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दीदी और दोस्त (Completed)

Story Hindi 119 pages 6 months ago

1.
दीदी के कॉलेज का पहला दिन था,आज वो बड़े ही सज धज कर पर बट सिम्पल सी तैयार हुई जो की उनकी विशेषता तो बिलकुल नहीं थी,वो सलवार कामिज पहने हुई थी बहुत सिम्पल मेक उप था पर इतनी सुंदर वो कभी नहीं लगी थी मैं तो बस देखता रह गया,क्योकि मैंने उन्हें जादातर जीन्स वगेरह में देखा था या फिर स्कूल के यूनिफार्म में,मेरी तन्द्रा तब टूटी जब राहुल ने थोड़ी देर की खामोशी के बाद सिटी बजायी 'वाह मान गए दि आप तो पूरी क़यामत लग रही हो'

'थैंक्स भाई,क्यों जनाब आप क्या देख रहे हो'दि ने मुझे घूरते हुए कहा

'सच में दि इतनी सुंदर तो आप कभी नहीं लगी आप ऐसे ही सिंपल ड्रेस पहना करो,आपकी सादगी बड़ी ख़ूबसूरत है,'मेरे आँखों में अनायास ही पानी आ गया जिसे देख दि ने मुझे अपने गले लगा लिया,राहुल थोड़ी देर तो खड़ा देख रहा था वो जल्दी सेंटी भी नहीं होता था पर उससे रहा नहीं गया और वो भी हमसे लिपट गया जब हम अलग हुए तो हमारे आँखों में आंसू था,

'आप लोग भी ना बिना बात सेंटी करते रहते हो,'राहुल ने हस्ते हुए पर अपने आँखों में आया पानी पोछते कहा

'चलो भाई मुझे मुझे लेट हो जायेगा ',

'दि हम लोग छोड़ दे क्या आपको,'

'नहीं मनीष आ रहा है मुझे लेने,'मनीष दीदी के क्लास का लड़का था जिसने दि के साथ ही एडमिशन लिया था,दि के बहुत दोस्त थे जिनमे वो भी एक था,मनीष ने बहार से ही हॉर्न बजाया और दि हमें बाय कह चले गयी,हमारा भी स्कूल का टाइम हो गया था पर आज मन बिलकुल नहीं था,मैंने राहुल से कहा आज कही घुमाने चलते है,वो तो एक पैर में तैयार मिला,हम दोनों बाइक पर घुमाने निकले,घूमते घूमते हम दी के कॉलेज पहुच गए,कॉलेज बहुत बड़े यूनिवर्सिटी केम्पस में था और बहुत दूर दूर से लोग वह पड़ने आते थे इसलिए केम्पस में ही होस्टल बने हुए थे,होस्टल के लडको की और लोकल लडको की लडाईया अकसर होते रहती थी,दबदबा दोनों का था पर जादातर होस्टल के बन्दे ही बाजी मार जाते थे ऐसा नहीं था की सभी लड़ाई करते थे पर कुछ ग्रुप्स का काम ही था लड़ाईयां करना और राजनीती करना,जब बात राजनीती की आये और नेहा दि पीछे रह जाय ये तो हो ही नहीं सकता था,और मुझे यही डर था की वो किसी मुसीबत में ना फस जाय,कैम्पस में पहुच के ही राहुल की आँखे बड़ी हो गयी कारन थी लडकिया ,वो देखता हुआ और कुछ जगहों पर सिटी बजता हुआ मेरे पीछे बैठा था,ये बात शायद होस्टल के कुछ लडको ने नोटिस कर ली,और हमें रुकुवा दिया,

'क्यों बे कोन से डिपार्ट से हो,'एक काले से पतले लड़के ने कहा,

'तुझे कोई मतलब रास्ता छोड़ 'राहुल ने अकड़ दिखाई

'सालो होस्टल की लडकियों को छेड़ोगे,'उसने इतने जोर से ये कहा की मेरी भी फट गयी मैंने आसपास देखा कुछ और लड़के हमारे तरफ आ रहे थे,

'सॉरी यार हम नए है गलती हो गयी 'मैंने बात की नजाकत को समझते हुए कहा,पर साला राहुल उनसे पंगा लेने में तुला था,लडको की

संख्या लगभग 15-20 हो गयी और माहोल गर्म हो गया ऐसा लग रहा था जैसे अब तब हम मार खाने वाले ही है,उन्होंने राहुल की कॉलर पकड़ ली थी पर राहुल सीधे मुह उनसे बात ही नहीं कर रहा था,मैं भी मजबूर सा राहुल को ही समझा रहा था यार छोड़ चलते है माफ़ी मांग ले ,तभी कुछ लड़के गाडियो के झुण्ड में वह पहुचे लगभग 10-15 गाडियों में 20-25 की संख्या में लड़के और लडकिया थी,

'क्या हो रहा है यहाँ,'उन्ही लडको में एक ने कहा जिसे देख कर राहुल के होंठो में मुस्कान सी आ गयी,वो विक्की था उसके पीछे ही नानू भी बैठा था,

'ये तुम्हारा मामला नहीं है विक्की 'उस काले से दुबले पतले लड़के ने कहा

'जिसे तू पकड़ा है ना वो मेरा दोस्त है,तुझे पता नहीं था इसलिए छोड़ देता हु कान्हे आईंदा से धयान रखना,'

'ये लडकियों को छेड़ रहा था,'

'साले तेरी बहने है क्या वो,साले जब उन्ही लडकियों की मटकती गांड देखकर रात को मुठियाता है और ज्ञान चोद रहा है,'नानू की इस बात पर सभी हस पड़े और कान्हे ने आखिर राहुल की कालर छोड़ दि मैंने भी चैन की साँस ली,मुझे लड़ाई झगडे बिलकुल पसंद नहीं थे जब तक बात बिगड़ ना जाये हा ये बात अलग है की जब मैं गुस्से में आता तो अच्छे अच्छो की हवा निकाल देता था,

'सालो तुम यहाँ क्या कर रहे हो 'हम युनिवर्सिटी के कैंटीन में बैठे थे,हमारे साथ विक्की नानू थे बाकि लोग अलग अलग सीटो पे बैठ चुके थे,

'वो सब छोड़ साले ये बता तुम लोगो के साथ ये जो ताजा ताजा माले है वो सब कोन है,'राहुल ने उनके साथ बाइक के झुण्ड की लडकियों को देखते हुए कहा जो अभी वही अलग अलग लडको के साथ बैठी थी,

'साले ठरकी कही के,और इनसे मिल के क्या करेगा ये सब बासी हो गयी है,अभी कैम्पस में नया बैच आया है ताज़ी माल तो वह मिलेगी नयी नयी स्कूल से निकली हुई,' मुझे दीदी की याद आ गयी उन्हें भी कोई इसी नजरो से देख रहा होगा मेरा तो जेहन ही सिहर उठा,और गुस्से से भर गया

'मादरचोदो तुम्हे इसके अलावा कोई काम धंधा नहीं है क्या जब देखो लडकिया,सालो वो भी किसी की बहने होगी,'मुझे धयान ना रहा की मेरी आवाज थोड़ी उच्ची हो गयी थी आसपास वाले हमें देखने लगे पर थोड़ी देर में सब नार्मल हो गया,

'भाई ये तो तूने सही कहा की वो किसी की बहाने होंगी पर भाई हमारी तो नहीं है ना,'और तीनो हस पड़े मैंने माथा पकड़ लिया,तभी नेहा दि वहा आ गयी और हमें वहा देख हमारे पास आ गयी उन्हें देख मैं खुश हो गया,उन्होंने सबको हाय कहा और हमारे साथ बैठ गयी.

'यार तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो,'

'बस दि लडकिया ताड़ने आये थे,'दि ने राहुल को आँख दिखाई पर मुस्कुराके

'यार नेहा कैसा रहा तेरा पहला दिन 'नानू ने कहा,'कोई प्रोब्लम हो तो हमें बताना नंबर तो है ना हमारा,'

'हा है ना,ऐसे यार यहाँ तो सब अच्छे ही है सिनिएर ने थोड़ी इंट्रोडक्शन लिया थोड़ी छेड़ खानी बस इतना तो चलता है,'

'तुम्हारे लिए चलता है यार यहाँ तो इतने में भी लोग रो देते है ,या शिकायत कर देते है,'

'हां मेरे ही क्लास के कुछ लड़के रो पड़े,'और दीदी के साथ नानू भी हस पड़ा 'ऐसे कमाल की लग रही हो तुम,'विक्की ने बड़े प्यार से कहा,

'थैंक्स यार 'दीदी ने भी बड़े प्यार से जवाब दे दिया,मैंने विक्की के नजरो का पीछा किया वो सीधे दीदी के उजोरो पर जा रहे थे मुझे ये देख थोडा गुस्सा आया,उनके ताने उजोर कुर्ती में बहुत ही कसे और मोहक लग रहे थे,दीदी को शायद इसका अहसास हो गया ,उन्होंने मुस्कान के साथ और जवाब देते हुए अपना पल्लू ठीक किया इसपर विक्की भी थोडा झेप गया..मुझे पता था की मेरे दोस्त हो या राहुल के या दीदी के सभी दीदी को लाइन मरते थे वो थी ही इतनी सुंदर ये बात दीदी और राहुल भी जानते थे पर मेरे सामने किसी ने दीदी को घूरने की हिम्मत नहीं की थी,चाहे वो कितने बड़े कमीने ही क्यों ना हो,एक दो बार मेरी और राहुल की कुछ लडको से इस बात पर लड़ाई हो चुकी थी पर दीदी ने ही बीच बचाव किया था उन्होंने हमें समझाया था की जैसे तुम लोग किसी लड़की को देखकर आकर्षित हो जाते हो वैसे ही बाकि लड़के मुझे देख कर हो जाते है उसमे बुरा कुछ भी नहीं है,मैं भी लडको से आकर्षित हो जाती हु तो इसके कारन लड़ाई मत करना हां अगर कोई मुझे तकलीफ पहुचाये या मुझे छेड़े तो तुम लोगो को मेरी तरह से कुछ भी करने की आजादी है,छोटी छोटी बातो पे लड़ोगे तो सब से लड़ना पड़ेगा,

'शायद दि ने भी मुझे नानू की हरकत को पकड़ते देख लिया,जब मैंने दि को देखा तो वो मुझे मुस्कुरा के शांत रहने को कहा,थोड़ी देर बाद ही दि का कॉलेज का ग्रुप वह पंहुचा ,दीदी ने हमें सबसे मिलवाया,ये मेरे भाई है और ये हमारे सीनियर है और ये है मनीष इसे तो तुम लोग जानते ही हो और ये है भावना,शिल्पा ये दोनों होस्टल में रहते है और ये है जगदीश ये भी होस्टल में रह रहा है ,मनीष तो नार्मल था पर बाकि तीनो डरे हुए लगे विक्की और नानू को देखकर उन्होने पूरा 90 एंगल में झुकते हुए उन्हें विश किया की सभी हस पड़े,

'हम इन लोगो को जानते है,कल रात इनकी होस्टल में इनकी खूब रैकिंग की थी,'नानू ने हस्ते हुए कहा ,

'छोडो यार तुम नेहा मनीष के दोस्त हो तो हमारे भी दोस्त हुए 'विक्की ने समझाते हुए कहा

पर राहुल की नजर भावाना पर गड गयी थी जो मैंने और दीदी ने भी देख लिया दीदी ने मुझे सर हिला कर इशारा किया ये नहीं सुधरेगा,

2.

मैं अपने कमरे में लेपी लिए मशगूल था,तभी दीदी वहा आई,उन्होंने मेरे बिस्तर पर अपने को फैलाते हुए अपना मोबाईल निकला और मैसेज पड़ने लगी कभी कभी उनकी हसी मुझे सुनाई देती थी मैंने भी मुड कर उन्हें देखा ,

'क्या हुआ दि किससे बाते हो रही है,'

'कुछ नहीं यार मेरे कॉलेज वाला ग्रुप है,साले सभी पागल हो गए है,जिसे देखो प्यार मोहोब्बत आशिकी किये जा रहा है,पढाई की तो कोई बात ही नहीं करता,'मैं दि की बात सुनकर हस पड़ा,

'क्या दी आप तो ऐसे बोल रही हो जैसे आप पढाई की बाते पसंद करती हो,'दि भी हस पड़ी,

'फिर भी यार ,और बहुत सी चीजे है दुनिया में,अच्छा एक बात बता अगर मेरा कोई बॉयफ्रेंड हो तो तुझे कोई प्रोब्लम तो नहीं होगी,'मैं आश्चर्य से दी को देखा उनके होठो में एक शरारती मुस्कान थी पर मैं थोडा सीरियस था,

'दी आप की जो खुसी हो वो करो इसमें मुझे कोई प्रोब्लम तो नहीं है,पर आप तो जानती हो ना आजकल के लड़के कैसे है,'दीदी ने मुझे अपने पास बुलाया और अपनी गोद में सोने का इशारा किया मैं उनकी गोद में सर रख लेट गया,वो मेरे बालो को सहलाने लगी,

'हा भाई जानती हु पर मेरे भाई जैसे लड़के भी तो है ना,देख अभी तो मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है पर मनीष मुझे पसंद करता है,और उसने मुझे आज ही प्रपोस किया है ,तुम्हे क्या लगता है मनीष के बारे में ,' मनीष का नाम सुन मैंने राहत की साँस ली,मैं जनता था वो बहुत सी सीधा साधा लड़का है और सालो से दीदी का दोस्त भी है,

'मनीष गुड चॉइस दि पर उस डरपोक को इतनी हिम्मत कैसे आ गयी की आपको प्रपोस कर दे,'दीदी खिलखिला के हस पड़ी

'अरे सब हमारे राहुल का कारनामा है उसी ने उकसाया है उसे,नहीं तो वो बेचारा सालो से बस दिल में रखे था,' 'साला राहुल इतना बड़ा कांड कर दिया और मुझे बताया भी नहीं साले को आने दो कल उसकी खबर लेता हु,'दीदी और मैं हस पड़े और दी ने मुझे एक प्यारी सी पप्पी गालो में रसीद की,

'आकाश एक बात बोलू,राहुल का स्वभाव कैसा भी हो पर वो हमें बहुत प्यार करता है,'

'जनता हु दी,मुझे दुःख है की जो काम आपके लिए मुझे करना था उसे उसने कर दिया,शायद मुझे पहले मनीष को हिम्मत देनी थी पर मैं आपके दिल का हाल ना समझ पाया और राहुल ने समझ लिया,'दी बड़े प्यार से मुझे देखे जा रही थी,

'नहीं बही तेरी कोई गलती नहीं है असल में मुझे भी ये कन्फर्म नहीं था की मैं उसे प्यार करती हु की नहीं अभी भी नहीं हु बस हम अच्छे दोस्त है,और मैं अभी भी आगे नहीं बदना चाहती अभी मैंने उसे हां नहीं कहा है पर मुझे ख़ुशी है की उसने कम से कम अपने दिल की बात तो कह दि,'

तभी दि के मोबाईल में एक मेसेज आया और दीदी के चहरे के भाव में बदलाव सा महसूस किया, 'क्या हुआ आप गुस्से में क्यों लग रही हो '

'कुछ नहीं बस ऐसे ही,'और दीदी ने जल्दी से मोबाईल पे उंगली चलाये,सायद वो मेसेज को मिटा रही थी,मेरी दीदी ने आजतक कोई बात

मुझसे नहीं छिपाई थी यहाँ तक की कोन उन्हें परेशां करता है से कोई छेड़ दे तो भी वो हमें इसे मजे लेकर बताती थी पर आज क्या हुआ,

'दि आप मुझसे कुछ छिपा रही है,'दि थोडी हडबडा सी गयी जैसे सभी सच बोलने वालो के साथ झूठ बोलने पर होता है, 'नहीं भाई कुछ भी तो नहीं ' तू सोजा भाई'

'ठीक है पर आज आप मेरे साथ ही सोना' दीदी के चहरे में डर साफ़ दिखाई दे रहा था,

'नहीं भाई आज थोडा काम है कॉलेज का कर के ही सो पाऊँगी ,तू सो जा मैं आकर फिर यही सो जाउंगी ,'दीदी ने कभी मुझे मना नहीं किया था साफ़ था की दाल में कुछ काला है,

'तो यही आके करो काम मैं कुछ नहीं जनता आप मेरे पास की रहोगी,'दीदी के चहरे पे मजबूरी के भाव आ गए वो मेरी बात को टाल नहीं सकती थी कभी टाला ही नहीं था,

'ठीक है मैं अपना लेपी ले के आती हु,'थोड़ी देर बाद वो लेपी ले कर आई और अपना काम करने लगी,मैं उनको पकड़ के उनके बाजु में सो गया और सोचने लगा आखिर बात क्या होगी की दीदी मुझसे झूट बोलने लगी....

3.
रात मेरी नींद टूटी जब मैंने दीदी के रोने की आवाज सुनी,मैं पहले तो सोचा की मैं उठ कर उसका कारन पुछू पर कुछ सोचकर मैं चुप चाप लेटा रहा,दीदी किसी से बात कर रही थी,वो विडिओ चैट कर रही थी,

'तुम मुझे यु जलील नही कर सकते मैं ये नहीं करुँगी,'दि ने सुबकते हुए कहा,शायद सामने वाले बन्दे ने भी कुछ कहा हो मुझे सुनाई नहीं दिया,'भाग जा मादरचोद बहुत देखे तेरे जैसे,और मेरे भाइयो की बात कर रहा है तू ,तेरी हिम्मत कैसे हुई रुक साले बहुत झेल लिया तुझे अब तो तेरा लंड काट के तेरे मुह में ठुसुंगी,'और दि ने लेपी बंद कर दि पर कुछ अपसेट लग रही थी,मुझे समझ नहीं आ रहा था की अभी तो ये सुबक रही थी अभी इतनी हिम्मत कहा से आ गयी मुझसे ये देखा ना गया और मैं उठ कर दि के सामने बैठ गया,

'ये क्या है दि आप किसको धमकी दे रहे हो आप रो क्यों रहे हो,'दीदी मेरे अचानक जग जाने से थोड़ी डर सी गयी पर थोड़ी देर में रिलेक्स हो गयी 'भाई कुछ भी तो नहीं '

'दि आप प्रोब्लम में है और मुझे नहीं बता रही मतलब कुछ तो बहुत ही गलत है,मुझे तो उसी समय समझ आ गया था जब आप ने मेरे साथ सोने से इंकार कर दिया था ,अब आप चुपचाप बताओगी या मुझे अपनी कसम देनी पड़ेगी,'

'भाई प्लीज 'दीदी ने अपना सर पकड़ते हुए कहा 'दीदी प्लीज ' मैंने भी उनके गालो को चुमते हुए कहा,और दीदी जो अभी तक इतने टेंशन में थी वो हसने लगी,

'ओके तो सुन पर पहले ये वादा कर की इसे सुनने के बाद तू कुछ भी उल्टा सीधा नहीं करेगा मैं ही पूरा मसला सम्हाल्लुंगी ,तू कुछ भी नहीं करेगा,तुझे मेरी कसम है,कसम खा मेरी दीदी ने मेरा हाथ अपने सर पे रख दिया,'

'ओके अब बताओ'

'तो सुन बात ऐसी है की हमारा एक सीनियर है परमिंदर नाम से यही होस्टल में रहता है और विक्की नानू का दोस्त भी है,उसकी बड़ी चलती है कॉलेज में इसलिए विक्की मुझे उससे मिलवाया मैं उससे देखा के

ही इम्प्रेस हो गयी साले की क्या मस्त बॉडी है और बहुत अच्छा दिखता है,पर साला कमीना निकला,पहले दिन से लाइन मारने लगा मुझे भी लगा की ऐसा बंदा तो अपने लिए ही है,कुछ दिन साथ घूमना फिरना चला पर सब ही नार्मल था बट याद है जब मैं कॉलेज के एक दोस्त की बर्थ डे पार्टी में गयी थी,'

मुझे याद आया ये कुछ दस दिन पहले की बात थी,'हा दि याद है,'मैं चिंतित सा सुन रहा था,

'बस उसी दिन हम ड्रिंक किये हुए थे और उसने मुझे अपने ग्रुप से अलग एक रूम में ले गया और मुझे प्रपोस कर दिया,मैं ड्रिंक के नशे में थी मुझे कुछ समझ नहीं आया और उसने मुझे किस कर लिया ,'दीदी रोने लगी और मैं स्तब्ध सा सुन रहा था,

'मैं पूरी तरह मदहोश थी भाई,उसने मेरे....दीदी थोड़ी ठिठक गयी,वो मेरी कुछ पिक्चर ले लिया जो मुझे किस करते हुए और थोड़ी हरकत की उसने बट मैं समय पर सम्हल गयी और वहा से भाग गयी,उस समय तो मैं वापस आ गयी पर उसके बाद से वो मुझसे बड़ी रोमांटिक बाते करने लगा मुझे लगा वो मुझसे प्यार करता है पर मैं गलत थी मुझे कुछ दिन पहले पता लगा की वो तो कई लडकियों की साथ ...छि और उसके कारन कई लडकिया कॉलेज तक छोड़ने को मजबूर हो गयी,मैंने उससे रिश्ता तोडना चाहा तो उसने वो सारी पिक्स मुझे भेजी जो उसने उस दिन ली थी और मुझसे गन्दी गन्दी बाते करने लगा,और वो मुझे अपने रूम बुलाना चाहता था,ताकि मेरे साथ भी...'दीदी का रोना बड गया था और मेरा चहरा लाल टमाटर जैसा हो चूका था,मैं इतने गुस्से में था की मेरा सारा शारीर काप रहा था दीदी को शायद इस बात की भनक लग गयी वो मेरे सीने से चिपक गयी मैंने अपना हाथ उनके सर पर रखा ,

'आज तो उसने हद ही कर दि भाई,उसने मुझे अपनी बिना कपड़ो की पिक मांगने लगा,मैंने मन किया तो उसने धमकी दि की वो मेरी पिक्स को कॉलेज में फैला देगा,मैं डर के रोने लगी लेकिन उस बहन के लवडे ने एक गलती कर दि ,दीदी मेरे सीने से निकल चुकी थी उनके भाव पूरी तरह से बदले हुए लग रहे थे,वो अब गुस्से में दिखाई दे रही थी,

'उसने मेरे भाइयो को गाली दे दि,अब तो गया काम से '

'दि प्लीज मुझे एक बार मौका दो मै मेरी भुजाये उसे मसलने के लिए तड़फ रही है,'

दीदी को मेरे गुस्से का अंदाजा हो चला था,उन्होंने मुझे एक हग दिया और मेरे चहरे हो अपने चुम्मन के पूरा गिला कर दिया,

'भाई तूने मेरी कसम खायी है ना तू फिकर मत कर मैं उसे ऐसा सबक सिखौंगी की वो मुझे क्या किसी भी लड़की को धोखा देने की नहीं सोचेगा,चल अब सो जा,पता नहीं तुझे ये बता के मेरा मन बहुत हल्का हो गया है,अब तो मैं आराम से सो जाउंगी और मेरा प्यारा भाई रात भर गुस्से में जागेगा,'दीदी खिलखिला के हस पड़ी,दीदी की बेफिक्री देख कर मैं भी थोडा सा हल्का हो गया,मुझे पता था दीदी जो करेगी ठीक ही होगा उनके पास मुझसे जादा दिमाग है ये तो सब जानते है,मैं भी अब दीदी से लिपट कर सोना ही बेहतर

समझा,दीदी तो थोड़ी देर में ही सो गयी पर मैं ना सो पाया,

दीदी की लेपी अभी भी बंद नहीं थी मैंने उससे खोला और हिस्टरी देखने लगा पहले हिडन फाइल को खोजा थोड़ी देर में एक हिडन फोल्डर मुझे मिला जिसमे कुछ फोटोज थे मैं समझ गया ये यही फोटोज है,मैंने उसे अपने मोबाईल में डाला लेपी बंद की और सो गया,लेटे लेटे मैं उन फोटोज को देखने लगा.

पहला फोटो दीदी को एक लड़का किस कर रहा था देखने से ही पता लग रहा था की दीदी भी उसके सरूर में है,उनकी आँखे बंद थी,दीदी ने एक वाइट् कलर की फ्रोक पहने हुई थी,

दुसरे फोटो को थोडा निचे से खीचा गया था जिसमे वो दीदी के बूब्स दबा रहा था,तीसरे में उसके हाथ फ्रोक के अंदर थे ,चोथे में दीदी के सफ़ेद पेंटी के अंदर,पांचवे में उसने दि के बूब्स को बहार ही कर दिया और छटवे में उन्हें चूसने भी लगा,उसके बाद की कोई पिक नहीं थी शायद इतना होने के बाद दि को होश आया हो और वो उसे छोड़ कर भागी हो,

फोटोज देख के मेरा दिमाग तो घूम ही गया मेरा धयान दीदी पर गया वो इतने चैन से सो रही थी,वो एक ढीली सी टी शर्ट और छोटी निकर पहने हुई थी जाने क्यों मेरा हाथ उनके बूब्स पर चला गया मैं उन्हें महसूस करने लगा उन्होंने कोई ब्रा नहीं पहने थी उनकी पूरी गोलाई और नरमी के अहसास ने मुझे झकझोर सा दिया मैं ये क्या कर रहा हु ,पर मैं रुका नहीं मैंने उन्हें सीधा लिटाया और उनके ऊपर चढ़ गया,मेरे तने लिंग को अहसास होते देर ना लगी की उनकी निकर के निचे भी कोई अन्तः वस्त्र नहीं है मैं उनके ऊपर चढ़ तो गया पर उनके मासूम से चहरे को देखकर मेरा तना लिंग शांत हो गया मैं उनके प्यार में डूब सा गया मैंने अपने हाथो से उनका चहरा पकड़ा और उनके चहरे चूमना चालू किया धीरे धीरे मेरे लार से उनका चहरा गिला हो गया और दीदी कसमसाई ,

'भाई क्या कर रहा है,'मैंने उनके नाजुक होठो पर अपनी उंगली रख दि ,'दि कुछ मत बोलो'

दि ने अधखुली आँखों से मुझको देखा और अपने होठो पर मुस्कान ला कर मुझे अपने बांहों में लपेट लिया अब मैं और भी तीव्रता से उनका गाल चुसे जा रहा था अनजाने ही मेरा हाथ उनके उजोरो पर चला गया और मैंने उन्हें हलके से मसल दिया दीदी के आँख अब पुरे खुल चुके थे वो मेरी इस हरकत पे आश्चर्य से भर गयी थी,

'क्या कर रहा है,हट यहाँ से पागल हो गया है क्या,'अचानक मुझे मेरी स्थिति का आभास हुआ मैंने अपना हाथ तो हटा लिया पर हटा नहीं 'दि प्यार करने दो ना प्लीज

'क्या मतलब प्यार करने दो ऐसे प्यार करते है क्या पागल मेरे बूब्स दबा रहा है तू शर्म है की नहीं कुछ मैं तेरी दीदी हु गर्ल फ्रेंड नहीं,'दीदी ने मेरा चहरा अपने हाथ में ले रखा था और मुझे पुरे आश्चर्य से देखे जा रही थी मेरे चहरे पर सिर्फ मुस्कान थी,

'सॉरी दीदी,'मैंने पुरे मासूमियत से अपने कान पकड़ लिए,दीदी अभी भी आश्चर्य में डूबी हुई थी पर मेरे कान

पकड़ने पर उन्होंने मुझे मरना शुरू कर दिया और साथ में हसने भी लगी..थोड़ी देर में ही शांत हो गयी और मुझे अपने ऊपर खीच लिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी,मेरे बालो को सहलाने लगी,

'भाई जनता है तूने क्या किया,मैं जानती हु तेरा इरादा गलत नहीं था मेरा भाई तो मेरे बारे में गलत सोच भी नहीं सकता पर क्या हुआ था तुझे,'

'मैंने आपकी और परमिंदर की पिक्स देखी,पता नहीं क्यों पर आपके बूब्स देख के मुझे उसे महसूस करने का मन किया इसलिए मैं उन्हें दबा रहा था,फिर आप पर इतना प्यार आया की आपको किस करने लगा,बस सॉरी डी शायद मैंने सीमाए लाँघ दि'पहली बार मुझे थोडा दुःख हुआ और मेरे आँखों से आंसू की बुँदे निकल पड़ी.दीदी ने फोरन वो आंसू पि लिया

'तू पागल हो गया है,इसी लिए तुझे राहुल और मैं कहते है तुझे एक गर्ल फ्रेंड की जरूरत है,अब आंसू बहाना बंद कर,यार मैं जानती हु तू अब बड़ा हो गया है और ओपोजीट सेक्स के प्रति आकर्षण तो स्वाभाविक है,और उनके अंगो के बारे में जानने की उत्सुकता भी स्वाभाविक है लेकिन इसका ये मतलब ये नहीं तू अपने दीदी के ही पर्सनल पार्ट को टच करने लगे,'दीदी बड़ी स्वाभाविक थी और चहरे पर मुस्कान लाये हुए थी,

'लग रहा है राहुल से बात करके तेरे लिए बंदी ढूँढनी पड़ेगी ,राहुल को बताउंगी तू क्या कर रहा था,'मेरी तो फट के चार हो गयी

'डी प्लीज ऐसा मत करना वो क्या सोचेगा,मुझे मर डालेगा'

'क्यों तूने कुछ पाप किया है क्या,'

'नहीं'

'तो डर क्यों रहा है,'

'दि वो क्या सोचेगा ' दि हसने लगी

'मेरे पागल भाई मैं किसी को नहीं बताउंगी तुझे पागल दिखाती हु क्या,और अब भी तुझे प्यार करना है या सो जाये 4 बज चुके है,'

'दि पता नहीं आपको देखता हु तो लगता है बात चूमता ही रहू,'मैंने बड़ी मासूमियत से कहा

'इसीलिए तो तू मेरा प्यारा भाई है,जो दिल में आया बोल दिया ,अभी तक बच्चा ही है,,मेरा प्यारा बच्चा',अब दीदी मेरे ऊपर झपट पड़ी और चूम चूम के मुझे लाल कर दिया थकने के बाद ही हम सो पाए.....

4.

कॉलेज होस्टल का कमरा लगभग दोपहर के 2 बज रहे थे,परमिंदर अपने कमरे में किसी लड़की के साथ था,लड़की सकुचाई सी एक कोने में बैठी थी पूरा होस्टल खाली था सायद सभी क्लास गए हुए थे,लड़की ने सलवार कुर्ती पहनी थी जो पिंक कलर की थी,परमिंदर अपने पायजामे में था जिससे उसका ताना लिंग साफ़ दिखाई दे रहा था,पास में पड़ी बियर की खाली बाटल रखो थी,परमिंदर की विशाल छाती बालो से ढकी थी और उसका लम्बा चौड़ा कद किसी दानव की याद दिलाता था,लड़की ने नजर उठा के एक बार उससे देखा पर फिर वो मासूम सी लड़की घबराके अपना सर झुका ली,परमिंदर उसके पास जाकर सीधे उसके ताने और कठोर उजोरो पे अपना हाथ फेरने लगा,उन्हें हाथ लगाते ही उसके चहरे पे खुसी और आँखों में चमक आ गयी उसे अहसास हुआ की लड़की ने कोई अन्तःवस्त्र नहीं पहने है,उसने निचे भी जाचने के इरादे से हाथ बढाया,और उसकी योनी का आभास पाकर खुस हो गया लेकिन लड़की के आँखों में आंसू आ गए,

'गुड आयशा जैसे मैंने कहा था तुमने मेरी बात मानी मैं खुश हुआ.'लड़की ने लगभग सुबकने लगी,

'प्लीज आप मेरी फोटोज मुझे वापस कर दीजिये,मैं अच्छे घर की लड़की हु ,मुझे बर्बाद मत करो,'लड़की जोर से रो ही पड़ी,परमिंदर को उसका रोना बहुत भाया उसने उसके उजोरो को खूब ताकत से मसला लड़की के मुह से चीख सी निकल पड़ी,और उसका रोना और बड गया,

'रो मेरी जान रो जितना चीखना है चीख,अभी तो तू शरीफ घर की लड़की है ना,फिकर मत कर अभी तो तू नयी आई है,अभी तो तुझे यहाँ 4 साल रहना है,तेरी जवानी के खूब मजे लेने है हमें तुझे भी रंडी बना ही दूंगा मैं,पहले मैं फिर जो मुझे पैसा दे दे उसकी प्यास बुझाएगी तू,रो रो रो और रो ,'परमिंदर ने उसके उजोरो को कपडे के उपर से ही काटने मसलने और चूसने लगा ,लड़की असहाय सी रोये जा रही थी वो छटपटा तो रही थी पर अपने मजबूरी और उसके ताकत के सामने पूरी तरह लाचार थी,परमिंदर की बातो को सुनकर उसका दिल दहल गया वो चिल्ला चिल्ला के रोने लगी अपने भाग्य को कोसने लगी .

एक गलती की इतनी बड़ी सजा वो भी वो लड़का जिसे वो इतना प्यार करती थी,,

'मैं जनता हु तुझे अभी तक किसी ने हाथ नहीं नहीं लगाया है पर मेरा यकीं मान जब तू बासी हो जाएगी तो इसी होस्टल के ग्राउंड में तुझे लड़के 100 रूपये दे कर भी चोदना पसंद नहीं करेंगे,' परमिंदर दरिंदो की तरह हसने लगा और वो मासूम सी जान डर से कपने लगी उसे अपने भविष्य की ऐसी स्तिथि का बोध हुआ की उसे लगा की इससे तो मर जाना ही अच्छा होगा,वो सब सोचकर स्तब्ध हो गयी उसे दर्द का अहसास होना ही खत्म हो गया वो जिन्दा लाश सी अपनी मजबूर शारीर को उसे सौप दि ,लेकिन थोडा खेलने के बाद परमिंदर हो आभास हो गया की शायद उसने जादा ही बोल दिया कही ये चिड़िया भी उड़ ना जाये ,ऐसे भी लड़की के रोना बंद करने पर उसे मजा आना बंद हो गया था,उसे लगा था जैसे वो बाकि लडकियों जैसी होगी हो उसके मसलने पर थोड़ी देर में गर्म हो जाएगी पर ये तो बहुत ही सीधी निकली,खैर जो भी हो मुझे क्या पहले इसकी सील तोड़ कर अपना पानी निकल लू,परमिंदर ने मन में सोचा और उसके सलवार ना नाडा खोलने लगा लड़की का रोना बंद था जैसे वो किसी गहन चिंतन में डूबी हो और उसने कोई भी विरोध नहीं किया,,परमिन्दर बड़ी जल्दी में था और उसने उसका सलवार निकल फेका लड़की अभी भी ऊपर से ढकी हुई थी,परमिन्द्र को उसकी चिकनी योनी दिखाई दि पर उसे अब लड़की की हलत देख कुछ करने का मन ही नहीं कर रहा था,उसने ही उसे बालो को साफ़ करने को कहा था,वो उसे चाटना चाहता था,पहले अपनी छोटी उंगली को थूक से गिला कर उसने उसकी योनी में डाला,

'बाह या चुद है साली तेरी छोटी उंगली भी नहीं जा रही है,जब मेरा घुसेगा तो तेरी चीख सुनने में मजा आयेगा मुझे,'लड़की कुछ भी ना कही उसकी योनी सुखी थी पर उसे दर्द का अहसास भी नहीं हो रहा था,उसकी पवित्रता के तेज से चमकता चहरा गुस्से में लाल हो गया था.

उसकी आँखों से बेखबर परमिंदर उसकी योनी को चुसे जा रहा था,पर लड़की के चहरे पे एक मुस्कान फ़ैल गयी उसके आँख जलते अंगारों से धधकने लगे और परमिंदर ने जैसे ही अपने मन भरने पर अपना सर उठाया उसकी आँखे देख कर वो डर ही गया,

'क्या क्या हुआ तुझे ,'लड़की हसने लगी इस हसी में खुसी नहीं व्यंग था,परमिंदर को कुछ भी समझ ना आया उसने अपने को उठाने का प्रयत्न किया पर,खाचक खाचक खाचक तीन वार परमिंदर के पीठ पर कर दिए गए थे ,मदेरचोद ये क्या है,

'परमिंदर उठ खड़ा हुआ और उससे दूर हुआ तो देखा की लड़की के हाथो में एक लम्बा पेंच कस था जो उसने पास ही के टेबल से उठाया था,लड़की की ताकत परमिंदर के सामने कुछ भी ना थी पर उस नाजुक बाला ने अपने जिस्म से नहीं अपनी रूह तक की ताकत इन वारो में लगा थी,परमिंदर बुरी तरह जखमी था पर वो ताकती भी था उसने देर ना लगायी और लड़की की तरफ झपटा,लड़की को अपने नीची दबा लिया और उसके हाथो हो दबाकर उसको हथियार छोड़ने पर मजबूर कर दिया ,

'मदेरचोद मैं तो सोचा था की तुझे आराम से खाऊंगा पर अब तो तू आज ही नीलम होगी तुझे कोठे पर बिठाऊंगा साली मुझसे होसियारी करती है,'लड़की ऐसे तो उसके निचे पूरी तरह दबी थी और अपना शारीर भी नहीं हिला पा रही थी पर उसने अपना सर उठाया और परमिंदर के चहरे हो अपने दांतों में जकड लिया और पूरी ताकत से उसे काटने लगी,अपने दांत गड़ाने के लिए उसने पूरी ताकत लगा दि,परमिंदर के चहरे से दर्द भरी चीख निकली पर वो भी जीवट आदमी था,उसने पूरी ताकत से उसका पैर फैलाया और अपना चहरा छुड़ाने की कोसिस की पर नाकाम रहा उसने पास पड़ा वही पेचकर उठा कर उसकी योनी में दे मारा ,पर छटपटाहट की वजह से वो उसकी जंघा पर जा घुसी लड़की दर्द से कहार उठी पर उसने अपना मुह नहीं खोला उसके दांत अब पूरी तरह से धस चुके थे और उनसे खून भी रिसने लगे थे,,

परमिंदर से अब ना रहा गया उसने पास पड़ा पेन उठाया और उसके चहरे पे मरने को आतुर हुआ लेकिन तभी.....

दरवाजा को किसी नि बड़ी जोर से मारा और दरवाजा खुल गया,इसे देख परमिंदर के हाथ रुक गए वहा बहुत भीड़ हो चली थी कुछ 10-15 लड़के और एक लड़की कमरे में दाखिल हुए माजरा साफ था उन्होंने ने लड़की को उससे अलग किया और लडको ने परमिंदर की पिटाई करनी शुरू कर दि,लड़की ने आयशा को सम्हाला आयशा ने लडकी को देखते ही उसे अपने बांहों में भर लिया और फूट फूट कर रोने लगी,

'नेहा देख इस दरिन्दे ने मेरी क्या हालत कर दि ,'

नेहा को आभास हुआ की आयशा ने निचे कुछ नहीं पहना है और उसके जंघा से खून भी बह रहा है ,उसने पास रखा एक टाबेल उठा उसे ढाका और राहुल को इशारा किया,रहुल तुरंत ही आयशा के कपड़ो को कलेक्ट कर नेहा और उसे ले बहार आया और बाजु वाले रूम का ताला तोडा और उन्हें वह बिठा दिया,उसने कही से फर्स्ट एड किड भी जुगाड़ लिया,

'राहुल तुझे पता है ना क्या करना है ,अब बहार जा,'

'ओके दीदी,'राहुल कमरे से बहार निकला नेहा ने कमरा बंद किया लड़के परमिंदर को मारते मारते बहार ग्राउंड तक ले जा चुके थे ,राहुल परमिंदर के रूम में जाता है और उसका लेपी और मोबाईल अपने बेग में डाल वहा से निकल जाता है,

आयशा और नेहा के साथ एक और लड़का कमरे में था,बहार ग्राउंड में परमिंदर अधमरा पड़ा था और पोलिस आने वाली थी नेहा ने आयशा से कुछ बाते अकेले में की थी आयशा अब थोड़ी शांत दिखाई दे रही थी,

'आयशा तुम जानती हो ना इसका मतलब क्या होगा,तुम एक मुसलमान लड़की हो और पोलिस केस का मतलब क्या होगा तुम्हे पता है ना,'

'अविनाश सर ये कहोगे आपसे मुझे ये उम्मीद नहीं थी,क्या मुस्लिम लड़की की कोई इज्जत नहीं होती,'नेहा के स्वर में गुस्सा था ,

'मेरा मतलब वो नहीं है नेहा पर क्या इसके घर वाले मानेंगे,मैं और मेरी पूरी पार्टी तुम्हारे साथ है,और दूसरी पार्टीया भी हमारा सपोर्ट करेंगी पर तुम अगर थोड़ी भी कमजोर हुई तो हम कुछ नहीं कर पाएंगे और वो साफ़ साफ़ बच जायेगा,'

'सर मैं तैयार हु ,आप नहीं जानते वो कितना बड़ा दरिंदा है अगर बात सिर्फ मेरे जिस्म के इस्तमाल की होती तो शायद मैं उससे नहीं लडती,मेरी जैसी सीधी साधी लड़की अपना जिस्म उसे सौप देती पर वो दरिंदा तो मेरी पूरी जिन्दगी ही नारख बनाने वाला था ,मुझे बिकाऊ बनाने वाला था ,पता नहीं मुझ जैसी कितनी लडकिया इसका शिकार हुई होंगी ,(नेहा को अपनी याद आ गयी पर उसने कुछ भी एक्सप्रेस नहीं किया,)मुझे उन सब के लिए लड़ना है चाहे मेरे घर वाले माने या नहीं पर मैं इस दरिन्दे को सजा दिलवा के रहूंगी,'आयशा के चहरे पर दृढ़ता के भाव थे ,

'भगवान तुम्हारे साथ है मेरी बहन,तुम बहुत बहुद्दुर हो मैं तुम्हे न्याय दिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दूंगा,पुलिस आती ही होगी ,जल्द से जल्द तुम्हारा मेडिकल टेस्ट भी कराना होगा,आज देखो तो भगवान की लीला की नेहा ने हमें परमिंदर के बारे में बताया की वो

लडकियों को गन्दी गन्दी मेसेज करता है और हम उसे सबक सिखाने यहाँ पहुच गए ,(नेहा ने आयशा को आँखों से इशारा किया)और लड़ाई की आवाजे सुन दवाजा तोड़ दिया,'

अविनाश ने अपना हाथ प्यार से आयशा के सर पर और वहा से निकल गया,

अविनाश तिवारी ,यूनिवर्सिटी का प्रेसिडेंट है,अपनी राजनीती,अच्छाई ,समाजसेवा और कर्मठता के कारन प्रसिद्द था,और अपने इन्ही गुणों के कारन कॉलेज की ही नहीं जिले की राजनीती में अच्छी पहुच रखता था,बड़े बड़े नेताओ से उसकी पहचान थी और इसी कारन नेहा को उसके स्कूल के दिनों से वो आकर्षित करता रहा वो नेहा का पहला क्रास था,और उसके ही कहने पर नेहा ने स्कूल चुनाव लड़े थे और अपनी सफलता दर्ज करायी थी ,उसे इस यूनिवर्सिटी का सबसे पावरफुल व्यक्ति कहे तो अतिशोक्ति नहीं होगी,उसने नेहा से कई बार कहा था की वो उसे भाई बोले पर नेहा उसे सर कहती थी और उसके सभी कार्यक्रमों में बढचढ के हिस्सा लेती थी,अविनाश 6'2" की हाईट वाला चौड़ा लड़का था,माथे पर लम्बा लाल टिका और सफ़ेद कुरता जींस उसकी पहचान थी,ऐसे तो लडकिय उसपर लट्टू थी पर उसे समाज सेवा का ही नशा था,उसके साथ होने से नेहा और आयशा निश्चिंत थे क्योकि वो सच के लिए किसी से भी भीड़ जाने से परहेज नहीं करता था,...

इधर राहुल होस्टल के पास बने गार्डन में बेचैन सा अपने एक दोस्त के साथ बैठा था उसका दोस्त अपने चश्मे को बार बार सीधा कर रहा था और सोच रहा था की ये साला कहा फस गया पर राहुल की बात ना मानने का नतीजा है बहुत बड़ी सजा ,

'चल बेटा काम पर लग जा और इस मोबाईल और लेपी के पासवर्ड जल्दी खोल दे,मुझे पूरा डाटा इस हार्ड ड्राइव में चाहिए ,'

'राहुल भाई तू मुझसे गलत काम तो नहीं करवा रहा है ना,सुबह से यहाँ बैठा रखा है और अन आ रहा है,'

'साले चूतिये जो बोल रहा हु वो कर ना,नेहा दि को बताऊँ क्या की तू होसियारी मार रहा है,'

'कर रहा हु ना भाई नेहा को बीच में क्यों ला रहा है,'

उस लड़के ने अपनी उंगलिया चलानी शुरू की और अपने बैग से ना जाने कितने टूल्स निकले,ये हमारे कंप्यूटर जीनियस देबुजीत बाबू थे प्यार से लोग इन्हें बाबु ही कहते थे बाबु इसलिए क्योकि ये बंगाली थे और नेहा के क्लास में पड़ते थे,नेहा पर बड़ा क्रश था बन्दे को पर था एक नम्बर का फत्तू अभी कंप्यूटर साइंस में ही इंजीनियरिंग का स्टूडेंट था,

'अबे बंगाली जल्दी कर ना,टाइम नहीं है मेरे पास ये सब वापस रख के आना है मुझे,'

'कर रहा हु ना भाई,हा हो गया ,पूरा डेटा चाहिए क्या,'

'हा कुछ भी रह गया तो तेरी खाल खिचवा दूंगा ,'देबू ने गुस्से से राहुल को देखा,

'अरे मेरे प्यारे बाबु,इस काम के बदले तेरी नेहा दि से डेट फिक्स करा दूंगा,लेकिन किसी को कुछ बताना मत 'देबू का चहरा डेट सुनकर ही शर्म से लाल हो गया,

'सच्ची भाई,' 'अरे हा रे मेरे कंप्यूटर जीनियस ' देबू ने उंगली और तेजी से चलानी

सुरु की

राहुल और नेहा दीदी अगर टीम की तरह कम करे तो कमल कर देते थे ,मैं किसी से ऐसी बाते नहीं कर पता था और मेरे सामने कोई नेहा दि का नाम भी लेने से पहले सोचता था,राहुल फुल मस्ती में नेहा दि के नाम पर लोगो से काम निकलवाता था और दीदी भी उसका सपोर्ट करती थी,

'ले भाई हो गया तेरा काम,'देबू ने खुश होते हुए कहा

'गुड अब इसका सारा डेटा उड़ा दे,और इस ड्राइव का सारा डेटा मेरे लेपी में कॉपी कर दे ,'

'यार सब मैं ही करू क्या ,मैं इसे फार्मेट करता हु तू अपने में कॉपी कर ले ,' 'ओके बाबु 'राहुल ने शरारत से देबू के गालो में हाथ मार दिया और देबू भी हस पड़ा,

सारा कम हो चूका था ,राहुल ने देबू को फोन करने बोल भागता होस्टल पहुचा वो परमिंदर के रूम पहुच लेपी और मोबाईल रख दिया और दुसरे रूम में अविनाश था उसने उसके बहार निकलने का इंतजार किया ,राहुल को देख नेहा खुश हो गयी

'भाई काम हो गया ना ,'राहुल ने ड्राइव नेहा को पकड़ा दि नेहा ने उसे अपने बैग में रख लिया,

'गुड भाई,आयशा अब तुम्हे डरने की कोई जरूरत नहीं है सभी लडकियों की जिंदगी अब सेफ है मैं इससे चेक करके सब फोर्मेट कर दूंगी,अगर इसमें सभी फोटोज नहीं हुई तब शायद प्रोब्लम होगी,'

'नेहा अब मुझे किसी बदनामी का दर नहीं है,चाहे वो मेरी फोटोज इन्टरनेट में ही क्यों ना डाल दे,'

'नहीं दि इसके अलावा उसके पास कोई और डिवाइस नहीं है जिसमे हो सेव करके रख सके मैंने पूरा रूम चेक कर लिया है,'

'गुड और इसके अलावा और कही कॉपी तो नहीं किया ना,और देबू को कोई शक तो नहीं हुआ ना ,'

'नहीं दि यही सिंगल कॉपी है,(झूट बोल दिया)और देबू के साथ एक चाय पि लेना मैं आपकी डेट फिक्स कर के आया हु उसके साथ,'नेहा के चहरे में स्माइल आ गयी

'सही किया मैं उसे सम्हाल लुंगी,चलो आयशा बहार चलते है,'

5.

राहुल अपने कमरे में बैठा है और अपनी लेपी सुबह की डाली गयी हर फोल्डर को चेक कर रहा है अभी तक उसे कुछ हाथ नहीं लगा फालतू चीजो को कटता जा रहा है,अचानक उसकी आंखे चमकी उसे एक हिडन फोल्डर दिखाई दिया,उसे खोलते ही वो दंग रह गया करीब 15 लडकियों के नाम के फोल्डर बने हुए थे,उसे तो लगा साला अब तो उन मजा आ जायेगा,पर एक फोल्डर को देखते ही उसकी सांसे रुक गयी नाम था नेहा,,नेहा ने राहुल को परमिंदर के बारे कुछ नहीं बताया था,उसे बार इतना पता था की दीदी की सहेलियों को परेशान करता था,उसने कापते हाथो से उस फोल्डर को खोला तो उसे और बड़ा साक लगा इसमें बहुत से फोटोज थे और ना सिर्फ फोटोज विडिओ भी थे,उसने डूबे हुए दिल से एक विडिओ ऑन किया विडिओ ने दीदी स्कूल की यूनिफार्म में थी उसे फिर बड़ा साक लगा यानि दि परमिंदर को स्कूल से जानती थी हमें पता कैसे नहीं लगा,दीदी बड़े ही इठलाते हुए एक रूम में उछल खुद कर रही थी ये कमरा तो होस्टल का नहीं है ,डेट भी विडिओ के साथ छपे हुए थे यानि एक साल लगभग पुरानी है,दीदी 12th में रही होगी,तभी दीदी एक बड़े डबल बेड में बैठ जाती है और परमिंदर अपना केमरा एक जगह सेट कर देता है दीदी और वो बेड उसमे साफ साफ दिखाई दे रहे थे,वो उनकी स्कर्ट के अंदर हाथ घुसता है,

'नहीं ना अभी नहीं शादी के बाद करना,'पर परमिंदर रुकता नहीं और उनकी जन्घो को सहलाता हुआ उन्हें किस करने लगता है,

'जान मैंने तुम्हे बिना पेंटी के आने को कहा था ना तुम पहन के क्यों आई .

