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जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) (Completed)

Story Hindi 274 pages 6 months ago

अध्याय 1​
शांत माहोल इतना भयावक की डर ही लग जाये,मानसून की हलकी फुहारे,भीगे हुए लोगो की भीड़ और भीगे हुए नयन,शमसान की सी शांति में कुछ सिसकते बच्चे और बिच में पड़ी हुई दो लाशे,ये वीर ठाकुर और उनकी पत्नी की लाश थी जो एक सडक हादसे का शिकार हो गये थे,वीर ठाकुर पुरे इलाके के सबसे ताकतवर और रुशुखदार व्यति थे,आज पूरा गाव अपने देवता के लिए आंसू बहा रहा था..लेकिन एक शख्स वहा मोजूद नहि था,बाली ठाकर,वीर ठाकुर का छोटा भाई,वीर और बाली की जोड़ी की मिशाले दी जाती थी,दोनों भाइयो कि सांडो सी ताकत वीर का तेज दिमाग और दयालुता न्याय प्रियता और बाली का भाई के लिए कुछ भी कर गुजरने का जूनून इन दोनों को खास बनाता था,
इनके माँ बाप की जमीदार तिवारीओ से खानदानी दुश्मनी थी तिवारीयो ने उन्हें मरवा दिया,लेकिन बिन माँ बाप भी ये बच्चे शेरो जैसे बड़े हुए और जमीदारो के समानातर अपना वजूद खड़ा कर दिया…आज उनका सिक्का पुरे इलाके में चलता था,

वीर की शादी तिवारीयो के परिवार में हुआ था एक बड़े ही तामझाम के साथ और खून की नदियों की बाड में उनकी शादी हुई थी..सुलेखा रामचंद्र तिवारी की बेटी थी,दोनों में प्यार पनपा और वीर ने शादी के मंडप से ही सुलेखा को उठा लिया,इस बात पर खूब खून खराबा हुआ जिसका नतीजा हुआ सुलेखा के सबसे छोटे भाई वीरेंदर की मौत, आखिर कार मुख्यमंत्री के बीच बचाव और रामचंद्र की समझदारी से मामला शांत हो गया,समय के साथ मामला तो शांत हो गया पर दुश्मनी बरकरार रही…बाली लंगोट का कच्चा था जिसका सहारा लेकर तिवारियो अपने गाव की ही चंपा को बाली से जिस्मानी सम्बन्ध बनवाया और आखीर चंपा बाली के बच्चे की माँ बन गयी और उसके माँ बाप ने वीर के आगे गुहार लगायी आखीरकार मजबूरन वीर ने अपने वसूलो का सम्मान करते हुए बाली की शादी चंपा से करा दिया,चंपा ने आते ही अपना रंग दिखाना सुरु किया और बाली को घर से अलग होने के लिए मजबूर करने लगी,बाली ने उसे मारा पिटा और प्यार से समझाने की कोसिस की पर सब बेकार बाली मजबूर था की उसके भाई की इज्जत का सवाल था वरना उसे कव का मर के फेक दिया होता,
वीर ने बाली को परेसान देख उसे अपने से ही लगा हुआ अलग घर बनवा दे दिया और चंपा से वादा किया की वो और बाली अलग अलग काम करेंगे…इस फिसले से किसी को कोई फर्क ना पड़ा क्योकि सभी जानते थे बाली और वीर अलग दिखे पर अलग नहीं हो सकते….

वीर और सुलेखा के 4 बच्चे थे जो इनके प्यार की निसानी थे सबसे बड़ा था अजय फिर सोनल और विजय जुड़वाँ थे फिर निधि ,बाली और चंपा के 2 बच्चे थे पहला उनकी हवास की निशानी किशन और दूसरी मजबूरी की निशानी रानी…तो क्रम कुछ ऐसा था की=अजय फिर 2 साल छोटे सोनल विजय फिर एक साल बाद किशन फिर एक साल बाद रानी फिर 2 साल बाद निधि…
अजय में पूरी तरह से वीर के गुण थे अपने भाई बहनों पे अपनी जान छिडकता था वही विजय और किशन बाली जैसे थे अपने भाई की हर बात को सर आँखों पर रखते थे,विजय तो पूरा ही बाली जैसा था अपने चाचा की तरह ही भाई भक्त और ऐयाश और बलशाली…
इस सन्नाटे में ये सब बच्चे ही थे किनके सिसकियो की आवाजे आ रही थी,बाली बदहवास सा आया और अपने भाई भाभी की लाश देख मुर्दों सा वही बैठ गया जैसे उसे समझ ही ना आ रहा हो क्या हो गया,अचानक से ही किशन और रानी अपने पापा को देख रो पड़े और बाली की और दौड़ पड़े की चंपा ने उन्हें पकड़ लिया और खीचते हुए ले जाने लगी,”अरे इतने काम पड़ा है घर का तुम लोग यहाँ तमाशा लगा रहे हो जो मर गया वो मर गया अब चलो यहाँ से ”

चंपा के ये बोल बाली को जैसे जगा गए उसकी आँखों में अंगारे थे,वो गरजा जैसे शेर को गुस्सा आ गया हो सारा गाव बार डर से कपने लगा,”मदेरचोद तेरे ही कारन मैं अपने भाई भईया से अलग रहा ,मेरे भाई ने तुझ जैसी दो कौड़ी की लड़की को इस घर की बहु बना दिया नहीं तो तुझ जैसी के ऊपर तो मैं थूकता भी नहीं,तेरे कारन मैं अपने भातिजो से नहीं मिल पता आज तक तुझे मेरे भाई ने बचाया था देखता हु आज तुझे मुझसे कोन बचाता है,” बाली ने पास पड़ी कुल्हाड़ी उठाई,और चंपा की तरफ दौड़ गया,उसको रोकने की हिम्मत तो किसी में नहीं थी…उसने पुरे ताकत से वार किया.लेकिन ये क्या,,एक हाथ कुल्हाड़ी की धार को पकड़ के रोके है बाली ने जैसे ही उस शख्स को देखा उसका गुस्सा जाता रहा,वो अजय था,
बाली को उसकी आँखों में वही धैर्य वही तेज दिखा जैसा उसे वीर की आँखों में दिखता था,आज अचानक ही जैसे अजय जवान हो गया हो,
‘चाचा,चाची मेरा परिवार है,मेरे भाई बहन मेरे परिवार है ,इनपे कोई भी हाथ नहीं उठा सकता ,आप भी नहीं ,अब मेरे पापा के जाने के बाद मैं इनकी जिम्मेदारी लेता हु ‘अजय का इतना बोलना था की बाली उसके पैरो को पकड कर रोने लगा,
‘मेरे भईया ,मेरे भईया वापस आ गए ….’सारे गाव के आँखों में चमक आ गयी सभी बच्चे दौड़ते हुए अजय से लिपट कर रोने लगे चंपा स्तब्ध सी अपने जगह पर खड़ी थी ,उसने मौत को इतने करीब से छूकर जाते देखा की उसकी रूह अब भी काप रही थी ,और अजय ,अजय एक शून्य आकाश में देखता लाल आँखों से अब आंसू सुख चुके थे ,मन बिक्लुत शांत था और चहरे पर दृढ़ता के भाव उसके द्वारा ली जिम्मेदारी का अभाश दिला रहे थे ,…..

शांत माहोल इतना भयावक की डर ही लग जाये,मानसून की हलकी फुहारे,भीगे हुए लोगो की भीड़ और भीगे हुए नयन,शमसान की सी शांति में कुछ सिसकते बच्चे और बिच में पड़ी हुई दो लाशे,ये वीर ठाकुर और उनकी पत्नी की लाश थी जो एक सडक हादसे का शिकार हो गये थे,वीर ठाकुर पुरे इलाके के सबसे ताकतवर और रुशुखदार व्यति थे,आज पूरा गाव अपने देवता के लिए आंसू बहा रहा था..लेकिन एक शख्स वहा मोजूद नहि था,बाली ठाकर,वीर ठाकुर का छोटा भाई,वीर और बाली की जोड़ी की मिशाले दी जाती थी,दोनों भाइयो कि सांडो सी ताकत वीर का तेज दिमाग और दयालुता न्याय प्रियता और बाली का भाई के लिए कुछ भी कर गुजरने का जूनून इन दोनों को खास बनाता था,

इनके माँ बाप की जमीदार तिवारीओ से खानदानी दुश्मनी थी तिवारीयो ने उन्हें मरवा दिया,लेकिन बिन माँ बाप भी ये बच्चे शेरो जैसे बड़े हुए और जमीदारो के समानातर अपना वजूद खड़ा कर दिया…आज उनका सिक्का पुरे इलाके में चलता था,

वीर की शादी तिवारीयो के परिवार में हुआ था एक बड़े ही तामझाम के साथ और खून की नदियों की बाड में उनकी शादी हुई थी..सुलेखा रामचंद्र तिवारी की बेटी थी,दोनों में प्यार पनपा और वीर ने शादी के मंडप से ही सुलेखा को उठा लिया,इस बात पर खूब खून खराबा हुआ जिसका नतीजा हुआ सुलेखा के सबसे छोटे भाई वीरेंदर की मौत, आखिर कार मुख्यमंत्री के बीच बचाव और रामचंद्र की समझदारी से मामला शांत हो गया,समय के साथ मामला तो शांत हो गया पर दुश्मनी बरकरार रही…बाली लंगोट का कच्चा था जिसका सहारा लेकर तिवारियो अपने गाव की ही चंपा को बाली से जिस्मानी सम्बन्ध बनवाया और आखीर चंपा बाली के बच्चे की माँ बन गयी और उसके माँ बाप ने वीर के आगे गुहार लगायी आखीरकार मजबूरन वीर ने अपने वसूलो का सम्मान करते हुए बाली की शादी चंपा से करा दिया,चंपा ने आते ही अपना रंग दिखाना सुरु किया और बाली को घर से अलग होने के लिए मजबूर करने लगी,बाली ने उसे मारा पिटा और प्यार से समझाने की कोसिस की पर सब बेकार बाली मजबूर था की उसके भाई की इज्जत का सवाल था वरना उसे कव का मर के फेक दिया होता,

वीर ने बाली को परेसान देख उसे अपने से ही लगा हुआ अलग घर बनवा दे दिया और चंपा से वादा किया की वो और बाली अलग अलग काम करेंगे…इस फिसले से किसी को कोई फर्क ना पड़ा क्योकि सभी जानते थे बाली और वीर अलग दिखे पर अलग नहीं हो सकते….

वीर और सुलेखा के 4 बच्चे थे जो इनके प्यार की निसानी थे सबसे बड़ा था अजय फिर सोनल और विजय जुड़वाँ थे फिर निधि ,बाली और चंपा के 2 बच्चे थे पहला उनकी हवास की निशानी किशन और दूसरी मजबूरी की निशानी रानी…तो क्रम कुछ ऐसा था की=अजय फिर 2 साल छोटे सोनल विजय फिर एक साल बाद किशन फिर एक साल बाद रानी फिर 2 साल बाद निधि…

अजय में पूरी तरह से वीर के गुण थे अपने भाई बहनों पे अपनी जान छिडकता था वही विजय और किशन बाली जैसे थे अपने भाई की हर बात को सर आँखों पर रखते थे,विजय तो पूरा ही बाली जैसा था अपने चाचा की तरह ही भाई भक्त और ऐयाश और बलशाली…

इस सन्नाटे में ये सब बच्चे ही थे किनके सिसकियो की आवाजे आ रही थी,बाली बदहवास सा आया और अपने भाई भाभी की लाश देख मुर्दों सा वही बैठ गया जैसे उसे समझ ही ना आ रहा हो क्या हो गया,अचानक से ही किशन और रानी अपने पापा को देख रो पड़े और बाली की और दौड़ पड़े की चंपा ने उन्हें पकड़ लिया और खीचते हुए ले जाने लगी,”अरे इतने काम पड़ा है घर का तुम लोग यहाँ तमाशा लगा रहे हो जो मर गया वो मर गया अब चलो यहाँ से ”

चंपा के ये बोल बाली को जैसे जगा गए उसकी आँखों में अंगारे थे,वो गरजा जैसे शेर को गुस्सा आ गया हो सारा गाव बार डर से कपने लगा,”मदेरचोद तेरे ही कारन मैं अपने भाई भईया से अलग रहा ,मेरे भाई ने तुझ जैसी दो कौड़ी की लड़की को इस घर की बहु बना दिया नहीं तो तुझ जैसी के ऊपर तो मैं थूकता भी नहीं,तेरे कारन मैं अपने भातिजो से नहीं मिल पता आज तक तुझे मेरे भाई ने बचाया था देखता हु आज तुझे मुझसे कोन बचाता है,” बाली ने पास पड़ी कुल्हाड़ी उठाई,और चंपा की तरफ दौड़ गया,उसको रोकने की हिम्मत तो किसी में नहीं थी…उसने पुरे ताकत से वार किया.लेकिन ये क्या,,एक हाथ कुल्हाड़ी की धार को पकड़ के रोके है बाली ने जैसे ही उस शख्स को देखा उसका गुस्सा जाता रहा,वो अजय था,

बाली को उसकी आँखों में वही धैर्य वही तेज दिखा जैसा उसे वीर की आँखों में दिखता था,आज अचानक ही जैसे अजय जवान हो गया हो,

‘चाचा,चाची मेरा परिवार है,मेरे भाई बहन मेरे परिवार है ,इनपे कोई भी हाथ नहीं उठा सकता ,आप भी नहीं ,अब मेरे पापा के जाने के बाद मैं इनकी जिम्मेदारी लेता हु ‘अजय का इतना बोलना था की बाली उसके पैरो को पकड कर रोने लगा,

‘मेरे भईया ,मेरे भईया वापस आ गए ….’सारे गाव के आँखों में चमक आ गयी सभी बच्चे दौड़ते हुए अजय से लिपट कर रोने लगे चंपा स्तब्ध सी अपने जगह पर खड़ी थी ,उसने मौत को इतने करीब से छूकर जाते देखा की उसकी रूह अब भी काप रही थी ,और अजय ,अजय एक शून्य आकाश में देखता लाल आँखों से अब आंसू सुख चुके थे ,मन बिक्लुत शांत था और चहरे पर दृढ़ता के भाव उसके द्वारा ली जिम्मेदारी का अभाश दिला रहे थे ,…..

अध्याय 2​
वक़्त को गुजरते देर नहीं लगी अजय अब *** का हो चला था ,उनका पालन पोषण उनकी माँ समान सीता मौसी ने किया बच्चो और पति से चंपा की दूरी बरकरार थी पर वो किसी से कुछ नही कहा करती ,उसने अजय से माफ़ी मांगने की कोसिस की पर हिम्मत ही नही जुटा पाई,बाली और अजय ने पूरा काम मिला लिया था ,पर अजय बाली को कुछ करने नहीं देता बस सलाह लेता था ,घर का कोई लड़का पढ़ नहीं पाया इसलिए अजय अपनी बहनों को ही पढ़ना चाहता था ,सोनल और रानी को उसने कॉलेज की पढाई के लिए बड़े शहर भेज दिया था ,वहा एक घर भी खरीद दिया था ताकि उन्हें कोई भी तकलीफे ना हो ,और एक काम करने वाली भी साथ में भेजी गयी थी ,वही निधि अभी स्कूल में थी ,निधि अजय के सबसे करीब थी ,अजय के साथ ही सोना ,खाना यहाँ तक की नहाना तक अजय के साथ ही करने की जिद करती थी,अजय की वो जान थी इसलिए सबसे जिद्दी और नकचड़ी भी थी ,शरीर तो जवान हो चूका था पर उसका बचपना अभी भी बाकि था ,और वही अजय को भी पसंद था ,सभी भाई बहन उसे बहुत जादा चाहते थे और पूरे घर की लाडली निधि ने अजय से शहर जाने से साफ इंकार कर दिया ,वो अजय को किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहती थी ,इसलिये अजय ने रूलिंग पार्टी को फंड देकर अपने गाव में ही कॉलेज खुलवाने का फैसला किया ,पर सरकार तिवारियो के भी दबाव में थी इसलिए फैसला हुआ की कॉलेज दोनों गांवो में ना खोलकर पास के कस्बे में खोला जाय….विजय और किशन दोनों बिलकुल देहाती और एयियाश हो चले थे पुरे के पुरे बाली पर गए थे ,पर किशन बाकि दोनों भाइयो की अपेक्षा थोडा कमजोर था,और अपने माँ के थोडा करीब भी था ,पर दोनों अजय के भक्त थे जो अजय कहे बिना सोचे करना ही उनका काम था ,चाहे किसी को मारना हो या मार ही देना हो ,

इधर तिवारियो का मुखिया रामचन्द्र अभी भी जिन्दा था पर कभी अपने नाती नातिन की सकल भी देखने नहीं गया ,गजेन्द्र उसका बड़ा बेटा था जिसने उसके पुरे कारोबार को सम्हाल लिया था ,गजेन्द्र के दो बच्चे थे और और उसके छोटे भाई महेंद्र के तीन इंट्रो बाद में होगा सबका ,गजेन्द्र अपने भाई अविनाश की मौत का बदला लेबा चाहता था और ठाकुरों को पुर्री तरह तबाह कर देना चाहता था ,जिसने उनकी छोटी बहन और भाई को छीन लिया ,पर रामचंद की सोच ऐसी नहीं थी इसलिए दोनों में जादा बनती नहीं थी ,

कहानी शुरू करते है आम के बगीचे से ,ये आम का बगीचा ठाकुरों का था और एक बड़े इलाके में फैला हुआ था ,और उनके खेतो से लगा हुआ था ,सुखी पत्तियों पर किसी के दौड़ाने की आवाजे और साथ में घुंघरू की आवाजे उस शांत माहोल में दूर तक फ़ैल रही थी ,वही किसी लड़की के जोर से हसने की आवाजे आई और ,

‘हाय से दयिया ,ठाकुर जी आज इतने बेताब काहे है ,’रेणुका ने एक पेड़ पर खुदको छुपाते हुए कहा ,

‘आजा मेरी रानी कल रात को भी तेरी माँ उठ गयी थी साला अब सबर नहीं होता ,’विजय ने दौड़ के उसे पकड़ने की कोसिस की

पर ना कामियाब रहा ,

‘अब कोई दूसरी ढून्ढ लो ,आज मुझे देखने लड़के वाले आ रहे है ,मेरी शादी हो गयी फिर क्या करोगे ,और इतना खोल दिया है आपने अपने पति को क्या दूंगी ,’विजय ने उसे पीछे से दबोच ही लिया ,और उसके चोली को फेक कर उसके उजोरो को मसालने लगा ,रेणुका भी मतवाली हो गयी वो विजय के ही हम उम्र थी और उस सांड को अपने चौदहवे सावन से झेल रही थी,विजय के सम्बन्ध ऐसे तो कई लडकियों से थे पर रेणुका उसकी खास थी ,और घर में काम करने वाले नौकर की बेटी थी ,

‘अरे मेरी जान तू चली जाएगी तो मेरा क्या होगा ,तू ही तो है जो मुझे सही तरीके से झेल लेती है,’विजय अब अपने हाथ से घाघरे का नाडा खोल रहा था ,गाव की लडकिया कोई अन्तःवस्त्र नहीं पहनती थी,तो घाघरा खुलना यानि काम हो जाना ,

‘अरे छोडो छोटे ठाकुर मेरी शादी तो अजय भईया करा के रहेंगे ,ये मछली तो आप के हाथ से गयी ,आह कितना बड़ा है ,पता नहीं शादी के बाद मैं क्या करुँगी ,आःह आअह्ह्ह्ह ठाकुर ,विजय अपना लिंग उसकी बालो से भरी योनी में रगड़ रहा था पर अन्दर नहीं डाल रहा था,वो लडकियों को गरम करने के बाद ही अपना काम करता था,उसने अपने हाथो से उसके ऊपर का कपडा भी खोल दिया ,और उसके शारीर को पीछे से चुमते हुए निचे उस करधन तक आया जो उसने ही रेणुका हो दिया था ,

‘आआअह्ह्ह मार डाआआअ लोगे क्या ‘विजय अपनी जिब से उसके भारी निताम्भो को चाटने लगा,और मुह आगे बड़ा कर उसके योनी में जीभ घुसा दि ,

‘आआह्ह्ह आअह्ह्ह्ह अआह्ह्ह हूमम्म विजय ,’योनी को भरपूर गिला करने के बाद रेणुका को उठा के एक पेड़ के निचे बिछे चादर में ले जा लिटा दिया ,और उसके पैरो को अपने कंधे में रखता हुआ अपना पूरा लिंग एक बार में ही उसके अंदर कर दिया ,

‘ईईईईई माँआआअ ‘एक चीख पुरे वातावरण में फ़ैल गयी और धक्को की आवाजे सिस्कारियो और चपचप की आवाजे एक लयबद्ध रूप से आने लगी ,ये तूफान तब तक चला जब तक की रेणुका कई बार अपने चरम को पा चुकी थी और विजय अपनी सांड सी ताकत से उस मांसल और बलशाली लड़की के आँखों से आंसू नहीं निकल दिया ,विजय अपने चरम पर उसके उजोरो को अपने दांतों से काट लिया और उसके अन्दर एक लम्बी और गाढ़ी धार छोड़कर उसके ऊपर ही सो गया ,रेणुका के आँखों में आंसू तो थे पर चहरे पर अपरिमित सुख झलक रहा था ,उसने अपने बांहों में विजय को ऐसे पकड़ा था जैसे वो उसे कभी

अध्याय 3​
विजय जब घर पहुचता है तो वह रेणुका की माँ और लड़के वाले बैठे होते है ,बड़े से कमरे में,बीचो बीच एक बड़े से सोफे पर अजय बैठा होता है,बाकि सब हाथ मोडे छोटी छोटी खुर्सियो में बैठे होते है ,तभी विजय वह पहुचता है,..

विजय लड़के को देखता है ,’साला चुतिया,ये मेरी रेणुका को क्या संतुस्ट करेगा,’विजय मन ही मन उस पतले दुबले से लड़के को देख कर बोलता है,

‘तो आप बताइए लड़की आपको पसंद है ना,’अजय लड़के के पिता को देखते हुए कहते है,

‘ठाकुर साहब ये आप क्या कह रहे है,आप तो हमारे लिए भगवान है,आपका हाथ जिस लड़की पर है उसे हम कैसे मना कर सकते है,’लड़के के पिता ने थोडा डरते हुए कहा ,

‘हम्म्म ठीक है ,तो शादी की तारीख तय कर लो क्यों मौसी क्या कहती हो ,’अजय ने सीता मौसी की तरफ मुह कर पुचा जो उस समय पास के सोफे में बैठी सुपारी काट रही थी ,

‘हा कर दो लेकिन एक शर्त है,रेणुका कही नहीं जाएगी ,इस लड़के को यही नौकरी पर रख लो ,अगर ये भी चली गयी तो इसकी माँ का क्या होगा ,बेचारी का पति भी नहीं है,अकेले हो जाएगी क्यों रे,और तेरे तो 3 बेटे है ,ये निकम्मा यहाँ काम भी कर लेगा ,’मौसी ने लड़के के बाप को देखते हुए कहा,

‘और ऐसे भी (विजय को देखते हुए ) रेणुका जो काम करती ही वो कोई नहीं कर सकती ना ..’ विजय के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी जिसे अजय ने भी देख लिया उसे और मौसी को उसके सभी करतूतों का पता होता था ,पर इसे वो जाहिर नहीं होने देते थे,

‘जैसा आप कहे मौसी जी ,ये बनवारी आज से आपका हुआ ,आप जब कहे शादी कर देंगे ,’अजय ने पंडित से तारीख निकलने को कहा और वह से उठ कर चल दिया ,सभी हाथ जोड़े खड़े हो गए ,मौसी को छोड़ …

‘मौसी बहुत बहुत धन्यवाद आपका आपने मेरी बेटी का जीवन सवार दिया,’रेणुका के माँ के आँखों में पानी आ गए थे ,

‘अरे तू भी ना रे विमला ,रेणुका मेरी भी तो बेटी है ना,और विजय सारी जिम्मेदारी तुझे ही उठानी है शादी की ,पूरी तयारी अच्छे से होनी चाहिए ‘सभी चले जाते है बस विजय और मौसी वह रह जाते है,

विजय मौसी के गोद में जा कर लेट जाता है ,

‘मौसी जी थैंक् आपने तो रेणुका को यही रख लिया ,’

‘अरे मेरे छोटे ठाकुर ,क्या मुझे पता नहीं की वो तुम्हारी जरुरत है ,और मेरा तो काम ही है तुम्हारी जरूरतों को पूरा करना ,बस अपने भाई के इज्जत में कालिक मत पोतना,नहीं तो अजय सब सहन करेगा पर इज्जत से खिलवाड़ नहीं,जो करना देख के ही करना ,”

विजय उठकर मौसी के गालो को चूम लेता है ,और वहा से भागता हुआ चला जाता है ,मौसी हस्ती हुई सुपारी कटते रहती है ,

“पागल लड़का “मौसी के मुह से अनायास ही निकल पड़ता है,

अध्याय 4
एक शांत कमरा जो अजय ने अपने पढाई के लिए ही बनवाया था,जिम्मेदारियों के भोझ तले वो खुद तो नहीं पढ़ पाया पर उसे पढ़ने का बहुत शौक था,इसलिए उसने अपने घर में एक लिब्रेरी बनवा रखी थी,वो वह बैठ के पढ़ा करता था ,वो चाहता था की उसके छोटे भाई भी वहा पढाई करे पर किसी को इसमें कोई खासी दिलचस्पी ही नहीं थी,अजय बड़े ही मन से एक पुस्तक पढने में लगा था की किसी की पायल की आवाज से उसका धयान भंग हुआ ,वो समझ चूका था की ये निधि ही होगी ,निधि छमछम करते उसके

पास आती है उसे देखकर अजय के चाहरे पर एक मुस्कान आ जाती है,निधि एक लहनगा चोली पहने हुए थी ,और किसी गुडिया की तरह सुंदर लग रही थी ,आज जरुर किसी के कहने पर उसने ये रूप लिया होगा ,अजय के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,16 साल की निधि का शारीर अपने यौवन के उचाईयो पर था पर दिल और दिमाग से वो किसी बच्चे की तरह मासूम थी ,खासकर अपने भाइयो के सामने ,उसका मासूम सा चहरा देख अजय के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,वो देख रहा था की कैसे निधि बड़ी मुस्किल से अपने लहंगे को सम्हाल रही थी,वो देहाती लहंगा जो शायद रेणुका का लग रहा था ,उसके लिए आफत ही था पर बड़ी ही उम्मीद से वो उसे पहने हुए अपने भाई को दिखने आ रही थी ,अजय ने अपनी किताब पर एक पेन रख कर उसे बंद किया और उसकी और मुड कर उसे देखने लगा .वो उसके पास पहुची तब तक निधि के चहरे में भी एक मुस्कान ने जन्म ले लिया था,

‘भईया देखो मैं कैसे लग रही हु ,’एक उत्सुकता और चंचलता से निधि ने पूछा ,

‘ये क्या नया शौक चढ़ा है तुझे ,’अजय उसी मुस्कान से अपनी सबसे लाडली और प्यारी बहन को देखते हुए कहा,

‘बताओ ना भाई ,कितने मुस्किल से पहन कर आई हु और आप ‘निधि थोड़े गुस्स्से में आते हुए बोली

‘अरे मेरी प्यारी बहना ,तू जो भी पहन लेगी वो अच्छा ही होगा ना ,बहुत प्यारी लग रही है ,’अजय उसके गालो पर एक हलकी सी चपत मरते हुए बोला ,निधि उछल पड़ी

‘भईया जानते हो मैं ना यही पह्नुगी रेणुका दीदी की शादी में ,’

‘हम्म्म अभी से तयारी और ये देहाती वाला लहंगा क्यों पहनेगी मेरी बहन,तेरे लिए तो शहर से डिजायनर लहंगा ला देंगे,खरीददारी करने शहर जाना है ना ,’अजय की बात सुनकर निधि फिर उछल पड़ी ,

‘सच्ची भईया,’

‘हा और रानी और सोनल को भी तो लाना है ना ,’

‘वाओ’ निधि उछल कर अजय के गले लग जाती है,जब वो थोड़ी सामान्य होती है तो अजय से दूर होती है ,

‘तो भईया इसे मैं दीदी को वापस कर देती हु,’अजय को हसी आ जाती है ,

‘तो ये रेणुका का है ,’

‘हा तो और क्या मैं भी अब बड़ी हो गयी हु ,मैं भी अब दीदी की शादी में लहंगा पहनूंगी ‘निधि फिर से सम्हालते हुए बहार निकलने लगी तभी किशन अंदर आता है ,निधि को ऐसे चलता हुआ देख वो हस पड़ता है ,

‘अरे बहना ,पहले ढंग से सम्हाल तो ले फिर शादी में पहनना ,’किशन की बात से निधि को गुस्सा आ जाता है ,

‘मैं सम्हाल लुंगी समझे ,बड़े आये आप ‘निधि मुह बनाकर वहा से चली जाती है ,किशन हसता हुआ अजय के पास आता है …

‘भईया वो बनवारी के बारे में पता कर लिया है ,सीधा साधा लड़का है ,’

‘ह्म्म्म ठीक है फिर उसे भी घर में रख सकते है ,और एक दो दिन में ही शहर जायेंगे,रानी और सोनल को लाने और समान भी खरीद लायेंगे ,सबके कपडे वगेरह ,तू चलेगा ,’

‘भईया यहाँ भी तो किसी को रहना पड़ेगा ना ,विजय भईया जाने को कह रहे है तो मैं यही रह जाऊँगा ,

‘ठीक है फिर ,दो गाड़िया जाएँगी और दो ड्राईवर ,तीन नौकर

और 5-6 पहलवान भी रहेंगे किसे भेजना है देख लेना ,’

‘ठीक है भईया ,’अजय फिर से अपने किताब को उठा कर उसमे खो जाता है …..

अध्याय 5
अजय अपने कमरे में कसरत कर रहा होता है ,रात सोने से पहले उसे व्ययाम की आदत थी उसका विशाल सीना घने बालो से ढका हुआ था ,भुजाओ की गोलाई और चौड़ाई किसी पहलवान की तरह थी,बिक्लुल सपाट पेट जिसमे 6पेक वाली धरिया साफ़ दिख रही थी,

उसका रूम किसी राज महल के विशाल कक्ष जैसे बड़ा था,जहा पर एक कोने में कसरत के कुछ समान रहे थे,आदमकद का शीशा लगा था जिसपर से उसे अपने आप को देखने की सुविधा होती थी ,अजय अपने में सम्मोहित सा दर्पण में अपने को घुर रहा था और पसीने से भीगा हुआ उसका बदन कमरे की दुधिया रोशनी में चमक रही थी,भार उठाने पर उसकी मसपेशिया फुल सी जाती थी जिससे उसकी विशाल काया और भी विशाल हो जाती थी ,अपनी ताकत को वो वह पूरी तरह से खपाने में आमादा था,जैसे इसके बाद दुनिया खत्म ही हो जानी है,तभी उसे हलके हलके से किसी पायल की आवाज आई जिससे उसके चहरे पर एक मुस्कान घिर गयी ,वो जानता था की ये पायल किसकी है ,उसने मुड़कर देखा निधि उसकी ओर ही बढ़ी आ रही थी ,निधि ने एक झीनी सी सफ़ेद कलर की nighty पहन रखी थी जो पूरी तरह से पारदर्शी था और उसका साचे में ढला बदन उसे साफ़ साफ दिखाई दे रहा था ,वो पगली कभी अन्तःवस्त्र भी तो नहीं पहनती थी ,अजय की नजर जब उसके मादक शारीर पर गयी तो उसने अपना सर पकड़ लिया और मन में ,

“ये लड़की कब बड़ी होगी ,इतना बड़ा कमरा बना के दिया हु इसे और ये मेरे पास ही सोती है,इतनी बड़ी हो गयी है और ऐसे कपडे पहन के घुमती है,इसे कब शर्म का आभास होगा,कब इसे पता लगेगा की वो अब बच्ची नहीं रह गयी है ,क्या उसे सचमे नहीं पता ,नहीं ऐसा तो नहीं है ,सभी तो कहते है की गुडिया बड़ी हो गयी है समझदार हो गयी है,पर मेरे ही सामने ये क्यों बच्ची बन जाती है ,मेरी प्यारी सी गुडिया देखो कितनी खूबसूरत लग रही है ,किसी की नजर ना लग जाए इसे ,इतनी प्यारी इतनी नाजुक है मेरी बच्ची,कैसे दूर कर पाउँगा इसे ,लेकिन कब तक आज नहीं तो कल तो इसे किसी और की होना ही है ना,फिर क्या करूँगा कैसे रहूँगा इसके बिना ,नहीं कुछ भी हो जाए मैं इसे अपने से अलग नहीं करूँगा ,पर एक भाई का फर्ज भी तो अदा करना है ना मुझे ,”अजय के आँखों में पानी आ गया था,जिसे देख निधि मुस्कुरा पड़ी उसे पता था उसका भाई उसे देख के ही उसके लिए प्यार से भर गया है,अजय कितना भी बलशाली क्यों ना हो और कितना भी गंभीर क्यों ना हो वो हमेशा अपने बहनों के लिए और खाशकर निधि के लिए बहुत ही नर्म दिल का था निधि ने उसे कई बार अकेले में रोते हुए देखा था,या ये कहे की सिर्फ निधि ने उसे रोते हुए देखा था,क्योकि अजय और किसी के सामने नहीं रोता,पर निधि ही उसके सबसे करीब थी और निधि ही उसके पास अधिकतर समय गुजरती थी ,माँ बाप के मौत के बाद से निधि के लिए

उसका भाई ही उसकी जिंदगी था ,पता नहीं क्यों इतने बड़े हो जाने पर भी निधि को उसके साथ रहने पर निधि की समझदारी जाती रहती है और वो बच्चो जैसे हो जाती है ,जबकि निधि में बहुत समझदारी थी वो इतनी भी भोली नहीं थी जीतनी वो दिखाती थी ,

“भईया आप क्यों रो रहे हो ,”निधि ने मजे लेने के लिए कहा

“मै कहा रो रहा हु,और तू ऐसे कपडे क्यों पहन के घूम रही है ,अब तू बड़ी हो गयी है समझी “अजय को अपनी आँखों से बहते मोती का आभास हो गया और उसने अपने हाथो से उसे पोछा,

“कहा घूम रही हु आपके ही पास तो आ रही हु अपने कमरे से और बाजु में तो है आपका कमरा,और मैं अभी बच्ची हु समझ गए ना आप ,मुझे बड़ी नहीं होना है और आपके लिए तो कभी भी नहीं ,”निधि की प्यारी प्यारी सी आवाज ने अजय के चहरे पर एक मुस्कान फैला डी ,सच में कितनी प्यारी है मेरी बहना…

“अच्छा अब तो तेरी शादी करने की उम्र हो गयी है मेरी बच्ची जी ,”अजय पुलअप मारते हुए कहा,निधि ने बुरा सा मुह बनाया और अजय के कमर को पकड लिया और उसमे झूल गयी अजय के लिए तो निधि फूल सी थी वो उसे भी अपने साथ ऊपर उठा लिया जिससे निधि को बहुर मजा आने लगा ,मगर 6-7 बार के बाद अजय की हिम्मत जवाब देने लगी वो उतरने वाला था पर निधि ने उसे टोक दिया,

“भईया मजा आ रहा है करते रहो ना “अजय अपनी बहन की बात को कैसे टाल सकता था,वो फिर पुलअप करना सुरु किया 10 लेकीन निधि का मन नहीं भरा था 15 अजय के बाईसेप और सोल्डर में दर्द भर चूका था मसल्स में तनाव बाद रहा था जैसे अभी ही फट जाने को है ,वो सामान्यतः 10-15 के रेप लेता था पर निधि का वजन भी काफी था,लेकिन अजय की हिम्मत नहीं टूटी उसने आँखे बंद की और एक गहरी साँस लेकर पूरी ताकत लगा दि ,उसने महसूस की निधि की ख़ुशी को उसके चहरे की हसी वो खिलखिलाना जब वो ऊपर जाता है ,उसका वो चहकना अजय के अन्दर पता नहीं कहा से इतनी ताकत आ गयी की वो लगातार पुलअप करने लगा 20,30,अजय के मसल्स तनाव में फटने को थे पर अजय को दर्द का कोई भी आभास ही नहीं हो रहा था,उसके चहरे पर एक मुस्कान थी और आँखे बंद थी वो निधि के चहरे को निहारे जा रहा था ,अचानक की निधि ने अजय की हालत देखि और अपने जिद पर उसे बड़ा दुःख हुआ अजय के एक एक नश जैसे फटने वाले हो वो तुरंत अजय को छोड़ डी और अजय को भी रोक दिया अजय जब निचे उतरा उसका हाथ पूरी तरह से अकड़ गया था,निधि ने उसका हाथ सीधा करना चाहा तो अजय के मुख से एक आह निकली ,निधि के आँखों में पानी आ गया वही अजय को अपनी गलती का आभास हो गया की उसकी बहन डर गयी है ,और उसने दर्द की जगह अपने चहरे में मुस्कान ला लिया ,और निधि की आँखों के पानी को अपने हाथो से साफ़ करने के लिए आगे बढ़ाया,पर निधि ने उससे पहले ही अजय के सीने में आ चिपकी…

“दर्द दे रहा था तो बोले क्यों नहीं ,भईया आप कैसे करते हो कितने गंदे हो “निधि उसकी छाती में मुक्के मरने लगी ,अजय के पसीने से उसका

चहरा भी गिला हो गया ,वो उसके शारीर से चिपकी और उसका शारीर अजय के पसीने से गिला होने लगा ,वो अजय से आते मर्दाना खुसबू के आभास में डूबी हुई अजय को और जकड ली,ये खुसबू उसके लिए मर्द होने की निशानी था ,उसके भाई की निशानी था,जो उसे बहुत पसंद थी ,अजय दर्द को नजर अंदाज करता हुआ अपने अपने हाथो को निधि के सर पर रखा,

“मेरी बहन कुछ बोले और मैं उसे पूरा ना करू ऐसा हुआ है क्या कभी ,”अजय उसके सर को चूमता है,और निधि को अलग करता है ,

“चल अब मैं नहा के आता हु ,जल्दी सोना है आज कल फिर शहर जाना है,”निधि भी मुस्कुराते हुए अजय से फिर चिपक जाती है ,रुको ना अच्छा लग रहा है ,अजय उसके सर में हाथ फिरता है ,

“पूरी रात तो लिपट के ही सोएगी ना अब नहाने दे ना बहन ,”निधि मुस्कुराती हुई अलग होती है और अपनी एडी उठा कर अपने भाई के गालो पर एक किस कर लेती….

अध्याय 6
दूसरे दिन सभी लोग शहर की ओर निकल पड़े निधि अजय और विजय के साथ एक गाड़ी में कुछ लठैत भी थे, अजय सोनल और रानी को सरप्राइस देना चाहता था इसलिए सीधे घर न जाकर वह एक होटल में रुक गए, निधि ने शहर में pab के बारे में बहुत सुन रखा था, उसने अजय और विजय से एक डिस्को में चलने की इजाजत मांगी अजय को उसको इनकार करते भी ना बना, दिन भर के थके होने के कारण wo सो गए और शाम को तैयार होकर पास के ही एक डिस्को में चले गए, निधि एक जींस टॉप पहनी थी जिसमें उसका शरीर बहुत ही आकर्षक लग रहा था,

इधर सोनाला रानी अपने कुछ दोस्तों के साथ एक डिस्को में बैठी हुई इंजॉय कर रही थी, उसकी एक दोस्त किसी लड़के को बड़े देर से घूरे जा रही थी, सोनल ने उसे देखते ही उसकी नजर का पीछा किया कोई 6 फुट 2 इंच का लंबा चौड़ा गबरु जवान लड़का जो पीछे से बहुत ही हैंडसम लग रहा था सोनल समझ गई की खुशबू उसी लड़के को देख रही है, उसने खुशबू को कोहनी मारते हुए कहा,

“ क्या बात है मेरी जान तू तो कभी किसी लड़के को भाव भी नहीं देती और आज घूरे जा रही है,”

“ क्या करूं यार लगता है उस लड़के से मुझे प्यार हो गया इतना हैंडसम असली मर्द लग रहा है,” सोनल ने उसका चेहरा देखना चाहा पर नाकामयाब हुई, कुछ ही देर में एक हट्टा-कट्टा भारी भरकम शरीर का लड़का बार के काउंटर पर जोर से गिरा वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान उसकी तरफ ही चला गया, सोनल और रानी मुंह खोल कर उन्हें देख रहे थे, वही खुशबू एक सम्मोहित निगाह से उस लड़के को देख रही थी जिसने उस भारी भरकम लड़के को बार के काउंटर पर पटक दीया था, wo wahi लड़का था जिसे खुशबू इतनी देर से घूरे जा रही थी, अनायास ही सोनल और रानी के मुंह से निकला “भैया….

”

डिस्को में आते ही निधि अपनी मस्ती में झूमने लगी वही अजय और विजय पास ही बार में बैठे चुस्कियां लेने लगे, तभी किसी लड़के ने आकर निधि को छेड़ना शुरू कर दिया जिसे देख अजय का खून खौल गया, अजय ने सीधा जाकर उस लड़के को उठाकर बार के काउंटर में पटक दिया, पास खड़े कुछ और लड़के जो कि उनके ग्रुप के थे वहां आ गए लेकिन अजय और विजय के सामने कौन टिक सकता था, उनकी ताकत के आगे सभी छोटे लग रहे थे, जब तक लड़ाई खत्म हुई निधि ने सोनल और रानी को देख लिया था वह दौड़ कर उनके पास गई और उनसे लिपट गई, जैसे उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता हो कि उनके भाई लड़ रहे हैं, वह जानती थी कि अजय और विजय को हराना किसी के बस की बात नहीं..

दोनों ने मिलकर सबकी हड्डियां तोड़ दी वहां खड़े सोनल के दोस्त जिनमें कुछ लड़कियां और कुछ लड़के थे आंखें फाड़े उन्हें देख रहे थे, अजय और विजय भी अब उनके पास आ गए थे.. सोनल और रानी दौड़ कर उनसे लिपट गए, सोनल को अजय का कपड़ा देख कर समझ आ गया यह वही लड़का है जिसे खुशबू ghur रही थी,

“ भैया आप लोग यहां” सोनल ने अजय से लिपटते हुए पूछा,

“ हां बहन रेणुका की शादी है और हम तुझे सरप्राइज देना चाहते थे इसलिए पहले घर नहीं आए लेकिन तुम तो यही मिल गई”

“ भैया मुझे आपको किसी से मिलाना है,” सोनल अजय और विजय को अपने दोस्तों के पास ले गई और सब से मिलवाया खुशबू अभी भी अजय को घूर रही थी, सोनम ने हल्के से उसे कोहनी मारी थोड़ी देर बाद सब जाने को हुए, तो खुशबू ने सोनल को थोड़ी देर के लिए अपने पास रोक लिए,

“ यार तेरे भैया तो बहुत हैंडसम है, मैं तो लगता है उनकी दीवानी हो जाऊंगी क्या नाम है तेरे भाई लोगों ka,”

“ जिनकी तो दीवानी हो रही है वह अजय है अजय ठाकुर और छोटे भैया विजय विजय ठाकुर, चल अब जा रही हूं देर हो रही है भैया राह देख रहे होंगे,तू भी चल ना हमारे साथ ”खुशबु कुछ सोचते हुए ना में सर हिलाया , सोनल तो वहां से चले गई पर दोनों का नाम सुनते ही खुशबू की आंखों में पानी आ गया उसकी आंखें लाल हो गई जैसे खून उतर आया हो, खुशबू बस उनको जाते हुए देखने लगी और सोचने लगी, जिंदगी में पहली बार किसी से प्यार हुआ कोई लड़का पसंद आया किसी को दिल दिया मोहब्बत की उसे अपना बनाना चाहा पर किसे, अपनी बुआ के लड़के को उस लड़के को जिसके खून के प्यासे मेरे घरवाले है, उस लड़के को जिस के परिवार ने मेरे मां-बाप को रुलाया, जिसके पिता ने मेरे चाचा को मारा खुशबू रोती हुई और अपने आंखों में पानी की धार लेते hui वहीं बैठ गई……………

अध्याय 7
सभी शहर वाले घर आ जाते है ,सोनल और रानी बहुत खुस थे की रेणुका की शादी लग गयी है और वो घर में ही रहेगी ,तीनो बहन मिलकर समान की लिस्ट बनाते है,अजय का शहर वाला घर भी काफी अच्छा था,अजय किशन या विजय को वहा भेजना चाहता था ,ताकि शहर का कारोबार भी देखा जा सके पर दोनों को गाव से ही

प्यार था ,और उनकी मस्तिय भी गाव में ही चल सकती थी ,अजय अपने भाइयो पर बेवजह का बोझ भी नहीं डालना चाहता था,आखिर सब खाना खाने बैठे,सोनल और रानी ने अपने हाथो से खाना बनाया था,

“भाई कैसा है खाना ,”सोनल बड़े ही प्यार से अजय से पूछ रही थी,

“हम्म बढ़िया है,”अजय थोडा गंभीर लग रहा था जैसा वो हमेशा ही लगता था,

“हमें भी पूछ लिया करो मैं भी तो तेरा भाई हु,”विजय ने हलके से कहा सोनल उसे आँखे दिखने लगी

“तुझे तो जो भी दे दो बस रेणुका के हाथ का ही अच्छा लगता है “सोनल धीरे से उसे कह गयी ,विजय जैसे उछल गया और चुप रहने का इशारा किया रानी और सोनल दोनों हस पड़े वही निधि एक अजनबी निगाहों से उन्हें देखने लगी,अजय ने सुना तो सब और समझा भी सब पर कुछ प्रतिक्रिया नहीं दि ,

“सोनल तुम पड़ी लिखी हो और समझदार भी हो गयी हो ,पर मैंने सोचा नहीं था की तुम यु डिस्को में बैठी शराब पीती हुई मिलोगी,और वो लड़के लडकिया तुम्हारे दोस्त है ,कैसे कपडे पहने थे उन सबने ,देखो मैं तुम्हे डाट नहीं रहा हु बस तुम लोग अब बड़ी हो गयी हो और अपना अच्छा बुरा समझती हो मुझे कहने का यु तो कोई हक़ नहीं है पर ,…”अजय का इतना बोलना था की सोनल फफक कर रो पड़ी वही रानी की भी सुबकिया अजय को सुनाई दि ,उसे इस बात का इल्म ही नहीं था की वो कुछ गलत बोल गया है ,उसने सर उठा कर अपनी बहनों को देखा सोनल तो रो रही थी और निधि उठकर उसके पास जा चुकी थी और उसे दिलशा दे रही थी,सोनल सुबकते हुए बोल पायी

“भईया आप ऐसे क्यों बोल रहे हो की हम पर आपका कोई हक़ नहीं है,क्या हम शहर में रहकर पढाई करते है तो हम आप के लिए पराये हो गए ,भईया आप हमारे लिए भगवन हो ,आपने हमें पाला पोसा है ,आप ही हमारे बाप हो और माँ भी आप ने हमें कोई भी दुःख नहीं होने दिया ,अपनी हर खुशियों को हमारे बाद ही समझा है ,आपको क्या लगता है की हम पढ़ लिख कर ये सब भूल जायेंगे ,हम जाहिल नहीं है भईया जो आपने किया उसे भूल जाय ,और आप ऐसे क्यों बोल रहे हो ,आपको बुरा लगा तो हमें डाटो मरो पर पराया मत करो भईया ,”सोनल बड़ी मुस्किल से ये बोल पायी की अजय को भी ये अहसास हो चूका था की वो कुछ गलत बोल गया है,वो उठा और सोनल और रानी को एक साथ अपनी बांहों में भर लिया दोनों मोम की गुडिया जैसे उसके तरफ खिसकती चली गयी और उसके सीने में समां गयी ये देखकर निधि भी अपने को नहीं रोक पायी और दौड़कर उनसे लिपट गयी ,ऐसे तो विजय का भी बड़ा मन कर रहा था पर अजय के कारन वो वही खड़ा रहा पर सोनल ने अपने हाथो से उसे इशारा किया और वो भी दौड़कर सोनल के पीछे से ही उन्हें अपने बांहों में भर लिया ,थोड़ी देर में जब सब सामान्य हुआ तो सभी अलग हुए लेकिन सोनल अभी भी अजय को जकड़े हुई थी ,अजय सोनल से पहले कभी ऐसे प्यार नहीं जताया था ,असल में रानी और सोनल,किशन और विजय के बहुत ही करीब थे और चारो अजय से थोडा डरते भी थे वही निधि को बस अजय ही

समझ आता था बाकियों से वो उतनी घुली मिली नहीं थी ,निधि कभी भी अजय से नहीं डरी,सारे भाई बहान उसे भईया की चमची कहते थे,लेकिन आज अजय की बांहों में सोनल को बहुत सुकून मिल रहा था,वो इसे छोड़ना नहीं चाहती थी,अजय भी अपना हाथ सोनल के सर पर ले गया ,

“सॉरी बहन गलती हो गयी ,मुझे लगा की मेरी बहने शहर आकर बदल गयी होंगी और जैसा वह का माहोल था और जैसे तुम लोग लडको के साथ बैठे थे मुझे सच में तुम लोगो का वह होना अच्छा नहीं लगा ,पर क्या करू बहन मैं एक भाई हु ना वो भी एक जाहिल गाव का लड़का,”सोनल अजय के मुह पर अपना हाथ रख दिया ,

“मेरे भाइयो से जादा अच्छा वहा कोई भी नहीं था,वहा जो लोग थे वो अपने बाप की दौलत उड़ने वाले थे ,पर मेरे भाई तो कई लोगो को आश्रय देने वाले है,भईया हमें माफ़ कर दीजिये हम वहा कभी नहीं जायेंगे ,और भईया हम शराब नहीं पि रहे थे वो एक दोस्त का बर्थ डे था इसलिए चले गए ,और वो सभी लड़के लडकिय मेरे कॉलेज के दोस्त है ,सॉरी भईया ,और आप मेरे भाई सबसे बेस्ट है ,:सोनल अजय के गाल पर एक किस देकर उससे अलग हुई ,रानी भी दौड़कर आई और अजय को किस कर दि ,अजय हलके से मुस्कुरा दिया वही विजय ने सोनल को अपने गाल पर उंगली रखते हुए इशारा किया ,सोनल ने जीभ दिखा के इशारे में हलके से रेणुका कहा और हसने लगी ,ये देखकर निधि ने जाकर विजय को एक किस दे दिया ,विजय बहुत खुश हुआ और सोनल को चिढाने लगा ,तभी निधि बोली

“हमारे भईया सबसे बेस्ट है तभी तो आपकी सब फ्रेंड्स इन्हें लाइन मार रही थी ,और खासकर वो खुसबू कैसे अजय भईया को घुर रही थी ,”निधि ने मुह बनाते हुए कहा ,लेकिन सब थोड़े असहज हो गए जिसे अजय ने महसूस कर लिया था ,

“कौन खुसबू ,”

“वही पिंक कपड़ो वाली “निधि ने फिर चिड़ते हुए कहा ,

“भईया वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त है ,वो अपने परिवार के साथ यही रहती है ,”सोनल ने बात सम्हाला

“कौन कौन है उसके परिवार में “अजय ने यु ही पूछ लिया

“उसके माता पिता तो यहाँ नहीं रहते ,उसने बताया की वो विदेश में रहते है यहाँ उसके दो भाई और उसकी एक बहन है,एक भाई अभी छोटा है स्कूल में है वो अपने दादा जी के पास गांव में रहता है ,”अजय सब धयान से सुन रहा था ,

“अच्छा कोण से गांव के है वो ”

“वो तो मुझे नहीं पता भईया ”

“ह्म्म्म ठीक है ,दोस्तों का चयन हमेशा सम्हाल के करना, जानती हो ना हमारे कितने दुसमन है ,चलो अब सो जाओ कल मुझे किसी से काम है ,पापा के पुराने दोस्त है उनसे मिलाना है ,मैं सोने जा रहा हु और तुम लोग भी जादा बाते मत करना ठीक है ना ,”सब ने सर तो हिला दिया पर वो कहा सोने वाले थे ये तो उन्हें भी पता था ,और अजय को भी ,अजय के जाने के बाद उनकी मस्ती चालू हो गयी लेकिन पहले निधि के जाने का वेट कर रहे थे ,थोड़ी देर में निधि भी बोर होकर अजय के कमरे में चली गयी ,और उसके जाते ही ,

“कैसे रे कमीने अपनी महबूबा की शादी करा रहा है

,”सोनल ने विजय का कॉलर पकड़कर कहा,विजय और सोनल जुड़वाँ थे वही किशन और रानी भी इनके हमउम्र इसलिए इनके बीच कुछ भी छिपा हुआ नहीं था ,खासकर सोनल और विजय के बीच ,

“क्या करू यार मौसी और भईया की बात कोई टाल सकता है क्या ,लेकिन एक चीज तो अच्छी है कि वो अपने पास ही रहेगी ”

“यानि तेरी तो ऐश है ,कमीना साला बहुत ही लक्की है तू “सोनल ने हस्ते हुए कहा यु तो रानी को सब कुछ पता था पर वो थोडा असहज महसूस कर रही थी अगर किशन होता तो अलग बात थी ,उसे किशन की बहुत याद आ रही थी,

“दीदी मैं चली सोने आपलोग को शर्म तो है नहीं की छोटी बहन बैठी है,और ऐसे बात कर रहे हो “रानी ने बुरा सा मुह बनाया ,सोनल हस पड़ी वही विजय ने उसे ऊपर से निचे तक घुर के देखा

“ऐसे हमारी छोटी बहन अब बहुत बड़ी हो गयी है ,है ना सोनल “और सोनल को आँख मार दिया ,रानी उसका मतलब समझ कर शर्मा गयी विजय को एक मुक्का मार कर झूठा गुस्सा दिखाते हुए वहा से चली गयी वही सोनल की हसी छुट गयी ,रानी के जाते ही सोनल विजय की बांहों में आ गयी ,विजय सोफे में बैठा था और सोनल उसपर झुक बैठ गयी थी विजय ने उसे अपने बांहों में भर लिया ,और उसके सर को किस किया ,

“निधि कितनी लकी है ना विजय की घर में ही रहती है ,और एक हम है जो अपने भाइयो से मिलने के लिए भी तडफते रहते है ,कितने दिन हो गए तेरी बांहों में नहीं सोयी हु,मुझे तो निधि से जलन होती है कभी-कभी, हमेशा भईया से चिपकी रहती है और हम है भाई के गले लगने के लिए भी सोचते है ,और उनसे डरते है ,

विजय उसके सर को सहलाता है

“भईया से गले लगने को तो मैं भी तडफता हु मेरी जान ,वो देवता है उनकी पूजा करो पर प्यार ना दिखाओ ,और निधि तो बच्ची है ,प्यारी सी गुडिया “सोनल उसे कस लेती है

“हा वो तो अब भी तुम्हारी प्यारी सी गुडिया है ,तुम्हारी प्यारी गुडिया के हर चीज बड़े हो रहे है कभी देखा भी है “विजय उसे एक चपात उसके सर में मार देता है की सोनल आऊ कर जाती है ,

“मैं अपनी गुडिया के देखूंगा ,कामिनी कही की “सोनल फिर हस देती है

“हा हा मेरा राजा भाई तो बहुत शरीफ है ना ,जैसे उसे कुछ पता ही नहीं गाव की ना जाने कितनी लडकियों को तुमने ,….

और अभी सरीफ बन रहा है ,हां अब तो तू रेणुका का ही देखता होगा मैं तो भूल गयी थी ,”विजय उसे जोर से जकड लेता है की सोनल के मुह से आह निकल जाती है और वो छूटने के लिए छटपटाने लगती है ,

“आजकल बहुत बोल रही है ,और वो आयटम कौन थी मस्त थी क्या नाम था हा खुसबू ,”सोनल अपना सर उठा के देखती है

“कमीने वो भाभी है तेरी समझे ,”

“अच्छा जैसे भईया उसे घास भी डालेंगे ”

“क्यों नहीं डालेंगे ,मैं उसकी मदत करुँगी ना भईया को पटाने में,कब तक मेरे भईया हमारी जिम्मेदारियों के बोझ में दबे रहेंगे हमें भी तो उनके लिए कुछ करना चाहिए ना,और खुसबू से अच्छी कोई हो सकती है क्या ,और मैंने खुसबू की निगाहों में देखा है वो तो बस पगला गयी है भाई को देखकर ,”

“अरे हमारे भईया किसी हीरो से कम है क्या ,चल ठीक है हम भी मदद करेंगे और उसके चरण धो के पियूँगा अगर भईया ने उसे हमारी भाभी मान लिया तो ,चल जान अब सोना है कल भाई जल्दी उठा देंगे पापा के किसी दोस्त से मिलने जाना है ,”

“ओके पर मेरे और रानी के साथ ही सोयेगा तू ,कितने दिन हो गए तुझसे लिपट के सोये हुए ,और जबसे ये रेणुका जवान हुई है मेरे भाई को ही छीन ली “सोनल हलके गुस्से से बोली

“अरे मेरी जान रेणुका क्या कोई भी लड़की मेरे बहनों की जगह नहीं ले सकती समझी चल अब चलते है ,”सोनल मुस्कुरा कर अपने भाई के बांहों से निकलती है और उसके गालो में प्यारी सी पप्पी दे देती है ,विजय भी मुस्कुरा देता है ,

“और ये कोण दोस्त है पापा के जिससे मिलने जाना है ,”

“अरे है कोई बड़ा अजीब नाम है ,बाली काका ने कहा है की मिलके आ जाना ,क्या नाम है ….

हा डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवदा वाले “सोनल आँखे फाडे देखती है

“डॉ चुतिया ”

“डॉ चुतिया ये कैसा नाम है ”

“अरे बहुत नाम है उनका इस शहर में उन्हें सब चुतिया डॉ कहते है ,कल मिल लेना तुम्हे भी पता चल जायेगा …”सोनल मुस्कुराती हुई विजय का हाथ पकडे अपने रूम में जाती है ….

अध्याय 8
अजय और विजय डॉ चुतिया के क्लिनिक पहुचाते है ,जाने से पहले उन्होंने सभी को तैयार रहने के लिए कहा था ताकि जल्द ही सारी शोपिंग करके पूरा काम निपटा लिया जाय,वो क्लिनिक पहुचते है,एक छोटा सा क्लिनिक था उनका अंदर जाने पर वह कोई भी मरीज नहीं दीखता ,डॉ अपने केबिन में बैठे हुए थे ,अजय केबिन के बहार से ही दरवाजा खोलता है और अंदर झाकता है,डॉ उसे अपने लेपटोप में कुछ काम करते हुए दिखाई देते है,

“क्या मैं अंदर आ सकता हु,”डॉ बिना डॉ उठाये ही कहते है

“हा हा आ जाओ अजय ,”अजय और विजय दोनों आश्चर्य से अंदर जाते है ,एक सावले रंग का पतला दुबला सा शख्स चेयर पर बैठा होता है ,चहरे की आभा उसके ज्ञान को बतला रही थी ,उम्र कोई 40-45 की वही एक 29-30 साल की महिला जो दिखने में सेकेटरी जैसे पोसख पहने थी ,जिसके उन्नत वक्ष उसके तने हुए कपड़ो से बहार आने को बेताब थे और कुलहो के उभार ऐसे थे जिसे देख कर विजय के मुह में पानी आ गया वही अजय थोडा असहज सा हो गया ,

“हा बैठो बैठो “डॉ ने सर उठाते हुए कहा ,

“वाह तो तुम अजय हो और तुम विजय ,बिलकुल अपने बाप पर गए हो ,वीर ठाकुर साले की क्या पर्सनाल्टी थी ,बिलकुल तुम्हारी तरह और बाली तुम तो उसके जीरोक्स लगते हो विजय ,”दोनों डॉ को आश्चर्य से देख रहे थे ,की पापा और चाचा को इतने अच्छे से जानने वाले शख्स को ये जानते ही नहीं ,

“वो डॉ साहब काका ने आपसे मिलने को कहा था ,कोई काम था क्या ,”

“ह्म्म्म काम तो नहीं था बस मैं तुमसे मिलना चाहता था,वीर के जाने के बाद मैं वह कभी नहीं आ पाया ,सोचा उसके बच्चो से ही मिल लू,और तुम्हारी बहने कैसी है ,यही कॉलेज में पड़ती है ना,बाली ने मुझे बताया था,”

“जी यही है ,”अजय ने एक छोटा सा उत्तर दिया वही विजय नजर बचा के उस महिला को देख रहा था जिसे डॉ ने भाप लिया .

“ये मेरी सेकेटरी है ,मेरी मारलो “

विजय को खासी आ गयी ,

“कोई बात नहीं इसका नाम सुनकर सभी को ऐसा ही होता है ,ऐसे तुम इसे मेरी बुला सकते हो,मेरी विजय को थोडा बहार ले जाओ और पानी पिला देना ,देखो पानी ही पिलाना “डॉ और मेरी के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी वही अजय को चिंता होने लगी क्योकि वो विजय को अच्छे से जानता था और ये उनका गाव नहीं था,उनके जाते ही डॉ अजय के तरफ मुखातिब हुआ,

“अजय बात कुछ ऐसी है की मैं तुम्हे विजय के सामने नहीं बता सकता,बात असल में ये है और ऐसी है की मैंने आज तक बाली से भी ये बार छुपा के रखी थी,अब तुम बड़े हो चुके हो और मेरा मानना है की तुम अब समझदार हो तो तुम्हे ये बात बता सकता हु,पर मेरी बात को बड़े ही धयन से सुनना और इसका जिक्र किसी से नहीं करना ,”अजय के चहरे पर चिंता के भाव गहरा गया था,जिस वक्ती को उसने कभी देखा नहीं था वो उसे क्या बताने वाला है जो उसने इतने दिनों तक छिपा रखा था,

“अजय देखो जिस दिन तुम्हारे पापा मम्मी का एक्सीडेंट हुआ था वो मेरे पास ही आ रहे थे “अजय चौक गया ,

“हा अजय बात ऐसी है की ये कोई हादसा नहीं था ,बल्कि सोची समझी चाल थी ,और ये एक मडर था,वो दोनों अकेले ही शहर के लिए निकले है ये बात किसी ने उन्हें बताई थी ,और उन्हें प्लानिंग से एक्सीडेंट कराया गया था,”अजय की आँखे लाल हो चुकी थी वो जानता था की किसने ये बताया होगा और किसने उनका एक्सीडेंट कराया होगा …

“मैं जानता हु डॉ ये किसने किया होगा ,ये मेरी ही चाची और तिवारियो की मिली भगत होगी “डॉ उसे लाल होते देख थोडा घबराया पर उसने उसे शांत रहने को कहा ,

“अजय पहले तो मुझे भी ऐसा ही लगा था,इसलिए मैं तुम्हे शांत रहने को कह रहा हु,जल्दबाजी में लिया गया फैसला कई जिन्दगिया बर्बाद कर सकता है,और अब तुम अकेले तो नहीं हो तुम्हारे ऊपर कई जिम्मेदारिय भी तो है,”डॉ की बात से अजय चौक गया और डॉ को घूरने लगा

“डॉ हमारे परिवार का एक ही दुसमन है और वो है तिवारी,उनके सिवाय ये काम कौन कर सकता है ,और आपने ये फैसला कैसे किया की वो गुनाहगार नहीं है,आप जानते ही क्या है हमारे परिवार के बारे में ,”अजय के चहरे से मनो खून उतर आया हो लेकिन डॉ शांत थे और उनकी शांति ही अजय को शांत रहने को मजबूर कर रही थी,वो चाह कर भी अपने को बेकाबू नहीं कर पा रहा था,ये कैसे हो रहा था ये तो उसे भी नहीं पता था बस उसे लग रहा था की जैसे कोई ताकत उसे शांत कर रही थी ,ये डॉ का ही ओरा था ,उनका ही प्रभाव था की अजय कुछ नहीं कर पा रहा था,

“हा अजय मैं तुम्हारे परिवार की स्तिथि को नहीं जानता ,इसलिए मैं इतने सालो से तुम्हारे माँ पिता के कातिलो को ढूँढ रहा हु,तुमने सही कहा की मेरा तुम्हारे परिवार से कोई रिश्ता नहीं है है ना,इसलिए तुम्हारे परिवार को बचाने के लिए मैं बाली से सच छिपा के रखा था,मैंने सोचा था की तुम समझदार होगे

,अगर तुम्हे मेरे बात पर भरोषा नहीं है तो ठीक है ,जाओ मार दो अपनी चाची को और बहा दो खून की नदिया तिवारियो के लेकिन असली गुनाहगार का क्या ,जो आज भी तुम्हारे परिवार को बर्बाद करने की सपथ लिए बैठा है,तुम्हे क्या लगता है, तुम्हारी बहनों पर यहाँ कोई भी खतरा नहीं है,तुम और तुम्हारा परिवार आज भी खतरे में है ये समझ लेना तुम ,मैं सालो से तुम्हारे परिवार पर नजर रखे हु,जब वीर जिन्दा था तब भी मैंने उसे आगाह किया था की तुमपर खतरा है,मेरे बच्चे जो गलती तुम्हारे पिता ने की वो तुम मत करो “डॉ की बाते सीधे अजय के दिल में लगी उसे डॉ के अहसानों का मतलब समझ आया वो उठा और डॉ के चरणों में बैठ गया ,अब उसकी आँखों मर आंसू था ,

“अंकल मुझे नहीं पता की मैं क्या करू पर आपने जो कहा अगर वो सच है तो मैं उसे तबाह कर के रहूँगा जिसने मेरे परिवार को उजड़ने की कोसिस की है ,कोण है वो ”

डॉ ने उसे उठाया और फिर से उसे खुर्सी में बैठाया

“यही तो पता नहीं चल पा रहा है ,मैंने जीतनी जाच अभी तक की है उसमे इतना ही पता चल पाया है की वो ना तो तिवारी है ना तुम्हारी चाची,इनफोर्मेसन देने वाला कोण है ये पता नहीं चल रहा पर हा एक्सीडेंट जिस ट्रक से हुआ था उसका ड्राइवर से मैं मिला उसकी अब मौत हो चुकी है ,उसे बस किसी ने अच्छे खासे पैसे दिए थे वो कोण था ये उसे नहीं पता,”

“पर आपको कैसे पता चला की तिवारियो का इसमें कोई हाथ नहीं है,”

“जब तुम्हारे पापा जिन्दा थे तभी से हमने तिवारियो के यहाँ अपने आदमी बिठा के रखे थे ,उन्होंने ही मुझे ये बताया था की उस दिन कोई भी कही नहीं गया और ना ही उसके कुछ दिन पहले ही कोई ऐसी हरकत हुई की कोई शक उनपर जाए ,माना वो लोग तुम लोगो के सबसे बड़े दुसमन है ,पर तुम्हारी माँ उस घर्र की ही तो बेटी है ,और रामचंद्र कभी अपनी इकलौती बेटी को नहीं मार सकता ,वो तो आज भी उसे बहुत प्यार करता है ,और तुम लोगो को भी वरना उसके बेटे यु चुप रहने वालो में से तो नहीं है ,”अजय को डॉ की बात पर भरोषा होने लगा

“पर अंकल अब हम क्या करेंगे “डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी

“कुछ भी नहीं ,बस इन्तजार ….ताकि वो कुछ करे और हमारे हत्थे चढ़े …”डॉ एक शून्य आकाश में देखते हुए बोला …

तभी एक चीख आई वो चीख मेरी की थी,अजय और डॉ अपने खयालो से निकले अजय जैसे ही उठने को हुआ डॉ ने अपनी जगह से उठकर उसे रोक लिया और उसका हाथ पकड़ कर मुस्कुरा दिया …

“डॉ साहब सॉरी वो विजय ”

“कोई बात नहीं आज मेरी को भी कोई असली मर्द मिल ही गया जो उसकी चीख निकल सके “अजय ने अपना सर निचे कर लिया और डॉ के पैर पढ उनसे आशीर्वाद लिया

“अंकल हमें जाना होगा वो बहाने भी वेट कर रही होंगी “डॉ कुछ नहीं बोले और अपने सिट पर बैठ गए ,अजय अपना सर निचे किये ही कमरे से बाहर आया

अध्याय 9
इधर …..

डॉ के केबिन से निकलते ही मेरी की कातिल हसी ने विजय को मदहोश कर दिया वो उसके पीछे पीछे किसी पालतू की तरह जाने लगा,मेरी की बलखाती कमर और उभरे हुए गांड ने विजय की सांसे बढ़ा दि थी,एक तो मेरी का कातिल शारीर उसपर उसकी कातिल अदाए,विजय की हालत ही ख़राब थी,मेरी उसे बहार बने काउंटर पर ले गयी,और वही सोफे पर बैठा दिया,

“आप क्या पीना पसंद करेंगे,”बड़ी ही लिज्जत से अपने छातियो को विजय की ओर झुकाती हुई बोली ,विजय की निगाहे उसके बंद कबुतारो पर अटक गए जो बस फुदकने के लिए बेताब थे,विजय ने अपने सूखे गले से थूक को निगला और बड़ी मुस्किल में कह पाया ,

“जो आप पिला दे,”मेरी उसकी ये हालत देख जोर से हस पड़ी,और अपनी होठो पर अपनी जीभ फिर कर बोली ,

“चाय काफी या पानी क्या पियोगे,”विजय ने अपने मन में सोचा ,साली अगर मेरे गाव में होती तो अभी तक इसे पटक के चोद चूका होता,क्या करू भईया भी साथ है ,चांस लू या रहने दू,नहीं नहीं भाई को पता चल गया तो ,ये साली बहका रही है,कुछ तो हिम्मत दिखानी पड़ेगी हम भी ठाकुर है,विजय ने अपना गला साफ़ करते हुए अपने चहरे पर एक स्माइल लायी और

“मेडम जी दूध नहीं मिलेगा क्या,”विजय के चहरे पर एक हसी खिल चुकी थी की उसकी पूरी हिचक जाती रही ,वो पहले तो मेरी के बड़े बड़े बालो को देखा फिर उसके चहरे को मेरी के होठो में भी एक मुस्कान आ चुकी थी,

“नोटी बॉय ,दूध पीना पी तो टॉयलेट में आ जाओ,”विजय के तो जैसे बांछे खिल गए ,वो बड़ी बेताबी से मेरी के पीछे आया ,टॉयलेट में पहुचते ही मेरी ने दरवाजा बंद कर दिया ,और उसके ऊपर टूट पड़ी जैसे सदियों से पयासी हो ,ऊपर उसके शर्ट से बहार निकलते कबूतर विजय के लिए खास आकर्षण थे उसने देर नहीं करते हुए उसके शर्ट के बटन खोलने लगा ,पर मेरी ने उसका सर पकड़ कर अपने होठो के पास ले आई और उसके होठो को अपने होठो में भरकर चूसने लगी ,जैसे विजय को कुछ समझ नहीं आ रहा हो ,आज तक वो ही लडकियों पर भरी रहा था ,पर आज ये क्या हो रहा था ,एक औरत उसपर भरी हो रही थी ,विजय ने अपनी ताकत का इस्तमाल किया और मेरी को अपने दोनों हाथो से हवा में उठा दिया मेरी तो जैसे चुहक ही गयी ,विजय उसके कमर को पकड कर उसे किसी गुडिया की तरह उठा लिया और उसके जन्घो को अपने सर तक ले आया ,उसने उसकी स्कर्ट में अपने सर को घुसा दिया ,और बड़े ही सुखद आश्चर्य में पड़ गया क्योकि मेरी ने कोई भी अन्तःवस्त्र नहीं पहने था,उसकी कोरी बिना बालो की योनी उसके होठो के पास थी,उसने अपना सर उठाया और अपने होठो पर मेरी को बैठा दिया मेरी उसकी ताकत से हस्तप्रद सी हो गयी वही जैसे ही विजय ने अपनी नथुनों से उसकी योनी को जोर से सुंघा उसके नथुनों से आती हवा ने मेरी के योनी पर प्रहार किया और मेरी की योनी ने तेजी से पानी छोड़ना शुरू कर दिया विजय अपने जीभ को निकाल कर सीधे ही उसके योनी के दोनों फाको के बीच रगड़ने

लगा,उसे उस नमकीन पानी का आभास हो गया मेरी विजय के सर में बैठी थी और उसके बालो को अपने हाथो से जकड रखा था,वो विजय के जानवरों जैसे ताकत और तरीके की दीवानी होती जा रही थी ,आज तक ना जाने कितने लोगो को उसने अपने जिस्म का स्वाद चखाया था पर ये पहला शख्स था जो मेरी पर भारी पड़ रहा था,और उसे अपने काबू में कर लिया था,मेरी के दिल से यही बात निकली साला मर्द तो यही है,बाकि सब तो …???

विजय अपने जीभ का कमाल दिखा कर मेरी को पागल ही कर दिया था,विजय के अंदर का जानवर जगाने लगा था जो की जब जाग जाये तो बड़ा ही खतरनाक हो जाता है ,विजय उसकी योनी को ऐसे खा रहा था जैसे कोई कुत्ता किसी चाकलेट केक को खाए ,अपने पूरा सर उसने उस छोटे से छेड़ में डालने की ठान ली थी,उसके दांत जब जब योनी को रगड़ते मेरी की आहे निकल पड़ती उसे इतना मजा आ रहा था की उसके आँखों से आंसू आने लगे ,

“अआह्ह्ह आह्ह ओ ओ ओ बेबी बेबी सक इट सक इट ,माय होली जीजस मैं मर जाउंगी ओह ओह ओह बेबी ,नो नो नो “विजय ने अपने दांतों से उसकी योनी की दीवारों को काटना चालू कर दिया हलके हलके किये वार ने मेरी की हालत इतनी ख़राब कर दि की वो विजय के बालो को नोचने लगी ,उसने पूरी ताकत से विजय के बालो को उखाड़ने लगी पर विजय नहीं माना वो रोने लगी ,हा लेकिन वो आंसू मजे के थे मजे के अतिरेक के ,वही विजय को पहली पबार इतनी दुधिया गोरी और चिकनी चुद मिली थी जिसके फांके भी गुलाबी थे वो उसे कैसे छोड़ देता ,मेरी अपने सर झुका के विजय के गले तक ले आई और उसके दांतों से जो भी चमड़ी आई उसने अपने दांत गडा दिए ,पर वो तो साला हवसी जानवर ,सांडो की ताकत वाला विजय था इस फूल का प्रहार उसपर क्या असर करता पडले में वो उसका कमर उठा कर अपने दांतों को उसकी योनी में रगड़ दिया ये प्रहार मेरी नहीं सह पायी और एक जोरदार चीख के साथ झड गयी ,उसे इसका भी भान नहीं रहा वो क्लिनिक में है,विजय का चहरा पूरी तरह से भीगा हुआ था उसने उसके पानी को चूस चूस कर पिया उसे भी इस बात का इल्म ना रहा था की वो क्लिनिक में है ,उसने मेरी को निचे उतरा तो मेरी जैसे मरी हुई थी,बिलकुल बेसुध लेकिन उसके चहरे पर तृप्ति के भाव थे पर विजय का डंडा तो अब पुरे जोर में खड़ा था जसने उसके स्कर्ट को निकल फेका पर मेरी की हालत देख थोडा रिलेक्स करने की सोची मेरी को अपने सीने में चिपका लिया ,मेरी बेसुध सी उसके ऊपर अपने को पूरी तरह से छोड़ चुकी थी ,थोड़ी देर बाद रिलेक्स होकर जैसे ही मेरी आँखे खोली उसने विजय को पकड़ कर एक जोर का किस उसके होठो में दिया

“थंक्स विजय तुमने जो किया वो कोई नहीं कर पाया ”

“अरे थंक्स छोड़ अब मेरा भी…”विजय इतना ही बोला था की दरवाजे में खटखट हुई ,आवाज अजय की थी जिसे सुनकर विजय का खड़ा डंडा पूरी तरह से मुस्झा गया उसे याद आया की मेरी किस तरह चीखी थी,वो डर और शर्म से पानी पानी हो गयी वही मेरी की

हसी निकल पड़ी,विजय ने उसका मुह दबाया और

“बस आता हु भईया दो मिनट “विजय बड़ी ललचाई नजरो से उसके योनी को देखा फिर उसके तरबूजो को ,उसका चहरा यु उदास हो गया था जैसे किसी बच्चे के हाथो से कोई चोकलेट छीन ले,मेरी उसकी ये स्थिति देख उसके गालो में बड़े ही प्यार से किस किया और

‘कोई बात नहीं मेरी जान ,मेरी इस गुलाबो में आजतक सिर्फ दो ही मुसल गए है,एक तो डॉ का और एक मेरे पति का लेकिन तुझे भरोसा दिलाती हु तीसरा तेरा होगा,तूने तो मुझे खुस ही कर दिया “विजय को उसकी बात से थोड़ी रहत मिलती है वो जल्दी अपनी हालत दुरुस्त कर वह से निकलता है मेरी अब भी अंदर थी बहार अजय नहीं होता वो अपने भाई की इज्जत बचने के लिए क्लिनिक के बहार निकल गया था,विजय सर निचे किये हुए अजय के पास पहुचता है ,अजय उसके चहरे के डर को देखता है और उसे अपने भाई पर बड़ा प्यार आता है ,और उसके चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है पर वो कुछ कहता नहीं और वो घर की ओर चल देते है,…..

अध्याय 10
जब दोनों घर पहुचे तब तक सभी देविया तैयार होकर अपने भाइयो का वेट कर रही थी,सोनल और रानी ने सामान्य सा टी शर्ट और जीन्स पहना हुआ था पर निधि कही दिख नहीं रही थी,
“निधि कहा है ,”अजय ने पहला प्रश्न किया
“वो तैयार हो रही है ,”सोनल ने चिढ़ते हुए कहा ,उसकी बात सुन कर अजय को समझ आ गया था की जरुर निधि इन दोनों को परेशान कर दि होगी ,
“कैसे अभी तक तैयार नहीं हुई ”
“अरे भईया महारानी जी को कोई भी कपडा पसंद ही कहा आता है ,मेरे और रानी के सभी कपडे देख लिए बड़े मुस्किल से एक स्कर्ट उसे पसंद आया है ,प्लीज् आज उसके लिए उसकी पसंद के बहुत सारे कपडे ले दीजियेगा नहीं तो वह जाकर हमें परेशां करेगी,”सोनल थके हुए आवाज में बोली ,जिसपर अजय हस पड़ा

“हा ठीक है उसे जो भी पसंद आएगा सब ले लेना और तुम लोग भी अपने लिए अच्छे कपडे ले लेना ,और हा मैं तो भूल ही गया था ,तुम सब अपने लिए डिसाईंनर लहंगा भी ले लेना और रेणुका के लिए भी तो लेना है कपडे ,और सबके लिए 2-3 लेना नहीं तो वहा जाकर झगड़ोगी “सोनल और रानी का चहरा खिल गया ,ऐसे तो वो अजय से कुछ मांगने में हिचकिचाते थे पर निधि हो तो उन्हें कोई गम नहीं ,निधि को आगे करके अजय से अपनी हर मांग पूरी कर लेते थे ,लहगे का आईडिया भी सोनल ने निधि के दिमाग में डाला था,दोनों खुस थे की आज तो जी भर के शोपिंग करेंगे ….

तभी निधि बहार निकली और सब उसे बस देखते ही रह गए वो इतनी प्यारी लग रही थी उस ब्लैक स्कर्ट में,उसका दुधिया गोरा मासूम सा चहरा जो अपनी जवानी के उत्कर्ष में था ,काले रंग में और भी खिल के आ रहा था,चहरे की लाली और कौमार्य का तेज, सादगी का श्रृंगार उसकी खूबसूरती को चार चाँद लगा रही थी ,सभी बस उसे आँखे फाडे यु देख रहे थे की निधि भी शर्मा गयी ,उसका शर्माना अजय और विजय के आँखों में पानी ला गया ,अपनी सबसे प्यारी बहन को उन्होंने पहली बार यु बड़े होने के अहसास में देखा था ,निधि हमेशा ही झल्ली जैसे रहा करती थी जिससे उसकी सुन्दरता और उसका यौवन निखरकर बाहर नहीं आता था ,दोनों भाई अनायास ही उसके पास गए और उसके एक एक गालो को चूम लिया ,निधि और भी शर्मा गयी ,अजय और विजय ने उसकी कमर के पीछे से अपने हाथ मिलाये और मुठठी बढ़ कर एक झूले सा तैयार कर दिया वो दोनों निचे बैठ गए ,ये किसी नाटक जैसा हो रहा था निधि को भी समझ नहीं आ रहा था की उसके भाई कर क्या रहे है ,अजय ने उसे इशारा किया की इसपर बैठ जा वो उनके हाथो से बने झूले पर बैठ गयी और उनके कंधो को पकड़ लिया उन्होंने अपनी गुडिया को उठा लिया ,और सोनल और रानी के पास पहुचे अब तक ये सब देखकर दोनों के आँखों में भी आंसू आ चुके थे ,वही निधि अपने भाइयो का अपने लिए प्यार देखकर अपने को रोक नहीं पायी और उसकी आँखों ने सब्र का बांध तोड़ दिया ,वो निचे उतरी और अपने छोटे से हाथो से अपने विशालकाय भाइयो को लपेट लिया ,दोनों उससे लिपट कर उसके सर पर एक किस किया ,सोनल अपने आंसुओ को पोछती हुई बोली,
“अगर ये इमोशनल ड्रामा हो गया हो तो चले बहुत देर हो रही है ,और आप लोग को और भी तो समान खरीदना है ना,हमें तो कपड़ो में और लेडिस के itams में ही रात हो जायेगी ,”सब अलग हुए और अजय ने भी अपने आंसू पोछे जिसे देख कर सोनल और रानी हस पड़े ,उन्हें हसता देख अजय अपने को थोडा सम्हाला और विजय की तरफ देखा जो दबी सी हसी हस रहा था,अजय थोडा असहज होते हुए
“अब तुझे क्या हुआ ”

“भाई आपको रोता देखा तो हसी आ गयी ,कल की बात अलग थी पर आज भी ,ही ही ही “रानी हस पड़ी अजय भी मुस्कुरा दिया
“तुम लोग क्या मुझे पत्थर समझते हो ,मैं भी इन्सान हु,मेरा भी दिल है,हा पहले की बात अलग थी ,पहले मैं बड़ा था और तुम सब छोटे थे ,लेकिन अब तो मेरी सबसे छोटी बहन भी बड़ी हो गयी है ,अब बड़ा भाई नहीं तुम्हारा दोस्त बनकर रहने का समय आ गया है ,तो अब तक मैं हमेशा अपने जस्बातो को दबाता रहा पर अब ना तुम्हे मुझसे डरने की जरुरत है और ना ही मुझे ,अब मैं भी तुम्हारे साथ हसूंगा तुम्हारे साथ रोया करूँगा ,”अजय का इतना बोलना था की तीनो लडकिय दौड़कर उसके गले लग गई वही विजय दूर से उन्हें देख रहा था ,जब सब उसे छोड़ी तो उसने विजय को देखा वो ऐसे जैसे देख रहा था जैसे वो भी उसके गले लगाना चाहता हो पर कोई तमीज उसे रोके हुई थी ,अजय ने उसे

देखा उसकी ओर मुड़ा और अपनी बांहे फैला दि ,विजय की आँखों में आंसुओ की नदी बह गयी वो दौड़ के आया और अजय को ऐसे कस के जकड लिया जैसे कभी छोड़ेगा नहीं ,ये जिंदगी में पहली बार हुआ था जब अजय और विजय गले मिल रहे थे ,अभी तक तो बड़े भाई का मान उनके प्यार पर भरी पड़ जाता था पर आज क्या हुआ था,अजय के मन में वो बाते चल रही थी
अजय मन में :-“आज मेरे भाई बहन मेरे दोस्त बन गए ,जो जिम्मेदारी मैं एक बड़ा और जिम्मेदार भाई बनकर नहीं निभा पाउँगा वो शायद मैं इनके करीब आकर इनका दोस्त बन कर निभा पाऊ,डॉ ने कहा है की मेरे परिवार पर खतरा है कैसा खतरा ,मेरे परिवार में किसी को आंच नहीं आना चाहिए ,मुझे इनका दोस्त बनना है पर अपनी मर्यादा को भी नहीं भूलना है,मैं आज भी इनका वही बड़ा भाई हु बस थोडा सा खुला हुआ ……”
बहनों को माल में छोड़ अजय ने उन्हें कपड़ो की लिस्ट पकड़ा दि और अपना कार्ड देने लगा ,
“अरे भईया आप लोग आ जाओ ना फिर पेमेंट कर देना ,आप लोगो के लिए भी तो कपडे लेने है ना “सोनल ने टाइम देखते हुए कहा
“नहीं बेटा हमें देर हो जाएगी शादी का पूरा समान लेना है ,जो जो गाँव में नहीं मिलेगा ,और फिर उसे अपनी किसी गाड़ी में भरकर भिजवा देंगे फिर आयेंगे,”ठाकुरों का अपनी ट्रेवल एजेंसी थी ,ठाकुर ट्रेवल्स जिसे वीर बाली ने शुरू किया था और अजय विजय ने बढाया था,आज इनके बसे कई जगह चलती थी ,और एक ही कॉम्पिटिटर था जी हा तिवारी ट्रेवल्स ..
“पर भईया हमें और भी देर लगेगी आप चिंता मत करो “निधि हस्ते हुए बोली अजय ने उसे आँखे दिखाई और फिर मुस्कुराता हुआ ओके कहकर वह से निकल गया उसने पीछे अपने साथ आये पहलवानों और बाकि लोगो को वही छोड़ दिया ताकि उन्हें कोई प्राब्लम ना हो ,उन्होंने पूरा समान खरीद कर लोड करा 3-4 घंटे में भेज भी दिया…जब वो माल पहुचे तो शाम के 5 बजे हुए थे , अजय और विजय खुस थे क्योकि वो अब रात तक गाव भी जा सकते थे पर माल पहुचने पर उनके आशा पर पूरी तरह से पानी फिर गया ….

मॉल में घुसते ही उसने देखा की उनके पहलवान किसी आदमी के चारो और हाथ बांधे खड़े है साथ में एक इंस्पेक्टर भी बैठा है वो शख्स अपने सर पर हाथ रखे हुए है ,इंस्पेक्टर ने अजय को पहचान लिया
“अरे ठाकुर साहब बढ़िया हुआ आप आ गए अब मुझे छुट्टी दीजिये “इंस्पेक्टर को देख अजय और विजय घबरा गए,
“अरे सिंग साहब आप ,क्या हुआ कुछ प्रोब्लम तो नहीं है “इंस्पेक्टर सिंग पहले अजय के ही इलाके में पोस्टेड था और ठाकुरों को अच्छे से जनता था,अजय से ही सिफारिश करा कर उसे पैसे वाले जगह में (शहर में )अपनी पोस्टिंग करायी थी ,अजय आगे बढ़ कर उससे हाथ मिलाता है ,

“अरे कुछ नहीं वो आपकी तीनो देवियों के कारन यहाँ आना पड़ा ,ये जो बैठा है वो यहाँ का मनैंजर है ,उसने ही हमें बुलाया था,वो क्या है निधि बिटिया को एक कपडा पसंद नहीं आया तो उसने उसे फेक दिया इस बात पर यहाँ की सेल्स गर्ल से उसका झगडा हो गया ,निधि को तो आप जानते है ना उसने दो हाथ उसे लगा दिए और उसने मनेजर और बाउंसर को बुला लिया बाउंसरो बिटिया को बाहर जाने कहा और उसने पहलवानों को बुला लिया ,पहलवानों ने बाउंसरो को तो मारा ही तोड़ फोड़ भी चालू कर दि,तो इसने (मनेजर की तरफ उंगली दिखाते हुए )मुझे बुला लिया ,मैंने निधि को समझा लिया और इसे भी पर निधि ने आप को कुछ ना बताने की कसम दे दि और कहा की जब तक आप ना आओ इसे यही बैठे रहने दो और मुझे भी यही बैठा दिया है ,अब उनकी बात तो नहीं टाल सकता ना तो …”इंस्पेक्टर के चहरे में एक मुस्कान आई वही विजय ने मनेजर को घुर के देखा की उसकी सांसे ही रुक गयी वो कुछ बोलने की हालत में नहीं था,अजय के चहरे पर पहले एक मुस्कान आई फिर उसका चहरा गंभीर हो गया ,
“थैंकस थैंकयु सो मच सिंग साहब ,ये लडकिय ना …”अजय एक गहरी साँस लेता है
“ओके आप को तकलीफ हुई इसके लिए माफ़ करे ,थैंक्स ”
“अरे ठाकुर साहब आप भी क्यों हमें जलील कर रहे है,हम तो आपके सेवक है “अजय इंस्पेक्टर के हाथो को पकड़कर उसे माफ़ी मांगता है और धन्यवाद देता है इंस्पेक्टर के जाने के बाद पहलवानों को इशारे से जाने को कहता है ,और मेनेजर के पास जाकर हाथ जोड़ लेता है जो की विजय को बिलकुल भी पसंद नहीं आता ,
“माफ़ कीजिये सर मेरी बहनों के कारण आपको तकलीफ हुई ,”मनेजर उठ कर लगभग उसके पैर पकड़ने की मुद्रा में बोला ,
“नहीं नहीं सर मुझसे गलती हो गयी की मेडम को परेशानी हुई सॉरी ,मुझे पता नहीं था की वो कौन है ,मैंने उस लड़की को भी निकल दिया है सर काम से “उसने हाथ जोड़ते हुए अजय से कहा विजय उसे ऊपर से निचे तक देखा
“साले तुझे अभी भी नहीं पता की वो कोण है नहीं तो तेरी पैन्र्ट अभी तक गीली हो जाती “अजय ने घूरकर उसे देखा विजय को अपनी गलती का अहसास हुआ और वो चुप हो गया ,
“उस लड़की को बुलाओ जिसको निधि ने मारा था “मेनेजर ने तुरंत ‘जी सर’ कहते हुए फोन घुमाया और 10 मिनट में ही वो लड़की उनके

सामने थी,अजय ने उसे धयान से देखा ,माल का ही ड्रेस(लाल रंग की टी शर्ट और जीन्स) पहने वो पतली दुबली सवाली सी लड़की अपने सर को झुकाय खड़ी थी,उसके चहरे से ही आभाव और गरीबी झलक रही थी ,7-8 हजार महीने की तनख्वाह के लिए उसे इतना जलील होना पड़ा था,जितना वो महीने भर में अपने खून पसीने से कमाती थी उतना तो यहाँ आने वाले एक दिन में उड़ा कर चले जाते थे ,फिर भी अपने आत्मसम्मान के लिए उसने झगडा कर लिया पता नहीं अब उसकी नौकरी रहे या ना रहे ,
गरीबो का कोई आत्मसम्मान नहीं होता ये उसकी माँ उसे कहा करती थी ,और सेल्स वालो का तो होता ही नहीं ये उसका मनेजर,, फिर भी उसने झगडा किया ,
अजय के पास आते ही उसकी पर्सनाल्टी और रौब देखकर उसे ये तो समझ आ चूका था की किसी बड़े आदमी से पंगा हो गया है,वो कपने लगी जिसे देखकर अजय को बहुत ही बुरा लगा ,उसने अपने हाथ बढ़ाते हुए उसके कंधो पर रखा वो सिहर उठी थी,
“तुम्हारा क्या नाम है बहन “बहन उस लड़की ने अपना चहरा उठाया अजय की आँखों में उसके लिए गुस्सा नहीं दया और प्रेम दिखाई दिया इतने देर से मन में चल रही शंकाओ का एक प्यार भरे शब्द ने निराकरण कर दिया था ,जो शख्स एक अदन सी लड़की को इतने प्यार से बहन पुकार सकता है वो गलत तो नहीं हो सकता ना ही क्रूर उसका मुरझाया चहरा खिला तो अजय को भी थोडा शकुन आया …
“जी सर वो सुमन “अजय ने उसे देखा पता नहीं क्यों वो लड़की उसके दिल को कही छू गयी थी ,अजय बहुत ही संवेदनशील था जो उसकी कमजोरी और ताकत दोनों थी,
“अच्छा चलो मेरे साथ ,और आप भी “अजय ने मनेजर को कहा सभी वह चलने लगे जहा तीनो देविया खरीदी कर रही थी ,वो एक बड़ा सा किसी डिजायनर ब्रांड का शाप था,पुरे माल में इन तीनो की दहशत सी हो गयी थी वो जहा भी जाती उस शॉप का मनेजर खुद आ कर उन्हें अटेंड करता ,अपने भाइयो को आता देख निधि दौड़कर आई और अजय के गले लग गयी उसके हाथो में एक लहंगा था ,जो बहुत ही महंगा लग रहा रहा था ,निधि जब उस लहंगे को घसीटते हुए भागी तो सभी कर्मचारियों के दिल से एक चीख निकली लेकिन दिल में ही दब गयी ,
“भईया देखो ये कैसा है “अजय ने उसे अपने से दूर किया

“वो सब छोड़ पहले ,इससे माफ़ी मांग ,”अजय ने सुमन के तरफ इशारा करते हुए कहा
निधि उसे देख कर नाक मुह सिकोड़ ली पर सामने अजय था ,वो हिली तो नहीं पर कुछ बोली भी नहीं ,अजय ने सुमन को आगे किया सभी की सांसे रुकी हुई थी की क्या होने वाला है ,अजय ने वही खड़े एक सेल्समेन को बुलाया और निधि जिस लहंगे को पकडे थी उसके तरफ इशारा करते हुए कहा ,
“इस लहंगे का रेट कितना है ”
:सर 15 हजार ”
“ओके, निधि मेरी बात धयान से सुनना तुम अपने लिए 15 हजार के कोई 3-4 लहंगे लेने वाली हो जिसे तुम सिर्फ रेणुका की शादी में पहनोगी या शायद उसके बाद कभी कभी “अजय सुमन की तरफ मुड़ता है ,
“तुम्हारी सेलरी कितनी है ,”
“सर 7 हजार ”
“बस या और कुछ ”
“सर इंसेंटिव

मिलता है,कुछ बेचने पर महीने का टोटल 10-12 तक पहुच जाता है ”
“कितने लोग है तुम्हारे घर में ”
“सर माँ है और एक छोटा भाई है ”
“क्या करती है माँ और भाई ”
“सर माँ कुछ नहीं करती वो बीमार रहती है ,और भाई अभी पढ़ाई कर रहा है ,”
“तो तुम इतने कम पैसे में ही पुरे घर का खर्च चलती हो ,और अपनी माँ का इलाज और भाई की पढ़ाई भी ”
“जी सर “सुमन की नजरे अभी भी निचे ही थी
“जितना तुम 5 महीने में कमाती हो उतने की मेरी बहन अपने लिए सिर्फ लहंगा ले के जा रही है,फिर भी तुमने इससे लड़ाई क्यों की “सुमन के आँखों में आंसू था पर वो सर झुकाय ही थी
“बोलो जो पूछ रहा हु”अजय ने थोड़ी उची आवाज में कहा
“सर मैंने कोई लड़ाई नहीं की मैंने तो बस मेडम को समझाया की कपडे को ऐसे मत फेके ,सर इतना महंगा कपडा होता है अगर फट जाय तो हमारी सैलरी से कट जाएगा ,उतनी तो हमारी सेलरी भी नहीं होती ,अगर मुझे सेलरी नहीं मिली तो मेरे घर वाले खायेंगे क्या ,लेकिन मेडम गुस्से में आ गयी और मुझे मार दिया ,”सुमन सिसकने लगी अजय ने अपना हाथ बढाया और उसके कंधे पर अपना हाथ रखा ,वो निधि की तरफ घुमा
“निधि तुम इससे माफ़ी मांगना चाहो या नहीं तुम्हारा डिसीजन है,पर तुम्हारे कारन इसे जॉब से भी निकल दिया गया है ,हा ये गरीब है पर इनका भी आत्मसम्मान है ,ये भी इन्सान है और इन्सान को इन्सान की इज्जत करनी चाहिए ,वरना हममे और जानवरों में फर्क ही क्या रह जायेगा ,”निधि की आँखों में पानी आ चूका था ,उसे अपनी गलती का अहसास हो चूका था ,वो आगे बड़ी और सुमन को अपने गले से लगा ली और बच्चो जैसे पुचकारने लगी ,
“सॉरी बहन मुझे माफ़ कर दे ,”वो उसे ऐसे मना रही थी जैसे बच्चे एक दुसरे को मानते है ये देखकर सभी0 के चहरे में स्माइल आ गयी ,मनेजर और कर्मचारियों ने चैन की साँस ली और सुमन भी उसके मानाने और प्यारी बातो से हस पड़ी ,लेकिन निधि ने फिर एक तीर छोड़ दिया
“मनेजर अंकल आप इसे जॉब से नहीं निकालेंगे “मनेजर ने हां में सर हिलाया
“और भईया मुझे ये माल बहुत पसंद आया ,इसे खरीद लो ना ,”सब फिर आँखे फाडे उसे देखने लगे,और निधि सुमन को अपने साथ ले गयी कपडे की चोइस कराने लेकिन अजय और विजय के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,विजय ने अजय की ओर देखा
“भईया ऐसे भी खरीदने की सोच ही रहे थे गुडिया का दिल भी रख लेते है और अपना काम भी हो जाएगा कोई दूसरा क्यों यही ले लेते है “अजय मेनेजर की तरफ मुड़ता है ,

“किसका है ये माल और कहा रहता है “मनेजर भी उन्हें आँखे फाडे देख रहा था
“सर ये सिंघानिया साहब का है ,मुंबई में रहते है ”
“विवेक सिंघानिया ”
“जी सर उन्ही का ”
“ठीक है विवेक सर तो हमारे खास आदमी है ,उनसे मैं बात कर लूँगा “मनेजर हाथ जोड़ कर खड़ा रहता है उसके दिमाग में विजय की बात गुज रही थी (“साले तुझे अभी भी नहीं पता की वो कोण है नहीं तो तेरी पैन्र्ट अभी तक गीली हो जाती “)…………………

अध्याय 11
शहर के कमरे के का र्रूम अजय आज अपनी सोच में डूबा था और खाना खा कर सीधे रूम में आ गया ,निधि और रानी अपने कमरे में ख़रीदे हुए कपड़ो में बीजी थे वही सोनल विजय के साथ हाल के एक कोने में रखे सोफे पर लेती थी ,वो विजय के गोद में अपना सर रख कर लेटी हुई थी और विजय उसके बालो को सहला रहा था ,

”यार आज डॉ चुतिया के पास गए थे ने क्या हुआ वहा,”
क्लिनिक की बारे में सोचकर उसे मेरी की याद आ जाती है,और उसके चहरे पर एक मुस्कान खिल जाती है,जिसे सोनल भाप जाती है,क्या हुआ मेरे हीरो क्यों मुस्कुरा रहा है ,
“अरे यार क्या बताऊ,उसकी सेकेटरी मेरी वाह “सोनल ने उसे आश्चर्य से देखा
“क्या वाह कर रहा है,तेरे जैसे कमीने सिर्फ एक चीज के लिए लडकियों को देखते है,”विजय सोनल को घुर के देखता है जो हलके हलके मुस्कुरा रही थी,

“बहुत बात करने लगी है तू,(थोड़ी देर रूककर )ऐसे सच भी है,लेकीन आज तो मजा ही आ गया ,”विजय एक अगड़ाई लेते हुए कहा ,सोनल को समझ तो आ गया था की उसका कमीना भाई क्यों कुछ तो कर के आया होगा ,उसने आँखों से इशारा किया क्या हुआ
विजय हसता हुआ उसे सारी बाते बताता गया और सोनल मुह खोल के उसकी करतूत सुनती रही ,जब उसे पता चला की विजय के साथ KLPD हो गया तो वो जोर जोर से हसने लगी की उसका पेट दुखने लगा,वो सोफे एस गिरते गिरते बची वही विजय बुरा सा मुह बनाया हुआ था ,जब सोनल का हसना थोडा कम हुआ तो उसने विजय के मुह को अपने हाथो से दबाया ,
“कोई बात नहीं भाई उसकी भी ले लेना ,ऐसे उसने तुझसे वादा किया है तो निभाएगी ही ना,ऐसे उसका नाम सुनकर तेरा शेरखान बिलकुल तन गया है ,”सोनल फिर से हसने लगी ,विजय का डंडा खड़ा होकर सोनल के सर को चुभ रहा था,विजय थोडा असहज हो गया पर सोनल के हसने पर उसे थोड़ी रहत मिली ,उसने सोनल के गालो पर एक चपत मारी
“अपने भाई से ऐसा मजाक करती है,”सोनल उसे घूरती है
“भाई ,वाह रे मेरे भाई,तुझे बताने में और करने में तो शर्म नहीं आई अब तू भाई बन रहा है साले”विजय और सोनल दोनों मुस्कुरा पड़े ,विजय सोनल को धयन से देखता है,माथे पर लगा छोटा सा टिका जो उसके गोरे मुखड़े को प्यारा बना रहा था,वो एक ढ़ीले से टी शर्ट और बोक्सर में थी जो उसके घुटनों के ऊपर था ,कपड़ो के ढीले पण के बावजूद उसके कटाव साफ़ दिख रहे थे,उसके छातिके उन्नत पहाड़ विजय की कोहनी से हलके रगड़ खा रहे थे ,जिसका आभास दोनों को ही नहीं था ,वासना का कोई नामो निशान उनके बीच नहीं था ,पर विजय उसकी सुन्दरता में खो गया था और सोनल भी अपने भाई की मर्दाना छाती में उगे बालो को अपने हाथो से सहला रही थी ,उसे तो सिर्फ उसके भाई ही मर्द लगते थे बाकी लडको में वो ,वो वाली बात ही नहीं पाती थी ,
“क्या देख रहा है भाई,”सोनल धीरे से कह पायी
“बस देख रहा हु मेरी बहन कितनी सुन्दर है,”
“झुटा कही का ,तेरी itams से जादा सुंदर थोड़ी होंगी तेरी बहने “विजय उसे अपने

बाजुओ में भरकर अपने सर को निचे उसके चहरे के पास लाता है ,
“दुनिया में कोई ऐसी लड़की नहीं है जो मेरी बहनों से सुंदर हो ,” विजय सोनल के गालो पर अपने होठो को रख देता है ,लेकिन हटाता नहीं और अपनी थूक से उसे गिला कर देता है,सोनल के चहरे पर एक मुस्कान खिल जाती है और वो अपनी बाजुओ को विजय के गले में डाल लेती है और अपनी ओर खिचती है ,विजय उठाकर उसे देखता है ,सोनल की प्यारी मुस्कराहट में वो खो जाता है ,
“भाई आई रेली लव यु ,तू हमेशा मुझे ऐसे ही प्यार करेगा ना ,”विजय सोनल के नाक से अपनी नाक रगड़ता है ,

“कोई शक”सोनल हस पड़ती है और उसे अपनी बांहों में भर लेती है ,थोड़ी देर में दोनों उठकर अपने रूम में जाते है वह निधि और रानी अब भी कपड़ो को लेकर ही बाते कर रही होती है निधि अभी भी वही सुबह वाला स्कर्ट पहने बैठी थी ,विजय पीछे से जाकर उसे कस कर पकड़ लेता है,
“क्या मेरी खरगोश तुझे सोना नहीं है क्या,”सब उसे प्यार से खरगोश बुलाया करते थे ,निधि उसकी बांहों में मचल कर अपना सर उठा कर उसके गले को किस कर लेती है,ये देख कर रानी की आँखों में आंसू आ जाता है ,
“क्या हुआ दीदी ”
“मुझे किशन की बहुत याद आ रही है ,हम सब यहाँ साथ है और वो वहा अकेला ,”
“कोई बात नहीं दीदी कल तो जा ही रहे है ना ,”
“हा और तू फिकर मत कर वहा उसका ख्याल रखने के लिए लाली है ना,”सोनल की बात से रानी रोना बंद कर उसे मार देती है वही सोनल और विजय हसने लगते है ,लाली किशन की पर्मनेट वाली जुगाड़ थी ,(जुगाड़ ही कहूँगा क्योकि गर्ल फ्रेंड कहना गलत होगा ),निधि सब को हस्ते हुए देखकर सबका मुह देखने लगी उसे ये बात समझ नहीं आया की लाली दीदी किशन भईया का धयान कैसे रखेंगी ,आखिर उसने विजय से पूछ ही लिया ,,विजय मुस्कुरा कर उसके गालो में किस कर लिया

“कुछ नहीं मेरी खरगोश चल रात हो चुकी है तू सो जा ,कहा सोएगी ”
“अरे ये तो भईया की चमची है वही सोयेगी उनके साथ ”
“मुझे भईया बिना नींद नहीं आती समझी “निधि ने अपना बुरा सा चाहरा बनाते हुए कहा ,जिसपर सभी हस पड़े
“तो शादी के बाद क्या करेगी जब अपने पति के साथ सोना पड़ेगा ”
“भाग जाओ मुझे नहीं करना शादी वादी आप कर लेना ,मैं नहीं छोड़ने वाली अपने भाइयो को”निधि की प्यारी बातो ने सभी के चहरे पर फिर से एक मुस्कान खिला दिया और वो सभी के गालो में किस करके वह से अजय के रूम चली गयी …..

