजाय बालों पे लगा दोगे क्रीम

देवश : त..एक है जैसी आपकी इच्छा मेमसाहेब

मैंने जैसे ही पट्टी उतारी साला संगमरमर जैसी पतली कमरिया क्या चिकना बदन था?…मैंने थूक घोंटते हुए फौरन इलाज शुरू किया…पहले छोटे बाल्टी में गुगुला पानी लाया और फिर उसे बारे ही आहिस्त आहिस्ते निसान पे लगाकर साफ करने लगा…गरम भीगे तौलिए के अहसास से रोज़ आंखें मुंडें सिहर जाती है…सिसक उठती

मैं भी सोफे पे पालती मारें बैठा उसके पीठ को तौलिए से पोंछ रहा था उसके बाद…उसके निशानो पे हाथ पाहिरा…और क्रीम लगाने लगा….एक आहह भी रोज़ के मुँह से ना निकली…हूँ बस अनके मुंडें पड़ी रही..बार बार उसका ब्रा बीच में लग जाता वहाँ पे एक निशान था जिसपे क्रीम लगाना मुश्किल था…मैंने रोज़ से कहा की हूँ अपनी ब्रा की हुक खोल दे ताकि मैं पूरे पीठ पे क्रीम लगा सुकून…रोज़ ने आंखें मुंडें ही अपना हाथ बढ़के हुक को खोल डाला..ब्रा 2 पीस में जैसे दोनों ओर गिर पड़ी उसका एकदम नंगा पीठ मेरे सामने था

मैंने बारे अच्छे से क्रीम लगाकर उसके दर्द में राहत दी….रोज़ को काफी सुकून मिला…”अगर तुम कहो तो मसाज भी कर दम”………मैंने मौके को समझके बोला “ऐसी वैसी हरकत तो नहीं करोगे ना”………रोज़ ने मुस्कुराकर बोला….”ईमान का पक्का हूँ”…….मैंने भी जवाब दिया…”ऑलराइट देन दो इट”…..ऊसने फिर आँख मूंद के लिए सोफे पे ही सर रख दिया

मैंने थोड़ा सा तेल लाया और उसके गर्दन और हाथ सब जगह की मालिश करने लगा पीठ पे बचे कुचे निशानो से दूर के हिस्सों में मालिश करते हुए उसके कमर में बार बार हाथ चला जाता फिसल के….रोज़ कोई हरकत नहीं कर रही थी…और ना कसमसा रही थी…मुझे नहीं लगता उसे कुछ फील होने वाला था…मैंने धीरे से ऊस्की निचले पीठ के हिस्सों पे तेल मलके वहाँ माँस को मुट्ठी में भरके मालिश किया…इस पे रोज़ थोड़ी कसमसा जाती…धीरे धीरे उसके हाथ को फिर मलते हुए ऊस्की नाज़ुक उंगलियों की भी मालिश की शायद हूँ सो गयी थी…मैंने सोचा क्यों ना टांगों की भी कर दम..

साला तेल की कटोरी लिए उसके ताअंगो से थोड़ा थोड़ा करके एलास्टिक पेंट हटाया और वहां तेल मलने लगा…उसके पाओ पे भी…रोज़ ने कोई हरकत ही नहीं की…हूँ शायद सो चुकी थी…मैंने उसके घुटने तक फिर जाँघ तक तेल को माला…इस बीच में बार बार मेरा हाथ उसके गांड पे लग जाता..लेकिन ज्यादा आगे बढ़ना रीलेशन को खराब करने वाली बात थी…

अचानक मुझे अहसास हुआ की मालिश के चक्कर में साला अपना पेंट के अंदर में कबका खड़ा वज्र गोरी में के पीठ और टांगों पे भी दबा हुआ था…मुझे बहुत शर्मिंदा महसूस हुआ..और साथ में खुद पे गुस्सा भी आया मैं अभी उठने वाला ही था की रोज़ ने मेरे हाथ को पकड़ लिया

(UPDATE-49)

देवश : के..क्या हुआ रोज़? (मैंने मुदके पलटके देखा)

रोज़ : काफी सुकून मिला काश ऐसी कोई पहले कर देता थॅंक्स

देवश : तुम बोलो तो मैं रोज़ ही कर दम…अच्छे काम के लिए थॅंक्स कैसा? इतना तो मेरा फर्ज बनता है

रोज़ : वैसे ईमान के पक्के नहीं हो तूमम?

देवश : वॉ कैसी??

रोज़ : ये पेंट में क्या छुपा रखा है? गुण (मेरी तो साली बोलती बंद अब तो मेरी मां चुदेगी)

देवश : क्क्क…के क्या बक्क रही हो?? व्व..आस मैंने कहना गन?

रोज़ : अच्छा ग ज़रा पास आना तो (और ऊसने मुझे अपनेई तरफ एक झटके में खींचा हूँ उठ बैठ इयोर ऊसने मेरे प्यज़ामे से निकले उभर पे उंगली रखी या यूँ बोलो तो लंड पे उंगली रख दी मेरा तो पूरा बदन काँप गया एक कुँवारा लड़का बन गया था में जैसे)

देवश : यईए वॉ नहीं?

रोज़ : अच्छा ग जवान हूँ और तुम भी जवान हो और जवान लड़कों का ये क्यों खड़ा होता है ये तो जानते ही होंगे दूध पीते बच्चे तो नहीं है यहां कोई जो समझ नहीं सकता

देवश : देखो रोज़ हूँ मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ लेकिन मैं सच कहता हूँ आगे ऐसा!
रोज़ ने मेरे होठों पे उंगली रखकर दबाई और मुझे उसी पल अपने संग सोफे पे धकेल दिया मैं ये भूल चुका था उसके छातियो पे तंगी ब्रा अटकी हुई आध खुली छातिया दिख रही थी…पर मैं ऊस वक्त रोज़ के कररणामे से डरा हुआ था…ऊसने मेरे ऊपर चढ़के मेरे चेहरे पे हाथ पाहिरा और मेरे बालों को सहलाया

रोज़ : हुम्हें काम करते हुए इतना दिन हो गया लेकिन तुमने कभी अपने ज़ज़्बात नहीं बताए अब मुझे बोका मत समझो…तुम्हारी हूँ पर्सनल डेरी मेरे लिए जो इंग्लिश में शायरिया लिखते हो मैं सब पढ़ चुकी हूँ यहां तुम अनॅलिसिस करते हो या मुझे अनॅलिसिस करते हो बताओ बताओ

देवश : सच पूछो रोज़ तो में..मैं पागल सा हो गया हूँ जबसे तुम्हें देखा हूँ बस तुम्हारे साथ ही वक्त बिताना चाहता हूँ ना जाने क्या हो गया है तुमसे?

रोज़ : यू स्टुपिड इसे ही तो लव कहते है यू आर फॉलिंग इन लव विड में (रोज़ यक़ीनन बाहरी देश की आई गोरी में थी..

लेकिन उसके अल्फाज़ो में कुछ ऐसे वर्ड्स थे जो यक़ीनन मुझे समझणाए में डायरी ना लगी)

रोज़ ने फौरन मुस्कुराकर अपने चेहरे को मेरी ओर झुकाया और मेरे होठों में अपने होंठ रख डालें…हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे…मैंने आंखें बंद नहीं की मैं इस मंजर को अपने आंखों से महसूस करना चाहता था…एक के पल को महसूस करते हुए मैं जैसे डूब गया उसके लाल लाल होठों को चुस्सते हुए मुझे इतना मजा कभी नहीं आया

रोज़ पागलों की तरह मुझे किस कर रही थी शायद विरासत में मेक आउट करना अपनी अँग्रेज़ मां से सीखा था…फिर हूँ कभी नाक कभी कान कभी गाल कभी माथे पे चूमते हुए मुझसे लिपट चुकी थी….”वादा करोगे की तुम मेरा साथ निबहोगे मुझसे शादी करोगे कभी छोढ़के नहीं जाओगे”…..साला ये लाइन जब लड़कियों के मुँह से सुनता होंठ ओह पूरा बदन काँप जाता है प्यार का बुखार चढ़ जाता है और ऊस वक्त मेरे जैसा दीवाना आदमी सिर्फ़ यही कहता हाीइ “क्यूउ नहीं? बिल्लकुल्ल्ल”…मैंने उसके प्रपोज़ल को स्वीकार कर लिया था

और फौरन उसे कमर से अपने गेरफ्त में लेते ही पलट डाला अब हूँ सोफे पे मैं उसके ऊपर मैं उसके होठों को बुरी तरह से चुस्सने लगा…हूँ मुझे पागलों की तरह चूमें जा रही थी..मैंने फ़ौरना उठके अपना शर्ट उतार डाला..और फिर उसके ब्रा पे हाथ रखकर झिझक उठा

मेरी गरम सांसों को हूँ अपने गालों पे महसूस कर रही तो ऊस्की भी गरम साँसें मेरे मुँह से टकरा रही थी “के.या हुआ?”….ऊसने मेरे चेहरे को हाथों में भ्रष्ट हुए बोला
“क्या मैं तुम्हारा देख सकता हूँ?”……..रोज़ ने प्यार से मुस्कराया और खुद ही मेरे हाथ को अपने छाती पे रखा और फौरन मेरे हाथ को उठाया ऊस्की ब्रा मेरे हाथों में आ गयी और साथ ही साथ ऊस्की चुचियां भी

मैंने ऊस्की छातियो पे हाथों को रखा तो जैसे करेंट सा दौड़ने लगा मैंने बारे ही प्यार से ओस्कि छातियो को दबाया…मैंने फिर उसके होठों पे होंठ रख डालें…मैंने उसके मुकोते को उतारना चाहा लेकिन ऊसने मेरा हाथ नीचे कर दिया “न..नहीं वादा करूं अभी तुम ये चेहरा नहीं देखोगे”…..मुझे किस करते हुए…”पर क्यों?”…..ऊसने मेरे चेहरे को फिर हाथों में भरा…”मुझे वक्त चाहिए”…..उसके जवाब को सुन मैंने भी हामी भारी कोई बात नहीं मुझे उससे प्यार था उसके चेहरे से नहीं…चाहे हूँ दिखाए ना दिखाए मैं तो उसके सामने पूरा हाज़िर था

ऊसने फिर मुझे अपने ऊपर सवार किया और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे..फिर मैंने ऊस्की छातियो को डबाते हुए उसके निपल्स को मुँह में भरके चुस्स्सा..”आहहस्स आहह”…..ऊसने झाढ़ झाढ़ के अपना पेंट भी उतार डाला हूँ अब पैंटी में थी और मैं प्याजमे में…उसका हाथ मेरे चड्डी पे सख्त हो गया..वो मेरे उभर को दबाने लगी..

और मैं उसके छातियो को दबा दबा के चुस्सने लगा ऊस रात बादलो की भयंकर गरगरहट भारी गुँज़ज़ पूरे माहौल में दाखिल हो रही थी…

और हम दोनों एक दूसरे से बस लिपटे रहे जल्द ही लाइट चली गयी…लेकिन हम दोनों एक दूसरे से अलग नहीं हुए…

भारी भाऋीश से पूरा शहर भीग रहा था…जल्द ही हूँ गाड़ी खंडहर में पहुँची…और उसके रुकते ही एक नक़ाबपोश गाड़ी से उतरा ऊसने काले रंग का मुखहोटा पहना हुआ था जिसमें सिर्फ़ आँख नाक और होंठ दिख रहे थे…फिर उसके उतरते ही ऊसने गाड़ी का फाटका खोला….और फिर हूँ शॅक्स अपने मगरमच्छ के चंदे के बने जुटते एक एक कदमों के साथ रखते हुए ऊस बंद खंडहर में लिए दाखिल हुआ

सामने एक बड़ी बल्ब की रोशनी जल रही थी…एक बड़ा सा डाइनिंग टेबल था…ऊसमें पहले से ही शहर के बारे बारे माफिया लोग बैठे हुए थे…और सब उसी का इंतजार कर रहे थे…ऊस शॅक्स के बगल में चल रहा हूँ काला मास्क पहना आदमी दूसरी ओर देखता है…दूसरी ओर भी एक शॅक्स जिसने अजूबा जैसा मुखहोटा पहना हुआ था अपने तीर से बार बार खेल रहा था

इन अज़ीबो गरीब लोगों को देखकर सब फुसर फुसर कर रहे थे…हूँ शॅक्स टेबल पे बैठा..लेकिन उसके बैठने से पहले ही सब उठ खड़े हुए..मानो जैसे उसका लोहा मानते थे…”मीटिंग शुरू की जाए हमारे सर खलनायक यही चाहते है”…..सिगर्रेतटे फहूंकते हुए अपने होठों से निकलकर ऊसने मुखहोते को फिर ठीक किया

उसके अज़ेब से मुकोते को देख सब गुंडे चुपचाप थे बस ऊस्की उबलटी निगाहों को देख रहे थे इन तीन नक़ाबपोशो को देखने के बाद बातें शुरू हुई ऊस शॅक्स ने सबकी बातें सुनी की कितना इस बार पुलिस का शिकंजा है और उनके ड्रग्स दवाइयों की शकल में पकड़ी गायहाई

“तुम हरामजादो को खलनायक के साथ बैठने का कोई राइट नहीं बनता…जिस तरह हमारे कंपनी का नुकसान हुआ उससे कई ज्यादा हुम्हें इस बात का गुस्सा है की हमारे कोकेन और घना से लाई इल्लीगल इंपोर्टेड ड्रग्स भी पकड़ी गयी उसका कौन जिम्मेदार था बताओ”……खलनायक ने चिल्लाते हुए कहा

काला नक़बपसो जो डाई ओर खड़ा था खलान्यक के ऊसने बताया की उसका ज़िमीडार जावेद हुस्सियान है जो पुलिस के हटते चढ़ गया उसके पकड़े जाने की बड़ी वजह एक पुलिस इंस्पेक्टर था और साथ ही साथ एक बाइकर लड़की जो आजकल शहर की हीरोइन भारी फिर रही है रोज़

खलनायक मुस्कराया…और ऊसने उठके जावेद हूसेन के पारटनेस को वही पे गोली से चली कर दिया..सब सहम उठे “आप लोगों को डरने की जरूरत नहीं जिसने गुनाह किया खलनायक ने उसे सजा दी खलनायक को दो लोगों से भर इचिढ़ है एक तो औरत ज़ात और एक बड़ज़ात इन हरमियो ने मेरा पकड़वाया काला लंड”…..

खलनायक ने मुस्कुराकर अपने काले मास्क पहने नक़बोश को नाम पुकारा

काला लंड : कहिए हुज़ूर
खलनायक : दुबई से ब्ड फिर वहां से हिन्दुस्तान आना हमारा एक ही मंसूबा था…जल्द से जल्द जावेद हूसेन को मौके पे ही निशानेबाज़ के हाथ से मरवा दो…और दूसरी चीज़ ऊस लड़की रोज़ का पता लगाओ और जिस पुलिस की इन्वॉल्व्मेंट थी ऊन सबका नाम मुज़ेः च्चाईए
निशानेबाज़ : आप चाहे तो हम ऊँका काम ऐसे ही तबाह कर देते (अजूबा का मुखहोटा पहने दाएँ ओर खड़े खलनायक के आदमी ने कहा)
खलनायक : नहीं मैं चाहता हूँ की ऊन सबकी मौत मेरे सामने हो अभी हम इस देश से नहीं जाएँगे..हमारे रहने का इंतेज़मत करो

बदल की गरहट के साथ सब वापिस अपने अपने गाड़ी में सवार होकर निकल गये

रात के डेढ़ बज चुके थे….लेकिन ना तो रोज़ के आंखों में नींद थी और ना ही मेरे….रोज़ और मैं कब अपने अपने कपड़ों से निवस्त्र होकर एक दूसरे के अंगों को सोफे पे ही लेटे लेटे सहला रहे थे पता नहीं….बस रोज़ के चेहरे पे उसका मुखहोटा था ऊस्की चमकीली आंखें बार बार मुझे उसके चेहरे की तरफ ले जा रही थी उसके होंठ जो लाल लिपस्टिक से साने हुए थे उसे अपने मुँह में भरके मैंने चुस्स लिया रोज़ गरमा गयी थी “आहह उम्म्म”….ऊओसने आहें भारी

मैंने ऊस्की छातियो को काश क़ास्सके दबाया रोज़ के टाँग साँप की तरह मेरे टांगों से लिपट गये फिर वो मेरे ऊपर किसी बिल्ली की तरह चलते हुए चढ़ने लगी और फिर बिल्ली की मुद्रा से बदलते हुए मेरे चेहरे पे बैठ गयी वो नंगी थी ऊस्की पूरी चुत मेरे मुँह पे..मेरा साँस और दम दोनों घूँट गया…अब मेरा चेहरा उसके चुत से रगड़ कहा रहा था…जबकि मेरे नाक उसके चुत के मुआने में दबी हुई थी…मैं गहरी गहरी साँसें लेकर साँस खींच रहा था और ओस्कि चुत की महेकदर पांकुदियो के बीच से निकलती हवा को सूंघ रहा था अफ क्या महक थी उसके पूरी गान्ड से लेकर चुत तक की मैंने अपनी जुबान खोली और ऊस्की चुत में चलाने लगा…

“आअहह आहह”…..रोज़ ने मेरे बालों को सहलाते हुए बैठे बैठे ही अपनी चुत को मेरे मुँह पे रगड़ने लगी…और मैं उसके दोनों जांघों को हाथों से क़ास्सके जकरे हुए उसके चुत को चुस्सने लगा….उसके दाने पे नाक रगड़ने लगा उसके चुत के छेद के भीतर अपनी थूक भारी जबान घुसा दी….रोज़ की आंखों के पुतलिया बंद खुल रहे थे…रोज़ा आहें भरे जा रही थी

(UPDATE-50)

फिर उसके बाद ऊसने इंग्लिश में मोनिंग लेना शुरू कर दिया “आहह फ्फूकककककक आहह फुक्कककक मईए आहहह”…..

और उसका पूरा शरीर काँपा बड़ी ज़ोर से और ऊसने मेरे मुँह पे ही वीर्य की बरसात कर दी मेरे मुँह पे झड़ गयी वॉ फिर भी मैं उसके चुत में मुँह घुसाए रहा और उसके छेद के अंदर बाहर जुबान करता रहा…पूरी तरह काँपने लगी थी रोज़ ऊस्की चुचियों के निपल्स भी सख्त हो आ गये थे वो खुद मेरे मुँह पे उछालने लगी और मेरे सर को पकड़कर अपने चुत में दबाती रही

मैं लेटे लेटे ही बिजलियो के शोर और रोज़ की आहों को सुनते हुए बस उसके चुत को चाटने में जैसे खो गया था…कुछ देर बाद रोज़ एक बार फिर कामसा उठी और इस बार वो मेरे ऊपर से हाथ बैठी…जैसे ही वो मेरे ऊपर से हटी मैंने गहरी सांस खींची और हापसने लगा मेरा पूरा चेहरा लाल था वीर्य से भीगा पसीने से तरबतर रोज़ हस्सने लगी…और फिर ऊसने झुककर उल्टे तरीके से मेरे होठों को चुम्मा मैंने फिर उसके होठों को छूसा

इन अँग्रेज़ लड़कियों में सेक्स की भरमार होती है..जब तारक चढ़ती है तो संभालना मुश्किल होता है इन्हें…रोज़ किसी पॉर्न आक्ट्रेस की तरह सारे काम कर रही थी मानो जैसे कितनी माहिर हो..जबकि ऊसने खुद बताया की ऊसने आजतक किसी लोंडे को खुद को हाथ लगाने तक नहीं दिया सिवाय उसके बाय्फ्रेंड के जिसने सिर्फ़ उसे खूब किस किया और उसके बदन को सहलाया था…रोज़ सोफे पे फिर सामने आकर बैठ गयी और इस बार ऊसने मेरे नंगे बीच बीच में उठते खड़े लंड को मुँह में भर लिया पहले तो उसे हाथों से सहलाया फिर उसके नोक पे नाखूनर अगड़ते हुए उसे मुँह में भर लिया

और मेरे लंड को पूरा मुँह में लेकर बारे ही ज़ोर ज़ोर से चुस्सने लगी…मेरा पूरा बदन सख्त हो गया प्री-कम झड़ उठा…लेकिन वो मेरे लंड को बड़ी ज़ोर से बीचते हुए चुस्सथें जा रही थी…तो कभी अंडकोषो को मुँह मिनट भरके उल्टे तरीके से चुस्सती…अब मुझसे सहन नहीं हुआ और मैंने उसके बालों के गुकचे को पकड़कर उसके सर में ही लंड तूससने लगा…और वो भी अओउू अओउू करके मेरे लंड को चुस्सने लगी…उसका मुँह ऊपर नीचे कर रहा था और वो चुस्सती रही

कुछ ही देर में मेरे हद की इंतिहान टूट गयी…और मैं उसके मुँह में ही झधने लगा…आहह उसके पूरे मुँह पे मेरे ही रस के फवारे छूटने लगे…और वो तृप्त होकर बस मेरे लंड को सहलाती रही कुछ देर सहलाने के बाद ऊसने चाँदी ऊपर नीचे की और फिर हल्का हल्का जबान गीला छिचिपे वीर्य से भरे सुपाड़े पे लगाया उसके थूक की लार मेरे लंड से जैसे जुड़ी हुई थी

फिर मैंने उठके उसके होंठ पे लगी लार को पोंछा और उसका एक क़ास्सके चुम्मा लिया..

हम दोनों फिर पागलों की तरह एक दूसरे को किस करने लगे…मैंने उसे लेटा दिया और फिर उसके टाँग को खोल डाला…ऊसने अपनी चुत के मुआने पे धायर सारा थूक माल लिया…मैंने उसी वक्त उठके अपने लंड को हाथों में हिलाते हुए दराज़ से एक पैकेट कॉंडम निकाली जो मैं दिव्या को चोदने के लिए उसे करता हूँ ऊसने पूछा नहीं क्योंकि वो आंखें मुंडें हुए अपने छातियो को सहला रही थी तरकपन तो उसे भी चढ़ा हुआ था

मैंने फौरन कॉंडम के पैकेट को फाड़ा..कॉंडम लगाया और ऊके टांगों को अपने कंधे पे रखते हुए धायर सारा लूब्रिकेट उसके चुत के मुआने और अंदर तक दाखिल किया…फिर धीरे से एक धक्का दिया काम नहीं बना फिर बारे ही ज़ोर से धक्के मारने शुरू किए…तो इस बार चुत में लंड घिस्सते हुए घुस गया….रोज़ काँप उठी दर्द से चिल्लाने लगी…मैंने उसके आंखों में पहली बार आँसू देखे…मैंने उसके आँसुयो को पोंछा और उसके होठों कोचुस्सता रहा

वो सुबक्ती रही और मेरे धक्को को झेलती रही…ऊस्की टाँगें मेरी कमर से जुद्डी हुई थी…और मैं गान्ड में पूरी ताक़त भरके ऊस्की चुत में ही स्ट्रोक मारता रहा..”आहह आहह आहह आहह आहह”….हम दोनों आहें भरते रहे…ठप्प ठप्प करके गान्ड अंडकोष टकराके बज उठती…जिस्म एक दूसरे से जुध जाता…और फिर हल्के फकच से लंड बाहर आता और फिर पूरा का पूरा समा जाता…रोज़ की चुत में रोज़ की सूजी चुत के द्वार से अंदर बाहर होते लंड को देखने का अलग ही मजा था

ऊस्की चुत इतनी गरम थी की साला लग रहा था जैसे लंड चील जाएगा…ऊसने अपनी गान्ड भीच दी…दर्द उससे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था…ऊसने होठों पे दाँत रख दी…और मैं खूब ज़ोर से उसे चोदता रहा…जब एकदम तक गया तो फिर उसी के संग लायतके एक टाँग अपने तंग पे रखकर ऊस्की गान्ड के मुआने पे लंड हल्के से रखा और एक हल्का धक्का मारा

लंड गान्ड के भीतर प्रवेश कर गया…रोज़ बहुत ज़ोर ज़ोर से दहढ़ रही थी…जगह बेसमेंट थी इसलिए डर नहीं था…ऊस्की आवाज़ पूरे माहौल में गूंज रही थी…मैं उसके मुँह पे हाथ रखकर उसे बारे ही क़ास्स्स क़ास्सके चोदते रहा…ऊस्की गान्ड जैसे फॅट सी गयी…सच में बहुत टाइट था…फिर मुझसे और मारा नहीं गया लंड खींचके बाहर निकल लिया लंड थोड़ा सा चील गया था फिर पोसीटों बदली और इस बार रोज़ ने खुद ही थूक अपनी चुत पे लगते हुए कुतिया बन गयी

मैं भी उसके पीछे झुक गया…और उसके चुत में फिर एक करारा धक्का मारा..इस बीच कॉंडम फहत गया और मैं उसे चोदता रहा…जब अहसास हुआ की निकल जाएगा तो एक बार लंड को बाहर खिंचा आधा कॉंडम निकाला हुआ था और उसके ऊपर का हिस्सा फहत चुका था..फौरन दूसरा कॉंडम फाड़के लगाया..

उसी मुद्रा में रोज़ मेरा इंतजार करती रही फिर मैंने झट से ऊस्की चुत में जब लंड डाला तो फहरी वो आंखें मूंदके चुदाई का अहसास लेने लगी…मैं भी उसे खूब ज़ोर से चोदता रहा…”श फुक्ककक में फुक्कककी में पूस्सयययी”…..धक्के तेज हुए और 10-12 धक्को एमिन ही मेरा पूरा बदन अकाध सा गया “आहह फुफककककक उउउ आहह आहह आहह”…..मैं चिल्ला उठा और मेरे दहानते हुए मेरे लंड से वीर्य उगल दिया…उसी मुद्रा में बस रोज़ झुकी रही ऊस्की आग भी शांत थी

फिर मैंने धीरे से लंड बाहर खींचा और वीर्य से भरे कॉंडम को उतार फैका इस वक्त शरीर में बहुत ज्यादा कमज़ोरी और सर दर्द लगता है मैं न्ह्ापस्टे हुए सोफे पे लाइट गया और ठीक मेरे ऊपर पष्ट पढ़कर रोज़ भी लाइट गयी…बदल गाराज़ उठे..कब बाहर की मुसालदार बारिश खिड़की से मेरे चेहरे पे पर्िी मुझे पता नहीं लगा..मैंने उठके रोज़ को किसी तरह से लिटाया और फिर वॉशबेसिन आकर ब्रश करने लगा…भाई चुत चाटने के बाद उसका रस आप कब घूंत्त लेते हो इससे कभी कभी बीमारिया भी हो जाती तुरंत ब्रश कर लेना च्चाईए

(UPDATE-51)

मैं ब्रश कर ही राह था…इतने में सोई रोज़ का चेहरा देखा…बदल गाराज़ रहे थे….एक बार मैंने ब्रश रोकते हुए सोचा क्यों ना रोज़ा का मुखहोटा उतारके देखा जाए आख़िर वो है कौन? लेकिन मेरे ज़मीर ने मुझे इस बात की गवाह नहीं किया…और मैं फिर अपने काम में मलिन हो गया

सुबह 6 बजते बजते ही…जेल से जावेद हूसेन को निकाला गया उसे आज कलकत्ता के सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया जा रहा था…साथ में पुलिस की दो जीप थी…जेल के पास वाले जंगलों के पादो के सबसे बारे लत्टड पे निशानेबाज़ मुस्कराए चड़ा हुआ था…ऊसने बाइनाक्युलर से जावेद हूसेन और बाकी पुलिस कर्मियो को देखा की उसे वन पे सवार किया जा रहा है निशानेबाज़ ने फौरन खलनायक को कॉल किया

खलनायक सिगरेट सुलगता हुआ फोन उठता है

निशानेबाज़ : वो निकल रहा है

खलनायक : काम तमाम कर दो उसका

निशानेबाज़ : इसे सर (इतना कहते हुए निशानेबाज़ अपनी तीर को आईं पे लेता है ऊस्की एक ही निगाह से वो जावेद हूसेन को घूर्रते हुए मुस्कुराकर देखता है और फिर अपना तीर चोद देता )

स्ररर स्ररर करता हुआ तीर सीधे हवा में उड़ते हुए सीधे जावेद हूसेन के सीने के आर पार घुस जाती है……”उग्घ”……साँस खींचने तक का वक्त मिलता जावेद हूसेन को और वही धायर हो जाता है पुलिस में हड़कंप मच जाती है…पुलिस इधर उधर देखने लगती है लेकिन हमला करीब 50 में दूरी से हुआ था..इसका अंदाज़ा तक पुलिस नहीं लगा पति

जल्द ही पेड़ की टहनियो से कूदते हुए निशानेबाज़ फौरन अपनी बाइक पे बैठ जाता है….

लेकिन तभी पुलिस की कर्मियो की निगाहों में वो आ जाता है पुलिस का एक झुंड उसके पीछे लग जाता है…निशानेबाज़ अभी बाइक को फुरती से निकल ही पता इतनें आइन काला लंड वहां पहुंच जाता है और अपनी ट्रक से पुलिस की जीप को ढलान के ऊपर से टक्कर मर के गिरा देता है जीप धमाके के साथ उड़ जाती है और पुलिस का झुंड मौके पे ही मारा जाता है

रात का तूफान कब का थाम चुका था? और सुबह का सूरज भी निकल चुका था…सुबह 10 बज चुके थे…त्रिंग्ग त्रिंग्ग करके मेरा फोन बज उठा…फिर एक बार रिंग हुई नींद इतनी गहरी थी की उठ ही नहीं पा रहा था…एक बार उठके अपने से लिपटी रोज़ को देखा जिसके बाल बिखरे हुए थे सूरज के चाव में कैसी चमक रही थ्िवो उसके आंखें बंद…ऊस्की गहरी सांसों की आवाज़…उसका एक हाथ मेरे पेंट पे….मैंने उसे हल्के से हटाया और हमारे ऊपर की सफेद चादर हटाई…मैं नंगा ही उठ बैठा…वक्त 10 बज चुका था…जल्दी से पास रखी बजती फोन को उठाया

कमिशनर : इंस्पेक्टर देवश कहाँ हो तुम?

देवश : सो..र्रयी सर वो कल रात की गश्त ज्यादा लगा ली जिसे वजह से नींद नहीं आई बस अभी उठा हूँ सर कहिए

कमिशनर : मैं तुम्हारे शहर आया हूँ तुम्हारी गैर मौज़ूदगी देखकर मुझे बहुत बुरा लगा जल्द से जल्द पे.से पहुंचे…फौरन जावेद हूसेन को किसी ने मर डाला है

मेरी मीठी नींद और यादें एक पल में टूट गयी जब मैं एकदम से जागा सर की बात सुनकर…मैंने फौरन हामी भरते हुए फोन रखा…अफ रोज़ अब भी गहरी नींद की आगोश में थी उसे उठना संभव नहीं था मैंने फौरन जैसे तैसे तैयार होकर अपनी वर्दी पहनी और रोज़ के लिए एक खत लिख दिया…और उसके माथे को छू के बिस्तर पे ही खत रखते हुए जल्दी से ख़ुफ़िया घर से बाहर निकाला….

जीप स्टार्ट की और फौरन थाने की ओर रवाना हुआ

थाने में पहुंचते ही…पता चला कमिशनर साहेब सर्क्यूट हाउस में तहरे है…वही मुझे बुलाया है दोपहर में…तो साले ने अभी क्यों हड़बड़ा दिया? थोड़ा सा नाश्ता किया और फिर उसी वक्त ही सर्क्यूट हाउस पहुंचा…बागान में कमिशनर एक आदमी के साथ बैठा हुआ था जो ब्ड के वर्दी में दिख रहा था…दोनों चाय की चुस्किया ले रहे थे मुझे आवाज़ दी और अपने पास बुलाया…बगीचे के दूसरी गुलबो में माली पानी डाल रहा था…ऊसने मेरी ओर एक बार नज़र फहीराई

देवश : सर (मैंने सल्यूट मारी और फिर उनके इजाज़त से बैठा)

कमिशनर : आओ आओ इनसे मिलो ये है बांग्लादेश के सुपेरटीएँडेंट ऑफ पुलिस उस्मान ख़ान…ये हमारे शहर आए हुए है एक बहुत ही जरूरी खबर देने इंटररपोल से पता लगाया गया की आज ही जावेद हुस्सियान को मर दिया किसी ने

देवश : ओह नो सर मैंने तो उसे अभी हाल ही में अरेस्ट !

कमिशनर : जी हाँ उसी आदमी का कत्ल हुआ

इससे पहले कमिशनर कुछ और बोलता…वो सुपेरिटेंडेंट उस्मान बोलने लगा…

उस्मान : जी सही फरमाया आपने जावेद हूसेन ब्ड का मोस्ट वांटेड क्रिमिनल था जिसे आप लोगों ने गेरफ़्तार किया उसे सेंट्रल जेल से हमारे देश में ले जा रहा था…और उसे मारने वाला कोई और नहीं खलनायक है

देवश : ख..अल्नायककक ये कौन्ण है?

कमिशनर : दरअसल बांग्लादेश दुबई पाकिस्तान में ड्रग्स की अगर कोई सबसे ज्यादा तस्करी करता है तो वॉ ये खलनायक है इसकी आजतक कोई पिक्चर पुलिस के पास नहीं है बारे से बारे ख़ुफ़िया एजेन्सी इसके पीछे लगे हुए है जो भी इसके टे तक पहुंचा उसे मर गिराया…आज सुबह करीब 6:20 के लगभग जावेद हूसेन को इसी के आदमी ने जान से मर गिराया..हमने उसका पीछा किया तो हमारी पूरी एक पुलिस फौज जीप के साथ खाई से नीचे गिरके धमाके के साथ उड़ गयी

देवश : ओह माइ गॉड ये केस तो बहुत सीरीयस है पर ये खलनायक यहां?

कमिशनर : जाहिर है इसने जावेद हुस्सियान के लिए यहां पाओ रखा है..

लेकिन खबरियो से पता चला की इनकी बारे बारे माफिया से दो दिन पहले रात को मीटिंग हुई थी…वहां से भी हुम्हें जावेद हूसेन के लोगों की तीन लाशें मिली…उसका माल पकड़ा गया है और वो काफी गुस्से में नहीं

UPDATE-52)

उस्मान : इट’से बिग ऑपर्चुनिटी आप इंडियन्स के लिए अगर आप लोगों ने उसे गेरफ़्तार कर लिया तो सोच लीजिए की आपने ब्ड के सबसे खतरनाक साँप को पकड़ लिया है…वैसे हमसे जितना होगा हम आपकी मदद करेंगे ये खलनायक नक़ाबपोश है इसके काम में इसके दो आदमी इसके साथ कॉपेरते और ऑपरेट दोनों करते है इन ल्गू के नाम भी अज़ीब है एक सनकी की पूरी गान्ड है इसमें काला लंड और निशानेबाज़ जिसने जावेद हूसेन को मारा शामिल है इनसे उलझना मौत को दावत देने के बराबर है

देवश : थॅंक्स फॉर थे इन्फार्मेशन सर अब आप फिक्र ना करे मैं उसे अरेस्ट करने की पूरी कोशिश करूँगा

कमिशनर : ओके देन (कॉँमससिओनेर उठके उस्मान से हाथ मिलता है और उस्मान फिर अपनी मॅटॅडोर में बैठ जाता है इधर कमिशनर मुझे फिर ज़ोर देने लगते है की जल्द से जल्द रोज़ वाला केस निपताओ और इन तीनों को अरेस्ट करो)

मादरचोद एक के बाद एक केस हाथ में दे देता है…अभी रोज़ से प्यार भी नहीं हुआ और फर्ज की लरआई में कूदना पारह रहा है…रोज़ के वजह से ही तो जावेद हूसेन को पकड़ा गया…लेकिन कमिशनर है की रोज़ को ही गलत तेहरा रहा है…जो भी रहे इस खलनायक से मिलना बेहद जरूरी था

जल्द ही काम धाम निपटाके दोपहर को वापिस ख़ुफ़िया घर में पहुंचा…रोज़ का नाम पुकारा…लेकिन वो जा चुकी थी…बिस्तर पे मेरा खत नहीं था…अचानक एक खत मिला टेबल पे उसे पढ़ा….रोज़ ने छोडा था मेरे लिए “तुम्हारे साथ एक एक पल जैसे लगा मानो की एक ख्वाब हो इट’से जस्ट लाइक हेयर ओन ड्रीम ई विल मीट यू टुनाइट आस अभी”……मैंने मुस्कुराकर दिल-ए-हाल रोज़ का जाना..खैर उसे ज्यादा खतरे में डालूँगा नहीं कहीं वो इस खलनायक के पीछे ना लग जाए…क्योंकि मैं अब रोज़ को खोना नहीं चाहता था…इस केस को खुद मुझे कवर करना था…

जल्दी से हाथ मुँह धोया और फिर अपने घर आया..कल रात करीब तीन घाटे ही सोया हुआ था बाकी घंटे तो सेक्स करने में ही उलझा हुआ था…इस वजह से नींद अब भी गहरी लग रही थी…इतने में फोन किया…दिव्या ने झल्लाके कहा मिल गयी फुर्सत काम से उसे मानने में भी दस घंटे लगे कह दिया साफ साफ की मेरे घर आकर मुझसे मिल ले मेरे हाथ में एक केस है जिसके लिए मैं उलझा हुआ हूँ..

ऊसने कुछ नहीं कहा बस फोन रख दिया आना तो था ही साली को

जल्दी से पेशाब करने टॉयलेट में घुस्सके निकाला था…की फिर घंटी बाजी इतने जल्दी कौन आ गया?…शायद काकी होगी…मैंने दरवाजा खोला लेकिन शॅक्स अंजना था पर कहीं ना कहीं जाना पहचाना सा लगा…जैसे दरवाजा खोला सामने खड़े 25 साल के चश्मा लगाए लड़के ने अपना चश्मा उतरा और मेरे गले लग गया

“आस हूओ मेर्रेर्र भी मेररीए यार कैस्सा हाीइ तू?”…..ये कोई और नहीं मेरा कज़िन मेरे दूर का भाई मामुन था…असल में मामुन मेरे दादी के घर से तालूक़ रखता है…लेकिन मैं उससे बचपन में ही मिला था..आज ऐसे मिलना हो जाएगा सोचा नहीं था

देवश : अरे भैईई तू तो काफी बड़ा हो गया यार

मामुन : तेरे से कुछ ही साल तो बड़ा हूँ यार तू एकदम नौजवान हो गया

देवश : अरे आना बैठ…(उसे बैठते हुए मैंने कोल्ड्रींक्स निकाली हम दोनों कोल्ड ड्रिंक्स पीने लगे)

देवश : और बता आज इतने सालों बाद इतर में कैसे? तू तो लग रहा है बड़ा आदमी बन गया सुना था तू कलकत्ता में कोई बड़ा बूससिनएस्स्मन बन गया

मामुन : हां हां हां हां सब दुर्गा मां की कृपा है…दरअसल मैं यहां तुझे तो पता ही है सोचा एक बार परिवार के पास जौउ तो वहां देखा की वो जगह किसी ने खरीद ली है…

देवश : तू चाचा चाची वाले घर गया था…दादी वाले घर

मामुन : हाँ हाँ वही खैर तू बुरा मत मान मुझे लाग तू शायद वही होगा पर तुझे इस हालत में देखकर सच पूछ तो इन 22 सालों में इतना कुछ बदल गया और मैं वापिस आ भी नहीं पाया अगर मैं होता तो तेरे साथ हुए दगाबाजी का बदला जरूर लेता मैंने सब सुना गावंवालो से

देवश : भाई जाने दे जो बीत गया सो बीत गया ऊन कामीनो को उनकी मौत मीलगई किसी ने ऊँका कत्ल किया

मामुन : हाँ यार खैर तो मैं जब वहां पहुंचा ना तो ! (मामुन अभय ईकेः ही रहा था इतने में दिव्या घर में दाखिल हुई)

दिव्या मुझे और मामुन को देखकर हड़बड़ा गयी…उसी पल मामुन भी उसे हैरानी भाव से देखने लगा “आ..रही हाँ भैईई यहीी यहीी लड़की बोल रही थी इसी का घर है जाओ यहां से”……..दिव्या भी मामुन को देखते हुए मेरे पास आकर बोली

दिव्या : हाँ ये आज मेरे यहां आए थे ये आपके क्या लगते है?

देवश : उम्म मेरे भैईई है तुम एक काम करो तुम हमारे लिए खाना बनाओ अरे भाई ये दिव्या है मेरी असिस्टेंट

UPDATE-53)

दिव्या को बुरा तो लगा पर मेरे पास हमारे रीलेशन को छुपाने का कोई रास्ता नहीं था….दिव्या सदा हुआ मुँह लेकर किचन में चली गयी…मामुन मुझे अनख् मारने लगा “क्या भैईई कोई सेट्टींज्ग??”……मामुन को मैंने हल्का सा तापी मारा “चलो भाई क्या मज़ाक कर रहे हो नहीं बस ऐसे ही कमिशनर ने रखवाई है”…….मामुन मुझसे मजे लेने लगा..

फिर उसके बाद वो फ्रेश होने बाथरूम चला गया…मैं दिव्या के पास आया वो चावल बना रही थी

देवश : दिव्या मांफ कर दो…मुझे

दिव्या : क्यों मांफ कर दम तुम्हें ? एक तो बिना बताए तुम आए नहीं दो दिन से कहाँ थे? और अब कह रहे हो काम का इतना भोज अब ये कौन है? (दिव्या सही में चिड़चिड़ा गयी थी एक तो उसे बात करना था मुझसे खुलके और एकदम से मेहमान को देख उसका मुँह बंद गया)

देवश : देखो मामुन यहां ज्यादा दिन नहीं रुकेगा चला जाएगा समझा करो आज्वो इतने सालों बाद आया है

दिव्या : कालतक तो तुम्हारा कोई परिवार नहीं था

देवश : आजएक्द्ूम से खोजते हुए आया है ये कलकत्ता में रहता है इसको मेरा अड्रेस नहीं पता था…आज खोज बिन करके आया है चला जाएगा तुम प्ल्स माहौल को शांत रखो उसे अंजान रखना जरूरी हाीइ ठीक हे

दिव्या : ओकायी

देवश : मैं तुमसे बात करूँगा अभी मैं बहुत तक भी गया और हूँ केस को लेकर उलझा हूँ सब शांत हो जाएगा फिर बताता हूँ

दिव्या : ठीक हे तुम जाओ मैं खाना लगती हूँ

इतना कहकर दिव्या पतीले के पानी को छानने लगी….बाहर आते ही मामुन मुस्करा रहा था ऊसने बैग से मेरे लिए एक सोने की घारी निकाली “अरे ये क्या? बाप रे तू कहाँ से ले आया ये सब?”…….”कैसी है इंपोर्टेड है? तुम्हारे फ्रॅन्स से है”…….मैंने घारी को देखते हुए मामुन की बात सुनी

देवश : भाई लेकिन इट’से वेरी कॉस्ट्ली

मामुन : अरे चढ़ ना ये सब तो चलता है तू तो भैईई है

देवश : तो यहां कबतक का दौड़ है?