'शायद उसके हाथ पेंटी तक पहुच चुके थे दीदी की आंखे बंद थी पर वो एक हाथ से उसके हाथो को अपने योनी को मसलने से रोक रही थी इसी खीचातानी में स्कर्ट पूरा ऊपर उठ जाता है और नेहा की जंघे साफ दिखने लगती है उसकी मदहोश आवाज परमिंदर के होठो में दबी है पर वो अब भी अपना हाथ नहीं हटा रही थी ,परमिंदर उनकी पिंक पेंटी के उपर से योनी को मसल रहा था,जिससे काम रस से पेंटी भीग चुकी थी पर वो दीदी के विरोध के कारन हाथ अंदर नहीं ले जा पा रहा था,

'तुम्हारे बोलने से मैं बिना पेंटी के घुमुंगी क्या ,'दीदी दूर भागती हुई बोली और बाथरूम में चली गयी, तभी परमिंदर का फोन बज उठता है ,परमिंदर लेट जाता है पर केमरा के पास ही उसका चेहरा दिखता है साइड से,

'कमाल की लड़की दिलाया है साले,अभी तक अनछुई है पर जल्द्दी ही सील तोडूंगा फिर मिल के खायेंगे साली को ,'थोड़ी देर रूककर,'तू फिकर मत कर चिड़िया नयी है उछालेगी ही पर वादा है मेरा तुम दोनो ने मुझसे इसकी दोस्ती करायी है तो तुम दोनों को जरुर भोग लगवाऊंगा,साली कॉलेज आने दे इसे फिर दौड़ा दौड़ा के होस्टल में पेलेंगे,'एक गन्दी हसी उसके चहरे पर आ जाती है,राहुल कपने लगता है दोनों ने दोस्ती करायी इसका मतलब क्या हुआ,उसका मन घबराने लगता है,तभी नेहा बहार आती है परमिंदर फिर से उसपर टूट पड़ता है,

और इस बार वो उसके उपर लेता हुआ होता है,उसे किस कर रहा होता है,दीदी उसे किस तो कर रही है अपने निचे उनके हाथो का संघर्ष जारी है,उनका स्कर्ट पूरी तरह ऊपर था और जंघे चमक रही थी आखिर परमिंदर अपना हाथ अंदर घुसाने में कामियाब हो जाता है और ये क्या दीदी टूट सी जाती है अपना हाथ निचे से हटाकर परमिंदर के सर पर ले आती है ,वो सर को सहलाने लगती है दोनों की जीभे एक दुसरे में मिली हुई है और दीदी की आंखे बंद है,परमिंदर अपना खेल जरी रखता है और पेंटी पकड़कर निचे खीच देता है ये अचानक हुआ झटका दीदी को समझ आय तब तक देर हो चुकी थी और उनकी पेंटी कमर से नीची और जन्घो के अंत तक आ गयी वो कसमसाकर अपने हाथो को निचे लाती है पर कोई फायदा नहीं होने वाला था,थोड़ी देर के लिए किस टूटती है नेहा गुस्से से देखती है पर परमिंदर फिर से उसे प्यार से किस करने लगता है ,और एक उंगली उनकी योनी में घुसा देता है ,दीदी थोड़ी देर छटपटाती है पर उनका हाथ फी उसके सर में जादा जोर से पकड़ लेती है ,ये पूरा दृश्य राहुल को उत्तेजित करने को काफी था उसने अपने लिंग को बहार निकल लिया दीदी की बिना बालो की योनी को देख और उसमे घुसते एक उंगली को देख राहुल का लिंग फटने को हो गया उसने अपने हाथ से इसे पकड़ा,इधर परमिंदर अपना पायजामा निचे करता है उसने अंदर कुछ पहना ही नहीं होता,पायजामा के निचे होने के आभास से नेहा बहुत जोरदार विरोध दिखाती है पर परमिंदर दोनों हाथो से उसका सर पकड़ा है और उसके मुह में अपनी जीभ

घुसाई है,नेहा इतना विरोध कर रही थी की परमिंदर को अपना हाथ निचे ले जाने का मौका ही नहीं मिल रहा था और उसका लिंग बार बार फिसल जाता था वो अपना हाथ निचे लाकर सेट करता तो नेहा कमर हिलाकर और दोनों हाथो को निचे लाकर उसे रोकती वो उसके हाथो को ऊपर एक हाथ से पकडे हुए था पर फिर भी वो कामियाब ना हो पाया,आखिर तंग आकर उसने अपने दोनों हाथो से फिर कोसीसी की पर इस बार नेहा का हाथ आजाद हो गया और उसने एक जोरदार धक्का परमिंदर को मर दिया,परमिंदर गुस्से में अपना हाथ उठाया पर ना जाने क्या सोचकर रुक गया ,

'जान प्लीज् तुम मुझसे प्यार नहीं करती क्या,'

'आप ये क्या कर रहो प्यार करती हु बहुत करती हु पर ये सब नहीं ,प्यार करती हु तभी सबसे झूठ बोलकर इस होटल में आपसे मिलने आ गयी ,और आप मेरे साथ छि ,'दि ने तुरंत अपने कपडे ठीक किये और बाथरूम में घुस गयी ,परमिंदर बहुत गुस्से में लग रहा था उनके अंदर जाने के बाद ,

'छि साली फिर बच गयी लगता है साली के साथ अब दूसरा रास्ता ही अपनाना पड़ेगा,'

तभी राहुल का फोन बजा,उसने स्क्रीन में देखा आकाश का फोन था वो ग्लानी से भर गया,उसने अपनी हालत देखि तो उसके आँखों में आंसू आ गए ,

'थैंक्स मेरे भाई तूने बड़ा कम कर दिया दीदी का ,'

'दीदी का ??,' राहुल के आवाज में आश्चर्य था की दीदी ने मुझे भी परमिंदर के बारे में बताया है क्या वो भूल ही गया की दीदी ने उसे भी अपने बारे में नहीं बताया है,

'हा कॉलेज की हर लडकिया तेरी दीदी ही तो है ,' दीदी की आवाज आई स्पीकर आन था

'अच्छा आप भी है साथ,'

'क्या कर रहा है,'राहुल थोडा ठिठक गया

'कुछ नहीं भाई बस तुम लोग क्या कर रहे हो ,आज तो दि ने उस बेचारी लड़की को बचा ही लिया,'

'कुछ नहीं बस सोने की तयारी,सोचा तुझे कॉल कर लू तू घर भी नहीं आया ,मैं तो दि को लपेट के पकड़ा हु तू अकेला सो बेटा ,मैंने दि को किस करते हुए कहा,'

'भाई मैं सो रहा हु थोडा थक सा गया हु,'

'तुझे क्या हुआ बे सब ठीक तो है ना यही आजा तू भी '

राहुल का गला भर रहा था ,उसने रखना ही ठीक समझा,

'भाई कुछ नहीं हुआ मैं कल मिलता हु,'

राहुल स्क्रीन की तरफ देखता है पर उसे अब इतनी हिम्मत नहीं हुई की वो पूरा देखे उसने ये सभी फाइल डिलीट करने की सोची पर उसे आया वो दो लोग जिन्होंने दीदी को परमिन्दर से मिलवाया,उसके लिए ये ख़तम करना आसान नहीं था आखिर उसने निश्चय किया की वो सभी को देखेगा और सच का पता लगाएगा...पर अभी उसने सोना ही ठीक samjha

6.
राहुल जिम में प्रवेश करता है,आज वो चौकन्ना सा है मैं आदतन सुबह जल्दी ही आ गया था,दीदी थोडा लेट से आती थी और आखिर में आता था राहुल .

'क्यों बे कल कैसे उदास था,'राहुल मेरी बात सुनकर चौक जाता है,

'कुछ नहीं भाई बस ऐसे ही थोडा थक गया था,दीदी कहा है,'उसने इधर उधर नजरे घुमाते हुए पूछा,

'अभी आई है ,एरोबिक कर रही होगी तू भी जा साले कुछ करेगा तो नहीं तू जाके लडकियों के पिछवाड़े देख ,'राहुल का व्यवहार कुछ बदला सा था मेरी बात सुन वो नजर झुकाके आगे बाद गया और एरोबिक रूम की तरफ जाने लगा,मुझे कुछ शक तो हुआ पर मैंने उतना गौर नहीं किया,राहुल जा के थोड़ी दूर खड़ा हो दीदी को देख रहा था वो दौड़ रही थी,पास ही उसने नानू और विक्की को देख लिया,उनको देखते ही राहुल की भव चढ़ गयी,दोनों नेहा के पिछवाड़े को ही घूरे जा रहे थे वह ऐसे तो और भी लडकिया थी,पर वो दोनों नेहा को देख कर ही लार टपका रहे थे ,,,राहुल को पास आता देख नानू ने विक्की को कोहनी से मारा और दोनों राहुल की तरफ मुखर हुए,

'क्या भाई आ गया,देख क्या मस्त गांड है साली के ,'नानू ने एक लड़की के तरफ इशारा करते हुए कहा,

राहुल अपने विचारो में ही खो गया,'साला आकाश सही कहता था,ये जब दीदी को देख रहे थे तो मुझे इनपर गुस्सा आ रहा था और मैं खुद कितनी लडकियों को घूरते रहता हु ,हे भगवन क्या मैं गलत था या ये सही है ,नहीं घुरना गालत तो नहीं हो सकता पर अगर इन्होने दीदी को परमिंदर के पास सौपा था तो मैं इन्हें नहीं छोडूंगा,अब मुझे ही ये पता लगाना है,और अब मुझे भी नार्मल रहना पड़ेगा ताकि किसी को शक ना हो जाए,'

आज पूरा दिन राहुल बस लोगो को देख रहा था,मैंने भी ये देखा और उससे बात करना ही ठीक समझा,

'क्या हुआ भाई,अब तो बता दे क्या हुआ है,'मैंने राहुल के पास जाते हुए कहा,नानू भी उसके साथ ही था,

'कुछ नहीं भाई,बस थोडा दिल भरा भरा लग रहा है उस लड़की को देखकर ,साले परमिंदर ने तो उसकी जिंदगी ही बिगड़ दि थी,'राहुल का चहरा मुरझा सा गया,नानू उसे आश्चर्य से देख रहा था,

'अरे यार मेरा भाई इतना सेंसेटिव है मुझे तो पता ही नहीं था,'मैंने राहुल को हलकी सी चपात लगाते हुए कहा,

'साला मुझे भी नहीं पता था की ये इतना दुखी भी हो सकता है,'नानू ने हलकी हसी हस दि ..

राहुल नानू की तरफ देखते हुए कुछ अलग भाव ले आया,

'परमिंदर तो तुम्हारा दोस्त था ना तुम्हे नहीं पता था क्या की वो क्या करता है,'अब चौकाने की बरी नानू की थी,

'अरे भाई हमें तो पता था की ये लड़की बाज है,जैसे हम है पर ये नहीं पता था की ये इतना कमीना है की लडकियों को गंदे मैसेज करता है,और जबर्दस्ती भी करेगा,हमें तो लगता था की वो लडकिया पटाता है और उनसे खेलता है,और साला उनकी विडिओ भी निकलता है ये हमें कहा पता था,'उसकी बात सुनकर मैं और राहुल चौक गए

'विडिओ बनता है ???तुझे किसने बताया उसके पास से तो कुछ नहीं मिला था ना,कोई फोटो या विडिओ,'मैंने प्रश्न दागा जिसे सुनकर वो थोडा सकुचा गया,

'भाई होस्टल के लड़के बता रहे थे और अब हमें उससे क्या मतलब है ,'नानू ने अपनी सफाई दि

'साले जब तुझे पता था की वो अच्छा लड़का नहीं है तो तूने दीदी की दोस्ती उससे क्यों कराई ,'अब चौकाने की बरी राहुल की थी ,

'इसने दोस्ती करायी,कब'राहुल के चहरे पर गुस्सा साफ़ दिख रहा था जिसे देखकर नानू भी एक बारी डर गया,

'अरे दीदी ने ही तो बताया था मुझे ,करीब एक महीने पहले इन दोनों ने दोस्ती करायी थी,'

"एक महिना पहले यानि दीदी ने आकाश से झूट बोला है,कैसे पता करू की सच क्या है साला विडिओ भी देख नहीं पा रहा दीदी की ऐसी हालत देखि नहीं जाती अब क्या करू भगवान ,"राहुल ने मन में सोचा,

'भाई नेहा को तो जानते हो ना मैं और विक्की परमिन्दर से बात कर रहे थे और उसी समय नेहा आ गयी तो इंट्रो कराया था,पर नेहा तो बातूनी है उससे घुल मिल गयी और पता नहीं आगे क्या हुआ,मुझे बस इतना ही पता है,'मुझे बात नार्मल लगी पर राहुल की आँखों में अब भी शक था,

तभी विक्की और नेहा दीदी भी बात करते हुए वह पहुचे दोनों हस हस के बात कर रहे थे राहुल की भव फिर से चढ़ गयी,'क्यों क्या हो रहा है अरे आकाश आज तू भी इनके साथ मेरी बात को सीरियस ले लिया क्या 'दीदी ने हसकर कहा,

'कौन सी बात दि ,' 'अरे वही गर्ल फ्रेंड वाली 'दीदी ने आँख मारते हुए कहा ,

'क्या दि आप भी जब कोई लड़की पसंद आएगी तो सबसे पहले आप को ही बताऊंगा इन चिड़ीमारो के साथ मुझे लड़की नहीं देखनी साला मेरी ही बदनामी हो जाएगी,'मेरी बात पर दीदी हसने लगी और बाकियों का चहरा उतर गया,

7.

राहुल अपने कमरे में बैठा है और अपनी लेपी सुबह की डाली गयी हर फोल्डर को चेक कर रहा है अभी तक उसे कुछ हाथ नहीं लगा फालतू चीजो को कटता जा रहा है,अचानक उसकी आंखे चमकी उसे एक हिडन फोल्डर दिखाई दिया,उसे खोलते ही वो दंग रह गया करीब 15 लडकियों के नाम के फोल्डर बने हुए थे,उसे तो लगा साला अब तो उन मजा आ जायेगा,पर एक फोल्डर को देखते ही उसकी सांसे रुक गयी नाम था नेहा,,नेहा ने राहुल को परमिंदर के बारे कुछ नहीं बताया था,उसे बार इतना पता था की दीदी की सहेलियों को परेशान करता था,उसने कापते हाथो से उस फोल्डर को खोला तो उसे और बड़ा साक लगा इसमें बहुत से फोटोज थे और ना सिर्फ फोटोज विडिओ भी थे,उसने डूबे हुए दिल से एक विडिओ ऑन किया विडिओ ने दीदी स्कूल की यूनिफार्म में थी उसे फिर बड़ा साक लगा यानि दि परमिंदर को स्कूल से जानती थी हमें पता कैसे नहीं लगा,दीदी बड़े ही इठलाते हुए एक रूम में उछल खुद कर रही थी ये कमरा तो होस्टल का नहीं है ,डेट भी विडिओ के साथ छपे हुए थे यानि एक साल लगभग पुरानी है,दीदी 12th में रही होगी,तभी दीदी एक बड़े डबल बेड में बैठ जाती है और परमिंदर अपना केमरा एक जगह सेट कर देता है दीदी और वो बेड उसमे साफ साफ दिखाई दे रहे थे,वो उनकी स्कर्ट के अंदर हाथ घुसता है,

'नहीं ना अभी नहीं शादी के बाद करना,'पर परमिंदर रुकता नहीं और उनकी जन्घो को सहलाता हुआ उन्हें किस करने लगता है,

'जान मैंने तुम्हे बिना पेंटी के आने को कहा था ना तुम पहन के क्यों आई .

'शायद उसके हाथ पेंटी तक पहुच चुके थे दीदी की आंखे बंद थी पर वो एक हाथ से उसके हाथो को अपने योनी को मसलने से रोक रही थी इसी खीचातानी में स्कर्ट पूरा ऊपर उठ जाता है और नेहा की जंघे साफ दिखने लगती है उसकी मदहोश आवाज परमिंदर के होठो में दबी है पर वो अब भी अपना हाथ नहीं हटा रही थी ,परमिंदर उनकी पिंक पेंटी के उपर से योनी को मसल रहा था,जिससे काम रस से पेंटी भीग चुकी थी पर वो दीदी के विरोध के कारन हाथ अंदर नहीं ले जा पा रहा था,

'तुम्हारे बोलने से मैं बिना पेंटी के घुमुंगी क्या ,'दीदी दूर भागती हुई बोली और बाथरूम में चली गयी, तभी परमिंदर का फोन बज उठता है ,परमिंदर लेट जाता है पर केमरा के पास ही उसका चेहरा दिखता है साइड से,

'कमाल की लड़की दिलाया है साले,अभी तक अनछुई है पर जल्द्दी ही सील तोडूंगा फिर मिल के खायेंगे साली को ,'थोड़ी देर रूककर,'तू फिकर मत कर चिड़िया नयी है उछालेगी ही पर वादा है मेरा तुम दोनो ने मुझसे इसकी दोस्ती करायी है तो तुम दोनों को जरुर भोग लगवाऊंगा,साली कॉलेज आने दे इसे फिर दौड़ा दौड़ा के होस्टल में पेलेंगे,'एक गन्दी हसी उसके चहरे पर आ जाती है,राहुल कपने लगता है दोनों ने दोस्ती करायी इसका मतलब क्या हुआ,उसका मन घबराने लगता है,तभी नेहा बहार आती है परमिंदर फिर से उसपर टूट पड़ता है,

और इस बार वो उसके उपर लेता हुआ होता है,उसे किस कर रहा होता है,दीदी उसे किस तो कर रही है अपने निचे उनके हाथो का संघर्ष जारी है,उनका स्कर्ट पूरी तरह ऊपर था और जंघे चमक रही थी आखिर परमिंदर अपना हाथ अंदर घुसाने में कामियाब हो जाता है और ये क्या दीदी टूट सी जाती है अपना हाथ निचे से हटाकर परमिंदर के सर पर ले आती है ,वो सर को सहलाने लगती है दोनों की जीभे एक दुसरे में मिली हुई है और दीदी की आंखे बंद है,परमिंदर अपना खेल जरी रखता है और पेंटी पकड़कर निचे खीच देता है ये अचानक हुआ झटका दीदी को समझ आय तब तक देर हो चुकी थी और उनकी पेंटी कमर से नीची और जन्घो के अंत तक आ गयी वो कसमसाकर अपने हाथो को निचे लाती है पर कोई फायदा नहीं होने वाला था,थोड़ी देर के लिए किस टूटती है नेहा गुस्से से देखती है पर परमिंदर फिर से उसे प्यार से किस करने लगता है ,और एक उंगली उनकी योनी में घुसा देता है ,दीदी थोड़ी देर छटपटाती है पर उनका हाथ फी उसके सर में जादा जोर से पकड़ लेती है ,ये पूरा दृश्य राहुल को उत्तेजित करने को काफी था उसने अपने लिंग को बहार निकल लिया दीदी की बिना बालो की योनी को देख और उसमे घुसते एक उंगली को देख राहुल का लिंग फटने को हो गया उसने अपने हाथ से इसे पकड़ा,इधर परमिंदर अपना पायजामा निचे करता है उसने अंदर कुछ पहना ही नहीं होता,पायजामा के निचे होने के आभास से नेहा बहुत जोरदार विरोध दिखाती है पर परमिंदर दोनों हाथो से उसका सर पकड़ा है और उसके मुह में अपनी जीभ

घुसाई है,नेहा इतना विरोध कर रही थी की परमिंदर को अपना हाथ निचे ले जाने का मौका ही नहीं मिल रहा था और उसका लिंग बार बार फिसल जाता था वो अपना हाथ निचे लाकर सेट करता तो नेहा कमर हिलाकर और दोनों हाथो को निचे लाकर उसे रोकती वो उसके हाथो को ऊपर एक हाथ से पकडे हुए था पर फिर भी वो कामियाब ना हो पाया,आखिर तंग आकर उसने अपने दोनों हाथो से फिर कोसीसी की पर इस बार नेहा का हाथ आजाद हो गया और उसने एक जोरदार धक्का परमिंदर को मर दिया,परमिंदर गुस्से में अपना हाथ उठाया पर ना जाने क्या सोचकर रुक गया ,

'जान प्लीज् तुम मुझसे प्यार नहीं करती क्या,'

'आप ये क्या कर रहो प्यार करती हु बहुत करती हु पर ये सब नहीं ,प्यार करती हु तभी सबसे झूठ बोलकर इस होटल में आपसे मिलने आ गयी ,और आप मेरे साथ छि ,'दि ने तुरंत अपने कपडे ठीक किये और बाथरूम में घुस गयी ,परमिंदर बहुत गुस्से में लग रहा था उनके अंदर जाने के बाद ,

'छि साली फिर बच गयी लगता है साली के साथ अब दूसरा रास्ता ही अपनाना पड़ेगा,'

तभी राहुल का फोन बजा,उसने स्क्रीन में देखा आकाश का फोन था वो ग्लानी से भर गया,उसने अपनी हालत देखि तो उसके आँखों में आंसू आ गए ,

'थैंक्स मेरे भाई तूने बड़ा कम कर दिया दीदी का ,'

'दीदी का ??,' राहुल के आवाज में आश्चर्य था की दीदी ने मुझे भी परमिंदर के बारे में बताया है क्या वो भूल ही गया की दीदी ने उसे भी अपने बारे में नहीं बताया है,

'हा कॉलेज की हर लडकिया तेरी दीदी ही तो है ,' दीदी की आवाज आई स्पीकर आन था

'अच्छा आप भी है साथ,' 'क्या कर रहा है,'राहुल थोडा ठिठक गया

'कुछ नहीं भाई बस तुम लोग क्या कर रहे हो ,आज तो दि ने उस बेचारी लड़की को बचा ही लिया,'

'कुछ नहीं बस सोने की तयारी,सोचा तुझे कॉल कर लू तू घर भी नहीं आया ,मैं तो दि को लपेट के पकड़ा हु तू अकेला सो बेटा ,मैंने दि को किस करते हुए कहा,'

'भाई मैं सो रहा हु थोडा थक सा गया हु,' 'तुझे क्या हुआ बे सब ठीक तो है ना यही आजा तू भी '

राहुल का गला भर रहा था ,उसने रखना ही ठीक समझा,'भाई कुछ नहीं हुआ मैं कल मिलता हु,'

राहुल स्क्रीन की तरफ देखता है पर उसे अब इतनी हिम्मत नहीं हुई की वो पूरा देखे उसने ये सभी फाइल डिलीट करने की सोची पर उसे आया वो दो लोग जिन्होंने दीदी को परमिन्दर से मिलवाया,उसके लिए ये ख़तम करना आसान नहीं था आखिर उसने निश्चय किया की वो सभी को देखेगा और सच का पता लगाएगा...पर अभी उसने सोना ही ठीक समझा...

8.
राहुल जिम में प्रवेश करता है,आज वो चौकन्ना सा है मैं आदतन सुबह जल्दी ही आ गया था,दीदी थोडा लेट से आती थी और आखिर में आता था राहुल .

'क्यों बे कल कैसे उदास था,'राहुल मेरी बात सुनकर चौक जाता है,

'कुछ नहीं भाई बस ऐसे ही थोडा थक गया था,दीदी कहा है,'उसने इधर उधर नजरे घुमाते हुए पूछा,

'अभी आई है ,एरोबिक कर रही होगी तू भी जा साले कुछ करेगा तो नहीं तू जाके लडकियों के पिछवाड़े देख ,'राहुल का व्यवहार कुछ बदला सा था मेरी बात सुन वो नजर झुकाके आगे बाद गया और एरोबिक रूम की तरफ जाने लगा,मुझे कुछ शक तो हुआ पर मैंने उतना गौर नहीं किया,राहुल जा के थोड़ी दूर खड़ा हो दीदी को देख रहा था वो दौड़ रही थी,पास ही उसने नानू और विक्की को देख लिया,उनको देखते ही राहुल की भव चढ़ गयी,दोनों नेहा के पिछवाड़े को ही घूरे जा रहे थे वह ऐसे तो और भी लडकिया थी,पर वो दोनों नेहा को देख कर ही लार टपका रहे थे ,,,राहुल को पास आता देख नानू ने विक्की को कोहनी से मारा और दोनों राहुल की तरफ मुखर हुए,

'क्या भाई आ गया,देख क्या मस्त गांड है साली के ,'नानू ने एक लड़की के तरफ इशारा करते हुए कहा,

राहुल अपने विचारो में ही खो गया,'साला आकाश सही कहता था,ये जब दीदी को देख रहे थे तो मुझे इनपर गुस्सा आ रहा था और मैं खुद कितनी लडकियों को घूरते रहता हु ,हे भगवन क्या मैं गलत था या ये सही है ,नहीं घुरना गालत तो नहीं हो सकता पर अगर इन्होने दीदी को परमिंदर के पास सौपा था तो मैं इन्हें नहीं छोडूंगा,अब मुझे ही ये पता लगाना है,और अब मुझे भी नार्मल रहना पड़ेगा ताकि किसी को शक ना हो जाए,'

आज पूरा दिन राहुल बस लोगो को देख रहा था,मैंने भी ये देखा और उससे बात करना ही ठीक समझा,

'क्या हुआ भाई,अब तो बता दे क्या हुआ है,'मैंने राहुल के पास जाते हुए कहा,नानू भी उसके साथ ही था,

'कुछ नहीं भाई,बस थोडा दिल भरा भरा लग रहा है उस लड़की को देखकर ,साले परमिंदर ने तो उसकी जिंदगी ही बिगड़ दि थी,'राहुल का चहरा मुरझा सा गया,नानू उसे आश्चर्य से देख रहा था,

'अरे यार मेरा भाई इतना सेंसेटिव है मुझे तो पता ही नहीं था,'मैंने राहुल को हलकी सी चपात लगाते हुए कहा,

'साला मुझे भी नहीं पता था की ये इतना दुखी भी हो सकता है,'नानू ने हलकी हसी हस दि ..

राहुल नानू की तरफ देखते हुए कुछ अलग भाव ले आया,

'परमिंदर तो तुम्हारा दोस्त था ना तुम्हे नहीं पता था क्या की वो क्या करता है,'अब चौकाने की बरी नानू की थी,

'अरे भाई हमें तो पता था की ये लड़की बाज है,जैसे हम है पर ये नहीं पता था की ये इतना कमीना है की लडकियों को गंदे मैसेज करता है,और जबर्दस्ती भी करेगा,हमें तो लगता था की वो लडकिया पटाता है और उनसे खेलता है,और साला उनकी विडिओ भी निकलता है ये हमें कहा पता था,'उसकी बात सुनकर मैं और राहुल चौक गए

'विडिओ बनता है ???तुझे किसने बताया उसके पास से तो कुछ नहीं मिला था ना,कोई फोटो या विडिओ,'मैंने प्रश्न दागा जिसे सुनकर वो थोडा सकुचा गया,

'भाई होस्टल के लड़के बता रहे थे और अब हमें उससे क्या मतलब है ,'नानू ने अपनी सफाई दि

'साले जब तुझे पता था की वो अच्छा लड़का नहीं है तो तूने दीदी की दोस्ती उससे क्यों कराई ,'अब चौकाने की बरी राहुल की थी ,

'इसने दोस्ती करायी,कब'राहुल के चहरे पर गुस्सा साफ़ दिख रहा था जिसे देखकर नानू भी एक बारी डर गया,

'अरे दीदी ने ही तो बताया था मुझे ,करीब एक महीने पहले इन दोनों ने दोस्ती करायी थी,'

"एक महिना पहले यानि दीदी ने आकाश से झूट बोला है,कैसे पता करू की सच क्या है साला विडिओ भी देख नहीं पा रहा दीदी की ऐसी हालत देखि नहीं जाती अब क्या करू भगवान ,"राहुल ने मन में सोचा,

'भाई नेहा को तो जानते हो ना मैं और विक्की परमिन्दर से बात कर रहे थे और उसी समय नेहा आ गयी तो इंट्रो कराया था,पर नेहा तो बातूनी है उससे घुल मिल गयी और पता नहीं आगे क्या हुआ,मुझे बस इतना ही पता है,'मुझे बात नार्मल लगी पर राहुल की आँखों में अब भी शक था,

तभी विक्की और नेहा दीदी भी बात करते हुए वह पहुचे दोनों हस हस के बात कर रहे थे राहुल की भव फिर से चढ़ गयी,'क्यों क्या हो रहा है अरे आकाश आज तू भी इनके साथ मेरी बात को सीरियस ले लिया क्या 'दीदी ने हसकर कहा,

'कौन सी बात दि ,' 'अरे वही गर्ल फ्रेंड वाली 'दीदी ने आँख मारते हुए कहा ,

'क्या दि आप भी जब कोई लड़की पसंद आएगी तो सबसे पहले आप को ही बताऊंगा इन चिड़ीमारो के साथ मुझे लड़की नहीं देखनी साला मेरी ही बदनामी हो जाएगी,'मेरी बात पर दीदी हसने लगी और बाकियों का चहरा उतर गया,

एक शांत कमरा और एक टेबल कुछ पोलिश वाले कमरे के बाहर थे और कमरे में विक्की नानू थे जो परमिंदर से मिलने आये थे,

'साला पूरी जिंदगी ही लुट गयी बहनचोद ,अब ना कोई कैरियर रहेगा और ना इज्जत,'परमिंदर ने लगभग रोते हुए कहा,

'मदेरचोद क्या जरुरत थी जबर्दस्ती करने की ,सब तो मिल ही जाता ना तुझे प्यार से ही कर लेता एक बार दवाई खिला देता फिर तो तेरी गुलामी करती ही ना वो साले इतनी अच्छी मॉल छुट गयी तेरे कारन,'नानू ने गुस्से में कहा ,

'बहन के लवडे यहाँ जिंदगी झंड हो गयी है इसे मॉल की पड़ी है,साली वो छिनाल नेहा की ही करनी है ये

सब,'परमिंदर ने धीरे से कहा,

'वो सब छोड़ सब तेरी ही गलती है साले क्या जरूरत थी नेहा से पंगा लेने की बोला था ना उसके भाइयो के बारे में कुछ मत बोलना मार दि ना गांड तेरी ,अब ये बता वो सब फोटोज और विडिओ कहा है ,साले तुझे पता है ना किसी के हाथ लग गए तो हमारे सब कर्मकांड फुट जायेंगे,'विक्की ने गंभीर स्वर में कहा,

'लवडे मुझे क्या पता कहा है मैं तो लेपी और मोबाईल में ही रखा था ,भाई मुझे यहाँ से बाहर निकालो यार वो अविनाश साला हाथ धोकर पीछे पड़ा है जेल करा के ही मानेगा ऐसा लग रहा उसकी ही बहन को चोद दिया हो ,और उस साली आयशा का कुछ करो की केस वापस ले ले ,'

'मदर चोद पागल हो गया है क्या तेरी लेपी और मोबाईल हमने छान मार लिया पर कही कुछ भी नहीं है साले याद कर कही और तो सेव नहीं कर के रखा है,और जेल से तुझे कोई नहीं बचा सकता बस अगर हम बहार रहे तो यहाँ तुझे पैसे भेजते रहेंगे पर अगर वो विडिओ पोलिश के हाथ लग गया ना तो हम भी जेल के अंदर हो जायेंगे बता दे लवडे कहा रखा है ,'इस बार विक्की गुस्से से भर गया था,

'नहीं भाई वही था,'

;कोई आया था क्या ' 'सालो बहुत लोग थे आते ही मरना चालू कर दिया मेरा तो धयान ही नहीं गया उधर ,'विक्की और नानू सोच में थे की क्या किया जाय

'चल ठीक है अब हम चलते है 'दोनों उठ कर जाने लगे

'भाई और कब आओगे यहाँ अंदर मेरे लिए कुछ पैसे छोड़ जाओ यार यहाँ सब बहुत महंगा है साला घर वाले तक बात करने को तैयार नहीं है,भाई कम से कम सूटटा तो पिने मिल जायेगा,'परमिंदर ने बड़े ही आग्रह के भाव से उन्हें देखा,

'भाग जा मादरचोद,बहुत चूत मरी है ना तूने अब गांड मरा यहाँ ,'नानू ने हस्ते हुए कहा और दोनों बहार निकल गए .....

विक्की अभी भी थोडा टेंशन में था ,'हो ना हो ये काम नेहा का ही होगा उसे परमिंदर के बारे में अच्छे से पता है अब साला मुझे टेंशन हो रहा है 'विक्की ने गंभीर होते हुए कहा ,

'भाई बात तो तेरी जम रही है पर अगर उसे कुछ करना होता तो अभी तक हम जेल में होते ना,और आज जिम में भी तो हमसे हसके बात कर रही थी ,तो इसे क्या समझे ,'

'साले जो समझ ना आये वही तो नेहा है साली कोई बड़ा कांड तो नहीं करने वाली या हमसे कुछ करने की तयारी में तो नहीं है ना,'विक्की फिर चिंता मग्न हो गया,

इधर नेहा अपना लेपी खोल के अपने रूम में बैठी है,और धयान से हेड फोन लगाये विडिओ को देख रही है वो उन अश्लील विडिओ में से कुछ काम की चीज निकलने की कोसीसी में है और पेन कापी में कुछ नोट कर रही है,.....

9.
नेहा अपनी स्कूटी से एक क्लिनिक के पास रुकती है ऊपर लिखा था डॉ चुन्निलाला तिवारी यरवदा वाले (M.B.B.S.

) जिसे देख कर नेहा के चहरे में मुस्कान आ गयी ये थे डॉ चिन्नीलाल जिसे लोग डॉ चुतिया या चुतिया डॉ भी कहा करते थे डॉ साहब थे तो ऍम बी बी एस पर वो एक मनोवैज्ञानिक ,दर्शनशास्त्री भी थे इसके अलाव भी उनके बहुत गुण थे जो आगे पता चलते जायेगा,नेहा अंदर गयी तो उसने देखा की डॉ अपनी नर्स मेडम मेरी मार लो के साथ गुफ्त्गुह फरमा रहे है,और उसके पिछवाड़े को अपने हाथो से सहला रहे है नेहा के चहरे की मुस्कान और बढ़ गयी ,मेरी के भाव से लग रहा था की डॉ ने अपनी उंगली उसके पिछवाड़े में घुसा दि है,

'डॉ साहब क्या मैं अंदर आ सकती हु ,'डॉ चुतिया ने अचानक अपने हाथ मेरी के स्कर्ट से निकले तो मेरी उचक पड़ी,

'अरे नेहा तुम तुमने तो डरा ही दिया था मुझे लगा कोई पेशेंट आ गया ,'चुतिया के चहरे पर मुस्कान फैली,

'अरे चुतिया जी आपके पास कोई पेशेंट आते भी है जो आप डर रहे हो,'नेहा अब खिलखिला के हस पड़ी और टेबल के सामने रखे खुरसी पर बैठ गयी

'और बताओ क्या चल रहा है काम हुआ की नहीं ,कुछ मिला तुम्हे ,'डॉ अब सीरियस था,

'नहीं सर कुछ नहीं बस इतना ही पता चला की जैसे ही वो इंजेक्शन परमिंदर किसी को लगता था वो लड़की वासना के आगोश में डूब जाती थी और फिर सेक्स की अपरिमित भूख का शिकार हो जाती थी जिसे पूरा करना कठिन हो जाता था पर वो क्या है ये तो समझ ही नहीं आ पाया वो हरे रंग का लिक्विड है'नेहा ने अपने विडिओ से देखे सभी डिटेल्स डॉ को बताये,

'पता नहीं साले को ये कहा से मिल गया ,पता लगाना पड़ेगा उससे भी जरुरी है ये पता लगाना ई उसने ये किसे किसे दिया है और इसका इलाज क्या है,'

'ये तो पता चल गया है की किसे दिया है और इलाज तो आप ही कर सकते हो डॉ,'

'कोई बात नहीं ,और विक्की और नानू का क्या करना है,उन्हें भी तो उनके किये की सजा मिलनी चाहिए ना,'

'मिलेगी अभी तो उन्हें कुछ पता ना ही चले तो बेहतर है,उन्हें तो अभी ही जेल भेजा जा सकता है पर मैं नहीं चाहती की जो लडकिय इन सबसे दूर हो गयी है वो इन विडिओ के बहार आने से बेइज्जत हो जाये,उन्हें तो मैं सजा दूंगी पर थोडा मजा भी तो करने दो उनके साथ उन्हें भी तो पता चले की दर्द तकलीफ और जलील होना क्या होता है जब जिस्म की भूख इतनी बढ़ जाये की इज्जत का ख्याल ही ना रहे ,तो वो पीड़ा क्या होती है,'कहते कहते नेहा की आँखों में पानी आ गया साथ ही आँखे लाल अंगारे सी धधाकने लगी...

'ओके जैसा तुम ठीक समझो,पर क्या कोई उस दवाई के असर के बाद भी अच्छी जिंदगी जी सकता है,'डॉ ने प्रश्न दागा,

'अरे चूतिये जब जिंदगी में आफत आती है तो जीना भी सिखा देती है,'मेरी ने बड़े गंभीर लहजे में कहा था पर नेहा उसके अरे चूतिये बोलने के तरीके से हस पड़ी ,डॉ भी बड़ी आँखे किये उसे देखने लगा,

'डॉ साहब एक बात पुछु,आप अपना निक नेम क्यों नहीं बदल लेते ये क्या चुतिया नाम रखा हुआ है ,'अब गंभीर होने की बारी डॉ की थी,

'नेहा बात ऐसी है की गुस्सा और हँसी आदमी के जीने की पहचान है ,ये बतलाती है की कोई व्यक्ति जीवंत है की नहीं,जब मुझे कोई इस नाम से बुलाता है तो मुझे या तो गुस्सा आता है या हँसी तो मुझे पता लग जाता है की मैं भी जिन्दा हु,'डॉ की फिलासफी सुनकर नेहा के चहरे में भी मुस्कान आ गयी ...

'डॉ सर मुझे एक बात और पूछनी थी आपसे,आपको मनोविज्ञान का भी ज्ञान है,मेरी एक प्रोब्लम है,'

'हा हा पूछो ना,'

'मेरे भाई आकाश को तो आप जानते ही है,वो हमेशा से बड़ा ही सीधा साधा रहा है ,अपने काम से काम रखने वाला है,मैंने आजतक उसे किसी लड़की की तरफ आकर्षित होते नहीं देखा,और मुझे तो वो दिलो जान से चाहता भी है,पर मुझे एक चिंता सता रही है,अभी हाल में ही जब उसने परमिंदर और मेरी तस्वीरों को देखा था,तब से पता नहीं उसे कुछ हो गया है,मैंने उसके नजरो में अपने लिए ही वासना देखी ,इतना ही नहीं जिस दिन उसने फोटोज देखे उस दिन तो उसने मेरे स्तनों को भी सहलाया,मैं उससे बहुत प्यार करती हु और उसके लिए कुछ भी कर सकती हु पर मैं अपने भाई को यु वासना के आग में जलते नहीं देख सकती जो मुझे फील होती है,कभी तो लगता है मैं उसके लिए पूरी तरह खुल जाऊ और उसकी हवस को शांत कर दू पर मैं नहीं चाहती वो इस ग्लानी में जिए वो मुझे बहुत प्यार करता है,पर आजकल ये कभी कभी ही हो रहा है,वो मेरे अंगो को निहारता है और फिर बहुत ग्लानी से भर जाता है,वो कोई दूसरी लड़की पसंद करने को भी तैयार नहीं है डॉ साहब कुछ उपाय बताइए की वो नार्मल हो जाए..

'नेहा बहुत ही परेशान हो गयी होती भी क्यों ना वो अपने भाई से बेतहासा प्यार जो करती थी,

'हूमम्म मेरी बात ध्यान से सुनना तुम्हे कुछ चीजे बुरी लग सकती है पर ये मेरा फर्ज है और अब तुम्हारा भी,जहा तक मैं आकाश को जानता हु उसे पहले ही लडकियों में कोई इंटरेस्ट नहीं था,लेकिन है तो वो मर्द ही और वो भी गबरू मर्द ,उसके अंदर बहुत ही ताकत है जो उसे देख के ही समझ आता है और इतनी एनर्जी को सम्हालना बहुत मुस्किल होता है,मुझे तो लगता है उसने आज तक हस्तमैथुन भी नहीं किया होगा,और दिन ब दिन उसकी एनर्जी बड़ते ही जा रही है,वो इसे सम्हाल पता है क्योकि उसने कभी ऐसे विचार अपने मन में नहीं लाये कोई ऐसा दोस्त भी नहीं है उसका जो सेक्स से सम्बंधित बाते उससे करे राहुल भी उससे ये सब बाते करता डरता है ,और दुसरो की बात को वो इग्नोर कर देता है,दुस्र्री चीज की वो हमेशा से तुम्हारे साथ ही रहा है,साथ ही सोता है तो उसे लड़के और लडकियों के बीच का वो अंतर अभी तक समझ नहीं आया था जिससे वो सेक्सुअल विचारो की और प्रेरित हो जाय,उसे लड़की का मतलब दीदी ही समझ आता और बहन का मतलब एक अलग किस्म का प्यार,जिसमे वासना का नाम भी नहीं है,इतनी एनर्जी होने से और उसका उपयोग ना होने से आम आदमी पागल भी हो जाता है,(नेहा के चहरे पर चिंता के भाव गहरा गए ) लेकिन अब तक आकाश ने इस एनर्जी को तुम्हारे प्यार में और व्ययाम में और पढाई में लगा दिया,ये कंडीशन तो योगियों और ब्रम्ह्चारियो की होती है इस लिए आध्यात्म के मार्ग पर कई लोग पागल भी हो जाते है,इसलिए उन्हें खानपान का संयम नियमीत योग,प्राणायाम,और ध्यान व्यायाम करने कहा जाता है,इससे मन शांत होता है और विचार ही नहीं आते पूरी ताकत अध्यात्मिक विकाश में ही लगती है,पर आकाश तो ये सब नहीं कर सकता ना,,,अब हुआ ये है की उसे तुम्हारी फोटोज देखकर वो चीजे समझ आने लगी जिनसे वो अभी तक बचा हुआ था,और उसकी एनर्जी इतनी है की जब वो सेक्सुअल विचारो से भरता है तो वो पागलो जैसा हो जाता है,अब तुम उसकी दीदी ही नहीं रह गयी तुम एक लड़की भी हो उसके लिए उसे बाकि लडकियों में दिलचस्पी भी तो तुम्हारे बेपनाह प्यार की वजह से ही नहीं थी ना,तो अब कैसे पैदा होगी ,जब तक वो किसी लड़की में तुम्हारा चहरा नहीं देखता उसे प्यार की फेल्लिंग नहीं आएगी,लेकिन उसे अब सेक्सुअल विचार आने लगे है तो उसको शांत करना जरुरी है,...

'डॉ की बातो से नेहा की चिंता डर में बदलने लगा,

'कैसे???मैं अपने भाई को खो नहीं सकती डॉ कुछ तो उपाय होगा इसका ,मैं कुछ भी करुँगी आप बताइए तो ,'डॉ के चहरे पर नेहा का प्यार देखकर एक मुस्कान आ जाती है,

'नेहा तुम कुछ नहीं कर सकती,'नेहा स्तब्ध हो जाती है,

'अपने भाई के लिए मैं कुछ भी कर सकती हु ,आप बताइए डॉ मुझे अपना शारीर उसे देना है क्या मैं तैयार हु डॉ,वो जो मेरे साथ करना चाहे कर सकता है बताइए ना डॉ,'कहते कहते नेहा रोने लगी लेकिन डॉ के चहरे पर अब भी मुस्कान था,वो अपनी जगह से खड़े हुए और नेहा के सर को प्यार से सहलाने लगे,

'तुम्हे कुछ नहीं करना है ,बस यही करना है,'डॉ साहब ने फिर फिलासफी झाड दि,नेहा आश्चर्य से आँखों में आंसू लिए डॉ को देखती रही,

'अरे चूतिये सीधे बता दे ना बच्ची को इसकी भी लेने की फ़िराक में है क्या,मुझसे मन नहीं भरता तेरा,'मेरी ने बड़े प्यार से ये कहा,और साथ में अपने स्तनों को दबाकर इशारा किया ,डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी

'हा नेहा तुम्हे कुछ नहीं करना है,बस उसे समझाना है की कुछ गलत नहीं है अगर आप मन में प्यार रखो,प्यार हवास से जादा ताकतवर है,अगर तुम उसे अपना जिस्म दे भी दो तो क्या होगा ,वो तुम्हे भोगेगा और फिर ग्लानी से भर जायेगा जो की किसी के लिए अच्छा नहीं होता,उसे अपने किये पर कोई पछतावा नहीं होना चाहिए,उसे लगाना चाहिए की ये बस वैसा ही प्यार है जो तुम अभी तक करते आय हो ,ये काम है तो बड़ी ही विचित्र पर आकाश को प्यार की भाषा का ही पता है उसे हवस का पता नहीं है,अगर दर्शन की भाषा में कहो तो उसका अनहत चक्र(heart chakra of 7 kundalini chakra) जादा विकसित है,बाकि चक्रों के मुकाबले,तो जब वो कुछ करे तो बस उसके साथ प्यार से पेश आओ उसे मत कहना की ये गलत है,उसे प्यार देना अगर उसे ग्लानी के भाव आय तो उसे समझाना की ये भी तो प्यार ही है,सिर्फ हवस से हवस ही बढेगी उसके अंदर जो तुम भी नहीं चाहोगी,उसकी वासना को प्यार में बदलने दो हो सकता है की वो तुमसे सेक्स करे हो सकता है ना भी करे उसे कुछ करने पर फ़ोर्स ना करो बस करने दो तुम अपना प्यार लुटाओ और देखो वो शांत रहने लगेगा उसकी एनर्जी फिर नए दिशाओ को खोज लेगी,क्योकि एनर्जी कभी स्थिर नहीं होती ये ओशो ने भी कहा है,वासना से ये निचे जाएगी और शांति में ये ऊपर....'नेहा का दिल अब शांत था उसने डॉ के हाथो को पकड़ चूम लिया ...

'thanks dr. so sweet of you..हा मैंने उसे उस दिन ये कहा था की गलत है,,पर जब मैंने उसे प्यार किया तो वो मेरे प्यार में खो गया..मुझे समझ आ गया है,की कैसे कुछ नहीं करना है,और यही करना है,'नेहा ने एक स्माइल दि और डॉ दे विदा लिया,डॉ अब मेरी की तरफ मुड़े,,उसके निताम्भो को अपने हाथो से दबा दिया

'बहुत बोल रही थी चल अब सटर गिरा अब तेरे चिल्लाने का टाइम है..'मेरी के चहरे पर भी मुस्कान आ गयी,

10.

मैं घने जंगलो में भटक रहा था की मेरे पीछे संपो का झुण्ड पड़ जाता है उसे कुछ समझ नहीं आता की आखिर हो क्या रहा है मैं बस दौड़ता हु अपनी रफ़्तार बदता हु पर वो संपो का झुण्ड उसका पीछा नहीं छोड़ रहा था,मैं दौड़ता हु हफता हु और आखिर एक झील दिखाई देती है जो बेहद गहरी है मेरे के पास आख़िरकार दो ही रस्ते बचते है या तो सापो से लडे या झील में कूद जाये इसी असमंजस में होता हु की मेरा पैर फिसल जाता है और झील की गहरे में गिरता जाता हु, शारीर भर शून्य हो जाता है और अचानक आंखे खुलती है पसीने से भीगा हुआ हाफ रहा होता हु..

'हे भगवान कितना डरावना सपना था,'मैंने अपने को सम्हालते हुए सोचा देखा तो मैं पूरा ही पसीने से भीगा हुआ था,सांसे अब भी तेज चल रही थी धड़कने अनियमित थी,मैं पूरा बदहवास सा इशार उधर देख रहा था,मैंने a.c. की तरफ देखा वो भी अपने में मस्त सा चल रहा था,तो पसीना क्यों वो भी इतना मैंने मन में सोचा,मैंने बाजु देखा तो दीदी सोयी हुई थी,मैंने अपनी सांसो को सम्हाला दीदी शायद मेरे सोने के बाद मेरे रूम में आई थी,मैंने अपने सपनो पर गौर किया पर कुछ समझ नहीं आया,मैंने दीदी को फिर से देखा मैंने पाया की दीदी एक झीनी सी टी शर्ट और निकर पहने है हो की उनके घुटनों के बहुत ऊपर है और मुस्किल से ही उनके कमर को छुपाये हुए है,उनकी जांघे केले के पेड़ के तने जैसे दिखाई दे रहे थे,और उनकी कमर में उभरे हुए उनके नितंभ किसी धनुष के आकर के थे मैं उनकी इस गोलाई को देखता रह गया मैं इस सोच में ही था की दीदी ने करवट ली और उनके उन्नत वक्ष मेरे सामने आ गया मुझे उस दिन की याद आ गयी की दीदी ने कोई अन्तःवस्त्र नहीं पहने है,मैं उनको निहार ही रहा था की ना जाने कब मैं दीदी के प्यार भरे चहरे से उनके कामुक अंगो पे केन्द्रित हो गया,और प्यार ने वासना का रूप लेना सुरु किया,मैं अब भी इसे वासना मानने को तैयार ना था,मैंने बिना हिचक उनके वक्षो को छुआ उनकी रेसम सी मुलायम त्वचा का अहसास मेरे रोंगटे खड़े कर दिया,मैं वासना के गर्त में जा रहा था की मैंने दबाव बड़ा दिया और दीदी की नींद टूट गयी,दीदी ने कसमसाते हुए मुझे देखा जैसे पूछ रही हो की क्या कर रहा है,मैंने दीदी के दाये वक्ष को सहला दिया पर दीदी ने कोई प्रतिक्रिया देने के बजाय एक मुस्कान से मेरा स्वागत किया और झूठा गुस्सा दिखा मेरे सर पर एक चपात मारी,

'तेरा नाटक फिर चालू हो गया,सिर्फ रात को ही बहन के लिए प्यार जगता है क्या ,'दीदी ने मेरे सर पर हाथ फेरते हुए कहा,इस अप्रत्यासित उत्तर से मैं स्तब्ध सा उनके चहरे को देखता रहा,

'ऐसे क्या देख रहा है,'दीदी ने उसी मुस्कान के साथ पूछा,

'मुझे लगा आप गुस्सा हो जाओगे,'मैंने भी एक मुस्कान अपने चहरे पे लाई

'क्यों मेरा भाई मुझे प्यार करे तो मैं गुस्सा क्यों होने लगी,'

'क्योकि ये गलत है ना,आप मेरी बहन

हो तो बहन के साथ ये सब नहीं होता ना,'

'अच्छा बेटा प्यार तो प्यार होता है इसमें कुछ भी सही गलत नहीं होता जो चीज मेरे भाई को खुसी दे वही मुझे भी खुसी देगी और जिसमे हम दोनों खुश है वो गलत कैसे हो सकता है,'दीदी ने मुझे खीचकर अपने ऊपर ले लिया और बड़े ही प्यार से मेरे गालो को चूसने लगी कभी कभी वो उन्हें दांतों से काट भी लेती थी बदले में मैंने कमान सम्हाली और मैंने भी उनके गालो को चुसना शुरू कर दिया दीदी का इतने प्यार का असर मेरे ताने लिंग पर पड़ा जो दीदी के निकर में रगड़ खा रहा था,दीदी के मुह से निकली हलकी सिसकिया मुझे सुनाई दे रही थी,और अपने लिंग से मैं उनकी योनी के गीलेपन को भी महसूस कर पा रहा था,वप सुखद अहसास मुझे बेहद विचलित कर रहा था मेरा विचलित होना शायद दीदी भाप गयी क्योकि मैंने बहुत ही जोर से लिंग को उनके टांगो के बीच दबा दिया दीदी की तो आह ही निकल गयी ये तो अच्छा था की दीदी और मैंने कपडे पहने हुए थे ,मुझे विचलित देख दीदी ने कमान सम्हाली,मैं इस वार से थोडा नर्वस हो गया की कही दीदी को दर्द तो नहीं हुआ,दीदी मेरे ऊपर आकर मुझे चूमने लगी,आँखों से लेकर मेरे बालो तक को उन्होंने नहीं छोड़ा इतना प्यार देख कर मेरी आँखे भरने लगी और प्यार के झोके ने वासना के तूफान को भी शांत कर दिया,मेरा लिंग मुरझाने लगा पर हमारा प्यार जारी रहा,दीदी आज बड़ी शिद्दत से मुझे प्यार कर रही थी उन्होंने मेरे आंसू तक पी लिए,ये भी ना पूछा की ये आंसू क्यों शायद उन्हें पता था की क्यों...

