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खूबसूरत डकैत (Completed)

Story Hindi 136 pages 6 months ago

खूबसूरत डकैत

1
पुलिस थाने में सुबह से हलचल थी ,बड़े बड़े पुलिस के अधिकारी सुबह से वहां जमावड़ा लगाए बैठे थे ,साथ ही थे बहुत से प्रेस वाले ,
अभी भी इंस्पेक्टर प्रभात ठाकुर का सर पुलिस स्टेशन के गेट पर लटक रहा था ,वँहा का स्टाफ ख़ौफ़ज़दा दिखाई पड़ रहा था ,जिला S.P. बाकी के अधिकारियों के साथ विचार विमर्श में लगे हुए थे …
तभी गाड़ियों का काफिला वँहा आकर रुक गया
कई गनमैन निकले और सभी अधकारी उठकर खड़े हो गए ,सामने से आ रहे थे केशरगड के जमीदार और विधायक साहब ठाकुर प्राण सिंह …
चहरे के रौब से अच्छे अच्छे थर्रा जाए लेकिन आज उनके ही आदमी को इस बेरहमी से मार दिया गया था ,
“आइए ठाकुर साहब “
जिला S.P. खड़ा हो गया था
“हम यंहा बैठने नही आये है एस .पी. कब पकड़ोगे तुम मोंगरा देवी को “
मॉंगरा का नाम सुनकर ही सभी की बोलती बंद हो गई ..
“हम पूरी कोशिस कर रहे है ठाकुर साहब “
“अरे मा चुदाएं तुम्हारी कोशिशें तुम लोगो से कुछ भी नही होगा”
ठाकुर के मुह से गली सुनकर एस.पी. भी भड़क गया
“हमे गली देने से क्या होगा आपके पास भी तो बाहु बल है बहुत बाहुबली बने फिरते हो आप ही क्यो नही पकड़ लेते उसे ,प्रभात आपका ही तो आदमी था “
ठाकुर को मानो झटका लगा ,जैसे उसे किसी ने दर्पण दिखा दिया था ,वो सकपकाया और चिढ़ते हुए वँहा से चला गया …
इस सब घटनाक्रम को वँहा पदस्थ नया इंस्पेक्टर अजय देख रहा था ,उसे आज ही बुलाया गया था ताकि तुरंत ही जॉइन कर ले ,बेचारा अभी अभी तो सब इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग से इंपेक्टर बना था नई नई उम्र थी और ऐसी जगह ट्रांसफर कर दिया गया जंहा कोई भी नही आना चाहता था …
अजय ने डरते हुए वँहा के हेड कांस्टेबल राधे तिवारी से कहा
“पंडित जी ये मोंगरा कौन है “
“मत पूछिये इंस्पेक्टर साहब नाक में दम कर के रखा है इस लड़की ने ,कभी इसी गांव की एक नाजुक सी भोली भली परी हुआ करती थी,लेकिन हालात ने ऐसी पलटी खाई की आज लोग उसे खूबसूरत डकैत के नाम से जानते है ..

”
अजय के मुह से आश्चर्य से निकाला
“खूबसूरत डकैत ???”

2
रात के अंधियारे में झींगुरों की आवाजे फैल रही थी
छोटी छोटी पहाड़ियों के बीच कुछ लोग हथियारों के साथ खड़े या बैठे हुए थे एक छोटी सी गुफा नुमा जगह में एक बहुत ही हसीन लेकिन भरे हुए बदन की औरत लेटी हुई थी ,उसके पैरो के पास ही एक लंबा चौड़ा मर्द बैठा हुआ था जो उस लड़की के पैरो को दबा रहा था,कमरे में मशालों से थोड़ा उजाला था ,
उस आदमी की छाती चौड़ी और बालो से भारी हुई थी उसका बदन नंगा था और मशाल की रौशनी में चमक रहा था,वो कोई काम का देवता ही प्रतीत हो रहा था वही वो महिला भी किसी काम की प्रतिमा सी दिखाई दे रही थी ,बिल्कुल मांसल दार अंग जो की अपने गोर रंग और तेल के कारण चमक रहा था,हर अंगों में संतुलित भराव था,लेकिन कही भी मांस या चर्बी की अधिकता नही थी ,वो मर्द भी उसे ललचाई निगाहों से देख रहा था लेकिन किसी सेवक की तरह ही पेश आ रहा था,लड़की की आंखे बंद थी और उसका लहंगा उसके घुटने तक उठा हुआ था वही उसके ब्लाउज मे कोई भी चुन्नी नही थी जिससे उसके उन्नत उजोरो के बीच की खाई आसानी से दिख पा रही थी ,
वो मर्द उसके घुटनो तक ही तेल के साथ मालिस कर रहा था लेकिन लड़की के चहरे पर कोई भाव नही था जैसे वो कही खोई हुई हो ,आंखे तो बंद थी लेकिन चहरे पर एक चिंता की लकीर भी थी …
“सरदार आज कुछ चिंता में लग रही हो ,लगता है मेरे हाथो ने भी तुमपर कोई असर नही किया “
मॉंगरा के चहरे में मुस्कान आ जाती है ..

“हा रे बलवीर आज प्रभात सिंह को मारने के बाद भी मुझे चैन नही मिला ,पता नही ये चैन कब पड़ेगा …”
बलवीर जैसे धधक उठा था
“जब आप उस जमीदार के खून से नहाओगी “
मोंगरा उठ कर उसके सर को बड़े ही प्यार से सहलाने लगी
“सच कहा तूने “
वो उस लंबे चौड़े दानव की देह वाले मर्द को किसी बच्चे की तरह पुचकार रही थी ,और वो मर्द भी जैसे अपने मां के सामने बैठा हो ,वो किसी देवी की तरह उसे देख रहा था ,उसके आंखों में प्रतिशोध की ज्वाला थी लेकिन मोंगरा की आंखों में उसके लिए ममतामई प्रेम ही दिख रहा था ,चाहे वो कितनी भी क्रूर हो ,चाहे सरकार भी उससे ख़ौफ़ खाती हो लेकिन अपने गिरोह के लिए वो 22-23 साल की लड़की किसी देवी से कम नही थी और वो भी अपने गांव और गिरोह के सदस्यों को अपने बच्चों की तरह प्यार करती थी ,यंहा तक की 35 साल का भरा पूरा मर्द बलवीर भी उसके आगे उसका बच्चा लग रहा था …
वो उसे अपने सीने से लगा लेती है ,जैसे बलवीर उसकी बड़ी बड़ी छातियों में धंस जाता है ,वो अपने ब्लाउज के आगे के बटन खोलने लगती है और मानो दो फुटबाल उछाल कर बाहर आ गए हो ,जैसे उन्हें जबरदस्ती ही कस कर बांध दिया गया था ,
बलवीर जैसे सदियों से प्यासा था ,वो उसके निप्पल को चूसने लगा,लेकिन मोंगरा के चहरे पर वासना की लकीर भी नही खिंची वो बलवीर को अपने बच्चे की तरह अपने सीने से और भी जोर से चीपका कर उसे अपने स्तनों का रस पिलाने लगी ,उसके बाल बलवीर का चहरा ढंके हुए थे और उसके हाथ बलवीर के सर को सहलाते हुए उसे अपना प्यार दे रहे थे,बलवीर किसी भूखे बच्चे की तरह मोंगरा की भरी छातियों को चूस रहा था ,उसके आंखों में आंसू था ,और मोंगरा की भी ममता जैसे छलक रही हो वो भी उस मजे में आंसू बहा रही थी…
ना जाने ये कैसा अजीब सा रिश्ता था इन दोनो के बीच का…
बहुत देर तक वो बस ऐसे ही उसकी छातियों को चूसता रहा…
जब दोनो ही थक गए तो वो अलग हुआ और कुछ सोचता हुआ बोला…
“सरदार एक नया इंस्पेक्टर आया है प्रभात की जगह पर “
“तो क्यो मुश्किल है क्या ???”
“हा है तो “
“क्या “
“बहुत ईमानदार है “
मोंगरा जोरो से हँस पड़ी और उसके चहरे में एक गजब की आभा छा गई जिसे बलवीर देखता ही रह गया जैसे उसमे खो जाएगा
“हा ईमानदार है तब तो सच में मुश्किल है ,लेकिन देखे तो उसकी ईमानदारी कितनी है और किस चीज की है ,जो पैसे से नही बिकते वो डर के बिक सकते है ,जो डरते भी ना हो वो औरत के जिस्म के आगे बिक जाते है “
मोंगरा थोड़ी गंभीर हो चुकी थी
“सरदार जंहा तक मुझे पता चला है वो ना तो आजतक पैसे में बिका ना ही किसी से डरा इसलिए एस.पी.

ने आपको पकड़ने यंहा भेजा है ,लेकिन औरत का पता नही …”
मोंगरा के चहरे में मुस्कान आ गई
“ठीक है उसे भी आजमा लेंगे “

3
सुबह सुबह जब सूर्य भी नही निकला था ,अजय अपनी आदत के मुताबिक दौड़ाने निकल पड़ा उसे सुबह का माहौल बहुत पसंद था साथ ही उसे पसंद थी सुबह की हवा ,और पसीने में तर होता हुआ शरीर ..
अभी 4 ही बजे होंगे,जगह नई थी लेकिन सुहानी थी ,जंगलों और पहाड़ो से घिरा हुआ जगह था,दूर दूर तक कोई बस्ती नही ,वो दौड़ाता हुआ जंगल में बने पगडंडियों में आगे निकल आया था ,थककर एक जगह रुक गया जहां पानी की कलरव ध्वनि सुनाई दे रही थी ,लगा जैसे पास ही कोई झरना होगा,वो अपनी सांसों को काबू में करता हुआ था आगे जाने लगा,
उसे किसी लड़की की मधुर आवाज सुनाई देने लगी …
झाड़ियों के कारण उसे कुछ दिखाई तो नही दे रहा था लेकिन वो उस ओर बढ़ता गया,सूरज अभी अभी अपनी लालिमा फैला रहा था,उसे घर से निकले 1-1.30 घण्टे तो हो ही गए होंगे …
मौसम में ठंड अभी भी थी ,लेकिन वो पसीने से भीग चुका था ,उसे इस जंगल के सुहाने मौसम में पता ही नही लगा की वो कितना आगे आ गया है ,
सामने के दृश्य को देखकर अजय का युवा मन आनंदित हो उठा ,वो कौतूहल से सामने देखे जा रहा था ..

एक परी सी हसीन लड़की साड़ी में लिपटी हुई छोटे से झरने के पास खड़ी थी ,वो उससे अभी दूर ही थी लेकिन अजय की नजर उसपर जम गई ,
साड़ी उसके शरीर से चिपकी हुई थी और गोरा रंग खिलकर दिख रहा था.पूरी तरह भीगी हुई अपने धुन में गाने गा रही थी,वो मस्त थी और उसकी मस्ती को देखकर अजय भी मस्त हुए जा रहा था …
दूर से ही उसे लड़की के स्तनों का आभास हुआ ,उसने कोई भी अंतःवस्त्र नही पहने थे ,अजय का दिल धक कर रह गया …
लेकिन उसे अचानक ख्याल आया की वो क्या कर रहा है ,एक स्त्री के रूप से ऐसा मोहित होकर उसे इस तरह छुप कर देखना क्या सही होगा ,उसके अंदर की नैतिकता अचानक से जाग गई और वो मुडकर तुरंत ही जाने लगा…
झाड़ियों में हुए शोर से जैसे लड़की का ध्यान उधर गया ,और उसका गाना बंद हो गया ,
अजय जैसे ठिठक गया और मुड़ा..
लड़की उसे डरकर घूरे जा रही थी साथ ही उसने अपने हाथो से अपने स्तनों को भी छुपा लिया था जैसे उसे अंदेशा हो की हो ना हो वो उसे ही घूर रहा था …
ऐसे उसके जिस्म का हर अंग घूरने के लायक था,उसके पुष्ट पिछवाड़े भी निकल कर सामने आ रहे थे,और पेट में नाभि की गहराई भी खिल रही थी ,लेकिन अजय को बस उसकी आंखे दिखी ..
बड़ी बड़ी आँखे जैसे अजय को सम्मोहित ही कर जाएगी ..
और उसमे लिपटा हुआ डर देखकर अजय को अपने स्थिति का बोध हुआ ..
वो वही से चिल्लाया
“डरो नही मैं गलती से यंहा आ गया था,मुझे माफ करो “
ये बोलता हुआ अजय वँहा से चला गया लेकिन लड़की के होठो में मुकुरहट फैल गई ….

अजय को पास ही एक छोटा सा मंदिर दिखा,छोटे से चबूतरे में एक पत्थर रखा हुआ था,जिसपर लोगो ने तिलक लगा दिया था,वो जगह साफ सुथरी थी जिससे ये अनुमान लग रहा था की यंहा लोग अक्सर आते होंगे,आस पास किसी बस्ती का नामोनिशान नही था बस वो झरना था और दूर तक बस जंगल का फैलाव …
अजय पास ही एक पत्थर में जा बैठा ..
तभी उसे पायलों की आवाज सुनाई दी ,झम झम की आवज से अजय जैसे मोहित ही हो गया ,उसने देखा वही लड़की थी ,और वही साड़ी पहने आ रही थी ,वो साड़ी अब भी गीली थी थी और उसके बदन से चिपकी हुई भी थी लेकिन लड़की के चहरे में अजय को देखकर भी डर नही था बल्कि एक मुसकान थी ,उसके हाथो में एक छोटा सा पात्र था ,वो आकर पहले तो उस छोटे पत्थर पर जल चढ़ाती है ,और फिर थोड़ी देर हाथ जोड़े जैसे भाव मग्न हो जाती है …
अजय उसके उस सौदर्य को बाद देखता ही रह गया ,गोरा कसा हुआ बदन लेकिन बेहद ही मासूम सा और आकर्षक चहरा था उसका ,चहरे के नीचे ठोड़ी में गोदना था,जो की हल्के नीले रंग में कुछ बिंदियों की तरह दिख रहा था ,नाक में छोटी सी नथनी उसके सौदर्य को और भी बढ़ा रही थी ,हाथ पाव भरे हुए थे लेकिन कही से भी चर्बी की अधिकता नही थी ,लग रही थी जैसे जंगल में जंगल की देवी उतर आयी हो ,पाव में पायल था और छोटी सी एक साड़ी उसके शरीर का एक मात्रा कपड़ा था,वो भी गीला ही था और उसके शरीर से चीपक कर उसके एक एक अंग को निखार कर सामने ला रहा था …
सबसे आकर्षक थे उसकी आंखे ,तेज आंखे,बड़ी बड़ी और बिल्कुल काली पुतलियां,अजय के जेहन में अभी भी वो आंखे घूम रही थी जो उसने झरने में देखी थी …
थोड़ी देर तक लड़की यू ही बैठी रही और अजय भी फिर वो खड़ी हुई और पास पड़ी झाड़ू उठाकर उस जगह में पड़े कुछ पत्तो को झड़ने लगी …
पास से ही कुछ फूल तोड़ लायी और उस पत्थर में चढ़ा दिया ..
फिर अजय की ओर मुड़ी जो बहुत देर से युही बैठा हुआ बस उसे ही देख रहा था…
और जाकर उसके पास बैठ गई ,अजय को जैसे कोई करेंट लगा हो ,
वो हड़बड़ाया और लड़की जोरो से हँस पड़ी .उसके साफ चमकते दांतो की पंक्तियां अजय के आंखों में झूम गई …
“अब तुम मुझसे डर रहे हो ,मैं कोई बहुत थोड़ी हु “
“तुम यंहा अकेले ..इतने घने जंगल में “
“जंगल तुम्हारे लिए होगा हमारे लिए तो घर है “
लड़की ने ऐसे कहा की अजय को अपनी ही बात पर पछतावा हुआ
“ओह और ये पत्थर “
अजय ने उस उस पत्थर की ओर इशारा किया जिसे अभी अभी वो लड़की पूज रही थी
“अरे ये पत्थर नही है ये तो देवी है जंगल की देवी ,और हमारी कुल देवी “
“ओह मुझे लगा की इस जंगल की देवी तुम हो “
अजय के मुह से अनायास ही निकल पड़ा ,
“क्या क्या कहा “
“कुछ कुछ नही “
थोड़ी देर तक कोई कुछ भी नही बोल पाया
“तुम्हारा नाम क्या है ,कहा रहती हो “
“चंपा ...मैं पास के ही कबिले के सरदार की बेटी हु और तुम ...

तुम तो शहरी लगते हो यंहा क्या कर रहे हो “
“मैं इस चौकी का इंस्पेक्टर हु “
लड़की ने अजीब निगाह से उसे देखा
“ओह तुम हो नए इंस्पेक्टर ...लेकिन तुम तो पुलिस वाले नही लगते “
उसके चहरे में एक अजीब सी मुस्कान थी
“क्यो ??”
अजय को भी उसकी बात पर आश्चर्य हुआ
“क्योकि तुम इतने जवान हो और फिर भी तुमने मुझे नहाते देखकर मुह फेर लिया और यंहा के पुलिस वाले तो औरतों को देखकर लार टपकाते है ,वो पुराना इंस्पेक्टर भी वैसा ही था,सही किया मोगरा ने जो उसे मार दिया “
अजय बिल्कुल अवाक रह गया था ,वो हमेशा से शहरों में रहा था औऱ ये जगह भी उसके लिए अनजानी थी ,वो सोच रहा था की पुलिस को लेकर यंहा के लोगो का नजरिया ऐसा है …
“सभी लोग एक जैसे थोड़ी होते है “
उसने अपने बचाव में कहा
“हा लगता तो ऐसा ही है”
उस नाजुक बाला ने अपने बड़े बड़े नयनो में ऐसे चंचलता से नचाया की उसकी निगाहे सीधे अजय के दिल को छेद कर गई ,और वो उठकर भागने लगी अजय बस उसके रूप में खोया हुआ हुआ ठगा सा बैठा रह गया ...

4
‘कितने आदमी थे रे कालिया ‘
‘सरदार 2’
‘और तुम 3 फिर भी खाली हाथ आ गए ,क्या सोचा था सरदार खुस होगा शाबासी देगा …’
एक ब्लैक एंड वाइट tv में शोले का ये डायलॉग सुनकर मोंगरा बच्चों की तरफ खुस हो रही थी ,और अचानक उसने tv बंद कर दिया और खुद खड़ी हो गई …
“तो कितने आदमी थे रे कालिया “
सभी लोग अपनी सडी हुई दांत निकाल कर हँसने लगे
“अरे सरदार मेरा नाम कालिया नही लखन है “
सामने खड़ा हुआ एक 50 साल का पतला दुबला सा आदमी हँस पड़ा ,
“हमने कह दिया ना की तू कालिया तो तू ही कालिया है बताओ कितने आदमी थे “
“सरदार दो ही थे और वो आपके सामने है “
लखन ने दांत दिखाते हुए कहा ,मॉंगरा अभी आर्मी जैसे कपड़ो में थी और हाथ में एक बड़ा सा बंदूख पकड़े हुए थी ,
उसके सामने दो आदमी एक जैसे फिरंगी औरत थी और दूसरा देशी पतला दुबला मर्द उनके आंखों में पट्टियां बंधी हुई थी …
“अच्छा खोल दो दोनो को “
थोड़ी ही देर में दोनो के हाथ और आंखों की पट्टियां हटा दी गई ,
पट्टी हटते ही फिरंगी जैसे दिखने वाली लड़की का मुह खुला का खुला रह गया …
“अरे ऐसे क्या देख रही हो मेडम जी “
मॉंगरा ने अपने अंदाज में कहा
“वाओ आप तो बहुत सुंदर हो “
सच में मॉंगरा इस समय किसी नई नई जवान अटखेलिया करती हुई लड़की सी लग रही थी ,उसके लंबे खुले हुए बाल लहरा रहे थे जिसे उसने बंधने की भी कोशिस नही की थी …
लकड़ी की तारीफ से वो किस नजाकत से भरी हुई लड़की के जैसे शर्मा गई …
“तुम्हारी हिंदी तो बड़ी अच्छी है हमे तो लगा तुम फ़िरंगन हो “
“नही मैं तो भारत की ही हु बस मेरे पिता जी फिरंगी थे “
“ओह नाम क्या है तुम्हारा “
“मेरी “
“मेरी?? ये कैसा नाम है “
“बस ऐसा ही नाम है मेरा ,तो इंटरव्यू शुरू करे मॉंगरा देवी “
मेरी के होठो में बड़ी प्यारी मुस्कान थी जिसे देखकर मॉंगरा को

भी बड़ी खुसी हुई
“बिल्कुल लेकिन ऐसा क्या हो गया की आपको हमारा इंटरव्यू लेना है “
“अरे आपको नही पता की आप इंस्पेक्टर प्रभात को मारकर कितनी फेमस हो गई हो ,सभी आपके बारे में और भी ज्यादा जानना चाहते है इसलिए हमने सोचा की आपका इंटरव्यू ले ले “
“अच्छा ऐसा है क्या तो फिर चलो ,ऐसे मैं तो सिर्फ डॉ साहब के कहने पर इंटरव्यू दे रही हु ,क्योकि उन्होंने आपको भेजा है ,और ये क्या उनका क्लिनिक अच्छे से नही चलता क्या जो वो न्यूज़ चैनल खोल रहे है “
दोनो ही जोरो से हँस पड़े
“अरे वो डॉ चुतिया है उनका कोई भी भरोसा नही है ,पहले मैं उनकी सेकेट्री थी अब न्यूज़ चैनल की एंकर बना दिया है मुझे ,कहते है की पहले मोंगरा की स्टोरी लाओ उसके जीवन में जो हुआ उसे दुनिया को दिखाना जरूरी है “
मोंगरा उसकी बात को सुनकर थोड़ी शांत हो गई और उसके आंखों में आंसू की कुछ बूंदे आ गई …
“हा डॉ साहब जानते है की मेरे साथ क्या बीती है और किन परिस्थितियों में मैंने हथियार उठाने का फैसला किया ,लेकिन उन्हें इन सबसे दूर ही रहने को कहना क्योकि अगर मैं नंगी हो जाऊ तो कई लोगो के कपड़े उतर जाएंगे,और इससे डॉ को भी दिक्कत हो सकती है क्योकि वो कभी नही चाहेंगे की मेरी कहानी दुनिया तक पहुचे ….”
मोंगरा थोड़ी देर तक बस ऐसे ही रही ,फिर अपने आंसू पोछने लगी
“अच्छा चलो शुरू करते है “

5
इधर
चौकी में अजय बस चंपा के ख्यालों में खोया हुआ था ,तभी राधे तिवारी आता है
“कहा खोए हो सर,जो काम करने आपको यंहा भेजा गया है उसपर भी कुछ ध्यान देते है “
वो हड़बड़ाया
“अरे हा पंडित जी ,तो पहले मुझे मोंगरा की तस्वीर तो दिखाइए “
तिवारी एक फाइल उसके सामने पटक देता है..
और अजय फाइल खोलते ही उस तस्वीर को बस देखता रह जाता है ….
वही चहरा जिसे वो दिन भर से याद कर रहा था ,उसके खुले हुए बाल और पासपोर्ट फ़ोटो में भी वही मादकता ,वो अपना सर पकड़ लेता है …
“हे भगवान “
“अरे क्या हुआ सर “
“अरे इसे तो मैं आज ही झरने के पास मिला था ,साली मुझे बना के चली गई “
अजय अपना सर जोरो से ठोकने लगता है लेकिन तिवारी आश्चर्य होने के बदले जोरो से हँसने लगता है ..
“अरे सर वो चंपा होगी “
अजय की आंखे फट जाती है
“तूम उसे जानते हो ...लेकिन ये तस्वीर “
“चंपा ,मोंगरा की जुड़वा बहन है ...

जब से जमीदार ने उनके माता पिता को मार डाला था तबसे पास के कबीले के सरदार में उसे गोद ले लिया और मोंगरा को डाकु चिराग सिंग अपने साथ ले गए ,दोनो में जमीन आसमान का अंतर है “
अजय बस अजीब सी मनोदशा में उसकी बातो को सुनता रहा
“लेकिन तब तो बड़ी दिक्कत होती होगी ,अगर मोंगरा की जगह किसी के चंपा को मार दिया तो या उसे जेल में डाल दिया तो …”
“नही सर हम यहां के निवासी है तो हमे कोई भी दिक्कत नही है ,हमे ये पहले से पता ही की वो दोनो जुड़वा है ,और इसलिए कबिले के सरदार ने चंपा के ठोड़ी में 3 बड़े बिंदी बनवाये है ,जो की एक टेटू की तरह है जिसे यंहा पर गोदना कहा जाता है वही सबसे बड़ा अंतर है दोनो में ..”
अजय के नजरो में चंपा की तस्वीर उभर गई ,सचमे चंपा के ठोड़ी पर वो गोदना था जिसे देखकर वो सुबह मोहित हो गया था ……
“लेकिन फिर भी ,अगर मॉंगरा ऐसा गोदना बनवा ले तो “
“अरे साहब फिर भी दोनो को पहचानना बहुत ही आसान है ,मॉंगरा एक डाकू है उसके चहरे में वो उजाड़पन है लेकिन चंपा के चहरे में एक कोमलता है,चंपा में एक नाजुकता है जबकि मॉंगरा सामने हो तो अच्छे अच्छे का मुत ही निकल जाता है ,और सबसे बड़ी बात की मोंगरा ने कभी अपने को छिपाया नही अगर वो सामने होगी तो वो खुद ही बता देती है की वो क्या है ,उसके पास इतना जिगर है की वो खुद को कभी नही छिपाती ,और हा मोंगरा चंपा से थोड़ी पतली भी तो है “
अजय को समझ नही आ रहा था की इन सबसे वो कैसे दोनो में भेद कर पायेगा लेकिन तिवारी बड़ा ही काँफिडेंट लग रहा था क्योकि उसने बचपन से दोनो को देखा था …

“अच्छा अच्छा ठीक है लेकिन चंपा को और कबिले के सरदार को कह देना की वो सतर्क रहे “
“वो हमेशा ही सतर्क रहते है इसलिए बेचारी चंपा कही आती जाती भी नही ,बस घर से जंगल और जंगल से घर बाहर गांव या दूसरी जगह इसी डर से नही निकलने दिया जाता क्योकि कोई उसे मोंगरा समझकर मार ही ना दे “
अजय को जाने क्यो लेकिन चंपा के ऊपर बहुत दया आई ,उसने उसके हुस्न को देखा था ,उसकी टपकती हुई जवानी को देखा था,उसे वो मदमस्त होकर नाचना था लेकिन बेचारी अपनी बहन की वजह से बस एक जेल सी जिंदगी जी रही थी ….

अजय थोड़ी देर बस सोचता रहा
“तो कहा से शुरू किया जाए ,मुखबिरों को सूचना भेज दो ,और पता करो की अब मोंगरा कहा मिल सकती है …”
तिवारी भी कुछ सोच रहा था
“साहब एक बात पुछु बुरा तो नही मानोगे “
“हा बोलो ना “
“आप चंपा से कहा मिल गए “
तिवारी के होठो में मुस्कान थी
“वो जंगल के अंदर एक झरना है वही ,वो वँहा जंगल देवी की पूजा कर रही थी ,मैं सुबह दौड़ाता हुआ वँहा पहुच गया था “
अजय ने चंपा के नहाने के बात को पूरी तरह छुपा लिया
“ओह ये बात मैंने पहले किसी इंस्पेक्टर से नही कही लेकिन आपसे कह रहा हु …”
अजय उसके चहरे को बस देखे जा रहा था
“क्योना चंपा का इस्तेमाल मॉंगरा को पकड़ने के लिए किया जाए …”
अजय चौका
“नही नही ...वो एक सीधी साधी सी लड़की है उसे इन सब झमेलो से दूर ही रखो तो अच्छा है “
तिवारी के होठो में एक मुस्कान आ गई
“एक ही दिन में बहुत कुछ जान लिया साहब आपने “
अजय झेप गया
“चलिए कोई बात नही लेकिन मेरी बात पर ध्यान जरूर देना “
अजय बस सर हिला कर रह गया ….

6
सुबह के इंतजार में अजय रात भर बेचैन रहा उसे चम्पा से मिलने की बहुत इच्छा हो रही थी ,बार बार उसका वो रूप उसकी आंखों के सामने आ रहा था वही मोंगरा का भी अहसास हो जाता,उसे बार बार याद आ जाता था की मोंगरा भी चम्पा की तरह ही दिखती है …

आज वो 4 बजे से पहले ही घर से निकल गया ,और दौड़ाता हुआ उसी जगह पहुच गया जंहा झरना था,उसने झड़ियो के ओट से देखा तो चम्पा अभी अभी आयी मालूम हुई ,उसका शरीर अभी पानी से भीगा नही था,थोड़ी सी आहट और पता नही क्या जो चम्पा को अजय के होने का अहसास दिला गया …
वो उसकी ओर मुड़ी तो अजय डर के कारण तुरंत ही पलट कर छुपने लगा ,लेकिन उसे चम्पा की जोरो की हँसी सुनाई दी ..
“हा हा हा इंस्पेक्टर बाबु बाहर आ जाइये ये क्या शहरी लोगो की तरह छुप छुप कर देख रहे हो देखना है तो सामने से ही देख लो ,जंगल में आये हो तो जंगल के कानून से रहो...

मैं कोई शहर की लड़की नही जंगल की लड़की हु और ये जंगल ही मेरा घर है ,तो फिक्र मत करो इस एकांत में भी एक मर्द को देखकर मैं डरूँगी नही …”
वो फिर खिलखिलाई लेकिन अजय को लगा जैसे मेरी चोरी पकड़ी गई हो ,वो बाहर आया ,
“यंहा आओ “
वो उसके पास जाकर रेत में बैठ गया और वो पानी में जाने लगी,मौसम में अभी भी ठंड थी लेकिन उसके पानी में जाने से अजय के माथे पर पसीना आने लगा,सिर्फ एक छोटी सी साड़ी का टुकड़ा उनके शरीर में था,सिर्फ साड़ी और कुछ भी नही ,उसने औरत को कभी इतना निर्भीक नही देखा था,लेकिन ये जंगल था ,और चम्पा के शरीर में भी कोई अंतःवस्त्र या पेटीकोट जैसी चीज नही थी,मात्रा एक साड़ी थी जो भीगने के साथ साथ उसके शरीर से चीपक गई और उसकी जवान भरी हुई देह की एक एक करवट अजय के आंखों के सामने आ गई ,साड़ी छातियों से ऐसे चिपके जैसे उसके शरीर का ही कोई अंग हो ,उसके उन्नत स्तनों की गोलाई का पूरा आभास होने लगा था ,सही कहा था पंडित जी ने चम्पा थोड़ी मोटी थी लेकिन उसे मोटा नही गदराया कहा जाता है,
भरा पूरा देशी शरीर ,और हर एक अंग से मादकता का झलकना,अजय के लिए तो खुद को सम्हालना भी मुश्किल हो रहा था,अजय उसके देह के जादू में फंस रहा था लेकिन उसकी नैतिकता ने ही उसे आगे बढ़ने से रोके रखा था ..

वो बिना किसी भी परवाह के बड़े ही चैन से नहा रही थी,अपने हर अंग को अपने हाथो से रगड़ती हुई,अजय के चहरे में पसीने की एक धार आ गई ..
“बाबुजी लगता है आपको बहुत गर्मी लग रही है आप भी आ जाइये पानी बहुत ठंडा है “
वो कुछ नही कह पाया लेकिन और उसे शांत देख वो बाहर आ गई ,अजय उसके हुस्न को बस एकटक देखता ही रह गया ,वो अजय के पास आयी और उसके हाथो को पकड़ कर पानी में खिंचने लगी,उसे आज समझ आया की जंगल की लड़की की ताकत क्या है ,वो सच में बलशाली थी अजय जैसा जवान और गठीला मर्द भी मानो उसके सामने बच्चा ही लग रहा था,लेकिन अजय के मन के किसी कोने में उठाने वाले अहसासों ने उसे और भी कमजोर बना दिया था क्योकि वो खुद भी तो उसके साथ जाना चहता था ,ऊपर से तो ऐसे ही दिखा रहा था की उसे नही जाना है लेकिन अंदर से मन के किसी कोने से वो जाने को बेताब ही था…
उसके पैर चम्पा के थोड़े ही प्रयास से चलाने लगे और वो अपने स्पोर्ट शूज़ तथा कपड़ो की फिक्र किये बिना ही पानी में चला गया ..
चम्पा ने सही कहा था की पानी ठंडा था,लेकिन चम्पा के पास होने के अहसास से उसके शरीर में थोड़ी गर्मी तो आ ही गई थी ,उसका दिल उतना धड़क रहा था जितना तो उसने कभी दौड़ाते हुए भी महसूस नही किया था …
डॉक्टरों ने सच ही कहा है की सेक्स सबसे अच्छे कार्डियो में से एक है ...

लेकिन उसे करने वाला मजबूत होना चाहिए और उस आग की पूर्णता में सेक्स किया जाना चाहिए …

अजय का शरीर ठंडे पानी में भी आग की तरह जलने लगा था,बचपन से वो एक शर्मिला लड़का था और ये उसके लिए किसी लड़की का प्रथम स्पर्श था ,वो भी ऐसे मौसम में वो भी इतनी हसीन लड़की का वो भी ऐसी जगह जंहा दूर दूर तक कोई ना हो ,और वो भी उस अप्सरा की इस अवस्था में जबकि अजय खुद ही उसपर मोहित हुए बिना नही रह पाया था…

चम्पा का पूरा बदन पानी से गीला था और उसने अजय के हाथो को अपने कमर पर टिका दिया अजय की दशा देखकर वो खिलखिलाई ,उसके दांतो की पंक्ति ने अजय को और भी मोहित कर दिया था ,वही अजय उसके गीले कमर को अपने जलते हुए हाथो से महसूस कर पा रहा था ,उसने एक चांदी की पतली करधन पहनी थी जो की उसके नाभि के नीचे लटक रही थी ,चम्पा को जैसे कोई फर्क ही नही पड़ रहा हो वो अजय से थोड़ा अगल हुई और अजय के ऊपर पानी फेकने लगी ,वो किसी बच्चे की तरह व्यहार कर रही थी ,उसकी मासूमियत ने अजय के दिल में प्यार का एक झोंका सा चला दिया ,जिस्म की हवस कुछ पलो के लिए ही सही लेकिन प्यार की मिठास में बदल गई थी ,अजय बड़े ही धयन से उसे देख रहा था और उसके होठो में एक मुस्कान आ गई ,वो प्यार की छोटी सी मिठास भी बड़ी ही काम की थी क्योकि उसने अजय को चम्पा के रूप को देखने का एक नया ढंग दे दिया था ,वो अब उसके चहरे की मासूमियत उसकी अल्हड़ अदाओं में खो रहा था ,चम्पा के द्वारा फेके गए पानी से वो पूरी तरह से गीला हो गया था और अब वो भी अपने शर्म को हटाकर उसके साथ खेलना चाहता था ,उसने भी पानी को चम्पा की तरफ फेकना शुरू कर दिया दोनो ही खिलखिला रहे थे और उस सन्नाटे से भरे हुए जंगल में दोनो की अठखेलियों से उठाने वाली हँसी की आवाजे गूंज रही थी …

चम्पा और अजय एक दूसरे को जायद से ज्यादा भिगाने की कोशिस कर रहे थे जबकि दोनो ही भीग चुके थे और इसी कोशिस में अजय चम्पा के पास आ चुका था और अचानक ही वो चम्पा के ऊपर गिर पड़ा ,पानी अभी उनके कमर तक ही था ,लेकिन अजय के यू गिर जाने से चम्पा उसे और खुद को सम्हालने में लग गई यही हाल अजय का भी था ,और उसने अपने हाथो से चम्पा की कमर को जोरो से जकड़ लिया दोनो ही जिस्म एक साथ एक दूसरे से लिपट कर पानी में जा गिरे और इसी दौरान चम्पा के वक्षो को ढका हुआ साड़ी का पल्लू जो की ऐसे भी बहुत छोटा ही था सरक गया और चम्पा के गुम्बदों से उन्नत और गोल लेकिन मुलायम वक्ष अजय के सीने में गड़ गए..

जैसे एक करेंट अजय के शरीर पर चल गया था ,वो ये सोचकर ही घबरा गया की एक लड़की की नंगी छतिया उसके सीने में धंसी जा रही है ,वो उन वक्षो के मुलायम अहसास को महसूस कर पा रहा था,चम्पा भी अब थोड़ी शांत हो गई शायद उसे भी ये अहसास हो गया था की आखिर उनके जिस्म अब जवान हो चुके थे और वो किसी मर्द की बांहों में इस स्तिथि में है …
लेकिन दोनो ही पानी में पड़े हुए थे और अब भी खुद को सम्हालने में लगे हुए थे ,अजय ने खुद को सम्हाल लिया और चम्पा को भी सहारा देकर खड़ा कर लिया ,अब भी दोनो के जिस्म मिले हुए ही थे लेकिन अजय को इतनी हिम्मत ना हुई की वो चम्पा के वक्षो को निहार सके ,वो उन्हें देखना चाहता था लेकिन नही देख पाया ,वो बस चम्पा के चहरे को ही देख रहा था जो की ऐसे शर्मा रही थी और उससे अलग भी नही हो पा रही थी,अजय ने भी चम्पा को पहले बार ऐसे शर्माते हुए पाया था ,वो उससे अलग होने को मचली ही थी की उसे अहसास हुआ की अजय ने उसे कसकर जकड़ लिया है ,अजय का हाथ अभी भी चम्पा के कमर पर कसे हुए था,और वो एकटक उसकी ओर देखे जा रहा था इससे चम्पा की शर्म और भी बढ़ गया थी ,अजय और चम्पा की सांसे एक दूसरे में टकरा रही थी और दोनो ही मूर्तियों की तरह वही जम चुके थे …
चम्पा का हाथ भी अभी तक अजय के गले में पड़ा हुआ था उसने अपना सर नीचे कर लिया और उसका चहरा लगभग अजय के गले से नीचे और सीने से थोड़ा उपर तक था,अजय को अपना सर हल्का सा नीचे करके उसे देखना पड़ रहा था ,अजय ने उसके बालो में ही चूम लिया ,अजय की इस हरकत से चम्पा ने सर उठाया और अजय को आश्चर्य से देखने लगी,अजय ने फिर से उसके माथे को चूम लिया ,जिससे चम्पा के होठो में एक हल्की शर्म से भरी हुई मुस्कान खिल गई ..
“क्या इरादा है बाबू जीवन भर ऐसे ही रहना है की छोड़ोगे भी”

चम्पा ने अपना हाथ उसके गले से हटाया और उसकी बात से अजय भी हड़बड़ाया और उसने तुरंत ही चम्पा के कमर को छोड़ दिया ,चम्पा ने तुरंत ही अपने साड़ी का पल्लू उठाकर अपने खुले हुए वक्षो को ढंक लिया लेकिन इस 1-2 सेकेंड में ही अजय के सामने चम्पा की जवानी का भरपूर खिला हुआ सबूत उसके गोल और बड़े वक्ष आ गए ,जो कुछ ही पलो के लिए उसके सामने रहे लेकिन अजय की नजर में ऐसे बस गए की उसके पूरे शरीर में झुनझुनी सी छूट गई …
अजय भी शर्म से भर गया और खुद ही नजर घुमा लिया और पानी से बाहर जाने लगा,उसकी इस हरकत से चम्पा के होठो में एक मुस्कान आ गई ना जाने को अजय का इस प्रकार उससे शर्माना उसे बहुत भा गया था ..

अजय ने नजर तो घुमा ली थी लेकिन उसके आंखों में अब भी चम्पा के वक्ष नाच रहे थे ,वो अपना सर झटकता लेकिन वो फिर के आ जाते ,और उसके लिंग में भी एक अजीब सी झुरझुरी का अहसास उसे हो रहा था ,वो अपने गुदाद्वार को ऊपर खिंच कर अपनी झुरझुरी पर काबू पाने की कोशिस कर रहा था जिसे उसे स्कूल में एक योग के शिक्षक ने सिखाया था जिसे मूलबन्ध कहा जाता है...लेकिन ना जाने क्यो आज अजय अपनी इस हल्की सी वासना को दूर भागना नही चाहता था जबकि वो उसके साथ हो जाना चाहता था…
वो जाकर उस चबूतरे के पास जा बैठा जिसपर पत्थर के रूप में जंगल की देवी विराजमान थी ,थोड़ी देर में चम्पा भी आ गई और चम्पा वँहा आ गई और फिर से फूल चढ़ा कर उस जगह को साफ करने लगी ………….

7
अजय बस उसे एकटक देखता रहा और चम्पा अपने काम में व्यस्त रही ,लेकिन कहने को ही वो काम कर रही थी असल में उसका पूरा ध्यान ही अजय की ओर था उसे पता था कि वो उसे घूर रहा है,लेकिन जैसे ही वो पलटती थी अजय अपनी नजरे फेर लेता था ,वो मंद मंद मुस्कुराती लेकिन कुछ नही कहती थी ,
आखिर में वो अजय के पास आकर बैठी ,
और उसे देखने लगी,अजय थोडा असहज हो गया ...और इधर उधर देखने लगा
“क्यो बाबुजी ऐसा क्या खास है मुझमें जो आपकी नजर मुझसे हट ही नही रही “
अजय बुरी तरह से झेंपा
“नही नही तो …”
चम्पा मुस्कुराई ,,,वो पहले की तरह खिलखिलाकर हँसी नही,उसकी मुस्कान में एक दर्द की झलक अजय को साफ दिख रही थी…
“क्या हुआ तुम उदास हो “
“नही बाबू बस सोच रही हु की मर्द कैसे जिस्म से आकर्षित हो जाते है और उसे ही प्यार समझने लगते है ,चाहे तुम जैसा अच्छा मर्द ही क्यो ना हो…”
अजय को ऐसा लगा मानो किसी ने उसे आईना दिखा दिया हो ..
वो बिल्कुल ही चुप हो गया ,उसके मन में एक ग्लानि का भाव उभरा और उसकी नजर झुक गई …
चम्पा ने बड़े ही प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा ..
“बाबू तुम बहुत ही अच्छे हो इसलिए नही चाहती की तूम किसी दलदल में फंस जाओ ,जिस्म के आकर्षण को प्यार मत समझ बैठना,यंहा बहुत से शहरी लोग आते है जो यंहा की औरतो के जिस्म से मोहित हो जाते है ,कुछ तो उनसे प्यार की बाते करते है और भोली भाली लड़कियों को बहला कर उनके जिस्म से खेलकर वापस चले जाते है,कुछ को लगता है की वो प्यार में पड़ गए है लेकिन वो बस हवस में होते है…
तुम इन दोनो में से कोई नही हो तुम अच्छे हो ,तुम्हारा दिल साफ है ,इसलिए तुम जिसे अपना मानोगे उसे कभी धोखा नही दोगे ,इसलिए समझा रही हु ,प्यार और जिस्म के आकर्षण में पहले फर्क करना सिख लो फिर आगे जाने की सोचना ….

”
अजय ने कभी सोचा ना होगा की ये जंगल की सीधी साधी सी लगने वाली लड़की इतने ज्ञान की बाते करेगी ,लेकिन वो खुस था की चम्पा ने सब कुछ क्लियर कर दिया था उसके मन में भी उठाने वाले अंतर्द्वंद जैसे खत्म से हो गए थे उसे थोड़ा हल्का महसूस हुआ …
वो चम्पा के दमकते हुए चहरे को देखने लगा ,चम्पा के चहरे में अब भी मुस्कान थी लेकिन वो उदास नही थी जैसे की वो अपने दिल की बात कहकर बोझ से मुक्त हो गई हो …
अजय ने हा में सर हिलाया
“हा लेकिन इन सबका मतलब ये नही है की तुम यंहा आ नही सकते असल में तुम्हारे आने से मुझे बहुत अच्छा लगता है वरना मैं तो बोर ही हो जाती हु ,पूरा जीवन मानो अकेलेपन में ही निकल रही है “
“तूम अपने को अकेला मत समझो चम्पा मैं हु ना ,और तुमने बिल्कुल सही कहा मुझे इस बात की खुसी है की तुमने मुझे फंसने से बचा लिया ,ये मेरे जीवन में पहली बार हुआ है की मैं किसी से आकर्षित महसूस कर रहा हु,और मुझमें तो इतनी हिम्मत भी नही थी की मैं तुमसे कुछ कह पाऊ,शायद मैं इसे ही प्यार समझ लेता लेकिन तुम तो मुझसे बहुत ही ज्यादा समझदार निकल गई तुमने मुझे सोचने का मौका दिया की ये क्या था,......मैं तुम्हारा हमेशा इस बात के लिए आभारी रहूंगा चम्पा “
इस बार चम्पा खिलखिलाकर हँस पड़ी
“क्या अजीबोगरीब बाते करते हो बाबू आप भी ,संचमे आप बहुत ही शरीफ हो ,पता नही इंस्पेक्टर कैसे बन गए “
उसकी हँसी देखकर अजय भी मुस्कुरा उठा,
“पता नही कैसे बन गया बस गलती से एग्जाम निकल गया था “
इस बार दोनो ही जोरो से हँस पड़े …
“तुम मेरे साथ बाहर हमने चलोगी”
अजय ने हल्के से कहा
“नही बाबा ,अगर बाहर निकली तो लोग मुझे मोंगरा समझकर डरने लगेंगे या कोई हमला भी कर दे “
“अरे मैं तो हु ना तुम्हारे साथ कुछ नही होगा “
चम्पा सोच में पड़ गई ..
बहुत देर तक ऐसी ही शांति छाई रही
“क्या हुआ “
“मेरे पास सिर्फ दो साड़ी है “
अजय को उसकी बात समझ आ गई थी ,
“कोई बात नही ...मैं तुम्हे कपड़े ला दूंगा “
चम्पा मानो खुसी से झूम गई
“सच में “
और अजय के गले से लग गई ,फिर एक बार दोनो के जिस्म मिल गए और अजय को अपने सीने में मुलायम लेकिन बड़े स्तनों का आभस हुआ ,चम्पा ने खुद को काबू में किया ,जब वो अलग हुई तो उसके चहरे में शर्म फैली हुई थी ……….

8
“सर इसे अगर चेनल में चला दे तो हाहाकार मच जाएगा …”
मेरी अभी डॉ चुतिया के बाजू में बैठी हुई थी दोनो मोंगरा के इंटरव्यू वाले वीडियो को ध्यान से देख रहे थे
“ह्म्म्म”
डॉ बस इतना ही बोला
“आपकी जान को भी खतरा हो सकता है “
“ह्म्म्म”
डॉ ने एक अंगड़ाई ली,और कमरे में उपस्थित दोनो लोगो को देखा जिनमे से एक मेरी थी और एक वो कैमरामैन जिसने वीडियो रिकार्ड किया था …
“ये बात बाहर नही जानी चाहिए की मोंगरा ने कोई इंटरव्यू दिया है ...

ये वीडियो मेरे पास सही सलामत रहेगा वक्त आने पर ही इसे बाहर निकलेंगे “
दोनो ने डॉ की बात में सहमति में सर हिलाया …

****************
दिन भर अजय के होठो में एक मुस्कान रही और शाम होते ही वो अपने कस्बे से कुछ दूर एक छोटे शहर की दुकान में पहुच गया और लड़कियों के कुछ कपड़े खरीदने लगा,उसने एक दो सलवार सूट और 2 साड़ियां ली ,लेकिन उसे याद आया की वो ब्लाउज तो लिया ही नही ,और चम्पा तो अंडरगारमेंट भी नही पहनती,ये सोचकर ही अजय के होठो में मुस्कान आ गई जिसे हम लोग समाज में गलत मानते है और अंगप्रदर्शन कहते है वो उस जंगल की लड़की के लिए बिल्कूल प्राकृतिक और नैसर्गिक है..
लेकिन अगर उसे बाहर अपने साथ घूमना था तो उसे कुछ समाज में प्रचलित कपड़े देने होंगे …
उसने कुछ अंडरगारमेंट्स भी ले लिए और एक दो ब्लाउज भी लेकिन उसे उसके शरीर के सही माप का अंदाज भी तो नही था,वो बस अपने अंदाजे से ही कपड़े ले रहा था ,लेकिन फिर भी वो संतुष्ट था ..
वो सारे कपड़े पकड़ कर घर आया दिन भर उसे बस चम्पा ही चम्पा याद आ रही थी और साथ ही उसके द्वारा कही गई बाते,वो काम तो कर रहा था लेकिन दिमाग कही और ही लगा हुआ था,वो उसकी बातो को याद करके कभी गंभीर हो जाता तो कभी हँस लेता ..
सुबह बस उसे चम्पा से मिलने का ही इंतजार था ……..

9
रात के अंधियारे में हल्की केंडल की रौशनी बिखर रही थी और बलवीर अपनी सरदार के शरीर की मालिश कर रहा था ,
मोंगरा अभी बस एक पेटीकोट पहने हुए बैठी थी,ऊपर का बदन पूरा नंगा ही था , उसके बड़े और घने बाल ही उसके वक्षो को छुपा रहे थे ,और बलवीर उसके पीछे बैठा हुआ उसके पीठ पर तेल मल रहा था ,उसके हाथो की फिसलन से चम्पा को बेहद ही सुकून मिल रहा था ..
ऐसे तो बलवीर को मोंगरा अपना सब कुछ ही दिखा चुकी थी लेकिन फिर भी एक पर्दा जरूर रखती थी क्योकि उसे पता था की वो उसकी सरदार है और अगर वो अपनी इज्जत नही करेगी तो गिरोह के लोग उसकी इज्जत कैसे करेंगे …
वो अपने मर्जी से मजे करती थी ना की किसी के जबरदस्ती या दवाब में ,चाहे दबाव प्यार का ही क्यो ना हो …
ऐसा बलवीरर के लिए तो वो उसकी मां थी माना की गिरोह के सभी सदस्य मोंगरा से उम्र और बल में बड़े थे लेकिन फिर भी उसका प्रभाव ऐसा था की वो उसे मां मानते थे ,और मोंगरा अपने गिरोह के सभी सदस्यों को अपना बेटा…
ये अलग बात थी की ये बस एक प्रतीक ही था और सब कुछ मोंगरा के ऊपर ही था………
बलवीर के गर्म हाथो के स्पर्श से मोंगरा के जिस्म की गर्मी भी बढ़ रही थी लेकिन फिर भी ना जाने वो आजकल खुद को क्यो बलवीर से दूर रख रही थी ,बलवीर के दिमाग में ये बात भी चलती थी लेकिन वो फिर भी था बड़ा ही वफादार साथी,
“सरदार आप कुछ अलग सी लग रही हो कुछ दिनों से “
मोंगरा के चहरे में थोड़ी मुस्कान आ गई वो जानती थी की आखिर बलवीर ऐसा क्यो कह रहा है …फिर भी उसने कहा
“क्यो..

”
बलवीर को कुछ भी बोलते नही बना ,वो क्या बोलता की हमारे बीच जिस्मानी संबंध नही बन पा रहे है?
मोंगरा को भी पता था की बलवीर ये नही बोल पायेगा ,मोंगरा पलट कर लेट गई ,उसके घने काले बाल अब भी उसके वक्षो को ढंके थे लेकिन अब उसका चहरा बलवीर के चहरे के नीचे था,दोनो की ही आंखे मिल रही थी ..
मोंगरा ने अपना हाथ आगे किया ,बलवीर इशारे को समझता हुआ उसकी ओर झुका,मोंगरा ने अपने हाथो से बलवीर का सर पकड़ लिया और अपने सीने से लगा लिया ,बलवीर जैसे आनन्द के सागर में डूब गया हो ,उसकी आंखे बंद हो गई ,
बाल अभी भी मोंगरा के छाती पर फैले हुए थे और बलवीर के चहरे से रगड़ खा रहे थे ,लेकिन बलवीर ने कोई भी शिकायत नही की ,वो मोंगरा के ऊपर जबरदस्ती नही कर सकता था,चाहे पूरे गिरोह में उससे बलशाली कोई नही था लेकिन मोंगरा के सामने वो बस एक गुलाम की तरह वफादार था और एक बच्चे के तरह मासूम ..
बलवीर का विशाल शरीर मोंगरा के ऊपर छा गया था और मोंगरा के इशारे से वो उसके वक्षो में अपने जीभ को रगड़ता हुआ उसका दूध निचोड़ने लगा था ,मोंगरा की भी आंखे मजे में बंद हो जाती लेकिन फिर वो बस शून्य को देखने लगती जैसे कोई लाश हो ,बलवीर जब कुछ देर तक उसे ऐसे ही लेटे हुए महसूस किया तो वो उठकर मोंगरा के आंखों को देखने लगा जो की अभी भी शून्य को ही घूरे जा रही थी ..
“क्या हुआ सरदार ..”
जैसे मोंगरा की तंद्रा टूट गई…
“उस इंस्पेक्टर का समझ नही आ रहा है”
“चम्पा को तो उसके पीछे लगाया है ना अपने “
“हा लेकिन वो इतना अच्छा है की चम्पा भी उसके प्यार में पड़ने लगी है…”
उसकी बात सुनकर बलवीर के चहरे का भी रंग उड़ने लगा …
“रास्ते से ही हटा देते है “
बलवीर थोड़ा धीरे से ही कहा लेकिन मोंगरा के चहरे पर डर के भाव आ गए
“नही हमने कसम खाई थी की किसी बेगुनाह को नही मरेंगे “
“लेकिन वो हमारी सबसे बड़ी मुसीबत बन सकता है “
मोंगरा थोड़ी देर यू ही चुप रही
“उसे चम्पा ही अपने प्यार से सम्हालेगी…”
बलवीर थोड़ा चिंतित तो था लेकिन मोंगरा के सामने वो क्या कह सकता था ...

10
जोरो की बारिश सुबह से ही हो रही थी और अजय चम्पा से मिलने को बेताब था,वो अपनी बाइक उठाकर सुबह ही चम्पा से मिलने चला गया ,वँहा जाकर देखा तो उसके दिल में खुसी की लहर दौड़ गई और साथ ही एक टीस भी उठी ,खुसी इसलिए क्योकि चम्पा एक पेड़ के नीचे दुबकी हुई खड़ी थी ,बारिश बहुत ही तेज थी ,जंगल की बारिश ऐसे भी बहुत ही डरावनी होती है वो भी तब जब अभी सूरज पूरी तरह से नही निकला हो ,और टिस उसके दिल में इसलिए उठी क्योकि उसे देख कर ही लग रहा था की वो सिर्फ इसलिए आयी थी क्योकि वो जानती थी की अजय भी यंहा आएगा ,उसके चहरे में हल्का गुस्सा था और वो झूठी नाराजगी का भाव जिसमें बहुत सा प्यार मिला हो ,नाराजगी इसलिए क्योकि अजय को आने में देर हो गई थी …
अजय मुस्कुराते हुए उसके पास पहुचा ,वो ठंड से कांप रही थी ,अजय ने तुरंत ही अपने बेग जो वो अपने साथ लाया था उसे खोलकर एक रेनकोट निकाला और उसे पहना दिया ,
“कितनी देर लगा दी ??”
चम्पा ने तुरंत ही कहा
“तुम्हे क्या जरूरत थी इतनी बारिश में इतनी सुबह यंहा आने की “
दोनो ने एक दूसरे को देखा
चम्पा के चहरे में हल्की सी मुस्कान आ गई
“क्योकि मुझे पता था की तुम यंहा जरूर आओगे ..”
चम्पा के आंखों से एक आंसू भी निकला था जो बारिश में धूल गया ,अब उसके होठो में बस एक मुस्कान थी ,अजय का मन किया की वो वही उसके होठो से अपने होठो को मिला दे लेकिन उसने अपने को काबू कर लिया था..
“तो अब तो पूरी ही भीग गई हो ,और ठंड से कांप भी रही हो चलो तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ दु “
चम्पा जोरो से हँस पड़ी
“मेरे घर तक ये मोटर नही जाएगी साहेब …”
“तो मेरे घर चल ऐसे भी तेरे लिए बहुत से कपड़े लाया हु “
अजय की बात से चम्पा अपनी बड़ी बड़ी आंखों से अजय को देखने लगी ,
उसका रूप देखकर अजय हमेशा की तरह ही मोहित था ,बारिश की झमाझम के शोर में उस जंगल में दोनो ही एकांत में थे कोई और होता हो जरूर ही कोई फायदा उठाने की कोशिस करता,ऐसे अजय के लिंग ने भी विद्रोह कर दिया था वो भी अपने पूरी ताकत से खड़ा हुआ था ,और वही चम्पा की योनि ने भी पानी छोड़ा था ,जो की बारिश के पानी से भीगी उसकी साड़ी में कही गुम होकर रह गई थी ..
लेकिन दोनो ने ही अपने को काबू में रखा था ,पता नही कब और कौन सी एक चिंगारी उस ज्वालामुखी को फोड़ देती,
“तुम्हारे घर जाना क्या सही रहेगा .लोग क्या बोलेंगे “
चम्पा थोड़ी शर्मायी
“हम लोगो की फिक्र करेंगे तो लोग हमे जीने ही नही देगें ,जो बोलना है बोले ,मेरे सामने तो नही कह सकते ना,जब मैं सही हु तो मैं क्यो डरु”
अजय की बात सुनकर चम्पा का चहरा खिल गया ..
“और अगर तुम अपने घर लेजाकर मेरे साथ कुछ ...यानी वो सब ..