मामुन : बस 2 दिन

देवश : क्यूउ? आजकल क्या कर रहा हे तू ? और घर में सब कैसे है? काकी काका

मामुन : काकी अच्छी है और काका एक्सपाइर हो गये 8 साल पहले ही

देवश : ओह माइ गॉड ई आम सॉरी वैसे भी हम तो लास्ट टाइम बच्चे थे जब एक दूसरे से मिले थे उसके बाद तो

मामुन : जाने दे यार जो बीत गया सो बीत गया मुझे देख मैं अब कितने पैसों में जी रहा हूँ एंजाय कर लड़कियां पता यही जिंदगी है वैसे अभी तक शादी!

देवश : नहीं भैईई मिली नहीं

मामुन : अच्छा ग इतनी सेक्सी सेक्सी लड़कियों के साथ घूमता होगा इंस्पेक्टर मिया (तब्टलाक़ दिव्या खाने लेकर आ गयी और बिना कुछ बोले सैंडल पहनने लगी)

मामुन : कहाँ जा रही हो मैडम आइये आप भी खाना कहा लीजिए?

दिव्या : नहीं मैं कहा लौंगी बाद में उम्म देवश जी मैं जा रही हूँ (ऊस्की इशारो को समझा मामुन के प्रेसेंसें आइन वो कुछ कह नहीं पा रही थी..उसके बाद वो वापिस मेरे नये घर चली गई)

मामुन मजे लेटराहा…मुझे दिव्या के नाम से फ़्लर्ट करता रहा…फिर हमारे बीच के हँसी मज़ाक के बाद ऊसने बताया की उसका चंदे का बिज़्नेस है…और वो काम के सिसीले में यहां आया है…फिर कलकत्ता चला जाएगा…मैंने उसे घर में ही स्टे करने को कहा…फिर थाने के लिए रवाना हो गया…मैंने सोचा वही से दिव्या से मिल लूँगा

सूरज की दोपहरी शाम में ढाल गयी….

खलनायक सिगर्रेते को सुलगाए…चेयर पे बैठा…टीवी पे चल रही ब्लूएफील्म को देख रहा था…तभी निशानेबाज़ ने खबर सुनाई की पुलिस से भारी जीप खाई में गिरके ब्लास्ट हो गयी पर ब्ड का सुपेरिटेंडेंट उस्मान यहां आया था..ऊसने हमारे पीछे पुलिस फौज लगवाई है इंडिया की…ज़िंदा या मुर्दा की घोषणा की है

खलनायक : हां हां हां आजतक कोई पकड़ सका जो पकड़ लेगा हुम्हें

निशानेबाज़ : कहे तो उनके दिल पे ही सीधे निशाना लगा दम

खलनायक : जो भी अपनी मौत के लिए हमारे पास आ रहे है आने दो फिर लगा लेना..वैसे पता चला माल किस पुलिस ऑफिसर ने पकड़वाया था

निशानेबाज़ : आदमियों ने बताया की यही का इंस्पेक्टर है…और एक हेरोईएन बनी फिर रही है इस शहर की रोज़ उसी ने हमारे माल को पकड़वाया ये रही ऊस्की तस्वीर इसे बड़ी मुश्किल से खबरियो से लिया गया ऊन्होने ही उसके पीछा करके तस्वीर ली

खलनायक ऊस खूबसूरत मुखहोते पहनी लड़की रोज़ की तरफ देखकर मुस्कराया “रोज़ उफ़फ्फ़ क्या ये गुलाब की तरह महेकत्ि भी है”……..खलनायक के मुखहोते अंदर मुस्कुराहट साफ झलक रही थी…”ये तो इसके पंखुड़ी को तोधने के बाद ही पता चलेगा”…..निशानेबाज़ ने मुस्कराया

जल्द ही खलनायक ऊस काले कमरे में आया खूब ज़ोर ज़ोर से काला लंड कसरत करते रहा था उसके हाथों में उठी रिंग ऊपर नीचे हो रही थी…जिसका वज़न 40 किलो था…”20 22 26″…..इतने में खलनायक की आहट सुन ऊसने धढ़ से वज़न से लगी बारबेल रिंग को एक तरफ फैक दिया फिर मुदके खलनायक की तरफ देखा

काला लंड के सामने खलनायक ने ऊस तस्वीर को पेश किया…काला लंड ऊस लड़की को देखते हुए तस्वीर पे उंगली फहीराने लगा “है बहुत कमसिन खिलती किसी गुलाब की काली की तरह इसी ने माल पकड़ाया था नाम है इसका रोज़”…….खलनायक ने काला लंड के मन में उबलते शैतानी सोच को महसूस करते हुए बोला

काला लंड : हां हां हां हां काफी दीनों बाद कोई कमसिन पर रफ लड़की मिली है वरना आजतक तो सिर्फ़ एक ही सांस में दम तोड़ी है

खलनायक : जनता हूँ टेढ़ी है यह और तुम टेढ़ी चीज़ कितना पसंद करते हो इसलिए ये काम तुमपे छोडा…

काला लंड : ये मिलेगी कहाँ?

खलनायक : शहर का गश्त लगती है रोज़ रात..इसके रात के आजके हुंसफर बन जाना

काला लंड : आखिरी रात का हुंसफर हाहाहा

इसके बाद काला लंड अपनी जबान रोज़ के तस्वीर पे फहीराता है और उसे घूर्रने लगता है…खलनायक बस शैतानी हँसी निकाले कमरे से बाहर निकल जाता है..

“दिव्या मेररी बात तो सुनू”………दिव्या कुछ सुनाने की मूंड़ में नहीं थी एक तरफ मुँह फहीराए बैठी थी

मैंने उसके सामने जब हुआ तो वो दूसरी ओर हो गयी…”प्ल्स दिव्या मेरी बात तो सुन लो”….मैंने मिन्नत करते हुए कहा उसे समझाना बेहद जरूरी था…”मैं कुछ सुनना नहीं चाहती”…….

दिव्या गुस्से से मेरी ओर नहीं देखते हुए कह रही थी

देवश : मैंने अकाहिर ऐसा क्या कह दिया? जिससे तुम मुझसे इतना नाराज़ हो मेरी इस छोटे से गलती की इतनी बड़ी सजा मत दो

दिव्या : मैंने कोई सजा नहीं दे रही लेकिन देख रही हूँ तुम्हें तुम आजकल मुझसे दूर रही रहे हो…घर से लेट से आते हो और मुझसे बात नहीं करते ढंग से बस जब प्यार करना होता है कर लेते हो

देवश : बस करो दिव्या मैं तुम्हें कोई इग्नोर नहीं कर रहा ये तुम्हारी सोच है..देखो मैं अभी एक बहुत बारे केस में फ़सा हुआ हूँ

दिव्या : किस केस में फंसे हो तुम? तुमने काला साया से खुद को क्यों अलग किया इसी लिए ना की हम एक खुशाल जिंदगी जी सके..लेकिन तुम अब भी अपने फर्ज के चक्कर में मुझसे दूर हो रहे हो

देवश : देखो दिव्या फर्ज अपनी जगह है और प्यार अपनी जगह मेरी जिंदगी में मेरा फर्ज यक़ीनन इंपॉर्टेंट है पर तुम भी हो क्या काला साया का कोई राज़ जनता था तुम ही थी तुमने मुझे ऊस वक्त इतना सपोर्ट किया और अब तुम मुझसे कफा हो रही हो महेज़ मैं तुम्हारे सात हनःी रहता इसलिए

(UPDATE-54)

दिव्या का गुस्सा कहीं हड़त्ाक शायद जायेज़ था..पर शायद कहीं ना कहीं गलती मैं भी कर रहा था…एक तरफ देवश की दिव्या और दूसरी तरफ उसी के दूसरे रूप काला साया की अक्स जैसी रोज़….जिसकी तरफ मैं कुछ ज्यादा झुकाव देने लगा उसके आक्राशण में ऐसा खोया की दिव्या को भूल गया लेकिन यक़ीनन मज़बूरी मैं दिव्या को सहारा दिया था पर क्या मैं उससे प्यार भी करने लगा था नहीं बस उसके साथ दुश्मनों तालूक़ रखे थे एक दूसरे की प्यास भुज़ाई यक़ीनन रोज़ अगर जिंदगी में ना आती तो मैं दिव्या से ही शादी करता लेकिन अब सिचुयेशन बदल चुकी थी…

दिव्या को समझाने में मुझे बहुत वक्त लग गया…केस को भी भूल उसी को मानने में लग गया…आख़िरकार दिव्या सुबकते हुए मेरी ओर देखकर मुझसे उक्चि आवाज़ में बात करने के लिए माँफी मागने लगी…मैंने उसे अपने गले लगा लिया…मैं जनता था दिव्या शायद ऊन चिपकू औरतों में से नहीं बस वो प्यार चाहती है…शायद अपने औकवाद के चलते वो ये सोचती है की मैं उससे शादी नहीं करूँगा..लेकिन उसे समझाना बेहद जरूरी था की मैं उससे क्यों नहीं शादी कर सकता? फिलहाल वो वजह मैं बोल ना सका क्योंकि दिव्या मेरे जिस्म पे हाथ फेरने लगी और उसके मन में क्या चल रहा था ? ये मैं जनता था..दिव्या भी गरम लड़की थी इसमें कोई शक नहीं और ऊस वक्त बिना ऊस्की चुदाई के दिल नहीं मना

मैंने दिव्या को बाहों में भरा और उसके होठों को चूमने लगा..दिव्या भी मेरे बालों पे हाथ फिराती मुझे चूमने लगी….

ऊस वक्त अगर रोज़ होती तो जाहिर है मुझे जान से मर देती…पर इन लड़कियों को इनके ही जगह रखना ठीक है…मैंने दिव्या को बहुत ज़ोर से किस किया…और ऊसने भी मुझे पागलों की तरह चुम्मना शुरू कर दिया…मेरे हाथ उसके छातियो पे चलने लगे और कपड़े को ऊपर से ही ऊस्की छातियो को दबाने लगा….दिव्या ने फौरन मुझे धकेला और अपना पजामा नीचे खिसका लिया…मैंने भी अपने कपड़े उतार फ़ैक्हे

दिव्या मेरे सीने पे चढ़के मेरे छाती को चूमते हुए मेरे निपल्स पे ज़बानफहिराने लगी मैंने उसके चेहरे को उठाया हाथों में लिया और उसे अपनी बाहों में खींच लिया…दिव्या की चुत में लंड अंदर बाहर हो रहा था…ऊस्की टाँगें मेरे कंधों पे थी और मैं कभी ऊपर तो कभी नीचे होता…ऊस्की चुत के मुआने पे उंगली करता हुआ लंड को बहुत फुरती से उसके चुत में रगड़ रगदके घुसाता…धक्के पेलता….दिव्या आंखें मुंडें मीठी मीठी सिसकियां ले रही थी

दिव्या ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया…और मैंने भी धक्के ज़ोर से देने शुरू कर दिए..लंड चुत से अंदर बाहर होने लगा..और मेरे हाथ उसके बिखरी ज़ुल्फो को समिटाने लगे वो मेरे होठों को चुस्सने लगी….हम दोनों पसीने पसीने होकर भीगने लगे…दिव्या की चुत से मैंने लंड बाहर खींचा….और उसके पेंट पे ही झधने लगा…धायर सारा रस उसके पेंट और नाभी पे भरने लगा….

दिव्या निढल पड़ी मुझे अपनी ऊपर खींच लेती है…मैं उसे अपने सीने से लगाकर बाहों में भर लेता हूँ….कब शाम का ढलता सूरज ढाल गया पता ही नहीं चला…

रोज़ जल्द ही बाइक से उतरके ख़ुफ़िया घर में प्रवेश करती है फिर चारों तरफ देखते हुए अनॅलिसिस रूम की लाइट्स ऑन करती है…”अरे देवश अभीतक नहीं है यहां”……वो चारों ओर देखते हुए मेरा नाम पुकारती है पर मैं उसे किसी जगह नहीं मिलता…”यक़ीनन पे.से में होगा”..अचानक ऊस्की निगाह मेरी इंतजार में ही ठहरी थी इतने में…उसका ध्यान ऑन परे पीसी पे परता है

उसे ऑन करते ही उसका दिमाग तनकता है…स्क्रीन पे खलनायक और उसके शागीर्दो का चेहरा दिखता है उनकी डीटेल्स जो मैंने पुलिस स्टेशन से लेकर रखी थी और ऊस केस पे मैं काम कर रहा था वो सब पढ़ लेती है…उसके चेहरे पे मुस्कान उमाध उठती है..और वो फिर अपने ग्लव्स और हेलमेट को पहने वापिस बाइक पे सवार होकर ख़ुफ़िया दरवाजे से बाहर निकल जाती है…

“इस लौंडिया को देखा है?”……काला लंड वन के अंदर ही ऊस खबरी को पूछता है…पहले तो वो खबरी रोज़ के तस्वीर को देखकर मुस्कुराता है और फिर बताता है की वो इस रास्ते से गश्त लगते हुए जंगल के रास्ते की ओर निकल जाती है….काला लंड खुश होता है…और उसके आंखों में शैतनपान दिखता है

बाइक को फुरती से चलते हुए रोज़ देखती है की उसके सामने दो वन खड़ी है…वो वन से फौरन उठ खड़ी होती है..

वन से निकलते हॉकी का डंडा और चैन लिए खलनायक के गुंडे उसी को देखकर तहाका लगाकर हस्सने लगते है…और फिर धीरे धीरे रोज़ को घैर लेते है…”श तो ऊस कुत्ते के पलुए हो तुम लोग”………..रोज़ चारों ओर ऐसे निगाहों से देखती है मानो उसके लिए ये कोई छोटी बात हो

फौरन कुत्ता शब्द सुनकर ऊसपे हमला बोल देते है गुंडे…रोज़ फुरती से अपनी बेक किक सामने से आते गुंडे पे मारते हुए दूसरे गुंडे पे बाअई किक मारती है…इस बार उसके मुक्के ऊन गुंडों पे बरसते है..ऊस्की फुरतिदार..पार्कौुर करते हुए करतब लगते हुए…लातों घुसो की बरसात करते हुए हरक़तो को देख..काला लंड अपनी वन से बाहर आता है…वो लोग रोज़ को जकड़ लेते है…पर काला साया के दिए ट्रेनिंग और अपने हुनर से वो दोनों टाँग सामने के गुंडों पे मारते हुए चैन को पकड़कर सीधे ऊस गुंडे को ही जकड़ लेती है जो उसे पकड़ा हुआ होता है….

वो गुंडा वही दम तोड़ देता है…दूसरा गुंडा जैसे ऊसपे हावी होता रोज़ ने उसके मुँह को पकड़कर अपने घुटने से दे मारा उसके मुँह से खून निकल गया वो अपना चेहरा पकड़ा गिर गया…रोज़ ने अपना हॉकी का डंडा पकड़ा..और ऊन गुंडे पे बरसाना शुरू कर दिया…ऊनमें से कोई भी ऊसपे हावी नहीं हो पा रहा था….काला लंड मुस्कुराकर बस देखें जा रहा था

रोज़ आख़िर ऊन आखिरी बचे गुंडों को भी दरशाही कर देती है…इतने में उसके सर पर प्रहार होता है…रोज़ अपना सर पकड़े दूसरी ओर देखती है जिसके हाथ में पीपे होता है काला लंड उसके सामने खड़ा है…अपने सामने इतने भयनकर ख़ूँख़ार हिंसक काले नक़ाबपोश शॅक्स को देख रोज़ थोड़ी ठिठक जाती है पर वो लरआई नहीं छोढ़ती….रोज़ ऊसपे बरस पार्टी है…और उसके भाई डाई बेक मंकी सारी किक्स उसके चेहरे पे उतार देती है…काला लंड जितना उसे कक्चा समझ रहा था वो उतनी थी नहीं

ऊसने फौरन पीपे उसके मुँह पे दे मारा..रोज़ भौक्लाके गिर पड़ी उसके होठों से खून निकल गया..पर रोज़ झुकी नहीं और सीधे ही काला लंड से भीढ़ गयी…काला लंड उसे उठा उठाकर पटकने की कोशिश करने लगा पर हर पटकी से पहले ही रोज़ करतब करके उछाल फहानाद के ज़मीन पे स्त्री होकर कूद पड़ती…रोज़ को ये लरआई भारी लग रही थी पर हार मना उससे स्वीकार नहीं

अचानक से देवश की घंटी बज उठी…देवश ने टाइम देखा..”श में गोद रात हो गयी शितत्त”……उसे याद आया की रोज़ के गश्त लगाने का वक्त है यह…वो जैसे तैसे अपनी बेवकूफी भरे दिमाग को कोसता हुआ ख़ुफ़िया घर पहुंचा “र्रोस्से रोस्से”….रोज़ वहां नहीं थी…अचानक से देवश ने फौरन नॅविगेशन सिस्टम ऑन किया जिसमें ट्रेसिंग डिवाइस था रोज़ की बाइक पे हरपल होता है वो…ताकि देवश उसे बॅकप दे सके…अचानक से रोज़ की ट्रेस में उसे अपना ख़ुफ़िया कमरा दिखता है….रोज़ लर्र रही है एक काले नक़बपसो के साथ और चारों ओर गुंडे गिरे परे है…..

”शितत्त”…….देवश फौरन भाग निकलता है

उधर चक्कर महसूस होते ही गश खाके घायल रोज़ फौरन ज़मीन पे गिर पार्टी है..काला साया उसके गले से उसे उठाकर फौरन उसके सर को वन के दीवार पे पटकता है…रोज़ दर्द से सिसकते हुए वापिस ज़मीन पे देह जाती है…अब उससे ये लरआई लरना संभव नहीं था…अपने कटे होंठ से खून को पोंछते हुए काला लंड उसके बालों से उसे उठता है और अपने बाए पॉकेट से खैची निकालता है..वो पागलों की तरह उसके लहू लुहन चेहरे पे हाथ फेरते हुए उसका खून चखता है..और फिर कैची उसके बालों में जैसे ही फंसाने को होता है

इतने में जीप पे बैठा देवश फुरती से ऊस जीप को काला लंड के पास ले आता है काला लंड रोज़ को चोद जीप को घूर्रता है और हिंसक की तरह उसके सामने दौधता है…देवश भी गुस्से में जीप को तेजी से काला लंड के ऊपर चढ़ाने वाला ही होता है की इतनें आइन काला लंड खुद ही बैलेन्स बिगड़ते ही जीप के ऊपर से टकराते हुए दूसरी ओर जा गिरता है…देवश जल्दी से निकलकर गोली ऊसपे डाँगता है

गोली दो बार काला लंड के बाज़ूयो में लगती है और वो वही गिर परता है….”ओह नो रोस्से रोस्से”…….देवश बाए साइड में गिरी रोज़ को उठाते हुए कहता है…”आहह ससस्स बहुत मारा कमीने ने”…….रोज़ के होठों पे गाली को सुन देवश को चैन आया की वो ज़िंदा है…ऊसने गुस्से भारी निगाहों से काला लंड की ओर देखा और उसे उठते देख हैरान हो गया….काला लंड उठके एकदम से गुस्से में जीप को उठाने लगता है उसके ऐसी असीम ताक़त कोदेख देवश घबरा जाता है

“ओह माइ गॉड ये इंसाना है की मॉन्स्टर”…..इतने देर में काला लंड जीप ऊन दोनों के ऊपर लुड़का देता है…देवश फौरन रोज़ को खींच लेता है..और दोनों दूसरी ओर गिर पारट है और ऊस ओर जीप गिर पार्टी है…काला लंड उसके करीब आता है “ओह माइ गॉड इस पे तो गोली का कोई असर नहीं हुआ”……..डीओॉश हड़बाहात में गोली सड़क पे चोद देता है और फौरन अपने काला साया पैट्रो से ऊसपे हमला करता है पर वो डीओॉश को दूर उछाल फैक्टा है…डीओॉश बैलेन्स बनकर उठ खड़ा होता है और फिर जीप पे देखते हुए ऊस ओर खड़ा हो जाता है “आबे ओह मादरचोद”…….

काला लंड का गुस्सा दहेक उठता है रोज़ के पास जाने के बजाय देवश की ओर भागता है…देवश मुस्कुराकर अपनी जेब से निकलते लाइटर को जीप पे फ़ेक देता है जिसका पेट्रोल लीक कर रहा था

और ऊस ओर से जैसे कूड़ता है…काला लंड जीप से दौड़ते हुए टकराता है और तभी बूओं एक धमाका होता है…जीप के चीटड़े उड़ जाते है…और आग की लपतो में काला लंड चिल्लाते हुए जंगल में कूद जाता है…डीओॉश हालत को समझते हुए रोज़ को कंधे से उठता है और किसी तरह रोज़ की बाइक पे सवार होकर उसके सामने निढल रोज़ को बिता देता है और जितनी हो सके उतनी रफ्तार से बाइक दौड़ा देता है

(UPDATE-55)

काला लंड आग की लपतो को भुजाते हुए रास्ते के सामने खड़ा होकर दूर जाते देवश और रोज़ की तरफ देखता है और ज़ोर से दहधाता हाईईईई…देवश निढल रोज़ के सर को अपने सीने पे रख देता है और उसके चेहरे को चूमते हुए बाइक फुरती से दौधने लगता है

जल्दी ख़ुफ़िया घर पहुंचकर…बाइक को किसी तरह अनॅलिसिस ऑफिस वाले घर में लाकर…मैं जल्दी से बाइक रोककर रोज़ को अपने बाहों में भरके उठता हूँ…और उसे लाके सोफे पे लेटा देता हूँ…रोज़ अब भी निढल थी

पहले तो उसके कपड़े जैसे तैसे उतारे और सिर्फ़ उसे ब्रा और कक़ची में रखा..ताकि उसके पूरे बदन का मुआना करूं अफ कितने चोटें थी लाल लाल निशानो की कुछ तरफ खरोचें थी…बाल भी बिखरे हुए थे..आज तो ऊस जल्लाद ने मेरी रोज़ को मर ही दिया होता….मैंने मुआना किया और एक एक अंगों को चेक किया…शुक्र है की हड्डी सलामत कोई अंग नहीं टूटा…असल में जब काला साया के वक्त भी ऐसे गुंडों से टकराने पे खुद को घायल महसूस करता था…तो अपने काबिल डॉक्टर से सीखी कुछ स्किल्स की मदद से खुद को चेक कर लेता था…मेरे हाथ में अब भी ऐसा स्प्रेन है जो अभीतक ठीक नहीं हुआ और ये मेरी एक बेहद दर्दनाक कमज़ोरी है

खैर मैंने ऊपर वाले का धनञयवाद करते हुए..फौरन इलाज के लिए फर्स्ट ाईड बॉक्स और कुछ पत्तियां ले आया….पहले बाल्टी भर वॉर्म वॉटर से रोज़ के जिस्म को स्पंज बात करने लगा…उससे उसका हाथ मुँह धोया…चेहरे और नाक से निकल रहे खून को पोंछा..और फिर उसके बदन को फिर जहां जहां उसे दर्द था वहां वहां पत्तियां कर दी…उसके बाए आर्म के शोल्डर पे पट्टी बाँधी और फिर एक जाँघ के निचले हिस्से पे…रोज़ अब काफी बेहतर महसूस कर रही थी

रोज़ को जल्द ही होश आ गया….”रोज़ अरे यू ऑलराइट? सब ठीक तो है ना”….उसके चेहरे को थपथपाते हुए मैंने बोला….

ऊसने जैसे मेरी ओर धुंधली निगाहों से देखा वो मुस्कुराते हुए मेरे गले लग गयी…कुछ देर तक हम वैसे ही बैठे रहे

रोज़ : आहह आज तो ऊस कमीने ने मर ही दिया होता

देवश : हां हां हां और जाए अकेले जंग में कूदने के लिए…क्या जरूरत थी? मुझे तुमने एक फोन तक नहीं किया

रोआए : मुझे लगा तुम खुद बिज़ी हो…बेक उप तो थे ही तुम

देवश : हाँ और कब फोन करती बेक उप के लिए जब तुम ऊपर चली जाती तब…फिर मेरा क्या होता? सोचा है इन ज़ालिमो के अंदर रहें नाम की चीज़ नहीं खैर ये शॅक्स काला लंड तुम्हें कहाँ मिला था?

रोज़ : इसने मेरे रास्ते को घैर लिया…इसका टारगेट मैं ही थी हो ना हो इसकी मेरे से कोई दुश्मनी है (रोज़ अभी कशमकश में खोई सी थी इतने में कमिशनर और ब्ड के ऑफिसर उस्मान की बात दिमाग में घूम गयी और एक ही नाम सामने आया खलनायक)

फिर मैंने तफ़सील से रोज़ की ओर देखते हुए उसे बताया की खलनायक एक शातिर माफिया है और इसके गान्ड में दो खतरनाक गुंडे है जो इसके पलूए है और अब शायद इनके निशाने में तुम इसलिए हो क्योंकि तुमने खलनायक के ड्रग्स और उसके आदमियों को मर गिराया जावेद हुस्सियान उसी का आदमी था

रोज़ : ओह ई से (रोज़ फिर गहरी सोच में दुबई फिर ऊसने मुझे ऊन्हें एलिमिनेट करने का कोई रास्ता पूछा)

देवश : नहीं रोज़ मैं तुम्हें और खतरे में नहीं डालूँगा तुम ऊन ल्गो से दूर रहो

रोज़ : ऐसे कैसे कह सकते हो तुम? मैं एक सूपरहीरो हूँ और मैंने अक्चाई से लार्न के लिए वचन लिया

देवश : अचाई क्या जिंदगी से बढ़के है तुम्हारे? मेरी पुलिस फोर्स है ऊन लूग के पीछे अब तुम्हें अकेले मौत के मुँह में दावत देने नहीं चोदूंगा समझी तुम

मेरे परवाह और आंखों में अपने लिए डर को देख….रोज़ मुस्कराई ऊसने ऐसे कई ख़तरो से खेला था…पर आज ऊस्की कोई परवाह करने वाला सामने बैठा था….रोज़ ने हल्के से मुस्कराया लेकिन वो फीरसे सोफे पे लाइट गयी उसे थोड़ा दर्द था बदन में “तुम आराम करो मैं निकलता हूँ”……..देवश उठने ही वाला था की रोज़ ने उसके हाथ को क़ास्सके पकड़ लिया

रोज़ : मुझे छोढ़के आज कहीं मत जाओ ना (ऊस्की आंखों में अपने लिए जो प्यार उमड़ते देखा उससे साला मेरे पाओ जम गये)

बात भी ठीक ही थी उसे अकेला छोढ़ने का मेरा भी कोई मन नहीं था…पर दिव्या वो भी तो अकेले थी…लेकिन रोज़ पे जानलेवा हमला मतलब अब खलनायक उसे टारगेट कर रहा है कहीं ना कहींशायद मुझे भी करेगा…और ऐसी हालत में दूर रहना ठीक बात नहीं…मैंने फौरन घर पे फोन किया हाल जाना….दिव्या आज गुस्सा नहीं हुई उसे मुझपर यकीन नहीं था…मैंने फोन कट कर दिया….

तभी मामुन का भी फोन आ गया…ऊनसे बताया की वो अपने यार के यहां तेहरा है आज घर नहीं आएगा वहां पार्टी है…मैंने कहा मैं कौन सा घर में हूँ जहाँ मर्जी वहां तहेर? आज वैसे भी मैं घर नहीं आने वाला बिज़ी हूँ काम पे…उससे भी बात करके फोन कट कर दिया

फिर अपने शर्ट और जीन्स को उतारके वैसे ही चड्डी पहने…रोज़ के बगल में आकर उसे लिपटके लाइट गया…रोज़ ने हम दोनों के ऊपर चादर ओढ़ ली और मेरे सीने पे मुँह लगाए मेरे पीठ पे हाथ फेरते हुए आराम करने लगी मैं बस उसके ज़ुल्फो के साथ खेलने लगा…आज सेक्स करने का मूंड़ नहीं था ऊससकी हालत ठीक नहीं थी मैं बस उसके साथ वैसे ही लिपटे आनंद ले रहा था और कब मेरी भी आँख भारी होने लगी मुझे पता नहीं

“य्ाआआआआआ”……धड़धस धड़धस्स करके चीज़ों को पटकते हुए काला लंड गुस्से से तमतमाए जा रहा था…..खलनायक बस चुपचाप अपने आदमियों के सामने खड़ा उसके गुस्से को घूर्र रहा था….काला लंड के सर पे खून सवार था…आज ऊसने सबसे बड़ी हार वॉ भी महीज़ एक पुलिस ऑफिसर से पाई थी और एक लड़की से…”ऊस कमीने के वजाहह से मेरा सारा मूंड़ खराब हो गया ऊसने मेरे बदन पे आग लगाइइ कमीने को चोदूंगा नहीं मैं मां चोद दूँगा ऊस्की”…….काला लंड गारज़ते हुए पास कहरे आदमी का गला दबोच देता है

निशानेबाज़ सिर्फ़ मुस्कुराता है…गला चोदते ही वो आदमी फर्श पे गिरके मर जाता है….खलनायक अपने आदमियों को ऊस्की लाश ठिकाने लगाकर कहकर पास आत है

खलनायक : जानता हूँ मैं तुम्हारे गुस्से को लेकिन फिहल तुम्हें आराम की सख्त जरूरत है…तुम्हारे ज़ख़्म्‍म्म

काला लंड : ये ज़ख़्म्‍म्म तब शांत होंगे जब मैं ऊस रंडी की बच्ची को अपने हाथों से नंगा करके टॉर्चर करूँगा मुझे वो इंस्पेक्टर चाहिईए बॅस (काला लंड के पागलपन और गुस्से को खलनायक जनता था..

वो मुस्कुराकर हामी भरके बाहर आ गया साथ में निशानेबाज़ भी)

निशानेबाज़ : अब क्या करे? जो काम आपने इसे दिया था ये ऊसपे खड़ा नहीं उतरा

खलनायक : बिना मारें काला लंड शांत नहीं होगा देखा नहीं कैसे ऊस आदमी को मर डाला जबतक किसी का खून ना बहा दे तबतक शांत नहीं होता यह (काला लंड दीवार पे घुस्से मर रहा था जिसकियवाज़ बाहर सबको सहेमा दे रही थी)

खलनायक : बाकी के गुंडे कहाँ है? कौन था वो शॅक्स जिसने ऊस रोज़ को बचाया?

निशानेबाज़ : सर बाकी गुंडे या तो हॉस्पिटल में साँसें गीं रहे है या कुछ तो मर चुके फिलहाल तो पुलिस के आदमी पे हमला हुआ है ये बात आग की तरह फैल गयी होंगी हुम्हें कुछ दिन तक तो काला लंड का गुस्सा और खुद को अंडरग्राउंड रखान भी जरूरी है

(UPDATE-56)

खलनायक : खलनायक कोई चूहा नहीं जो अंडरग्राउंड हो जाए…पता करो वो इंस्पेक्टर कौन है?

स्साहीब साहेब…एक गुंडा आया जिसके हाथ पाओ पट्टी से बँधे थे…ऊसने बताया की ऊसने ऊस इंस्पेक्टर का पिक लिया जैसे उसे होश आय फौरन हॉस्पिटल से यहां चला आया “उम्म्म इसका मतलब साफ है की वो लड़की रोज़ और वो लड़का एक दूसरे को अच्छे से जानते है और काफी हुनरबाज़ भी है तभी तो हमारी फौज पे ही वो भारी पड़े”……..खलनायक का शातिर दिमाग टांका

खलनायक ने वो मोबाइल पिक्चर ड्केही…दो तीन पिक थे कुछ तो ज्यादा ब्लर हो गये थे पर एक पिक साफ थी…”हम क्या नाम है इसका? शकल थोड़ी थोड़ी पहचान में नहीं आ पा रही साफ नहीं है”…..खलनायक ने गुस्से से गुंडे को देखते हुए बोला…”साहेब ये पिक भी तो चुपके लिया था…वैसे उसका नाम इंस्पेक्टर हाँ इंस्पेक्टर देवश चटर्जी है”…….खलनायक का दिमाग ठनक गया….”क्या? अच्छा अच्छा”…..तो इसका मतलब इस देवश मिया के अंदर कोई रहस्य है उसे रोज़ के लिए जाओ ले आओ उसे यहां मैं उसे 24 घंटों के अंदर यहां पेश चाहता हूओ”………खलनायक के आर्डर को फॉलो करते हुए गुंडा निकल गया

खलनायक : और हाँ एक काम और करो? एक कमसिन लौंडिया को पेश करो…आज काला लंड के भूख वही शांत कर सकती है…वरना उसे आउट ऑफ कंट्रोल होने से कोई नहीं बच्चा पाएगा

खलनायक के सनकी हँसी को सुनते हुए निशानेबाज़ भी तहाका लगाकर हस्सता है…जल्द ही कमरे के भेतर एक लड़की को फैक दिया जाता है…उसे देखते ही काला लंड घुर्राने लगता है…लड़की एकदम ज़ोर से उसे देखकर सहेंटे हुए पीछे होने लगतीई है…और फिर उसके बाद काला लंड उसके बालों से उसे पकड़कर उसके होठों पे दाँत बिताके कांट लेता है…दर्दनाक बेरहेमी का यह तमाशा खलनायक गौर से देखते हुए बस तहाका लगाकर हस्सता है.

“व्हातत्त नॉन्ससेंसी?”……कमिशनर गिलास का पनई पीट हुए देवश की ओर्देखते हुए कहते है “तुम्हारी जान ऊस रोज़ ने बचाई ऊस चोर ने”………कमिशनर ने देवश की सारी बातों को सुनते हुए कहा

देवश : सर मैं सच कह रहा हूँ मुझपर जानलेवा हमला हुआ है…और इसमें हाथ खलनायक का है…और रोज़ नहीं होती तो मुझे कोई नहीं बच्चा पाता

कमिशनर : देखो देवश हर बात की एक हद होती है तुम ऊसें एर सामने उकचा दिखाने की कोशिश कर रहे हो पर कानून के निगहाओ में वो सिर्फ़ एक महेज़ मुज़रिम है…तुमपे आहेसां होंगे उसके पर मेरेल इए वो महेज़ खलायक के भट्टी एक मुज़रिम है

देवश : आप समझना चाहते क्यों नहीं है सर? अगर मैं उसे बचाता नहीं तो रोज़ को कुछ हो जाता

कमिशनर : तो फिर तुमने उसे अरेस्ट क्यों नहीं किया? काला लंड को क्यों नहीं पकड़ पाए जिसके तुमने बारे बारे दावे किए थे

देवश : ई आम सॉरी सर वहां से भागना बेहद जरूरी था वरना ऊस ताकतवर शैतान से बचना मुश्किल ही था मुझे आपसे उसके लिए चुत अट साइट का आर्डर चाहिए

कमिशनर : देखो देवश पहले ही तुमने ऊसपे गोली चलाई ठीक वो मारा नहीं इट;से फॉर डिफेन्स लेकिन उसके लिए चुत अट साइट का मैं आर्डर तुम्हें काटतायी नहीं देने वाला बिकॉज़ मैं ऊन तीनों को ज़िंदा पकड़ना चाहता हूँ इट’से अबौट और कंट्री’से रेप्युटेशन

देवश : वाहह सर सिर्फ़ एक रेप्युटेशन के लिए यू आर बिकमिंग सो सडिस्टिक कोई मारे या बचे इट डोएस्न;त मॅटर तो यू वेट्स रॉंग विड यू सर? प्ल्स सर अगर उसे रोका नहीं गया तो वो और मासूमों की जानें लगा हे इस गोडड़मान ब्लडी साइको

कमिशनर : और यू अरे आ ब्लडी अडमेंट (देवश खून खौले आंखों से कमिशनर की ओर देखने लगा) ठीक है है सर आप मुझे आर्डर नहीं देंगे ना सही लेकिन अगर आगे छलके कोई मासूम मारा तो उसके ज़िमीडार आप होंगे…मुझे अपनी प्रमोशन की परवाह नहीं…ऐसे ही तो आपने काला साया के लिए एन्कौतेर लिख डाला…जबकि ऊसने नायक काम किया जिस मुज़रिम से आपको बेनेफिट है उसे मारना मतलब क्रोरो का नुकसान

अगर पुलिस ही नुकसान और प्रॉफिट की बात सोचे वो भी मुर्ज़िमो से तो फिर कानून के तरज़ू में सिर्फ़ प्रॉफिट और करप्षन ही मुझे दीखेगा

कमिशनर : गेट आउट देवश और डोंट आर्ग्यू विड में मैं जनता हूँ मैंने क्या किया और ई हॅव डन एवेरितिंग राइट..गो नाउ राइट नाउ

देवश : जा रहा हूँ सर ये याद रखिएगा आज काला साया का होना कितना जरूरी था…कल रोज़ भी मारी जाएगी…फिर हमारा कानून ऊन मुर्ज़िमो को पकड़ पाए या ना पाए पर ऊन लोगों के लिए हिज़ाड़ो की तरह ताली जरूर बजाएगा

इस बार देवश का गुस्सा सर चढ़के बोला….और वो तमतमते हुए थाने से निकल गया….

पीछे कमिशनर बस गुलाबी निगाहें लिए टेबल पे मर के बैठ गया…

देवश पूरे रास्ते गुस्से से जीप को चला रहा था…कमिशनर की एक एक काँटे डर चुबती बातें उसके दिमाग को जैसे कांटें जा रही थी…जल्द ही वो इतर पहुंचा…और फिर अपने घर ऊसने गाड़ी रोकी और गुस्से में टमतमाते हुए दरवाजे की ओर देखा…ये क्या? लगता है मामुन अभीतक आया नहीं

देवश ने अकेले ही दरवाजा खोला और फिर बिस्तर पे जाकर लाइट गया…आज उसका मूंड़ बेहद खराब था एक तो काला लंड से भीढात के साथ ही उसे भी थोड़ी चोटें आई थी…ऊपर से कमिशनर चुत अट साइट के आर्डर को भी रेफ्यूज़ कर रहा था वो जनता नहीं की ये तीन बदमाश कितने खतरनाक है…लेकिन ऊपर के कुर्सी में बैठे लोगों को कैसे समझाए???

देवश सर पे हाथ रखकर अभी बैठा ही था इतने मेंडरवाजे पे दस्तक हुई….देवश ने दरवाजा खोला…”अरे ये क्या काकी मां आप?”…..देवश के चेहरे पे थोड़ा मुस्कान आया

अपर्णा काकी : हाँ और नहीं तो क्या? बेटा ज़रा एक गिलास पानी पीला दे बहुत दूर से छलके आई हूँ

UPDATE-57)

देवश : अच्छा रुकिये

देवश ने अपर्णा काकी के सारी से आ रही पसीने की महक को महसूस किया…और जल्दी से फटाफट पानी के बजाय ग्लूकों-द काकी को दी…काकी ने मुस्कुराकर ग्लूकों-द को एक ही साँस में पी लिया…”अब जाकर राहत मिली”…..अपर्णा काकी ने धीमी साँस लेते हुए कहा

देवश : आप कहाँ से आ रही हो इतना छलके?

अपर्णा : अरे बेटा तेरी शीतल के लिए रिश्ता पक्का हुआ है

देवश : क्या? वाहह ये बहुत खुशी की बात आपको भी मुबारकबाद कब कैसे?

अपर्णा : अरे बेटा एक लड़का शीतल को कुछ दीनों से पीछा कर रहा था…खेतों से लेकर घर तक मुझे लगा कहीं लड़का गलत तो नहीं लेकिन फिर मैंने उसके बारे में पूछताछ की तो पाया की वो लड़का फ़ौजी में वो क्या नक्शा बनाते है वो कमा करता है…डाल में रहके और बर्दमान में रहता है

देवश : अच्छा लड़का लेकिन ठीक तो है ना

अपर्णा : हाँ बेटा मुझे तो बहुत अच्छा लगा उसे शीतल बहुत पसंद है…बोलता है की मैं इसके बिना किसी से शादी नहीं करूँगा वो दहेज की भी डीमाड नहीं कर रहा…अब ऐसा लड़का हमें कहाँ मिलेगा तू ही बता? ये कामकल तो समझती नहीं

देवश : क्यों शीतल राजी नहीं है?

अपर्णा : बेटा मैं तो उसे समझते समझते तक गयी बस रोने लगती है बोलती है की मैं आपको और देवश भैया को छोढ़के कहीं नहीं जाना चाहती अब तू ही बता ऐसे थोड़ी ना होता है

देवश : होगा काकी मां शीतल राजी होगी

अपर्णा : वो कैसे बेटा?