भावनाए आंसू बनकर बड़े शिद्दत से निकल रही थी मेरा दिल भर आया था मुझे महसूस होने लगा था की मेरे अंदर कोई ताकत है जो मुझसे ये सब करा रही है की मैं वासना के गर्त में जा गिरता हु फिर प्यार की उचाईयो में पहुच जाता हु मुझे क्या हो रहा था मुझे नहीं पता पर इतना जरूर पता था की मैं दीदी को छोड़ नहीं सकता उनको अपने अलग नहीं कर सकता मैं अपने ही हाथो मजबूर था मैं मजबूर था अपने भावना के हाथो उन उठती लहरों के हाथो जो तुफानो सी आती थी और मेरे जेहन को झकझोड़ देती थी,,,,

मैंने जो नहीं सोचा था की कभी मैं ऐसा भी करूँगा वो मैं कर रहा था,मैंने अपने आंसुओ को रोकना चाहा पर ये नहीं रुके मैंने अपने भावनाओ को दबाना चाहा पर इस तूफान में मेरी शक्ति ही छीन ली थी मैं खुद को मजबूर पा रहा था की दीदी ने मेरे आँखों को चूमना शुरू किया ,

'आकाश कुछ मत सोचो मत रोको अपने आप को होने दो जो होता है ,अपनी भावनाओ को रोकने से तुम ही दुखी होगे तुम्हे ही तकलीफ होगी बह जाने दे भाई सब को निढल छोड़ दे हो जाने दे जो हो रहा है ,अपने को छोड़ रिलेक्स हो जा मेरे भाई,तेरी दीदी तेरे साथ है,'उनकी बातो में मानो कोई जादुई नशा सा था मैं अपने को रिलैक्स करने लगा वो मुझे सम्मोहित कर रही थी (इसे मनोविज्ञान की भाषा में इनफार्मेशन देना कहा जाता है ,जिसका प्रयोग सम्मोहन में और दूसरी थेरपी में किया जाता है,)मैंने खुद को छोड़ने लगा पर मेरे खुद को ढीला छोड़ते ही मैं फिर वासना से भर जाता था मैं अजीब उलझन में पड़ने लगा पर दीदी की बात मानकर मैंने आख़िरकार अपने को उनके हवाले और वक्त के हवाले छोड़ दिया,,दीदी अपना सब कुछ मुझे सौपने को तैयार थी और मैं भी अपना सब कुछ उनपर लुटाने को तैयार था,

दीदी की सिसिकिया बदने लगी मैंने उन्हें अपने निचे लिटाया और बहुत ही शिद्दत से किस करना शुरू किया उनके गालो को उनके बालो को उनके लबो को उनकी चमड़ी के हर उस हिस्से हो जहा तक मेरी पहुच थी,मैंने अपने होठो को उनके होठो पर रखा और एक ही धक्के में मेरी जीभ उनके मुह में चली गयी मैंने किसी को पहली बार इस तरह किस किया था,मैं उनके मुह की गहराई नापने लगा दीदी ने भी मेरा साथ देते हुए अपने जीभ से मेरे जीभ को सहलाया और हम दोनों एक दुसरे के होठो को चूसने लगे ,मैंने इतना आनद कभी महसूस नहीं किया था,मेरे दिल में दीदी के लिए बहुत प्यार था,और मैंने पूरी ताकत इस एक चुम्मन में लगा दि ,मैंने उनके सर को अपने हाथो से पकड़ के थोडा तिरछा किया हुआ था,और मुझे वहा से हटने का मन ही नहीं हो रहा था,दीदी के आँखों से खुसी के आंसू आ रहे थे उन्होंने मेरे सर हो जोर से पकड़ा था और अपनी ओर ऐसे खीच रही थी जैसे वो मुझमे समां जाना चाहती हो,ना जाने कितने समय तक हम ऐसे ही रहे,समय रुक सा गया था,बिना वासना के बिना लिंग में तनाव के भी इतने देर तक किस किया जा सकता है

ये ना तो मैंने सोचा होगा ना ही दीदी ने ,,,,जब हमारा ये चुम्मन टुटा तो मैंने देखा की दीदी के होठो पर से खून बह रहा है,मैंने उसपर अपने होठ रखे और उसे पिने लगा दीदी ने दर्द से आह ली,मुझे भी अपने होठो पर दर्द महसूस हुआ लगा की उससे भी खून आ रहा है शायद हम प्यार में इतने डूब गए थे की हमें ये अहसास भी नहीं हुआ की हमने एक दुसरे के होठो को काट लिया है,

'आई लव यु भाई,'दीदी के चहरे पर मुस्कान थी,उनके होठ अभी भी सूजे हुए लग रहे थे,मैंने उसे अपने हाथो से छुआ और मेरी चिंता देख कर दीदी मुस्का दि,

'फिकर मत कर तेरे भी होठ सूजे हुए है,'और दीदी के खिलखिलाने की आवाज पुरे कमरे में फ़ैल गयी...उनका यु खिलखिलाना मुझपे फिर से प्यार का रंग चढ़ा दिया और मैं फिर दीदी के ऊपर टूट पड़ा....

ना जाने कितने देर और कितने बार तक हम एक दूजे के होठो का रसपान किया और अपने होठो को युही मिलाये हम नींद के आगोश में चले गए ....

ना जाने कितने देर और कितने बार तक हम एक दूजे के होठो का रसपान किया और अपने होठो को युही मिलाये हम नींद के आगोश में चले गए ....

11.
उसी रात

राहुल अपने कमरे में बैचैन सा घूम रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था की कैसे वो उन विडिओ को देख पायेगा,कही उसके दिल में नेहा दीदी के लिए बुरे विचार ना भर जाए,पर उसे देखना तो था ही,वो लेपी ऑन करता है,और वो फोल्डर खोलता है,उसने जो विडिओ अधूरी छोड़ दि थी वो वही से सुरु करता है,नेहा दीदी रूम से निकलती है और परमिंदर फिर उसे अपने पास खीचने की कोशिश करता है पर वो उसे धक्का से देती है और

'अब आज का कोटा पूरा हो गया है ,कभी और मिलूंगी लेकिन ऐसी हरकत दोबारा की तो सोच लेना,मैं आपको प्यार करती हु आपको मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोई जरुरत नहीं है लेकिन शादी के बाद,'परमिंदर चाह कर भी कुछ नहीं कर पता दीदी कपडे पहनती है और परमिंदर को किस करती है,और वह से निकल जाती है,

राहुल चैन की सांसे लेता है,लेकिन अभी तो शुरुआत थी,अभी तो बहुत कुछ जानना बाकी था,राहुल सोचता है की क्यों ना दुसरे फोल्डर भी चेक किये जाए,वो फोल्डर के नाम पड़ने लगता है ,जिसमे एक फोल्डर आयशा का भी था,उसे खोलने पर उसे कुछ खास नहीं मिलता बस एक दो विडिओ और कुछ फोटोज थी शायद ये परमिंदर के लिए नयी चिड़िया थी,परमिंदर ने उसके साथ कुछ किया भी नहीं था ना ही कोई नूड फोटोज थे बस कुछ सेमी नूड फोटोज थे राहुल समझ गया की अपनी इज्जत बचने के लिए उसने ऐसा किया होगा,लेकिन एक और नाम पर राहुल की नजर रुक गयी वो नाम था प्रीति ,

'इसकी माँ का ,मादरचोद हो क्या रहा है कॉलेज में,सारी स्कूल की लडकियों को यही फसा के रखे है,'राहुल बड़ा ही गंभीर था फिर भी उसके चहरे पर एक स्माइल आ गयी,क्योकि वो प्रीति को जानता था, प्रीति कोई शरीफ लड़की नहीं थी वो तो राहुल जनता था पर वो भी परमिंदर के चुंगुल में होगी ये उसे उम्मीद

नहीं थी असल में प्रीति राहुल और आकाश की ही क्लास में थी,और उनके साथ जिम भी जाती थी लडको को अपने अंग दिखाना उसे खासा पसंद था,उसके पीछे तो सारा स्कूल दीवाना था सिर्फ दो लोगो को छोड़ कर एक आकाश और दूसरा राहुल...राहुल था तो लौंडी बाज पर उसे टाइट माल ही पसंद आते थे और वो जानता था की प्रीति फैली हुई है,लेकिन वो उससे बहुत छेड़खानी करता था और वो उसकी बहुत अच्छी दोस्त भी थी,प्रीति राहुल के घर के पास ही रहती थी और उसके घर वाले राहुल पर बहुत भरोसा भी करते थे,दोनों साथ ही बड़े हुए थे..समझ लीजिये की फ्रेंड्स विथ बेनिफिट वाला मामला था बस राहुल जादा बेनिफिट नहीं उठता था,और सबसे बड़ी बात ये थी की प्रीति को एक ही लड़का दिलो जान से पसंद था जो उसे घास भी नहीं डालता था,जी हा सही समझे वो था मैं यानि आकाश,..

राहुल ने जल्दी से वो फोल्डर खोला देखा की यहाँ तो लगता है कोई पोर्न की साईट ही खोल दि हो राहुल देख के दंग रह गया की इतने विडिओ उसने सलेक्ट आल किया तो पता चला साला 135 विडिओ है उसके फोटो एक भी नहीं थे उसने पहला विडिओ ओपन किया लेकिन उम्मीद से बाहर उसे जो दिखा वो देख के दंग रह गया प्रीति पहले ही विडिओ में दो लोगो के साथ हवस का खेल खेल रही थी ,पहला था विक्की जो विडिओ चालू होने पर पहले सोया हुआ दिखाई दिया और प्रीति उसके ऊपर पुरे जोश में उछल रही थी और दूसरा बन्दे का चहरा तो नहीं दिखाई दे रहा था क्योकि वो विडिओ शूटिंग कर रहा था ऐसे राहुल समझ गया की दूसरा नानू ही होगा ,

प्रीति बिलकुल कसी हुई और लम्बी थी,प्रीति को ऐसा देख कर राहुल का लिंग तो तन ही गया पर उसका दिमाग भी दौड़ने लगा,उसे ये तो समझ आ गया था की विक्की और नानू भी इस खेल का अहम् हिस्सा थे ,और नेहा दीदी को भी परमिंदर से सेटिंग करने में उनका ही हाथ है,और सबसे बड़ी बात ये की वो दोस्ती के नाम पर उसे चुतिया बना रहे थे,वो जिम में तो प्रीति को देखकर आहे भरते थे और साले एक डेढ़ साल से उसे चोद रहे थे...

राहुल के चहरे में मुस्कान गहरा गयी जैसे उसे समझ आ गया हो की क्या करना है,वो समझ गया था की आगे की प्लानिंग में वो प्रीति को साथ ले सकता है और उसे उम्मीद थी की दीदी भी उसे प्रीति का उपयोग उसके द्वारा करेगी क्योकि वो जानती थी की वो उसका बहुत अच्छा दोस्त है,रहुल ने अब हिलाना ही सही समझा और वो विडिओ पर धयान लगाना सुरु किया ,

प्रीति बिक्लुल एक्सपर्ट की तरह विक्की के ऊपर कूद रही थी,राहुल जनता था की प्रीति ने अपना कौमार्य बहुत पहले ही भंग कर लिया था,पर बहुत ही मेन्टेन थी वो आहे भरे जा रही थी और विक्की बिलकुल शिथिल सा पड़ा था,वही नानू जैसे राहुल को लग रहा था ने अपनी क्रिएटिविटी दिखानी सुरु कर दि वो फोकस प्रीति के चहरे पर लाया ,वो बिखरे हुए बाल,माथे पर एक छोटी सी बिंदी मासूम सा चहरा राहुल ने कभी प्रीति को इतनी प्यारी नहीं पाया था,कैमरा के पास आने पर प्रीति मुस्कुराने लगी और अपनी जीभ दिखा के नानू को चिढाने लगी,ये करते हुए वो बहुत मासूम लग रही थी ,वो अब धीरे धीरे उछल रही थी उसकी आँखे वासना से बंद हो रही थी ,फिर भी वो देखने के लिए आँखों को खोलने की कोसिस कर रही थी,उसके सांसे और आहे एक ही ताल में थे,राहुल ने अपने लिंग को आजाद किया और धीरे धीरे मसलने लगा,वही अब फोकास प्रीति के कमर में था,विक्की का लिंग किसी प्रिस्टन की तरह लग रहा था और उसकी योनी में पूरा समता था गीलापन इतना था की साफ साफ दिखाई दे जाय,प्रीति कर कमर पीछे की ओर ज़ूम करके केमरा ने उसके बने टेटू पर फोकस किया जिसे राहुल कई बार देख चूका था,वो लाल कलर का टेटू था जिसमे दिल का निशान था और एक तीर दिल के आर पार थी ,राहुल के चहरे पर मुस्कान आ गयी क्योकि ये टेटू प्रीति ने उसके साथ ही जाकर एक माल में बनवाया था,प्रीति ने कहा था की जब आकाश मेरी पिछवाड़े से लेगा और जब मैं उसके लिए कुतिया बनूँगी तब वो इसे देखकर मचल जायेगा,आकाश के लिए बना वो टेटू ना जाने कितने लोगो को आकर्षित किया हो और ना जाने कितनो ने उसे कुतिया बनाया होगा,राहुल प्रीति की बातो से छिड़ गया था पर क्या करता...और आज ..

केमरा फिर प्रीति के फेस पर फोकस होता है और नानू की आवाज सुनाई देती है ,

'बोल रे रंडी मजा आ रहा है ना ,'नानू खिलखिला कर हसता है

'हा बहुत,'प्रीति के आवाज में नशिलापन है,और आवाज भारी थी,

'तो बता किससे चुदा रही है अभी तू,'प्रीति ने अपने होठो पर एक उंगली घुसा दि और अंदर बहार करने लगी ,उसके आँखे बोझिल थी उसका चहरा वासना की आग में जल रहा था वो उस आपर मजे के आगोश में थी जो उसे मिल रहा था ,वो हूमम्म हम्म्म करते अपने उंगलियों को चूस रही थी,उसके आँखों का काजल फ़ैल चूका था और चहरे पर पसीने की कुछ बुँदे साफ दिखाई दे रही थी ,वो धीरे धीरे बड़ी मुस्किल से अपने को हिला रही थी वो मजे में डूबी थी जैसे नानू की बातो को सुन ही ना पा रही हो ,नानू ने फिर से अपना प्रश्न दोहराया...

'बता ना कौन है तेरा यार ' नानू ने उसके चहरे को अपने हाथो से पकड़ा और उंगलि को निकल कर अपने होठो को अपने हाथो से निचोड़ दिया,फिर अपने होठो को उसके होठो में ले जाकर चूसने लगा,,दृश्य इतना उत्तेजक था की राहुल ने अपने हाथो की स्पीड बड़ा दि ,

'मेरा यार आकाश ,मेरी जान करो ना मुझे,हा हा और आअह्ह्ह्ह आह्हह्हह्हह्हह ,'आकाश का नाम लेते ही प्रीति जोश में भर गयी और फिर से पूरी ताकत से उछलने लगी और विक्की और नानू के हँसाने की आवाज आई ,,..

'इंजेक्शन का आसार है बड़े साली तो पहले से रांड ही थी पर अब तो इसे ठंडा करना हमारे बस का भी नहीं रह गया है लगता है धंधा ही करवाना पड़ेगा हां हा हा हा ,'नानू गन्दी हसी में हसने लगा वही विक्की की हालत कुछ ठीक नहीं थी प्रीति इतने जोरो से उछल रही थी की विक्की के मुह से सिस्कारियो के जगह दर्द की आहे निकलने लगी,

'बस कर साली मारेगी क्या,हे भगवन आह आह ,हे भगवन आह आह ,रुक जा साली आह मदेरचोद रुक जा मैं गिरने वाला हु ',विक्की ऐसा चिल्ला रहा था जैसे कोई उसका बलात्कार कर रहा हो ,वही नानू की हसी उसकी हालत देख और बढ़ गयी थी ....

'आह आह आकाश मेरी जान और तेज और तेज जान और और और आह आह आह आह आह ,ह्म्म्मम्म्म्म 'प्रीति की सांसो की तेजी अब राहुल को भी सुनाई देने लगी की विक्की ख़तम हो गया ,जब प्रीति को आभास हुआ तो उसने एक खीच के झापड़ विक्की को दे मारा विक्की की चीख ही निकल पड़ी, खड़े होकर नानू को खीच ली और उसके ऊपर बैठ गयी, केमरा बुरी तरह हिला और नानू के चिल्लाने की आवाज आई जैसे किसी ने उसे जोर लगा के बिस्तर पर पटका हो ,वही विक्की ने केमरा सम्हाला और पहले दो तीन झापड़ प्रीति को दे मारा पर प्रीति को इसका असर ही नहीं हो रहा था,प्रीति के इस रूप को देखकर तो राहुल भी डर गया पर उसे अभी अपना पानी निकालना था,प्रीति पुरे जोश में उसपर उछल रही थी अब तो नानू की हालत भी गंभीर हो गयी थी वही प्रीति के मुह से सिर्फ आकाश का नाम आ रहा था,

'मेरी जान तुम कितने अच्छे हो आह आह प्लीज् प्लीज् जान जान आह आह आह और जोर से ओऊ जोर से ,'नानू जैसा गबरू मर्द भी घबराया लग रहा था,वो इतने जोर से ऊपर निचे हो रही थी ,उसके ताने और कठोर वक्षो को नानू बड़े बेरहमी से मसल रहा था ,पूरा स्तन लाल हो चूका था जैसे किसी ने बड़े देर से उससे मसला हो ,जब केमरा निचे आया तो नानू के लिंग और प्रीति की योनी का मिलन दिखा काम रस की अधिकता से चप चप की आवाजे आ रही थी विक्की का वीर्य भी अभी तक वही पड़ा था और इसलिए नानू को आसानी हो रही थी अब यो रिलेक्स हो गया ल्र्किन शायद प्रीति को इसमें मजा नहीं आ रहा था,उसने पास पड़े कपडे से अपने योनी के पास का सारा गीलापन पौछ लिया और फिर से लिंग पर बैठ गयी ,नानू के चहरे पर डर का भाव आ गया वही विक्की की हसी गूंज गयी नानू ने विक्की को इशारा किया और विक्की ने प्रीति के गालो को जोर जोर से थप्पड़ो से मरने लगा पर सब बे असर था,प्रीति अब भी उतने ही जोश में थी थोडा गीलापन आने पर नानू की हालत ठीक हुई वो मुर्दों सा वह पड़ा था और प्रीति की आँखों से आसू के धार बहने लगे वो जितना जितना रोती उतने जोरो से धक्के मरती थी ,'आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आकाश आकाश आई लव यू जाआआन जान जान '

प्रीति भी अब शांत होने लगी नानू ने भी अपना पानी छोड़ा और राहुल की धार सीधे उसके लेपी तक पहुच गयी ....

थोड़ी देर बाद सब जगह शांति रही ,राहुल कुछ नहीं सोच पा रहा था उसने कभी किसी लड़की को इतना जंगलीपन दिखाते नहीं देखा था,उसने अपनी सांसो को सम्हाला वही विडिओ में भी सभी अपने सांसो को सम्हालने में लगे थे .....

'साली जोरदार दवाई है ,क्या दिए हो मुझे सालो पागल ही बना दिए हो ..'प्रीति थोड़ी सम्हालने के बाद कहा,'इतनी ताकत आ गयी थी मुझमे सेक्स की इतनी तलब और इतना जोश तो कभी नहीं था मुझमे ..

'विक्की नानू को देखकर मुस्कुराने लगा,

'ये सब छोड़ और बता मजा आया की नहीं ,'विक्की ने नेहा के निताम्भो को सहलाते हुए पूछा,

'इतना मजा तो कभी नहीं आया ,साला लग रहा था की 10 लोग और आ जाए तो भी कम पड़ेंगे,'प्रीति ने नानू को अपनी तरफ खीचते हुए कहा ...'अबे लवडे 100mg की दवाई खायी थी फिर भी इस साली ने निचोड़ दिया हमें,मुझे तो ये इंजेक्शन सही नहीं लग रहा पता नहीं परमिंदर ने ये क्या ला के दे दिया है,'नानू ने चुन्तित स्वर में कहा..

'अबे फिकर मत कर ये साली पहले से चुदैल है इसलिए बेकाबू हो गयी सही लड़की पर इसका असर धीरे धीरे होगा ,और जितना वो करते जायेगी हवास उतनी बढेगी ,पर उससे भी मजा बहुत आएगा इसलिए ये काम का है,'

'चलो यार मैं चलती हु ,और अब तो रिकॉर्डिंग बंद कर हो क्या इसे नेट पर दिखाओगे क्या ,'प्रीति थोडी चिंतित थी

'नहीं यार ये तो हमारा पर्सनल कलेक्शन है ,'नानू के आवाज के साथ ही वो विडिओ ख़तम हो गया,राहुल के पास कुछ सवाल खड़े हो गए क्या है ये इंजेक्शन और क्या दीदी को भी दिया गया है और प्रीति आकाश को इतना कब से चाहने लगी की सिर्फ उसका ही नाम ले रही थी,...

तभी राहुल के मोबाईल पर काल आता है नाम देख उसके चहरे पर मुस्कान तो थी पर थोडा आश्चर्य भी हुआ ...नाम था डॉ चुतिया....

'हल्लो राहुल कैसे हो ,'चुतिया की आवाज आई

'बढ़िया हु डॉ आप कैसे है और इतने रात काल सव ठीक तो है ना,'

'ठीक तो कुछ भी नहीं है दोस्त और ये तो तुम्हे भी पता है ,मैं तुमसे सीधे ही बात करता हु ,मुझे ये बताओ की तुमने परमिंदर के लेपी और मोबाईल से जो विडिओ निकले है वो तुम्हारे पास है ना या तुमने उसे डिलीट कर दिया है,'डॉ की बात सुनकर राहुल के होश उड़ जाते है ,

'डॉ कौन सा विडिओ वो तो दीदी के पास है,'

'मेरा नाम चुतिया है पर मैं नहीं,मैं तुम्हे बचपन से जनता हु,की तुम क्या चीज हो और मुझे ये भी पता है की अब तक तुम्हे ये भी पता चल गया होगा की नेहा भी इस दलदल में फासी हुई है ,और प्रीति भी तो सच सच बताओ क्योकि बहुत मासूम लोगो की जिन्गगी का सवाल है ,'डॉ ने गंभीर होते हुए कहा ,

'आप दीदी से ही क्यों नहीं ले लेते विडिओ,'

'क्योकि वो सानी (चालक ) और तुम डेड साने हो तुम जानते हो नेहा के लिए अपनी और बाकि लडकियों की इज्जर का बहुत महत्व है ,और वो कभी उन विडिओ को किसी को नहीं देगी पर मैं जनता हु की तुम्हारे पास भी एक कॉपी है ,और ये भी की तुम मेरी मदद करोगे क्योकी तुम नहीं चाहोगे की तुम्हारी दीदी पर कोई आफत आये ये लड़ाई इतनी आसान नहीं है राहुल की परमिंदर को अन्दर करा कर काम हो गया इसे ना तुम अकेले लड़ सकते हो ना ही नेहा हां ये अलग बात है की नेहा को लगता होगा की वो अकेले ही सब कर लेगी पर ये उसकी गलत फहमी है ,और मेरे ख्याल से तुम्हे मेरी बात समझ आ रही होगी तो कल सुबह पुरे विडिओ ले कर मेरे पास आ जाओ ताकि मैं उनमे कुछ चेक कर सकू और इतने तो

तुम समझदार हो की नेहा को इसको भनक नहीं लगने दोगे ,ओके'डॉ की बात तो राहुल के भेजे में घुस गयी

'ओके डॉ पर मुझे आप पर पुरा भरोसा है,मैं कल आपको मिलाता हु,'

12.
दुसरे दिन...

मैं अपने बिस्तर पर पड़ा दीदी को निहार रहा था दीदी की आँखे भी खुली और उन्होंने सीधे मेरे होठो पर अपने होठ रख दिए हमारे दिन की शुरुवात मीठे चुम्मन से हुई,

'भाई,तेरा बहुत बड़ा लगता है,'सुबह सुबह लिंग में तनाव स्वाभाविक था पर दीदी ने ये मह्दूस कर लिया और मैं झेप गया रात का खुमार उतरने के बार मैं अपने प्राकृतिक स्वभाव में आ गया था शर्मीला लड़का,

'क्या दीदी आप भी ,वो सुबह बड़ा हो जाता है ना,और इतना बड़ा से क्या मतलब है जितना सबका होता होगा उतना ही तो होगा ना,और आप किसका देख लिए जो तुलना कर रहे हो ,अब झेपने की बरी दीदी की थी

'चुप कर गंदे मैं किसका देखूंगी पर मेरी फ्रेड्स जो बताई थी उस हिसाब से तो बहुत बड़ा है तेरा,चल अब जल्दी से फ्रेश हो जा जिम जाना है ना तुझे प्यार करने के चक्कर में कही तू हेल्थ से ना खिलवाड़ करना शुरू कर दे,'दीदी हस्ते हुए उठी और अपने रूम की तरफ बाद गयी,मैं भी जल्दी तैयार होक जिम पहुचा आज मैं बहुत खुश था,पता नहीं इतना हल्का महसूस हो रहा था और दिल बेहद खुस था ,पर आज पहली बार मैंने लडकियों के कर्व पर ध्यान देने लगा तभी विक्की और नानू को आते देखा हम हाथ मिलाये और वो दोनों एरोबिक में चले गए मैं भी स्टारेच करने लगा तभी मैंने जो देखा वो देख कर मैं चौक गया साला राहुल आज मुझसे भी पहले पहुचा हुआ है,मैंने देखा वो प्रीति से बात कर रहा है जिसके बारे वो बोलता था की साली पकाती बहुत है,मुझे देखकर राहुल ने आ कर गला मिला और प्रीति ने मुझे हाय कहा ,

'क्या भाई आज तो कमल हो गया साले ,तू मुझसे पहले आ गया है ,और इससे हसके बात कर रहा है माजरा क्या है,'मेरी बात सुन दोनों के चहरे पर मुस्कान आ गयी

'हा भाई कमल तो हो ही रहा है आज ,आज पहली बार तुझे किसी लड़की को निहारते देखा है,'मैं झेप गया साले ने मुझे देख लिया था ,आखिर मैं उसके दिल का टुकड़ा था मेरी भावनाए उससे कहा छुपाने वाली थी ,

'हां भाई पता नहीं क्यों आज दिमाग वह चला गया ऐसे अब हम लोंग जवान हो गए है यार नजर चली गयी तो क्या गलत हो गया ,'

'अरे वह आज मेरा भाई जवान हो गया वो भी अचानक से क्या बता है ,'हम हसने लगे

'अब मेरा राजा जवान हो ही गया है तो मेरी जवानी को भी भोग ले ,मेरे कर्व भी देख ले ,ये देख तेरे लिए ही टेटू करा के बैठी हु कब से सब देखते है तेरे सिवा,'प्प्रीति ने घूमकर अपने टेटू देखाए मैं उसकी बातो से हैरान रह गया की इसे क्या हो गया,मैं जनता था की वो मुझे पसंद करती है और मेरे लिए टेटू भी बनवाया है पर मैंने कभी उसे इतना भाव नहीं दिया था,उसकी बात सुनकर राहुल तो हसने लगा और अपने हाथ से उसका सर सहलाने लगा जैसे वो कोई बच्ची हो ,मुझे

ये अजीब लगा पर जब मैं बदल रहा था तो हो सकता है राहुल भी बदल रहा हो ,

हसने वालो में एक और जुड़ गया मेरे पीछे ही दीदी भी खड़ी हस रही थी,

'अच्छा तो मेरे भाई को फसा रही है तू,,'दीदी की आवाज सुनते ही प्रीति सजग हो जाती है और मैं और राहुल उन्हें देखकर खुस हो जाते है,

'क्या दीदी मैं क्या फसौंगी इसे,ये मुझे फसा कर रखा है,और आपके दोनों भाई तो घास भी नहीं डालते सब आपका ही असर है,'प्रीति की बात सुनकर दीदी के चहरे पर स्माइल आ गयी और उन्होंने मेरे और राहुल के सर पर हाथ फेर दिया ,और बड़े प्यार से हमें देखने लगी ,

'हां मेरे भाई है ना,'दीदी ने धीरे से कहा और उनकी आँखों में थोडा गीलापन उतर आया,राहुल ने आगे बढकर उनके आँखों को चूम लिया और उनकी आँखों में आया पानी उसके मुह में चला गया ,

'दीदी आप बहुत जल्दी सेंटी हो जाती हो ये क्या है ,'राहुल ने बड़े प्यार से कहा,मैं दि को देख रहा था उनके चहरे पर हमारे लिए अद्भुत प्यार होता था,

'मुझे अपने भाइयो पर नाज है,मेरे भाई ही मेरी जिंदगी है,और लड़की हु मैं मुझे रोने का पूरा हक़ है समझे,'दीदी ने राहुल को प्यारी सी चपत लगा डी,

हम सब अपने कामो में बिजी हो गए सबसे जादा एक्सरसाइज मुझे करनी होती थी ,आज प्रीति भी मेरे साथ साथ ही चिपकी रही जिसपर मुझे हसी आ रही थी पर मैं अपना काम पुरे ईमानदारी से करता हु खासकर एक्सरसाइज,प्रीति को जब से राहुल ने कहा था की मैं लडकियों के कर्व में धयान दे रहा हु वो मुझे अपने कर्व दिखने में लगी थी,ऐसे उसका शारीर बहुत अच्छा था वो रेगुलर एक्सरसाइज करती थी और साथ थी और कार्डियो और डांस का उसे हमेशा से शौक था,उसके वक्षो पूरी गोलाई से ताने हुए थे और कमर पूरी तरह से सपाट थी उसके एब्स भी अच्छी तरह से दिखाते थे ,बड़े बूब्स सपाट कमर किसे पसंद नहीं आती पर उसका सबसे आकर्षक पहलू था वो था उसका नितंभ,,,जो बहुत ही कसा हुआ था और उसके उभार लोगो को पागल बना देता था,

प्रीति ने मेरे पास आकर मुझे अंगो को एक एक कर कई तरीके से दिखा रही थी आज पहली बार मैं भी उसको निहार रहा था जिससे वो बहुत खुश भी दिख रही थी ..

वही दीदी और राहुल कुछ बाते कर रहे थे और थोड़े सीरियस लग रहे थे मेरे लिए ये कोई नयी बात नहीं थी वो दोनों मिलकर कुछ ना कुछ करते ही रहते है और मैं अधिकतर उनके कामो से दूर ही रहता हु,

राहुल मैंने विडिओ देखे और जानते हो उसमे प्रीति के भी विडिओ है,'राहुल नकली आश्चर्य प्रगट किया ,'और अब तुन्हें मेरा एक काम करना होगा,तुम प्रीति को बचपन से जानते हो तुम उससे दोस्ती बढाकर अपने भरोसे में ले लो ,'

'अरे दीदी वो तो अभी भी मेरे भरोसे में है,'राहुल ने मुस्कुरा के कहा,

'नहीं भाई अभी वो और किसी के भरोसे में है तुम नहीं जानते उसे कैसी लत लगी हुई है ,मैं तो तुम्हारे सामने बोल भी नहीं पाऊँगी ,उसे इन सबसे दूर करना होगा भाई,'

'दीदी क्या परमिंदर के अलावा भी कोई था जो उसके साथ था ,'मुझे लगा दीदी विक्की और नानू का नाम लेगी लेकिन,'नहीं भाई परमिंदर ही था और अब हमें बस उस दवाई का तोड़ ढूँढना है जो परमिंदर ने लडकियों को दिया था,उसके लिए मुझे थोड़ी प्रीति की मदत चाहिए पर वो मेरे बातो को सीरियस नहीं लेगी तुम्हे उसे अपने भरोसे में लेकर मेरे पास लाना होगा जिससे मैं उससे बात कर सकू,'

दीदी क्यों विक्की और नानू को बचा रही थी ये राहुल के समझ में नहीं आया,

लेकिन दीदी मन में सोचती है,'क्या करू भाई मैं तुझे हर चीज नहीं बता सकती,मैं नहीं चाहती मेरे भाइयो पर किसी का साया भी पड़े मुझे ये सब खुद ही निपटाना होगा,'

इधर प्रीति के लटके झटके बढ़ रहे थे और मुझे परेशानी होने लगी 'अरे यार तू किसी और को अपने दिखा ना ये सब अब मुझे चैन से एक्सरसाइज तो करने दे ,प्रीति मुह बनाते हुए बहा से जाने को हुई तभी नानू आ करके अरे वह प्रीति बड़ी सेक्सी लग रही हो उनके आँख मिले और दोनों मुस्कुरा दिए जिसे मैंने टोटल इग्नोर कर दिया ,

'जिसे लगना चाहिए उसे तो मैं कभी भी सेक्सी नहीं लगती 'प्रीति ने मेरी ओर देखा और चली गयी,'भाई तू भी कभी किसी लड़की को घास डाल दिया कर ,'मैंने नानू को देखा आज उसकी बातो पर मैं गुस्सा नहीं हुआ और बेंच प्रेश करने लगा,,..

14.

डॉ चुतिया का क्लिनिक राहुल की लेपी से डॉ बहुत देर से कुछ देख रहे थे,राहुल मेरी को घुर घुर के देख रहा था क्योकि उसने बहुत ही छोटा स्कर्ट पहना था और उसके गोल गोल मोटे जंघा साफ दिखाई दे रहे थे और राहुल को उत्तेजित कर रहे थे,जिसे मेरी भी समझ गयी थी और वो जानबूझ के अपने निताम्भो को मटकाकर उनका प्रदर्शन कर रही थी उनके कसाव स्कर्ट के छोटे होने के कारन साफ़ दिखाई दे रहे थे,राहुल अपने तने हुए लिंग को सम्हालने की कोसीसी में था जिसे देखकर मेरी के चहरे पर मुस्कान आ जाती है,इधर चुतिया बहुर ही गंभीर दिख रहे थे वो बारी बारी से सभी लडकियों के विडिओ देख रहे थे और उन्होंने हेडफोन लगाया हुआ था ताकि बाकि के दो जन आवाजे ना सुन सके ,वो सभी के मनोविज्ञानिक पक्षों को गंभीरता से देख और लिख रहे थे,राहुल बोर सा हो गया था और वो उठाकर टॉयलेट की तरफ बढ़ा जो की डॉ के केबिन के बहार था जैसे वो अंदर घुसा थोड़ी देर में ही मेरी भी अंदर आ गयी ,उसे देख कर राहुल चौक तो गया पर खुश भी हो गया की चलो टाइम पास तो हो जायेगा,

'क्या हेंडसम बहुत घुर रहे थे मुझे क्या पसंद आ गया मेरे अंदर,'

'आपके अंदर तो सभी कुछ अच्छा ही होगा मेडम ,एक बार दिखाइए तो क्या है आपके अंदर.'राहुल ने मेरी के वक्षो को देखते हुए कहा,मेरी के चहरे पर मुस्कान आ गयी ,

'सही कहते है डॉ तू डेड साना है,'कहते हुए मेरी ने उसका हाथ पकड़कर अपने वक्षो में रख दिया ,मेरी के इतने बड़े थे की राहुल ने दोनों हाथो से एक ही वक्ष को पकड़ पाया और उसे चुसना दबाना शुरू कर दिया,मेरी के आह निकलने लगे पर राहुल का असली इंटरेस्ट तो उसकी जंघा थी,उसने अपने हाथो से उसे छूना सुरु किया और उसकी कोमलता को महसूस करने लगा,

'वाह क्या चीज है ,मजा आ गया,'उसने अपने हाथो को ऊपर ले जाने लगा जहा से जंघा की शुरुवात होती है ,राहुल के मन में तब एक बड़ा लड्डू फूटा जब उसे अहसास हुआ की मेरी ने अंदर कुछ भी नहीं पहना है,धीरे धीरे किये इस वार से मेरी भी विचलित हो गयी और अपना हाथ बड़ा कर उसने राहुल के हाथो के ऊपर रख दिया

'आह मेरे हेंडसम ,बस कर नहीं तो कुछ करने का मन हो जायेगा,'

राहुल का हाथ मेरे की योनी पर था जो पूरी तरह से गीली थी और राहुल उसमे उंगली डालना चाह रहा था पर मेरी अपने हाथो से उसका विरोध करने लगी ,और उसके हाथो को वह से हटाने लगी,

'अरे मन हो जायेगा तो होने दो ना ,खेल लेते है ये खेल भी,'राहुल उत्तेजित हो चूका था उसने अपनी जिप खोल के अपने लिंग को बहार निकला,लेकिन जैसे ही मेरी को ये अहसास हुआ वो राहुल के चहरे को पकड़ के ऊपर कर दि ,

'नहीं रे मेरे हेंडसम ये सब नहीं,मुझे भरने का आधिकार बार दो लोगो के पास है इतना मजा कर लिया ना बस इतने में खुश रह,'कहते हुए वो जाने लगी ,

'दो लोग कौन एक तो डॉ हो गए और दूसरा,'मेर पलटी

'दूसरा मेरा पति 'मेरी मुकुराते हुए वापस आई

राहुल के होठो में अपने होठो को भरकर किस किया और चली गयी,राहुल बेचारा ठगा सा देखता रहा लेकिन फिर अपनी उंगलियों को सुंघाकर ही खुश हो गया,

डॉ चुतिया ने लेपी बंद कर अपने सिट पर आँखे बंद कर बैठे थे,राहुल और मेरी उन्हें देखे जा रहे थे की वो कुछ कहेंगे,थोड़ी देर बाद उन्होंने आँखे खोली,

'हम्म्म मुझे तो कोई बड़ी गड़बड़ लग रही है इतनी पावरफूल इंजेक्शन परमिंदर या विक्की नानू के पास आया कहा से,लडकियों का विहेबियर देख के लगता है की सिंपल और अच्छी लडकियों को भी इससे बिगाड़ा जा सकता है,और जितना जादा उनके साथ सेक्स होता है वो उतनी ही उतावली हो जाती है,अगले बार के लिए और तुमने नेहा वाला फोल्डर देखा,?'

नेहा का नाम सुनकर राहुल का चहरा उतर जाता है,और वो नजरे नीची कर ना में जवाब देता है,

'यार जो हो गया उसे बदला तो नहीं जा सकता ना,तुम उसे अपनी दीदी मानते हो और एक सगी बहन से जादा और दुनिया में सब से जादा प्यार तुम आकाश और नेहा से करते हो ,तुम्हारे लिए ये देखना बहुत मुस्किल होगा मैं ये बात जनता हु,और तुम देखना चाहो या ना देखो ये तुम्हारा पर्सोनल बाते है तो मैं तुम्हे देखने के लिए या नहीं देखने के लिए फ़ोर्स नहीं करूँगा ,लेकिन नेहा वाला केस बाकियों से अलग है,आयशा की किस्मत अच्छी थी की उसे इंजेक्शन नहीं लगाया गया पर नेहा की किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी,लेकिन नेहा ने हो काम किया है वो काबिले तारीफ है,वो अपने सेक्स को कण्ट्रोल कर पा रही है ये ही बहुत बड़ी उपलब्धि है,खैर उसे भी प्रोब्लम्स होती होंगी पर तुम भाई हो उसके ऐसी बाते तुम्हे तो नहीं बता सकती ना ,इस इंजेक्शन से लडकिया बहुत जल्दी वासना के आगोस में आ जाती है जो की किसी भी लड़की के लिए कभी सही होता क्योकि कई लड़के उन्हें छेड़ते रहते है,और यहाँ तो ऐसा हो रहा है की सिर्फ एक बार इंजेक्शन देने पर लडकिय सेक्स के लिए पागल सी हो जा रही है,और उसके बाद थोडा सा भी किसी लड़के के छूने पर भी उनकी वासना जाग जाती है जिसे सम्हालना बहुत मुस्किल है और एक बार सेक्स करने पर दूसरी बार और भी जल्दी वासना के गिरफ्त में आ जाती है,इसलिए शायद उन लडकियों के विडिओ कम है जो सीधी सधी थी पहले से लिकिन पिंकी जैसी लडकिय तो निम्फोमेनिक (सेक्स एडिक्ट) ही बन गयी,,पता नहीं बेचारियो का क्या हाल होता होगा मुझे तो सोच के भी दुःख होता है,की ये साले लड़के सिर्फ अपने थोड़े से मजे के लिए लडकियों को जिंदगी भर की सजा दे गए,'डॉ का चहरा दुःख से भर गया मेरी अपना हाथ उनके सर पर रखकर सहलाती है,राहुल कुछ सोच में पड़ा होता है,

'डॉ आप भी तो लडकियों के मामले में कमीने है पर आप ऐसा क्यों कह रहे है की बेचारी लडकिय क्या आप के पास ये दवाई होती तो आप उसका युस किसी ऐसी लड़की को फ़साने में नहीं करते जो आपको पसंद आ गयी हो और वो आपको भाव नहीं दे रही

हो,'डॉ के चहरे पर मुस्कान आ गयी

'राहुल लडकियों से फ्लर्ट करना और उनके साथ संबध बनाना तो प्राकृतिक चीजे है लड़के लडकियों को तरफ तो आकर्षित होंगे ही लडकिय भी होती है ,पर किसी को दर्द पहुचना ,किसी की भावनाओ से खेलना,किसी के साथ जबरदस्ती करना रुग्न मानसिकता का प्रतिक होता है,तुम एक लड़की को घुर सकते हो और वो तुम्हे स्माइल कर सकती है या गुस्सा दिखा सकती है उसकी मर्जी है पर अगर तुम ये चाहो की वो अपना गुस्सा ना दिखाए तो ये तो गलत है ना,लडकिय भी तो इन्सान ही है ना तो क्यों उनपर इतना जुल्म होता है,,कोई लड़का चलती गाड़ी में उन्हें छेड़ देता है,कोई उनके अंगो को मसल देता है ये सभी मानसिक रूप से बीमार लोग है ,हा अगर लड़की तुम्हे नजरो से ही आमंत्रित करती है अपने हाव भाव से बताती है की वो भी तुम्हे पसंद करती है, तुम्हारा विरोध नहीं कर रही और उसका गुस्सा झुटा है तब कोई प्रोब्लम नहीं है लेकिन तुम किसी के साथ जबरदस्ती कर रहे हो तो वो तो गलत है ना,'राहुल को बात कुछ कुछ समझ आ गयी थी ,

'लेकिन कैसे पता चलेगा की लड़की इंट्रेस्टेड है की नहीं ,'

'बहुत सिंपल है बस महसूस करो बाते समझ में आने लगती है,तुम उन्हें देख के समझ जाओगे जैसे वो समझ जाती है,लडकिय दिमाग से नहीं दिल से जीती है इसलिए उनमे कुछ खास शक्तिया होती है वो आसानी से लोगो के सिग्नल्स को भाप जाती है,पर पुरुष सोचता बहुत है इसलिए वासना से भर जाता है और उसका स्वभाव ही आक्रामक होता है,इसलिए जरुरी है की सोचना कम करो और चीजो को महसूस करो,'....

राहुल और मैं स्कूल से अपने घर आते है ,हमें जोर की भूख लगी थी तो हम किचन में चले जाते है,मेरी मम्मी कही दिखाई नहीं दे रही थी शायद वो पड़ोस वाली आंटी के घर गयी होंगी जैसा वो हमेसा जाती थी ,हम किचन में ही बैठकर रोटिय खाने लगे की हमें जोर से हँसाने की आवाजे आने लगी हमें देखा की ये तो दीदी की आवाज है,

''साला दीदी को क्या हो गया जो रावन जैसे हस रही है,'राहुल ने कहा,

'पता नहीं कुछ मूवी देख रही होगी और क्या,'तभी उनके साथ किसी और लड़की के हसने की भी आवाजे आने लगी ,हमें समझ आ गया की कोई सहेली आई होगी ,हम नाश्ता कर मेरे रूम की और जाने लगे ,की दीदी को आभास हो गया की हम लोग आ गए गई उन्होंने आवाज डी,

'राहुल ,आकास मेरे रूम में आओ,'हम दोनों थके से थे हम बेमन से उनके रूम में पहुचे वहा दीदी के साथ दो और लडकिय बैठी थी ,एक को मैं पहचानता था ये भावना थी जो हमें उस दिन केंटिन में मिली थी और दूसरी लड़की अनजान थी पर उसकी ख़ूबसूरती को मैं देखता रह गया और उसमे खो सा गया इतनी खूबसूरत इतनी प्यारी कोई कैसे हो सकती है,इतनी प्यारी तो सिर्फ मेरी दीदी ही है,मैं उसके गोर रंग और चहरे के तेज को देख रहा था,उसका चहरा इतना तेजस्वी था जैसे पूरी पवित्रता उसमे ही उतर आई हो ,हमरे आते ही दीदी ने हमारा इंटो कराया

'इनसे मिलो ये है मेरे भाई ,मेरे जिगर के टुकडे राहुल और आकाश ,और ये है मेरी प्यारी सहेलिय,भावना इससे तो तुम मिल चुके हो ,और (मेरे दिल की धड़कन जैसे थम सी गयी उस हसीना का नाम सुनने के लिए )आयशा,"

आयशा अच्छा ये वही लड़की है जिसने इतनी बहादुरी दिखाई थी ,आकाश बेटा ये तो तेरे लिए परफेक्ट है इसमें दीदी के से गुण है, मैंने अपने आप से कहा,राहुल भावना को देखे जा रहा था ,और भावना राहुल को देखकर शर्मा रही थी जैसे वो उसकी कुछ हो ,वही आयशा ने मुझे सिर्फ हल्लो कहा और राहुल की तरफ मुड गयी ,

'मैं इन्हें कैसे भूल सकती हु यही तो है जिन्होंने मेरी इतनी मदद की है,और इनके कारन ही तो हमारी इज्जत आज बची हुई है वरना....

'कहते कहते आयशा चुप हो गयी दीदी ने उसे गले लगाया,'छोड़ ना पुरानी बातो को 'साला राहुल तो हीरो बन गया था,भावना उसे देख कर मुस्का रही थी आयशा उसकी तरीफ कर रही थी और मैं ,मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मैं हु ही नहीं,

'आपने जो बहद्दुरी का काम किया वो तो तारीफ के काबिल है,'मैंने अपने को प्रस्तुत करने के उद्देश्य से कहा,

'हुम्म थैंक्स,और राहुल जी आप कैसे है,'इसकी माँ का ये क्या हुआ जहा मैं कभी लडकियों को भाव नहीं देता था ये लडकिय मुझे भाव नहीं दे रही थी,मैं थोडा मायूस हुआ,आयशा राहुल पर जादा इंट्रेस्टेड लग रही थी ,मुझे इस बात का कभी दुःख नहीं होता पर मैं उससे बात करने को बेचैन था ,आज तक पहली बार ऐसा था की मैं किसी लड़की से बात करने को बेचैन था,मैंने निराश होके दीदी की तरफ देखा शायद वो मुझे देख रही हो और अपने भाई के मन की बात जान ले ,पर मैं निराश हो गया वो भी उनलोगों के साथ बिजी थी और मैं पहली बार भीड़ में अकेला सा महसूस किया जबकि मेरे लिए ये हमेसा की बात थी की मैं दीदी के दोस्तों के बीच चुप ही रहता था,और राहुल ही बात करता था पर मैं आज अटेंशन चाहता था इसलिए दुखी था,मैं जा भी नहीं सकता था क्योकि मैं जाना भी नहीं चाहता था ,मैं थोडा बेचैन होने के बाद आयशा के चहरे को देखने लगा ,हरे कलर की सलवार में वो कमल की लग रही थी वो बड़ी ही मासूम सी दिख रही थी पर एक आत्मविश्वास और संकल्प का तेज उसके चहरे पर दिख रहा था,कानो में बलिया जब हवा से लहराती थी तो मेरा दिल भी उसके साथ लहराने लगता ,उसके होठो का गुलाबीपन क्या मादकता थी ,वो बोल रही थी और मैं उनके किसी साचे में ढले हुए से मोती से चमकीले दांतों को देख रहा था ,बात करने पर उसके गुलाब की पंखुडियो से होठ जब चलते तो मेरा दिल भी झूम उठता,उसकी आँखे हे भगवान बड़ी बड़ी हिरनी जैसी जीतनी चंचलता उसके आँखों में थी उतनी ही गहराई भी थी सफ़ेद आँखों पर काली पुतलियो का चलना .और उसका पलक झपकाना ,फिर होठो पर एक मुस्कान आई और मैं फिर दिवाना हो गया उसके गाल लगता था की छू लू तो गंदे हो जायेंगे ,बालो को अपने उंगलियों में घुमाती और लट बनती फिर नजरे झुकाती फिर उठाती,उसकी प्यारी बाते उसकी मीठी आवाज,उसके काले बाल जो उसके कमर तक थे,मैं बस खोया सा उसे देख रहा था जब तक की मुझे किसी ने झकझोरा नहीं,

'आकाश आकाश ,अबे तुझे क्या हुआ आकाश ,'राहुल मुझे झकझोर रहा था ,फिर पानी के छीटे मैं होश में आया 'हा हा हा क्या हुआ क्या हुआ 'कमरे में सभी हस रहे थे ,सिवाय एक शख्स के वो थी आयशा,..वो मुझे गुस्से से घुर रही थी,मैं बुरी तरह से झेप गया और नजर झुका ली ,मैंने नजर उठाके जब दीदी को देखा तो उन्होंने मुझे नजरो से इशारा कर दिया और मैं शर्माता हुआ वहा से भाग गया...जाते जाते मैंने फिर से मुड़कर देखा आयशा अब भी गुस्से से मुझे देख रही थी जैसे मुझे खा ही जाएगी,

13.