यानी कुछ करने की कोशिस करोगे तो “
चम्पा बुरी तरह से शर्मा रही थी और अजय बस उसकी अदाओं में खो गया था,दोनो ही बस चाह रहे थे की कोई तो शुरवात करे कोई भी पीछे नही हटता लेकिन शुरुवात करना ही तो सबसे बड़ी मुश्किल होती थी …
“अगर करना होता तो यही नही कर लेता …”
अजय ने हल्के से कहा और चम्पा और भी शर्मा गई ..
चम्पा की मौन स्वीकृति मिल चुकी थी ,अजय भीगता हुआ गया और अपनी बाइक स्टार्ट कर दी..
चम्पा भी उसके पीछे आकर बैठ गई…
ये पहला मौका था जब अजय को चम्पा पर शक हुआ ..
क्योकि चम्पा ऐसे बाइक में बैठी जैसे उसे बाइक में बैठना आता हो …
अजय भले ही चम्पा के नशे में था लेकिन फिर भी उसका खोजी दिमाग जो की एक इंस्पेक्टर का होना चाहिए और जिसके लिए उसे ट्रेनिगं मिली थी वो बार बार कह रहा था की कुछ तो झोल है,क्या उसे चम्पा से पूछना चाहिए की जंगल में रहते हुए ऐसा कोन है जिसके साथ वो बाइक में बैठी है ???
लेकिन उसे इतनी हिम्मत नही हो पा रही थी ..
दोनो ही आगे निकल गए और चम्पा ने अपना हाथ अजय के कमर में कस दिया ,उन जंगली उबड़ खाबड़ रास्तों में चलते हुए अजय की उत्तेजना का भाव कही गायब हो गया था वो चम्पा की हर एक मूवमेंट को बड़े ही ध्यान से नोटिस कर रहा था ,वही शायद चम्पा को भी उसके दिल की बात समझ में आ गई थी ..
“सालो के बाद किसी के साथ बैठी हु ..पहले पिता जी ले जाय करते थे,जबसे पिता जी का देहांत हुआ और मोंगरा डाकू बन गई बाहर की दुनिया देखने को भी नसीब नही हुआ “
अजय के मन में उठ रहे विचार अचानक ही शांत हो गए ..
लगा जैसे सभी सवालों का जवाब मिल गया हो …
दोनो ही अजय के सरकारी क्वाटर तक पहुचने तक शांत ही रहे ..
अजय ने जल्दी से घर को खोला
लगभग 5.30 हो चुका था लेकिन बारिश रुकने का नाम ही नही ले रही थी दोनो ही पूरी तरह से भीग चुके थे साथ ही ठंड के मारे कांप रहे थे ..

अंदर आते ही अजय ने वो कपड़े चम्पा के सामने रख दिए जिसे उसने उसके लिए लाये थे ,उसे देखकर चम्पा के चहरे में मुस्कान आ गई लेकिन वो कुछ भी नही बोली
“तुम्हे जो पसंद है वो पहन लो ,और मैं चाय बनाता हु बहुत ठंड लगी है “
चम्पा हँस पड़ी
“क्या हुआ ???”
अजय ने बड़े ही सवालिया नजरो से उसे देखा
“सामने शराब की बोतल रखी है और तुम चाय के पीछे पड़े हो “
वो और भी जोरो से हँसी, अजय के कमरे के टेबल में एक आधी विस्की की बोतल रखी थी ,
“तुम पीती हो ??”
अजय ने सवालिया अंदाज में चम्पा से कहा
“बड़े अजीब मर्द हो तुम भी जवान लड़की सामने है और गर्मी लाने की लिए तुम चाय और विस्की की सोच रहे हो”
अजय दंग सा वही खड़ा रहा लेकिन चम्पा मुस्कुराते हुए चुपचाप एक साड़ी उठाकर एक कमरे के अंदर चली गई ……

11
जवानी कितनी खूबसूरत हो सकती है अजय को आज ख्याल आया था,चम्पा बाथरूम से बाहर आ चुकी थी और अजय बस उसे घूर रहा था ,वो हल्के गर्म पानी से नहा कर निकली थी ,और बदन में एक मात्र टॉवेल था,जो उसकी भरी हुई जवानी को सम्हालने में नाकाम लग रहा था,बालो अब थोड़े सूखे थे उन्हें भी अच्छे से पोछा गया था,अजय ने सामने रखी विस्की की बोतल से दो पैक बनाये और एक चम्पा की ओर किया ,अजय की नजर को इसतरह घूरता हुआ देखकर चम्पा भी शर्मा गई थी लेकिन उसने झट से वो पैक पकड़ा और एक ही बार में हलक से उतार दिया ..
उसे देखकर अजय ने भी एक ही सांस में पूरा पैक गटक दिया ,लगा जैसे उसके आहारनली में आग सी लग गई हो ,ना पानी ना सोडा उसे याद भी नही आया वरना वो तो बर्फ डालकर आराम से पीने वाला शख्स था ,उसका बिगड़ा हुआ मुह देखकर चम्पा जोरो से हँस पड़ी ,उसके चहरे में आयी हुई चमक से वो और भी हंसीन हो गई थी …
“तुम तो बेवड़ी निकली “अजय के चहरे में मुस्कान था लेकिन उसके चहरे से पता लग रहा था की उसके जीभ का स्वाद अभी भी बिगड़ा हुआ है ..

चम्पा पास ही रखे बिस्तर पर बैठ गई ,
“हमारे गांव में तो इससे भी कड़वी शराब मिलती है,ये तो कुछ भी नही है “
अजय ने बिना कहे दूसरा पैक बना दिया लेकिन इस बार पानी के साथ ,दोनो ने फिर से उसे एक ही सांस में गटक दिया ,अब उसके जिस्म में गर्मी का संचार होना शुरू हो गया था ,
उस हल्के सुरूर में ऐसा लगा की मानो उनका शरीर हल्का हो गया ,अजय भी पूरी तरह से भीग चुका था वो भी एक टॉवेल पकड़ कर अंदर चला गया और फिर अपने कपड़े उतार कर बस टॉवेल में ही बाहर आया,अब उसे चम्पा से वो शर्म नही आ रही थी ,जब वो बाहर आया तो चम्पा भी उसके गठीले बदन को वैसे ही देख रही थी जैसे अजय चम्पा को देख रहा था,असल में अजय के अदंर रहते चम्पा ने दो पैक और लगा दिए थे और उसकी आंखों में नशा साफ दिख रहा था ,अजय का गोरा गठीला शरीर और चौड़ी छातियों में उगी हुई बालो का गुच्छा चम्पा को आकर्षित कर रहा था ,चम्पा उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने पास बैठा ली और उसके लिए एक पैक बनाकर उसके सामने की जिसे अजय फिर से एक ही सांस में अंदर कर गया ,दोनो की निगाहे अब बिना रोक टोक और शर्म के एक दूसरे के बदन को घूर रही थी ,
अचानक ही अजय का हाथ चम्पा के पहने टॉवेल पर चला गया और उसने उसकी गांठ खोल दी ,वो बिना किसी रुकावट के गिर गया और पहली बार चम्पा का पूरा बदन उसके सामने छलक पड़ा दोनो की आंखों में नशा था और साथ ही वासना भी ,दोनो की ही आंखे आधी बंद हो चुकी थी ,
अजय का शर्मिलापन और चम्पा की चंचलता दोनो ही वासना और शराब के सुरूर में काफूर हो गई थी ,
अजय ने चम्पा को थोड़ा धक्का दिया और वो बिस्तर में गिरती चली गई ,वही अजय भी उसके ऊपर आ चुका था,ना जाने कब अजय ने अपने टॉवेल को भी निकाल फेका ,दोनो ठंडे बदन एक दूसरे से सट चुके थे और दोनो के शरीर गर्म होने लगे थे,अजय और चम्पा नंगे ही एक दूसरे से लिपटे सोए थे लेकिन एक चुम्बन भी दोनो के बीच नही हुआ था,चम्पा ने अजय के गले में हाथ डाला हुआ था और अजय भी अपनी भुजाओं से चम्पा का आलिंगन कर चुका था,लेकिन दोनो बस उसी अहसास में डूबे हुए थे ,
अजय का लिंग चम्पा की बालो से भरी हुई योनि से टकराता जरूर था लेकिन फिसल कर चम्पा के जांघो के बीच चला जाता ,दोनो में से किसी ने इतनी जहमत नही की कि अजय के लिंग को उसकी सह जगह में ले जाया जाय ,
इधर चम्पा के योनि से भी रिसाव बढ़ने लगा था और वो भी मस्त हो रही थी ,लेकिन किसी को तो पहल करनी ही थी ,आखिर अजय को अपने लिंग के फटने जैसा अहसास हुआ,वो पूरी तरह से तना हुआ था और खून का वेग उसके लिंग के नशों में तेजी से दौड़ रहा था ,साथ ही दिल भी बेहद जोरो से धड़कने लगा था मानो अब उससे बर्दास्त नही होगा,लेकिन अजय के साथ ये पहली बार हुआ था वो थोड़ा डरा भी की ये क्या हो रहा है,
अजय से जब सहा ही नही गया तो उसने अपने लिंग को बस हाथो से सही जगह सताया थोड़ा चम्पा की योनि में रगड़ने के

बाद ही उसके लिंग का शिरा गीला होगा,एक बार फिर उसने हाथो के माध्यम से ही अपने लिंग को चम्पा की फूली हुई योनि के दोनो होठो के बीच चलाया,चम्पा की पकड़ और भी बढ़ गई थी और उसके मुह से सिसकारियां निकल रही थी ,अजय की कमर थोड़ी हिली और उसे ऐसा लगा जैसे उसके लिंग की चमड़ी फ़टी जा रही है,वो दर्द से कहारा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी ,योनि के दोनो होठ खुल चूके थे और उसके लिंग का आगे का भाग चम्पा की योनि के द्वार पर घुस चुका था,साथ ही चम्पा की एक बड़ी ही आह भी उसके कानो में पड़ी जैसे वो भी कहार रही हो,
अजय को लगा की उसके लिंग को उन दो नरम और गीली चमड़ी ने इतने जोरो से जकड़ा हुआ है की वो थोड़ा भी नही हिल पायेगा लेकिन ये अजय का वहम बस था,योनि से रिसने वाले गीले और चिपचिपे पानी में भीगते ही फिर से उसके लिंग को मानो जगह मिल गई और वो थोड़ा और अंदर चला गया,फिर से एक कहार दोनो के होठो से निकल गई …
लेकिन इस बार अजय ने अपने दांत चम्पा के वक्षो पर गड़ा दिए थे,वो उनसे अभी तक खेला ही नही था और फुर्सत ही किसे थी ..
इस बार चम्पा भी उसकी इस हरकत से तेज आह के साथ उसके बालो को अपने ओर और भी जोर से खिंचा और फिर कुछ ही सेकंड में उसका सर उठाकर उसके होठो को अपने होठो में भीच लिया ..
दोनो के होठ भी एक दूसरे में घुलने लगे थे ,और अजय ने फिर से थोड़ी ताकत लगाई इस बार अजय की ताकत ज्यादा ही लग गई थी और उसका लिंग पूरे का पूरा ही चम्पा की योनि में धंस गया …
“आआहह “चम्पा के मुह से जोर की आह निकली और उसने उसे रोकने के एवज में अजय के होठो के निचले हिस्से में अपन दांत ही गड़ा दिया ..
दोनो ने ही थोड़ी देर सांस लेने में बेहतरी समझी और एक दूसरे की आंखों में देखा,दोनो को ऐसा लगा जैसे जन्म जन्म से बस इसी की तलाश में थे ,मानो दोनो ही खुसी से पागल हो गए और एक दूसरे को बेतहासा चूमने चाटने लगे ,और इसके साथ ही अजय के कमर की रफ्तार भी बढ़ गई और दोनो की सिसकियों की भी ..
कमरे में फच फच और आह ओह की आवाजे ही गूंज रही थी ,दोनो ही जंहा दांत लगता गड़ा देते थे और दोनो ही अपनी आंखे बंद किये इस सुख की दुनिया में मस्त हो गए थे …………..

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12
दोनो ने ही थोड़ी देर सांस लेने में बेहतरी समझी और एक दूसरे की आंखों में देखा,दोनो को ऐसा लगा जैसे जन्म जन्म से बस इसी की तलाश में थे ,मानो दोनो ही खुसी से पागल हो गए और एक दूसरे को बेतहासा चूमने चाटने लगे ,और इसके साथ ही अजय के कमर की रफ्तार भी बढ़ गई और दोनो की सिसकियों की भी ..
कमरे में फच फच और आह ओह की आवाजे ही गूंज रही थी ,दोनो ही जंहा दांत लगता गड़ा देते थे और दोनो ही अपनी आंखे बंद किये इस सुख की दुनिया में मस्त हो गए थे …………..

अजय और चम्पा की आंखे मिली और दोनो ही थोड़े से शर्मा गए,शराब का नशा टूट चुका था और वासना की आग भी अब बुझ चुकि थी ,लेकिन दोनो ही अब एक दूसरी के प्रति एक अजीब से बंधन महसूस कर रहे थे ,
दोनो जल्दी से उठे और अपने अपने कपड़े पहनने लगे ,ना जाने कितने देर तक ये खेल चला था और उसके बाद आयी नींद ने दोनो को अपने आगोश में ले लिया था ..
शायद दोपहर हो गई थी और दोनो को ही जोरो की भूख लग रही थी ,
चम्पा अपने टॉवेल को सम्हाला और फिर अजय के द्वारा लाये गए कपड़ो को देखने लगी वही अजय जल्दी से बाथरूम में घुस गया था ..
चम्पा उसके द्वारा लाये सामानों को देखते देखते ही पता नही कहा खो गई ,जब अजय बाहर आया तो उसने चम्पा की आंखों को वही अटका पाया वो समान को देखे जा रही थी ,हल्के हाथो से छू छू कर और उसे ऐसे सहला रही थी जैसे कोई बहुत ही प्यारी चीज मिल गई हो ,लेकिन उसके आंखों में आंसू था …
वो उसके पास आया और मानो उसके मन की बात जानने के लिए पूछा
“क्या हुआ ??”
“ये मेरा सपना था बाबु की मैं भी कभी ऐसे कपड़े पहन पाऊ जिसे मेरे लिए मेरा मर्द लाया हो ,और ये चूड़ियां …”
वो फफक पड़ी थी ,अजय को समझने में देर नही लगी की आखिर चम्पा कहना क्या चाहती थी ,
उसने उसे पीछे से जकड़ लिया और उसके गले में एक चुम्मन कर दिया ..
“मैं अब तो तेरा मर्द बन चुका हु ना “
चम्पा के रोते हुए चहरे में मुस्कुराहट तो आ गई लेकिन अब भी आंखों में उदासी थी ..
“नही बाबू ना जाने मेरे कारण आपको क्या क्या सहना पड़े मैं आपको इन सब तकलीफो में नही डाल सकती ,मेरे लिए ये एक सुखद सपना ही अच्छा है जिसे मैं जीना चाहती हु ,जब नींद खुलेगी तो असली दुनिया में चली जाऊंगी लेकिन जब तक ये भ्रम रहेगा तब तक कम से कम खुस हो लेती हु “
चम्पा की बातो में सच में एक अजीब सा दर्द था
“लेकिन मैं तो तुझे अपनी औरत मान चुका हु ..”
अजय ने अपनी गिरफ्त बड़ा दी और चम्पा जैसे उसके बांहो में सिमट गई ,वो अपने हाथो से उसे चूड़ियां पहनने लगा,चम्पा का पूरा शरीर ही उसके चौड़े सीने से ठिका हुआ था ,जैसे वो कोई भी बल नही लगा रही थी और अजय भी उसे प्यार से चूड़ियां पहना रहा था ,अजय ने उसके टॉवेल को फिर इस निकाल फेका चम्पा कोई भी विरोध नही कर रही थी असल में उसके चहरे में कोई भाव आ ही नही रहे थे ,बस आंखों में पानी था जैसे वो किसी सपने में हो…
अजीब सा माहौल था ये चम्पा के जिस्म में कपड़े नही थे लेकिन हाथो में लाल चमकदार चूड़ियां थी ,जो उसके गोरे कलाइयों में बहुत ही फब रही थी..
अजय ने उसे एक बड़े आईने के सामने बिठा दिया था,सम्पूर्ण शरीर ही चमक रहा था,चम्पा भी अपने को जैसे सालो बाद देखी हो वो अपने ही आकर्षण से मुग्ध हो गई थी ..

हाथो की लाल चुड़िया जो हर कलाई को आधे से ज्यादा भरे हुए थे ,और उसका गोरा गठिला शरीर उस आईने में खिलाकर कह रहा था की ये रूप की देवी है ,उसके काले और लंबे बाल बिखरे हुए थे ,चहरा दीप्त था ,और आंखों में आंसू ..
अजय बड़े ही प्यार से उसके बालो में कंघी कर रहा था ,उसके प्यार को देखकर चम्पा और भी उसकी हो जा रही थी ,वो बस अजय के प्यार को महसूस करती और उसके आंखों का पानी और भी बढ़ जाता,अजय के लिए प्यार हर पल ही बढ़ रहा था,और वो खुद का अस्तित्व ही मिटा कर सिर्फ अजय की हो जाना चाहती थी ,बालो को संवारने के बाद अजय ने उसका माथा चूमा और उसके कपड़ो की तरफ बढ़ गया ,
उसने एक पेंटी और ब्रा उठाई जिसे उसने बड़े ही मेहनत से चुना था ,वो भी लाल रंग की ही थी ,उसका कपड़ा रेशमी और मुलायम था जो हाथो में पड़कर भी बहुत ही सुख देता था,अजय ने इसपर भी अच्छे पैसे खर्च किये थे ..
उसने पहले अपनी रानी के वक्षो को ब्रा से ढंका और फिर वो लाल पेंटी पहनाई ,
चम्पा तो बड़े ही आश्चर्य से ये सब देख रही थी लेकिन उस लाल जोड़े में जो की बस उसकी गुप्तांगों के लिए था ,वो और भी मोहक सुंदर और मादक हो गई थी ,
अजय तो एक बार उसकी इस सौंदर्य को बस देखता ही रह गया और चम्पा उसकी नजरो से ही शर्मा गई ,उसका चहरा लाल हो गया असल में उसे भी कभी महसूस नही हुआ था की वो इतनी सुंदर है ,और बिना अजीब बात ये थी की बिना कपड़ो की चम्पा इन दो कपड़ो में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी ,
उसका यौवन खिलकर सामने आ रहा था …
अजय ने फिर से कपड़ो की ओर रुख किया और उसके ब्लाउज पेटीकोट और एक साड़ी उसे पहनाई ,ब्लाउज थोड़ी कड़ी जरूर हुई लेकिन उससे चम्पा के वक्षो का भरपूर सौंदर्य सामने आया ,,
सच ही था की नंगेपन से ज्यादा छुपी हुई चीज सुदर होती है ,
वो बस चम्पा को देखता ही रह गया था उसे नही पाता था की चम्पा इतनी भी खूबसूरत हो सकती है,ना ही अजय ने ना ही चम्पा ने ये कभी सोचा था …
अजय भी अब तैयार होने लगा जब तक चम्पा ने उसके किचन की कमान सम्हाली और कुछ अच्छा थोड़ी रोटी सब्जी बना दिया और कुछ बनाना तो उसे भी नही आता था ..
लेकिन अजय को लगा मानो वो स्वर्ग का खाना खा रहा हो सालो से वो बस अपने ही हाथो का खा रहा था ..

दोनो में बाते बहुत ही कम हो रही थी लेकिन एक दूसरे की हर अदा पर वो प्यार से भर जरूर जा रहे थे ,ऐसे माहौल में बात करके वो इसे बर्बाद नही करना चाहते है ,
अजय ने उसे अपने बाइक के पीछे बैठाया चम्पा ने एक कपड़ा अपने चहरे में बांध लिया था लेकिन फिर भी वो इतनी सुंदर दिख रही थी की सभी लोग एक बार तो उसे देख ही लेते थे,अजय अपनी बुलेट को शहर की ओर बड़ा दिया ,चम्पा भी उसके कमर पर अपने हाथो को कसे हुए शायद सालो बाद इस आजादी का अनुभव कर रही थी वो भी अपने प्यार के साथ…
वो अजय के कंधे में अपना सर चीपका चुकी थी ये समर्पण का भाव था जो एक लड़की के अंदर आता है जब वो लड़के पर सबसे ज्यादा भरोसा करने लगती है …
************
अजय के कहने पर चम्पा ने अपना स्कार्फ खोल लिया था ,लेकिन उसे अब भी डर था की कोई उसे कुछ कह या कर ना दे ,लेकिन अजय निश्चिंत था ,वो उसे उसी माल में ले गया जंहा से उसने चम्पा के लिए कपड़े ख़रीदे थे वो और भी कुछ समान उसे दिलाना चाहता था ,उसके चहरे की रौनक को देखकर तो हर लड़का ही उसकी ओर देखे बिना नही रह पा रहा था ,शायद वँहा सभी मोंगरा को जानते थे और कई तो उसका चहरा भी पहचानते थे लेकिन शायद ही किसी को इस बात पर शक हुआ हो की ये लड़की ही मोंगरा है ,असल में वो इतनी सुंदर और सभ्य लग रही थी की किसी को मोंगरा का ख्याल भी नही आया होगा …
वो बिना किसी रोक टोक के ही समान खरीदते रहे खाना खाया और अजय ने उसे फ़िल्म भी दिखाई,चम्पा तो बड़े ही आश्चर्य से उस बड़े पर्दे को देखने लगी ..
जब फ़िल्म शुरू हुई तो चिल्ला उठी
“इतना बड़ा सर ..”
इससे पहले की सभी उसकी ओर देखने लगे ,अजय ने तुरंत ही हंसते हुए उसके उसे समझाया और चम्पा अपनी गलती को समझ कर शर्मा गई और अजय के कंधे में सर लगा कर देखने लगी ,फ़िल्म के दौरान ना जाने कितनी बार ही अजय को चम्पा पर प्यार आया और वो उसके होठो को अपने होठो में समा लिया ,ये अब उनके लिए एक सामान्य सी बात हो चुकी थी ,दोनो ही इस नए नए रिश्ते की मस्ती में मस्त हो चुके थे ,दोपहर से शाम हो चुकी थी और दोनो अभी अभी फ़िल्म से निकल कर माल में ही बने रेस्टारेंट में नाश्ता कर रहे थे ,चम्पा के लिए ये सभी चीज अजीब थे इस तरह के कपड़े ,फ़िल्म और ऐसा खाना लेकिन वो सबको इन्जॉय भी कर रही थी …

13
तभी कुछ लोग वँहा आये आश्चर्य की बात थी की उनके हाथो में बड़े बड़े लाठियां थी कोई खुलेआम रिवाल्वर को अपने हाथो में घुमा रहा था लेकिन किसी ने उन्हें रोकने की हिम्मत नही की ,वो लगभग 10-15 की संख्या में थे ,एक लड़का उनके सामने चल रहा था और एक जैकेट पहने हुए था,सभी लोग उन्हें शक और डर की नजर से देख रहे थे ..

वो लोग सीधे आये और लड़के ने चम्पा के सर पर गन टिका दी ,चम्पा और अजय दोनो के लिए के बिल्कुल ही अप्रत्याशित था ,बाकी के लड़के उन्हें घेर कर खड़े हो गए ,पूरी तरह से शांति पूरे माहौल में छा गई थी …
“ये क्या बतमीजी है “
अजय गुस्से से चीखा
“तुम्हारा खेल खत्म हुआ मोंगरा बाई “लड़के के चहरे में क्रोध साफ दिख रहा था ..
लेकिन उसकी इस बात पर अजय बस जोरो से हँस दिया लकड़ा उसे अजीब निगाहों से घूरा ..
“मुझे अभी तक इस बात पर शक हो रहा था की किसी ने इसे देखकर मोंगरा क्यो नही कहा ..लेकिन अब समझ आया की अभी तक क्यो नही कहा क्योकि जमीदार साहब को खबर करना था...और फिक्र मत करो ये मोंगरा नही उसकी बहन चम्पा है”
लड़के के चहरे में अविश्वास के भाव आये
“मैं तुम्हारे इलाके का नया इंस्पेक्टर हु अजय ...जमीदार साहब मुझे पहचानते है “
अजय ने उसे कांफिडेंस में लाने के लिए कहा ..
लेकिन उस लड़के ने अभी भी वो गन नही हटाया था चम्पा खामोश सी बैठी थी जैसे उसे पता था की ये होने वाला है …
लड़के ने एक फोन किया
“पिता जी ये तो चम्पा है ,और वो नए इंस्पेक्टर के साथ है ..”
उधर से भी कुछ कहा गया और लड़के ने फोन अजय को दे दिया लेकिन इस दौरान भी चम्पा के सर से किसी ने भी गन नही हटाई थी …
अजय वँहा से उठा और थोड़ी दूर जाकर बात करने लगा
“हम ठाकुर प्राण बोल रहे है “
:जी ठाकुर साहब “
“ये क्या है इंसपेक्टर हमने तुम्हे मोंगरा को पकड़ने के लिए भेजा था लेकिन तुम उसकी हमशक्ल के साथ रंगरलियां मना रहे हो “
“ठाकुर साहब ये ही मेरे काम का ही हिस्सा है ,आप भी जानते है की दोनो ही बहने हमशक्ल है,लेकिन पता नही की अभी तक जितने भी लोग यंहा उसे पकड़ने आये वो इस बात का फायदा क्यो नही उठा पाये ,मैं इस बात का फायदा उठाकर उसे पकडूँगा, ये मेरे प्रेम जाल में पूरी तरह से फंस चुकी हैं, इसके जरिए ही इसकी बहन तक पहुचा जा सकता हैं”
ठाकुर ने शाबासी के कई वाक्य कह डाले
“बहुत बढ़िया अजय ,तुम बस उस कुतिया को हमारे हवाले करो और मुह मांगा इनाम तुम्हारा …और चम्पा को फसाने में जितनी भी मदद लगे हम देंगे “
अजय के चहरे में कुटिल मुस्कान खिल गई
“फिलहाल तो 1 लाख ही भेज दो ,साली को पटाने में बहुत पैसा खर्च होगा….”
दोनो तरफ से हँसी गूंज गई …..

मोंगरा के जिस्म में लगे हुए घाव को देखकर बलवीर के मन में अजीब सी तिलमिलाहट हो रही थी,लेकिन वो कर भी क्या सकता था आखिर मोंगरा थी तो उसकी सरदार …
बलवीर बड़े ही प्यार से उस जख्म को छुआ..
“आउच “मोंगरा के चहरे में एक दर्द की लहर आने की बजाए खुसी झलकने लगी,आंखों में मस्ती के बादल थे और होठो में हल्की सी मुसकान….

बलवीर की चिढ़ इसे देखकर और भी बढ़ गई थी …
अचानक ही चम्पा की नींद खुली और अब भी उसके होठो में वही मुस्कान थी और थोड़ी शर्म भी …
“लगता है की चम्पा सरदार पर भारी पड़ रही है,सरदार भूलिए मत की आप चम्पा नही मोंगरा है,शायद उस इंस्पेक्टर ने आपके अंदर वो सारे अरमान जगा दिए है जो एक साधारण लड़कियों के अंदर होते है और आज तो हद ही कर दी आपने अपना मिशन भूलकर उसके साथ ……”
वो चुप था ,लेकिन मोंगरा के होठो में अभी भी वही मुस्कान थी,
बलवीर और भी बुरी तरह से झल्ला गया
“जिस्म की हवस मिटाने तक तो ठीक था सरदार लेकिन तुम तो ...तुम तो ऐसा लग रहा है जैसे तुम उसके प्यार में पड़ गई हो “
बलवीर का चहरा रूवासु हो गया जिसे देखकर मोंगरा खिलखिला कर हँस पड़ी …
“वाह बलवीर बहुत बड़ी बड़ी बाते करने लगा है तू तो ...लगता है की तु भी हमसे प्यार करने लगा है …”
मोंगरा की बात सुनकर बलवीर थोड़ा घबरा सा गया लेकिन कुछ भी नही कहा ..
“घबरा क्यो रहे हो ,बलवीर मैं हमेशा से जानती हु और तुमसे मैं सिर्फ अपने जिस्म की प्यास ही बुझती थी लेकिन फिर भी तुम्हारे प्यार के कारण मेरे अंदर भी प्यार की लहरे उठानी शुरू हो गई मैं तुम्हे चाहती हु लेकिन अपने बेटे की तरह …”
बलवीर की आंखों में पानी था,
“तुम ये क्या कह रही हो सरदार “
“सच ही कह रही हु ,”मोंगरा के आंखों में भी आंसू आ गए थे वो बलवीर के बालो पर प्यार से हाथ फेर रही थी
“सरदार उस अजय का कोई भी भरोसा करना ठिक नही है हो सकता है की वो आपको जमीदार के हवाले कर दे ,क्या पता सरकारी आदमी है हम उसके बारे में जानते भी नही है और वो हो सकता है की जमीदार से मिला हुआ होगा “
मोंगरा के होठो में एक मुस्कान आ गई
“नही बलवीर मेरा अजय ऐसा नही है “
बलवीर को मोंगरा का अजय के प्रति इतना अपनापन चुभ सा गया ..
“क्या पता की आपके अजय के मन में क्या चल रहा होगा “
अचानक ही बलवीर उठ खड़ा हुआ और मोंगरा के हाथो को अपने सर पर लगा लिया
“आपको मेरी कसम है की अपनी असलियत उसे नही बताओगी “
मोंगरा थोड़ी मचल गई
“सुनो सरदार तुमने ये नाटक किया था क्योकि तुम उस अजय को फंसा कर जमीदार तक पहुचना चाहती थी लेकिन अब तो हद हो गई है आप तो खुद ही उसके प्यार में फंसती जा रही है ...क्या आप वो सब भूल गई जो उस हरामजादे जमीदार ने आपके और आपके परिवार के साथ किया था ...याद करो सरदार उस दर्द को जो उसने आपको दिया है…”
बलवीर के चहरे की नशे खिंच गई थी ,लेकिन मोंगरा के आंखों में बस दर्द ही था…
“वी दर्द मैं कैसे भूल सकती हु ...लेकिन पता नही क्यो अजय के प्यार के आगे लगता है की वो सब चीजों को भूल कर बस उसकी बांहो में झूलती रहूं ……….”
अब शायद बलवीर से ये असहनीय हो चुका था वो उठ खड़ा हुआ ..
“आप वो सरदार नही रही जो अपने लोगो के लिए जिया मरा करती थी “
बलवीर उठकर जाने लगा था,मोंगरा ने उसका हाथ पकड़ लिया..

“रुको …मैं जानती हु की तुम क्या चाहते हो ,और फिक्र मत करो तुम्हारी सरदार में अभी भी इतनी ताकत है की वो अपने लक्ष्य के सामने अपने प्यार को आने नही देगी ...लेकिन तुम जो सोच रहे हो वो भी सच है की मैं अजय के प्यार में बौरा सी गई हु ...उसमे मुझे मेरा भविष्य दिखाई देता है,लेकिन अपने भविष्य के लिए मैं तुम लोगो की भावनाओ से नही खेल सकती …”
मोंगरा अब भी बलवीर को किसी आशा से देख रही थी ऐसे तो उसका हुक्म ही इस गुट का नियम था लेकिन फिर भी मोंगरा अपने सभी सदस्य साथियों का समान सम्मान करती थी……
“चम्पा को अपने प्यार से प्यार करने दो इस बात पर मुझे मत रोको लेकिन मोंगरा अपना इंतकाम लेगी ...और क्या पता शायद अजय भी हमारे किसी काम आ जाए …”
मोंगरा की बात सुनकर बलवीर ने एक गहरी सांस ली ,उसके चहरे में संतोष के भाव तो अभी भी नही आये थे लेकिन फिर भी वो थोड़ा शांत जरूर दिख रहा था…….

14
अजय के हाथो में रुमाल में लिपटी हुई नोट की दो गड्डिया थी ,वो उसे अपने हाथ में झूला रहा था,मन बिल्कुल शांत ऐसा लग रहा था जैसे वो इसे तौल रहा हो …
मन में कई विचार एक साथ चल रहे थे ,
“साहब साहब “
तिवारी की आवाज से जैसे वो चौका और फिर तुरंत ही उन गड्डियो को एक दराज में डालकर बाहर आया …
“अरे पंडित जी आप यंहा “
“साहब आप कल से दिखे नही तो सोचा की चलो हलचल पूछ आऊ ,तबियत तो ठीक है ना “
“ओह वो हा मैं ठीक हु ,”
वो थोड़ी देर तक सोचता ही रहा
“अच्छा तिवारी जी एक बात बताइये की क्या आपको चम्पा का घर पता है “
तिवारी एक गहरी मुस्कान में मुस्कुराया
“क्या बात है साहब बड़ी बेताबी हो रही है उससे मिलने की ..”
अजय अपनी ही बात को सम्हालता हुआ बोला
“ऐसा तो कुछ नही बस ...बस सोचा की जो लड़की खतरनाक डाकू की बहन हो उसे अपनी नजर में रखना ही चाहिए “
तिवारी जैसे उसके मन के दशा को समझ गया था
“अच्छा चलिए लिए चलता हु आपको भी ,आप भी इस शक को दूर कर ही लो की वो दोनो एक नही दो है “
अजय थोड़ा झेंपा जरूर लेकिन वो उसके पीछे हो चला,दोनो ही अजय के बुलेट से जा रहे थे,एक समय के बाद रास्ता भी बंद हो गया था ,इतना घना जंगल देख कर तो अजय को थोड़ा डर भी लगा ,गाड़ी वही खड़ा कर वो दोनो ही एक बड़े बड़े पेड़ो के बीच से होते हुए उबड़ खाबड़ रास्तों पर चलने लगे ,और थोड़ी ही देर में उन्हें कुछ झोपड़ियां दिखाई दो ,मुश्किल से 7-8 झोपड़ियां थी ..

वँहा पहुचते ही लोग उन्हें अजीब निगाहो से देखने लगे ,वो अजय को ऐसे देख रहे थे जैसे की वो किसी दूसरे ग्रह से आया हुआ हो,तिवारी उनके लिए नया नही लग रहा था …
हर घर बड़ी दूर दूर में बसा हुआ था ,और बड़ी ही शांति पसरी हुई थी ,
अजय और तिवारी दूसरे छोर तक पहुचे एक छोटी सी झोपडी थी जो की अन्य घरों के मुकाबले थोड़ी और अलग थलग थी ,घर के बाहर एक बुड्डा बैठे हुए बीड़ी पी रहा था ,चारो ओर अथाह शांति फैली थी बस झींगुरों की आवाजे फैली थी या तो पत्तो की सरसराहट,कभी कभी कुछ बच्चों की हँसी भी सुनाई दे जाती थी ,
बरामदे में घुसते ही एक मादक सी गंध अजय के नाक में पड़ी जिसने उसे मदहोश सा कर दिया था,ये गंध थी महुए ही ,महुआ जो की आदिवासियों के द्वारा बनाया गई शराब थी जो की वो लोग खुद ही बनाते है ,बिल्कुल ही शुद्ध..
तिवारी जाकर बुजुर्ग के पैर पड़ता है
“चम्पा दिखाई नही देती ,हमारे नए साहब है महुआ पीने आये है ..”
बुजुर्ग ने थोड़ी देर तक अजय को घूरा फिर अदंर चला गया ,अजय को उसका व्यवहार थोडा अजीब लगा लेकिन वो बुजुर्ग थोड़ी ही देर में एक मटकी जैसे पात्र लिए कोई पेय लेकर उपस्तिथ हुआ ,
अजय के नाक में वही गंध फिर से फैल गई लेकिन इस बार वो थोड़ी ज्यादा ही थी ,
फिर उस बुजुर्ग ने 3 ग्लास लाये और पूरी तरह से महुए से भर दिया ,तिवारी ने तिरछी निगाहों से अजय की ओर देखा और मुस्कराया ,
तीनो ने ही ग्लास थाम लिया ये अजय के जीवन में पहली बार था जब वो हाथ से बनी हुई शराब चख रहा था,उसे लगा जैसे आजतक उसने जो महंगी से महंगी शराब पी है वो भी इसकी मादकता और पवित्रता के सामने फीकी है ,बिल्कुल ही ओरिजनल और साफ …
पहला ही ग्लास अजय के दिमाग में एक सुरुर पैदा कर चुका था ……..

दूसरे के बाद से उसकी आंखे बंद होनी शुरू हो गई ,
“चम्पा कहा है “
उसने अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में कहा
“वो अभी जंगल में महुआ बीनने गई है ,लकड़ी वगेरह इकठ्ठा करके ही आएगी…”
बुड्ढे ने पहली बार कुछ सही कहा था ,तीसरा ग्लास भी भर दिया गया था लेकिन अजय समझदार व्यक्ति था उसने उसे प्यार से मना कर दिया वो जो पता करने आया था वो नशे में समझ ही नही सकता था,
थोड़ी ही देर में एक लड़की एक साड़ी पहने आती हुई दिखाई दी,बस सूती साड़ी का एक कपड़ा और वही तराशा हुआ जिस्म जिसे देख कर अजय जैसा मर्द भी मदहोश हो गया था ,अजय की आंखों में चमक आ गई क्योकि सामने से आने वाली लड़की उसकी चम्पा थी,,,
चम्पा पास आयी और बड़े सलीके से उसने दोनो के सामने हाथ जोड़े और कमरे में चली गई ,
“लो मिल लो यही है चम्पा “
तिवारी अच्छे नशे की हालत में आ चुका था ,थोड़ी ही देर में चम्पा बाहर आयी और अजय को देखकर मुस्कुराने लगी ,
अजय को इस नशे की हालत में चम्पा और भी हसीन दिखाई देने लगी थी ,चम्पा भी उसे यू देखता हुआ देखकर मुस्कुराई,साथ ही उसके चहरे में नारी सुलभ शर्म फैल गया,
“अरे सर एक और हो जाए अब तो देख ही लिया ना अपने “
तिवारी की बात सुनकर अजय ने एक ग्लास और ले ही लिया ,लेकिन इससे वो पूरी तरह से घूम चुका था और आखिर में तिवारी ने ही उसे उठाकर वँहा से उसके घर छोड़ा ….
शाम जब उसकी आंखे खुली तो होठो के एक मुस्कान थी वो चम्पा से मिलना चाहता था और फिर से वो उसके घर के ओर चल दिया ,
वँहा चम्पा उसे बच्चों के साथ खेलते हुए मिली शाम ढलने को थी और चम्पा उसे देखकर भागते हुए अपने घर के अंदर घुस गई ..

“अरे रुको तो सही “
वो उसके पीछे ही भागा था लेकिन बाहर उसके बाप को देखकर वो वही रुक गया ,लेकिन देखा की वो चिलम जला कर रखा था और पूरे नशे में था,
अजय जाकर उसके पैर छुवे
“फिर से पीने चले आये”
बुजुर्ग की बात सुनकर वो थोड़ा मुस्कुराया
और मन में सोचा
‘पीने तो आया हु लेकिन शराब नही शबाब ‘
थोड़ी ही देर हुई थी की चम्पा अपने हाथो में एक मटकी लेकर आ गई ,और एक ग्लास में शराब भर कर अजय की ओर बड़ा देती है ,उसके चहरे में शर्म की मुस्कान थी अजय भी उसे घूरे जा रहा था ,
“ऐसे क्या देख रहे हो “
उसकी प्यारी आवाज से अजय जैसे फिर से होशं में आया
“बहुत प्यारी लग रही हो “
वो और शर्मा गई
“खाना खा के जाना आपके लिए देशी मुर्गा बना देती हु “
चम्पा ने हल्के से कहा
“ओह पति देव की इतनी सेवा “
“चुप रहो”
चम्पा घबराकर अपने बापू की ओर देखी लेकिन वो तो नशे में धुत पड़ा था और फिर हल्के से मुस्कुराई और अजय के कंधे पर एक चपत मार दी ,
“चलो जल्दी से इसे खत्म करो जल्दी से खाना बना देती हुई बापू तो लगता है आज ऐसे ही रहेंगे “
“वाओ तो आज रात में …”
अजय इतना ही बोलकर रुक गया लेकिन चम्पा के चहरे में मुस्कराहट और भी बढ़ गई लेकिन साथ ही शर्म भी ,वो भागते हुए वँहा से अंदर चली गई लेकिन उसकी अदा से ही अजय के दिल में गुदगुदी उठ गई,और वो बेख़ौफ़ ही उठा और कमरे के अंदर चला गया ,उसे देखते ही चम्पा घबराई और थोड़ी पीछे हो गई ,अजय उसके करीब जा खड़ा हो गया था दोनो की ही सांसे तेज थी और एक दूसरे के चहरे से टकरा रही थी ,
चम्पा एक दम से शांत हो गई थी और अपनी नजर नीचे किये हुई थी ,वही अजय की भी नजर बस उसके चहरे में जा टिकी थी ..
“ऐसे क्या देख रहे हो ,बाहर बापू बैठे है”
चम्पा की बात को जैसे अजय ने अनसुना कर दिया और अपने चहरे को उसके पास लाते हुए उसके गालो को चूमने की कोशिस की लेकिन चम्पा ने अपना चहरा सरका लिया ,उसके होठो में मुस्कुराहट थी लेकिन दिल जोरो से धड़क रहा था …
अजय ने अपने हाथो से उसके चहरे को अपनी ओर किया अब चम्पा के माथे पर पसीना था ,वो कोई विरोध नही कर रही थी उसकी आंखे बंद थी ,अजय ने अपने होठो को चम्पा के होठो के पास लाया और चम्पा की सांसे और भी तेज होने लगी उसके होठो भी फड़फड़ाने लगे लेकिन,वो जड़वत बस वही खड़ी रही और अजय ने बड़े ही इत्मीनान से उसके होठो को अपने होठो में ले लिया ..

चम्पा की तो जैसे सांसे ही रुक गई थी उसे लगा जैसे उसके शरीर में कोई भी ताकत बाकी नही है और वो गिर जाएगी उसने खुद को अजय के बांहो में डाल दिया ,अजय भी प्यार से उसके बदन को सहलाते हुए फिर से उसके चहरे को उठाया और उसके चहरे को ध्यान से देखने लगा,
इतना मोहक रूप अजय ने देखा ही नही था,वो फिर से अनायास ही उसके होठो में खुद के होठो को भिड़ा दिया ,इस बार चम्पा के हाथ अजय के सर पर जा टिके थे और वो उसके बालो को सहला रही थी वही अजय भी अपने जज़बातों की तूफान को होठो के जरिये चम्पा के अंदर धकेल रहा था …..
चम्पा का कसा हुआ बदन अजय के बदन से मिल चुका था ,चम्पा की गोल उभरी छतियो का मुलायम अहसास अजय के सीने में हो रहा था,अजय ने चम्पा की साड़ी हो उसके कंधे से हटाया और अपने होठो को उसके कंधे पर लगा दिया ,
लेकिन अजय को एक और आश्चर्य हुआ की वो सब घाव कहा गए जो उसने कल चम्पा को दिए थे ,जबकि चम्पा के दांतो के निशान अब भी अजय के कंधे पर जिंदा थे…
लेकिन अजय ने अभी ये सभी चीजे सोचने की फिक्र ही नही की और अजय ने फिर से चम्पा के कंधों को चूमना शुरू कर दिया ,चम्पा भी अपने अस्तित्व को अजय को सौपने लगी थी दोनो के जिस्म की गर्मी एक दूसरे में मिल रही थी …
और दोनो ही एक दूसरे में खोना चाहते थे …
लेकिन तभी …
गोली की आवाज पूरे वातावरण में गूंज गई …
अजय तुरंत ही सतर्क हो उठा वही चम्पा के चहरे में ख़ौफ़ साफ साफ दिख रहा था ……...
15
“ये क्या था “चम्पा बुरी तरह से चौकी
अजय तुरंत ही उठा और झोपड़े से बाहर की ओर गोली की दिशा में जाने लगा ,पहले तो चम्पा ने उसका हाथ पकड़ लिया था लेकिन फिर अजय ने उसे शांत किया,अजय तो चम्पा को बहुत ही निडर लड़की समझ रहा था लेकिन चम्पा का इस तरह से घबराना उसे दुखी कर गया …
वो भागता हुआ जंगल में पहुच चुका था किसी के दौड़ाने की आवाज का पीछा करने लगा उसे कुछ लोग दिखाई दिए …
“रुको “अजय जोर से चिल्लाया जिसे सुनकर सभी रुक गए और अजय की ओर देखने लगे…
“तुम कौन हो और जंगल में क्या कर रहे हो “उस रौबदार आदमी ने अजय से सवाल किया ,उसके साथ 2 लोग और थे सभी के हाथो में बड़ी बन्दूखे थी …
“मैं इंस्पेक्टर अजय हु ,यंहा का इंचार्ज …”अजय अपने सांसों को काबू में करता हुआ बोला
“ओह इंस्पेक्टर साहब ,मैं यंहा का रेंजर हु ,पता लगा था की कुछ लोग यंहा पर शिकार कर रहे है तो उन्हें पकड़ने चले आया था ,लेकिन सालो ने गोली चला दी,उन्ही का पीछा कर रहे थे …”
तो ये भी सरकारी आदमी था अजय को सुकून मिला
“कौन लोग थे मैं कुछ मदद करू “
“कहा सर वो लोग तो अब निकल चुके ….

मोंगरा गैंग के लोग होंगे नही तो यंहा किसके पास बन्दूखे होती है “
“ओह”
अजय बस इतना ही बोल पाया था
“नाक में दम कर रखा है सालो ने ऊपर से भी प्रेशर रहता है ,क्या क्या देखे “
रेंजर तिलमिला गया था
“काम ही ऐसा है सर ,मेरी कोई मदद लगे तो बेहिचक कहिएगा ,मुझे भी उन्हें पकड़ना है ,आप की भी मदद लगेगी”
“बिल्कुल बिल्कुल और आप तो इसी लिए बुलाये गए है,जमीदार साहब ने तो आपको ऊपर बात करके बुलवाया है...चलिए आज आपसे मुलाकात भी हो गई “
दोनो ने हाथ मिलाया अजय फिर से चम्पा के झोपड़े की ओर चल पड़ा ,शांत जंगल में बस झींगुरों की आवाजे आ रही थी वो दौड़ाता हुआ दूर निकल गया था ,अब वो बिल्कुल ही अकेला था और रात के अंधेरे में सरसराता जंगल ,लेकिन फिर भी उसे डर नही लग रहा था,बल्कि वो तो चम्पा से मिलने को रोमांचित हुआ जा रहा था,
वो थोड़ी दूर ही आया था की उसे फिर से किसी के कदमो की आहत सुनाई दी ,वो सतर्क हो गया था ,और बड़े ही धीरे धीरे कदम बड़ा रहा था ,चांद के मध्यम प्रकाश में उसे रास्ते का इल्म तो हो रहा था लेकिन फिर भी दूर तक दिखाई नही दे रहा था…
“मेरे जानू …”
एक बहुत ही मदभरी और मीठी आवाज ने उसे चौका दिया वो इस आवाज को अच्छे से पहचान सकता था,वो चम्पा की आवाज थी …
वो इधर उधर देखने लगा लेकिन जंगल के बड़े बड़े पेड़ो में उसे कोई दिखाई नही दिया ,तभी उसे खिलखिलाने की आवाज आई ,वो समझ चुका था की चम्पा ही उसके साथ मस्ती कर रही है..
“कहा छुपी हो तूम सामने आओ ना “
अजय बेचैन होकर बोला
“तुम ढूंढो मुझे “
चम्पा फिर से खिलखिलाई ,अजय के चहरे में भी मुसकान आ गई ,
’कहा ये लड़की अभी इतना डर रही थी और कहा ये मेरे पीछे पीछे आ गई ,ना जाने ये क्या क्या खेल दिखाएगी ‘
वो हसंते हुए उस आवाज का पीछा करने लगा ,चम्पा के भागने से उसके पायलों की आवाज से पूरा जंगल ही गूंज उठा था ,छम छम की आवाज के पीछे अजय भी भागा जा रहा था लेकिन चम्पा को वो पकड़ ही नही पाया ..

भागते भागते उसकी सांसे फूल गई थी और आखिर वो उस झील के पास पहुच गया था जंहा चम्पा उसे पहली बार और फिर कई बार मिली थी …
चम्पा झील के किनारे ही एक बड़े पत्थर पर बैठी हुई थी ,उसके शरीर पर अब भी वही एक साड़ी थी जिसे उसने थोड़ी देर पहले पहना था लेकिन हाथो में बोतल थी जिसे वो अपने मुह से लगा रही थी,ये भी चम्पा का एक अलग ही रूप था ,उसके पैरो में पायल थे जो काले रंग के थे जैसा यंहा की आदिवासी महिलाएं पहनती है ,उसका गोरा और खिला हुआ रूप चांद की रौशनी में चमक रहा था,वो इठला रही थी बलखा रही थी और इतरा रही थी…
अजय उसके अदांओ में मोहित होकर उसके ओर खिंचा चला जा रहा था,जैसे एक चुम्बक दूसरे चुम्बक की ओर खिंचा चला जाता है ,उसे शराब का नशा फिर से मदहोश कर रहा था जिसे वो कुछ देर से भुला हुआ था ,
अजय पत्थर के पास पहुच गया और चम्पा के पैरो को पकड़ कर उसे चूमने लगा जिससे चम्पा खिलखिलाई ,
लेकिन फिर उसे प्यार से देखने लगी ,अजय ने ही अपना सर उठाया और उसे देखने लगा ,दोनो की नजर मिली और चम्पा थोड़ी शर्मा गई ,और नजर नीचे कर लिया …
अजय अपने स्थान से उठकर चम्पा की कमर को पकड़ कर उसे पत्थर से नीचे ले आया ,अब वो अजय के सामने खड़ी थी लेकिन उसका शरीर अब भी पत्थर से ठिका हुआ था ,दोनो के ही जिस्म आपस में सटे हुए थे ,चम्पा के हाथो से अजय ने शराब की बोतल को ले कर अपने मुह से लगाया ,उससे वही महुवे की खुश बू आ रही थी ,वो एक ही बार में आधी बोतल पी गया क्योकि आधी तो चम्पा ने ही खत्म कर दी थी,बोलत फेकने के बाद अजय फिर से चम्पा को देखने लगा जो की उसे ही देख कर मुस्कुरा रही थी ,
“क्या हुआ “
उसने बस अपना सर ना में हिलाया और अजय के पास थोड़ी और सरक गई ,ऐसे दोनो के बीच कोई जगह तो नही बची थी लेकिन फिर भी चम्पा जितना हो सके उतना अजय को अपने से सटाकर रखना चाहती थी ,दोनो के जिस्म उस हल्की ठंड में भी गर्म थे और एक दूसरे को अपनी गर्मी पहुचा रहे थे ,चम्पा का चहरा अजय के सीने के पास था ,अजय ने थोड़ा झुककर चम्पा एक होठो के पास अपने होठो को लाया ,दोनो की सांसे एक दूसरे से टकराने लगी और होठो हल्के हल्के ही एक दूसरे को छू रहे थे ,दोनो के ही होठो में फड़फड़ाहट थी ,
अजय हल्के से अपने सर को आगे करके चम्पा के होठो को अपने होठो में भर लिया ,
चम्पा का भी हाथ अजय के बालो में कस चुका था ,दोनो के जिस्म मिल चुके थे और एक दूसरे में सामने का पूरा प्रयास कर रहे थे ,
चम्पा की सुडौल भरी हुई दूध की थैलियां अजय के सीने में धंस रही थी और अजय उसके बालो को पकड़ कर उसे अपने मुह में सामने की कोशिस कर रहा था ,
अजय उसके होठो से निकल कर उसके चहरे और कंधे तक आ गया ,उसने चम्पा के एक मात्रा वस्त्र का पल्लू उसके सीने से सरका दिया,अब चम्पा का जिस्म ऊपर से पूरी तरह से नग्न था,अजय अपने एक हाथ से उसके उजोरो को सहलाने में लग गया ,
“आह……आह ....

”
चम्पा हल्के हल्के से सिसकियां ले रही थी अजय उसके गले को चूमता हुआ उसके कंधे तक पहुचा और उसके जीभ ने कुछ खुरदुरा सा महसूस किया ,जिससे चम्पा की आह ही निकल गई ..
अजय थोड़ा रुक कर उस जख्म को देखने लगा ,जो उसके कंधे पर था …
“ये ..”अजय की आंखे आश्चर्य से बड़ी हो गई थी क्योकि कुछ देर पहले जब उसने चम्पा के कंधे पर अपने होठ फेरे थे तक ये जख्म नही थे,वो दांतो के गढ़ने से बने हुए जख्म थे जो उसके कंधे पर भी थे …
अजय की बात पर चम्पा हल्के से हँसी ..
“कल की बात भूल गए क्या ,जानवरो की तरह कई जगह पर काट लिया था और अब ऐसे मासूम बन रहे हो ..”
अजय का सर घुमा ,मतलब साफ था की वो मोंगरा और चम्पा दोनो के साथ रह चुका था इन दो लड़कियों में से एक मोंगरा थी और दूसरी चम्पा ….
लेकिन ……..
लेकिन दोनो में भेद कैसे किया जाए ???
दिखते एक जैसे है ,बाते एक जैसी,अदाएं भी एक जैसी ,और जो के मात्रा पहचान तिवारी ने उनके अलग होने की बताई थी वो भी दोनो में था …
शायद यही मोंगरा है ...अजय के दिमाग ने कहा,क्योकि इस लड़की में वो शर्म नही थी जो की दूसरे के अंदर थी …
लेकिन ..???
लेकिन ये भी हो सकता था की शर्म बस दिखावा हो ,
अजय के दिमाग ने फिर से कहा ,वो बेचैन हो गया लेकिन अपनी बेचैनी भर जाहिर नही किया और अपने होठो से चम्पा/मोंगरा के कंधे को चूमता रहा ,
‘अगर ये मोंगरा है तो इसका मतलब की मैं एक डाकू के साथ जिसे मैं पकड़ने आया हु ,उसके साथ रात बिताई है ,लेकिन मैंने इसकी आंखों में भी तो वही प्यार देखा था जो मैंने उस दूसरी लड़की के आंखों में देखा था ‘
अजय बुरी तरह से घबरा गया था,और उसकी घबराहट चम्पा से ज्यादा देर तक छुपी नही रह पाई ..
“क्या हुआ ??आप थोड़े बेचैन लग रहे हो “
“कुछ नही कुछ भी तो नही “अजय हड़बड़ाया
“बताइये ना “
अजय ने उसके चहरे को देखा ,चांद की रोशनी में अब भी उसका चहरा चमक रहा था,वही प्यारा चहरा और आंखों में अजय के लिए वही प्यार ,अजय के दिल ने कहा यही चम्पा है ,कोई भी लड़की झूट बोल सकती है लेकिन किसी की आंखे नही ,वो प्यार से भारी आंखे जो अजय को निहार रही थी वो कैसे झूट बोल सकती है ….
अजय का दिमाग तो कहता था की यही मोंगरा है लेकिन दिल उसे चम्पा ही समझ रहा था ,अजय ने दिल की सुनने की ठान ली और चम्पा के गालो में एक चुम्बन झड़ दिया ..

“चम्पा मैं एक परेशानी में हु “
अजय ने एक दाव खेलने की सोच ली
“क्या “
“यही की तुम और मोंगरा एक ही तरह दिखती हु ,अगर कभी मोंगरा मेरे सामने आ गई तो मैं तुम दोनो में से तुम्हे कैसे पहचान पाऊंगा “
चम्पा थोड़ी गंभीर हो गई थी …
“उसका नाम मेरे सामने मत लो ,और उसे पहचानना कोई मुश्किल काम भी नही है ,बस उसकी आंखों में देखना,मेरी आंखों में आपके लिए बेपनाह प्यार दिखेगा और उसकी आंखों में बस शैतानियत ,वो किसी से प्यार नही कर सकती वो तो बस खून की प्यासी है “
चम्पा का चहरा तमतमा गया था
“तो तुम उसे पसंद नही करती “
“बिल्कुल नही ..कहने को तो हम दोनो ही बहने है लेकिन मेरे लिए तो वो कब की मर चुकी है ..”
“फिर भी अगर वो मेरे सामने आयी तो कैसे ..”
चम्पा थोड़ी देर तक उसे देखती है और मुस्कुराती है ..
“बहुत ही आसान है ,उसके ठोड़ी पर ये गोदना नही है ,इसे बापू ने मेरे ठोड़ी में तब गुदवाया था जब उन्होंने मुझे गोद लिया “
चम्पा अपने ठोड़ी में बने हुए गोदने को अजय को दिखाने लगी
लेकिन अजय को पता था की दोनो ही लड़कियों के चहरे पर उसी जगह पर वैसा ही गोदना है
“लेकिन अगर मोंगरा ने भी पोलिश से बचने के लिए यही पर ऐसा ही गोदना गुदवा लिया हो तो “
चम्पा के चहरे पर बहुत ही नैसर्गिक चिंता आ गई ,कोई देखकर कह ही नही सकता था की ये झूट बोल रही है या सच …
“तब क्या करेंगे “चम्पा ने मासूमियत से कहा
“मेरे पास एक तरकीब है शायद यही अच्छा रहे “
अजय उसे देखने लगा लेकिन उसके चहरे का कोई भी भाव नही पढ़ पाया ..
“बोलिये “
“मैं तुम्हे एक गुप्त कोड बताऊंगा ,जिसे बस तुम्हे ही पता हो ,इसे तुम किसी और को मत बताना ,जब जब हम मिलेंगे तो तुम उस कोड को मुझे बता देना ,मुझे पता चल जाएगा की ये तुम हो वो नही “
चम्पा मानो खुसी से उछाल गई
“हा यही सही रहेगा “
“तो तुम्हारा गुप्त कोड है 7745 “
चम्पा कुछ देर तक उसे बार बार बोलकर उसे याद कर लेती है
“चलो बहुत रात हो गई अब घर चलते है “अजय की बात से चम्पा का मुह छोटा हो गया
“अभी तो आये है और कुछ किया भी तो नही है “
अजय के चहरे में मुस्कुराहट आ गई थी ..
करना तो वो भी बहुत कुछ चाहता था लेकिन दोनो के पहचान के कन्फ्यूसन में उसकी सारी उत्तेजना और प्यार जाता रहा ...वो मोंगरा के साथ कुछ भी नही करना चाहता था और अभी उसे बस यही पता करना था की आखिर कौन मोंगरा है और कौन चम्पा ,7745 से उसे ये तो पता चल ही जाएगा की ये वो लड़की है जिसके साथ उसने जिस्मानी रिश्ते बनाये थे,...
अजय ने उसके सर पर छोटा से चुम्मन दिया…
“अभी मैं थक चुका हु ,फिर कभी “
चम्पा मायूस तो थी लेकिन फिर भी उसने अजय को पहले अपने बांहो में भर लिया और फिर उसके होठो में हल्का से चुम्मन दिया …..