देवश : वो आप मुझपर चोद दीजिए मैं एक बार ऊस लड़के से मिल लू जिंदगी का सवाल है देख भी लूँगा उसका खंडन कैसा है? क्या वो मेरी शीतल को खुश भी रख पाएगा

अपर्णा : हाँ बेटा ये काम तो तू ही कर सकता है बस किसी तरह शीतल को मना ले बहुत ही अच्छा लड़का है हाथ से निकल गया तो चिराग लेकर भी नहीं मिलेगा

देवश : ठीक है मुझे टाइम दीजिए

(मैंने फौरन अपर्णा काकी से ऊस लड़के का नाम पूछा ऊन्होने बताया रामलाल है मैंने उसे फोन किया और उससे मुलाकात करने को कहा पहले तो वो झिझक गया फिर वो मान गया)

अपर्णा काकी खुश हो गयी….”बेटा सोच रही हूँ अगले महीने ही शीतल की शादी करवा दम वो के है ना? लड़का फिर चला भी जाएगा वापिस वो बोल रहा है वहां क्वार्टर में उसे रखेगा”……..मेरे लिए ये बात सुनकर बहुत ही अच्छा महसूस हुआ…मैं भी चाहता था की शीतल अब मुझसे थोड़ी दूरिया बनाए ताकि वो अपना नया ग्रहस्ति जीवन जी सके…एक बार दूसरे मर्द की आदत पढ़ जाएगी खुद पे खुद वो ऊस की हो जाएगी….ये सब सोचते हुए मैं खुश हुआ

अपर्णा काकी ने मेरे उदासी को समझा की आज मेरा मूंड़ ज्यादा क्यों नहीं ठीक है?….”केस के मामले में थोड़ा बिज़ी हूँ काकी मां और ऊपर से बढ़ते काम का भोज”………..अपर्णा काकी ने मुस्कुराकर बोला….”तू भी शादी कर ले बेटा एक बार औरत आ गयी तो फिर तेरी टेन्शन दूर हो जाएगी “………मैंने मुस्कुराकर अपर्णा काकी की बात को सुना

देवश : क्या काकी मां? तुम भी ना मुझे कोई और लड़की झेल भी सकेगी आप तो मेरे राग राग से वाक़िफ़ हो

अपर्णा : हाँ हाँ तू अपने इस पेंट के भीतर छुपे ऊस राक्षस की बात कर रहा है ना जो एक बार हमारी बिल में घुस्सके खुद दर्द पहुंचता है

देवश : हाँ काकी मां बस वही बात है

अपर्णा : तब तो तेरे लिए औरत खोजनी पड़ेगी 40-35 की जो तुझे झेल सके

देवश : क्या काकी मां?

अपर्णा : और नहीं तो क्या तेरे इस मोटे मूसल को तो गड्ढा चाहिए छेद थोड़ी ही

देवश : अच्छा ग मेरे साथ रही रहके आप भी खुल गयी हो

अपर्णा काकी हंस पड़ी…ऊँका पल्लू थोड़ा नीचे सरक गया और उनके भारी छातियो के कटाव को देखकर मैं खुद पे खुद उनके चेहरे के करीब आने लगा…काकी भी मेरे नज़दीक आने लगी…हम अभी एक दूसरे के होठों से होंठ सताके चुमन्ने ही लगे थे की मेरा सख्त आइरन रोड की तरह खड़ा हो गया…मेरे हाथ काकी मां के ब्लाउज के फ़िटे पे और उनकी न्नगी पीठ को सहलाने लगे हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये…एक दूसरे के होठों को पागलों की तरह चूम ही रहे थे इतने में दरवाजे की घंटी बज उठी मैं दरवाजे की ओर रुख करने लगा…पर काकी मां मेरे चेहरे को पाखारे अपने होठों से सताने लगी…ऊन्हें तारक चढ़ चुकी थी..

फिर फोन बज उठा…मैंने फुआरन काकी मां को धकेल दिया और दरवाजा खोलने के लिए हम दोनों गहरी गहरी साँसें चोद रहे थे काकी मां ने अपना पल्लू अपने छातियो के ऊपर रख लिया…जैसे दरवाजा खोला मामुन आ चुका था

काकी मां को देखकर एकटक उसके मदमस्त जवानी को निहारने लगा…मैंने उसे झिंजोधा “क्या देख रहा है आबे”……मामुन कुछ नहीं बोला बस मुझे अनख् मर दी “ये वैसी औरत नहीं है”……मैंने धीमे आवाज़ में कहा…काकी मां बर्तन ढोने चली गई…उसे भी मम्मून को देखकर थोड़ा आश्चर्य हुआ…कुछ देर बाद मैं किचन आया माँफी माँगी काकी मां से मामुन के रवैये के लिए…ऊन्होने कुछ नहीं कहा बस मुस्कराया..और बोली की ये कौन है?…मैंने ऊन्हें बताया तो ऊन्हें याद आ गया ऊन्होने बोला ये यहां कैसे? मैंने बताया की वो मुझे ढूँढते हुए आया है…काकी मां ने उसे संभलके रहने को कहा और पूछा की कबतक रहेगा? मैंने बताया की बस चला जाएगा कल परसों तक…तो ऊन्होने फिर कुछ नहीं कहा फिर मुझसे रिकवेस्ट की रामलाल से मिल लू आज शाम…मैंने हामी भारी और ऊन्होने जल्द ही विदा कर दिया मामुन के सामने उनके साथ कुछ करना ठीक नहीं…क्योंकि मैं अपनी औरतों को दूसरों के सामने पेश नहीं करता

फिर मामुन से बातचीत में बातें काट गयी…मेरा गुस्सा कहीं हड़त्ाक शांत हो चुका था…मैं दोपहर तक दिव्या और मेरे दूसरे घर पहुंचा…घर में ताला लगा हुआ था…यक़ीनन सब्ज़ी मंदी गयी होंगी….

मैं फिर वहां से रामलाल को फोन मिलाए उससे मिलने गया

रामलाल नुक्कड़ पे ही चाय पी रहा था…मुझे देखते ही वो उठ खड़ा हुआ…रामलाल देखने में गबरू जवान था 25 साल का और काफी देखखे ही डिसेंट लग रहा था…मैंने गाड़ी रोकी और उससे हाथ मिलाया…वो भी मुझसे मेरे बार्िएन में पूछने लगा एक अफ़सर एक फ़ौजी से आज मिला था…फिर हमने कुछ देर चाय पी एक दूसरे का परिचय लिया और खेतों की तरफ निकल लिए

देवश : देखो रामलाल मुझे तुमसे कुछ बातें कहनी है इसी लिए तुम्हें बुलाया है?

रामलला : हाँ कहिए ना भैया

देवश : देखो उमर में तो हुमुमर ही हो तुम मेरे…लेकिन रही बात ज़िम्मेदारियो की वो तुम्हें संभालनी होगी मेरी बहन है शीतल खून का रिश्ता तो नहीं पर खून के रिश्तो से भी बढ़के है…तुम मेरी बहन का पीछा करते थे मैंने सुना

रामलाल हकला गया…”दररो नहीं तुम मुझसे एकदम खुलके कह सकते हो क्या तुम्हें शीतल पसंद है?”……वो शर्मा गया फिर ऊसने हाँ कहा…”उम्म देखो एक दूसरे के साथ जबतक फ्रेंक नहीं होंगे बात आगे नहीं बढ़ेगी मैं यही चाहता हूँ की तुम शीतल की खूबसूरती के साथ साथ ऊस्की इक्चाओ को समझो मेरी बहन पे सभियो की नज़र है कोई भी उसे गंदा ही करना चाहेगा फ्रॅंक्ली बोल रहा हूँ तुम्हें कहना नहीं”………मैंने उसे समझते ही कहा और वो सुनता रहा हाँ हाँ में जवाब देता रहा

रामलाल : हाँ भैया मुझे शीतल पसंद है पर वो मुझसे राजी नहीं हो रही क्या मैं इतना बुरा हूँ? मैं उसे दुनिया की सारी खुशिया दूँगा मेरे घर में सिर्फ़ मेरी एक बीमार मां है जो मेरे बाबा के साथ यहां रहती है मेरी पोस्टिंग बर्दमान में है 22000 की टंकवह है और सरकारी फेसिलिटी अलग से

देवश : देखो रामलाल मेरी बहन ने बहुत तक़लीफें देखी है ऊसने बहुत गरीबी और दर्द सहा है वो मेहनती है और कोई लालची नहीं पैसों की इसी लिए तुम ये भूल जाओ की वो तुम्हारी पोस्टिंग के लियेटुँसे शादी करेगी असल सुख तब उसे दोगे जब औरत को तुम उसका असली गहना दोगे उसे खुश रखोगे उसे वो वाला प्यार दोगे

रामलाल पहले तो कुछ समझा नहीं फिर वो जब समझा की मैं किस टॉपिक की बात कर रहा हूँ तो मुस्कुराकर शरमाते लगा ..”बोलो मेरी बहन को तुम ऊन सबतरह की सुख दे पाओगे”….रामलाल ने मेरे हाथ को पकड़ा और बोला “सच पूछिए तो बिलकुल मेरी एक गर्लफ्रेंड थी इससे पहले मैं झूठ नहीं बोलूँगा उससे मेरे काफी अच्छे संबंध थे पर वो मुझे धोखा दे गयी अगर आपको ये बात बुरा ना लगे इसलिए मैंने ये बात कहीं”………..

मैंने रामलाल के कंधे पे हाथ रखकर ऊस्की बातों को गौर से सुना

UPDATE-58

देवश : तुम ने सारी बातें दिल से कहीं है पर मेरी बहन कुँवारी है लेकिन काकी मां ने मुझे बताया की शीतल भी बहुत ज्यादा जवान खून है समझ रहे हो ना अगर उसे तुम खुश रख पाओगे तो मैं इस रिश्ते को हाँ कहूँगा ये हम मर्दों की बीच की बात है तुम्हें ध्यान से समझना होगा इसमें कोई बुराई नहीं ना ही मेरी बहन कोई ठरकी है पर फिर भी औरत का असली गहना उसका मर्द होता है और उसका सुख

रामलाल कुछ दायरटक सोचता है मुझे लगा मैंने कुछ ज्यादा कह डाला क्या? लेकिन ऊसने मुस्कुराकर बोला उसे ये रिश्ता मंजूर है पर वो शीतल को मनाए कैसे?…..मैंने मुस्कुराकर उसे बहुत ही राज़ की बात कहीं की उसे कैसे बहलाना है और कैसे प्यार करना है? वो खुद पे खुद ऊसपे नीचावर हो जाएगी रामलाल बहुत ही हैरान हुआ की वो कैसे घर में शादी करने जा रहा है लेकिन आक्साइड तो बंदा था ही जो औरत से दूर रहे वो आक्साइड तो होगा ही फिर ऊसने तरक़ीब को समझा और मुझसे विदा लेकर चला गया

मैं बहुत खुश था अब जल्द ही रामलाल शीतल को पता लेगा और उससे शादी भी कर लेगा….रामलाल भी यही चाहता था उसे भी कोई शर्म नहीं हुई…फिर मैं जीप पे सवार हुआ तभी विरेसलेशस से सूचना मिली थाने आने को

मैंने फौरन जीप थाने की ओर रुख की…देखता हूँ की काफी भीढ़ है…और एक औरत की लाश के ओसफेद कफ़न से धक्का हुआ है जो ऊपर से पाओ तक शायद नंगी ढकी हुई है (ये वही लाश थी जो खलनायक ने अपने काल लंड के संतुष्टि के लिए किडनॅप की थी और उसे परोसा था बेरहें साइको के सामने)…मैं उसके करीब गया एक तरफ कुछ औरतों के झूंड रो रहे थे शायद वो ऊस्की मां थी…जो कलेजा पीँत रही थी…हवलदार ने सूचित किया की ऊस्की बेटी की लाश को यहां खलनायक के गुंडों ने चोद दिया और ऊस लड़की के साथ बलात्कार हुआ है और उसे बेरेहमी से मर डाला है और जानभुजके थाने पे ऊस्की लास हचोढ़ दी

मैं उसके करीब जाकर उसका जैसे काप्रा हटाया तो मेरी आँखें शर्म से बंद गयी…जल्दी से काप्रा धक्का उसका शरीर नंगा था प्रेससवाले ऊस्की तस्वीर खींचें जा रहे थे…”आप लोगों की वजहह से मेरी बेट्तिी को मर डाला ऊन हरामज़दाओ आख़िर कैसे पुलिसवाले हो आप लोग जिसने मेरी फूल जैसी बची को बच्चा ना पाया ऊन कामीनो को पकड़ ना सके “……ऊस्की मां रो रोके मुझे और मेरे अफ़सर्स को गालिया दी जा रही थी मैं बहुत खुद को बेबस महसूस कर रहा था

हवलदार ने बताया की लड़की को कल रात अगवा किया गया था खलनायक के गुंडों ने जब वो ट्यूशन से आ रही थी और फिर सुबह ही ऊस्क इलाश दिन दहाड़े के थाने के पास फ़ेक दी मुआना किया तो दिल शहर गया लड़की के चुत से खून बंद ही नहीं हुआ और उसके बदन पे इर्द गिर्द बेरेहमी से खरॉच दाँत काटने के चोटों के निशान है उसके चेहरे को इतनी बुरी तरीके से किसी

चीज़ पे पटका है की पहचान करना भी थोड़ा मुश्किल था…पता नहीं किस जालिम ने इतनी बेदर्दी से ऐसी मासूम को अपने होश का शिकार बनाया मेरा तो खून खौल उठा थानेक एब ईछो बीच खलनायक ने ऊस लड़की को नंगा करके ऊस्की लाश फैक दी…इसका एक ही परिणाम है की वो मेरी मर्दानगी को ललकार रहा है….मेरा गुस्सा सातनवे आसमान पे चढ़ गया

सबके जुबान पे था काश काला साया होता ना जाने वो कहाँ गायब हो गया? वो लड़की जो खुद को इस शहर की बचाव कहती है वो रोज़ कहाँ है? सबके जुबान पे रोज़ और खुद के नाम को सुन सच में आज मेरी मर्दानगी को जैसे ललकार मिला था मैं शर्म के मार्िएन लाश को जल्द से जल्द मॉर्ग के लिए रवाना कर डाला…और वहां मैं खड़ा नहीं रही पाया थाने के अंदर घुस गया

थाने में बैठा बैठा बस चुपचाप डेस्क टेबल के बॉल को घुमा रहा था…इतने में बाहर का शोर्र सुनाई दिया….पुलिस के नाम की हाय्ी हाय्ी हो रही थी…प्रेस वालो किसी तरह हवलदार रोकें जा रहे थे इतना बड़ा घटना घाट गया इतनी शरामणाक हत्या हुई थी एक मासूम लड़की की…पब्लिक के साथ साथ न्यूज वालो का भी गुस्सा उबाल रहा था हर कोई जवाबा चाहता था आख़िर क्यों नहीं पुलिस काला साया की तरह काम करती..

मेरा पारा चढ़ गया….अगर कॉन्स्टेबल नहीं रोकता तो मैं बाहर निकल जाता…लेकिन हालत काबू से बाहर नहीं थे सारे आम पुलिस पे कीचड़ उछाला जा रहा था…पुलिस की बेज़्ज़ती हो रही थी…कुछ पुलिस अफसरों ने लाठी चार्ज करने तक को कह डाला पर मैंने मना किया क्योंकि कहीं ना कहीं कुसूरवार तो हम थे ही…जो एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अफसरों ने काला साया को मर गिराया था मतलब ऊन्हें लगता था वो भी आज सर झुकाए अफ़सोस कर रहे थे उनके झुके चेहरों को देख मेरे अंदर की ज्वाला कमिशनर और ऊस खलनायक पे निकल रही थी

किसी तरह बाहर आया धारणा शाम तक चल रही था…सबने मुझसे पूछताछ स्टार्ट कर दी…”दीखिई बात सुनिईए मेरी बाट्ट सुनिईए”……..मैंने गारज़ते हुए कहा सब चुप हो गये….

”मानता हूँ हमने बहुत बड़ी ग़लतिया की पर इस गलती को सुधारने का मुझे मौका चाहिए आप लोग जैसा सोच रहे है वैसा नहीं है”………मैंने अभी कहा ही था की एक आदमी ने चिल्लाके कहा की उनकी बेटी के सात हहुआ वो क्या अच्छा था? जबसे काला साया गायब हुआ है तबसे वारदातें बढ़ी जा रही है फिर से हाय्ी हाय की बोल श्रुऊ हो गयी…”शुतत्त उप”……इस बार मैं भड़क उठा

देवश : आप लोगों को मैं समझाए जा रहा हूँ पर आप लोग कुछ समझने के लिए राजी ही नहीं है…आज एक खून हुआ कलकत्ता जाए दिल्ली जाए हिन्दुस्तान के हर कोने में जाए क्या क्राइम रुकता है नहीं ना क्राइम आप हम जैसे लोगों से पनपता है…हम पुलिस वाले तो सिर्फ़ उसे रोकने की कोशिश करते है पर हमारे हाथ बँधे है अपने ही हथकड़ियों से जी हाँ हम कोई भी एक्शन लेंगे ऊपर से हुंपे दबाव आता है बड़ी बड़ी पहुंच होती है भ्रष्ट पॉलिटिशियन्स का पहरा होता है तो क्या हम लोग जानभुज्के मुर्ज़िमो को सजा नहीं देना चाहते ज़रा सोचिए

काला साया आज हमारी ही बदौलत इस दुनिया में नहीं है…ये बात सुनते ही सब शॉक्ड हो गये सब खामोश थे जैसे क़ब्रुस्तन में सन्नाटा छा जाता है….”काला साया जरूर आता अगर ऊस्की साँसें चलती तो…काला साया को मर दिया गया है…महानन्दा नदी में अपनी बचाव और एनकाउंटर से बचने के लिए ऊसने खूड़खुशी कर ली”……….ये सुनते ही सब भड़क उठे

देवश : आप चाहते है ना की हमने गलती की तो ज़रा सोचिए हम तो छोटे मुलाज़िम है असली सरकार तो वहां ऊपर बैठी है क्यों नहीं उससे सवाल करते क्यों नहीं जवाब माँगते लेकिन मैं वचन देता हूओ खलनायक और उसके बढ़ते अपराध को मैं रोकुंगा चाहे इसमें मेरी जान क्यों ना चली जाए? आपको जो सवाल पूछना है वो सारे जवाब मैं दे चुका यक़ीनन मैं आपकी बेटी को वापिस नहीं ला पाऊँगा मुझमें वो ताक़त नहीं लेकिन कसम देता हूँ की मैं इंसाफ जरूर करूँगा

प्रेस रिपोर्टर्स मेरी बातों को ध्यान से सुन रहे थे मेरे आंखों से निकलते आँसुयो को पढ़ रहे थे…मेरी चेहरे पे फ्लॅशलाइट्स हो रही थी…न्यूज चॅनेल में मेरा इंटरव्यू यक़ीनन कमिशनर देखकर हक्का बक्का हो गया था..ऊस्की तो जैसे गान्ड फटने लगी थी…और धीरे धीरे उसे हर जगहों से कॉल आने लगा…काला साया जो पब्लिक का देवता था उसका एनकाउंटर किसने कराया? कोँमिसिओनेर ने क्यों आर्डर दिया?…खलनायक भी इस इंटरव्यू को सुनकर बस तहाका लगाकर हंस रहा था..

जल्द ही लोग धीरे धीरे गुस्से की आग में जाने लगे उनके पास सवाल तो थे गुस्सा भी पुलिसवालो पे लेकिन उनके हर सवाल का जवाब उपरी लोगों के पास था…ऊन लोगों ने तायी किया की अब वो कलकत्ता पुलिस हेक़ुआर्तेर जाकर ये जवाब माँगेंगे….

मैं केबिन में बैठा हवलदार और सब मुस्करा रहे थे और ऊन्होने मुझे पानी दिया शांत होने को कहा…मेरी हालत ठीक नहीं थी मैं फौरन जीप पे सवार होकर घर के लिए रवाना हो गया

“फ्फूककक थींम फुक्कक तेमम्म अल्ल्ल बस्टर्द्ड़स”….रोज़ इधर से उधर तहेलते हुए लंगड़ाके मेरी ओर देख रही थी मैं एकदम गुमसूँ चुपचाप मुँह पे हाथ रखकर गहरी सोच में डूबा हुआ था

रोज़ : क्या सोच रहे हो? काश मैं ऊन बॅस्टर्ड्स को सबक सीखा पति काश मेरी ये कमज़ोर हाथों में कुछ और दम होता

देवश : गलती तुम्हारी नहीं है रोज़ तुम इंजूर्ड थी वरना ये वारदात कभी नहीं होती

रोज़ : ऊन हरामजादो ने अपना रेज निकालने के लिए एक लड़की पे अपना गुस्सा निकाला हमारा…ऊस काले नक़ाबपोश को मैं ज़िंदा नहीं छोढ़ूंगी

देवश : तुम कुछ नहीं करने वाली कुछ भी नहीं

रोज़ : वॉट अरे यू आउट ऑफ और माइंड? इतना कुछ हो गया और तूमम्म?

देवश : बिलकुल वो लोग बहुत ताकतवर है हमें ऊओनेहीं हराना होगा हम पिचें आयी हटेंगे पर कभी कभी जंग में कूदना आसान नहीं होता..

रोज़ : तो तुम कहना क्या चाहते हो? हम ऊन्हें कैसे रोकेंगे?

देवश : मेरे आर्डर आने तक तुम कही नहीं जाओगिइइइ

रोज़ : देवस्शह प्लीज़ ऐसा मत करो

देवश : ई साइड नो मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता और रही बात लोगों की ई विल गुड ताकि केर ऑफ तात्ट प्लीज़ इस बार मान जाओ

रोज़ : फिनने मैं जा रही हो

देवश : रोस्सी रोस्सईए (रोज़ बाइक पे सवार होकर निकल गयी यक़ीनन वो अब क्राइम-फाइटिंग तो नहीं करेगी लेकिन उसके दिल में मेरी बात कही चुभ गयी थी)

मैं अपने चेहरे पे हाथ रखकर वही बैठ गया…जब दूसरी ओर निगाह पड़ी…तो शीशे में बंद काला साया के कपड़े और उसका मास्क मेरे सामने था….मेरे आंखों में अंगार सी छा गयी आज खुद को अकेला महसूस कर रहा था…एक तो रोज़ बिना कुछ कहें निकल चुकी थी और इधर मैं कशमकश में कहीं खोया हुआ था सबकी बातें दिमाग में जैसे गूंज रही थी अगर काला साया होता? अगर वो होता? तो क्या वो रोक सकता?

(UPDATE-59)

मैं आज हार गया हूँ दिव्या”…….दिव्या के गाओड़ी में सर रखकर मेरे आंखों से आँसू बह रहे थे

“तुम ऐसा क्यों सोच रहे हो? देवश…मानती हूँ अपराध को रोका नहीं जा सकता तो क्या तुम ऐसे घूंत्त घूँट के कबतक जियोगे अगर आज काल साया ना होता तो क्या ये लोग सुरक्षित रही सकते थे….तुम एक महेज़ इंसान हो कोई देवता नहीं हर इंसान को अपनी बचाव खुद करनी पढ़ती है अगर कल तुम मुसीबत में फासे तो कौन बचाएगा”…….

मैं दिव्या के बातों को सुन रहा था उसके हाथों को अपने बालों को सहलाते महसूस कर रहा था

देवश : तुम सही हो दिव्या बहुत सही हो आज मेरा मूंड़ नहीं हे मैं थोड़ा गश्त लगाकर आता हूँ

दिव्या : सावधान रहना मुझे तुम्हारी फिक्र लगी रहेगिइइ

देवश : तुम हो ना साथ मेरे (दिव्या के माथे को चूमते हुए मैं निकल गया)

जीप को फुरती से 60 की बढ़ता में चला रहा था…सड़क एकदम सुनसान थी….जगह जगह सड़क के कुत्ते भौंक रहे थे कहीं रो रहे थे कोई शराबी कचदे के धायर पे सोया हुआ है…कहीं कोई ग़रेबे सड़क पे चादर बिछाए सो रहा है….रात का 1 बज रहा था…आंखों से आँसुयो को रोक नहीं पाया…साला ये जिंदगी की भी अज़ीब है कहाँ से श्रुऊ किया था? कहाँ चल रहा है? एक वक्त था बदले की भावना में जी रहा था और आज ऐसे मोड़ पे हूँ की जिस गलियों को छोडा जिस भैईस को चोदा आज ऊस्की इतनी जरूरत महसूस हो रही है…कमिशनर की मां तो चुद रही होगी बारे बारे उक्चे लोग पब्लिक सब ऊसपे क्वेस्चन की बरसात कर रही होगी हम और होना भी च्चाईए ऊस जैसे मतलबी इंसान को क्या समझा आए की काला साया की क्या जरूरत थी?…..अचानक देखता हूँ की किसी ने मेरी जीप को ओवर्टेक किया

पुलिस की जीप को ओवर्टेक..मैं जीप रोककर फौरन उतरा…”आए कौन्ण है?”…….वन से कुछ गुंडे बाहर निकले….और दूसरी ओर निशानेबाज़ मज़ूद था…जो सिगरेट फहुंककर मुझे देख रहा था मुस्करा रहा था..”तो तू है वो इंस्पेक्टर जिसने रोज़ को बचाया हरमजादे”……..एक गुंडे ने बताया वाइर्ले पे अभी हाथ रखने ही वाला था

की इतने में हॉकी का एकदांडा हाथ पे पड़ते पड़ते बच्चा.आ..मैंने फ़ौरना उसके चेहरे पे एक घुसा मर के उसे गिरा डाला….पीछे से चैन मेरी गर्दन पे…और गुंडे के लात घुषो की बौछार मुजपे…आज इतना बेबस हो जाऊंगा सोचा नहीं था…ऊन्होने फुरती से एक लात मर के मुझे गिरा डाला…”शितत मोबाइल भी दूर जाकर गिरी अब ना तो रोज़ को कॉल कर सकता था और ना ही पुलिस को सूचना दे सकता था…आज बेबस हो गया त मैं”…….तभी एक हॉकी का डंडा सीधे मेरे सर पे पारा….आहह…मैं दूसरी ओर गिर पड़ा

हाहहाहा…ऊन लोगों की तहाका लगती हँसी मेरे अंदर के खून को खौला रही थी….”बड़ा आया इंस्पेक्टर साले उठ हाहाहा खलनायक भाई से पंगा लेगा कांट दो साले के हाथ पाओ हड्डी तोड़ दो इसकी”……..निशानेबाज़ ऊन गुंडों की बातेयसुनके उठ बैठा

“आबे ओह जान से मत मर देना मर के खलनायक भाई के पास लेकर भी जाना है”…….

ऊस्की बात को सुनकर गुंडे ने हाँ में सर हिलाया मेरी ओर हिंसक निगाहों से आगे आए…मुझे उठाते ही फिर मेरे पेंट और मुँह पे हॉकी का बल्ला पड़ा…बहुत क़ास्सके दर्द उठा…लेकिन तीसरे वार जैसे ही मुझपर होता ऊस हॉकी के बल्ले को हाथ से रोक डाला…काला साया यक़ीनन नहिता पर दानव पैच तो थे ही बरक़रार

फौरन जंग की शुरूवात की और भाई किक सामने हॉकी का बल्ला पकड़े शॅक्स के मुँह पे…वो लोग मुझपर भीढ़ गये…अब मैं अपने फॉर्म में आ गया और अपनी मंकी किक सामने वाले के सीने पे उतार डाली वो वन पे जा गिरा…शीशा खनक से टूटा और उसके पीठ पे धंस गया….दूसरी आईडी की चोट एक गुंडे की गर्दन पे…मैंने फुरती से अपनी पेंट के पीछे से नानचाकू निकाला…और ऐसे करतबो से चलाने लगा….की वो लोग सहम गये

“आओ सुवार की औलादो क्या हुआ? रांड़ की पैदाइश हो क्या?”…….ऊन्होने मेरे गाली को सुनते ही आक्रमण कर डाला…मैंने नानचाकू को बारे फुरती से ऊँपे चला डाला…किसी का सर किसी का टाँग किसी की गर्दन किसी का मुँह…किसी की अँड सबपे नानचाकू बरसाने लगा…ऊन लोगों की टूटती हड्डिया और बिबीलते स्वरो से वही धैरहोणे लगे….”पुलिसवाले के पास नानचाकू स्ट्रेंज”……निशानेबाज़ जो सोच रहा था की ऊस्की पलूए इस पुलिस को मर गिराएँगे डर्सल चूतिया था उसे क्या पता? की जिस शेयर को वो लोग पुलिसवाला समझ रहे है वो असल में कौन है?

निशानेबाज़ मेरा एक्शन देखने लगा….ऊन गुंडों को इतनी मर मारा की वो लोग उठ नहीं पाए जल्द ही निशानेबाज़ ने फुरती से मेरे ऊपर तीर चला दी जो मेरे बाए कूल्हे पे लगा…”आअहह”……मैं दर्द से बिबिला उठा वो अभी दूसरा हमला करता उसके तीर को मैंने हाथों से लोक लिया.और फिर ऊसपे नानचाकू फ़ैक्हा..उसके चेहरे पे जा लगा….निशानेबाज़ हड़बड़ा गया…मैं उसके पीछे दौरा…ओसोने फिर तिरो का हमला किया इस बार मैं बच ना पाया पीठ और गर्दन पे तीर धंस गया

निशानेबाज़ तहाका लगाकर हस्सने लगा….मैंने पास रखी हॉकी स्टिक उठाई और उसके मुँह पे मारी….वो बच निकाला लेकिन मैंने उसके पाओ को पकड़कर नीचे पटक डाला…”टीटी..तू इतना हुनर कैसे जनता है साले”……निशानेबाज़ करते का हमला करने लगा…”मैंने उसके दोनों हाथ ओको क़ास्सके दबोच लिया…”क्योंकि तू मुझे नहीं जनता मैं कौन हूँ और सीधे उसके मुँह पे एक लात जमा दी

निशानेबाज़ देख सकता था की इतने घायल होने के बाद भी मुझमें कितनी हिम्मत थी खलनायक ने सक़ती से मना किया था की मैं जान से ना मारू..निशानेबाज़ मुझे पाक्ड़ने आया था लेकिन अब वो साँप को कैसे पकड़ पाता..”बिना तीर के तू कुछ नहीं कर सकता कमीने”…….

मेरी एक लात उसके पीठ पे जम गयी

निशानेबाज़ भागा…मैं भी उसके पीछे तीर को उकाध के अपने कमर और जिस्मो से अलग करके फैक्ने लगा…जल्द ही वो साए की तरह वापिस अपनी गुप्तिए निए गाड़ी में सवार हो गया…मैं उसके पीछे जाता ही लेकिन ऊसने गाड़ी मेरे ऊपर चलानी की सोची मैंने फौरन कूदके उसके रास्ते से हाथ गया और वो बढ़ता में गाड़ी को लेकर कहीन्द और भाग गया…पुलिस को सूचना देना बेकार ही था…वो भाग चुका था…मैं वैसे ही घायल हालत में इधर उधर देखते हुए जीप पे सवार हुआ गुंडे धायर हो चुके थे

एक को उठाकर उससे पूछताछ की तो पाया खलनायक ने मुझे किडनॅप करने के लिए भेजा था…और ऊस्की नज़र मुझपर है क्योंकि मैंने उसका माल और ऊस्की दुश्मन रोज़ को बचाया है….मैंने ऊस अधमरे गुंडे को वही फ़ेक डाला…और अपनी जीप एप सवार हो गया…क्योंकि ठिकाना उसे भी पता नहीं था

किसी तरह जीप को बीच में ही रोकना पड़ा दर्द बहुत ज्यादा बढ़ने लगा…मैंने देखा सामने एक घर है जो जाना पहचाना है वही लंगदाते हुए दरवाजा खटखटने लगा….अचानक दरवाजा खुला और एक साया मेरे सामने खड़ा था

“कोई हे दरवाज़..आ के..होल्ल्लो”……मेरी आवाज़ बुरी तरीके से कनपें जा रही थी…दर्द से बेचैनी हो रही थी…बार बार आंखें बंद होने लगी थी…”अरे कोई है आहह”……धधस्स से एकदम से दरवाजा खुल गया…और एक साया सामने अंदर से बल्ब की रोशनी में साफ उसके चेहरे को देखते ही जान में जान आई ये जाना पहचाना साया कंचन का था..

ऊसने मुँह पे हाथ रखकर…मेरी तरफ देखा और मेरे फटे कपड़ों से निकल रहे खून को…”अरे साहाबब आप?”…….इससे पहले वो कुछ और कह पति…मैंने उससे अंदर आने की इजाज़त माँगी..ऊसने फौरन झट से मुझे घर के अंदर दाखिल करवाया ऊसने क़ास्सके मेरे कंधे को पकड़ा हुआ था…मेरी चलने की हिम्मत नहीं थी…वो तो अच्छा हुआ की कंचन का सहारा मिल गया…ऊस्की बस्ती पास ही में दिख पड़ी…जल्दी से ऊसने दरवाजा बंद करके मुझे खतिए पे लेटा दिया

मैं दर्द से सिसक रहा था…ऊसने फौरन मेरे ज़ख़्मो को देखते हुए बोला “या अल्लाह आपका तो खून बह रहा हाीइ आपको क्या हुआ साहेब?”……..मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था फिर किसी तरह उठके इस हालत को खुद ही संभालना था

फौरन अपने फटे वर्दी वाले शर्ट को उतार फ़ेक अब मेरे जिस्मो के इर्द लगे तीर के घाव को देखकर कंचन ने मुँह पे हाथ रख दिया और फिर मेरी पीठ पे भी देखा….खून से बनियान थोड़ी लाल हो गयी थी “अल्लाह जख्म बहुत गहरा है अब क्या करे?”……वो सोच में पारह गयी “आ..हे के..आँचनन्न फ़ौरान किसी डॉक्टर को बुला लाओ जो तुम्हारे बस्ती के कहीं पास रहता हो बोल देना आहह दारोगा घायल है प्ल्स जल्दी करो”……..

कंचन गरीब जरूर थी पर नुस्खे और होशियार चाँद भी थी

(UPDATE-60)

ऊसने फौरन मुझे बताया की पास के एक बस्ती में एक डॉक्टर रहता है वो उसे बुला सकती है…वो भागके निकल आ गयी दरवाजा लगाकर मैं वैसे ही पड़ा रहा…जल्दी दो आवा सुनी..कमरे में डॉक्टर बातचीत करते हुए आया और फौरन मेरे ज़ख़्मो को देखते हुए कथिए पे बैठ गया….”ओह माइ गॉड इंस्पेक्टर बाबू आप ठीक है?”…….डॉक्टर ने सवाल किया…”आहह हान्न्न बस खून बहन जा रहा है प्ल्स आप मेरा यही इलाज़ कर दीजिए हॉस्पिटल जाने की मेरी हिम्मत नहीं है ना ही उठने की अब”……डॉक्टर कुछ देर सोचते हुए मेरे घाव का निरक्षण करते हुए

बक्सा खोलता है अपना…फहरी मुझे एक इंजेक्शन लगता है साथ ही साथ कंचन को एक कटोरा और गरम पानी और कुछ चीज़ें लाने को कहता है…कंचन बेचारी फटाफट अपने छोटे से कोने के रसोईघर से कुछ चीज़ें ले आती है…फिर डॉक्टर मुझे बेहोश कर देता है उसके बाद मुझे नहीं पता की मेरे साथ क्या हुआ सब जलन सी लग रही थी

जब होश आया तो पाया डॉक्टर अपने पसीने को पोंछते हुए मुस्करा रहा था मैं खतिए पे आध नंगा लेटा हुआ था..सिर्फ़ चड्डी में था मेरे पूरे बदन के इर्द गिर्द पत्तियां लगी हुई थी…”अफ अब आप सुरक्षित है वो तो अच्छा हुआ तीर ज्यादा गहरा नहीं घुसा वरना जान भी जा सकती थी आपके गर्दन में तीर बुरी तरीके से घुस गया था बहुत मुश्किल से ड्रेसिंग कर पाया हूँ सिलाई भी कर दी है अब आप कुछ देर आराम कीजिए”……बेचारे डॉक्टर ने जो हिम्मत और ईमान दिखाई मेरे प्रति मेरे आंखों में आँसू घुल गये इस गरीब बस्ती में इतना अपनापन है कभी सोचा नहीं था शायद काला साया के वक्त पुणे कमाने का नतीजा था

डॉक्टर : अच्छा इन्हें ये कुछ दवैया दे देना बाकी दवाई दिन में किसी फार्मेसी शॉप से खरीद ले आना

कंचन : अच्छा डॉक्टर बाबू

देवश : आ..

हह डॉक्टर प्ल्स आप ये बात बाहर किसी को मत बतायेगा

डॉक्टर : पर आप्पे जनन्लेवा हमला हुआ है इंस्पेक्टर बाबू आपको अपने पुलिस

देवश : एक केस पे काम कर रहा हूँ ना तो उसी के कुछ गुंडों ने मुझे घायल कर दिया बचते बचाते यहां आ गया फिक्र मत करो कंचन वो लोग यहाँ नहीं आ पाएँगे मैंने ऊन्हें अच्छा चकमा दे दिया है बस ये बात इस घर से बाहर ना निकले प्ल्स डॉक्टर बाबू

डॉक्टर : अच्छा ठीक है आप आराम कीजिए

डॉक्टर के जाते ही…कंचन कुछ देर तक खतिए के पास ज़मीन पे तापकरे खून को साफ करने लगी फिर पोंछा मारने के बाद…ऊसने बाल्टी भर के मेरे बदन के इर्द की सफाई भी की…साला कच्चे में भी लेटा हुआ उसके बदन को घूर्रने की आदत नहीं गई थी ऐसे हालत में भी लंड अपनी औकवाद पे आ ही जाता है…पर मुझे कंचन पे बहुत प्यार उमड़ रहा था उसे बेचारी ने मेरे लिए इतना किया और मैंने अपने फायदे के लिए उसे नौकरी से निकाल दिया था

कंचन : बाबू अब आप ठीक हे ?

देवश : बहुत आराम मिल रहा है

कंचन : अब आप जल्दी ठीक हो जाएँगे मैं आपको हल्दी का ढूंढ़ लाके देती हूँ

कंचन ने कुछ देर बाद हल्दी का दूध मुझे दिया…ऊसने मुझे क्सिी तरह अपने हाथों के सहारे से उठाया और बिताके गरम दूध दिया फहुंक फहुंक के ईंे के बाद…10 गाज के घर के चारों ओर देखते हुए मैंने ऊसपे नज़र डाली “और बताओ कैसी हो?”………मेरे मुस्कराने पे वो भी अपने पुराने ही बात विचार में आ गयी

कंचन : हम तो ठीक है बाबू आप सुनाए?

देवश : अरे तुम्हा..रहा पति कहाँ है? और तुम्हारे बच्चे?

कंचन : ऊ सब तो नानी के गाँव गये है और हमरा पति कुछ महीनों पहले ही गुजर गया

देवश : हे भगवान जानके दुख हुआ

कंचन : ना ऊस शराबी निक्कममे के लिए क्या दुख करना बाबू आप आराम कीजिए हम आज नीचे सो जाएँगे

देवश : मेरी वजह से तुमको इतनी दिक्कतें उतनी पड़ी है ना

कंचन : अरे बाबू आपका नमक खाया है? हम तो ए बात से खुश है की आप अपने फर्ज के प्रति कितने जागरूक हो गये है आपको यूँ लधता देख हमें बहुत खुशी मिली हम गरीब से जो जुड़ेगा हम आपके लिए करेंगे पर अभी आपको कहीं जाने ना देंगे

देवश : अरे पगली हां हां हां चलो तुम्हारे अंदर मेरे लिए कोई नफरत तो नहीं है ना मैंने तुम्हें काम से आने पे

कंचन : ना ना बाबू आप बारे लोग है जब चाहे तब रखे जब चाहे तब निकले हम कौन होते है नफरत करने वाले हमारी औकवाद ही क्या?

देवश : अच्छा ग ऐसा नहीं बोलते तुम्हारा दिल तो सोने जैसा है जो अपने बाबू के लिए इतना कुछ की हो

कंचन : इंसानियत है आपका नमक खाया आपके पैसों से रोती खाई है

देवश : अच्छा तुम एक काम करो तुम सो जाओ खामोखाः मेरे वजह से तुम्हारी नींद भी खराब हो गयी

कंचन : ठीक है बाबूजी आप भी सो जाए

कंचन ने पल्लू नहीं उतरा…और वही नीली सारी पहनें चटाई बिछाके बिस्तर बनकर सो गयी….

मैं भी दर्द में आराम महसूस करने लगा था आँख भारी हो आई…कंचन को जब काल साया बनकर बचाया था तो उसके बदन की खुशबू आजतक नाथुनो में थी…लेकिन कैसे कहिएं कंचन जी को की हम ही काला साया है हम तो उनके लिए सिर्फ़ उनके मालिक बाबू देवश मिया ही थे

​

(UPDATE-61)

खलनायक सिगरेट सुलगते हुए…अपने नक़ाब को थोड़ा ऊपर उठाकर होठों के बीच सिगरेट सुलगाए काश ले रहा था…इतने में ऊस्की निगाह निशानेबाज़ पे पड़ी जिसका मुँह चोटों से सूज गया था…और अकेले खड़ा था….”हां हां हां एक पुलिसवाला तुमसब् पर भारी कानून कब से तुम्हारी मां चोदने लगा”……खलनायक ने उठके माधुरी डिक्सिट का गाना चोली के पीछे क्या है ? सुनते हुए मुस्कुराकर निशनीबाज़ की ओर देखा…जो चुपचाप आँखें झुकाए खड़ा था

“क्या? यही काम के लिए भेजा था”………खलनायक ने सिगरेट को पाओ के नीचे दबाते हुए कहा

“आपने आर्डर दिया था वरना ऊस साले को तो मैंने तीर से चली कर देता”……खलनायक ने आगे आकर उसके चेहरे पे एक थप्पड़ रसीद दिया ऐसा पहली बार हुआ था..चट्टकक के इयवाज़ सुन पास खड़े गुंडे सहम गये…निशनीबाज़ के आंखों से आँसू का कटरा निकल गया

“हरंखोर मां छुड़ाने के लिए अपना बॉडीगार्ड बनाया है तुझे”…..खलनायक गुस्से में उसके माथे पे उंगली मारते हुए बोला..”भेजे में कुछ समझ नहीं आता मादरचोद गान्डू”…..खलनायक का गुस्सा उबाल सा गया था

खलनायक : पहले तो ऊस लौंडिया रोज़ को नहीं मर पाए वो हरामी का बीज बीच में आ गया फिर उसके पकड़ने भेजा तो बेटीचोड़ अपनी गान्ड मरवके आ गये तो अकेला तुम सब पे भारी उसका इतना मोटा लंड था जो तुम लोग ऊस्की लेने के लिए अपनी टाँगें खोल के लाइट गये…बोल्लो हरामजादो

खलनायक पहले कभी इतना गुस्सा नहीं हुआ था..ब्ड से यहां आने के बाद आज पहल इबार उसे अपने शिकार से नाकामयाबी हासिल हो रही थी…”अफ मैं भी कितना पागल हूँ काश ये काम काला लंड को देता…तुझे बस तीर चलाने ही आता है…”………खलान्यक कमर पे हाथ रखकर सोच ही रहा था

निशानेबाज़ : भैईई मैंने उसके गर्दन और बदन पे तीर चला दी थी वो साला घाया लज़रूर हुआ है..अगर उसे इलाज़ ना मिला तो मरने की गारंटी पक्की एक बार और चान्स दो भैईई

खलनायक : हम नानचाकू चलता है अकेले ही फुरती से हुनर से तुझे हरा दिया मामूली आदमी नहीं होगा वो जो रोज़ जैसी सुपेरहेरोइने का साथ दे रहा है पक्का कुछ गड़बड़ है एक पुलिस इंस्पेक्टर इतना तेज इतना फुर्तीला इतना हुनरबाज़ ना हो ही नहीं सकता जो निशनीबाज़ का निशाना रोक दे…आज तक जिसके भी ऊपर तूने तीर छोडा गर्दन से आर पार हुई है उसके और तू एक मामूली इंस्पेक्टर हम

खलनायक सोचते हुए मुस्कुराता है…”चल ठीक है आज तेरी इस गुस्तकी को मांफ की पर तुझे नेक्स्ट चान्स नहीं मिलेगा”…..

