अध्याय 1
माता पिता के देहांत के बाद पुरे घर की जिम्मेदारी मेरे कंधो पर आ पड़ी थी, मैं शहर में रहता था जबकि मेरे परिवार के अन्य लोग पास के गाव में ,गाव में ऐसे तो पूरा परिवार था पर बटवारे की वजह से कोई अपना कहने को ना था मैं सालो से बहार रहकर ही पढाई की थी और फिर यही जॉब भी करने लगा ,मेरे कॉलेज की एक लड़की काजल से मेरा अफेयर था सोचा था की थोडा सेटल होने के बाद माँ को सब बता दूंगा पर अचानक हुए इस वाकये से मैं स्तब्ध रह गया ,मेरे परिवार में मेरी दोनों छोटी बहनों की जिम्मेदारी अब मेरे ऊपर थी,मैंने उन्हें अपने पास शहर ले आया और उनकी पढ़ाई की व्यवस्था भी यही कर दि,पूर्वी मेरी छोटी बहन थी जो अभी स्कूल में थी और बड़ी शरारती थी और दूसरी निशा अभी स्कूल से निकली थी और उसे यहाँ के कॉलेज में दाखिला करा दिया था,कुछ दिनों के बाद मैंने काजल से शादी भी कर ली ,ताकि हम दो कमाने वाले हो जाए शादी हमने कोर्ट में की थी जिसमे बस मेरी दोनों बहने और काजल के पापा , भाई वरुण ,और भाई का दोस्त सुशांत आये थे ,काजल की माँ भी गुजर चुकी थी ,काजल और मैं अलग अलग होटल्स में मेनेजर थे...मैंने अपने बड़े काम निपटा दिए और टेंशन फ्री हो गया मैंने अपनी बहनों से कह रखा था की जो लड़का तुम्हे पसंद आये उससे तुम्हारी शादी करा दूंगा,मेरी बहने गाव में रहने के कारन बहुत ही शर्मीली थी लेकिन मुझे क्या पता था की शहर की हवा में क्या जादू होता है,
कहानी तब से शुरू होती है जब मैं अपने होटल के काम से एक दूसरे होटल में गया था,हमारे शहर में कुल 5 बड़े होटल्स थे जिसमे हमेशा बहुत जादा प्रतियोगिता होती थी ,मैंने और काजल ने अपनी शादी की बात तक इसलिए छुपाई थी की कही हमें नौकरी से इसलिए ना निकल दिया जाय की हम दोनों प्रतियोगी होटल्स में काम करते है,मेरे होटल के मालिक कपूर साहब थे और काजल के होटल के मालिक खान साहब दोनों में कट्टर दुश्मनी थी,दोनों बहुत रसूखदार लोग थे और हर चीज में प्रतियोगी थे ,ये सब तबसे शुरू हुआ था जबसे कपूर साहब की बेटी ने खान के बेटे से शादी कर ली सब बढ़िया था पर खान का लड़का अजीम बड़ा आइयाश किस्म का था सो दोनों का तलाक हो गया और दोनों नामी घराने एक दूसरे के दुश्मन ...मैं मेहता एंड संस के होटल में पंहुचा मुझे मेहता साहब के साहबजादे रवि से मिलाना था,मैं रवि के केबिन में पंहुचा ही था की वह के मेनेजर किशन ने मुझे रोक लिया ..
'अबे क्या कर रहा है ,रवि साहब अभी बिजी है ,'हम सभी होटल के मैनेजरों को अच्छी तरह पहचानते थे,और हमारी दोस्ती भी ठीक ठाक ही थी ,
'अबे मुझे रवि ने खुद बुलाया था ,कुछ काम था उन्हें ,'
'बुलाया होगा मेरे भाई पर समझा कर साला रवि अभी यहाँ की HR के साथ लगा हुआ है,अपनी ठरक मिटने दे उसे फिर मिल लेना,'HR का नाम सुनते ही मेरे मुह में पानी आ गया ,नाम था शबनम क्या माल थी
' साला रवि बड़ा खुश किस्मत है यार,'
'साले तेरे पास उतने पैसे होंगे ना तो तू भी खुशकिस्मत हो जायेगा ,साली को पैसे चाहिए और रवि को उसकी जवानी ,बेचारा उसका पति जितना उसने उसे नहीं चोदा होगा उतना तो रवि ने इसे चोद लिया है,'किशन हँसाने लगा,मैंने अपना सर धीरे से उसके केबिन के दरवाजे से लगाने की कोशिस की वह से शबनम की आँहो की आवाजे मुझे साफ़ सुनाई दे रही थी ,,
'साला क्या चोद रहा है बे कितना चिल्ला रही है,'
'अरे कुछ नहीं साली रांड है ,उसे खुस करने के लिए चिल्लाती है,'
'साले तुझे कैसे पता ,'मैंने आँखे बड़ी कर उससे पूछा,
'अबे मैंने भी ली है उसकी जब रवि हॉलिडे पर था ,'किशन ने अपने दांत निकल दिए ,मैं आश्चर्य से उसे देखने लगा,
'भाई मेरी भी कुछ सेटिंग करा दे ना मैं भी उसकी ले लू ,साली कमल की लगती है बे,'मैंने अपनी आँखों में हवास भर कर कहा,
'करा दूंगा पर तुझे मेरी सेटिंग उस खान के होटल वाली मेनेजर से करना पड़ेगा क्या नाम है उसका हां काजल साली चलती है तो लगता है की पकड़ के पेल ही दू,'काजल का नाम सुनकर मेरे दिल की धड़कन ही बड गयी /
'साले वो खान के होटल की है तुझे तो पता है ना,अपना कैसा है वहा से और काजल शादीशुदा लड़की है बे और बहुत संस्कारी भी है,'
'हा जनता हु साले उसके संस्कार,मुझे तो लगता है वो खान का लवंडा उसे फुल पेलता होगा उसके होटल की माल को वो कैसे छोड़ देगा,और उसके पति का तो अता पता भी नहीं है ,सुना हु किसी दुसरे जगह रहता है,और तू साले हमें चुतिया ना बना साथ साथ गार्डन जाता है ना उसके ,वो भी अपने बहनों के साथ ,साले तू उसे चोदे और हमे बोले संस्कारी ,'मेरा चहरा लाल पड़ने लग गया मुझे समझ नहीं आ रहा था की इसे क्या कहू,और इसने जो आजिम के बारे में कहा उससे मेरा दिल ही दहल गया था मुझे इतना तो पता था की अजीम बहुत ही कमीना लड़का है,
'अबे वो मेरे बहनों की दोस्त है इसलिए ,चल छोड़ इस मादरचोद का काम कब पूरा होगा,'
'हो जायेगा,अभी तो चालू हुआ है चल काफी पीते है,'मैं बुझे मन से उसके साथ चलने लगा,...
आध्याय 2
कपूर साहब आज बहुत गुस्से में थे और मैं सर झुकाए खड़ा था,
'क्या कर रहे हो हो तुम,एक इतना बड़ा प्रोजेक्ट हाथ से चला गया ,आखिर रवि क्यों नहीं माना तुमने तो उससे बात की थी ना ,
'सर मैं क्या कर सकता हु,उन्होंने ऑफ़र किया था की उन्हें लड़की चाहिए तभी वो बात को बढाएंगे और मैं कहा से लड़की लाता,पता नहीं खान साहब ने कहा से लड़की का जुगाड़ कर दिया...
'कपूर साहब ने मुझे खा जाने वाली नजर से देखा
'अबे मादरचोद मुझे क्यों नहीं बोला वो साला खान अपनी मेनेजर को भेज दिया होगा .साले तेरी जगह मैं भी कोई लड़की ही रख लेता हु...'मैं फिर काजल के बारे में सोचकर अपसेट हो गया
'सर ऐसा नहीं है ,;तभी कमरे में कपूर साहब ही बेटी रश्मि आई
'पापा आप इसे क्यों डांट रहे है,मैं इससे बात करती हु ,तुम बाहर चलो ,,'मेरी तो फटी पड़ी थी मैं अपने को सम्हालता हुआ उसके पीछे चला गया वो उस रूम में पहुची जो उसके लिए रखा गया था,
'हम्म्म्म तो क्या नाम है तुम्हारा,'
'मेडम देव '
'हम्म्म मेनेजर साहब ,अब से पापा की बात मानने की जरुरत नहीं ही समझे,और वो काजल क्या लगती है तुम्हारी,'काजल का नाम सुनकर मेरी फट के चार हो गयी,
'नहीं मेम कुछ नहीं 'रश्मि ने मुझे बड़े प्यार से देखा मैं नजर झुके खड़ा था,
'साले मैं पापा नहीं हु ,और ये मत समझना की की अजीम से मेरी शादी इसलिए टूटी क्योकि वो ऐयाश था ,असल में मैं भी उतनी ही ऐयाश हु पर बस मैं लड़की हु ना कोई चीज खुलके नहीं कर सकती ,अब बता क्या सम्बन्ध है तेरा और काजल का ,'मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की मैं क्या बोलू,
'सुन बे देव मुझे नहीं पता की तुम दोनों के बीच क्या है पर मैं अब तेरी मालकिन हु और मुझे उन खान लोगो के होटल की वाट लगानी ही तू समझ जा ,बोल क्या प्लान है तेरे पास की सब ठीक हो जाये,'मैं फिर कुछ नहीं बोल पा रहा था ,वो मुझे गुस्से से देखि ,
'अच्छा सुन ,अब से अगर कोई कस्टमर तुम्हे बोले की रात का जुगाड़ है क्या तो क्या बोलोगे,'
मैं थोडा डरा हुआ था
'मेडम दारू या लड़की 'मेम के होठो पर मुस्कान आ गयी
'साले दोनों के बारे में पूछ रही हु,'
'मेडम दारू तो मिल जाएगी पर लड़की कहा से,...
'मैं बोलते बोलते हुए रुक गया,
'साले तेरे जैसे मेनेजर के कारन ही ये होटल घाटे में जा रहा है,दोनों में हां बोलना और मुझे बताना समझा ,'मैं थोड़ी देर आश्चर्य से उन्हें देखा फिर हां में सर हिलाया ,
'और तेरा जो भी है ,आजिम की उस रांड काजल के साथ उसे युस कर समझा थोड़ी ना तेरी बीवी है तेरे बहनों की दोस्त बस है ना'अब तो सच में मेरी फट गयी मेरे आँखों से आंसू आने को थे पर मैंने बड़े मुस्किल से उन्हें सम्हाला और हां में सर हिलाया ये तो मैंने किशन को बताया था उसने कब इन्हें बता दिया पर सबसे सवाल ये था की क्या सच में काजल ऐसी है?????
अध्याय 3
आज मैं बहुत ही बेचैन सा अपने घर में गया ,वह देखा तो मेरी दोनों बहने पढ़ने में लगी थी काजल अभी तक नहीं आई थी,मैंने काजल को फ़ोन किया
'कहा हो जान ,'मैंने उत्सुकता से पूछा ,
'अभी तो मैं (उसकी आवाज नार्मल नहीं थी )वो अजीम सर के साथ हु ,सुनो ना मीटिंग है और लेट हो सकता है और पूर्वी को बोल देना की खाना बना दे ओके बाय,'कहकर उसने कॉल काट दिया मेरे मन की बेचैनी और बढ़ गयी थी मैंने पूर्वी को खाना बनाने को बोल अपने रूम में चला गया मैंने उन्हें बोला की मेरे सर में दर्द है और मैं सोने जा रहा हु ,खाना बना के खा के सो जाना और उठाकर खा लूँगा या जब काजल आएगी खा लूँगा,
मैं अपने कमरे में जाकर ऐसे ही लेटा सोच रहा था की मेरे रूम में निश आ गयी मैंने उसे देख थोडा गुस्सा दिखाया ,
'मैंने कहा था ना की सर में दर्द है ,क्या हुआ आराम करने दे मुझे चल जा,'वो बिना कुछ बोले मेरे बिस्तर के पास आ गयी और उसके हाथो में एक तेल था मेरे सिरहाने बैठ के मेरा सर दबाने लगी और तेल लगाने लगी ,उसके हाथो के कोमल अहसास और उसके प्यार भरे स्पर्श ने मुझे बहुत शुकून दिया मैंने उसे सर उठा कर देखा तो वो मुझे देख मुस्कुरा रही थी,मैंने उसके गोद में अपना सर रख लिया और अपने हाथो को उसके कमर से बांध लिया,वो मेरे सर को सहलाती और मालिश करती रही ..थोड़ी देर में ही मेरी आँखे लग गयी और जब मैं उठा तो देखा की रात के 11 बज चुके थे मुझे लेटे 2 घंटे हो चुके थे काजल शायद अभी भी नहीं आई थी और मैं अब भी निशा के गोद में ही सोया था,मेरे हलचल होने से उसकी भी नींद टूटी वो मेरे बालो को प्यार से सहलाई..
'अब कैसा लग रहा है भईया,'
'मेरी प्यारी बहन ने मालिश की है अच्छा ही लगेगा ना,इधर आ..'वो मेरे ऊपर झुक गयी और मैंने उसके गालो को चूम लिया मैं वहा से उठा उसका प्यार देखकर मेरा दिल हल्का हो गया था,मैंने उसे खाना बनाने को कहा और साथ ही खा कर सो गया ...काजल को काल किया पर उसने नहीं उठाया ,ये हमारे काम में अकसर होता था की हमें रात में भी काम करना पड़ता था और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा था पर आज मैं दुखी था ,पता नहीं क्यों पर मैं दुखी था मुझे काजल का यु मेरा फोन ना उठाना और रात भर बहार रहना अच्छा नहीं लग रहा था,...
अध्याय 4
मेरी आंखे खुली तो मैंने काजल को अपने पास पाया वो झीनी सी नाईटी में मुझे दिखाई दि,उसके उजोर बड़े ही प्यारे लग रहे थे मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी ख़ूबसूरती को निहारने लगा,मैंने देखा की वो आँखे मूंदे हुए बड़ी प्यारी लग रही थी ,उसने अभी तक अपने माथे की छोटी सी बिंदी नहीं हटाई थी जो उसके गोर चहरे को और भी खूबसूरत बनती थी ,उसके होठो में काटने का निशान देख मेरी दिल की धड़कन रुक सी गयी मुझे कल की सारी बाते याद आने लगी ,मैंने उसके उस जखम को छुआ,मुझे हल्का सा खून का जमाव महसूस हुआ,मैंने उसके प्यारे चहरे को फिर से देखा ,क्या मेरी प्यारी काजल ऐसा कुछ कर सकती थी की मैं उसपर शक कर सकू पर ये खून का जमाव ,और साफ़ पता चल रहा था की किसी ने उसे दांतों से काटा है,मेरे प्यार में क्या कमी रह गयी थी की मेरी प्यारी बीबी किसी गैर मर्द का बिस्तर गर्म करेगी ,मुझे अब भी ये यकीं नहीं हुआ मैंने फिर से काजल के उरोजो को देखा जो की बहार आने को बेताब थे मैंने उसे आजाद ही कर दिया,उनके आजाद होने पर काजल के मुह से एक मदभरी सी आह निकली ,
'नहीं ना जी क्या कर रहे हो ,'मैंने देखा काजल नींद में ही थी पर उसका जी कहना मुझे सुकून दे गया क्योकि वो मुझे ही जी कहा करती थी,मैंने उसके उजोरो को निहारा तो मुझे लाल घेरे दिखाई दिए जैसे की किसी ने उसे बुरी तरह से मसला हो ,काजल बहुत गोरी थी और मैंने उसे कभी कभी मसला भी था उसके वो निशान ऐसे ही थे जैसा मेरे मसलने पर उसके वक्षो पर पड़ते थे ,मेरी आंखे नम होने लगी मैंने फिर उसके मासूम से चहरे की ओर देखा ,मुझे यकीं ना आया की वो मुझे किसी भी सूरत में धोखा दे सकती है,मैंने उसके उजोरो को मसलना शुरू किया,
'नहीं ना जान प्लीज् नहीं ना कोई आ जायेगा ,'काजल अभी भी नींद में थी मैंने अपने होठो को उसके होठो के पास ले जाकर उसके होठो को चूमने लगा वो अपने होठो को मेरे लिए खोल दि मैंने अपने होठो को उसके होठो में घुसा दिया मुझे दारू की बू आनी शुरू हो गयी ,हमारे लिए दारू पीना कोई बड़ी बात नहीं थी ,शायद काजल ने कल शराब पि हो मैंने अपने हाथ उआकी नाईटी के निचे से उसकी प्यारी योनी के पास ले गया मैंने पाया की उसमे कुछ कड़ा सा अहशास हुआ मनो वीर्य सुख गया हो मैंने अपने दिल को समझाया की ये वीर्य नहीं होगा मैं उसके निचे गया उसके कपडे को ऊपर उठाया,उसके गोर जांघ मेरे सामने थे मैं उसे चटने लगा ,काजल बहुत ही नशे में थी पर वो मचलने लगी थी मैं जन्घो को चाटते हुए उसकी योनी तक आ गया ,मैंने पाया की वह कुछ कड़ा सा है मेरी लार पड़ते ही वो चिपचिपा हो गया मैंने उसे जीभ से चखकर देखा ,वो वीर्य ही था मेरा दिल बैठ गया था ,मेरी आँखों में आंसू था पर मेरा लिंग वो तो ताना था अपनी ही धून में मुझे लगा था की मैं उसे उठा के उसे मार ही डालू पर मैंने ऐसा नहीं किया मुझे उसे भोगना था ,जाने किसने उसे
भोग होगा ये वीर्य किसका था मुझे नहीं पता था पर ....
मैं मैं तो बस अब पागल ही हो गया था मैंने अपने कपडे उतार फेके और उसके ऊपर चढ़ गया मैंने ये परवाह नहीं की कि उसकी योनी में गीलापन है या नहीं मैंने अपने थूक से ही अपने लिंग को भिगोया और एक जोरदार धक्का ...
'अआह्ह्ह नहीं ना क्या कर रहे हो ,इतना तो किये हो ना अब बस करो ना दर्द हो रहा है घर भी जाना है,'काजल की बातो से मैं पूरी तरह टूट चूका था मैं अपने पुरे जोर से उसे फिर से धक्का लगाया काजल की आँखे अब भी बंद थी और उसने मुझे अपनी बहो के घेरे में भर लिया
'आपका तो कभी ख़तम ही नहीं होता है ना 'उसने बहुत ही नशीली आवाज में कहा ,
'चलो अब जल्दी करो ना प्लीज ,सर भी करेंगे क्या ,'अब तो मैं रो ही पड़ा मैं चाहता था की मैं वहा से उठ कर भाग जाऊ पर मैंने दूसरा रास्ता अपनाया मैंने एक जोरदार झापड़ काजल को मारा मेरे मारने से वो तड़फ गयी और होश में आकर मुझे देखने लगी ,
'ये क्या कर रहो हो जी ,हटो ना ,मुझे मार क्यों रहे हो ,'
'मदरचोद चुपचाप पड़ी रह रात भर दूसरो से चुद्वाकर आई है और अपने पति से नखरे कर रही है ,'
'अआह्ह्ह आह्हह्हह्हह्हह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् प्लीज् ना जान ,छोड़ दो ना रुक जाओ ना थोड़ी देर बस .थोड़ी देर बस जाआआन ..'
मैंने बेहिसाब धक्के मारने शुरू कर दिए ,काजल दर्द से तडफ रही थी उसकी योनी अभी भी गीली नहीं हुई थी वो दर्द से छटपटा रही थी पर मैंने कोई रहम नहीं की मैंने उसके चहरे को अपने हाथो से दबा लिया .ये पहली बार था जब मैंने काजल से जबरदस्ती की थी पर मैं क्या करता मेरा दिल आज टूट चूका था मेरी प्यारी बीवी बेवफा थी,मेरी चाहत लुट चुकी थी वो भी ना जाने कितनो से ...मैंने अपने वीर्य की धार सीधे काजल के योनी में छोड़ दि ,वो कुछ समझ पाती इससे पहले ही मैं वहा से उठकर अपने बाथरूम में चला गया ,पर जब मैं बिस्तर से उठा तो मैंने एक परछाई दरवाजे की पीछे देखि जो तुरंत भाग गयी मुझे अहसास था की वो मेरी बहने ही थी जो काजल के आवाज के कारन वह आ गयी थी ,...
अध्याय 5
मैं सुबह से ही बिना खाए पिए ही होटल चला गया ,आज मेरा दिन बिलकुल ही बेकार होने वाला था ऐसा मुझे लग रहा था ,लेकिन किसे पता था की क्या होना है ,सुबह से ही मैं होटल स्टाफ को व्यस्त रखा था ,सभी मेरे स्वभाव से परचित थे इसलिए उन्हें भी ये शक हो चला था की मैं आज बिलकुल ही अपसेट हु,दोपहर को रश्मि आई और आते ही उन्होंने मुझे अपने केबिन में बुलाया,
"क्या बात है आज बहुत ही उदास हो ,"मैं अब भी सर झुकाए खड़ा था,
"तु सर कब उठाएगा मादरचोद"रश्मि चिल्ला के बोली की मेरी रूह भी काप गयी ,और मेरे आँखों ने अपने सब्र का बांध तोड़ दिया मैं रोने लगा ,रश्मि ऐसे तो बहुत ही खतरनाक और प्रोफेशनल लड़की थी पर ना जाने उसे क्यों मेरे लिए एक सहानभूति सी पैदा हो गयी थी ,मैं काँपता हुआ और रोता हुआ वहा खड़ा था और वो मेरे पास आकर मुझे एक पानी का ग्लास पकड़ा देती है ,और धीरे धीरे मेरे सर पर अपना हाथ घुमाने लगती है ,मुझे कुछ कुछ आराम मिला और मैंने सोचा भी नहीं था की इस होटल की मालकिन और इतने बड़े बाप की ये बिगलैड लड़की मुझे इसतरह से प्यार दिखाएगी ,
"देव जानते हो पापा ने मुझसे यहाँ की जिम्मेदारी देते हुए कहा था की तुम्हे यहाँ से निकाल दू ,तुम किसी काम के नहीं ,"मैंने सर उठाया तब तक वो अपने खुर्सी में जाकर बैठ चुकी थी ,
"लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया क्योकि मुझे पता है की तुम कितने काम के हो ,हमारा होटल बिना कुछ गलत काम किये भी चल रहा है तो वो तुम्हारे ही लगन और मेहनत के बदोलत है ,हा यहाँ पर वक्त के साथ बदलाव की भी जरुरत है और वो शायद दुनिया के नजर में गलत भी हो पर ..................बिजिनेस में सब जायज हो जाता है समझे मिस्टर "रश्मि हलके से हसी वही मेरा दिल भी थोडा हल्का हो गया था ,मैं अब रश्मि को देखने का साहस कर सकता था,
"देव तुम मुझे एक मालकिन के तरह नही एक दोस्त की तरह मानो जो भी आईडिया तुम्हारे दिमाग में हो वो मुझे खुलकर बताओ ,खुलकर यानि समझते हो ना ,खुलकर बिना किसी भी हिचक के ,मैं तुम्हे एक और मौका देती हु ,पापा को गलत साबित करने का ,सोचो अगर तुम्हारी नौकरी गयी तो तुम्हारी बहनों का क्या होगा ,"रश्मि की सहानभूति और अपनत्व ने मुझे जीत लिया था ,मैं क्यों उदास हु और मैं क्यों वो ना करू जो तरक्की के लिए और पैसे कमाने के लिए जरुरी है ,मेरी बीवी तो अपना जिस्म भी इस नौकरी के लिए लगा रही है ,उसे तो कभी गलत नहीं लगा होगा और मैं किसी दूसरी लडकियों के लिए भी शर्मा रहा हु ,
"मेडम मैं आपकी बातो को समझ गया ,मैं अपना दिलो जान लगा दूंगा इस होटल के लिए ,ये होटल ही यहाँ का नंबर वन होटल होगा ,मेरा आपसे वादा है ,"मैंने इतने जोश से बोला की रश्मि भी खुस हो गयी और आश्चर्य से मुझे देखने लगी ,
"ह्म्म्म बढ़िया लेकिन देव तुम मुझे मेडम बुलाना छोडो यार मुझे रश्मि ही बुलाया करो .
पता नहीं तुमसे कुछ अपना सा लगता है मुझे तुम अच्छे आदमी हो ,और अगर कोई आईडिया हो तो बताओ अभी "मेरे भी चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,
"मेडम जी ,(रश्मि ने मुझे घुर के देखा ) सॉरी रश्मि एक आईडिया तो है मेरे पास "वो उत्सुकता से मुझे देखने लगी
"हमें कुछ लडकिया हायर करनी पड़ेगी "रश्मि हसने लगी
"ये भी कोई बात हुई कल ही तो ये बात हमने कही थी ,और मैंने कुछ प्रोफेशनल लोगो से बात भी की है ,वो भी लडकियों की सप्लाई करने को मान गयी है ,"
"नहीं मेडम,सॉरी रश्मि (रश्मि हसने लगती है ) मैं प्रोफेसनल लडकियों की बात नहीं कर रहा हु ,मैं बात कर रहा हु ऐसी लडकियों की जो प्रोफेसनल ही ना दिखे ,वो बिलकुल सामान्य सी यहाँ पर काम करने वाली लडकिया लगनी चाहिए ,मैंने अधिकतर देखा है की लोग शरीफ लडकियों के साथ करना चाहते है ,प्रोफेशनल तो उन्हें कही भी मिल जाएगी पर सामान्य सी खुबसूरत और कामकाजी लड़की जिसे वो पटाने की सोच भी नहीं सकते बस देख कर ही खुश रहते है वो अगर उन्हें मिल जाए तो कैसा रहेगा ,"रश्मि ने मुझे बड़े गौर से देखा
"ह्म्म्मम्म देव ,.....देव यार तुम तो शराफत से सीधे ही कमीनेपन में उतर आये मैंने सोचा नहीं था की तुम इतने बड़े कमीने होगे ,पर ये होगा कैसे एक पढ़ी लिखी लड़की जिसे हम उसके क्वालिफिकेशन के आधार पर जॉब में रखेंगे वो क्यों अपना जिस्म का सौदा करने देगी ,"मेरे चहरे पर एक कातिल मुस्कान निखर गयी ,
"हमें जादा कुछ भी करना है बस कुछ ऐसी बन्दिया हमें चाहिए जो ये काम पहले से कर रही है ,जैसे मेहता ग्रुप वाली HR शबनम ,"रश्मि की आँखे चौड़ी हो गयी ,मैंने अपनी बात जारी रखी ,
"देखिये होगा ये की ये सिर्फ क्लाईंट का मनोरंजन ही नहीं करेंगी बल्कि यहाँ काम करने वाली लडकियों को भी इस काम के लिए उक्सयेंगी ,उन्हें पैसे और मजे का लालच देंगी कोई भी पढ़ी लिखी शरीफ लड़की को भी कभी ना कभी तो इन सब चीजो की जरुरत पड़ती है ना मेडम सॉरी रश्मि जी "रश्मि ने हसकर मुझे देखा ,
"हम्म्म्म तुम सही कह रहे हो ,एक और लड़की है मेरे दिमाग में जो इस काम में एक्सपर्ट है ,काजल .................(मेरा चहरा ही उतर गया जिसे उसने समझ लिया था )सॉरी वो तो संस्कारी लड़की है ना जैसा तुमने कहा था ,"
"नहीं मुझे समझ आ चूका है वो संस्कारी तो नहीं है पर मैं उसके साथ काम नहीं करना चाहता,"रश्मि ने अपने भव चड़ा लिए ,
"क्यों "
मैं ख़ामोशी से उसे देखता रहा जैसे मैं अपने सपनो में गम हो चूका था
"बस समझ लीजिये की उसने मेरा दिल तोडा है और अब वो भी मेरे लिए वैसे ही दुश्मन है जैसा की अजीम आपके लिए "मैंने रश्मि के कमजोर नश पर हाथ रख दिया था ,पर उसके चहरे पर एक मुस्कान खिल गयी उसे भी ये समझ आ चूका था की मैं और वो मिलकर खान के होटल को बर्बाद कर सकते है पर कैसे ...ये एक कहानी ही थी ........
अध्याय 6
मैं आज घर लेट से जाने का प्लान बनाया मुझे शबनम से अपने होटल को जॉइन करने की बात करनी थी,ये तो स्वाभाविक था की वो बहुत ज्यादा कीमत बोलने वाली थी लेकिन उसके पास वो हुनर था जो कोई सामान्य लड़की के पास नही मिलता….
वो पढ़ी लिखी थी शादी शुदा थी,दिखने में कातिल सी खूबसूरत थी और सबसे बड़ी बात वो अपने जिस्म का सौदा करना और उसकी कीमत दोनो जानती थी….यंहा का मैनेजर तो मैं था लेकिन उसे हमने HR का पोस्ट देने की सौची,अभी जो HR का काम देख रही थी वो भी बहुत टैलेंटेड लकडी थी इसलिए उसे हटाने की जगह हमने दो पोस्ट बना दिए...क्योकि इसे कुछ अलग ही काम करना था….
मैं होटल के ही रेस्टारेंट में बैठा हुआ शबनम का इंतजार कर रहा था...
“हाय देव “
वो बला की खूबसूरत लग रही थी…जिसपर मेरी नजर थोड़े देर के लिए जम ही गई थी..
“हाय आओ आओ “मैं उसके स्वागत के लिए खड़ा हुआ
“तो बहुत इमरजेंसी में बुलाया है मुझे क्या बात है”
“कुछ नही एक जॉब का ऑफर था तुम्हारे लिए “
वो खिलखिला कर हँस पड़ी
“जॉब तुम मुझे जॉब ऑफर कर रहे हो ,यार मैंने तो सुना की तुम्हारी जॉब में ही खतरा है ,कपूर साहब बहुत ही भड़के हुए है तुम्हारे ऊपर “
हाय उसकी अदा उसकी मुस्कान ,इन गलियारों में बाते इतनी तेजी से फैलती है मुझे समझ आ गया था,
“ह्म्म्म वो कल की बात थी मेडम ...आज कहानी कुछ अलग ही है,हम कुछ नए रिक्रूटमेंट करना चाहते है ,हमे एक HR मैनेजर चाहिए तुम्हारे जैसी ,और कुछ लड़कियों का भी रिक्रूटमेंट है ..जो तुम्हे हमारे साथ मिलकर फाइनल करना होगा “
शबनम को कुछ जैसे समझ सा आ गया
“ओह ,मुझे लगा की तुम्हारे रहते इस होटल को कभी मेरे जैसे मैनेजर की जरूरत नही पड़ेगी ,”वो थोड़ी से उदास हो गई थी ना जाने क्यो..
“तुम क्यो उदास हो रही हो,आजकल टैलेंट से क्या होता है “अब मैं थोड़ा उदास हो गया
“पता नही क्यो लेकिन तुम्हें ये सब करते देखना अच्छा नही लगता,तुम हमारे कालेज के टॉपर थे यार ,इतने टैलेंटेड हो और फिर भी “
शबनम मेरे ही कॉलेज की जूनियर थी ..
“ह्म्म्म छोड़ो वो सब, अब अगर मार्किट मे बने रहना है तो सब कुछ करना पड़ेगा “
उसके चहरे में थोड़ी चमक आई ,तभी एक वेटर आ गया
“मेरे लिए ब्लैक काफी और तुम “
“सेम “
“हम्म तो मुद्दे की बात करे ..”
“देखो देव रवि ऐसे भी मुझे अच्छी खासी तनख्वाह देता है,जो की मेरे टैलेंट से कही ज्यादा है ...तो मैं तुम्हारा प्रपोसल क्यो एक्सेप्ट करू “
पता नही क्यो लेकिन उसकी खूबसूरती ने मुझे दीवाना बना दिया था,
“क्योकि बात सिर्फ पैसों की नही है,रवि के पास तुम्हारी इज्जत क्या है ये हम दोनो को पता है,यंहा तुम्हे इज्जत भी मिलेगा और उससे ज्यादा पैसा भी ,...”
“उससे ज्यादा पैसा ...
तुम पागल हो गए हो कपूर जैसा कंजूस आदमी उतने पैसे दे पायेगा,उतनी तो तुम्हारी सेलरी भी नही है “
“ह्म्म्म देखो अब कपूर साहब होटल के काम को छोड़कर दूसरे बिजनेस में ध्यान देने की सोच रहे है,तो यंहा का पूरा काम रश्मि देखेगी,जाहिर सी बात है की वो नए सोच की लड़की है और सच मानो पैसे खर्च करने में कोई कमी नही करेगी,बस एक चीज की कमी नही होनी चाहिए …”
शबनम ध्यान से मेरी बातो को सुन रही थी,
“उन्हें काम सॉलिड चाहिए ,तुम्हे हर बंदी को तैयार करने पर इंसेंटिव भी मिलेगा जो की सेलरी से कही ज्यादा हो सकता है,रवि के जैसे यंहा कोई जबरदस्ती करने वाला नही होगा,तुम अपने पति और घर को भी टाइम दे पाओगी और पैसे ...वो तो तुमने सुन ही लिया “
“ह्म्म्म MBA किया था तो सोचा नही था की ये सब भी करना पड़ेगा “
शबनम हल्के से हँसी जिसे देखकर मेरे चहरे में भी हँसी आ गई ,हमारी काफी आ चुकी थी ..
“यार देव लेकिन एक बात बताऊ ,मुझसे ज्यादा टैलेंटेड तो काजल है ,तुमने उसे हायर करना चाहिए था “वो हल्के से मुस्कुराई ,लेकिन मेरा चहरा उतर गया ..
“हम्म मुझे पता है तुम दोनो के बारे में “शबनम की बात से मैं चौका और उसकी ओर देखने लगा ..
“फिक्र मत करो किसी को नही बताऊंगी ,लेकिन काजल मेरी अच्छी दोस्त रही है,हमारी बात होते रहती है और वो भी तो बेचारी मेरे ही जैसे है बस उसके पति को उसके काम का पता चल गया है “
शबनम के चहरे में आयी हुई कातिल मुस्कान से मेरे पैरो की जमीन खिसक गई ..
“तुम तुम बोलना क्या चाहती हो “
“वही जो तूम सुन रहे हो ...लेकिन देखो यार देव हमारा फील्ड ही कुछ ऐसा हो गया है,तुमने ही तो कहा था की सिर्फ टैलेंट से आजकल कुछ भी नही होता,,उसे भी तो अपनी जॉब बचानी पड़ी जैसे तुम्हें बचानी पड़ी...यहां बहुत कंपीटिशन है देव वो नही करेगी तो कोई और कर लेगा ...और अब तो तुम भी मान गए हो की इन सब चीजो की जरूरत तुम्हारे होटल को भी है ...मैं भी तो शादी शुदा होने के बाद भी रवि के साथ ...करना पड़ता है देव तुम मर्द हो तुम नही समझो की औरतों के दिल में क्या गुजरती है जब कोई पराया मर्द …”
मेरे आंखों में आंसू आ गए थे…
शबनम ने मेरे हाथ को अपने कोमल हाथो से पकड़ा और उसे सहलाया इसमें बहुत ही अपनत्व था…
“मैं जानती हु की हम गलत कर रहे है और मैं इसे पूरी तरह से सही भी नही कहती,और ना ही ये कहती हु की इसके बिना हम रह नही पाएंगे,लेकिन हमारे खर्चे अब इतने हो गए है की इसे सिर्फ काम करके पूरा करना मुश्किल है ...और फिक्र मत करो जो सीक्रेट है वो सीक्रेट ही रहेगा और कब से जॉइन करना है …”
शबनम की बात से मुझे थोड़ा सुकून तो मिला ,असल में बात से नही उसके कोमल हाथो के अहसास से ..
“कल से “
“ओके “ वो खड़ी हुई और मेरे पास आकर मेरे गालो में एक हल्की से पप्पी लेकर वँहा से निकल गई ……...
अध्याय 7
मुझे घर जाने का मन ही नही कर रहा था ,मैं बड़े ही भारी मन से घर पहुचा ,मेरी बहने बड़ी ही बेसब्री से मेरा इंतजार कर रही थी,उनके प्यारे चहरो को देखकर मेरे मन की सभी थकान मिट गई,अगर मैंने कोई गलती की तो इन लोगो का क्या होगा,मुझे इनके लिए जीना था,इन लोगो के लिए मुझे काजल का साथ चाहिए था,ताकि मैं इनको पढ़ा सकू ,कुछ ऐसी जगह में भेज सकू जंहा इनको वो ना करना पड़े जो की काजल कर रही थी...मैं सोफे में बैठा हुआ उन्हें देख रहा था और मेरी आंखों में पानी आ गया,पूर्वी मेरे गोद में आकर बैठ गई ,कितनी प्यारी थी मेरी जान ,मैंने बड़े ही प्यार से उसके माथे को किस किया ,निशा भी आ चुकी थी उसके हाथो में पानी का ग्लास था ,और मेरे लिए ब्लैक काफी …
वो भी मेरे बाजू में आकर बैठ गई थी ,मैं उसके बालो को सहलाने लगा ,
“तुम लोगो की पढ़ाई कैसी चल रही है,”
“अच्छी चल रही है भइया लेकिन ये शहर के लोग लोग बड़े ही अजीब से है,”पूर्वी ने अपने मासूम अंदाज में कहा
“क्यो क्या हुआ “
“कुछ नही यंहा के लड़के साले पता नही कैसी कैसी ड्रेश पहनते है,और बाल देखो तो हँसी आ जाती है,और लडकिया भी कितने मॉर्डन टाइप के कपड़े पहनती है “
“तो तुम्हे भी पहनना है क्या “
मैंने उसके गालो को पकड़कर खिंचा
“आउच दर्द होता है अब बच्ची नही हु जो गालो को खिंचते रहते हो “पूर्वी का गुस्सा मुझे सबसे भाता था
“अच्छा बहुत बड़ी हो गई है तू “
“वो तो हो गई हु ,लड़के देख के सीटियां मारते है मुझे “
निशा उसकी बात से गुस्से में आ गई
“कोई तमीज नही है क्या तुझे भइया के सामने ऐसे बात कर रही है “
शायद पूर्वी को इसका अहसास हो गया ,और मुझे भी की मेरी बहने अब बच्ची नही रह गई है और मुझे इनके ऊपर थोड़ा और ध्यान देना होगा लेकिन मेरे पास वक्त की कहा था,,अगर ये गांव में ही रहती तो ऐसी बात मेरे सामने नही कह पाती लेकिन अब मुझे लगा की उन्हें भी शहर का थोड़ा रंग चढ़ रहा है ,लेकिन मैं अपनी बहनों को बांध कर भी तो नही रख सकता था ना ही रखना चाहता था ,बस वो बिगड़ ना जाए यही दिल में एक डर सा लगा रहता था ,
“कोई बात नही निशा ये तो पागल है ...तो तुम लोगो को भी ड्रेश चाहिए क्या “मैंने दोनो को पूछा
“नही भइया वो सब बहुत महंगी आती है “निशा बहुत ही समझदार की तरह बात करने लगी थी
“तो तेरा भाई क्या इतना गरीब है ,और ऐसे भी मुझे इंक्रीमेंट भी मिलने वाला है “मैने उन्हें खुस होते हुए बताया
“ऐसे भइया एक बात बोलू बुरा तो नही मानोगे “निशा थोड़ा धीरे से बोली
“हम्म क्या हो गया “उसके इस तरह बोलना मुझे अजीब लगा था,
“वो भाभी ने आज हमे बहुत सारी ड्रेशस दिलवाई है ,लेकिन उन्होंने कहा की आपको पता लगेगा तो शायद आप हमे डांटेंगे ..
”उसका सर झुक गया था ,
“वो कब आयी “
“वो तो दोपहर से आ गई है,हम बाहर शॉपिंग किये और बाहर ही खाना खा कर आ रहे है,आपके लिए भी पैक करवा के लाया है….वँहा से आने के बाद वो थककर सोई हुई है...प्लीज उन्हें मत डांटना आप लोगो का कल भी झगड़ा हुआ था “
निशा की बात सुनकर मैंने निशा को देखा ,वो सहम गई ...अब मेरे घर में दो जवान बहने थी जिनकी जिम्मेवारी मेरे ऊपर थी,और मैं भी पागलो जैसे काजल के साथ ऐसा व्यवहार कर बैठा मुझे पता था की काजल मेरी बहनों का ध्यान अपनी बहनों की तरह ही रखती है,मैं तो अपने ही कामो और परेशानियो में उलझा रहता था लेकिन काजल जब भी वक्त मिलता मेरी बहनों के साथ हमने फिरने चली जाती,वो उनके लिए दोस्तो जैसी थी और मैं….मैं किसी खड़ूस बाप की तरह ,मुझे अब अपनी बहनों से नजदीकियां बढ़ानी थी ताकि मैं उन्हें समय दे पाउ और उन्हें खुस भी रख पाउ...मैंने प्यार से निशा के सर पर हाथ फेरा और उठाकर अपने कमरे में चला गया ,वँहा काजल बेफिक्र सोई हुई थी ,मैंने उसे जगाना भी ठीक नही समझा …..
लेकिन मेरी आहट से वो जाग चुकी थी और आंखों में थोड़ा डर लिए मुझे ही देख रही थी ,उसका वो मासूम चहरा ,,,
मैं तो बस उसे निहारता ही रह गया,ये मेरी काजल थी,मेरी जान ..;लेकिन क्या करू अब मैं इससे वो प्यार नही कर सकता था जो कभी किया करता था,मैंने इसे पटाने के लिए ना जाने क्या क्या पापड़ बेले थे,मैं एक गहरी सांस छोड़कर बाथरूम की तरफ जाने लगा लेकिन मैं फिर से मुड़ा,उसका चहरा मायूस था और वो थोड़ी सहमी हुई लग रही थी,मैं फ्रेश होकर आया वो भी थोड़ी पूरी तरह से उठ चुकी थी ,हम दोनो ने ही कोई बातचीत नही की जब तक की हम फिर से अपने कमरे में नही आ गए,हम दोनो ही खामोश बिस्तर में बैठे हुए थे….बोलने को कुछ बाकी भी तो नही था,
“तुमने जो बहनों को कपड़े दिलवाए उनके लिए थैंक्स “
असल में मुझे ये खामोशी खाए जा रही थी.
“वो मेरी भी बहने है “
उसने एक सपाट सा जवाब दिया ,
“तुम शबनम से बात करती हो…”मुझसे रहा नही जा रहा था,
“ह्म्म्म “
“तब तो ये भी जानती होगी की मैं उसे अपने साथ रख रहा हु “
“ह्म्म्म “
“हर चीज उसे बताती हो ,हमारे बेडरूम की बाते भी “
अब काजल खामोश थी,मैं उसके चहरे को नही देख रहा था ,लेकिन मुझे उसकी सिसकिया सुनाई देनी शुरू हो गई थी,
मैंने उसे देखा ,मैं क्या कहता...कि कोई बात नही जो हुआ ऐसा होता है,मैंने तुम्हे माफ कर दिया ...ये तो मैं नही कह सकता था,तो क्या कहता की निकल जाओ मेरी जिंदगी से ….
नही ये भी मैं नही कह सकता…
“रो क्यो रही हो”मैंने ये कहा ,क्योकि मेरे पास कहने को कुछ था भी तो नही ..वो हल्के से मुझे देखी ,मेरी आंखों में झांकते हुए वो मेरे सीने से लग गई ,और उसके आंसू मेरे सीने को ही भिगोने लगे,मेरे हाथ ना जाने किस ताकत के कारण उसके बालो को सहलाने लगे थे...
मैं उसपर प्यार तो बिल्कुल भी नही जताना चाहता था लेकिन क्या करू,...
मैंने उसे बिस्तर में लिटा दिया,उसके काले बाल बिस्तर में ही फैल गए थे
उसके गुलाबी फुले हुए गाल आंसुओ से गीले थे,आंखों में अभी भी नमी थी,पलके अब भी झुकी हुई थी ,होठ अब भी फड़फड़ा रहे थे,सिसकिया अब भी हल्के हल्के से निकल रही थी ,धड़कने अब भी थोड़ी तेज थी,सांसे अब भी थोड़ी गर्म थी,
मेरे हाथ उसके गालो को सहलाने लगे,मेरा मन चाहता था की मैं उससे लड़ाई करू,उसे जान से मार डालू और मैं किसी प्रेमी की तरह उसे निहार रहा था,शायद वो भी मेरे इस बर्ताव को लेकर थोड़े आश्चर्य में थी लेकिन मेरा खुद पर काबू ही नही रहा ,मैं उसके फड़फड़ाते हुए होठो के पास अपने होठो को लेजाकर उसकी नरमी को महसूस करने लगा,उसकी सिसकिया अब बंद हो गई थी लेकिन उसकी सांसे थोड़ी तेज हो चली थी,मेरे होठो की त्वचा हल्के हल्के ही उसके होठो से स्पर्श कर रही थी,उसके सांसे उत्तेजना से बढ़ने लगी थी,वो एक अजीब से दौर से गुजर रही थी ,वैसा ही कुछ हाल मेरा भी तो था,एक डर ,उसके जेहन में था लेकिन वो इस अचानक हुए बदलाव से और भी घबराई हुई थी,वही नफरत और दर्द मेरे जेहन में था पर मैं अपने उमड़ते हुए प्यार की धार को रोक ही नही पा रहा था,मैं भी इस बात को लेकर घबराया हुआ था और अपने होठो को उसके होठो से मिलने से रोकना चाहता था,लेकिन मेरे अंदर का वो प्रेमी जो इस सामने लेटे हुए शख्स से बेपनाह मोहोब्बत करता था वो मुझे रोक रहा था,वो मुझे उसके ओर बड़ा रहा था,मैं जैसे किसी लोहे की तरह उस चुम्बक की ओर खिंचा जा रहा था,
हमारे फड़फड़ाते हुए होठ एक दूसरे में मिल ही गए ,मैं उन्हें उतने ही प्यार के चूम रहा था जितने की जीवन में कभी किया होऊ..वो हल्के हल्के से रोने लगी थी,उसके हाथ मेरे गले से आकर लिपट गए ,वो भी अपने होठो को ताकत से मेरे होठो में भरने लगी...हम दोनो ही एक दूसरे में गुथे जा रहे थे,हमारा पूरा अस्तित्व ही एक दूसरे में मिलने लगा था…….
जब हम अलग हुए हमारी सांसे उखड़ी हुई थी,आंसू की एक बून्द मेरे आंखों से भी टपक गई ,काजल के चहरे में छोटी सी ही सही लेकिन मुस्कान थी ,वो मेरे बालो को सहलाने लगी मैं उसके आंखों में देखने लगा ……..
“तुम्हारी बेवफाई के लिए मैं तुम्हे माफ नही कर सकता “
मेरे मुह से ये अल्फाज निकलेंगे ये तो ना काजल ने सोचा था ना मैंने ,वो दंग सी रह गई वो बस मुझे देखती रही
“लेकिन क्या करू तुम्हे प्यार करना भी तो नई छोड़ सकता “
मैं भी जानता था और वो भी की मेरे दिल ने जो ये दोनो बाते कही है वो सच ही तो थी..वो मुझे जोरो से अपनी ओर खिंची और मैं उससे लिपट गया..
“मैं जानती हु….मैं जानती हु की जो मैंने किया वो माफी के काबिल नही है ,और मैं ये भी जानती हु की आप मुझे बेतहासा प्यार करते है ,...
लेकिन एक बार आप ही बताइये की मैं अब क्या करू ,जो आप बोलोगे वो मैं करूँगी …”काजल की बातो में सच्चाई थी लेकिन उसने मेरे लिए ही मुश्किल पैदा कर दी थी ,अब मैं उसे कैसे कहु की उसे क्या करना चाहिए वो तो मुझे भी नही पता था..
मैं उठा और एक सिगरेट जला कर सीधे बालकनी में पहुच गया,
मैं गहरे कस लगता हुआ गहरे सोच में था…काजल मेरे पास आकर खड़ी हो गई थी,
“तुम वो होटल छोड़ दो “
“तुम्हे लगता है ये इतना आसान है,हमारा घर लोन में है,और बहनों की पढ़ाई और आगे का खर्च ...”
“मैं जितना कमाता हु उसमे हम अच्छे से जी सकते है,और किसी दूसरे होटल में कोई जॉब तो तुम्हें मिल ही जाएगी,”
“बात सिर्फ पैसों की नही है देव...तुम्हे क्या लगता है अजीम मुझे होटल छोड़कर जाने देगा “
मेरी आंखे चौड़ी हो गई मैं काजल को देखने लगा ..
“वो इतना शरीफ नही है देव ,मेरे लिए होटल छोड़कर जाना शबनम जितना आसान नही है,वो बहुत ही कमीना है देव..मुझे अपनी चिंता नही है पर मेरी वजह से बहनों की जिंदगी में कोई तकलीफ नही आनी चाहिए …”
काजल की बात से मैं दंग रह गया,
“हा देव अजीम पागल है,रश्मि से पूछो की उसने उसे क्यो छोड़ा था,वो बहुत ही खतरनाक है..”
“तो क्या मैं ऐसे ही हाथ पर हाथ धरे बैठे रहू,मैं अपने जान में खेल जाऊंगा काजल तुम एक बार हिम्मत तो करो हम ये शहर ही छोड़कर चले जाएंगे..”
मैंने काजल की बांहो को पकड़ लिया था..
“देव बात को समझो ,जब प्रॉब्लम इतनी बड़ी नही है तो क्यो इसे बड़ा बनाना “
“मतलब “मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,
वो मेरे सीने इस लागकर मेरे पीठ को सहलाने लगती है…
“देखो,अजीम अपने कारोबार के लिए और अपने स्वार्थ के लिए मेरा यूज़ करता है लेकिन बदले में अच्छे खासे पैसे भी तो देता है,मेरी सेलरी तुमसे 5 गुनी ज्यादा है,और वो मुझे कोई तकलीफ भी तो पहुचने नही देता………”
मैं उसके तर्क से हैरान था..
“और तुम ही सोचो कल से पहले क्या तुम्हे मेरे प्यार में कोई कमी दिखाई दी थी,..मैं तुमसे दिलो जान से प्यार करती हु देव,क्या जो चल रहा है वैसा ही नही चल सकता,ये ना सिर्फ हमारे केरियर का सवाल है बल्कि हमारी खुसी भी इससे जुड़ी हुई है,मैं अपने काम से खुस हु देव मुझे कोई भी परेशानी नही है,लेकिन क्या तुम मुझे इस रूप में स्वीकार कर पाओगे...मैं तुमसे वादा करती हु की तुम्हारे लिए मेरा प्यार कभी कम नही होगा..”
काजल की बातो पर मुझे विस्वास ही नही हो रहा था,वो चाहती क्या थी ??
वो चाहती थी की मैं उसके दुसरो के साथ सोने पर स्वीकृति दे दु,..
“तुम पागल हो गई हो “मैंने उसे अपने से हटा लिया
“तुम समझती क्या हो मुझे,मैं तुमहे पैसे के लिए बेच दु “
काजल की आंखे फिर से नम होने लगी थी जबकि मुझे गुस्सा आ रहा था
“देव मेरी जान ,ये एक बिजनेस है तुम समझते क्यो नही ,किसी और के चोदने से मेरी चुद घिस नही जाएगी “
काजल की इस बात पर मुझे विस्वास ही नही हुआ वो ऐसा कैसे बोल सकती है ,वो किसी रंडी की तरह बोल रही थी.
मेरे चहरे में आये भाव को उसने पढ़ लिया ,
“देव मेरा प्यार सिर्फ तुम्हारे लिए है ,अगर मेरा शरीर किसी और का हो भी जाय तो क्या फर्क पड़ता है,क्या हम एक ओपन रिलेशनसिप में नही रह सकते ...मेरी तरफ से तुम किसी के साथ भी सेक्स करने को आजद हो ,और मुझे मेरी आजादी दे दो,क्यो हम इस रिश्ते की वजह से अपने केरियर और आजादी को दाव पर लगा रहे है देव…”
उसकी बात मेरे दिमाग के ऊपर से जा रही थी,मैंने आज तक उसके सिवा किसी दूसरी लड़की से सेक्स नही किया था और वो ...वो मुझे ओपन रिलेशन में लाना चाहती थी..
“क्या तुमने कभी शबनम के बारे में गलत नही सोचा,सच सच बताना देव क्योकि मुझे सब कुछ पता है”
काजल बात से मैं थोड़ा सहम गया ,
“देव तुम उसके बारे में सोच सकते हो लेकिन मैं तुम्हारे सिवा किसी के बारे में नही सोच सकती,जो मैं करती हु वो बस मेरा काम है,मुझे ग्राहकों को खुस करने के ही तो पैसे मिलते है”
“तुम एक रंडी की तरह बात कर रही हो “मैं उग्र हो गया था..
“देव आराम से सोचना इस बारे में ,कोई जल्दी नही है,और तुम मुझे रंडी कहो या और कुछ लेकिन असलिलयत यही है की मैं तुमसे बहुत प्यार करती हु ,,,,”
वो मेरे गालो में एक किस देकर बिस्तर में चली गई ,और मैं सिगरेट के गहरे कस लगाता हुआ बस काजल को देखता रहा और उसके प्रस्ताव के बारे में सोचता रहा……..
क्या सही और क्या गलत के खेल में मेरे सर में दर्द होने लगा था,मैं बालकनी में ही बैठा बैठा सोने लगा था…….
अध्याय 8
शबनम अभी भी नंगी लेटी हुई थी और मेरे वीर्य को अपने पेंटी से पोछ रही थी ...मुझे तब आश्चर्य हुआ जब उसने अपनी पेंटी को अपने पर्स में डाल लिया ,
“अरे ये क्या कर रही हो,फेक दो इसे “
वो जोरो से हँसी …
“इतनी महंगी पेंटी फेक दु ...और ऐसे भी ये मुझे तुम्हारी याद दिलाएगा,इसे मैं नही धोने वाली..”उसने मुझे आंख मारी,लेकिन उसकी बात से मेरे लिंग में एक उछाल जरूर आ गया…
“चलो रश्मि मेडम से भी मिल लेता हु और तुम उन लकड़ियों की ट्रेनिंग शुरू कर दो …..
मैं रश्मि के केबिन में बैठा हुआ था,वो किसी से फोन से बात कर रही थी,हमेशा की तरह खूबसूरत रश्मि,अच्छी खासी हाइट थी,गोरों चिट्टी लड़की,और चहरे में मालकिनों वाला रुआब ,,..
“ह्म्म्म तो मिस्टर देव कैसा रहा पहला दिन शबनम के साथ “वो फोन रखते हुए बोली,उसके चहरे में एक मुसकान थी,
“अच्छा था मेडम “
“तुम नही सुधारोगे “
मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ ,
“सॉरी रश्मि “
वो फिर से हल्के से मुस्कुराई और अपनी कुर्सी से उठाकर मेरे सामने टेबल में आकर बैठ गई,उसके मिनी टाइट स्कर्ट से उसकी दोनो जाँघे चमकने लगी ,वो कमाल की सेक्सी लग रही थी,होठो पे लगा हुआ लाल लिपिस्टिक और उसके काले खुले हुए बाल उसे और भी सेक्सी लुक दे रहे थे,रश्मि को इतना सजकर आते मैंने पहली बार देखा था,
“नजर बचा के क्यो देख रहे हो सीधे ही देख लो..”
वो फिर से हँसी ,लेकिन मैं झेप गया,उसने मुझे अपनी जांघो को छुपकर देखते पकड़ लिया था,वो मेरे बालो में हाथ फेरकर मुस्कुराई ..
“कमान यार देव,इतना शर्माना बंद करो अब तो तुम्हे कस्टमर और लड़कियों के साथ डील करना पड़ेगा…”
वो साली कातिल थी,गजब की मुस्कान थी ,आज तो दिल और लंड दोनो ही बेताब हो रहा था,पहले शबनम और फिर ये …
शायद उसे मेरे पेंट की ऊँचाई का पता चल गया..
“ओह मिस्टर ,ऐसे ऊँचा करने की जरूरत नही है ,फ्रेंड बोला है तुम्हे बॉयफ्रेंड नही “
उसने मेरे पेंट की तरफ इशारा करके मुझे हल्के से डांट दिया और मैं थोड़ा घबरा सा गया,
“सॉरी वो ,....”
“क्या सॉरी साले घंटे भर से तुम शबनम के साथ ऐयासी कर रहे थे और फिर से खड़ा कर रहे हो ,...”वो टेबल से उठकर फिर से अपनी कुर्सी में बैठ गई लेकिन इससे मेरे दिल में एक डर भर गया,वो सच में मुझसे इतना फ्रेंडली थी अगर वो गुस्सा हो गई तो…
“सॉरी मेडम …”मैंने अपना सर झुका लिया था,
“चलो कोई नही आईन्दा से ध्यान रखना ,हम दोस्त है उससे ज्यादा बढ़ने की कोशिस मत करना ओके “
“ओके मेडम “
मैं अभी भी सर झुकाए हुए था,
“अब अगर एक बार भी तुमने मुझे मेडम कहा तो साले जान से मार दूंगी “वो झूठे गुस्से से बोली और हँस पड़ी ,मैं भी उसकी बात से थोड़ा रिलेक्स हो गया था….
“तो….मुझे होटल के सारे डिटेल्स चाहिए ,खासकर अकाउंट के,हो सके तो आज ही ..”
“जी ……..
रश्मि “मैंने अपने को सुधारते हुए कहा जिससे वो हल्के से मुस्कुराने लगी ………
आज रश्मि को होटल का पूरा कारोबार समझते मुझे देर हो गई थी,शबनम के साथ हुआ एनकाउंटर और इतना सारा माथापच्ची वाला काम ,मैं बुरी तरह से थका हुआ घर पहुचा ,निशा सोफे में ही सोई हुई मिली,रात 1 बज रहे थे…
मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसके माथे में हाथ फेरने लगा …
मेरे स्पर्श से वो जागी ,
“आप आ गए भइया “वो सोफे से उठ चुकी थी
“हाथ पैर धो लीजिये खाना लगा देती हु “
“अरे पागल तू क्यो परेशान हो रही है मैं खा के आया हु,तेरी भाभी आ गई ,”
“नही थोड़ी देर पहले तो फिर से गई है,रात को नही आ पाऊंगी बोल रही थी…”उसकी बात सुनकर मेरा चहरा थोड़ा उदास हो गया,जिसे निशा ने पढ़ लिया,
“भइया आपके और भाभी के बीच सबकुछ ठीक तो है ना ……”
“हा मेरी जान सब ठीक है,जा जाके सो जा,”
मैं अपने कमरे में आ गया,और फ्रेश होकर बिस्तर में लेट गया,बीते हुए पूरे दिन की तस्वीर मेरे दिमाग में आने लगी थी,मैं सोच रहा था की आखिर काजल क्या प्लान कर रही है...उसके पास इतने पैसे कहा से आने वाले है,
काजल जैसी भी हो लेकिन वो मूर्ख तो नही थी,वो पढ़ी लिखी थी,और इस बिजनेस की एक्सपर्ट भी थी,वो टैलेंट के मामले में भी कमाल की मैनेजर थी,उसे अकाउंट की भी अच्छी जानकारी थी ,तो मैं इतना तो समझता था की अगर वो कुछ करने वाली है तो उसके पास कुछ तो सॉलिड प्लान होगा….
क्या मुझे उससे पूछना चाहिए ,क्या मुझे उसकी मदद करनी चाहिए…????
मेरे दिमाग में हर चीज बहुत ही तेजी से चल रही थी की दरवाजे में दस्तक हुई ,दरवाजा लॉक नही था तो वो खुलता चला गया ,वो निशा थी ,उसने अभी अभी चेंज किया था वो एक काले रंग की झीनी सी नाइटी में थी,आज पहली बात मैं उसे इस रूप में देख रहा था,हा वो मेरी बहन थी और मैं उसके बारे में कुछ भी गलत नही सोच सकता लेकिन वो सच में सेक्सी लग रही थी,वो धीरे से मेरे पास आयी और मेरे साथ ही बिस्तर में लेट गई और मुझे कसकर पकड़ लिया …
“क्या हो गया बड़ा प्यार आ रहा है भाई पर ..और ये किसने दिया ..”
“नींद नही आ रही भइया,इसे तो भाभी जी ने लिया है हमारे लिए,बहुत से मॉर्डन कपड़े दिलवाए है ...कैसी है “
वो मुझे छोड़कर उठी और अपने कपड़े को पकड़ कर मुझे दिखाने लगी..
“हम्म ठिक है पर सोते समय ही पहना कर इसे ,बहुत ट्रांसपरेंट है,आज मुझे भी पता चला की मेरी बहन कितनी बड़ी हो गई है”
मैं ये सब अचानक ही बोल गया था लेकिन निशा ने जैसे सब समझ लिया उसका चहरा शर्म से लाल हो गया था,
“छि भइया मैं जा रही हु,”
वो बिस्तर से उठाने वाली थी की मैं उसका हाथ पकड़कर खिंचते हुए उसे अपने सीने से चिपका लिया..वो भी मेरे बालो से भरे नंगे सीने में खुद को समेटने लगी,उसके गाल मेरे बालो से रगड़ खाने लगे थे जिसका कोमल अहसास मेरा प्यार और भी बढ़ा रहा था,मैं उसके बालो में हाथ फेरने लगा था...
मेरी बांहे उसके कोमल जिस्म को समेटे हुए थी और उसकी सांसे मैं अपने सीने में महसूस कर पा रहा था,ना ही वो कुछ बोल रही थी ना ही मैं लेकिन मुझे इससे बहुत सुकून मिल रहा था,दिन भर की थकान और दिमाग का पूरा टेंसन ही धूल गया,मैं उसके सर पर एक किस करके अपनी आंखे बंद कर बस उसके अहसास को महसूस करने लगा…….
शरीर की थकावट ने आंखे कब लगा दी पता भी नही चला ……..
अध्याय 9
जब आंख खुली तो सूरज भी चढ़ चुका था,और मेरे बाजू में सोने वाली निशा की जगह अब काजल ने ले लिया था,वो मुझे अपने बांहो में समेटे हुए सो रही थी,हमारे बीच जो कुछ भी चल रहा है उसके बाद भी वो मुझसे ऐसे लिपटी हुई थी जैसे की अब भी वो मुझसे उतना ही प्यार करती हो,मैं उसके मासूम से चहरे को देख रहा था,उसके तन का वो पतला कपड़ा उसके यौवन को ढक पाने में असमर्थ था,उसके स्लेवलेस नाइटी से झांकते हुए उसके उजोर और जांघो के बीच से झांकते हुए उसके योनि के भाग इस बात का इशारा दे रहे थे की उसने नीचे कुछ भी नही पहना है,मेरे सीने में सर रखे वो एक मासूम सी बच्ची लग रही थी,उसके लिए मेरे मन में प्यार ही प्यार था,जो उसे देखते ही उमड़ कर सामने आने लगा,लेकिन………….???
लेकिन पूरी रात वो ना जाने क्या गुल खिला कर आई थी,उसकी इस मादक जवानी को भोगने वाला मैं नही कोई और ही था,उसके कोमल उरोजों को मसलने और अपने दांतो के निशान उसमे छोड़ने वाला मैं नही कोई और ही था,उसके योनि के रस से भीगा हुआ लिंग मेरा नही किसी और का रहा होगा…….
जलन,ईर्ष्या,दुख,और गुस्सा...सभी मेरे मन में एक साथ आ कर चले गए,वही मैं प्यार ,दर्द,उत्तेजना,के कम्पन को भी अपने दिल में महसूस कर रहा था,ये आज भी,सब जानते हुए भी,मेरे लिए सोच पाना कठिन हो गया था की काजल का जिस्म मेरे सिवा किसी और का भी है,लेकिन….
लेकिन जिस समय मैंने शबनम की पेंटी उतारी थी उसी समय काजल मेरे प्यार के बंधन से आजाद हो चुकी थी,.....अब वो बंधी नही थी क्योकि मैंने भी इस बंधन को तोड़कर आजदी को चुना था,अब ये आजादी मुझे कितना दर्द देने वाली थी ये तो मुझे भी नही पता था……….
मैं उठाने को हुआ तो काजल मचली,और मुझे और भी जोरो से जकड़ लिया ,मैं अपने होठो को उसके होठो के पास लाकर उसके गुलाबी होठो में अपने होठो को रख दिया,मैं हल्के हल्के से उसे चूसना चाहता था ताकि वो जग ना जाए...मैं डरने लगा था…..मैं डरने लगा था काजल को अपना प्यार दिखाने से ,मैं नही चाहता था की उसे पता चले की मैं उससे कितना प्यार करता हु,वो बस यही समझे की मैं उससे नफरत करने लगा हु,
लेकिन बाबू इश्क मुश्क छिपता तो नही …
मैं तो बहुत ही हल्के हल्के ही उसके होठो को चूम रहा था लेकिन उसने मेरे बालो में अपने हाथ रख दिए और इससे पहले की मैं वँहा से उठ भागता उसने अपनी पूरी जीभ ही मेरे होठो में घुसा दी ,...
दोस्तो सच बताऊ की ये मजबूरी क्या थी??
मैं उसे छोड़ भी नही सकता था और पकड़ भी नही ...मैं अपने ही मन के कोलाहल में घूम सा हो चुका था,,लेकिन मैं उसके होठो को चूसने लगा,मैं भूल जाना चाहता था की मैं क्या हु,वो क्या है…
जब हम अलग हुए तो काजल की आंखे मुझे ही देख रही थी और होठ ...होठो में एक मुस्कान फैले हुए था जैसे मेरी चोरी पकड़ ली हो…
मैं थोड़ा नर्वस था मैं जल्दी से उठाना चाहता था लेकिन काजल ने मुझे जकड़ लिया था और वो अब मेरे ऊपर आ गई,उसके बाल फैले हुए थे ,माथे का सिंदूर थोड़ा फीका लग रहा था ,उसके कमर मेरे कमर के ऊपर थे ,मेरा लिंग उसके नंगे जांघो के बीच रगड़ खा रहा था,उसके बाल मेरे मुह में फैल गए जिसे मैंने हटाया,वो बहुत ही मादकता से मुस्कुरा रही थी,शायद मैं इस का दीवाना ही हो जाता अगर मुझे असलियत पता न होती…
लेकिन अब भी तो मैं उसका दीवाना ही था….
उसने मेरे हाथो को अपनी कमर में रख दिया और झुककर मेरे गालो को ,माथे को ,नाक,होठ ,आंखे बल,गला सब अपने होठो से भिगोने लगी थी,उसके हाथ मेरे छाती में चलते ,पीठ में चलते,मेरे कमर के नीचे पहुचते,बालो के सहलाते या दोनो हाथो से मेरे चहरे को पकड़ लेते और वो मुझे बेतहासा चूमती…..
वो पागल हो गई थी ,इतनी जितनी की वो पहले होती थी,मुझसे रहा नही गया और मैंने भी उसके बालो को पकड़ कर उसके चहरे को अपने चहरे से मिला लिया…..
उसकी आंखों से टपका हुआ आंसू मेरे गालो में फैल गया था,और मैं उसके होठो को अपने होठो से अलग करना ही नही चाहता था,.............
हम तब तक ऐसे ही रहे जब तक की निशा ने दरवाजा नही खटखटाया ,हम दोनो ही एक दूसरे से अलग हुए और एक दूसरे के चहरे को देखकर मुस्कुराए …..
“भइया ...नाश्ता लगा दु क्या …”
“रुक फ्रेश होके आता हु “
मैं लेटे हुए ही चिल्लाया ..
“रुको ना थोड़ी देर “
काजल अब भी मेरे ऊपर ही थी..
“अगर तुम रात को आ जाया करो तो सारी रात तुम्हारे साथ बिताऊंगा “
मैंने बुझे स्वर में कहा जिसका कोई भी जवाब उसके पास नही था,उसका खिला हुआ चहरा मुरझा गया और वो मेरे ऊपर से हटी,मैं सीधे बाथरूम में घुस गया…..
मैं ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था,काजल बाथरूम में थी,तभी उसका मोबाइल बजा..
“देव देखो तो किसका काल आया है”
वो बाथरूम से ही चिल्लाई ,,,
उसका मोबाइल उसके पर्स में रखा था मैंने उसे खोला मोबाइल निकाल कर उसे दे दिया ,वो बाथरूम में ही बात करने लगी ,...
तभी मेरी नजर उसके पर्श पर पड़ी,एक काले रंग का कपड़ा उसके अंदर था जो की मोबाइल के साथ थोड़ा बाहर आ गया था,मैं जाकर उसे बाहर निकाला ,वो पेंटी थी…
काजल की पेटी जिसपर किसी के वीर्य को पोछा गया था,जिसके कारण वो कड़ा हो गया था,जैसे शबनम ने मेरे वीर्य को पोछा था…
काजल बात करके मुझे मोबाइल देने को हाथ बाहर निकाली और उसकी नजर मेरे ऊपर गई जो की उस पेंटी को ध्यान से देख रहा था,
“उसे भी दे दो ,धो लेती हु “
उसका स्वर ठंडा था,मैंने उसके हाथो से मोबाइल लिया और पेंटी उसके हाथो में थमा दिया ……..
एक बार हम दोनो की आंखे मिली ,
“अब छुपाने को हमारे बीच रहा क्या है देव……..”
काजल की बात का जवाब दिए बिना मैं पीछे मुड़ा ही था,
“लेकिन तुम मुझसे छिपाने लगे हो “मैं आश्चर्य से भरा हुआ फिर से मुड़ा ...इस बार काजल की आंखे पानी से भरी हुई थी ,
“अपना प्यार ...तुम मुझसे अपना प्यार छुपाने लगे हो देव”
उसका गाला रुंधा हुआ था,मेरे पास उसके सवाल का कोई जवाब भी तो नही था,मैं तुरंत ही वँहा से निकल गया……..
अध्याय 10
होटल में घुसते ही मुझे रिसेप्शन में ही रवि दिखाई दिया (मेहता एंड सन्स होटल का मालिक) वो शबनम के साथ खड़ा हुआ था साथ ही ,एक अधेड़ आदमी और एक बहुत ही सुंदर सी लड़की भी खड़ी हुई थी…
“गुड मॉर्निंग सर “मैं रवि से मिलते हुए कहा ..
“गुड मॉर्निंग मिस्टर देव ..यार तुमने तो हमे कंगाल ही कर दिया,हमारी सबसे अच्छी बंदी को तुम अपने पास ले आये”
उसने शबनम की तरफ इशारा किया और शबनम मुस्कुराने लगी..
“सर नथिंग पर्सनल इट जस्ट बिजनेस “
“वो सब तो ठिक है देव जी लेकिन एक बात तो है रश्मि इस होटल को बहुत आगे लेके जाएगी,जंहा तुम जैसा मैनेजर हो और शबनम जैसी HR उसे कौन रोक सकता है..”