अध्याय 12
सुबह ही सब तैयार होकर चलने को हुए ,सुबह से सुमन भी अपना समान पकड़कर आ चुकी थी,आ उसने एक हलके रंग का सलवार कमीज पहने था,उसके कपड़ो से ही उसके असली आर्थिक हालत का पता चल रहा था,लेकिन निधि को वो बिलकुल भी पसंद नहीं आया उसने तुरंत उसे अपने कमरे में ले जाकर अपने कपडे पहनने को दे दिया ,एक जीन्स और कमीज में अब उसका रूप कुछ खिलने लगा था,सब गाव के लिए निकल पड़े,गाव में उनका स्वागत करने को पूरा घर मौजूद था ,सिवाय उनके चंपा चाची के,निधि में सबको सुमन से मिलवाया ,रानी दौड़कर किशन के गले लग गयी वही सोनल सीधे बाली चाचा के तरफ भागी,अपनी बच्चियों को देखकर बाली भी बहुत खुस था,किशन को रानी छोड़ ही नहीं रही थी,सोनल उसके पास पहुच कर उसके गले से लग गयी,रानी ने भी अपने आशु पोछे और और किशन ने भी ,सोनल ने धीरे से पूछा ,
“और मेरे भाई ,लाली भाभी कैसी है,”किशन का चहरा लाल हो गया,

“क्या दीदी आप भी ना सबके सामने ,वो तो खड़ी है देख लो ना,”रानी और सोनल खिलखिला पड़े और सीता मौसी की तरफ बढे,मौसी ने बड़े ही प्यार से दोनों को दुलारा,और अजय को देखते हुई बोली
“रेणुका की तो शादी कर दिया तूने अब तेरी दोनों जवान बहनों का भी कुछ सोच ,इनके भी हाथ पीले कर दे अगले साल “रानी और सोनल ने बुरा सा मुह बनाया वही मौसी और अजय हस पड़े…
“मौसी इन्हें पड़ने दो जितना पड़ना चाहे फिर तो शादी करना ही है ,हम तो नहीं पढ़ पाए पर अपनी बहनों को तो खूब पढ़ाउंगा ,”दोनों लडकिय अजय से आकर चिपक गयी ,
“देख कही जादा पड़कर वही शादी ना कर ले “मौसी ने दोनों को चिढाते हुए कहा
“इनका भाई अभी मारा नहीं है ,जो इन्हें भाग के शादी करना पड़े ,मेरी बहने जिसे पसंद करेगी इनकी शादी उनसे ही करूँगा,अपने आप को बेच दूंगा पर अपनी बहनों के लिए हर खुसी ला के दूंगा,”अजय जैसे खुद से बात कर रहा था,दोनों उसके चहरे को देखने लगे वही मौसी के चहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान घिर गयी ,और रानी और सोनल की आँखों में अपने भाई का प्यार देखकर पानी आ गया ,उन्होंने अपनी एडी उची की और एक प्यार भरी पप्पी अजय के गालो में दि …

“चढ़ा ले इन्हें भी ,एक तेरी छोटी है ,इतना चढ़ा के रखा है,”मौसी ने प्यार से अजय को देखते हुए कहा ,अजय ने निधि की और देखा वो सुमन को घर दिखा रही थी और नौकरों को उसके रूम तैयार करने को कह रही थी ,सुमन बेचारी को अपने भाग्य पर जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था,जो लड़की उसे गलिया देकर मार रही थी उसके कारन उसकी जिन्दगी सवर गयी ,वो निधि को बड़े ही प्यार और सम्मान से देख रही थी,जिसे वो उसके लिए भगवन हो,वही किशन की नजरो को विजय ने पढ़ लिया जो सुमन को देखे जा रहा था,विजय उसके पास जाकर बोला,
“सोचना भी मत साले ,निधि और भईया का हाथ है उसपर,”किशन के चहरे पर एक कातिल मुस्कान खिल गयी ,
“अच्छा इसलिए आप अभी तक पीछे हो “विजय भी हस पड़ा
“अरे यार इतनी तो लडकिय छानी

है हमने ,एक नहीं सही ,”
“ह्म्म्म बात तो सही है भईया पर इस लड़की में कुछ तो बात है ,”विजय उसे घूरता है
“क्या बात है बे हवसी ,लाली से जादा खुबसूरत है क्या,बेचारी सवाली सी दुबली पतली है ”
“भईया ये थोड़ी तैयार हो जाए और आँखों में काजल लगा ले ना तो देखना आप भी दीवाने हो जाओगे”विजय हँसाने लगा
“तुझे ही मुबारक हो ऐसी कलि मैं तो खिले हुए फूलो को भी रुला देता हु ये तो मर जायेगी ,”किशन विजय की ओर देखता है ,
“ह्म्म्म तो मैं इसे खाऊंगा ,लेकिन थोडा आराम से रिस्क जादा है निधि को पता चला तो मार डालेगी ..”दोनों हसने लगे..
रानी किशन के पास पहुचती है ,

“भाई माँ कहा है ,”
“होगी अपने कोपभवन में ,इस घर में कुछ ख़ुशी हो तो उन्हें ही सबसे जादा तकलीफ होती है ना “किशन छिड़ते हुए कहता है,रानी के आँखों में आंसू आ जाता है ,
“भाई ऐसा मत बोल ,आपके और मेरे सिवा उनका है ही कोण इस दुनिया में ,”सोनल भी पास आ जाती है ,वो समझ चुकी थी की रानी क्यों दुखी है …
“चल रानी चाची से मिलकर आते है ,”सोनल ने उसके कंधे पर हाथ रखा ,रानी उसके सीने से लग के रोने लगी विजय भी ये सब देख कर उनके पास पहुचता है ,वो रानी के कंधे पर हाथ रखता है ,
“देखो भले ही चची हमारे बारे में जो भी सोचे पर हमारे लिए तो वो माँ जैसी है है ना ,”विजय बोलता चला गया
“पहले इस घर में जो हुआ वो हुआ पर अब हम सबको मिलकर उन्हें फिर से हसना होगा ,हम सब यहाँ खुसिया मनाये और हमारी माँ वह अकेली बैठी रहे ये कैसे हो सकता है,”
“पर भईया आप तो जानते हो माँ की आदत वो इस घर की खुशियों में कभी सरिक नहीं होती ,पापा तो उनसे बात भी नहीं करते वो अकेले ,”किशन बोलते हुए थोडा उदास सा हो गया,
“अब नहीं मेरे भाई हम सब की मिलकर उन्हें मनाना चाहिए ,चाचा उन्हें नहीं माफ कर पाए पर अजय भईया ने उन्हें हमेशा ही अपनी माँ माना है ,और अब चाची को हम फिर से अपने परिवार का हिस्सा बनायेंगे,”सोनल ने चहकते हुए कहा की सभी को उम्मीद की एक किरण दिखने लगी सभी चंपा के कमरे की तरफ जाने लगे ,
रानी और किशन कमरे में जाते है वही सोनल और विजय बाहर ही रुक जाते है ,दोनों को देखकर चंपा उछल पड़ी और दौड़कर रानी को अपने सीने से लगाकर रोने लगी ,
“मेरी बच्ची तू आ गयी ”
“हा माँ और आप निचे क्यों नहीं आई सब लोग थे बस आप नहीं थी “चंपा के आँखों में पानी आ गया और उसका गला भर सा गया था,वो थोड़ी देर तक बस चुप ही रही ,फिर बड़ी मेहनत करके कुछ बोल पायी ,

“बेटी मैं वहा आकर सबकी ख़ुशी ख़राब नहीं करना चाहती थी ,”सोनल और किशन कमरे में आते है ,जिसे देख कर चंपा थोड़ी असहज सी हो जाती है ,
“आपको किसने कहा की आपके आने से किसी को तकलीफ होगी ,बल्कि आपके आने से तो हमें ख़ुशी होती ,आप भी तो हमारी माँ है ना “अब तक सोनल के आँखों में भी पानी आ चूका था,चंपा अपना सर निचे किये थी और कोई भी जवाब नहीं दे रही थी,विजय ने आगे बड़ते हुए

चंपा के हाथो को थाम लिया ,
“चाची हम बचपन से ही माँ के प्यार के लिए तरसे है ,बाप का प्यार तो हमें बाली चाचा और अजय भईया ने दिया है ,पर क्या हम आपके बच्चे नहीं है ,सालो पहले जो हुआ वो बस हादसा था,उसकी अपने आपको और हमें इतनी बड़ी सजा मत दीजिये ,आप हमारी माँ है चाची ,”चंपा नज़ारे निचे किये हुए रो रही थी ,जिस परिवार को उसने आजतक इतनी नफरत दि थी वही उसे इतना प्यार करता है चंपा ने कभी सोचा ही नहीं था,जब से अजय ने उसकी जान बचायी थी वो अंदर से पश्चाताप में जल रही थी ,लेकिन वो कभी भी ये किसी से नहीं कह पायी थी ,,बाली आज भी उससे उतनी ही नफरत करता था जीतनी वो पहले किया करता था,इधर सोनल और विजय भी रोने लगे थे किसे पता था की इस विशाल देह में भी एक मासूम सा धडकता दिल है ,चंपा से अब रहा नहीं गया वो मुड़ी और जाने को हुई लेकिन उसी समय किसी ने उसके पैरो को जकड लिया एक सुबकी सी उसके कानो को सुनाई दि ….उसने बिना निचे देखे ही खुद को आगे धकेला पर वो मजबूत हाथ थे जिसके कारन वो हिल भी नहीं पा रही थी ,उसने मजबूर होकर निचे देखा तो उसका मुह खुला का खुला रह गया …अजय उसके पैरो को पकड़ा र्रो रहा था ,चंपा ने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी ,हुआ ये की अजय ने जब सबको जाते देखा तो वो भी धीरे से उनके पीछे चल दिया उनकी बाते सुनकर उससे रहा नहीं गया और वो अंदर आकर चंपा के पैरो को पकड़ लिया,

“चाची क्या हमसे कोई गलती हुई है जिसके वजह से आप हमसे दूर रहती है ,क्या हमें आपके प्यार पाने का कोई हक़ नहीं है ,”ये चंपा के लिए बहुत ही जादा था उसके सब्र का बांध अब टूट ही गया वो फफक कर रो पड़ी और अजय को उठा कर उसे अपने सीने से लगा लिया ,
“नहीं अजय मैं तुम्हारी गुनाहगार हु,मेरी वजह से ही भईया भाभी की मौत हुई है ,मैंने ही तुम्हारे चाचा को उनके भाई से अलग किया ,पूरी गलती मेरी है मेरे बेटे ,मैं माफ़ी के काबिल नहीं हु,वीर भईया तो भगवान थे जिन्होंने मुझ जैसी लड़की को इस घर की बहु बनाया पर मैंने क्या किया इस घर को तोड़ने की कोशिश की ,अगर मैं ना होती तो शायद भईया भाभी जिन्दा होते और इसपर भी तुमने मेरी जान बचाई ,तुम भी वीर भईया जैसे हो मेरे बेटे और मैं अब तुम्हारी खुशियों में नहीं आना चाहती ,”चंपा अजय को ऐसे गले लगायी थी जैसे जन्म की प्यासी को ,जैसे कई जन्मो से इसी पल का इन्तजार था ,आज वो अपने गुनाहों की माफ़ी मांग रही थी जो वो हमेशा मांगना चाहती थी ,अजय उससे अलग हुआ और उसके चहरे को अपने हाथो में थाम लिया उसने बड़े प्यार से उसे देखा,
“चाची जो भी हुआ वो तो हो चूका है ,अब हम नयी सुरुवात करते है ,आप हमारी माँ है और हमारे खुशियों और दुःख में सरिक कोने का आपको पूरा हक़ है ,हम सब यही चाहते है की आपके चहरे में फिर से एक मुस्कान आ जाय,”चंपा के चहरे में एक मुस्कान फैली वो कोई सामान्य मुस्कान नहीं थी ,बहुत ही दर्द के बाद जेहन से

आई थी ,उसमे ममता भी था और पश्चाताप भी ,उसमे दर्द भी थी और खुसी भी ,चंपा ने अजय के माथे को चूम लिया ,उसके नयना अब भी धार बहा रहे थे..बाकि सभी बच्चे भी आकर उनसे लिपट गए ,थोड़े इमोशनल ड्रामे के बाद सब अलग हुए और अपने कमरों में गए ,…

अध्याय 13
सुबह ही सब तैयार होकर चलने को हुए ,सुबह से सुमन भी अपना समान पकड़कर आ चुकी थी,आ उसने एक हलके रंग का सलवार कमीज पहने था,उसके कपड़ो से ही उसके असली आर्थिक हालत का पता चल रहा था,लेकिन निधि को वो बिलकुल भी पसंद नहीं आया उसने तुरंत उसे अपने कमरे में ले जाकर अपने कपडे पहनने को दे दिया ,एक जीन्स और कमीज में अब उसका रूप कुछ खिलने लगा था,सब गाव के लिए निकल पड़े,गाव में उनका स्वागत करने को पूरा घर मौजूद था ,सिवाय उनके चंपा चाची के,निधि में सबको सुमन से मिलवाया ,रानी दौड़कर किशन के गले लग गयी वही सोनल सीधे बाली चाचा के तरफ भागी,अपनी बच्चियों को देखकर बाली भी बहुत खुस था,किशन को रानी छोड़ ही नहीं रही थी,सोनल उसके पास पहुच कर उसके गले से लग गयी,रानी ने भी अपने आशु पोछे और और किशन ने भी ,सोनल ने धीरे से पूछा ,
“और मेरे भाई ,लाली भाभी कैसी है,”किशन का चहरा लाल हो गया,
“क्या दीदी आप भी ना सबके सामने ,वो तो खड़ी है देख लो ना,”रानी और सोनल खिलखिला पड़े और सीता मौसी की तरफ बढे,मौसी ने बड़े ही प्यार से दोनों को दुलारा,और अजय को देखते हुई बोली

“रेणुका की तो शादी कर दिया तूने अब तेरी दोनों जवान बहनों का भी कुछ सोच ,इनके भी हाथ पीले कर दे अगले साल “रानी और सोनल ने बुरा सा मुह बनाया वही मौसी और अजय हस पड़े…
“मौसी इन्हें पड़ने दो जितना पड़ना चाहे फिर तो शादी करना ही है ,हम तो नहीं पढ़ पाए पर अपनी बहनों को तो खूब पढ़ाउंगा ,”दोनों लडकिय अजय से आकर चिपक गयी ,
“देख कही जादा पड़कर वही शादी ना कर ले “मौसी ने दोनों को चिढाते हुए कहा
“इनका भाई अभी मारा नहीं है ,जो इन्हें भाग के शादी करना पड़े ,मेरी बहने जिसे पसंद करेगी इनकी शादी उनसे ही करूँगा,अपने आप को बेच दूंगा पर अपनी बहनों के लिए हर खुसी ला के दूंगा,”अजय जैसे खुद से बात कर रहा था,दोनों उसके चहरे को देखने लगे वही मौसी के चहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान घिर गयी ,और रानी और सोनल की आँखों में अपने भाई का प्यार देखकर पानी आ गया ,उन्होंने अपनी एडी उची की और एक प्यार भरी पप्पी अजय के गालो में दि …

“चढ़ा ले इन्हें भी ,एक तेरी छोटी है ,इतना चढ़ा के रखा है,”मौसी ने प्यार से अजय को देखते हुए कहा ,अजय ने निधि की और देखा वो सुमन को घर दिखा रही थी और नौकरों को उसके रूम तैयार करने को कह रही थी ,सुमन बेचारी को अपने भाग्य पर जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था,जो लड़की उसे गलिया देकर मार रही थी उसके कारन उसकी जिन्दगी सवर गयी ,वो निधि को बड़े ही प्यार और सम्मान से देख रही थी,जिसे वो उसके लिए भगवन हो,वही किशन की नजरो को विजय

ने पढ़ लिया जो सुमन को देखे जा रहा था,विजय उसके पास जाकर बोला,
“सोचना भी मत साले ,निधि और भईया का हाथ है उसपर,”किशन के चहरे पर एक कातिल मुस्कान खिल गयी ,
“अच्छा इसलिए आप अभी तक पीछे हो “विजय भी हस पड़ा
“अरे यार इतनी तो लडकिय छानी है हमने एक नहीं सही ,”

“ह्म्म्म बात तो सही है भईया पर इस लड़की में कुछ तो बात है ,”विजय उसे घूरता है
“क्या बात है बे हवसी ,लाली से जादा खुबसूरत है क्या,बेचारी सवाली सी दुबली पतली है ”
“भईया ये थोड़ी तैयार हो जाए और आँखों में काजल लगा ले ना तो देखना आप भी दीवाने हो जाओगे”विजय हँसाने लगा
“तुझे ही मुबारक हो ऐसी कलि मैं तो खिले हुए फूलो को भी रुला देता हु ये तो मर जायेगी ,”किशन विजय की ओर देखता है ,
“ह्म्म्म तो मैं इसे खाऊंगा ,लेकिन थोडा आराम से रिस्क जादा है निधि को पता चला तो मार डालेगी ..”दोनों हसने लगे..
रानी किशन के पास पहुचती है ,
“भाई माँ कहा है ,”
“होगी अपने कोपभवन में ,इस घर में कुछ ख़ुशी हो तो उन्हें ही सबसे जादा तकलीफ होती है ना “किशन छिड़ते हुए कहता है,रानी के आँखों में आंसू आ जाता है ,
“भाई ऐसा मत बोल ,आपके और मेरे सिवा उनका है ही कोण इस दुनिया में ,”सोनल भी पास आ जाती है ,वो समझ चुकी थी की रानी क्यों दुखी है …
“चल रानी चाची से मिलकर आते है ,”सोनल ने उसके कंधे पर हाथ रखा ,रानी उसके सीने से लग के रोने लगी विजय भी ये सब देख कर उनके पास पहुचता है ,वो रानी के कंधे पर हाथ रखता है ,

“देखो भले ही चची हमारे बारे में जो भी सोचे पर हमारे लिए तो वो माँ जैसी है है ना ,”विजय बोलता चला गया
“पहले इस घर में जो हुआ वो हुआ पर अब हम सबको मिलकर उन्हें फिर से हसना होगा ,हम सब यहाँ खुसिया मनाये और हमारी माँ वह अकेली बैठी रहे ये कैसे हो सकता है,”
“पर भईया आप तो जानते हो माँ की आदत वो इस घर की खुशियों में कभी सरिक नहीं होती ,पापा तो उनसे बात भी नहीं करते वो अकेले ,”किशन बोलते हुए थोडा उदास सा हो गया,
“अब नहीं मेरे भाई हम सब की मिलकर उन्हें मनाना चाहिए ,चाचा उन्हें नहीं माफ कर पाए पर अजय भईया ने उन्हें हमेशा ही अपनी माँ माना है ,और अब चाची को हम फिर से अपने परिवार का हिस्सा बनायेंगे,”सोनल ने चहकते हुए कहा की सभी को उम्मीद की एक किरण दिखने लगी सभी चंपा के कमरे की तरफ जाने लगे ,
रानी और किशन कमरे में जाते है वही सोनल और विजय बाहर ही रुक जाते है ,दोनों को देखकर चंपा उछल पड़ी और दौड़कर रानी को अपने सीने से लगाकर रोने लगी ,
“मेरी बच्ची तू आ गयी ”
“हा माँ और आप निचे क्यों नहीं आई सब लोग थे बस आप नहीं थी “चंपा के आँखों में पानी आ गया और उसका गला भर सा गया था,वो थोड़ी देर तक बस चुप ही रही ,फिर बड़ी मेहनत करके कुछ बोल पायी ,
“बेटी मैं वहा आकर सबकी ख़ुशी ख़राब नहीं करना चाहती थी ,”सोनल और किशन कमरे में आते है ,जिसे देख कर चंपा थोड़ी असहज सी हो जाती है

,
“आपको किसने कहा की आपके आने से किसी को तकलीफ होगी ,बल्कि आपके आने से तो हमें ख़ुशी होती ,आप भी तो हमारी माँ है ना “अब तक सोनल के आँखों में भी पानी आ चूका था,चंपा अपना सर निचे किये थी और कोई भी जवाब नहीं दे रही थी,विजय ने आगे बड़ते हुए चंपा के हाथो को थाम लिया ,

“चाची हम बचपन से ही माँ के प्यार के लिए तरसे है ,बाप का प्यार तो हमें बाली चाचा और अजय भईया ने दिया है ,पर क्या हम आपके बच्चे नहीं है ,सालो पहले जो हुआ वो बस हादसा था,उसकी अपने आपको और हमें इतनी बड़ी सजा मत दीजिये ,आप हमारी माँ है चाची ,”चंपा नज़ारे निचे किये हुए रो रही थी ,जिस परिवार को उसने आजतक इतनी नफरत दि थी वही उसे इतना प्यार करता है चंपा ने कभी सोचा ही नहीं था,जब से अजय ने उसकी जान बचायी थी वो अंदर से पश्चाताप में जल रही थी ,लेकिन वो कभी भी ये किसी से नहीं कह पायी थी ,,बाली आज भी उससे उतनी ही नफरत करता था जीतनी वो पहले किया करता था,इधर सोनल और विजय भी रोने लगे थे किसे पता था की इस विशाल देह में भी एक मासूम सा धडकता दिल है ,चंपा से अब रहा नहीं गया वो मुड़ी और जाने को हुई लेकिन उसी समय किसी ने उसके पैरो को जकड लिया एक सुबकी सी उसके कानो को सुनाई दि ….उसने बिना निचे देखे ही खुद को आगे धकेला पर वो मजबूत हाथ थे जिसके कारन वो हिल भी नहीं पा रही थी ,उसने मजबूर होकर निचे देखा तो उसका मुह खुला का खुला रह गया …अजय उसके पैरो को पकड़ा र्रो रहा था ,चंपा ने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी ,हुआ ये की अजय ने जब सबको जाते देखा तो वो भी धीरे से उनके पीछे चल दिया उनकी बाते सुनकर उससे रहा नहीं गया और वो अंदर आकर चंपा के पैरो को पकड़ लिया,
“चाची क्या हमसे कोई गलती हुई है जिसके वजह से आप हमसे दूर रहती है ,क्या हमें आपके प्यार पाने का कोई हक़ नहीं है ,”ये चंपा के लिए बहुत ही जादा था उसके सब्र का बांध अब टूट ही गया वो फफक कर रो पड़ी और अजय को उठा कर उसे अपने सीने से लगा लिया ,
“नहीं अजय मैं तुम्हारी गुनाहगार हु,मेरी वजह से ही भईया भाभी की मौत हुई है ,मैंने ही तुम्हारे चाचा को उनके भाई से अलग किया ,पूरी गलती मेरी है मेरे बेटे ,मैं माफ़ी के काबिल नहीं हु,वीर भईया तो भगवान थे जिन्होंने मुझ जैसी लड़की को इस घर की बहु बनाया पर मैंने क्या किया इस घर को तोड़ने की कोशिश की ,अगर मैं ना होती तो शायद भईया भाभी जिन्दा होते और इसपर भी तुमने मेरी जान बचाई ,तुम भी वीर भईया जैसे हो मेरे बेटे और मैं अब तुम्हारी खुशियों में नहीं आना चाहती ,”चंपा अजय को ऐसे गले लगायी थी जैसे जन्म की प्यासी को ,जैसे कई जन्मो से इसी पल का इन्तजार था ,आज वो अपने गुनाहों की माफ़ी मांग रही थी जो वो हमेशा मांगना चाहती थी ,अजय उससे अलग हुआ और उसके चहरे को अपने हाथो में थाम लिया उसने बड़े प्यार से उसे देखा,

“चाची जो भी हुआ वो तो हो चूका है ,अब हम नयी सुरुवात करते

है ,आप हमारी माँ है और हमारे खुशियों और दुःख में सरिक कोने का आपको पूरा हक़ है ,हम सब यही चाहते है की आपके चहरे में फिर से एक मुस्कान आ जाय,”चंपा के चहरे में एक मुस्कान फैली वो कोई सामान्य मुस्कान नहीं थी ,बहुत ही दर्द के बाद जेहन से आई थी ,उसमे ममता भी था और पश्चाताप भी ,उसमे दर्द भी थी और खुसी भी ,चंपा ने अजय के माथे को चूम लिया ,उसके नयना अब भी धार बहा रहे थे..बाकि सभी बच्चे भी आकर उनसे लिपट गए ,थोड़े इमोशनल ड्रामे के बाद सब अलग हुए और अपने कमरों में गए ,…

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अध्याय 14
सभी लोग बस शादी की तैयारियों में व्यस्त थे ,लडकिया सजने सवारने की तैयारिया कर रही थी ,ऐसा लग ही नहीं रहा था की किसी नौकरानी के बेटी की शादी है ,सभी उसे घर का सदस्य ही मान कर जुटे हुए थे ,घर को सिंपल सा सजाया गया था,और पूरा परिवार बहुत खुस नजर आ रहा था,सुमन भी अब घर में घुल मिल गयी थी वो हर वक्त ही निधि के साथ रहती और जो निधि कहती बस वही करती ,निधि को तो जैसे एक प्यारी सहेली मिल गयी थी,सुमन भी कुछ ही दिनों में खिलने लगी थी ,निधि उसे किसी गुडिया जैसे सजाती थी ,उसने उसे नए नए कपडे दे रखे थे ,लगता ही नहीं था की वो कोई आश्रित है ऐसा ही लगता था की वो परिवार की कोई सदस्य है,सभी भाई बहन मिलने की खुसिया मना रहे थे और अब चंपा भी पूरी तरह साथ थी ,अजय बाली को मना चूका था बाली चंपा से बात तो नहीं करता पर उसके वहा होने से कोई समस्या भी नहीं थी,इधर बारात के एक दिन पहले निधि की जिद थी की हल्दी के कार्यक्रम के साथ महंदी और डांस का भी कार्यक्रम करे,ऐसे अजय को ये सब आफत सा लग रहा था ,पर बहनों की खुशियों को नजरंदाज भी नहीं कर पा रहा था,उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था ,सभी घर के लोग हल्दी खेलने में बिजी थे सब एक दुसरे को दौड़ दौड़ कर हल्दी लगा रहे थे ,बस सबकी हसी ठहाको से पूरा घर गूंज रहा था,काम करने वाले नौकरों और मजदूरों को भी नहीं छोड़ा जा रहा था,वो बेचारे थोड़े नर्वस भी थे ,इतने बड़े घर की लडकिय उन्हें हल्दी लगा रही थी ,कुछ की आँखों में पानी था तो कोई उन्हें दुवाए दे रहा था,ठाकुरों की यही बात उन्हें सबसे अलग और लोकप्रिय बनाती थी की वो इंसानों का सम्मान करते थे और उनसे इंसानों जैसे ही बर्ताव करते थे,,,

किशन की नजरे सुमन पर थी,पर वो निधि से अलग ही नहीं होती थी,आज अच्छा मौका मिला था ,वो अपने हाथो में हल्दी लिए निधि को पीछे से पकड़ता है और उसके गालो में हल्दी रगड़ने लगता है ,निधि जब सम्हालती है तो वो और सोनल किशन के हाथो को पकड़ लेते है और निधि सुमन को उसे हल्दी लगाने का इशारा करती है ,सुमन थोड़ी डरी डरी सी उसके पास जाती है और उसे हल्दी लगाने लगती है,किशन जब अपने को छुड़ाता है वो सीधे सुमन के तरफ ही बढता है वो उसे पीछे से पकड लेता है और उसके गालो के साथ साथ उसके उभरे उजोरो पर भी हाथ मल देता

है,सुमन चुह्क सी जाती है ,किशन उसे हस्ते हुए देखकर वहा से चला जाता है ,सुमन ने बहुत दुनिया देखि थी और उसे समझ आ चूका था की किशन के इरादे क्या है,वो काप सी गयी उसका ध्यान निधि की ओर गया जो अपनी मस्ती में मस्त थी ,और अजय से चिपके हुए उसके गालो से खेल रही थी,सुमन नज़रे निचे किये वहा से जाने लगी ,किशन दूर खड़ा उसकी प्रतिक्रिया देख रहा था,सुमन के आँखों में आंसू थे वो दौड़ते हुए अपने कमरे की ओर्र जाने लगी ,किशन उसका पीछा करता हुआ उसके कमरे में पंहुचा ,वो कमरे में जा कर रो रही थी की उसके कमरे में दस्तक हुई ,उसे लगा की निधि उसे बुलाने आ गयी होगी ,उसने अपने आँखों से पानी पोछते हुए दरवाजे के पास पहुचती है,लेकिन दरवाजा खोलते ही उसके होश उड़ गए वह किशन खड़ा मुस्कुरा रहा था ,सुमन ने एक सलवार कमीज पहने हुई थी वो पूरी तरह से रंगा हुआ था ,वो कुछ कह या कर पाती किशन उसे धक्का के कर अंदर कर देता है और कमरे का दरवाजा लगा देता है ,सुमन उसके चहरे को देखती है ,उसे शराब की गंध महसूस होती है ,किशन देरी ना करते हुए हुए उसे अपने बांहों में भर लेता है और उसे चूमना शुरू कर देता है ,सुमन धीरे से चिल्लाती है और उससे छूटने की कोशिस करने लगती है ,
“नहीं नहीं भईया ये आप क्या कर रहे है ,”किशन उसके चहरे को देखता है

“मदेरचोद मैं तेरा भईया नहीं हु ,समझी “वो उसके गालो पर एक जोर का तमाचा जड़ देता है ,सुमन की रोने की आवाज और भी तेज हो जाती है ,जिससे किशन को और हिम्मत मिलती है ,
“चुपचाप जो करता हु करने दे,मुह मत खोलना नहीं तो तुझे और तेरे परिवार को गायब करा दूंगा ,तेरा भाई और तेरी माँ *** कॉलोनी में रहते है ना ,”सुमन उसकी बात सुनकर दंग रह जाती है,उनका रुतबा तो वो देख ही चुकी थी ,
“अगर किसी को बताई या चिल्लाई तो सोच लेना मैं तेरे परिवार की क्या हालत करता हु,”साफ़ था ये उससे दारू का नशा ही बुलवा रहा था वरना किशन तो उसे पटाने की सोच रखा था,बलात्कार की नहीं,सुमन उसकी बातो से लाचार सी हो चुकी थी ,उसके लिए उसका भाई और माँ ही तो थे ,उसे वो खतरे में नहीं डाल सकती थी ,सुमन ने ना चाहते हुए भी अपने को किशन के हवाले कर दिया किशन अब अपनी मनमानियो में उतर आया और उसके जिस्म के हर हिस्से हो दबोचने लगा ,सुमन बस आंसू बहाती हुई किसी लाश सी खड़ी थी,किशन ने अपने हाथो से उसके कोमल और अनछुए उरोजो को निचोड़ने लगा,सुमन का रोना बढता गया वो हलके हलके से चिल्ला रही थी,पर उसने अपना हाथ पीछे बांध कर रखा था ,
किशन ने अपने हाथो को आजाद किया और पुरे शारीर पर बेफिक्री से चलने लगा उसे ये तो समझ आ चूका था की अब ये लड़की कोई भी विरोध नहीं करेगी ,आज तो उसकी चांदी हो गयी थी ,उसने सुमन के कमीज के पीछे की चैन खोल दि उसके हाथ उसके पीठ पर चलने लगे ,सुमन एक मूर्ति सी खड़ी अपने इज्जत को जो उसने इतने दिनों से सम्हाल के रखा था लुटते देख रही

थी ,जिस आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उसने और उसकी माँ ने इतने दुःख उठाये थे वो आज लुटाने वाला था वो बेचारी बस खड़े होकर इसका तमाशा ही देख सकती थी कोई भी विरोध उसके परिवार के लिए जानलेवा हो सकता था,वो एक बुत सी खड़ी बस आंसू बहा रही थी,किशन ने उसके पीठ पर हाथ चलते हुए उसके ब्रा के हुक को खोल दिया ,उसके नग्गे सवाले पीठ पर उसके हाथ चलने लगे ,किशन ने उसे अपने तरफ खीचा और उसके होठो को अपने होठो में भर लिया ,लेकिन सुमन ने अपना सर दुसरे तरफ कर लिआ ,किशन को गुस्सा आया और एक तेज झापड़ फिर सुमन के गालो में पड़ा वो बेचारी वही गिर गयी,किशन उसके बालो को पकड़ता हुआ उसे उठता है और फिर उसके होठो को अपने होठो में भरता है ,सुमन उसका साथ तो नहीं देती पर उसका विरोध भी नहीं करती ,वो उसके पतले से कोमल होठो की पंखुडियो को अपने दातो से कटता हुआ अपनी जीभ उसके मुह में घुसा देता है वो बेचारी बस उसे होता महसूस कर रही होती है,किशन उसकी कमीज उतर कर जमीन में फेक देता है उसके उजोरो की चोटी अब निखरकर किशन के सामने थी ,जिन्हें वो अपने मजबूत हाथो से दबाता हुआ मसलने लगता है ,
“आह्ह्ह नहीं ना भईया नहीं ना “दर्द के कारन सुमन के मुह से निकल पड़ा ,किशन ने उसके निप्पल को अपने दांतों से कटा की वो दर्द से उछल पड़ी ,उसके दांतों के निशान उसके निप्पल पर पड़ चुके थे ,

“मादरचोद बोला था ना की भईया मत बोल ,आज तो तुझे चोद कर अपनी रंडी बनाऊंगा,हा हा हा ,और अभी दर्द शुरू कहा हुआ है अभी तो असली दर्द देना बाकि है तुझे ,”किशन किसी दानव सा हसता हुआ कह गया की सुमन की आत्मा भी सिहर उठी,
किशन उसके उजोरो को अपने मुह में भरकर चूसने लगा ,जो कृत्य किसी भी लड़की को उत्तेजित कर सकता था ,वो ही बिना मर्जी से करने पर लडकियों के लिए सबसे जलील करने वाले और यातना देने वाले होते है ,जो उनकी आत्मा को मार देते है,किशन अपने मन के भरने तक उन्हें चूसता रहा और फिर उसके सलवार के नाड़े को खीच कर सलवार को निकल दिया,अपने नग्न होने के अहसास से सुमन का जमीर मर सा गया था ,किसी ऐसे आदमी के सामने नग्न होना जिसे वो प्यार नहीं करती ,अभी तक तो उसे वो अपना भाई ही मान रही थी ,किशन ने उसके शारीर पर पड़ा आखरी वस्त्र भी निकल दिया उसके बालो से भरे हुए योनी में एक उंगली घुसा दि ,उसकी पूरी तरह से सुखी योनी में वो उंगली किसी दर्दनाक हादसे से कम नहीं थी ,वो चिल्ला पड़ी ,
“नहीं नहीं मुझे बक्स दो ,मैं आपके बहन जैसी हु ,मैं मैं नहीं नहीं “सुमन जैसे खुद से ही बाते कर रही थी किशन का तो इसका कोई भी असर नहीं हो रहा था ,वो निचे बैठ कर अपने होठो को उसकी योनी तक ले जाता है और जीभ निकल कर उसे चाटने लगता है ,किशन ये क्यों कर रहा था ??????शायद इसी लिए क्योकि उसने कभी किसी का बलात्कार नहीं किया था ,उसने हमेशा ही लडकियों की सहमती से ही उनको भोगा था,पर आज वो बलात्कार

कर रहा था पर उसे भी इसका आभास नहीं हो पा रहा था ,वो अपने शराब के नशे में ही डूबा सा अपने कृत्य को अंजाम दे रहा था,वही सुमन का वो अंग अब किशन के क़ब्से में था जो कोई औरत या लड़की उसे देना पसंद करती है जिसे वो प्यार करती है ,लेकिन समाज ने लडकियों को वो स्थान दिया है की वो बेचारी कभी भी किसी को अपनी मर्जी से अपनी इज्जत सौप नहीं पाती ,कोई एक खुसनसीब ही होती है जिन्हें ये सौभाग्य मिलता है की वो अपनी इज्जत अपने प्रियतम को सौपे वरना यहाँ तो शादी भी बलात्कार करने का ही लायसेंस हो जाता है ,एक लड़की के लिए जीना कितना मुस्किल होता है ये सुमन अच्छे से जानती थी पर उसे भी यही करना पड़ेगा उसने शायद सोचा भी नहीं था,वो अपने खयालो में खो जाती है जबकि किशन उसके योनी को अपने थूक से भिगो चूका होता है….

किशन ने उसे पास ही बिस्तर पर पटक दिया जैसे ही वो बिस्तर में गिरी उसके आँखों से आंसू गायब हो गए और चहरे पर एक मुस्कान तैर गयी ,किशन के लिए ये मुस्कान बहुत ही रहस्यमयी हो गयी की ये क्या हो रहा है,उसने घुर के सुमन को देखा ,और सुमन ने मुस्कुराते हुए कहा ,
“जैसे मैं एक लड़की हु ,तुम्हारी बहने भी तो लडकिय है ना “बस इतना ही बोल के वो मुस्कुराती हुई किशन को देखने लगी ,किशन के दिल में उसकी बात तीर सी लगी ,उसके चहरे पर गुस्सा आने ही वाला था की,
“कोई ऐसे ही तुम्हारी बहनों के साथ भी करेगा ,या क्या पता करता होगा,”सुमन के चहरे पर एक व्यंग भरी मुस्कान थी जो किशन के दिल को छीर कर रख देती है वो गहरे सोच में पड़ जाता है ,सुमन के जगह उसे कभी रानी दिखाई देती है तो कभी निधि का हसता हुआ चहरा ,वो अपना सर झटकता है ,
“ठाकुर साहब मैं भी किसी की बहन हु ,ये याद रखना और आपकी भी बहने है ये भी,”किशन की उत्तेजना पूरी तरह से कम हो जाती है उसके दिमाग में कई खलबलिया मच जाती है ,वो उसे मरना चाहता है पर सुमन के दिल से ये बात निकली थी जो सीधे किशन के दिल को जाकर लगी थी वो ,अपने हाथ वापस खीच लेता है और वहा से निकल जाता है और सुमन की मुस्कान अब फिर एक उदासी में बदल जाती है ………………….

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अध्याय 15

बारात आने को थी सभी तैयार बैठे थे ,घर की सभी लडकियों में डिजाइनर लहंगा पहना था,सभी बहुत ही सुंदर दिख रहे थे ,वही सुमन और लाली ने साड़ी पहने हुई थी,विजय और किशन तीन चार पेग लगाकर काम में बिजी थे ,वही अजय और बाली बड़े आराम से बैठे बाते कर रहे थे ,महमानों के नाम पर गाव के ही कुछ लोग थे,विजय रेणुका के कमरे में पहुचता है,वह रेणुका दुल्हन के लिबाज में तैयार बैठी थी,साथ में ही सुमन,रानी और सोनल भी थे ,विजय को आया देख सोनल के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,
“क्यों भाई क्या हुआ “सोनल ने पूछा,
“कुछ नहीं बस कुछ काम था यहाँ पर ,”रानी भी हसने लगी ,तभी निधि आकर सुमन को अपने साथ बुला लिया ,उसके जाते ही सोनल और रानी उठने लगे,
“चलो जानती हु क्यों आये हो यहाँ ,चलो जल्दी जो बात करना है कर लो पर जल्दी ना हम लोग बस आधे घंटे में आ रहे है ,”सोनल ने जाते हुए हसकर कहा ,उनके जाते ही विजय ने दरवाजा लगाया और रेणुका को पकड़ कर किस करने लगा ,
“अरे ठाकुर साहब ये क्या कर रहे हो ,पूरा मेकअप ख़राब हो जाएगा,”रेणुका हस्ते हुए कह गयी,
“अरे मेरी जान आज के बाद पता नहीं कब मौका मिले तुझसे प्यार करने का ,”विजय ने उसके बड़े बड़े उजोरो को दबाते हुए कहा ,
“हाय क्या कर रहे हो ,और मैं कहा भाग रही हु आपसे दूर यही तो रहने वाली हु ना ,और क्या प्यार प्यार कह रहे हो आप,प्यार करते हो या अपनी आग बुझाते हो ,”रेणुका की बात विजय को चुभ गयी थी ,उसने झटके से उसे छोड़ दिया ,उसका चहरा उतर गया था जो रेणुका को समझते देर ना लगी ,

“अरे ठाकुर साहब आप तो बुरा मान गए ,हमारा रिश्ता कभी ऐसा नहीं था की हम एक दुसरे को प्यार करे पर मुझे एक बात तो पता है की आपने मुझे कभी धोखा नहीं दिया ,आप ने मुझे जितना सम्मान और मजा दिया है उतना मुझे कोई नहीं दे सकता,”रेणुका उसके पास आई और अपने होठो को उसके होठो पर लगा दिया ,पर विजय उन्हें चुसना ही भूल गया था,रेणुका ने उसके सर को उठाते हुए उसकी नजरो को देखा
“विजय मुझे देखो ,”विजय ने रेणुका के चहरे को देखा,
“हम बचपन से साथ है ,हमारे बीच में जो भी हुआ वो बस जिस्म की जरुरत थी पर क्या सचमे ऐसा था ,मैंने हमेशा तुम्हे अपना पति ही माना ,पर हम अलग है हम अब भी सबकुछ कर सकते है पर हम कभी उस रिश्ते में नहीं बंध सकते जिसे शादी कहते है ,”पता नहीं आज विजय को क्या हो रहा था ,उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई उससे उसकी सबसे बड़ी सम्पत्ति छीन रहा हो ,वो भावुक हो गया था,उस लड़की के लिए जिसे उसने हमेशा ही बस एक जिस्म ही समझा था,उसने रेणुका के चहरे को देखा उसके आँखों में आंसू थे और उसका काजल बहने को हो रहा था वो आगे बढकर उसके आँखों का पानी अपने हाथो से साफ करता है,
“रेणुका मैं नहीं कह सकता की मैं तुम्हे प्यार करता हु ,पर तुम मेरे लिए हमेशा ही बहुत इम्पोर्टेंट रहोगी ,तुम्हे मेरे कारन कभी

भी कोई तकलीफ नहीं होगी,ये मेरा वादा है तुमसे और तुम्हारी सभी तकलीफों में मैं तुम्हारे साथ रहूँगा,अगर तुम चाहो तो शादी के बाद कभी तुम्हारे रस्ते में नहीं आऊंगा,”विजय ने रेणुका के माथे को चूम लिया ,इसपर वो हस पड़ी ,
“क्या ठाकुर साहब आप से दूर जाउंगी ये तो मैं सोच भी नहीं सकती ,और होने वाला तो नाम का पति होगा असली पति तो आप ही होंगे ,और मुझे माँ भी तो आपको ही बनाना है ना “रेणुका ने अपनी शोखिया दिखाई की विजय दीवाना हो गया और उसने रेणुका के होठो को चुसना सुरु किया ,अपनी जीभ रेणुका के होठो में डालकर वो उन्हें चूसने लगा ,वैसे तो दोनों के लिए कोई नयी बात नहीं थी पर आज बात कुछ अलग थी ,दोनों बहुत ही शिद्दत से एक दुसरे से लिपटे हुए थे ,रेणुका एक चमकीले लाल रंग की साड़ी पहने थी,हाथ लाल रंग की चूडियो से भरा था और गले में कुछ जेवर थे ,विजय का हाथ उसके खुले कमर में गया वो उसे मसलने लगा ,रेणुका के मुह से एक आह निकली और उसने विजय के होठो को काट लिया ,विजय ने एक मुस्कान देकर उसकी साड़ी को ऊपर उठाना सुरु किया ,साड़ी कमर से ऊपर हो चुकी थी की गाजे बजे की आवाजे होनी शुरू हो गयी ,बारात आ चुकी थी और उनके पास जादा समय नहीं थी ,विजय ने जल्दी से अपने पेंट को निचे किया और अपने मुसल को निकल कर रेणुका के जन्घो के बीच लाया उसके अन्तःवस्त उसे रोक रहे थे उसने उसे उतरा नहीं बस साईड किया,उसकी बालो से भरी हुई चूत पहले से ही गीली थी ,विजय ने उसे थोडा सा सहलाया और अपने मुसल को निशाने पर लाकर उसके अंदर करने लगा ,
रेणुका ने उसे अपने बांहों में खीच लिया और अपने जिसमे को उसके हवाले करते हुए उसके बांहों में समां गयी ,विजय उसे पास के दिवार पर टिका दिया और पहले बड़ा झटका मारा ,रेणुका के हाथ विजय के सर के चारो तरफ थे और दोनों के होठ आपस में मिले हुए बस चूस रहे थे ,दोनों आनद के सागर में गोते लगा रहे थे,पहला झटका पड़ते ही रेणुका के चूडियो की आवाज सुनाई दि जिससे विजय का मुसल और भी फुल गया,और उसने अपने सांसो को रोककर तेज झटके लगाने शुरू किये ,एक तूफान सा उस कमरे में आया और दोनों अपनी इज्जत,दर्द ,थकान भूलकर बस एक दुसरे में खोने लगे

“आह आह आह आह ठाकुर साहब आह विजय मेरी जान आह मैं तुम्हारी हु आह आह आह ”
“हां हां हां हा मेरी रांड ,हा मेरी जान ,हा मैं तुझे माँ बनाऊंगा हां हा हा ,आह आह आह ,”
“हा बनाओ मुझे माँ ,आह हम्म हूम “विजय अपनी पूरी ताकत लगा रहा था और पुरे कमरे में उनकी कहारे गूंज रही थी,दोनों में अपने में मस्त थे चूडियो की आवाज से पूरा कमरा गूंज गया था ,और अब दोनों के काम रस ने छप छप की आवाजे करनी शुरू कर दि ,विजय ने उसे उठाकर दीवाल के तरफ उसका मुह किया रेणुका अपने हाथो से दिवार का सहारा लिए खड़ी हो गयी ,विजय में पीछे से उसके बालो को पकड़ा और उसके योनी में अपना मुसल पेल दिया ऐसा लग

रहा था जैसे वो किसी घोड़ी की सवारी कर रहा हो ,उसके जन्घो से टकराते रेणुका के निताम्भो की आवाज एक लयबद्ध रूप से थाप पैदा कर रही थी ,रेणुका के नाजुक निताम्भो से ठकराने पर विजय और भी उत्तेजित हो जाता था ,
“मदरचोद रांड ,तुझे तो मैं जिंदगी भर ऐसे ही चोदुंगा ,आह आह आह ”
“हा हा हा मेरे राजा ऐसे ही ,ऐसे ही ऐसे ही आह आह ऊऊऊ ओओ ओ ओ ओ “विजय उसके मुह में अपनी उंगलिया घुसा देता है जिसे वो चूसने लगती है ,विजय अपनी पूरी ताकत हर एक धक्के में लगा रहा था ,
इधर कमरे के बहार सोनल और रानी रेणुका को बुलाने आने वाले थे ,जैसे ही वो कमरे के दरवाजे में दस्तक देने वाले होते है ,उन्हें रेणुका की आहे सुनाई देती है ,दोनों को समझ आ चूका था की अंदर क्या हो रहा है ,उनके चहरे पर एक मुसकान फैली और वो कमरे से अलग हो इन्तजार करने लगे ,कुछ ही देर में रेणुका और विजय की एक जोरदार चीख फैलती है की सोनल और रानी आसपास देखने लगते है की कोई पास तो नहीं है ,सोनल जल्दी से दरवाजा खटखटाती है ,यहाँ विजय अपनी मर्दानगी का गढ़ा पानी रेणुका के अंदर छोड़ रहा था ,की दरवाजे में हुई दस्तक से दोनों एक दुसरे को देखकर मुस्कुराते है और अलग होकर अपने कपडे सम्हालते है ,और दरवाजा खुलते ही सोनल आकर विजय के कानो को पकड़ कर खीच लेती है ,
“अरे ये क्या कर रही है ,”

“सालो तुमको यहाँ बात करने के लिए छोड़ा था की रासलीला करने ”
“अरे बात ही तो कर रहे थे ,”
“हा सालो बात कर रहे थे ,बहार तक आवाज जा रही थी तुम्हारे बात की और अगर निचे वो नगाड़े नहीं बज रहे होते ना तो निचे भी पहुच जाती ,और तुझे शर्म नहीं आती रे ,बाहर तेरा शौहर बारात लेकर खड़ा है और यहाँ तू ,…छि “सोनल ने छि तो कहा पर उसके चहरे पर मुसकान साफ थी अगर रेणुका अपना सर उठाकर देखती तो शायद उसे समझ आ जाता
“अब सर क्या झुका के खड़ी है जा जाकर बाथरूम से हो आ फिर तुझे निचे भी जाना होगा ,चल “रेणुका भागती बाथरूम में घुस जाती है वही विजय सोनल के कमर को पकड़कर अपने पास खिचता है और उसके गालो में एक चुम्मन ले लेता है ,
“थैंक्स यार तूने मेरी एक मन्नत पूरी कर दि ,”सोनल अपने को छुड़ाती है ,
“चल भाग साले तेरी मन्नत नहीं ये तेरी हवस है और जल्दी से निचे जा भईया तुझे ढूंढ रहे है ”
विजय जल्दी से सोनल को एक किस करता है
“मेरी बहन ग्रेट है “और वहा से निचे चला जाता है ,

अध्याय 16

इधर किशन अपने किये पर पछता रहा होता है ,उसने कभी किसी से माफ़ी नहीं मांगी थी,पर आज ना जाने उसका दिल ये क्यों कर रहा था की वो जाय और सुमन से माफ़ी माग ले ,लेकिन वो उससे नजरे चुरा रहा था जिसका आभास सुमन को हो चूका था,ऐसे तो किशन आज भी नशे में था,पर उसके तेवर बदले से थे ,निधि और सुमन बैठे इधर उधर की बाते कर रहे थे,तभी निधि ने सुमन से कुछ लाने को कहा ,सुमन उठ कर निधि के रूम की और बढ़ी रास्ते में उसे किशन आता हुआ

दिखा,किशन का धयान उसपर नहीं था ,की अचानक उसने सुमन को देखा और नजरे झुकाए थोडा अलग जा कर खड़ा हो गया ,इस बात को सुमन ने नोटिस कर लिया और उसके पास से गुजरती हुई वो रुक गयी ,किशन अपनी नजरे दूसरी तरफ किये हुए था,उसे जैसे ही आभास हुआ की सुमन उसके पीछे ही खड़ी है वो झट से पीछे मुड़ा,
“तुम “किशन की आवाज भी भारी हो चली थी ,वही सुमन उसे घूरे जा रही थी ,
“कुछ कहना है तो कह दीजिये ठाकुर साहब क्यों खुद को जला रहे है ,हम तो गरीब लोग है हमारे इज्जत की कोई कीमत नहीं होती ,फिर आप क्यों यु अपना चहरा उतारे घूम रहे है “सुमन अभी भी उसे घुर रही थी,

“मैं वो मैं “किशन के लिए कहना मुस्किल था क्योकि उसे खुद ही नहीं पता था की उसे क्या कहना है ,उसके शब्द बड़ी मुस्किल से निकल पाए,
“मुझे माफ़ कर दो ,मुझसे गलती हो गयी ,मैंने आज तक कभी भी किसी के साथ यु जबरदस्ती नहीं की है ,पर कल शायद नशे में ….”किशन आगे कुछ नहीं कह पाया उसकी नजरे अभी भी निचे थी ,वही सुमन के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी,
“आप एक नौकर से माफ़ी मांग रहे है ठाकुर साहब ये तो आपको शोभा नहीं देता ,आप तो मेरी माँ और मेरे भाई को मरने वाले थे ,आप कल जो भी करते मैं आपको ना नहीं कह पाती पर क्या हुआ की आप मुझ अभागन को बक्स दिए “किशन शर्म से पानी पानी हो रहा था,ना जाने कितनी लडकियों की इज्जत से खेलने वाला शख्स आज खुद शर्मिंदा खड़ा था,

“मुझे अपनी बहने याद आ गयी ,तुम्हारी बाते मुझे दिल से दहला गयी ,मैं तुम्हारी जगह अपनी बहनों को रखा और मेरी रूह काप उठी,मैंने कितनी ही लडकियों के साथ,,,,,,पर आज तक मैंने किसी से जबर्दस्ती नहीं की है ,मुझे माफ़ कर दो और पता नहीं तुममे ऐसा क्या है की मैं अपने को रोक नहीं पाया ,तुम मुझे अच्छी लगती हो पर वो ,,,….ओओह सॉरी मुझे …..

यानी मेरा मतलब है की मैं ……मैं जबर्दस्ती नहीं करना चाहता था,लेकिन वो …” किशन को कहने को शब्द नहीं मिल रहे थे वही किशन का मतलब समझ सुमन की दिल की धड़कने बदने लगी उसे समझ नहीं आ रहा था की वो कैसा रियेक्ट करे ,जो आदमी कल उसकी इज्जत लुटने वाला था वो आज उससे डर रहा है यही नहीं वो कह रहा है की वो मुझे पसंद करता है ,सुमन बड़े ही उलझन में फस चुकी थी ,वो ये भी जानती थी की किशन झूट नहीं कह रहा है और ना ही एक्टिंग ही कर रहा है ,उसने छोटी सी उम्र में बहुत दुनिया देखि थी ,उसे अच्छे बुरे का ज्ञान तो था ,ना जाने कितने लोग उसे बुरे नजरो से देखते थे ,और ना जाने कितनो ने उसे खरीदने की और पटाने की कोसिस की थी पर उसने कभी आपने आत्मसम्मान से समझोता नहीं किया था ,लेकिन आज जो शख्श उसके सामने था वो झूट नहीं कह रहा था ,उसे तो पता ही नहीं था की वो कुछ कह गया वो बात उसके दिल के किसी कोने से अनजाने में निकल गयी थी जिसे वो रोकना चाहता था,पर किशन की बातो में कितनी भी सच्चाई क्यों ना हो सुमन को ये पता था की किशन उससे दिल से प्यार नहीं कर सकता ,और कर भी लिया तो कभी उसे अपना नहीं बनाएगा ,कहा किशन कई करोडो का मालिक और कहा वो एक नौकरानी,….उसने अपने होठो में आती मुस्कान को सम्हाला और इस बात के आभास ने उसके होठो में मुस्कान की जगह एक दर्द भरी उदासी ला दि ,वो अपने मुफलिसी के दर्द का अहसास कर मुस्कुरा पड़ी ,
“हम नौकर है साहब ,हमें पसंद कीजिये ,हमारा इस्तमाल कीजिये लेकिन दिल से ना लगाइए,”सुमन के होठो की दर्द भरी मुस्कान ने किशन के दिल को छल्ली छल्ली कर दिया ,सुमन वहा से चली गयी और किशन ……वो बस उसकी बातो की गहराई और दर्द के आभास को महसूस करता खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा……..

इधर
अजय और बाली बैठे बाते कर रहे थे की एक नौकर भागता हुआ उनके पास आया ,
“ठाकुर साहब वो कोई मेहमान आये है साथ में कोई मेमसाहब भी है ,”अजय ने बड़े ही आश्चर्य से उसे देखा वो बाली के साथ बहार गया ,एक बड़ी सी कार खड़ी थी और एक औरत काले कलर की साड़ी पहने उस कार के पास खड़ी थी ,उसके गोर रंग और मादक जिस्म पर वो साड़ी कमाल की लग रही थी ,कहा जाय तो जैसे सनी लिओन काले साड़ी पहन कर खड़ी हो ,अजय उसे पहचानने की कोसिस कर ही रहा था की बाली के मुह से निकला ,
“अरे मेरी तुम लोग आ गए ,”अजय को याद आया की ये तो मेडम मेरी है ,डॉ चुतिया की सेकेटरी ,उसने नजरे घुमाई उसे डॉ कार से थोड़ी दूर अजय के गार्डन में एक पौधे को बड़े गौर से देखते हुए दिखाई दिए ,मेरी आगे बढकर बाली के गले लगती है और फिर अजय के इससे अजय थोडा गबरा जाता है जिसे देखकर बाली और मेरी दोनों हस पड़ते है ,
अजय और बाली फिर डॉ के पास जाते है ,

“अरे डॉ साहब क्या देख रहे हो ,”बाली उसके पास जाता है डॉ उठकर उससे गले मिलता है ,और अजय उसके पैर छूता है पर डॉ उसे भी अपने गले लगा लेता है ,
“कुछ नहीं यार बस इस पौधे को देख रहा हु ,ये बूट जोलोकिया है ना ,”सब उन्हें आश्चर्य से देखते है ,
“ये तो मिर्ची का पौधा है डॉ साहब ,अभी इसमें मिर्च नहीं आये है पर हमरे एक दोस्त ने इसे गिफ्ट दिया था ये इसे असम से लाये थे ,बस एक ही पौधा है ,”
“हम्म सायद तुम्हे नहीं पता इसका नाम है बूट जोलोकिया ये विश्व की सबसे तीखी मिर्चियो में एक है ,इसे नागा चिली भी कहते है और बहुत से नाम है इसके ,इसे अलग ही रखना और कभी नग्गे हाथो से नहीं छूना ,अगर इसमें मिर्च लग जाय तो बढ़िया है वरना ऐसे मौसम में ये सायद ही होगा ,”डॉ बड़े गंभीरता से बता रहे थे की मेरी ने कहा ,
“विजय कही दिखाई नहीं दे रहा है “उसकी बातो से जहा अजय घबरा जाता है वही डॉ के चहरे में मुस्कान आ जाती है ,
“आप लोग अंदर आइये ना “अजय बड़े requast के भाव से कहता है ,

अध्याय 17

विजय जब निचे आया तो उसे मेरी और डॉ दिखाई दिए ,मेरी को देखकर उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी,मेरी से उसकी नजरे मिली तो दोनों के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,

“आज तो ये माल ही लग रही है इसे तो मैं घोड़ी बनाकर चोदुंगा,”विजय ने मन में कहा ,वही किशन भी मेरी को देखता ही रहा ,और विजय से उसके बारे में पूछा ,विजय ने उसे सिर्फ फॉर्मल इनफार्मेशन दे डी ,दोनों जाकर डॉ और मेरी से मिले ,और फिर अपने कामो में बिजी हो गए ,
बारात आ चुकी थी ,कार्यक्रम अपने सबाब पर था,दुल्हे की तरफ से भी जादा लोग नहीं थे ,अजय को शादी जल्द से जल्द निपटाने की जल्दी थी इस शादी के कारन वो कई दिनों से अपने काम में धयान नहीं दे पा रहा था,उसे शहर के माल की डील भी पूरी करनी थी ,वो डॉ और बाली के साथ बैठा हुआ था वही मेरी निधि और सुमन के साथ बाते कर रही थी ,सोनल और रानी दुल्हन को तैयार करने में बिजी थे और विजय

और किशन बरातियो को खिलाने पिलाने में ,डॉ और बाली बात कर रहे होते है ,
“अरे बाली इस लड़के के घर में कौन कौन है ,”
“बस डॉ साहब बाप, सौतेली माँ और 3 भाई और है इसके वो दूसरी माँ से ही है ,”
“और इसकी माँ ”
“उसका देहांत हो गया है ,काफी पहले इसकी माँ के देहांत के बाद इसके बाप ने दूसरी शादी की और फिर पास के ही गाव में आकर रहने लगे ,पहले इसका बाप शहर में रहता था,वही काम करता था ,वो रहा उसका बाप किशोरीलाल “डॉ उसे ध्यान से देखता है ,एक दुबला पतला सा आदमी लेकिन चहरे पर एक तेज झलक रहा था,और व्यक्तित्व में एक तेज दिखाई पड़ रहा था,
“दिखने में तो ये अच्छे घर का लगता है ,और इसका बेटा तो इसके जैसे बिलकुल नहीं दिखता देखो ना ,”डॉ की बात सुनकर बाली हसने लगा ,डॉ भी हसने लगा ,
“अरे डॉ साहब आप भी ना ,हमेशा चीजो को शक की निगाह से देखते है ,मैं इसके बाप को कई सालो से जानता हु ,जब से वो शहर छोड़ कर इधर बसा ,अच्चा आदमी है सीधा साधा सा मेहनती है ,बेचारा ”
“सीधा साधा ,ह्म्म्म चहरे से तो लगता नहीं “डॉ ने हलके से कहा ,
“मिलवाओगे नहीं “डॉ ने बाली से कहा ,

“हा हा क्यों नहीं ,अरे अजय जरा किशोरीलाल को बुला तो .”अजय जाकर उसे बुलाता है वो आकर हाथ जोड़े खड़ा हो जाता है ,
“ये डॉ साहब है ,हमारे खास दोस्त है शहर से आये है ,”किशोरीलाल हाथ जोड़कर नमस्कार करता है,
डॉ पास पड़े एक कुर्सी को दिखाते हुए कहते है “अरे बैठो बैठो ”
किशोरीलाल हाथ जोड़ता हुआ “अरे साहब आप लोगो के साथ बैठे ये हमारी औकात कहा ,”डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है ,
“अरे आज तो तुम दुल्हे के बाप हो बैठो ना यार “डॉ जिद करके कहता है ,वो बाली की ओर देखता है ,बाली भी उसे बैठने का इशारा करता है,वो डरते हुए वहा बैठ जाता है,
“तो तुम शहर में काम करते थे ,”डॉ ने सवाल किया ,
“जी साहब ”
“कहा ”
“जी वो …..

वो शारदा काटन मिल में ,मिल बंद हुआ तो काम की तलाश में इधर आ गया ,”
“ह्म्म्म कहा के रहने वाले हो ,”
“जी बिहार का ”
“लहजे से तो बिहारी नहीं लगते ,”
“वो ……वो बचपन से ही मिल में काम कर रहा हु ना ,बचपन में घर से भाग गया था और यहाँ आकर काम करने लगा फिर कभी वापस ही नहीं गया ,”

“हम्मम्मम्म पहली पत्नी कहा की थी तुम्हारी “थोड़ी देर एक सन्नाटा सा हो जाता है,किशोरीलाल के आँखों में आंसू आ जाता है ,बाली को लगता है की डॉ कुछ जादा ही सवाल जवाब कर रहे है ,वो इशारे में डॉ को रुकने को कहते है वही डॉ बाली को बस चुप रहने को कहता है ,
“पता नहीं कहा की थी मिल में मजदूरी करती थी ,उसका भी कोई नहीं था और मेरा भी कोई नहीं था तो मैंने उससे शादी कर ली ,पर मिल में लगी आग से वो ,”वो फफक कर रो पड़ा ,डॉ को याद आया सालो पहले मिल में आग लगी थी ,आग छोटी थी और एक औरत के जलने की खबर आई थी जिससे बहुत बवाल भी मचा था ,
“लगता है बहुत ही जादा प्यार करते थे अपनी बीवी से ,”
“जी हा ,मुझे माफ़ कर दीजिये की मैं इस तरह ,”
“नहीं नहीं मुझे माफ़ करो की मैंने तुम्हारे जख्मो को कुरेद दिया ,”डॉ उसके कंधे पर अपना हाथ रखते है और उसे शांत करने लगते है ,

अध्याय 18

आज विजय बहुत ही बेचैन था ,बेचैनी थी की आज हमेशा उसके साथ रहने वाली उसकी आईटम किसी और का बिस्तर गर्म करेगी ,ये सोचकर भी उसका शारीर सिहर उठता था,वो रेणुका से प्यार तो नहीं करता था पर ,,,,पर ये क्या था,आज मेरी भी उसे बहुत भाव दे रही थी पर उसे उसके तरफ भी कोई आकर्षण नहीं हो रहा था ,लगभग 12 बजे ही शादी का कार्यक्रम खत्म हुआ था और लड़की की बिदाई कर दि गयी थी ,एक दो दिन रेणुका को अपने ससुराल में रहना था फिर वो वापस हवेली पर आ जाती,विजय बिदाई के बाद ही किशन के साथ पिने चला गया ,थोड़ी देर में ही किशन भी वहा से चला गया और विजय ने कुछ जादा ही पि ली थी ,वो घर के बहार बने गेरेज में बैठा पि रहा था की उसे किसी के पायलो की आवाज सुनाई दि,सामने देखा तो सोनल और किशन खड़े थे किशन ने उसकी हालत देखकर सोनल को बुला लिया क्योकि वही थी जो उसे कुछ समझा सकती थी जबकि किशन तो उसे समझाकर थक चूका था,सोनल को देखते ही उसने अपना ग्लास छिपाने की नाकाम कोसिस की और किशन को घुर के देखा ,किशन ने हसकर उसे देखा ,
“लो दीदी अब आप ही सम्हालो मैं चला बहुत नीद आ रही है मुझे ,”सोनल ने विजय को गुस्से से घुर की विजय का आधा नशा तो जाता ही रहा ,सोनल अभी भी अपने लहंगा चोली में ही थी वो विजय के पास आकर खड़ी हो गयी,
“क्या देवदास बनकर बैठा है यहाँ पर चल उठ “उसने विजय का हाथ पकड़कर उठाने की कोसिस की ,
“तू भी बैठ ना यहाँ ,या चले जा मुझे पिने दे आज “विजय को उठाना इतना आसान तो नहीं था,
“क्या बैठ जाऊ,चल ना भाई,चल एक काम कर यहाँ से चल,ओफ्फ कितने मच्छर है यहाँ पर कितनी गन्दगी है यहाँ बैठा पि रहा है ,चल तेरे कमरे में चलते है

ठीक वहा बैठकर पि लेना जितना पीना है ,और मैं रात भर तेरे साथ बैठ जाउंगी,”
“आज की रात तो बैठ जाएगी बाकि रातो का क्या होगा,”विजय अपना सर उठाकर हसता है ,सोनल को गुस्सा तो आता है पर इस हालत में उसे कुछ कहना भी उसे उचित नहीं लगता,
“तू चल रहा है की नहीं ,भाई को बुलाऊ क्या “सोनल झूठा गुस्सा दिखाकर अपना तुरुप का इक्का फेकती है ,विजय भईया का नाम सुनकर ही सहम जाता है ,और बड़ी मज़बूरी सा उठता है ,सोनल उसे अपना सहारा देकर उठती है ,उसका वजन इतना था की बेचारी फुल सी सोनल दब सी जा रही थी ,विजय अपने को सम्हालता है और सोनल को अपने बांहों में कस लेता है ,और पास रखी बोतल को पकड़कर सोनल को दे देता है,
“तेरा भाई इतना भी कमजोर नहीं है की उसे सहारे की जरुरत पड़े मेरी जान ,तू बस ये बोतल सम्हाल “सोनल मुस्कुराते हुए वो बोतल पकड़ लेती है और विजय उसे अपने बांहों में उठा लेता है ,
“आउच भाई क्या कर रहा है ,नशे में है खुद भी गिरेगा और मुझे भी गिरा देगा,”सोनल एक मुस्कान लाकर विजय के सर को सहलाती है ,
“तेरा भाई तुझे कुछ नहीं होने देगा मेरी जान ,नशे में हु लेकिन इतना भी नहीं की अपनी फुल सी गुडिया को नहीं सम्हाल पाऊ “सोनल बस हस देती है ,विजय ने शायद पहली बार उसे गुडिया कहा था,
“ओह तो मैं आपके लिए गुडिया हो गयी ,”सोनल हस्ते हुए कहती है ,
“चल बे मुझे और पीना है ,कहा चले तेरे रूम या मेरे रूम ”
“तुम्हारे ही रूम चलो ,मेरा रूम तो बिखरा होगा अभी “विजय उसे उठाकर अपने रूम ले जाता है और बिस्तर पर डाल देता है ,उसके हाथो से शराब की बोतल लेकर वो एक घुट सीधे ही लगाता है ,सोनल अपने भाई के इस रूप को देखकर उदास हो जाती है और उसके आँखों में आंसू की कुछ बुँदे तैर जाती है ,जिसका आभास विजय को भी हो जाता है ,वो अपने चहरे को सोनल के चहरे के पास लाता है ,सोनल को उसके मुह से आते शराब की गंध से उबाई आती है पर अपने भाई के चहरे को देखकर वो उसी में खो सी जाती है ,विजय अपने होठो से उसके आंसुओ को पि लेता है और शराब को सोनल के मुह में लगार्ता है,सोनल उठकर बैठ जाती है ,और अपने आंसुओ को पोछकर उसे घूरती है विजय ना जाने क्या कर रहा था उसे भी इसका इल्म नहीं था,

“पागल हो गया है क्या कभी देखा है मुझे शराब पीते हुए,”विजय उसे नशीली आँखों से देखता है और
“ओह मुझे लगा की रेणुका है ,”सोनल के चहरे में झूठा गुस्सा आ जाता है क्योकी वो जानती है की विजय मजाक कर रहा है ,विजय के चहरे में भी एक मुस्कान आ जाती है ,वो उसे पलटा कर उसके कमर के ऊपर बैठ जाती है,
“तुझे आज बहुत कुछ लग रहा है अब बताती हु तुझे ,”सोनल अपने उंगलियों को विजय के कमर के पास लाकर उसे गुदगुदाती है वो जानती थी की ये विजय की कमजोरी था ,विजय हसने लगत्ता और छूटने के लिए छटपटाने लगता है ,
“हा हा हा हा माफ़ कर दे बहन अब नहीं बोलूँगा कुछ हा अह प्लीज् ना ओह प्लीज् ना हा हा अह

“सोनल उसे बड़े मजबूती से पकडे हुई थी और गुदगुदा रही थी ,विजय को जब बर्दास्त नहीं होता तो वो शराब की बोतल को छोड़कर सोनल के कमर को पकड़ता है और उसे पलटा कर अपने निचे ला देता है सोनल को समझ आ चूका होता की अब बाजी विजय के हाथो में है और उसकी ताकत के सामने उसकी कुछ भी नहीं चलेगी,वो मुस्कुराती हुई अपने को उसके हवाले कर देती है ,विजय उसके प्यारे से चहरे को देखता है उसने उसे पलटाया था की वो उसे गुदगुदाए और अपना बदला ले पर सोनल के प्यारे से चहरे को देखकर वो सबकुछ भूलकर बस उसे ही देखने लगा ,सोनल के मुस्कुराते हुए फडफडाते हुए होठ ,और उसकी लालिमा उसके माथे का टिका ,उसका गोरा चहरा और बड़ी बड़ी मासूम सी आँखे ,काले पलक नैनों के निचे का वो काजल ,वाह ,………………..
“कितनी प्यारी है तू मेरी जान ,”विजय ने अपने नशीले बोझिल आँखों से अपने जान की खूबसूरती का दीदार किया ,सोनल भी मुस्कुरा उठी उसने अपने हाथो को विजय के सर पर रख दिया और उसे अपने ओर खीचा ,विजय उससे गले लग कर उसे अपनी बांहों में भर लिया और सर उठाकर उसके गालो में एक भीगा सा किस दे दिया ,सोनल उसका चहरा सहलाने लगी ,विजय ने उसके नाक से अपनी नाक रगड़ी और उसके होठो पर भी एक किस कर लिया ,सोनल के होठो पर मुसकान गहरी हो गयी ,लेकिन विजय ने अब उसके निचले होठो को अपने होठो पर ले लिया और उसे चूसने लगा ,सोनल की आँखे बंद हो गयी और मुस्कान ने एक बेचैनी का रूप ले लिया ,उसके मुख से एक आह निकली और उसने अपने हाथो पर जोर देकर विजय को अपने से अलग किया .

“आअह्ह्ह्ह भाई ये क्या कर रहे हो,”जैसे विजय को होश आया वो जल्दी से उसे छोड़ा और उठाने को हुआ पर सोनल ने अपने हाथो से उसके सर को दबा दिया ,
“सॉरी बहन वो ….

”सोनल फिर मुस्कुरा पड़ी
“सॉरी की क्या बात है ऐसे बहुत अच्छा था,मुझे तो पसंद आया ,”विजय भी मुस्कुरा दिया
“तो मुझे हटाई क्यों ”
“तो क्या करती तू भाई है मेरा समझे कमीने कही के “उसने प्यार से कहा
“जब तक तू है तब तक तो मुझे सम्हाल लेगी फिर मैं क्या करूँगा ,रेणुका के जाने का पता नहीं क्यों बहुत दुःख हो रहा है “विजय में अपना मुह बनाकर कहा की सोनल को हसी आ गयी,
“तुझे दुःख नहीं हो रहा बेटा तेरी जल रही है की अब तेरे आईटम की कोई और लेगा ,”सोनल हसने लगी ,विजय ने उसकी कमर कसकर दबाया और अपनी ओर खीचा
“तेरी तो ”
“आह हा हा हा ,”सोनल ने अपना हाथ उसके सर पर दबाया ,
“मुझे किस कर ना भाई जैसा कर रहा था ,”
“क्यों तू तो मेरी बहन है ना “सोनल फिर हस पड़ी
“तो क्या हुआ जब बहन बोले तो करना चाहिए समझे “सोनल इतराते हुए बोली
“भाग जा तू ,,नहीं करूँगा किस तुझे अब “सोनल ने आँखे चौड़ी की वही विजय झूठे गुस्से में भी हस पड़ा ,सोनल ने उसे अपनी और खीचा
“साले देखती हु कैसे नहीं करेगा “सोनल उसका चहरा अपने ओर खीचने लगी और विजय हसता हुआ अपने सर को इधर उधर करने लगा ,सोनल को भी हसी आ रही थी,और वो हस्ते हुए उसके होठो को अपने होठो तक लाने की कोसिस करने लगी पर वो जल्द ही थक गयी और रोनी सी सूरत बनाकर उसे छोड़ लेट गयी ,विजय को अपनी प्यारी बहन की ये सूरत पसंद नहीं आई और उसने अपने होठो को उसके होठो के पास लाकर रोक दिया सोनल मुस्कुरा उठी और उसके गले में अपनी बांहे डाल दि ,पर ना ही विजय ने ना ही सोनल ने होठो को मिलाया वो बस एक दुसरे के होठो की गर्मी को अपने होठो से महसूस करने लगे ,विजय थोडा और निचे हुआ तो उसके होठ सोनल के होठो पर टकरा गए ,पर जुड़े नहीं ,
“जनाब अब छू भी लीजिये ,या हमें ही पहले करना पड़ेगा ,”सोनल ने मुस्कुराते हुए कहा ,
“कुछ करना नहीं है जान बस होने दे ना ,तू बहन है मेरी तुझे प्यार कर सकता हु जितना तू चाहे जैसा तू चाहे पर बस प्यार हो तभी और प्यार होता है किया नहीं जाता ,ये तू ही कहती थी ना ,”

“हा मेरे समझदार भाई ,”सोनल उसके सर को दबाती है और अपने होठो से उसके निचले होठो को चूसने लगती है ,विजय अब भी कुछ नहीं कर रहा था,सोनल ने आखे बंद कर दि ,विजय ने बस कुछ देर तक अपनी बहन के होठो को फिल किया और जब उससे रहा नहीं गया तो उसने अपने हाथो को उसके सर के पीछे किया और उसके होठो पर अपने होठो को भर दिया सोनल के मुह से एक गहरी सांस निकली और उसने भी अपने बांहों का घेरा जकड लिया और विजय को जोर से अपनी ओर खीच लिया ,विजय ने अपने होठो को उसके होठो में घुसा दिया और दोनों की आँखे बंद हो गयी दोनों ही बस एक दुसरे की नाजुकता और अपने लिए प्रेम को महसूस कर रहे थे ,…दो होठ ही नहीं बल्कि दो जाने मिल गयी थी,दो सांसे मिल गयी थी ,दो धड़कने मिल गयी थी,दो जस्बात मिल चुके थे,करने को कुछ भी नहीं था बस जो था वो प्यार था ,बस एक

दूजे में खो जाने की आशा और एक ही चाह….वो बहुत ही धीरे धीरे एक दुसरे के होठो को चूम रहे थे ,जब वो अलग हुए तो दोनों के ही आँखों में आसू की बुँदे थी,दोनों नाम आँखों से एक दूजे को देखते है,आँखे नाम थी और चहरे पर मुस्कान एक अजीब सी चमक चहरे में था एक संतुष्टि का भाव उन्हें घेरे हुए था,
दोनों फिर एक दुसरे को देखते है और विजय अपने होठो को उसके पास लाता है और उसके होठो पर हलके से किस कर उसे अपने बांहों में समां कर अपनी ओर खिचता है सोनल भी अपने भाई से लिपट कर उसके चहरे को देखते हुए उसके सांसो से अपनी सांसे मिलाती हुई निढल सी उसकी बांहों में सो जाती है ,,,,,………..

अध्याय 19

इधर अजय के कमरे में ,
निधि चम् चम् करती हुई कमरे में आती है तब तक अजय नहीं आया हुआ होता ,वो बचे खुचे काम निपटा कर कमरे में प्रवेश करता है कमरे में निधि को देखकर उसके चहरे में एक मुस्कान आ जाती है ,वो बहुत ही थका हुआ होता है और निधि दर्पण के सामने खड़ी हुई अपने को निहार रही थी ,अजय भी अपने कपडे निकल कर एक निकर पहन लेता है निधि को देखता हुआ हसता है ,
“अभी तक अपने को देख रही है मेरी बहन “निधि उसे देखकर एक हलकी सी हसी में हस्ती है और उसके पास जाती है अजय अपने कपडे उतर रहा होता है ,

“भाई बहुत थक गयी हु आज तो मैं ,मैं नहाने जा रही हु आप भी चलोगे क्या ,”
“नहीं अभी थोड़ी एक्सेरसयिस कर लेता हु फिर नहाऊंगा,”
“ओके तो जल्दी से करो फिर दोनों साथ नहायेंगे,”अजय उसकी बात सुनकर हलके से मुस्कुराता है ,लेकिन कुछ कहता नहीं क्योकि उसे पता था की अगर निधि ने कह दिया तो कह दिया ,अजय जाकर थोड़ी मोड़ी एकसरसाइज करता है ,जब पसीने से लथपथ हो जाता है तब थोड़ी देर के लिए हवा में बैठ कर अपने पसीने को सुखा रहा होता है ,की निधि भी उसके पास आकार बैठ जाती है ,और उससे लिपट जाती है ,
“अरे तू कपडे तो चेंज कर ले ,अभी तक इतने भरी कपड़ो में घूम रही है ,”निधि हसते हुए वहा से उठ कर अपने कमरे में चली जाती है वापस आने पर वो एक काली nighty पहने थी ,अजय को पता नहीं कुछ दिनों से क्या हो जा रहा था की वो अपने बहन के जिस्म से नजरे ही नहीं हटा पता था ,उसका निधि के लिए प्यार तो सबको ही -पता था पर यु जो उसे एक आकर्षण की अनुभूति हो रही थी वो उसके समझ में नहीं आ रही थी,निधि मुस्कुराती हुई उसके पास जाती है ,अजय भी नहाने को तैयार हो जाता है ,अजय बाथरूम में जाकर एक टब में लेट जाते है ,हलके गर्म पानी में उसे बहुत सुकून मिल रहा था ,वो निधि को देखकर पास आने का इशारा किया निधि ने अपनी nighty वही उतर कर रख दिया और नग्गे है आकर अजय के ऊपर लेट गयी ,निधि का ऐसा करना अजय के लिए कोई नयी बात तो नहीं थी पर उसे निधि के अंगो का जो अनुभव हो रहा था वो उसके लिए बहुत ही आश्चर्य जनक था ,क्योकि वो निधि के नग्गे और गुप्त अंगो को छूने से बच रहा था ,आज तक उसकी कोई भी लड़की से दोस्ती या

महोब्बत नहीं रही ,उसने नारी को जाना ही नहीं था ,जो उसे पता था वो अपनी बहनों से या मौसी से पर वो केवल और केवल प्यार ही था ,

अजय की उम्र तो अब शादी की हो चली थी उसके भाइयो का सम्बन्ध कई लडकियों से था ,उसे भी वासना का पता था ,और उस क्रिया का भी जो एक मर्द और ओरत के बीच होता है पर वो निधि को एक बच्ची ही मानता था ,पर ना जाने क्यों उसे लगने लगा था की अब समय आ गया है की निधि से दुरी बनायीं जाय ,वो पगली शर्म से अनजान थी ,लेकिन अजय के लिए ये भी आसान नहीं था,निधि से दुरी वो बना भी ले लेकिन निधि ,निधि उससे दूर नहीं हो सकती …..
निधि अपने भाई की विशाल छाती पर सर रखे अपने शारीर को बस उसके हवाले कर लेटी थी ,उसके स्तनों की नुकीली गोलाईया अजय के सीने में दब रही थी वही पानी से भीगा उसका चिकना बदन अजय के बालो से भरे शारीर पर रगड़ खा रहा था ,ऐसे तो ना ही अजय को ना ही निधि को इससे कोई भी आपत्ति थी ,ना ही उनके बीच वासना की कोई झलकी भी थी पर अजय ने ठान लिया था की इस बारे में वो निधि से बात करेगा ,
“निधि ,…..निधि सो गयी क्या ,”
“नहीं भाई ,बस इतना अच्छा लगा रहा है की कुछ बोलने का मन नहीं कर रहा ,”निधि ने अचानक हलचल की और अजय से अपने को रगडा,अजय उसे अपनी मजबूत बांहों में घेरा हुआ उसके सर को सहला रहा था वही निधि अपने स्तनों को उसके बालो से भरे छाती पर रगड़ रही थी ,इसमें तनिक भर भी वासना नहीं थी पर एक अजीब सा सुकून दोनों को मिल रहा था ,
“सुन ना मेरी जान ,तू अब बड़ी हो गयी है ,अब इस तरह से हमारा रहना ठीक नहीं है ,”अजय ने डरते हुए कहा क्योकि उसे निधि का गुस्सा नहीं झेलना था ,निधि भी सर उठाकर उसे देखती है ,

“क्या ऐसे रहना मतलब ”
“मतलब की नंगे रहना ,मैं तेरा भाई हु ,”
निधि ने हलके से सर उठाकर उसे देखा
“तो ,तो क्या हुआ की आप मेरे भाई हो ”
“अब तू बड़ी हो गयी है बहन ”
“तो ,”निधि ने रूखे हुए स्वर में कहा
“तो अब तुझे और मुझे ऐसे नहीं रहना चाहिए और क्या ,”
“क्यों “निधि के सवाल थे बड़े ही आसान पर आसान से सवालो के उत्तर देना कभी कभी बहुत मुस्किल हो जाते है ,
“क्यों क्या बोला तो बड़े हो गए है ,”
“तो “निधि ने मुस्कुराते हुए कहा
“तो ऐसे नहीं रहना चाहिए ,”अजय ने प्यार से उसके सर को सहलाते हुए कहा ,
“क्यों “निधि की मुस्कान और बड गयी थी ,
“अरे क्यों क्या यार बोल तो रहा हु की अब हम लोग बड़े हो गए है ,अब तू भी बच्ची नहीं रही बड़ी हो गयी है “अजय ने हलके से झल्लाते हुए कहा
“तो ……………..

”एक शांति सी छा गयी और अजय ने निधि को घुर के देखा और निधि खिलखिला कर हस पड़ी ,अपनी गुडिया को हसते हुए देखकर फिर अजय सब भूल गया
“खरगोस कही की “अजय ने उसके बालो को पकड़कर उसका सर उठाया और उसके गालो में किस करने लगा ,निधि भी हसते हुए अपने भाई के प्यार का मजा लेने लगी ,दोनों के शारीर गिले होने के कारण आपस में बखूबी फिसल रहे थे अजय के हाथ उसके कुल्हो पर चले गए और वो उसे सहलाने लगा ,उसका हाथ अपने निताम्भो पर महसूस कर निधि को भी बहुत अच्छा लगने लगा और वो ऊपर उठाकर अजय के होठो को अपने दांतों से काट लिया ,अजय के चहरे पर एक मुस्कान ने घर कर लिया वो उसके बालो को पकड़कर अपनी ओर खीचा और उसके होठो पर अपने दांत लगाने लगा निधि ने अपने चहरे को हस्ते हुए हटा लिया और पलट गयी अजय का हाथ फिसलता हुआ उसके योनी के ऊपर आ गया वो उसके योनी के बालो को सहला रहा था वो की पानी से भीगे होने के बाद भी शायद घने होने के कारण पूरी तरह से भीगे नहीं थे ,अजय ने अपना हाथ ऊपर लाया जो सीधे उसके पेट से होता हुआ उसकी स्तनों के पहाड़ो पर आकर रुक गया उसके हाथ बिना किसी प्रयास के ही चल रहे थे वही निधि भी अपने भाई के प्यार में डूबी हुई उसके चहरे हो अपने बांहों में समायी अजय के गालो पर अपने चुम्मानो की बारिश कर रही थी ,

निधि के होठ फिसल कर अजय के होठो के पास आता है और दोनों के गिले होठ आपस में मिल जाते है ,थोड़ी देर तो यु ही दोनों आपस में अपने होठो को रगड़ते है पर अजय के हाथो के स्तनों तक पहुचने और उसके स्तनों को हलके हाथो से सहलाने से निधि को इतना मजा आता है की उसके होठ अनायास ही खुल जाते है और अजय की जीभ मानो इसी क्षण की प्रतीक्षा में था वो उसके होठो के अंदर चला जाता है निधि बस आँखे बंद किये पहली बार घट रहे इस सुखद आभास को महसूस कर रही थी वही अजय भी अपनी सबसे प्यारी बहन के होठो को चूस रहा था ,दोनों की आँखे बंद थे और दोनों ही प्यार के सागर की लगारो में झूम रहे थे उन्हें समाज के बंदिशों का नहीं पता था ना ही वो जानना भी चाहते थे ,सही गलत के उनके लिए कुछ भी मायने नहीं रह गए थे ,वो तो बस एक ही भाष को समझने लगे थे वो थी प्यार की भाषा ……निधि ने भी अपने भाई के जीभ का स्वागत किया और अपने होठो से उसके जीभ को जकड कर चूसने लगी,पता नहीं इस खेल में एक बात और हुई की अजय ने निधि के स्तनों को हलके हाथो की जगह थोड़ी जोर से दबाया ये भी अजय ने जानबूझ के नहीं किया था पर निधि और अजय के ऊपर इसका सीधा प्रभाव हुआ और निधि ने अजय के सर को जोर से जकड लिया वही अजय के लिंग में भी एक हलचल सी हो गयी ,वो पूरी तरह से अकड़े इससे पहले ही दोनों का चुम्मन समाप्त हुआ और दोनों एक दुसरे को देखकर मुस्कुराने लगे ,निधि ने नजर उठा कर जैसे ही अजय के मुस्कुराते हुए चहरे को देखा तो निधि शर्मा गयी और अजय के सीने में जा लगी ,थोड़ी देर तक ऐसे ही

लेटे रहे ,
“भईया ये क्या था ,बहुत अच्छा था ”

अजय क्या कहता की ये क्या था उसे तो खुद भी इसका पता नहीं था की ये क्या था ,
“ये किस था बहन और क्या था ,और चल अब सोते है बहुत रात हो गयी है ,”निधि ने अजय को और जोरो से पकड़ लिया
“नहीं मुझे नहीं सोना यही अच्छा लग रहा है मुझे आपकी बांहों में ”
अजय उसके सर को सहलाता है और प्यार से उसकी ओर देखता है वो एक मासूम से बच्चे की तरह उससे लिपटे हुए सो रही थी ,अजय उसकी इस ख़ुशी में खलल नहीं डालना चाह रहा था ,इसलिए वो उसे ऐसे ही छोड़ देता है और उसके बालो को सहलाता हुआ अपनी भी आँखे बंद कर लेता है ,उसकी आँखे कब लगती है उसे भी पता नहीं चलता ,जब उसकी नींद खुलती है तो वो उठकर निधि को पोछता है और उसे उठाकर अपने बिस्तर पर लिटाता है ,………..

अध्याय 20

आज सुबह कुछ अजीब थी ,ना जाने कल रात क्या हुआ था की एक मदहोशी ने विजय और अजय का अपने बहनों से सम्बन्ध की परिभाषा ही बदल दि थी ,वो आज भी उन्हें उतना ही प्यार करते थे जितना की पहले किया करते थे पर बस प्यार करने का तरीका बदल गया था,वो अब और जादा अपने प्यार की गहराईयो ने जा सकते थे ,
शादी के खत्म होने से घर में एक तूफान के बाद आया सन्नाटा था वही अजय को आज डॉ और मेरी की मेहमान नवाजी करनी थी ,नाश्ते के टेबल पर आज सभी मौजूद थे जो कभी कभी ही होता था,मेरी विजय को देख देख कर मुस्कुरा रही थी ,वही किशन सुमन से आँखे ही नहीं मिला पा रहा था पर सुमन जरुर उसे चुपके चुपके देख लिया कर रही थी,सीता मौसी घर के मुखिया के खुर्सी में बैठी थी उसके बाजु में बाली फिर डॉ और मेरी बाली के सामने अजय और विजय ,चंपा समेत घर की सभी लडकिय उन्हें नाश्ता दे रही थी और पास ही खड़ी थी ,निधि अभी तक वहा नहीं पहुची थी,सीता मौसी का स्थान इस घर में बहुत जादा था माना की वो ठाकुर नहीं थी पर उसको इतना महत्व आखिर कारन क्या था ,कारन तो सभी को पता था ,की उनके बेटे ने वीर की जान बचाने के लिए अपने सीने में गोली खायी थी ,सीता को वीर और बाली भी अपनी माँ जैसा मानते थे ,

डॉ ने आखिर वो पुरानी बात छेड़ ही दि ,वो बाली की तरफ देखते हुए बोले ,
“क्यों बाली कलवा कही दिखाई नहीं दे रहा है ,”कलवा का नाम सुनते ही सभी थोड़ी देर के लिए चुप हो गए ,अजय ने सीता के तरफ देखा जिसकी आँखों में पानी आ चूका था ,बाली भी थोडा उदास सा हो गया आखिर उसने भी तो हमेशा ही कलावा को अपने छोटे भाई की तरह ही माना था,
“डॉ साहब वो यहाँ नहीं रहता कुछ सालो से पता नहीं उसे क्या हुआ है ,घर की तरफ आता ही नहीं यही पास में जो जंगल है वहा एक पहाड़ पर छोटी सी कुटिया बना कर रहता है ,कहता है सब कुछ माया है ,और मुझे इसमें नहीं पड़ना है ,सन्यासी बन गया है ,साला “बाली ने साला तो कह दिया पर अचानक उसे अहसास हुआ की सीता भी वही बैठी है और वो उसे देखकर झेप गया ,सीता ने बाली को देखकर हलके से मुस्कुरा दि ,पर

उसके चहरे का वो दर्द जो एक माँ के अपने बेटे से बिछड़ने पर होता है उसके चहरे पर साफ़ दिखाई दे रहे थे ,अजय ने अपने हाथो को बड़ा कर सीता के कंधे पर रख दिया ,जिसे सीता ने चूम लिया ,उसके आँखों में अतीत की सारी बाते एकाएक ही तैर गयी ,

बात तब की थी जब जब 9 अगस्त 1942 को भारत छोडो आन्दोलन चलाया गया ,सीता के पिता ने उसमे बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया जोकि तब बच्चे ही थे ,,देश आजाद हुआ और सीता ने भी एक नए भारत को बनते देखा ,उसकी शादी जमीदार तिवारियो के खानदान के ही एक व्यक्ति से हुई जोकि खुद भी तिवारी था और जमीदारो का वफादार था ,सीता के पिता एक समाज सेवक थे और हमेशा से गरीबो और पिछडो की मदद को तैयार रहते थे ,उन्ही के गाव में ठाकुरों का परिवार था जोकी गरीबो की मदद को हमेशा तैयार रहता ,वीर और बाली के पिता सीता के पिता के सहयोगी बन चुके थे ,बात कुछ खासी जादा नहीं बढही थी जब तक की 1967 में नक्सलबाड़ी की घटना नहीं हुई ,सीता अपने पिता के आदर्शो और पति की वफादारी के बीच पिसती रही थी ,वीर और बाली जब 5-6 साल के थे तब सीता ने भी दो बच्चो को जन्म दिया जिनका नाम कलवा और बजरंगी रखा गया ,1967 में नक्सलबाड़ी की घटना हुई जहाँ भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 मे सत्ता के खिलाफ़ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की। मजूमदार चीन के कम्यूनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बहुत बड़े प्रशंसकों में से थे और उनका मानना था कि भारतीय मज़दूरों और किसानों की दुर्दशा के लिये सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार हैं जिसकी वजह से उच्च वर्गों का शासन तंत्र और फलस्वरुप कृषितंत्र पर वर्चस्व स्थापित हो गया है। इस न्यायहीन दमनकारी वर्चस्व को केवल सशस्त्र क्रांति से ही समाप्त किया जा सकता है।

(विकिपीडिया से लिया गया है)

इस घटना का प्रभाव ठाकुरों पर भी दिखाई देने लगा और उन्होंने भी जमीदारो के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत कर दि ,बात बढ़ने लगी और जमीदारो ने आन्दोलन को कुचलने में अपनी पूरी ताकत झोक दि ,सबसे पहले उन्होंने इसके नेता की हत्या की जो की बाली और वीर के माता पिता थे ,इससे सीता के पिता को दुःख तो हुआ पर वो अहिंसा का रास्ता अपनाने वालो में से थे उन्होंने ठाकुरों को रोका भी था पर कोई फायदा नहीं हुआ ,आखिरकार वही हुआ जिसका डर था ,भयानक नरसंहार कई मासूम और निर्दोष लोगो मारे गए ,जिसका पूरा जिम्मा सीता के पति पर था ,सीता उसके इस दानवी स्वरुप को देख उससे नफरत करने लगी लेकिन लेकिन फिर भी वो वहा से जा नहीं पायी,उसके पिता ने उसे लाने की कोसिस की और आख़िरकार 18 साल की सीता अपने एक बच्चे कलवा के साथ अपने पिता के पास चली आई लेकिन बजरंगी को उसका पति छोड़ने को तैयार नहीं हुआ ,बजरंगी बिना माँ के और फिर बिना बाप के बड़ा हुआ और तिवारियो का सबसे बड़ा वफादार साबित हुआ वही सीता के पिता के रहते और उनके मौत के बाद भी सीता ने ही वीर बाली और कलवा को शेरो की तरह बड़ा किया ,वीर और बाली की जोड़ी ने जहा जमीदारो का वर्चस्व खत्म कर दिया वही कलवा उनका सबसे बड़ा वफादार दोस्त भाई और लगभग सेनापति बनकर उभरा ,जिसने एक बार वीर को बचने के लिए गोली तक खायी और ना जाने कितनी चोटे खायी ,आज बजरंगी तो तिवारियो के यहाँ उनकी सेवा में था पर कलवा शांति की तलाश में ,,,,,,,,,,,,,……..डॉ की आवाज से सीता अपने सपने से बहार आई ,
“ह्म्म्म चलो आज कलवा से मिल कर आते है ,क्यों अजय चलोगे हमारे साथ “अजय भी उसी खयालो में डूबा था जिसमे सीता ,वो अचानक हुए प्रश्नों से हडबडा गया ,और वो कुछ बोल पाता उससे पहले ही निधि की आवाज आई ,
“वाओ कलवा चाचा के पास मैं भी जाउंगी “निधि एक हाफ निकर और टी-शर्ट में जो की घर में उसका परिधान ही था ,में निचे आई चहरे से लग रहा था अभी अभी जगी हो ,वो आकर सीधे अजय के पीछे खड़ी हो चुकी थी ,जब डॉ ने सवाल किया था ,और जवाब देते हुए उसने अजय के गले में अपना हाथ डाल दिया ,अजय ने मुस्कुराते हुए देखा वो आकार अजय की गोदी में बैठ गयी और उसके ही प्लेट से नाश्ता करने लगी ,उसकी इस बचकाना हरकत को देख कर सभी के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,

“कब बड़ी होगी रे मेरी ये गुडिया ,”सीता मौसी ने अपने हाथ को निधि के सर पर फेरते हुए कहा ,……..
कालवा से मिलने जाने सभी तैयार हो चुके थे ,लेकिन विजय और किशन को कुछ काम आ गया था ,वही मेरी ने तबियत ख़राब होने का बहाना बनाया और सुमन को मेरी की देखभाल के लिए छोड़ दिया गया ,निधि ,डॉ,अजय ,सोनल रानी और बाली तैयार होकर कलवा से मिलने चल दिए …………..

अध्याय 21

सभी के जाने के बाद विजय और किशन ही बचे थे ,मेरी और सुमन मेरी के कमरे में चले गए क्योकि मेरी ने कहा की उसके सर में दर्द हो रहा है ,
“भाई आज तू अकेला ही चले जा ना ,मेरे सर में थोडा दर्द हो रहा है,”विजय ने अपना सर पकड़ते हुए कहा ,किशन ने एक बार विजय को देखा ,
“क्या बात है आपका और मेरी मेडम का सर एक साथ दर्द दे रहा है ,”विजय के चहरे में भी एक मुस्कान आ गयी ,जिसे किशन समझ चूका था ,

“भाई बचकर वो हमारी मेहमान है ,कोई उलटी सीधी हरकत मर कर देना ”
“अबे साले हरकत तो पहले ही हो चुकी है आज तो घमासान होगा ,”विजय हसने लगा ,किशन को कुछ समझ आ चूका था की बंदी इससे पट चुकी है ,
“ओके भाई ऐश करो ,मैं भी एक दो घंटे में आ जाऊंगा “किशन के जाने के बाद विजय ने जल्दी से मेरी के रूम का रुख किया वहा सुमन को देखकर वो थोडा उदास हो गया ,
“अरे विजय आओ आओ तुम्हारा ही इन्तजार कर रही थी ,”मेरी ने बड़े ही मादक अंदाज में उसका स्वागत किया सुमन ने दोनों के चहरे के भावों को पढ़ लिया वो नर्वस सी हो गयी ,

“साला पूरा परिवार ही ठरकी है इनका “सुमन ने मन में ही सोचा विजय आकर मेरी के साथ एक खुर्सी में बैठ गया मेरी ने एक लाल रंग की साड़ी पहने हुए थी ,जो हमेशा की तरह उसके अंगो को छुपा कम और दिखा जादा रहा था,उसके नीले कलर के ब्लाउज में उसके बड़े बड़े स्तनों को समाने की ताकत नहीं थी फिर भी बेचारी पूरी तरह फैले हुए उन्हें समाने की कोसिस कर रहे थे,अंदर कोई अन्तःवस्त्र नहीं पहने होने के कारन उसके निप्पल का उभार साफ दिख रहा था,मेरी पास की खुर्सी पर बैठी थी और उसके पैर सुमन के हाथो में था जो की निचे बैठे उन्हें दबा रही थी ,सुमन उसके एडियो की मसाज कर रही थी ,विजय ललचाई नजरो से मेरी के स्तनों को देखता है पर सुमन का लिहाज उसे कुछ करने या कहने नहीं देता ,
“ये सुमन बहुत एक्सपर्ट है कितने अच्छे से मसाज करती है की मेरे सर का दर्द पूरी तरह से खत्म हो गया ,”
विजय में सुमन को देखा वो अपने सर निचे किये हुए बड़े प्यार से मसाज कर रही थी ,विजय की बेचैनी बढ़ रही थी उससे अब इन्तजार नहीं हो रहा था,
“बहन एक काम करो तुम आराम करो मैं यहाँ मेडम के साथ हु,किसी चीज की जरुरत होगी तो तुम्हे बुला लूँगा ,”सुमन ने सर उठा कर विजय को देखा आज फिर इस परिवार के एक शख्स ने उसे बहन कहा था ,कैसा परिवार है ये कोई इतने प्यार से बहन बोलकर मान देता है तो दूसरा उसे रंडी कहकर उसकी इज्जत पर हाथ डालता है ,ऐसे उसके दिल में अब किशन के लिए कोई भी द्वेष नहीं था ,वो जानती थी की किशन अपने किये पर कितना पछता रहा है और उसके कारण ही उसके दिल में उसके लिए एक सम्मान का जन्म हो चूका था ,वो इस परिवार से प्यार करने लगी थी सभी उसे इतना प्यार और सम्मान देते है जो उसे अपनी जिंदगी में कभी नहीं मिला था ,वो तो बस आभाव की जिंदगी जानती थी ,उसका जन्म किसी रहिस

आदमी के हवस का नतीजा थी जिसने उसकी माँ को माँ बनाया था और फिर पता नहीं कहा चला गया ,और उन्हें छोड़ गया तकलीफों को भोगने के लिए और उसनके हिस्से में आई बस तकलीफे…सुमन के आँखों में आंसू की कुछ बुँदे आ गयी जिसे विजय और मेरी दोनों ने देख लिया था ,दोनों ही ऐसे तो सेक्स के भूखे थे पर एक मासूम सी लड़की के आँखों से बहते हुए आंसू ने उन्हें कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया ,विजय चाहे कितना कमीना क्यों ना हो उसका दिल बहुत ही नर्म था ,वही मेरी का भी यही हाल था ,मेरी ने झुक कर सुमन के चहरे को उठाया ,सुमन को अपने गलती का अहसास हुआ और वो अपने आंसुओ को पोछने लगी ,

“क्या हुआ बहन रो क्यों रही है कुछ तकलीफ है क्या यहाँ तुझे ,”विजय ने अपना चहरा उसके पास लाते हुए कहा ,
“नहीं भईया कोई तकलीफ नहीं है बस आपलोगों का प्यार देखकर मुझे रोना आ गया ,इतना सम्मान और प्यार मुझे कभी किसी ने नहीं दिया ,कोई इतने प्यार से मुझे कभी भी बहन नहीं बुलाया जितना आप और अजय भईया ने बुलाया है ,”विजय ने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा और उसे सांत्वना दिया वो कुछ बोला नहीं क्योकि उसे खुद भी समझ नहीं आया की अपनी बहनों के अलावा उसने कभी किसी को इतने प्यार से कभी भी बहन नहीं बुलाया था ,वही मेरी के दिमाग में एक बात आ गयी
“और किशन ने वो तुझे बहन नहीं बुलाता क्या ,”मेरी के चहरे पर एक मुस्कान भी फ़ैल गयी ,वो जब से आई थी वो किशन और सुमन को नोटिस तो कर रही थी सुमन का उसे देखना और किशन का यु उससे भागना कुछ तो था इनके बीच ,,ऐसे बात तो विजय को भी समझ आ गयी थी क्योकि किशन ने इसका हिंट पहले ही दे दिया था ,उसने बात को सम्हाला
“कोई बात नहीं ठीक है अपने कमरे में जाओ आराम करो और हम सब हमेशा तुम्हारे साथ है ,और तू इतनी प्यारी और समझदार है की तू इस प्यार और सम्मान की हक़दार भी है “सुमन के चहरे पर एक ख़ुशी के भाव आये और वो अपने कमरे के लिए चले गयी उसके जाते ही विजय ने कमरे का किवाड़ बंद किया और मेरी के तरफ घुमा ,उसके मन में एक ही बात आई ,
“सनी लीओन इन साड़ी ”

मेरी भी मुस्कुराते हुए उसे देखने लगी और अपनी अदाओ का जाल फेकना शुरू किया ,उसने एक मादक अंगड़ाई ली और अपने उंगलियों को अपने मुह के अंदर बहार करने लगी विजय भी देर ना करता हुआ उसके पास पंहुचा और उसे उठा कर सीधे बिस्तर में पटक दिया ,
“अरे राजा इतनी क्या बेचैनी है ,”
“क्या करू मेरी रानी तुझपर टूटने के लिए तो कब से इन्तजार कर रहा हु ,”
“चल झूठे कही के ऐसा होता तो कल रात में ही आ जाता ना “रात की बात याद करके विजय को हसी आ गयी और सोनल का चहरा भी सामने आ गया उसने अपने सर को एक झटका दिया ,
“अरे जानेमन छोडो कल की बाते कल की बात पुरानी ,”विजय मेरी के ऊपर खुद पड़ता है और उसके गालो को अपने मजबूत हाथो से दबाकर उसके लाल रसदार होठो को चूसने लगता है ,मेरी को इससे ही उसके ताकत का अहसास हो

जाता है और उसके मन में एक उमंग जग जाती है ,
“हाय तेरे जैसे मर्द के लिए ही तो मैं बनी हु,कब से तडफ रही थी तेरी बांहों में कुचले जाने के लिए ,”
“तो कुचल देते है ना “विजय ने अपने हाथो को उसके बड़े बड़े कबुतारो पर ले गया और उसे निचोड़ने लगा ,उसके ब्लाव्स को जैसे फाड़ता हुआ अलग किया और उन मखमली पहाड़ो को अपने दांतों से काटने लगा ,
“आह्ह्ह आह्ह अह कमीने साले काट मत ना ”
“चुप मदरचोद ,”विजय हवस के नशे में बोखला गया था उसका लिंग इतना तना हुआ था की उसे भी दर्द होने लगा था ,उसने उरोज को चुसना नहीं खाना शुरू किया उसके दांतों के निशान मेरी के दुधिया उरोजो को लाल कर रहे थे उसके निप्पल विजय के थूक से भीगे हुए तन कर विजय के दांतों में आ जाते और वो उन्हें हलके से काटकर मेरी को जन्नत में पंहुचा देता ,

“आहा हम्म आह मम मम्म आः अह्ह्ह्हह “मेरी ने जोर जोर से अपने वासना की अभिवक्ति की विजय भी अपने सर को निचे ले जाने लगा ,मेरी के सपाट पेट पर आकर रुक गया,उसकी गहरी नाभि में उसने अपने जीभ डाली और थूक से उसे गिला कर दिया ,मेरी के साड़ी को खोलने तक का सब्र विजय में नहीं था वो अपने हाथ निचे कर मेरी के साड़ी को ऊपर सरका दिया उसके ,गोर गोरे जांघ अपनी पूरी गोलइयो में अब विजय के सामने थे वो अपने जीभ से उनका स्वाद चख रहा था वही मेरी अपने आनद के शिखर पर अपनी आँखे बंद किये उसके दांतों को अपने जन्घो पर महसूस कर रही थी,उसने अपने दांत गडा दिए ,
“अआः मादर आह बहन चोओओओओ द “मेरी दर्द और लिज्जत से चीख पड़ी विजय अपने सर को उसकी साड़ी के अंदर घुसा दिया बिलकुल साफ सुथरी चिकनी और पानी से भीगी हुई रसदार मलाई की तरह उसकी चुद की पंखुडियो ने विजय को अपना रस पिने का आमंत्रण दिया ,उसकी मादक गंध विजय के लिए असहनीय हो रही थी ,वो उनपर ऐसे टुटा जैसे कोई भूखा कुत्ता हड्डी पर टूटता है ,उसने उसे मुह में भरकर अपनी जीभ से पूरा काम रस पि गया ,
“आआआआ आआआआअ आआआ आआआआअ म्म्मम्म्म्मम्म म्मम्मम्मम्म विजय आआअ आअह्ह्ह्ह विजय “मेरी के मादक लिज्जत भरी सिसकिया पुरे कमरे को भर रही थी ,विजय ने चूसते हुए ही अपने कपडे उतारे उसका लिंग ऐसे अकड़े था जैसे कोई लोहे का गर्म सरिया हो,वो जल्दी से उठा और पाने सरिये को मेरी के नर्म नर्म और गर्म गर्म छेद में घुसा दिया ,

“आअह्ह्ह्ह कितना टाइट है तेरा “विजय के मुह से अचानक ही निकल पड़ा ,ना जाने कितने दिनों बाद उसने इतने टाइट योनी में अपना लिंग घुसाया था ,
“अआह्ह्ह मेरे मालिक ,आआह्ह्ह “मेरी की एक चीख निकली और वो निढल होकर गिर पड़ी उसने अपने कामरस से विजय के लिंग को भीगा दिया था ,लेकिन खेल तो अभी शुरू हुआ था ,विजय के धक्के तो अभी अभी शुरू हुए थे ,वो अपने लिंग को बहार निकल कर पहले अच्छे से उसके चिपचिपे कामरस में भिगोता है और फिर से अपना मुसल उसके योनी में घुसा देता है

,
“आआह्ह्ह्ह विजय आह्ह्ह ”
“मेरी रंडी आज तो तुझे तबियत से चोदुंगा “विजय ने अपनी स्पीड बडाई हर धक्का रक सिसकारी छोड़ जाती थी कभी कभी विजय का ताकतवर धक्का मेरी की चीख भी निकल देता था ,
“ह्ह्ह्ह ह्ह्हम्म्म्म ह्म्म्म आह्ह आह्ह आह्ह्ह नहीं नहीं आह्ह अहहह विजय आह्ह विजय माँ माँ मर गयी आह्ह आह्ह नहीं नहीं धीरे ना कमीने आह जोर से जोर से “मेरी बडबडा रही थी
“आह्ह मदेरचोद आह्ह तेरी माँ की आह्ह “विजय भी अपनी पूरी ताकत से उसे पेले जा रहा था,

विजय उसे पलटता है ,कभी दीवाल से लगता है कभी जमीन पर ,कभी बिस्तर के कोने में ,कभी कुतिया की तरह कभी पर उठाकर ,विजय जैसे मन में आता उसे वैसे भोगे जा रहा था ,लेकिन साला झड नहीं रहा था ,मेरी को भी इसकी चिंता होने लगी की ये झड क्यों नहीं रहा है ,वो एक समय के बाद बिलकुल बेसुध सी हो गयी थी ऐसी हैवानियत भरी चुदाई का उसके लिए पहला अनुभव था ,वो कई बार झड चुकी थी और अब उसे दर्द भी होने लगा था पर वो विजय के झाडे बिना ये खेल खत्म नहीं करना चाहती थी ,विजय ने जब देखा की ये बहुत जादा दर्द में है तो किसी तरह अपने को सम्हाला ,और उसके होठो में अपने होठो को घुसा दिया ,
“आआह्ह पता नहीं जान आज क्यों नहीं झड पा रहा हु ,”मेरी और विजय की सांसे उखड़ी हुई थी मेरी निढल होने के बावजूद आपने हाथो को उसके सर पर ले आती है और उसके बालो को सहलाती है ,

“जितना समय लेना है ले लो पर अब थोडा प्यार से आराम से करो ना “विजय के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है वो उसके चहरे को देखता है और उसे जोरदार किस करता है ,अब वो उठकर एक तेल की शीशी लाता है और अपने लिंग में तेल की मालिश कर उसे फिर से उसके अंदर घुसता है ,
“इससे तुम्हे दर्द कम होगा “मेरी बड़े प्यार से उसके सर को अपनी ओर खिचती है दोनों अपने होठो को एक दुसरे के होठो में समां लेते है और विजय अब धीरे धीरे अंदर बहार करने लगता है ,नहीं पता कितने देर तक जब तक की वो उसके अंदर झड नहीं जाता ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,………………..

अध्याय 22

इधर सभी लोग जंगल में पहुच जाते है ,वो पहाड़ी इलाका है जिसमे घने तो नहीं पर मध्यम और आबादी वाले जंगल है ,कही कही कुछ बस्तिया मिल जाती है पर जादा आबादी नहीं है ,निधि बार बार गाड़ी से झाककर बाहर की ओर देख रही थी ,बाहर का मौसम और नजारा बहुत ही सुहाना था,छोटे छोटे पहाड़ जो की निधि ने अपने घर से देखे थे ,लेकिन कभी उसे इनके पास जाने का मौका ही नहीं मिला गाड़ी पहसो को कटते हुए बने सडक पर चल रही थी ,ये अटल बिहारी की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का परिणाम था की देश के सुदूर इलाको में भी पक्की सड़के बन गयी है ,ऐसे यहाँ आवाजाही कम ही होती है पर जरुरत तो है ,ये जगह नक्साली और खतरनाक जंगली जानवरों के प्रकोप से बची हुई थी ,इसलिए यहाँ घुमना भी बहुत अच्छा सौदा था,उनके घर से कुछ 5-6 किलोमीटर दूर ही एक पहाड़ो में चदते हुए वो एक पहाड़ी के पास रुके ,जो लोग ऐसे इलाको में जा चुके है उन्हें ये पता होगा की सडको के किनारे पर से निचे की खाई को देखना कितना अद्बुत नजारा होता है, पहाड़ी तक बस गाड़ी जाती थी आगे उन्हें खुद ही चढ़ाई करनी थी बार बार चलने और दुपहिया वाहनों की आवाजाही के कारन एक पगडण्डी सी पेड़ो के बीच से बनी थी ,बाली ने सभी को पहाड़ी के ऊपर बने एक मंदिरनुमा जगह को दिखाया ,
“वो देखो वहा मिलेगा कलवा “सभी के चहरे पर एक ख़ुशी के भाव तैर गए,
“लेकिन चाचू वहा तक जायेंगे कैसे ,वो तो बहुत ऊपर दिख रहा है ,”निधि ने स्वाभाविक सा प्रश्न दागा,क्योकि वो कभी इस इलाके में नहीं आई थी उसका ये प्रश्न स्वाभाविक था

“अरे रास्ता है ना ,सीढि नहीं है पर चढ़ जाओगे फिकर मत करो ,जादा दूर नहीं है ,”सभी वहा चड़ने लगे पास में ही एक मनमोहक सा झरना था जिसके कलकल की आवाजे सभी के कानो तक पहुच रही थी ,निधि ने ये झरना देखने की जिद की पर अजय ने उसे मना लिया पहले चाचा से मिलकर आते है ,
जैसे तैसे सभी ऊपर पहुचे डॉ और लडकियों की हालत ही ख़राब हो चुकी थी ,बाली और अजय तो मेहनत करके ही बड़े हुए थे और उनका रहना बसना भी इसी इलाके में हुआ था ,उनके लिए तो ये बच्चो का खेल था ,पर बाकियों की सांसे फुल गयी थी ,वो थककर चूर हो जाते,और आराम करने बैठ जाते ,कोई सीढि नहीं होने के कारन उनके लिए ये और भी मुस्किल हो रहा था ,
लेकिन वहा पहुचने के बाद प्रकृति का नजारा और वहा बहती ताज़ी और ठंडी हवा ने सबकी थकान मिटा दि ,एक छोटा सा मंदिरनुमा ईमारत थी ,वो एक आश्रम की तरह लग रहा था ,कुछ स्थानीय गाव वाले भी वहा दिखाई दे रहे थे ये वही लोग होंगे जिनकी गाड़िया निचे खड़ी थी ,वो वह प्रवेश किये देखा की वहा एक साधू जैसा दिखने वाला शख्स बैठा है और उसके आसपास कुछ लोगो की भीड़ लगी हुई है ,बाली आगे बढकर उसे प्रणाम करता है जिसका अनुसरण सभी लोग करते है ,सभी वैसे ही वह बैठ जाते है जैसे की बाकि सभी बैठे थे ,वहा कोई मूर्ति नहीं थी बस ये साधू ही थे ,बढ़ी

हुई दाढ़ी विशाल सीना जिसमे बालो का जंगल था ,बड़े बड़े बाल जो फैले हुए थे माथे पर चन्दन का टिका और बस एक धोती पहने हुए ,चहरे का तेज ही उनकी सिद्दी का बयान कर रहा था,आँखे अधमुंदी सी थी मानो गहरे ध्यान की अवस्था में बैठे हो ,तेज ऐसा था की वहा पहुचने पर ही सभी के मन में शांति के भाव आ गए ,वो वहा बैठे ही थे की एक वक्ती आकर बाली के सामने हाथ जोड़कर उसे प्रणाम करता है बाली उसे देखकर मुस्कुराता है पर किसी में कोई बात नहीं होती बाली सबको इशारा कर वही बैठने को कहता है और उसके साथ बहार आ जाता है,

“नमस्कार ठाकुर साहब बड़े दिनों बाद पधारे आप ”
“हा यार कलवा से मिलने आये है सभी कहा है वो ”
“अरे वो तो पता नहीं धयान में बैठा होगा कही पर आप यहाँ महाराज के पास बैठिये मैं लड़के भेज देता हु उसे बुलाने के लिए “वो उस आश्रम का एक सेवक था जैसे कलवा भी वहा एक सेवक की तरह ही रहता था ,बाली फिर जाकर अपने स्थान में बैठ गया ,अजय और डॉ की आँखे बंद हो चुकी थी इतनी शांति इतना गहरा अनुभव दे रही थी जैसे दुनिया में कुछ और ना हो बस बस बस सांसे हो ,धड़कने हो ,एक भाव हो और आप हो ……………..
आधे घंटे कैसे बीते किसी को कुछ पता ही नहीं चला ,बाबा आँखे खोल चुके थे पर अभी भी गहरे ध्यान से उठाने के कारन उनकी आँखे अधखुली ही थी बड़ी मुस्किल से वो अपनी आँखों को खोल पा रहे थे ,जैसे संसार को देखना उनकी मज़बूरी हो वरना बस समधी में चले जाते ,वह मौजूद लोग बारी बारी से उनसे मिलाने लगे किसी ने कोई प्रश्न किया कोई अपना दुखड़ा रो रहा था ,किसी की कोई मांग थी बाबा सभी की बातो को ध्यान से सुनते और आराम से उत्तर देते थे ,लगभग आधे धंटे और निकल चुके थे बाबा की आँखे भी अब पूरी तरह से खुल चुकी थी और उनके बोलने में एक तीव्रता भी आ चुकी थी ,सभी के जाने के बाद बस ठाकुर परिवार ही वहा बचा था बाली ने जाकर उनके चरण स्पर्श किये सभी ने फिर उसका अनुकरण किया ,
“कहो बाली कैसे हो ”
“सब आपकी कृपा है बाबा कालवा से मिलाने आये थे ,”बाबा के चहरे पर एक मुस्कान आ गई
“ह्म्म्म और तुम कैसे हो अजय ”
“अच्छा हु बाबा ”
“बहुत दिन हुए इधर आये हुए ,”अजय ने अपना सर झुका लिया

“हा बाबा बहुत दिन हो गए “बाली ने डॉ और बाकियों का परिचय दिया उन्होंने सभी का अभिवंदन किया ,डॉ आज बहुत प्रसन्न दिख रहे थे ,किसी महात्मा से मिलाना और आजकल तो महात्मा मिलना ही बहुत बड़ा सौभाग्य होता है ,
“आप कुछ कहना चाहते है डॉ साहब “बाबा ने धयन से डॉ को देखा
“आपसे मिलने के बाद सारे प्रश्न खत्म हो गए प्रभु “डॉ ने अनुग्रह के भाव से बाबा को देखा बाबा के आँखों में भी एक स्नेह डॉ के लिए छलक पड़ा ,तभी कलवा भी आ चूका था वो सभी को देख बहुत खुश हुआ ,सभी उससे मिलाने बहार आये और एक बरगद के पेड़ के निचे बने चबूतरे में बैठे बाते हरने लगे पर डॉ अब भी वही बैठे थे ,
“तो तुम कलवा को ले जाने आये

हो ”
“हा बाबा आज उसके परिवार को उसकी जरुरत है ,कोई तो है जो इस परिवार को बहुत ही नुकसान पहुचना चाहता है ,और मैं जनता हु जब तक कलवा रहेगा इस परिवार को कोई हाथ नहीं लगा पायेगा ,”बाबा जोरो से हस पड़े
“डॉ जो होना है वो तो हो कर रहेगा ,कलवा के रहते भी तो वीर और उसकी पत्नी की मौत हो गयी ना ,उन्हें तो वो नहीं बचा पाया ,ना ही अपने भाभी और उसके बच्चो को आजतक ढूंढ पाया और देखो आज उसके दुःख ने उसे प्रभु के शरण में ला दिया ,और तुम कितने सालो बाद आये यहाँ ”
दोनों के चहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ गयी मतलब साफ़ था की डॉ यहाँ पहले भी कई बार आ चुके थे ,
“हा बाबा आपसे दूर रहने का तो मन मुझे भी नहीं करता ,मैं भी चाहता हु की आपके शरण में आकर अपने को ध्यान की गहराईयो में डूबा हु पर क्या करू ,ध्यान मजबूर होकर तो नहीं किया जा सकता ना जैसे आज कलवा कर रहा है ”
“बेटा जो ध्यान करता है उसके लिए कोई मज़बूरी होती ही नहीं है “बाबा ने एक मनमोहक मुस्कान दि ,

“जाओ कलवा से मिल लो “डॉ उठकर बाबा के चरणों को स्पर्श करते है और बहार कलवा से मिलने चले जाते है ,कलवा डॉ को देखकर आगे बढता है और उसके गले लग जाता है ,कलवा के चहरे पर एक अदुतीय तेज दिखाई दे रही थी जो उसके साधना के कारन उसके चहरे पर खिली थी ,शारीर से वो किसी पौरुष की मूर्ति लगता ही था ,डॉ ने अजय और बाली को इशारे से कुछ कहा दोनों ही समझ गए की ये अकेले हे कलवा से कुछ बात करना चाहते है ,अजय ने सभी को झरना दिखने के बहाने निचे ले गया साथ ही बाली भी हो लिया ,
“कहिये डॉ साहब बहुत दिनों बाद याद किया लगता है कुछ काम आ पड़ा है ,”डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी
“हा काम तो आ पड़ा है ,ऐसे भी अब मैं अकेला सा हो गया हु ,तुन्हें मेरे साथ चलना चाहिए ”
“भूल जाओ डॉ बस अब और नहीं ऐसे भी दुनिया में मेरा अब है ही कौन और किसके लिए करू मैं ये सब ,एक माँ है जो उस परिवार में है जहा उसे इतना प्यार और सम्मान मिलता है और एक भाई है (बजरंगी )जो मुझे देखना भी पसंद नहीं करता अब बचा ही क्या है ,और मेरी काबिलियत ही क्या है डॉ देखो ना ,ना ही मैं वीर भईया और भाभी को बचा पाया और ना ही अपनी भाभी और उनके मासूम बच्चो को ढूंड पाया ,”डॉ थोडा गंभीर हो जाते है
“कलवा ये तुम्हारी गलती नहीं थी ,वीर का एक्सीडेंट का तो मैंने भी पता नहीं लगा पाया और तुम्हारी भाभी और उसके बच्चे वो तुम्हारी गलती नहीं थे ,बजरंगी ने उनके साथ क्या किया ये किसी को नहीं पता वो बेचारे तो तिवारियो के साजिस का शिकार हो गए ,”
“साजिश कोई भी रचे पर मैं तो अपने भाई को नहीं समझा पाया ना की मेरी भाभी पवित्र है ,नहीं डॉ अब मुझसे ये नहीं हो पायेगा अब मैं नहीं कर सकता ये सब ,अब आप ही सम्हालो इन समस्याओ को मुझे यहाँ बहुत शुकून है मैं यहाँ ध्यान करता हु अपने आप के पास रहता हु ,खुश हु और मेरी मनो तो आप भी यहाँ आ जाओ शांति से

बढकर कोई चीज नहीं है दुनिया में “डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी
“किस शांति की बात कर रहे हो कलवा अच्छा ये बताओ की आँखे बंद करने पर क्या तुझे वीर और सुशीला (बजरंगी की बीवी और कलवा की भाभी ) का चहरा नहीं दीखता ”

कलवा एक गहरे सोच में पड़ जाता है ,मानो डॉ ने जो कहा वो सच ही था ,
“अभी तुम्हारी जरुरत है इस परिवार को ,अजय पर बहुत खतरा है ,और मुझे कुछ अनहोनी की भी आशंका दिख रही है ,पता नहीं दिल क्यों कहता है की तुम्हे इनके साथ होना चाहिए ,”
कलवा अब भी गहरे सोच में पड़ा था ,
“डॉ बजरंगी कैसा है “डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी
“आज भी उससे प्यार करते हो ”
“भाई है डॉ वो मेरा “कलवा के आँखों में आंसू आ जाते है और डॉ उसके कंधे पर हाथ रखता है कलवा के आँखों के सामने बिता हुआ कल घुमने लगता है ,
बचपन में ही कलवा को उसकी माँ सीता उसके नाना के पास ले आई और कलवा और बजरंगी अलग हो गए कलवा वीर और बाली के साथ बड़ा हुआ,लेकिन दोनों भाइयो में गजब का प्रेम था जो सभी को पता था ,कलवा कभी कभी छुप कर बजरंगी से मिलने जाता था और बजरंगी भी उससे मिलने ठाकुरों के गाव आया करता था ,समय बिता और ठाकुरों और तिवारियो में दुश्मनी बढती गयी बजरंगी तिवारियो का तो कलवा ठाकुरों के सेनापति की हैसियत में आ चुके थे दोनों भाइयो का सामना अकसर होता रहता था लेकिन सभी को पता था की ये एक दुसरे पर हाथ नहीं उठा सकते दोनों अपने अपने खेमे के वफादार थे और इसपर किसी को कोई भी संदेह नहीं था ,दोनों अपने जिम्मेदारियों से हटकर शहर में मिला करते थे वीर के खास दोस्त डॉ चुतिया भी थे ,वीर डॉ कलवा और बजरंगी सभी अपनी जिम्मेदारियों और आपसी रंजिश से दूर शहर आकर मौज मस्ती करते थे ,वक़्त ने करवट ली और वीर ने सुलेखा से शादी कर ली दोनों परिवारों में तनाव इतना बढ़ गया की कलवा और बजरंगी का मिलना लगभग बंद ही हो गया पर ,पर दोनों कभी कभी छुपकर शहर में जाकर मिल ही लिया करते थे ,वही वक अनाथ लड़की से बजरंगी को प्यार हो गया और उसने वही उससे शादी भी कर ली ,ये बात सिर्फ उसे और कलवा को ही पता था ,लड़की का नाम था सुशीला ,सुसीला और बजरंगी एक दुसरे से बहुत प्यार करते थे और सुशीला ने दो बच्चो को जन्म दिया ,लेकिन ये बात तिवारियो तक पहुच गयी वो सीधे तो बजरंगी को कुछ नहीं बोल सकते थे पर उन्होंने एक साजिस रची ये ही एक ऐसा मौका था जिससे कलवा और बजरंगी में दुश्मनी करा कर वो ठाकुरों को तबाह करने के लिए बजरंगी का उपयोग कर सकते थे ,उन्होंने बजरंगी के दिमाग में शक का कीड़ा डाला और अपनी साजिस के तहत बहुत ही आराम से इसे पनपने दिया ,एक दिन जब बजरंगी शहर पहुचा तो वहा कलवा को देखकर भड़क गया कलवा उसे समझाता रहा की सुशीला उसके लिए माँ के समान है पर ……..