मैं अपने कमरे में आयशा की याद में खोया था की राहुल मेरे कमरे में आया .और मुझे गले से लगा लिया ,

'वाह वाह मेरे भाई को प्यार हो गया,'मैं थोडा शर्मा गया 'क्या पता भाई अभी तो कुछ नहीं बोल सकता ,आज ही तो देखा हु उसे,उसकी वो प्यारी बाते वो आँखे'मैं फिर खोने लगा की राहुल ने मुझे टोक दिया ,

'साले फिर से बेहोश मत हो जाना ,तू तो पहली बार में ही पगला गया है बे,आब आगे क्या करेगा,'मैंने बड़े अधीर हो के राहुल को देखा,

'भाई मुझे क्या पता ,' 'साले तू तो उसे ऐसे घुर रहा था की लड़की ही डर जाए,पहला इम्प्रेसन ही ख़राब कर दिया ,भाई इतना अधीर होने की क्या जरुरत है अभी अभी तो मिली है ,प्यार का मजा ले ,'राहुल ने मेरे माथे को चूमा और अपने घर की और निकल गया,,,,

'मैं आज रात बड़ा बेचैन था दीदी भी मेरे कमरे में नही आ रही थी,मैंने ही उनके कमरे में जाने की सोची...दीदी अपना लेपी लेकर बिस्तर में बैठी थी,दीदी ने मुझे देखा और मुस्कुराई और फिर अपने काम में लग गयी ,दीदी के इस स्वभाव से मुझे थोड़ी बेचैनी हुई,क्योकि आज जो हुआ था उसके बाद से मैं दीदी से अभी मिल रहा था और वो मुझे इग्नोर कर रही थी,...मैं उदास हो कर जाने लगा,

'इधर आके बैठ जा ,'मैं चुपचाप उनके पास आकर बैठ गया,दीदी फिर अपना काम करने लगी थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना लेपी बंद किया,

'तो मेरे भाई जी बताइए ,आप जैसा डिसेंट लड़का ऐसी हरकत क्यों कर रहा है,'मैं थोडा डर गया

'क्या हुआ दीदी ,मैंने क्या किया 'दीदी ने मुझे झूठे गुस्से से देखा,

'क्या किया तूने मेरी फ्रेंड्स के सामने मुझे इतना शर्मिंदा फील कराया उसका क्या और कोई किसी लड़की को ऐसे घुर के देखता है क्या ,,पता नहीं मेरी दोस्त मेरे बारे में क्या सोचेंगी,'मैं नज़ारे झुकाए बैठा था और दीदी हलके हलके मुस्कुरा रही थी ,

'पता नहीं दीदी मुझे क्या हो गया था मैं सच में नहीं चाहता था की ऐसा कुछ हो ,सॉरी दीदी मुझे माफ़ कर देना,अगर मेरी वजह से आपको दुःख पंहुचा हो तो ,,....'मेरी आँखों में एक दो बूंद आ ही गए और मेरी आवाज भी भारी हो गई...

दीदी ने हस्ते हुए मेरे सर पर अपना हाथ रखा और सहलाने लगी

'अरे पागल तुझे नहीं पता आज मैं कितनी खुश हु आख़िरकार वो दिन आ ही गया जब मेरे भाई को प्यार हो गया ,,और आयशा अच्छी लड़की है लेकिन अभी अभी उसका दिल टूटा है इसलिए वो थोडा अपसेट रहती है बस और कुछ नहीं ,आजा मेरे प्यारे भाई,'दीदी ने मुझे खीच कर अपने सीने से लगा लिया आज मैं भी बहुत खुस था,

'ऐसे भाई उसमे क्या पसंद आ गया तुझे ,कभी तो तुझे कोई पसंद नहीं आई थी,'

'उसमे मुझे आप दिखाई दिए दीदी ,वो आपके जैसे ही है बहुत सुंदर,बहुत मासूम और बहुत बहाद्दुर 'कहते हुए मैं फिर दीदी के सीने से जा लगा,दीदी के आँखों में आंसू थे उन्हें डॉ की बाते याद आ रही थी की जिस लड़की में उसे तेरा चहरा दिखेगा वो उससे ही प्यार कर पायेगा मेरा भाई मुझे इतना प्यार करता है ,मैं इसके प्यार को कभी हारने नहीं दूंगी ,,दीदी मेरे सर को किस करने लगी ,इतना उनकी आँखों से आंसू बह रहे थे जो मैं नहीं देख पा रहा था ,और वो मुझे चूमे जा रही थी ,उन्होंने मेरा सर उठाया तो मैंने उनकी भीगी हुई आँखे देखि,मैंने उनकी आँखों के अपने होठो में समां लिया,एक आंसू ढूलता हुआ दीदी के दोढी तक आ पहुच मैंने झट से उसे अपने में समां लिया ,अब दीदी के चहरे में एक मुस्कान फैली मेरे चहरे में भी मुस्कान फ़ैल गयी,,

दीदी ने मेरा सर अपने हाथो में लेकर मेरे होठो में अपने होठो को मिला दिया,अब दीदी को किस करना आम सी बात हो गयी थी मैंने भी अपने जीभ को उनके होठो में घुसा दिया जिसे वो चूसने लगी,दीदी थोडा हटकर उठी और अपने टेबल से एक चोकलेट उठाया और मुझे दिया ,

'हैप्पी वाला पहला प्यार भाई,भगवान तुम दोनों को मिलाये और तुम दोनों हमेशा खुस रहो,'दीदी फिर मेरे सीने में सर रख कर सोने लगी,

'दीदी चलो ना साथ ही खाते है,'दीदी ने अपना सर उठाया और मैंने चोकलेट का एक टुकड़ा तोड़ कर उनके मुह में डाल दिया ,दीदी ने एक स्माइल की और मेरा सर पकड़ कर मुझे किस करने लगी वो चोकलेट का टुकड़ा दीदी के मुह से मेरे मुह में आ गया ,मैंने उसे थोडा चूसा फिर दीदी के मुह में भेज दिया हमने पूरी चोकलेट ऐसे ही ख़तम की,और फिर दीदी ने एक बोतल उठाई और अपने मुह में पानी भरा ,पर उसे निगला नहीं और मुझे देखने लगी ,,,मेरे चहरे पर एक स्माइल आ गयी मैंने आगे बढकर उनके होठो को चूसने लगा और आधा पानी मेरे मुह में आ गया ,इन सब हरकतों को हम कर तो प्यार के कारन रहे थे पर मेरे और दीदी के शारीर को शायद ये बात नहीं पता थी वो उत्तेजित होने लगा था मेरा लिंग खड़ा हो चूका था और दीदी के निकर भी योनी के ऊपर गिला था,जैसे ही दीदी को मेरे ताने होने का आभास हुआ तो वो मुझसे हटती हुई मेरे लिंग को सहला दि और खिलखिला के हसने लगी,मैंने भी जब उनका गीलापन देखा तो मैंने उन्हें इशारे से बताया और मैं भी हसने लगा हम दोनों ही हस रहे थे की अचानक दीदी

हस्ते हस्ते मेरे ऊपर आ गयी आज मैंने भी अंदर कुछ पहना नहीं था मेरे ऊपर आने से मेरा तनाव उनकी गीलेपन पर रगड़ खा गयी ,मैं भी अपनी उत्तेजना में थोडा दबाव दे दिया ,और स्माइल कर दिया पर इससे दीदी की आह निकल आई ,

'आह भाई ,'और उन्होंने मुझे देख एक स्माइल दि,

'अब तो तेरा मोटा हथियार आयशा के काम आएगा सम्हाल के रखना,कही दीदी के प्यार में इसे लुटा ना देना ,'दीदी कह कर खिलखिला गयी,उनका प्यारा चहरा देख मैंने उन्हें निचे कर दिया और बिना कुछ बोले ही उन्हें चूमने लगा ,उनके होठो को चुमते हुए मैने फिर ऊपर से अपना लिंग रगड़ना चालू किया अब मैं तेज हो रहा था और बड़े बेरहमी से वार कर रहा था ,मैं पागलो जैसे हो रहा था मेरे अंदर वासना का एक सैलाब सा आ रहा था और रगड़ने के बजाये उसे मरने लगा था ,मेरे ऐसे करने से दीदी की योनी पर सीधे चोट पड़ रही थी,और दीदी को शायद बड़ा दर्द हो रहा था,वो आह आह कहे जा रही थी पर मुझे रोक नहीं रह थोड़ी देर बाद दीदी ने मुझे रुकने कहा

'भाई भाई सुन ना ,(मैंने उन्हें देखा)मेरी आँखों में देख ,'मैं उनकी आँखों में देखने लगा कुछ बुँदे वहा उनके आँखों की शोभा बड़ा रही थी ,दीदी के चहरे पर कोई गुस्सा और दुःख नहीं था ,वो मुस्कुरा ही रही थी पर उन्होंने मेरी आँखों की गहराई में झाकते हुए मुझे प्यार की एक सौगात दि ,और मेरे होठो को भर लिया ,थोड़ी देर के रसपान के बाद मैं फिर उग्र होने को था दीदी ने मुझे फिर ऊपर उठाया मेरी आँखों में देखा

'भाई इतना उतावला क्यों हो रहा है ,'दीदी ने मेरे बालो को सहलाते हुए कहा,

'पता नहीं दीदी कुछ कण्ट्रोल में नहीं रहता ,'दीदी मुस्कुराने लगी ,

'खोल दू क्या अपने कपडे ,अंदर घुसयेगा क्या,'दीदी ने मनो व्यंग किया हो और हसने लगी ,तभी मेरे दिमाग की बत्ती जली की मैं क्या कर रहा था,

'दीदी सॉरी ,' 'भाई कोई सॉरी बोलने की जरुरत नहीं है मैं तेरी ही हु ,तू मेरे से सेक्स करना चाहे तो भी मैं मना नहीं करुँगी ,'दीदी बड़े प्यार से मुझे सहलाये जा रही थी,

'क्या दीदी आप भी कही मैं आपसे सेक्स कर सकता हु क्या मैं तो आपका भाई हु ना,मैं ऐसा क्यों चाहूँगा,'मेरी आवाज में गंभीरता थी....

'दीदी ने मुझे फिर अपने ऊपर ले लिया ,

'मेरे प्यारे भाई ,तेरे पास जो इतनी ताकत है ना ये उसका ही उछाल है,तो फिकर मत करना तेरी दीदी तेरे लिए सब कर सकती है समझा ,'मैंने हां में सर हिलाया और दीदी ने फिर मुझे चूमना शुरू कर दिया,थोड़ी देर में ही दोनों थककर सो जाते है ,थोड़े देर बाद नेहा उठकर किसी का इंतजार कर रही है तभी उसका मोबाईल बजता है ,उसके चहरे पर खुसी आ जाती है,काल राहुल का था ,

'दीदी वो तैयार है,कल आपसे मिलाने ला रहा हु,'

'ओके भाई ,तो कल मिलते है गुड नाईट,'

मैं थोडा बेचैन था मुझे आयशा से मिलाने का उससे बात करने का मन हो रहा था ,मैं चाहता था की दीदी के साथ ही कॉलेज चला जाऊ पर क्या करे दीदी भी आज कॉलेज नहीं जाने वाली थी और राहुल भी आज प्रीति के साथ घर आ रहा था ,दीदी से मिलाने तो मेरे लिए उसके साथ जाना भी मुस्किल था मैं इसी सोच में था की क्या करू ,मैंने अकेले कॉलेज जाकर आयशा से मिलाने का फैसला किया ,और अगर मिल ना पाऊ तो कम से कम देख ही लूँगा ,मैंने दीदी को ये सब बता दिया दीदी हँसाने लगी और कहा ठीक है चले जा,

'दीदी राहुल को बोलो ना साथ चले मैं अकेले कैसे आज तक कुछ भी तो नहीं किया हु मैं आपके और राहुल के बिना,,,'

'अरे मेरे भाई प्यार की लड़ाई तो तुझे ही लड़नी है और जीतनी भी है,वो भी अकेले ,समझा लड़की के दिल को जितना कोई खेल नहीं है ,और वो भी आयशा जैसी चोट खाई लड़की के..मैं जानती हु मेरा बाई बहुत बहाद्दुर है और बहुत समझदार है तू कर लेगा,,'

'पर दीदी कैसे '

'क्या कैसे बस कुछ मत करना तू दिल से उसे प्यार करता है ना तो दिल की सुनना जो दिल कहे करना दिमाग मत लगाना,बस दिल के साथ रहना तेरा दिल बहुत मासूम और प्यारा है मेरे भाई आयशा को भी इससे प्यार हो जायेगा,,'दीदी ने मुझे एक प्यारी सी पप्पी दि ,...

इससे दीदी ने चैन की साँस भी ली क्योकि शायद मेरे रहते वो प्रीति से अच्छे से बात नहीं कर पाती,मैं भी अपने पहले प्यार की उमंग में था मैंने दीदी का मोबाईल निकला दीदी के साथ एक सेल्फी ली और अपने रूम चला गया , थोड़ी देर में वह राहुल प्रीति को लेकर पहुचता है,मैं कॉलेज जाने को तैयार होकर निचे आया था,कि वाह ये कौन है,मैंने जब उस लड़की का चहरा देखा तो मुझे यकींन नहीं आया की ये प्रीति है,प्रीति ने आज काले कलर की सलवार कमीज पहिनी हुई थी ,मैंने उसे इतने सिंपल कपडे में कभी नहीं देखा था ,मेकअप भी बहुत ही हल्का था,एक छोटी से बिंदी उसके चहरे को और भी मासूम बना रही थी मैं उसके चहरे को ही देखता रहा जिससे वो शरमाने लगी मुझे और आश्चर्य हुआ की ये शर्मा रही है,उसके गुलाबी होठो को वो अपने मोती जैसे दंन्तो से दबाना ,अपने लटो को उंगली से घुमाना और मुझे चोर निगाहों से देखना वह कितनी कमाल की लग रही थी वो ,उसे इस तरह घूरता देख कर राहुल मेरे पास आ कर मुझे हिलाया,

'साले फिर से बेहोश हो जायेगा क्या ,'मैंने हसकर उसे धक्का मारा और प्रीति के पास जाकर उसे अपने सीने से लगा लिया और वो भी मुझसे चिपक के रोने लगी,

'we miss you sewty welcome home,'प्रीति भी मुझसे अलग हुई मैंने उसके गालो को अपने हाथो में लेकर उसके आंसू पोछें ,

'तुझे फिर से ऐसा देखकर अच्छा लगा ,क्यों अलग हो गयी थी हमसे ,तुझे उस गंदगी में देखकर बहुत तकलीफ होती थी ,'राहुल ने मुझे आँखों से नहीं का इशारा किया ,और मैं भी चुप हो गया ,और उसे फिर एक बार गले लगा लिया ,..तभी दीदी वहा पहुची और अपने बाजुओ को

खोल कर उसका स्वागत किया..प्रीति उनके गले लग गयी और रोने लगी दीदी ने उसे सहलाया कुछ बुँदे तो दीदी के आँखों में थे वो ऐसे प्रीति से बहुत प्यार किया करती थी पर उसका यु आवारा लडको के संग घुमाना और ऐयासिया करना उन्हें बिलकुल पसंद ना आता अब दीदी को शायद उसके हालत का सही सही अनुमान लगा था...मैंने राहुल को बताया की मैं आयशा से मिलाने जा रहा हु उसने मुझे बेस्ट ऑफ़ लक कहा और मैंने सबको बाय कहकर वह से निकल गया,

दीदी प्रीति को अपने कमरे में ले गयी और राहुल को वही बैठने को कहा राहुल तो जानता था की क्यों ..

प्रीति जैसे ही दीदी के बिस्तर में बैठी उसे कुछ गड़ता है,

'अरे दीदी ये मोबाईल,'

'अरे छोड़ उसे ये आकाश भी ना अभी सेल्फी लेने के बाद यही छोड़ गया होगा,रख दे बाजू में'फिर दीदी थोड़ी सीरियस होकर बोलना शुरू करती है.

' प्रीति मुझे पता है की तुम किस मुसीबत में हो ,'द्दीदी अपना लेपी ऑन कर उसे उसका विडिओ देखने लगी,प्रीति का चहरा पर शर्म से झुक गया ,दीदी ने उसे अपने सीने से लगा लिया ,

'देख प्रीति बात ऐसी है की तूने जो भी किया वो अपने मजे के लिए किया और तुझे पता भी नहीं चला की तू कब उनके कब्जे में हो गयी पर मेरी बहन तू नहीं जानती की कितनी भोली भली लडकियों की जिंदगी इन लोगो ने बर्बाद कर दि है,इस इंजेक्शन का असर क्या है ये अनुमान ही नहीं लग पा रहा है ,तुझपर इसका अलग असर है और बाकियों पर अलग हमें सबकी जिंदगी बिगड़ने से बचानी है और तू ही है जो मुझे सच बता सकती है जो सच इस विडिओ में भी नहीं है ,की इसमें और कौन कौन सामिल है ,मुझे लगता है की परमिंदर,नानू और विक्की तो बस मोहरे है असल में ये बड़ा रेकेट फ़ैलाने की कोसिस है शायद कोई सीधी साधी लडकियों को फसा कर उनसे धंधा करने की कोसिस ,क्या तेरे साथ कुछ ऐसा हुआ था,,'दीदी का चहरा पुरा सीरियस था वही प्रीति उन्हें ठगी सी देख रही थी,

'दीदी मेरा सौदा हुआ था,एक बार नहीं कई बार लेकिन मैंने ये बस मजे के लिए ही किया था जब की ये लोग मेरी प्यास नहीं बुझा पाए तो इन्होने कहा की तूझे इसी और से करवाते है पैसे भी मिल जायेंगे और तुझे भी अलग अलग लडको का मजा आएगा,मैं तो तुरंत मान गयी थी, मैंने कभी नही सोचा था की ये लोग इतने कनेक्शन वाले होंगे मुझे तब अटपटा लगने लगा जब वो इतने अलग अलग ग्राहक ढून्ढ के लाने लगे मैंने तो खूब पैसे कमाए और बहुत मजे भी लिए पर आज मुझे समझ आ रहा है की उन्होंने मुझे प्रोफेसनल रांड ही बना दिया था..कभी कभी तो विदेशी लोग भी आते थे ,और हर टाइप के लोग ...'कहते हुए प्रीति आकाश में खोयी सी देखने लगी जैसे अभी अभी उसे कुछ समझ आया हो वो अपने नशे में इतनी खोयी थी की दुनिया की सच्चाई उसे समझ नहीं आ रही थी ,अभी अभी वो जागी सी लगी,जैसे अचानक ही कोई शीशा टुटा हो,

'हम्म मेरा शक सही था ये लोग बस मजे के लिए ऐसा नहीं कर रहे थे ,इनके पीछे कोई बड़ी ताकत का हाथ है जो लडकियों को इस धंधे में धकेलने के फ़िराक में है,तेरे साथ कुछ और भी लडकिय आती थी क्या,'

'हा दीदी पर मैं किसी को पहचानती नहीं ,पहचान का मौका ही नहीं मिलता था ,मुझे तो पता भी नही होता था की मुझे कहा ले जा रहे है ,कभी कभी होटल तो कभी किसी के फार्महाउस,वगेरह ,'दीदी ने प्रीति को देखा उसे इस बात का जरा भी अफ़सोस नहीं लग रहा था की उसके साथ ये सब हुआ था,शायद उसे इससे कोई परेशानी नहीं थी परेशानी तो उनको होती जिनकी मर्जी के खिलाफ उन्हें इस धंधे में धकेला जाता....

दीदी ने राहुल को भी ऊपर बुला लिया और अपने ढंग से ये बता दिया की इन सबमे पूरा गेंग ही शामिल है पर वो कौन है ये पता लगाना एक चुनौती है ,उन्होंने राहुल को ये भी बता दिया की विक्की और नानू बभी इसमें शामिल है और उन्हे अभी कुछ नहीं करना है जब तक की दीदी कुछ ना कहे और कैसे भी करके उन्हें फ़साना है जाल में .

'दीदी वो मेरे कांटेक्ट में है मैं कुछ करू शायद मुझे कुछ बता दे,'प्रीति ने कहा

'नहीं प्रीति वो वो तुम्हे बस इस्तमाल करते है तुमसे प्यार नहीं की तुम्हे कुछ बताये और ऐसे भी उन्हें कितना पता है इसका भी कुछ भरोसा नहीं है क्योकि वो दोनों भी परमिंदर के इशारे में ही काम करते थे ,मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा है की आगे क्या करना है ,शायद समय ही कुछ बतायेगा ,और राहुल प्लीज् आकाश को इन सबसे दूर रखना उसे ये पता चल गया तो कुछ भी कर सकता है शायद नानू और विक्की को ही मार डाले ,मैं अपने भाई को खोना नहीं चाहती तू तो समझदार है पर वो अपने दिल की ही सुनता है,'राहुल तो सब समझ रहा था उसने भरोसा दिलाया और सब वक्त के हाथो में छोड़ दिया,...

पर वक्त को क्या मंजूर था वो तो किसी को नहीं पता ना...मैं अपने घर से निकला और थोड़ी दूर गया ही था,की मुझे एक डर ने घेर लिया मैंने कभी ये नहीं किया था मैंने तो किसी लड़की को घुर तक नहीं था,मैं इस डर के कारन पीछे तो नहीं हट सकता था,मैंने हिम्मत बढाने के लिए दीदी को काल लगाया,मैं खामोश ही था की एक रिंग भी नहीं जा पायी थी और दीदी ने फोन उठाया मैं कुछ बोलने वाला ही की प्रीति की आवाज सुनाई दि...

'अरे दीदी ये मोबाईल,'मैंने आगे की बनते सुनने लगा और चुप ही रहा मेरे आँखों में लहू आये ,चहरा कपने लगा और जब आखिर में दीदी ने राहुल से मुझे कुछ ना बताने की बात कही तो मैंने अपना फोन रख दिया ...मेरी आँखों में लहू उतर आया था मैं गुस्से से थर्रा रहा था,पर दीदी की वो आखरी बात मुझे याद आ रही थी की वो दिल से सोचता है कुछ गलत ना कर दे ...मुझे क्या करना था मुझे नहीं पता पर मैं ये भी जानता था की मुझे दीदी ने ही आज कहा था,की जो करना दिल से करना दिमाग की अपेक्षा दिल की बात सुनना उन्होंने तो कहा था प्यार के लिए पर अब मैंने इसे इस जंग में भी अपनाने की सोची प्यार हो या जंग दिल लगा देना चाहिए ,हा ये मेरे लिए जंग ही थी क्योकी परमिंदर ने मेरी जान से भी जादा कीमती बहन को धंधे वाली बनाना चाहा,और मेरे प्यार(आयशा) को भी धोखा दिया और मेरी बचपन के दोस्त को तो धंधे वाली ही बना दिया,इनमे से एक वजह ही काफी थी मुझे इसे एक जंग मानने के लिए मेरे पास तीन थी,......

14.
मैंने अपनी आँखे बंद की मुझे ऐसे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या करना है पर मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और अजनबी राहो में बस चलने लगा बिना किसी मंजिल के तलाश के ,बस चल ही रहा था जहा दिल ले जाए ....

अचानक एक बोर्ड देख कर मेरी आँखे चमकने लगी लिखा था

"डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवदावाले " डॉ चुतिया को तो मैं बचपन से जनता था ,और ये भी ये हर समस्या का हल बता सकते है मैं,अंदर गया डॉ साहब धयान में बैठे थे जमीन पर और डॉ की खुर्सी पर उनकी असिस्टेंट मेरी बैठी थी,मुझे देखकर उसने चुप रहने का इशारा किया मैं सामने रखी चेयर पर बैठ गया ,मेरी उठाकर मेरे पास आई और अपना मुह मेरे चहरे के करीब कर दिया मुझे अब उसके सांसो की खूसबू महसूस हो रही थी ,उसने अपने तने उरोजो को मेरे पास ला दिया और मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ,उसकी उस हरकत से मेरे लिंग में हलचल होने लगी और मैंने उसे घुर कर देखा मेरे गुस्से से लाल आँखों को देखकर मेरी तुरंत पीछे हट गयी,मैंने अपने पास ना आने का इशारा किया मेरी सांसे थोड़ी तेज हो चली थी मैं उसे सम्हालने में लगा था ,लगभग आधे घंटे के बाद डॉ उठे और मुझे देखकर मुस्कुराये,वो अपनी चेयर पर बैठे की मेरी ने कहा ,

'सर ये तो हायपर अग्ग्रेसन का केस लगता है,'डॉ मेरी को देख कर मुस्कुरा दिए,

'आज कैसे रास्ता भूल गए आकाश और घर में सब ठीक है ,'

'डॉ सब ठीक होता तो आपके पास आने की जरुरत ही नहीं पड़ती ,मुझे सब पता चल गया है ,अब आप बताइए की मैं क्या करू,'डॉ के चहरे पर अब भी मुस्कान थी

'क्या पता चल गया है,'

'डॉ आप जानते है,और मैं भी जनता हु की नेहा दीदी ,मेरे पापा और राहुल आपसे पूछे बिना कुछ नहीं करते मैं ये नहीं मान सकता ही शहर में इतनी बड़ी घटना हो गयी जिससे दीदी भी जुडी है और आपको कुछ नहीं पता होगा,अब आप बताइए डॉ की मैं क्या करू,'डॉ अब भी मुस्कुरा रहे थे,

'तुम्हे कैसे पता चला,'मैंने सब कुछ बताया की कैसे मैंने फोन किया और कैसे मुझे ये सब पता चला ,'डॉ इतना तो समझ गए की मुझे पूरी डिटेल तो नहीं पता है पर जो पता चला है वो काफी है,

'मैं भी इसी दिन का इंतजार कर रहा था की कब तुम्हे ये पता चलेगा क्योकि नेहा और राहुल दोनों ही दिमाग से सोचते है पर तुम अलग हो तुम दिल से करोगे और उनके हाथ कुछ आयेगा ये कहा नहीं जा सकता पर तुम्हारे हाथ जरूर कुछ आ जायेगा,अब सुनो तुम्हे पहला काम ये करना है की तुम्हे नार्मल रहना है वरना नेहा तुम्हे कुछ नहीं करने देगी,और नेहा और राहुल को कुछ नहीं पता चलना चाहिए ...

'

'मैं नार्मल कैसे रह सकता हु डॉ इतना कुछ हो गया मेरी खुद की बहन और मेरे भाई जैसे दोस्त ने ये सब छुपाया ,मेरे जेहन में तो आता है की मैं किसी का क़त्ल कर दू और शुरुवात करू उन विक्की और नानू से,'उसके तेवर देख डॉ के चहरे की मुस्कान गहरा गयी वही मेरी ने डॉ के कानो में कहा 'मैंने कहा था ना,'डॉ ने उसे चुप रहने को कहा,

'मैं जो अभी कर रहा था इसे ध्यान कहते है ,कोई जादा कठिन चीज नहीं है बस अपनी आती जाती सांसो को देखना है तुम्हे और बाकि चीजो को कुछ देर के लिए भूल जाओ जब तक तुम ध्यान कर रहे हो क्योकि हमारा दिमाग इतना ज्यादा सोचता है बेमतलब की बातो को की हम कही भी एकाग्र नहीं हो पाते,ध्यान तुम्हे अपने लक्ष्य से भटकने नहीं देगा ,तुम उन चीजो को समझ पाओगे जो तुम इस मन से नहीं समझ पाते ,थोड़ी देर को बैठो अकेले में और आंखे बंद करके देखो को तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है फिर अपने आप को शिथिल करो और सब कुछ शिथिल हो जाने दो और देखो बस देखो अपनी सांसो को देखो,और तुम पाओगे की तुम्हारे विचार शांत हो रहे है और तुम एक अलग ही ताजगी से भर रहे हो ,ये तुम्हारे इमोशन पर काबू करने के काम आएगा ,तुम्हारी ताकत का सही उपयोग करने के काम आएगा,तुम इसे साधो ये तुम्हे सिद्ध बना देगा,' उनकी बातो में ही नशा था की मेरे संताप कम हो गए मैं अपने को जादा शांत महसूस करने लगा,

'पर डॉ मैं शुरुवात कहा से करू,'

'रस्ता दिख ही जायेगा ,तू चलना तो शुरू कर,अब अपने आप को खोल दे तेरे आसपास ही बहुत कुछ हो रहा है जिससे तुझे पता चलेगा की क्या करना है,अपने दिल की सुनना क्योकि तेरा दिल बहुत ही विकसित है वो तुझे गलत मार्गदर्शन नहीं करेगा,बाकि कुछ पता चले तो मुझे बताना,मैं भी इसी मामले में लगा हुआ हु,और कई लोगो पर निगाह रखे हुआ हु..

मैंने डॉ से आज्ञा मांगी और घर के तरफ चल पड़ा मुझे आयशा की याद आई पर मैंने सबसे पहले दीदी के मोबाईल से काल हिस्ट्री को मिटाना उचित समझा...

'एक अँधेरा कमरा जहा एक खुर्सी पर एक शख्स बैठा सिगरेट पि रहा था ,हलकी हलकी रोशनी कमरे में दरवाजे के बीच से आ रही थी ,सामने एक लड़के को उल्टा टांगा गया था उसके मुह में कपडा भरा था और एक पोलिश वाला उसे मार रहा था ,उसके जख्मो से खून बहने लगा था,वो पसीने से लथपथ था और कुछ बोलना चाहता था,पोलिश वाले ने उसका मुह खोला ,

'सच कह रहा हु सर मुझे नहीं पता की वो विडिओ कहा गया मैंने तो उसे सम्हाल के रखा था,,'आदमी ने फिर इशारा किया और पोलिश वाले ने उसे फिर मरना शुरू कर दिया,इस बार उसकी चीख कमरे से बहार तक गयी ,

'साले सालो की मेहनत को तूने ऐसे ही जाने दिया,कितना पैसा खर्च किया उन लडकियों पर ,तेरी ऐसयाशियो पर,तेरे कारन उन्हें धंधे में नहीं बैठाया की तू मुझे पूरी तैयार माल देगा और तू मदेरचोद ,और अब तूने एक ही सहारे को भी खो दिया ,मार साले को,..

'पोलिश उसे फिर से मारने लगा और वो आदमी कमरे से बहार चला गया,..थोड़ी देर में पोलिश वाला भी बहार आया

'सर मुझे नहीं लगता की इसे कुछ भी पता है साला ये तो ऐयाश था ,कुछ प्लान करके नहीं किया होगा,पर अब तक आप इससे भी छिपे हुए थे अब इसको आप का भी पता चल गया है क्या करना है इसका ,'

'मैंने कभी नहीं सोचा था की ऐसा करना पड़ेगा साला सोचा था की इसे जाने दो विडिओ के सहारे किसी और से ये काम करूँगा पर सब पानी फिर गया फिर इसके केस के बाद से सब बहुत सजग हो गए है ,साल काम करना मुस्किल हो जायेगा,भरोसेमंद लड़के मिलना भी मुस्किल है ,साला इतने दिनों की मेहनत कोई लूट के ले गया,अब इसका क्या करना है,किसी और से मिलेगा तो मेरा नाम बोल देगा,इसे यही ख़तम कर जादा से जादा तू सुस्पेंद हो जायेगा ,इसे कुछ दिन नजरो में बहला फुसला के रख और जब इसके घाव भर जाए तो इसे फंसी में टांग देना और आत्महत्या बता देना ...अभी तक कौन कौन इससे मिलाने आये है ,'

'सर वही दोनों इसके साथी ,नानू और विक्की कल ही आये थे ,उसके बाद से तो कोई नहीं आया है,'

'ह्म्म्म इसे अब किसी से मिलाने ना देना बोल देना की तबियत ख़राब है या कुछ भी करके फिरर काम तमाम ,'...

परसेंट डे इन कहानी

मैं डॉ के क्लिनिक से निकल कर सीधे घर पहुचता हु,राहुल की बाइक अभी भी बहार खड़ी है,मुझे डॉ की बाते याद आई मैंने अपने को नार्मल रहने का सजेसन दिया ,कुछ गहरी सांसे ली और अंदर गया दीदी की रूम से अभी भी हसने की आवाजे आ रही थी वही मम्मी किचन में नाश्ता बना रही थी,मैं किचन में गया .

'क्या बना रही हो माम ,'

'कुछ नहीं बेटा राहुल ने पराठे खाने की जिद की थी तो सबके लिए पराठे बना रही हु,तू क्या खायेगा,और आज अकेले कहा निकल गया तू,कभी तो अकेले कही नहीं जाता,'मैंने मुस्कुराके माँ को देखा ,खुदा की दूसरी मूरत मेरी माँ ,

'कही नहीं बस काम से गया था,अच्छा मेरे लिए भी बना दो मैं दि के कमरे में हु ,'

मैं दीदी के कमरे में गया और जाकर सीधे दीदी के गोद में जा पड़ा,

'अरे क्या हुआ इतनी जल्दी कैसे आ गया ,गया था की नहीं कॉलेज,'दीदी में मेरे सर में हाथ फेरते हुए पूछा,मैं दीदी के चहरे को देखकर मुस्कुराने लगा और थोडा ऊपर होकर मैंने उनके गालो में किस किया और फिर उनकी कमर को पकड़कर अपना मुह उनके कमर में छिपा लिया,

'साला ऐसे शर्मा रहा है लगता है बात बन गयी इसकी,'राहुल की आवाज आई जिसमे खुसी की एक झलक भी थी,मैंने मन में सोचा भाई बात तो बन गयी मेरी लेकिन तुझे कैसे बताऊ,

'बोल ना भाई क्या हुआ ,'दीदी फिर मेरे सर पर अपना हाथ फेर रही थी,उनके प्यार का अहसास मेरे बालो से सीधे मेरे दिल तक पहुच रहा था और मेरी आँखे सकून से बंद हो गयी,लेकिन मेरी इस हरकत से उनमे चिंता बढ़ गयी और मैं भी अपने खवाबो से बहार आ गया,

'कुछ नहीं दीदी नहीं जा पाया पता नहीं क्यों मन ही नहीं ,किया '

'साले मन नहीं किया की फट गयी,'राहुल ने थोड़े गुस्से में कहा पर मैंने बड़े आराम से उसकी बातो को सुना ,

'अब मैंने डरना बंद कर दिया भाई,क्योकि मेरी दीदी ने कहा की दिल की सुनना ,अब मैं अपने दिल की सुनुगा,'ये कहकर मैं फिर दीदी के गालो में एक किस किया और दीदी के मोबाईल को पकड़कर एक सेल्फी ली और बड़े आराम से काल हिस्ट्री को डिलीट कर दिया,दीदी मेरी बात सुनकर थोड़ी इमोशनल हो गयी वही प्रीति ने अभी तक अपनी जुबान नहीं खोली थी उसने भी अपने मुख का द्वार खोल दिया,

'मेरे बारे में तेरा दिल क्या कहता है,'बोल कर प्रीति बड़ी प्यारी निगाहों से मुझे देख रही थी,

'तेरे बारे में तू मेरी सबसे प्यारी दोस्त है,'बोलते हुए मैं प्रीति के पास आया जो अभी भी दीदी से थोड़ी दूर बिस्तर में बैठी थी और पीछे से आकर उसे अपने से लपेट लिया ,मेरे ऐसा करने से राहुल और दीदी ने मुझे हैरानी से देखा वही प्रीति तो शर्म से लाल हो गयी ,क्योकि मैं दीदी के सिवा किसी लड़की के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करता था दीदी और राहुल के मुह खुल गए थे,

'दीदी आपने सच में इसे ना जाने कौन सा गुरु मंत्र दे दिया ,मेरा भाई तो एक ही दिन में बदल गया है,'मैं अब भी प्रीति को ऐसे पकडे हुए था ,

'मेरा भाई अब दिल की सुनने लगा है ना ,नजर ना लग जाए इसे ,ना जाने क्या क्या हमेशा से अपने उसूलो के कारण अपने दिल में दबा के रख लेता था ,अब मेरा भाई भी खुल के जिए इससे जादा मुझे क्या चाहिए ,'दीदी के आँखों में हलके आंसू की बूंद आ गयी थी जिसे मैंने आगे बढकर अपने होठो से चूम लिया दीदी ने

मुझे एक हलकी चपत मरी और बड़े प्यार से मेरी और देखा,

'भाई प्रीति तक तो ठीक है पर आयशा को ऐसे मत पकड़ लेना नहीं तो दीदी का मंत्र फेल हो जायेगा ,'राहुल की एक हसी गूंजी वही बाकि लोग मुस्कुरा दिए,

'भाई दीदी का मंत्र कभी फेल नहीं होगा ,क्योकि अगर मुझे लगेगा की किसी को मेरे व्यवहार से कोई परेशानी है तो मैं उसे करूँगा ही नहीं ना,वो मेरा दिल मुझे बताएगा की क्या सही है और क्या गलत,'मेरी बातो से राहुल तो चुप हो गया और उठाकर मेरे करीब आकर मुझे गले से लगा लिया ,मैंने फिर प्रीति को देखा वो अभी भी शर्मा रही थी मैंने एक स्माइल उसे दि ,तभी मम्मी पराठे लेकर कमरे में आ जाती है,

15.
मैं अपने रूम में ध्यान में बैठा था आज पहली बार मैं ध्यान करने बैठा था जैसा की डॉ ने मुझे बताया था,मुझे पहले पहल बड़ी बेचैनी का अहसास हुआ वही थोड़ी देर बाद मैंने पाया की मेरे विचार मेरे सामने चल रहे है जैसा की कोई टीवी की स्क्रीन है ,मैंने एक घंटे का अलार्म दे रखा था इसलिए निश्चिंत हो मैं बैठा था,मेरा शारीर धीरे धीरे शांत होने लगा,लगातार विचारो का ये प्रवाह मेरे मन को कभी बेचैन करने लगा था पर मुझे डॉ की बाते याद आ गयी की बैठे रहो देखो की क्या हो रहा है,देखो अपने विचारो को ,मैं बैठा ही रहा की मेरे सामने एक घना जंगल आया वह कई लोगो की भीड़ थी ,जंगल में लोगो की भीड़ बात कुछ समझ नहीं आती वो भी बिलकुल शहर के से लोग,पर विचार अगर सब्कोन्सिअस(अवचेतन ) से आये तो उसमे लोगिक नहीं होता,किन्तु सत्य की परछाई होती है,मैंने देखा बड़ी दौड़ भाग चल रही है ,कई नेता भाषण दे रहे है ,कई अजीब चहरो को हस्ते पाया...

मैं देखता रहा कुछ देर में सभी लगभग खली हो गए फिर मैंने एक कमरे को देखा देखा की एक कमरा है वह एक आदमी को मारा जबरदस्ती फांसी में चढ़ाया जा रहा है ,मैंने उसका छटपटाना देखा ,थोडी देर में ही वो विचार भी ख़तम हो गया ,मैंने फिर एक विचारो की भीड़ का सामना किया और एक भोर से धुंधले कमरे में एक स्त्री को नग्न होते देखा देखा की वो मचलती हुई एक लड़के के पास जा रही है और वो लड़का बड़े ही इत्मीनान से उसका मटकना देख रहा है,लड़की धीरे धीरे उसके पास जाती है उस लड़के के साथ सो जाती है और अचानक दोनों मुझे देखते है और जोरो से हस्ते है वो चहरे मेरे जेहन हो कापा का रखा देते है ,वो चहरे थे दीदी और राहुल के ,मैं डर से कापने लगा और बहुत ही जल्दी अपनी आँखे खोली मैं उस समय हाफ रहा था ,सामने दीदी बैठी मुस्कुरा रही थी पर मेरे डरने से वो भी डर गयी और हडबडाते हुए मेरे पास आई,दीदी को देखते ही मेरी रूह तक काप गयी मैं सपने और हकीकत में फर्क नहीं कर पा रहा था,की दीदी ने मुझे झकझोर दिया ,

'भाई भाई क्या हुआ क्या हुआ,'मैं भी अपने को सम्हाला मुझे समझ आया की ये महज विचार ही थे ,मैंने दीदी को सम्हालते हुए उन्हें अपने ठीक होने का दिलासा दिलाया ,थोड़ी देर में हम दोनों नार्मल हो गए ,

'अरे ये क्या कर रहा था तू और क्या हुआ था तुझे ,'अब मैं दीदी के गोद में सोया हुआ था और वो मेरे बालो को सहला रही थी ,

'कुछ नहीं दीदी ध्यान कर रहा था,'

'अरे ध्यान में लोग शांत होते है और तू डर रहा था ,और तुझे क्या जरुरत है इन सबकी ,किसने कहा है ये सब करने के लिए ,'मैंने थोड़ी देर सोच पर मैंने कुछ सच और कुछ झूट का कोम्बिनेसन परोसना ही सही समझा,

'दीदी वो मैं आज डॉ चुतिया के पास गया था,वो क्या है ना की मुझे बहुत डर लग रहा था आयशा के पास जाने में और वापस आता तो राहुल मजाक उडाता इसलिए मैं घुमाता डॉ के पास चला गया उन्होंने कहा की तू मैडिटेशन कर तुझे शांति मिलेगी,तो मैंने आज try किया पर कुछ आजिबो गरीब चीजे दिखने लगी और मैं डर गया और आँखे खोल दि डॉ ने कहा था की एक घंटे बैठना और मैं (मैंने अपना मोबाईल देखा )हम्म्म 45 मिनट तक बैठ गया ,पता ही नहीं लगा,'दीदी को डॉ की उर्जा और योगियों वाली बाते याद आई ,उनके चहरे में एक मुस्कान आ गयी ,

'कोई बात नहीं भाई डॉ ने कहा है तो किया कर और तुझे कुछ प्रोब्लम होगा तो उनसे बात भी कर लेना 'दीदी मेरे बालो को सहलाती रही और मेरे आँखों में वो मंजर बार बार घुमने लगा मैंने कुछ गहरी सांसे ली और ना जाने कब मेरी आँखे बंद हो गयी मेरी नाक में एक अजीब सी पसीने की बदबू या खुसबू आई मैंने आँखे खोली तो मैं दीदी की कमर को पकडे सोया था और ये खुसबू उनके योनी की थी मेरा नाक अभी दीदी के योनी के ऊपर ही था और दीदी अब भी मेरे बालो को सहला रही थी ,उनकी झीनी सी निकर से मुझे उनके योनी की खूसबू साफ साफ आने लगी ,मैंने

आगे बढ़ कर अपनी नाक दीदी की योनी में रगड़ दि मुझे कुछ घुंघराले बालो का आभास हुआ जिसपर नाक को रगड़ना बहुत ही सुखद प्रतीति थी,लेकिन इससे दीदी ने मेरे सर को पकड़ लिया और हसने लगी ,

'भाई मत ना रे क्या कर रहा है,गुदगुदी होती है ,'मैं जानता था की दीदी ने अंदर कुछ भी नहीं पहना है इसलिए मैंने जान बुझ के फिर से नाक को रगडा इस बार थोड़े जोर से दीदी खिलखिला के हसने लगी और नहीं नहीं बोलने लगी ,वो उठाने को हुई पर मैंने अपना हाथ नहीं हटाया और उन्हें फिर से बिठा लिया ,मैं उन्हें देखने लगा उनका गोरा मुखड़ा प्यारी बड़ी बड़ी आँखे छोटी सी बिंदिया जो चहरे की शोभा बड़ा रही थी ,उन्हें चमकीले दांत और गुलाबी होठ जिसे देखते ही मैंने दीदी के सर को पकड़ कर निचे कर दिया और अपने पर झुका के उनके होठो को चूमने लगा दीदी ने भी अपने भाई पर प्यार की बारिश कर दि ,दीदी और मैं प्यार की गहराई में डूबकिया लगाने लगे और मैं उन्हें लिटा कर उनके ऊपर लेट गया और दीदी के चहरे को प्यार भरी निगाहों से देखने लगा ,की मुझे फिर से वो दृश्य दिखाई दीया जिसमे दीदी और राहुल को देखा था मेरे पुरे शारीर में एक झुनझुनी भर गयी और मैं मचलता हुआ बिस्तर पर बैठ गया मेरे शारीर पर पसीना था जो बंद ही नहीं हो रहा था ,मेरी इस स्तिथि को देख कर दीदी फिर डर गयी और मुझे फिर से अपनी बांहों में ले लिया...

'क्या हुआ भाई बता ना क्या हुआ ,क्या देख रहा है तू की तू इतना डर रहा है या तू बेचैन हो रहा है ,'मुझे चुप देख दीदी ने मेरा हाथ अपने सर पर रख दिया

'तुझे मेरी कसम है भाई बता...'मैं दीदी की कसम तो नहीं तोड़ सकता था पर बता भी तो नहीं सकता था ,मेरा दोस्त जिसे मैं और जो मुझे अपनी जान से जादा चाहता था और मेरी दीदी जिसे वो अपनी दीदी मानता है ,जिसके लिए वो कुछ भी कर सकता है ,....वो तो मैं भी दीदी से प्यार करता हु पर मैं भी तो ,नहीं मैं दीदी के साथ ऐसा नहीं कर सकता मैं तो बस इन्हें प्यार करता हु ,,,पर क्या प्यार में लिंग ऐसा खड़ा होता है क्या तू अपनी बहन के चुद को नहीं रगड़ रहा था तो अगर राहुल दीदी के साथ वो कर ले अगर वो दीदी की चूत में ....नहीं नहीं मैं ये क्या सोच रहा हु ,दीदी की चूत छि मैं इतना गन्दा कैसे सोच सकता हु ,,,लेकिन दीदी की चूत ...मेरा मन बहुत ही जादा बेचैन होने लगा पर दीदी की चूत सोचते ही मेरा लिंग अकड़ने लगा मुझे क्या हो रहा था इसका मुझे कोई इल्म नहीं था ये तो महज एक शब्द था चुद लेकिन इसका प्रभाव मेरे शारीर के अंगो पर पड़ रहा था और मेरे जेहन में एक की शब्द गूंजने लगा दीदी की चुद ,दीदी की चुद ,दीदी की चुद ....

मेरी आँखों से आंसू आने लगे लगे मेरा लिंग इस दुखद घडी में भी पूरा तन गया था,मेरे अन्तः वस्त्र ना पहने होने की वजह से दीदी को इसका पूरा भान हो गया की ये किसी बहुत बड़े दुविधा में है ,उन्होंने अपनी पूरी ताकत से मुझे अपने सीने से लगा लिया उनकी उन्नत वक्ष मेरे सर से टकरा गए और मेरे मन की आवाजे बदल गयी ''ये रही दीदी की बोबस दीदी के बोबस बड़े बड़े बोबस दबा ले इसे चूस ले इसे अब चुतड को भी चाट ले हहहाहा '' जैसे कोई और मुझे चिढ़ा रहा हो मैं जोर जोर से रोने लगा दीदी के दिल की धड़कन मुझे जोर जोर से सुनाई देने लगी थी वो डर से काप रही थी मेरी दशा का ख्याल उनके जेहन को भेद रहा था,,दीदी मुझसे पूछ रही थी क्या हुआ क्या हुआ ...अचानक दीदी को डॉ की बाते याद आ गयी की तुम्हारा प्यार ही इसे बचा सकता है ,और आकाश अपनी उर्जा को दबा रहा है ,दीदी को समझ आ चूका था मैं बहुत बड़े अंतर्दव्न्द में फसा था जहा एक तरफ प्यार था तो दूसरी तरफ वासना,,दीदी ने मेरा हाथ अपने वक्षो पर रख दिए और मेरे होठो को चूमने लगी मेरे हाथ रुके हुए थे वो मुझे ग्लानी का आभास करा रहे थे ,राहुल के सपने ने मुझे अपनी दीदी के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया की अगर राहुल ये कर के गलत है तो मैं भी तो ये करके गलत हुआ ना ....लेकिन दीदी के लगातार मेरे होठो को चूमने पर मैं थोडा शांत हुआ और दीदी से सीधे बात करने की ठान ली ,मैं दीदी से अलग हुआ ..

'क्या हुआ भाई तुझे ,मेरे जिगर के टुकडे 'दीदी की आँखे भरी हुई थी ,मेरे लिए प्यार देख मेरा मन अब थोडा शांत हुआ पर मन के किसी कोने में अब भी (दीदी की चूत )कोई कह रहा था ...

'दीदी की चूत 'मैंने दीदी को कह कर मुस्कुरा दिया फिर अपनी गलती का आभास होने पर अपनी नजरे झुका ली ..दीदी ने अपने हाथो से मेरा सर उठाया उनके चहरे पर एक मुस्कराहट आ गयी थी ..

'क्या कहा तूने '

'सॉरी दीदी वो ...'

'बोल दे अब समझा तेरे मेरे बीच कुछ भी गलत नहीं है ,बोला था मैंने कभी सॉरी मत कहना ,तेरी दीदी तो तेरी है रे पागल 'दीदी ने एक हलकी चपत मेरे गालो में मार दि ,'अब बोल '

'दीदी वो मेरे दिमाग में एक गलत चीज चल रही थी ,मैंने उसे दबाने की कोशिस की तो वो और भी बढ़ गयी ,'

'क्या चीज '

'दीदी रहने दो ना मैं नहीं बोल सकता,'दीदी ने फिर मेरी ओर देखा और मेरा सर ऊपर किया

'दिमाग में कुछ भी चले वो गलत और सही नहीं होता ,उसे दबाना नहीं चाहिए निकल देना चाहिए या धयन कर ले देख ले अब बोल ,कुछ सही गलत नहीं ...