“थैंक यु सर “
मैंने सोचा नही था की रवि मुझसे इतने प्यार से बात करेगा ..
“हम्म और इनसे मिलो ये है डॉ चुतिया ,और ये आई इनकी सेकेट्री मिस मेरी मारलो “
उन्होंने उस अधेड़ और उस खूबसूरत लड़की की ओर इशारा करते हुए बोले ..मैं उनकी बात से चौक ही गया,किसी का नाम चुतिया कैसे हो सकता है..और मेरी मारलो ...
“हैल्लो सर “
“हैल्लो ,यार मुझे तुम्हारे होटल में एक कमरा चाहिए ..एक डबल बेडरूम,मेरे और नंबर हो 123 …”
मैं कभी रवि को देखता तो कभी उस शख्स को रवि अपने होटल में ना लेजाकर उसे मेरे होटल में क्यो ले आया था..
“ओक्के सर पर ये 123 में कोई खास बात है क्या ..मतलब कोई दूसरा रूम मिले तो ,”
साला ठरकी था,एक ही बेडरूम चाहिए था उसे अपने और अपनी सेकेट्री के लिए
“हा मेरा लक्की नंबर है इसलिए...रवि के होटल में वो नंबर खाली नही था तो मैं यंहा चला आया “
रवि ने खुद इसे यंहा तक छोड़ा था तो ये कोई आम आदमी तो होगा नही ,मेरे दिमाग में कई बाते एक साथ चल गई
“ओके सर ओके ..
मैं अभी देखता हु “
मैं तुरंत ही काउंटर में जाकर 123 को बुक करने कहा और साथ ही उनका सभी समान उनके कमरे में पहुँचवा दिया,आश्चर्य था की समान के नाम पर उनके पास कुछ भी नही था,केवल एक बेग …
दोपहर में जब मैं होटल के राउंड पर था मुझे फिर से डॉ चुतिया दिखाई दिए ,वो रेस्टारेंट में अपनी सेकेट्री के साथ बैठे हुए थे ,साथ ही एक और लड़की भी थी जिसे मैं पीछे से पहचान नही पाया था,मैं जाकर उनका कुशल छेम पूछना चाहता था क्योकि यही तो मेरा काम था...मैं उनके पास पहुचा ..
“हैल्लो सर ,रूम में कोई प्रॉब्लम तो नही हुई ,कैसा लगा आपको हमारा ये होटल “
मैं बड़े ही नम्रता से सर झुकाए हुए उनसे बात कर रहा था,
“हम्म बहुत अच्छा ,और हा इनसे मिलो ये खान साहब के होटल की मैनेजर मिस काजल,आई थिंक तुम इसे जानते होंगे “
काजल ,मैंने तुरंत ही उनके साथ बैठी हुई लड़की को देखा,काजल मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी,ये यंहा क्या कर रही थी….,वो मेरे बोलने से पहले ही बोल पड़ी ..
“जी सर हम दोनो ही एक दूसरे को जानते है,हाय देव कैसे हो ..”
“अच्छा तुम कैसी हो ..”
“बहुत अच्छी …”
“हम्म अच्छी तो होगी ही,बहुत तरक्की जो कर रही होई खान साहब के होटल में “मैं थोड़ी दबी हुई आवाज में बोला जिसका मतलब काजल को साफ साफ समझ में आ गया था…
“लगता है तुम दोनो कुछ पर्सनल बात कर रहे हो ,बहुत ही कोड में..”डॉ हँसने लगा
“नही सर कुछ नही ...अच्छा सर मैं चलती हु,मेरे प्रस्ताव पर ध्यान दीजिएगा “काजल बोलकर उठ गई ,और उन्हें नमस्ते करते हुए वँहा से निकल गई ,
“बहुत ही सुंदर लड़की है क्यो देव …”
डॉ ने फिर से मुझसे कहा
“जी जी सर .एस्क्युस मि सर “
मैं भी जल्दी से वँहा से निकला,काजल गेट पर ही मुझे मिली,वो मुझे देखकर पार्किंग वाले जगह में जाने लगी और अपनी गाड़ी के पास जाकर रुक गई ,उसे पता था की मैं उसके पीछे ही आ रहा हु
“क्या हुआ तुम मेरे पीछे क्यो आ रहे हो “
“ये चल क्या रहा है ….रवि इसे हमारे होटल में छोड़कर जाता है और तुम इससे मिलने आती हो बात क्या है “
मैंने एक ही सांस में बोला,जिससे काजल के चहरे में एक मुस्कान उभर गई ,
“तुम और तुम्हारी मेडम रश्मि दोनो ही होटल बिजिनेस के खेल में कच्चे हो “
वो इतना ही बोलकर कार का दरवाजा खोलने लगी ,मैं तुरंत ही दरवाजा बंद कर दिया और उसका रास्ता रोक कर खड़ा हो गया..
“मतलब “
मैंने उसे घूर कर देखा ,
“मतलब की ये डॉ चुतिया उर्फ डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवदा वाले है ,और अभी ये यंहा इंस्पेक्टर की हैसियत से आये है ,होटल के निरक्षण के लिए और उसे रेटिंग देने के लिए ,मुझे हैरानी है की तुम्हारी मेडम को भी ये बात नही पता ना ही तुम्हे...हम तो इन्हें खुस करने के लिए कुछ भी करने को तैयार बैठे है ,लेकिन इन्हें तुम्हारे होटल से ना जाने क्या दिलचस्पी है ...
जो की ये यंहा आकर ठहर गए …”
काजल की बात सुनकर मुझे अपने ही ऊपर गुस्सा आने लगा और रश्मि के ऊपर भी ,उसे इन सब चीजो की जानकारी होनी चाहिए थी ..
काजल ने मुझे हटाया और दरवाजा खोलकर फिर से निकल पड़ी ...अब मुझे सब कुछ समझ आ गया था,काजल डॉ को अपने होटल बुलाने को ही यंहा आयी होगी ,शायद उसे अच्छी रेटिंग के लिए कोई डील भी दी होगी ...जो भी हो ये बिजिनेस था और काजल ने मुझे डॉ के बारे में बता कर मेरे ऊपर ही अहसान किया था ,मैं फिर से भागा हुआ वापस पहुचा इस बार डॉ ,रश्मि के साथ खड़ा हुआ दिखाई दिया ..मैं उनके पास पहुचा …
“ओह देव तुम इनसे मिले ये है डॉ ..”रश्मि के बोलने से पहले ही डॉ बोल उठा
“ये आज इससे तीसरी मुलाकात है,सच में तुम्हारा होटल तो कमाल का है जितना सोचा था उससे कही अच्छा “
“थैंक यु सर “मैंने आभार व्यक्त किया
“अंकल आप कब तक रुक रहे है यंहा पर “
रश्मि डॉ को अंकल बोल रही थी ,
“बस बेटा कुछ दिन मेरा काम हो जाए फिर मैं चला यंहा से “
“ओके और देव ये हमारे पर्सनल मेहमान है इन्हें कोई भी कमी नही होनी चाहिए “
“जी मेडम “
रश्मि ने मुझे देखा
“कितनी बात समझना पड़ेगा तुम्हे “
मैं हैरान था की वो क्या बोलना चाह रही है ,
“मेरा नाम है …”
मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ
“सॉरी रश्मि “
वँहा खड़े सभी हँसने लगे …………
मैं अभी रश्मि के सामने ही खड़ा हुआ था,और थोड़े गुस्से में भी था,
“रश्मि यार तुमने मुझे बताया क्यो नही ,”
“ओह अब मैं यार बन गयी ..”रश्मि ने मुझे बड़े ही अदा से देखा
“तुम पहले डिसाइड कर लो की मैं तुम्हे क्या बोलू,...”इस बार मैं गुस्से में था और मेरा गुस्सा देख कर वो हँस रही थी ,
“अच्छा अच्छा मजाक कर रही थी ,तुम्हे जो भी बोलना है वो बोल लो लेकिन बोलो तो सही की क्या नही बताया …”
“यही की डॉ चुतिया यंहा होटल को रेटिंग देने आये है,कम से कम मैं तैयारी…”
लेकिन रश्मि ने मुझे टोक दिया
“क्या क्या अंकल यंहा होटल को रेटिंग देने आये है ,पागल हो गए हो तुम किसने कहा तुम्हे …”
अब चौकने की बारी मेरी थी …मैं आंखे फाडे हुए उसे देख रहा था,
“तुम पहले अपने इंफॉर्मर्स को सही करो,अगर वो ऐसे न्यूज़ देंगे तो तुम इस होटल का बंटाधार कर दोगो …”
रश्मि ने मुझे झडक दिया …
“लेकिन ….वो किस काम से यंहा आये है “
मैं मूर्खो जैसे पूछ बैठा ..
“अब तुम कस्टमर से उनके पर्सनल कामो को भी पूछोगे “
रश्मि ने मुझे आंख दिखाया और मैं सॉरी बोलकर वँहा से निकल गया……
मैं झल्लाया हुआ था,काजल के कारण मुझे आज रश्मि के सामने बेइज्जत होना पड़ा था..
मैं अपने केबिन की तरफ जा रहा था की मुझे शबनम किसी से मोबाइल में बात करते हुए आती दिखी,वो हँस रही थी जैसे मोबाइल में कोई उसे जोक सुना रहा हो …
मुझे देखते ही वो रुकी मैं भी रुक गया,
“ओके मैं बाद में बात करती हु “वो फोन रखकर मुझे देखने लगी,मुझे देखते हुए वो अपनी हँसी को कंट्रोल कर रही थी ,
“ऐसे क्या हँस रही हो ,और तुम्हे पता है आज काजल यंहा आयी थी “
“अच्छा “उसने थोड़ा सीरियस होने की एक्टिंग की जिसमे वो बिल्कुल भी नाकाम हो रही थी क्योकि उसके चहरे में अब भी मुस्कुराहट फैली हुई थी ..
“क्या अच्छा ,ये काजल समझती क्या है अपने आप को उसके कारण मुझे रश्मि से डांट खानी पड़ गई “
जो जोरो से हँसने लगी जैसे बहुत देर से हँसी दबा के रखी हो और हंसते हंसते ही मेरे कंधों पर हाथ रख लिया उसकी हँसी इतनी ज्यादा थी की वो खड़े भी नही हो पा रही थी ,उसने अपना चहरा मेरे सीने से ठिका लिया ,
“ऐसे क्यो पागलो जैसे हँस रही हो “मुझे और भी गुस्सा आया
“और नही तो क्या करू वो तुम्हे फिर से मूर्ख बना गई ..और क्या जरूरत थी उसका पीछा करने की “
वो हंसते हुए मुझसे अलग हुई ,
ओह तो इसे सब पता है,शायद अभी अभी वो काजल से ही बात कर रही थी ,
मैं नाराज होकर वँहा से जाने लगा लेकिन शबनम मेरे पीछे ही मेरे केबिन में आ गई ,
“अरे सुनो तो “
“कुछ नही सुनना मुझे तुम और तुम्हारी सहेली ...साला मेरी तो कोई औकात ही नही है “
मैं धड़ाम से अपने चेयर में बैठा ,शबनम मेरे बाजू में आकर खड़ी थी ,सामान्य से साड़ी पहने हुए ...उसके कमर की नंगी चमड़ी मेरे चहरे के पास थी जिसे देखकर मुझे कुछ होने लगा लेकिन मैं अभी गुस्से में था…
वो मेरे गोद में बैठ गई ..
“क्या डील हुई है डॉ और उसके बीच जिसके बारे में उसे सोचने को कह रही थी ..”
मैंने अपने मन की बात जाननी चाही ,उसने अपनी बांहे मेरे गले के चारो ओर डाल कर रखा था,और मेरे चहरे को देख रही थी ,ऐसा लग रहा था जैसे हम प्रेमी प्रेमिका ही है..
“तुम काजल के मामले में क्यो जानना चाहते हो देव,छोड़ो उसे …”
वो मेरे बालो को सहलाने लगी ,मैं किसी बच्चे की तरह रूठा हुआ बैठा था,
“अच्छा अगर नही बताना है तो जाओ यंहा से ,...
उठो मेरी गोदी से “
मेरे बात को सुनकर वो हल्के से मुस्कराई ,
“अच्छा तुम तो ऐसे हुक्म झाड़ रहे हो जैसे तुम मेरे प्रेमी हो …”वो मेरी आंखों में देखकर कहने लगी ,
“सच कहती है काजल की तुम बहुत ही मासूम हो ,अब जाकर मुझे यकीन हो गया”
वो मेरे बालो को सहला रही थी ,इतने प्यार से जैसे की सच में उसका और मेरा कोई गहरा रिश्ता हो ,मैंने उसकी आंखों में देखा और उसके बालो को पकड़कर उसे अपने चहरे के पास ला दिया और उसके होठो में अपने होठो को डाल कर चूसने लगा,वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी ,उसके होठो की ना जाने कितनी लिपिस्टिक मेरे होठो के माध्यम से मेरे अंदर आ गई थी …
“बताओ ना जान क्या डील है “मैंने उसे छोड़ते ही कहा ,मैं जानने को बहुत ही उत्सुक था..वो मेरे गालो में हल्की सी चपत लगा कर हल्के से हँसने लगी …
“तुम सच में मेरे प्रेमी बनते जा रहे हो देव,..इतनी मोहोब्बत तो मेरे पति ने भी आज तक नही दिखाई..दुनिया के लिए मैं एक रांड हु और पति के लिए बस सेक्स और पैसे की मशीन ...तुम ही एक हो जो इतना प्यार दिखा रहे हो ..”शबनम की भावनाएं बढ़ रही थी ,शायद हम दोनो के तरफ से ,मैं फिर से उसे खीचकर उसके होठो को चूसने लगा .जब मैंने उसे छोड़ा तो दोनो के ही आंखों में एक चमक थी …
“अब इमोशनल करके बातो को घुमाओ मत बताओ की क्या डील है…”
वो हँसी …
“तुम तो पीछे ही पड़ गए यार …..मुझे भी नही पता की क्या डील है..सच में तुम्हारी कसम ..”
उसने मेरे सर पर हाथ रख दिया,ऐसे तो हमारा रिश्ता इतना नही था की वो मेरी कसम खाये लेकिन फिर भी मैंने उसकी बात मान ली,या ये कहो की दिल ने मुझे मानने के लिए मजबूर ही कर दिया ..
“हम्म तो वो क्या डील लेकर डॉ के पास आयी थी ????”
मैं थोड़ा अचंभित था,
“उसने कहा है की कल का अखबार देख लेना तुम्हे पता चल जाएगा “
शबनम की बात से मैं फिर से आश्चर्य में पड़ गया था,आखिर क्या हुआ है….डॉ किस काम से यंहा आया है,और वो है कौन ...क्या होने वाला है आज जो कल के अखबार में आने वाला है…
मैंने अपना सर झटका …
“अब छोड़ो ये सब जो भी होगा पता तो चल ही जाएगा ना “
शबनम के चहरे में मुस्कुराहट तैर रही थी ,उसके गुलाबी होठो की लाली मुझे ना जाने क्यो इतने आकर्षित करते थे,उसका मादक जिस्म देखकर कोई भी उसे छूने को बेताब हो जाए ...तो मैं क्या था,मेरे हाथ उसके कमर में चले गए,मैं उसके खुले हुए कमर को मसल रहा था,वो हल्के नाराजगी भरे स्वीकृति से मुझे देखने लगी ,
“चलो ना जान लग्जरी रूम में चलते है “
सच में मुझे बड़ा मन हो रहा था उससे सेक्स …...नही नही प्यार(इस नाम से सेक्स करने में मजा आता है) ...करने का …
वो मुस्करा कर मुझे देखने लगी .
“अच्छा जी ,एक रात का 1-5 लाख रेट है मेरा और तुम फोकट में ही मेरी रोज लेना चाहते हो …”
मैंने उसके कमर को और भी जोरो से रगड़ा ..
“ये हवस नही मेरी जान प्यार है मेरा “
मैंने आवाज को नशीला करते हुए एक अदा से कहा ..
“ओह जनाब का प्यार मेरे पिछवाड़े में गड़ने लगा है ..”वो जोरो से हँसी ,सच में मेरा लिंग तनकर उसके नितम्भो में गडने लगा था ..मैं भी हल्के से मुस्कुराया ..
“चलो ना यार “
उसने मेरे होठो में अपनी उंगली रख दी ,
“चुप रहो ,बहुत काम है ,और रोज रोज करके आदत खराब नही करनी मुझे...तुम्हारे बीवी की दोस्त हु,तुम्हारी कलीग हु .. तुम्हरी प्रेमिका नही …”वो हंसते हुए खड़ी हुई थी की मैंने उसके हाथो को पकड़ कर उसे फिर से अपने गोद में बिठा लिया ..
“मेरी जान लक्षण तो अब प्रेमिका वाले ही दिख रहे है..और पैसे का क्या है जान मांगो तो वो भी दे दे …”
मैं हल्के से मुस्कुराया
“हाय क्या अदा है तुम्हारी और ये गरीबो वाले डायलॉग मत बोलो,जिनके पास पैसे नही होते वो ही जान देने की बात करते है….और ऐसे भी तुम्हारी जान तो काजल की मुझे क्या दोगो “
उसकी वो बात सीधे दिल में लगी लेकिन थी तो सच्ची ही ,मेरी पकड़ उसकी सच्ची बात से ही ढीली हो गई,जिसका अहसास उसे हो गया,वो शायद मुझे नाराज या दुखी नही करना चाहती थी वो मेरे कानो के पास आयी और मेरे कानो में फुसफुसाने लगी..
“जान..इस जिस्म की जो कीमत तुम देते हो वो कोई नही दे सकता,लेकिन रोज नही ,प्लीज़ “उसकी इस अदा ने मेरे दिल को बहुत सुकून पहुचाया मैं उसे फिर से अपनी ओर खीचकर उसके होठो पर टूट पड़ा,और उन्हें तब तक चूसता रहा जब तक दिल नही भर गया,और वो कमरे से चली नही गई ………...
अध्याय 11
आज भी मेरे आने पर काजल नही आयी हुई थी ,होटल का काम बहुत ही बढ़ता जा रहा था,हमे आगे के प्लान को एक्सीक्यूट करने में मेहनत करनी पड़ रही थी ,हमारे पास कई नए इडियास थे,जिनपर हम धीरे धीरे से अमल करते जा रहे थे,मैं घर पहुचते पहुचते बेहद थक जाया करता था,वो शारीरिक ही नही मानसिक थकान भी होती थी ,और काजल को घर में ना देखने से एक जलन सी होने लगती…….
मैं जानता था की उसे रोक पाना अब मेरे लिए मुश्किल है और मैं तो अब उसे रोकना भी नही चाहता था,मैंने उसे उसकी जिंदगी में आजाद छोड़ दिया था,मैं अपने पति का धर्म निभाने को तैयार था लेकिन उससे उसके पत्नी धर्म निभाने की आशा छोड़ ही दी थी…….
हम दोनो के बीच में प्यार तो अब भी था लेकिन कई दीवार खड़ी हो गई थी ,मैं उस दिन को कोसने लगा था जब मुझे काजल की असलियत का पता चला,ना ही मुझे असलियत का पता चलता और ना ही मैं दुखी होता,जिंदगी ऐसे ही चलती रहती…………
खैर अब मेरे घर में मुझे सुकून पहुचने के लिए मेरी दो प्यारी बहने भी तो थी,मेरे जाते ही वो मेरी सेवा में लग गई कोई मेरे जूते उतार रहा था तो कोई चाय लाकर दे रहा था...
उन दोनो को देखकर ही मेरी सारी थकान दूर हो जाती थी…
मैं फ्रेश होकर खाना खाने बैठा था,आज तीनो ने साथ में ही खाना खाया,मैं जब सोने रम पहुचा तो कल की तरह ही निशा मेरे कमरे में आ गई,लेकिन आज उसके साथ पूर्वी भी थी…
मैं दोनो को ही आंखे फाडे हुए देख रहा था,वो दोनो इतनी बड़ी हो गई थी और मुझे पता ही नही चला…….
दोनो के जिस्म में भराव आने लगे थे,निशा जंहा पूरी तरह से भर गई थी वंही पूर्वी के नए नए विकसित अंगों में मादकता भर रही थी…
दोनो के ही स्तनों की ऊँचाई अच्छी खासी हो चली थी और नितम्भो में भी भराव आने से उनकी चाल में एक मटक पैदा हो गई थी ,जंहा निशा ने आज भी वही नाइटी पहनी थी वही पूर्वी एक स्लेवलेस स्पोर्ट टीशर्ट में थी जो की डीप नेक भी था और उससे उसके उजोर पूरे तने हुए दिखाई दे रहे थे,वही वो नीचे एक छोटी सी निकर पहने हुए थी ,जो उसकी कमर के नीचे की गोलाइयों का भरपूर नजारा दिखा रही थी ……
एक बार मैं दोनो को घूरता रहा फिर अपने दिमाग को झटका…
ये मुझे क्या हो गया ,मैं अपनी ही बहनों की जवानी को घूर रहा था…
दोनो मुझे ऐसा देखकर हल्के से मुस्कुराए और मेरे आजु बाजू आकर लेट गए ……..
पूर्वी ने जहा मेरे सीने में अपना सर रख लिया था वही निशा ऊपर उठाकर मेरे सर को दबाने लगी,मेरा सर अब उसकी गोद में था….
मेरे सर के बाल निशा के जांघो को रगड़ रहे थे और उसकी मुलायम सी त्वचा का आभास मुझे सुकून दे रही थी ….
“चलो बीवी नही है तो मेरी प्यारी बहनों के साथ कुछ समय तो बिताने मिल रहा है..”
मेरी बात से दोनो ही मुस्कुराने लगे .
“हा भइया भाभी होती तो ऐसे रूम में घुसने थोड़ी देते ,दरवाजा लगा के ..”पूर्वी बोलकर हँसने लगी लेकिन इस बात से निशा नाराज हो गई
“कुछ भी बोलती रहती है थोड़ी भी तमीज नही है “
“अरे बोलने दे ..मेरी प्यारी गुड़िया है ये ,कुछ भी बोल सकती है मुझे ..”मेरी बात से पूर्वी खुस होकर मुझे और जोरो से जकड़ लेती है ….
थोड़ी देर में ही पूर्वी नींद के आगोश में चली गई,ऐसे सो तो मैं भी गया था लेकिन मेरी नींद खुली जब निशा उसे उसके कमरे में ले जाने को उठा रही थी ,पूर्वी जैसे नींद में चल रही हो वो अपने कमरे में जाकर सो गई ,निशा उसे पहुचाकर फिर से आयी,और मेरे गले से लग गई,मैं अभी थोड़े नींद में तो था लेकिन मुझे ये पूरी तरह से पता था की ये निशा ही है,मैंने भी उसे जकड़ा,उसकी झीनी नाइटी की वजह से उसके यौवन के सभी उभारों का आभास मुझे हो रहा था,लेकिन वो मेरी बहन थी मेरी सगी बहन ..
“भइया …”
“ह्म्म्म “
“ये भाभी रात रात भर कहा रहती है आप उसे कुछ बोलते क्यो नही हो “
उसके सवाल ने मेरे होशं ही उड़ा दिए ,जैसे नींद में किसी ने पानी डाल दिया हो ..
मैं जानता था की निशा अब बड़ी और समझदार हो गई है,वो चीजो को समझने लगी है और दो दिनों से उसका यू मेरे पास आकर सोना निरर्थक तो नही हो सकता ,जरूर कुछ बात तो थी ,
“अरे काम होता है ना तू तो जानती है ना “
“हा जानती हु लेकिन फिर भी भइया ,आप तो रात में आ जाते हो ,और आपको नही लगता की भाभी का काम अभी अभी ज्यादा बढ़ गया है ,पहले तो वो भी रात में आ जाया करती थी लेकिन कुछ दिनों से उनका रात रुकना कुछ ज्यादा ही हो गया है “
निशा की चिंता बेवजह तो नही थी लेकिन मैं उसके नजरो में काजल को गिरा तो नही सकता था……
“अरे तू भी कहा की बातो में पड़ गई ,चल सो जा “
“नही भइया ये बेवजह की बात नही है ,ऐसे में आपकी और भाभी की शादी शुदा जिंदगी भी प्रभावित हो जाएगी “
उसकी बात से मैं चौक गया ,ये मेरी वही छोटी बहन है जो कभी मेरी गोद में खेला करती थी ,ये इतने समझदारी की बाते कर रही है,हा अब वो कालेज जाने लगी है और उसका शरीर भी किसी औरत की तरह विकसित हो चुका है,शायद उसे सभी चीजो का ज्ञान भी हो ,लेकिन फिर भी थी तो वो मेरी छोटी बहन ही ,मेरे लिए ये समझना हमेशा ही मुश्किल रहेगा की वो बड़ी हो गई है ..
“प्लीज़ भइया बताओ ना कही कोई प्रॉब्लम तो नही है “
“नही मेरी जान कोई प्रॉब्लम नही है बस कुछ ही दिनों की बात है उसके होटल में कोई जरूरी काम चल रहा है “मैं उसे अपने से और भी सटाते हुए बोला...लेकिन मेरे मन में कई बाते चल रही थी ,मुझे काजल से बात करके ये सब बंद करवाना होगा कम से कम रात रुकना कम करवाना ही होगा,मैं नही चाहता की मेरी बहनों को ये पता चले की उनकी भाभी कैसे काम कर रही है,
मैं सोने की कोशिस कर रहा था पर मेरी आंखों से नींद काफी दूर हो चुका था….
तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी ,नंबर देखकर मैं हैरान हो गया,ये रश्मि थी इतने रात को क्या हो गया इसे ,मैं बुझे हुए मन से फोन उठाया मुझे लगा की शायद कोई काम आ गया होगा…
“हैलो देव …”
“हा रश्मि “
“तुम जल्दी से आ जाओ बहुत गजब हो गया “
मैं हड़बड़ाया और रश्मि मुझे देखकर मेरे ऊपर से उठ गई
“क्या क्या हो गया …”
“यार छापा पड़ा है ..”
मेरी फट के चार हो गई अभी अभी तो वो काम शुरू किया था और अभी छापा भी पड़ गया ..
“खान के होटल में “
रश्मि की इस बात ने मेरे अंदर पहले से कही ज्यादा डर को भर दिया था,क्योकि अगर मेरे होटल में छापा पड़ता तो शायद रश्मि पैसे के बल में मुझे खुद को और होटल को बचा लेती लेकिन खान के होटल में तो काजल थी …
आगर काजल यह पकड़ी गई तो ...
मैं बुरी तरह से डरा हुआ था…
“हैल्लो “
रश्मि ने मुझे कुछ ना बोलता हुआ देखकर कहा
“हा सुन रहा हु “
“अजीम और उसकी वो रांड काजल दोनो ही गिरिफ्तार हो गए है ,एक कमरे से लाश मिली है एक लड़की की ,वो शराब के नशे में थी और उसी के कारण मारी गई,पुलिस को शक है की अजीम उस लड़की से धंधा करवाता था,काजल को भी पुछताज के लिए ले जाय गया है …”
“ओके ओके मैं आता हूं “मैं जल्दी से उठा और तैयार होने लगा ,
“क्या हुआ भइया इतने परेशान क्यो हो “निशा की भव चढ़ गई थी ..
“कुछ नही बस मैं आता हु ,काम आ गया है ,तुम सो जाओ और पूर्वी और अपना ख्याल रखना “
मैं निकलने ही वाला था की शबनम का फोन आ गया ..वो काजल को लेके बहुत ही डरी हुई थी,मैंने अपनी गाड़ी होटल की ओर मोड़ दी ,लेकिन मुझे पोलिश स्टेशन भी जाना था ,मैं दुविधा में फंसा हुआ था,मैंने शबनम को काल किया
“तुम भी तैयार हो जाओ मैं तुम्हे लेने आ रहा हु ,हम पहले पुलिस स्टेशन चलते है ना जाने काजल का क्या हाल होगा ,मैं अकेले नही जा सकता लेकिन तुम्हारे बहाने जा सकता हु “
मेरी बात शबनम समझ चुकी थी ..
अध्याय 12
मुश्किल तो था,हा बहुत मुश्किल था …..
खुद को रोक पाना जबकि काजल मेरे सामने खड़ी थी ,जब मैं पुलिस स्टेशन पहुचा तो काजल बैठे इंस्पेक्टर से बात कर रही थी वही अजीम का कही अता पता ही नही था,मेरे लिए आश्चर्य की बात थी की वँहा पर वो डॉ चुतिया भी मौजूद था,उसने मुझे बड़े ही आश्चर्य से देखा लेकिन जब शबनम जाकर काजल से गले मिलने लगी तो उसका आश्चर्य थोड़ा कम हो गया...काजल ने तिरछी नजरो से मुझे देखा…
हम दोनो ही मजबूर थे की सब के सामने हम एक दूसरे से मिल भी नही सकते थे,मेरे दिल में तो आया की मैं जाकर उसके गले लग जाऊ लेकिन क्या करू,मैं तो मजबूर था,वही हाल काजल का भी हो रहा था,वो भी मेरे गले लगने को बेचैन थी ,वो बार बार मेरी ओर देख रही थी ,वो अपना स्वाभाविक स्वभाव खो चुकी थी जिसका असर उसके हाव् भाव से साफ पता लग रहा था,...
कोई भी एक्सपीरियंस आदमी ये बता सकता था की हम दोनो ही थोड़े बेचैन है…
और मेरे ख्याल से डॉ एक्सपीरियंस वाला था ,क्योकि उसके भी चहरे के भाव बदलने लगे थे,वो हमे ऑब्जर्व कर रहा था,....
वँहा क्या हुआ था ये तो मुझे पता नही लेकिन मैं काजल से मिलने को बहुत ही उत्तसुक जरूर था..
“ओके डॉ साहब थैंक्स ..”
हम बाहर आ चुके थे,
“अरे इसमें थैंक्स की क्या जरूरत है,तुमने मेरा काम कर दिया और मैंने तुम्हारा ...यही तो डील थी “
काजल का काम ...मैं ये क्या सुन रहा था,जैसे मैं अचंभित था वैसे ही शबनम भी अचंभित थी…
लेकिन काजल ने डॉ को इशारा किया और डॉ को अपनी गलती का अहसास हो गया…
“तो मैं निकलता हु ..”
“ओके डॉ “
काजल मेरी ओर पलटी ही थी ..
“ऐसे तुम दोनो में क्या चल रहा है ..”डॉ के चहरे में एक कुटिल मुस्कान छा गई थी ..
“कुछ... कुछ भी तो नही ..
”
काजल बड़ी ही परेशानी से बोल पाई ..
“बेटा मेरा नाम डॉ चुतिया है मुझसे छिपा कर क्या करोगे,ऐसे भी मैं पता लगा ही लूंगा “
डॉ की बात से काजल थोड़े सकते में आ गई
“फिक्र मत करो मैं किसे बताने जा रहा हु ,नही बताना है तो मत बताओ..”
डॉ ने हंसते हुए कहा
“ये मेरे पति है ..”काजल ने आखिर डॉ के सामने राज खोल ही दिया.
“लेकिन प्लीज् किसी को पता ना चले..वरना हमारी नॉकरी जा सकती है,और जो अभी हो रहा है उसमे तो हमारी जान भी जा सकती है...सबको यही लगेगा की हम दोनो मिले हुए है...और इनफार्मेशन लीक करते है”
“ओके ओके मेरी तरफ से तुम दोनो ही निश्चिंत रहो ,लेकिन यार ऐसे काम और ऐसे पैसे का क्या करना जब संबंध ही मुसीबत में पड़ जाय ..और जिस तरह की जिंदगी तुम जी रहे हो या जीना चाहते हो उससे कई प्रॉब्लम हो सकती है…”
डॉ की बात सही थी हम अब भी कौन सी अच्छी जिंदगी जी रहे थे..
“जी डॉ लेकिन ….जो शुरू कर दिया है उसे खत्म भी तो करना होगा ना…”
डॉ ने हा में सर हिलाया और वँहा से चला गया ,लेकिन मेरे लिए बड़ी मुस्किल पैदा कर दी थी ,काजल ने ना जाने क्या क्या मुझसे छिपा कर रखा था…
मैं उसे आंखे बड़ी करके देखने लगा ,रात का समय था लेकिन स्टेशन में अब भी कुछ लोग थे ..
“चलो तुम्हे घर छोड़ देता हु..मुझे रश्मि ने बुलाया है “
मेरे काजल से कहे पहले शब्द थे ,हम गाड़ी में बैठे और काजल मेरे साथ वाली सीट में बैठी थी,उसने मेरे सर को पकड़ कर मेरे होठो को अपने होठो में मिला लिया…
मैं भी बेताबी से उसे चूम रहा था..जब हम अलग हुए ,
“ये सब क्या है काजल “
काजल की होठो में मुस्कान आ गई ,वो भी जानती थी की मैं ना जाने कितने देर से ये सब पूछना चाहता था लेकिन नही पूछ पा रहा था..
“सब पता चल जाएगा,लेकिन ये सही जगह नही है,आप पहले घर आइये ..”
मैं काजल को घर छोड़ कर होटल चला गया ,रश्मि बहुत ही बेचैन लग रही थी…..
“कितनी देर लगा दी तुम दोनो ने ..”
वो सच में बेचैन थी मुझे तो लगा था की वो खुस होगी …
“वो रश्मि हम पुलिस स्टेशन गए थे ..”
शबनम ने कहा .मैंने उसे आश्चर्य से देखा उसे ये बोलने की क्या जरूरत थी .
“कुछ पता चला “
रश्मि को जैसे कोई फर्क नही पड़ा ..
“काजल को छोड़ दिया गया है ,लेकिन अजीम नही दिखा,शायद उसे कही और रखा गया हो ..”
“हे भगवान “
,रश्मि अपना सर पकड़ के बैठ गई थी …
मुझे मामला कुछ समझ नही आ रहा था ..
“रश्मि तुम इतने चिंता में क्यो हो ये तो अच्छा ही हुआ ना,इससे हमारे होटल को फायदा होगा “
रश्मि ने मुझे घूरा …
“हम्म लेकिन अजीम मेरा पति था,मेरा पहला प्यार था वो ..”
ये लडकिया भी बड़ी अजीब होती है ,जिस आदमी को बर्बाद करने की कसम खाई थी आज उसके लिए ही इतनी चिंता में थी …
अब मैं क्या बोलता ..
“कोई बात नही छूट जाएगा ,खान साहब बहुत ही पहुचे हुए आदमी है “
मैं उसे थोड़ा शांत करने के लिए कहा …
“नही नही छूटेगा वो ...
उसके पापों की तो उसे सजा एक ना एक दिन मिलनी ही थी ….ये कोई छोटा मोटा केस नही है ,और उसे फसाने वाला उसका ही कोई आदमी है ,वरना जंहा तक मैं अजीम को जानती हु वो साला एक नंबर का हरामी था,वो इतनी जल्दी फसने वालो में तो नही था……….”
मेरे सामने काजल का चहरा उभर गया,लेकिन वो उसे क्यो फसाने लगी ….
“कहा खो गए “
मैं अपने खवाबो से बाहर आया
“कही नही ….लेकिन तुम तो उससे बदला लेना ही चाहती थी फिर क्यो इतना दुखी हो रही हो…”
मैंने यू ही पूछ लिया,वो एक गहरी सास ली ..
“तुम नही समझोगे देव..पति-पत्नी का रिश्ता होता ही कुछ ऐसा है,माना हम दोनो का अब तलाक होई चुका है,माना की हम गलत रास्ते पर थे ,लेकिन फिर भी वो मेरा पति था...कुछ दर्द तो रह ही जाता है ...जब तुम्हारी शादी होगी शायद तब तुम्हे समझ आये ……..”
मेरी शादी…????मुझसे अच्छा कौन जान सकता था की पति पत्नी का रिश्ता क्या होता है…..उसका तो तलाक हो चुका है,मैं तो उसी घर में रहता हु,एक बिस्तर में सोता हु,फिर भी मुझे पता नही चल पा रहा है की आखिर उसके दिमाग में चल क्या रहा है………
“ठीक है तुम लोग जाओ ...मैं खामख्वाह तुम लोगो को परेशान कर दी “
रश्मि ने गहरी सांस ली ………..
अघ्याय 13
कमरे में घुसते हुए मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था,...
आज मेरी काजल मेरे कमरे में मेरा इंतजार कर रही होगी…….
मैं जब अंदर पहुचा तो सच में काजल जग रही थी ,उसने वही साड़ी पहनी थी जिसे पहन कर वो होटल गई थी ,लेकिन उसके माथे में गढ़ा सिंदूर था और गले में मंगलसूत्र..हाथो में लाल चूड़ियां सजी हुई थी,उसने ये रूप मेरे ही लिए ही बनाया था,
“बहुत देर कर दी ,क्या बोल रही थी आपकी रश्मि मेडम “
दरवाजे की आवज से वो उठाकर खड़ी हुई..
मैं जाकर बिस्तर} में बैठ गया …
“शायद मुझे लगा था की तुम सवाल नही जवाब दोगी …”
मैंने उसे घूरते हुए कहा ...जिससे वो हल्के से मुस्कुराई और मेरे बाजू में आकर बैठ गई ..
“क्या जानना चाहते हो “
“सब कुछ “
हम दोनो ही खामोश थे…
“मैंने अजीम को उसके किये की सजा दिलवा दी ,अब वो कभी बाहर नही आ पायेगा...और जब तक वो बाहर आएगा तब तक उसके लिए कुछ भी अपना कहने को बचा नही होगा ..”काजल का स्वर ठंडा था लेकिन उसके बातो में एक अजीब सा दर्द था,साथ ही हौसला ..
“क्या ऐसा कर दिया अजीम ने जो तुम उसे सजा दिलाना चाहती हो ..”
मैं जानने को उत्सुक था…
वो हल्के से मुस्कुराकर मुझे देखने लगी …
“जानने की हिम्मत है आपमे …”
उसकी इस बात से मुझे एक धक्का सा लगा
“ऐसी क्या बात है जिसे जानने के लिए मुझे हिम्मत की जरूरत पड़ेगी...
ऐसे भी तुम्हारे बारे में तो मैं जानता ही हु की तुम एक रंडी हो “
मेरे मुह से निकली बात में इतनी घृणा थी की मुझे खुद ही अफसोस होने लगा ,लेकिन काजल के चहरे की मुस्कान और भी बढ़ गई ,लेकिन उसमे दर्द कुछ ज्यादा ही टपकने लगा था…
“हा मैं एक रंडी हु ,और मुझे एक सीधी साधी लड़की से एक रंडी बनाने वाला अजीम था…”
उसने बोलना शुरू किया ..
“बात तब की है जब हमारी शादी भी नही हुई थी ……………………………….”वो अपनी कहानी बताते रही और मेरे हाथ मुक्के की तरह बंधने लगे ...मैं उन्हें और भी जोरो से कसने लगा था,बताते हुए वो ना जाने कितनी बार रोई थी,कितनी बार मेरे गले से लग गई ,मेरे आंखों में आंसू थे और दिल में अंगारे धधकने लगे थे,,,
मैं हर हाल में उन सभी को खाक में मिला देना चाहता था जिन्होंने मेरी ये हालत की थी …
वो मुझसे लिपट कर रो रही थी और मैं चुपचाप ही सब सुन रहा था ,मुझे बदला लेना था,ऐसा जो दुनिया याद रखे,अजीम को जेल भिजवाना तो बस शुरुवात ही थी ,अभी तो बहुत लोगो को बर्बाद करना था…
“अब तो आप सब जान गए ,अब तो आपको पता चला की मैं ये सब क्यो कर रही थी ,किसके लिए और किसके कहने पर कर रही थी …”
मैंने काजल को जकड़ लिया ,
“मैं सबको बर्बाद कर दूंगा काजल जिन्होंने ये किया है सभी को बर्बाद कर दूंगा,सभी को उनके किये की सजा मिलेगी काजल “
मेरा जिस्म भी धधकने लगा था,मैं लाल हो चुका था ..
“नही जान जल्दबाजी सबकुछ ही बिगड़ देगा...हमारे अपने भी इसमें जल जाएंगे,नही हमे ऐसा कुछ भी नही करना है जिससे उन्हें थोड़ा भी शक हो ,हमे उनके ही खेल में उन्हें मात देनी है ...हमे अपनो को बचाना है ,और जिन्हें अपनी शोहरत और दौलत का इतना घमंड है उन्हें चकनाचूर करना है…..”
काजल जानती थी की मेरे लिए इस आग को सम्हाल पाना कितना कठिन था,वो सच में ये सब इतने दिनों से सह रही थी ….
“तुम मेरी नजर में और भी चढ़ गई हो काजल ,मैंने तो कभी सोचा ही नही था की तुम ये सब सह रही हो ,वो भी मेरे और मेरे परिवार के लिए “
काजल ने मेरी आंखों में देखा,मैं उससे बेपनाह प्यार से देख रहा था..
“अब जो भी करना है हम साथ मिलकर करेंगे...और मेरी कसम खाओ जो भी हो जाए ये राज राज ही रहेगा…”
उसने मेरा हाथ पकड़कर अपने सर में रखा ...मैं बदले के लिए जुनूनी हुआ जा रहा था ,लेकिन बदले का जस्बा तो मुझसे ज्यादा काजल के अंदर भरा हुआ था,वो शांत दिमाग से एक मंजिल को पार कर गई थी ,लेकिन वो जानती थी की ये तो अभी पहली सीढ़ी ही है …..
“मैं कसम खाता हु काजल …”
“और आप किसी को भी पता नही चलने दोगे,निशा या पूर्वी को भी “काजल ने बहुत ही जोर देकर कहा ..
“हम्म मैं अपने जज्बातों को पूरी तरह से काबू में रखूंगा ,तुम फिक्र मत करो ,ये राज मेरे सीने में रहेगा,और हम वैसी ही जिंदगी जिएंगे जैसा की जीते आ रहे है...लेकिन “
मैं बोलते हुए चुप हो गया ..
“लेकिन क्या “काजल ने मुझे परखने वाली निगाह से देखा ..
“मैं तुम्हे कैसे किसी और के साथ देखु ..”
मैं मायूस हो गया था..
“जब मुझे सच्चाई पता नही थी तो शायद मैं ये बर्दाश्त भी कर लेता लेकिन अब …..अब मेरे लिए ये बहुत ही कठिन होगा मेरी जान “मैं उससे लिपट कर रोने लगा ..
“नही जान …...जब इतनी तकलीफ सह ली तो थोड़ी और सही ,मैं जानती हु की हमे तोड़ने की भी कोशिस की जाएगी ,और यही हमारा इन्तेहान होगा...हमे सब कुछ सहना होगा,और अपने खेल को आगे बढ़ाना होगा ...यकीन मानो जीत हमारे सभी दुखो को धो देगी ..और मुझे खुसी इस बात की है की आप भी मेरे साथ हो ,वरना अकेले मैं शायद ये जंग हार ही जाती .”
मैं उसे पकड़कर उसके होठो को चूसने लगा,
“अब तू अकेली नही है मेरी जान अब मैं तेरे साथ हु ,”
हम दोनो ही बेताबी से एक दूसरे के होठो को चूसें जा रहे थे जैसे हमारा प्यार फिर से वापस आ गया हो ….
मैं अब इस जंग को काजल के लिए और दुखद नही बनाना चाहता था,मैं इसे उसके लिए सुखद बनाना चाहता था…
“जान ऐसे ये डॉ चुतिया की क्या कहानी है,ये तुम्हारे कहानी में कहा फिट होता है..”
काजल हँसने लगी ..
“वो कहानी में फिट नही होते,वो ही है जिन्होंने ये कहानी बनाई है”
वो फिर से मेरे होठो को जोरो से चूसने लगी …
मैं फिर से उससे अलग हुआ ..
“एक बात बताओ वो आज सुबह वाली पेंटी में दाग किसका था “
मेरी बेताबी को देखकर वो जोरो से हँस पड़ी ,वाह मैं यही हँसी तो उसके होठो में चाहता था..
“अजीम का तो नही था…”इतना बोलकर वो फिर से हँसी और मेरी जोरो से गांड सुलग गई..
मैं फिर से उसे जोरो से चूमने लगा ..
“बड़े बेताब हो रहे हो आप तो अपनी बीवी के आशिक के बारे में जानने को “उसने मेरे दुखते हुए रग पर हाथ मार दिया,उसने इस अदा से मुझे छेड़ दिया की मैं ना रो पाउ ना हँस पाउ ..
“बहुत मजा आ रहा है मुझे जलाकर ..”
मैं उससे नाराज हो गया था..
वो मेरे पास आई और मेरे गालो को हाथो से अपनी ओर ले जाने लगी,मैं उसकी ओर चहरा नही मोड़ रहा था,वो अपना चहरा ही मेरे सामने ले आई ..
उसकी आंखों में प्यार ही प्यार था,..
“सोच लो ..अगर आगे बड़े तो यही जलन सहना पड़ेगा,तैयार हो …”
वो सच में सीरियस लग रही थी ,मैंने उसके होठो में अपने होठो को घुसा कर जवाब हा में दे दिया…...
अध्याय 14
नई सुबह और नया जोश ...
आंखे तो लेट से ही खुली लेकिन मन में उमंग नया था,मैं बेहद ही उत्त्साहित था क्योकि अब मेरे लिए ये किसी नए जीवन की तरह मालूम हो रहा था…
आज मेरा नजीरिया बदला तो नजारे भी बदले हुए दिख रहे थे…
निशा ने मुझे रोज की तरह नाश्ता दिया,लेकिन आज मैंने उसे उस नजर से देखा जो कभी नही देखा था,पूर्वी के लिए बहुत ही प्यार आ रहा था,मेरी नजरो के बदलाव को निशा ने भी बहुत कुछ समझ लिया था,
“आज कुछ अलग लग रही हु क्या”
“नही तो”
“फिर आप ऐसे क्यो घूर रहे हो जैसे की कोई बदलाव मुझमे आ गया हो ,और आज आप बहुत ही खुस लग रहे हो क्या बात है …”
निशा का आश्चर्य गलत नही था,उसने मुझे इतने दिनों से बहुत ही तकलीफ में ही तो देखा था..
“अरे कुछ नही मेरी जान तेरी भाभी को कल समझा दिया हु की ज्यादा नाईट ड्यूटी ना करे ,वो अब रात में जल्दी घर आ जाया करेगी,”
निशा का चहरा थोड़ा उतर गया..
“अरे भइया इसे तो भाभी का नाईट ड्यूटी ही पसंद था ,आपके साथ सोने जो मिल जाता था”पूर्वी बोलने से पहले कभी सोचती ही नही थी,इसलिए निशा ने उसे जोरो से मारा
“चुप कर कमीनी कही की कुछ भी बोलती है”
मैं हल्के से हंसा
“अरे तुम दोनो के लिए तो मेरे पास टाइम ही टाइम है,तुम भी सो जाना मेरे साथ “
दोनो हल्के से हँसने लगे सभी को पता था की ये तो सम्भव नही है …
आज होटल में भी एक नई ऊर्जा के साथ पहुचा था,कुछ कर दिखाने का जस्बा जो होता है ना वो आपको सच में एक ऊर्जा से भर देता है...वो ऊर्जा आपके पूरे व्यक्तित्व में दिखाई देने लगती है….
“क्या बात है देव बाबू आज तो चमक रहे हो “
शबनम से हुई आज की पहली मुलाकत इसी वाक्य से शुरू हुई ..
मैने जवाब देने के बजाय सिर्फ मुस्कुराना पसंद किया…
शाम मैं अपने ही होटल के बार में डॉ चुतिया को बैठे हुए देखा,
“अरे आओ आओ देव कैसे हो ..”
उन्होंने अपने विस्की की चुस्की लेते हुए कहा ..
“अच्छा हु सर आप बताइये आपको यंहा कोई दिक्कत “
“नही यार कोई दिक्कत नही है,बैठो ना “
“जी सर धन्यवाद “
“कुछ लोगे “
“नही सर ठिक है “
“अरे लो यार कुछ “
“एक स्कोच “
मैंने आये हुए वेटर से कहा ..
“तो ...
लगता है तुम्हारी आंखे कुछ पूछना चाहती है मुझसे “
“मुझे काजल ने सब कुछ बतलाया सर”
डॉ एक गहरी सांस लेते है …
“ह्म्म्म तो अब क्या करना चाहते हो “
मैंने अपना कंधा उचकाया …
“मुझे नही पता की आगे क्या करना चाहिए “
“तुम कुछ करो ही मत ,क्योकि आदमी जो सोचता है वो हो ये जरूरी नही,जैसे कल की घटना को ही ले लो,हमे कौन सा पता था की वो लड़की कल मर जाएगी,मुझे तो बस इतनी ही इंफारमेशन मिली थी काजल के द्वारा की वो लड़की अजीम से तंग आ गई है और अजीम के खिलाफ जाकर वो गवाह बन सकती है ,लेकिन किस्मत देखो अजीम को भी उसपर शक हो गया और उसके हुक्म की नाफरमानी की उसने उसे जो सजा दी उनके कारण उसकी मौत हो गई ,और अजीम सालो के लिए जेल में “
“लेकिन कब तक सर आज नही तो कल वो बाहर आ ही जाएगा “
डॉ मुझे देखकर मुस्कुराने लगे ..
“उसके खिलाफ इतने सबूत ही पुलिस के पास की वो तो गया कम से कम 14 सालो के लिए अंदर ,उसपर मर्डर ,रेप,और देहव्यापार की धाराएं लगी है,वो तो गया ,,,अब बाकियों का सोचो ,”
“तो मैं क्या करू डॉ आप ही कुछ बताइये “
“तुम कुछ भी मत करो...कुछ करने की चेष्ठा ही गलती करा सकती है,सही समय का इंतजार और सही मौके पर सही वार ही काम आएगा...बस देखते जाओ ,समझते जाओ ,अपने आप को तैयार करते जाओ,आपना जाल फैलाते जाओ,जब वक्त आएगा तो बस एक ही सही वार और सभी ढेर….आगे क्या सिचुएशन आने वाली है ये कोई भी नही बोल सकता इसलिए धैर्य ही असली कुंजी साबित होगी…”
डॉ की पूरी बात मेरे भेजे में घुस गई थी…
“सर एक कस्टमर आपसे मिलना चाहता है”
मैं अभी अपने केबिन में था की मेरे पास रिसेप्शन से फोन आ गया...मैं उस कमरे की तरफ गया जंहा मेरी जरूरत थी..ये बहुत ही बड़े बिजनेसमैन थे,लगभग 58-60 साल के व्यक्ति,हमारे होटल के एक खास कस्टमर,मोटे और लंबे चौड़े ..
और यही थे जिन्होंने पिछले बार मुझे लड़की की मांग की थी ...
“गुड इवनिंग सर “
मैं कमरे में दाखिल हुआ ,आओ आओ देव ..
“कहिए सर क्या सेवा करू आपकी “
वो कमीनो के जैसे मुस्कुरा रहा था,
“वही मेरी पुरानी मांग ,इसबार निराश मत करना”
“बिल्कुल नही सर आप हमारे बेहद खास कस्टमर है ,कोई स्पेसल डिमांड आपकी “
साला ये भी मुझे अपनी जिंदगी में कभी करना पड़ेगा मैंने सोचा ही नही था,मैं आज एक दलाल बन चुका था,रंडियों का दलाल..
मेरी बात से उसका चहरा खिल गया,मादरचोद एक ठरकी बुड्डा था,बाल तो पक चुके थे लेकिन हवस नही गई थी,
“यार वो तेरे होटल की नई मैनेजर है ना,क्या नाम है शबनम .उसकी दिलवा दे ...क्या माल है साली बिल्कुल ही कड़क,जब से देखा है मेरा तो फंफनाने लगा है “
उसकी बात सुनते ही मेरे दिल में एक जोर का झटका लगा,शबनम जैसी भी हो उससे एक लगाव सा हो गया था ,
“सर वो …….
सर कोई दूसरी लड़की नही चलेगी “
उसका दिमाग खराब हो गया
“साले मादरचोद तुझसे अच्छा तो खान के ही होटल में रुक जाता,वँहा हुए केस के कारण यंहा आ गया,मुझे बोला गया था की सभी सेवा देंगे..लेकिन तू फिर अपनी बकचोदी दिखा रहा है..वही चले जाता हु .वँहा उनकी मैनेजर भी कम नही है तेरी शबनम से ,,,क्या नाम है उसका हा काजल,साली वो भी मजे देने में कमी नही करती ,बोल हा या ना ..नही तो मैं चला ..”
इस मादरचोद को तो आज मार ही देने का मन कर रहा था,एक तरफ ये मेरी नई नई गर्लफ्रेंड (शायद नही थी लेकिन बोला जा सकता है) की मांग कर रहा है,और अगर वो नही मिली तो मेरी बीवी को चोदने चले जाएगा…..सच में मेरी स्तिथि बहुत ही बुरी थी ,और मैंने एक पति की तरह अपनी पत्नी को ज्यादा महत्व देते हुए गर्लफ्रेंड को ठुकवाना पसंद कर लिया ..
“ओके ओके सर मैं बात करता हु,आप नाराज मत होइए “
“ह्म्म्म क्या रेट है उसका “
“सर मैं उससे बात करके बताता हु “
मैं बाहर जाकर तुरंत शबनम से मिला ,और उसे सारी बात बताई,मेरा चहरा उससे बात करते हुए लाल हो गया था,मैं शबनम को उसके पास नही भेजना चाहता था ये बात तो शबनम भी जानती थी ...उसने मेरे गालो पर अपने हाथ रख दिए ..
“ये हमारा बिजिनेस है यार तुम ऐसे भावनाओ में बहने लगे तो हम खाक अपना बिजनेस करेंगे”
मैंने उसे अपने गले से लगा लिया
“ओहो तुम भी ना सुनो उसे तुम 10 लाख बोलना एक नाइट का “
मैं चौक गया …
“10 लाख देगा वो “
“क्यो मुझमे कोई कमी है क्या जो वो 10 नही देगा ..”शबनम ने शरारती सी मुस्कान से मुझे देखा
“नही लेकिन इतने पैसे “
“उन्हें सर्विस भी वैसी ही मिलती है ,तुम फिक्र मत करो वो पुराना हरामी है उसे रेट का पता होगा ,पुराने होटल में मैं 1 आए 5 लाख तक एक रात का लेती थी ...लेकिन अब मुझे भी रेट बढ़ाना पड़ेगा वरना साले मेरे ही पीछे पड़ जायेगे और जो लडकिया यंहा लाकर रखे है वो सभी फालतू हो जाएंगी,और हा इसमें से 20% तुम्हारा होगा,20% होटल का “
क्या गणित था,यानी एक ही डील में मैं 2 लाख कमाने वाला था जो की मेरी महीने की सेलरी थी ..सच में ये बहुत ही कमाल का बिजनेस था,
मैं फिर से उस आदमी के पास पहुचा,
“15 लाख पागल हो गए हो तूम “
वो मेरी बात ही बौखला गया था..
“खान के होटल वाली मैनेजर तो 8 लाख लेती है ,इसमें ऐसा क्या है जो मैं 15 लाख दूंगा “
साला मेरे ही सामने मेरी बीवी का भाव बता रहा था ,इसे तो मैं नही छोडूंगा ,मैंने कुछ गहरी सांसे ली …
“सर माल नया है ,पूरी सर्विस देगी और उसने भी 8 की ही डिमांड की है …”
वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा
“लेकिन 2 लाख मेरे होंगे ,और बाकी के 5 लाख होटल के ...आप अब खान के होटल जा सकते है लेकिन सिक्योरिटी की कोई गारंटी आपको नही मिलेगी ...यंहा आपको हम सिक्योरिटी की गारेंटी देते है ..मैं पर्सनली आपका ख्याल रखने के लिए मौजूद रहूंगा ,तो सर मेरा भी तो कुछ बनता है..
”
वो थोड़ा ठंडा हो आ,इजाजत से बड़ा पैसा कभी नही होता…(खासकर जिनके पास इज्जत और पैसा दोनो बहुत हो )
“लेकिन यार 15 कुछ तो कम करो ,इतने में तो मैं 15 कॉलेज की लडकिया चोद लूंगा “
बात तो साले की सही ही थी …
“सर आप बोलो तो कालेज की ही लडकिया जुगाड़ देता हु आपके लिए 1 लाख से कम में हो जाएगी ,अगर आपके पास पैसे की कुछ कमी हो तो दूसरा माल भी है हमारे पास”
मेरी बात से वो भड़क गया …
“मादरचोद समझ के क्या रखा है तूने...सोने चांदी का व्यापारी हु मैं ,लाखो की कमाई एक दिन की है मेरे लिए ,तू भेज उसे ,”
उसकी गर्मी और ईगो मेरे काम आ गई क्योकि मैंने 2 लाख की जगह अब 7 लाख कमा लिया था,या शबनम को अगर बताता तो 5 लाख तो मुझे मिलने ही वाले थे,होटल के खाते में मैं 8 लाख बताने वाला था,एक एक मेरे और शबनम के तो कुल शबनम को साथ लेकर मेरी एक रात की कमाई 6 लाख होने वाली थी ,सचमे इतना पैसा जब मिलने वाले हो तो दुख अपने ही आप भाग जाता है ………
शाम ढला और मैं कमसिन सी शबनम को उस कमीने के हाथो में सौप कर और उससे एडवांस पैसे लेकर जो की कुछ चेक में जो की होटल और शबनम के खाते में जाने थे,और कुछ कैश जो मेरे और शबनम के लिए पर्सनली थे,लेकर वँहा से निकल गया,
ये मेरी पहली दलाली की कमाई थी….
बोलते हुए भी अजीब लगता है ना…..मैं होटल का मैनेजर नही रंडियों का दलाल बन गया हु ...
अध्याय 15
मैं होटल से निकल कर सीधे ही काजल को फोन लगाया ,
“हैल्लो कहा मिलु,आज मेरे पहली कमाई तुम्हे देना चाहता हु..”
उसकी हल्की मुझे सुनाई दी
“कितनी है ..”
“6 लाख “
“वाट ??? कौन सा बकरा फंस गया आज..”
काजल ने हंसते हुए कहा ..
“रूपचंद नाम है उसका ,बहुत बड़ा सराफा व्यापारी है “
“ओह वो साला ठरकी “
इतना बोल कर ही काजल चुप हो गई ,मैं कैसे भूल गया था की काजल भी उसके साथ रात बिता चुकी थी …
“तुम्हारा तो पुराना कस्टमर है ना “मेरी आवाज अचानक ही ठंडी हो गई और पूरा जोश अचानक ही कही गायब सा हो गया…
“आप आ जाइये मेरे पास ,होटल के पार्किंग में मिलना ,और प्लीज् उदास चहरा लेकर नही उसी जोश में आना “
“काजल तुम्हे नही लगता की अब बहुत हो गया,छोड़ देते है सब ये शहर ,ये धंधा ,तुम्हारे पास भी बहुत पैसे हो चुके है अब ,कोई छोटा मोटा बिजनेस शुरू कर लेंगे”
दूसरी ओर से बस शांति थी ..
“काजल “
“ह्म्म्म “
“कुछ बोलोगी “
“हमने इस बारे में बात किया था,जो शुरू हो गया उसे खत्म करके ही छोड़ना है,और आपकी बहनों का भी तो सोचो “
उसकी बात से मैं भी थोड़ा खामोश हो गया,
“ठीक है मैं आता हु “
मैं उसके होटल के पार्किंग में पहुचा जंहा वो पहले से ही मौजूद थी ,वो हमेशा की तरह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ,
मैंने पूरे पैसे चेक छोड़कर उसके हाथो में पकड़ा दिए ..
उसने एक गहरी सांस ली ,
“ये सब कितना गलत है वो हम दोनो ही जानते है देव लेकिन तुम भी समझते हो की मैं क्या चाहती हु ,प्लीज् आज के बात मेरी कसम खाओ की ये सब छोड़ने नही बोलोगे,जब तक की हमारा काम पूरा नही हो जाता “
काजल का चहरा सचमे सीरियस था..
“मैं कसम नही खा सकता जान ,तुम जानती हो क्यो “
मेरा स्वर ठंडा था लेकिन दिल में एक जोश भरा हुआ था,उसने भी हामी में सर हिलाया ..
“तो चल रही हो घर या कोई कस्टमर है तुम्हारा भी “
मैं थोड़े मजाक के मूड में बोला ..
“भग जाओ आप,कोई कस्टमर नही है मेरा ...और ऐसे भी अभी यंहा आने से सबकी फट रही है,”वो खिलखिलाई फिर चुप हो गई ..
“होटल की हालत बहुत ही खराब है ,पूरी रेप्युटेशन दाव पर लगी है मुझे ही कुछ करना होगा “
“क्या करोगी ? और जो कदम तुमने उठाया इससे ये सब तो होना ही था “
“ह्म्म्म खान साहब से एक डील करनी होगी ,बस वो थोड़े और मजबूर हो जाए ..”
काजल के चहरे में एक कमीनी सी मुस्कान खिल गई,मेरी मासूम सी काजल आज क्या क्या करने पर तुली है ..
“तो अगला शिकार कौन है “
मैं थोड़ा उत्सुक था ..
“पहले तो खान के दूसरे बिजनेस में घटा करवाना होगा ,ताकि वो इस होटल पर ज्यादा ध्यान दे,उसके बाद ही कोई डील हो पाएगी …”
“लेकिन तुम्हे लगता है खान किसी भी डील के लिए हा कहेगा ,यानी तुम ही सोचो कोई अपने मेहनत से खड़ा किये इतने बड़े होटल का 50 % तुम्हे क्यो देगा “
ऐसे मुझे काजल के दिमाग पर शक तो नही था लेकिन खान इतना बड़ा चुतिया आदमी भी नही था की काजल को 50% का हिस्सेदार बना दे,उसके पर मैनेजर की कोई कमी तो नही थी …..
काजल फिर से मुस्कुराई ..
“इसी इम्पॉसिबल को तो पॉसिबल करना है,पहले कुछ चोट फिर डील फिर चोट फिर 50% लेके उसी का पैसा लगा के इस होटल को टॉप में ले जाना है ...फिर बस कुछ परसेंट की बात होगी किसी तरह उससे 10 परसेंट और निकलवाने होंगे ..तब हमारे पास होगा 60% और हम हो जाएंगे इस होटल के मालिक …”
मुझे नही पता था की काजल ऐसा कैसे करेगी लेकिन जो भी हो मुझे उसका साथ देना था,अब चाहे फलक मिले या गर्दिशों की खाक ,जो भी हो हम साथ साथ है …
तभी पार्किंग के सुने सुनसान से जगह में कोई आता हुआ दिखा ,मुझे लगा की कोई गार्ड होगा लेकिन ये कोई दूसरा ही आदमी था ,मैं थोड़ा डर गया ..
“डरो नही ये अपना ही आदमी है..”
“हाय हर्ष ..इनसे मिलो ये देव है मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त “
वो एक नवजवान सा लड़का था,मुझसे और काजल से भी छोटा रहा होगा,लेकिन बहुत ही हेंडसम और लंबा चौड़ा बॉडीबिल्डर टाइप की पर्सनाल्टी थी उसकी ..
“हैल्लो सर ..”
“हैलो “
“देव ये हमारे होटल का नया चमकता चिराग है ,बहुत मेहनती और सबसे बड़ी बात बहुत ही आज्ञाकारी “
काजल ने हँसते हुए कहा ,सच में मेरी काजल हंसते हुए कितनी सुंदर लगती है …
“क्या मेडम आप भी ..
अब यंहा आपकी बात नही मानूंगा तो किसकी मानूंगा ,आप के कारण तो मुझे ये जॉब मिली है”
काजल ने मेरे अपेक्षा के विरुद्ध एक कदम उठाया वो जाकर मेरे ही सामने उसके गालो को हाथो से मला और उसके गालो पर एक किस कर दिया..जिससे मैं तो आश्चर्य में पड़ गया लेकिन हर्ष शर्म से लाल हो गया ,
“सो क्यूट बेबी “
काजल उस 6’2” के लंबे चौड़े हेंडसम हल्क से बंदे को क्यूट बेबी बुला रही थी….बड़ा याराना लगता है…
“तो देव आप चलिए मैं आपको बाद में जॉइन करती हु “
उसके सामने वो मुझे और कुछ बोल भी तो नही सकती थी,मैं उसे गुस्से से देखने लगा शायद वो मेरे मन की दशा समझ चुकी थी ..
“हर्ष यार वो मैंने तुम्हे जो फाइल दी थी ना अकाउंट की वो कहा है “
काजल बड़ी चालक थी
“मेडम वो ऊपर में ही है आपके केबिन में ,मैंने चेक किया है सब कुछ सही है “
“ओके अभी लाओ उसे “
उस बेचारे का चहरा उतर गया
“मेडम मैं घर जा रहा था “
“तो ...चलो ठीक है कल सुबह ही मुझे वो दिखाना “
“ओके मेडम “वो जल्दी से भागा की कही काजल उसे फिर से ना किसी काम में फंसा दे ,काजल और मेरे चहरे में एक मुस्कान आ गई
मैंने उसके जाते ही काजल को अपने बांहो में ले लिया
“बहुत बेबी बोल रही हो “
“क्यो जलन हुई क्या “वो हल्के से मुस्कुरा रही थी .
“हम्म थोड़ी सी “
“तो निकाल लेना पूरी जलन घर तो आने दो ,”
“यंहा थोड़ी ठंडक पहुचा दो ना “मैं उसके साड़ी से झांकते हुए उसके नंगी कमर पर हाथ फेरा
“पागल हो क्या “वो मचली
“मरवाओगे आप “वो हँसने ,जब मैंने थोड़ा और जोर दिया
“छोड़ो ना ,घर आ रही हु ,पूरी जलने को बहा दूंगी “
वो खिलखिलाते हुए मेरी पकड़ से बाहर हुई ,
“बहूँगा तो लेकिन तेरे अंदर “मैं फिर से उसे पकड़ने को हुआ लेकिन वो छूट कर मुझे चिढ़ाते हुए भाग गई …..
मैं भी घर की राह लिया ..
आज मुझे खुसी थी की मेरे साथ मेरी काजल होगी,और उसकी वो बहाने वाली बात से मेरा लिंग झटके मारने लगा था..
आज इतने दिनों के बाद मैं फिर से काजल को वैसे ही प्यार करूँगा,,औ
अध्याय 16
खाली बिस्तर में मेरी स्वप्न सुंदरी की आशा में मैं करवटे बदल रहा था,काजल अभी भी नही आई थी,मुझे लगा कि फिर से आज मेरे साथ धोखा तो नही हो जाएगा,
मैं अपने लिंग को भी तसल्ली दे रहा था,
“तू सोया रह भाई, जब जिंदगी के ही लवडे लगें हो तो अपना लवडा शांत ही रखना चाहिए”
मैंने अपने बाबूराव से कहा..(जैसे शेक्सपियर की कहानी के लाइन को लोग quote के रूप में यूज करते है,आप भी मेरी इस लाइन को qoutation के रूप में यूज़ कर सकते हो )
लेकिन मैं गलत था,मेरे कमरे का दरवाजा खुला और काजल अंदर आयी ,उसने आते ही मुझे प्यार से देखा,मेरा बाबूराव खड़ा होकर अकड़ने लगा,जैसे कह रहा हो की आज कुछ तूफानी करते है...
मैं काजल पर टूट पड़ा,वो भी मुझे पागलो की तरह किस किये जा रही थी
काजल को बिस्तर पर पटकते ही मैं अपने कपड़े खोल कर फेक दिया और काजल के गालो को खाने लगा,उसके गुलाबी से गाल जो रस से भरे हुए थे ,मेने उसके गालो को पूरी तरह से भिगो दिया था,मेरे थूक से गिला हुआ उसका गाल अपनी नरमी से मुझे सुख दे रहा था और मैं और भी टूटकर उसके गालो को खा रहा था,अपने दांतो से मेने उसके गालो में निशान ही बना दिए जिसपर काजल ने मुझे एक शिकायत भरे निगाहों से देखा पर उसकी आंखों में अब भी वही प्यार था जो मैं हमेशा से ही मेरे लिए महशुस करता हु…………….
उसके बालो को अपने हाथो में फसाकर मैं उसे सहलाने लगा,और वो भी बेहद कामुक अंदाज में मेरे होठो पर टूट पड़ी,दो जिस्मो की गर्मी ने हमारे बदन में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया था,
मैं काजल के कपड़ो के तरफ रुख किया और उसके कपड़ो को धीरे धीरे उतारने लगा , मैं उसके भरे हुए नितंबो को अपने हाथो से भरकर उसे मसलने लगा,काजल और भी गहरे से मुझे चूमने लगी ,मैं उसका शर्ट खोलकर फेक चुका था,शायद अब काजल को सहन नही हो रहा था और वो जल्दी से ही अपने कपड़े खोलने लगी,लेकिन मैंने उसको उसकी पेंटी खोलने से मना कर दिया वो मुझे फिर से शिकायत के भाव से देखने लगी ,मैं अपने पूरे कपड़े खोल कर नंगा हो कर उसके सामने खड़ा हो गया ,मेरे लिंग को देखकर वो हल्के से हँसी और उसे पकड़कर उसे इतने प्यार से चूसने लगी जैसे की वही वो चीज थी जिसके लिए वो इतनी प्यासी थी,.....
मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुच रहा था और मैं झरने को बिल्कुल भी तैयार नही था,मुझे तो अभी जितनी देर हो सके अपनी जान के साथ खेलना था,मैं काजल के मुह से अपना लिंग निकल कर अलग किया ,वो जल्दी से अपनी पेंटी निकालने को हुई पर मैंने उसे फिर से रोक दिया वो मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगी ,और मेरे होठो में एक शरारती सी मुस्कान उभर आयी .,....
“नही ना जान करो ना “
उसने लगभग रोते हुए कहा ,वो आमतौर पर इतनी बेताब नही होती पर आज तो कई दिनों के बाद हम प्यार के गोते में डूबने वाले थे...