बजरंगी अपने बीवी बच्चो के साथ वहा से चला गया उसके बाद उनका कुछ भी पता कलवा को नहीं चल पाया ,बजरंगी ने सुशीला से भी सम्बन्ध खत्म कर लिया ,और ऐसा बोखलाया की ठाकुरों और कलवा के खिलाफ एक जंग सी छेड़ दि ,और इसी का नतीजा हुआ की एक बार लड़ाई में उसने वीर पर गोली चला दि वो गोली कलवा ने अपने सीने में खाई और दोनों भाइयो का रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो गया वो कभी मिलते नहीं थे ,और अगर किसी काम से मिलते भी तो बात नहीं करते ,कलवा ने बाली और वीर को सभी बाते बताई डॉ के साथ मिलकर उसने अपने भाभी को ढूंढने की भी बहुत कोसिस की पर कोई नहीं मिला ,उन्हें लगा की बजरंगी ने उन्हें मार दिया हो उसका गुस्सा था ही ऐसा ,पर कलवा आज भी अपने बड़े भाई से बहुत प्यार करता था और वीर की मौत के बाद से ही वो सब कुछ छोड़कर आश्रम में आ गया था,

कलवा की आँखे नम थी और वो शून्य आकाश को देखे जा रहा था,डॉ ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा
“जो हो चूका है उसे याद करने से क्या मतलब है ,घर चलो अपने परिवार के साथ रहो अजय में मुझे वीर की छबि दिखाती है सायद तुम भी उसमे वीर को ढूंड पाओ “कलवा डॉ के गले से लग गया ,थोड़ी देर में ही उसने मनो कुछ फैसला कर लिया था ,
“आऊंगा डॉ घर भी आऊंगा पर अभी नहीं कुछ दिनों के बाद “कलवा के चहरे पर एक मुस्कान खिल गयी थी ,

अध्याय 23

इधर घर में विजय और मेरी का घमासान जारी था,की तभी किशन भी वापस आ गया सबसे पहले उसके मन में विजय और मेरी के बारे में ही विचार आया ,वो मेरी के कमरे की तरफ जाने को हुआ ,लेकिन उसने देखा की सुमन बगीचे में एक पेड़ के निचे अकेले ही बैठी है दोनों की नजरे मिली और किशन ने अपनी नजरे झुका ली और अंदर चला गया ,मेरी के रूम में पहुचने पर उसने दोनों की आहे सुनी और मजे लेने लगा तभी उसे लगा की कोई उसके पीछे है उसने मुड़कर देखा तो सुमन खड़ी थी ,सुमन को देखकर वो फिर से झेपा और वहा से जाने लगा लेकिन सुमन ने दौड़कर उसका हाथ थाम लिया ,किशन अब भी अपने चहरे को झुकाए खड़ा था ,
“आपसे कुछ बात करनी है ”
“हा कहो ”
“यहाँ नही गार्डन में चले “सुमन उसके जवाब का इतजार करे बिना ही उसे अपने साथ गार्डन की तरफ ले जाने लगी वो किसी पुतली सा उसके पीछे पीछे आने लगा,क्या था इस लड़की में जिसने किशन जैसे कमीने लड़के को इतना कमजोर बना दिया था ,दोनों बगीचे में पहुचे उसी पेड़ के निचे जहा पर सुमन बैठी हुई थी ,पूरा बगीचा खाली था और हलकी धुप में मौसम बड़ा ही सुहाना और मनमोहक लग रहा था,किशन अब भी सर गडाए वही खड़ा था ,

“आप मेरे साथ ऐसे क्यों बिहेव कर रहे है ठाकुर साहब ,आपके इस बिहेब को घर के सभी लोग केयर कर रहे है आज ही मेरी मेडम ने भी मुझे ये पूछ लिया ,प्लीज मन की आप अपने किये पर दुखी होंगे पर मुझे किश्मत से ये परिवार मिला है ऐसी कोई हरकत मत कीजिये की किसी को आपपर शक को और वो मुझे यहाँ से निकल दे ”
सुमन की बातो से किशन

चौक पड़ा और पहली बार उसके खून की धार थोड़ी तेज हुई
“तुम्हे क्या लगता है मेरी हरकत के बारे में जानकर मेरे परिवार के लोग तुम्हे निकल देंगे और मुझे शबासी देंगे ,तुमने समझ के क्या रखा है मेरे परिवार को ,यहाँ लड़की की इज्जत के बहुत मायने है ,हा हा हम कमीने है हा हम लडकियों के साथ सब कुछ करते है पर उनकी मर्जी से ,हम ठाकुर है हम बलात्कार नहीं करते ,”
अपने परिवार के बारे में बोलकर किशन का चहरा खिल गया था और सुमन के होठो पर एक मुस्कान आ गयी थी
“अच्छा तो वो क्या था जो आप ने मेरे साथ किया “सुमन के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी वही किशन झेप सा गया
“वो वो तो तुम मुझे अच्छी लगती हो इसलिए ,माफ़ी तो मांगी ना तुमसे नजर भी नहीं मिला पा रहा हु “किशन आज कुछ बोल पाया था ,सुमन खिलखिलाकर हस पड़ी किशन ने अपना चहरा उठाकर उसके चहरे को देखा पता नहीं क्या आकर्षण था उस लड़की में जो किशन उसकी तरफ खीचा जा रहा था,उसकी पर्सनल रखेल लाली भी उससे कही जादा सुन्दर थी पर कभी कभी सुन्दरता ही सब कुछ नहीं होता उसके व्यक्तित्व में एक निखर था ,एक दृढ़ता थी जो किशन को उसकी ओर आकर्षित करती थी ,किशन उसके चहरे को ऐसे देख रहा था अब झेपने की बारी सुमन की थी उसका चहरे पर शर्म उतर आई ,उसने अपने बालो की लटो से खेलना शुरू कर दिया ,उसका सावला चहरा रंगत से भर गया था,वही उसके आँखों का काजल किशन के दिल में छुरिया चला रहा था ,आजतक कोई भी लड़की ने उसके दिल पर ऐसा जादू नहीं किया था जो उसे हो रहा था ,वो आगे बढ़ना चाहता था पर अपनी आदत से बिलकुल विपरीत वो घबरा रहा था ,उसने अपने हाथ आगे कर उसके गालो को छूने की कोसिस की पर फिर कुछ सोचकर वापस खीच लिया ,ये देख सुमन के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,
“क्या हुआ ठाकुर साहब आज आप इस कनीज को छूने से भी डर रहे है “सुमन फिर खिलखिला उठी उसका खिलखिलाना जैसे किशन के दिल में जाकर लग गया उसने सुमन के कमर को पकड़ा और अपने तरफ खीचा वो कटपुतली सी उसके तरफ खिची चली आई ,सुमन की सांसे ही रुक गयी उसकी धड़कने बाद रही थी पर वो कुछ भी नही कर रही थी बस किशन का चहरा देखे जा रही थी ,किशन ने अपना चहरा उसके चहरे के पास लाया ,किशन की सांसे उसके सांसो से टकराने लगी ,दोनों की सांसो में गर्मी का अहसास आ रहा था,उसनके होठ एक दुसरे के नजदीक जा रहे थे ,सुमन के होठ फडफडाने लगे थे ,

तभी किशन उससे अलग हो गया उसने अपना सर झटका,जैसे सुमन को भी होश आया हो ,वो लाज से गडी जा रही थी पर उसने हिम्मत करके बोला
“किशन मुझे माफ़ कर दो मेरा मतलब वो नहीं था,”
उसकी बाते किशन को समझ ही नहीं आई
“मतलब ,तुम क्यों माफ़ी माग रही हो माफ़ी तो मुझे मंगनी चाहिए ”
“मतलाब की मेरा इरादा वो नहीं था की आपको अकेले में लाकर ,,,,यानि आपको फसाऊ ,आप मुझसे नजरे चुराते थे वो मुझे पसंद नहीं आ रहा था इसलिए मैंने आपको अकेले में बुला लिया ”
किशन चौक सा

गया उसने तो कभी ऐसा सोचा भी नहीं था ,
“फसाऊ मतलब ,तुम मुझे कैसे फसा सकती हो ,मेरा मतलब है की तुमने ऐसा कैसे सोचा की मैं ऐसा सोचूंगा ”
सुमन की आखे कुछ भीग गयी थी,
“शायद आप नहीं जानते पर जब एक गरीब लड़की किसी आमिर लड़के के प्यार में पड़ जाती है तो लोग कहते है की लड़की ने लड़के हो अपने जाल में फसाया है ,आप करोडो के मालिक है और मैं आपके पैरो की जुती की तरह हु,मैं वो गलती नहीं कर सकती जो मेरी माँ ने किया था एक अमीर लड़के से प्यार ,मेरे बाप ने ही उन्हें ये कहकर छोड़ दिया की तुमने मुझे मेरे पैसो के लिए फसाया है ,”
सुमन के आँखों से पानी की धार बहने लगी किशन से ये बर्दास्त नहीं हुआ और उसने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी ओर खीच लिया ,वो उसके गले से लग गयी लेकिन वो अपने को छुड़ाने की कोसिस करने लगी
“नहीं ठाकुर साहब मुझ गरीब पर दया करो मुझसे प्यार ना दिखाओ ,मैं कोई ऐसा सपना नहीं देखना चाहती जो पूरा ना हो ,”
किशन उसके चहरे को बड़े ही प्यार से अपने हाथो से सहलाता है सुमन की आँखे गंगा जमुना बहा रही थी ,वो उसकी आँखों के पानी को अपने होठो में भर लेता है सुमन एक और जोरदार कोसिस छूटने की करती है ,वो प्यार में नहीं पड़ना चाहती थी ,उसे किशन का खालिस पाक प्यार साफ साफ महसूस हो रहा था,

किशन ने उसके झटपटाते जिस्म को अपनी बांहों में भरा और उसके होठो में अपने होठ को डाल दिया ,सुमन रोती हुई कुछ देर तक उसका विरोध करती रही पर उसके प्यार भरे अहसास से वो टूट गयी और किशन के बांहों में समां गयी वो किशन के सर को पकडे उसका साथ देने लगी ………….

दोनों जब अलग हुए तो दोनों के आँखों में पानी और होठो में मुस्कान थी,सुमन फिर किशन के बांहों में आकर समां गयी वो पेड़ के निचे बैठ गए ,
“किशन सोच लो प्यार की राह आसान नहीं होती ,कही तुम मेरा दिल ना तोड़ देना ,बहुत टूटी हु अब और नहीं सह पाऊँगी ,”
किशन उसके बालो में अपनी उंगलिया फिरता है
“प्यार अगर करने से होता तो क्या बात थी ,ये तो बस हो जाता है ,और जब तक मेरी सांसे है तब तक तुम्हारे साथ रहूँगा ,मुझे कसम है मेरे परिवार की मेरे बहनों की ,हां अगर ये सांसे ही अटक गयी तो …”
सुमन ने अपने उंगलिया उसके होठो पर रख दिए किशन उसे देख कर अपने आँखे से हसने लगा ,सुमन बिना कुछ कहे उसके पास आई और उसके होठो के निचले फांको को काट लिया ,
“ख़बरदार आप आईंदा ऐसा बोले तो ,”दोनों ने एक दुसरे की आँखों में देखा
“और हा मैं आपसे वो सब नहीं करूंगी ,वो सब शादी के बाद ,”सुमन इठलाते हुए बोली
“क्या सब “किशन भी उसके मजे लेने की फ़िराक में बोल पड़ा
“अरे वही सब जो आप उसदिन मेरे साथ करना चाहते थे और आज विजय भईया मेरी मेडम के साथ कर रही है ,और आप कमीने कही के कान लगा कर सुन रहे थे “सुमन ने एक मुक्का उसे मारा किशन हस पड़ा
“अरे मेरी जान उसमे बहुत मजा है ,”
“होगा पर मेरे साथ नहीं करोगे शादी से पहले ”
“तो किसके साथ करूँगा”
“किसी के साथ नहीं “किशन की आँखे चौड़ी हो गयी

“यार लेकिन मुझे तो इसकी आदत है हर सप्ताह एक दो बार तो करना पड़ता है ,जान या तो तुम मान जाओ या ………”सुमन ने अपनी आँखे बड़ी करके उसे देखा
“कितने कमीने हो आप लोग बस वही चलता है ना आपके दिमाग में ,”वो थोड़ी देर के लिए शांत हो गयी
“अच्छा मैं आपको इतना प्यार दूंगी की आपको उसकी जरुरत ही नहीं पड़ेगी और अगर पड़ेगी तो कर लेना किसी से भी मैं मना नहीं करुँगी “किशन उसे बड़े प्यार से देखता है
“सच्ची”
“मुच्ची”
किशन फिर उसे पकड़कर अपनी ओर खिचता है वही सुमन भी खिलखिलाते हुए उससे चिपक जाती है और किशन उसके होठो में अपने जीभ को घुसा देता है ,
ये दो प्यार के पंछी अपने में मस्त थे वही दो आँखे इन्हें देखे जा रही थी,घर की गेलरी से चंपा अपने बेटे को देख रही थी ,चंपा विजय और किशन के करतूतों के बारे में तो जानती थी पर आज मामला कुछ अलग था ,वो सुमन के लिए किशन के प्यार को पहचान पा रही थी वही उसके चहरे पर एक सुखद आश्चर्य के भाव आ गए थे ,की उसका कमीना बेटा आज प्यार में पड़ गया है ,वो दोनों को दुवाए देती अंदर चली जाती है ,

अध्याय 24

शाम होने को थी और डॉ और मेरी सभी से विदा लेकर वापस शहर चले जाते है ,चंपा का मिजाज बड़ा ही खुश था की उसके बेटे को प्यार हो गया है वही अजय और विजय अपने बहनों से सम्बन्ध को लेकर दुविधा में थे की ये क्या हो गया है ,बस होठो से होठो का मिलना ही इतनी बेचैनी ला सकता है ये किसी को भी अहसास नहीं था,निधि अब बस अपने खयालो में खोयी थी तो सोनल भी

बस विजय के सपने देख रही थी,वही कुसुम और किशन एक दूजे के ख्वाबो में थे और अजय और विजय निधि और सोनल के ,पूरा घर बस एक प्यार का मंदिर सा हो गया था ,जहा किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर हो क्या रहा है ,क्या ये सही है या गलत ,………बस सभी अपने अपने ही दुनिया में भटक रहे थे ,मेरी ने बड़े ही गंभीरता से और नम आँखों से विजय को विदा किया था जो सोनल को और दुसरे सदस्यों को भी दिखाई दे रहा था,पर सोनल के दिल में एक कसक सी उठी थी की आखिर क्यों ये हुआ ,क्यों मेरे भाई के लिए मुझसे भी जादा प्यार एक लड़की लिए हुए है ,…………
शाम ढलने को थी और सभी एक अजीब उदासी के साए में थे फिर से रात आने को थी ,और कोई भी उसका सामना करने को तैयार ना था,केवल निधि को छोड़कर क्योकि निधि के लिए ये बस प्यार का एक नया आयाम था जबकि बाकियों के लिए प्यार की नयी परिभाषा ,,,………..
निधि हमेशा की तरह अजय के रूम में जाती है वही सोनल और विजय अपने अपने कमरों में थे ,अजय और निधि आपस में लिपटे पड़े थे,निधि मासूम बच्ची सी नींद के आगोश में थी वही अजय उसे अपने सीने से लगाये पुचकार रहा था ,अपनी जान से भी जादा प्यारी बहन को अपनी बांहों में कसा हुआ बस उसके अहसास में गुम था,निधि हमेशा की तरह ही एक झीनी सी nighty में ही थी और हमेशा की तरह बिना किसी अंतःवस्त्रो के थी ,अजय के हाथ उसे सहला रहे थे और निधि गहरी नींद में भी अपने भाई को जकड़े हुए सो रही थी,अजय के हाथ धीरे धीरे निधि के कमर के निचे आते है ,nighty के ऊपर से भी उसके निताम्भो की गोलइयो का आभास अजय कर पा रहा था,नाजुक और नर्म नर्म उसके नितंभ कितने मखमली और मुलायम लग रहे थे की अजय वहा से अपने हाथ ही नहीं हटा पा रहा था,वो धीरे धीरे उसे सहलाने लगा,अजय ने हलके से जोर लगाया और निधि नींद में ही कसमसा गयी ,

“भईया ह्म्म्म ” निधि ने मचलते हुए कहा
अजय सर उठाकर उसे देखता है पर निधि की आँखे अभी भी बंद थी और वो नींद में ही थी ,
अजय फिर से उसकी निताम्भो में अपने हाथ ले जाकर सहलाता है ,पर इस बार वो nighty के निचे से हाथो को ले जाता है ,,निधि के नग्गे निताभो का अहसास अजय के जिस्म में एक कपकपी सी दौड़ जाती है ,उसे यकीं नहीं हो रहा था की वो ये सब कर रहा है वो भी अपनी सबसे प्यारी बहन के लिए क्या ये गलत है ,,,,,,,,,,,,,
अजय ने अपने हाथो को पीछे खीचा और निधि को अपने से अलग करने की कोशिस की पर निधि ने उसे और भी जोरो से जकड लिया ,,
“हम्म्म ”
अजय की धड़कने बढ़ रही थी वो ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहता था जिससे की उसके प्यार भरे इस रिश्ते की मर्यादा पर आंच आये, वो बेचैन सा वहा लेटा होता है ,आंखे तो खुली हुई थी, नींद का नामोनिशान नहीं था,….

वो यही सोच में था की उसे आखिर क्या हो गया है क्या वो अपनी बहन को प्यार भी नहीं कर सकता ,…पर क्या ये प्यार था या वासना थी …

नहीं नहीं मैं कभी अपने बहन के बारे में ऐसा नहीं सोच सकता ,ये प्यार ही है ,बस ये प्यार अब थोडा जिस्मानी हो रहा है ,और क्या हो रहा है हम तो हमेशा से ही ऐसे रहते है इसमें गलत क्या है की मैं अपनी बहन के जिस्मो से खेल रहा हु मैं उसे पसंद करता हु ,उसे प्यार करता हु इसमें कुछ भी गलत नहीं है ,,मैं उसके बिना नहीं रह सकता वो भी मुझसे दूर नहीं रह सकती तो दिक्कत क्या है , मैं क्यों इतना सोच रहा हु इस बारे में क्यों मैं तकलीफ में हु,…मैं अपनी बहन को सब तरह से प्यार करूँगा ,जो उसे अच्छा लगेगा मैं करूँगा कभी भी उसे अपने से अलग नहीं होने दूंगा .वो मेरा प्यार है मेरी चाहत है मेरी जान है मैं हमेशा ही उसका रहूँगा …..
अजय अपने खयालो में खोया था उसके आँखों से आंसू की बुँदे छलकने लगी,निधि के मासूम चहरे को देखता हुआ वो ये बाते अपने मन में अपने आप से कह रहा था ,वो उसके लिए सबसे इम्पोर्टेंट थी और अब उसके मन में कोई भी गलानी के भाव नहीं थे वो जनता था की प्यार में सब जायज है ,पर प्यार की परिभाषा क्या है ,???????????

रिश्तो की परिभाषा क्या है और समाज कोण होता है हमें ये बताने वाला की किस रिश्ते को हम किस तरह निभाए..हमारी मर्यादाओ का ठेका लेने वाला समाज हमें एक वक्त की रोटी भी नहीं खिला सकता तो मैं उसकी फिकर क्यों करू ….
अजय निधि के चहरे के पास अपने चहरे को ले जाता है और उसके होठो को अपने होठो में रखकर उसके निचले होठो को चूसने लगता है ,निधि नींद में कसमसाती है पर वो अपने भाई का साथ देने लगती है ,अजय की बेताबी अब और भी बढ़ रही थी वो अपनी फूलो सी नाजुक बहन की पूरी नाजुकता को महसूस करना चाहता था ,उस अनखिले फुल की नाजुक कोमलता को प्यार से खिलाना चाहता था ,उसके सुगंध से भर जाना चाहता था ….वो निधि के होठो को जोर से चूसने लगता ही की निधि की नींद भी खुल जाती है अजय की आंखे बंद थी और वो उसके होठो को चुसे जा रहा था ,निधि भी उसके सर को अपने हाथो से जकड़कर उसे अपनी ओर खीच लेती है और उसका साथ देते हुए अपने जीभ को अजय के होठो से भीतर जाने देती है ……..

“पुच पुच पुच ,”दोनों के होठ आपस में जंग लड़ रहे थे ,अजय अपने पुरे बल का प्रयोग कर उसे खाने लगा था ,निधि की हालत भी ख़राब थी वो अजय की बेताबी से अचंभित तो थी पर अपने भाई को पूरा प्यार देने के लिए उसका साथ पुरे दिल से दे रही थी ,अजय उसके जीभ को अपने होठो से अंदर खिचता है और फिर अपने दांतों में गडा लेता है ,अजय उसके होठो के नाजुक कलियों को बस अपने दांतों और होठो से खाने की कोशिस करने लगता है ,,…..

निधि भी बेताब सी उसके सर को अपने चहरे पर पूरी ताकत से दबाये हुए उसका साथ दे रही थी ,जब अजय रुका तो निधि उसपर टूट पड़ी और उसके होठो को खाने लगी ,अजय के हाथ उसके निताम्भो पर आ गए उसने उसके नग्गे निताम्भो को अपने हाथो में भरा और उस मखमली दो पहाड़ो को दबाने लगा ,अजय का ऐसा करना निधि के लिए एक उत्तेजक प्रहार था ,वो अपने को अपने भाई के हाथो सौप चुकी थी हमेशा से ही निधि अजय की ही थी ,आज अजय को भी इसका आभास हो गया ,निधि और अधिक उत्तेजित होकर उसके होठो को चूसने लगाती है और फिर दोनों तब तक अलग नहीं होते जब तक निधि बेहोश होने की हद तक नहीं आ जाती ,निधि का साँस फूलने लगा था पर वो अपने भाई से अलग नहीं होना चाहती थी ,वही अजय निधि के होठो को ऐसे पकडे हुए था की ना ही वो खुद भी सांसे ले पा रहा था ना ही निधि ही ले पा रही थी ,दोनों अलग हुए दोनों ही हाफ रहे थे एक दुसरे को देखकर वो खिलखिला पड़े और जैसे ही थोडा होश सम्हाल के उनकी सांसे सामान्य हुई वो फिर एक दुसरे के ऊपर टूट पड़े ,अब अजय का हाथ निधि के सर पर चला गया था ,उसे लगाने लगा की निधि के होठ ही इतने नशीले और आनद दायक है की उससे मन भरने में ही उसे बहुत समय लग जायेगा ,ना जाने कैसा रस था उनके होठो में जो खत्म ही नहीं हो रहा था और कैसा जनून था की वो होठो से आगे ही नहीं बढ़ पा रहे थे …………..एक प्यार की लहरों सा जो रेला चला था दोनों उसकी लहरों में सवार बस उस सफ़र का आनद ले रहे थे ….

अध्याय 25

आज सोनल और रानी के जाने का दिन था ,सभी बहुत उदास थे, रेणुका अभी भी ससुराल से नहीं आई थी,छुट्टियों इतनी जल्दी खत्म हो जाती है किसी को भी पता नहीं चलता ,दोनों ही तैयार होकर निचे आते है इसबार किशन और विजय उन्हें छोड़ने शहर जाते है साथ में सुमन भी थी वो भी अपने माँ और भाई से मिलना चाहती थी ,साथ में कुछ पहलवान भी होते है जो अलग गाड़ी से जाने वाले थे ………….

आँखों में आंसू लिए पूरा परिवार उन्हें विदा करने बहार आता है ,
“घर फिर से सुना हो जायेगा ,तुम लोगो के बिना “अजय सोनल के सर पर हाथ रखकर कहता है
“भईया आप लोग कभी कभी आया करो ना हमसे मिलने और कभी वहा भी रहा करो,”
“हा सोच तो मैं भी रहा था ,पर यहाँ का काम भी बहुत हो जाता है ना ,और ये तो हमारी मिटटी है इसे छोड़कर कहा जायेंगे ,तुम लोग अच्छे से पढाई करो निधि का भी एडमिशन इस सत्र से कॉलेज में करा दूंगा ,कम से कम वो तो मेरे पास रहेगी “सोनल और रानी अजय से लिपट जाते है ,

“वी मिस यु भईया,”
अजय भी दोनों के माथे पर एक किस करता है और उन्हें बिदा करता है ,
दोनों गाड़िया अपने रफ़्तार में थी ,जिस गाड़ी में विजय और बाकि लोग थे वो आगे चल रहा था वही पहलवानों की गाडी पीछे थी ,की अचानक ही पहलवानों की गाड़ी का चक्का हिलने लगता है ड्राईवर गाड़ी स्लो करता है और सर बहार निकल कर देखता है ,
“अरे यार साला टायर पंचर हो गया “डाइवर गाड़ी रोककर निचे उतरता है सभी पहलवान निचे उतर जाते है ,विजय की गाड़ी इतनी तेजी से जा रही थी की उन्हें ये भान भी नहीं रहा की दूसरी गाड़ी पीछे रह गयी है ,दूसरी गाड़ी के ड्राईवर ने विजय को काल कर बताया की गाड़ी पंचर है ,
“ठीक है हम लोग यही रुकते है तुम लोग स्टेपनी लगा कर आओ ,”विजय ने चिंतित स्वर में कहा
वो घने जंगल के बीचो बीच थे दूसरी गाड़ी लगभग 2-3 किलो मीटर ही दूर थी ,एक घना सन्नाटा सभी ओर पसरा था ,वही गाड़ी में बैठी लडकियों की आवाज से वो शांति का वातावरण ध्वनित हो रहा था ,

तभी कही से एक भाला फेका गया जो आकर सीधे गाड़ी के कांच को तोड़ता हुआ ड्राईवर के सीने में घुस गया कोई कुछ समझ पाते इससे पहले कोई एक दर्जन लोग हाथो में हथियार लिए गाड़ी को घेर कर खड़े हो जाते है कुछ वक्ती टंगिये से गाड़ी के सीसे पर वार करते है ,लडकियों के चिल्लाने की आवाजे पुरे माहोल में फ़ैल रही थी ,विजय इस अचानक हुए हमले से स्तब्ध था ड्राईवर के खून के छीटे अभी भी उसके चहरे पर थे ,सभी सिमट कर एक साथ हो गए थे वही कुल्हाडियो से कांच को तोड़ने की कोसिस जारी थी ,विजय फोन निकल कर सीधे पहलवानों को फोन करता है ,सभी पहलवान गाड़ी को वही छोड़कर भागते है वही दूसरी गाड़ी का ड्राईवर अजय को कॉल कर देता है ,इधर विजय अपनी पिस्तौल ढूंढता है पर आज उसकी किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी पिस्तौल उसके पास नहीं थी ,गाड़ी के सीसे टूटने को थे विजय बाहर निकल कर लड़ भी नहीं सकता है पूरी गाड़ी उनसे घिरी हुई थी और बहार निकलने का मतलब होगा की बहा बैठी लडिकियो पर वो सीधे आक्रमण करते …..

विजय और किशन की आँखे मिली और जैसे उन्होंने इशारे में ही कुछ बात कर ली किशन पीछे से एक सरिया निकलकर विजय को देता है विजय अपनी तरफ के टूट रहे काच से उस सरिये को घुसा कर सामने वाले को अपने दरवाजे से हटने को मजबूर कर देता है ,जैसे ही उसे थोडा गेप मिलता है वो फुर्ती से अपने तरफ का दरवाजा खोलता है और बहार आते ही दरवाजा बंद कर देता है किशन भी फुर्ती दिखा उसे अंदर से लॉक कर देता है ,अब विजय बाहर था,कुछ लोग उसपर तलवारों से वार करते है वो अपने सरिये से उसे रोकता है सभी उसे गाड़ी से दूर ले जाने का प्रयास कर रहे थे ताकि जल्दी से जल्दी गाड़ी का कांच तोडा जा सके और अंदर आक्रमण किया जा सके ,
लेकिन विजयी उन्हें गाड़ी से दूर रखने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहा था ,लेकिन वो दूसरी तरफ ड्राईवर सिट का शीशा तोड़ने में सफल रहे और गाड़ी को अनलोक कर दिया दूसरी तरफ से आक्रमण होने लगे सभी का बहार निकलना जरुरी हो गया था सभी विजय की तरफ बहार निकल गए किशन और विजय एक रक्षा कवच की तरह तीनो लडकियों को घेरे थे दोनों के हाथो में बस एक सरिया था ,ऐसे तो विजय बहुत ताकती था पर लडकियों को बचाने के कारण वो खुलकर नहीं लड़ पा रहा था ,उसका पहला उद्देश्य था की कैसे लडकियों को सेफ रखा जा सके थोड़ी देर तक किशन और विजय के बचाव के कारन कोई भी उन्हें छू नहीं पाया तभी पहलवानों की चिल्लाने की आवाजे सुनाई देने लगी वो पास आ चुके थे ,की उनमे से एक व्यक्ति ने इशारा किया और सभी उन्हें वही छोड़कर भागने लगे उनकी मद्दत वहा से कुछ दूर पर बैठे कुछ व्यक्ति तीर कमान से कर रहे थे उनके कारण विजय उनके पीछे भी नहीं जा पाया ,पहलवानों के आते ही विजय लडकियों को पहलवानों के सुपुर्द कर उनलोगों के पीछे भागता है पर तब तक वो दूर निकल चुके थे ,

साफ़ था की योजना बड़े ही इत्मिनान से बनायी गयी थी ,और योजना बनाने वाले को पता था की वो कब निकलेंगे और किस गाड़ी से जायेंगे,
सभी शहर वाले घर में बैठे थे ,डॉ चुतिया,बाली और अजय भी वहा पहुच चुके थे ,दोनों ही चिंतित लग रहे थे ,
“पूरी प्लानिंग के साथ आये थे साले “विजय चिंतित होकर कहता है
“डॉ साहब अब मुझे लगता है की बहनों को गाव में ही रहने दिया जाय ,यह अकेले है खतरा भी बढ़ रहा है ,आज इतना बड़ा हमला हो गया पता नहीं आगे क्या होगा,”अजय भी चिंतित स्वर में कहता है ,
“यहाँ अगर हमला होना होता तो हो चूका होता ,यहाँ लडकिय सुरक्षित है ,फ़िक्र की कोई भी बात नहीं है ,लेकिन मुझे लगता है अब हमें कलवा को वापस लाना ही पड़ेगा,वही है जो शायद इसका पता लगा पाय की ये खेल कौन खेल रहा है,” डॉ ने संजीदगी से कहा
“आप समझ नहीं रहे है डॉ ये हमारे परिवार का मामला है “विजय की आवाज थोड़ी जोर से हो गयी थी ,
“विजय डॉ साहब भी हमारे परिवार का ही हिस्सा है,” अजय ने उसे शांत करते हुए कहा ,विजय बस झुंझलाकर रह गया

…
“ह्म्म्म सही कहा डॉ अब कलवा को भी वापस आना ही होगा ,”बाली एक गहरी साँस लेता हुआ कहता है ,
“मैं साले इन तिवारियो को छोडूंगा नहीं मेरे परिवार पर हमला करते है ,भईया अब समय आ गया है की खून की होली खेली जाय ,एक लड़ाई आर पार की “विजय की आँखों में खून सवार था …की डॉ के जोरो से हसने की आवाज गूंज गयी सभी आश्चर्य से उन्हें देखने लगते है ,
“तो तुम्हे अब भी लगता है की ये हमला तिवारियो ने करवाया है ,हा हा हा “सभी की निगाहे डॉ पर थी वो आगे कहते है ,

“अगर तिवारियो ने ये हमला कराया होता तो हमलावरों के पास कम से कम एक पिस्तौल तो होती ,लेकिन नहीं थी तलवार ,तीर कमान ,और भाले ,कौन लड़ता है ऐसे आजकल ,जरुर कोई गरीब आदमी होगा ,जिसके पास या तो पैसे नहीं या दिमाग नहीं है ,लेकिन दिमाग तो है इतनी अच्छी प्लानिग किया ,तुम्हे भी पता है की कितना मुस्किल होता है ऐसे किसी पर हमला करना ,जब साथ में 7-8 प्रशिक्षित पहलवान हो हथियारों से लेस हो ,ना जाने कितने दिनों का इन्तजार किया गया होगा इसके लिए की कैसे दो गाडियों को अलग किया जाय ,और अब उनके लिए और भी कठिन हो गया है हमला करना क्योकि वो जानते है की अब तुम लोग सुरक्षा और भी बड़ा दोगे ….सोचो कितने दिनों तक इन्तजार किया होगा इस आदमी ने ये जो भी हो ……….तुम्हारे माँ बाप के ऊपर हमला हुए ही 12-13 साल हो चुके है ,ये दूसरा हमला है ,कितना धैर्य इतनी समझ ……..”डॉ फिर चुप हो गए और सोच में गुम हो गए ,वही डॉ की बातो से बाकि लोग भी सोच में गम हो गए ,ये बात तो सही थी की जो भी किया गया बहुत धैर्य के साथ किया गया था ,और उनके परिवार पर होने वाला दूसरा हमला था…डॉ ने फिर से कहना शुरू किया
“अजय तुम्हे सुरक्षा की फ़िक्र करने की जरुरत नहीं है ,तुम्हारे पास आज भी पर्याप्त सुरक्षा है ,और हमेशा से रही है ,वो तुम्हारा या तुम्हारे परिवार का कुछ भी नहीं बिगाड़ पायेगा और ये बात उसे भी पता हो गयी होगी ,मुझे नहीं लगता की तुम्हारे ऊपर अब कोई दूसरा हमला होगा,इतने दिनों में उसे भी पता चल ही गया होगा की तुम्हारा सुरक्षा घेरा कितना मजबूत है…वो तुम्हे दुसरे तरीको से मारने की कोशिस करेगा ,पहले तो ये पता लगाओ की आखिर अंदर की बाते उन्हें पता कैसे चल रही है ,क्या कोई ऐसा है जो तुम्हारे घर में रह रहा हो और किसी दुसरे के लिए काम कर रहा हो ,”
“डॉ साहब हमारे घर में तो सभी पुराने लोग ही है ,बाकि हम किसी को काम पर रखते ही नहीं ”
“कही सुमन “विजय के मुह से अनायास ही निकल गया
“नही वो लड़की नहीं हो सकती ,कोई और ही है ……..

”डॉ बोलते बोलते सोच में पड़ जाते है …
तभी सुमन वहा आती है ,
“;भईया मैं घर जाना चाहती थी माँ और भाई से मिल लेती “सभी उसे घुर कर देखते है विजय अब भी उसे शक के नजरो से देख रहा था पर डॉ और अजय को उसपर भरोसा था ,
“ठीक है तैयार हो जाओ मैं छुडवा दूंगा “अजय कहता है
“ठीक है भईया “सुमन वहा से चली जाती है ,उसके जाते ही विजय फिर से अपनी बात पर जोर देता है
“हमारे घर में सभी लोग पुराने ही है बस यही है जो अभी अभी आई है ,भईया एक बार चेक करने में क्या जाता है ,”
“हा अजय ,विजय की बात ठीक ही है एक बार इसके साथ जा कर चेक किया जाय की इसका बेकग्राउंड कैसा है ,मैं इसके साथ जाता हु आज मुझे यहाँ की समझ भी है पता लगाना आसान हो जायेगा ,”डॉ की बात से सभी सहमत हो जाते है ,
थोड़ी देर में डॉ सुमन के साथ उसके घर की ओर चल देते है ,एक पतली बस्ती में उसका घर था ,डॉ के लिए जगह चिर परिचित थी लेकिन बहुत दिनों से वो वहा आये नहीं थे ,गाड़ी उन्हें घर से कुछ दूर ही छोड़ना पड़ा ,झुग्गी जैसी बस्ती में सुमन और डॉ चलते गए ,पहले तो सुमन ने मना किया था की बहार ही छोड़कर चले जाय पर डॉ ने साथ चलने की जिद कर ली ,…एक छोटा सा मकान का छोटा सा दरवाजा और गलियों के हालात ही डॉ को ये बता रहे थे की इनकी आर्थिक स्थिति क्या होगी ,मकान बस एक कमरा ही था बस एक ही कमरा और सभी चीजे सलीके से जमी हुई थी ,लगता था की सुमन ने ही इस छोटे से एक कमरे के घर को ऐसा सजाया होगा ,खिडकियों के आभाव में कमरे में एक अजीब सी नमी और गंध थी ,कमरे में दवाइयों की गंध फैली हुई थी जो किसी बीमार की मौजूदगी का संकेत देती थी,प्रकाश का साधन केवल एक छोटा सा माध्यम रौसनी से जलता हुआ बल्ब थी था ,जिसका दुधिया प्रकाश कमरे में दुधिया उजाला कर रहा था ,दो बिस्तर जमीन में लगे हुए थे ,जिनमे एक को सलीके से फोल्ड कर रखा गया था जिससे कमरे में थोड़ी जगह बने ,दुसरे बिस्तर में एक महिला उम्र कोई 35-40 की दिखाई दि ,समझते देर नहीं लगी की यही सुमन की माँ है ,वक़्त के थपेड़े ने उसे इतना मारा था जो उसके चहरे और उसकी काय से साफ ही पता लग रहा था ,कुछ किताबे एक और पड़ी हुई थी ,पूरा घर साफ़ सुथरा था ,जो गरीबी के बाद भी खुद्दारी और आत्मविश्वास की निशानी था ,
सुमन को देखते ही महिला उठी और आकर उसे अपने सीने से लगा लिया ,पर जब उसे भान हुआ की साथ में कोई और भी है वो उस वक्ती को देखती है और अपने किये पर शर्मिंदा होती है ,

“डॉ साहब आइये ना ,माफ़ कीजिये हमारे घर में आपको बैठाने के लिए खुर्शी भी नहीं है ,यहाँ आइये “सुमन ने बड़े प्यार और इज्जत से डॉ को बिस्तर पर बैठने का इशारा किया डॉ बहुत ही ख़ुशी से इस आग्रह कोई स्वीकार करते है ,
“माँ ये डॉ चु….

ये डॉ साहब है हमारे मालिक के खास दोस्त है और यहाँ के जाने माने इंसान है,और डॉ साहब ये मेरी माँ है ”
डॉ के चहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आ गयी लेकिन उन्होंने बता ही दिया ,
“नमस्ते मेरा नाम डॉ चुन्नीलाल है लोग मुझे प्यार से चुतिया डॉ कहते है “जहा डॉ की बात से सुमन शर्मिंदा सी हो गयी और डॉ को गुस्से से देखती है डॉ एक मुस्कान सुमन की ओर देते है वही सुशीला के चहरे का भाव बदलने लगता है ,
“चुतिया डॉ “उसकी माँ हलके आवाज में कहती है मानो अतीत की किसी यादो में कोई भुला हुआ सा याद ढूंड रही हो ,उसके चहरे के भाव को दोनों जन पढ़ लेते है ,
“क्या हुआ माँ “सुमन थोड़ी सी घबरा जाती है ,
“आप ही डॉ चुतिया है ,”वो बड़े ही आश्चर्य से डॉ को देखती है ,
“जी हा क्या आप मुझे जानती है ”
“हा हा यानि नहीं जानती तो नहीं पर मैंने आपके बारे में बहुत सुना है “वो बहुत ही उत्तेजित होकर कहती है जैसे उसे कोई पुरानी बात याद आ गयी हो
“किससे “डॉ उसे इस तरह व्यवहार करता देख उत्सुकता से पूछता है
वो बताना शुरू करती है ,उसकी आँखों में पानी की धार थी जो कडवे अतीत की यादो से आई थी वही सुमन को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की क्या बाते हो रही है और क्यों …लेकिन डॉ ……डॉ के चहरे पर एक ख़ुशी साफ़ तौर से खिल गयी थी उसका चहरा चमकने लगा था ……..

अध्याय 26

इधर घर में अजय के पास फोन आता है जिसे सुनकर उसका चहरा ख़ुशी से खिल जाता है ,बाली उसके चहरे के भाव देखकर
“क्या हुआ अजय खुश लग रहे हो ”
“हा चाचा कलवा चाचा इस घटना के बारे में जानकर वापस आ गए है ,”
बाली भी ख़ुशी से झूम गया
“अब कलवा आ गया है तो कोई फिकर नहीं है मुझे ,डॉ को फोन लगा तो ”
जी चाचा ,अजय डॉ को काल करता है
“हल्लो अजय ”
“डॉ साहब कलवा चाचा वापस आ गए ”
“वो तो होना ही था ,वो आज भी उस घर का वफादार है और तुम्हारे परिवार पर कुछ आंच आये और वो ना आये ये तो नहीं हो सकता ना ”
“जी डॉ हम लोग आज ही गाँव निकल रहे है ,आप भी चले कलवा चाचा आपको देखकर खुश हो जायेंगे ”
“नहीं अजय मैं एक दो दिन में आता हु ,सुमन को लेकर और यार तुम भी बाद में जाना क्या जल्दी है बूढ़े के लिए अपने बूढ़े बाली चाचा को भेज दे,तू आया है तो थोडा एन्जॉय करके जाना “अजय को हसी आ गयी बाली वही बैठा उसे पूछता है क्या हुआ वो कुछ नहीं में सर हिलाता है ,
“नहीं डॉ साहब अभी एन्जॉय करने का समय नहीं है मैं और बाली चाचा गांव को निकल रहे है,किशन और विजय को दो दिनों के लिए यही छोड़ रहा हु,आप लोग साथ ही आ जाना ”
“अच्छा ठीक है ”

अजय और बालि गांव को निकल जाते है वही अब विजय और किशन भी थोड़े रिलेक्स हो जाते है ,कलवा का आना ही काफी था सभी को रिलेक्स करने के लिए ….

दिन भर की थकान ने सभी को जल्द ही नींद के आगोश में सुला दिया ,,,
सुबह से ही सोनल और रानी कॉलेज के तैयार होने लगे वही विजय और किशन को समझ नहीं आ रहा था की वो आज क्या करे ,
“अरे भाई हमारे साथ कॉलेज चलो ना ,पर किसी को मत बताना की आप हमारे भाई हो “सोनल ने रानी को आँख मरते हुए कहा
“लेकिन हम वहा क्या करेंगे और हम तो आजतक कॉलेज नहीं गए हम अखंड देहाती लोग है वह तुम्हारे दोस्तों के सामने तुम्हारी इज्जत जाती रहेगी ,”किशन ने यु ही कहा जिसपर सोनल की आँखों में गुस्सा भर गया ,
“किसकी इतनी हिम्मत है की मेरे भाइयो को कुछ बोल दे ,तुम लोग हमारी शान हो समझे ,और अब चुप चाप चलो हमारे साथ ,”सोनल के गुस्से को देखकर विजय को हसी आ गयी और वो उसे पीछे से पकड़ लिया ………
“अरे मेरी जान को गुस्सा आ गया ,ठीक है हम साथ चलेंगे पर तुम अपने दोस्तों से क्या कहोगी हम कोण है ,बॉयफ्रेंड ”
“अरे यार भाई तुम लोग भी ना कौन पूछेगा यहाँ ,और बोल देंगे दोस्त हो “सोनल विजय की बांहों में मचलते हुए बोलती है ,
“ओके दीदी हम लोग भी तो बोर हो रहे है चलो कम से कम आपकी सहेलियों को ही लाईन मार लेंगे “किशन की बात सुनकर रानी और सोनल जोरो से हस पड़े विजय और किशन को समझ नहीं आया की क्या हुआ
“भाई माँ ने हमें सब बता दिया है की कैसे तू और सुमन ….ही ही ही अब भी लाइन मरना है किसी को …ही ही “रानी हस्ते हुए बोली और सोनल ने उसका साथ दिया
वही विजय और किशन हस्तप्रद से खड़े थे ,किशन के दिमाग में ये नहीं आ रहा था की माँ को कैसे पता चला वही विजय को ये नहीं समझ आ रहा था की आखिर इस कमीने के कर क्या दिया जो चाची को भी पता चल गया….
“माँ ने यानि क्या बता दिया ”

“अरे यही उस दिन गार्डन में ….”रानी बोलती हुई किशन के बांहों में झूल जाती है और उसका चहरा अपने हाथो में भर लेती है ,
“भाई मैं बहुत खुश हु की तुझे प्यार हो गया ,गार्डन में माँ ने तुम्हे देख लिया था ,सुमन अच्छी लड़की है और माँ भी इससे बहुत खुश है और मैं भी आखिर पहली बार मेरे कमीने भाई को किसी लड़की से प्यार हुआ “रानी की आँखों में आंसू था वही वो उसके चहरे को चूम रही थी ,विजय सोनल को पकडे हुए था, सोनल उनका प्यार देख खुद को रोक नहीं पायी और अपना सर उठाकर विजय को देखती है सोनल के भीगे हुए नयना विजय को प्यार का संकेत दे रहे थे वो अपना सर झुकता है और अपने होठो को उसके होठो के पास लाता है ,वो दोनों ये भी भूल जाते है की यहाँ किशन और रानी भी है सोनल भी तड़फती हुई अपने होठो को विजय के होठ से लगाती है विजय का जीभ अपने आप ही सोनल के होठो में चला जाता है ……….

दोनों एक दुसरे की गहरइयो में गोते लगाने लगते है वो प्यार के अहसास में दुनिया को भूल चुके होते है ,विजय सोनल को पीछे से पकड़ा था उसके हाथ सोनल के कमर को जकड़े हुए थे वही सोनल के हाथ विजय के सर को पकडे हुए थे ,
वही रानी और किशन दोनों को आँखे फाडे देख्र रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे ये दोनों कोई प्रेमी युगल हो ….हा वो प्रेमी तो थे पर एक रिश्ते के बंधन में बंधे हुए …रानी किशन को देखती है उसकी आँखों में एक अजीब सा आश्चर्य होता है जैसे पूछ रही हो ये क्या हो रहा है किशन भी रानी को देख कर अपने कंधे उचकता है ,पर दोनों को इस तरह से देखना उनके मनो को भी थोडा भीगा देता है ,,,रानी किशन से चिपकी हुई ही खड़ी थी वो ऊपर उठकर किशन के होठो को चूम लेती है ,किशन उसे झूठे गुस्से से देखता है वही रानी उसे एक मुस्कान देती है ,जब तक विजय और सोनल भी अलग हो जाते है दोनों को जब ये आभास होता है की सामने रानी और किशन है दोनों शर्म से गड जाते है ………
“ओह हो प्रेमी जोड़ा ,शर्म नहीं आती आप लोगो को आप भाई बहन हो या बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड जो होठो में होठो को भरकर चूस रहे हो ,और विजय भईया आपतो इमरान हासमी बन गए हो ऐसा लग रहा था दीदी के होठो को खा ही जाओगे “रानी हलके झूटे गुस्से और एक मुस्कान के साथ कह गयी ,सोनल शर्म से लाल हो गयी थी वही विजय भी अपनी नजरे नीची किये खड़े थे ,किशन अब भी आँखे फाडे उन्हें देख रहा था उसे समझ ही नहीं आ रहा था की क्या कहू और क्या करू …..

ये गलत है या सही है उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था ,
“क्यों क्या हुआ अब सर झुकाए क्यों खड़े हो आप लोग “रानी ने फिर से कहा
“वो रानी वो बहन “सोनल कुछ बोलने की कोसिस करती है पर कुछ बोल नहीं पाती
“हा क्या हुआ बोलो बोलो ”

“मैं सोनल से बहुत प्यार करता हु ,और ठीक है की वो मेरी बहन है पर मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता ,और तू भी मेरी बहन है तुझे अगर ये गलत लगता है तो हमें सजा दे तेरा पूरा हक़ है हमपर …तू मार दे या जान से ही मार दे बहन अगर प्यार करना और जाताना गलत है तो हा हमसे बहुत बड़ी गलती हुई है और हम ये गलती हमेशा करेंगे “विजय ने अपने ठोस से शब्द रख दिए उसके बोलने में एक विस्वास था जो सभी को हिला कर रख दिया,
रानी के आँखों में आंसू आ गए और सोनल ने विजय को अपनी बांहों में भर लिया ,और उसकी छाती में सर छुपा कर अपने को उसके हवाले कर दिया जैसे अब उसे कोई भी नहीं रोक सकेगा ,
“भाई मैं जानती हु आप एक दूजे से बहुत जादा प्यार करते हो ,और आप कुछ भी करो वो गलत नहीं हो सकता ,क्योकि प्यार में कुछ भी गलत नहीं होता,पर ये दुनिया की नजरो में गलत है आप हमारे सामने ये कर दिए पर दुनिया के सामने ना करे ,ये दुनिया प्यार को नहीं समझ पाती,अगर भाई बहन भी एक पार्क में बैठे बाते कर रहे हो तो भी लोग उसे गलत निगाहों से ही देखते है ,और मैं तो हमेशा चाहती हु की हमारा प्यार ऐसे ही बना रहे”रानी की आँखों से आसू आ रहे थे विजय सोनल को छोड़कर रानी को अपनी ओर खिचता है और अपनी बांहों में भर लेता है वही किशन की आँखों में भी आंसू आ जाते है और सोनल उसके गले से लग कर उसके गालो में एक चुम्मन देती है ,किशन के चहरे पर एक शरारती मुस्कान आती है और वो अपने होठो पर उंगली रखकर सोनल को इशारा करता है की यहाँ ,सोनल झुटा गुस्सा दिखा कर उसे एक मुक्का मरती है और उसके सीने से लग जाती है , सभी हसने लगते है ,किशन सोनल के बालो को सहलाता है और तभी सोनल अपना सर उठाकर किशन के होठो पर हलके से किस करती है और मुस्कुराते हुए फिर उसके छाती पर अपने चहरे को छुपा लेती है ,किशन भी मुस्कुराता हुआ उसके सर पर एक किस करता है………………

अध्याय 27

अजय घर पंहुचा सभी कलवा के आने से बहुत खुश दिख रहे थे ,खासकर सीता मौसी …
सीता मौसी और चंपा आज एक साथ ही बैठे थे पास ही कलवा भी बैठा था,वही निधि भी कान में हैडफ़ोन डाले चंपा के गोद में सोयी थी ,अजय और बाली ने जब ये सब देखा तो वो भी दिल से खुश हो गए ,ये पहली बार था जबकी बाली ने चंपा को अपनी भतीजियो पर यु दुलार दिखाते देखा था,कलवा के आने से घर में एक सकारात्मक उर्जा का संचार हो रहा था ,कालवा ने जब दोनों को देखा तो अपनी बांहे फैला कर खड़ा हो गया दोनों उसके गले से लग गए ,जब सब कुछ सामान्य हुआ तो सभी बैठकर मस्तिया करने लगे थे ,कलवा को घर के बाकी बच्चो की याद सता रही थी ,अजय ने उसे भरोसा दिया की वो बस

दो दिनों में ही वापस आ जायेंगे …..सबसे खास बात आज ये थी की चंपा भी सबके साथ साथ थी ,वो किसी किसी बात पर हलके से मुस्कुरा देती ,बाली चोर नजरो से उसे देख लिया करता कभी वो चोर नजरो से बाली को देख लेती ,पर दोनों के बीच कुछ भी बाते नहीं होती ,सालो का वैमनस्य था दोनों के बीच ऐसे कैसे ठीक हो जाता ,वही कलवा दोनों की इस दुविधा को समझ रहा था ,
कालवा से आश्रम के बारे में सुन सुन कर वह की खूबसूरती की बाते सुन सुन कर निधि को फिर से वहा जाने का मन करता है और वो चंपा के गोदी से उठकर जाकर अजय को पकड़ लेती है ,
“भाई मुझे फिर से आश्रम जाना है ”
“हा चलेंगे ना ”

“अभी ”
“पागल है क्या अभी कहा जायेंगे ,कितना समय हो गया है शाम होने वाली है ”
“नहीं अभी “निधि अजय को कसकर पकड़ लेती है ,जिसे देख सभी हस पड़ते है
“और चड़ा के रख अपनी इस दुलारी को,कितनी जिद्दी हो गयी है “सीता मौसी उसकी टांग खिचती है ,सभी हस पड़ते है पर निधि को जैसे किसी की बातो से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था,अजय की दुविधा देख कलवा कहता है
“बेटा अभी नहीं जा सकते वहा और अगर चले भी गए तो क्या ही देख पाओगे ,कल सुबह चले जाना ताकि दिनभर घूम के आ जाओ ”
“अरे काका कल तो कोई भी नहीं आया होगा ,कुछ दिन बाद चल देंगे जब सभी आ जायेंगे ”
“आप लोग मुझे कही नहीं घुमाने नहीं ले जाते ,मैं घर में बैठी बोर हो जाती हु , मुझे आज के आज जाना है मैं कुछ नहीं जानती ,फिर मेरा कॉलेज चालू हो जाएगा तो कहोगे की पढाई करो ,कॉलेज छोड़कर कहा जाओगी ,”निधि का मुह फुल चूका था ,अजय को बुरा तो लगा पर वो जानता था की शाम होने को है और वहा जाना खतरों से खाली नहीं है ,और वो रात तक वापस भी नहीं आ सकते …अजय को देखकर कलवा उसे अलग से बुलाता है ,
“देखो अजय अगर निधि जिद ही कर रही है तो तू उसे वहा ले जा ,वहा आश्रम में रात को सोने का इंतजाम हो जायेगा और वहा नहीं जाना चाहोगे तो मेरी एक झोपडी है ,जहा मैं रहता था , तुम वहा रुक जाना ,जो झरना तुमने देखा था बस उसके पास ही है ,तुमने देखा भी होगा ,”
“हा काका देखा है पर ,निधि को लेकर जाना और अकेले ,मुझे सही नही लग रहा है ,और आप तो जानते है की हमारे आने जाने पर कोई नजर रखे हुए है ,हमले का डर हमेशा लगा रहता है ,और इस पागल लड़की के जिद में मैं इसे मुस्किल में नहीं डाल सकता “कलवा के चहरे पर मुस्कान आ गयी
“तुम सही कह रहे हो पर एक काम करो की तुम उसे मना कर दो ,वो रोती हुई नाराज होकर अपने कमरे में चली जायेगी तब कुछ देर बाद तुम उसके पास जाना और उसके साथ पीछे के गेट से निकल जाना ,जाने के लिए कोई ऐसी बाइक ले जाओ जिसे कोई भी पहचाने और अपने कपडे भी बदल लो ,ऐसे उस इलाके में अभी शांति है और मुझे तुम पर पूरा भरोषा है की अगर कुछ हुआ भी तो तुम सब सम्हाल लोगे ,और तुम्हे कुछ परेशानी हो गयी तो तुम बाबा जी के पास मदद को जा सकते हो ,किसी की इतनी हिम्मत

नहीं है की उनके आश्रम में घुस जाए ,”
कलवा की बात अजय को समझ आ गयी और वो जाकर निधि को डांटकर मना कर देता है और सचमे निधि मुह फुलाकर वहा से चली जाती है ,

जब सब चले गए बस कलवा और बाली ही गार्डन में रह गए थे,
“अब चंपा पहले जैसी नहीं रह गयी ,मैं जब से आया हु मुझे ये देख कर ख़ुशी हुई की वो कैसे निधि को माँ जैसा प्यार कर रही थी ,”कलवा बाली की ओर देखता हुआ कहता है ,दोनों बचपन के दोस्त थे वही कलवा ही था जो चंपा को को भी बाली की शादी से पहले से जानता था,असल में तो उसे ने ही दोनों को मिलाया था क्योकि वो बजरंगी से मिलने तिवारियो के गाव जाता रहता था ,
“हा यार बात तो सही है ,मुझे भी ये देख कर बहुत ख़ुशी होती है ,पर काश वो हमेशा से ऐसी रहती तो …”बाली की आँखे नाम हो चुकी थी ,कलवा उसके कंधे पर हाथ रखता है ,

“भाई जब जागो तभी सवेरा,तुमने भी बहुत पाप किये है अपनी जिंदगी में समझ ले ये उसका ही परिणाम था ,अब उसके साथ अच्छा बरताव किया कर ,उससे बात किया कर ,और उसने जो भी किया वो तिवारियो के भड़काने पर किया था ,लेकिन जब से वीर भईया गए है ,वो उनके संपर्क में नहीं रही ,इतने सालो से वो सबसे दूर रही है ,यही उसकी सजा सजा है मेरे भाई “कलवा की बातो से बाली की मन की दुविधा जाती रही ,कुछ दिनों से वो चंपा को देख रहा था और उसका गुस्सा उसके लिए धीरे धीरे कम हो रहा था,जो अब पूरी तरह से कम हो चूका था ,पर एक दुविधा सी उसके मन में जरुरु थी जो की अब कलवा के समझाने से कम हो चुकी थी ,
“तू तो पूरा ही बाबा बन गया बे “बाली ने मजाक में कहा और दोनों हसने लगे
“चल आज मेरा भाई आया है आज दारू पीते है ,पहले की तरह ही शुद्ध देसी वाला मउहा,जगलो में जाकर ,देशी मुर्गे के साथ बिलकुल शुद्ध और प्राकृतिक ,क्या बोलता है फिर से जवानी के दिन जीते है “कलवा भी हस पड़ा
“साले तू अभी भी इन सबके शौक रखता है ”

“क्या करू भाई जब से तू गया है किसके साथ जाता ,सब छुट गया है ,याद है पहले कैसे हम दोनों भईया से छुपकर जगलो में जाया करते थे ,देसी मऊहा ,देसी मुर्गा ,और देसी लडकियों के साथ ,….

हा हा हा क्या दिन थे यार वो भी ,”बाली याद कर थोडा इमोशनल सा हो जाता है ,
“हा यार क्या दिन थे ,पर अब नहीं ये सब छोड़ चूका हु मैं ,यही शराब थी जिसने ना जाने कितने गलत काम कराये है हमसे ,वीर भईया ने हमें कभी भी मन नहीं किया पर इसका हमने क्या फायदा उठाया ,पता नहीं कितनी लडकियों की जिंदगी से खेल गए ,”कवला थोडा उदास सा हो जाता है ,
“क्या गलत किया था भाई ,क्या कभी किसी लड़की को बिना उसकी मर्जी के कुछ किया है हमने ,”
“हा नहीं किया पर क्या हमने जो किया वो सही था ”
“अबे वो हमारी जवानी थी ,लडकिय भी तो अपने कपडे हमारे लिए ऐसे ही खोल दिया करती थी ,हा हा हा ”
बाली की बात सुन कर कलवा भी मुस्कुरा देता है ,
“चल बस हो गया अब हम भी बड़े हो चुके है और हमारे बच्चो के दिन आ गए है ,तू चंपा से जाकर बात तो कर ,अब उम्र के इस पड़ाव में भी क्या तू और वो अकेले ही रहोगे ,जिंदगी भर तो तूने उसे प्यार नहीं दिया अब दे दे ,”कलवा की बात बाली को समझ में तो आ चुकी थी पर इसपर अमल करना थोडा मुस्किल मामला था ……….क्योकि सालो से दोनों ने आपस में बात नहीं किया था …

अध्याय 28

इधर शहर में ………..
सोनल ,रानी ,किशन और विजय कॉलेज के लिए निकल जाते है ,किशन ने जहा एक ब्लू टी-शर्ट पहना था वही विजय ने ब्लैक वही किशन जहा ब्लैक जींस में था वही विजय डेनिम ब्लू जींस में ,,,,,कातिल और क्लासिक कॉम्बिनेशन लेकिन विजय के सामने किशन फीका ही दिख रहा था ,उनकी बहनों ने अपने भाइयो के लिए इस्पेसल शोपिंग की थी ,ये उनकी ही चॉइस थी ,विजय का गोरा रंग काले रंग में और भी खिलकर आ रहा था ,वो किसी रियासत के राजकुमार सा लग रहा था ,बस माथे पर लाल टिका और हाथो में एक तलवार की कमी थी,….उसका लम्बा चौड़ा शारीर उसमे ऐसे खिल रहा था की कोई भी देखे तो बस थोड़ी देर के लिए देखता ही रह जाय ,ऐसे तो दोनों के परिधान बहुत ही सोबर थे पर उनकी पर्सनाल्टी को देख कर माडल भी जलन खा जाते ,विजय के कसे हुए डोले चौड़ा सीना और सपाट पेट ,दुधिया गोरा तेजमय उसका शारीर ,और उसकी लम्बाई ……दूसरो की बात छोडो दोनों बहनो की ही नजर अपने भाइयो से नहीं हट रही थी ,विजय की पर्सनाल्टी के सामने किशन टिक नहीं पा रहा था लेकिन वो किसी चोकलेटी बॉय सा लुक कर रहा था ,उसका शारीर विजय जितना चौड़ा तो नहीं था पर लम्बाई और गोरा रंग मासूम सा छरहरा बदन उसे चोकलेटी लुक दे रहे थे ,उसके चहरे में वो तेज नहीं था जो विजय और अजय के रंग में था ……….

जब चारो कॉलेज में इंटर हुए तो शायद ही कोई होगा जिसने इन दोनों नए लडको को मुड कर और घुर कर नहीं देखा हो ,सोनल और रानी तो थोड़े घबरा भी गए थे ,क्योकि उन्हें पता नहीं था की उनके भाई इतने ज्यादा हैण्डसम है,की लडकिय तो लडकिय लड़के भी उन्हें घुर रहे थे ,खासकर विजय को ,एक तो उसकी लम्बाई और शारीर ही ऐसा था की वो अलग से ही दिख जा रहा था ,ऊपर से उसके अंदर का वो तेज जो शहर में रहने वाले लडको ने शायद कभी जाना ही नहीं था ,एक आजीब सा तेज होता है जो बयां नहीं किया जा सकता ये तेज आता है ,सही खाने पिने से ,व्ययाम से ,निश्चिन्त दिनचर्या से ,और कुछ कुछ अपने खानदान से …सोनल और रानी उन्हें केंटिन में ले गयी ,उनके लगभग सभी दोस्त अजय और विजय से मिल चुके थे इसलिए उन्होंने सच्चाई नहीं छुपाई और उन्हें सबसे इंट्रो कराया ,विजय उस दिन तो अजय के साथ था और इसलिए बड़ी ही शराफत से सबसे मिल रहा था पर आज इतनी लडकियों को देखकर वो बहुत ही खुश था ,ऐसा लग रहा था की शेर को खरगोशो का झुण्ड मिल गया हो ,वही किशन अब प्यार का मारा हो गया था उसे सभी के बीच सुमन की ही याद आ जाती है ,विजय अपने रंग में आ रहा था ,सोनल उसे बार बार आँख दिखाती और वो थोडा चुप हो जाता ,पता नहीं क्या था साले में की सभी लडकिय उससे जोक की तरह चिपकी जा रही थी,ऐसे की सोनल रानी किशन और खुसबू (सोनल की बेस्ट फ्रेंड जो अजय की दीवानी थी )दुसरे ही टेबल में आ गए ,और विजय सभी लडकियों से घिरा हुआ दुसरे टेबल में था ,

“तेरा भाई पागल है “खुसबू ने हस्ते हुए कहा
“तो तू भी जा ना उसी के साथ बैठ “सोनल चिड़ते हुए बोली
“अरे मैं तो तेरे अजय भईया की दीवानी हो गयी हु ,पता नहीं जब से उनको देखा है …..”खुशबु खो सी गयी अपने और अजय के बीच की गहराई को वो अच्छे से जानती थी ,वो जानती थी की अगर उनके बीच कुछ हुआ तो वही इतिहास फिर से दोहराया जाएगा जो उसके बुआ के समय में हुआ था ,वही कत्लेआम वही नफरत ………खुशबु के आँखों में फिर से पानी आ गया जिसे सोनल ने देख लिया ,
“अरे मेरी जान अब ऐसा भी क्या प्यार की जुदाई में रोना शुरू कर दो ,हा …मेरी गारंटी है की तू ही मेरी भाभी बनेगी ,”सोनल ने खुशबु के बाजुओ को हलके से चुटकी काटी की खुशबु हस पड़ी

“क्या पता बहन ,वक़्त को क्या मंजूर है ,”वो शून्य आकाश में देखने लगी थी
वही किशन एक अनजान नजरो से खुशबु को देख रहा था उसे समझ नहीं आया की आखिर ये हो क्या रहा है ,
“ये हमारी भाभी जी है,अजय भईया की गर्लफ्रेंड और होने वाली बीवी चलो पाओ छुओ “रानी को मजाक सुझा ,किशन को थोडा यकीं नहीं आया पर सोनल और खुशबू की बाते और खुसबू का इतनी गंभीरता दिखाना ….

वो उठा और खुशबु के पैरो को छूता हुआ ,
“पाँव लागी भाभी जी “किशन के इस कारनामे से अपने खयालो में खोयी हुई खुशबू अचानक ही जागी और खड़ी हो गई ,उसने आसपास देखा रानी और सोनल पेट पकड़ कर हस रहे थे वही बेचारा किशन मासूम सा खड़ा था ,पुरे केंटिन में उसे देखने वाला और कोई नहीं था ,एक कोने में विजय के टेबल के आसपास लकिया ऐसे मंडरा रही थी जैसे वह कोई क्लास चल रही हो ,वो उन्हें पता नहीं क्या क्या कहानिया सुना रही थी लडकिय बीच बीच में जोरो से हस्ती ,वो किसी के गालो को किसी के बालो को छूता और वो लड़की शर्मा जाती वही बाकि जलने लगते ,ऐसा लग रहा था की कोई हैण्डसम सा प्रोफ़ेसर क्लास ले रहा हो …वही कुछ लड़के भी वहा बैठे उसे जलन की निगाहों से देख रहे थे ,
खुसबू और किशन को जब समझ आया की ये एक मजाक ही वो भी हसने लगे और खुशबु ने सोनल को एक हलके से मुक्का मारा ,
“तो तूने नितिन को बताया क्या अजय भईया के बारे में “सोनल ने बातो के दौर में ही पूछ लिया ,खुसबू ने उसे एक गंभीर सा चहरा बनाया और
“तूने बताया क्या ……….,”खुशबु का इतना ही बोलना था की सोनल ने अपनी आँखे बड़ी करके उसे रोक दिया जैसे कह रही हो कुछ भी मत कहना ,खुशबू समझ गयी थी की किशन पास ही और किसी को कुछ भी नहीं पता ,खुशबु ने टॉपिक पलट दिया
“तूने बताया क्या अजय को मेरे बारे में “सोनल और रानी ने राहत की साँस ली ,
“भाई देख ना ये विजय क्या कर रहा है ,हमें क्लास भी जाना है ,उसे बुला ला ”
“अरे दीदी वो मेरी कहा सुनेगा ”
“अरे जा ना क्यों नहीं सुनेगा “किशन उठकर विजय के पास चले जाता है ,सोनल खुशबु की तरफ रुख करती है ,
“तू पागल है क्या ,मैंने नितिन के बारे में अपने भाइयो को नहीं बताया है ,”सोनल ने धीरे से कहा ,खुशबू के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी
“हा कामिनी तो तूने कैसे सोच लिया की मैं अपने भाई को तेरे भाई के बारे में बताउंगी”सोनल के चहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी
“हा यार ये भाई लोग बड़े अजीब होते है है ना ,बहनों के ऊपर जान छिडकते है ,कुछ भी करने को तैयार रहते है ,लेकिन जैसे ही किसी लड़के का नाम आया तो बस….

सब प्यार की “सोनल बोलकर चुप हो जाती है ,थोड़ी देर बाद वो फिर कहती है
“एक हम बहन है जो अपने भाईयो के लिए लडकिय ढूंढते रहती है “सोनल थोडा सा चिढ जाती है ,
“अरे मेरी जान वो इसलिए क्योकि भाइ कभी भी अपनी बहनों को गलत हाथो में जाता नहीं देख सकता ,”खुशबु बड़े ही प्यार से कहती है ,
“ऐसे मुझे लगता है अजय भईया मेरे और नितिन के रिश्ते को लेकर मान जायेंगे उन्होंने कहा भी था की हम लोग जिसे पसंद करेंगे उससे हमारी शादी करा देंगे ,”सोनल ने चहकते हुए कहा ,वही खुशबु फिर अपने ही विचारो में खो गयी ,’तुझे क्या पता बहन की जब अजय को इस रिश्ते के बारे में पता चलेगा और ये पता चलेगा की हम कौन है ,ना जाने क्या भूचाल आएगा

इधर किशन विजय को बुलाने आता है ,विजय किशन का हाथ पकड़कर अपने पास खीच कर बैठा लेता है ,लेकिन किशन को इसमें कोई भी इंटरेस्ट नहीं था ,वो विजय के कानो में कहता है ,
“अबे इन्हें छोड़ बहार चल मस्त प्रोफ़ेसर है ,क्या फिगर है जैसे मेरी का था ,”विजय आँखे उठाकर किशन को देखता है ,वो जल्दी से सबको बाय कहता है और वहा से उठकर किशन के साथ हो लेता है ,मेरी का नाम सुनकर ही उसे कुछ कुछ होने लगता है ,किशन उसे सीधे सोनल के पास ले जाता है ,
“तो हो गए फुर्सत ,कमीने कही के कुछ तो बहनों की इज्जत का ख्याल करता “सोनल झुटा गुस्सा दिखाती है ,विजय किशन को घुर कर देखता है वो हलके हलके मुस्कुरा रहा था ,
“अरे मेरी बहना मैं तो तुम्हारी इज्जत बढ़ा रहा था ,अब देखना कितनी लडकिया तुम्हे मेरा नम्बर मांगती है “विजय सोनल के चहरे को प्यार से हाथो से पुचकारता है ,सोनल के होठो में एक मुस्कान आ जाती है ,
“भईया आप इतनी जल्दी लडकिय पटा कैसे लेते हो ,गाव में भी शहर में भी ,कम उम्र की भी और मेरी जैसी सेक्सी को भी “रानी हस्ते हुए कहती है ,मेरी का नाम सुनकर उसे किशन की याद आ जाती है ,
“बस बहनों तुम्हारा प्यार है तुम्हारे भाई पर ,मुझे किशन से अकेले में कुछ बात करनी है मैं आता हु “विजय किशन के कंधे को पकड़कर केंटिन से बहार ले जाता है ,किशन को पता था की वो उसे क्यों ले जा रहा है पर वो चुपचाप ही साथ चल देता है …और केंटिन से बहार निकलते ही दौड़ पड़ता है ,

“रुक साले तुझे बताता हु मैं “विजय भी किशन के पीछे पीछे दौड़ता है ,
इधर एक तेज रफ़्तार से आती हुई एक बाइक ,जिसमे दो लड़के सवार थे किशन के अचानक भागने से उनका बेलेंस डगमगा जाता है ,और तेजी से ब्रेक लगाते है ,किशन उनसे हल्का सा टकरा भी जाता है ,
“मादरचोद पागल है क्या,”बाइक चला रहे लड़के की आवाज आती है ,की विजय जाकर उसका कॉलर पकड़ लेता है ,बदले में वो शख्स भी विजय का कालर पकड लेता है
“गाली किसे दे रहा है मादरचोद ………….

”पूरा केम्पस बस उन दोनों को देख रहा था ,ऐसे लगा की दो पहाड़ एक दुसरे से टकराने वाले है ,विजय किसी पर्वत सा विशाल लग रहा था वही सामने वाला शख्स भी कम ना था ,लम्बाई चौड़ाई में वो लगभग विजय के ही बराबर था ,काले रंग की कमीज और डेनिम ब्लू जींस पहने ,माथे में लाल रंग का लम्बा तिलक उसके गोर और चमकीले रंग में खिल कर दिखाई दे रहा था ,चहरे से किसी राजकुमार सा लग रहा था ,छाती के घने बाल उसके शर्ट से झांक रहे थे वही उसके एक सफ़ेद धागा उन्ही बालो में से देखी पड़ रहा था ,जो उसका जनेऊ था,इससे पता चल रहा था की वो एक ब्राम्हण कुल का लड़का है ,दोनों के चहरो में एक सा तेज था जैसे लग रहा हो की इनका खून एक ही है ,उस लड़के के पीछे बैठा शख्स भी अब निचे उतर चूका था पर दोनों एक दुसरे का कालर नहीं छोड़े थे ,पुरे केम्पस में एक शांति फ़ैल गयी थी ,,,लेकिन दोनों में से कोई भी कुछ कर नहीं रहा था वो बस एक दुसरे की आँखों में देखे जा रहे थे ,जैसे आँखों से ही जंग जितना चाह रहे हो ,दोनों की आँखे लाल थी जैसा की खून उतर आया हो ,उन्हें लग रहा था की जैसे ये दुश्मनी आज की नहीं ये उनके खून में थी ,खून का उबाल उनके चहरे पर साफ दिख रहा था ,दोनों ने ही एक ही रंग के कपडे पहने थे ,एक ही कद काठी एक ही जैसा तेजस्वी चहरा ……………….दोनों ही रुके हुए थे किसी ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं की दो आवाजे जोर से आई …भईया रुको
लेकिन किसी को भी कोई फर्क नहीं पड़ा था,दोनों को किसी ने जोरो से हिलाया ..
“भईया भईया “दोनों अपनी बहनों के तरफ मुड़े …उनके कानो में एक दूर की आवाज सी सुनाई दि …”ये सोनल का भाई है ” “ये खुशबु के भईया है ”

दोनों ने एक दुसरे को छोड़ा पर दोनों की आँखे आपस में मिली ही थी ,वो खून का उबाल अभी भी शांत नहीं हुआ था ,ना जाने क्यों ये कैसा आकर्षण था जो दोनों ही समझ नहीं पा रहे थे ,,,,किशन,रानी ,सोनल ,खुशबु और वहा खड़ा हर शख्स उनकी इस हरकत को देखकर हैरान था ,की सोनल ने पानी की बोतल ली और एक एक करके दोनों के सर में डाल दिया …..
की जैसे कोई सपने से जागे हो दोनों ही हडबडा से गए …दोनों ने आस पास देखा और एक दुसरे को देखा सब तो ठीक था फिर हुआ क्या था ,…..
“क्या कर रहे हो तुम लोग ,पागल हो गए हो क्या ….

”सोनल की आवाज से दोनों का धयान उसकी तरफ गया
“नितिन ये मेरे भाई है विजय और किशन ,और विजय ये खुसबू के भाई है नितिन और राकेश “सभी एक दूजे से हाथ मिलते है सिवाय नितिन औरर विजय के दोनों अभी भी एक दूजे को देख रहे थे
“चलो हाथ मिलाओ क्या हुआ “सोनल फिर गुस्से से कहती है ,दोनों अपने हाथ आगे बढ़ाते है और एक दुसरे के हाथो को मजबूती से दबाते है सोनल और खुशबु ये देख कर डर ही जाते है ,सोनल तो हाल काफी अच्छा था पर खुसबू उसेकी तो रूह ही काप गयी ,,,वो जानती थी की ये क्यों हो रहा है ,खानदानी दुश्मनी इतनी ताकतवर होती है की खून भी अपना रंग दिखाना शुरू कर देता है ……उसके कानो में अपने दादा रामचंद्र तिवरी की बात गूंज रही थी ,”बेटा जिस दिन ये दोनों परिवार आपस मे दुशमनी छोड़कर प्यार से रहेंगे उसी दिन मेरा जीना सफल होगा,मैं अपने बच्चो के हाथो मजबूर हु पर बेटा अगर तुझे मौका मिले तो तू जरुर दोनों परिवारों को मिला देना ….मुझे मेरे नाती नतनिनो से मिला देना ”
खुशबु को लगने लगा की उसके दादा का सपना कभी भी पूरा नहीं हो पायेगा,….

अध्याय 29

कुछ देर और दो काफी से दोनों नार्मल हो चुके थे सभी बैठ कर काफी पि रहे थे ,विजय और नितिन बाते तो नहीं कर रहे थे पर अब सामान्य व्यवहार कर रहे थे की ,एक लड़का उनके पास दौड़ता आया ,नितिन भाई आपको और (विजय की ओर देखते हुए )इसको प्रिन्सिपल मेडम बुला रही है…सोनल ने अपना सर पकड़ लिया उसे समझ आ चूका था की किसी ने उनके लड़ाई की बात प्रिंसिपल तक पंहुचा दि होगी और वो खडूस मेडम जो की नितिन को ही लाइन मारती है ऐसा मौका कैसे छोड़ सकती थी ,
मिसेस काव्या सेठ ,एक 40-45 साल की कातिल महिला थी ,पूरा कॉलेज उसके हुस्न पर दीवाना था वही काव्य नितिन पर ,सोनल और नितिन के बारे में उसे पता था की दोनों एक दुसरे से प्यार करते है इसलिए वो सोनल के पीछे लगी रहती थी ,ऐसे तो काव्य काफी स्ट्रिक्ट थी पर उसके दिल के किसी कोने में वो एक चंचल औरत ही थी ……..

अब काव्य को ये पता चल गया की नितिन की लड़ाई सोनल के भाई से हुई है ,वो ये मौका नहीं छोड़ सकती थी ,लेकिन उसे ये नहीं पता था की वो जिसकी बेज्जती करने वाली थी वो विजय था,जिसने अपने भाई के अलावा किसी की नहीं सुनी ,और इसी बात का सोनल को डर था वो कुछ उल्टा सीधा ना कर दे ,
“भाई प्लीज् कुछ उल्टा सीधा मत करना मेडम के पास ,नितिन यार सम्हाल लेना प्लीज “सोनल ने हाथ जोड़कर कहा ,नितिन ने हलके से हां में सर हिलाया वही विजय को ये अच्छा नहीं लगा की सोनल नितिन को सम्हालने को कह रही है ,उसने भी हां में सर हिला दिया…
दोनों प्रिंसिपल के ऑफिस के बहार पहुचे साथ में सभी थे पर सिर्फ दोनों को ही अंदर जाना था बाकियों को अंदर आने से मेडम ने मना कर दिया था ,,,,इससे पहले की वो अंदर जाते

“सोनल यार टॉयलेट कहा है मुझे जोरो की आई है ” सोनल ने विजय को गुस्से से देखा ,और इशारे से बताया वो अंदर गया और करीब 2 मिनट के बाद वापस निकला उसके चहरे में एक कातिल मुस्कान थी जिसे सोनल और किशन समझ रहे थे ,नितिन पहले ही अंदर जा चूका था ,
“भाई प्लीज कुछ उल्टा सीधा मत करना “सोनल ने उसके कानो में कहा ,विजय उसके माथे को चूमता है
“कुछ नहीं होगा फिकर मत कर “विजय अंदर जाता है ,
“क्या मैं अंदर आ सकता हु “अंदर नितिन सर निचे किये हाथ बंधे खड़ा था ,वही काव्या उसके सामने टेबल से टिकी हुई खड़ी थी ,विजय ने जैसे ही उसे देखा उसके कमर के निचे हलचल होनी शुरू हो गयी ,उसने सही सुन रखा था ये सच में माल थी,महरून रंग की साडी पहने ,उसके तने हुए स्तनों से उसकी घाटी साफ़ दिख रही थी वही होठो में लाल रंग का लिपस्टिक ,ऐसे लग रहा था की नितिन के आने पर खास रूप से लगाया गया हो ,साड़ी से उसका पेट साफ झांक रहा था वही उसकी नाभि की गहरी और उसके सपाट पेट विजय के जानवर को जगाने के लिए काफी था ,
मेडम ने सर उठाकर देखा ,नितिन की तरह ही लम्बा चौड़ा कदकाठी का एक गबरू जवान उसके सामने खड़ा था ,वो विजय को देखकर थोड़ी देर देखते ही रह गयी ,उसने उसे ऊपर से निचे तक देखा उसका गुस्सा या कहे झूठा गुस्सा जो वो विजय पर करने वाली थी थोडा कम हो गया …विजय आकर नितिन के सम्नातर खड़ा होता है पर नितिन की तरह मुह निचे किये हुए नहीं बल्कि उसकी जवानी को निहारते ,
काव्या उसे ऐसा घूरते देख खुद भी नर्वश हो जाती है ,की विजय उसे निचे देखने को बोलता है ,काव्य की तो सांसे ही रुक जाती है ,विजय के जींस में एक बम्बू जैसा तना था ,,विजय अपने बम्बू को सहलाता है और उसे टेढ़ा कर काव्य को उसकी मोटाई और लम्बाई दिखता है ,….

उसे तो ये यकीन ही नहीं आ रहा था की कोई उसके सामने ऐसा भी कर सकता है वही किसी का इतना बड़ा भी हो सकता है ,काव्या ललचाई आँखों से उसे देख रही थी ,तभी नितिन को ये शांति समझ नहीं आती वो सर उठा कर
“मेडम ”

नितिन का ये कहना काव्या को जैसे सपने से जगाता है ,वो थोड़ी देर तक तो खुद को ही सम्हालती है …
“हा हा नितिन तुम जाओ बाहर ,इसे मैं देख लुंगी ”
“मेडम इसकी कोई गलती नहीं है ,प्लीज ,ये तो इस कॉलेज का भी नहीं है ”
“मैंने कहा ना ,जाओ “नितिन बुरा सा मुह लिए वहा से निकल जाता है ,बहार सभी नितिन को इतनी जल्दी आते देख घबरा जाते है ,
“नितिन विजय कहा है “सोनल घबराते हुए उसे पूछती है
“मेडम ने उसे रोक लिया है ,बहुत गुस्से में है ”
“हे भगवान मेरे भाई को बचाना उस चुड़ैल से “सोनल हाथ जोड़कर ऊपर देखती है वही किशन सोनल के पास आकर हलके से फुसफुसाता है
“दीदी भगवन से विजय की नहीं मेडम की सलामती की दुआ मांगो ,वो अपनी कच्छी टॉयलेट में उतार कर गया है “सोनल आश्चर्य से किशन को देखती है किशन हां में सर हिलाता है और सोनल अपना सर पकड़कर बैठ जाती है ……………
इधर काव्या को समझ नहीं आ रहा था की आखिर वो उसे बोले क्या ,
“तो तुम सोनल के भाई हो ,”अपने सूखे गले से थूक की एक घुट गटकते हुए कहा
“जी मेडम जी ” विजय के चहरे पर वही मुस्कान अब भी थी
“अच्छा यहाँ पर गुंडा गर्दी करने आये हो ,मैं इस कॉलेज का अनुशासन कभी ख़राब नहीं होने दूंगी “काव्या का धयान बार बार उसके मुसल पर चले जाते थे,
“मैं यहाँ करने तो कुछ भी नहीं आया था ,पर अब लग रहा है कुछ तो करना ही पड़ेगा “विजय काव्या के थोड़े और पास जाता है ,उसका चहरा काव्य के चहरे के बिलकुल नजदीक था ,काव्या की भार्री होती सांसे विजय के चहरे से टकरा रही थी,काव्या के नथुनों में एक अजीब सी गंध आई मर्दाना शारीर की ,वैसे ही शारीर की जिसकी वो भूखी थी ,उसने एक गहरी साँस लेकर पूरी खुसबू अपने अंदर उतार ली ,विजय तो खिलाडी था उसे लडकियों से खेलना बहुत अच्छे से आता था,वो अपने हाथ काव्या के कमर पर ले जाता है उसे जकड़ता नहीं बल्कि हलके से उसके पेट पर हाथ चला देता है ,काव्या के शारीर में एक झुनझुनाहट सी दौड़ जाती है ,उसके मुह से एक गर्म आह छूटती है ,विजय अपने हाथ बढाता है और बड़े ही हलके हाथो से उसे ऊपर की ओर ले जाने लगता है वो उसके साड़ी के पल्लू को गिरा देता है उसके कसे हुए ब्लाउस से उसके तने हुए भराव लिए हुए स्तन विजय के सांप में एक जोरदार हलचल मचा देते है और वो उसकी कमर को पकड़ कर उसे अपनी ओर खीच लेता है ,
“आहाह्ह्ह नहीं बाह र सभी खड़े है ,”काव्या के मुह से अनायास ही निकल जाता है ,
“अरे मेडम जी दुनिया की इतनी भी क्या चिंता ,उन्हें खड़ा रहने दो ,मेरा भी तो खड़ा है उसका कुछ सोचो ,”वो उसे और कसकर अपनी ओर खिचता है ,काव्या की कमर जाकर विजय की कमर से सट जाती है उसका लिंग सीधे उसकी

योनी से टकराता है की काव्या की आह ही निकल जाती है ,विजय उसके मासल निताम्भो को अपने हाथो से भरकर जोर से अपनी ओर खिचता है ,फिर उसमे भरा मांस अपने हाथो से मसलता है काव्या ऐसे तो विरोध ही नहीं कर पा रही थी पर उसे अपने सम्मान की चिंता होने लगी ……….

ना जाने कितने सालो से वो अपने काम की आग को दबा कर रखी थी,जब उसने पहले पहल नितिन को देखा था तभी उसके काम की अग्नि ने सर उठाया उसे एक मर्द दिखा जो उसे संतुस्ट कर सकता था ,पर नितिन तो जैसे सोनल का दीवाना था और उसका शांत स्वभाव ………..बहुत कोसिसो पर भी वो कुछ नहीं किया ,और एक ये था नितिन के टक्कर का मर्द साले ने आते ही …..हे भगवन मैं क्या करू ,कैसे सम्हालू खुद को मैं अपने को रोक क्यों नहीं पा रही ,कितना मजबूत है ये ,कितना जालिम है हे भगवान …काव्या अपने ही खयालो में खोयी थी और विजय ने उसे मसलना शुरू कर दिया ,उसके पिछवाड़े को मसल मसल कर लाल कर दिया इतने कोमल की विजय को मजा ही आ गया था ,लेकिन काव्या जैसे भी थी वो इस कॉलेज की प्रिंसिपल थी और इस समय वो अपने ऑफिस में थी जहा कोई भी आ सकता था ,ऑफिस का गेट अब भी अंदर से बंद नहीं था इसका सवाल ही पैदा नहीं होता ,कोई भी बिना नोक किये ऐसे तो अंदर नहीं आता पर अगर आ गया तो ……….क्या करू इतने सालो की मेहनत और परिश्रम से ये इज्जत बनायीं है और एक ही पल में सब खत्म हो जाएगा ,पर इस आग को बुझाने वाला भी तो इतने सालो बाद ही मिला है ,…हे भगवान …..
काव्या जहा भगवान् से सलाह मशवरा कर रही थी वही विजय तो अपनी ही धुन में था उसे क्या पड़ी थी इज्जत की या किसी और चीज की ,वो तो काव्या के अंगो से ऐसे खेल रहा था जैसे उसकी ही जागीर हो वही काव्या के अंग भी उसे अकड़कर समर्थन दे रहे थे …विजय के हाथ काव्या के पीठ तक पहुचता है वो उसके ब्लाउस के चैन को खोलने लगता है ,काव्या जैसे बेसुध हो चुकी थी उसे इतना मजा आ रहा था की वो कुछ नहीं कर पा रही थी उसका दिमाग अब भी एक अजीब द्वन्द में फसा था ,पर वो उसे रोक नहीं पा रही थी …
विजय काव्य के ब्लाउस की चैन खोलकर उसके ब्रा की हुक भी खोल देता है ,जैसे अचानक ही काव्या को होस आया वो उसके बांहों में मचलने लगी ,
“प्लीज् छोड़ दो ना ये ऑफिस है मेरी इज्जत है ”

विजय उसके चहरे को देखता है उसकी सूरत रोनी सी हो गयी है ,ये उस मज़बूरी के कारन जो काव्या को जकड़े हुए था ,वो बेचारी चाहती भी थी और नहीं भी चाहती थी ,,,दोनों ही पक्ष बड़े ही मजबूत थे ….

उसे जितना प्यार अपनी इज्जत से था उतना ही अपने शारीर की आग को बुझाने की तलब भड़क उठी थी ,इसी द्वंद ने उसके आँखों में वो पानी ले आया था ,विजय को उसकी मज़बूरी से ऐसे तो कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला था पर उसके चहरे पर वो पहली बार एक मासूमियत देखता है जो उसे भा जाता है ,वो उसके सर को अपने हाथो में लेकर अपने होठो को उसके होठो से सटा देता है ,काव्या तो ऐसे भी सब कुछ हार ही चुकी थी ,वो उसके होठो में समाते चले गयी ,दोनों के होठ एक दूजे में खो ही गए काव्या की आँखे बंद हो गयी और वो अपनी सभी दुविधा से मुक्त हो गयी उसे तो बस अब विजय में सामना था उसकी हो जाना था …………..साला ये प्यार और वासना बड़े ही अजीब तरह से एक दुसरे से मिलते है एक पतली लकीर होती है दोनों के बीच ,जब प्यार उमड़ता है तो एक समर्पण का भाव पैदा होता है और जब वासना जागती है तो कुछ पाना चाहता है,पर प्यार कब वासना बन जाय और बासना कब प्यार बन जाय कोई नहीं कह सकता …यहाँ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था काव्या और विजय वासना के एक तूफान से शुरू हुए थे और प्यार के एक झोके पर आकर खो जा रहे थे …………….
दोनों की लबो की गहराइया एक दूजे में मिल रही थी वो काव्या के मन में समर्पण आ गया था वही विजय के मन से उसे पाने का भाव चला गया था ,दोनों ही पागल हो रहे थे पर उतावले नहीं ,विजय हाथ बड़ा कर उसकी नग्गी पीठ को सहलाने लगा ,उसके दांत काव्या के होठो को हलके हलके से काटते थे..

जिससे काव्या के अंदर भी एक हल्का हल्का सा नशा छा रहा था ,वो भी अब विजय के बालो को अपने पंजे ने दबाये जा रही थी और उसके चहरे को अपनी ओर खीच रही थी ,
इधर बहार सभी बेचैन थे की आखिर अंदर हो क्या रहा होगा ,सोनल और किशन के अलावा,
सबसे जादा बेचैन तो खुशबु लग रही थी ,तभी सामने से एक चपरासी हाथ में फाइल लेकर आता हुआ दिखाई दिया ,वो अपनी ही धुन में मगन सा सर निचे किये चला आ रहा था ,किशन की नजर उसपर पड़ी उसने सोनल को इशारा किया सोनल भी थोड़ी सी डर गयी पर जैसे ही वो चपरासी उनके पास पंहुचा ,
“भईया आराम से मेडम बहुत गुस्से में है आज ,”सोनल ने तीर छोड़ दिया ,उसका उद्देश्य था की वो चपरासी अंदर ना झाके और बाहर से ही नोक करे ताकि विजय और मेडम को सम्हालने का थोडा समय मिल जाय ,मेडम के गुस्से में होने की बात सुनकर वो थोडा सचेत हो गया और धीरे धीरे केबिन की तरफ बढ़ने लगा ,जैसे ही उसने दरवाजा नोक किया …
अंदर काव्या अपने नशे से छुटी और उसने विजय को झटके से अपने से अलग किया और अपने कपडे ठीक किये विजय पहले की तरह उससे दूर खड़ा हो गया था ,उसके होठो काव्या के लिपस्टिक से सने हुए थे ,वही काव्या का लिपस्टिक पूरी तरह से फ़ैल चूका था ,वो प्यार से विजय को देखती है और अपने पर्स से एक रुमाल निकल कर उसके होठो से अपने लिपस्टिक को पोछती है वही फिर एक छोटा सा दर्पण निकल कर अपने होठो के लिपस्टिक को भी सही करती है और अपने बालो को सवरती है ,,,इशार चपरासी देरी होते देख फिर से एक बार दरवाजे में दस्तक देता है ,

“कौन है क्या हो गया “एक गरजती हुई आवाज उसके कानो में पड़ती है ,काव्या को सचमे उसपर बहुत गुस्सा आ रहा था ,वो एक शेरनी से गरजती है जिससे वो बेचारा सहम सा जाता है ,
“मेडम वो आज शिक्षा मंत्री का दौरा होना है यहाँ ,सर ने ये फाइल तत्काल देने को कहा था ,वो दरवाजा खोलने की भी हिम्मत नहीं करता ,वही काव्या के दहाड़ से खुसबू और बाकियों का दिल भी थोडा सा काप जाता है उन्हें लगता है की ये विजय को लेकर गुस्से में है ,सभी जानते थे की वो नितिन को कितना लाइन मारती थी ….

“ठीक है आ जाओ “चपरासी जब अंदर पहुचता है विजय सर निचे किये खड़ा होता है और काव्या अपने चेयर पर बैठी होती है ,
“मेडम ये ”
“ह्म्म्म कितने समय आ रहे है मंत्री जी ”
“मेडम मंत्री है कभी भी पहुच सकते है ” तभी एक सायरन की आवाज सुनाई देती है
“मेडम लगता है वो आ गए ”
“ह्म्म्म और बहार ये क्या भीड़ लगा के रखा है सबने सबको भेजो यहाँ से “चपरासी जल्दी से जाता है और सबको वहा से जाने को कहता है
“क्या हो रहा है अंदर “खुसबू बड़े ही बेचैनी से पूछती है
“वो लड़का सर झुकाए खड़ा था ,और मेडम बहुत गुस्से में थी ,लड़का तो आज बच गया मंत्री जी आ रहे है ना ,चलो सब यहाँ से भागो जल्दी “सभी वहा से ना चाहते हुए भी चले जाते है
इधर काव्या उठकर विजय से लिपट जाती है ,
“सॉरी जान पर आज कुछ नहीं वो बस पहुचते ही होंगे ,”
“कोई बात नहीं तुम्हे मैं इतनी जल्दी तो नहीं छोडूंगा ,पर क्या करू कल ही गांव जाना पड़ेगा,पता नहीं फिर कब मिल पाए हम “काव्या का चहरा उदास हो जाता है वो उससे अलग होकर थोड़ी दूर चले जाती है और उदास आँखों से विजय को घूरने लगती है विजय आगे बदने ही वाला होता है की दरवाजा फिर से खुलता है इसबार बिना किसी भी पूर्व अनुमति के ,,,,कुछ लोग सीधे अंदर आ जाते है ,
“क्या मेडम जी आज तो आप हमारे स्वागत में भी नहीं आई “एक अधेड़ सा शख्स जो इस राज्य का शिक्षा मंत्री था ललचाई नजर से काव्या के भरपूर जवानी को देखता हुआ कहता है ,इससे पहले की काव्य कुछ जवाब देती ….
“बिना अनुमति किसी के ऑफिस में घुस जाना कहा की सराफत है मंत्री साहब ,”विजय की आवाज से सब चौक जाते है वही काव्या के चहरे पर एक डर फ़ैल जाता है ,मंत्री को गुस्सा आता है वो मुड़कर उस शख्स को देखता है और उसे देखते ही उसका सारा गुस्सा काफूर ……….
“अरे विजय तुम यहाँ ,”विजय के चहरे में एक मुस्कान तैर जाती है ,

“हां आया था किसी काम से ,आप तो बड़े आदमी हो गए हो आते ही नहीं अब घर “दोनों आगे आकर एक दुसरे से हाथ मिलाते है ,
“अरे क्या करे यार जब विधायक थे तब तक तो समय मिल ही जाता था जब से मंत्री बने है साला समय ही नहीं होता ,आखरी बार कॉलेज के सिलसिले में ही तुम्हारे घर गया था ,अब तो कॉलेज बन गया है इस साल से तुम्हारी प्यारी बहन की पढाई भी शुरू हो जायेगी ,अजय का बहुत प्रेसर था इस कॉलेज का काम जल्दी करवाने को लेकर …”सबी लोग इस लम्बे चौड़े शख्स को धयान से देखने लगते है ,कुछ लोग इसे पहचान भी लेते है या अंदाजा लगा लेते है की ये अजय ठाकुर का भाई है ,
“हा तो क्या मेरी बहन एक साल बर्बाद करती कॉलेज के लिए ,,ऐसे मुझे आपसे एक काम है अभी ,”
“हां बोलो बोलो ”
“काव्या मेडम का यहाँ से ट्रांसफर करा दो “सभी चौक से जाते है बेचारी काव्या भी ,यहाँ शहर में पोस्टिंग के लिए उसने कितने पापड़ बेले थे और ये ….

“क्या???? यानि क्यों ?? कुछ गलती हो गयी क्या मेडम से ”
“नहीं मंत्री मोहोदय हम चाहते है की ये हमारे कॉलेज का भार सम्हाले ,उस क्षेत्र का ये पहला कॉलेज है ,हम चाहेंगे की किसी बड़े ही जिम्मेदार और मेडम जैसी स्ट्रिक्ट प्रिंसिपल वहा रहे ,इससे वहा का स्तर बढेगा “विजय के चहरे में एक मुस्कान फ़ैल गयी वही काव्या ने एक झूठे गुस्से से विजय को देखा
“हा ये तो ठीक है ,पर वहा तो दूसरा प्रिंसिपल पहले से अपोइन्ट कर चुके है और अगले ही सप्ताह से वहा क्लास शुरू होने वाली है,ऐसे में ,और मेडम तो खुद ही बड़ी मुस्किल से शहर में तबादला कराया था वो फिर किसी छोटी जगह नहीं जाना चाहेंगी “इससे पहले कोई कुछ बोले काव्या बोल पड़ी
“मैं तैयार हु “वो इतनी उत्सुक्रता से कह गयी की सभी उसे देखने लगे वो थोड़ी असहज हो गयी ,विजय के चहरे में भी एक मुस्कान आ गयी ,वो थोड़ी सम्हली
“यानि मुझे वहा कोई दिक्कत नहीं होगी ठीक है मैं जाने को तैयार हु ,कम से कम बच्चो का भविष्य तो सुधरेगा ”
“ओके ठीक है मैं आज ही उस प्रिंसिपल को यहाँ के लिए और मेडम को वहा के लिए ट्रांसफर आर्डर निकलवाता हु ”
“धन्यवाद “विजय एक मुस्कान देता है और वहा से निकल जाता है ……….

अध्याय 30

इधर अजय और निधि गाव से निकल चुके थे कोई उन्हें ना पहचान ले इसलिए वो स्कार्फ बांधे हुए थी वही अजय ने हेलमेट लगा रखा था ,दोनों पहाड़ी के निकट पहुच गए,पहले गाड़ी एक जगह लगाकर वो ऊपर चले गए क्योकि शाम होने ही वाली थी इसलिए पहले अजय ने कलवा के झोपड़े का जायजा भी ले लिया था ,एक आदमी के रहने के लिए परियाप्त जगह थी ,एक कोने में एक बिस्तर पड़ा था,और एक लालटेन और एक माचिस बस इतना ही ,घास की कुटिया थी जहा पर और किसी चीज की जरुरत ही नहीं थी ,लकड़ी का दरवाजा था जिसपर ताले का होना ना होना एक ही था ,पास के झरने की मनमोहक आवाज वहा तक आ रही थी…झरना देखने और पास के फूलो के बगीचे में घुमने से पहले वो पहाड़ी के ऊपर जाकर बाबा जी के दरसन कर लेना चाहते थे वही आश्रम से खाना खाकर निचे आने की योजना थी ,और बाबा जी को ये भी पता होना चाहिए की ये निचे है ,ताकि कोई भी परेशानी हो तो मदद मिल सके ,….
ऊपर जाकर बाबा जी से मिलने और फिर खाना खाने के सिलसिले में रात हो गयी ,एक सेवक ने उन्हें टार्च ला दिया …
“ठाकुर साहब कोई भी परशानी नहीं होगी यहाँ पर आपको आज चांदनी रात है आज तो झरने की सुन्दरता कमाल की होती है ,” सेवक ने बड़े ही आत्मीयता से कहा
“हा काका ,कालवा काका के झोपड़े में ही रात गुजरेंगे हम लोग ,कोई समस्या तो नहीं होगी ना ”
“अरे कोई भी समस्या नहीं होगी ,पिने को पानी और कुछ फल रख लो यहाँ से ,जगली जानवरों की भी दिक्कत नहीं है यहाँ पर आप बेफिक्र होकर जाइये ..

”

दोनों ख़ुशी ख़ुशी निचे चले जाते है ,हलकी हलकी फुहारे पड़नी शुरू हो गयी थी ,कोई 6-7 बजे होंगे …निचे जाते जाते बारिस की बुँदे कुछ मोटी हो चुकी थी जिससे दोनों थोड़े से भीग भी गए थे ,
आज निधि ने एक पिंक रंग का सलवार कमीज पहना हुआ था जिसमे उसका दुधिया रंग निखर कर आ रहा था ,वही अजय एक टी शर्ट और जींस में था ,उसे अभी भी यही डर था की कही बारिश तेज ना हो जाए ,
झरने की मनोरम सुन्दरता को कर दोनों ही मंत्रमुग्ध हो गए ,पूरी चांदनी में झरने का बहता साफ़ पानी और निर्मल लग रहा था ,पास बनाये गए बगीचे के फूलो की सुगंध से पूरा वातावरण महक रहा था और झरने की मादक आवाज ने रोंगटे खड़े करने वाले शांति का अनुभव चारो और बिखेरे हुए थे ….दोनों पास के एक समतल सी रेत वाली जगह पर बैठे थे ,एक दूजे की बांहों में बठे बस झरने को देख रहे थे …
“भईया कितना प्यारा है ना यहाँ पर ,इसीलिए काका ने यहाँ पर अपनी झोपडी बनायीं है ,”
“हा कितनी शांति है यहाँ पर ,”
तभी कुछ लोग वहा और आ गए देखा की पास के गाव वाले ही थे जो ऊपर भी उन्हें दिखे थे ,अधिकतर प्रेमी जोड़े या नए शादी शुदा लोग से लग रहे थे ,इस जगह पर प्रेम खिल जाए तो कोई भी आश्चर्य ही नहीं …सभी युगल अपना अपना स्थान सुनिश्चित कर वह बैठ गए ,जैसे सभी को पता ही था की ये दोनों भाई बहन है तो सभी इनसे दूर ही रहे ,
“भईया यहाँ भी शांति नहीं है चलो गार्डन घूम के आ जाते है ,”
“अरे बेटा ये सबके लिए है ,और आज चांदनी रात है ना तो ये लोग थोड़ी देर यहाँ बैठने के लिए आते है यहाँ पर ,रात होने पर सब चले जायेंगे ,और गार्डन सुबह घूम लेंगे ना…”
“नहीं चलो ना भईया “निधि के जिद में अजय कुछ बोल ही नहीं पाता था
“चल ठीक है ”

दोनों कुछ देर तक पास के गर्दन ही घूमते रहे ,बारिस की फुहारे अभी भी थी पर रुकने को स्थान ठो उनके पास था ,और वो फुहारे इतने अच्छे लग रहे थे की उनसे बचने का कोई भी प्रयास वो नहीं कर रहे थे …एक दो घंटे तक वो वही घूमते रहे,छोटी सी जगह थी पर बहुत से अलग अलग फूलो का संग्रह वहा पर था इसलिए दोनों को मजा आ रहा था ,वो फिर झरने में कुछ देर बैठने को चले गए इसबार झरना पूरी तरह से सुना था ,कोई भी नहीं दिख रहा था ,निधि थक चुकी थी और फुहारों में पूरी तरह से भींग भी चुकी थी ,उसकी कमीज पूरी तरह से उसके शारीर में आकर के चिपक चूका था और उसके बदन की मसलता पूरी तरह से दिख रही थी ,अजय की नजर बार बार उसके स्तनों ,उसके बड़े चौड़े निताम्भो और उसकी पतली कमर में चले जाते ,पता नहीं ये क्या हो रहा था ,क्यों हो रहा था पर अब निधि के शारीर का एक आकर्षण अजय के अदर आ रहा था ,औरत के शारीर को वो निधि से ही तो जानता था ,कभी भी किसी लड़की या औरत के ऊपर उसने गलत निगाह नहीं डाली थी ,पर आज अपने ही बहन पर ,,……नहीं नहीं ये तो बस प्यार था ,,,हा प्यार थोडा जिस्मानी सा प्यार ………
दोनों झोपड़े में अपने जूते उतर

रेत में चलने के लिए नग्गे पर झरने की ओर निकल पड़े ,निधि थके हुए थी इसलिए अजय ने निधि को अपने कंधे पर उठा लिया,निधि अपने बांहों के घेरे अजय के गले में डाले थी ,अजय को अनायास ही ये महसूस हुआ की बालो के भीग जाने से निधि को सर्दी सी लग रही है वो अपना शर्ट उतर निधि के बालो को पोछता है निधि एक प्यारी सी मुस्कान उसे देती है ,वो अपना शर्ट वही छोड़कर नग्गे बदन ही उसे उठा लेता है निधि उसके कसे हुए मजबूत और चौड़े सीने में अपने सर को ठिकाकर अपने भाई के बदन की गर्मी का अहसास करती है ,निधि उससे जितना चिपक सकती थी चिपक गयी ,अजय रेत में चलता हुआ किसी अच्छे से जगह की तलास कर रहा था पुरे वातावरण में बस झरने की आवाज थी ,दोनों भी अभी चुप थे ,अजय ने निधि को निचे उतरा निधि ने अजय को पेशाब जाने का इशारा किया ,अजय ने भी सहमती में सर हिलाया ,निधि पास के ही एक झाडी के पीछे चली गयी ,थोड़ी देर में वो दबे पाँव वापस आती है और अजय के कान में धीरे से …
“भईया चुप रहना कोई आवाज मत करना आपको कुछ दिखाना है ”
“क्या …..”निधि उसके होठो में अपने उंगलियों को रख देती है ,इधर बारिस की फुहारे कुछ और तेज होने लगी थी …निधि अजय का हाथ पकडे एक पेड़ के पास जाकर रुकी अजय ने चाँद की रोशनी में वहा जो देखा वो बस एक टक उसे देखता ही रह गया ……..

पास ही झाड़ियो के आड़ में दो जिस्म नग्गे एक दूजे में समां रहे थे ,अजय को उस लड़की का चहरा देख याद आया की ये तो वही नव जोड़ा है जिनकी अभी अभी शादी हुई है और वो यहाँ घुमने आये है ,पास के ही गाव से लेकिन लड़की ने तो लाल रंग की साड़ी पहने हुए थी …अजय ने नजर दौड़ाई उसे वो लाल साड़ी वही पड़े मिली साथ ही बाकि के कपडे भी सायद लड़के के कुछ कपडे और लड़की के अंदर के कपड़ो को लेटने के लिए बिछाया गया था ,उसके चूडियो से भरे हाथ अभी खन खन की आवाजे पैदा कर रहे थे दोनों की सिसकियो से पूरा माहोल मादक हो रहा था ,उन्हें लगा होगा की यहाँ अब कोई भी नहीं है और वो बिलकुल ही बेफिक्र होकर प्यार में उतर गए थे ,बारिश की बुँदे उनपर पड़ रही थी और इससे उनके जिस्म की आग और भी बड रही थी ………लड़की का गोरा बदन उस काले सांड से शारीर वाले इन्सान के निचे पिस रहा था ,और साफ साफ पता चल रहा था ,
अजय के लिंग में ये मादक दृश्य देख कर तनाव होने लगा वो निधि के साथ था उसे जैसे ही ये होश आया वो वहा से जाने लगा पर निधि ने उसका था पकड़ लिया ,,,निधि के होठो में एक चंचलता की मुस्कान थी ,कोई भी बुरा भाव उसे अभी भी नहीं पकड़ पाया था वो तो बस मजे के लिए इसे देखना चाहती थी ,निधि ने अजय को पेड़ के निचे बैठने को कहा जिससे वो तो उन्हें देख सके पर उन युगल को कुछ पता नहीं चले अजय ने आँखों से इंकार किया तो निधि ने झूठे गुस्से से उसे आँख दिखाई ,अजय को अपनी बहन की मासूमियत पर बहुत प्यार सा आया वो पगली यहाँ भी जिद कर रही है ,हारकर अजय वहा बैठ ही गया और

निधि उसकी गोदी में …
अजय का लिंग अब भी पूरी ताकत से खड़ा था जो निधि के कोमल निताम्भो में चुभ रहा रहा था ,
“आपका वो चुभ रहा है ,हटाओ ना उसे “निधि ने अजय के कानो में कहा अजय बुरी तरह से नर्वस हो गया पर निधि के चहरे को देखकर उसे समझ आ गया की उसकी बहन को उससे कोई तकलीफ नहीं है ,उसने उसे अर्जेस्ट किया और निधि को अपनी बांहों में भरकर उसके गालो में एक प्यारा चुम्मन रसीद कर दिया ,निधि अपना पूरा भर अजय के ऊपर डाल दि अजय भी पेड़ से ठीक गया और अपनी बहन को अच्छे से जकड लिया निधि ने अपना सर अजय के कंधे पर ठीक रखा था दोनों की आँखे मिली और निधि ने अपने होठो को अजय के होठो पर मिला दिया …………..

प्यार का एक उफान तो सुरु हो चूका था ,दोनों ने बड़े देर तक एक दूजे के होठो का रसपान किया अजय के हाथ अनजाने में ही निधि के कोमल वक्षो पर आ गए वो उन्हें हलके हलके से मसलने लगा निधि की आँखे भी बंद हो रही थी ,अजय को जब ये होस आया की वो क्या कर रहा है तब उसने अपने हाथो को रोका और निचे ले आया पर निधि ने उसके हाथो को पकड़कर फिर अपने वक्षो में ले गयी ,बारिस से भीगा उसका बदन और अंदर अंतःवस्त्रो की कमी ने अजय को उसके कोमल और भीगे वक्षो का जो अहसास दिया उससे उसका लिंग फिर से दर्द करने लगा था ,वो निधि के निताम्भो के निचे घुटा सा जा रहा था ….
इधर वो युगल अपनी मस्ती के चरम पर थे ,की लड़की उठी और कुतिया की पोजीशन में आ गयी ,लड़के ने अपना काला लिंग निकल कर उसके पिछवाड़े में डाल दिया ,और उसके बालो को अपने हाथो से जकड कर घुड़सवारी करने लगा ……
ये दृश्य अजय और निधि के लिए बहुत ही जादा मादक हो रहा था निधि अपना मुह खोले उन्हें एक टक देख रही थी वही अजय की सांसे भी बहुत ही तेजी से चल रही थी दोनों ही अपने आपे में नहीं थे ,अजय के हाथ जहा निधि के वक्षो पर बड़े ही तेजी से चल रहे थे वही निधि भी अपने सांसो को सम्हालने में नाकामियाब हो रही थी ,बारिस और तेज हो रहा था और उस युगल की काम लीला भी …निधि जैसे आज अचानक से जवान हो गयी हो और अजय जैसे आज अचानक से सेक्स का दीवाना हो गया हो ,निधि ने अपना हाथ बढाकर अजय के एक हाथो को पकड़कर निचे ले आई और अपने सलवार के ऊपर से अपनी योनी में उसका हाथ रगड़ने लगी अंदर तो कुछ पहना नहीं था इसलिए हाथो का सीधा संपर्क उसकी योनी से हो रहा था ,तेज होने वाली बारिस की फिकर किसे थी दोनों ही अपनी मस्ती में मस्त हो चुके थे,दोनों ही ओर हवास का नाच चल रहा था ,हा ये हवास ही था यहाँ प्यार की कोई भी संभावना बाकि नहीं थी ,अजय और निधि अपने जीवन के पहले यौनसुख में डूबे थे ,वो अपने चरम के नजदीक थे …अजय अपनी बहन की योनी को ऐसे मसल रहा था जैसे वो उसी के लिए बने हो ,बालो से भरी हुई उसकी योनी में बालो की रगड़ इतनी सुखद होगी ये ना तो अजय ने सोचा था ना ही निधि ने …..

इधर युगल अपने चरम में पहुच चुके थे और एक तेज धार के साथ ही उनकी काम लीला समाप्त हो गयी दोनों एक दूजे में लिपटे हुए अपनी सांसो को सम्हाल रहे थे वही निधि ने भी अपने जीवन का पहला काम की बौछार कर दि ,,,,,,निधि निढाल हो गयी अजय को अपने हाथो में कुछ गरम सा महसूस हुआ जैसे निधि ने पेशाब कर दिया हो वो रुका नहीं,उसकी उमंग तो अभी भी शांत नहीं हुई थी पर निधि ने उसके दोनों हाथो को अपने हाथो से रोका और नहीं में ना का इशारा अपना सर हिला कर किया …..अजय को होश में आने को कुछ समय लग गया वो अब भी उसे दबाये जा रहा था निधि निढाल होकर उसके ऊपर लेट गयी …दोनों भरी बारिस में पेड़ के निचे बैठे थे ,बारिश काफी तेज हो चुकी थी पर वासना की गर्मी से दोनों को पसीना आ रहा था ……जब अजय रुक गया और कुछ सम्हला तो निधि ने अपना सर उठा कर उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया ,ये क्या हुआ था इसकी समझ तो दोनों को नहीं थी पर जो भी हुआ वो उनके जीवन में एक नया अध्याय जरुर लिखने वाला था ऐसा अध्याय जो उनकी जिंदगी की धरा ही बदल देने वाली थी ……….

अजय जब अपनी प्यारी बहन को भरपूर किस कर के होश में आया तो उसने निधि के चहरे को देखा उसकी आँखों में पानी था ,अजय की धड़कने फिर से बड गयी उसकी आँखे किसी अनजाने डर से डबडबा गयी ,ना जाने क्या हो गया आज क्यों हो गया आज ………प्यार का तो कही भी नामोनिशान नहीं था…..था तो बस हवास की एक आज जो अब तो बुझ चुकी थी लेकिन अपने साथ कई सवाल लाकर रख दिए थे….सही गलत के फेरे से तो शायद वो निकल ही जाता पर अपनी बहन को दुःख देने के अपराध से कैसे मुक्त हो पाता……..
दोनों अपनी भरी आँखों से एक दूजे को निहारे जा रहे थे ,कोई भी बात उनके बीच नहीं हो रही थी ,इधर प्रेमी युगल वहा से जा चुके थे और ये बारिस में उस ठंडी बारिस में पसीने से भीगे हुए अपने जिस्म की तपिस लिए एक दूजे के आँखों में देख रहे थे …………
“मुझे माफ़ कर दे बहन “अजय लग्भाग रोते हुए कहा लेकिन निधि के चहरे में एक मुस्कान आ गयी और वो ऊपर होकर अजय के होठो को अपने होठो में भर ली ,और पहली बार अजय से एक समझदारी की बात कह गयी
“थैंक्स भईया ,ऐसा मजा मुझे जिंदगी में कभी नहीं आया था ,दुनिया कुछ भी बोले लेकिन मैं आपसे बहुत प्यार करती हु ,और ये मजा मुझे देने का हक़ सिर्फ आपका था और आपका है और आपका रहेगा ………………..

”
अजय बस अपनी चंचल सी झल्ली सी दिखने वाली बहन के मुह से निकले पहले समझदारी के शब्दों का विश्लेषण करता हुआ उसके आँखों में देखता रहा …………

अध्याय 31

बारिस बढ़ने लगी थी और जगल का माहोल और भी शांत हो रहा था ,निधि और अजय अपने खयालो की दुनिया से बाहर आये और झोपड़ी के तरफ भागे ,आज इनके बीच कुछ ऐसा हो चूका था की दोनों ही बड़े गुमसुम से थे ,पर कब तक दोनों के बीच का प्यार तो खत्म नही हुआ था ,निधि को ये खामोशी बर्दास्त नहीं हो रही थी ,
“भईया मुझे उठाकर ले चलो “निधि ने अपने स्वाभाविक से लहजे में कहा ,अजय ने उसकी आँखों में फिर से वही मासूमियत देखि अजय मुस्कुराता हुआ उसे अपने बांहों में उठा लिया ,निधि के लिए अजय की मुस्कान ही बड़ी चीज थी ,वो अपने बांहों का हार अजय के गले में डाले हुए अपने शारीर का भार उसके ऊपर डाल दि ……
“भईया आई लव यु “निधि ने उसके सीने में अपने को छुपाते हुए कहा
“लव यु टू मेरी रानी “अजय ने उसके माथे को एक किस कर लिया

दोनों की बारिस में पूरी तरह से भींग चुके थे ,झोपड़े में पहुच कर अजय ने टार्च जलाया और वही पड़े हुए अपने शर्ट से निधि को फिर खुद को पोछा ,दिक्कत ये थी की अब दोनों को ही अपने कपडे उतरने थे क्योकि दोनों ही पूरी तरह से भींग चुके थे ,बहार बारिश जोरो पर थी और वो घास का झोपड़ा पानी से भीगा हुआ एक मादक गंध छोड़ रहा था ,ये वही अनुभव कर सकता है जिसे कभी ऐसे जगहों पर बरसात में रहने का अवसर मिला हो ,बेहद मादक और मस्त कर देने वाली गंध होती है और एक हलकी गर्मी झोपड़े में थी ,अजय पहले लालटेन जलाता है और टार्च बंद कर निधि को देखता है वो अपने कपडे उतर रही थी ,अजय घबरा सा जाता है क्योकि दरवाजा अभी भी खुला हुआ ही था ,वो जल्दी से दरवजा बंद करता है और लालटेन की रोडनी को बहुत ही धीमा कर देता है ,उस दुधिया से प्रकास में निधि का अंग अंग खिल कर दिख रहा था अजय सांसे रोके उसे देख रहा था ,,,,जिस शर्रीर को अजय ने पाल पोस कर इतना बड़ा किया था ,जिस जिस्म को अजय उसके बचपन से देख रहा था वही शारीर आज अचानक उसके अंदर वासना की लहरे पैदा कर देगा उसने सोचा ही नहीं था……….
अजय को यु घूरता देख निधि भी शर्मा गयी ..वो लड़की जो कभी भी अपने भाई से नहीं शर्माती थी आज उसके सामने शरमा रही थी और वो भाई जो कभी भी अपने बहन के बारे में कुछ भी ग़लत नहीं सोच सकता था आज उसे नग्न देखकर उसका लिंग तनाव से भरने लगा था …अजय ने जल्दी से बिस्तर को बिछाया ,बिस्तर के नाम पर एक चटाई थी एक घास एक बना हुआ गद्दा और एक उसपर बिछाने के लिए कपडा ,एक झीना और पतला सा कपडा ओढ़ने को था .अजय ने जल्दी से सभी को जमाया और निधि जल्दी से उसके अंदर घुस कर वो पतली सी चादर ओढ़ ली ,अजय खुद अपने कपडे उतरने में शर्मा रहा था वजह था उसका अकड़ा हुआ लिंग ….