“मैं तो हमेशा के लिए आपकी हो चुकी हु कब चाहे जो चाहे कर लेना …”

15
अजय के दिल में जोरदार हलचल चल रही थी ,एक तरफ भोली भाली चम्पा थी जिससे वो दिलोजान से मोहोब्बत करता था तो दुसर्री तरफ थी खतरनाक और चालक मोंगरा….
दोनो के बाद उसे सरकार और ठाकुर का भी प्रेशर था की वो जल्द से जल्द ही मोंगरा को पकड़ने की दिशा में काम करे,दिन भर वो उसी उधेड़ बन में लगा रहा था ..
रात में वो तिवारी के साथ बैठा हुआ शराब पी रहा था …
“सर जी कोई मुखबिर कोई भी सूचना नही दे रहा है और s.p. साहब और ठाकुर रोज ही फोन करके पूछते है की आखिर क्या क्या काम कर लिया मोंगरा को पकड़ने के लिए ,क्या करे सर जी ऐसे हाथ पर हाथ तो धरे बैठे नही रह सकते कुछ तो करना ही होगा …”
तिवारी की बात से अजय के माथे पर चिंता की सिलवटे पड़ गई
“हम्म्म्म तिवारी जी समझ तो मुझे भी कुछ नही आ रहा है ,लेकिन अगर हमे मोंगरा को पकड़ना है तो उसकी कहानी शुरू से जाननी होगी की आखिर मोंगरा ,डाकू मोंगरा कैसे बनी …”
अजय की बात सुनकर तिवारी के होठो में मुस्कान आ गई और उसने पूरा ग्लास एक ही बार में हलक के अंदर धकेल दिया ..
“अब की ना सर अपने सही बात ,मैं इसी इलाके में पैदा हुआ हु और मैंने मोंगरा के बचपन को भी देखा है ,और उसके इस रूप को भी ,जमीदार साहब के मोंगरा के परिवार पर किये हुए जुल्म को भी ,और फिर मोंगरा के विद्रोह को भी लेकिन आज तक किसी ने इसपर कोई भी दिलचस्पी नही दिखाई बस मोंगरा को पकड़ने के अंधी दौड़ में लग गए,ऐसे भी यंहा उसे कोई पकड़ने में दिलचस्पी नही रखता सभी बस उसे मार कर ठाकुर से मुँहमाँगा इनाम पाना चाहते है …”
“लेकिन मुझे सब कुछ जानना है और पूरे डिटेल से जानना है ,मोंगरा में मुझे खासी दिलचस्पी जाग गई है “
अजय की बात सुनकर तिवारी फिर से मुस्कुराया ..
“मोंगरा पे या चम्पा पे “
अजय बुरी तरह से झेंप गया और तिवारी खिलखिलाकर हँस पड़ा ..
“इसमें आपका कुसूर नही है साहब,कुसूर तो आपकी उम्र और चम्पा की जवानी का है ,इस उम्र में अगर ऐसी जवान मदमस्त लड़की सामने हो तो कोई भी फिसल जाए या प्यार में पड़ जाए “
तिवारी अब भी हल्के हल्के मुस्कुराते हुए मजे ले रहा था …
“वो सब छोड़िए तिवारी जी आप मुझे वो बतलाइए जो की जरूरी है ,आखिर मोंगरा डाकू कैसे बनी ..”
तिवारी का चहरा गंभीर होने लगा ….

“बात तब की है जब मैं नया नया पोलिस में लगा था और पास ही के गांव में मेरी पोस्टिंग थी ,देखने को तो यंहा पर सभी कुछ ठीक था लेकिन असल में ऐसा नही था जमीदार का यंहा पर एकछत्र राज हुआ करता था,यंहा के निवासी भी इस बात को स्वीकार कर चुके थे की न्याय और कानून से ऊपर ठाकुर है और उसकी बात है आसपास के 20-25 गांव का कानून था ,सभी कुछ अच्छा था जब तक बड़े ठाकुर यानी प्राण सिंह के पिता का देहात ना हो गया ,लेकिन प्राण सिंह के हाथो में ताकत आते ही उसने इसका गलत उपयोग करना शुरू कर दिया ,उसे बस दो ही नशे थे एक तो शराब का और दूसरा लड़की का ,और इसका शिकार गांव की कई औरते हुई ………….”

यंहा से कहानी फेलशबेक में चलेगी
प्राण सिंह का आतंक इतना था की लडकिया घर से निकलना ही छोड़ चुकी थी ,ना जाने किस मनहूस घड़ी में ठाकुर की नजर उसपर पड़ जाए और वो उसे उठा कर ले जाए ,किसी के पास इतनी हिम्मत भी तो नही थी की उसके खिलाफ कुछ कह सके …
प्राण सिंह आतंक का दूसरा पर्याय बन चुका था ,जो भी उसके खिलाफ बोलता या कोशिस भी करता तो उसकी एक ही सजा होती थी उसकी और उसके घर वालो की मौत………..
आखिर कुछ गांव के सरपंच मिलकर पोलिश के पास जाने की सोचते है …

पुलिस स्टेशन में
“साहब, ठाकुर के लोग जब चाहे किसी के भी घर घुसकर लड़कियों को उठा लेते है ,हमारे घर की बहु बेटियों का जीना मुहाल कर रखा है ,गांव छोड़कर जाना चाहते है तो भी नही जा सकते ठाकुर के लोग फिर से गांव में लाकर पटक देते है ,इनकी ही मजदूरी करते है और इनके ही गुलाम बन गए है ,साहब हमारी भी कुछ इज्जत है ,लकड़ियों को तालाब में ही नंगा कर देते है ,वही पर ……”
एक बुजुर्ग बोलते बोलते ही फफक कर रो पड़ा …
टेबल में इंस्पेक्टर बैठा था वही सभी सरपंच हाथ जोड़े जमीन में बैठे थे ,पास ही तिवारी खड़ा था जिसके माथे पर ये सब सुनकर पसीना आ चुका था ,इंस्पेक्टर अभी पान खाने के बाद अपने दांतो को लकड़ी से साफ कर रहा था ,
“ह्म्म्म तो इसमें क्या हो गया कोई नई बात थोड़ी है ,और तुम्हारी बहु बेटियों को कभी ना कभी तो चुदवाना ही है ,लडकिया है तो कोई ना कोई तो चोदेगा,फिर ठाकुर साहब या उसके किसी आदमी ने चोद लिया तो क्या फर्क पड़ गया …”
इंस्पेक्टर के इस बयान से वो सभी बस एक दूसरे के चहरे को देखने लगे ….
तभी भर कार आने की आवज आई ,एक साथ ही कई कार आकर रुकते गए ..
इंस्पेक्टर हड़बड़ाया और तुरत ही अपने को सीधा किया और खड़ा हो गया ,इधर प्राण ठाकुर रौब से आ रहा था ,उसे देखकर सभी खड़े हो गए और हाथ जोड़ लिए वही सभी के चहरे पर पसीना भी था …
“क्यो बे मादरचोदों तुमलोग यंहा क्या कर रहे हो,इस मादरचोद से मेरी शिकायत करने आये हो ..”
उसने इंस्पेक्टर की तरफ उंगली की ,इंस्पेक्टर ने गली सुनकर भी अपने दांत दिखाए ..

लेकिन प्राण सिंह भड़का
“तुम सालो की बेटियां ,बहुये,हमारी रखैल है ये बात समझ लो जिसे जब चाहे तब उठाकर लाएंगे और रोक सको तो रोक लेना “
वो बुजुर्ग जो उस समझ इंस्पेक्टर से बात कर रहा था वो फिर से ठाकुर की बात सुनकर फफक कर रो पड़ा ..
“ठाकुर साहब रहम ,हम आपकी बात पर सहमत है लेकिन हमारी लड़कियों के साथ यू मारपीट ना किया जाए ,जो आपको पसंद है वो आपके हवेली भेज देंगे इस तरह घर को उजाड़ा ना जाए बस यही विनती है …”
एक दूसरा सरपंच हाथ जोड़े बोला ..
ठाकुर कुछ देर सोचता रहा
“ह्म्म्म ठीक है लेकिन तुम्हारे गांव की हर लड़की को एक बार सबसे पहले मुझसे फिर मेरे सभी आदमियों से चुदना होगा,फिर अगर ठिक लगे तो उसे रखेंगे या भेज देंगे ,लेकिन हमारे बिना कोई लड़की जवान नही होगी ना ही कोई बहु यंहा हमारे हवेली में आये बिना अपने पति के घर जाएगी ...बोलो मंजूर ………”
मजबूरी की हद हो चुकी थी लेकिन फिर भी उसे सहने के अलावा उनके पास कोई चारा भी तो नही था ...सरपंचों ने एक साथ हा में सर हिलाया …
प्राण सिंह के होठो में एक शैतानी हँसी नाच गई ….

16
इधर गांव में सरपंचों की बात आग की तरह फैल गई,पुरुष जमीदार के घर के नॉकर थे और महिलाये उनकी रखैल, ये ही उनकी नियति बन गई थी,
लेकिन इसे सभी तो स्वीकार नही कर सकते थे,बुराई जब अपने चरम में होती है तभी न्याय के लिए भी आवाज उठाई जाती है,विद्रोह के स्वर बुलंद होने लगे थे जिसमें सबसे ऊपर नाम था कालिया का…
सभी सरपंच जब सर गड़ाए बैठे थे तब कालिया दहाड़ रहा था,
“शर्म आती है मुझे तुम जैसे नपुंसको को अपना बुजुर्ग कहते हुए,उससे अच्छा अपनी बेटियों को मार ही डालो और साथ मे तुम लोग भी मर जाओ,यू नपुंसको की तरह जीने से तो कही अच्छा होगा कि तुम सभी मर जाओ,मुझे तुम्हारा फैसला स्वीकार नही है,तुम लोगो के हाथो में चूड़ियां होंगी लेकिन मैंने अपनी माँ का दूध पिया है और उसी दूध की कसम है मुझे किसी भी लड़की की ओर अगर ठाकुर या उसके आदमीयो ने छुआ भी तो उनके हाथ उखाड़ देंगे ,हम उनके खेतो में मजदूरी करते है उनके लिए फसल उगाते है,हमारी मेहनत से वो अमीर है और उसी पैसे के जोर पर हमारी ही इज्जत से खेल रहे है,कौन कौन मेरे साथ है हाथ उठाओ या नपुंसको की तरह अपनी जिंदगी चलाओ ,मेरे साथ आने पर तुम्हे अपना खून बहना पड़ेगा लेकिन मौत भी तुम्हारी शानदार होगी,”
कालिया के काले चहरे पर पसीने की बरसात हो रही थी,पूरा तन भीग चुका था,उसके एक एक शब्द मानो शोलो की तरह धधक रहे थे,गांव के कुछ नवजवान अपना हाथ उठाते है और उठकर कालिया के साथ हो जाते है,वँहा बैठे हुए बुजुर्ग बस देखते ही रहते है कि कैसे उनके बच्चे अपने हाथों में टंगिया भाले पकड़ कर ठाकुर के पिस्तौल का सामना करने निकल पड़े है,
महिलाएं जिन्होंने इन्हें दूध पिलाया था वो अपने बच्चों की बहादुरी पर अपना सीना

फुलाये बैठे उन्हें दुवा दे रही थी लेकिन दिल के किसी कोने में वो डरी हुई भी थी,लगभग पूरे 3-4 गांव के कुछ जवान लड़के आगे आये ,
“उनके हाथो में बंदूख है और तुम्हारे हाथो में कुल्हाड़ी “
वही बुजुर्ग जो पुलिस स्टेशन में रोया था आंखों में पानी लाकर कालिया को देख रहा था
“बापू अब नही बहुत डर लिए हम लोग अब और नही ,उस ठाकुर ने तो हैवानियत पर उतर आया है,मैं मर जाना पसंद करूंगा लेकिन अपनी बहन और बीवी को उसके सामने नही परोसूंगा….”
कालिया की आंखे लाल थी लेकिन उसकी बात से घर के अंदर से झांकती उसकी बहन और बीवी की आंखों में भी पानी आ गया और दिल में कालिया के लिए सम्मान और भी बढ़ गया …
सभी युवक जो भी हथियार मिला उसे इकठ्ठा कर अपने अपने घरों में चले गए थे,लगभग सभी नवजवान कालिया के बात से सहमत था लेकिन वँहा कितने ही बचे थे ,सभी तो ठाकुर के पास बंधुआ मजदूर थे ,कुछ थोड़े से युवक गांव में थे …
रात की शांति में घोड़ो की आवाज ने सभी के कान खड़े कर दिए ,ठाकुर के हवस मिटाने के लिए उसके आदमी लड़की लेने आ चुके थे,आते ही उन्होंने दो तीन गोली आसमान में चला दी ,वो अभी सरपंच के ही घर के सामने थे जो की कालिया का पिता था ,
“अबे सरपंच निकल बाहर ,ठाकुर के पास कोई भी लड़की अभी तक क्यों नही पहुची …”
गरजती हुई आवाज से पूरा गांव ही गूंज गया ,नवजवानों ने पहले ही घात लगा लिया था ,वो बस इसी इंतजार में थे की कब वो लोग आये और उनपर हमला किया जाए ,20 युवक अपने हथियार के साथ कोई 10 बन्दूकधारी गुंडों का मुकाबला करने को तैयार थे ,कालिया ने एक पेड़ के ऊपर से अपने साथी को संकेत किया और उसके साथी जहर में अपने तीर को डूबा कर सीधे उस हट्टे कट्टे गुंडे के ऊपर निशाना साधा लेकिन चलाया नही ,तब तक बाकी के तीरंदाज भी अपने अपने जगह पर तीर कमान सम्हाले खड़े हो चुके थे ,कालिया के एक इशारे पर वँहा तीरों की बारिश को गई ,चीखे गूंजने लगी थी की कुछ युवक कुल्हाड़ी और लोहे के रॉड लेकर गुंडों के ऊपर टूट पड़े ,सभी इतने गुस्से में थे की उनके धड़ो से सर अलग कर भले की नोक मे लगा दिया गया था ,उत्साह उन्माद में बदल गया था और अपनी पहली जीत पर कालिया खून को अपने चहरे में मल रहा था ,,
सालो की दासता का अंत और आजादी की शुरुवात का जश्न मनाया जा रहा था ,घोड़े और बंदुखों को अपने पास रख लिया गया और एक घोड़े पर उसी गुंडे के सर को बांधकर ठाकुर के हवेली की ओर भेज दिया गया ……
पूरे गांव में मानो खुसी की लहर दौड़ गई थी ,लेकिन एक बूढ़ी आंख अभी भी चिंतित थी ,वो कालिया के पिता और गांव के सरपंच थे और कालिया के इस विद्रोह से उठाने वाली कत्लेआम को सोच कर सिहर जा रहे थे ………..

17
कालिया की एक हरकत ने आग की ज्वाला भड़का दी थी ,रातों रात ये चर्चा आम हो चुकी थी कि किसी गांव के नवजवानों ने ठाकुर के लोगो को मार डाला ,और ना सिर्फ मारा बल्कि एक गाला काट कर ठाकुर को भी भेज दिया ,
इस हरकत से बाकी के सभी गांव के उन युवकों में जो की अभी ठाकुर की मजदूरी करते थे अब वो भी अपनी कायरता का अहसास करने लगे थे,
उन्हें भी लगने लगा था की वो अपने घर की औरतो की इज्जत को बचने के लिए अपनी जान भी दे देंगे ,और ठाकुर के बंधवा मजदूरों ने रातों रात ही विद्रोह कर दिया ,ठाकुर के कई लोग मारे गए वही ठाकुर ने भी अपना जोर लगाना शुरू कर दिया था ,उसने पुलिस की भी मदद ली और पुलिस ने आकर मजदूरों पर गोलियां चला दी जिससे कुल्हाड़ी और तीर कमान रखे कई लोग मारे गए ,खूनी खेल को वही दबा दिया गया और सरकारी तंत्र को पैसा और ख़ौफ़ के बल में ठाकुर ने खरीद लिया ,एक जीत से ठाकुर भी अहंकारी हो गया था और अब वो पुलिस की सहायता से कालिया और गांव वालो को सबक सिखाना चाहता था …….
इधर
“कालिया हमारी देखा देखी ठाकुर के पास रह रहे मजदूरों भाइयों ने भी ठाकुर के लोगो पर हमला कर दिया लेकिन सभी मारे गए ,ठाकुर के 20 लोगो को मार दिया था लेकिन ठाकुर ने पुलिस बुला दी और हमारे भाइयों को गोलियों से छल्ली कर दिया गया ,लगभग 50 मजदूर मारे गए …...कई घायल भी है ,एक ही रात में सब हो गया ,और आज इंस्पेक्टर और ठाकुर के लोग हमारे ऊपर टूटने वाले है ,हमारे एक फैसले से तबाही ही तबाही मचने वाली है ……”
कालिया अपने साथी की बात से गंभीर हो गया था ,अभी 3 घंटे ही हुए थे उसे ठाकुर के लोगो को मारे हुए रात अभी भी बाकी थी और उनके पास सिर्फ 10 बन्दूखे थी ,वही ठाकुर के पास पूरी फ़ौज थी ,अब कत्लेआम होना स्वाभाविक था ,साथ ही उसे अपने परिवार का भी डर था ,गांव की और भी लड़कियों का भी डर था ,लेकिन वो अपने फैसले से मुकर भी तो नही सकता था ,ना ही डरने का समय था ,अब तो उसे मासूम जिंदगियों को लूटने से बचना था ……..

वो उठा
“इससे पहले की वो हमपर हमला करे हमे उनपर कर देना चाहिए ,उन्हें मौका ही नही देना है सम्हालने का …”
कालिया ने अपने दोस्तो को तुरंत ही इकठ्ठा किया जिनकी संख्या अब और भी बढ़ गई थी ,वो 20 से 50 हो चुके थे आसपास के गांव के लोग भी उनके साथ हो चुके थे ,वो कुछ को गांव में छोड़कर अपने बाकी साथियों के साथ निकल गया ,उसका अगला मुकाम था पुलिस स्टेशन …
इंस्पेक्टर ने पहले ही पास की बटालियन से सिपाही बुला लिया थे …
“कालिया आज तो खून की होली खेलने वाले है ये लोग,देखो पुलिस के कितने लोग है सभी तैयारी कर रहे है साथ ही ठाकुर के भी आदमी है ,सभी हमारे गाँव की ओर जाने वाले है …”
कालिया के साथी की बात से सभी थोड़े डर गए थे ,लेकिन कालिया के चहरे में शिकन तक नही थी ,उन जैसे पुलिस के लोगो में से एक को पहचान कर अपने दोस्तो से कहा ,
“ये तो तिवारी भैया है ना ...पास के गांव वाले ,इन्हें कैसे भी करके मेरे पास लाओ “
“कालिया वो भी अब पुलिस वाला है “
“तो क्या हुआ है तो हमारे ही बीच के हमारी बात को समझ पाएंगे ,आखिर इनकी भी तो बहु बेटी,मा होगी जिनकी इन्हें फिक्र हो “
थोड़े देर में ही एक कंकड़ से तिवारी का ध्यान आकर्षित किया गया और जैसे ही तिवारी ने गांव के लोगो को देखा वो किसी बहाने से झड़ियो के पास आ गया
“भइया गांव वालो की जिंदगी आपके हाथो में है “
तिवारी कालिया को बेहद ही गुस्से से घूर रहा था
“ये सब कुछ तुम्हारे कारण हो रहा है और मैं क्या कर सकता हु मैं एक छोटा सा सिपाही ही तो हु “
“आप ही सोचो की अगर आपके बहन पर ये बात आती तो आप क्या करते ,भैया साथ दीजिये आप बहुत कुछ कर सकते हो “
तिवारी सोच में पड़ गया था
“मुझे बस इंस्पेक्टर तक पहुचाइए,ये इंस्पेक्टर ही है जो की ठाकुर का कुत्ता है अगर वो ही खत्म हो जाए तो पुलिस भले ही हमे ढूंढेगी लेकिन यंहा तुरंत ही बड़े अधिकारी जरूर आ जाएंगे और ठाकुर कुछ भी नही कर पायेगा ,”
तिवारी जैसे आग बबूला हो गया
“सालो तुम अपने को समझते क्या हो ,बड़े अधिकारी को क्या ठाकुर नही खरीद सकता गांव के गांव तुम्हारे कारण खत्म कर दिए जाएंगे “
“हा लेकिन अगर उन्हें पता हो की मैं कहा हु तो वो मुझे ढूंढेंगे ना की गांव वालो को परेशान करेंगे ,और अगर साथ में अखबार वाले भी हो जाए तो सब कुछ ठिक हो जाएगा “
तिवारी सोच में पड़ गया था
“अगर आज रात तक इन्हें गांव में जाने से रोक लिया जाए तो एक आदमी है जो की हमारी मदद कर सकता है ..

”
तिवारी को जैसे कुछ याद आ गया था
“कौन है एक सनकी लेकिन काम का आदमी मैं उसे शहर में मिला था वो तुम्हरी मदद जरूर कर सकता है ,वो अगर आ जाए हमारे साथ तो पुलिस गांव में जाकर तबाही नही करेगी लेकिन हा तुम्हे जरूर यंहा से कही दूर भागना पड़ेगा “
सभी मिलकर एक प्लान बनाते है

18
“हजूर इतनी रात को ठाकुर का काम हद हो गई …”तिवारी इंस्पेक्टर के पास आकर कहता है
“क्या करे इस साले की नॉकरी भी बजानी पड़ती है ,पैसा तो यही देता है…चलो गांव में धावा बोलने की तैयारी करो आज तो मजा आ जाएगा ,गांव की हर औरत को नंगा करूंगा वो भी अपने हाथो से “
इंस्पेक्टर की हैवानियत भरी हँसी सुनकर तिवारी को ऐसा लगा की अभी उसे जान से मार दे लेकिन फिर भी उसने खुद को काबू में कर लिया था……..
“हजूर वो सब तो ठिक है लेकिन गांव के लोग भड़क गए तो हमारी खैर नही”
तिवारी की बात सुनकर इंस्पेक्टर को जोरो से हँसी आयी
“वो साले गवार हमारा क्या कर लेंगे ,हमारे पास ताकत है और ठाकुर के आदमी भी तो हमारे साथ है “
तिवारी जबरदस्ती हंसा
“वो तो है ,क्यो ना जाने से पहले थोड़ा सा जश्न मना लिया जाय ,साले गांव वाले रातों रात गांव छोड़कर जाने के फिराक में थे हमने पकड़ लिया ,एक मस्त लौंडिया हाथ आ गई है “
तिवारी की बात सुनकर इंस्पेक्टर की आंखों में चमक आ गई
“कहा है “
“खास हुजूर के लिए छिपा के थाने के पीछे झड़ियो में रखी है ,अगर इन लोगो के हाथो में आ गई तो सोच लो क्या हाल होगा “
इंस्पेक्टर ने तिवारी की तारीफ की और एक शराब की बोलत से दो घुट पीकर सीधे ही झड़ियो की तरफ सब से नजर बचा कर चल दिया ,...
“उह उह “इंस्पेक्टर कुछ बोलना चाहता था लेकिन उसके मुह से कुछ भी नही निकल पा रहा था ,कालिया ने उसके मुह को जोरो से दबोच लिया था ..
‘खचाक ‘
चाकू की नोक इंस्पेक्टर के पेट में घुसी और पूरी अंतड़ियों के साथ बाहर आ गई ,साथ ही एक जोर का वार उसके गले में किया गया और लहू की धार का एक फुहारा सा फुट गया …
इंस्पेक्टर तड़फता हुआ जमीन में गिर पड़ा …….
घोड़ो के आवाज से सबका ध्यान उस ओर गया ..
“वो देखो साले भाग रहे है”
तिवारी ने जोरो की आवाज लगा दी ,ठाकुर के आदमी के साथ साथ पुलिस वाले भी उस ओर देखने लगे ,
“ये साले है कौन और यंहा क्या कर रहे है …”
एक हफते हुए पुलिस वाले ने पूछा ..
तिवारी अपने चहरे की मुस्कान को बड़ी ही मुश्किल से रोक पाया था ..

“क्या पता ऐसे इंस्पेक्टर साहब कहा है …”तिवारी ने जोरो से कहा ,सभी लोग इंस्पेक्टर को ढ़ंढने लगे कुछ ही देर में उसकी लाश भी मिल गई ,तिवारी ने जल्दी से हेडक्वार्टर को फोन लगा दिया ,इससे पहले कोई कुछ समझ पता तिवारी फिर से चिल्लाया
“सालो तुम लोग कर क्या रहे हो पीछा करो उसका “
कालिया अपने घोड़े में बहुत दूर निकल चुका था ,घने जंगल में जो घोड़े ठाकुर के आदमियों के पास थे वो उनमे ही भाग पड़े,अब बस पुलिस वाले बच गए थे ,इंस्पेक्टर की इस तरह से मौत की खबर से महकमे में हड़कंप मचा दिया था और SP खुद हाल जानने के लिए निकल पड़ा था ,ठाकुर भी ये सुनकर चिंतित हो गया था क्योकि उसे गाँव को तबाह करना था और उसके सारे आदमी किसी अनजान व्यक्ति के पीछे भाग रहे थे ……
***********
घने जंगलों में ठाकुर के आदमी कालिया का पीछा करते हुए खो से गए थे दूर दूर तक कही भी उसका कोई निशान नही दिख रहा था ,बस घोड़ो की आवाज आ रही थी ,बड़े बड़े पेड़ और अंधेरे में वो जैसे रास्ता ही भटक गए हो ,अब घोड़े धीरे हो चुके थे और वो वापस जाने की सोच रहे थे लेकिन उन्हें नही पता था की वो एक जाल में फंस चुके है जिसे कालिया और तिवारी ने मिलकर बनाया है …
अचानक एक रस्सी से लटकता हुआ पत्थर का गोला आया और सीधे एक घुड़सवार के सर को चकनाचूर कर दिया …
वो चीख भी नही पाया था की उसका शरीर धड़ाम से गिर गया …
सभी लोग पलटे और उसकी ये दशा देख कर अंधाधुन गोलियां चलाने लगे …
कुछ देर में ही वँहा शांति थी …
“मुझे तो लगता है की कोई हमे फंसा रहा है “
एक आदमी धीरे से दूसरे से बोला कि अचानक ही कई तीर आकर सीधे लोगो के सरो के आरपार होने लगे ,बस तीरों की आवाजे आ रही थी जो की बेहद वेग से और पास से चलाई जा रही थी ,घने जंगल के सन्नाटे को चीख जैसे चिर रहे थे ……
फिर से गोलियां चलाई गई लेकिन सब बेकार ……
बचे हुए लोग अपने घोड़े से उतर कर जमीन में आ गए थे ख़ौफ़ से उनका जिस्म और मन कांप रहा था ,
“कौन है कौन है …”
एक हट्टा कट्टा आदमी जो कभी ठाकुर के संरक्षण में गरजता था आज किसी चूहे की तरह बोल रहा था ,
कालिया गरजा
“तेरा और ठाकुर का काल हु मैं मादरचोद …”
‘धाय ‘उसने पहली बार गोली चलाई और सीधे उसका सर उड़ा दिया फिर से तीर चलने लगे और बाकी के लोग भी कीड़े मकोड़े की तरह उस जाल में मर गए …………
सभी बन्दूखे और घोड़े उठा ली गई ,अब कालिया के पास अच्छे खासे हथियार थे और घोड़े भी ,लेकिन उसका सबसे बड़ा हथियार था जो की आज ही उसे पता चला था वो था ये जंगल …
जंगली होने का जो फायदा उसे आज मिला था उसे वो अच्छे से समझता था जंगल के अंदर उसे हराना किसी के लिए भी बहुत मुश्किल होने वाला था क्योकि वो सभी इस जंगल में ही बड़े हुए थे ,अब वक्त था ठाकुर की सत्ता को गिरने का लेकिन उससे पहले कालिया को अपने परिवार को भी बचाना था

19
तिवारी की बात सुनकर अजय जैसे नींद

से जागा …
वो अभी शराब के नशे में था लेकिन इतना भी नही की उसे कुछ समझ ना आ रहा हो वही तिवारी नशे में कुछ ऐसा कह गया था जो उसे नही कहना चाहिए था …
“तो तिवारी जी अपने कालिया की मदद की जो बाद में सब के सर का दर्द बना था ,कालिया डाकू ,,,मोंगरा का गुरु कालिया ????”
तिवारी को अपनी गलती का अहसास तो हुआ लेकिन फिर भी बोले हुए शब्द तो वापस नही लिए जाते …
“हा साहेब लेकिन आप ही सोचो की उस समय मैं कर भी क्या सकता था वो इंस्पेक्टर भी कमीना था और ठाकुर तो है ही कमीना अगर कालिया ने हथियार नही उठा लिया होता तो वो गांव की सभी औरतो को धंधे वाली बना देता …”
तिवारी की बात से अजय के दिल में ठाकुर के लिए एक बहुत ही तेज नफरत का भाव जागा लेकिन उसे पता था की उसकी ड्यूटी क्या है और अब उसे ये भी पता चल गया था की डाकुओं को पुलिस की तरफ से मदद करने वाला कौन है …
“हम्म तो तिवारी जी अपने जो किया सही ही किया शायद आपकी जगह मैं होता तो मैं भी यही करता ….”
अजय ने एक घुट अंदर किया ..वो तिवारी से सच उगलवाना चाहता था और सच तभी बाहर आता जब तिवारी को लगता की उसकी बात का अजय पर सही असर हो रहा है …
“तो तिवारी जी वो शख्स कौन था जिसने गांववालो की पुलिस से बचने में मदद की और क्या इसके बाद भी ठाकुर ने गांव में दहसत फैलाने की कोशिस की ?“
तिवारी एक गहरी सांस लेता है और पास रखे बोतल से एक जाम बना कर अपने हलक के अंदर करता है …
“ह्म्म्म साहब वो शख्स तो उसी दिन आ गया ,sp साहब और ठाकुर भी पधारे ठाकुर ने अपना रंडी रोना रोया और कुछ पैसे sp की झोली में डाल दिए ,लेकिन डॉ चुतिया जी तब तक पधार चुके थे …”
“डॉ चुतिया ?????? वो जो की आजकल प्रेस खोलकर बैठे है ”
अजय की आंखे बड़ी हो गई थी …
“हा वही पहले तो युवा दल के नेता हुआ करते थे ,मेडिकल की पढ़ाई हो चुकी थी लेकिन फिर भी छात्र संघ में बड़ा दबदबा था ,मैं उन्हें पहले ही मिल चुका था ,उन्हें एक फोन करने की देरी थी की वो खुद भी पधार गए और साथ ही अखबार के लोगो को भी ले आये ,बेचारे sp चाहते हुए भी कुछ नही कर पाए लेकिन फिर भी कई गांव वालो से पूछताछ की गई और जो सामने आया वो सब अखबारों की हेडलाइन बन गई ठाकुर के सारे कारनामो का भांडा फुट गया,ठाकुर जैसे गांव के लोगो को भूल ही गया था क्योकि केंद्र से भी उसके ऊपर प्रेसर आने लगा था,वो खुद को बचने में ही लगा रहा लेकिन फिर भी उसकी दहसत कम नही हो रही थी आखिर पुलिस भी तो उसकी ही थी ,लेकिन फिर भी वो चुप ही था,”
अजय तिवारी की बातो को ध्यान से सुन रहा था ,की दिन की पहली किरण ने खिड़की से दस्तक दी …….

दोनो के सर भारी हो रहे थे और आंखे बंद होने लगी थी…
…

*************
दोपहर जब अजय उठा तो तिवारी जी जा चुके थे ,अजय के मन में रात की सब बाते गूंज गई थी …
आखिर कालिया और मोंगरा का संबंध क्या है ???
वो इसी सोच में डूबा हुआ तैयार हुआ और पुलिस स्टेशन चला गया ,तिवारी जी आज नजर नही आ रहे थे …
“तिवारी जी कहा है ..??”
अजय ने एक दूसरे कांस्टेबल से पूछा
“क्या पता सर कह के गए है की अगर सर आये तो उन्हें बोल देना की चम्पा ने याद किया है घर आयी थी लेकिन सोए थे …”
जैसे अजय के लिए इस थाने में दो ही केस थे एक ही चम्पा और दूसरी मोंगरा ,,लेकिन वो बेचारा तो अब खुल कर प्यार भी नही कर सकता था क्योकि उसे ये भी नही पता था की आखिर चम्पा कौन है और मोंगरा कौन है ……….
वो वही झरने के किनारे पहुचा ,
दोपहर का समय था और बहुत ही गहरी शांति वँहा फैली हुई थी ..
वँहा उस समय कोई भी नही था वो जाने को पलटा ही था की उसे चिरपरिचित झम झम की आवाज आनी शुरू हो गई उसके चहरे में एक मुस्कान खिल गई ,वही जंगल के लिवास में आयी हुई वो परी उसके सामने थी ,अजय के मन की हर शंका जाने कहा भाग चुकी थी वो जो भी हो लेकिन अजय उससे बस वैसे ही प्यार करना चाहता था ,उसके नशीले आंखों की मस्तियो में खो जाना चाहता था,उसके उन्नत वक्षो से दूध चखना चाहता था ,उसके भरे हुए होठो के मदमस्त प्यालों से झलकती हुई शराब को पीना चाहता था ,उसके रेशमी लहराते हुए केशुओ में उलझना चाहता था ,उसके कमर के नीचे और जांघो के बीच की छोटी सी सुराही को सोच कर अजय के तन मन में एक आग दौड़ गई ,वो मन ही मन सोचने लगा
‘मा चुदाये वो कोई भी हो मुझे क्या दोनो ही तो मुझे कितना प्यार देती है और दोनो का ही प्यार तो मुझे सच्चा लगता है क्यो ना मैं दोनो के साथ हो लू ,और साथ रहकर ही जानने की कोशिस करू की वो कौन है …’
अजय की वासना उसपर हावी थी ??? नही सिर्फ वासना नही बल्कि वो प्यार जो उसे इन लड़कियों से मिला था ,जो उसे जमाने में कही नही मिल पाया था ,वो सिर्फ जिस्म का सुख नही था जिस्म के ऊपर भी मन के ऊपर भी वो रूह तक की संतुष्टि उसे मिली थी वो इसे यू ही नही खोना चाहता था सिर्फ इसलिए की उसे नही पता की वो कौन थी …
वो उसे प्यार भरी निगाहों से आते हुए देखता रहा ..
वो मचलते हुए उसके पास आ रही थी उसके कमर की हर लचक में अजय का दिल भी मचल जाता था,वो पास आई इतना की दोनो की सांसे ही टकराने लगी और
चटाक …
एक जोरदार तमाचा अजय के गालो में पड़ा ,चम्पा के आंखों में आंसू थे ..
अजय चम्पा के इस कारनामे से हड़बड़ा ही गया था …
“क्या क्या हुआ तुम्हे “
“क्या हुआ पूछते हो शर्म नही आती तुम्हे मेरी बहन के साथ ...छि ..वो भी उस नागिन के साथ जिसे पकड़ने तुम आये हो मैने रात में ही तुम्हे उसके साथ देखा था ,तुम और वो छि …”

अजय का दिल जोरो से धड़कने लगा ..

वो झल्ला गया था
“क्या छि कह रही हो मुझे कैसे पता चलेगा की कौन मोंगरा है और कौन चम्पा तुम दोनो ही तो एक जैसी दिखती हो तो क्या इसमें भी मेरा ही दोष है ..”
अजय जोरो से बोला था जिससे चम्पा दहाड़ मार कर रोने लगी ..
“वो कुतिया कभी नही चाहती की हमारा मिलन हो इसलिए उसने कल गोली चलवाई थी मुझे तो पहले ही शक था लेकिन तुम्हे उसके साथ देखकर ….”
“अरे पगली तो तुमने उसी समय क्यो नही बतलाया “
“कैसे बताती तुम्हे उसके साथ देखकर मेरा तो खून ही जल गया था ,”
चम्पा ने इतनी मासूमियत से कहा की अजय का दिल उसके लिए पिघल गया और वो उसे अपने आगोश में खिंच लिया
“कुछ कहने की जरूरत ही नही तुम्हे सोच रहा हु की तुम्हे एक ऐसी चीज दे दु जो सिर्फ तुम्हारे पास रहे “
अजय की बात से चम्पा के चहरे में शर्म के भाव गहरा गए ,और वो दबी हुई हँसी में हँसने लगी
“ऐसे क्यो शर्मा रही हो “
अजय को भी थोड़ा आश्चर्य हुआ की आखिर उसने ऐसा क्या कह दिया था ,
“क्यो ना शरमाऊं तुम बात ही ऐसा कर रहे हो ,”अजय फिर से चकरा गया
“और अभी मैं मां नही बनूंगी वो सब शादी के बाद “
ओह तो ये पगली ये चीज सोच कर बैठ गई थी ,अजय को चम्पा की बात और सोच पर हँसी आयी लेकिन साथ ही साथ बहुत सारा प्यार भी आया ,उसने चम्पा को और भी जोरो से जकड़ लिया
“अरे पगली मैं बच्चे की बात नही कर रहा कोई ऐसी चीज जो तुम मुझे बोलो तो मुझे पता लग जाए की वो तुम हो कोई और नही “
चम्पा का चहरा जैसे मुरझा गया जिसे अजय समझ भी गया
“तो मेरी रानी को बच्चा चाहिए “
चम्पा ने हाथों से उसे मारा
“हर लड़की चाहती है की वो मां बने खासकर जिसे मा बाप का प्यार नसीब नही हुआ हो ,...”उसकी आंखों में आंसू आ गए थे
“ओह मेरी जान ...मैं तुम्हे दुनिया की हर खुसी दूंगा बस पहले वो तुम्हारी बहन मेरे हाथ लग जाए ,बहुत सर दर्द कर रखा है उसने “
“हा जब उसे चूम रहे थे तब तो सर दर्द नही दे रहा था तुम्हारा “
चम्पा का मुह फिर से फूल गया था ,अजय को उसपर हँसी आ गई और उसने उसके होठो पर अपने होठो को रख दिया जिसे धीरे धीरे करके ही सही लेकिन चम्पा भी चूमने लगी थी …
“जान 4577 “
“ये क्या है ..”
“जब तुम ये बोलोगी तो मैं समझ जाऊंगा की ये तुम ही हो मोंगरा नही “
चम्पा के चहरे में मुस्कान आ गई और उसने अजय के सर को जोरो से पकड़ कर उसे अपनी ओर खिंच लिया ,दोनो के होठो मिल गए थे जो की बहुत देर तक मिले ही रहे ,लार एक दूसरे से लिपटने लगी थी और चम्पा के जिस्म के एक मात्रा कपड़े को अजय उतारने लगा था ,देखते ही देखते दोनो के जिस्म नंगे हो चुके थे और दोपहर के सही भी दोनो नंगे जिस्म दुनिया की परवाह किये बिना ही झील में उतर गए थे……….
सांसे तेज हो रही थी और जिस्म की तड़फन बढ़ने लगी थी …
अजय ने चम्पा के गले में किस किया चम्पा के शरीर में जैसे कोई करेंट दौड़ गया था ,वो अजय को और भी जोरो से जकड़ने लगी थी ….

चम्पा के कमर के नीचे की गोल गोल चूतड़ों में हाथ फेरते हुए उसके कोमलता के अहसास से अजय की आंखे बंद हो रही थी ,वही हाल चम्पा का भी था,
वो भी मदहोश सी हो रही थी,आंखे तो दोनों की ही बंद थी और सांसे तेज ,धडकनों की शहनाईयां भी तेजी से बज रही थी,चम्पा को भी अजय के लिंग का अहसास हो रहा था जो उसके उन्नत कुलहो पर हलके हलके चोट कर रहा था,इस घिसाई का मजा लेते हुए दोनों ही भूल गए थे की वो झील में गले तक चले आये है ,दोनों ही जिस्म नंगे थे और पानी के ठंडक में भी गर्म हो रहे थे ,दोनों के ही पाँव गहराई की और जा रहे थे,पानी उन्हें सर तक डुबो गया था लेकिन हाय रे उस मोहोब्बत का नशा की किसी को होश भी नही था ,दोनों के होठ एक दूजे से मिल चुके थे और एक दूजे की जीभ को लपेटते हुए वो मुह की गहराई में जा रहे थे,सांसे बंद होने लगी तो वो एक दूजे के मुह से साँस लेने लगे थे ,चम्पा पलती और अजय के सीने में दबती चली गई ,एक दुसरे को उन्होंने मजबूती से जकड़ रखा था ,पानी के अंदर होने से साँस लेने में दिक्कत आने लगी थी लेकिन कोई भी दुसरे को छोड़ने को तैयार नही था ,और अजय ने अपने लिंग को चम्पा के योनी में धसाना शुरू किया और चम्पा का मुह खुल गया झील का ताजा पानी उसके मुह में भर चूका था जिसे उसने अगले ही पल अजय के मुह में धकेल दिया था ,
दोनों ही थोड़े बहार आये ताकि साँस ले सके ,जिस्म एक दुसरे में गड़े जा रहे थे ,कमर हलके हलके ही चल रही थी लेकिन स्वर्ग का सुख दे रही थी ,लिंग और योनी का घर्षण अभी भी पानी के अंदर ही हो रहा था,अजय ने चम्पा के कुलहो को दबोच रखा था वही चम्पा भी अपने हाथो से अजय के कुलहो को अपनी ओर और भी ज्यदा सटा रही थी ,
जब कमर ने रफ़्तार पकड़ी तो अजय चम्पा को गोद में उठा कर किनारे में ले आया और रेत में लिटा कर उसके उपर छा गया…
“आह मेरी जान ओह जान ओह “
चम्पा के मुह से सिस्कारिया निकलने लगी थी ,अजय भी उसके गालो को अपने दांतों से खा रहा था उसके वक्षो को अपने मुह में भरे जा रहा था और अपने कमर की गति को तेज और तेज किये जा रहा था ,दोनों के जिस्म भीगे हुए थे लेकिन फिर भी जिस्म की घर्षण से उत्पन्न पसीने से भी भीगे जा रहे थे …
होठो से लार बह कर एक दुसरे के जिस्म को और भी चिपचिपा कर रहे थे,सांसे जैसे अटकने को थी और दिल की धड़कने मानो रुकने को हो गई थी ,
दोनों ही अपने चरम पर आ चुके थे और बस झरने ही वाले थे ,
“मुझे भीगा दो मेरे राजा ,अन्दर तक भीगा दो मई आपकी गुलाम बन कर जीना चाहती हु”
चम्पा अपने चरम में पहुच कर अजय से आग्रह करने लगी जिससे अजय के जिस्म ने भी अपना बांध तोड़ दिया और तेज धारा के साथ चम्पा की योनी में बहता चला गया …………….

अजय और चम्पा किसी मनोहर सपने में खोए से झरने के किनारे गीले रेत में लेटे हुए थे ,एक दूसरे के जिस्म को सहला रहे थे मानो दुनिया में बस यही एक चीज है जो उनके लिये हो..
लेकिन सपना तो आखिर सपना ही होता है ,कभी ना कभी तो उसे टूटना ही होता है ,
दोनो के जिस्म अभी भी पानी में थोड़े डूबे हुए थे और थोड़े बाहर ,,अजय के तेज धक्के के कारण वो फिसलते हुए पानी में आ गए थे …
दोपहर का समय था और धूप की तेजी अब बदन को जलाने लगी थी ,अजय चम्पा को उठाकर एक पेड़ के नीचे ले आया साथ ही अपने कपड़ो को भी ,ऐसे तो चम्पा बदन में एक ही कपड़ा पहनती थी वो उसकी कुछ मीटर की साड़ी ..
अब अजय चम्पा की गोद में लेटा हुआ था और चम्पा उसके बालो को सहला रही थी ….दोनो ही किसी दुनिया में खोए हुए थे की अजय बोल पड़ा ..
“चम्पा आखिर ऐसा क्या हुआ था मोंगरा एक डाकू बन गई और तुम यंहा आ गई “
उसकी बात सुनकर चम्पा थोड़े देर के लिए चुप हो गई …
और अजय के बालो में उंगलियां फसाये सहलाती रही ,अजय के गालो में उसके आंखों का पानी आ टपका ,अजय उठ खड़ा हुआ और चम्पा के गालो को दोनो हाथो से पकड़ लिया और उसके गालो में अपने होठ लगा कर उसके आंखों से झरते हुए खारे पानी को अपने होठो से अंदर कर लिया …
“मेरी जान अगर तुम्हे इस बारे में बात नही करना है तो मैं तुमसे कुछ भी नही पूछूंगा “
अजय ने गंभीरता से कहा जिससे चम्पा के होठो में भी एक मुस्कान आ गई और वो उससे लिपट गई ..
“क्या बताऊँ यही तो समझ नही आता ,ठाकुर की ज्यादतियों के बारे में बतलाऊ या फिर मोंगरा के जिस्म की भूख के बारे में,या मेरे पिता के बदले के बारे में या मेरी माँ की फूटी हुई किस्मत के बारे में क्या क्या बतलाऊ तुम्हे कुछ समझ नही आता ……”
इतना कह कर चम्पा तो चुप हो गई लेकिन अजय को जैसे एक बहुत ही बड़ा शॉक लग गया ,ये चम्पा क्या कह रही थी ..
वो चम्पा की आंखों में झांकने लगा
“मुझे सब कुछ ही जानना है …..”
इस बार चम्पा अजय के गोद में लेट गई और अजय उसके बालो को सहलाने लगा ..
चम्पा ने बोलना शुरू किया

20
चम्पा की जुबानी आगे की कहानी

ठाकुर के आतंक की सीमा बढ़ने लगी थी वो हमारे गांव और आसपास के गांव की बहु बेटियों को अपने हवस का शिकार बनाने पर तुला हुआ था ,पुलिस भी उसके साथ थी वो ज्यादती पर उतर आया था तभी मेरे पिता ने ठाकुर के खिलाफ हथियार उठा लिया ..

मेरे पिता गांव के सरपंच के बेटे थे और बहुत ही बहादुर और गुस्सेल थे उनका नाम था कालिया जो की बाद में कालिया डाकू के नाम से प्रसिद्ध हुए …
वो जब गांव छोड़कर जंगलों में गए तब उनकी नई नई शादी हुई थी,मेरी माँ देखने में बहुत ही सुंदर थी पिता जी उससे बहुत प्यार करते थे लेकिन ठाकुर से विरोध करने पर उन्हें गांव छोड़कर जंगल में जाकर रहना पड़ा था ,वो वही से ठाकुर के खिलाफ साजिश रचा करते थे ,उन्होंने ठाकुर को फंसा दिया था उनका साथ कांस्टेबल तिवारी और डॉ चुतिया दे रहे थे……

फ़्लैशबैक स्टार्ट
कालिया के विद्रोह से ठाकुर की मानो रीढ़ ही टूट गई थी ,जो लोग उसके वफादार थे कालिया उन्हें ढूंढ ढूंढ कर मारता था ,ठाकुर बौखला गया था और कालिया के परिवार पर हमला करना चाहता था लेकिन कालिया को मानो पहले से पता था की वो उसके परिवार को निशाना बनाएगा इसलिए उसने अपने परिवार को अपने पास बुला लिया था ,लेकिन जंगल की भागादौड़ी और भयानक माहौल में वो अपने परिवार को नही रख सकता था,खासकर उसकी फूल सी पत्नी और बहन दोनो जवान लडकिया जिसे कालिया सबसे ज्यादा प्यार करता था लेकिन ये ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी थे, इनके इज्जत की रक्षा करना उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती भी थी ,वो उन्हें एक आदिवासी काबिले के सरदार के पास रख कर अपना काम किया करता था ,..
इधर
ठाकुर ने कई नए लोगो को अपने साथ शामिल करना शुरू कर दिया ताकि वो कालिया का मुकाबला कर सके और उसमे सबसे खास था परमिंदर ..

परमिंदर बहुत ही सुलझा हुआ व्यक्ति था जो की ताकत में किसी से कम नही था ,वो ठाकुर के एक दोस्त के पास काम किया करता था वो शादीशुदा था और उसका एक बेटा भी था जिसका नाम बलवीर था (जो बाद में मोंगरा के गिरोह में जा मिला ) परमिंदर के पास ताकत के साथ साथ दिमाग भी तेज था इसलिए ठाकुर उसे पसंद करने लगा था ,परमिंदर की सूझ बुझ ने ठाकुर को कारोबार में बहुत फायदा पहुचाया था लेकिन उसकी असली परेशानी थी कालिया ……
“ठाकुर साहब मेरी बात मानो तो कालिया के बारे में सोचना छोड़कर आप उसके बीवी और बहन को ढूंढो “
परमिंदर ठाकुर के लिए जाम बना रहा था ,
“लेकिन कैसे साले ने ना जाने कहा उन्हें छिपा कर रखा है मिलती ही नही “
“तो कोई मुखबिर कालिया के गिरोह में क्यो नही भेज देते आप ऐसे लोगो की कमी तो नही जो पैसे के लिए अपने गांव से दगा करेंगे “
ठाकुर ने एक नजर परमिंदर की ओर देखा
“तुम्हे क्या लगता है की मैं गांव वालो को तकलीफ देता हु “
परमिंदर जोरो से हँस पड़ा
“मैं स्वामिभक्त हु ठाकुर साहब जो बोलोगे करूंगा चाहे वो सही हो या गलत लेकिन मुझे पता है की कालिया क्यो डाकू बना है ,आप किसी डाकू से नही लड़ रहे हो आप अपने अहंकार से पैदा हुए हैवान के कारण मिले श्राप से लड़ रहे हो …”
परमिंदर की बात सुनकर ठाकुर कुछ देर के लिये बस उसे देखता रहा लेकिन कुछ भी ना कह सका क्योकि वो जानता था की परमिंदर सही कह रहा है और साथ ही ये भी जानता था की उससे ज्यादा खुलकर कहने वाला और सही सलाह देने वाला साहसी आदमी उसे नही मिलेगा ….
परमिंदर की सलाह मानकर ठाकुर ने एक आदमी ढूंढ ही लिया और कालिया के गिरोह में उसे शामिल भी करवा दिया ..
और वही हुआ जो की ठाकुर चाहता था कालिया की कमजोरी का पता ठाकुर को चल गया था ………...
“हम कहा है तुम लोग कौन हो ,और हमारे कपड़े ...ये किसने बदले ”
डरे हुए आवाज में कनक(कालिया की बहन ) कह रही थी..
पास ही बैठी रोशनी (कालिया की बीवी) भी डरी हुई थी लेकिन उसे सब कुछ समझ आ रहा था की आखिर उनके साथ क्या हुआ है ,वो एक बड़े से कमरे में थे जंहा बीचों बीच फूलों से भरा हुआ बड़ा सा बिस्तर था,पास ही सेविका के रूप में खड़ी हुए कुछ 5 लडकिया थी ,
कनक और रोशनी दोनो के ही आदिवासी महिलाओं के कपड़े निकाल दिए गए थे उन्हें नई महंगी और रेशमि पारदर्शी साड़ी पहनाई गई थी लेकिन वो भी बस साड़ी ही थी उसके अलावा और कुछ भी नही ..
उस साड़ी में भी उनका यौवन पूरे का पूरा दिख रहा था,वो दोनो ही काम की देवियां लग रही थी लेकिन डरी हुई ,भविष्य के खतरे का आभास उन्हें हो गया था वो सहमी हुई थी लेकिन उन सेविकाओं को देख कर उन्हें लगा की ये भी उनकी ही तरह जबरदस्ती यंहा लायी गई होंगी …
“आप ठाकुर साहब की हवेली में है ,कल रात ही आपलोगो को यंहा लाया गया था,ठाकुर साहब ने कहा है की अपदोनो हमारी मेहमान है और दोनो की खूब जतन की जाए ..

”
एक बहुत ही सुंदर सी लड़की ने बड़े ही प्यारे शब्दो में कहा ,उसकी नजर नीची थी मानो वो उनकी ही दासी हो ,ठाकुर उनके साथ ऐसा व्यवहार करेगा ये तो दोनो ने ही नही सोचा था उन्हें तो लगा था की अगर ठाकुर के हाथो में आ गए तो फिर जिस्म को नोच कर खा दिया जाएगा…
लेकिन ठाकुर जिस्म को नोचने ही वाला था भले ही इस तरह ही क्यो ना हो ….
“आप लोग कुछ लेंगे “
फिर से उसी लड़की ने कहा
“हमे अपने घर जाना है “
कनक बोल उठी ,सभी के सर पहले से ज्यादा झुक गए लेकिन किसी ने कुछ भी नही कहा ..
रोशनी ने कनक को समझाया की वो मुसीबत में फंस चुके है और अभी उन्हें सम्हल कर कदम उठाना पड़ेगा ताकि यंहा से निकल जाए और अब तक ये बात कालिया को पता चल गई होगी वो हमे बचा लेगा ……
दोनो को ही कालिया की उम्मीद थी लेकिन ना जाने आगे क्या होने वाला था …..
“मालकिन आप दोनो नहा लीजिए ठाकुर जी आते ही होंगे”
उस लड़की की बात सुन कर दोनो ही दंग रह गए
“हम तुम्हारी मालकिन नही है “
रोशनी ने जोरो से कहा
“हमे आपको मालकिन कहने और गुलाम की तरह रहने का ही हुक्म मिला है ,आप कृपया नहा ले वरना ठाकुर साहब हमारे ऊपर गुस्सा होगें”
ठाकुर ये क्या कर रहा था या क्या करना चाह रहा था ,रोशनी समझने की कोशिस कर रही थी लेकिन गरीबी में रही कनक को ये वैभव बहुत ही भा रहा था ,उसकी ललचाई नजर रोशनी से बच नही सकी .
“ये तुम्हारे भाई के बैरी का घर है ,ये सभी सुख हमारे लिए मिट्टी जैसे है “
रोशनी ने कनक को झटकते हुए कहा ,वो भी हड़बड़ाई
“लेकिन भाभी सुख तो है ना …”कनक के सपाट बोल से रोशनी भी असमंजस में पड़ गई ,ना ही पिता ने ना ही पति ने सुख के नाम पर दिया ही क्या था उसे ,जीवन एक काटे की तरह ही बिता था ..ऐसा नही था की रोशनी कालिया से प्रेम नही करती थी लेकिन फिर भी ना ही वो उसके साथ ज्यादा वक्त बिता पाई थी ना ही सांसारिक जरूरतों को ही वो पूरा कर पाया था,लेकिन वो कालिया का बेहद सम्मान करती थी उसकी ही इज्जत की रक्षा के लिए कालिया ने हथियार उठाया अपने परिवार और जान की भी नही सोची …
“तेरे भइया ने हमारी इज्जत की रक्षा के लिए अपने जान की भी नही सोची …”
रोशनी के मन में चल रही बात उसने कह ही डाली …
“लेकिन ठाकुर तो अब भी हमारी इज्जत उतरेगा ना ...भाभी मैं नही कहती की भइया गलत है लेकिन सोचो क्या सचमे वो हमे बचा पाएंगे,और क्या ठाकुर हमे ऐसे ही जाने देगा,तो क्यो ना हम इन सुखों का ही मजा ले ले जब तक हम यंहा है ...

क्योकि फिर तो जीवन में हमे ये कभी देखने भी नही मिलेगा “
कनक की बात से रोशनी के आंखों में आंसू छलक गए थे ,कनक का गला भी बैठ गया था लेकिन वो खुद को सम्हालते हुए बोली
“भाभी मैं अपना बलात्कार करवाना नही चाहती,हा अगर कुछ होगा तो मैं भी उसका मजा लुंगी “
इतना ही कहकर कनक स्नानगृह की ओर चली गई ,और रोशनी अब भी अपने आंखों में आंसू लिए हुए अपनी ननद की बातो को सोचती रही ,सच में उनकी किस्मत ही थी की ठाकुर उनसे ऐसे पेश आ रहा था वरना वो उन्हें किसी रंडी से ज्यादा अहमियत नही देता वो भी बस जिस्म की भूख मिटाने के लिए ……

21
इधर
कालिया अपने माता पिता के लाश के सामने घुटने के बल बैठा था ,
“कालिया हरिया का कही भी पता नही लगा “
एक आदमी हफते के उसतक पहुचा
“सरदार वो अपने ईमान का सौदा करके भाग गया है ,उसके घर में भी बीवी और बहन है उन्हें उठा कर लाता हु साले से उसके करनी का बदला लेंगे “
एक दूसरा आदमी गरजा
“मैं किसी का सरदार नही हु मैं कालिया हु तुम्हारा कालिया ,और हरिया की बहन मेरी भी बहन है ,वो मेरे गांव की बेटी है ,उसकी बीवी मेरे गांव की बहु है और मेरी भी बहु है ,किसी ने उनको छूने की कोशिस भी की तो मैं उसके हाथो को काट दूंगा
कालिया गरजा और सभी चुप हो गए
“हरिया ने जो किया है उसकी सजा उसे मिलेगी ,और ठाकुर ने जो किया है उसकी भी उसे सजा जरूर मिलेगी …”
“लेकिन कालिया पहले हमे भाभी और कनक को बचने की सोचना चाहिए ना जाने वो उनके साथ कैसा सलूक करेगा “
कालिय ने एक गहरी सांस ली ,
और कुछ सोचने लगा ,
“आज ही धावा बोलेंगे उसके हवेली में “
कालिया बोल उठा
“लेकिन कलिया वँहा जाना अपने हाथो से अपनी जान को दाव पर लगाना है तुम तो जानते हो ठाकुर की हवेली हवेली नही किला है ,कोई नही बच पायेगा “
कालिया फिर से सोच में पड़ गया क्योकि बात तो सही ही थी
“तो सिर्फ मैं जाऊंगा …”
“तुम पागल हो गए हो क्या वँहा तुम अकेले ...तुम्हारी जान हम सबके लिए बहुत ही जरूरी है कालिया सिर्फ तुम्हरी बहन और बीवी नही इतने लोगो के घर की बहु बेटियां आज तुम्हारे ही कारण सलामत है …”
“अगर मैं ना रहा तो तुम इस गिरोह को सम्हालोगे, ये गिरोह टूटना नही चाहिए शम्भू ,“
उसने शम्भू के कंधे पर हाथ रखा,शम्भू रो ही पड़ा था ,कालिया अपने जिद पर अडिग था और ये बात सभी को पता थी ……

‘बहुत याराना लगता है …….’
‘बसंती इन कुत्तों की सामने मत नाचना ..