वो मछली जैसे तड़फने लगी और मुझे उसकी तड़फन बहुत ही मजेदार और मनमोहक लग रही थी ,मैं उसके पास जाकर उसे लिटा दिया और खुद उसके पेंटी के पास अपनी नाक ले जाकर जोरो से सूंघ लिया,उसके कामरस से भीगा वो अंतःवस्त्र इतने मादक खुसबू से भरा था की मैं फिर से उसे जोरो से सूंघने से अपने को नही रोक पाया,लेकिन मेरी इस हरकत से काजल की हालात और भी खराब हो गयी उसे होने वाले का अंदेशा हो चुका था और उसका शरीर छटपटाने लगा था वो अपनी कमर ऊपर कर मुझे आमंत्रण दे रही थी और जब मैं अपना नाक उसके योनि के भाग से लगाया वो अपने कमर को ऊपर कर मेरे नाक से अपनी योनि को रगड़ने लगी,काजल की योनि से बहते हुए गीले गीले से प्यार की धार ने मेरे नाक को भी भिगो दिया और मेरे मुख से एक मुस्कान सी निकल गयी ….
वो बस झरने ही वाली थी और मैं उसे यू बेताबी में झरने नही देना चाहता था उसे भी वो मजा मिले जिसके लिए वो इतनी तड़फ रही थी ,मै उसकी पेंटी को उसकी योनि के ऊपर से हटा कर अपनी जीभ से उसे चाटने लगा,काजल का हाथ मेरे सर पर था और वो पूरे ताकत से उसे अपने अंदर लेने की चेष्टा कर रही थी पर शायद उसे वो आनंद नही मिल पा रहा था जिसके लिए वो तडफ रही थी और आखिर में वो हारकर मुझे अपने ऊपर खिंच ही लिया ,आज मैं काजल की ताकत देखकर दंग ही रह गया वो मुझे बिल्कुल ही आराम से उलटा कर के मेरे ऊपर चढ़ गयी ,अपने हाथ मेरे लिंग पर रख उसे अपने आग की उस भट्ठी में डाल दी जो पानी से भरी थी,........
काजल अंदर से इतनी गर्म होगी मुझे पता नही था आज तो उसकी योनि मानो कोई भठ्ठी ही हो,मेरे लिंग के अंदर जाते ही काजल को ऐसे सुख का अहसास हुआ जैसे सालो से प्यासे को कोई अमृत ही पिला दे,
“aaaahhhhhh जाआआआआन लव यु बेबीईईईईई “
वो अपनी रफ्तार तेज करने लगी उसकी सिसकियों से ही मैं झट जाता इतनी मादकता अपने अंदर लिए है मेरी रानी काजल ……
“आह आह आह आह आह आह ,ओ ओ ओ आह जआआआननन आह जाआआआआआआनननन “
वो किसी पम्प की तरह मेरे ऊपर कूद रही थी और मेरे होश ही उड़ा रही थी मुझे पता था की काजल इतनी गर्म हो चुकी थी की वो ज्यादा समय तक नही टिकने वाली ,मेरी अकड़ को आज काजल शायद तोड़ ही देती वो बिल्कुल भी आराम के मूड में नही थी ,वो लगातार ही कूद रही थी ,
“लव यू बेबी ,लव यू ,फ़क मि जान आह आह आह ,”
“लव यू मेरी रानी “
हमारी सांसे कब उखाड़ जाती इसका कोई भी भरोषा ही नही था,पर आनद के उस सागर से मैं कभी भी बाहर नही निकलना चाहता था,लेकिन शायद काजल को जल्दी से ही झरना था वो अपनी बेताबी के इंतहा पर थी और वो उस ज्वाला को निकाल देना चाहती थी जो उसके अंदर भरी हुई थी ,काजल ने अपने स्तनों को मेरे मुह में ठूस दिया और मैं भी किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उसके स्तनों का पान करने लगा..
मैं और भी उत्तेजित हो गया और उसे नीचे से ही और जोरो के धक्के देने लगा पर शायद वो जोर नही बन पा रहा था ,काजल भी अब कूदना बन्द कर जोरो से धक्के मारे जा रही थी मेरे अंडों में एक दर्द भर गया पर उसी दर्द का तो मजा था,,....
हम दोनो ही अपने तरफ से पूरी ताकत से धक्के दे रहे थे…
“आह वो आह आह आह आह जान जान आह “
दोनो के धक्के एक साथ मिलकर और भी तेज और प्रभावशाली हो जाते और दोनो के मुह से ही एक सिसकारी फुट पड़ती थी...उसके योनि से रगड़ते हुए मेरे लिंग की चमड़ी से उठाने वाला वो आनद मैं कभी भी खोना नही चाहता था पर वो एक धारा सी मेरे वृषनकोशों से आती हुई मुझे प्रतीत हुई और काजल भी अपने चरम के नजदीक ही थी हम दोनो ही अंतिम धक्कों पर अपनी पूरी की पूरी ताकत खर्च कर रहे थे ,और वो ज्वाला फूटा और काजल मेरे ऊपर झरने सी धार छोड़ती हुई लेट गयी,मेरा भी हाल उससे अन्यथा नही था और मैं भी उसके अंदर ही एक तेज फुहारे को छोड़ता हुआ हाँफने लगा,...............
दोनो ही हाफ रहे थे और दोनो ही उस आनंद में डूबे थे जो हमे अभी अभी मिला था...वो गीलापन हमारे यौन अंगों से बाहर आ रहा था,चिपचिपे वीर्य में मिला काजल का कामरस मुझे इच्छा तो हुई की उसे पी लू पर उठाने की हिम्मत ही नही जुटा पाया और मुझे पूरा यकीन था की यही हाल काजल का भी हो रहा होगा उसे भी मेरा वीर्यपान करना बहुत ही पसंद था ,खासकर जब गहरे संतोष की दशा हमे घेरे हुए हो …………………
उखड़ती सांसो में मेरा प्यार काजल के अंदर जा रहा था और वो भी मेरे वीर्य को अपनी योनि सिकुडकर अपने अंदर ही रखने का प्रयाश कर रही थी ,मैं उसे और भिगोना चाहता था पर मेरे अभी का कोटा पूरा हो चुका था …………..
अध्याय 17
काजल के नंगे जिस्म की गर्मी ने सुबह सुबह ही उत्तेजित कर दिया था,रात को उठा हुआ तूफान फिर से उठ खड़ा हो गया,बिस्तर से उठने के बाद एक राउंड बाथरूम में नहाते हुए भी निपटा लिया गया था…
सच में ये प्यार कई दिनों को बाद ही उमड़ कर आ रहा था,असल में जब किसी चीज को खोने का डर ज्यादा हो तो प्यार भी ज्यादा हो जाता है...यंही हमारे साथ भी हो रहा था..
अक्सर पति पत्नी के रिस्तो में कुछ सालो बाद ही एक सुस्ती सी आ जाती है,कारण साफ है की जब आपको पता है की ये कही नही जाने वाली तो आप उसे महत्व देना ही बन्द कर देते है...ये चीज गर्लफ्रैंड बॉयफ्रेंड के रिलेशन में भी दिखता है..लेकिन अगर कुछ ऐसा हो जाए की वो आपसे दूर हो जाए तब उसकी अहमियत समझ आने लगती है..
आज मैं जल्दी ही होटल पहुच गया था,पहुचते ही मुझे रूपचंद दिखाई दिया,वही जो कल रात शबनम के साथ था..
“वाह यार देव मान गए क्या कमाल का माल दिया था तुमने ,पूरे 15 वसूल हो गए ,ये तो खान के काजल से भी मस्त थी “
वो साला अपनी गंदी शक्ल के साथ मुझे बेमकसद ही जला रहा था,मैं उस मोटे के साथ काजल को इमेजिंन भी नही करना चाहता था,मन किया की एक झापड़ उसके गालो में लगा दु ,,..लेकिन हाय नॉकरी हँसकर ही बात करना पड़ता है..
“थैंक्यू सर आप हमारे खास कस्टमर है,खास लोगो को खास चीज ही दी जाती है,ऐसे आप जा रहे है..”
“हा अपना काम तो हो गया,मिलते है कभी और कोई खास माल आये तो रखना मेरे लिए ऐसा ही कोई तगड़ा माल ..अभी अभी और ले के आ रहा हु उसकी “
वो हंसता हूं वँहा से चला गया ,और मेरे पैर अपने ही आप उस कमरे की ओर चले गए जंहा वो ठहरे थे,मेरे पास उस रूम का पास था,जिसे मुझे रूपचंद ने हैंडल किया था ..मैं रूम खोलकर अंदर पहुचा,शबनम अभी अभी नहा कर निकली थी और मुझे देखकर मुस्कुराने लगी,देखा तो बिस्तर के बाजू में ही उसकी पेंटी पड़ी हुई थी जिसे उठाकर ओ डस्टबिन में डाल देती है..
“अरे तुमने तो मुझे कहा था की तुम फेंकती नही ,धो कर रखो गी ..”
वो खिलखिला कर हँसने लगी..
“जब कोई इसे गंदा करने के लाखो दे रहा हो तो 2-3 हजार की पेंटी तो ले ही सकती हु ना “
“लेकिन उस दिन तो ..”
वो मेरे पास खड़ी थी और उसके शरीर से आती हुई महक ने मुझे उत्तेजित कर दिया था मैंने उसे अपने से कस लिया..
“अरे देव बाबू ,जब किसी के साथ बिना पैसों के सोया जाय तो क्यो पेंटी को फेकूँगी,ये तो उन कस्टमर के लिए है जो हमे पैसा देते है,नया कस्टमर नई पेंटी “वो मेरे गालो में एक किस कर मुझसे अलग हो गई,मेरे दिमाग में काजल के बेग से निकली हुई पेंटी घूम गई ..
“काजल के बेग से भी मुझे एक मिली थी “
वो मुझे थोड़े आश्चर्य से देखी और जोरो से खिलखिलाकर हँसने लगी ..
“तो वो भी सोई होगी किसी के साथ बिना पैसे लिए “
वो अपने टॉवेल को की उसके शरीर से लिपटा हुआ था उतार कर फेक देती है,अब मेरे सामने पूरी तरह से नंगी खड़ी थी ,वो अपने बेग से एक नया सेट निकालकर पहनने लगती है ,और फिर अपना ड्रेश पहन कर तैयार हो जाती है..
“ऐसे क्या देख रहे हो देव “
मैं उसे ये सब करते देख रहा था,वो अभी दर्पण के सामने खड़ी थी और अपना मेकअप लगा रही थी …
“देख रहा हु की किसे एक परी सी सुंदर लड़की एक भद्दे से मर्द के साथ रात बिता लेती है ...और उसके बाद भी सुबह यू हँसती हुई दिखती है”
मेरा स्वर ठण्डा था..शबनम मुझे आश्चर्य से देख रही थी वो मेरे पास आकर मेरे गालो को सहलाने लगी ..
“देब ये एक धंधा है और धंधे में इमोशन को बीच में नही लाना चाहिए...अगर वो आया तो किसी के साथ सोना तो दूर किसी को हाथ लगाने भी नही दिया जा सकता...और जब हमे धंधा करना ही है तो कस्टमर के चहरे में क्या रखा है...हमने तो यही सीखा है की खुद भी किसे मजे लिए जाय,ये देखो “
वो एक दवाई अपने बेग से निकाल कर दिखाने लगी..
इसे कस्टमर को खिला दो तो भी हल्क बन जाता है,रात भर घोड़े के जैसे दौड़ता है,और आंखे बंद करने के बाद कौन सा किसी का चहरा दिखाई देता है...हम भी संतुस्ट और कस्टमर भी खुस “
वो फिर से खिलखिलाई ,लेकिन मुझे उसकी बात पर आश्चर्य हुआ क्योकि मुझे आज पता चला की शबनम जो की इतनी सुंदर और मासूमियत की देवी लगती है,इस धंधे की इतनी बड़ी खिलाड़ी है,वो सच में किसी रंडी सी बाते करने लगी थी..
इधर रश्मि भी इस धंधे की पहली कमाई से खुस थी ,वक्त बीतता गया और हमारा होटल बहुत ही तेजी से नाम कमाता गया,होटल में अभी कुछ 15-20 ऐसी लडकिया थी जो वक्त आने पर जिस्म का धंधा करती थी ,ये सभी आम लड़कियों की तरह ही थी जो होटल में काम करती थी ,कोई देखकर नही कह सकता की ये क्या काम करती होगी,सभी का कंट्रोल शबनम के हाथो में ही था,मुझे मेरा कमीशन मिल जाया करता,जो की ग्राहक के ऊपर होता था,मैं भी इन कामो में अब एक्सपर्ट सा बन गया था,MBA की डिग्री का ये तो फायदा हुआ की मैं अच्छे से मोलभाव कर लिया करता था,मुझे लोगो के हैसियत की पहचान थी ,कम से कम 1 लाख और ज्यादा से ज्यादा 15-20 लाख तक का सौदा होता था,मैं जितना ज्यादा पैसा लड़कियों को दिलाता उतना ही बड़ा कमीशन मुझे मिलने लगा था..इतने पैसों की तो कल्पना भी नही की थी जितने मुझे 1 महीने में ही मिल गए थे…….
इधर काजल के होटल की हालत बहुत ही खराब चल रही थी,खान साहब के बिजनेस में बड़ा घटा हुआ था ,पुलिस को उनके कई गैरकानूनी धंधों के बारे में पता चल गया,जिससे अजीम और खान साहब के ऊपर मुकदमो की संख्या बढ़ती गई,...
मुझे पता था की ये सभी कुछ काजल का ही किया धरा था,लेकिन दुनिया की और अजीम और खान की नजरो में वो उनकी सबसे करीबी सहलाकर बनकर उभरी,वही थी जो अजीम के वकील के साथ उसके मुकदमो में जाया करती थी ,या उससे मिलने जेल जाया करती थी ,वही खान पूरी तरह से टूट गया था,एक इकलौता बेटा जेल में हो और धंधे में इतना घटा उसके लिए सहन से बाहर हो रहा था,उसे सांत्वना देने का काम भी काजल का हि था,......
वही रश्मि और खान के बीच एक अजीब सा कनेक्शन भी उभरने लगा था,रश्मि मुझे लेकर खान के होटल गई थी ,
“तुम बाहर बैठो मैं आती हु “
हम खान के केबिन के बाहर खड़े थे ,बाहर ही हमे काजल मिल गई जो की खान के केबिन से अभी अभी निकली थी ,वो हमेशा की तरह ही साड़ी में थी ,लेकिन उसके बाल अभी बिखरे हुए थे,साड़ी थोड़ी अस्त व्यस्त दिख रही थी ..वो हमे देख कर चौकी नही ,शायद खान ने उसे बता दिया होगा की रश्मि आ रही है,लेकिन मैं उसकी ये हालत देखकर चौका ..
“गुड मॉर्निंग मेडम “
काजल ने रश्मि को हल्के से मुस्कुराते हुए विस् किया ..
“बीच (हिंदी में कुतिया )”
रश्मि ने उसके अभिवंदन का जवाब देते हुए कहा,और मुह बना कर अंदर चली गई ..
काजल ने मुझे देखा जो की हैरत से उसे देख रहा था वो मुझे आंख मारकर हल्के से हंसते हुए वँहा से चली गई,मैं बाहर ही रखे सोफे में बैठ गया ..
रश्मि जिस शख्स से सबसे ज्यादा चिढ़ती थी वो थी काजल …
उसे लगता था की काजल की ही वजह से उसके और अजीम के रिश्तों के बीच में दरार आयी है...ऐसे काजल ने मुझे ये बात बता दी थी इसलिए मुझे इससे कुछ फर्क नही पड़ा लेकिन अब ये खान ……..
अध्याय 18
रश्मि और खान के बीच क्या बाते हो रही थी ये तो मुझे नही पता लेकिन इससे हमारा भविष्य और हमे क्या करना है इसकी रूपरेखा जरूर तय हो रही थी…
मैं बैठे हुए बोर हो रहा था मैं उठा और काजल को काल किया ,मैं टहलता हुआ एक सीढ़ियों से ही एक फ्लोर ऊपर चला गया,जहा मेहमानों के कमरे बने हुए थे,सामने एक गैलरी थी जिसमे से नीचे का रिसेप्शन दिख रहा था,
“हलो ..”
काजल की मधुर एवं मेरे कानो में पड़ी
“क्या कर रही थी खान के साथ “
मैंने उसे छेड़ते हुए कहा
“क्या करोगे जानकर “वो मुझे जलाने लगी ,मुझे वो नीचे रिसेप्शन में दिखाई दी,
“ऊपर देखो “
उसने सर उठाया मैंने हाथ हिलाया
“पागल हो गए हो क्या हाथ क्यो हिला रहे हो,कोई देख लेगा तो “
“तो क्या “
“तो कुछ नही प्रॉब्लम हो जाएगी जानते हो ना,मैंने तुम्हे क्या बताया था…..”
“हम्म ऐसे सच में जब भी तुम्हे किसी और के साथ देखता हु खून खोल जाता है”मेरी आवाज से मेरे दिल की जलन साफ साफ झलक रही थी जिसका आभास काजल को भी हो गया ,
“ओ मजनू जलना बंद करो कुछ ही दिनों की तो बात है फिर मैं सिर्फ और सिर्फ आपकी ही रहूंगी,,,,”
हम दोनो ही थोड़े देर को चुप हो गए
“अभी भी तो सिर्फ आपकी ही हु,लेकिन इस जिस्म को किसी और को भी सौपना पड़ता है”
मेरे लिए उसकी ये बात सहन से बाहर हो रही थी
“बस करो यार छोड़ो इन बातो को “
“शुरू किसने किया था “
अचानक मुझे कुछ हलचल का आभास हुआ ,मैंने पलट कर कमरों की तरफ देखने लगा,एक कमरे का दरवाजा खुला और एक लड़का बाहर आया,मैं उसे पहचानता था,वो हर्ष था,वही जिससे मैं पार्किंग में मिला था,शायद वो भी मुझे देखकर पहचान गया,उसके चाल से लगा की वो घबराया हुआ है,वो बड़ी जल्दी जल्दी आया और मुझे क्रॉस करके सीधे लिफ्ट के पास पहुच गया,लिफ्ट को आने में समय था वो सीढ़ियों से ही उतरने लगा ..
मुझे उसकी हरकत बड़ी अजीब लगी क्योकि उसने मुझे एक बार भी नही देखा …
“ये हर्ष को क्या हो गया कमरे से बाहर आया और इतनी जल्दी में भाग गया,देखा भी नही मुझे जबकि हमारी नजर मिली थी और मुझे पूरा यकीन है की वो मुझे पहचान गया होगा “
काजल जो की किसी को कोई काम समझा रही थी फिर से ऊपर देखती है,इस बार उसकी अदा में भी एक डर का आभास हुआ ,दरवाजा फिर से खुला ,मेरी नजर दरवाजे पर थी क्योकि ये वही दरवाजा था जंहा से हर्ष निकला था,एक अधेड़ उम्र की महिला कोई 55-60 साल की उम्र की बाहर आयी ,उसके चहरे में एक अजीब से संतोष का भाव था,देखकर लगा जैसे अभी अभी तैयार हुई हो ,वो एक मोटी सी आंटी टाइप की महिला थी ,वो भी मेरे पास से गुजरी और लिफ्ट तक आयी लेकिन हर्ष से विपरीत वो मुझे देख कर एक स्माइल पास कर गई,ये एक औपचारिक सी मुस्कान थी जो की हम किसी अनजाने व्यक्ति को देखकर दिया करते है…
वो बड़े ही आराम में थी..
“उसके लिफ्ट में घुसते तक मैं चुप थी था ..
“ये हो क्या रहा है यंहा पर “
काजल अब भी लाइन में थी “
“कुछ भी तो नही “
“तुम मुझसे छुपा रही हो …”मैं थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए उससे बोला ,तब तक वो महिला नीचे जाकर काजल के पास पहुच चुकी थी,उसने काजल को गले से लगाया थोड़ी बात की और चली गई …
“ओह तो जो मैं समझ रहा हु क्या वही हो रहा है यंहा पर “
मैंने जैसे कुछ समझ गया था
“ये आईडिया मेरा है ,इसे अपने होटल में ट्राय करने की सोचना भी मत समझे….”
काजल की बात से मेरे चहरे में एक मुस्कान खिल गई,
“क्या करू यार होटल इतने घाटे में चल रहा है की कुछ तो करना ही पड़ेगा ना,मैं नही चाहती की ये होटल बंद हो जाए और हमारे हाथ सिर्फ कुछ भी नही आये ,कुछ फायदा हो तभी तो खान इसे चालू रखेगा “
मैं जोरो से हंसा
“तो हर्ष तेरे होटल का जिगिलो है ,दिखने में तो मासूम सा लगता है”मैं फिर से हंसा
“दिखने में मैं भी मासूम ही लगती हु ,वो रश्मि और तुम्हारी प्यारी सी शबनम भी मासूम ही लगती है..”
काजल ने प्यारी सी शबनम में बड़ा जोरो डाला..
“क्यो अब तुम्हे जलन हो रही है “
“क्यो ना हो..लेकिन फिर भी एक तस्सली तो है की वो तुम्हारा ख्याल रख रही है….”
काजल की आवाज में एक प्यार सा आ गया था…
“मुझे आज रश्मि और खान की मीटिंग को लेकर डर लग रहा है…”
मैंने अपनी चिंता जाहिर की
“कोई बात नही मैं जानती हु वो यंहा क्यो आयी है ,वो खान के कान मेरे खिलाफ भरना चाहती है,लेकिन फिक्र मत करो ,मर्दो की कमजोरी का मुझे पता है...और मुझे नही लगता की जो मैं खान को दे सकती हु वो रश्मि उसे देगी..आखिर वो ससुर है उसका ..”
काजल का कमीना पन फिर से बाहर आ रहा था..
“क्या दे रही हो तुम खान को “
मैं थोड़ा सीरियस था
“इन बातो से दूर ही रहो क्यो खुद को जलाना चाहते हो …”
काजल ने ठंडे आवाज में कहा..
“चलो शायद उनकी मीटिंग खत्म हो गई होगी “
मैं फोन रखकर नीचे पहुचा,थोड़ी ही देर में रश्मि और खान दोनो ही बाहर आ गए थे..
“मैंने जो बोला है उसपर गौर कीजियेगा पापा”
रश्मि खान को पापा बोल रही थी यानी अभी भी उसके दिल में रिश्तों की मर्यादा बची थी,मतलब की रश्मि ने खान को वो नही दिया है जो काजल उसे देती है ..
“हा बेटा तुम चिंता ना करो ,मैं ध्यान रखूंगा,और तुम्हारी बात अजीम तक भी पहुचा दूंगा “
हम दोनो ही कार से जा रहे थे जिसे रश्मि ही चला रही थी ,
“क्या बात हुई तुम लोगो में “
मैं ऐसे तो पूछना नही चाहता था लेकिन थोड़ी हिम्मत करने पूछ ही लिया ,उसने मुझे देखकर बुरा सा मुह बनाया ..
“वो साली रंडी उनके दिमाग में सवार है ...जब सब बिक जायेगा तब समझ आएगा उन्हें “
वो किस रंडी की बात कर रहे थे वो तो मैं समझ गया था…
मैंने अपना चहरा बुरा सा बना लिया ,ऐसे उसकी बात पर मुझे दुख तो नही हुआ लेकिन ये करना जरूरी था,क्यो???
ये बाद में पता चल जाएगा ..
“अब तुम क्यो दुखी हो रहे हो “
“कुछ नही “मैंने ऐसे कहा जैसे काजल को रंडी बोलने से मुझे बहुत ही दुख पहुचा है ..
“क्यो काजल को रंडी बोली इसलिए ,तुम्हारी बहन की सहेली है ना वो …..उससे अपनी बहनों को दूर ही रखा करो पता नही कब उन्हें धंधे में ले आये “
रश्मि ने बड़े ही रूखे स्वर में कहा लेकिन मेरे मन में आया की अभी इसकी अतड़िया निकाल कर निचोड़ दु …
“तुम भी तो खान को बर्बाद करना चाहती थी “
मैंने रश्मि के जले में नमक डालना चाहता था जैसा की उसने मेरे में डाला था..
“हा अब भी चाहती हु ,लेकिन इसका फायदा मुझे होना चाहिए उस रांड को नही “
रश्मि ने साफ साफ लफ्जो में अपनी बात कह दी थी …
“तो जो वो खान को दे रही हो वो तुम भी दे दो ,आखिर ऐसा क्या है उस मैनेजर में जो खान साहब उनके दीवाने बने फिर रहे है ,जबकि उनका होटल आज इतने घाटे में चल रहा है….”
मैंने अपना दाव खेल दिया ,जिससे रश्मि बुरी तरह से झल्ला गई ,उसने कार को जोरो से ब्रेक मारा ..
“आउट “
“वाट “
“आई सेस आउट ,निकलो यंहा से “
मेरी फट गई मैं इस तरह के रिएक्शन की तो उम्मीद नही किया था ..
“बट वाय “
“जस्ट आउट ,मैं तुमसे बहस नही करना चाहती और मेरा मूड बहुत ही खराब है मुझे समझने की कोशिस मत करो वरना...मैं अपना आपा खो दूंगी “
मैं चुपचाप ही बाहर निकल गया उसने दरवाजा बन्द किया और तेजी से कार लेकर चली गई …….
वैसे उसकी इस हरकत से मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई,काजल का प्लान सचमे काम कर रहा था,लेकिनमैंने आस पास नजर दौड़ाई कोई ऑटो नही दिखा,मुझे ऐसी जगह पर ये बात नही कहनी थी ...
अब साला अब इतने दूर मैं जाऊंगा कैसे ?????????
______________________________
अध्याय 19
मैं करीब रात 9 बजे घर आया,मुझे 8 बजे ही काजल का मेसेज मिल गया था की वो आज घर नही आ रही है,,,आजकल काजल मुझे पहले से ही मेसेज कर देती है,उसने मुझसे बहुत सी बाते छुपानी छोड़ दी है,लेकिन जो वो छुपती है मैंने उसे पूछना भी बंद कर दिया,मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट अब ये सब जल्द से जल्द खत्म कर एक आरामदायक जिंदगी जीना था,मैं एक नार्मल सा इंसान हु जो की जिंदगी की ज्यादा उथल पुथल को सह नही पाता,मुझे शांति चाहिए थी,मुझे एक आम जीवन जीना था ,लेकिन अब वो पूरी तरह से संभव नही रहा,
मैं उन मर्दो में नही हु जो की अपनी बीबी को अपना गुलाम समझते है और किसी और मर्द से साथ कल्पना भी नही कर सकते ,ना मैं ऐसे मर्दो में शामिल हु जो की अपनी बीबी के गुलाम है और उसे किसी दूसरे मर्दो के साथ देखकर उत्तेजित हो जाते है जिसे हम CUCKOLD कहते है...मैं दोनो ही तरह का नही हु ना ही दोनो के बीच का ही हु …
मैं अपनी बीबी से अपने परिवार से बेपनाह प्यार करता हु ,लेकिन मैं उनका गुलाम नही हु,मैं अपनी बीबी या बहनों को किसी मर्द के साथ नही देख सकता लेकिन अगर वो मजबूर हो या अपनी इच्छा से किसी कारण से ये कर रहे हो तो मैं उनके विरोध में भी नही जा सकता…..शायद इसी लिए मैं इतना परेशान था,अगर मैं दोनो में से एक होता तो मेरे लिए ये सब सहन करना ज्यादा मुश्किल नही था,मैं या तो काजल को मार चुका होता या तलाक दे चुका होता,या उसकी चुदाई देख कर हिला रहा होता,लेकिन मैं इनमें से कुछ भी नही कर रहा था……
घर में मेरा स्वागत हमेशा की तरह मेरी बहनों ने बड़े प्यार से किया ,जब उन्हें पता चला की आज काजल नही आ रही है तो दोनो के चहरे खिल गए …
“मतलब आज हम आपके साथ सोएंगे..”मेरी प्यारी पूर्वी ने बड़े चहक के कहा
“तुम मेरे साथ क्यो मैं तुम्हारे साथ सो जाता हु “
“मतलब “पूर्वी को मेरी बात समझ नही आयी थी
“मलतब मेरी बहना रानी की मैं तुम्हारे कमरे में सो जाता हु “
मेरे इस बात से दोनो ने एक दूसरे को देखा,जैसे की कोई शॉक लग गया हो ..
“नही नही भइया हम आपके ही कमरे में सोएंगे “निशा ने जल्दी से कहा,उसके चहरे में एक डर साफ झलक रहा था,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई थी,क्योकि काजल ने मुझे कुछ ऐसा पहले ही बता दिया था जिसके कारण ये मुझे अपने कमरे से दूर ही रखना चाह रही थी ,लेकिन काजल ने ये भी कहा था की अगर मैं सब कुछ ठीक करना चाहता हु तो मुझे अपने इमोशन पर काबू करना होगा ,मैंने कुछ दिनों की प्रेक्टिस से अपने चहरे का भाव बदलने और उसे छुपाने की थोड़ी खूबी तो हासिल कर ही ली थी ,जिसका उपयोग मैं आज रश्मि के सामने करके आया था,
“क्या हुआ “मैंने जोर दिया
“वो क्या है भइया हमारे कमरे का बिस्तर बहुत छोटा है 3 लोग कैसे आएंगे,,और समान भी इधर उधर पड़ा हुआ है आप देखोगे तो डाटोगे …”
पूर्वी ने जल्दी जल्दी से कहा ,
वाह रे मेरी प्यारी बहना ,कितने सफाई से झूट बोल रहे हो ,उनके इस झूट में भी मुझे बड़ा प्यार आया और आंखों में आंसू ही आ जाते लेकिन मैंने खुद को सम्हाल लिया,मेरी मासूम सी पूर्वी को ना जाने क्या क्या सहना पड़ रहा था ,वो किसी को बचाने के लिए कितने आराम से झूट बोल रही थी ,लेकिन उसकी आंखे ……..
वो अभी भी उतनी ही मासूम थी और उसकी आंखों अब भी सच बोल रही थी ,उसकी आंखों में डर और झूट से आयी हुई ग्लानि साफ साफ झलक रही थी ,लेकिन मैंने उन्हें कुछ भी नही कहा…
“ओके चलो ठीक है तैयार होकर मेरे कमरे में आ जाओ “
“जी भइया दोनो ही एक साथ खड़े हो गए “
मैं अपने कमरे में सोया हुआ आने वाले भविष्य की संभावनाएं तलाश रहा था की दोनो परिया मेरे कमरे में दाखिल हुई..
दोनो के ऊपर काजल का प्रभाव साफ साफ झलक रहा था ,उनके ये कपड़े काजल की ही पसंद के थे ,लेकिन काजल इन्हें मुझे या पता नही किसे किसे उत्तेजित करने के लिए पहना करती थी ,वो कपड़े मेरी बहने मेरे साथ सोने के लिए ही पहन कर आ जाती थी …
मुझे इस बात पर हँसी भी आयी और उनके हुस्न को देखकर मैं उनपर मोहित भी हो गया,खासकर पूर्वी के लिए मेरे दिल में बहुत ही प्यार उमड़ जाता था,नई नई कली की तरह उनखिली हुई मेरी पूर्वी मासूमियत और चंचलता से भरी हुई थी,और मेरे लिए उसका असीम प्यार उसकी आंखों से ही झलक जाता था,वही निशा उसके अपेक्षा जिस्म से कही ज्यादा भरी हुई थी ,और किसी भी मर्द की पहली पसंद निशा ही होती लेकिन निशा में वो मासूमियत नही थी जो की पूर्वी के हर एक अदा से झलकती थी..
हमेशा की तरह ही दोनो मेरे आजु बाजू आकर लेट गए और पूर्वी ने मुझे अपनी बांहो में कस लिया ,उसकी कोमलता और कोमल स्तन और उसका चहरा मेरे सीने में आ धसे ..
वही निशा का चहरा मेरे चहरे के पास ही था वो मुझे ही देख रही थी,वो मुझसे ऐसे सटी हुई थी की उसके स्तन मेरे कोहनियों से लग रहे थे,मैं भी उसपर जोर दे देता ,वो अपने बांहो को मेरे गले से लपेट ली ,वो मेरे ऊपर आना चाहती ही लेकिन वँहा पहले से ही पूर्वी का राज था,उसका मेरे ऊपर अधिकार पूर्वी के बाद ही आता था...वो इंतजार करने लगी की कब पूर्वी नींद में चली जाय,और उसे उसके कमरे में छोड़ कर आया जाय..
उसके चहरे में पूर्वी के लिए थोड़े गुस्से का भाव आ गया ,जिसे मैं आसानी से पढ़ सकता था,जिससे मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई..
“वो छोटी है रे “
मैंने उसके कानो में कहा
“तो क्या हमेशा आपके ऊपर चढ़ जाती है ,मुझे जगह ही नही मिलता “
उसने रूठने वाले स्वर में कहा ,
“तो क्या हुआ बेचारी जल्दी सो भी तो जाती है,फिर तो तू ही पूरी रात मेरे ऊपर चढ़े रहना “
मुझे अपनी ही बात पर हँसी आ गई क्योकि हम ये क्या बोल रहे थे..
“हम्म इसीलिए तो इसे कुछ नही बोलती “निशा ने मेरे गालो में एक किस करते हुए कहा …..
ना जाने ऐसे ही मेरी नींद कब लग गई ,शायद मैं आज इतना चला था की थक चुका था,नींद टूटी किसी कोमल होठो के अहसास से जो की मेरे होठो को छू रहा था,उस होठ का गीलापन मेरे होठो से मिल रहा था,मैंने हल्के से ही आंखे खोली,ये निशा थी जो मुझे सोता हुआ पाकर मेरे होठो को हल्के हल्के चूम रही थी ,उसने पूर्वी को उसके कमरे में रुला दिया था,मैं थोड़ी देर तक ऐसे ही रहा लेकिन फिर मैंने अपना हाथ उसके कमर से लपेट लिया..
वो ऐसे हड़बड़ाई जैसे की उसकी चोरी पकड़ी गई हो
“क्या हुआ मेरी जान ,क्या कर रही हो “
मैंने निशा को छेड़ा
“सॉरी भइया “वो झेप सी गई
मैंने अपना हाथ उसके कमर के नीचे रखा मुझे उसके सुडौल गोल गोल नितम्भो का आभास हो रहा था,उसकी नाइटी थी ही इतनी झीनी सी की मुझे उसकी पेंटी के इलास्टिक तक का पता चल रहा था ,मेरे इस हरकत से वो भी थोड़ी मचली,उसने मुझसे दूर हटने की बजाय और मुझसे चिपक गई………
उसका सर मेरे गालो के पास था,जबकि उसकी कमर मेरे कमर के ऊपर, उसके बड़े मुलायम वक्ष मेरे सीने से दबे हुए थे, उसके शरीर की गर्मी मेरे बदन में घुलने लगी थी….
मैं बिना किसी रोक टोक के उसके नितम्भो को सहला रहा था, वो हल्की आई आहों के साथ मुझसे और सटने की कोसिस कर रही थी,या शायद मेरे सीने से अपने वक्षो को सहला रही थी, उसकी इस हरकत से मेरे लिंग में भी एक हरकत आ गई,
मैं अपनी सगी छोटी बहन के साथ था, और मेरा लिंग अकड़कर उसके जांघो के बीच रगड़ खा रहा था…
ना जमाने की ना ही इस पवित्र रिश्ते की कोई भी परवाह मेरे मन मे बची थी, अब हम दोनो बस जिस्म रह गए थे,एक लड़की और एक लड़के का जिस्म,जो मिलन को बेकाबू होने लगे थे…
मेरे हाथो का दबाव उसके नितम्भोपर और भी जोरो से बढ़ता जा रहा था ,मैं उसे मसल ही रहा था, वो भी बेकाबू हो रही थी, उसकी सांस उखड़ने लगी थी, वो अपने गालो को मेरे दाढ़ी के कारण थोड़े खुरदुरे गालो में रगड़ने लगी थी,शायद उससे उसे कोई दर्द सा उठा और वो अपने चहरे को मेरे चेहरे के पास लायी…
उसकी आंखें थोड़ी बंद सी हो गई थी,बिखरे बाल ,अध खुली आंखे और माथे में आया पसीना ...वो पूरी तरह से वासना के गिरफ्त में मतवाली हो चुकी थी..
हमारी आंखे मिली और साथ ही होठ भी मिल गए…
इसबार मैंने उन्हें चूसने में कोई कमी नहीं दिखाई,जब मेरे और निशा के होठो ने एक दूजे के थूक से खुद को मिला लिया था,और उस गीलेपन से उठाने वाले आनन्द में हम दोनो ही मगन हो गए थे ठीक उसी समय निशा के जांघो के बीच मेरा तना हुआ लिंग भरपूर मालिस कर रहा था,और उसकी नाइटी उसके कमर से ऊपर हो चुकी थी जिससे मेरे हाथ सीधे उसके नितम्भो को उसकी पेंटी के ऊपर से ही पूरी तरह से महसूस कर पा रहे थे,वही उसकी पैंटी के आगे के भाग जो अपने में उसकी कोमल योनि को छुपाए हुए थे,वो गिला होकर मेरे निकट को सामने से गीला कर रहा था……
हवस….
हवस ,वासना ,काम ये आग ही ऐसी है जो सभी मर्यादाओ और रिस्तो को भुला देती है,निशा मेरी छोटी बहन ,वही निशा जिसे मैंने बचपन से खिलाया था,अपने बांहो में उठाया था,एक बाप के रूप में जिसकी मैं परवरिश कर रहा था,जो मुझे अपना भगवान मानती थी,जिसके लिए मैं ही सबकुछ था,वही निशा मेरे नीचे थी और मैं एक मर्द बना हुआ उसके स्त्री के जिस्म को मसले जा रहा था,और वो भी इसके आनद में डूब रही थी ,मर्यादाओ को बचाने एक दीवार हमारे बीच थी जो कपड़ो के रूप में थी,हमारे अंतःवस्त्रों के रुप में थी,मेरे हाथ अब उनतक भी पहुचने लगे थे,मैं उस इलास्टिक को अपने उंगलियों से फंसाकर उसे नीचे करने की कोशिस कर रहा था ,वो भी उसके कमर को छोड़कर नीचे होने लगे थे,उसके नितम्भ अब पूरी तरह से आजाद थे,उसकी कोमल गोलाइया मेरे हाथो में सामने लगे थे,मैं उन्हें उसे भी नीचे कर रहा था,जिससे उसके सामने का भाग भी नंगा होने लगा,उसके योनि के बालो का अहसास मुझे होने लगा था,
“भइया ऊह “वो मचलने लगी शायद उसे भी पता था की इस तूफान का क्या अंत होने वाला है,सभी मर्यादाओ का अंत,और दो नंगे जिस्मो का मिलन जो की सिर्फ जिस्म होंगे ,बिना रिस्तो के किसी बंधन के,उसकी पेंटी कमर से उतर कर जांघो तक पहुच गई थी और उसने थोड़ी मेहनत करके उसे अपने पैरो से नीचे उतार दिया,लेकिन अभी भी मैं निकर में ही था,जिसे उतारने की शुरूवार निशा ने ही की,वो मेरे निकर के दोनो छोरो को पकड़कर उसे नीचे खिंचने लगी और आहिस्ता आहिस्ता मेरे जिस्म में बस एक अंडरवियर ही बच गया था,जिसमे से मेरा कड़ा लिंग उसके नंगे यानी में रगड़ खा रहा था और उसे और भी उत्तेजित कर रहा था,मेरे अंडरवियर का आगे का भाग उसके कामरस और मेरे प्रिकम से बुरी तरह से गीला हो चुका था….
इधर हमारे होठो में एक दूसरे के होठो से मानो जंग ही छेड़ दी थी ,जैसे जैसे हमारे कपड़े उतरे थे वैसे वैसे ही हम और उत्तेजित होकर एक दूसरे पर आक्रामक रूप से टूट पड़े थे,बस एक आखरी दीवार हमारे सामने थी जिसका भी कोई भरोषा नही की वो कब हट जाए,..
अभी तक मेरे ऊपर चढ़ी हुई निशा को मैंने अपने नीचे खिंच लिया अब मैं उसके साथ मनमानी करने को पूरी तरह से आजाद था वही उसने भी मुझे अपना सब कुछ सौप दिया था,वो पूरी तरह से समर्पण की स्तिथि में आ गई थी ,वो अपने हाथो को मुझसे लपेटे हुए बस आहे ले रही थी ,मैं अपने अंडरवियर की पतली दीवार के बावजूद भी उसमे घुसने को जोर लगा रहा था,जिससे मेरा लिंग के हल्के से कपड़े की दीवार के माध्यम से ही सही लेकिन उसके योनि को फांको को बुरी तरह से रगड़ रहा था,गीलापन बढ़ने लगा था और मुझसे और सहन नही हो रहा था वही हाल शायद निशा का भी रहा हो ,हम अपने वासना के चरम पर थे,निशा ने अपना हाथ मेरे अंडरवियर के इलास्टिक पर रख दिया था,उसकी उंगलिया उसमे फसने लगी थी वो मेरे शरीर में बस कुछ ही देर का मेहमान था और उसके उतरते ही जो होने वाला था उससे हम दोनो ही बाकिफ थे………
लेकिन शायद कुदरत को कुछ और ही मंजूर था ,इससे पहले की निशा अपने उंगलियों के माध्यम से मेरे आखिरी कपड़े को उतार फेके हमे गेट के खुलने की आवाज सुनाई दी ,शायद वो हाल का गेट था,यानी काजल के आने का संकेत...हम दोनो की ही सांसे बेकाबू थी ,
“मुझे भाभी पर इतना गुस्सा कभी नही आया,रोज तो 5-6 बजे ही आती है आज 4 बजे ही आ गई”निशा ने बड़े ही गुस्से में कहा और तुरंत ही अपने कपड़ो को ठीक करने लगी मैं भी जल्दी से अपने निक्कर को पहन कर सो गया,निशा जल्दी ही अपनी पेंटी को ढ़ंढने लगी और उसे पहन कर मुझसे लिपट कर सोने की एक्टिंग करने लगी...ये उस समय हुआ जब काजल ने हमारे कमरे का गेट खोला ,हम दोनो की ही सांसे अब भी तेज चल रही थी ,काजल ने कमरे की लाइट नही जलाई और अपना बेग रखकर सीधे ही बाथरूम में चली गई ,बाथरूम के प्रकाश से हमारा कमरा भी रौशन हो गया था,
“अरे भाभी आप आ गई ,मैं अपने कमरे में जाती हु “
निशा आंखों को मलते हुए बोली और सीधे अपने कमरे में चली गई,लेकिन मैं…...मुझे तो सोने की ही एक्टिंग करनी थी…..
अध्याय 20
निशा के जाने के कुछ देर बाद ही काजल फ्रेश होकर बाहर आयी उसके शरीर से नहाने के बाद भी उसके परफ्यूम की खुसबू मेरे नाक में आ रही थी ,जिस खुसबू का मैं दीवाना था…
मैं पहले से ही बहुत ही उत्तेजित था लेकिन फिर भी मुझे सोने की एक्टिंग तो करनी ही थी,
मैं सोया ही रहा ,काजल मेरे पास आयी और मेरे गालो में एक किस करने सोने लगी ,......मेरी नीद तो गायब थी ,जब निशा चली गई और मेरा लिंग थोड़ा ठंडा हुआ तब मैंने सोचा की आखिर मैं कर क्या रहा था,ये बात सोचते ही मेरा मन में ग्लानि के भाव आ गए की मैं अपनी ही बहन के साथ …???
मैं सच में गिरा हुआ आदमी हु …..
जब तक लिंग में अकड़ था मेरे अंदर हवस की आग थी तब तो मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था,शायद इसी लिए हवस ,काम वासना,क्रोध,लोभ,मोह ,मद,को आग कहा गया है क्योकि सबसे पहले सोचने समझने की क्षमता को ही जला देता है……
मैं जब उठा तो काजल नींद में थी मैंने उसके गालो में किस किया और बाथरूम की तरफ बढ़ा,मेरी नजर उसके पर्स पर चली गई ,ना जाने क्यो कोई आकर्षण मुझे उसतक ले गया जब मैंने अंदर देखा तो एक लाल रंग की पेंटी दिखाई दी,मैंने उसे छुवा नही लेकिन मेरा दिमाग फिर से खराब हो गया,काजल रात भर किसी से बिना पैसों के चुद कर आयी थी इसका मलतब था की वो शायद खान होगा,मादरचोद खान,अपने बेटी की उम्र की लड़की को ठोक रहा था,..
मैं इस बात से थोड़ा अपसेट भी था क्योकि काजल का इस तरह खान को सबकुछ देना और इधर मेरी ही बहन के साथ मेरे संबंधों ने मुझे थोड़ा झकझोर दिया था,मुझे पता था की मैं दोनो का ही कुछ नही कर सकता ,आज संडे था उर जैसे सभी आज के दिन छुटिया मानते है हमारे लिए आज सबसे ज्यादा बिजी दिन होता है,हमारा रेस्टारेंट और बार आज लगभग फूल होता है,मैं जल्दी से ही होटल को निकल गया..
होटल पहुचते ही मुझे सूचना दी गई की रश्मि ने मुझे याद किया है ,मेरा मूड और भी खराब हो गया क्योकि ना जाने अब इसे क्या हो गया था,ऐसे भी जो कल हुआ था मुझे लगा की वो अब भी गुस्से में होगी,मझे बताया गया की वो स्विमिंग पुल में थी ……
मैं जब स्विमिंग पुल पर पहुचा तो रश्मि एक बिकिनी में दिखी और मुझे देखकर मुझे स्माइल पास की ,मुझे थोड़ी राहत हुई क्योकि वो मुझसे अब गुस्सा नही है,मुझे देखकर वो पुल से निकली...
उसे देखकर मेरा मुह थोड़ा सा खुल गया था लेकिन उसे मैंने जल्द ही बंद कर लिया .वो मुस्कुराती हुई मेरे पास आयी और मुझे बैठने को कहा ,जबकि वो एक चेयर में सो गई जिससे उसके सभी मूल्यवान समान मेरे सामने खुलकर आने लगे थे..
“कल के लिए सॉरी देव मुझे ऐसा नही करना चाहिए था..”
वो फिर से मुस्कुराई
“मैं तो आपका नॉकर हु मेडम आपके पास नॉकरी करता हु ,आप की मर्जी आप जो भी करो मेरे साथ “
उसने मुझे आश्चर्य से देखा जबकि मैं अपना चहरा उदास बनाये हुए था,इन दिनों में मैं एक अच्छा एक्टर तो बन ही गया था,बाहर से मैं उदास दिख रहा था लेकिन अदंर से मेरा लिंग अकड़ने लगा था,शायद कल हुए हादसे के बाद मुझे हिला लेना था,मैं अपने को असंतुष्ट महसूस कर रहा था जिसका असर मेरे लिंग में साफ साफ महसूस हो रहा था…..
रश्मि के चहरे में एक मुस्कान आ गई ..
“अच्छा इतना गुस्सा ,रश्मि से मैं मेडम हो गई और मैनेजर से तुम मेरे नॉकर हो गए “
“जो सही है उसे बदला तो नही जा सकता ना”
“ओहो ..चलो तुम्हारा मूड ठीक करने लिये मैं तुम्हे एक इनाम देती हु “
मैं चौक कर उसे देखने लगा ,कही वो खुद मेरे साथ तो नही सोने वाली..
मैं मन ही मन में खुस हो रहा था…
“असल में तुम्हारी बात के बारे में मैंने बहुत सोचा और मुझे तुम्हारा आईडिया भी पसंद आया ,जो काजल उन्हें दे रही है वो तो मैं भी दे सकती हु “
वो मुस्कुराने लगी लेकिन मेरी फट गई,क्या ये सच में अपने ससुर के साथ …….क्या पता की पैसा लोगो से क्या क्या करवा सकता है…
“लेकिन अभी तुम्हारे इनाम की बात,आज तुम्हारी छुट्टी “
उसने ऐसे कहा जैसे किसी बंधवा मजदूर को एक दिन की छुट्टी मिल गई हो ,साला एक दिन की छुट्टी से मेरा क्या होने वाला है,ऐसे भी मैं घर में रखकर भी क्या उखाड़ लेता ..
“नही मेडम रहने दीजिये ,मेरे पास ऐसे भी घर में कोई काम नही है और आज संडे है आज यंहा पर भीड़ भी ज्यादा होगी “
वो मुझे देख कर मुस्कुराई ..
“अभी इनाम पूरा नही हुआ है ,आज तुम मैनेजर के काम से छुट्टी ले रहे हो लेकिन तुम्हे आज शबनम के साथ काम करना है ,वो एक विशेष पार्टी का आयोजन कर रही है,उसके काम को एक महीना पूरा हो गया है,यानी हमारा पहला कस्टमर एक महीने पहले आया था,तब से लेकर अभी तक हमने कई कस्टमर की सेवा की है और लाखो कमाए है,तो शबनम का प्लान है की हमारे खास और मालदार कस्टमर को एक ट्रीट दी जाए,आज उन्हें जिसे मन करे उसे फ्री में करने दिया जाय...तो शाम से ही कस्टमर आने शुरु हो जाएंगे ,और रात से कार्यकम शुरू हो जाएगा,आज की सभी तैयारी की जिम्मेदारी तुम्हारे और शबनम के कंधों पर है...तो इसलिए यंहा के काम से तुम्हारी छुट्टी …और हा ये काम ऐसे होना चाहिए की यंहा के किसी भी कस्टमर को इसकी भनक ना लगे,बहुत ही गुप्त रूप से बाकी सब शबनम समझा देगी ….”
ये क्या बात हुई साला एक दिन की छुट्टी बोलकर मेरी गांड ही ले ली ..इतना काम पकड़ा दिया ..
“क्या हूं क्या सोच रहे हो”
वो अपने शरीर से कोई लिकविड मल रही थी ..
“इसमें इनाम जैसी क्या बात है “
मैंने चहरा उतरते हुए कहा,वो खिलखिला कर हँसी ..
“अरे शरीफ आदमी ,आज तुम्हारे लिए भी सभी फ्री है ,जाओ और इन्जॉय करो “
मैं इस लिंग का क्या करू जो बात बात पर इतना अकड़ जाता है ,साला उसकी बात को सुनकर ही उछाल मारने लगा,ऐसे भी उसे देखकर तो तना हुआ ही था..
मैं शबनम के पास पहुचा ,
“तो तैयार हो,”
“ह्म्म्म क्या क्या तैयारी करनी है ..”
“पहले तो मुझे ये समझ नही आ रहा है की कहा तैयारी करनी है,हम होटल के किसी स्टाफ को तो इसमें इन्वॉल्व नही कर सकते तो क्या करे और हमे बड़ी जगह चाहिए “
“हम्म वो सब मेरा काम तुम लड़कियों को तैयार करो कितनी लडकिया होंगी “
मैंने सबकुछ शबनम के हाथो में ही सौप दिया था,मुझे ये भी पता था की हमारे होटल में कितनी लडकिया है जो ये काम करती है और वो कौन कौन है..
“15 लडकिया होंगी और 20 कस्टमर “
मैं चौक गया ,
“यार ये तो बड़ी नाइंसाफी होगी ,20 लोगो के लिए सिर्फ 15 लडकिया “
वो जोरो से हँसी
“अरे पागल एक एक लड़की 5-5 का एक दिन में ले लेंगी तुम इसकी टेंशन मत लो ,तुम मेरे हिसाब से अरेंजमेंट करके दो “
“ओके तो कांफ्रेंस हाल में ये काम हो जाएगा “
“”अच्छा तो होटल स्टाफ का क्या करोगे”
मैं सोच में पड़ गया ,
“यंहा करना सही नही होगा,कपूर साहब का एक फार्म हाउस है वँहा पर ही सब कार्यक्रम होगा हमे चाबी मिल गई है ,उसे सजवाने का काम तुम्हारा ,वँहा एक हॉल है जिसे पब की तरह तैयार करो ,और डांस फ्लोर भी बिछावा दो ,एक स्विमिंग पुल भी है उसे साफ करवा दिया गया है,शराब और खाने के इंतजाम की जिम्मेदारी तुम्हारी, लड़कियों को तैयार करने और मेहमानों का ख्याल रखना मेरा काम है “
“यार इतना होगा तो मजदूरों की जरूरत तो पड़ेगी ही ना “
“हम्म इसलिए सभी काम शाम तक हो जाना चाहिए..फिर मजदूरों को रुखसत करो वँहा से ,रात के 9 बजे से ही कार्यक्रम शुरू हो जाना चाहिए “
साला ये संडे तो मुझे महंगा पड़ गया इतना काम ,मैं चाबी लेकर सीधे अपने कांटेक्ट से बात करने लगा,और लोगो को उनका काम समझने लगा ….
रात की तैयारी हो चुकी थी ,हाल किसी पब की तरह लग रहा था,जंहा हल्की हल्की ही रोशनी थी ,आज यंहा हवस का नंगा नाच होने वाला था,मैंने सभी मजदूरों और करगिरो को वँहा से भेज दिया था,खाना और शराब लडकिया ही सर्व करने वाली थी ,,,सब कुछ जमा दिया गया था और मैं अपने काम से संतुष्ट था,जैसा शबनम ने मुझे सजाने को कहा था सभी कुछ वैसा ही था,शाम होते ही शबनम भी आ चुकी थी और सभी लडकिया भी ,....
“हम्म गुड वर्क देव इसीलिए रश्मि तुम्हे इतना पसंद करती है ,तुम सच में एक अच्छे मैनेजर हो “
शबनम ने सब अरेंजमेंट को देखते हुए कहा “
“थैक्स यार लेकिन साला सब बहुत ही थकाने वाला था “
मैं सचमे बहुत ही थक गया था..
“तो तुम एक पैक मारो और ऊपर के कमरे में आराम करो जब नींद खुले तो नीचे आ जाना...बची हुई थकान यंहा मेरी लडकिया मिटा देंगी “
शबनम की अदा पर तो मैं मरता था साली सच में कातिल थी…...मैं दो पैक पीकर ऊपर के कमरे में आराम करने चला गया ,.......
जब नींद खुली तो 9 बज चुके थे ,मैं हड़बड़ाया..
साला सभी मेहमान आ गए होंगे,मैं उठा ही था की मेरी नजर सामने रखे सोफे पर पड़ी ,एक जोड़ी कपड़े ,जिसमे शर्त पेंट ,टाई और एक कोट था ,और साथ ही एक लेटर वहां पर मुझे मिला …
‘ये ड्रेश कोड है मेहमानों का इसे पहन कर नीचे आना’ये शायद शबनम ही होगी’
मैं उन कपड़ो को पहन कर नीचे गया,माध्यम रोशनी में मध्यम आवाज में गाना चल रहा था,सभी लडकिया सिर्फ ब्रा और पेंटी में ही हाथो में जाम लिए घूम रही थी ,वो फार्महाउस का कमरा किसी सेक्स क्लब की तरह लग रहा था,अजीबोगरीब लोग मेरी ही तरह ड्रेश में वँहा बैठे हुए थे,जिनमे से अधिकतर की उम्र 50 के ऊपर की थी ,मुझे उनके सामने जाने में शर्म आ रही थी ,कुछ लडकिया कस्टमर के जांघो में बैठी थी ,और वो लोग उनको हल्के हल्के मसलते हुए अपने जाम का मजा ले रहे थे,एक लड़की बाकायदा कमरे के बीचो बीच पोल डांस कर रही थी जिसे चारो ओर से लोग घेरे हुए मजा ले रहे थे,कोई कुर्सी में बैठा था तो कोई खड़ा हुआ था लेकिन सभी टुन्न थे,मैं बड़ा ही नर्वस सा महसूस कर रहा था,मेरी नजर शबनम पर पड़ी,वो कमरे में एक मात्र लड़की थी जो की पूरे कपड़ो में थी,उसने एक काले रंग का लांग गाउन पहना हुआ था ..वो मुझे देखकर मुस्कुराई और मुझे नीचे आने का इशारा किया,मैं चुपचाप ही उसके बाजू में जाकर खड़ा हो गया ,ऐसे भी किसी का भी ध्यान मेरी ओर नही था,तभी वो पोल डांस खत्म हुआ और सभी तालिया बजाने लगे...एक लड़की आयी और माइक में बोलने लगी …
“आपके सामने पेश हमारे खास मेहमानों के लिए डिज़ाइन किया गया बेले डांस “
सभी फिर के तालिया बजाने लगे,एक लड़की स्टेज में आ गई उसने भी बस अपने ब्रा और पेंटी ही पहने थे ,लेकिन कमर में बड़ी सी करधन लटक रही थी ,वो म्यूज़िक के साथ धीरे धीरे अपनी कमर मटकानी शुरू कर देती है,उसके सेक्सी नितम्भ झूलने लगते है और म्यूज़िक के साथ साथ थिरकने लगते है…….
“ये सब तुम्हारा आईडिया था ,कहा से पकड़ कर लायी हो इनको,सच में अरब की लग रही है “
मैंने शबनम के कानो में कहा जो की मेरे बाजू में ही खड़ी थी ,वो मुझे देखकर मुस्कुराई ..
“अब ये मत कहना की ये तुम्हे चाहिए “
वो हल्के से हँसने लगी ,
“नही मेरे लिए तो तुम ही काफी हो “
मैंने शरारत भरे लहजे में कहा और उसने भी शरारत में मुझे कोहनी मार दिया ..
वो दूध जैसे गोरी ,लंबी सी लड़की ,अपने बड़े बड़े चूतड़ों को बड़ी ही खूबसूरती से हिला रही थी ,उसकी ये अदा देखकर वँहा बैठे लोग बड़ी ही हवस की निगाह से उसे घूर रहे थे,वही जिनके गोद में लडकिया बैठी थी वो कभी उनकी जांघो को मसलते हो कभी उनके सीने को ,तो कभी उनके जांघो के बीच हाथो को ले जाते…
“अब समय आ गया है “
शबनम की बात से मेरा ध्यान उसपर गया..
“किसका “
“ये बुड्ढे ऐसे तो कुछ नही कर पाएंगे ,इनके ड्रिंक्स में अब वायग्रा की गोली मिला देते है..
”
मैंने शबनम को आश्चर्य से देखा
“पागल हो गई हो क्या ,इनकी उम्र देखो अगर किसी को हार्टअटैक आ गया तो हम फंस जायेगे “
शबनम मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ..
“10 रुपये वाला मैनफोर्स का टेबलेट नही खिला रही हु इन्हें जो इनके दिल की धड़कने बढ़ जाएगी..फिक्र मत करो अच्छे क़्वालिटी की वायग्रा मंगवाई है इन ठरीकियो के लिए,ये हमे लाखो रुपये देते है तो इनकी सेवा भी अच्छी होनी चाहिए ना,क्या मतलब होगा अगर ये कुछ कर ही नही पाए..और हम इन्हें बता कर देंगे ये “
शबनम ने एक लड़की को इशारा किया और उसे अपने पर्श से निकाल कर कुछ टेबलेट्स दे दिए …
“ये कोई ड्रग्स तो नही है ना “मुझे अब भी चिंता हो रही थी
“नही ये उनके हार्टबीट को कंट्रोल में रखेगा,और स्टेमिना को बड़ा देगा ,कम से कम एक जवान लड़के जितना तो इन्जॉय कर ले ये बुड्ढे “
वो हँसने लगी
“ओह तब तो मुझे भी ले लेना चाहिए “
मैं मुस्कुराया
“अरे यार तुम तो बिना इसके भी इतने देर चल जाते होई तुम्हे क्या जरूरत है इसकी “वो बड़े ही मादक निगाहों से मुझे देख कर मुस्कुराई….
लड़की ने सभी के पास जाकर वो गोलिया उनके ड्रिंक्स में डाल दिए ,थोड़ी देर में ही गोलियो अपना असर दिखाना शुरू कर दिया …
लोग उत्तेजना से लाल हो रहे थे,जो बैठे थे वो भी खड़े हो गए थे और उस लड़की के साथ ही नाचने लगे थे,शराब,शबाब और गोली तीन तीन नशो ने सबको पागल सा बना दिया था,एक सेठ जी ने अपने जेब में हाथ डाला और नोटो की गद्दी निकालकर उस लड़की की ऊपर डालने लगा ,अब लड़की अपने कमर को और भी जोरो से मटकाने लगी,और पिछवाड़े को उस सेठ के मुह में ही ठिका दिया,वो सेठ भी अपनी जीभ से उसके बड़े पिछवाड़े के छेद को चाट रहा था,हवस का नंगा नाच शुरू हो गया था,लोग लड़कियों को जोरो इस मसलने लगे थे,अधिकतर लोग तो बीच में नाच रही लड़की को ही घेरे हुए थे,तभी म्यूजिक चेंज हुआ और डांस सांग्स लगा दिया गया ,सभी मस्त थे कोई दारू उछाल रहा था तो कोई नोट,पूरे कमरे में नोटो की बारिश होने लगी थी,सभी यंहा पर मुफ्त का मजा लेने आये थे लेकिन बिना कोई पैसा लिए भी उनके जेब से पैसे निकाल लिया गया था,मैं मन ही मन में शबनम की तारीफ करने से नही बच पाया,उसने एक लड़की को इशारा किया और वो जाकर नोटो को एक बाल्टी में डालने लगी,क्योकि लोगो के पैरो के नीचे आकर वो खराब हो रहे थे ,साथ ही दारू भी छलकाए जा रहे थे,जिससे नोट खराब होने लगे थे,
एक सज्जन ठरकी ने एक बड़ी ही नवजवान कमसिन सी लड़की को पकड़ रखा था अब वो उसे ही शराब से नहलाने लगे थे,और शराब उसके जिस्म से चाटते ...
वो लड़की भी उनके साथ दे रही थी ,
शबनम मेरे दाहिने ओर खड़ी थी ,हम दोनो ही बहुत पास पास खड़े थे,किसी को भी हमारे ऊपर ध्यान ही नही था,सब खुद में ही इतने मस्त थे ,कही 4-4 लोग एक ही लड़की के जिस्म से खेल रहे थे तो किसी लड़की के पास कोई प्रेमी ही नही था ,वो नोटों को समेट रही थी तो कोई दारू लाकर उन्हें दे रही थी ,रंग चढ़ने लगा था ,लेकिन पार्टी तो अभी शुरू ही हुई थी ..
इन सब को देखकर मेरा भी लिंग जोर मारने लगा,और मेरा हाथ शबनम की मांसल पिछवाड़े में जा टिका…..वो मुझे देखकर मुस्कुराई और थोड़ी सी मेरी ओर खिसक गई ,अब हम दोनो एक दूसरे से बिल्कुल ही सटे हुए थे ,और मेरा हाथ उसके पिछवाड़े को दबा रहा था..उसने अपना सर भी मेरे कंधे पर रख दिया ..
हमारे कुछ ही दूर पर उस बेले डांसर को उन लोगो ने नंगा ही कर दिया था ,वो जमीन में लेटी हुई थी और 5-6 लोग उसे घेरे हुए थे,कोई उसके
ऊपर शराब डाल रहा था तो कोई पैसे ,कोई उसके शरीर से शराब को अपनी जीभ से चाट रहा था तो कोई अपने ग्लास से उसे शराब पिला रहा था,और उसके होठो से खुद पी रहा था,कोई उसके जांघो के बीच अपना मुह लगाए हुए थे तो किसी का हाथ और जीभ उसके बड़े बड़े वक्षो में फिर रहे थे...वो भी मतवाली हो गई थी ,इतने मर्दो का हाथ और शराब का नशा उसके अंदर भी मजा भर रहा था ,वो मचल रही थी लेकिन बड़े ही आहिस्ता आहिस्ता,
मैं उसे देखकर और भी उत्तेजित हो गया था,मेरा लिंग अपने पूरे तनाव में आ चुका था,
“सोचो अगर इस लड़की की जगह काजल होती तो “
शबनम ने मेरे कानो के पास आकर बड़े ही मादक ढंग से कहा ,काजल का नाम सुनकर ही मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा ,तभी एक लड़की जाम का प्याला एक ट्रे में लिए हमारे पास पहुची थी शायद इसे शबनम ने ही बुलाया था,मैं लगातार ही 4 पैक निगल गया,क्योकि मैं उस लड़की में काजल को देख रहा था..
मेरे दिल की धड़कने बड़ी हुई थी ,सांसे तेज थी और मैं जलन के साथ साथ उत्तेजना की तीव्र अनुभूति कर रहा था,और शबनम के पिछवाड़े को अपनी पूरी ताकत से मसल रहा था जिसके कारण वो भी जल्दी जल्दी सांसे ले रही थी ,गर्म तो वो भी हो चुकी थी ,मैंने उसे अपने हाथो से पकड़ कर अपने से और भी सटा लिया और उसके होठो में अपने होठो को दाल कर चूसने लगा..वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी ,
“देखो देव तुम्हारी बीबी को लोग कैसे मसल रहे है”
शबनम की आवाज बहुत ही धीरे हो गई थी और वो सिसकिया ले रही थी ,उसके आवाज में ही इतनी मादकता था की किसी का झड़ जाए ,मैंने उस लड़की को देखा लोग उसे मसलने में लगे हुए थे,उसका पूरा शरीर गीला होकर चमक रहा था,वो गीलापन या तो शराब की थी या लोगो के थूक की ,,लोग उसपर चढ़ने की कोसीसे कर रहे थे लेकिन एक लड़की के उनपर 5 लोग एक साथ तो नही चढ़ सकते ना ..
सभी लोग धीरे धीरे अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिए थे ,एक आदमी अपने पेंट से ही अपना लिंग निकाल कर उसके मुह पर ठिका दिया था जिसे वो जीभ से ही चाट रही थी ,
“देखो देव तुम्हारी बीवी कैसे उसका लंड चाट रही है ,थोड़ी देर में वो उसके मुह के अंदर होगा ..”
शबनम की इस बात से मेरे सामने काजल का चहरा उभर गया..
“ये भी शादी शुदा ही है तुम्हारी काजल की तरह देखो उसके माथे के बीच में हल्का सा लालपन दिख जाएगा जो उसके सिंदूर के कारण है,जिसे उसने अभी अभी धोया था,तुम्हारी काजल भी ऐसे ही सिंदूर को धोकर चुसेगी “
उसकी बात से मेरे अंदर जलन और उत्तेजना की चोट बड़े ही जोरो से पड़ी और मैं उसे और भी पागलो की तरह चूमने लगा ,मेरे दांत उसके होठो में गाड़ने लगे थे और उनसे खून भी आने लगा था,लेकिन उसे इन बातो से कोई फर्क नही पड़ रहा था क्योकि वो भी अत्यधिक उत्तेजना में थी ..
फिर से मेरी नजर उस लड़की की ओर गई ,उस शख्स का लिंग अब उसके मुह में था और वो उसे पूरे जोश में चूस रही थी वही उसके योनि में एक लिंग उसके अंदर घुसकर सवारी करने लगा था बाकी के लोग भी नंगे हो चुके थे और उसके जिस्म से खेल रहे थे…...अब पूरे कमरे में सिर्फ हम दोनो के ही जिस्म में कपड़ा बचा हुआ था ...मैने हाथो को पीछे ले जाकर शबनम के गाउन का चैन खोल दिया और उसके गाउन को उसके कंधों से नीचे तक सरका दिया उसकी तनी हुई ब्रा मेरे सामने आ गई थी जिसमे से उसके मादक भरे हुए चुचे झांकने लगे थे,मैं आने हाथो से उसे दबाने लगा,शबनम भी मेरे सर को पकड़े हुए अपने होठो में घुसा रही थी ,हम दोनो या तो एक दूसरे के होठो को चूस रहे थे या फिर एक दूसरे के चहरे को गीला कर रहे थे,आग बढ़ने लगी थी ,हमारे अंदर भी और कमरे में मौजूद लोगो के अंदर भी ,लोग जिसे मन करे उसे पकड़ कर अपना लिंग उनके मुह में या योनि में डाल रहे थे,,एक दो लोगो ने तो लड़कियों के पिछवाड़े में भी लिंग घुसा रखा था,,फिर भी कुछ लडकिया ऐसी थी जो अब भी खाली थी और अपने बारी का इंतजार कर रही थी,दो बाल्टियों में पैसे बटोरे जा चुके थे,और सभी ओर बस हवस ही हवस दिखाई दे रही थी ,लड़कियों की चीखने की आवाज से लेकर हल्की हल्की सिसकियों तक ,और मर्दो के गरजने से लेकर फच फच की आवाजो से पूरा कमरा गूंजने लगा था,
मैं भी अपने पूरे शबाब में था एक तरफ काजल का चहरा मेरे दिमाग में घूम रहा था तो दूसरी तरफ शबनम का कोमल जिस्म मेरे हाथो में था,
शबनम भी मेरे कपड़ो को उतारने लगी थी ,और मैंने उसके गाउन को निकाल कर ही फेक दिया ,शबनम ने मुझे रोका और एक लड़की को इशारा किया ,दो लडकिया पास में सटे हुए कमरे में जाकर गड्ढे निकालने लगी,यंहा तो सभी लोग फर्श में ही शुरू हो गए थे,लेकिन इससे किसी को चोट भी आ सकती थी वो गड्ढे लगाने लगी,मैं फिर से शबनम को पकड़ने को हुआ लेकिन उसे मुझे झडक दिया ..
“पहले गड्ढे लगा देते है,”मेरा दिमाग तो खराब हुआ लेकिन मैं जल्दी से उस कमरे की ओर भगा ,लोग अपने काम क्रिया में व्यस्त थे हम उन्हें बिना डिस्टर्ब किये ही गड्ढे लगा देते और वो फिर उसने आ जाते,10 मिनट में ही सभी मोटे मोटे गद्दों के ऊपर थे सभी गड्ढे एक दूसरे से जुड़कर एक बड़ा सा एरिया तैयार कर दिया था,जंहा जो चाहे वो जिसे चाहे उसके ऊपर चढ़ रहा हटा,मैं भी शबनम को उस गड्ढे में पटक दिया ,हम और उसे चूमने लगा,गड्ढे निकालने वाली 2 लड़कियों ने भी हमे जॉइन कर लिया था,शायद उनसे भी सहन नही हो रहा था,एक मेरे लेट गई और मेरे पीठ को चूमने लगी , दूसरी मेरे बाजू में आ गई थी ..
शबनम मेरे नीचे थी और एक लड़की मेरे ऊपर ये मेरे लिए किसी जन्नत से कम नही था,मैंने जल्दी से ही शबनम के बाकी के कपड़े खोल दिए जबकि लडकिया मेरे कपड़े खोलने में लगी हुई थी ,अब हम दोनो भी नंगे थे …….