निशानेबाज़ जैसे बच्चों की तरह मिन्नटें करने लगा “पार भैईई प्लीज़ सिर्फ़ एककक”……खलनायक ने उसे गुस्से भारी निगाह दिखाई “बार बार नाकामयाबी हमें काटतायी पसंद नहीं जा मां छुड़ा अब”………खलनायक की बातों को सुनकर निशानेबाज़ हॉल से बाहर चला गया

खलनायक : आए ऊस इंस्पेक्टओए पे नज़र रखना और हाँ वॉ नयी मीटिंग कब की है वृंदमुनई मात में नेक्स्ट मीटिंग होनी चाहिए रात 12 बजे सुना है वो गर्दन 2 सालों से बंद पड़ा है अरेंज करो और अपने डीलर को कॉल करो (अपने आदमियों को कहते हुए सबने ठीक है भाई बोला)

उधर रोज़ अपने बिस्तर पे आँख मंडी पड़ी थी…उसके ज़ुल्फो से उसका चेहरा धक्का था पर ऊस्की निगाहें साफ सोच में दुबई थी….उसका एक तरफ मुखहोटा पड़ा हुआ था…आज देवश की बात ने उसे कही न्ना कहीं तोड़ डाला था…तो क्या इसलिए ऊसने चोरी चाकरी छोढ़के ईमान का रास्ता अपनाया ताकि ज़ुल्मो से पीछे हटे…ना अब वो इस लाइन में आ चुकी थी…उसे ही कुछ अकेले अब करना था..शातिर तो हत इचोरी के टाइम भी ऊसने अकेले ही सबकुछ हैंडिल किया तो अब क्यों नहीं

रोज़ : हम आज रात को नींद तो नहीं आनेवाली मुझे देवश को शर्मिंदगी उठानी पड़ी उसका बदला मैं ऊस कमीने खलनायक से लेकर रहूंगीइ और इसका सिस्टम मुझे पता है कैसे करना है पुरानी रोज़ का दिमाग चलना होगा…(सोच की कस्माकश में दुबई रोज़ एकदम से मुस्कान भरने लगी)

रोज़ : एस्स पहले ये आइडिया कायु नहीं आया? पार मैं अब अकेली थोड़ी ना हूँ उसके साथ दगाबाजी नहीं कर सकतीी क्या सोचा देवश मेरे बार्िएन में ? नहीं ये सब उसके लिए ही तो है अब बेटा खलनायक तू बचेगा नहीं

रोज़ उठके अपने मुखहोते को पहन लेती है…और पास रखी पनचिंग बैग पे पूंछ मार्ण एलगती है…

उधर नींद की आगोश से जब टूटा…तो देखता हूँ कंचन कार्रहते भर रही इहा इसाली का चर्विदार बदन आंखों में जैसे घूम रहा है….

”काश एक बार रगड़ सकता छी छी देवश ये क्या सोच रहा है? जिसने तेरे लिए इतना किया उसके साथ पर तूने कर भी तो रखा है नहीं भाई रिस्क नहीं ले विधवा बन चुकी है क्या पता गलत सोचे”………देवश अपने लंड से लड़ने कहा पर ऊस्की औकवाद बैठने का नाम नहीं ले रही थी

ऊसने एक बार उठके देखा तो कंचन की नीली सारी का पल्लू हाथ गया था और ऊस्की सपाट नंगी पेंट और गोल गहरी नाभी ऊपर नीचे हो रही थी उसके ब्लाउज के भीतर छुपी मोटे मोटे खरबूजे भी ऊपर नीचे साँसों की वजाहो से हो रहे थे…कथिए पे किसी तरह करवट बदले देवश अपनी आंखों से सोई कंचन के बदन को सैक रहा था

मैं धीरे धीरे बैठ से जब नीचे झाँका तो देखा की कंचन का सपाट पेंट और उसके ब्लाउज में ढकी अधखुली छातियो का दीदार हो रहा है…मैंने फौरन जैसे तैसे उठके एक बार अंगड़ाई ली पूरे बदन पे पट्टी थी…दवाई का हल्का हल्का नशा था…पर चड्डी से लंड एकदम मिसाइल की तरह खड़ा होकर सलामी दे रहा था…

तरकपन की आग में जलते हुए धीरे धीरे कथिए से नीचे उतरा…और कंचन के पास जाकर लाइत्न्े लगा….मैंने देखा कंचन गहरी साँसें ले रही है…उसी पल उसके पेंट पे हाथ फेरने लगा अफ कितना मुलायम गुदाज़ पेंट था…अगर वो जान जाए की मैं काला साया हूँ और उसे चोद भी रखा हूँ तो शायद वो मुझसे सहएमे ना और शायद चुदाया भी ले पर शायद वो मैंने तब ना पर उसके क़िस्सो से पक्का था की वो भी काला साया के साथ राजी ही थी

मैंने धीरे उसके पल्लू को एकदम दूसरी ओर फ़ेक दिया…अब वो पेटीकोट और ब्लाउज में मेरे सामने लेटी हुई थी….मैं उसके पेंट की नाभी पे उंगली घुमाने लगा…उसका सीना ज़ोर ज़ोर से ढक ढक कर रहा था ऊस्की कसमसाहट और ऊस्की ऊपर नीचे हो रही छातियो को देखकर समझ आ रहा था…मैंने फिर उसके पेंट पे ही हाथ घुमाएं रखा इतने में ऊस्की नींद टूट गयी और मुझे देखकर हड़बड़ाकर उठ बैठीी “से..अहेब आ..पे ये क्या?”…….

मेरा हाथ अब भी उसके पेंट पे था

देवश : सस्सह अरे पगली बस तूने मेरी इतनी सेवा की उसी लिए तुझसे प्यार करने का दिल किया

कंचन : पर साहेब मैं आपकी नौकर हूँ आप मेरे साथ ये सब क्यों कर रहे है? आपकी हालत ठीक नहीं लाइट जाए साहेब बाहर हल्ला हुआ तो गज़ब हो जाएगा

देवश : तुम बनाएगी की मैं (मैंने हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर रखते हुए उसके छाती पे रख दिया कंचन ने हाथ धकेलने की कोशिश की और ऊसने मेरा हाथ क़ास्सके पकड़ लिया जो उसके छातियो पे चल रहे थे)

देवश : कंचन आज तुझे एक सक्चई बताना चाहता हूँ अगर तुझमें हिम्मत है तो सुनकर घबराएगी तो नहीं

कंचन : आप कहना क्या चाहते हो?

देवश : काला साया मैं ही हूँ (कंचन एकदम से चौंके उठ बैठिी पूरी तरीके से मेरा हाथ उसके पेंट से हाथ चुका था वो मेरी ओर एकटक देखने लगी और फिर मैंने मुस्कुराकर उसे सारी दास्तान सुना दी)

कंचन मुँह पे हाथ रखकर मेरी ओर देखकर एकदम से मुस्कराने लगी..”साहेब आप तो देवता हो देवता यकीन नहीं हो रहा की आप जैसे आदमी जिसको मैं निकँमा और बुज़दिल समंझती थी आप इतने नायक दिल दिलेर निकोल्गे”………मैंने कंचन का हाथ पकड़ा और उसे शांत होने कहा

देवश : पर कंचन मैंने तो तेरे साथ किया है वो रात तो मज़बूरी में थी पर हम दोनों को मजा आय था ना

कंचन : आप भी ना

देवश : अरे तू शर्मा क्यों रही है? तेरी झांतों भारी चुत तेरे टांगों के बीच जो थी आज भी मेरे दिमाग में घूम रही है और तेरे ये ब्राउन निपल्स जो दूधु निकलते है ऊन्हें तो देखकर लगता है जैसे रस पी जाओ काश मैं तुझसे शादी कर पता

कंचन : आप तो बारे छिछोरे निकले साहेब अगर ऐसा था तो पहले आपने खुद के पहचान क्यों नहीं बताई हमें हम कौन सा शहर में ढिंढोरा पीटते

देवश : अरे पगली ऊस वक्त हालत सही नहीं थे चल कंचन अब मुझे वो करने दे जो मैं करना चाहता हूँ

कंचन पर वॉर करने लगी…पर मैंने ऊस्की एक ना सुनी और उसके ब्लाउज का हुक खोलने लगा…कंचन झेंप सी गयी थी..पर उसे यकीन नहीं हो रहा था की मैं काला साया ही हूँ..ऊसने अपनी ब्लाउज का स्तनों खोल डाला…मेरे अश्लील बातों ने उसे गरमा दिया था….फिर मैंने ऊस्की ब्रा से ही ऊस्की छातियो को दबाते हुए उसका ब्रा का हुक भी खोल डाला…फिर धीरे से ऊस्की पेटीकोट का नारा भी खिच के उतार दिया…कंचन एकदम मूर्ति की तरह अपने बदन को छूने दे रही थी उसके चेहरे शर्म से लाल हो चुके थे

मैंने जैसे ही ऊस्की पेटीकोट के नारे खोल के उसे नीचे खिसकाया..ऊस्की मांसल मोटी जांघों के बीच पैंटी के इर्द सीन इकाल्ती झांतों के गुकचे बाहर निकल आए….मैंने ऊस्की पैंटी पे मुँह रगड़ा तो कंचन वपयस लाइट गयी…मैंने ऊस्की पसीने डर महेकदर चड्डी भी खिसकाके उतार दी

“अब चल कंचन आज फिर मजे ले ले”…..

कहते हुए मैंने उसके ब्रा को खोल के फ़ेक दिया…और ऊस्की सूजी झाँटो भारी चुत की फहाँको में एक उंगली डाला दी…”उईईई”…..कंचन के मुँह से सिसकने की आवाज़ निकल उठी…मैंने कंचन की चुत में उंगली कर दिया…और उसके छातियो को भरपूर तरीके से दबाने लगा…..”आहह अफ आप तो सच में वॉ हो”………कंचन कसमसाने लगी ऊसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मैं उसके छातियो को चुस्सने लगा अफ कितने मोटे निपल्स थे उसे ही चूसने में पूरा टाइम लग गया था

UPDATE-62)

कंचन ने टाँगें खोल ली…और मैं ऊस्की चुचियों को चूसता रहा…ऊसपे अपना सर रगड़ने लगा…फिर धीरे उसके ऊपर चढ़ा और उसके पेंट को चूमते हुए ऊस्की झांतों भारी चुत में मुँह लगा डाला “हाय्ी दाययाअ आहह साहेब्ब्ब आपको गंदा लगेगा हम साफ नहीं करते”……मैंने कंचन के उंगलियों में अपनी उंगलियां फ़सा ली…एक हाथ से ऊस्की छातियो को दबाते हुए ऊस्की महेकदर चुत में मुँह लगा दिया ऊस्की कुरकुरी बालों में जुबान फहरते हुए उसके छेद में जबान फहीराने लगा…ऐसा नमकीन स्वाद था की दिमाग खराब हो गया

कंचन पानी चोद रही थी अपनी चुत से…साली की चुत इतने जल्दी गीली हो गयी थी…मैंने फौरन ऊस्की चुत को मुट्ठी में लेकर भींचा और ऊसपे फिर मुँह लगते हुए चाटने लगा….कंचन अकड़ने लगी और ऊसने फिर ज़ोर से चिल्लाते हुए रस चोद दिया….मैं कंचन के ऊपर आया और घुटनों के बाल बैठते हुए उसके मुँह के पास लंड लाया “अब चुस्स इसे”…….

कंचन के आँख लाल थी वो भी किसी रंडी की तरह मेरे लंड को चुस्सने लगी…स्लूर्रप स्लूर्रप की आवाज़ मुँह से निकल रही थी वो एकदम प्यार से मेरे मोटे लंड को चुस्स रही थी…उसके चंदे के आगे पीछे हाथों से किए चुस्स रही थी

कुछ ही देर में ऊसने अपने थूक से मेरा लंड पूरा गीला कर डाला…मेरे गोलियों को भी कुछ छूसा…और फिर मैं उसके मुँह में ही धक्के मारने लगा…कंचन ओओउू ओउू करती हुई मुँह के भीतर तक लंड ले रही थी…मैं किसी तरह उसके मुँह से लंड निकलकर ऊस्की टाँगों को फैला लिया…मैंने ऊस्की चुत के मुँह पे लंड रखा…और एक क़ास्सके धक्का मारा…फकच्छ से लंड गीली चुत के भीतर तक जा बैठा

कंचन को कोई फर्क नहीं पड़ा चुदासी औरत तो थी ही साली का हज़्बेंड खूब रगड़ता था उसे…इन इंडियन औरतों में एक बात होती है की इन लोगों की गर्मी बहुत होती है मैं उसके चुत में ढापा धाप धक्के मारने लगा…फ़च फ़च करके ऊस्की चुत से लंड अंदर बाहर होने लगा…”आहह आहह आअहह और आरामम्म से बाबूजी आहह धीरे आहह”………कंचन की चुत पे लंड पेलते पेलते साला मजा दुगुना हो गया अब रस छोढ़ने का वक्त होने लगा और उसी पल शरीर में अकड़न महसूस हुई और मैं लगभग कनपता हुआ कंचन के ऊपर देह गया…लंड कंचन की चुत में लबालब रस छोढ़े जा रहा था…मैं उसके गालों को चूमते हुए पसीने पसीने हो गया कंचन भी पसीने पसीने निढल सी पढ़ गयी थी

रोज़ दीवार के ऊपर चढ़ते हुए वृंदमुनई के ऊस बंद परे गर्दन में घुस गयी…चारों ओर एक बारे बारे पेड़ के चाव में छूपते हुए ऊसने गौर किया एक तरफ दो जीप खड़ी है बाहर और कुछ दूरी से तहाका लगानी की हँसी आ रही है…”उम्म इन्फार्मेशन तो यही थी की आज ही के आज ये लोग यहां डीलिंग करेंगे”………रोज़ किसी तरह दूसरे ओर प्रवेश करती है…तभी उसे 10 गुंडे दिखते है एक तरफ जानमाना लोकल गॅंग्स्टर तो दूसरी ओर खलनायक

रोज़ उसे बेहद गौर से देखते हुए अपनी गुण निकाल लेती है…उसका गुस्सा सांत्वे आसमान पे चढ़ जाता है….पहले वो कुछ फोटोस ऊन लोगों की डीलिंग की गुप्टीनिए तरीके से ले लेती है..अचानक खलनायक को कुछ महसूस होता है…और वो अपने आदमियों को झाधी के पास जाने को कहता है…गुंडे लोग ऊस ओर जैसे जाते है ऊँपे फियरिंग स्टार्ट हो जाती है…पांचों के पाँच गुंडे वही देह जाते है

खलनायक भौक्लते हुए माफिया पे गोली दंग देता है “बेटीचोड़ तूने हमें फंसाने के लिए आदमी भेजा है हरंखोर दगाबाज़”……….

इससे पहले वो गॅंग्स्टर कुछ और कह पता उसका काम वही तमाम हो जाता है…खलनायक अपने मुखहोते को ठीक करते हुए गुंडों को ऊस साए पे गोली चलाने का आर्डर देते हुए बाहर की ओर भागने लगता है

रोज़ किसी हुनरबाज़ करतबो की तरह गुलाटी मारते हुए…झाड़ी के कभी इस पार तो कभी ऊस पार अंधेरे में ऊन गुंडों पे आकरमन करने लगती है…ऊस्की गोली खत्म होती है तो मारे गुंडों की गोली से रिलोडेड करके ऊन लोगों पे गोलियां चलाने लगती है ऊस्की स्किल्स इतने परफेक्ट हो गयी थी एक हाथ से वो गोली किसी भी एंगल में चला रही थी….आख़िर कार सारे गुंडों को धायर करते हुए वो फौरन बाहर के रास्ते की ओर भागती है

खलनायक दीवार फहांदणे की कोशिश करता है…पर तब्टलाक़ उसे महसूस होता है की गाड़ी में बैठा उसका ड्राइवर मारा जा चुका है….वो पीछे की ओर जैसे मुड़ता है तो वही तहेर जाता है…रोज़ सामने खड़ी होती है…”हिलना मत वरना गोली चला दूँगी”……खलनायक को रोज़ का डर नहीं था पर उसे डर था की कहीं पुलिस ना आ ढँके उसके दोनों गुंडों को ऊसने आज अपने साथ लाआया नहीं होता

खलनायक : ठीक अच्छे मैंने अपने हाथ उठा दिए मेरे पास कोई हत्यार नहीं अब क्या करना चाहती है तू?

रोज़ : हिम्मत की अंकल देनी होगी दूसरे के देश में घुसके जीना हराम कर डाला तूने सभी का

खलनायक : भाई यही तो मेरी रोज़ी रोती है इसे लात मारूँगा तो ख़ौँगा क्या? (खलनायक तहाका लगाकर हस्सता है रोज़ उसे चिल्लाके चुप कर देती है)

रोज़ : पुलिस यहां किसी भी पल पहुचेगी पर उससे पहले तू अपना मुखहोटा उतारके मुझे अपना चेहरा दिखाएगा

खलनायक : खलनायक ने ये कसम खाई है की वो ये चेहरा किसी को नहीं दिखाएगा चाहे ऊस्की मौत भी क्यों ना हो जाए चला दे गोली वैसे भी आज पहली बार एक खूबसूरत हसीना के हाथों से मारूँगा हाहाहा शवाब तो मिलेगा या शायद कोई पुण्या किया था जो आज ये हालत देख रहा हूँ

रोज़ : वही रुक जा

खलनायक बहुत शातिर था…ऊसने फौरन अपने जुटे में लगी लेज़र को अपने हाथों में लगे स्तनों से ऑन किया और सीधे रोज़ के टांगों के बीच के भाग पे लगा दिया..रोज़ को एक जलन हुई उसके चंदे के कपड़े पे छेद था..”इसे कहते है नियत जल उठी”……..खलनायक ने फौरन फुरती से रोज़ को पकड़ लिया

रोज़ का गुण दूसरी ओर गिर पड़ा…दोनों एक दूसरे पे लात घुसों की बौछार करने लगे….

लेकिन दोनों में से कोई हार नहीं मान रहा था…अचानक खलनायक ने रोज़ के दोनों हाथों को बाँध दिया फुरती से उसी के कपड़े को फाड़के और उसे ज़मीन पे गिरा दिया पास से गुण भी उठा ली “अब बता चित भी मेरे पटा भी मेरा…क्या सजा डूटुझे?”………रोज़ गुस्से भारी निगाहों से खुद को बेबस महसूस करते हुए खलनायक की ओर देख रही थी

खलनायक : तुझे मारने का बहुत दिल कर रहा है पर तुझ जैसी खूबसूरत्त मासूम तीखी चालबाज़ मज़बूत लौंडिया जैसी कोई नहीं तूने मेरा बहुत नुकसान किया फिर भी दिल तुझपे मेहेरबान आयी

रोज़ : कमीने हाथ तो खोल फिर तुझे अपनी खूबसूरती का दीदार करती हूँ (गुस्से से थूकते हुए)

खलनायक : अच्छा ग चाहू तो काला लंड के हवाले तुझे कर दम पर तू दिल को जैसे भा गयी है

रोज़ : मर दे मुझे कमीने इंतजार मत कर

खलनायक : तू मुझे ललकार मत मैं तुझे इतनी आसान मौत नहीं दूँगा तू खुद मेरे नाम से तडपेगी ऐसा जादू तुझपे करूँगा

खलनायक जो बेरहेमी और लड़कियों के प्रति इतना कठोर था आज ना जाने क्यों वो बार बार रोज़ के चेहरे को प्यार से देख रहा था…आजतक उसके जिंदगी में बेहद खूबसूरत औरतें आई जो काला लंड के हवाले मौत के आगोश में गयी पर ना जाने क्यों रोज़ उसे पागल सी कर रही थी…..दूसरी ओर रोज़ को वो तरक़ीब भाने लगी…और ऊसने सोचा की यही आसान तरीका है खलनायक के चेहरे उसका परदा उठाने का…ताकि वो खलनायक को अपने हुस्न के जाल में डालकर उसे मर स्काए…ऊसने दिल ही दिल में देवश से माँफी माँगी अपनी होने वाली गुस्ताख़ी के लिए और खलनायक को मुस्कुराकर देखा

खलनायक हाथ बँधे रोज़ के तरफ देख रहा था उसके चेहरे पे लगे नक़ाअब होने से वो मुस्करा रहा था या नहीं इसका पता नहीं चल पा रहा था…बस उसके इस राक्षस जैसी मुखहोते के अंदर की दो आँखें जो बेहद तिरछी निगाहों से रोज़ की ओर देख रही थी….रोज़ बस अपने हाथ को छुड़ाने की नाकाम कोशिशों में बस हिल डुल रही थी वो बैठी बैठी बस खलनायक के वार का इंतजार कर रही थी

खलनायक : सोचा नहीं था की टेढ़ी लड़की जिंदगी में मिलेगी और तुझ जैसी लौंडिया के लिए तो अपुन पूरा माफिया लाइन चोद दे (खलनायक रोज़ के चेहरे पे हाथ फिरता है और उसके होठों पे पागलों की तरह उंगलियां चलाने लगता है रोज़ कसमसा रही थी हाथों के स्पर्श से ही उसका दिल ढक ढक करने लगा था)

खलनायक फौरन अपने एक हाथ में रखी गुण को लिए ही…अपनी जॅकेट उतारने लगता है और फिर अपना शर्ट भी…उसका चिकना बदन रोज़ के सामने होता है…फिर वो अपनी बेल्ट को ढीली करने लगता है और फिर अपनी ज़िप भी…वो किसी बलात्कारी की तरह सेक्स पसंद नहीं करता था…लेकिन ज़बरदस्ती एमिन वो सिर्फ़ लड़कियों के हाथ पकड़ लेता था.और ऊँपे चढ़ जाता था….ऊसने धीरे से अपनी पेंट भी उतार के फ़ेक दी…और फिर चारों ओर देखा सन्नाटा में बस लाशों का धायर पड़ा हुआ था.

.कहीं उसके आदमी तो कहीं उसका डीलर

खलनायक : चल तूने फायदा तो किया वरना मुझे अपनी ड्रग्स बेचनी पढ़ती अब तो पैसे भ इमेरे हाथ में ड्रग्स भी बेचने नहीं पड़ेगी और एक कमसिन लड़की भी पूरी रात इस सन्नाटे भरे वीरान जंगल में बिताने को हाहाहा

कहीं दूर कुत्ता रो रहा था…एकदम ठंडी वीरनीयत थी..वो धीरे से अपने कक़ची को भी खिसका के उतार फैक्टा है…रोज़ दूसरी ओर मुँह मोड़ लेती है…खलनायक उसके मुखहोते लगे चेहरे को अपनी ओर करता है और फिर उसके संग बैठ जाता है…हालाँकि रोज़ चाहे तो उसे मर सकती है पर ना जाने क्यों देवश से हुई ऊस्की एक दूरिया उसे खलनायक जैसे खतरनाक मर्द की ओर भी आक्रशित कर रही थी उसके पास खींच रही थी…ऊस जैसा ज़लैईं खतरनाक अमीर कोई नहीं चाहे तो उसका हाथ थाम ले तो दुनिया उसके कदम चूमे पर रोज़ को तो अपना प्लान अंजाम देना ही था खुद के जिस्म को हवाले करके

खलनायक ने झट से रोज़ को एक धक्का दिया…रोज़ गिर पड़ी उतना चाहा लेकिन तभी खलनायक ने रोज़ के गर्दन पे एक हाथ दे मारा…रोज़ चिल्ला उठी उसके बाद धीरे धीरे ऊस्की आंखें बंद हो गयी….”अब आया ना मजा”……रोज़ बस धुंधली निगाहों से खलनायक को अपने जिस्म को छूते महसूस कर रही थी

खलनायक ने रोज़ की जॅकेट के ज़िप को धीरे धीरे आहिस्ते से उतार डाला..फिर ऊस्की बुलेटप्रूफ हाफ स्लीव जॅकेट को भी रोज़ टॉप में थी…खलनायक ने बिना पवाह किए रोज़ को सहारे से उठाया और उसके कमर से टॉप का सिरहा निकलते हुए उसे रोज़ के जिस्म से निकलते हुए उतार फ़ैक्हा…रोज़ के गले में ऐसा दर्द था की वो बदहवासी हो गयी थी खलनायक का ऊसने गला दबोचना भी चाहा पर खलनायक ने उसके हाथ को झट से अलग कर दिया…और उसे फिर लेटा दिया..वो रोज़ के सपाट चिकने पेंट पे उंगलियां फहीराने लगा..रोज़ हुहह जैसी आवाज़ निकालने लगी

कसमसाती रोज़ को देखकर खलनायक पागल सा होने लगा…ऊसने रोज़ के जीन्स पे हाथ डाला और बेल्ट को और जीन्स को भी ढीला करके खिसाके टांगों से निकाल डाला…रोज़ अब एक काली पैंटी में थी और ब्रा में…खलनायक ने उसके ब्रा को खैच के उतार दिया जिसे ब्रा का हुक टूट गया और फिर ऊस्की पैंटी पे नाक लगते हुए ऊस चड्डी को भी खिसाके उतार दिया

रोज़ मदरजात एकदम नंगी थी बस अपने छातियो को हाथों से छुपा रही थी और अपनी टांगों के बीच के भाग को भी क़ास्सके टांगों से छुपा लिया…खलनायक ने रोज़ के पूरे बदन पे एक बार हाथ फायरा…जैसे निरक्षण कर रहा हो..फिर ऊसने रोज़ के ऊपर चढ़ते हुए उसके होठों पे होंठ सटाये रोज़ उसे किस तो नहीं कर रही थी पर खलनायक उसके होठों को मुँह में लेकर बुरी तरीके से चुस्स जरूर राह था…म्‍म्म्ममम एमेम करती रोज़ पाओ पटकने

(UPDATE-63)

वो अपने हाथों से खलनायक को धकेलने लगी पर सब नाकामयाब….

खलनायक ने उसके दोनों हाथ को क़ास्सके पकड़ा और उसके महेकते बदन पे मुँह फहीराने लगा….और फिर धीरे उसके छातियो से हाथों को हटा कर देखने लगा ऊसने उसके सख्त निपल्स को मुँह में भर लिया..रोज़ एकदम पत्थर सी बन गयी…खलान्यक बारे फहुराती से छातियो को दबा रहा था…अपनी टाँग रोज़ के टांगों के बीच फहीरा रहा था….रोज़ चुट्त नहीं सकती थी…वो बस खलनायक के बदन से लिपटी हुई थी…खलनायक ने रोज़ के छातियो को दबाते हुए उसके पेंट पे मुँह लगाया और वहां एक चुम्मा लिया…रोज़ एकदम सिसक उठी वो अपने बदन को हवा में उठाने लगी

खलनायक ने थोड़ा सा मास्क उठाया और अपने होठों से निकलती लपलपाती जुबान और होंठ दोनों पेंट पे रखक्के चुम्मने लगा..नाभी को चाटने लगा…रोज़ का बदन गोरी होने से अंधेरे में भी चमक रहा था….खलनायक पागलों की तरह पेंट को किस करता हुआ नीचे होने लगा

फिर ऊसने दोनों टांगों को हाथ से अपने फैलाया…और फिर बीच के सूजी चुत के भाग पे अपना मास्क आधा उठाते हुए अपने मुँह को रख दिया…रोज़ चौंक उठी…वो खलनायक के सर पे हाथ रखने लगी उसके मास्क को भी उठाने की कोशिश करने लगी…पर खलनायक इतना चूतिया नहीं था ऊसने क़ास्सके रोज़ के हाथ को अपने सर पे ही पकड़े रखा…और उसके सूजी चुत के नमकीन रस को पीने लगा

रोज़ की सूजी चुत के भीतर मुँह लगाकर ऊस्की महक को सूंघते ही जैसे वो पागल हो गया और बारे ही फुरती से रोज़ के हाथों को पकड़े पकड़े वो रोज़ के चुत के भीतर मुँह लगाए जबान चलता रहा उसके दाने को भी चुस्सता रहा…रोज़ कसमसाने लगी आहें भरने लगी…अपने छातियो पे ना चाहते हुए भी दबाने लगी…आजतक ऊसने ये बदन क्सिी को अँहि सौंपा था सिवाय अपने बाय्फ्रेंड और फिर अपने होने वाले प्यार देवश को लेकिन आज उसे समझ नहीं आ रहा था ऊसने ये क्या निर्णय लिया था

रोज़ के टांगों के बीच मुँह लगाए करीब कुछ देर तक खलनायक चुत को चाँटता रहा…और ऊसपे मुँह लगाए एक बार रोज़ की तरफ देख पढ़ता…ऊसने देखा की रोज़ एकदम लाल हो गयी है…तो फौरन चुत के मुआने पे दो उंगली डाली…फकच से उंगली अंदर धंस गयी…खलनेयक ज़ोर से चुत में उंगली करने लगा…बीच बीच में आहें भरती कार्रहती इधर उधर रगड़ती रोज़ को देखकर मजे भी लेने लगा….

रोज़ कुछ नहीं कह पा रही थी लेकिन ऊस्की चुत पे होती उंगली ने उसे रस छोढ़ने को मज़बूर कर दिया और वो कुछ ही पल में झड़ गयी खलनेयक ने नमकीन रस भारी चुत में फिर मुँह लगाकर उसे छूसा…और उसका स्वाद चक्खा…फिर ऊसने उठके रोज़ के छातियो को भी चूसना शुरू किया….

इस बीच रोज़ के चुत पे लंड घिस्स रहा था…जब ये बात खलनायक ने नोटिस की तो ऊसने रोज़ को कांपता पाया…उसे लगा शायद रोज़ भी चुद ने को बेक़रार है अब घोड़ी की लगाम उसके हाथ में आ चुकी है

ये सोचते ही ऊसने अपने लंड को चुत पे घिस्सते हुए रस भारी चिकनी छेद में एक ही धक्के में पेल दिया…लंड अंदर घुस्सते ही रोज़ दहढ़ उठी…खलनायक ने एक हाथ से रोज़ के मुँह पे रख दिया..रोज़ फिर लाइट गयी ऊसने बारे ही आहिस्ते आहिस्ते लंड को करार धक्को से अंदर तक घुसेड़ दिया…रोज़ इस धक्को से बीच बीच में तड़प उठती…अब जो होना था वो हो चुका था…रोज़ की चुत में खलनायक का लंड धंस चुका था…

कुछ देर खलनायक वैसे ही रोज़ को देखते हुए दोनों पंजों को धंस को पाकड़े ही एक करारा धक्का लगता है…रोज़ फिर चीख उठती है….खलनायक रोज़ को तड़पते देखकर फिर चुदाई शुरू करता है…और फिर धक्के तेजी से बढ़ता है लंड चुत से अंदर बाहर धीरे धीरे होते होते राजधानी एक्सप्रेस की तरह एकदम ज़ोर की रफ्तार से अंदर बाहर होने लगता है…फचक पकच करके रोज़ की गीली चुत पानी छोढ़ने लगती है और फवारे की तरह चुत से निकालने लगती है लंड के चारों ओर से…लंड इतना चिकना था की चुत में आराम से प्रवेश करते गया

रोज़ की आंखों में आँसू देखकर खलनायक उसके चेहरे के करीब अपना चेहरा रखकर उससे नज़र मिलता है “तेरे आंखों के आँसू बता रहे है की तू मज़बूर है…और मैं तेरे मज़बूरी का फायदा उठा नहीं रहा बल्कि मैं इस रात का फायदा यू था रहा हूँ हालत का फायदा उठा रहा हूँ”………खलनायक रोज़ के होठों पे होंठ रखकर उसे किस करने लगता है…अब रोज़ भी धक्को से सिहरने लगती है

दोनों के बदन आपस में मिलने लगते है रोज़ आंखें मुंडें रहती है…और खलनायक बड़ी ही धीमी आवाज़ में आहें भरते हुए रोज़ की चुत में लंड अंदर बाहर कर रहा होता है…वो रोज़ की छातियो को दबाए हुए रोज़ के गाल और होठों पे चूमने लगता है…कुछ ही देर में ऊस्की रफ्तार बेहद तेज हो जाती है और फिर वो झधने की कगार पे पहुंचने लगता है…दोनों की मीठी मीठी सिसकियां पूरे माहौल में गुणंज़े लगती है

कुछ ही देर में खलनायक अपना लंड रोज़ की चुत से निकल लेता है और उसके मुँह पे रखकर मूठ मारने लगता है….रोज़ को ना चाहते हुए भी ये काम तो करना ही था वो खलनायक के मोटे लंड को चुस्सने लगती है…ताकि वो अपने प्लान को अंजाम दे सके….रोज़ अओउ ुआओउ करके बेधधक बेसवार जलती आग में तारक की खलनायक के सिसकियों को सुनते हुए उसके लंड को चुस्सती है…..

और कुछ ही पल में खलनायक लंड को रोज़ के मुँह से बाहर निकलकर उसके चेहरे पे ही झधने लगता है

रोज़ का पूरा चेहरे और मुखहोते पे सफेद गाढ़ा रस लगने लगता है…खलनायक भी हापसने लगता है पसीने पसीने होते हुए भी वो घुटनों के बाल बैठा नंगा नंगी रोज़ के चेहरे पे लंड फहीराते हुए अपने रस को निचोड़ रहा था…

रोज़ का चेहरा रस से गीला था…और उसके होठों पे लंड लगते के साथ ही रोज़ ने फौरन एक मुक्का उसके अंडकोष पे झड़ दिया…खलनायक गिर पड़ा…वो बहुत तक गया था…रोज़ ने फौरन ऊसपे न्नंगी चढ़ते हुए उसके मास्क को उतारना चाहा…पर नाकमााबी टूर से खलनायक ने उसे एक ही लात में हवा में फ़ेक दिया रोज़ दूर जाकर थोड़ा गिर पड़ी…खलनायक हंसते हुए उठा और काँपते हुए अपनी जीन्स पहनने लगा

इतने में पुलिस की साइरन की आवाज़ आने लगी…”तेरे पास भी वक्त नहीं और ना मेरे पास है पार्कसम से ये रात हमेशा याद आएगी चाहे तो अभी मेरा हाथ पकड़ और मेरा साथ निकल जा इस जगह से कहीं दूर..चोद ईमान को क्या रखा है इसमें सिर्फ़ दुख है दर्द और गरीबी”……….रोज़ के तरफ खलनायक हापसते हुए उसे हाथ देता है…रोज़ कीिस बैग की तरह न्नंगी घुर्रा रही थी जैसे अभी झपट पड़ेगी…पर पुलिस की साइरन को सुन वो भी काँप उठी

खलनायक अपने मास्क को ठीक करता हुआ..जीन्स और जॅकेट पहनने की कोशिश करने लगा ऊसने एक बार रोज़ की तरफ देखा और उसे उसके कपड़े फ़ेक के दिए….रोज़ ने ऊस हालत में जैसे तैसे कपड़े पहने…लेकिन ऊस्की फटी ब्रा खलनायक एह आठो एमिन थी उसे खलनायक सूंघ रहा था…रोज़ गुस्से से उबाल रही थी “तेरे लिए हमेशा मेरा दरवाजा खुला है मानता हूँ तू मुझे पुलिस के हवलए करना चाहती है लेकिन वो कभी नहीं होने वाला पर तेरे लिए मेरे घरके दरवाजे हमेशा खुला है कभी मिलना हो तो ढूँढ लेना मेरे आदमी बता देंगे तुझे हाहहहा”…….तहाका लगते हुए खलनायक भाग निकला

रोज़ को सख्त गुस्सा आ रहा था..

आज वो इतना करीब होकर भी खलनायक को पकड़न आ सकी और ऊसने अपने बदन भी उसके हवाले कर दिया उसे खुद पे गुस्स्सा तो बहुत आया…लेकिन शर्मिंदगी के सिवाह और कोई चारा नहीं था…ऊसने जैसे तैसे अपने रूमाल से मुखहोते को उतारके पूरे चेहरे को पोंछा और वहां से फौरन दूसरी साइड से भाग निकली…जल्दी पुलिस को गाड़ी मिली खलनायक की और संग में घासो पे बिछी लाशें खलनायक ऊन में से कही नहीं था एक बार फिर पुलिस हाथ मलते रही गयी

रोज़ अपनी बाइक को तेजी से दौड़ा रही थी उसके ज़हन में खलनायक की बातें गूंज रही थी खलनायक ने उसे सिर्फ़ छुआ नहीं बल्कि उसे अपना साथी बनने का हाथ दे रहा था वो आदमी खतरनाक है चाहता तो गोली से मुझे मर देता पर ऊसने मुझे मारा क्यों नहीं? दूसरी ओर ऊसने अपने माथे को टांका की ये सब क्या किया मैंने? देवश के साथ धोखा ऊसपे क्या बीतेगी जब उसे पता चलेगा की मैंने खलनायक के साथ!….रोज़ को अपने ऊपर घिन्ना भी हो रही थी बेरहेआल ऊसने फैसला कर लिया की इस बारे में वो देवश को कुछ नहीं बनाएगी

सुबह 4 बजने से पहले ही..मैंने किसी तरह उठके अपनी पत्तियो के अंदर को ज़ख़्मो को टटोला..और फिर धीरे धीरे अपनी फटी वर्दी को किसी तरह पहनें…बिना कंचन को जगाए दरवाजे से निकल गया…ताकि उसके मोहल्ले वालो में किसी को मेरे यहां तहेरने की भनक ना लग जाए..एक तो ऐसे ही बेचारी विधवा है ऊपर से उसका कोई भी नहीं अब सब उसी पे उंगली उठाएँगे…मैंने जैसे तैसे एक नोट चोद दिया बांग्ला में…और वहां से निकल गया

पता चला जीप किनारे में ही वैसी की वैसी खड़ी है…चलो पुलिस को कुछ पता तो नहीं चला..मैंने जीप जैसे तैसे स्टार्ट की और अपने नये घर में आकर हॉर्न बजाई…दिव्या की नींद टूट गयी और ऊसने हप्पी छोढ़ते हुए दरवाजा खोला…मैंने फौरन गाड़ी अंदर कर ली…दिव्या मुझे अज़ीब तरीके से चलते देख पास आई

दिव्या : के..क्या हुआ तुम्हें?

(UPDATE-64)

देवश : नहीं पहले घर के अंदर मुझे ले चलो फौरन (दिव्या ने मुझे कंधे से पकड़ा और अंदर ले आई)

अंदर आकर एक गिलास ठंडी लस्सी पी..