’
‘गब्बर मैं तेरा खून पी जाऊंगा ‘
“वाह मेरे धर्मेंद्र ,भाभी मस्त फ़िल्म है ना सोले…धर्मेंद्र देखो ना क्या दिखता है ”
कनक tv स्क्रीन को देखकर तालिया बजा रही थी,रोशनी को उसकी ये हरकते बिल्कुल भी पसंद नही आ रही थी ,लेकिन क्या करे वो भी बार बार फ़िल्म की ओर आकर्षित हो जाती थी ,लेकिन फिर नजर बचा कर विक्रांत ठाकुर(प्राण ठाकुर का छोटा भाई ) की ओर देखती और डर जाती जो सोफे में बैठे हुए कनक की हरकतों का मजा ले रहा था .विक्रांत लगातार कनक को ही घूरे जा रहा था जैसे रोशनी का कोई अस्तित्व ही नही हो ,वो दोनो किसी रानियों की तरह सजाई गई थी और एक बड़े से कमरे में बड़े से सोफे पर बैठी थी ,जंहा सामने एक साफ पर्दा लगा हुआ था जिसमे .अभी सोले चल रही थी ,ये विक्रांत का ही कमरा था ,विक्रांत ने जब कनक को पहली बार देखा तब ही उसका कनक पर दिल आ गया था,विक्रांत प्राण से थोड़ा अलग था,जंहा प्राण को फूलों को निचोड़ने में मजा आता था वही विक्रांत को फूलों की धीमी सुगंध में ,वो भी कनक का धीरे धीरे मजा लेना चाहता था,रोशनी को प्राण ने पसंद किया था लेकिन विक्रांत के कहने पर ही प्राण उससे अभी तक दूर था ,क्योकि वो भी विक्रांत की तरह पहले उसे अपने बस में करना चाहता था लेकिन प्राण को कहा आती थी प्यार की भाषा लेकिन वो अपने भाई की जिद और रोशनी के मादक यौवन के कारण रुक गया था,वो इस फूल की निचोड़ना नही चाहता था बल्कि इसका इत्र बना कर हमेशा के लिए अपने पास रखने की चाह में था …
विक्रांत ने ही कनक को लुभाने के लिए उसे हर सुविधा दिलाई जिसके बारे में वो सपने में नही सोच सकती थी और इसका असर भी उसके ऊपर हो रहा था,कनक को सभी चीजों से मोह हो गया था ,जैसे वो अपने भाई और उसकी कुर्बानी को भूल ही गई थी …
“हमारे छोटे ठाकुर भी धर्मेंद्र से कम है क्या ..”
विक्रांत के पैरो के पास बैठा मुंसी जो उसका पैर दबा रहा था बोल पड़ा ,और अचानक ही कनक का ध्यान उसे घूर रहे विक्रांत की ओर गया ,मानो कनक को कई वाल्ट का झटका लगा हो ,सच में नवजवान और गठीले बदन के मालिक विक्रांत को देखकर वो शर्म से ढेर हो गई और उठकर जाने को हुई ,विक्रांत आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी गोद में बिठा लिया …
विक्रांत उसके गालो को हल्के हाथो से सहलाने गया,कनक के जिस्म में एक करेंट दौड़ गया …
“अरे रानी तुम्हारे लिए ही तो ये सारे जतन किये है और तुम ...

तुम हो की हमसे दूर जा रही हो”
कनक का गाला सुख चुका था वो लाज के मारे सर गड़ाए जा रही थी ,आज पहली बार किसी मर्द ने उसे इस तरह से छुवा था,अभी अभी तो वो जवान हुई थी ,विक्रांत के शरीर से गुलाब की हल्की हल्की लेकिन मोहक खुश्बू आ रही थी ,जो की गांव के मर्दों के शरीर से नही आया करती ,मेहनतकस लोगो के शरीर से पसीने की खुश्बू आती है जो की कनक को बदबू लगती थी ,
विक्रांत उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसके कनक के जिस्म को हल्के हाथो से मसल रहा था,कनक उसके आगोश में मचल रही थी ,थोड़ी ना नुकुर करती लेकिन फिर भी मानो वो पिघल रही हो ,रोशनी बस दोनो को देखे जा रही थी फिर अपना ध्यान tv में लगा देती लेकिन जो उसके सामने चल रहा था वो ज्यादा आकर्षण पैदा करने वाला था,विक्रांत ने मुंसी को वँहा से भगा दिया लेकिन रोशनी को वही बैठे रहने का हुक्म दिया,रोशनी के मन में भी ना चाहते हुए भी एक अजीब सा भाव उमड़ कर आ रहा था ,कनक की तो आंखे ही बंद हो गई थी ,
कोई अगर देखता तो कहता की दो प्रेमी एक दूसरे के आलिंगन में है ,ना की किसी दुश्मन की बहन से बदले वाली बात है,कनक और रोशनी दोनो ही भुल गए थे की वो अपने दुश्मन के घर उसकी बांहो का मजा ले रही है …
विक्रांत बड़े ही धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था कनक का थोड़ा मोड़ा विरोध भी कम हो चुका था,रोशनी ना चाहते हुए भी बार बार तिरछी आंखे से उन्हें देख ही लेती ,कनक के चहरे का भाव बता रहा था की वो कितने आनंद में है और यही रोशनी की पीड़ा थी,अगर विक्रांत कनक का बलात्कार करता तो शायद वो कभी इतनी उत्तेजित नही होती लेकिन विक्रांत ने जो किया था वो उसे और भी ज्यादा तोड़ रहा था,शरीर से भी और मन से भी वो कालिया को जान से ज्यादा चाहती थी लेकिन आज जीवन में पहली बार उसके मन में कालिया के अलावा किसी दूसरे की मूरत घर कर रही थी,वो विक्रांत के गठीले जिस्म से मोहित हो रही थी ,वो अपने को रोकती कभी कभी खुद को धिक्कारती लेकिन फिर भी कनक की हल्की सिसकियां जो अभी बिना कुछ किये भी फुट पड़ती थी ,रोशनी के मन में इस सुख के भोग की लालच को जगा रहा था ..

रोशनी इतने मानसिक उधेड़बुन से गुजर रही थी की उसकी आंखे भर गई थी वो वँहा से उठकर जाने को हुई लेकिन विक्रांत ने उसका दौड़कर उसका हाथ पकड़ लिया,वो खड़ी हुई थी और विक्रांत उसे अपने से सटा लिया,

रोशनी की जैसे सांसे ही रुक गई ,आंखों में अब भी पानी था लेकिन आंखे बंद हो चुकी थी ,विक्रांत ने अपने ऊपर के कपड़े को निकाल फेका था,उसका गठीला जवान बदन और उसके बदन की खुश्बू दोनो ने रोशनी को उत्तेजित कर रहे थे,रोशनी की पीठ विक्रांत के बालो से भरी छाती में जा सटी,
“आह ह ह “
रोशनी के मुह से निकल गया,विक्रांत पुराना खिलाड़ी था ,रोशनी की आह से उसके होठो में एक अजीब सी मुस्कान खिल गई ,इन दोनो बालाओं का बलात्कार करके भी वो ये सुख नही पा सकता था जो अब उसे उनके साथ खेलकर मिल रहा था,कालिया से असली बदला लिया जा रहा था लेकिन अलग रूप से ………
विक्रांत ने रोशनी को अपने पास बिठा लिया,अब रोशनी और कनक दोनो उसके दोनो ओर बैठे थे,वो जानता था की कनक तो उसके गिरफ्त में पहले से है लेकिन रोशनी को और तोडना होगा ,वो अपना ध्यान अब रोशनी पर लगाने लगा,उसके साड़ी के पल्लू को गिरा दिया और अपने जीभ को उसके गर्दन पर लगा दिया..
“आह न न न ही ही”
रोशनी की आंखे बंद थी और वो बड़ी मुश्किल से बोल पाई,उसके फुले हुए स्तन का ऊपरी भाग उसके कसे ब्लाउज से बाहर झकने लगा था ,विक्रांत ने ललचाई निगाह से उसकी गोरी चमकदार चमड़ी को देखा,रोशनी और कनक दोनो ही गांव की रसदार और भरी हुई लडकिया थी,विक्रांत ने अपनी जीभ से रोशनी के खुले हुए स्तन को चाट लिया ,
“नही ...ओह नही आह “वो मछली जैसे छटपटाई और जल्दी से उठकर बाहर की ओर भागने लगी,उसकी इस हरकत से विक्रांत जोरो से हंसा लेकिन उस रोकने की कोशिस नही की ……..
रोशनी के जाते ही कनक विक्रांत के छाती को खुद ही चूमने लगी,विक्रांत हँसता हुआ सोफे में इत्मीनान से लेट गया
“तेरी भाभी पर अभी प्यार का भूत चढ़ा है फिक्र मत कर एक दिन वो भी तेरी तरह अपने जिस्म को मेरे सामने रख देगी ,और तुम दोनो को हम दोनो भाई अपनी कुतिया बना कर रखेंगे ...हा हा हा “
विक्रांत की बात से कनक थोड़ी रुकी लेकिन विक्रांत ने उसके सर को पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया,
“चाट मेरी रानी “कनक फिर से उसके सीने के बालो पर अपने जीभ फेरने लगी जैसे विक्रांत की बात का उसपर कोई प्रभाव ही नही पड़ा हो ……….

22
कालिया अपने बीवी और बहन की फिक्र में किसी भी खतरे से लड़ जाने को तैयार था ,वो अकेला हि उन्हें ठाकुर के किले से छुड़ाने को निकल पड़ा…….

कालिया दूर से ही उस हवेली को ध्यान से देख रहा था और साथ ही अंदर जाने की तरकीब ढूंढ रहा था ,पूरी हवेली मानो कोई किला हो ,चारो तरफ पहरेदार ही पहरेदार थे,बंदूख धारियों से पूरी हवेली ही घिरी हुई थी ,कालिया हवेली के पिछले भाग में गया,वँहा सुरक्षा कम थी लेकिन फिर भी बड़े से दीवाल के पर पहुच पाना भी मुश्किल था,कालिया ने अपने साथ एक रस्सी लाई थी ,वो गुना भाग कर एक नतीजे में पहुचा की वो रस्सी से दीवाल को पर करेगा फिर हवेली के बगीचे से छिपता हुआ मुख्य घर तक जाएगा,वो रस्सी को सही जगह डालने में सफल रहा और उसके सहारे ऊपर चढ़ नीचे कूद गया,उसका दिल जोरो से धड़क रहा था लेकिन अभी डरने का समय भी तो नही था,

वो फिर से रस्सी को उस बड़े से बगीचे में एक जगह छुपा दिया,और मुख्य हवेली की ओर बढ़ने लगा,लोग रात के सन्नाटे में एक दूसरे से बात करते हुए या ऊंघते हुए पहरा दे रहे थे,उसने ध्यान दिया की नॉकर आ जा रहे है और पहरेदार थोड़ा भी ध्यान उनपर नही दे रहे है,उसने रिस्क लेने की सोची और अपने बंदूख को वही रख चाकू को अपने कपड़े में छिपा कर अपने को थोड़ा संवारा ताकि वो गांव का ही आम आदमी लगे ,और जल्दी से जाकर एक आलू के बोरे को उठा लिया ,वो दूसरे दरवाजे से अंदर जाना चाहता था,

“ये क्या ले जा रहा है”

एक कड़कदार आवाज उसके कानो में पड़ी ,उसे लगा जैसे उसका दिल ही बाहर आ जाएगा …

“वो आलू है ,रसोई में पहुचा रहा था “

वो अपने को सम्हालते हुए बोला
“अबे मादरचोद अभी तुम्हे ये सब काम सूझ रहा है दिन भर क्या कर रहे थे,चल जा “

एक पहरेदार तम्बाखू मलते हुए बोला,कालिया पीछे के दरवाजे से रसोई तक चला गया,बड़ी सी रसोई थी लेकिन ठाकुर के परिवार के रहने का कमरा ऊपर था ये नॉकरो की जगह थी ,कालिया ने रात का फायदा उठाया और आहिस्ते से एक पाइप के सहारे ऊपर पहली मंजिल तक आ गया,बड़े बड़े दरवाजो और खिड़कियों से सुशोभित आसियान था,कालिया को समझ ही नही आ रहा था की इतने कमरों में आखिर रहता कौन होगा और जंहा उसे जाना है वो कमरा कौन सा होगा ,या ठाकुर ने उन्हें हवेली के अलावा कही और रखा है ,पहली मंजिल से नीचे का नजारा साफ साफ दिख रहा था ,जंहा कई पहलवान हाथो में बड़ी बड़ी बंदूख लिए टहल रहे थे,सामने से जाना अब भी खतरनाक था ,वो फिर से पीछे का रुख किया ,उसने पीछे की ओर से खिड़कियों में झकने की सोची लेकिन नीचे गिरने का और किसी के देख लेने का डर उसे सता रहा था,वो बेहद परेशान था की उसे किसी के पायलों की आवाज सुनाई दी ,देखा तो एक सजी सवारी लड़की माथे में लाल सिंदूर लगाए और लगभग पूरे दुहलन के लिबास में झम झम करती उसी ओर आ रही थी ,वो छुपने को भागा इतने बड़े घर में उसे समझ ही नही आ रहा था की जाए तो कहा जाए,उसे सीढ़िया दिखाई दी और वो उसी में चढ़ता गया,वो हवेली के छत पर था तीन मंजिलों की हवेली बाहर और अंदर से

विशालकाय थी,और पूरे ओर से दूर दूर तक खेतो से घिरी हुई थी,थोड़ी दूर उसे जंगल भी दिखाई दे रहा था,छत पूरी तरह से शांत थी ,वो वँहा से नीचे देख पा रहा था,साथ ही उस हवेली की सही संरचना भी उसे तभी समझ आयी,असल में वो हवले वर्गाकार थी,जंहा वो खड़ा था वो एक छोर था ,वर्ग की चारो भुजाओं की तरह कमरे बने हुए थे और बीच में बड़ा सा बरामदा था जो की बाहर से नही दिखता था,वो एक छोर में खड़े हुए दूसरे छोर के कमरों को देख पा रहा था ,जो कमरे खुले हुए वो अपने वैभव की कहानी खुद ही कह रहे थे,

‘साला इतने बड़े घर में रहते कितने लोग होंगे,’उसके दिमाग में अनायास ही आ गया ,तभी उसे फिर से झम झम की आवाज सुनाई दी जिस आवाज से भागकर वो यंहा आया था फिर से उसे सुनकर वो डर गया लेकिन फिर उसे याद आया की वो एक अकेली औरत है और कालिया के पास उसे डराने को एक चाकू भी तो है ,वो सतर्क होकर अंधेरे में एक कोने में जा छिपा ..

वो लड़की आयी और छत की एक छोर में जाकर बैठ गई,वो सामने कुछ देख रही थी फिर उसने अपने हाथो से कुछ निकाला और अपने मुह में लगा लिया ,कालिया ने पहली बार किसी औरत कोई सिगरेट पीते हुए देखा था,उसने ठाकुर को ही ऐसा करते हुए देखा था बाकी गांव के लोग तो बस बीड़ी में ही खुस थे ,वो गहरे कस लगाए जा रही थी जैसे किसी गंभीर से ख्यालों में हो ...थोड़ी ही देर हुए थे की उसकी नजर अंधेरे में छिपे हुए कालिया पर पड़ गई ……

“कौन है कौन है वँहा “

कालिया को लगा की जैसे बचने का कोई भी चारा नही है

“मलकीन हम हम हरिया है”

“कौन हरिया और यंहा क्या कर रहे हो पता है ना की यंहा नॉकरो को आने की अनुमति नही है “

“माफ कीजिए मालकिन “

“चलो जाओ यंहा से “

कालिया चुप चाप उठा और वँहा से जाने लगा लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था ,छत में बिछे पानी के एक पाइप में कालिया का पैर फंसा और वो गिर गया साथ ही उसके कपड़े में रखा चाकू उसके कपड़े से निकल कर सीधे उस लड़की के पैरो में गिर गया ,लड़की उस चाकू को तो कभी कालिया को देखती ,इतना बड़ा चाकू देख उसे किसी अनहोनी की असंका जागी वो चिल्लाने को ही हुई थी की कालिया ने फुर्ती दिखाई और जाकर उसे दबोच लिया,उसके मुह को जोरो से बंद कर दिया और पैरो से ही चाकू को उठाकर उसकी गर्दन पर टिका दिया,अब फंस चुका था तो डरना कैसा …

“थोड़ी भी आवाज की तो सीधे गाला रेत दूंगा “

कालिया ने कड़क आवाज में उसके कानो में कहा ,लड़की सिहर गई और शांत हो गई,कालिया ने धीरे से उसके मुह से हाथ हटाया ..

“कौन हो तुम और क्या चाहते हो “

लड़की ने डरे हुए आवाज में पूछा
“मै...क्या करोगी जानकर ..चलो पूछ ही लिया है तो बता दु मेरा नाम कालिया है…”

लड़की जितना पहले डर रही थी कालिया का नाम सुनकर मानो उसका डर ही खत्म हो गया ..

“कालिया,..

वही कालिया जिसने इतने सालो बाद ठाकुर को उसकी औकात दिखाई,और जिससे बदला लेने के लिए वो उसकी बहन और बीवी को उठा लाया है,वही गरीबो का मसीहा “

लड़की उसके गिरफ्त से छूट गई थी लेकिन फिर भी कालिया से दूर नही भाग रही थी ना ही उससे डर रही थी बल्कि उसकी बातो में अपने लिए तारीफ सुन कालिया भी हैरान रह गया ..
“तुम तुम कौन हो …”

लड़की ने एक फीकी सी हँसी हँसी ..

“एक अभागन और ठाकुर के जुल्म का एक शिकार ...लेकिन अब लोग मुझे इस हवेली की ठकुराइन बुलाते है ,मैं प्राण ठाकुर की नई पत्नी हु …”

कालिया को याद आया प्राण ने कुछ महीने पहले ही अपनी पहली बीवी के मरने के बाद अपने से आधी उम्र की लड़की से शादी की थी ,
“तुम तो इस हवेली की ठकुराइन हो फिर तुम्हे कैसा दुख “

कालिया ने व्यंग मारा ,लड़की का मुह दुख से भर गया

“ठाकुर ने मेरे पिता के गले में तलवार रखकर मेरा बलात्कार किया था,उसे मैं ज्यादा पसंद आ गई तो वो मुझे हवेली ले आया और अपनी बीवी के मरने के बाद मुझे अपनी बीवी बना लिया,उसके लिए मैं बस हवस मिटाने का एक खिलौना ही हु उससे ज्यादा कुछ भी नही ..दुनिया को शायद लगता होगा की मैं इतने बड़े घर की मालकिन हु ,जमीदार की बीवी लेकिन असलियत तो मैं ही जानती हु,मेरी पिता जी ने मुझे फूलों की तरह पाला था,अच्छे संस्कार दिए थे ,पढ़ाया लिखाया,कालेज तक की पढ़ाई कर मैं नॉकरी कर रही थी ,लेकिन प्राण की नजर मुझपर पड़ गई ,मैं पड़ी लिखी हु शहर की रहने वाली हु शायद इसलिए इसने मुझे अपनी पत्नी का दर्जा दे दिया वरना शायद मैं भी उसकी रखैल बन कर रह जाती …”

लड़की के आंखों से आंसू की बूंदे टपकने लगी ,कालिया कहता भी तो क्या कहता उसे अपने परिवार के दो सदस्यों की चिंता और भी जोरो से सताने लगी …
“मेरी बीवी और बहन कहा है “
लड़की के होठो में एक मुस्कान आ गई

“हर लड़की उनकी तरह खुशकिस्मत नही होती ,मैं तो सुख छोड़ कर इस नरक में आयी थी लेकिन तुम्हारी बहन को तो इसी नरक में मजा आने लगा है ,वो भी बेचारी क्या करे उसने इतने बुरे दिन देखे है ,गरीबी देखी है शायद इन सब सुखों के सामने जिस्म का सौदा उसे छोटा ही लग रहा होगा …”

कालिया उसकी बातो से चौक गया था ,उसके चहरे का भाव देखकर लड़की ने उसका हाथ पकड़ लिया ,चलो तुम्हे दिखती हु,वो उसे अपने साथ नीचे ले जाने लगती है और एक खिड़की के सामने अंधेरे में खड़ी हो जाती है ,कालिया उसके पीछे से अंदर का नजारा देख कर ही दंग हो जाता है,बड़े से पर्दे पर फ़िल्म चल रही थी …

‘बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना ‘

कनक तालिया बजा रही थी और रोशनी उसके साथ बैठी हुई थी,दोनो लडकिया किसी रानी की तरह सजाई गई थी जैसे इस वक्त मौजूद प्राण ठाकुर की पत्नी थी ,कनक तो चहरे से ही बहुत खुस दिख रही थी वही रोशनी के चहरे में अलग अलग भाव आ जा रहा था ,कालिया के रगों में खून जोरो से दौड़ाने

लगा,उसे समझ ही नही आ रहा था की वो क्या प्रतिक्रिया करे ,वो बस खिड़की से अंदर झांक रहा था……

कालिया देख रहा था की उसकी बहन किसी जिस्म बेचने वाली सस्ती रंडी जैसे हरकत कर रही है,उसके आंखों में आंसू आ गए ,वो भले ही एक डाकू बन गया हो लेकिन था तो वो गांव का एक सीधा साधा इंसान ही जो अपने परिवार से बेपनाह मोहोबत करता था,उसकी आंखों में आया हुआ आंसू झलक कर उसकी आंखों को छोड़कर नीचे गिरा कुछ बून्द जाकर ठकुराइन जिसका नाम पूनम था के कंधे में गिर गया,पूनम उसके सामने ही खड़ी थी ,वो अपना चहरा उठाकर कालिया को देखने लगी वो समझ सकती थी की आखिर कालिया के अंदर क्या चल रहा होगा,जिस परिवार को कालिया ने खत्म करने की सौगंध खाई थी ,उसी परिवार के सदस्य के सामने उसकी ही सगी बहन ऐसे व्यव्हार कर रही है ,हवेली में मिल रहे सुख ने उसे झोपड़ी में सीखी हुई मर्यादाओं को भुला दिया था,पूनम अपना हाथ आगे बड़ा कर कालिया के गालो पर रख दी ,ना जाने को कालिया उसे बेहद ही आकर्षित कर रहा था ,कमरे के अंदर कालिया के परिवार की इज्जत कनक विक्रांत के प्रति आकर्षित हो रही थी तो वही बाहर अंधेरे में खिड़की के पास खड़े विक्रांत के परिवार की इज्जत पूनम कालिया के प्रति आकर्षित हो रही थी,जंहा कनक को विक्रांत के शरीर से उठाने वाला इत्र का गंध मदहोश कर रहा था वही पूनम को कालिया के शरीर से उठाने वाली पसीने की खुश्बू मदहोश किये जा रही थी ,

वो जानबूझकर कालिया से और भी सट गई,प्राण से शादी के बाद कभी भी उसे प्यार तो मिला नही लेकिन साथ ही उसे शरीर का सुख भी प्राण नही दे पाया,जिस्म को नोंचना और शारीरिक सुख दो अलग चीजे होती है,प्राण के शरीर में अब इतना दम था भी नही की वो किसी नई नई जवान हुई लड़की के जिस्म की भूख को मिटा सके ,पूनम के लिए वो भूख कोई मायने नही रखती थी लेकिन फिर भी कालिया के मर्दानगी की खबरे वो कई दिनों से सुनती आ रही थी ,उसे मन ही मन कालिया से एक अजीब सा प्रेम भी हो गया था जिसके बारे में वो खुद भी नही जानती थी ,असल में उसे कालिया में वो शख्स दिख रहा था जो उसके ऊपर हुए अत्याचार का बदला प्राण से ले सकता था,और अवचेतन में छिपा यही आदर या प्रेम या कहे की आकर्षण आज बाहर आ रहा था..

कालिया को भी अब ये महसूस हो रहा था की पूनम कुछ ज्यादा ही उससे सट रही है,लेकिन कालिया के मन में कोई भी गलत विचार उसके लिए नही उठ रहे थे..

लेकिन जब रोशनी को विक्रांत ने खिंचा और अपने से सटा लिया और जब रोशनी की भी आंखे मजे में बंद हो गई कालिया टूट गया और वँहा से जाने को हुआ .

पूनम ने तुरंत ही उसका हाथ पकड़ कर अपने पास खिंच लिया और अपने से सटा लिया…

पूनम का सर कालिया के छाती में लग गया था और पूनम की भारी छतिया कालिया के विशाल चौड़े सीने से,पूरी तरह से काला कालिया और दूध ही गोरी पूनम एक दूसरे से चिपके हुए अमावस और पूर्णिमा की रात का मिलन लग रहे थे,पुनम की सांसे तेज हो रही थी वही कालिया उसकी इस हरकत से घबरा गया था,

“जब वो तुम्हारे घर की इज्जत से खेल रहे है तो तुम क्यो पीछे हो ,तुम उनकी इज्जत की धज्जियां उड़ा दो “

पूनम ने अपने हाथो को कालिया के सीने के बालो पर फेरा ,कालिया का दिमाग शून्य में चला गया था उसे कुछ भी समझ आना बंद हो चुका था वो फिर से अंदर देखा,विक्रांत उसकी नई नई बीवी को उत्तेजित करने में कामयाब हो गया था ,कालिया को जोरो का गुस्सा आया और वो पूनम को जोरो से अपने बांहो में दबोच लिया ..
“आह “

पूनम को लगा जैसे वो किसी असली मर्द की बांहो में आ गई हो,ऐसी गिरफ्त और वो पसीने से भीगा कालिया का बदन और उसकी मजबूत मांसपेशियां पूनम पूनम के योनि से रिसाव करने को काफी थी,पूनम की कमर कालिया के कमर पर रगड़ खाने लगी ये कैसे हो रहा था ये तो पूनम को भी समझ नही आ रहा था लेकिन वो अपने कमर को जैसे कालिया के कमर से जितना हो सके उतना चिपकाना चाहती थी,कालिया भी उनके पिछवाड़े में उठे हुए पर्वत जैसे नितंबो को पकड़कर अपने कमर से और भी जोरो से दबा देता है…

पूनम की दबी ही सिसकी निकली ,कालिया की आंखे लाल थी वो गुस्से से बौखलाया था रोशनी अभी भी विक्रांत की बांहो में मदहोश सी पड़ी थी ,
कालिया ने पूनम की साड़ी को उठा लिया,पूनम की साड़ी कमर तक उठ चुकी थी कालिया ने अपने पंजे से पूनम के दोनो जांघो के बीच को दबोच लिया,
“आह नही “

पूनम उत्तेजना के मारे जैसे मर रही थी वो अपना सर कालिया के कंधे पर गड़ा गई,वो जोरो से सिसकियां ले रही थी ,कालिया ने अपने धोती से अपने लिंग को निकाला और सीधे ही पूनम के जांघो के बीच दे मारा,लेकिन वो भूल गया था की शहर की लडकिया नीचे कुछ कपड़ा भी पहनती है,उसका लिंग पूनम की पेंटी के ऊपर से ही पूनम के योनि में प्रहार कर गया,पूनम तो पूरी तरह से टूट गई वो जोरो से चिल्लाना चाहती थी उसे लगा जैसे किसी ने लोहे का रॉड उसके योनि में मार दिया हो,लेकिन अपनी आवाज को दबाने के लिए उनके अपना खुला हुआ मुह कालिया के कंधे में गड़ा दिया और दांतो को उसके मांस पर गड़ा दिया,कालिया कोई जब समझ आया की एक और कपड़ा पूनम के योनि में है वो हाथो को लेजाकर उसे थोडा साइड हटा कर फिर से अपने लोहे के सरिए जैसे लिंग को उसकी योनि में टिकाया जो अभी पूरी तरह के गीली हो चुकी थी और उसे एक ही झटके में पूनम के अंदर उतार दिया,कालिया का झटका इतना तेज था और उनका गांव का मजबूत लिंग पूनम की नाजुक योनि के लिए इतनी बड़ी थी की वो छिल कर खून फेक दी ,वो

दर्द में झटपटा गई लेकिन उसका मुह बस खुला का खुला ही रह गया ,दर्द और आश्चर्य के मारे उसके मुह से आवाज तक ना निकली ...कालिया ने तुरंत ही उसके मुह को अपने हाथो से दबा दिया ताकि उसकी चीख उसके हाथो में ही घुट जाए,पूनम की आंखों में आंसू था,और कमरे के अंदर रोशनी ने अपने को विक्रांत से छुड़ा लिया था और अपने आंसुओ को पोछती हुई भागी थी ,

ये दोनो ही आंसू कालिया लिये उसकी गलती का अहसास दिलाने वाले साबित हुए वो तुरंत ही पूनम से अलग हो गया,पूनम ने अंदर देखा और समझ गई की कालिया उससे अलग क्यो हो गया,लेकिन उसके होठो में मुस्कान थी वो अपना कपड़ा थोड़ा ठीक की और कालिया जो अभी हुए हादसे से उभरा भी नही था के कानो के पास अपने होठो को लाई
“सच में तुम असली मर्द हो ,कितना बड़ा और कठोर है तुम्हारा ,तुम्हारे साथ मजा आएगा “

पूनम की बात से जंहा कालिया बुरी तरह से झेंपा वही पूनम उसे झेंपता हुआ देखकर हल्के से हँस पड़ी ……..
“रोशनी कहा है “
कालिया ने कहा और पुनम मुस्कुरा दी
“इतनी जल्दी क्या है अभी तो विक्रांत तुम्हारी बहन के साथ मस्त है अभी वो तुम्हारी बीवी को नही सताएगा,ऐसे भी रोशनी विक्रांत के लिए बल्कि प्राण ठाकुर के लिए लाई गई है,..”
पूनम ने कालिया को चिढ़ाया और कालिया ने गुस्से में पूनम का मुह दबा लिया
“वो मेरी है और मेरी ही रहेगी”
कालिया के आंखों में शोले दधक रहे थे,और पूरा शरीर ही गुस्से से जल रहा था,लेकिन पूनम उससे थोड़ी भी नही डरी ,बल्कि उसके आंखों में थोड़े आंसू जरूर आ गए
“बहुत प्यार करते हो तुम अपनी रोशनी से ...लेकिन कालिया तुम विक्रांत को नही जानते वो उसे बदल देगा,तुमने देखा की वो आज ही बहकने लगी थी ,कुछ दिनों में वो विक्रांत के रंग में रंग जाएगी फिर विक्रांत उसे प्राण के सुपुर्द कर देगा,शायद वो प्राण की दूसरी बीवी बना दी जाए…”
पूनम के आंखों में दर्द का आंसू था ,और कालिया के दिमाग में एक अजीब सी शांति,तूफान से पहले और बाद एक गहरी शांति छा जाती है वही शायद इस समय कालिया के दिमाग में था ,
“मुझे क्या करना चाहिए”
पूनम के चहरे में फिर से एक मुस्कान आई,
कालिया उससे पूछ रहा था की उसे क्या करना चाहिए इसका मतलब साफ था की कालिया पूनम पर भरोसा करने लगा था ,
“तुम मुझपर भरोसा कर पाओगे ??”
पूनम ने व्यंग्यात्मक रूप से कालिया से पूछा
“इसलिए पूछ रहा हु ,शायद इस समय मैं सिर्फ तुमपर ही भरोसा कर सकता हु”
कालिया की बात सुनकर पूनम थोड़ी आश्चर्य में पड़ गई ,शायद उसने सोचा ही नही था की कालिया भी इतना जहीन और समझदार होगा…
“ऐसा क्या है मुझपर जो तुम सिर्फ मुझपर भरोसा दिखाने की बात कर रहे हो..”
कालिया के होठो में हल्की सी मुस्कान आई
“तुम्हारे आंसू झूठे नही थे ,ना ही अभी है ...

मैं ज्यादा पड़ा लिखा तो नही हु लेकिन इतनी तो समझ है मुझे “
कालिया की बात सुनकर पूनम भी मुस्कुरा उठी .
“अच्छा तो पहले ये करो की यंहा से जाओ ,लेकिन पहले अपनी प्यारी रोशनी से मिलना ना भूलना ,उससे मिलने का बंदोबस्त मैं कर दूंगी लेकिन सम्हाल कर यंहा तक तो शांति है लेकिन उन दोनो के पहरे में बहुत से लोग लगा रखे है ठाकुरों ने…”
रोशनी से मिलने का नाम सुनकर ही कालिया झूम उठा ..
“ज्यादा खुस होने की जरूरत नही है अभी तो तुम बस उसे देख पाओगे,वो वँहा अकेली नही होगी ना ही मुझे ही उसके पास जाने की इजाजत है तो बस देख पाओगे बस,बात करवाने का मैं बाद में इंतजाम करूंगी “
कालिया का चहरा फिर से मुरझा गया लेकिन फिर भी वो इतने में ही खुस था की उसे ये पता लग जाए की उसकी बहन और बीवी को आखिर किस कमरे में रखा गया है ,और कैसे रखा गया है,वो बाद में और आदमियों के साथ जाकर उन्हें वँहा से निकालने का प्रयास कर सकता था …

23
इधर
रोशनी के जाने से विक्रांत के चहरे में एक मुस्कान आ गई थी ,वो अपने खेल में सफल हो रहा था,वही कनक उसके सीने को जमकर चाट रही थी ,विक्रांत को तो अभी भी यकीन नही हो रहा था की कालिया की बहन इस किस्म की निकल जाएगी उसके लिए उसे कोई भी महेनत नही करनी पड़ी…
वो कनक के सर को पकड़ कर उसे नीचे ले जाने लगा,कनक विक्रांत के शरीर को चाट रही थी ,और विक्रांत एक एक कर अपने कपड़े खोल रहा था ,उसे कनक की जीभ से अपनी मसाज होने में बहुत ही मजा आ रहा था ,
कनक नीचे जाती गई और अपने हाथो से ही विक्रांत को नंगा करने लगी ,वो विक्रांत की कमर के पास थी ,पेंट खोलने के साथ ही साथ विक्रांत का मोटा ताजा जवान लिंग फुंकार मरता हुआ कनक के चहरे से टकराया,
विक्रांत की हँसी छूट गई वही कनक उसे एकटक देखती रही.
“कभी देखा नही है क्या “
“देखा है लेकिन पहली बार इतने पास से देख रही हू…”
विक्रांत की भौ चढ़ गई
“किसका देख ली तू रांड”
कनक शर्मा गई और थोड़ी घबरा भी गई उसे लगा की जोश में गलत बात मुह से निकल गई
“अरे बोल ना अब भी शर्मा रही है “
“वो वो भइया का जब वो भाभी के साथ …”
कनक का चहरा पूरी तरह से लाल हो गया था शायद उस दिन की बातो को सोचकर ,वही विक्रांत के दिमाग में एक चित्र घुमा ,गोरी चिट्टी रोशनी के ऊपर काला कलूटा कालिया ,और नाजुक सी रोशनी के ऊपर कालिया का विशाल और मजबूत शरीर ...एक सिहरन सी उसके शरीर में दौड़ गई ,मानो वो घबरा गया हो
“कैसा है तेरे भइया का ..”वो रूखे हुए स्वर में बोला ,लेकिन कनक जैसे सपने में खो गई थी ,वो जागी ..
“बहुत बड़ा, काला और बिल्कुल लोहे जैसा दिखता है ..

”कनक का मुह खुल गया था जिसे देखकर विक्रांत को ना जाने क्यो लेकिन बहुत ही जलन हुई ,वो कनक का सर पकड़ कर उसके खुले हुए मुह में अपने अकड़े हुए लिंग को भर दिया ,
“मादरचोद इससे भी बड़ा है क्या …”
कनक गु गु कर रही थी ,विक्रांत ने पहली बार इस तरह के कनक पर जोर जबरदस्ती की थी ,थोड़ी ही देर में उसे जैसे होशं आया की वो क्या कर रहा है ,वो कनक के सर को छोड़ा वो खुद के व्यवहार से ही आश्चर्य में था लेकिन ये तो वो भी समझ रहा था की एक बेहद ही जलन भरा अहसास उसे हुआ था जो शायद उसे जीवन में पहली बार हुआ था ,उसने हमेशा ही अपने को हर चीज में आगे पाया था,यंहा तक की प्राण से भी आगे वो खुद को मानता था और जंहा बात सेक्स की हो उसे आजतक यही लगता था की उसका औजार ही सबसे मजबूत और बड़ा और वो किसी भी लड़की को अपने जाल में फंसा सकता है...लेकिन
लेकिन पहले रोशनी ने उसका ये भरम तोड़ दिया ,उसे कुछ खास दुख नही हुआ क्योकि वो जानता था की वो रोशनी को कभी भी पा सकता है लेकिन अब कनक की बात ने उसे सच में जला दिया था उसे लगा की शायद इसी लिए रोशनी उसके पास नही आयी क्योकि उसका पति उससे ज्यादा मजबूत है …
कनक भी आश्चर्य से उसे देख रही थी जो की बहुत ही तेजी से हांफ रहा था ..
“हा दूर से तो ऐसा ही लगता था की भइया का वो तुमसे बहुत बड़ा है ,भाभी तो उसे दो हाथो में भी नही समा पाती थी ,”कनक के चहरे में उसे जलाने वाली मुस्कान आयी ,विक्रांत को लगा जैसे किसी ने बिजली का झटका दे दिया हो,वो एक घुमा कर चाटा कनक के गालो में लगा दिया,उसका उठा हुआ लिंग ना जाने कैसे मुरझा गया था वो लाल हो चुका था और अपने अंदर उठ रहे शैलाब से बुरी तरह से परेशान भी..
उसे खुद का व्यवहार ही समझ नही आ रहा था और इसलिए वो और भी बौखला गया था ,वो तुरंत ही उठकर तेजी से कमरे के बाहर निकल गया,
कनक के होठो में उसकी स्थिति को देखकर एक बड़ी ही रहस्यमय मुस्कान आ गई ,जैसे उसे विक्रांत की कमजोरी का पता चल गया हो………..

Sep 19, 2019

#29

24
कालिया एक कमरे में बड़े ही बेताबी के साथ घूम रहा था ,थोड़ी देर बाद ही पुनम वँहा आयी,
“कहा है रोशनी …”
कालिया की बेचैनी उसके आवाज से ही पता चल रही थी
“अच्छी है तुम्हारी रोशनी फिक्र मत करो”पूनम हल्के से हँसी
“तुम्हारी बेचैनी सही है कालिया लेकिन अभी तुम्हे थोड़ा तो धैर्य धरना होगा ,ये कमरा सभी के नजर के बाहर ही है और तुम यंहा खिड़की से आ जा सकोगे,बाहर ताला पड़ा होता है इसलिए यंहा कोई आता भी नही मैं तुम्हारी रोशनी को यंहा तक लाने का प्रयास करूंगी,लेकिन अभी नही अभी वो ही बहुत पहरे में है,,,”
पूनम की बात तो कालिया को सही लगी लेकिन उसके दिल में अभी एक डर था जो उसने पूनम के सामने रख दिया
“लेकिन इतने दिनों में अगर उसे कुछ हो गया तो..

”
पूनम कालिया को ध्यान से देखती है उसे भी पता था की ठाकुरों का कोई भरोसा नही है की कब उनका हवस जाग जाए ..
“तुम्हरी रोशनी को कोई चोट तो यंहा नही लगने दी जाएगी लेकिन हो सकता है की उसके जिस्म से खेला जाए ,जो माहौल अभी है मुझे नही लगता की रोशनी के मर्जी के बिना प्राण या विक्रांत उसे छूने वाले है “
“वो कभी नही मानेगी “
कालिया गरजा ,लेकिन पूनम के होठो में मुस्कान आ गई
“वो तो तुम्हे आज ही दिख गया था …..कालिया जिस्म का कोई भरोषा नही की वो कब मचल जाए ,और रोशनी की आज की हरकतों से तो मुझे लगता है की वो भी जल्दी ही बहक जाएगी ,और बस एक बार की देर है फिर इस रास्ते से वापस नही आया जा सकता ..”
कालिया गहरे सोच में पड़ गया था
“तब तो मुझे जल्द ही कुछ करना होगा,”
“क्या करोगे ,यंहा से उसे ले जाओगे ,ले जा सकते हो ,तुम्हारा आना मुमकिन हो सकता है लेकिन उसको यंहा से ले जाना ,,,,दोनो मारे जाओगे ,और उसमे तुम्हारे तरह ताकत और लचक काबिलियत नही है की वो इस बड़े दीवार को खुद जाए …”
कालिया जानता था की रोशनी को ले जाना उसके लिए मुसीबत बनने वाला था …
“लेकिन मैं उससे अभी मिल तो सकता हु ना “
पूनम थोड़ी देर सोचते रही .
“तुमने एक चीज गौर की कालिया तुम इतने देर से बस रोशनी की ही बात कर रहे हो ,कनक के बारे में तुमने कुछ पूछा ही नही ..”
कालिया का चहरा मायूस हो गया था
“उसे यंहा की खुसिया ही भा गई है तो पूछने का सवाल ही पैदा नही होता,शायद मेरी परवरिश में ही खराबी थी जो उसे झोपड़ा नही महल को चुन लिया,एक भाई की नजर से देखु तो लगता है की अगर वो यंहा रहे तो ही सही है ,कम से कम खुस तो रहेगी जो उसे बचपन से चाहिए था वो सब उसे यंहा मिल जाएगा,बचपन में वो बोला करती थी उसे महल में रहना है ,नॉकर चाहिए,दौलत की भूख तो उसे हमेशा से थी लेकिन गरीबी ने सब कुछ मार दिया था शायद इसलिए वो अपने को समर्पित कर गई और थोड़ा भी नही सोचा ….”
कालिया के आंखों में आंसू थे ,पूनम उसके पास गई और उसके कंधे पर अपना हाथ रखा,
“कोई बात नही शायद उसे ये चकाचौंध पसंद आ रहा होगा लेकिन कब तक ,और मैं तुमसे ये पूछना चाहती थी की अगर रोशनी को भी ये सब पसंद आ रहा हो तो ,या आने लगा तो ...तो क्या तुम उसे भी अपने साथ नही ले जाओगे “
कालिया बुरी तरह से चौक गया ,ये सच भी हो सकता था …
“क्या तुम देखना चाहोगे की अखिर क्या रोशनी को ये सब पसंद आ रहा है या नही …”
कालिया अवाक था .,,
“मैं चाहती हु की तुम अभी उससे मत मिलो अगर तुम चाहो तो उसे देख जरूर लो ,क्या पता उसे भी इस शानोशौकत की आदत लग जाए और तुम जिस पत्नी को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नही कर रहे हो वो पहले वाली लड़की ही ना रह जाए ...

ये भी हो सकता है की वो तुम्हारे साथ जाने से ही माना कर दे,या अगर पत्नी धर्म निभाते हुए अगर तुम्हारे साथ चले भी जाए तो भी हमेशा अपने फैसले पर दुखी रहे …”
कालिया बुरी तरह से मचल गया था ,वो बेचैनी से पूनम की बात को सोचने लगा,उसका दिल कहता था की रोशनी ऐसा नही करेगी लेकिन क्यो नही ???
अगर उसे ऐसा शानो शौकत मिलता तो क्या वो छोड़ देता,अपने परिवार के लिए क्या वो ये सब छोड़ देता,..???
कालिया इसी सोच में था ,
परिवार के लिए ये शब्द उसके दिमाग में घुमा,
‘कौन है परिवार मेरा या रोशनी का सिर्फ मैं ही तो ऐसा बच गया हु जिसे वो परिवार कह सकती है …
या शायद मैं भी नही ,....
रहता ही कितने दिन हु उसके साथ ,दिया ही क्या है आजतक उसे ,सिर्फ दर दर की ठोकरों के सिवा,क्या वो फिर से सारी जिंदगी ऐसे ही जीने के लिए मेरे साथ चली आएगी,जबकि यंहा उसे सारे सुख मिलेंगे,जिस्मानी सुख भी …’
जिस्मानी सुख की सोच कर कालिया के रग रग में खून का प्रवाह तेज हो गया ,चहरा तमतमा गया ,वो किसी और के बांहो में रोशनी की कल्पना भी कैसे कर सकता था वो भी तब जब रोशनी खुद ही अपना जिस्म किसी को सौप दे …
लेकिन ये होने ही वाला था अगर रोशनी यंहा रहती है तो आज नही तो कल ये होकर ही रहेगा ,...ये भी हो सकता है की रोशनी मेरी ही राह देख रही हो ,और अगर मैं उसके सामने ना आऊ तो फिर उसके सामने फिर और क्या रास्ता बचेगा सिवाय इसके की वो मर जाए या फिर प्राण की रखैल बन कर रहे …
“नही नही मुझे उसके सामने जाना ही होगा वो भी मेरी ही प्रतीक्षा कर रही होगी “
कालिया जोरो से बोल गया ,पूनम उसे देखती रही..
“ठीक है अगर तुम यही चाहते हो ठीक है ,लेकिन मेरी बात पर भी गौर करना “
“मैं के सब कुछ सोच कर ही बोल रहा हु ,अगर उसे यंहा का सुख पसंद हो तो मैं उसे यही छोड़ कर चला जाऊंगा लेकिन अगर वो मेरे साथ आना चाहे तो दुनिया की कोई भी ताकत मुझे नही रोक पाएगी ,लेकिन पहले मुझे उसे भी ये बताना होगा की मैं उसे लेने आ चुका हु और आज नही तो कल उसे लेकर ही जाऊंगा …”
कालिया के चहरे पर आये दृढ़ निश्चय के भाव को देखकर पूनम भी कुछ नही कह पाई ,और बस उससे बिदा लेकर एक दरवाजे से बाहर चली गई ……...

कालिया पूनम के साथ हो लिया ,पूनम के दिमाग में बस यही चल रहा था की आखिर कैसे कालिया को रोशनी से मिलवाया जाए ,वो कालिया को एक दासी की साड़ी देकर उसे पहनने को बोलती है ,कालिया ने अपनी धोती के ऊपर पेटीकोट डालकर और बनियाइन के ऊपर ब्लाउज डालकर वो साड़ी पहन लेता है,लेकिन उन बड़ी हुई दाढ़ी और मूंछो का क्या करे ,पूनम की हँसी उसे देखकर ही नही रुक रही थी ,वो मर्दाना शरीर का मालिक था और कुछ भी करने पर भी वो किसी औरत की भांति नही दिख पा रहा था,पूनम ने दिमाग दौड़ाया और घूंघट डालने को कहा ,घूंघट डालने के बाद भी उसके शरीर का क्या किया जाए पूनम को समझ ही नही आ रहा था,फिर भी उसने रिस्क लेने की सोची और उसे अपने साथ साथ रोशनी और कनक के कमरे की ओर ले गई,,..
वो पहले ही जाकर अपनी विस्वस्त दासी को उस कमरे में रखवा चुकी थी ताकि समय पड़ने पर वो काम आये क्योकि पूनम का भी उस कमरे में जाना सम्भव नही था केवल चुनी हुई दसिया ही उस कमरे के लिए निर्धारित की गई थी जिसमे से एक पूनम की खास थी,
पूनम ने उस दासी के साथ ही कालिया को भी उस कमरे की ओर भेज दिया ,उसे किसी दाई का नाम दे दिया जो वैसे ही मर्दाना ढंग के थी और औरतो की मालिश किया करती थी ,साथ ही हमेशा घूंघट में ही रहती थी,दासी को समझा दिया गया था की कह दे की इसका मौन चल रहा है और उपवास है,बाकी प्राण अगर पूछे तो कह दे की विक्रांत ने मालिश के लिए भेजा है और विक्रांत अगर पूछे तो कह दे की प्राण ने भेजा है,क्योकि वो दोनो ही ऐसी छोटी छोटी बातो पर कोई ध्यान ही देते थे,
कालिया कमरे में आ चुका था ,वो दासी बाकियों से बात में उलझी हुई थी,
“आओ दाई इस कमरे में आओ “कालिया दूसरी दासी के पीछे हो लिया ,कालिया ने जितना देखा था वो समझ गया था की आखिर क्यो कनक यंहा की दीवानी हुई जा रही थी,अभी वो उनके बाथरूम में थे जंहा बड़ा सा टब था जिसमे दो तीन आदमी आराम से आ सकते थे,हल्के कुनकुने पानी में गुलाब के फूल तैर रहे थे जिससे रोशनी का शरीर ढंका हुआ था ,शायद उसने कोई भी कपड़े नही पहने हुए थे,
जितना बड़ा वो बाथरूम था उतना बड़ा तो कालिया का पूरा घर भी नही था ,आलीशान तब और बड़ा सा रोशनदान जंहा से धूप छनकर आ रही थी,इत्र की खुश्बू से कालिया का नाक ही भर गया था,लगा की वो स्वर्ग में है ,
कालिया ने रोशनी को देखा ,वो आंखे बंद की हुई आराम से लेटी हुई थी जैसे उसे दुनिया की कोई भी खबर या फिक्र ना हो,उसके सर के पास बैठी हुई एक दासी उसके कंधों को हल्के हल्के से मालिश कर रही थी,उसे देखकर ही कालिया का मनोबल थोड़ा टूट गया,
‘सच में वो कितने सुख में है ‘उसने अपने मन में कहा
तभी कमरे का दरवाजा खुला और कनक वँहा आयी,उसे अपने जालीदार घूंघट से देखकर ही कालिया के होशं उड़ गए ,
‘क्या भगवान अब यही दिन देखना बच गया था ‘वो फिर से मन ही मन रो पड़ा ..

कनक पूरी तरह से नंगी थी और हल्के हल्के से हंसती हुई आकर रोशनी के साथ उस टब में लेट गई …
“क्या भाभी मजा आ रहा है..”कनक खिलखिलाई
तभी वँहा पूनम की चहेती दासी भी आ गई और सर झुकाकर एक ओर खड़ी हो गई ,कनक उसे देखने लगी दोनो की नजर मिली और दोनो ने हल्के से मुस्कान आपस में बिखेर दी..
कनक की बात सुनकर कालिया को और भी पीड़ा पहुची थी,उसकी भी बहन उसकी ही बीवी से ऐसी बात कर रही थी..
रोशनी ने आंखे खोली उसकी आंखे लाल थी ,और चहरा शांत ..
“चाहे कितनी भी सुख दुविधा मिल जाए लेकिन …...तेरे भइया के साथ झरने में नहाने का मजा थोड़ी ही आएगा ..”
वो दुखी थी जो उसकी आवाज से ही पता चल पा रहा था लेकिन वो रो नही रही थी ,शायद बहुत रो चुकी थी ,
“ओह तो भइया का काला लंड याद आ रहा है मेरी भाभी को ..”
कनक फिर से जोरो से हँस पड़ी
रोशनी बुरी तरह से शर्मा गई साथ ही कालिया भी …
कनक ने रोशनी की मालिश कर रही दासी को वँहा से भेज दिया,अब कमरे में बस पूनम की दासी ,कनक रोशनी और कालिया थे..
“ऐसे भइया की तरह ही तगड़ा लंड हमारे विक्रांत बाबू का भी है,देखा ना कैसे पकड़े हुए थे आपको ..”
कालिया तो बुरी तरह ही हिल गया ये उसकी बहन थी जिसे उसने गोद में खिलाया था,वही आज अपनी भाभी को बेवफाई के लिए उकसा रही है...कालिया गुस्से से भर गया लेकिन कुछ भी नही कह पाया ..
“चुपकर कुछ भी बोलती है और तुझे कैसे पता की तेरे भइया का वो …”रोशनी शर्मा गई जिसे देखकर कालिया और भी गुस्से में भर गया ,साली दोनो एक सी है ,उसने मन में ही कहा
“जब आप और भइया करते थे तो मैं भी छुपकर देखा करती थी ..
“छि बदमाश कैसी लड़की है तू “रोशनी पहली बार खिलखिला कर हँसी वही कालिया को तो अपने कानो पर विस्वास ही नही हो रहा था,जिसे वो अपनी सीधी साधी बहन समझता है जिसे दुनिया के कोई टेढ़े चाल नही पता वो तो एक …
कालिया आगे की बात नही सोचना चाहता था ..
“तेरे भइया कहा है कनक क्या वो हमे भूल गए है क्या वो यंहा नही आएंगे …”
कालिया को लगा की वो तुरंत ही अपना घूंघट निकाल दे ,वो ऐसा करने ही वाला था की एक हाथ ने उसे रोक लिया वो हाथ उस दासी का था जिसे पूनम ने कालिया के साथ भेजा था..
“उन्हें अब भूल भी जाओ भाभी ,विक्रांत तुम्हारा दीवाना है तुम्हे रानी बना कर रखेगा,उस कंगाल के पास तुम्हे क्या मिलेगा तुम विक्रांत के साथ हो जाओ और बस ऐश करो ,वैसे भी उसका लौड़ा भी तुम्हारे कालिया के बराबर का ही है ..

”
कनक और हंसती इससे पहले ही एक जोरदार झापड़ उसके गाल पर पड़ गया ये झापड़ रोशनी का ही था,वो गुस्से में लाल थी लेकिन कनक को जैसे कोई भी प्रभाव नही पड़ा वो अभी भी मुस्कुरा रही थी,
“भाभी ऐसे भी भइया यंहा आने से रहे और विक्रांत के पास बहुत पैसा है हम दोनो ही ऐश करेंगे …”
कनक की आंखों में भी पानी था लेकिन फिर भी उसकी बातो में शरारत थी,
रोशनी उसके चहरे को देखती ही थी पता नही क्या था उस चहरे में जो वो खामोश हो गई ,तभी वो दासी बोल उठी
“अरे मालकिन कहा विक्रांत साहेब इनको छू पाएंगे ,ये तो प्राण साहब की रखैल बनाने लायी गई है “
कालिया से अब रहा नही गया वो अपना घूंघट खोलकर सबके सामने आ गया ,जिसे देखकर रोशनी कुछ कहने ही वाली थी लेकिन कनक ने उसका मुह दबा दिया ,रोशनी की आंखों में बस पानी था वो कालिया को और कालिया उसे देखे जा रहे थे ..
कालिया कुछ कह पाता इससे पहले ही रोशनी ने उसे चुप रहने का इशारा किया.पता नही ये क्या हो रहा था लेकिन कालिया ने कुछ भी नही कहा ,वो अपनी बीवी और बहन की आंखों में पानी और प्यार को देख सकता था ,लेकिन उसे बड़ा आश्चर्य भी हो रहा था की ये वही कनक है जो आंखों में उसके लिए इतना प्यार लिए हुए भी ये सब बोल पा रही थी …
“अरे विक्रांत साहब को तुम नही जानती ,उन्हें जो पसंद आ गया उसे वो ले कर रहेंगे,और ऐसे भी उन्हें भी तो ये साबित करना है की उनका लंड हमारे कालिया भइया से मजबूत है और वो तो भाभी के चुद में जाने से ही पता चलेगा की कौन सा लंड ज्यादा मजबूत है ..”
कनक ने दासी की बात का जवाब दिया लेकिन ये सब बोलते हुए उसने अपना सर नीचे कर लिया था,वो कालिया से नजर नही मिला पा रही थी ,कालिया को समझ आ चुका था की ये सब किसी ना किसी खेल का ही कोई हिस्सा है जिसे कनक और वो दासी मिलकर खेल रहे है और साथ ही उन्होंने रोशनी को भी मिला लिया है,रोशनी बस कालिया को देख रही थी उसके आंखों से निर्झर आंसू बह रहे थे लेकिन मुह से कोई भी आवाज नही आ रही थी ..
“लेकिन प्राण साहब कैसे मानेगे…”उस दासी की आंखों में भी ये सब देखकर आंसू आ चुके थे.
“वो तो विक्रांत ही जाने “
कनक ने हल्के से आवाज में कहा
“मैं दोनो की नही हो सकती किसी एक की होंगी अगर उन्होंने जबर्दस्ती करने की कोशिस की तो मैं अपनी जान दे दूंगी ..ऐसे भी उस बुड्ढे प्राण में रखा ही क्या है ,मुझे भी विक्रांत पसंद आया लेकिन ...

इतनी जल्दी हा भी कैसे कहु “
रोशनी इतना ही बोल पाई साथ ही जब वो विक्रांत पसंद आया बोली तो अपना सर कालिया को देखकर ना में हिला रही थी,कालिया को उसपर बड़ा ही प्यार आया ,वो उसकी ओर बढ़ने ही वाला था की रोशनदान से एक साया सा दिखने लगा ,कालिया को समझते देर नही लगी की हो ना हो रोशनदान के पीछे कोई है ,वो झट से अपना घूंघट लगा लेता है ,और रोशनी के पास जाकर बैठ जाता है और उसके हाथो को पकड़ कर मालिश करने लगता है ,रोशनी के साथ साथ उस दासी और कनक के चहरे में भी एक मुस्कान खिल गई …
“लेकिन दोनो में से एक की होगी कैसे ???”
वो दासी फिर से बोली
“मुझे क्या पता ..दाई चलो मेरे पूरे शरीर की अच्छे से मालिश करो मुझे बड़ा थका थका लग रहा है ,मुझे क्या करना है जो मुझे जीतेगा मैं तो उसकी हो जाऊंगी ..”
रोशनी का चहरा अब खिल गया था और वो ये बोलते हुए थोड़ी हँसी थी ,
कालिया ने थोड़ा जोर लगाकर उसके कंधे को मसाला
“आह ..थोड़ा धीरे करो दाई “रोशनी की आह में बहुत ही प्यार भरा हुआ था,वो मचल गई थी ..कालिया का हाथ फिसलकर उसके स्तनों तक जा पहुचा ,वो हल्के हल्के उसे मसलने लगा .रोशनी ने उसे झूठे गुस्से से देखा और हल्के हाथो की चपत कालिया के कंधे पर मार दी ..
कनक और दासी इसे देखकर मुस्कुरा उठे…
“लगता है भाभी तुम खून खराबा करवाओगी …”कनक हँस पड़ी साथ ही रोशनी और दासी भी..
“चलो तुम दोनो जाओ यंहा से मुझे दाई से अच्छे से मालिश करवानी है ,अब विक्रांत ही जाने की उसे मुझे कैसे पाना है ,मैं भी देखती हु की इतनी बड़ी बड़ी बात करने वाले ठाकुर के सीने और लंड में आखिर कितनी ताकत है ,देखती हु अपने भाई के सामने खड़ा भी रह पायेगा या फुस्सी फटाके की तरह फुस हो जाएगा …”
रोशनी की बात पर बाकी दोनो लडकिया भी खिलखिला गई ,
“ठिक है भाभी ...दाई इनका अच्छे से मालिश करना हम दोनो बाहर जा रहे है “कनक इतना बोलकर रोशनदान का पर्दा खिंच देती है और कमरे में थोड़ा अंधेरा हो जाता है ,दोनो ही खिलखिलाकर बाहर निकल जाती है और साथ ही रोशनदान से वो छाया भी खिसक जाता है ……...

25
कालिया वापस जा चुका था, कालिया के चहरे में एक खुसी थी जो उसके सबसे अच्छे साथी चिराग सिंग को समझ ही नही आ रही थी …
देसी दारू की बोलत लिया हुआ कालिया अपने में ही हँस रहा था,
“अबे तुझे क्या हो गया ,कनक और भाभी ठाकुर के गिरफ्त में है ,तेरे मां बाप को ठाकुर ने मार दिया और तू यंहा देसी पी कर मुस्कुरा रहा है ..”
कालिया ने हल्के से हंसते हुए उसे अपने पास बैठा लिया और पूरी कहानी बता दी ,चिराग कालिया के बचपन का दोस्त था,दोनो साथ ही बड़े हुए थे,ऐसे उसे इन सब को सुनकर खुस होना था लेकिन उसका चहरा तमतमा गया था,जिसे देखकर कालिया चुप हो गया …
“क्या हुआ तू यू गुस्से से क्यो भर गया”
“तू नामर्द है ...