वो अपने जींस को पहने हुए वही बैठ गया एक झरोखा भी उस झोपड़े में था जिससे बाहर की मनोहर प्रकाश किरणे अंदर आ रही थी ,और साथ ही ठन्डे ठन्डे हवा के झोके भी जो आकर दोनों को सिहरन से भर देते थे ….निधि को ठण्ड लगने लगी जो भी उसने ओढा था वो उसके ठण्ड को भगाने को काफी नहीं था ,

“भईया आओ ना ठण्ड लग रही है ,”अजय के मन में एक अजीब सी असमंजस थी ,ये क्यों था उसका लिंग का तनाव यु क्यों था ,की वो अपनी बहन को ठण्ड में यु सिहरता हुआ छोड़ कर बैठा है ,क्या हुआ है उसे ,वो इतना स्वार्थी कैसे बन गया है ,क्यों बन गया है ,वो अपनी बहन से प्यार क्यों नहीं कर पा रहा है ,ये लिंग उसे प्यार करने क्यों नहीं दे रही है ,ये क्यों इतनी उत्तेजित सा हो रहा ही ,अजय सर गडाए हुए सोच रहा था की निधि के दांतों के कडकडने की आवाजे अजय के कानो में पड़ी ,अजय का दिल दहल गया उसकी बहन को उसकी जरुरत थी और वो यु ,….अजय के आँखों में आंसू आ गए थे वो उठा और अपने शारीर से पुरे वस्त्र निकल फेका और लालटेन को बुझा दिया ,लालटेन के बुझाते हु कमरे में अँधेरा हो गया पर कहते है ना अँधेरा कितना भी घना क्यों ना हो एक प्रकाश की किरण के सामने कुछ भी नहीं है …..उस छोटे से झरोखे से चाँद की निर्मल रोशनी कमरे में आ रही थी और सोने पर उस झरोखे से चाँद के दर्शन भी हो रहे थे ,बदलो में छिपा हुआ चाँद कभी कभी प्रगट हो जाता कभी चिप जाता ,और बहार की तेज बारिस की फुहारे कभी कभी हवा के झोको के साथ होते हुए कमरे में आ जाते थे ,जो इस ठण्ड में हलकी सी और सिहरन पैदा कर देते ….

कमरा पूरी तरह से दिख रहा था ,इतना प्रकाश तो था ,पर इतना भी नहीं था की सब स्पष्ट दिखाई दे ,

अजय आकर निधि से लिपट गया निधि के कसकर उसे जकड लिया ,उसके वक्ष हलके से गिले ही थे और ठण्ड के कारन उसके रोंगटे खड़े हुए थे ,अजय और निधि ने अपने अपने शारीर की गर्मी एक दुसरे से साझा की और दोनों को ही उस स्पर्श से एक सुखद अनुभूति हुई …इस सुखद अनुभूति से दोनों और भी पिघल गए और एक दुसरे के और पास आ गए ,निधि ने अपने एक पैर को अजय के कमर के ऊपर से उसे घेर लिया ,जिससे अजय का तना हुआ लिंग सीधे ही निधि के योनी की दीवारों पर रगडा गया ,अजय और निधि दोनों के ही मुह से एक हलकी सी आह निकली ,जहा अजय इससे थोडा घबरा गया वही निधि के होठो पर एक मुस्कान सी आ गयी ,अजय अपने लिंग को पकड़कर तिरछा करता है और निधि अपने कमर को और भी सटा देती है जिससे अजय का लिंग उसकी जन्घो में रगड़ खा जाता है ,फिर से दोनों की एक मादक आह निकल आती है ,अजय का लिंग इस छुवन से और भी अकड़ सा जाता है और झटके मरने लगता है ,निधि की आँखे उस अहसास से हलके से बंद हो रही थी वही अजय की आँखों में आंसू आने लगे ,वो चाहकर भी इसे कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था ,ये गलत था उसका दिल चीख चीख कर यही कह रहा था…गलत गलत होता है ,ये तेरी बहन है जिसे तू जिंदगी में अपने आप से भी जादा प्यार किया ,अब क्या हुआ सिर्फ जिस्म की आग ने तुझे इतना अँधा बना दिया की तू अपने बहन से अपनी जान से …..ऐसी हरकत अजय के आँखों का पानी छलकने लगा था वो सिसकिय ले रहा था ,उसके मन में उठी हुई इस हलचल का असर उसके लिंग में भी पड़ने लगा वो हलके हलके मुरझाने लगा ,निधि आखे खोले अपने भाई को देख रही थी ,उसके आँखों से गिरते हुए आंसू को देख रही थी वो अपने भाई की दुविधा को पहचान पा रही थी इसका साबुत था उसका कुछ भी ना कहना और उसके आँखों से बहाने वाले वो अनमोल आंसू की बुँदे ………कुछ देर तक अजय अपने ही खयालो में रहा जब वो आँखे उठा कर निधि को देखा तो निधि को भी उसने रोता हुआ पाया,
“क्या हुआ मेरी रानी “अजय ने अपने हाथो से निधि के चहरे को मलते हुए कहा ,
“भाई आपका प्यार कभी भी मेरे लिए गलत नहीं हो सकता ,कोई भी फुल की खुशबू कभी माली के लिए गलत नहीं होती,माली ही तो होता है जिसने बागो को सीचा है ,अब अगर वो थोड़ी खुसबू ले भी ले तो क्या ये गलत है ,भईया मेरा ये जिस्म एक फुल है और इसकी सुगंध बस आपके लिए है ,क्योकि आप ही इसके माली हो …….

”
निधि की समझदारी भरी बाते सुनकर अजय के चहरे में एक मुस्कान सी आ गयी ,उसने अपनी प्यारी सी गुडिया को अपने पास खीचा ,उसके स्तनों को अपने चौड़े और मजबूत सीने से सटाया ,

“मेरी गुडिया इतने समझदारी भरी बाते कर रही है ,तू फुल है मेरी जान और मैं इसे हमेशा ही सम्हाल कर रखूँगा ,इसे गन्दा नहीं होने दूंगा ”
“आपका प्यार मुझे मिलेगा तो मैं और खिल जाउंगी भाई ,गंदगी सोच में होती है किसी काम में नहीं “निधि की आँखे अब भी भरी थी वो अपने भाई को कसकर पकड़ी थी दोनों नग्गे जवान जिस्म एक दूजे में सामने को तैयार थे पर ये तो बस प्यार में ही हो सकता है की कोई भी उत्तेजना उनमे नहीं थी था तो बस एक अनोखा सा प्यार ,……….
दोनों बड़े ही देर तक यु ही एक दुसरे से लिपटे रहे धीरे धीरे दोनों के जिस्म की ठंडक कम होने लगी पर मौसम की ठंडक ने दोनों को अलग होने नहीं दिया ,जब जस्बातो की आंधी थोड़ी कम हुई तो अजय उठकर बहार देखता है रात घनी हो चुकी थी ,बारिस अब भी अपने सबाब पर था चाँद गाने बदलो में कही छिप सा गया था ,पूर्णिमा की ये रात घोर अमावास सी लग रही थी ,निधि भी उठकर उस झरोखे से बहार देखती है और फिर दरवाजा खोलकर बहार निकल पड़ती है ,अजय उसे ऐसा करते देख घबरा जाता है ,वो उसके पीछे भागता है निधि दौड़ते हुए बारिश में भीगते हुए झरने की तरफ जाने लगती है ,कैसी पागल लड़की है ,जिस्म में कोई भी कपडा नहीं तेज बारिश ,सुनसान सन्नाटे से भरा हुआ माहोल ,घनी रात जो अब अंधियारी भी हो चुकी है और ये है की ऐसे ही निकल भागी ,
अजय जाते जाते टार्च और एक निधि के कपड़ो को साथ रख लेता है वो जब निधि के पास पहुचता है निधि एक चट्टान पर लेटे हुए थी ,चाँद फिर से कुछ किरणे बिखेरता है ,दुधिया रोशनी में निधि का दुधिया जिस्म चमक रहा था ,अजय उसके पास जाता है निधि उसे पकड़ कर अपने ऊपर खीच लेती है ,और उसके होठो में अपने होठो को लगा उसकी गहराई में गोते लगाने लगती है ,….अजय फिर से उत्तेजित होने लगाया है उसका लिंग फिर से पुरे आकर में आने लगता है और निधि के जन्घो के बीच दस्तक देने लगता है ,निधि उसे अपने ऊपर खीच कर सुला लेती है दोनों ही जिस्म एक दूजे में लिपट रहे थे ,कभी निधि ऊपर तो कभी अजय निधि अजय के लिंग को पकड़ अपने योनी की दीवारों में रगडती है ,अजय को इसका भान होते ही उसे एक झटका लगता है और वो उठाकर खड़ा हो जाता है ,वो बड़ी बड़ी आँखों से निधि को देखे जा रहा था ,,,,,निधि की आँखे थोड़ी नशे में थी वो अधखुली ही थी वो बड़े ही आग्रह और प्रेम से अजय को देख रही थी जैसे कह रही है छोड़ भी दो ये दुनिया दारी की बाते और आजाओ मुझे अपना बनाने …लेकिन अजय ……….अजय के हाथ पाँव काप रहे थे वो अपने प्यार से अलग नहीं होना चाहता था पर कुछ मरियादा की लकीरे थी जो उसे अपने प्यार से अलग किये हुए थी ,वो उठाकर सीधे झोपड़े की ओर चला जाता है ..

झोपड़े में जाकर वो खुदको पोछता है और कपड़ो को फिर से निचोड़ कर सुखा देता है ,वो दरवाजे से झाकता है निधि अब भी दरवाजे के बहार कड़ी थी ,बाल बिखरे हुए थे पुरे नग्न शारीर से पानी की धारे बह रहे थे वो दरवाजे के बहार ही थी पर झोपड़े में नहीं आ रही थी ,अजय उसे धयान से देखता है पुरे गिले शारीर में उसकी आंखो का पानी साफ़ दिखाई पड़ रहा था ,अजय के आँखों में भी पानी था और निधि की आँखों में भी ,,,निधि तैयार थी लेकिन अजय नहीं अजय चाहता था की ये रात कैसे भी खत्म हो जाय और निधि चाहती थी की ये रात कभी भी खत्म मत हो ……………………..

अजय आज पहली बार निधि के प्रति ऐसे व्यवहार कर रहा था ,की निधि बहार खड़ी भीग रही हो और अजय उसे अंदर भी ना बुलाय ,,….निधि के आंसू बाहरी नहीं थे वो उसके जेहन के किसी कोने से आ रहे थे ,वो अपने भाई को अपने सबकुछ को आज ऐसे उससे मुह मोड़ते देख रही थी …….अजय से रहा नहीं गया वो बहार जाता है निधि को उठाने की कोसिस करता है निधि ने उसका हाथ झटक दिया उसके चहरे पर एक दुःख साफ़ दिख रहा था दुःख था अपने भाई के मुह मोड़ लेने का दुःख उसकी अवमानना का दुःख …
निधि हाथ छुड़ाती है पर अजय फिर से उसका हाथ पकड़ने की कोसिस करता है वो बस उसे अंदर लाना चाहता था ,निधि फिर हाथ छुड़ा लेती है ,अब अजय से सहन नहीं हुआ वो अपनी प्यारी फुल सी बहन पर अपने बल का प्रयोग नहीं करना चाहता था पर उसे थोड़ी जबरदस्ती करनी पड़ी वो उसे जबरदस्ती उठाने की कोसिस करने लगा पर निधि ने चिल्लाते हुए उसे अलग कर दिया अजय डर के उसे छोड़ दिया ……दोनों एक दुसरे के आमने सामने बिलकुल ही नग्गे खड़े थे ,जोरदार होने वाली बारिस दोनों को भीगा रही थी वो दोनों बस एक दूजे के चहरे को देख रहे थे ,निधि के चहरे में अब दुःख की जगह गुस्सा था ,उसकी आँखे लाल हो चुकी थी इतनी देर से पानी में भीग रही थी की उसे खुद पता नहीं था पर ठण्ड का कही नामोनिसन नहीं था ,अजय को ने उसे प्यार से समझाने की कोसिस की पर बात नहीं बन पा रही थी ,आखिर अजय के सब्र का बांध भी टूट गया वो उसकी ओर झपटा निधि ने पुरे ताकत से उसे अलग करना चाहा पर अजय अब सचमे ताकत का प्रयोग कर रहा था ,वो उसके मुह को अपने हाथो से पकड़कर उसके होठो में अपने होठो को डाल देता है और उसके होठो को अपने पूरी ताकत से चूसने लगता है ,निधि पहले तो छटपटाती है पर थोड़ी देर में अजय के बालो को पकड़कर उसका साथ देने लगाती है ,
बड़ा ही अजीब सा दृश्य था …दोनों भाई बहन बिलकुल नग्गे जोरो की बारिश में एक सुनसान और निर्जन जंगल में खड़े है और एक दूजे से चिपके हुए अपनी पूरी ताकत से एक दूजे के होठो को खा रहे है ……..

उनके प्यार का उफान जब पुरे शबाब में था तो अजय ने निधि की कमर को पकड़कर उठाया निधि ने भी अपने पैर्रो को अजय के कमर में जकड लिया अजय उसे झोपड़े में ले आया और दोनों के होठ एक क्षण के लिए भी अलग नहीं हुए थे ,अजय दरवाजा लगता है और निधि को बिस्तर मे सुला देता है सबकुछ करते हुए भी दोनों एक दूजे से अलग नहीं हुए थे आज उन्हें एक दुसरे से कोई अलग नहीं कर सकता था ,दोनों किसी जगली जानवरों जैसे तब तक एक दुसरे के होठो को खाते रहे जब तक की सांसो ने अंतिम जवाब नहीं दे दिया ,….दोनों हफ्ते हुए अलग हुए और एक दुसरे के आँखों में देखकर फिर से अपने होठो को मिला लिया ……

जब ये उफान थमा तब तक दोनों के मन में प्यार ही बच गया था …..
“बहुत जिद्दी हो गयी है तू आजकल ,क्या जरुरत थी पानी में ऐसे भीगने की ”
“आप मुझे छोड़कर क्यों गए ,”
“नहीं तो और क्या करता जो तू कर रही थी ना वो …….हम भाई बहन है मेरी जान ,मैं तुझे कुछ ऐसा नहीं कर सकता जिससे तेरी जिंदगी बर्बाद हो जाए ”
निधि ने अजय को बड़े प्यार से देखा और उसके होठो में एक प्यारी सी किस ली
“कौन कहता है की इससे मेरी जिंदगी बर्बाद हो जायेगी ,भाई याद रख लो आज नहीं तो कल लेकिन मुझे अगर कोई कलि से फुल बनाएगा रो वो आप ही बनोगे समझे “निधि में गंभीरता और शरारत दोनों के मिश्रण से कहा ,अजय के चहरे पर एक मुस्कान तैर गयी
“बड़ी बड़ी बाते करती है कहा से सिखा ये सब ”
“आपके प्यार से ”
“अच्चा ,तेरी तो “अजय फिर से अपनी चंचल शरारती बहन के होठो को अपने होठो में भर लेता है ,वो उसके स्तनों से खेलता है उसके जन्घो को,निताम्भो को जी भर के मसलता है पर हवस…..हवस कही खो गयी थी बस प्यार ही बाकी था ना अजय के लिंग में कोई तनाव था ना ही निधि को अजय का लिंग चाहिए था ,दोनों को बस एक ही चीज चाहिए थी एक दुसरे का बेपनाह प्यार ,………..और प्यार की कामना नहीं की जाती वो किया जाता है बिना किसी उम्मीद के ,बिना कुछ पाने की चाहत के …
दोनों एक दूजे में लिपदे कब नींद के आगोश में खो गए पता ही नहीं चला ….

अध्याय 32

इधर शहर में विजय किशन ,रानी,सोनल ,खुशबु,नितिन,और राकेश सभी एक बार कम पब में बैठे हुए थे अब नितिन और विजय की कुछ कुछ बनने लगी थी जिसे देखकर उनकी दोनों बहने बहुत खुस दिख रही थी ,विजय को नितिन में अजय की छबि दिखाई दे रही थी ,होती भी क्यों ना थे तो वो दोनों एक ही खून बस पता नहीं था,नितिन के अंदर अजय सी गंभीरता थी ,सभी बैठे बैठे बाते कर रहे थे ,विजय ने कुछ और भी नोटिस किया वो था सोनल और नितिन का एक दुसरे के प्रति बिहेविअर ,उसे समझते ज्यादा समय नहीं लगा की दोनों के बीच कुछ तो हो रहा है ,सोनल का यु उसे देखना और नितिन का भी उसे नज़ारे बचाकर देखना ,विजय को समझ आ रहा था की उसकी बहन उससे कुछ छिपा रही है ,पर विजय तो इतना खेला खाया हुआ आदमी था उससे कुछ छिपा पाना थोडा मुस्किल काम था ,थोड़ी देर में जब सब बिजी हो गए तो सोनल ने खुसबू को इशारा किया ,खुसबू ने नितिन को चुटकी मार कर इशारा कर दिया तीनो समझ चुके थे की क्या करना है ,नितिन टॉयलेट के लिए निकल पड़ा वही खुशबू और सोनल भी वहा से टॉयलेट के लिए निकल पड़े ,इधर राकेश एक बहुत ही खुशमिजाज पतला दुबला सा लड़का था ,जो सोनल को दीदी और रानी को बहन कहकर पुकार रहा था ,लग ही रहा था की ये सब एक दुसरे को बहुत अच्छे से जानते है ,किशन रानी और राकेश की खूब जम रही थी ,

तीनो का थोड़ी थोड़ी देर में वहा से उठाकर जाना विजय को खटक गया वो कुछ बहाना बनाकर वहा से निकल गया ,बाकि बचे तीनो लोग एक दुसरे की बातो में इतने खोये थे की उन्हें कुछ भी पता नहीं लगा ,इधर नितिन,खुशबु और सोनल निचे बेसमेंट में पहुचे खुसबू उन्हें अकेला छोड़कर वहा से थोड़ी दूर खड़ी हो गयी नितिन और सोनल एक कार के पीछे एक दुसरे के गले में बांहे डाले खड़े थे …….
“नितिन यार मेरे भाई को हमारे बारे में कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए “सोनल नितिन के गालो में हाथ फेरते हुए बोली
“लेकिन कब तक सोनल …….

कभी तो हमें ये बताना पड़ेगा ना ,मैं तुमसे प्यार करता हु और प्यार करना कोई गुनाह तो नहीं है ना ,मैं तो चाहूँगा की आज ही तुम विजय को हमारे बारे में बताओ “सोनल घबरा जाती है
“नहीं नितिन पता नहीं विजय कैसा रियेक्ट करेगा ,ये भाई लोग होते ही ऐसे है जब खुद करे तो सब ठीक पर जब बहन करे तो ये गुस्से से आग बबूले हो जाते है ,तुम ही सोचो खुसबू हमें मिलाने में मदद करती है पर अगर तुम्हे पता चले की खुसबू किसी से प्यार करती है तो ……तो तुम क्या करोगे “सोनल की बातो से नितिन सचमे सोच में पड़ गया पर अगले ही पल उसके होठो में मुस्कान आ गयी ,
“सोनल मेरी जान मैं अपनी बहन से बहुत प्यार करता हु और उसकी पसंद मेरी पसंद होगी ,हा बस वो मेरी बहन को खुस रखे ,”नितिन एक गहरी साँस लेता है और बोलना जारी रखता है

“पता है सोनल मेरी बुआ भी किसी से प्यार करती थी ,और मेरे पापा और दादा के मर्जी के खिलाफ उन्होंने शादी की ,मेरे दादा को तो बात समझ आ गयी पर मेरे पापा कभी नहीं माने और एक खुनी जंग हो गयी ,मेरी माँ ने हमें इससे दूर ही रखा वो नहीं चाहती थी की हमारे ऊपर हमारे परिवार के खून खराबे वाले माहोल का साया भी पड़े ….खास मेरे पापा मेरी बुआ को समझ पाते वो उनसे बहुत प्यार करते थे और करते है पर क्या करे ये ईगो चीज ही ऐसी है की रिस्तो को खा जाती है …..मैं अपनी बहन के साथ ऐसा कभी नहीं होने दूंगा चाहे मुझे अपने परिवार से लड़ना पड़े या अपने सीने में गोली खानी पड़े पर मैं अपनी बहन को उसका प्यार दिलाकर रहूँगा …….

”नितिन के आँखों में आंसू थे वही सोनल के आँखों में भी नितिन का अपनी बहन के लिए प्यार देखकर आंसू आ गए उसे अजय और विजय की याद आ गयी ,उसने नितिन की आँखों में अपने होठो को रखा और सारा खारा पानी अपने होठो में ले ली ,सोनल नितिन के होठो को अपने होठो के पास लायी और जैसे ही उनके होठ मिलाने वाले थे ,किसी के खासने की आवाज से दोनों चौके देखा तो एक और विजय खड़ा था वही दूसरी ओर खुसबू ,दोनों ने उनकी बाते सुनी थी और दोनों के आँखों में पानी था ,नितिन और सोनल विजय को देखकर घबरा गए पर उसके चहरे में मुस्कान देख कर सोनल को राहत मिली …उसकी आँखों में आंसू देखकर उसे समझ आ गया की उसका भाई क्या सोच रहा था ,वही खुसबू को नितिन और सोनल ने अस्चर्य चकित होकर देखा ,हुआ ये था जब बेसमेंट में तीनो आये तो साथ ही उनके पीछे विजय भी आ गया और जब विजय सोनल और नितिन की बाते सुनने को कार के पीछे छिपा तो खुसबू ने उसे देख लिया ,खुशबु दोनों को सचेत करने आई थी पर अपने भाई की बाते सुनकर वो वही रुक गयी ,सोनल दौड़कर विजय के गले से लग जाती है और अपना सर उसके छाती में छिपाकर रोने लगती है ,दोनों का प्यार देखकर खुशबू भी नितिन से चिपक कर रोने लगती है ,थोड़ी देर बाद जब सोनल विजय से अलग होती है तो विजय नितिन को अपने गले लगने का इशारा करता है ,नितिन आकर विजय के गले लग जाता है .
“अगर मेरी बहन को थोड़ी भी तकलीफ दि ना तो काट दूंगा “विजय नितिन को छोडते हुए कहता है ,सोनल उसे एक मुक्का मरती है वही नितिन हसाते हुए उसे उसके कंधे पर हाथ रखता है ,
“भाई मैं सोनल से बहुत प्यार करता हु ,पर आप से जादा नहीं कर सकता ,क्योकि भाई बहन का प्यार बहुत ही पवित्र और मजबूत होता है ,लेकिन मैं आपसे वादा करता हु की मेरे कारन सोनल को कभी कोई तकलीफ नहीं होगी ,”नितिन का इतना कहना था की विजय फिर से उसे खीचकर अपने सीने से लगा लेता है ,दोनों कन्याए भी दौड़कर उनके गले से लग जाती है …………………………..

शाम ढल चुकी थी रात हो चुकी थी सभी घर पहुच चुके थे आज सोनल और विजय एक कमरे में और किशन और रानी दुसरे कमरे में सोने चले जाते है 2 दिनों बाद उन्हें जाना है फिर जाने कब मिले दोनों अपनी सबसे अजीज बहनों को भरपूर समय देना चाहते थे …

सोनल आज बहुत खुश थी खुश होती भी क्यों ना आज उसे जो सबसे बड़ा डर था वो खत्म हो गया था ,सोनल जब बाथरूम से बहार आती है तो विजय उसे देखकर दंग रह जाता है ,वो एक झीनी सी nighty में थी ,काले कलर की वो nighty सोनल के दुधिया और भरे हुए जिस्म में खूब खिल रही थी ,सबसे आकर्षक उसके जांघ लग रहे थे ,जो की अपनी मसलता लिए हुए बिलकुल खिल कर सामने आ रहे थे ,उसकी nighty उसके कमर से कुछ ही नीच निचे तक थी ,जांघे पूरी तरह से दृश्य थी वही अगर वो थोड़ी भी झुकती तो उसकी काली पेंटी भी साफ़ दिख जाती ऐसे विजय को वो भी एक दो बार दिख ही गयी ,ये nighty सोनल के जिस्म का पूरा प्रदर्सन कर रहा था ,उसके वक्षो की सोभा भी निराली थी जो बिना ब्रा के पारदर्शी कपडे से झांक रहा था पर कपडे का रंग काला होने के कारन सिर्फ हलके हलके दिखाई दे रहा था ,लेकिन अजय की निगाहे तो सोनल की जन्घो और उसके बलखाते हुए भारी निताम्भो में टिक गयी ,सोनल को जब इसका आभास हुआ की विजय क्या देख रहा है तो वो शर्मा के पानी पानी हो गयी …….विजय ने अपनी प्यारी बहन को जब शरमाते देखा तो उसे अपनी गलती का आभास हुआ पर दोनों काफी खुले हुए थे ,वो बिस्तर से खड़ा हुआ और सोनल के पास आया और उसे पीछे से जकड लिया ,विजय बस एक निकर में था ,ना अंदर ना बाहर ही उसने कुछ पहना हुआ था,अपने बहन के जवानी को देखकर उसका लिंग भी तन चूका था जिसे छोर निगाहों से सोनल ने भी देख लिया था ,और मन ही मन मुस्कुरा गयी थी …….

विजय का उसे पीछे से पकड़ना और उसके लिंग का सोनल के निताम्भो से रगड़ खाना सोनल की तो सांसे ही रुक गयी उसके मुह से एक आह निकल गयी ,वही विजय को अपने किये पर थोडा पछतावा हुआ और वो वहा से जाने लगा तो सोनल ने उसका हाथ पकड़कर उसे अपने पास खीचा और अपने एडी उठाकर उसके होठो में अपने होठो को रख दिया ,,ये बिन बोला और अनजाना सा रिश्ता दोनों के बीच बन चूका था की वो जब भी मन करे एक दुसरे के होठो पर अपने होठो को टिका देते और एक दूजे के होठो का रसावादन करते …दोनों एक दुसरे में ऐसे डूबे की उन्हें ये भी ख्याल नहीं रहा की वो बिस्तर तक आ गए और सोनल को बिस्तर में लिटा विजय उसके ऊपर आ गया ,,,,सोनल ने अपने हाथो से अपने भाई के सर घेरे उसे अपने पास खीच रही थी ,वही विजय भी अपनी पूरी ताकत से अपने बहन के होठो के चिथड़े निकल रहा था ,उसका लिंग अब सीधे सोनल की योनी के ऊपर रगड़ खा रहा था ,परिणाम ये हुआ की सोनल का शारीर अकड़ने लगा वो अपनी कमर को उठा उठा कर उसके लिंग को अपनी योनी में रगड़ खाने में मदद कर रही थी ,उन दोनों को पता भी नहीं था की वो ये क्या कर रहे है ,असल में वो इतने खोये थे प्यार की गहराईयो में की उन्हें भान भी नहीं रहा की वो भाई बहन है ,…..दोनों की आँखे बंद थी और दोनों के हाथ एक दुसरे के सर को पकडे थे ,विजय के हाथ सोनल के सर के ऊपर थे और उसके बालो में फसे थे वही सोनल के हाथ विजय के गले के चारो ओर और वो उसे अपनी ओर खीच रही थी ,,….

विजय का हाथ अपने आप नीछे चला गया और सीधे सोनल की योनी के ऊपर जा लगा उसने अपने निकर को निकल फेका और जैसा की उसे आदत थी उसने सोनल के पेंटी को भी निकल फेका ,उसे होस नहीं था की वो किसी और लड़की नहीं बल्कि अपने बहन के साथ है ,वो बहन जो उसे सबसे जादा प्यार करती है उसे एक पल को इसका ख्याल नहीं रहा था ,,,,वो अपनी पुरानी आदतों से मजबूर था जो उसे एक यन्त्र की तरह ये सब करा रही थी,वही सोनल को ये अहसास पहली बार हो रहा था वो भी अपने मजे में ऐसे डूबी थी की उसे भी होश नहीं रहा की वो अपने भाई के साथ है ,,
विजय ने सोनल की पेंटी निकल दि दोनों के होठ अब भी मिले हुए थे और आँखे अब भी बंद थी ,विजय ने अपने विशाल मुसल को सोनल की अनछुई योनी में घिसना शुरू किया सोनल तो जैसे स्वर्ग में पहुच गयी हो वो मजे के कारन सांसे भी नहीं ले पा रही थी ,वो अपनी आँखे खोलना भी चाहती तो उसकी आँखे नहीं खुल पा रहे थे ,वही उसके शारीर का हाल उसकी गीली योनी बयां कर रही थी ,जैसे एक सैलाब सा फुट पड़ा हो विजय हलके हलके अपने हाथो से अपने लिंग को पकड़कर धीरे धीरे सोनल की गीली योनी के दीवारों पर और थोड़े अंदरूनी दीवारों पर रगड़ रहा था ,पर उसने उसे अंदर नहीं किया वो उसी तरह सोनल को तडफा रहा था जैसे वो लगभग हर लड़की को तडफाता था ,जब तक की वो कुछ अपना कमर उठा कर के उसके लिंग को अपने अंदर ना ले ले ,पर सब और सोनल की बात बहुत ही अलग थी सोनल अभी तक अनछुई थी ,वो अपने कमर ऊपर भी कर रही थी पर लिंग फिसल जाता था उसे इससे बहुत मजा आता था ,इशार विअय भी माहिर खिलाडी के जैसे अपना सर निचे लता है और उसके वक्षो को अपने मुह में भर उनका रस पिने लगता है हवास की आग ने दोनों को अँधा बना रखा था ,दोनों को आंखे खोलकर हकीकत को देखने की भी फुर्सत नहीं मिली ,तूफान आता गया बढता गया की विजय ने एक उंगली सोनल के पूरी तरह से गिले चूत में घुसा दि ….नयी नवेली सोनल के लिए ये असहनीय वार था

“आआह्ह्ह अआह्ह्ह भाई ईईईईईईईई ………..

”सोनल का पूरा शारीर अकड़ गया और जैसे एक जवालामुखी फूटा हो ,कामरस का एक फुहार बड़े जोरो से फूटा और सोनल निढल होकर लेट गयी ,पर विजय “भाई ईईईईईइ “ये शब्द विजय को चौकाने वाले थे वो सर उठा कर देखता है ,निचे उसकी बहन हाफ रही थी ,विजय का चहरा शर्म और ग्लानी से लाल हो जाता है ,वही सोनल जब आंखे खोलती है तो उसे सच्चाई का आभास होता है ,सोनल का हाल भी विजय से अलग नहीं था ,दोनों की आँखे मिलती है ,कुछ भी कहने को दोनों के पास कुछ भी नहीं था ,,,
विजय अपनी हालत को देखता है और अपनी निकर पहन कर वहा से लगभग भागता हुआ बहार निकल जाती है ,और सोनल ………सोनल अपने आँखों में आंसू लिए एक टक बस छत को घूरते रह

अध्याय 33

सोनल और विजय के बीच जो भी हुआ इससे दोनो ही बहुत कशमकश में थे,विजय तो वहां से चला गया पर वो उस हसीन से हादसे को भूल नही पा रहा था,यही हाल कुछ कुछ सोनल का भी था ,
इधर रानी और किशन भी अपने दुनिया में मस्त थे ,दोनो एक दूजे के बांहो में बांहे डाले लिपटे हुए अपने प्यार का अहसास एक दूजे तक पहुचा रहे थे,
“भाई मन करता है की युही हमेशा आपकी बांहो में रहू पर आप फिर कल मुझसे दूर हो जाओगे….”रानी का चहरा थोड़ा सा मुरझा गया,
“क्या करे बहन जाना तो पड़ेगा ही ना,पर मैं जल्दी ही आऊंगा,अपनी प्यारी बहना के पास “किशन कहता हुआ रानी के चहरे पर एक किस करता है ,दोनो के नाक एक दूसरे से टकरा रहे थे,
“हा हा जानती हु आप मुझे याद भी नही करोगे,वहां तो आपकी सुमन होगी ना,अब तो उसके बांहो में ही पड़े रहोगे दिन भर “रानी के चहरे पर के मुस्कान आ जाती है वही किशन भी मुस्कुरा देता है ,
“अरे पागल कोई भी लड़की मेरी बहन की जगह थोड़े ले सकती है ,तुम तो मेरी जान से भी ज्यादा प्यारी हो मुझे ,और रही बात सुमन की तो हा पहली बार मुझे किसी लड़की से इतना प्यार हुआ है ,ऐसे तुझे तेरी भाभी कैसे लगती है..”
रानी के चहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान खिल जाती है और वो किशन के होठो को प्यार से एक किस करती है ,
“मेरी भीभी भी मेरे भाई की तरह मीठी है “ रानी की हसी पूरे कमरें में गूंज जाती है ,वही किशन अपने को सम्हाल कर रानी पर टूट पड़ता है और उसके गालो पर चुममनो की झड़ी लगा देता है ……….

इधर सोनल जब बाहर आती है तो विजय की हालत देखकर बहुत चिंतित होती है,विजय बाहर सोफे में बैठा हुआ बस सिसक रहा था,चहरा लाल ,आँखों मे जैसे खून उतर आया हो,सांसो को अब भी सम्हालने के कोशिस में था, सोनल की आंखों में भी आंसू थे,वो विजय के पास जाती है और बड़े ही प्यार से उसके बगल में बैठ जाती है ,सोनल अपने नाजुक हाथो से अपने प्यारे भी के गालो को सहलाती है ,विजय जैसे नींद से जागा हो सोनल को पकड़कर फुट फुट के रोने लगता है,वो अपने मजबूत बांहो में सोनल को ऐसे जकड़ लेता है मानो वो उसे अपने में मिलाना चाहता हो,सोनल के बड़ी उभार वाली छाती में सर रखकर विजय को बड़ा सुकून मिलता है वही वही सकून सोनल के मन में भी पैदा हो जाता है,वो उसके सर को अपने हाथो से सहलाती है और बड़े ही प्यार से धीरे से उसे अपने से और चिपकती है ……..
“भाई ए भाई सुन ना,रो मत यार मैं तो तेरी ही हु ना फिर क्यो रो रहा है ,जो हुआ वो हो गया प्लीज़ रोना बंद कर “सोनल अपने भाई को मना रही थी पर खुद ही रोये जा रही थी ,बड़ी देर तक दोनो इसी तरह एक दूजे के बांहो में पड़े हुए आंसू बहाते रहे ,सोनल ने माहौल को सहज बनाने के लिए फिर अपने पुराने अंदाज में कहा …
“साले हो गया अब तेरा नाटक चल जल्दी मुझे नींद आ रही है ,”सोनल ने उसे अपने से अलग करते हुए कहा ,
विजय ने घूरकर सोनल को देखा वो अपने आंसू पोछ रही थी और एक मुस्कान उसके चहरे पर था,वो फिर से उसके गालो को धीरे से सहलाती है और एक प्यारी सी चपत उसके गालो पर लगा देती है,,विजय के चहरे पर भी एक मुस्कान खिल जाती है पर वो अब भी बहुत दुखी लग रहा था,

“सॉरी बहन में बहक गया था ,”विजय के आंखों में फिर से आंसू आने लगे,सोनल उसे घूर के देखती है
“क्या सॉरी ,साले जब हर लड़की के साथ ऐसी हरकत करेगा तो बहकेगा ही न ,ऐसे एक बात बताऊ यार सचमे बहुत मजा आ रहा था ,काश तू मेरा भाई न होता तो मैं तुझे खीचकर अपने पास बुला लेती ,,,,(सोनल के होठो पर एक शरारती मुस्कान खिल गयी)हाय रे साली किश्मत भाई से ही इतना प्यार होना था “
विजय स्तब्ध सा सोनल को देखता है जिसे देखकर सोनल खिलखिलाकर हस पड़ती है ,विजय अब भी उसे प्रश्नवाचक निगाहों से देख रहा था ,सोनल फिर उसके गालो पर अपने हाथ ले जाती है ,
“क्यो क्या हुआ कुछ गलत कहा क्या मैंने …तू अपने दिल से बता जिंदगी में सबसे ज्यादा प्यार तूने किस्से किया है ….

”विजय की आंखे अपने आप बन्द हो जाती है उसके नजरो के सामने वो सभी लडकिया घूमने लगती है जिससे कभी उसने सेक्स किया हो ,,,उसकी नजर कुछ देर को मेरी और रेणुका पर आकर रुकती है कभी निधि और अजय पर लेकिन फिर उसे सफेद कपड़े में सोनल दिखाई देती है ,मुस्काती हुई प्यारी सी मुस्कान उसके चहरे पर थी जैसे वो कह रही हो क्यो क्या देख रहा है ,बचपन से लेकर आज तक की सभी धुंधली यादे उसके जेहन में घूमने लगती है…जो पल उसने सोनल के साथ बिताये थे वो सभी उसके जेहन में एक एक कर आने लगते है ,और आखिर में आज का उसका रूप जिसपर वो दीवाना हो गया था ,खुसी से उसका चहरे खिल जाता है और …
“आई लव यू सोनल “अनायास ही उसके मुह से निकलता है

“लव यू भाई “सोनल की आवाज कानो में पड़ते ही वो आंखे खोलता है सोनल उसके सामने मुस्काती हुई खड़ी थी ,उसे बिल्कुल भी सब्र नही रह जाता वो उससे लिपट कर उसे अपने बांहो में जकड़ लेता है ,और उसके गालो को किश करने लगता है ,वो उसके चहरे को भिगो देता है
“आई लव यू सोनल,आई लव यू सोनल,आई लव यू सोनल,आई लव यू सोनल,आई लव यू सोनल,आई लव यू सोनल,लव यू ,लव यू, लव यू ,लव यू”विजय पागलो की तरह यू ही उसके चहरे पर चुममनो की बरसात कर देता है ,सोनल भी अपने भाई के अपने लिए पागलपन को देखकर बस उसके प्यार को महसूस करती है ……जब विजय उसे छोड़ता है तो सोनल उसे अपने पास खीचकर उसके होठो पर अपने होठो को ठीक कर उसके होठो को प्यार से और धीरे धीरे चूसने लगती है ,दोनो एक दूजे को छोड़ते है और एक दूजे की आंखों में देखकर हल्के से मुस्कुरा देते है …
“हो गया या और भी कुछ है चल अब सोते है ,पर अब कोई प्यार नही दिखाना नही तो फिर से बहक जाएगा “सोनल विजय का हाथ पकड़कर उसे अपने बिस्तर तक लाती है ,विजय किसी कठपुतली की तरह उसके पीछे पीछे चला जाता है ,सोनल उसे बिस्तर में लिटा उसके बाजू में आकर उसे अपने बहो में भरकर एक किस उसके होठो पर देती है ,

अध्याय 34

दो दिन बिता और रिस्तो ने नई करवट ले ली,वो दिन भी आया जब सबको वापस जाना था,डॉ भी सुमन और उसकी माँ के साथ वहां पहुच चुका था ,सभी गांव की ओर चल पड़े,सुमन को देखकर किशन की बांछे खिल उठी और दोनों ने नैनो की भाषा मे एक दूजे को प्यार का संदेशा भेजा, पूरे रास्ते सुमन की माँ एक दुविधा में थी,
गांव पहुचने पर डॉ ने सुमन की माँ का परिचय सबसे करवाया, लेकिन कलवा वहां नही दिख रहा था,सभी बैठ कर बाते कर रहे थे कि कलवा भी वहां आ गया,उसकी नजर सुमन की माँ पर गयी दोनो की आंखे मिली और जैसे दोनो एक दूजे को देखकर हस्तप्रद हो गए,,कुछ देर वहां एक सन्नाटा पसर गया दोनो की आंखों में आंसू थे।

“भाभी आप “
“भइया आप”

कलवा ने सुमन की ओर देखा और जाकर उसे अपने गले से लगा लिया,सभी उनको बस आंखे फाडे देख रहे थे,
“माँ ये सुशीला है,बजरंगी भइया की पत्नी और ये सुमन उनकी बेटी है,है भगवान कहा कहा नही ढूंढा मैंने आप लोगो को “
कलवा के आंखे भर गई थी वही सुमन की खुशी का कोई ठिकाना ही नही था ,जो हमेशा अपने को अकेला समझती थी आज उसे उसका असली परिवार मिल गया था,वो भी कलवा को जकड़ लेती है,
“चाचा आप मे चाचा हो”
“हा बेटी और ये तुम्हारी दादी है” कलवा सीता मौसी की ओर इशारा करता है ,सीता की आंखे खुशी से डबडबा रही थी उसने अपनी बांहे फैला दी और सुमन दौड़ कर उसके गले से लग गयी,सीता ने सुशीला को भी पास आने का इशारा किया वो भी उसके गले लग गयी,
“माँ आपका एक पोता भी है,आज वो नही आया” सुशीला ने सीता से कहा,सीता ने उसके उसके सर पर हाथ फेरा,
सभी के चहरे खुसी से खिले हुए थे,किशन ने फोन कर रानी और सोनल को भी ये बात बता दी,,,,,आज इस परिवार के लिए मानो त्योहार था ,
पर इन सबके खुशियों के बीच एक चेहरा उदास था वो थी चम्पा,,,कलवा को उसकी उदासी का कारण पता था,और चम्पा के दिमाग में बस एक ही बात गूंज रही थी,
‘सुमन बजरंगी की बेटी है’ उसका चेहरा एक अजीब से तनाव से लाल हो चुका था पर शायद उस दर्द को वो नही जताना चाहती थी इसलिए वो चुपके से अपने कमरे में चली गयी,,,….

अध्याय 35

घर मे ख़ुशियाँ छाई थी,लेकिन सबसे खुश थे किशन और सुमन,वो प्रेम के पंछी अपनी ही दुनिया मे खोये थे,जहा एक ओर सुमन को उसका पूरा परिवार मिल गया था वही किशन अपने पहले प्यार के खुमार में डूबा हुआ था,मगर चम्पा की खुशियो को मानो ग्रहण लग गया हो ,उसे क्या हुआ था ये तो कोई भी नही जानता था पर उसके चहरे की उदासी बाली की भी समझ आ गयी……

बाली अपने कमरे में जाता है ,चम्पा किसी बहुत गहरे खयालो में डूबी थी ,बाली आज सालो के बाद चम्पा और अपने पुराने कमरे में गया जहा कभी उसने ऐयासिया की थी वही कमरा जो कभी उसका हुआ करता था ,पर वीर की मौत के बाद से वो कमरा बस चम्पा का रह गया था,बाली के मन में चम्पा को लेकर फिर से एक सम्मान का भाव जागने लगा था,कलवा की कोशिशो से बाली फिर से एक नई शुरुवात करना चाहता था,वो अब चम्पा से प्यार करना चाहता था जो उसने कभी भी उससे नही किया था,चम्पा तो बस इस घर में समान की तरह बन कर रह गयी थी,उसे बाली वो स्थान देना चाहता था जो चम्पा का ही था पर उसकी गलतियों की वजह से उसे नही मिल पाया था,

बाली अपने कमरे में अपना समान पहले से रखवा लिया था ,जिससे चम्पा को ये आभास हो चुका था की बाली अब इसी कमरे में रहने वाला है ,उससे उसका सामना कैसे होगा ये तो उसे भी नही पता था,पर वो खुस थी शायद बहुत ही खुस क्योकि यही तो उसके जिंदगी की एक मात्र इच्छा रह गयी थी………..

बाली की आहट से चम्पा थोड़ी हड़बड़ा कर खड़ी हो जाती है ,
“आप ……”

“हा मैं ,”बाली उसके पास जाकर बैठ जाता है और उसका हाथ पकड़ कर उसे भी अपने पास बिठा लेता है ,इतने सालो बाद दोनो साथ थे ,पूरी जवानी उन्होंने अलग होके बिता दी…

बाली को भी ये समझ नही आ रहा था की आखिर वो कहे तो क्या कहे ……शब्द तो कुछ थे नही ,दीवार जो उनके बीच थी वो इतनी बड़ी हो चुकी थी की कोई शब्द शायद अब उसे नही तोड़ पाती…फिर भी बाली ने कुछ कहना चाहा पर उससे पहले ही चम्पा बोल पड़ी

“मुझे माफ कर दीजिये,मैं जानती हु की मेरी गलती माफ् करने के लायक नही है पर फिर भी………..मैं आपकी बहुत इज्जत करती हु.मुझे माफ् कर दीजिये …..”

चम्पा की आंखों से पानी की एक धार बह निकली शायद सालो से वो ये बाली से कहना चाहती थी पर बाली कभी उसे ये सुनने को तैयार ही नही था….

बाली भी उसके इस जस्बात को समझता था ,उसने उसके हाथो को अपने हाथो में ले लिया,

“तुमने जो भी किया उसकी सजा तो तुम्हे मिल ही गयी ,अब उन सबको छोड़कर हमे अपनी आगे की जिंदगी जीनी है ,चम्पा के आंखों में खुसी के आंसू छलक उठे बाली ने आगे बढ़कर उसे अपने गले से लगा लिया ,चम्पा के शरीर में एक झुनझुनाहट दौड़ पड़ी जो उसके इतने दिनों से दबाये गए अरमानो की वजह से आ रहा था ,बाली उससे थोड़ा अलग हुआ ,वह भी इतने सालो की दूरी से संकोच में था पर शरीर की छुवन तो अपना काम कर गई थी ,उसने चम्पा को ध्यान से देखा ,आज भी वो उतनी ही सुंदर लग रही थी ,असल में चम्पा को सूंदर कहना थोड़ा गलत होगा उसे कामुक कहना ज्यादा सही होगा,उसने अपनी जवानी में अपनी मादकता से ना जाने कितने मर्दो को अपना दीवाना बना दिया था ,उसके विशाल स्तनों की शोभा उसके कसे हुए ब्लाउज़ में चमकीले से लगते और उसके चमड़ी की लालिमा से दमकते थे ,आज वो सौंदर्य कई सालो से अनछुई थी ,इसलिए थोड़ी सी ढीली पड़ गयी थी ,पर वो मादकता का झरना अभी भी उतना ही ताजा और मिठास से भरा हुआ था ,…….
बाली की नजर जैसे ही उस पर्वत शिखर पर गयी उसकी सांसे तेज होने लगी ,जिसका आभास चम्पा को भी हो चला था,उसे इस बात से एक झुनझुनाहट सी महसूस हुई की शायद फिर से बाली उसके यौवन का रस वैसे ही पियेगा जैसा की वो पहले पिया करता था,उसके यौवन को वो निचोड़ कर रख देगा,बाली की ताकत का अंदाज उसे था वो जब भी वासना के आग में जलता था तो सामने वाली चाहे कितनी भी मजबूत हो उसे निचोड़ कर ही दम लेता ,पुरानी यादो और नई आशंकाओ से चम्पा के बदन में एक करेंट सी दौड़ गयी उसे अपनी सालो सी सूखी पड़ी हुई योनि में एक हलचल सी महसूस हुई ,मानो आज उसने अपने प्रियतम के लिए अपना द्वार खोलने की ठान ली हो…दोनो की कुलबुलाहट साफ थी और दोनो ही एक अजीब सी मर्यादा के बंधन में बंधे थे ,मर्यादा थी उम्र की और बंधन था उस संकोच का जिसे वो सालो से जीते आ रहे थे…..

दोनो ही आगे बढ़ाना चाहते थे पर क्या करे दीवार कैसे गिरे ,बाली ने कोशिस करने की सोची पर दीवार इतना बड़ा था की एक ही झटके में गिरना उसने भी ठीक नही समझ ,आज उस उमंग की शुरुवात तो हो चुकी थी ,अब वो आग उन्हें आज नही तो कल मिला ही देगा………………..

कई आग इस घर के लोगो में एक साथ लगी थी ,अजय और निधि के बीच ,किशन और सुमन के बीच ,विजय और सोनल के बीच ,,,सोनल और नितिन के बीच ,अजय और खुसबू के बीच ,,बाली और चम्पा के बीच ,,,और एक आग और थी जिसका जिक्र अभी तक नही हुआ है ,वो आग थी रेणुका और बनवारी (रेणुका का पति ) के बीच ………

पता नही कौन सी आग किसे कब जलाने वाली थी पर जो भी होना था वो तो बस होना था ………..

अध्याय 36

किशन अपनी प्रेमिका के गले में हाथ डाले अपनी ही दुनिया में मगन अपने कमरे में बैठा था ,सुमन और किशन दोनो के बीच का प्यार अपने परवाने चढ़ने लगा था ,दोनो एक दूजे के हमेशा पास रहना चाहते थे ,किशन उसके गालो को चूमता है ,
“क्यो अब तो तुम ये नही कहोगी न की मैं कहा इतना अमिर और तुम एक गरीब की बेटी “किशन सुमन को थोड़ा और कस लेता है ,
“आप ऐसे क्यो कह रहे हो ,मैं तो आपसे तब भी उतना ही प्यार करती थी जितना आज करती हु,आप चाहे कुछ भी रहो आप मेरे पति हो “सुमन एक मुस्कान के साथ कहती है और उसके गालो को चुम लेती है ,किशन के चहरे पर भी एक मुस्कान आ जाती है ,
“अच्छा जी तो अपने पति को बस किस से मनाना चाहती हो ,मुझे तो और भी बहुत कुछ चाहिए “किशन उसे थोड़ा और जकड़ता है और सुमन हँसते हुए उसे अलग होने के लिए जोर लगती और उससे छूट जाती है ,

“मैन आपको पहले भी कहा था ना की शादी से पहले कुछ भी नही ,तो……और आप मेरे पति है लेकिन अभी आधे है जब शादी हो जाए तो पूरे होंगे ,”सुमन एक मस्तीभरी अदा से कह जाती है और किशन का चहरा थोड़ा मायूस से हो जाता है पर उसके चहरे की मुस्कान कम नही होती ,वो फिर से अपनी बांहे फैला देता है ,सुमन ना में सर हिलती है ,किशन उसे इशारे से प्लीज् कहता है ,सुमन अपने होठो पर एक हल्की सी मुस्कान लिए उसके पास आती है और उसके सीने में सर रखकर खुद को छोड़ देती है ,,,,किशन उसके बालो को सहलाता रहता है ,उसके घने बालो में वो अपनी उंगलिया फिरता है और उसके प्यारे चहरे को धयान से देखता है ,इतनी मासूमियत थी उसके इस चहरे में पर फिर भी कितनी दृढ़ता ,एक ओज का प्रवाह था जो बहुत ही शीतल था पर इस बात को भी प्रामाणिक करता था की वो कितनी मजबूत है …………
दोनो ने अपने होठो को एक दूजे के पास लाया दो काँपते हुए होठ बस मिलने ही वाले थे की एक जोरदार आवाज ने उन्हें हिला दिया..

“किशन “ किशन और सुमन दोनो ही चौककर और घबराकर उस शख्स की और देखने लगे ,चम्पा जैसे बुखार से कॉप रही हो ,आंखे लाल और चहरा गुस्से से तमतमाया हुआ,काँपते होठो से उसके शब्द तो निकल चुके थे पर वो कपन अब भी जारी थी,दोनो ही डर गए थे ……
“ये क्या कर रहा है “चम्पा की आवाज पहले से कम पर फिर भी जोर से थी,
“मा वो वो …”किशन अपनी जगह से उठता है

“खबरदार किशन अगर मैंने आज के बाद फिर से तुम्हे इस लड़की के साथ देखा तो ,ये लड़की निकल जा यहा से और आईन्दा मेरे बेटे के पास भी मत आना …”किशन और सुमन दोनो ही भौचक्के से चम्पा को देख रहे थे और उसके बोले हुए एक एक शब्द को समझने की कोसिस कर रहे थे,दोनो को जब यह समझ आया की उन्हें क्या कहा गया है तक देर हो चुकी थी चम्पा सुमन का हाथ पकड़कर उसे कमरे से बाहर निकल देती है और किशन की और पलटकर
“अगर तूने आज के बाद फिर से इस लड़की से संबध रखने की कोशिस की तो तू मेरा मरा मुह देखेगा”
ये बात दोनो ने ही सुनी थी सुमन रोती हुई अपने कमरे की तरफ भागी वही किशन बस अपनी मा को देखता रहा जो अभी तक इस रिस्ते से खुस थी अचानक उसे क्या हो गया था……

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अध्याय 37

निधि आज अजय के कमरे में नही गयी,उसे जाने क्यो कुछ डर सा लग रहा था,डर किससे अपने ही भाई से,क्यो जिसे वो इतना प्यार करती है जो उसे इतना प्यार करता है उससे क्या डर था निधि को,
लेकिन उसका दिल आज अजय के नाम से ही जोरो से धड़कने लगता शायद वो अब बड़ी हो रही थी,शायद उसे अब लाज की खबर हो रही थी,शायद उसे अब अपने जिस्म में उस संवेदना का अहसास होने लगा था जिसे सारी दुनिया पाप कहती है,
और अजय उस दिन के वाकये के बाद से अजय अपनी प्यारी बहन के लिए प्यार से भरा हुआ था ,अब स्तिथि कुछ अलग ही हो चुकी थी ,अब निधि डर रही थी और अजय मर रहा था…
पर प्यार की आग है ,कब तक कोई दबाएगा,एक ना एक दिन तो बाहर आना ही था,
अजय बेचैनी से निधि का इंतजार कर रहा था पर वो नही आयी ,आज दूसरा दिन था जब निधि उससे दूर भाग रही थी,ये उसके जीवन में पहली बार हो रहा था,उससे आखिर रहा नही गया,वो अपने कमरे से निकालकर निधि के कमरे में जाता है,दरवाजा बंद था,वो खटखटाता है,निधि दरवाजा खोलती है और अजय को देखकर थोड़ी सहम जाती है,

एक सफेद सादे से सलवार कमीज में निधि किसी जन्नत की परी सी लग रही थी,जैसे अभी अभी आसमान से जमीन में उतरी हो,शायद अभी अभी उसने अपना चहरा धोया था,कुछ पानी की बूंदे अब भी उसके चहरे पर खेल रहे थे,अजय को देखकर उसके नयनो ने सहम कर कुछ प्यार के मोती छोड़ दिए,वो नजर गड़ाकर नीचे देखने लगी,अजय ने उसे इस स्थिति में देखा और देखता ही रह गया,क्या उसने गलती कर दी थी,क्या उसने अपनी बहन को नाराज कर दिया था,क्या हुआ था निधि को जो ऐसे कर रही है ,उसने कभी भी निधि को ऐसे उदास नही देखा था,
“क्या हुआ मेरी जान मुझसे कुछ गलती हो गयी क्या,”अजय ने अपनी

निगाहों को उसके प्यारे चहरे पर गड़ाया,निधि ने अपना मासूम सा चहरा हल्के से उठाया ,उसके आंखों का आंसू अब साफ नजर आ रहा था,उसके मासूम भोला सा चहरा लाल हो चुका था ,वो एक फरियादी निगाहों से अजय को देख रही थी,
“भैया गलती तो मुझसे हुई है,”निधि से अब नही रहा गया वो दौड़ कर अजय के सिने से लग गयी,अजय उसके सर को सहलाता हुआ
“क्या कह रही हो ,तुमसे कोई गलती हो ही नही सकती “
“भैया अब मुझे पता चला की आप मुझे क्यो दूर रहने को कहते थे,मैंने भी अपने जिस्म में वो संवेदना को महसूस किया है,अब मुझे समझ आया की भाई बहन क्यो एक उम्र के बाद एक दूसरे से दूर रहते है,हा भैया आप सही थे अब मैं जवान हो चुकी हु…….”
निधि जोरो से रोने लगी थी वही अपनी प्यारी सी लाडली बहन की बातो को सुनकर अजय के दिल में एक जोर का दर्द हुआ,मेरी बहन आज ये क्या कह रही है ,जो बात मैं हमेशा ही चाहता था की वो समझ जाए वो उसे इस तरह से समझेगी उसे ये यकीन ही नही हो रहा था,
“मेरी प्यारी बहन तू मेरे लिए हमेशा ही बच्ची रहेगी मैं तुझे प्यार करना नही छोड़ सकता मेरी जान”
अजय उसे अपने से अलग करता है और उसके चहरे पर चुममनो की झड़ी लगा देता है,निधि की आंखों का गीलापन अब लालिमा लिए हो जाता है,हल्की लाल आंखों में गीलापन और मासूमियत निधि की सुंदरता को चार चांद लगा रहे थे,,
उसके नरम लाल होठो की फड़कन उसके जज़्बातों की कसमकस का बयान कर रहे थे ,अजय ने उसके होठो को अपने दांतो से हल्के से दबाया निधि की आंखों में अजय के लिए बस प्यार था ,वो उसे रोक तो नही रही थी पर अपने को उसपर छोड़ दी थी वो कुछ करना भी नही चाहती थी,

हल्के हल्के वार से निधि में एक मदहोशी ने जन्म ले लिया वो अपने आंखों को बंद कर अपने भाई को बस महसूस करना चाहती थी,
उसके वो तड़फते होठ आज अपने को समर्पित कर चुके थे,अजय के दिल में भी वासना तो नही थी पर अब कोई भी ग्लानि के भाव भी नही थे,अब तो उसे बस अपनी बहन का प्यार चाहिए था,उसने निधि के नितंबो को अपने हाथो में थमा और उसे उठा लिया,निधि किसी गुड़िया सी उसके साथ उठती गयी उसने अपने पैरो को अजय ने कमर से लपेट लिया,अजय उसे उसके बिस्तर पर ले गया और उसके ऊपर सो गया,
अजय ने उसके होठो को अब अपने होठो से भर लिया,दोनो ने अपने आप को बस एक दूजे के लिए समर्पित कर दिया था…
एक कहानी बनने को थी ,प्यार से भरी हुई एक कहानी,एक दस्ता,एक आशिकी एक फकत सी बेताबी,एक हसीन सी मदहोशी,एक करवा,एक इठलाती सी नदी की धार जैसी मोहब्बत,एक तमन्ना,एक जज़बातों का तूफान,एक थमी सी धड़कन बढ़ी सी धड़कन……..

और मोहोब्बत के आग में जलते हुए दो जिस्म जो ना रिस्तो को जानते थे और ना ही दुनिया की रश्मो को, जानते थे तो बस एक दूजे की शोहबत और एक दूजे के लिए मोहोब्बत…
अजय के होठो ने निधि के गहराइयों को नापा और निधि बेहाल सी हो गयी,आज ये पहली बार था जब निधि अपने जिस्म की आग को महसूस कर पा रही थी ,ये वही भाई था जिसने कभी उसे अपने कंधे पे खिलाया था,अपने बांहो में झुलाया था,निधि उन बीते लम्हो को याद कर रो पड़ी उसे बहुत ही गहरे में ये यकीन हो चला था की जो वो कर रहे है वो गलत है,,,,,
अजय अपनी बहन को भरपूर प्यार देना चाहता था पर किस कंडीशन में…नही क्या उसकी मर्जी के बगैर उसे प्यार करे ये नही कर सकता था,निधि के आंसुओ का मतलब क्या है,..
“क्या हुआ मेरी रानी,”
“नही भैया ये सही नही है,मेरा मन अजीब सा लग रहा है,”
प्यारी सी भोली सी मासूम सी निधि,चहरे पर आया आंसू ,अजय ने उसके गालो में बहते आंसुओ को अपने होठो से अपने अंदर ले लिया,
“तुझे ऐसा लगता है तो ठीक है मेरी जान ,मैं तुझे किसी भी कीमत में दुख नही पहुचा सकता ,मुझे मेरी प्यारी बहन से प्यार है बहुत ही प्यार है,और मुझे मेरी शरारती बहन चाहिए ऐसे बड़ी बड़ी बातें करने वाली नही..”अजय ने अपने हाथो से उसके चहरे को उठाते हुए कहता है,…निधि के होठो में एक मुस्कान आ जाती है ,हा उस झरने और झोपड़े वाले रात के बाद से मानो वो बड़ी सी हो गई थी जो हमेशा कहती थी की वो अपने भाई के लिए कभी भी बड़ी नही होगी वही आज अपने उसी भाई के लिये बड़ी हो गयी……
उसने फिर से अजय को देखा ,अब उसके आंखों में वही भोलापन था जिसका अजय दीवाना था,उसने आगे बढ़कर अजय के होठो को अपने होठो से लगाया और उसे बड़े ही प्यार से चूसने लगी…
“भैया i love you ,मुझे माफ् कर दीजिये की मैं आपसे ऐसा व्यवहार कर रही थी,मैं कैसे भूल गयी थी की आप मेरे वही भाई हो जिसने मुझे अपनी जान से ज्यादा प्यार किया है”..

निधि अब अजय के सीने से लिपट गयी,उसके उन्नत उरोजों ने अजय के सीने से गडकर उसे एक असीम आनंद दिया,वो अपनी प्यारी सी बहन की जवानी के अहसास में खोया उसके बालो को अपने हाथो से सहलाने लगा,
“मुझे भी माफ कर दे बहन की मैं तुझे कभी भी समझ नही पाया”
“आपको मुझे समझने की कोई भी जरूरत नही है भइया आप बस मुझे प्यार करो “निधि के चहरे पर फिर से वही शरारती मुस्कान खिल गयी जिसका अजय इंतजार कर रहा था…

अजय के अंदर से एक प्यार का बहाव हुआ और वो निधि को जोरो से पकड़कर उसे फिर से बिस्तर पर पटक दिया,और उसके ऊपर टूट पड़ा…
अजय ने जोरो से उसके चहरे को चूमना शुरू किया ,निधि बस हंस रही थी,उसकी खिलखिलाहट से पूरा कमरा गूंजने लगा था,धीरे धीरे उसकी खिलखिलाहट कम होने लगी ,वही अजय भी अब धीरे धीरे उसके बदन पर हाथ फेरता हुआ उसके होठो तक पहुचा और उसके होठो को धीरे धीरे से खाने लगा,
निधि के रसीले होठो का रस अब अजय के होठो को मिल रहे थे,निधि की हंसी ने अब हल्की और उत्तेजना से भरी हुई सिसकियों में बदल चुकी थी,अजय उसके सलवार के ऊपर से ही उसके उठे हुए मांसल नितंबो को सहला रहा था,दोनो ही उस झोंके में बहना चाहते थे,थोड़ी झिझक अब भी दोनो के जेहन में बाकी थी पर प्यार कहा कुछ देखता है………
निधि ने एक करवट मारी और अजय को अपने नीचे ले लिया,अब अजय बस अपनी जान की हरकतों को देख रहा था,वो उसके कपड़े को निकलने लगी और उसके नग्गे सीने में फैले बालो के जंगलो को अपने होठो से चूमने लगी,अजय के शरीर में एक झुनझुनाहट सी दौड़ी,उसने अपना हाथ उसके सर पर रख दिया,निधि पागल सी हो गयी थी,वो उत्तेजित हो रही थी और उसने अजय के नीचे के वस्त्रों को भी निकल फेका,उसने उसके अंतःवस्त्रों को भी निकलने में देरी नही की,अजय खुद थोड़ा सा असहज हो गया पर निधि अब कहा उसकी सुनने वाली थी,अजय बस अपनी आंखे बंद किये उसके होठो की कोमलता को अपने शरीर में महसूस कर रहा था,छाती से होते} हुए वो उसके नाभि तक पहुची फिर कमर और फिर उसके लिंग तक,अजय का लिंग फूलकर और भी भयानक लग रहा था,कोई और लड़की होती तो शायद इसे देख डर ही जाती पर निधि पर तो प्यार का भूत सवार था,उसको शरीर की बनावट नही अजय के प्यार से प्यार था,अजय का लिंग बस उसके लिए वैसे ही था जैसा की उसके शरीर के बाकी के हिस्से,अपनी बहन की निश्छलता को देख अजय को बड़ा प्यार आ रहा था,वो उसके बालो को अपने हाथो से सहला रहा था,उसकी उत्तेजना अब थोड़ी काम हो चुकी थी वो बस बिना किसी उत्तेजना के उस प्यार के नए स्वरूप को महसूस करना चाहता था जो उसे निधि दे रही थी……..

निधि उसके लिंग को अपने होठो से सहलाती है,लिंग में इससे थोड़ा झटका पड़ता है और वो उछाल पड़ता है ,जिससे निधि की हंसी छूट जाती है ,अपनी मासूम सी बहन की हंसी से अजय का दिल भी खिल उठता है,,,वो उसे बस ऐसे ही देखना चाहता था,हस्ते हुए खिलखिलाते हुए…..
अजय के पैरो तक को छुमने के बाद निधि अजय के ऊपर लेट जाती है अब बारी अजय की थी वो उसे नीचे कर उसके चहरे को देखता है,उसके शरीर और मन में अब हवस की एक रेखा भी नही थी,वो उसके बालो को प्यार से सहलाता है दोनो की नजरे मिलती है और होठ भी….

अजय धीरे धीरे उसके होठो को चूमता जाता है,उस रसीले होठो का ऐसा चुम्मन जो दोनो की सांसे भरने पर ही खत्म होता है,निधि के कोमल उरोजों की चोटी अजय का धयन अपनी ओर खिंचती है और वो उसे हल्के से मसलने लगता है,
“भाई aahhhhh…….love you “
अजय के हाथ पीछे जाकर उसके कमीज की चैन खोलते है और धीरे से उसे उसके जिस्म से निकल अलग करते है,जैसा की अजय को पता था की उसने अंदर कुछ भी नही पहना था,अजय को हसी आ जाती है और निधि उसे देख थोड़ी सी शर्माती है और उसे अपने ओर खिंचती है,दोनो के नग्गे जिस्म की गर्मी ने दोनो के प्यार की आग को हवा दे दी,अजय उसके होठो को चूमते हुए अपने शरीर को जब भी हिलाता था,निधि के विसाल स्तन उसके बालो से रगड़ खाते और एक सनसनी सी दोनो के शरीर में फैल जाती,
अजय के लिंग ने फिर से आकर ले लिया और वो उसे निधि के जांघो के बीच की गहरी खाई में रगड़ने लगा,निधि के मादक आवाजे कमरे में फैलने लगी थी,पर दोनो अब भी हवस और प्यार की उस सिमा के बंधन में थे,जो भाई बहन के रिस्ते की मर्यादा थी…अब ना अजय और ना ही निधि इस मर्यादा के बंधन में बांध कर रहना चाहते थे,निधि ने ही पहल की और अपने सलवार का नाडा खोल सलवार भी निकल फेका..
दोनो नग्गे जिस्म फिर से एक हो गए दोनो एक दूसरे को भरपूर प्यार देना चाहते थे ,पर दोनो अपनी मजबूरी पर रो पड़ते की वो उतना प्यार ही नही कर पा रहे थे जिससे दोनो की प्यास बुझ जाय,अब बस एक ही तरीका था,….
दोनो ही सेक्स की दुनिया में अनाड़ी थे,पर अजय के लिंग की दस्तक से निधि की योनि में कामरस का बहाव होने लगा था ,उत्तेजना चरम पर थी पर आगे क्या करना है किसी को भी नही पता था,आखिरकार दोनो ही हार गए,
“मुझे माफ कर दे बहन मुझे कुछ भी नही आता”अजय लगभग रोते हुए कहा
“हा जैसे मैं तो मास्टर हु ना”निधि भी रो रही थी उसने बड़ी ही मासूमियत से कहा.

“तो क्या करे,मुझे तुझे प्यार करना है ,और करना ही है,बहुत करना है जान”
अजय उसके होठो पर फिर से टूट पड़ा,दोनो की आंखों में आंसू उस बेचैनी के थे की वो एक दूजे को टूटकर प्यार नही कर पा रहे थे,दोनो फिर से अपने होठो को मिलाप को बेहद ही उत्तेजित लेवल में ले गए और अजय ने धीरे से अपने कमर को आगे खिसकाया ,कामरस से भीगी हुई निधि की योनि का सुराख इतना नही था की वो अजय के इस विशाल से लिंग को अपने अंदर ले ले,नतीजा यही हुआ की लिंग फिसल कर उसके बाजुओ पर जा टकराया,अजय फिर से रो पड़ा,निधि ने उसके गालो को सहलाया और अपना हाथ नीचे ले जाकर उस छेद को ढूंढा जो शायद उम्र के इस पड़ाव में भी बेहद उपेछित सी थी,उसने अजय के लिंग को पकड़कर उस छेद पर रगड़ा,अजय ने सही समय में अपनी काबिलियत दिखाई और धीरे से कमर पर जोर दिया ,उस छेद ने भी अपना गुणधर्म दिखाते हुए लिंग को अपने अंदर आने की इजाजत दे दी पर बिल्कुल ही अनछुई सी योनि के फैलाव के निधि को दर्द की लहर सी महसूस हुई ,अजय को मार्ग तो मिल गया था पर सफर अब भी बाकी था…
“आआआआहहहहहहह भईया “निधि की हल्की चीख ने अजय को रुकने पर मजबूर कर दिया ,अजय का लिंग भी पहली बार इस अजीब से अहसास को महसूस कर रहा था,उसकी चमड़ी ने पहली बार अपना स्थान छोड़ा था और उसे भी एक दर्द ने घेर लिया था,
दोनो एक दूसरे के आंखों में झांके दोनो के चहरे पर एक मुस्कान फैल गयी,

“भइया मैं अब पूरी तरह से आपकी हुई’
निधि के दिल की गहराइयों से निकली ये बात अजय के दिल की गहराइयों तक पहुची और दोनो के होठ फिर से मिल गए ,फिर से उत्तेजना ने अपना काम किया और इसबार बिना किसी मेहनत के अजय धीरे धीरे ही अपनी कमर को हिलाने लगा,दोनों को ही पता था की वो क्या कर रहे है पर बस कर रहे थे…
अजय का लिंग धीरे धीरे निधि की योनि में अपनी जगह बनाता गया काम रास ने अपना काम बखूबी किया था,वो लिंग को पूरी तरह से भिगो चुका था,और उत्तेजन ने दोनो को दर्द सहने की असीम शक्ति दे दी थी,लिंग अब पूरी तरह से निधि के योनि की सैर कर रहा था,बिना किसी रोकटोक के बिना किसी बाधा के…….दोनो ही प्रेम के पंछी अपने जज़बातों का बयान अपना प्यार एक दूसरे पर लूटा कर कर रहे थे,होठ अब भी अलग नही हुए थे ना ही कोई भी संभावना थी..एक शांति सी दोनो के जेहन में थी क्योकि एक असमंजस की एक भावनाओ की,दीवार टूटी थी…अब दोनो के बीच कोई भी दीवार नही रह गयी,प्यार बेपर्दा हो चुका था,और दोनो जिस्म ,दोनो मन एक हो चुकी थी…..

कमरे में और दोनो के मानो में फैली शांति ने उनकी कामुक उत्तेजना को समाप्त कर दिया था,रह गयी थी तो बस एक प्यार की लहर……
निधि के कामरस से गीले अजय के लिंग ने अब अंदर बाहर करना बंद कर दिया था,वो उसी गर्म गुफा में आराम कर रहा था ,और निधि अजय से लिपटी हुई बस अजय के शरीर से मिलने वाले प्यार महसूस कर रही थी दोनो बस इसी गहराई में दुबे रहे जब तक की उनकी आंखे नही लग गयी……….

अध्याय 38

अजय की नींद निधि के हिलाने से खुली,अभी सुबह नही हुई थी पर निधि की कसमसाहट से अजय के लिंग जो की अब भी निधि के योनि में फसा था,कुछ गुदगुदी दी हुई,दोनो की नींद टूट चुकी थी ,दोनो ने एक दूजे को देखा,क्या सुबह थी वो,…
ये नया अहसास था दोनो के ही लिए.
अजय ने बड़े ही प्यार से उसके बालो को सहलाया तो निधि भी शर्माकर उसके बाजुओ में खुद को समेट ली……..

अजय ने अपने लिंग को हल्के से चलाया,जिसके छुवन से ही निधि की योनि ने पानी जैसा चिपचिपा से रस छोड़ दिया,और अजय के लिंग को अपने अंदर पूरा आने को सहायक हो गया,अजय का लिंग भी ऐसे फूला जैसे अब गुब्बारे में हवा भर दी गयी हो और अब बस वो फूटने वाला ही हो…अजय अपने आप ही अपने कमर को आगे पीछे करने लगा था,हल्के हल्के धक्कों से दोनो ही प्यार के असीम दरिया में गोते लगाने लगे…
जन्नत का मजा उनके लिये खुल चुका था और वो वहां से बाहर ही नही आना चाहते थे…
दोनो के अंगों की चमड़ी के मिलान से इतना मजा भी हो सकता है ये तो शायद उन्हें भी नही पता था,पर जो हो रहा था उससे उनका इनकार भी नही था,वो बस अपने आंखों को बन्द किये इस मजे को अपने अंदर जितना हो सके उतना इकट्ठा कर रखना चहते थे,
दोनो की सांसे अब फूलने लगी थी ,लेकिन अजय ने हार नही मानी उनसे धक्के थोड़े तेज कर दिए,निधि को सहन मुश्किल हो गया था,उसकी आहों से कमरा गूंज रहा था,

“aaaahhh aahhh bhaaaa ईईईईई yaaaaa “
उसकी चीख से पूरा कमरा गूंज गया,निधि ने एक तेज धार छोड़ी और अजय के नीचे दबे हुए उसके तेज धक्कों को सहती हुई निढाल हो गयी,,अजय ने जब निधि को देखा तो उसकी आंखों में आंसू था,
अजय घबरा गया वो तो अपनी नाजुक सी बहन को कोई भी तकलीफ नही दे सकता था फिर कैसे वो उसे इस तरह से दर्द में तड़फता देख सकता था,वो तुरंत रुक गया…..

“क्या हुआ जान ,मेरी बहन दर्द हुआ क्या”
अजय के इस प्यार को देखकर निधि के होठो पर एक मुस्कान खिल गयी,..

वो अजय के बालो को अपने उंगलियों में फसा कर उसे अपने ऊपर खिंच लिया और उसके होठो से अपने होठो को मिलाकर एक लंबा से चुम्मन दिया…
“नही भैया कोई भी दर्द नही था,इतना मजा तो मुझे जिंदगी में कभी भी नही आया ……”निधि की हालात कुछ अजीब ही थी आंखों में पानी था,योनि में पानी था ,और होठो में एक प्यारी सी मुस्कान…अजय का लिंग अब भी उसके योनि में पूरी तरह से कसा हुआ था,पर वो अब फिर से उसे चुम कर उसे अपने ऊपर लिटा कर सो गया,वो मानो झड़ना ही नही चाहता था क्योकि झड़ने का मतलब था की उसे अपनी प्यारी बहन से अलग होना पड़ता,और अजय को ये बिल्कुल भी मंजूर ना था…..
सुबह की रोशनी जब घर में फैली तो दोनो की नींद खुली देखा तो निधि वहां से जा चुकी थी ,अजय उठा उसने अपनी हालत देखी और खुद पर ही मुस्करा दिया,उसके लिंग में निधि की योनि के कुछ बाल फसे थे और चादर में खून के धब्बे,उसने ध्यान से देखा तो उसे अपने लिंग में भी एक काटा हुआ घाव से दिखाई दिया,पहले प्यार का दर्द भी मीठा होता है,अजय बस मुस्कुरा कर वहां से उठ जाता है……..

अध्याय 39

सुबह सुबह निधि जल्दी से तैयार हुई आज उसके कॉलेज का पहला दिन था..वही साथ ही सुमन को भी जाना था,दोनो ही तैयार थे ,उन्हें पहुचने के लिए बड़े ताम झाम किये गए थे,अजय ,विजय,कलवा और चम्पा साथ जाने वाले थे…चम्पा सुमन और किशन पर नजर रखने के लिए वहां जा रही थी ,जब किशन को पता चला चम्पा भी साथ जा रही थी तो वो अपना जाना ठीक नही समझा ,विजय को तो मेडम से मिलने की चाह सता रही थी जो काम उसने अधूरा छोड़ा था उसे पूरा करना चाह रहा था,और उसने अजय से कह दिया था की दोनो को कॉलेज छोड़ने की पूरी जिम्मेवारी उसकी…….
कॉलेज पहुचने पर अजय और कलवा की आंखे तो जैसे किसी शख्स पर जम सी गयी वो और कोई नही रामचन्द्र तिवारी का छोटा बेटा महेंद्र था,साथ में बजरंगी भी था और एक लड़का भी साथ था,ऐसे तो महेंद्र अजय का मामा था पर दुश्मनी ने खून के रिस्तो को भी कहा अपना होने दिया है….
कलवा ने धीरे से अजय के कानो में कहा..
“लगता है महेंद्र अपने बेटे को भी यहां एडमिशन कराने लाया है”
अजय ने उस लड़के को देखा ,रिस्ते में तो उसका भाई था पर अब उसे निधि की चिंता सताने लगी पुरानी दुश्मनी के कारन कही उसकी बहनों पर कोई आंच ना आ जाय….कलवा अजय की चिंता समझ चुका था,
“फिक्र की कोई बात नही है अजय ,विजय तो यहां इन्हें लाने लेजाने आएगा ही साथ में ही हम थोड़ी और सिक्योरटी यहां बढ़ा देंगे कुछ लोग हमेशा यहां पर रहेंगे “

अजय ने सहमति में अपना सर हिलाया..वही महेंद्र की नजर भी ठाकुरो पर पड़ी तो जैसे किसी ने तपते तवे पर पानी के झिटे मार दिए हो गुर्राया पर बजरंगी ने उसका हाथ थाम लिया और उसे शांत किया वो अपने बेटे के साथ कॉलेज के अंदर चला गया वही अजय विजय भी निधि और सुमन के साथ अंदर गये.

इधर काव्या मेडम की हालात थोड़ी खराब थी वो ठाकुरो का रोब तो देख ही चुकी थी और उसे बहुत खुशी थी की यहां वो विजय के साथ ऐसा करेगी पर यहां आने पर उसे पता चला की यहां पर तिवारियो का भी बोल बाला है और दोनो के बीच पुश्तैनी दुश्मनी है…उसकी हालात तो खराब हो चुकी थी पर उसने अपने ट्रांसफर की बात भी की पर किसी ने एक नही सुनी ,अब तो उसे बस विजय पर ही कुछ भरोसा था की वो कुछ कर दे…महेंद्र और अजय आमने सामने हुए महेंद्र तो अजय को देख कर उसे पूरी तरह से इग्नोर की कर दिया पर अजय के दिल में ना जाने क्या आया उसने महेंद्र के पास आकर उसके पैर छू लिये…सबके लिए ये बात बहुत ही चौकाने वाली थी अजय ने निधि ,सुमन.और विजय की तरफ इशारा किया
“ये हमारे मामा जी है इनके पैर छुओ “
निधि और सुमन को इसका कोई भी ज्ञान नही था उन्होंने तुरंत उनके पैर छू लिए पर विजय तो सब जानता था और उन्हें ही अपने मा बाप का कातिल मानता था,वो कैसे उसके पैर छुता विजय की नाराजगी तो अजय समझ चुका था पर वो उसे कुछ भी नही कहा…
महेंद्र ना चाहते हुए भी अपने भांजे भांजियों को आशीर्वाद दे डाला ,निधि को देखकर तो उसके आंखों में आंसू ही आ गए बड़ी ही मुश्किल से वो उसे सम्हाल पाया ,निधि में उसे अपनी बड़ी बहन का चहरा दिखा उसकी वही लाडली बहन जिसके लिए तीनो भाई अपना सबकुछ हस्ते हस्ते नॉछवार कर देने को तैयार थे ,पर एक गलती और सब कुछ बदल गया इतने सालो से वो दर्द उसके अंदर था वो आज फिर से ताजा हो गया और वो ना चाहते हुए भी निधि के बालो बड़े प्यार से सहला गया,बड़ी ही मुश्किल से उसने अपने आंसुओ को सम्हाल था,लेकिन निधि ने अपने बालो पर रखे हाथ से आने वाले प्यार के अहसास को समझ लिया और वो बड़े ही प्यार से महेंद्र को देखने लगी ,

“मामाजी ….हमे तो पता भी नही था की हमारे मामा भी है..आप कहा थे मामाजी..”निधि की बातें महेंद्र को फिर से चुभ गयी ,
“इतने दिनों तक आपको क्या हमारी याद नही आयी और जब माँ चली गयी तो क्या आपने हमसे रिश्ता ही खत्म कर दिया”
निधि की बातो से महेंद्र ही नही साथ खड़े सभी लोग हस्तप्रद थे क्योकि जवाब किसी के भी पास नही था,पर निधि ने जो किया वो महेंद्र के लिए सहन के बाहर था,वो जाकर सीधे महेंद्र के गले से लग गयी ….और रोने लगी …महेंद्र को अपनी बहन की छवि उसमे दिख रही थी पर उसके इस तरह उससे लिपटना उसके लिए बहुत ही भावुक हो गया वो अपने को रोक नही पाया और फुट फुट कर रोने लगा जैसे कोई जवालामुखी सा आज फुट गया हो ….

उन्हें दूर से देख रहे कलवा,चम्पा और बजरंगी भी वहां आ चुके थे और इस नजारे को देख कर थोड़े भावुक हो गए थे…उसके साथ आया उसका बेटा भी बड़े ही आश्चर्य से उन्हें देखे जा रहा था,पर कुछ कह नही पा रहा था ,आज तक उसने अपने पिता को दुसरो को रुलाते ही देखा था पर ये लोग कौन थे जिसे देखकर उसके पिता यू रो रहे है…
महेंद्र ने निधि को गले से लगा कर अजय को भी अपने पास बुलाया और उसे अपने गले से लगा लिया विजय को ये बिल्कुल भी पसंद नही आ रहा था पर वो मजबूरी में वहां खड़ा था …
“मेरे बच्चों मुझे माफ कर देना मेरे बच्चों ,हमारे ही कारण मेरी बहन को इतना दुख उठाना पड़ा,वो हमसे अलग हो गयी वो इस दुनिया से चली गयी हमारे ही कारण …..”
विजय को और भी गुस्सा आया ,महेंद्र अजय और निधि से अलग हुआ और दोनो के माथे पर अपना हाथ फिराया और अजय की तरफ देख कर बोला,
“मुझे पता है की तुम शायद यही सोचते होंगे की हमने ही तुम्हारे माता पिता का एक्सीडेंट करवाया है पर मेरा यकीन मानो हम आज भी अपने बहन से उतना ही प्यार करते है जितना पहले करते थे ,आज भी हमारी प्रोपर्टी का एक हिस्सा उसके नाम पर है ,लेकिन भाई (वीरेंद्र ) की मौत के बाद मैं और भइया (गजेंद्र ) तुम्हारे पापा और चाचा से बदला लेना चाहते थे जो भी हुआ पर हम अपनी बहन को चोट भी नही पहुचा सकते थे ……….”अचानक ही महेंद्र की आंखे लाल हो गयी ..
“जिसने भी मेरी बहन को मारा है मैं उसे कभी नही छोडूंगा,हम आज भी उसकी तलाश में है…”
ये वहां खड़े सभी लोगो के लिए बड़ा सा शॉक था क्योकि सभी को लगता था की तिवारियो ने ही वो एक्सीडेंट करवाया था..पर अजय को ये बात पता थी

“मुझे पता है मामाजी की आप लोग इतना नही गिर सकते की अपनी ही बहन को इस तरह से ………लेकिन जिसने भी ये किया है उसे मैं ढूंढ कर रहूंगा,पर अब ये दुश्मनी मुझसे बर्दाश्त नही होती हमे एक हो जाना चाहिए कितनो दिनों तक हम यू ही लड़ते रहेंगे और इस जहर से अपने परिवार के लोगो की खुशियो की बलि देंगे…प्लीज् मामाजी अब ये बंद होना चाहिए ..”महेंद्र ने अजय को ध्यान से देखा वही चमक जो वीर में थी वही सोच,….अब उसे अपने और अपने भाई के ऊपर ही गुस्सा आ रहा था ,पर शायद अब भी सब कुछ ठीक हो सकता था…उसने अजय के कन्धे पर अपना हाथ रखा…
“हाँ बेटा अब ये दुश्मनी खत्म होनी चाहिये पर भईया …मैं अपने तरफ से पूरी कोसिस करूँगा..

और अभी भैया विदेश में है शायद कुछ ही दिनों में वो आने वाले है ,जब वो आय तो तुम सब एक बार हमारे घर जरूर आना ,पिताजी तुम्हे देखकर बहुत खुस होंगे…”
अब अजय ने उस लड़के की तरफ चहरा किया …

“बिल्कुल मामाजी ,और ये हमारा भाई है ,अब तुम अपनी बहन के साथ ही पढोगे क्या नाम है तुम्हारा “
“जी धनुष “
सभी के चहरो पर हसी और मुस्कान था यहां तक की विजय की आंखों में भी कुछ आंसू आ चुके थे हालांकि विजय ने उसे छुपा लिया था…
पर एक चहरा किसी को घूर रहा था…वो था बजरंगी ….
सुमन को देखने के बाद से ही उसे कुछ अपनापन सा महसूस हो रहा था ,कलवा ने इस बात को ताड़ लिया और इससे अच्छा समय क्या हो सकता था इस राज को खोलने के लिए ,उसने बजरंगी के कंधे पर हाथ रखा
“भैया जब ये अपने इतने पुराने दुश्मनी को रिस्तो के प्यार की खारित भुला सकते है तो हम क्यो नही ,”
बजरंगी ने कलवा का हाथ अपने कंधे से हटा लिया,
“ये दुश्मनी नही है कलवा तुमने जो किया उसे विश्वासघात कहते है”
महेंद्र को उनकी बातें समझ आ रही थी क्योकि उसने ही उन दोनो के बीच ये आग लगाई थी ,बच्चों के इस प्यार ने उसे पिघला दिया था वो अब इन भाइयो के बीच भी सुलह करना चाहता था ,वो आगे बढ़कर बजरंगी के कंधे पर हाथ रखता है …
“जिस तरह से आज तक सभी इसी गलत फहमी में थे की वीर का एक्सीडेन्ट हमने कराया है उसी तरह तुम भी एक गलतफहमी में जी रहे हो बजरंगी असल में ऐसा कुछ भी नही था जैसा तुम सोच रहे हो …..इनके बीच का रिश्ता बहुत ही पवित्र था पर शायद हम ही थे जो तुम्हे इस बात को मानने नही दिए हमारा भी इसमें एक स्वार्थ था जो तुम समझ सकते हो,पर यकीन मानो ये बस एक गलतफहमी ही थी जिसकी सजा तुम दिनों ने भुगती ही ……”महेंद्र के इतना कहने से बजरंगी थोड़ा समझ तो गया पर उसे इस बात से बिल्कुल भी फर्क नही पड़ रहा था की उसके और कलवा के संबंध कैसे है उसे तो हमेशा से ही सुशील और अपने बच्चों की तलाश थी जिसे उसने अनजाने में ही अपने से अलग कर दिया था…बजरंगी ने हा में सर हिला दिया पर वो ग्लानि का भाव जो उसे इतने दिनों तक खाये जा रहा था वो कैस कम होता ……उसकी दुविधा कलवा समझ चुका था..

“भैया ये आपकी सुमन है जिसे हम दोनो सालो से ढूंढ रहे है वो हमे अभी अभी ही मिली ,आपकी बेटी सुमन “
सुमन और बजरंगी दोनो के लिए ये शायद जिंदगी का सबसे हसीन छन था पर वो उसे कैसे इजहार करे ये उनके समझ से बाहर था….वो बस एक दूजे को देख रहे थे देख रहे थे और बस देख रहे थे…ना आंखों में आंसू ना होठो में कोई भी मुस्कुराहट बस एक अजीब सी खामोशी सी छाई हुई थी ….की अचानक बजररंगी सुमन के पास आकर उसे अपने सीने से लगा लेता है और वो धार टूट जाती है जो अब तक सम्हाल कर रखी गयी थी ….बस आंसू और मोहोब्बत…
प्यार हवाओ में था और बस प्यार था ….

ना जाने कितना समय बीत गया जब चपरासी डरते हुए उनके पास आया …
“ठाकुर साहब ,तिवारी साहब वो …एडमिशन ..”
उसे देख सभी हंस पड़े और फिर से महेंद्र ने सुमन, निधि और धनुष को अपने साथ लेकर प्रिंसिपल की आफिस की तरफ चल पड़ा साथ ही अजय और विजय उसके पीछे चलने लगे ….

अध्याय 40

सभी अंदर गए काव्या सभी को देख कर खड़े हो गई, विजय की आंखें जैसे ही काव्य के ऊपर गई उसके होठों पर एक मुस्कुराहट आ गई, दोनों की नजरें मिली लेकिन काव्या बहुत डरी हुई थी, ठाकुरों और तिवारियो की लड़ाई के बारे में उसे पता था जिसके कारण वह घबराई हुई थी घबराती भी कैसे नहीं इस इलाके में उनके जितना दमदार ताकतवर दूसरा कोई नहीं था काव्या ने ऐसे तो ठाकुरों का रुतबा भी देखा था, काव्या को देखते ही सभी लोगों ने उसे नमस्ते किया काव्या घबराई हुई अपनी जगह से उठकर आगे को आ गई, दोनों परिवारों के सदस्यों को एक साथ देख कर काव्य को ऐसे तो कुछ समझ नहीं आया इस पर विजय ने हल्की सी हंसी के साथ आंखों ही आंखों में उसे समझाया,

“ अरे मैडम आप खड़ी क्यों हो गई बैठीये बैठिए”

महेंद्र ने तत्परता से कहा,

“ हम अपने बच्चों का एडमिशन कराने लाए हैं अब इनका भविष्य आपके हाथों में मैंने आपके बारे में बहुत सुना है आप बहुत ही स्ट्रिक्ट और मेहनती शिक्षक हैं ऐसा मुझे बताया गया है, आशा करता हूं कि आप हमें निराश नहीं करेंगे,”

काव्य जैसे-तैसे अपने को संभाल रही थी, विजय ने आगे बढ़कर सब का परिचय दिया और काव्य से निधि सुमन और धनुष का परिचय कराया, एडमिशन की सारी फॉर्मेलिटी पूरी होने के बाद सभी वहां से वापस चले गए बाहर जाकर सभी फिर से एक बार इमोशनल से हो गए,

“ मामाजी अभी आप हमारे घर आइए साथ में नानाजी को भी लाइए हम बच्चे आपका प्यार पाने के लिए तरस रहे हैं,”

अजय ने फिर भरी हुई आंखों से कहां,

मैंने अजय के कंधों को कसकर पकड़ा और अपने गले से लगा लिया,

“ बेटा बात तो तुम्हारी ठीक है लेकिन बाली इस बात से कभी सहमत नहीं होगा मैं उसे जानता हूं वह अपने भाई के लिए जान छिड़कने वाला था शायद वह हमें कभी माफ न करें, वह कभी यह मानने को तैयार नहीं होगा उसके भाई का कत्ल हमने नहीं करवाया है,”

“ मामा जी मैं चाचा को समझाऊंगा वह मेरी बात समझ जाएंगे मैं चाहता हूं कि हम दोनों परिवार साथ साथ रहें हम परिवार हैं और हमें परिवार की तरह रहना है,”

सभी ने इस बात पर हामी भरी और अजय को यह समझ आ गया था कि अगर बाली को कोई समझा सकता है तो वह सिर्फ और सिर्फ डॉक्टर ही है,

सभी ने एक दूसरे से विदा मांगा और वहां से चले गए लेकिन दो आंखें यह सब देख रही थी शायद अनजान सी वह दो आंखें किसी के आकर्षण में आए बिना ही सभी के हाव-भाव को पढ़ रही थी, वह शक्स इनका प्यार देखकर अंदर ही अंदर जल गया उसकी आंखें लाल सुर्ख लाल हो गई थी बदन तपने लगा, जैसे कुछ अनचाहा सा हो गया

हो,
“ दोनों परिवार मिलकर ऐसा नहीं हो सकता मेरे जीते जी ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता मैं नहीं मिलने नहीं दूंगा मैं कभी एक नहीं होने दूंगा, इन्हें इनके कर्मों की सजा मिलेगी मैं उनके परिवार की एक एक शख्स को तड़पा तड़पा के मारूंगा जैसे मैंने वीर को मारा और उसकी पत्नी को मारा, आज सभी अनजान है कि मैं कौन हूं लेकिन एक दिन आएगा जब यह लोग अपने किए हुए कामों पर पछताएंगे बाली महेंद्र कलवा बजरंगी तुम सभी पछताओगे मैं किसी को नहीं छोडूंगा, तुम्हारे घर की हर एक लड़की को नंगा करके रहूंगा और हर लड़के को जान से मार दूंगा जैसा तुमने मेरे साथ किया वैसा ही मैं तुम्हारे साथ करूंगा, आज मैं तुम्हारे घर में घुस गया हूं कल मैं तुम्हारे दिमाग में घुसूंगा, तिल तिल कर तड़पऊंगा, देखता हूं कब तक बचोगे, यह अजय यह विजय यह नितिन कब तक बचाएगा तुम्हे देखता हूं *तुम खुद ही लड़ोगे खुद ही मरोगे और मैं तमाशा देखूंगा,”

एक शैतानी सी हंसी पूरे माहौल में गूंज गई……

अध्याय 41

अजय अपने कमरे में बैठा बेचैन से इधर उधर झांक रहा था,निधि उसे ध्यान से देख रही थी,वो अपने हाथों में मोबाइल पकड़े कुछ सोच रहा था बेचैन सा था,
“क्या हुआ भईया, आप यू क्यो परेशान हो”
“ कुछ नहीं यार बस सोच रहा हूं कि दोनों परिवार को कैसे मिलाऊं डॉक्टर से कैसे बात करें, बाली चाचा को समझाना बहुत जरूरी है वह शायद ही इस बारे में मानेंगे,”
निधि अपने हाथ अजय के बाहों में डाल कर उसकी गोद में बैठ गई, अजय उसके बालों को सहलाने लगा,
“ भैया इसमें डरने वाली क्या बात हैं, चाचा आप की बात समझ जाएंगे मुझे इस बात का पूरा यकीन हैं, आप बस डॉक्टर से बात कीजिए और उसे समझाइए कि वह चाचा से बात करें,”
अजय ने हामी में सर हिलाया,और डॉ को काल लगाया,उसने आज होने वाली सभी बातें डॉ को बता दी…डॉ भी उसकी बाते सुनकर खुस हुआ और बाली से इस बारे में बात करने के लिए राजी हों गया,…

अजय को अब राहत महसूस हो रही थी वो जाकर निधि के बाजू में लेट गया,निधि एक प्यारा सा पारदर्शी स्कर्ट पहने हुए थी उसने बहुत से कपड़े खरीदकर शहर से लाये थे,जिसमे कुछ बहुत ही उत्तेजक थे,उसे इन सबका कुछ पता नही था वो तो बस खुला खुला रहना चाहती थी ,उसका बस चले तो पूरे घर मे नंगे घूमे पर क्या करे उसे भी जवानी की दहलीज पर इस बात का भान हो गया था कि उसका जिस्म अब पहले सा नही राह गया है,चोर नजरो से कुछ लोग उसे देख ही लिया करते है,ठाकुरो के घर की लड़की को घूरने की हिम्मत तो शायद किसी मे न थी पर जिस्म के आकर्षण से कोई कैसे बच सकता था,वही आकर्षण लोगो को उसे देखने पर मजबूर कर देता था,गोरा दमकता रंग,भरा हुआ शरीर ,भारी स्तन और पिछवाड़े ,मादक बड़ी बड़ी आंखे और लाल रसीले होठ…और अगर कोई उसके चेहरे पर नजर फेर दे तो बस वही रुक जाय,नशीली जवानी और मासूम सा चहरा कातिलाना कॉम्बिनेशन था,और

वो दोनो निधि के पास था,लोग चाहकर भी उससे नजर नही हटा पाते,पर अजय विजय का ख़ौफ़ भी तो कातिलाना ही था….युही गांव ने नए जवान हुए लड़के निधि को अपने रातो की रानी माना करते थे,हर रात उसके नाम से ही वो अपना वीर्य छोड़ते चाहे वो हाथो में हो या किसी के अंदर…
उनमे ही पास के गांव का एक और भी बासिन्दा था जो निधि की मादकता में खोया था,पर ठाकुरो के डर से वो बेचारा उसे आंख उठाकर भी नही देख पाता….उसका नाम था बनवारी और अब वो रेणुका का पति था…इसकी कहानी बाद में अभी आते है अजय के कमरे में जहाँ हुस्न की मलिका और कई नवजवानों की रातो की रानी निधि अपने बड़े भाई से पूरे प्यार और समर्पण के साथ आलिंगन में थी,एक दूजे के अहसास में खोए हुए ये भाई बहन ऐसे तो अब एक दूसरे के शरीर का सुख भी भोग चुके थे पर वासना की आग ने अब भी इन्हें जलाया नही था….

वो अपने ही दुनिया मे रहने वाले लोग थे ,जो अपना प्यार समझते थे उनके बीच अब सामाजिक मर्यादा और बंधन नही थे,वो अपने नंगे जिस्म को एक दूसरे से छिपाते नही थे ना ही उसके प्रति राग से भरते थे,वो प्यार की नई परिभाषा गढ़ रहे थे जो दुनिया की नजरों में मान्य नही थी पर इनके लिए तो इनकी दुनिया ही थी……
निधि ने मचलते हुए अजय को अपने बांहो में भर लिया और उसके कानों के पास आकर हल्के से एक फूक मार दी,अजय गुदगुदी से हस पड़ा,और जोरो से निधि को अपने ऊपर भीच लिया,दोनो की नजरें मिली और एक दूसरे के होठो को मिला कर दोनो ने अपने दिल मे बसे प्यार का इजहार किया,..
उस कोमल नरम होठो की नाज़ुकता ने अजय को निधि को अपनी ओर और भी जोर से खिंचने को मजबूर कर दिया,दोनो जिस्म ऐसे मिले जैसे सदियों से प्यासे हो ,एक दूजे से इंच भर भी दूर रहना अब उनको गवारा नही था,निधि अपने होठो को अजय के अंदर धसाय जा रही थी और अजय उसके जीभ को खीचकर अपने जीभ से सहला रहा था…
स्कर्ट तो बस नाम की पहनी थी,अंदर से उसके जिस्म की एक एक करवट का पता अजय को अपने हाथों पर हो रहा था,उसने भी अपने को निर्वस्त्र किया और अपनी सबसे प्यारी बहन की जवानी को भीगने को तैयार हो गया,उस नाजुक सी अप्सरा के कसावो को छूता हुआ वो अपने लिंग को उसकी गीली योनि के पंखुड़ियों पर रगड़ने लगा,निधि ने भी अपने भाई के प्यार को अपनाने के लिए अपने कूल्हों को उचकाए पर लिंग था इतना बड़ा और योनि तो अभी अभी ही खुली थी,खून के भराव से फूली हुई उसकी योनि ने अपने सीमित जगह के कारण उसके लिंग को ठुकरा दिया,पर अजय ने अपने हाथों के सहारे फिर से उस कठोर से लोहे को इसके योनि की पंखुड़ियों के बीच लेजाकर उसे सहलाता हुआ उस छेद तक पहुचा जिसे लोग जन्नत का द्वार कहते है….

निधि की भगशिश्न(claitoris) रगड़ खाने से वो भी उसी नशे में थी जिसमे अजय था वो भी लगातार अपने कूल्हों को अपने भाई के कूल्हों पर रगड़ रही थी,प्यार की इस बेताबी ने आखिरकार अपना अंजाम ढूंढ ही लिया उस जन्नत की छेद में अजय ने अपने लोहे जैसे सरिये को हल्के से प्रवेश कराया,…

दोनो ने प्यार की एक चीत्कार लगाई और एक दूसरे के हो जाने के अहसास में डूब गए,जैसे जैसे अजय का लिंग निधि की गहराइयों में जा रहा था निधि अपने भाई के लिए असीम प्यार का अनुभव कर रही थी वो अपने को पूरी तरह से अजय को समर्पित कर रही थी तन से भी और मन से भी….

पूरी तरह अंदर जाकर अजय रुका और अपने बहन के गद्देदार नितंबो के मुलायमता को मसलता हुआ उसे अपनी ओर खींचा, दोनो कि नजरें फिर से मिली इस बार दोनो की आंखे आधी बंद थी,शायद दोनो ही एक दूजे को पूर्णतः नही देख पा रहे थे पर दोनो ही उस प्यार का ,उस एक होने के अहसास को बखूबी महसूस कर रहे थे ,दोनो इस मिलन पर खुद को भूलकर दूसरे के हो चले थे….

दोनो फिर से अपने होठो को एक दूजे के होठो की गहराई में धकेल दीया…

निधि ने अपने कमर को हल्के से हिलाया पर इस हिलाने से मिलने वाले सुख को वो सम्हाल ना पाई और अजय से जोरो से लिपट गई… ईस सुख की भी अजीब सी फितरत है इसे भी सहना पड़ता है और उसके लिए अपने प्यार के सहारे की जरूरत पड़ती है…

वो रगड़ इतनी उतेजक थी कि निधि के अंग अंग में एक सिहरन सी दौड़ पड़ी,वो फिर से मछली की तरह फड़फड़ाने लगी,अजय ने उसे अपने मजबूत बाजुओ में कस लिया,ये वही बाजू थे जिनमें वो दुश्मनों को कसकर मार डालता था आज वही अपनी नाजुक सी बहन को कसे था और वाह रे प्यार उसकी नाजुक कोमल सी बहन उसके बाजुओ में कसकर मर जाना चाहती थी,…

इसबार कमर अजय ने हिलाई थी एक एक वॉर दोनो की गहराइयों से निकलते प्यार की पैदाइश थी और दोनो को एक सुखद अहसास से भर देती थी,दोनो फिर एक दूजे के बाहों में जकड़ लेते,एक दूसरे में मिट जाने की तमन्ना ही ऐसे होती है,वो इतने जोरो से एक दूसरे को कसते जैसे सामने वाले में समान चाहते हो…

हल्के हल्के ही सही पर धक्के बढ़ने लगे ,कभी एक जोरदार से धक्का दिया जाता और पूरे कमरे में निधि की मादक चीख सी गूंज जाती,सुख की अभिव्यक्ति जब हो ही नही पाए तो या तो चीख बन जाती है या आंसू …आज दोनो ही निधि कें पास थे,वो सिसकियां लेती तो कभी चीखती आंखों में आंसू की बूंदे भी शोभा बड़ा रही थी ,वही हाल अजय का भी था,जिसके नाम से लोग काँपते थे वो आज खुद के मजे को काबू में नही कर पा रहा था होठो से सिसकियां निकल रही थी

“आह आह आह आह” बस “हा हा हा “ “नही हिहिहिहि “

ये शब्द कमरे में गूंज रहे थे,और दो नंगे जिस्म अपनी मस्ती में दुनिया को भूले हुए बस गुथे हुए प्यार का खेल खेल रहे थे…

आखिर जब अजय ने अपने प्यार की धार निधि के अंदर छोड़ी तो उसका गीलापन गाढ़ापन और गर्मी ने निधि

को टूटने पर मजबूर कर दिया वो भी अजय को कसकर पकड़े हुए झरने लगी,दोनो ही रस एक साथ मिलकर निधि और अजय के उस जोड़ से बाहर को टपकने लगे ….

पर होश कहा था ,ये प्यार का कारवां था,जो चल निकला था तो आसानी से थमता नही…दोनो अब भी एक दूजे को खुद में समाए हुए थे और इस आनन्द से आनंदित हो रहे थे…

अध्याय 42

अब थोड़ा आते है रेणुका और बनवारी की कहानी पर,
बनवारी गांव का एक सीधा साधा से लेकिन मजबूत लड़का था,अपने खेतो में वो बैलो की तरह मेहनत करता,अपनी सौतेली मा के तानो को नजरअंदाज कर अपने काम को मन लगा कर करने वाले बनवारी की ऐसे तो कोई भी बुरी आदत नही थी सिवाय की वो प्यार में था……किसके?????
बात उसकी शादी से दो साल पहले की है जब वो एक दिन अपने पिता किशोरीलाल और मा के साथ बाजार में कुछ समान लेने अपने गांव से ठाकुरो के गांव आया था,भारी भारी थैलो को बड़ी मुश्किल से सम्हालता हुआ बनवारी दोनो के पीछे चल रहा था की गांव के स्कूल की छुट्टी हुई और उसे स्कूल की ड्रेश में एक अप्सरा दिखी….उसके बदन और चहरे को देख बनवारी जैसे बूत बना वही खड़ा हो गया..लेकिन जैसे ही उसकी मा की नजर उस पर पड़ी उसके गालो में एक जोरदार चाटे की रसीद दे दी…
“कलमुहे हमारी जान लेगा क्या ,ठाकुर की बहन को ऐसे गुर रहा है”

उसने फुसफुसाते हुए कहा,बनवारी को जैसे कोई भी दर्द नही समझ आ रहा था वो तो बस उसके रूप यौवन में खोया था,लेकिन किशोरीलाल ने उसे झकझोर कर वहां से ले गया पर बनवारी के मन में वो प्रतिमा छप गयी और वो उसे पाने को बिल्कुल उतेजित सा हो गया,वो जब भी समय मिलता स्कूल पहुच जाता और बस दूर से ही उस हसीन से चहरे को घूरता रहता,धीरे धीरे उसे ये भी पता चल गया की जिसे वो पाना चाहता है उसका नाम निधि है और वो ठाकुर अजय की बहन है,जिनके नाम से सभी काँपते थे वो नाम उसेमें कोई भी दहसत पैदा नही कर पाते,लेकिन एक दिन उसकी इन हरकतों का पता किशोरीलाल को चला और उसने अपने बेटे को बैठा कर ठाकुरो की असली ताकत के बारे में बतलाया,तब से धीरे धीरे ही सही बनवारी को मजबूरन निधि को अपने दिल से निकलना पड़ा,लेकिन किसी को ना दिल में बसना अपने बस में होता है ना ही निकलना……..

दिल के किसी कोने से एक टिस सी बनवारी को हमेशा ही सताती थी की काश वो उस हसीन ख्वाब को पा सकता ,उसे भी ये यकीन हो गया था की ये ख्वाब ही है लेकिन ख्वाब का अपना ही मजा होता है,
जब उसकी शादी रेणुका से तय हुई तो उसे जितनी खुसी अपने शादी की नही थी उससे ज्यादा खुशी उसे उस घर में रहने का हो रहा था ,वो सोचता था की चलो इसी बहाने ही सही निधि के रोज दर्शन तो हो जाएंगे…लेकिन रेणुका से उसकी शादी ने उसके मन को ऐसे ही बदल दिया जैसा की रेणुका के मन को बदल दिया,दोनो ही एक दूजे से मिलकर एक दूजे के प्यार में पड़ गए,
जहा रेणुका को बनवारी की सादगी और उसका इतना खयाल रखना भा गया वही बनवारी को रेणुका की खूबसूरती और प्यार ने मोह लिया ,दोनो ही एक दूजे के हो चुके थे,और एक दिन इसी प्यार के आगोश में आकर बनवारी ने रेणुका को अपने दिल की हर वो बात बता दी जो उसके दिल में निधि के लिए हुआ करता था,अपने पति की मासूमियत और सच्चाई से प्रभावित रेणुका भी उसे अपने और विजय के रिस्ते के बारे में बोल गयी ,दोनो ही एक दूजे के प्यार में ही रहना चाहते थे और ये उस प्यार के ही कारण था की दोनो ही एक दूजे के अतीत को भूलकर एक नई जिंदगी जीने की राह में चल पड़े………

जब रेणुका और बनवारी आकर ठाकुरो की हवेली में रहने लगे तब रेणुका को बस यही डर था की विजय उसे कुछ करने को ना कहे लेकिन वक़्त भी अजीब करवट ले रहा था और विजय रेणुका को लगभग भूल ही चुका था,इतने दिनों में विजय ने कभी भी रेणुका से संबंध बनाने की कोशिस नही की थी और रेणुका जानती की अगर विजय ने ये कोशिस की तो शायद वो उसे इनकार भी नही कर पाएगी….अपने पति को वो बहुत ही प्यार करती थी पर विजय उसकी आग को बढ़ाने और फिर अच्छे से बुझाने वाला शख्स था उसे मना करना रेणुका के लिए आसान तो बिल्कुल भी नही था…….
जो भी हो वक़्त बीत रहा था और एक दिनविजय और रेणुका का सामना हो ही गया…दोनो की आंखे मिली और रेणुका ने हँसकर उसका अभिवादन किया,
“कैसी हो तुम “
“अच्छी हु आप कैसे हो ठाकुर साहब “
“देख तो रही थी तेरे बिना तो मेरी राते ही सुनी हो गयी….”
रेणुका को एक करेंट सा लगा,वो अपनी आंखे नीची कर खड़ी रही ,
शायद विजय उसकी ये खामोशी समझ चुका था,
“ऐसे क्यो सर नीची कर ली,तू अब शादी शुदा है और मैं किसी भी बात के लिए तुझे जोर नही डालूंगा,शायद तू ये बात जानती है ,ऐसे तेरा पति कैसा है…”
विजय की बातो से रेणुका को थोड़ी सी राहत मिली और उसने अपना सर उठाकर उसे देखा और हल्के से मुस्कुराया
“अच्छे है ,…….

बहुत अच्छे है’”
“ओहो ऐसे बहुत अच्छे है ,तुझे अच्छे से चोदता है की नही ,सचमे मुझसे भी अच्छा चोदता है “

रेणुका के लिए ये बहुत ही बडा प्रश्न था शायद बनवारी के प्यार ने उसे बदल दिया था नही तो ऐसी बातें तो विजय के साथ उसके रोज का काम था,
“क्या हुआ फिर से सर नीचे अरे यार आशिक नही दोस्त तो समझ सकती है ,ऐसे भी मैंने तुझे कहा ना की तुझसे कोई भी जबरदस्ती नही करूँगा..अब हस भी दे मेरी जान “
विजय ने उसके गालो को पकड़ कर उसे हिला दिया ,रेणुका हस पड़ी और बड़े ही गौर से देखने लगी…
“क्या सच में आप मुझसे सिर्फ दोस्त बनकर रह सकते हो …”
“ह्म्म्म पहले शायद नही रह पता पर कुछ दिनों से पता नही मेरे साथ क्या हुआ है की मुझे अब लड़कियों की इज्जत करने का दिल करता है”
रेणुका ने उसे थोड़े आश्चर्य से देखा और खिलखिला के हस पड़ी
“अच्छा सचमे”
विजय भी थोड़ा झूठे गुस्से में मुह बनाया और हस पड़ा,
“हा सचमे…लेकिन तुम उस चोमू के प्यार में कैसे पड़ गयी”
अब रेणुका ने झूठ गुस्सा अपने मुह पर लाया
“वो जैसे भी है पर सच में वो बहुत ही प्यारे है और मेरी बहुत ही फिकर करते है ,और हा आपके जैसा तो कोई मुझे नही कर सकता पर वो जितना भी करते है मैं उसमे खुश हु,सच में ठाकुर साहब मैं उनके साथ बहुत ही खुश हु….”बोलते बोलते रेणुका के आंखों में एक चमक सी आ गयी ,विजय भी अपना हाथ बढ़ाकर उसके सर को प्यार से सहला दिया और बड़े ही प्यार भारी आंखों से रेणुका को देखा ,
“हमारे बीच जो भी हुआ उसे अब भूलने का समय आ गया है ,और हा तुझे खुश देखकर मुझे बहुत खुशी हुई ,”
रेणुका विजय को अपनी ओर खिंच कर उसकी बांहों में समा गयी ,

“छोटे ठाकुर आप बहुत ही अच्छे हो मैंने कभी नही सोचा था की आप ऐसे मान जाओगे सचमे अगर आप जिद करते तो मैं आपने को कभी नही रोक पाती….मै हमेशा आपको अपना दोस्त मानूँगी सबसे अच्चा दोस्त,धन्यवाद छोटे ठाकुर अपने मुझे मेरी नजर में गिरने नही दिया…”
रेणुका के आंखों में आंसू था वही विजय के मन में एक अजीब सी खुशी थी वो कभी भी किसी लड़की के साथ जबरदस्ती नही करता था पर पहली बार उसके उसे एक अलग सी खुशी मिल रही थी जो कभी उसकी अय्याशी का समान थी आज वो किसी और की बीवी थी और उसे भी विजय बड़ी इज्जत से देख रहा था ……….
किसी ने सच ही कहा है की लडकिया प्यार करने ,इज्जत करने के लिए होती है आप उसे जितना प्यार और सम्मान दोगे उससे कही ज्यादा वो आपको लौटती है ,लडकियो से हिंसा और जबरदस्ती करने वाला तो मर्द ही नही होता…
आज विजय को असली मर्द होने का अहसास हुआ……..

अध्याय 43

वक्त निकलने लगा था और निधि और सुमन दोनो ही कॉलेज जाने लगे थे ,विजय उनको छोड़ने और लेने जाता था लेकिन उसे काव्या से मिलने का मौका ही नही मिल पता,उसने देखा उसका नम्बर लिया और उससे बातें करने लगा,दोनो रात को घंटो ही बाते किया करते थे,लेकिन उससे आगे बढ़ने का समय ही नही मिल पा रहा था ,वही अब निधि के और नए भाई धनुष की भी उनसे बहुत जमने लगी थी ,ऐसे तो धनुष हमेशा से ही अकेले गांव में रहकर पला था और उसके खून में ही जमीदारो वाली बात थी पर वो निधि और सुमन के लिए बहुत ही सुलझा हुआ लड़का होता था,तीनो से कॉलेज के छात्र और यहां तक की टीचर भी घबराते थे ऐसे तो किसी को इनसे कोई भी प्रॉब्लम नही थी पर क्या करे लोगो को डरने की आदत पड़ चुकी थी,
कॉलेज को बने हुए पहला ही साल था पर वहां सभी इयर के बच्चों ने एडमिशन लिया हुआ था,जो बच्चे अभी तक शहर में पड़ रहे थे या कॉलेज नही जा सकने के कारण वहां की वो लडकिया जो डिस्टेन्स से पढ़ाई कर रहे थे सबके लिये ये कॉलेज एक उम्मीद ले के आया था ,वही एक और उम्मीद यहां पनप रही थी वो थी ठाकुरो और तिवारियो के सत्ता को तोड़कर अपनी नई सत्ता स्थापित करने का प्रयास………

ऐसे तो अभी तक ऐसा कुछ बड़ा प्रयास नही किया गया था और उसकी जरूरत भी बहुत ज्यादा नही थी पर लोगो के पड़ने के कारण और शहर से जो लड़के फिर से गांव आये थे उन्होंने एक नए वर्ग का निर्माण करना शुरू कर दिया था,वो वर्ग ना तो बहुत ही पढ़ा लिखा और ना ही अनपढ़ था ,ना ही ज्यादा गरीब था और ना ही ज्यादा अमीर एक मध्यमवर्ग का निर्माण एक नई क्रांति का संकेत था,ये किसी को मिटाना नही चाहते थे बस अपनी एक नई पहचान बनाना चाहते थे ,ऐसे तो अब बाजारों में बाहर और वही से आने वाले लोगो ने पैसे कमाने शुरू कर दिए थे और सर्विस क्लास लोगो की संख्या भी बढ़ गयी थी ,इसलिए अब ठाकुरो और तिवारियो के अलावा कई लोग ऐसे थे जिनके पास पैसा तो था,बहुत नही पर था,लोगो के पास कारे थी महंगी गाड़िया भी लोगो के पास थी ,वही घरों में उपयोगी सभी समान लोगो के पास आने शुरू हो गए थे ,लोगो के रिस्तेदार गवर्मेंट के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक थे ,कुछ लोग राजनीति में भी अच्छा नाम कमा रहे थे ,मतलब की एक नए से और शक्तिशाली मध्यमवर्ग और निम्न उच्चवर्ग का उदय वहां हो रहा था………
सत्ता का टकराव अभी तक जो दो बिंदुओं के बीच था वो एक नए बिंदु की ओर बढ़ सकता है ये तो किसी को भनक भी नही थी पर पहली भनक पड़ी जब कॉलेज का इलेक्शन होने वाला था…पहला इलेक्शन था और वहां दोनो शक्तिशाली परिवार के बच्चे पढ़ रहे थे….