अब बोलेगा की लगाऊ झापड़ 'दीदी के चहरे में हल्का गुस्सा आ गया था मैं अपनी दीदी को अपने लिए ना जाने कितने दिन बाद यु गुस्से में देखा था ,

'दीदी मेरे दिमाग में चल रहा था की दीदी की चुद ,बस यही बात बार बार अभी भी वही चल रही है ,हलके हलके ,सॉरी दी दी 'मैंने सॉरी कहा ही था की दीदी ने मेरे होठो पर अपने हाथ रख दिया

'बोला ना कोई सॉरी नहीं ,और चल रहा था तो उसे हटाने की क्या जरुरत है ,तेरी दीदी एक लड़की है और हर लड़की की चूत होती है ,तो इसमें क्या है चल बोल दीदी की चुद ,मेरे साथ बोल 'दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने योनी में रख दिया मैं घबरा ही रहा था ...

'मेरी प्यारी दीदी की चूत ,ये है ,चल बोल 'दीदी ने ये कहकर मेरे हाथो को अपनी योनी में रगड़ दिया जिससे मेरे लिंग ने एक भरपूर झटका मारा और दीदी ने मुझे अपने पास खीच कर मेरे लिंग को अपने हाथो में भर लिया और मेरे कानो के पास अपना मुह कर कहा

'और ये है मेरे प्यारे भाई का बड़ा सा लवड़ा "दीदी हसने लगी पर मेरी हालत ख़राब हो चुकी थी ,दीदी ने फिर से मुझे बोलने कहा मैंने हिम्मत करके कहा

'ये है ,मेरे प्यारी दीदी की चूत ,'मेरे हाथ अभी स्थिर ही थे ,

'मसलेगा कौन ,मसल के बोल 'और दीदी ने मेरा हाथ मसल दिया और मेरे गालो को काट लिया ,उनकी स्वछन्द हसी ने मेरे रूह तक को शांत कर दिया अब मैं होसले से भर गया था मैंने अपने हाथ को पूरी ताकत से रगडा ,

'ये है मेरी प्यारी दीदी की चुद ,और इसकी खुसबू मस्त है ,'दूसरा लाइन मेरे मुह से अनायास ही निकल गया ,दीदी ने पहले तो अपनी आँखे बड़ी की पर फिर खिलखिलाकर हसने लगी ...

'अब भी आ रहा है दिमाग में ,'

'नहीं दीदी अब तो बस मजा आ रहा है,खासकर आपके ये बाल बड़े अच्छे लग रहे है ,'दीदी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी निकर के अंदर ले जाने को खीचा पर मैंने अपने हाथ पीछे कर लिए ...

'नहीं दीदी आज बस इतना ही आज मैंने आपकी चुद को चुद कह पाया मेरे लिए काफी है ,'दीदी के चहरे पर प्यार के भाव उभार गए उन्होंने मेरे माथे पर किस किया और मुझे प्यार से अपनी गोदी में सुलाकर तब तक थपकती रही जब तक की मुझे नींद ना आ गयी

16.
उसी रात

राहुल आज भी प्रीति के घर में था ,प्रीति राहुल के गोद में अपना सर रखे सोयी हुई थी ,राहुल बिस्तर से सटे दिवार से अपने को टिकाये हुए फ़ैला था और प्रीति के बालो को सहला रहा था,

'राहुल जानते हो आज तुमने मुझे जन्नत दे दि,मुझे आज पता चला की मुझे प्यार करने वाले इतने लोग है ,तुम हो दीदी है ,आकाश है,.आकाश है ये उसने बड़े धीरे से कहा और शर्मा गयी जिसे राहुल ने भांप लिया ,उसने उसके प्यारे चहरे को देखा ,और निचे झुक कर एक प्यारी सी पप्पी उसके गालो में रशीद कर दि,..

'तू जानती है ना की आकाश कभी तेरा नहीं हो सकता,वो तुझे दोस्त मानता है और उसके लिए दोस्त का मतलब दोस्त ही होता है,तू उससे जादा आशा मत कर बैठना मैं नहीं चाहता की तेरा दिल टूट जाए,'

'मैं जानती हु यार पर आज जब उसने मुझे इतने प्यार से पकड़ा तो मैं उसकी और भी दीवानी हो गयी,कितना प्यारा है ना आकाश,'प्रीति ने अपना चहरा उठा कर राहुल के होठो को चूम लिया,

'हा अब आकाश ही तो तुझे प्यारा लगेगा,मेरा पत्ता तो अब कट 'राहुल के चहरे पर एक मुस्कान फ़ैल गयी और उसने प्रीति के गालो को हलके से दबा दिया ,

'चल अब रात हो रही है मैं चलता हु ,'राहुल प्रीति को हटा के जाने लगा ,प्रीति ने उसका हाथ पकड़ लिया ,वो अभी भी उसी सलवार में थी ,

'तू तो मेरी जान है पागल ,और जा ना आज मेरे साथ,घर में बोल देना की आकाश ने रोक लिया,'प्रीति के वक्ष उसके कुर्ती में बड़े आकर्षक लग रहे थे जिसपर राहुल की निगाह चले जाती है और वो उसे वह से हटाने में असमर्थ हो जाता है ,प्रीति को भी इसका आभास हो गया और उसने अपने होठो पर एक स्माइल ला कर अपना दुपट्टा निकल कर फेक दिया ,अब उसके आकर पूरी तरह से राहुल के सामने थे ,उसका गोरापन हलके बहार निकले हुए भागो से पता चल रहा था,और उसका विसाल आकार बीच की खाई से मापा जा सकता था ,अपनी सबसे प्यारी दोस्त को इस हाल में देख राहुल थोडा सकुचा गया ,अभी अभी तो इसे इस दलदल से निकालने की सोच रहे थे की ये अपने यौवन का जादू मुझपर ही चलाने लगी ,राहुल ने गहरी साँसे ली,

'रुक कर क्या करूँगा,'उसने बड़ी मुस्किल से दिल को सम्हाल कर नजरे हटाते हुए कहा,प्रीति बिस्तर से उठती है और राहुल के पास आ जाती है ,उसके होठ राहुल के होठो से बस छूने वाले ही थे और उसकी सांसे राहुल की सांसो को बेकाबू कर रही थी,

'जो तुम चाहो मैंने कभी तुम्हे मन किया है क्या,'राहुल के चहरे पर एक हसी आ गयी ,

'अभी तो तू सुधरने वाली थी ,आकाश को अपना सबकुछ मानने वाली थी और अभी तू मुझे ये कह रही है ,'प्रीति के चहरे पर एक कातिलाना मुस्कान थी ,

'आकाश तो मैं अपना सबकुछ मानती ही हु ,और मेरे जिस्म हो किसी ने भी भोगा हो ,मैंने मन में हमेशा आकाश का ही चहरा रखा है (ये बात तो राहुल भी जानता था,)और सुधरने की बात है तो इतनी पुरानी आदत है इतनी जल्दी कैसे छुट जायेगी ,और तुम क्या चाहते हो मैं किसी और के पास चली जाऊ,अब तो मैं अपना जिस्म सिर्फ 3 लोगो को दूंगी ,'राहुल को उसकी बात सही लगी पर 3 लोग का नाम सुन उसने अपनी आँखे चढ़ा दि ,

'तुम्हे ,आकाश को अगर वो लेना चाहे तो और अपने पति को इडियट क्या हमेशा बिन बियाही रहूंगी ,'प्रीति की शरारत से राहुल का पसोपेज जाता रहा उसने अपनी निगाहे अब बिना किसी रोक टोक के उसके स्तनों पर टिका दि और धीरे से उसके होठो को अपने होठो में समां लिया ,

'ऊह्ह ऊह्ह ,'राहुल ने अपने हाथो को आगे बढाकर उसके स्तनों पर जमाया और हलके

से उसे मसलना शुरू किया

'हम्म्म उह्ह राहुल रुको ना मैं कपडे बदलकर आती हु,'प्रीति ने थोडा कश्मसाते हुए एक अंगड़ाई राहुल के बांहों में ली,

'तू इतनी सुन्दर मुझे आज तक कभी नहीं लगी ,तुम अब सलवार ही पहना करो और ऐसे ही प्यारी सी बिंदी लगाया कर,'

'अआह्ह्ह राहुल राहुल 'प्रीति राहुल से अपने को सटा लेती है राहुल ने उसके नितम्भो को दबाया था,और इससे वो विचलित हो गयी थी ,राहुल ने उसे अपनी बांहों में भरकर उसे बिस्तर में पटक दिया और खुद उसके ऊपर आ गया ,प्रीति के चहरे पर एक मादक मुस्कान थी ,

'आई लव यू राहुल ,'प्रीति राहुल के गालो को अपने हाथो से सहलाया ,

'चल झूटी,'

'सच में यू आर बेस्ट '

'अच्छा और आकाश '

'वो तो ...एक सपना सा है ना अच्छा ना बुरा बस मेरा एक सपना जिसे मैं सभी में जीना चाहती हु,'प्रीति की बातो में एक दर्द उतर आया जो राहुल को बिलकुल पसंद नहीं आया ,

'चल तो फिर आज उस सपने को फिर जी ले,आँखे बंद कर (राहुल ने अपने हाथो से उसकी आंखे बंद की )और अपने सच्चे प्यार से प्यार कर 'प्रीति ने अपने आँखों में आकाश की तस्वीर ला ली,राहुल ने अपने हाथो का कमाल दिखाना शुरू किया उसके बिखरे बालो को उसके कंधे से हटाया और अपने हाथो से उसके स्तनों हो हलके से सहलाकर उसके कपडे में से बहार झाकते भाग को अपने होठो से चाटना शुरू कर दिया ,उसने हलके से वह दांतों को गडाया ,

'आअह्ह्ह्ह मेरी जान 'प्रीति ने अपने हाथो से राहुल के सर को जकड लिए ,'मेरी जान ऊह्ह आह्ह आह्ह '

राहुल अब उसे चूसने लगा और थोडा जोर लगा के उसकी कुर्ती से बाहर निकलने की कोशिस की ,

'रुको मैं जीप खोल देती हु,'प्रीति ने अपने को उठाने की कोशिस की मगर राहुल ने उसे फिर से पटक दिया

'कहा ना आँखे बंद जो करना है वो मैं कर लूँगा ,'प्रीति के चहरे पर एक संतोष और मादकता की मुस्कान थी ,उसने फिर से अपनी आँखे बंद की ,और अपने हाथो को राहुल के सर पर लगा दिया ,राहुल उसके कानो के पास जाकर फुसफुसाया,

'प्रीति मेरी जान मैं आकाश हु ,तुम्हारा सिर्फ तुम्हारा आकाश मुझे प्यार करो ,करोगी ना 'प्रीति मानो सम्मोहन ने चली गयी थी ,उसने अपने हाथो को बहुत दबाव से राहुल के सर पर जकड़ा ,राहुल ने उसके गालो को चुसना शुरू कर दिया ,

'हां मेरी जान मैं तुम्हे सब कुछ दूंगी ,सब कुछ ,आपका ही है ना ,प्लीज् ले लो ना जान ,'प्रीति के आँखों में आंसुओ की कुछ धारे थी जिसे राहुल ने अपनी जीभ से चाट लिए .

'मैं आज तुम्हे अपना बना लूँगा ,आज तुम्हे अपने प्यार से भिगोऊंगा ,तुम्हे इतना प्यार दूंगा की तुम दुनिया को भूल जाओगी,'राहुल ने अपने होठो को उसके होठो में लाकर टिका दिया वो बेचैन मछली सी तडफाने लगी और उसके होठो को भरपूर ताकत से चूसने लगी ,दोनों के जीभ आपस में टकराते और उनकी थूक एक दुसरे में मिलाने लगी राहुल की आँखे भी बंद हो गयी और उसे जो चहरा दिखा उससे उसका दिल जोरो से धड़कने लगा ,पर उसने अपनी किस तोड़ी नहीं उसके सामने नेहा का चहरा था उसे लग रहा था की यो उसे किस कर रहा है ,किस टूटने पर उसने अपनी आँखे खोली उसके सामने प्यारी सी एक लड़की अपना सब कुछ बिछाए पड़ी थी उसकी माथे की प्यारी सी छोटी सी बिंदिया उसे नेहा की याद दिलाने लगी और उसका सलवार से आती स्त्रियत्व की गंध उसे किसी दुसरे ही जहाँ में ले जाने लगी उसने अपनी आँखे फिर बंद की पर उसे अब भी नेहा का मुस्काता चहरा दिखा उसे परमिंदर और नेहा के बीच के सभी दृश्य याद आ गए और उसका लिंग अपनी पूरी जोर पर फुंकर मरने लगा उसने उसे शांति देने के लिए प्रीति के टांगो को खोला और कपडे के ऊपर से ही जोर से रगड़ दिया ,उसका तनाव इतना था की दोनों ही काप गए ...

'आह्ह्ह आकाश ,'....'आह्ह्ह दीदी ...'दोनों के स्वर एक साथ ही निकले प्रीति ने फिर कुछ समझ कर अपनी आँखे खोली और राहुल को अपने गलती का अहसास हुआ ,वो उसे प्रश्नवाचक दृष्टी से देख रही थी ,पर राहुल के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,

'तू अपने सपने में जी और मुझे अपने सपने में जीने दे,,,,'राहुल की बात से प्रीति का चहरा भी खिल गया वो एक बड़ी मुस्कान के साथ फिर से अपनी आँखे बंद कर ली और राहुल को अपने पास खीचते हुए उसके कानो में बोली ..

'आजा भाई मुझे अपना बना ले मैं तेरी ही हु,'राहुल अपनी वासना में अब अँधा हो चूका था उसके कानो में ये बात जाते ही वो पागलो जैसे प्रीति को चूमना शुरू कर दिया,उसने अपने हाथो से उसके भरपुर निताम्भो को मसलना शुरू कर दिया ,

'अआह्ह्ह राहुल आअह्ह्ह्ह,'

'आआह्ह्ह ऊउम्म मेरी प्यारी दीदी ऊउम्म्माअ ऊउम्म्मा 'राहुल ने उसके कंधे पर पड़े कपडे को फाड़ने जैसा खीचा जिससे प्रीति के कंधे का भाग नग्न हो गया ,राहुल ने अपनी थूक उसपर गिरा दि और उसे चाटने लगा ,प्रीति आनद के समुन्दर में तैर रही थी ,वो अपने सपनो के शहजादे को अपनी इज्जत सौपने के मजे में खोयी थी ,राहुल ने अपने हाथ पीछे पीछे कर कुर्ती की चैन खोल दि और बड़े उतावले होकर उसे निकल फेका प्रीति अब भी अपने ब्रा में थी जो राहुल को बिल्किल भी रास नहीं आ रहा था ,उसने तुरंत उसे निकल कर फेक दिया और उसके स्तनों को अपने हाथो और मुह में भर मसलने और चूसने लगा ,

'आअह्ह्ह्ह हा हा आकाश मेरी जान ,मेरे प्यार ,मेरी जाआआआन आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह 'प्रीति की सिस्कारिया पुरे रूम में गूज गयी थी ,राहुल उनपर थूक रहा था फिर उसे चांट रहा था,उसके निप्पलो से जन्मो के प्यासे जैसा पि रहा था जैसे अभी उसमे से अमृत की धार निकल पड़ेगी ,

'आह्ह्ह दीदी वाह ,कितने प्यारे है ऊम्म्म्म ,'

'हां बही तेरे ही है ,तेरे लिए ही इनमे दूध भरा है चूस ले इसे ,'प्रीति का मादक स्वर राहुल के लिंग के नाशो को बर्दास्त नहीं हो पा रहा था,वो इतने तने हुए थे की जैसे अभी ही फट जायेंगे,जब भी प्रीति उसे भाई बोलती वो खुद को और जादा तना हुआ पाता था,

उसने अपने होठो को निचे लाते हुए उसकी गोरी गहरी नाभि पर अपने थूक छोड़ दिए उसके चूसने से पूरा पेट गिला हो चला था ,प्रीति अपने हाथो से उसका सर दबाये जा रही थी और और वो 'दीदी दीदी मेरी प्यारी दीदी मुझे प्यार दे दो दीदी प्लीज दीदी ,'

वही प्रीति 'आकाश मेरा सबकुछ तुम्हारा है ,आआह्ह प्लीज् प्लीज् आआह्ह्ह्ह ले लूऊऊऊओ इस्ससे 'राहुल को जब अपने तनाव बर्दास्त नहीं हुआ तो उसने फिर प्रीति के होठो को अपने होठो में भर लिया और अपना लिंग उसकी योनी में पुरे ताकत से दबाने लगा उसे इतना भी होश ना रहा की अभी निचे के वस्त्र निकलने को बाकि है,दोनों अपनी आँखे मूंदे अपने सपनो में खोये हुए थे जब भी दोनों को उनके सपनो का चहरा स्पष्ट दिखाई पड़ता वो वासना और प्यार के मिलेजुले आग में जल उठाते थे ,प्रीति की योनी का गिलापन उसके अंतःवस्त्र तथा सलवार को पार करता बहार तक आ चूका था ,तभी राहुल को उस गिलेपन का आभास हुआ और उसने अपने सभी कपडे एक ही झटके में निकल दिए और उसके ऊपर पसर गया अब उसे ये गीलापन अपने लिंग पर अहसास हुआ उसने एक जोर का झटका मारा की प्रीति चुहक पड़ी

''प्लीज् अंदर कर सो ना ,'राहुल कपडे उतरने में लगे वक्त से थोडा सम्हाल चूका था

,उसे ग्लानी के भाव घेरने ही वाले थे की प्रीति ने अपनी आँखे खोली और हाथ बढाकर उसकी आँखे बंद कर अपने पास खीचा और उसके कानो में कहा ...

'प्लीज् भाई अंदर करो ना अपनी दीदी की चूत में डालो जल्दी ..'प्रीति के इस हथियार ने राहुल को फिर से बेकाबू कर दिया वो अपनी आंखे बंद कर अपने हाथ निचे ले आया और उसके नाड़े को खोलकर सलवार को उसकी पेंटी सहित उतर फेका अभी भी दोनों की आँखे बंद थी और राहुल का हाथ उसकी योनी को सहला रहे थे दोनों के शारीर की तपन एक दूजे में मिल जा रही थी और सांसे आपस में ही घुल जा रही थी ,योनी इतनी भीग चुकी थी की राहुल का हाथ गिला हो गया उसने देर ना करते हुए अपने लिंग को आराम देने की सोची जो फूलकर फटने वाला था,उसने अपने होठो को प्रीति के होठो के पास लाया ,दीदी मेरा प्यार लो ,

'हां मेरी जान मेरे भाई ,मेरे आकाश मेरी जान ....'वो बोलते ही रही थी की राहुल ने उसकी छेद में अपना लिंग धीरे से सरका दिया ,उस अपार आनद में राहुल को सिर्फ और सिर्फ नेहा का मादकता से खिला चहरा ही दिखाई दे रहा था वही प्रीति ने एक लम्बी आह बरी जब तक की लिंग को उसने अपने में पूरा नहीं समां लिया ,,,दोनों दुनिया को भूल चुके थे ये भी की वो क्या कर रहे थे पूरी तरह हुए इस मिलन में बस मिलन ही बचा रह गया था ,मिलने वाले खो चुके थे ..ना जाने कब तक वो एक दूसरे के बहो में कसे हुए अपने आप को सामने की कोशिस करते रहे और राहुल ने अपनी कमर हलके हलके हिलानी सुरु कर दि,

'आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आआअ काआआ शाआआ आअह्ह्ह्ह 'प्रीति हर धक्के में आकाश का नाम जप रही थी उसकी आवाज इतनी भरी हो चुकी थी उसके मुह से बहार भी मुस्किल से आ रही थी दोनों खोये थे कुछ पता ही नहीं था जो था वो बस उन्माद था ख़ुशी थी ,प्यार और वासना की उचाईया थी ,आनद था ...

'दीदी आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् दीदी आअह्ह्ह्ह ह्हूउम्म्म्म हूमम्म 'राहुल की सांसे भी भरी थी और आंखे बंद जब लिंग योनी की दीवारों में घुसता तो उससे उठाने वाला अपरिमित आनद दोनों को डूबा चूका था ,योनी का गीलापन लिंग को भिगोये हुए उसमे सामने की कोसिस में था वही योनी की दीवारे अपने को फैलाती सिकोड़ती हुई राहुल को अपने अन्दर और जादा तेजी से घुसाने का आमंत्रण दे रही थी ,लिंग और भी फूलने लगा था,और धक्के जोर पकड़ने हो थे

'आआअ कक्क श 'प्रीति ने भरी चीख मारी और अपने नाखूनों को राहुल के छाती पर पूरी तरह से गडा दिए ...

राहुल अब और भी जोर से धक्के मारने लगा था ,दोनों के कामरस के मिलन से एक लयबद्ध ध्वनी पुरे कमरे में फ़ैल रही थी और चप चप चप की आवाजो के बीच प्रीति की सिसकी गुमने लगी वो फिर पूरी तरह से तैयार थी अपने महबूब को अपने शारीर का एक एक कतरा देना चाहती थी ,पूरी तरह से उसकी होना चाहती थी ,

'दीदी दीदी दीदी दीदी आअह्ह्ह्ह नहीं नहीं दीदी दीदी 'राहुल ने अपनी पूरी ताकत हर धक्को में लगा दि ,लेकिन उसका लिंग अपने वीर्य को छोड़ने को तैयार ही नहीं था जिससे वो पागल सा हो गया था वो प्रीति को काटने लगा उसने उसके सतनो जो अपने दांतों से दबाया और पुरे ताकत से उन्हें गडा दिया ,उसके मास की मादकता से राहुल के दांतों को इतना सकून मिला की वो उसके कंधे पर अपने दांतों को गडा दिए और जोर जोर से धक्के मरने लगा ,प्रीति को मानो दर्द का आभास ही नहीं हो रहा था वो अपने नाखूनों से राहुल के पीठ पर कई निशान बना चुकी थी और उसकी प्यास जब चरम में थी तो उसने राहुल के स्तनों को काट लिया नाखूनों से पूरा पीठ ही छिल चुकी थी जिससे खून भी बहने लगी थी वही हाल प्रीति के जिस्म का भी था राहुल इतनी मजबूती से दांत गडाए था की खून का रिसाव शुरू हूँ गया पर परवाह किसे थी ,राहुल पागलो जैसे धक्के लगा रहा था और दीदी दीदी चिल्ला रहा था वही प्रीति आकाश की माला जप रही थी...

आख़िरकार वो क्षण आया जब दोनों प्यार की मंजिल पर पहुचे ऐसे तो प्रीति ने वो मंजिल दो बार देख ली थी पर ये अंतिम और निर्णायक था ...

'दीदी दि दि दि दि ईईईईईईईईईईइ 'राहुल के चिल्लाने से पूरा कमरा गूंज गया और उसने अपने निर्णायक धक्को से अपना पूरा वीर्य प्रीति के अंदर छोड़ दिया वही प्रीति उस वीर्य के गर्म अहसास से एक बार फिर अपने शिखर पर पहुच गयी और दबे और बेबस सी आवाज में आकाश कहती हुई अपने नाखुनो को राहुल की कमर में गडा दिया और कामरस की फुहारे छोड़ने लगी....

जैसे एक तूफान आया और शांत हो गया ...सब कुछ शांत हो चूका था ,,,योनी में लिंग फसा हुआ अपने ही वीर्य और योनी के कामरस से भीगा मुरझा रहा था,सांसे अब भी उखड़ी हुई थी पर किसी को फ़िक्र नहीं थी की उसे सम्हाले ,,,दोनों ही निढल हो चुके थे और किसी को उठाने की हिम्मत भी नहीं थी ......

17.

आज सुबह जब मैं उठा तो मेरा सर दीदी के गोद में था और वो भी वही लेटी हुई थी,मैं उठाकर उनको एक प्यार भरी किस दिया और फ्रेश होकर निचे आ गया मैं सोफे पर बैठा हुआ टीवी देख रहा था की दीदी भी काफी पकड़ कर आ गयी मुझे मेरी कॉफ़ी देकर वो मेरे बाजु में बैठ अख़बार खोला ,दीदी ने नेशनल और मैंने रीजनल न्यूज़ पड़ने शुरू किये पहली ही न्यूज़ हमारे शहर की थी जिसे देख मैं चौक गया ,

'अरे ये कैसे ,'दीदी ने झट से मुझे देखा और न्यूज़ पड़ने लगी ,

'ओ माय गॉड ,'न्यूज़ परमिंदर के जेल में फांसी लगाने की थी ,दीदी के चहरे पर चिंता के भाव आ गए थे ,

'क्या हुआ दी साला तो था ही कमीना बढ़िया हुआ की खुद ही मर गया .'

'नहीं भाई वो इतना कमीना था की उसे अपने किये पर कभी आत्मग्लानी नहीं हो सकती वो आत्महत्या कर ले मैं नहीं मान सकती ,जरूर कोई बड़ी साजिस है ,'दीदी ने थोडा धीरे से कहा.मेरा भी माथा खनका मैंने पूरी न्यूज़ पड़ी इंचार्ज को ससपेंड कर दिया गया था,जाँच के आदेश थे पर मैं भी जनता था की इससे कुछ नहीं होने वाला ,खैर दीदी के चहरे पर अब भी चिंता के भाव थे जो मुझे कभी भी अच्छे नहीं लगते थे ..

मैंने दूसरा पजे खोला वह अविनाश तिवारी की बड़ी सी फोटो छपी थी ,बहुत से लोगो ने विज्ञापन दे कर उसे जन्मदिन की बधाई दि थी ,दीदी ने जैसे ही वो पेज देखा उनका चहरा खिल गया जो की मुझसे नहीं छिप पाया मैंने दीदी को चुटकी कटते हुए कहा ,

'क्यों दीदी अविनाश को देखकर बड़ी खिल गयी आप ,क्या बात है लगता है मनीष का पत्ता कट ,'दीदी मेरी बात से थोडा शर्मा गयी

'कहा यार ये कहा और मैं कहा ,इसके तो हम सिर्फ सपने देख सकते है ,'दीदी की बातो से मेरी आंखे बड़ी हो गयी ,दीदी ने कभी भी इसका जीकर नहीं किया की वो अविनाश को पसंद करती है,पर मुझे लगा की यार दीदी ने मेरे लिए इतना किया है क्या मैं उनके लिया कुछ नहीं कर सकता ,

'अरे दीदी आप try तो करो और देखना मेरी दीदी तो कभी नहीं हारती ,'

'नहीं आकाश इनके लाइफ का मकसद ही अलग है ,ये मुझे तो क्या किसी भी लड़की को पसंद नहीं करते ,इनको लाइफ से कुछ और चाहिए ,छोडो मेरी बातो को ..'दीदी के चहरे पर एक मायूसी सी देखि

'अरे दीदी try तो करते रहना चाहिए चाहे कुछ मिले या नहीं ,गीता में भी कहा गया है ना कर्म करो फल की चिंता मत करो ,'दीदी ने मुझे मुस्का के देखा और मेरे गालो पर अपने हाथ रख दिए ,

'तो आप उसे अभी काल कर रही हो जन्मदिन की बधाई देने के लिए ,'दीदी ने मुस्का के मुझे देखा और हां में सर हिला दिया ,

अपने रूम में जाने के बाद मैंने डॉ चुतिया को काल किया और कल वाली पूरी बात बताई ये नहीं बताया की दीदी के साथ क्या किया पर डॉ ने वो अपने से ही समझ लिया ना जाने कैसे ...

'तुम्हे फिकर करने की कोई बात नहीं है ,तुमने जो देखा उसमे कितनी सच्चाई है इसका पता तो आज की ही न्यूज़ से पता चल गया ,देखो परमिंदर ने फ़ासी लगा ली और जो तुमने नेहा और राहुल के बारे में देखा उसकी फीकर मत करो ये तुम्हारे मन को एक प्रोजेक्शन हो सकता है ,मन बहुत तरह हे सपने दिखता है कुछ अच्छे कुछ बुरे पर जब तुम ध्यान में प्रवेश करते हो तो तुम्हारे फालतू विचार कम हो जाते है और तुम्हे कई चीजे दिखने लगती है ,तुम ये ना समझना की ये कोई शक्ति है नहीं मन तो हमें हमेशा ही सब दिखता रहता है ,हमें समझ नहीं आती क्योकि मन में बहुत से विचार चलते रहते है ,

तुमने पहले ही दिन में पूर्वाभास का अनुभव किया है ,ये कुछ लोगो में हमेशा से होता है ,तो कुछ हो ध्यान में जाने से सपनो में या बिचारो के रूप में होता है ,यह असल में बहुत ही छोटी ताकत है जो किसी भी ध्यान करने वाले को कुछ ही दिनों में आ जाती है ,और भी आगे जाने से तुम्हे एस्ट्रल ट्रेवलिंग,टेलीपेथी जैसी चीजो का भी आभास हो सकता है ,और जिन चीजो से तुम डर रहे हो उनसे डरो नहीं वो सब कॉमन है ,मन ऐसी चीजे भी प्रोजेक्ट करेगा जो तुम्हारे अंतस में बहुत ही गहराईयों में छुपी है कभी कभी तुम डर सकते हो पर इसे देखो देखो और सिर्फ देखो ,,,,'

डॉ की बातो से मुझे कुछ कुछ रहत मिली और मैंने कहा

'डॉ अब आगे मुझे क्या करना है ,'

'वो करो जो तुम कर सकते हो ,इतना ही काफी है की तुम उतना प्रयास करते हो जितना तुम कर सकते हो ,बाकि चीजे तो हो ही जाती है ,हर प्रयास तुम्हारी ताकत और क्षमता को बढाता है ,समझे ...'

'ज्यादा तो नहीं पर कुछ कुछ जरूर समझा ,'डॉ हसने लगे और मुझे बाय कहकर फोन काट दिया मुझे कुछ याद आया और मैंने उन्हें फिर से काल किया ,

'डॉ मुझे कुछ दिनों पहले सांपो के सपने आये थे ,इसका क्या मतलब है ,'डॉ हसने लगे

'हर सपनो का मतलब जानना चाहते हो क्या ,'डॉ की हसी जारी थी थी ,

'डॉ प्लीज बड़ा ही भयानक था वो सपना '

'अच्छा वो कुछ नहीं सापो का सपना देखने का मतलब है ,दबी हुई सेक्स की वासना ,जिसे तुम दबा देते हो उसे तुम्हारा मन सपनो से पूरा कर लेता है ,फिकर मत करो अब तुम्हे ये सपने नहीं आयेंगे क्योकि तुम्हारे साथ नेहा है ,'डॉ ने एक रहस्यमयी हसी हसी और फोन रख दिया...

मैं फिर से ध्यान में बैठ गया इसबार मेरा मन शांत हुआ लगभग एक घंटे बाद ही मैं उठा देखा की हर चीज बड़ी ही शांत और प्रसन्न लग रही थी ,मुझे बड़ा ही हल्का सा लग रहा था,

कुछ देर में मैं दीदी के रूम में गया वहा मुझे दीदी के कीसी से बात करने की आवाजे सुनाई दि,मैं थोड़ी देर ठहरा

'हां ओके ,हां मैं आउंगी ना ,जी हां थैंक्स ,अरे आप भी ओके ओके सर ,नहीं मैं सर ही बोलना पसंद करुँगी ओक ,सी यु एंड अगेन हैप्पी बिर्थ डे,(एक हंसी )हा हा हा ,ओके सर बाय ,'मैंने देखा दीदी अपने होठो को दातो से दबाई हुई थी और थोड़े देर के लिए फोन के स्क्रीन को देख कर मन ही मन खुश हो रही थी उनकी खुसी मुझसे ना छुप सकी और मैं समझ गया की ये अविनाश से ही बात कर रही थी ,मैं अंदर आया दीदी ने मुझे देखा और मैंने उन्हें प्रश्नवाचक नजरो से देखा ,दीदी बिलकुल बच्चो की तरह उछल के खड़ी हो गयी और मुझे अपने बाहों में भर के नाचने लगी ,

'भाई मैंने अविनाश को काल किया था और उसने मुझे अपनी पार्टी में इनवाइट किया है ,और आयशा को भी साथ लाने को कहा है ,'मैं आयशा का नाम सुनकर खुस हो गया मैंने दीदी को किस ले लिया ,

'दीदी मैं भी चलूँगा ,'दीदी ने एक झूठे गुस्स्से वाला फेस बनाकर मुझे देखा ,

'अच्छा बच्चू दीदी अकेले जाती तो कहता बोरिंग पार्टी में मैं क्या करूँगा और अब ,(दीदी खिलखिला दि ) ओके और अविनाश ने तुम्हे और राहुल को भी बुलाया है,'

'वो हमें जानता है ,'मैंने थोड़े आश्चर्य से पूछा,'

'अरे यार वो नेता है ,और नेता लोग सबको जानते है और तुम लोग तो मेरे स्कूल प्रसीडेंट के चुनाव के टाइम कितने एक्टिव थे ,और कितनी बार तो उससे मिल चुके हो ना ,'

'हां वो तो है ,पर मुझे लगा नहीं था की वो हमें याद रखेगा ,अब हो मैं राहुल को भी काल कर देता हु और प्रीती को भी पकड़ लेंगे ,'

'ओके ,लेकिन पार्टी शाम को है और तो अभी स्कूल जाने को तैयार हो जाओ राहुल भी आता ही होगा,और वही उसे बता देना ,मैं भी कॉलेज जाती हु,'दीदी ने मुझे एक किस दिया और मैं वहा से अपने रूम में आ गया...

18.

अविनाश की पार्टी

दिखने में अविनाश जितना सिंपल दिखता था उसकी पार्टी उतनी ही बड़ी और रंगीन लग रही थी ,बड़े बड़े लोग आये हुए थे ,मुझे यकीं ही नहीं आया की एक कॉलेज के प्रेसिडेंट के बर्थडे पार्टी में राज्य के सभी बड़े नेता दिख रहे है ,और सभी पार्टी के लोग आये हुए थे ,कुछ नामी बिजिनेसमेन और अधिकारी भी वह दिख रहे थे ,लेकिन अधिकतर लोग स्टूडेंट्स ही थे कुछ गुंडे टाइप के लडको का समूह भी था पर वो सभी से बड़ी तमीज से बात कर रहे थे और नौकरों जैसे काम भी कर रहे थे ,दीदी और राहुल के लिए ऐसी पार्टी कोई नयी बात नहीं थी ,पर मैं ऐसा कभी नहीं देखा था ,मैं हमेशा बोर होने की बात कर नहीं आता था पर आज तो आयशा आई थी,तो आना ही था सोचा आज कुछ मामला सेट कर लू,

दीदी आयशा साथ आये और मैं राहुल और प्रीति के साथ आया जब हम आये तो अविनाश दीदी और आयशा से बात कर रहा था ,हम पास गए उसे विश किया और दीदी ने हमारा एक इंट्रो कराया ..

'अरे मैं इन लोगो को जनता हु ,अच्छा आप लोग पार्टी इंजॉय करे ,'तभी आयशा ने कहा ,आयशा आज तो जन्नत की पारी लग रही थी मैं उसे देखता ही रहा ऐसे भी मैं जब से आया था नजर बचा बचा कर उसे ही देख रहा था ,

'भईया थैंक्स फॉर एव्री थिंग अब तो परमिंदर भी नहीं रहा केस तो colse हो जायेगा ना ,'

'हा बिलकुल अब तुम्हे भी झंझट में पड़ने की जरुरत नहीं है ,मैं सब देख लूँगा,और शायद अदालत उसे वो सजा नहीं दे पाती जो कुदरत ने उसे दे दिया ,'तभी पीछे से एक आवाज आती है

'हैप्पी बिर्थ डे हमारे युवा नेता जी ,'हम सब पीछे मुड़ते है ,डॉ चुतिया खड़े थे और मुस्कुरा रहे थे वही आज मेरी ने नीले रंग की साड़ी पहनी थी जिसमे वो बहुत ही कमल की लग रही थी ,उसका मांसल देह भरपूर निखार में था ,और उसने आज सिन्दूर भी लगाया था ,जो मुझे समझ नहीं आया ,मैंने देखा की राहुल उसे घुर रहा है और वो भी उसे देख कर इशारे कर रही थी ,मेरे चहरे में एक मुस्कान आ गयी वही जब मेरी ने मुझे देखा तो थोड़ी डर गयी जिसे देखकर मैं हलके से हस पड़ा ,

'ओह थैंक्स डॉ साहब फॉर कमिंग ,'दोनों थोडा बात किये फिर वो हमसे विदा ले लिया दीदी उसे जाते देखती रही और एक गहरी सांसे छोड़ी जिसे देख मैं और आयशा हस पड़े दीदी ने अपने को थोडा सम्हाला और डॉ से बात करने लगी दीदी से बात कर डॉ ने मेरी को वही छोड़ मुझे अपने साथ चलने को कहा ,जिससे राहुल को थोडा आश्चर्य हुआ ,

'क्या बात है दीदी आज डॉ हमें छोड़ आकाश में बहुत दिलचस्पी ले रहे है ,'

'हा आजकल वो डॉ से ध्यान सिख रहा है ,वो मेरी तुम तो बहुत हॉट लग रही हो आज ,'दीदी मेरी की ओर मुखातिब हुई और वो सभी बाते करने लगे ....

मैं और डॉ कुछ लोगो से मिलाने के बाद थोड़ी दूर खड़े थे ,

'डॉ अविनाश की भी क्या पहुच है ना ,देखो ना है तो वो एक यूनिवर्सिटी का प्रेसिडेंट पर इतने बड़े लोगो से उसके पहचान है ,और सब उसके बर्थडे पार्टी में भी आ गए ,'

डॉ अभी एक सिगरेट पि रहे थे और उनके हाथ में एक विस्की का पेग था,

'पहुच छोडो ठाठ देखो ,इतनी बड़ी पार्टी ,कबाब और शराब ,वो भी इतने लोगो के लिए ,इतने में तो सिंपल लोग शादी में खर्च करते है ,और वो भी एक इमानदार मने जाने वाले नेता जो की बस एक यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट है ,सामान्य घर का लवंडा,वो भी गाव का ,'डॉ ने मुझे देख एक रहस्यमयी मुस्कान दि ,उनके तर्क से मैं भी थोडा चकित हुआ और सोच में पड़ गया

'हा वो तो है पर नेता लोगो को पैसे की क्या कमी और ये भी तो कुछ उपरी कमाई करता होगा ना ,'

'हा पर इतनी क्या उपरी कमाई करता होगा की सिर्फ बर्थडे की पार्टी में 3-4-लाख खर्च कर दे 'रकम सुन मैं थोडा चौका

'तुम अभी बच्चे हो जब तुम कुछ कार्यक्रम कराओगे तब तुम्हे समझ आएगा की इतना करने में कितना खर्च आता है ,'

'तो आपको क्या लगता है की ये भी कुछ खपला करता होगा ,'

'करते तो सब है ,पर पॉइंट है की क्या घपला करता है ,'डॉ ने मुझे देखा और एक स्माइल दि,

'वो देख रहे हो वो इंस्पेक्टर माथुर है ,'मैंने देखा एक अधेड़ टाइप का आदमी जो सर से गंजा था और खूब दारू पि रहा था ,डॉ उसे हाय करते है और इशारे से अपने पास बुलाता है ,वो भी एक स्माइल लिए डॉ को देखता है और हलके हलके लड़खड़ाते हुए डॉ के पास पहुचता है ,

'हल्लो डॉ साहब ,'

'क्या माथुर ससपेंड होने के दुःख ने पि रहे हो ,'

'क्या करू डॉ ये मदेरचोद सालो को मरने के लिए मेरा ही जेल मिला था ,खुद तो मर गए और मुझे फासा दिया ,अब चलेगी इंक्वायरी तब तक बैठो घर में ,मादरचोद 'मैंने उसे बड़े धयान से देखा ,

'अरे कोई बात नहीं ,लेकिन एक बात समझ नहीं आई उसने ये क्यों किया .

'

'अरे मुझे क्या पता डॉ क्यों किया ,'

'ह्म्म्म ये भी सही है ,कोई मिलाने आया था उससे ,'

'हा उसके दोस्त आये थे ,दो लवंडे थे और तो कोई नहीं साले के घर वाले भी नहीं आये थे ,अच्छा डॉ चलता हु आज तो धूत होकर नाचूँगा ,अविनाश भाई का बर्थडे है वही मुझे बचा सकते है ,'उसने डॉ को आँख मारी और चला गया ,हम दोनों को समझ आ गया था की नानू और विक्की ही है जो उससे मिले थे ,

'हूमम्म कुछ समझे ,'डॉ ने मुझे देखा

'क्या'

'की ये शख्स झूट बोल रहा था ,'मैंने उन्हें फिर से प्रश्न भरी निगाहों से देखा

'कैसा झूट '

'की उससे मिलाने सर दो लड़के आये थे और कोई नहीं ,मैं साइकोलॉजीस्ट हु इतना तो समझ गया ,यानि डाल में कुछ काला तो है ,तुम पूछते थे ना की क्या करू तुम्हारा टाइम अब शुरू होता है ,'मैं अब भी प्रश्न वाचक निगाहों से उन्हें देखा

'इसपर नजर रखो और मौका मिलते ही इसे उठा लो और मैं तुम्हे एक पता देता हु वह लेजाकर इसकी खूब धुलाई करो और इससे वो राज उगलवाओ की वो कोन था जो परमिंदर से मिलने आया था ,और ये भी की क्या उसके कहने पर ही उसे मार दिया गया '

मैं डॉ की बात सुनकर पूरी तरह डर गया,

'डॉ ये आप क्या कह रहे है ,मैं ये सब कैसे ,मतलब मैंने तो कभी किसी को मारा तक नहीं है और किडनेप ...डॉ ये और दीदी लोग को क्या कहूँगा की कहा था,'

'मारा नहीं है तो मारो ये बॉडी क्या घास छिलने के लिए बनाये हो और नेहा की फिकर मत करो मैं सब सम्हाल लूँगा तुम्हे बस ये सोचना है की तुम्हे ये करना है की नहीं ,तुम उस दिन जब मेरे क्लिनिक में आये थे तो मुझे लगा था तुममे एक गरम खून है और तुम अपनी दीदी के लिया कुछ भी कर सकते हो ,मुझे नहीं पता था की तुम डरपोक हो .

'डॉ के इतने कहने पर में ही मेरे आँखों में खून आ गया और डॉ के चहरे पर एक मुस्कान डॉ ने मुझे वो एड्रेस दिया और बेस्ट ऑफ़ लक कहकर दीदी लोगो के पास चले गए ,मुझे आयशा से फिर बात ना कर पाने का मलाल तो था पर मेरे लिए ये करना जादा जरुरी था ,मैं माथुर के पीछे हो लिया और एक गलास उठा कर थोड़ी दूर में खडा था ,माथुर पहले कुछ अनजान लोगो के पास जाता है ,बहुत ही मस्ती से अपनी ड्रिंक करता है,मैं थोडा दूर होने की वजह से दीदी लोगो को नहीं दिख पा रहा था ,मैं बहुत धयान से उन्हें देखा ,दीदी और प्रीति बेचैन थे और इधर उधर देख रहे थे वही मेरी और आयशा राहुल से बिजी थे ,,,पर डॉ के वह पहुचने पर दोनों शांत हो गए और मेरी होठो पर एक मुस्कान आ गयी ,

इधर माथुर मेरी नजरो से ओजल हो गया मैंने उसे ओझल होते देखा और उसकी तरफ दौड़ पड़ा,मैं उस बिल्डिंग के पास पंहुचा लिफ्ट 5 फ्लोर दिखा रहा था,जब कुछ ना सुझा मैं पूरी ताकत लगा के सीडिया चड़ने का फैसला किया और जजब मैं हफता 5th फ्लोर में पंहुचा मुझे समझ नहीं आया की आखिर वो किस रूम में गया है ,मैंने उस होटल के लगभग सभी रूमों को चेक किया पहले तीन रूम लॉक था चौथे में एक बुजुर्ग दंपत्ति ठहरे थे जो बड़े परेसान दिख रहे थे कारन था ये पार्टी और पाचवा रूम,मैंने जब उस रूम का पूछा तो बोले की दिन रात आवाजे आती है होटल वाले बोलते है हनीमून वाला रूम है ,मैंने जब खटखटाया तो एक भरी भरकम आदमी पुरे नशे में बहार निकला मैंने अन्दर झाका तो एक कमसिन कन्या को चादर लपेटे लेटे पाया ,

'क्या हुआ क्या है ,'

'माथुर है क्या ,'

'कौन माथुर 'उसकी आँखे लाल थी और वो बड़े ही गुस्से में लग रहा था ,

'कुछ नहीं आप जारी रहिये ,'उसने ऐसे मुह बनाया जैसे मुझे मार डालना चाहता हो पर कुछ नहीं कर पा रहा ,

मैंने सोच में था की आखीर वो गया कहा मैं ऐसे ही उदास सा सीढियों के पास पहुच तो मुझे वह ऊपर जाती सीढियों में पैरो के ताजे निशान दिखे मैं तुरंत ऊपर की और बड़ा ऊपर मुझे छत जाने का रास्ता दिखाई दिया ,मैं धीरे से ऊपर पंहुचा देखा बड़ा सा छत और पूरा सन्नाटा ,मैं फिर आगे बड़ा एक कहार ने मेरा ध्यान खीचा और मेरे मुह से जोरो की चीख निकली....

माथुर की लाश पूरी तरह से खून से लथपथ जैसे किसी ने बहुत बे रहमी से मारा हो ,मेरी चीख से निचे से कुछ वेटर भाग के आये मुझे शांत करा के ..

'सर आप निकल जाए अगर किसी को पता चला की आप छत में आये थे तो ना जाने कितने सवाल खड़े होंगे ,अभी आपकी चीख शोरगुल के कारण किसी ने नहीं सुनी होगी ,आप निकल जाए और जब तक ये बात खुले नहीं किसी को नहीं बताये ,'

'पर मैंने ,,,,,मैंने तो कुछ भी ...

,,नहीं किया '

'हम जानते है आप तो हमारे सामने अभी ऊपर आये पर पोलिश को समझाना तो मुस्किल है ना,'मेरी आँखों में अँधेरा था ,मैंने पहली बार कोई लाश को ऐसे देखा था ,,मैंने उन्हें धन्यवाद दिया और वह से भागता निचे चला आया ....और डॉ को काल लगाया सारी बात बताई डॉ तुरत मेरे पास पहुचे ,

'तू वह से भगा क्यों ,'

'तो क्या करता मैं डर गया था,'डॉ मुझे गुस्से से देख रहे थे,

'चल मेरे साथ 'हम फिर वह गए पर अब वह लाश नहीं थी देखकर मेरा तो दिमाग ही चकरा गया ,

'ये देखा ऐसे ही डरेगा तो कर लिया मुकाबला,'मेरे माथे पर पसीने की धार तैर गयी

'नाम तो मेरा चुतिया है पर असली चुतिया तो तू है,जब जब तू चिल्लाया तो डीजे के इतने शोर में निचे के फ्लोर से इतने वेटर कहा से आ सकते है ,पहले तो कोई नहीं था ना,'मेरा दिमाग फिर से चकरा गया,

'मैं ,मैं उन्हें पहचान लूँगा एक दो को तो हा हा पहचान लूँगा 'डॉ ने मुझे घुर के देखा

'हा जैसे वो तेरे लिए बैठे होंगे की तू आएगा और उन्हें पहचान लेगा ,चल अब एक मौका तो गया दूसरा ढूँढना पड़ेगा ,और याद रखना तेरे साथ जो शख्स खड़ा है वो सिर्फ एक डॉ नहीं है,कुछ भी हो जाय डरना नहीं और भागना नहीं समझे ,'मैंने अपना सर हिलाया

19.
मैं अपने रूम में बहुत ही टेन्स होकर लेटा था ,और पार्टी में हुए हादसे के बारे में सोच रहा था,की मेरे मोबाईल पर एक मैसेज आया

'हाय 'मैंने unkonwn नंबर देख थोडा ठिठका

'हाय आप कौन '

'हह्म्म्म मुझे तो लगा की जिसे देखकर आप बेहोश हो गए उसका नंबर तो अभी तक निकल ही लिया होगा ,पर आप तो लगता है बहुत सुस्त आदमी है,मिलकर भी बात नहीं किये कोसिस भी नहीं की ,ओके अगर आपको कोई इंटरेस्ट नहीं है तो सॉरी ,'आयशा ओ माय #$@$% आयशा ने मुझे मेसेज किया मेरी तो पूरी चिंता फिकर तन्हाई ,जुदाई ,हवाई सब ही उड़ गयी ,

'नहीं वो मैं ,आपको नंबर किसने दिया 'मैं गलत जा रहा था या सही ?????

'राहुल ने कहा था की आपसे बात कर लू ,आप बात करना चाहते है ,कहिये क्या कहना था आपको ,उस दिन के लिए सॉरी बोलना चाहते हो तो कोई बात नहीं इट्स ओके 'अब इससे क्या बात करू ,साला किसी तो try कर ही लेना था काश ......

लेकिन बात याद आई दिल से करो ,मैंने दो तीन गहरी सांसे ली और

'कुछ नहीं आपको देखा तो मैं खो ही गया आप बहुत सुन्दर हो ,'

'अच्छा हर लड़की सुन्दर होती है ,कोई नयी बात ,'

'आप मेरे लिए बहुत मायने रखती हो जीतनी कोई और नहीं रखती ,'थोडा देर का सन्नाटा

'क्यों मैं आपकी कोण हु ..'मेरी सांसे रुक गयी मैं सोचने लगा वो मेरी कौन है और एक मेसेज मेरे हाथो से लिखता चला गया ..

''कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….

मेरे लिये तुम कौन हो……

कैसे बताऊँ !!!

कैसे बताऊँ मैं तुम्हें

तुम धड्कनॊं का गीत हो,

जीवन का संगीत हो!

तुम जिन्दगी, तुम बन्दगी !

तुम रोशनी, तुम ताजगी!

तुम हर खुशी, तुम प्यार हो !

तुम प्रीत हो, मनमीत हो !

आँखों में तुम, यादों में तुम !

साँसों में तुम, आहों में तुम !

नींदों में तुम, ख्वाबों में तुम !

तुम हो मेरी हर बात में…

तुम हो मेरे दिन रात में !

तुम सुबह में तुम शाम में !

तुम सोच में तुम काम में !

मेरे लिये पाना भी तुम !

मेरे लिये खोना भी तुम !

मेरे लिये हँसना भी तुम !

मेरे लिये रोना भी तुम !……… और जागना सोना भी तुम !!!

जाऊँ कहीं देखूँ कहीं…

तुम हो वहाँ…तुम हो वहीं !

कैसे बताऊँ मैं तुम्हें…….. तुम बिन तो मैं कुछ भी नहीं !!!

कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम कौन हो !!!

ये जो तुम्हारा रूप है…ये जिन्दगी की धूप है !