और फिर अपने फटे कपड़े को उतार फ़ैक्हा कपड़ों पे लगा खून और जगह में इतने गहरे छेड़ो को देखकर दिव्या मेरी ओर गंभीरता से देखने लगी ऊस्की निगाह मेरे बदन पे लगी इर्द गिर्द के पत्तियो पे पड़ी…”हे भगवान ये सब कैसे?”………मैंने उसे अपने पास बिठाया

और तफ़सील से उसे सारी बातें बता दी की कल रात गश्त के दौरान खलनायक के आदमियों ने मुझपर हमला किया…दिव्या अपने मुँह पे हाथ रखकर रोई सूरत से मुझे देख रही थी…मेरे जख्म अब भी भरे नहीं थे…दिव्या ने मुझे लिटा दिया और मेरी बताई दवाई मार्केट से खरीदकर जल्दी से ले आई

कंचन भी उठके मुझे ही ढूँढेगी और हड़बड़ाकर मेरे पहले वाले घर आएगी और मैं वहां ना मिलूँगा तो फिक्र अलग…इतनी औरतें जिंदगी में हो गयी की की किस को बताते फीरू….फिर अचानक आँख ढाल गयी….अचानक फोन बज उठा…दिव्या ने मुझे फोन दिया बोला किसी बारे अफ़सर का फोन है

मैंने फोन जैसे उठाया हवलदार ने बताया की आपको कमिशनर ने कलकत्ता बुलाया है अर्जेंट…मैंने अपने हाल के बारे में बताया हवलदार बहुत परेशना हुआ साथ में कॉन्स्टेबल्स ने भी मेरे यहां आने की इजाज़त माँगी वो सब फ़िकरमंद थे मैंने ऊन्हें बुला लिया….2 कॉन्स्टेबल और मेरे काबिल अफ़सर्स जिन्होंने काला साया को मर गिराया था और हवलदार आए….दिव्या ने सबको चाय पानी दिया…सबने मुझे सपोर्ट किया और गुस्सा हुआ की आप हमें सूचित क्यों नहीं किए? खलनायक के बढ़ते अपराध बहुत ज्यादा घातक होते जा रहे है

मैंने ऊन्हें समझाया ये तो चलता ही रहेगा हमारा कमिशनर कभी ऊन्हें मारने का आर्डर नहीं देगा…अफसरों को भी दुख था की ऊन्होने गलत रास्ता इकतियार किया ऊन्हें गिल्ट था की काला साया को मारने के बजाय ऊन्हें इन खतरनाक मुर्ज़िमो को मर गिरना चाहिए था….लेकिन सारी लगाम तो कमिशनर के हाथ में है वो लोग तो सिर्फ़ मामूली मुलाज़िम थीं मेरी तरह…खैर हवलदार ने बोला की आपको आज ही बुलाया गया है…दिव्या थोड़ी फिक्र करने लगी पर मैंने कहा मैं जल्दी ऊनसे बात करके आ जाऊंगा…शायद कल की प्रेस रिपोर्टिंग में कॉँमससिओनेर को मुझपर गुस्सा आया है की काला साया की मौत का खुलासा हो गया है और खलनायक को मारने केओर्दर्स नहीं दिए जा रहे

मैं जैसे तैसे किसी तरह ठीक होकर जीप से कलकत्ता के लिए रवाना हुआ…रोज़ की भी फिक्र थी अभी तक वो आई भी होगी की नहीं? मैंने ही तो उसे उसके फर्ज से निकाल दिया था…कुछ समझ नहीं आ रहा था जिंदगी में इतने घाव कभी नहीं झेले थे…जल्द ही कलकत्ता पहुंचा पुलिस हेडक्वॉर्टर्स…वहां पहले से ही कुछ लोग धारणा दिए बैठे थे मुझे देखते ही ऊन्होने रास्ता चोद दिया

कमिशनर के केबिन में आते ही…कमिशनर ने मुझे बारे ही गौर से देखा और फाइल पटकते हुए खड़े हो गये…”आओ आओ हमारे काबिल ऑफिसर आइये बैठेंगे या चाय पिएँगे”……..

मैंने सलाम ठोनकटे हुए आश्चर्य नजारे से कमिशनर की ओर देखा

कमिशनर : ये जो बाहर लाइन देख रहे है ना सब आपका ही किया धारा है…मुझे ये उम्मीद नहीं थी अपने ऑफिसर से की वॉ अपने ही कमिशनर और रेस्पेक्टेड सर पे उंगली उठाएँगा ऊँपे कीचड़ उछालेगा प्रेस वालो के सामने

देवश : मैंने कोई कीचड़ नहीं उछाला है सर सिर्फ़ हालत को देखते हुए कहा है

कमिशनर : ओह चुत उप मुझसे बदला जो लेना था तुम्हें क्यों? ठंडक मिल गयी अपने ही अफसरों पे कीचड़ उछालके बेज़्ज़ती करके हाउ कुड यू दो तीस? ई डिड्न’त ईवन थिंक डेठ बाहर देखा कितने लोग धारणा दे रहे है हिज़डो की तरह तालिया बजकर हमारा मज़ाक उड़ा रहे है वॉट दो यू थिंक अभी अरे जोक?

देवश : सर डेठ’से नोट देयर फॉल्ट गलती हमारे सिस्टम की है अगर आपने ठोस वक्त पे एक्शन!

कमिशनर : ये क्या तुम्हें हिन्दी फिल्म लग रहा है जहाँ पे कमिशनर ने आर्डर दिया और तुम गोली बरसाने निकल गये कानून भी कोई चीज़ है बेटा..अगर हम ही लॉ को नहीं मानेगे तो हुममें और मुज़रिमो में फर्क क्या रहेगा बताओ ज़रा

देवश : ई वाज़ जस्ट ट्राइयिंग तो तेल यू अबौट और फॉल्ट सर देखिए मैंने कोई कीचड़ नहीं उछाला खलनायक ने कल एक मासूम लड़की के साथ घिनौना सोशण किया और उसे मर के सरेआम थाने के सामने नंगा चोद दिया दीदी यू एवर फील डेठ अगर यही अगर आपकी बेटी या बहन

कमिशनर : श शुतत्त उप (कमिशनर ने गुस्सा होकर गाराज़ उठा लेकिन देवश एक टॅस से मास नहीं हुआ)

देवश : लगता है ना ऐसे ही जिसके घर पे बीती है उसे लगता है…वो तो महेज़ 19 साल की एक मासूम जवान लड़की थी…कल कोई और भी होगा खुदा ना खस्ता कुछ अगर हो जाए तो क्या ये वर्दी ये कानून देख पाएगा और एक लाश नहीं सर मैं ये केस हैंडिल जरूर कर रहा हूँ और अब मैं भी इन लोगों की तरह यही चाहता हूँ की मैं खलनायक और उसके आदमियों के सीने में गोली भर दम

कमिशनर : ये नहीं हो सकता क्योंकि खलनायक एक इंटरनॅशनल मुज़रिम है और बाहर कंट्री को वो ज़िंदा चाहिए अगर वो ज़िंदा ना मिला तो इंडिया के फंड्स तक रुक जाएँगे

देवश : हाहाहा देश को अपनी फिक्र है बाकी जो देश के लोगों के साथ हो वो जाए भढ़ में वाह सर आपसे ये सीख सीखने को मिला इस फंड का क्या? ऐसे रस्ेआचेस का क्या? क्या ये ऊस लड़की को वापिस ला देगा? क्या वो लोग हमारे देश को क्राइम फ्री कर देंगे नहीं सर जो करेंगे हम खुद करेंगे और मैं अब यही चाहता हूँ अपने जो काला साया

कमिशनर : देखो देवश काला साया काला साया वॉट आ क्रोक काला साया सिर्फ़ एक महेज़ मुज़रिम था एक मामूली इंडियन मुज़रिम ना ही कोई इंटरनॅशनल उसे मारना जरूरी था

देवश : हाँ क्योंकि वो आपके फंड्स रोक रहा था यही ना

कमिशनर : अपनी हद में रही लो देवश यू अरे टॉकिंग विड और सीनियर वैसे भी तुममिेन और मुज़रिमो के किससे आम है सुन रहा हूँ रोज़ के साथ भी

तुम आजकल घूम रहे हो ये ना हो की कहीं तुम ही पुलिस की टारगेट बन जाओ…ई आम रियली परेशान डेठ की जो तुम्हारे साथ हुआ मुझे पुलिस नबाताया लेकिन हमें ये सब सहना होगा

देवश : सहन वो करते है जिन्हें मरवाने का शौक होता है मुझे नहीं मैं मारने का शौक रखता हूँ और नो सर ई आम टॉकिंग विड आ लाइयर आ लाइयर हूँ जस्ट लाइयिंग विद हिज़ ओन पीपल वेर हे ऑल्वेज़ ट्राइयिंग तो प्रिटेंड डेठ थे पुलिस इस फॉर थे प्रोटेक्शन और अगेन्स्ट क्राइम और यू जस्ट सेल्लिंग तीस पीपल फॉर और ओन प्रॉफिट इस्न;त इट? अब मातृ भाषा में बोलता हूँ ई आम रिज़ाइनिंग तीस जॉब

मैं गुस्से की आग में केबिन से निकल ही रहा था….”सोच लो देवश तुम बहुत बड़ी गलती करने जा रहे हो”……..मैं मूधा “सर गलती की थी जिंदगी में अपने असल पहलू को छोढ़के बदले की भावना को छोढ़के अब मैं आज़ाद हूँ थेन्क यू सर आपके साथ काम करके मुझे सही गलत की पहचान हुई”……..कमिशनर झल्ला उठा

“गेट आउट ई साइड गेट आउट यू अरे सस्पेंडेड”……..मैंने मुस्कुराकर कुछ और नहीं कहा..बस अपनी गुण और अपने स्टार्स को उतारके टेबल पे रख डाला…और फिर अपनी बेल्ट भी उतार के फ़ेक दी “सर ये तो सिर्फ़ एक पत्ता था कुत्ते के गले में अब ये कुत्ता काटने को आज़ाद है क्योंकि अबतक ये सिर्फ़ भौंक सकता था”……..कमिशनर का गुस्सा सांत्वे आसमान पे था…मैंने मुस्कुराकर निकल गया

सब कोई सुन चुका था…हर कोई मेरे ओर देख रहा था…मैं सस्पेंडेड हो चुका था और मुझे फकर भी था…कॉन्स्टेबल और हवलदार के आंखों में आँसू थे…मैंने उनके कंधे पे हाथ रखा और सबको हाथ जोड़के अपनी जीप पे सवार हो गया….धारणा फिर शुरू हो गया और मैं जीप पे सवार होकर अपने घर निकल गया

ऊस दिन मैं टूट सा गया था….कुछ अच्छा नहीं लग रहा था…..अपने वीरान घर पहुंचा….अनॅलिसिस ऑफिस की बत्तिया जलाई…काला साया के नक़ाब और कपड़ों को शीशे के अंदर देखा…और फिर मुस्कुराकर अपनी आँसुयो को पोंछके सोफे पे बैठ गया…सोफे पे हाथ रखते ही मुझे रोज़ की याद आई….आज मेरी ही वजाहो से मैंने रोज़ को अकेला कर डाला था..सिर्फ़ मेरी वजाहो से….4 दिन हो गये ना रोज़ आई ना ही उसका कोई खत उसका पता भी नहीं जनता था…इधर दिव्या भी मेरे लिए दुखी थी क्योंकि मैं टूट सा गया था उधर एक खुशख़बरी सुनाने को मिली की शीतल रामलाल के साथ बर्दमान में ब्याह के लिए जा चुकी है…अपर्णा ने मुझे न्योता भेजा पर मेरे आने का कोई मतलब नहीं था और ना मन था… अब मैं अपने फर्ज से बिलकुल दूर हो चुका था और बढ़ते अपराध पे अब मेरा कोई हक़ नहीं था रोकने का

उधर खलनायक अपने कुर्सी पे बैठा..रोज़ के ब्रा को सूंघ रहा था जिसे ऊसने ऊस्की चुदाई के वक्त खींच के फाड़ दिया था…सफेद ब्रा को सूंघते देख उसके आदमी मुस्कराने लगे….

तभी कमरे में निशानेबाज़ आया…और ऊसने मुस्कुराकर खलनायक को ब्रा सूंघते पाया

निशनीबाज़ : सर?

खलनायक : बोलो ब्रदर क्या खबर लाए हो ? (खलनायक खुशी मन से ऐत्ते हुए बोलता है)

निशानेबाज़ : वो साला देवश पुलिसवाला नहीं रहा उसे सस्पेंड कर दिया ज्यादा ज्यादा आगे आगे कर रहा था अब तो साले को मारना और भी आसान है

खलनायक : हाहाहा वाहह बहुत खूब वैसे भी हमारा माल हमारे हाथों मेंआअ सी हुका है….पुलिस भी अब हुंपे नज़र कड़े कर चुकी यक़ीनन इस देवश की वजह से कहीं पुलिस हमारे मौत का पैगाम का सुना दे

निशानेबाज़ : आप कहें तो इन अफसरों को भी!

UPDATE-65

खलनायक : खून ख़राबा हमें पसंद है लेकिन मौके पे…जब हम यहां से निकलेंगे वैसे ऊस लड़की रोज़ को भी हम साथ ले जाएँगे

निशणेबाज़ : पर सर ये आप क्या कह रहे है? वॉ तो हमारी दुश्मन उसके वजह से हमें कितना नुकसान उठना पड़ा माल को लेकर

काला लंड चुपचाप एक जगह खड़ा सुन रहा था…”नुकसान हुआ तो भरपाई भी कर दी है ऊसने”……..निशानेबाज़ और बाकी गुंडे हैरान थे….”अब भरपाई कैसे की उसका तुम्हें बयान करना मैं जरूरी नहीं समझता…रोज़ के पीछे लग जाओ और इस बार मैं इसमें ंसाथ दूँगा मुझे वो लौंडिया ज़िंदा चाहिए और उसके ठीक मेरे हाथों में आने के बाद मैं ऊस देवश और इस देश में एक हड़कंप मचके यहां से फरार हो जाऊंगा गॉट इट”……….निशानेबाज़ ने सिर्फ़ आदेश का पालन करते हुए सर झुकाया

“अब जाओ हमें कुछ देर आराम करने दो”…….सारे गुंडे और निशनीबाज़ बाहर निकल गये…क्सिी को भी हक़ नहीं की ऊस हाथों में ब्रा की बात छेद दे…यक़ीनन ऊन लोगों को लगा किसी का शिकार खलनायक ने किया है…पर वो जानते नहीं की रोज़ खलनायक के दिल में बस चुकी है

काला लंड बार बार ऊस ब्रा को देख राह था….और ऊसने पास आकर खलनायक के जाते ही ऊस दराज़ से ऊस ब्रा को सूँघा…और उसके आंखों में एक जुनून सवार हो गया और ऊसने ऊस ब्रा कोफौरन दराज़ में रख डाला..इसकी खुशबू में तो ऊस औरत की महक है”……काला लंड का गुस्सा सातनवे आसमान पे चढ़ गया उसे सब समझ आ चुका था….

उधर रोज़ देवश की तस्वीर को देखकर उदास थी…और खलनायक के खुद के जिस्मो पे हुए हर स्पर्श को महसूस कर सकती थी…ऊसने फौरन देवश के तस्वीर पे लगे आँसू को जल्दी से पोंछा…और फिर अपने कपड़ों की ओर देखा….ऊसने ऊन कपड़ों को जल्दी से पहन लिया..और फिर एक बार नक़ाबपोश रोज़ बन गयी..जिसके आंखों में अंगार था….आज वो फिर गश्त के लिए बाइक पे सवार होकर निकल जाती है…और ऊस्की आंखें आज खलनायक के आदमियों को ढूदन्ह रही होती है….

आँधी तूफान की तरह बाइक को पूरी रफ्तार से चलते हुए…रोज़ हेलमेट के अंदर से ही चारों ओर के सन्नाटे अंधेरे में देख रही थी….

बस ऊस्की बाइक की मोटर की आवाज़ उसे सुनाई दे सकती थी…इस वीरने में एक चिटी भी नहीं दिख रहा था…लेकिन तभी ऊस्की निगाह एकदम से सामने हुई और बाइक को फौरन ब्रेक मर दी…बाइक ने एक ज़ोर का झटका खाया और रुक गयी…रोज़ वैसे ही बाइक पे सवार बस सामने घूर्र रही थी

वन की गाड़ी में बैठा एक जाना पहचाना शॅक्स था जिसके चेहरे के नक़ाबपोश से साफ मालूम हो चुका था की यह कौन है?….खलनायक ऊस्की ओर देखते हुए जैसे उठा…उसके मोष्टंडे गुंडे और पेड़ की दूसरी ओर छुपे टहनियो पे निशानेबाज़ ऊसपे निशाना लगाए बैठा है….

रोज़ बाइक को बंद करके चाबी निकलती है…और फिर फुरती से खड़ी हो जाती है…ऊन गुंडों की तरफ देखते हुए एक बार हल्का मुस्कुराती है और खलनायक के तरफ आने लगती है “आज तुम्हें मेरे गुंडों से लार्न की जरूरत नहीं तुम्हें रोज़…आज ये गुंडे तुम्हें उठाने आए है”…….खलनायक की बात सुन वही रोज़ रुक जाती है

रोज़ : मुझे क्या कोई कमज़ोर औरत समझ रखा है तूने कमीने?

खलनायक : हाहाहा इसी आइडिया पे तो मैं फिदा हूँ तुम्हारे रोज़ अपनी महक मेरे जिंदगी में भी डाल दो तो शायद इस ज़िल्लत भारी जिंदगी दो पल का प्यार मिल सके

रोज़ : तुम जैसा आदमी प्यार तो क्या नफरत के भी काबिल नहीं

खलनायक : क्या सोचती हो तुम? की यहां इस दो कौड़ी के लोगों के लिए तुम इतना जोखिम उठाकर क्राइम का सफ़ाया कर डोगी..हां हां हां तुमसे भी शातिर मुज़रिम है दुनिया में और मैं जनता हूँ ऊस कमीने इंस्पेक्टर के लिए तूने ये रास्ता छूना तेरा पूरा हिस्ट्री पता लग चुका है मुझे अपनी हाँ दे दे और मेरा हाथ थाम ले

रोज़ : मुज़रिम हाला तो ने बनाया और ऊसने तो एक अच्छा रास्ता दिखाया आज मैं उसी में सुकून महसूस करती हूँ जिसे तू दो ताकि की कह रहा है वो मेरे अपने है और तू जिसका नाम गाल्त लवज़ो से लेरहा है ऊस्की मैं कोई लगती हूँ

खलनायक का गुस्सा सातनवे आसमान पे था…निशानेबाज़ बस खलनायक की कमज़ोरी पे ऊस्की खिल्ली मन ही मन उड़ा रहा था…खलनायक ने अपने आदमियों को इशारा किया….ऊन्हें पहले से ही बताया गया था जैसे भी हो आज रोज़ को उठाना है ताकि वो उसे किडनॅप करके अपनी बना सके और फिर उसे अपने साथ इस देश को एक गहरा जख्म देकर बांग्लादेश ले जाए

जैसे ही गुंडे रोज़ की तरफ आए…रोज़ फुरती से उनके ऊपर खुद ही बरस पड़ी…रोज़ ने फौरन अपनी बेक किक सामने वाले गुंडे के छाती पे मारी..और ऊन गुंडों से भीढ़ गयी….निशनीबाज़ बस हमको के इंतजार में था…वैसे ही वो खिजलाया हुआ था देवश की वजह से पर सख्त ऑर्डर्स थे खलनायक के एक खरॉच भी ऊस्की जान लेने के लिए काफी थी….

रोज़ गुंडों से मुकाबला करने लगी…ऐसा लग ही नहीं रहा था की यह खतरनाक हसीना किसी के हाथ में आने वाली है…खलनायक बस चुपचाप देखता रहा…कुछ ही पल में रोज़ ने ऊन सब गुंडों को दरशाही कर दिया…वो लोग ऊस देवी से भीख मागने लगे…”देख लिया कुत्ते अपने गुंडों को कैसे भीख माँग रहे है जान की बेहतर है अपने आपको मेरे हवाले कर दे”………खलनायक तहाका लगाकर हस्सने लगा…कुछ समझ नहीं पाई रोज़ पर वो जानती थी खलनायक का कोई खतरनाक ही मूव था उसी पल एक तीर उसके कंधे को छूते निकल गयी रोज़ ने जैसे ही ऊपर उठना चाहा…दूसरा तीर उसके मुखहोते पे लग्के उसके मुखहोते को चेहरे से जुड़ा करके पेड़ पे धासा…तीर पे उसका मुखहोटा लटक सा गया

रोज़ आशय होकर गिर पड़ी ऊसने अपना चहरा छुपा लिया…निशनीबाज़ ने खलनायक की ओर देखा ऊसने निशानेबाज़ को उतार जाने को कहा…बिना मुखहोटा के रोज़ का लरना नामुमकिन ही था वो बस अपने बेबसी पे एक बार फिर पछताने लगी वो चेहरे को हाथों में लिए टांगों को सिमते ज़मीन पे लाइट गयी…”ज़रा देखे तो इस चेहरे की मालकिन कैसी है?”….खलनायक के हाथ अभी रोज़ के चेहरे तक पहुंचे ही थे….और ऊसने उसका हाथ को लगभग हटाने की कोशिश की ही थी…इतने में एक और बाइक की आवाज़ सुनाई दी..हेडलाइट की चकाचौंड रोशनी से खलनाया की आँखें बंद सी हो गयी वो अपने मुखहोते पे हाथ रखकर पीछे होकर खड़ा हो गया

वो बाइक सवार ठीक खलनायक से 20 कदम दूरी पे आ खड़ा हुआ…निशानेबाज़ भी उसे घूर्र घूर्र के देखने लगा…खलनायक को कुछ समझ नहीं आया..लेकिन जब हेडलाइट ऑन करके वो धीरे धीरे बाइक से उतरा…और उसके नज़दीक आने लगा…तो निशानेबाज़ और खलनायक दोनों हैरान हो गये ऊन्हें मालूम नहीं था ये कौन है?……सामने वही काले कपड़ों में…काले नक़ाब के ऊपर एक और मुखहोटा…जिसे देखकर कोई भी कह देगा की ये कोई और नहीं “काला साया” है

खलनायक : कौन है तू?

काला साया : काला साया (रोज़ फुरती से एकदम चेहरे को ढके ही खड़ी हो गयी जो गुंडे उसे जानते थे उनकी साँसें रुक सी गयी सब ठिठक गये सिवाय खलनायक के और निशानेबाज़ के जो उसे जानते नहीं थे)

खलनायक : तो शायद ये नहीं जनता की क्सिी के रास्ते में आने का क्या अंजाम होता है?

काला साया : तू शायद ये नहीं जनता की इस शहर का पहले कभी कोई योद्धा भी रही चुका है…जिससे तू अंजान है अपने अंजाम की सोच

खलनायक गुस्से में तो था ही ऊसने अपनी गुण निकाल ली…काला साया ने फुरती से अपने छुपे हाथ की गुण सीधे खलनायक के हाथों पे मर दी…गोली सीधे नीचे गिर पड़ी खलनायक के हाथों से वो अपने हाथ पे लगे गोली से दहेक उठा…काला साया उसके करीब जैसे आया…निशानेबाज़ ने निशाना सांड़ दिया…काला साया फुरती से दूसरी ओर जा कूड़ा…निशानो पे निशाना लेकिन हर हमले से ऐसे बच रहा था जैसे कोई तेज तरह नेवला….

खलनायक ने अपनी गोलियों से निशाना सांड़ दिया…जो सीधे निशनीबाज़ के ऊपर बरस उठी वो संभाल ना पाया और उसे लास्ट में जंगल के ढलान में कूद जाना पड़ा..

दूसरी ओर खलनायक ठिठक सा गया उसके आदमी वैसे ही लाहुलुहान परे थे जो बचे कुचे थे वो तो काला साया के नाम से ही भाग गये…खलनायक ने खुद ही मोर्चा संभाला…और रोज़ पे जैसे हाथ लगाने की कोशिश की…काला साया एकदम से उसके चेहरे पे लात दे मारता है…खलनायक दूर जा गिरता है

खलनायक पहली बार किसी से टकरा राहत हां….वो अपने जेब से लंबा सा चाकू निकलता है और काला साया पे फुरती से चलाने लगता है…काला साया उसके हर हमले से बचते हुए उसके हाथ को पकड़ लेता है लेकिन उसके पेंट पे खलनायक की लात जैसे लगती है वो पीछे हो जाता है खलनायक जैसे ही दूसरा लात मारता…काला साया ने उसके टाँग को पकड़ा और उसे एक ही झटके में अपने दूसरे बेक किक से गिरा डाला…अभी चाकू उठाने के लिए खलनायक पलटा ही था काला साया ने उसके गोली लगे हाथ पे पाओ रख दिया…खलनायक ज़ोर से दहढ़ उठा

काला साया कुछ समझ नहीं पा रहा था की इस मुखहोते के भीतर कौन है…लेकिन तभी उसके कमर पे निशनीबाज़ का तीर एक बार फिर छू जाता है…काला साया दर्द से बिबिला उठता है…और वो गुस्से भारी निगाहों से निशानेबाज़ की ओर देखता है इससे पहले निशानेबाज़ और तीर लगा पता वो उसके ऊपर अपनी स्विस नाइफ निकलकर फैक देता है जो सीधे उसके टहनी पे जा लगती है और निशानेबाज़ गिर परता है

UPDATE-66

खलनायक को इतने देर में मौका मिल चुका था काला साया को धकेलके गाड़ी पे सवार होने का….काला साया तब्टलाक़ तीर से मुखहोटा निकलकर रोज़ को देता है…रोज़ चुपचाप बस काला साया की ओर देखती है…काला साया उसके चेहरे पे हाथ रखकर मुस्कुराता है..और फिर गुस्से से खलनायक के पीछे भागता है निशनीबाज़ गुस्से में सामने खड़ा हो जाता है…काला साया जैसे ऊसपे हमला करता है वो अपने करते डर मूव्स को उसे करता है…काला साया अपने नानचाकू को निकलकर ऊसपे बरसाने लगता है उसके करते धरे के धरे रही जाते है

और काला साया उसके चेहरे पे मिट्टी फैक्टा हुआ उसके पूरे बदन पे नानचाकू का वार बरसा देता है….निशानेबाज़ भी भागने लगता है….तब्टलाक़ खलनायक भी गाड़ी पे सवार होकर अपने ड्राइव को भागने के लिए कहता है…रोज़ पहले ही वन के पिछले भाग से अंदर घुस जाती है और खलनायक का गर्दन दबोच लेती है….

खलनायक उसे धकेल देता है और रफ्तार तेज करने को बोलता है काला साया पीछे भागता है निशानेबाज़ को उठते देख वो अपनी गोली अपने बदले को याद करके निशानेबाज़ के उसी जगह पे मारता है जहाँ निशानेबाज़ ने उसे तब मारा था जब वो देवश था…निशानेबाज़ गोली खाके दूसरी ओर गिर परता है

काला साया पहाड़ी के ढलान पे चढ़ते हुए दूसरी ओर मुड़ती वन के ऊपर सीधे छलाँग लगा देता है पूरी बढ़ता की वन पे छलाँग लगते ही किसी मकड़े की तरह दोनों ओर हाथ से पकड़ते हुए बैलेन्स बनता है…खलनायक अपना चाकू वन के छत्त पे घुसाने लगता है…काला साया हर हमले से मुश्किल से बचता है

रोज़ इस बीच खलनायक को रोकने की कोशिश करती है और उसी पल काला साया शीशे पे अपने घुस्से का वार करके शीशा तोड़ देता है और ड्राइवर का गला पकड़ लेता है गाड़ी कभी इधर तो हकाभी उधर धंस खाने लगती है…इतने में काला साया अपनी गोली सीधे ड्राइवर के भेजे पे चला देता है…ड्राइवर मौके पे ही मर जाता है….खलनायक उसे धकेलटा हुआ खुद ही ड्राइविंग करने लगता है..काला साया पीछे के खुले फाटक से गाड़ी पे प्रवेश करता है….

काला साया : रोज़ अपना हाथ दो

रोज़ जैसे ही काला साया को अपना हाथ देने वाली होती है…खलनायक उसे पकड़ लेता है रोज़ उसके मुँह पे एक लात मार्टी है…खलनायक को गहरी चोट लगती है…और तब्टलाक़ काला साया रोज़ के साथ गाड़ी से छलाँग लगा देता है…खलनायक रुक नहीं पता अपनी हार को देख उसे वहां से भाग जाना ही परता है गाड़ी को पूरी रफ्तार में करके वो एक बार पीछे मुदके अपनी रोज़ को काला साया की बाहों में देखता है और फिर गाड़ी को बढ़ता में बहुत दूर ले जाता है

निशानेबाज़ भी दर्द में करहाते हुए किसी तरह अपनी बाइक पे बैठकर वहां से रफूचक्कर हो जाता है…काला साया और रोज़ एक दूसरे के गले मिलते है मानो जैसे दोनों के दुख आज एकदुसरेक ओ देखकर खत्म हुए हो….रोज़ प्यार से काला साया के गाल को चूमती है

रोज़ : मुझे मांफ कर देना देवश मैंने तुम्हें गलत समझा बहुत दिल दुखाया है तुम्हारा

काला साया बस उसे चुप रहने का इशारा करके मुस्कुराता है और उसके होठों पे उंगली रख देता है….कुछ देर बाद वो खुद ही पुलिस को फोन करके सूचित करता है…और फिर एक नज़र निशानेबाज़ पे दौरता है पर वो गायब हो चुका था…काला साया फौरन अपनी बाइक पे रोज़ को सवार करते हुए पूरी रफ्तार से वहां सीन इकल जाता है….इलाके में चाय पीते लोगों की निगाह जैसे ही रोज़ और साथ में अपने पुराने हीरो काला साया पे पड़ी वो लोग चिल्लाने लगते है खुशी से….

पर पूरी रफ्तार से रास्ते से गुजरता हुआ काला साया सिर्फ़ मुस्कुराकर ऊन लोगों की तरफ देखता है

सबके होठों पे एक ही बात आ गयी थी “काला साया वापिस आ गया है”…अगली सुबह जल्द ही पुलिस हेडक्वॉर्टर में कमिशनर को फोन आया और जैसे ऊसने रिसीवर उठाया..ऊस्की साँसें थाम गयी उसका हाथ काँप गया “वॉट नॉनसेन्स?”……कमिशनर को कल रात की घटना पुलिस बताती है की मुठभैरर में काला साया खलनायक से लारा है उसके आदमियों को अरेस्ट करके बयान किया गया….अब शायद काला साया अकेले ही खलनायक का सफ़ाया कर देगा इस बात को सुन एक बार फिर कमिशनर कुर्सी पे गिर परता है

और उसके आंखों के सामने अख़बार में फ्रंट पेज पे छापा होता है

बदल गारज़ने लगते है मौसम जैसे बिगड़ने लगता है…जल्द ही अपने वीरान घर पहुंचकर काला साया और रोज़ दोनों अपने गुप्तिए कमरे में आकर पष्ट हो जाते है….रोज़ एकटक काला साया की ओर देखती है…जो अपने दर्द से सिसक रहा है…रोज़ उसके करीब आकर उसके बदन पे हाथ फेरते हुए जख्म को टटोलने लगती है…तभी उसे जॅकेट के पीछे एक हल्की सी थोड़ी गहरी जख्म दिखती है..गनीमत थी सिर्फ़ 1इंच ही तीर अंदर घुस पाया था…रोज़ काला साया के कपड़ों को उतारने लगती है

जैसे ही काला साया अपने सारे कपड़े उतारके अपने अंडरगार्मेंट्स में आता है…उसे देखते ही रोज़ मुँह पे हाथ रख लेती उसके पहले से ही बदन पे कई जगह पत्तियां थी..काला साया अहसास करके मुस्कुराता है

काला साया : ये निशानेबाज़ से पहली मुठभैर के है जो कुछ दिन पहले हुए थे

रोज़ : ओह माइ गॉड मेरी वजह.हे ये सब हुआ है मैंने ही तुम्हें अकेला अपनी बेवकूफ़ियो के लिए मुझे मांफ कर देना

काला साया : अरे यार इधर आओ (रोज़ को अपने जाँघ पे बिताते हुए)

उसके प्यार से ज़ुल्फो पे उंगलियां फहीयर्ता है “वो मज़बूर देवश था काला साया नहीं…तुम अगर मुझे धोखा भी डोगी ना तो भी मैं तुम्हें मांफ कर दूँगा ना जाने क्यों पर तुमसे कुछ जुड़ सा गया है”…….अपने दिल पे हाथ रखते हुए काला साया ने मुस्कराया

रोज़ ने उसके चेहरे से उसका मास्क और उसका काला काप्रा उतार दिया…वो चाहती थी की क्या ये सच में ऊस का देवश है जिसे लोग नाम से काला साया बुलाते है..मुखहोते के उतरते ही सामने देवश का पसीने भरा चेहरा देखकर रोज़ मुस्कुराकर देवश से गले लग गयी

“ई लॉवी यू ई वाज़ सो मिस्सिंग यू”…….

रोज़ ने चिल्लाते हुए देवश से एकदम लिपटके कहा

देवश : सस्स्शह इट’से ओके आहह से

रोज़ : ओह तुम्हारा जख्म प्ल्स मुझे दवाई लगाने दो

देवश मुस्कुराकर बिना कुछ कहें पेंट के बाल लाइट जाता है…फिर रोज़ ऊस्की सिखाई तरह से ड्रेसिंग करने लगती है और ऊस जख्म पे दवाई लगाने लगती है…देवश बस अपने दर्द को भी भूल मुस्कुराकर रोज़ के गिरते ज़ुल्फो के साथ उसके चेहरे को देख रहा था…रोज़ की जब निगाह पड़ी रोज़ मुस्कराने लगी

उधर खलनायक चीज़ों पे चीज़ें तोड़ रहता…उसे शांत करना किसी के बस की बात नहीं थी…जब खलनायक घुर्राटें हुए ऊन गुंडों के करीब आकर उनके गर्दन को पकड़कर ऊन्हें धकेलने लगा…”सालों मां के लौदो किसी काम के नहीं हो तुम पहली बार एक दो कौदीी के आदमी से भागना पड़ा पहली बार खलनायक को जंग से पीछे हटना पड़ा…इस्शह”………खलनायक का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था

UPDATE-67

निशानेबाज़ जिसके कंधे से लेकर छाती तक पट्टी लगी थी चुपचाप पष्ट पड़ा लेटा हुआ था…डॉक्टर सहेंटे हुए बाहर निकल गया…खलनायक ने गुण निकाली और एक आदमी के मुँह में लगा दी “मुझे ऊस हरामी की एक एक इन्फार्मेशन चाहिए वो कौन है? कहाँ से आया? सबकुछ”……..खलनायक ने झल्लाते हुए बोला

आदमी 2 – सर इन्फार्मेशन ही क्या अपुन ऊस्की पूरी कुंडली जनता है तभी तो अपने पंतर लोग एक ही झटके में वहां से सतक लिए

खलनायक घुर्राटे हुए ऊस बंदे की हिम्मत की अंकल दे रहा था जो इतना कुछ कह गया…ऊस आदमी ने पुराने पुराने न्यूसपेपर्स के आर्टिकल्स तस्वीर के साथ खलनायक के सामने टेबल पे पेश की…खलनायक उसे उठा उठाकर पढ़ने लगा…ऊसमें उसी बंदे काला साया की तस्वीर थी…”हम”….

वो बस धीमी साँस छोढ़ता हुआ पढ़ने लगा

आदमी 2 : यही नहीं सर ये आदमी इस शहर के पुलिस के साथ मुरज़रीमो के नाक में दम कर गया रॉबरी करप्षन मर्डर या कोई भी क्रिमिनल केस ही जो पुलिस के हॅंडोवर होने से पहले ये सुलझता है…ये ना ही किसी पे रहें करता है और अपने मुज़रिमो को गोली से उड़ा देता है…कलकत्ता की पुलिस भी इसे ढूँढ रही है लेकिन बाद में इसके बढ़ते अपराध के लिए पुलिस ने इसका एनकाउंटर जारी कर दिया था लेकिन ये साला बच निकाला…और वापिस आया आपसे लार्न

खलनायक : हम लेकिन रोज़ को देखकर लग रहा था जैसे वो उसे जानती हो…

निशानेबाज़ : आहह भी हूँ सकता है की ये रोज़ उसे पहले से जानती हो? क्या पता काला साया की वॉ (निशानेबाज़ ने और कुछ नहीं कहा क्योंकि जलते अंगरो भारी आंखों को खलनायक के वो और घूर्र नहीं सकता था)

खलनायक : मुझे किसी की बात नहीं सुन्नी रोज़ सिर्फ़ मेरी है रही बात इस नये दुश्मन की काला साया इसके जिंदगी पे तो मैं काला ग्रेें लगाउँगा पहली बार कोई टक्कर का आदमी मिला है…इसके लिए तो तुम ही ठीक हो है ना काला लंड

काला लंड अंधेरे से निकलकर सामने आया और ऊसने एक बार ऊस तस्वीर की ओर देखते हुए घूरा…काला लंड ने ऊस तस्वीर को एक ही झटके में फाड़ डाला…”समझो ये मेरा अगला अपोनेंट है रेसलिंग का”…..ऊस्की गारज़ान ने खालनयक को तहाका लगाने पे मज़बूर कर दिया…वो जनता था काला लंड से भीढना साक्षात बेदर्द मौत को गले लगाना….काला लंड बस चुपचाप खलनायक को घूर्र रहा था…और फिर ऊस फटे तस्वीर को

रोज़ काला साया के छातियो को चूमते हुए उसके लंड पे कूद रही थी…नीचे से काला साया धक्के लगते हुए रोज़ के चुचियों को मुँह में भरके थोड़ा उठके चुस्स रहा था….रोज़ बैठी बैठी बस लंड पे रगदाई खाके अपनी गान्ड को पूरी रफ्तार में ऊपर नीचे उछाल रही थी…काला साया फौरन रोज़ के छातियो को क़ास्सके दबाने लगा….रोज़ चाह रही थी की वो सारी बात काला साया को बता दे पर ऊस्की हिम्मत नहीं हो पा रही थी..फिर अचानक से काला साया ने रोज़ को अपने नीचे लेटा दिया और ऊस्की टांगों को अपनी कमर में फ़साए ऊस पे चढ़के धक्के लगाने लगा

रोज़ ऊन धक्को का जवाब अपने मीठे मीठे सिसकियों से दे रही थी….ऊस्की आंखें ढाल सी गयी थी…काला साया के हाथ रोज़ के मुखहोते पे आ गये…पर वो कटरा रहा था बिना मर्जी के बिना शायद रोज़ गुस्सा हो जाए….पर रोज़ शायद यही चाहती थी और आज इतने दीनों बाद खुद ऊसने अपना मास्क उतार फैका…उसके चेहरे को देखते ही जैसे सागर का पानी नहेर में गिर रहा हो ऐसा हाल काला साया का था…और दोनों प्यार से एक दूसरे से लिपट गये

काला साया उर्फ देवश ने उसके मखमल जैसे चेहरे पे उंगलियां फहीराई उसके चेहरे को वो बहुत ही प्यार से घूर्र रहा था..

फिर ऊसने उसके कंपकपाते होठों से होंठ लगा दिए…रोज़ ने अपनी गान्ड उठा ली…और देवश भी बारे ही काश क़ास्सके धक्के पेलने लगा…चुत से लंड फ़च से निकलता और धंस जाता
ऐसी हालत में सिर्फ़ देवश उसके चेहरे को चूम रहा था…और ऊसने फिर फौरन अपना लंड बाहर खींचा

और रोज़ के सामने ही उसके पेंट पे अपना रस उगलने लगा…जब उसके लंड से आखिरी बंद भी टपक के गिर पड़ी…तब जाकर देवश पष्ट होकर अपनी अँग्रेज़ गोरी में रोज़ के गले से लिपट गया….और उसके पेंट पे लगे रस को हाथों से पेंट और छातियो पे रोज़ के मलने लगा….”देवश मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ”…….रोज़ ने देवश के चेहरे की ओर देखते हुए बोला

फिर उसके बाद रोज़ ने खलनायक के संग हुए मुठभैर के बारे में सबकुछ बता दिया…की उसके साथ क्या क्या हुआ था?….देवश बस सुनता गया पहले तो उसे अपने कानों पे विश्वास नहीं हुआ की वो ये क्या सुन रहा है की रोज़ खलनायक के साथ…उसे बेहद गुस्सा आया आख़िर क्यों? क्यों वो अकेले लर्र्ने चली गयी जबकि उसे देवश ने मना किया था….देवश कुछ देर तक खामोश रहा शायद रोज़ को डर था कहीं देवश उससे दूर ना हो जाए

देवश ने रोज़ के चेहरे पे हाथ रखा..और ऊस्की तरफ देखा…रोज़ के आंखों में नांसु थे…”मैंने तुमसे क्या कहा था? की चाहे जो भी हो मैं तुमसे दूर नहीं हो सकता…लेकिन तुम्हें ये बात मुझे बतानी चाहिए थी…एनीवेस जो हुआ उसे भूल जाओ इतना सब हो गया और मैं कुछ ना कर सका”…..मैं गुस्से में बैठ गया

रोज़ भी बैत्टते हुए मेरे कंधे पे हाथ रखकर समझने लगी “प्ल्स देवश ट्राइ तो अंडरस्टॅंड गलती मेरी ही थी मुझे लगा की मैं उसे”…….

मैंने रोज़ की तरफ देखा और उसके हाथ को हटाया “पर तुमने इतना भरा खतरा अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो यानि अब ऊस्की निगाह तुमपर है ये बात खतरे की है रोज़ और मैं नह्िचाहता तुम ऊन लोगों से और उलझो प्ल्ज़्ज़”……मैंने रोज़ को समझाया रोज़ चुप होकर सुबकने लगी

मैंने उसके आँसुयो को पोंछा और उसे अपने गले से लगा लिया…हालकनी मुझे खलनायक पे बेहद गुस्सा आ चुका था…पर मेरे पास सवर् के अलावा और कोई चारा नहीं था…ना ही मैं जनता था की मुझे मारने की खलनायक ने पूरी प्लॅनिंग कर ली थी…मुझे मर के वो रोज़ को हमेशा हमेशा के लिए अपने साथ ले जाएगा…इस बात से मैं कहीं ना कहीं थोड़ा बेख़बर था

अगले दिन जब मैं घर पहुंचा…तो पाया दिव्या टीवी पे न्यूज देख रही है…कल रात के हादसे और काला साया के वापिस आने की खबर शायद वो सुन चुकी थी जब मैं अंदर आया तो वो मुझे आँसुयो भारी निगाहों से घूर्रने लगी

दिव्या : क्यों ? तो क्या इसी लिए तुम रात रातभर गायब रहते थे? यही था तुम्हारा प्लान तुम फीरसे?
देवश : देखो दिव्या मुझे बनना जरूरी था…मेरे अपनों को मेरी जरूरत थी
दिव्या : तुमने मुझसे वादा किया था की तुम ये लाइन चोद दोगे फिर क्यों?
देवश : कुछ चीज़ें हमारे हाथों में नहीं होती यक़ीनन मैंने जो फैसला लिया आज ऊस फैसले से अलग हो रहा हूँ पर ये जरूरी था…खलनायक को रोकने के लिए जानती हो अब मेरे पास कोई चारा नहीं है जब चाहे तब कोई ना कोई दुश्मन मेरा आकर मुझे मर सकता है
दिव्या : पर!