पूरे कमरे में किसी के भी जिस्म में कोई कपड़ा नही बचा था,आज मुझे समझ आया था की इसका महत्व क्या है,इसका महत्व था की हम सभी बिल्कुल ही आजाद महसूस कर रहे थे,और सेक्स से भरे हुए हमारे अंदर किसी भी सही गलत की भावना का जन्म नही हो रहा था,हम बस डूबने को आतुर थे,सभी के सभी ……
अब यंहा कोई कस्टमर या कोई काल गर्ल नही रह गई थी ,रह गए थे तो जिस्म ,,,महिला और पुरुषो के जिस्म जो की एक दूसरे में डूब जाने को आतुर थे…
सभी इडेन्टिफिकिशन खत्म हो चुके थे,सभी की आंखे भारी थी और बिना कुछ सोचे समझे बस जो मिला उसे फील कर रहे थे ,एक आदमी ने शबनम को अपनी ओर खिंच लिया और मैं धीरे से मेरे बाजू में सोई हुई लड़की के ऊपर चला गया ,मेरा लिंग शबनम के योनि में धसा लेकिन उसके चहरे के पास किसी दूसरे मर्द का चहरा था,वो उसके होठो में अपने होठो को भरे हुए सिसक रही थी जबकि मैं बाजू में सोई हुई लड़की के ऊपर चढ़ा हुआ उसके होठो को चूम रहा था ,मैं शबनम के ऊपर तिरछा हो गया था,मेरे पैर कही और थे और मेरी कमर बस शबनम के ऊपर थी मैं उसे जोरो से धक्के मार रहा था जबकि मेरा पूरा धड़ उस लड़की के ऊपर था……
थोड़ी देर में ही हम खिसकते हुए एक दूसरे से चिपकने लगे थे,सभी मर्द और लडकिया एक दूसरे में गुथे जा रहे थे,ना जाने मेरे ऊपर कौन था ना जाने मेरे नीचे कौन था,ना जाने मेरा लिंग किसके योनि में या मुह में जा रहा था,ना जाने मेरा मुह किसके मुह और योनि में जा रहा था,समझ कुछ भी नही आ रहा था,पूरे 20 कस्टमर ,15 लडकिया ,मैं और शबनम सभी एक साथ हो चुके थे और एक दूसरे के ऊपर थे ,मुह जंहा जाने लगता चाटने लगते और लिंग जंहा घुस जाता हिलाने लगते,वही हाल सबका था वही हाल मेरा था,वही हाल लड़कियों का भी था…………
ये खेल कब तक चला मुझे पता नही लेकिन आखिरी हालत बेहोशी ही थी ……..
अध्याय 21
जब मेरी आंखे खुली तो कुछ आवाजे मुझे सुनाई दे रही थी ,किसी की सिसकियों की ,मैं उठा कुछ लोग उठ चुके थे और अपना नया कारनामा शुरू कर दिया था,कुछ लोग अभी भी बेसुध ही पड़े थे,,,
आज एक लड़की ने मुझे बहुत आकर्षित किया था वो थी पोलो डांस करने वाली लड़की,मैंने देखा की उसने सिर्फ मुझे ही नही बाकियों को भी आकर्षित किया था,क्योकि अभी भी कुछ लोग उसे कुतिया बनाये हुए उसके पीछे से उसे पेल रहे थे और एक शख्स उसके मुह में पेले जा रहा था,बाकी लोग अपनी बारी के इंतजार में थे…...मुझे फिर के काजल की याद आ गई ,अगर वो यंहा होती तो शायद सभी लोग उसके पीछे ही दीवाने हो जाते,उन सभी लोगो में मैंने एक को पहचान लिया ,ये गुलाबचंद था,हमारा पहला कस्टमर..उसकी भी नजर मुझसे मिली वो अभी उसके मुख का चोदन कर रहा था...उसने एक बड़ी सी मुस्कान मुझे दी ,मैं भी बदले में मुस्कुराया..
शबनम कही दिखाई नही दे रही थी ,मैं फ्रेश होने के लिए एक पैक लगा कर ऊपर वाले कमरे में आ गया,,,बिस्तर में शबनम पसरी हुई थी और उसने कपड़े भी पहने हुए थे,घड़ी देखा तो अभी 2 ही बजे थे मतलब की ये रात भर चलने वाला था,मैं उसके ही बाजू में आकर सो गया,लेकिन नीद ना जाने कहा जा चुकी थी मेरे दिमाग में बस उस औरत की तस्वीर ही घूमे जा रही थी,मैं बेचैन होकर फिर से नीचे चला गया,अभी तक लोग थककर उसे छोड़ चुके थे ,वो मुझे देखते ही मेरे पास आ गई ,
“विकास जी ये लोग फिर के उठ गए तो फिर के मेरे पीछे लग जाएंगे,प्लीज् किसी सेफ जगह पर ले जाइये ,मैं बहुत ही थक चुकी हु”
पहले तो मैं उसके मुह से अपना नाम सुनकर ही दंग रह गया,फिर मुझे याद आया की मैं होटल का मैनेजर हु,और ये पार्टी मैंने ही ऑर्गेनाइज की है,उसे मेरा नाम पता हो तो कोई भी आश्चर्य की बात नही थी,मैंने उसे अपने साथ चलने को कहा,मैं अब अपने पुराने ड्रेश में था और वो पूरी तरह के निर्वस्त्र…
उसने एक सिगरेट का पैकेट उठाया और मेरे साथ ही ऐसे ही चल पड़ी,उसका चहरा बता रहा था की वो बहुत ही थकी हुई है,मैन एक विस्की की बोलत भी अपने साथ रख ली...मैं इस फार्महाउस में कई बार आ चुका था और यंहा के बारे में सब पता था,मैं उसे सबकी नजर से बचाकर ऊपर ले गया,लेकिन उस कमरे में नही जंहा शबनम सोई हुई थी..ये कमरा अधिकतर कपूर साहब अपने खास गेस्ट के लिए यूज़ करते थे,कमरा शानदार था,मैंने उसे बैठा कर उसके लिए एक टेबल लाया ,वो मुझे आश्चर्य से देखने लगी जैसे पूछ रही हो की इसका मैं क्या करू…मैंने उसे याद दिलाया की उसने कोई भी कपड़ा नही पहना हुआ है...वो मुस्कुराने लगी ..
“अब किससे क्या छुपाऊ “वो खिलखिलाकर हँसी मैं भी मुस्कुरा दिया लेकिन उसने मेरा मान रखने के लिए ही सही उसे लपेट लिया था,मैं उसके लिए और अपने लिए ड्रिंक्स बनाकर ले आया ,
“तुम्हे पहले होटल में नही देखा है,,,”
“हा ये काम मैं पार्ट टाइम में करती हु,कभी कभी जब पैसे की जरूरत हो ,या मस्ती का मूड बन जाए “उसने थोड़े मादक अंदाज में कहा ..
“ओह तो आज इनमें से क्या था”मैं भी उससे खुलना चाहता था क्योकि पसंद तो वो मुझे भी बहुत ही आयी थी..
“ह्म्म्म दोनो ही ..असल में जब शबनम ने मुझे प्लान के बारे में बताया था तो मुझे लगा की अच्छे पैसे भी मिल जाएंगे और मजा भी आएगा,लेकिन मुझे क्या पता था की सभी लोग मुझपर ही टूट पड़ेंगे “
वो फिर से खिलखिलाने लगी...किसी प्रोफेशनल प्रॉस्टिट्यूट के साथ ये मेरा पहला मौका था,ऐसे शबनम और काजल भी ये किया करते थे लेकिन वो बहुत ही अलग थे ,
“ऐसे आपका नाम मैं नही पूछ पाया “मैंने हल्के से कहा
“मोहनी “वो धीरे से बोली और मुस्कुराई
“ओह सच में अपने सबका दिल ही मोह लिया था,और ऐसे आप काम क्या करती है,फूल टाइम “
उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा,
“लगता है मैं आपको बहुत ही पसंद आ गई ,”वो खिलखिलाई जिससे मैं थोड़ा सा झेप गया जैसे किसी ने मेरी चोरी ही पकड़ ली हो ….
“मेरे फूल टाइम काम के बारे में ना ही जाने तो बेहतर है ..शायद आप यकीन ना करे “
“आप बताइये तो सही “
मैंने थोड़ा फोर्स किया
“अब रहने भी दीजिये ,मैं बहुत थक गई हु ,एक पैक और मिलेगा मुझे सोना है “
“क्यो नही “
मैंने हम दोनो के लिए नया पैक बनाया और पीकर वँहा से निकल गया ,मैं फिर से शबनम वाले कमरे में आकर सो गया ,इस बार शराब ने थोड़ा असर दिखाया और मेरी नींद लग गई …….
“भइया आप बहुत ही गंदे हो कोई काम समय पर नही करते “
मेरे घर आते ही पूर्वी मुझपर भड़क उठी,
“क्या हुआ मेरी जान “
अभी शाम होने को आया था और मेरी नींद दोपहर में खुली जब तक की सभी मेहमान और लडकिया जा चुकी थी ,शबनम भी मेरे लिए एक लेटर छोड़कर जा चुकी थी जिसमे लिखा था की होटल मत आना,यंहा की साफ सफाई करवा कर घर चले जाना ,मैं बाकी के समय साफ सफाई करवाने में ही निकाल दिया था ,पूरे हाथ पैरो में हैंगओवर वाला दर्द भरा हुआ था ,लेकिन जैसे तैसे मैं सभी काम निपटा कर घर आया ,और पूर्वी मेरे ऊपर चिल्ला पड़ी ..
“क्या हुआ आज मेरे कालेज जाना था आपको और आप इस समय आ रहे हो “
वो मुझे घूरने लगी जैसे की मैंने बहुत बड़ा पाप कर दिया हो ..
मैं तो भूल ही गया था …
“ओह तो निशा के साथ चली जाती “
“भइया हमारे प्रोफेसर ने हमारे पेरेंट्स को बुलाया है ,प्रोफेसर सभी के पेरेंट्स से मिल रही है ..”
“ओके ओके कल चले जाएंगे “
“हमम कल तो जाना ही है और अगर आपका कोई काम निकल आया ना तो मैं बताऊंगी आपको “
पूर्वी ने मुझे धमकाते हुए कहा जिससे मुझे थोड़ी सी हँसी आ गई …….
अध्याय 22
जब मेरी आंखे खुली तो मैंने चारो ओर अंधेरा पाया,ऐसा लग रहा था जैसे मैं घण्टो से बेहोश था,मैंने याद करने की कोशिस की मैं कहा हु ,मुझे याद आया मैं अपनी बहनों के साथ उनके कॉलेज गया हुआ था,मैं पूर्वी और निशि के प्रोफेसर्स से मिला और उनके बारे में उनसे बात की ,कॉलेज में ही मुझे मोहनी मिली,मोहनी वही फार्महाउस वाली बेले डांसर जिसपर मैं फिदा हो गया था,उसने बताया की उसके भाई के प्रोफेसर ने उसे मिलने बुलाया था,कैसा अजीब सा संयोग था की मैं भी अपनी बहनों के लिए यंहा आया था,हालांकि मुझे उसका भाई साथ दिखाई नही दिया,उसने कहा की वो क्लास में चला गया है,जैसे मेरी बहने अपनी क्लास में जा चुकी थी…….
या शायद वो मुझसे अपनी इडेन्टिटी छुपा रही थी ,उसका काम ही कुछ ऐसा था…….
मैंने उसे कही ड्राप करने की बात कही और वो मान भी गई ,मैं कार में बैठा था और मोहनी मेरे बाजू में ,वो कमाल की लग रही थी ,उसका खिला हुआ चहरा और कसाव लिए हुए उसका बदन...बड़ा ही मादक अंदाज था उसका लेकिन आज वो पूरी तरह से ढकी हुई एक संस्कारी महिला की तरह दिख रही थी,साड़ी से झांकता हुआ यौवन मुझे लुभा रहा था ,मांग में मोटा सा सिंदूर और गले में लटकता हुआ मंगलसूत्र उसके शादी शुदा होने की गवाही चीख चीख कर दे रहा था…..
मैं कार स्टार्ट ही करने वाला था की रश्मि का फोन आ गया,मैं नीचे उतारकर बात करने लगा,वो थोड़ी भड़की हुई थी ,मैं अभी तक होटल नही पहुचा था और 1 की बजाय 2 दिन से गायब था…..उसने मुझे जल्दी से होटल पहुचने को कहा…
हम कालेज का केम्पस क्रॉस करके सुनसान इलाके से गुजर रहे थे तभी किसी ने मुझे पीछे से जोरो से पकड़ लिया ,मैं थोड़ा छटपटाया भी था लेकिन उसने मेरे नाक को एक रुमाल से दबा दिया था……..
मैं अभी अभी होश में आया हुआ बिते हुए समय को याद कर रहा था,मैं उठने को हुआ तो मुझे पता चला की ना सिर्फ मेरी आंखों में पट्टी बांधी गई है बल्कि मेरे हाथ भी बंधे है,,मैं जमीन में बैठा हुआ था...कितने समय से ,,ये तो मुझे भी नही पता ………………..
मुझे किसी के फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी ,कुछ जूतों की आहट..
अचानक ही मेरी आंखों में बंधा हुआ पर्दा खिंच लिया गया ,और अब कमरे में मद्धम रौशनी सी फैल गई …..
मैं कुछ समझ पता इससे पहले ही ,एक हट्टे कट्टे से इंसान ने मेरे पेट में एक लात मारा जिससे मैं कहर गया ..
“काजल कहा है “
उसकी रौबदार आवाज मेरे कानो में पड़ी ..
काजल??????मैं उसे रविवार की सुबह से नही देखा था,मैं अपने काम में (पार्टी में ) इतना व्यस्त हो गया था की मुझे याद भी नही रहा ,और फिर थकान ने कुछ सोचने का मौका नही दिया था….
“मुझे मुझे नही पता “मेरे पेट में लगे लात का दर्द अब भी बाकी था ..
“हम्म “उसने वँहा उपस्थित और लोगो को देखा,मैं उन्हें डरा हुआ देख रहा था ,वो साले सांडों की औलाद लग रहे थे,5 की संख्या में थे ,उनमे से एक शख्स मेरे पास आया और फिर से मुझे एक लात लगा दिए ..
“क्या प्लान कर रही है काजल “
वो मुझे घूरता हुआ बोला…
मैने अनजान बनने और आश्चर्य से भरे होने का नाटक किया ,
उसने एक जोरो का थप्पड़ मेरे गाल पर मारा
“मादरचोद बताता है की नही ,खान साहब को सब पता चल गया है की तू और काजल पति पत्नी हो ..अब चुपचाप बता दे की काजल क्या प्लान कर रही है खान साहब से उसकी दौलत हड़पने के लिए “
मैं आंखे फाडे उन्हें देखता रहा,शायद ये लोग मुझे चुतिया समझ रहे थे लेकिन ऐसा था नही ,अगर खान को पता चलता तो वो मुझे नही काजल को उठवाता ..
“मुझे कुछ भी नही पता आप लोग ये क्या बात कर रहे हो ,हा मैं मानता हु की हम शादी शुदा है लेकिन ..”फिर से थप्पड़ मेरे गालो पर पड़ा ..
“हमे चुतिया समझता है ..ऐसे नही मानेगा ये इसकी बहनों को ;लाओ,साले के सामने जब हम इसकी बहनों से सुहागरात मनाएंगे तो सब बकेगा अपने आप “
मैं पूरी तरह के कांप गया ,जिस्म में एक झुरझुरी सी दौड़ गई ,लगा मानो कोई हाई पवार का करेंट लग गया हो ..
“नही नही आप क्या जानना चाहते है ,मेरी बहनों को इसके बीच में मत लाइये प्लीज् …”
उनके चहरे में के विजयी मुस्कान फैल गई
“तो बताओ अजीम को अंदर किसने करवाया और काजल के आगे का प्लान क्या है “
मुझे अब भी लग रहा था की ये खान के आदमी नही हो सकते
“मुझे नही पता सच में मुझे नही पता,मुझे तो ये भी नही पता की काजल कुछ प्लान कर रही है,वो बहुत ही सीधी साधी और संस्कारी लड़की है प्लीज् आप लोगो से कुछ गलतफहमी हुई है “
मेरी बात से सभी जोरो से हँसने लगे
“संस्कारी ..हा हा हा “
उसने अपने सड़े हुए दांत दिखाए
“अगर आपको जानना ही था तो खान साहब सीधे काजल से क्यो नही पूछ लेते “मैं जानता था की खान काजल के पीछे पागल है ,और ये उसके लोग नही हो सकते
“तुझे अब भी लगता है की हम खान के आदमी नही है “उसमे से एक शख्स ने मुझे पैनी निगाहों से देखा जैसे मेरा दिमाग पढ़ रहा हो ..
“काजल मिल जाती तो उसे ही उठा लेते,लेकिन वो खुद ही रविवार से गायब है…”
उसकी इस बार ने फिर से मेरे शरीर पर करेंट दौड़ा दिया ,मैं बुरी तरह से चौक गया,ये चौकना असली था,
“उसका फोन भी स्विचऑफ आ रहा है ,वो तो बेटा तुझे फंसा कर निकल गई ,पता नही क्या क्या कारनामे किये है उसने अब तुझे ही सब भुगतना पड़ेगा ...जो जानता है बता दे ,वरना तेरी बहनों को नंगा करने में हमे ज्यादा समय नही लगेगा “वो लोग फिर के कमीनो की तरह हँसने लगे ,मैं बुरी तरह से डर गया था …..
“नही नही मैं सच कह रहा हु मुझे कुछ नही पता ..मेरी बहनों को बीच में मत लाओ प्लीज् …”
मैं रोने लगा,यंहा क्या हो रहा था मैं इसका अंदाज भी नही लगा पा रहा था ,मैं फुट फुट कर रो रहा था …..
उनलोगों को भी शायद लगा की मैं सच कह रहा हु ,उनमे से एक ने अपना मोबाइल निकाला और किसी को काल किया .
“मेडम ये तो कह रहा है की इसे कुछ भी नही पता…..हा हा वो भी कहा ना ,ओके ओके ठीक है मेडम “वो काल डिस्कनेक्ट करके फिर इस मेरी ओर हुआ ..
“तुझसे अब मेडम ही बात करेंगी “
वो सभी वँहा से चले गए …..
मेडम ??? आखिर कौन थी ये मेडम ..कही रश्मि को तो काजल के प्लान का शक तो नही हो गया,असल में उसे तो यकीन ही था की काजल कुछ गुल खिला रही है ,तो रश्मि ने मुझे किडनैप करवाया है????????
या खान ने ???
काजल कहा है ,इतने दिनों तक तो वो कभी बाहर नही रहती फिर आखिर क्या बात हो गई ???
मेरा जेहन बुरी तरह से छटपटा रहा था,मेरे होठो से खून की एक हल्की सी धार बह रही थी ..
और सबसे ज्यादा परेशान मैं ये सोच कर हो रहा था की आखिर मेरी बहने है कहा ???
थोड़ी देर में ही कमरे का दरवाजा फिर से खुला ,किसी के पायलों की आवज मेरे कानो में आयी ,मैं सर उठाकर उसे देखने लगा,वो मुझे देखकर मुस्कुराई और मैं आश्चर्य से भर गया था ..
“मोहनी तुम ……..”
वो मुस्कुराते हुए मेरे पास आयी और अपने को झुका लिया ..
“ओहो देखो तो कितना मार दिया इन जालिमो ने ..”
वो मेरे होठो से बहते हुए खून को अपने उंगलियों से फिराकर उसे अपने होठो में डाल लेती है ,
“ह्म्म्म तुम बता क्यो नही देते जो तुम्हे पता है “उसने फिर से प्यार से कहा
“सच में मुझे कुछ नही पता ,मुझे जाने दो ,और मेरी बहने “
वो हल्के से मुस्कुराई
“बहुत प्यार करते हो अपनी बहनों से …...लेकिन अफसोस ...तुम्हारी बीवी ने ही तुम लोगो को धोखा दे दिया ,जब उसे अहसास हुआ की वो फसने वाली है तो तुम्हे छोड़कर गायब हो गई ..ओहो मेरे देव तुम सच में कितने शरीफ हो “
उसने अपने होठो को मेरे होठो के पास लाया और उससे निकलते हुए खून को अपने होठो से चूम लिया ,मुझे एक हल्का सा दर्द हुआ ..
“मुझे कुछ पता होता तो मैं अब तक बता चुका होता,...आखिर हो कौन तुम और मुझसे क्या जानना चाहती हो ,सच में मुझे कुछ भी नही पता और तुम भी तो थी ना पार्टी में मैं तो वही था रविवार से ..मैंने तबसे ना ही काजल को देखा है ना ही उससे बात की है “मैं फिर से रोने लगा,..असल में मैं एक्टिंग करने की कोशिस कर रहा था क्योकि मुझे काजल से कही ज्यादा अपनी बहनों की फिक्र थी,..........
“तुम्हारी बहने सलामत है लेकिन तब तक जब तक की हम चाहे..तुम और तुम्हारी दोनो बहने हमारे रेडार में हमेशा रहोगे ..याद रखना जैसा मैं बोलू तुम्हे वैसा ही करना होगा ..”
मैं फिर से आश्चर्य से उसे देखने लगा ,वो मुझसे क्या करवाना चाहती थी ..
“तुम किसके लिए काम करती हो ,कौन हो तुम मुझसे क्या चाहती हो “
मैं थोड़ा बौखलाया
“तुमसे क्या चाहती हु वो तो पता चल ही जाएगा ..
और मैं खान साहब के लिए काम करती हु ,उन्हें तुम्हारे और काजल के रिलेशन के बारे में पता चल गया और तबसे ही उन्होंने तुमपर नजर रखने के लिए मुझे भेज दिया ..”वो मुस्कुराने लगी
“इससे पहले की काजल उनके गिरफ्त में आती वो गायब ही हो गई ,,,”
अब उसकी बात मुझे भी सच लगने लगी थी ,,,
“और रही बात की मैं कौन हु ,मैंने कहा था ना तुमसे की जब मेरे जॉब के बारे में पता चलेगा तो तुम यकीन ही नही कर पाओगे ….”
वो फिर से मुस्कुराई ..
“मैं अजीब की दूसरी रखैल हु ,...”
वो एक अजीब तरीके से मुस्कुराई
“पहली तो भाग गई “...उसका इशारा कहा था मुझे पता चल चुका था ,और उसकी बात से मेरे पूरे शरीर में एक करेंट दौड़ गया……….
अध्याय 23
मन में दहसत और एक उलझन के साथ मैं होश में आया ,और आते ही ज्यादा आश्चर्य में पड़ गया,मैं इस समय एक लक्जरी कमरे में था...इस कमरे को अच्छे से पहचानता था...मेरे ही होटल का एक लक्जरी कमरा था ये ,मैं बड़े ही आश्चर्य से इधर उधर देखने लगा,मुझे लगा जैसे मैं किसी सपने से जगा हु…..
पूरा दिन मेरे आंखों के सामने फिर से बड़ी ही तेजी से घूम गया था,मैंने अपनी घड़ी देखी,अभी 3 बज रहे थे…
मैं बहनों को कॉलेज छोड़कर 11 बजे के करीब कॉलेज से बाहर आया था...मेरे माथे में अब भी पसीना था ,चोटों का दर्द अब भी कायम था,मतलब साफ था की ये सपना तो नही था……….
लेकिन मैं यंहा कैसे पहुचा,ये लोग इतने ताकतवर है की उन्होंने मुझे बिना किसी की नजर में आये यंहा तक छोड़ दिया जबकि मैं बेहोश था……..
कई सवाल मेरे दिमाग में आ रहे थे लेकिन ये समय सवालों में पड़ने का नही था,मैंने तुरंत ही अपना मोबाइल निकाला और काजल को काल किया ,मैं बेपनाह रूप से परेशान हो चुका था क्योकि अभी भी काजल का नंबर स्विचऑफ बतला रहा था ,ये स्तिथि मेरे लिए और भी ज्यादा परेशान करने वाली थी,मैंने खुद को थोड़ा रिलेक्स किया और कमरे से बाहर आया ,मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी था अपनी बहनों की हिफाजत..
क्योकि मेरे दिमाग में मोहनी के वो आखरी शब्द गूंज रहे थे जिसके बाद मुझे बेहोश कर दिया गया,
“हमारी नजर तुम्हारे और तुम्हारी बहनों के ऊपर 24 घण्टे रहेगी..अगर हमे तुम्हारे किसी भी हरकत पर शक हुआ तो समझो ………”
मैं इतना सुनकर ही बेहोश हो गया था….
मुझे उसकी वो बाते अभी भी याद थी और जब तक की मैं काजल से बात नही कर लू आगे का निर्णय लेना मेरे लिए खतरनाक होने वाला था …….
मैं सीधे ही होटल के रिसेप्शन में पहुचा ,मुझे देखते ही रिसेप्शनिस्ट बोल पड़ी ..
“सर रश्मि मेडम ने आपको बुलाया है”
मैं चौका ...रश्मि ने मुझे सुबह ही जल्दी आने को कहा था,हे भगवान वो मेरे ऊपर चढ़ जाएगी ..मैं डरा हुआ सा भागता हुआ उसके केबिन में पहुचा ..
मुझे अब भी समझ नही आ रहा था की मैं उसे क्या जवाब दूंगा …
“मे आई कमिंग “
मुझे देखते ही उसके चहरे का भाव बदला ,गुस्सा करने की जगह वो मुस्कुराई ..
“आइये जनाब,लगता है रविवार का बुखार अभी तक नही उतरा है,तुमने तो यार हद ही कर दी “
“सॉरी वो कुछ ऐसे काम आ गए की मैं….”
“कोई बात नही जो तुमने अरेंजमेंट किया था उससे हमारे होटल को बहुत ही ज्यादा फायदा हुआ ,तो मैं तुम्हारी ये गलती माफ करती हु लेकिन पहली और आखरी बार ओके..यार अगर नही आ पाते तो कम से कम बता दिया करो ,यंहा भी कई काम होते है”
मैंने हा में सर हिलाया
“और ये चहरा इतना थका हुआ क्यो लग रहा है,और ये खून “
ओह यार ,मैंने चहरा धोया था लेकिन खून का रिसाव फिर से चालू हो गया था,असल में उन पहलवानों ने जो मेरी धुलाई की थी उसके कारण मेरे चहरे से खून निकलना शुरू हो गया था,वक्त ने इसे बंद तो कर दिया था लेकिन हल्का रिसाव और निशान अभी भी बाकी थे…
“वो कुछ नही ऐसे ही मजाक मजाक में बहन से लग गया “
“ओहो लगता है बहन भाई में बहुत ही प्यार है ..क्यो “
उसके चहरे में मुसकान आ गई लेकिन मैं कुछ भी नही बोला ..
“असल में मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी देव “
मैं फिर से उसे देखने लगा ,अब ये इतनी सीरियस क्यो दिखाई दे रही थी ..
“मैंने तुम्हारे बातो पर बहुत गौर किया …...और मुझे लगा की मुझे भी खान साहब को वो देना चाहिए जो की काजल उसे दे रही है”
उसकी बात सुनकर मेरा दिल एक बारकी धक से हुआ ,
“क्या ??? यानी क्या देना चाहती हो तुम उसे “
मैं पूरी तरह से अनजान बनते हुए उससे कहा
उसके चहरे में बस एक मुस्कान आ गई ………….
______________________________
अध्याय 24
ज्वालामुखी का लावा जब फुट कर बाहर निकलता है ,तो वातावरण के ठंड से जम कर बेसाल्ट चट्टान बनाता है,वही अगर वो अंदर ही किसी कारण से जम जाय तो वो ग्रेनाइड चट्टान बनाता है…
ये मैं क्यो बोल रहा हु ,क्योकि मेरी हालत एक ज्वालामुखी की तरह हो गई थी ,जिसमे दर्द का लावा भरा हो ,बेवफाई के दर्द का, लेकिन मैं ना ही अंदर ज पा रहा था ना बाहर ही निकल रहा था…..
कितनी अजीब सी बात है की प्रकृति अपने को कभी नही दोहराती लेकिन फिर भी हर चीज का मूल स्रोत एक ही है …
मसलन 1000 मिलियन वर्ष पहले तक पृथ्वी सिर्फ और सिर्फ गर्म गैस ही थी ,जो जम कर लावा का रूप ले रही थी ,फिर लगभग 500 मिलियन वर्षों पूर्व के मध्य ये जमने लगी और पहली सतह का निर्माण करीब 235 मिलियन वर्ष पूर्व हुआ ,जो की आपस में जुड़ा हुआ था….
अब चाहे सोना हो या कोयला या हीरा या पीतल या संगमरमर या नीलम या तांबा या लोहा सभी एक ही लावा से बने हुए है..लेकिन परिस्थितियों के कारण ,दबाव ,और वातावरण के कारण सभी अलग अलग प्रतीत होते है...
अगर फिजिक्स की भाषा में बोले तो और भी सूक्ष्म तहो में जा सकते है जंहा पूरे ब्रम्हांड में सिर्फ और सिर्फ ऊर्जा है और कुछ भी नही है ,बस परमाणु है जो की न्यूट्रॉन प्रोटॉन और इलेक्ट्रान से मिलकर बने हुए है जो की ऊर्जा के कण है….
फिर भी इतने विभेद देखने को मिलते है,सबकुछ ऊर्जा का ही परिवर्तित रूप है उसके अलावा कुछ भी नही ….
मैं भी परिस्थितियों का मारा था,एक तरफ मेरी खुद की बीवी थी जिससे मैं इतना प्यार करता था लेकिन आज की परिस्थिति में मेरे मन में उसके लिए शंका थी,वही मुझे अपनी बहनों के भविष्य की फिक्र थी,मेरी जान और मेरे पूरे परिवार का भविष्य ही खतरे में था …..
मैं बुरी तरह से झल्ला सा गया था और शाम होते ही मैं घर को चला गया ,
मैं सीधे अपने कमरे में गया और वँहा जाते ही मेरी आंखों में एक चमक आ गई ………
वो काजल थी ,मेरी काजल ,थककर ऐसे सोई हुई थी जैसे की कोई बच्चा सोता है…
मेरी निराश जीवन की एक आशा थी काजल,उसे देखकर मुझे बेहद प्यार और शुकुन का अहसास हुआ ,मैं जैसे डूब ही गया ,मैं जाकर उससे लिपट गया,वो बेफिक्री से बस थोड़ी कसमसाई लेकिन उसकी नींद गाढ़ी थी..
मैं उसके शरीर की गर्मी को खुद को डुबोने लगा,मैं उससे ऐसे सट जाना चाहता था जैसे की हम दोनो दो नही एक ही हो …
मेरी ताकत बढ़ते ही उसे मेरे होने का अहसास हो गया,
वो पलटी और मेरे सीने में सर रखकर सोने लगी वो जागने के मूड में तो बिल्कुल भी नही थी …लेकिन मुझे कसकर जकड़े हुए जरूर थी …
मैं अपने ही सोच में पड़ गया था ,जिसके कारण मैं सुबह से परेशान था वो खुद कितने बेफिक्री से सो रहा था,
उसे जैसे इन सबकी खबर ही नही थी ,सभी को लग रहा था की वो भाग गई है और ये रानी साहिबा यंहा आराम फरमा रही है ……….
मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई और मैं फिर इस उसके माथे को चूमा मुझे कम से कम इतनी तो तसल्ली हुई की वो मेरे पास है मेरे साथ है ….
जिक्र नही किया था कभी मैंने,अपनी मोहोब्बत का वो पगला सीने में जो सर रखा मेरा हो गया,बस यही मेरे साथ भी हो रहा था,ऐसा लगा जैसे वो मेरी हो गई हो ,अचानक से ही सही लेकिन बस मेरी हो ,बेमतलब सी ही सही लेकिन बस मेरी हो ,तमन्नाओ सी ही सही लेकिन बस मेरी हो ,मुस्किलो सी ही सही लेकिन बस मेरी हो ,परेशानियों सी ही सही लेकिन बस मेरी हो….,डूबे हुए मन में कश्तियों सी वो आयी थी,और बुझे हुए दिल में चिमनियों सी जल गई ….
मैंने फिर इस उसके माथे को चूमा ,इसबार उसके होठो पर भी एक मुस्कान आ गई वो हल्के से उठी उसके होठ मेरे होठो के पास ही थे और हमारी सांसे एक दूजे के होने का अहसास दिला रही थी ,उसके गुलाबी होठो से आने वाली खुसबू से मैं भी खुद को बचा नही पाया और उसके नरम होठो पर अपने जलते हुए होठो को हल्के से सहला दिया ,उसकी मुस्कान फिर से गाढ़ी हो गई थी ,,,
“क्या हुआ आज बड़े उतावले हो रहे हो “
“आज लगा था की मैंने तुम्हे खो ही दिया है…”
मैं हल्के से ही कह पाया जबकि मेरे होठ उसके होठो को बस छू रहे थे,उसके आंखों से नींद जैसे गायब हो गई थी ,मैंने अपने हाथो से उसके कमर को पकड़ रखा था वही उसने अपने बांहो को मेरे सीने से जकड़ा था,
उसके आंखों में एक आश्चर्य झूलने लगा..
“क्या हुआ आपको ये क्या बोल रहे हो,मैं कहा जाऊंगी आपको छोड़कर “
वो सच में बहुत ही आश्चर्य में थी …..जबकि मेरी भी हालत उससे जुदा नही थी ,मैं भी तो अपने अजीब से कसमकस में डूबा हुआ था ….
“तुम्हारा मोबाइल स्विचऑफ है “
वो हल्के से मुस्कुराई ..
“अच्छा तो इतनी सी बात पर ऐसे फिक्रमंद हो गए आप “
वो थोड़ी सी हँसी ..
“ओह नही जान ...लेकिन आज …..”
मैंने उसे पूरी घटना बता दिया ..
“हम्म मोहनी ...मैंने नही सोचा था की मोहनी इसमें शामिल हो जाएगी ,हा रश्मि ऐसा कुछ करेगी ये मुझे लगा था ..”
इसका मतलब था की वो मोहनी को जानती है,और रश्मि ऐसा क्यो करेगी ,मैं फिर से आश्चर्य से भर गया..
“असल में ये हमारे ही खेल का परिणाम है “
“लेकिन मोहनी ने तो कहा था की वो खान के लिए काम करती है “
“उसने गलत नही कहा था “
काजल ने बोलना शुरू रखा
“वो भटनागर साहब के साथ काम करती है “
मैं भटनागर को जानता था ,असल में वो एक चार्टर अकाउंटेंट है जो की खान और कपूर दोनो के लिए काम करता है ,मतलब ये हुआ की मोहनी भी दोनो के लिए ही काम करती है ..
“लेकिन इससे हमे कैसे पता लगेगा की ये काम खान ने किया या रश्मि ने और उन्होंने ये क्यो कहा की काजल ने तुम्हे धोखा दिया है ...और बार बार तुम्हारे प्लान के बारे में पूछना “
काजल थोड़ी सीरियस हो गई
“असल में इस बात को लेकर तो मैं भी कंफ्यूज होई रही हु,क्योकि शक तो दोनो को ही मुझपर है ,और रश्मि में ना जाने खान के कानो में क्या भरा हुआ है ,वो अब मुझे अपने से दूर ही रख रहा है,मैंने इतनी मेहनत की है यंहा तक पहुचने के लिए अब इसे खराब होने नही दे सकते…..और भगवान का शुक्र है की मैंने आपको सब कुछ पहले ही बता दिया वरना आप के लिए ये और भी शॉकिंग होता और असल में होना भी चाहिए ….”
उसके चहरे में एक चमक आ गई ...\
“हा सही है देव ये शॉकिंग ही होना चाहिए तुम्हारे लिए की कोई तुम्हारी बीवी के बारे में पूछे क्योकि तुम्हे तो ये कुछ भी नही पता “
मैं उसकी बात को समझ रहा था लेकिन फिर भी मेरे दिमाग में और भी कई प्रश्न थे ..
“लेकिन तुम्हारा मोबाइल और खान साहब को हमारे रिश्ते के बारे में पता होना ?????”
उसके चहरे में एक मुस्कान आ गई
“उन सब बातो से कुछ नही होता,ऐसे भी रश्मि को तो पहले से ही पता है ,जैसा की मैंने तुम्हे बताया था की अजीम और रश्मि दोनो ही हमारे रिश्तों के बारे में जानते है ,और उन्हें अपने काम से मतलब है ,हो सकता है की रश्मि ने ही खान को बताया हो...और वो ये जांचने के लिए की तुम्हे कुछ पता है की नही तुम्हे किडनैप करवा लिया हो ..मेरे मोबाइल के स्विचऑफ होने का भी उन्होंने बहुत फायदा उठाया है तुम्हे डराने के लिए सोचा होगा की तुम डरकर सब बोल दोगे .हमे बस उनके सामने यही नाटक करना है की हम नही पता की उन्हें सब कुछ पता है ...उन्हें समझने दो की हम मोहरे है ,और हम अपना खेल उन्हें मोहरा बना कर खेलेंगे...तुम कल होटल में इतना दुखी दिखना जैसे की कोई मर गया हो ...उन्हें भी तो लगना चाहिए की तुम एक सीधे साधे से इंसान हो जिसकी बीवी कमीनी है ,और हम दोनो के बीच में कुछ भी सही नही है ...तुम मुझे पूछना चाहते हो लेकिन मैं तुमसे झगड़ा कर लेती हु ,तुम अपनी बहनों की वजह से मुझसे ज्यादा बहस नही करते और मैं तुम्हे दबा कर रखती हु ….”
वो मुस्कुराने लगी ..
“तुम तो मुझे एक्टिंग सीखा के ही रहोगी “
मैं हल्के से हंसा ,उसने अपने बांहो का हार मेरे गले में डाल दिया ..
“मेरी जान अब तुम उनके यूज़ करने के लायक हो गए हो,हमारे दुश्मन मुझे हराने के लिए तुम्हे यूज़ करेंगे…”
वो थोड़ी देर चुप रही और फिर थोड़ी सीरियस सी बोलने लगी
“अब तुम्हे मुझसे नफरत करनी होगी देव ,सबके सामने मुझसे बहुत ही नफरत करनी होगी ताकि उन्हें यकीन हो जाए की तुम उनके जाल में पूरी तरह से फंस चुके हो ...शायद तुम्हारे लिए ये मुश्किल हो ,क्योकि तुमने मुझे हमेशा ही इतना प्यार किया है ,मेरी गलतियों के बावजूद मुझे इतना चाहा है “
काजल की आंखों में पानी की बूंदे आ गई थी ,ना जाने मैं इस मुखड़े को और इस रूह को कैसे नफरत कर पाऊंगा ..
मैं कैसे इस मखमली देह को नफरत कर पाऊंगा ,मैं कैसे उसके प्यार से भरे हुए मन को नफरत कर पाऊंगा …
मैं उसके होठो को अपनी ओर खिंच कर उसे चूमने लगा ,मेरे होठ उसके होठो में डूबने लगे ..
जब हम अलग हुए दोनो ही एक दूसरे के अहसास से भरे हुए थे,दोनो ही एक दूजे की आंखों में झांक रहे थे..
“सच में इन सब के कारण मेरा दिमाग ही ठंडा हो गया “
मैं उसके बालो पर अपनी उंगलिया फेरते हुए बोला
“ओह तो तुन्हें गर्मी देना होगा ,”वो मुस्कुराई
“ह्म्म्म लगता है मेरे चार्जर को तुम्हारे प्लग में लगाना ही पड़ेगा “
वो खिलखिलाई और मैं उसके ऊपर खुद गया ……...
अध्याय 25
मैं सर गड़ाए बैठा हुआ था,कमरे में बीप बीप की आवाजे लगातार आ रही थी ,अचानक मेरे कंधे पर एक हाथ आया और मैं सर उठाकर उसे देखने लगा,मेरी आंखे लाल थी ,प्रतिशोध की आग से भरी हुई आंखे,जिसे देखकर एक बार डॉ चुतिया भी डर गए जो की मुझे सांत्वना देने के लिए आये थे..
“उन्हें ऐसा नही करना चाहिए था,खासकर पूर्वी के साथ तो बिल्कुल भी नही ,मेरी मासूम सी बच्ची …..”
मैं इतना ही कहते हुए रुका मेरी नजर फिर से पूवी पर पड़ी जो की बिस्तर में लेटी हुई थी ,चहरे पर अब भी वही मासूमियत झलक रही थी ,वो बेहोश ही और हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में थी ,मैं अभी अभी ही आया था डॉ यहां पहले से ही उपस्थित थे उनके कहने नपर ही मुझे पूर्वी के पास आने दिया गया था…
“शायद वो तुम्हे डरना चाहते थे,या शायद ये बस किसी मनचले की करतूत हो “
डॉ ने गंभीर से स्वर में कहा
“जो भी जिसने भी ये किया उसने अच्छा नही किया,मैं पूर्वी को सबसे अधिक प्यार करता हु,शायद काजल और निशा से भी ज्यादा ..”मैं अब भी धीरे धीरे ही बोल रहा था जैसे खुद से बोल रहा हु ..
“जो डर जाते है देव दुनिया उन्हें ही डराती है …”
मैं फिर से डॉ के चहरे की ओर देखा और उठ खड़ा हुआ,,मैं सीधे ही आईसीयू से बाहर आया ,मेरे पीछे डॉ भी बाहर आने लगे ,बाहर काजल और निशा थे,काजल भी खबर मिलने पर अभी अभी ही आयी थी जबकि निशा पूर्वी को हॉस्पिटल लाने वालो में एक थी..
मुझे देखकर निशा मेरी ओर लपकी लेकिन
‘चटाक’
मेरा हाथ घूमता हुआ सीधे निशा के गालो में पड़ा और उसके गोरे गालो पर मेरे पांचों उंगलियों के निशान छप गए,वँहा उपस्थित सभी लोग हमे ही देखने लगे थे लेकिन फिक्र किसे था…
“ये सब कुछ तेरे ही कारण हुआ है “मैं उत्तेजित होकर बोला और उसका हाथ पकड़कर उसे खिंचता हुआ ले गया ..काजल ने मुझे ऐसे देखा मानो पूछ रही हो की ये क्या बोल दिया लेकिन मैं आज किसी की सुनने के मूड में नही था ,काजल ने एक बारगी मुझे रोकने की कोशिस की लेकिन डॉ ने उसे रोक दिया…
“जाने दो उसे आज नही जागा तो पूरे जिंदगी डर डर कर ही जियेगा “
डॉ की ये हल्की सी आवाज मेरे कानो पर पड़ी ,
मैं गाड़ी चला रहा था जबकि निशा रोती हुई मेरे बाजू में बैठी की वो कुछ भी बोलने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी वही मैं कुछ बोलने के मूड में ही नही था..
मैंने गाड़ी एक चाय की टापरी पर रोकी जो की उनके कालेज जाने के ही रास्ते पर पड़ता ,निशा और मैं नीचे उतरे ,
“कौन था वो “मैंने सपाट सा सवाल किया ,
“वो नीले शर्ट वाला “निशा ने उंगली दिखाई,मेरी नजर उस नीले शर्ट वाले लड़के पर जम गई ,वो एक लंबा चौड़ा स्मार्ट सा लड़का था जोकि अपने 5-6 दोस्तो के साथ किसी बात पर सिगरेट पीते हुए ठहाके लगा रहा था,मैं पीछे से एक लोहे निकाल कर उसकी ओर बढ़ने लगा,उसके किसी दोस्त का ध्यान अचानक ही मुझपर गया,उसने सभी को सतर्क कर दिया उस लड़के की आंखे जैसे निशा पर पड़ी जैसे वो सब कुछ समझ गया,मैं उनके पास पहुचा ही था की ..
“अरे देखो ये है इस रंडी का भाई,या कोई आशिक है “उसने जोरो से कहा सभी हँसने लगी लेकिन मुझे उसकी बात का कोई फर्क नही पड़ा मैं सपाट सा चहरा बनाये हुए उनकी ओर बढ़ रहा था,वो सभी चौक कर सतर्क खड़े हो गए,
“देखो मैं तो बस उसे डरना चाहता था “
वो अपने हाथो को मेरी ओर मुझे रोकने का इशारा कर रहा था की ..
“रआआआ टट “रॉड घुमा और सीधे उसके चहरे से टकराया ,वो लोहे की मोटी रॉड थी जिससे उसका जबड़ा ही उखाड़ गया,मुह से खून की धार निकलने लगी और उसके सभी दोस्त ख़ौफ़ज़दा से कभी मुझे देखते तो कभी उसे सम्हालते …
“ये लड़की धंधा करती है ,इस बेचारे ने तो बस रेट पूछा था दूसरी वाली को और उसने इसे थप्पड़ मार दिया “
उसका एक दोस्त बौखला कर बोल पड़ा ,मैंने फिर से रॉड घुमाया और ‘रआआआ टट’
उसका भी जबड़ा टूट गया और मुह से खून की धार बहने लगी ,माहौल में पूरी तरह से सन्नाटा था और साथ ही मेरे दिल में भी ,मैंने हाथ घूमने से पहले ये भी नही सोचा था की दूसरे लड़के की क्या गलती थी,मेरा चहरा अभी भी सपाट था,...
वँहा खड़े लड़के और बाकी लड़को को जैसे होश आया हो ,वो मुझे देखकर चिलालने लगे और मेरी ओर दौड़े ,जैसे मुझे खा जाएंगे,अपने दोस्तो की ये हालत देखकर वो सभी बौखला गए थे ,
“मारो मादरचोद को हमारे इलाके में आके हमारे भाई को मारा है इसने “
एक लड़का पूरे जोश में चिल्लाय ,लेकिन मेरे मन में एक जु तक नही रेंगी,मैं वैसा ही खड़ा रहा जैसे पहले था,लड़को के हाथो में जो आया वो उसे पकड़ कर मेरी ओर दौड़ाने को हुए ,जो पहला लड़का मेरे पास पहुचा उसके हाथ में लकड़ी का बांस जैसा कुछ था ,इससे पहले की वो उसे घुमा भी पता वो मेरे रॉड के रेंज में था और ‘रआआआ टट’
दूसरे के पेट में रॉड चला गया,तीसरा जो की मेरे पास ही खड़ा था ,वो अपने मुक्के को मेरी ओर उछाला और मैं झुकते हुए रॉड से उसके पैरो में वार कर दिया ,जैसे उसके घुटने टूटे हो ,वो दर्द से छटपटाता हुआ नीचे गिर गया,अपने तीनो दोस्तो का हाल देखकर बाकी के सभी वही जड़वत खड़े हो गए,मैं इंताजर में था की कौन आगे आएगा,उन्होंने मुझे चारो ओर से घेर लिया था ,लेकिन कोई भी आगे आने का साहस नही कर पा रहा था,सबसे ज्यादा हालत उसकी खराब थी जिसके पेट में मैंने रॉड घुसा दिया था,वो चीखता हुआ जमीन में छटपटा रहा था लेकिन किसी की इतनी हिम्मत भी नही हो रही थी की कोई आगे आकर उसे उठा ले ……..मेरे मन में अब भी ख़ौफ़ या भविष्य की कोई चिंता नही थी,मैं ऐसे खड़ा था जैसे मुझे इससे कोई भी फर्क नही पड़ता की कोई मरे या जिए……
कहते है ना की नंगे से खुदा भी डरता है,ये तो मामूली से कालेज के लड़के थे,और मैं अभी पूरी तरह के नंगा था,मेरे ऊपर कोई भी मर्यादा और कानून के डर का कपड़ा नही था,मैं सभी कुछ तभी छोड़ आया था जब मैंने पूर्वी को देखा था,इस लड़के ने उसे डराने के लिए ही सही लेकिन तेजाब उसके ऊपर फेक दिया था,वो उसे जलाना नही चाहता था लेकिन फिर भी उसके तिरछे फेके गए तेजाब से मेरी बहन का हाथ जल गया ,और उसे हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा था ,मेरी मासूम बहन को ये लोग ना जाने कितने दिनों से परेशान कर रहे थे,जब इसके बावजूद वो नही टूटी तो उन्होंने ये ट्रिक इस्तमाल में लाई …
वो सभी भी किसी के बेटे या भाई थे लेकिन वो अपनी मर्यादा से बाहर गए थे जिसका अंजाम उन्होंने भुगता था,इसके लिए मेरे दिल में ना तो ग्लानि थी ना ही कोई दया ,
मैं बाकी खड़े हुए लड़को की तरह मुड़ा उनमे से कुछ तो डरकर बहुत दूर जा खड़े हुए थे ,जो पास में थे वो भी कांप रहे थे की पता नही मेरा अगला शिकार कौन होगा ...
मुझे उनकी हालत देखकर थोड़ी हँसी भी आ गई जिसने मेरे चहरे में हल्की सी मुस्कान ला दी ,मुझे मुस्कुराता देखना शायद उन लड़को के लिए और भी डरावना था,क्योकि या तो उन्होंने किसी को गुस्से में पागल होते देखा होगा ,या चिल्लाते हुए मारधाड़ करते,लेकिन मैं उन सभी से अलग था,मैंने अभी तक किसी से कोई भी बात नही की थी ,मैंने तो एक शब्द भी नही निकाला था लेकिन मेरे कारण 4 लड़के खून से सने हुए पड़े थे,मैं थोड़ा आगे बड़ा था लड़के तीतर बितर हो गए ,मैं उस लड़के के पास पहुचा जिसने पूर्वी के ऊपर तेजाब फेका था…
“किसी लड़की को छेड़ने से पहले ये याद रखना की वो भी किसी की बहन होगी ,...शायद तुम्हारी भी कोई बहन होगी ,अगर होगी तो तुम समझ पाओगे की एक भाई पर क्या बीतती है ……..”
मैं उठकर सीधे अपने कार की ओर बड़ा ,निशा अजीब सी निगाहों से मुझे देख रही थी ,मेरा दिल एक अजीब से सुकून से भर गया था,शायद आज पहली बात मैंने किसी के ऊपर हाथ उठाया था मैं तो एक सीधा साधा सा लड़का था.ये पूर्वी का प्यार ही था जो मुझे यंहा तक खिंच लाया था…..
तभी वँहा पुलिस सायरन की आवाज सुनाई दी ,लड़के जख्मी लड़को को उठा रहे थे ,पुलिस की गाड़ी वँहा पहुच चुकी थी मैंने देखा की डॉ भी पुलिस के साथ पीछे पीछे पहुचे थे ,पुलिस वालो से देर ना करते हुए जख्मी लड़के की मदद की ..
“आपको मेरे साथ चलना होगा”
इंस्पेक्टर मेरे पास पहुच चुका था,मैंने वो रॉड उसके हवाले कर दिया ,डॉ के भाव को देखकर मैं समझ गया था की ये पुलिस डॉ ने ही बुलाई थी शायद मेरी मदद करने लेकिन यंहा का हाल देखकर वो भी दंग थे …
“तुम चलो मैं आता हु “डॉ ने मुझे कहा और मैं इंस्पेक्टर के साथ चल दिया …….
______________________________
अध्याय 26
दोस्तो यंहा से कहानी अलग अलग लोगो द्वारा बताई जाएगी..
अभी तक ये कहानी देव बोल रहा था,तो अब से ये कभी राइटर ,कभी निशा,या काजल की ओर से चलेगी…
राइडर्स कृपया कन्फ्यूज़ ना हो,और इसके लिए मैं पहले ही बता दूंगा ..ऐसे लगभग रोज ही उपडेस आ रहे है तो स्टोरी आप भूलोगे नही की क्या चल रहा है,स्मूथ स्टोरी चलाने की कोसिस रहेगी ताकि ज्यादा कन्फ्यूजन ना हो……..
निशा अभी अपने आंसुओ को रोक नही पा रही थी ,जबकि देव जेल में था,निशा अभी काजल के पास ही हॉस्पिटल में बैठी थी,काजल उसे सांत्वना दे रही थी ,लेकिन निशा का दुख कम नही हो पा रहा था…
“अपने भइया को क्या क्या बताया है भाभी “
निशा की इस बात से काजल थोड़ी सहम गई
“क्या सब कुछ बता दिया अपने “
निशा ने भरे हुए नजरो से काजल को देखा जैसे काजल को फिर से धक्का लगा हो
“मैं अब भइया से कैसे नजर मिला पाऊंगी..और आपको हमे भी तो बतलाना चाहिए था..”
निशा का चहरा परिवर्तित होने लगा था,वो गुस्से में आ रही थी लेकिन ये हॉस्पिटल था ….
“मैने उन्हें कुछ भी नही बताया है निशा “
“उनके बातो से तो ऐसा नई लगा की अपने उन्हें कुछ नही बताया होगा “
वो जोर देने के अंदाज में बोली ..
“मेरे भइया इतने सीधे है की उन्हें तो हमपर शक भी नही हो सकता था,लेकिन आपकी ही गलती से ये सब हुआ है,बाहर से आकर नशे की हालत में ही भइया को सब कुछ बता दिया था अपने ...उन्हें आप अपना कस्टमर समझ रही थी “(उपडेट नंबर 4)
काजल उसका चहरा देखने लगी ,उसे यकीन नही हो रहा था की ये बात निशा को कैसे पता ..
शायद निशा को उसकी नजर से कुछ समझ आ गया था..
“मैं उस रात आप लोगे के कमरे के बाहर ही थी ,”
काजल अब घबरा गई ..
“घबराइए नही ना आपको कुछ होगा ना ही आपके इकलौते भाई वरुण को ,...लेकिन आपके पापा ..”
निशा के चहरे में एक अजीब से भाव आये जिसे देखकर काजल डर गई
“नही निशा पापा को कुछ मत करना “उसकी आवाज ही कांप गई थी लेकिन निशा के चहरे में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई …….
“अगर आप चाहती है की वो बुड्डा अपनी बाकी की जिंदगी चैन से काटे तो ….”
काजल के आंखों में आंसू की एक धार बहने लगी थी ,उसका रूह भी निशा की बात से काँपने लगा था..
“तो……”
काजल ने कांपते हुए आवाज में निशा से कहा ,
“तो अब भइया को मेरे खेल से दूर ही रखना ,मैंने जीवन में सबसे अधिक प्यार उन्हें ही किया है...अपने एक बड़ी गलती तो कर ही दी और वो तो ठहरे भोले भाले वो मुझे सुधारने के लिए प्राण ले लिए होंगे..अगर मैं उनकी बहन ना होती तो आज वो मेरे होते..तुम्हारे आने से वो मुझसे दूर हो गए लेकिन अब मैं उन्हें अपना बना के ही छोडूंगी ,अगर तुम बीच में आयी तो जानती हो ना……”
काजल ने उसकी आंखे देखी,वो लाल थे ,जैसे किसी जुनूनी के होते है,वो एक जुनून में ही तो थी ,अपने भाई को पाने के जुनून में ना जाने वो इसके लिए क्या कर जाएगी...काजल के प्राण कांप गए वो एक भीगी बिल्ली जैसे सिमट कर रह गयी ,उसके मुख से कोई भी शब्द नही फूटा बस वो हा में सर हिला कर ही रह गई …….
इधर
“भाभी दिदि ने आपको कुछ कहा ,और भइया को क्या जरूरत थी की वो उन लड़को से भिड़ने जाते “
मासूम सी पूर्वी का चहरा देखकर काजल को उसपर बहुत ही प्यार आया ,वो अभी अपने बिस्तर में लेटी हुई थी और नर्सो के द्वारा की जाने वाली बात को सुनकर उसे पूरा माजरा समझ में आ चुका था..
“उन्होंने जो किया वो तो हर भाई करता ,और वो दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार भी तो तुमसे ही करते है …”काजल के चहरे में एक मुस्कान खिली ,वही मुस्कान पूर्वी के चहरे में भी थी ..
“निशा दिदि ने आपको कुछ कहा क्या ,मुझे बताइये मैं बतलाती हु उन्हें ,समझती क्या है वो अपने को “
पूर्वी का गुस्सा भी तो इतना प्यारा था की काजल हँस पड़ी
“पहले जल्दी के ठीक तो हो जाओ ,और निशा को मैं लुंगी , तुम उसकी फिक्र छोड़ो..
पहले तो मुझे लगा था की निशा को सम्हालना आसान होगा ,लेकिन आज उसकी आंखे देखकर तो ऐसा नही लग रहा था जैसे वो कयामत ही ला देगी …….”काजल ने थोड़ी देर हुई बातचीत को याद किया
“क्या बोल रही थी वो ..”पूर्वी के चहरे में भी एक गहरे भाव आये ..
“वही पुरानी बात ...लेकिन इस बार उसकी आंखों में जो जनून था वो मैंने पहले कभी नही देखा था..”
पूर्वी ने एक गहरी सांस ली ..
“लगता है अब मुझे ही उतारना होगा “उसने अपने आप से कहा …………….
अध्याय 27
“वाह मेरे देव तुम तो यार हीरो निकले “
रश्मि का चहरा दमक रहा था,मैं अभी अभी थाने से जमानत में छूट कर आया था और जमानत करवाने वाली रश्मि ही थी ,मैने कुछ लड़को को क्या मार दिया ये लोग मुझे हीरो बनाने में ही तूल गए थे,रश्मि को तो इतना खुस मैंने कभी नही देखा था,आखिर बात क्या थी इतनी खुसी की …
“उसने मेरी बहन को छेड़ा था बस इसलिए “
“ओह लेकिन हर लड़का इतना बहादुर तो नही होता जो इतने लड़को के बीच अकेला पहुच जाय...खैर मैं तुम्हारे इस फैसले से बहुत खुस हुई “
वो इतनी खुस क्यो हो रही थी ,ये प्रोफेशनल लड़की थी इसे खुसी बेवजह तो नही हो सकती ..
मैं उसे यही बात अपनी आंखों से पूछ रहा था…
“असल में अब तुम तैयार हो ..”
वो हल्के से मुस्कुराई ..
“किस लिए ????”
मैं फिर के आश्चर्य से भर गया
“लड़ाई के लिए “
मुझे कुछ भी समझ नही आया की वो क्या बोल रही थी …
“खान से और किससे “उसने अपनी बात पूरी की
“लेकिन भला मैं क्यो उनसे लड़ने लगा “
वो खिलखिलाई
“यंहा एक जंग तो छिड़ी ही हुई है देव ,,ये दिमाग की जंग है और तुम चाहो या ना चाहो तुम इस जंग का हिस्सा हो “
वो खामोश थी लेकिन उसके होठो में एक मुस्कान थी मैं उसकी बातो को समझने की कोशिस कर रहा था ……..
“अगर मैं कहु की पूर्वी पर ये हमला खान ने करवाया था तो “
उसने एक बम फोड़ा
“नही ये नही हो सकता वो तो बस कॉलेज के आवारा लड़के थे “जितना मैं समझ पाया था मैंने कहा
“तुम जानते नही खान को वो साला बहुत ही कमीना है ,अपने बेटे से भी ज्यादा ,और वो साली रंडी काजल “
वो इतना ही बोलकर चुप हो गई ,मुझे पता था की रश्मि को मेरे और काजल के रिलेशन के बारे में पता था लेकिन फिर भी वो बार बार काजल को रंडी क्यो कहती थी……..जब भी वो उसका नाम लेती उसके चहरे में एक घृणा के भाव साफ नजर आ जाते थे ….
“काजल का इससे क्या लेना देना “
मैं थोड़ा सा चिढ़ गया था ..
“हा भई तुम तो उसकी तरफदारी करोगे ही आखिर तुम्हारी दोस्त जो है संस्कारी काजल …..बहुत पसन्द करते हो तुम उसे ?”
रश्मि के चहरे में मुझे जलाने वाली व्यंग वाली मुस्कान थी ,उसने एक एक शब्द बड़े ही सोच कर बोला था ,उसने पसंद कहा था प्यार नही क्योकि उसे लगता था की मुझे नही पता की उसे ये पता है की हम दोनो पति पत्नी है …..
“तुम ऐसे क्यो बोल रही हो “
“कुछ तो कहा होगा तुमसे काजल ने …..”
मैं चौक गया ..
“मैं जानती हु की तुम मुझे नही बताओगे,लेकिन वो काजल जिसकी बात तुम मान रहे हो वो तुम्हे ही फंसा रही है अपना काम निकालने के लिए “
साला सभी यही कहे जा रहे थे ,आखिर ये कौन सा काम है जो मेरे बिना नही हो सकता या जिसके लिए सबको मेरी जरूरत थी …...काजल ने भी कहा था की अब रश्मि तुमने अपने जाल में फसाने की कोशिस करेगी,वही हो रहा था रश्मि ने अपना खेल खेलना शुरू कर दिया था और मोहरा था मैं ……
“कौन सा काम “
मैंने आखिर पूछ ही लिया
“काम तो पता लग ही जाएगा तुम्हे ...लेकिन सबसे जरूरी चीज ये है की तुम किसकी बात मानते हो ...अपने काजल की ,या अपने बहनों की जिसपर तुम जान छिड़कते हो ,या शबनम की जो की एक पक्की रांड है और पैसों के लिए कुछ भी कर सकती है,या उस मोहनी की जो खान की रंडी है ...या मेरी “
मैं बुरी तरह से चौक गया था ,रश्मि को मोहनी के बारे में कैसे पता था …...वो हल्के से मुस्कुराती हुई अपनी जगह से उठाकर मेरे सामने आकर टेबल पर बैठ गई ,उसके छोटे स्कर्ट से उसकी मांसल और लंबी जाँघे मेरे सामने थी,मेरा चहरा उसके सीने के पास था ,मैं अब उसकी खुसबू सूंघ पा राह था उसने बड़ी ही महंगी और मादक परफ्यूम लगा रखी थी …
उसके उन्नत उरोजों की चोटिया मेरे चहरे के बिल्कुल नजदीक थी ,मुझे लग रहा था की वो मुझे बहकाने के पूरे मूड में है ...उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया …..और अपना चहरा झुकाया ,जिससे हम दोनो के ही चहरे एक दूजे एक कुछ इंच की दूरी में रह गए थे…
“मैं जानती हु देव की तुम इस समय बहुत ही कन्फ्यूजन की स्तिथि से गुजर रहे हो..तुम्हारे सामने वो लोग भी है जिनसे तुम बेपनाह मोहोब्बत करते हो और वो भी जिनसे तुम्हे कोई वास्ता ही नही है...मैं जानती हु की मेरा साथ देना तुम्हारे लिए सबसे कठिन होगा ...तुम मुझे हमेशा ही अपनी बहनों और काजल के बाद ही रखोगे लेकिन ……..”
वो थोड़ी देर के लिए चुप हो गई,उसकी उज्वल आंखों को मैं घूर रहा था हम दोनो की ही आंखे मिली हुई थी लेकिन शब्द किसी के नही फुट रहे थे ……
“लेकिन क्या “
“मैं चाहती हुई की तुम मेरी बातो पर भी गौर करो ..कहने की जरूरत नही की इन बातो को किसी के साथ भी शेयर मत करना...ना ही काजल के साथ ना ही अपनी बहनों के साथ ना ही शबनम और मोहनी के साथ ...
एक बार तुम मेरा भी तो भरोषा करके देखो “
एक लड़की जो की इस होटल की मालकिन थी ,जिसे कुछ दिनों पहले तक मैं देखकर ही कांप जाया करता था आज वो मुझसे ऐसे रिक्वेस्ट करेगी मैं सोच भी नही सकता था आखिर क्या करना था मुझे जो सभी मुझे अपने भरोसे में लेना चाह रहे थे ……
“बोलो देव कर पाओगे भरोषा …या इस दीवार को तोड़ने के लिए मुझे कुछ और भी करना होगा “
उसने अपने हाथो से मेरे हाथो को पकड़कर अपने जांघो के बीच तक ला दिया ,मेरी सांसे उखड़ने लगी थी ,ये कैसा तरीका था उसका भरोसा जितने का,मेरी उंगलिया उसके स्कर्ट के अंदर से उसकी योनि के ऊपर के कपड़े को छू गई ,मैने तुरंत ही अपना हाथ बाहर निकाला ,मैं ऐसा करना तो नही चाहता था लेकिन ये एक स्वाभाविक सा रिस्पॉन्स था ….
मैं पसीने से तर हो गया था जबकि ac पूरे जोरो से चल रहा था ..मैं उसकी आंखों में देखा वो हल्के से गीले थे जैसे वो ये करना तो नही चाहती थी लेकिन किसी ताकत ने उससे ये जबरदस्ती करवाया हो ,मेरे हाथो को निकालने से उसे जैसे चैन पड़ा हो …
उसके चहरे में एक मुस्कान आयी ..
“तुम बहुत अच्छे हो देव ,तुम्हे कुछ भी होना चाहिए “
वो मेरे बालो को सहलाने लगी
“अच्छे लोगो की ऐसे भी दुनिया में कमी है ,”
उसकी बात मेरे दिमाग के ऊपर से जा रही थी
“तो बोलो मुझे कुछ और करना होगा ये तुम ऐसे ही मेरा विस्वास कर पाओगे “
मैं बुरी तरह से झुनझुलाया …
“बहुत हुआ ये सब आखिर तुम चाहती क्या हो “
मैं जोरो से बोल गया .वो मुस्कुराई
“कुछ नही बस एक विस्वास ,की तुम मेरी कही बातो को किसी से शेयर नही करोगे …”
मैंने हा में सर हिलाया
“मैं कैसे मान लू की तुम ऐसा करोगे “
वो हल्के से बोली
“तुम्हे भी मेरे ऊपर इतना विस्वास तो रखना ही पड़ेगा “
वो गंभीर हो गई
“हम्म तो ठीक है देव ...अगर तुम्हे लगे की तुम्हे किसी को बताना है तो बता देना लेकिन पहले कम से कम मेरी बातो को समझने की कोशिस जरूर करना ...मेरा साथ देने की कोशिस जरूर करना ,अगर नही दे पाओगे तो भी मैं तुम्हे गलत नही समझूँगी क्योकि तुम भी मजबूरी में बंधे हो प्यार की रिश्तों की मजबूरी में ……”
मैं थोड़े देर शांत ही रहा …
“क्या बोलना चाहती हो …”
“ह्म्म्म देव जब मैं कालेज में थी तभी से मुझे अजीम से प्यार हो गया था ….”
वो बोलना शुरू कर दी ……
“अजीम और मैं बेस्ट कपल की तरह से रखने लगे थे ,वो मुझे बहुत प्यार करता था लेकिन फिर सब कुछ बदलने लगा ,,,अजीम को शराब और शराब का शौक चढ़ने लगा था ,और उसके लिए जिम्मेदार थी एक लड़की ……..”
मैं चुप ही था ,वो भी चुप हो गई
“काजल???”
मैंने कहा था ..
“नही मोहनी “उसका उत्तर था ..
“हम्म तो फिर तुमने अजीम को छोड़ दिया बस इतना ही ना “
मैं झुंझला गया था ….
लेकिन उसके प्यारे से चहरे में उदासी घिरने लगी ………
“अजीम को लड़कियों का शौक था लेकिन वो इतना कमीना नही था,हम दोनो की लड़ाइयां होनी शुरू हो गई थी ,वो उस समय की बात है जब उसके होटल में काजल की एंट्री हुई ,वो एक सीधी साधी से लड़की लगी जिसे मोहनी को कहकर अजीम अपने सांचे में ढालने में लग गया..शुरुवात में मोहनी ने काजल को बिगड़ने में अजीम का भरपूर साथ दिया लेकिन फिर धीरे धीरे काजल ही अजीम के दिमाग में छाने लगी ,काजल के नशे में अजीम ने मोहनी को किसी चाय में पड़े हुए मख्खी की तरह निकाल फेका…….
मोहनी से मुझे प्रॉब्लम तो थी लेकिन फिर भी वो कभी हमारे पर्सनल और प्रोफेशनल मेटर ने टांग नही अड़ाती थी लेकिन काजल में हमारे रिस्तो को बर्बाद नही किया वो प्रोफेशनल चीजो में भी बहुत दखल करने लगी…
खान साहब के पूरे करोबर का इकलौता मालिक अजीम ही है,और उनकी कंपनी के बोर्ड ऑफ डारेक्टर में मुझे भी जगह मिली थी …
लेकिन पता नही काजल ने ऐसा क्या किया की मुझे बोर्ड ऑफ डारेक्टर के लिस्ट से हटा दिया गया,,,मैं तब भी कुछ नही कहती हो सकता था की कंपनी की किसी पॉलिसी के कारण ये किया गया रहा हो लेकिन मुझे झटका तब लगा जब काजल को मेरी जगह बैठा दिया गया..
इस बात को लेकर अजीम से मेरा फाइनल झगड़ा हुआ और आखिर में वो तलाक में तब्दील हो गया……….”
मैं उसकी बातो को ध्यान से सुन रहा था क्योकि ये उस बात के बिल्कुल ही विपरीत थी जो की काजल ने मुझे बताई थी ……
“वो सिर्फ एक रंडी ही नही है देव वो जादूगरनी है ...और उसका साथ देने वाली थी …”
रश्मि अपनी बात को कहते कहते ही रुक गई जैसे सोच रही हो की ये कहु की नही .
“क्या हुआ बोलो .”
“देव प्लीज् मेरी बातो का बुरा मत मानना..मैं जो भी कह रही हु अगर तुम्हे लगे की ये गलत है तो भी तुम पहले उसे परख लेना,,..ये तुम्हारे लिए बड़ी बात हो सकती है और हो सकता है की तुम गुस्से में आ जाओ ...लेकिन मेरी बात को ध्यान से सुनना …”
मैं सकते में आ गया था आखिर रश्मि कहना क्या चाहती थी …
“बोलो मैं सुन रहा हु,वादा करता हु की तुम्हे कुछ भी नही कहूंगा “
मैं उसे शांत करने के उद्देश्य से बोला क्योकि मुझे यंहा एक नई कहानी सुनने को मिल रही थी और मैं इसे जानना चाहता था …
“वो निशा थी ….तुम्हारी बहन “
मेरे चहरे के भाव तेजी से बदलने लगी थे ...अगर काजल ने मुझे निशा के बारे में पहले ही नही बता दिया होता तो शायद मैं रश्मि की जान ही ले लेता …….लेकिन मैं चुप था…
लेकिन रश्मि को शक ना हो इसलिए मैंने ऐसी एक्टिंग की जैसे मैं बहुत ही ज्यादा शॉक में पहुच गया हु ….
“मेरी बात पर यकीन करने की जरूरत नही है देव ,तुम जब तक जान ना लो मत मानो लेकिन अपनी नजर बदलो शायद तुम्हे अपने आस पास बहुत कुछ अजीब सा लगे “
रश्मि के एक एक शब्द में मेरे लिए भरपूर सहानुभूति और प्यार का अहसास किया मैंने…..
ये अजीब था क्योकि मैं जानता था की वो मुझे काजल के खिलाफ भड़काने वाली है लेकिन उसकी बाते मुझे इतनी सच्ची क्यो लग रही थी ………
वो मेरे सर को पकड़ कर अपने सीने से लगा ली ,जैसे मुझे सांत्वना दे रही हो …
उसके उजोर के तकिए और खुसबू ने मुझे बड़ा सुकून दिया ,मैंने उसे अपनी बांहो में भर लिया और वो मेरे सर को सहलाने लगी …
एक अजीब सी आत्मीयता का आभास मुझे उसके स्पर्श में हो रहा था…
“लेकिन मैं क्या कर सकता हु इन सबमे ..और तुम मुझे ये सब क्यो बता रही हो “
मैं अपने आखिरी दुविधा को मिटाना चाहता था..