चन्दन से तरसा है ये बदन …बहती है ईसमें एक अगन !

ये शोखियाँ ये मस्तियाँ …. तुमको हवाओं से मिली !

जुल्फ़ें घटाओं से मिली !

होठों में कलियाँ खिल गयीं….. आखों को झीलें मिल गयीं !

चेहरे में सिमटी चाँदनी….. आवाज में है रागिनी !

शीशे के जैसा अंग है…फ़ूलों के जैसा रंग है !

नदियों के जैसी चाल है… क्या हुस्न है ..क्या हाल है !!!

ये जिस्म की रंगीनियाँ…… जैसे हजारों तितलियाँ !

बाहों की ये गोलाईयाँ…. आँचल में ये परछाईयाँ !!!

ये नगरियाँ हैं ख्वाब की…..कैसे बताऊँ मैं तुम्हें..हालत दिल – ऎ – बेताब की !!!

कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम कौन हो !!!

कैसे बताऊँ….कैसे बताऊँ….

कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम धरम हो !!!

मेरे लिये ईमान हो !

तुम ही ईबादत हो मेरी…… तुम ही तो चाहत हो मेरी !

तुम ही अरमान हो मेरा !

तकता हूँ मैं हर पल जिसे.. वही तो तस्वीर हो तुम.

तुम ही मेरी तकदीर हो.

तुम ही सितारा हो मेरा…. तुम ही नजारा हो मेरा.

यूँ ध्यान में मेरे हो तुम..जैसे मुझे घेरे हो तुम.

पूरब में तुम, पश्चिम में तुम!!!….उत्तर में तुम, दक्षिण में तुम !!!

सारे मेरे जीवन में तुम.

हर पल में तुम…हर छिन में तुम !!!

मेरे लिये रस्ता भी तुम…. मेरे लिये मन्जिल भी तुम.

मेरे लिये सागर भी तुम..मेरे लिये साहिल भी तुम.

मैं देखता बस तुमको हूँ….मैं सोचता बस तुमको हूँ.

मैं जानता बस तुमको हूँ… मैं मानता बस तुमको हूँ.

तुम ही मेरी पहचान हो…!!!

कैसे बताऊँ मैं तुम्हें…. देवी हो तुम मेरे लिये.

मेरे लिये भगवान हो !!!

कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम कौन हो !!!

कैसे………..

????'' (नोट ==> ये ओरिजनल जावेद अख्तर साहब की लिखी रचना है )

मैंने मेसेज सेंड किया ,और फिर थोड़ी देर तक एक खामोशी मुझे अपने दिल की बात कहने का सुख मिल गया था ,पर ना जाने आयश की हालत क्या थी ,लेकिन थोड़ी देर में ही ,

'हम्म्म ओके सब लड़के ऐसे ही होते है ,मैं सो रही हु बाय गुड नाईट 'मेरे चहरे पर उसके atitude को देख एक मुस्कान आ गयी ,

'ओके बाय गुड नाईट ,और बाकियों का नहीं परा मैं तो तुम्हारे लिए यही सोचता हु ,'मेरा दिल हल्का हो गया था ,और मुझे सच में कोई फर्क नहीं पड़ रहा था की वो क्या सोच रही होगी

20.
राहुल अपने लेपटोप में बैठा नेहा के फोल्डर को खोला देख रहा था ,सभी विडिओ लगभग एक से थे और किसी में भी परमिंदर नेहा के साथ सेक्स नहीं कर पाता ,पर हां ये सभी विडिओ नेहा के प्रति राहुल के विचारो को बदलने के लिए काफी थे ,नेहा के बूब्स और उसकी योनी तक का दर्शन राहुल को हो गया था ,कभी एक दो उंगली भी अन्दर कर डी गयी थी ,पर सेक्स के लिए नेहा कभी राजी नहीं हुई ,राहुल को अब ये देख गुस्सा तो आता पर ना जाने कौन सी ताकत उसे अपना हाथ अपने लिंग पर ले जाकर उसे मरोड़ने पर मजबूर कर देती थी,पर अभी भी एक आखरी विडिओ बाकि था ...राहुल ने फिर धडकते दिल से उस विडिओ को ओपन किया ....विडिओ लगभग रात 8 बजे की थी और तारीख आयशा के केस से कुछ महीने पहले का ,विडिओ की लम्बाई देख राहुल भी दंग था विडिओ 8 घंटे की थी यानि शाम 8 बजे से सुबह के 4 बजे तक

कुछ देर तक एक खाली रूम दिखता है ,रहूल ने रूम पहचान लिया ये विक्की नानू का रूम था ,फिर परमिंदर और नेहा अंदर आते है ,नेहा को देखकर राहुल की सांसे रुक जाती है ,नेहा ने आज एक लाल रंग की साड़ी पहने हुई थी ,मांग में सिन्दूर था और गले में मंगलसूत्र,कमर पर एक पतला करधन झूल रहा था और हाथ लाल रंग की चूडियो से भरे हुए थे ,वही पर परमिंदर भी शेरवानी पहने था ,राहुल के मुह खुला का खुला रह गया ,

'मदेरचोद ये क्या बकरचोदी है ,ये दोनों शादी भी कर लिए ,शायद ये दीदी को शादी का झासा देकर चोदेगा ,'चोदेगा शब्द जेहन में आते ही राहुल का नाग फुंकारने लगा

दोनों बहुत खुस थे और आते ही दोनों एक दुसरे के गले से लिपट गए ,परमिंदर दीदी के कमर पर अपना हाथ फेर रहा था और दीदी भी एक प्यारी स्माइल के साथ उसके गले में अपनी बान्हे डाली थी तभी रूम के डोर पर एक दस्तक होती है ,नानू और विक्की वहा आते है और नेहा बिस्तर पर बैठ जाती है ,सब कुछ बिलकुल नार्मल लग रहा था ,नानू के हाथो में एक सेम्पियान

की बोतल थी ,

'आज मेरे दो दोस्त एक हो गए इस ख़ुशी में जाम हो जाए ,'नानू ने बोतल दिखाते हुए कहा

'यार आज लेट हो गया है ,प्लीज कल करते है ना ,पता नहीं घर में क्या बहाना बनाना पड़ेगा ,'

'अरे लेट हो गया ,आज हमारी शादी हुई है और तुम घर कैसे जा सकती हो ,आज कुछ बहाना बना कर रात यही रुको और हमारी सुहागरात का क्या होगा ,'परमिंदर ने

नेहा को अपने बाजुओ से पकड़ते हुए कहा ,नेहा के चहरे पर एक स्माइल आ गयी

'बच्चू सुहागरात तो असली शादी के बाद ही होगी ये मंदिर वाली शादी के बाद नहीं ,जब हम दोनों अपने परिवार के आशीर्वाद से शादी करेंगे ,'नेहा ने अपना सर परमिंदर के कंधे पर रख दिया ,पर ये सुनकर नानू का चहरा उतर गया ,लेकिन विक्की ने आगे होते हुए कहा ,,

'तुम्हारे घर वाले मान जायेंगे ,तुम हिन्दू हो और ये सिख्ख '

'यार कोई मानता थोड़ी है मनाना पड़ता है ,और नहीं माने तो आज के फोटोग्राफ कब काम आयेंगे 'नेहा ने फिर एक प्यारी सी मुस्कान दि,

'ओके ठीक है पर ये तो तुम्हे पीना ही पड़ेगा ,हमारे दोस्तों की शादी हुई है यार ऐसे कैसे छोड़ देंगे ,'विक्की ने फिर जोर दिया

'जान प्लीज् ऐसा मौका फिर थोड़ी आएगा ,'परमिंदर भी नेहा के गालो पर एक पप्पी लेता हुआ बोला ,

'ओके बाबु,मैं फ्रेश होक आ जाऊ ,'

'हा but ये दुल्हन का लिबास मत उतरना बहुत मस्त लग रही हो इसमें 'परमिंदर ने आँख मार दि और नेहा बाथरूम चले गयी ,

'मदेरचोद बहुत हुआ आज तो साली का काम कर ही देते है ,साला कितना तद्फाएगी बे 'नानू बड़े नाराज ढंग से कहा ,

'हां परमिंदर आज इसका काम कर देते है ,कम से कम इंजेक्शन लगा के एक बार इसे स्वाद तो चखाना ही पड़ेगा वरना सारी मेहनत में पानी फिर जाएगा,'

'हम्म ओके दारू में नशे की गोली डाल दे ,आज प्यार से या मार से काम तो इसका करके रहेंगे' नानू के चहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गयी थी ,विक्की ने जल्दी से ड्रिंक बनाया और एक में गोली डाल सब अपना अपना ड्रिंक पकड़ लिए पर नानू ने एक और गोली डाल दि ,

'मदेरचोद ये क्या कर रहा है पूरी बेहोश हो गयी तो मजा क्या आएगा ,'

'अबे साली ब्लैक बेल्ट है अगर हमपे टूट पड़ी ना तो माँ चोद देगी ,'परमिन्दर के होठो में मुस्कान आ गयी ,इधर नेहा अपने रूम से निकल कर आती है और परमिंदर के बाजु में बैठकर अपना ड्रिंक उठाती है ,सभी चेयर्स कर एक ही साँस में ड्रिंक पि जाते है ,पहला ही ड्रिंक नेहा के लिए आफत बन जाता है ,इतने मात्रा में नशे की गोली जाने के कारण उसका सर घूमने लगता है और वो परमिंदर के सहारे अपने को छोड़ देती है ,

'ये मुझे क्या हो रहा है ,बहुत नींद आ रही है ,'

'कुछ नहीं हुआ जान बस थकावट होगी और दारू का नशा ,'नेहा परमिंदर को फिर उन दोनों को देखती है और उसके आँखों से आंसू आ जाते है ,

'तुम लोग ...

मेरे साथ दारू का नशा ऐसा नहीं होता ,'तीनो हसने लगते है नेहा उनकी हसी को जैसे पहचान जाती है और अपने शारीर को पूरी ताकत से ऊपर उठती है उसकी सांसे भारी हो रहे थे आँख बंद होने को थे ,पैर लडखडा रहे थे पर वो उठ कड़ी हुई और परमिंदर को देख कर ,

'मैं तुमसे प्यार करती थी ,इतना जितना शायद किसी से नहीं किया और तुम ,'उसकी आवाज भी अब भरी हो चली थी उसकी हालत देखकर सभी की मुस्कान अब शैतानी हसी में बदल गयी थी ,पर नेहा तो नेहा थी उसने पास रखा बोतल उठा लिया और सीधे परमिंदर के सर में दे मारा ,

'मदर चोद ,तुझे तो आज रंडी बनायेंगे साली आज तुझपर कोई रहम नहीं करेगा ,'पर्मिन्दीर उठकर अपने सर को देखता है जिससे खून बह रहा था और वो गुस्से से लाल हो जाता है ,वो नेहा के हाथ को पकड़ बोतल को फेक देता है जो आधी टूट चुकी थी ,और फिर तीनो मिलकर उसे बिस्तर में फेक देते है ,

'नानू जल्दी से दवाई बना दे ,आज इसका मजा ऐसे लेंगे की इसे भी मजा आये ,एक बार इसे खून चखा देते है फिर खुद दौड़ी हमारे पास आएगी ,नेहा के हाथो को विक्की और पैरो को परमिन्द्र,नेहा उनकी बात सुन तो पा रही थी पर कुछ कर नहीं पा रही थी ,उसकी आँखों से अब भी आंसू आ रहे थे शारीर इतना निढाल हो चूका था की वो जिन्दा लाश सी लग रही थी ,दोनों ने उसे छोड़ दिया क्योकि अब वो कुछ करने की हालत में नहीं थी ,तभी नानू इंजेक्शन ले आता है और लगाने ही वाला होता है की ,

'अबे रूक साले चुतिया है क्या ,पता नहीं इंजेक्शन लगते ही उसका नशा कम हो जायेगा ,और ताकत भी आ जाएगी साली हम लोगो को मार डालेगी ,पहले इसके हाथ को बिस्तर से अच्छे से बांध जब तक इसे मजा ना आना शुरू हो जाय और पैर छोड़ देना थोडा छटपटाएगी तो मजा आएगा ,'नानू ने तुरंत इंजेक्शन पास रखा और नेहा के हाथो को बांध दिया और नेहा को इंजेक्शन लगा दिया गया नेहा कुछ देर तक तो ऐसे ही पड़ी रही पर थोड़ी देर में ही उसने अपनी आँखे खोली,उसकी आँखे अब भी लाल थी और आंसुओ से भरी थी ,

'क्या हुआ मेरी चिड़िया अब नहीं छटपटा रही तू अब तो ताकत आ गयी है ना ,'नेहा परमिंदर को देखने लगी ,

'ऐसा क्यों किया तुमने मैं तुमसे प्यार करती थी ,'सभी हसने लगे और अपने कपडे उतरने लगे नेहा जिन्दा लाश सी सोयी हुई थी ,सभी नंगे होकर उसके पास आय ,नेहा ने सभी को क़तर दृष्टी से देखा लेकिन अपने को बचने के लिए पहली बार अपने हाथ पैरो को हिलाना चलू की पर कोई भी फर्क नहीं पड़ा ,

परमिंदर उसके पास आ कर उसके साड़ी को ऊपर करना शुरू किया विक्की और नानू उसके दोनों और उसे खा जाने वाली नजर से देख रहे थे ,

'प्लीज परमिंदर प्लीज ऐसा मत करो मैं,प्लीज 'नेहा अपने पैरो को छुड़ाने की कोसिस करने लगी और जोर जोर से रोने लगी ,वही ये देख सभी जोर से हसने लगे और नानू ने अपना हाथ से उसका पल्लू हटाया और उसकी गोलियों को देख कर एक आह भरी ...

'मदरचोद कब से इसे देखना चाहता था आज तो पूरा खाने को मिलेगा ,'और अपने हाथो से उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसे मसलने लगा ,नेहा बस रो रही थी और अपने को छुड़ाने की पूरी कोसिस कर रही थी ,

'नहीं नहीं प्लीज् ,'परमिन्द्र ने उसकी साड़ी जन्घो से ऊपर कर दि और उसके जन्घो को चूसने लगा ,नेहा की छटपटाहट उसके मजबूत और भारी शारीर के आगे दब कर रह गया ,वो उसके जन्घो के बीच पहुचा तब तक नानू और विक्की उसके ब्लाउस के बटन खोल चुके थे और ब्रा निकल उसकी बड़ी बड़ी दूधिया स्तनों पर अपने होठो को लगाकर चूसने लगे थे ,नेहा बस मत करो कह कह रोये जा रही थी ,इधर परमिंदर ने जब अपने दांत उसके जन्घो में गढ़ा दिए नेहा एक जोर की चीख मरी पर विक्की ने उसका मुह दबा दिया ,परमिंदर उसी योनी को सूंघने लगा और जैसे ही उसने अपनी जीभ वहा लगायी वो खुश हो गया ,

'भाइयो दवाई असर कर गयी साली की चूत पानी छोड़ रही है वो भी किसी ऐसे रंडी जैसे जिसे लवड़ा लेने का भूख चड़ा हो ...'सभी हसने लगे वही नेहा नहीं नहीं कहते हुए अपने को ढीला छोड़ दि सभी समझ चुके थे की वो अब हार मान चुकी है ,और परमिंदर ने उसकी पेंटी निकल कर नानू की और फेक दि ,नानू उसे अपने नाक से लगा कर सूंघने लगा ,

'वाह साली में बात तो कुछ खास है,ले साली अभी अपने चुद का पानी सूंघी है ,'नेहा अपने सर को घुमाने लगी पर नहीं जबर्दारती उसके नाक ने पेंटी को रगड़ दिया ,

'भाई अब इसे नंगी कर ही देते है ,'नानू उतावला हो रहा था ,

'साले पहले साली की चूत तो चाटने दे फिर देखना साली कूद कूद कर चुद्ववायेगी ,'नेहा असहाय सी बस उसे देख रही थी उसकी सिसकिया अब भी जारी थी पर शारीर इतना उत्तेजित महसूस कर रहा था की वो खुद चाहने लगी थी की कोई उसकी योनी को सह्लाय ..

परमिंदर ने जैसे ही अपनी जीभ नेहा की योनी पर लगाया नेहा की पहली ख़ुशी की आह निकल गयी जिसे देख सभी खुस हो गए ..

नेहा के आँखों से अब भी आंसू बह रहे थे और दिल दुःख रहा था पर वो अपने जिस्म के हाथो मजबूर महसूस कर रही थी ,परमिंदर जोर जोर से नेहा की योनी को चूस रहा था और नेहा की सिस्कारिया लम्बी हो रही थी ,

'आअह्ह्ह्ह अआह्ह्ह नहीं नहीं आआअह्ह चुऊऊउसोओओओओओओ मत प्लीज्आआआअ 'इधर नानू और विक्की भी अपनी सभी मनोकामना पूरी कर रहे थे नेहा का कोई ऐसा अंग नहीं बचा जहा ये दोनों ने अपने होठो से चूसा ना हो नानू नेहा के प्यारे चहरे को अपने थूक से गिला चूका था वो अपने होठो को उसके होठो के पास लता पर नेहा अपना चहरा हटा लेती है ,इतने में परमिंदर अपने लिंग को नेहा की योनी में रगड़ता है ,नेहा आँखे खोलकर उसे देखती है पर कोई विरोध नहीं करती ,तभी नानू ने कहा

'भाई पहले दवाई खा लेते है,रात भर मजे करेंगे हम भी ,100mg की ला दू '

'साले लवड़ा सूज जायेगा और तीन लोग है ये ले पाएगी ,'विक्की ने चिंता जाहिर की

'अरे आज तो ये सब ले लेगी 'परमिंदर ने स्माइल किया और तीनो ने दवाई खा ली

परमिंदर फिर रगड़ने लगा और नेहा मचलने लगी ...

'बोल प्लीज डालो ,अबे वो केमरा इधर ला इसके मुह के पास ,नेहा के आंसू अब सुख चुके थे उसे अब किसी से कुछ भी मतलब नहीं था ,केमरा नेहा के चहरे पर फोकस होता है ,

'प्लीज डाआआअ लोओओओ 'नेहा ने ये कहकर आंखे बंद कर ली और परमिंदर ने धीरे से अपना लिंग अंडर कर दिया ..

'आअह्ह्ह्ह माँ ह ह ह अआह्ह्ह 'नेहा सिस्कारिया लेने लगी पर उसे दर्द नहीं मजा आ रहा था वो अपनी आंखे बंद किये हुए थी और परमिंदर धीरे धीरे अंदर बहार कर रहा था ,कैमरे का फोकस अब उनकी योनी और लिंग ले मिलन को दिखा रहा था फिर वो अपनी जगह में चला गया परमिन्द्र की स्पीड बदने लगी की नेहा की आवाज में जान आने लगा ,

'आह्ह्ह आह्ह्ह अह्ह्ह्हा अह्ह्ह हां हां हां माँ माँ आहाह्ह्ह आह्ह्ह आह्ह 'नेहा की आहे ,परमिंदर का धक्का और योनी में लिंग के मिलन से उठी कामरस के चिप चिप की आवाज एक ले में थी ,बाकि दोनों जाने अपनी मनमानी कर रहे थे कुछ देर बाद विक्की जाकर सिगरेट जला लाया और खड़ा होकर कस मरने लगा ,तभी नेहा का मोबाईल बज उठा ,विकी ने देखा की आकाश का फ़ोन है ,उसने परमिंदर को रोका और नेहा को कहा

'सुन बोलना दोस्त के यहाँ हु ,कल आउंगी ,'नेहा ने बड़ी मुस्किल से आँखे खोली ,परमिंदर धीरे धीरे धक्के दे ही रहा था जिसके वजह से नेहा की आँखे मजे से खुल ही नहीं रही थी ,विक्की ने उसे रोक दिया और गुस्से से देखकर उसे नहीं का इशारा किया ,

'हां भाई ,मैं एक फ्रेंड के घर में हु ,कल आउंगी प्लीज् मम्मी को बता देना और मना भी लेना ,'नेहा बड़ी भरी आवाज में कहा ,उसके आँखों से आंसुओ की धार भी बहने लगी तो परमिंदर ने फिर धीरे से एक धक्का लगाया ,नेहा का मुह खुल गया और वो उसे याचना के भाव से देखने लगी और नहीं करो करके सर हिलाया ,

'दीदी ये आपकी आवाज को क्या हो गया है ,ऐसे

क्यों बात कर रही हो .'

'भाई सॉरी मैंने थोड़ी ड्रिंक की है और सो रही हु ,प्लीज् बाबु सॉरी' बोलते ही नेहा फफक कर रो पड़ी विक्की के चहरे की हवाइया उड़ गयी पर जब उसे समझ आया की आकाश सोचेगा की शराब पिने के कारन रो रही है तो उसे तसल्ली हुई ,पर परमिंदर का हरामी दिमाग ऊस रोने का फायदा उठाने के लिए धीरे धीरे फिर से अन्दर बहार करने लगा ,

'प्लीज ,'नेहा ने परमिंदर को देख कर कहा ,और जैसे ही उसने एक जोर से झटका दिया नेहा आह को दबाने के लिया जोर से सॉरी बोल पड़ी ,परमिंदर को इसमें मजा आया और वो थोड़ी तेजी से अन्दर बहार करने लगा ,नेहा का दिल अपने इस हाल पर रो पड़ा और वो जोर से रोने लगी ,

'प्लीज भाई भाई सॉरी भाई सॉरी भाई ,,प्लीज मुझे माफ़ कर दो भाई मैं अब ये सब नहीं करुँगी बस आज भाई बस आज भाई ,प्लीज 'नेहा परमिंदर के धक्को के धून में बोल रही थी और रो रही थी ,लेकिन इधर आकाश की हालत उसे देख ख़राब हो गयी ..;.

'दीदी दीदी कुछ नहीं हुआ मत रोवो प्लीज मैं हु ना ,मैं सब ठीक कर दूंगा प्लीज दीदी ,,'लेकिन नेहा यही बोले जा रही थी ,नेहा सॉरी कहे जा रही थी और इधर परमिंदर की स्पीड बढ रही थी आकाश की धड़कन भी तेज होने लगी वो दीदी दीदी बोले जा रहा था ,आकाश से अब सहन नहु हुआ

'दीदी आप कहा हो मैं आपके पास आ रहा हु ,दीदी बोलो किस दोस्त के पास हो दीदी '

ये सुन नानू और विक्की की हालत ख़राब हो गयी पर परमिन्द्र दे दानादन ठोके जा रहा था और नेहा भी सॉरी भाई कहकर जोरो जोरो से रो रही थी

'दीदी मैं आ रहा हु 'और वो पल आया जब की परमिन्दर ने एक जोरदार पिचकारी से नेहा की योनी को भिगो दिया ,और नेहा के मुह से निकल

'नहीं (नेहा जोर से चिल्लाई की आकाश भी डर गया )नहीं भाई (नेहा ने खुद को सम्हालते हुए कहा )'परमिंदर एक विजयी मुस्कान लेकर खड़ा हुआ और नेहा की योनी से परमिंदर का वीर्य बहार आने लगा ,

एक और पिचकारी और छुटी और जिसका रंग सीधे लेपटोप के स्क्रीन में पड़ा राहुल ने तुरंत विडिओ पौस करके उसे पोछा ना जाने कब उसका हाथ अपने लिंग पर पहुच चूका था ,वो रिलेक्स होकर फिर से विडिओ स्टार्ट किया ,

नेहा थोडा सम्हाल चुकी थी ,वो थोडा सम्हालते हुए बोली

'भाई तू मुझे माफ़ कर दिया ना '

'हां दीदी आप क्यों पागल हो रही हो ,मेरी दीदी कोई गलत काम नहीं कर सकती,आपको क्या हो गया है ऐसे क्यों बोल रही हो दीदी ,'आकाश भी अब रो रहा था उसका रोना सुनकर नेहा को अपनी गलती का अहसास हुआ ,

'माफ़ कर दे भाई मैं खुद को रोक नहीं पायी ,मत र्रो भाई अब मैं ऐसा नहीं करुँगी भाई ,तू और राहुल तो मेरी जान हो राहुल से भी माफ़ी मांगूंगी जब समय आएगा ,भाई माफ़ कर दे एक मीठी सी पप्पी दे मुझे मैं कल आती हु ,'आकाश सम्हला और एक किस नेहा को देता है नेहा भी एक किस उसे देती है और बाय बोल भीगी आँखों से फोन रखती है ,

अब तक दीदी का मेरे लिये और अपने लिए प्यार देखकर राहुल

की आँखे भी नाम हो चुकी थी उसे अपने से बहुत ही घृणा होती है ,और वो विडिओ को फ़ास्ट मोड़ में दल देता है ,

फोन रखने के बाद नानू और विक्की नेहा पर टूट पड़ते है थोड़ी देर रोने के बाद नेहा को भी वासना का बुखार चढ़ता है ,और तीनो उसे हर तरह से रात भर कई बार चोदते है ,नेहा का पूरा शारीर वीर्य से भीगा दिया जाता है और कई जगहों में काटने का निशान होता है ,तीनो लड़के भी उत्तेजक दवाई के असर में जानवरों की तरह और बिना थके कई घंटे तक ये खेल खेलते है ,अंत तक सब की हालत मुर्दों जैसी हो जाती है और लगभग 4 बजे सुबह के नानू मुस्किल से उठकर विडिओ बंद करता है ,,,,राहुल ग्लानी से भरा होता है पर नेहा के जिस्म को याद कर उसे बेहद उत्तेजना होने लगती है वो एक अजीब कशमकश में फस चूका था,...,

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21.
राहुल आज बड़ा ही उदास है और स्कूल में भी चुप ही रहता है ,मुझे ये देखकर बहुत ही चिंता होती है की आखिर मेरा प्यारा दोस्त यु खोया खोया सा क्यों लग रहा है ,

'क्या हुआ बे साले इतना उदास सा क्यों रह रहा है तू ,'राहुल चुप

'बता दे तुझे दीदी की कसम है 'मुझे थोडा गुस्सा आ जाता है ,

'भाई दीदी की कसम मत दिया कर,कुछ बताने लायक होता हो तुझे नहीं बताता क्या ,अपने दोस्त को ऐसा समझ रखा है तूने ,'राहुल भी थोडा गुस्सा हो गया ,

मैंने मन ही मन उसे गलिया दि ''साले कोण सा तुम लोग मुझे कुछ बताते हो ''

'बोल दे ना भाई '

'कुछ नहीं दोस्त '

'बोल भोसड़ीके 'राहुल ने मुझे घूर के देखा

'कुछ नहीं बोला ना बे क्यों आंड खा रहा है ,'मैंने राहुल के आँखों में देखा कुछ तो गलत था ,

'हुम्म ओके चल आज बियर पीते है ,'राहुल ने मुझे बड़े आश्चर्य से देखा

'साले तू कब से पिने लगा,'

'जब से तू मुझसे चीजे छिपाने लगा है ,अब चल '

'सच भाई कोई प्रोब्लम नहीं है,तू क्यों टेंशन ले रहा है ,'

'साले आजकल मैं धयान करता हु ,तेरी आँखे बता रही है की तू छुपा रहा है ,ठीक है नहीं बताना है तो मत बता (मैं कुछ देर सोच में पड़ा रहता हु )अच्छा एक बात बता जो प्रीति ने मुझे बताया वो सच है क्या ,'मेरी बात से राहुल बिलकुल ही काप सा गया जो मैंने भाप लिया

'क्या बताया 'मुझे प्रीति ने कुछ भी नहीं बताया था ,

'वही आयशा और दीदी और प्रीति और परमिंदर नानू विक्की ,तू तो मुझसे कोई बात नहीं छुपता ना तो इतनी बड़ी बात कैसे ...'मैंने कुछ भी नहीं किया था पर ना जाने क्यों मेरी आँखों में आंसू आ गए ,राहुल को लगा की शायद इसे सब पता चल गया है ,वो डर गया

'भाई कुछ तो नहीं हुआ 'मैंने उसे देखा मेरी आँखे लाल हो चुकी थी ,पता नहीं आजकल मैं अपने इमोशन को काबू से बाहर कर देता था ,राहुल सच में डर से कापने लगा ,

'भाई सॉरी वो दीदी ने कहा था की ...

'मेरे आँख लावो की तरह उबलने लगे थे और आंसू की धार बह चली थी मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है ,पर डॉ के कहे मुताबिक मैं बस अपने को छोड़ देना चाहता था,

'मुझे विडिओ देखना है ,'विडिओ के नाम सुनकर राहुल पसीने से लथपथ हो गया और वहा से भागने लगा ,,मैंने उसका हाथ पकड़ कर खीचा वो मेरे आगे किसी गुडिया से जादा ताकतवर नहीं लग रहा था मैंने अपने हाथो से उसकी गर्दन पकड़ी और उसे हवा में उठा दिया ,राहुल मेरे इस रूप को देखकर दंग था ,सायद मैं भी

'भाई ये क्या कर रहा है ,विडिओ मेरे पास नहीं है ,'मुझे अपने आप का अहसास हुआ तो मैंने उसे निचे उतार दिया ,वो अब भी डरा हुआ था ,

'मैं डॉ चुतिया से मिला था ,और मैं जनता हु की विडिओ कहा कहा पर है ,अब तू बतायेगा की नहीं ,तू मेरा भाई है ,पर ये मेरी दीदी का सवाल है ,बाकि तू समझदार है,'राहुल ने एक गहरी सांसे ली और डॉ को गाढ़ी गाढ़ी गालीया अपने मन में दिया ,

'ठीक है चल ,पर मुझसे एक वचन कर अगर तू मुझे अपना भाई मानता है तो ,'मैं थोडा नार्मल हो चूका था ,मेरे मुह से मेरे ही राज निकल गए थे और मैंने अँधेरे में तीर मारा था ,

'तेरे लिए कुछ भी कर सकता हु तू जानता है ना ,'

'हां भाई पर ये दीदी से जुड़ा मामला है ,पता नहीं तू इसे देखने के बाद कैसा रियेक्ट करेगा ,'मुझे लगा की जो फोटोज मैंने दीदी के मोबाईल में देखि थी शायद ये वही होंगी और मैं सम्हाल लूँगा ...

'ठीक है बता क्या वादा चाहिए तुझे ,'

'तुझे मेरी कसम है ,तुझे दीदी की कसम है की तू उसे देख कर कोई भी उल्टा सीधा या जल्दबाजी में कुछ भी नहीं करेगा ,पहले जा कर दीदी से मिलेगा उन्हें इनके बारे में मत बताना ,पर मैं जनता हु तू दीदी से मिलकर शांत हो जायेगा तो पहले दीदी से मिलकर बात करेगा फिर ही तू कुछ और करेगा ,मंजूर 'मैं थोड़ी देर उसे देखता रहा

'अगर मंजूर ना हो तो तू मेरी जान ले ले मैं तुझे कुछ नहीं दिखाऊंगा 'मैंने उसे हसकर देखा और उसे अपने गले लगा लिया ,वो साला बड़ा प्यारा लग रहा था ,

'ठीक है मंजूर ,लेकिन अभी चल '

राहुल ने अपने रूम में लेपी खोली पासवर्ड डाला और उस फोल्डर को खोला मुझे तुरंत दीदी का नाम दिख गया ,

'तू हट मुझे देखना है ,'

'पर भाई मैं दिखा रहा हु ना 'मैंने उसके कंधे को पकड़ कर उसे पीछे धकेल दिया और खुद लेपी के पास चला गया वो लडखडाता हुआ पीछे की आ गया और मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,

मैंने दीदी वाला फोल्डर खोलने के लिए कर्सल वह ले गया,राहुल की दिल की धड़कने बढ़ी हुई थी जिसकी आवाज मुझे भी सुनाई दे रही थी ,जब इसकी धड़कने इतनी बडी हुई है तो मेरा क्या होगा क्या मैं सच में इसे सम्हाल पाउँगा अगर कुछ नया दिख गया तो ,मैं लगातार 15 गहरी सांसे ली राहुल मुझे ऐसे देख रहा था जैसे मैं कोई भूत हु ,मेरा मन जब पूरी तरह से शांत हो गया तो मैंने उसे मुस्कुरा के देखा और क्लिक कर दिया ,

इतने विडिओ मेरी

धड़कने बड रही थी मैंने फिर 10 गहरी सांसे ली खुद को सम्हाल कर मैंने पहले विडिओ में क्लीक किया राहुल वह से जाने लगा मैंने उसका हाथ पकड़ उसे रोक लिया ,

पहले विडिओ को देखते देखते मेरी आँखों में अंगारे थे मेरा पूरा शारीर काप रहा था मैं जमीन में बैठ गया और आँखे बंद कर बाद दीदी के चहरे को देखने लगा ,

''दीदी मेरी प्यारी दीदी क्या क्या नहीं सहा है तुमने इतना क्यों उससे प्यार किया जिसने तुम्हे धोखा दिया...तुम्हारी कोई गलती नहीं थी दि तुम प्यार में थी उस लड़के के ,तुमने मुझे नहीं बताया राहुल से छुपाया क्योकि तुम प्यार में थी अपने भाइयो के ,सब अकेली सहती रही ना '

राहुल के आँखों से भी आंसू की धरा बहाने लगी ,वो मुझसे आकर लिपट गया ,

'भाई मैं भी तेरा गुनाहगार हु ,जब परमिंदर और आयशा वाला केस हुआ तब से ये विडिओ मेरे पास है ,तब से मैं ये दर्द अपने जेहन में दबा के रख्खा हु ,मुझे माफ़ कर दे मेरे भाई ,'मैं राहुल से लिपट के रोता रहा और वो मुझसे जब तक हमारे आंसू नहीं थम गए ,अब मेरा दिल बिलकुल हल्का था और रास्ता साफ ...

मैं उठा और दूसरे विडिओ को चलाने के लिए क्लीक किया ,लेकिन राहुल ने मुझे टोक दिया ...

'भाई सब में वही है ,लेकिन अगर तुझमे हिम्मात है और तू ये देख पाए तो आखरी विडिओ देख ले ...'मैंने आखरी विडिओ चलायी पहला नजारा देख कर ही मैं पास राखी खुर्सी पर गिर गया मैं किसी बुत की तरह सब देख रहा था लेकिन राहुल ने उसे फ़ास्ट फारवर्ड किया उसने मुझे इंजेक्शन के बारे में बताया और उस जगह विडिओ को ले गया जहा मेरी और दीदी की बात हुई थी मेरी आँखों में आंसू थे और उस दिन का मंजर साफ़ हो चला था...इतने पर राहुल ने विडिओ बंद कर दिया मेरे अंग अंग में बस अंगारे थे आँखों में पानी था ,जो मेरी जलती हुई आँखों को थोडा सकून दे रही थी ,मेरे दांत आपस में पिस रहे थे ,चहरा किसी अंगारे सा तपता हुआ किसी टमाटर सा लाल हो चूका था,मै८न बेसुध सा अपनी जगह पर बैठा निर्वात(खाली स्थान) को ताक रहा था ...

'भाई इन लोगो ने दीदी के साथ 8 घंटो तक बलात्कार किया'मैंने सर उठाकर राहुल को देखा

'हा भाई ये बलात्कार ही था ,मैंने भी ये विडिओ कल ही देखा,पर ठहरा नामर्द ,हा भाई मैं नामर्द हु जो ये सब देखकर भी चुप बैठा हु एक जन तो अब जा चूका है,पर बाकि दो को तडफा तडफा के मरना भाई,उन्होंने हमारी दीदी के जिस्म से कपडे उतारे है ,उनके जिस्म से चमड़ी उखाड़नी चाहिए 'राहुल के भी हाथ पाँव कापने लगे थे ,मैं अपनी जगह से उठा और राहुल को गले से लगा लिया वो फफककर रो पड़ा ...

'भाई जो तूने किया उसके लिए भी हिम्मत चाहिए ,अब गुस्से से काम नहीं चलेगा हमें इस पेड़ के जड़ तक को काट के फेकना है ,तू अपने को रिलेक्स कर और जा कर विक्की और नानू से मिल और इस पते पर ले आ (मैंने डॉ वाला पता उसे दिया ),याद रहे उन्हें पता नहीं चलना चाहिए की तू गुस्से में है ,और तू उन्हें कॉल नहीं करेगा और ऐसे मिलना की कोई देखे नहीं ,तेरे साथ आते भी कोई नहीं देखना चाहिए,,,अब हम दोनों भाई मिलकर कुछ करेंगे पर दीदी को पता नहीं चलना चाहिए ,पुरे विडिओ मैं अभी डिलीट कर रहा हु ,तुझे कोई प्रोब्लम तो नहीं 'राहुल बड़े आश्चर्य से मुझे देख रहा था ,उसके आँखों में मेरे लिए आंसू था ,उसने बड़े प्यार से मुझे नहीं कहा ,

'मैंने तुझसे वादा किया था ना की दीदी से मिलकर ही जाऊंगा तो मैं दीदी से मिलाने जा रहा हु'

वो मेरे गालो पर अपने हाथ रख कर मुझे बड़े प्यार से देख रहा था ,

'साले आज तो तू दीदी की तरह समझदारी वाली बात कर रहा है ,इतना समझ कहा से आ गया'

'दीदी से '....

22.
मैंने पुरे विडिओ डेलेट कर डी और घर को चला गया मुझे नहीं पता था की मैं दीदी से कैसे डील करूँगा ,दीदी के रूम को नोक किया दीदी ने बड़े प्यार से मुझे देखा ,

'क्या हुआ भाई थका हुआ लग रहा है ,काफी पिएगा क्या ,बनाकर लाऊ"मैंने ना में अपना सर हिलाया ,दीदी की बातो में प्यार था ,उनकी आँखों में प्यार था ,मैं उनके पास आकार बैठ गया वो एक किताब की ओर देख रही थी ,मैंने दीदी के आँखों में आते बालो को अपने हाथो से हटाया ,उन्होंने मेरी तरफ देखा और प्यार से मेरे होठो पर एक चुम्मन दे दि,दीदी के चहरे पर एक मुस्कान खिल रही थी अब वही मुस्कान मेरे चहरे पर भी थी ,मैं उनके प्यारे चहरे को निहारे जा रहा था की उन्होंने मुझे आँखों से इशारा किया ,क्या हुआ ,

'आप पढो ना मुझे बस आपको देखने का मन हो रहा है ,'वो मेरे गालो पर अपना हाथ रख सहला डी और फिर से किताब पड़ने लगी ,जाने कैसे मेरी दीदी ने मुझे अपनी काले कल से अलग रखा होगा ,हमारे बीच इतना सब हुआ कैसे वो अपनी आग को उस दवाई के इतने स्ट्रोंग असर के बाद भी सिर्फ प्यार ही दिखाया ,तुमने बहुत सहा है दीदी ,बहुत जली होगी तुम भी अपने वासना के आग में पर कभी मुझपर अपनी आंच तक नहीं आने दि ,हमेशा अपने प्यार की छाव तले मुझे बिठाया ,जब मैं रुका तो तुम भी रुक गयी उस आग को तुमने कैसे सम्हाला होगा,इतना कुछ सहती रही ,इतना जलील किया है उन लोगो ने तुम्हे और तुम बस हमें खुशिया और प्यार ही देती रही ,क्या बीती होगी तुमपर जब वो गिध्ध तुम्हे नोच रहे थे और तुम अपने भाई के लिए रो रही थी ,उन्होंने तुम्हारा बलात्कार किया ,हा ये बलात्कार ही था और तुम तुम बस मुझे याद करती रही ,तुमने मुझे जो दिया है उसका एक तिनका भी तुम्हे दे पाऊ तो मेरा तुम्हारा प्यार सफल हो जाएगा ,तुमने तो खुद को मेरे प्यार में भूला दिया और मैं ,मैं अनजान

सा बस....लेकिन अब नहीं दीदी हां सच कहता है राहुल उनके शारीर से उनकी चमड़ी तक खीच लूँगा मैं ,तुमपर कोई आंच अब नहीं आएगी नहीं आएगी ,तुम्हे पता चलने भी नहीं दूंगा ,तुम्हारे इस हालत के जिम्मेदारो को ढूंड ढूंड कर मरूँगा जड़ से मिटा दूंगा ....

मेरी आँखों में आंसू की बुँदे देख दीदी घबरा गयी और मेरे आंसुओ को अपने होठो में ले लिया ,मेरे चहरे पर फिर एक मुस्कान आ गयी ,

'क्या हुआ पागल ऐसे क्यों देख रहा है ,'दीदी ने मेरे गालो को सहलाते हुए पूछा ,मैं आगे बढ़कर उनके होठो को अपने होठो में लिया और उनमे खो गया जब हम अलग हुए तो दीदी मुस्कुरा रही थी ,

'इसलिए देख रहा हु ,क्योकि मेरी प्यारी दीदी हस्ते हुए इतनी प्यारी दिखाती है ,'दीदी ने मेरी आँखों में देखा उस प्यार भरे अहसास को देखकर दीदी ने मुझे अपनी ओर खीचा और मेरे होठो को अपने होठो में भर लिया .....

23.
एक बड़ा कमरा जो एक सुनसान जगह पर था राहुल उसपर टहल रहा था ,वो बड़ा ही बेचैन लग रहा था,विक्की और नानू भी किसी का बेसब्री से इन्तजार कर रहे थे,लेकिन वो एक टेबल पर बैठे सिगरेट पी रहे थे ,

'अबे कब आएगी तेरी वो item साला इतनी देर हो गए और उसे करेंगे कहा यार,यहाँ तो बिस्तर भी नहीं है .'नानू ने अपने हाथो से सिगरेट फेकते हुए कहा,राहुल ने बस एक नजर उन्हें देखा और चुप ही रहा ...

इधर मैं उस जगह पर पहुच चूका था और मैंने दरवाजा खटखटाया राहुल दरवाजा खोलते ही उन दोनों के तरफ इशारा करते हुए एक कातिल मुस्कान में मुस्काया..मुझे देख कर वो दोनों सकते में आ गए

'आकाश तुम यहाँ 'विक्की ने कहा

'हा मैं 'मैं हस्ते हुए उनके पास जाता हु और हाथ मिलाता हु ,विक्की जैसे ही हाथ आगे बढाया मैंने उसे अपनी ओर खीच लिया और बड़ी जोरो से एक लात उसके टांगो के बीच लगा दि,वो तिलमिलाता हुआ बैठ जाता है ,और मुझे आश्चर्य से देखने लगता है ,उसका चहरा देखकर मेरे सर में खून चढ़ गया,मुझे वो सभी दृश्य दिखाई पड़ने लगे जो दीदी के साथ हुए थे ,इससे पहले की नानू कुछ समझ पता मैं नानू पर भी झपटा और उसके गर्दन को दबाते हुए उसका सर टेबल पर दे मारा,एक ही वार दोनों के लिये काफी थी पर मुझे देख कर राहुल को ना जाने कौन सा जोश आ गया की उसने पास रखे एक लोहे के सरिये से नानू के सर पर एक वार कर दिया ,नानू का सर फटा और वो जमीन में बेहोश हो पद गया ,इधर विक्की ने कुछ होश सम्हाला और खड़े होने की कोसीसी की पर राहुल ने लगातार कुछ वार उस सरिये से कर दिए..मैंने राहुल को रोका और इशारा किया ,हमने दोनों को खुर्सियो में बांध दिया,पास में ही पानी से भरी एक बाल्टी राखी थी ना जाने कब से उसे भरकर रखा गया हो ,मैंने उसे अपने पास ले लिया ...

और नानू के सर पर उधेल दिया ,नानू को होश आने लगा और विक्की ने हमें सवाल भरे निगाहों से देखा,,

'ये सब क्या है ,'मैंने उसे गुस्से दे देखने लगा ,मेरे अंदर की जवाला इतनी बढ़ रही थी मुझे नहीं पता था की मैं कितने देर में अपना आप खो दूंगा

'तम्हारी सच्चाई हमें पता चल चुकी है ,अब तुम्हरे पास एक ही आप्शन है की तुम हमें बताओ की वो दवाई तुम्हे कहा से मिली,'मेरी बात सुनकर विक्की का चहरा लाल हो गया ,वो डर से कुछ बोल नहीं पा रहा था पर उसने उसने थोड़ी हिम्मत जुटाई,,

'हमें नहीं पता वो परमिंदर जानता था,'मेरे चहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आई और राहुल ने अपना हाथ चलाया और कई घुसे एक साथ जड़ दिए ,विकी बोखला गया पर कुछ कह ना सका मैं पास ही पड़े सरिये को पकड़ कर आया और विक्की के गले में रख दिया ,

'तुमने जो किया मन तो कर रहा है की तुम्हारे शारीर से तुम्हारी चमड़ी भी नोच लू ,पर तुम्हारे पास बचने का एक रास्ता है ,एक नाम और तुम आजाद ,बताओ जो भी पता है ,'मेरी आँखों में दीदी का चहरा घूम गया पर मैंने अपने को खोने से रोका ...विक्की जानता था की मेरे सर पर खून चढ़ा हुआ

'प्रफुल्ल ,एक फार्मसिस्ट है ,उसने ये दवाई बनायीं है पर उसका भी कुछ दिन पहले क़त्ल हो चूका है ,आगे का मुझे नहीं पता ,उन लडकियों को परमिंदर को तैयार करने कहा गया था,ताकि उन्हें हाई क्लास के लिए तैयार किया जाय ,हम लोग एक दो बार प्रफुल्ल के लेब गए थे पर ये उससे या परमिंदर से कोण करता था ये किसी को नहीं पता ,प्लीज् भाई अब हमें छोड़ दो 'राहुल और मैं एक दुसरे को देखते है,

'अच्छा एक बात और बता की प्रीति को तो तुमने धंधा कराया था ना ,तो ग्राहक कहा से लाते थे और कहा ले जाते थे ,'प्रीति का नाम सुन मैं थोडा हैरान तो हुआ पर मुझे पता था की राहुल को हो पता है वो मुझे नहीं पता ,

'वो वो परमिंदर ही सब करता था हमें कुछ नहीं पता ,'मैंने सरिया उसके गले में धकेल दिया

'जब तुझे कुछ नहीं पता तो तू जी कर क्या करेगा ,'एक खून की फुहार फूटी और मेरे चहरे पर आ लगी ,

ये मंजर देख नानू का तो पेसाब निकल गया ,राहुल उसे लात घुसे से मारने लगा और आख़िरकार तब तक मेरे हाथ से सरिया लेकर उसने उसका काम भी खत्म कर दिया ...

लेकिन राहुल का गुस्सा शांत नहीं हुआ उसने अपने जेब से एक चाकू निकला और उन्दोनो के चमड़े को उनके शरीर से उधेड़ने लगा ,राहुल को देख मुझे लगा जैसे वो विक्षिप्त हो चूका है ,मैंने उसे उसके मन की भड़ास निकलने से नहीं रोका और आश्चर्य जनक रूप से मेरा मन बहुत ही शांत हो चूका था,मैंने डॉ चुतिया को कॉल किया और पूरी कहानी बताई ,उन्होंने हमें वह से जल्दी निकलने और लाश को वही छोड़ देने को कहा ,,...

मैंने फिर एक बार मुड़कर राहुल को देखा वो अब अपना सर पकडे बैठा था उसके कपडे तक खून से रंग चुके थे ,मैंने फिर डॉ को कॉल लगाया

'डॉ वाश रूम कहा है ,'

'मकान के पीछे वाले हिस्से में देखना '

24.
आज मुझे इतना सकून हो रहा था जैसे कोई बढ़ा बोझा सर से उतर गया हो ,मैं जब घर आया तब शाम रात में तब्दील होने को थी,मेरे आते ही दीदी ने मुझे बड़ी ही परेशांन निगाहों से देखा

'कहा था तू इतने देर से ,पता नहीं क्यों मुझे इतनी बेचैनी हो रही थी,कॉल भी नहीं उठाया और राहुल कहा है ,उसने भी कॉल नहीं उठाया कही जाते हो तो ठीक है पर कॉल तो कर सकते थे ना ,'मैंने हलके से मुस्कान के साथ दीदी को देखा ,वो मुझे झूठे गुस्से से देखती है और आंखे बड़ी करके डराने की कोशिस करती है ,जिससे मेरी हसी छुट गयी ,और मैंने दीदी को अपनी बांहों में भर लिया,

'आई लव यू दीदी,'मैंने दीदी के मासूम से चहरे को प्यार से सहलाते हुए उनके नर्म गालो में एक चुम्बन रसीद कर दि ,

'मी टू भाई ,'दीदी के आँखों में चमक आ चुकी थी ,हम एक दुसरे के चहरे को बड़े प्यार से देख रहे थे की मम्मी ने किचन से ही आवाज लगायी ,,

'अगर तुम दोनों भाई बहन का इमोशनल ड्रामा हो गया हो तो खाना लगा दू ..'मैं और दीदी हस्ते हुए अलग हो गए ....

रात मुझे दीदी से मिलाने का मन हुआ और जब मैं उनके रूम पंहुचा तो वो किसी से विडिओ चैट कर रही थी ,वो हस रही थी शर्मा रही थी,उन्होंने मुझे देखा तो इशारे से मुझे अपने पास बुला लिया ,सामने अविनाश था मैंने उसे हल्लो कहा और उन दोनों को मेरे वह होने से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था ,बल्कि दीदी जादा खुश दिख रही थी मतलब साफ़ था की अभी ये दोनों कोई गलत चीज नहीं कर रहे थे ...लेकिन दीदी उसके हर बात पर हस्ती थी,थोड़ी शर्मा जाती मैंने दीदी का ऐसा रूप कभी नहीं देखा था ,मुझे इतना तो समझ आने लगा की दीदी उससे प्यार करती है या बहुत ही जादा पसंद करती है ...मैंने भी भी उससे थोड़ी फॉर्मल बात की और उसने हमें गुड नाईट कहकर चैट ख़तम कर दिया ..

दीदी ने लेपी बंद किया और मुझे शर्मा कर देखा मैं उनके गोद में सो गया

'दीदी एक बात पुछू ,'

'हा बोलो 'वो मेरे बालो को सहलाती रही

'ये अविनाश मुझे ठीक नहीं लगता,'दीदी के हाथ अचानक से रुक गए

'क्यों ऐसा क्यों बोल रहा है,'मैंने सर उठाकर उनको देखा ,उनके चहरे की लाली कुछ फीकी सी थी

'वो आपने बर्थ डे पर गौर किया इतना खर्च किया था,इतने पैसे कहा से लाया होगा ,'मैं जैसे अपने ही मन की बात कह रहा था,लेकिन दीदी फिर मुस्कुरा पड़ी

'अरे यार उसके कांटेक्ट बहुत है ,किसी ने फिनेंस कर दिया होगा,राजनीति में ये होता है ,सभी बड़े कारोबारी अपना काम निकलने के लिए राजनेताओ की मदद लेते है ,और थोड़े पैसे पार्टी फंड में भी डाल देते है ,'

'मगर आप तो कहती हो वो इमानदार है '

'हा वो तो है ,पर यार कितना भी इमानदार हो जाय पार्टी चलने के लिए पैसे तो चाहिए ना वो तो बड़े बिजनेसमैंन ही देते है ना ,'दीदी ने मेरे गालो पर अपना हाथ रखा ...