दिव्या के पास कोई चारा नहीं था…देवश उसे समझने लगा पर वो देवश की जान जोखिम में डालने के लिए खिलाफ थी…दिव्या उसे कफा हो गयी…फिर ऊसेन खुद ही दिव्या को अपने पास बिठाया और उसे विश्वास दिलाया की अब पुलिस उसके पीछे नहीं लगेगी और ऊसने जो कसम ली है वॉ खलनायक को मर के ही खत्म होंगी….दिव्या को अपने मन को मज़बूत करना होगा..दिव्या सुनती चली गयी देवश के मकसद को…ऊसने रोज़ के बारे में पूछा उसे थोड़ा खटका लगा दोनों को साथ बाइक पे…देवश ने सारी बात खुलके बता दी की वो ऊस्की पार्ट्नर है…दिव्या ने कुछ और नहीं कहा और फिर देवश के कंधे पे सर रखकर उससे लिपट गयी…देवश जनता था जुर्म और लौंदियो को संभालना उससे कोई नहीं सीख सकता…लेकिन रोज़ के अपमान का उसे खलनायक से बदला लेना ही था
“वॉट नॉनसेन्स? इस तीस सीरियस्ली?”……..एकदम से कमिशनर पीछे मुदके अपने काबिल पुलिस ऑफिसर्स पे जो सर झुकाए खड़े थे ऊँपे कमिशनर बरस पड़ा…काला साया की खबर अख़बार में चप्प चुकी थी…पुलिस की निंदा की जा रही थी….और ऊपर से दबाव भी पब्लिक का बढ़ते जा रहा था…

कमिशनर : क्या मैं यही एक्सपेक्ट कर सकता हूँ? तुम गंदूयो से…एनकाउंटर स्पेशलिस्ट खुद को बोलते हो लानत है जो एक महेज़ इंसान को

पुलिस ऑफिसर से.

पे – सॉरी पर अब ई डॉन’त थिंक की हमारी टीम ज़िल्ले में अच्छा काम कर रही है क्योंकि काला साया पुलिस से एक कदम आगे हमेशा होता है अब वो ऊस नदी में कूदके कैसे बच्चा ये तो खुदा ही जाने

कमिशनर : वाहह तुम्हें खुद ही यकीन नहीं की तुम्हारी बंदूक से निकली गोली एक मुज़रिम को छू भी सकती है…हुहह मुझे तुम बॅस्टर्ड्स को केस ही नाहिदेना चाहिए था एक तो ऊस देवश इंस्पेक्टर देवश जिन्हें मैंने बारे ही आदर से ट्रांसफर दी और आज वॉ हुहह सस्पेंडेड क्या किया ऊसने हम सब की गान्ड में लंड डालकर चला गया

पुलिस ऑफिसर – सर गुस्ताख़ी मांफ कीजिएगा पर देवश सर अपना काम काबिल-ए-तारीफ से कर रहे थे…हाँ सर से.पे सर सही कह रहे है आपके ऑर्डर्स पे ही देवश सर ऊन्हें मारने का हमको दिया था….यही नहीं सर हमने पूरी कोशिश की थी…लेकिन हम ये नहीं समझ पा रहे की आप काला साया को छोढ़के खलनायक जैसे शातिर मुज़रिम को मारने का क्यों नहीं ऑर्ड रहे

कमिशनर : ओह अब तुम पुलिस ऑफिसर्स मुझपर अपने सर पे ही उंगली उठा रहे हो…ये सब ऊस देवश किया धारा है ई वन’त फर्गिव हिं ई वन’त गेट आउट ई साइड गेट आउट

कमिशनर चिल्ला उठा..पुलिस ऑफिसर्स दाँतों पे दाँत पीसके बाहर निकल गये…सब अंदर ही अंदर कमिशनर को गाली दे रहे थे महेज़ अपने पैसे और लालच के चक्कर में वो अडमेंट हो चुका है

उधर जल्द ही पुलिस वालो ने देवश को ये खबर दी..की कमिशनर आजकल ज्यादा ही खिस्सिया गये है….देवश उनके साथ हँसी मज़ाक करने लगा…ऊन्हें भी फक्र था की देवश ने नौकरी सही राह के लिए छोढ़ी….काला साया के बारे में बताते ही देवश ने भी हैरानी भाव का नाटक प्रकट किया…कुछ ही देर में पुलिस फोर्स चली गयी….लेकिन देवश थमा नहीं था काला साया तो आज नहीं तो कल उसे फिर बनकर निकलना ही था

देवश अपने जैसे घर लौटा…दिव्या को छोढ़के तो ऊसने देखा मामुन बैग पैक कर रहा है….”और भाई क्या फुर्सत मिल गयी?”…….

मामुन ने मुस्कुराते हुए कहा

देवश : हाँ भाई सॉरी यार तुझे ज्यादा टाइम नहीं दे पाया वो दरअसल काम में इतना उलझा हुआ था की (मामुन ने देवश के कंधे पे हाथ रखा)

मामुन : अरे यार क्या बात है? भाई से मिल लिया मेरे लिए बहुत है चल मेरा टाइम भी हो गया अब मुझे भी जाना है कलकत्ता वापिस

देवश : थोड़े दिन और रुक जाता तो सही रहता

मामुन : भाई वक्त कभी किसी के लिए नहीं रुकता खैर तुझे मिस करूँगा भाई और आते रहना यार कलकत्ता आता क्यों नहीं?

UPDATE-68

देवश : फिलहाल तो वक्त नहीं सब ठीक हो जाए फिर (देवश ने मामुन को ये नहीं बताया की उसे नौकरी से निकाल दिया गया है क्या पता मामुन अफ़सोस जताए वैसे भी उसे अपने पर्सनल चीज़ें शेयर करने का कोई शओक नहीं था)

मामुन देवश से गले मिलकर मुस्कान देकर निकल गया…देवश ने उसे स्टेशन तक चोद दिया…मामुन के जाने के बाद…देवश वापिस घर लौटा…और अपने कमरे में आकर सुस्टते हुए लाइट गया इतने में…खिड़की से झाँक रहे ऊस शॅक्स ने अपना नंबर मिलाया जो दूरबीन को एक हाथ में लिए बारीक़ी से फोन के उठने के इंतजार में था

“हाँ भाई वॉ घर पे है अबतक तो कोई नहीं आया उसके वहाँ ठीक है भाई”…..खलनायक के आदमी ने अपनी दूरबीन को रखा और फिर झधियो से निकलकर चला गया…इधर देवश अनजाने मुसीबत से बेख़बर बस सो रहा था…इतने में दरवाजे पे दस्तक हुई

देवश की एकदम से नींद टूटी…ना घर पे कोई था कंचन तो गयी हुई है शीतल की शादी में दूसरे गाँव…रोज़ को घर मालूम नहीं..शायद दिव्या ही होगी…सोचकर देवश उठ खड़ा हुआ…हूँ तेज कदमों से दरवाजे की तरफ आने लगा…और दरवाजे के दूसरी तरफ गुंडे हाथों में हॉकी का डंडा और गुण लिए बस दरवाजे के खुलने की प्रतीक्षा में थे

दरवाजा एकदम से खुला..वो लोग सतर्क हो गये.दरवाजा अभी खुलता उससे पहले ही दरवाजे पे सटा ऊस गुंडे के पेंट से गोली निकल गयी…गुंडा वही पेंट पकड़ा गिर पड़ा..उसके मरते ही चारों गुंडे सावधान हो गये और वो भी कोई हरकत कर पाते किसी ने खैच के दरवाजे पे एक लात अंदर से दे मारी..दरवाजों सहित हूँ गुंडे हड़बड़ाकर सीडियो से नीचे गिरते चले गये

सामने काला साया खड़ा था..ऊस्की मुस्कान ऊन लोगों को बताने के लिए काफी थी की उनकी प्रतीक्षा में हूँ खुद पलखे बिछाए बैठा हुआ था…”साले तेरी मां की”…अभी दूसरा गुंडा उठके गोलीचलता…उसके गर्दन पे काला साया के फुर्रत चाकू का निशाना धस्ता चला गया..काला साय कूदके ऊन गुंडों पे हावी हुआ….ऊँका शक यकीन में तब्दील हो सा गया की कहीं ये देवश ही तो नहीं हूँ लोग बस ऊसपे टूट परे…चाहे हूँ बचे या नॅब अच्छे…अब ऊँका शिकार एक ही था

देवश ने फुरती से हॉकी के डंडे से ऊँपे वार करना शुरू कर दिया..

और जब वो लोग अपने हत्यार निकल पाते…काला साया ऊँपे गोली दंग देता…पांचों के पाँच गुंडे वही मारें गये…काला साया ने फौरन अपने मुखहोते को उतारके इधर उधर देखा..और फौरन रोज़ को फोन किया…मोहल्ले की आस पास घर नहीं था…इस वजह से देवश को दोपहर के वीरान में लर्र्ने का मौका मिल गया..वो एक पल चारों ओर निगाह डालते हुए लाशों को अंदर ले आया…तब्टलाक़ रोज़ भी आ गयी और ऊसने देवश की ओर देखा

देवश : मुझे आए थे मारने…यक़ीनन अब मैं खलनायक का नेक्स्ट टारगेट हूँ

रोज़ : बाप रे अच्छा हुआ तुम सतर्क थे..मैंने तो तुम्हें शायद आज खो ही दिया था (रोज़ ने देवश के गले लगते हुए कहा)

देवश : जल्दी से इन लाशों को ठिकाने लगाना है…अगर कोई आ गया तो प्राब्लम हो जाएगी पुलिस को पता नहीं चलना चाहिए

रोज़ : ठीक है (रोज़ और देवश ने मिलकर ऊन लाशों को बारे ही अच्छे से जीप में डाल दिया…और फिर देवश खुद लाश को खलनाया के एड एक पास ले जाकर फैक आया)

निशानेबाज़ को फोन आया “दमनीत इतना घंटा लगता है एक इंस्पेक्टर की लाश यहां लाने को”…..निशानेबाज़ ने जो फिर सुना अपने गुंडों से दंग रही गया…जल्द ही हूँ घटना स्थल पे पहुंचा और अपने गुंडों की लाश देखी हर किसी के ऊपर स्प्रे से लिखा था काला साया..जिसे पढ़कर निशानेबाज़ का खून खौल उठा

खलनायक : वाहह एक इंस्पेक्टर को मर नहीं पाए तुम लोग हुहह जबसे मैं इंडिया आया हूँ तबसे ना हार नाकामयाबी ही झेल रहा हूँ…पहले तो रोज़ फिर हूँ इंस्पेक्टर और भी ये काला साया…ऐसा क्यों लगता है? जैसे ये तीनों एक दूसरे के कड़ी हो

निशानेबाज़ शर्म से सर झुकाए था…ऊसने खलनायक से पूछा की हूँ चाहे तो खुद देवश को खत्म कर दे..उसे एक मौका चाहिए…लेकिन खलनायक को सूझने लगा की नहीं एक बार पहले ही तो उसे चान्स दिया था..अब देना बेवकूफी है…हार मानके निशानेबाज़ चुप हो गया…खलनायक ने फिर से काला साया की तस्वीर को देखा और फिर कुछ कुछ सोचने लगा…तब्टलाक़ काला लंड भी अपने शिकार को पकड़ने के लिए तैयार हो चुका था

खलनायक : एक तुम ही मेरी उम्मीद हो काला लंड क्या तुमसे मैं होप रख सकता हूँ (काला लंड कुछ नहीं बोला सिर्फ़ चुप रहा)

खलनायक : हम मतलब तुम मुझे निराश नहीं करने वाले तुम्हारी ये दहेकत्ि आँखें ये क़ास्सी मुट्ठी साफ बता रही है की तुम काला साया का खून देखने के लिए बरक़रार हो..एनीवेस उसके ठिकाने का पता लगाओ साथ में निशानेबाज़ को भी ले जाओ आज मुझे किसी भी हाल में काला साया मुर्दा चाहिए…वैसे भी ज़िंदा तो उसे काला लंड छोढ़ेगा नहीं क्यों है ना? (खलनायक ने मुस्कुराकर काला लंड की तरफ देखा..

जो गुस्से से बस हामी भर रहा था)

खलनायक के आदेश पे ही…निशानेबाज़ और काला लंड अपने गुंडों को लेकर निकल गये…तब्टलाक़ टीवी पे कमिशनर की इंटरव्यू को सुन खलनायक कुर्सी पे बैठ गया…उधर रोज़ और देवश भी टीवी न्यूज को देख रहे थे

“कहा जा रहा है आज कमिशनर की बैठक में ऊन्होने हमें सूचित किया है की वो अब इस शहर में और खून ख़राबा नहीं होने देंगे केवल 10 किलोमीटर दूर कलकत्ता से इतर जैसे छोटे शहर में आज उगरवादी और मुज़रिमो का दायरा बन सा गया है…खलनायक जैसे बारे इंटरनॅशनल अपराधी इस छोटे से शहर में हाहाकार मचा रहे है…कमिशनर ने बताया की आज हूँ ये निश्चय कर रहे है की खलनायक और उससे जुड़े सभी अपराधी मारें जाएँगे…ये फैसला ऊन्होने यक़ीनन आक्च के लिए लिया हो पर कहीं ना कहीं पब्लिक के दबाव और सरकार को जवाब देन एक लिए ही ऐसा निर्णय लिया गया है…अभी हाल ही में एक इंस्पेक्टर को बर्कष्ट कर दिया गया कारण ऊँका मुज़रिमो से जुड़े होने का अंदेशा था…कमिशनर अब चुप बैठने वाले नहीं”…….चुपचाप रोज़ मुस्कुराकर देवश की तरफ देख रही थी

देवश : ये कमिशनर बहुत बरबोला है सबकुछ पब्लिक ने करवाया है

रोज़ : वैसे ये क्या? मर पाएगा खलनायक को एनकाउंटर तो कर नहीं सकता

देवश : हम अपने लिए शायद खलनायक के हाथों खुद की क़ब्र खुद्वा रहा है..

रोज़ : हुम्हें कुछ करना च्चाईए देवश ये बात तरफ रही है…खलनायक बहुत खतरनाक है आज ऊसने अपने गुंडों को भेजा कल भी निशानेबाज़ का तुमपे हमला होना…कहीं हूँ ये तो नहीं जान गये की तुम ही काला साया

देवश : नहीं रोज़ ऐसा नहीं है…खैर अगर ऐसा होता भी है तो मैं तैयार हूँ मैं उसे खुद इस देश से मिथौँगा…चाहे कुछ भी क्यों ना हो? चलो देर करना ठीक नहीं गश्त लगाना शुरू कर देना चाहिए आज मैं कहलनयक के आदमियों का सफ़ाया हर हाल में करूँगा

रोज़ : शायद वो भी ढूँढ रहे हो

देवश बस मुस्कराया और ऊसने अपने लिबास को पहनते हुए बाइक स्टार्ट कर ली…रोज़ भी बाइक स्टार्ट करके निकल गये….उधर खलनायक कमिशनर के न्यूज को सुन गुस्से से तमतमा उठा….एक के बाद एक दुश्मन बढ़ते जा रहे है…और ऊँपे लगाम कसने की दूर खलनायक ऊँका कुछ कर भी नहीं पा रहा सोचते ही खलनायक का गुस्सा दुगुना हो उठा

हूँ बस मुस्कुराकर कमिशनर के बने तेलएवेरसिओं स्क्रीन पी आ रहे तस्वीर को घूर्र रहा था..और दूसरी तरफ काला साय की मौत का लुत्फ़ उठाने की कोशिश में न्ता….

“पक्की खबर है”…….खबरी ने निशानेबाज़ को बताया…निशानेबाज़ एक बार वन में बैठे सिगार फहूंकते काला लंड की तरफ देखने लगा….”हम गाड़ी स्टार्ट कर और बताए पाते पर ले चल”…….

जल्द ही गुंडे ने गाड़ी स्टार्ट की निशानेबाज़ भी सवार होकर निकल गया पीछे खबरी की लाश पड़ी हुई थी

काला लंड और निशानेबाज़ को पता लग चुका था की खलनायक आखिरी बार कहाँ देखा गया है…लेकिन खबरी ने जो बताया था हूँ सीधे दिव्या के घर का पता था…जिसे आखिरी बार उसके खबरी ने ऊधर ही देखा..जल्द ही गाड़ी सन्नते भारी रात में रुक गयी..और ऊस सड़क के चारों ओर घूर्रते हुए गुंडे बाहर निकल आए..सिगार को भुजाते हुए काला लंड और निशानेबाज़ मौत बनकर देवश केन आए वाले घर की ओर ही आ रहे थे

उधर घर के अंदर देवश की तस्वीर लिए दिव्या अनके मुंडें सो रही थी….इस बात से बेख़बर की एक अनचाहा ख़ौफफनाक मुसीबत दरवाजे पे दस्तक देने वाला हैबिके को तेज रफ्तार से रोज़ और काला साया दोनों दौड़ा रहे थे…काला साया की निगाहों में ना जाने एक अज़ीब सी बेचैनी थी ना ही अपने लिए पर किसी और के लिए…ऊसने फौरन बाइक बीच में रोक दी जब रोज़ ने उसे आवाज़ दी…रोज़ के बाइक के रुकते ही…काला साया भी बाइक को रोकके रोज़ की तरफ गंभीरता से देखने लगा..रोज़ एक लाश के तरफ जा रही थी

बाइक को रोकके…काला साया भी पीछे पीछे रोज़ के आया..तो पाया सड़क के बीचो बीच एक अधमरी लाश पड़ी हुई है…ये कोई और नहीं खलनायक का ही खबरी था जिसे मौत के घाट उतारके निशानेबाज़ और काला लंड निकल गये थे…

रोज़ : ओह में..य गोद इसकी साँसें थोड़ी बहुत मज़ूद है

काला साया : अरे ये तो खलनायक का खबरी लगता है आई आंखें खोल्लो तू..एमेम त..हीक हो

गाल को थपथपाते ही…साँस खींचते हुए बड़ी ही मुश्किल से गोली की जगह को पकड़े खबरी ने अधखुली आंखें खोली तो सामने काला साया को देखा…

काला साया : क्या हुआ तुम्हें? किसने किया ये सब?

खबरी : आ..हे से..हायद भ..अगवांन की लात..पे… हे… एमेम..मैंन आ… उघ (खबरी ने ऐत्ते हुए काला साया के गेरेबेअं को अपने खून भरे हाथों से पकड़ा काला साया ने उसके हथेली पे हाथ रखकर उसे आराम से बताने को कहा)

खबरी : एम्म..मैंन्न आहह सस्स डब्ल्यू..आस के..हलननेकक के गुंडे को आपक.ए ग..हरर का पा..था दी..या हूँ आहह वो लोग आपकी त..आलशह में..आइन आहह निकल्ली हे

काला साया : क्या? किस तरफ गये है वो कौन से घर का पता दे दिया तुमने?? जवाब दो सी’मॉनणन (काला साया के दिल की बेचैनी और बड़ी और ऊसने सख्त इसे खबरी को झिंजोध दिया रोज़ ने मना किया)

खबरी : में..आंफ का..र्ना शायद ज़्..इंदगी में..आइन ईकक पुना का काम कर पौउू आपकी मदद कर सकुउ वॉ लोग कॉलेज स्ट्रीट की तरफ (अभी कुछ और कह पता खबरी ने दम तोड़ दिया उसका हाथ ज़मीन पे गिर पड़ा)

काला साया एकदम से हताश उठ खड़ा हुआ…रोज़ ने उसके कंधे को झिंजोधा “के..या हुआ?”…….काला साया ने रोज़ की तरफ हड़बड़ाकर देखा और फिर एकदम से चिल्लाया “न्नहिी दिव्या घर पे है शितत्त सी’आंटी”…….

रोज़ इससे पहले कुछ समझ पति एक बार लाश बने खबरी को देख वो फिर बाइक पे सवार होकर काला साया के साथ निकल आ गयी

काला साया पूरी रफ्तार से बाइक को नये खरीदे दादी वाले घर की ओर मूंड़ चुका था…वहां तो दिव्या है वो किस हाल में न्होगी..ये सब सोच सोचकर ही काला साया का बदन काँप राह था…जल्द ही वो लोग बांग्ला पहुंचे…वहां पहले से खड़ी खलनायक के जीप को देख…दोनों सटरक होकर दौड़ परे

काला साय ने फुरती से अपने लॉन में छलाँग लगते हुए टूटी खिड़की से आर पार हो गया…”द्डिवव्या दिवव्याअ”……काला साया दौड़ते हुए सीडियो पे चढ़के ऊपर वाले कमरे की ओर भागा..रोज़ जैसे अंदर आई ऊसने हैरानी से काला साय को दिव्या का नाम पुकारते सुना फिर चारों ओर के टूटे चीज़ों को बिखरा पड़ा देख गंभीरता लाया

काला साया अभी कमरे की तरफ पहुंचा ही त…उसके चेहरे पे एक पीपे का वार हुआ और काला साया हड़बड़ाकर दो तीन सीडी से नीचे आ गिरा…रोज़ ने उसे उसी पल उठाया…इतने में सामने से आते काला लंड जिसके गेरफ्त में दिव्या थी और उसके साथ दो गुंडे को देखकर दोनों भौक्ला उठे…दिव्या चिल्ला रही थी

काला साया ने उठके फौरन अपनी नानचाकू निकाली और उसके सामने वाले गुंडे पे एक ही वार कर डाला…गर्दन को पकड़े वो गुंडा देह गया…काला लंड सीधे दिव्या को चोद काला साया से जा टकराया….तब्टलाक़ पीछे से गोली के हमले से बचते हुए रोज़ सोफे के पीछे जा छुपी…और ऊसने भी अपने हत्यारों को निकालके वार करना शुरू किया…”दिवव्याअ इधर आओ”…रोज़ उसके पास जाना चाहती थी पर गोलियों के वजाहो से सोफे से उठ खड़ी नहीं हो पाई

UPDATE-69

दिव्या डर के मारें सहेंटे हुए क्‍ाअल लंड को काला साया से लर्टे देख बुरी तरह सहेमने लगी..काला लंड ने काला साया को कभी दूसरे दीवार पे कभी दूसरी ओर पतकना शुरू कर दिया…काला साया दर्द के मार्िएन खड़ा हो नहीं पा रहा था…काअ लंड ने जैसे ऊसपे पीपे का वार करना चाहा..काला साया ने नानचाकू से बेदर्दी से काला लंड पे प्रहार करना शुरू कर दिया..काला लंड नानचाकू के दर्द से दहढ़ उठता…रोज़ तब्टलाक़ मोर्चा संभा ल्चुकी थी..और ऊसने फुरती से गुंडों पे अपने घातक हमले शुरू कर दिए और गुंडों को गोलियों से ही चली कर दिया

लोग डरे सहमने अपने घर में घुस चुके थे…किसी की हिम्मत नहीं थी जो इन लोगों के मामलों में दखल देते…काला साया को घूर्रते हुए काला लंड ने उसके नानचाकू को अपने हाथों में लेकर फ़ेक दिया..और ऊसपे लैंप का वॉर किया..काला साया बच निकाला…ऊसने इस बार हाथों से हाथ भेड़ने का फैसला किया और काला लंड पे टूट पड़ा…उसके मुँह पे छाती पे कंधे पे टांगों पे लात घुस्सें माअरएन शुरू किए..रोज़ ने भी तब्टलाक़ अंदर घुस रहे सभी गुंडों को अपने करते स्किल से डरहाशी करते हुए फाइरिंग कर करके ऊँका तममम कर डाला था..

इतने में एक तीर सीधे रोज़ के गुण पे लग्के उसे गिरा देता है

रोज़ निशानेबाज़ को बाहर खड़ा पति है और उसके करीब भागती है….निशानेबाज़ ऊसपे तीर का वार शुरू कर देता है..लेकिन गुलाटी और करतब्बाज़ रोज़ पे इसका असर नहीं हो पता वो उसके हर हमले से बच निकलती है…काला लंड और साए एक दूसरे से हाथापाई कर रहे थे….ना ही कोई हार मान रहा था…काला लंड जैसे उसके पास आता…खैच के एक कोब्रा पूंछ उसके मुँह पे पढ़ चुका था ऊसने मुँह से खून उगल डाला और उसका गुस्सा सातनवे आसमान पे चढ़ गया

तब्टलाक़ दिव्या सहेंटे हुए बाहर निकल चुकी थी….लेकिन काला साया को पीटते देख वो रही नहीं पा रही थी उसके करीब आने की नाकामयाब कोशिश कर रही थी…इधर रोज़ खुद निशानेबाज़ से झुझ रही थी…काला लंड ने सख्त इसे काला साय के दोनों हाथ गले पे काश दिए…काला साया साँस घोटने लगा..वो तड़पने लगा…”नहीं छोड्धह दूओ”……दिव्या ने काला लंड के काससे हाथों को अलग करना चाह लेकिन उसे एक धक्का मर के काला लंड ने सोफे पे गिरा डाला

दिव्या ने फौरन एक पास पड़ी बोतल काला लंड के पीछे आकर उसके सर पे मर दी..काला लंड को कुछ असर नहीं पड़ा बस पीछे से रिस रिस के खून बहाने लगा…ऊसने काला साया को वही चोद दिव्या की ओर आँखें घुमाई दिव्याशींटे हुए पीछे होने लगी…काला लंड ने उसे धार दबोचा…काला साया ख़ास्ते हुए अपने बेहोशी हालत से उठने की कोशिश करने लगा

दिव्या के पल्लू को ऊसने खींच के फाड़ डाला और उसके सर को मज़बूती से पकड़े तस्वीर पे दे मारा…दिव्या चीख उठी..और वही दम सांडके गिर पड़ी…अचानक काला लंड की निगाह दिव्या के अधखुली छातियो पे पड़ी…उसके अंदर का शैतान फिर जागने लगा अबतक वो सिर्फ़ काला साय की प्रतीक्षा कर रहा था इसलिए ऊसने अबतक दिव्या को जीवित रखा था..लेकिन अब उससे सवर् नहीं हुआ और वो दिव्या पे टूट पड़ा..दिव्या चिल्ला उठीी “ड्ड..एवूससह बाकच्छाऊओ प्लीज़ मुझहेब अचाऊ देवस्सह”………काला साया का गुस्सा दहेक उठा और ऊसने उठके के बार काला लंड की तरफ देखा और अपने पास रखी स्टूल सीधे उसके सर पे बाजाद दी..स्टूल टूट के बिखर गया और करहाते हुए हुए काला लंड अकड़ते हुए उठ खड़ा हुआ..काला साया ने उसके मुँह पे दो घुस्से मार्िएन और उसके गले को दबोचते हुए गिरा दिया…रोज़ तब्टलाक़ अपनी करते डर मूव्स से निशानेबाज़ के मुँह पे एक लात मारते हुए उसे लुड़का चुकी थी..इओतने में ऊसने पास रखी गमले को उठाया और सीधे निशानेबाज़ के सर पे दे मर दिया निशानेबाज़ वही गिर पड़ा

काला साया ने पास रखी लैंप की तार को खेनचके काल लंड के गले पे बाँध दिया और उसके गले को ज़ोर से खींचा…काला लंड दर्द से तड़पने लगा सांस घुटने लगी….

लेकिन वो बस नाखून से काल साया के काससे हाथों को जख्मी कर रहा था…ऊसने काला लंड को बहुत देर तक वैसे ही गले को तार से काससे रखा…काला लंड बेहोश हो गया…काला साय ने उसे चोद दिया और साँस खेंचते हुए दिव्या को उठाकर उसके गले लग गया

दिव्या रोने लगी….रोज़ जबतक अंदर आई तब्टलाक़ ऊसने देवश को यूँ दिव्या से गले लगा हुआ पाया..अचानक से काला लंड जो अब भी धीरे धीरे उठ रहा था उसे देख रोज़ ने उसके मुँह पे एक लात जमानी चाही पर काला लंड ने उसके पाओ से ही उसे उठाकर दूसरी ओर फैक दिया…रोज़ को घायल होकर दर्द से चिल्ला उठी

काला साया अभी पीछे मुड़ता उसके गर्दन पे वही तार काला लंड ने काश दी थी….काला साया ने फुरती से कोहनी का वार सीधे कालल अंड के नाक पे कर दिया…काला लंड मुँह पकड़े बेदर्दी से काला साया के मास्क को खींच चुका था….और उसी हालत में नाक से बहते खून से लड़खधने लगा..देवश ने अपनी फुरती से लत सीधे काला लंड के अंडकोष पे जमा दी और उसे गुस्से से लॉन के दीवार पे दे फ़ैक्हा…लॉन का दीवार टूट गया…और काला लंड सड़क के दूसरी ओर जा गिरा…घायल काला लंड पे अब भी देवश की निगाह ही थी इतने में निशानेबाज़ कब लरखरके लाहुलुहन देवश के चेहरे को देखकर हक्का बक्का हो गया

“इसका मतलब काला साया कोई और नहीं इंस्पेक्टर देवश है”………ऊसने मुस्कुराकर एक बार देवश की ओर देखा और अपनी तीर का निशाना एक आखिरी बार सांधा…लरखरत हुए…तब्टलाक़ दिव्या ने निशानेबाज़ को निशाने सांधते हुए 10 कदम दूर देख ही लिया था…वो ज़ोर से चिल्लाते हुए काला साया के सामने जा खड़ी हुई “न्न्नाहिी इय्ाआहह”….ऊसने अपने दोनों हाथ हवा में उठा दिए ताकि देवश को कहीं से तीर ना लगे..लेकिन उसके पेंट को चीरती हुई तीर आर पार हो गयी…दिव्या वही तिठके बैठ गई…जब द्वेओश को अहसास हुआ वो चिल्ला उठा “दिववववययाआआ”…..ऊसने एक बार तीर पे काँपते हुए हाथ रखा जो पेंट के आर पार थी और एक बार थपथपति दिव्या की ओर देखा जिसके आंखें बंद हो रही थी

रोज़ तब्टलाक़ बाहर निकल चुकी थी और ऊसने अपनी गोली सीधे निशानेबाज़ के टाँग पे दे मारी…निशानेबाज़ गोली खाके पीछे गिर पड़ा…”दिवव्या दिवव्यया प्लीज़ अनाखहे मत बंद करना दिव्या”……साँस घूंटति दिव्या बस लाहुलुहन मुस्करा रही थी

दिव्या : में..उजहहे नहीं पता त हां कििई आज ये सफफ़ा..र्र आह यहीी ख़टमाम हो जाएगा
देवश : ना…ही दिव्या ना..ही तू..एम्म मुझे मचोड्धह्के नहीं दिव्व..या दिवव्यवाआ
दिव्या : मुझे..माफ़फ कर देना पा..र्र में…ऐंन्न य..ई हां..सीन ला..म्हू को नहीं भुल्ला सकूनगिइइइ तू…मने मेरे दिल में ज..ओ जा..गया गयी आहह द..आह के..आरृंगिइइ की तू …हां..मेस्सा मेरे..ई आर..

अहोगग्गगीए उउगघह उहगगघ (दिव्या और कुछ कह नहीं पाई ऊसने एक बार रोज़ की तरफ अधखुली नजारे से देखा और एक बार देवश के टपकते आँसुयो कीरर्र ओररर)

ऊसने धीरे धीरे काअंपते हाथों से दे..वॉश के आँसुयो को पोंछा…और उसे शुक्र्रीयादा कहक्की थाम गयी..उसके हाथ ज़मीन पे गिर परे…ऊस्की साँसें बंद हो गयी और ऊस्की आंखें वैसे ही खुली की खुली रही गयी…देवश ने रोते हुए उसके हाथ को उठाकर चूमा और उसे अपने सीने से लगा लिया….दिव्या मर चुकी थी

निशानेबाज़ किसी तरह उठके लंगदाते हुए गाड़ी की तरफ दौधा…”वोब हाग रहा है”……रोज़ ने ज़ोर से चीलाया….देवश की आंखों में गुस्सा दहेक उठा…और वॉ चिल्लाके उसके पीछे दौरा “रृक्क्क हरामज़ादे”………देवश ने फौरन निशानेबाज़ का गला दबोच दिया और उसे उठाकर दूसरी ओर ज़मीन पे पटक दिया…और उसके गोली लगे जख्म से गोली को अपने हाथों से ही खींचके निकाल डाला “आआआअहह”……निशानेबाज़ ज़ोर से तड़प उठाा

देवश ने फौरन निशानेबाज़ के बाए ओर फँसे तिरो को उसके छाती और बदन के हर हिस्सों पे बेदर्दी से गुस्सा डाला…निशानेबाज़ चीखता रहा…और रोज़ उसके बेदर्द मौत को देख सकती थी जानती थी अब काला साया नहीं रुकने वाला…आज उसका अपना खोया था और अब उसके दुश्मनों को उसका ये खून का बदला खून से ही चुकाना था…देवश ने दर्द में कार्रहते हुए रोते निशानेबाज़ की ओर देखा और पास रखिी एत उठा ली “य्ाआआआअ”……और ऊसने वॉ एत से निशानेबाज़ के मुँह को टुकुच दिया…रोज़ ने क़ास्सके अपनी आंखें बंद कर ली एत लूड़कते हे दूसरी ओर खून से सनी गिर पड़ी

देवश बस घुर्रटा हुआ निशानेबाज़ के लाश के ऊपर खड़ा था…रोज़ ने मौके को समझा और फौरन देवश को संभाला…पीछे के गाड़ी से काला लंड को गुंडों ने जैसे तैसे उठाया और फरार हो गये…देवश दिव्या के पास आया और ऊस्की लाश को उठा लिया अपनी बाहों में…रोज़ ने फौरन देवश के चेहरे को मास्क से धक्का आस पास के लोग खिड़कियो से दोनों को जाते देख रहे थे जिनके बाहों में एक लाश थी एक मासूम लड़की की लाश जिसका इस घटना से कोई लेना देना नहिता…

पुलिस जल्द ही आ गयी…लोगों से तफ़तीश हुई घर पे कोई नहीं था ना ही देवश और ना ही दिव्या…लोगों ने बताया की खलनायक के गुंडों ने हमला किया और दिव्या को जान से मर दिया..पर देवश ऊन्हें नहीं दिखा सिर्फ़ काला साया और उसके साथी रोज़ दिखी थी दोनों ने ऊस्की लाश को ली और चले गये बाकी के गुंडे भी फरार हो चुके थे….

पुलिस जो देवश का खास था उसे देवश की चिंता सताने लगी और उसे ढूंढ़ना जारी किया उसे लगा शायद देवश खलनायक के केस के खिलाफ लरआई कर रहा था क्या पता? कहीं उसे भी ऊस्की मैड दिव्या के साथ मर तो नहीं दिया…उनकी आंखें तब गंभीर हो उठी जब किनारे ऊन्हें बेदर्दी से निशानेबाज़ की लाश मिली जिसका बेरहें कत्ल हुआ था…इंस्पेक्टर जनता था ये काम काला साया को छोढ़के कोई नहीं कर सकता…ऊसने दो कॉन्स्टेबल बंगले पे तैनात किए और बाकी लाशों के लिए आंब्युलेन्स का बंदोबस किया

दूसरी ओर…आग की लपतो में चीट्टा बनी जलती….दिव्या की लाश जल रही थी…बेहद चुपचाप देवश को जैसे एक सदमा लगा था…रोज़ ने उसके कंधे पे हाथ रखा और उसे अपना दिल मज़बूत करने को कहा…देवश के आंखों में सिर्फ़ दिव्या की वो प्यार भारी बातें घूम रही थी इतना कुछ किया था दिव्या ने उसके लिए…अपनी ही ग़लतियो से जो कोई भी कहे आज अपनी ही ग़लतियो से ऊसने दिव्या को खो डाला…आज अगर वो काला साया ना होता तो दिव्या शायद मज़ूउद होती…लेकिन इस खून भारी जंग में उसे अपनों को तो खोना ही था…देवश की निगाहों में रोज़ की एक ही बात सामने आई….की खलनायक को इसका मुआवज़ा चुकाना है और यह तुम ही कर सकते हो सिर्फ़ तुम काला साया….जलती चीता के लपतो में देवश की आंखें भी अंगार बनकर दहेक उठी…
दरवाजे की दस्तक को सुन…आज फिर दिल में जैसी बेचैनी दौड़ आई…ऊस वक्त मैं किचन में चाय बना रहा था…दराज़ में पड़ी थी रिवाल्वर बस दो कदम दूर छलके निकालने की डायरी..और इधर दरवाजे पे दस्तक बढ़ती ही जा रही है…मैंने फौरन चाय का गॅस ऑफ किया…और धीरे कदमों से दराज़ से अपनी रिवाल्वर निकाल ली…एक यही सेल्फ़-डिफेन्स के लिए मेरे पास था…मैंने फौरन दरवाजे के आध में खड़ा हो गया और दरवाजे की चिटकनी खोल दी

जो शॅक्स अंदर घुसा…उसे देखकर जो हाथ गुण उठाने के लिए खड़े हुए थे वो वापिस झुक गये….”अरे काकी मां आप?”…….सामने मेरी मुस्कुराती अपर्णा काकी खड़ी थी

ऊसने मुझे यूँ सकते में देख कारण जाना…मैंने रिवाल्वर रख दी उनके भी चेहरे पे गंभीर भाव था..लेकिन मुझे ज्यादा बताने की जरूरत नहीं हुई क्योंकि ऊन्होने फौरन मुझे बता दिया की मेरा अभी हाल कैसा चल रहा है कैसे मुसीबतों से झुझा हूँ और पुलिस की नौकरी भी चोद दी..

बातों बातों में मैंने चारों ओर देखकर झट से दरवाजा बंद करके दो कुण्डी लगा दी

अपर्णा – अरे बेटा तू ठीक तो है इतना कुछ हो गया और तूने अपनी मां को फोन भी नहीं किया

देवश : हालत ही कुछ ऐसे थे काकी की फोन करने का मन ना हुआ आप भी तो शीतल की शादियो में व्यस्त थी और मैं खमोखाः आपके इस खुशहाल पल को यूँ

अपर्णा : बस बस बना दिया मुझे तूने पराया बहुत सुन लिया अब तू मेरे साथ मेरे घर में रुकेगा

देवश : नहीं काकी मां समझा करो

अपर्णा : नहीं वही कुछ नहीं चुपचाप चल और अच्छा हुआ पुलिस की नौकरी तूने चोद दी खमोखाः आएदीन के हो रहे अपराध ओह मां तेरे को ज्यादा चोट तो नहीं आई तू ठीक तो है ना इस्सह बच्चा को अकेला चोद दिया था मैंने

देवश : अरे मेरी फ़िकरमंद काकी मां चिंता क्यों करती है? तेरा देवश सही सलामत है तू बस ये बता शीतल की शादी कैसे हुई पहले तो कान पकड़ के माँफी माँगता हूँ की मैं अपनी बहन का कंयाडान ना करा पाया वहां आपके साथ नहीं आया

अपर्णा : ना ना इतना कुछ हो जाने पे कौन इंसान खुशी मना सकता है? खैर तेरी शीतल बहुत खुश है और यहां आई हुई है शादी के बाद रस्म हुई है कुछ दिन मायके में रहने की उसी लिए आज तेरे से मिलने का ऊसने प्रोग्राम भी बना लिया है…

(UPDATE-70)

देवश : अरे तो रामलाल के साथ उसका विवाहित जीवन कैसा चल रहा है पूछा ऊस्से? कहीं कोई

अपर्णा : अरे बेटा हर औरत जब काली से खिलती फूल बनती है ना तो फिर उसे व्यतीत करना ही पढ़ता है हाँ बहुत खुश है शीतल तेरे से मिलने के लिए दोनों छटपटा रहे है आख़िर तू शादी में जो नहीं आया बहटू कफा भी है

देवश : छी छी छी छी और मैंने शीतल को तोहफा भी नहीं दिया कोई बात नहीं मैं अभी बाज़ार से उसके और रामलाल के लिए तोहफा ले आता हूँ और मां अब मुझे मना मत करना कुछ तो देने दे आख़िर मेरी बहन है

अपर्णा : अच्छा बाबा अच्छा किसने रोका है तुझे? खूब करना अपनी बहन को प्यार (अपर्णा काकी ने फिर मेरे बारे में बताया की ऊन्हें आस पड़ोस के मालकिन से पता चला और मेरे नये घर को देखने भी गयी थी वहां पुलिस ने घर को बंद करवा दिया है इसलिए वो चटपटाते हुए सीधे यही चली आई)

कुछ देर बात करने के बाद…अपर्णा काकी ने मेरे लिए खाना बनाया और फिर चली गयी उनके रुकने का दिल तो था पर रामलाल शीतल को यहां छोढ़के अपने क्वार्टर चला गया ये सुनकर मुझे अच्छा ही लगा चलो कम से कम मेरी नयी नवेली शादी शुदा बहाना को देख तो पाऊँगा जी भर के खुशी जैसे उमड़ सी आई थी मेरे आँगन में

फटाफट बाज़ार से दो जोड़ा सारी कीमती वाली खरीद ली…कॉन्स्टेबल धीरज मिल गया ऊसने मुझे घर तक चोद दिया और बोला की अगर कोई भी प्राब्लम लगे सर तो फोन कर दीजिएगा..