ये स्वाभाविक था की प्रेजिडेंट के लिए अगर वो खड़े हो जाते है तो कोई दूसरा खड़ा भी ना हो,लेकिन नया संघर्ष यही से शुरू हुआ जब धनुष ने फैसला किया की वो चुनाव में खड़ा होगा,उस कॉलेज में लगभग 15-20 गांव के लोग आते थे वही जहा वो कॉलेज था वो खुद एक विकसित कस्बा था,वहां के एक सेठ के बेटे अभिषेक ने भी फार्म भर दिया,वो लास्ट ईयर का स्टूडेंट था और शहर से यहां एडमिशन लिया था वहां उसे राजनीति की थोड़ी समझ भी थी,

सभी ने सोचा था की एकतरफा चुनाव होगा,पर भईया इंडिया डेमोक्रेटिक देश है….
माहौल में तनाव सा फैल गया और वहां के सभी पैसे वाले सेठ और बिजेनसमेन जो प्रायः वहां के मूल निवासी नही थे और ठाकुरो और तिवारियो से जिनका कोई मतलब नही था वो एक होकर अभिषेक का साथ देने लगे,बात छोटी सी थी पर अभिषेक राजनीति का पुराना खिलाड़ी रह चुका था और उसने छात्रों को इकट्ठा करने की अपनी कबिलियात को भुनाया और साथ ही अपने बाप की मदद से कॉलेज के बाहर भी अपना समर्थन खड़ा कर लिया,लोग बोलने लगे की एक आजाद देश में चुनाव में खड़ा होने का हक तो सभी को है तो क्यो हम ठाकुरो और तिवारियो के गुलाम बने फिरे,कॉलेज के चुनाव की बातें कॉलेज से निकालकर बाहर बाजारों और घरों में होने लगी अभी धनुष और अभिषेक ने बस अपना नामांकन डाला ही था लेकिन अभिषेक ने बातो को ऐसे फैलाया की सभी जगह गहमा गहमी सी फैल गयी थी ,बात इतनी फैली की सीधे महेंद्र तिवारी के कानों में पड़ी,बात बड़ी नही थी पर अपनी जमीदारो वाली शान का क्या करे,अगर सचमे धनुष चुनाव हार गया तो उनकी साख का क्या होगा,इससे उनकी इज्जत पर सीधे धक्का लगता,महेंद्र भी सोच में पड़ गया और उसने वही किया जो वो हमेशा से करते आ रहा था,अभिषेक के बाप के घर पहुचा और उसे चेतावनी दे डाली,लेकिन साला अभिषेक तो बड़ा खिलाड़ी निकल गया उसने ना सिर्फ उसका वीडियो रिकॉर्ड किया बल्कि वहां लोगो को इकठ्ठा कर लिया,ऐसे भी लोग तिवारियो से थोड़े से नाराज रहते थे और अब तो उनके पास एक नेता भी आ गया था जो खुद भी मारने को तैयार था और ऐसे भी अभिषेक ने पहले से ही सभी को भड़का के रखा था,सभी उसके समर्थन में कूद पड़े और महेंद्र को जनमत के सामने झुकना पड़ा और वहां से वापस आना पड़ा,
ये उसके लिए और भी बड़ी चोट थी क्योकि अभिषेक ना केवल उस वीडियो को फैला रहा था,वो भी फैला रहा था की देखो जिससे तुम डरते हो वो कुछ भी नही है मेरे घर में आया था और दुम दबा के उसे भागना पड़ा…..

इज्जत को बड़ा आघात लग रहा था और धनुष का हारना भी लगभग तय दिख रहा था,इससे ना केवल महेंद्र बल्कि धनुष भी टेंशन में रहने लगा,राजनीति की समझ ना होने से पॉवर खोखली से रह जाती है और डेमोक्रेटिक देश में पॉवर का उपयोग दिमाग से ही किया जाता है…
निधि को धनुष का ये चहरा देखे नही जाता था और साथ ही अब लोगो की हिम्मत भी बढ़ने लगी थी और ऐसे ही एक वाकये ने अजय विजय को मैदान में आने को मजबूर कर दिया…………………

अध्याय 44

शहर का एक आलीशान बार जो तिवारियो का था ,एक पर्सनल कमरे में एक सोफे पर महेंद्र बैठा था,पास ही बजरंगी भी बैठा था,तभी कमरे में अजय विजय और कलवा आते है,सभी को देखकर महेंद्र खड़ा हो जाता है और सभी से गले मिलता है,
सभी बैठकर बातें करने लगते है महेंद्र बहुत ही परेशान सा दिख रहा था वो पूरी बात अजय को बताता जाता है जिसे सुनकर विजय का खून तो खोलता है पर अजय बड़े ही ध्यान से सुन रहा है……
महेंद्र अपनी बात का अंत करता है …….
“मैं सभी सह सकता हु लेकिन उन्हेंने जो मेरी बेटियों (निधि और सुमन)के साथ किया वो ,हिम्मत कैसे हो गयी उनकी उनसे ऐसे बात करने की,और ये साला इंस्पेक्टर भी उन्हें अरेस्ट करने को तैयार ही नही,सभी मंत्री साले मुह फेर कर बैठ गए,क्या हो गया है हमारी इज्जत का सभी कहते ही की वो अपना हाथ नही फसा सकते अरे साले हमारा दिया ही तो खा रहे है और अब ….”ये कहते हुए महेंद्र अपना पूरा पैक एक सांस में खत्म कर देता है…..तभी एक वेटर आकर पेग बनाने लगता है ,कलवा और अजय मना कर देते है पर विजय ललचाई निगाह से उसे देखता है पर अजय के पास होने से वो भी मना कर देता है जिसे महेंद्र देख लेता है उसके चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है ….वो कोल्ड्रिंक मांगता है और विजय के कोल्ड्रिंक में चुपके से दो बड़े पेग मिला कर उसे पीने का इशारा करता है ,विजय के चहरे पर चमक आ जाती है ,अजय भी उसे शराब मिलते देखता है पर कुछ नही कहता…अजय बोलना शुरू करता है ……..

“मामाजी अब ये हमारी इज्जत पर बात आ गई है,और ये लड़का (अभिषेक)बहुत ही चालक है इसे दिमाग से ही हराया जा सकता है ताकत से नही,कोई भी नेता अपना हाथ सीधे इस मामले में नही डालेगा उन्हें भी तो वहां से वोट चाहिए.,आप फिक्र मत करो मैं देख लूंगा,धनुष चुनाव भी जीतेगा और हमारे सभी विरोधी जमीन में भी मिल जाएंगे.लेकिन मार से नही प्यार से,आप कुछ भी नही करेंगे अब से पूरा मामला मैं देखूंगा….”
एक शांति सी वहां पर छा गयी ,कलवा और बजरंगी वीर को याद करने लगे कैसे वो बड़े से बड़े मसलो पर बड़े ही शांत ढंग से सोचता था,अजय पर वीर की छाप साफ दिखती थी…….
“सबसे पहले हमे इस इंस्पेक्टर का ट्रांसफर किसी ऐसे जगह करवाना होगा की सभी को समझ आ जाय की हमारे खिलाफ जाने से क्या होता है….

पर सीधे नही इसका कोई पुराना मामला निकलना पड़ेगा,फिर हमे धनुष का एक संगठन बनाना पड़ेगा जो बहुत मजबूत हो और जिसमे सभी तरह के लोग हो ,ताकि हमे सबकी सहानुभूति मिल सके,गरीब पिछडो को साथ लेना होगा,जो आपके और हमारे घरों में खेतो में मजदूरी करते है उनके बच्चों को आगे लाकर उन्हें भी दूसरे पदों में खड़ा करना होगा…फिर रही सेठो की बात तो उनकी लाइफ लाइन उनका धंधा है,उन्हें तोडना है तो उनके सभी धंधों पर चोट करना होगा,अगर तिवारी और ठाकुर अपना धंधा मिला ले और बांट ले तो हमारे सामने वो कुछ भी नही है,हर समान हम उनसे सस्ते में खरीदेंगे और सस्ते में ही बेचेंगे,उनके माल की कमी बाजार में कर देंगे उन्हें माल ही नही मिल पायेगा,फिर देखते है साले कैसे नही आते हमारे पास…

आपकी नदी के किनारे जो बगीचे की जमीन है वहां से आने जाने वाली सभी गाड़ियों रो रोककर उनसे पैसे लो,आपकी जमीन से गाड़ी निकल रहे है तो आपका पैसा लेना भी जायज है और इससे उनकी लागत भी बढ़ जाएगी,लेकिन सभी सेठो से दुश्मनी नही की जा सकती कुछ को अपनी तरफ भी मिलना पड़ेगा,जो हमारे पुराने वफादार है और जो अभी चुप बैठे हुए ही उन्हें अपनी तरफ मिला लेते है ,कम से कम वो दुसरो को बस भड़का दे तो उनकी ताकत कम हो जाएगी,20 % भी हमारे तरफ आ गए तो पूरा मार्केट हम अपनी तरफ खिंच लेंगे,रही कॉलेज की बात तो जो लड़के अभी तक नही पड़ पा रहे थे उन्हें ये बताओ की ये कॉलेज ही हमने यहां खुलवाया है ,धनुष को हर बच्चे से अच्छे से बात करने को कहो,निधि और सुमन अब लड़कियों को मिलने का काम करेंगी………जब बड़े घर के बच्चे गरीबो से प्यार से बात भी कर दे तो वो उनके गुलाम हो जाते है ,प्यार की ताकत बहुत होती है मामाजी,और प्यार बस दिखावे का ना हो वो सचमे उनकी समस्या सुने और समझे तो कुछ ही दिन में सब हमारे ही हो जाएंगे ,और रही उन लड़को की बात जो मेरी बहनों को सुना कर गए तो उनका कुछ भी करने की अभी जरूरत नही है उनमे से कई खुद ही आकर उनसे माफी मांगेंगे..बाकियों को इंस्पेक्टर ठाकुर सम्हाल लेगा…(सभी उसे देखते है) हा हालात को देखते हुए उसकी पोस्टिंग यहां करनी होगी वो हमारा भरोसेमंद आदमी है ,अगर कुछ मार पिट की नोबत आती है तो सब कुछ आराम से निपटा लेगा……….बस जीत हमारी ही होगी और लोग भी हमे पहले से ज्यादा प्यार और इज्जत देंगे,ये महज एक चुनाव नही है ये हमारे वजूद को और भी पुख्ता करने का समय है…………..”
सभी अजय को ध्यान से अपलक देख रहे थे उसका दिमाग पूरी प्लानिंग करके आया था,सभी उसकी बात से सहमत थे…………..

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अध्याय 45

अजय के प्लान पर अमल होना शुरू हो गया और उसका रिजल्ट बहुत जल्द ही दिखाना शुरू हो गया,
पहली चीज जो हुई वो थी तिवारियो के परिवार से एक नए नेता का उदय एक ऐसा नेता जो सचमे ही दुसरो के दुखो को सुनता समझता और उसे हल करने की पुरजोर कोसिस करता था,धनुष के मन में ना जाने ये दया का भाव कहा से पनपा पर दुसरो के तकलीफों को सुनते हुए वो भावभिभोर सा हो जाता उसके आंखों में आंसू आ जाते और वो सच्चे दिल से उनकी मदद को तत्पर रहता,उसका जमीदारो वाला रुआब भी जाता रहा वो इतना विनम्र और शांत हो गया था की उसे जानने वाले भी हैरान थे,पर लोगो के लिए ये एक बड़ी तसल्ली की बात थी ,अजय और ठाकुर तो ऐसे भी अपने दयाशीलता के लिए प्रसिद्ध थे पर तिवारियो के परिवार में ये पहला शख्स था,अब उसे कॉलेज के चुनाव से भी मतलब नही रह गया था,और वो सभी से मिलता था साथ ही निधि और सुमन भी लड़कियों के बीच बहुत ही पॉपुलर हो गए थे ,ऐसे भी वो बहुत ही संवेदनसील तो पहले से ही थे अब उन्हें मौका मिला था की वो दुसरो की मदद कर सके वो अपनी पूरी ताकत लगा रहे थे,,,,,,लोग उन्हें देखते तो उनका दिल गदगद हो जाता सुमन को गरीबी और अभाव का बहुत ही ज्ञान था जो उसे लोगो से इंटरेक्ट होने और मुस्किलो को सही तरह से समझने में मदद कर रहा था ,कुल मिला कर हवा धनुष के तरफ बहने लगी जो लोग उन्हें गालिया देते नही थक रहे थे वो अब उनकी तारीफ करते नही थकते थे,उन्हें उनकी सच्चाई दिखाई दे रही थी,अभिषेक बुरी तरह से झल्ला गया था ,लोग उसका साथ देना छोड़ रहे थे ,जो गुंडे उसने पाले थे वो सभी अब ठाकुर के निशाने पर थे और अधिकतर जेल में थे उसके डर से कई अभिषेक का साथ छोड़ चुके थे………..
इधर सेठो की हालात खराब हो चुकी थी और धंधे में हो रहे भारी नुकसान की भरपाई के लिए वो जमीदारो और ठाकुरो के आगे झुक ही गए,वहां सभी कुछ तो इन दोनो परिवारों का ही था ,इनकी लड़ाई के कारण ही दूसरे अपना धंधा जमा पाए थे ,दोनो परिवारों का मिलने की खबर जंगल के आग की तरह फैल गयी थी और सभी को पता था की अब इनसे मुकाबला करना लगभग ना मुमकिन ही,…यहां तक की अभिषेक के पिता ने भी अपने हाथ उठा लिए………………..

लेकिन अभिषेक ने हार नही मानी थी उसे अब भी यकीन नही हो रहा था की उसके इतने मेहनत से बनाया गया किला कुछ ही वॉर से ढह गया है…उसने मन में कुछ ठाना और धनुष से मिलने चला गया…उस समय धनुष निधि और सुमन केम्पस में ही बैठे किसी मुद्दे पर बात कर रहे थे साथ ही वहां और भी बहुत से लोग बैठे थे…अभिषेक धनुष के पास जाता है,सभी उसे ही देखने लगते है….

“धनुष मैं इस चुनाव से अपना नाम वापस ले रहा हु…”
सभी अब भी उसे ही देख रहे थे…
“क्यो क्या हुआ “
“मुझे लगता है की मैं ये चुनाव नही जीत सकता”
“तो इसमें क्या हुआ ,असली बात जितना नही लड़ना है,और हम लोकतंत्र में रहते है मेरे दोस्त यहां सभी को अधिकार है की वो चुनाव लड़े और लोगो की सेवा करे,मैं कौन होता हु तुम्हे रोकने वाला,और तुमने जो किया वो बहुत ही बड़ा काम था तुमने पहली बात इस क्षेत्र में दो सबसे ताकतवर परिवारों के विरुद्ध लड़की लड़ी और मुझे लगता है की लोकतंत्र के लिए ये बहुत जरूरी है की एक मजबूत विपक्ष सदा मौजूद रहे….”
धनुष अब बड़ी बड़ी बाते करना भी सीख गया था ,जिसे देख कर निधि बहुत इम्प्रेष हुई,साथ ही वहां मौजूद सभी लोग भी …

“नही धनुष मुझे गलत मत समझना लेकिन मैं हार के डर से नही बल्कि तुम्हारे किये काम से खुस होकर चुनाव से अलग होना चाहता हु,मैंने ये चुनाव किसी का भला करने के लिए नही लड़ा था ,मैं तो बस खुद को दिखना चाहता था,(अभिषेक ने निधि को देखा,निधि उसके किये इशारे से थोड़ी हस्तप्रद सी हुई पर उसे समझ आ रहा था की जब से वो कॉलेज में आयी तबसे अभिषेक उसे देखा करता है पर कभी भी उससे बात करने की हिम्मत शायद वो नही जुटा पाया,शायद इसी लिए उसने खुद को साबित करने के लिए ये कदम उठाया था,निधि ने मन में ही एक मुस्कान जगाई लेकिन उसे होठो तक नही आने दिया) लेकिन मैं जब से तुम्हे लोगो की मदद करते देखा है तबसे मेरे दिल में एक बेचैनी सी हो गयी है ,मैंने ये चुनाव जितने के लिए क्या नही किया लेकिन तुम बस लोगो की मदद कर रहे हो,मैंने तुम्हे और तुम्हारे परिवार को बदनाम करने की साजिशें रची और तुम अब भी मुझसे इतने प्यार से बात कर रहे हो ,”
अभिषेक के आंखों में पानी आ चुका था जिसे देखकर धनुष भी अपनी जगह से उठकर उसके गले लगा लिया,
‘मैं तुम्हारे साथ काम करना चाहता हु धनुष ,मुझे कोई भी पद नही चाहिए बस तुम्हारे साथ काम करने का एक मौका चाहिए मैं कभी भी तुम्हे निराश नही करूँगा”
“ह्म्म्म “धनुष उससे अगल होता है,
“मुझे अपने भैया से बात करनी होगी तुम थोड़ी देर को यही रुको “

धनुष अजय से बात करता है और अजय उसे थोड़ी में कॉलेज पहुचने का कहकर फोन रख देता है,वो लोग फिर से बातें करने लगते है और अभिषेक ने ज्ञान से धनुष और सभी लोग प्रभावित होते है जैसे की उसे पहले भी राजनीति का थोड़ा ज्ञान था,धनुष मन में ही उसकी सिफारिस अजय से करने की ठान लेता है साथ ही एक हलचल सी निधि के जेहन में भी होती है इतना हेंडसम सा लड़का,और बड़ा ही प्रभावी,नाक नक्श के अलावा निधि को उसके साहस हिम्मत ने भी बड़ा प्रभावित किया था,साथ में उसकी वो आंखे जो हमेशा ही निधि को चोर निगाहों से देखती थी ,निधि भी अपने जवानी के ऐसे मुकाम में थी जहा उसके सीने में भी ऐसी बातो से हलचल होनी तो स्वाभाविक था,उसे कॉलेज का

पहला दिन याद आया जब अभिषेक को उसने पहली बार देखा था वो उसे दूर से ही घूर रहा था जो की निधि को बिल्कुल भी पसंद नही आया था ,पर धीरे धीरे उसे वो पसंद आने लगा था ,खासकर जब उसने धनुष के सामने अपना नामांकन डाल दिया…और आज उसने ये भी इशारों में काबुल लिया था की ये उसने निधि के लिए ही किया था ,और भी शायद वो उसके लिए ही धनुष के साथ मिलने को तैयार हो गया हो…सोचकर निधि के चहरे में एक मुस्कान आयी पर ये मुस्कान अब मन तक सीमित नही रह सकी और उसके होठो भी साथ ही हिल गए…….
अजय ने आकर सभी का अभिवादन किया धनुष ने उसे सभी बातें बताई और अपना सुझाव दिया ,इससे पहले की वो कुछ कहता निधि ने अजय को अलग में लेजाकर थोड़ी बात की और मुड़कर अभिषेक को देखते हुए मुस्कुरा दिया ,,अभिषेक को अपना तीर निशाने पर लगता हुआ दिखा…
“हम्म्म्म मैंने बहुत सोचसमझकर एक फैसला किया है,धनुष मुझे लगता है की अभिषेक के पास बहुत नॉलेज है जो की इस कॉलेज के बहुत ही काम आएगा,अभी ये कॉलेज नया है और इसे एक एक्सपीरियंस नेता की जरूरत ही और मुझे नही लगता की तुम्हे इस पद का कोई भी मोह है ,इसलिए मुझे लगता है की अभिषेक को ही कॉलेज का प्रेजिडेंट बनाना चाहिये …:”
सभी स्तब्ध से अजय को ही देखने लगे थे,लेकिन निधि और धनुष इससे संतुस्ट से दिख रहे थे ,यहां तक की अभिषेक के चहरे में भी कोई भी एक्सप्रेशन नही था उसे भी समझ नही आ रहा था की आखिरकार हो क्या गया उसे लगा था की शायद कोई छोटा मोटा पद उसे दे दिया जाएगा पर यहां तो प्रेजिडेंट का पोस्ट ही उसे दिया जा रहा है वो भी उनके द्वारा जिसका उसने इतना विरोध किया था ,,,,,सभी अपने कानो की खराबी समझकर थोड़ी देर तक रुके रहे पर जैसे ही धनुष ने अभिषेक के गले से लगकर उसे बधाई दी सभी को होश आया ,साथ ही निधि और सुमन ने भी उसे हाथ मिलाकर बधाइयां दी ,निधि से हाथ मिलते हुए उसने थैंक्स कहा और उसका जवाब निधि ने मुस्कुराते हुए वेलकम कहकर दिया,अभिषेक के दिमाग में ये तो साफ हो चुका था की निधि भी उसमे इंटरेस्ट ले रही थी ,

तभी एक लड़का खड़ा हुआ और जोरो से चिल्लाया
“धनुष भैया “
“जिंदाबाद “सभी लोग जोरो से नारे लगाने लगे …
“निधि दीदी “
“जिंदाबाद “
लेकिन धनुष ने उसे रोक और धनुष ने नारा लगाया
“अभिषेक भैया “
“जिंदाबाद”
“हमारी एकता “
“जिंदाबाद “…………

इधर
महेंद्र को समझ नही आ रहा था की ये क्या हो रहा है ,अजय के ऊपर उसे पूरा भरोषा था बार जीती सीट किसी और को ऐसे ही दे देना उसके समझ के परे था ,तभी निधि, सुमन ,धनुष ,अजय विजय ,तिवारियो की हवेली में पहुचते ही ….महेंद्र ये देखकर भावविभोर हो जाता ही और उन्हें अपने गले से लगा लेता है ,उनका परिचय रामचंद्र से करवाता है ,उसे अपनी आंखों में एक क्षण को तो विस्वास ही नही होता….

कभी भी इसकी उम्मीद नही थी की वो अपने नाती नातिनिनो को कभी देख भी पायेगा…वो गले लगाकर रोने लगता है,बच्चे भी अपने नाना से मिलकर बहुत खुस होते है माहौल बिल्कुल ही बदल सा जाता है ,खासकर निधि को देखकर रामचंद्र को अपनी बेटी की याद आ जाती है ,वो उसे अपना सबकुछ लूट देने को तैयार हो जाता है…भावनाए उफान पर थी वही बजरंगी भी सुमन को झकडे खड़ा था,वो अभी भी उसकी मा से नही मिल पाया था हा उसतक खबर जरूर पहुच चुकी थी पर शायद आज वो उसके साथ ही उनके घर जाय या बाली को सब पता चलने तक और उसके शांत होने तक इंतजार करे……भावनाओ का सैलाब खत्म होने पर अजय,विजय ,धनुष,बजरंगी और महेंद्र थोड़े अलग से जाकर बैठे निधि को तो उसके नाना छोड़ने को तैयार नही थे ना ही निधि उन्हें….
“मुझे माफ कर दीजिये मामा जी मैंने आपसे पूछे बिना ही फैसला कर लिया “
“अरे बेटा मुझे तुमपर पूरा भरोषा है की तुम कुछ भी गलत नही करोगे,पर मुझे ये बात समझ नही आयी “
धनुष और विजय हसने लगे
“मामाजी इससे पहले तो हमारी इज्जत समाज में बढ़ेगी ,दूसरा मैं अपने भी को मामूली से कॉलेज का प्रेजिडेंट नही बल्कि इस स्टेट का मुख्यमंत्री बना देखना चाहता हु…”

अजय की बात से सभी हस्तप्रद से हो गए ,अभी तक दोनो के परिवार से किसी ने भी प्रोफेशनल राजनीति नही की थी तो सबका चौकाने स्वाभाविक ही था………
“बेटा ये तुम क्या कह रहे हो और इसमें तो बहुत ही समय लगेगा “
“हा बिल्कुल लगेगा ,पर मैंने धनुष के अंदर एक बात देखी है ,वो राजनीति और समाजसेवा के लिए ही बना है ,मैं चाहता हु की ये अपनी साख ना केवल इस कॉलेज और इस क्षेत्र में बल्कि पूरे प्रदेश में फैलाये और किसी भी पार्टी से जुड़कर नही ,खुद का एक संगठन बनाकर जो की अभी तो राजनीति में सक्रिय नही होगा ,पर जब होगा तो पूरे दम के साथ होगा….

अभी अपने संगठन में अच्छे और कर्मठ लोगो को जोड़ता जाय ,जो की काबिल भी है और परिवारवाद और गंदी राजनीति के कारण काबिल होकर भी कुछ नही कर पा रहे है ,दुसरो को मौका देकर ही आगे बढ़ा जा सकता है ,और ये हमारी पहली पहल थी…
अपने अभी इस चुनाव में देख ही लिया होगा की हमारे ही पैसे से नेता और मंत्री बने लोग भी मुसीबत में हमसे मुह मोड़ लेते है तो क्यो न इन लोगो को भी राजनिति से साफ कर दे और ऐसे लोगो को सत्ता में बैठाए जो की हमारे लिए और जनता के लिए काम करे ,……………”
उसकी बात से सभी थोड़े सोच में पड़ गए फिर महेंद्र उठाकर उसको गले से लगा लेता है …………

इधर
घने जंगल में एक छोटी सी पहाड़ी के नीचे एक पत्थर में बैठा वो शख्स अभिषेक को दखते ही उसपर बरस पड़ा…
“क्या सोचा था मैंने की तू दोनो परिवार को हराकर उनकी इज्जत को मिट्टी में मिला देगा लेकिन तू साले दोगला निकल लड़की और सत्ता के लालच में तूने मुझे धोखा दिया …”
वो शख्स बंदूक की नोक अभिषेक के माथे पर टिका देता है,
“अगर धोखा ही देना होता तो तुम्हारे पास क्यो आता “
अभिषेक की बात सुनकर वो थोड़ा सा शांत होता है….
“चुनाव जीतकर भी क्या हो जाता ,लेकिन सोचो अगर अजय की लाडली मेरी हो जाय तो क्या होगा…ऐसे भी मैं उसे पाना चाहता था,मेरा काम भी हो जाएगा और उसके जरिये तुम्हारा काम भी हो जाएगा ,और मेरे नाम वापस लेने से निधि के ऊपर मेरा सॉलिड सा इम्प्रेशन पड़ा है ,जो लड़की मुझे बिल्कुल भी भाव नही दे रही थी अब वो अजय से मेरी सिफारिस करती है ,तुझे क्या लगता है की अब भी मैं उसे नही पटा पहुँगा ,”
“हम्म्म्म पटा उसे और जितना चाहता है चोद उसे ,मैं चाहता भी यही हु की उसके घर की सभी लड़कीयो को मैं रंडी बना कर रख दु”
उसके आंखों में खून सा उतर गया था,
“चोदने के अलावा भी आता है तुम्हे कुछ ….इससे तो मैं उसकी पुरी की पूरी जायजाद भी हड़प सकता हु….”अभिषेक ने एक शैतानी हँसी हँसी …और उस शख्स के चहरे पर भी एक मुस्कान खिल गयी…….

अध्याय 46

इधर डॉ बाली से बात करके तिवारियो की सच्चाई से परिचित करता है,पर बाली वो बात मानने को तैयार ही नही था,

“मैं ये मान ही नही सकता की मेरे भैया भाभी को तिवारियो ने नही मारा है मैं जानता हु की तुम बस मुझे बहलाने को ये सब कह रहे हो ,तिवारियो से मैं बदला ना लू ये तो हो ही नही सकता……..”

“तुम्हे क्यो लगता है की तिवारियो ने वीर को मारा था,”

“मुझे लगता नही मुझे ये यकीन है….”

“क्यो ऐसे क्यो तुम्हे यकीन है”

“मैं उनकी फितरत हमेशा से जानता हु…..”
डॉ कुछ देर तक शांत ही रहा….दोनो ओर से एक सन्नाटा था…

“चलो छोड़ो वो सब और बताओ की क्या चल रहा है …”

बाली थोड़ा गुस्से में था..

“क्या चलेगा,बस साले सभी पागल हो गए है इन्हें लगता है की मुझे कुछ भी पता नही है ,पर मैं सब कुछ जानता हु की यहां क्या हो रहा है……उस महेन्द के बेटे के साथ मिलकर सुमन और निधि घूम रही है और अजय को कोई भी परवाह ही नही है…….पता नही इस बात पर अजय को कैसे यकीन हो गया की उसके पिता को तिवारियो ने नही मारा है,,,मैं बता देता हूं की मैं कुछ कर जाऊंगा,भूल जाऊंगा की वो मेरे ही भाई का खून है……..”

डॉ को कुछ भी समझ नही आ रहा था की बाली को कैसे समझाए और वो भी इतने गुस्से में है,सब सोच रहे थे की बाली को कुछ भी पता नही है पर उसे सब कुछ पता था…पर वो अजय की इज्जत के कारण कुछ कह नही रहा था उसे लग रहा था की वो इस घर में बिल्कुल ही अकेला हो गया है,अजय विजय ,कलवा सुमन निधि सभी अपने ही धुन में रहते थे किसी को भी इस बात की फिकर नही थी की उसे कैसे लग रहा है….

इधर तिवारियो के बड़े भाई गजेंद्र भी कुछ दिनों के लिए गाँव आ चुका था ,महेंद्र ने उसे बहुत समझने की कोशिस की पर वो भी बेकार ही रहा,उसे अब भी यही लगता था की ठाकुरो के कारण ही उनके बहन की जान गयी है….

गजेंद्र ने महेंद्र और धनुष को भी ये धमकी दे दी की अगर ठाकुरो के परिवार से किसी से भी कोई दोस्ती रखी तो वो उन्हें ही जान से मार देगा…

कुछ दिन और ही ऐसे ही बीत गए,दोनो परिवारों के बुजुर्गों के कारण पूरे ही माहौल में एक तनाव सा पैदा हो गया था,…

एक दिन डॉ गांव आये हुए थे और बाली के साथ बैठे चाय पी रहे थे,साथ ही अजय , विजय और किशन भी बैठे थे ,की एक लड़का जो की निधि के खुफिया बॉडीगार्ड के तौर रखा गया था दौड़ते हुए वहां आया सर से खून की धार निकल रही थी,गाड़ी को पटक कर वो इतने तेजी से घर के अंदर घुसा की उसकी सांसे फूल गयी थी वो हफ़ता हुआ जाकर सबके सामने खड़ा हो गया…

“ठाकुर साहब “उसने जोर जोर से कहा

“क्या हुआ ,ये क्या हाल बना रखा है क्या हुआ तुझे तपन “अजय और विजय उसे देखकर खड़े हो गए थे,दोनो के चहरे पर चिंता और अनहोनी के डर के भाव साफ दिख रहे थे,

“ठाकुर साहब वो निधि ….निधि …”

“क्या हुआ निधि को “इसबार बाली और डॉ भी खड़े हो चुके थे बाली के इस सवाल से पूरा घर गूंज गया …

“निधि को वो धनुष उठाकर ले गया “वो टूटती हुई सांसो से कह पाया ,

“उठाकर ले गया “अजय ने धीरे से कहा ..

“वो दोनो आज सुबह कॉलेज के लिए निकले पर वो और सुमन कॉलेज ना जाकर सीधे मंदिर गये ,मैं उनके साथ ही था ,वहां धनुष और निधि ने शादी कर ली और उनके गुंडों ने हमारे आदमीयो को बहुत मारा ,सबको बंदी बना लिया है मैं जैसे तैसे वहां से भाग पाया हु,वो निधि और सुमन को लेकर तिवारियो के बंगले से गए है…”उसने सभी कुछ एक ही सांस में कह दिया ………

बाली जैसे जमीन पर गिरने वाला था ,उसे डॉ ने सम्हाला लेकिन अजय का चहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था,विजय और किशन को समझते देर नही लगी की अब आगे क्या करना है,तुरंत ही वहां गाड़ियों का काफिला सा लग गया ,सभी हथियार जो भी घर में कही भी छुपे थे वो निकल के लाए गए,बाली अब थोड़ा सम्हाल चुका था…

“देखा देखलिया ना ,क्यो बे चूतिए क्या कहा था तूने मुझसे की वो सुधार गए है ,सब कुछ भूल जाऊ देख लिया ना कमीनगी तो उनके खून में है …मेरी भोली भाली दी बेटी को गुमराह करके ले गए साले ….”

“ले तो गए चाचा पर अब खून की नदिया बहेंगी ,उसके परिवार में मैं किसी को भी नही छोडूंगा”

एक गरजती आवज ने सबके दिलो को चिर कर रख दिया ये आवाज अजय की थी ,

“लेकिन हो सकता की वो एक दूसरे को प्यार करते हो ,और निधि अपने मर्जी से उनके साथ गयी हो “

डॉ ने थोड़ा डरते हुए कहा …

“मैंने अपनी बहन से बहुत प्यार किया है डॉ और उसने मुझे इतना बड़ा धोखा दिया….अब वो क्या उसकी लाश भी इस घर में नही आएगी ,जिसे वो अपना ससुराल समझ कर निकली है उसे उसी जगह पर दफना कर आऊंगा….”

इतना कह कर ही अजय एक गाड़ी में बैठता है और वहां से निकल जाता है,लेकिन उसके बात से बाली के प्राण तक कांप जाते है,बूढा सा हो चला बाली अपने को ऐसा असहाय कभी भी महसूस नही किया था,आज उसका ही बेटे के समान भतीजा अपनी सबसे प्यारी बहन को मारने की कसम खाकर निकला था वो भी अपने दुश्मनों के कारण ,वो उठ खड़ा हुआ ,…

“नही नही डॉ उसे रोको उसे रोको ,वो उन कमीनो की गलती की सजा मेरी फूल सी बेटी को नही दे सकता “बाली के इतने कहने तक सभी गाड़िया वहां से जा चुकी थी ,बाली और डॉ दौड़ाते हुए बाहर जाते है और डॉ की गाड़ी से उनके गाड़ी के पीछे चलने लगते है ….

तिवारियो का बंगाल किसी किले से कम ना था ,इस एक कदम से खून की नदिया बहना तो तय था ,,……….

अध्याय 47

तेज गाड़ियों का काफिला तिवारियो के बंगले पर पहुच चूका था,ये बंगला कम और कोई किला सा ज्यादा लग रहा था,चारो ओर बस बंदूक लिए लोग मौजूद थे ,जो बस किसी के इशारे के इंतजार में थे की एक इशारा और गोलियों की बौछार हो जाय,बंगले के बाहर सभी गाड़िया रुक गयी और बंदूक धारी लोगो ने अपनी पोजीशन लेनी सुरु कर दी,अजय बिना किसी की परवाह किये सीधा गेट को एक लात मार कर खोल देता और अंदर आ जाता है,उसके साथ ही कुछ 50 की संख्या में लोग है जो विविध हथियारों से लेस है,सभी बंदूक धारी अपने अपने निशाने को सेट कर चुके थे,चाहे वो अजय के लोग हो या तिवारियो के सभी को पता था की किसे मरना है और कब मरना है ,हाथो में तलवार लिए लोग अपने प्रतिद्वंदी के आंखों में सीधे ही देखते हुए बढ़ रहे थे सभी को पता था की बस एक इशारा और खून की नदिया बहने वाली है………..
अजय विजय किशन सबसे आगे होकर चल रहे थे,तिवारि भी अपने घर के बाहर आ चुके थे,महेंद्र ,गजेंद्र ,बजरंगी,एक साथ खड़े थे वही रामचंद्र अपने वीलचेयर में बैठा था जिसे सुमन पकड़े थी ,निधि और धनुष घर की बाकी महिलाओं के साथ खड़े थे लेकिन सभी घर से बाहर आ चुके थे जैसे की वो इन्ही का इंतजार कर रहे हो ,विजय के इशारे से उसके सभी लोग थोड़ी दूर ही रुक गए लेकिन सभी विजय के एक इशारे के मोहताज थे ,वही तिवारियो के सभी लोग महेंद्र एक इशारे का इंतजार कर रहे थे,सभी ने अपने लक्ष्य साध लिए थे….
पीछे डॉ ,बाली और कलवा भी पहुच चुके थे और सभी अजय के बराबर में आकर खड़े हो गए….

बाली को देखकर गजेंद्र ने एक कातिल सी मुस्कान छोड़ी जिससे बाली का कालेजा ही जल गया,अजय और उनके बीच कुछ ही फासला रह गया था की अजय निधि को देखकर वही रुक गया ,निधि अजय को देखकर भागते हुए उसके पास आने लगी उसकी आंखों में बस आंसू थे ,उसने धनुष का हाथ पकड़ा और अजय के पास चली गयी ,…………..
अजय की आंखों से खून और पानी साथ ही निकल रहा था,वो लाल आंखे जो किसी को भी डरा दे,अजय ने पिस्तौल की नोक धनुष की ओर कर दी,धनुष और निधि अजय से कुछ एक हाथ की ही दूरी पर थे,
इससे पहले की कोई कुछ भी बोले निधि ने बंदूक की नोक अपने सर पर टिका दिया,
“भईया मैं अपनी मर्जी से यहां आयी हु ,”
अजय ने एक गर्जना की …
“तो फिर पहले तुझे मरूँगा “
बाली अजय के इस गुस्से को देखकर सहम गया ,लेकिन तभी एक और जोरो की गर्जना हुई जो गजेंद्र की थी ,
“खबरदार …ये तेरी बहन नही अब मेरी बहू है,इसे छूने से पहले तुझे मेरी लाश से गुजरना पड़ेगा.”
उस लंबे चौड़े आदमी की गर्जना से पूरा माहौल ही कुछ पलो के लिये शांत हो गया ऐसा लगा की उसकी आवाज अभी भी लोगो के कानो में गूंज रही हो ,
“क्या मेरे प्यार में कभी कोई भी कमी आयी थी जो तुने इतना बड़ा कदम उठा लिया,कितना प्यार किया था मैंने तुझे और तू इसके लिए मुझसे लड़ने को तैयार हो गयी है ….

तुझे मा बाप सा प्यार दिया मैंने और तू ………..”
अजय के हाथ अब काँपने लगे थे ,निधि की वो प्यार से भारी हुई आंखे जिनमे बस प्यार के सिवाय कुछ भी ना था,वो बड़ी बड़ी आंखे आंसुओ से भरी थी जिनमें एक भी आंसू आता था तो जो भी अपने होठो से उसे पी लेता था आज वही उसके माथे में बंदूक टिका कर खड़ा था…….
तभी एक हँसी माहौल में गूंज गयी ,ये गजेंद्र ही था….वो बाली की तरफ मुखातिब हुआ

“देखा बाली एक भाई का प्यार देखा ,मैं भी अपने बहन को ऐसे ही प्यार करता था ,और तू और तेरा भाई इसीतरह मेरी प्यारी सी बहन को मुझसे दूर ले गए,याद है वो दिन जब मैं अपनी बहन के सर पर यू ही पिस्तौल टिका कर खड़ा था ,और वो वीर के सामने ऐसे ही खड़ी थी…..
बाली और गजेंद्र दोनो के आंखों में वो दृश्य घूम गया और दोनो की ही आंखे नम हो गयी ,गजेंद्र को निधि में अपनी बहन का चहरा दिख रहा था,उसके दिल ने अब सबर का बांध तोड़ दिया था और वो फुट फुट कर रोने लगा,
“नही अजय तू उसे नही मार पायेगा ,मैं भी नही मार पाया था ,मेरे भी हाथ यू ही कांप रहे थे जैसे की तेरे कांप रहे है……मैं भी तेरी मा से उतना ही प्यार करता था जितना की तू अपनी बहन से करता है……..मेरी बहन मेरी प्यारी बहन ,तुमने उसे मार डाला बाली तुम मेरे बहन के हत्यारे हो और अब ये मेरी बहु है देखता हु कौन इसे हाथ लगता है ”
माहौल में कुछ अजीब सी तब्दीली हो रही थी ,जो लोग गुस्से से भरे हुए हाथो में हथियार लेकर खड़े थे उनकी आंखे भी अब नम थी,
“आप नही मार पाए होंगे पर मैं इसे नही छोडूंगा,इसने मेरी इज्जत,से खेला है ,इसने मेरे भरोशे को चकनाचूर कर दिया,,,”अजय फिर से गरजता है और अपने हाथो और निधि के सीधा कर देता है ,तभी बाली दौड़ता हुआ आकर उसका हाथ नीचे कर देता है और एक जोर का झापड़ अजय के गालो में रसीद करता है ,
बाली गुस्से से भरा था पर उसकी आंखे कुछ अलग ही कहानी कह रही थी उसे वो लम्हा बार बार याद आ रहा था जब उसकी भाभी गजेंद्र के सामने वीर की रक्षा के लिए खड़ी थी और गजेंद्र इतना क्रूर होकर भी अपनी बहन पर गोली नही चला पाया था ,लेकिन आज अजय जो निधि पर अपनी जान छिड़कता था आज उसे मारने को उतावला है ,उसकी आंखे रोती नही तो क्या करती…
“तू अपनी बहन को मरेगा,जिसे तूने अपनी गोदी में खिलाया है उसे मरेगा तू ,एक गलती क्या उसने इतनी बड़ी कर दी ,क्या तेरी इज्जत तेरा प्यार इतना बड़ा हो गया की तू इसे मरेगा…..

क्या एक भाई जो अपनी बहन से प्यार करता हो वो उसे मार सकता है …”बाली ने गरजते अजय का गिरेबान पकड़ लिया ,
“हां चाचा सही कहा अपने ,”अजय की आवज अब कुछ धीमी थी
“एक भाई जो अपनी बहन से प्यार करता है वो उसे नही मार सकता,”
लेकिन फिर अजय गरजा …
“लेकिन ये बात आप लोगो को कौन समझायेगा जो दिल में नफरत की ऐसी आग लेकर चल रहे है…”बाली अब उससे अलग हो गया था ,और वो आश्चर्य से अजय को देख रहा था ,वही गजेंद्र भी उतने ही आश्चर्य से भरा हुआ था…
“यही तो मैं आपको इतने दिनों से समझा रहा था की मेरी माँ को इन्होंने नही मारा है,ये उनसे इतना प्यार करते थे की उन्हें मार ही नही सकते…और मामा आप(अजय गजेंद्र की तरफ देखता है ) ,आज बहन की बहुत याद आ रही है,बहुत प्यार उमड़ रहा है ,हम चार बच्चों को उसने जन्म दिया तब कहा थे आप,मेरे पिता पर आपने हमले करवाये ,तब कहा था आपका प्यार ,कभी अपने अहंकार को छोड़कर आप मेरी माँ से मिलने आये ,अभी ये जानने की कोशिस की कि आपके भांजे भांजियों कहा है,जिंदा है या मर गए ,अब याद करके रोने से क्या होगा मामाजी अगर अपने अहंकार छोड़ दिया होता तो शायद मेरी माँ और मेरे पिता दोनो ही इस दुनिया में होते….शायद हमारी इसी दुश्मनी का फायदा कोई और उठा ले गया…
और छोटे मामा(गजेंद्र का सबसे छोटा भाई जो की वीर की गोली से मारा गया था) को मेरे पिता ने नही मारा था ,वो एक गलती थी आप भी जानते ही की मेरे पिता ऐसे नही थे ,वो मेरी मा की खुसी के लिए जान भी दे सकते थे,सबको लगा था की छोटे मामा पिता जी की गोली से मारे गए पर वो गोली किसी और ने चलाई थी जिसका निशाना मेरे पिता थे,पर किश्मत से वो गोली मामाजी को लगी….अपने तो कभी उस पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पढ़ने की भी जहमत नही उठाई होगी….”

अजय का इतना बोलना था की गजेंद्र और बाली की नजरे मिली जैसे की कोई बहुत पुरानी दीवार एक झटके में मोम सी पिघलकर बह गयी हो….गजेंद्र से रहा नही गया वो दहाड़े मार कर रोने लगा…इतना मजबूत दिखने वाला शख्स ऐसे रोयेगा किसे पता था ,सभी लोग जो वहां खून की होली खेलने आये थे वो अपने आंसू पोछ रहे थे….

बाली आवक का गजेंद्र को देख रहा था ,वो कभी अजय को देखता तो कभी गजेंद्र को …गजेंद्र उठता है और बाली के गले से लग जाता है …बाली भी उसे ऐसे कसकर पकड़ लेता है जैसे उसे अपने बड़े भाई मिल गए हो,इतने दिनों की या कहे पीढियो की दुश्मनी ऐसे खत्म हो जाएगी किसी ने नही सोच था…दोनो अलग होते है,…
बाली अजय को देखता है,और अपनी आंसू पोछते हुए कहता है …
“जो हुआ उसे भूल जाओ अजय हम धनुष और निधि की शादी धूमधाम से कराएंगे ,”
“हा अजय जो गलती एक बार हमसे हुई थी वो दोहरानी नही चहिये “
अजय के होठो में एक मुस्कान आ जाती है ,वो निधि को देखता है ,निधि के आंखों में अब भी आंसू थे ,वो अपनी रोनी सी सूरत लिए बाली को देखती है ,
“किसकी शादी ,मैं तो अभी बच्ची हु ,और धनुष मेरा भाई है ,”
वो अजय को देखती है ,
‘अब बहुत हुआ भैया देखो आप ने मुझे कितना रुला दिया ,सच में कभी ऐसा हुआ तो आप मुझे मार दोगे “निधि की मासूमियत को देखकर अजय के दिल में एक प्यार की लहर सी उठ गयी और उसने उसका हाथ खीचकर अपने सीने से लगा लिया ,और उसके गालो और माथे को चूमने लगा जैसे की वो बहुत ही दिनों बाद उससे मिली हो…सच में अजय के लिए नाटक में भी निधि के ऊपर गुस्सा करना कितना कठिन था आज उसे पता चला ,और निधि भी अपने भाई के झूठे गुस्से को देखकर ही सचमे रो पड़ी थी जिसे देखकर अजय के हाथ काँपने लगे थे…
“नही मेरी जान मैं सपने में भी ये नही सोच सकता मेरी रानी “
गजेंद्र और बाली कभी एक दूजे को देखते तो कभी अजय और निधि को उन्हें तो अभी भी समझ भी आ रहा था की ये हो क्या रहा है,बजरंगी दौड़कर कलवा के गले लग जाता है और सुमन इन दोनो के वही विजय महेंद्र के गले से लग जाता है ,सभी के आंखों में आंसू थे ,रामचंद्र अपने परिवार को देखकर अपने आंसुओ को रोक ही नही पा रहा था ,धनुष उसके कंधे पर हाथ रखे खड़ा था,
‘ये हो क्या रहा है “बाली एक आश्चर्य भरे स्वर में कहता है ,

“आप दोनो को समझने के लिए बस एक छोटा सा नाटक “
महेंद्र अपने कानो को पकड़ता है ,और बाली के गले से लग जाता है ,
“लेकिन ये ….”
बाली उस लड़के की तरफ इशारा करता है जो खून से सना हुआ भागता खबर देने आया था,
“वो विजय भैया ने बोला तो ….”
उसके चहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी और अब सबके चहरे पर मुस्कान आ गयी थी ,सब एक दूजे के गले से लग रहे थे….
अंत में अजय और सभी बच्चे रामचंद्र के पास पहुचते है वो सभी के गले से लगता है ,
“अजय आज तुमने वो पुरानी जिम्मेदारी निभा दी जो ना मैं निभा पाया था ,ना ही तुम्हारे माता पिता निभा पाए…बेटा तुमने दोनो परिवारों को एक कर दिया है “रामचंद्र उसके माथे को चूमता है…
“ऐसे ये आईडिया किसका था ,”बाली एक स्वाभाविक से प्रश्न करता है …..
“डॉ साहब का “
बाली और गजेंद्र सबसे दूर खड़े हुए डॉ को देखते है जो की अभी हल्के हल्के से मुस्कुरा रहा था…वो दोनो जाकर डॉ के गले से लग जाते है …….

अध्याय 48

सभी ओर खुशिया फैली हुई थी वही जंगल के एक पत्थर पर बैठा वो शख्स बड़ा ही गंभीर लग रहा था,अभिषेक भी वही था जो बहुत ही खुश दिख रहा था ,
“मेरी तो फट ही गयी थी जब मुझे ये पता चला की धनुष और निधि ने शादी कर ली ,साला सारे सपने ही चूर हो गए थे ,अब थोड़ा अच्छा लग रहा है,”उसने अपने पेंट के ऊपर से ही अपने लिंग को मसला और एक आह भरी,जिसे उस शख्स ने देख लिया और उसके चहरे पर गुस्से का भाव आ गया,वो अपनी जगह से उठता है और पास ही पड़े लकड़ी से अभिषेक पर हमला कर देता है ,वो उसे पिटे जा रहा था,
“मादरचोद मेरी सालो की मेहनत बर्बाद हो गयी और तुझे अपने ही लंड की पड़ी है,तुझे बस निधि की चुद के अलावा और कुछ सूझता नही क्या,…अगर दोनो शादी कर लेते तो शायद दोनो परिवारों में फिर से वैसे ही दुश्मनी हो जाती और मेरा काम आसान हो जाता और तू कह रहा है की ठीक ही हुआ”

“लेकिन लेकिन सोचो ना अगर मैं निधि को पटा लेता हु तो पूरी दौलत …..”
अभिषेक उससे बचने की ही सोच रहा था वही वो शख्स बस उस मारे जा रहा था ,
“साले मुझे दौलत नही चाहिये मुझे उनकी बर्बादी चाहिये ,दोनो परिवार के लोगो की बर्बादी मैंने तुझपर फालतू में ही भरोषा कर लिया साले तुझे तो आज मार ही डालूंगा….”अभिषेक की हालात खराब हो रही थी उसके घुटनो पर एक वार होता है और वो चिल्ला पड़ता है”
“आह नही मुझे छोड़ दो मैं तुम्हारे बहुत काम आने वाला हु “
“तू मादरचोद मेरे क्या काम आएगा मैं खुद ही सब कर लूंगा,”
“नही नही “
जब उसका मन भर जाता है तो वो अभिषेक को छोड़ देता है …..
“आज के बाद बोलने से पहले सोच लेना की क्या बोल रहा है वरना आज तो तुझे छोड़ रहा हु फिर कभी नही छोडूंगा,उनकी बर्बादी ही मेरे जीवन का एक मात्र मकसद है समाझ गया की नही,चल तुझे हॉस्पिटल छोड़ देता हु “
अभिषेक लंगड़ाते हुए उठता है और वो उसे उठाकर वहां से निकल जाता है ,….

इधर
सभी लोग बहुत ही खुस थे और इसी सिलसिले में रामचंद्र गजेंद्र से कहता है की नितिन और खुसबू को भी यही बुला लो,अपने परिवार से सबका परिचय हो जाएगा ,वैसे ही यही प्लान अजय और बाली भी कर रहे थे,बिजय के चहरे पर सोनल का नाम सुनते ही मुस्कान आ जाती है….

वही किशन भी रानी से मिलने को लेकर बेताब हो जाता है ,उसका चहरा देख कर सुमन हस पड़ती है उसके साथ ही अजय ने सुशीला(सुमन की मा जो बेटे की पढ़ाई के कारण फिर से शहर चली गयी थी,इसबार उसे परमानेंट यहां रखने के लिए लाया जा रहा था,बजरंगी उसे अपने पास रखना चाहता था ) और उसके बेटे को भी लाने की बात की जिससे सुमन भी बहुत खुश थी पर पास ही चम्पा खड़ी थी जो उसे एक अजीब से निगाह से देखती है,जिसे देखकर सुमन चुप हो जाती है वही किशन को भी उसकी मा के भाव समझ आ जाते है,वो विजय के पास चला जाता है,और उसके कानो में…
“भाई के बात करनी है अकेले में चल ना “
विजय उसे देखता है कुछ समझने की कोशिस करता है पर उसे कुछ भी समझ नही आता वो उसके साथ चल देता है ,
“क्या हो गया,”
“यार कुछ भी समझ नही आ रहा है ,की मा को क्या हो गया है,”
“क्या हो गया है चाची को”
“पता नही मेरे और सुमन को लेकर उनका व्यवहार कुछ अलग ही हो रहा है ,”
विजय की आंखे चढ़ जाती है,वही किशन उस दिन हुए हर बात को बताता जाता है…..
“ये बड़ी ही अजीब बात है ,अब तो चाची को और भी कुछ प्रॉब्लम नही होनी चाहिये थी,मैं चाची से बात करता हु “
“नही भाई इतने सालो के बाद तो मा हमारे परिवार का हिस्सा बनी है और उसे सुमन से कोई भी परेशानी नही है बस उसे मेरे और उसके रिस्ते को लेकर परेशानी है ,’”

“बिना बात किये कुछ भी समझ नही आएगा की क्या परेशानी है और चाची से नही तो चाचा से बात करता हु “
“पागल हो गया है क्या ,जानता नही की पापा इतने सालो के बाद तो मां से बात करना शुरू किये है मैं नही चाहता की कोई ऐसी बात हो जाय की वो दोनो फिर से अलग हो जाय….”
“ह्म्म्म तो कौन किससे बात किया जाय ,अच्छा मैं कलवा चाचा से बात करता हु वो दोनो के नजदीक रहे है वो चाची से बात कर लेंगे ….”
“हा ये ठीक रहेगा ….

“
इधर
सभी को बुलावा भेज दिया जाता है,खुसबू और सोनल दोनो ही गांव जाने के खबर से बहुत ही खुश थे ,नीतिन अपने भाई बहन के साथ तुरंत ही निकल गया वही सोनल और रानी को लाने सुबह के ही विजय और किशन निकल पड़े…
इधर विजय ने कालवा से ये बात की और सुमन और किशन की प्रॉब्लम के बारे में बताया,कालवा को तो पहले से ही ये पता था की आखिर क्यो चम्पा उन दोनो के प्यार को स्वीकार नही कर रही है पर बच्चों के प्यार को भी समझ सकता था और इसलिए वो चम्पा से बात करने पहुचा,इस समय बाली घर में नही था और डॉ भी चले गए थे,सो उसे यही समय उचित लगा ,कलवा चम्पा के कमरें में जाता है उसे देख चम्पा चहक उठती है,

“इतने दिन हो गए कभी फुरसत से बात करने की नही सोची आज क्या बात है की हमारे द्वार पर आ रहे हो “
उसकी बात सुनकर कालवा को वही पुरानी चम्पा याद आ गयी जो कभी उसकी दोस्त और बाद में दुश्मन हुआ करती थी ,जवानी के दिनों में उसने और बजरंगी ने उससे बहुत मस्ती की थी ,सभी यादे उसके जेहन में एक चित्र की तरह एक ही पल में गुजर गयी ,जो उसकी आंखों से चम्पा को भी समझ आ गया और वो भी कुछ असहज हो गयी ,उसने कालवा से बाहर चलकर बात करने को कहा,कालवा भी समझता था की इसतरह उसके कमरे में बात करना उचित ना होता,ऐसे किसी को कोई भी परेशानी तो नही होती पर जो भी उनके बीच हो चुका था वो इन्हें इसतरह अकेले में बात करना गवारा नही कर रहा था….
दोनो कमरे के बाहर जाकर एक गैलरी में बैठे और बाते करने लगे ऐसे तो दोनो को ही ये समझ नही आ रहा था की आखिर बात कहा से स्टार्ट की जाय,…
“जो हमारे बीच हुआ वो सब पुरानी बाते थी कालवा इन्हें हमे भूल जाना चाहिये,”
“तुम्हे क्या लगता है की मैं इन सभी बातो को याद कर रहा हु “
चम्पा के होठो पर एक मुस्कान सी खिल गयी,
“बीती बातो को भुलाना इतना भी तो आसान नही होता ना,क्या करे ना चाहते हुए भी वो जेहन में आ ही जाती है “
चम्पा ने धीरे से कहा
“हा ये तो है,पर मैं यहां तुमसे कुछ और बात करने आया हु ,देखो चम्पा हमने तो हमारी सारी जिंदगी दुसरो से लड़ने में ही निकल दी,हमे तो नफरतों और तन्हाई के सिवा कुछ भी हाथ नही लगा,तुम्हारी और मेरी दोनो की कहानी एक सी ही है,(चम्पा की नजरे नीची थी और आंखों में पानी जो शायद कालवा को भी महसूस हो रहा था पर वो उसे कुछ भी कहना चाहता ,शायद जो दर्द चम्पा के सीने में दफन था आंसू बनाकर बाहर आ रहा था,)
लेकिन हमे अपने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नही करना चाहिये ,उन्हें वो प्यार मिला है जो हमे कभी भी नही मिल पाया और तुम उसे उनसे छीनना चाहती हो ,नही चम्पा ये अन्याय होगा,ये अन्याय होगा बच्चों पर ,तुम हमारी गलती की सजा उन्हें क्यो देना चाहती हो …”
चम्पा ने अपने आंसू पोछे
“तुम हमारी गलती क्यो कह रहे हो कालवा,गलती तो सिर्फ मेरी ही थी मैंने ……..

”बोलते हुए वो रुक गयी और कुछ देर का सन्नाटा वहां फैल गया ,

“गलती मेरी ही थी चम्पा की मैंने बाली को नही रोका ,तुमसे मैं इतनी नफरत करता था की ….”
चम्पा कालवा को देख कर हल्के से मुस्कुराती है ,
“नफरत ….हा कालवा मैंने काम है ऐसा किया की तुम मुझसे नफरत करो ,ये तुम्हारी गलती नही थी की मैं तुम्हारे भाई के साथ सो गयी,ये तुम्हारी गलती नही थी की मैंने तुम्हारे भाई के बच्चे को अपने पेट में रखा ,ये तुम्हारी गलती नही थी कालवा की मैंने बाली को फसाया और उससे शादी करके फिर से तुम्हारे घर में आ गयी ,मेरे ही कारण तुमने इतने सालो का वनवास काटा…ये तुम्हारी गलती नही है कालवा की वही बच्चा आज बड़ा होकर अपनी ही सौतेली बहन के प्यार में पड़ गया है…..तुम्हारी तो बस एक ही गलती थी की तुमने मुझ ऐसी बाजारू लड़की को इतना प्यार किया जो कभी भी उसका प्यार समझ नही पाई…जो उसके सामने ही उसके भाई के बांहो में जाकर सो गयी,जिसने उसके दोस्त को फसाया सिर्फ अपने फायदे के लिए जिसने तुम्हारा दिल तोड़ा ये जानते हुए भी की तुम मुझसे कितना प्यार करते हो…हा कालवा मुझे हमेशा से पता था की तुम मुझे कितना प्यार करते हो पर मैंने हमेशा इसी प्यार का फायदा उठाया और तुम्हे असीमित दुख पहुचाया ….हो सके तो मुझे माफ कर दो कालवा हो सके तो मुझे माफ कर दो ….”
चम्पा फुट फुट कर रोने लगी ,और कालवा….जैसे बरसो से दबाया जख्म फिर से हरा हो गया पर उसे अब चम्पा पर गुस्सा नही था ,वो भी जानता था की वक़्त ने चम्पा को कितना बदल दिया है,वो उसके रोते हुए चहरे को देखता है,वही वो लड़की थी जो गांव में यू इठलाती हुई चलती थी की सभी की सांसे रुक जाय,कालवा ही वो पहला शख्स था जिसने इसके यौवन के उस नाजुक डोर को तोड़ा था,कालवा पहले तो उसे सिर्फ भोगता था पर धीरे धीरे वो इसके प्यार में पड़ गया ,लेकिन अपने यौवन के द्वार के टूटते ही चम्पा की खुजली ऐसे बढ़ी की वो मतवाली सी होकर इधर उधर मुह मारने लगी ,और लोगो के लिए वो एक रखेल की तरह हो गयी ,जिसमे सबसे अय्याश लोग शामिल थे ,एक था बजरंगी और दूसरा महेंद्र तिवारी,…ये अपने इलाके के सबसे प्रभावशाली लोग थे और बहुत ही अय्याश भी थे ,कालवा और बजरंगी उस समय एक जिस्म दो जान हुआ करते थे ,पर ना कालवा ने कभी बताया और ना ही बजरंगी कभी समझ पाया की कालवा चम्पा से इतना प्यार करता है,उसे तो ऐसे ही लगा की जैसे बाकी लडकियो को वो साथ भोगते है वैसे ही ये भी है,लेकिन चम्पा को हमेशा से ये पता था,क्योकि जब भी कालवा के सामने ही बजरंगी चम्पा को नंगा कर उसे भोगता तो कालवा के चहरे पर एक उदासी सी आ जाती ,जो चम्पा को बहुत ही पसंद आती थी ,वो उसे यू ही दर्द पहुचने में मजा लेती …आखिरकार कालवा ने सबको अपने दिल की बात बताने की ठान ली,लेकिन पहले वो चम्पा से पूछना चाहता था,उसने चम्पा से अपने दिल की बात कर ही ली ,लेकिन

चम्पा ने उसका तिरिस्कार ये कहकर कर दिया की उसके आशिको में तो तेरे मालिक भी है ,तू तो बस उनका कुत्ता है ,उस समय तक बजरंगी के बाली भी चम्पा के पास आने लगा था,वो एक तरह से महेंद्र ,बजरंगी ,और बाली की रांड थी पर बाली वहां कम ही आता था और महेंद्र को भी नई नई लडकिया चहिये थी इसलिए वो बजरंगी की ही माल थी, इसका असर ये हुआ की कालवा चम्पा के पास आना ही छोड़ दिया और उसके प्रति एक नफरत से भर गया,और उसने अपने दिल की बात किसी को भी नही बताई….वक़्त बढ़ता गया और बजरंगी ने चम्पा के पेट में अपना बच्चा छोड़ दिया,उसी समय बजरंगी शहर गया और उसे सुशीला से प्यार हो गया उसके बाद वो सब कुछ भूल कर उसके ही पीछे पड़ गया ,इसी समय बाली भी चम्पा के पास आया लेकिन बजरंगी और कालवा के ना रहने के कारण तिवारियो को इसका पता चल गया ,और उन्होंने साजिस के तहत बाली को फंसा दिया ,उन्हें भी पता था की अगर बजरंगी को ये पता चलेगा तो वो कभी भी इसके लिए तैयार नही होगा,बजरंगी के आते तक बाली की शादी भी हो चुकी थी ,बजरंगी चाह कर भी कुछ नही कर पाया ,किशन बाली का नही बजरंगी का बच्चा है ये बात केवल चम्पा को ही पता थी ना ही तिवारियो को ना ही बजरंगी को,ना बाली को और ना ही कालवा को ….लेकिन चम्पा को तो कालवा को जलाने में मजा आता था,उसने कालवा को जलाने के लिए सारी बात उसे बता दी,और कालवा भी खून का घुट पीकर रह गया क्योकि किसी को अब बताने से भी कोई फर्क नही पड़ना था,कुछ दिनों बाद ही बजरंगी ने सुशीला से शादी कर ली और सुमन का जन्म हुआ,और कुछ दिनों बाद वीर की मौत और फिर दोनो भाइयो में दुश्मनी ,वीर की मौत के बाद से कालवा बहुत टूट गया था,वो इस घर में वीर के कारण ही रह रहा था,इसलिए वो वहां से जाने की ठान लिया…..

सभी यादे उसके जेहन में एक तीर सी चल गयी और उससे उठाने वाला दर्द उसके चहरे पर बस एक आंसू के रूप में बह गया,वो अपनी आंखों को पोछ कर चम्पा को देखा वो अब भी आंसू बहा रही थी ,उसने अपना हाथ चम्पा के कंधे पर रख दिया ,
“जो हुआ वो हो चुका है चम्पा अब हमारे और तुम्हारे सोचने से कुछ भी बदल नही जाएगा,मुझे अपना प्यार नही मिला और मैं जानता हु की प्यार को ना पाने की तकलीफ क्या होती है,मैं चाहता हु की बच्चों को उनका प्यार मिले ….”
चम्पा अब भी सुबक रही थी ,
“हा कालवा मैं भी यही चाहती हु पर …वो भाई बहन है .कैसे ….नही कालवा मैं जानते हुए भी ये पाप नही कर सकती ..”
कालवा ने उसके कंधे पर रखे अपने हाथ को जोर से दबाया ,जिससे चम्पा उसकी तरफ देखने लगी .
“ये बात सिर्फ मुझे और तुन्हें पता है ….तो दुनिया के नजर में तो ये गलत नही हुआ ,और रही बात पाप की तो जब दोनो ही एक दूसरे से प्यार करते है तो क्या पाप और क्या पूण्य ….”
चम्पा ने भी अपनी सहमति में सर हिलाया ….

और कालवा को देखकर मुस्कुराई …
“क्या तुमने मुझे माफ कर दिया “चम्पा हल्के से हँसकर कहा जिसे देखकर कालवा का दिल खिल गया ,
“सालो पहले …”कालवा और चम्पा दिनों के चहरे पर एक मुस्कान थी …
पर कोई था जिसके आंखों से इनकी बात को सुनकर आंसू टपक रहे थे,वो थी सुमन …
आज शहर जाने से पहले किशन ने उसे बताया था की कालवा चाचा माँ से हमारे बारे में बात करेंगे और इससे वो बहुत ही खुस थी वो कालेज से आकर पहले चम्पा के कमरे की तरफ भागी और कालवा और चम्पा को गैलरी में बैठे बात करते देख उनकी बात सुनने लगी….पर जैसे जैसे बात आगे बड़ी सुमन के आंखों में बस पानी था,चम्पा और कालवा सच जानते हुए भी उनके प्यार के संबंध के लिए राजी हो गए थे पर क्या सुमन अपने ही भाई के साथ…….
उसका मन उत्तर देने के हालात में तो नही था….और ना मैं अभी उत्तर देने के हालात में हु,….

इधर

विजय और किशन शहर पहचे ,सोनल और रानी की ख़ुर्शी का ठिकाना नही था,दोनो उनसे ऐसे लिपटे की अलग ही ना हो ,विजय को तो ऐसे लगा की जैसे कोई खालीपन भर गया हो ,वो अनचाहे ही सोनल को अपने ओर इतने जोरो से खिंच रहा था जैसे वो उसे अपने अंदर ही भरना चाहता हो ,वासना नही प्यार भी इतनी बेसब्र हो सकती है ये उन्हें देख कर जाना जा सकता था,जब सभी अलग हुए तो सभी के आंखों में आंसू था,ये अजीब सा प्यार इनके बीच था ,अजय और निधि के बीच सोनल और विजय के बीच और रानी और किशन के बीच…

ये इतना गहरा लगाव था जो कभी कभी रिस्तो की सीमा को भी तोड़ देता था,वो उफान सा आता और उनके बीच के रिस्तो की दीवार को तहस नहस ही कर देता,..

रानी ने विजय को देखा और उसके गले से लग गयी वही सोनल के लिए तो किशन मानो बच्चा था,वो भी उसे अपनी छाती से लगा ली,दोनो तैयार अपने भाइयो के इंतजार में बैठी थी,वो जल्द ही गांव के लिए निकल जाना चाहती थी ,कुछ ही देर में सुशीला और उसका बेटा(वरुण )भी वहां आ गए ,सभी गांव की ओर निकल पड़े थे….

इधर

सुनसान जंगल में वो शख्स जिसे लोग मिस्टर एक्स कहते थे,जो दोनो परिवारों का जानी दुश्मन था अलग अलग रूपो में घूमने वाला ,आज किसी की तलाश में भटक रहा था ,उसके साथ ही गांव का कोई व्यक्ति था,जो की वहां की आदिवासी भाषा में बात कर रहा था,

“यही है “उस आदिवासी ने एक गुफा की ओर दिखते हुए कहा ,एक्स उसे अपने जेब से थोड़े पैसे निकाल कर देता है और वो आदिवासी वहां से चला जाता है ,वो थोड़ा डरा हुआ भी लग रहा था,वो जल्दी से अपना रास्ता नापता है,एक्स वहां खड़े उस गुफा को देखता है,उसकी फूली हुई सांसे और आंखों ने एक अजीब सी उम्मीद के साथ ही एक भय की धार भी उसके शरीर मर दौड़ रही थी,एक सकरा सा गुफा था ,जिसमे इतनी जगह नही थी को कोई खड़ा हो सके ,बहुत हिम्मत के बाद वो बड़ी उम्मीद से वहां आया था,उसने सुन रखा था की यह कोई बहुत ही पॉवरफुल तांत्रिक रहता है ,जो की शैतान की साधना करता है,साफ था की उसका काम वही कर सकता था,अच्छे तांत्रिक तो बुरे विचार भी अपने से दूर रखते है,शैतानी साधना करने वाले को तांत्रिक कहना गलत होगा लेकिन ये तो एक मजबूरी ही है की उसे कुछ और नाम से नही पुकारा जा सकता,

उसकी सांसे सर्द हो रही थी ,एक डर की लहर से उसके शरीर में झुनझुनी सी दौड़ रही थी,पर वो हिम्मत करके उस गुफा के तरफ बड़ा,उसे अपने घुटने के बल चल कर जाना था,पता नही की आगे और कितनी सकरी हो जाय ,वो हिम्मत कर आगे जाता गया ,,थोड़ी दूर जाने के बाद वो घने अंधेरे से घिर गया,उसने अपनी टार्च जलाई और आगे के मार्ग में सरकने लगा,उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वो किसी नर्क में आ गया हो ,लेकिन उसे एक आश जगी उसे कुछ रोशनी सी आती हुई दिखी,अब उसका डर और रोमांच दोनो ही बड़ गया था,उसने बहुत कुछ सुन रखा था पर उसे देखने वाला कोई भी अभी तक जिंदा नही बचा था,उसे अपने जीवन की परवाह भी नही थी उसे तो बस ठाकुरो और तिवारियो की बर्बादी से ही मतलब था,उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी पर वो फिर भी हिम्मत नही हारा और चलता गया,...

लगभग 20 मिनट ही चलने के बाद उसे के बड़ी सी जगह दिखाई दी ,जिसे वो क्या कोई भी नही सोच सकता था की जमीन के अंदर इतना भव्य सी जगह है ,एक काले राक्षस की विशालकाय मूर्ति वो देखने में ही भयानक लगता था उसके चरणों के पास बैठा वो तांत्रिक ,जो अभी आंखे मूंदे ऐसे बैठा था जैसे की वो धयन में बैठा हो ,पास में बहुत से नर कंकाल पड़े थे…..जिसे देखकर एक्स की हालात ही खराब हो गयी,पर वो हिम्मत कर उसके पास पहुचा,और उसके पैरो के पास देशी दारू और बकरे का मांस रख दिया जैसा की उसने सुन रखा था,की अचानक ही वो तांत्रिक अपनी आंखे खोल जिसे देखकर एक्स दो कदम पीछे हो गया ,पूरी तरह लाल आंखे ,जैसे जलते हुए अंगारे हो ...

बड़े बड़े बाल जो बिखरे हुए थे,लंबा चौड़ा और हट्टा कट्टा उसका बदन बड़ी हुई दाढ़ी मूंछे ,और पूर्ण रूप से नग्न उसे देखकर तो कोई भी डर जाय ,वो एक्स को देखकर जोरो से हँसने लगा ,.....

“हा हा हा इतने दिनों बाद किसी ने मेरे पास आने की कोसिस की ,जो भी यहां आया वो कभी भी बाहर नही जा पाया ये देख उनके कंकाल ...तुझे किसी ने बताया नही की मैं नरभक्षी हु ...और तू यहां मरने चला आया …”

उसकी हँसी से पूरी गुफा गूंज गयी ,गुफा में एक ओर से पता नही कहा से कुछ रोशनी फैली थी और एक हल्की सी जलप्रवाह की आवाज आ रही शायद पास ही कोई जलस्रोत हो,हवा तो वहां बिल्कुल भी नही चल रही थी पर जहा रोशनी पहुच रही हो वहां कही से हवा भी आ ही रही होगी …

उसकी हँसी से एक्स में दहसत फैल गयी पर वो वहां डरने तो नही आया था वो पहले आने वालो की तरह किसी खजाने की तलाश में या और किसी प्रलोभन में नही आया था उसका मकसद कुछ जायद ही तबाही थी ,वो अपनी जान की परवाह करता तो शायद यहां कभी नही आ पता….

“मैं आपके समक्ष कुछ बहुत ही जरूरी काम से आया हु महाराज आप ही मेरा काम कर सकते है …’

“यहां हर कोई अपने ही प्रलोभनों से आता है मूर्ख ...लेकिन तूने मेरे लिए इतनी शराब और बकरा लाया इसलिए जब तक ये खत्म ना हो जाय मैं तेरी बात सुनूंगा फिर तुझे भी मार कर अपने शैतान को भोग लगाऊंगा...बोल “

वो बिना पके मांस को ही चबाना शुरू कर दिया ,जिसे देख एक्स को भी उल्टी सी आने लगी पर उसके पास समय बहुत ही कम था…

“मुझे वीर ठाकुर और रामचंद्र तिवारी के परिवार को तबाह करना है ,और मुझे आपकी मदद चाहिये …”वो थोड़ा निर्भीक होते हुए कहा ...लेकिन उनका नाम सुनकर वो अपना खाना ही छोड़ दिए वो रुक सा गया और उसके चहरे को ध्यान से देखने लगा ……

“पुनिया ….तू पुनिया है “

एक्स घबरा गया ,ये तो वो नाम था जो की उसने सालो पहले ही छोड़ दिया था….ये कौन है जो उसे इतने अच्छे से पहचानता है आज उसका ना तो पुराना नाम कोई जानता था ना ही उसका अतीत के बारे में और कुछ…

वो उसे घूर के देखने लगा ….

“तूने मुझे नही पहचाना,देख मैं हु “वो खड़ा हो गया ,लेकिन ये क्या उसके दोनो पैर लकडी के थे वो लड़खड़ाता हुआ पुनिया तक पहुचा

“देख मैं हु “

पुनिया उसे देखते हुए मानो दुखो के सागर में डूब गया ,उसके आंखों से आंसू की धार निकलने लगी वो जैसे जैसे उसके पास आ रहा था उसका दिल और भी दहल जा रहा था ,उसे पता था की उसे चलते हुए कितनी तकलीफ हो रही होगी ,वो लकड़ियां उसी ने तो बंधी थी वो अपने घुटनो पर गिर जाता है साथ ही वो तांत्रिक भी उसके पास बैठ जाता है ,और उसके चहरे को अपने हाथो में ले लेता है ,

“जग्गू मेरे भाई,उस गजेंद्र ने तेरा क्या हाल बना दिया है ….तू यहां कैसे पहुचा ...

ये सब तू तांत्रिक कैसे बन गया …”

अब जग्गू एक जोरो की हँसी हँसता है,और पुनिया को देखकर उसे उठाकर पास ही बैठा देता है और खुद वो उसी जगह पर बैठ जाता है जहा पर वो पहले था,

“तू तो गांव और मुझे छोड़कर चला गया ,और मैं इस जख्मी पैरो को लेकर कहा जाता ,मैं निराश सा जंगल में आकर रहने लगा,मेरी बीवी को वो हरामी अपनी रखेल बना कर रखे थे,उसके पैसे से ही घर चल रहा था,मेरी निराशा जब ज्यादा बढ़ गयी तो मैंने अपनी जान देने की ठान ली और जंगल में चलता हुआ सोच रहा था की किसी जंगली जानवर के सामने अपनी जान दे दु ,पर इसी गुफा से एक तांत्रिक निकाला उसे देखकर मैं डर से काँपने लगा पर मुझे याद आया की मैं तो यहां पर मारने आया हु तो मैं इससे क्यो डर रहा हु ,वो वही तांत्रिक था जिसकी खोज में तू यहां आया है,उसी नरभक्षी तांत्रिक की सभी जगह पर इतनी दहसत है ,आज लोग मुझे वही समझते है पर वो मैं नही बल्कि मैं तो उसका शिष्य हु,वो तो कब के मर चुके है .,,,मेरी हालात को देख और मेरे साहस को देख उसने मुझे यहां आने का कारण पुझा मैंने उन्हें सब बताया वो बोले की अगर तू मरने मारने को तैयार है तो मैं तुझे ये विद्या सीखा दूंगा,मेरा कोई भी शिष्य नही है सब मुझसे इतना डरते है ,

मुझे तो मरना ही था मेरे भाई मैं उसकी बात मानकर ये विद्या सिख ली और देख आज तेरे भाई से दुनिया डरती है ,”

एक जोरो की हँसी माहौल में गूंज गयी ….

पुनिया के चहरे पर भी एक मुसकान आ गयी …

“मैं भी उनके अत्याचारों को नही भुला हु,और उनसे बदला लेने को तडफ रहा हु….”

उसने अपनी जेब से दो फ़ोटो निकाली ,और गज्जू को दिखाया जिसे देखकर उसके चहरे में चमक आ गयी …

“ये उनके घर की लडकिया है,ये निधि है अभी मासूम है ,ये वीर की बेटी है,और ये जिसका शायद तुझे बेसब्री से इंतजार होगा,इसका नाम खुसबू है ये गजेंद्र की बेटी है….”

गज्जू के चहरे में बदले की आग धधक उठी थी वो चिल्ला उठा …

“इनका भी वही हश्र होगा जो हमारी बीबियों और बहनों का उन्होंने किया था,चहरे तो मासूम लग रही है इनकी सील तो मैं तोडूंगा,और इन्हें शैतान से चुदवाऊंगा ….इनकी बली से शैतान मुझे और भी शक्ति देगा जब वो इन दोनो कुवारी लड़कियों को भोगेगा..हा हा हा ….हम इन्हें अपनी रंडिया बना कर रखेंगे…”

ऐसी हँसी की दिल दहल जाय,शैतानियत उनके चहरे से टपक रही थी…

“हा जग्गू ये दोनो अभी तक सील बंद है,इसे हमारे बदले के लिए ही बनाया गया है…(उन्हें नही पता था की निधि अब कुवारी नही है,अजय ने ही अपनी बहन को भोगा है,और खुसबू का कोई भरोसा नही की कब अजय उसे भी भोग ले)”

“पुनिया मेरे भाई ना जाने कितने दिन हो गए किसी लड़की को भोगे हुए इन कच्ची कलियों का तो मैं मांस ही उतार दूंगा...

जल्दी से इनको मेरे पास ले के आ फिर कोई भी हमे नही रोक सकता उन्हें बर्बाद करने से …”

फिर से दोनो की हँसी से पूरी गुफा गूंज उठी …

अध्याय 49
..

सभी लोग घर पहच चुके थे,किशन को कलवा ने खुशखबरी दी जिसे सुनकर वो झूम गया...सभी एक दूजे से मिलने में व्यस्त थे,कल वो समय तय किया गया था जब तिवारियो का पूरा परिवार ठाकुरो के घर आने वाला था ,सभी बहुत ही जोश से भरे हुए थे ,यहां तक की वहां काम करने वाले भी जोश से भरे थे,डॉ को भी बुलाया गया था,वो अपनी सेकेट्री मेरी के साथ आने वाले थे,इंस्पेक्टर ठाकुर ,कुछ नेता गण,सभी पार्टी के मंत्री,यहां तक की मुख्यमंत्री जी भी, धनुष और निधि की पार्टी के लोग,जिनमे अभिषेक प्रमुख था,कॉलेज की प्रिंसिपल मेडम काव्या सेठ सभी को बुलाया गया था,कुल मिलाकर एक जश्न का आयोजन किया गया था,उस क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली दो परिवारों के मिलान का समारोह था,तैयारिया जोरो पर थी और सभी बहुत ही खुस थे,वहां के लोग भी सालो की दुश्मनी के समाप्त होने से खुश थे……..

किशन अब बस सुमन से मिलना चाहता था,वो उसके कमरे के पास ही फटक रहा था लेकिन सुमन की मा और उसका भाई अंदर थे,वो बाहर कभी आता एक नजर डालता और फिर चला जाता,वही उसकी इस हरकत को रानी ने पकड़ लिया…

“क्यो मेरे प्यारे भइया जी ,भाभी से बात किये बिना चैन नही मिल रहा है क्या “

किशन उसे देखकर चौक गया

“नही यार मैं तो बस यहां यू ही घूम रहा था,”

‘“अच्छा अब बनो मत सब जानती हु मैं,चलो मेरे साथ “

वो उसका हाथ पकड़ कर उसे सीधे सुमन के कमरे में ले जाती है वहां सुशीला ,वरुण (सुमन का छोटा भाई ),और निधि बैठे हुए थे,साथ ही सुमन भी थी सभी अपनी बातो में खोये थे वही वरुण कोई किताब निकाल कर पड़ रहा था…

“चाचीजी देखो आपका दमांद सुमन से मिलने के लिए कितना बेचैन हो रहा है,”

रानी के ऐसा बोलने से ही किशन की सांसे रुक गयी ,वही सभी हँसने लगे,घर में सभी को ये पता चल चुका था,और सभी इस रिस्ते से काफी खुश भी थे...सुशीला उठी और भरे हुए नयन से किशन को अपने गले से लगा लिया,

“भगवान इतनी खुसी एक साथ दे रहा है कही नजर ना लग जाय,”वो रोते ही अपने आंखों से काजल निकल कर किशन के माथे के पास लगाती है,किशन तो इस बात से फुला नही समा रहा था पर सुमन के चहरे पर वो खुसी नही दिख रही थी…

“चल अपनी जीजा जी को प्रणाम कर “सुशीला ने वरुण से कहा पर वो अभी भी अपनी पुस्तक में खोया था,

“ये तो ना पुस्तक मिल जाय तो इसे कुछ भी नही सूझता “

“लगता है किताबी कीड़ा है “निधि ने कहते हुए वरुण के सर पर एक हल्की सी चपत मार दी,वरुण उसे गुस्से से देखता है ,पर अगले ही पल वो फिर से किताब में घुस जाता है….

“बेटा अब बात तो तुम्हे जिंदगी भर करना है तो अब थोड़ा सबर रखो …”सुशीला ने हँसते हुए कहा जिससे किशन शर्मा गया,

“जी चाची “

“चाची नही बेटा अब मुझे मा कहकर पुकारा कर “

“जी माजी “किशन वहां से चला जाता है .

वही निधि और रानी सुमन को छेडने लगे पर वो बेचारी क्या करती चाह कर भी उसके चहरे पर वो ख़ुर्शी नही आ पा रही थी जो होनी चहिये थी….

रात हो चली सभी अपने कमरे में थे,सोनल विजय के पास चली गयी थी और रानी किशन के पास ….निधि तो अजय के साथ ही सोती थी..

आजय के कमरे में

“भइया कितना अच्छा है ना ,अब किशन भइया की शादी हो जाएगी …”निधि ने अजय के सीने में हाथ फेरते हुए कहा …

“हा बहन सचमे बहुत खुशी हुई ये जानकर “

“लेकिन भैया आप कब करोगे शादी ,नियम से तो आपकी पहले होनी चहिये ना आप तो सबसे बड़े हो “

अजय निधि को देखता है जो हल्के हल्के से मुस्कुरा रही थी,

“बहुत बड़ी हो गयी है तू बड़ी बड़ी बातें करने लगी है…”अजय उसे अपने ऊपर ले लेता है,हमेशा की ही तरह निधि ने बस एक स्कर्ट पहना था वही अजय पूरा नंगा ही था,उसके ऊपर आने से उसकी कमर अजय के लिंग को छू जाती है ,अपनी प्यारी बहन के नाज़ुकता का अहसास अजय को रोमांचित कर देता है,वो उसे अपने ऊपर भीच लेता है,कितनी प्यारी और नाजुक थी निधि जो इस तरह अजय के मर्दाने और मजबूत बांहो में सोई थी,अजय के सीने के घने बाल निधि के छातियों से रगड़ खाकर निधि और अजय दोनो को ही एक सुखद अहसास दे रहे थे…

निधि अपना सर ऊपर उठाती है और अजय की आंखों में देखती है,हमेशा की तरहः ही उसके आंखों में बस प्यार ही दिखता है ,वो चंचल की कोमल सी प्यारी सी गुड़िया अजय के होठो को अपने नरम गुलाबी पतले से होठो से मिलती है…

अजय अब उसके होठो का रस पी रहा था ,दोनो ही एक दूसरे के प्यार के अहसास में गम थे,निधि अपने स्कर्ट को निकलने के लिए अजय से अलग हुई पर अजय ने उसे फिर से अपने ऊपर खिंच लिया और उसके मजबूत लोहे जैसे शरीर में निधि के कोमल यौवन से भरे जिस्म को छुपा लिया,

अजय का लिंग अब अपने बहन की योनि की गर्मी में भीगना चाहता था,वो अपनी अकड़ दिखा रहा था,उसने अपने लिंग को निधि के कोमल योनि के पास लाया ,उसकी योनि के घने बालो से रगड़ खा कर वो और भी अकड़ गया वही निधि भी अपने भाई का प्यार पाकर गीली हो गयी थी ,वो जोरो से अपने होठो को उसके होठों के अंदर करती है और अजय नीचे से अपने लिंग को निधि की गहराइयों में उतार देता है,ये इतना सहज और प्यार भरा अहसास था जिसमे ना तो कोई छल था ना ही कोई वासना….

बड़ी आसानी एक अजय का पूरा लिंग उसके अंदर समा गया ,इतने दिन में दोनो लगभग रोज ही एक दूसरे को प्यार देते थे ,और इसी प्यार के कारण निधि की अनछुई योनि आज इतनी जवान हो गयी थी की अजय जैसे मजबूत लिंग को भी आसानी से अपने अंदर ले ले ,,,,अब दर्द का नाम तक उसे नही आता था ,आता था तो बस उस गर्म अहसास का मजा जो वो जिंदगी भर लेना चाहती थी……

निधि ने हल्की मदहोश आंखों से अजय को देखा ,उस आंखों में अब ना तो कोई शर्म थी ना ही कोई भी ग्लानि ,ना कोई वासना था तो बस अपने भाई के लिए वो असीमित प्यार जिसका बयान शायद वो लफ्जो में नही कर सकती थी और ये ही एक माध्यम था जिसके द्वारा वो अपने भाई से उस प्यार का जिक्र कर पाती थी ,ये उनके एक दूजे से प्यार को बयान करने का एक साधन ही था,वो बस अपने भाई के मजबूत बदन से लिपटी हुई उसके शरीर के मजबूती से गदगद हो रही थी ,

“खुसबू दीदी आपसे बहुत प्यार करती है भइया ,मेरे खातिर आप उनसे बात कर लेना “

वो सोए हुए ही अजय से कहती है ,

“कौन “

“सोनल दीदी की सहेली ,सोनल आप उससे मिले भी हो वो पब वाली लड़की याद है,सोनल दीदी आप से ये बात कहने से डर रही थी इसलिए सबने मुझे ये बात करने को कहा …….”

अजय के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है,

“जिसे मेरी बहने पसन्द कर ले उसे मुझे पसंद करने में कोई भी दिक्कत नही है ,पर जान मेरे ऊपर सबकी जिम्मेदारियां है,पहले अपनी प्यारी बहनों के हाथ तो पीले कर लू फिर अपने बारे में सोचूंगा “

वो निधि के चहरे पर एक प्यार भरा चुम्मन देता है,उसका लिंग जरूर निधि की योनि में समाया था पर उन्हें वासना के हिलोरों में नही बहना था उन्हें तो बस अपना प्यार देना था वो बस ऐसे ही रहते थे ,कभी धक्के देने की कोई भी जल्दबाजी कोई नही करता ,वो बस उस अहसास के साथ रहना चाहते थे…..

“लेकिन आप मिलोगे उनसे जल्द ही ,प्रोमिश करो “

निधि ने अपना सर उठाया और अजय को देखते हुए प्यार से कहा

अजय को उसकी मासूमियत देखकर उसपर बड़ा प्यार आया और उसकी आंखों में देखने लगा

“प्रोमिश मेरी जान “

और अजय उसके होठो पर ऐसे खाने लगा जैसे वो कोई बर्फी हो ….

इधर विजय के कमरे में

विजय काम निपटाकर आता है वो आज बहुत ही थक गया था सुबह से वो काम ही कर रहा था ,लेकिन कमरे में दाखिल होते ही उसकी आंखों में चमक आ जाती है ,सोनल के जिस्म को वो ऐसे देख रहा था जैसे की कोई अजूबा देख लिया हो वो लग भी तो कमाल रही थी ….

उसकी नाइटी से उसके शरीर का हर हिस्सा बड़ा ही मादक लग रहा है वो भी उसे देखकर खड़ी हो गयी और उसे ऐसे देखता पाकर थोड़ी शर्मा गयी पर फिर उसने अपनी बांहे फैला कर उसे अपने पास बुलाया ,विजय दौड़ता हुआ जाकर उससे लिपट गया,दोनो जैसे सदियों के बिछड़े हो एक दूजे से चिपक गए ,

“आज तो मेरी रानी बहुत ही सेक्सी लग रही है,इतने पतले कपड़े पहन के रहेगी तो मेरी भी नियत डोल जाएगी “

विजय ने उसे शरारती निगाहों से देखा

“मैं तो अपने भाई की ही हु,नियत डोले या कुछ भी हो जाय “

इसबार सोनल इमोशनल हो गयी थी ,उसकी आंखों में आंसू थे और वो फिर से विजय से लिपट गयी,विजय ने उसे अपने बिस्तर में लिटाया,उसके नाजुक जिस्म से आती हुई वो महक विजय के होश उड़ाने को काफी थे वो उसके बालो को सहलाता हुआ उसके यौवन को निहारता है और उसे ऐसे देखता पाकर सोनल भी शर्मा जाती है,और उसके गाल पर एक प्यारी सी चपत मार देती है,

वो सोनल के नितंबो को अपने हाथ में भर कर उसे अपने ऊपर ला देता है और उसके नितंबो को सहलाने लगता है ,सोनल थोड़ी गदराई थी ,उसके गोल नाजुक और भारी नितम्भ विजय को एक अलग ही अहसास दे रहे थे पर वो अहसास दूसरी लड़कियों से मिलने वाले हर अहसास से बहुत ही जुदा था,ना जाने आजतक उसने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया था कितनो के जिस्मो से खेला था पर सोनल के साथ बात अलग थी उसके बदन को छूना उसके अंदर वासना को नही बल्कि एक अजीब से अहसास को जगती थी जिसे शायद लोग प्यार कहते थे,वो उसके लिए कुछ भी कर सकता था और सोनल भी उसके लिए कुछ भी कर सकती थी ,वो महज एक जिस्म नही थे वो भी बहन थे और उनका प्यार कोई वासना से भर हुआ खेल नही था बल्कि वो उस प्यार की अभिव्यक्ति थी जो वो एक दूसरे से करते थे,

सोनल की गोलियो को छुता हुआ विजय उसकी आंखों में खो गया,उसे अपनी बहन की आंखों में आया वो पानी पसंद नही आया वो उसे अपने होठो से पी गया ,

“हमे कितने दिनों तक अलग रहना पड़ता है भाई ,साले तेरे साथ सोने को तरस जाती हु “

“मैं भी जान “

“चल ना झूठे कही के ,तुझे दूसरी लड़कियों के साथ सोने में फुरसत मील तब ना तू मुझे याद करेगा “

“अरे इतनी सारी तो तेरी छमिया है यहां पर ,साले अय्याशी तू करता है और मुझे बोल रहा है की कोन सी लडकिया “

“नही जान अब कोई भी है,आख़िरीबार जो हुआ था वो रेणुका से हुआ था,शादी वाले दिन फिर तो कोई भी नही है,”

“अच्छा और सेठ मेडम ‘

“अरे उनके लिए तो समय ही नही मिल पा रहा है,अब सब ठीक हो गया तो अब शायद कुछ हो जाय “

“ओह तो मेरा शेर भाई कई दिनों का भूखा है “

:हा जान “

विजय ने मुह बनाते हुए कहा ,सोनल खिलखिलाकर हँस पड़ी ,और उसके गालो में एक प्यार भरी पप्पी दे दी ,

“ह्म्म्म तो मेरे भाई के भूख को मुझे ही मिटाना पड़ेगा,”उसने बड़ी ही शरारत भरे लहजे में कहा पर विजय उसे बड़े ही गंभीर भाव से देख रहा था

,

“क्या हुआ साले ऐसे क्यो देख रहा है,”

सोनल हल्के से फुसफुसाई ,और विजय उसे खीचकर अपने सीने से लगा लिया ,सोनल को भी उसके हालात का पता चल गया था वो भी बहुत ही सेंटी हो चुका था ,सोनल ने मजाक छोड़कर अपने भाई को प्यार देने की सोची और उसके होठो पर अपने होठो को सटा दिया,

विजय सोनल के होठो को भरपूर ताकत से खाने लगा जैसे की उसे और कभी ये नही मिलेगा,सोनल भी अपने प्यारे भाई पर अपना सबकुछ लुटाने को आमादा थी ,वो अपने शरीर को विजय से सटा ही दी और अपने जिस्म को उसके जिस्म में रगड़ने लगी,दोनो ही एक दूसरे में खो जाना चाहते थे और उन्हें भी वही एक तरीका पाता था…..

लेकिन एक रिस्तो की दीवार अब भी उनके बीच थी ,शायद मन के किसी कोने में….

विजय सोनल के नितंबो को सहलाने की बजाय अब उसे मसलने लगा था,वही सोनल के मुह से भी सिसकिया निकल रही थी ,उसे समझ भी नही आ रहा था की जो वो कर रही है ये सही है या गलत पर जो भी हो रहा है वो उसे सही गलत के दायरे से बाहर ही रखना चाहती थी ,इतने दिनों के बाद वो अपने भाई के साथ थी वो अपने को सही गलत के दायरे में बांधकर अपने भाई को प्यार से वंचित नही करना चाहती थी…

विजय के हाथ अब उसके नाइटी के अंदर थे ,सोनल की झीनी सी पेंटी से उसके कोमल शरीर का अहसास विजय को हो रहा था ,पहले की तरह आज वो वासना से भरा हुआ नही था ना ही उसमे कोई भी उत्तेजना आयी थी,वो तो बस सोनल को भरपूर प्यार देना चाहता था,जितना उसमे भरा है वो सब उसमे उढेल देना चाहता था…

उसका हाथ कब उसके पेंटी के अंदर चला गया उस पता भी नही चला,पुरानी आदते अपना असर जरूर दिखती है वही विजय के साथ भी हो रहा था,वो उसकी पेंटी को स्वाभाविक तौर पर ही उतारने लगा,वो तो बस सोनल के होठो के रस पीने में मगन था पर कब उसने उसके पेंटी की इलास्टिक को पकड़ कर सरकना शुरू किया उसे भी पता नही चला,हा ये सोनल को जरूर पता चला पर उसके होठो में और मन में बस एक मुस्कान आयी वो अपने भाई के आदत से वाकिफ थी,उसे पता था की उसे ये भी होश नही था की वो उसकी पेंटी उतार रहा है ,पर सोनल ने उसे नही रोका वो अब उसे रोकना ही नही चाहती थी ,ना जाने कब वो भी शादी के बंधन में बांधकर चले जाय और विजय से ऐसे मुलाकात कब हो ,वो अपना सब कुछ उसे देख देना चाहती थी पर उसे भी पता था की मर्यादाओ की दीवारे विजय को ही रोक देंगी उसे अपने भाई के प्यार पर पूरा विश्वास था,वो जानती थी की विजय का प्यार किसी वासना से प्रेरित नही है और वो अपनी सीमाओं को नही लांघेगा और अगर लांघेगा तो भी सोनल को वो सहर्ष स्वीकार था…

विजय उसे पागलो की तरह चुम रहा था,दोनो की ही आंखे बंद थी और कब विजय ने अपने नीचे के कपड़े निकल फेके उसे पता नही चला,अब दोनो जने नीचे से नंगे थे और उनके गुप्त कहे जाने वाले अंग अब गुप्त नही रह गए थे ,उनका मिलान हो रहा था वो एक दूजे में रगड़ खा रहे थे .

पर इन बावरे प्यार के पंछियों को क्या फर्क पड़ने वाला था ,वो बस अपने प्यार की लहरों में सवार ना जाने कहा जाने को निकल पड़े थे ,ऐसे सफर पर जिसकी कोई मंजिल ही नही थी ,और जो उसकी मंजिल थी वो एक भाई-बहन के रिस्ते में जायज नही माना जाता था…….

सोनल की योनि और विजय के लिंग का टकराव जारी रहा पर प्यार का खुमार ऐसे छाया था की ना तो विजय के लिंग में कोई भी तनाव था ना ही सोनल के योनि में कोई गीलापन,दोनो बस एक दूजे को पकड़े हुए चुम रहे थे,लेकिन थे तो वो भी शरीर ही ना ...कब तक वो शरीर के बंधनो से बच सकते थे लगातार हो ने वाले टकराव ने आखिर धीरे धीरे विजय के लिंग में तनाव भरना शुरू कर दिया,जब हल्का ताना हुआ लिंग सोनल के योनि से टकराया तो उसे जैसे होश आया की वो क्या कर रही थी और ये सोचकर ही उसके योनि में अचानक ही एक दरिया सी बहने लगी वो विजय को जोरो से चूमने लगी,और जैसे ही वो विजय के बालो को अपने उंगलियों में फसाकर उसके चहरे की तरफ ऊपर बढ़ी उसके कमर ने ऊपर की तरफ गति की और विजय का तन चुका लिंग जो की सोनल के योनि के द्वार पर ही खड़ा था वो हल्के से योनि के अंदर चला गया ,

“आह ,मेरी जान “

सोनल के मुह से अनायास ही निकल गया ,लिंग अभी थोड़ा ही अंदर गया था पर सोनल की योनि अभी बहुत ही टाइट थी ,उसे अभी भी खुलने का मौका ही नही मिला था ,अचानक हुए इस झटके से विजय ने अपनी पुरानी आदत के अनुसार ही एक जोर का झटका दिए और इसबार उसका हाथ भी सोनल के नितंबो को थामे था,और ये झटका विजय के पूरे मूसल से लिंग को सोनल के अंदर पहुचा दिया ,वो लिंग जिसने खेली खाई भरीपूरी औरतों की सांसे रोक दी थी ,और चीख निकल दी थी आज उसकी सबसे प्यारी बहन की लगभग अनछुई योनि की दीवारों को चीरता हुआ अंदर चला गया,सोनल के मुह से चीख निकलना तो स्वाभाविक था,

“आह भाई “वो जोर से चीखी ,भला हो उस हवेली का जो इतनी बड़ी थी,और विजय के होठो का जो सोनल के होठो को भरे हुए थे, वरना सारा घर ही उठ जाता ,

विजय को भी अब अहसास होने लगा था की वो क्या कर रहा है,सालो से उसने इतनी टाइट चुद में अपना लिंग नही घुसाया था,उसे अचानक ही याद आया की मैं किसके अंदर चला गया ,भाई ….

है भगवान फिर से ,उसने ऊपर देखा सोनल ही थी …

जो उसके चहरे पर आये एक्सप्रेशन को देखकर समझ गयी की विजय को अभी अपनी गलती का अहसास हो रहा है ,उसे हँसी आ गई ,उसे हँसता देखकर विजय के होठो पर भी एक मुस्कान आ गयी,

“कामिनी रोक नही सकती थी “

सोनल ने शरारती मुस्कान से उसे देखा

“मैं क्यो रोकू तुझे इतनी समझ नही है क्या की किसके अंदर डालना है किसके अंदर नही,कोई अपनी बहन के अंदर डालता है क्या भला,और वो भी इतने जोर से हाय ,”

विजय सोनल को झूठे गुस्से से देखा पर अपनी बहन की इन्ही बातो पर तो मरता था,सोनल के एक मुस्कान की खातिर तो वो जान भी दे सकता था,आज उसे कोई भी ग्लानि के भाव नही आये क्योकि वो जानता था की उनका प्यार समाज के हर बंधनो से बढ़कर है ,वो सोनल को और कस लेता है,अब उसे अपने लिंग में सोनल के प्यार की गर्मी का अहसास हो रहा था ,सोनल को भी अपने भी के लिंग का अहसास अपने अंदर हो रहा था ,वो अपने को भरा हुआ महसूस कर रही थी ,उसे ऐसा लगा जैसे बस ऐसे ही जिंदगी गुजर जाय और उसे कुछ नही चाहिये…….

अध्याय 50

इधर किशन के कमरे में

किशन और रानी साथ ही लेटे थे,

“भाई सुमन कुछ खास खुस नही लग रही थी बात क्या है ,कोई परेशानी तो नही हो गई तुम दोनो के बीच ,,,”

“नही जान ऐसा तो कुछ भी नही हुआ है,मैंने भी ये देखा की वो पहले की तरह नही दिख रही थी,”

“पर क्या हो गया है उसे”

“मुझे क्या पता यार”

तभी सुमन उसके कमरे के बाहर से गुजरती है और वो किशन और रानी के बातो में अपना जिक्र पाकर रुक जाती है,वो हल्के से खुले हुए दरवाजे को धकेलती है और वो दरवाजा खुलता जाता है,दोनो ही सुमन को यहां देखकर चौक जाते है,और उन्हें देखकर सुमन भी चौक जाती है,कारण था सुमन का कपड़ा...

जो कपड़ा वो पहनी थी वो बिल्कुल ही पारदर्शी था और उससे उसके अंगों का हर कटाव दिख रहा था,वो भी एक नाइटी था,रानी निधि और सोनल जितनी गोरी और भरीपूरी तो नही थी पर वो भी जवानी के दहलीज पर थी और उसके बदन से चम्पा की जवानी वाले दिनों की याद आ जाती थी,उज्जवलता और कौमार्य की मसुमता दोनो ही उसके चहरे पर खिले होते थे,जिन अंगों को खेलने के लिए कोई भी मर्द बहक जाय वो मतवाले अंग जवानी की खूबसूरती से नही बच सकते,यही कारण था की रानी भी उन कपड़ो में किसी परी से कम नही लग रही थी और किशन अपना प्यार उस परी पर लूटाने को बस एक निकर में तैयार बैठा था,उसका बदन ऊपर से पूरी तरह वस्त्र विहीन था,और उसे देखकर तो सुमन भी थोड़ी शर्मा गयी थी,

रानी थोड़ी सम्हलकर

“आओ भाभी जी ,आखिरकार भैया की याद आपको आ ही गयी ,”

वो उठाकर सुमन की ओर बढ़ती है ,और सुमन के छाती से लग जाती है,सुमन को उसके उजोरो का पता साफ चलता है ,वो फिर के एक आश्चर्य में पड़ जाती है की ये तो किशन को भी हो रहा होगा,रानी ने पतले से नाइटी ने अंदर कुछ भी नही पहना था और उसके एक एक अंगों का आभास सुमन को साफ हो रहा था,कोई भी बहन अपने भाई के साथ ऐसे कैसे सो सकती है,सुनम के तो समझ के बाहर थी ,वो रानी से अलग होती है ,

“अच्छा भैया अब भाभी जी आ गयी तो मैं चलती हु “ वो जाने को हुई पर किशन ने दौड़कर उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया

“अरे तेरी भाभी का कोई भरोषा थोड़ी है की वो कितने देर मुझसे नाराज हो जाय ,तू रुक और मेरे साथ ही सोना आज कितने दिन हो गए तेरे साथ सोए …”

सुमन फिर से चौकी ये इस हालत में किशन के साथ सोने वाली थी,उसे थोड़ी जलन भी होने लगी ,लेकिन आखिरकार वो दोनो भाई बहन थे और उनके रिस्ते पर शक करना अजीब था,लेकिन वो भी तो किशन की बहन थी …..

ये खयाल आते ही सुमन का चहरा उतारने लगा...जिसे देख कर किशन उसके पास आया और उसे अपनी बांहो में ले लिया ,

“क्या हुआ मेरी जान मैं तो बस मजाक कर रहा था,तुम आज क्यो ऐसे उदास हो,नाराज हो क्या मुझसे,...”

सुमन उसे देखती है और फिर से उसके बांहो में आ छुपती है…

“नही लेकिन कुछ सही नही लग रहा है,एक अजीब से घबराहट मेरे मन में छा रही है,”

“कुछ भी तो नही हुआ है सब तो ठीक है,”

रानी दोनो को ऐसे देख कर वहां से जाने लगती है,किशन उसका हाथ पकड़कर रोक लेता है,

“रुक जाओ आज साथ ही सोते है,”किशन रानी और सुमन को अपने बिस्तर में ले जाता है और दोनो के बीच खुद भी सो जाता है,दोनो ही उसे जकड़कर उसकी छाती में सर रख लेते है,....किशन दोनो के गालो पर प्यार से किस करता है और दोनो बदले में उसे साथ ही किस करते है,....

रात चढ़ने लगती है और सुबह की पहली किरण आने के इंतजार में थी,सुमन की नींद खुलने पर वो चौक जाती है,रानी की नाइटी उसके कमर के ऊपर थी और उसकी पतली सी पेंटी से उसके गोल गद्देदार नितम्भ झांक रहे थे,वही किशन रानी की तरफ ही करवट लिए लेटा था,उसके हाथ रानी के नग्गे कमर पर थे ,दोनो के ही कमर चिपके हुए थे,रानी के पाव भी किशन के कमर से लिपटे थे,ये देखकर सुमन एक अजीब से जलन से भर गयी उसे ये बिल्कुल भी पसंद नही आ रहा था,वो किशन को अपनी ओर खिंचती है,वो नींद में ही था,लेकिन उसके खिंचने से उसकी नींद हल्के से टूट गयी,वो उसका हाथ पकड़कर अपने कमर में लगा देती है,किशन हल्की रोशनी में उसका चहरा देखता है और उसके होठो पर एक मुस्कान आ जाती है वो उसके कमर को पकड़कर अपनी ओर खिंचता है,सुमन उसके ओर खिंची चली जाती है,सुमन ने सलवार कमीज पहन रखी थी जो थोड़ी ढीली सी थी ,किशन उसके पिछवाड़े में हाथ फिरता है ,सुमन के मुह से एक आह निकलती है और वो उससे अलग होने की कोशिस करती है पर किशन फिर से थोड़ा जोर लगता है और उसे अपनी ओर खिंच लेता है,वो अपने सर को उठाकर सुमन के होठो में अपने होठो को रख देता है,कुछ देर तो सुमन अपना सर इधर उधर हटाती है फिर वो अपने होठो को खोलकर उसके जीभ को अपने मुह में प्रवेश दे ही देती है,दोनो के जीभ मिलते है और वो एक दूजे को और भी कस कर जकड़ लेते है,किशन अपने हाथ सुमन के पीछे ले जाता है और सुमन भी उसके बालो में अपने हाथ फंसा लेती है,दोनो ही एक दूजे में खो जाते है और प्यार की गहराई का अहसास करने लगते है,

होठ दोनो के ही गीले थे,और जस्बात का एक उफान दिलो में था,

किशन का हाथ फिर से उसके कमर से होता हुआ उसके नितम्भो पर पहुचता है पर इस बार सुमन मना नही करती और किशन उसे जोर जोर से मसलने लगता है,सुमन के मुह से आहे फुट पड़ती है और किशन का लिंग उसकी अहो को सुनकर फुंकार मारने लगता है,उसके कड़ेपन का आभास सुमन को अपने योनि के ऊपर होता है और जैसे उसकी सांसे ही रुक जाती है वो अपने को किशन से अलग करने की कोशिस करती है पर वो उस उन्माद में इतना जोर ही नही लगा पाती की उससे अलग हो जाय…..

किशन फिर से उसे अपनी ओर खिंचता है और इस बार वो अपना लिंग उसकी योनि के ऊपर थोड़ा रगड़ भी देता है,सुमन फिर से थोड़ा छटपटाती है फिर एक झूठा गुस्सा किशन पर दिखाते हुए उसके पीठ पर मुक्का मरती है ,लेकिन शरीर की कहानी तो कुछ और ही थी उसकी योनि से रस की धार निकालनी शुरू हो चुकी थी ,वो एक आनंद की दुनिया में थी जिससे वो अब तक अनजानी ही थी,वो भी अपने पैरो को किशन के कमर पर जकड़ने लगती है पर किशन मौका देख उसके सलवार के नाड़े को खोल देता है ,सुमन को उस उन्माद में इसका पता भी नही चलता ,लेकिन जब चलता है तो देर हो चुकी होती है ,किशन उसके सलवार को नीचे कर चुका था,अब तक सुमन के पैर किशन के कमर पर लिपट चुके थे और सलवार उसके घुटनो के नीचे चला गया था,वो अपने पैरो को खोलने की कोशिस करती लेकिन किशन तो अपने पैरो के उसके पैरो को जकड़ चुका था,

“नही ना ….”वो बस इतना ही बोल पाई थी की किशन ने फिर से अपने होठो को उसके होठो से लगा लिया और सुमन फिर से अपनी दुनिया में खो गई ,उसे होश तब आया जब उसे एक ताजा सा मूसल उसके योनि में रगड़ खाने का अहसास हुआ,किशन अपने निकर को सरका चुका था और अपने लिंग को आजाद कर सुमन के पेंटी के ऊपर से ही रगड़ रहा था,उसकी योनि के गीलेपन के कारण पेंटी का वो हिस्सा भी भीग चुका था,और ये अहसास किशन को हो रहा था,भले ही ये सुमन के लिए नई बात हो पर किशन तो इस खेल का पुराना खिलाड़ी था…..

“हे भगवान ये आप क्या कर रहे हो …”सुमन की सांसे पूरी तरह से उखड़ी हुई थी..

वो अपने को छुड़ाने को थोड़ी छटपटाई पर किशन ने उसे ऐसे जकड़ा था की वो असफल ही हुई,उसने आखिरकार वो कर दिया जिसका डर सुमन को था,वो पेंटी के एक सिरे को उसके योनि से हटा कर उसपर अपने लिंग को रगड़ दिया,,,,,वो बहुत ही जोर से छटपटाई और इससे रानी की नींद ही खुल गयी…

“मैंने कहा था ना की शादी से पहले कुछ भी नही ,प्लीज् नआआआआ “

रानी तब तक उठ चुकी थी ..

“आप लोगो को शर्म वर्म है की नही बहन बाजू में सोई है और आप चालू हो गए,बोल देते अपने रूम में चली जाती “

वो अपने आंखों को मलते हुए बोलती है,किशन की हालत खराब हो गई और जिसे ही उसकी पकड़ ढीली हुई

“हे भगवान ,”सुमन किशन को झटके से पीछे करते हुए अपने कपड़े सम्हालते हुए वहां से भागी ,उसका चहरा शर्म से पूरी तरह लाल हो चुका था..

किशन भी अपने लिंग को जल्दी से अंदर करता है,सुमन के जाने के बाद वो उसे शिकायत के भाव से देखता है और रानी हस्ते हुए उसे देखने लगती है…

“बहुत जल्दी है भईया “

“तेरी तो “

किशन रानी के ऊपर कूद जाता है ,उसका लिंग अभी भी ताना हुआ था और रानी के कमर से कपड़ा अभी भी उठा हुआ था,उसकी पेंटी तो सुमन से भी छोटी थी,किशन का लिंग अनायास ही उसकी पेंटी के ऊपर से योनि पर रगड़ खाता है,

“आउच गर्लफ्रैंड की हवस बहन पर निकलोगे क्या”रानी उसके पीठ को मरते हुए कहती है,

“ये हवस नही जान ये तो मेरा प्यार है,”

किशन उसे हँसते हुए देखता है वो भी उसे देखकर मुस्कुराती है और दोनो के होठ मिल जाते है….दोनो एक दूजे के बांहो में पड़े हुए फिर से नींद के आगोश में चले जाते है….

अध्याय 51

जुनून प्यार या हवस,जो भी हो एक रात तो इन सबमे ही चली गई,सुबह सभी को इंतजार था,इंताजर इस पीढ़ी को एक दूसरे से मिलाने का था,वीर ,बाली,गजेंद्र,महेंद्र के बच्चे अपने भाई बहनों से मिलने को बेताब थे,ठाकुरो की हवेली तो दुल्हन की तरह से सजी हुई थी,मेहमानों का आना जाना सुबह से शुरू हो चुका था,सभी व्यस्त थे अपने अपने कामो में लगे हुए थे.सीता मौसी अपने बच्चे से मिलने को बेताब थी तो सुशीला अपने पति से….वही तिवारियो की हवेली में भी हलचल सुबह से ही थी,सभी लोग तैयार बैठे थे,लेकिन एक शख्स की धड़कने बड़ी हुई थी वो थी खुसबू...उसे ये सोचकर ही डर लग रहा था की जब नितिन और सोनल को पता लगेगा तो अंजाम क्या होगा,के ये भी पता था की उनके बारे में विजय को भी पता चल चुका है,विजय का रिएक्शन कैसा होगा….और सबसे ज्यादा अजय ...आज वो अजय से मिलने वाली थी,सोनल भी उसे अजय के नाम से चिढ़ाने लगी थी,लेकिन जब उसे पता लगेगा की वो उसके बुआ का ही लड़का है तो क्या रिएक्शन होने वाला है ये सोचकर ही उसका दिल जोरो से धड़क रहा था…..

आखिरकार सभी तैयार होकर वहां पहुच जाते है,,,जोरो से उनका स्वागत होता है….सभी बच्चे..

तिवारी परिवार का परिचय एक बार और दे देता हु…

दादा रामचंद्र,उसके 3 बेटे,गजेंद्र,महेंद्र और वीरेंद्र..वीरेंद्र मर चुका है,गजेंद्र के दो बच्चे -नितिन और खुसबू,महेंद्र के 3 -राकेश ,भूमिका,और धनुष ….

तीनो भाइयो की पत्नियां भी साथ आयी थी लेकिन उनका नाम समय पर ही बताऊंगा…

गाड़िया रुकती है और सभी बाहर आते है ,उनके हाथो में बड़े बड़े गिफ्ट के पैकेट थे,और आंखों में अपार खुशी...

ठाकुरो का परिवार भी आरती और फूल मालाएं पकड़े उनका स्वागत करता है,तभी नजरे मिलती है और कुछ चहरो से खुशी अचानक ही गायब हो जाती है,हँसने की आवाजे तो ऐसे चारो ओर फैल रही थी पर फिर भी एक शांति सी कुछ मनो में चल रही थी,उन्हें समझ ही नही आ रहा था की कैसे रिएकट करे …

तभी अचानक अजय की नजर खुसबू पर पड़ती है और वो उसे पहचानने की कोशिस करता है,और तभी निधि की आवाज आती है,....

“अरे आप तो वही है ना वो पब वाली...जो अजय भइया को लाइन मार रही थी…आप तो सोनल दीदी की सहेली है ना …”

चहरो पर पसीने आ जाते है और अजय को भी सब याद आता है ,वो निधि के माथे में एक चपत मरता है,

“कुछ भी बोलती है,”

चोरी पकड़े जाने पर अनजान बनने की जरूरत अब किसी को भी नही थी,सोनल और खुसबू गले मिलते है वही रानी और भूमिका भी ,एक दूसरे से गले मिलते है,सोनल नितिन को हल्के से हाय कहती है,लेकिन जब बात विजय और नितिन की आती है तो विजय अब भी फैसला नही कर पा रहा था की वो क्या करे….नितिन अपना हाथ विजय की ओर बढ़ाता है,लेकिन विजय बस उसे घूरे जा रहा था…

तभी एक हाथ पीछे से विजय के कंधे पर आता है...वो बाली था.

“बेटा हमारे बीच जो भी गलतफहमियां थी उसे छोड़कर अब हाथ मिलने का समय आ गया है,ये तुम्हारा भाई है,इससे हाथ मिलाओ ...विजय की इस हरकत से सभी थोड़े स्तब्ध थे,अजय को भी ये समझ नही आ रहा था की विजय ऐसा क्यो कर रहा है,लेकिन सोनल और नितिन और खुसबू सब कुछ समझ रहे थे,विजय जैसे अचानक ही तंद्रा से उठता है,वो सीधे सोनल की ओर देखता है,सोनल हल्के से अपना सर सहमति में हिलती है और विजय नितिन के आंखों में देखता हुआ उसके हाथो से अपना हाथ नही मिलता बल्कि सीधा उसके गले से लग जाता है,सभी को इससे सकून आता है,और विजय नितिन के कानो में हल्के से कहता है…

“मुझसे अकेले में मिलना “

नितिन कुछ भी नही बोल पता उसकी खामोशी ही असल में उसकी हा थी,स्थिति कुछ अजीब सी तो थी लेकिन सभी उसे सम्हालने में लगे थे….