“क्योकि तुम एक अच्छे इंसान हो इस लिए मैंने तुम्हे ये सब बतलाया वरना मैं खुद ही कुछ कर लेती …….और काजल और निशा के करीब भी हो इसलिए तुम ही वो काम आसानी से कर सकते हो ,रही बात की मुझे क्या मिलेगा..मुझे मेरा हक चाहिए जो की खान की प्रोपर्टी पर मेरा है...मुझे अजीम को सही रास्ते में लाना है..अब हमारे रिश्ते पहले जैसे तो नही हो सकते लेकिन फिर भी पहला प्यार तो पहला प्यार ही होता है…..”
मैंने अपना सर उठाया ,आज मैंने रश्मि को पहली बार रोते हुए देखा था …….
अध्याय 28
“हैल्लो इन्स्पेक्टर ठाकुर कैसे है आप “
डॉ ने इंस्पेक्टर से हाथ मिलाते हुए कहा ,
“आपकी कृपा है सर “
दोनो के ही होठो में मुस्कान आ गई
“हैल्लो देव”ठाकुर ने अब अपना हाथ मेरी ओर बढ़ाया ,
मैं ऐसे भी अभी तक इस बात को लेकर चिंतित था की आखिर डॉ ने मुझे अपने साथ आने को क्यो कहा है,ये वही इंस्पेक्टर था जिसने मुझे अरेस्ट किया था शाम का समय था और मैं होटल से थका हुआ अपने घर जाने को ही निकला था,आज पूर्वी भी हॉस्पिटल से घर शिफ्ट हो गई थी,पिछले 3 दिनों से निशा मुझसे नजरे चुरा रही थी,अब मुझे भी उससे बात करने की इच्छा जागने लगी थी लेकिन फिर भी जब तक पूर्वी हॉस्पिटल में थी हमे ऐसा समय ही नही मिल पा रहा था की हम कुछ बात कर पाए,मैं घर को निकला ही था की काजल का काल आया उसने मुझे जिला सेंटर जेल में बुलाया था,मैं चौका लेकिन फिर भी क्या करता ,वही मुझे डॉ मिलने वाले थे जो की बाहर ही मिल गए,काजल को आने में समय था ,अभी अभी ठाकुर साहब पहुचे थे……
“आखिर बात क्या है सर”
मैंने डॉ की तरफ रुख किया ..
“हम अजीम से मिलने आये है “
सुनकर मैं दंग रह गया ,अगर काजल को ही मिलना था तो मुझे लाने की क्या जरूरत थी ,
शायद डॉ को मेरी नजर समझ आ गई
“असल में वो चाहती थी की अब तुम भी हमारे ही साथ रहो,”मुझे कुछ समझ तो नही आया लेकिन मुझे समझने की कोई जरूरत भी तो नही थी,आखिर जो हो रहा है वो देखना बस तो था मुझे …
मैंने जेल के गेट में काजल की कर रुकते देखी,हम सभी अभी गेट के बाहर ही थे..
वो उतर कर सीधे ठाकुर के पास पहुची
“क्या हुआ है अजीम को “
उसकी आवाज में एक अजीब सी घबराहट थी लगा जैसे वो अजीम के लिए बहुत ही चिंतित है …
“पता नही कुछ अजीब सी हरकते कर रहा है ,अभी तक खान को पता नही चला है उसे कुछ पता चले उससे पहले मैंने डॉ को बताना सही समझा …
अचानक ही काजल के चहरे में आया हुआ चिंता का भाव थोड़ा कम हुआ
“हम्म तो चले “
डॉ ने ठाकुर को निर्देश दिए ..
आज मुझे पता चला की पॉवर का इस्तमाल कैसे किया जाता है,जिस जेल में सामान्य कैदी के परिवार को मिलने के लिए लाइन लगानी पड़ती है ,और एक निश्चित समय दिया जाता है ,अगर आपके पॉवर हो तो लाइन छोड़िए समय की भी कोई पाबंदी नही होती , इंस्पेक्टर हमे सीधे जेलर के कमरे में ले गया,वो भी थोड़ी औपचारिक बातचीत के बाद सीधे हमे एक दूसरे कमरे में ले गया …
वो एक अंधेरा कमरा था जंहा पर एक बड़ा सा कांच लगा था ,देखने से ही समझ में आ रहा था की ये इंवेस्टिगेशन के लये बनाया गया है……
वँहा उस कांच की दीवार से हमे दूसरे कमरे का नजारा साफ दिख रहा था ,जंहा पर अजीम बैठा हुआ था,वो असली इन्वेस्टिगेशन रूम था,मुझे नही पता था की जेलों में भी इस तरह की सुविधा होती है,जेलर के साथ कुछ और भी पुलिस वाले वँहा पहुचे थे..
“आप बात कर लीजिये जब हो जाए तो मुझे बता देना मैं बाहर ही हु “
ये कहते हुए जेलर और ठाकुर दोनो ही बाहर निकल गए ..
काजल ने फिर किसी का इंतजार किये बिना ही अंदर के कमरे की ओर रूख किया ,अजीम के साथ भी एक पोलिस वाला मौजूद था,जो काजल को देखते ही बाहर निकल गया..
“ओह तुम आ गई “पुलिस वाले के जाते ही अजीम ने काजल को गले से लगा लिया,वो अभी कैदी के कपड़ो में था,और जोरो से रो रहा था,मैंने महसूस किया की उसका वजन कुछ कम हो गया है,चहरे का तेज फीका पड़ा हुआ है,ये वही आदमी था जो की गरज कर बाते किया करता था आज उसकी ये हालत देखकर तो मुझे भी उसके ऊपर दया आ गई …….
वो बहुत ही मजबूर और कमजोर लग रहा था..
उसने काजल को ऐसे पकड़ रखा था जैसे की अमरबेल की लताये किसी वृक्ष को ….लेकिन मुझे इस बात से बिल्कुल भी जलन नही हुई क्योकि वो इतना मजबूर दिख रहा था और काजल इतनी मजबूत की मुझे तो अजीम के ऊपर ही तरस आ रहा था,ऐसा लग रहा था जैसे वो सालो से काजल की राह देख रहा हो……….
काजल उसके पीठ को थपथपा रही थी जैसे वो उसे सांत्वना दे रही हो …
“आओ आराम से बैठो “काजल ने उसे पास की ही कुर्सी में बिठा दिया ,हमे उनकी आवाज स्पीकर के जरिये साफ साफ सुनाई दे रही थी वही आईने से ऐसा लग रहा था जैसे की वो हमसे कुछ ही दूरी में बैठे हुए बाते कर रहे हो...
“काजल ..काजल मैं पागल हो जाऊंगा “
उसकी आवाज में एक अजीब सी तडफ थी….
वो फफक कर रो पड़ा ,और उसने बैठे ही बैठे काजल के कमर को जकड़ लिया ,अब उसका सर काजल के पेट पर था,काजल अब भी खड़ी हुई थी ,काजल ने उसके बालो को सहलाना शुरू किया,इससे उसे जरूर ही बहुत शुकुन मिला होगा ,वो किसी बच्चे की तरह काजल से लिपटा हुआ था वही काजल उसे किसी माँ की तरह दुलार कर रही थी,अब मुझे समझ के आया की रश्मि क्यो काजल से इतना जलती है……….
“मैं आ गई हु ना सब ठीक हो जाएगा “
“मैं मरना नही चाहता काजल मरना नही चाहता प्लीज् मुझे यंहा से निकालो “
वो तड़फता रहा ,
काजल के कांच की ओर देखा जिसके दूसरे सिरे में हम उसे देख रहे थे ,उसके चहरे में एक कमीनी मुस्कान खिल गई,
सच पूछो तो मेरा दिल ही धक कर रह गया,..
उसकी मुस्कान ही उसके विजय की गाथा कह रही थी ,ऐसा लगा जैसे काजल को उसे इस हालत में देखकर अपार संतोष हुआ हो…….
मेरी काजल इतनी बेरहम होगी ये तो मैंने भी नही सोचा था...काजल का ये रूप पहली बार मेरे सामने था…
“तुम फिक्र मत करो ...बस अपने पिता और उस रश्मि की बातो में मत आया करो ,नही तो मैं तुमसे रूठ जाऊंगी “
काजल के इतना कहते ही उसने काजल को और भी जोरो से कस लिया ..
“मुझे माफ कर दो काजल ,मैं बहक गया था मुझे लगा की मेरे पिता मुझे छुड़ाना चाहते है लेकिन तुमने मेरी आंखे खोल दी वो तो रश्मि के जिस्म के बहकावे में आकर मुझे ही फांसी पर चढ़वाना चाहते है,दोनो ही मिलकर मेरी जायजाद हड़पना चाहते है,मुझे माफ कर दो काजल ….प्लीज् मुझसे मत रूठना ,तुम रूठ गई थी तो मैं पागल ही हो गया था ”वो और जोरो से रोने लगा और काजल की मुस्कान और भी गहरी हो गई..
मैं समझ गया था की काजल ने उसे किसी तरह से खान साहब और रश्मि के बारे में भड़का दिया है...लेकिन कैसे ?
वो उसके बालो पर हाथ फेरे जा रही थी ,
“तुम फिक्र मत करो मैं अब तुमसे नही दूर नही होने वाली ,और तुमसे मिलने भी आया करूँगी ,ये लो तुम्हारे सभी दुखो की दावा “
उसने हाथो से एक पुड़िया निकाल कर अजीम के आगे कर दी ,जिसे देखकर अजीम का चहरा ही खिल गया ,मुझे समझते देर नही लगी की काजल उसे ड्रग्स दे रही है...मैं अंदर से कांप गया ..
“थैंक्स काजल ,तुम मेरे लिए इसे भी ले आई ,मैं तो इसके बिना पागल ही हो गया था “वो बड़ी ही उतावली से उसे देखने लगा जैसे कोई बच्चा चॉकलेट को देखता है,उसने हाथ बढ़ाया लेकिन काजल ने मुठ्ठी बंद कर ली ..वो बेचैन हो उठा,अब मुझे समझ में आया की काजल ने उसे कैसे अपने वश में आर रखा था...
“पहले प्रोमिश करो की मेरे ऊपर शक नही करोगे और उन दोनो से दूर ही रखोगे “
वो ललचाई निगाहों से उसे देख रहा था,
“प्रोमिश मैं तुम्हारी कसम खाता हु काजल प्लीज् अब मत तड़फ़ाओ “काजल की एक जोरदार हँसी कमरे में गुज गई उसने बड़े ही प्यार से उसके माथे को किस किया और उसके हाथो में वो पुड़िया थमा दी ..
“मैं जेलर से बोलकर तुम्हरे लिए नए कमरे का इंतजाम करवा देती हु “
अजीम काजल को ऐसे देख रहा था जैसे की वो उसके ही अहसानो पर जिंदा हो …
“तुम मेरे लिए कितना करती हो काजल और एक मेरे पिता है जो मुझे यंहा आकर भी लेक्चर ही देते रहते है,खुद तो बाहर मेरी पत्नी के साथ अय्याशी करते है…”उसकी आंखे नम थी
“तुम फिक्र मत करो तुम्हरे बाहर निकलते ही हम उन्हें सबक सिखाएंगे,बस तुम जल्दी से बाहर आ जाओ,मैं पुलिस को खरीदने की पूरी कोशिस कर रही हु,ताकि केस में कोई सबूत ही ना मिल पाय या जो सबूत मीले है वो सभी नष्ट कर दिए जाए ,उसके लिए भले ही मुझे अपना जिस्म भी देना पड़े लेकिन मैं तुम्हे छुड़ाने में पीछे नही हटूंगी ..”काजल की बातो से अजीम और भी भावविभोर हो गया था …
“और मुझे थोड़े पैसे चाहिए …”काजल थोड़े देर के लिए शांत हो गई …..
“ये सब यंहा तक लाने के लिए सभी को खिलाना पड़ता है तुम तो समझते ही हो ...तुम्हारे पिता जी तो देने से रहे और होटल का बिजनेस भी ऐसा नही रहा की तुम्हरे बिना पैसों का इंतजाम हो जाए ,रश्मि ने अपने होटल में वही काम शुरू कर दिया है जो की हम करते थे,और अब वो और भी पॉवर फूल हो गई है ,तुम्हे बर्बाद करने की तो जैसे कसम ही खा के बैठी है वो ,खान साहब भी क्या करे उनके सामने तो जैसे ही वो अपने कपड़े खोलती है वो चुप ही हो जाते है….अब तुम ही बताओ अजीम मैं सबके लिए पैसे कहा से लाऊ …...ये सभी तो तुम्हारे लिये अपना जिस्म बेचकर कर रही हु…”
काजल रोने लगी ….
मुझे पता था की उसका रोना सिर्फ एक एक्टिंग ही है और उसे पैसे की कोई कमी भी नही है ,होटल का पूरा कारोबार ही उसके पास था और होटल इतने भी घाटे में नही चल रहा है ,उसके अलावा उसने होटल को अच्छे से सम्हाल लिया था जिससे पूरे मुनाफे का 10-20 % तो काजल शो ही नही करती थी यानी वो सभी पैसे काजल के पास थे ,इससे खान को लगता था की होटल घाटे में चल रहा है...खान काजल पर आंख मूंदकर विश्वास कर रहा था जैसे की अभी अजीम …..
“तुम फिक्र मत करो काजल कुछ करते है,तुम्हरा जिस्म अब मेरे लिए है और किसी के लिए नही जितना तुम्हे करना था वो तुम कर चुकी हो अब नही “अजीम थोड़ा कॉन्फिडेंट दिख रहा था ,शायद वो अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल करने जा रहा था……
“क्या करोगे तुम ..”काजल ने एक व्यंग सा मार दिया जिससे वो तिलमिला गया ,और खड़े होकर इधर उधर घूमने लगा ..
“मेरे पास एक प्लान है “
काजल ने धीरे से कहा ,अजीम की नजर भी उसपर ही जम गई
“होटल के अधिकतर शेयर तुम्हारे नाम है ,तुम उनमे से कुछ मेरे नाम कर दो ...अब यंहा रहते हुए बस यही किया जा सकता है ...अभी होटल की हालत खस्ता जरूर है लेकिन हमारे होटल का कुछ नाम तो है ,हो सकता है की उन्हें बेचकर हमे कुछ पैसे मिल जाए ..
”अजीम की निगाहे काजल पर ही जम गई थी जैसे वो कुछ सोचने लगा हो
लेकिन काजल ने इतने स्वाभाविक तरीके से कहा की कोई भी उसकी बातो में आ जाता,
“मैं जानती हु अजीम की तुम सोच रहे होंगे की उन शेयर की कीमत ही कितनी होगी जो हमारे काम आएगी ,मुझे पता है कि शेयर के भाव हमे ओरिजनल कीमत से कई गुना कम मिलेगा लेकिन इससे हमारी समस्या तो कुछ देर के लिए कम होगी …”काजल ने अपनी आंखों में आंसू ला लिया था ..मैं तो उसकी इस एक्टिंग से ही हैरान था,खान के होटल के शेयर के कम पैसे मिलेंगे,वाह रे काजल …….
ओरिजनल कीमत से कम से कम 20 गुना ज्यादा पैसे उस शेयर के मिलते ,इतना तो उस होटल की हालत देखकर कोई भी जानकर आदमी बता सकता था लेकिन अजीम को ये समझा दिए गया था की होटल की हालत बहुत ही खस्ता है ,साथ ही खान के बाकी के कारोबार भी डप्प हो रहे है ,और इन सबका कारण उसकी गिरफ्तारी है,
अजीम बेचैनी से कमरे में घूमने लगा ,काजल ने उसे अपने पास खिंच लिया ,और उसके गले से हाथ डाल दिया और उसकी आंखों में देखने लगी …
“तुम फिक्र मत करो मैं सब सम्हाल लुंगी ….मैंने तो अपना सब कुछ ही तुम्हारे नाम कर दिया है और तुम हो की थोड़े से शेयर के लिए भी सोच रहे हो ,जबकि तुम्हे पता है की उनसे भी पैसों की समस्या खत्म नही होगी ,लेकिन मैं और पैसों का इंतजाम कर लुंगी …...तुम्हरे लिए सब कुछ “
वो हल्के से मुस्कुराई और उसके होठो में अपने होठो को घुसा दिया ,इस दृश्य की मैंने कल्पना भी नही की थी ,मैं बुरी तरह से झेप गया था ,मेरी बीवी मेरे ही सामने किसी गैर मर्द के होठो को अपने होठो में भरे हुए चूस रही थी ,जैसे की दोनो के होठ ही जम गए हो …..मैंने नजर फेर ली ,मेरी हालत देखकर डॉ के चहरे में मुस्कान आ गई,
“ठिक है तुम बताओ की मुझे क्या करना है “
मुझे अजीम की आवाज सुनाई दी ,
“बस दो मिनट रुको तब तक तुम एक शॉट मार लो ,और कम ही यूज़ करना इसे बहुत कीमती है और बड़ी मुश्किल लगती है यंहा लाने में “काजल उसे देखकर मुस्कुराई और उसके होठो में फिर से एक किस देकर बाहर निकल आयी ,
जैसे ही हम दोनो की नजर मिली उसकी नजर नीचे हो गई थी वही हाल मेरा भी था,डॉ ने कुछ पेपर काजल के सामने कर दिए ,,
“पूरे रेडी है,बस एक साइन और 60% तुम्हरे नाम हो जाएगा “
मैं बुरी तरह से चौक गया ,
“क्या 60% वो इतना पागल नही है की 60% में सिग्नेचर कर देगा “मैं चीखा
दोनो ही मुस्कुराने लगे ,
“वो तो नही करेगा लेकिन जो वो अभी अपनी नाक में डाल रहा है वो ये जरूर करवा देगा “
मैं कांच से देख रहा था ,अजीम पुड़िया खोलकर उसे सूंघने लगा था..उसका चहरा लाल पड़ने लगा जैसे की वो किसी अलग ही दुनिया में पहुच गया हो ….
“काजल एक बार फिर से सोच लो हम इस पैसे के बिना भी खुस रह सकते है ,और किसी को ऐसे नशे में धोखा देना ???”
मेरी आंखों में चिंता साफ थी लेकिन काजल की आंखे कुछ और ही कहानी कह रही थी …
“जो इसने मेरे साथ इस नशे में किया है उसके सामने शायद ये कुछ भी नही “काजल की आवाज भारी हो गई थी लगा जैसे वो रोने वाली हो …
मैं उसे देखता ही रहा जब वो अंदर गई और अजीम ने हंसते हंसते उसे बांहो में भरकर काजल में साइन कर दिए,..........
काजल ने कांच की दीवार को देखा उसके चहरे में विजय की मुस्कान थी …………..
अध्याय 29
“रुको “मेरी आवाज से निशा रुक गई जिसने अभी अभी मेरे लिए दरवाजा खोला था,
जेल से आने के समय काजल फिर के होटल चले गई थी ,निशा ने दरवाजा खोला और सर झुकाए जाने लगी ,मुझे ये बात बहुत ही तकलीफदेह लग रही थी की मेरी ही बहन मुझसे ऐसे पेश आ रही थी ,शायद वो उस दिन की मेरी बातो को अब भी अपने दिमाग में बसा कर रखे थी…
“तुम ऐसे मुझसे भाग क्यो रही हो “निशा पलट भी नही रही थी और सर झुकाए खड़ी थी …
“कुछ भी तो नही भइया “
“पूर्वी कैसी है “
“ठिक है अपने कमरे में है “मैंने निशा से अभी बात करना उचित नही समझा ,मैं सीधे ही उनके कमरे की ओर बढ़ा,आज उसने मुझे नही रोका ,मैं कमरे में था और मेरे सामने मेरी प्यारी बहन पूर्वी लेटी हुई थी,मुझे देखते ही वो खुसी से उछाल पड़ी,वो आज ही घर आयी थी और मैं उससे अभी मिल रहा था…
“कैसी है मेरी जान “मैं उसके पास ही बिस्तर में जाकर बैठ गया ,वो उठाने को हुई लेकिन मैंने उसे लिटा दिया ..
“अरे मुझे कोई उठाने क्यो नही देता है “
उसकी मासूमियत में तो दुनिया कुर्बान थी ..
मैं हंसा
“मैं पूरी तरह से ठीक हु भइया अब तो मैं कालेज भी जा सकती हु “
कालेज ?????
मैंने तो ये सोचा ही नही था,अब क्या मेरी बहनों का कालेज जाना ठीक होगा क्योकि जो मैंने किया था उससे पूरे कालेज में इन्ही की चर्चा हो रही होगी,और उनको खतरा भी होगा …
मेरे मनोभाव शायद पूर्वी की समझ में आ गए थे..
“अरे जिसका आपके जैसा भाई हो उन्हें अब कोई कुछ नही बोलेगा आप क्यो फिक्र कर रहे हो “
पूर्वी ने मेरे मन की बात सुन ली थी ,
“कुछ दिन रेस्ट कर ले फिर मैं ही तुझे कालेज छोड़कर आ जाऊंगा “मैंने उसके बालो को सहलाते हुए कहा ,
“क्या भइया आप भी ….कितना रेस्ट करूँगी मैं ,बोर होई जाती हु यंहा लेटे लेटे ..
और आप फिक्र मत करो मेरी अब मुझे कुछ भी नही होगा “
“ह्म्म्म “
मैं भी चुप हो गया और उसके जख्मो को देखने लगा ,ज्यादा गहरा घाव नही बना था,लेकिन जलने वाली जगह में निशान बच गया था,घाव पूरी तरह से ठीक था और उसकी चमड़ी से उसके नस दिख रहे थे,ऊपर की त्वचा जल गई थी ,मुझे उसे देखकर फिर से बड़ा दुखी हुआ ,
“देखो ना भइया सब तो ठीक हो गया है और मुझे कोई कमजोरी भी नही है अब “
वो उठकर मेरे गले में झूल गई ,मुझे मेरी पुरानी पूर्वी वापस मिल गई थी ,मैं उसे अपने गले से लगा कर रखा रहा,मेरी नजर उस कमरे में पड़ी…..
यही वो कमरा था जंहा मेरे आने से मेरी बहनों को परेशानी थी ,आज उन्हें कोई परेशानी नही हो रही थी इसका मतलब था की उन्होंने वो चीज हटा दी होगी ,मैं ध्यान से देखने लगा सभी कुछ तो ठीक था बस एक चीज के ,एक दीवाल जो की बिस्तर के बाजू ने ही था,मुझे लगा की उसपर कोई पोस्टर चिपका हुआ रहा होगा जिसे अभी अभी निकाला गया था,क्योकि पोस्टर तो निकल गया था लेकिन उस जगह का कलर बाकी दीवाल के कलर से अलग था,मैं फिर से नजर दौड़ाया और मुझे वो पोस्टर भी दिख गया,जो की निशा के स्टडी टेबल के नीचे में मोड़कर रखा गया था,क्या था उस पोस्टर में जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ,???
मैं ज्यादा खुफिया गिरी नही करना चाहता था …
मुझे निशा का आभास हुआ जो की मेरे पीछे ही खड़ी थी ,मैं जब पलटा तो उसने फिर से नजर झुका लिया,मैंने पूर्वी को देखा और आंखों ही आंखों में पूछा कि क्या हुआ ..
उसने उसने अपनी नजर बड़ी करके मुझे बताया की आपके ही कारण हुआ है ये अब मनाओ ...उसका चहरा और एक्प्रेशन देखकर मुझे हँसी आ गई लेकिन मैं बस मुस्कुराया …
मैंने निशा का हाथ पकड़ा और बिस्तर में बिठा दिया ,वो अब भी नजर गड़ाए हुए बैठी थी ,
“मुझसे नाराज हो ???”
मैंने कहा ही था की वो वँहा से उठ कर चली गई ,मैंने देखा था की उसके आंखों में आंसू थे ...हम दोनो ही उसे जाते हुए देखते रहे लेकिन कोई कुछ भी नही बोल पाया ,वो कमरे से बाहर चली गई शायद किचन में …
“इसे क्या हो गया है “मैं पूर्वी की तरफ मुड़ा जो की उदास दिख रही थी ..
“भईया ……..”वो भी चुप हो गई और उसने उस पोस्टर की तरह उंगली की जो की गोल मोड़कर रखा गया था,मुझे पता था की यही वो पोस्टर है जोकि कभी इस दीवार मके लगा रहा होगा ..
“उसे देखो “
पूर्वी ने उदास स्वर में ही कहा ..
मैं उठकर उस तक पहुचा और उसे खोला …
मेरी नजर फ़टी की फ़टी रह गई थी ,ये था जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ……
मैं चौक कर फिर से पूर्वी को देखने लगा
“हम नही चाहते थे की आपको इसका पता चले लेकिन …..
दीद आपसे बहुत प्यार करती है भइया और ये इसका सबूत है ,”
मेरी बहन मुझसे प्यार करती है तो इसमें छिपाने वाली क्या बात थी ???
ये उस पोस्टर से पता लग रहा था,जिसके बीच में एक दिल बना हुआ था जिसपर मेरी फ़ोटो लगी थी ,उसके चारो ओर सिर्फ मेरी ही फ़ोटो थी,ऐसा लग रहा था की किसी नवजवान लड़की को प्यार हो गया हो और वो अपने महबूब की तस्वीरों से दीवाल को सजाने के लिए इसे बनाया हो ,निशा की मेहनत इसमें साफ नजर आ रही थी ,मेरी कुछ चुनिंदा तस्वीरों से उसने एक आदमकद का पोस्टर बनाया था...मेरी आंखे भर गई ..
“मैं भी आपसे प्यार करती हु भइया लेकिन दिदि का प्यार कुछ अलग ही है ...वो आपके लिए पागल है ,यहां तक की जब आपकी शादी हुई थी तब सबसे ज्यादा वही रोइ थी ...मैं जानती हु की ये गलत है लेकिन ………..”
पूर्वी थोड़ी चुप हो गई ,मुझे काजल ने कुछ तो बता दिया था लेकिन आज मैं इसे फील भी कर सकता था …
“दिदि ने तो भाभी को भी धमका दिया था ,वो तो भाभी को भी ……..”जैसे पूर्वी को होशं आया हो की वो क्या बोल रही है ,वो चुप हो गई जैसे कोई सदमा लगा हो ,मैं उसके पास जा बैठा
“भाभी को भी क्या “
पूर्वी के चहरे में एक डर आ गया था मैं जानता था की वो क्या बोलना चाहती थी ..
“कुछ नही भइया “
“मुझसे कब तक तुम लोग झूट बोलकर निशा को बचाने की कोशिस करोगे ..मैं जानता हु की उसने काजल को मारने की कोशिस की थी और तुझे भी …..”कमरे में एक अजीब सा सन्नाटा पसर गया था …
“मैं ये भी जानता हु की जो एसिड अटैक तेरे ऊपर हुआ वो उसी ने करवाया था…”
अब पूर्वी रोने लगी थी ,
मैंने उसे अपने सीने से जकड़ लिया ,
“मैं जानता हु मेरी जान की तुम निशा को कितना प्यार करती हो ,उसकी हर गलतियों के बावजूद और मैं ये भी जानता हु की निशा के लिए ये सहना बहुत ही मुश्किल होता है की मैं उसके अलावा किसी और को प्यार दिखाऊ,मैं जानता हु की वो बीमार है और उसे अगर कुछ ठीक कर सकता है तो मेरा प्यार ..लेकिन इसका ये तो मतलब नही हुआ की मैं तुझे प्यार करना बंद कर दूंगा ……….अब तो निशा भी जानती है की मुझे उसके बारे में पता चल गया है शायद इसी लिए वो मुझसे इतनी दूर भाग रही है,लेकिन वो दिल की अच्छी है ,वरना अभी तक वो काजल और तुझपर और भी हमले करवा सकती थी ,उसे अपनी गलती का अहसास है लेकिन वो बीमार है ,जब उसे उत्तेजना होती है तब उसमें कुछ भी सोचने समझने की शक्ति नही बच पाती,और जब गलती हो जाए तो फिर पछताने के सिवा और कोई चारा नही बचता “
पूर्वी मेरे सीने से लगी हुई सिसक रही थी ..
“भइया सच में दिदि अच्छी है ,मेरे ऊपर हमला तो करवा दिया लेकिन फिर वो इतना रोइ है ,,,,,,,वो तो ठीक से खाना भी नही खा पा रही है प्लीज् उसे मनाओ शायद जब आप उसे समझाओगे तभी तो ठीक हो पाएगी...
सच में हमशे बहुत बड़ी गलती हो गई,हमे आपको सब कुछ पहले ही बता देना था ,अगर हम आपको पहले ही बता देते तो शायद मुझेपर ये अटैक ना होता और ना ही भाभी मुसीबतों में फंसती “वो रोती रही ..
“फिक्र मत कर मेरी जान मैं सब कुछ सम्हाल लूंगा अब उसे सम्हालना मेरे ऊपर है …”
मैं थोड़े देर और पूर्वी के साथ ही बैठा रहा और फिर बाहर जाकर निशा की ओर रुख किया ,वो अभी किचन में ही थी………
“ये क्या कर रही हो “
मैं निशा को देखकर चौक गया था,उसके बाल बिखरे हुए थे और वो किचन में जमीन में बैठी थी ,ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत ही रोई हो ,उसने मुझे देखा उसकी आंखे बता रही थी की उसकी हालत क्या थी ,आंखों का काजल आंसुओ की वजह से फैल गया था,कपड़े अस्त व्यस्त थे जैसे उसने उसे जोरो से खिंचा हो ,वो एक बहुत ही दर्दनाक मानसिक द्वंद से गुजर रही थी …
लेकिन मेरे लिए डर का कारण था वो धारदार चाकू जो उसने अपने हाथो में पकड़ रखा था...मुझे देखते ही वो ऐसे चौकी जैसे कोई चोर चौक जाता है,
उसके इरादे समझ कर मेरे दिल की धड़कने ही रुक गई ..
“नही निशा …”मैं जोरो से बोल गया और दौड़कर उसके पास पहुचा ,वो मुझसे बचने लगी जैसे मैं उसका बलात्कार करने वाला हु …
वो मुझे खुद को छूने भी नही देना चाहती थी
“नही भइया मत छुओ मुझे ..मैंने पाप किया है भइया ...मैंने पाप किया है…”
मैंने हाथ बढ़ाया लेकिन वो फिर से पीछे हट गई ..
‘मेरी बहन मेरी बात सुन मैं तुझसे बहुत प्यार करता हु ,निशा मेरी जान सुन मेरी बात “
मेरे आंखों में पानी आने लगा,ऐसा लगा जैसे उसकी इस हालत का जिम्मेदार मैं ही था,दिल तडफ गया और आंखों से वो पानी टूटकर गिर पड़ा ,
“नही भइया ,मैंने पाप किया है भइया मुझे मत छूना आप भी गंदे हो जाओगे भइया,मुझे मर जाना चाहिए मुझे मर जाने दो ..”
मैं जैसे रो ही पड़ा लेकिन निशा को जैसे कुछ फर्क ही नही पड़ रहा था,वो अभी भी सिमटी हुई बैठी थी मेरे रोने से उसे कोई फर्क नही पड़ रहा था,वो अपने ही धुन में थी लेकिन उसकी इस हालत को देखकर मैं बुरी तरह से टूट गया था ,
लेकिन ये समय टूटने का नही था,अगर मैं टूटा तो हो सकता था की मैं अपनी बहन को हमेशा के खो दु,क्या मैं इतना भी मजबूत नही था जितनी मेरी छोटी बहन और मेरी बीवी थी जिन्होंने इतने दिनों तक मुझसे ये बात छुपाए रखी थी ...
और निशा को पूरी तरह से सम्हाल कर रखा था…
लेकिन आज निशा की हालत सबसे खराब थी ,कारण था मेरे द्वारा उसे बोले गए वो शब्द जो उसे अंदर ही अंदर से खोखला कर रहे थे,अगर मुझे पता होता की इसकी हालत ऐसी हो जाएगी तो मैं उस पर कभी ये जाहिर ही नही होने देता की मुझे सब कुछ पता है ,मैं इसे साधारण ऑब्सेशन समझ रहा था लेकिन आज मुझे पता चला की काजल ने मुझे जल्दी कुछ करने को क्यो कहा था,
निशा बहुत ही बेचैन और डरी हुई लग रही थी ,जैसे किसी लड़की के साथ जबरदस्ती की जा रही हो और वो एक कोने में सिमट कर बैठी हो ,वही हालत इस समय निशा की थी वो एक कोने में सिमट कर बैठी हुई थी ...और मुझे दूर रखने को कह रही थी ,
मेरे सामने सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी वो चाकू जिसे उसने कस कर पकड़ रखा था ,मैंने उसका ध्यान भटकना ही ठीक समझा ..
“निशा ,,,मेरी बहन मेरी आंखों में देख ,क्या तुझे लगता है की मैं तुझसे नाराज हु ….”
वो थोड़ी देर को शांत हुई
“देख मेरी आंखों में मैं तो दुनिया में सबसे ज्यादा तुझसे ही प्यार करता हु ..फिर ये गलत कैसे हुआ मेरी बहन ...क्या तू भूल गई उस दिन को अगर काजल नही आती तो हम एक ही हो जाते ….है ना “
मेरी बात से वो बहुत ही शांत हो गई थी लेकिन अब भी उसके हाथ चाकू पर मजबूती से बंधे हुए थे ..
वो एक सोच में पड़ गई थी जिसने मुझे एक मौका दिया ..
“अगर तुझे मेरी बात पर यकीन नही तो मेरे कमरे में चल ,मैं तुझे पूर्वी और काजल से भी ज्यादा प्यार करता हु ,मैं तुझे सब से ज्यादा प्यार करता हु “
मैं एक उमंग में बोल गया ,मैंने अपने बात में पूरी तरह से फिलिंग भरी क्योकि मैं नही चाहता था की उसे मेरे झूट का पता चले ,
“सच्ची ..”उसकी आवाज में एक अद्भुत भोलापन था
“आप झूट तो नही बोल रहे हो “
वो धीरे से बोली
“पागल मेरी बात तुझे झूट लग रही है ..मेरे गले से लग के देख ..आ मेरे पास आ “
वो अब भी झिझक रही थी ,मैं उसके पास नही जा रहा था क्योकि वो हड़बड़ाहट में कोई गलत कदम भी उठा सकती थी ..
“आना ...अपने भाई पर तुझे भरोषा नही है ,मैं तो सोचता था की तुम मुझे बहुत प्यार करती हो लेकिन तुम्हे तो मुझपर भरोषा ही नही है …”मैंने रूठने की एक्टिंग की
“और जब भरोषा ही नही है तो छोड़ो मैं जा रहा हु “
ये बोलते हुए मेरे दिल की धड़कने भी रुक गई थी क्योकि मैं वँहा से नही जाना चाहता था लेकिन निशा को ये बोलना पड़ा ,अगर वो कोई प्रतिक्रिया नही करती तो मेरे लिए सचमे एक मुसीबत खड़ी हो जाती ..
मैं थोड़ा मुड़ने को हुआ
“नही …”
निशा की आवाज ने मुझे हिम्मत दी मैं झट से उसकी ओर हुआ
“नही मैं आपके ऊपर भरोषा करती हु भइया “
उसके आंसू सुख चुके थे वो अभी अभी नार्मल कंडीसन में नही आयी थी और मुझे अभी उसे नार्मल नही करना था अभी तो मुझे उसके हाथ से वो चाकू छुड़वाना था
“तो आ मेरे गले लग जा ,वरना मैं चला “
वो मेरे आंखों में देखने लगी जैसे मुझे नाप रही हो …
“सच में तू मुझसे प्यार वयार नही करती ,सब दिखावा है तेरा “
मैं हल्के गुस्से में बोला ताकि उसके दिल में बात लगे और वो तुरंत कुछ ऐसा करे जिससे मुझे मौका मिल जाए ,
“नही भइया मैं आपसे बहुत प्यार करती हु “
वो मेरी ओर बड़ी और मैने उसे खीचकर अपने सीने के लगा लिया ,जैसे एक ज्वालामुखी फटा हो वो जोरो से रोने लगी ,मुझसे लिपटे हुए उसके आंसुओ से मेरे कपड़े भीगने लगे थे मैंने उसे अपने सीने से ऐसे कसा था जैसे मैं उसे अपने अंदर समाना चाहता था ,मैं जानता था की उसके लिए रोना कितना जरूरी था,,,मैंने उसके हाथो से वो चाकू निकाल कर दूर रख दिया और उसे जकड़कर बस वही बैठ गया ,उसका रोना बंद नही हुआ लेकिन उसने मेरे गालो में चुम्बनों की बरसात ही कर दी ,उसके थूक से मेरा पूरा चहरा गीला हो गया था,वो मुझे पागलो की तरह चूम रही थी ..
“I LOVE YOU BHAIYA ...I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,....I LOVE YOU BHAIYA...I LOVE YOU BHAIYA...I LOVE YOU BHAIYA ...I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,....I LOVE YOU BHAIYA...I LOVE YOU BHAIYA “
वो बोलते हुए थक भी नही रही थी और मुझे चूमे जा रही थी उसके मुह से बस एक ही बात निकल रही थी ,मैंने तो जैसे उसके सामने खुद को सिलेंडर ही कर दिया था ,जब वो रुकी तो मैंने फिर से उसे जोरो से जकड़ा ,मैं उसे उठाकर अपने कमरे में ले गया और बिस्तर में डाल दिया ,उसके आंखों में अब भी आंसू थे ,मैं उसके बाजू में सोया और उसे जकड़ लिया ,वो फिर से मुझे चूमने लगी ..
“भइया क्या आप सच कह रहे हो सबसे ज्यादा मुझे प्यार करते हो …”
मैं मुस्कुराया
“कैसे साबित करू ,इतना भी यकीन नही है अपने भइया पर “
वो मुझसे लिपट गई
“नही भइया मैं बस आपको खोना नही चाहती “
“दुनिया की कोई ऐसी ताकत है क्या जो मुझे मेरी बहन से जुदा कर दे ...और तुझे काजल और पूर्वी से क्या डर है ,क्या तुझे लगता है की उनके कारण मैं तुझसे अलग हो जाऊंगा ,अरे पागल तू मेरी है और मैं तेरा हु,तूने ऐसा सोच भी कैसे लिया की काजल और पूर्वी तुझे मुझसे अलग कर देंगे ,,,क्या तुझे मेरे प्यार में विस्वास ही नही है “
ना जाने कब मैं एक्टिंग करते करते सच बोलने लगा था,मेरी हर बात मानो मेरे दिल से आ रही थी और मेरे आंखों का वो आंसू भी झूठा नही था जो अभी अभी मेरे आंखों से गिरा था …
“मुझे माफ कर दो भइया मैं आपको समझ ही नही पाई “
मैंने उसे फिर से जकड़ लिया ,वो सुबकते हुए ही मेरे सीने में समाई हुई सोने लगी थी ,वो मानसिक थकान उसके ऊपर हावी हो गया था और वो धीरे धीरे नींद के आगोश में जा रही थी ...
मेरे दिल में आया की मैं उसके होठो को चूम लू लेकिन आज वो सही समय नही था ,मुझे अपनी बहन की बेहद ही फिक्र हो रही थी ,जिस तरह की मानसिक स्थिति उसकी थी वो प्यार से ज्यादा पागलपन बन चुका था ,मुझे पहले अपने प्यार के बल में ही उसे सही करना था और मैं इसके लिए कुछ भी करने को तैयार था……...
अध्याय 30
“हद हुई है, अब हुई है, जीने मरने दीजिये,..
.छोड़कर दुनिया मुझे वैरागी बनने दीजिए,
घूम आया हुआ फ़क़त दुनिया की सारी भीड़ में ,भीड़ ही मैं बन न जाऊ , कुछ अपना सा करने दीजिये ………”
दिल से निकली एक शायरी जो ना जाने क्यो दिल के किसी कोने से निकल आयी ,
निधि अब भी मेरी बात को ध्यान से सुन रही थी ,उसने हाथ से अपना चहरा ठिका रखा था और उसकी निगाहे मुझे ही देख रही थी ,हम टेबल में बैठे हुए थे मेरे सामने नाश्ता लगा हुआ था लेकिन मेरे अंदर के कुछ निकलने को बेताब हो रहा था,पूर्वी और निशा दिनों ही मेरी बातो को ध्यान से सुन रहे थे…
“भइया आप क्यो बैरागी बनोगे ?/”
पूर्वी का स्वाभाविक सा प्रश्न था,
“बस कुछ अब सो जाना चाहता हु ,सब कुछ छोड़कर ..”
“ऐसा क्यो बोल रहे हो “निशा चौकी
“क्या बोल रहा हु”
“क्या छोड़ना चाहते हो आप ,अपनी जिम्मेदारियां ??
या हमे ..”
उससे पहले की निशा की आंखों में आंसू आ जाए मैं हँस पड़ा ..
“पागल हो तुम लोग तुम्हे क्यो छोड़ने लगा मैं ,मैं तो सोच रहा था की काम बहुत हो गया,क्यो ना कही छुट्टी मनाने चले ..”
देखते ही देखते मेरी दोनो परियों के चहरे खिल गए ,
“वाओ भइया यकीन नही होता की आप ऐसा बोल रहे हो “पूर्वी बोल पड़ी
“क्यो ?? क्यो यकीन नही होता “मैं चौका
“अरे आप तो वर्कोहोलिक(जिसे काम का नशा हो ) हो,मुझे लगा था की आप कभी छुट्टी नही लेते “पूर्वी फिर से बोल पड़ी लेकिन इस बार उसके होठो में मुस्कान थी ,
“तो डिसाइड करो की कहा जाना है मैं शाम को मिलता हु “
दोनो ही खुस हो गए …
“जगह तो अच्छी है लेकिन तुम जानते हो की मैं नही जा पाऊंगी “
काजल ने फोन में ही अपनी मजबूरी जाता दी ,मैं जानता था की वो नही जा पाएगी ...इसीलिए तो ये प्लान किया था ..
“ओके जान लेकिन मैं बहनों को प्रोमिश कर चुका हु “
“ठीक है जानू ,आप सब चले जाओ 3 दिनों की ही तो बात है,ऐसे भी अभी मेरे पास बहुत सा काम है”
काजल ने एक गहरी सांस छोड़ी जैसे सच में काम से बहुत थक गई हो……
“तो तुम तैयार हो क्या सोचा तुमने “
मैं रश्मि के केबिन में बैठा था ,
“मेरा जवाब हा है ,”
मेरे जवाब से वो सुबह के फूलो की तरह से खिल गई
“थैंक्स देव “वो उठी और मेरे गले से लग गई ,पहली बात मैं उसके इतने पास था ,उसके बदन से आते हुए खुसबू ने मुझे बहुत शुकुन पहुचाया और मैं उसे एक अपनत्व का अहसास दिलाने हल्के से जकड़ लिया,ऐसा लग ही नही रहा था की वो मेरी बॉस है बल्कि ये लग रहा था की वो मेरी दोस्त है ,
“तो पेकिंग करना शुरू करो “
वो उछलते हुए बोली जैसे की बच्ची हो
“डोंट वरी वो आज ही हो जाएगा और कल से 3 दिनों के लिए मैं केशरगढ़ में “
वो बहुत ही खुस लग रही थी ,
“जानते हो ना तुम्हे किससे मिलना है …तुम उनसे मिल चुके हो “
उसने मुझे याद दिलाया
“हा जानता हु,डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवादवाले ...उर्फ डॉ चुतिया से……. “
रश्मि का चहरा खिल चुका था ………...
अध्याय 31
कार अपने रफ्तार में चल रहा था,पीछे पूर्वी बैठे बैठे ही सो गई थी ,मेरे मन में कई सवाल मचल रहे थे वही उसके साथ ही एक उत्सुकता भी मेरे मन में थी ,
मेरे बाजू में बैठी हुई निशा जैसे पूर्वी के सोने का ही इंतजार कर रही थी वो बार बार मेरे हाथो से अपने हाथो को टच करती और ऐसे दिखाती जैसे की वो बिल्कुल ही अनजाने में हो गया हो ,मैं गाड़ी चला रहा था और वो मेरे बाजू की सीट पर ही बैठी थी ,उसके इस हरकत से मेरे होठो में एक मुस्कान सी खिल जाती थी ,
ऐसे लग रहा था जैसे कोई जोड़ा अभी अभी बंधन में बंधा हो और एक दूसरे को लुभाने का प्रयास कर रहा हो ,मुझे काजल के साथ बिताये कालेज के समय की याद आ गई जब हमारे जिस्म नही मिले थे लेकिन मन मिल चुके थे,छोटी छोटी बातो पर शर्माना फिर हल्के से मुस्कुराना,छोटी छोटी सी वो शरारते,वो जवानी के सबसे अच्छे दिन होते है ,हल्की छेड़छाड़ और बहुत सारा प्यार ….
मैं वो सब सोच कर एक गहरी सांस ली ,और निशा की तरफ देखा ,काजल इसी उम्र की थी जब हम दोनो प्यार में पड़ गए थे,ये उम्र होती ही ऐसी है …..
मैं निशा को देखकर मुस्कुराया और वो बिल्कुल ही स्वाभाविक रूप से शर्मा गई …
मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे हम दोनो हनीमून में जा रहे हो ,वही एक अजीब सा डर और उत्साह दोनो ही एक साथ होता है…
शायद निशा मुझसे एक प्रेमी सा वर्ताव चाहती थी ,शायद वो चाहती थी की मैं ही आगे बढूं लेकिन क्या मैं ये कर पाऊंगा ,वो मेरी प्रेमिका नही थी वो मेरी बहन थी ,मेरी सगी छोटी बहन …..
ये सब सोच कर मेरे शरीर में एक झुनझुनी सी भर गई ,बड़ी अजीब सी दशा थी मेरी ,मेरी बहन चाहती थी की मैं उसके साथ प्रेमियों जैसा वर्ताव करू,और मेरे दिल में भी उसके लिए एक आग उठने लगी थी ,बस डर यही थी की कही उस आग में हमारी मर्यादा ही ना जल जाए ,उस आग में रिश्तों की महीन डोर ही ना जल जाए ,हवस की आग बड़ी ही जालिम होती है वो कभी भी नही देखती की सामने कौन है …
मैं इस सोच में जैसे डूब ही गया ,मेरा शरीर हल्के से कांप गया था,लेकिन मेरे नजरो के सामने उस दिन का नजारा भी घूम गया जब मैं और निशा आगे बढ़ चुके थे ,उसके जिस्म का हर कटाव मेरे आंखों के सामने से होकर गुजर गया,मैं बुरी तरह से घबराया और तुरंत ही निशा की ओर देखा ..
वो मुझे ही घूर रही थी लेकिन उसकी आंखे कुछ और ही कह रही थी ,
क्या वो भी वही सोच रही थी जो की मैं सोच रहा था ,जैसे वो एक नशे में थी ,आंखे हल्की सी बोझील थी,क्या वो हवस के नशे में थी ????
इससे पहले मैं कुछ भी समझ पाता वो इठलाकर मेरे पास आ गई और मेरे बांहो को अपने हाथो से जकड़ कर अपना सर मेरे कंधे में ठिका दिया,उसने अपनी आंखे बंद कर ली और मुझे बहुत ही सुकून का आभास हुआ,
मैं आराम से गाड़ी चला रहा था जबकि वो मुझे किसी प्रेमिका की तरह जकड़े हुए थी ,वो एक हल्के गुलाबी से कसे हुए सलवार कमीज में थी,भगवान ने उसे बहुत ही सुंदर बनाया था ना सिर्फ सुंदर चहरा दिया था जबकि कसे हुए शरीर से भी नवाजा था,उसकी छातिया जैसे किसी पहाड़ सी उसके कमीज से बाहर झांक रही थी ,ना जाने उसने ये जानबूझ कर किए था या ये किसी और कारण से हुआ था लेकिन उसका दुपट्टा उसके सीने से गिरकर उसके गोद में आ गया था और उसके वो पहाड़ मुझे अपने तराइयों को दिखा रहे थे,उसने जो काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी उसकी इलास्टिक तक मुझे दिखने लगी थी ,मैं तो कुछ देर के लिए नजर जमा नही बैठा था जैसे पहली बार किसी महिला के यौवन को देख रहा हु ,
मैंने अपना सर झटका ,’ये मेरी बहन है ‘
मरे दिमाग ने मुझसे कहा ,लेकिन अगर ये मेरी बहन ना भी होती तो भी इसे देखने का कोई कारण मेरे पास नही था क्योकि मैंने कभी किसी पराई लड़कियों की तरह नजर नही गड़ाई थी ,मैं बहुत शर्मिला लड़का रहा हु ,हा ये बात अलग थी की कुछ लड़कियों के साथ मेरे संबंध बन गए है लेकिन वो सिर्फ एक इत्तफाक ही था और साथ ही साथ वो अभी किसी अलग तरह की लडकिया थी ,लेकिन मैंने कभी किसी अच्छी लड़की के लिए बुरा नही सोचा था ,मैं तो उन लड़कियों के लिए भी बुरा नही सोचा था ,लेकिन किस्मत ही ऐसी थी की लड़कियों की फ़ौज मेरे सामने आ गई ,और अब उनमे मेरी खुद की बहन भी शामिल हो गई थी ……
करीब 4 घण्टो के सफर के बाद हम केशरगढ़ के उस गेस्टहाउस में पहुच गए जंहा हमे रुकना था,कोई खास बड़ी जगह नही थी वो ,किसी कस्बे जैसा था लेकिन बहुत ही उन्नत लग रहा था ,हरियाली और साफ सफाई मेरी बहनों को ये जगह पसन्द आने वाली थी
,पास ही एक किला भी था और ऊंचे ऊंचे पहाड़ भी गेस्टहाउस से दिख रहे थे ,शहर से ऐसी जगह आने पर कुछ नही बस हरियाली ही दिख जाए तो काम हो जाता है ,मुझे बहनों को थोड़ा घूमना था और डॉ से मिलकर कुछ पता करना था ,वो भी मुझे यही मिलने वाले थे,
मैंने निशा को सीट में ही लिटा दिया था वो बैठे बैठे सो गई थी ,पूर्वी तो पहले से ही सोई हुई थी ,गेस्टहाउस पहुचते ही मैंने उन्हें उठाया …
“आइये साहब हम आपकी बहुत ही देर से प्रतीक्षा कर रहे थे ,”एक अधेड़ सा आदमी भागते हुए हमारे पास आया,ये सरकारी गेस्ट हाउस था,कुछ पुलिस के लोग भी दिख रहे थे ,सभी मुझे इतनी इज्जत दे रहे थे जैसे मैं कोई ऑफिसर हु ,शायद डॉ ने ही ये अरेंजमेंट किया था,पता नही डॉ मुझे क्या दिखाने वाला था और क्या समझने वाला था लेकिन इसके लिए मैं बहुत ही उत्साहित था साथ ही रश्मि भी ,उसने जल्दी से जल्दी मुझे डॉ से मिलने का आदेश दिया था,पता नही केशरगढ़ क्या क्या खेल खेलने वाला था,एक तरफ मेरी बहन थी जो मुझे अपना प्रेमी या शायद पति मान बैठी थी और दूसरी तरफ डॉ के द्वारा बताया जाने वाला रहस्य था ...मैं एक गहरी सांस लेकर छोड़ा और गेस्टहाउस के अंदर जाने लगा ………..
अघ्याय 32
कमरे की बत्तियां हल्के प्रकाश फैला रही थी और मैं बेचैन सा लेटा हुआ छत को निहार रहा था,आज पूर्वी और निशा दोनो ही बाजू के कमरे में सो चुकी थी ,मुझे तो लगा था की वो मेरे साथ सोने की जिद करेंगी लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ था…
अचानक दरवाजा खुला ,जैसा मुझे यकीन था निशा अंदर आयी वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ,उस हल्के रोशनी में भी उसके जिस्म का हर कटाव मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था,वो मेरे पास आकर लेट गई थी ,उसने एक बहुत ही पतली सी नाइटी डाल रखी थी ,उसे देखकर मैं थोड़ा घबराया क्योकि मुझे पता था की आज हमे रोकने वाला कोई भी नही है ,लेकिन मैंने खुद को वक्त के हाथो में सौपने की ही ठान ली ,
उसके आंखों में एक अजीब सा नशा था जो आजतक मैंने किसी भी दूसरी लड़की के आंखों में नही देखा था,एक अजीब सी चाहत और जुनून उसकी आंखों में दिख रहा था,
अगर वो मेरी बहन ना होकर मेरी बीवी होती तो शायद मैं उसे देखकर खुस हो जाता लेकिन ये नशा ना जाने क्यो मुझे डरा रहा था…
“नींद नही आ रही है क्या “
मैंने उससे पूछ लिया ,वो मेरे बांहो में आके सो गई थी,
“कैसे आएगी भइया जब आप मेरे पास नही हो “
उसकी आवाज थोड़ी भारी थी जैसे उसने अभी अभी गहरी सांस ली हो शायद उसकी सांसे भी तेज हो रही थी ,वो मेरे पास आने से पहले ही उत्तेजना के शिखर में थी …
“क्या चाहती हो “मैं अनायास ही बोल गया ...
“भइया अब मैं कुछ भी नहीं करना चाहती ,मैं बस आपकी होना चाहती हु ,पूरी तरह से आपकी ,मुझे नहीं पता मैं क्या करूँगी पर मुझे इतना पता है ,जो भी होगा वो मेरा प्यार होगा,'
मैंने सजल नैनों से उसके मस्तक पर एक चुम्बन का तिलक किया ,और अपने होठो से उसके होठो को मिला दिया और हमारे बीच की सभी दूरिय उसी क्षण से ख़तम हो गयी ,हम अब एक ही थे और कोई दूजा ना था ,हम बस अपने को एक दूजे में समेटने की पूरी कोसिस कर रहे थे,,, ना जाने कितने समय तक हम एक दुसरे के होठो को चूसते रहे थे हमारी सांसे थी पर मेरे लिंग में कोई भी अकडन नहीं थी और ना ही इसका भान ही रह गया,समय जैसे रुक सा गया हो ,हम एक दूजे को अपनी बांहों में भरे बस खो जाना चाहते थे ,मुझे तब थोडा होश आया तब मेरा हाथ निशा के स्कर्ट के अंदर घुस आया था, और उसकी पीठ को सहला रहा था ,उसकी नंगी पीठ पर अपने हाथो को चलते हुए मैंने उसके स्कर्ट को निकल फेका मेरा सीना पहले से ही नग्न था ,निशा के नर्म स्तनों के आभास ने मुझे फिर से किस के खुमार से बहार निकला मैंने अपने हाथो से उसे दबाना शुरू किया पर होठो को नहीं छोड़ा निशा ने अपने हाथो को मेरे सर पर कस लिए थे और पूरी शिद्दत से मेरे होठो को अपने में समां रही थी ,उसे शायद मेरे हाथो के हलचल तक का आभास नहीं हो रहा था ,पर जब मैंने पूरी ताकत से एक वक्ष को दबाया ,
'आहह भइया थोडा धीरे ,'निशा साँस लेती हुई बोल पायी उनकी सांसे उखड़ी हुई थी ,वो साँस ले पाती इससे पहले ही मैंने फिर से अपना मुह उसके मुह में घुसा दिया ,मैंने उसे पीठ के सहारे लिटाया और उसके ऊपर छा सा गया,मैंने दोनों हाथो से उसका चहरा पकड़ा और उसके होठो को छोड़ा फिर ,फिर उसके गाल ,उनकी आँखे उनकी नाक ,उसका माथा ,आँखों की पुतलिया,गरदन ,कन्धा ,छाती ,उजोर ,पेट ,नाभि ,...
मैं बस चूसता गया मुझे नहीं पता था की मैं क्या कर रहा हु ,ना निशा को ही पता था,हम बस खो से गए थे मैंने फिर उसके उजोरो को पकड़ा और उसके उन्नत निपलो को अपने होठो में समां लिया ,निशा बस छटपटा रही थी ,
'आः आःह भइया,आः आः आआअह्ह्ह्ह भाआआआआआई ,'मैंने अपने मन भर उसे चूसा जब तक की वो लाल नहीं हो चुके थे, नीचे मुझे उसकी पेंटी के ऊपर से जन्घो के बीच का गीलापन मुझे दिखाई दिया,मुझे अपने जांघो के बीच एक विशाल खम्भे सा दिखाई दिया ,जिसकी अकडन से अब मुझे दर्द होने लगा था,मैंने उसे आजाद कर दिया ,मैंने पेंटी के छोरो को अपने दोनों हाथो से पकड़ा,मैंने निशा की और देखा निशा काप रही थी ,वो एक दिवार थी जो मुझे हमेशा के लिए गिरानी थी ,जिसे गिराकर ही मैं निशा को अपना बना सकता था,
“इजाजत है “
मैंने निशा को छेड़ा
“अब भी इजाजत लोगे क्या “
मुस्काते हुए उसने पूछा और मुझे अपने ऊपर खीच लिया मेरे होठो को फिर अपने होठो में भर लिया ,
“मेरे भइया ,”
निशा ने मेरे हाथो को पेंटी के ओर ले गयी वो मेरे आँखों में ही देख रही थी उसके चहरे पर अब भी वो मुस्कान थी और आँखों में वही प्यार ,मेरे हाथो में दबाव बनाते वो पेंटी को निकल दी और अपने पैरो से निकाल निचे फेक दिया ,वो अब मेरे सामने नंगी थी ,पर मुझे इसकी फिकर ही नहीं थी ना ही मैंने ये देखने की जहमत की ,मैं तो फिर निशा के होठो को चूसने लगा ,हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे मैं उसके ऊपर लेटा था ,और निशा अपनी आँखे बंद किये बस खोयी हुई थी ,मेरा अकड़ा लिंग निशा के गिले योनी में हलके हलके घिस रहा था,थोडा गीलापन से भीग कर लिंग भी फिसलने लगा मैंने एक दबाव दिया पर वो जन्घो से जा टकराया ,ऐसा कई बार होता रहा पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ,क्योकि ये बिलकुल स्वाभाविक तौर से हो रहा था ,मैं कोई मेहनत नहीं कर रहा था,मैंने तो निशा को किस करने में डूबा हुआ था,पर निशा ने मेरे लिंग को पकड़ा जैसा की उसका पहला मौका नहीं था उसने उसे सही जगह लगाया ,वहा पहुचकर वो चिपिचिपा गिलापण मेरे लिंग को फिर से घेर लिया ,मैंने स्वभावतः फिर झटका मारा लेकिन ये क्या मेरे मुह से एक चीख सी निकली जो निशा के होठो में खो सी गयी ,मेरी लिंग की चमड़ी ने इस घर्षण का आभास किया था लेकिन उस अतिरेक आनद से बढकर मेरे लिए कुछ भी नही रह गया था,मैंने फिर एक जोरदार झटका मारा और ,
'आआह्ह्ह्ह भा ईई या भा ईईईईईईई या '
'निशा आआआआ आह्ह्ह्ह 'हमारा मिलन हो चूका था पर अभी तो उफान की शुरुवात भर थी ,
मैंने और निशा ने आँखे खोलकर एक दूजे को देखा ,हम एक रहत की साँस ले रहे थे ,हमारी आँखे मिली दोनों के चहरे पर एक मुस्कान फैली और मैंने फिर एक जोरदार धक्का मार दिया ,
'अआह्ह्ह 'दोनों के मुह से निकला और दोनों एक दूजे को देख हस पड़े ,,,मैंने धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा ,मेरा लिंग निशा के योनी रस से पूरी तरह से
गिला हो चूका था और हम फिर एक गहन तन्द्रा में प्रवेश कर रहे थे जहा बस प्यार था और दुनिया की कोई शय नहीं..
हमारी आँखे फिर बंद होने लगी... मैं तो किसी भी तरह से आंखे खोल भी पा रहा था पर निशा की आँखे इतनी बोझिल हो चुकी थी वो अपनी आँखे खोल ही नहीं पा रही थी ,मेरे धक्के एक लय पकड़ चुके थे और हमारी सांसे और आंहे ,उसी लय में चल रहे थे ,समय खो चूका था ,और सारा जहा भी खो चूका था ,हम एक दुसरे को काट रहे थे ,चूस रहे थे चूम रहे थे ,पर हमें नहीं पता था की हम क्या कर रहे है ,कोई कण्ट्रोल हमरे ऊपर नहीं था ,ना हमारा ना और किसी का ,पहले धीरे धीरे आःह आह्ह से लेकर तेज तेज सांसे और आह उह ओह तक पहुच जाते फिर धीरे- मध्यम- तेज ये सिलसिला ना जाने कब तक चलता रहा ,हमें आँखे खोल एक दूजे को देखने की फुर्सत नहीं थी ,जैसे किसी ने कहा है ,’
बिना किसी के परवाह के ,बिना किसी मांग के ,बिना किसी तलाश के ,बिना किसी चाह के ,हम थे और बस हम थे,,,...एक दूजे में ऐसे घुल रहे थे की पता लगाना भी मुस्किल था की मैं और तू अलग भी है ,बस मेरा मुझमे ना रहा जो होवत सो तोर ,तेरा तुझको सोपते क्या लागत है मोर...
सांसो में अपनी अंतिम गहराई तक हमें डूबा दिया ,जब लक्ष्य करीब आने को थी तो बस थोड़ी देर के लिए सांसे रुक गयी मेरे अंदर से एक विस्फोट हुए ना जाने कितनी ताकत से मैं धक्के लगाये जा रहा था लेकिन उस विस्फोट ने मुझे शांत कर दिया एक गढ़ा सफ़ेद ,चिपचिपा सा द्रव्य ,मेरे अंदर से निकल निशा की योनी को भिगो दिया वही निशा की योनी से ना जाने कितनी बार फुहारे निकल चुकी थी ,लडकियों की एक खासियत होती है की अगर वो प्यार की गहराई का आभास कर पायी और उससे सेक्स करे जिसे वो प्यार करती है तो वो एक नहीं कई चरम सुख (ओर्गोस्म )का अनुभव आसानी से कर पाती है ,एक सम्भोग में लगभग 7 तालो का ओर्गोस्म संभव है ,ऐसा शोधो ने पता लगाया है ...निशा ने भी आज किसी गहरे तालो पर इसका अनुभव किया था ,और मैंने भी ,तूफ़ान तो शांत हो चूका था पर जैसे हम जम ही चुके थे ,हमारे शरीर एक दूजे से अलग ही नहीं हो रहे थे ,हम पसीने से भीगे थे हमारी सांसे उखड़ी थी ,पर हमारे चहरे में एक परम शांति का आभास था,सबकुछ शून्य हो चूका था ,खो चूका था ,इतनी शांति का आभास मैंने कभी नहीं किया था,ऐसा लग रहा था जैसे मैं खाली हो चूका हु ,बिलकुल हल्का ....हम एक दूजे के चुमते रहे हमारे होठ जैसे कभी एक दूजे से ना बिछड़ेंगे वैसे ही चिपके रहे ,हमारे शरीर इक दूजे के पसीने से सने थे ,चहरा और होठ एक दूजे की लार से सने थे और निशा की योनी से मेरा वीर्य अब बहार आने लगा था ,मेरे कमर अब भी हलके हलके चल रह थे…….
अध्याय 33
लिंग की चमड़ी में वो कोमल सा अहसास,
“आह “
मेरे मुह से अनायास ही निकले हुए शब्द थे…….
मैं अभी अर्धसुषुप्त अवस्था में था,ना जगा ही था ना ही पूरी तरह से सोया था,अपने लिंग की कसावट कुछ महसूस हो रही थी ,
ना जाने समय क्या हुआ था लेकिन मुझे लग रहा था की मैं सपनो में खोया हुआ हु,लेकिन धीरे धीरे ही मुझे अहसास हुआ की मैं जाग रहा हु ,और सचमे कोई गीली सी और कसी हुई चीज मेरे लिंग में घर्षण कर रही है…..
मेरे हाथ अनायास ही नीचे चले गए सोचा की सपने में शायद मजा आ रहा हो तो हाथो से ही शांत कर लू,
लेकिन ये क्या ????
नीचे किसी के कोमल बालो का संपर्क मेरे हाथो में हुआ ,मैं थोड़ा चौका …
“:आह”
मजे के अतिरेक में फिर के मेरे मुह से निकला…
ओह क्या अहसास था,मेरी लिंग की चमड़ी को चूसा जा रहा था,जिससे वो फैल गई थी और मेरे हाथ उस सर पर रख गए जो की उसे चूस रही थी …
मुझे याद आया की मैं कहा हु और वो कौन हो सकती है जो मुझे ये सेवा दे रही थी ,कमरे की खिड़कियों से आती हुई धूप से इतना तो समाज आ चुका था की ये मेरे जागने का समय है ,मैं अपने सर को हल्के से उठा कर देखने की कोशिस की …..
मेरे इस हलचल से निशा कोई भी समझ आ गया था की मैं जाग चुका हु,उसने अपना सर उठाया और हमारी आंखे मिली…………
जैसे नए जोड़े सुहागरात के बाद शर्मा रहे हो ,निशा के चहरे में मुझे देखते ही लाली आ गई ,लेकिन मैं उत्तेजित था,मैंने उसे प्यार से देखा और अपना हाथ उसके सर पर रखकर उसे हल्के से दबा दिया ,वो जैसे ,मेरा इशारा समझ गई थी और उसने फिर से मेरे लिंग में अपना मुह गड़ा दिया ….
कल तक जिस बहन के लिए मैं दुनिया की हर खुसी लाने को तैयार था आज वो मेरे जांघो के बीच मेरे लिंग को चूस रही थी ,...
मैं भी क्या करता असल में यही तो उसके लिये जीवन की सबसे बड़ी खुसी थी …..
जिस बहन को अपने बांहो में झुलाया था,जिसके इज्जत की पिता की तरह रक्षा करने की कसम हर रक्षाबंधन में खाई थी आज उसकी उसी इज्जत का मैं लुटेरा बन गया था,या शायद ये कहु की मैं उसकी इज्जत का मलिक था…….
जिसके कदमो में दुनिया बिछाने के ख्वाब देखे थे वो आज खुद मेरे लिए नंगी बिछी पड़ी थी ,......
गीले गीले होठो की लार मेरे लिंग से मिलकर मुझे सुकून दे रही थी और ना जाने निशा को क्या सुख दे रही थी की वो और भी जोरो से इसे चूसने लगी ,मैं अपने चरम में पहुचने वाला था…
“ओह मेरी रानी बहन चूस भइया का …….ओह नही “
मेरे मुख से ना जाने क्यो ये निकलने लगा था ..
वो इस बात के परेशान होने की बजाय और भी मस्ती में आ जाती थी और जोरो से चूसना शुरू कर देती थी ,उसके होठो से लार नीचे टपकने लगा था वही मेरी हालत और भी खराब हो रही थी ..
सांसे फूल रही थी और उसके मुख का चोदन कर रहा था,मैं अपने कमर को उठा उठा कर उसे स्वीकृति दे रहा था और वो भी अपने भाई के लिंग को पूरी तल्लीनता से चूस रही थी ,उसे देखकर तो ऐसा लग रहा था की उसे फिर खाने को कुछ ना मिलेगा और यही धरती पर एक ही चीज है जिसे चूसकर वो अपनी भूख मिटा पाएगी
वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी …..
मैंने उसे अपने ऊपर आने का संकेत दिया ,
वो मेरे ऊपर चढ़ गई ,
मैं उसके होठो को अपने होठो में भरकर चूसने लगा,मेरे ही वीर्य के कुछ बून्द मेरे ही होठो में आ रहे थे……
हम दोनो ही मुस्कुरा उठे ,ये वो पल था जब हमारे बीच की सभी दीवारे ढह गई ,
सेक्स तो उत्तेजना में भी हो सकता है लेकिन जब बिना किसी अवरोध और उत्तेजना के भी जिस्म मिल जाए और ग्लानि की जगह जब होठो की मुस्कुराहट ले ले तो समझो की दीवार गिर गई ……………… …
अध्याय 34
“केशरगढ़ के महल उस खण्डर में जाकर के क्या करोगे साहब “
उस छोटे से और भद्दे से आदमी ने कहा ..
“तुझे क्या करना है तू चल रहा है की नही “
मैंने उसे घूरा ,ये गाइड के रूप में मुझे दिया गया था ये हमे पूरा केसरगढ़ घुमाने वाला था,”
“अरे साहब नाराज क्यो होते है छलिए छलिए लेकिन वँहा घूमने लायक कोई जगह नही है “
मैंने उसे फिर से घूरा क्योकि मेरी बहने उसकी बात को सीरियसली ले सकती थी लेकिन मुझे डॉ ने वही मिलने को कहा था,
“तू चल ना यार क्या नाम है तुम्हारा “
“छेदीलाल छिछोरे “
“क्या हा हा हा “निशा जोरो से हँस पड़ी ,पूर्वी के साथ साथ मैं भी मुस्कुरा उठा ,
“ये कैसा नाम है छिछोरे ??”
लेकिन उस शख्स ने हमारी बात का बिल्कुल भी गुस्सा नही किया जैसे उसे पता ही हो की हम ऐसा ही कुछ रिएक्ट करेंगे ,
“वो क्या है सर मैं छ को छ बोलता हु “
उसने अपने बड़े बड़े सड़े हुए दांत हमे दिखाए
“वो तो सभी छ को छ ही बोलते है “
पूर्वी बोल पड़ी
“नही मेडम आप समझी नही मैं छ को छ बोलता हु “
हम सभी कन्फ्यूज़ थे तभी एक स्टाफ वाले ने हमे देख लिया ,
“सर वो ये कह रहा है की वो च को छ बोलता है ,और इसका नाम छेदीलाल चिचोरे है “
“बड़ा अजीब सरनेम है है यार तुम्हारा “
वो फिर से अपने सड़े हुए दांत मुझे दिखा दिया ,मेरी बहने थोड़ी सी हँसी लेकिन इस बार ज्यादा नही …
अध्याय 35
“साहब यंहा पर किले में पुरातात्विक स्थल है अगर आप घूमना चाहे “
हम केशरगढ़ के किले में पहुचे ही थे ,और एक व्यक्ति ने मुझसे कहा उसने आंखों से इशारा किया किया की मेरे साथ चलिए ,मैंने बस हा में हल्के से सर हिलाया ,
“अरे साहब वो भी खंडहरों को क्या देखना ,वँहा पर गार्डन है जंहा पर सेल्फी पॉइंट है ,वँहा चलते है “
छिछोरे ने कहा ,जिससे मेरी बहने खुस हो गई
“हा भइया,एक तो यंहा बस खण्डर है और आप यंहा ले आये”
पूर्वी ने उसकी हा में हा मिलाया ,
“ऐसा करो तुम लोग गार्डन जाओ मैं जरा देखु की कौन सा पुरातात्विक स्थल है
यंहा पर ,तुम्हारी भाभी से मैंने बहुत नाम सुना है इसका “
दोनो छिछोरे के साथ गार्डन की तरह चल दिए जबकि मैं खण्डरहो की तरफ …
अंदर जाने पर मुझे डॉ दिखाई दिए ,उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपने पास बुलाया ,उनके पास ही एक अधेड़ महिला खड़ी थी ,मुझे लगा की मैंने इसे कही देखा है,वो कोई विदेशी लग रही थी ..