'ह्म्म्म आप को कभी नहीं लगा की अविनाश के सम्बन्ध गलत लोगो से है ,'दीदी हस पड़ी जैसे उन्हें लगता था की मैं एक छोटा बच्चा ही हु और मुझे दुनियादारी की कोई समझ नहीं

'अरे मेरे प्यारे भाई ,नेता लोगो को तो सबसे सम्बन्ध बना कर रखना पड़ता है ना ,क्या अच्छा और क्या बुरा ,तू इन सबके बारे में मत सोचा कर ,तू अपनी पढाई और अपनी सेहत पर ध्यान दे ,तू जिम भी रेगुलर नहीं जा रहा है कुछ दिनों से ,और हा आयशा पर भी थोडा ध्यान दे ,'दीदी खिलखिलाकर हस पड़ी ,दीदी सचमे अजीब थी दुनिया में कुछ भी हो रहा हो ,उनके साथ कुछ भी हुआ हो पर मेरे पास ,मेरे साथ आकर वो सारे दुखो को ताक में रख देती है ,सिर्फ मेरी ख़ुशी उन्हें बस यही दिखता है और कुछ नहीं ,मैं दीदी के दुःख को कभी ना पड़ पाया कभी समझ नहीं पाया क्योकी वो मुझे अपने दुखो से हमेशा दूर रखती थी ,मेरे लिए उनके पास जो था वो था बस खालिस प्यार ,प्यार और प्यार ,...

मैंने उनके चहरे को अपनी तरफ झुकाया और अपने होठो को उनके होठो पर मिला दिया ,दीदी भी मेरा साथ देने लगी और वो मेरे साथ ही लेट गयी,आज हवस मुझसे खोशो दूर था और दीदी का जिस्म मुझे आकर्षित नहीं कर रहा था ,मैं बस अपनी आँखे मूंदे उनके प्यार को अहसास करना चाहता था,उनके होतो की नशीली शराब को बस पीना चाहता था ,

मैंने उनकी आँखों में देखा मुझे एक प्यार भरी तमन्ना दिखाई दि मुझे लगा जैसे वो मुझे कुछ कहना चाहती हो मैंने आँखों से उन्हें पूछ ही लिया की क्या बात है ,

'तुम्हे वो दिन याद है जब तुमने कहा था की दीदी की चूत,'मैं थोडा शर्मा गया

'क्या दीदी आप भी उसे पकड़ कर बैठी हो,हो गया ना अब वो ख्याल भी मेरे मन में नहीं है,अब मैं किसी भी असमंजस में नहीं हु ,मुझे पता है हमारे बीच कुछ भी गलत नहीं हो सकता,जो भी होगा वो महज प्यार होगा ,कोई वासना नहीं ,'दीदी मुस्कुराते हुए मेरा हाथ अपने हाथो में लेकर अपने निकर के अन्दर डालती है ,मैं उनके नर्म बालो का अहसास अपने हाथो से कर उन्हें सहलाने लगता हु,

'अच्छा तो मेरा भाई यहाँ भी छू सकता है ,वो भी प्यार से ,'मैं उनके योनी को सहलाता हु और उनके बालो को अपनी उंगलियों में फेरता हु ,

'हा दीदी मैं आपको हर जगह छू सकता हु ,वो भी प्यार से ,बिना किसी वासना के बिना किसी उत्तेजना के ,...(मैं कह ही रहा था की मेरे लिंग में थोड़ी अकड़ होनी शुरू हो गयी )सॉरी उत्तेजना तो होगी पर वासना नहीं 'दीदी फिर खिलखिला पड़ी और मुझे किस करने लगी मैं अब उनकी निकर को निकल देना चाहता था ,मैंने उसे पकड़कर निचे खीचा दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया ,

'अभी नहीं ,अभी तुम्हे मुझे बहुत प्यार करना है ,फिर इसे उतरना ,'दीदी के चहरे पर एक शरारती मुस्कान थी .

'मैं आपके लिए सब करूँगा ,पर क्या आपको ये पसंद आएगा की आपका भाई आपको नंगा करे ,'ना जाने मेरे मुह से ये क्या निकल गया था ,

'नहीं मुझे अच्छा नहीं लगेगा ,'मेरा चहेरा थोडा दुखी हो गया ,लेकिन दीदी ने मेरे गालो पर अपने हाथो को रगडा

'मैं चाहती हु की मेरा भाई मुझे इतना प्यार करे की हमारे बीच कपडे जैसे शब्द का अर्थ ही ना रह जाए ,ये सेक्स ये जिस्म,ये कपडे ,ये समाज के बंधन ,ये सब चोचले सब ख़तम हो जाय ,क्या तू मुझे इतना प्यार देगा की तेरी दीदी इन सबसे आजाद हो जाय और तुझमे ही मिल जाय ,'दीदी की सांसे भारी थी और आँखों में आंसू थे बड़ी अजीब सी शर्त थी दीदी की वो मुझमे मिलना चाहती थी पर कैसे मुझे पता नहीं वो क्या चाहती थी मुझे पता नहीं ,पर जो समझ आया वो था प्यार बस प्यार और प्यार ....

आज दीदी को जी भर कर किस किया जी मुझे लग रहा था की आज के बाद वो मुझे नहीं मिलेगी,मैं अपना प्यार देना चाहता था पर बिना किसी हवास के,मैं उनकी शरीरी से आती गंध को अपने नथुनों में भरना चाहता था,मैं उनके मुलायम त्वचा को अपने हाथो से सहलाना चाहता था मैं उनकी फूली हुए गालो को अपने होठो में भरकर उनका रस पीना चाहता था,मैं उनके शारीर के किसी भी हिस्से को नहीं छोड़ना चाहता था ,

मैंने उनके माथे को अपने होठो से लगाया और उनकी आँखों में अपनी आँखे गडा दि,उनकी आँखे एक आमंत्रण दे रही थी की आ जाओ मुझमे सामने आओ ,मैं उनके नाक से अपनी नाक टिका दि ,और हमारी आती जाती सांसे एक दुसरे में घुलने लगे ,उनके उन्नत वक्षो को अपने विशाल छाती से रगड़ता हुआ मैं उनके होठो से आती मस्त खूसबू में डूब गया और अपने होठो को उनके होठो पर लगा कर उनके गुलाबी नर्म होठो के गीलेपन को और गिला करने लगा ,मेरी जीभ उनके जीभ से टकराई और मैंने उनकी जीभ को अपने अंदर खीचने लगा ,वो बिना किसी स्वाद के भी मीठा था,और हमारी थूक आपस में मिलाने लगी ,मेरा शारीर अब उनके नाजुक शारीर को पूरी तरह ढके थी और वो मुझमे ऐसे समायी थी जैसे कभी अलग ही ना होना चाहती हो ,मैं उनके नाजुक जिस्म को मचलता हुआ आगे बढ़ रहा था की उनकी सांसे भी भरी होने लगी थी और मेरे जिस्म की हर हरकत उनके मुह से आह के रूप में निकल जाती ,

मेरा हाथ अब उनके स्तनों का आभाश कर रहा था की कितने नर्म ,मुलायम ,लेकिन कसे हुए थे ,निप्पलो ने तो अपनी सीमा तक अपने को ताने हुए थे ,जैसे किसी पर्वत की चोटी को मात देने चले हो ,मेरा हाथ पड़ते ही वो सिसकी ,

'आह भाआआअ ईईई 'उनकी मादक सिसकी ने मेरे हाथो को पकड़ बढ़ने पर मजबूर कर दिया था और मैं उन्हें मसलता हुआ उनके अहसासों में खोया जा रहा था ,उनकी मादक गंध मुझे मदहोश कर रही थी अब कुछ भी ना रहे अपना बस खो जाओ ,खो जाओ उस मस्तानी सी धड़कन के अहशास में ,मैंरा लिंग ना जाने कब से ताना हुआ अब दर्द देने लगा था ,सायद यौवन के इस अद्भुत शिखर पर वो अपनी भी मर्जी चलाना चाहता था,मैंने दीदी के जन्घो के बीच उसे जगह दि की वो उतावला सा एक ही झटके में फुंकर मरने लगा मैंने उसे थोडा और और दबाया की दीदी ने मुझे अपने बांहों में कस दिया और मेरे होठो को काटने लगी ,जवाब में मैंने भी एक अपने हाथो को उनके स्तन पर और अपने लिंग को उनकी योनी पर मसल दिया

'भाई मैं मर जाउंगी ,आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह भाआयआआ ईईईई 'दीदी की सिस्कारियो ने मेरी उत्तेजना को और भी बड़ा दिया था और मैंने उनके टी शर्ट को उतरने लगा दीदी ने मुझे पूरा सहयोग किया किया,मैं अब उनके नर्म सुडोल उन्नत स्तनों का आभास सीधे अपने जिस्म पर कर पा रहा था ,मैंने अपने हाथो से उनके सर को पकड़ा और थोडा तिरछा कर अपने होठो को उनके होठो से मिलकर चूसने लगा,मेरी उंगलिया उनके बालो में फसी

थी,और दोनों के जिस्म की गर्मी आपस में मिल रही थी , हम दोनों चाहते थे की अब रुकना नहीं है ,पर कैसे मैं आगे जाऊ मैं एक ओहापोह में था,मैं अपने शारीर से ही उनके नग्न शारीर को रगड़ रहा था की दीदी ने मुझे ऊपर से नग्न कर दिया और मेरे निकर को निकाल फेका,मेरा पूरा शारीर अब नग्न था,और मेरा लिंग अब सीधे दीदी के झीने निकर से उनकी योनी में प्रहार कर रहा था हर प्रहार दीदी के शरीरी को कापा देती थी और ना जाने वो कैसे इतनी गीली हो रही थी मेरा लिंग उनके कामरस का आभाश उनके निकर के ऊपर से ही कर ले रहा था,मेरा लिंग अब फिसल कर उनकी योनी की फंको में फिसलता चला गया और लिंग का सिरा उनकी नाभि को छूने लगा ,ये रगड़न दीदी के लिए आफत ही बन गयी क्योकि अब मेरा लिंग उनकी योनी पर लेता हुआ था उनकी फांके मेरे लिंग को गोलियों को अपने में समाये हुए थी पर वो उसे भेद नहीं रही थी ,बल्कि लेटे हुए थी ,दीदी ने मेरे होठो को इतनी जोर से काटा की मेरे होठो से खून की थोड़ी सी धार निकल पड़ी पर परवाह किसे था ,दर्द कहा था जो भी था बस प्यार था बस प्यार का खुमार था,नाभि पर मेरे लिंग के शिखर को महसूस कर दीदी ने नेरा सर उठाया और मेरी आँखों में देखने लगी ,उनकी निगाहे आधी बंद थी जैसे कोई नशा किये हो ,वो अपने सांसो को सम्हालते हुए कह पायी ,

'कितना बड़ा है भाई तेरा ,'मैंने उनके मदहोश चहरे को देखा और कोई जवाब दिए बिना ही मैंने अपने उनके होठो पर एक लार गिरा दि और उस चिपचिपे लार को फिर से चिपचिपा करने लगा मैंने दीदी के निकर तक अपने हाथ ले जाकर उसे उतरने लगा पर दीदी ने अब मेरे हाथो को रोका और अपने सर पर ले जा रख दिया ,मेरे लिए अब रुकना बड़ा ही मुस्किल था मैंने कमर उठाया और निकर के ऊपर से फिर एक जोरदार दबाव उनकी योनी में दे दिया दीदी फिर छटपटा गयी और उनकी योनी की थिरकन उनके पुरे शरीर में फ़ैल गयी वो काप गयी ,और मुझे जोरो से भीच लिया ,मैं जनता था की दीदी अभी अपने आखिरी वस्त्र को निकलना नहीं चाहती ,शायद वो अपने भाई से इतनी ही दूरी चाहती है ,मेरे लिए रुकना तो मुस्किल था पर दीदी के मर्जी के खिलाफ अपने प्यार की तिलांजलि देना मैंने कभी उचित नहीं समझा ,मैं उनसे प्यार करता हु,ना की वो मेरे लिए कोई वस्तु है जिसे मैं भोगु ,

'दीदी र्रुका नहीं जा रहा ,खोल दो ना ,'मैंने पहली बार ऐसा आग्रह उनसे किया था,'उनकी आँखों में पानी थी भीगे हुए आँखों से वो मुझे देखने लगी ,

'मैं भी यही चाहती हु भाई , मुझसे भी नहीं रुका जा रहा पर ये हमारे प्यार की इन्तहान है की हम कहा पर रुक सकते है ,कम से कम आज तो रुक जा ,अगर तू चाहे तो खोल दे पर मैं चाहती हु की तू रुक जा ...

'मेरे गालो को अपने हाथो से सहलाती वो प्यार का ऐसा इंतहान बता गयी जो एक यौवन के गुरुर में डूबे और उत्तेजना के शिखर पर पहुच चुके लड़के के लिए लगभग असंभव होता है ,पर मैंने दीदी के आँखों का पानी देखा और मेरा प्यार मेरी उतेजना पर हावी होने लगा मैंने आगे बढकर तुरंत ही उनके आँखों के उस पानी को अपने होठो में भर लिया और उस खारेपन को महसूस करता हुआ ना जाने मेरे आँखों में कब पानी आ गया ,मैंने उनके मासूम से चहरे पर अपने होठो को लगाया और उनके गालो को चूसने लगा ,जब तक की मेरा लिंग शांत नहीं हो गया ,वो भी जनता था की उसकी उतेज्जना का महत्व बस आज इतना है था ,दीदी ने अपने भाई के अपने लिए अथाह प्यार को महसूस कर मुझे अपनी बांहों में भिचा और फिर हमारे होठ मिल गए हम एक दूजे से तब तक मिले रहे जब तक की नींद ने हमें बेहोश ना कर दिया ........

25.
(दो महीने के बाद )

डॉ और मैं दोनों एक होटल के वेटिंग रूम में बैठे थे ,डॉ के चहरे पर चिंता के भाव थे वही आकाश बस कुछ करने को उतावला दिख रहा था ,

'तुम सच में ये करना चाहते हो ,'डॉ ने चिंतित भाव से आकाश की और देखने लगे ,

'मुझे कोई रोक सकता है क्या ,उसकी चमड़ी अपने हाथो से निकलने की कसम खायी है डॉ मैंने अब वो नहीं बच पायेगा मेरे हाथो से ,'मेरे चहरे पर एक दृठता के भाव दीप्तिमान हो गया था,

'मगर वो बहुत ही पावरफुल है ,उसे यहाँ से उठाना बहुत मुस्किल होगा और क्या नेहा मानेगी की ये सब उसने ही किया है ,वो तो उससे प्यार करने लगी है ,तुम भी जानते हो ,'

'मैं उन्हें सब बताऊंगा ,की क्या हुआ था ,और वो भी उसके मुह से कहलाऊंगा ,आप बस मुझे इजाजत दे ,'डॉ ने हां में सर हिलाया ...मैं वाह से उठकर राहुल को कॉल लगता हु और

'भाई तू तैयार है ,आज हमारा अंतिम संघर्ष है ,'

'भाई क्या हम सही समय का वेट नहीं कर सकते यहाँ मुख्यमंत्री भी आने वाले है और बहुत पोलिश वाले भी है ,'मेरे चहरे की गंभीरता और भी बढ़ जाती है ,

'नहीं तूने सोच कैसे लिया की अब जब मुझे पता है की दीदी की जिंदगी किसने बर्बाद की है मैं समय का इन्तजार करूँगा ,जो होगा वो होगा या तो मरेंगे या मारेंगे तू आ रहा है कई या मैं अकेले निपटाऊ उसे ,'राहुल मेरी बात से हडबडा गया था ,

'भाई पागल है क्या साले साथ जिए है मरना पड़ेगा तो साथ ही मरेंगे ,और लवडे क्यों मरेंगे जब दीदी का प्यार हमारे साथ है,और वापस जाकर मुझे प्रीति को भी ठोकना है और तुझे भी तो आयशा को पटाना है ना..'मेरे चहरे पर एक हसी खिल गयी

'भोसड़ीके चल प्लान शुरू करते है.

,देबू कहा है (देबू एक कम्पूटर जीनियस है ,जिसके बारे में कहानी के शुरुवात में बताया गया था,)'

'वो अपनी पोजीशन में है ,'

'ओके'

मैं तेजी से कांफ्रेंस हल की तरफ बढता हु,बहार मुझे पास दिखने को कहा जाता है ,मैं पास दिखाकर आगे बढता हु ,मुख्यमंत्री का भाषण चल रहा होता है ,और अविनाश अभी उनके साथ ही होता है मैं गौर से स्टेज को देख रहा था,तभी एक शख्श के मोबाईल पर एक कॉल आता है और वो स्टेज से उतारकर निचे आ जाता है ,वो चलता हुआ लिफ्ट की तरफ बढता है और साथ में ही मैं भी सबसे नजर छुपकर उसके पीछे बढता हु वो लिफ्ट से ऊपर चला जाता है ,मैं स्क्रीन में देखता हु 5 वे फ्लौर पर लिफ्ट रुकी थी मैं पूरी ताकत से दौस्ता हुआ ऊपर जाने लगता हु ,वहा पहुचने पर मैं फिर राहुल को काल करता हु ,

'हां 5वा फ्लोर है ,'

'जनता हु बस दो मिनट 'राहुल एक होटल के कर्मचारी के पोशाख में आता है उसके हाथो में इ ट्रे है ,'मैंने देबू को कॉल लगाया थोड़ी देर में ही उसने कॉल उठा लिया ,

'हां वो अकेला है ,तुम लोग जा सकते हो ,'मैं राहुल को इशारा करता हु ,राहुल गेट के पास पहुचता है ,

'सर रूम सर्विस '

'नहीं चाहिए बाद में आना 'अंदर से आवाज आती है ,

'सर मेडम ने शेम्पियान का ऑर्डर दे दिया था वो थोड़ी देर में आने को कह गयी है ,'उस शख्श के चहरे पर एक मुस्कान आई (जैसा की मुझे लगा )

'रुको 'और उसने गेट खोल दिया राहुल सर झुकाए अंदर चला जाता है ,पर थोड़ी ही देर में

'राहुल तू 'राहुल उसे धक्का देकर गिरा देता है '

'हां मदेरचोद मैं 'मैं भागकर अंदर जाता हु और उसपरर घुसो की बारिश कर देता हु ,वो चिल्लाने को होता है पर मैं उसके मुह को दबा देता हु ,राहुल जल्दी से अपने ट्रे के निचे से एक बोतल निकलता है और उसे अपने रूमाल से गिला कर उसके नाक पर रख देता है ,वो शख्स थोड़ी छटपटाहट के बाद बेहोश हो जाता है ,मैं उसे गुस्से से भरा हुआ देखने लगता हु ,

'मन तो करता है इसे अभी मार दू पर ....

इसे तो दीदी ही मारेगी ,'मैं देबू को कॉल लगाता हु ,

'सारे कैमरे हैक है ,'

'कब के तुम्हारा ऊपर आना किसी ने नहीं देखा अब जल्दी निकालो इससे पाहे की होटल स्टाफ को पता लगे की कैमरे हेक है मैं बस उन्ही कैमरे हो हेक कर रहा हु जिसमे तुम्हारी फुटेज आने वाली होगी वरना उन्हें पता चल जायएगा ,'

'गुड 'मैंने फोन रखा,राहुल उस शख्स को दो तीन घुसे लगा देता है ,

'चल जल्दी कर ,इसे तो आज दिनभर और मनभर मारना है ,'राहुल एक काला कपडा निकल कर उसके सर को ढक देता है और उसे हम उसे ट्रे के निचे डाल देते है राहुल और मैं उसे लेकर लिफ्ट में पहुचते है और फर्स्ट फ्लोर पर ही रुक जाते है,मैं उसके सर से काला कपडा हटा कर उसे कंधे में डालकर पीछे की सीढियों से निचे जाने लगता हु राहुल लिफ्ट में ही ट्रे लेकर निचे जाता है किचन में ट्रे छोड़कर वहा से भागता है और सीधे मेरे पास बेसमेंट में पहुचता है ,तभी देबू का काल आता है ,

'सालो उसका मोबाईल स्विच ऑफ करो और बेसमेंट में बने टॉयलेट में जा कर छुपो जब तक सभी मंत्री यहाँ से बहार नहीं चले जाते कार लेकर मैं वह नहीं आ सकता सभी कार की चेकिंग हो रही है ,डॉ भी मेरे साथ ही है ,'

हम वह के टॉयलेट में जा छुपते है ,लगभग एक घंटे हो चुके थे की वो शख्स थोड़ी हलचल करने लगता है ,

'अबे दवाई की शीशी कहा है ,'मैं राहुल की तरफ देखता हु ,

'भाई वो तो मैंने फेक दि डस्टबिन में 'मैं उसे घुर के देखता हु वो मुझे आँखों से ही सॉरी कहता है की मेरे चहरे पर एक मुस्कुराहट आ जाती है और मै राहुल को इशारा करता हु वो बहार जाता है,

'कोई नहीं है 'और मैं उसे एक जोरदार घुसा मरता हु वो फिर बेहोश हो जाता है ,अब राहुल के चहरे में भी एक स्माइल थी ,कुछ देर बाद देबू का कॉल आया ,

'हा हम तैयार है ,कार लेके आ रहा हु ,'

'ओके '

कार आने पर मैंने फिर से उस शख्स को कपडे में ढँक दिया और कार में डाल दिया डॉ के चहरे पर एक विजयी मुस्कान थी ,और देबू कार से बहार आता है , और मेरे गले लगता है ,

'थैंक्स दोस्त 'वो मुझे दीदी का मोबाईल वापस करता है

'भाई मैं अपने प्यार के लिए कुछ भी कर सकता हु ,'उसके भोले चहरे पर अब एक चमक थी पहली बार था जब देबू ने खुलकर दीदी को अपना प्यार स्वीकारा था ,

'भाई तो आज से तू मेरा जीजा है,बस अब दीदी को पटा लईयो मैं तेरे साथ हु ,'और मैं एक बार फिर से देबू के गले मिलता हु ,देबू के चहरे में शर्म था ..

मैं राहुल को दीदी का मोबाईल देते हुए

'राहुल तू दीदी को लेकर गोदाम पहुच मैं इसे लेकर वहा पहुचता हु ,'राहुल आश्चर्य से मुझे देखता है

'मैं साले दीदी को ये खुसखबरी तू क्यों नहीं देता ,'मैं थोडा गंभीर था

'नहीं भाई वो सब बताने की मुझमे हिम्मत नहीं है ,मैं जनता हु तू ये कर सकता है ,दीदी को बस इसका नाम मत बताना वरना वो यहाँ नहीं आ पायेगी ,और जब मेरे बारे में बताएगा तो उन्हें यकीं दिला देना की मैं बिलकुल ठीक हु ,और तुझे अगर मारे तो कुछ झापड़ खा लेना ,'राहुल के चहरे पर एक हसी तैर गयी ,

'साले तेरे लिए तो गोली भी खा लू 'राहुल आगे बढकर मेरे गले लग जाता है और वहा से निकल जाता है ,इधर हम भी अपने ठिकाने पर पहुचते है और एक खुर्सी पर उसे बांध देते है ,कला कपडा अभी भी उसके चहरे को ढंका था ,इधर राहुल दीदी को सब बताता है ,की कैसे हमें उसके बारे में पता चला पर वो नहीं बताता की वो शख्स कौन है ,दीदी सच में उसे दो झापड़ लगा देती है जिसे राहुल मुस्कुराते हुए झेल लेता है और दीदी उससे लिपट के रोने लगती है ,अब उसके शख्स से मिलने की नहीं मेरे पास पहुचने की जल्दी है ,

'ना जाने मेरे भाइयो ने मेरे लिए कितनी तकलीफ उठाई है ,अब चल जल्दी मुझसे एक पल भी इन्तजार नहीं हो रहा है ,मुझे मेरे भाई को पहले देखना है ,'राहुल का चहरा अब भी लाल था पर होठो पर एक मुस्कान थी ,

'उस दरिन्दे को देखना है या आकाश को ,'राहुल ने शरारती मुस्कान से पूछा

'पहले तो मेरे भाई को ,अब चल ना 'दीदी ने भी मुस्कुराते हुए कहा ....

26.

बड़े से गोदाम में एक खुर्सी पर बंधा वो शख्स अपने को छुड़ाने को तडफ रहा था ,पास ही मैं देबू और डॉ खड़े थे मैंने जैसे ही ये देखा की वो होश में आ रहा है,उसे कई घुसे मार दिए ,वो चिल्ला पड़ा ,डॉ ने मुझे इशारा किया और मैंने एक पड़ा हुआ कपडा उठा उसके मुह में ठूस दिया जब वो मुझे देखा तो उसकी आँखों में डर साफ़ था जिसे देखकर मेरे चहरे पे एक स्माइल सी आ गयी ,थोड़ी देर में दरवाजे पर दस्तख हुई मैंने फिर उसका चहरा ढंका और दरवाजा खोला सामने दीदी राहुल और प्रीति खड़े थे प्रीति को लाने मैंने ही कहा था क्योकि उस आदमी ने उसकी भी जिंदगी बर्बाद की थी ,दरवजा खोलते ही जैसे ही मैंने दीदी को देखा की चटाक एक जोरदार चांटा मेरे गालो में पड़ा ,इसे देखकर राहुल की हसी छुट गयी पर उसने अपना मुह दबा लिया ,

'बहुत बड़ा हो गया है तू ,क्या समझता है तू अपने आप को हीरो है तू ,इतनी सी उम्र में ये सब काम करेगा तू ,दो लोगो को किडनेप करके मार दिया ,इतने बड़े लोगो से पंगा ले लिया और ये ,ये क्या है किडनेप करके ले आया समझता क्या है तू अपने आप को ,'मेरे चहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी लेकिन दीदी का चहरा गुस्से से तप रहा था वही उनकी आँखों में आंसू था और आवाज भरी रही ,मैं आगे बढकर उनको पकड़ने को हुआ पर फिर एक तडाक दुबारा मेरे गालो में पड़ा ,

'मत छूना मुझे और मत कहना मुझे दीदी ,तुझे कुछ हो जाता तो ,कैसे जीती मैं दीदी अब पूरी तरह से रो पड़ी और आकर मेरे गले लग गयी मैं उनकी बालो को सहलाने लगा तभी राहुल ने मुझे इशारे से अंदर जाने को कहा ,हमं अंदर आ चुके थे पर दीदी अब भी मुझसे लिपटी थी ,

'दीदी मैं बिलकुल ठीक हु ना,कुछ नही होगा आपके भाई को जबतक आपका प्यार मेरे साथ है ,दीदी ,ओ दीदी ,'मैंने दीदी के चहरे को उठाया और उनके गालो में एक चुम्बन दे दिया ,उनकी बड़ी बड़ी आँखे लाल हो चुकी थी वही गीली आँखे इतनी प्यारे लग रही थी मैंने उनके आँखों पर अपने होठ रख दिए ,

'जिसने आपकी जिंदगी को बर्बाद किया आज आपको उसे सजा देनी है ,दीदी उसका चहरा देख शायद आप को यकीं ना हो पर हा इसी आदमी ने आपकी और ना जाने कितनी लडकियों की जिंदगी से खेला है ,और दीदी आप अपने भाई की सोच रही हो ,और उन सभी लडकियों का क्या वो भी तो किसी ना किसी की बहन होंगी ना ,'

'मुझे तुझपर गर्व है मेरे भाई ,भगवान् ऐसा भाई सबको दे ,और ये कोई भी हो इसे तो मैं अपने हाथो से मरूंगी 'दीदी ने मेरे गालो को हाथो से सहलाया और उस शख्स के तरफ मुड़ी डॉ चुतिया उस शख्स के चहरे से नकाब उठाते है उसके मुह में अभी भी वो कपडा ठूसा हुआ होता है ,उसे देखकर दीदी के चहरे के भाव पूरी तरह से बदल गए उनके पैर लड़खड़ाने लगे ,वो गिरते हुए बची मैंने दौड़कर उन्हें सम्हाला वो उस शख्स के पास लड़खड़ाते हुए जाती है और उसके पैरो में बैठ जाती है ,

'मनीष ....

'दीदी के आवाज में एक रुदन था जैसे किसी ने दिल ही चिर दिया हो ,उनकी आवाज सुनकर मेरे जेहन से एक हाय निकल गयी ,

'आखिर क्यों ,इतना बड़ा धोखा प्यार का नाटक क्यों,'दीदी रोने लगी है और मनीष के चहरे में एक हसी के भाव है ...

27.
(दो महीने पहले )

मैं,राहुल और डॉ चुतिया तीनो पूरी मेहनत से उस शातिर दिमाग को ढूंढने में लगे थे ,मेरा और डॉ का शक अविनाश पर था ,मैं दीदी को अविनाश से दूर ही रखना चाहता था पर वो उसकी ओर आकर्षित होती जा रही थी ,उन्होंने एक दिन अविनाश को प्रपोस भी कर दिया लेकिन अविनाश ने उन्हें कहा की तुम तो मेरी बहन जैसी हो ,दीदी का सपना चूर चूर हो गया वो उस दिन खूब रोई ,अविनाश मुझे दीदी को सम्हालने को कहा ,उसकी इन बातो से मेरे शक की सुई घूमी और मैंने सीधे सीधे सोचना शुरू किया ,हमने अविनाश की फंडिंग का पता किया उसमे से कुछ ऐसे शख्स थे जो प्रीति ने ग्राहक हुए थे ,लेकिन उन्होंने अविनाश को फंडिंग किसी और वजह से की थी ,जो की पूरी तरह से बिजिनेस था ,

इधर दीदी का दिल टूट चूका था और मनीष उनके करीब आ रहा था ,मैं और राहुल भी उसे पसंद करते थे और वो दीदी को प्रपोस भी कर चूका था इसलिए हमने दीदी को सम्हालने के लिए उसकी मदद की थोड़े ही दिन में हमने उन्हें बिक्लुल नार्मल कर दिया ,और उन्होंने मनीष का पप्रपोसल भी हमारे कहने पर एक्सेप्ट कर लिया,लेकिन मनीष ने दीदी से इतना प्यार जताया की दीदी उससे बहुत प्यार करने लगी थी ,अभी तक मेरे और दीदी के जिस्मानी सम्बन्ध भी कम हो चुके थे और मैं आयशा की और दीदी मनीष की और जादा ध्यान देने लगे था ,आयशा मुझसे लगभग पट चुकी थी पर मैं उसे प्रपोस नही कर पा रहा था ,वही प्रीति राहुल के बहुत ही करीब हो गयी थी और उनमे एक प्यार का रिश्ता जन्म ले रहा था,,,दीदी मनीष के प्यार में डूबने लगी थी ,हम सभी इससे बहुत खुस थे,लेकिन फिर हमें एक बात पता चली

डॉ चुतिया ने पता लगाया की प्रफुल्ल पहले एक डॉ के पास काम करता था जो की मनीष के पापा है , वही से हमने मनीष और उसके पापा के ऊपर नजर रखी,उसके पापा तो सामान्य लगे पर मनीष की हरकते कुछ अजीब लगी ,पता लगाने पर पता चला की वो जितना सीधा लगता था उतना है नहीं ,उसका उठाना बैठना कई बड़े लोगो से था ,प्रफुल्ल के नौकरी छोड़ने के बाद भी वो उसके साथ मिलता रहा और उससे ही वो दवाई बनवाई थी ,फिर परमिंदर से दोस्ती की जो की विक्की और नानू का दोस्त हुआ करता था और बहुत बड़ा लड़की बाज था ,मनीष को विक्की और नानू की आदतों का पता था इसलिए उसने परमिंदर पर ही भरोसा दिखाया ,और उसे अपने धंधे में मिला लिया क्योकि उसे पता था की वो तो लडकिय पटा नहीं पायेगा ,उसने लडकियों के दम पर अपने कांटेक्ट अच्छे किये इसी के चलते प्रीति और कुछ दूसरी लडकियों को भी युस किया ,और ये काम वो परमिंदर के भरोसे कर रहा था ,विक्की नानू तक को इसकी खबर नहीं

लगी की इसके पीछे कोण है,पर ये तो अभी ट्रेलर ही था वो ऐसी लडकियों की फौज खड़ा करना चाहता था,और उसका सबसे बड़ा शिकार थी कॉलेज की सबसे सुंदर लडकिय नेहा और आयशा पर यही उससे गलती हो गयी नेहा तो फसकर भी निकल गयी ,और आयशा फस ही नहीं पायी ,और उसे मुसीबत में डाल गयी ,मनीष के सभी कांटेक्ट को मिलाने पर प्रीति ने भी अधिकतर के साथ सेक्स करने को स्वीकार किया ,पर मैं जल्दबाजी नहीं करना चाहता था और मैंने और सुबूतो को इकठ्ठा करना ही सही समझा ,इसी दौरान मनीष ने दीदी के साथ सेक्स की कोशिस की पर दीदी ने साफ़ मना कर दिया वो उसे बहुत चाहती थी पर वो दूध की जली थी ,मनीष ने उन्हें काबू में करने के लिए उन्हें राजनितिक पार्टी में ले जाना शुरू किया जो दीदी को बहुत पसंद था ,,बड़े लोगो से मिलवाना और लीडरशिप,दीदी के अविनाश से सम्बन्ध भी सामान्य हो गए बल्कि उसके लिए इज्जत और भी बढ़ गयी दीदी उसकी पार्टी भी ज्वाइन कर ली,मनीष दीदी को इम्प्रेश करने के लिए उन्हें लोगो से मिलवाता था लेकिन वो कभी इतनी इम्प्रेस नहीं हो पाई की अपना जिस्म दे दे ,लेकिन ये भी मनीष की गलती निकली क्योकि एक सिंपल लड़के की इतनी पहचान ने हमारा शक और पुख्ता किया ..

इधर किसी बड़े साबुत की तलाश में हम देबू से मिले जो दीदी का दीवाना था हमने देबू पर भरोसा जताया और उसे अपने साथ मिला लिया दीदी के बारे में सुनकर उसके आँखों में आंसू आ गए ,उसकी आँखों में मैंने दीदी के लिए प्यार देखा जो मैंने कभी और किसी लड़के के आँखों में नहीं देखा था,मुझे वो लड़का भा गया और मैंने उसने भी अपना सब कुछ छोड़कर हमारी मदद करने की ठान ली,उसने मनीष और अविनास का मोबाईल हेक किया और उनके सभी कॉल हम सुनने लगे ,दो तीन दिनों में ही साफ़ था की अविनाश बिलकुल ही क्लियर है और मनीष ही फसाद की जड़ है ,वो बेहद बेचैन था क्योकि उसे कोई भी लड़की नहीं मिल पा रही थी और ग्राहक उस पर प्रेसर डाल रहे थे उसकी आखिरी उम्मीद नेहा दीदी ही थी ,लेकिन यही फिर से उसकी गलती निकली ,हमें नेहा दीदी के मोबाईल का इस्तमाल उसे फ़साने में किया और ये यकीं दिला दिया की वो उससे सेक्स करने को राजी है और उस होटल के कमरे में उसे मिलना है,आखरी कंफरमेशन डॉ ने उसके अकाउंट की जानकारी निकलवा कर उस होटल के वेटिंग रूम में दे दि,जिसके बाद मैंने आखरी लड़ाई लड़ने की ठान ली और वो हमारे चुंगुल में था...

डॉ ने मनीष के मुह में लगा कपडा खोला जैसे लग रहा था की वो कुछ बोलना चाहता हो ,उसकी हसी से सारा कमरा गूंज गया वो एक शैतान की हसी थी,उसके चहरे पर धधकते अंगारे और आँखे बिलकुल सुर्ख लाल हो चुकी थी ,दीदी अब भी उसके पैरो के पास पड़ी उससे यही पूछ रही थी की तुमने ये क्यों किया...

'क्यों किया क्योकि मैं पवार चाहता था,क्यों किया क्योकि मैं तुम जैसी रंडियो को नग्गा कर बाजार में नचाना चाहता था,क्यो किया पूछती है साली रांड,मुझे पैसा चाहिए पवार चाहिए और तेरे जैसी सभी लडकिय मुझे मेरे निचे चाहिए ,'मनीष की बातो से जहा दीदी स्तब्ध थी वही मैं गुस्से से भरा हुआ उनके पास आता हु ,लेकिन डॉ ने मुझे इशारे से वही रोक दिया और आँखों से कहा की रुक नेहा को बोलने दे,आग तो मेरे तन मन में भी बड़क चुकी थी पर डॉ के कहने से मैं समझ गया की पहले नेहा दीदी को बदला लेने दो ,,

'मैं तुमसे प्यार करती थी मनीष ,और इतना बड़ा धोखा ,'

'धोखा हा हा हा ,धोखा ...साली तू मुझसे प्यार नहीं करती थी तू तो मेरे पास मजबूरी में आई थी जब तेरे चूत की आग बुझाने वाला कोई नहीं रहा तो मेरे पास आयी ,मैं तो तुझे कब से लाइन मार रहा हु और तू ,तू तो पटी उस परमिंदर से क्यों ,क्योकि उसका बड़ा था ना हा हा हा (मनीष पर मनो शैतान सवार था ,)और फिर भी मुझे घास नहीं साली ,हा तुम तो मेरे अच्छे दोस्त हो पर ये सब मैं कैसे कर सकती हु मैं वैसी लड़की नहीं हु,कोण कहता था ,और फिर उस अविनाश के पीछे पड़ गयी ,मैं सरीफा बना सीधा साधा बना पर नहीं ,और जब उसने भी तेरी गांड में लात मारा तब जाकर तू मेरे पास आई साली ,'तब तक एक जोरदार तमाचा मनीष के गालो में पढ़ चूका था ,ये हाथ दीदी का था ,

'मैं सच में तुम्हे प्यार करने लगी थी ,और ये तुम जैसे लडको के दिमाग की हैवानियत है की तुम लोगो के लड़की सिर्फ एक चीज है जिसका इस्तमाल करो और फेक दो ,लड़की का जिस्म फकत जिस्म नहीं होता उससे उनका मन और रूह भी जुडी होती है,तुमने मेरे जिस्म को पाना चाहा लेकिन तुमने मेरी रूह को भी मारा है,सर तेरे कारण मुझे जानवरों की तरह रौंदा गया,मेरे जैसी ना जाने कितनी लडकियों की रूह तक तुमने बेच दि,इसकी सजा तूम्हे मिलेगी ,ऐसी की तुम्हारा रूह तक काप जायेगा ,तुमने कई लडकियों को इस हालत में लाकर खड़ा कर दिया है की सायद अब वो किसी से प्यार ना कर सके ,प्यार के नाम से ही घिन आने लगी है अब तो ,इतनी हैवानियत जो तुमने की है उसका बदला तुमसे ले कर रहूंगी ,'दीदी का तन किसी गर्म सलाख की तरह लाल हो रहा था ,उनके बातो की तपन से माहोल शांत था और सबको बस ये इन्तजार था की दीदी क्या करने वाली है,दीदी ने पास पड़ा लोहे का सरिया उठाया और उसके पैरो में दे मारा,मनीष के मुह से दर्द की चीख निकली पर उसके चहरे पर अब भी मुस्कान थी ,

'जानती है ना की कैसे तीन लडको ने तुझे घंटो तक रौंदा था,हा हा हा 'दीदी के चहरे पर एक कातिलाना मुस्कान थी ,

'तू ये सब बाते कर के बच नहीं सकता मरेगा तो तू तड़फ तड़फ के ही ,'दीदी ने वो सरिया उसके कंधे पर घुसा दिया उसके मुह से फिर एक दर्दनाक चीख निकली ,जिससे दीदी के चहरे पर एक शकुन के भाव आये ,

'जानता है जलील होना किसे कहते है,दर्द किसे कहते है ,'प्रीति

जो अब तक सब चुपचाप देख रही थी वो आगे आ गयी ,

'जनता है जब कोई गैर मर्द तुम्हेरे जिस्म को रौंद रहा हो और कुछ ना कर पाने की आत्म गलानी किसे कहते है 'कहते हुए प्रीति ने अपने पैरो को उसके जन्घो के बीच दे मारा ,इससे पहले उसके मुह से चीख निकले दीदी ने सरिया उसके मुह में घुसा दिया, उसके होठो को काटता वो सरिया जबड़े से बहार निकल गया ,अब वो चीख भी नहीं पा रहा था ,और पूरी आवाज उसके मुह में ही दबी रह गयी,इधर देबू कपने लगा था ,राहुल ने उसे सम्हालते हुए उसे वहा से जाने के लिए कहा,वो मुड़ा ही था की

'रुको मुझे मिर्च नमक और तेल और एक कढाई और कुछ लकडिया चाहिए 'दीदी की बातो को सुनकर मनीष गु गु करने लगा उसकी आँखों में आतंक साफ दिख रहा था ,पर सरिया घुसे होने पर वो कुछ नहीं कह पाया ,दीदी ने हस्ते हुए वो सरिया बहार खीच लिया ,अब मनीष के मुह से खून की धार निकल पड़ी पर वो कुछ बोलने में अश्मर्थ था ,वो सायद माफ़ी मांग रहा था पर उसकी आवाज स्पष्ट नहीं थी ,दीदी का आदेश सुनते ही राहुल और देबू वह से निकल गए ,दीदी ने पास पड़े टेबल को उसके सामने रखा और आराम से बैठ गयी ,प्रीति ने सवालिया नजरो से उन्हें देखा ,

'अरे आराम से मरेंगे इस मदरचोद को इतनी जल्दी क्या है ,'दीदी हलके से हसी उनकी हसी में इतनी क्रूरता थी की एक बारी मेरा दिल भी जोरो से धडक गया डॉ मेरे पास आये और मेरा हाथ पकड़ कर

'आकाश इसे करने दो जो करना चाहे इतने दिनों से अंदर ही अंदर जलती रही है ,आज इसके मन का भड़ास नहीं निकला तो शायद ये कभी किसी से वो प्यार नहीं कर पायेगी और प्यार बिना इसकी जिंदगी नारख सी हो जानी है ,'मैंने भी सहमती में अपना सर हिलाया ,कुछ देर तक दीदी उसे युही घुर के देखती रही वो दर्द का आदि हो चूका था ,खून बंद ही नहीं हो रहा था ,अब वो रो रहा था चिल्ला रहा था पर कुछ भी करने को मुह खोलता तो दर्द की लकीरे उसके चहरे पर साफ़ दिखाती ,दीदी और प्रीति के चहरे पर उसके दर्द को देखकर एक हलकी मुस्कान आ जाती थोड़ी देर बाद ही प्रीति ने पास पड़ा एक लकड़ी का टुकड़ा उठा लिया ,और मनीष के सर में हाथ फेरते हुए बड़े प्यार से कहा ,

'जानते हो मेरी जान जब चुद सुखी हो और कोई जबरदस्ती तुम्हारे चुद और गांड में एक साथ घुसता है तो कितना दर्द होता है ,(वो थोड़ी देर रुकी )नहीं जानता मेरा बाबु ,मैं बताती हु 'मनीष आक्रांत नजरो से उसे देख रखा था ,उसकी नजरे ही उसका डर का सबब बताने को काफी थी,प्रीति ने दीदी को देख जिनके चहरे की मुस्कान और फ़ैल गयी थी ,प्रीति लकड़ी के टुकडे को उसके कटे हुए होठो के पास खुरेदने लगी और जीभ के कटे हिस्से में घुसा के हिला दि ,मनीष का बंद ही नहीं हो पा रहा था ,उसके जबड़े लटके हुए थे ,वो दर्द से छटपटाने लगा ,पूरी कुर्सी हिलने लगी थी,

'दर्द होता है 'प्रीति ने बड़े प्यार से पूछा ,मनीष बस रो रहा था ,और प्रीति चिल्ला

पड़ी

'मुझे भी होता था मदरचोद ,हा मैं दवाई के असर में थी ,पर मेरे जमीर को ही मार डाला तुम लोगो ने एक वैश्या या यही कहा था ना तूने रंडी ,रंडी बना दिया ना तूने मुझे ,'प्रीति एक जोरदार झापड़ और लगा देती है ,उसके आँखों में आंसू थे ,मनीष का जबड़ा लटक गया और मुह से खून और लार मिलकर टपकने लगी ,आंसू तो मेरे अर दीदी के आँखों में भी थे ,तभी राहुल आता है उसके हाथो में एक बैग था ,देबू शायद घर जा चूका था ,

'तेल गर्म करो कढाई में और नामक मिर्च मुझे दो 'राहुल तुरंत कुछ इटे लाकर लकडिया जलाता है और कड़ी में तेल गर्म करने लगता है ,इधर दीदी नमक उठाती है और प्रीति को इशारा करती है ,प्रीति सरिये को उठा कर दीदी से पूछती है कहा पर ,

'जहा तेरा मन करे 'प्रीति सरिये को उसके जन्घो में घुसा देती है फिर दूसरी जांघ में मनीष ना चिल्ला पा रहा था और ना ही कुछ कर पा रहा था उसका दर्द बस उसकी आँखों से दिख रहे थे ,वो छूटने को छटपटाता पर कोई फायदा नहीं था,वो दहशत भरी आँखों से उन्हें देख रहा था ,उसके आखो में आसू थे ,दीदी नमक ले जाकर उसके जख्मो में छिड़क देती है वो दर्द से काप जाता है दीदी और प्रीति के आँखों में आंसू थे और चहरे पर हैवानियत लेकिन जब जब वो छटपटाता था दोनों के चहरे पर एक अपार शकुन दिखाई देता था,दीदी ने मिर्च प् पेकेट फाड़ा और उसके मुह में डाल दिया वो दर्द से बस छटपटाता हुआ बेहोश हो गया उसका सर निचे को झुक गया मिर्च ने अपना असर दिखाया और खून तो कम हो गया और लार बहने लगी ,लेकिन दीदी ने उसे हिलाया ,

'नहीं नहीं तू इतने जल्दी बेहोश नहीं हो सकता तू इतने जल्दी मर नहीं सकता तुझे अभी और तद्फाना है ,नहीं नही ,'प्रीति ने अपने नजर दौड़ाये और साथ रख ठंडा पानी जो उसके पर्श में ही था ले आई और पूरा उसके ऊपर डाल दि ,पानी कंटेनर में होने की वजह से बिलकुल ठंडा था ,जिससे मनीष को होश आया लेकिन उसकी इतनी हिम्मत नहीं हो पा रही थी की वो सर उठा ले वो जितने जल्दी हो सके मरना चाहता था ,दीदी ने उसका से उठाया,और कुर्शी के पीछे के सिरे से लगा दिया वो बेबस निगाहों से दीदी को देख रहा था ,दीदी उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली अभी तो तुझे दर्द मिलना बाकि है मेरी जान ,और उबलते तेल के तरफ इशारा किया ,मनीष की रूह तक काप गयी उसकी आँखे अब पथरा चुकी थी वो बस देख रहा था ,उसके हाथ पैर चलने बंद हो चुके थे ,दीदी ने उस छूती सी कढाई को देखा जिसमे तेल उबल रहा था ,यो अपना दुपट्टा निकल कर उसके सिरे को पकड़ी और कडाही पकड़ कर उसके पास आ गयी ,प्रीति ये देख कर जोरो से रोने लगी जैसे ना जाने कब से ये रोना दबा के राखी हो दीदी ने उसके सर पर से तेल को डालना सुरु किया,दीदी की आत्मा से एक रुदन निकला जैसे वो खली हो रही हो वो दोनों चीख चीख कर रो रही थी .

मनीष तड़फता रहा ,इतना छटपटाया की आखिर में खुर्सी समेत गिर गया उसके मुह के इतना जख्मी होने पर भी स्की चीखे निकल रही थी जैसे उसकी आत्मा जल रही हो ,उसके शारीर में फलोले थे और वो आख़िरकार निढल पड़ा था ,पर उसकी सांसे चल रही थी ,दीदी और प्रीति पुरे खाली हो चुके थे .....

थोड़ी देर एक गंभीर शांति का वातावरण बन चूका था,दीदी ने मुझे देखा और मुझसे लिपट गयी ,

'भाई इसने तुझे भी बहुत तडफाया है ,अभी ये जिन्दा है ,अब इसे मार डालो ,'मैं दीदी से अलग हुआ हाथो में सरिया लिया अब तक उसके पुरे शारीर में फफोले थे वो हलके हलके साँस ले रहा था ,उसे देखकर ही मेरा पूरा गुस्सा शांत हो चूका था ,मैंने राहुल को देखा मेरी दशा उससे छुपी नहीं थी हम एक नार्मल इन्सान ही थे ,दीदी और प्रीति ने जो किया वो उनके सालो का गुस्सा था ,हमें भी उस पर गुस्सा था पर इन दोनों के इस रूप को देखकर हमरी आत्मा शांत हो चुकी थी ,मुझे कुछ ना करता देख प्रीति सामने आई और हाथो से सरिया लेकर उसके गले में घुसा दिया ,,

राहुल प्रीति के पास आकर उसे गले से लगा लिया यही मैं दीदी को अपनी बांहों में भर लिया ...डॉ वह खड़े खड़े कुछ सोच रहे थे ,थोड़ी देर बाद रक् कोई कुछ नहीं बोल रहा था ,असल में कोई कुछ बोलने की हालत में भी नहीं था,आख़िरकार डॉ ने ही बात की शुरुवात की ,

'तुम लोग यहाँ से चले जाओ,बाकि मैं सम्हाल लूँगा,और हो सकता है की पोलिश तुमसे पुछ्ताज करने आये तो डरना मत ,विक्की और नानू के लापता होने का केस पहले ही चल रहा है,पर उसमे तुम नहीं फसोगे ,पर इसके केस में नेहा के मोबाईल से उसे लास्ट कॉल गया था,तो पुछ्र्ताज हो सकती है बोल देना की दोस्त था ,और अभी से लेकर रोज कम से कम 15 दिनों तक उस्क्व नंबर में कॉल करते रहना ,ताकि उन्हें लगे की तुम्हे भी नहीं पता की वो लापता है,हो सके तो एक दो दिन में उसके पापा को भी कॉल कर लो ,और तुमने उसे लास्ट बार कब देखा था,डॉ ने नेहा दीदी से पूछा ,

'दो दिन पहले,'

'नहीं तुमने उसे आज देखा है ,मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में ,स्टेज पर अविनाश के साथ ,तुम्हारे साथ राहुल और आकाश भी थे और मैं भी था ,सबका बयां लिया जायेगा सबको यही कहना है...और अविनाश को अभी कॉल करके उसके पहने शर्ट की तारीफ करो की बहुत क्यूट दिख रहे थे ,और पूछो की मनीष कहा है ,मुझसे बात किया और स्टेज से उतरकर गायब हो गया ,और रही कमरा फुटेज की बात तो तुम तीनो वापस जाओ और एक दो फुटेज वहा से खिचावाओ ताकि उसे देबू आज के फुटेज में ऐड कर सके ,'हम सब डॉ की बातो को धयान से सुन रहे थे ,और वहा से निकलकर हमने ऐसा ही किया.....