“कुदरत का करिश्मा देखो, सभी भाई -बहन एक ही जगह पर पढ़ रहे थे और ना इन्हें कुछ पता था ना ही हमे ,,,चलो अच्छा है ये एक दूसरे को पहले से ही जानते है…”

गजेंद्र ने कहा….

अजय ने सभी को अंदर बुलाया ,और फिर मेहमान ,खाना, परिचय, और भी बहुत कुछ सबसे ज़्यादा इंजॉय धनुष और निधि कर रहे थे,सभी उनपर जी भरकर प्यार भी लुटा रहे थे,सुमन का भाई वरुण जैसे इन सबसे अछूता अकेले बैठा था उसे तो अपने पिता से मिलने की भी कुछ खास खुसी नही हुई,उसे ये सब ऐसा लग रहा था जैसे की सब दिखावा हो रहा है,निधि और धनुष ने उसे कई बार पकड़कर ले जाने की कोशिस की ,कभी उसे डांस करने की कोशिस करते तो कभी उसे किसी गेम में पार्टिसिपेट कराने की कोशिस करते लेकिन वो साला पूरा सुस्त आदमी था,उसे अपनी किताबे ज्यादा याद आ रही थी और उसकी मा ने उसे सख्त हिदायत दे रखी थी की आज पढ़ाई नही करेगा...उसे असल में सबपर ही बहुत गुस्सा आ रहा था,उसे ये सब सिर्फ वक़्त की बर्बादी ही लग रही थी,वो बेचारा करता भी तो क्या,आज इतने सालो के बाद एक आदमी उसपर इतना प्यार देखके कहता है की वो उसका बाप है,उसे तो बचपन से ही बस अपनी माँ और बहन का पता था,और पता था तो बस इतना की जिंदगी कितनी कठिन है,मुफलिसी क्या होती है,जमाने की सामने जब कोई आपकी जवान बहन को जलील करता है ,मा को गली देता है तो वो दर्द क्या होता है,छोटी सी उम्र में ही उसे वो पता चला जो शायद लोगो को अपनी जिंदगी भर में पता नही चलता ,वो था दर्द एक अजीब सा दर्द ,जब से उसे समझ आयी थी उसे बस इतना ही समझ आया की दर्द क्या होता है और जीने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है….और उसे ये ही बताया गया था की उसे पढ़ना है इतना की वो अपनी बहन और माँ की अच्छे से परवरिस कर सके,उनकी जिम्मेदारी उठा सके…

वो जिम्मेदारी का अहसास उसमें बचपन से भर दिया गया था,सुमन उसे कभी भी कोई काम नही करने देती सब कुछ उसने अपने ही नाजुक कंधों में उठाया था,क्योकि वो चाहती थी की वो अपने भाई को खूब पढ़ाये और खूब बड़ा आदमी बनाये,उसकी मा लगभग उसे ये अहसास दिलाती की देख तेरी बहन कितनी मेहनत करती है सिर्फ इसलिए की तू पढ़ सके ….और इसी सब बातो का असर ये था की उसके लिए अगर जीवन में कुछ सबसे जरूरी था तो वो था पढ़ाई ….शायद सुशीला और सुमन भी ये कभी ना समझ पाते की वो वरुण को क्या बना दिए है,वो जज़्बातों से कोसो दूर हो चुका था,क्योकि उसे बचपन से भावनाओ से दूर रहना ही सिखाया गया था,नही तो शायद वो अपनी माँ और बहन की हालत को देखकर कुछ गलत रास्तो पर निकल पड़ता...बहुत ही खूबी से उसे पाला गया था और यही अब उसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गयी थी,सुमन और सुशीला भी समझ नही पाते थे की इसे इस माहौल में कैसे ढाले वो तो अब भी वही पुराना वरुण था जो झोपड़ों में पला था,ऐसा नही था की वो संवेदनहीन हो उसे भी दुनिया की समझ थी पर एक अजीब सा डर उसे घेरे रहता एक असुरक्षा की भावना….

की ये जो सब अच्छा है वो खत्म हो जाएगा और उसे फिर से वही जाना पड़ेगा जहा से वो आया है और इसलिए उसे पड़ना है और कुछ ऐसा बनाना है की वो अपनी माँ और बहन को एक अच्छी सी जिंदगी दे सके जो किसी की खैरात ना हो जो उनकी हो ….

और ये उसका बाप जो ना जाने कहा से अभी अचानक ही प्रगट हो गया है,क्या पता फिर से वो कब यहां से चला जाएगा…और आज माँ को क्या हो गया है हमेशा तो खुद ही कहती थी की तू बस पढ़ यही हमारी जिंदगी बदलेगा और अब पुस्तक से ही दूर कर दी….

वो बेचारा अपने सोच में बैठा हुआ था,एक कोने में एक कुर्सी में,उसने कभी भी कोई ढंग का कपड़ा भी तो नही पहना था और आज उसे जबरदस्ती कोई महंगा सा जैकेट पहना दिया गया था वो इसमें भी बहुत ही अनकंफर्टेबल फील कर रहा था ,

तभी उसके पास एक अधेड़ उम्र की एक औरत आकर बैठी ,

“हैल्लो ,क्या नाम है तुम्हारा,तुम बजरंगी भइया के बेटे हो ना,कितने क्यूट हो…”

उस महिला ने उसके गालो को खिंचा और वो गुस्से से उसे देखा ,सफेद साड़ी में लिपटी हुई वो महिला,वरुण शायद उसके हुस्न की कदर ना जानता हो पर वो बहुत ही खूबसूरत थी,मांग में सिंदूर नही था,हाथो में कुछ ही चूड़ियां थी वो भी सादी ,एक पतली सी घड़ी,और चहरे से बहुत सी शालीन और पढ़ी लिखी लग रही थी,गोरा रंग पर कोई भी श्रृंगार नही ,उज्वल चहरा ,और भरा हुआ शरीर ,लेकिन वरुण ने तो शायद उसके चहरे को ही देखा वो भी गुस्से से और वो फिर से आगे देखेने लगा..

“अरे बहुत गुस्से में दिख रहे हो ,आदत डाल लो तुम्हे मेरे ही साथ रहना है,”वो खिलखिलाती है और उसके कसे हुए सुंदर दांतो की पंक्तिया चमक उठती है,

वरुण भी उसे घूरकर देखता है,

“हा तुम्हारी माँ और तुम अब बजरंगी भइया के साथ ही रहोगे ना ,तो मुझसे दोस्ती कर लो मैं तुम्हारे काम आऊंगी “

वो हँसते हुए उसके सामने अपना हाथ बढ़ाती है पर वरुण कोई भी इंटरेस्ट नही दिखता …

“और मैं तुम्हे पढ़ाऊंगी भी,मुझे सब आता है,जो तुम्हे सीखना है “इस बार उसकी बात में थोड़ी शरारत और थोड़ी मदहोशी भी थी जिसे वरुण समझ ही नही पता लेकिन उसके चहरे को वो एक बार फिर से देखता है उसे अपने स्कूल टीचर की याद आ जाती है और वो खुस होकर उससे हाथ मिलता है,चलो कोई थो था जो उसे पढ़ाई की बातें कर रहा था….

तभी बाली और बजरंगी मंच पर चढ़ते है ,और बाली माइक पकड़कर सुमन और किशन की सगाई की अलाउंसमेन्ट कर देता है,सभी खुस हो जाते है,सुमन और किशन को स्टेज में बुलाया जाता है,सुमन इधर उधर देखती है उसे वरुण एक कोने में बैठा दिखता है,वो पहले दौड़कर वरुण के पास आती है ,

“अरे मेरे साथ चल आज मेरी सगाई है और तू यहां बैठा है,”

वो उसका हाथ पकड़कर उसे खड़ा करती है वरुण बड़े ही बेमन से खड़ा होता है,

“चाची जी आप भी चलिए ना …”

वो उस महिला को देखकर कहती है,

“हा बेटा तुम चलो मैं आती हु”सुमन वरुण को लेकर वहॉ से चली जाती है और वो महिला उन्हें जाते हुए देखती है,उसकी आंखों से शायद कोई भारी दर्द फूटने को होता है पर वो जैसे तैसे उस दर्द को सम्हालती है,उसके चहरे पर खुसी तो आ ही नही पा रही थी ,पर वो अपने आंसुओ को निकलने से जैसे तैसे रोकती है,और स्टेज की तरफ देखने लगती है,इस भीड़ में कोई ऐसा नही था जिसे उसकी फिकर थी,सभी अपने बच्चों के साथ खुस थे ,हा ये उसका ही परिवार था लेकिन शायद सिर्फ कहने को….

ये महिला वीरेंद्र की विधवा थी,...नाम था आरती,,,

अध्याय 52

इधर

समारोह पूरे सबाब पर था और इधर दिलो में भी आग सी लगी थी,नितिन खुसबू और सोनल को इशारा करता है,और सोनल विजय को सभी के दिलो की धड़कने बढ़ी हुई थी,सभी विजय के रूम में चले जाते है,विजय जब पहुचता है तब तक सोनाल खुसबू और नितिन पहुच चुके होते है,सभी बैठ कर एक दूजे को देखरहे होते है,शमा गंभीर सा था…..

विजय भी कमरे में आता है,और आते ही सीधे नितिन के गले को पकड़ लेता है….

“साले प्यार के नाम पर तूने इतना बड़ा धोखा दिया…”

सोनल और खुसबू इससे डर गए साथ ही नितिन भी घबरा गया...सोनल दौड़कर विजय के पास पहुचती है,

“विजय ये क्या कर रहा है,”

“इसने …..इसने तेरे प्यार से खेला है सोनल,इसे पता था की तू कौन है और ये….”

“इसे कैसे मालूम होगा की मैं कौन हु और हमे भी कहा पता था की ये कौन है,विजय प्लीज़ मामले को बिगड़ मत …”

विजय सोनल के चहरे पर आये आंसुओ को देखता है और उसका हाथ अपने ही आप ढीला होता जाता है…

वो नितिन को छोड़कर अपने कमरे में एक दराज से विस्की की बोतल निकलता है और 3-4 घुट सीधे ही पी जाता है,उसे भी समझ नही आ रहा था की क्या करे….

“मुझे सचमे नही पता था था विजय की ये कौन है और अब जानने के बाद की ये मेरी बहन है मैं कैसे……..कैसे इस रिस्ते को आगे बड़ा सकता हु,....तुम अगर कहो तो मैं अभी से सोनल की जिंदगी से दूर हो जाऊंगा…”

नितिन अपनी आंखे अभी भी नीचे किये हुए था…

“हा एक को अपनी मर्यादा की पड़ी है और एक को समाज की,,,”खुसबू की बातो में दर्द और व्यंग दोनो था...वो आगे कहती है..

“लेकिन तुम दोनो ने ये पूछा भी की आखिर सोनल क्या चाहती है,उसे क्या चाहिए ….

एक लड़की के दिल को समझने की तो किसी को कोई फुरसत ही नही है,ठीक है की अब सोनल नितिन की बहन है पर इसका मतलब क्या हुआ...की जो प्यार वो दोनो एक दूजे से करते है वो खत्म हो जाएगा….नही मुझे पता है ये नही हो सकता,क्योकि मुझे भी प्यार हुआ है…”नितिन खुसबू को घूर कर देखता है उसके लिए ये बात एक आश्चर्य} ही थी अभी तक खुसबू ने उसे कुछ भी नही कहा था….

“हा नितिन मैं अजय से प्यार करती हु,ये बात तो उसे भी नही पता,लेकिन सच यही है और एक सच किसी को भी नही पता….मैं पहले से जानती थी की तुम कौन हो ,”सभी आश्चर्य से खुसबू को देखते है…

“जब सोनल ने पब में मुझे तुम्हारे नाम बताये तब ही मुझे पता चल गया था की तुम लोग कौन हो ,दादा जी ने मुझे तुम्हारे नाम बतलाए थे और मैं दादा जी की बहुत करीबी हु,उन्होंने मुझसे वचन लिया था की मैं दोनो परिवारों को मिलने के लिए जो भी कर सकू करूँगी,लेकिन इत्तफाक देखो मुझे अजय से उसे देखते ही प्यार हो गया,और वो प्यार तो तब भी कम नही हुआ जब दोनो परिवार एक दूजे के खून के प्यासे थे और तुम सोचते हो की अब तुम दोनो एक दूसरे से अलग हो जाओगे तो ये बहुत बड़ी गलती होगी…”

“लेकिन ये दोनो भाई बहन है”विजय चिल्लाता है

“तो क्या हुआ”सोनल विजय को झकझोर देती है,दोनो की आंखे मिलती है और उसे रात का वो शमा याद आ जाता है ,वो प्यार था की एक ग्लानि का भाव या शर्म या और कुछ लेकिन विजय का सर अपने आप ही नीचे हो जाता है उसका सारा गुस्सा जाता रहता है और उसके आंखों में आंसू की बूंदे आने लगती है...सोनल उसे अपने गले से लगा लेती है…

“भाई कुछ भी गलत नही हुआ,जो हमने किया वो भी और जो हम करने वाले है वो भी ,,,...”विजय को ये समझ नही आ रहा था की सोनल अपने और उसके बारे में बोल रही है या अपने और नितिन के बारे में पर जो भी हो उसे कुछ कुछ समझ तो आ रहा था,

“भाई प्यार तो प्यार होता है ना सब भूलकर बस मेरी खुशी देखो ना,मैं खुश हु और खुस रहूंगी मुझे इन रिस्ते के बंधनो में मत बांधो भाई ….”विजय का हाथ उसके बालो पर चला गया वो उसे कसकर पकड़ लेता है …

“चाहे दुनिया वाले कुछ भी कहे पर तेरी शादी होगी तो नितिन से ही होगी ,और वो साला अगर मना करे तो उसे बांधकर मंडप पर बैठूंगा…”

वो नितिन को देखता है जो अभी भी थोड़ा सा सोच में था पर विजय के आखिरी लाइन से वो भी हँस पड़ता है साथ ही विजय खुसबू की तरफ देखता है,

“और आप बनोगी मेरी भाभी …”

खुसबू थोड़ा शर्मा जाती है…

तभी कमरे में मिसेस कव्या सेठ (जो अभी कॉलेज की प्रिंसिपल है) आ जाती है ,

“ओह मुझे माफ करना समझ नही आ रहा था की टॉयलेट कहा पर है,इतना बड़ा घर है तुम लोगो का “

“अरे आप आइए ना मेडम “

सोनल कहती है,

“अरे प्रोग्राम तो वहां चल रहा है और तुम लोग यहां बैठे हो “

“वो मेडम “नितिन कुछ बोलने वाला होता है.तभी सोनल उसका बात काट। देती है.

“मेडम वो सब आप छोड़िए ना और भइया का ही रूम है आप इसका टॉयलेट इस्तेमाल} कर लीजिये …

“ओके “ कव्या विजय को देखते हुए हल्की मुस्कान के साथ टॉयलेट में घुस जाती है,

“चलो हम सब चलते है ,”

सभी बाहर निकल रहे होते है तो सोनल विजय को रोकती है ,

“अरे आप कहा जा रहे है ,मेहमान आया है यहां कुछ खातिरदारी करो “

विजय के चहरे पर मुस्कान आ जाती है वही नितिन और खुसबू उसे अजीब निगाहों से देखते है…

“मतलब की उन्हें अकेला मत छोड़ो साथ ही आ जाना ना “

“ओके मैं भी रुक जाता हु “नितिन कहता है.

“भइया उसे सम्हाल लेंगे तुम्हे होशियारी दिखाने की कोई जरूरत नही है”सोनल नितिन का हाथ पकड़ती है और खीचकर उसे ले जाने लगती है,साथ ही वो विजय को हल्के से आंख भी मार देती है और साथ ही विजय के चहरे पर एक शैतानी मुस्कान उभर जाती है…

इधर कव्या तो आयी ही विजय से मिलने को थी ,वो जल्दी से निकलती है

“कैसी हो मेडम जी “विजय उसके कमर में हाथ डालकर उसे अपनी ओर खिंचता है,

“भागो तुम ,यहां मैंने खुशी खुशी ट्रांसफर मंजूर किया था की तुम यहां हो ,और एक् तूमहो की हाल चाल पूछने भी नही आये,”

“अरे मेडम जी क्या करे काम ही ऐसे आ गए थे की आपसे मुलाकात ही नही हो पा रही थी ,पर आप फिकर मत करे अब तो आपके लिए पूरा समय है मेरे पास”

“अच्छा तो क्या करोगे”

“जो भी काम उस दिन बच गया था सब आज ही पूरा कर लेते है”

“अच्छा “

कव्या एक घाघरा पहने हुई थी ,मांग में गढ़ा सिंदूर और हाथो में भरी हुई चूड़ियां ,उसके मादक जिस्म में कहर ढहा रहा था,वो ये श्रृंगार भी तो विजय के लिए ही कर के आयी थी

,मादकता में और भी मादक उसके होठो की वो लाली थी जो विजय को उसे चूसने को कह रही थी और विजय ने वही किया ,वो उसे अपने हाथो से उठाकर सीधा ही अपने बिस्तर पर लिटा दिया ,उसने देखा की वो विस्की का ढक्कन अब भी नीचे ही गिरा था,उसने उस बोतल को पकड़ा और दो घुट खुद लगाए फिर कव्या के होठो से लगा दिया ,वो भी दो घुट ऐसे लगा गयी जैसे की कोई पुरानी शराबी हो ,....

उसके ब्लाउज़ से झांकते हुए उसके बेहतरीन उजोरो को वो अपने होठो से महसूस करने लगा और हाथो को पीछे लाकर वो ब्लाउज़ की चैन खोल दिया,कव्या की एक सिसकारी पूरे कमरे में फैली तभी दरवाजा फिर से खुलता है….

“कम से कम दरवाजा तो लगा दिया करो “और एक हँसी पूरे माहौल में गूंज जाती है कव्या जल्दी से अपने को सम्हालने और ढकने में लग जाती है पर विजय के होठो में एक मुस्कान आ जाती है,सामने मेरी खड़ी थी (मेडम मेरी ,डॉ की सेकेट्री )वो एक हल्के रंग की साड़ी पहने सनी लीओन सी लग रही थी ,हाथो में हल्के डिजाइनर चूड़ियां ,और उसका गजब का गदराया बदन ,देखने वाले का मन तो डोल ही जाय,

दोनो औरतें विजय के ताकत की गुलाम और शादीशुदा था,दोनो ही गदराये हुस्न की मलिका थी ,और दोनो को ही विजय चाहिये था ….

वप इठलाते हुए बिस्तर की ओर बढ़ती है,

“जानेमन तुम आदमी हो या घोड़े,कितनी औरतों को अपने नीचे लाओगे…”विजय उसे बस मुस्कुराते हुए देखता है और उसे अपने ऊपर डाल देता है,

“बाकियों का तो नही पता लेकिन आज तुम दोनो को “

उसकी इस हरकत और इस बात से कव्या भी सामान्य हो चुकी थी और तीनो एक साथ ही जोरो से हस्ते है…

“अब तो दरवाजा लगा दो या किसी और की राह देख रहे हो “

मेरी हँसते हुए कहती है,विजय जल्दी से दरवाजा लगता है ,उसके टाइट जीन्स से भी उसका अकड़ा हुआ लिंग दिख रहा था जिसे दोनो ही बड़ी कामुक नजरो से देख रही थी ….

विजय उनके पास आता है दोनो ही अपने जीभ पर उंगलिया फिराती है,

आज तक ने ना जाने कितनी लड़कियों के साथ ये खेल खेला था पर आज पहली बार दो लडकिया और वो इतनी हरीभरी और खेली खाई ...विजय जैसा आदमी ही ये रिस्क लेने को तैयार हो सकता था और दोनो को ही खुश करने की गारेंटी भी दे सकता था,विजय जैसे ही बिस्तर पर पहुचा दोनो ही उसपर झपड़ पड़ी जहा कव्या उसके ऊपर के भाग को सम्हाल रही थी वही मेरी ने नीचे के भाग की जिम्मेदारी ले ली थी ,मेरी ने उसे नीचे से नंगा कर दिया और कव्या ने ऊपर दे कव्या अपने होठो को उसके होठो पर भर कर उसका रस चूस रही थी और वही मेरी उसके अकड़े हुए लिंग को अपने होठो से गिला कर रही थी ,विजय की सांसे तेज हो रही थी और उसकी आंखे बंद,आज तक दुसरो के अंगों को निचोड़ने वाले विजय के अंगों को आज कोई दूसरा निचोड़ रहा था और वो बस सोया हुआ था,काव्या ने अपने उजोरो को अपने तने हुए ब्लाउज़ से अलग किया और ब्रा के ऊपर से ही उसे विजय के मुह में घुसेड़ दिया वो कुछ कह पता उससे पहले ही काव्या ब्रा को एक ओर कर अपने उभरे हुए निप्पल को उसके हल्के से खुले मुह में घुसा देती है,विजय भी उस उतेजित निपल को अपने मुह में पाकर खुस हो जाता है और जोरो से चूसने लगता है…

“आह मेरी जान “काव्या विजय के बालो को अपने उंगलियों में फंसा लेती है,वही विजय उसके निप्पल को दांतो से हल्के से काट देता है ,

“हाय कमीने कही के ,बहुत ही शरारती हो तुम ,हाय “

“अभी शरारत दिकहि कहा हो जान “

“मेरे बारे में भी तो कुछ सोचो “मेरी ने अपने मुह से विजय का लिंग निकल कर कहा ,विजय ने उसे मुस्कुराकर देखा और उसके पैर जो उसके सर के पास थे को पकड़कर उसकी साड़ी को ऊपर किया और अपना सर वहां घुसा दिया,

काव्या का चहरा थोड़ा उतर सा गया,तो मेरी ने उसे अपने पास खिंचा और उसके घाघरे में अपना मुह घुसा दिया,विजय ने मेरी के योनि में दांतो से कलाकारी की वो उचक पड़ी और उतेजना में काव्या के पेंटी से ही उसके योनि को खा गयी …

“आह पागल हो तुम लोग,मार ही डालोगे “काव्या छटपटाई

और जाकर विजय के कमर से चिपकने लगी ,विजय ने अपने हाथ से उसका से अपने लिंग की ओर मोड़ दिया और वो जैसे इशारा समझ गई हो विजय का लिंग अपने होठो में भर

लिया…..

सभी एक दूसरे को स्वर्ग की सैर करा रहे थे,जब जब विजय कोई कलाकारी मेरी के योनि से करता ,मेरी उतेजना में आकर काव्या की योनि में घुस कर उसे खा सी जाती और काव्या उतेजना में विजय के लिंग को और जोर से अपने मुह में भिचा लेती,विजय का चहरा पूरी तरहः से मेरी के कामरस से गिला हो चुका था ,वही हाल मेरी का भी था ,वही काव्या के थूक से विजय का लिंग पूरी तरह भीग था चुका,सभी की सांसो की ही आवाज से कमरे में एक हलचल सी हो चुकी थी ,मेरी और काव्या एक जोरो की धार छोड़ते हुए अपनी योनि की आग शांत कर ली ,लेकिन अब विजय की आग अच्छे से बड़ी थी बस बात ये था की इस आग का पहला शिकार कौन होने वाला था…

वो उठकर दोनो को ही अपने ओर खिंच लिया ,सभी एक दूसरे के होठो को,गालो को चुम रहे थे ,सभी के चहरे अब रस से भीगे थे,मेरी और काव्या के कपड़ो की हालत बहुत ही खराब हो चुकी थी ,कोई कुछ कहता उससे पहले ही विजय ने काव्या को अपने नीचे ला लिया और उसके घाघरे का नाडा खोल कर उसे नीचे कर दिया,नीचे उसकी पेंटी पूरी तरहः से उतरी नही थी उसे बस एक तरफ सरकाया गया था,विजय ने उसे उतारने की जहमत भी नही की और अपना तना हुआ लिंग उसके अंदर पेल दिया….ऐसे तो मेरी के थूक ने उसे बहुत चिकना बना दिया था फिर भी वो सालो से किसी मर्द का लिंग अपने अंदर नही ली थी वो चीख ही गई होती अगर मेरी ने उसकी हालत भाप कर उसके होठो पर अपने होठ को नही रख दिया होता,विजय का मूसल एक पिस्टल की तरह अंदर बाहर हो रहा था,काव्या की आंखे फट कर बाहर निकालें को हो गयी थी पर मेरी के सहलाने से और विजय के धक्कों से वो फिर से गीली हो गयी ….

“आह मेरी जान ,आह हाय विजय आह ,सालोओओओ से कोई नही कीईईईईई याआआआआआ है मुऊऊऊ झे ….आह आह आह “जोरदार धक्कों से काव्या का शरीर ही नही बल्कि पूरा बिस्तर भी हिलने लगा था….

वही मेरी ने उनपर उठाकर अपने होठो को विजय के होठो से मिला दिया और दोनो के होठ मिलते ही विजय पर फिर से एक नशा चढ़ा और वो फिर से बहुत ही जोतो से धक्का देने लगा…

“मैं मर जाऊंगी थोड़ा धीरे प्लीज़ प्लीज़ “वो चिल्लाने को हुई मेरी ने फिर से अपने होठ उसके होठो पर रख दीये लेकिन विजय ने अपनी स्पीड और ताकत कम नही की ,काव्या की आंखे बाहर को हो रही थी उसका चहरा पूरी तरह से पसीने से भीग चुका था लेकिन उसकी आहे मेरी के मुह में दबकर रह जाती उसकी आंखों से आंसू आने लगे थे ,और ये देखकर विजय को बड़ा मजा आ रहा था ,सालो के बाद ऐसा हुआ था की वो किसी को ऐसे बेदर्दी के साथ पेल रहा हो …

काव्या ने खुद को पूरी तरहः से छोड़ ही दिया वो बेहाल ,बेबस और पूरी तरहः से थक चुकी थी उसे नही पता था की विजय इतना बड़ा शैतान है ,वो उसके मर्दानगी के कायल भी हो रही थी पर वो साथ ही वो अपने को बिल्कुल असहाय भी महसूस कर रही थी उसके लिए इंचभर भी हिलाना मुश्किल हो रहा था,वो झटपटाना चाहती थी पर उसके लिए ये मुश्किल था,विजय का विशाल शरीर और मेरी की पकड़ के सामने वो बेबस थी लेकिन ये भी सच था की उसे ऐसा मजा जिंदगी में पहली बार आ रहा था,वो भीग जाती और फिर से गीली हो जाती ,वो अकड़ी। और तेज फुहारे उसने छोड़े अपने चरम सुख की अनुभूति कर वो निढल हो गई,लेकिन ये तो विजय था की अभी भी उसमे पूरा खजाना बाकी था,मेरी ने विजय को रोका और खुद अपने कपड़े उतार कर काव्या के ऊपर आ गई

वो एक कुतिया के तरहः अपने घुटनो और हाथो के बल थी और नीचे काव्या थी जिसके मुह में उसने अपने स्तनों को घुसा रखा था,वही विजय को उसकी चिकनी योनि की वो दरार दिखी जिसे लोग जन्नत का दरवाजा भी कहते है,वो अपने लिंग को जो की काव्या के रास से भीगा था उस दरवाजे में लेजाकर एक जोर का धक्का दिया,मेरी अपेक्षाकृत आसानी से उस वॉर को सह गई वो ,आनद के सरोवर में तैरने लगी और विजय लगातार उसे धक्के देने लगा….मेरी के झरने के बाद भी विजय बचा हुआ था वो फिर से काव्या को देखता है जिसे देखकर वो थोड़ी घबरा जाती है ,

“फिकर मत कर जान ये तुझे बड़ा मजा देगा”मेरी काव्या के होठो पर अपने उंगलियों को फेरते हुए कहती है,इस बार मेरी भी चाहती थी की अब विजय झर ही जाय वो काव्या के पैरो को विजय के कंधे पर टिका देती है ,जिससे उसकी योनि दो फांको में साफ तौर से बंट जाती है ,विजय अपनी पूरी हवस निकलने के उद्देश्य} से पूरे जोर से धक्के लगा रहा था और आखिर वो समय भी आया की विजय ने अपने वीर्य की पहली धार सीधे काव्या के गर्भ में उतार दी,......और मानो एक तूफान शांत हो गया...तीनो एक दूसरे से लिपटे कुछ देर तक पड़े रहे पर कब तक….मेरी काव्या और विजय की आग फिर से भड़की और इसबार सभी को बहुत मजा आया ...

विजय पूरे खेल में तीन बार झडा और भेदभाव ना करते हुए वो एक बार मेरी के अंदर भी झडा ,और एक बार दोनो के चहरे पर...दोनो औरते अब पूरी तरहः से नंगी थी और पसीने से भीगी हुई थी ,विजय ने ना जाने कितनी बार उन्हें चरमसुख तक पहुचा दिया था……………

अध्याय 53

“तुम पागल हो गयी हो”

“भैया वो अच्छी लड़की है ,”

“तो,जानती है ना अब वो हमारी बहन है”

“तो क्या हुआ और अपने तो मुझे प्रोमिश किया था ”

“देखो निधि तब की बात और थी अब की और है,

“क्या बदल गया”

“अरे पागल लड़की तुझे इतना भी समझ नही आता क्या,बड़ी नेता बनकर घूमती है ,अब वो हमारी बहन है “

“तो क्या हुआ “

“अब तू इस टॉपिक में मुझसे बात नही करेगी बस”

निधि अजय को घूर रही थी,

“अब ऐसे घूरना बंद कर ,और मुझे काम करने दे,इतने लोग आये है यहां और तू ये सब बात कर रही है और ये विजय कहा चला गया,”अजय वहां से जाने को होता है,लेकिन निधि ने उसका हाथ पकड़ रखा था ,

“अब छोड़ भी दे “

“आप मुझसे गुस्सा हो “

“नही जान मैं अपनी प्यारी बहन से कैसे गुस्सा हो सकता हु “

“तो जो बात मैंने कही वो करोगे ना ,खुसबू अच्छी लड़की है भइया “

“अच्छा लेकिन तुम तो उसे पसन्द नही करती ना “

“वो मेरे भइया को मुझसे छीन लेगी तो मैं उसे क्यो पसंद करूँगी लेकिन भइया सच में वो बहुत अच्छी है और वो आपसे बहुत प्यार करती है उसकी आंखों से पता चलता है…”

“मैंने कहा ना की अब उस टॉपिक में कोई बात नही “

“मैं तो करूँगी आप को गुस्सा आये तो आय “

अजय सर पकड़ लेता है,

“ठीक है करते रह बात लेकिन मूझे छोड़ दे अभी काम है ना बेटा “

“ठीक है “

अजय उसके माथे में एक प्यार भरा चुम्मन देखर वहां से निकलता है मेहमान सभी अपनी मस्ती में थे,लेकिन विजय को ना देखकर अजय थोडा चिंतित हो जाता है ,तभी उसे सोनल खुसबू और नितिन आते हुए दिखते है

“अरे सोनल अजय कहा है “

“भैया वो तो किसी काम से गए है “

“कहा “

“अरे वो मेरे ही काम से बाहर गए है “

“घर में इतने लोग आये है और तुमने उसे बाहर भेज दिया ,तुम लोग भी ना “

अजय के जाने के बाद नितिन और खुसबू उसे देखने लगते है

‘क्या देख रहे हो चलो यार पार्टी इंजॉय करते है “

खुसबू की नजर अभी भी बार बार अजय की ओर चले जाती थी,अजय ने उसे महसूस तो किया लेकिन हर बार उसे इग्नोर कर दिया,

“क्या देख रही हो मेरी जान “

सोनल ने खुसबू को कोहनी मरते हुए पूछा

“बस देख रही हु की तेरे भइया कितने अच्छे है “

वो हल्के से शर्मा गयी

“अच्छा “

“हा “

“तो बात चलाऊ क्या ,भइया “

“अरे नही “

लेकिन तब तक अजय सोनल की बात सुन चुका था और वो उसके पास आ जाता है,

“क्या हुआ सोनल “

“भइया ये खुसबू है “

“हा जानता हु ,बडें मामा की बेटी और तुम्हारी दोस्त ,और मेरी प्यारी बहन “

अजय ने अपना हाथ खुसबू के सर पर चलाया लेकिन इससे खुसबू को जरा भी अच्छा नही लगा ,वो जिसे अपना पति

मानती थी वो उसे अपनी बहन बनाने में लगा था,सोनल का भी चहरा उतर गया था और अजय सब समझता भी था पर वो जानबूझ कर ऐसा कर रहा था ,वो फिर से दोनो परिवारों के बीच कोई भी दीवार नही बनाना चाहता था,तभी अभिषेक की इंट्री हुई ,

“नमस्ते सर “

“ये क्या सर सर लगा के रखा है ,तुम मुझे भैया ही कहा करो ,और ये है मेरी बहने सोनल और खुसबू,और ये है अभिषेक हमारे कॉलेज के प्रेजिडेंट और पार्टी के बड़े ही अच्छे कार्यकर्ता और धनुष निधि के बहुत अच्छे दोस्त “

अभिषेक तो खुसबू को बस देखता ही रह जाता है ,वो भी निधि से कम हसीन ना थी और सोनल वाह

‘साला इसके परिवार की तो हर लड़की माल है ‘अभिषेक मन में सोचता है

“हलो मेम “

“क्या मेम लगा के रखे हो भइया ने बोला ना तुम हमे भी दीदी ही कहो “

सोनल ने उसे खिंचते हुए कहा ,तभी निधि ,धनुष सोनल और बाकी बच्चे भी आ गए वहां विजय के अलावा सभी थे ,अजय ने उन्हें थोड़ा कंफर्ट देने के लिए वहां से जाना ठीक समझा ….

प्रदेश के कुछ मंत्री भी वहां पहुचे थे थोड़ी देर में मुख्यमंत्रि भी पहुच गए ,अजय भी उनका स्वागत करने सभी बड़ो के साथ ही खड़ा था …

“तो अजय कैसे चल रहा है तुम्हारा कारोबार “

मुख्यमंत्रि राजन बंसल साहब ने खाने की प्लेट से एक टुकड़ा उठाते हुए कहा ,सभी नेता और बड़े लोग एक साथ ही बैठे थे ,बंसल के बाजू में अजय खड़ा था और बाली और गजेंद्र उसके आजु बाजू में बैठे थे ,

“बस बढ़िया है सर आपकी कृपा है “

“यार लेकिन तुम इस कृपा का गलत फायदा उठा रहे हो …”जिसने भी उसकी आवाज सुनी वो उन्हें ही देखने लगा …

“मैं समझा नही “

“मैं तुम्हारी पार्टी की बात कर रहा हु ,देखो यहां तो विपक्ष के लोग भी आये है और सरकार में बैठे लोग भी….लेकिन यार तुम्हे क्या पार्टी बनाने की जरूरत पड़ गयी “

“अरे सर वो तो बस बच्चों के कारण ,और वो कोई राजनीतिक पार्टी नही है ,बस बच्चे कुछ काम करना चाहते है तो साथ मिलकर कर रहे है.

”

“अरे तो हमारी पार्टी जॉइन करा दो उन्हें हम भी तो समाज की भलाई के लिए ही काम कर रहे है “

अजय के चहरे में बस एक मुस्कान आ गई

“अरे बंसल साहब क्या आप अजय को भड़का रहे हो ,और आप कितना समाज की भलाई के लिए काम करते हो हमे सब पता है “

ये आवाज विपक्ष के नेता की थी ,

“अरे चुप करो यार तुम सब क्या इसे संसद समझ रखा है ,तुम लोग दोस्त हो इसलिए यहां बुलाया और तुम यहां भी चालू हो रहे हो “

गजेंद्र ने दोनो को ही झपडते हुए कहा और दोनो ही बस बदले में हकले से मुस्कुरा दिए

“और अगर मेरे बच्चे राजनीति में आ गए ना बेटा तुम दोनो की गद्दी चले जाएगी समझ गए ना अपनी गद्दीयां बचा के रखो हा हा हा “गजेंद्र ने फिर कहा और सभी हस पड़े …

“हा ये बात तो है “बंसल ने भी मुस्कुराते हुए कहा

कार्यक्रम समाप्त होने को आ रहा था शाम होने वाली और विजय अभी भी दोनो स्त्रियों की ठुकाई में व्यस्त था,बंसल ने जाते हुए अजय को अकेले में बुला ही लिया …

“देखो अजय बाली और गजेंद्र दोनो ही मेरे दोस्त रहे है और दोनो ही हमे बहुत बड़ी राशि चंदे में देते है ,लेकिन मेरी बात को याद रखना अगर कभी राजनीति में आने की जरूरत महसूस हो तो हमारे ही साथ आना ,राजनीति बहुत ही खतरनाक चीज है ,मैं तुमसे ये कह रहा हु क्योकि तुम समझदार हो...और तुम इतना भी जानते होंगे की हम अगर 15 सालो से सत्ता में है तो इसकी कोई तो वजह होगी ,यहां साम दाम दंड भेद सभी का सहारा लेना पड़ता है ,और मैं कभी नही चाहूंगा की तुम्हारे जैसा इतना ताकतवर परिवार हमारे पार्टी का दुश्मन बन जाय “

इस बार बंसल के चहरे पर कोई भी मुस्कुराहट नही थी ,अजय ने उसे महसूस किया उसे कुछ अजीब सा अहसास हुआ ,जैसे बंसल उसे सीधे सीधे धमका रहा है ,

“अच्छा मैं चलता हु “बंसल अपने कार में बैठने लगा

“रुकिए मुझे आपसे कुछ और भी बात करनी है मैं आपके साथ कार में ही चलता हु थोड़ी दूर उतर जाऊंगा “

बंसल के चहरे में एक मुस्कान आ गयी जैसे उसे मनमांगी मुराद मिल गयी हो ,लेकिन वहां खड़े बाकी लोग अजय को अजीब नजरो से देखने लगे ,अजय ने कलवा को बस कुछ इशारा किया कलवा ने भी सर हिलाया और अजय बंसल के साथ उसकी गाड़ी में बैठ गया …

“तो अजय क्या कहना चाहते हो “

“बस यही की आप इतने क्यो डरे हुए है “

बंसल ने अजय को थोड़े आश्चर्य से देखा

“तुम सचमे समझदार हो अजय ,तुम्हारी पार्टी का जनाधार बढ़ रहा है और उससे वो लोग भी जुड़ने लगे है जिन्हें राजनीति में जगह नही मिल पाई थी ,माना की अभी वो बस एक छात्र संगठन है लेकिन कब तक जो लोग तुम्हारे साथ जुड़ रहे है वो उसे बस एक समाज सेवी संगठन बनकर नही रहने देंगे ….

और मेरे डर का कारण ये है की अगला चुनाव बस आने को ही है ऐसे में अगर तुम्हारी पार्टी ने चुनाव लड़ा तो …”

“आपको डर है की आपकी सीटे उन्हें मिल जाएगी ,क्योकि वो बहुत एक्टिव है और आपकी सरकार से लोग बोर हो चुके है “

बंसल मुस्कुराया

“विपक्ष से लड़ने को हमारे पास पूरा प्लान है ,उनकी सभी कमियां हमारे पास है ,सभी किच्छा चिट्ठा हमे पता है ,लेकिन इस बार हमारे खिलाफ भी बहुत ही जनाक्रोश है अगर तुमने पार्टी उतारी तो शायद तुम्हे कोई फायदा ना हो पर हमे घटा जरूर होगा,विपक्ष जीत सकता है ,जिससे तुम्हे कोई फायदा नही होगा ,लेकिन मेरा 4था कार्यकाल पूरा करने का सपना खतरे में पड़ जाएगा ….तुम हमारे आदमी हो और तुम्हारे दादा के साथ मैं भी लड़ा था,तुम्हारे पापा भी मेरे अच्छे दोस्त रहे है ,हम दोनो ही बहुत ही मुस्किलो से ऊपर उठे है ,तुम हमारे साथ आ जाओ...निधि और धनुष को मंत्री पद दिला देंगे हमारे ही बच्चे है दोनो ,अबतक के सबसे युवा मंत्री होंगे हमारे बच्चे उनका शौक भी पूरा हो जाएगा और मेरा सपना भी …”

बंसल की बात पूरी की पूरी अजय को समझ आ गई लेकिन उसे भी पता था की लोग सरकार से कितने परेशान है ,उसे भी एक्टिव पॉलिटिक्स में जाना था और ये एक अच्छा ऑप्शन हो सकता था लेकिन ………

“आपकी बात तो ठीक है सर पर अभी तो उन्हें बहुत कुछ सीखना है और जहा तक रही राजनीति की बात तो हा हम राजनीति में आ रहे है लेकिन किसी भी पार्टी के साथ नही ….जब हम आप लोगो को चंदा देकर जीता सकते है तो अपने बच्चों को क्यो नही ,हा अगर आपको सरकार बनाने में हमरी मदद लगेगी तो हम आपका समर्थन जरूर करेंगे लेकिन विधायक तो हम जीत कर ही बनेंगे और वो भी अपनी पार्टी से ….

बंसल का चहरा उतर गया उसे शक तो था लेकिन अब ये यकीन हो गया ,ये सब अजय का फैलाया हुआ जाल ही था ,वो धीरे धीरे अच्छे लोगो को दूसरी पार्टीयो से खीचकर अपनी पार्टी में मिला रहा था ,वो सभी उसके समाज सेवा कार्यक्रम का हिस्सा होते थे वो लोग अपनी पार्टीयो में रहते हुए अजय की पार्टी के साथ काम कर रहे थे ,क्योकि अजय की पार्टी कोई पॉलिटिकल पार्टी नही थी किसी को भी शक नही होता लेकिन बंसल ने ये भांप लिया था ,

“तुम तो सीधे दुश्मनी पर उतर आये यार …”

“अपने ही कहा था सर की राजनीति में कोई किसी का सगा नही होता ,”

अजय के चहरे पर एक मुस्कान आ गई

“अजय राजनीति गंदी चीज है और तुम अच्छे आदमी हो तुम्हारे जैसे आदमी को ये सब सोभा नही देगा “

“आप भूल गए की तिवारी और ठाकुर परिवार एक हो चुका है और तिवारी कमीनेपन में आप सबके बाप रह चुके है ,वही ठाकुरो का जनाधार आज भी कायम है ,आप अपनी गद्दी बचाइए बंसल साहब,हमारे क्षेत्र से तो जितने की सोचना भी भूल जाइये …..

”

एक लड़का जो उनके ही सामने पैदा हुआ था ,बंसल को ऐसी बाते बोल रहा था,बंसल साहब की तो भवे चढ़ गयी लेकिन थे तो वो भी एक माने हुए राजनितज्ञ ,उन्हने अपने को शांत ही रखा

“सोच लो अजय आज तुम जितना सोचते हो उससे कही ज्यादा पवार हमारे पास है,अब जमीदरियो का दौर गया और दौर गया की लाठी के बल पर बाहुबली बने फ़िरो ,आज पुलिस और सत्ता से ज्यादा पावरफुल कोई भी नही है “

“जानता हु सर इसलिए तो कह रहा हु ,ये सत्ता आती कहा से है ,ये भी तो जनता के द्वारा ही चुनी जाती है ,और लोकतंत्र में जनता से पावरफुल कोई नही हो सकता और मेरे पास आज जनता का सपोर्ट है,हमारे पूर्वजो ने कभी यहां राज किया था,और जनता आज भी हमे अपना राजा मानती है ……….”

अजय की आंखों में ऐसी चमक बंसल ने कभी नही देखी थी ये एक अजीब सी चमक थी,अजय का रूप कुछ अलग सा हो गया था ,मानो सचमे कोई राजा हो ….बंसल के दिमाग में ये बात कौध गई,वो अजय के दादा और पिता(वीर )के साथ भी काम कर चुका था ,उसने ये चमक उसके दादा में देखी थी लेकिन कभी वीर में वो चमक नही दिखी वीर को तो अपने को सम्हालने में ही बहुत वक़्त लगा था,लेकिन अजय में वही चमक,जनता आज भी हमे राजा मानती है,बंसल उस वाक्य को खोजने की कोसिस कर रहा था ,यहां के जमीदार तो तिवारी थे ,फिर राजा ठाकुर कैसे हो सकते थे??????

तिवारियो की जमीदारी जिस राज में आती थी वो भी किसी दूसरे रियासत में थी ,हो सकता था की ये उन्ही ठाकुरो के परिवार से संबंध रखते हो जो वहां के रियासत के राजा थे ,लेकिन इसके बारे में बंसल को नही पता था,

“तुम कहना क्या चाहते हो अजय “इसबार बंसल की आवाज कुछ धीमी थी ,

“कुछ नही सर बस हम आपकी बहुत इज्जत करते है और भले ही हम राजनीतिक रूप से प्रतिद्वंदी हो जाय लेकिन आप हमारे पिता के मित्र रहेंगे और आपके लिए हमारे दिल में सम्मान कभी भी खत्म नही होगा”

बंसल के चहरे पर एक मुस्कान आ गई

“तुम्हे भी हमारी कभी भी जरूरत पड़े तो याद करना,लेकिन फिर भी मैं तुम्हे ये हिदायत दूंगा की राजनीति से दूर रहो वो तुम्हारे बस का नही है ,और मैं तुम्हारे लिए हमेशा शुभकामना करूँगा “

गाड़ी रुकती है और अजय बाहर निकलता है,और पीछे आ रही गाड़ी जिसमे कलवा सवार था बैठकर फिर से अपने हवेली की ओर चल पड़ता है…..

वहां सभी अजय का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे ,सभी मेहमान जा चुके थे केवल दोनो परिवारों के लोग ,डॉ चुतिया ,बस बचे थे …

“क्या हुआ अजय ऐसे बंसल के साथ कहा चले गए थे…”गजेंद्र चिंतित होते हुए पूछता है..

अजय उसके कंधे पर हाथ रखता है ,

“कुछ नही मामा जी बस अब हमारा राज फिर से प्राप्त करने का समय आ गया है…”

सभी उसे प्रश्नवाचक निगाह से देख रहे थे,

वो बाली की तरफ देखता है ,

“कल केशरगढ़ चलना है “

बाली उसे आश्चर्य से देखता है और अजय बिना कुछ बोले ही वहां से चला जाता है ……...

अध्याय 54

“भइया हम केशरगढ़ क्यो जा रहे है,”

निधि अपने भाई के बाहों में आकर लेट गई.

“क्योकि हमे वहां कुछ काम है “

“क्या काम है भइया “

“तुम्हे रानी बनाना है”

“अरे आप भी ना रानी तो राजा की होती है ,”

“हा वो तो है बहन ,तो राजकुमारी बनाना है “

“अरे लेकिन राजकुमारी तो वो होती है ना जिसके पापा राजा होते है “

अजय उसकी बात पर उसे देखने लग जाता है ,अजय की प्यार भरी आंखे जैसे ही निधि से मिलती है निधि उठकर उसके होठो को चुम लेती है,और फिर उससे लिपट कर उसके सीने में छिप जाती है.

“भइया बताइये ना “

“हमारे पापा राजा ही थे बेटा बस उन्होंने हमे बताया नही “

“क्या “निधि जैसे खुसी और आश्चर्य से उछल जाती है,

“हा”

“पर भइया हम कहा के राजा है”

“केशरगढ़ “

“हा हा हा “निधि जोरो से हँसती है

“अच्छा मजाक था भइया ,हम उस खण्डर के राजा है ,जहा कुछ भी नही है उससे अच्छा तो हमारी हवेली है “

“केशरगढ़ कोई किला बस नही है निधि ,वो एक जगह थी कभी,जिसके अंदर आज के कई शहर आते है, हम वहां के राजपूत ठाकुरो के वंसज है ,जिसका हमारे दादाजी को पता था लेकिन उन्होंने कभी इसका जिक्र हमारे पापा से नही किया क्योकि इसका कोई भी मतलब नही था लेकिन अब उसका बहुत मतलब होने वाला है…”अजय गंभीर था ,और निधि परेशान

“ये क्या बोल रहे हो भइया “

“तू मेरी सबसे प्यारी गुड़िया है और तुझे मैं एक राजकुमारी बनाऊंगा “

निधि अपने भाई को बड़े ही प्यार से देखते है ,

“सच में “

“हा मेरी जान सच में “वो उसके माथे में एक किस करता है ,

तभी उसकी नजर निधि के हाथो में पहने एक पतले से घड़ी पर जाती है ,वो उसने पहले कभी नही देखी थी ,

“ये घड़ी ???”

“अभी ने दी है अच्छी है ना “

“कौन अभी “

“अरे भईया अभिषेक …”

“ओह हा अच्छी है,”

अजय उस घड़ी को ध्यान से देखता है ,और थोड़ा गंभीर हो जाता है .

निधि अजय को ऐसे गंभीर देख कर उसके गालो को अपने हाथो से सहलाती है

“क्या हुआ भइया “

“कुछ भी तो नही “

“बताओ ना “

“तुम अभिषेक को पसंद करती हो ???“

निधि थोड़ा सा शर्मा जाती है साथ ही उसका दिल जोरो से धड़कता है वो अजय से सटकर सोई थी अजय को उसके धड़कन का आभास हो जाता है,

“ये कैसा सवाल है भइया,वो मेरा अच्छा दोस्त है “

“बस दोस्त है या दोस्त से कुछ जाता “

“आप भी ना कुछ भी बोलते हो दोस्त से ज्यादा क्या होगा,और मैं किसी को भी अपना भाई नही बना लेती जैसे आप बना लेते हो …”

निधि ने अपना मुह फूलते हुए कहा ,अजय ने उसे देखा जैसे पूछ रहा हो किसीके बारे में बोल रही है

“क्या देख रहे हो वो खुसबू …”

“वो हमारी बहन है समझी “

“बहन होगी आपकी मेरी तो भाभी है”

“चुपकर पागल कही की और बात मत घुमा जो पूछा वो बता ना “

“मैं बात नही आपको घुमा दूंगी मैं राजकुमारी हु वो भी केशरगढ़ की ,समझे “

निधि ने बात सचमे घुमा दिया था और अजय को पता था की उसे क्या करना है वो बात को वही छोड़ देता है और उसे अपने बहन की बदमाशियों में बहुत प्यार आता है ,

“अच्छा मेरी राजकुमारी जी पहले ये घड़ी उतार दो कही तुम्हारे अभी की घड़ी टूट ना जाय,जाओ अपने रूम के रख दो “

निधि मुह बनाते हुए चले जाती है...

“अच्छा मेरी राजकुमारी जी अब आज्ञा हो तो सो जाय …”

“राजकुमारी चाहती है की आप उससे प्यार करे ,वो पलंगतोड़ वाला “

निधि अपना जीभ निकल कर उसके होठो पर रख देती है ,और अजय उसके जीभ को अपने दांतो से दबा लेता है,और हल्के से काटता है ,निधि झूठे गुस्से से अजय के छाती में एक मुक्का मरती है ,

“चूसने को दिया था काटने को नही “

अजय बस उसे देखने लगता है ,कितनी प्यारी थी निधि ,और अभिषेक ….उसका तो पता करना पड़ेगा,अजय निधि को किसी भी के भरोसे नही सौप सकता था जबकि उसे पता था की उसके कई दुश्मन घूम रहे है,और सभी को पता था की निधि ही अजय की सबसे बड़ी कमजोरी है,अजय निधि को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाना चाहता था ना की कमजोरी…

अजय निधि को निहारते निहारते फिर से अपने विचारों में खो गया था,

“आउच ,क्या कर रही है “निधि की खिलखिलाहट उसे सुनाई दी ,निधि ने अजय निचले होठों को जोरो से काटा था,

“कहा खो जाते हो जल्दी से आओ कल सुबह जल्दी से जाना है ना “

“तेरी तो “

अजय पूरे ताकत से निधि को पकड़कर बिस्तर में डाल देता है और फिर से उनके प्यार का करवा चल पड़ता है….

सुबह से सभी तैयार होकर केशरगढ़ की ओर निकल जाते है साथ में तिवारियो का परिवार भी था,सभी को यही उत्सुकता थी की जो अजय ने उन्हें बताया है क्या वो सच है,अगर वो सच होता तो हजारों सालो का वो रहस्य खुल जाने वाला था,और अजय को वो राजगद्दी आधिकारिक तौर पर मिल जाती जो कभी केशरगड़ के राजाओं की थी,

घने जंगलो के बीच वो खण्डर सा किला था,जिसमे किले के अवशेष ही बचे थे,पता नही वहां कौन सा ऐसा खजाना था जिससे अजय को फायदा होने वाला था,जब वहां लोग पहुचे तो देखा की पूरी जगह पुरातात्विक विभाग ने घेर रखा था,

“अरे यहां तो कुछ काम चल रहा है,”

बाली ने वहां मौजूद मजदूरों को देखते हुए कहा

“फिक्र मत कीजिये चाचा डॉ की यहां की सुपरवाइजर से पहचान है,

“सुना है कोई विदेशी महिला है ,इटली से आयी है “

“हाँ मामा जी मैंने भी सुना है “

“अरे तुम लोग क्यो दिमाग लगा रहे हो हमारी ही बंदी है …”डॉ ने सबको टोका ,

सामने से एक अग्रेजो जैसे गोरी हल्की मोटी सी लगभग 35-40 साल की महिला आ रही थी ,जो डॉ को देखते ही उसे हाथ हिलाकर दिखती है ,उसे देखकर मेरी (सेकेट्री ) भी बहुत खुस हो जाती है ,वो पास आकर डॉ के गले से लगती है ,

“वाओ डॉ बहुत दिनों बाद मिले “

“बस इधर आना ही नही होता यार “

“वाओ ये तो मेरी है ना इकबाल भाई की वाईफ ,कैसे है इकबाल भाई ,सुधरे की तुमने उन्हें छोड़ दिया “

“नही दीदी वो तो नही सुधरे मै उन्हें छोड़ कर अब डॉ साहब की सेकेट्री बन गई हु “

दोनो गले मिलते है,

डॉ उसका परिचय बाकियों से कराता है,

“ये मलीना है ,यहां की सुपरवाइजर .15 साल पहले ये यहां आयी थी तब इस जगह पर किसी का भी ध्यान नही गया था .आज इसके मेहनत से इसने यहां के इतिहास को जानने में बहुत मदद मिली और साथ ही मिला कुछ कीमती चीज ,कुछ तस्वीरे,कुछ लेख ,और एक सुराग जो बताता है की यहां से उनके परिवार के लोग आखिर गए कहा,अभी कोई भी ऐसा नही सामने आया जो उनका वंसज होने का दावा करे ,आज भी यहां के लोग उन्हें ही अपना राजा मानते है ,अगर अजय या आपके परिवार के किसी भी का डीएनए यहां मौजूद खून के छिटो से मिल गया तो ये साबित हो जाएगा की आप ही इनके वंसज है ….

”

“लेकिन इससे हमे क्या फायदा होगा “

विजय ने सवाल किया

“इससे हमारी शाख का हमे पता चलेगा …”

अजय के चहरे में एक अजीब सी चमक आ गई ,

“मुझहे लगता है,मलीना जी की मैंने आपको कही देखा है …”

बाली की बात से डॉ और मलीना दोनो ही हँस पड़े ,

“क्या यार बाली आप भी हमे भूल गए ,”

मलीना ने उसे हँसते हुए देखा

“सच में याद नही आ रहा है की कहा देखा है ,तुम काजल की दोस्त हो क्या “

मलीना और डॉ जोरो से हँसते है,

“पकड़ तो लिए बाली जी ,लेकिन आपको काजल याद रही हम नही “

“सॉरी यार “

बाली भी आकर मलीना के गले लगता है,

“साले बाली काजल को तू कैसे भूलेगा “

डॉ उसे कोहनी से मारता है,

“चुप कर बे मरवाएगा क्या “

“तो कैसे है विकास और काजल “

काजल का नाम लेते ही बाली के चहरे में एक चमक सी आ गई थी ,

“बहुत अच्छे है ,विकास अब IAS बन चुका है और काजल का वही पुराना होटल का बिजनेस …”

“हम्म आदित्य इंटरनेशनल”

“चलिए जब यहां तक आ गए तो कभी उनसे भी मिल लीजिएगा,ऐसे आप तो हमे भूल ही गए “

“हा भैया के मौत के बाद से सबकुछ बदल सा गया “

“बहुत दुख हुआ वीर का सुनकर ,इतना अच्छा इंसान था ,दोस्तो के लिए जान देंने वाला “

डॉ सभी का परिचय एक एक कर मलीना से करता है,

“ऐसे गजेंद्र और महेंद्र तुम भी इसके पिता जी को जानते हो “

दोनो डॉ को धयन से देखते है ,

“ये मिश्रा जी की बेटी है ,मिश्रा जी याद है जो कभी चीफ सेक्टरी हुआ करते थे “

“यार उन्हें कैसे भूल सकते है ,बहुत अच्छे इंसान थे ,दुख हुआ उनके बारे में जानकर “

मलीना के चहरे पर एक फीकी मुस्कान आ गई

“हा अच्छे इंसान तो थे……..”

डॉ अपना हाथ उसके कंधे में रखता है,

(नोट-मलीना ,काजल ,विकास,इकबाल,मिश्रा के बारे में ज्यादा जानने के लिए मेरे दूसरी कहानी बीवी के कारनामे पढ़े )

“तो कौन है हमारे राजा साहब “

“ये “

अजय आगे आता है,मलीना उसे ध्यान से देखती है,

“पूरा वीर है ये तो ,मैं जब वीर को पहले बार देखी थी तभी समझ गई थी की वो किसी राजघराने से होगा,राजाओं की तरह पर्सनाल्टी थी उसकी ...अजय तुम्हारा ब्लड सेम्पल चाहिए होगा मुझे,और आइए आप सब आपको कुछ दिखाना है ….

”

खण्डर सा हो चुका वो महल आज बड़ा ही अद्भुत लग रहा था सामान्य जानो का वहां आना जाना निषेध था,उनलोगों के उसे खोद खोद कर बहुत सारा भाग बाहर ले आये थे,एक एक पत्थर को साफ किया गया था,और उनमे बनी कलाकृतियां बेहद खूबसूरत लगने लगी थी,

“वाओ “

निधि के मुख से अनायास ही निकल गया,

“भइया मैं तो सोच रही थी की ये बस खण्डर होगा लेकिन ये तो पूरा महल जैसा है कितना सुंदर है,बस थोड़ी छत को बनवाना पड़ेगा “निधि के बात सुनकर सभी हँसने लगे ,अजय ने अपना हाथ उसके सर पर रखा,

“सच में तुमने बहुत मेहनत की है मलीना ,जब मैं पहले यहां आया था तो ये बस अवशेष ही बचे थे,इतना मेहनत किया है तुमने इन सबको सम्हालने में “

“मूल्यवान चीज को सम्हालने और खोजने में मेहनत तो लगती है डॉ ,मैंने तो अपनी पूरी जवानी यही बिता दी तब जाकर कुछ पता चल पा रहा है,ये देखो ये तुम लोगो को देखना चाहिए…”

एक बड़ी सी मूर्ती कमरे के कोने में रखी थी ,थोड़ी टूटी थी लेकिन फिर भी अच्छी कन्डीशन में थी ,

“ये हमे जमीन के नीचे से मिली जब हम इस कमरे को खोदना शुरू किये थे,ये कमरा शायद राजा का कमरा रहा होगा,ये इतना बड़ा है ,कई एकड़ के फैले किले के क्षेत्र के महल के हिस्से में ये सबसे बड़ा कमरा है,और इसकी नक्कासी देखो...अभी तो मुझे और 15 साल लग जाएंगे इस किले को पूरी तरह समझने में “

वो आधी बाते फुसफुसाते हुए कह गई……….

उस मूर्ती को तो सब देखते ही रह गए …

“अब समझे अजय की मैंने तुम्हे ये क्यो कहा था की तुम हो ना हो राजपरिवार के सदस्य होंगे ..”

डॉ ने मुस्कुराते हुए अजय से कहा जो की बड़े ही ध्यान से उस मूर्ति को देखे जा रहा था…

“सचमे अद्भुत …”

बाली और गजेंद्र के मुह से एक साथ ही निकला,

“ये तो हु ब हु भईया जैसी दिख रही है “

निधि भी उछाल गई …

लेकिन मलीना थोड़ी गंभीर थी ,

“मुझे पूरा विस्वास है की तुम राज परिवार के ही वंसज हो ,लेकिन इसे सिद्ध करना बहुत ही कठिन होने वाला है ,यहां के पुरातात्विक विभाग के अधिकारी इस मूर्ती को यहां से ले जाना चाहते है ...वो ऐसे तो कह रहे है की वो इसे किसी म्यूजियम से रखेंगे लेकिन मेरा ख्याल है की ये इसे नष्ट करने की कोसिस करेंगे ..”

“क्यो ,कही बंसल तो इसमें इन्वॉल्व नही है”

अजय की बात से मलीना उसे देखने लगी जैसे की उसने उसके मन की बात समझ ली हो …

“हा मुख्यमंत्रि का इतना प्रेशर कभी नही था,पहले भी कहा गया था की इस मूर्ति के बारे में किसी को भी भनक ना लगे,और इसे कई बार यहां से ले जाने की कोसिस भी की गई थी लेकिन मेरे दबाव में सभी झुक जाते थे ,लेकिन इस बार तो हद हो गई मुझे ही चार्ज से निकलने की धमकी दे दी..

जब मैंने पहली बार इस मूर्ति को देखा था तो मुझे ये बहुत कुछ वीर की याद दिलाता था,लेकिन तबतक वीर की मौत हो चुकी थी ,बंसल साहब भी इसे देखकर शॉक हो गए थे,और उन्होंने आनन फानन में ही मुझपर दबाव डाला था की इस मूर्ती को यहाँ से गायब कर दिया जाय ,लेकिन मेरे पास यहां का फूल चार्ज था और सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरातात्विक महकमो के दबाव में आकर बंसल चुप हो गया ,कभी कभी और भी कोसीसे की गई पर वो भी नाकाम हो गई ,बदले में राष्ट्रीय विभाग ने उन्हें लताड़ भी दिया,तब से वो चुप बैठ गया,लेकिन कल से उसने पूरी ताकत लगा दी है इस मूर्ती को यहां से ले जाने की आज शाम तक वो परमिशन भी ले आएगा,...मुझे तो लगता है की वो चाहता ही नही की राजाओं के वंसजो का पता चले….मुझे समझ ही नही आ रहा है की क्या किया जाय ”मलीना कहते हुए रुक गई

“आप आज छुट्टी ले लीजिये ,आपकी तबियत आज अचानक खराब हो जाएगी “

“क्या “अजय की बात मलीना को समझ नही आयी

“ये मजदूर कहा के है ,और आपके सिवा यहां और कौन कर्मचारी या अधिकारी है “

“सभी मजदूर तो पास के गांव वाले ही है ,कुछ कर्मचारी है जो अलग अलग काम देखते है ,और कुछ जूनियर भी यहां पर होंगे...कुछ बाहर के होंगे कुछ आये नही है..”

“ठीक विजय ,नितिन ,धनुष,किशन,राकेश ….सभी को ख़रीद लो ,और आप यहां से चले जाइये आज की छुट्टी ले लीजिये..सभी को समझा दो की हम यहां आये ही नही थे,चाचा जी,मामा जी प्रेस को फोन लगाइए,जितने भी हमारे विस्वसनीय लोग प्रेस में है सबको काल कीजिये किसी को भी भनक नही लगनी चाहिए की वो क्या रिपोर्टिंग करने वाले है,और आज दोपहर तक ये मूर्ती इंटरनेशल न्यूज़ होनी चाहिये,हर एंगल से इसका फ़ोटो खीचकर छपवाये और हम भी यहां से निकलते है बस कुछ लोग यहां देख रेख में होंगे विजय तुम नितिन के साथ रुक जाओ ,जैसे ही न्यूज़ वाले आ जाए हम भी आ जायेगे,आसपास से भीड़ भी इकठ्ठी करनी है ,कलवा चाचा बजरंगी चाचा आप ये काम करो ,लोगो को अपनी गाड़ी में भरकर लाओ और यहां एक माहौल तैयार कर दो...एक बार इंटरनेशनल लेबल में बात पहुच गई तो बंसल का बाप भी इस मूर्ती को नष्ट नही पायेगा...ये हमारे लिए बहुत ही इम्पोटेंट है,पैसा बहा दो सबको खरीद लो ,जितना चाहे उतना दे दो ……”अजय के फैसला सुनने की देरी थी की सभी अपने काम में व्यस्त हो गए…

मलीना आंखे फाड़कर देखने लगी ,

“आप अगर ये कल ही बता देती तो शायद अभी तक ये इंटरनेशल न्यूज़ होती “

“लेकिन इससे तुम्हे क्या मिलेगा,अगर तुम राजा के वंसज साबित भी हो जाते हो तो भी ये प्रोपर्टी तो सरकार की ही होगी और यहां से तुम एक ढेला भी नही ले जा पाओगे “

“मुझे बस वो नाम चहिये आपको पता नही की बंसल इसके पीछे हाथ धो कर क्यो पड़ा है,ये इस राज्य की राजनीतिक साख की बात है …….”

मलीना बस उसके चहरे को देखते रह जाती है...

अध्याय 55

“नही मुझे कुछ नही पता “

एक जोर का डंडा फिर से अभिषेक के पेट में पड़ता है,

और उसकी चीख सुनाई देती है……..

“बस करे क्या भाई अब तो भूख भी लग गयी,”

राकेश की आवाज सुनाई देती है,

“अबे तुम अभी इस परिवार का हिस्सा बने हो हमारा तो नियम है पहले जी भर के मारो फिर जी भर के खाओ “

विजय ने हँसते हुए कहा और फिर डंडा घुमा दिया,अभिषेक के चीख के साथ ही किशन और विजय की हँसी निकल गई,

तभी गेट खुला और अजय और नितिन कमरे में आते है,वो एक गेरेज जैसा कमरा था जहा ज्यादा समान नही थे,बीचो बीच अभिषेक को उल्टा लटकाया गया था,जो की बस एक जीन्स पहने था,ऊपर वो कुछ भी नही पहने था और डंडों की चोट साफ नजर आ रही थी,

“चलो साले की किश्मत अच्छी है की भैया आ गए”

किशन की भी हँसते हुए आवाज अभिषेक को सुनाई दी और वो भी थोड़ा रिलेक्स हुआ…..

“क्या कहा इसने”

अजय का पहला सवाल यही था,

“बोलता है कुछ पता नही “

विजय ने साफ शब्दो में कहा

“अच्छा नीचे उतार”

अजय के आदेश मिलते नही उन्होंने उसे नीचे उतार के बैठा दिया,

अजय और नितिन उसके पास ही गए थे की अभेसेक का रोना शुरू हो गया,

“भइया मैं सच कहता हु मुझहे कुछ भी नही पता,आप लोग मुझे क्यो उठाकर लाये है मुझहे समझ नही आ रहा “

“घड़ी……...याद है ना जो तूने निधि को दी थी ,उसमे एक माइक्रोफोन था ,हमारी बात सुनकर तू क्या करना चाहता था,बस इतना बता दे,तेरा बाप तुझे हर जगह ढूंढ रहा है,मैं नाही चाहता की उसके इकलौते बेटे लाश उसे मिले वो भी ऐसे की वो उसे पहचान ना पाए “

अजय ने बड़े ही सरल शब्दो में अभिषेक को समझा दिया,लेकिन नितिन के लिए ये पहली बार था ,किसी के साथ इस तरह पेश आना उसे तो इसकी भनक भी नही थी,वो थोड़ा चौका तो जरूर लेकिन उसे भी याद आया की वो भी तिवारियो के परिवार से है जंहा ये सब घटनाये रोज का काम है…

“मुझे तो ये घड़ी मिस्टर एक्स ने दी थी निधि को देने के लिए ….बस भइया मुझहे इससे ज्यादा कुछ भी नही पता “

“भाई ये जबसे हमे चुतिया बना रहा है मिस्टर एक्स बोल कर बोलो तो इसकी खाल खिंचवा दु “

इसबार विजय सचमे गुस्से में था ,लेकिन अजय ने उसे रुकने को कहा

“कौन है ये मिस्टर एक्स “

अभिषेक पूरी कहानी बताने लगा की कैसे एक आदमी उसे मिला और निशि की तस्वीर दिखाकर उसे बहलाया ,कैसे उसने ही उसे चुनाव में खड़े होने को कहा और वो दोनो परिवारों से इतनी नफरत करता है...उसका नाम किसी को नही पता लेकिन जो भी उसे जानते है वो उसे मिस्टर एक्स के नाम से जानते है,उन्होंने ही उनकी गाड़ी पर हमला कराया था और शायद उनके पिता की हत्या के पीछे भी उसका ही हाथ है,और उस घड़ी से उसे ये भी पता चल गया की वो केशरगढ़ जा रहे है,लेकिन वो कुछ भी नही कर पाया,अब उसका प्लान उनकी बहनों को पटा कर …………..

“अभेसेक उससे आगे नही बोल पाया क्योकि उसे पता था की उससे आगे सुन पाना शायद ना तो अजय ना ही नितिन के लिए संभव था,वो बस इतना ही बोल पाया की उनकी नजर निधि और खुसबू पर है………

अजय और नितिन जो अपन बहनों से जान से भी ज्यादा प्यार करते थे,उसकी बात से आग से जलने लगे लेकिन वक़्त जलने का नही जलाने का था……….

सबसे बड़ी समस्या थी की क्या ऐसी प्रॉब्लम थी की मिस्टर एक्स उनके परिवार को बर्बाद करना चाहता है,

“छोड़ दे इसे जाने दे “

अजय ने विजय को आदेश दिया …

“लेकिन भाई ……”

“बस बोला ना जाने दे इसे ,और अगर वो जो भी हो तुझे मिलने बुलाये तो जरूर जाना लेकिन हमे बताकर ,और तू आज सुबह से यहां था ये किसी को भी पता नही चलना चाहिए ….”

“जी भइया “

अजय उसके पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखता है,

“देख भाई तूने मुझे भइया कहा है और निधि ने तुझे अपना दोस्त माना है,दोस्त ही नही शायद दोस्त से कुछ ज्यादा ,और मुझे कोई भी एतराज नही है,लेकिन अगर वो लोग कामियाब हो गए तो ना तुझे निधि मिलेगी और ना ही हमारा साथ,तुझे ये सोचना है की तुझे क्या चाहिए ,तू हमारे साथ रह उसके बारे में जो भी तुझे पता चले वो हमे बता ,मैं तो तुझे इस राज्य के मंत्री के रूप में देख रहा था और तू ही यू गद्दार निकला …”

विजय की आंखे लाल हो चुकी थी पर अजय ने उसे इशारे से शांत रहने को कहा वही अजय के प्यार भरे बातो से अभिषेक पिघल गया और रोने लगा,वो अजय से माफी मांगने लगा अजय उसे सहानुभूति ही दिखता रहा और उसे सही सलामत वापस भेज दिया ,.....

“इसपर नजर रखने के लिए आदमी इसके पीछे लगा दे “

अजय के कहने से ही किशन तुरंत ही उसके पीछे वहां से निकल गया…

“माना की आप निधि से बहुत प्यार करते है और हमारे घर के सबसे बड़े आप है लेकिन भाई वो मेरी भी तो बहन है….और आप उसे ये कह रहे है की आपको उससे कोई भी प्रॉब्लम नही है…”

विजय सचमे गुस्से में था…

“बात को समझ उसे अपनी ओर करना सबसे जरूरी था,

“अरे मा चुदाये आपकी ये राजनीति भरी बाते ,आपको पता था की ये हमारी बहन के लिए ये सोच रहा है लेकिन आपने उसे जाने दिया,साले की लाश भी नही मिलनी थी कही …’”

विजय गुस्से को यू पी रहा था की उसके आंखों में पानी आ गए ..

आज पहली बार था की विजय ने अजय के किसी भी फैसले पर सवाल उठा दिया था ,यू तो अजय को भी कहते हुए कुछ भी नही बना वो भी जवाब की तलाश में था…..विजय को अपनी गलती का आभास हुआ और वो कमरे से निकल गया ,अजय के आंखों में बस आंसू थे ...

नितिन अपना हाथ उसके कंधे पर रखता है…

“भाई विजय दिल से सोचता है दिमाग से नही “

नितिन ने अजय को सहानुभूति देते हुए कहा ,

“वो भी निधि से उतना ही प्यार करता है जितना की मैं,बस दिखता नही है,,,सच में नितिन परिवार की जिम्मेदारी निभाते निभाते कुछ फैसले ऐसे भी लेने पड़ते है जो दिल से नही दिमाग से लेने पड़े,उसने कुछ भी गलत नही किया और मैंने भी जो किया वो हमारे परिवार की भलाई के लिए ही था…”

अजय का यू रोना शायद की कोई समझ सकता था,नितिन उसे बस सहारा दे रहा था,...............

अध्याय 56

“छि कितनी बदबू फैला के रखे हो रूम में …”

निधि की प्यारी सी आवाज से विजय चौका जब वो अपने ओल्ड मोंक की बोलत से 4 था पटियाला पैक बनाकर तैयार था,आज उसे इसी हार्ड दारू का सहारा था,वो बड़ा ही परेशान था,निधि यू तो उसके कमरे में नही आती थी लेकिन अजय से सब सुनने के बाद वो खुद को रोक नही पाई थी…

कमरे में घुसते ही उसे रम की वो खुसबू/बदबू आयी (खुसबू उनके लिए जो पीते है और बदबू उनके लिए जो……..छोड़ो यार )

“ये क्या कर रहे हो छोड़ो इसे”

निधि ने ग्लास हाथ से छिनने की कोसीस की लेकिन विजय की लाल आंखे उसे भी थोड़ा डरा गई …………….

“तू यहां क्यो आयी है तेरा तो एक ही भाई है ना जा उसके पास ,मुझे क्या हक है तेरे जिंदगी के फैसले लेने का,जो अजय भइया कहे वही सही है,कोई तेरी जिंदगी बर्बाद भी करदे तो हमे हक नही है बोलने का………”

विजय की आंखों में आंसू थे ,और दिल में एक अजीब सा दर्द जो उसे कभी भी फील नही हुआ था,वो शराब का सहारा ले रहा था,लेकिन शराब साली किसकी सगी है,जब दिल के गम भुलाने को पियो तो गड़े दर्द को और जगा देती है ,...

निधि बेचारी बस उसे देखती ही रह गई वो विजय को प्यार करे या उस लाचारी पर रोये उसे समझ ही नही थी ,लेकिन सोनल जो उनके पीछे खड़े सब सुन रही थी वो गुस्से में आ गई और उसके हाथ से वो ग्लास पकड़कर पटक दिया ….

विजय उसे भारी हुई आंखों से ही देखता रहा…

“हा साले तुझे कुछ भी हक नही है अपने बहनों की जिंदगी के लिए फैसला करने का किया ही क्या है तूने ……”

निधि डरकर सोनल को चुप करने गयी लेकिन उसने उसे अलग कर दिया

“क्या आता है तुझे और क्या जानता है तू अजय भइया के बारे में ,सब कुछ सहकर जिसने हमे इस मुकाम में पहुचाया आज तू उनका ही दिल दुखा आया ,तुझे तो बस यही समझ है की मारो या मारो,और तुझे क्या चाहिये दारू और लड़की ……..”

सोनल के इतने कहने पर ही विजय फफककर रोने लगा निधि जाकर उसे अपने गले से लगा ली,निधि की कमर पर विजय का सर था और वो रोये जा रहा था.लेकिन सोनल का गुस्सा शांत नही होने वाला था,

“क्या बहन की जिम्मेदारी की बात कर रहा है तू….

क्या किया है तूने आज तक बहनों के लिए “

“दीदी बस करो भाई को देखो कितने दुखी है और आप हो की …”

“ए भईया की चमची जा तू जाकर अजय भइया के साथ सो जा ,मेरे भाई को मेरे लिए लिए छोड़ दे ……”

विजय और निधि सोनल का चहरा देखने लगे ….अब सबके आंखों में आंसू था,निधि तो वही बैठ गयी उसे यकीन नही हो रहा था की उसके घर में ये क्या हो रहा है,आज एक भाई किसी एक बहन का तो दूसरा दूसरे बहन का हो गया,

लेकिन कुछ ही देर में सोनल के चहरे पर एक मुस्कान आयी …

“क्यो लगा हुआ ना दर्द ….सोच कैसा लगा होगा भैया को जब तूने उन्हें ये कहा ,उन्होंने हममें कब कोई फर्क समझा जो हम समझ रहे है,और उन्होंने जो फैसला किया है वो कुछ सोचकर ही किया होगा,वो हम सबकी भलाई चाहते है,निधि ,मुझहे और रानी को अगर कोई सबसे ज्यादा प्यार करता है तो वो अजय भइया है ,साथ सोने से ही सब कुछ नही हो जाता समझे…”सोनल के साथ इसबार विजय और निधि भी हल्के से हँसे …

“माफ कर दो यार गलती हो गई बस समझ नही आया उस समय …”विजय मुस्कुराते हुए कह गया

“और भइया आई लव यू ...और मेरे भी भैया है समझी नितिन की gf “

निधि ने विजय के गालो पर एक जोर का किस किया ,लेकिन वो gf वाली बात पर सोनल उसे मारने लगी निधि विजय के पीछे छुप गई ,

,माहौल अचानक ही बदल गया था,निधि विजय के गोद में बैठ जाती है ,

“भइया इतनी बदबू है इसमें आप पी कैसे लेते हो ….”

सोनल और विजय बस मुस्कुरा दिए और जवाब में विजय ने निधि के गालो को पकड़कर एक जोर का किस ले लिया ………….

अध्याय 57

केशरगड़ की खबर जंगल में आग की तरह फैली और कुछ ही घंटे में पुरातत्व के बड़े अधिकारियो का जमावड़ा वहां हो गया,अजय की तरफ से वहां के कुछ बंदों ने सिफारिश भी करदी,और अजय के ब्लड का सेम्पल भी लिया गया,ये भी एक न्यूज़ बन गई की अजय ठाकुर नाम के शख्स ने केसरगढ़ के राजपरिवार का होने का दावा किया,डीएनए टेस्ट के बाद असलियत का खुलासा होगा,,लेकिन उस शख्स का चहरा वहां मिले मूर्ति से हूबहू मिलती है,

बंसल को भी समझ आ चुका था कि उसने देरी कर दी है और अब कुछ भी कर पाना मुश्किल है,अजय को उसका नाम तो मिल ही जाएगा,बस उसे अब राजनीति में उसे आगे बढ़ने से रोकना था,और साथ ही अपने को ज्यादा मज़बूत करना था,

इधर अभिषेक से मिस्टर x (पुनिया ) ने संबंध ही काट लिया क्योकि उसे पता चल गया था की उसे पकड़ लिया गया है,उसे इस बात का भी पता चल गया था की अजय राजनीति में आना चाहता था,उसने बंसल से बात करने की ठानी…

वो अपने दोस्त जग्गू जो की एक तांत्रिक था,के पास बैठा अपने मन की बात कर रहा था,

“तुम्हे क्या लगता है बंसल से बात करना ठीक होगा,”

“तू चुतिया है ,बंसल तो तुझे ही अजय के सामने पेश कर देगा की तू ही उसके मा बाप का कातिल है ,और भूल मत वो राजनीतिज्ञ है कोई चुतिया नही जो तेरी मदद करेगा,अजय के लिये तुझसे बड़ा गिफ्ट क्या होगा,और बंसल बदले में उसे अपने पार्टी में मिला ले तो क्या अजय मना कर पायेगा,नही …….बंसल को इतनी समझ तो होगी ना ..”

“हा यार जग्गू तू ठीक कहता है,लेकिन अब क्या एक मोहरा इतने दिनों की मेहनत से जुटाया था वो भी गया,”

“कुछ तो जल्दी करना होगा,मेरा भी लंड अब सब्र नही कर रहा जबसे इन कमसिन हसीनाओं को देखा है”

पुनिया का तो माथा ठनक जाता हैं,

“साले तुझे बस चुद दिखाई दे रहा है,इतने सालो का बदला भूल गया तू “

जग्गू ने अपने पीले और बेहद ही बेकार दांत निकले और हँसने लगा

“भाई सालो हो गए है ना ,तू क्या समझे गा,मेरे गुरु तो हाथ से भी हिलाने नही देते थे,बस जब कोई लड़की की बलि दो तब ही उसे कर सकते हो,जल्दी दिला यार …”

पुनिया गहरे सोच में पड़ गया था,की आखिर किया क्या जाय ,की अचानक उसे एक आईडिया आया ,

“क्योना तिवारियो के हवेली में सेंध डाली जाय ?????”

“कैसे “

पुनिया ने चहरे पर एक कातिल मुस्कान आ गई ….

इधर तिवारियो की हवेली में ,

राकेश महेंद्र का बेटा अपने कमरे में मोबाइल पर कुछ देख रहा था की उसके कमरे का दरवाजा हल्के से खुला ,उसने नजर उठाकर देखा तो सामने आरती(वीरेंद्र रामचंद्र के सबसे छोटे बेटे की पत्नी ) खड़ी थी ,उसके हाथ में दूध का ग्लास था,वो सफेद साड़ी में भी किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी,उसकी उबलती हुई प्यासी जवानी मर्द के स्पर्श को लगभग भूल सी गई थी,उसके स्तन मलवाले से उसके तने हुए ब्लाउज़ को फाड़ने को तैयार थे,उनके बीच की घाटी की गहराई भी उसके चमकदार और मांसल स्तनों का आभास दे रहे थे,उसे देखकर ही राकेश के चहरे पर एक मुस्कान आ गई ,

वो कमरे के अंदर आयी और अपने पीछे ही कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया,सफेद साड़ी जो की इतनी पतली थी की उसके उजोरो की घाटी साफ दिख रही थी,उसके बड़े नितम्भ और पतले कमर की वो लचक ,किसी काम की देवी सी वो लचकते हुए राकेश के पास पहुची और उसके बिस्तर पर बैठ गई ,

“तुम्हारे लिए दूध लायी हु “

उसके हर शब्द से वासना की महक आ रही थी,

“आप तो जानती हो चाची की मुझे दूध कैसे पीना पसंद है,”

राकेश का लिंग उसके पतले निकर को फाड़ रहा था,आरती की नजर उसके अकड़े लिंग में गयी और उसके योनि से भी कुछ रस काम का टपक पड़ा,वो एक खुजली के अहसास से मचल गई,

“पहले ग्लास से तो पी लो ,साथ ही शिलाजीत भी लायी हु “

वो दो गोलिया शिलाजीत की दूध में मिला देती है जो की आसानी से घुल जाता है,राकेश उस दूध को पकड़ता है वो केशर की महक से महक रहा था,राकेश के चहरे पर एक मुस्कान आ गई ,और वो जल्दी से उसे पी गया ,आरती उसके पास आई उसकी सांसे तेज थी ,राकेश की भी सांसे कुछ तेज हो रही थी,

राकेस ने अपने हाथ उसके कमर पर लगाया और वो मचल गई

“आह बेटा “

राकेश फिर से मुस्कुराया और उसे फिर से अपने पास खिंचा उसका जिस्म किसी गर्मी से पसीना छोड़ रहा था ,जिससे आरती एक शरीर गिला हो गया था,उसके नरम त्वचा के अहसास से राकेश के जिस्म पर भी एक झुंझुरी सी दौड़ गई ,

पसीने के गीले पतले साड़ी के कारण जिस्म का कटाव उभर कर आ रहा था,आरती की खुसबू से राकेश के अंगों में अकड़ान बढ़ रही थी,

वासना की आग उम्र और रिस्तो के बंधन को नही मानती वो हर दीवार तोड़ कर उस आग को शांत करना चाहती थी,एक विधवा औरत अपने बच्चे की उम्र के लड़के के साथ आज सबकुछ करने को तैयार थी,शायद ये उनका पहले बार भी नही था,लेकिन आरती करती भी क्या,उसकी शादी नई नई थी की बेचारी का पति पारिवारिक झगड़े के कारण मारा गया,एक अच्छे घर की लड़की जो एक जमीदार खानदान की बहु थी,पढ़ी लिखी थी,समाज के सामने शालीन थी,मर्यादित थी,लेकिन जिस्म की आग जो उसके पति ने उसे लगाई थी लेकिन उम्र के उस दौर में जब ये आग सबसे ज्यादा होती है उसके पति की मौत हो गई,आरती की ये मजबूरी थी की वो अपने को किसी ऐसे के हाथो में सौपे जो की उसकी इज्जत के

ना उछाले ,राकेश जब जवान हुआ तब से ही आरती ने उसे सम्हाल लिया,राकेश सबसे ज्यादा प्यार अब आरती को ही करता था,वो उसके लिए पहले मा थी ,बाद में उसकी सबसे अच्छी दोस्त और उसके बाद उसकी गर्लफ्रैंड बन गई,आज भी राकेश के दिल में उसके लिए बहुत प्यार और सम्मान था,लेकिन शायद राकेश को भी उसकी मजबूरी समझ आती थी और वो उससे जिस्म का रिश्ता निभाने में संकोच नही करता ……..

आरती आज बड़े दिनों के बाद फिर से राकेश के साथ थी,आज वो अपनी सभी जलन मिटाना चाहती थी,वो राकेश के होठो के पास आकर उसके आंखों में झांकती है,राकेश की आंखे उससे टकराती और वो अपने होठो को आरती के होठो में मिला देता है,

दोनो एक दूजे के जिस्म से खेलने लगते है और राकेश उसके पल्लू को सरकाकर उसके बड़े बड़े आमो के रस को पीने की कोशिस उनके ब्लाउज़ के ऊपर से ही करने लगता है….

उसकी जीभ का स्पर्श पाकर आरती की आहे निकलने लगती है,

“आह बेटा थोड़ा आराम से ,नही दांत मत गड़ा ना “

“आज तो पूरे मन की करूँगा चाची आप को नही छोडूंगा,इतने दिनों के बाद मिली हो “

राकेश उतेजित था और उसके दन्तो के निशान आरती के उजोरो पर पड़ रहे थे वो उसके बालो को अपने हाथो से कसकर पकड़े हुए थी ,राकेश अपने दांतो को गड़ाता और थूक से उसके ब्लाउज़ को भिगोने लगा,आरती को मजबूरन ब्लाउज़ के बटन खोलने पड़े ,अंदर अंतःवस्तो की कमी के कारण उसके उजाले स्तनों की चोटी के दर्शन राकेश को आसानी से हो गए,और वो अपनी आदत के अनुसार अपने दन्तो और लार से उसे भिगोने लगा,उसके निप्पलों को अपने मुह से भरकर वो उसे पूरी तकत से चूसने लगा,आरती के लिये सहन से बाहर हो रहा था,उसका शरीर मादकता से भरा हुआ था और किसी मर्द के ना छूने के कारण वो जलते तवे सा हो गया था,थोड़े से पानी के छीटे भी धुवा उठा देते थे,

राकेश का इतना सा खेल ही उसे झड़ने को काफी था,वो पागलो की तरह मतवाली से झूमि और एक धार उसके पेंटी को भिगो दी ,राकेश उसकी हालत पर मुस्कुराया ,और आरती उसे झूठे गुस्से से देखने लगी,

“शैतान कही का “और उसके गालो को पकड़ कर उसके होठो को अपने होठो से भिगोने लगी…

माहौल की गर्मी बढ़ रही थी,और दोनो की उत्तेजना भी,और राकेश से और नही सहा गया वो अपनी प्यारी चाची को बिस्तर में लिटा कर सीधे उसके साड़ी को पकड़कर उठाने लगा,एक ही झटके में उसे कमर से ऊपर खिंच दिया राकेश का हाथ पेंटी पर गया ही था,

“अरे इतनी क्या उतावली है मैं उतार देती हु,’

लेकिन खड़ा लिंग किसकी सुनता है,वो उसे उतारा जैसे की वो इसे फाड़ ही देगा,आरती को उसके उतावले स्वभाव को देखकर हँसी भी आ गई,लेकिन उसकी हँसी ज्यादा समय तक नही रही ,क्योकि राकेश ने सीधे ही उसके योनि में अपना लिंग धसा दिया,वो बेचारी एक आह भरकर रह गई,और अपने बांहो के घेरे से राकेश को घेर लिया,वो उसे अपनी पूरी ताकत से धक्के लगाए जा रहा

था……..

कमरे में छप छप छप की आवाजे आ रही थी ,आरती ने पहले ही अपना पानी निकल दिया था और वो फिर से उतेजित हो चुकी थी,और राकेश का लिंग पूरी तरह से भीगा हुआ अंदर बाहर हो रहा था,कमर चलता रहा आहे निकलती रही ,और दिल धड़कते रहे ,और वो लावा राकेश के अंदर से निकल कर सीधा आरती के अंदर समा गया….

अध्याय 58

“सुरेश है ये हमारे काम आ सकता है”

पुनिया आज बहुत खुस दिख रहा था,सुरेश आरती के मामा का लड़का था,और वीरेंद्र की मौत तथा आरती के इस तरह जवानी में ही विधवा हो जाने को लेकर बहुत ही दुखी भी रहता था,वो वन विभाग में एक अधिकारी के पोस्ट में था,और उसकी नफरत ठाकुरो और तिवारियो से हमेशा से थी,ठाकुरो से इसलिए क्योकि उनके कारण वीरेंद्र की जान गई और तिवारियो से इसलिए क्योकि उन्होंने उसके बहन को दूसरी शादी नही करने दिया,कभी सुरेश पुनिया के गांव में ही इंचार्ज हुआ करता था और जग्गू और पुनिया के लिए सहानुभूति भी रखता था,लेकिन सालो से उनका इससे कोई भी मेल मिलाप नही था….

“लेकिन क्या वो मानेगा,खफा होना और दुश्मनी होने में बहुत ही फर्क है ,सुरेश चाहे कितना भी नफरत करता हो वो हमारे साथ आएगा उसकी गुंजाइस थोड़ी कम ही है,”

जग्गू ने नाम तो सुझा दिया था लेकिन वो भी कंफर्म नही था की सुरेश उनकी मदद करेगा की नही ,

“सुरेश क्या कर सकता है मुझे तो आरती की मदद चाहिए वो अगर हमारे साथ आ गई तो काम हो जाएगा,”

जग्गू को नही पता था की पुनिया क्या करने वाला है पर उसे उसपर पूरा भरोसा था,

इधर

ठाकुरो की हवेली में चहलपहल बढ़ गयी थी ,अजय को केशरगढ़ के राज परिवार का वारिस घोषित कर दिया गया था,इस हैसियत से उसे राजा घोषित किया गया उसका राज तिलक हुआ और एक बड़ी पार्टी की गई साथ ही परंपरा के अनुसार वो गरीबो में बहुत सा दान भी दिया. ,वहां के लोग अपने राजा को देखने को दूर दूर से आने लगे रोज ही अखबारों में तस्वीरे वगैरह कुल मिलाकर पूरे इलाके में बात का एक ही विषय था ,अजय का राजा बनना….

इससे उनको कोई आर्थिक मदद नही मिलने वाली थी पर एक सम्मान जो अजय और उसके परिवार का वहां था वो कई गुना बढ़ गया था,

हवेली की रंगत ही कुछ और हो चुकी थी और साथ ही समय पास आ रहा था सुमन और किशन की शादी का...सुमन अब हर दुख को छोड़कर बस किशन को अपना पति बनाने को बेताब थी ,कुछ ही दिनों में उनकी शादी थी ,बाली चाहता था की उससे पहले अजय और विजय की भी शादी हो जाय लेकिन उसे भी पता था की ये मुमकिन नही है,

वक़्त चलता चला गया और चुनाव को भी एक ही साल का समय बचा था,निधि और धनुष बड़े ही ताकत से चुनाव की तैयारी में लगे थे,वही अब अभिषेक निधि से दूर रहने लगा था उसे पता था की उसकी एक छोटी सी गलती उसे कही का नही रहने देगी….

निधि को पहले तो ये अजीब लगा लेकिन फिर वो अपने काम में इतनी व्यस्त होने लगी की उसे इसकी सुध भी नही रहती थी………

उस रात बाली अपने कमरे में गया ,वो अब चम्पा के साथ ही सोया करता था,लेकिन अलग अलग बिस्तरों में ,इतने दिनों की दूरी अब भी नही भरी थी ,

“शादी की तैयारीया कैसे चल रही है …”

ऐसे तो वो दोनो बहुत ही कम बात किया करते थे पर जब से किशन की शादी फिक्स हुई थी वो कुछ चीजो के लिए बात कर ही लिया करते थे,

“ठीक है और ये बच्चे मुझे कुछ करने ही कहा देते है,अब तो इनकी ही चलती है अब मैं बुड्ढा हो गया हु “

बाली हँसते हुए कहा,

“आप भी ना अभी तो आप किसी जवान को भी मात दे दे ...अभी भी तो वैसे ही है “

बाली की नजर सीधे चम्पा पर गई वो उसके बदन को ही घूर रही थी ,बाली से नजर मिलते ही उसकी नजर शर्म से झुक गई ,बाली को भी बड़ा अजीब सा लगा,ये सालो की दूरियां जिसने मन के जज़बातों को दफना दिया था,एक हल्की सी आहत ने उसे हिलोरे मारने पर मजबूर कर दिए था.,

दोनो ही चुप होकर सोने की कोशिस करने लगे वो अलग अलग बिस्तर में सोए थे ,चम्पा के दिल की धड़कन बाली तक पहुच रही थी लेकिन वो मूरत बना बस सोया हुआ था,की चम्पा उठी जैसे वो इस आग को बर्दास्त नही कर पाएगी उसके उठने की आहट से बाली भी उसकी ओर देखने लगा ,जैसे ही चम्पा बिस्तर से उठी उसका पल्लू नीचे गिर गया….

वो अभी बेफिक्र थी उसे लगा की हमेशा की तरह बाली दूसरी ओर मुह किया सोया होगा,लेकिन बाली की नजर सीधे ही उसके उजोरो पर गई,आज भी चम्पा की कातिल अदाएं वही थी जो सालो पहले हुआ करती थी,उसके उजोरो के मदमस्त पर्वत ब्लाउज के उस दर्रे से झांक रहे थे,वो मखमली जिस्म का वो हिस्सा बाली के मन को बहकाने को काफी था,सालो से किसी औरत के जिस्म का स्वाद उसे नही मिला था यही हाल कुछ चम्पा का भी था और दोनो एक दूसरे के सामने इस हालत में थे की वो कुछ कर भी नही पा रहे थे और किये बिना रहना भी मुस्किल हो रहा था…..

दूधिया रोशनी में चमकता हुआ चम्पा का जिस्म और उससे आने वाली वो मनमोहक खुशबू,उम्र के इस पड़ाव में वो उसका शरीर और भी गदरा गया था,भारी नितम्भ,उभरे उरोज ,और चहरे पर वही कातिलाना अंदाज,...

कभी वो कई लोगो का बिस्तर गर्म करती नही थकती थी,और उसके अदाओं ने ना जाने कितनो को पागल बना रखा था,दोनो ही एक दीवार से खुद को अलग पा रहे थे और उस दीवार को तोडना दोनो की हसरत थी,लेकिन ….

मजबूर आकांक्षाओं की दीवार एक ही चोट में धराशायी हो जाती लेकिन वो चोट पहले कौन लगाता,वो अपनी नजर झुकाए बालकनी में चली गई ,और हवा के हल्के झोको ने चम्पा को उस आग से कुछ आराम दिया,उसने अपने पल्लू के पर्दे को हटा कर अपनी उरोजों को सांस लेने के लिए खुला छोड़ा वो उसे मसल कर अपनी भावनाओ को सकून दे रही थी,

नीचे कलवा अभी अभी कुछ काम निपटा कर लौट रहा था,चम्पा के कमरे के नीचे एक सन्नटा होता था,वो जगह उनके बगीचे की थी,कलवा अपनी अकेली रातो में वहां आकर कुछ सकून के पल बिताया करता था,दोनो की नजरे मिली और कलवा भी उस काम की मूरत को देखता रह गया,,,...

चम्पा को अपने स्थिति का आभास कलवा के नजरो से ही हुआ और उसके चहरे पर शर्म की लाली खिल गई ,वो उसे देखकर हल्के से मुस्कुराई ,वो बहुत अच्छे दोस्त थे ,कलवा कभी चम्पा का आशिक हुआ करता था और ये बात चम्पा को भी पता थी,आज इतने दिनों बाद दोनो की वही भावनाएं फिर से जाग गई ,कुछ देर को ही सही लेकिन कलवा उसे वैसे ही घूर रहा था जैसे की वो पहले घूरा करता था और चम्पा की अदाएं कुछ टिस करती हुई कलवा तक पहुच रही थी,उसके चहरे पर शर्म ने एक मुस्कान की जगह ले ली थी जो की एक कामोत्तेजक मुस्कान थी,महिलाओं की ये मुस्कान किसी भी समझदार आदमी के दिमाग को बिगड़ देती है ,ये एक सिग्नल होता है की वो महिला आपमे उत्सुक है,

कलवा का दिल सालो बाद यू जोरो से धड़का था,और अचानक ही मानो दोनो को होश आया की वो ये क्या कर रहे है……

चम्पा ने अपने को झट से ठीक किया और नजर नीची कर अपने कमरे में चली गई वही कलवा को भी ये आभास हुआ और वो भी वहां से निकल जाना ही बेहतर समझा ….

चम्पा कमरे में दाखिल हुई तो उसने बाली को जागता पाया,वो अपने बिस्तर में बैठा किसी सोच में गुम था…

“क्या हुआ नींद नही आ रही आपको “

चम्पा जुबान में अचानक ही एक मीठापन आ गया था,कुछ ही देर पहले हुए सभी वाक्यो ने उसके योनि में कुछ रिसाव शुरू कर दिया था और अपने बिस्तर में लेटकर चादर के नीचे उसे शांत करना चाहती थी लेकिन अभी बाली जाग रहा था,और उस उत्तेजना ने उसमे एक हिम्मत ला दी वो सीधे बाली के बाजू में बैठ गई,और अपना हाथ बाली के हाथो में ले लिया ,

“पता नही कुछ अजीब लग रहा है..”

बाली मुड़ने वाला ही था की चम्पा ने बड़ी अदा से अपने पल्लू को नीचे गिरा दिया,बाली की आंखे सीधा उसके ब्लाउज़ के दरार पर पड़ी...और वो अपनी थूक गटक गया,

चम्पा की हिम्मत और बड़ी वो बाली के पैजामे से झांकते उसकी मर्दानगी को देखने लगी,जो तन कर किसी रॉड की शक्ल ले चुका था,इसके आभास ने ही उसे और उत्तेजित कर दिया ,और वो अपना हाथ बाली के बालो में ले आयी और उसे अपनी ओर खिंचने लगी ,इतना बलशाली बाली भी किसी कठपुतली की तरह उसके इशारों पर खिंचा चला गया और उसके सीने से जा लगा….

बाली की सांसे अब चम्पा के दरारों पर पड़ रही थी,जिससे दोनो ही जिस्मो की आग बढ़ती जा रही थी,अब बाली से भी सहन करना कठिन हो रहा था और वो अपने मुख को खोलकर थोड़ा नीचे जाता हुआ उसके खुले जगह पर अपनी जीभ लगा दिया..

चम्पा के लिए ये सहन करना कठिन था,वो बाली के सर को अपनी छाती पर जोरो से भिच ली..और वो दीवार टूट गई ...वो संकोच की दीवार आगे क्या होने वाला था दोनो ही जानते थे और इस उमंग से ही दोनो के दिल की धड़कन तेज हो गई थी,बाली ने चम्पा की सहमति पा कर अपने हाथो और मुह को काम में लगा दिया वो धीरे धीरे बढ़ता हुआ उसके उजोरो को हर जगह से चाटने लगा और उसे निर्वस्त्र करने लगा चम्पा को भी अब ये कपड़े सुहा नही रहे थे,दोनो ही सालो के प्यासे थे और कब ये आग फुट जाय इसका कोई भी भरोसा नही था,बाली के अंदर का जानवर अब धीरे धीरे जागने लगा था,वो चम्पा के दूध को दुहने में आमादा था वो इतने जोरो से उसे निचोड़ रहा था की चम्पा को लगा की कही इनसे खून ना निकल जाय बाली अपनी जवानी में लौट गया था,वो चूसता मसलता,चम्पा के शरीर को तोड़ रहा था,और चम्पा की आहे पूरे सबाब में गूंज रही थी…

बाली ने आखिर चम्पा का वो आखरी वस्त्र भी निकाल फेका और खुद भी पूरी तरह निर्वस्त्र हो उसके उस गुफा में अपने लिंग को घुसाने लगा,दोनो ही इतने गर्म थे की कुछ ही धक्कों ने दोनो को तोड़ दिया और दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे….

जल्दी झरने का कोई दुख किसी को भी नही था क्योकि वो जानते थे की अब तो हर रात जवान होने वाली है ………..

“तुम बहुत ही कसी हुई हो ,जैसे जवानी में होती थी…”

बाली का प्यार पाकर चम्पा और भी खिल गई थी,उसने मादक अदा दिखाते हुए बाली को अपनी ओर खिंचा

“और आप वैसे ही जानवर है जैसे पहले हुआ करते थे,,..”

चम्पा की बात सुनकर बाली के अर्ध तने लिंग ने फिर से फुंकार मारी

“अब दिखता हु की जानवर किसे कहते है…”

दोनो का ठहाका पूरे कमरे में गूंज गया और बाली चम्पा के ऊपर सच में जानवरो जैसा झपटा...

अध्याय 59

किशन की शादी की शॉपिंग करने पूरा परिवार शहर गया हुआ था,शहर के उसी माल में जहा कभी सुमन उन्हें मिली थी आज वो माल ठाकुरो का था,तिवारी परिवार की तरफ से गए थे खुसबू और नितिन ,आरती स्वाभाविक था की शॉपिंग दिन भर चलनी थी ,वहां के कई दुकान भी अजय ने ही खरीद लिए थे,कुछ को महेंद्र ने ,कुछ बाकियों के भी थे...

माल में चहलकदमी सुबह से जोरो पर थी ,जब खुद मालिक का परिवार आ रहा हो तो ये होना स्वाभाविक भी था,

सुमन आज उसी दुकान में बैठी थी जंहा कभी वो काम किया करती थी,वो अपने सभी साथियों को देखकर भावुक हो गई,सभी उससे ऐसे मिल रहे थे जिसे की कोई नई दुल्हन पहली बार मायके आयी हो,लेकिन सभी को पता था की अब ये यहां की कर्मचारी नही बल्कि मालकिन है, अपने आंखों में आंसू और दिल में विनय का भाव लिए वो वहां बैठी थी ,उसे तो अपनी किश्मत पर कभी कभी यकीन भी नही होता था,क्या ये एक सपना था,लोग उसे किसी महारानी की तरह से ट्रीट कर रहे थे,लेकिन उसके आंखों में बहुत ही विनम्रता उन लोगो के लिए थी होती भी क्यो ना कभी वो भी उन्ही में से एक हुआ करती थी,

सुमन का साथ निधि ने कभी नही छोड़ा,सभी उसको देख कर ही पहचान गए की यही वो लड़की है जिससे हुई लड़ाई ने सुमन की पूरी जिंदगी ही बदल कर रख दी,वक़्त भी कैसे कैसे खेल खेलता है,जिस चीज के लिए सुमन को अपनी नॉकरी से भी हाथ धोना पड़ा था वही चीज उसे नॉकर से मालकिन बना दिया…

इधर

कुछ जवा दिलो के लिए ये ट्रिप किसी पिकनिक से कम नही था ये वो मौका था जहा वो एक दुसरे को निहार सकते थे,खुसबू नितिन और सोनल तो यहां आये ही इसी लिए थे की वो अपने सनम की कुछ झलक देख पाए,

विजय ने भी उन्हें थोड़ा स्पेस देने की सोची और किशन को लेकर लड़कियों के साथ बैठ गया ,जिसे कभी लड़कियों के साथ शॉपिंग करना पसंद नही था वो दोनो लवंडे आज शादी की शॉपिंग में सबका हाथ बटा रहे थे,ऐसे वो सचमे लड़को को बोझिल करने वाला होता है,पर आज दोनो ही उसे इंजॉय कर रहे थे,किशन के पास तो इसका वाजिब कारण भी था लेकिन विजय के पास क्या कारण था???सिर्फ सोनल और नितिन को स्पेस देना या खुसबू को अजय से बात करने का कोई मौका देना…??

इसके अलावा भी एक कारण उसके सामने था,वो थी सफेद साड़ी में लिपटी हुई एक अधेड़ उम्र की विधवा महिला ,जो की अपने सौंदर्य और पहनावे के तरीके से ना तो अधेड़ लग रही थी ना नही विधवा,आरती की कमाल की खूबसूरती ने विजय को सोचने पर मजबूर कर दिया था,वो ऐसे तो उसकी मामी थी और उसे किसी गंदे नजर से देखने का उसका कोई मूड भी नही था लेकिन आरती के वो इशारे जो अक्सर कोई महिला किसी को आकर्षित करने को करती है ,विजय को अंदर से तोड़ रही थी ,वो लड़कियों के मामले में हरामी लड़का था और उसे हर बात साफ समझ आ रही थी की क्यो विजय के देखने पर ही आरती अपने पल्लू को सम्हालती है जिससे कुछ छिपता तो नही बल्कि कुछ दिख ही जाता है और क्यो वो विजय के नजर पड़ते ही अपने कमर की साड़ी को थोड़ा हटा लेती है,जिससे उसकी पतली कमर का वो भाग सामने आ जाता है….

विजय पका हुआ खिलाड़ी था वो हर इशारे अच्छे से समझ रहा था और वो उसे और भी अच्छे से समझने के लिए वहां बैठा हुआ था ,दोनो में एक खेल चल रहा था जिसे बस दोनो ही जानते थे,और किसी को भी इसकी भनक तक नही लग रही थी होती भी कैसे सभी अपने कामो में इतने मसरूफ थे की उन्हें इनपर ध्यान देने की फुरसत ही नही थी,विजय ने आखिर मर्यादाओ के बंधन को तोड़कर आगे बढ़ने की सोची जब खुद लड़की तैयार है तो ट्राय करने में क्या जाता है,ऐसे भी हवस में रिस्ते नही देखा करते ,

विजय जाकर आरती के पास बैठ गया,दोनो की नजर मिली और एक मुस्कान दोनो के होठो में खिल गया,

विजय ने एक अंगड़ाई ली और उसका हाथ सीधे जाकर आरती के स्तन से टकराया,वो ऐसे था की आरती भी इसकी फिक्र ना करती अगर उसे पता नही होता की विजय का असली मकसद क्या था,विजय ने फिर से रिएक्शन देखा उसकी इस हरकत ने आरती के होठो की मुस्कान को और भी चौड़ी कर दि थी,जिससे विजय का लिंग एक जोरदार झटका लगा दिया,

उसके बालो से आने वाली खुसबू ने ऐसे भी उसे पागल बना दिया था ,और उसकी तरफ से आ रहे इस इशारे से वो झूम सा गया,उसने एक कदम आगे बढ़ाने की सोची और अपना हाथ आरती के पीछे से ले जाकर उसके खुले हुए कमर पर रख दिया ,आरती को इतनी हिम्मत की उमीद नही थी उसे लगा था की ये भी किसी आम ठरकी की तरह होगा उसे क्या पता था की ये सभी ठरकीयो का बाप निकले गा उसे इसकी बिल्कुल भी उमीद नही थी फिर भी वो कोई रिएक्शन नही दिखाई ,इससे विजय को समझ आ चुका था की वो पूरी तरह से तैयार है उसे बस मौका चाहिए था आगे बढ़ने का,

“मामी ये सब कितना बोरिंग है ना “

विजय ने आरती से पहली बार बात की थी

“हा है तो ,ऐसे हमारा रहना भी जरूरी नही है”विजय की आंखे चौड़ी हो गई ये तो बहुत ज्यादा चालू है ,इसे खुद इतनी जल्दी पड़ी है,वो सोच में लग गया की आखिर क्या किया जाय की उसे यहां से बाहर निकाला जाय…….

इधर

सोनल खुसबू नितिन और अजय बाहर ही खड़े थे …

“तुम लोगो को नही देखना कपड़ा “

अजय ने सोनल से पूछा

“अरे भैया आप अकेले हो जाओगे ना इसलिए हम रुक गए “

“अरे जाओ मेरे साथ नितिन है ना “

नितिन ने ऐसे देखा जैसे की वो ही फस गया हो ,

“असल में मुझे भी शॉपिंग पसन्द नही “

खुसबू ने हल्के से कहा जिसे सोनल समझ गई ,

“ह्म्म्म एक काम करते है मैं और नितिन अंदर जाते है आप खुसबू का ख्याल रखो…”इससे पहले की अजय कुछ कह पता सोनल नितिन का हाथ पकड़कर वहां से अंदर चली गई,जब अजय ने खुसबू को देखा तो वो हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी ,वो लोग नीचे के फ्लोर में बैठे हुए थे,विजय अभी अभी ऊपर गया था…..

अजय को कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था उसे पता था की उसे खुसबू के साथ अकेले क्यो छोड़ा गया है पर वो रिश्तों के बंधन को तोडना नही चाहता था….

“तुम्हे कुछ चाहिए बहन “

अजय ने खुसबू को देखते हुए जानबूझ कर कहा ,जिससे उसका मुह उतर सा गया

“नही और आप मुझे बहन ना कहा कीजिये “

खुसबू ने पहली बार अजय का विरोध किया था उसके आवाज में सचमे एक गुस्सा था उसे भी पता था की अजय भी ये जानता है की उसके दिल में अजय के लिए क्या है पर फिर भी वो उससे दूर जाने की कोसीसे करता है ,

“बहन को बहन ही तो कहते है ना “

“मैं आपकी बहन नही हु ये आप समझ लीजिये “

अजय ने उसके मासूम से चहरे पर वो गुस्सा देखा जिसमे गुस्सा कम और दुख ज्यादा था,अजय ने कुछ नही कहा लेकिन कुछ ही देर की ये खामोशी एक अजीब सी बेचैनी लेके आ गया ,

“चलिए काफी पीते है,”खुसबू ने कहा

“जाओ सोनल को ले जाओ मूझे मन नही है “

खुसबू का पारा चढ़ गया और वो अजय का हाथ पकड़कर उसे माल से बाहर ले जाने लगी .

“ये क्या कर रही हो “

“आप मुझे बहन कहते है तो ठीक है हु मैं आपकी बहन अब चलिए जहा मैं ले जा रही हु “

अजय बस उसके साथ खिंचता चला गया….

माल से ही लगा एक गार्डन था जिसमे प्रेमी युगलो का जमावड़ा हुआ करता था,खुसबू और सोनल यहां अक्सर अपने दोस्तो जिनमे नितिन भी शामिल था उनके साथ आया करते थे,वो उसे खिंचते हुए ले जाती गई ,बड़ा गार्डन था,और दोपहर का वक़्त जिसमे वो गार्डन बंद हुआ करता था,बस ट्रिक ये था की उसके केयरटेकर को कुछ पैसे देने होते थे,और खुसबू को ये पता था उसने उसे 100 का एक नोट दिया और उसने उसे एक छोटे से गेट से अंदर घुसने को कहा ,वहां आकर कुछ जोड़े तो सेक्स भी कर लिया करते थे,लेकिन उन्हें इतने एकांत की जरूरत नही थी ,अजय को भी सब समझ आ रहा था लेकिन वो भी उसके साथ चलने में कोई भी एतराज नही जताया कयोकि उसे भी खुसबू से बात करनी थी वो भी हर चीज क्लियर करना चाहता था,

“आराम से करना थोड़ा देख कर कोई देख ना ले “

केयरटेकर की गंदी सी हँसी निकली जिसमे उसके रंगे हुए दांत दिखने लगे,वो एक 40-45 साल का मोटा से आदमी था जिसकी सूरत से ही कमीनेपन झलक रहा था, दोनो ही उसका मतलब समझ चुके थे,खुसबू को इससे कोई फर्क नही पड़ा लेकिन अजय का दिमाग सरक गया,अजय ने एक झापड़ खीचकर उसके गालो में लगा दिया ,आवाज इतनी शानदार थी की आसपास में आते जाते लोग भी रुककर उन्हें देखने लगे ,और ताकत इतनी लगाई थी वो वहां से दूर जा गिरा ,उसके मुह से खून आ रहा था,और पास ही उसका एक दांत गिरा पड़ा था,वो बौखलाई आंखों से अजय को देख रहा था,आजतक ना जाने कितने लोगो को उसने ये कमेंट किया था ये पहला शख्स था जिसने इसका विरोध ही नही किया बल्कि उसे इतने जोरो का चांटा भी रसीद कर दिया...अक्सर लोग उसकी बात सुनकर हँसकर टाल दिया करते थे क्योकि सबको पता था की वो वंहा क्या करने जा रहे है…

खुसबू के मुह से एक हँसी निकल गई और वो अजय का हाथ पकड़कर सीधे छोटे गेट से अंदर चली गई ,वो शख्स बस ठगा सा उन्हें देखता रहा …………..

इधर

विजय को आरती का इशारा तो मिल गया था पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करें, उसने सोनल को इशारा किया जो अभी लहंगा देखने में व्यस्त थी,

विजय बाहर आय साथ में सोनल भी,

“यार तुम लोग को इतना अच्छा मौका मिला है और तुम यहाँ बैठे हो,”

“हा यार बट सुमन के साथ रहना भी तो जरूरी हैं ना,”

“हा वो तो हैं, लेकिन आस पास कोई गार्डन नहीं है क्या,”

सोनल कुछ सोचती है,

“अरे यहां बाजू में तो एक गार्डन हैं जो शाम में खुलता है लेकिन अगर गार्ड को पैसा दो तो वो दोपहर में भी खोल देता है,”

“परफेक्ट”

“लेकिन यार सब लोगों को क्या बोलूंगी “

“अरे कुछ मत बोल ,भाई की शादी है और अपनी होने वाली बहु के लिए अच्छे से कपड़े सलेक्ट कर”

सोनल उसे अजीब निगाहों से देखती हैं, दोनो फिर से आकर बैठ जाते हैं, कुछ ही देर में आरती उठती हैं और कुछ बहाना बनाकर निकल जाती हैं, फिर विजय उठकर निकल जाता हैं, सोनल उसे धयन से देखने लगती हैं वो उसे आंख मारकर निकल जाता हैं, सोनल को जैसे कुछ समझ आया और उसकी आंखें चौड़ी हो गई,वो उसे रोकना चाहती थी पर कैसे???

इधर विजय और आरती भी गार्डन पहुच चुके थे,

वहां वो गार्ड अभी अभी मार खाकर अपने जख्मो पर दवाई लगाए बैठा था,खून तो रुक चुका था लेकिन दर्द नही गया था,

“बॉस अंदर जाना है “

विजय ने कुछ नोट आगे बढ़ते हुए कहा ,जिससे वो गार्ड थोड़ा झल्ला गया,

“अभी बंद शाम को आना “

“अरे ये रखो ना “

उसने वो नोट उसके पॉकेट में डाल दिए

“बोला ना बंद है समझ नही आता “

गार्ड ने चिल्लाने की गुस्ताखी कर दी,विजय ने अंदर नजर डाली,गार्डन ऐसे तो बड़ा था लेकिन उसे कुछ कपल वहां दिख गए ,

“वो अंदर जो लोग है वो कैसे चले गए “

“चलो बहस मत करो जाओ यहां से ,साले पता नही कहा से चले आते है”

विजय का माथा खनका और एक जोर का तमाचा उसने खिंच दिया,

चटाक ….

ये तमाचा उसे दूसरे गाल पर पड़ा था,गार्ड फिर से जमीन पर था और उसका एक दांत भी बाहर निकल गया ,वो बेचारा रोनी सूरत बनाये विजय को देखने लगा ,आरती जंहा हस पड़ी वही विजय भी मुस्कुरा दिया ,उसका गुस्सा थोड़ा कम हो चुका था,

उसने हाथ आगे बढ़ाकर उसे खड़ा किया और उसके जेब में पैसा रखे ,

“चल गेट खोल “

“दादा गिरी है क्या “

वो रोनी सूरत बनाये कह रहा था,विजय ने अपने जीन्स के पीछे रखी पिस्तौल निकली और उसके माथे में टिका दिया

“हा दादागिरी है”

गार्ड की हालत सांप सूंघने जैसी थी और उस बेचारे के मुह से कोई भी शब्द नही फुट रहे थे,आखिर उसने छोटी गेट की तरफ इशारा किया ,दोनो वहां से गार्डन के अंदर चले गए …

गार्ड अपनी कुर्सी पर बैठा बस यही सोच रहा था की आज किसका मुह देखकर उठा था….