“आओ आओ देव ,इनसे मिलो ये है यंहा की खोजकर्ता मेडम मलीना “
ओह याद आया की मैंने इन्हें कहा देखा है ,
“हैल्लो मेडम मैंने आपकी किताब पड़ी है ‘डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़’ उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थी मैंने,मेरी वाइफ आपकी किताबो को बहुत ही चाव से पढ़ती है “
वो मुस्कुराई ,
“आजकल के बच्चे भी इन सबमे इंटरेस्ट रखते है यकीन नही होता “वो मुस्कुराते हुए बोली
“मलीना ये देव है ,देव….श्रुति का पति “
मै चौक गया की डॉ ये क्या बोल रहे है ,लेकिन मलीना मेडम का चहरा मेरे ऊपर ही अटक गया ,उनकी मुस्कुराहट जाने कहा गायब हो गई और आंखों में आंसू आ गए ,उन्होंने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया था और मेरे माथे को चूमने लगी,मैं परेशान था की ये हो क्या रहा है,लेकिन मूझे उनके उनमे एक बहुत ही गहरे अपनत्व का अहसास हो रहा था…
मैं आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,
“अब समझ आया की वो मेरे किताबो को क्यो पढ़ती है ,मेरी ही तो बेटी है आखिर माँ से दूर कैसे रहेगी “
मलीना फफक कर रो पड़ी ,मेरा मुह खुला का खुला रह गया मैं कभी डॉ को देखता तो कभी मलीना को …
काजल ने मुझे अपनी माँ की तस्वीर दिखाई थी लेकिन ये वो तो नही थी ये तो कोई और ही थी …..डॉ ने मुझे आंखों से बस शांत रहने को कहा ,
“कैसी है वो उसे मेरी याद ही नही आती ,इतना गुस्सा की वो मुझसे मिलने भी नही आ सकती ,2 साल हो गए उसे देखे हुए ,शायद मुझे उसकी सजा मिल रही है जो मैंने अपने पिता के साथ किया था ,उनसे दूर जाकर “
डॉ ने उन्हें सम्हाला ,और मुझसे दूर जाकर उनसे कुछ बात करने लगे ,वो थोड़ी शांत हुई …
“अच्छा तो तुम अपनी बहनों के साथ आये हो कहा है वो सब “
इस बार मलीना के होठो पर एक मुसकान थी …….
अध्याय 36
“साहब यंहा पर किले में पुरातात्विक स्थल है अगर आप घूमना चाहे “
हम केशरगढ़ के किले में पहुचे ही थे ,और एक व्यक्ति ने मुझसे कहा उसने आंखों से इशारा किया किया की मेरे साथ चलिए ,मैंने बस हा में हल्के से सर हिलाया ,
“अरे साहब वो भी खंडहरों को क्या देखना ,वँहा पर गार्डन है जंहा पर सेल्फी पॉइंट है ,वँहा चलते है “
छिछोरे ने कहा ,जिससे मेरी बहने खुस हो गई
“हा भइया,एक तो यंहा बस खण्डर है और आप यंहा ले आये”
पूर्वी ने उसकी हा में हा मिलाया ,
“ऐसा करो तुम लोग गार्डन जाओ मैं जरा देखु की कौन सा पुरातात्विक स्थल है यंहा पर ,तुम्हारी भाभी से मैंने बहुत नाम सुना है इसका “
दोनो छिछोरे के साथ गार्डन की तरह चल दिए जबकि मैं खण्डरहो की तरफ …
अंदर जाने पर मुझे डॉ दिखाई दिए ,उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपने पास बुलाया ,उनके पास ही एक अधेड़ महिला खड़ी थी ,मुझे लगा की मैंने इसे कही देखा है,वो कोई विदेशी लग रही थी ..
“आओ आओ देव ,इनसे मिलो ये है यंहा की खोजकर्ता मेडम मलीना “
ओह याद आया की मैंने इन्हें कहा देखा है ,
“हैल्लो मेडम मैंने आपकी किताब पड़ी है ‘डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़’ उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थी मैंने,मेरी वाइफ आपकी किताबो को बहुत ही चाव से पढ़ती है “
वो मुस्कुराई ,
“आजकल के बच्चे भी इन सबमे इंटरेस्ट रखते है यकीन नही होता “वो मुस्कुराते हुए बोली
“मलीना ये देव है ,देव….श्रुति का पति “
मै चौक गया की डॉ ये क्या बोल रहे है ,लेकिन मलीना मेडम का चहरा मेरे ऊपर ही अटक गया ,उनकी मुस्कुराहट जाने कहा गायब हो गई और आंखों में आंसू आ गए ,उन्होंने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया था और मेरे माथे को चूमने लगी,मैं परेशान था की ये हो क्या रहा है,लेकिन मूझे उनके उनमे एक बहुत ही गहरे अपनत्व का अहसास हो रहा था…
मैं आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,
“अब समझ आया की वो मेरे किताबो को क्यो पढ़ती है ,मेरी ही तो बेटी है आखिर माँ से दूर कैसे रहेगी “
मलीना फफक कर रो पड़ी ,मेरा मुह खुला का खुला रह गया मैं कभी डॉ को देखता तो कभी मलीना को …
काजल ने मुझे अपनी माँ की तस्वीर दिखाई थी लेकिन ये वो तो नही थी ये तो कोई और ही थी …..डॉ ने मुझे आंखों से बस शांत रहने को कहा ,
“कैसी है वो उसे मेरी याद ही नही आती ,इतना गुस्सा की वो मुझसे मिलने भी नही आ सकती ,2 साल हो गए उसे देखे हुए ,शायद मुझे उसकी सजा मिल रही है जो मैंने अपने पिता के साथ किया था ,उनसे दूर जाकर “
डॉ ने उन्हें सम्हाला ,और मुझसे दूर जाकर उनसे कुछ बात करने लगे ,वो थोड़ी शांत हुई …
“अच्छा तो तुम अपनी बहनों के साथ आये हो कहा है वो सब “
इस बार मलीना के होठो पर एक मुसकान थी …….
अध्याय 37
मैं अभी अपनी बहनों के साथ मलीना मेडम के घर में बैठा हुआ था,वो मेरी बहनों से ऐसे घुल गई थी जैसे की वो उन्हें बहुत सालो से जानती हो ,डॉ निशा के नजर में आये बिना ही वँहा से जा चुका तथा शायद निशा को डॉ की जानकारी थी,मलीना मेडम हमे लंच के लिए अपने साथ ही ले आयी थी,मैं सोफे में बैठा इधर उधर देख रहा था वही मेरी बहने मेडम से गुफ्तगुह करने में व्यस्त थी ,मेरी नजर एक तस्वीर पर पड़ी और मेरी आंखे चौड़ी हो गई ,अभी तक तो मुझे डॉ और मलीना की हरकते ऐसे भी समझ नही आ रही थी लेकिन इस तस्वीर से तो मैं और भी परेशान हो गया था..
तस्वीर में एक लड़का और दो लडकिया थी ,अजीब बात थी की मैं दोनो ही लड़कियों को पहचानता था,लड़के के एक बाजू में खड़ी थी मलीना मेडम और दूसरे में जो खड़ी थी उसे मैं अभी तक काजल की माँ के रूप से ही जानता था,जी हा मुझे काजल ने उसी औरत को अपनी माँ कहा था,जो की उसके बचपन में ही गुजर गई थी ,बीच का शख्स मेरे लिए अनजान था जिसके हाथो में एक छोटी सी बेबी थी ,उसकी आंखे मुझे काजल की याद दिलाती थी ……..
क्या वो सच में काजल है ???
अगर ऐसा है तो क्या काजल मलीना की बेटी है या फिर उस औरत की जिसे काजल अपनी माँ कहती है,क्या काजल का नाम काजल ही है या फिर श्रुति जैसा की मलीना ने कहा ….
बहुत से सवाल मेरे दिमाग में थे ,सबसे बड़ी ये बात थी की अगर मलीना सच बोल रही है तो ऐसी क्या मजबूरी हो गई की काजल को अपना नाम बदलना पड़ा..और मुझसे ये बात छुपानी पड़ी ……..
अध्याय 38
“ये किसके साथ फ़ोटो खिंचाया है आपने “
काजल वो फ़ोटो देखकर बहुत ही उत्त्साहित लग रही थी जो की निशा ने अपने वाट्सअप के स्टेटस में डाला था,जिसमे निशा ने मेरे,पूर्वी और मलीना मेडम के साथ सेल्फी ली थी ..
“पहचानो ..तुम इन्हें जानती हो “
“हा जानती तो हो मैं इन्हें ,इन्ही की तो पुस्तके पढ़ती रही हु मैं ,मेडम मलीना “
काजल ने ऐसे कहा जैसे पुस्तको के अलावा मलीना से उसका कोई संबंध ही नही था,क्या वो सच में झूट बोलने में इतनी माहिर थी की अपनी माँ को पहचानने से भी इतने सफाई से इनकार कर दे …
“हम्म ये केशरगढ़ के किले में मिली हमे ,निशा और पूर्वी सके अच्छी ट्यूनिंग हो गई तो उन्होंने अपने घर खाने पर बुला लिया …”
“वाओ बहुत ही अच्छा “
झूट बोलने वाला कितना भी महारथी क्यो ना हो कुछ कमियां तो हर इंसान में होती है,काजल की आवाज थोड़ी धीमी हो चुकी थी शायद वो अपने भरे हुए गले को छुपाने की कोसीस कर रही थी ,मैंने उसे थोड़ा और कुरेदने की सौची शायद मैं जान पाउ की वो सच में भावनाओ में है या नही ..
“मैंने उन्हें तुम्हरे बारे में बतलाया वो बहुत खुस हुई की तुम उनके किताब की दीवानी हो “
काजल थोड़ी देर को चुप थी,
“फ़ोटो भी दिखाई क्या मेरी “
“ओ यार भूल गया ,कल दिखाऊंगा “
“नही ……..
वो नही क्या जरूरत है “
लेकिन तब तक उसकी नही ने मेरे दिमाग में पूरा मामला साफ कर दिया था ,वो नही को थोड़ा जोर से बोल गई थी जिसका शायद आभास उसे भी हो गया था ,दोनो में कुछ तो संबंध जरूर है वरना कहा पुरातत्व विज्ञान और कहा वो मैनेजमेंट की लड़की ,मुझे तो पहले भी ये बात अजीब लगती थी की क्यो काजल उनकी और सिर्फ उनकी ही किताब पढ़ती है ..
“हम्म्म्म ओके …….”
“जान आपकी बहुत याद आ रही है “
काजल ने बात को बदलने की कोशिस की ,मुझे उसकी आवाज में वो भारीपन मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी ,समझने में कोई भी देरी नही लगी की ये बातो को घूमना चाहती है वरना उसे मेरी याद आएगी और वो इतनी दुखी हो जाएगी की उसकी आवाज ही भर जाए ये तो मुझे मुमकिन नही लगता था ,,,,
“तुम भी आ जाओ फिर यंहा ,अच्छी जगह है ,एक दो दिन और रुकने की सोच रहा हु “
“नही ..मत रुको जल्दी आ जाओ ,,मैं अपने काम कर कारण वँहा नही जा सकती “
वो मुझे आकर्षित करने के लिए अपनी आवाज को नशीली बनाने लगी …
“आ जाओ ना मुझे मसलने “उसने बड़ी ही सेक्सी अदा में कहा ..
“तुम्हे मसलने के लिए तो खान वँहा बैठा है “
मैंने एक व्यंग कर दिया जिससे वो बुरी तरह से बौखला गई
“तुम ...तूम ना ….कितनी बार कहा की ये सब को हमारे बीच में मत लाओ …”
उसके आवाज से नाराजगी साफ साफ थी..मैं जोरो से हँसने लगा ..
“अच्छा छोड़ो उसे मैं एक दो दिन में ही आता हु ,और तुम्हे कुछ चाहिए यंहा से …”
“बस तुम आ जाओ और कुछ भी नही चाहिए “
काजल की आवाज में वो गर्मी अब नही रही ,मुझे लगा कि शायद मुझसे कोई गलती हो गई है .
“नाराज हो गई क्या ,लव यु जान “
मैं अपनी आवाज नरम करके बोलने लगा ..वो हल्के से हँसी
“बहुत सारा लव यु ….ऊऊऊम्म्मम्माआआ “
वो खुस थी और उसकी आवाज में चहक वापस आ गया था ..
“अब जल्दी आओ ,बहुत सी बाते करनी है तुमसे ..”
……………………..
______________________________
मेरी कहानियाँ
copleted story-
दीदी और दोस्त (completed) जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) बीबी के कारनामे रंडियों का घर
running -
खूबसूरत डकैत
________________________________________
#1679
22nd June 2018
chutiyadr
Custom title
Join Date: 18th May 2017
Location: clinic
Posts: 5,014
Rep Power: 28 Points: 24278
मैं काजल से बात करके पलटा ही था की दरवाजे में मुझे निशा दिखाई दी ,वो अपने बालो में उंगलिया फिराते हुए मुझे घूर रही थी ,उसके होठो में एक कातिल सी मुस्कान थी और वो अपने पारदर्शी कपड़ो से अपने जिस्म की नुमाइश कर रही थी ,जवानी के इस मोड़ पर उसके जिस्म में पूरा भराव आ चुका था और वो कपड़े को फाड़ डालने को बेताब हो रहा था,अब वो मेरी बहन नही रह गई थी की मैं उसके जिस्म के भराव को ना निहारु…
वो इठलाते हुए मेरे पास आयी ,और अपनी बांहे मेरे गले में डालकर झूल गई ….
“हम यंहा पर हनीमून मनाने आये है और आप मेरी सौत से लगे हुए हो “
उसकी मुस्कान में नाराजगी भी मिक्स थी ,मैंने उसे कुछ बोलना सही नही समझा और अपने होठो को उसके होठो से मिला दिया ,
सभी बाते बस तूफान में बह गई वो प्यार का तूफान था ये की हवस का ??????
मुझे लगता है की वो हवस का ही तूफान था क्योकि प्यार का रिश्ता तो हम पीछे छोड़ आये थे ………
अध्याय 39
जिस्म की प्यास बुझ चुकी थी और मैं अपनी खिड़की से बाहर झांक रहा था ,बाहर मुझे छिछोरे दिखाई दिया ,मैंने अपनी सिगरेट सुलगाई और उसकी हरकतों को देखने लगा,
वो नाम का ही नही काम का भी छिछोरा था ,
इसी रेस्टरूम में काम करने वाली एक महिला को पकड़े हुए दिखाई दिया ,वो दोनो झाड़ियों के पीछे थे लेकिन मैं दूसरी मंजिल में खड़ा हुआ था ,गार्डन की झाड़ियों के पीछे का दृश्य देखकर मैं अपनी हँसी रोक नही पाया ,क्योकि वो महिला शादीशुदा थी और छिछोरे के बीवी तो नही थी ……
“छेदीलाल “
मैं जोरो से चिल्लाय जिसे सुनकर वो दोनो ही अलग हुए और मुझे ऊपर खड़ा देख जैसे उनके प्राण ही सुख गए …
महिला दौड़ती हुई भागी वही छेदीलाल बस मूर्ति बना हुआ मुझे ताक रहा था ,मैं खिलखिला के हँस पड़ा ,मैं अपनी शर्ट पहन नीचे आया ही था की छेदीलाल मेरे पाव में गिर गया ..
“मुझे माफ कर दीजिये दीजिये साहब,किसी को मत बताइयेगा वरना नॉकरी जाएगी वो अलग लेकिन इसका पति मार मार के मेरा भर्ता ही बना देगा “वो गिड़गिड़ाने लगा और मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई
“अच्छा पहले बोल की चंदू के चाचा ने चंदू के चाची को चांदी के चमचे से चटनी चटाई ..”
मैं मुस्कुराकर उसे देखने लगा ,वो हड़बड़ाया सा मुझे देखने लगा
“छंदू के छाछा ने छंदू के छाछि को छांदी के छमचे से छटनी छटाई”वो बड़ी ही मुश्किल से बोल पाया
मैं जोरो से हँस पड़ा और उसका मुह मुरझा गया ..
“अच्छा चल मेरा एक काम कर तेरा कमरा कहा है “
वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,मैं उसे लेकर उसके कमरे में चला गया
एक छोटा सा रूम था उसका ..
मैंने मोबाइल निकाल कर उसे काजल की तस्वीर दिखाई
“इसे पहचानता है “उसकी आंखे बड़ी हो गई थी जिसका मतलब मुझे समझ आ रहा था की ये इसे जानता है …
……………..
“साहब आपके पास इनकी तस्वीर कहा से आयी “
“तू वो बता जिसे मैं पूछ रहा हु “
“जी साहब जानता हु ..”
वो हड़बड़ा रहा था …
“कौन है ये “
“श्रुति श्रुति मेमसाहब”
उसकी जबान बुरी तरह से लड़खड़ा रही थी लेकिन मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल चुका था की काजल असल में कौन है ..इससे पहले की मैं और कुछ पूछता मेरा मोबाइल बज उठा ,नंबर डॉ का था ..
“उससे पूछने से तुम्हे तुम्हारे सवालों का सही जवाब नही मिलेगा ,कल तुम मुझसे मिलो अकेले में …”
उन्होंने पता तो बता दिया लेकिन मैं और भी चकित रह गया क्योकि डॉ मुझपर भी नजर रखे हुए था …
अध्याय 40
मैं बड़ी मुश्किल से डॉक्टर से बोल पाता हु,
“वो चाहती क्या हैं, “
मैं झुंझलाया था …..
“वह चाहती क्या है यह तो शायद वही बता पाएगी ,लेकिन एक चीज मैं तुम्हें बता देना चाहता हूं की बदले की आग व्यक्ति से कुछ भी करा सकती है.. चाहे वह कितना ही कमजोर क्यों ना”
हो डॉक्टर की बात मेरी समझ में आ रही थी लेकिन फिर भी मैं असमंजस की स्थिति में था आखिर काजल इतना परेशान क्यो थी ?
क्या मेरा कोई वजूद नहीं था शायद उसके लिए….शायद नही वो मुझसे प्यार करती है , वह मेरे लिए बहुत मायने रखती थी रखती है और रखती रहेगी, मेरे सामने काजल का अतीत घूम रहा था उसके बचपन की यादें रह रहकर मुझे सता रही थी न जाने कितने दुख उसने झेले थे जिसके बारे में वह बात नहीं करती ..शायद उसने कभी मुझसे यह नहीं चाहा कि मैं उसका साथ दु या शायद वो जानती थी कि मैं उसका साथ नहीं दे सकता, बात इतनी आसान तो नहीं थी जितना मैं समझ रहा था उसने कई दुख देखे हैं जो मेरी समझ से परे हैं, काजल मेरी अपनी काजल मैं उसे कैसे किसी सीमाओं में बांध पाऊंगा वो हर सीमाओं से परे है ,उस पानी की तरह जो बस बहती जाती है,वह उस सावन की तरह है जो कब आएगी इसका अंदेशा किसी को नहीं , मैं दर्पण में खड़ा अपने अक्स को निहार रहा था ,परछाई... वह तस्वीरें...
वह हल्की हवा की खुशबू ,महक का जादू अतीत की कही अनकही कहानियां थी जो मुझे जानने थी, मैं परेशान था व्याकुल था मेरा दिल गवाही नहीं दे रहा था कि वह गलत है और वही हुआ मुझे जितना भी अब तक पता चला मुझे यही समझ आया कि काजल गलत नहीं थी ना वह है और शायद वह नहीं होगी उसके साथ जो बीती थी वह एक दर्दनाक घटना थी शायद उसका रोग उसके जीवन में आज भी कायम था, मैं अपनी पलकें गड़ाए डॉक्टर को निहार रहा था डॉक्टर भी मुझे घूर कर देख रहा था,, जैसे जानना चाहता हो कि मेरे दिल में क्या चल रहा है…
आखिर उसने कहा
“ मैंने जो भी तुम्हें बताया है कभी इसका जिक्र काजल से मत करना न जाने उसके लिए कितनी बड़ी बात होगी वह हर चीज तुमसे छुपाना चाहती है, क्योंकि उसे पता है तुम्हें बताने से सिर्फ उसका दुख बढ़ेगा, उसे खुशी देना हो सके तो उस का साथ देना मैं जानता हूं कि तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल होगा लेकिन मैं जानता हूं कि तुम यह कर सकते हो…”
डॉक्टर वहां से उठ कर चला गया और मैं बस एक तक दिवाल को घूरता रहा…
*******************
घूमते-घूमते ना जाने मैं कहा जा रहा था, मैं उन जगहों में घूम रहा था जहां काजल की पूरी जिंदगी थी ,लेकिन उसने कितने राज अपने सीने में छुपाए हुए थे वह 2 साल पहले ही तो यहां आई थी लेकिन मुझे कभी पता नही चल पाया …
मैं उस होटल में पहुंचा जहां से इन सब की शुरुआत हुई थी नाम था आदित्य इंटरनेशनल
मैं बस निहारे जा रहा था वह एक शानदार होटल था...
वह वापस अपनी बहनों के साथ आया और लजीज खाने का लुफ्त उठा रहा था आसपास नजर दौड़ाई कुछ खास नहीं कुछ ऐसा नहीं जिससे मुझे संदेह हो..
“भइया खाना तो बहुत अच्छा है” निशा ने कहा
“ हां” मैंने जवाब दिया…
अचानक ही मैं बहुत गुस्से में आ गया
“यह सब क्या है” मैंने जोरों से कहा वहां पर बेटर तुरंत उपस्थित हुआ.
“ क्या हुआ सर”
“ यह क्या है”
मैंने प्लेट में पड़े हुए एक काक्रोच की तरफ इशारा किया ,वह बुरी तरह चौका
“ सर सर यह कहां से आया”
मैंने उसे घूरकर देखा,
“ यह खाना तुमने ही लाया था ना “
वह चकित हुआ
“ जी जी सर,पता नहीं सर यह कैसे हुआ”
लेकिन मैं क्रोधित था मैंने उसकी एक न सुनी
“अपने मैनेजर को बुलाओ “ मैं फिर जोर से बोला, वह डरता हुआ भागा थोड़ी देर में होटल का मैनेजर मेरे सामने था, वह मुझसे माफी मांग रहा था लेकिन मैंने एक तमाशा खड़ा कर दिया..
आखिरकार थक कर उन्होंने कुछ फोन किए,और मेरे होठो में मुस्कान खिल गई …
कुछ ही देर में वहां एक लंबा चौड़ा सा व्यक्ति आकर खड़ा हुआ और बड़ी नम्रता से मुझसे कहा
“सर जो भी हुआ उसके लिए हमें माफ कर दीजिए मैं इस होटल का मालिक हूं आपका खाना फ्री है और आशा करता हूं कि यह बात यहां से बाहर नहीं जाएगी “
मैंने उस व्यक्ति को घूरा और उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया जैसे वह समझ गया हो कि मैं मान गया हूं..
“ हेलो सर मेरा नाम अयूब खान है मैं इस होटल का मालिक हूं” मैंने अपना हाथ बढ़ाया वह कुछ 25 साल का शख्स था, दिखने में बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम लग रहा था आयूब मैंने मन ही मन दोहराया अच्छा तो यह अजीम का भाई है, मेरे चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई…
आयूब को देख पूर्वी के चेहरे पर एक अलग स्वभाव आया .मैं उस को पहचानता था मैं जानता था की पूर्वी उसकी तरफ आकर्षित है ,यह इस उम्र की नजाकत थी कि किसी भी स्मार्ट और हैंडसम लड़के को देखकर एक लड़की तथा किसी भी खूबसूरत लड़की को देखकर एक लड़का आकर्षित हो जाए एक सामान्य सी बात है मैं उससे हंसकर बात करने लगा और थोड़ी देर में वह हमसे बहुत ही घुल मिल गया देखते ही देखते निशा और पूर्वी की उससे दोस्ती हो गई ,हमने उससे विदा लिया और उसे शहर आने का निमंत्रण दिया जब उसे पता चला कि मैं एक होटल का मैनेजर हूं तो वह मुझसे और भी खुल गया और जब उसे पता चला कि मैं रश्मि के साथ काम करता हूं तो उसका चेहरा अचानक सूख गया मैं उसकी भावनाओं को समझ सकता था ,मैंने हंसा
“ कोई बात नहीं जो हुआ सो हो गया लेकिन मुझे एक चीज समझ नहीं आती आखिर खान साहब के दो बेटे हैं तो क्यों अजीम को ही अपना बेटा मानते हैं या ये कहे कि दुनिया के सामने सिर्फ अजीम ही आता है मुझे तो आज तक पता नहीं था कि खान साहब के दो बेटे हैं”
उसका चेहरा और मुरझा गया उसने बात को बदलना चाहा और मैंने भी कोई जोर नहीं डाला क्योंकि मैं जानता था की असलियत क्या है और यही असलियत शायद मुझे काजल का बदला लेने में मदद करने वाली थी
********
“तो मुझे लगता है तुम्हें आयूब बहुत पसंद आया”
मैंने हंसकर निशा और पूर्वी से कहा ,पूर्वी तो जैसा शर्मा ही गई मैंने पहली बार उसे शरमाते हुए देखा था मैं भी थोड़ा हंसा और निशा भी क्योंकि मुझे पता था कि निशा का आकर्षण सिर्फ मेरे लिए है ..
लेकिन क्या मैं पूर्वी का इस्तेमाल करूंगा ???
शायद???
मेरे लिए यह सोचना भी पाप है लेकिन क्या सच में ??
मैं सोच में गुम हो गया मैं यही सोच रहा था कि क्या मैं सच में पूर्वी का इस्तेमाल करना चाहता हूं आयुष को फसाने के लिए..
शायद नहीं, शायद हां ,शायद पता नहीं,
मैं असल में दोनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता था मैं चाहता था जो हो बस हो जाए, अगर इस दौरान मुझे कुछ ऐसी चीज पता चले या कुछ ऐसा हो जाए जिससे मैं काजल की मदद कर सकूं तो शायद वह कार्य मुझे करना चाहिए और अगर ऐसा ना हो तो ???
जिस तरह मैंने आयूब व पूर्वी को नजर मिलाते देखा था मुझे लग रहा था इन दोनों के बीच कुछ तो खिचड़ी पक सकती हैं अभी मैं कुछ कह नहीं सकता था लेकिन पूर्वी मेरी सबसे प्यारी बहन है मेरे लिए यह करना बहुत मुश्किल था कि मैं उसे मछली के दाने की तरह इस्तेमाल करू, मैं उसे उसकी स्वतंत्रता में रहने देना चाहता था ,मैं चाहता था कि अगर वह प्यार करें तो सफल हो, मैं चाहता था कि वह खुश रहे और शायद इसी प्यार में और इसी खुशी में मुझे मेरी मंजिल मिल सकती थी, मैं सोच में गुम सा हो गया मुझे डॉक्टर की बताई बातें याद आ रही थी तो साथ ही पूर्वी का उस लड़के को देखना ,उन दोनों की निगाहों में एक अजीब सा आकर्षण एक दूसरे के लिए ,वह आकर्षण किसी भी नौजवान की आंखों में जब देखा जाता है तब बड़े ही आराम से बताया जा सकता है कि आखिर उनके दिल में चल क्या रहा है लेकिन क्या आयूब एक अच्छा लड़का है ??
मुझे नहीं पता था जितना मैं उसे जान सका या जितना मैंने दूसरों के द्वारा सुना था.. जी हां मैं आज दिनभर यही तो कर रहा था होटल आदित्य इंटरनेशनल की पूरी जानकारियां मेरे पास थे आयूब की जानकारी मेरे पास थी, जितना मैंने उसे जाना मुझे बस इतना ही समझ आया कि वह एक बड़ा सुलझा हुआ लड़का है शायद पूर्वी के लिए अच्छा है, शायद ना भी हो?
लेकिन मैं इन दोनों को स्वतंत्रता देना चाहता था देखना चाहता था कि आखिर कितनी आगे बढ़ते हैं खैर जो भी हो मैं थक चुका था जमाने भर के विचार मेरे दिमाग में घूम रहे थे और अब मुझे जरूरत थी आराम की और शायद उससे पहले निशा की…
**************
पता नहीं क्यों लेकिन मुझे निशा की आदत सी पड़ रही थी उसका मुझे इतना प्यार करना मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोई मुझे इतना भी प्यार कर सकता है, रही बात काजल की मैं जानता था कि वह मुझे बहुत प्यार करती हैं लेकिन वह मेरी बीवी थी और निशा मेरी बहन दोनों के व्यक्तित्व में जमीन आसमान का फर्क है, न जाने क्यों लेकिन मैं दिन-ब-दिन निशा की और आकर्षित होते जा रहा हूं ,जिसे मैंने निशा को बचाने के लिए शुरू किया था ,जिसे मैंने अपनी बहन की भलाई के लिए शुरू किया था अब वह मेरे लिए पाप नहीं रह गया था अब शायद वह मजा बन गया एक ऐसा मजा जिसमें मैं डूबते जा रहा हूं ,उसके शरीर कण कण उसके अंग प्रत्यंग उसके कटाव उसके एक एक घुमाव, उसके जिस्म का भराव , उसकी मासूमियत ,उसकी हंसी ,उसके बाल ,उसके गाल, उसके होठों की लाली ,उसकी मतवाली चाल, उसके पसीने की सुगंध, उसका हंसना ,उसका बोलना, उसका चलना, उसका रुकना, उसका देखना, उसका मुझे छूना
,उसका मुझे प्यार करना उसका हर एक बर्ताव ,उसकी अदाएं ,उसके नखरे, उसके झूठ, उसकी सच, उसकी हया, उसकी बेहयाई , उसकी नजाकत उसकी फितरत उसकी मोहब्बत उसकी सिहरन, उसकी उलझन ,उसका द्वेष उसका राग ,उसकी सीमाओं को तोड़ना और नई सीमा बना देना ,उसका मेरे बालों पर हाथ फेरना.. उसके आंसू ...जब वह कहती है कि आप मेरे हो सिर्फ मेरे.. उसकी बड़ी-बड़ी आंखें और आंखों का वह काला घेरा जो काजल से बनता है, उसकी आंखों से झड़ते हुए प्यार के झरने उसका दिल जो इतना सख्त होकर भी कितना नरम है, मुझे कभी-कभी लगने लगा कि मैं कहीं पूरी तरह से तो उसका नहीं हो जा रहा हूं, हां शायद लेकिन नहीं शायद,
वह मेरी बीवी नहीं थी वह मेरी प्रेमिका नहीं थी लेकिन अब वह मेरे लिए इन दोनों से बढ़कर है मैं क्या हूं ? मैं क्यों हूं ? मैं किसका हूं ???यह सवाल बड़े पेचीदे हैं लेकिन उसका एक जवाब निशा के पास है कि ‘आप मेरी जान हो आप मेरे लिए हो और आप मेरे हो’ उसकी प्यार भरी बातें जिसका शायद कोई मूल्य ना हो, जो तर्क की सीमाओं में नहीं बंधती जो तर्क से बाहर है वो अलग ही दुनिया की बात है जो एक प्रेमिका एक प्रेमी से करती हैं,या एक बच्ची करती है अनगढ़ सी ,बेमतलब सी , वैसी बातें यह सब निशा की खूबी थी तर्क से दूर प्यार की किसी दुनिया में खोई हुई थी ,एक सागर में खोई हुई थी जिसका कोई किनारा उसके पास में ना था …
वह मुझे अपनी गहराई में पाना चाहती थी, वह हमेशा मुझ में समाना चाहती थी, उसके पास इसके सिवा और कोई काम नहीं था उसकी जिंदगी में इसके सिवा और कोई मकसद नहीं था और शायद यही बात मुझे उसकी ओर इतना आकर्षित करती है ,क्योंकि काजल की जिंदगी में एक मकसद है और वह मकसद मैं नहीं हूं…
लेकिन निशा की जिंदगी में जो मकसद है वह सिर्फ मैं हूं…………………………………………………………………………….
अध्याय 41
रसदार होठों का चुंबन ले कर, जीभ में जीभ घुसकर जीभ से जीभ मिलाकर और दिल की धड़कनों को एक साथ करें फकत उसके होठों को अपने दांतो में गड़ा कर मैं मदहोश हो रहा था….
निशा की जवानी में डूब कर उसके गद्देदार पिछवाड़े अपने हाथों से सहलाते हुए उसके गीले गीले होठों पर मैं और थूक ,मिला रहा था,
जीवन का यह सुख शायद सभी को नसीब होता है लेकिन मेरे जैसा नहीं, क्योंकि नीचे पड़ी वह लड़की कोई और नहीं थी वह मेरी बहन थी मेरी अपनी बहन जिस की जवानी के उठान को हम अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए उपयोग में ला रहा थे..
“भैया भैया भैया भैया भैया थोड़ा धीरे धीरे कीजिए ना इतना क्यो उतावले हो रहे हो, इतने क्यों मतवाले हो रहे हो आपकी ही हु , आपकी ही रहूंगी इतने उतावले मत हो “
निशा कहे जा रही थी लेकिन उसकी बातो का मुझ पर कोई असर नहीं हो रहा था, मैं तो बस उस में डूबना चाहता था उस गहराई तक जहां तक आज तक मैंने डूबा नही था, हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे और मेरे हाथ उसके गद्देदार पिछवाड़े को सहलाते हुए उसे अपनी ओर खींच रहे थे..
दो नंगे जिस्म एक दूसरे से सटे हुए एक दूसरे में गुथे जा रहे थे सांसे तेज थी धड़कन मध्यम थी, जितना हो सके एक दूसरे से मिलने की ख्वाहिश थी ,दीवानगी सर पर चढ़ी हुई थी मेरा लिंग अकड़ कर अपनी प्यास बुझाने को बेताब था , वही निशा की योनि रस से भरी हुई छलक रही थी ,मेरे लिंग की चमड़ी थोड़ी पीछे हुई और वह धीरे-धीरे निशा की योनि में समाते गई.. एहसास ..वह एहसास इतना सुखदाई था कि हम दोनों के ही मुंह से सिसकी निकल गई निशा ने मेरे बालों को जोरों से पकड़ा और अपनी और खींचा मैंने भी उसके टांगों को हल्का सा फैलाया और अपने लिंग को और भी अंदर दबाने लगा जब तक कि वह अपनी पूरी गहराई में नहीं चला गया..
निशा ने मेरे होठों को अपने दांतो से काटा शायद मुझे दर्द होना चाहिए था लेकिन वह दर्द इतना मीठा था कि मैं बार-बार लेना चाहता था, रात के अंधेरे में हल्की रोशनी से कमरे में फैली दूधिया रोशनी में दो जिस्म एक हो रहे थे ,कमर हल्की-हल्की चल रही थी निशा के यौवन से भरपूर उसके स्तन मेरे हाथों में थे ,कभी उसके फूलों को अपने होठों से चूमता और उसमें रस के भंडार को और निचोड़कर पीने की कोशिश करता..
दोनों डूबे थे मस्ती अपने चरम में थी मैं निशा के ऊपर उछले जा रहा था और वह अपने कमर को मेरे कमर से मिलाने की पूरी कोशिश कर रही थी, निशा ने मुझे नीचे पटक दिया और मेरे ऊपर आकर अपने कमर को हिलाने लगी..
“ भैया मैं मर जाऊंगी ...आह आह ..मुझे अपना बना लो ...आह आह ..सिर्फ अपना बना लो ...आह आह ..बस मेरे हो जाओ ओह भईया ...आह आह ..आह आह .. और मुझे कुछ नहीं चाहिए,जोरो से भइया आह मुझे अपने प्यार में डूबा लो भइया जोरो से आह भइया .. मैं और कुछ नहीं चाहती आई लव यू भैया ,आई लव यू ,आई लव यू भैया, आई लव यू,...आह आह .....आह आह आह आह आह आह .
”
अब वह मेरे ऊपर थी और पूरा कंट्रोल उसके ही हाथों में था मैं शांत पड़ा हुआ उसके चेहरे को देख रहा था वह मेरे ऊपर आ गिरी थी और उसके बाल मेरे चहरे के चारों तरफ फैल गए, निशा की सांसे बहुत जोरों से चल रही थी जो मेरे गालों से टकरा रही थी उसकी आंखें अधमुंदी थी जैसे कोई नशे में हूं थोड़ी देर बाद जैसे तूफान हल्का सा शांत हुआ और कमर धीरे धीरे चलने लगे हवस की गहराई प्यार की गहराई में बदलने लगी थी, हम दोनों एक दूसरे के जिस्म का पूरा एहसास कर पा रहे थे और वो प्यार जिस्म से लेकर मन तक पहुंच रहे थे हम एक दूसरे की रूह को छूने में कामयाब हो पा रहे थे, मैं उसके बालो को सहला रहा था और वह मेरे ऊपर गिरी हुई अपने जिस्म को सिर्फ मेरे लिए छोड़ दी थी उसके नाज़ुक शरीर का एहसास मेरे त्वचा से होता हुआ मेरे मन की गहराइयों में उतर रहा था..
मैं उसे बहुत प्यार करने लगा था, पहले भी करता था लेकिन अब प्यार का स्वरूप भी बदल चुका था, मैंने उसके बालों को अपने चेहरे से हटाया और उसको अपनी बाहों में जोरों से खींचा वह कसमसाई हुई मेरे बाहों में समा गई वह अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रही थी और मेरे जिस्म को सहला रही थी वह किसी समर्पण की प्रतिमा सी थी अपने आप को मेरे लिए समर्पित कर चुकी थी, मैंने आंखें खोली एक हल्का सा प्रकाश दरवाजे के माध्यम से कमरे में आता हुआ दिखाई दिया ..
देखा तो दो आंखें देखते ही समझने में देर नहीं लगी कि वह और कोई नहीं बल्कि पूर्वी है ,पूर्वी का मासूम चेहरा मेरे सामने खिलकर आ गया था..
हम दोनों की नजरें मिली वह जाने को हुई लेकिन अचानक से फिर रुक गई उसकी आंखों में आंसू थे एक अजीब सा दर्द शायद छलकने को था, शायद मैं उस दर्द को समझ पाता वह अपने आंखों से कैसे देख पा रही थी कि उसका खुद का भाई अपनी सगी बहन के साथ नंगा सोया है.. किसी के लिए भी यह सोच पाना मुश्किल है लेकिन मेरी प्यारी सी छोटी सी बहन इतने बड़े दर्द को किस प्रकार झेल पा रही होगी.
उसके आंखों का आंसू मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आया मैंने अपने हाथ उठाया है और उसे अपने पास बुलाया, उसने अपना सिर ना में हिलाया लेकिन मैंने उसे फिर से आंखों ही आंखों में इशारा किया आजा शायद मुझे तेरी जरूरत है उसने एक बार निशा की और देखा मैंने आंखों से कहा कि इसकी फिक्र मत कर, वह हल्के कदमों से कमरे में आई मैंने उसका हाथ थामा और अपनी ओर खींच लिया वह सकुचाई सी धीरे से बिस्तर में बैठी निशा ने अचानक अपना सिर उठाया कभी वह पूर्वी को देखती तो कभी मुझे मैंने प्यार से निशा के चेहरे को सहलाया
“क्या यह मेरी बहन नहीं है, मैं जानता हूं कि तुम दोनों को ही पता है कि क्या हो रहा है लेकिन मैं किसी से छुपाना भी नहीं चाहता, निशा मैं उससे बहुत प्यार करता हूं और इस प्यार में कोई बंटवारा नहीं है कभी यह मत सोचना कि मेरे लिए पूर्वी और तू दो अलग हैं तुम दोनों ही मेरे लिए एक ही हो.. हां यह जिस्म का रिश्ता जो तेरे साथ मेरा बन गया है वह शायद एक भाई बहन के रिश्ते में नहीं होना चाहिए था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं पूर्वी को भूल जाऊं या तेरे ऊपर मेरा कोई विशेष अधिकार हो गया तुम दोनों आज भी मेरे लिए मेरी जान हो ,मेरी बहने हो ,आज भी मेरी कलाई में राखी तुम्हारे नाम की बंधती है…..”
“ निशा मेरी बात को समझना जितना अधिकार तुम्हारा मेरे ऊपर है उतना ही पूर्वी का भी है ..यह जिस्मानी रिश्ता केवल मेरे और तुम्हारे बीच ही रहेगा ,लेकिन मुझे पूर्वी को भी प्यार करने दे “
निशा बहुत भावुक हो चुकी थी उसकी आंखों में आंसू था साथ में पूर्वी के भी शायद इन दिनों जब उसके मन से सभी के लिए नफरत निकल चुका था और वह मेरे ही दुनिया में खोई हुई थी इस समय में और इस खुशी में उसे सोचने पर मजबूर किया था की सच में हम दोनों भाई बहन हैं हमारा जो रिश्ता बन चुका है उसे भुलाया नहीं जा सकता उसे बदला नहीं जा सकता लेकिन निशा का मेरे ऊपर एकाधिकार चाहना शायद निशा को यह बात समझ आ गई थी कि प्यार में अधिकार नहीं होता ,या समझ नहीं आई थी..??
मैंने फिर से निशा की आंखों में देखा
“बहन... मेरी जान... प्यार में कोई एकाधिकार नहीं होता असला प्यार में तो अधिकार ही नहीं होता प्यार में होता है तो सिर्फ और सिर्फ समर्पण जो तूने किया है मेरे लिए, लेकिन अगर तू यह चाहती है कि कि तेरा मेरे ऊपर अधिकार हो तेरे प्यार नहीं बस जिस्म की हवस होगी यह वासना होगी, अधिकार की चाह करना ही वासना है”
निशा ने मेरी आंखों की गहराइयों में झांका और मेरे होठों पर हल्का सा चुंबन दिया,
“ भैया मैं जानती हु कि आप क्या कहना चाहते हो लेकिन क्या करूं ..
जब आपको किसी दूसरे को प्यार करते देखती हु तो दिल जल जाता है सांसे रुक जाती हैं लगता है कि कोई आपको मुझसे छीन लेगा मैं इस बात से परेशान हो जाती हु कि कैसे आपके प्यार का बटवारा करूँगी ,भैया मैं मानती हूं कि मुझसे गलती हुई लेकिन क्या आप मुझे माफ नहीं करोगे..”
मेरे होठों पर मुस्कान आ गई मैंने पूर्वी का हाथ पकड़ा और उसे अपने ऊपर खींचा मेरी एक बाह में निशा थी वहीं दूसरी बाह में पूर्वी..
निशा के जिस्म में एक भी कपड़ा नहीं था उसकी योनि में अभी भी मेरा लिंग पूरी तरह से समाया हुआ था लेकिन पूर्वी?? पूर्वी मासूम निश्चल सी मेरे बाहों में खुद को सामने की कोशिश कर रही थी वह अचानक से रो पड़ी
“भैया यह क्या हो रहा है मैंने कभी ऐसा तो नहीं सोचा था मैंने आपका प्यार चाहा है , मैं दीदी का प्यार चाहा है , मैं चाहती थी कि आप दोनों मिलो ,मैं आपके और दीदी के बीच नहीं आना चाहती थी ..लेकिन ??
यह क्या हो रहा है क्या प्यार करना इसी को कहते हैं क्या प्यार करने के लिए दो जिस्म का मिलना जरूरी है???
क्या जिस्मों के बाहर प्यार नहीं होता??
अगर दीदी आप से प्यार करती थी क्या जरूरी था कि उनका जिस्म आपके जिस्म से मिले क्या जरूरी था वह करना जो दुनिया की नजर में गलत है????”
मेरी मासूम बहन ने मुझसे ऐसा सवाल पूछ लिया था जिसका जवाब मेरे पास नहीं था शायद उसने मुझे आइना दिखा दिया था लेकिन अब देर हो चुकी थी बहुत देर मैं प्यार से उसके बालों को सहला रहा था इधर निशा मेरे गालों को चूमते हुए अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रही थी बड़ी अजीब सी कंडीशन थी ...एक तरफ मेरी वह बहन थी जिसके साथ मेरी जिस्मानी संबंध है और एक तरफ मेरी वह बहन थी जिसे बेहद प्यार करता था जिसके बारे में मैं गलत सोच भी नहीं सकता था ..
मासूमियत हवस और प्यार तीनों एक साथ हैं थे जज्बात मोहब्बत और भावनाओं का उफान सब कुछ एक साथ थे.. जिस्म की आग ,प्यार की ठंडकता सब कुछ एक साथ थे, निशा रो रही थी पूर्वी भी रो रही थी और मेरे आंखों में पानी था.. दो जिस्म नंगे पड़े थे लेकिन आंखों में पानी लिए, मेरा लिंग मेरी बहन की योनि की गहराइयों में था उसमें अकड़ भी थी और वह योनि के रस से भीगा हुआ भी था लेकिन मन में हवस का एक कतरा भी नहीं बचा था, निशा भी रोते हुए अपने कमर को हल्के हल्के हिलाए जा रही थी और मेरा अभी भी उसके मांसल चूतड़ों को सहलाया जा रहा था.. मेरी दोनों बहनें मेरे साथ थी, उस रूप में जो दोनों चाहती थी एक को बस प्यार चाहिए था और दूसरे को मुझ पर अधिकार मेरे जिस्म पर अधिकार..
दोनों को वो मिला था जो वह चाहते थे और मुझे???
मुझे मिली थी जन्नत, मेरे साथ दोनों थे दोनों का प्यार मेरे साथ था , मेरा मन शांत था मैं खुश था मानो पूरे दुनिया की जन्नत मेरे कदमों में हो, पूरी दुनिया की खुशियां मेरे कदमों में है अपने दोनों बहनों को प्यार करना चाहता था उस तरह से जिस तरह से वह चाहती थी.. एक से जिस्मानी होकर तथा दूसरे से रूहानी होकर .....
अध्याय 42
जीवन की सभी करामातों ने मुझे और भी अधिक मजबूत बना दिया था,अभी अभी मैं छुट्टी से वापस आया था और आके अपने कमरे में बैठा हुआ सोच रहा था की आगे क्या करना चाहिए कि मेरे मोबाइल की बत्ती जल उठी ,,
“हैल्लो “
“आ गए जान “
दूसरी ओर से काजल ने कहा
“कहा हो तुम देखने को दिल कर रहा है “
वो हँसी ..
“होटल आयी थी यार ,और कहा शाम को मिलते है ,तुम भी जाओ मेडम रश्मि तुम्हारा इंतजार कर रही होगी “
मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई क्योकि काजल ने मेडम रश्मि बोला ही कुछ इस तरह जैसे वो इस बात को लेकर जलती हो …
मुझे काजल से मिलने का बहुत ही मन कर रहा था मैं उसके सामने मलीना की बात करना चाहता था और उसके चहरे का एक्सप्रेशन देखना चाहता था की आखिर वो फिर मुझसे कैसे छिपाती है ,
मैं जल्दी से तैयर हुआ और उसके होटल की तरफ भागा ..
पहली बात तो मैं उसे सरप्राइज देना चाहता था ,
मैं सोच में पड़ गया की आखिर कैसे पता करू की वो कहा होगी ,सीधे उसके पास जाने से पहले मैं सोच रहा था मेरे दिमाग में एक आईडिया आया मैंने शबनम को फोन लगाया ,
“अरे कहा हो मेरी जान “शबनम की नशीली आवाज मेरे कानो में आयी
“बस छुट्टियां खत्म हो गई है अभी अभी पहुचा हु “
“ओह तो इस कनीज को कैसे याद कर लिया “
वो फिर से अपनी मादक आवाज में बोली
“तुम मेरी कनीज नही तुम तो मेरी मलिका हो “मैं मुस्कुरा उठा
“ओहो ऐसी बात है ..
”वो जोरो से हँसी
“लगता है साहब को कोई जरूरी काम आ गया है “
उसने मेरी चपलिसी की वजह समझने में ज्यादा देर नही की
“बस मैं चाहता हु की तुम पता करो को काजल कहा है ,असल में मैं उसे सरप्राइज देना चाहता हु “
शबनम थोड़ी देर सोचने लगी
“अरे क्या हुआ “
“सोच लो कही तुम्हारा सरप्राइज देना तुम्हारे लिए मुश्किल ना पैदा कर दे “
वो जोरो से हँसने लगी ,हा मैं कैसे भूल गया था की काजल क्या क्या करती है ,शबनम की बातो में तो दम था लेकिन फिर भी मुझे तो काजल से मिलना ही था
“तुम पता तो करो वो होटल में है तो आखिर है कहा और ये भी बताने की जरूरत नही है की उसे पता नही चलना चाहिए की मैं आ रहा हु “
वो शायद मुस्कुराई होगी
“ओके जैसा आप कहे मेरे आका “वो फिर से खिलखिलाई
**********************
होटल के बाहर ही मुझे हर्ष मिल गया शायद उसने मुझे पहचान लिया था …
“हैल्लो सर “
मैं हड़बड़ाया ,मैं कैसे भूल गया था की यंहा पर मुझे बहुत से लोग जानते है ,
“ओह हैल्लो “
“आप तो काजल मेडम के फ्रेंड है ना “
“हम्म “
“कहा है तुम्हारी मेडम “
“वो तो ……..”
वो चुप हो गया जैसे सोच रहा हो ,
“क्या हुआ “
“कुछ नही सर वो तो असल में खान साहब के फॉर्म हाउस में है “
मेरे दिल में एक जोर का धक्का लगा
“ओह और फार्महाउस कहा पर है “
“मुझे नही पता सर बस इतना ही बताया था मेडम ने ,वो दोनो किसी डील के कारण वँहा गए है ,आप एक बार फोन करके कन्फर्म कर लीजिए “
वो थोड़ा झेप गया क्योकि उसके मुह से शायद कुछ गलत निकल गया था ,
*********************
मुझे शबनम काल कर रही थी
“हैल्लो “
“मजनू जी के लिए बुरी खबर है “
उसकी बात सुनकर मैं थोड़ी देर तक कुछ भी नही बोला
“काजल मेडम तो होटल में नही है “
“तो कहा है ???”
“वो तो उसने नही बताया है बस इतना ही कहा की वो अभी 2 घण्टे बाद ही होटल पहचेगी “
“ओक्के “
“मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी “
मैंने थोड़ा जोर दिया
“हा पूछो ना “
“खान का फार्महाउस कहा पर है “
मेरी बात से शबनम थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गई
“ओ तो काजल वँहा गई है ,यार देव क्यो आग से खेलना चाहते हो ,छोड़ो काजल को मैं हु ,यंहा आ जाओ तुम्हे जन्नत दिखाउंगी “
वो बहुत ही कमीनी सी आवाज में बोली
“जो पूछा है वो तो बताओ “
उसने मुझे पूरा पता बताया लेकिन साथ ही हिदायतें भी दे डाली ,लेकिन मैं उसकी हिदायतें कहा मानने वाला था …
मैंने गाड़ी घुमा दी ..
मैं कर में ही था की काजल का फोन आ गया
“तुम होटल आये थे,हर्ष ने बलताय “
लग रहा था की मेरा होटल आना उसे पसंद नही आया ,या हर्ष का मुझे बतलाना
“हा सोचा था की सरप्राइज दूंगा ,लेकिन अब वापस जा रहा हु ,तुम तो अपने खान को खुस करने में बिजी हो “
थोड़ी देर तक उधर से कोई भी जवाब नही आया
“देव प्लीज् …….
”
उसकी आवाज में एक निराशा थी
“अगर मुझे कुछ पता नही होता तो बात और थी ,जबकि मुझे सब पता है तो भी तुम मुझसे ये सब छिपाने की कोशिस कर रही हो “
मैं उसे समझते हुए कहा
“हा क्योकि असलियत तुम्हे जला देगी और मैं नही चाहती की तुम जलो ,तुम्हे दुख हो ..माना की तुम्हे सब कुछ पता है लेकिन फिर भी मेरी बात सुनकर तुम्हे जलन होगी मैं वो बिल्कुल नही करना चाहती ,मैं तो इसे बस जल्द से जल्द खत्म करके तुम्हारे साथ ही अपना पूरा जीवन बिताना चाहती हु ……..अब प्लीज् देव ऐसे मजाक भी मत किया करो क्योकि इससे मुझे लगने लगता है की मैं तुम्हारे साथ धोखा कर रही हु ..
हाँ अगर तुम भी वैसे होते तो अलग बात थी “
मैं उसकी बात सुनकर चौका
“कैसा ???”
वो थोड़ी देर तक चुप थी
“अरे बताओ भी क्या हूं “
“cuckoldry का नाम सुना है “
वो धीरे से बोली ...मैं उसकी बात सुनकर सन्न रह गया और फोन काट दिया ,मुझे इसके बारे में ज्यादा तो नही पता था लेकिन मैं कुछ तो जानता ही था …………..
अध्याय 43
“तुम्हें मलिनी कैसी लगी”
काजल ने मुझसे लिपटकर कहा.
“ बहुत अच्छी,लगा ही नहीं जैसे किसी अनजान से बोल रहा हूं”
काजल का चेहरा चमक उठा, वह किसी बच्चे की तरह उछल पड़ी ,
” काश मैं उन्हें देख पाती”
“ तो चलो कभी चलते हैं”
उसका चेहरा थोड़ा सा उदास हो गया
“और क्या-क्या किए” उसने बात को पलटा
“और कुछ नहीं बस घूमे फिरे और हां डॉक्टर से भी मिला”
काजल चौकी, वह मेरी बाहों से अलग हो गई
“क्या तुम डॉक्टर साहब से मिले”
“ हां क्यों यहां हमारी पहचान तो हो ही चुकी थी वह मुझे वहां दिख गए थे”
काजल का चेहरा गंभीर होता गया..
“ क्या हुआ डॉक्टर का नाम सुनते ही तुम्हारे चेहरे में क्या हो गया”
मैंने उसे परखने के अंदाज में कहा उसने अपने आप को तुरंत संभाला
“कुछ भी तो नहीं “
थोड़ी देर सोचती रही
“ अच्छा मैंने जो तुम्हें कहा था उसके बारे में क्या सोचा”
उसने थोड़ी नजाकत के साथ और थोड़ी शरारत के साथ मुझसे पूछा
“ किस बारे में???”
“ अरे वही जो मैंने तुम्हें कहा था cuckoldry के बारे में”उसके होठो में मुस्कान थी
“ तुम पागल हो गई हो क्या”
मैं अपनी भावनाओं को छुपाते हुए कहा
“ ऐसी कोई बात नहीं लेकिन फिर भी मुझे लगता है की तुम्हे कितना दुख होता होगा , उससे अच्छा है कि दर्द का मजा लिया जाए”
मैंने अपना सिर झटका
“दर्द का मजा “वह मेरे ऊपर आ चुकी थी उसने मेरे होठों पर अपने तपते हुए होठ रखें वह चुंबन कुछ देर तक चलता रहा..
मैं उसके जिस्म को सहलाता रहा और वह मादक सिसकियां लेते रही
“क्यों दर्द में मजा नहीं है क्या???
“दर्द में शायद मजा हो सकता हैं लेकिन तड़प में नहीं ,जलन में नहीं, उस पीड़ा में नहीं जब भी मैं सोचता हूं कि तुम किसी और के साथ हो तुम्हें नहीं पता कि मेरे अंदर क्या बीतती है ऐसा लगता है कि मार डालो तुम्हें भी और उसे भी जो तुम्हारे साथ हैं….”
काजल को देर तक गंभीरता से मुझे देख तेरे फिर अचानक से हलके से मुस्कुराई
“ यही तो तड़प है जो तुम्हें मजा देगा “
उसकी बातें मुझे समझ नहीं आ रही थी मैं उसे गौर से देखता रहा उसका प्यारा सा चेहरा खिला हुआ था,वो मन में कुछ सोच कर मुस्कुरा रही थी..
“ ऐसे क्यों मुस्कुरा रही हो क्या तुम्हें सच में लगता है कि मैं वह करूंगा “
उसने अपना सिर ना में हिलाया
“मुझे नहीं लगता कि तुम ऐसा कर पाओगे लेकिन हां अगर तुम ऐसा करोगे तो शायद मुझे बहुत खुशी हो “
मैंने उसे बड़े आश्चर्य से देखा
“ ऐसा क्यों कह रही हो “
“क्योंकि मुझे हमेशा दुख रहता है कि तुम जल रहे हो सिर्फ और सिर्फ मेरे कारण तुम्हें इतनी तकलीफ है झेलनी पड़ रही है सिर्फ मेरे कारण तुम चाहे मानो या ना मानो लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं बेबी”
काजल की आंखों में अनायास ही आंसू आ गए,
“ हो सकता है कि यह करने से तुम्हें थोड़ा सुकून मिलेगा”
“ सुकून कैसा सुकून तुम्हें लगता है कि तुम्हें दूसरे के साथ देख कर मुझे सुकून मिलेगा”
मैंने उसके आंसुओं को अपनी उंगलियों से हटाया, वह हलके से मुस्कुराई उसकी प्यार भरी नजरें भी मुझे देख रही थी..
“ मैंने तो सुना है कि कुछ लोगों को इससे सुकून मिलता है मजा मिलता है मुझे लगा शायद तुम भी ऐसा कर पाओगे चलो ठीक है कोशिश कर लेना मैं यह नहीं कहूंगी कि तुम ऐसा करो या ना करो यह तुम्हारे ऊपर है लेकिन अगर तुम इस बात का मजा लेता है तो शायद यह मेरे लिए सबसे अच्छी बात होगी कम से कम मैं उस दर्द से मुक्त हो जाऊंगी कि मैं तुम्हें तकलीफ दे रही हूं,”
“तो तुम ऐसा कर ही क्यो रही हो काजल कि तुम्हें मुझे तकलीफ देनी पड़ रही है”
मैं उसे घूरता रहा वह मेरे आंखों में झांकती रही ….
“देव मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूं “
,मैंने उसे फिर से एक बार आश्चर्य से देखा
“क्या “मेरा स्वर ठंडा था
“ अपना अतीत जो सुनना तुम्हारे लिए शायद बहुत जरूरी है”
मैं सोच में पड़ा था कि काजल ने कहना शुरू किया
“जानते हो देव जब मैं एक छोटी बच्ची थी मेरे पापा एक चॉकलेट लेने के लिए भी 10 बार सोचते थे ,”
मैं उसे देखता रहा और वह कहती रही
“ इतनी तकलीफ देखी है, इतने दर्द सहे हैं...
मैंने देखा है गरीबी किसे कहते हैं हर तरफ बस लोगों की बुरी नजर रहती है जब मैं 16 साल की थी तब लोगों ने मुझे ऐसे देखा था जैसे मुझे खा जाएंगे, उनकी आंखों में हवस साफ दिखाई देते थे , लेकिन मैंने अपने आप को बचा लिया…”
काजल की बातें मुझे समझ नहीं आ रही थी लेकिन बस मैं सुन रहा था ..
“देव जब मैं बच्ची थी मेरे पापा मुझे एक दुकान ले गए , उन्होंने मुझसे कहा कि कौन सी मिठाई खाएगी,मैं मिठाइयों को घूरते रह गई सामने कई प्रकार की मिठाइयां थी रंग बिरंगी ऐसी ऐसी जो मेरे साथ कभी देखी नहीं थी मैं बस उसे देखते रह गई थोड़ी देर बाद मैंने एक मिठाई के ऊपर हाथ रखा मैंने कहा मुझे इसे खाना है पापा ने दुकानदार से रेट पूछा दुकानदार ने जो कीमत बताई पापा सोच में पड़ गए.. थोड़ी देर इधर उधर की बातें करते रहे मुझे बहला रहे थे , उनके पास इतने पैसे ही नहीं थे कि वह उस मिठाई को खरीद पाय मैंने उनका चेहरा देखा था ,वह उदास थे दुखी थे सिर्फ मेरी वजह से ,सोची वह उस मिठाई को खरीद नहीं पाया जो मेरी जरूरत थी और वो जरूरत नहीं थी और बस मेरी तमन्ना थी मैं उनके आंखों में झांकती रही थोड़ी देर बाद पापा एक दूसरी मिठाई लेकर वहां से निकल गए,मैं उनके साथ चल रही थी मैं एक बच्ची थी देखो बस एक बच्ची लेकिन मुझे सब समझ आ रहा था..पैसे की कमी ,इतनी कमी की उन्होंने मेरी जरूरत को ठीक नहीं समझा था हम थोड़ी देर तक चलते रहे फिर पापा ने मुझे कहा क्यों बेटा तुम्हें यह मिठाई पसंद है ना मैंने कहा नहीं पापा मुझे तो वही मिठाई पसंद थी जो आपने दिखाई थी..
पापा मेरे चेहरे को देखते रहे बस देखते रहे बिना कुछ बोले मेरा हाथ पकड़ कर वह मुझे फिर से उसी दुकान में ले गए, उन्होंने वही मिठाई ली जिसे मैंने कहा था हां यह अलग बात है उसके बाद मेरे पापा की जेब में थोड़ा भी पैसा नहीं था हम दोनों पैदल ही घर गए क्योंकि हमारे पास ना तो ऑटो ना ही रिक्से का पैसा था,पाप ने अपने लिए वो जूते भी नही लिए जिसे लेने के लिये उन्होंने महीने भर से पैसे जोड़े थे,...
वह दिन था और आज के दिन है मुझे पैसे की अहमियत समझ आ गई “
वह बस इतना ही बोल पाई थी लेकिन मेरे दिल से एक बात निकल गई
“अच्छा तो अगर ऐसा है तो हम दोनो ही कमाते है काजल ,हमारे पास पैसे की क्या कोई इतनी कमी है की तुम्हे अपना जिस्म बेचना पड़े “
काजल के आंखों से आंसू छलक गए थे,साथ ही मेरे भी ..
“बात अभी पूरी नही हुई है देव …”
उसने मेरी बात को फिर से कांटा ..
“मैंने तुम्हे बतलाया था ना की मेरी मा का देहांत बहुत पहले ही हो चुका है …”
काजल की मा ,हा उसने बतलाया तो था लेकिन मैं तो आज भी कन्फ्यूज़ हु की उसकी असली माँ कौन है और उसका असली पिता कौन है ...मैंने हा में सर हिलाया
“असल में उनका देहांत प्राकृतिक रूप से या किसी बीमारी से नही हुआ था ..
”
मैं उसकी बात सुनता ही रहा
“उन्हें मारा गया था “
“क्या “इस बार मैं बुरी तरह से चौका
“हा देव उनका बलात्कार किया गया था और उसके कुछ दिनों के बाद हत्या “
मैं उसे बस देखता ही रहा
“मेरे पिता जी जिस होटल में काम करते थे,मेरी मा भी उसी होटल में काम करती थी ,होटल का मालिक एक बहुत ही कामुक इंसान था ,वो तो खुद भी शादीशुदा था लेकिन फिर भी वँहा काम करने वाली सभी औरतों पर उसकी नजर रहती थी ,मेरी मा पर भी उसकी नजर थी ...उसने पहले तो मेरे पिता की गरीबी का फायदा उठाना चाहा लेकिन जब वो नही मानी तो उसने उनका बालात्कार किया,जब मेरे पिता जी और मा पुलिस के पास पहुचे तो उस होटल के मालिक ने अपनी पहुच लगाकर उन्हें ही अंदर करवा दिया ,उस दिन मुझे दूसरी बार पैसे की वेल्यू का पता चला,मेरे पिता जी को छोड़ने के लिए उसने फिर से मेरी मा के साथ बालात्कार किया,इस बार उसका साथ वो इंस्पेक्टर भी दे रहा था ,उन्होंने मेरे ही घर में मेरे ही सामने मेरी मा की इज्जत लूटी थी ,मैं रोती रही अपने भाई को गोद में लिए हुए ...पूरे मोहल्ले को पता था की मेरे घर में क्या हो रहा है लेकिन किसी की इतनी हिम्मत ही नही हुई की वो कुछ कर पाए……”
कमरे में शांति फैल गई थी ,काजल की आंखों में मानो खून उतर आया था उसकी आंखे लाल हो चुकी थी और उसके आंसू सुख चुके थे …
“आज भी मेरे कानो में मेरी मा के हर चीख़ घुंजा करते है देव...मैं उसे नही भुला सकती ,मैं उन लोगो को नही भुला सकती जिन्होंने ये किया है ...वो दरिंदे वँहा भी नही रुके ,मेरे पिता ने जेल से छूटने के बाद उनसे बदला लेने के लिए एक आदमी की मदद ली थी ...जिसे तुम आज डॉ के नाम से जानते हो ,उन्होंने थोड़ा प्रयास किया जिससे इंस्पेक्टर तो सस्पेंड हो गया और होटल का मालिक वँहा से भाग निकला लेकिन जाते जाते उन्होंने मेरी मा को भी मार दिया,बिना उसके बयान के दोनो ही रिहा हो गए ,डॉ भी कुछ नही कर पाए …...मेरे पिता जी के लिए भी वँहा रहना मुश्किल था वो भी वँहा से निकल आये,और छोटी मोटी नॉकरी करके मुझे पढ़ाया ……..डॉ को मैं तब से जानती हु ,वो मेरे लिए मेरे पिता के समान है ,”
काजल की आंखे सुखी हुई थी आंसू की एक बून्द भी उनमे नही थी लेकिन था तो एक दर्द एक गहरा दर्द ,,,
आंखे लाल...सुर्ख लाल हो चुकी थी जैसे की अंगारे हो ,मैं उसे देखकर ही कांप गया ,ऐसे भी मैं कई तरह के कन्फ्यूजन से घिरा हुआ था,
“जानते हो देव वो होटल का मालिक कौन था “
काजल ने फिर से कहा ,मैंने ना में सर हिलाया
“होटल आदित्य इंटरनेशनल का मलिक ,मिस्टर खान ….
”
इस बार चौकाने के लिए मेरे पास बहुत से कारण थे
“क्या??????”
मैं बुरी तरह से चिल्लाया
“तुम्हे आज तक यही लगता रहा की अजीम ने मुझे इस धंधे में उतारा और मैं उसके जयजात के लालच में हु इसलिए मैं ये सब कर रही हु ,या ये लगा होगा की तुम्हारी बहन के कहने पर ये सब कर रही हु ,जैसा की मैंने तुम्हे बतलाया था…
लेकिन देव असल बात तो यही है की ना तो निशा ना ही अजीम मुझे इस बिजनेस में लाये है ,मैं यंहा आयी हु बस और बस उन्हें बर्बाद करने ...मैं चाहती तो खान और उस इंस्पेक्टर को एक ही बार में मार सकती थी लेकिन नही देव उन्हें तो पल पल करके मरूँगी ,उन्हें इतना तड़फाउंगी की वो मारने की दुवा मांगे लेकिन मर ना पाए …”
काजल की सांसे तेज हो चुकी थी वो गुस्से से दहक रही थी ,चहरा लाल हो चुका था ,उसके एक एक बात में मुझे सच्चाई दिखाई दे रही थी
“और जानते हो देव मैंने तुम्हे ऐसा प्रस्ताव क्यो दिया था …??क्योकि मैं चाहती हु की अब तुम मेरी मदद करो ...बहुत हो गया देव मैं अकेले ये सब नही कर सकती मैं बस खान की रंडी बनकर रह जाऊंगी ,मुझे उन्हें नंगा करके रास्ते में भीख मांगने पर मजबूर कर देना है ,देव”
काजल ने मेरी बांहो को मजबूती से जकड़ लिया
“तुम्हे मेरा साथ देना होगा देव,सोचो की मैं उन दरिंदो के नीचे खुद को रौंदाती हु फिर भी उफ नही करती ,तो क्या तुम मुझे देख भी नही सकते ????
मेरे लिए देव मेरे लिए “
इस बार वो रो पड़ी ,मैं अपने को इतना मजबूर कभी महसूस नही किया था ,ये क्या हो रहा था मेरे जीवन में
“मैं सब कुछ करूँगा मेरी जान “
मेरे मुह से ये शब्द सीधे मेरे दिल से निकल कर आ रहे थे ,मैं जानता था की काजल मुझसे क्या मांग रही थी लेकिन उसकी कहानी जो की मुझे सच ही लग रही थी उसे सुनने के बाद मैं उसका। साथ ना दु ऐसा तो हो ही नही सकता था …
“देव तुम्हे मेरा साथ देना ही होगा ..मैं जानती हु की तुम्हारे लिये ये कितना मुश्किल होने वाला है लेकिन तुम्हे उस दर्द में मजा भी ढूंढना ही होगा ...मैंने ढूंढा है इसीलिए आज मैं उन लोगो के नीचे आने से थोड़ा भी नही झिझकती जिन्होंने मेरी मा को मारा था और जिन्होंने उनका बलात्कार किया था ,तुम्हे भी वो रास्ता ढूंढना होगा देव...तुहे बहलाने वाले तो यंहा पर बहुत मिलेंगे ,निशा मुझे कभी भी पसंद नही करती थी ,और अब तो अजीम और खान के जयजात पर रश्मि की भी नजरे है ,दोनो ही तुम्हे मेरा साथ देने से रोकेंगे लेकिन तुम्हे फैसला करना होगा देव,ये बहुत ही निर्णायक वक्त है जबकि हम अपना मास्टर स्ट्रोक खेल सकते है ..”
वो जैसे बोल कर चुप हुई और मेरे आंखों में देखते हुए मेरे जवाब का इंतजार करने लगी ..
“मैं तुम्हारे साथ हु काजल “
मैं बस इतना ही बोल पाया था और वो मेरे गले से लग गई …..
अध्याय 44
जवां रंग ,जवां कालिया ,जवां जवां सी उमंग...
ये नजारा दिखाई देता है सुबह सुबह गार्डन में घूमने से ..