अपनी बीवी और बहन को रंडी बनाना चाहता है,क्या विस्वास की वो जो सोच रहे है कर ही पायेगें अगर नही कर पाए तो ..और भाभी तो बच ही जाए लेकिन कनक ,वो इतना गिर सकती है मैंने सोचा ही नही था…”
उसके आंखों में आंसू थे ,जो कालिया के समझ के परे था,
“चिराग मेरे दोस्त तू ही बता की हम क्या कर सकते है ..”
कालिया ने चिराग के कंधे पर हाथ रखा …
“मैं कनक को ये सब नही करने दूंगा ,तिवारी भइया से बात करता हु…”
चिराग के कनक की इतनी फिक्र करता देख कालिया कुछ सोच में पड़ गया,आज उसे समझ आया था की चिराग राखी के दिन उसके घर क्यो नही जाता था,वो उसकी मा को अपनी मा की तरह मानता था और पिता को अपना पिता ,उसने हमेशा ही रोशनी को मा जैसा दर्जा दिया लेकिन फिर भी वो कभी कनक को बहन नही कह सका...कालिया के होठो में एक मुस्कुराहट तो आयी लेकिन उसमे दर्द ही दर्द था,वो समझ चुका था की चिराग कनक से महोब्बत करता है….

“ये एक जाल है ,वरना हवेली में घुसना इतना आसान तो नही हो सकता “
डॉ चुतिया गंभीर थे,
“वही तो मैं भी इसे समझा रहा हु “चिराग बोल पड़ा
दोपहर का वक्त था और झील के किनारे जंहा जंगल की देवी की छोटा सा मंदिर था एक गुप्त सभा हो रही थी जिसमे तिवारी और डॉ चुतिया भी शामिल थे …
“लेकिन मुझे तो कोई भी ऐसी बात नही लगी जिसमे खतरा हो..”
“यही तो समझ के परे है की ठाकुर इतना बेफिक्र कैसे हो सकता है जब की उसके पास परमिंदर जैसा वजीर हो “
डॉ का तर्क कालिया के भेजे में घुस गया ..
“तो अब..”
कालिया के साथ साथ बाकी के सभी सदस्य डॉ की ओर देखने लगे
“हम्म्म्म तो अब….अगर उसने तुम्हारी जासूसी की होगी तो यकीन मानो की उसे सब कुछ पता होगा की तुम किससे किससे मिले क्या क्या किया ,लेकिन फिर भी उसने तुम्हे सही सलामत जाने दिया इसका मतलब है की वो तुम्हारे जरिये हवेली में छुपे अपने सभी दुश्मनों ढूंढना चाहता है,वरना और तो कोई कारण नही दिखता,अब वो अपनी बीवी पर भी नजर रखे होगा,मेरे ख्याल से अगर अभी प्राण से सबसे ज्यादा खतरा किसी के है तो वो है पूनम को होगा …
तो हमे पहले उसके जाल का फायदा उठाना चाहिए और अपना जाल उसके जाल से बदल देना चाहिए …”
डॉ की बात सुनकर सभी भौचक्के थे ..
“उसका जाल यानी वो तुम्हे हवेली में उस खास रास्ते से आने जाने से नही रोकेगा...मतलब की कोई ऐसा होगा जिसे तुम्हारे आने का पता होगा,फिर तुम हवेली में जंहा जाओगे वहां भी तुम पर नजर रखने को कोई होगा,ठाकुर को हवेली के गद्दार चाहिए मतलब की वो ये सब काम अपने कुछ खास लोगो से ही करवा रहा है ,सभी को इसके बारे में नही पता,तो अगर तुम उसके उन खास लोगो को पहचान लो जो की तुमपर नजर रखने के लिए नियुक्त किये गए है तो …….”
“तो…..

”
कालिया समझने की कोशिस कर रहा था
“तो तुम कनक और रोशनी को आराम से बाहर ला सकते हो,क्योकि ठाकुर ने उस एक जगह पर ही पहरा हटाया है ताकि तुम्हारे आने का पता सिर्फ उसके खास लोगो को ही पता चल पाए...तो अगर वो खास लोग ही ना रहे हो फिर नजर कौन रखेगा ,तुम्हारा रास्ता साफ होगा ,क्योकि ठाकुर ने खुद ही उस जगह से पहरा हटाया है ……”
कालिया तो झूम गया लेकिन डॉ ने उसे रोका
“ये काम एक दिन में नही हो सकता की तुम उन लोगो को पहचान पाओ तो तुम्हे बहुत ही धैर्य रखना होगा साथ ही इस बात की भनक की हमे ठाकुर के इरादे का पता है किसी को नही होना चाहिए तुम वैसे ही जाओगे जैसे कल गए थे ,बिल्कुल ही छुपकर ,और बाहर से तुम्हारा कोई आदमी इस बात की नजर राखेगा की तुम्हारे जाने से वँहा क्या क्या परिवर्तन होता है ,ताकि उसके लोगो का पता चल सके की वो कहा छुपे हुए है,और हा ये कुछ दिन तक रोज करना होगा क्योकि तभी साफ पता चल पायेगा की कितने लोगो को ठाकुर ने इस खास काम के लिए नियुक्त किया हुआ है…..”
डॉ की बात पर सभी ने सर हिला दिया ..
“लेकिन उसका क्या जो पूनम और कनक सोच रही थी की भाई से भाई को लड़ा दिया जाय ..”कालिया को अभी भी ये लगता था की वो प्लान भी सही है..
डॉ उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया
“ठाकुर प्राण सिंह इतना बड़ा चुतिया नही है की एक लड़की के लिये अपने भाई को मार दे...लेकिन हा अगर विक्रांत लड़की के चक्कर में आकर प्राण को मारने की कोशिस करे तो ये जरूर होगा की विक्रांत नही बचेगा ...तो उनके चक्कर को छोड़ो,तुम रोशनी ,कनक और पूनम तीनो को बाहर ले आओ…”
कालिया ने हा में सर हिलाया

26
वर्तमान में
फोन के घनघनाने की आवाज से अजय का ध्यान टूटा और साथ ही चम्पा का भी ..
अजय ने अपने फोन को अजीब निगाह से देखा
“साला यंहा तो टॉवर ही नही मिलता और आज जब इतनी इंटरेस्टिंग कहानी सुन रहा हु तो पता नही कहा से फोन आ गया “
अजय ने फोन काट कर फिर से चम्पा की ओर देखा
“तुम्हे ये सब कहानी लग रही है ,जाओ मैं कुछ नही बताती “
“अरे मेरी जान मेरा मतलब वो नही था ,मैं जानता हु की ये सब सच में हुआ था ..”
तभी फोन फिर से बजा ,अजय ने उसे उठा लिया
“क्या जी सर “वो अब खड़ा हो चुका था
“जी जी जी सॉरी सर जी सर…”
उसने फोन काटा
“इसकी मा की “
“क्या हुआ ??”चम्पा के चहरे में एक डर आ गया
“कुछ नही बस साली मोंगरा ने फिर से एक कांड कर दिया ..”
“क्या हुआ …???”
“SP साहब का फोन था,विक्रांत की बीवी को मार दिया गया है जो की शहर में रह रही थी ,”
“नही बुआ …”चम्पा खड़ी हो गई उसके आंखों से आंसुओ की धार टपकने लगी
“बुआ ????? विक्रांत ठाकुर की पत्नी यानी कनक “
चम्पा ने हा में सर हिलाया
“कैसे “
“अभी कुछ नही बता सकती आप जल्दी जाओ ..

और ये काम मोंगरा का नही हो सकता वो बुआ से बहुत ही प्यार करती थी ,ये काम जरूर ठाकुर ने किया होगा “
वो सुबक रही थी ,
“मोंगरा ठाकुर को कभी नही छोड़ेगी “
चम्पा ने सुबकते हुए ही कहा ,कुछ देर के लिए अजय बस उसे देखता ही रह गया ……

शहर का थाना प्रभारी जांच में जुटा हुआ था ,अजय के जाते ही पहले उसने उसे पकड़ लिया ,
“अबे यंहा इतना बड़ा कांड हो गया तू अभी आ रहा है ..”
“अरे सर मुझे जैसे ही पता चला मैं दौड़ा चला आया ,लेकिन ये तो आपके एरिये का केस है मुझे क्यो बुलाया “
“क्योकि वो डकैत तो तेरे एरिये की है ,और जमीदार साहब ने इस्पेसल तुझे बुलवाया है …जल्दी जा साहब भड़के हुए है “
अजय को पहले तो सभी ने अजीब निगाह से देखा लेकिन जब ठाकुर ने उसे अपने पास बुलाया और उसके कन्धे पर हाथ रखा सभी की आंखे और भी फैल गई ..
“उसे पकड़ने की कितने करीब पहुचे ??”
ठाकुर का पहला प्रश्न था
“समझलीजिये साथ ही सोता हु “
ठाकुर ने अजय को अजीब निगाहों से देखा
“जब कालिया को आप अपने घर में ही नही पकड़ पाए तो थोड़ा धैर्य रखिये अभी अभी तो आया हु,थोड़ा समझने तो दीजिये ,इतने सालो में क्या हुआ ,कनक आखिर विक्रांत की बीवी कैसे बन गई ???”
प्राण के होठो में मुसकान आ गई
“लगता है तुम ये काम कर ही लोगे जिसके लिए तुम्हे बुलाया गया है,आज तक किसी को ये बात पता नही चल पाई थी की कालिया मेरे घर आता था,तुमने तो बहुत कुछ पता कर लिया “
अजय थोड़ा हंसा
“सब इसका कमाल है “
उसने नजर नीचे करके अपने पेंट की तरफ इशारा किया ,प्राण भी हँस पड़ा लेकिन फिर उसे ख्याल आया की वो कहा है ,प्राण अजय को ले कर थोडा दूर हट गया ..
“इसी के चक्कर में मेरे भाई ने उस रांड से शादी कर ली,साला मुझे मरना चाहता था आज देखो ,खुद की बीवी मरी पड़ी है और लड़कियों के जैसे रो रहा है…”
अजय ने उस ओर देखा एक अधेड़ आदमी सिसक रहा था साथ ही एक और लड़की थी जो उम्र चम्पा जितनी ही लग रही थी वो भी उससे लिपटे हुए रो रही थी,
“ये विक्रांत और उसकी बेटी है…”
“ह्म्म्म तो कनक को अपने मरवाया है ..”
अजय ने मुस्कुराते हुए प्राण की ओर देखा
प्राण के चहरे में भी मुस्कुराहट आ गई
“बहुत खूब तुम आदमी तेज हो ,साली बहुत तकलीफ दे रही थी,हवेली और जायजाद तो पहले ही छोड़ दिया था इन्होंने,भाई की खातिर इन्हें जिंदा भी रखा और यंहा घर भी दिया,इनकी बेटी को भी कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करवाया , लेकिन पता चला की इसने मोंगरा को शरण दिया था ,और वो यंहा रह कर मुझे मारने की प्लानिंग कर रही थी ,साला अब मेरे बेटे से नही रहा गया ,ठोक दिया साली को “
अजय ने फिर से उस लड़की की तरफ देखा ,बड़ी ही मासूम थी लेकिन आंखे लाल ..शायद रो रो कर या फिर गुस्से में ???
वो अजय को ही घूर रही थी ,जैसे उसे खा जाएगी ..
अजय ने तुरंत ही आंखे मोड़ ली ..

“मुझे इस लड़की के तेवर कुछ सही नही लग रहे “
अजय तुरंत ही प्राण से कह गया
“जानता हु,गुस्सा तो उसके खून में है,विक्रांत की बेटी जो है ..और जब उसकी मा का कातिल उसके सामने खड़ा हो तो गुस्सा तो उसे आएगा ही “
अजय चौका ..
“मतलब उसे पता है “
“इन दोनो के सामने ही तो मारा था ,लेकिन फिक्र मत करो कोई कुछ नही कहेगा,विक्रांत का एक छोटा बेटा भी है जो की होस्टल में रहता है और हमारी निगरानी में है ,बाकी तो तुम समझ ही गए होंगे “
अजय मन ही मन ठाकुर को गालियां देता है लेकिन चहरे में बस एक मुस्कान ले आता है ,और फिर से उस लड़की को देखता है ,उसे देखकर ही उसे आभस हो गया की कनक कितनी सुंदर रही होगी ,पतली दुबली सी लंबी लड़की बड़ी बड़ी आंखों वाली,दूध सी गोरी लेकिन अभी चहरा लाल था ,उसके तेवर से ही लग रहा था की वो कितनी गुस्सेल है,लेकिन फिर भी अजय को बहुत ही प्यारी लगी,उसकी साली जो थी …
प्राण अजय को देखता रहा
“क्या हुआ लड़की भा गई क्या “
अजय बुरी तरह से झेंपा
“फिक्र मत कर अगर मेरा काम कर दिया तो दोनो तेरे “
“दोनो ???”
“हा तेरी चम्पा और ये साली रांड की औलाद भावना ,रखैल बना कर रख लेना दोनो को ..”
‘भावना ‘अजय ने मन में ही दोहराया ,लेकिन उसे प्राण पर गुस्सा भी आया ,क्योकि भावना रिश्ते में उसकी बेटी जैसे थी …

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रंडी से प्यार , प्यार या धोखा , दीदी और दोस्त , रंडियो का घर,
,बीवी के कारनामे, खूबसूरत डकैत,
जादुई लकड़ी , बीवी के आशिक , जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी)
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Sep 19, 2019

#32

27

ठाकुर और बाकी के पुलिस वालो के जाने के बाद अजय फिर से कनक के घर में गया…
“क्यो आये हो यंहा “
भावना चिल्लाई
“थोड़ी तहकीकात करनी है “
अजय ने अपनी पुलिसिया अकड़ में कहा
“देखो अभी हम बहुत दुखी है,अभी हम कुछ भी कहने की स्तिथि में नही है “
विक्रांत जो की कभी बहुत ही गुस्सेल हुआ करता था अब बहुत ही शांत दिख रहा था...उसने ही भावना को आगे बढ़ने से रोक लिया था …
“लेकिन पुछताज तो करनी ही पड़ेगी “अजय का अंदाज अब भी वही था..
“कितने कमीने हो तुम “
भावना फिर से चिल्लाई ,
“ये जानते हुए भी भी की मा को किसने मारा है तुम यंहा पुछताज करने आ गए...दीदी तुम्हारे बारे में गलत थी तुम तो ठाकुर से मिले हुए हो ,दीदी तुम दोनो को नही छोड़ेगी “
अजय सोच में पड़ गया की क्या मोंगरा ने उसे सब बता दिया था ..
“अच्छा तो दीदी से तुम्हारी अच्छी बनती है,”अजय थोड़ा रुका
“तब तो तुम मेरी साली हुई “
अजय के मजाक से किसी को हँसी तो नही आयी लेकिन दोनो ही उसे घूरने लगे ..

“क्यो मोंगरा ने सब कुछ नही बताया क्या ??”
दोनो ही एक दूसरे का चहरा देखने लगे
“तुम गद्दार हो,इधर दीदी के साथ प्यार की बाते करते हो और उधर ठाकुर के साथ वफादारी दिखा रहे हो “
भावना की आवाज इस बार थोड़ी ठंडी थी ..
“समझा करो मुझे ठाकुर से दोस्ती करके रखनी पड़ती है ,वरना मेरे स्थान पर कोई दूसरा आ जाएगा,और मैं तुम्हारी दूसरी दीदी के बारे में बात कर रह हु ,चम्पा की , ना की मोंगरा का “
उसकी बात सुनकर दोनो ने फ्रिर से एक दूसरे को देखा ,विक्रांत खड़ा होकर उसके पास पहुचा ..
“तुम आग से खेलने की कोशिस कर रहे हो,चम्पा को भूल जाओ क्योकि मोंगरा तुमसे बेहद प्यार करती है,मोंगरा तुम्हे पाने के लिए कही चम्पा को ही ना मार दे,कनक उसे समझा के थक गई लेकिन …..वो किसी की बात सुनती ही कहा है …”
“तब तो मेरे लिए और ही आसान हो जाएगा ,मोंगरा को खत्म करना और ठाकुर को भी ..”
अजय इतना ही बोलकर वँहा से निकलने ही वाला था की उसकी नजर एक पुस्तक में पड़ी अजय कुछ देर उसे ध्यान से देखकर उसके पास पहुचा और पुस्तक में फंसे हुए एक चमकीले कागज को खिंच लिया ,वो एक तस्वीर थी जिसमे मोंगरा हाथो में बड़ी सी पिस्तौल लिए दिख रही थी ..लेकिन अजय उसे और देख पाता उससे पहले ही भावना दौड़ी आयी और उसके हाथो से वो फ़ोटो खिंच लिया …...अजय उसकी इस अदा पर हल्का सा मुस्कुराया और घर से निकल गया …...

28
रात अंधियारे में छोटे से दिए की लालिमा में मोंगरा का नंगा शरीर चमक रहा था,बाल बिखरे हुए थे,और बलवीर का नंगा देह उसके शरीर के बाजू में पड़ा था,अभी बलवीर का मुह मोंगरा के स्तन से दूध पी रहा था,और मोंगरा उसके बालो को सहलाते हुए किसी ख्वाब में खोई हुई थी..
“उसने मेरी बुआ को मार डाला बलबीर ,और मैं कुछ भी नही कर सकी,उसने बुआ को मेरे कारण मारा ..”
बलवीर चहरा उठा कर उसकी ओर देखता है,मोंगरा के आंखों में आंसू नही थे लेकिन आंखे कही खोई हुई जरूर थी ,
“मैं अजय के बांहो में थी और उसने …”
“मैंने पहले ही कहा था की इस इंस्पेक्टर के चक्कर में मत पड़ो लेकिन तुम तो मेरी बात सुनती ही नही,क्या मैं तुम्हे प्यार नही करता,क्या बाकी के गिरोह के लोग तुम्हे प्यार नही करते...

और अगर जिस्म में भूख है तो बोलो ये बलवीर तुम्हारे जिस्म को निचोड़ कर रख देगा,तुम्हारी हर प्यास को बुझा देगा “
बलवीर बोलते हुए उत्तेजित हो गया था,उसकी आवाज कांप रही थी,गुस्सा उसके चहरे पर साफ साफ झलक रहा था,लेकिन मोंगरा के होठो में उसके बात को सुनकर बस मुस्कान आयी ,और उसने बलवीर के कड़े लिंग को अपने नरम हाथो में ले लिया जो की किसी हल्के गर्म लोहे की रॉड की तरह मजबूत और गर्म था,
मोंगरा ने बलवीर के कमर को हल्के से धक्का दिया बलवीर ने इशारा समझा और अपने कमर को मोंगरा के कमर के ऊपर ले आया,मोंगरा ने उसके उस रॉड की तरह तने हुए लिंग को अपने हाथो से पकड़ कर अपनी योनि में रगड़ा जो की अभी पूरी तरह से गीली तो नही थी लेकिन लिंग के आभस से थोड़ी गीली हो गई थी ,इशारा समझ बलवीर ने भी हल्के से अपनी कमर को मोंगरा के कमर पर टिकाया और लिंग उसकी योनि की गहराई मे धसता चला गया…
मोंगरा की आंखे बंद हो चुकी थी और उसके हाथ बलवीर के बालो को जकड़ चुके थे ,बलवीर हल्केहल्के ही सही लेकिन ताकतवर धक्के दे रहा था,
“आह आह मैं ठाकुर को नही छोडूंगी बलवीर नही छोडूंगी ..आह आह ,तुम मेरे साथ हो ना मेरे बच्चे ..”
“हा हा हा मरते दम तक तुम्हारे साथ हु ,आह “
बलवीर की कमर तेज होने लगी थी,और मोंगरा के आंखों से आंसू की बूंदे टपकने लगी,बलवीर किसी जानवर की तरह पूरी ताकत लगा कर मोंगरा के योनि पर प्रहार किये जा रहा था,उसका विशाल शरीर मोंगरा को मसल रहा था,और मोंगरा के पूरे शरीर के अपने अंदर समाया हुआ था,
“आह उस मादरचोद अजय को भी जान से मार दूंगा तुम्हे छूने की हिम्मत कैसे की उसने आह आह “
बलवीर अब उत्तेजना के शिखर पर पहुच चुका था,
मोंगरा के आंखों में तो आंसू थे लेकिन होठो में बलवीर की बात सुनकर मुस्कुराहट आ गई ,उसने बलवीर के बालो को जोरो से खिंचा और और उसके मुह को अपने छातियों से लगा ली ,बलवीर पूरी शिद्दत से उसके वक्षो को अपने मुह में भरकर अपने दांतो को गाड़ने लगा …
दर्द और मजे में मोंगरा चीखे जा रही थी और उत्तेजना के शैलाब में बलवीर और मोंगरा एक साथ ही ढेर हो गए,बलवीर का गाढ़ा गाढ़ा वीर्य अब मोंगरा के योनि से बह कर बाहर निकल रहा था,बलवीर मुर्दों की तरह मोंगरा के ऊपर लेट गया था ,और मोंगरा भी लाश सी अपनी सांसों को सम्हाल रही थी ……...

मोंगरा की नजर अब भी छत को देख रही थी ,बलवीर उसके बाजू में नींद की आगोश में जा चुका था,लेकिन मोंगरा की आंखों में नींद ही नही था,वो अपने अतीत की यादों में खोई थी ,जब मॉंगर और बलवीर एक साथ ही खेला करते थे,बलवीर उससे बचपन से प्यार करता था,अपने पिता के लाख मना करने के बाद भी उससे मिलता ,आखिरकार परमिंदर ने उसे टोकना भी छोड़ दिया ,लेकिन वो जानता था की वो कालिया की बेटी है,उस हवेली में उसे कोई भी पसंद नही करता था,और मोंगरा का सबसे बड़ा दुश्मन था ,ठाकुर रणधीर सिंह…
रणधीर प्राण का इकलौता बेटा था,और लगभग बलवीर की उम्र का,प्राण और परमिंदर दोनो ही चाहते थे की बलवीर रणवीर का वादफ़ादार बने जैसा की परमिंदर प्राण का वफादार था लेकिन वक़्त को कुछ और ही मंजूर था बलवीर अपने से 15 साल छोटी मोंगरा के साथ खेला करता था,बलवीर को हमेशा ही मोंगरा की ही फिक्र रहती थी,ताकत तो बलवीर में भी परमिंदर जैसी ही थी ,लेकिन वो ताकत मोंगरा की रक्षा के लिए ही खर्च होती थी,लोगो को लगता था की बलवीर मोंगरा को अपनी बहन समझता है ,शायद हा भी और ना भी क्योकि वक़्त के साथ साथ जब मोंगरा जवान हुई तो सब कुछ बदलने लगा,रणवीर और बलवीर दोनो ही मोंगरा की जवानी के पीछे दीवाने होने लगे थे,मोंगरा थी ही इतनी आकर्षक ,कम उम्र में ही उसके जिस्म में भराव आने लगा था,बलवीर तो उसे दिल से चाहता था लेकिन रणवीर की निगाहे उसके जिस्म में रहती थी ,वो भी उससे 15 साल बड़ा था और ना जाने कितनी लड़कियो की इज्जत उसने अपने हाथो से उतारी थी ,लेकिन मोंगरा कभी उसके हाथ नही आती थी,उसके बीच का सबसे बड़ा रोड़ा था मोंगरा की मा और बलवीर…
मोंगरा पलट कर बलवीर के तरफ देखती है जो की उसके बाजू में सोया हुआ था ,सही मायने में मर्द था बलवीर ,चौड़ी छाती ,गठी हुई भुजाएं ,ताकत का जीता जाता नमूना लेकिन मन से बिल्कुल ही बच्चा,खासकर मोंगरा के लिए तो वो बच्चा ही था,मोंगरा के मन में उसे देखकर बेहद प्यार उमड़ गया उसने थोड़ा आगे बढ़कर बलवीर के गालो को चूम लिया ..
अभी उसके शरीर से पसीना बह रहा था और कमरे में जल रहे छोटे से दिए की रोशनी में बलवीर का पूरा नंगा शरीर चमक रहा था,मोंगरा उसके चहरे को ही निहारे जा रही थी,क्या क्या नही किया बलवीर ने उसके लिए ,उसे तब सहारा दिया जब कोई अपना उसके साथ नही था,अगर वो नही होता तो ….

तो शायद वो भी नही होती …
मोंगरा को अब अजय की याद आयी,ये बलवीर था जो मोंगरा से प्यार करता था और वो अजय है जिससे मोंगरा प्यार करती है …
मोंगरा की आंखों में फिर से पानी आ गया,उसे याद आया की कैसे वो दिन भर अजय की बांहो में चम्पा बनकर पड़ी रही और ठाकुर ने उसकी बुआ को मरवा दिया,बुआ ने ठिक ही कहा था की अजय को चम्पा की ही रहने दे ,शायद एक डाकू के नसीब में एक पुलिस वाले का प्यार नही था,होता भी कैसे अजय तो चम्पा से प्यार करता हैं ना ही मोंगरा से …
मोंगरा से तो बलवीर प्यार करता है वो भी बिना किसी शर्त के ,बिना कुछ मांग के,.
बलवीर ने तो आज तक कभी मोंगरा से उसका जिस्म भी नही मांगा लेकिन मोंगरा ही थी जो उसके प्यार को देखकर ही उसे अपना सब कुछ देने को तैयार हो गई थी ,और आज भी वो यही सोच रही थी की बलवीर के लिए ये जिस्म क्या ये जान भी दे दु तो कम होगा,
जिस्म का भोग बलवीर को लगा कर वो बलवीर के अंदर के जानवर को थोड़ा शांत रख पाती थी,लेकिन बलवीर खुद से कभी आगे बढ़ने की कोशिस नही करता और करता तो भी मोंगरा के एक बार रोकने पर ही रुक जाता,मोंगरा उसे प्यार से देखती जैसे एक मां अपने भूखे बेटे को देखती है,और उसे अपने जिस्म का भोग वैसे ही करवाती जैसे एक मा अपने बेटे को खाना खिलाती है,बलवीर किसी भूखे कुत्ते सा मोंगरा के ऊपर टूट पड़ता था,लेकिन वो मोंगरा ही थी जो बलवीर के ताकत को ना सिर्फ सह पाती थी बल्कि अपनी जिस्मानी और मानसिक जरूरतों के हिसाब से उसे नियंत्रित भी कर सकती थी …
मोंगरा का ध्यान अपने योनि के ऊपर गया जिससे अब भी बलवीर का गढ़ा वीर्य समाया हुआ था,उसने पास ही पड़े एक कपड़े से उसे पोछना चाहा लेकिन फिर ना जाने क्यो रुक गई,वो बलवीर से सटी और उसके गालो पर प्यार से हाथ फेरा..
उसे कुछ आहट सी सुनाई दी ,जब मोंगरा ने उस ओर देखा ,लेकिन फिर बेफिक्री से बलवीर के सीने में एक चुम्मन किया ,
बलवीर थोड़ा मचला ,और मोंगरा ने उसे अपने पास और भी जोरो से खिंच लिया ..बलवीर की आंखे खुल गई..

मोंगरा ने फिर से बलवीर के लिंग को पकड़ा जो की सोया हुआ होने के बावजूद भी इतना बड़ा लग रहा था की किसी लड़की की गहराई में पहुच जाए ,
मोंगरा के हल्के हाथो से सहलाने से उसका लिंग फिर से फुंकार मारने लगा,मोंगरा अपने होठो को बलवीर के कानो के पास ले गई,
“और घुसना है क्या “
बलवीर की नजर वैसे ही ललचाई थी जैसे किसी बच्चे की चाकलेट को देखकर ललचाती है…
मोंगरा को उसकी उस नजर को देखकर ही हँसी आ गई ,और उसके लिंग के पकड़ कर अपने सिर को नीचे किया,
जैसे बलवीर जन्नत में पहुच गया हो ,मोंगरा के होठो की गर्मी से उसका लिंग फिर से फुंकार मारने लगा था ,मोंगरा ने अब फिर से लिंग को उसी योनि में डाल लिया जिसमे अब भी बलवीर का वीर्य भरा हुआ था,बलवीर को अपने ही वीर्य का ठंडा अहसास हुआ और ये सोचकर ही उसके लिंग में अधिकतम अकड़ आ गई की अभी तक मोंगरा ने उसके वीर्य को साफ नही किया था…
दोनो की कमर फिर से मिल गई और दोनो फिर से एक अलग दुनिया की सैर में निकल पड़े ……..

मोंगरा अभी बलवीर की आगोश में थी वही अजय अपने ही ख्यालों में खोया हुआ था,रात का सन्नाटा उसे सोने नही दे रहा था,वो बेचैन था,हर एक कड़ी को जोड़ने की नाकाम कोशिस करता हुआ वो और भी बेचैन हो जाता था …
आखिरकार कुछ पेग पी लेने के बाद वो अचानक ही अपने कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और ना जाने क्या सोचकर कही निकल गया,जंगलों के बीच उसकी साइकिल चल रही थी ,उस सुनसान जंगल के उबड़खाबड़ रास्ते के लिए ही उसने ये छोटी सी स्पोर्ट साइकिल की थी,जुगनुओं की झिंगुरिओ की आवज से माहौल और भी डरावना हो रहा था लेकिन अजय के दिमाग में कोई भी डर नही था,वो बेख़ौफ़ था,लेकिन अधीर भी ,उसके दिमाग में बार बार वही तस्वीर आ रही थी जिसे उसने आज विक्रांत के घर में देखा था,वो मोंगरा की तस्वीर जिसमे वो एक बड़ा सा पिस्तौल लिए खड़े थी ,और पीछे का वो मंदिर ….
पहाड़ की चोटी में बना हुआ वो मंदिर ऐसे तो तस्वीर में बहुत ही छोटा सा दिखाई दे रहा था लेकिन फिर भी वो अजय के दिमाग में बस चुका था और वो मोंगरा की उस मंदिर से दूरी का अंदाजा लगा रहा था,तस्वीर पहाड़ी के नीचे से नही बल्कि सीधी ऊँचाई से खिंची गई थी ,मतलब था की किसी दूसरी पहाड़ी से ,क्योकि तस्वीर में वो मंदिर मोंगरा के नीचे दिख रहा था,मतलब की आसपास की कोई पहाड़ी जो की उस मंदिर वाली पहाड़ी से ऊंचा होगा,अजय इतने देर से यही सोच रहा था की आखिर वो कौन सी पहाड़ी होगी जंहा मोंगरा अपने पूरे गैंग के साथ छुपी होगी ..

ऐसे तो उसे सुबह तक का इंतजार करना था लेकिन ये उत्तेजना ही उसे सोने नही दे रही थी और वो अपनी साइकिल लेकर निकल पड़ा था…
दो घंटे की मसक्कत के बाद वो उस मंदिर वाली पहाड़ी के नीचे खड़ा था और ध्यान से बाकी सभी पहाड़ी को देख रहा था,उसने अपना मोबाइल निकाला और मेप से आसपास की ऊची पहाड़ी खोजने लगा,मोबाइल की रोशनी से आसपास के कीड़ो ने उसे जरूर परेशान किया लेकिन आखिर उसे समझ में आ ही गया की क्यो मोंगरा ने उस जगह को चुना होगा…
अपनी साइकिल झड़ियो में छिपा कर वो पहाड़ में चढ़ना शुरू कर दिया ,बड़े छोटे पत्थरो का सहारा लेकर वो आगे बढ़ता गया,चांद की रोशनी ही उसकी मददगार थी ,एक पत्थर के ऊपर सोए हुए बंदुखधरि को देखकर उसे ये निश्चित हो गया की मोंगरा यही कही होगी…..
परिस्थिति तो ऐसी थी की उसे डरना चाहिए था लेकिन फिर भी उसके दिल दिमाग में ऐसा जनून था की उसे डर लेशमात्र भी नही हो रहा था,वो खुद भी अपने किये पर अचंभित हो रहा था वो मंजिल की ओर ऐसे बढ़ रहा था जैसे कोई शक्ति ही उसे उस ओर खिंच रही हो …
वो पहाड़ी के बीच तक आ चुका था,कुछ घोड़े और समतल जगह भी उसे दिखाई दे गई ,एक छोटे से गुफा नुमा जगह से कुछ रोशनी छन कर आ रही थी जैसे अंदर दिया जलाया गया हो,और बाहर बस लकड़ियों से बनाया गया एक दरवाजा था जिससे अंदर देख पाना बहुत ही आसान था ...वो हल्के कदम से और बहुत ही आहिस्ते आहिस्ते उस ओर बड़ा ,अंदर का नजारा देखकर वो दंग ही रह गया ,क्योकि अंदर उसकी सपनो की रानी पूरी नंगी किसी और लंबे चौड़े मर्द के साथ लेटी हुई दिखाई दी…
वो वही लड़की थी जिसके आगोश में उसने पूरी सुबह से दोपहर बिताई थी या वो इसकी जुड़वा बहन थी ,अजय दोनो में बिल्कुल भी फर्क नही कर पा रहा था,अभी मोंगरा छत को देख रही थी जैसे किसी ख्याल में खोई हो …
पुलिस रिकार्ड को याद करके अजय को याद आया की मोंगरा के बाजू में सोया हुआ शख्स कोई और नही बल्कि मोंगरा का वफादार और परमिनन्दर का बेटा बलवीर है..
मोंगरा उसके ओर पलटी और बलवीर को प्यार भरी निगाहों से देखने लगी,
अजय को पता नही क्यो लेकिन इतनी जलन सी महसूस हुई की वो वँहा से जाने को हुआ और इसी में एक गलती उससे हो गई वो दरवाजे से टकरा गया,अचानक ही मोगरा पलटी और जैसे दोनो की नजर मिल गई,..
अजय तो जैसे किसी मूर्ति सा स्थिर हो गया था,मोंगरा ने थोड़ी देर ही उसे घूरा जैसे उस अंधेरे में देख रही हो की वो कौन था और अनायास ही उसके होठो में मुस्कुराहट सी आ गई ..

वो बलवीर की ओर हुई और उसकी छाती को चूमने लगी …
अजय ये समझ नही पा रहा था की मोंगरा ने उसे देखा की नही ,कमरे में पर्याप्त रोशनी थी की अजय मोंगरा को देख पा रहा था वही बाहर चांद ने इतनी रोशनी बिखेर दी थी कोई शख्स किसी को देखकर पहचान जाए लेकिन इतनी भी नही की उस लकड़ी के दरवाजे के बाहर से झकता हुआ शख्स अंदर से दिखाई दे जाए …
लेकिन अगर मोंगरा ने अजय को नही देखा तो वो मुस्कुराई क्यो ???
ऐसा अजय को क्यो लगा की मोंगरा उसकी आंखों में ही देख रही थी ..
अजय बस इसी सोच में था की बलवीर भी उठ गया था और दोनो की प्रेम लीला चालू हो गई थी ,मोंगरा ने बलवीर के लिंग को अपने मुह में ले लिया था और उसकी आंखे बार बार उस आंखों से मिल जाती थी जो की बाहर से उन्हें झांक रहा था ….
अजय के दिल में तेज दर्द सा होने लगा था,एक अजीब सी जलन उसके अंदर होनी लगी,मन किया की अभी पिस्तौल निकाल कर दोनो ही उड़ा दु ,लेकिन ...वो फिर से घबराया,वो जल्दबाजी में पिस्तौल ही भूल आया था,जब जब मोंगरा और अजय की आंखे मिलती थी मोंगरा मुस्कुरा देती ,अजय को अब यकीन हो गया था की मोंगरा ने उसे यंहा देख लिया और शायद पहचान भी लिया है ……..
अजय को ये दर्द क्यो हो रहा था शायद इसलिए क्योकि उसे अभी मोंगरा में चम्पा का अश्क दिख रहा था,और अपनी चम्पा को किसी दूसरे मर्द की बांहों में देखकर उसका खून जल रहा था,वो खुद को बार बार समझा रहा था की ये चम्पा नही बल्कि मोंगरा है उसकी चम्पा ऐसा नही कर सकती…
और अगर मोंगरा ने उसे देख लिया था तो वो उसपर वॉर क्यो नही कर रही बल्कि उसे जलाए जा रही है ..
क्योकि शायद वो अजय से प्यार करती है,लेकिन प्यार करने का ये कौन सा तरीका था की खुद के जिस्म को दूसरे के सामने सौपते हुए दिखाना..
अजय को याद आया जो विक्रांत ने उससे कहा था की मोंगरा उससे बेहद प्यार करती है ...लेकिन यंहा तो ये देख कर नही लग रहा था की मोंगरा उससे पैर करती होगी …
“साली रांड “
अजय ने मन में ही कहा और वँहा से निकल गया …
मन में कई टन जितना बोझ लेकर ,आज मोंगरा इतने पास होते हुये भी वो कुछ नही कर पाया लेकिन अब वो पुलिस के साथ आएगा और साथ ही मोंगरा की ईट से ईट बजा देगा ….
वो जल्दी से नीचे उतारना चाहता था ,वो भागता हुआ उतारने लगा…
तेजी ने उसकी पोल खोल दी और एक डाकू चिल्ला पड़ा
“कौन है वँहा “
अजय हड़बड़ाया और पैर के फिसल जाने से गिरता हुआ एक पेड़ से जा टकराया…..
माथे से खून बहने लगा था और उसका सर घूमने लगा,धीरे धीरे उसकी आंखे बंद हो गई …….

29
“अरे मेरी जान को चोट तो नही आयी “
अजय चौक गया क्योकि ये चम्पा की आवाज थी ,चम्पा या मोंगरा ??
उसने झट से अपनी आंखे खोली..
वो किसी की गोद में पड़ा हुआ था ,दीये की रोशनी में वो उसे पहचान सकता था ,जिस्म नंगा ही था और होठो में वही मुस्कान और सामने खड़ा बलवीर उसे गुस्से से घूरा जा रहा था...

बलवीर भी नंगा ही था जिससे उसका वो गठीला विशालकाय बदन अब अजय के सामने था…
“बलवीर तुम जाओ ..”
मोंगरा ने हुक्म दिया ..
“तुम्हे अकेले इसके साथ छोड़कर ???? “
बलवीर ने खा जाने वाली निगाह से अजय को देखा ,लेकिन अजय के चहरे में एक शिकन तक नही आयी ..
“तुम फिक्र मत करो मैं सम्हाल लुंगी …”
बलवीर अजय को घूरता हुआ वँहा से निकल गया ..
“ऐसी क्या जल्दी थी की रात में ही आ गए मुझसे मिलने “
मोंगरा की हँसी से अजय का खून जल गया वो झटके से उठा ,उसका चहरा गुस्से से तमतमा रहा था …
“ओह मेरी जान गुस्सा है “
मोंगरा की बात अजय को ऐसी लगी जैसे वो उसे चिढ़ा रही हो ..
“चुप कर साली रंडी ..तेरे ठिकाने का मुझे पता चल चुका है अब देखना मैं तेरे गिरोह की ईट से ईट बजा दूंगा ..”
अजय का चहरा गुस्से से तमतमा गया था लेकिन मोंगरा जोरो से हँस पड़ी…
“ओह मेरा बच्चा गुस्सा है लेकिन पुलिस को तुम तब बलाओगे जब तुम यंहा से जाओगे...तुम्हे क्या लगता है की तुम खुद ही यंहा आये हो …?वो तस्वीर मैंने ही रखवाई थी मुझे पता था की तुम इस मंदिर के बारे में जानते हो और तुम जरूर अपना दिमाग लगाओगे और मुझे ढूंढते हुए यंहा तक आ जाओगे लेकिन …….लेकिन सोचा नही था की इतनी जल्दी ,बहुत ही बेचैन था मेरा बाबू मुझसे मिलने के लिए ,बहुत प्यार करते हो मुझसे ..”
मोंगरा के होठो पर एक कमीनी सी मुस्कान थी …
“प्यार ??? तुझे लगता है की मैं तुझसे प्यार करता हु ?? साली रंडी …”
अजय का चहरा गुस्से से जल रहा था लेकिन मोंगरा के होठो पर अब भी वही मुस्कान थी ..
“मैं चम्पा से प्यार करता हु तुझसे नही ,और जितना मैं उससे मोहोब्बत करता हु उतना ही तुझसे नफरत ..”
अजय की दशा को देखकर मोंगरा खिलखिलाई ..
“ओह मेरी जान लेकिन तुम किस चम्पा से मोहोब्बत करते हो 7745 वाली से या 4577 वाली से ….”
मोंगरा जोरो से हँस पड़ी और अजय पिला पड़ गया …
“चम्पा नाम की कोई भी लड़की नही है जो भी है बस मैं ही हु ,तुम्हारी चम्पा भी और तुम्हारी मोंगरा भी …”
मोंगरा जोरो से हँसने वाली थी लेकिन रुक गई कारण था अजय के आंखों में आया हुआ आंसू …
अजय को लगा जैसे उसकी पूरी दुनिया ही खत्म हो गई …वो नीचे बैठ गया था और सर पकड़े हुए रो रहा था ,उसे विस्वास ही नही हो रहा था की उसके साथ ऐसा कुछ हुआ है ...वो बार बार चम्पा को याद कर रहा था उसने उसकी आंखों में देखा था ,उसके दिल की धड़कने सुनी थी वो गलत कैसे हो सकती थी ???
चम्पा का अजय के लिए प्यार गलत कैसे हो सकता था ,अजय का दिल ये मानने को तैयार हि नही था की चम्पा नाम की कोई लड़की नही है या मोंगरा ही चम्पा बनाकर उस धोखा दे रही थी …….
अजय की हालत देखकर मोंगरा की आंखों में भी आंसू आ गए …
“मुझे माफ कर देना अजय लेकिन ...

मैं तुमसे इतना प्यार करती हु की तुम्हे पाने का मुझे और कोई रास्ता नही दिखा “
अजय तुरंत ही खड़ा हो गया और पास ही पड़ी हुई बंदूख उठा लिया और सीधे मोंगरा पर तान दिया …
“बोल मेरी चम्पा कहा है “वो गरजा …
उसे कमरे के बाहर बड़ी हलचल सी महसूस हुई ,लगा की बाहर फ़ौज का जमावड़ा हो चुका है …
“बोल नही तो अभी तेरे दिन में ये सारी गोलियां दाग दूंगा “
मोंगरा के चहरे में कोई भी शिकन नही थी बस आंखों में थोड़े आंसू थे..
“इतना प्यार करते हो तुम मुझसे ...मैं ही तो तुम्हारी चम्पा हूं ..”वो रोते हुई बोली
अजय को लगा की उसका वो रोना बेहद असली है ,जैसे दिल से ही निकल रहा हो ,लेकिन वो कैसे मान सकता था की ये ही उसकी मासूम सी चम्पा है ,नही ये मोंगरा थी और वो उसे फंसा रही थी ...अजय अपने दिल को बार बार समझाने लगा ..
“देखो मैं किसी को नही बुलाऊंगा ,और चम्पा के साथ सब कुछ छोड़कर चला जाऊंगा ,लेकिन कह दो की मेरी चम्पा का भी अस्तित्व है ,वो है...मैं जानता हु की तुम दोनो अलग अलग हो “
अजय सुबकने लगा ..
“तुम चम्पा से प्यार नही करते अगर करते तो ठाकुर को मारने में मेरी मदद करते “
“चम्पा किसी को मरना नही चाहती ..”
“लेकिन तुम तो चाहते हो ...मुझे मारना चाहते हो ,इसीलिए तुमने ठाकुर से हाथ मिलाया ..”
“मैं ठाकुर के करीब जाकर उसे फसाना चाहता था जिससे उसे उसके कर्मो की सजा कानून दे सके …”
मोंगरा हँस पड़ी …
“कानून क्या सजा देगा ,सजा तो मैं उसे दूंगी …लेकिन याद रखो अजय तुम चाहे जिससे प्यार करते हो मैं तुमसे ही प्यार करती हुई और मैं तुम्हे पा के रहूंगी …चाहे इसके लिए मुझे चम्पा को मरना क्यो ना पड़े ”
मॉंगर शेरनी जैसे गरजी …
अजय के होठो में मुस्कान आ गई …
“मतलब की मेरी चम्पा है ,और मेरे रहते तुम उसे छू भी नही सकती ,”
अजय ने वो दरवाजा खोल दिया ,बाहर सभी की बंदूक की नली अजय के ऊपर ही थी ,सूर्य की धुंधली सी किरण फिजाओं में फैल चुकी थी ,और मोंगरा के सभी सिपाही तन कर खड़े थे सभी की नजर अजय के ऊपर ही थी …
बलवीर अब भी उसे गुस्से में घूर रहा था ….
“खबरदार जो किसी ने कोई भी जुर्रत की तुम्हारी सरदार को यही उड़ा दूंगा “अजय गरजा ..
वो कमरे से बाहर आ चुका था साथ ही मोंगरा भी कमरे से बाहर आ गई ,अभी भी अजय के बंदूक की नली मोंगरा के ऊपर ही थी .मोंगरा अब भी नंगी थी और सुबह की किरणों में उसका जिस्म चमक रहा था ,लेकिन गिरोह के सभी सदस्यों के सामने नंगी खड़ी होने पर भी उसके चहरे में कोई भी शर्म नही था,बल्कि बस एक मुस्कान के साथ वो अजय को देख रही थी ,अजय को मन हुआ की अभी उसके सीने में सारी गोलियां डाल दे लेकिन वो ये नही कर सकता था …
वो धीरे धीरे पीछे हट रहा था और बंदूख की नोक पर मोंगरा को लेकर वँहा से निकल जाना चाहता था ..

अचानक ही बलवीर ने पास पड़ा हुआ डंडा उठा लिया ,अजय ने तुरंत उसकी ओर बंदूक घुमा कर फायर कर दिया और …………………….
और सभी जोरो से हँस पड़े क्योकि बंदूक में गोली ही नही थी ,अजय बंदूक का टिगर दबाता रहा और सभी उसकी मूर्खता पर जोरो से हँस रहे थे यंहा तक की मोंगरा भी उसे देखकर हँसने लगी थी ,लेकिन बलवीर अब भी गुस्से से उसे घूरे जा रहा था ,उसने आपके हाथो में पकड़ा हुआ डंडा उठाया और सीधे अजय के उनपर घुमा दिया,जो की सीधे ही उसके सर में आकर लगा…
अजय का सर फिर से चकरा गया था और वो फिर से धड़ाम से नीचे गिर गया…..

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30
एक छोटा कमरा और एक छोटी सी खिड़की ,जिसमे से आती हुई छनी हुई धूप ने अजय को होशं में लाया ,हाथ पाव बंधे हुए थे और कुछ आवाजे सुनाई दे रही थी ,वो सरकता हुआ खिड़की के पास आ गया ……
“तुम्हे उसे छोड़ देना चाहिए मोंगरा तुम समझने की कोशिस तो करो “
“नही समझना है मुझे कुछ वो मेरा है और मैं उसे किसी के साथ भी नही बाट सकती चाहे वो मेरी बहन ही क्यो ना हो “
“मेरी बात मानो क्या तुम मुझे इतना भी नही मानती “
“मानती हुई डॉ लेकिन इस बात के लिए नही …”
मोंगरा की बात सुनकर डॉ चुतिया और तिवारी दोनो ही मायूस से दिख रहे थे,अजय उन्हें देख सकता था,सामने मोंगरा थी जो अपने तेवर में थी और डॉ और तिवारी जो की मोंगरा को बचपन से जानते थे उनकी भी कोई कदर नही कर रही थी ..
“क्या मैं उनसे मिल सकता हु “
तिवारी ने कहा और मोंगरा उसे देखने लगी
“देखो मोंगरा हो सकता है की हम उसे समझा ले ...और तुम्हारी कुछ मदद हो जाए ठाकुर को मारने में “
डॉ चुतिया ने अपना दावा फेका ..
“ठिक है मैं बचपन से आप दोनो की कद्र करती हुई बस इसलिए …”
उसने एक आदमी की ओर इशारा किया और वो दोनो को उस कमरे के पास ले आये और थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला ,अजय असहाय सा दोनो को देख रहा था …
तिवारी ने दरवाजा बंद कर दिया ..
“चम्पा ठीक तो है ना उसे कुछ किया तो नही मोंगरा ने “
अजय का पहला सवाल था जिसे सुनकर तिवारी और डॉ दोनो के होठो में मुस्कान आ गई ..
“वो ठीक है तुम्हे उसकी फिक्र करने की जरूरत नही है,वो मेरे साथ है शहर में ...और तुम फिक्र मत करो हम तुम्हे छुड़ा लेंगे “
डॉ की बात से अजय को थोड़ी राहत तो मिली लेकिन फिर भी वो बेचैन था ..
“तिवारी पुलिस को बुला ले और यंहा पर अटैक करवा …”
अजय की बात से तिवारी और डॉ दोनो ही चुप हो गए
“नही सर हमे पता है की ठाकुर ही गलत है और मोंगरा को मारने का मतलब है की ठाकुर को फिर से पूरी ताकत मिल जाना हम ये नही कर सकते ..अगर करना होता तो कब का कर चुके होते …”
अजय को समझ आ चुका था की ठाकुर और डॉ दोनो ही मोंगरा से मिले हुए है ..
“लेकिन तुम देख रहे हो ना की वो अपने ही धुन में है और अब तो आप लोगो की बात भी नही मान रही है “
अजय बौखला गया था ..

“तुम फिक्र मत करो अजय हमारे पास एक दूसरा प्लान है तुम्हे छुड़ाने का .तुम यंहा से बाहर निकल जाओ और चम्पा के साथ नई जिंदगी बिताओ बस ...ठाकुर और मोंगरा को अपनी जंग खुद ही लड़ने दो …”

31
वो दिन का ही समय था अजय को यंहा कैद हुए 3 दिन हो चुके थे ,अभी अभी मोंगरा और बलवीर कही गए थे ,वो खिड़की के पास बैठा हुआ सब कुछ देख रहा था और बस किसी मदद की तलाश में था …….
वो बैठा बैठा सो गया था की उसे फिर से घोड़ो की आवाज सुनाई दी ..उसने देखा की मोंगरा वापस आ चुकी है लेकिन इस बार उसके साथ बलवीर नही था ,घोड़े से उतर कर वो सीधे अजय के कमरे में आयी ..
“क्यो मेरी जान कैसे हो “
अजय गुस्से से उसे देख रहा था
“अरे मेरी जान को बहुत ही गुस्सा आया ..”
मोंगरा के खिलखलाने की आवाज से पूरा कमरा गूंज गया,उसकी बात सुनकर बाहर खड़े हु उसके आदमी भी हँस रहे थे ,ये अजय के लिए रोज का काम हो गया था,कभी कभी मोंगरा उसके कमरे में आया करती थी और उसे यू ही सताया करती थी ..
“सुनो इसके हाथ पैर अच्छे से बांध कर इसे घोड़े पर बिठा दे ..”
मोंगरा ने कमरे के बाहर खड़े हुए आदमी से कहा
“लेकिन सरदार इसे आप कहा ..”
“मादरचोद जो बोला है वो कर …”
मोंगरा ने सीधे ही पिस्तौल उसके सामने ठिका दिया वो घबरा कर अजय के बंधनो को और कसने लगा,और कुछ लोग उसे उठा कर मोंगरा के घोड़े में बिठा दिया ,मोंगरा उसके पीछे जा बैठी और घोड़ा फिर से चल पड़ा ,वो पहाड़ी से नीचे आ चुके थे अभी तक मोंगरा ने एक शब्द भी नही कहा था …
नीच उतर कर वो जंगल की तरफ जाने लगे ….
थोड़ी दूर ही गए होंगे की अजय की नजर उस वेन पर पड़ी जो की वँहा खड़ी हुई थी ...तिवारी और डॉ को देखकर अजय आश्चर्य में पड़ गया था ……
उसके सारे बंधन खोल दिए गए ,वो उस लड़की की तरफ देखने लगा जो उसे छुड़ा कर लाई थी …
उसकी आंखों का आंसू ही उसकी सच्चाई बता रहा था ..
“चम्पा “अजय ने अपनी कांपती हुई आवाज में कहा
वो रोते हुए उसके गले से लग गई ….
वो ऐसे गले मील जैसे उनके लिए समय थम ही गया था और जंहा में और कुछ भी नही बचा था ..
*******************
“अब आप लोगो का हो गया हो तो चले “तिवारी ने हल्की आवाज में कहा
“जब मोंगरा को ये पता चलेगा तो वो बौखला जायेगी और अब हमारा भी इस जगह रहना ठीक नही …”तिवारी की आवाज से ख़ौफ़ साफ समझ आ रहा था
“उसे पता चल जाएगा की तुम्हे किसने छुड़ाया है ..खैर छोड़ो चलो जितनी जल्दी हो सके हमे यंहा से निकलना होगा ..”
डॉ फिर से गाड़ी में बैठ गया लेकिन पता नही अजय को क्या हो गया था वो कभी डॉ को देखता तो कभी चम्पा को और कभी तिवारी लेकिन वो एक कदम भी हट नही रहा था …
सभी के चहरे पर अजय के इस व्यव्हार दो देखकर चिंता की लकीर छा गई थी …..
“अजय चलो “चम्पा ने उसके हाथो पर जोर डाला
“नही ...

ऐसे नही अगर ऐसे गया तो मोंगरा हमे फिर से ढूंढ लेगी और फिर शायद वो हो जाए जो नही होना चाहिए,वो ठाकुर से बदला लेने की बजाय हम सब से बदला लेगी ...मैंने उसकी वो दीवानगी देखी है ,मैं उसका पागलपन जानता हु …”
“लेकिन अजय हम कर भी क्या सकते है ...क्या तुम मेरा वो सपना पूरा नही करोगे जो हमने साथ में देखा था,मैं एक घर चाहती हु अजय ,तुम्हारा साथ चाहती हु ,हम दोनो इन सबसे कही दूर चले जायेंगे ….”********
“नही चम्पा ऐसे नही मैं तुम लोगो की जिंदगी को दाव पर नही लगा सकता ……..मुझे मुकाबला करना होगा …”
“किसका “
डॉ ने चौक कर कहा
“मोंगरा और उसके गिरोह का “
“तुम पागल हो गए हो ..?”
लगभग तीनो ने एक साथ ही कहा
“हा थोड़ा सा “अजय के चहरे में मुस्कुराहट फैल गई और उसने तिवारी के कमर में लगा हुआ वैयरलेश निकाल लिया ……

32
कुछ ही देर में वँहा पुलिस और ठाकुर के आदमियों की कई गाड़िया लग चुकी थी ,सभी इतने खामोशी में हो रहा था की ऊपर पहाड़ में बैठे किसी भी शख्स को इसकी भनक ना हो,चम्पा तिवारी और डॉ की अजय ने एक नही सुनी उसे कोई धुन चढ़ गई थी ,अजय ने ही पूरा प्लान बनाया था और पहाड़ी को पूरी तरह से घेर लिया गया था …
“तुम में से कोई भी वँहा नही जाएगा “
अजय ने ठाकुर के बेटे रणधीर से कहा…
और इससे पहले वो कुछ भी बोले सीधे उसके माथे पर पिस्तौल ठिका दिया …
“अपनी ठाकुरगिरी अपने पास रख यंहा मत दिखा ..चुपचाप यंहा बैठा रह …”
रणधीर जैसे मचल कर रह गया और अपने साथियों के साथ थोड़ी दूर जाकर बैठ गया ,वही अजय सभी पुलिस वालो को समझने लगा की कैसे पहाड़ी को घेरना है और बिना किसी को शक हुई अपनी पोजिशन लेनी है …

“सरदार आपने ही तो कहा था की उसे मेरे साथ भेजो “
“मादरचोद “
एक करारा झापड़ उस आदमी के गालो में पड़ा जिसने अजय को आजाद किया था ….मोंगरा की बेचैनी अजय साफ साफ देख रहा था वो आधे घंटे से उसकी प्रतीक्षा कर रहा था , अभी वो पूरी तरह के तैयार था और उसके सामने जाने को और वो उसके सामने प्रगट हो गया,लेकिन अब वो अकेला नही था उसके साथ पूरी फ़ौज थी …….
“तो वो रांड तुम्हे छुड़ा के ले गई “मोंगरा का चहरा गुस्से से जल रहा था ..
“उसे और जिसने भी उसका साथ दिया है मैं उसे नही छोडूंगी “
अजय ने अपनी पिस्तौल उसके सामने कर दी ..
“अब और नही मोंगरा तुम्हारा खेल अब खत्म हुआ ,गिरफ्तार कर लो इसे और इसके बाकी साथियों को “
अजय के एक आदेश पर सभी सिपाही भागे देखते ही देखते सभी के हाथों में हथकड़ी पड़ते गई बलवीर भी मजबूरी में हथकड़ी पहन चुका था ,सभी के हथियार भी जब्त कर लिए गए थे,लेकिन अभी तक किसी ने मोंगरा को नही छुवा था या ये कहे की किसी सिपाही की उसे छूने की हिम्मत नही हो रही थी..