मैंने उसे जाने को कहा…फिर आर्डर करके कुछ पकवान मँगवाए शाम करीब करीब 5 बजे तक शीतल अपने पति रामलाल के साथ आ गयी

वाहह उसे सररी में देखकर लंड एकदम बेचैन हो गया ऊस्की सुंदरता भी खिल गयी थी…शीतल मुझे देखकर जान चुकी थी की मेरे साथ हाल ही में क्या कुछ हुआ है वो मेरे से लग्के रोने लगी…मैंने उसे गले लगाया ऊस्की पीठ पे बँधे पेटीकोट के डोरे पे हाथ घुमाया और रामलाल से भी गले मिला…दोनों बहुत खुश थे…मैं क्यों नहीं आया बहुत कफा हुए…फिर ऊन्हें मानने में 2 घंटे लग गये..रामलाल को मेरे लिए बहुत अफ़सोस हुआ साथ एमिन शीतल को भी मैंने कहा फिलहाल तो मैं सिर्फ़ ऊन दोनों की खुशी सुनना चाहता हूँ

शीतल हम मर्दों के बीच हँसी मज़ाक का विषया बन गयी थी…शीतल शर्माके बर्तन ढोने चली गयी….रामलाल को मैंने पूछा की सबकुछ कैसा चल रहा है शीतल खुश तो है ना तुम्हारे साथ?….इतना पूछना था रामलाल ने मेरा हाथ पकड़ लिया “भैया मैं बहुत खुश हूँ सब आपकी वजह से आप नहीं जानते शीतल का यौवन इतना मधुर है की मैं उसके बिना एक सेकेंड भी नहीं रही पाऊँगा ऐसा लगता है नौकरी भी चोद दम आपके कहें मुताबिक मैंने उसे खेत में ले जाकर उसके साथ खूब खुलके बातें की और जैसा अपने बताया था उसे खुश करने को वो भी किया”…..उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया….मैंने ऊस्की खूब मजे लिए

शीतल भी खुश थी ये जान्ँके खुशी हुई पर अब बहाना जी अपने ही भाई से शर्मा रही थी…बीच बीच में टोकती क्या बातें चल रही है मेरे भैया और पति के बीच….कुछ देर में अपर्णा काकी भी आ गयी खूब हँसी मज़ाक का दौड़ चला…फिर पता लगा की शीतल को वो अगले माह लेने आ जाएगा…खुशी तो बहुत हुई लेकिन मेरा मकसद भी इसी वक्त में चल रहा था इसलिए खुलके शीतल से एंजाय करना भी एक सजा…अपर्णा काकी ने बोला की वो रामलाल को छोढ़ने जा रही है….पर शीतल ने मना किया बोली उसे और टाइम स्पेंड करना है मेरे साथ..पर अपर्णा काकी ने बोला भला वो अपनी पति को सी ऑफ करने भी नहीं जाएगी

रामलाल को शक ना हो मैंने ही शीतल को जाने कहा की 1 महीना तो है और हमारे रामलाल का क्या होगा ऊन्हें भी तो प्यार देकर आओ…रामलाल मुस्कराया शीतल भी झेंप सी गयी..फिर अपर्णा काकी रामलाल और शीतल को लेकर निकल गयी…मैंने शीतल को पहले से ही किचन में पकड़कर कान में फुसफुसा दिया की वो जैसे तैसे रात को यहां आ जाए…ये काम शीतल को खुद करना था

उसके जाने के बाद करीब करीब 7 बज गया..पर शीतल नहीं आई..रामलाल तो शायद ट्रेन में बैठ भी चुका होगा….कुछ देर बाद शीतल की आवाज़ आई दस्तक देते हुए दरवाजे पे..मैं तो पहले ही तैयार था..और दरवाजा खोल के उसे अपनी बाहों में कैद कर लिया..शीतल एकदम शर्मा गयी “क्या भैया आप तो अपनी शादी शुदा बहन को शादी के भी नहीं चोद रहे”…..

मेरे बालों से कहलते हुए…”क्या करे? बहाना हो ही तुम ऐसी चल आ बैठ तेरे से अब खुलके बात करूं”……..मैंने शीतल को बिस्तर पे बिठाया और अच्छी तरह से चारों घर का दौरा किया….मुझे पता है मजे में खलल तो पहुंचने वाला शैतान हमेशा होता है…फिर कमरे में आकर दरवाजा खिड़की सब बंद कर दिया…रोज़ का फोन आया और उसने बताया की वो दौरे पे है मैंने उसे झूठ कह दिया की मेरे घर पे अपर्णा काकी आए हुए है…रोज़ ने आपत्ति की उसे लगा शायद इस वक्त जाना ठीक नहीं…मैंने उसे सावधान रहने को बोलकर फोन कट कर दिया

तब्टलाक़ शीतल हाथों के बाल बिस्तर पे बैठी मुझे प्यार भारी अदायो से देख रही थी…”और भैया श मां इस्श इतना चोट कैसा लगा आपको?”……मैंने अपनी बनियान जैसे उतारी मेरे पीठ पे लगे चोट और पट्टी को देख ऊसने सवाल करा..उसे बताने के बाद उसके आंखों में भी आँसू आए पर वो खुश थी की मैं सुरक्षित हूँ…मैंने उससे अपना बताने के लिए पूछा

शीतल : मां तो चोद ही नहीं रही थी…मैंने बोला की भैया बुला रहे है आज वो मुझसे काफी प्यार करना चाहते है

देवश : अच्छा तू अब मुझे सुलही पे चढ़ाएगी अगर मां को पता चल गया तो

शीतल : अरे भैया शीतल ऐसी चीज़ है जो किसी को भनक ना लगने दे खैर भैया आपको पता है रामलाल ने मेरे साथ क्या किया?

देवश : क्या किया? (सुनाने को तो मैं भी बेचैन था ओसोसके मुँह से हालकनी मेरे सारे तरक़ीब जो रामलाल ने इस्तेमाल किए और मुझे बताए वही वो भी बता रही थी)

शीतल को वो खेत ले गया…और वहां ऊसने ऊस्की चुत चानति…और उसे मजा दिया…ऊसने शीतल को भी अपना लंड चुस्वाया…पहले तो ऊसने साफ इनकार किया…लेकिन शीतल के मनपसंद रसगुल्ले दिखाने पे शीतल शर्मा गयी…शीतल ने भी रामलाल का लंड छूसा और फिर उसका दिया हुआ रसगुल्ला खाया..रामलाल ने शीतल को काफ टाइम देना शुरू किया…और उसे गंदी गंदी पिक्चर दिखाने ले जाने लगा…उसका कहना था की मेरे से भी ज्यादा रामलाल ठरकी है…शीतल को वो बहुत देर तक मजा देता है..और अब शीतल भी शादी के बाद बहुत चुदासी हो गयी है..अभी तक दोनों में से किसी ने बच्चा लेने की सोची नहीं है…देवश ने शीतल को बधाई दी

देवश : हम ये बहुत अच्छा हुआ चल तू खुश तो है ना
शीतल : हाँ लेकिन शायद मेरे बिना आप खुश नहीं भैया
देवश : तो खुश कर दे (मेरे हाथ ने तुरंत शीतल के पल्लू को गिरा डाला)

शीतल बेशरम सी हो गयी थी वो खुद उठके अपने ब्लाउज के स्तनों मेरे सामने खड़ी होकर खोलने लगी…फिर ऊसने अपनी पेटीकोट के नारे को भी खुद ही खोल डाला…”मैं तो रामलाल के सामने ऐसे ही पेश होती हूँ रोज़ रात लेकिन लगता है आज भैया मुझे नहीं छोढ़ने वाले”….शीतल ने होठों के बीच उंगली रख आँख मारी..और अपने पेटीकोट को खोल के उतार दिया ऊसने एक छोटी सी फ़िटे वाली पैंटी पहनी थी….

जो बिकिनी ज़्ीडा लग रही थी…ये भी रामलाल की चाय्स थी

शीतल ने वो कक़ची भी उतार डाली अब उसके भारी भरकम मांसल जांघों के बीच एक अच्छा ख़ासा झाँत उगा हुआ था..और ऊस्की नीचे से चुत भी ऊस्की गहरी काली खाई में खो सी गयी थी ऊसने पलटके अपने भारी नितंबों का भी दीदार कराया..अपने नितंबों को उचकके घोधी बनकर मुझे अपनी गान्ड की फहांक दिखाई उसके भी इर्द गिर्द थोड़े बाल उगे हुए थे बस गोल गहरा छेद दिखाई दे रहा था

मैं संभाल ना पाया..और अपनी बहन के ब्लाउज को धीरे से हटाया…बहन के छाती पेटीकोट से बाहर निकल आए…उसके मोटे निपल्स को मुँह में लेकर चूसे बगैर मैं रुक ना पाया..और बड़ी बड़ी से दोनों चुचियों को मुँह में भर लिया “हाँ भैया ऐसे ही चूसो ना हमारी आहह”……शीतल ने मुझे अपनी छाती से चिपका लिया..और मैं ऊस्की छातियो को ज़ोर से दबाने लगा शीतल और मेरे होंठ एक दूसरे से भीढ़ गये जुबान लार्न लगे होंठ गीले थूक से तरबतर हो गयी…शीतल की छातिया को मैं हाथों से मसलते हुए उसके होठों का जोरदार चुम्मा ले रहा था…शीतल की आंखें मंडी हुई थी

फिर शीतल को लाइटाया और ऊस्की टाँगें फैला दी…मैं उसे बिस्तर पे लैटाके घुटनों के बाल फर्श पे कुत्ता बनकर बैठ गया और ऊस्की मधक मनमोहक खुश्बुदार चुत पे जुबान फहरने लगा…ऊस्की झांतों भारी चुत को चूसने में जो मजा आया वो लाजवाब था…मेरी आग भधकी हुई थी वैसे इतने दीनों बाद आज ही इतने महीनों बाद बहन पे न्योछावर कर रहा था….ऊस्की चुत में मुँह लगा लग्के उसके अंगूर जैसे दाने को चूसा और ऊस्की गुलाबी फहाँको में जितना हो सका उतना जीभ रगड़ा घुसाया चाटना..छूसा सबकुछ किया

शीतल इस बीच मेरे बालों को सहलाने लगी…जब ऊस्की चुत मेरे लंबो से अलग हुई तो वो रस से तरबतर थी..”आहह भैया आहह ज़ोर से बारे ज़ोर से सस्स आहह हाइईइ दैया मैं गाइिईई”……शीतल का शरीर ज़ोर से अकड़ा और वो झधने लगी…उसका बरसता पानी मेरे चेहरे पे पढ़ने लगा…वो ठप ठप्प की आवाज़ अपने चुत पे मारते हाथों से निकालने लगी फिर अपनी ही चुत में उंगली की…ऊस्की चुत बेहद गहरी हो गयी थी चुदाई करते करते

मैंने उसे उठाया और पाओ तक सर को झुका दिया…अब ऊस्की गुकछेदार बालों के बीच के छेद पे मैं अपना लंड रगड़ने लगा..ऊसने बोला वो चूसना चाहती है लेकिन मुझे चुदाई की जल्दी थी…मैंने उसके गान्ड के छेद पे थूक खाकरते हुए फैका और उसे अंगुल से खोलना चाहा…फिर लंड को छेद पे दबा दिया..शीतल काँप गयी और मेरा लंड भी बारे ही सटाक से अंदर प्रवेश कर गया…गान्ड काफी पहले से सख्त थी…”ऊन्हें गीन आती हे भैया आहह इसलिए गान्ड नहीं मारते”……शीतल ने झुके झुएक ही मेरे लंड को गान्ड में महसूस करते हुए करहते हुए कहा

मैंने उसके गान्ड में फकच से लंड घुसाय और निकाला..और फिर बहुत आहिस्ता धक्का मारने लगा….

शीतल पाओ पे हाथ रखकर खड़े खड़े झुककर चुद रही थी ऊस्की दबी आवाज़ सिसकियों के साथ साथ दर्द भी निकल रही थी…मैं उसे खूब काश क़ास्सके धक्के पेल रहा था..तप्प ठप्प फिर फ़च फ़च्छ…जैसे ही एक बार लंड अंदर धीमें सरकता फिर ऊस्की पेंट पे हाथ क़ास्सके 2-3 धक्के मारता करार करार…शीतल की तो जैसे जान निकल रही थी वॉ भी आहह आ आहह करके चुदवाती रही फिर मैंने लंड ऊस्की गान्ड के छेद से बाहर खींचा…और फिर शीतल को बिता ही दिया

UPDATE-71

अब उसके मुँह में मेरा लंड था अपने गान्ड की आंद्रूणई महक और मेरे लंड के निकलते रस की मिली जुली खुशबू उसके मुँह में थी..जिसे सूँघके वो बदहवासी सी हो गयी थी बॅस उम्म्म्म एम्म करते हुए चुस्सें जा रही थी….फिर ऊसने मेरे अंडकोषो को भी मुँह में भरके चुस्सा…और फिर लंड को मुट्ठी में लेकर उसे तैयार करने लगी…ऐसा लगा जिसे अब तो मैं झड़ ही जाऊंगा

उसे मैंने अपने ऊपर सवार किया और गान्ड से उठाया…अब उसके चुत में लंड को टिकाया और ऊसने खुद ही लंड पे चुत को एडजस्ट करके खुद को बिठाया..अब वो मेरी गोदी में थी और मैं नीचे से उसे चोद रहा था….शीतल करारी कराई धक्को की सिसकियां निकाल रही थी…ऊसने चेहरा ऊपर कर लिया था मानो जैसे इस सुकध अहसास को वो झेल नहीं पाएगी ऊस्की चुत रस छोढ़ने लगी…जो मेरे पाओ और तंग से टपक रहा था..चुत बेतरती से गीला था…और मेरा लंड आसानी से अंदर बाहर प्रवेश हो रहा था हम दोनों की साँसें टकराई एक दूसरे को पागलों की तरह चुमन्ना शुरू किया होंठ चूसे जुबान से जबान लगाए एक दूसरे के मुँह में थूक उगला और मैं भी अकड़ते हुए उसी की चुत में झड़ गया उसे मैं लगभग पकड़ा ही रहा गान्ड पे एक हाथ एक हाथ उसके कमर पे क़ास्सके रखे ही रहा..जब मैं स्थिर हो गया तब हांफते हुए हम दोनों बिस्तर पे देह गये

वो मुझसे लिपट गयी..और मेरे लंड की निकलती बूँदो को निचोढ़ने लगी….करीब 9 बजे तक मैंने उसके साथ मनचाहा प्यार किया…इन घंटों के बीच उसे फिर 3-4 बार चोद दिया…मेरी हालत बहुत ताकि हुई सी हो गयी…ऊसने नंगे ही उठके मेरे लिए खाना बनाया और फिर गुसोल करने चली गयी….अचानक घंटी की आवाज़ सुनाई दी मैं सकपकके पास रखी पिस्तौल को हाथों में ले लिया…ऊस वक्त शीतल नहा रही थी…उसे पता नहीं लगा…मैं खुद ही पजामा पहनकर झट से दरवाजा खोला सामने अपर्णा काकी थी वो मुझे मुस्कुराकर देख रही थी वो शीतल को लेने आई थी “अब हो गयी बहन-भाई के बीच बातें अब चल भी शीतल कितना टाइम लगाएँगी भाई को भी आराम करने दे”…..सच ही कहा था ऊन्होने आराम ही तो करना था मुझे मैं भी मुस्कराया

अपर्णा काकी शीतल के तैयार होते तक ठहरी फिर ऊसने पूछा की शीतल अभी नहाई क्यों?…शीतल सकपका गयी पर्म आने बताया की उसे गर्मी लग रही थी और उसे जो सारी दी शायद उसका काप्रा मोटा है….

अपर्णा काकी बस हस्सने लगी ऊन्हें शक ना हुआ…शीतल को लेकर दोनों को विदा करके मैं बिस्तर पे पष्ट हो गया…एक बार सोचा क्यों ना रोज़ को फोन करके हाल चाल पूछ लू? पर उसका फोन नहीं आ रहा था

मैं तैयार होकर आज पहली बार गश्त लगाने बाहर निकाला….काला साया बनकर जब अपने ख़ुफ़िया घर के भीतर बने अनॅलिसिस ऑफिस आया तो वहां भी रोज़ नहीं थी…शायद वो अब भी बाहर हो पूरी रास्ते गश्त लगाकर मैं वापिस घर आया..पर रोज़ कही न्ना मिली..मुझे लगा शायद वो अपने घर चली गयी हो उसका घर तो देखा हुआ नहीं था ना ही कभी पूछा अचानक दरवाजे के नीचे बाहर एक लिफाफा पड़ा हुआ था

मैंने उसे उठाया और ऊसमें एक सीडी देखी…उसे फौरन घर में घुस्सके डिस्क प्लेयर पे लगाया…वीडियो के ऑन होते ही जो देखा उससे मेरी साँसें अटक गयी…सामने मेरा चेहरा था और निशानेबाज़ की लाश के ऊपर मैं खड़ा…ये तो क्सिी वीडियो का क्लिप है उसके बाद एक भयंकर चेहरा चेहरा नहीं मुखहोटा..खलनायक का

खलनायक : इंस्पेक्टर देवश ना ना काला साया क्यों भैसाहेब? तो आप ड्युयल रोल में काम कर रहेः आई और हम सोच रहे है हमारे दुश्मन दो हाहाहा (तहकाल अगाते हुए ऊसने सिगरेट का धुंआ फहुंका) खैर जो भी हो तुम्हारी पार्ट्नर मेरा पहला प्यार यूँ बोले तो तेरा मेरा प्यार पीछे है मेरे

खलनायक के हटते ही स्क्रीन पे रोज़ एक चेयर पे बँधी बेहोश थी…खलनायक ने उसके गर्दन पे अपने होंठ रगड़ें..मेरा पारा चढ़ रहा था “हां हां हां ये चुंबन तो मैं इसे जिंदगी भर दूँगा काला साया क्योंकि ये मेरी है..लेकिन तेरा क्या? तूने जो शांटराज की बाज़ी आंखों में धूल झूँकके सबको उल्लू बनाया और क्‍ाअल साया बना रहा वो तू मुझपर नहीं कर सकता डर मत क्सिी को नहीं बताऊंगा जैसे मुझे तू नहीं जनता किस इस मुखहोते के पीछे कौन है? सिर्फ़ एक ही बात कहूँगा वीडियो के और होते ही एक अड्रेस शो होगा उसे पढ़ लेना और बताए जगह पे आ जाना क्योंकि जो तू चाहता है वो मैं भी चाहता हूँ रोज़ को पाना है और मुझे रोकना है तो आजा”………खलनायक का ओपन चॅलेंज सुनकर मैं चुपचाप बस उसे घूर्रता रहा

उसके बाद वीडियो ऑफ हो गया एक काले स्क्रीन पे लाल लाल फ़ॉन्ट पे अड्रेस शो हुआ…मैंने ऊस अड्रेस को पढ़ा और फौरन उसी पल दिमाग सकते में हो गया “अफ रोज़ काश तुम्हें मैंने अकेला नहीं छोडा होता..दिव्या के खोने के बाद मुझे अब रोज़ को खोने का डर सटा रहा था रोज़ उनके क़ब्ज़े में है और मुझे इस शायर की मांड में अकेले ही घुसना होगा”…….

मैं चुपचाप बस अपनी काला साया के दिमाग से प्लान का जाल बुनने लगा

वीडियो की सीडी बाहर निकालके उसे मैंने फिर दराज़ के अंदर फ़ेक दिया…दिल इतना ज़ोर से गंभीर था की काअं और दिमाग सब सुन्न सा पार गया था…करूं तो करूं क्या? आज पहली बार काला साया को कोई ऐसा टक्कर का दुश्मन मिला था…मैंने फौरन दराज़ से अपनी रिवाल्वर निकाली और उसे पॉकेट में रख लिया

दूसरे ही पल मैं जीप पे सवार होकर रफ्तार से जीप को रास्ते पे दौड़ा दिया…पूरी तेज रफ्तार में बस मुझे अपनी नजारे के सामने रोज़ के जिस्म पे खलनायक हाथ फेराया दिख रहा था…ना जाने वो उसके साथ कैसे कैसे शरामणाक हरकत कर रहा होगा…रोज़ का प्यार मेरे लिए इतना ख्याल रखना…और ऊसपे हुए खलनायक के सितम सब दिमाग में जैसे घूमें लगा…दूसरी ओर दिव्या जो मुझे छोढ़के चली गयी उसका खून से लथपथ चेहरा मेरे सामने था ऊस्की लाश जिसे मैंने गोद में रखा था सबकुछ महसूस कर सकता था मैं

जल्द ही अपने इल्लीगल गुण के व्यापारी से मिला ऊसने मुझे एक सिल्वर कलर की हॅंड्ग्यून दी और फिर ऊस्की कुछ बातें बताई मैंने उससे एक-47 की दो बंदूक ले ली और साथ में बहुत से बुलेट्स..आजतक उसके व्यापार को मैंने कंट्रोल कर रखा था इसलिए ऊस्की मेरे सामने कुछ भी नहीं चलती थी….मैं वापिस गाड़ी पे सवार हुआ बताए जगह पे पहुंचने से पहले ही गाड़ी रोक दी

मैंने अपने एक-47 को दोनों हाथों में ले लिया और धीरे धीरे दुश्मन के बसे पे पहुंचा…इलाका सुनसान था या फिर वजह कुछ और थी…मुझे मारने का पूरा इंतजाम किया था खलनायक ने शायद वो मेरी प्रेज़ेन्स को बखूबी जनता था..लेकिन आज मेरे दिल में डर कम और गुस्सा ज्यादा उबाल रहा था…मेरे साथ कोई नहीं था अंदर रोज़ बेबस पड़ी होगी

UPDATE-72

यही सोचकर मैं गाड़ी पे सवार हो गया और सीधे गाड़ी को फुरती बढ़ता से पोर्ट के वेरहाउस के करीब ले आया…अचानक से मुझपर तढ़ तढ़ करके गोलियां स्टार्ट हो गयी अब इतनी रात गये क्सि किस जगह से वो लोग चुत कर रहे थे पता नहीं लेकिन जब सामने के गुंडों को देख पाया तो ऊन्हें अपनी गाड़ी से ही राउंड डाला…मैं गाड़ी में ही छुपा रहा और गाड़ी को ड्रिफ्ट करते हुए रोक दिया..मैंने ऊपर की डीक्की का दरवाजा खोला और अपनी फ्री हेंड बाइनाक्युलर को क्लोज़ करके नाइट विषन मोड ऑन किया..टांक पे वेरहाउस के ऊपर जहां जहां वो छुपे थे वही पे फाइरिंग स्टार्ट कर दी कुछ तो बच गये और कुछ भाग खड़े हुए

ऊन्होने ने भी मुझपर तबतोध गोलियां चलानी शुरू कर दी….मैं गाड़ी से निकलकर पूरी लूड़करते हुए गिरते पारट वेरहाउस में जा घुसा…गुण की गोलियां चलनी फिर शुरू….

इस बार मैं रहें नहीं करने वाला था सीधे बीच में ही चलने लगा और जो भी सामने आया ताबड़टोध गोलियां बरसानी शुउ कर दी…सीडियो पे चढ़ते हुए खड़े गुंडों को मारते हुए उनकी लाशों से चलते हुए और मैं ऊपर आया…फिर दूसरी ओर से आ रहे गुंडे पे फौरन एक-47 की गोलियों की बौछार कर दी….जो इधर छुपे थे सब मुझपर हमला करके अपनी गुण को रिलोड कर देते लेकिन आज मेरे सामने कोई टिकने नहीं वाला था…एका एक मैं बसे में मेरे सामने आते सभी पे गोलियां डाँगते जा रहा था एक गुण खत्म होती तो दूसरी एक-47 तैयार मैं जानभुज के गोली ऐसी जगहों में मारता की वो बेवकूफ़ गुंडे सामने आ खड़े होते….और ऐसा करते करते मैं अब वेरहाउस के दूसरी मंजिल पे पहुंच गया

अचानक फिर गोली स्टार्ट हो गौ इस बार मेरे बुलेट प्रूफ जॅकेट्स पे तीन चार लग भी गयी…मैं लुढ़क्के एक ओर हो गया और फिर अपनी गुण को रिलोड किया…और अपने हेंड ग्रीनेड का शेल कीचते हुए सीधे पास खड़े आ रहे गुंडों के तरफ लूड़कके फिख् डाला…बद्धाम्म एक जोरदार धमक हुआ और लोहे के जीने पे खड़े सबके वही दरशाही हो गये सिर्फ़ चारों ओर धुंआ चुट्त गया…मैं धुए से निकलकर पांचों गुंडे पे हावी हो गया और अपनी एक-47 ऊँपे दंग दी

“भाई ऊसने हमारे सारे गुंडों को अकेले ही खत्म कर दिया”……एक आदमी भौक्लते हुए बोला….खलनायक जो सोई रोज़ के ज़ुल्फो से खेल रहा था उठके मुस्कराया “आने दे आने दे थोड़ी हवा आने दे वैसे भी रोमीयो को कभी जूलिएट नसीब ही नहीं हुई”……..तहाका लगते हुए मुस्कराया खलनायक

मैं ओसोक्ी चाल में यक़ीनन फ़सस्ता जा रहा था मेरा समय और एनर्जी दोनों खर्चो हो रही थी….लेकिन एक के बाद एक गुंडे मेरा रास्ता रोके हुए खड़े थे…अब यहां मुझे फुरती से काम लेना था….फौरन गुण को रिलोड किया और एक ओर गोली मारी…सारेई न्गुंदे उसी ओर गोली चलाने लगे कुछ मेरे नज़दीक आए….मेरा नानचाकू उनकी प्रतीक्षा कर रहा था जैसे ही आए सटास से उसके गले पे चैन घूमता हुआ दबा दिया और दूसरे के माथे पे इतनी ज़ोर का प्रहार किया की वो वही देह गया…मैंने सोच लिया था की किसी गुप्त जगह पे ही खलनायक छुपा पड़ा हुआ है…और मुझे भी उसी लाइन में जाना है….फौरन पास के चिम्नी को देखते हुए मुझे कुछ कुछ आइडिया आया और मैं गुप्तिए चिम्नी में घुस्सता चला गया चिम्नी ना कहक के मैं उसे गुप्त रास्ता काहु तो ज्यादा बेहतर होगा

मैं धीरे धीरे चारों तरफ घुमके बड़ी ही कठिनाई से बीच बीच के जलियो में देखते हुए जा रहा था ऑफिस बंद परे मशीन के ऊपर के चिम्नी से मैं होते हुए सीधे सर्क्यूट वाइर्स जो अब बंद हो चुके थे उसके पास आया और जल्दी से ना जाने क्यों ऊन सिरकूत्स को चाकू से कांट दिया…खलनायक के कमरे की और शायद बाकी जगहों की लाइट्स कट हो गयी….

मैंने फौरन एक जाली पे एक लात मर के ऊस्की फाटक को खोल के फैक दिया और सीधे नीचे धाधाम से गिर पड़ा

चोट तो आई पर मुझे अब अपना हत्यार संभालना था…”भाई वो मिल नहीं रहा शितत”…….गुंडे अंधेरे में ही खड़े डाल बनकर मुझे ही ढूँढ रहे थे….”मदारचोढ़ो उसे जल्दी ढुंढ़ो वरना एक एक की टाँग!”…धाधम्म्म…अचानक से खलनायक का दरवाजा टूट पड़ा…और मुझे सामने एमेग्ेर्नेसी लाइट में कहरा खलनाया और साथ में एक ओर बैठी रोज़ दिखी

उसके गुंडे मुझपर तबतोध गोली चलाने ही वाले थे मैंने ऊन्हें अपने गुण से ही चुत कर दिया…खलनायक बचते हुए मेरी ओर गोली चलता है जो मेरे बाज़ू को छू के निकल जाती है पर मैं हौसला बनाए रखता हूँ और ऊन गुंडों को गोली से आख़िरकार चुत कर देता हूँ…अब सामने लाशें और खलनायक और एक जगह रोज़ ही थी…बाकी गुंडे मुझे ढूँढते हुए गोली की आवाज़ सुनकर खलनायक के कमरे की ओर आ रहे थे मैंने लोहे के दरवाजा को ऐसा बंद किया अब उसके खुलने के तो चान्सस नहीं थे वो बस धक्के देकर गोलियां बरसा रहे थे जो कोई काम नहीं कर पा रहा था

खलनायक : वाहह रे वाहह आख़िरकार अपनी महबूबा को बचाने के लिए तू इतने जल्दी यहां भी आ गया मेरे गुंडों को भी मर गिराया वाहह
काला साया : आबे ओह सनकी इंसान तेरा अब पाँसा फैक्ना बंद अब तंशा देखेगा तू अपनी ही मौत का
खलनायक : भैया जी बहुत आए बहुत लोग मारें गये पर मुझ तक पहुंच नहीं पाए या यूँ कह लो मेरे इंस्पेक्टर भाई देवश

मेरा माता टांका य..ईयीई के..या बॅया..क्वास्स है? “तेरा भी मेरा ना कोई सगा है ना कोई अपना सब मर चुके”…..मैंने जाने की उक्सूता जाहिर की शायद उसे मेरे बारे में पता चल गया हो पर वो भी अपनी आइडेंटिटी रिवील कर दे….मैंने ऊस्की ओर तिठकते हुए ड्कहा गुण तो उसी की ओर पॉइंट करके था..लेकिन ऊसने एक छोटा पिस्तौल रोज़ के माथे पे लगा दिया उसके होश में आते ही वो भी हड़बड़ा गयी मुझे यूँ इस हालत में देखकर भौक्लाई पर खलनायक ने उसे चुप रहने को बोला…”खैर तू अपना ये मुखहोटा उतार फ़ेक मैं वादा करता हूँ की तेरे साथ सही तरीके से पेशौँगा”…….मैंने मुस्कराए ना में इशारा किया…”तू जो करना चाहता है कर ले पर रोज़ को जाने दे”……..मैंने गुस्से में तमतमाता

खलनायक : ओह हो मैं तो भूल गया बड़ा प्यार है तुझे इस पे खैरर तुझे सब समझता हूँ मैं (खलनायक ने अपने मुखहोते पे हाथ रखा मेरा बदन काँपने लगा अब ओसोका चेहरा मेरे सामने होने वाला था वो आख़िर मुझे इतना कैसे जनता है? लेकिन वो मुस्कराया और ऊस्की मुस्कुराहट जबतक समझ में आती)

एक पीपे का डंडा मेरे सर पे लग चुका था…पीछे काला लंड खड़ा था….मुझे घूर्र रहा था रोज़ ज़ोर से चीखी…”देवश सेफ उर्सेलफ”…..

एक और डंडा मेरे मुँह पे लग गया और मैं ऐसा घास्शह खाके दूसरी ओर जा गिरा की मुझे उठने की हिम्मत नहीं हो पा रही थी…काला लंड बेसवरी से अपने ऊपर हुए ज़ख़्मो का बदला मुझसे लेने वाला था…”य्ाआअ”…..मैंने उठके उसके पेंट और छातियो पे घुसों की बरसात कर दी…लेकिन ऊसपे कोई फरक़ नहीं पड़ा और ऊसने मुझे उठाकर दूसरी ओर फ़ेक डाला…शीशे से टकराके मैं दोबारा ज़मीन पे आ गिरा

“क्यों काला साया? बहुत बारे स्पाइडरमॅन हो ना सूपरमन हो? करो करो लररू”…काला लंड ने मेरी गर्दन उठाई और खलनायक के हँसी मेरे कानों में गुज़नते रही…काला लंड ने मुझे उठाया और बाहर हग किया ऊसने इतना क़ास्सके मुझे जकड़ लिया की मेरे हड्डिया जैसे चटकने को हो गौ …आहह मैं दर्द से बिलबिला उठा…मैंने उसके दोनों गर्दन पे करते का एक चॉप वार किया वो अपनी ए सर को पकड़कर बैठ गया और ऊसने मुझे एक लात मारी

मैं सीधे दीवार से टकराया…मैं भी उठ रहा था और वो संभाल चुका था वो मेरे करीब आया और ऊसने मेरे मुँह को दोनों हाथों से पकड़ा और बेदर्दी से दीवार पे दो बार दे मारा…और फिर उठाकर एक पटकी और लगाई…मैं उठने की हिम्मत नहीं थी…मैंने अपने घुटने मोड़ के उसके मुँह पे दे मारा..उसके नाक से खून बहाने लगा वो ऊपर उठा और ऊसने मुझे उठाकर फिर एक घुसा मर दिया…मैं लरखरके उसे लार्न की नाकाम कोशिशें कर रहा था

लेकिन ऊसने मुझे फिर धक्का देकर गिरा दिया…उसके हाथ में मेरा टूटा मास्क था…ऊसने उसे फैका और मेरी ओर आया मैं घायल लरखरते हुए उठके उसके दोनों टांगों पे गोली चला दी…वो पहले तो घायल हुआ लेकिन ऊसने उठके फिर मेरे ऊपर हावी होना चाहा…ऊसने इस बार मेरी गर्दन दबोची और मुझे टीयूब लाइट पे मेरा गर्दन सहित सर घुसा दिया….तुबलेईघत के सर पे टूटते ही जैसे सर सुन्न सा पारह गया और मैं एक लाश बनकर फर्श पे मुँह के बाल गिर पड़ा

UPDATE-73

रोज़ रोए जा रही थी उसके हाथों में नहीं था वरना जान से मर देती काला लंड को…काला लंड बस मुस्कुराकर मेरी ओर देखे जा रहा था….मैं अब उठने वाला नहीं था…अचानक काला लंड पे थूकती रोज़ को देख उसका पड़ा चढ़ गया लेकिन वो उसके करीब आता खलनायक ने उसे गुस्से भारी निगाहों से देखा…काला लंड ने गुस्से में तमतमते हुए खलनायक को ही एक गुस्सा झाड़ दिया खलनायक गिर पड़ा..रोज़ संभाल गयी..काला लंड रोज़ के नज़दीक आया और उसके होंठ पे अपने नाखुंब चुभने लगा रोज़ दर्द से बिलख उठी

इतने में खलनायक ने टीयूब लाइट सीधे काला लंड के पीठ पे दे मारी…लेकिन ओसोे कोई असर ना हुआ और ऊसने खलनायक की गर्दन दबोच ली….”आ…हह सस्सस्स के.आमीने मेरा..खाखी”……खलनायक को अब सख्त गुस्सा चढ़ गया और ऊसने अपने पास रखी चाबी ओसॉके हाथों में दे घुसाई

कालल अंड दर्द से गिर पड़ा…खलनायक ने जैसे गुण पकरी ही थी..

काला लंड ने उसके गर्दन को दबोचा और उसके सर सहित शीशे के आएनए में दे फैका..खलनायक का पूरा गर्दन शीशे से टकराके आर पार हो गया और खलनायक काँपते हुए गिर पड़ा….काला लंड ने कुर्सी सहित रोज़ को गिरा दिया और ऊस्की राससियो को नोंच नॉचके फ़ेक दिया रोज़ चिल्लाने लगी पर काला लंड बेरेहम था..ऊसने उसके गर्दन को पकड़ा और उसके होन्ो को अपने दाँतों से कांट लिया..रोज़ चिल्लाई ऊस्की आवाज़ सुन्न मेरे आंखें खुल चुकी थी

रोज़ के साथ वो बहुत ही बुरी तरीके से बलात्कारके करने की कोशिशें कर रहा था..ऊसने उसका अभी जीन्स नीचे खिसका ही दिया था..तभी मैं उठ खड़ा हुआ…कालल अंड को जब ये बात महसूस हुई तो वो उठके मेरी ओर देखता है और मुस्कुराकर मुझसे भीढने के लिए आगे आता है…मैं अपना मशेटी निकाल चुका था तब्टलाक़

काला लंड मुझसे टकराता है हालाँकि इस बार मैं हार मानने वाला नहीं था…और उससे भीढ़ जाता हूँ…मैं उसके हाथ पे ही मशेटी चला देता हूँ…और ऊस्की दो उंगलियां कांतके गिर जाती है…मैं ऊस्की गर्दन दबोच लेता हूँ उसे मारना आसान तो नहीं था…लेकिन मुझे भी उससे लार्न की पूरी कोशिश आज कारण इति सबकुछ दाव पे लगा था….मैंने उसके कमज़ोरी उसके सर को पाया जिसे वो बच्चा रहा था और ऊसपे करते का वार शुरू किया…काला लंड अब पष्ट परने लगा लेकिन वो मुझपर हावी होना बंद नहीं कर पा रहा था

कभी इस ओर कभी ऊस ओर की चीओंज़ों पे मुझे पटक देता और मैं भी पूरी कोशिश में ऊसपे वार करके उसे उठाकर किसी तरह पटक देता…हाथाआपाई के दौरान ही मैंने अपने मशेटी से उसके सर के मास्क को चियर दिया और ऊसपे चढ़ गया जैसे ही उसके मास्क को दो भाग में चियर डाला वो एक दम दहधते हुए एक ओर गिरके छटपटाने लगा रेस्लर लोगों की एक कमज़ोरी होती है की वो अपने चेहरे को हमेशा छिपाते है ताकि ऊँका साल चेहरा दुनिया के सामने ना आ सके…गुण चलना बेवकूफी ही थी

मैंने उसके सर को पकड़ लिया और जिस तरह ऊसने रोज़ दिव्या और बाकी मौसम औरत को मारा था ठीक उसी तरह उसके सर को क़ास्सके पकड़ लिया वो लगभग छुड़ाने की तो कोशिश करने लगा पर बच ना पाया..और मैंने ऊस्की गर्दन को माड़ोध के तोड़ दया…वो ज़ोर से दहधा और वही मर के लाश बन गया रोज़ रोते हुए मेरे गले लग गयी…खलनायक तब्टलाक़ अपने आधे अधूरे फटे मास्क से मेरी ओर देख रहा था रोज़ मेरे पीछे हो गयी…उसके हाथ में बंदूक थी…वो लरखरा रहा था

“अब बचने का फायदा नहीं चुपचाप हार मान जा”…….मैंने गुस्से से बोला….खलनायक ने देखा की रोज़ नेरा मेरा हाथ पकड़ा है लेकिन ऊसने गुण नहीं चलाईइ उसके आंखों में मैं आँसू देख सकता था

“साल..आ जिंदगी एमेम..एन्न हे..आमएस्सा डर..ड्ड साहा आहह पर साअला एक प्याररर आदमी क्यों…तो..द्ध एटा है….क्यों..टते भी..आहुट्त किस.मात्ट वाला हे तुउउउ”…..

खलनायक के आवाज़ में भारीपन था शायद उसके आँसू उसके दर्द को चेहरे ढके होने से भी नहीं छुपा पा रहे थे…ओसॉके एक आँख के निकलते अनसु को देख सकता था “जिंदगी में बहुत क्राइम किया अपून्ं ने लेकिन साला कभी सुख नहीं मिला पर साले तुम दोनों को मैं!”…….अभी वो गुण पॉइंट हुंपे कर पाता पुलिस की साइरन आवाज़ उठ गयी

“भागने की कोशिश मत करना खलनायक हमने इस पोर्ट कोचरो ओर से घेरर लिया है खलनायक अपने आदमियों के साथ खुद को हमारे हवालेक आर दो”…..खलनायक बहुक्ला उठा तब्टलाक़ मेरे गोली ओसॉके पाओ पे लग चुकी थी वो वही गिर पड़ा

काला साया : जी तो करता है यही मर दम तुझे पर साले तुझे ज़िंदा रहके दर्द सहना होगा जो दर्द तूने सबको दिया सिर्फ़ अपनी खुशी और बदले के लिए

मैं जानना तो चाहता वो कौन है? पर मुखहोटा उठाने का वक्त नहीं था..मैंने रोज़ को लिया और क्सिी तरह दूसरी ओर से निकालने लगा..खलनायक को भागना ही था…उसके आदमी जो बच गये थे वॉ पुलिस पे ही ताबड़टोध गोलीय बरसाने लगे..लेकिन एका एक पुलिस के मुत्बायर और गोलीबारियो में मारें जा रहे थे…खलनायक के पास शायद अब कोई बेक उप नहीं बच्चा त हां हूँ बस लरखरते हुए अपने टाँग से निकलते खून पे रूमाल चड़ा चुका था उसका अड्डा अब पूरी तरीके से तहेस नहेस होने जा रहा था…इधर मैं इन हाला तो में जैसे तैसे रोज़ के संग बाहर आया पीछे के रास्ते पे पुलिस थी…शायद कमिशनर ने ही इन लोगों को भेजा होगा…मैंने और रोज़ ने फौरन छलाँग लगा दी पिछवाड़े के फाटक से हम दोनों आज़बेस्टेर पे गिरते हुए सीधे नीचे आ गिरे…मुझे बेहद चोट आई रोज़ संभाल गयी ऊसने मुझे जैसे तैसे उठाया..पुलिस की टुकड़ी ऊस साइड भी आंर वाली थी…

मैं और हूँ गटर के अंदर घुस गये….और शटर लगा ली जिससे पुलिस को वहां किसी के आने का आवास नहीं हुआ….हम धीरे धीरे गटर के नीचे आए…हूँ गटर सीधे पोर्ट से सटे समंदर में खुलता था…बचना तो था ही पर रोज़ कटरा रही थी इतनी बड़ी जोखिम ऊसने कभी नहीं लिट ही..मैंने उसका हाथ पकड़ा और हम दोनों समंदर की धारा में कूद परे…गटर का पानी सीधे समंदर के फासले में आ गया लेकिन बीच में गटर और समंदर के बीच एक छेद था…गुण बेकार थी…रोज़ का साँस लेना मुश्किल पढ़ने लगा…मैं एक लात मारा गटर लोहे से सख्त था..मैंने हेंड ग्रीनेड बॉम्ब सीधे दरवाजा के छेद पे लगाया और उसका शेल खींच दिया हम दोनों जब तक वापिस गटर के रास्ते आते दरवाजा उड़ गया और इसके साथ ही इतनी ज़ोर का धक्का लगा पानी में ही कम गटर के द्वार से समंदर आ गये…मैंने रोज़ को पकड़ा और हम दोनों तैरते हुए ऊपर आने पुलिस के टाइम तैरने की अच्छी खासी ट्रेनिंग लिट ही…हम दोनों तैरते हुए ऊपर आए पानी का इतना बहाव था की पूछो मत….

दूर पोर्ट के ऊपर पुलिस की टुकड़िया ऊपर नीचे आती जाती दिख रही थी…गाड़ियों की लाइट्स और समंदर पे भी रोशनी मारी जा रही थी जाना मना गॅंग्स्टर आज उनके हाथ लगने वाला था…तभी मैंने अपनी बाइनाक्युलर से देखा की खलनायक कबका समंदर की धारा में कूद चुका है…और हूँ सीधे बंद पड़ी खिड़की को तोधके समंदर में जा कूड़ा…मैं उसके करीब जाना चाहता था..पर रोज़ ने मुझे रो कड़िया पानी का बहाव रात को तेज हो जाता है हम दोनों बार बार डूबने के कगार पे पहुंचने लगे

रोज़ : उसे जाने दो वॉ इस बहती धारा में ही बहके डुबके मर जाएगा पुलिस उसी की तलाश कर रही है हमें देखती है कुछ भी कर सकती प्लीज़ बात को समझो

काला साया : मैं उसे नहीं चोदूंगा ऊस कमीने मेरी दिव्या को!