उसी जवानी में मैं भी डूबा हुआ गहरी गहरी सांसे ले रहा था ,मेरे साथ साथ मेरी दोनो बहने भी थी ,मैं उनके साथ कुछ ज्यादा समय बिताने के इरादे में था,
एक हँसता मुस्कुराता हुआ हसीन सा चहरा मेरे पास आया ,मैं उसे देखकर पहचान तो गया लेकिन फिर भी मैंने कोई भी प्रतिक्रिया नही की ..
“कैसे हो देव सुना है तुम अपनी बीवी के अतीत को ढूंढने में लगे हुए हो “
उस मदमस्त बाला ने कहा जिसे देखकर गार्डन में उपस्थित सभी लड़के आहे भर रहे थे,उसके शरीर की बनावट की कुछ ऐसी थी लेकिन मेरे लिए वो बिल्कुल भी उत्तेजक नही थी …
“तुम्हे किसने कहा “
मोहनी जोरो से हँस पड़ी ..
“मुझे तुम्हारे एक एक पल की खबर रहती है,और मैंने जो तुमसे काम कहा था तुम उसपर भी ध्यान नही दे रहे हो ,लगता है तुम अपनी बीवी के वर्तमान से ज्यादा उसके अतीत पर धयन दे रहे हो ,खान साहब को ये बिल्कुल भी पसंद नही आएगा “
उसने थोड़ा गुस्से से कहा ,मैंने एक बार अपनी बहनों की ओर देखा जो की मुझसे बहुत दूर थी और अपने आप में ही मस्त थी …
मेरे चहरे में एक कुटिल सी मुस्कान आ गई
“पहले तो मुझे ये समझ आ गया है की तुम खान साहब के लिए काम नही करती ….”
जैसे उसके होश उड़ गए उसके चहरे से ये बात साफ थी की मैंने उसे पकड़ लिया था ,
“और दूसरा तुम्हे मेरे पल पल की कोई खबर नही है वरना तुम यंहा मेरी जासूसी करने या मुझे धमकी देने नही आती “
वो बौखलाई ,लेकिन मैं मंद मंद मुस्कुराता रहा
“अच्छा तो तुम रश्मि के लिए काम करती हो ,तभी मैं भी सोचु की किसी को पता भी नही लगा और तुमने मुझे उस जगह से जंहा से मुझे बंदी बनाकर रखा था वँहा से होटल के कमरे तक कैसे लायी ,फिर तुम्हे जब काजल और मेरे बारे में सब कुछ पता है तो खान साहब कोई एक्शन लेने की बजाय मुझे को किडनैप करवाएंगे...
रश्मि ने ये सब क्यो किया और खान साहब का नाम ही क्यो फसाया ये तो मुझे भी समझ में आ गया है ,लेकिन तुम्हारी क्या मजबूरी थी की तुम अजीम और खान को धोखा देकर रश्मि के साथ काम करने लगी …”
मेरे चहरे की मुस्कुराहट और भी गहरी हो गई वंही मोहनी के चहरे में भी एक मुस्कान आ गई
“तुम तो सच में बहुत ही दिमाग वाले निकले ,क्या तुम्हे जरा भी डर नही लगा था जब मैंने तुम्हे किडनैप करवाया था “
“डर तो मैं गया था लेकिन जब मैंने चीजो को ध्यान से सोचा तो मुझे सब कुछ ही समझ आ गया ,खान के पास अभी तो इतना दिमाग नही है की वो काजल के खिलाफ कोई काम करे लेकिन हा रश्मि जरूर काजल के पीछे पड़ी हुई है मुझे बस ये जानना है की तुम क्यो रश्मि की गुलामी कर रही हो”
मैंने गुलामी शब्द में ज्यादा जोर दिया क्योकि मैं उसे थोड़ा सा बहकाना चाहता था और मेरे कहे अनुसार वो थोड़ी बेचैन भी हो गई
“मैं उसकी कोई गुलामी नही करती ,मुझे वो पैसे देती है ये काम करने के लिए पहले वो मुझसे अजीम की जासूसी करवाती थी वही अब वो मुझसे खान की जासूसी करवाती है ,मुझे अपने पैसे से मतलब है ना की मैं कोई जासूसी करती हु ,और अब जब काजल खान को अपने वस में कर रही है तो रश्मि के लिए सबसे बड़ा खतरा तो काजल ही है ,इसलिए वो अब काजल की जासूसी करवाती है लेकिन काजल शायद उसके उम्मीद से ज्यादा ही चालक है इसलिए उसने तुम्हे टारगेट करने की सौची लेकिन उसने गलतियां कर दी और तुम्हे सब कुछ पता चल गया …”उसने एक ही सांस में कह दिया
“तो तुम बस अगर पैसे के लिए काम करती हो तो क्यो ना मेरे साथी काम करो “
उसकी आंखे चौड़ी हो गई
“तुम्हारे पास है ही क्या देने के लिए “
मैं जोरो से हंसा
“शायद तुम्हे पता नही लेकिन अब अजीम से ज्यादा जायदाद मेरे पास है मैं तुम्हे पैसे से नहला सकता हु “
वो हक्की बक्की हो कर मुझे देखने लगी
“अजीम और खान के पास क्या है ???एक होटल केशरगड में ? एक होटल यंहा ?कुछ और बिजनेस जो की अभी पूरी तरह से घाटे में चल रहे है “
उसने हा में सर हिलाया ,वो एक C.A.
के साथ काम करती थी तो मुझे यकीन था की उसे पैसे की भाषा अच्छे से समझ आएगी
“अब मेरी बात पहले ध्यान से सुनो फिर कोई फैसला करना ,मैं अभी केशरगड में था तुम्हे तो पता ही है की मैं काजल के बारे में पता करने की कोशिस कर रहा था वँहा मुझे जानती हो क्या पता लगा “
उसने ना में सर हिलाया लेकिन उसके चहरे से उसकी उत्तेजना और बेचैनी साफ साफ झलक रही थी
“मुझे ये पता लगा की काजल असल में होटल आदित्य के मालिक की बेटी है ,”उसके चहरे में कुछ खास प्रतिक्रिया नही आयी
“ये तो मुझे पहले से पता है ,की वो होटल पहले आकाश जी का था जिसकी बेटी काजल है लेकिन उन्होंने IAS ऑफसर बनने के बाद ही उसे बेच दिया और खुद वँहा से दूर चले गए “
इस बार मैं थोड़ा कन्फ्यूज़ हो गया लेकिन मैंने उसे चहरे में लाने नही दिया
“उन्होंने वो होटल बेचा नही था बल्कि खान ने इसपर अपना अधिकार जमाया था ,साथ ही उसने यंहा की सभी प्रॉपर्टी पर भी अपना अधिकार जमाया जो की असल में काजल के पिता के ही नाम की थी ,तो उसकी असली मालिक कौन हुई काजल ही ना ,इसलिये ही काजल अपनी पूरी ताकत से खान को फसने पर तुली हुई है ,और जबकि आज भी उसके पास वो कागज है जिसपर खान ने आकाश जी से धोखे से साइन करवाये थे ,तो पहली चीज की काजल के लिए अब ज्यादा मुश्किल नही है की लीगली वो सब कुछ फिर से अपने नाम में कर सकती है ,और जबकि खान भी उसके झांसे में है अजीम तो उसका कुत्ता ही बना हुआ है वो जंहा बोलती है वो साइन कर देता है ,कुछ ही दिनों में सब कुछ ही काजल के नाम पर होगा वो भी बिल्कुल ही लीगल रूप से …….”
असल में मैंने ये कहानी बनाई थी मुझे भी नही पता था की असल में काजल को कितना सक्सेज मिला है या ये की वो असल में आकाश और मलीना की बेटी है भी की नही लेकिन मैंने जो पासा फेका मोहनी उसमे सच में ही फंस गई .उसका चहरा ही बतला रहा था की वो मेरी बातो पर यकीन कर रही थी …
“तो ..जब कुछ भी खान और अजीम का है ही नही तो कैसे वो रश्मि को मिलेगा ,साथ ही साथ हमारे पास ऐसा भी प्लान है की हम जब चाहे रश्मि और कपूर के पूरे बिजनेस को एक ही बार में तबाह करके यंहा के राजा बन सकते है ,अब तुम्हे सोचना है की तुम किसका साथ देना पसंद करोगी उगते हुई सूरज का या डूबते हुए सूरज का ……..
तुम्हे ये भी पता होगा की काजल के पिता एक IAS अधिकारी थे इसलिए सरकारी अमले भी उसकी बहुत ही पहचान है ,अगर उसके पास पैसा आ गया तो वो अपने हिसाब से सब कुछ चलाने लगेगी ,तब तुम कहा जाकर छुपागी ??”
मेरी बात में ऐसा कांफीडेंस था की मोहनी सच में डर गई..जबकि असलियत ये थी मुझे भी असलियत का कोई पता नही था ,लेकिन मेरा काम हो गया था
“हमारे साथ आ जाओ आज नही तो कल पैसे और पॉवर की कोई कमी मैं तुम्हे होने नही दूंगा ऐसे भी तुमपर तो मेरा दिल आ गया था ,जब मैंने तुम्हे पहली बार देखा था …..
”
पहली बात की मैंने हमारे साथ कहा था मतलब मैं उसे बतलाना चाहता था की मैं और काजल अब एक ही हो गए है ,और काजल के हर एक्शन के बारे में मुझे पता है ,दूसरा मैंने जो दुसरी बात उसे कही उसकी तारीफ में उससे उसे ये जरूर लगता की मैं कुछ तो उस पर फिदा हु ,मैंने ये जानबूझ कर कहा था क्योकि मैं उसे दिखाना चाहता था की मैं भी अमीरों की तरह अय्यास हो सकता हु ,क्योकि अभी तक उसने लोगे के अमीरी और उनके अय्यास होने का ही फायदा उठाया था मैं भी चाहता था की वो मेरा फायदा उठाये...बड़ी अजीब बात थी लेकिन असलियत ये ही थी की अगर वो मेरा फायदा उठाएगी तभी वो मेरे नीचे आ पाएगी ,जिस्म से भी और दिमाग से भी ,मैं उसे अपनी गुलाम की तरह यूज़ करना चाहता था …और इसके लिए सबसे जरूरी था की मैं एक मालिक की तरह पेश आउ…
वो बहुत ही सोच में पड़ गयी थी उसे मेरी मालकियत का तो अहसास होने ही लगा होगा वो मेरे बातो से ही समझ आ रहा हटा की मैं उससे क्या चाहता हु …
“मुझे सोचना पड़ेगा “
“सोच लो लेकिन देर मत करना क्योकि तुम सोचती थी की तुम मेरे ऊपर नजर रखे हो ,जबकि तुम मेरे रेडर में हो ,मैं तुम्हरे हर एक मूवमेंट पर नजर रखे हुए हु ,”
वो चौकी
“तुम्हे क्या लगा थी की तुम्हारा यंहा आना महज इत्तेफाक था,तूम आओगी ये मुझे पहले से पता था इसलिए ही मैं यंहा आया वरना कब तुमने मुझे यंहा आते हुए देखा था,और इसलिए मैंने अपनी बहनों को भी अपने से दूर ही रखा था क्योकि मैं तुमसे अकेले में बात करना चाहता था “
उसका चहरा आश्चर्य से लाल हो गया उसकी आंखे बड़ी हो गई उसे यकीन ही नही आ रहा था की एक साधारण सा दिखाने वाला शखस उसकी जासूसी कर रहा है ,
असली बात ये थी की मुझे इस बारे में बिल्कुल भी पता नही था की वो आ रही है या वो मुझे यंहा मिल जाएगी लेकिन जब वो आ ही गई थी और मेरे हर झूट को मान ही रही थी तो मैंने ये पासा भी फेक दिया उसे सचमे लगा की मैं उसकी जासूसी कर रहा हु और उसके ऊपर नजर रखे हुए हु ,मेरी बहने पता नही क्यो अभी भी हमसे दुर थी और मोहनी को लग रहा था की ये भी प्लान किया हुआ है ताकि हम दोनो आपस में ज्यादा बात कर सके …
मैं अपनी बातो को मोहनी को समझने में सफल हो गया था
“तो तुम्हे जल्दी से ही फैसला लेना पड़ेगा अगर इसके बारे में रश्मि को पता लगा तो पहले तुम्हारा पति जायेगा फिर तुम ...
ऐसे भी मुझे कई नेताओ और अधिकारियों को दावत देनी थी ,तुमसे अच्छी रंडी मुझे कहा मिलेगी उसने सामने परोसने के लिए “
मैंने अपने आंखों में बड़ी ही कमिनियत लायी जिससे वो कांप ही गई ,ऐसी बाते कोई साधरण आदमी तो नही कर सकता उसे ये अहसास हो गया की सच में मेरे पास कोई पवार आ गई है वरना उसे मेरे बारे में पता ही था की मैं कितना सीधा साधा आदमी हु ,से लगने लगा की सच में मेरे पास कुछ ऐसा है की ये सब कर भी सकता हु ,मेरा सीधा साधा होना फिर मेरा ये रूप बदलना उसे समझ आ रहा था जो की मेरे लिए अच्छी बात थी ...वो गिड़गिड़ाई
“नही देब ऐसा कुछ भी मत करना मैं रश्मि को कुछ भी नही बतलाऊंगी “
“ह्म्म्म तो सोचकर बताना अगर तुम हमारे साथ हो तो तुम्हे डरने की कोई भी जरूरत नही हम पहले की ही तरह दोस्त रहेंगे और मैं अपने दोस्तो का बहुत ही ख्याल रखता हु ,,,और अगर तुम्हे कोई गलती करने की कोशिस की तो याद रखना की दोनो ही होटलों में कई लोग मेरे ही दया से जॉब कर रहे है और वो अब मेरे साथ है ,और पूरे होटल के कैमरे का एक्सेस भी मेरे ही पास है इसके साथ ही सभी कमरों में रश्मि के कमरों में भी मैंने उसकी बातो को रिकार्ड करने की डिवाइस लगा के रखे है ,तुम मुझसे कभी नही बच पाओगी …….”
मैं हल्के से मुस्कुराया ,माना की ये सभी बाते गलत थी लेकिन मोहनी के चहरे से पता चल गया था की वो मेरी बात को मान चुकी थी ………..
उसके जाने के बाद मैंने एक गहरी सांस ली ,आज मेरी एक्टिंग मेरे काम आ गई अगर ये मेरे साथ आ जाए तो मैं इसे डबल एजेंट की तरह यूज़ करूँगा ,रश्मि को लगेगा की वो मेरे ऊपर नजर रख रही है वही मैं रश्मि के ऊपर नजर रख पाऊंगा ……..
अध्याय 45
मन कई आशंकाओं से भरा हुआ था, और गाड़ी बहुत ही स्पीड से चल रही थी, वैसे ही मेरे दिल की स्पीड भी बढ़ी हुई थी,वो बहुत ही तेजी से धड़क रहा था, मैंने गाड़ी रोकी और जोरो से गहरी सांस ली,मैं इस समय खान के फार्महाउसमें था,मुझे अजीब सा डर लग रहा था,काजल ने तो मुझे कह दिया था की तू इसके मजे लो लेकिन क्या मैं सच में ऐसा कर सकता हु ये मैं नही जानता था,
मैं गहरी सांसे लेकर उस बंगले नुमा फार्महाउस को देखने लगा ,मैं किसी ने नजर में नही आना चाहता था ,मैं आशंकित था की अंदर क्या हो रहा होगा असल में यू ही इधर आ गया था मुझे सच में नही पता था की अंदर काजल होगी भी या नही …
मैंने थोड़ी दूर में झाड़ियों के अंदर अपनी गाड़ी लगाई और दीवाल फांदने का प्लान बनाया ,मैं आहिस्ता से एक दीवार में चढ़ गया और अंदर खुद गया ,पता नही अंदर क्या हो लेकिन जानने का एक पागल पन मेरे अंदर आ चुका था,मैं काजल को भी नही बतलाना चाहता था की मैं क्या कर रहा हु ,मैं किसी जासूस के तरह कमद रख रहा था और वैसे ही सोचने लगा था,
मैं अंदर आ चुका था और मैंने खुद को सम्हाला,मैं धीरे धीरे अंदर गया,अंदर जाकर मैंने मैं उस बड़े से घर जिसे बंगाल भी बोला जा सकता है के पास पहुचा,मैं विशेष धयन इस बात का रख रहा था की कही मुझे कोई देख ना ले साथ ही की कही कोई कैमरा तो नही लगा हुआ है ,ऐसे तो मुझे कोई भी कैमरा नही दिखाई दिया ,मैं बड़े ही ध्यान से अंदर गया,मैं पहले तो उस बंगले को ध्यान से निहारने लगा ,मुझे कुछ खिड़कियां और बाहर लगी हुई a.c, के डब्बे ही दिख रहे थे,मैं पहले तो मेन गेट के अंदर जाने की सोच रहा था लेकिन फिर मैंने अपना इरादा बदला और मैं उसके चारो ओर घूमने लगा,मुझे वो जगह दिख ही गई जंहा से मैं अंदर जा सकता था ,वो फर्स्ट फ्लोर की ख़िदखि थी ,मैं उसे हल्के से खोला तो समझ आया की ये किचन है ,वँहा से अंदर जाना भी तो खतरे से खाली नही होगा,मैं गंभीर सोच में पड़ा हुआ था की मेरा ध्यान वँहा फले हुए कुछ आमो पर गया,मैं अपनी ही सोच में उन पके हुए आमो को निहारता रहा ,और फिर थोड़ी देर बाद मुझे मेरा प्लान सूझ गया मैं फिर से दीवार फांद कर बाहर चला गया ……..
……..
“कौन है भोसड़ी का जो पत्थर फेके जा रहा है “
एक बुजुर्ग सा व्यक्ति फार्महाउस की मेन गेट को खोलकर बाहर आया ,मैं उसे देखकर रुका लेकिन वँहा सके भागा नही ,वो यंहा का गार्ड लग रहा था ,मैं पिछले 15 मिनट से पत्थर फेक रहा था ,कुछ आम के पेड़ जो की दीवारों से बाहर झांक रहे थे उनमे पके हुए आम दिखाई दे रहे थे मैं उन्हें ही निशाना बनाता लेकिन जानबूझ कर ऐसे पत्थर फेंकता था की उन्हें पड़े ही नही बल्कि सीधे अंदर चले जाए,लेकिन फिर भी बहुत देर तक किसी ने कोई केयर ही नही किया,ऐसे भी ये एक वीरान सी जगह थी यंहा का गार्ड भी घोड़े बेचकर सो रहा होगा,लेकिन मेरी मेहनत सफल हुई और वो उस गार्ड को समझ आ गया की कोई अंदर पत्थर फेक रहा है ,वो मुझे घूरा क्योकि मैं कोई आवारा लड़का तो नही था जो की आम के लालचमे पत्थर फेक रहा हो,
“का हुआ बाबू कहे पत्थर मार रहे हो “
वो गुस्से में था लेकिन फिर भी मेरे कपड़ो के कारण उसने मुझसे थोड़ी तमीज से बात करना ही सही समझा,साथ ही उसने देखा की मेरे बाजू में ही मेरी कार भी खड़ी है ..
“ओ सॉरी बाबा असल में इन्हें देखकर लालच आ गया था साला शहर में ऐसे आम कहा मिलते है ,ताजा ताजा ,और वो भी इतने नेचरल पेड़ में ही पके हुए ,खाने का मन कर गया ,सोचा की एक दो तोड़ लू लेकिन साला निशाना ही सही नही जा रहा ……”
वो थोड़ी देर तक मुझे घूरता रहा फिर जोरो से हँस पड़ा,
“क्या बाबुजी आप तो पढ़े लिखे हुई अमीर आदमी लगते हो बच्चों जैसी हरकत क्यो कर रहे हो “
मैं तुरंत अपने जेब से एक 500 का नोट निकाल कर उसके सामने किया,
“बाबा कुछ आम मिल सकता है क्या,मेरी पत्नी को बहुत पसद है “वो ललचाई निगाहों से उस नोट को देखा और मुझे समझ आ गया कि ये बुड्डा मेरे बहुत काम में आने वाला है…..
“ठिक है मैं कुछ आम आपके लिए तोड़कर लाता हु”उसने पैसे बड़े ही प्यार से स्वीकार कर लिए,वो अंदर जाने लगा साथ ही मैं भी ,लेकिन उसने मुझे रोक दिया
“अरे ये क्या बाबु यही रुको हम आते है “
“अरे बाबा देखने तो दो की गार्डन में और क्या बोया है कुछ पसंद गया तो वो भी ले जाऊंगा,..”
वो मुझे घूरने लगा
“अरे उसके अलग से पैसे ले लेना”
उसके चहरे में मुस्कान आ गई
“अरे बाबू ताजा भी है और ओरजेनिक भी है “
“ऑर्गेनिक ??”
“हा हा वही “
“अरे वाह तब तो सोने में सुहागा होगा,बाबा देखने तो दो गार्डन “
“अरे नही मरवाओगे क्या,गेट में ही कैमरा लगा है ,तुम रुको मैं पहले कैमरा बंद कर दु फिर अंदर आ जाना “
वो अंदर चला गया और मेरे होठो की मुस्कान और भी बढ़ गई साला जिस काम को मैं इतना मुश्किल समझ रहा था वो कितना आसान था,बस मुझे इस बुड्ढे को अपने बस में करना होगा आधी इन्फॉर्मेशन तो यही दे देगा..
*******
मैं इत्मीनान से पूरे गार्डन में घूम रहा था सच पुछु तो बहुत ही अच्छे और ताजे फल थे वँहा सच में एक बार तो मैं भी उन सब्ब्जियो और फ्लो को देखकर भूल गया था की मैं यंहा पर क्यो आया हु ,उस बुड्ढे ने कैमरा मेरे अंदर आने के बाद चालू कर दिया,मैं समझ गया था इंट्री पर ही कैमरा लगा हुआ है,वँहा एक बड़ा सा कुत्ता भी था ,जब मैंने उसे देखा तो मेरे प्राण ही सुख गए थे ,क्योकि अगर पहले मैं इस कुत्ते के संपर्क में आ जाता तो ये मेरा आधा मांस ही खा गया होता,अभी मैं उसे अपने हाथो से सहला रहा था और वो भी मुझे पहचानने लगा था,साथ ही उसने अपने बेटे बहु से भी मुझे मिलाया,वो इतने इत्मीनान में था की मुझे पता चल गया की यंहा खान नही है ,लेकिन मेरे लिए ये अच्छा ही था की मैं इस फार्म हाउस के सभी लोगो से अच्छे से मिल गया ,मैंने उनसे उनकी ही भाषा में बात की औऱ ये भी बलताय की मैं पास ही काम करता हु और इस रॉड से गुजरता रहता हु ,मैं बहुत ही गरीब घर का हु मेहनत करके इतना बड़ा हुआ हु ,मैंने उसके बेटे हो कुछ मूलभूत सपने भी दिखा दिए जैसे की वो अपने बेटे को कैसे पढ़ाये ताकि वो आगे चलकर कुछ बड़ा आदमी बन पाए ,मैंने वँहा पर 1 से 1.5 घंटे बिताये और हालत ये हो गई की उन्होंने मुझसे रिक्वेस्ट किया की आप जब भी इधर से गुजरे तो यंहा जरूर आया करे,उसका बेटा बड़ा ही सुलझा हुआ इंसान लग रहा था जो की अपनी गरीबी से त्रस्त था,मैं उसे शहर लाने और उसे नॉकरी दिलाने की भी बात कर दी ,बुड्डा गार्ड तो मुझे मेरे पैसे भी लौटने लगा लेकिन मैंने जिद करके उसे वो पैसे दे ही दिए ,मेरी सहजता और अच्छाई आज काम आ गई थी मैं उन गरीब लोगो से असांनी से मिल पा रहा था ,आदमी अगर सचमे अच्छा हो तो उसकी अच्छाई उसके व्यव्हार से झलकने लगती है ,
मैं उसके बेटे को कोई गलत सपने नही दिखा रहा था मुझे सच में लगा की मैं इसे कोई काम दिला दु ,मैंने उसे कुछ समय मांगा और वँहा से चला गया ,उसका बेटा सारे फ्लो और सब्जियों के साथ मुझे छोड़ने मेरे कार तक आया…
“साहब आते रहिएगा,”
“बिल्कुल हरिया भाई,लेकिन यार तुम्हारे मालिक को अगर पता लगा तो गजब हो जाएगा “
“अरे आप फिक्र मत कीजिये यंहा का सब कुछ हमारे ही कंट्रोल में रहता है उसे कभी पता नही चलेगा ,आप बस मुझे फोन कर दिया कीजियेगा ...वो साला तो बस अपनी ऐयासी के लिए यंहा आता है सच बोलू तो मुझे ये सब बिल्कुल भी नही पसंद लेकिन क्या करे कोई और काम भी तो नही है,साला रंडियों के साथ यंहा आता है कभी वो तो कभी उसके दोस्त,यंहा मेरी बीवी भी है मेरे बच्चे भी है ,मुझे तो बहुत ही बुरा लगता है भइया …”
उसके आंखों में आंसू आ गए थे ,वो मुझे भइया बुला रहा था मैंने उसे दिलासा दिलाया की मैं उसके लिए जल्द ही कोई नॉकरी ढूंढूंगा ,मैं वँहा से निकल गया..
लेकिन मेरे दिमाग में एक बात बार बार आ रही थी की गरीबी लोगों को क्या क्या नही करने पर मजबूर कर देती ..
कहा ये सुलझा हुआ और समझदार आदमी ,इसकी इतनी अच्छी बीवी और बच्चा है एक परिवार वाला आदमी और कहा वो ऐसी जगह में काम कर रहा है जो खान ने सिर्फ और सिर्फ अपने ऐयासी के लिए ही बनाया था,
ऐसा नही था की उन्हें यंहा किसी भी चीज की कमी थी लेकिन कमी थी तो बस सम्मान की ……….
अध्याय 46
मैं कुछ ज्यादा ही चालाकी दिखाने लगा था ,मैंने रश्मि से भी यही कहा की मुझे कुछ खास पता नही चला,ऐसे मुझे इतना मोहनी के कारण पता ही लग गया था की रश्मि को कितना पता है…
वक्त आगे बढ़ने का नाम ही नही ले रहा था,जाने क्यो इतनी खामोशी सी फैल गई थी ,मेरा होटल में समय कटाना मुश्किल हो रहा था,मैं रश्मि के ऑफिस से निकल कर सीधा शबनम के पास चला गया,उसे एक केबिन दिया गया था,ऐसे तो होटल में इसकी जरूरत नही थी लेकिन वो और भी तो बहुत से काम कर रही थी ,वो मुझे देखते ही बहुत ही चहक कर उठी
“ओह यार देव कितने दिनों के बाद आज आये तुम ,”मेरे चहरे में भी एक मुस्कान फैल गई वो बला सी खूबसूरत लग रही थी
पास बैठी हुई एक लड़की खड़ी हो चुकी थी ,बहुत ही कम उम्र की लड़की लग रही थी शायद कालेज में हो ,
“मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही थी “
वो हँसी
“चलो झूठे कही के “
उसने लड़की की ओर देखा जो की मुझे अजीब निगाहों से घूर रही थी ,जब हमारी नजर मिली तो झेंपी और सर झुका लिया,मैंने उसे ध्यान से देखा अचानक ही मुझे कुछ याद आया और मैं बिल्कुल ही सहम गया मुझे याद आ गया था की ये कौन थी,
“अच्छा तुम बाहर जाओ “शबनम ने उस लड़की को कहा वो सर झुकाए हुए वँहा से वैसे भागी जैसे वो चाहती ही हो की जल्द से जल्द वँहा से निकल जाए ,उसके जाते ही मैं शबनम के सामने बैठ गया ..
“ये लड़की यंहा क्या कर रही थी “
मेरी निगाहों को जैसे उसने पहचान लिया था ..
“वही जो की बाकी की लडकिया मेरे पास करती है “
“तुम पागल हो गई हो ,इतनी कम उम्र की लड़की से ये सब काम करवा रही हो “
“अरे यार ये लीगल एज से कही ज्यादा है ,तुम फिक्र क्यो कर रहे हो “
“लेकिन ये मेरी बहन के साथ पड़ती है अभी तो ये कालेज में ही है “
शबनम के चहरे में मुस्कान फैल गई
“अरे मेरे बलमा इस उम्र की लडकिया तैयार हो जाती है सेक्स के लिए और इस उम्र में इन्हें भी तो बहुत खुजली होती है ,जिस्म की खुजली और साथ ही साथ पैसे और शोहरत की खुजली ,असल में लड़कियों का यही सही उम्र है ...और मर्द भी तो इस उम्र की कमसिन कलियों को तोडना पसंद करते है इनके हमे ज्यादा पैसे मिलते है “
उसके चहरे का मुस्कान और भी गहरा गया ,लेकिन आज मुझे अपने पर घृणा होने लगी थी ,ये लड़की पूर्वी की क्लासमेट थी ,मेरी प्यारी सी पूर्वी जिसे तो मैं सोच भी नही सकता था की वो बड़ी भी हो गई है …
मेरा चहरा मुरझा गया था ..
शबनम मेरे पास आयी और मेरे सर को अपने स्तनों में गाड़ा दिया,मेरे सर उसके सीने से टिके हुए थे जो की उसके बड़े बड़े स्तनों के कारण उसके स्तनों में जा धसे थे ,
मेरे लिए ये कोमल तकिया आज किसी वासना का नही बल्कि एक गहरी दोस्ती का अहसास करा रहा था,हा शबनम मेरी दोस्त तो थी ,,,
वो बड़े ही प्यार से मेरा सर सहला रही थी
“देव यार तुम बड़े ही इमोशनल टाइप के आदमी हो बात बात पर इमोशनल हो जाते हो ,तुम्हे कई काम करना है और तूम मुह लटकाए बैठे हो ,हा ये सब गलत है लेकिन हम किसी भी लड़की के साथ जबरदस्ती तो नही करते ना...मुझे और काजल को जबरदस्ती इस धंधे में लाया गया था,बाद में आदत हो गई और पैसे मिलने पर मजा भी लेने लगे ,लेकिन मैं इस बात का पूरा ध्यान रखती हु की कोई भी लड़की को जबरदस्ती इस धंधे में ना लाया जाए ...वो अपनी मर्जी से आती है और चाहे तो अपनी मर्जी से वापस भी जा सकती है ,तो फिर इसके लिए तुम कैसे दोषी हुए “
उसकी बातो में सच में गजब का प्यार झलक रहा था ,मैं उसे और भी जोरो से कस लिया पता नही क्यो लेकिन मुझे यंहा सुकून मिल रहा था..
“अरे क्या हुआ ,मेरी चाहिए क्या “
वो खिलखिलाई ,मैंने जब सर उठाया तो वो होले होले से मुस्कुरा रही थी
“चोदने के लिए इतने बहाने क्यो कर रहे हो सीधे ही बोल दो की चोदना है “
वो फिर से खिलखिलाई ,लेकिन मैंने उसे फिर से जकड़ लिया और किसी बच्चे की तरह उसके सीने से अपने सर को गड़ा लिया ,सच ही है की सबसे सुकून बच्चा बन जाने में ही मिलता है …
मर्दों के साथ एक चीज होती है की उन्हें सबसे सुकून माँ के सीने से लगने में ही मिलता है ,लेकिन वक्त के साथ और सेक्स के प्रभाव के कारण औरतों के सीने को सेक्स का प्रतीक मान लिया जाता है ,एक मर्द औरत के सीने को देखकर उत्तेजित होता है और यही से वो अपना सुकून भी खो देता है ,लेकिन फिर कभी वो अपनी प्रमिका के ,या पत्नि के या और किसी औरत के सीने में जब अपना सर लगाकर सोता है तो उसे उतना ही सुकून मिलता है ,लेकिन एक शर्त जरूरी है की वासना अंदर ना हो …
वही हाल मेरा भी था,मुझे भी बहुत सुकून मिल रहा था मैं एक बच्चे की तरह ही वासना से रहित था और मेरी ये दशा शबनम से छुपी नही थी ,वो भी मेरे सर को प्यार से सहलाने लगी ,...
सच ही तो है की सभी प्यार मां के प्यार से ही सुरु होते है और एक इंसान जीवन भर उसी को ही ढूंढता रहता है…
लेकिन उसके लिए बच्चा बनना ही पड़ता है ये ही उसकी अनिवार्य बात होती है ..
मैं अपने मानसिक थकान से बहुत ही थक चुका था और अब उसके सीने में गड़ा हुआ आराम कर रहा है …
ये बहुत देर तक रहा ,जब मैं अपना सर उठाया तो देखा की शबनम की आंखों में आंसू है और साथ ही मेरे भी ये आंसू आखिर क्यो आये थे ये तो मैं भी नही जानता था ना ही शबनम ही जानती थी ..
“क्या हुआ “मैंने उसे पूछा
“कुछ नही “उसने ना में सर हिलाया
“तू पहले ऐसे मर्द हो जिसने मुझे आजतक की जीवन में पहली बार इतने प्यार से छुवा है ,मेरे पति ने भी मुझे कभी इतने प्यार से नही छुवा “
वो आंसुओ को पोछते हुए भी हँसने की कोशिस करती है ,और मुझे बड़ी ही प्यार भारी निगाह के देखती है ,
“मन करता है की तुम्हारे लिए अपना सब कुछ लुटा दु “
उसने बहुत ही धीरे से कहा ,उसका कहना भी साबित कर रहा था की वो ये नही कर सकती और इसी लिए वो इतना धीरे बोली क्योकि वो चाहती तो है लेकिन कर नही सकती ,मेरे चहरे मे भी मुस्कान खिल गई मैं उठा और उसके माथे को चूम लिया …
लग रहा था की हम कालेज के नए नए जोड़े हो जो अभी अभी प्यार में पड़ा हो ..
“मुझे तुमसे कुछ भी नही चाहिए लेकिन यही प्यार मेरे लिए रखना “
मैंने मुस्कुराते हुए कहा
“लेकिन मुझे तो तुम्हे देना है सब कुछ देना है और रात भर देना है “
वो फिर से मस्ती के मूड में आ गई थी ,वो इतना बोल के ही खिलखिलाई ,
मैं भी उसके साथ हँस पड़ा था …..
अध्याय 47
मैंने काजल को ताबड़ तोड़ पलंग तोड़ प्यार किया ,कारण????
कारण था वो बाते जो आज काजल ने मुझे कही थी ,वो आज मुझे थोड़ा और cuckoldry की तरफ धकेलने के लिए कुछ बाते कही जैसे वो सेक्स करते हुए कभी कभी अजीम का नाम ले लेती ,और मैं गुस्से से भर जाता उसके होठो में आयी हुई मुस्कान से मेरा गुस्सा और भी बढ़ जाता और मैं उसे जमकर धक्के मारने लगता,रात भर यही चलता रहा लेकिन एक बात तो मुझे भी समझ में आ गई की आखिर cucklodry की psychology क्या होती है …
असल में जब दिल जलता है तो एक अजीब ही तरह का मजा भी आता है ,आपके खून का प्रवाह बढ़ जाता है और आप अलग ही दुनिया में पहुच जाते है ,आप किसी को मारना चाहते है और उत्तेजित हो जाते है ये आपके सेक्स को और टेस्टोस्टेरोन को भी प्रवाहित करता है आप ज्यादा ताकतवर और मजबूत महसूस करने लगते है,ये उन लोगो के लिए नही है जो पहले से कमजोर हो और बात बात पर रोने वाले हो लेकिन ये मुझ जैसे मजबूत और गुस्सेल लोगो के लिए हो सकता है क्योकि इसकी आग से सच में मेरी सेक्स लाइफ तो बहुत ही खरतरनाक तरीके से अच्छी हो गई ,लेकिन वो सेक्स बस हवस के साथ किया गया था,वँहा पर वो प्यार की नजाकत नही थी …
काजल को मैंने कभी पूरे जिंदगी में इस तरह से नही रौंदा था जैसा मैने आज किया था ...काजल भी बहुत खुस थी की मैं इसे इन्जॉय कर रहा हु,वो थककर सोई हुई थी लेकिन मेरे आंखों से नींद ही गायब हो चुकी थी ,मैंने उसके मोबाइल को अपने हाथो में लिया ,अजीब सी बात थी और बड़ी ही आश्चर्य की बात थी की उसने अभी तक अपने मोबाइल का पासवर्ड चेंज नही किया था ये वही था जो उसके कालेज के समय में होता था,कई मोबाइल चेंज कर लिए गए लेकिन पासवर्ड वही यही होता है प्यार ,क्योकि वो पासवर्ड मेरा डेट ऑफ बर्थ था,और मेरे मोबाइल में उसका ..
मैंने उसका वाट्सअप चेक किया और मुझे किसी ठाकुर साहब का मेसेज दिखा,
‘कल मिलोगी ना तुम्हारे लिए गिफ्ट खरीदा हु ‘
पहला लाइन यही था
‘अरे ठाकुर साहब इसकी क्या जरूरत थी ,’
‘बस समझलो की ये मेरी ख्वाहिस है की मैं तुम्हे ये दु ‘
‘अच्छा ठीक है लेकिन खान साहब …’
‘अरे तुम फिक्र मत करो खान के फार्महाउस में ही मिलो मैं उससे बात कर लूंगा ‘
‘ओके तो कल 12 बजे ‘
‘ओके मेरी जान ‘
‘ठाकुर साहब आप फिर से चालू हो गए ‘
‘तो क्या बुरा कहा ,इतना भी हक नही है क्या,खान ही तुम्हे जान कहे ये तो अच्छी बात नही हमे भी तो कुछ हक होना चाहिए ‘
काजल ने बहुत सी स्माइल भेजी
‘ओके जान अब ठीक’
‘हाय तुम तो मार ही दोगी ‘
काजल ने फिर से स्माइल भेजी
‘ओके जानू अब मेरे पति को मेरी जरूरत है मैं आपसे कल मिलती हु ‘
‘कितना खुशनसीब है साला देव जो तुम उसके साथ रोज रहती हो ‘
मेरी गांड ही सुलग गई साला मेरा नाम भी जानता है..
‘बस मख्खन लगाओ आप चलो कल मिलते है ..’
‘बस इतना ही कुछ और नही’
‘ओके बाय जानू ,,लेकिन खान साहब को नही पता लगना चाहिये की ..’
वो बस इतना ही लिखी थी
‘खान की मा का भोसड़ा ‘
‘देखिए मेरे साथ ऐसी गंदी बात नही करना ‘
काजल ने बहुत सी गुस्से वाली स्माइल भेजी
‘ओह सॉरी मेरी जान असल में पोलिस वाला हु ना तो गली मुह में रहती है तुम बुरा मत मानना ,खान को मैं कुछ भी नही बताऊंगा बस इतना कहूंगा की काम के सिलसिले में तुमसे मिलना था ..”
“ओके ‘
‘बस ओके ‘
काजल ने बहुत से हँसते हुए स्माइल भेजे
“ओके मेरी जान ‘
सच में वो लिखते हुए काजल मुस्कुराई जरूर होगी क्योकि शिकार उसके जाल में फंस गया था ,मैं उस ठाकुर को नही जानता था लेकिन मुझे इतना तो पता चल गया था की वो कोई पुलिस वाला है…
क्या वो वही पुलिस वाला था जिसने काजल की मा के साथ बलात्कार किया था और खान का दोस्त था (जैसा की काजल ने बतलाया था )
मैं सोच में पड़ गया था उसकी प्रोफ़ाइल पिक्चर में भी उसकी शक्ल का पता नही लगा क्योकि उसने किसी धर्मात्मा की तरह एक धार्मिक की पंक्ति लगा के रही थी ,कैसे मादरचोद लोग होते है दुनिया में..
करना उन्हें है गलत काम लेकिन दिखाएंगे के वो भगवान के कितने बड़े भक्त है कितने अच्छे इंसान है ,इन्ही मादरचोदों के कारण दुनिया इस हाल में आ गई थी ,
मुझे उसके उस प्रोफ़ाइल पिक्चर को देखकर उससे और भी चिढ़ सी हो गई क्योकि वो एक पुलिस वाला था जिसका कर्तव्य था की वो समाज के लिए कुछ करता लेकिन नही वो पैसे और चुद के पीछे पड़ा हुआ था,इस मादरचोद को तो मैं पर्सनली मारूंगा ..
मेरे दिमाग में ये ख्याल आया मैं आगे की बातचीत पड़ने लगा
‘umaaaaaaaa ‘
इसके साथ कुछ होठो के चिन्ह और किस के साथ दिल के निशान वाले स्माइल से उसने कई लाइन भर दी थी
‘आप फिर से शुरू हो गए मैंने कहा ना की मैं खान साहब की वफादार हु और सिर्फ और सिर्फ खान साहब के साथ ही मेरे संबंध है ...मैं शादी शुदा हु और किसी और मर्द के साथ सोती हु तो इसका मतलब ये नही की मैं रंडी हु “
अचानक ही काजल का तेवर अलग हो गया था मुझे समझ में आ रहा था की ये जो भी है वो खान का दोस्त है लेकिन उसकी नजर काजल पर है और काजल इसके सामने ये दिखाना चाहती है की वो खान की वफादार है लेकिन ये उसे पटाने के चक्कर में है ,मैं जानता था की काजल उससे पट ही जाएगी लेकिन पहले तो भरपूर नखरा चोदेगी क्योकि उसे अपनी इमेज अच्छी बनानी थी …
अखिकतर लडकिय यही ट्रिक अपनाती है ,वो पट तो जाएगी लेकिन फिर ही अपने को सती सावित्री जताने में कमी नही करेंगी ,चुड़वाएँगी तो कई लोगो से लेकिन फिर भी कोई नया लड़का मिल जाए तो पहले उससे मेहनत करवाएंगी ताकि उस लड़के को लगे की लड़की अच्छी है और किसी के साथ भी नही सो जाती..
मुझे काजल की इस बात पर थोड़ी हँसी आयी क्योकि कालेज के समय में मैं ऐसी लड़कियों से बहुत ही चिढ़ता था लेकिन आज मुझे पता चला की मेरा प्यार मेरी बीवी ही ऐसी है ..
खैर जो भी ये एक लड़की के लिए जरूरी है की जो लड़का उसके पीछे दुम हिलाता हुआ फिर रहा है वो उसके कंट्रोल में ही रहे और इसके लिए पहले अपनी इमेज अच्छी करनी भी बहुत ही जरूरी होती है ,तो काजल जो कर रही थी वो सही था आखिर ठाकुर से उसे भी कुछ काम करवाने होंगे..
काजल की इस बात से ठाकुर हड़बड़ाया जरूर होगा
“सॉरी अगर तुम्हे बुरा लगा होगा तो ,लेकिन क्या करू मैं तुमसे प्यार करने लगा हु ‘
ठाकुर साहब ने भी वही कहा जो की हर कमीना लड़का कहता है ,जब उसे किसी लड़की को चोदना हो तो वो प्यार के नाम का सहारा ही तो लेता है
‘लेकिन खान साहब से ये गद्दारी होगी ‘
काजल ने लेकिन लिखा था मतलब की तैयार थी ,ये भी हर वो लड़की करती है जिसे चुदवाना भी है लेकिंन नखरे करके
‘अरे मा चुदाये खान ‘
‘आप फिर से गली दे रहे है’
‘सॉरी जान सो सॉरी ‘
‘पहले आप ये आदत सुधारो मुझे गली बिल्कुल भी पसंद नही ‘
मुझे ये पढ़के हँसी आ गई क्योकि मैं आज ही काजल को मा बहन की गालियां देकर ही चोदा था ,हा चोदा ही तो था आज प्यार ही कहा किया था बस चोदा था ,अपना लंड उसकी चुद में घुसा कर पेला ही तो था ,पूरी ताकत से लेकिन बस इतना ही तो किया था ..
चोदना एक अजीब सा शब्द है जिसमे बस एक गुस्सा है ,एक फ्रस्ट्रेसन जो की निकल गया ,
लेकिन चुद कितना प्यारा लगता है बोलने में ,एक बार बोलिये चुद …
बड़ा ही cute सा शब्द है ,है ना
वही लंड बोलकर देखिए ..साला लगता है की अजीब सा है ,एक बार बोल कर देखो लंड ..
लौड़ा ,कितना अजीब है साला ,बोलने से ही अजीब लगता है बोलकर ही देख लो लंड या लौड़ा एक मर्दाना फिलिंग है उसमे लेकिन चुद ,बड़ा ही प्यारा लगता है ……….
है ना..,इस पर कमेंट करना की चुद बोलना प्यारा लगता है की नही ..
और एक कमेंट मुझे चाहिए ‘चोदना’ पर भी ,ये मादरचोद आखिर है क्या चोदना ऐसा लगता है जैसे की कोई मजदूरी करवा रहा है ,चोदना सोच कर देखो जरा...एक काम है ये ,चोदना ..??
जैसे कोई मजदूर मेहनत करता है वैसे ही लड़कियों के लिए लड़के मजदूरी करते है ,,उन्हें चोद कर ..
मैं फिर से पढ़ने लगा
‘सॉरी जान अब नही दूंगा .लेकिन तुम मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु सच में मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हु ‘
ठाकुर उत्तेजित हो गया था
‘कुछ भी करने की जरूरत नही है प्यार में कोई लेन देन नही होता ,बस प्यार होता है आप मुझे प्यार करो यंही मेरे लिए काफी है ‘
सच में मेरी बीवी हरामी थी .वो साली वही सब उस ठाकुर को बोल रही थी जो वो मुझे बोला करती है ,शायद ये सब उसने मुझसे ही सीखा था
‘लेकिन मुझे तुम्हे गिफ्ट तो देना है ‘
‘वो तो आपका हक है ‘
काजल ने उसे ग्रीन सिग्नल दे ही दिया
‘सच में ‘
‘कोई शक .12 बजे आप मिलिए .लेकिन खान साहब को बताए बेगैर ओके ‘
‘ओके मेरी जान .एक किस तो दो ‘
‘पागल हो गए हो आप ‘
‘तेरे प्यार में पागल हो गया हु जान ,मैंने और खान ने एक साथ कई लडकियो को किया है ,लेकिन तुम पहली हो जिसके लिए मुझे खान से झूट बोलना पड़ रहा है ,सच में वो तुम्हारे प्यार में ही है ‘
‘मुझे तो लगता है की वो तुमसे शादी भी कर लेगा ‘
‘नही मैं अपने पति को नही छोड़ सकती मैंने खान साहब को भी ये बता दिया है ..लेकिन मैं उन्हें धोखा भी तो नही दे सकती पता नही आपको जानू बोल रही हु आपसे उनसे पूछे बिना मिल भी रही हु ,उन्हें कैसा लगेगा ‘
‘अरे जो लगेगा देखा जाएगा ,लेकिन मेरे लिए तो तुम बहुत ही इम्पोर्टेन्ट बन चुकी हो मैं तो अपने बीवी से भी उतना प्यार नही करता जितना की तुमसे करता हु ,तुम मेरी जिंदगी हो काजल अगर तुम कहो तो मैं अपनी बीवी को तलाक देकर तुमसे शादी करने को भी राजी हु ‘
काजल ने कुछ देर तक कुछ जवाब ही नही दिया
‘इतना प्यार करते हो मुझसे ‘काजल का जवाब आया
‘हा ‘
काजल फिर थोड़े देर कुछ मेसेज नही की
‘कल आप मिलिए ,मुझे लगता है की आप मुझे खान साहब से ज्यादा प्यार करते है,मैं भी तो देखु की आप मुझसे कितना प्यार करते है ‘
काजल ने अपना दावा खेल दिया था
‘ओके जान …..सॉरी तुम्हे बुरा लगा हुआ हो तो ‘
ठाकुर इस बार सम्हाल कर बोल रहा था
‘उम्ममम्मम्माआआ लो किस भी दे दिया ,लेकिन लव यू तभी बोलूंगी जब लगेगा की आप सच में मुझसे प्यार करते हो ..
मेरी जानू ‘
काजल ने उसे छेड़ा
‘हाय मेरी जान तुमसे लव यु सुनने के लिए तो अपनी जान भी दे दूंगा ‘
‘ऐसा फिर से मत बोलना ,आपकी जान जाने से पहले मेरी जान चले जाए ,आइंदा ऐसा नही बोलोगे ,,कल मिलती हु पति देव आ रहे है …’
इसके बाद काजल ने तो कोई मेसेज नही किया लेकिन ठाकुर जरूर कई आई लव यु ,और मैं तुम्हारे लिए सब कुछ करूँगा के मेसेज कर चुका था …
मैं सब पढ़ने के बाद हल्के से मुकुराय क्योकि मुझे पता था की कल मुझे क्या करना है ,,,
अध्याय 48
3 महीने बाद
इंस्पेक्टर ठाकुर के बंदूख कि नोक मेरे ही ओर थी ,
“बहुत खेल खेल लिया तुमने अब मेरी बारी है ,”
मैं बेखोफ खड़ा हुआ था,पास ही काजल स्तब्ध सी मुझे देख रही थी,
‘रुको ठाकुर ‘
वो चिल्लाई लेकिन तब तक ठाकुर की गोली चल गई ,काजल ने उसका हाथ उठा दिया था और मैं बचने के लिए थोड़ा दूर जा गिरा था,ठाकुर फिर से बौखला गया और मेरे ऊपर फिर से बंदूक तान दी इस बार उसका निशाना सही था लेकिन उसकी गोली चलती इससे पहले ही काजल बीच में आ गई ..
धाय धाय धाय
ऑटोमेटिक लोडिंग वाली बंदूक ने अपना काम कर दिया था ,लगातार तीन गोली सीधे जाकर काजल के सीने को चीरते हुए निकल गए मैं बौखला गया था ,जैसे कोई सुध ही ना बची हो ,वही ठाकुर भी स्तब्ध सा उसे देख रहा था वो तो मुझे मरना चाहता था ताकि काजल को पा सके लेकिन काजल ने ये गोलियां खाकर ये साबित कर दिया था की वो जिस्म से चाहे जिसकी भी हो लेकिन उसकी रूह सिर्फ मेरी है …..
मैं गुस्से से तिलमिलाया और पास ही पड़े एक पत्थर से ठाकुर पर वॉर कर दिया ,उसका सर जख्मी हो गया था ,मैं उसकी पत्थर से उसका सर फोड़ना शुरू कर दिया ,वो बेसुध हो गया था और मैं तो पहले से ही बेसुध था ,मैं चीख रहा था चिल्ला रहा था ,और पत्थर उसके सर पर मारे जा रहा था..
“नही देव मेरे पास आओ “काजल इस हालत में भी थोड़े होश में थी
मैं जल्दी से काजल के पास पहुचा ,मैंने उसे सीने से लपेट लिया था,मेरा पूरा कपड़ा खून के रंग से रंग चुका था ..
“आई लव यु देव ,हमेशा से तुम मेरे हीरो रहे हो हमेशा से मैंने सिर्फ और सिर्फ तुम्हे प्यार किया है “
काजल इतना ही बोलकर बेसुध हो गई ,मैं चीखा
“काजल ………..नही काजल तुम मुझे छोड़कर नही जा सकती काजल “
तभी
धाय ….
एक गोली मेरे पीठ में आकर धंस गई ,ठाकुर लेटे हुए था और उसके हाथो में बंदूक थी
मैं गुस्से से लाल हो चुका था और उसे जान से मार देना चाहता था .
मैंने पास ही पड़ा हुआ एक रॉड उठाया और उसके पैरो में घुसा दिया ,वो चीखा ही था की मैंने अपने पैरो से उसके मुह पर वॉर किया ,वो बेसुध हो गया मैं फिर से काजल के पास आया ,मैं रो रहा था मेरी काजल मुझे छोड़कर नही जा सकती थी ………
मैं होशं में आया तो मैंने अपने पास डॉ चुतिया को पाया ,
“काजल कहा है “
मेरा पहला सवाल यही था ..
“वो कोमा में है,गोलियां निकाल दी गई है लेकिन होश नही आया है ,खैरियत है की दिल को गोली नही लगी वरना”
मैं रोने लगा था
“ये सब मेरी ही गलती के कारण हुआ है डॉ ना मैं वो कदम उठता और ना ही ये हादसा होता “
डॉ मेरे पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरा ..
“तुम्हारी गलती नही है देव अपने को दोष मत दो जो भी हुआ वो किस्मत का ही तो खेल था ,सब ठीक हो जाएगा “
“निशा कहा है ???”
मुझे अचानक ही निशा की याद आयी
“वो भी ठीक है और अभी जेल में है ,फिक्र मत करो वँहा हमारे लोग है उसे कोई तकलीफ नही होगी ,”
मैं थोड़ा शांत हुआ
“उसके खिलाफ कोई सबूत मिला ??”
मैंने फिर से कहा
“नही अभी तक तो नही ,सिर्फ पूर्वी की ही गवाही है उसके खिलाफ लेकिन उतना काफी नही है ,काजल के गवाही के बिना उसे जेल में ज्यादा दिनों तक नही रख पाएंगे उसके वकील भी बहुत ई स्ट्रांग है ,लेकिन अभी उसका छूटना ठीक नही होगा “
डॉ के चहरे में चिंता साफ झलक रही थी
“उसे बेल दिलवाओ डॉ वो मेरी बात सुनेगी ,मैं बहक गया था जो मैं उसकी बात नही सुना ,लेकिन इस हादसे से मुझे समझ आ चुका है की मुझे उसकी बातो को सिरियसली लेना चाहिए था “
“लेकिन उसके बाहर आने से काजल और पूर्वी दोनो के ही जान को खतरा है ??”
डॉ मेरी बातो से चकित दिख रहे थे ,
“मैं सम्हाल लूंगा ,मैं उसे अच्छे से समझता हूं आप उसे बाहर निकलवाये “
डॉ थोड़ी देर तक तो सोच में ही डूबा रहा लेकिन फिर वो बाहर चला गया ,मैं उठाकर उसके पीछे ही बाहर आया
“आप पागल हो गए हो क्या ये क्या कर रहे हो “
सामने पूर्वी और शबनम खड़ी थी
“मुझे काजल से मिलना है “
“अभी तुम आराम करो शाम को मिल लेना ,ऐसे भी उसे ज्यादा मिलने नही दिया जाता हम तम्हे स्ट्रेचर में ले जाएंगे “
शबनम की आंखों में भी पानी था और पूर्वी के भी ,मुझे शक था की कही काजल को कुछ हुआ तो नही है और ये लोग मुझसे झूट बोल रहे है ,मैंने शंका की नजर से दोनो को देखा ,
पूर्वी रोते हुए मेरे पास आयी और मुझसे लिपट गई ..
“भइया ये क्या हो गया “
“काजल ठीक तो है ना तुमलोग मुझसे कुछ छिपा तो नही रहे “
पास खड़े हुए डॉ के चहरे में मुस्कान गहरा गई
“छुपाने को बचा ही क्या है देव ,अभी आराम करो शाम को मिल लेना,फिक्र मत करो काजल हमे छोड़कर इतनी जल्दी नही जाने वाली “
डॉ के चहरे में दृढ़ता के भाव उभर गए जैसे उन्हें काजल पर बहुत ही ज्यादा यकीन हो ..
अध्याय 49
काजल मेरी काजल ,आंखे बंद किये ना जाने कीस दुनिया में खो गई थी ,उसे देखकर एक बार तो मूझे चक्कर ही आ गया,मैं वही था जो कुछ दिनों पहले उसे मारने का प्लान कर रहा था ,आज उसकी इस कुर्बानी ने मुझे फिर से याद दिलाया जो वो मुझे बोला करती थी ,
‘मैं तुम्हारी ही रहूंगी देव चाहे शरीर किसी और के पास ही क्यो ना रहे लेकिन रूह तलक बस तुम्हारी ही रहूंगी ‘
मेरी आंखे भीग गई थी और मैं सिसक रहा था ,मेरा हाथ अभी भी काजल के हाथो में था,वो ऑपरेशन थिएटर मुझे काटने को दौड़ रहा था ,
‘कितना पागल था तू देव जो अपनी जान की वफादारी पर उसके प्यार पर शक किया ‘
मेरे दिल से बार बार यही बात निकल रही थी मैं बैठा बैठा अतीत की यादों में खो गया था ,3 महीने पहले जब मैंने काजल की जासूसी का फैसला किया था शायद वो मेरे जीवन का सबसे बेकार फैसला था,काजल मुझे सब कुछ तो बताना ही चाहती थी ,वो तो ये भी चाहती थी की मैं उसे दूसरे के साथ देखकर भी एन्जॉय करू ..
हा एक पति के लिए ये कितना कठिन था ये मैं और वो दोनो ही जानते थे लेकिन वो भी अपने जिद में थी और मैं भी …
वो दिन जब मैं हरिया से फोन कर उसके फार्महाउस में आने की बात कही मैंने उसे एक जॉब का आफर दिया था ,मुझे पता था की काजल और ठाकुर वही मिलने वाले है ,ठाकुर उसे कोई गिफ्ट देने वाला था पता नही वो क्या था,
हरिया को भी ये बात पता थी की 12 बजे के करीब खान का दोस्त इंस्पेक्टर ठाकुर वँहा आने वाला था,उसने इसी बात के कारण मुझे मना कर दिया लेकिन मैं उससे इतममिन से बात करना चाहता था…
मैं फॉर्महाउस में था ..
“सर जी आप मेरी बात नही समझ रहे है वो बड़े ही खतरनाक लोग है ‘
उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठा
“अच्छा ये बताओ क्या यही लड़की उनके साथ आती है “मैंने उसे काजल का फ़ोटो दिखाया वो चौक गया
“इस रांड का फ़ोटो आपके पास कैसे “
रांड मेरे दिल में एक जलन सी उठी मेरे ही सामने साला मेरी ही बीवी को रांड बोल रहा था
“बस जानता हु ,तुम्हे जॉब चाहिए ना “
वो घबरा गया था
“मेरी लाश पर मैं जॉब का क्या करूँगा आप कौन हो ,और आप मुझसे क्या करवाना चाहते हो ,सर जी मुझे तो लगा था की आप एक शरीफ इंसान हो इसलिए आपकी मदद करने की सोची लेकिन आप की नियत तो मुझे साफ नही लग रही है ..वो लोग मुझे और मेरे पूरे परिवार को मार देंगे ..”
वो बहुत ही डरा हुआ लग रहा था ,हो भी क्यो ना उसे खान और ठाकुर के बारे में कुछ तो पता ही रहा होगा
“एक चीज का ईमानदारी से जवाब देना,क्या खान और ठाकर तुम्हारी बीवी पर गंदी नजर नही डालते “
वो सन्न रह गया .उन्होने तो कई बार उसे पैसे भी ऑफर किये थे लेकिन वो शरीफ महिला थी ..
उसका सर झुक गया
“क्या तुम्हारा खून नही खोलता ,क्या पैसे की इतनी अहमयत है की तुम अपना ईमान भी बेच दोगो “
मेरी बाते उसके सीने में तीर सी चुभने लगी थी
“मैं कर भी क्या सकता हु,और वो लोग ज्यादा झेड़ते नही ,मैं अंजू (हरिया की बीवी ) को उनके पास भेजता भी नही “
“अगर किसी दिन भगवान ना करे की वो लोग दारू के नशे में हो और अपनी तलब का शिकार अंजू को बना ले तो क्या करोगे “
वो दंग सा मुह फाड़े मुझे देख रहा था उसे भी पता था की ये भी हो सकता है और वो कुछ भी नही कर पायेगा
“ऐसा कैसे हो सकता है अभी तक तो ऐसा नही हुआ “
“नही हुआ या तुम्हे पता नही है ,हो सकता है की उन्होंने अंजू के साथ जबरदस्ती की कोशिस की हो लेकिन अंजू ने अपनी मजबूरी के कारण तुम्हे कुछ भी नही बतलाया हो ….”
कुछ देर के लिए शांति छा गई थी ,उसकी नजर जमीन को देख रही थी और वो कई सोचो में गुम था,मैं उसकी मजबूरी समझता था वो ये नॉकरी छोड़कर नही जा सकता था ,क्योकि बाहर के दुनिया इससे भी खतरनाक थी …
“तुमने ही तो मुझे बतलाया था ना की उन्होंने अंजू को ऑफर किया था ,लेकिन अंजू ने मना कर दिया था ...ये बात क्या अंजू ने तुम्हे तुरंत ही बता दी थी …”
वो चुप था
“ये बात भी तो उसने तब ही बताई जब तुमने उसे उनके पास गिलास ले जाने को कहा था ,है ना “
हरिया ने मुझे पहले ही सब कुछ बता दिया था और मैं जानता था की वो अपने परिवार से बहुत ही प्यार करता है ..
उसने हा में सर हिलाया
“देखो हरिया तुम्हारी और मेरी कंडीसन एक ही है ,जैसे तुम उन लोगो से डरे हुए हो वैसे ही मैं भी डरा हूं ,जैसे तुम मजबूर हो वैसे ही मैं भी मजबूर हु ,क्यो ना इन लोगो को ही खत्म कर दिया जाए “
वो चौक कर मुझे देखने लगा
“खत्म करने का मतलब मारने से नही है ,आर्थिक रूप से खत्म करने की बात है,उनका पावर खत्म किया जा सकता है ,”
वो समझ नही पा रहा था की वो क्या करे
“और इसमें तुम्हारा भी फायदा होगा “
उसने मुझे ध्यान से देखा
“कैसा रहेगा अगर ये फॉर्महाउस ही तुम्हारा हो जाए ,”
वो फिर से चौका
“मैं ये कर सकता हु तुम्हे बस मेरी थोड़ी सी मदद करनी होगी ,तुम्हे और तुम्हारे परिवार को कुछ भी नही होगा इसकी मैं गारेंटी ले सकता हु क्योकि उन्हें कभी पता ही नही चलेगा ,और मैं अगर पकड़ा भी गया तो डरो नही मैं तुम्हारा नाम नही लूंगा ,वो मेरा कुछ भी नही बिगड़ सकते डोंट वरी ,तुम अपने और अपने परिवार के लिए ये करो मेरा साथ दो ,मुझे यंहा आने जाने दो ,तुम्हारी पत्नी ,तुम्हरे पिता और तुम्हारे बेटे को भी इसके बारे में नही पता चलेगा ,तुम फिक्र मत करो ,”
फॉर्महाउस बहुत ही बड़ा था और सच में यंहा अगर कोई लाश भी लाके गाड़ दे तो किसी को पता नही चलेगा …
उसने हा में सर हिलाया उसकी सहमति का मतलब था की अब ये फॉर्महाउस मेरा ही था ...मैं यंहा जब चाहे आकर जो चाहे कर सकता था ...
मैं खुसी से उसे देखा और पहली पगार के रूप में 2 हजार का एक नोट उसकी ओर बढ़ाया ..
“नही साहब ये सब नही चाहिए ,बस जो आपने कहा वो हो जाए तो मेरी जिंदगी सफल हो जाए “
पहली बार मैंने हरिया के आंखों में लालच देखा था ,मैं उस साधारण से भोले इंसान को लालची नही बनाना चाहता था लेकिन क्या करू मेरी भी तो मजबूरी थी ….
***********************
12 बज चुके थे और ठाकुर पहले से ही आ चुका था वो बेचैनी से इधर उधर घूम रहा था वो पहले से ही 3-4 पैक दारू के पी चुका था,उसने आते ही सोफे में एक बड़ा सा गिफ्ट के रैपर में पैक कोई समान रखा था ,पता नही वो काजल को क्या देने वाला था,वो घड़ी देखता तो कभी मोबाइल …
ठाकुर को देखते ही मुझे समझ आ गया था की आखिर काजल इसमें इतना इंटरेस्ट क्यो ले रही है ये वही इंस्पेक्टर था जिसने मुझे और काजल को अजीम से मिलवाया था ,तो वो खान का दोस्त भी है और साथ ही काजल के चाहने वालो में से एक भी ,वो अभी जेल का जेलर था और अजीम से संपर्क बनाने में काजल का सबसे बड़ा हथियार ...
मैंने हरिया से बंगले की पूरी डिटेल ले ली थी ,मुझे पता था की वो कौन सा कमरा यूज़ करते है ,और कहा से उन्हें देखा जा सकता है ,कैसे उनकी बाते सुनी जा सकती है,मैंने कुछ माइक्रोफोन वँहा लगा दिए थे ताकि मुझे कम से कम आवाज तो सुनाई दी ,देखने का भी जुगाड़ हो गया था..
वक्त ऐसे लग रहा था की बहुत ही धीमी गति से बढ़ रहा है वही मेरी और ठाकुर की दिल की धड़कने जरूर बढ़ी हुई थी …
आखिर वो समय आ ही गया जब काजल आयी ,आज उसने काले रंग की साड़ी पहने हुई थी ,उसे देखकर एक बार मेरा दिल जोरो से धड़का कहा मेरी नाजुक सी कोमल सी काजल और कहा ये काला भैसा ..
उसके मादकता से कोई भी मर्द दीवाना हो जाए तो ये भी कम ही था,
मैं नजर गड़ाए हुए उन दोनो को देखता रहा ..
उसे देखकर ठाकुर का मुह खुला का खुला ही रह गया ,काजल मुस्कुराते हुए आयी और सीधे ठाकुर के गले से लग गई ,
“ओह ठाकुर साहब आपको ज्यादा इंतजार तो नही करना पड़ा “
ठाकुर ने पहले तो अपना थूक गटका ...उसे मानो यकीन ही नही हो रहा था की इतनी सुंदर लड़की भी दुनिया में होती है ,
काजल का हर एक अंग उसकी साड़ी से झांक रहा था ,वो दूध सी गोरी और मसलता से भरपूर थी ,मुझे तो कभी कभी अपनी ही किस्मत पर यकीन नही होता था की ऐसी लड़की जिसे पाने को दुनिया दीवानी हुई घूमती है मेरे बिस्तर में रोज ही रहती है ..
उस काली साड़ी में से उसका यौवन और भी निखर कर आ रहा था ,
वो आकर सीधे ठाकुर के गले से लग गई ,उसके तने हुए स्तन ठाकुर के चौड़े सीने में गड़े,वो एक भैस जैसा ही दिख रहा था और काजल के उज्ज्वल जिस्म के आगे तो उसका कालापन और भी ज्यादा खिल रहा था ,
ठाकुर तो मानो स्वर्ग में ही था,और इसे देखकर मेरी झांटे सुलग रही थी ,
मादरचोद साला ...
मेरे मुह से अनायास ही निकल गया
लेकिन ठाकुर भी उसके सौन्दर्य को देखकर डर रहा था,क्योकि जितना लालच हो उतना खोने का डर भी तो होता है,
वो कोई भी कदम जल्दबाजी में नही बढ़ाना चाहता था ,
“तुम्हारे लिए तो जिंदगी भर इंतजार कर सकता हु “
उसने बड़े ही रोमांटिक अंदाज से कहा ,काजल मुस्कुरा उठी
“सो स्वीट “ठाकुर का चहरा खिल गया हो भी क्यो ना ,साला मादरचोद …
काजल अंदर आयी और सोफे में बैठ गई
“वाओ ठाकुर जी अपने मेरे लिए गिफ्ट लिया है ,वाओ “
वो ऐसी चहकी जैसे कोई बच्ची हो
“हा जान सिर्फ तुम्हारे लिए लेकिन मैं चाहता हु की तुम मेरे लिए इसे पहनो “
काजल ने शरारत भरे नजरो से उसे देखा ,अच्छा तो ये साला ठरकी मेरे जान के लिए कोई कपड़ा लाया है ..
“ठाकुर साहब आप जानते हो ना खान साहब को पता लगेगा तो …”
काजल ने ऐसे कहा जैसे की वो तो राजी है लेकिन खान का डर है
“तुम फिक्र क्यो रही हो वैसे भी तुम उसकी बीवी तो हो नही और मैं भी उसका हर काम इसीलिए करता हु क्योकि तुम कहती हो वरना मैं खान के उल्टे सीधे काम करता क्या “
अच्छा तो वो काम के बदले मेरी पत्नी की लेना चाहता था ...साला मादरचोद ..
मैं मन ही मन उसे गालियां तो दे रहा था लेकिन मैं भी उत्तेजित हो रहा था की आखिर उसने ऐसे कौन से कपड़े लाये है जिसे वो काजल को पर्सनली पहना कर देखना चाहता था ..
काजल उसकी बात सुनकर मुकुराई
“वो तो ठिक है लेकिन फिर भी मैं हु तो खान साहब की ही गुलाम ..”
काजल का चहरा मुरझा गया ,अब वो सच में मुसझाया था या वो एक्टिंग कर रही थी वो कहना कठिन था ..
“अरे तुम ऐसा क्यो सोचती हो मैं हु ना ,तुम्हे गुलाम से मालिकिन बना दूंगा “
ठाकुर उसके पास जाकर बैठ चुका था और काजल भी उसके कंधे में अपना सर ठिका चुकी थी ,मैं जले हुए दिल से ये सब देख रहा था की कैसे मेरी बीवी उस अधेड़ से काले और बदसूरत आदमी को अपने हुस्न के जाल में फंसा रही थी ,वो कितना आगे जा सकती है ये सोचकर ही मैं रोमांचित हो जा रहा था ,मैं सांसे रोके हुए देख रहा था …
“हम्म्म्म लेकिन आप तो ठहरे खान साहब के दोस्त आप मेरी मदद क्यो करेंगे आपको तो बस मेरी जवानी ही चाहिये …”
काजल ने अब भी उदास सा मुह ही बनाया था
ठाकुर ने मौका देख कर उसके कंधे पर अपना हाथ फिरना शुरू कर दिया था,साला मादरचोद ..
काजल उसके और भी करीब आ गई और उससे लिपट ही गई
“अरे मेरी जान तुम्हे किसने कह दिया की मैं उसका दोस्त हु ,वो साला मुझसे अभी तक कई गैरकानूनी काम करवाता रहा बदले में मुझे क्या मिला ????ये नॉकरी???