अजय सभी की इस हरकत को देखता हुआ हंसता हुआ एक हथकड़ी अपने हाथो में लेकर मोंगरा को देखने लगा जो अपने इतनी मेहनत से बनाये हुए साम्राज्य को बिखरता हुआ देखकर आंखों में आंसू लाकर बस हल्की हल्की सी सिसक रही थी उसकी आंखे गुस्से से जल रही थी और हाथो में पिस्तौल लहरा रहा था लेकिन उसे चेतावनी दी गई थी की अगर उसने को भी हरकत की तो उसे और उसके साथियों को भुजंकर रख दिया जाएगा …
अजय बस उसे देखकर मुस्कुरा रहा था और बेफिक्र ही हाथो में हथकड़ी लिए उसकी ओर बढ़ रहा था,मोगरा की आंखों में पानी था और उसके हाथ पिस्तौल में कस रहे थे,वो पहाड़ी के एक किनारे जा पहुची थी जंहा से नीचे बस खाई थी ,अजय को होने वाले हादसे की समझ आ चुकी थी ,वो इसी डर में था की कही मोंगरा खाई में ना खुद जाए ...
“मोंगरा ठाकुर के किये की सजा मैं उसे दूंगा तुम अब अपने को सिलेंडर कर दो ..”
मोंगरा ने ना में सर हिलाया वो खाई के और भी करीब पहुच चुकी थी …
“पुलिस कभी ठाकुर को नही पकड़ सकती अजय मेरी बात समझो मुझे जाने दो ठाकुर को अगर कोई रोक सकता है तो वो हु मैं …...सिर्फ मैं……..”
“तुम्हारी गलती है मैं उसे गिरफ्तार कर सकता हु मेरे पास उसके खिलाफ सबूत है ,बचपना मत करो मोंगरा ..”
“मैं तुमसे प्यार करती हुई अजय बस यही कहना था ,सच में बहुत ज्यादा प्यार और तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हु लेकिन ये नही ...भगवान तुम्हे और चम्पा को सुखी रखे ,उससे कहना की उसकी बहन उससे बहुत प्यार करती थी ..शायद इसीलिए तुम दोनो को जिंदा रखा जबकि तुम दोनो ही मेरे मकसद में सबसे बड़े रोड़े थे …”
मोंगरा सिसक रही थी अजय के दिल में अजीब सी पीड़ा हुई लेकिन फिर भी उसने अपने इरादे नही बदले थे ...
वो उसकी ओर बढ़ ही रहा था की एक और आवाज आयी …
“इस रंडी को कैद करके क्या करोगे इंस्पेक्टर इसका काम यही खत्म कर देते है “
अजय पलटा रणधीर हाथ में बंदूख लिए मुस्कुरा था,
“नही “अजय बस चिल्लाया ही था की एक गोली की आवाज आयी और रणधीर के हाथो से पिस्तौल दूर जा गिरी ,बलवीर अपने हाथो में लगी हुई हथकड़ी की फिक्र किये बिना ही रणधीर पर टूट पड़ा था ,रणधीर थोड़ा सम्हला तो मोंगरा ने उसके ऊपर बंधूक तान दी ..
“नही मोंगरा नही “
अजय बस कहता ही रहा और गोलियों की आवाज से पूरा माहौल गूंज गया ,मोंगरा की पिस्तौल से निकली हुई सभी गोलियां रणधीर को छलनी कर रही थी ,अजय को इसे रोकने का कोई भी जरिया दिखाई नही दिया वो अपने हाथ में रखे हुए पिस्तौल से गोलियां चलाने लगा जो की सीधे मोंगरा को लगी और वो खाई में गिरने को हुई ..
“नही ……….”
ये एक आवाज नही थी दो थी ,एक अजय की दूसरी बलवीर की दोनो ही खाई की ओर भागे थे ...मोंगरा का जिस्म खाई में गिरता हुआ दिखाई दिया,अजय तो वही रुक गया लेकिन बलवीर नही वो खुद गया उसके हाथ बंधे हुए थे लेकिन फिर भी खुद गया ...अपनी मोंगरा को बचाने को खुद गया…..

अजय बस किनारे में खड़ा देखता ही रहा ,आंखों में आंसू और दिल में दर्द लिए बस देखता ही रहा ………….

33
“आखिर हुआ क्या था जो मोंगरा ठाकुर से इतनी नफरत करती थी ,आपकी कहानी तो अधूरी रह गई थी “
अजय ने तिवारी को कहा ,दोनो अजय के घर पर दारू पी रहे थे ,तभी चम्पा वँहा आयी और कुछ भुने हुए काजू उनके सामने रख दिया ..
“भाभी जी अगर आपकी इजाजत हो तो आपके पति को थोड़ी देर के लिए ले जाऊ”तिवारी ने शरारत से कहा
चम्पा शर्मा गई ..
“क्या तिवारी चाचा आप भी ,मैं आपकी बेटी हु ना की भाभी और अभी हमारी शादी कहा हुई है,इन्हें तो काम से फुरसत ही नही है जो मुझे शादी कर ले “
चम्पा की बात से अजय का चहरा गंभीर हो गया था ..
“चम्पा मैंने मोंगरा से वादा किया था की ठाकुर को उसके किये की सजा दिलवाऊंगा ...मुझे उसके खिलाफ ज्यादा से ज्यादा सबूत इकठ्ठे करने है ..जिस दिन ठाकुर सलाखों के पीछे जाएगा उस दिन मैं तुमसे शादी करूंगा ….”
सभी चुप हो चुके थे ,अभी मोंगरा को गए हुए 15 दिन हो गए थे ,ना उसकी लाश मिली ना बलवीर की शायद पहाड़ी के नीचे बहने वाली नदी में दोनो बह गए थे ..
अजय दिन रात बस ठाकुर के पीछे लगा था,ठाकुर को अपने बेटे के मरने का गम तो था लेकिन साथ ही मोंगरा और उसके गैंग के जाने की खुसी भी थी ..
चम्पा अब अजय के साथ ही रहती थी..कभी कभी भावना और विक्रांत उससे मिलने आते थे ,अजय काम में बहुत ही ज्यादा बिजी था और उसे मामले को फिर से पूरा समझने की इक्छा पैदा हुई ……
तिवारी और अजय अब कमरे से बाहर चले गए थे,तिवारी ने एक सिगरेट सुलगाई ..
“चम्पा के सामने ये सब बात मत किया करो ,वो हमेशा से इन सबसे अलग थी ….”
“तो अपनी अधूरी कहानी पूरी करो ..”
अजय ने उसके हाथो से सिगरेट ले ली …
तिवारी गहरी सास लेकर कहता गया…….
कहानी वँहा से स्टार्ट करते है जंहा से छोड़ा था ..
फ्लेशबैक स्टार्ट…
कालिया फिर से हवेली में था लेकिन इस बार वो किन्ही और चीजों के प्रति सजग था,उसके साथी अलग अलग जगहों में छिपकर हवेली में होने वाली गतिविधियों का नुमायना कर रहे थे,
कालिया अंदर जाते हुए डरने की एक्टिंग कर रहा था वो जानता था की ठाकुर के लोग उसे देख भी रहे है और रोकने वाले भी नही है ...उसे खुद पर भी हँसी आ रही थी क्योकि अंदर जाते हुए उसे डर तो लग ही नही रहा था ,लेकिन एक्टिंग जरूर कर रहा था…
वो सीधे उसी कमरे में पहुच गया जो उसके लिए पूनम ने मुक़म्मल कर रखा था,
जब आपको पता हो की कोई आपको देख रहा है तब ऐसी एक्टिंग करना बड़ा ही मजेदार अनुभव होता है,कालिया को बस थोड़ी ही देर इंतजार करना पड़ा …
“ओह तो तुम आ गए “पुमन आते ही दौड़कर उसके गले से लग गई ..
“ये क्या कर रही हो कोई देख लेगा …”
“यंहा हमे कोई भी नही देख सकता ..

”
“फिर भी मैं किसी और से प्यार करता हु”
कालिया ने पूनम को खुद से दूर करने की कोशिस की लेकिन पूनम किसी जोक की तरह कालिया के शरीर से चीपक गई थी ….
उसने अब अपना सर उठाया..
“तो उस दिन जो हमारे बीच हुआ था”
“वो महज एक इत्तफाक था ,उस समय मैं गुस्से में था ..”
पूनम के चहरे की मुसकान और भी चौड़ी हो गई..
“तो ये इत्तफाक फिर से हो जाए “
पूनम ने कालिया के धोती के ऊपर से ही उसके लिंग को सहला दिया,ना चाहते हुए कालिया के लिंग ने एक फुंकार मार दी और मुह से एक आह सी निकल गई …
“छोड़ो मुझे “
कालिया ने जोर का झटका दिया और पूनम उससे अलग हो गई …
“देखो पूनम मैं तुम्हारी बहुत इज्जत करता हु,जिस तरह से तुमने अपनी जान पर खेलकर हमारी मदद की है मैं उसके लिए तुम्हारा अहसान मंद भी हु लेकिन ...मेरी एक बीवी है जिससे मैं बहुत ही महोब्बत करता हु …”
पूनम के आंखों में थोड़ा पानी आया..
“इतनी खुसनशिब है रोशनी जो उसे तुम्हारे जैसा पति मिला है ….लेकिन हमारे परिवार में मर्द दो-तीन शादी करते है फिक्र मत करो मैं भी तुम्हारी पत्नी बन जाऊंगी .”पूनम ने चहकते हुए कहा ,
फिर थोड़े धीरे स्वर में बोली
“या फिर रखैल ..जो बनाना चाहो “
कालिया उसकी बात सुनकर ही कांप गया था ,पुनम के आंखों का आंसू बता रहा था की उसके दिल में कालिया के लिए क्या है,क्या ये महज शाररिक सुख की कामना थी या कुछ और ???
कालिया ना तो समझ पाया ना ही उसे समझना था…
“मुझे रोशनी और कनक से मिलना है …”
पूनम के चहरे में दर्द भरी मुस्कान खिल गई..
“जरूर हजूर …”
वो धीरे धीरे चलते हुए उसके पास आयी और गालों में एक प्यार भरा किस कर दिया
“मैं समझ चुकी हु की तुम मुझे अपनी पत्नी तो नही बनाओगे ,,लेकिन कम से कम रखैल तो बना ही सकते हो ..”
हँसते हुए उसने कालिया के लिंग को मसल दिया और शरारत भरी हँसी हँसते हुए वो वँहा से निकल गई …
पूनम की इस शरारत से कालिया के चहरे पर भी ना चाहते हुए एक मुस्कान आ गई,

34
कालिया रोशनी के साथ उसी बाथटब में लेटा हुआ था जिसमे वो उस दिन लेटा था ..दोनो एक दूसरे में खो गए थे ,
इधर हवेली के एक कमरे में ..
“वो साला मेरे ही घर में है और मेरी बीवी उसे सपोर्ट कर रही है ,मादरचोद को यंही मार डालने का मन करता है ,या उसके सामने ही उन तीनो लड़कियों को काट डालूंगा …”
प्राण ने शराब को एक सांस में अपने अंदर पहुचा दिया …
परमिंदर उसे सांत्वना देता है ,
“अभी ना जाने कितने हितैषी होंगे उसके इस हवेली में ,सभी को धीरे धीरे ढूंढना बहुत ही जरूरी है वरना क्या पता की हम उसे मारने की सोच रहे है और वो हमारे ही घर में हम पर ही भारी पड़ जाए “
परमिंदर की बात से प्राण शांत तो हो गया लेकिन उसके कानो में पूनम की वो आवाज अब भी साफ साफ गूंज रही थी जिसे उसने आज सुना था,उसकी बीवी उसके दुश्मन की रखैल बनना चाहती है …….

प्राण गुस्से को पीने के कारण कांप रहा था लेकिन फिर भी मन के किसी कोने में उसके अंदर स आवाज आ रही थी की दिमाग से काम ले ,जल्दबाजी में सब कुछ गड़बड़ हो जाएगा …..
“साला इतना महंगा बाथरूम बनवाया था ,3 लाख का झूमर लगवाया था ,1 लाख का तो वो टब ही है और साले उनमे वो कालिय अपनी बीवी के साथ मौज कर रहा होगा ,.ना जाने कल मेरी बीवी भी ....इसकी मा की चुद …”
प्राण ने अपने हाथ में पकड़े हुए कांच के गिलास को जोरो से फेका जो दीवाल से टकरा कर चकनाचूर हो गया ..”
परमिंदर को उसकी बात पर थोड़ी हँसी भी आयी लेकिन वो इसे अपने तक ही दबा कर रह गया..
“कुछ तो करना होगा परमिंदर हम ऐसे हाथ पर हाथ धरे तो नही बैठ सकते ना “
“बेशक हमे बस कुछ करना तो होगा ठाकुर साहब लेकिन अभी नही ...बेफिक्र रहिए और किसके लिए रो रहे हो वो लड़की जो कभी मन से आपको अपना पति स्वीकार ही नही कर पाई,क्या आश्चर्य है की वो आपसे धोखा कर रही है ,अपने भी तो उसके बाप के गले में तलवार रखकर उसे उठाया था,वो कैसे आपको प्यार कर सकती है ,जिस प्यार और वफ़ा की आप उससे कल्पना कर रहे हो क्या अपने कभी उसे दिया है ..”
प्राण को लगा जैसे किसी ने उसे आईना दिखा दिया था,वो बौखला गया था लेकिन वो परमिंदर था कोई और होता तो शायद प्राण उसे गोलियों से भूंज देता...परमिंदर के साथ यही दिक्कत थी वो बेबाक था चाहे ठाकुर ही क्यो ना हो वो उसकी गलतियों को गिना देता,लेकिन ठाकुर उसे बर्दास्त करता था क्योकि उसे भी पता था की ऐसा वफादार और सच्चा आदमी उसे नही मिल सकता………

रात के 2 बजे होंगे,परमिंदर अपनी बीवी के बांहो में था ,वो अभी अभी पति पत्नी वाले काम से निपटे थे ,थके होने के बावजूद परमिंदर कभी अपनी पत्नी को निराश नही करता था,वो 1 बजे था ठाकुर के पास ही था,काम से थका हुआ आया और बीवी को देखकर उससे प्यार करने लगा….
परमिंदर छत को ताक रहा था,उसकी बीवी उसके नंगे छाती में उगे हुए काले बालो को सहला रही थी ..जिस्म की कोमलता परमिंदर के मर्दाना जिस्म से सटी हुई थी और दोनो के प्यार के परिणाम स्वरूप उत्पन्न पसीने की महक दोनो को एक दूजे के प्रति और भी लुभावना बना रही थी …
“क्या हुआ कुछ सोच रहे हो ,सब ठीक तो है ना “
“हम्म सब ठीक है ,लेकिन कभी कभी लगता है की ठाकुर की वफादारी करने से अच्छा कोई दूसरा काम देख लू …”
“क्या हुआ “
“कितने घिनोने काम करना पड़ता है मुझे यंहा ,सच कहु तो दिल गवाही नही देता लेकिन फिर सोचता हु की ये ही मेरा काम है जो हम पुरखो से करते आ रहे है...लड़ाई,इसके अलावा हमे आता ही क्या है,कभी राजाओं के सेवक थे तो अब ठाकुर के है ,मेरा बेटा भी यही करेगा,हमारे खून में वफादारी है ,जिसके साथ रहे वो गलत हो या सही साथ नही छोड़ते,...”
परमिंदर की बीवी उसके सीने को प्यार से चूमती है ..

“मैं अपने बेटे को ठाकुर का वफादार नही बनाऊँगी वो तो उसका वफादार होगा जो नेक हो और जो ठाकुर जैसे लोगो को ही खत्म कर दे “
परमिंदर आश्चर्य से अपनी बीवी को देखता है ,जो उसे देख कर बस मुस्कुरा रही थी ………..

35
कालिया जंगल में बैठा हुआ इस बात पर विचार कर रहा था की क्या रोशनी ,कनक और पूनम को इस बात के लिए आगाह कर दिया जाय की प्राण उनकी हर हरकत पर नजर रखे है …
उसे सभी का समलित जवाब हा में मिला लेकिन समस्या था की कैसे क्योकि अगर प्राण किसी तरह से उनकी बात सुन रहा होगा तो फिर क्या होगा,जवाब आया की क्यो ना पूरी बात लिख कर पढ़ाई जाय…
कालिया ने यही किया,रोशनी और कनक ने तो इसे आराम से स्वीकार कर लिया लेकिन पूनम ने जब ये सब पढ़ा तो माहौल कुछ अलग था……
वो उसी कमरे में थे…
“ह्म्म्म तो फिर ये बात है”
कालिया ने उसे चुप रहने का इशारा किया
“क्या इशारा कर रहे हो मेरे राजा ...लगता है की तुम मुझे अपनी रखैल बनाने को राजी हो ही गए जो ऐसे इशारे कर रहे हो “
कालिया पूनम की बात सुनकर दंग रह गया,पूनम इठलाकर उससे लिपट गयी और उसके कान में फुसफुसाई ..
“अगर ऐसा है तो मैं उस साले प्राण को तड़फा कर मार डालूंगी ,साले ने मुझे मेरे घर से उठाया था,मेरे पिता को जलील किया था अब तो उसे इसकी सजा मिलनी ही है ,जिसके मोह में आकर उसने मुझे उठाया था उसकी शरीर को मैं उसकी ही नजरो के सामने दूसरे को सौप दूंगी और तुम्हे मेरा साथ देना होगा “
उसके आवाज में संकल्प ,दर्द और बदले की चाह साफ थी साथ ही कालिया के लिए एक धमकी भी थी ,क्योकि उसने साथ देना होगा नही कहा था ,उसने कहा था साथ देना ही होगा …
कालिया को समझ आ चुका था की पूनम ऐसा क्यो कर रही है लेकिन आगे वो क्या करे इस बारे में वो समझने की कोशिस कर रहा था,
“तुम मुझसे सच में प्यार करती हो या बस अपनी जिस्म की भूख मिटाना चाहती हो ..”
कालिया ने थोड़ा जोर से कहा ताकि अगर प्राण सुन रहा हो तो उसे भी ये सुनाई दे जाए …
वो खिलखिलाई ..

“तुम मुझे अच्छे लगते हो ,अब इतने कम दिनों में प्यार तो हो नही सकता ना,लेकिन हा अगर तुम उस दिन जैसे मेरा साथ दो तो तुम्हारे मजबूत इरादों और मजबूत लिंग से मुझे संचमे प्यार हो जाएगा “
वो मुस्कुराई,उसकी मुस्कुराहट बिल्कुल सच्ची थी जैसे उसकी ये बात सच्ची थी ,सच्चाई ढूंढने के लिए कुछ खोजना नही पड़ता बस आंखों में उभरे भाव ही काफी होते है…
वो मचलते हुए कालिया से लिपट गई और साथ ही कालिया भी जोरो से हँस पड़ा और उसे मजबूती से अपनी बांहो में भर लिया,वो ध्यान से पूनम को देखने लगा,वो परी थी जिसकी कल्पना भी शायद कालिया अपनी दूसरी जिंदगी में नही कर सकता था ,
वो खूबसूरती में कनक और रोशनी से कही आगे थी ,लेकिन उसकी खुसबसूरती को नापने वाली आंखे होनी चाहिए,
नीली आंखे ,बिल्ली सी आवाज ,भूरी प्यारी सी लड़की ,बाल पूरे तरह से काले नही थे,चहरे के रंग के कारण वो भी थोड़े भूरे थे लेकिन लंबे और मजबूत ,होठो की लालिमा किसी गुलाब सी थी किसी भरे हुए मय के प्याले ही लगते थे ,
कालिया आगे बढ़कर उसके होठो को हल्के से चूमा ,वो आंखे उठाई उसकी आंखों में देखने लगी ,ये क्या हो रहा था उनके बीच …
पता नही क्या था लेकिन जैसे कोई करेंट सी दोनो के जिस्म में दौड़ गई थी ,पूनम के बदले की आग और कालिया का पत्नीव्रता होना सब जैसे कही पीछे छूट गया,ये अजीब था वो ये सब इसलिए तो नही कर रहे थे की उनके मन में एक दूसरे के लिए प्यार था या जिस्म की हवस ही थी ,नही ऐसा कुछ तो नही था लेकिन अभी अभी जो हुआ था वो क्या था…
दोनो के आंखों में आया हुआ वो भाव क्या था जिसे दोनो ही अपने दिलो में महसूस कर रहे थे,वो दोनो ही झटके से अलग हो गए और अपने आप से यही सवाल पूछने लगे…
कालिया ने सिर्फ एक ही औरत से प्यार किया था और वो थी उसकी बीवी ,वही पूनम कालिया के करीब इसलिए जाना चाहती थी क्योकि उसे वो मर्द लगा जो उसका बदला ले सके …
लेकिन वो होठो का एक मिलन सभी गणित को बिगड़ कर रख दे रहा था,
“मुझे माफ करो की मैं “कालिया कुछ बोलता इससे पहले ही पूनम ने उसके होठो पर अपने हाथ रख दिए ...और सर ना में हिलाया ,वो कालिया के करीब आई और उसके कानो में कहा ,
“पता नही ये क्या था लेकिन ये नही होना चाहिए,जिस्म मिल जाय लेकिन जस्बात नही वरना हम दोनो हो मुसीबत में फंस जाएंगे…..”
कालिया ने सर हा में हिलाया …
“चलो तुम्हे तुम्हारी प्यारी पत्नी से मिलवा देती हु …”पुनम मुश्किल से सामान्य हो पाई क्योकि उसके जीवन में ये पहला मर्द था जिसके लिए उसे ऐसा अहसास हुआ था,ये एक दिन के मिलन का नतीजा नही था शायद कुछ उसने मन में पहले ही रहा हो जो आज अचानक से बाहर आ गया ...

सम्मान कब और कैसे प्यार में बदल जाए कहा नही जा सकता……

36
विक्रांत उसी कमरे था जंहा उसने वो खेल खेला था ,और अब भी रोशनी और कनक उसके साथ बैठे थे लेकिन कनक आज उस दिन की अपेक्षा बहुत ही शांत थी ,क्योकि उसे भी पता था की जिस प्लान को वो पूरा करना चाहती थी वो अब नही हो सकता लेकिन इसके एवज में उन्होंने एक गलती कर दी थी वो था की विक्रांत के मन में रोशनी को पाने की चाह पैदा करना ,विक्रांत जुनूनी और हवसी दोनो ही था ,अब वो रोशनी को हवस नही बल्कि जुनूनी नजरिये से देख रहा था ,उसके मन में उसे पाने के अगल अगल ख्यालात पैदा हो रहे थे...वही कनक और रोशनी इसी सोच में थे की आखिर विक्रांत को उसके शैतानी इरादों से कैसे रोका जाए……
“क्यो मेरी जान आज बड़ी चुप हो “विक्रांत के बाजू में बैठी हुई कनक के जांघो पर हाथ फेरते हुए विक्रांत ने कहा ..
कनक ने उसका हाथ हटा दिया,एक खुलासा और कालिया की मौजूदगी दोनो ने ही कनक और रोशनी के सोचने के तरीके को बदल दिया था,पहले वो अपने को मजबूर समझ रही थी कालिया के आने से वो मजबूत हो गई,लेकिन इस खुलासे से की प्राण उनपर नजर रखे है वो डर गई थी,उन्हें समझ ही नही आ रहा था की आखिर करे तो क्या करे,अगर विक्रांत का साथ दिया तो कालिया की प्रतिक्रिया क्या होगी और अगर नही दिया तो विक्रांत क्या करेगा,और फिर प्राण…
वो ना तो कालिया को गुस्सा दिलाना चाहते थे ना ही विक्रांत को क्योकि दोनो में से किसी को भी गुस्सा दिलाने का मतलब था की कालिया के ऊपर संकट आना …
रोशनी उठी और अपनी ननद को पास बुला कर उसके कानो में कहा …
“तू इसे सम्हाल मैं तेरे भइया को सम्हालती हु,अगर उन्हेंने तुझे कुछ करते देख लिया तो वो खुद को माफ नही कर पाएंगे...और अगर उन्होंने वक्त से पहले कुछ कर दिया तो समझो की आफत आ जाएगी “
कनक ने सर हिलाया,विक्रांत रोशनी को जाते हुए देखता रहा लेकिन कुछ नही कहा,कह तो उसकी आंखे रही थी जो गुस्से से लाल हो चुकी थी …
“ये साली रांड अपने को समझती क्या है ,किसी दिन इसे जबरदस्ती चोद दूंगा ,बड़ी आयी सती सावित्री बनने वाली ,इसे प्यार से पाना चाहता हु और भाई की इसपर नजर है इसलिए अभी तक बची हुई है…”
विक्रांत ने कनक को गुस्से से देखा,कनक ने अपने को तैयार कर लिया था वो मचलते हुए उसके पास आ गई और उसके गोद में बैठ गई ,वो एक कसे हुए सलवार में थी जिसका दुपट्टा उसने पहले ही फेक दिया था,...
“ठाकुर साहब हमे भी देख लिया करो ,हम कच्ची कली है हमे भी फूल बना दीजिए..”
कनक ने विक्रांत का हाथ अपने वक्षो में रख दिया ,विक्रांत कच्ची कली होने की बात सुनकर उसपर थोड़ा ध्यान दिया ..

“तुझे फूल तो बनाऊंगा मेरी जान लेकिन उसे पाने की जिद जो कर बैठा हु “
कनक का अब बस एक ही मकसद था की विक्रांत के दिमाग से रोशनी का बहुत उतारना और उसने गांव की महिलाओं से ये सिख रखा था की उसे ऐसा करने के लिए विक्रांत का पानी निकलना पड़ेगा ….
वो मुस्कुराती हुई घूम कर बैठ गई ,अब उसके दोनो पैर विक्रांत के कमर को घेरे हुए थे,और चहरा उसके चहरे के करीब दोनो की सांसे टकरा रही थी ,हवाओ में एक अजीब सी खुशबू ही और माहौल में एक अजीब सी बात,ये वही समय था जब कलिया पूनम दो देख रहा था,और यंहा विक्रांत कनक को …
दोनो ही जोड़े एक दूसरे से प्यार नही करते थे लेकिन फिर भी दोनो ही एक दूसरे के आंखों में उस खास वक्त में खो से गए थे ,कहा जाता है की एक ही तरह की एनर्जी एक दूसरे को आकर्षित करती है और बढ़ाती भी है,इसलिए प्राचीन लोग कोई भी साधना ब्रम्हमुहूर्त में करने पर जोर देते थे क्योकि आसपास के समस्त साधक उस समय साधना में होंगे और सब की एक तरह की एनर्जी मिलकर सबका संवर्धन करेगी…
शायद ऐसा ही कुछ यंहा हो रहा था ..
दोनो ही जोड़े जो एक दूसरे से प्यार नही करते थे एक दूसरे की आंखों में खिंच से गए ,दोनो के लब मिले और जैसे कामदेव ने प्रेम का बाण मार दिया हो दोनो जोड़ो को एक अजीब सी संवेदना का अहसास हुआ ,जो की हवस नही थी वो प्रेम था,खालिस प्रेम …
कनक और विक्रांत एक दूसरे को छोड़ दिया,उन्हें समझ ही नही आया की ये उनके साथ क्या हुआ ,विक्रांत बेचैन हो गया,इतने लड़कियों के साथ सो चुके विक्रांत के लिए ये पहला आभस था वो भी उसके साथ जिसे वो अपनी दासी बनाना चाहता था,वही कनक के लिए तो पहला पुरुष विक्रांत ही था लेकिन वो उससे नफरत करती थी ,हा उसकी मर्दानगी पर उसे थोड़ा मोह तो आया था,और उसने उस दिन कनक के हवस को भी जगाया था लेकिन वो प्यार तो नही था लेकिन अभी अभी जो हुआ वो क्या था….दोनो ही अजीब से कंफुसन में थे,कनक से ज्यादा बेचैन विक्रांत था क्योकि वो इस लड़की के प्यार में तो मरकर भी नही पड़ना चाहेगा…
वो जल्दी से उठा और बिना कुछ बोले या नजर मिलाए ही वँहा से निकल गया,कनक भी अपनी सोच में गुम हुए हादसे को सोचती रही …….
हा ये सच है की प्यार में पड़ जाना या उसका आभस हो जाना भी किसी हादसे से कम नही होता……….

37
विक्रांत एक गहरी परेशानी में अपने कमरे में बैठा हुआ था,और वही पूनम और कनक भी आने ही ख्यालों में थे,
कालिया रोशनी के साथ सुकून से लेटा था लेकिन उसके दिमाग में भी कई विचार चल रहे थे,कनक ने पूनम को वो बतलाया जो उसके साथ हुआ था,
पूनम शायद इस बात को नही संमझती अगर उसने भी इसका अनुभव नही किया होता लेकिन अब वो कनक की बात को समझ सकती थी ,
विक्रांत के कमरे का दरवाजा खुला,इसने इसी कमरे में ना जाने कितनो की इज्जत लूटी थी ,कितनो को नंगा किया था लेकिन आज वो अजीब से कसमकस में फंसा हुआ था,उसे प्यार कैसे हो सकता है वो तो खुद को शैतान समझता था,कमरे के खुलने की आवाज से वो चौका ..
सामने खड़ी दुल्हन सी सजी हुई पूनम उसके सामने खड़ी हुई थी ………
“आप फिर से मुझे जलाने आ गई “
वो बौखलाया नही बल्कि हल्की आवाज में बोला,पता नही आज उसे जोर से बोलने पर भी तकलीफ हो रही थी …
पुमन मुस्कुराते हुए उसके बाजू में आकर बैठ गई ..
“तुम मेरे देवर हो लेकिन आज तक हमारा रिश्ता कभी देवर भाभी का नही बन पाया ,क्योकि तुम्हारे लिए मैं भाभी से ज्यादा बस तुम्हारे भइया की लूट का समान थी ,इस घर में औरतो को तो ऐसे भी कोई इज्जत नही मिलती ,और मैं ये भी जानती हु की तुम दोनो ही भाईयों के लिये औरत बस एक जिस्म है जिसका भोग करना और इस्तेमाल करने के अलावा तुम कुछ जानते ही नही ,शायद इसीलिए हमारे बीच भी ये दूरी है की हम एक दूसरे से बात भी नही करते …”
विक्रांत ने पहले संचमे कभी ऐसे अपनी भाभी से बात नही किया था असल में उसने तो कभी पूनम की ओर ध्यान भी नही दिया था,वो थी जिसे उसका भाई उठाकर ले आया था पहले तो अपनी ऐयासी के लिये फिर जाने क्या सोचकर उसे अपनी बीवी बना लिया था उससे ज्यादा पूनम का कोई अस्तित्व विक्रांत के लिया नही था…
“तो आज क्यो आयी हो ये बात याद दिलाने की हम कितने बड़े शैतान है …”
पूनम के होठो में एक हल्की सी मुस्कुराहट जाग गई
“नही ये याद दिलाने के लिए की इस शैतान के अंदर एक इंसान अभी भी जिंदा है ….

तूम अपने भाई से हमेशा से ही अलग थे ,तुम्हे कभी भी जबरदस्ती करना पसंद नही आया और तुम्हारे भाई ने कभी बिना जबरदस्ती के काम ही नही किया ,तुम्हरे दिल में जाने अनजाने ही मानवता थी,हा तुम्हारी परवरिश ऐसी हुई की तुम शैतान बन गए लेकिन तुम्हारे अंदर इंसानियत है और आज वही इंसानियत के कारण तुम प्यार में पड़ गए …”
विक्रांत आश्चर्य से पूनम की ओर देखने लगा…
“मुझे कनक ने सब कुछ बताया,जैसे तुम डरे हुए हो वैसे वो भी डरी हुई है…उसे भी कभी उम्मीद नही थी की वो तुम्हारे बारे में ऐसा महसूस करने लगेगी लेकिन जो होना होता है उसे कौन रोक सकता है …”
विक्रांत कुछ कहता उससे पहले ही पूनम ने अपना हाथ उसके सर पर रख दिया ,विक्रांत ने पहले ऐसी फीलिंग कभी महसूस नही की थी आज दिन में दूसरी बार था जब उसका प्यार से हो रहा था ,अपनत्व से हो रहा था,उसके आंखों में अनायास ही आंसू आ गए ,उसका दिमाग जोरो से कह रहा था की प्यार तेरे लिए नही है तू शैतान है,लेकिन फिर दिल का एक कोना इतना ज्यादा डॉमिनेटिंग हो रहा था की वो भावनाओ में बहने लगा था,दिमाग के ऊपर दिल छा गया था और वो ना चाहते हुए भी पूनम से जा लिपटा,
पूनम उसके बालो को इतने प्यार से सहला रही थी की विक्रांत में कुछ अजीब से भाव जागे ,वो अपनत्व वो प्यार ..शायद इन्ही सबकी तलाश उसे बचपन से ही थी लेकिन कभी उसने इसे खोजा ही नही था,उसे लगा जैसे उसे वो सब मिल गया जो वो बचपन से अनेक चीजों में खोजता हुआ फिर रहा था,कभी उसे माँ की गोद नसीब नही हुई थी ,बाप भी उसका प्राण की तरह ही था,और कोई बहन भी नही थी ,ऐसा कोई दोस्त नही जो उसे प्यार कर सके ,थी तो बस लडकिया जिसे वो भोगा करता था लेकिन वो जिस्म तक ही सीमित रह जाती ….
अनजाने में ही विक्रांत बहुत प्रयास करता की वो लड़कियों के जिस्म से भी पार पहुचे वँहा जिसे इश्क कहते है जो बढ़ने पर इबादत बन जाती है लेकिन लकड़ियों के लिए भी वो बस एक ऐसा जमीदार ही रह जाता था जो पैसे या ताकत के बल पर उन्हें अपना रहा था …
वो लड़कियों से बहुत ही सलीके से पेश आता लेकिन किसी के प्यार में पड़ने के लिए इतना काफी भी तो नही होता ,लडकिया अंदर से तो ये जानती थी की वो मजबूर है उसकी बांहो में जाने के लिए…
आज उसे लग रहा था की उसे वो मिल ही गया ,एक अजीब सी संतुष्टि उसे पूनम के छातियों से लगकर हो रही थी ,वो वासना नही प्रेम था,एक भाभी का अपने देवर के लिए जैसा एक बहन का अपने भाई के लिए होता है ,...
असल में प्यार का स्वरूप एक ही है बस उसको जताने का तरीका अलग होता है,पति पत्नी या प्रेमी अपने प्यार को जिस्म के मिलन के जरिये जताते है तो माँ और बहने अपने बेटे की फिक्र स्नेह करके ,वही बाप अपने बच्चे को डांट कर भी अपना प्यार जता जाता है,...

ये प्रेम जब जीवन में उतरता है और जब किसी को इसका अहसास किसी भी रूप में होता है वो सबसे पहला काम होता है वो है व्यक्ति का रूपांतरण …..
कहा गया है की प्रेम होता नही है प्रेम में गिरा जाता है ,और जो गिर गया उसके लिए पूरी दुनिया ही प्रेम हो जाती है ..विक्रांत प्रेम में गिर चुका था ,और उसके अंदर एक रूपांतरण होने लगा था,और शायद इसी लिए वो रो रहा था ,पूनम के सीने से लगे हुए बच्चों की तरह रो रहा था,...
दरवाजे पर खड़ी कनक की आंखों में भी आंसू थे ,उसे भी पता था की विक्रांत किस दर्द से गुजर रहा है ,लेकिन हर रूपांतरण एक दर्द के साथ ही शुरू होता है ,व्यक्तित्व का बदलना कोई खेल नही होता ,पुराने हर आदत जब बेकार लगने लगती है,जीवन बिल्कुल सुना सा लगने लगता है,लगता है की जीवन में जो भी किया वो बेकार था फिजूल था,और जब इतना समय बिता देने की ग्लानि होती है,पुरानी सड़ी हुई व्यक्तित्व की परते सामने आती है तो दर्द तो होता ही है …….आंसू तो निकलते ही है ………..

38
हवेली से निकलने का प्लान बन चुका था ,अब बस आखिरी फैसले का इंतजार था,
इधर ठाकुर प्राण ने भी कुछ खास ना पता चलते देख अटैक करने का प्लान करना शुरू कर दिया ,इसी बीच कालिया और पूनम के बीच बात बढ़ने लगी …..
कालिया पूनम के बांहो में था,कालिया मैं जानती हु की तुम लोग यहां से निकलने वाले हो लेकिन क्या जाते जाते मुझे कोई तोहफा नही दोगे…
कालिया ने पूनम को प्यार से निहारा ..
“तुम कौन कहता है की मैं तुम्हे छोड़कर चला जाऊंगा “
“नही कालिया मैं इस हवेली को तभी छोडूंगी जब मैं प्राण की मौत देख लू “
पूनम की बात से कालिया स्तब्ध रह गया,उसने प्यार से उसके बालो को सहलाया ..
“तुहारी वो ख्वाहिश भी पूरी करूंगा लेकिन अभी बताओ क्या चाहिए तुम्हे तोहफे में ..”
पूनम हल्के से मुस्कराई ..
“तुम्हारा बच्चा “
पूनम बोल कर शर्मा गई लेकिन कालिया किसी सोच में पड़ गया..
“प्राण तुम्हे मार डालेगा ..”
“नही वो नही मरेगा...उसकी इतनी हिम्मत नही की तुम्हारे और मेरे बच्चे को हाथ लगा दे “
कालिया ने पूनम को जोरो से जकड़ा और उसके होठो में अपने होठो को घुसा दिया,दोनो ही मस्त हो चुके थे एक दूसरे के जिस्म की प्यास दोनो में बढ़ने लगी थी,पूनम कालिया का हाथ पकड़कर उसे एक दूसरे कमरे में ले गई,ये आलीशान कमरा था जंहा बड़े से प्रेम में प्राण और पुमन की फ़ोटो लगी थी …
“तो ये तुम्हारा कमरा है ,”
पूनम ने हा में सर हिलाया
वो बड़ा सा गोलाकार बिस्तर जिस्म कम से कम 4 लोग सो जाए ,कालिया ने पूनम का हाथ पकड़कर उसे उस बिस्तर में पटक दिया,दोनो के होठ मील और जिस्म भी मिलते गए ……..

39
कनक और रोशनी अपनी तैयारी में बैठे थे ,विक्रांत भी उनका साथ देने को तैयार था,लेकिन वो हवेली छोड़कर नही जाना चाहता था ,वो अपने भइया से आशीर्वाद लेकर ही कनक को अपनाना चाहता था,उसे पता था की प्राण उससे कितना प्यार करता है,कनक घबराई जुरूर लेकिन अपने प्यार पर उसे पूरा भरोषा था,
“अगर मरेंगे तो साथ ही मरेंगे “विक्रांत ने उससे कहा

इधर
प्राण से अब बर्दास्त नही हो रहा था,परमिंदर के मना करने के बाद भी वो नही रुका ,बड़े बड़े स्पीकर में अब पूनम की सिसकियां गूंज रही थी ,और दूसरी ओर उसका भाई उसके दुश्मन की बहन से शादी करने की बात सोच रहा था ,
प्राण ने पिस्तोल उठाई और अपने कमरे की ओर चल दिया…

*************
पूरे हवेली में घेरा बंदी शुरू हो गई थी,ठाकुर के सभी लोग सचेत थे ,ये सब समय से पहले हो रहा था,कालिया की जल्दबाजी का ही नतीजा था ,कालिया के लोगो ने जब देखा की हवेली को घेरा जा रहा है,तुरंत ही डॉ और त्तिवारी से संपर्क किया ,जल्दबाजी में ही गिरोह के सभी लोग वँहा पहुच गए और अपने सरदार को वँहा से निकालने का प्लान बनाने लगे ,गिरोह का नेतृत्व चिराग कर रहा था…

********
हवेली के बाहर जितनी गहमा गहमी मची थी वैसी ही गहमा गहमी हवेली के अंदर प्राण सिंग के बिस्तर में भी मची हुई थी ,कालिया और पूनम एक दूसरे के नंगे जिस्म में दोहरे हुए जा रहे थे,कालिया ने जोर लगाया और अपना गर्म लावा पूनम के गर्भी में डाल दिया …..
पूनम को लगा कि जैसे उसे जन्नत मिल गई हो …….
कालिया तैयार हुआ और रोशनी और कनक के पास पहुच गया,पूनम भी तैयार होकर कमरे से बाहर निकली थी की…
प्राण उसके सामने खड़ा था उसकेआंखों में जैसे अंगारे थे …..
पूनम को देखते ही उसने गोलियां चला दी …….
गोलियों की आवाज पूरे माहौल में गूंज गई थी ……
पूनम लुढ़ककर नीचे गिरते गई …..
चारो ओर खून फैला था,और एक गजब की शांति पूरे वातावरण में छा गई …..

हवेली में बस ठाकुर के सिपाहियों के जूते की आवाज गुंजने लगी ,कालिया उसकी बहन और पत्नी घिर चुके थे,विक्रांत उसे बचता हुआ सामने चल रहा था ,वो उन्हें गेट तक ले गया जंहा से कालिया ने बाहर निकलने का रास्ता बनाया हुआ था,बचाव में कलिया के लोग भी फायरिंग करने लगे थे और कुछ अंदर भी आ चुके थे ,
परमिंदर सामने ही खड़ा हुआ था,विक्रांत को देखकर उसकी आंखे चौड़ी हो गई ..
“सामने से हट जाओ छोटे ठाकुर वरना आज मेरे हाथो से नही बच पाओगे ..

”
“मैं मर जाऊंगा पर्मिदंर लेकिन इन्हें तुम नही रोक सकते “
विक्रांत के पीछे खड़े कालिया ने अपने पिस्तौल में अपनी हाथ मजबूत की ,चारो तरफ शोर शराबा था लेकिन ठाकुर का किला कालिया के लोगो के लिए अभेद्य ही रहा ,कालिया के लोग गोलियां खा रहे थे शिकस्त नजदीक दिखाई पड़ रही थी ,जैसे तैसे विक्रांत के सहारे वो गेट तक पहुच गए जिसे दीवाल तोड़कर बनाया गया था ,बाहर कालिया के लोग थे और अंदर ठाकुर के गोलियां ही दोनो ओर के लोगो की रक्षा कर रही थी ,विक्रांत के कारण ठाकुर का कोई आदमी उनपर गोली नही चला रहा था यंहा तक की परमिंदर भी रुक गया था ,
प्राण जब बाहर आया और सामने का नजारा देखकर बौखला गया उसका ही भी उसके दुश्मन की ढाल बना हुआ है ,उसने आव देखा ना ताव और गोलिया चला दी जो सीधे सामने खड़े हुए विक्रांत के सीने में जा धंसी …
“विक्रांत …”
कनक की चीख निकली लेकिन कालिया उसे खिंचता हुआ हवेली के पार जा चुका था,दोनो ओर से गोलियों की बरसात सी हो गई ,प्राण अपने दिल के अजीज भाई को इस हालत में देखकर खुद को रोक नही पाया और गोलिया बरसते हुए गेट के बाहर तक आ गया जिसे पर्मिदंर ही खिंच कर अंदर लाया ………
कालिया और ठाकुर दोनो के कई लोगो को गोलिया लगी थी और कुछ ही देर में माहौल में शमशान की तरह की शांति छा गई थी ………..

40
प्राण अपने घर की खमोशी को महसूस कर रहा था,हाथो में जाम लिए वो परेशान दिख रहा था,कालिया से खेल खेलने की सजा में उसे अपने बीवी और भाई को खोना पड़ा था,दोनो ही अभी हॉस्पिटल में थे और जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे,परमिंदर उसकी खामोशी को समझ सकता था ,लेकिन वो कह कुछ भी नही सकता था,शायद ये सभी उसकी ही गलती के कारण हुआ था,वो सर झुकाए बाहर जा रहा था की प्राण ने उसे रोक लिया…
“परमिंदर यार ये क्या हो गया ...इतनी दौलत शोहरत अब किस काम की जब घर में कोई अपना ही नही …”
दरवाजे पर खड़ा प्राण के पहली बीवी का बेटा रणधीर सब सुन रहा था प्राण ने उसे देखा और अपने पास बुलाया ...उसके सर पर हाथ फेरा ,
“पापा माँ कहा है “
वो अभी बहुत छोटा था की इन सभी चीजों को समझ सके लेकिन उसकी माँ के गुजर जाने के बाद से पूनम उसे बहुत प्यार देती थी ,बच्चा छोटा था लेकिन प्यार को तो समझ ही सकता था,प्राण नही चाहता था की उस पर पूनम का साया ज्यादा पड़े क्योकि वो उसे भी अपनी तरह बनाना चाहता था लेकिन फिर भी आज उसकी बात सुनकर प्राण का दिल कचोट गया…
“वो कही गई है आ जाएगी जाओ तुम अपने कमरे में “
उसके जाते ही प्राण ने एक और पेग बनाया ...और गहरी सांस ली ..
“मैं उस औरत को कभी माफ नही करूंगा ...चाहे तुम कुछ भी कहो ना ही अपने भाई को ...लेकिन उस औरत को अपने पास जरूर रखूंगा ,ताकि कालिया की सारी जिंदगी उसे मेरे कैद से छुड़ाने में निकल जाए ..

”
उसने एक ही बार में अपना पूरा पेग खत्म कर दिया ……

41
विक्रांत और पूनम की हालत में बहुत सूधार आ चुका था ,प्राण ने विक्रांत को कह दिया था की तू कनक से इस शर्त पर शादी कर सकता है की तुझे हवेली और जायजाद दोनो को छोड़ना होगा …
विक्रांत पड़ा लिखा था और अपने दम में कनक को पाल सकता था उसने हामी भर दी ,वही पूनम के पेट में गोली लगने से उसका गर्भाशय भी क्षति ग्रस्त हो चुका था,डॉ ने कह दिया था की वो कभी माँ नही बन पाएगी ,प्राण को ना जाने क्यो लेकिन ये सुनकर बेहद खुसी हुई ,क्योकि वो जानता था की पूनम के गर्भ में कालिया का बीज है …
दोनो के हॉस्पिटल से छूटने के बाद विक्रांत कनक से शादी कर हवेली छोड़कर शहर चला जाता है वही पूनम को प्राण अपने साथ ले आता है,पूनम एक जिंदा लाश सी हो गई थी,कालिया ने उससे मिलने की और उसे छुड़ाने की बहुत कोशिस की लेकिन सभी असफल रही …
ठाकुर और डाकुओं के बीच की जंग वैसे ही चल रही थी ,और ठाकुर को एक खबर मिली …
कालिया बाप बन गया है ,मानो ठाकुर के आंखों में चमक आ गई ,
वो अभी पूनम के कमरे में था …
“तुम्हे कालिया का बच्चा चाहिए था ना “
पूनम जैसे सपने से जागी ...वो आंखे फाड़ कर ठाकुर को देख रही थी ,
“सुना ही उसे जुड़वा लडकिया हुई है,उसकी बीवी और बहन को तो मैं अपनी रांड नही बना पाया लेकिन उसकी बेटियों को जरूर बनाऊंगा …”
ठाकुर की भद्दी हँसी से पूनम के प्राण कांप गए …
ठाकुर जा चुका था,कालिया को पिता बने लगभग 6 महीने हो चुके थे कालिया ने दोनो बेटियों का नामकरण किया चम्पा और मोंगरा ,ठाकुर के लोग दोनो पर नजर रखे हुए थे और एक दिन आया जब वो मोंगरा को कालिया के पहरे से चुराने में कामियाब रहे ,ठाकुर ने मोंगरा को लाकर पूनम की झोली में डाल दिया …
कालिया बौखलाया बहुत खून भी बहा लेकिन आखिर उसे हार का सामना ही करना पड़ा,ठाकुर अपनी जायजाद का काफी हिस्सा हवेली की सुरक्षा पर खर्च कर रहा था,उसने हवेली को और अपनी सुरक्षा को अभेद्य बना दिया था,पुलिस और राजनीति में उसके ही लोग थे ,वो दिन ब दिन ताकतवर हो रहा था ,नए नए हथियार और टेक्नालॉजी के इस्तेमाल के कारण वो कलिया जैसे डाकुओं के गिरोहों के पहुच से बहुत बाहर था ,हा वो कालिया को मरना चाहता था लेकिन उसमे उसे भी कुछ कामयाबी हासिल नही हो रही थी,लेकिन कालिया जंहा जंगल का बादशाह था वही जंगल के बाहर ठाकुर का राज था……..

पूनम ने मोंगरा को बेहद प्यार दिया ,लेकिन वो जानती थी की ठाकुर उसे किस लिए बड़ी कर रहा है ,वो उसे या तो अपने बेटे की रांड बना देगा या फिर उसे अपने ही पिता के खिलाफ इस्तेमाल करेगा…
लेकिन पूनम को एक उम्मीद सी दिखी वो था बलवीर का मोंगरा के प्रति प्रेम …
पूनम जानती थी ठाकुर को गिरना है तो परमिंदर को पहले गिरना होगा और परमिंदर की सबसे बड़ी कमजोरी थी उसका इकलौता बेटा बलवीर …
पूनम ने एक कठोर फैसला लिया और पूनम और बलवीर के प्यार को बढ़ावा दिया,वही रणधीर की नजर भी जवान होती मोंगरा पर टिकी रही ,वक्त बढ़ता रहा,चम्पा कालिया के गिरोह में तो मोंगरा ठाकुर के हवेली में बढ़ती गई ,दोनो ही जवानी की दहलीज पर पहुच गई थी और बला की खूबसूरत थी ,
मोंगरा को लेकर अक्सर ही बलवीर और रणधीर में लड़ाई होने लगी ये परमिंदर और प्राण दोनो के लिए चिंता का सबब बन चुका था,बलवीर ताकतवर था और बेहद ही गुसैल भी ,अगर वो परमिंदर का बेटा ना होता तो प्राण उसे कब का मरवा चुका होता ,लेकिन अब रणधीर की मोंगरा को पाने की बेताबी ,और बलवीर आ उसके प्रति बेहद प्यार ने दोनो बापो को चिंता में डाल दिया था,पूनम अब अधेड़ हो चुकी थी और उनकी हालत पर मुस्कुराया करती थी लेकिन उसे ये डर हमेशा ही रहता की मोंगरा किसी मुसीबत में ना फंस जाए,अब मोंगरा का हवेली में रहना उसे खतरे से खाली नही लग रहा था,लेकिन कैसे वो उसे यंहा से आजाद करे ……..
उसके दिमाग में एक बात कौंधी …

42
मोंगरा अब 16 साल की हो चुकी थी और पुरषों में मुह में उसे देखकर ही लार आ जाती थी ,पूनम ने इरादा बनाया की वो मोंगरा को वो गुर सिखाएगी जो एक बेबाक और मजबूत लड़की में होना चाहिए,लड़को को अपने इशारे पर चलाने का गुर …
वो जानती थी की मोंगरा इतनी हसीन है की वो किसी भी मर्द की नियत को खराब कर दे लेकिन उसे ट्रेनिंग की जरूरत थी वैसी ट्रेनिंग जो एक जिस्म का धंधा करने वाली लड़की लेती है,या एक सीक्रेट सर्विस में काम करने वाली महिला ,किसी को हुस्न के जाल में फसाना और जब काम हो जाए तो उसे मौत के घाट उतने पर भी पीछे ना रहना …..
वो उस मासूम लड़की को खतरनाक बनाना चाहती थी ताकि वो एक नागिन सी जहरीली और मादक हो सके …
पूनम को मोंगरा को बचाने और उसे इस दलदल में भी कमल की तरह खिलाने का यही रास्ता दिखा,
वो अपने काम में लग गई थी ……...

“ये मुझे ऐसे क्यो देख रही है…”
मोंगरा के मादक मुस्कान को देखकर रणधीर आश्चर्य में पड़ गया था ..
“अरे ठाकुर साहब आखिर कब तक अपना मुह फुलएगी ,आप तो मालिक ही हो कभी ना कभी तो उसे आपकी ही होना है ..”
रणधीर के खास चापलूस मनोहर ने कहा ,और अपनी बत्तीसी निकाली ..
मनोहर की चापलूसी रणधीर की छाती चौड़ी हो गई और अपनी जमीदार वाली अकड़ में वो अपने मूंछो को ताव देने लगा..

मोंगरा उसके इस प्रतिक्रिया पर खुद में हँस पड़ी …
‘साले को लग रहा है की इसके रोब में फंस गई मोंगरा साले की अक्ल ठिकाने लगाती हु ‘
मोंगरा ने मन में सोचा और उसकी ओर मुह मटका कर ऐसे किया जैसे उससे उसे चिढ़ हो और बलवीर को हाथो से इशारा कर उसकी ओर चल दी ..
रणधीर ना सिर्फ मायूस हो गया बल्कि गुस्से से भी भर गया,जंहा उसे पाने की हवस में वो जला रहा रहा था मोंगरा थी की उसे कोई भाव ही नही देती थी ,आज पहली बार वो उसे देखकर मुस्कुराई थी लेकिन फिर ना जाने उसे क्या हो गया..उसकी छाती फिर से सिकुड़ गई …
वो मोंगरा के मटकते हुए पिछवाड़े को देख रहा था ,पता नही लेकिन आज जैसे मोंगरा के कमर में कुछ ज्यादा ही लचक थी जैसे उसे ललचा रही हो ,रणधीर के मुह से लार दी टपक गई वो मचल कर रह गया ,मोंगरा को उभरे हुए पिछवाड़े को देख कर उसे लग रहा था जिसे अभी उसे पकड़ कर भर दे लेकिन …
उत्तेजना उसके चहरे में दिख रही थी वो आंखे फाडे हुए उसे देख रहा था,जो लड़की उससे लगभग 10 साल छोटी थी,उसके सामने ही बड़ी हुई और आज उसका ही खड़ा करने में आमादा थी ,27 साल के रणधीर ने ना जाने कितनी लड़कियों को अपने नीचे लिटाया था लेकिन मोंगरा उसके लिए हसरत थी एक ख्वाब थी जिसे वो हर हालत में पूरा करना चाहता था …
वो नजर टिकाए हुए ही था की मोंगरा पलटी और उसने फिर से एक मुस्कान रणधीर को दी,मायूस रणधीर की जैसे बांछे खिल गई ,उसके दिल में एक लहर सी उठी ,इतने दिनों तक जिसे पाने को उसने इतने पापड़ बेले आज वो पहली बार उसे देखकर ऐसे मुस्कुराई थी ,लगा की मॉंगरा को पाने की मंजिल अब ज्यादा दूर नही रह गया है…

43
रोज की तरह ही मॉंगरा बलवीर के साथ चली गई ,लेकिन आज रणधीर को ज्यादा गुस्सा नही आया क्योकि आज उसे वो मिला जो उसे कभी नही मिला था मॉंगरा की तरफ से एक इशारा..

*******
मॉंगरा अभी बलवीर के गोद में लेटी थी ,दोपहर का वक्त था और ठाकुर के हवेली के बगीचे में लगे हुए आम के पेड़ ने नीचे दोनो की ही फुर्सत का ठिकाना था,वो अक्सर ही यंहा आते थे,बलवीर की उम्र भी रणधीर जितनी ही थी लेकिन मोंगरा को देखने का नजरिया उसके बिल्कुल ही विपरीत …
वो रणधीर से कही ज्यादा बलशाली था,गठीला शरीर और रौबदार चहरा ...कोई भी लड़की उसे देखते ही रह जाती लेकिन आज तक बलवीर के जेहन में मोंगरा के अलावा और कोई नही आ पाई थी …
“वो साला कुत्ता तुझे आज फिर ऐसे देख रहा था ,जी करता है साले की आंखे निकाल दु …:
मोंगरा हल्के से हँसी ,जैसे वो बलवीर को अधीर देखकर अधिकतर करती थी ..
“क्यो तुम्हे इतनी जलन क्यो होती है उससे “
मोंगरा के सवाल पर बलवीर ने एक बार उसे घूरा लेकिन कुछ भी नही कहा ..

“तुम मेरे भाई हो क्या “
बलवीर जैसे झुंझला गया
“किसने कहा “
“सब कहते है की बलवीर और मोंगरा भाई बहन की तरह रहते है “
“नही मैं तेरा भाई नही हु”
मोंगरा के चहरे पर एक हल्की मुस्कान आई …
“तो क्या हो ,..मेरे घरवाले ..”
मोंगरा खिलखिलाई ,लेकिन बलवीर हड़बड़ा गया
“छि कैसी बात करती हो ,शर्म नही आती क्या,शर्म बेच खाई हो क्या “
बलवीर की भोली बाते मोंगरा को बहुत अच्छी लगती थी ,बलवीर उससे उम्र में ही बड़ा था लेकिन समझ में वो मोंगरा को बच्चा ही लगता था,या ये कहे की बलवीर अपनी समझदारी मोंगरा पर नही झाड़ता था ..
“तो ऐसे क्यो जलते हो ,देखने दो अगर देखता है तो ..”
बलवीर गुस्सा में आ गया ,वो खड़ा होने लगा ..
“तो जा उसी के पास ,तुझे तो उसका देखना अच्छा लगता है ना कैसे उसके सामने ही कमर मटका के चल रही थी …”
मोंगरा फिर से हँस पड़ी लेकिन बलवीर गंभीर था उसके चहरे से गुस्सा टपक रहा था,वो जाने को हुआ और मोंगरा जल्दी से उठाकर पीछे से उसके जकड़ ली ..और अपना सर उसके पीठ पर टीका दिया …
“छोड़ मुझे ..पैसे का बहुत प्यार हो गया है तो जा उसी के साथ ..हम कौन है तेरे ”
“नही …”मोंगरा की आवाज बहुत ही धीमी थी
“मुझे क्यो पकड़ती है जा ना उसी के पास ..उसका देखना तुझे अच्छा लगता है ना “
बलवीर की बात से मोंगरा सिसकने लगी ,उसकी सिसकियां सुनकर बलवीर फिर से हड़बड़ाया,बलवीर कभी मोंगरा को रोता हुआ नही देख सकता था वो पलटा और उसे अपने बांहो में उठाकर फिर से उस आम के छाव में ले गया,वो किसी गुड़िया सी मोंगरा को उठाये हुए था,अब मोंगरा बलवीर के छाती से लगी सिसक रही थी और उसकी गोद में बैठे हुई थी ..
बलवीर ने उसके सर पर प्यार से अपने हाथ फेरे ..
“मेरी बात का इतना बुरा मान गई क्या ,तुझे पता है ना की मैं तुझे रोता हुआ नही देख सकता “
उसकी बात सुनकर मॉंगरा थोड़ी और उसके छाती से लग गई ..
“तुम्हे क्या लगता है की पैसा मेरे लिए तुझसे ज्यादा जरूरी है ,या तू ये सोचता है की तेरी जगह कोई और ले सकता है …मैं अगर यंहा हु तो सिर्फ तेरे और माँ की वजह से वरना कब की मर गई होती ,कैसे देखते है मुझे ये हवेली के लोग ,कोई मारने की बात करता है तो कोई कलंक कहता है,यंहा मुझे कोई भी पसंद नही करता बलवीर लेकिन एक तू ही है जो मुझे सच्चे मन से अपना मानता है…”
मोंगरा के कहने से बलवीर भी भावुक हो गया था,वो जोरो से उसे अपने गले से लगा लेता है ..
“तुझे कोई और देखे ना दिल जल जाता है मेरा पता नही क्या हो जाता है ..”
मोंगरा के आंसुओ से भरे नयना में भी मुस्कुराहट झलक गई…
“इतना प्रेम है मुझसे ..”
बलवीर सोच में पड़ गया
“प्रेम का तो नही पता लेकिन जो भी है बस ऐसा ही है ..”
मोंगरा ने अपना चहरा ऊपर किया ..