अध्याय 60

“बोलो क्या बोलना चाहती हो”

अजय एक पेड़ के नीचे बैठ गया ,एक मस्त हवा ठंडी सी खुशबूदार हवा के झोंके ने उसे सहलाया,जिसमे बगीचे के फूलो की खुसबू भी साथ थी,बड़े दिनों बाद उसे इसतरह से सुकून से बैठने का मौका मिल रहा था,बगीचे के एक किनारे में वो बैठा हुआ खुसबू को देखने लगा जो की एक सादे सफेद सलवार सूट में थी ,उसकी सादगी उसे निधि की याद दिला गई लेकिन उसके व्यवहार में निधि जितनी चंचलता नही थी,वो बहुत गंभीर स्वभाव की थी,अजय के लिए ये परफेक्ट मेच था लेकिन वो रिस्ते के कारण पूछे हट रहा था,

आज पहली बार उसने खुसबू की खूबसूरती को निहारा ,कसा हुआ शरीर,और जरूरत के हिसाब से ही भराव ,न कम ना ज्यादा,मासूम सा उज्वल चहरा,गुलाबी होठ,घने बाल जो उसके कमर को छूते थे,उसके बल उसके नितंबो कटाव में ठहरकर विश्राम कर रहे थे,बहुत ही नाजुक मुलायम त्वचा की मलिका थी खुसबू ,उसके शरीर से एक सौंधी सी खुसबू आ रही थी,अजय मानो उसकी ख़ूबसूती में डूबने लगा था,वो अपने को मुश्किल से सम्हाला लेकिन तब तक खुसबू को भी इसका आभास हो गया था की उसके दिल में क्या चल रहा है,वो हल्के से मुस्कुरा कर अजय को देखने लगी,अजय ने अपनी नजर नीचे कर ली ,वो उसके बाजू में जा बैठी ,

“मैं आपसे बहुत प्यार करती हु ,”

वो उसके कंधे पर अपना सर रख लेती है,और उसकी भुजा को अपने हाथो से पकड़ लेती है ,अजय उसे हटाता नही ,

“तुम मेरा जवाब जानती हो खुसबू तुम मेरी बहन हो “

“कब से ?????”

“हमेशा से ….बस हमे पता नही था”

“लेकिन जब मुझे आपको प्यार हुआ था तब तो मुझे ये नही पता था की आप मेरे भाई हो ,अब मैं क्या करू,मेरी क्या गलती है की जिंदगी में पहली बार जिसे दिलो जान से चाहा वो मेरा भाई निकल गया…”

खुसबू के आंखों से आंसू की एक बून्द निकल कर उसके गालो तक पहुच गई ,अजय उसके चहरे को नही देख रहा था लेकिन उसके भरे हुए गले का पता उसे चल गया था,

“लेकिन अब तो पता है ना ,जानबूझकर हम ये नही कर सकते …”

थोड़ी देर तक वहां शांति रही

“अच्छा एक बात पुछु “

“हम्म्म्म “

“अगर भाई बहन होने से प्यार नही कर सकते तो नितिन और सोनल क्या करेंगे,वो कैसे शादी करेंगे एक दूसरे से ,वो भी तो तब से प्यार करते है जबसे उन्हें पता ही नही था की वो एक दूसरे के भाई बहन है ,अब आप क्या करोगे …”

खुसबू की बात सुनकर अजय उससे अलग होकर उसे देखने लगा ,उसे एक बड़ा शॉक सा लगा ,वो उसकी आंखों में देखता रहा ,उसे समझ ही नही आ रहा था की वो इसका क्या जवाब दे ….

“हा ये सच है…”

अजय अपने सर को पकड़ कर बैठ गया

“खुसबू तुम समझ नही रही हो इस परिवार को साथ लाने के लिए मैंने कितने दिनों का इंतजार किया है,ये एक फैसला सब कुछ बिगड़ देगा ,अगर किसी एक पक्ष की भी इसमें असहमति हुई तो बवाल हो जाएगा ,मैं नही चाहता की फिर से वही हो जो हमारे मा बाप के साथ हुआ था…….

”

खुसबू मुस्कुराते हुए फिर से उसके बाजुओ को पकड़ कर उसके कंधे में अपना सर रख देती है,

“मैं सब समझ रही हु ,दादा जी भी यही चाहते थे और मैं भी लेकिन जो हो गया उसका तो कुछ नही किया जा सकता ,विजय भैया ,नितिन और सोनल तो मान गए है,और किसी भी बच्चे को इसमें कोई परेशानी नही होगी,वो तो हमारे बारे में भी जानते है और हमारे पक्ष में खड़े है ,और रही मेरे घर में किसी के नही मानने की बात तो मैं और नितिन भइया सबको मना लेंगे और रही आपके घर में किसी के नही मानने की बात तो आपकी बात कौन नही मानेगा वहां…”

अजय अब भी सोच में पड़ा था,

“लेकिन …”

खुसबू उसके होठो में अपनी उंगली रख देती है,

“मुझे पता है की आपको सोनल और नितिन के रिश्ते से कोई भी एतराज नही है,और मैं ये भी जानती हु की आप मुझसे बहुत ही प्यार करते है ,बस कहते नही ,लेकिन मैं लड़की हु आपकी आंखों को भी पढ़ सकती हु “

अजय खुसबू को देखने लगता है खुसबू के होठो में एक मुस्कान थी ,अजय अब भी कुछ नही कहता लेकिन खुसबू जैसे सब समझ जाती है और उसके गालो में किस कर लेती है ,अजय थोड़े गुस्से से उसे देखता है…

“सॉरी “वो हल्के से हस कर कहती है ……

इधर

विजय आरती को झुरमुट के पीछे ले जाता है और जैसे की दोनो ही बहुत देर से प्यासे थे वो बस चालू हो जाते है ,एक दूसरे को बेहद ही जोर से दबाने लगते है,एक दूसरे के कपड़े निकल के जैसे फेक ही देते है,दोनो आदमजात नंगे किसी की भी परवाह किये बिना बस हवस की आग बुझाने में लग जाते है,

जब आरती नंगी होती है तो विजय उसे पीछे करता है और उसके जिस्म को ध्यान से देखता है,

“वाह”विजय के मुह से निकल जाता है,

“ऐसा क्या वाह कर रहा है जिसे की कभी देखा ही नही ,मैं अब इतनी भी हसीन नही रही “

“कौन चुतिया ये कहता है की तुम हसीन नही हो ,मामी जी ईईईईई”

वो उसे अपने नंगे जिस्म से लगा लेता है,उसका लिंग जो तन कर किसी लोहे की रॉड की तरह लग रहा था,आरती की पेट में चुभता है,

“सच में कमाल का जिस्म है आपका ,बिल्कुल सटीक ,जंहा जरूरत हो वहां इतना मांस है की मन करता है नोच के खा जाऊ”वो अपने लिंग को फिर से उसके पेट में गड़ा देता है,

“आउच ...

तो खा जा ना कमीने “

वो विजय के चहरे को खीचकर उसे अपने होठो के पास लाती है और उसके होठो को चूसने लगती है,दोनो ही एक दूसरे के होठो को खिंचने खाने लग जाते है ,दोनो ही मस्ती में थे और एक दूसरे के जिस्म को भरपर रूप से मसल रहे थे,विजय उसकी मखमली त्वचा का दीवाना हो गया था,वो उसके नितंबो को अपने हाथ से पकड़कर उसे उठा लेता है ,अब उसका लिंग उसकी योनि की दीवार पर था,लिंग में योनि का पानी लगने लगता है,विजय था तो बड़ा पहुचा हुआ खिलाड़ी वो योनि से कुछ देर ही अपने लिंग को रगड़ता है,उसके हाथ आरती के नितंबो को पकड़े थे वही आरती के हाथ विजय के गले से लिपटे थे,वो अपने लिंग को अपनी कमर हिलाकर ही अरजेस्ट करता है और खच से जैसे कोई चाकू गोभ दिया गया हो ,

“आआहह जानवर है क्या “

आरती के आंसू निकल आते है वही विजय की हँसी उसका पूरा लिंग आरती के योनि में धस गया था,थोड़ी देर में ही वो उसे खड़े खड़े अपने हाथो को ऊपर नीचे कर संभोग करने लगता है,

आरती की आंखे बंद हो गई थी,राकेश इसके सामने बच्चा ही था,वो विजय के ताकत की दीवानी हुई जा रही थी ,वो ऐसे चिल्लाने लगी जैसे की कोई नई नई दुल्हन हो ,विजय को भी उसके योनि के कसाव का आभास हो रहा था,

वो उसे नीचे घास में लिटा देता है,

“लगता है किसी ने इसे ढीला नही किया है,बहुत कसाव है इसमें ,मजा आ गया मामी जी “वो फिर से अपने कमर को जोरो से चलाने लगता है,आरती पागलो जैसे चिल्ला रही थी,मानो किसी कुवारी लड़की की सील टूट रही हो,विजय भी जानवरो की तरह उसे चोद रहा था,उसके गालो शरीर को काट रहा था,वो अपने पूरे सबाब में था,

इधर

आरती की चीख सुने गार्डन में गूंज रही थी,यहां तक गार्ड को भी ये आवाजे सुनाई दे रही थी लेकिन उसमे इतनी हिम्मत नही थी की वो उसे मना करे ,वो तो और भी डर गया था की कोई राह चलने वाला इसे सुन ना ले ,उसके मुह से खून बह रहा था जो अभी अभी बंद हुआ था ,रुमाल से उसने अपना मुह ढक रखा था,वो फिर से मार खाना नही चाहता था,वो तो भला हो की गाड़ियों के शोर में वो आवाज आने जाने वालो तक नही पहुच रहे थे ,लेकिन अगर कोई थोड़े भी ध्यान से सुनता तो उन्हें ये समझ आ जाता की कुछ तो हो रहा है,कभी कभी ये तेज हो जाते फिर कम हो जाते …

“ये साले मादरचोद आज मेरी नॉकरी और मेरी जान लेकर रहेंगे “

गार्ड अपने में भी भुनभुनाया

इधर

ये आवाज अजय और खुसबू तक भी पहुच रहे थे ,जो की गार्ड की अपेक्षाकृत और भी ज्यादा और क्लियर था,गार्डन के शांत माहौल में आरती की चीख कभी कभी फैल जाती थी ,दोनो को पता था की क्या हो रहा है ,दोनो ही असहज हो रहे थे ,आखिर थोड़ी ही देर में अजय से ये ना सहा गया ,

“सालो को इतनी भी तमीज नही है की पब्लिक प्लेस में कैसे रहना चाहिए “वो खड़ा होने ही वाला था की खुसबू ने उसे रोक लिया

“छिड़िये ना वो यहां इंजॉय करने ही तो आये है “

“तो ऐसे इंजॉय करेंगे

अपने घर में करे ना ये सब “

वो गुस्से से लाल होने लगा था

“बेचारों के पास घर नही होगा इसीलिए तो आये होंगे “

अजय फिर गुस्से से उसे देखता है

“तुम्हे बहुत पता है “

“हा मैं भी तो यहां आती थी सोनल और नितिन के साथ “

अजय का दिमाग ही घूम गया ,उसके दिमाग में नितिन और सोनल की सेक्स की बात आई और वो ...

“मादरचोद “

अजय खुसबू के गले को अपने हाथो से पकड़ कर उसे उठा देता है वो दोनो ही बैठे थे लेकिन खुसबू फिर भी थोड़ी ऊपर हो गई ,उसका चहरा लाल हो गया ,और आंखों में आंसू आ गए ,वो कुछ बोलना चाहती ही लेकिन बात उसके गले से नही निकल रही थी वो बस गु गु कर रही थी ,अजय को जब उसकी हालात का अंदाजा हुआ वो उस झट से छोड़ दिया ,ना जाने उसे इतना गुस्सा कैसे आ गया था ,खुसबू खांसने लगी

“क्यो क्या आपकी बहन सेक्स नही कर सकती जिससे वो प्यार करती है “

खुसबू गुस्से में भर गई थी,उसने व्यंग मारा था …

“मैं प्यार के खिलाफ नही हु ,ना ही शाररिक संबंधों के लेकिन उसका भी कोई समय और जगह होती है ,कोई प्यार में हो तो बात अलग है लेकिन इस तरह नही ,मेरी बहन ऐसा नही कर सकती और अगर तुम भी कहो तो मैं ये नही मान सकता ….”

अजय का गुस्सा थोड़ा कम हो गया था,लेकिन फिर भी ना जाने क्यो उसके सीने में एक अजीब सी जलन थी ,

“मुझे भी अपने भाई पर पूरा भरोसा है वो सोनल से प्यार करता है हवस के लिए उसके साथ यहां नही आता था,मैं तो बस आपको परखने के लिए बोल दिया ,और हम पूरे क्लास यहां आते थे ,कॉलेज बंक करके …”

खुसबू ने अपनी सफाई दी जिसकी कोई जरूरत तो नही थी लेकिन फिर भी खुसबू को बोले बिना नही रहा गया,उसने अजय का गुस्सा और ताकत का अभी अभी अंदाजा किया था ,इससे उसके मन में अजय के लिए एक अनजाना सा डर बैठ गया ,,लेकिन साथ ही एक खुसी थी,वो ये सोच कर ही मचल गई की जब अजय उससे प्यार करेगा तो वो उसे इसी तरह से पकड़ेगा,वो उसपर अपनी ताकत लगाएगा……...ये एक अहसास ही खुसबू को रोमांचित कर गई ,वो थोड़ी और अजय की दीवानी बन गई ….

ये लड़कियों के साथ हमेशा ही होता है ,वो ताकत की मुरीद रहती है ,वो हमेशा ही चाहती है की उनका प्रेमी उन्हें बेहद प्यार करे,और आराम से प्यार करे रोमांटिक हो , लेकिन एक स्थिति में वो उसे अपना मालिक बनाना चाहती है ,वो अपने को सौप देना चाहती है ,लेकिन इसे वो अपने प्रेमी पर छोड़ देती है की वो उसे पूरा ले ले ,उसपर अपना अधिकार जमाये …

तभी एक आवाज फिर से आयी .

“ओह जोर से जोर से जोर से “

अजय से अब नही रहा गया

“चलो यहां से उन्हें ही करने दो जो करना है “

वो खुसबू का हाथ पकड़े खड़ा हुआ ,खुसबू की आंखों में अजय को देखकर पानी आ गया उसे लगा जैसे की वो उसे अपना बनाने ले जा रहा हो ,वो अब उसका हो,अजय ने पहली बार उसपर इतना अधिकार जताया था वो उसके हाथो को खीचकर उसे उठा रहा था ,और फिर उसे खीचकर अपने साथ बाहर ले जा रहा था,खुसबू तो उसी नशे में खोई हुई ,जाते जाते खुसबू ने उस झुरमुट के तरफ देखा जिधर से आवाज आ रही थी,कुछ भी दिखाई नही दे रहा था लेकिन उसने उन कपड़ो को जरूर देख लिया जो की उन झाड़ियों से बाहर को फेके गए थे,जाने क्यो उसे लगा की इन्हें कही देखा है,अचानक उसे कुछ याद आया उसकी आंखे चौड़ी हुई लेकिन फिर उसे अपने ही ख्याल पर हँसी आई ,ऐसा थोड़ी ना होगा ,वो हल्के से हँसी और गार्डन से बाहर की ओर चल दी ,गार्ड ने उन्हें जाते देखा वो खड़ा हो गया ,उसे समझ आ गया की ये तो वो नही है जो चिल्ला रहे है,अजय ने एक बार गार्ड को देखा लेकिन उसने कुछ भी नही कहा ,गार्ड अपनी खड़ा होकर उसे सलाम करता है,अजय कुछ रिएक्शन दिए बिना ही वहां से चला जाता है……...

अध्याय 61

किशन की शादी को कुछ ही दिन बचे थे,सभी लोग पूरे जोश से इसकी तैयारी में लगे थे,खुसबू अब अक्सर ही इनके हवेली में आया करती थी,कभी कभी रात भी सोनल के साथ ही बिताया करती थी,अजय के करीब जाने का कोई भी मौका वो नही छोड़ती,अजय के दिल में उसके लिए प्यार तो था लेकिन वो अब भी बहुत असमंजस में था,वो सोनल और नितिन के रिस्ते को लेकर भी बहुत असमंजस की स्थिति में पड़ा हुआ था ,आखिर उसने सोनल से बात करने का फैसला किया…..

रात होने को थी और अजय ने सोनल को अपने कमरे में बुलाया था,खुसबू उसे बता चुकी थी की उसने अजय को सब सच सच बता दिया है,

सोनल के मन में भी थोड़ा डर जरूर था,

“आओ सोनल “

अजय अभी एक्सरसाइज कर रहा था,सोनल आकर उसके पास ही खड़ी हो गई,उसने उसके बदन पर एक नजर डाली ,बालो से भरा उसका चौड़ा सीना पसीने से चमक रहा था,भुजाए अभी अभी भार उठाने की वजह से फड़क रही थी,नशों में खून तेजी से दौड़ रहा था,जिससे उसकी नशे फूल सी गई थी,चौड़ा मस्तक तेज से दमक रहा था,सोनल उसे मोहित सी देख रही थी,अजय बस एक छोटी सी निकर डाले हुआ था,उसका पूरा गठीला जिस्म सोनल के सामने था,

‘वाओ “ उसके मुह से निकला

अजय भी उसकी तरह देखकर मुकुराय ,वो पास ही खड़ी थी ,तभी निधि भी कमरे में आ गई वो अपनी आदत के अनुसार एक झीनी सी नाइटी में थी अंदर कुछ भी नही पहनने के कारण उसके मदमस्त भरे पूरे जिस्म का हर भाग उस पारदर्शी नाइटी से झांक रहा था,

सोनल उसे देखकर और भी हैरान रह गई

“ये क्या पहन कर घूम रही है ,इतनी बड़ी हो गई है पर अकल बिल्कुल नही आयी है “

सोनल ने निधि को डांटा

“मैं कौन सा बाहर घूम रही हु और मैं तो रोज यही पहनती हु ,आप भी तो अपने रूम में यही पहन के रहती हो ,”

वो अपनी चिरपरिचित मासूमियत से बोली .अजय के चहरे में एक मुस्कान आ गया ,

“अरे तो भी भइया के सामने ???”

वो हल्के से बोली

“अच्छा आप विजय भइया के साथ ऐसे ही सोती हो तो …”

निधि झँझला गई ,सोनल को भी होश आया की ये क्या बोल गई ,अजय ने उसे एक भरी निगाह से देखा लेकिन वो उसे क्या बोलता,वो खुद भी तो निधि के साथ जिस्म के रिस्ते में उतर गया था….

निधि आगे बढ़कर अजय के गले से लग गई,उसकी पूरी नाइटी अजय के पसीने से गीली हो गई थी,लेकिन वो उसे नही छोड़ रही थी ,सोनल बस उसे देखे जा रही थी,वो दोनो के लिए तो ये नार्मल बात थी लेकिन सोनल जो उसे देख रही थी उसे इसमें एक मादकता दिखी ,दो जिस्म लगभग नंगे एक दूसरे से लिपटे थे ,निधि ने अपने होठो को अजय के होठो के पास किया और अजय ने उसे अपने होठो में भर लिया,थोड़ी देर तक वो एक दूसरे को यू ही चूमते रहे ,सोनल को आभास हुआ की वो भी विजय के साथ यही करती है,आज उसे लगा की शायद भाई बहन के रिस्ते में वो बहुत आगे निकल गए जितना नही निकलना चाहिए था,ये अहसास उसे भी अभी हुआ,खुद को अहसास कभी भी नही होता लेकिन दूसरे को देखने से लगता था की ये तो कुछ ज्यादा हो रहा है,अजय ने उसके चहरे के भाव पड़े और उसे अपनी ओर बुलाया,वो काँपती हुई अजय के पास आई ,आज उसे इन क्रियाओं में भाई बहन का प्यार नही दो देह का मिलान दिख रहा था,

अजय ने उसे उसके कमर से पकड़ा और उसे अपनी ओर खिंच लिया,वो उससे सट गई,उसकी सांसे एक अनजाने डर से तेज हो गई थी,अजय ने अपनी गर्दन नीचे किया और उसके होठो को भी अपने होठो से लगा लिया ,सोनल के लिए ये थोड़ा मुश्किल था,वो अभी प्यार की उस संवेदना में नही थी जंहा से उसे ये सब अच्छा लगता लेकिन वो अजय को ना भी नही कह पा रही थी,दोनो के होठ मिले निधि उनसे थोड़ी अलग हुई और बिस्तर में जाकर लेट गई ,यहां अजय का हाथ सोनल की कमर में गया और वो उसे और भी करीब खिंच लिया,अजय को ना जाने क्यो सोनल पर बहुत प्यार आ रहा था,उसे नितिन की वजह से ऐसा लग रहा था की वो उससे अलग हो रही है ,अजय को सोनल के लिए ऐसे ख्याल कभी भी नही आये थे,वो सोनल की आंखों में देखता है,

सोनल भी डरी हुई सी उसके आंखों में देखने लगी,लेकिन जैसे ही उनकी आंखे मिली उसका सारा डर जाता रहा,अजय की आंखों में उसके लिए अथाह प्यार था,सोनल को अपनी गलती का अहसास हुआ ,उसका भाई उसे बेहद प्यार करता था,उसके मन में कोई भी पाप उसके लिए आ ही नही सकते थे,सोनल की आंखे नम हो गई थी ,अजय उसकी आंखों के पानी को अपने होठो से पी गया ,

“i love you भइया,मुझे माफ कर दो “सोनल रोती हुई अजय से लिपट गई ,अजय को समझ नही आया की आखिर वो ऐसा क्यो बोल रही है,

वो उसके बालो को सहलाने लगा,

“क्या हुआ मेरी जान “

“कुछ नही भइया आज पहली बात मेरे दिल में आपके लिए गलत ख्याल आया “अजय फिर से कंफ्यूज हो गया था,सोनल उसके छाती के बालो में अपने हाथ फेरने लगी

“सोनल मैंने तुम्हे कुछ बात करने बुलाया था,”

“जी भइया “

“तुम बैठो मैं नहाकर आता हु “

वो बाथरूम में घुसा साथ ही निधि भी दौड़कर उसके साथ घुस गई,सोनल को ये देखकर हँसी आ गई ,वो अपनी आंसुओ को पोछते हुए बिस्तर में बैठ गई,कुछ देर बाद अजय और निधि बाहर आये,निधि एक नए नाइटी में थी शायद वो उसे पहले से बाथरूम में रख रखा था,अजय भी एक टॉवेल

में बाहर आया और एक निकर उठाकर उसे पहनने लगा,ये सब वो अपनी दोनो जवान बहनों के सामने कर रहा था,लेकिन ना तो उसके मन में कोई बात आयी ना ही उन दोनो के दिमाग में ,

वो फिर से बिस्तर में बैठा,

“सोनल मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु और मुझे तुम्हारे और नितिन के बारे में पता चला ,मुझे इससे कोई भी परेशानी नही है लेकिन क्या तुम दोनो किसको लेकर स्योर हो ..”

“भइया इसका क्या मतलब हुआ हम एक दूसरे से प्यार करते है ,और एक दूसरे से शादी भी करना चाहते है,”

“लेकिन तुम दोनो भाई बहन हो ये जानते हुए भी “इस बार अजय थोड़ा गंभीर था,और सोनल भी ,सोनल के आंखों में कुछ आंसू आ गए थे,उसने अपना मन दृढ़ किया जैसे वो कुछ निश्चय कर ली हो ,अजय निधि और सोनल के बीच में लेटा था वही निधि उससे लिपटी हुई लेटी थी जबकि सोनल उसके दूसरी ओर बैठी थी,वो उसके और पास गई उसके सीने में अपनी हथेलि रखी ,और उसे सहलाने लगी

“भइया हम सगे भाई बहन तो नही है ना,और अपने ही तो कहा था की मैं जिससे भी कहु आप उससे मेरी शादी करोगे,मुझे आपपर पूरा भरोसा है भइया की आप मेरा साथ दोगो,और अगर आप ये सोच रहे हो की ………….

सोनल थोड़ी देर को चुप हो गई ,अजय अब भी उसके चहरे को देख रहा था वही निधि को जैसे कुछ मतलब ही नही था वो बस आंखे बन्द किए सोई थी,

“कि भाई बहन है तो हमारे बीच सेक्स कैसे होगा,तो भइया दिल में अगर प्यार हो तो जिस्म का मिलान पाप नही होता,”

वो एक ही सांस में बोल गई,”

सोनल इतना बोलकर उसके सीने में अपने सर को टिका दिया

“मैं जानती हु भइया,समाज की मुझे कोई भी चिंता नही है ,आप सबसे लड़ जाओगे मेरे लिए “वो सुबकने लगी अजय ने उसे उठाया और अपने ऊपर खिंच कर उसे गले से लगा लिया ,वो अब भी सुबक रही थी ,अजय उसके बालो को सहला रहा था,

“नही मेरी जान मुझे समाज की नही तुम्हारी चिंता है,और चिंता है इन दो परिवारों को जो इतने सालो की दुश्मनी के बाद आज जाकर मिले है,

“मैं जानती हु भइया ,लेकिन अगर आप साथ हो गए तो कोई भी कुछ नही कहेगा,मुझे लगता है सभी मान जाएंगे”

“ह्म्म्म,तो तेरी भी शादी किशन के साथ ही कर दे “

सोनल का सुबकना अचानक ही बन्द हो गया,वो उठी अजय के चहरे में एक मुस्कान थी ,उसे देखकर उसके होठो में मुस्कान और चहरे में शर्म आयी वो उसे एक मुक्का अजय की छाती में लगाई ,और फिर से उससे लिपट गई,

“भइया एक चीज बोलू ,”

“हम्म “

“आप बुरा मत मानना लेकिन मेरे और विजय के बीच भी सेक्स हो गया,हम पता नही कैसे ये कर बैठे,आज जब आपको और निधि को यू किस करते देखा तो लगा की हमने शायद बहुत बड़ी गलती कर दी ,भाई बहन के प्यार का ये मतलब तो नही की जिस्म की आग बुझाई जाए,”सोनल फिर से रो रही थी और वो अब उठकर बैठ गई थी,वो अजय के चहरे को देख रही थी वो बोलते रही ..

“भइया आपकी कसम की हमारा ये इरादा बिल्कुल भी नही था,हम तो बस एक दूसरे को प्यार करते है जैसे की आप और निधि ,लेकिन ना जाने ऐसा क्या हुआ की हमे समझ ही नही आया की क्या हुआ और हमारे जिस्म मिल गए …”

अब अजय क्या बोलता वो खुद भी शॉक था,उसे भी समझ नही आ रहा था की जो वो निधि के साथ प्यार बोलकर करता है क्या वो गलत है या सही ,इसी गलत सही के फेर में सालो तक वो निधि से अलग रहने की कोसीसे करता रहा था,लेकिन वक्त के सामने किसीकी चलती है जो अजय की चलती ,वो चुप ही था ,उसे समझ नही आ रहा था की क्या कहे गुस्सा हो जाय या और कुछ ,हा उसके दिल में एक अजीब सा दर्द जरूर था,जो की एक बेचैनी थी या कोई तमन्ना या की कोई सपना क्या था …..??????

“अरे पागल उसे सेक्स नही प्यार करते है समझी आप भी ना दीदी,और ये मैं और भैया रोज ही करते है…. “

निधि मचलते हुए कह गई ,वो अजय के बांहो में मचली ,उसके आंख अब भी बन्द ही थे….लेकिन ये सुनकर सोनल का रोना बिल्कुल ही बन्द हो गया,अब वो और अजय दोनो ही शॉक थे ,दोनो कभी एक दूजे को देखते तो कभी निधि को ,शायद ये निधि को भी समझ आ गया था वो ऐसे कूदकर उठी जैसे कभी सोई ही नही हो ,

“सच्ची तो कह रही हु”उसने फिर से कहा ,और दोनो को देखने लगी,अजय बिल्कुल ही नर्वस हो गया था,लेकिन सोनल के होठो में एक मुस्कान आ गई

“ओह भइया ऐसी बात है तभी आप खुसबू से दूर भगते हो ,अपनी सगी बहन के साथ तो सबकुछ कर सकते हो और मामा की लड़की आपकी बहन हो गई उससे दूर रहना चाहते हो “सोनल के चहरे में अभी भी मुस्कान थी

“मेरे भैया को कुछ भी मत बोलो दीदी ,उन्होंने जो भी किया मेरे कहने पर किया और जो भी ये गलत हो तो वही सही मैं अपने भइया का साथ कभी नही छोड़ने वाली और दुनिया के नियमो की तो मा की …. “निशि इतना बोलकर ही रुक गई

अजय अब भी कुछ नही बोल पा रहा था,

“सोनल मुझे माफ कर दे ,लेकिन पता ही नही चला की ये कब हो गया,और तुझे पता है की मैं अपनी बहनों से कितना प्यार करता हु मैं उनके बारे में बुरा सोच भी नही सकता ….”

अजय की आंखों में भी पानी आ गया था ,वो जानता था की जिस परिस्थिति में ये सब हुआ था वो गलत नही थे लेकिन समाज की बनाई रिवाजो के सामने उसे अपने द्वारा किया काम गलत लगने लगा था,

सोनल उसके माथे में अपना हाथ फेरती है,

“मैं समझ सकती हु भइया ,प्यार की क्यो सिमा नही होती सीमा तो रिश्तों की होती है,जब प्यार रिश्तों के आगे निकल जाय तो वो मर्यादा का बंधन लांघ सकती है,मेरे और विजय के साथ भी यही हुआ जो आपके साथ हुआ ,अब ये गलत है या सही मुझे नही पता लेकिन जो है वो बस है….

”

अजय ने बड़े प्यार से सोनल को देखा ,

“तो निधि आज हम दोनो मिलकर भइया से प्यार करेंगे “सोनल की बात से निधि खुस हो गई लेकिन अजय को जैसे ही ये बात समझ आयी

“नही पागल हो क्या “

“भइया हम तो प्यार करने की बात कर रहे है आप तो गलत समझ लिए “

सोनल ने मुस्कुराकर शरारत से कहा और दोनो बहन अजय के ऊपर कूद गए ,अजय भी हँसता हुआ उनसे खेलने लगा,लेकिन आज कोई भी सेक्स के मूड में नही था वो बस मस्ती कर रहे थे…………..

अध्याय 62

पूरा घर सजा था,चारो ओर खुशियो की बारिस हो रही थी,किशन की शादी की रस्मे शुरू हो चुकी थी ,किशन की बारात ठाकुरो के हवेली से निकल कर ततिवारियो के हवेली में जानी थी,गाजे बाजे से बारात निकली ,पूरा परिवार झूम रहा था,

बारात का स्वागत और हँसी ठिठोली में समय बीत रहा था,शादी की रस्मे जोरो पर थी ,अजय ने एक नजर खुसबू को देखा,सचमे ऐसा लग रहा था जैसेकि स्वर्ग से कोई अप्सरा उतर आयी हो ,घाघरे चोली में लिपटी हुई वो हुस्न की मलिका सुमन के साथ जब बाहर निकली तो अजय बस उसे ही देखता रह गया,खुसबू की नजर जब अजय पर पड़ी तो वो भी शर्मा गई ,आज पहली बार था जब अजय खुसबू को इतने प्यार से देख रहा था,

मेहमानों में कुछ खास लोग भी आने शुरू हो गए थे,मुख्यमंत्रि जी डॉ चुतिया के साथ बाते कर रहे थे,विपक्ष के नेता भी साथ ही थे,तभी अजय उनको जॉइन करता है ,

“बधाई हो अजय अब तो तुम भी राजनीति के दंगल में आ गए “

अजय के चहरे में एक कुटिल सी मुस्कान आयी उसे इन सीनियर नेताओ से बहुत कुछ सीखना था ,वो जंहा बाहर एक दूसरे को काटने में लगे होते है वही जब दूसरे वो फुरसत में एक दूसरे से मिलते है तो हँसी ठिठोली में समय बिताते है,इन्हें देखकर कौन कह सकता था की जो दो लोग सामने खड़े थे वो एक दूसरे के राजनीतिक रूप से कट्टर दुश्मन थे ,और अब इनके दुश्मनों में एक नाम अजय का भी था,

“बस आप लोगो की कृपा है अंकल ,आप लोग अगर समाज के लिए कुछ बुनियादी काम करते तो शायद हम जैसे लोगो को राजनीति में आने की जरूरत ही नही पड़ती “

अजय की बात सुनकर डॉ हँसने लगा ,

“मंत्री साहब अब इससे बच कर रहिए गा,कम समय में ही बहुत कुछ सिख लिया इसने “

सभी हँसने लगे .

“अरे भई राजनीति तो इसके खून में है,राजाओं के वंसज है ,और इसके दादा जी, वाह कमाल के राजनेता थे ,ऐसे सच कहा डॉ इसने तो हम दोनो पार्टीयो को डरा ही दिया है ,लेकिन बेटा राजनीति में सिर्फ चुनाव जितना ही काफी नही होता बल्कि सत्ता में आकर ही समझ आएगा की असली मुश्किलें कहा है “

मुख्यमंत्रि बंसल साहब मुस्कुराते हुए बोले ,

“अंकल आप कुर्सी खाली तो कीजिये फिर आप तो है ना हमे मार्गदर्शन देने के लिए ,हम भी सत्ता चला ही लेंगे …”

अजय ने ये बात हस्ते हुए कही और सभी फिर से हँस पड़े

“अब ये पक्का राजनेता बन गया है “

बंसल साहब ने टिप्पणी की ,

तभी बाकी के बुजुर्गों ने दोनो नेताओ को अपने पास बुला लिया ,अब डॉ और अजय ही रह गए थे,

“यार अजय इस बार लगता है की तुम्हारी पार्टी कुछ सीटे तो जीत ही जाएगी लेकिन तुम्हे गठबंधन करना पड़ेगा ,क्यो ना तुम बंसल की पार्टी से ही गठबंधन कर लो ,और साथ ही चुनाव लडो”

“नही डॉ साहब गठबंधन का मतलब होगा की हमे उनके सामने झुकना पड़ेगा ,चुनाव तो हम अकेले ही लड़ेंगे कम से कम हमे हमारी ताकत का अंदाजा तो लग ही जाएगा ,और चुनाव आयोग को पार्टी की रूपरेखा भी भेज दी है कुछ ही दिनों में चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम भी डिसाइड हो जाएगा ,2-4 सीट ही मिले लेकिन अपने दम पर मिले तभी काम की है ,उसके बाद देखेंगे अगर गठबंधन का मौका मिला तो दोनो पार्टीयो में जो हमारे एजेंडे पर काम करने को तैयार होगा उसका ही साथ देंगे “

डॉ अजय की समझ से बहुत खुस दिख रहे थे,

“लेकिन अगर तुम बंसल की पार्टी से अभी गठबंधन करोगे तो 10 से 12 सीटे तुम्हे मिल सकती है “

“लेकिन बंसल अंकल इतनी सीटे हमे क्यो देंगे ,मेरे ख्याल से 4-5 सीट देने को ही तैयार होंगे “

“बंसल अक्लमंद आदमी है वो अगर 10 सीट भी तुम्हे दे देगा तो उसका कोई नुकसान नही होगा ,तुम्हारे इलाके से तो उसका जितना अभी लगभग नामुमकिन है ,4 सीटे तो तुम्हे आराम से केशरगढ़ क्षेत्र से मिल ही जाएंगी ,लेकिन बाकियों ने मुकाबला तो बंसल और तुम्हारे बीच का ही होगा ,इससे उसकी 20-25 सीटो पर बुरा असर पड़ सकता है ,यहाँ सिर्फ जितना ही इम्पोर्टेन्ट नही होता ,बहुमत भी तो चाहिए और अगर उन सीटो में तुम्हारे झगड़े से अगर दूसरी पार्टी को फायदा पहुचा तो सीधे से बंसल के बहुमत को नुकसान होगा ,ऐसे भी 10 सालो से ये मुख्यमंत्रि है इसका इसबार जितना बड़ा ही मुश्किल लग रहा है ,जनता भी इससे पक चुकी है ऐसे में कोई नई पार्टी जिसके समर्थक उसके ही लोग हो ,बंसल के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है ,वो तो चाहेगा की तुम उसके साथ आकर चुनाव लड़ो ,और निधि या धनुष को कोई मंत्रालय भी दे dega …….

अजय सोच में पड़ गया लेकिन उसने बहुत ही जल्दी फैसला भी कर लिया ,

“नही डॉ कम सीट ही मिले लेकिन चुनाव तो अकेले ही लड़ेंगे ,उसके बाद अगर सरकार को गठबंधन की जरूरत पड़ी तो डील कर लेंगे ,4 सीट के साथ भी मैं अपने भाई बहन को मंत्री बना सकता हु ,क्योकि आखरी बहुमत तो हमारे होने से ही होगा ,मुझे ये असंका है की इस बार बहुतमत किसी को नही मिलेगा ,और हम गेम चेंजर हो जाएंगे “

डॉ अजय की बात सुनकर हँसने लगता है ,

“ठीक है ठीक है लेकिन जेम चेंजर बनने के लिए कम से कम 10 सीटे होनी चाहिए ,मेहनत शुरू कर दो 20 सीटे चुन लो जिनमे तुम्हारे जितने की संभावना सबसे ज्यादा हो ,जंहा तुम्हारा रुतबा हो या तुम्हारा व्यपार फैला हो ,इनमें से 10 भी तुम्हारे हाथ लगे तो तुम जेम चेंजर हो जाओगे ,फिर तुम्हारे बिना कोई भी सरकार नही बना पायेगा …”

अजय डॉ एक दूसरे की बातो से सहमत होते है,तभी कोई डॉ को बुलाने आ जाता है …………….

अध्याय 63

सभी शादी की रश्मो में बिजी हो गए थे,अजय अकेले में छत में जाकर बैठा था,पंडित जी के मंत्रोच्चार की ध्वनियाँ वातावरण में गूंज रही थी,तभी उसे किसी के पायल की आवाज आयी,वो चौका क्योकि वो खुद सबसे छिपकर छत में जाकर बैठा था,और ऊपर से नीचे गार्डन में हो रहे फंक्शन को देख रहा था,वो पलटा

“अरे तुम यहां ??”

“आप भी तो यहां है “खुसबू मुस्कुराई साथ में अजय भी

“मेरा पीछा कर रही हो “

“वही समझ लीजिये “

अजय ने फिर से उसे ऊपर से नीचे तक देखा ,जिससे खुसबू के दिल की धड़कन बढ़ गई वो शर्म से नजर नीचे किये अजय के पास आकर खड़ी हो गई ,अजय ने उसका हाथ पकड़ा और पास ही बिठा लिया ,दोनो ही अब छत की बाउंड्री से पीठ सटाए बैठे थे,अजय के हाथ के स्पर्श ने खुसबू के शरीर में एक झुनझुनी सी दौड़ा दी ,

“ह्म्म्म अब बोलो क्यो पीछा कर रही हो मेरा “

“आप यहां अकेले क्यो बैठे है “

“पहला प्रश्न तो मैंने पूछा था ना “

“तो पहला उत्तर भी आप ही दे दो “खुसबू हल्के से हँसी,उसकी ये हँसी अजय के दिल के गहराइयों तक पहुच गई ,वो दिल से खुसबू को पसंद करता था,बस कुछ दीवारे थी जो सोनल से मिलने के बाद बहुत ही कमजोर हो चुकी थी ,

अजय ने खुसबू के हाथो को हल्के से सहलाया ,और फिर उसे अपनी ओर जोर से खिंचा ,खुसबू को इसकी अपेक्षा ही नही थी,वो सीधे अजय के ऊपर जाकर गिर गई,

“आउच क्या कर रहे है आप “

अजय ने उसे अपने बांहो के घेरे में भर लिया

“कुछ नही बस तुम पर हक जताने की कोसिस “

खुसबू के तो आनंद की सिमा ही नही थी ,जिसे वो इतने दिनों से चाहती थी ,और जो उसे मिलना लगभग नामुमकिन लग रहा था आज वो हो रहा है,अजय उसपर हक जताना चाहता है,

खुसबू की खुसी का बयान उसकी आंखों ने किया,वो बहने लगे,वो अपने सर को अजय की छाती में गड़ा कर सुबकने लगी ,अजय का हाथ उसके सर पर गया और वो उसे सहलाने लगा ,खुसबू ने अपनी बांहो फैलाई और अजय को जकड़

लिया,

अजय उसके गालो में अपनी उंगलिया फिराने लगा

“ए देखो मुझे “

खुसबू ने अपना सर ना में हिलाया

“अरे देखो तो सही “

फिर से ना में सर हिलाया

“क्यो ,क्या हुआ ?”

“ऊऊऊ न हु “

“बताओगी क्या हुआ “अजय अपने होठो को उसके कानो के पास ले जाकर हल्के से फूक मारी,खुसबू मचल गई वो सुबकते हुए भी हल्के से हँस पड़ी ,

“मत कीजिये ना “खुसबू मचलते हुए बोली

“अच्छा तो मैं जाता हु “

अजय उसे अपने से हटाने लगा ,

खुसबू ने सर उठाकर उसे देखा ,उसकी आंखे अब भी गीली थी

“रुक जाइये मत जाइये ……”वो उसे छोड़ने को तैयार नही थी

“अच्छा कर लीजिये जो करना है “इतना बोलकर वो फिर से अजय को जकड़ ली

“अच्छा क्या करू “

“जो अपना दिल चाहे …”खुसबू की आवाज थोड़ी धीरे थी ,वो तो बस अपने को अजय के सामने सौपना चाहती थी,वो अपना सर तक उसके सीने से हटाने को राजी नही थी ,होती भी कैसे जिसे इतने शिद्दत से चाहा था वो आज मिला था,

“अच्छा कुछ भी कर लू “अजय उसके कानो के पास जाकर कहता है

“ह्म्म्म मैं तो आपकी ही हु,बहुत पहले से मैंने खुद को आपको सौप चुकी हु ,आप ही मुझे अपनाने से इनकार कर रहे थे …”वो अजय के सीने में खुद को और भी जोरो से दबाती है,

“मैं आपकी हु और जीवन भर आपकी ही बनकर रहना चाहती हु ,मुझे अपना लीजिये “

खुसबू अब लगभग रोने लगी थी ,अजय उसका चहरा ऊपर उठता है जो वो उठाने नही दे रही थी वो अपना सर उसके सीने से अलग नही होने दे रही थी,जब उसका चहरा अजय के चहरे के पास आता है वो अजय उसके होठो में प्यार से एक किस कर लेता है

“मुझे माफ कर दो खुसबू ,मुझे समझ ही नही आ रहा था की आखिर मैं क्या करू,आई लव यु खुसबू ….”

खुसबू अपने आँखों में पानी लिए अजय को प्यार से देखती है वो उसे बहुत कुछ कहना चाहती थी ,अपना दिल उसके सामने चिर कर रख देना चाहती थी लेकिन कैसे ,मजबूरी में बस उसके होठ कांप रहे थे,और आंखों से आंसू बह रहे थे

……………………

“कुछ बोलो ना”अजय अब भी उसके बालो को सहला रहा था,

“उ हु ,मैं कुछ भी नही बोलूंगी बस ऐसे ही रहो ,सारी जिंदगी बस अब ऐसे ही बीत जाय,और मुझे कुछ भी नही चाहिए “

अजय ने उसे प्यार से देखा लेकिन उसका चहरा अजय के सीने में गड़ा हुआ था,वो उसके सर पर ही एक किस करता है,

“अच्छा चलो अब देर हो रही है सभी हमे ही ढूंढ रहे होंगे “

खुसबू फिर से ना में सर हिला देती है ,वो बिना कुछ बोले यू ही एक दूजे के चिपके हुए ना जाने कितने देर तक बैठे रहे,समय थम चुका था,बस धड़कने थी कोई जिस्म कही नही था,फ़क़त कुछ सांसे थी,और था वो अहसास एक दूजे के होने का,एक दूजे में खो जाने का …….

तभी किसी के पायलों की आवाज आने लगी दोनो अपनी दुनिया से बाहर निकले ,ही थे की सोनल ने दूर से उन्हें देख लिया,वो जल्दी से अलग हुए …

“ओहो ओहो अब चिपके ही रहो मुझे देख के अलग क्यो हो रहे हो “

खुसबू बुरी तरह से शर्मा गई थी वही अजय भी थोड़ा नर्वस हो रहा था,दोनो ही खड़े हो गए

“हम इन्हें कहा कहा ढूंढ रहे है और ये है की यहां प्रेम की पींगे हांक रहे है,ओहो क्यो मेरी खुसबू रानी “

सोनल जाकर खुसबू को छेड़ने लगी खुसबू घबराकर वहां से भागी,लेकिन खुसबू ने उसे पकड़ लिया और उसके चहरे पर एक किस कर दिया ,अजय ये सब देखकर सोनल के लिए प्यार से भर गया वो अपनी बांहे फैलाकर सोनल को उसमे आने का निमंत्रण देता है और सोनल दौड़ते हुए उसके सीने से लग गई ,खुसबू तो दौड़ कर बाहर चली गई ,और सोनल अजय के बांहो में थी,

“क्यो भइया आखिर हमे भाभी मिल ही गई “

“हम्म मेरी जान ,”

“तो लव यु वगेरह बोला की नही “

“जब दिल में ही प्यार हो तो क्या बोलना “

“अरे भइया बोलना भी जरूरी होता है बस प्यार करना ही नही बल्कि उसे जताना भी जरूरी होता है “

“ठीक है मेरी मा वो भी कर देंगे लेकिन अब नीचे चल सब ढूंढ रहे होंगे “

“हा भइया जल्दी चलिए “

नए नए प्यार का नशा ,वो खुमार वो खुसबू ,कुछ अलग ही फिलिंग होती थी ,अजय खुसबू के प्यार की खुसबू में खोया हुआ था ,और ये बात हवा में बह रही खुसबू जैसे चारो ओर फैलाने लगी थी,लगभग सभी बच्चों तक ये बात पहुच गयी और सभी इससे बहुत खुस थे ,दोनो ही एक दुसरो को रह रह कर देखते और खुसबू इससे शर्मा जाती और सोनल उसे छेड़ने का कोई भी मौका नही छोड़ रही थी,सुमन की बिदाई का समय आ गया था ,रोने वाला कोई था ही नही ,क्योकि सभी इस रिश्ते से बेहद खुस थे ,लेकिन उसकी मां की आंखों में आंसू आ ही गया ,

ठाकुरो की हवेली में किशन का कमरा फूलो से सजाया गया था,ऐसे तो किशन ने अब तक ना जाने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया था लेकिन आज उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,ये बात भी स्वाभाविक थी क्योकि सुमन उसका प्यार था,और ये पहली बार था …..

तो धक धक करते जिया के साथ वो छत में टहल रहा था,उसकी इतनी हिम्मत नही हो रही ही की वो अपने कमरे में जाय

तभी उसे किसी के आने की आहट हुई अजय उसके पास आया था ,

उसे देखते ही वो उसके पास चला गया ,अजय ने अपने चहरे में एक मुस्कुराहट लाते हुए उससे आंखों से ही पूछ लिया की क्या हुआ ,

“पता नही भैया बहुत घबराहट हो रही है”

अजय की मुस्कान चौड़ी हो गई

“ये तेरे साथ पहली बार तो नही है “

“नही भइया वो बात नही है पर ना जाने क्यो बहुत ही घबराहट हो रही है,ऐसा लग रहा है जैसे की ये पहली बात हो ,पहले कभी ऐसे दिल नही धड़का था,सांसो ने तो जैसे आंदोलन कर रखा है,समझ नही आ रहा की ये क्या हो रहा है “

अजय उसके कंधे पर प्यार से अपना हाथ रखकर कहता है,

“अरे पगले तेरा ये हाल है ओ जरा सोच की उसका क्या हाल होगा,ये स्वाभाविक है होता है ,और अगर तू ऐसे डरेगा तो उसे कैसे समझयेगा ,अब तेरी शादी हो चुकी है मतलब की वो अब तेरी जिम्मेदारी है ,उसका सुख दुख अब सब तुझसे ही होगा ,अब चल गहरी सांसे ले और नीचे चल ,सब ठीक होगा “

अजय के पास होने के अहसास से ही किशन के दिल में हिम्मत आ गई वो 2-4 गहरी सांसे लेकर

“चलो भइया किला फतह करते है “

अजय की हँसी छूट गई

“किला मुझे नही तुझे फतह करनी है ,चल अब नीचे “

अध्याय 64

किशन कमरे में आया तो चौक गया ,सभी औरते वही जमावड़ा डाले बैठी थी,उसका पूरा जोश ही ठंडा होने लगा ,सभी उसे देखते ही मजाक उड़ाने लगी वो बेचारा पसीने से भीग चुका था,लेकिन सभी उसकी हालत देखकर उसपर थोड़ा तरस खाकर वहां से जाने लगे लेकिन रानी और निधि अब भी वही थी ,किशन ने दोनो को सवालिया निशान से देखा ,

“ऐसे कैसे चले जाएंगे भइया,हमारे रश्म के पैसे कहा है “

रानी के चहरे पर मुस्कान थी उसे पता था की किशन ने ऐसा कभी सोचा भी नही होगा,वो सच में घबरा गया …

“ये ये कैसा रस्म है मुझे तो किसी ने कुछ बताया है नही “

“ओहो देखा भाभीजी आपका पाला किस बुद्धू से पड़ गया ,अरे मेरे प्यारे भइया जी आज जब तक आप हमे हमारे मुह मांगे पैसे नही दे देते हम इस कमरे से नही जाएंगे “

किशन थोड़ी देर सोचा लेकिन उसके चहरे में एक मुस्कान आ गई

“अरे मेरी बहनों तुम्हारे लिए पैसा क्या मैं अपनी जान भी दे दु “

“अभी के लिये तो पैसे ही काफी है ,भइया जल्दी दो मुझे बहुत नींद आ रही है “इस बार निधि के अपने मासूमियत वाले अंदाज में कहा ,

“तो अपनी भाभी के साथ सो जा ना ,ऐसे भी तुम्हारे यंहा रहने से मुझे कोई परेशानी नही है “

“अच्छा तो मैं तो यंही सो रही हु गुड नाइट “निधि बिस्तर में मुह गड़ाकर सो गई ,

“अरे ये क्या कर रही है ,तुझे कहा था ना की जब तक भाई पैसे ना दे यही रहना और तू यहां सोने लगी आज इनकी सुहागरात है पगली ,और अब ये कमरा भाभी जी का है हमारा नही “रानी निधि को हिलाते हुए बोली ,किशन उसके पास आकर बैठ गया ,वो सुमन के बाजू में ही

बैठी थी ,सुमन अभी दुल्हन के जोड़े में सिकुचाई हुई पैर मोड़कर बैठी हुई थी उसे देखकर लगता ही नही था की ये इस घर में इतने दिनों से रह रही थी,किशन रानी के बाजू में बैठ गया ,निधि अपनी आंखे खोले उन्हें देख रही थी ,किशन ने रानी के बालो को अपने हाथो से सहलाया ….और उसे गौर से देखने लगा ,पता नही क्यो लेकिन रानी की आंखों में उसका स्पर्श पड़ते ही आंसू आ गए ,वो अपने भाई की खुसी से बहुत ही खुश थी पर उसे व्यक्त नही कर पा रही थी ,कभी किशन एक आवारा सा लड़का हुआ करता था इस लड़की के प्यार ने उसे क्या से क्या बना दिया,

“मेरे पास जो भी है वो तेरा ही तो है पगली ,क्या चाहिए तुम दोनो को अगर तुम्हारे भाई के बस का रहा तो जरूर दूंगा ,लेकिन ये मत कहना की ये कमरा अब तुम्हारा नही रहा,या मैं तुम्हारा नही रहा तुम्हे यंहा रहना है तो यही रहो ,और मैं तो जीवन भर तुमलोगो का रहूंगा,मुझे मेरी बहनों से दुनिया की कोई भी ताकत अलग नही कर सकती “

रानी के मुह से कोई बोल ही नही निकल रहे थे ,वो बस आंसू लिए अपने भाई को देख रही थी वो किशन से लिपट गई ….

“लव यू भाई,मुझे तुमसे कुछ भी नही चाहिए और मुझे पता है मेरा भाई मुझसे कितना प्यार करता है मैं आज बहुत खुश हु भाई ,मेरे भाई को उसका प्यार मिल गया …”

वो दोनो थोड़ी देर तक एक दूसरे से चिपके रहे ,तभी निधि बोल पड़ी

“भइया मुझे तो चाहिए “

“तू बोल तो सही मेरी प्यारी गुड़िया को क्या चाहिये “किशन उसके बालो में हाथ फेरने लगा

“जल्दी से एक प्यारा सा भतीजा ….और इसमें देरी नही होनी चाहिए “रानी और निधि हँसने लगे वही सुमन बेचारी थोड़ी सकुचा गई ,वो जरूर घूंघट के नीचे मुस्कुराई होगी …

“अरे बहन अब इन्हें छोड़ देते है नही तो भतीजा आने में देरी हो जाएगी “रानी और निधि फिर से हँसे और किशन और सुमन को किस करके कमरे से निकल गए……..

आज वस्ल की रात थी ,और किशन के साथ सुमन की दिल की धड़कने भी बढ़ी हुई थी ,किशन बड़ी मुश्किल से उसके पास जाकर बैठा था,सुमन अब भी घूंघट में ही बैठी मुस्कुरा रही थी ,वो कभी अपने पैरो को एक दूसरे पर मसलती कभी किशन के पहल का इंतजार करती ……..

“सुमन …..”

“हम्म्म्म “

“अरे कुछ तो बोलो “

कुछ देर तक कोई भी आवाज नही आयी ,किशन उसके पास जाकर उसका घूंघट उठा लेता है ,सुमन बड़ी मुश्किल से ही सही लेकिन अपनी नजर नीचे ही गड़ाए रखती है,

“सुमन …..

”

“हम्म “

“ऐसे कैसे चलेगा,मुझे भी बहुत डर लग रहा है “

सुमन हल्के से हस्ती है ,वो हँसी हल्की ही थी लेकिन किशन के कानो तक पहुच ही गई

“अरे तुम्हे मजाक लग रहा है ,ये देखो “

वो सुमन के हाथो को पकड़कर उसे अपने दिल के पास लाकर रख देता है जो की तेजी से धड़क रहा था,सुमन उसे नजर उठाकर देखने पर मजबूर हो जाती है ,जो लड़का कभी उसका रेप करने वाला था जो ना जाने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स कर चुका था आज वो एक लड़की के सामने बैठा ये कह रहा है ,पहले तो सुमन को यकीन नही हुआ था लेकिन उसके धड़कते दिल ने उसे सच बता दिया था,

दोनो की नजर मिली और सुमन ने तुरंत ही अपनी नजर झुका ली ,सुमन की नजर का प्रेम देखकर किशन को कुछ राहत मिली और साथ ही थोड़ी हिम्मत भी मिली वो उसके और पास गया …

“सुनो ना “

“ह्म्म्म “

“तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो मन करता है की ………..”

सुमन ने कुछ भी नही कहा बस उसके बांहो को जो की सुमन के बाजू में था हल्के से मरती है ,

“अरे मैं तो किस की बात कर रहा हु “

सुमन कुछ भी नही कह पाती …

“अच्छा लगता है तुम्हारा मन नही है मैं जाता हु “

किशन को भी पता था की वो उसे रोकेगी लेकिन उसने अपने आवाज में एक झूठा गुस्सा लाया ,एक हल्का सा गुस्सा ,

सुमन तुरंत ही उसकी प्रतिक्रिया देती है और जैसे ही किशन पलटने को होता है वो उसका हाथ पकड़कर रोक लेती है ,

“मत जाओ “सुमन उसे देखते हुए बोलती है ,इससे किशन के चहरे में एक मुस्कान आ जाती है लेकिन सुमन शर्मा जाती है,और फिर से अपनी नजर नीचे कर लेती है ,

“तुम तो कुछ बोल ही नही रही हो “

“क्या बोलू “

“मेरी बात का जवाब दोगी “वो हा में सर हिलती है …

“हम तो इतने दिनों से साथ है ना फिर आज इतना क्यो शर्मा रही हो “

वो फिर से नजर उठाकर उसे देखती है लेकिन फिर से नजर झुका लेती है,

“क्योकि अब आप मेरे पति हो “

“अच्छा तो अपने पति के पैर तो तुमने छुवे ही नही “किशन के चहरे में एक मुस्कुराहट तैर जाती है वही सुमन जैसे कुछ भूल गई हो वो हड़बड़ाई और तुरंत किशन के पैर ढूंढने लगी किशन जोरो से हँसा और इसी हलचल में उसने सुमन को अपने ऊपर गिरा लिया ,अब किशन बिस्तर में पड़ा था वही सुमन उसके ऊपर पड़ी थी ,सुमन का घूंघट पूरी तरह से निकल चुका था ,हलचल में बाल भी थोड़े बिखर गए थे,लेकिन फिर भी सलीके से सवांरे गए थे ,एक आउच के साथ वो किशन की बांहो में थी ,किशन ने आराम से एक तकिया अपने सर में रख लिया और स्तिथि का भान होने पर सुमन बिल्कुल शर्मा कर पहले तो छूटने की कोसिस करने लगी लेकिन किशन की बांहो ने उसे मजबूती से कस रखा था ,वो हारकर अपना सर उसके सीने से लगा के लेट गई उसका विरोध कम होने पर किशन ने उसके मुखड़े को उठाकर देखा ,वो कठपुतली सी उठ गई ,सजी सवारी सवाली सलोनी सी सुमन ,एक तेज से भरा हुआ रूप जो की उसकी परिस्थितियों से और भी उज्वल हो गया था,वो

आंखे बंद किये हुए किशन को अपना सब सौपने को तैयार थी ,ऐसे तो किशन ने बहुत ही हूर परिया देखी थी लेकिन सुमन के प्यार के आगे सब ही फीके थे ,वो अपने सर को उठाकर उसके होठो पर एक चुम्मन लेता है जिससे सुमन फिर से हरकत में आती है और अपना सर उसकी छाती में गड़ा देती है ,

“सुमन मेरी जान ,कितनी मुद्दत से तुम्हे पाना चाहा था और आज मिली तो यू बेरुखी दिखा रही हो “

सुमन बस हँस कर रह गई ,किशन उसके बालो को सहलाता रहा ,वो भी एक सुकून में खो गया था जंहा करने को कुछ भी नही था,जो भी था वो होने को था,वो जब हो जाय परवाह किसे थी,अब तो सुमन उसकी थी और वो उसका ……

वो उसके बालो को सहलाता रहा ,सुमन भी आंखे बंद किये अपने पति के अहसास को अपने अंदर भरती रही ,लेकिन ना वो ही आगे बढ़ रहा था ना ही सुमन …

आधे घंटे यू ही बीत गए ,किशन का हाथ भी अब उसके सर पर ही रखा था लेकिन कोई भी हलचल नही कर रहा था,सुमन को लगा जैसे की किशन सो ही गया हो ,वो उठाकर उसे देखने लगी सचमे किशन आंखे बंद किये हुए लेटा था,उसे उसे देखकर हँसी आयी और वो उठाकर उसके होठो के पास जाकर रुकी वो देखना चाहती थी की वो सोया है या नही ,कोई भी हलचल नही होने पर वो उसके होठो पर एक प्यारी सी किस करती है ,और उठाकर फिर से उसे देखती है वो अब भी आंखे बंद किये हुए सोया था ,वो फिर से उसके होठो के पास पहुचती है और जैसे ही वो उसके होठो पर किस करती है किशन अपने हाथो को उसके सर पर लाकर रख देता है और अपने होठो को खोलता हुआ उसके होठो को चूसना शुरू कर देता है ,इससे सुमन पहले तो चौक जाती है लेकिन जैसे ही उसे ये आभास होता है की किशन पहले से जग रहा था वो अपने हाथो से उसे मारती है लेकिन अब उसका सर किशन के कब्जे में था ,वो उसके होठो को बेपनाह चूमे जा रहा था ,आखिर सुमन भी अपने लाज के पहरे को कब तक सम्हाल पाती ,वो भी अपने होठो को खोलकर उसका स्वागत करती है और दोनो के जीभ आपस में टकरा जाते है ,एक पल को जैसे सब रुक जाता है लेकिन अगले ही पल दोनो ही दुनिया की हर फिक्र को छोडकर अपने महबूब की बांहो में समा जाते है ,दोनो ही एक दूसरे के होठो की गहराइयों को नाप रहे थे और एक दूसरे के सर को पकड़े हुए उसे अपनी ओर खिंचने की कोशिस कर रहे थे,ये तब तक चला जब तक की उनकी सांसे इतनी नही भर गई की वो अलग होने पर मजबूर ना हो जाय ,जैसे ही वो अलग हुए सुमन जल्दी से उसे छोड़ कर फिर से शर्माती हुई दूसरे तरफ मुह कर सो गई ,और किशन उसके पीछे से उसे जकड़ लिया ,वासना की कोई भी लहर अभी दोनो के मन में नही उठी थी ,ना ही मन में ना ही शरीर में ,वो बस एक दूसरे को अहसास करना चाहते थे ,किशन उससे जितना सट सकता था सट गया ,और उसके गले को चूमने लगा ,उसके होठो में जो भी आता वो उसे ही बड़ी शिद्दत से चूमता चूसता जा रहा था वो उसके गले से बालो तक पूरा सर से लेकर उसके माथे से होता हुआ उसके गालो तक ,उसकी आंखों को

नाक को होठो को गालो को गले से आगे के हिस्से से होता हुआ उसके छातियों के उस हिस्से को जो की उसके ब्लाउज़ के बाहर से झांक रहे थे ,उसने उसकी साड़ी के पल्लू को दूर फेक दिया सुमन ऊपर बस ब्लाउज़ में थी जिससे किशन को उसके उन्नत स्तनों की झलकियां मिल रही थी ,किशन ने अपने जीभ को उस दोनो स्तनों की खाई में घुसाने की कोशिस की लेकिन नाकाम ही रहा लेकिन जितना उसके जीभ और होठो के दायरे में आया वो उसे पूरी शिद्दत से चूसा चाटा और चूमा ,सुमन किशन के सर को पकडकर उसे कभी रोकती तो कभी अपने पास धकेलती ,उसकी सांसे भी तेज हो गई थी वही किशन की उत्तेजना भी बढ़ गई थी ,सुमन अब अपने पीठ के बल आ चुकी थी और किशन उसके ऊपर लगभग चढ़ ही गया था,वो अपने हाथो को ऊपर कर उसके स्तनों पर दबाव बनाया जो की सुमन के सहन के बाहर था ,

“आह जान “

वो उसके सर को पकड़कर उसे अपने ऊपर खिंची और उसके होठो पर अपने होठो को मिला दिया ,दोनो फिर हवस के एक झोंके से बाहर आकर प्यार के सागर में डूबने लगे ,पहले तो वो जोरो से चूसने लगे थे लेकिन फिर वो आराम से और इत्मीनान से एक दूसरे के होठो में खोने लगे,किशन ने आगे बढ़ने की सोची और अपना हाथ उसके पेट से ले जाकर उसके साड़ी के अंदर घुसने की कोसीसे करने लगा ,सुमन ने उसका हाथ रोका और उसके कानो ने धीरे से कहा

“आज नही ना “

किशन को कभी किसी समझदार आदमी की वो बात याद आ गई जिसने कहा था की सुहागरात की पहली रात सिर्फ प्यार नो सेक्स ….

किशन मुस्कुराता हुआ अपना हाथ वहां से हटा लिया और फिर से उसके होठो में घुस गया ,सुमन अपने पति के द्वारा अपने लिए किये सम्मान और आदर को देख कर उसके प्रति प्यार से और भी भर गई और उसे जिंदगी भर पूरा प्यार देने का वचन मन में लेती हुई ,उसके होठो में अपने होठो को समर्पित कर दिया ………..

अध्याय 65

“तो बताओ ना भाभी जी की क्या क्या हुआ “रानी और निधि ने सुबह से ही सुमन को पकड़ लिया था,

“कुछ भी नही “

“ऐसा कैसे हो सकता है ,की किशन भाई कुछ भी ना करे “

सोनल कमरे में आते हुए बोली

“सच्ची दीदी कुछ नही हुआ बस किस “

“अरे वाह मेरे भाई को एक ही रात में सुधार दिया तुमने “सोनल हँस पड़ी साथ में बाकी सभी …

इधर

अजय और नितिन बैठे बाते कर रहे थे,साथ ही विजय धनुष और अभिषेक भी थे

“भइया हमे बहुत ही सोच समझकर काम करना पड़ेगा “

“हम्म अभिषेक तूम कालेज के अध्यक्ष हो कितने लड़के है हमारे साथ “

जब से इन भाइयो ने अभिषेक को उल्टा लटकाया था वो बेचारा भीगी बिल्ली की तरह रहता था और साथ ही उनकी हर बात माना करता था,अजय को पता था की इसे बस में रखना बहुत जरूरी है क्योकि उसके अंदर प्रतिभा थी जिसका उपयोग जिसका उपयोग अजय को अपनी पार्टी के लिए करना था ,

“भइया लगभग सभी “

“लगभग का क्या मतलब होता है “विजय की दमदार आवाज से अभी थोड़ा घबराया ,अजय ने उसे शांत रहने को कहा ,

“भइया कुछ लोग पहले से पुरानी पार्टी के मेम्बर है ,और वो कुछ ना कुछ पदों में भी है उन्हें तोडना मुश्किल है “

“हम्म कोई बात नही दूसरी पार्टीयो में भी तो कोई होना ही चाहिए ,अभी अगर हम उन्हें अपने साथ लाने की कोशिस करेंगे तो वो नाजायज मांगे करेंगे उससे अच्छा है की उन्हें हम ऐसे हराये की वो हारकर हमारे साथ आने पर मजबूर हो जाय ,इस साल पहला इलेक्शन विधानसभा का होगा,फिर लोकसभा अगले साल से शुरू होने वाला है ,उसके बाद पंचायत चुनाव और निगमो के चुनाव होंगे ,हमे अपना बेस इतना मजबूत रखना है की पहले 2 इलेक्शन में भले ही हमे कम सीटे मिले लेकिन स्थानीय चुनाव तक हमारा परचम लहराए,एक एक गांव के एक एक बूथ तक हमारी पहुच होनी चाहिए ,हर जगह से जितने भी लोग है सभी को इकट्ठे करो ,सभी कार्यकर्ता को से जो भी वोट ला सकता है अपनी शक्ति दिखाने को कहो हम सबसे पर्सनली मिलेंगे,जो भी योग्य होगा उसे सीट दी जाएगी ,और पद भी ,निर्वाचन आयोग में पार्टी की मान्यता के लिए दरखास्त दे दी आई है ,कुछ ही दिनों में हमे हमारा नाम और चुनाव चिन्ह भी मिल जाएगा ,हमे तुरंत शक्ति प्रदर्शन के लिए रेलिया निकालनी शुरू करनी होगी ,बहुत काम है दोस्तो भीड़ जाओ पूरे प्रदेश में फैल जाओ और चुन चुन कर उम्मीदवार लाओ जो अपने इलाको का नेतृत्व करे ,,,,

उसी शाम फिर से एक मीटिंग होती है जिसमे करीब 100 लोग शामिल थे अधिकतर लोग युवा ही थे ,ठाकुर-तिवारी परिवार के सभी बच्चे वहां मौजूद थे और अजय के नेतृत्व में सभी को उनकी जिम्मेदारी बांटी जा रही थी ,सबसे ज्यादा काम अजय , निधि धनुष के पास था ,बाकियों को बस अपने ही क्षेत्रो में जाने का काम दिया गया था ,जिसका जैसा समर्थ था वैसा काम उन्हें मिल गया था ,निधि को पार्टी का प्रेजिडेंट बनाया गया,वही धनुष को

मुख्यमंत्रि का उमीदवार घोषित कर दिया गया ,अभिषेक पार्टी का महासचिव था ,साथ ही हर इलाके में गांव और ब्लाक लेवल तक और शहरों में जिला से वार्डो तक के प्रतिनिधियो की लिस्ट भी जारी कर दी ,ये काम कई दिनों का था लेकिन अजय ने होशियारी दिखाई थी और पहले से ही लिस्ट तैयार रखी थी ,जैसे सालो से वो उसी काम में भिड़ा हुआ हो ,एक एक प्रतिनिधि हैरत में था की अजय उन्हें पर्सनली जानता है,उनके इलाको की समस्याओं को जानता है ,

असल में अजय ने इसकी प्लानिंग सालो में ही की थी ,वो पूरे इलाके में घूमता रहता था और कई लोगो से मिलता जो की सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक्टिव थे ,वो अलग अलग पार्टी के या स्वतंत्र काम करने वाले थे ,अजय सभी को लिस्टेड करता रहता था और उनके काम पर नजर भी रखता था ,उसने अपनी पार्टी का इतना बड़ा खांचा बना दिया था की विरोधी पार्टीयो के पसीने आने वाले थे ,जो उन्हें बच्चा समझ कर मजाक में ले रहे थे ……...

ये बात दूसरे दिन के अखबारों की हेडलाइन होने वाली थी ,अखबार से बहुत से लोग भी वँहा शामिल थे और उन्हें खूब पिलाया गया ,और खूब खातिरदारी की गई ,ये सभी काम विजय और नितिन के सुपुर्द था ,अजय विजय और नितिन पर्दे के पीछे से काम करने वालो में थे,धनुष और निधि के चहरा सामने होना था,और किशन राकेश और बाकियों को इससे दूर ही रखा गया था ,ज्यादा से ज्यादा अपने क्षेत्र में कुछ प्रचार के लिए उनका उपयोग होता ….

अब बस देर थी पार्टी के नाम के आने की और चुनाव चिन्ह के मिलने की …….

वही हवेली पहुचने के बाद सबको इंतजार था सुमन के गुड न्यूज़ की जो शायद आज रात होने वाला था ,......

अध्याय 66

जिन हसीन पलो का इंतजार किशन और सुमन को था वो आ ही गया था ,सुमन ने दुनिया से लड़कर अपना कौमार्य अपने पति के लिये बचाया था वही किशन भी अपने हवसी और चंचल स्वभाव को त्यागकर बस सुमन का ही हो गया था,दोनो के लिए ये रात बहुत ही खास थी ,उनकी सुहागरात तो मन चुकी थी लेकिन अब भी सुमन का जिस्म पूरी तरह से किशन का नही हुआ था,समर्पण की एक इंतहान अभी भी बाकी था,

सुमन भी जानती थी की आज कुछ हो सकता है और वो इस बात से थोड़ी डरी डरी सी थी ,

वो काम में व्यस्त थी,चम्पा के साथ घर के काम कर रही थी ,ऐसे यही काम वो रोज किया करती थी ,सीता मौसी अपनी पोती को साड़ी में देखकर गदगद हो रही थी वही चम्पा अपनी बहु और अपनी सौतेली बेटी के ऊपर पूरा प्यार लुटा रही थी ,ये बात तो सुमन को भी पता थी ,लेकिन सुमन अब इस बारे में सोचना नही चाहती थी ,लेकिन मन है …….

मन तो मन ही है ,वो बातो को घुमा फिरा कर सामने ले ही आता है ,सुमन बार बार ये बात भुलाने की कोसीसे करती थी की वो और किशन एक ही खून है ,खून के रिस्ते से वो भाई बहन ही है ,लेकिन फिर भी वो दिल के किसी कोने में इस बात को भूल नही पा रही थी ,

‘क्या मुझे किशन जी को ये बता देना चाहिए ‘

उसके मन ने खुद से ही ये सवाल किया

‘नही नही पागल हो गई हो क्या ,अगर ऐसा हुआ तो अनर्थ हो जाएगा,घर में बवाल हो सकता है,उस समय चम्पा मा की क्या मजबूरियां थी इसपर किसी का भी ध्यान नही जाएगा ,किशन शायद खुद भी डिप्रेशन में आ जाए ‘

उसने मन ही मन इस बात को ना खोलने की सोची लेकिन वो अपने भाई से ही कैसे जिस्म का रिस्ता बना सकती थी……..????

वो बड़ी उधेबुन में बैठी रही ,काम खत्म होने पर चम्पा ने उसे कमरे में जाने को कहा वो हा बोलकर वहां से तो निकल गई लेकिन कमरे में जा ना सकी,वो छत में जाकर बैठ गई वो अपने इसी खयालो में पागल हुए जा रही थी ,उसे समझ नही आ रहा था की आखिर वो करे तो क्या करे ….

वो रोये जा रही थी ,

रानी ने उसे गुमसुम देखा था,जब वो छत में जा रही थी तो उसके चाल से ही उसे समझ आ गया था की कुछ गड़बड़ है वो उसका पीछा करने लगी ,आखिर वो सुमन के जाने के थोड़ी देर के बाद धीरे धीरे ऊपर जाने लगी ,उसने जब सुमन को रोते हुए पाया तो उसे समझ ही ना आया की आखिर ऐसा क्या हो गया की वो ऐसे रो रही है ,क्या मा ने कुछ कहा,नही वो इसे क्यो कुछ कहेगी ,तो भाई ने ? हा ये हो सकता है ,

थोड़ी देर हु ही उसे देखती रही फिर जाकर सुमन के पास ही खड़ी हो गई ,उसे देखकर सुमन हड़बड़ाई और उठी ,वो अपने आंसू पोछने लगी ,

“क्या हुआ भाभी “

“कुछ भी तो नही “

“तो बिना कारण के आप रो रही है ??”

“वो वो मा की याद आ गई “

रानी के चहरे में हँसी आ गई

“भाभी आप को जब झूट बोलना नही आता तो क्यो बोलती हो ,बताओ ना क्या हो गया “

सुमन चुप थी उसे समझ ही नही आ रहा था की आखिर वो उसे क्या जवाब दे ,रानी उसके पास जाकर उसकी बांहे पकड़ती है ,

“आज जो होने वाला है उसके लिए रो रही हो क्या “

सुमन को याद आया की आज क्या होने वाला है ,

“नही नही ….नही तो “

रानी फिर से मुस्कुराई

“या मेरा भाई आपको पसंद नही है ,जबरदस्ती शादी तो नही की ना आपने,...

हर मर्द की तमन्ना होती है की वो सुहागरात में अपनी पत्नी को अपना बना ले लेकिन आपने वो करने नही दिया ,आज आप यहां बैठी हो ,जबकि भाई वहां बेसब्री से इंतजार कर रहा है, मुझे तो लगता है की तुम्हारे दिल में कभी भाई के लिए प्यार था ही नही “

रानी एक ही सांस में सब कुछ बोल जाती है वही सुमन बस उसे देखते रह जाती है,उसके मुह से कोई भी बात निकल ही नही रही थी,उसे समझ ही नही आता की रानी को कैसे समझाए

“ऐसा नही है रानी “वो बड़ी ही मुश्किल से ये बोल पाई

“तो कैसा है ,अगर ये सच नही है तो बताओ की क्या सच है,”

रानी इस बार ने थोड़ी जोर से कहा ,और बदले में सुमन भी जोरो से रोने लगी ,वो वँहा से जाने लगी लेकिन रानी ने उसका हाथ जकड़ लिया

“तुम ऐसे नही जा सकती “

“नही रानी मुझे छोड़ दो सच इतना कड़वा है की तुम उसे सह नही पाओगी इसे मुझतक ही रहने दो ,वो मेरा इंतजार कर रहे होंगे मुझे जाने दो “

रानी के चहरे में फिर से एक मुस्कुराहट आ गई लेकिन ये मुस्कुराहट भी बहुत कड़वी थी

“नही भाभी “

इस बार उसकी आवाज नरम थी ,उसने जानबूझ कर ये सोच कर ही उसे कड़वे वचन कहे थे की वो टूटकर सच बता दे लेकिन रानी को भी इसका आभास हो गया था की सुमन इतनी जल्दी नही टूटने वाली

“भाभी जी ,अगर आपके दिल में भाई के लिए प्यार नही हो तो शायद आप कभी खुस नही रह पाएंगी और ना ही भाई खुस रह पायेगा ,आपके हाथो में दो जिंदगियां है “

“मैं उनसे बेपनाह प्यार करती हु रानी ,मेरी जान भी उनकी एक हँसी के सामने कुर्बान है “

रानी उसका हाथ छोड़ देती है और सुमन भी जल्दी से वहां से निकल जाती है ,लेकिन रानी के दिमाग में ये बात घर कर गई के आखिर ऐसा कौन सा सच है जो सुमन उससे छुपा रही है ,खैर उसे जो जानना था उसे समझ आ गया था की सुमन की ओर से कोई भी देरी नही है वो तो अपने को किशन के नाम ही कर बैठी है………

इधर

किशन अपने कमरे में अधीर इधर उधर घूम रहा था ,तभी उसे सुमन की आहट मिली उसका दिल धक कर रह गया ,सुमन की सांसे फूली हुई थी वो छत से दौड़ाते हुए सीधे वहां आयी थी ,दोनो की नजर मिली ,सुमन अभी भी उसी खयालो में थी लेकिन उसे अब अपनी गृहस्थी सम्हालना था और इन सब बातो का कोई अर्थ अब नही रह गया था ,सोचने के लिए बहुत देर हो चुकी थी ,वो अपने होठो में मुस्कुराहट लाती है ,किशन उसे देखकर मुस्कुराता है ,वो उससे बिना कुछ कहे ही अपने कपड़े पकड़कर बाथरूम में घुस जाती है वो फ्रेश होकर एक नाइटी पहन लेती है जिसे किशन की बहनों ने उसके लिए शादी के तोहफे के रूप में लिया था ,वो सफेद रंग की झीनी सी नाइटी थी ,जो काफी हद तक पारदर्शी थी ,उसके जांघ उसमे साफ दिख रहे थे,ऐसी ही नाइटी इस घर की सभी लडकिया पहनती थी लेकिन सुमन के लिए ये पहली बार था,वो सवाली सी थी ,निधि या सोनल की तरह उसके जांघो का भराव भी उतना नही था लेकिन फिर भी उसके आत्मविस्वास में कोई कमी नही आयी

,वो एक बार फिर से अपने को दर्पण में देखती है ,थोड़ा घूम घूम कर उसके कूल्हों का वजन अभी उतना ज्यादा नही था लेकिन फिर भी वो साफ साफ भरे हुए देख रहे थे,वो खुद ही शर्मा जाती है,उसके स्तनों की बीच की घाटी साफ और उत्तेजक प्रतीत हो रही थी ,लेकिन अब भी उसे लगा की कुछ कमी है उसे अपने मांग के सिंदूर की याद आयी ,चहरा धोने से उसके मांग का सिंदूर थोड़ा सा फीका पड़ गया था,वो बाहर आयी ,किशन अपना मुह फाडे उसे निहार रहा था ,लेकिन सुमन ने उसकी ओर देखा भी नही वो अपने ड्रेसिंग के पास पहुची और अपनी मांग में गढ़ा सिंदूर लगाया,नए दुल्हन जैसे उसके हाथ अब भी चूड़ियों से सजे हुए थे ,उसने अपने बालो को पूरा खोला और कंघी से थोड़ा सीधा किया ,वो उसे खुला ही रहने दी ,अपने माथे की पुरानी बिंदिया निकल कर उसने नई बिंदिया लगाई ,अब फिर से उसने अपने को देखा लेकिन वो इतनी हसीन लग रही थी की वो खुद को भी नही देख पा रही थी ,वो शर्म से मरी जा रही थी ,उसे समझ ही नही आ रहा था की वो किशन के पास कैसे जाए ,

उसकी हालत और सुंदरता देख किशन को अपने किश्मत पर गुमान हुआ वो उठा और सुमन के पास गया ,सुमन अब भी सर नीचे किये खड़ी थी ,उसने उसे पीछे से जकड़ लिया ,दोनो के ही अंग अंग में एक झुनझुनाहट सी दौड़ गई ,दोनो ही सिहर गए …

किशन ने उसके गले पर अपने होठो को टिकाया ,उसके कोमल होठ के स्पर्श से ही सुमन का बदन अकड़ गया ,

“आह “वो धीरे से आह लेने लगी ,इतने देर के मानसिक तनाव से उस एक स्पर्श ने मुक्ति दिला दी वो समझ गई की यही उसकी नियति है और किशन को प्यार देना और उससे प्यार पाना ही उसके लिए सौभाग्य की बात है,उसने अपने को पूरी तरह से किशन के लिये समर्पित करने की कसम खाई और पलट कर किशन के होठो में अपने होठों को मिला लिया ,ये किशन के लिए आश्चर्यजनक था क्योंकि अभी तक वो इतना शर्मा चुकी थी की किशन उससे पहल की उम्मीद ही नही कर रहा था ,लेकिन वो खुश था बहुत खुस ,दोनो के होठ मिले और सिलसिला शुरू हो गया,किशन ने उसे ले जाकर बिस्तर में पटक दिया और उसके ऊपर आकर उसके होठों की गहराइयों में अपने जीभ को ले गया ,दोनो ही मस्ती में डूबे हुए थे ,दोनो ही दुनिया के अहसास को भूल कर बस एक दूजे में खोये हुए थे,जब दोनो ही थक गए तो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराए

“तो आज क्या प्लान है “किशन ने सुमन के कानो में कहा और जवाब में सुमन ने उसे अपनी ओर खिंच लिया और उसके होठो को फिर से चूमने लगी ,किशन के लिए इतना इशारा ही काफी था,वो धीरे से अपने हाथो को उसके जांघो पर सहलाता है और सुमन के होठो से सिसकारियां निकलने लगती है ,उसके लिए ये सब पहला अहसास था,उसके योनि से धार छूटनी शुरू हो चुकी थी ,किशन ने देर नही करते हुए अपने कपड़े निकाल फेके लेकिन सुमन अब भी वैसे ही थी किशन का लिंग सुनम के पेंटी को भेदता हुआ सीधे उसके योनि पर वार कर रहा था,जो अब

सुमन के लिए भी सहना मुश्किल ही रहा था ,वो बेचैनी में छटपटाई और आखिर में खुद ही अपने हाथो को नीचे कर किशन के लिंग को पकड़कर अपने योनि में जोरो से रगड़ने लगी ,किशन उसके इस व्यव्हार से हक्का बक्का रह गया ,वो जोरो जोरो से सिसकिया लेते हुई झड़ गई ,वो हफते हुए थोड़ी शान्त हुई तो उसकी नजर किशन पर गई,उसे अपने किये की याद आयी और वो बुरी तरह से शर्मा कर अपने मुह को छुपाने लगी लेकिन इससे पहले ही किशन उसके ऊपर कब्ज़ा जमा चुका था और इस बार वो सुमन के हर एक अंग को चुम रहा था ,उसके होठ सुनम के एक एक अंगों को नाप रहे थे और गीला कर रहे थे ,सुमन फिर से गर्म होने लगी थी ,वो किशन के बालो को पकड़े हुए बस आहे ले रही थी ,किशन उसके कपड़ो को अभी तक नही निकाला था वो उसके जांघो तक आ गया और ऊपर जाने लगा ,वो उसके पेंटी के किनारे पर था ,दोनो जांघो के बीच कसे हुए पेंटी को ही चाट रहा था ,और उसे इधर सुमन उसके बालो को और भी जोरो से कसे जा रही थी ,अंत में फिर से उससे नही रहा गया और वो किशन के सर को अपने योनि में दबाने लगी ,किशन के चहरे में एक मुस्कान आ गई और वो जोर लगा कर उठ खड़ा हुआ ,सुमन उसे अजीब से खा जाने वाली निगाह से देख रही थी ,किशन उसके ऊपर आकर उसकी पेंटी को निकालने लगा ,उसे पता था की सुमन वर्जिन है और यही सही मौका है जब वो बेहद गर्म है वो उसे झरने नही देना चाहता था ,किशन ने अपनी एक उंगली उसके योनि के अंदर डाली वो अंदर से बेहद गर्म थी लेकिन गीली भी थी ,सुमन ने एक जोरो की आह ली और किशन के बालो को पकड़कर झूल गई ,किशन ने अपने होठो को उसके होठो से मिलाया और उसके योनि में अपने उंगली को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा ,वो पास से ही एक क्रीम पकड़ लाया और उसे अपनी उंगली में लगा कर उसे अपने लिंग के लिए तैयार करने लगा ,वो फिर थोड़ी थोड़ी देर में ही रुक जाता जिससे सुमन का ओर्गास्म ना हो ,सुमन बेहद ही चिढ़ गई थी जिससे किशन को हँसी आ रही थी ,वो अब तैयार थी वो फिर से उसके होठो को चूसने लगा और अपने लिंग की ऊपरी चमड़ी को पीछे कर उसके योनि में रगड़ने लगा ,सुमन बस सिसकिया ले रही थी ,क्रीम का प्रभाव ,योनि का गीलापन और सुमन के तन में फैली सेक्स की गर्मी ने किशन का काम आसान कर दिया था ,वो पहली बार में अपना आधा लिंग उसके अंदर डाल दिया ,सुमन जोरो से चीखी लेकिन उसकी चीख किशन के होठो में ही घुट गई ,थोड़ी देर के किस ने उसे फिर से राहत दी और किशन धीरे धीरे धक्के मरता हुआ सुमन के योनि में अपना स्थान बनाने लगा ,थोड़ी ही देर में किशन का लिंग पूरी तरह से सुमन के योनि के अंदर था ,एक ही झटके के साथ सुमन फिर से अपने चरम सुख पर पहुच गई और ढेर हो गई ,किशन भी हालात को समझता हुआ रुक गया और उसे अपने ऊपर लेकर उसे सुस्ताने का मौका देने लगा ,सुमन के घने बाल पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो चुके थे ,उसका सिंदूर फैल गया था और वो

बेहद ही सेक्सी लग रही थी ,उसकी कुछ चूड़ियां टूट गई थी जिसे किशन ने बाजू में ही फेक दिया था ,किशन का लिंग अब भी उसके अंदर था,सुमन इन एक मदहोश आंखों से उसे देखा ,वो इतने मजे से गुजरी थी की पूरी दुनिया ही भूल गई थी ,किशन पर उसे इतना प्यार आ रहा था की उसका दिल किया की अभी उसके लिये अपनी जान दे दे ,वो झुककर उसके होठो पर अपने होठो को रखती है और चूसने लगती है ,दोनो की आंखे अभी आधी खुली और आधी बंद थी ,दोनो ही मदहोशी के आलम में गुम थे,सुमन ने अपने कमर को थोड़ा हिलाया उसे अपने भरे होने का अहसास हुआ ,वो किशन के लिए और भी प्यार से भर गई ,किशन का लिंग उसकी योनि में मजबूती से समाया हुआ था और सुमन की योनि भी उसे मजबूती से कसे हुए थी ,वो इतनी गीली थी लिंग आराम से अंदर बाहर हो रही था,लेकिन अब किसी को कोई भी जल्द बाजी नही थी ,सुमन आराम से कभी कभी अपने कमर को हिला कर उसे अपने अंदर खिंचती या बाहर निकलती वही कभी कभी किशन धक्के देता लेकिन वो अभी एक दूजे के होठो का रस पान कर रहे थे,वो एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे,अब सेक्स गौण हो गया था और अहसास ही सब कुछ रह गया था,पता नही कितने देर तक ये ही चलता रहा ,किशन का वीर्य कब निकल कर सुमन को भर गया उन्हें पता ही नही चला ,लिंग अब भी नही मुरझाया था और अब भी वो खेल जाती था ,वीर्य योनि से निकलकर बिस्तर को गीला कर रहा था ,लेकिन परवाह किसे थी वो ऐसे ही घंटो तक एक दूसरे के बांहो में पड़े रहे और नीद के आगोश में समा गए …

अध्याय 67

अपने कमरे में एक चेयर में बैठा हुआ अजय कमरे की छत को निहार रहा था,बीते समय की हर घटना उसके दिलो दिमाग में एक साथ ही चल पड़ी ,वो कड़ियों को जोड़ रहा था,लेकिन कुछ भी समझ नही आ रहा था,देखने को तो सब कुछ ही बड़ा शांत सा चल रहा था लेकिन असल में शायद कोई तूफान उनका इंतजार कर रहा था,पहले तो उसे अपने दुश्मनों का पता था लेकिन अब ….

ना जाने कौन कब कहा से वार कर दे ,उसे अपनी चिंता तो कभी भी नही थी लेकिन अपने परिवार की चिंता उसे हमेशा ही सताती,

“भइया क्या हुआ आप आज बड़े ही चिंता में लग रहे हो ,कोई परेशानी है क्या “निधि की कोमल आवाज से अजय का ध्यान उधर गया,

“नही कोई बात नही बस ऐसे ही “

“क्या ऐसे ही ,अब तो मूझे बताया करो अब मैं बड़ी हो गई हु और अगर हम चुनाव जीत गए तो मैं मंत्री बन जाऊंगी ,सोचो अपनी छोटी सी बहन जिसे आप कुछ भी नही बताते वो मंत्री बन जाएगी “

अजय उसकी बातो पर हँस पड़ा ,

“ह्म्म्म क्या बताऊ तुझे “

निशि अजय के पैरो के पास बैठ कर अपना सर उसके गोद में रख लेती है ,

“अपना हर दर्द ,”

अजय उसके सर को यू ही थपथपाता है ,

“सोच रहा था की ना जाने जिंदगी किस मोड़ पर ला रही है,पहले तिवारियो का पंगा था अब ये इलेक्शन ,सालो से इस दिन का इंतजार किया था जब सब कुछ मिल रहा है तो एक अजीब सा डर दिमाग में भर गया है…”

“आप अगर डर जाओगे तो हमारा क्या होगा,मेरा भाई कभी भी डर नही सकता मैं तो मान ही नही सकती की आप डर गए “

“अच्छा ,डर नही एक बेचैनी तो है ना “

“तो मूड थोड़ा ठिक कर देती हु “

निधि अपने नाइटी को ऊपर करके उसके गोद में बैठ जाती है ,अब निधि का चहरा अजय के चहरे के पास ही था,उसके उजोर अजय के सीने से लग रहे थे और वो अजय के जांघो के बीच अपने जांघो को फसाये बैठी थी जिससे उसकी योनि का हिस्सा अजय के लिंग से टकरा रहा था,वो अपने बालो को खोले हुई थी जिससे वो और भी सेक्सी लग रही थी ,दोनो के रिस्ते में अब इतना खुलापन आ गया था की वो कुछ भी करने से हिचकिचाते नही थे,अजय ने अपने हाथो से उसके नितम्भो को पकड़ा ,अपनी आदत के अनुसार निधि अब भी नंगी ही थी वो उसके नरम नरम नितम्भो को अपने हथेलियों से और भी पास खिंचता है ,निधि एक नजर अजय को देखती है और फिर उसके होठो को अपने होठो में भर लेती है,

दोनो ही बहुत देर तक एक दूसरे के होठो का रसपान करते है ,

“अब बेचैनी कम हुई “

“तेरी बांहो में तो दुनिया भूल जाता हु ,मेरी जान “

वो कसकर उसके कमर को पकड़ कर अपनी ओर खिंचता है और फिर से उसे अपने सीने से लगा कर उसके होठो को चूमने लगता है,”

इधर

“तुम पागल हो गए हो भाई “

आरती अपने भाई सुरेश पर भड़क गई

“मैंने क्या गलत कहा है आरती “

“तुमने सब कुछ तो गलत कहा है ,तुम मुझे कह रहे हो की मैं इस परिवार से गद्दारी करू ,आखिर क्या मिलेगा मुझे इससे “

“क्या मिलेगा,जो अभी तक इस परिवार ने तुम्हे दिया क्या वो सही था,अपनी प्रतिष्ठा के कारण मेरी कम उम्र की बहन ने विधवा की जिंदगी बिताई क्या ये सही था,क्या तुम्हारे अरमानो को प्रतिष्ठा की आड़ में कुचल देना सही था आरती,तुम फिर से शादी कर सकती थी लेकिन नही तिवारियो की मर्यादा,उनकी इज्जत के कारण तुम्हे इस उम्र में विधवा की जिंदगी जीनी पड़ रही है क्या ये सही है ………….

”

आरती खामोश थी ,

“तुम्हे ये किसने भड़का दिया है ,तुम तो ऐसे नही थे ,एक तुम ही तो जिसे मैं अपना कह सकती हु ,ये लोग बहुत ही खतरनाक है भाई और अब तो इनके सबसे बड़े दुश्मन ठाकुर भी इनसे मिल गए है ,अब इन्हें हराने की बात सोचना भी गलत होगा…”

“हमे इन्हें हराना नही है आरती हमे इनसे लड़ना नही है ,हमे तो बस उनलोगों का थोड़ा सहयोग करना है बाकी सब उन्हें ही करने दो,”

“लेकिन क्या ये सही होगा”

“हा बिल्कुल जो इन लोगो ने किया है उसके सामने ये कुछ भी नही है ,तुम्हे बस इनकी जानकारी उन तक पहुचानी है बस ,”

“लेकिन भाई “

“मैंने तुम्हारे मा बाप को तुम्हारी याद में तड़फकर मरते देखा है और इसकी वजह ये लोग ही है ,मेरे लिए यही एक वजह काफी है इनसे बदला लेने का,आज जब खुद तकदीर ने हमे ये मौका दिया है तो हमे ये क्यो नही अपना लेना चाहिए ,मैं एक छोटे से नॉकरी में हु मेरे लिए इनसे लड़ना बहुत ही मुश्किल है लेकिन वो लोग इनके गुरुर को तोड़ कर रख देंगे ,”

सुरेश आरती का हाथ पकड़ लेता है ,

“देख बहन ये एक ही मौका कुदरत ने हमे दिया है ,अब ज्यादा सोच मत ऐसे भी हमे कुछ भी तो नही करना है ,किसी को पता भी नही लगेगा की क्या हुआ है,तुम्हे जो जानकारी मांगी जाय वो देना है ,”

आरती की आंखे अब भी पूरी तरह से सहमत नही थी लेकिन फिर भी उसने अपना सर हा में हिला दिया ………..

इधर

शाम होने को थी और कलावा बगीचे में कुछ काम कर रहा था तभी रानी की नजर कलवा पर पड़ी ,वो बार बार एक जगह को खोदता फिर थोड़ा ऊपर को देखता फिर उस जगह को खोदता,

रानी के समझ ही नही आ रहा था की आखिर कलवा इस तरह बेवजह क्यो जमीन खोद रहा है ,तभी उसने ऊपर देखा उसकी मा चम्पा वहां बैठे हुए चाय पी रही थी ,वो अभी किसी से बात कर रही थी ,वो भी कभी कभी कलवा की तरफ देखा करती लेकिन दोनो ही बस एक दूसरे से नजर बचाकर एक दूसरे को देख रहे थे,रानी को उनकी निगाहों में कुछ कुछ होता है वाली फीलिंग देख रही थी वो भी कन्फ्यूज़ थी,ऐसे तो वो कल रात से ही समझने की कोशिस कर रही थी की कुसुम के साथ क्या गड़बड़ चल रही है लेकिन यहां ये नजारा देखकर उसके माथे पर फिर से एक लकीर पड़ गई ,आखिर इस घर में ऐसा हो क्या रहा था जो सबसे छुपा था,

कलवा का गठीला बदन किसी भी लड़की को आकर्षित कर सकता था,इस उम्र में भी उसके पेट में चर्बी का नामोनिशान नही था,सपाट पेट और बड़े गठीले भुजाओं के मालिक काले कलवा का कालापन उसे और भी मजबूत दिखता और वो भी बड़ा आकर्षक लगता था,वो भी दिन हुआ करते थे जब की चम्पा और कलवा प्यार की पींगे हाँकते थे और आज ये दिन है जब उनके बीच फिर से एक आकर्षण का बीज पनपने लगा था ,ये बीज इतना फलने वाला था ये तो वक़्त ही बताता लेकिन अभी तो रानी के लिए ये एक पहेली ही थी वो तो कभी सपने में भी इस रिस्ते के बारे में सोच नही सकती थी ………

अध्याय 68

अजय बेचैनी से मेरी

की तरफ देखता है जो की विजय को घूर रही थी ,अजय फिर अपनी घड़ी की ओर देखता है फिर वो विजय की ओर देखता है जो की मेरी को घूर रहा था,अजय फिर घड़ी के तरफ देखता है,

“आखिर डॉ है कहा कितना समय लगेगा उन्हें “

अजय के इंतजार की सीमा खत्म हो रही थी ,

“आप 8 बजे सुबह से यहां आकर बैठे है ,क्लिनिक 10 बजे खुलता है,”

मेरी के दो टूक जवाब से अजय झल्ला जाता है ,

“मैंने उन्हें कहा था और उन्होंने कहा था की वो आ रहे है “

“हा तो आ ही रहे होंगे आप इतने परेशान क्यो हो रहे हो “

“उन्हें फोन लगाओ अभी “

अजय टेबल में जोर से हाथ मरता है ,वहां रखा पानी का ग्लास भी उछल पड़ता है ,मेरी उसे गुस्से से देखते हुए कमरे से बाहर निकल जाती है ,थोड़ी ही देर में डॉ वहां आ जाते है ,

“अरे यार अजय क्या हुआ इतने बेताब हो रहे हो “

“मुझे लगा था की आप हमेशा किसी भी समय मेरी सहायता के लिए उपस्थित रहेंगे “

“तो हु तो ना यहां बताओ “

“मुझे आपसे अकेले में कुछ बात करनी है “

इतना सुनकर ही मेरी और विजय के चहरे में चमक आ जाती है जिसे डॉ समझ जाता है

“मेरी “

“जी सर विजय को क्लिनिक दिखा कर आती हु “

विजय भी डरता हुआ उठता है

“अब बताओ क्या बात हो गई है “

“मेरे परिवार पर हमले की साजिस हो रही है और आप ऐसे अनजान बन रहे है जैसे कोई बड़ी बात ही नही हुई “

डॉ के चहरे में एक मुस्कुराहट आ जाती है

“ये कोई नही बात तो नही है ,तुम्हारे परिवार पर खतरा हमेशा से ही रहा है “

“लेकिन अब हम दुश्मन को जानते भी तो नही है “

“तुम्हे इसके बारे में किसने बताया “

“कुछ लोग है जो जंगलो में रहते है लेकिन मुझे बहुत मानते है खासकर जबसे मैं राजा घोषित हुआ हु “

“हम्म राजा के वफादार आदिवासी ,तो पकड़ो उन लोगो को जो साजिस रच रहे है “

“वो कौन है ये तो पुख्ता उन्हें भी नही पता लेकिन वो फैली हुई खबर मुझे बता रहे है ,”

“देखो अजय अब तुम राजा घोषित हो चुके हो और साथ ही अब तुम राजनीति में भी आ गए हो ,तुम्हारे जितने वफादार है उतने ही तुम्हारे दुश्मन भी हो चुके है ,”

“लेकिन मेरे परिवार पर खतरा हो तो मैं कैसे चैन से रह सकता हु,रातो की नींद भी हराम हो रही है मेरी”

“मेरी बात मानो तुम्हे थोड़ा रेस्ट और शांति की जरूरत है “

“शांति नही डॉ मुझे ताकत चाहिए ,ताकत से ही मैं उन्हें हरा सकता हु “

डॉ जोरो से हँसता है जिससे पूरा कमरा गूंज जाता है .

“ताकत ,और हराना…...तुम किसके भाषा में बात कर रहे हो अजय ,ताकत से तुम कुछ भी नही कर पाओगे,ताकत सिर्फ बेचैनी पैदा करती है और शांति ,,,,,शांति ही तुम्हे असली रास्ता दिखा सकती है,मेरी मानो तो पहाड़ी वाले बाबा के पास जाओ और एक दो दिन वहां बिता के आओ ,मन थोड़ा शांत होगा तो कुछ रास्ता जरूर निकलेगा ..

”

अजय कुर्सी से टिक जाता है और अपनी आंखे बंद कर लेता है ,वही डॉ उसके चहरे में आये हुए परिवर्तन को देखने लगते है

“अजय तुन्हें पता है,तुम्हारे पिता जी को मैंने कभी इतना बेचैन नही देखा जीतना की तुम हो ,और इसलिए वो कभी कोई भी बाजी हारे नही ,जब तुम्हारे मन में शांति होती है तो तुम मुझे वीर की याद दिला देते हो ,”

अजय के चहरे में एक मुस्कुराहट आ जाती है ,

“लेकिन डॉ ये कौन लोग हो सकते है जो हामरे पीछे इतनी शिद्दत से पड़े हुए है .”

“ये तो मुझे नही पता लेकिन उसमे कोई तो ऐसा है जो तुम्हारे बहुत करीब रह रहा है ,किशन की शादी में तुम्हे और निधि को मारने की जो साजिस हुई थी उससे तो यही लगता है ,और फिर तुम्हारे पार्टी के मीटिंग के दिन वाली बात “

अजय एक गहरी सांस लेता है

“तुम्हारे और मेरे अलावा और किसी को ये बाते पता तो नही है”

“नही बस मैं,निधि और आप ,विजय को भी अभी तक इन सबके बारे में नही बताया हु ,”

“हम्म्म्म बताना भी मत पता नही वो जोश में आकर क्या कर बैठे “

इन दोनों ही घटनाओं ने अजय को सोचने पर मजबूर कर दिया था,लेकिन फिर भी वो बात अपने तक ही रखा ताकि चुपचाप ही कोई ऐसा काम किया जा सके जिसकी भनक उनके दुश्मनों तक ना पहुचे ,

“लेकिन डॉ कोई तो कदम लेना ही पड़ेगा ,ऐसे बैठे रहे तो उनके होशले और भी मजबूत हो जाएंगे “

“कदम तो लेना है लेकिन इतने सफाई से और इतने खामोशी से की किसी को भनक भी ना लगे,और उनके हौसले और भी ज्यादा मजबूत होने दो ,इसी में वो कोई बड़ी गलती करेंगे,अभी तक वो लोग बड़ी ही खामोशी से अपनी तैयारी कर रहे थे अब उन्हें सामने आने का मौका देना होगा,दोनो ही घटनाओं में एक बात तो तुमने भी नोटिस की होगी की वो किसी को मरना नही चाहते थे,बस निधि और खुसबू को पकड़ने की साजिश थी उनकी ,”

निधि और खुसबू का नाम सुनकर ही अजय की आंखे फिर से लाल हो गई ,

“वो लड़का जिसे शादी में अपने पकड़ा था वो कुछ बोला ,ओ उन्हें पानी में बेहोशी की दवाई मिला कर पिलाने वाला था “

“नही असल में वो भी नशेड़ी किस्म का लड़का है जिसकी खबर उन केटर्स को भी नही थी जिनके साथ वो आया था,वो लोग बड़ी पार्टी होने के कारण कुछ लोगो को रोजी के हिसाब से काम कराने के लिए लाये थे,ये भी शहर में रोजी में काम करता है,दिन के 300 और नशा करके पड़ा रहता है ,इस काम के लिए उसे 10 हजार मिलने वाले थे ,उसे बस दवाई पानी में मिला कर निधि और खुसबू को पिलाना था उसके आगे का काम उसे नही करना था ,वो काम दूसरे लोगो का था ,जिसका उसे पता भी नही था,वो तो अच्छा हुआ की मेरे बंदे की नजर उस पर चली गई और वो निशि के अजीब हरकत को परख कर मुझे खबर दे दिया ,जिससे हमे उस लड़के का पता लग गया साथ ही खुसबू भी बच गई,लेकिन हमने एक गलती कर दी ,हमे निधि के किडनैप होने तक वेट करना था अगर हम थोड़ी और धीरज से काम लेते तो शायद कोई ऐसा आदमी पकड़ में आ

ही जाता जो की तुम्हारे ही घर में रहकर तुम्हारे ही खिलाफ साजिश कर रहा है……..”

डॉ की बात सुनकर अजय ने फिर से एक गहरी सांस छोड़ी .

“मेरी बात मानो कुछ दिन रेस्ट करो जाकर बाबा जी के पास रहो साथ ही खुसबू और निधि को भी ले जाओ ,वहां पर सुरक्षा का पूरा इंतजाम हो जाएगा ,और वहां आकर अगर किसी ने भी अगर कुछ करने की कोशिश की तो वो आसानी से पकड़ा जाएगा ,तुम्हे थोड़ी बेफिक्री दिखानी होगी ताकि वो लोग फिर से जल्दी ही कोई कांड करे और धरे जाए ,चुनाव से पहले ही ये निपट जाए तो अच्छा होगा क्योकि चुनाव के दौरान फिर से सभी को खुले में जाकर प्रचार करना है और उसमे खतरा और भी बढ़ जाएगा …”

तभी बाहर से मेरी के चिल्लाने की आवाज आती है ,अजय और डॉ एक दूसरे को देखते है ,अजय का सर झुक जाता है लेकिन आज उसे इन बातो की ज्यादा परवाह नही थी ,

“मेरी बात मानो अजय कुछ दिन आराम करो ,मैं यहां से अपने बंदे तुम्हारे पीछे लगा देता हु जो की 24 घंटे तुम्हारी और तुम्हारे परिवार की सुरक्षा में तैनात रहेंगे उनकी डिटेल मैं तुम्हे भेज देता हु ,उन्हें कहा कहा रखना है ये भी बता दूंगा ,किसी भी बहाने से अपने आस पास ही रखो ,”

“हम्म ओके डॉ ,और आप कुछ IAS,IPS अधिकारियों से मेरी मुलाकात करवाने वाले थे ,”

“हम्म मेरा एक पुराना दोस्त है जो की पहले फारेस्ट में अधिकारी था वो अब आईएएस है ,विकास ,वो तुम्हरी बैठक अरेंज करने की कोशिस कर रहा है ,”

“विकास ….नाम सुना सुना सा लगता है “

“बिल्कुल सुना होगा ,केशरगड़ में ..तुम्हरे चाचा और तुम्हारे पिता जी उसी अच्छे से जानते थे,खैर तुम अभी आराम करो बाकी सब देखा जाएगा ,हमे अपनी कोशिश करनी है बाकी की बाते भगवान पर छोड़ दो ….”

डॉ का लहजा और बात दोनो ही सर्द थे,

अध्याय 69

इधर

रात में एक गांव में कुछ लोग ख़ौफ़ से कांप रहे थे,

“तूने सचमे उसे देखा “

“हा बड़े बडे बिखरे हुए बाल थे,पूरा नंगा और मारे हुए हिरण के मांस को कच्चा ऐसे खा रहा था जैसे की कोई जंगली जानवर ,मुझे देखकर चिल्लाया कि मैं आ रहा हु तुम लोगो के जीवन में अंधेरा भरने ...

मैं तो कांप ही गया,मेरी तो सांसे ही नही चल रही थी ऐसे भागा हु वहां से की पीछे मुड़कर भी नही देखा “

सभी लोग उसकी बातो को ध्यान से सुन रहे थे,तभी एक बुजुर्ग बोल उठा

“जबसे पहाड़ी वाले बाबा ने उस तांत्रिक को भगाया था तब से अब तक वो कभी यहां के किसी व्यक्ति को नही सताया ,लेकिन अब कुछ दिनों से वो फिर से अपना ख़ौफ़ फैला रहा है,हमे बाबा के पास जाना होगा नही तो इसके आतंक और भी बढ़ जाएगा ,वो हमारे गांव से लोगो को उठाना शुरू कर देगा ,हमारी बहु बेटियों की इज्जत से खेलने लगेगा और हम कुछ भी नही कर पाएंगे ,अभी देर नही हुई है कल ही चलो बाबा जी के पास ,आखिर पिछले 100 सालो से उन्हों ने ही तो हमे बचा कर रखा है ……”

बुजुर्ग की बातो से सभी सहमत थे ,उसके सिवा किसी के पास कोई चारा भी तो नही था ,

इधर

उसी दिन गांव की बैठक के थोड़ी देर बाद ,अंधेरे जंगल में 3 व्यक्ति खड़े थे ,

“वो लोग पहाड़ी वाले बाबा के पास जाने वाले है”

बाकी के दोनो व्यक्ति जोरो से हँसने लगे

“जाने दो जाने दो देखते है की वो क्या बिगड़ता है हमारे अघोरी तांत्रिक का “

“नही वो बहुत ही शक्तिशाली है ,पहले भी जब तांत्रिक ने गांव वालो को सताया था तो उसी बाबा ने उनकी मदद की थी ,”

इस बार उनमे से एक के चहरे पर थोड़ी शिकन आयी

“अच्छा वो पहाड़ी वाले बाबा जो है उन्होंने कैसे बचाया था गांव वालो को “

“कहते है आज से कुछ 100 साल पहले की बात है जब हमारे तांत्रिक महाराज खुले गांवो में घुमा करते थे और हर अमावस की रात को एक कुवारी लड़की की भेंट गांव वाले उन्हें चढ़ाते थे ,जिसके साथ वो संभोग करते और उसकी बलि देते थे,गांव वाले उनसे इतना डरते थे की कोई भी इसके खिलाफ नही बोलता था,जो बोलता वो दूसरे दिन का सूरज ही नही देख पता ,सभी को पता है की वो नरभक्षी है ,लेकिन उसी समय हमारे गांव का कोई व्यक्ति पहाड़ी वाले बाबा से मिला और उन्हें यहां लाकर पहाड़ी में उनके लिए सबने मिलकर मंदिर बनवा दिया ,उन्होंने ही तांत्रिक महाराज को गांव से भगाया ,उसके बाद भी कभी कभी कुछ लोग गांव से गायब हो जाया करते थे,लोग उस गुफा के आसपास भी नही जाते थे,उस कुछ सालो बाद ये घटनाएं होना बंद हो गई और लोगो को लगा की तांत्रिक महाराज का देहांत हो गया लोग फिर से गुफा के आसपास जाने लगे लेकिन फिर से वही कहर ,और इतने सालो बाद फिर से महाराज को देखकर सभी फिर से घबरा गए ….

”

“ये पहाड़ी वाले बाबा की उम्र कितनी है “

“क्या पता जैसे हमारे तांत्रिक महाराज अमर है वैसे ही बाबा भी अमर है वो हमेशा ही 50-60 के ही दिखते है ,”

उस व्यक्ति ने थोड़े आश्चर्य से कहा

“हम्म्म्म तुम क्यो तांत्रिक की पूजा करते हो तुम भी अपने पहाड़ी वाले बाबा की पूजा किया करो “

“मुझे भी ताकत चाहिए “

“अच्छा “

उस शख्स के चहरे में एक कुटिल सी मुस्कान आ गई

“क्या तुम लोगो ने उन्हें देखा है”

“हा मैंने उन्हें देखा है,तुम्हे भी मिलवा दे क्या “

गांव का आदमी सिहर उठा

“डरो नही बस दारू की एक बोतल और 2 किलो बकरे का कच्चा मांस ,लेकर अमावस की रात को आ जाना ,साथ ही अगर कोई कुवारी लड़की ले आओ तो तुम्हारी तो सिद्धि पक्की “

वो थोड़ा खुस हुआ लेकिन फिर से डर गया

“नही नही जो भी उस गुफा में गया वो बाहर नही आया है ,कई लोग वँहा दारू और मांस लेकर गए लेकिन कोई भी बाहर नही आया “

“हम तो आये ना “

वो सोच में पड़ जाता है ,

“देखो अभी समय है इससे पहले की तांत्रिक बाबा की ताकत और बड़े और वो गांव में आकर घूमने लगे जो जो उनकी शरण में आ जाएगा वो ही बचेगा ,सोचलो और अब पहाड़ी वाले बाबा कुछ भी नही कर पाएंगे क्योकि अब हमारे तांत्रिक बाबा इतने ताकतवर हो चुके है की उनके सामने कोई भी नही टिक सकता …जय शैतान की ,”

एक शख्स ने जोरो से कहा ,वो जग्गू था जो की खुद ही तांत्रिक बाबा के भेष बना चुका था ,

उसके साथ ही उसका दोस्त पुनिया था दोनो मिलकर बाबा के नाम पर कुछ लोगो को अपने तरफ करने में कामियाब हो चुके थे जिनसे सिद्धि और डर के नाम पर कुछ काम करा लिया करते थे ….

उसकी बात सुनकर वो शख्स और भी काँपने लगा

“जय शैतान की ...जय शैतान की ..”

“ठीक है अभी तू जा और कल फिर से शराब और मांस लेकर आना “

उसके जाते ही जग्गू मांस पर झपटा जिसे पुनिया ने रोका

“अबे इसे भून तो ले “

“अरे मेरे भाई सालो से कच्चा ही खा रहा हु अब आदत मत बिगड़ मेरी वरना इन लोगो को डराएंगे कैसे ,तू अपने लिए इसे भून ले “

“हम्म ठीक है लेकिन पहले गुफा के अंदर चल “

दोनो ही गुफा के अंदर चले जाते है …

“मुझे एक बात समझ नही आयी की आखिर ये पहाड़ी वाले बाबा अभी तक 50-60 के कैसे लगते है जबकि गांव वाले उन्हें 100 सालो से जानते है “

“अरे ये लोग तो मुझे भी वही तांत्रिक मानते है ,मेरा गुरु 70-75 साल में ही मर गया था ,हो सकता है की उसका भी कोई गुरु रहा हो जिसे ये लोग आदमखोर तांत्रिक मानते रहे हो ,इन्हें तो ये ही लगता है की ना तांत्रिक मरता है ना ही पहाड़ी वाले बाबा ,तो जैसे तांत्रिक का रहस्य है वही रहस्य बाबा का भी होगा “

“ह्म्म्म “पुनिया ने एक गहरी सांस ली और अपने शराब को अपने हलक से उतारा…..

अध्याय 70

धाय धाय धाय

हवा में गोलियो की आवाज और बारूद की बदबू फैल गई थी ,अजय के कंधे को छूते हुए वो बुलेट गुजरी थी लेकिन अजय की आंखों में खून उतर गया ,जो बुलेट उसे बस छू के निकली थी वो सीधे निधि के कंधे पर जा घुसी थी ,अजय बौखलाया उसने इतनी तेज ब्रेक मारी उसकी मोटरसाइकिल कई मीटर तक यू ही घसीटती चली गयी …….जंगल में घोर सन्नाटा छा गया गाड़ी रुकी ही थी की फिर कुछ नकाबपोश शख्सियत जंगल से प्रगट हुए वो जानते थे की इस समय अजय और निधि अकेले ही छिपकर बाइक से पहाड़ी वाले बाबा के आश्रम के लिए निकले है ,दूर दूर तक कोई नही था ना ही किसी से मदद की ही कोई उम्मीद थी ,निधि के कंधे से बहता हुआ खून अजय को पागल बना रहा था वही उन्हें इस अवस्था में देखकर नकाबपोशों के हौसले और भी बढ़ गए थे .,...वो तेजी से अजय की तरफ बड़े और फायर करने लगे ,उनकी संख्या लगभग 10 थी सबके ही हाथो में अत्याधुनिक हथियार थे और अजय बिल्कुल ही खाली हाथ वो झट से बाइक के पीछे छुपा उसे पता था की ये छुपने की सही जगह नही है लेकिन वो कर भी क्या सकता था ,वो निधि को अपनी बांहो में भरे हुए था और गोलियां उसके शरीर के पास से गुजर कर जा रही थी ,की अचानक बाजुओ में कोई नुकीली सी चीज आकर गड़ी,वो उसे आश्चर्य से देखने लगा वो तो जानवरो को बेहोश करने वाला इंगजेक्शन था ,वो घबराया हुआ निधि को देखने लगा और उसकी आंखे बंद होने लगी वो चाहकर भी सम्हाल नही पा रहा था अब वो नकाबपोश उसके आसपास ही खड़े दिख रहे थे और वो निधि को उठा रहे थे ,अजय ने पूरी कोशिश की लेकिन वो अपना हाथ भी नही उठा पा रहा था ,वो बस निधि की चीख और नकाबपोशों के हँसने की आवाज को ही सुन पा रहा था……..धीरे धीरे उसके आंख बंद हो गए …..