रोज़ : प्ल्स मेरे खातिर…(और कुछ कह नहीं पाया हम पोर्ट से बहुत दूर आ गये तभी खुदा के फ़ज़ल से एक मचवारा जो बहुत से गुजर रहा था हमें दिख गया)

मचवारा : दादा अपनी छोले आसुन छोले आसुन (भैया आप इधर आइये इधर आइये)

ऊसने हम दोनों को देख लिया था…हम दोनों फहत से उसके बहुत पे चढ़ गये…”पानी बहुत गहरा है आप लोग डूब जाएगा आप लोग लाइट जाओ वरना पुलिस देख लेगी हम देख रहा है ऊन्को”…….मचवारे ने हम दोनों को बहुत पे ही लाइट जाने को बोला हम दोनों वैसे ही पष्ट होकर खास रहे थे हम लाइट गये

काला साया : भाई जैसे भी करके ज़मीन पे पहुंचा दे

मचवारा : ठीक है साहेब आप जैसे महान आदमी को भला कौन नहीं साथ देगा

UPDATE-74

मैं इतना चर्चित था ये बात का अंदाज़ा मुझे भी नहीं पता…बस मैं देख सकता था की अंधेरी समंदर की लहरो में ना जाने कहा खलनायक गायब हो गया क्या हूँ डूब गया? उसका कोई बॅकप भी नहीं था…लेकिन मैं ये जनता था इसके साथ ही शायद खलनायक और मेरी दुश्मनी की दास्तान यही उसके मौत से खत्म हो गयी थी

मैं बस चुपचाप रहा मैंने रोज़ की तरफ देखा और उसके होठों से होंठ लगा लिए मानो जैसे उसे पाके कितना खुश था? रोज़ के आंखों में आँसू थे मचवारा बस चोरी निगाहों से हम दोनों का प्रेम प्रसंग देख रहा था…हम दोनों वैसे ही जाली पे बहुत के ऊपर लेटे रहे जब तक ठोस ज़मीन और पुलिस की नजारे से दूर ना हो गये…

सुबह की चकाचौंड रोशनी जब खिड़की से परदों के इधर उधर से निकलते हुए बिस्तर पे पड़ी..तो एक बार आंखों को मलते हुए अपने नंगे सीने से लिपटी हुई अपना सर मेरे छाती पे रखे हुए…जिसके बाल इधर उधर बिखरे हुए थे जिसके आंखों से लेकर आधे चेहरे तक एक काला मुखहोटा था…और उसका एक हाथ मेरे सीने को पाखारे हुए पीछे तक..और एक हाथ मेरे चेहरे के मुखहोते को सहलाते हुए

आज 2 दिन जैसे मानो कितने साल गुजर गये हो?….

कैसे? खलनायक से लर्रकर मैंने उसके आदमियों को मर डाला…काला लंड की लाश पुलिस को बाकी गुंडों के साथ मिल चुकी थी…लेकिन खलनायक का कुछ पता ना चल पाया…वो जो समंदर में डूबा उसके बाद ना तो मुझे और ना ही कभी पुलिस को नज़र आया…लेकिन कहीं ना कहीं इस देश को उससे शायद निजात मिल गया था…अगर वो मर चुका होगा या तो ऊस्की लाश डूबते हुए कहीं ना कहीं तो पहुंच जाएगी…लेकिन सबसे सुकून भरा दिन मुझे ये सुबह और अपने दिव्या के बदले पे जीत की हो रही थी

मैंने महसूस किया की रोज़ थोड़ी हिली है…मैंने उसके पीठ को सहलाते हुए उसके चेहरे को अपनी तरफ किया…वो मासूमियत निगाहों से मेरी ओर देखते हुए मेरे सीने पे सर रखकर मेरे होठों पे उंगली फहरने लगी…हम दोनों ही चादर के अंदर कब से नंगे एक दूसरे से लिपटे थे ये बात का हमें पता नहीं था…मैंने रोज़ को अपने ताक़त से अपने ऊपर उठा लिया..और उसके कमर से होते हुए ऊस्की गान्ड की फहाँको में हाथ फहरने लगा….रोज़ मेरे सीने पे अपना सर रखकर छोटे बच्चों की तरह सोने लगी

रोज़ : देवष

काला साया : हाँ रोज़!

रोज़ : सबकुछ फीरसे शांत हो गया ई होप की अब तुम सबकुछ भुला चुके हो

काला साया : नहीं भुला पाया हूँ कुछ चीज़ें (एकदम से हड़बड़ाकर रोज़ ने मेरी ओर चेहरे को मोड़ा उसके आंखों में सवालात थे अब क्या रही गया था?)

काला साया : हां हां हां अरे हाउ कॅन ई फर्गेट यू? (मेरी बात को सुन रोज़ मुस्कुराकर मुझसे और क़ास्सके लिपट गयी उसके भारी छातिया मेरे सीने पे जैसे पीस रही थी उसके कड़क निपल्स जैसे गुदगुदी पैदा कर रहे थे)

रोज़ : तो फाइनली तुम अब क्या चाहते हो?

काला साया : एक अच्छी जिंदगी एक नया मोड़

रोज़ : जैसे?

काला साया : जैसे तुमसे शादी (मैंने उसके चेहरे को हाथों में भर लिया)

रोज़ को मानो जैसे ऊस्की मन की मुराद पूरी मिल गयी थी…ऊसने मेरे होठों को क़ास्सके चूम लिया और ज़ोर से बोल पड़ी “रेअल्लययी”…..मैंने मुस्कुराकर उसके एग्ज़ाइट्मेंट भरे चेहरे पे हाथ रखकर क़ास्सके उससे कहा “बिलकुल मेरी जान”…….रोज़ मुझसे फिर गले लिपट गयीचदर कब हम दोनों थोड़ा अलग हो गया पता नहीं

दिल को बस एक सुकून था मानो जैसे आज सारी मुरादें पूरी हो गयी हो…रोज़ को इतना क़ास्सके अपने से लिपटाया की उसे छोढ़ने का दिल ना हुआ…कहते है जब खुदा मेहेरबन होता है तो चारों तरफ खुशिया बरसता है…आज उनकी मेहरबानी मुझपर थी….जिस पेज निक्की बेला के सपने देखा था उससे भी कई गुना खूबसूरत गोरी में मेरे आगोश में थी…जो खुद मुझसे शादी करने के प्रस्ताव रखी हुई कब से बैठी थी?….

जब आदमी के सामने बर्गर हो तो वो रोती क्यों खाए? इतने अच्छे रिश्ते को अगर ठुकराया तो मुझसे बड़ा गान्डू फिर कौन बस ऊस दिन बस मैं उससे लिपटा ही रहा ना ही कोई कम का भोज ना ही कोई और लरआई सिर्फ़ हम और तुम

शादी के बारे में सोचते हुए मैं बाइक दौड़ा रहा था….बाज़ार के चारों ओर के लोगों की तरफ एक निगाह दौड़ाई…मानो जैसे इस शहर में कितना चहेल पहले हो…ना ही कोई लाफद ना ही कोई झगड़ा…एक पॅड्रे से बात कर ली…ऊन्होने मुझे बताया की रोज़ के साथ रोमन कॅतोलिक विवाह के रिवाज़क ए साथ कोर्ट मरीज़ भी कर लू….मैं बहुत खुश हुआ खैर पुलिसवालो का पता नहीं था की ऊँका एक्स-कॉप शादी करने वाला है….ऊस दिन वो आए थे मुझे बधाई दी लड्डू भी बाँटे खलनायक की मौत पे ऊँका जश्न्ञ देखकर मुझे भी खुशी हुई

कलकत्ता के चर्च में शादी का पूरा प्रोग्राम मैंने बना लिया…गुप्त रूप से शादी करके मैं रोज़ के साथ कोर्ट मरीज़ भी कर लूँगा…वापिस इतर पहुंचते पहुंचते शाम हो गयी….रोज़ को फोन पे ही खबर सुनाई वो काफी खुश थी…इधर कमिशनर के बार्िएन में पता चला की ऊँपे गवर्नमेंट और इंटरनॅशनल अफीशियल्स के दबाव मिल रहे है ऊन्होने कैसे खलनायक का एनकाउंटर करा दिया? उसे रंगे हाथों पकड़ना था सीक्रेट एजेंट्स का वो मोस्ट वांटेड क्रिमिनल था वगैरह वगैरह…कॉँमससिओनेर मिया की नींद तो ऐसे हराम हुई मानो ऊन्हें किसी ने शाप ही दे दिया हो

अपर्णा काकी को बताया तो वो भी बेहद खुश हुई की चलो मैंने कोई रिश्ता पसंद तो किया…लेकिन ऊन्होने ज्यादा आपत्ति नहीं जताई…क्योंकि मामला मेरा था बस मुझे सुझाव देने लगी…आज मैं बेहद खुश था…और खुशी के मारें एक राउंड अपर्णा काकी की चुत का भी ले लिया….बिस्तर पे ही लैटाके उनके पल्लू को हटाया और फिर उनके पेंट को चूमा और फिर उनके पेटीकोट को एकदम ुआप्र करके चड्डी को एक तरफ हटते हुए सीधे दे दाना दान धक्के पेल दिए काकी की चुत में…काकी मां तो पष्ट होकर बस धक्को का मजा लेती रही…इन औरतों को जितनी बेरहेमी से चोदा लेकिन ये लोग आहह ऊ ई तक की आवाज़ नहीं निकालती बस इन्हें तो लंड ले ले कीआदात हो जाती है और बस आहें भरती रहती है चाहे इनका भोसड़ा क्यों ना भर दे?

शीतल भी मांझी हुई खिलाड़ी थी….मां को जिस दिन ठंडा किया बेटी दूसरे ही दिन हाज़िर…क्या कारिएन चलो कभी कभी देसी खाना भी कहा लेना चाहिए…..अब तो हमारी शादी शुदा बहाना भाई से खूब जी भरके चुदवाती थी…ऊस्की मोटी मोटी गान्ड इतनी मोटी हो गयी थी की साला बाउन्स करती थी…उसे नंगा करके मैं खूब उसके पिछवाड़े को बाउन्स करवाता था…और फिर दान दाना दान लंड उसके गान्ड में डालकर चोदता था…और फिर वो अपने थूक से भरे मुँह में लंड लेकर जो चुस्ती अफ क्या कहने? जन्नत हो तो यही….

मैंने शीतल से वादा किया मैंने उससे शादी की नहीं तो क्या उसे बच्चा तो जरूर दूँगा….शीतल भी अब जी भरके बिना कॉंडम के चुदवाने लगी मेरे पास 6-7 दिन ही था उसके बाद तो उसे वापिस अब जाना था

आख़िरकार शीतल को कुछ ही दीनों में उल्टिया शुरू हो गयी…और ऊसने रामलाल को मुबारकबाद दी जबक इशीतला जानती थी बच्चा तो मेरा है ऊस्की चुत को कब से चोद छोड़कर अपना पानी डाल रहा हूँ ये वो भी जानती है…रामलाल तो अपने होने वाले बच्चे के लिए पागल हो गया और ऊसने जल्दी से शीतल को अपने साथ लेकर चला गया

आख़िरकार खुशी जिंदगी ऐसे ही चलने लगी….एक दिन फोन बजा त्रृिंगगग त्रिंगगग…फोन को उठाते ही एक जानी पहचानी आवाज़ कानों में पड़ी

UPDATE-75. (FINAL UPDATE)

मामुन : अययई बडी व्हातसस्स अप्प? कैसा हे तुऊउ?

देवश : अर्र…ई भी मेरे यार मेरी जानन्न तू सुना बस कैसा चल रहा है सब?

मामुन : चुप साले जबसे आया हो वएक बार भी फ़ॉएं नहीं किया तूने? ऐसा थोड़ी ना चलता है

देवश : भी मांफ कर दे कहूँ तो सॉरी पर प्लीज़ मेरी नादानी को मांफ़्क आर दे

मामुन : मांफ तो हम तब ही करेंगे जब आप यहां आएँगे म्ृर

देवश : भाई वो दरअसल!

मामुन : देख देख तूने नौकरी चोद दी है मुझे पता लग गया इतना पराया कर दिया मुझे तूने कोई प्राब्लम तो नहीं है ना पैसों की

देवश : भाई ज़मीदार के पोते है पैसों की कभी कमी हुई है भला

मामुन : ये हुई ना बात चल अच्छा हुआ अब तुझसे मुझसे डर नहीं लगेगा हाहाहा अच्छा भाई तुझे फोन करने का था की इस हफ्ते तू आजा मिलने देख ना मत करियो बहुत आस से फोन किया है यहां मैं काफी बोर हो रहा हूँ तू आएगा तो दिल बह लेगी

देवश : भाई लेकिन (कैसे कहता की अब मैं रोज़ से शादी को बेक़रार था लेकिन ना जाने क्या आया मैंने मुस्कुराकर हाँ कह दिया)

मामुन : ये हुई ना बात चल तू आजा पूरा खाने का इंतजाम करूँगा मैं वैसे सुनकर दुख हुआ की दिव्या!

देवश : भैया जाने दो प्लीज़

मामुन : ई आम सॉरी चल तू बस ये समझ की तेरा अपना अब भी ज़िंदा है कोई तू बस आजा मैं तेरा इंतजार कर रहा हूँ

देवश : ठीक है भाई

मामुन : ना रुकेगा कोई नहीं लेकिन भाई से मिल तो ले

देवश : अच्छा ठीक है बाबा आता हूँ

मामुन : यआःाहह चल फोन रख ओके बयी

मामुन ने फोन कट कर दिया….खैर ये भी ठीक ही था की एक बार मामुन से मिल लू ताकि गीले शिकवे सब दूर हो जाए…कैसे उसे काहु की मैं रोज़ से शादी करने वाला हूँ अब जैसे तैसे रोज़ से शादी करके मैं यहां से अब जाना ही चाहता था…जब इतना होप लेकर बुला र्हाः आई तो तहेरना कैसा?

देवश धीरे धीरे कवर्ड के पास गया और ऊसने मुस्कुराकर वो कवर्ड खोला जिसके अंदर एक गुण रखी थी….देवश ने उसे हाथ में लेकर बस मुस्कराए हुए अज़ीब निगाहों से देखा…”कभी कभी बदला अधूरा रही जाता है”…….

देवश की मुस्कान एक पल के लिए कठोर सी हो गयी और ऊस्की निगाह फिर वही काला साया के रूप के भट्टी बदले की आग में जल उठी
रात के करीब 12 बज चुके थे….कुत्तों की हावव हावव आवाज़ को सुनकर एकबार बेचैनी से कमिशनर साहेब उठ बैठे….ऊन्होने एक नज़र अपनी बीवी की ओर की…जो घोड़े बेचके सो रही है…”अफ कितना बुरा सपना था काला साया ने तो मुझे मर ही डाला था”…..कमिशनर अपने भयंकर सपने को व्यतीत करते हुए बबदबड़ाया…ऊसने उठके झड़ से गिलास में डालकर एक गिलास पानी लिया और फिर धीमी साँस छोढ़ते हुए उठा…

“इतने बारे घर में इतनी सेक्यूरिटी है सबसे पहली बात घुसेगा कैसे हां हां हां हां”…….कमिशनर अपनी बुद्धि की तारीफ करते हुए तहाका लगाकर हंसा…”आज लगता है नींद नहीं आएगी अफ एक गिलास पी ही लेता हूँ”…..कॉँमससिओनेर धीरे धीरे अपने रूम से बाहर निकलकर सीडियो से नीचे उतरा…पास ही बने शराब की अलमारी से एक बोतल निकलकर वही पास के कुर्सी पे बैठकर टेबल पे रखकर गिलास में डालने लगा…”हां अच्छा हुआ वॉ मादरचोद खलनायक भी उम्म्म”….अपने गले में घोंटते हुए एक ही बार में जम खाली कर दी…दूसरा पेग बनाते हुए कमिशनर ने अभी आधी शराब पी ही थी की सामने खड़े ऊस शॅक्स को देखकर उसके हाथ से गिलास चुत के फर्श पे ही बिखर गया

कमिशनर : क्क्क..क्कहालननायक्ककक त..तूमम्म?

खलनायक : हाँ मैंन जिसके गान्ड के पीछे तू बहुत दीनो से पड़ा हुआ था बारे ही परवाचन सुनता है ना न्यूज मेंन अब बोल

कमिशनर : आररी रूपाल्ल्ल जीवँनन् आररी आई वातचममंणन्न् अरे कहाँ म्मररर गये सब के सब्बब? (कमिशनर डर के मारें चिल्ला उठा लेकिन कोई नहीं आया)

खलनायक : मुझे क्या इतना चूतिया समझा है की मैं ऐसे ही तेरे घर में घुस जाऊंगा उठ के देख उठ के देखह देखह (कॉँमससिओनेर भुआकलते हुए भागा बाहर की ओर बाहर का दरवाजा बंद था और बाहर के सारें सेक्यूरिटी मानो जैसे बेहोशी मुद्रा में परे थे) वैसे भी तेरी बीवी पे मुँह पे भी सेम स्प्रे छिड़का है अगर उसके ऊपर 10 आदमी भी चढ़ जाए ना हाहाहा तो उसे सुबह तक कुछ पता नहीं चलेगा

कमिशनर : से..हत्त अप्प द..एखू में..मैंन त..उंहें चोदूंगा नहीं यू आर..ए में..एससिंग डब्ल्यू.इतह आ पुलिस कोँमिससिओंनेर

खलनायक : हां हां हां हां जिसकी पेंट गीली है और जो अपने सामने कोई भी खतरनाक गुंडे को देखकर हल्का जाता है कॉँमससिओनेर उसे कहते है हां हां हां हां साले बेटीचोड़ तू भी बहुत बड़ा चोद लगता हे लेकिन तूने जो किया ना ऊस्की भरपाई तो तुझे दूँगा ही

खलनायक धीरे धीरे कोँमिससिओएंर के आगे आने लगा कमिशनर के पास कोई हत्यार नहीं था वो बस भौक्ला रहा था…भौक्लते भौक्लते उसके आँख इतने बारेह उए की वो ज़ोर से चिल्लाया और उसका जिस्म अकड़ने लगा….

अपने सामने एक राक्षस जैसे मुखहोते को करीब आते देख जिसके हाथों में चाकू उसका दिल का दौरा बढ़ने लगा वो अपने कलेजे को पकड़ा वही गिरके छटपटाने लगा….खलनायक बस चुपचाप वैसे ही खड़ा रहा…कुछ देर बाद कमिशनर का बदन तहेर गया…खलनायक जनता था ऊस्की साँसें तांचुकी है

खलनायक : हां हां हां हां चलो आज पहली बार कोई मेरे खौफ से मारा है अगर ज़िंदा बचता तो बेदर्दी मौत मरता

अगले दिन कलकत्ता की एक पौष इलाके पे बने फ्लैट के अंदर देवश अड्रेस पूछते हुए आया….दरवाजा अपने आप खुल गया सामने मामुन सिगरेट पी रहा था उसका धुंआ छोढ़ते ही उसे कमरे में देवश आते दिखा “आए मेरे यार तू आ ही गया वाहह”……मामुन ने देवश से गले मिलकर उसके कंधे पे हाथ रखकर उसका स्वागत किया

देवश : क्या भाई तू तो बेहद अमीर हो गया ये सब क्या है? लगता है जैसे दावत रख है तूने मेरे लिए

मामुन : भाई आए और दावत ना रखू चल बैठ आज पहली बार आया है तू मेरे ग़रीबखाने चल एक एक पेग हो जाए

देवश : नहीं नहीं मैं पीता नहीं

मामुन : अच्छा ठीक है पर मैं तो इस जश्न्ञ में पिऊंगा (मामुन ने एक पेग बनाया और पीने लगा)

देवश चुपचाप मुस्कुराकर मामुन की ओर देखकर चारों ओर देखने लगा “वैसे काफी पैसेवला हो गया है तू?”….देवश ने तंग पे तंग रखते हुए कहा….मामुन बस पागलों की तरह हंस रहा था “भैईई सब खुदा की मर्जी है जिस आदमी के जिंदगी में पैसा ना हो वो कर भी क्या सकता था? और आज लौंडिया है पैसा है शौरहट है दौलत है”…….मामुन के आंखों में जैसे दुख के आँसू थे

देवश : हो भी क्यों ना? जो लोगों के दिल में दहशत फैलाए उसे तो सब खुदा ही मानेंगे ना मिस्टर खलनायक (चौका देने वाली थी ये बात मामुन कुछ देर तक गंभीर होकर देवश की शकल देखने लगा फिर मुस्कराया)

देवश : असल में तेरी चोरी पकड़ी गई है साले मुझे यकीन नहीं होता मेरा भाई खलनायक और मैं ही एक सूपरहीरो वाहह क्या फॅमिली है गंदा तो हमारा खून था ही जो कभी क्सिी के आँसुयो की कदर ना कर सका क्या बिगाड़ा था मैंने तेरा? जो तूने मुझसे इतना बड़ा बदला

मामुन : बदला बादडला में फूटत (मामुन ने एक ही झटके में टेबल पे साज़े सभी खाने को टेबल सहित उल्टा के फ़ेक दिया) अरे मैंने किसका क्या बिगाड़ा था? जो मुझे ये दिन देखना पारा एक दिन था जब रोती के लिए डर डर भीख माँगता था…तेरी वो दादी जिससे मेरे परिवार वालो ने अपना हक़ माँगा ऊसने मुझे मेरी मां सहित जॅलील करके भागाया मेरा बाप जो खुद एक नसेडी था ऊसने मुझे क्या दिया….भाई तुझे सब दिया और मुझे कुछ नहीं कुछ भी नहीं

देवश बस सुनता गया….”बचपन में ही मां को कैन्सर हो गया अपनी दादी से पैसे माँगे तो चाचा और चाची ने दादी सहित मुझे भगा दिया….

फिर बापू का बढ़ता कर्ज़्ज़्ज़ कौन जी सकता है यार कौन? मां का दो साल में ही देहांत हो गया…बाप ने अपनी आदत नहीं छोढ़ी डर मैं भीख माँगता रहा दरवाजे दरवाजे पैसे की भीख माँगी…लेकिन दिल था की एक बहुत बड़ा आदमी बनूंगा और मैं बना भी खलनायक बना भी”…….मामुन की आंखें इस तरह अध्याना करने लगी जैसे ऊस्की सारी घटना उसके आंखों केसांने हो

“एक आदमी मिला एक दिन बोला मेरे बार में काम करेगा…मैं छोटा था मैंने हाँ कह दिया….असल में वो एक दूर्गस स्मगलिंग का धंधा करता था…धीरे धीरे मैं उसका अज़ीज़ बन गया उसके सारे पैटरे सीख लिए….और वो मेरे हाथ से सप्लाइ करवाने लगा ड्रग्स बंगाल से ब्ड तक ब्ड से मुंबई तक…हमारा कारोबार अच्छा चला…मैंने उसे साफ कहा की मैं पैसों के लिए कुछ भी कर सकता हूँ..चाहे किसी का खून भी एक जूननून था दिल में एक बड़ा जुनून एक दिन पुलिस ने पकड़ लिया 8 महीन के लिए जेल में डाल दिया…वापिस निकाला फिर कॉंटॅक्ट किया उसी आदमी से तब्टलाक़ मैं खुद बिज़्नेस संभालने लगा…और धीरे धीरे ब्ड में रहना शुरू कर दिया…यहां से मेरे काले धंधों का अच्छा कारोबार चलने लगा पैसा होने लगा…लौंडिया शौरहट सब होने लगा लेकिन जान का खतरा तो था ही…धीरे धीरे इसकी आदत पढ़ गयी और मैंने खुद के चेहरे को एक नाक़ा ब्सी ढक लिया जिस दुनिया में मुझे शैतान का नाम दिया गया था बुरा कहा जाता था वही नाम मैंने रखा…खलनायक्क इस तरह खलनायक बनकेना जाने कितनों की सुपारी ली कितने खून बहाए कितना दूर्गस बैचा कितनों की ज़िंदगया उज़ादी कितनों का घर उजड़ा लेकिन पैसा पैसाआ हर ओर से पैसा यही तो चाहिए एक मज़बूर को”……..

मामुन की दास्तान सुनते सुनते मैं चुपचाप उसके हाथों में रखी ऊस खलनायक के मुखहोते को घूर्र रहा था

देवश : हम लेकिन तू बच्चा कैसे पिछली रात को? तू तो
मामुन : हां हां हां हां (तहाका लगाकर मामुन हंसा) अगर मेरा भाई एक शातिर खिलाड़ी हो सकता है काला साया तो मैं एक शातिर मुज़रिम क्यों नहीं? बेक उप प्लान बारे से बारे डॉन के पास रहता है…जल्दी से पिछली रास्ते से पानी में जब कूड़ा तो वहां मेरा बिसात पहले से ही बिछा हुआ था मुझे डूबना अच्छा आता है क्योंकि बहुत बार ड्रग्स जो पानी में गिरे है पुलिस की निगाहों से बचाने के लिए समंदर के अंदर तक छुपाया है…वैसे ही एक बहुत मैंने 20 में अंदर छुपाई थी…मौके पे फरार होने के लिए और उसी पल मैं कलकत्ता में प्रवेश कर गया
देवश : वाहह रे वाह फॅब्युलस डॉन बनना कोई तुझसे सीखे पर ये तेरी मज़बूरी नहीं थी तेरा शीतन बनने की दास्तान थी
मामुन : भाई जो भी बोल आज इस लाइन में बहुत पैसा है
देवश : रंडी के लाइन में भी पैसा है तो क्या अपनी गान्ड में लंड डालवौ और चुका बन जाओ वैसे भी तू हियिरा बन जा सरकार की तरफ से मुफ्त में!
मामुन : टेरी मां की चुत (देवश हस्सा मामुन के लाल लाल जलते आंखों को देख बस वो भी गंभीर हुआ)
देवश : आबे तू विक्टिम लगता है यार कोई डॉन नहीं मानता हूँ मज़बूरी इंसान को तबाह कर देती है पर तू खुद एक तबाह इंसान है कहीं भी तू जाए तुझे सरकार गोली मर देगी क्या मिलेगा ये सब करके? मुझे तो सुकून है तू मुझसे जलता है ना ये ले कागज़ पे लिखवाड़े तेरे नाम सबकुछ कर देता हूँ
मामुन : अरे भीख नहीं च्चाईए मुझे मना हम एक ही कश्ती के दो राही है पर तुझे सब मिला पर मुझे नहीं लेकिन अब तू बचेगा भी नहीं तूने वैसे ही आधे से ज्यादा मेरा प्लान बर्बाद कर दिया मेरी रोज़ को मुझसे छीन लिया
देवश : हां हां हां चाहे दौलत छीन के ले लेकिन याद रख प्यार पाया जाता है छीना नहीं

मामुन : शट अप्प यू रास्कल (मामुन ने गोली मेरे छाती पे रख दी मैं चुपचाप खड़ा रहा अचानक एक्ज़ोर्दार पीपे का प्रहार मेरे सर पे हुआ मैं बस वैसे ही त्तिहक के गिर पड़ा….जो पीछे खड़ा था उसे देखते ही मैं चौंक उठा ये कोई और नहीं मामुन का भाई कबीर था)

मामुन एकदम से तहाका लगकर हस्सने लगा “दास्तान तो सच्ची थी पर किरदार कोई और था तुझे क्या लगता है? की मैं खलनायक हूँ इतना बड़ा गान्डू समझा है मुझे जो अपना राज़ खुद ही बता दम…असली खलनायक तो ये है”……..

मामुन ने अपने भाई के गले मिलते हुए बोला दोनों एक दूसरे से यूँ गले मिलते देख मैं दर्द से काँपते हुए उठने की कोशिश करने लगा कबीर मामुन का भाई जिसे आजतक मामुन ने छुपाएं रखा था

कबीर : हां हां हां कैसा है भाई मेरे? वाहह आज ऐसे सिचुयेशन में मिलना होगा सोचा नहीं था…मामुन बहुत अच्छा काम किया है तूने मेरे दुश्मन को मेरे ही घर लाके…दरअसल मामुन मेरा बिज़्नेस पार्ट्नर है शान्त्राज की चाल मैं चलता हूँ अंजाम ये उसे देता है खलनायक मैं बनता हूँ नाम ये लेता है समझा नहीं चल मैं समझता हूँ अबतक जो तूने सुना वो दास्तान इसकी नहीं मेरी थी….ये बेचारा तो हालत का मज़बूर था लेकिन जब खलनायक मैं बना तो इसे भी अपना अज़ीज़ बना लिया क्यों भाई?

मामुन : हाँ भाई

कबीर : वरना तू आ रहा है और मैं तेरे सामने आ जाओ ये जानते हुए की तू मुझे मारने के लिए पूरी तैयारी करके आएगा हां हः हां नो वे चल अब मैं तुझे सुनता हूँ आगे की दास्तान….मेरा भाई डर डर की ठोकरे कहा रहा था जब उसे पता चला की मैं एक शातिर डॉन बन गया हूँ खलनायक तो ऊसने मुझे हेल्प की…शातिर ऐसे नहीं बना मामुन की गर्लफ्रेंड क्या नाम था उसका

मामुन : चाँदनी भैईई

कबीर : हाँ चाँदनी ब्ड के सुपेरिटेंडेंट की बेटी जिसे जाल में इसने फंसाया मुझे बहुत पसंद थी मैं पुलिस की निगाहों में अबतक आया ही नहीं था पर साला दिल ये दिल एक दिन उसे इन्हीं हाथों से पकड़कर उसी के बिस्तर पे रेप किया मामुन बहुत कफा था मुझसे बहुत ज्यादा..लेकिन इसने भाई का फर्ज निभाया और हमने मिलकर ऊस्की नंगी लाश उसके बाप के सामने (दोनों भाई तहाका लगाकर हस्सने लगे मैं चुपचाप गिरा हुआ था)

कबीर : पूरा पुलिस फोर्स के जैसे आगे लगा दी हो गान्ड में हमारे पीछे पारह गये…इधर मेरी भी ताक़त दुगुनी होती गयी दुबई ओमान सौदी बांग्लादेश मुंबई सब जगह अपना ही बोलबाला होने लगा….और इधर मां जिसने हमें पाला मेरे बाप ने दूसरी शादी करके जिसे हामरे घर लाया जिसे ये भी पता ना इूसका बेटा कितना सफर्ड करके आज एक शख्सियत बना मेरा तो खून खौल गया और मैंने क्या किया पता हां? ऊस कुतिया को ब्लैकमेल किया अपनी ही सौतेली मां को पहले उसे ज़लील करने के लिए उसका बाय्फ्रेंड बनाया फिर उससे खलनायक बनकर फहईरौती माँगी और उसे पाते पे बुलाया और फिर उसके साथ मिलकर चोदा छोड़ी किया साली गान्ड बहुत टाइट थी….बाप को ये बात पता चल गयी और फिर हमने क्या किया पता है दोनों ने मिलकर ऊसको भी मर दिया हमारी सौतेली मां हम दोनों की रांड़ बन गयी हाहहाहा और एक दिन एक शीक की ऊसपे नज़र पड़ी और उसे भी हमने बैच दिया पहले तो बहुत नखरे कर रही थी फिर उसे इंजेक्शन लगा दिया उसके बाद इस तरह हमारी दास्तान चल पड़ी

देवश : आ..

हह सोचा नहीं था की कभी इतने बार एमरडारचोड़ो से पाला पड़ेगा तुम जैसा दाज्जल अगर दुनिया में कोई होगा तो वो तुम दोनों ही होंगे लेकिन फिक्र नोट तुम लोग ये सोचक मुझे मरोगे की अब मैं पोलिसेवाल नहीं रहा तो ग़लतफहमी आहह (देवश ने उठते हुए मुस्कराया)

और ऊसने काला साया वाली चल चल दी अपने जुटे में रखकर ऊस पैकेट को जिसे ऊसने अपने हाथों में गिरे गिरे ही ले लिया था फौरन दोनों के ऊपर फैका हड़बड़ाहट में मामुन ने गोली चला दी जो सीधे पैकेट पे लगी और बढ़म्म से एक धुंआ फैल गया….देवश तब्टलाक़ अपनी भाई किक मामुन के छाती पे उतारके उसे गिरा चुका था…कबीर ख़ास्ते हुए पागलों की तरह अंधाधुंध पीपे मारें जा रहा था “मदारचोड़ड़ मेरे भाई को छोड्धह”…….मामुन कुछ का आर नहीं पा रहा था बस चीख और चिल्ला रहा था..

देवश ने उसके हाथों को बेदर्दी से माधोड़के तोड़ दिया…मामुन ज़ोर से चिल्ला उठा…पास रखी बोतल को देवश ने उठाकर उसके कनपाती पे दे मारा बोतल टूट गयी और मामुन के सर से खून निकालने लगा देवश ने मामुन के गर्दन को क़ास्सके जकड़ा और उसके पेंट पे ही जितनी बार होसका टूटी काँच की बोतल घुसेड़ दी…मामुन चीखता चिलाता रहा पर कबीर धुए की बदौलत अँधा हो गया था…कुछ देर बाद जब धुंआ हटा तो चीखते चिलाते कबीर ने सामने एक लाश देखी मामुन मर चुका था उसके पेंट गहराई तक कटा हुआ था चारों ओर खून ही खून

कबीर : हरामिी मदारचोद्द्दद्ड (कबीर का गुस्सा सातनवे आसमान पे चढ़ गया वो आग बाबूला होकर पागलों की तरह सोफा और टेबल को इधर उधर फैक्ने लगा)

तब्टलाक़ देवश बाथरूम में घुस चुका था और ऊसने अपनी गुण रेलोअडक आर ली…कबीर ने अपनी गुण निकाल ली और चारों ओर देवश को खोजने लगा “कमीने बाहर निकलल्ल्ल आज तुझहहे नहीं चोदूंगा”……अपने से खों भरे मामुन के लगे खून को हाथों से पोंछते हुए गुण किसी तरह देवश ने उठाया और दीवार से झाँका…कबीर ने फौरन फाइरिंग शुरू कर दी…दीवार में छेद हो गया देवश भागते हुए हेमां के पीछे चला गया ऊसने भी फाइरिंग शुरू कर दी….कबीर वैसे ही गिर पड़ा दोनों में से कोई हार नहीं मना….गोली से चारों ओर धुंआ धुंआ होने लगा

जब दोनों की गोली खाली हो गयी..तो फौरन कबीर ने गुण फ़ैक्हके देवश पे छलाँग लाग दी…देवश फौरन कबीर से हातपाई करने लगा…कबीर को जैसे खून सवार था ऊसने उसे फौरन पकड़कर दीवार पे दे मारा…देवश का आएना से सर टकरा गया वो धंस खाके गिर पड़ा….कबीर ने फौरन पास रखी तार देवश के गले पे लगाकर फसनी चाही…पा देवश ऊसपे घुसा और लात मरता रहा…कुछ देर में ही कबीर के सर पे पास रखकर वैसे का प्रहार हुआ और वो गिर पड़ा उसके माथे से खून बहाने लगा…देवश लंगदाते हुए बाहर निकल आया

कबीर ओसॉके ऊपर बैग की तरह झपटा..

देवश ने फौरन उसके सर को पकड़ा और दोनों सोफे पे से गिरते हुए सीधे टेबल को ऊपर जा गिरे…टेबल टूट गया और दोनों घायल होकर इधर उधर गिर परे…देवश लंगदाते हुए फिर उठा…कबीर ने उसके दोनों आंखों में उंगली धस्सा दी…देवश ज़ोर से चिल्लाके सीडियो पे जा गिरा…कबीर ने तब्टलाक़ टीवी को उठाकर देवश पे मारना चाहा देवश सीडी से हाथ गया टीवी टूट गयी…देवश और कबीर दोनों ही खून खत्तर हो चुके थे….फार्महाउस जैसी जगह पे घर था दूर दूर तक कोई नहीं जैसे समझ आए की आख़िर मसला क्या है?

कबीर ने देवश को उठाया और सीधे दूसरी ओर पटक दिया…देवश बेहोश हो गया…कबीर इधर उधर भौक्लके गुण ढूंढ़ने लगा…ऊसने मामुन के गुण को उठा लिया और रोते हुए मामुन के चेहरे पे हाथ रखकर उसके माथे को चूमा मामुन की लाश वैसे ही पड़ी हुई थी…कबीर उठके चारों ओर देखने लगा “देवस्शह देवस्शह”…….पागलों की तरह कबीर इधर उधर खोजने लगा…लेकिन देवश वहां से गायब हो चुका था…कबीर को डर सताया और ऊसने बाहर की कुण्डी लगा दी..साथ ही साथ टूटी खिड़कियां और दरवाजे भी…ऊसने टीवी ऑन किया और फुल साउंड पे लगा दिया ताकि बाहर किसी को पता ना चल पाए की यहां क्या हो रहा है?

कबीर धीरे धीरे लंगदाते हुए पास रखी पीपे को उठाकर इधर उधर देवश को खोजने लगा “बाहर निकल्ल्ल मैंनी कहा बाहररर नियकल्ल्ल मदारचदोद्ड साली मेरे आदमियों को मर दिया मेरी महबूबा को मुझसे छीन लिया आहह आजज्ज तुझहही मैं ज़िदनान है छोढ़ूनाग तुझसे तेरा सबकुच छीन लूँगा मेरे भैईई को मारा तुन्नी हारांज़ाडी मेरी बाहियीई को”……कबीर चिल्लाता हुआ दहढ़ रहा था

अचानक वो पर्दे की तरफ जाने लगा..जैसे जैसे वो पर्दे के पास गया ऊसने एक ही झटके में परदा हटाया वहां कुछ नहीं था हवा से परदा हिल रहा था पूरे घर में खामोशी चाय थी सिर्फ़ टीवी की आवाज़ दूसरे कमरे से आ रही थी…इतने मेंन्न्न् कबीर एकदम से हड़बड़ाया और वो सीधे स्टोर रूम के दरवाजे से टकराते हुए उसके सामानो पे जा गिरा…”उग्गघ उहह आह”….ऊस्की आवाज़ घूंत्त चुकी थी सामने उसके ही मुखहोते को पहना खलनायक उसे मुस्कुराकर देख रहा था…कबीर मुँह से खून उगलता रहा उसके पेंट से आर पार एक चुरा हो चुका त हां….खलनायक ने उसे सख्त हाथों से खींचा कबीर ने उसका हाथ पकड़ना चाहा पर खलनायक ने उसे क़ास्सके एक बार और ज़ोर से खींचके निकाल डियाकबीर साँस खिंचता हुआ ऊस मुखहोते के तरफ हाथ बढ़ता है जिसे खलनायक पकड़ लेता है

“जिंदगी में एक आहेसन करना की दोबारा मिर जिंदगी में कभी मत आना अलविदा भी”…..

खलनायक अपना मुखहोटा उठ आर फ़ैक्हता है देवोःस सामने खड़ा होता है और साथ ही उसका चुरा फिर कबीर के पेंट के अंदर धंस जाता है…कबीर की आंखें थे जाती है और वो मुस्कुराकर वैसे ही पत्थर बन जाता है

कुछ देर बाद लाहुलुहन लंगड़ते हुए देवश सुकून भर एअंडाज़ में मुस्कुराता है और कबीर की तरफ देखता है…कबीर के नास्स को छूते ही पता चलता है वो मारा जा चुका है चारों ओर सामान बिखरा पर है मामुन की एक जगह लस्शह पड़ी है “आख़िरकार खलनायक का अंत उसी के हाथों को चुका था”…..वो एक बार कमिशनर को खलने क्का मुखहोते पहनकर मर चुका त और उसका मुखहोटा कमिशनर के घर चोद आया था ताकि पुलिसवालो को लगे की खलनायक ने ही कमिशनर को मारा और इस देश से फरार हो गया

देवश बाथरूम में जाकर नहा लेता है और अपने आपको ठीक करते हुए एक बार दोनों लाशों की ओर देखता है कबीर के जगह पे पट्टी थी जहां उसे कल रात गोली लगी थी….देवश जानके खुश होता है खलनायक सच में ही मारा जा चुका है….देवश फोन करता है रोज़ को “हाँ रोज़ आहह से शादी की डेट फिक्स हो चुकी है हाँ तुम तैयार हो जाना प्लान चेंज हो गया है हम मेक्सिको जा रहे है हाँ बस जो कहा उसे सुन लो चुपचाप ओके में जान लव यू”……देवश मुस्कुराता है और खलनायक के मुखहोते को लेकर एक बार दोनों लाशों को देखता है फिर अपने कपड़े को बदलके घर से निकल जाता है….क्सिी को शक भी नहीं होता

देवश अपनी जीप स्टार्ट करता है और वहां से निकल जाता है….जल्द ही न्यूज सुनाने को मिलती है एक घर में दिन दहाड़े बेरहेमी से मौत कौन आया था कौन गया किसी को मालमूं नहीं? दो भाइयों की मौत जिनके बारे में पता चलता है की वो बांग्लादेश से है….कमिशनर का भी रात गये खून हुआ था सबूत में खलनायक का मुखहोटा मिलता है पुलिस को आख़िर खलनायक कौन था? ऊस्की मारने की वजह तो सामने आई ही थी की पुलिस उसके पीछे है और एनकाउंटर के आर्डर खुद कमिशनर ने दिए थे लेकिन खलनाया क्के मुखहोते के पीछे किसका चेहरा था ये आजतक ना तो पब्लिक और ना पुलिस ना जान पाए और ये भी शातिर गन्मन मुज़रिमो के लिस्ट में जुड़ चुका था

उधर काला साया फिर गुमनाम हो गया….ना जाने कहा चला गया लोग बस उसे अपना भगवान मानते थे रोज़ भी गायब थी पर कोई ये नहीं जनता था 2 साल बाद…मेक्सिको के समंदर पे पंचियो की आवाज़ को सुन लहरो को देखते हुए बहुत चलते देवश अपनी पत्नी रोज़ को बाहों में लिए बस अपने आनेवाली जिंदगी के बार्िएन में सोच रहा था …किस किस तरह जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया?….वो बस खुश था की आज उसका बदला यक़ीनन पूरी तरीके पूरा हो चुका था

THE END ??​

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