28.

आज एक गजब की शांति मेरे दिल में थी,हो भी क्यों ना दीदी को उनका इंसाफ मिल चूका था ,मैं बहुत ही इत्मिनान से लेटा हुआ था ,दीदी मेरे विशाल सीने के घने बालो में सर छुपाये एक छोटी बच्ची की तरह मुझमे समां जाने की कोशिस कर रही थी,हम दोनों हो शांत थे और दीदी कभी अपना चहरा मेरे सीने पर रगडती कभी मेरे बालो से खेलती थी ,

'दीदी ,'बहुत देर तक दीदी की कोई हरकत ना देखकर मैंने कहा,

'ह्म्म्म 'दीदी हलके से

'कुछ बोलो ना,'

'क्या '

'मैं कुछ बात बोलू ,'

'हम्म्म'मैं दीदी के बालो को सहलाता रहा ,और वो मेरे छाती के बालो को ,

'दीदी आपको देबू कैसा लगता है ,वो आपसे बहुत प्यार करता है .'दीदी ने अपना चहरा ऊपर उठा कर मेरी और देखा,

'भाई प्लीज ,अब और नहीं ,तूने देखा ना ,पहले परमिंदर फिर मनीष,साला जिससे भी प्यार की उसने मुझे धोखा दे दिया ,'मैं दीदी को और दुखी नहीं करना चाहता था,

'अच्छा पर अविनाश ने तो नहीं दिया ना धोखा,सब थोड़ी ना एक जैसे होते है,'दीदी ने अपनी आँखे बड़ी कर मुझे देखा ,

'वो तो बहुत अच्छे है,पर देख ना जो अच्छा निकला उसने अपनी बहन बना लिया ,'

'ह्म्म्म मतलब की आपके भाई लोग ही अच्छे होते है,जैसा की मैं है ना,'मेरे और दीदी के चहरे पर एक मुस्कान खिल गयी ,

'हां मेरे भाई ,मेरे नसीब में किसी अच्छे इन्शानो की गर्ल फ्रेंड नहीं बहन बनना ही लिखा है ,आयशा कितनी लक्की है ना की तेरे जैसा बॉयफ्रेंड उसे मिला ,'मैंने दीदी के चहरे को पकड़ कर अपने पास खीचा ,

'ये बात अपने दोस्त को समझाओ ना,'दीदी की एक हसी निकल गयी ,

'वो तो कब से राजी हो जाती तू ही फट्टू है तो वो बेचारी क्या करेगी ,'दीदी ने हस्ते हस्ते मेरे सर पर एक प्यारी से चपात मार दि,

'अरे दीदी पहली बार है ना यार समझा करो ,लेकिन दीदी एक चीज बोलू,उसे जब भी देखता हु मुझे तुम्हारी ही याद आ जाती है ,और जानती हो उसे मैं पसंद ही इसलिए करता हु क्योकि वो मुझे तुम्हारी याद दिलाती है ,'दीदी मेरी बातो को सुन थोड़ी इमोशनल हो गयी उनकी आँखों में प्यार के कुछ आंसू आ गए थे ,

'मेरा प्यारा भाई,तू कब बड़ा होगा रे ,जब भी तुझे देखती हु तू मुझे वही छोटा सा नन्हा सा शांत भोला भाला सा मेरा प्यारा भाई लगता है ,'दीदी मेरे मुह को अपने हाथो में दबा दि और मेरे गालो में एक जोरदार सा किस कर दि की मेरा पूरा गाल ही गिला हो गया,

'क्या दीदी मैं बच्चा थोड़े ना हु,'मैंने उस गीलेपन को साफ़ करते हुए कहा,'

'मुझे तो लगता है ,'मुझे एक शरारत सूझी

'अच्छा लेकिन आप तो कहती थी की मेरा बहुत बड़ा हो गया है,,'मेरे चहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गयी

'अरेएएए 'दीदी के चहरे पर एक मुस्कान तेरी पर थोड़ी ही देर में उनका चहरा गंभीर हो गया,

'क्या हुआ दि ,'दीदी में मुझे बड़े ही प्यार से देखा और मेरे माथे पर एक किस कर दिया

'भाई कितने दिन हो गए ना हम ऐसे साथ समय ही नहीं बिता पाय ,मैं भी कहा उस कमीने के

प्यार में पड़ गयी थी,'

'हा दीदी और प्लीज् आप देबू के बारे में सोचना जरुर वो बहुत ही अच्छा लड़का है ,और मैंने उसकी आँखों में देखा है वो आपसे बहुत प्यार करता है,आप भी जिंदगी में आगे बड़ो और खुश रहो मुझे इसके अलावा क्या चाहिए ,'

'ओके भाई पर अभी नहीं ,अभी तो मुझे मेरे भाई का प्यार उसे दिलाना है ना ,और मुझे अपने भाई को बहुत सा प्यार करना है ,और तुझसे जादा मुझे कोई प्यार कर सकता है क्या,'दीदी ने मुझे इतने प्यार से देखा की मेरे मन का सैलाब फुट पड़ा और मैंने उन्हें कसकर अपने सीने से लगा लिया ,कुछ ही देर में मैंने दीदी का चहरा उठाया उन्होंने मेरी आँखों में कुछ आंसू देखे और अपने होठो से उसे पि लिया और मेरे होठो पर अपने होठो को टीका दिया हमारा होठ बस टिके थे उनमे कोई भी हलचल नहीं हो रही थी,अगले ही पल मैंने उनके उपरी होठो को अपने होठो में ले लिया ,दीदी की एक आह ऐसे निकली जैसे तपते हुए तवे में पानी छिड़क दिया गया हो ,

'ह्म्म्म ह्म्म्म 'मैं पुरे लिज्जत से उनके होठो को अपने होठो में भरकर उनका रस पीना शुरू किया ,दीदी ने अपने स्तनों को मेरे सीने में दबाना शुरू कर दिया ,जब हमारा ये चुम्बन टुटा तो दोनों की आँखों में पानी था ,और होठो में एक मुस्कान ,

'मैं तरस गयी थी भाई इस प्यार के लिए ,'मैंने दीदी के आँखों से लुडकता पानी अपने हाथो से पोछा ,

'तो क्यों नहीं आई मेरे पास ,'दीदी ने एक गहरी सांस ली,

'शायद मैं कही और उस प्यार को तलाश रही थी ,मैं भी कितनी पागल हु ना,तुम्हे अपना सब देने का वादा किया और किसी और की तलाश में लग गयी ,'

'नहीं दीदी आप सही हो ,मैं आपका भाई हु,हमें एक समय पर रुक ही जाना था ,और 'दीदी ने मेरे होठो पर अपने उंगलिया रख दिए ,

'नहीं भाई हमें कही नहीं रुकना था ,और अब हमें अपनी दीवारों को तोडना होगा ,यही तो वो प्यार है जिसकी मुझे और तुम्हे तलाश है ,भाई ये हवस नहीं है ,मेरे अंदर उस दवाई का डोस होते हुए भी मैं इतने दिनों तक किसी से सम्बन्ध नहीं बनायीं इसका कारन तुम्हारा ही तो प्यार था,और अगर ये हवास होता हो शायद मेरे लिए रुकना मुस्किल हो जाता ,हम उतने आगे निकल गए जितना एक कपल जाने के बाद कभी रुक नहीं पाता पर हमारे प्यार ने मुझे दवाई के असर के बाद भी रोके रखा और तुम्हे इतनी उर्जा होते हुए भी ,ये हवास में संभव नहीं था भाई ,ये प्यार ही है,हमरे बीच का प्यार ,जहा हमें एक दुसरे से कुछ नहीं चाहिए बस एक दूजे की खुसी चाहिए,'मैं दीदी के मासूम चहरे को देख रहा था ,उनकी बड़ी बड़ी आँखे ,उनके नर्म गुलाबी होठ,उनके फुले हुए गाल जो चिकनाई से चमक रहे थे ,आँखों में भरा पानी जो उनकी उज्वल आँखों को और चमका रहा था,उनके काले बाल जो उनके कमर तक जाते थे और उनकी कमर के नीच की वो गोलाईया जो किसी नर्म नर्म किसी इद्रधनुष की तरह थे ,उनकी मासूमियत पर मैं अपनी जान दे देना चाहता था

,उनके लिये जहा की हर ख़ुशी उनके कदमो में रख देना चाहता था ,शायद मुझे मेरा प्यार दिखने का और कोई रास्ता नहीं दिख रहा था की आख़िरकार मैं क्या कर डालू की दीदी के चहरे पर एक हसी आ जाए ,उनकी मुस्कान कभी भी नहीं जानी चाहिए ,मैंने प्यार से दीदी के गालो पर अपने हाथ ले गए ,मेरा स्पर्श इतना भावनाओ से भरा था की दीदी के मन ने भी उसे महसूस कर लिया ,वो मेरे हाथो को चूम गयी ,हमारे आँख आपस में मिले हुए थे एक पल के लिए भी हमें एक दूजे से दूर नहीं जाना था,

'भाई आज हर दिवार तोड़ दो इस प्यार को आजाद कर दो की हम इस मुक्त गगन में खुलकर सांसे ले सके ,'मैं अब भी दीद के चहरे हो देख रहा था ,मुझे नहीं पता था की मैं कैसे दिवार को तोडूंगा,शायद दीदी भी इस बात को समझ चुकी थी,वो मेरे ऊपर झुकी और मेरे कानो में कहा ,

'आज मेरी निकर भी उतर सकता है ,'दीदी की इस बात ने मुझपर एक करेंट की धार छोड़ दि ,एक झुनझुनी सी मेरे पुरे बदन में फ़ैल गयी थी,मैंने सर उठाया तो दीदी के चहरे पर मैंने शर्म देखा और होठो में मुस्कान ,मुझे खुद पता नही था की मैं कैसा रियेक्ट करू मैंने खुद को पूरी तरह से दीदी को सौपने का फैसला किया ,

'दीदी अब मैं कुछ भी नहीं करना चाहता ,मैं बस आपका होना चाहता हु ,पूरी तरह से आपका ,मुझे नहीं पता मैं क्या करूँगा पर मुझे इतना पता है ,जो भी होगा वो मेरा प्यार होगा,'दीदी ने सजल नैनों से मेरे मस्तक पर एक चुम्बन का तिलक किया ,और अपने होठो से मेरे होठो को मिला दिया और हमारे बीच की सभी दूरिय उसी क्षण से ख़तम हो गयी ,हम अब एक ही थे और कोई दूजा ना था ,हम बस अपने को एक दूजे में समेटने की पूरी कोसिस कर रहे थे ना जाने कितने समय तक हम एक दुसरे के होठो को चूसते रहे थे हमारी सांसे थी पर मेरे लिंग में कोई भी अकडन नहीं थी और ना ही इसका भान ही रह गया,समय जैसे रुक सा गया हो ,हम एक दूजे को अपनी बांहों में भरे बस खो जाना चाहते थे ,मुझे तब थोडा होश आया जब मैं दीदी के टी शर्ट के अंदर अपना हाथ घुसाए था और उनकी पीठ को सहला रहा था ,उनकी नंगी पीठ पर अपने हाथो को चलते हुए मैंने उनके शर्ट को निकल फेका मेरा सीना पहले से ही नग्न था ,दीदी के नर्म स्तनों के आभास ने मुझे फिर से किस के खुमार से बहार निकला मैंने अपने हाथो से उन्हें दबाना शुरू किया पर होठो को नहीं छोड़ा दीदी भी अपने हाथो को मेरे सर पर कसली थी और पूरी शिद्दत से मेरे होठो को अपने में समां रही थी ,उन्हें शायद मेरे हाथो के हलचल तक का आभास नहीं हो रहा था ,पर जब मैंने पूरी ताकत से एक वक्ष को दबाया ,

'आहह भाई थोडा धीरे ,'दीदी साँस लेती हुई बोल पायी उनकी सांसे उखड़ी हुई थी ,वो साँस ले पाती इससे पहले ही मैंने फिर से अपना मुह उनके मुह में घुसा दिया ,मैंने उन्हें पीठ के सहारे लिटाया और उनके ऊपर छा सा गया,मैंने दोनों हाथो से उनका चहरा पकड़ा और उनके होठो को

छोड़ा फिर ,फिर उनके गाल ,उनकी आँखे उनकी नाक ,उनका माथा ,आँखों की पुतलिया,गरदन ,कन्धा ,छाती ,उजोर ,पेट ,नाभि ,...मैं बस चूसता गया मुझे नहीं पता था की मैं क्या कर रहा हु ,ना दीदी को ही पता था,हम बस खो से गए थे मैंने फिर उनके उजोरो को पकड़ा और उनके उन्नत निपलो को अपने होठो में समां लिया ,दीदी बस छटपटा रही थी ,

'आः आःह भाई,आः आः आआअह्ह्ह्ह भाआआआआआई ,'मैंने अपने मन भर उसे चूसा जब तक की वो लाल नहीं हो चुके थे,मैं निचे आये दीदी का निक्कर और उनकी जन्घो के बीच का गीलापन मुझे दिखाई दिया मैंने अपने जनहो के बीच एक विशाल खम्भे सा दिखाई दिया ,जिसकी अकडन से अब मुझे दर्द होने लगा था,मैंने उसे आजाद कर दिया ,मैंने निकर के छोरो को अपने दोनों हाथो से पकड़ा,मैंने दीदी की और देखा दीदी काप रही थी ,वो एक दिवार थी जो मुझे हमेशा के लिए गिरानी थी ,जिसे गिराकर ही मैं दीदी को अपना बना सकता था,

'दीदी ,'दीदी ने बड़ी मुस्किल से आँखे खोल मुझे देखा ,

'निकाल दू ,'दीदी के चहरे में एक मुस्कान आ गयी ,एक प्यार उनकी आँखों में उतर गया ,

'अभी भी पुच रहा है ,'मुस्काते हुए उन्होंने पूछा और मुझे अपने ऊपर खीच लिया मेरे होठो को फिर अपने होठो में भर लिया ,

'मेरा प्यारा भाई ,'दीदी ने मेरे हाथो को निकर के और ले गयी वो मेरे आँखों में ही देख रही थी उनके चहरे पर अब भी वो मुस्कान थी और आँखों में वही प्यार ,मेरे हाथो में दबाव बनाते वो निकर को निकल डी और अपने पैरो से निकाल निचे फेक दि ,वो हमेशा की तरह कुछ नहीं पहनी थी ,पर मुझे इसकी फिकर ही नहीं थी ना ही मैंने ये देखने की जहमत ही की ,मैं तो फिर दीदी के होठो को चूसने लगा ,हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे मैं उनके ऊपर लेटा था ,और दीदी अपनी आँखे बंद किये बस खोयी हुई थी ,मेरा अकड़ा लिंग दीदी के गिले योनी में हलके हलके घिस रहा था,थोडा गीलापन से बिग कर लिंग भी फिसलने लगा मैंने एक दबाव दिया पर वो जन्घो से जा टकराया ,ऐसा कई बार होता रहा पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ,क्योकि ये बिलकुल स्वाभाविक तोर से हो रहा था ,मैं कोई मेहनत नहीं कर रहा था,मैंने तो दीदी को किस करने में डूबा हुआ था,पर दीदी ने मेरे लिंग को पकड़ा जैसा की उनका पहला मौका नहीं था उन्होंने उसे सही जगह लगाया ,वहा पहुचकर वो चिपिचिपा गिलापण मेरे लिंग को फिर से गेर लिए ,मैंने स्वभावतः फिर झटका मारा लेकिन ये क्या मेरे मुह से एक चीख सी निकली जो दीदी के होठो में खो सी गयी ,मेरी लिंग की चमड़ी ने पहली पर इस घर्षण का आभास किया था लेकिन उस अतिरेक आनद से बढकर ये दर्द नहीं था,मैंने फिर एक जोरदार झटका मारा और ,

'आआह्ह्ह्ह भाऐईई भाऐईईईईईईई '

'दिदीईईईईइ आह्ह्ह्ह 'हमारा मिलन हो चूका था पर अभी तो उफान की शुरुवात भर थी ,

मैंने और दीदी ने आँखे खोलकर एक दूजे को देखा ,हम एक रहत की साँस ले रहे थे ,हमारी आँखे मिली

दोनों के चहरे पर एक मुस्कान फैली और मैंने फिर एक जोरदार धक्का मार दिया ,

'अआह्ह्ह 'दोनों के मुह से निकला और दोनों एक दूजे को देख हस पड़े ,,,मैंने धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा ,मेरा लिंग दीदी के योनी रस से पूरी तरह से गिला हो चूका था और हम फिर एक गहन तन्द्रा में प्रवेश कर रहे थे जहा बस प्यार था और दुनिया की कोई शय नहीं हमारी आँखे फिर बंद होने लगी मैं तो किसी भी तरह से आंखे खोल भी पा रहा था पर दीदी की आँखे इतनी बोझिल हो चुकी थी वो अपनी आँखे खोल ही नहीं पा रही थी ,मेरे धक्के एक लय पकड़ चुके थे और हमारी सांसे और आंहे ,उसी लय में चल रहे थे ,समय खो चूका था ,और सारा जहा भी खो चूका था ,हम एक दुसरे को काट रहे थे ,चूस रहे थे चूम रहे थे ,पर हमें नहीं पता था की हम क्या कर रहे है ,कोई कण्ट्रोल हमरे ऊपर नहीं था ,ना हमारा ना और किसी का ,पहले धीरे धीरे आःह आह्ह से लेकर तेज तेज सांसे और आह उह ओह तक पहुच जाते फिर धीरे माध्यम तेज ये सिलसिला ना जाने कब तक चलता रहा ,हमें आँखे खोल एक दूजे को देखने की फुर्सत नहीं थी ,जैसे किसी ने कहा है ,"यहाँ हर पल ही रहती है मस्ती ,की सर झुकाने की फुर्सत नहीं है ,"

ये हमारे लिए पूजा थी ,प्राथना थी ,सजदा था,वो दुआ थी जिसमे पाना ना था,जो बस थी ,बिना किसी के परवाह के ,बिना किसी मांग के ,बिना किसी तलाश के ,बिना किसी चाह के ,हम थे और बस हम थे,,,...एक दूजे में ऐसे घुल रहे थे की पता लगाना भी मुस्किल था की मैं और तू अलग भी है ,बस मेरा मुझमे ना रहा जो होवत सो तोर ,तेरा तुझको सोपते क्या लागत है मोर...

सांसो में अपनी अंतिम गहराई तक हमें डूबा दिया ,जब लक्ष्य करीब आने को थी तो बस थोड़ी देर के लिए सांसे रुक गयी मेरे अंदर से एक विस्फोट हुए ना जाने कितनी ताकत से मैं धक्के लगाये जा रहा था लेकिन उस विस्फोट ने मुझे शांत कर दिया एक गढ़ा सफ़ेद ,चिपचिपा सा द्रव्य ,मेरे अंदर से निकल दीदी की योनी को भिगो दिया वही दीदी की योनी से ना जाने कितनी बार फुहारे निकल चुकी थी ,लडकियों की एक खासियत होती है की अगर वो प्यार की गहराई का आभास कर पायी और उससे सेक्स करे जिसे वो प्यार करती है तो वो एक नहीं कई चरम सुख (ओर्गोस्म )का अनुभव आसानी से कर पाती है ,एक सम्भोग में लगभग 7 तालो का ओर्गोस्म संभव है ,ऐसा शोधो ने पता लगाया है ...दीदी ने भी आज किसी गहरे तालो पर इसका अनुभव किया था ,और मैंने भी ,तूफ़ान तो शांत हो चूका था पर जैसे हम जम ही चुके थे ,हमारे शरीर एक दूजे से अलग ही नहीं हो रहे थे ,हम पसीने से भीगी थे हमारी सांसे उखड़ी थी ,पर हमारे चहरे में एक परम शांति का आभास था,सबकुछ शून्य हो चूका था ,खो चूका था ,इतनी शांति का आभास मैंने कभी नहीं किया था,ऐसा लग रहा था जैसे मैं खाली हो चूका हु ,बिलकुल हल्का ....

हम एक दूजे के चुमते रहे हमारे होठ जैसे कभी एक दूजे से ना बिछड़ेंगे वैसे ही चिपके रहे ,हमारे शरीर इ दूजे के पसीने से सने थे ,चहरा और होठ एक दूजे की लार से सने थे और दीदी की योनी से मेरा वीर्य अब बहार आने लगा था ,मेरे कमर अब भी हलके हलके चल रहे थे जो बड़ी आसानी से फिसल रहे थे पर मुझे रुकने पसंद ही नहीं आ रहा था और ना ही दीदी ही मुझसे अलग होना चाहती थी ,हम वैसे ही लेटे रहे वीर्य अब भी निकल रहा था पर किसे फिकर थी ,मेरे लिंग में कोई जादा ढीलापन नहीं था ,थोड़ी देर में वो फिर उसी आकर में आ गया फिर उसकी नशे तन गयी ,सायद दीदी के कामरस का पान कर वो जादा ही मोटा हो गया था ,जैसे की कामसूत्र ने कहा है की महिलाओ का कामरस पुरुषो के लिंग के लिए सबसे पोसक होता है ,मेरा लिंग पहले से जादा ताना हुआ लग रहा था और जादा मोटा ,दीदी को भी इसका आभास को चूका था ,उन्होंने बस मुझे देखा और मुस्कुराई..

'मेरा प्यारा भाई,रुक बहुत गिला है पोछ दू ,'दीदी उठाने हो हुई लेकिन मैंने उन्हें दबा लिया जैसे मैं नहीं चाहता हु की वो मुझे एक पल के लिए भी छोड़ के जाए

'नहीं दीदी रहने दो अच्छा लग रहा है ,'हम फिर रति क्रिया में डूब गए ये तब तक चला जब तक की थककर हमारी आँखे ना लग गयी रात भर ना मैं ही अलग हुआ ना उन्हें होने दिया ...मेरा लिंग उनकी योनी में स्खलित होता और वही डूबा रहता,,,,,,,,

29.
कल सुबह मैं जल्दी उठा मेरी हालत बहुत ही खराब लग रही थी, मैंने देखा कि दीदी बाथरुम चली गई है चादर में खून के निशान लगे हुए थे जो हमारे प्यार की निशानी थे., मैं तो बस सोच रहा था की आगे क्या होगा, मैं डॉक्टर से मिलना चाहता था लेकिन उनसे क्या कहता है कि मैंने यह सब किया वह भी अपनी दीदी के साथ, मैं खुद को समझाने में लगा था लेकिन क्या समझा पाता मुझे कुछ नहीं पता मैंने अपने आप को संभाला और बाथरूम की तरफ चल दिया मैंने देखा कि दरवाजा खुला हुआ था. और दीदी अंदर पूरी तरह से नंगी नहा रही थी मैं उनके जिस्म को देखने लगा वह भरी भरी , संगमरमरी जिस्म जो किसी की भी नियत को डगमगा सकता है ,उनके वह उभार उनका पिछवाड़ा , मैं बस उन्हें देखता रहा...

उन्होंने जैसे ही मुझे पलट कर देखा उनके होठों पर एक मुस्कान थी जो बड़ी प्यारी लग रही थी ,नहीं लग रहा था हमारे बीच कुछ ऐसा हुआ है जो नहीं होना था वह अभी भी मुझे उतने ही प्यार से देख रही थी, जैसे पहले देखती थी, मेरी सांसे कुछ और बदती चली थी कुछ और मेरी धड़कन थोड़ी मध्यम थी थी..

उनका चेहरा पानी से भीगा हुआ था उनके बालों से पानी गिर कर उनकी जंघो तकआ रहा था , मैं अनायास ही उनकी तरफ बढ़ता गया मेरे चेहरे पर हम मासूमियत के भाव नहीं थे मैं फिर से उन को पाना चाहता था मैं फिर से उनका होना चाहता था मैं सिर्फ से अपनी जन्नत खोजने निकला था, मैं फिर से यह चाहता था कि मैं उनके साथ एक हो जाऊं, मैं उनके पास गया पीछे से दीदी को जकड़ लिया दीदी ने फिर मुस्कुरा कर मुझे देखा, मैं उनकी चाहतों में खोना चाहता था मैं उनकी बाहों में सोना चाहता था, मैं उनकी सांसो में रहना चाहता था, मैंने उन्हें किस किया, उनके गालों पर, उनकी बालों को अपने हाथों से सहलाया ,उनके वक्षों को मसलता गया, मेरे हाथ अब उनकी योनि पर थे उनके वह घुंघराले बाल जो उनकी योनि में को घेरे हुए थे, ना जाने कैसे एक उंगली मैंने उनकी योनि के अंदर डाली और धीरे-धीरे उसे अंदर बाहर करता रहा ,उनकी योनि गरम नरम मखमली और पानी से भीगी हुई थी वह काम रस का पानी था, मैं भी पूरा नंगा ही था मैंने अपने लिंग को जो अब तक पूरी तरह तन चुका था दीदी के गीले गीले गर्म-गर्म योनि में अंदर तक ले जाने लगा एक बार दीदी भी अपनी आँहो को नहीं रोक पाई उन्होंने पलटकर मुझे अपने आगोश में भरने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुई, मैंने उन्हें पीछे से पकड़ रखा था मेरी मेरे धक्के की स्पीड बढ़ती जा रही थी पहले धीरे-धीरे फिर जोर जोर से दीदी के मुंह से आहे निकलने लगी,

' आह आह आह आह आह भाई भाई भाई भाई आह आह आह आह आह आह भाई भाई धीरे भाई धीरे-धीरे और धीरे-धीरे थोड़ा तेज हां भाई ऐसे ही ऐसे ही आह आह आह आह आह आह आह रुक जाओ ना जाओ ना थोड़ी देर के लिए रुको ना, मुझे पलटो ना मैं तुम्हारा चेहरा देखना चाहती हूं '

वह पलट गई और मुझसे लिपट गई उन्होंने मेरे जीभ से जीभ मिला लिया और उनकी थूक मेरे मुंह के अंदर जाने लगी मैंने भी अपनी जीभ से जीभ से दीदी की गहराइयों को नाप लिया मेरे धक्के बड रहे थे.

वह स्पीड पकड़ रहे थे, मैं और जोर से और जोर से और जोर से और जोर स दीदी और मेरी सांसे एक हो रही थी मुझे रुकना नहीं था, ना ही दीदी को हम बस एक होना चाहते थे, वह पानी की फुहार है जो हमारे तन में गिर रही थी मानो कोई आग ही आग हो, ठंडे पानी में भी हमारा शरीर तपाये जा रहा था, वह तपन ऐसी थी कि मुझसे सहा नहीं जा रहा था, मैंने दीदी का एक पैर उठाकर अपने हाथों में ले लिया और दीदी की योनि में जड़ तक जाने लगा, वह रगड़ कितनी मजेदार थी कि मैं रुकना नहीं चाहता था मुझे लग रहा था कि जैसे हमेशा मैं ही रहूं यही करता रहू, दीदी पास रखा साबुन उठाया और मुझे नहलाने लगी, मेरे पूरे शरीर पर उन्होंने साबुन मल दिया ,साबुन ने अपना कमाल दिखलाया हम दोनों का शरीर एक दूसरे में फिसलने लगा, दीदी के उन्नत वक्ष अब मेरा मुंह में थे,मैं उन्हें चूस रहा था दबा रहा था जैसे उनका दूध अभी पीना चाहता हूं, दीदी ने अपना हाथ मेरे सिर पर रख दिया और वह उसे अपनी और खींचने लगी दीदी की सांसे बढ़ने लगी थी और मेरी भी, हम बस अब झड़ने वाले थे मैंने दीदी को दबोचा उनके वक्षों में अपने दांत गड़ा दिए, Ek Aur Toofan आकर चला गया मैं अब दीदी के अंदर अपना गाढ़ा वीर्य डाले जा रहा था, डाले जा रहा था....

जैसे कभी यह खत्म ना हो, फिर भी ये खेल रुक नहीं रहा था मेरी स्पीड कम नहीं हो रही थी, दीदी ने मुझे नहलाया सहलाया और मेरे कानों पर धीरे से कहा भाई हो गया ना अब तो रुक जा, मैं दीदी के मासूम चेहरे को देखता रहा और अपना कमर तेजी से चलाता रहा उनके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर मैंने स्पीड और बढ़ा दी ,फिर से दीदी के मुंह से

"आह आह आह आह भाई भाई मेरा प्यारा भाई मेरा सबसे प्यारा भाई आई लव यू भाई भाई आह आह भाई मुझे अपना बना लेना हां हां हां भाई ऐसे ही हां भाई, और जोर से और जोर से हां हां"

फिर एक तूफान चल पड़ा फिर मैं दीदी के अंदर झड़ता गया दीदी ने फिर मुझे दबोच लिया और अपने नाखून मेरे पीठ पर गडा दिए, हमारे प्यार का यह सफर भी खत्म हो गया हम दोनों नहा कर बाहर निकले, दीदी ने तालियों से मुझे साफ किया और वह आईने के सामने अपने बालों को सवारने लगी, मैंने फिर से उन्हें पीछे से पकड़ा और उनकी योनि पर अपने हाथ फिराने लगा, दीदी ने मुड के मुझे देखा भाई तेरा मन नहीं भरा क्या, मैंने हंस कर उन्हें कहां दीदी अभी कैसे भर जाएगा...

मेरे और दीदी का चेहरा आईने में दिख रहा था, मैं दीदी के उन्नत वक्ष को अपने हाथों से सहला रहा था, मेरा लिंग फिर से अकड़ने लगा, मैंने पीछे से ही अपने लिंग को दीदी की योनि में रगड़ना शुरु किया और धीरे से उसे अंदर कर दिया दीदी के मुंह से फिर से आह निकली...

क्या भाई फिर से मुझे हंसी आ गई लेकिन मैं अपनी हरकत जारी रखी ,धीरे-धीरे दीदी के भी योनि में गीलापन आ गया और उनके निप्पल खड़े होने लगे, मैंने उन्हें आईने के सामने झुका दिया अब दीदी का चेहरा आईने में दिख रहा था, और मैं उनके पीछे खड़ा हुआ, मेरी कमर अब तेजी से चलने लगी दीदी फिर से सिसकियां लेने लगी, मैंने दीदी के बाल को पकड़ा और जैसे कोई घोड़े की सवारी करता हो, वैसे ही दीदी को घोड़ी बनाकर घुड़सवारी करने लगा दीदी के उन्नति पृष्ठ दीदी के मेरे सामने थे उन्होंने अपने हाथों से दबा रहा था इतना मज़ा इतना नशा जैसे मैं जन्नत में हूं, मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह मुझे इतना मजा देगा और कोई नहीं मेरी दीदी देगी, मेरी प्यारी दीदी, इतनी प्यारी ,इतनी प्यारी जिसे मैं अपना पूरा जहान मानता हू, जिनके चेहरे पर एक शिकन भी आए तो मेरा दिल धड़कता है, जिनके चेहरे पर चिंता की एक लकीर भी मुझे बेचैन कर देती है आज मैं उन्हें भोग रहा था, मैं उनके मजे ले रहा हूं ,सिर्फ सिर्फ और सिर्फ क्या मैं अपनी वासना को पूरी कर रहा हूं, नहीं यह प्यार है ,,खाक का प्यार???? यह तो पूरी तरह से वासना थी.. नहीं नहीं यह तो प्यार है, मेरा प्यार मेरी दीदी का प्यार मेरी दीदी गलत नहीं कर सकती और मैं कैस मैं कैसे मैं कैसे गलत कर सकता हूं, नहीं नहीं अचानक मेरी स्पीड धीरे होने लगी मैं किसी सोच में किसी गहरी सोच में डूबने लगा, दीदी ने मुड़कर मुझे देखा मेरे चेहरे की चिंता उनसे छुपी नहीं थी वह जानती थी कि मैं क्या सोच रहा हू उन्होंने मुड़कर मुझे पकड़ लिया, मेरी आंखों में देखा मेरी आंखों में कुछ पानी आ चुका था ,मेरा जेहन दर्द से भर रहा था दीदी ने मुझे अपने हाथों से सहलाया ,

" भाई तु जो सोच रहा है वह तो सही है, लेकिन यह हमारा प्यार है, इसमें कोई सीमा नहीं है, नहीं हो सकती है, अगर तू दुखी है ,अगर तू दुखी है तो मत कर लेकिन याद रख तेरी दीदी को भी इसमें वही मजा मिलता है जो तुझे मिलता है, भाई मेरे प्यारे भाई आकाश प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़ दर्द में मत रहना, जो भी बात है खुलकर कर तेरी दीदी अब तेरी है पगले, तू नहीं जानता तूने मुझे कितना सुख दिया है, मैं तेरी हूं मैं अपने भाई की हु,और मुझे तेरा होने से कोई नहीं रोक सकता तू भी नहीं, अब से हमारे बीच यह आंसू नहीं आएंगे"

उन्होंने हाथ बढ़ाकर मेरे आंसू पोछें उनकी बातों से मेरा दिल हल्का हो गया था लेकिन लिंग में तनाव अभी भी था, मैंने फिर धीरे-धीरे धक्के देना शुरू किया दीदी की एक ही खिलाती हंसी सुनाई थी और दीदी फिर से अपना सर दर्पण के सामने कर दी दीदी के चेहरे का भाव बदल रहा था और मेरी स्पीड भी बढ़ रही थी, अब मेरे मन में कोई ग्लानि नहीं थी मैंने फिर से उनके बालों को पकड़कर अपनी तरफ खींचा दीदी हल्के से दर्द में चिल्लाई

" भाई आह आह आह आह" थप थप थप थप की आवाज से पूरा कमरा गूंज

गया हमारी सांसे फिर से तेज होने लगी मैं आईने से दीदी का चेहरा देख रहा था उनके चेहरे पर आई खुशी महसूस कर रहा था जो बढ़ा रही थी,जो मेरा जोश बढ़ा रही थी, मैंने उनकी कमर को अपने हाथों से जोर से पकड़ा और पूरी ताकत से धक्के देने लगा धक्का देने लगा दीदी का कामरस मेरे लिंग को भीगा चुका था, और बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रहा था दीदी के चेहरे पर असीम आनंद के भाव थे, और मेरा चेहरा लाल हुआ जा रहा था पता नहीं क्यों छूटने का मन ही नहीं कर रहा था, ना ही मेरा ना ही मेरे लिंग का.. हम दोनों ही इस लम्हें को और ज्यादा और ज्यादा देर तक रखना चाहते थे, लेकिन कब तक जब तक सांसे बंद हो जाए, मैंने अपनी पूरी ताकत अपने कमरे में लगा दी मेरा लिंग पूरी जड़ तक दीदी के अंदर जा रहा था, दीदी खुशी से आनंद से चमक रही थी उनके मुंह से सिसकारियां छूट जा रही थी उन्होंने अपने होंठों को अपने दांतों में दबा रखा था उनकी आंखे बंद थी उनका नंगा जिस्म पूरी तरह से चमक रहा था, मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी आखिरकार दीदी ने एक फुहार छोड़ी और वह निढल होकर जमीन में गिर गई... मैंने किसी तरह उन्हें अपने हाथों से संभाले रखा दी जैसे बेहोश हो गई थी, मैंने उन्हें उठाकर वैसे ही अपनी गोदी में उठाया और बिस्तर पर औंधे मुंह लिटा दिया, मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उसी स्पीड से फिर से अपनी कमर हिलाने लगा दीदी के नितंबों में पढ़ने वाली चोट की आवाज इतनी मादक थी एकलव्य लयबद्ध तरीके से आवाज में आ रही थी, दीदी मानो बेहोश थी और मैं उनकी कमर पर अपनी कमर को तेजी से खिलाया जा रहा था, मेरे धक्के अब बहुत तेज और बहुत ताकत से लगाया जा रहे थे, दीदी बस आह आह कर रही थी वह भी बहुत धीरे आवाज म दीदी ने फिर एक बार फुहार छोड़ी और फिर थककर चूर हो गई, लेकिन मैं, जैसे मेरे अंदर कोई जानवर आ गया हो मैं रुकने का नाम नहीं ले रहा था, मैंने दीदी के कमर को अपने हाथों से उठाया और पूरी ताकत से अपने धक्के बढ़ा दिया, मैंने दीदी के ऊपर लेट गया और उनके चेहरे को अपनी ओर खींचा उनकी आंखे बंद थी मैंने उनके होठों को अपने होठों में दबा लिया और उन्हें चूसने लगा, थोड़ी देर में दीदी ने जब आंख खुली तो मुझे अपनी नशीली आंखों से देखने लगी, मैं अभी उनके होंठों को चूस रहा था मेरे कमर और धीरे धीरे चल रहे थे दीदी की आंख खुलते ही मैंने कमर की स्पीड बढ़ा दी दीदी के चेहरे पर फिर एक स्माइल आ गई, उन्होंने मेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ा और अपनी तरफ खींचा मेरे होठों को चूसने लगी जब हमारे होंठ एक दूसरे से अलग हुए पर दीदी ने हल्के से कहा

"भाई भाई सुनना जल्दी करना कॉलेज भी तो जाना है"

मैंने उठ कर फिर से उनके कमर को अपने हाथों में पकड़ा और तेजी से धक्के लगाने लगा दी दी दी दी थोड़ी देर ही मेरा साथ दे पाई और फिर झाड़कर चूर हो गई लेकिन इस बार दीदी ने मुझे रोका और पास से ही एक

कपड़ा लेकर अपनी योनि को साफ किया और हंसकर मुझे कहा अब डाल... अब दीदी की योनि थोड़ी सुखी थी जिससे मेरे लिंग को अच्छी रगड़ मिल रही थी, जिससे मेरा मजा और बढ़ गया था मैंने तेजी दिखलाई और फिर से पूरी ताकत जुटा कर अंदर बाहर करने लगा, आखिरकार दीदी का गीलापन गीलापन फिर से बढ़ने लगा और मेरा लिंग फिर से दीदी की गहराइयां नापने लगा, थोड़ी देर के मेहनत के बाद ही मैंने अपना संपूर्ण गाढ़ा वीर्य दीदी के अंदर छोड़ने को तैयार हो गया, मैंने फिर से पूरी ताकत से धक्के लगाए और अपना पूरा वीर्य दीदी के अंदर धकेलता गया..

अब मैं बिल्कुल बेजान सा दीदी के ऊपर गिर पड़ा दीदी ने मुझे संभालते हुए अपने ऊपर लिया और मेरे लिंग को जो कि थोड़ा बेजान हो रहा था अपनी योनि में डाल लिया ताकि थोड़ा भी वीर्य बाहर ना जाने पाय, दीदी के ऐसा करने से मेरे लिंग में थोड़ी अकड़न फिर बढ़ गई और मैं दीदी की योनि में समाया हुआ उन्हें पकड़कर सोने लगा....

लगभग आधे घंटे हम दोनों ऐसे ही सोये रहे, हम एक दूसरे को किस करते, कभी मैं हल्के हल्के कमर चलाता, दीदी मुझे जकड़ लेती मेरे होठों को अपने होठों में भर लेती ,हम आधे घंटे तक ऐसे ही लेटे रहे... दीदी आखिरकार मन मारकर उठी और नहाने चले गई साथ मैं भी चल दिया, हम दोनों साथ नहाए और तैयार होकर बाहर निकल गया.....

30.
मैं और दीदी डॉक्टर के क्लीनिक में बैठे हुए थे दोनों आज बहुत खुश लग रहे थे डॉक्टर हमारे सामने अपनी मेज पर कुछ कर रहे थे,

“क्या बात है आज से तुम दोनों के चेहरे बहुत ही चमक रहे हैं,” हम दोनों के चेहरे में एक शर्म का भाव आ गया,

“कुछ नहीं डॉक्टर हम तो बस आपको धन्यवाद देने आए थे”

“धन्यवाद धन्यवाद किस लिए”

“आपने यह जो सब किया हमारे लिए उसके लिए आपका धन्यवाद”

“अरे तुम दोनों तो मेरे बच्चे हो मैं तुम्हारे लिए नहीं करुंगा तो किसके लिए करुंगा, लेकिन एक बात कहूं आज सच में तुम दोनों बहुत प्यारे लग रहे हो लगता है कोई खास बात है”

मैं आश्चर्य से डॉक्टर को देख रहा था लेकिन दीदी के चेहरे में एक शर्म का भाव दिखाई पड़ रहा था दीदी का चेहरा लाल हो चुका था मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था, लेकिन दीदी सब समझ रही थी कि डॉक्टर क्या कहना चाहते हैं

हम लोग डॉक्टर से यही बात करते रहें थोड़ी देर बाद डॉक्टर से विदा लेकर हम दोनों जाने लगे डॉक्टर ने दीदी को रोक लिया और मुझे बाहर बैठने कहा, मुझे तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन डॉक्टर की बात कैसे डाल सकता था मैं बाहर चला गया…

“तो लगता है तुम दोनों के बीच कुछ हो गया”

“क्या डॉक्टर आप भी” दीदी ने शरमाते हुए कहा

“ हां कुछ तो हो गया तुम्हारे चेहरे की चमक बता रही है कि कुछ तो हो गया तो बताओ आकाश कैसा है, जैसे मैंने बताया था वैसे ही है ना बिलकुल जानवर सा” डॉक्टर के चेहरे में एक इस्माइल आ गई जबकि दीदी पूरी तरह से शर्मा

चुकी थी

“ हां डॉक्टर आप सही कह रहे हैं मुझे कभी-कभी आकाश की चिंता होती है, मैं तो देख कर दंग रह गई कितनी ताकत वह कैसे संभाल पाते हैं” डॉक्टर का चेहरा थोड़ा गंभीर हो गया

“ वह सब तो ठीक है लेकिन आकाश के अंदर कोई ग्लानि का भाव तो नहीं है,”

“ हां थोड़ा तो है लेकिन अब वह इसमें मजे लेने लगा है,” दीदी अभी डॉक्टर से नजर नहीं मिला पा रही थी..

“ ठीक है ठीक है कोई बात नहीं ऐसा तो होगा मुझे पहले ही लगा था वह तुमसे बहुत प्यार करते हैं और तुम भी उससे बहुत प्यार करती हो जब दोनों एक दूसरे से इतना प्यार करते हो तो फिर डर किस बात का तो फिर किस बात का दुख है किस बात की ग्लानि, तुम दोनों इस चीज को इंजॉय करो यह तुम दोनों के लिए अच्छा है कोई भी चीज अच्छी या बुरी नहीं होती उसे अच्छा या बुरा बनाया जाता है जब दिल में प्यार है तो हर चीज अच्छी है और जब दिल में प्यार नहीं होता तो हर चीज बेकार है, तुम दोनों तो बने ही एक दूसरे के लिए हो तुम्हारा प्यार ही तुम्हारी पहचान है, बस आकाश को बहुत प्यार देना वह तुम्हारे बिना नहीं रह पाएगा उसे दूर मत होना उसे डूब जाने देना जितना वह डूबना चाहे…” दीदी डॉक्टर की बात बहुत ध्यान से सुन रही थी,

“ डॉक्टर आपसे एक बात कहनी है”

“हां कहो”

“ डॉक्टर आकाश, आयशा को बहुत प्यार करता है, मुझे कभी कभी डर लगता है कि मेरे कारण आयशा और आकाश के रिश्ते में कोई दरार ना आए, क्या काश उसे भी इतना प्यार कर पायेगा जितना वह मुझे करता है,” डॉक्टर बस मुस्कुरा दिये

“ नहीं कभी नहीं आकाश उसे उतना प्यार कभी नहीं कर पाएगा लेकिन हां तुम्हारा और आकाश का प्यार कुछ अलग है और आकाश और आयशा.का प्यार कुछ अलग है, आकाश भले हि तुम्हारे साथ सेक्स करता है लेकिन फिर भी वह तुझे अपनी बहन मानता है, वह तुझे दिल से चाहता है लेकिन तू उसकी बहन है दीदी है यह चीज मत भूलना,” डॉक्टर की बात से दीदी के चेहरे में एक चमक आ गई

“ मैं भी अपने भाई को बहुत प्यार करती हूं डॉक्टर और उसे हमेशा खुश देखना चाहती हूं भले इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े मैं हर चीज़ करने को तैयार लेकिन डॉक्टर एक बात आपसे कहना है,( इसके बाद दीदी और डॉक्टर के बीच हुई बात गुप्त रहेगी जिसे मैं बाद में खोलूंगा )”

“ हां यह तो ठीक है लेकिन देबू को कैसे मनाओगे..” डॉक्टर ने अपनी चिंता जाहिर की

“ वह बहुत अच्छा लड़का है और मुझसे बहुत प्यार करते हैं मुझे लगता है वह मान जाएगा,”

“हूमममममम ओके देखते हैं लेकिन अगर नहीं माना तो” डॉक्टर फिर चिंता से दीदी को देखते हैं

“ नहीं माना तो आप तो है ना आप किस दिन काम आओगे” दीदी के चेहरे में एक मुस्कान थी वही मुस्कान डॉक्टर के चेहरे में भी थी….

दीदी देबू से मिलने के लिए राजी हो गई , मैं और राहुल उनके इस फैसले से बहुत खुश थे आखिरकार दीदी के जीवन में फिर से कोई प्यार आ रहा था, हम देबू को बचपन से जानते थे जानते तो हम मनीष को भी थे लेकिन देबू के आंखों में मैंने प्यार देखा था जो मनीष की आंखों में कभी नहीं देखा…

देबू इस बात से बहुत खुश था की दीदी उससे मिलने को राजी हो गई पहले कुछ दिन के मुलाकातों में ही दीदी और देबू बहुत करीब आ गए दीदी ने मुझे बताया कि कैसे आज हम ने किस किया और कैसे वो आगे बढ़े,... एक महीने तक यही सिलसिला चलता रहा और आखिरकार दोनों एक हो ही गया, मेरी उम्मीद की विपरीत दीदी ने इस बात का जश्न मनाया.. इन 1 महीनों में मैंने भी आयशा को प्रपोज किया और उसने भी इसे स्वीकार कर लिया, कुछ दिनों बाद कुछ अजीब सा हुआ दीदी देबू से शादी करने की जिद करने लगी, और घरवालों को मनाने की जिम्मेदारी मुझे और राहुल को दी गई, शादी का कारण था की दीदी प्रेग्नेंट थी, देवों के दीदी के सामने कुछ नहीं चल पा रही थी उसे डर था कि उसके घर वाले इस बात का विरोध करेंगे जो हुआ अभी लेकिन दीदी ने किसी की एक नहीं सुनी वह अपना बच्चा नहीं गिराना चाहती थी, मै और राहुल भी नहीं चाहते थे कि दीदी इतनी जल्दी बड़ी जिम्मेदारियों के बोझ तल दब कर रह जाए... लेकिन दीदी किसकी सुनती थी वह तो अपनी जिद पर अड़ी थी,

“ दीदी आप जानती हो यह फैसला आपकी जिंदगी बर्बाद कर सकता है” मैंने गुस्से में कहा

“ हां लेकिन मैं अपने प्यार की निशानी को अपने से अलग नहीं करूंगी, यह बात तुम समझ लो…” मेरी बात सुनकर दीदी का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था राहुल और देबू की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह दीदी का सामना करता या उसे कुछ समझाने की कोशिश करता…

“ दीदी आप बात को समझ नहीं रही हो”

“ भाई तू नहीं समझ रहा है बस और मुझे कुछ नहीं सुनना अगर तुम दोनों घरवालों से मेरी बात नहीं करोगे तो मैं घर छोड़कर जा रहे हूँ.. और हां देबू अगर तुम अपने घरवालों से मेरी बात नहीं कर सकते या मुझसे शादी नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं यह बच्चे इस दुनिया में आएगा तो आएगा, यह मेरे प्यार की निशानी है और मैं इसे किसी भी हालत में कुछ नहीं होने दूंगा चाहे इसके लिए मुझे अपने प्यार से लड़ना पड़े, घरवालों से लड़ना पड़े या भाई तुमसे लडना पड़े….

” दीदी के चेहरे में एक दृढ़ता साफ दिखाई दे रही थी जिसे झुकाना किसी के बस में नहीं था उन्होंने अपना फैसला कर लिया था और अब वह किसी की नहीं सुनने वाली थी…

मजबूरन है हमें घरवालों से बात करनी पड़ी मेरे घर वाले तो मान गए लेकिन देबू के घर वाले इस बात का पूरा विरोध किया आखिरकार देबू को घर छोड़कर आना पड़ा एक मंदिर में एक सादे फंक्शन में शादी का कार्यक्रम हुआ… शादी के आठवें महीने बाद ही दीदी ने एक प्यारे से बच्चे को जन्म दिया…

दीदी उस दिन बिस्तर पर लेटी हुई थी और मै उनके पास बैठा हुआ था.. मैंने बच्चे को बड़े प्यार से देखा मेरा भांजा कितना प्यारा कितना सुंदर मैंने उसके छोटे छोटे हाथों को अपनी उंगलियों से सहलाया उसका वह लाल चेहरा दीदी और मेरे बीच की सभी गहराइयों को भर दिया… दीदी मुझे प्यार से देख रही थी और मैं उस बच्चे को देख रहा था, कमरे में बस हम दोनों ही दीदी मुझसे कहा देख भाई तेरा भांजा, मेरे चेहरे पर एक मुस्कुराहट खिल गई मैंने दीदी से प्यार से कहा नहीं दीदी मेरा बेटा…

दीदी ने थोड़े आश्चर्य से मुझे देखा और मैंने कहा

“ उस दिन मैंने डॉक्टर और आपकी सभी बातें सुनी थी”

दीदी थोड़ी देर आश्चर्य से मुझे देखती रही लेकिन फिर उनके चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ गई

“ तो तूने यह बताया क्यों नहीं”

“ आपने मुझे बताया था क्या, मैं उसे बहुत प्यार दूंगा दीदी अपनी जान से ज्यादा इसे प्यार करूंगा यह मेरे और आपके प्यार की निशानी है…” हम दोनों की आंखों में आंसू थे और हम दोनों इस बच्चे को देख रहे थे…..

( समाप्त)​

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