“उसे देखकर अपनी कमर मटकाने या उसे देखकर मुस्कुराने में मुझे मजा नही आता बलवीर ना ही उसे ही मुझे दूसरी औरतो की तरह उसके पैसे चाहिए जो उसके साथ जा के सो जाऊ...लेकिन उसके सहारे मुझे इस कैद से आजाद होना है …”
बलवीर उसकी बात सुनता ही रह गया उसे समझ नही आ रहा था की आखिर वो करना क्या चाहती है ..
“तू करना क्या चाहती है मोंगरा “
मोंगरा के होठो में रहस्यमयी हँसी आ गई ..
“तू बस देखता जा लेकिन कभी अपनी मोंगरा की नियत पर संदेह मत करना ,और कभी मुझसे नाराज नही होना..चाहे कुछ भी हो जाए ..कसम खा मेरे सर की “
मोंगरा ने बलवीर के हाथो को अपने सर पर रख दिया ,बलवीर बस किसी कठपुतली उसे कसम दे बैठा..
बलवीर को इस कसम की कीमत बहुत महंगी चुकानी पड़ी ,लेकिन वो मोंगरा के प्रति उसका प्यार ही था की उसने कभी उफ तक नही किया ……...

मोंगरा की गर्म सांसे रणधीर के चहरे में पड़कर रणधीर के दिल को पिघला रही थी , जीवन में पहली बार वो मोंगरा के इतने नजदीक था ,दिल की धड़कने किसी ट्रेन की तरफ दौड़ रही थी ,ये रणधीर का ही कमरा था जंहा से निकलते हुए मोंगरा को उसने बस इतना कहा था की ‘रानी इधर भी आ जाओ ‘
हर बार की तरह उसने सोचा था की मोंगरा बुरा सा मुह बनाकर चली जाएगी लेकिन मोंगरा अंदर आ गई ,ना सिर्फ आयी बल्कि रणधीर से चीपक कर खड़ी हो गई,मोंगरा की उन्नत छतिया रणधीर के सीने में धंस रही थी ,और रणधीर अपनी सांसे रोके हुए खड़ा था,रणधीर ने अब तक मोंगरा को लेकर कई ख्वाब देखे थे ,वो सोचता था की जब मौका मिलेगा तब वो उसे दबोच लेगा,लेकिन आज मौका था जो खुद मोंगरा ने दिया था लेकिन रणधीर किसी भीगी हुई बिल्ली की तरह सहम गया था,वो असल में मोंगरा के इस अचानक बदले व्यव्हार से ही घबरा गया था क्योकि इसकी तो उसने कभी कल्पना भी नही की थी …
उसके सब ख्वाब बस ख्वाब ही रह गए थे,
वही मोंगरा को पता था की रणधीर की ऐसी ही हालत होगी ,ये उसकी मुह बोली माँ पूनम ने उसे पहले ही बता दिया था,आखिर इतने सालो से वो रणधीर को जानती थी ..
रणधीर की सांसे अटकी हुई थी और मोंगरा के होठो में एक कातिल मुस्कान थी ,वो अच्छे से सिख रही थी…
“क्या बोलना है ठाकुर साहब ,रोज बुलाते हो आज आ गई तो ऐसे क्यो घबरा रहे हो,कभी लड़की नही छुई क्या …”
रणधीर जल्दी से जगह बना कर थोड़ा अलग हुआ ..
“तुझमे ना जाने इतना करेंट कहा से आया “
वो हड़बड़ाकर बोल गया ,और मोंगरा हँस पड़ी ..
“करेंट तो हमेशा से था इसलिए तो आज तक तू मुझे नही छू पाया,बस मुझे घूरता रहा,छेड़ता रहा लेकिन …”
“वो ...

वो तो मैं पिता जी और माँ के कारण …”
“ओहो बहाने तो देखो ,,”मोंगरा फिर से मुस्कुराई लेकिन तब तक रणधीर सम्हाल चुका था और उसके लिंग ने फुंकार मारनी शुरू कर दी ,
जब इंसान अपने लौड़े की सुनने लगता है तो डर कोसो दूर भाग जाती है,रणधीर भी मोंगरा के पास आकर उसके कमर को अपने हाथो में फंसा उसे अपने से सटा लेता है,
मोंगरा जिसने एक नई फ्रॉक पहनी थी जिसे बलवीर ने उसे लाके दिया था,उसे अपने जांघो के बीच रणधीर की मर्दानगी का अहसास होने लगा,उसका लिंग लोहे से कड़ा हो गया था,
उसकी सांसे उखड़ी हुई थी शायद वो अपने ख्वाब को पूरा करना चाहता था ,उसकी लुंगी से उसका लिंग बाहर झकने लगा था ..
मोंगरा ने उसके कमर को अपनी ओर और खिंच लिया और उसका लिंग मोंगरा के जांघो के बीच से होता हुआ उसके पेट तक रगड़ खा गया ..
“आह …”
रणधीर की आंखे बंद हो गई क्योकि मोंगरा ने उसे ऐसे जकड़ा था की उसके लिंग की चमड़ी भी खिसक गई थी ,सूखे हुए कपड़े में रगड़ खाने से उसे थोड़ा दर्द तो हुआ लेकिन मजे के असीम आकाश में वो दर्द कही गुम ही हो गया था,
मोंगरा ने उसे थोडा और पीछे किया और उसके खड़े हुए लिंग को अपने हाथो में भर लिया,रणधीर बस उस हसीना के अदांओ पर आश्चर्यचकित हुआ आंखे फाडे अपने किस्मत पर इठला रहा था,वो क्या करने वाली थी इसका अंदाज लगा पाना उसके दिमाग के बाहर ही था..
मोंगरा ने मुस्कुराते हुए उसे देखा ,
“यही सब कुकर्मो की जड़ है बोल तो इसे काट दु “
मोंगरा के हाथ में पास ही पड़ा हुआ एक चमकदार चाकू था जिसे उसने अभी अभी उठाया था ,रणधीर का डर से बुरा हाल हो गया ,जिसका पता उसके लिंग के तनाव से ही पता लग रहा था वो ऐसे सिकुड़ा जैसे गुबबरे से हवा निकल रही हो ..
मोंगरा जोरो से हँसी ,इतने जोरो से की पूरे कमरे में सिर्फ उसकी हँसी गूंजने लगी…
उसने रणधीर के लिंग को छोड़ दिया और उसके चहरे का भाव अचानक ही बदलने लगा ,वो दृढ़ हो चुका था आंखे जैसे अंगारे थी ..
“मोंगरा को पाने के लिए शेर का दिल चाहिए,तेरे जैसे गीदड़ का नही जो बात बात पर डर जाए,जब ऐसी हिम्मत हो तो मेरे पास आना ,सब कुछ दूंगी तुझे ..”
रणधीर बस उसे जाते हुए देखता रहा उसके मोंगरा के इस रूप को देखकर उसका चहरा पसीने से तर हो चुका था ...

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इधर रणधीर मॉंगरा के रूप जाल में फंसता जा रहा था तो वही हवेली के बाहर की स्तिथि भी गर्म थी,कालिया के ऊपर लोगो का भरोषा बढ़ने लगा था,तिवारी की मदद से कुछ पुलिस वाले भी अब उसके मददगार थे,कुछ अधिकारियों तक उसका पैसा जाता था जिससे वो उसका थोड़ा मोड़ा सहयोग कर दिया करते थे,देखा जाय तो कालिया की धाक और ताकत अब भी प्राण के मुकाबले कुछ भी नही थी लेकिन फिर भी प्राण के लिए तो एक सर दर्द ही था,और दूसरी सर दर्द उसके घर में ही पल रही थी ,अगर प्राण को पता होता की ये लड़की आगे जाकर उसकी इतनी गांड मारने वाली है तो शायद वो उसे रंडी बनाने के सपने नही देखता कब का मार चुका होता,लेकिन प्राण ने भी वही भूल कर दी जो अधिकतर लोग कर जाते है ,औरत को कम समझने की भूल …
रणधीर मोंगरा के रूप जाल में तो फंस ही चुका था लेकिन उसे जो चीज ज्यादा तकलीफ दे रही थी वो थी उसका व्यंग बाण जो उसने रणधीर के ऊपर छोड़ा था,मोंगरा के शब्द रणधीर के कलेजे पर तीर की तरह चुभ गए थे,लेकिन उसकी ये समझ के परे था की ये तीर कितने दूर की सोच कर लगाई गई थी ,मोंगरा और पूनम भी चाहती थी की ऐसे शब्द बोले जाय जो रणधीर को सोचने पर मजबूर कर दे ,साथ ही उसका ये भरम भी मिट जाए की मोंगरा कोई ऐसी वैसी लड़की है ,वो उसे मोंगरा के लिए पागल कर देना चाहते थे,लेकिन वो नशा कुछ अलग होने वाला था..
मोंगरा ने रणधीर की ओर देखना भी बंद कर दिया था,अब वो उससे बात करने की कोशिस करता,जैसे कुछ बदल गया था ,वो उसे इम्प्रेस करने की कोशिस करता लेकिन उसकी कोई भी बात मोंगरा को इम्प्रेस कर पाने में नाकाम होती …
“आखिर तुम चाहती क्या हो “
एक दिन उसने मोंगरा का रास्ता ही रोक दिया..
मोंगरा ने उसे पहले तो गुस्से से घूरा लेकिन देखते ही देखते उसके चहरे में एक अजीब सी मुस्कान खिल गई ..
“पूछ तो ऐसा रहे हो जैसे जो बोलूं दे ही दोगे ,चलो हटो मेरे रास्ते से ..”
“अरे बोल कर तो देखो ..”
रणधीर बेहद ही कांफिडेंस में था ,मोंगरा ने एक बार आसपास देखा वँहा कोई भी नही था..
“बलवीर बता रहा था की बाहर शहर में सिनेमा घर है और वँहा बहुत बड़ा पर्दा है …..”
मोंगरा ने ऐसे कहा जैसे किसी दूसरी दुनिया की बात कर रही हो ..रणधीर के होठो में मुस्कान आ गई
“तुम्हे देखना है “
मोंगरा के तेवर अचानक ही बदल गए..वो ललचाई आंखों से उसे देखने लगी ..
“तुम सच में दिखा सकते हो ,लेकिन ठाकुर साहब तो मुझे हवेली से बाहर जाने ही नही देते ..”
“मैं भी तो ठाकुर हु “
“लेकिन …”
“जाना है ...की नही ..”
“हा “मोंगरा ने धीरे से कहा
“तो चलो लेकिन मुझे क्या मिलेगा “
रणधीर का डर जैसे चला गया था,
“हर चीज के लिए तुम्हे कुछ देना ही पड़ेगा क्या ..?”
मोंगरा शरारत से बोली जैसे सब कुछ ठीक हो गया हो …
“तुमने ही तो कहा था तुम्हारी बन जाऊंगी ..”
“ओ हो बड़े आये ..

”
वो थोड़ी देर चुप रही
“अच्छा चलो कुछ दे दूंगी ,लेकिन बलवीर भी हमारे साथ जाएगा “
बलवीर का नाम सुनकर रणधीर के चहरे का रंग उड़ गया वो थोड़ा मायूस दिखा ..
“अरे उसे दूर बिठा देंगे और हम साथ बैठ जाएंगे ,अब वो मेरा इतना अच्छा दोस्त है मैं उसके बिना कैसे जाऊंगी ..”
रणधीर अचानक से ही चौका लेकिन फिर उसके दिमाग में आया ,यार ये दोस्त भी तो हो सकते है..हो सकता है की वो जैसा सोचता हो वैसा ना हो..
“लेकिन वो तुम्हे मेरे साथ देखके बुरा नही मान जाएगा ..”
रणधीर ने अपना शक बोल ही दिया ..
“क्यो मानेगा,वो मेरा दोस्त है ..सबसे अच्छा दोस्त और मुझे खुश देखकर उसे तो खुसी ही होगी..और उसे भी फ़िल्म देखने मिल जाएगा,..”
रणधीर कुछ सोच में पड़ा था..
“देखो रणधीर मैं तुम्हे पसंद करती हु ,और मुझे नही लगता की बलवीर को इसमें कोई दिक्कत होगी ,वो तो तुम पर इसलिए गुस्सा करता था क्योकि तुम मुझे ऐसा वैसा कहते थे,लेकिन कुछ दिनों से तुम्हारे व्यव्हार में आये बदलाव ने उसे भी तुम्हारे प्रति एक नया नजरिया दे दिया ,कल तो उसने ही कहा की रणधीर से जाकर बात कर ले वो परेशान सा दिख रहा है….”
रणधीर को यकीन ही नही हुआ की बलवीर उसके बारे में ऐसा बोलेगा ..
“हम सब साथ ही तो बड़े हुए है फिर हमारे बीच काहे का बैर …”
कहते कहते ही मोंगरा की नजर थोड़ी आगे बढ़ गई जंहा से बलवीर आ रहा था ,
वो बलवीर को देखकर उसके सीने से लग गई और पूरी बात बता दी ..बलवीर गंभीर था लेकिन उसने रणधीर की ओर हाथ बड़ा दिया ..
“मेरी मोंगरा का ख्याल रखना ,अगर इसको चोट पहुचाई तो सोच ले ..मैं नही देखूंगा की तू किसका बेटा है ..”
“तूम फिर शुरू हो गए ..बस एक फ़िल्म तो देखना चाहते है हम साथ में शादी थोड़ी ना कर रहे है..”मोंगरा खिलखिला दी,बलवीर के होठो में भी एक मुस्कान आयी और दोनो के चहरे में आये भाव ने रणधीर को भी थोड़ा सहज किया

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रणधीर मोंगरा को फ़िल्म दिखाने के लिए मान तो गया था लेकिन उसे बलवीर अब भी खटक रहा था,उसने अपने खास लोगो से थिएटर को घेरने को कहा और अपने खास चापलूस मनोहर को भी अपने साथ ले गया,थिएटर पूरी तरह के खाली था,बलवीर और मनोहर को बालकनी की सबसे आगे वाली सीट पर बिठाया गया वही मोंगरा और रणधीर आखरी लाइन में एक बड़े से सोफे जैसे सीट में बैठे जिसे रणधीर की खास फरमाइश में वँहा लगाया गया था ,वो सीट उसके लिए ही थी ..
“ये पूरा थियेटर खाली क्यो है कोई बकवास फ़िल्म तो नही ले आये मुझे”
मोंगरा की बात पर रणधीर थोड़ा मुस्कुराया
“अरे मेरी जान जब हम फ़िल्म देखते है तो बस हम ही देखते है ,पूरी टिकिट हमने ही खरीद ली है “
मोंगरा के होठो में मुस्कान थी ..

बलवीर मनोहर को घूर के देख रहा था,मनोहर की बलवीर से ऐसे भी फटती थी लेकिन क्या करे मालिक ने हुक्म जो दिया था निभाना तो पड़ेगा ही …
बलवीर के मन में मोंगरा को लेकर चिंताएं गहरा रही थी लेकिन वो जानता था की मोंगरा जो भी कर रही थी वो सही ही होगा ,उसे अपने से ज्यादा मोंगरा पर भरोषा था,
फिर भी वो मुड़ मुड़ कर देख ही लेता,दोनो अभी बात ही कर रहे थे,वो बहुत दूर थे लेकिन फिर भी बलवीर को वो दिख रहे थे,जब रणधीर ने बलवीर को पलट कर देखते हुए देखा उसने बस एक इशारा गेट पर खड़े हुए गार्ड की ओर किया ,कुछ ही मिनट में थियेटर की लाइट बंद हो गई और फ़िल्म शुरू हो गई ,अब बलवीर को दोनो स्पष्ट नही दिख रहे थे,लेकिन फिर भी फ़िल्म के लाइट में दोनो का थोड़ा आभस जरूर हो रहा था,
मोंगरा ने अपने जांघो में रणधीर के हाथ का आभास किया ..
जो उसे हल्के हल्के से रगड़ रहा था..
“बहुत जल्दी है तुम्हे ..”
मोंगरा की बात व्यंग्यात्मक थी ..उसने रणधीर के हाथो को जकड़ लिया था,
“अरे मेरी जान थोड़ी तो जल्दी है मुझे ,ऐसे भी तुम्हारी ये अदा ही हमे मार डालती है..”
मोंगरा खिलखिलाई,
“अच्छा तो इतने दूर क्यो हो पास आ जाओ नही खाऊँगी तुम्हे “
मोंगरा ने रणधीर के कॉलर को पकड़कर उसे अपने पास खिंच लिया..
रणधीर उसके इस प्रहार से स्तब्ध था लेकिन अब उसे ऐसे झटकों की आदत हो चुकी थी वो समझ चुका था की ये लड़की कोई भी झटका दे सकती है …
मोंगरा की सांसे अब रणधीर की सांसों से टकरा रही थी ,रणधीर मन मुग्ध होकर उसके उस काया को देख रहा था,सच में कितनी सुंदर थी मोंगरा कभी कभी उसे ऐसा लगने लगता था की उसे इस हसीना से प्यार हो गया है लेकिन फिर वो अपने को सम्हालने की कोशिस करता था..
मोंगरा भी उसकी आंखों में देख रही थी …
“क्या हुआ मेरे ठाकुर साहब आंखों में ही खो जाओगे क्या “
मोंगरा की बात में अजीब सा आकर्षण था,उसने इसे बहुत ही होले से कहा था जैसे उसकी सांसे ही आवाज का रूप लेकर निकल रही हो ,कानो के पास कही गई इस बात में हल्की सी मदहोशी भी थी और हल्की सी शरारत भी ,
ये रणधीर के लिंग में नही बल्कि दिल के किसी कोने में चोट कर गई ,
“लगता है जीवन भर तेरी आंखों को ऐसा ही देखता रहू ..”
मोंगरा हल्के से हँसी लेकिन उस हँसी में अजीब सा दर्द था..
“कितनी लड़कियों से ये बात कह चुके हो ठाकुर साहब ,जो करने आये हो वही करो,क्यो प्यार का झूठा शगूफा फैलाने की कोशिस कर रहे हो ..”
रणधीर मोंगरा की बात को समझ चुका था,उसका सर नीचे हो गया..
“मैं जानता हु मोंगरा तुम मेरी बात का भरोसा नही करोगी लेकिन यही सच है की तुम्हारे लिए मेरे दिल में कुछ अजीब सा है जो किसी दूसरी लड़कियों के लिए नही होता,तुम्हे पाने की इच्छा तो मेरी है लेकिन जबरदस्ती नही ..”
मोंगरा मुस्कुराई
“जबरदस्ती कर भी नही सकते,मुझे क्या ऐसी वैसी लड़की समझ कर रखा है..

”
इस बार रणधीर भी मुस्कराया
“तू तो सब से अलग है मेरी जान ,और मैं तो तेरा दीवाना हु “
रणधीर ने अपना हाथ मोंगरा की साड़ी के झांकती हुई कमर में डाल दिया और उसे अपनी ओर खिंच लिया,और मोंगरा के फुले हुए गाल में एक बेहद ही संवेदनशील और प्यार से भरा हुआ चुम्मन झड़ दिया,
मोंगरा उसके आभस से थोड़ी देर के लिए ही सही लेकिन खो सी गई ,उसमें एक अजीब सी मिठास थी लेकिन मोंगरा ने तुरंत ही अपने सर को झटका दिया ,तभी रणधीर ने अगला किस मोंगरा के गले में कर दिया था,वो कसमसाई और रणधीर को थोड़ा और अपनी ओर खिंच लिया,यंहा फ़िल्म तो चल रही थी लेकिन कोई भी फ़िल्म देखने नही आया था सबका एक अलग ही उद्देश्य था,बलवीर बार बार पीछे पलटता था लेकिन अंधेरे में उसे कुछ भी दिखाई नही दे रहा था लेकिन जो परछाई उसे दिख रही थी उसमे उसे इतना तो आभस हो चुका था की दोनो गले मिले हुए है ,उसके दिल में एक दर्द उठा,अचानक उसकी नजर मनोहर से मिली जो अपनी दांत निकाले हुए हँस रहा था शायद उसने भी पीछे देखा था,बलवीर ने एक जोर का घूंसा उसके मुह में दे मारा,मनोहर की दो दांत टूटकर उसके हाथ में आ गई और मुह से खून फेक दिया ,वो सहमे हुए गुस्से से भरे हुए बलवीर को घूर रहा था..
“निकल यंहा से मादरचोद “
बलवीर की बात सुनकर वो दौड़ाता हुआ रणधीर के पास पचूच गया,रणधीर अभी मोंगरा के कंधे पर अपने चुम्मन की बरसात कर रहा था जिससे मोंगरा भी मदहोश हो रही थी और उसका साथ दे रही थी ,की ..
“ठाकुर साहब बलवीर ने देखो क्या किया मेरे दांत तोड़ दिए ..”
रणधीर को उसकी बात सुनकर बेहद गुस्सा आया और उसने उसके गाल पर एक जोर की चपात लगा दी ,
“मादरचोद देख नही रहा है की मैं बिजी हु भाग यंहा से “
मनोहर की ये हालत देखकर मोंगरा जोरो से हँस पड़ी ..
“तुम जाओ और किसी से मरहम पट्टी करवा लो मैं बलवीर से बात कर लुंगी …”
“अरे जान रुको ना कहा जा रही हो ,”
“वो गुस्से में रहा तो कुछ भी कर देगा “
“वो कुछ नही करेगा इस साले की शक्ल ही ऐसी है की कोई भी इसे मार दे तुम आओ ना मेरे पास ,तू जा भोसड़ीके और चहरा मत दिखाना फ़िल्म खत्म होते तक “
मनोहर मायूस सा वँहा से निकल गया ,और रणधीर ने मोंगरा का हाथ खिंचकर फिर से उसे अपने से सटा लिया ,वो खिलखिलाते हुए उसके गोद में जा समाई ..

रणधीर ने मोंगरा के छातियों को छुपाए हुए साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया और उसके सीने की शुरुवात में अपने होठो को लगा दिया,वो नीचे जा रहा था जंहा मोंगरा के स्तनों को उसके ब्लाउज ने बड़ी ही मुश्किल से सम्हाल कर रखा था,स्तनों के ब्लाउज से झांकते हुए खुले भाग पर अब रणधीर के होठ थे ,उसे अपनी किस्मत पर यकीन ही नही हो पा रहा था की जिसे वो जीवन में सबसे जायद पाने की कोशिस और चाहत करता था आज वो उसके पास है,वो पूरी तरह से मोंगरा के रस को पीना चाहता था,उसका लिंग भी अब अपनी तैयारी में था,वो मोंगरा के खुले हुए कमर को अपने हाथो से मसलने लगा था ,दोनो की ही सांसे अब तेज थी जो संकेत थी की दोनो ही अपनी मदहोशी को अब काबू नही करना चाहते ,रणधीर ने अपने शर्ट को खोल कर फेक दिया ,मोंगरा के हाथ अब उसके सीने के बालो से खेल रहे थे,मोंगरा की आंखे भी अब नशीली हो चुकी थी वो अपने हाथो से अब मोंगरा के गदराए हुए सीने में फले हुए आमो को जोरो से दबाने लगा था,वो जैसे उसे निचोड़ ही देना चाहता था..
“आह धीरे करो ना ..”मोंगरा की सिसकियां गूंजने लगी थी
“अब सहा नही जा रहा है जान ,मोंगरा के ब्लाउज का एक बटन टूट कर गिर गया और अब रणधीर का हाथ उसके खाली जगह में घुस गया,मोंगरा ने कोई भी ब्रा जैसी चीज नही पहने थे ,रणधीर का हाथ सीधे ही उसके निप्पलों से टकराया ,
“ओह “मोंगरा ने ताकत लगा कर उसके सर को अपने सीने से लगा लिया,मोंगरा की ताकत इतनी थी की रणधीर को लगा की इन गोल भारी गुब्बारों के बीच उसका दम ही निकल जाएगा,वो छटपटा रहा था लेकिन मोंगरा की गिरफ्त तब भी बहुत मजबूत थी ,मोंगरा उसे देखकर मुस्कुराई और अपने हाथो से अपने एक कबूतरो को आजाद कर दिया ,मोंगरा ने अपने ब्लाउज के सारे बटन ही खोल दिए ,दोनो ही पर्वत बाहर झूलने लगे जिसमे से एक को मोंगरा ने रणधीर के मुह में ठूस दिया,वो सांस ना ले पाने के कारण छटपटा तो रहा था लेकिन फिर भी अपने मुह से उसके स्तनों को बाहर नही निकलना चाहता था,मोंगरा उसकी इस स्थिति को देखकर थोड़ा हँसी और उसे अपने गिरफ्त से आजाद कर दिया,रणधीर अब एक हाथ से उसके स्तन को दबा रहा था वही मुह में भर कर पूरा रस भी चूस रहा था,मोंगरा की हालत भी खराब थी और वो उसके बालो को चूम रही थी ,उसकी सिसकी से रणधीर और भी मदहोश होकर स्तनों को निचोड़ता ,.......
तभी थियेटर का दरवाजा खुला और अचानक ही लाइट जल गई ,मोंगरा हड़बड़ाया कर जल्दी से अपने साड़ी के पल्लू से अपने सीने को ढक लिया,रणधीर गुस्से से गेट की ओर देखा लेकिन फिर उसका गुस्सा डर में बदल गया था ..
वही हाल बलवीर का था,वो पहले मोंगरा को देखकर दुखी हो गया लेकिन फिर दरवाजे में खड़े शख्स को देखकर चौक गया ..
गेट पर पर्मिदंर खड़ा हुआ था और बहुत ही गुस्से में लग रहा था…..

46
उसने बस तीनो को बाहर आने का इशारा किया और वँहा से निकल गया ,रणधीर जल्दी से अपने कपड़े पहन कर बाहर भागा ..
बलवीर भी मोंगरा के साथ हो ली ,
“ये इतनी जल्दी कैसे आ गए ..”
मोंगरा ने बलवीर को हल्के से पूछा ,पहले तो बलवीर ने उसे गुस्से से देखा ..
“मुझे क्या पता माँ ने बापू को शायद जल्दी ही बता दिया ..और तुम तो ये सब इतनी जल्दी नही करने वाली थी ना,अगर बापू नही आते तो ..”
बलवीर के गुस्से को देखकर मोंगरा मुस्कुरा उठी और बलवीर के गालो को प्यार से चूम लिया ..
“क्या करू मैं भी थोड़ा बहक गई थी ,अब जल्दी चलो देखते है हमारी इस हरकत से हवेली में क्या कोहराम मचेगा ..”
चटाक ….
प्राण गुस्से से कांप रहा था,वही रणधीर के लिए ये शाररिक से जायद मानसीक और भावनात्मक दर्द था,हवेली का माहौल तनावपूर्ण था,पिता ने अपने पुत्र पर पहली बार हाथ उठाया था,
“तुम इस रांड के कारण हमारे नियमो को तोड़ दिया,क्या तुम्हे पता नही की इसे बाहर जाने की इजाजत नही है …”
प्राण ने कांपते हुए कहा ..
रणधीर की नजर नीचे थी ..
“ठाकुर साहब आप खामख्वाह डर रहे है मैं कहा भाग जाऊंगी जो आप मुझे बांध कर रखना चाहते है ,और रणधीर ने जो भी किया वो मेरे कारण किया सजा मुझे मिलनी चाहिए…”
मोंगरा की निडरता से प्राण और भी बौखला गया ..
“चुप कर रांड …ये हमारे घर का मामला है ”
प्राण चिल्लाया
“पिता जी आप उसे बार बार यू रांड कहना बंद कीजिये वो रांड नही है “
रणधीर की इस बात से सभी स्तब्ध रह गए वही मोंगरा और पूनम के होठो में दबी हुई मुस्कान आ गई ,प्राण स्तब्ध सा रणधीर को देख रहा था ..
वो गुस्से में उसके ऊपर फिर से हाथ उठाने ही वाला था कि परमिंदर ने उसे रोक लिया ,
“चले जाओ यंहा से “
प्राण कांपते हुए बस इतना ही कह पाया …

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शाम रात में बदलने लगी थी और हवेली में एक सन्नाटा छा गया था ,
रणधीर मोंगरा के कमरे की ओर जा रहा था लेकिन कुछ आवाजो ने उसे खिड़की के पास ही रोक दिया ..
खिड़की पूरी तरह से बंद नही थी और आवाजे साफ थी …
रणधीर ने हल्के से धक्का लगाया और खिड़की खुलती गई ..
अंदर का नजारा देख कर रणधीर के दिल में एक जोर का झटका लगा……..।
अंदर मोंगरा उसी कपड़ो में लेटी थी जिसमे वो आज उसके साथ थी ,और बलवीर उसके बिल्कुल ही बाजू में सोया हुआ था,
बलवीर ऊपर से नंगा था उसके चौड़े सीने में उगे हुए घने बाल उसकी मर्दानगी बता रहे थे जिससे मोंगरा खेल रही थी ,
मजबूत लोहे सा जिस्म था,अपनी जवानी के पूरे शबाब में दोनो ही काम के साक्षात पुतले लग रहे थे..
मोंगरा की आंखों में मदहोशी थी जो साफ साग बता रही थी की उसके मनोदशा इस समय क्या होगी ..
उसकी साड़ी का पल्लू बिस्तर से नीचे लटक रहा था और ब्लाउज के कुछ बटन खुले हुए थे,पसीने उसके गले से उतर रहा था,सांसे तेज थी ,चहरे की लालिमा बढ़ी हुई और आंखों में मदहोशी..

मोंगरा ने अपने होठो को बलवीर के छतियो में लगा दिया,वो उसे बड़े ही प्यार से चूम रही थी,बलवीर ने अपनी मजबूत भुजा से उसे कस लिया मोंगरा जैसी धाकड़ लड़की की भी आह निकल गई ..
“तुम्हे नही पता की आज मैं कितना जला हु तुम्हारे लिए तुम्हे किसी और के बांहो में देखने से बड़ी सजा क्या हो सकती है ..”
मोंगरा ने आंखे उठाकर उन मासूम आंखों को देखा जो उसके लिए कुछ भी करने को तैयार थे ..
और ऊपर उठाकर उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया ,
रणधीर के दिल में जैसे खंजर चल गया हो..वो दर्द से तिलमिला उठा..
“मैं किसी के साथ भी रहु लेकिन रहूंगी तुम्हारी ही मेरी जान ,आज मेरा कौमार्य तुम्हारे हाथो से टूटेगा,ये अधिकार मैं तुम्हे ही दे सकती हु .तुम्ही सच्चे मर्द हो ...”
रणधीर को रोना ही आ गया ,लेकिन वो अब और भी विस्मय में था क्योकि जब मोंगरा ने जब ये कहा की तुम्ही सच्चे मर्द हो तो वो खिड़की की ओर देख कर मुस्कुराई ..
रणधीर को इस बात पर विस्वास ही नही हो रहा था की मोंगरा ये जानते हुए भी बलवीर की बांहो में थी की वो उसे देख रहा है ..
मोंगरा की कातिलाना अदा बिना किसी हथियार के भी किसी को मारने को काफी थी ,रणधीर को ये अपने आंखों का धोखा ही लगा..
मोंगरा बलवीर को उकसा चुकी थी और बलवीर ने उसे अपने नीचे डाल लिया,वो जानवरो सा उसके ऊपर टूट पड़ा..
एक ही झटके में उसके सीने को ब्लाउज से आजद कर दिया ,और उसकी साड़ी निकाल फेंकी..
मोंगरा अब बस एक पेटीकोट में थी और बलवीर के विशाल शरीर के नीचे मचल रही थी ,
“मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु मोंगरा ,तुम मेरी हो मेरी हो …”
बलवीर उसके पूरे चहरे को चूमने लगा,
मोंगरा का हाथ ऊपर था जिसे बलवीर के मजबूत हाथो में थाम रखा था,वो उसके उरोजों को चूमे जा रहा था,उसका दूध पीने की पूरी जिद में था,
मोंगरा की सिसकियां बढ़ते ही जा रही थी ,
बलवीर उठा और उसने अपने नीचे के वस्त्रों को निकाल फेका,उसके नाग की फुंकार ने रणधीर को भी डरा दिया था,उसकी आंखे और भी फट गई थी,मोंगरा भी उसे बिना पलक झपकाए देख रही थी ..

“तुम सच में सच्चे मर्द हो बलवीर “
मोंगरा ने उसके लिंग को हाथो से भरा और अपनी ओर खिंच लिया ,बलवीर की कमर अब लेटी हुई मोंगरा के होठो के पास थी बलवीर की आंखे बंद थी ,मोंगरा एक बार फिर खिड़की की ओर देखते हुए मुस्कुराई और खिड़की की ओर देखते हुए ही होले से बलवीर के ताजे लिंग को अपने होठो से सहलाकर अपने मुह में ले लिया,बलवीर मानो सुख के सातवे आसमान में पहुच चुका था…
“आह मेरी मोंगरा “उसका हाथो मोंगरा के सर पर अपने ही आप आ चुका था,मोंगरा भी अब खिड़की को देखना बंद कर चुकी थी उसकी आंखे भी बंद हो चुकी थी वो इतनी तन्मयता से बलवीर का लिंग चूस रही थी मानो समय रुक गया हो और मोंगरा के पूरे प्राण उसी एक काम में लग गए हो …
बलवीर का गीला लिंग अब और भी चमक रहा था,मोंगरा ने अपने पेटीकोट का नाडा खुद ही खोल दिया .अंदर बालो से ढकी हुई योनि को देखकर बलवीर उसपर ही टूट पड़ा,उसके होठ मोंगरा के योनि को पूरी तरह से सहला रहे थे…
“आह आह मैं मर जाऊंगी बलवीर आह ..मेरी जान “
मोंगरा की सिसकियां बढ़ने लगी थी ,थोड़ी ही देर में उसका बदन अकड़ा और वो निढल होकर गिर गई …….
कुछ देर उसकी आंखे बंद ही रही लेकिन फिर बलवीर के उंगली के योनि में घुसने के आभस से उसने आंखे खोली उसके होठो में मुस्कुराहट थी उसने फिर से खिड़की की ओर देखा ..
बेचारा रणधीर अपने प्यार को किसी और के हाथो लूटते हुए देख रहा था,लेकिन उसके लिंग ने जैसे बगावत करार दी थी वो झुकने का नाम ही नही ले रहा था,लिंग अपने पूरे शबाब पर था,उसकी अकड़ से रणधीर को दर्द तक होने लगा था,उसने अपने कपड़े के कैद से उसे आजद कर दिया और अपने हाथो में भरकर उसे सहलाने लगा…….
इधर बलवीर ने अपनी थूक मोंगरा की योनि को गीला कर दिया था,वो एक उंगली आसानी से अंदर बाहर कर रहा था,लेकिन अब भी उसमे इतनी जगह नही थी की उसका मूसल उस छोटी सी छेद में जा सके ,वो और थूक का सहारा ले रहा था,जब उसे लगा की ये भी काफी नही होगा वो घी ले आया और अपनी उंगलियों में लगाकर अच्छे से योनि में जगह बनाने लगा,मोंगा दर्द और मजे के सामूहिक सम्मेलन से मदहोशी और दर्द से भरी हुई सिसकियां ले रही थी ..
बलवीर अब उसके ऊपर छा गया था और अपने लिंग को घी से भिगो चुका था,चमकता हुआ उसका लिंग मोंगरा के योनि के द्वार को खोलने को तैयार था,पहले उसने योनि में हल्के हल्के ही लिंग को सहलाया और आराम से अंदर करने लगा…..
“आह बलवीर नही ही……..

”
मोंगरा की चीख सी गूंज गई जो जल्द ही बलवीर के मुह में दब गई ,वो उसके होठो को अपने होठो में भर चुका था,लिंग अंदर जाता गया और मोंगरा मानो बेहोश होते गई लेकिन बलवीर उसे प्यार से सहला रहा था,मोंगरा ने आंखे खोली और बलवीर के होठो में अपने होठो को भर लिया ,दोनो ही मदहोशी में एक दूसरे को चूम रहे थे,बलवीर भी धीरे धीरे धक्के को बड़ा था रहा ,दोनो का ही पहली बार था दोनो ही एक दूसरे के प्यार में गुम हो रहे थे,
मोंगरा ऐसे खो गई जैसे दुनिया अब उसके लिए खत्म हो गई हो ,धक्के तेज होते गए और मोंगरा और बलवीर के मुह से निकलने वाली आवाजे भी ……..
तूफान जब शांत हुआ दोनो ही पसीने से पूरी तरह से भीग चुके थे और बलवीर ने अपना पूरा दम मोंगरा की कोख में छोड़ दिया था……
और रणधीर ने दीवार पर ……
रणधीर ने जब खुद को देखा तो वो अपनी ही स्तिथि पर शर्म और ग्लानि से भर गया,वो दौड़ाता हुआ भागा,वही मोंगरा और बलवीर अपने ख्वाबो की दुनिया में मस्त एक दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे..

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“अब तो मेरा बेटा ही मेरा दुश्मन बना बैठा है परमिंदर समझ नही आ रहा की क्या किया जाय ..”
परमिंदर चुप ही था,प्राण नशे की हालत में था ..
“उस मोंगरा को रास्ते से हटाना ही होगा ,मैं भी अपने अहंकार में आकर उस नागिन को दूध पिला रहा था,साली तो लाते ही मार देना था,चलो अब भी समय है उसे मार कर कही फेक दो …”
परमिंदर अब भी चुप था
“क्या हुआ चुप क्यो हो ..”
“ठाकुर साहब उसने सिर्फ आपके बेटे पर ही नही मेरे बेटे पर भी काबू कर रखा है ,बलवीर के रहते उसे मरना मुश्किल ही है ..”
“तो फिर क्या किया जाए ???”
“अगर इन दोनो के कारण ही वो मर जाए तो …”
“मतलब “
“मतलब की उसे हवेली से बाहर भेज दो रणधीर के साथ और बाहर से आदमी बुला लेते है ,वो लोग उस पर नजर रखने के लिए कहो …,मौका पाकर वो लोग उनपर हमला कर देंगे और रणधीर को भी शक नही होग की
हमने हमला करवाया है ...और उसे हम बतलायेंगे की आपके दुश्मनों ने मोंगरा को मार डाला ….”
प्राण सोच में पड़ जाता है..
“क्या दिन आ गए है ,अपने ही बेटे पर हमला करवाना पड़ेगा,लेकिन क्या वो ये बात मान लेंगे की उसे हमने नही किसी और ने मारा है “
“फिक्र मत कीजिये बलवीर भी उनके साथ जाएगा ,यंहा से तो दोनो अकेले ही निकलेंगे लेकिन मैं बलवीर को जानता हु वो मोंगरा को रणधीर के साथ अकेले नही जाने देगा ,वो उनके पीछे जाएगा ही ,इसी दौरान उसके दिमाग में ये बात डाल देंगे की वो लोग ठाकुर के बेटे को मारने आये है,बलवीर मोंगरा को बचाने जरूर जाएगा ….और इन सबकी लड़ाई में मॉंगरा पर कोई गोली चला देगा …….”
प्राण की फिक्र थोड़ी कम हुई ..
“ठीक है जो करना है करो लेकिन रणधीर और मोंगरा बाहर जाएंगे क्यो ??”
“आप उसे वो शहर वाले फार्महाउस को देखने अकेले भेज दीजिये ,मोंगरा का साथ पाने के लिए वो उसे भी साथ ले जाएगा ,आग तो उसे लगी ही है…..

आज नही बुझा पाया तो कोई दूसरा मौका तो ढूंढेंगे ही ..”
प्राण के चहरे में मुस्कान आ गई ………

49
“लेकिन अकेले ही क्यो ,बलवीर भी साथ चले तो क्या दिक्कत है “
मोंगरा ने रणधीर के प्रस्ताव पर कहा …
“क्योकि मुझे अधूरा काम पूरा करना है ,और बलवीर के रहते मैं कुछ भी नही कर पाऊंगा ..”
“ओहो ऐसी बात है,लेकिन याद है मैंने कहा था की मुझे असली मर्द चाहिए और तुम तो अपने बाप के सामने कांपने लगते हो ..”
मोंगरा खिलखिलाई
“मोंगरा अगर तूम यही चाहती हो तो ठीक है मैं तुम्हे इस हवेली के ही बंधन से आजाद कर दूंगा ,अब चलोगी मेरे साथ ..”
मोंगरा रणधीर को देखती रही ...और उसके गले से लग गई ……..

दोनो ही एक कार में बैठे जा रहे थे,जंहा मोंगरा पूरी तरह से मस्ती के मुड़ में थी वही रणधीर बेहद ही गंभीर दिख रहा था,
“इतने चुप क्यो हो ,कल तो बहुत कुछ करने को उतावले थे..”
“कुछ नही कुछ देर में ही पता चल जाएगा..”
रणधीर ने कार रोड से उतार दी और जंगल की तरफ ले गया ,कुछ दूर जाने के बाद गाड़ी रुकी ..
“यंहा क्यो रोक दिए …”
“थोड़ी दूर में एक झरना है “
“ओह तो जनाब झरने में मजे लेना चाहते है …”मोंगरा के होठो में कातिल सी मुस्कान आयी लेकिन रणधीर अब भी चुप ही था
मोंगरा को ये उन्मुक्त वातावरण बेहद ही भा रहा था वो खुसी से इधर उधर दौड़ रही थी ..
“अरे वँहा खड़े हुए क्या देख रहे हो आओ ना “
मोंगरा चिल्लाई ,रणधीर धीरे धीरे उसकी ओर बढ़ने लगा,जब वो उसके थोड़ा नजदीक गया मोंगरा का ध्यान उसके चहरे पर गया..
वो कांप रहा था,पूरी तरह से लाल
“क्या हुआ तुम्हे “
मोंगरा रणधीर की तरफ आने लगी
“रुक जाओ मेरे पास मत आना “
मोंगरा चौकी क्योकि रणधीर ने उसके ऊपर पिस्तौल तान दी थी
“ये ..ये क्या कर रहे हो ठाकुर साहब ..ये कैसा मजाक है ”मोंगरा ने कांपती हुई आवाज में कहा
“मजाक तुम इसे मजाक कहती हो ??मजाक तो तुमने मेरे साथ किया है मोंगरा..मैं तो तुमसे प्यार करने लगा था लेकिन तुम ...तुमने मुझे धोखा दिया ,तुम उस बलवीर के साथ ,वो भी तुम्हे पता था की मैं तुम्हे देख रहा था..”
मोंगरा के होठो में कातिल मुस्कान खिल गई ..
“क्यो मजा आया ना ..सच में बलवीर सच्चा मर्द है”
रणधीर का गुस्सा सातवे आसमान पर था और उसके हाथ भी कांपने लगे थे …
“पिता जी सही कहते थे ...तू है ही रंडी ….”

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50
बलवीर हवेली दूर एक चाय की टापरी में बैठा हुआ रणधीर के गाड़ी के आने का इंतजार कर रहा था ,उसे पता था की आज रणधीर मोंगरा को अकेले ले जा रहा है ,लेकिन वो मोंगरा को अकेले तो नही छोड़ सकता था ,
वो एक मोड़ पर उसकी गाड़ी का इंतजार कर रहा था ताकि मौका देखकर वो उनके पीछे एक किराए की बाइक से लग जाए ..

तभी कुछ लोग वँहा आ गए ,और टपरी के पीछे बैठ कर शराब पीने लगे ,वो लोग 5 बाइक में थे ,
करीब 10 लोग थे ,दिखने से ही गुंडे जैसे लग रहे थे,उन्हें पहले बलवीर ने नही देखा था शायद वो किसी दूसरी जगह से थे ,
“सालो जल्दी करो ठाकुर का बेटा आता ही होगा ..”
“खबर तो पक्की है ना तेरी वरना साला हम यंहा बैठे ही रह जाएंगे और वो आएगा ही नही ..”
“अरे अंदर की खबर है फिक्र मत कर अपनी रांड के साथ जा रहा है अय्याशी करने उसके ही चेले में बताया है ..”
बलवीर के कान उनकी बात से खड़े हो गए ,वो अपनी गाड़ी उठाकर वँहा से चला गया,उसके जाते ही वो एक दूसरे को देखने लगे
“साले ने सुना की नही ..”
“फिक्र मत कर उसके चहरे से ही लग रहा था की उसने सुन लिया है ..”

रणधीर के गाड़ी के 3 बाइक चल रहे थे जिनमे के दो तो उन गुंडों के थे जिन्हें पर्मिदंर ने बुलाया था ,और एक था बलवीर वो सबसे पीछे चल रहा था ,वही गाड़ी के सामने 2 और बाइक थी ,सभी गुंडे एक दूसरे से वायरलेस की मदद से बात कर रहे थे ,वही उनके साथ वायरलेस की मदद से जुड़ा हुआ पर्मिदंर भी पल पल की खबर ले रहा था ……
रणधीर की गाड़ी जंगल में मुड़ने से सभी घबरा गए क्योकि सब ने सोचा था की वो मोंगरा को फार्महाउस ले जाने वाला है …
सभी उसके पीछे लग गए और जब उनकी गाड़ी रुकी तो वो भी कुछ दूर में ही रुक गए ,उन लोगो को ये भी पता था की बलवीर भी उनके पीछे है ,बलवीर गाड़ी एक कोने में लगाकर देखने लगा लेकिन जब उसने देखा की रणधीर मोंगरा के ऊपर पिस्तौल ताने खड़ा है तो वो दौड़ा …
“हमारी क्या जरूरत ये तो ठाकुर का बेटा ही उसे मारने पर तुला है “
एक आदमी ने वायरलेस से पूरी बात पर्मिदंर को बतलाई ..
“चलो अच्छा ही हमारे हाथ गंदे नही होंगे “परमिंदर भी मुस्कुराया और अगले ही पल…
“रणधीर नही …”
दौड़ता हुआ बलवीर मोंगरा की ओर आ रहा था ,बलवीर को देखकर रणधीर और भी घबरा गया और पिस्तौल से गोली चला दी जो सीधे जाकर मोंगरा के सीने में लगती गई ,खून की धार फुट पड़ी और बलवीर स्तब्ध सा बस उसके गिरते हुए बढ़ने को देखने लगा,वो दौड़ाकर उसे सम्हाला …
अब भी मोंगरा के होठो में मुस्कान थी वो प्यार से बलवीर के गालो को सहला रही थी ,...
रणधीर स्तब्ध खड़ा हुआ था,
पर्मिदर वायरलेस में चिल्लाया ..
“सालो देख क्या रहे हो रणधीर को वँहा से बाहर निकालो वरना बलवीर उसे मार डालेगा ..फायर करो “
वो लोग तेजी से सक्रिय हुए और रणधीर को खिंचते हुए अपनी बाइक में बिठा लिया …
“मादरचोद रुक …….”
बलवीर उनके पीछे दौड़ने को हुआ लेकिन गोलियां चलने लगी और मोंगरा ने बलवीर का हाथ थाम लिया ..
“मुझे छोड़कर मत जाओ बलवीर ..”
बलवीर रुका और देखते ही देखते मोंगरा की आंखे बन्द हो गई ,रह गई तो बस बलवीर की चीखे जो पूरे जंगल को दहला रही थी ……

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“हैल्लो हल्लो काम हो गया,रणधीर की गोली से मोंगरा मारी गई ,लेकिन बलवीर की हालत ठीक नही है ,.

..”
एक दूसरा जासूस वायरलेस से परमिंदर से बात कर रहा था..
“कोई बात नही वो ठीक हो जाएगा ,रणधीर को कुछ दिनों के लिये छिपाना पड़ेगा ,तुम आ जाओ और किसी के नजर में मत आना ..”
परमिंदर ने प्राण को देखा जो उसकी बात सुन रहा था,आज प्राण के चहरे में वो खुसी थी जो पहले कई दिनों से कभी नही आयी थी …

52

रणधीर को कही छिपा दिया गया था ताकि वो बलवीर के कोप से बच सके लेकिन बलवीर का भी कोई पता नही चल पा रहा था…

इधर

कालिया जंगल के अपने ठिकाने में बेचैनी के साथ घूम रहा था,चिराग सिंग और शंभु भी बेचैन लग रहे थे ..

कुछ देर के इंतजार के बाद उन्होंने किसी के आने की आहट सुनी और सामने जो था उसका चहरा देख कर कालिया और रोशनी दोनों ही झूम उठे …

“बापू ...मा…..”

मोंगरा दौड़ाते हुए जाकर दोनों से लिपट गई थी ,आज उसने पहली बार इन्हें सामने से देखा था,दोनों ही अपनी बेटी को जितयन प्यार दे सकते थे दे रहे थे,साथ ही आया बलवीर भी अपने आंखों में पानी लिए सब कुछ देख रहा था और फिर आयी चंपा जिसे देखकर बलवीर और मोंगरा का मुह ही खुल गया…

“ये तो बिल्कुल मेरी तरह ही दिखती है …”मोंगरा तुरंत अपनी बहन के गले से लग गई ,

“हा बस एक अंतर है इसके ठोड़ी में ये तीन बिंदिया बनाई गई है जिसे सरदार ने बचपन में ही बनवा दिया था..”

पूरा परिवार फिर से मिल चुका था ,सभी खुश थे तभी कालिया एक आदमी की तरफ मुड़ा

“अरे भवानी जा जाके ठाकुर को बता दे की मेरी बेटी अब मेरे साथ है ,उसका सपना अधूरा का अधूरा ही रह गया लेकिन अब मेरा सपना पूरा होगा ,ठाकुर की मौत का सपना …”

कालिया जोरो से हँस पड़ा था ………

****************

कहने के लिए भवानी ठाकुर का जासूस था लेकिन उसे जासूस कालिया ने ही बनवाया था ,ठाकुर उसे पाइसके देता था कालिया की जासूसी करने के लिया और वो कालिया का ही एक वफादार था,भवानी के चहरे में परेशानी साफ दिख रही थी ,वही परमिंदर और ठाकुर भी इस वाकये से बौखला गए थे,

“आखिर ये हुआ कैसे ..”

अभी तक उन्हें कुछ समझ नही आ रहा था की आखिर रणधीर ने जब मोंगरा को मार दिया था तो वो जिंदा कैसे बची वही परमिंदर इस चिंता में था की उसका बेटा भी मोंगरा के प्यार में पड़कर अब उसे ही धोखा दे गया ,

“ठाकुर साहब ये मोंगरा की ही चाल थी ,जब रणधीर मोंगरा को थियेटर ले गया था तब भी वो अपने प्लान में काम कर रहे थे,वंहा बलवीर कालिया के एक आदमी से मिला था और उसे मोंगरा का प्लान समझाया था ,रणधीर तो मोंगरा से अय्याशी करने में ही बिजी था,आखिर मोंगरा ने रणधीर को भड़का दिया ताकि वो उसे मारने की सोचे ,बलवीर ने उसके पिस्तौल में नकली गोलियां डाल दी थी ,रही सही कसर अपने उन दोनों को बाहर भेज कर पूरी कर दी ………..”

भवानी की बात से ठाकुर बुरी तरह से बौखला गया था ,वो परमिंदर की ओर ही देख रहा था ..

“तुम्हारे खून ने तो अच्छा धोखा दिया हमे “

परमिंदर क्या कहता लेकिन उसकी आंखे नीची नही हुई थी …

“ठाकुर साहब हमारे खून में ही वफादारी है,जैसे मैं आपके लिए वफादार हु वैसे ही मेरा बेटा उस मोंगरा के लिए वफादार है ,उसने अपनी वफादारी निभाई और मैंने अपनी ,लेकिन मुझे लगता है की अब मैं और ये काम नही कर पाऊंगा,मैं आपके लिए किसी की जान ले सकता और अपनी जान दे भी सकता हु लेकिन …..लेकिन मैं अपने बेटे की जान कैसे लूंगा,अब तो वो भी कालिया गिरोह का ए सदस्य बन गया है “

ठाकुर ने जीवन में पहली बार परमिंदर की आंखों में आंसू देखे थे ..

“तुम मेरे लिए आज भी उतने ही मूल्यवान हो परमिंदर ,अगर तुम भी मेरा साथ छोड़ दोगे तो मैं टूट ही जाऊंगा “

ठाकुर का अहंकार जैसे आज टूट सा गया था लेकिन परमिंदर ने जैसे फैसला कर लिया हो ..

“मुझे माफ कर दीजिए ठाकुर साहब ,मैं अपनी बाकी की जिंदगी चैन से गुजरना चाहता हु ,इन सब से दूर ,मैं अपने ही बेटे को मारने की साजिश में अपनी बाकी जिंदगी नहई गुजार सकता ,आपने मुझपर बहुत भरोसा किया है ,मुझे जानकर अच्छा लगा की आप की नजरो में मेरी इतनी कद्र है लेकिन ...लेकिन मुझे माफ कीजिये “

ठाकुर परमिंदर को रोकना तो चाहता था लेकिन परमिंदर के फैसले के सामने वो भी मजबूर हो गया था ,वो अपना सबसे अच्छा सिपहसालार को खो रहा था ……….

वर्तमान में

“ह्म्म्म फिर परमिंदर गया कहा “

अजय के मुह से अचानक ही निकल गया

“कोई नही जानता.सिवाय बलवीर के लेकिन उसने कभी किसी को नही बताया की परमिंदर आखिर गया कहा ,शायद वो अपनी बाकी की जिंदगी चैन से जीना चाहता था ,”

“यानी बलवीर से वो फिर से मिला ???”

“सुना है एक बार उसने बलवीर को अपने पास बुलाया था लेकिन उन दोनों में क्या बातचीत हुई और वो कहा गया था ये किसी को नही पता “तिवारी की बात से अजय को सकून मिला ..

“फिर फिर क्या हुआ ..?”

तिवारी के चहरे में अजय के उत्तेजना को देखकर एक मुस्कान आ गई

“वही जो नियति को मंजूर था,ठाकुर बौखला गया था और कालिया के पीछे पड़ गया था वही उसने कनक की मदद से चंपा ,मोंगरा और बलवीर को इन सबसे दूर शहर भेज दिया ,कालिया के पास ये समय था की ठाकुर पर पूरे जोर से प्रहार किया जाए क्योकि उसके पास परमिंदर अब नही था,दोनों की लड़ाई तेज हो गई लेकिन नशीब को कुछ और ही मंजूर था,ठाकुर को पता चल गया की भवानी असल में उसकी नही कालिया की जासूसी करता है और इसी का फायदा उठा कर वो कालिया के ठिकाने तक पहुच गया ,कालिया मारा गया साथ ही रोशनी भी पूरा गैंग ही तबाह हो गया …”

तिवारी ने एक गहरी सांस ली

“फिर ..”

अजय की उत्सुकता और भी बढ़ गई थी …

“फिर …….फिर मोंगरा और बलवीर वापस आये ..”

तिवारी के होठो में एक मुस्कान थी ….

53

हम दोनों बाहर ही थे की चंपा की आवाज आयी ..

“अब आप लोग अंदर आ जाइये रात बहुत हो गई है “

तिवारी हमसे बिदा लेकर अपने घर जा चुका था..

और मैं अब चंपा की बांहों में था…

“तुमने मुझे कभी बताया नही की तुम शहर में रहती थी “

“हा मेरी पढ़ाई वही हुई थी ,ठाकुर से बचने के लिए बाबूजी ने मुझे शहर भेज दिया था,लेकिन जब बाबूजी को ठाकुर ने मार दिया और मोंगरा और बलवीर वापस आ गए तो मेरा शहर में रहना भी दुर्भर हो गया...ठाकुर के आदमी हमे सभी जगह तलाश कर रहे थे,वो तो मुझे भी मार ही देते लेकिन तुमने मुझे बचा लिया “

चंपा की बात सुनकर मैं थोड़ा चौक गया ..

“क्या??क्या कहा की मैंने बचा लिया “

इस बार चंपा मुस्कुराई

“ठाकुर को पता था की मैं किसी जंगल के सरदार के पास नही बल्कि शहर में रहती हु और अपनी पढ़ाई कर रही हु,मैं भावना(कनक की बेटी) के ही कालेज में थी,इधर चंपा का आतंक फैल रहा था और वही ठाकुर को मेरी कोई सुध नही थी की कालिया की कोई दूसरी बेटी भी है ,मैंने मुम्बई से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और ..”

“वाट द फक ...तुम ...तुमने इंजीनियरिंग की है ..”

ये ऐसे था जैसे मेरे सर पर किसी ने कोई बम्ब फोड़ दिया हो ,मैं जिसे आजतक इस जंगल की भोली भाली लड़की समझ रहा था वो तो मॉर्डन लड़की है ..

“जी जनाब वो भी IIT मुम्बई से ,और उसके बाद MBA के लिए मेरा दाखिला IIM इलाहाबाद में होई गया ..”

“इसकी मा की …...“

मैं अपना सर पकड़ कर खड़ा हो गया था लेकिन चंपा घबराई नही बल्कि सिर्फ मुस्कुराती रही ..

“तुमने मुझे ये सब पहले क्यो नही बताया ..??”

इस बार चंपा के चहरे में एक फिक्र और चिंता के भाव थे

“इसी डर से की कही तुम मुझे छोड़कर ना चले जाओ ,मोंगरा ने अपना गेम खेल दिया था,तुम्हारे आने के पहले से ही ये सब शुरू हो गया था ,ठाकुर को पता चल गया था की मैं IIM से MBA कर रही हु वंहा मेरी जान को खतरा होने लगा था लेकिन ठाकुर को चकमा देने के लिए मोंगरा चाहती थी की मैं ये देश छोड़कर निकल जाऊ ,ये सब हो पाता लेकिन उससे पहले ही उस इंस्पेक्टर का खून हो गया और तुम उसकी जगह आ गए ,दीदी ने तुम्हे आजमाने की सोची और बलवीर के कहने पर तुमसे मिलने गई ,याद है जब तुम पहली बार मोंगरा से उस झील में मिले थे …”

“बलवीर के कहने पर ???”मैं फिर से थोडा आश्चर्य में था..

“हा मोंगरा किसी पर यू ही भरोसा नही कर लेती ,उसने तुम्हे आजमाया लेकिन उससे गलती हो गई ,वो तुम्हारे प्यार में पड़ गई उसे तुम बहुत अच्छे लगे ,लेकिन तुम उसे चंपा ही समझते रहे और वो भी आगे बढ़ गई ,उस दिन जब तुम दोनों टॉकीज में गए थे तो तुम्हें रणधीर मिल गया और ठाकुर ने तूम दोनों को बचा लिया ,क्योकि वो भी जानता था की अगर मोंगरा वंहा है तो उसके बेटे को भी वंहा खतरा होगा,तब तक तुम्हारे साथ मैं नही बल्कि मोंगरा ही थी लेकिन इन सबमे मोंगरा के सामने एक प्रश्न लाकर खड़ा कर दिया था की उसे किसे चुनना है ,अपने प्यार को या फिर उस लक्ष्य को जिसके लिए उसने अपनी जावानी अपना चैन सुख सब कुछ कुर्बान कर दिया था,और मोंगरा ने फैसला ले लिया ,उसने अपने लक्ष्य को ही चुना…...उसने इसके लिए मुझे फिर से वापस बुला लिया,ये बात ठाकुर को भी पता चल गई थी और वो इससे और भी ज्यादा परेशान हो गया क्योकि वो जानता था की अगर उसने मोंगरा समझ कर मुझे मार दिया तो बड़ी गड़बड़ हो जाएगी,उसने भी एक प्लान बना रखा था उसने तुम्हे खरीदने की कोशिस की वो जानता था की तुम चंपा के कितने करीब हो ,और मोंगरा को पकड़ने के लिए अपना जी जान लगा दोगे इसलिए उसने मेरी तरफ से ध्यान भी हटा लिया,तो तुमने ही मुझे बचाया ना ..”