इधर

खबर आंधी सी फैलाने लगी पूरा राज्य ही इस घटना से स्तब्ध था,घरके लोगो की नींद ही हराम हो गई थी ,उन्हें बस अजय की बाइक ही मिल पाई थी अजय और निधि का कोई भी सुराग हाथ नही लग रहा था ,पूरे 5 घंटे बीत गए थे ,प्रदेश के बड़े बड़े नेता और आफिसर भी इस बात से घबराए और हड़बड़ाये हुए थे,चुनाव सर पर था और अगर ऐसे में अजय और निधि का पता नही चल पता या कोई अनहोनी घटना घट जाती तो पूरा ठीकरा सत्तारूढ़ पार्टी के सर में फुट सकता था ,लेकिन चाहे विजय और बाली हो या तिवारी खानदान के लोग वो जानते थे की ये हमला राजनीतिक नही हो सकता ,कोई भी इतना बड़ा रिस्क नही उठाएगा,ये जानते हुए की उंनके परिवार की पहुच क्या है ,वो पूरे राज्य में हाहाकार मचा देंगे,.....

डॉ को अपने दिए गए सुझाव पर पछतावा हो रहा था ,आखिर उसने क्यो उन्हें अकेले ही जाने को कहा था,लेकिन अब देर हो चुकी थी किसी घर के भेदी ने ही कुछ ऐसी जानकारी लीक कर दी थी जिससे ये हादसा हो गया ,खोज चरम पर था जब डॉ ,बाली,कलवा और जिले का SP अजय और निधि को तलाश करते हुए पहाड़ी वाले बाबा के पास पहुच गए ,

“बड़ा ही गंभीर विषय है,आखिर कौन हो सकता है जो इस सहज और प्रेम से भरे हुए इंसान के लिए अपने दिल में नफरत रखता है…”

उस तेजमयी विशालकाय और मनमोहक व्यक्तित्व की गहरी आवाज गुंजी

“बाबा जी पूरा इलाका छान मारा लेकिन कही कोई सुराग नही मिला “

इस बार बाली ने रोते हुए कहा ,

“बाबाजी जो गोलियां अजय और निधि के किडनैप किये जाने वाले जगह से मिली थी उससे पता लगता है की इसमें नक्सलियों का भी हाथ हो सकता है…”SP कहा

तभी एक शख्स जो मैले कपड़ो में लिपटा हुआ था वँहा पहुच गया ,

“बाबाजी हमारी समस्या पर अपने गौर किया ,वो तांत्रिक तो अपनी हद से बाहर जा रहा है ,उसने फरमान भिजवाया है की हमारे गांव के सरपंच की कुवारी बेटी को जल्द से जल्द उसके पास भेज दे वरना वो हाहाकार मचा देगा ,”उस शख्स की आंखों में भी आंसू थे,डॉ ने बाबा जी को ध्यान से देखा ,

“क्या आप भी वही सोच रहे हो जो मैं सोच रहा हु “

डॉ ने बड़े ही गंभीर स्वर में कहा

“मुझे भी यही लगता है “बाबा जी की सहमति पर सभी लोग उन दोनो को ही देखने लगे

“हमे पहले गांव की समस्या सुलझानी चाहिए “

“आप पागल हो गए हो ,मेरा भतीजा और भतीजी की आपको कोई फिक्र नही है “बाली चीखा

“है…लेकिन तुमने नही सुना उसे कुँवारी लड़की चाहिए ,अगर उन्हें मरना ही था तो वो उन्हें मार ही देते शायद यहां बात और भी गहरी है जो हमारे समझ में नही आ रही है ,हो सकता है की गांव वालो की समस्या सुलझाते हुए हमे हमारी समस्या का समाधान भी मिल जाय,तुम लोगो के पास सब कुछ है जिससे हम उस तांत्रिक को पकड़ सके और उसके कहर से गांव वालो को बचा सके ,असल में मैंने अजय को इसी लिए यहां बुलवाया था ताकि वो मेरी जगह पर ये काम हाथ में ले सके ,हो ना हो भगवान हमे कुछ संकेत दे रहा है .”

6फिट 2 इंच का बाबा जी का शरीर उठ खड़ा हुआ ,एक गेहुये रंग की धोती बस उन्होंने लपेट रखी थी ,चौड़ी भुजाए और चौड़ी छाती देखकर कोई पहलवान भी उनसे डर जाय लेकिन मुख मंडल का तेज और सौम्यता उनके बारे में अलग ही जानकारी देती थी ….

पास रखा त्रिशूल उठा लिया लगा की साक्षात शिव प्रगट हो गए हो ,वहां बैठे हुए उनके भक्त जानो की आंखों में अश्रु की धारा बह गई ,एक भक्त ने शंखनाद किया ,बाकियों के रोंगटे ही खड़े हो गए थे ,

“हमे जाना कहा है “

वहां खड़े हुए SP ने टूटते हुए आवाज में कहा

“उस गुफा में चलो जंहा जाने से ये लोग घबराते है और जिसे तांत्रिक का निवास कहा जाता है “

अध्याय 71

इधर

अजय को बेहोश हुए ना जाने कितना समय बीत चुका था ,उसे हल्की हल्की सी आवाज आते सुनाई दे रही थी ,हा वो जिंदा था ,शायद उसे यकीन ही नही था लेकिन उसे जैसे ही निधि की याद आई वो पूरे होशं से भर गया ,उसने हल्के से अपनी आंखे खोली ,वो सीलन भरी जगह थी जंहा पर नमी का अहसास हो रहा था साथ ही मांस के सड़ने की हल्की बदबू फ़ैली थी ,सामने एक काले पत्थर की बड़ी सी मूर्ति दिखाई दी साथ ही जो दृश्य उसे दिखाई दिया उससे उसकी रूह तक कांप गई ,मूर्ति के नीचे एक लड़की नग्न अवस्था में बैठी थी उसके बाल बिखरे हुए थे ,वो अजीब सी मचल रही थी जब उस लड़की ने सर उठाया वो अजय के प्राण कांप गए वो निधि थी ,माथे पर बड़ा सा तिलक था और उसके चारो ओर फूल बिछाए गए थे ,उसका दूधिया शरीर दूर से ही साफ दिखाई पड़ता था ,वो मानो बहुत ही नशे में थी ,पास ही उसने 2 लोगो को खड़े हुए देखा ,एक नकाबपोश था जबकि दूसरा किसी तांत्रिक की तरह दिख रहा था ,पूर्ण नग्न उस शख्स के शरीर पर राख लिपटे हुए थी ,बालो के नाम पर जटाएं थी जो बिखरी हुई थी वो लगड़ा कर चल रहा था पास ही एक बलशाली सा आदमी नकाब में था ,अजय ने अपने हाथ चलाने की कोशिस की वो बंधा हुआ था ,उसने रुकने का फैसला किया ,वो उत्तेजना में कोई ऐसा कदम नही उठाना चाहता था जिससे निधि को कोई खतरा हो ,जब तक वो जिंदा था निधि के बचने की उम्मीद थी …

“आखिर ये कैसे हो सकता है “

नकाबपोश शख्स बौखलाया

“मुझे क्या पता लेकिन ये लड़की कुँवारी नही है “

लंगड़ा तांत्रिक बुदबुदाया

“आखिर कैसे मैं इसपर सालो से नजर रखा हुआ हु ,इसका कोई बॉयफ्रेंड भी नही है ,किसी लड़के की छाया भी इसपर नही पड़ी और ये ...और तुम ये कैसे कह सकते हो ,इतना बड़ा रिस्क उठाया है मैंने इसके लिए और तुम .”

वो और भी बौखलाया

“हमे लड़कियों के कौमार्य की परीक्षा करना सिखाया जाता है ,अगर इसकी बलि दे दिया तो शैतान नाराज हो जाएगा और इसकी सजा हमे मिलेगी ,”वो हड़बड़ाया हुआ बोला

“तेरे शैतान की तो मैं..

”

उसने अपनी बंदूख उठाई और उस मूर्ति के सामने तान दिया

“पुनिया “जग्गू जोरो से चिल्लाया ,पुनिया ने तुरंत ही उसे चुप करा दिया

“पागल हो गया है क्या ,हमारे नाम किसी को भी पता नही चलने चाहिए “पुनिया हड़बड़ाया

“तो तू शैतान के बारे में ये कैसे बोल सकता है ,ये लड़की अब शैतान की भेंट तो चढ़ चुकी है ,लेकिन इससे हमे कोई भी लाभ नही हो सकता,अगर हमने इसे छुवा तो उसका कहर हमपर बरसेगा ,अगर हम शैतान को इसे भोगने के लिए आमंत्रित करे तो ये कुँवारी नही है शैतान हम पर ही बरसेगा “

जग्गू बड़े ही गंभीर होते हुए कहा

“तू पागल है ये सब दुसरो को डराने के लिए ही ठीक है ,तू भी इन सब पर विस्वास करता है “

जग्गू जोरो से हंसा

“अपनी आधी जिंदगी मैंने ये सब देखते हुए बिताया है और तू मुझे विस्वास की बात करता है ,हा लोगो को डराने के लिए कुछ पैतरे अपनाने पड़ते है लेकिन ये कोई पैतरा नही है,सच में शैतान को कुँवारी लड़की का भोग लगाने से वो खुस होता है और इससे हमारी शक्ति बढ़ती है,सालो से मैं ये करना चाहता था ,उस सरपंच की बेटी ही मिल जाती तो अच्छा था कहा हम इसे कली समझ कर इसके पीछे पड़ गए ,अगर हमारा ये प्रयास सफल हो जाता तो हमे हराना किसी भी के लिए नामुमकिन हो जाता ,”जग्गू मायूस था

“लेकिन अगर हम इससे संभोग भी नही कर पाए तो इस लड़की के जिंदा रहने का मतलब भी क्या हुआ “पुनिया अब बेचैन हो गया था

“क्योकि हमने इसे शैतान को सौप दिया है ,मैंने सभी विधि विधान तो कर दिए है लेकिन शैतान को बुलाने से पहले मुझे इसके कौमार्य के भंग होने की जानकारी मिल गई ,जब मैं इसके योनि को छुवा ,हम बच तो गए लेकिन अब फंस भी गए ,अब इसे ना ही मार सकते है क्योकि इसे मारने का अधिकार अब शैतान का ही है ,”

कुछ देर की खामोशी के बाद पुनिया के चहरे में एक शैतानी मुस्कुराहट ने जन्म लिया

“अगर शैतान को इसके भाई के अंदर बुलाया जाय तो “पुनिया की बात से जग्गू का चहरा खिल गया

“ये हुई ना बात ,अब भाई ही अपनी बहन को मारेगा और इसके अंदर का शैतान उस आदमी को मार डालेगा जिसने उसे एक पहले से इस्तेमाल की हुई लड़की का भोग लगाया ,मतलब इसका भाई ही मरेगा ,हम बस तमाशा देखेंगे दोनो ही मौत का “

“मुझे तो ये देखना है की कैसे एक भाई ही अपनी बहन को हमारे सामने चोदेगा ,वो भी जब उसके अंदर शैतान का वास हो …”

पुनिया की ख़ौफ़नाक हँसी पूरे गुफा में गूंज गई वही उनकी बाते सुनकर अजय की रूह कांप गयी ..

अध्याय 72

निधि के नंगे जिस्म को घूरती हुई दो आंखे थोड़ी चौड़ी हो चुकी थी ,गुलाल फैल कर उसके जिस्म के कुछ हिस्सो में लग चुका था ,माथे का गुलाल फैल चुका था और वो झूम रही थी दुनिया की कोई भी खबर उसे नही थी ,जैसे वो किसी गहरे नशे में हो ,उफनती हुई जवानी पुनिया और जग्गू के मुह में पानी तो ला रहा था लेकिन उन्हें पता था की इससे छूना यानी अपनी ही मौत को दावत देना था,पास ही अजय बंधा हुआ था उसके कपड़े उतारे जा चुके थे उसे कुछ ऐसा पिलाया गया था की उसके आगे सबकुछ नाचता हुआ सा दिख रहा था ,वो बैचैन था उसे पता था की उसके साथ क्या किया जा रहा है लेकिन इतना मजबूर भी था की कोई सहारा उसे दिखाई नही दे रहा था,उसके हाथ अभी भी बंधे हुए थे और वो छूटने की पूरी कोशिस भी कर रहा था लेकिन वो लोग जानते थे की इसे छोड़ना मतलब अपनी ही मौत को दावत देना था,जग्गू अपने विधि विधान में लगा हुआ था उसने एक बड़ा सा चाकू निकाला और अजय के हथेली को बड़े ही प्यार से काट दिया ,खून की फुहार बरस गई थी ,उसकी हथेली को जग्गू ने निधि के सर के ऊपर रख दिया ,उसका खून निधि के बालो में सनता चला गया,निधि किसी जंगली जानवर की तरह गुर्राई जिसे देख दोनो के चहरे में एक मुस्कान खिल गई वही अजय सहम सा गया,उसकी आंखों में अपनी बहन की ये हालत देख कर आंसू आ गए थे,वो भी नशे में था लेकिन अपने को सम्हाले हुए किसी एक छोटे से चांस के इंतजार में था लेकिन जग्गू भी साधा हुआ खिलाड़ी था वो ऐसी कोई भी गलती नही करना चाहता था जिससे की सालो की मेहनत पर पानी फिर जाय ……

पास ही जलती हुई आग से निधि का जिस्म गर्म होने लगा था और वो पसीने से नहा चुकी थी ,जग्गू एक खोपड़ी में कुछ खून अजय का भरा और अपने मंत्र पड़ने लगा,उसने कुछ और भी उसमे मिलाया ,वो अजीब अजीब सी हरकते करता हुआ उस काले शैतान की मूर्ति के पास आया और उसके चरणों में उसे रख दिया फिर उसे उठाकर पुनिया को इशारा किया जो अब भी नकाब के पीछे ही था ,पता नही उसे अब भी यही डर था की कोई उसे पहचान ना ले ,पुनिया ने अजय का मुह पकड़ा और नाक बंद कर दी अजय को बहुत ही कस कर बंधा गया था लेकिन फिर भी उससे कुछ करवाना मुश्किल हो रहा था,पुनिया जैसे तैसे उसे सम्हाल रहा था अजय को जब सांस लेने में तकलीफ होने लगी वो मुह खोला जग्गू ने उसके मुह को पकड़ लिया और खोपड़ी में रखा हुआ द्रब्य उसके मुह में डाल दिया ,अजय मजबूरी में ही उसे पीना पड़ा ,,जैसे ही उसने वो द्रब्य पूरा खत्म किया दोनो उसे छोड़कर दूर खड़े हो गए ,और अजय को डरे सहमे से देखने लगे ,वो ऐसे छटपटा रहा था जैसे की करेंट लगा दिया गया हो ,वो छटपटाते हुए गिर गया,थोड़ी देर को शांति सी छा गई तभी अजय के शरीर में हलचल हुई उसकी बांहे फसफड़ाई और मज़बूती से बांधे गए बंधन किसी पतली डोर की तरह टूटते चले गए ,

“आआआआआहहहहहहह “अजय उठ खड़ा हुआ था वो ऐसे

गरजा जैसे की कोई शेर हो ,पुनिया और जग्गू डर से काँपने लगे थे ,अजय का चहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था मानो खून उतर आया हो ,भुजाए फड़क रही थी और सांसे तेज थी,आंखों पूरी तरह से लाल ,उसके अंदर शैतान आ चुका था ,दोनो ही अपने घुटनो पर बैठ गए और अपना सर जमीन से टिका दिया,अजय फिर से दहाड़ा ये दहाड़ इतनी डरावनी थी की दोनो के प्राण कांप गए वही इसकी आवाज बाहर खड़े उन लड़ाकों तक भी पहुच गई जो गुफा की रक्षा में तैनात किये गए थे ,वो इतना डरावना था की वो सब छोड़ वँहा से भागे,जैसे की कोई शेर उनके पीछे पड़ा हो ,

अजय रूपी शैतान निधि की ओर घुमा निधि अभी भी पागलो की तरह बस झूम रही थी ,इधर अजय अपने ही शरीर पर किसी और के कब्जे से छटपटाने लगा था लेकिन उसकी छटपटाहट किसी को भी दिखाई नही दे रही थी ,वो अपने शरीर पर फिर से अधिकार चाहता था ,वो बाहर का नजारा देख सकता था लेकिन जैसे लकवा मार दिया गया हो उसका कोई भी अधिकार अपने शरीर पर नही था ,शैतान निधि के करीब आया और उसे किसी फूल सा उठा लिया उसके हाथ निधि के नितम्भो पर थे और वो उसे मसलने लगा था ,वो उसके सामने किसी गुड़िया की तरह लग रही थी ,वो अजय का शरीर था जिसे उसने सालो की मेहनत से इतना भारी और ताकती बनाया था ,शायद शैतान भी इस शरीर से बहुत खुस रहा होगा,वो निधि को उठाकर बिछे हुए गुलाल पर पटक देता है ,

“आआआ “निधि को पहली बार दर्द का अहसास हूं और उसका होशं धीरे धीरे वापस आने लगा ,उसने देखा की अजय पूरी तरह से नंगा उसके सामने खड़ा है ,उसे जो पिलाया गया था उसका ही असर था की इतने जोरो से गिरने पर भी उसके शरीर में वो दर्द नही हो रहा था जो होना चाहिए ,वो थोड़े होश में थी और थोड़ी बेहोशी में ,अजय का शरीर उसके ऊपर लेट जाता है ,और जो होता है उसे देखकर पुनिया और जग्गू का दिमाग ही चकरा गया ,उन्हें लगा था की जैसे ही निधि को थोड़ा होशं आयेगा और वो अजय के शरीर को अपने ऊपर चढ़ते देखेगी वो चिल्लाने और छटपटाने लगेगी ,और शैतान उसके साथ जमकर बलात्कार करेगा लेकिन ……….

?????

लेकिन यहां तो माजरा उल्टा ही हो गया,निधि ने अजय के शरीर को ना सिर्फ सहर्ष अपने ऊपर लेटने दिया बल्कि वो उसके उसके गले में अपना हाथ भी डाल दी ,और उसे अपने ऊपर और भी जोरो से खिंचने लगी ,दोनो ही एक दूसरे के चहरे को देखने लगे ,वो खुद के ही जाल में ऐसे फंस चुके थे की उनकी बोलती ही बंद थी ,उन्हें बस एक ही आशा थी की जैसे ही शैतान को पता चलेगा की निधि का कौमार्य भंग हो चुका है वो अजय के शरीर को तड़फएगा और निधि को जबरदस्त तरीके से रौंदेगा,जिससे दोनो ही जान ही चली जाएगी ,वो लाचार से बस देखने लगे ,कितने ख्वाब देखे थे उन्होंने की निधि की जवानी का मजा लूटेंगे,लेकिन यहां तो सब कुछ ही उल्टा पड़ता नजर आ रहा था ,

अजय के शरीर में उपस्थित शैतान भी निधि के इस हरकत से घबरा गया था ,वह तो बुराई के वजूद में ही पल सकता था प्यार के नही ,इधर अजय के शरीर में बसा हुआ अजय निधि के हरकत को देखकर मुस्कुरा दिया ,वो अपनी बहन को प्यार करने के लिए जोर लगाने लगा,निधि और अजय का प्यार तो शैतान पर भी भारी पड़ने लगा था ,शैतान उसे तड़फना चाहता था लेकिन अजय अपनी ताकत उसे प्यार करने में लगाना चाहता था ,निधि ने अजय के शरीर का सर पकड़ा और उसे अपनी ओर खिंचते हुए उसके होठो को अपने होठो में मिला लिया ,अजय ने पूरी कोशिस की कि वो उसे महसूस कर सके और एक सेकंड के 10 वे हिस्से में ही सही उसने उसे महसूस किया ,अजय को key मिल गई थी ,उसे वो चाबी मिल गया था जिससे वो अपने शरीर पर फिर से अधिकार पा सकता था ,वही होठो के मिलने पर शैतान बुरी तरह से झल्ला गया था वो अपने सर को हटाने लगा लेकिन उसे लगा की शरीर का मलिक शरीर पर फिर से उपस्थित हो गया है वो कुछ देर के लिए असहाय हो गया ,उसे समझ आ चुका था की क्या हो रहा है ,वो फिर से गरजा ,वो उठ खड़ा हुआ और निधि को एक तमाचा जड़ दिया},तमाचा इतने जोरो का था की अगर निधि सामान्य हालत में होती तो शायद वो बेहोश ही हो जाती लेकिन भला हो उस द्रव्य का जिसे उन दोनो ने निधि को इसलिए ही पिलाया था की वो इतने नशे में रहे की शैतान की मार को सके और मर ना जाय,लेकिन इतने होश में भी रहे की अपने साथ होने वाली घटना को जान सके ,अब यही अजय और निधि के पक्ष में हो गया था ,निधि थोड़ी मचली और उस मार को अजय का प्यार समझ कर थोड़ा ऊपर उठकर उसे अपने गले से लगा लिया ,

“आह भईया “उसका नंगा जिस्म जब अजय के शरीर से पड़ा तो अजय उसे महसूस करने की पूरी तमन्ना से भर उठा वो निधि को जोरो से पकड़ा और अपने होठो से उसके होठो को मिलाकर चूमने लगा ,इसी दौरान अजय ने अपने लिंग को निधि के योनि ने प्रवेश करा दिया ,ये वो संवेदना थी जो इतनी मजबूत थी की अजय को अपने शरीर में बंधे रख सकती थी ,इससे उसके मन में निधि के लिए प्यार कई गुना बढ़ जाता था ,और वही हुआ ,अजय हल्के हल्के से अपनी कमर हिलाने लगा ,निधि उसके गोद में मचलने लगी और

शैतान ...उसकी हालत ऐसी हो गई थी जैसे पहले अजय की थी वो अपने को लकवा ग्रस्त महसूस कर रहा था ,वो कभी कभी अजय के शरीर में पुनः कब्ज़ा कर भी लेता तो उस प्यार का अहसास उसे कमजोर कर देता और अजय फिर से अपने शरीर को कब्जे में कर लेता ,इस बार शैतान ने पूरी ताकत लगा कर शरीर को अपने कब्जे में किया और उठ खड़ा हुआ उसे कुछ ऐसा करना था जिससे उसकी शैतानियत जिंदा रहे ,वो उठा और उसकी नजर उन दोनो खड़े शख्सों पर गई ,वो क्रोध से चिल्लाया ,दोनो ही दहल गए ,शैतान को हमेशा ही कुवारी लड़कियो का भोग लगाया जाता था ,आज उसे ना तो कुवारी लड़की दी गई बल्कि ऐसे लड़के के जिस्म में प्रवेश करा दिया गया जो की उस लड़की का प्रेमी था और उनका प्रेम इतना मजबूत था की उसकी शैतानियत उस प्यार के सामने फीकी पड़ रही थी ,वो दोनो की तरफ बड़ा दोनो ही काँपने लगे ,अजय को तो चाबी मिल ही गई थी वो अंदर बैठा खुस होता हुआ तमाशा देख रहा था ,वो अपने को ढीला छोड़ा वो जानता था की जैसे ही शैतान निधि के करीब भी पहुचे उसे क्या करना है से बस निधि को महसूस करने की अपनी तडफ को बढ़ानी है और वो अपने शरीर का मालिक हो जाएगा फिर उसे निधि के साथ शाररिक संबंध बनाना है ,

इधर

दोनो ही वहां से भागने की कोशिस करने लगे लेकिन शैतान ने दोनो को गले से पकड़ कर उठा दिया

“हे शैतान मैं तो आपका भक्त हु आप मुझे छोड़ दीजिये दया करे दया करे “

जग्गू चिल्लाने लगा

“तुमने मुझे ऐसे आदमी के शरीर में बुलाया जो की इस लड़की का प्रेमी है और वो लड़की भी कुवारी नही है ,ये दोनो पहले ही संभोग कर चुके है “एक भारी और डरावनी आवाज से पूरी गुफा गूंज उठी

“नही नही हमने नही इस शरीर के मालिक ने जानबूझकर आपको अपने शरीर में बुलाया है ,इसे दंड दे और इसकी प्रेमिका को भी “जग्गू ने काँपती आवाज में कहा

“आआआ मैं इसे नही छोडूंगा “शैतान चिल्लाया और दोनो को किसी गेंद की तरह दूर फेक दिया ,दोनो की ही जैसे हड्डियां ही टूट गई थी शैतान फिर से निधि की ओर पलटा

“यहां रहना खतरे से खाली नही है भागो यहां से “जग्गू ने पुनिया को इशारे से एक दूसरे गेट की तरफ इशारा किया जो सीधे ही जंगल की ओर खुलता था ,इसका पता बस जग्गू और पुनिया को ही था ,

“लेकिन मेरी सालो की मेहनत ,मैं इन दोनो को ही गोली मार देता हु “

पुनिया चिल्लाया

“साले पागल हो गया है क्या ,तू अजय को नही शैतान को गोली मरेगा और तुझे क्या लगता है इसके बाद हम दोनो बचेंगे,वो जिंदा खा जाएगा हम दोनो को ,भला इसी में है की भाग और अगली बार जब कोई लड़की लाये तो उसका अगला पिछले सब देख कर लाना “पुनिया की आंखों में खून उतर आया था उसे तो यकीन ही नही हो रहा था की आखिर ये हो क्या गया ..निधि और अजय जो एक दूसरे को इतने शिद्दत से चाहते है ...

उसने तो जन्म में भी नही सोचा था की ये हो सकता है लेकिन अब उसके लिए सोचने का कोई भी वक्त नही था वो दोनो वहां से निकल गए ...

इधर शैतान निधि के ऊपर चढ़ने ही वाला था की निधि ने अपनी बांहे उसके स्वागत के लिए फैला दी ,वो फिर से झल्लाया और चिल्लाया लेकिन इसका कोई भी असर निधि पर पड़ा ही नही वो बस मुस्कुराए जा रही थी और इसी प्यार के पल में शैतान कमजोर हुआ और अजय अपने शरीर पर हावी वो गया ,वो जल्दी से अपने होठो को निधि के होठो से मिला लिया और अपने लिंग को उसके योनि के हवाले किया वो बड़े ही प्यार और इत्मीनान से उसके साथ संभोग करने लगा था,उसे पता था की जितना वो प्यार से भरेगा शैतान उतना ही कमजोर होता जाएगा ,कभी कभी जब शैतान बहुत कोशिस के बाद शरीर को अपने काबू में ला लेता तो वो जोरो से धक्के देता था लेकिन इससे निधि डरती या दर्द से छटपटाती नही बल्कि आह भरती हुई उसे और अपनी ओर खिंच लेती और उसके चहरे में एक मुस्कान आ जाती उसे लगता था की उसके भइया उसके साथ शरारत कर रहे है कभी बहुत ही हल्के हल्के तो कभी जोरो से उसे प्यार कर रहे है ,बेचारा शैतान ..फिर से कमजोर पड़ जाता और अजय फिर से अपनी बहन के प्यार में डूब कर हल्के हल्के धक्के देने लगता ,जब शैतान आकर जोरो से धक्के देता था और निधि आहे भरती हुई मुस्कुराती तो अजय के होठो में मुस्कुराहट खिल जाती ,जो की उसके चहरे पर नही आ पाती क्योकि उस समय शरीर तो शैतान के कब्जे में होता लेकिन जैसे ही वो कमजोर पड़ता और अजय शरीर पर हावी होता वो रुकी हुई मुस्कान उसके चहरे में आ जाती ,निधि को भी ये खेल पसंद आ रहा था,सच तो ये था की कभी निधि और अजय को इससे ज्यादा मजा संभोग में आया ही नही था,एक व्यक्ति ने दोनो पक्ष यहां उपस्थित थे शैतान भी और प्यार करने वाला इंसान भी निधि की गदराई जवानी ने अपने काम का रस छोड़ दिया लेकिन इधर से तो कोई उम्मीद ही नही थी क्योकि यंहा एक नही दो शक्तियों एक साथ काम कर रही थी ,निधि बेतहासा अजय के गालो और होठो को चूमने लगी और अजय गहरे और धीरे धीरे धक्के उसकी योनि में लगाने लगा ,उसके मुह से भी आहे निकल रही थी ,शैतान इतना कमजोर पड़ चुका था की कुछ सेकंड को भी हावी नही हो पा रहा था,कभी हो भी जाता तो दो तीन धक्कों में फिर से वापस जाना पड़ता जो की निधि के लिया बहुत ही मजे का सबब बन जाते थे ,अगर उसे अभी कोई शरीर मिल जाता तो वो फुट फुट कर रो पड़ता वो कभी अपने को इतना कमजोर और असहाय महसूस नही किया था...

अजय अपने ये खेल चलता ही रहा जब तक की अजय को किसी के आने की आवाजे नही आने लगी वो शैतान को हावी नही होने देना चाहता था इसलिए वो बस उधर ध्यान ना देकर निधि से खेल रहा था निधि भी अपने भाई के प्यार के पूरी तरह डूबी हुई दुनिया को भूली थी ,,

तभी वँहा डॉ बाली पहाड़ी वाले बाबा और साथ में ही विजय नितिन और उनके कुछ और भी साथी प्रवेश किये बाबा ने माजरा देखते ही सब कुछ समझ लिया वो बाकियों को बाहर ही रोक कर खुद डॉ,विजय और बाली,कलवा के साथ उनके पास गए जंहा दोनो संभोग में रत थे सभी मुह फाडे ये देख रहे थे की कैसे एक भाई अपनी जान से प्यारी बहन के साथ संभोग में इतना व्यस्त है की उसे किसी का भी ख्याल नही …

“इसके शरीर में शैतान है ,सभी पीछे हट जाय “बाबा का हुक्म सुनते ही सभी पीछे हट गए ,विजय और बाली के आंखों में आंसू थे उनसे दोनो की हालत देखी नही जा रही थी ,बाबा ने कुछ मंत्र फुके अजय को समझ आ चुका था की उसकी सहायता को कोई आ चुका है वो धक्के में तेजी करने लगा ,वो जितने जोर जोर से हो सके धक्के देने लगा ,इससे शैतान को ऐसा लगा की उसे मौका मिल गया वो अजय के शरीर पर हावी हो गया और पूरे ताकत से धक्के देने लगा शैतान अब अपने पूरे शबाब पर आ चुका था ,निधि भी कई बार झड़कर थक चुकी थी इस तरह ताकतवर झटकों से छटपटाई और दर्द से चिल्लाने और उसे रोकने लगी ,शैतान तो खुसी से झूम उठा उसे लगा की अब वो आराम से इस शरीर को अपने कब्जे में रख सकता है लेकिन असल में अजय ने जानबूझकर अब उस शरीर में कब्जा करने से बच रहा था ,...

इधर बाबाजी ने मंत्र पढ़कर जो जल अजय के शरीर पर डाला उससे शैतान की चीख ही निकल गई ,अजय का शरीर भी जल उठा था उसके पीठ पर छाले पड़ने लगे वो निधि से दूर होकर छटपटाने लगा ,आंखे लाल हो चुकी थी वो गुस्से और पीड़ा से ऐसे भरा हुआ दिख रहा था जैसे किसी ने उसके साथ बहुत बड़ा धोका किया हो, अजय का शरीर थोड़ी ही देर में शांत होकर पड़ा रहा ...बाबाजी ने निधि के ऊपर भी मंत्र पड़कर पानी छिड़का जिससे वो बेहोश होकर गिर पड़ी,.........

अध्याय 73

अजय को होश आया तो वो अपने बिस्तर में पड़ा हुआ था,वो तेजी से उठकर खड़ा हुआ, पास खड़ी नर्स ने उसे रोका लेकिन

“निधि निधि कहा “

“आप शांत हो जाइए वो बाजू वाले कमरे में है और अच्छी है”

अजय को बहुत ही थकान महसूस हो रही थी लेकिन वो बेचैन था ,उसने हाथ मे लगी ड्रिप को निकाल फेका,

“अरे रुकिए “

नर्स उसके पीछे चलने लगी कमरे के बाहर परिवार का हर सदस्य मौजूद था,मुख्यमंत्री बंसल भी वहां आये हुए थे,सभी अजय को देखकर खड़े हो जाते है,लेकिन उसे इन सबकी फिक्र कहा थी,वो निधि के कमरे में गया, वो अभी भी आंखे बंद कर सोई हुई थी, पास ही उसकी बहने खड़ी थी,

“निधि निधि “

वो धीरे से आंखे खोलती है और बहुत ही प्यार से अजय को देखती है,

“आप कैसे हो ,”वो बहुत कमजोर लग रही थी, अजय के आंखों में आँसू था लेकिन निधि के चहरे में मुस्कुराहट ,

“आप फिक्र मत करो मैं अच्छी हु”

वो हल्के से मुस्कुराते हुए बोली

“जिसने भी ये किया है उसे मैं जिंदा नही छोडूंगा “

अजय की आवाज कांपने लगी थी

वो उठ कर बाहर आ चुका था,

“अगर पेशेंट को होश आ रही हो तो हमे बयान लेना होगा”

बाहर खड़ा sp डरते हुए बोला

“कोई बयान बाजी नही होगी,बस किडनैप किया गया और मिल गए इतना ही लिखो रिपोर्ट में “अजय की आंखे देखकर sp थोड़ा सहमा

“लेकिन सर”

“गुनहगारों को ढूंढने और सजा देने की जहमत तुम मत उठाओ sp , वो मैं कर लूंगा ,तुम बस फार्मेलटी पूरी करो और मेरी बहन का कोई बयान नही लिया जायेगा उसे आराम करने दो”

पास ही खड़े बंसल ने sp को इशारा किया और वो चलता बना

“अजय मेरा या मेरी पार्टी का इस सबसे कोई भी ताल्लुक नहीं है जैसा की ये मीडिया वाले कह रहे हैं,”

बंसल ने अपनी सफाई दी

“मुझे पता है अंकल और आप फिक्र मत करे मैं मीडिया के सामने आ कर सब कुछ क्लियर कर दूंगा,”सामने खड़ा हुआ विजय की आंखों लाल सूर्य जैसे धधक रही थी,

“वो तांत्रिक बचकर नही जा पायेगा भैया हम हर जगह उसे ढूंढ रहे हैं,”

“वो एक नही दो थे ,पुनिया हा यही नाम था उस दूसरे व्यक्ति का “

विजय थोड़ी भी देर लगाए बिना वँहा से निकला…

इधर

“मादरचोद तेरे इस शैतान के चक्कर में जिंदगी झंड हो जाएगी ,सभी तुझे कुत्तों की तरह ढूंढ रहे हैं,”

“मैंने कहा था, तूने ही तो जल्दबाजी की थी ,”

दोनो ही घने जंगल के बीच किसी अज्ञात स्थान पर छुपे हुए थे,

“खैर मरने मारने का फैसला तो कर ही चुके है,तो अब डरना कैसा “

पुनिया का चेहरा लाल हो चुका था..

इधर

अजय अब भी बहुत कमजोर महसूस कर रहा था, उसे सबने समझा कर उसके कमरे में सुला दिया था ,

एक सुबकने की आवाज ने उसकी नींद तोड़ी,

“तुम???”

खुसबू की आंखों में बस आंसू थे वो कुछ भी ना बोली वो उसके पैरों के पास बैठी हुई थी,

“अब कुछ बोलोगी भी”

लेकिन खुसबू की नजर अभी भी नीचे ही थी,अजय उठा और उसके हाथो को पकड़ कर अपने ऊपर खिंच लिया,खुसबू अब उसके ऊपर सोई हुई थी आंखों से आंसू बह रहे थे ,लेकिन वो अजय की छाती से चिपके हुए थी ,वो अपने सर को उठाने की थोड़ी भी जहमत नही उठा रही थी,

“मुझे पता चला कि उस तांत्रिक ने आपके और निधि के साथ क्या किया “वो और भी थोड़े जोर से अजय के सीने से लग गई,

अजय थोड़ी देर के लिए तो गम सा हो गया लेकिन फिर उसे निधि के चहरे के भाव दिखाई दिए और उसके चहरे में एक मुस्कान खिल गई ,लेकिन उसे भी ये डर लगा की कही खुसबू को ये भाव ना दिख जाय ,उसे उन दो लोगो पर बहुत ही हँसी आ रही थी जो की चाहते थे की भाई बहन का बलात्कार करे वही निधि को इतने मजे में उसने कभी नही देखा था साथ ही उसे भी इतने गहराई का अहसास कभी भी नही हुआ था,वो खुसबू को अपने से और भी सटा लेता है और उसे कसकर पकड़ता है ,उन यादो का असर उसके पेंट के नीचे के हिस्से में हो रहा था,उसे थोड़ा आश्चर्य हुआ की जिस चीज को लेकर वो इतना अपसेट था,और अपना खून जला रहा था जो की उसके और उसके परिवार के लिए सुरक्षा का विषय था ,उस बात में भी उसका लिंग अंगड़ाई मार रहा है,कहते है ना की शैतान बाहर ही नही एक शैतान अंदर भी होता है ,अजय को अपनी ही सोच पर हँसी आयी लेकिन फिर उसे याद आया की खुसबू ने आखिर कहा क्या है ,उसे पता चल गया मतलब की पूरे घर को इस बात का पता होगा,शायद कोई भी उसे कुछ कहे नही लेकिन ,,....ओह ये मौत सी खामोशी का कारण यही था…

वो खुसबू के बालो ने हाथ फेरता है ..

“तो तुम अब हमारे रिस्ते के बारे में क्या सोचती हो…”

अजय के बात से खुसबू उससे अलग हो गई और उसे बड़े ही दर्द भरे नजरो से देखने लगी ,

“आपको क्या लगता है “

अजय बिना कुछ बोले ही उसे देख रहा था,

“मैं आपकी हो चुकी हु और जो भी हुआ वो सब तो एक साजिश की तहत कराया गया था ,इसमें आप दोनो की गलती ही क्या है ,वो एक हादसा था जिसे भूल ही जाना चाहिए “

वो अजय की आंखों में देखती है

“कोई भी लड़की कभी ये सहन नही कर पाएगी की उसके प्यार के शरीर के साथ कोई और …”

अजय के बोलने से पहले ह खुसबू ने अपने उंगलियों को उसके होठो पर रख दिया

“बस अब चुप ,मैं जानती हु की आप क्या हो ..”

उसके होठो में एक मुस्कान तैरने लगी

“अच्छा क्या हु मैं “

“मेरे भगवान ..

”खुसबू अपने होठो को अजय के होठो के पास ले जाने लगी थी लेकिन अजय ने उसे वही रोक दिया ,

“ये मेरा निधि के साथ पहला सेक्स नही था खुसबू ,मुझे भगवान की उपाधि देने से पहले ये सोच लो ,की मेरे शाररिक संबंध मेरे बहन के साथ भी रहे है और ऐसा किसी गलती से एक बार नही हुआ है ये सोच समझ कर कई बार हमारे बीच हुआ है ,और इसका कोई भी गिला कभी भी मेरे दिल में नही रहा ना ही रहेगा ,मैं अपनी बहन से बेतहासा प्यार करता था करता हु और करता रहूंगा,मैं जानता हु की ये सब सुनने के बाद तुम मेरा यकीन नही करोगी लेकिन यकीन मानो मैं तुमसे भ बहुत प्यार करता हु “

अजय की बातो का खुसबू के कानो को विस्वास ही नही हो रहा था ,वो झटके से उठी और उठते ही लड़खड़ा गई ,वो थोड़ा सम्भली और अपने आंसू पोछकर अजय को अजीब से निगाहों से देखने लगी जैसे पूछ रही हो की क्यो ,आखिर क्या हुआ ये ...खुसबू बस देखती ही रही लेकिन अचानक जैसे उसे झटका लगा की आखिर हुआ क्या है वो झट से उठी और सीधे ही कमरे के गेट की तरफ अपने कदम बड़ा दिए ………

अध्याय 74

“उसने पुनिया का नाम ले लिया हम सब पकड़े जाएंगे “

आरती रो रही थी लेकिन उसका ममेरा भाई सुरेश अब भी शांत था,वो उसके डर को समझ रहा था लेकिन फिर भी उसे अपने पर भरोषा था,

“कुछ भी नही होगा तुम ऐसे रहो जैसे तुम हमेशा से रहती थी,और रही पुनिया की बात तो वो इतनी पुरानी बात है की किसी का भी ध्यान उसपर नही जाएगा ,इन लोगो ने इतने पाप किये है की इन्हें याद भी नही होगा की कोई पुनिया नाम का व्यक्ति भी है जिसकी इन्होंने जिंदगी बिगड़ दी थी ..”सुरेश का स्वर ठंडा था लेकिन इरादों में गर्मी अभी भी बाकी थी ,आरती सुरेश के कांधो पर हाथ रख देती है और उसके छाती में अपना सर रख देती है,

“तुम ही मेरे एक अपने हो भाई तुम्हारे लिए मैं सबकुछ कर सकती हु लेकिन ,,,,डर लगता है की तुम्हे ही खो ना दु ,ये दुश्मनी हमारे लिए नही है भाई हमने तो अपनी आधी जिंदगी बिता दी है अब और हमे क्या चाहिए हमे एक दूसरे का साथ तो मिल ही रहा है….

आरती अभी सफेद साड़ी में लिपटी हुई थी जो उसके बदन के हर एक करवट का बयान करता था,जवानी में ही वो बेचारी विधवा हो गई थी जिसका दर्द समझने वाला ये सुरेश ही तो था,अपनी बहन के लिए उसने खुद भी शादी नही की थी ,ना ही उसका कोई था ना ही आरती का ,आरती की शादी सुरेश की मर्जी के खिलाफ हुई थी,ऐसे भी किसी की इतनी हिम्मत नही थी की वो तिवारियो के सामने कुछ कह पाए,सुरेश तो अपनी जान भी दे देता लेकिन आरती के पिता ने उसे रोक दिया ,वो जानता था की भले ही आरती का ब्याह सबसे रसूखदार खानदान में हो रहा है लेकिन फिर भी वो लोग कैसे है खासकर आरती का पति,एक नंबर का ऐयास था ,उसकी नजर जब आरती के हुस्न पर पड़ी तो वो उसे पाने को बेताब हो गया,वो अच्छे घर की लड़की थी इसलिए उसने उससे शादी की सोची ,अब तिवारियो को कौन ना कह सकता था,पिता भी मजबूर होकर अपनी बेटी को किस्मत के भरोसे छोड़ दिया …

सुरेश कुछ नही भूल पाया था वो आरती को बेपनाह प्यार करता था लेकिन …..लेकिन वक्त के हाथो मजबूर हो गया था,तभी उसे पुनिया मिला,पुनिया से उसका संबंध बहुत ही पुराना था,जब सुरेश वनः विभाग का कर्मचारी हुआ करता था तब पुनिया भी उस गांव का निवासी था,पुनिया भी ठाकुरो और जमीदारो की दुश्मनी का सताया हुआ एक व्यक्ति था ,लेकिन पुनिया गायब हो चुका था ,जो उसे कुछ ही सालो पहले उसके संपर्क में आया था,पुनिया और सुरेश दोनो का ही मकसद एक ही था ,बस पुनिया की दुश्मनी ठाकुरो से भी थी लेकिन सुरेश की सिर्फ तिवारियो से ,सुरेश अपनी बहन के हालात को देखकर सालो से जल रहा था आज उसे एक उम्मीद दिखी थी,उसने अपनी प्यारी बहन को उस दरिंदे की बीवी बनते देखा था और फिर उसके विधवा हो जाने के बाद उसे तड़फते हुए ,वो जानता था की उसकी बहन के संबंध अपने ही भतीजे से थे ,जिस्म की प्यास में जलते अपनी बहन को वो कह भी क्या सकता था ,और अब विजय …..

सुरेश के लिए ये सब सहन करना हमेशा से मुश्किल रहा लेकिन आरती उससे कुछ भी नही छुपाती थी ,सुरेश भी अपनी मजबूरी का घुट पी जाता था ,

आरती उससे चिपकी हुई खुद को बहुत ही हल्का महसूस कर रही थी वही सुरेश भी अपनी बहन को गले से लगाए हुए उसके बालो को सहला रहा था वो कुछ सोच में डूबा हुआ था,

“इतना मत सोचो भाई जो होगा देखा जाएगा बस मुझसे वादा करो की तुम कभी इस लड़ाई में आगे नही आओगे ,जो भी हमारे साथ हुआ वो हो चुका है और हम दोनो ही इससे उबर चुके है ,क्या इतना काफी नही की मैं तुम्हारी बांहो में अपनी जिंदगी बिताऊँ “

सुरेश उसके माथे को चूमता है ,हा उन दोनो की मोहोब्बत सिर्फ जज़्बाती नई जिस्मानी भी थे ,सुरेश के लिए वो बहन से बहुत ज्यादा था वही आरती भी उसके लिए हमेशा खुद को खोले रखती थी लेकिन वो हमेशा तो साथ नही रह सकते थे ,

सुरेश ने उसके चहरे को ऊपर उठाया और उसके होठो में एक चुम्मन झड़ दिया दोनो के होठ मिले उसे एक दूजे के होठो में समा गए,वो काफी देर तक एक दूसरे को चूमते रहे ..आरती की आंखों में आंसू था

“मुझे बस इतना ही चाहिए ,मैं पूरी जिंदगी बस इतने में ही निकाल दूंगी “

सुरेश उसके आंखों में आये पानी को अपने होठो में समा लेता है,

“क्या क्या सपने थे हमारे,हम एक दूसरे से शादी करना चाहते थे,मैं तुम्हे अपने बच्चे की मा बनाना चाहता था लेकिन …..विजेंदर की मौत के कारण हमे अपने बच्चे को भी गिराना पड़ गया ,उसकी हवस के कारण हम एक नही हो सके आज भी हमे इस भाई बहन के चोले में रहकर एक दूसरे से मिलना पड़ता है ,हम खुलकर एक दूसरे को गले भी नही लगा सकते ,समाज मर्यादा मैं तो सब कुछ तोड़ने वाला था ना आरती लेकिन ,....

लेकिन ये दर्द अब नही सहा जाता मैं तुम्हे उनके चुंगुल से आजाद करा देना चाहता हु ,हम कही दूर चले जाएंगे आरती एक दूसरे की बांहो में जिंदगी बिताने “

सुरेश ने फिर से आरती के होठो को अपने होठो से मिला लिया था,आरती के आंखों से बहता पानी उसके होठो तक आता जो सुरेश के जीभ में लगकर एक नमकीन सा अहसास उसे दे रहा था,उसके गुलाबी होठ थोड़े खुले हुए थे वो उसके ऊपरी होठो को चूस रहा था ,जो किसी गुलाब की पंखुड़ियों की तरह नाजुक थे ,उम्र के इस पड़ाव में भी आरती के अंदर वही नाज़ुकता का आभास सुरेश को होता था जो उसके नवयौवन में होता था,सुरेश के हाथ आरती के कमर से होते हुए उसके पुष्ट नितम्भो पर चले गए ,जो मुलायम तो थे लेकिन अभी भी अपनी आकृति नही खोये थे,वो वैसे ही गोल थे जैसे उसकी पहली छुवन में हुआ करते थे,वो आरती को अपनी ओर खिंचता है,

“भाई मुझे अपनाने के लिए तुम्हे किसी समाज की स्वीकृति की जरूरत नही है ,मैं तुम्हारी थी और तुम्हारी ही रहूंगी ,हा ये जिस्म की गर्मी मुझे अपने जिस्म को औरों को सौपने पर मजबूर कर देता है लेकिन यकीन मानो की मैं तुम्हारे अलावा आज तक किसी को भी अपने दिल से नही लगाई हु,मेरे लिए तो तुम ही हो मेरे भाई,और ये कोई भाई बहन का चोला नही ये तो हमारा प्यार है जिसे हमने भाई बहन के रिस्ते का नाम दे दिया है ,प्यार तो हमारा तब भी था जब हम एक दूसरे के साथ बचपन में खेला करते थे,तब भी था जब तुमने पहली बार मुझसे कहा था की मैं बहुत ही सुंदर हु और मैं शर्मा गई थी,तब भी था जब तुम्हारे हाथो ने पहली बार मेरे शरीर को एक मर्द के जैसे छुवा था ,तब भी था भाई जब तुम्हरे होठ पहली बार मेरे होठो से मिले थे,”आरती रोने लगती है लेकिन बोलती जाती है ,

“तब।

भी तो था ना भाई जब तुमने पहली बार मेरे यौवन को पाना चाहा था और मुझसे वादा किया था की मैं तुम्हारी ही रहूंगी जिंदगी भर के लिए ,तब भी था जब तुमने पिता जी के सामने मुझे अपनी बीवी बनाने की बात की थी और उन्होंने तुम्हारे हाथ पैर तोड़ दिए थे ,तब भी था जब तुमने मुझे अपना बनाया था ,यही तो कमरा है ना भाई जंहा तुमने मेरा कौमार्य तोड़ा था और मेरे मांग में अपने नाम का सिंदूर डाला था,तब भी था भाई जब मेरे जिस्म को पहली बार मेरे समाज के सामने के पति ने भोगा था,तब भी था जब ये जिस्म राकेश और विजय के नीचे था ,तूने मुझे जब अपना बना लिया था भाई मैं तो तब ही से तेरी हु ,हमारे रिस्ते का नाम चाहे जो हो लेकिन मेरा ये जिस्म और मेरा मन सदा से तुम्हारे लिए ही था है और रहेगा “

आरती का पूरा चहरा आंसुओ से भीग चुका था,वही हाल सुरेश का भी था ,वो उसे अपनी ओर जोरो से खीचकर उसे अपने सीने से लगा लेता है ,

“मैं हर उस आदमी को बर्बाद कर दूंगा जिसके कारण तुम मुझसे अलग हुई ,,जैसे मैंने तुम्हारे पिता को दुनिया से रुखसत किए जैसे मैंने तुम्हारे पति को गोली मारी ,हमारे बीच कोई भी आये मैं उसे नही छोडूंगा ...आरती तुम मेरी हो तुम्हारे जिस्म को भोगने वालो को भी इसका हिसाब देना होगा,राकेश और विजय को भी तुम्हरे जिस्म से खेलने का पूरा हिसाब देना होगा आरती “वो जोरो से उसके होठो को अपने होठो में मिला कर चूसने लगता है,आरती भी अपने भाई के प्यार के उफान अब रोकना नही चाहती थी….दोनो ही बिस्तर में गिरते है और एक दूसरे में डूब जाते है…...

अध्याय 75

“ह्म्म्म पुनिया नाम कुछ सुना सुना सा लगता है”

किसी अनजान आवाज ने अजय के कान खड़े कर दिए थे,वो जल्दी से कमरे में घुसा जंहा डॉ,बाली,और वो शख्स पहले से मौजूद थे ,

“ओह अजय आओ आओ इनसे मिलो ये विकास है हमारे बहुत पुराने दोस्त है ,आजकल ये आईएएस बन गए है,मैंने तुम्हे बताया था ना “डॉ के कहने पर अजय बड़ी इज्जत से विकास से हाथ मिलता है ,और पास ही बैठ जाता है,डॉ ने उसे विकास के बारे में बता चुका था,

“सर आप कह रहे थे कुछ पुनिया के बारे में “

अजय विकास का ध्यान फिर से पुनिया के तरफ ले गया

“ओह हा ,जिसने तुम्हारे ऊपर हमला करवाया था ना,तुम्हे ही बताया था की उसका नाम पुनिया है ,ये नाम मैंने कही सुना तो है बस याद नही आ रहा है की कहा ,”

“याद करो यार इस आदमी को पकड़ लिया तो समझो सब कुछ पकड़ में आ जाएगा ,”डॉ ने जोर डाला और विकास याद करने की कोशिस करने लगा लेकिन फिर भी उसे कुछ याद नही आ रहा था

“कोई पुरानी दुश्मनी लगती है यार तुम्हारे परिवार से पहले तुम्हारे पिताजी और फिर ये सब ….

डॉ क्यो ना जूही को इस केस में लगा दे ,अब वो dsp बन गई है”

जूही डॉ और विकास की बहुत पुराने पहचान की थी और विकास की पत्नी काजल की सहेली भी थी,जूही अपने काबिलियत की वजह से पूरे पोलिस डिपार्टमेन्ट में मशहूर थी,बड़े बड़े केस उसने हैंडल किये थे ,और इसके ही वजह से उसे इतने प्रमोशन मिले की आरक्षक से वो dsp बन चुकी थी,

“इस काम के लिए सही रहेगी ??” डॉ ने थोड़ी चिंता जताई

“क्यो नही ,वैसे भी आजकल वो खाली बोर ही हो रही है “

“सर जिसे लगाना है आप लगा दीजिये लेकिन उस पुनिया और उस तांत्रिक का पता लगना बहुत ही जरूरी हो गया है,”

“हम्म तुम अपने चुनाव में ध्यान दो अजय बाकी का काम हम सम्हाल लेंगे “डॉ ने अजय को सांत्वना देते हुए कहा,

“डॉ कैसे ध्यान दु मैं ,मेरे लिए मेरे परिवार से ज्यादा जरूरी और क्या है और चुनाव घर में बैठकर तो जीता नही जाएगा ,उसके लिए सभी को बाहर निकलना ही पड़ेगा “

“तुम फिक्र मत करो घर को किला बना देंगे ,हमारे बॉडीगार्ड सादे कपड़े में हमेशा तुमलोगो के साथ रहेंगे,”

बाली ने दृढ़ता से कहा

“फिक्र मत करो मैं एक अच्छी सुरक्षा एजेंसी को जानता हु ,वो तुम्हे वैसे ही सुरक्षा देंगे कवर जैसे किसी बड़े नेता या VIP की होती है,किसी को पता भी नही चलेगा की तुम सुरक्षा घेरे में हो और तुम निश्चिंत भी रहोगे ,साथ ही अगर किसी ने तुम्हारे ऊपर हमले की कोसिस की तो और भी अच्छा होगा क्योकि वो पकड़ा जाएगा “विकास के सुझाव से अजय को थोड़ी राहत मिली …..

उन लोगो की बैठक खत्म हो जाती है ,वही खिड़की के बाहर से दो कान उनकी बाते सुन रहे थे ,वो झट से वहां से निकल जाता है और पुनिया को काल लगा कर सभी बाते बताता है ,

“ह्म्म्म विकास जी ,और जूही कोई बात नही दोनो मेरे पुराने परिचित है मैं उन्हें देख लूंगा,विकास को तो याद ही नही आएगा की मैं कौन हु ,और रही जूही की बात तो उसे तो मैं ऐसे घुमाउंगा की वो साये का पीछा ही करती रह जाएगी “

इधर

अजय अपने कमरे में बैठा हुआ कुछ सोच रहा था की सोनल की आहट से उसका ध्यान सोनल की तरफ गया ,

“भइया आप पागल हो गए हो “

अजय सोनल के चहरे का उड़ा हुआ होशं देखकर घबरा गया था

“क्या हुआ “

“क्या हुआ ,आप पूछ रहे हो क्या हुआ ? आई कांट विलिभ इट ,अपने खुसबू से क्या कहा ?”वो अब भी गुस्से में थी

“वही जो सच है “

“सच है ,अपने सोचा भी की उसके ऊपर क्या गुजरेगी “

“तू जानती है की सच क्या है ,तेरे और विजय के बीच भी तो …”

“आपको लगता है की हमारे बीच जो भी हुआ उसे समाज कभी भी स्वीकार करेगा ?”सोनल की आंखों में आंसू आ गए थे

“लेकिन मैं उस लड़की से कैसे झूट बोल सकता था जिसे मैं प्यार करता हु “

“भैया बात सिर्फ प्यार की नही है समझने की है ,अच्छा क्या खुसबू आपको कहती की उसने नितिन से सेक्स किया है और रोज करती हो तो आपको कैसा लगता “

अजय एक गहरी सोच में पड़ गया

“तेरा मतलब है की मेरे और निधि के बीच जो हुआ ,तेरे और विजय के बीच जो हुआ वो सब गलत था “

“नही मैं नही मानती की वो गलत था लेकिन समाज के लिए तो गलत ही ना ,सेक्स का रिश्ता भाई बहन के बीच नही होता भइया क्योकि समाज के लिए सेक्स गलत है ,और सेक्स हवस की निशानी होती है ना की प्यार की “

सोनल को अब लग रहा था की ये रिश्ता जो अनजाने में ही भाई और बहनों के बीच बन गया वो बहुत ही दुखदेने वाला हो रहा है…

“आप को क्या जरूरत थी बताने की ,जो हो गया वो हो गया ना ,”सोनल फुट फुट कर रोने लगी थी …

अजय उसके कंधे में हाथ रखता है और उसे प्यार से सहलाता है ,

“मैं खुसबू से कोई झूट नही बोल सकता ,चाहे वो कोई भी क्यो ना हो ,वो मेरे लिए मेरी जान है ,चाहे वो मेरे बारे में कुछ भी समझे मुझे उसकी कोई भी फिक्र नही है ,और रही बात मेरे और निधि के रिस्ते की वो उसने ना कोई हवस थी ना है और ना ही होगी ,वो मेरी प्यारी बहन है जिसके सामने मैं कुछ नही छिपता अब हो गया सेक्स हमारे बीच तो क्या कर सकता हु ,लेकिन हम दोनो में से किसी का भी ये मकसद तो कभी था ही नही ,ना ही भविष्य में ये करने का कोई मकसद है …”

सोनल गुस्से से अजय को देखती है ,लेकिन अजय थोड़े आश्चर्य में था क्योकि ये गुस्सा झूठा गुस्सा था एक शिकायत लेकिन होठो में आने से रोकी गई मुस्कान ,उसकी आंखे सोनल के चहरे के भाव को देखकर बड़ी हो जाती है ,

वही सोनल अपने जेब से मोबाइल निकाल कर उसे कान में लगा लेती है,यानी वो अभी किसी के साथ लाइन में

थी ,अजय को बात समझ आ जाती है ,

“मैंने कहा था की मेरे भइया तेरे लिए और अपनी बहनों के लिए दोनो के लिए पागल है ,इन्हें सही गलत से कोई भी वास्ता नही है इन्हें बस प्यार ही दिखाई देता है और प्यार ही समझ आता है “

वो अजय की ओर मोबाइल बड़ा देती है अजय भी समझ चुका था की लाइन में खुसबू ही थी ,

“हैल्लो “

उधर से बस रोने की आवाज आ रही थी …

“हलो इतना क्यो रो रही हो “

“तो और क्या करू “ये वाक्य बड़ी मुश्किल से बोला गया था और आवाज अजय के पीछे से आ रही थी ,वो मुड़ा देखा तो खुसबू आंखों में आंसुओ की बाढ़ लिए खड़ी हुई थी,यानी वो कमरे के बाहर ही खड़ी थी और मोबाइल से बाते सुन रही थी,

“तो दोनो प्रेमी जोड़े बात करो मुझे इजाजत दो “सोनल अपना मोबाइल अजय के हाथो से लेकर कमरे से निकल जाती है ,खुसबू अब अजय के पास ही खड़ी थी ,आंखों से आंसू अब भी बंद नही हो रहे थे,

“ह्म्म्म तो …”अजय उसे देखता हुआ बोला

खुसबू ने ना में सर हिलाया

“क्या “

“कुछ नही ,आप को …”

वो फिर से चुप थी

“आपको क्या “

“आपको क्या समाज के वसूलों की कोई परवाह नही है”

वो थोड़ी डरती हुई बोल गई

“किसने बनाया है उसे “

खुसबू नजारे उठाकर अजय को देखती है लेकिन कुछ नही बोलती

“समाज ने उसे अपनी सहूलियत के लिए बनाया है ,तो हम उसे अपनी सहूलियत के हिसाब से बदल भी तो सकते है “

अजय की बात तो बिल्कुल स्पष्ट थी लेकिन लॉजिकल नही थी

‘लेकिन ….”खुसबू कुछ बोलने को हुई ही थी की अजय ने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी ओर खिंच लिया जिससे खुसबू घबरा गई और अजय के चहरे को आश्चर्य से देखने लगी

“देखो ,एक लड़की और एक लड़के के बदन का शादी से पहले इस तरह संपर्क में आना भी तो गलत है ना लेकिन फिर भी हम ऐसे खड़े है ,तो क्या हम गलत है………..हा समाज के नजरो में तो है ,लेकिन क्या हम अपनी नजर में गलत है ,...नही क्योकि हम एक दूसरे से प्यार करते है और अगर प्यार नही भी करते तो भी ये गलत नही था क्योकि हमे इसकी जरूरत होती,और जब एक लड़की और एक लड़का दोनो ही अपनी मर्जी से सेक्स करे या शारीरिक संपर्क में आये तो वो गलत नही हो सकता …”

“लेकिन निधि आपकी बहन है…”खुसबू की आवाज बहुत ही धीरे थी..

“लेकिन प्यार तो मैं उससे भी करता हु और जो हुआ वो प्यार में हुआ ना ही जानबूझकर “

“प्यार में कोई ऐसा करता है क्या वो भी इतने बार “

खुसबू अब भी सुबकने लगी

“जब तुम्हे ये सब गलत लगता है तो फिर क्यो आ गई तुम मेरे पास “

“क्योकि मैंने आपको अपना पति मान लिया है ,और अब आप जैसे भी रहो आप ही मेरे पति हो “

“अच्छा”अजय के चहरे में एक मुस्कान आ गई

“लेकिन हम भी तो भाई बहन है”

“हमारी बात और है हम तो शादी करने वाले है”

अजय उसे और भी कस लेता है,अब उसका हाथ खुसबू के नितम्भो में था ,उसे एक शरारत सूझती है और वो उसके पिछवाड़े को जो की टाइट सलवार में उभरकर निकल रहे थे जोरो से दबाता है ,

“आउच …”खुसबू की रोनी सूरत और भी रोनी हो जाती है जिसे देखकर अजय को और मजा आता है

“कोई प्यार व्यार है आपको हवस के पुजारी हो आप “वो शिकायत भरे लहजे में कहती है लेकिन अजय फिर से उसे अपनी ओर जोरो से खीचकर उसके नितम्भो को मसलता है जिससे खुसबू उसके बांहो में मचलने लगती है,अजय के मजबूत शरीर के आगे वो एक गुड़िया ही थी,

“मेरी जान प्यार हो या हवस अजय कोई भी काम अधूरे में नही करता ,जो करता है पूरे दिल से करता है “अजय के फिल्मी स्टाइल के डायलॉग ने खुसबू के होठो में मुस्कुराहट ला दी लेकिन फिर भी वो उसे छुपाए रखी और जैसे ही पहला मौका मिला वो अजय से दूर हो गई

“भाग जाओ ,और अपना प्यार और हवस अपनी लाडली बहन पर ही दिखाओ “अजय कुछ कह या कर पता इससे पहले ही वो हंसते हुए वँहा से भाग गई ,अजय अब भी सोच में था की ये क्या हुआ ,खुसबू ने उसे माफ किया की नही ...उसकी हँसी से इतना तो पता चल गया था....

अध्याय 76

चुनावी रण अपने चरम पर पहुच गया था,सभी पार्टियां जी जान लगा रही थी लेकिन अजय इसमें बिल्कुल भी इंटरेस्ट नही दिखा रहा था,उसे तो अपने परिवार पर हमला करने वाले ही ही खोज थी ,चुनाव का पूरा दारोमदार खुसबू , सोनल और नितिन ने सम्हाल लिया था,चुनाव में मार्केटिंग वाले फंडे लगाए जा रहे थे ,चुनाव की रणनीति बनाने वाले एक्सपर्ट बुलाये गए थे,अजय और निधि पर हुआ हमला इस क्षेत्र के राजा पर हुए हमले के रूप में प्रचारित किया जा रहा था,3-4 सीटो पर जीत के आसार तो पहले भी थे लेकिन अब केशरगढ़ के पूरे क्षेत्र जो पहले रियासत का हिस्सा हुआ करती थी और आसपास के क्षेत्रों में भी अजय की पार्टी का दबदबा कायम होने लगा था,15 विधानसभा सीटे तो निश्चित तौर पर इनके पलड़े में गिरने वाली थी,और वही ये पूरी ताकत झोंक रहे थे,कुछ और जगहों पर भी आसार अच्छे थे लेकिन उन्हें भी पता था की 15 सीटो के साथ वो किंग मेकर बन जाएंगे ,उनके बिना सरकार बनाना सम्भव ही नही हो पायेगा,क्योकि कोई पार्टी को क्लियर बहुतमत के आसार नही थे,लेकिन अभी से कुछ कहना कोई भी ठिक नही समझ रहा था,तैयारी और प्रचार जोरो में था,निधि और अजय पूरी तरह से आराम कर रहे थे,युवाओं को जोड़ने ,मार्केटिंग और रणनीति बनाने की जिम्मेदारी खुसबू नितिन और सोनल के जिम्मे थी वही अगर कोई बाहुबली वाला काम हो तो,रैली निकालनी हो ,हल्ला मचाना हो तो विजय और किशन आगे आते,और धनुष छात्रों का नेतृत्व कर रहा था,उसकी शाख और सोच कमाल की थी ,कुल मिलाकर वो बेहतरिन टीम थे जो की कम से कम अपने क्षेत्र में अजेय हो गई थी,बाकी पुरानी पार्टियो ने भी उनके सीटो पर मेहनत कम कर दी थी और अपनी अपनी सीटे पक्की करने में लगे थे,इन दो परिवारों के सामने इनके ही इलाके में ऐसे भी कोई कहा टिकने वाला था…

इधर

एक गाँव की टापरी में एक 6 फुट से भी लम्बा भगवा रंग पहने बाल बढ़े और दाढ़ी में चहरा पूरी तरह से ढका हुआ एक साधु घूम रहा था ,वो एक चाय की टपरी में रुका

“जय जय शिव संभु “

उसकी दमदार आवाज ही उसके व्यक्तित्व को बयान करने को काफी थी ,चाय वाले और वँहा बैठे हुए कुछ लोग उसे बड़ी ही आस्था से देखने लगे ,चहरे का तेज ही इतना कमाल का था साथ ही साथ ही उसके व्यक्तित्व और आवाज ने सब के ऊपर एक गहरा असर छोड़ ही दिया,

चाय वाला हाथ जोड़े खड़ा हो गया,

“क्या चाहिए बाबा “

बाबा के चहरे में एक मुस्कान खिल गई

“कुछ नही बेटा एक चाय ही पिला दे “

उसकी आवाज गहरी और शालीनता से भरी हुई थी ,

“आइये आइये बैठिए “

एक आदमी अपने कुर्सी से उठता है

“आप कहा से है बाबा आपको पहले कभी देखा नही “

“अभी अभी हम इस ओर आये है ,हम भारत भ्रमण में है ,हमारे गुरु जो हिमालय के योगी है उन्होंने हमे आदेश दिया की बेटा जाओ और देश में घूम घूम कर लोगो में भगवान की आस्था जगाओ “

“बाबा आप तो बहुत

ही कम उम्र के दिखाई देते है ,क्या उम्र है आपकी “एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति जो थोड़ा पढ़ा लिखा लग रहा था उसने प्रश्न दागा,

“सुना नही है क्या ..जाती ना पूछो साधु की पूछ लीजिये ज्ञान “बाबाजी खिलखिला कर हँसने लगे उनकी निश्छल हँसी से सभी अभिभूत हो गए …

“बाबा जी चाय “

उन्होंने ने चाय का प्याला उठाया पीने लगे

“बाबाजी आप कहा कहा गए “एक नवयुवक बोल उठा

“सब अभी पूछ लोगे क्या ,इस गांव में कुछ दिन रुकूँगा ,तालाब के पास के मंदिर में कोई पुजारी रहता है क्या “

“जी बाबाजी पुजारी जी तो गांव में रहते है लेकिन मुखिया जी अगर मान जाय तो आप वँहा रह सकते है”

“तो चलो मुखिया का घर दिखा दो “

चाय पीकर बाबाजी मुखिया के घर की ओर चल पड़े

चुनाव के रिजल्ट आये और अजय की पार्टी राज्य की तीसरी बड़ी पार्टी बन कर उभरी,सबसे ज्यादा सीटे बंसल की पार्टी को मिला था,100 विधानसभा सीटो के राज्य में 42 बंसल को और 30 उसके विरोधी पार्टी को मिले थे,बहुमत किसी का भी नही था ,अजय की पार्टी 25 सीट के साथ तीसरी बड़ी पार्टी थी और 3 निर्दलीय विधायक चुने गए थे,स्वाभाविक था की अजय जिसका भी साथ देता वही सरकार बनाता,दोनो पार्टीयो ने मुख्यमंत्री के अलावा कोई भी पद देने की पेशकश की थी,अजय के परिवार का बंसल से सम्बन्ध बहुत ही पुराना था ,इसलिए अजय और पार्टी ने बंसल के नाम पर मुहर लगा दी,धनुष को उपमुख्यमंत्री के साथ गृह दिया गया,वही निधि को भी जो की पूरे चुनाव से दूर थी संस्कृति और खेल विभाग दिया गया,वो सबसे कम उम्र की मंत्री बनी,ठाकुर और तिवारी परिवार का कोई और सदस्य ना ही मंत्रिमंडल में था ना ही चुमाव लड़ा था,लेकिन उनकी पार्टी के जीते हुए सदस्यों को अलग अलग मंत्रालय दिया गया था,..अजय के लिए ये बस एक बोझ कम होने की तरह ही था,क्योकि उसे राजनीति से ज्यादा फिक्र उस शख्स की थी जो उनके ही बीच रहकर उनके लिए खतरा पैदा कर रहा था,और भाई बहन ने मंत्री बनने से उसे एक पवार सी मिल गई थी,पैसा और पवार तो उसके पास पहले भी बहुत था लेकिन अब सत्ता की पवार भी थी

अध्याय 77

अजय की गाड़ी एक घने जंगल में बनी पगडंडी पर चल रही थी,वो अकेला ही था और हांफ रहा था,गाड़ी में बैठे हुए भी ऐसा लग रहा था जैसे की वो कई किलोमीटर दौड़कर आया हो,पास ही एक धमाका होता है और अजय के गाड़ी के एक पहिये में जाकर गोली लगती है ,गाड़ी थोड़ी लड़खड़ाती है लेकिन रुकती नही ,वो अपने ही स्पीड में चली जा रही थी,टायर के चिथड़े उड़ गए लेकिन अजय ने गाड़ी नही रोकी आखिरकार एक छोटे मिसाइल सा बम आकर उसकी गाड़ी से टकराया जब तक अजय कुछ समझता उससे पहले ही बड़ा धमाका हो चुका था,..............

इधर

फोन पर पुनिया सभी कुछ सुन रहा था और साथ ही उसके चहरे का रंग भी बदलने लगा

“एक अकेला आदमी और तुम सब फिर भी वो तुम्हारे अड्डे को तबाह करके चला गया,”

“क्या मतलब की मर गया होगा लाश मिली की नही “

“नही मिली पागल हो गए हो जब तुम कह रहे हो की उसे बम से उड़ा दिया तो लाश तो मिलनी ही चाहिए थी…”

“और ढूंढो ,,,वो कोई आम आदमी नही है ,इस स्टेट का राजा है और अब दो मंत्रियों का भाई ..जगह जगह पोलिस और आर्मी तुम लोगो की तलाश में निकल पड़ी होगी जाओ और ढूंढो उसे “

पुनिया ने फोन पटका,अगर अजय जिंदा होगा तो उसका क्या हाल करेगा ये सोच कर ही उसकी रूह कांप जा रही थी ,.और अगर वो मर गया तो उसके परिवार वाले एक एक को चुन चुन कर मरेंगे ….

“ओफ़ अब क्या करू”पुनिया के मुह से अनायास ही निकला

इधर

ठाकुरो की हवेली में मातम परसा हुआ था,अखबारों की मुख्य खबर अजय की मौत ही थी,निधि पागलो जैसे घुमसुम सी बैठी थी वही बाकी लोगो का भी हाल बुरा ही था,जैसे रोते रोते आंसू सुख चुके हो ,मातम और सांत्वना का दौर कई दिनों तक जारी रहा लेकिन फिर भी अभी तक कोई भी पूरी तरह से सही नही हो पाया था,गार्डन में बाली और डॉ बैठे हुए बात कर रहे थे

“अब सोचता हु की सोनल और विजय की भी शादी कर ही दु ,घर के थोड़ी रौनक तो वापस आएगी ,बच्चों के चहरे अब देखे नही जाते “

बोलते बोलते बाली की आंखे नम हो गई थी

“हूऊऊ लेकिन क्या तुम्हे पता है की उन्हें कोई पसंद है की नही “

डॉ की बात से बाली ने चहरा ऊपर किया और आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,डॉ एक गहरी सांस लेकर कहने लगा

“सोनल नितिन को पसंद करती है वही अजय खुसबू को पसन्द करता था,जो हाल इस घर का है वही हाल अभी उस घर का भी है,अगर तिवारी मान जाए तो मेरी मानो और सोनल और नितिन की शादी कर दो ,दोनो परिवारों में खुसी थोड़ी तो लौटेगी और शायद इस रिस्ते के लिए सोनल भी ना ना कहे ..”

बाली गहरे सोच में पड़ जाता है

“देखो जंहा तक मैं समझता हु इस स्थिति में यही उचित होगा ,...सोनल को मनाना ही पड़ेगा ,मुझे डर तो निधि का है अजय के जाने के बाद वो तो मुर्दो की तरह से हो गई है ...अगर ऐसा ही चला तो ….उसे कही बाहर ले जाओ ,सुना है पास के ही गांव में एक बाबा जी ठहरे हुए है कुछ दिनों से उनके पास चलते है …”

“हम्म्म्म कुछ तो करना ही पड़ेगा वरना सभी फूल यू ही मुरझा जाएंगे “

बाली अपने मन ही मन कहता है….

सोनल और नितिन पूरे परिवार के सामने खड़े थे,

“लेकिन बाली ये दोनो तो भाई बहन है,”महेंद्र ने जोर देकर कहा

“जब इन्हें प्यार हुआ तो इन्हें भी कहा पता था की ये दोनो भाई बहन है “बाली ने अपनी बात रखी

सभी घर के सबसे बुजुर्ग रामचन्द्र तिवारी जो की सोनल के नाना और नितिन के दादा थे की ओर देखने लगे,

“बेटा प्यार ना जात देखता है ना ही धर्म ना ही रिस्ते ये तो बस हो जाता है,इनकी बात मान लो घर में थोड़ी खुसी तो आएगी”रामचंद्र ने नम आंखों से कहा,

वही खड़ी खुसबू जो की सुबक रही थी अपने दादा के नजदीक जाकर उनसे लिपट गई और अपने पिता की ओर देखते हुए बोली

“मैं भी अजय से प्यार करती थी पापा ,लेकिन अब वो नही रहे ,दादा जी सही कहते है अजय जी ने भी मुझे समझाया था लेकिन प्यार कुछ भी तो नही देखता ,इन दोनो की शादी अजय का भी सपना था…”

सभी की स्वीकृति तो मिल गई लेकिन सोनल शादी को तैयार नही हो पा रही थी ,डॉ की सलाह पर सभी पास के गाँव वाले बाबा जी के पास जाने को राजी हो गए ,बाबाजी जो की हिमालय से आये थे और देश का भ्रमण कर रहे थे,वो अभी पास ही के गांव में थे,वो इस इलाके में कुछ दिनों से घूम रहे थे कभी गायब हो जाते तो कभी फिर से आ जाते,लोगो में इनकी ख्याति फैल रही थी ,सभी परिवार उनके पास पहुचा जो की गांव के सरपंच के घर रुके हुए थे,लेकिन निधि वँहा जाने को राजी ही नही थी ,जब वो वापस आये तो सोनल शादी को राजी हो चुकी थी ,विजय अपनी बहन को भी दुख से उबरना चाहता था इसलिए जबरदस्ती निधि को बाबा जी के पास ले गया,उस समय बाबा जी अपने कमरे में बैठे हुए ध्यान में मग्न थे,उनकी लंबी चौड़ी काया देखकर वो किसी पहलवान से लगते थे,घनी दाढ़ी में उनका चहरा छिपा हुआ था लेकिन चहरे का तेज सभी तक पहुचता था,निधि और विजय के आने के बाद ही उन्होंने अपनी आंखे खोली निधि और उनकी आंखे मिली जैसे एक झटका निधि को लगा,वो वही पर बैठ गई और बाबाजी के चहरे को ध्यान से देखने लगी उसके ऐसे देखने पर बाबा मुस्कुराए और सभी को जाने का आदेश दिया,वँहा अभी बस निधि विजय और बाबा जी ही थे,

“ऐसे क्या देख रही हो …”

“आपकी आंखे किसी को याद दिलाती है”निधि का स्वर रुंधा हुआ था जबकि बाबा जी के चहरे में मुस्कान यथावत थी

“किसकी “

“मेरे भइया की ,”

“अच्छा “बाबाजी के चहरे की मुस्कान और भी चौड़ी हो गई निधि ने विजय को देखा तो वो भी मुस्कुरा रहा था निधि को समझते देर नही लगी वो उठी और भागी,बाबा से लिपट गई,वो अभी भी पद्मासन लगाए बैठे थे वो गिर गए थे और निधि उनके ऊपर थी ,निधि ने उनके गालो पर दो तमाचे जोर जोर के जड़ दिए ,निधि की आंखों से सैलाब बाहर आ रहा था वो कुछ भी बोलने और करने की स्तिथि में नही थी,बाबा ने उसके मुह को चूमा लेकिन वो हट गई

“अरे ऐसे गुस्सा क्यो हो रही हो …”

चटाक ,फिर से एक झापड़ अजय के गालो में था

“अरे बाबा माफ करो

“

चटाक

“अब “

चटाक

अजय हार गया और निधि को अपनी बांहो में जकड़ लिया और निधि के गालो में प्यार भरी पप्पी ले ली,

इधर विजय भी ये सब देखकर इमोशनल हो गया था,बहुत देर तक वो ऐसे ही लेटे रहे निधि उठी और जाने लगी

“अरे रुको तो क्या हुआ “

चटाक ,निधि ने रोते हुए अजय को चुप रहने का इशारा किया ,और उसकी दाढ़ी को खिंचा

“आउच दर्द होता है रुको “लेकिन निधि कहा मानने वाली थी उसने इतने जोर से अजय की दाढ़ी को खिंचा की अजय के त्वचा से खून आने लगी और निधि के हाथो में उसकी दाढ़ी थी ,निधि उसके पास ही बैठी और उसके गालो को सहलाया अजय के होठो में एक मुस्कान और ‘चटाक चटाक चटाक ‘

निधि रोटी रही और तब तक अजय को मरती रही जब तक की वो थक ही नही गई और फिर रोते हुए ही फिर से अजय के सीने से लिपट गई ,

“ये सब क्या है भइया आप ने मेरी जान ही निकाल दी थी,आप खुद को समझते क्या है कुछ भी करोगे और कभी सोचा है की हमारा क्या होगा ,कभी मेरे बारे में या खुसबू के बारे में सोचा अपने वो बेचारी पत्थर जैसी हो गई है ,लेकिन इसकी आपको क्या परवाह होगी …”अजय बस निधि के बालो को सहलाता रहा उसके पास बोलने को था भी कुछ नही उसे पता था की उसकी प्यारी बहन किस दुख से गुजरी है,उसकी आंखों में भी आंसू थे लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी तो पड़ता है ,

अब अजय ने फिर से अपनी दाढ़ी लगा ली थी और निधि उसके सामने ही बैठी थी,वो हल्के हल्के मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी,

“अब बताओगे की ये सब क्या है…”

“ह्म्म्म असल में जिसने हमे किडनैप किया ,जिसने हमारे माता पिता की जान ली उस पुनिया का सुराग इकठ्ठा करने के लिए मैं इस रूप में यहां रह रहा हु,अभी तक ये बात बस डॉ को पता थी ,असल में ये उनका ही प्लान था,डॉ के दोस्त विकास जो की अब IAS बन चुके है,वो पहले पास के ही कस्बे में कुछ दिन फारेस्ट अधिकारी के रूप में काम करते थे,उस समय वो पुनिया और जग्गू से मिले थे,तब तक उनके साथ सबकुछ ठिक ही चल रहा था ,फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ की वो दोनो ही गायब हो गए,मुझे इतनी जानकारी विकास जी ने दी ,हमने पता लगाने की बहुत कोशिस की पर कोई भी सुराख नही मिल पा रहा था फिर मैं उस कस्बे में गया और वहां कुछ दिन बाबा बन कर रहा,बातो ही बातो में मैंने पता लगाया की आखिर क्या हुआ था,जो भी उनके साथ हुआ वो सचमे दुखदाई था,पुनिया और जग्गू बहुत ही अच्छे दोस्त थे,और खुशहाली से रहते थे,वो आम गांव के इंसानों की तरह ही थे,लेकिन आफत तब आयी जब वीरेंद्र तिवारी यानी हमारे मामा जी जो की अब नही रहे और बजरंगी चाचा,कलवा चाचा के भाई की नजर इनकी बीवियों पर पड़ी ,वो लोग ऐसे भी बहुत ही ऐयास किस्म के लोग थे,उन्होंने हर हाल में उनकी बीवियों को पाना चाहा नतीजा ये हुआ की वो उन्हें घर से उठा के ले गए और जग्गू और पुनिया कुछ भी नही कर पाए ,दोनो ने जब इसकी शिकायत बाली चाचा से की तो

वो भी उन्हें समझा कर भेज दिए,बीवियां तो वापस आ गई लेकिन उसके बाद वो कभी भी उनकी नही रह गई,उनका उपयोग बजरंगी,विजेंद्र और यहां तक की बाली चाचा ने भी रंडियों की तरह करना शुरू कर दिया,ना ही पुनिया कुछ कर पाया ना ही जग्गू,आखिर पुनिया टूट ही गया और उसने जमकर विरोध किया जिसकी सजा सभी को मिली,दोनो के घर को जला दिया गया जग्गू के पैर काट दिये,पुनिया को एक बात पता चल गई थी की उसकी बीवी के साथ उन्होंने जबर्दति नही की थी बल्कि उसने ही अपने मर्जी से अपना जिस्म सौपा था वो पुनिया से खुस नही थी,उसने बदला लिया ,जब आग घर में फैली थी तो उसने अपनी पत्नी को मार दिया और अपने एक बेटे के साथ गायब हो गया,वही जग्गू भी कुछ दिनों के बाद वँहा से कही चला गया,सालो के बाद दोनो फिर से मिले अब पुनिया कोई साधारण आदमी नही रह गया है,वो नक्सलयो का सरदार है,और उनके जरिये ही हमारे ऊपर हमले करवाता आ रहा है,मैं पुनिया और जग्गू दोनो तक पहुचने में कामियाब रहा,लेकिन मैं उनको जड़ से खत्म करना चाहता था,क्योकि ना जाने इस साजिस में कौन कौन शामिल है,ये तो जाहिर है की हमारे परिवार वालो ने बहुतों के साथ ज्यादती की है अब ये मेरी जिम्मेदारी है की मैं इसे ठिक करू,ना सिर्फ पुनिया और जग्गू बल्कि ऐसे और भी कई परिवार हो सकते है,इनकी मदद कौन कर है मुझे ये पता लगाना था ,मुझे इनपर कोई भी गुस्सा नही रह गया है क्योकि इन्होंने अपने हक की लड़ाई लड़ी लेकिन एक स्टेज में जाकर हिंसा गलत हो जाती है,जिन्हें उन्हें सजा देनी थी वो दे चुके है,उन्होंने वीरेंद्र मामा को मारा,लेकिन हमारे माता पिता तो बेकसूर थे,अब वो दोनो ही हमारे पूरे परिवार के दुश्मन है….उनकी नफरत हमारे परिवार की सभी लड़कियों के ऊपर है ,जो हमारे परिवार के मर्दो ने उनकी बीबियों के साथ किया था अब वो हमारी औरतों के साथ करना चाहते है,इसलिए मुझे सभी का पता लगाना था,कोई हमारे परिवार के अंदर रहकर भी उनकी मदद कर रहा है,और वो अजय बनकर नही हो सकता था ,तो मैंने और डॉ ने ये खेल खेला,मैं अजय के रूप में उनके एक अड्डे में गया ,हमने सब कुछ प्लान किया हुआ था की जैसे ही वो बम्ब फोड़े मुझे खुद जाना है ,डॉ के आदमी वँहा मुझे बचने के लिए मौजूद थे और मैंने कपड़े भी ऐसे पहने थे की मुझे ज्यादा चोट नही आयी,मैं सुबह गायब हुआ और शाम को फिर से बाबा बन कर दूसरे गांव में चला गया,बाबा बनकर इनके बीच ही रहकर सब कुछ पता लगाना बहुत आसान है,...

”

अजय की बातो को निधि बड़े ही ध्यान से सुन रही थी,

“आप क्या भूल गए की मैं एक मंत्री हु ,आप बस बोलो की ये पुनिया है कौन मैं स्टेट की पूरी पोलिस लगा दूंगी “निधि के आंखों में गुस्सा था,

“नही निधि अब और गलती नही कर सकते,हा मैं जानता हु की पुनिया और जग्गू कौन है और कहा है लेकिन इनको पकड़ना कर मार देने से कुछ नही हो जाएगा,हमे जड़ तक इन्हें साफ करना होगा”

निधि मन मसोज के रह गई

“और किन्हें पता है की आप जिंदा हो ,क्या खुसबू जानती है…”

“नही खुसबू को कुछ दिन और ना ही पता चले तो बेहतर है,पहले बस डॉ को ही पता था ,कल सोनल और विजय को भी पता चल गया,और आज तुम्हे,बस लेकिन देखो मेरी याद में रोना मत छोड़ना नही तो सभी को शक हो जाएगा “निधि जाकर अजय से लिपट गई …………..

अध्याय 78

विजय घर की छत पर खड़ा हुआ अपने गांव का नजारा देखता हुआ,सिगरेट पी रहा था,रात के 11 बज चुके थे घर में एक सन्नाटा छा चुका था,अजय के जाने के बाद से ही ये माहौल था,उसे अब पता था की अजय कही नही गया है लेकिन फिर भी वो ,सोनल और निधि अपने को थोड़ा दुखी ही दिखाते थे,..

वो बड़े दिनों से ही परेशान चल रहा था आज वो बड़े दिनों के बाद शांति से सिगरेट के कस लगा रहा था,उसे किसी के आने की आवाज सुनाई दे,पायलों से ये तो समझ आ चुका था की कोई लड़की ही होगी,

“कहा कहा ढूंढ रही हु तुझे और तू यंहा पर है,ला इधर दे “सोनल को देखकर विजय ने अपना सिगरेट फिर से निकाल लिया जो की वो थोड़ा छुपा लिया था था,सोनल ने उसके हाथो से सिगरेट छीनकर कस लगाने लगी ,और दीवाल के पास खड़ी होकर देखने गांव की तरफ देखने लगी,विजय ने उसे पीछे से जकड़ लिया ,और अपना सर उसके कन्धे पर रख दिया ,

“आज बहुत दिनों के बाद चैन आया “विजय उसे जोरो से अपने शरीर से चिपकाते हुए बोला ,

“हम्म मुझे भी ,तुम्हारे लिए तो जैसे मैं गायब ही हो गई थी ,इतने दूर रहते थे तुम मुझसे “

सोनल ने भी अपने भाई के बालो में हाथ फेरा,

“क्या करू यार पहले चुनाव फिर भाई की ये खबर ,...

कुछ समझ ही नही आता था की क्या करू,अब सुकून है बस भाई इसे जल्दी से खत्म करे फिर हम पहले की तरह जिंदगी जी पाएंगे,बना किसी की फिक्र के एक दूसरे की बांहो में …”विजय बड़े ही प्यार से सोनल के गालो में हल्की सी पप्पी लेता है,

“हम्म लेकिन क्या तुम भूल गए की मेरी भी शादी हो रही है ,फिर मैं यंहा थोड़ी ना रहूंगी “सोनल की आवाज थोड़ी गंभीर थी,जिसे सुनकर अचानक ही विजय को याद आया की जिस बहन के साथ उसने बचपन बिताया था ,जिसके साथ जवानी के रंग देखे थे वो जाने वाली है,ये सोच कर ही विजय की आंखे भर आई ,वो अपने होठो को सोनल के कंधे पर रख कर सोच में डूब गया था,उसके आंखों से एक बून्द टपककर सोनल के कंधों में गिरा जिसका गिला अहसास सोनल को उसके मनोदशा के बारे में सचेत कर रहा था,वो पलटी और विजय की आंखों में देखने की कोशिस करने लगी वही विजय उससे आंखे बचा रहा था,

“इधर देख “सोनल ने विजय के चहरे को उठाया और उसकी आंखों में देखा ,

“ओह मेरा शैतान सा बहादुर भाई आज रो रहा है,”सोनल के चहरे में हल्की मुस्कुराहट थी जो अपने भाई के प्यार को देखकर आयी थी,

“मैं कहा रो रहा हु ,वो बस आंखों में थोड़ा कचरा चला गया “विजय का स्वर भरा हुआ था लेकिन उसने बहुत कोशिस की कि वो ठिक से बोल पाए ,

“अच्छा”सोनल की मुस्कान थोड़ी और बढ़ गई और वो उसके सीने से लागकर उसके आंखों से बहते हुए पानी को अपने होठो में समा लिया ,वो विजय के गालो को प्यार से सहलाने लगी ,विजय का हाथ भी अब उसकी कमर को थाम चुका था,वो और नजदीक आयी ,अब उसका चहरा विजय के चहरे के पास ही था,वो हल्की सी फूक विजय के आंखों में मारी ,जिससे विजय के चहरे में भी एक मुस्कान आ गई ,

“शैतान कही की “विजय ने हल्के से कहा,

“अब ये शैतानियां अपने पति को दिखाना वही सम्हालेगा तुझे “विजय थोड़ी हँसने की कोसिस करने लगा लेकिन उसका गला अब भी भरा हुआ था,

“भाई रो ले ,मैं जानती हु तुझे रोना आ रहा है”

“मुझे क्यो रोना आएगा “विजय लगभग रोते हुए बोला ,जिससे सोनल थोड़ी हँस पड़ी वो जानती थी की विजय उसे कितना प्यार करता है और उसके जाने की बात सुनकर वो कितना भावुक हो गया है,

“अच्छा तो जब मैं शादी कर के चली जाऊंगी तो मुझे याद करेगा ना “सोनल ने उसके गालो को सहलाते हुए कहा,

“चुप कर अब “विजय का बांध टूट पड़ा वो सोनल को कस कर जकड़े हुए रोने लगा,सोनल के चहरे में एक मुस्कुराहट थी लेकिन उसकी आंखे गीली थी ,वो विजय के बालो को सहलाये जा रही थी ,और विजय इस लंबे चौड़े खतरनाक आदमी को देखकर कोई कैसे कह सकता था की वो अपनी बहन की बांहो में किसी बच्चों की तरह रो रहा होगा,

“मेरा प्यारा भाई चुप हो जा “

सोनल उसे बच्चों जैसे ही पुचकारने लगी ..

“अच्छा पहले रुलाती है फिर चुप करा रही है,कामिनी तू तो पति के साथ जाकर खुस हो जाएगी और कभी सोचा है की तेरा भाई तेरे बिना कितना अकेला हो जाएगा “वो सोनल को और भी कस लिया ,सोनल को इससे थोड़ा दर्द होने लगा लेकिन इस प्यार के सामने उस दर्द की क्या औकात थी,उसने भी अपने बांहो की पकड़ को और मजबूत किया और जंहा उसके होठ पहुचे वही को चूमने लगी ,विजय थोड़ा हटा और सोनल के चहरे को पकड़कर उसे चूमने लगा,उसके गीले होठो के कारण सोनल का पूरा चहरा लार से गीला हो रहा था लेकिन उसने विजय को नही रोका ,उसके चहरे में मुस्कान थी जो अपने भाई की इस बेताबी की वजह से थी…….

जब वो अलग हुए तो विजय थोड़ा गंभीर हो गया,

“क्या हुआ फिर के मुह लटका लिया तूने “

सोनल ने बड़े ही प्यार से विजय के बालो में हाथ फेरा,

“अब तू नितिन की अमानत है,तुझे खुलकर प्यार नही कर सकता “

सोनल विजय की बात का मतलब समझ गई थी ,वो हल्के से हँसी ,

“अच्छा खुलकर या खोलकर ? साले सब समझ रही हु तू क्या बोल रहा है,और किसने कहा की मैं किसी की अमानत हो गई हु,मैं नितिन से प्यार करती हु और उससे मेरी शादी होने वाली है इसका मतलाब क्या है,की मैं तुझसे दूर हो जाऊंगी,”

विजय सोनल के चहरे को देख रहा था जो की इस अंधेरे में भी खिला हुआ मालूम हो रहा था,

“लेकिन ..”

“क्या लेकिन “सोनल ने उसका हाथ पकड़ कर अपने कमर में ठिका दिया,और धीरे से बोली

“जब तक मैं हु तब तक मेरे भाइयो का मुझपर पूरा हक है,.अगर मैं इस दुनिया में ना रही तो बात और है”

विजय ने उसके होठो में उंगली रख दी

“पागल हो गई है क्या ये क्या बोल रही है,”

“अगर जैसा निधि के साथ हुआ अगर मेरे साथ हो जाता तो ,...

और अगर भैया की जगह कोई और होता तो “सोनल की आंखों में एक अनजाना सा डर दिख रहा था,

“अब वो नही बच पायेगा ,भैया को पता है की वो कौन है इसका मतलाब ये है की उसपर 24 घंटे नजर रखी जा रही होगी,अब हमे चिंता की कोई आवश्यकता नही है”

“फिर भी “

सोनल ने हल्के मूड में कहा ,

“मैं उसकी माँ चोद देता “विजय गुस्से में बोला

वही सोनल जोरो से हँसी ,

“तुझे चोदने के अलावा आता ही क्या है साले “

सोनल की हँसी और उसके बात करने के बिंदास अन्दाज ने विजय के चहरे को खिला दिया था,वो अपनी सोनल को ऐसे ही देखना चाहता था ,उसने सोनल के कमर को जोरो से भिचा ,सोनल के मुख से एक आह निकल गई,

वो आकर सीधे विजय के सीने से जा लगी ,विजय उसकी आंखों में देखने लगा और उसके हाथ उसके पीठ पर चलने लगे,सोनल ने अपना सर विजय के कंधे में रख दिया ,

विजय एक गहरी सांस लेकर आसमान की ओर देखता है,इस प्यार भरे मौसम में उसकी जान उसके बांहो में थी इससे ज्यादा उसे क्या चाहिए था ,वो भावनाओ से भर गया था और उसने सोनल के चहरे को उठाकर उसके होठो में अपने होठो को टिका कर उसके होठो के रस को चूसने लगा,जिस्म का मिलान में जब हवस गायब हो जाय तो वो प्यार बन जाता है कुछ ऐसा ही इनके साथ हो रहा था,

दोनो के ही आंखों में प्यार के मोती थे और होठो में एक दूजे के होठ,वो एक दूजे के बालो में अपनी उंगलिया घुमा रहे थे और उनकी सांसे एक दूजे की सांसो से टकरा रही थी ,दोनो के नथुने से आती गर्म हवा दोनो के चहरे में पड़ती हुई मुलायम अहसास दे रही थी ,जब दोनो ही अलग हुए तो दोनो के चहरे में मुस्कान और आंखों में आंसू थे,

वो फिर से होठो के मिलान में व्यस्त हो चुके थे,विजय का हाथ अब सोनल के भरे हुए नितम्भो तक को सहला रहा था ,जिससे विजय के लिंग में असर होने लगा,जब वो अकड़ कर सोनल के योनि के द्वार पर टकराने लगा तो अचानक ही विजय ने सोनल को झटके से अलग किया ,सोनल अब भी मुस्कुरा रही थी,

“अब क्या हुआ तुझे “

“अब नही हो पायेगा यार ,पता नही साला ये क्यो ऐसे तन जाता है बार बार “विजय को अपने ही लिंग पर आज गुस्सा आ रहा था,लेकिन उसकी इस बात से सोनल जोरो से हँसने लगी,

“तुझे कितने दिन हो गए सेक्स किये हुए “

उसकी बात से विजय थोडा चौका,लगता था की जमाना बीत चुका है,

“याद नही यार,बहुत दिन हो गए “

“अरे पगले ,जो आदमी एक भी दिन लड़की के बिना नही रहता था वो इतने दिनों से खाली है तो उसका लिंग तो अकडेगा ही ना ,और तेरी सभी छमिया लोग कहा मर गई आजकल “

“सभी को छोड़ दिया पता नही मन ही नही होता कुछ करने का”

सोनल अपने भाई के चहरे पर प्यार से हाथ घुमाने लगी ,

“तू जब ऐसा बोलता है तो मुझे तेरी चिंता हो जाती है,बोल नही करू क्या शादी…तेरे साथ रहूंगी जिंदगी भर “

सोनल की बात से विजय को उसके ऊपर बहुत प्यार आता है और वो उसके चहरे को पकड़ कर एक जोर की पप्पी उसके गालो में दे

देता है,

“पगली कही की ,अब वो बात नही रह गई तेरे भाई में शायद मैं अब बड़ा हो गया हु “

“बड़ा या बुड्डा “सोनल फिर से खिलखिलाई

“क्या पता मेरी जान ,चल आज मेरे साथ सो ,अगर मन किया और कुछ हो गया तो बताना की बड़ा हुआ हु या बुड्डा “विजय ने शरारती अंदाज में कहा

“अरे मेरी जान तू कभी बुड्डा हो सकता है क्या,बस अब तू वो बच्चा नही रहा जिसे सिर्फ सेक्स चाहिए था ,नही तो अभी तक मुझे बचाता क्या ,बड़ा समझदार हो गया है मेरा भाई,लेकिन मुझे वो नासमझ वाला ही पसंद है “दोनो ही हँस पड़े और विजय के कमरे में चले गए

अध्याय 79

रात की रंगीनियां थी और हल्की सी सर्दी,बिस्तर में विजय लेटा हुआ बस सोनल को निहार रहा था,आंखों में अपने बहन का वो मचलता रूप था जिसे देखकर शायद मर्दो की जांघो के बीच कुछ कुछ होने लगे, लेकिन विजय के लिए उसकी बहन बस हवस मिटाने का कोई जरिया नही थी,वो उसकी परी थी,वो उसे प्यार भरी निगाहों से निहार रहा था ,उसकी आंखों में सोनल की उज्वल छटा थी,उसका वो रोशन चहरा ,चांद सा चमकदार लेकिन बिना किसी दाग के,वो मुस्कुराती हुई विजय के पास आई ,अभी अभी वो नहा कर निकली थी,सिर्फ अपने भाई के लिए ,.......सिर्फ अपने प्यारे भाई के लिए उसने वो महंगी सुगंध अपने शरीर में लगाई थी,सिर्फ अपने भाई के लिए उसने वो झीना सा कपड़ा पहना था जिसमे उसके जिस्म का हर भराव नजर आता,सिर्फ अपने भाई के लिए वो अपने शादी से पहले उसके साथ सोने को राजी थी जबकि वो जानती थी की कुछ भी हो सकता है,वो जानती थी की अगर विजय आगे बढेगा तो वो रोक नही पाएगी,वो क्या चाहती थी….?शायद कुछ भी नही ,...विजय क्या चाहता था..???

शायद कुछ भी नही …

बस दोनो को ही एक दूजे का साथ चाहिए था,एक दूजे का अहसास जो जिस्म से होकर मन की गहराइयों में चली जाती थी,एक एक छुवन जो ऊपरी त्वचा के गहरे पहुचता था…….

उसकी मुस्कुराहट ही तो थी जो विजय के दिल का सुकून थी ,उस मर्द कहलाने वाले विजय के आंखों में ना जाने कब आंसू की बूंदे छलकने लगी थी,सोनल के लिए ना जाने आज उसे ऐसा क्या प्यार आ रहा था,वो बार बार उसके जुदा होने के अहसास से भर जाता था,..

सोनल भी जानती थी की उसका भाई उसे कितना प्यार करता है,वो उसके लिए कुछ भी कर सकता था,कुछ ही दिनों में किसी और की हो जाने का अहसास जंहा सोनल के दिल में एक झुरझुरी सी पैदा करता था वही अपने भाई से जुदाई की बात सोच कर भी वो सहम उठती थी,लेकिन वो अपने को सम्हाल लेती ,क्योकि उसे विजय को सम्हालना था,वो मचलती हुई विजय के पास आयी और बिस्तर में पसरते हुए विजय की गोद में जा गिरी…

विजय के सामने अब उसका चहरा था,रात में भी सोनल अपने होठो में लाली लगाना नही भूली थी ,वो भी उसके भाई के लिए ही तो था,विजय उसके बालो में हाथ डालकर उसे अपनी ओर खिंचा लेकिन सोनल के उपर उठाने से विजय का नीचे होना ज्यादा सहूलियत भरा था,सोनल थोड़ी आकाश में उठी तो विजय भी थोड़ा नीचे झुका,दोनो के ही होठ मिले,रुकने का ठहराने का कोई भी इरादा किसी का भी नही था,होठो को होठो में ही मिलाए हुए दोनो ही बिस्तर में लेट चुके थे,विजय सोनल के बाजू में आकर लेटा था,होठ मिले हुए ही थे और सांसे भी मिलने लगी थी,आंखों में आंसू की थोड़ी थोड़ी धारा समय समय पर बह जाती थी…

“सोनल आई लव यू “

विजय ने उसके होठो को छोड़ते हुए कहा,

“ये कोई बोलने की बात है क्या भाई “सोनल हल्के से मुस्कुरा दी ,दोनो फिर से प्यार के सागर में गोते खाने लगे थे,विजय का शरीर अब सोनल और अपने कपड़ो की दूरी बर्दस्त नही कर पा रहा था ,धीरे धीरे ही सही लेकिन एक एक कपड़े जिस्म से उतरते जा रहे थे,कुछ ही देर में दोनो के बदन के बीच कोई भी दीवार नही बची थी,विजय के लिंग ने सोनल की योनि को छूना शुरू कर दिया था,अपने भाई की बेताबी को सोनल बखूबी समझती थी,लेकिन कुछ करना भी तो पाप होता,वो दोनो कुछ भी नही करना चाहते थे,वो बस होने देना चाहते थे,किसी ने इतनी जहमत नही की कि लिंग को उसकी मंजिल तक पहुचाये,सोनल की योनि में उगे हुए हल्के हल्के बाल जब जब विजय के लिंग से टकरा कर रगड़ खाते दोनो का मुह खुल जाता था,योनि ने अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया था,वही विजय का मुह सोनल के भरे है स्तनों का मसाज अपने होठो से कर रहा था,निप्पलों में जैसे कोई रस भरा हुआ वो विजय उसे चूसें जा रहा है,सोनल के हाथ विजय के सर को सहला रहे थे ,वो कभी विजय के ऊपर आती तो कभी नीचे इसी गहमा गहमी में दोनो के शरीर की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,जंहा विजय अपने कमर को हिलाने लगा था वही सोनल भी अपने कमर को उचकाए जा रही थी लेकिन लिंग था की अंदर जाने का नाम ही नही लेता,वो बस सोनल के योनि के से रगड़ खाये जा रहा था,विजय का कमर थोड़ा ऊपर हुआ ,सीधे तने लिंग ने योनि की गहराइयों के ऊपर की दीवार पर थोड़ी जगह बनाई,इस बार योनि इतनी गीली थी की लिंग को भिगोने लगी विजय किसी माहिर खिलाड़ी की तरह बेलेंस बनाये हुए कमर को नीचे करता गया,सोनल ने भी अपने शरीर को सीधा ही रखा था ताकि लिंग की दिशा भटक ना जाए,थोड़ा

अंदर जाने पर ही सोनल ने विजय को मजबूती से पकड़ लिया उसके दोनो हाथ विजय के नितम्भो पर टिककर उसे जोर दे रहे थे,और विजय बड़े ही एकाग्रता से अपने लिंग को बिना छुवे ही सोनल की योनि में प्रवेस करा रहा था,गीलेपन के कारण विजय का लिंग जल्दी ही सोनल की गहराइयों में समा गया ,

“आह भाई “सोनल के मुझ से मादकता भरी सिसकी निकली ,

“ओह ओह आह आह भाई ओह”उसके हाथ अब विजय के सर में तो कभी उसकी कमर में घूम रहे थे विजय ने अपने होठो को सोनल के होठो में डाल दिया और उसकी कमर एक निश्चित लय में सोनल के जांघो के बीच चलने लगी,दोनो ही अपने होश में नही रहे थे,सिसकिया और आनन्द के अतिरेक से निकलने वाली किलकारियों से कमरा गूंजने लगा था ………

कमरे के बाहर खड़ी दो काने इन आवाजो को सुन रही थी और अपने प्यार की याद में गुम थी उसकी आंखों में आंसू था,वो निधि थी,..सोनल और विजय की आवाजो ने उसके मन में एक बेचैनी सी जगा दी थी ,वो भी अपने भइया से वैसा ही प्यार करना चाहती थी जैसा सोनल कर रही थी लेकिन ,,,,,,,,,,,

लेकिन वक्त ने दोनो को बहुत दूर कर दिया था...

अध्याय 80

सोनल की शादी का दिन था,कड़ी सुरक्षा के बीच शादी होनी थी,कोई भी मेहमान बिना चेकिंग के अंदर नही आ रहा था,पास के गांव वाले बाबा (जी की अजय ही था) को विशेष निमंत्रण दिया गया था,

शादी अपने सबाब में चल रही थी वही अजय,डॉ,जूही और विकास अपने ही कामो में व्यस्त थे…...अजय ने आज ही का दिन मुकर्रर किया था सभी घर वालो के सामने उसका पर्दाफाश करने के लिए ,बस वो एक गलती करता और वो उसे पकड़ लेते उन्हें मालूम चल गया था की आज पुनिया क्या करने वाला है ,जग्गू उनके कब्जे में था,उसने ही बताया था की पुनिया आज खुसबू को किडनैप करने वाला है…….

शादी अपने सबाब में पहुच गई थी,बाबा बना हुआ अजय खुसबू के पास ही बैठा था,वो उसकी सुंदरता को घूर रहा था जो की दुख में मिलकर कम हो गई थी…

आखिर वो उठी और अंदर चले गई ,अजय उसका पीछा नही कर सकता था,जूही उसके पीछे हो ली और हुआ वही जिसतरह किशन की शादी में निधि को किडनैप करने की कोशिस की गई थी वैसे ही अब खुसबू को किडनैप करने की कोशिस की गई,एक महिला ने उसके मुह में एक रुमाल रखने की कोशिस की लेकिन …..

जूही झपट कर उस महिला को दबोच लिया ,और उसके मुह में ही रुमाल रख दिया वो महिला धीरे धीरे शांत हो गई,वो लोग अभी लेडिस टॉयलेट में थे,खुसबू हैरान थी जूही ने उसे शांत रहने को कहा और विकास और डॉ को खबर दे दी,दोनो ही वँहा पहुचे ,जूही ने खुसबू से नाटक करने को कहा और वो बेहोशी का नाटक करने लगी,जूही महिला की साड़ी को पहन कर उसे घसीटते हुए बाहर ले गई तभी एक आदमी वँहा पहुच गया ,

“लाओ मा जी मैं इसे ले जाता हु,”

जूही का चहरा नही दिखने की वजह से उसने जूही को ही वो महिला समझ लिया था,डॉ और विकास ने उसके सर पर बंदूक रख दिया ,

“अब तुम्हारा खेल खत्म “और बंदूक की चोट से उसे बेहोश कर दिया…

इधर शादी खत्म हो चुकी थी,रात काफी हो चुकी थी और सोनल की बिदाई का वक्त आ चुका था,थोड़े देर बाद ही सोनल की बिदाई थी ,की डॉ ने घर के सभी सदस्यों को एक जगह इकट्ठा होने का आग्रह किया साथ ही पुलिस के जवानों की भी भीड़ वँहा लग गई थी,सभी लोग आश्चर्य से देख रहे थे की आखिर माजरा क्या है….

“जिसके लिए अजय ने अपने जीवन के कीमती पलो का बलिदान किया ,जो हमारे परिवार का सबसे बड़ा दुश्मन था वो आज पकड़ा जा चुका है,और हम उसे आप लोगो के सामने ला रहे है,”डॉ माइक में बोल रहा था सभी लो एक हाल में बैठे हुए सभी आश्चर्य से भर गए थे,डॉ ने बाबा की ओर इशारा किया ,सभी बाबा को देखने लगे वो स्टेज में आया और अपनी दाढ़ी और बाकी का मेकअप निकाल दिया ,निधि और सोनल खुद खुद कर तालिया बजा रहे थे वही बाकियों की हालत खराब हो गई थी,खुसबू रोये जा रही थी वही हाल बाकियों का भी था,सभी अजय को देखकर ना सिर्फ हैरत में पड़ गए थे बल्कि बहुत ही भावुक भी हो चुके थे लेकिन अजय बस मुस्कुराता रहा ,

“मैं पहले तो आप सभी से माफी चाहूंगा की मैंने आप लोगो को इतना दुख दिया,चाचा जी ,खुसबू “बाली की आंखे अपने भतीजे को जिंदा देखकर रुकने का नाम ही नही ले रही थी,वही खुसबू बैठ गई थी वो खड़े होने की हिम्मत भी नही कर पा रही थी,

“ये रुप और मारने का नाटक मुझे करना पड़ा क्योकि मैं जानता था की कोई एक नही बल्कि कई लोग है जो हमारे परिवार के दुश्मन है….मैं सभी को ढूंढना चाहता था और ढूंढ लिया ये एक बड़ी पुरानी जिम्मेदारी मेरे पूर्वजो ने मेरे ऊपर छोड़ी थी की मैं एक राजा का धर्म निभाऊ और अपने लोगो की अपने परिवार की ,और समाज के लोगो की रक्षा करू,आज वो जिम्मेदारी भी पूरी हुई……..

इस मिशन में मैं जितना अंदर गया मुझे पता चला की ये लोग और कोई नही हमारे ही सताए हुए लोग है,इनसे मेरी पूरी सहानभूति है इसलिए मैं इन्हें कोई भी कठोर दंड नही देना चाहता मैं चाहता हु की ये लोग खुसी से रहे,और कानून इन्हें जो सजा देनी है वही दे,लेकिन मैं इन्हें माफ कर देना चाहता हु……..

मुझे इस खेल के मास्टर माइंड का तो पता था लेकिन ये नही की हमारे घर में इनका साथ कौन कौन दे रहा है,इसलिए मैंने आज का भी इंतजार करने की सोची ,आज इन्होंने खुसबू को किडनैप करने का प्लान बनाया था और यही उन्होंने गलती कर दी और पकड़े गए ,,,,,

तो ये वो लोग है जिन्होंने हमारे घर में रहकर हमशे गद्दारी की ….”

पोलिस के आदमी एक महिला और एक पुरुष को वँहा लाते है जिन्हें देखकर घर के सभी सदस्यों की आंखे फटी की फटी रह गई,ये रेणुका की मा,और रेणुका का पति बनवारी था…..

“नही अजय भइया आपसे कोई गलतफहमी हुई है मेरी माँ और ये ऐसा नही कर सकते ,”रेणुका रो पड़ी वो आगे बड़ी लेकिन विजय ने उसके कांधे पर अपना हाथ रखकर उसे सांत्वना दी ,

“मुझे माफ कर दे मेरी बहन लेकिन ये सच है ,और इन्होंने कुछ भी गलत नही किया ,तुम्हारी मा ने जो भी किया उसके पीछे हमारे परिवार की गलती थी,तुम जो एक नॉकर की बेटी की तरह अपनी जिंदगी गुजर रही हो तुम असल में ठाकुरो का खून हो,तुम मेरी बहन हो बाली चाचा का खून ,इनके गलती की वजह से तुम्हे ऐसी जिंदगी बितानी पड़ी...माफी तो हमे तुमसे मांगनी चाहिए बहन माफी तो हमे चाची से मांगनी चाहिए …”

पर कमरा चुप हो गया था,बाली को समझ ही नही आ रहा था की वो कैसे अपने चहरे को छिपाए ,वो वँहा से जाने लगा,”रुकिए चाचा जी ….अभी नही इस खेल का असली मास्टर माइंड तो अभी हमने पेश ही नही किया है ...लाओ उसे “

कमरे में पुनिया को लाया जाता है सभी फिर से चौक जाते है लेकिन इस बार उतने नही

“किशोरीलाल “बाली के मुह से निकल जाता है,ये किशोरीलाल था बनवारी का पिता और रेणुका का ससुर…

वो खा जाने वाली निगहो से बाली और तिवारियो को देखने लगा ,किसी को भी उसपर अभी तक कोई भी शक नही हुआ था,पास ही खड़ा सुरेश भी खुद सहम रहा था कही उसका राज भी ना खुल जाए लेकिन उसके बारे में किसी ने कुछ भी नही कहा ,...

“आखिर इसने ऐसा क्यो किया “दूल्हा बने हुए नितिन ने प्रश्न किया ,अजय सभी बाते बताता गया,महेंद्र तिवारी और बाली का सर झुक गया था,साथ ही पूरा तिवारी और ठाकुर परिवार अपने बड़ो के किये पर शर्मिदा था,बाली और महेंद्र आकर पुनिया उर्फ किशोरीलाल के कदम में गिर गये ,

“मुझे माफ कर दो पुनिये मुझे माफ कर दो ,बनवारी मुझे माफ कर दो बेटा,जवानी के जोश में हमसे बहुत से पाप हो गए ,अब इसका पछतावा करने से कोई भी लाभ नही लेकिन ,,,मैं जानता हु की हमारे पाप माफी के काबिल नही है लेकिन फिर भी मुझे मांफ कर दो ….

”

बाली और महेंद्र के आंखों में सच में प्रायश्चित के आंसू थे,बिना कुछ बोले ही पुनिये ने अजय की ओर देखा ,

“अगर मैं पूरे तिवारियो और ठाकुरो को भी मार देता तो भी शायद मेरी आत्मा को वो सकून नही मिलता जो की आज मिला है,मैं इनको इससे ज्यादा क्या इनके किये की सजा दूंगा की इन्होंने पूरी दुनिया के सामने ही मुझसे माफी मांग ली,अपने सभी सगे संबंधियों के सामने ….मैं तो बदले की आग में ये भी भूल गया था की जिन्हें मैं सजा देना चाहता था उन सभी की तो कोई गलती ही नही है,मैं तो मासूम से बच्चों को सजा देना चाहता था...तुम जीते अजय क्योकि तुम सच के साथ थे ,मेरा बदला सही होकर भी मैं हार गया क्योकि मैंने गलत तरीके अपनाए ...भगवान तुम्हे खुस रखे तुम्हारे परिवार को खुस रखे मेरा बदला तो पूरा हुआ और तुम्हे जो सजा देनी है तुम दे सकते हो…”

पुनिया की बातो से सभी के आंखों में आंसू आ गए थे,

“मैं कौन होता हु सजा देने वाला,अपने जो भोगा है उसके सामने और क्या सजा दी जा सकती है,मैं आपको कानून के हवाले कर रहा हु,वो जो भी फैसला करे वो मंजूर है,और आज से रेणुका इस घर की बेटी बनकर इस घर में रहेगी और बनवारी इस घर का दामाद,...पुनिये और रेणुका की माँ ने आंखों ही आंखों में अजय का आभार व्यक्त किया,पोलिस केवल पुनिया को ही ले गई ,रेणुका की माँ और बनवारी को ले जाने से अजय ने ही रोक दिया ...वो उनसे मांफी मांग कर अपने ही घर में रहने का निवेदन करने लगा लेकिन दोनो ही अब वँहा रहना सही नही समझ कर वँहा से निकल गए,साथ ही रेणुका भी चली गई…..अजय ने आगे उनको बहुत आर्थीक सहायता की जिससे बनवारी एक अच्छा बिजनेसमैन बनकर उभरा ,पुनिया और जग्गू ने अपने सभी गुनाहों को कुबूल लिया जिसमे कई कत्ल बलात्कार और किडनैपिंग जैसे जुर्म थे (जैसा की पुनिया नक्सलियों से भी मिला हुआ था और पहले से ही बहुत से अपराध कर रहा था)पुनिया को 14 सालो की और जग्गू को 7 साल की सजा हुई थी…………

अजय अब अपनी सभी जिम्मेदारी से मुक्क्त था,उसने वो रास्ता अपनाया था जो कभी किसी ने नही अपनाया ,प्रेम का रास्ता ,वो अपने दुसमनो को भी प्रेम से ही जीत लेता,इसी तहकीकात में उसे आरती और सुरेश के बारे में भी पता चला था,उसने स्टेज में तो कुछ नही कहा लेकिन बाद में सबके साथ सलाह कर उसने आरती की शादी सुरेश से करा दी,जो इतने सालो में नई हो पाया जिसके लिए ना जाने कितनी जाने गई वो अजय ने कर दिखाया था……..

समाप्त​

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