इस बार मेरा दिमाग हिल गया था मैं अपना सर पकड़े हुए बैठा हुआ था मेरे आंखों में दुख था आंसू थे ,मैं अपने को किसी बेवकूफ की तरह महसूस कर रहा था …

“तो तुम दोनों ने मिलकर मेरा इस्तेमाल किया,और तुम..तुमने तो बस मुझसे प्यार का दिखावा किया बस ..”

चंपा आकर मेरे बाजू में बैठ गई …

“सच कभी कभी कड़वा होता है अजय लेकिन मेरी बात का विस्वास करो की मोंगरा और मैंने दोनों ने ही तुमसे बेहद प्यार किया है ,तुम जानते हो की हमारी आंखे कभी गलत नही थी ...हा जब मुझे बुलाया गया था तब मैं बस एक खेल खेलना चाहती थी मोंगरा की मदद करना चाहती थी,याद है जब तुम मेरे झोपड़े में आये थे शराब पीने के लिए,मैंने उस दिन तुम्हे पहली बार देखा था ,तुम्हे महसूस किया था ,ये हमारा ही प्लान था की तुम मेरे नजदीक ना आ पाओ इसलिए मोंगरा ने गोली चलवा दी और तुम उसे ढूंढने जंगल में चले गए ,लेकिन यकीन मानो वो आखिरी बार था जब मोंगरा तुम्हारे साथ थी ,क्योकि मैं भी तुम्हारे प्यार में पड़ चुकी थी और मोंगरा ने ये कुर्बानी भी दे दी ,तब से तुम्हारे साथ बस मैं ही थी ,हमने ही एक दूजे को अपना प्यार दिया और आज भी मैं तुमसे बेहद मोहोब्बत करती हु …”

मुझे पता था मुझे पता था की मेरा चुतिया कट गया था लेकिन मैं इस बात से इनकार नही कर सकता की चाहे वो मोंगरा हो या चंपा इन्होंने मुझसे मोहोब्बत तो बेपनाह किया था,इनकी आंखे कभी झूट भी बोलती थी ,किसी की भी नही बोलती बस पढ़ने वाला होना चाहिए ..

मैं अपने ही दुनिया में गुम था की मुझे याद आया की इस लड़की ने खुद को जंगल में रखा जबकि ये तो महलों में रहनी चाहिए थी ,ये एक वेल क्लासिफाइड प्रोफेसनल है और शायद ये मुझसे ज्यादा कमाएगी लेकिन इसने सब छोड़कर मेरा साथ चुना था,खुद की पहचान को भी इतने दिनों तक छुपाए रखा था,सच में ये दोनों ही बहने पागल थी ,और शायद मैं भी क्योकि मैं भी इससे बेहद ही मोहोब्बत करता था ..

“तुम्हारी डिग्री का क्या हुआ “

“वो तो हो गई ,पिछले महीने ही लास्ट प्रोजेक्ट का सबमिशन था..”

मेरे होठो पर इस बार मुस्कान आ गई

“ये सब तुमने आखिर किया कैसे ???”

वो खिलखिलाई

“कुछ लोग है जो हमारी मदद कर दिया करते है ,मेरे पिता जी और मोंगरा के चाहने वाले ,वो दोनों ही डाकू थे लेकिन ...लेकिन उन्होंने अच्छाई के लिए हथियार उठाये थे कभी गरीबो और मजबूरों को परेशान नही किया,उनके कारण कई बच्चे अपनी जिंदगी अच्छे से जी पा रहे है ,अच्छे कालेजो में पढ़ रहे है और अच्छी नॉकरिया भी कर रहे है ,कभी कभी ये सब हमारी मदद कर देते है “

चंपा का चहरा शांत था ,मुझे एक अलग ही चंपा दिख रही थी मैंने अपने होठो को उसके होठो से मिला दिया ..

“एक बात पुछु मोंगरा और बलवीर कहा है ,अभी तक उनकी बॉडी नही मिली कही वो दोनों अभी भी …”

जो कीड़ा मेरे दिमाग में इतने दिनों से हलचल मचाये था आखिर वो बाहर आ ही गया ,लेकिन चंपा जोरो से हँस पड़ी …

“तुम रहोगे पुलिस वाले ही “

“क्या करे मेडम काम है अपना ..”

“ओह तो अपना काम कीजिये इंस्पेक्टर साहब ,खुद पता लगाइए की आखिर वो है कहा “

“मतलब की दोनों अभी भी जिंदा है “

“god only knows बेबी ..”

चंपा मेरी गोद में बैठते हुए बोली

“तुम्हारे मुह से अंग्रेजी सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा है “

वो फिर से खिलखिलाई

“कोई बात नही आदत हो जाएगी “

हमारे होठ फिर से मिल गए ……...

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समय बीतता जा रहा था ,मैं चंपा से शादी करना चाहता था लेकिन मोंगरा को मैंने वचन दिया था की मैं पहले ठाकुर को उसके किये की सजा दूंगा लेकिन ठाकुर के खिलाफ कोई भी सबूत ही हाथ नही लग रहा था,ठाकुर भी मेरा ट्रांसफर कही दूसरी जगह करना चाहता था लेकिन नही कर पा रहा था,

इधर चंपा डिग्री कंप्लीट हो गई और हम दोनों ने उसके पोस्ट ग्रेजुएशन सेरेमनी में हिस्सा लिया,उसे कनाडा की एक कंपनी का ऑफर भी मिला लेकिन उसने प्यार से इनकार कर दिया,

“यार तुम इन झंझट से दूर क्यो नही चली जाती ,मैं भी अपना काम खत्म करके वही आ जाऊंगा दोनों वही सेटल हो जाएंगे”

एक दिन मैंने उसे कह ही दिया

“मिस्टर अजय जी पहले मुझे अपनी बीवी बनाइये फिर मैं कही जाऊंगी,तुमसे शादी किये बिना मैं तुम्हे नही छोड़ने वाली “

चंपा की बात सुनकर मैं थोड़ा उदास हो गया

“क्या करू समझ से परे है ,ठाकुर मेरे सोच से कही ज्यादा चालाक है ,बेटे के मर जाने के बाद ऐसे तो वो टूट सा गया है लेकिन अभी भी उसकी पहुच बाकी है ,हमने उसके गलत कामो को बंद तो कर दिया लेकिन उसके खिलाफ कोई ऐसा सबूत नही जुटा पाए की उसे कोई सजा मील सके “

“तो तुम सच में उस कसम को लेकर सीरियस हो “

चंपा मेरे आंखों में देख रही थी …

“बहुत ज्यादा …”

“तो तुम्हरे पास समय है जितना तुम लेना चाहो,मैं कही नही जा रही तुम्हे छोड़कर ,ठाकुर ने मेरे पिता और मेरे मा को मार डाला लेकिन मेरे दिल में कभी उसके लिए बदले की भावना नही उठी ,लेकिन मोंगरा ने अपनी जिंदगी लगा दी ,मैं उसके जैसी नही हो सकती लेकिन मैं उसकी इज्जत करती हु ,उसका सपना पूरा करो अजय मैं तुम्हारी ही हु ,और तुम्हारी बीवी बनने के लिए कई जन्मों तक इंतजार कर सकती हु “

चंपा की आंखों में हल्की नमी थी लेकिन होठो में एक प्यारी सी मुस्कान हमारे होठ मिल गए थे…..

***********

“ये क्या कह रहे हो तिवारी जी “

“सच कह रहा हु सर वो खुद आपसे मिलने आने वाला है “

तिवारी की बात सुनकर मैं सोच में पड़ गया था लेकिन मैंने एक गहरी सांस ली

“ठिक है आने दो उसे देखते है क्या कहता है ..”

ठाकुर प्राण मुझसे मिलना चाहता था ,और मुझसे मिलने खुद आ रहा था क्या बात है ,लेकिन क्यो...बहुत जोर लगाने पर भी मुझे कुछ समझ नही आया ….

प्राण आकर मेरे सामने बैठ गया …….

“कहिए ठाकुर साहब आखिर हमे आज कैसे याद किया अपने “

मेरी बात सुनकर उसके होठो में एक फीफी की मुस्कान आई

“अजय जो हुआ वो तो हो गया लेकिन अब मैं अपने किये पर शर्मिंदा होता हु ,मैंने अपने भाई को खो दिया,अपने बेटे को खो दिया,मेरी बीवी मुझसे सालों से बात नही करती ,इतने धन दौलत का मैं करू तो क्या करू ,सब जैसे अब मुझे मिट्टी से लगने लगे है …

मैंने पूरी जिंदगी सिर्फ दौलत और ताकत कमाने में लगा दी अजय,अब मैं सकून की जिंदगी जीना चाहता हु इन सब लफड़ो से दूर …

मेरी बात से ये मत समझना की मैं तुम्हारे पास अपने को सिलेंडर करने आया हु ,नही मैं आज तक पुलिस के हत्थे नही चढ़ा आगे भी नही चढ़ूंगा क्योकि मेरे पहले किये बुरे कामो का कोई सबूत है नही और अब मैंने सारे बुरे काम खुद ही खत्म कर दिए है …

मैं यंहा तुम्हे आमंत्रण देने आया हु ,मैं एक नई शुरुवात करना चाहता हु ,इसलिए घर में एक पूजा रखी है जिससे मेरे बेटे की आत्मा को भी थोड़ी शांति मिले तुम्हे और चंपा को आना ही है ,अगर तुम आओगे तो मुझे और पूनम को अच्छा लगेगा..”

मैं ठाकुर को देखता ही रहा वो थोड़ी देर रुका और फिर बोलने लगा

“पूनम ने हमेशा ही मोंगरा और रणधीर को अपने बच्चों की तरह प्यार किया है ,ये उसके लिए बड़े ही दुख की घड़ी है,

वो चाहती थी की एक बार मोंगरा से मिल पाए,शायद चंपा के रूप में उसे मोंगरा दिख जाए …”

वो मुझे नमस्कार करता हुआ एक कार्ड देकर चला गया साथ ही तिवारी जी को भी एक कार्ड दिया था …..

मैं और तिवारी जी एक दूसरे को ही देख रहे थे,आंखों ही आंखों में एक दूजे को ये पूछ रहे थे की जाए की नही …

***********

“ठाकुर ने जो भी किया हो लेकिन हमे पूनम मौसी के लिया वंहा जाना चाहिए ,उन्होंने मोंगरा को दिल से प्यार किया था,अपनी बच्ची की तरह उसकी हिफाजत की और उनके ही कारण तो मा और बुआ ठाकुर के चुंगल से निकल पाई ,हम इतना कुछ कैसे भूल सकते है …”

ठाकुर के आमंत्रण की बात का पता चलते ही चंपा भावुक हो गई थी …

थोड़ी देर बाद ही मुझे पता चला की ठाकुर ने कुछ विक्रांत,भावना और डॉ चूतिया को भी निमंत्रण दिया है ,उसके साथ कुछ VIP लोग भी आ रहे थे …

आखिर हम सबने जाने का फैसला कर लिया ……

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55

चम्पा मेरी चम्पा इतनी खूबसूरत थी ,वो एक लाल रंग की साड़ी में किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी ,उसकी पतली झालरदार साड़ी उसे कसे हुए जिस्म में कसी हुई थी ,कमर में एक चांदी का कमरबंध लटक रहा था,उसकी नाभि के पास पेट का हिस्सा पूरी तरह से दर्शनीय था,पतली कमर और चौड़ी चूतड़ वाली मेरी जान के गोर गोरे जिस्म जो की उस लाल साड़ी की लालिमा से झांक रहे थे और मुझे दीवाना बना रहे थे,ऐसे तो मैंने उसे कई बार ही बिना किसी कपड़ो के भी देखा था लेकिन एक भारतीय नारी अगर साड़ी पहने खड़ी हो तो आप कुछ और कैसे देख सकते है…

उसकी लाल साड़ी के किनारों पर नक्कासी की गई थी ,हाथो का वर्क था जो की हरे पट्टी के ऊपर किया गया था,साथ ही उसने लाल रंग का ही ब्लाउज पहन रखा था,साड़ी पतली थी और ब्लाउज खुले हुए गले का दोनों का कॉम्बिनेशन किसी भी मर्द के दिल की धड़कनों को बढ़ाने के लिए काफी था,और उसके साथ उसका वो मादक जिस्म …..

उसने हल्के हल्के अपने गले के पास कुछ परफ्यूम का छिड़काव किया जिससे कमरे में हल्की गंध झूम उठी साथ ही मेरा दिल भी ,मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया था ,वो कसमसाई तो उसके हाथो की चूड़ियां खनक उठी……..

लाल हरे रंग की चूड़ियां कुछ चमकीले चूड़ियों के साथ पहने गए थे,मैंने उसके हाथो को अपने हाथो में ले लिया,उसकी हर चीज आज गजब की थी……

“कहर ढाने का इरादा है क्या ??”

मैं किसी सम्मोहन के आवेश में आकर बोल उठा..

“कहर ..??? आप के सिवा किसपर कहर बरसाउंगी ,”

उसने अपने निचले होठो को अपने दांतो से हल्के से कांटा ..और शरमाई मैंने उसे अपनी ओर पलटा लिया था ,उसके सीने मेरे सिनो में धंस गए

“ओह तो मेरी रानी मुझपर ही कहर बरसा रही है..”

मैंने उसके गले को चूमना चाहा लेकिन उसने अपना गला घुमा लिया फिर भी मेरे होठ का गीलापन उसके गले में जा चिपका ..

वो फिर से मचली

“ओहो छोड़ो ना पूरा खराब कर दोगो …”

“अरे जान खराब करने के लिए ही तो सजी हो ..”

मैंने थोड़े और जोर से उसे अपनी ओर खींचा

“हटो पार्टी के बाद घर आकर पूरा खराब कर लेना अभी तो हटो ..

”

उसने मुझे धक्का दिया और मैंने उसे छोड़ दिया

“तो पूरी शाम बस मुझे तड़फाना पड़ेगा “

मेरी बात सुनकर वो हँस पड़ी

“थोड़ी सी तड़फन भी अच्छी होती है जान,सुना नही है क्या इंतजार का फल मीठा होता है...अब चलो जल्दी से तैयार हो जाओ ,फूफा जी और भावना भी आते ही होंगे “

वो मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर जाने लगी लेकिन फिर रुक गई और पलटी और नीचे देखने लगी

“और अपने इसको भी थोड़ा सम्हालो टॉवेल फाड़ कर बाहर ना आजाये “

वो खिलखिलाते हुए बाहर भाग गई ,मेरी नजर नीचे गई सच में मेरा औजार टॉवेल फाड़ने को बेताब हो गया था ……..

“ओहो जीजू मैंने सुना था की लडकिया तैयार होने में टाइम लगती है लेकिन पहली बार देख रही हु की बीबी तैयार बैठी और और पति देव तैयार होने में लेट हो गए ...ऐसे हैंडसम लग रहे हो “

मेरे कमरे से निकलते ही भावना की आवाज आई ,वो लोग आ चुके थे ..

“अरे यार काम में फंस गया था ..”

************

ठाकुर के घर पूजा में सभी जाने पहचाने चहरे आये हुए थे,शहर से डॉ चूतिया और उनकी सेकेट्री मेरी भी पधारी थी,तिवारी जी भी आये हुए थे,प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री भी आये हुए थे,पुलिस विभाग के कई अधिकारी मुझे वंहा मिल गए ,ठाकुर जैसे अपने गुनाहों को साफ कर सभी से अच्छे रिश्ते बनाना चाहता था वो सभी से अच्छे से मिल रहा था मैंने अपने जीवन में उसे इतना नम्र कभी नही देखा था,साथ ही उसकी बीवी पूनम भी थी …...जब हम अंदर आये तो पूनम हमारे पास आ गई और चम्पा को देखते ही उसकी आंखों में आंसू आ गए ..

वो बार बार चम्पा के गालों को सहला रही थी ,तो कभी वो भावना पर भी अपना प्यार बरसाती ,भावना और चम्पा की भी आंखे गीली थी …..

मैंने इस हवेली के बारे में बहुत कुछ सुना था ,ऑफकोर्स कहानियों में लेकिन आज उसके अंदर आकर देख भी रहा था ,मैंने गौर किया जितना मैंने सोचा था ये उससे कही बड़ी थी ,मुझे याद आया की कैसे इसी हवेली में मोंगरा बड़ी हुई थी ,उससे पहले पूनम को कालिया ने इसी हवेली में प्रैग्नेंट किया था ,इसी हवेली के किसी कमरे में रोशनी और कनक को बंदी बनाया गया रहा होगा...मैं पूरी हवेली को ध्यान से देख रहा था तभी मेरे पास विक्रांत और डॉ आकर खड़े हो गए ..

“क्या देख रहे हो अजय ,”विक्रांत ने कहा

“कुछ नही फूफा जी बस ..”

“ह्म्म्म इसी हवेली में मेरा बचपन बिता और मैं यही जवान हुआ...इसी हवेली में मुझे मेरी कनक मिली “

विक्रांत ने एक गहरी सांस छोड़ी जैसे पुरानी यादों को वो बहुत मिस कर रहा हो

तभी मुझे हवेली के छत पर कोई इंसान की परछाई दिखाई दी …

“वंहा इस वक्त कौन होगा “अंधेरे के कारण मुझे साफ साफ कुछ नही दिख रहा था लेकिन मुझे इतना तो यकीन था की कोई व्यक्ति छत पर घूम रहा होगा ..

दोनों भी उस ओर देखने लगे

“होगा कोई हवेली का ही नॉकर ,यंहा बहुत से लोग काम करते है “

विक्रांत बोल उठा ………..

***********

पूजा खत्म हो चुकी थी कई मेहमान भी जा चुके थे ,पूनम और ठाकुर के विशेष अनुरोध पर कुछ लोग ही रुके हुए थे,सभी बड़े से हाल में बैठे बाते कर रहे थे ,मर्दों के लिए ड्रिंक्स की व्यवस्था की गई थी वही औरते आपस में ना जाने क्या बात करने में बहुत ही व्यस्त दिख रही थी …

डॉ,मेरी ,मैं ,चम्पा,विक्रांत ,भावना ,तिवारी के अलावा ठाकुर का एक अजीज दोस्त गृहमंत्री सेठ रुके हुए थे ..

“विक्रांत मैं चाहता हु की तुम बिटिया के साथ फिर से हवेली में आ जाओ “

पेग लगते हुए ठाकुर प्राण बोल उठा ,लेकिन विक्रांत बस अवाक उसके चहरे को देखने लगा जैसे उसे यकीन ही नही हो रहा था की उसे कोई ऐसा कुछ कहेगा …

“तुम मेरे छोटे भाई हो और मैं हमेशा से ही तुमसे बेहद ही प्यार करता हु …”

विक्रांत कुछ भी नही बोल पाया बस उसके आंखों में आंसू ही थे …

थोड़ी देर बाद सभी ने मिलकर डिनर किया रात बहुत हो चुकी थी हम जाने वाले थे लेकिन ठाकुर ने हमे फिर से रोक लिया ,उसके हाथ में एक लड्डू का पैकेट था ,

“बातों बातों में हम प्रसाद लेना तो भूल ही गए “प्राण के होठो में एक मुस्कान थी सभी का उसपर ध्यान गया

“लाओ मैं बांट देता हु “

मंत्री सेठ ने उसके हाथो से वो पैकेट ले लिया और सभी को बांटने लगा ,सभी ने बारी बारी से वो लड्डू खा लिया था अंत में वो ठाकुर के पास पहुचा ,सभी की आंखे उस समय ठाकुर के ऊपर जम गई जब सेठ ने प्राण को लड्डू नही दिया बल्कि हम सभी को देखते हुए हँसने लगा …

सभी की आंखे फट रही थी ,जैसे कुछ समझ नही आ रहा हो की आखिर हुआ क्या …

“तुम सभी के कारण आज मेरी ये हालत हुई है आज मैं सबसे अपना बदला लूंगा “

अचानक ही प्राण के चहरे का भाव बदला और वो अट्हास करने लगा,मेरे तो जैसे पैरों से जमीन ही खिसक गई थी ,मुझे समझ आ चुका था की आखिर हमारे साथ क्या हुआ है ,मैंने खड़े होने की कोशिस की लेकिन ..

धड़ाम ..

मैं जमीन में गिर गया था यही हालात चम्पा और डॉ की भी थी जिन्होंने खड़े होने की कोशिस की थी ,मैं कुछ बोलने वाला था लेकिन लगा जैसे मुह खोलने तक की ताकत नही बची है ,पूरा शरीर शून्य पड़ने लगा था ,जैसे पूरा शरीर पड़ा तो है लेकिन उसपर अब मेरा कोई भी काबू नही रह गया ,मुझे सब दिखाई और सुनाई दे रहा था,मैंने अपना सर घुमा कर चम्पा की ओर देखना चाहा जो की मेरे पीछे ही जमीन में गिरी हुई थी लेकिन सर भी घुमा नही पाया,ठाकुर के इरादों की समझ मुझे आ चुकी थी ,और अपना अंत नजदीक ही दिख रहा था ,कुछ ही देर हुए थे की कानो में आने वाली आवाजे भारी होती गई ऐसा लगा जैसे वो दूर जा रही है आंखे भी ना चाहते हुए बंद हो रही थी ,उसे खोले रखने तक की ताकत मुझमें नही थी ,आखिर सब कुछ धुंधला हो चुका था और बस एक सेकेंड की बात और सारी आवाजे और दृश्य गायब हो गये ……….

*********************

ना जाने कितनी देर हो चुकी थी ,मुझे लगा था जैसे मैं कभी आंखे नही खोलूंगा लेकिन मुझे होश फिर से आने लगा था ,मुझे कुछ कुछ आसपास का आभास होने लगा था ,आसपास कई लोगो की आवाजे आ रही थी जैसे बहुत भीड़ लगी हो ,मैंने धीरे से आंखे खोलने की कोशिस की मैं सफल भी हुआ ,सामने ऊपर छत दिखाई दे रही थी ,मैंने अपना गला मोड़ने की कोशिस की तभी किसी ने मेरे सर को अपने हाथो से उठाया ..

“रिलेक्स आराम से अभी कोई ताकत मत लगाइए आप ठीक है ..”

वो एक लड़की की आवाज थी मैंने देखा वो चहरा मैंने पहले कभी नही देखा था लेकिन उस सौम्य से चहरे में मुझे देखकर हल्की सी मुस्कान जरूर आ गई ,..

कुछ ही देर में मैं सामान्य हो चुका था और उस लड़की ने मुझे उठाकर बिठा दिया था …

“ये सब क्या हो रहा है “

मैंने उस लड़की से कहा जिसने एक डॉ वाला एप्रॉन पहने हुए था ,

“आप ठीक है आपको नशे की कोई दवाई खिलाई गई थी जिसके कारण आप बेहोश थे लेकिन अब आप होश में है ..”

मैंने नजर चारो ओर घुमाई सामने चम्पा मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी वही डॉ और विक्रांत भी होश में आ चुके थे और उन्हें भी डॉ उठाकर बिठा रहे थे ,बाकी के लोग अभी होश में नही आये थे जबकि तिवारी जी होश में आकर कुर्सी में बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे…वो डॉ मुझे छोड़कर दुसरो के पास चली गई

“ये सब क्या है तिवारी और ठाकुर और सेठ कहा है “

तिवारी मेरी बात सुनकर मुस्कुराया जिससे मैं और भी अचंबित हो गया ,हम जैसे नया जन्म लेकर आये थे पता नही हम जिंदा क्यो थे ?क्योकि ठाकुर तो हमे मारने का प्लान बना ही चुका था…

तिवारी एक चाय का कप लेकर मेरे पास आ गया और मुझे दिया

“थोड़ा रिलेक्स हो जाओ सर ,जवाब बाहर है,पहले चाय पी लो थोड़ा रिलेक्स हो जाओ फिर बाहर चलते है “

मैं बिना कुछ बोले चाय पीने लगा ,वंहा कोई भी कुछ नही बोल रहा था,डॉक्टरो की टीम सभी के पास जाकर उनके नब्ज़ देख रही थी और उन्हें इंगजेक्सन लगा रही थी जिससे लोग फिर से होश में आ रहे थे ,वही कमरे के बाहर मुझे और भी हलचल दिखाई दे रही थी कुछ पुलिस वाले भी दिखे जिससे मेरी उत्सुकता और भी बढ़ रही थी ,चम्पा बिल्कुल ही रिलेक्स दिख रही थी वो आंखे बंद कर सोफे से टिकी हुई लेटी हुई थी हमारे बीच कोई भी बात नही हुई …

चाय खत्म कर मैं खड़ा होने की कोशिस करने लगा,तिवारी ने मुझे थोड़ा सहारा दिया मैं अब अपने पैरों पर आराम से खड़ा था ..

हम बाहर आये और बाहर बरामदे पर पहुचते ही मैं फिर विस्मय से भर गया,चारो ओर बस पुलिस ही पुलिस दिख रही थी ,यंहा तक की कमिश्नर भी आये हुए थे…..

पास ही खड़ा एक सिपाही पंचनामा बना रहा था,

“इधर दिखाओ “

मैंने उसके हाथो से वो पंचनामा पकड़ा ,मैं उसे पढ़ने लगा

“ये सब क्या ..

ठाकुर और सेठ “

मैंने सिपाही को देखा

“जी सर दोनों कल रात आप लोगो को नशे की दवाई देने के बाद भारी शराब के नशे में छत से गिर कर मर गए …सीसीटीवी फुटेज से पता चला की इन दोनों ने मिलकर ही लड्डू में नशे की दवाई डालकर आप लोगो को खिलाया था ”

मैं अभी उसे देख रहा था तो कभी तिवारी को और कभी बरामदे में पड़े हुए उन दो लाशों को ……………...

56

बात साफ थी पंचनामा बन चुका था सभी इस बात को मान भी चुके थे लेकिन मेरा दिमाग अब भी इस बात को सही मानने को तैयार नही था…

प्राण ठाकुर इतना भी चूतिया नही था की खुद ही अपने घर में सीसीटीवी कैमरा लगा कर अपने गुनाहों को रिकार्ड होने दे ,वही वो इतना बड़ा चूतिया भी नही था की अपने हाथ में आया हुआ इतना बड़ा मौका यू ही छोड़ दे ,उसके सारे दुश्मन उसके सामने ही थे,सभी लाचार थे वो हमारे साथ कुछ भी कर सकता था ,लेकिन किसी को कोई भी नुकसान नही हुआ था ,मैं ये बात कैसे मान सकता था की प्राण हमे बेहोश करने के बाद दो मंजिल चढ़कर छत में जाकर इतनी शराब पीता है की वंहा से गिर जाता है यही नही उसका दोस्त जो की एक मंत्री है वो भी ऐसी बेवकूफी कर डालता है……

मुझे इसके पीछे कोई बड़ी साजिश का आभास हो रहा था लेकिन मैं कुछ भी नही कर सकता था ,क्योकि मुख्यमंत्री ने भी केस वही क्लोज करने की बात कह दी ,इसके ऊपर अब कोई और इंवेस्टिगेसन नही होनी थी ,ऐसे भी चीजे बिल्कुल साफ थी,ठाकुर के पास हमे बेहोश करने की मजबूत वजह भी थी ,और मंत्री को ऐसे भी ठाकुर के गुनाहों में बराबर का हिस्सेदार रहा था जिसका पता सभी को था,लेकिन ठाकुर के कारण कोई उसे कुछ बोलता नही था……..

मैं अपने घर के सोफे में बैठा हुआ यही सब कुछ सोच रहा था तभी …

“क्यो जीजू क्या सोच रहे हो ,मेरे ख्याल से शादी की तैयारी के बारे में ही सोच रहे होंगे ..”

भावना की खनखनाती हुई आवाज मेरे कानो में पड़ी..

मैंने आंखे खोली तो सामने भावना और चम्पा थी ,शादी की बात सुनकर चम्पा थोड़ी शर्मा गई थी…

ठाकुर को मरे 5 दिन हो चुके थे,मैं और चम्पा दोनों ही बेहद बिजी थी कारण था की ठाकुर की अन्टोष्ठी का कार्यक्रम,विक्रांत और भावना हवेली में रहने चले गए थे,वही चम्पा भी उनके और पूनम के साथ वही रह रही थी ,डॉ और मेरी भी वही रह रहे थे वो शहर वापस नही गए थे,आज चम्पा और भावना चम्पा के कपड़े लेने यंहा आये थे …

“कुछ नही बस आओ बैठो ना “

“मैं अपने कपड़े समेटती हु तू अपने और अपने जीजू के लिए चाय बना ले “

चम्पा बेडरूम की ओर बड़ी

“अरे पूरे कपड़े ले जाने की क्या जरूरत है “

मैंने बैठे बैठे ही कहा

“जीजू अब तो ठाकुर नही रहे ,मोंगरा दीदी को दिए वचन का भार भी आपके ऊपर नही है ...तो ...

तो अब चम्पा दीदी आपके साथ इस घर में तभी रहेंगी जब आप बारात लेकर हवेली आओगे और शादी करके इन्हें यंहा लाओगे ,समझे तब तक के लिए मैं अपनी दीदी को ले जा रही हु “

भावना मुस्कुराते हुए किचन की ओर चली गई

“ओह तो ये बात है …”

मैं भी मुस्कुराता हुआ अपने बेडरूम में गया जंहा चम्पा अपने कपड़े एक बेग में डाल रही थी मैंने उसे पीछे से जकड़ लिया

“अरे छोड़िए ना भावना आ जाएगी “

वो मेरी बांहों में ही मचली

“तुमने उस दिन कहा था की हवेली से वापस आते ही तुम्हारा श्रृंगार बिगाड़ दु लेकिन आज वापस आयी हो “

मैं उसके गले को चूमने लगा वो हल्के से हंसी और मेरी बांहों में कसमसाई

“क्या करू भावना और पूनम मा ने आने ही नही दिया ,और सुना ना भावना ने क्या कहा ,अब तो सुहागरात में ही मेरे दुल्हन वाला श्रृंगार बिगड़ना बच्चू “

वो कसमसाते हुए मेरे पकड़ से अलग हो गई और मुझे चिढ़ाते हुए जीभ दिखाने लगी

“अच्छा जी...ऐसे एक चीज बताओ की हमारी शादी मे मोंगरा और बलवीर आएंगे की नही “

मेरी बात सुनकर चम्पा के चहरे की हंसी गायब हो गई

“ये क्या बोल रहे हो “

“चम्पा मैं इतना भी बेवकूफ नही हु ,प्राण और सेठ ऐसे ही नही गिर सकते उन्हें किसी ने वंहा से प्लान करके गिराया है “

मेरी बात सुनकर वो थोड़ी मुस्कुराई

“आप और आपकी ड्यूटी बस हर समय यही चलते रहता है क्या ,अगर आपको लगता की उन्हें मोंगरा और बलवीर ने गिराया है तो ढूंढ लो उन्हें बात खत्म ...और अब कोई बहाने नही चलेंगे ठाकुर जा चुका है तो अब तुम्हे हमारी शादी के बारे में सोचना होगा ,वरना रहना यू ही अकेले इस घर में…….और शादी से पहले मुझे छूने की सोचना भी मत ..”

वो इठलाते और मुस्कुराते हुए वंहा से निकल कर किचन में जा घुसी ..

मुझे उसकी अदा पर बेहद ही प्यार आया मेरे होठो में मुस्कान भी आ गई लेकिन दिल के किसी कोने में एक टीस भी उठी की हो ना हो मोंगरा और बलवीर अब भी जिंदा है और उन्होंने ही ठाकुर को मारा है और मुझे लगता था की चम्पा ही नही भावना ,विक्रांत,तिवारी ,डॉ यंहा तक की पूनम भी इन सबमे शामिल थे ..

लेकिन मैं चाहते हुए भी कुछ नही कर पा रहा था ,किसी नतीजे पर बिना सबूत के पहुच जाना मेरी फितरत भी नही थी ,और ठाकुर कोई दूध का धुला भी नही था की मैं उसको इंसाफ ना दिला पाने की वजह से दुखी फील करू ,लेकिन मुझे सच जानना था क्योकि यही तो मेरा काम था ….

********************************

ठाकुर को मरे हुए 30 दिन ही हुए थे की हवेली को दुल्हन की तरह सजाया गया ,वजह थी मेरी और चम्पा की शादी …

चम्पा का कन्यादान पूनम कर रही थी और शादी के जश्न में कोई कमी नही आ जाए इसलिए 10 दिन पहले से ही विक्रांत और डॉ दिन रात लगे हुए थे ,मेरे माता पिता भी वहां आ चुके थे,उनके अलावा मेरी तरफ से और कोई नही आया था कोई था भी तो नही ,मेरी बारात मेरे सरकारी क्वाटर से हवेली तक गई…

मेरे माता पिता कुछ ज्यादा ही खुश लग रहे थे,जबकि मुझे लगा था की मेरी शादी की बात सुनकर उन्हें शॉक लगेगा लेकिन ऐसा नही हुआ बल्कि अब मुझे पता चला की मेरे माता पिता पहले से सभी को जानते थे और इस रिश्ते से बेहद ही खुश थे ,वो लोगो से ऐसे मिल रहे थे जैसे उनका इनसे बहुत पुराना राब्ता रहा हो ..

तिवारी ने मुझे बताया की पहले मेरे माता पिता पिता जी के कारोबार के चाहते यंहा हवेली आया करते थे ,इसलिए जब मेरी मा पूनम से मिली तो गले मिलकर और गाला फाड़कर रोने लगी ,वही मेरे पिता जी जब विक्रांत ,डॉ और तिवारी से मिले तो बेहद ही आत्मीयता के साथ मिले..

इतने दिन हो गए थे मुझे यंहा काम करते लेकिन पिता जी ने कभी नही बताया था की उनका हवेली से और यंहा के लोगो से इतनी घनिष्ट जान पहचान थी ,मेरे पिता जी ने बस ये कहा की ठाकुर प्राण सही आदमी नही था और इसलिए तुझे कुछ नही बताया …

आखिर सब कुछ ठीक हो चुका था ….

मैं पूरी शादी यही इंतजार करता रहा की कही मोंगरा और बलवीर मुझे दिख जाए लेकिन ऐसा नही हुआ उनकी कोई सुगंध भी मुझतक नही आई …….

****************

हवेली का वो कमरा पता जो की बेहद ही बड़ा था ,बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया था ,कमरे के बीचों बीच एक गोलाकार बिस्तर था जिसपर मेरी दुल्हन सजी हुई और शरमाये हुए बैठी थी ,उसके पास ही कुछ लडकिया भी बैठी थी जिनमे एक भावना थी बाकी सब उसकी सहेलियां …

जाते ही वो मेरा टांग खिंचने लगी और मेरा पर्स खाली करवाकर ही दम लिया ,वो लोग हसंते हुए बाहर भाग गई …

चम्पा के साथ कई महीनों से मेरा जिस्मानी रिश्ता रहा था,हम साथ ही रहा करते थे लेकिन पता नही आज फिर भी मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था,मैं उसके पास ही बैठा हुआ था वो घूंघट में थी ,जब मैंने वो घूंघट उठाया तो मैंने उसकी आंखों में आंसू देखे …

“तुम रो रही हो ..”

उसने नजरे उठाई ,उसकी बड़ी बड़ी आंखे काजल के कारण और भी बड़ी लग रही थी,आंखों में अब भी पानी भरा हुआ था जो उसके साफ आंखों को और भी उजला बना रहा था,

“आज मुझे वो मिल गया जिसका मैंने इतने दिनों से सपना देखा था ,ये खुसी के आँसू है दुख के नही “

वो हल्के से मुस्कुराते हुए बोली और उसके इस भोलेपन में मैं अपना दिल हार बैठा,मेरे होठ उसके होठो के पास जाने लगे थे ,उसकी आंखे बंद हो चुकी थी जब हमारे होठ एक दूसरे से मिले..

और कुछ ही देर में ही कमरे में बस चूड़ियों और सिसकियों की आवाजे ही फैल रही थी …………..

57

एक महीना बीत चुका था मेरे ट्रांसफर का आदेश आ चुका था और मेरे दिमाग से ठाकुर मोंगरा और बलवीर की बकरचोदी भी अब निकल गई थी ,

तिवारी जी ने भी अपना रिटायर ले लिया था,और भी अब नए जगह जाने से पहले कुछ दिन के लिए कही घुमकर आने की फिराक में था ,तो मैंने भी छुट्टी का आवेदन डाल दिया जो की सक्सेस भी हो गया …….

मैंने चम्पा को बता दिया था की मैं एक महीने की छुट्टी ले रहा हु ,जब मैं घर आया तो माहौल ही अलग था ,मेरे आते ही चम्पा मुझसे लिपट गई …..

“अरे क्या हुआ “

“जीजू आप लोगो की लाटरी लगी है “भावना खुसी से झूम रही थी

“क्या ???”

मैं चौका

“हा आपको याद है हमने कुछ दिन पहले ही एक ट्रेवल एजेंसी की लाटरी ली थी माल से “

चम्पा ने मुझे याद दिलाया ,एक शाम हम माल घूमने गए थे और वंहा एक काउंटर में नए खुले एक ट्रेवल एजेंसी वाले लॉटरी बेच रहे थे,लक्की विनर को कनाडा का ट्रिप फ्री था ..

“हा याद आया तुमने वो खरीदी थी राइट,क्या नाम था एजेंसी का ??”

मैं याद करने की कोशिस करने लगा

“मिस एंड मिस्टर भल्ला ट्रेवल एजेंसी ..हम वो जीत गए “

चम्पा के चहरे में आपर खुशी थी साथ ही मैं भी खुश हो गया

“वाओ क्या बात है आज ही मेरी छुट्टी भी मंजुर हो गई ऐसे कब निकलना है ..और कितने दिन का ट्रिप है “

“वही 10 दिन 10 रात का ,और हमे आज ही रात को निकलना होगा “

अब ये प्रॉब्लम आ गई

“लेकिन वीसा वगेरह “

मैंने अपनी दुविधा बताई

“ओहो जीजू डोंट वारी पासपोर्ट रेडी था तो वीसा का जुगाड़ डैडी ने कर दिया है ,आज रात मुम्बई के लिए निकलो वंहा से कल सुबह की फ्लाइट है “भावना की बात से मैं ताज्जुब में पड़ गया लेकिन फिर मुझे याद आया की ठाकुर विक्रांत के भी बहुत कनेक्शन्स है …

*************

जब हम वंहा पहुचे तो एक बड़ी सी गाड़ी हमारे स्वागत के लिए लग गई थी ,वंहा से हमे एक होटल ले जाया गया ,जंहा हमे बताया गया की ट्रेवल कंपनी के मालिक मिस्टर और मिसेज भल्ला पर्सनली हमसे मिलने आने वाले है ,

मुझे ये सब थोड़ा अजीब जरूर लग रहा था लेकिन मैंने सोचा की हो सकता है की क्लाइंट रिलेशन शिप मेंटेन करने के लिए ये सब किया जा रहा होगा…

हम सफर से बहुत ही थक चुके थे तो हमने भी आराम करने की सोची ..

शाम होने पर हम होटल के एक हिस्से में गए जंहा हमसे मिसेज और मिस्टर भल्ला मिलने वाले थे,मैं नार्मल टीशर्ट जीन्स में था वही चम्पा ने फूलों वाली एक स्कर्ट डाल रखी थी ,हमारे टेबल से नजारा बेहद ही शानदार दिख रहा था ,सामने समुंदर था और ठंडी हवाओ का सुकून भी …

मैं चम्पा का हाथ पकड़े हुए कुछ बैठा हुआ समुंदर को ही देख रहा था ,

“यार ये लोग कितने समय आएंगे ,मैं वाशरूम से आती हु “

चम्पा मुस्कुराते हुए वंहा से चली गई..

मैं अब भी समुद्र को देख रहा था,साथ ही मैंने दो विस्की के ऑर्डर भी दे दिए ,ऐसे सुनहरे मौसम में और सुकून भरे जगह में बैठकर विस्की पीने का आनंद ही कुछ और था ..

मैं आराम से चुस्कियां ले रहा था ,5 मिनट ही हुए थे की चम्पा वापस आकर मेरे पास बैठ गई …

उसने मेरे हाथो में अपना हाथ रखा ..

“वो लोग अभी तक नही आये ना “

उसकी आवाज सुनकर मैंने उसकी ओर देखा ,वो मुझे मुस्कुराते हुए देख रही थी ,उसकी प्यारी सी मुस्कुराहट को देखकर मैं भी मुस्कुरा उठा ……

मैं उसे बहुत ही बारीक नजरो से देख रहा था हमारी आंखे मिल गई और मेरी मुस्कुराहट और भी गहरी हो गई

“क्या हुआ “

उसने मुझे यू देखता पा कर कहा

“मुझे पता था और अब यकीन हो गया है “

उसने मुझे थोड़े आश्चर्य से देखा

“किस बात पर ..”

मेरे होठो की मुस्कान और भी गहरी हो गई

“की तुम दोनों जिंदा हो “

उसने मुझे अजीब निगाहों से देखा

“तुम ठीक तो हो,क्या हो गया है तुम्हे “

उसकी बात सुनकर मैं जोरो से हँस पड़ा

“अब बहुत हो गया मोंगरा ,अब मैं अपनी जान को आंखे बंद करके भी पहचान सकता हु “

मेरी बात सुनकर उसके होठो में भी मुस्कान खिल गई जो और भी चौड़ी हो गई ..

“बलवीर कहा है ??”

उसने मेरे सवाल का कोई जवाब नही दिया बल्कि हाथ से एक ओर इशारा किया ,उधर से चम्पा और बलवीर चलते हुए आ रहे थे दोनों के होठो में मुस्कान थी ,चम्पा और मोंगरा ने एक ही ड्रेस एक ही तरीके से पहन रखी थी ,

बलवीर पूरे सूट बूट में था,उसका धाकड़ शरीर पर वो कपड़े कसे हुए थे वो कोई बड़ा बिजनेसमैन ही लग रहा था …

“तुम जीत है इसने तो मुझे देखते ही पहचान लिया “

मोंगरा की बात सुनकर चम्पा खुशी से उछल पड़ी

“देखा मैंने कहा था की मेरा अजय अब धोखा नही खायेगा “

वो आकर मुझसे लिपट गई ,वही थोड़ी देर बाद ही बलवीर ने मेरे तरफ हाथ बढ़ाया और मेरा हाथ खिंचते हुए अपने सीने से लगा लिया ,

“कितने दिन से मैं तुम्हे अपने सीने से लगाना चाहता था भाई “

उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा चौका जरूर लेकिन ज्यादा ध्यान नही दिया

अब हम चारो आराम से वंहा बैठे अपना ड्रिंक इंजॉय कर रहे थे ..

“मुझे तुम लोगो से बहुत कुछ पूछना है”

आखिर मैं अपने को कब तक रोक पाता ..

“अरे पूछ लेना यार ,मेरी बहन इतने दिनों बाद मुझे मिली है थोड़ी बात तो करने दो “

मोंगरा ने मुझे झड़पा और चम्पा हँस पड़ी

“ऐसे तुम्हारे लिए कई सरप्राइज है हमारे पास “

चम्पा ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा

“तू तो बेटा मुझे रात में मिल “

मैंने उसे तिरछी निगाहों से देखा और वो थोड़ी शर्मा गई लेकिन तुरंत ही मुझे अपना जीभ दिखा गई ..

थोड़ी देर तक चम्पा और मोंगरा दुनिया जहान की बाते करते रहे वही बलवीर के मुझे एक अजीब बदलाव दिख रहा था वो मुझे बड़े ही प्यार से देख रहा था …

कुछ देर के बाद मैं फिर से फुट पड़ा

“अब तुम दोनों का हो गया हो तो ये तो बता दो की ठाकुर को तुमने कैसे मारा ?? मेरा तो सोच सोच कर ही सर दर्द हो गया है ,और इतनी ऊँचाई से गिरने के बाद तूम दोनों बच कैसे गए ,जबकी मेरी गोली भी तो तुम्हे लगी थी …???”

मेरी बात सुनकर मोंगरा थोड़ा मुस्करा दी …

तभी एक वेटर वंहा ड्रिंक लेकर आया

“इसे पहचानते हो “मोंगरा ने वेटर के तरफ इशारा किया

“सलाम साब ..”

ऐसे तो वेटर पूरे कोर्ट टाई पहने हुए था लेकिन जब वो हंसा तो तम्बाकू से लाल हुए दांत दिख ही गए

“ह्म्म्म तुम्हारे ही गैंग का मेंबर है ,यानी सब को यंहा बुला लिया है ,इतना कुछ कर लिया तो इसके दांत भी साफ करवा देती “

मेरी बात सुनकर सभी हँस पड़े

“दो दिन बाद ही अपॉइमेन्ट है साहब डेंटिस्ट के पास,जेल से छूटकर सीधे यंहा ही आ गया “

वो फिर से दांत दिखता हुआ वंहा से चला गया

“तुमने मेरे सवाल का जवाब नही दिया मोंगरा “

मोंगरा ने अंगड़ाई ली

“तुम्हे समझ जाना चाहिए की हम सबने मिलकर ये किया है “

“हा इतना तो समझ आ ही गया लेकिन कैसे ??”

वो फिर से मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी ..

“जब तुमने वंहा मुझे घेरने का प्लान बनाया और ठाकुर के लोगो को भी बुलाया तो,हमे ये पहले से पता था की तुम छूटते ही ऐसा कुछ करोगे,और जिंदा रहते हुए मैं ठाकुर तक नही पहुच पा रही थी तो मरना ही मैंने भी मरना ही ठीक समझा ,चम्पा ने मेरे भेस में जाकर तुम्हे छुड़ा लिया ,तुमने सोचा था की पुलिस काफी नही होगी तो ठाकुर के लोग नीचे हो घेर कर रखेंगे ,और तुमने उन्हें भी बुला लिया,तुम्हारे प्लान बनाते समय मैं वही मौजूद थी तुमसे थोड़ी ही दूर में ,तिवारी जी और डॉ के पास रखे माइक से तुम्हारी हर बाते सुन रही थी ,मुझे पता था की रणधीर कभी भी नीचे बैठ कर मुझे गिरफ्तार होने नही देगा वो ऊपर आकर मुझे मरना चाहेगा हमने इसी बात का फायदा उठाया ,प्लान तो मेरे और बलवीर के मारने का और ऊपर से गिरने का पहले ही बन चुका था,तो नीचे सारे इंतजाम कर दिए गए थे,खाई के नीचे हमने जाल और पेड पहले भी बिछा दिए गए थे,क्योकि पैराशूट वंहा काम नही कर पाता,हमने इसकी एक दो बार प्रेक्टिस भी कर ली थी ताकि समय आने पर हम परफेक्ट लैंडिंग कर सके …

अब जब रणधीर ऊपर जा रहा था तो तुम्हारे जाने के बाद मैं फिर से डॉ ,तिवारी जी और चम्पा से मिली ,तिवारी जी ने मुझे बताया की तुम उनकी ही गन अपने साथ ले गए हो जिसमे नकली गोलियां उन्होंने पहले से ही भर कर रखी थी,बस बात रणधीर की थी की उसका क्या करना है ,वो अपनी असली गोली ही चलाएगा इसलिए हमने फैसला किया की उसके आने तक और अटैक करने तक मैं अजय से बच कर रहूंगी जबकि बलवीर ऐसी जगह खड़ा होगा

जंहा से उसको गोली मारने से रोका जा सके ,और फिर मैं अपनी गोलियां उसके ऊपर उतार दूंगी ,बदले में तुम्हारे पास कोई चारा नही बचेगा मुझे गोली मारने का,मुझे गोली लगेगी जो की नकली गोलियां होंगी और मैं नीचे गिरूँगी और साथ ही बलवीर भी मेरे पीछे कूद जाएगा ,बस वही हुआ बात खत्म ……..”

ऐसे तो मेरे होठो पर मुस्कान थी लेकिन मैं अपने काम का पक्का इंसान था अगर ये इंडिया होता तो मैं अब तक इन्हें गिरफ्तार कर चुका होता ,मैंने एक गहरी सांस ली ,साले सब ने मिलकर मुझे अच्छा चूतिया बनाया था ……..

“और ठाकुर ..??”

“हम्म ठाकुर ..हमने बहुत सोचा की आखिर उसे कैसे मारा जाए,तब तक बलवीर छिपकर वही था और ठाकुर के ऊपर नजर रखे था लेकिन वो हवेली में घुसकर उसे नही मार सकता था ..”

“बलवीर वही था मतलब ??तुम कहा थी ..??”

मैं थोड़ा चौका

“अरे मैं कनाडा में जो थी ,यार तुम्हारी बीवी को मल्टीनेशनल कंपनी ने जॉब आफर किया था भूल गए क्या ??”

मैं कभी मोंगरा को तो कभी चम्पा को अवाक सा देख रहा था ..

“मतलब तुम ,चम्पा की जगह उस जॉब को जॉइन कर के यंहा आ गई “

“हम्म इंटरव्यू देना और जॉब लगाना कठिन होता है जॉब करना नही “मोंगरा जोरो से हँस पड़ी

“ऐसे भी कोई खास काम तो था नही इसका अगर प्रॉब्लम होती है तो चम्पा से पूछ लेती हु,यंहा आकर सब कुछ सेटल भी तो करना था,ये होटल फूफा जी के दोस्त का है उनकी मदद से बाकी लोगो को भी यंहा सेट करते गई और अब बलवीर यंहा का मैनेजर है …”

“बस ये साल इंग्लिश बोलना बड़ा कठिन काम लगता है,ऐसे यंहा आधे ही पंजाबी है “अचानक ही बलवीर बोल पड़ा और सब हँस पड़े

“अरे वो सब छोड़ो ठाकुर ..वंहा फोकस करो “मैं फिर से बोला

“हम्म तो बलवीर वंहा था और तब हमे पता चला की ठाकुर घर में पूजा कर रहा है और सभी को बुलाया है,अब ठाकुर इतना शरीफ हो जाए और सभी से दोस्ती करने की सोचे ये तो अजीब बात थी वो भी अपने बेटे के मरने के बाद ...

नही ऐसा तो नही हो सकता था हा ये जरूर हो सकता था की वो सबसे बदला लेना चाहता हो और कोई षडयंत्र कर रहा हो ,तो बलवीर को हवेली में घुसना ही पड़ा,वंहा कुछ लोग हमारे वफादार थे जो की पूनम मौसी के लोग थे और कुछ बलवीर और मेरे बचपन के दोस्त थे,वो हमारा बहुत साथ तो नही दे सकते थे लेकिन उनकी मदद से हवेली में घुसा तो जा सकता था,बलवीर और पूनम मौसी ने मिलकर पता लगाया की आखिर ठाकुर करने क्या वाला है,कुछ पता नही चला सिवाय इसके की गृहमंत्री सेठ ठाकुर से एक दिन पहले मिलने आया था ,प्राण ने अपनी सुरक्षा बड़ा रखी थी और पूनम को भी अपने पास नही फटकने दे रहा था ,तो हमारा टारगेट था सेठ …

सेठ रसिक आदमी था और ये हमारे लिए एक अच्छी बात थी ,उसकी एक पुरानी रखैल थी जिसका उसके घर रोज का ही आना जाना था हमने उसे पकड़ा ,अच्छे पैसे दिए ताकि वो सेठ को अच्छे से दारू पिलाये और डॉ चूतिया और उसकी असिस्टेंट को वंहा आने दे बस…

डॉ चूतिया ने जाकर उस इंगजेक्सन का प्रयोग किया जो पुलिस वाले कैदियों से सच बुलवाने के लिए प्रयोग में लाते है और साले ने सब कुछ उगल दिया,उसे सुबह याद भी नही था की उसने क्या किया था,सुबह सब कुछ ठाकुर के प्लान के मुताबिक ही होने दिया गया ,सभी को उसने दवाई खिलाई और बेफिक्र हो गया ,दोनों ही आराम से बैठे अपने जीत का जश्न मना रहे थे लेकिन उन्हें पता नही था की बलवीर काल बनकर छत में उनका इंतजार कर रहा था ,प्राण और सेठ चम्पा और भावना से अपनी हवस मिटाने के फिराक में थे तभी बलवीर वंहा आ धमका ,उसे देखकर ऐसे भी दोनों का पेंट ही गीला हो गया था क्योकि उन्होंने सोचा था की जब सब ही बेहोश है तो उन्हें किसी बॉडीगार्ड की जरूरत नही है उन्होंने सभी को बाहर भेज दिया था ,और बलवीर ने वही किया जो उसे करना था पहले उन्हें बांध कर छत में ले गया वंहा बिठाकर अच्छे से दारू पिलाई और फिर छत से फेक दिया ,और रात में ही वंहा से निकल कर यंहा आ गया ………..”

मोंगरा की बात से वंहा शांति सी छा गई थी,मोंगरा ने थोड़े देर रुककर फिर से बोलना शुरू किया

“मैं उसे अपने हाथो से मरना चाहती थी लेकिन क्या करे सभी चीजे अपने हाथो में तो नही होती ,ऐसे मुझे खुशी है की मेरे बलवीर ने ये काम पूरा किया “

उसने मुस्कुराते हुए बलवीर की ओर देखा ,बलवीर भी मुस्कुराते हुए उसे ही देख रहा था

“तुम दोनों खूनी हो ,मैं तुम्हे इसकी सजा दिलाकर रहूंगा “

मेरा पुलिसिया जामिर ना जाने कैसे फिर से जाग गया था

लेकिन वो दोनों ही हंसे

“मरे हुए लोगो को कैद नही किया जाता इंस्पेक्टर बाबू ..”

मोंगरा जोरो से हंसी और साथ ही चम्पा भी मुझे अब चम्पा पर गुस्सा आ रहा था क्योकि वो भी मोंगरा के साथ हँस रही थी ,ऐसे वो भी तो इस खेल में शामिल थी ….

“तुम बहुत ही ईमानदार हो अजय ,ऐसे ईमानदारी हमारे खून में है हमारे पिता ठाकुर के ईमानदार थे ,मैं मोंगरा का और तुम पुलिस के “

बलवीर ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा लेकिन उसकी बात सुनकर मैं बहुत ही बुरी तरह से चौका था..

“क्या ..ये क्या बक रहे हो ??”

मैंने अपना सर झटका

लेकिन वो ही नही बल्कि चम्पा और मोंगरा भी मुस्कुरा रहे थे ..

“ये सच है अजय ,परमिंदर भल्ला ही प्रवीण शर्मा है..”

चम्पा की बात सुनकर मैं कुछ देर के लिए उस समय में खो गया जब मेरे पिता और माँ शादी के समय हवेली गए थे,वो सभी से इतनी आत्मीयता से मिल रहे थे

मैं बलवीर को देख रहा था उसकी आंखों में आंसू था..

“ये बात मुझे भी नही पता थी भाई लेकिन पिता जी से मर संपर्क तब से था जब उन्होंने ठाकुर का काम छोड़ शहर जाने का फैसला किया,तब तुम छोटे थे और हमारी नानी के पास रहते थे,तुम्हे कभी भी हेवली नही लाया गया था क्योकि मा नही चाहती थी की तुमपर इन सबका साया पड़े ,और तुम्हारे ही भविष्य के कारण मा के पिता जी को ठाकुर का काम छोड़ने को मनाया था…...शहर जाने के बाद पिता जी ने अपना नाम बदल दिया और एक आम इंसान की जिंदगी जीने लगे,वही तुम्हारी परवरिश हुई,लेकिन पिता जी मेरे संपर्क में थे,उन्होने बताया की मेरा भाई यानी तुम पुलिस में चले गए हो और तुम भी हमारी ही तरफ अपने काम के प्रति बेहद ही वफादार हो ,लेकिन वक्त को ना जाने क्या मंजूर था कि तुम्हारी पोस्टिंग हमारे थाने में हो गई ,बहुत दिनों तक तो मुझे भी नही पता था की मेरा भाई ही थाने का वो पुलिस वाला है जिसपर मोंगरा फिदा हो गई है ,लेकिन फिर जब मेरी पिता जी से बात हुई तो मुझे पता चला की तुम ही मेरे भाई हो ये बात मैंने मोंगरा को बताई और तब उसे अपने और तुम्हारे जिस्मानी रिश्ते पर बड़ा ही दुख हुआ लेकिन फिर उसने चम्पा को यंहा लाने का फैसला किया ,बाकी का तो तुम जानते ही हो ….”

मैं बलवीर की बात सुनकर किसी और ही दुनिया में पहुच गया था

“लेकिन मुझे इन सबका पता कैसे नही चला “

मैं जैसे अपने ही आप से पूछ रहा था

“पता कैसे चलता सर जी हमने पता चलाने ही कहा दिया “

ये आवाज मेरे पीछे से आ रही थी ,जिसे मैं इतने अच्छे से जानता था की आंखे बंद कर भी पहचान सकता था ,मैं पीछे मुड़ा

“तो आप भी यही है तिवारी जी “

तिवारी हंसते हुए आया पास आया ,मैं बलवीर को और बलवीर मुझे देख रहा था,अचानक ही हम दोनों जोर से गले मिल गए और वही तिवारी ने एक सीट पकड़ कर बैठ गए थे ..

“ओहोहो कितना मधुर मिलन है ,इसी बात में थोड़ी दारू हो जाए मोंगरा बेटी “

तिवारी की बात सुनकर मोंगरा ने मुस्कुराकर पास खड़े एक वेटर को इशारा किया

“अच्छा चूतिया बनाया आप लोगो ने ,पापा तो पापा मा ने भी भनक नही लगने दी “

मैं जैसे खुद से ही बोल रहा था लेकिन मेरे दिल और चहरे में बस खुशी ही खुशी थी

“अरे सर अगर आप को बता देते तो क्या आप ये सब होने देते,परमिंदर भी जानता था और हम भी की उसका खून कभी अपने काम से गद्दारी नही करेगा ,सब सच जानते हुए भी आप अपने काम की ईमानदारी के कारण मोंगरा और बलवीर को सलाखों के पीछे पहुचाने में लगे रहते और इसका फायदा वो ठाकुर उठा ले जाता ...तो कहते है ना की अंत भला तो सब भला और जय हो परमिंदर भल्ला और जय हो बलवीर भल्ला “

तिवारी ने सामने रखा एक पैक एक ही झटके में अपने गले से उतार लिया …

*********समाप्त***********

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