कितनी सेलरी मिलती होगी मुझे और ऊपरी कमाई भी कुछ नही ,जब भी उसके मतलब का काम होता है साला मुझे वही ट्रांसफर करवा देता है ,लेकिन अब मेरे पास तुम हो और तुम ही उसके किस्मत की चाबी हो क्यो ना हम दोनो ही मिलकर उसके गांड में लात मारे और मेरे पावर और तुम्हारी काबिलियत के बदौलत हम दोनो ही उसके सर पर पैर रखकर निकल जाए “
काजल के चहरे में फिर से मुस्कान खिल गई,लेकिन उसने खुद को सम्हाल लिया
“ये आप क्या कह रहे है आप तो उनके दोस्त है ना “
ठाकुर के चहरे मे मुसकान और भी गाढ़ी हो गई
“तुम्हे क्या लगता है तुम जो अजीम के साथ कर रही हो खान को बिना बताए वो मुझे नही मालूम ...मैं जानता हु की तुम्हारी नजर खान के जयजात पर है लेकिन तुम उसे अकेले तो नही हड़प सकती तुम्हे मेरी जरूरत तो होगी ही ,”
अब काजल के चहरे में मुस्कान साफ साफ दिखाई देने लगी
“मैं जानती थी की तुम बहुत ही होशियार हो इसीलिये तो मैंने तुम्हे चुना “
दोनो ने ही एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखा ,वो आप से तुम में उतर चुकी थी
“और मैं भी जानता था की तुम बहुत चालाक हो इसलिए तो तुम्हे यंहा बुलाने की हिमाकत कर गया “
दोनो यह खिलखिला कर हंसे
“तो एक जाम हो जाए “
ठाकुर उठकर दो ग्लास में शराब भर लाया था,अब खान का पुराना राजदार काजल का दोस्त बन चुका था और अब काजल को अपनी अदाओं से उसे अपना दीवाना बनाना था ..
वो जाम अपने हाथो में लेकर उसके जाम से टकराई
“ये जाम हमारी दोस्ती के नाम “काजल कुटिलता से मुस्कुराई
“और साथ ही खान की बर्बादी के नाम “
ठाकुर भी मुस्कुरा रहा था ,दोनो ही एक ही सांस में पूरा पैक पी गए और एक दूसरे को देखने लगे ,मेरे दिल में बस एक ही बात आ रही थी …..साला मादरचोद ..
मैं इसके सिवाय और सोच भी क्या सकता था ,
उसने अपना हाथ काजल के कमर पर रख दिया
“अब तो आप हमारी दोस्त बन चुकी है तो ये गिफ्ट स्वीकार करे और साथ ही हमारी शर्त भी “
“क्या शर्त “
“यही की इसे हम अपने हाथो से आपको पहनना चाहते है “
काजल खिलखिलाई और मेरा गांड सुलग गया..
“अच्छा देखे तो जनाब हमारे लिए क्या लाये है “
काजल ने गिफ्ट को खोला
“यू नॉटी ...इसे पहनना चाहते है आप ,हम तो आपको बड़ा ही शरीफ समझ रहे थे और आप तो “
काजल गुस्सा तो नही थी लेकिन बड़े ही मादक अंदाज में और मादकता भरे हुए शिकायत के अंदाज में ठाकुर को देख रही थी …
“तुम्हारे जैसी हसीना को देखकर कोई मर्द कब तक शरीफ रहेगा ,और ये तो मेरा सपना था की मैं तुम्हे ये अपने हाथो से पहनाऊँ …”ठाकुर ने बड़े ही शायराना अंदाज में कहा और साथ ही ऐसे कहा जैसे काजल से रिक्वेस्ट कर रहा हो ..
मैंने नजरे गड़ाई की आखिर वो गिफ्ट था क्या ,मुझे काले रंग का ही कुछ दिखाई दिया ,
काजल ने उसे उठाया ,
“इसे पहनने का सपना देख रहे थे जनाब “वो मुस्कुराई लेकिन मेरा सब कुछ जल गया
‘साला मादरचोद ‘मैं फिर से बुदबुदाया
काजल के हाथो में काले रंग की एक झीनी सी पतली पेंटी थी ,शायद एक ब्रा अभी भी गिफ्ट के पैकेट में रखा था ..
दोनो ही एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे लेकिन मेरी हालत बहुत ही गंभीर थी ………..
अध्याय 50
काजल ………
वो ऐसे विहेब कर रही थी जैसे ठाकुर उसका प्रेमी हो ,
और ठाकुर …
साला उसे देखकर तो उसे मार ही देने का मन कर रहा था ,
काजल और वो दोनो ही सोफे में बैठे हुए हँस रहे थे,
“आपको नही लगता की ये थोड़ी छोटी है “
काजल ने उस पेंटी के बारे में पूछा ,जिसके जवाब में ठाकुर ने उसके साड़ी से झांकते और मानो फाड़ के बाहर आने को बेकरार वक्षो को हल्के से मसल दिया
“आउच कितने बदमाश हो आप “
काजल मचली जरूर लेकिन उसके होठो में मुस्कुराहट बढ़ गई थी ,
“अभी तो बदमाशी और भी ज्यादा करने का मन कर रहा है जानेमन लेकिन तुम ...कुछ करने ही नही दे रही “
काजल खिलखिला कर हँस पड़ी ,
“मुझे इसे तुम्हे पहनाना है “
ठाकुर मचल रहा था
“इतनी भी क्या जल्दी है “
काजल अदा से खड़ी हुई और हल्का म्यूजिक लगा कर उसके सामने आ खड़ी हुई,वो म्यूजिक के रिदम में अपने कमर को हल्के हल्के हिला रही थी और उसकी आंखे सीधे ठाकुर की आंखों से मिली हुई थी ,वो अदा से हिल रही थी ,साड़ी से झांकती हुई उसकी नंगी कमर चमक रही थी और उसकी नाभि के गहराई साफ साफ दिखने लगी थी ,
ठाकुर की आंखे उसकी कमर में ही अटक चुकी थी ,वो सांप सी उसे लहरा रही थी ,
ठाकुर की सांसे मानो अटक गई जब काजल उसके और भी पास आ खड़ी हुई ,उसकी कमर अब ठाकुर के सर के पास ही थी ,शायद उसकी सांसे अब काजल के पेट को छू रही होगी,
ठाकुर ने अपना सर थोड़ा आगे कर उसे चूमने की कोशिस की पर काजल खिलखिलाकर उससे दूर हो गई ,
ठाकुर ने बुरा सा मुह बनाया तो काजल फिर से उसके पास पहुच गई और इस बार वो उसके सर पर हाथ रखकर उसे अपनी ओर खिंचा,
ठाकुर का मुह सीधे काजल के नंगे पेट से जा टकराया ,वो पहले तो अपनी नाक उसके नाभी में रगड़ने लगा फिर अपनी जीभ निकाल कर उसे चाटने की कोशिस करने लगा ,
“आह “काजल ने एक मादक सिसकारी ली उसे जोरो से अपने ओर खिंच लिया
अब ठाकुर का मुह पूरा का पूरा ही उसके पेट में धंस गया था काजल की पकड़ इतनी थी की ठाकुर सांसे भी नही ले पा रहा था ना ही वो अपने चहरे को ही हिला पा रहा था …
वो बौखला गया था और काजल की गिरफ्त से छूटने की कोशिस करने लगा ,काजल जोरो से हँसी और उसे दूर कर थोड़ी दूर हो गई…
हल्का हल्का सेक्सोफोन का म्यूजिक सच में बहुत ही मधुर था और साथ ही बहुत ही रोमांटिक भी ,काजल फिर से उसकी आंखों में अपनी आंखे गड़ाकर हिलाने लगी और इस उसने अपने बाल
भी खोल लिए जिससे उसके घने और लंबे बाल उसके कंधे और छातियों पर भी बिखर गए थे ,वो अपने बालो से मादक अंदाज में सहलाने लगी साथ ही उसे ऊपर किया ,वो उससे खेलने लगी उसकी कमर अब भी म्यूजिक के साथ साथ ही चल रही थी ,
ठाकुर उसे देखकर ऐसे बावरा गया था मानो किसी गरीब को खजाना ही मिल गया हो ..
वो आंखे फाडे हुए काजल की अदाएं देख रहा था ,जैसे पलक झपकना और सांस लेना भी भूल गया हो ..
काजल फिर से उसके पास आयी और अपने पल्लू हो गिरा दिया ,
उसके ब्लाउज से भी उसके स्तनों की सुडौलता और भराव साफ साफ झलक रहे थे ,ठाकुर के आंखों में हवस जाग गई थी वो उसे ललचाई निगाहों से देख रहा था ,काजल ने उसके करीब आकर फिर से उसके चहरे को पकड़ लिया ,वो भी किसी खिलौने की तरह उसकी आज्ञा का पालन करने लगा था ,काजल उसे अपने सीने के पास लायी लेकिन गड़ाया नही वो उसे ऊपर से ही महसूस कर रही थी ,ठाकुर के आनन्द की सीमा क्या थी ये उसकी आंखे बता रही थी उसकी आंखे बंद हो चुकी थी ,वो खुद से कुछ भी नही कर रहा था सब कुछ काजल ही कर रही थी ,
वो अपनी नाक उसके स्तनों में रगड़ने लगा,काजल की भी आंखे बंद हो गई मानो किसी परम् सुख का अनुभव कर रही हो ,ये कोई एक्टिंग थी या हकीकत इसका अनुमान लगाना भी मेरे लिए कठिन हो गया था,वो मेरे साथ भी ऐसा ही करती थी ,,
वो आंखे बंद कर उसके नाक की रगड़ को महसूस कर रही थी ,और आनन्द में सिसकियां ले रही थी …
वो थोड़ा और जोर लगाती है इस बार वो झुककर अपने वक्षो की घाटी में उसके सर को घुसा देती है ,इसे देखकर तो मेरा भी लिंग अकड़ गया था ,क्योकि काजल की गोरी गोरी और बड़ी सी उस खाई में ठाकुर का काजला सा मुह बड़े ही अजीब तरीके से मुझे भी उत्तेजित कर रहा था ,
वो अपनी जीभ निकाल कर उसे चाटना चाहता था लेकिन मैं गलत था वो तो उसे खाने पर उतारू हो चुका था ,ठाकुर के दांत काजल के नंगे स्थल पर जा रहे थे वो ब्लाउज को भीगा रहा था और साथ ही साथ दांतो से हल्के हल्के से काट भी रहा था,उसकी जीभ भी आकर अपना थूक काजल के वक्षो में छोड़ रही थी…
काजल मचल रही थी और उसे और भी जोरो से अपने ऊपर दबा रही थी वही ठाकुर अपनी आंखे बंद किये हुए उस जन्नत का मजा ले रहा था जिसका हक सिर्फ मुझे मिलना था ,
मैं जलन और गुस्से से तो भर रहा था लेकिन साथ ही साथ एक उत्तेजना भी मुझमें घुलती जा रही थी ,
ठाकुर खड़े होने की कोशिस करता है लेकिन काजल उसे खड़ा होने ही नही देती और हंसकर फिर से दूर चली जाती है,
उसकी आंखे ठाकुर की आंखों से मिली दोनो के ही होठो में मुस्कुराहट थी ,एक अजीब सी मुस्कुराहट,ठाकुर ने आंखों ही आंखों में काजल से पास आने का इशारा किया लेकिन काजल ने आंखों ही आंखों में ठाकुर को ना का इशारा किया ,ठाकुर हल्के से मुस्कुराया और खड़ा हो गया ,मैंने देखा की उसके पेंट से ही उसका तनाव साफ साफ दिख रहा था ,उसने अपनी शर्ट उतार फेंकी और अपनी
बनियान भी ,वो थोड़ा पेटू जरूर था लेकिन लगता था की उसने अपनी जवानी में बहुत कसरत भी कि हो क्योकि उसके मसल्स बहुत ही बड़े दिख रहे थे ,वो किसी कुश्ती के पहलवान की तरह लग था ,उसका काल बदन भी कमरे के रोशनी में चमकने लगा ,
काजल ने उसके शरीर को ललचाई निगाहों से निहारा और उसके आंखों को मादकता से देखने लगी,ठाकुर भी अपने जिस्म की नुमाइश करने लगा और अपने पेंट की ओर इशारा किया जिसमे उसका लिंग अकड़ रहा था ,काजल ने मुह थोड़ा खुला ,पता नही वो सच में खुला था या उसने खुद ही इसे खोला था ,लेकिन वो ऐसा करने से ठाकुर को और भी मोहित कर गई वो स्त्रियों वाली सब अदाओं को जानती थी जिसे एक मर्द हमेशा ही पसंद करता है ,,,
काजल की इस हरकत से ठाकुर थोड़ा हंसा और उसके पास जाने लगा काजल उससे दूर जाने लगी वो उसे पकड़ने को झपटा ,काजल हट गई वो थोड़ा लड़खड़ाया और कमीनी सी मुस्कान के साथ उसकी ओर बढ़ने लगा ,थोड़ा रुक कर उसने अपनी पेंट भी निकाल कर हवा में उछाल दी ,उसके अंडरवियर से उसका लिंग सच में बहुत ही बड़ा और खतरनाक लग रहा था ,उसका काला बदन चमक उठा था,वो बहुत ही उत्तेजित था और काजल को कहा जाने वाली निगाहों से देख रहा था ,काजल कभी उसके बदन को देखती तो कभी उसके अकड़े हुए लिंग को ,काजल के होठो में अब भी मादक मुस्कान थी वो उसे घूर रही थी और ठाकुर भी तड़फता हुआ उसकी ओर बढ़ रहा था ,
जैसे जैसे ठाकुर उसकी ओर बढ़ता वो पीछे होती जाती ..
वो फिर से झपटा इस बार उसका हाथ ठाकुर के पकड़ में आ गया था
“आउच छोड़िए ना “
काजल ने मचलते हुए कहा जिससे ठाकुर हँस पड़ा और उसे अपनी ओर खिंच कर अपने से मिला लिया
ठाकुर ने उसे बहुत ही जोरो से जकड़ रखा था ऐसे की कोई हवा भी दोनो के बीच से पास ना हो पाए ,
काजल के वक्ष उसकी बालो से भरी चौड़ी छातियों में धंस गई थी वही ठाकुर का लिंग अब काजल के जांघो के बीच रगड़ रहा था ,काजल इससे और भी मचल रही थी लेकिन ठाकुर उसे कोई भी मौका नही देने वाला था ,उसने अपने होठो को काजल के गले और कंधों पर चलाना शुरू कर दिया
“आह नही ना आह “
वो छूटने का प्रयास करने लगी थी लेकिन मैं भी जानता था की वो छूटना नही चाहती थी वो और भी उसमें गड़ी जा रही थी ,और भी मचल रही थी
“आह नही ना... आह रुको ना ..थोड़ा सब्र तो करो आह ओह “
काजल की इन आवाजो से ठाकुर के साथ साथ मैं भी पागल हो रहा था ,वो और भी जोरो से उसे चूमता और अपने कमर को उसके कमर से टकराता ,भला हो उस साड़ी का जिसे मेरी बीवी ने पहन रखा था वरना उसका लिंग अभी काजल के अंदर ही होता वो 90 डिग्री में उठा हुआ था और सीधे ही काजल के जांघो में रगड़ रहा था,
काजल को भी इसका आभास जरूर हो रहा होगा ,वो भी गर्म होने लगी थी उसका विरोध कम हो रहा था और वो बस आहे ले रही थी वो अब भी छोड़िए ना कह रही थी लेकिन बहुत ही कमजोर स्वर में,वो उत्तेजित थी और शायद गीली भी ……..
ठाकुर ने उसकी कमर को पकड़ कर और भी जोरो से अपनी ओर खिंच लिया साथ ही अपनी कमर को भी उसके कमर से टकराया
“आह “एक जोर की आवाज काजल के मुह से निकली
दोनो की ही आंखे मिली और काजल ने उसे हल्के से मुक्के से मारा ,ठाकुर ने काजल को किसी गुड़िये की तरह ही उठा लिया और उसे सीधे सोफे में जा फेका और उसके ऊपर छा गया ,उसके भारी शरीर ने मेरी कोमल सी जान के नाजुक शरीर को ऊपर पूरी तरह से ढंक लिया था,वो उसे मसल रहा था और अब उसका हाथ काजल के ब्लाउज तक पहुच चुका था वो से मसल रहा था और उसे उतारने की कोशिस भी कर रहा था ,उसने उसे काजल के कंधे से नीचे गिरा ही दिया लेकिन वो अब भी काजल के बांहो में फंसे थे , वो उसके नंगे कंधे को चूमने लगा और उसे अपनी लार से भिगाने लगा,काजल मादक सिसकियां ले रही थी ,
वो काजल की घाटी तक अपनी जीभ ले जा रहा था लेकिन अब भी ब्रा की वजह से वो पूरी तरह से दिखाई नही दे रही थी ,लेकिन उसकी ब्रा जरूर दिखने लगी थी ,वो जितना हो सके उसे चूम रहा था और उसने अपने दांत भी काजल के कंधे पर गड़ा दिए ,
इधर मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुच गया था मैंने कब अपना लिंग अपने हाथो में ले लिया था मुझे भी नही पता लगा मैं जोरो से हिलाने लगा और जैसे ही ठाकुर ने अपने दांत गड़ाए मैं भी झाड़ा और दीवार में ही अपने को खाली कर दिया ,मेरी सांसे भी उखड़ी हुई थी ,क्या हुआ और क्या हो रहा है इसकी समझ मुझे अभी आई थी ,मैं पागल हो चुका था मैं क्या कर रहा था ,
ठाकुर ने काजल की साड़ी खोलने के लिए हाथ बढ़ाया लेकिन काजल ने हाथ पकड़ लिया
“यंहा नही बेडरूम में चलिए “
ठाकुर ने उसे किसी बच्चे की तरह उठाया साथ ही वो ब्रा पेंटी भी उठा ली जिसे वो काजल के लिए लाया था ,वो बेडरूम की ओर जाने लगा ,मैं वही बैठ चुका था मैं दहाड़ कर रोना चाह रहा था ,मुझे लग रहा था की जो मैंने किया था वो गलत है ,मैं वँहा एक पल भी नही रुकना चाहता था मैं वँहा से भागा,..............
अध्याय 51
ये क्या हो रहा है ,इतना तिरिस्कार ,इतनी जिल्लत ,इतनी नाकामी….
इतना बेसहारा तो मैंने अपने को कभी महसूस ही नही किया था,ये मेरे अंदर की निर्लज्जता थी या नपुंसकता ..
मैं क्यो कुछ नही कर पा रहा था ,मैं अपने को असहाय महसूस कर रहा था ,मैं अंदर से टूटा हुआ महसूस कर रहा था ,
मैं डरा हुआ था,कुछ घबराया हुआ,..
मुझे किसी ने कुछ भी तो नही किया था,किसी ने कुछ भी नही किया था लेकिन ये क्यो हो रहा था,
क्यो मेरे दिमाग में काजल और ठाकुर की छबि बार बार आ रही थी,क्यो मैं इतना बेचैन था की वो दोनो आखिर कर क्या रहे होंगे ,मैं अपने को रोक ही नही पा रहा था,मैं फिर से उसी दर्द को बार बार महसूस कर रहा था,मैं सोच कर ही सिहर उठता था की मेरी ही मौजूदगी में कोई मेरी पत्नी के साथ …….
मुझे रोना आ रहा था ,.........
आखिर क्यो मैं इसे चुपचाप देखता रहा मैं वँहा से भाग क्यो नही गया ,
आखिर मुझे हुआ क्या था की मेरा लिंग ये सब देखकर अकड़ रहा था,आखिर मैं ऐसा कैसे हो गया था ,
जिसकी रक्षा की शपथ ली थी उसे दूसरे के साथ देखकर ??????
लेकिन उसे क्या सच में रक्षा की जरूरत थी ,मेरे खयाल से नही ,वो खुद ही इसे अपनायी थी ,काजल अगर यंहा थी तो वो अपने लिए डिसीजन के कारण थी ,ये उसका खुद का ही तो फैसला था…….
मैं गार्डन में बैठा हुआ रो रहा था की मेरे मोबाइल की घंटी बजी…
मैं चौक कर देखा तो वो काजल थी ,और भी ज्यादा चौक गया …….
एक पूरा रिंग होने पर भी मैं उसे नही उठा पाया ,थोड़ी ही देर में अगला रिंग भी बजने लगा
“हैल्लो “मैं थका हुआ सा बोल पाया
“तुम यंहा क्या कर रहे हो “वो बौखलाई हुई आवाज में बोली
मैं हड़बड़ा गया था मैं चारो ओर देखने लगा ,मैं उस खिड़की के तरफ देखा जिस कमरे में वो दोनो गए थे ,कांच की खिड़की में लगे हुए पर्दे से झांकती हुई काजल मुझे दिखी ,मेरे पास कहने को कोई शब्द नही था ,लेकिन शायद वो मेरी कंडीसन देख कर समझ चुकी थी आखिर मैंने क्या देख लिया है ...वो अभी भी साड़ी और ब्लाउज पहने हुई थी लेकिन अब भी उसका दुप्पटा उसके कंधे में नही था…
“तुम तुम पागल हो क्या,यहां कैसे आ गए और ये क्या कर रहे हो कोई देख लेगा तो ..”
वो घबराई हुई थी
“और ऐसा हाल क्यो बना लिया है “
कहते कहते ही उसका गला भर गया ,उसकी आंखों से पानी तो नही झर रहा था लेकिन उसकी आवाज से जरूर पता चल रहा था की मेरी हालत देखकर उसे दुख ज़रूर हुआ होगा..
“अब कुछ बोलो भी “
“ठाकुर कहा है “
मेरे सवाल पर वो थोड़ी देर तक चुप ही थी,
“वो अभी बाथरूम में है उसके निकलने से पहले तुम यंहा से चले जाओ प्लीज् “
मैं उसे यू ही देखता रहा जैसे कोई खोया हुआ खजाना मेरे सामने हो..
“तुमने ही तो कहा था ना की देखो और इन्जॉय करो तो इन्जॉय करने आ गया था “
मेरे बातो में वो व्यंग था जिसे काजल अच्छे से समझती थी
“प्लीज् देव मैं जानती हु की तुम ये सब सह नही पाओगे ,देखो तुम्हारी हालत क्या हो गई है,”
उसके आवाज के दर्द को मैं महसूस कर पा रहा था ,मैं एक गहरी सांस लिया
“मुझे कुछ नही होगा तुम वो करो जो तुम यंहा करने आई हो “
पीछे से ठाकुर की आवाज आयी और काजल ने फोन काट दिया ,लेकिन पलटने से पहले ही उसने आंखों ही आंखों से मुझे समझया की मैं वँहा से चला जाऊ…
वो पलटी साथ ही उसने पर्दा भी खिंच लिया ,मेरे हेडफोन अब भी मेरे कानो में थे मैं उनकी बाते भी सुन सकता था..
“डार्लिंग अब और मत तड़फओ आओ इधर “
इस बार काजल ने कुछ नही कहा था लेकिन धम्म की आवाज से इतना तो मुझे समझ आ गया की वो बिस्तर में बैठ या लेट चुकी थी ,
“ओह मेरी जान क्या हुस्न पाया है तुमने मन करता है की कच्चा चबा जाऊ “
ठाकुर की ललचाई सी आवाज आयी ,लेकिन फिर भी काजल ने कुछ भी नही कहा
“क्या हुआ तुम्हे अभी तो अच्छी थी ???”
“कुछ अजीब सा लग रहा है ,”
“तबियत तो ठीक है “
“ह्म्म्म ,नही रुको...आज नही कभी और करते है “
“मैं सह नही पाऊंगा “
“जब जिंदगी भर के लिए कोई चीज मिल रही हो तो थोड़ा इंतजार कर ही लेना चाहिए “
पहली बार काजल की हँसी मुझे सुनाई दी लेकिन वो हँसी भी बड़ी फीकी सी लग रही थी
“आखिर हुआ क्या है ,??”
“कुछ नही जान बस आज नही ,मैं तुमसे वादा करती हु की ये पेंटी और ब्रा तुम्हारे ही हाथो से पहनूँगी लेकिन आज नही ,”
पता नही लेकिन ठाकुर जरूर झल्लाया होगा
“ठीक है जाओ “
‘थैक्स मेरी जान “काजल ने शायद उसके गालो को चुम्मन दिया था या उसके होठो को ??
लेकिन थोड़े ही देर में मेरे पास उसका काल आ गया
“मुझे घर में मिलो अभी “
मैं चुपचाप ही वँहा से निकलकर घर की ओर चल पड़ा …..
अध्याय 52
सोफे में बैठा हुआ मैं अपनी ही सोच में पड़ा हुआ था ,की दरवाजा खुला और काजल अंदर आयी वो बहुत ही गुस्से में लग रही थी ,
मेरे हाथो में स्कोच का एक पेग था,
“तुम्हे जरूरत क्या थी देव वँहा जाने की “
मैं खामोश रहा और एक सिप लगाई
“बोलो अब चुप क्यों हो ,जब सह नही सकते तो दूर ही क्यो नही रहते,वँहा बैठे रो रहे थे और यंहा बैठे हुए दारू पी रहे हो ..अब बोलो भी “
ऐसा लगा जैसे वो अब तब रोने ही वाली हो, मैं खड़ा हुआ और उसे अपने सीने से लगा लिया ..
“मैं वँहा तुम्हे देखकर उत्तेजित हो गया था काजल मुझे माफ कर दो तम्हारे और ठाकुर के फोरप्ले का मैं आनन्द उठाने लगा था,मैं इसी ग्लानि से भर गया…”
उसने मुझे खुद से दूर किया और मेरी आंखे में झांका वो अब मुस्कुरा रही थी
“तुम सच में उत्तेजित हो गए थे”
“हा”मैंने मासूमियत में सर हिलाया
वो जोरो से मेरे गले से लग गई
“वाओ यानी तुम जब तक नही झड़े तब तक तुम्हे सब कुछ अच्छा लगा “
मैं फिर से सर हिलाया
वो बहुत ही खुस हो गई
“यानी तुम तैयार हो बस इतना करना की अब की बार झड़ना नही “
मैं आश्चर्य से उसकी ओर देखने लगा
“मैं आज ही ठाकुर को फिर से बुलाती हु ,तुम तो जानते हो होंगे की उसने मुझे एक गिफ्ट दिया था “
मैं बिल्कुल ही शॉक हो गया
“तुम पागल हो गई हो नही नही मैं ये नही कर सकता “
उसने प्यार से मेरे गालो को किस किया
“मेरी जान तुम तो ये पहले भी कर चुके हो “
हम दोनो ही थोड़ी देर तक चुप थे और एक दूसरे की आंखों में देखते रहे
“मैं जानती हु ये कितना डरावना हो सकता है लेकिन मुझे उम्मीद है की तुम इसे इन्जॉय करोगे ,सोचो आज तो तुम्हे पता नही था की मैं क्या करने वाली हु .लेकिन अगर ये तुम्हारी इजाजत से हो तो बात ही कुछ और होगी..”
काजल की बातो से मेरे दिल से खून निकल गया था
मैं कैसे अपनी बीवी को किसी दूसरे का बिस्तर गर्म करने की इजाजत दे सकता था
“ये मैं कैसे कर सकता हु “मैं भड़क गया
“तुम ही ये कर सकते हो देव “
“आखिर कैसे “
मैं चिंतित था
“बस तुम कह दो की हमारे बीच का प्यार इससे कम नही होगा मैं दुनिया के साथ सो सकती हु अगर तुम कहो “
मैं बौखला गया था
“तुम तो वैसे भी सो रही हो और उसके मजे भी ले रही हो ,क्या मैंने ये नही देखा था की तुम कैसे सिहर रही थी क्या तुम्हारे मजे से लिए गए हुए सारे सिसकियां मैने नही सुनी है ,मैं जानता हु की तुम मजे ले रही थी और मैं ये भी समझने लगा हु की तुम अपने मजे के लिए मुझे cuckold की ओर धकेल रही हो …”
मैं गुस्से में तमतमा गया था
“मतलब है की तुम्हे ये नही लगता की मैं तुमसे प्यार करती हु “
वो भी भड़क गई थी
“नही नही लगता की तुम मुझसे प्यार करती हो ,तुम तो अपने बदले और जिस्म की आग में जल रही हो और इसमें तुमने ना सिर्फ मुझे घसीटा है बल्कि मेरी बहनों को भी घसीट लिया ,क्या मुझे ये नही पता की निशा की इस हालत की जिम्मेदार भी तुम ही हो “
मेरे मुख से निकले कड़वे शब्द उसके सीने को छलनी करने लगे थे
“तूम अपनी बहनों के बारे में सोच रहे हो देव ,तुम जो की खुद ही अपनी बहन के साथ सोता है …”
मैंने एक जोर का तमाचा उसके गाल में लगा दिया और एक गहरा सन्नाटा कमरे में छा गया था
मेरी आंखों से आंसू की बूंदे निकल गई ये पहली बार था जब मैंने काजल को मारा था ,उसका गोरा चहरा लाल हो चुका था
वो मुझे भरे हुए नयनो से देख रही थी …
“क्या ये सच नही देव की तुम
मोहनी और शाबनम के साथ भी सो चुके हो”
मैं सन्न रह गया ,
“और ये भी क्या सच नही की अगर तुम्हे मौका मिले तो तुम दूसरी लड़कियों के साथ भी सो सकते हो …”
हा जो काजल ने कहा था वो सच में बिल्कुल ही सच था
“देव जब तुम इसमें मजा ले सकते हो तो मैं क्यो नही बस इतनी सी बात तुम मुझे बता दो “
मैं फिर से चुप हो गया
“तुम पैसे और पावर के लिए ये सब कर रही हो “
मैं धीरे ही सही लेकिन बोल पाया
“हा हा हा “वो जोरो से हँसी
“अगर मजे के साथ साथ ये भी मिलता है तो क्या गलत है “
तार्किक रूप से उसकी बात भी सही थी
“लेकिन तुम मेरी पत्नी हो और मैंने जो भी किया वो तुम्हारे बाद किया जब मुझे पता चला की तुम ऐसा करती हो ,शुरुवात तुमने की थी,और तुमने मुझसे झूठ बोला “
“कौन सा झूट देव “
“यही की …….यही की …”
मैं बुरी तरह से कांप गया मुझे कोई झूट याद ही नही आया था
“लेकिन ये धोखा तो था ,तुमने झूट नही कहा लेकिन तुमने मुझे कुछ बतलाया भी तो नही था …….”
वो मुझे देख कर हँस रही थी मानो मुझे चिढ़ा रही हो
“देव मेरी जान तुम सच में भोले हो “
मैं सच में पगला गया था
“मैंने तुम्हे धोखे में रखा था लेकिन अब तो मैं तुम्हे सब बता रही हु ...अगर वफ़ा है तो इतना करना की मेरा साथ दो “
“किस बात का साथ चुदवाने का “
वो फिर से खिलखिला उठी
“हा चुदवाने का ,दूसरे से चुदवाने का तुम्हारी परमिशन के साथ “
उसकी आवाज में एक गुस्सा साफ झलक रहा था
उसने अपना बेग उठा लिया और वो बाहर जाने लगी
“मैं वही जा रही हु अपना गिफ्ट ठाकुर से पहनने ...तुम्हे अगर देखना है तो आ जाना ,और हा एक चीज और मुझे बहुत मजा आने वाला है ठाकुर का लंड बहुत ही बड़ा है तुमसे भी बड़ा…”
वो गुस्से में जाते जाते दरवाजे को जोर से बंद कर गई और मैं बस यही सोचता रहा की अब क्या करू ………..
अध्याय 53
कभी जिंदगी इतनी शिद्दत से लेती है की हमे समझ ही नही आता की हमारी ली जा रही है …
यही मेरे साथ भी हों रहा था जिंदगी मेरी शिद्दत से ले रही थी और मैं बस इसी सोच में पड़ा हुआ था की मैं क्या करू ..
मैं मोबाइल उठाकर हरिया को काल किया ..
“जी सर बोलिये “
“हरिया वो जो रांड तेरे फॉर्महाउस में बार बार आती है वो मेरी बीवी है ,”
मैं नशे में था और मैं बोल गया
वो चुप था बहुत देर तक बस चुप था
“हैल्लो “
“हा सर “
“तूने सुना ना मैंने क्या कहा “
“सुन लिया सर और वो अभी यंहा आयी हुई आई किसी का इंतजार कर रही है “
मैं जोरो से हँस पड़ा मुझमें इतनी ताकत भी नही बची थी की मैं गाड़ी चला सकू मैं बुरी बोतल ही पी गया था ,
“वो साला ठाकुर आने वाला होगा ,”
:इंस्पेक्टर ठाकुर ??”
“हा वही “
“जी सर अपने सही कहा उन्होंने ही फिर से मुझे फोन कर कहा था की वो आने वाले है और शराब की व्यवस्था उनके कमरे में कर दी जाए “
“तो तुमने कर दी क्या “
मैं टुन्न था
“हा सर कर दी एक बोलत शेम्पियन की और और बोतल स्कोच की रखवा दी है मेडम अभी हाल में ही उनका वेट कर रही है “
“मेडम यानी रंडी ..है ना “
मैं फिर से जोरो से हँस पड़ा लेकिन आगे से कोई भी रिप्लाय नही आया
“क्या हुआ तू चुप क्यो है “
“सर क्यो दर्द झेल रहे हो तलाक दो और काम खत्म करो अगर आप ये सब जानते हो तो आप उनके साथ है ही क्यो ??”
उसका प्रश्न मेरे दिल में घुस गया था
“क्योकि मैं उससे प्यार करता हु “
“ये कैसा प्यार है ??”
वो भी बड़ा बेचैन हो गया था
“छोड़ यार ...तू बहुत अच्छा आदमी है तुझे मैं उस फार्महाउस को गिफ्ट में दूंगा ये मेरा वादा है तुझसे …”
मैं इतना ही बोल कर फोन रख दिया,मैं सामने देखा तो दंग ही रह गया
सामने मेरी बहन पूर्वी खड़ी हुई मेरी बात को सुन रही थी ,मैं इतने नशे में था की मुझे सब कुछ धंधला दिख रहा था
वो स्तब्ध खड़ी हुई थी ,उसे देखकर मुझे बहुत ही प्यार आया
“मेरी जान आ जा आ मेरे पास बैठ “
वो मेरे पास आकर बैठ गई
“कब आयी तू “
मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया
“अभी जब आप बात कर रहे थे “
वो रो रही थी मुझे अभी पता चला था
“क्या हुआ तुझे रो क्यो रही है “
“आप इतना क्यो पी लिए हो भइया और भाभी को क्या हुआ ,वो कहा गई है और क्या ऐसा हो गया की आप उनके बारे में ऐसा बोल रहे हो “
शायद वो सब कुछ सुन चुकी थी
मैं पूरे नशे में ही था और मैं उससे झूठ भी नही बोल पाया
“वो अपने यार से चुदवाने गई है “
पूर्वी का क्या रिएक्शन था मुझे नही पता क्योकि मुझे सच में कुछ भी सही नही दिख रहा था
लेकिन उसने अपना हाथ मेरे गालो पर रख दिया
“आई लव यु भइया “
मैंने उसे देखा वो थोड़ी धुंधली सी मुझे दिखाई दी ,असल में 2-3 सूरत मेरे सामने घूम रही थी मैंने उसे पकड़ा और उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया थोड़ी देर किस करने के बाद
“आई लव यु मेरी जान “
उसके रोने की आवाज मुझे सुनाई दे रही थी
“भइया अपने बहुत ही पी ली है प्लीज चलिए सो जाइये “
“नही मैं बिल्कुल भी नही पिया हु ,अभी तो मुझे अपनी बीबी को चुदवाते हुए देखना है ,मैं फार्महाउस जाऊंगा और वँहा जब मेरी बीवी की चुद ठाकुर मार रहा होगा तो
मैं उसे देखकर अपना हिलाऊंगा ...हा हा हा मैं एक वो क्या कहती है काजल cuckold हा मैं तो एक cuckold हु मेरा जन्म भी तो इसी के लिए ही हुआ है मेरी बहन की मैं अपनी पत्नी को जिसे मैं शादी कर लाया था 7 वचन कर के लाया था ,उसे मैं दूसरे के बिस्तर में देखने के लिए ही तो जन्मा हु…”
मैं फुट फुट कर रोने लगा पूर्वी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया था …
वो भी रो रही थी और मैं भी …
एक लड़की और उसकी एक जिद ने हम दोनो को रोने में मजबूर कर दिया था ..
मैं जानता था की ये मेरी बहन है वो बहन जिसे मैं दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करता हु ,वो मेरी बच्ची थी मेरी छोटी बहन थी लेकिन मैं उससे इस तरह की बाते कर रहा था
अब मुझे पता चला था की मैं दुनिया का सबसे किश्मत वाला आदमी हु लोगो के पास गर्लफ्रेंड्स होती है बीबी होती है ,मेरे पास मेरी बहने है जिनसे मैं दुनिया की सब बाते कर सकता हु ..
मुझे आज पूर्वी के सीने से लगकर लगा की मेरी दुनिया कितनी हसीन है मेरे पास प्यार करने वालो के कमी नही है ,
काजल ने अगर वो फैसला किया जिसके कारण मैं दारू के नशे में डूब गया तो वो भी मेरे ही कारण किया था वो तो बेचारी सब छोड़कर मेरे पास आ रही थी मैंने ही उसे उकसाया उससे तमीज से पेश नही आया था ,
गलत सही का फैसला करने वाला है कौन ???
मैं भी तो गलत था या सही था ,वो भी तो गलत थी या सही थी …
और ये मेरी बहने है मेरी जान है ,जो मेरी हर गलतियों को सहकर भी मुझसे प्यार करती है ..
मैंने पूर्वी के माथे को चूमा ..
और उठ कर खड़ा हुआ ..
“मुझे फॉर्महाउस जाना है “
पूर्वी जरूर चौकी होगी
“भइया आप पागल हो गए हो क्या देखो अपनी हालत ऐसे में गाड़ी कैसे चलाओगे..”
“तू चलाएगी मुझे वँहा ले जा मैं काजल दो देखना चाहता हु ..”
पूर्वी जोरो से चीखी
“भइया आप पागल हो गए हो क्या ,नही आप मेरे पास रहोगे “
वो रोने लगी थी जिसकी आवाज मुझ तक पहुच रही थी
“भइया प्लीज् “
“प्लीज् मेरी जान समझ मेरी बात को मैं दुखी नही हु ,मुझे समझ में आ गया है की प्यार क्या होता है ,प्यार जिस्म को नही देखता वो देखता तो बस मन को और सच मान तेरी भाभी दूसरे के साथ भी बिस्तर में उतनी ही गर्म है जितनी मेरे साथ होती है …”
मैं उठ कर कर की चाबी निकाल कर बाहर जाने लगा ,
“भइया आप क्या बोल रहे हो वो आपको पता नही है आप सच में पिये हुए हो “
“मैं क्या बोल रहा हु मुझे पता है और मैं किससे बोल रहा हु ये भी मुझे पता है ...
,तू मेरी जान है दुनिया में अगर मैं सबसे ज्यादा प्यार किसी से करता हु तो वो तू ही है …”
मैंने पूर्वी के गालो में एक किस किया
“और मैं चाहता हु की तू कर ड्राइव करते हुए वँहा ले जा जंहा काजल ठाकुर के साथ है ,तुझे अजीब जरूर लगेगा की तेरा भइया पागल हो गया है लेकिन सच में जान मैं पागल नही हूं मैं तो बस दीवाना हो गया हु तेरा ,निशा का, काजल का,शाबनम का और थोड़ा थोड़ा रश्मि और मोहनी का भी ...वो जो भी करे लेकिन मुझे तो वो सब ही अच्छा लगता है …”
दारू मेरे दिल की बात को जुबान पर ला रही थी लेकिन पहली बार मैंने अपनी बहन के होठो में एक मुस्कुराहट देखी थी वो थोड़ी सी हँसी
“आप आज सच में पागल हो गए हो ,बस चुपचाप बैठना चलो मैं आपके साथ हु देखते है आज आप क्या तूफानी करते हो “
वो मेरे गले से लगकर मुझसे चाबी लेकर मेरे सामने चलने लगी और मैं उसके पीछे लग गया …..
अध्याय 54
पूर्वी के साथ बैठा हुआ मैं अपने में मगन होकर फॉर्महाउस की तरफ चल दिए थे ,गाड़ी अपनी रफ्तार से चल रही थी..
“पूर्वी वो तेरे भाभी की पेंटी खोलकर नई पेंटी पहनाने वाला है ...मुझे क्या करना चाहिए …”
मेरे सवाल से नही पूर्वी मेरे बात करने के तरीके से चौकी होगी,इतना खुलकर मैंने उससे कभी बात नही की थी
“मार दो उसे जो भाभी पर हाथ डाले”
पूर्वी ने दृढ़ता से कहा
“अच्छा मैं भी तो यही चाहता हु लेकिन….लेकिन तेरी भाभी अपने मर्जी से वँहा गई है उसका क्या करू “
वो भी सोच में पड़ गई थी
“दोनो को ही मार डालो ..”
उसने एक सपाट सा उत्तर दिया..मेरी बहन ..
मैं उसे किस करने के लिए उसके पास गया और उसके गालो में किस कर लिया
“भइया सीधे बैठो ना क्या कर रहे हो “
वो भी हड़बड़ाई
“लेकिन मुझे भी मजा आ रहा था जब वो तेरी भाभी के साथ ये कर रहा था तब क्या करू “
वो सोच में पड़ गई बहुत देर तक वो कुछ भी नही बोल सकी
“बोल ना क्या करू “
मैं अभी भी नशे में था और हिल रहा था
“जो आपकी मर्जी वो करो मुझे मत पूछो “
वो गुस्से में बोली और मैं हँस पड़ा
क्या जिंदगी हो गई है जिन्हें मुझे सम्हालना था वो मुझे सम्हाल रहे थे
फॉर्महाउस आते ही मैं एक लोहे का रॉड अपने कार से निकाल कर रख लिया और बाहर मुझे हरिया मिल गया ..
“ठाकुर आया क्या “
“सर आप बहुत नशे में है प्लीज् अंदर मत जाओ कुछ गलत हो गया तो “
“बे तू चिंता क्यो कर रहा है मैं सब सम्हाल लूंगा कुछ नही होगा ,ठाकुर आया की नही “
“अभी आया है “
“तो हट सामने से “मैं लड़खड़ाता हुआ गार्डन में पहुचा मेरे साथ ही साथ पूर्वी भी चल रही थी मैं रॉड को जमीन में घसीट रहा था जैसे मैं कोई साउथ का हीरो हु...लेकिन मैं क्या करने वाला था ये तो मुझे भी नही पता था ..
मेरी बहन ने कह रखा था की दोनो को मार दो लेकिन मैं अभी भी सीरियस नही था क्योकि मुझे खुद भी होशं नही था की मैंने क्या सुना था और मैं क्या करने जा रहा था …
मैं वँहा पहुचा जंहा मैंने जगह बना रखी थी अंदर देखने के लिए
,पूर्वी मेरे बाजू में खड़ी थी ..असल में मैं खड़ा भी नही हो पा रहा था मैं अब भी लड़खड़ा रहा था
मैं अंदर झांका और खिलखिला उठा
“देख तेरी भाभी क्या कर रही है “
पूर्वी अंदर झांकने लगी
अंदर काजल बिस्तर में लेटी हुई थी और ठाकुर उसके साड़ी से खेल रहा था
“भइया मार दो इन दोनो को “
पूर्वी कांप रही थी ,मैं उसे देखकर उसे फिर से उसके गालो में किस किया
“रुक ना अभी तो शो शुरू हुआ है देखने तो दे की आगे क्या क्या होता है “
पूर्वी शांत हो गई मैं फिर से देखने लगा
वो काजल के कपड़े खोल रहा था मुझे याद आया की मेरे पास हेडफोन है मैंने उसे अंदर लगे है डिवाइस से कनेक्ट किया और एक पूर्वी के कानो में भी डाल दिया ..
डर क्या होता है जैसे मुझे पता ही नही हो मैं बिल्कुल ही निडर हो गया था ये शायद मेरे द्वारा पी गई स्कोच की बोतल का कमाल था …
“आह जल्दी करो ना “
काजल मचल रही थी
“ये साला तेरी साड़ी खुल क्यो नही रही है “
ठाकुर बहुत ही जल्द बाजी में था आज ही उसने थोड़ी देरी की थी और काजल का पूरा मूड ही बदल गया था अब वो देरी नही करना चाहता था
जैसे तैसे वो साड़ी को खोल ही गया
काजल अभी मेरे सामने आधी नंगी लेटी हुई थी उसके बदन में साड़ी नही थी वो ब्लाउज और पेटीकोट में अंदर लेटी हुई थी और ठाकुर पूरा नंगा खड़ा हुआ था उसका बड़ा सा लिंग जो सच में बहुत बड़ा लग रहा था वो पूरे लंबाई में खड़ा हुआ था ..
अचानक ही वो उसके पेटीकोट से खेलने लगा और उसके नाड़े को निकालने की जद्दोजहत करने लगा..
काजल ने अपना सर घुमाया और हमारी ओर देखा जैसे हमे देख रही हो ,मैंने यही सोच कर ये खिड़की चूस की थी क्योकि इसमें जो कांच लगा था उससे दिन में अंदर आराम से देखा जा सकता था लेकिन अंदर से बाहर नही देखा जा सकता था क्योकि अंदर प्रकाश ज्यादा और बाहर प्रकाश कम होता था ,लेकिन काजल हमारी ओर ऐसे देख रही थी जैसे उसे पता था की मैं उसे इस खिड़की से देख रहा हु,वो मुस्कुराई …
ठाकुर अभी भी काजल के पेटीकोट के नाड़े में बिजी था लेकिन काजल ने अपना मोबाइल अपने हाथो में ले लिया और कुछ टाइप करने लगी जो मेरे पास मेसेज बनकर आया
“देखने का मजा ही कुछ और है अब देखो और इन्जॉय करो “
ये मेसेज पूर्वी ने मुझे पड़कर सुनाया था क्योकि मुझे साफ दिख ही नही रहा था
काजल हमारी ओर देखकर फिर से मुस्कुराई
“भइया ये हो क्या रहा है ??भाभी को पता है की आप उन्हें देख रहे है …”
वो बेचारी मेरी छोटी सी गुड़िया बुरी तरह से कन्फ्यूज़ थी
“हा वो मुझसे गुस्सा है और यंहा चली आयी “
“आप पागल हो या वो पागल है ये हो क्या रहा है ….
”
“तू देख ना और फिर बताना क्या करू तू जो बोलेगी वही मैं करूँगा दोनो को मार दूंगा या खुद मर जाऊंगा”
मैं उसे सामने कर दिया और खुद उसके पूछे सट ले नजारा देखने लगा
अंदर कामाग्नि में जलाते हुए दो बदन आपस में गुथे जा रहे थे,ठाकुर उसका नाडा खोलने में कामयाब हो गया था और अब देर ना करते हुए काजल के ऊपर खुद गया था ,जैसे मैं भी उस सीन का ही एक हिस्सा बन गया था मैं आंखे गड़ाए हुए उसे देख रहा है जैसे की मैं कोई मूवी देख रहा हु ,मेरे सामने मेरी बहन थी मेरी छोटी बहन जो अब तक शायद कन्फ्यूज़ ही थी की ये हो क्या रहा है ,वो शायद अपने को ही कोश रही होगी की वो क्यो उस समय वँहा गई …
मैं पीछे से उससे चिपका हुआ था और मेरा हाथ खिड़की से लगा हुआ था ,मेरे दोनो हाथो के बीच पूर्वी समाई हुई थी ,उसने एक बार मुझे बुरा सा मुह बनाकर देखा ,मैं मुस्कुराते हुए उसके गालो में किस कर गया ,वो फिर मुह बनाते हुए आगे देखने लगी ,उसे मुझपर बहुत गुस्सा आ रहा होगा लेकिन वो मेरे प्यार के कारण ही मुझसे कुछ कह नही पा रही थी …
अंदर का नजारा गर्म हो रहा था …
ठाकुर काजल के ऊपर चढ़े हुए पूरे ताकत से उसके गालो को खा रहा था ,उसके मोटे होठो ने काजल के नरम गालो को पूरी तरह से भिगो ही दिया था,उसके गाल लाल पड़ गए थे वो थोड़ा रुककर फिर से काजल के होठो तक आया,
“हम्म्म्म “
काजल ने एक पल की देरी किये बिना ही उसके होठो को अपने होठो में भर लिया और उसे चूसने लगी ,काजल के लाल नरम रसीले होठो का स्वाद ठाकुर पूरे तन्मयता से ले रहा था ,दोनो के थूक से मिली आवाज हमारे कानो में पड़ रही थी ,
काजल का उज्ज्वल शरीर ठाकुर के काले शरीर में धंसा जा रहा था ,
जैसे ही दोनो का चुम्मन टूटा दोनो ने एक दूसरे की आंखों में देखा दोनो ही मुस्कुरा रहे थे ..
“तो अब गिफ्ट खोलने की इजाजत है “
ठाकुर का लहजा बड़ा ही शांत था
“आपकी ही हु …”
काजल ने मादकता से कहा ,जैसे मेरे दिल में जलन भर गया वही मेरे लिंग में खून ..
काजल की बात सुनकर ही ऐसा लगा जैसे की मेरा लिंग किसी लोहे की रॉड सा हो गया हो और वो तनाव बर्दास्त नही हो रहा था ,मैं नशे में था फिर भी वो शब्द मेरे कानो में गूंज रहा था ..
मैंने अपने कमर को थोड़ा आगे धक्का दिया मुझे नरम नरम गद्देदार चीज मिली जिससे मेरे लिंग को शांति मिली ,
“आउच भइया ये क्या कर रहे हो “
पूर्वी ने पीछे मुड़ते हुए मुझसे कहा ,लेकिन उसकी आंखे वैसी नही रह गई थी ,उसकी सांसे थोड़ी फूली हुई थी ,वो मुझे गुस्से से नही नाराजगी से देख रही थी ..
“सॉरी बहन “मैं इतना ही बोल पाया क्योकिं मेरी सांसे भी फूली हुई थी
मैं नशे में जरूर था लेकिन इतना नही की अपनी प्यारी बहन को ना पहचान सकू
मैंने अपना लिंग थोड़ा पीछे खिंचा ,मुझसे सहन तो नही हो रहा था क्योकि सामने नरम गद्दा था जिसमे मैं आसानी से अपना लिंग रगड़ सकता था लेकिन वो गद्दा मेरी खुद की बहन का था ,और उस बहन का जिससे मैं बेहद प्यार करता था ..
मैं खुद को सम्हालकर अंदर देखने लगा ,ठाकुर उस गिफ्ट से ब्रा बाहर निकाल कर हिला रहा था वो उसे चूम रहा था जैसे फुटबॉल का वर्डकप हो…
उसके आंखों में खुसी नाच रही थी हो भी क्यो ना मन मांगी मुराद जो साले को मिल रही थी ,
वो काजल के पास आया और हाथ पीछे लेजाकर उसकी ब्रा को खोलने लगा ,देखते ही देखते काजल के बड़े और भारी स्तन नंगे होकर झूम गए ,वो कुछ देर तक एक टक उसे ही देखता रहा जैसे कोई आकर्षण उसे आकर्षित कर रहा हो वो उनकी ओर खिंचा जा रहा था ..
उसने अपने होठो से निप्पल को भर लिया और जोरो से चूसने लगा ,
“आह ठाकुर जी “
काजल की मादक आवाज निकली और वो सिसकियां लेने लगी लेकिन थोड़ी ही देर में उसने हमारी खिड़की की ओर देखा उसके होठो में एक कमीनी सी मुस्कान थी ,हम दोनो की ही आंखे मिली जैसे उसे पता था की मेरी आंखे कहा पर है ,
उसकी आंखे मुझे घूर रही थी और हाथ ठाकुर के सर पर था ,उसका मुह मजे में खुला हुआ था जिससे हल्की हल्की सिसकियां निकल रही थी ,
ये दृश्य मेरे लिए सहन से बाहर हो रहा था मैं उत्तेजना के ऐसे शिखर में था की मुझे लगा जैसे मैं अब झर जाऊंगा लेकिन मैंने अभी तक अपने लिंग को हाथ भी नही लगाया था और ना ही किसी और चीज से रगड़ा था शायद इसी लिए मैं अभी तक बना हुआ था ..
लेकिन आगे मेरी बहन थी मैं दारू के नशे में उसके साथ कुछ गलत तो नही कर सकता था लेकिन अब मुझे एक और भी नशा चढ़ चुका था ,हवस का नशा …
मैं डरते हुए अपने कमर को आगे किया मेरे लिंग ने उसके गड्ढे पर एक रगड़ खाई और
“आह “मुझे इतना सुकून मिला ,इस बार पूर्वी ने कोई विरोध नही किया लेकिन मैं बस एक ही रगड़ के बाद ही रुक गया था ,
इधर ठाकुर काजल के निप्पल्स को किसी बच्चे जैसे चूसे जा रहा था लग रहा था जैसे कोई बच्चा बहुत भूखा हो और उसे मा के वक्षो से दूध मिल गया हो ,काजल भी उसके बालो को सहला कर उसे अपने वक्षो का रस पिला रही थी ,लेकिन उसकी नजर अब भी मेरी तरफ ही थी ,
ठाकुर कभी कभी उसके निप्पल्स को काट भी लेता था तब काजल की आंखे बंद हो जाती थी और वो एक सिसकी लेकर ज्यादा मुस्कुरा का मुझे देखती थी ,
उसकी हर मुस्कान से मैं पागल हो जाता था और कमर को यदा कदा हिला ही देता था ,पूर्वी कोई शोर तो नही कर रही थी लेकिन एक बार उसने भी अपने गड्ढे को मेरे लिंग में रगड़ दिया था ,
वो भी जवान थी और नई नई जवानी तो और भी खतरनाक होती है उसे सम्हालना और भी मुश्किल होता है ,पूर्वी की भी हालत कुछ ऐसी थी ,वो खिड़की से नजर ही नही हटा पा रही थी…
इधर
“आउच बदमाश हो आप “
ठाकुर ने काजल के निप्पल को जोरो से काट लिया था जिससे काजल का पूरा ध्यान उधर ही चला गया
“हा हा हा “ठाकुर अपनी बत्तीसी दिखा कर हँसने लगा
और धीरे धीरे चूमता हूं नीचे को बढ़ता गया ,शायद वो भूल ही गया था की उसे क्या पहनाना है ..
नीचे आकर वो काजल के पेट में रुका और अपनी जीभ से उसकी नाभि को भिगोने लगा ..
काजल फिर से मचलने लगी थी लेकिन गुदगुदी में
“नही नही ना गुदगुदी हो रही है “दोनो ही हंसे जा रहे थे .
ठाकुर फिर नीचे आया और काजल की पेंटी के आस पास के जांघो को चूमने लगा ,वो फिर से मदहोश हो गया था और थूक से उसकी जनघो को भिगो रहा था ,
“आह आह आह “
काजल की आंखे बंद होने लगी थी वो बस सिसकियां ले रही थी और उसका सर पकड़े हुए अपनी पेंटी के बीचों बीच फसी हुई योनि में उसका सर सरकने की कोशिस कर रही थी लेकिन ठाकुर अभी भी उसके जांघो में बिजी था ..
वो सरकता हूं उसके योनि के करीब आया जो की रस की धार से पूरी तरह से भीग चुका था,
उसने हल्के से पेंटी के सिरे को सरकाया ,और गोर से देखने लगा ,
वो साला काला सा,शैतान सा इंसान मेरी नाजुक कली के कोमल गुलाबी योनि को निहार रहा था ,काजल उसके रिएक्शन पर हल्के हल्के मुस्कुराने लगी और फिर से मेरी ओर देखी ..
उसके चहरे में किसी विजेता सी मुस्कान खिल गई थी ,वो मुझे ऐसे देख रही थी जैसे कहना चाह रही थी की देखो मुझे चाहने वाले कितने है ,
मैं मचल सा गया और इस बार मेरे लिंग ने कोई भी झटका नही मारा ,
अंदर ठाकुर ने अपनी जीभ काजल की योनि में लगा दी और उसका रस पूरी तनमयता से पीने लगा,काजल की योनि रस से इतनी भर चुकी थी की वो उसे चुहक रहा था और इसकी आवाज हमारे कानो तक भी पड़ रही थी,
इस बार मैं थोडा पीछे हुआ था लकिन पूर्वी ने अपने कमर को थोड़ा पीछे कर मेरे लिंग पर ठिका ही दिया ,वो भी लय से अपनी कमर हिला रही थी ,मेरा अकड़ा हुआ लिंग उसके गड्ढे में समा कर और भी विकराल रूप ले रहा था मैं भी मजे के गर्त में जा रहा था …
वँहा काजल अपनी कमर उचका कर अपनी योनि को ठाकुर से चुस्वा रही थी और यंहा मेरी प्यारी बहन अपनी कमर हिलाकर मेरे लिंग को अपने चूतड़ों में रगड़ने की कोशिस कर रही थी ….
सभी जगह बस हवस का साया फैला हुआ था और रिस्तो की मर्यादा तार तार हो रही थी …..
ऐसे मर्यादा की फिक्र भी किसे थी ,मैं नशे में था और बाकी तीनो भी हवस के नशे में डूबे हुए थे ,मेरा हाथ आगे जाकर पूर्वी के कमर को पकड़ लिया,और वो मुझे सट गई,
अब मेरे हाथ पूर्वी के बदन पर बेफिक्र से चलने लगे,हमारी निगाहे खिड़की के अंदर थी जैसे वँहा काजल नही मैं और पूर्वी ही थे ,हम उस दृश्य में पूरे मगन हो चुके थे ,
उधर काजल के शरीर के आखरी कपड़े को भी निकाला जा चुका था और वो गहरी गहरी सांसे ले रही थी ,मैं देख रहा था की ठाकुर का अकड़ा हुआ लिंग फुंकार मार रहा था ,वो काजल की गीली योनि को बड़े ही लालची नजर से देख रहा था ,वो भूल ही चुका था की उसे पेंटी पहननी थी लेकिन अब वो बात ही नही कर रहे थे ,वो काजल के ऊपर आ गया था दोनो ही नंगे जिस्म एक दूसरे में मिल गए थे दोनो पसीने से नहाए हुए थे और एक दूसरे में गुथे जा रहे थे,एक दुख सी गोरी और दूसरा कोयले सा काला असल में ये दृश्य बेहद ही कामुक लग रहा था,,
ठाकुर अपने हाथो के सहारे थोड़ा ऊपर हुआ अभी अभी उसने काजल के होठो से रह को निचोड़ा था वो अपना हाथ नीचे ले गया ,
मेरी दिल की धड़कने ही रुक सी गई थी मुझे पता था की वो क्या करने वाला है,वही शायद पूर्वी की भी सांसे रुक चुकी थी ,4 जन हम वँहा थे लेकिन इस एक पल के लिए कोई भी सांसे नही ले रहा था ,सभी की सांसे अटकी हुई थी ,वो आखिरी दूरी जो उनके बीच में थी वो भी खत्म होने को थी,ठाकुर अपने लिंग को काजल की योनि में चला रहा था और एक भारी हुंकार के साथ उसने धीरे से उसे काजल के योनि में समा दिया ,
“आआहहहहहह “एक गहरी सिसकी काजल के मुह से निकली पूरा लिंग उसके अंदर था और मैंने अपने हाथो से जोरो से पूर्वी के योनि को दबा दिया
“ आआहहहहहह भइया “दोनो लडकिया पागल सी हो चुकी थी और दोनो ही पुरुष दीवाने ..
ठाकुर ने पहला झटका दिया और काजल के ऊपर आकर उसके होठो को चूसने लगा दोनो पागलो की तरह एक दूसरे को किस कर रहे थे ,वही मैने भी पूर्वी का चहरा पकड़ लिया और उसकी योनि को अपने हाथो के मसलता हुआ उसके होठो को अपने होठो में मिला कर चूसने लगा …
“ओह आह आह आह “दूसरी बार काजल को ठाकुर ने जोर जोर से कुछ धक्के दिए
मैं पूर्वी के पूछे जोरो से अपने लिंग को रगड़ रहा था और उसके होठो को खा रहा था ,मेरा हाथ उसके सलवार के नाड़े पर पहुच चुका था मैं उसे खोल दिया सलवार अब उसके पैरो के नीचे आ गिरा था मेरा हाथ फिर के उसके योनि पर गया ,इस बार उसकी पेंटी के उपर से ही मैं उसके योनि को मसल रहा था वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी ,
उधर काजल की सिसकियां और ठाकुर के हुंकार बढ़ते ही जा रहे थे ,दोनो ही अपने पूरे वेग में थे और मगन थे ,ठाकुर का सर काजल के कंधे पर ठिका हुआ था वो अपने कमर को जोरो से हिला रहा था ,काजल थोड़ी शांत हुई ,लेकिन उसके मुह से आह ऊह की आवाज लगातार आ रही थी वो अपने सर को मेरी ओर करके मुस्कुराने लगी ..
मैं उसकी मुस्कुराहट देखकर और भी जल गया और पूर्वी के पेंटी को मानो फाड़ता हूं उतारने लगा ,
“रुको भइया ‘
मैंने एक नही सुनी और अपने लिंग को निकाल कर उसकी योनि में दे मारा “
वो जोरो से चीखी लेकिन मैंने अपने हाथो से उसका मुह बंद कर दिया था..
खुन की एक धार उसके जांघो से निकल कर नीचे जमीन में गिरने लगी मैं बेदर्दी के साथ 3-4 धक्के ही मारे थे ,की वो जोरो से रोने लगी थी लेकिन उसका रोना भी मेरे हाथो में दब जा रहा था उसके आंखों से निकलते हुए आंसू को देखकर जैसे मैं तुरंत ही होश में आया ,
मैं अंदर निगाह डाली ,अंदर ठाकुर काजल पर कूदे जा रहा था और काजल उसके बालो को सहला रही थी ,फच फच की आवाजो से पूरा कमरा गूंज रहा था ,
लेकिन मैं पूर्वी की हालत देखकर बुरी तरह से चौक गया ,मेरे ढीले पड़ते ही वो जमीन में रोते हुए बैठ गई मैं उसकी हालत देख कर समझ चुका था की मैंने ये क्या कर दिया था ,मैंने जल्दी से खुद को सम्हाला …
अब मेरी आंखों में भी आंसू छलक गए
अंदर एक एक जोर की चीख सुनाई दी ये आनद के अतिरेक की चीख थी ,ठाकुर दहाड़ रहा था और उसका लिंग हवा में लहरा रहा था उसके लिंग से नीकला हुआ गढ़ा वीर्य अभी काजल के योनि के हिस्से से लेकर पेट तथा उसके स्तनों तक फैल चुका था ,थोड़ा सा वीर्य काजल के चहरे में भी चमक रहा था ,...
मैं जल्दी से पूर्वी के कपड़े को ठीक किया और वँहा से नीकल गया,सब कुछ तो ठीक था लेकिन मेरी एक गलती ने मुझे मेरी बहन के नजरो में ही गिरा दिया ,और उसके ही नही मुझे अपनी ही नजरो में गिरा दिया था ……..
अध्याय 55
सन्नाटा किसे कहते है ………???????
अतीत की गलतियों को सुधारा नही जा सकता ,ग्लानि में किसी माफी की जगह भी नही होती ,
और दर्द चुभन की कोई सीमा नही होती ,
कार में सन्नाटा फैला हुआ था और मैं ग्लानि से भरा हुआ था ,गाड़ी चलाते हुए बाजू में बैठी पूर्वी को सुबकते हुए देखता हुआ भी मैं कुछ नही कह पा रहा था क्योकि अतीत को बदला नही जा सकता जो हो गया वो हो गया ….
मैं चुप था लेकिन शांत नही था ,
मन में अजीब सवाल उठ रहे थे जिसका उत्तर मेरे पास नही था ,मेरी आंखों में आंसू तो नही थे लेकिन सीने में इतनी हिम्मत भी नही थी की मैं पूर्वी से सर उठा कर बात कर सकू ..
“मैं आपके साथ आयी ही क्यो …”
पूर्वी ने रोते हुए कहा ,वो फूल सी बच्ची सिकुड़े हुए बैठी थी ..
मैं उसे देखने की हिम्मत ही नही जुटा पा रहा था…
गाड़ी घर तक आ चुकी थी लेकिन अब भी मैं चुप ही था पूर्वी भी चुप ही थी …
वो सीधे बिना कुछ बोले ही अपने कमरे में चली गई ,
“अरे भइया पूर्वी को क्या हो गया और आप लोग कहा गए थे “
निशा की बातो का मैं क्या जबाव देता ,मैं नजर गड़ाए ही रखा मेरा नशा ना जाने कहा काफूर हो चुका था ,
मैं बिना कोई जवाब दिए ही सीधे अपने कमरे में चला गया ,मैं आंखे बंद किये हुए बीते बातो को याद कर रहा था ,मेरे सामने बार बार पूर्वी का चहरा झूम जाता था ,मैं अपना सर झटकता लेकिन फिर से वो चहरा दिमाग में भर जाता था…
उसकी साफ मासूम आंखे मुझे दिखाई दे रही थी,जो आंसुओ से भरी हुई थी ,वो उसका सिसकना और उसका वो दर्द मैं महसूस कर पा रहा था …
ना जाने कितना समय बीत चुका था की निशा कमरे में आयी उसकी आंखे लाल थी ,उसे देखते ही मेरा सर झुक गया …
चटाक ….
एक झन्नाटेदार थप्पड़ मेरे गालो में पड़ा वो रूह तक ही सिहर गया था ,
मेरा चहरा लाल था और माथे में पसीने की बूंदे तैरने लगी ,मैंने निशा को इतने गुस्से में कभी नही देखा था…
“मुझे शर्म आ रही है आपको भाई कहते हुए “निशा की आवाज लड़खड़ा रही थी
मैं कुछ भी कहने की हालत में नही था ,और कहता भी तो क्या कहता ??
मैं अब भी वही बैठा रहा जब निशा ने जोर से दरवाजा बंद किया और कमरे से निकल गई ..
मेरे आंखों में पानी आने शुरू हो चुके थे ,
ना जाने कब तक मैं ऐसे ही बैठा रहा मुझे दरवाजा खुलने का आवाज आया ,वो काजल थी जो हाल में निशा से कुछ बात कर रही थी ,थोड़ी देर में ही काजल अंदर आयी ,
मैं अब भी अपने बिस्तर में सिमटा हुआ बैठा था,मैंने काजल को देखा वो मुझे गुस्से से घूर रही थी ..
मैं ज्यादा देर तक उससे आंखे ही नही मिला पाया ,
वो बिना कुछ बोले ही बाथरूम में चली गई और आते ही दूसरी तरफ मुह कर सो गई …
मैं किसी गुनहगार की तरह बस बैठा हुआ अपने की विचारों में खोया हुआ था ना जाने कितना समय बीत चुका था और ना जाने कब मुझे नींद आ गई थी ………..
______________________________
अध्याय 56
मैं बुझे हुए मन से और बिना कुछ खाये पिये ही अपने ऑफिस में बैठा हुआ था ,गहरे सोच में डूबा हुआ था,ऐसे भी मैं कई दिनों के बाद यंहा आया था और मेरा काम भी आजकल कुछ खास होता नही था,शाबनम ने पूरी जिम्मेदारी ही ले ली थी ,वैसे भी उसे मुझसे दुगुना पेमेंट मिलता था साथ ही साथ अगल से और भी पैसे कमा रही थी ,मैं तो बस नाम का ही मैनेजर रह गया था,
घर परिवार ,प्यार और प्रोफेसन सब में मैं पिछड़ रहा था ,गहरे सोच में डूबे हुए मुझे सब कुछ छोड़कर भागने का मन करने लगा ….
“तुम ऐसा करोगे मैंने सोचा भी नही था “मैं चौका सामने शाबनम थी उसका चहरा उतरा हुआ दिख रहा था ..
मुझे काजल के ऊपर बहुत ही गुस्सा आया जो भी हुआ वो हमारे बीच की बात थी बाहर उसे फैलाने का क्या मतलब था ..मैं बस शाबनम को देखता ही रहा ..
“अरे इतने दिनों के बाद आये हो और फिर बस यू ही कमरे में घुस गए …”
मैंने राहत की सांस ली ,वो मेरे पास आकर बैठ गई क्या हुआ लगता है कुछ परेशान हो ..
“हाँ बस काजल के बारे में “
“अरे यार तुम उसकी फिक्र मत करो वो जो भी कर रही होगी वो कुछ सोच समझ कर ही कर रही होगी ,तुम बस चील मारो और चलो मेरे साथ एक कुछ दिखाना है ...रश्मि से मिले क्या तूम “
“नही तो “
“परफेक्ट चलो फिर जल्दी उससे पहले की वो तुम्हे देख ले “
मैं मन में सोच रहा था की अब इसे क्या हो गया है ..
वो मुझे उसी पुराने कमरे में ले गई जंहा हम अक्सर मिलते थे..
“ये सब क्या है “
उसने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा कर मेरे सामने अपने स्तनों को तान दिया था …
“क्यो आज पीने का मन नही कर रहा है क्या “
“यार तुम भी मैं इतने टेंसन में हु और तुम ये सब “
मैं उठकर जाने को हुआ उसने मुझे खिंचकर अपने सीने से लगा लिया ..
“देव यार प्लीज् कई दिन हो गए है..मेरी भी तो थोड़ी फिक्र करो “
उसकी तड़फ देखकर मैं आज पहली बार मुस्कुराया
“तुम भी ना “
मैंने उसे जोरो से जकड़ लिया ,वो थोड़ी कसमसाई …
“क्या हुआ अब क्यो कसमसा रही हो “
उसके चहरे में मुस्कान फैल गई
“यार तूम काजल की टेंशन मत लो मैं हु ना तुम्हारा टेंसन निकालने के लिए “
वो खिलखिलाई ,मैं भी मुस्कुरा दिया लेकिन ये मुस्कान फीकी थी
“क्या हुआ मेरी जान ,आज सच में तुम प्रॉब्लम में हो ,,कोई तो बात होगी वरना तुम्हे ऐसे तो मैंने कभी नही देखा था “
उसका चहरा भी थोड़ा संजीदा हो गया था ,क्या मुझे उसे बतलाना चाहिए ??
मेरे दिमाग में ये बात घूम रही थी ,मैं क्या करू ये मुझे समझ नही आ रहा था लेकिन मुझे किसी की जरूरत जरूर थी जिससे मैं कुछ एडवाइस ले सकू ..
“मुझसे एक गलती हो गई है शाबनम जो नही होनी चाहिए थी “
मैंने उसके कमर से अपना कसाव कम किया और उससे अलग होकर बिस्तर में बैठ गया ..
वो मेरे पास आकर बैठ गई थी
“आखिर हुआ क्या है कुछ तो बोलो “
मैं उसे बतलाते गया उसका चहरा गंभीर होने लगा था ,अंत में वो बौखलाई नजर आयी
“ये तुमने क्या कर दिया देव जंहा तक मैं पूर्वी को जानती हु वो तुमसे बेहद प्यार करती है और तुमने …”
मैं सर झुका कर बैठा रहा
“जानते हो तुमने इससे भी ज्यादा गलती क्या की है ?”
मैं उसे देखता रहा
‘तुम्हे उससे बात करनी चाहिए थी ,तुम्हे माफी मांगना चाहिए था लेकिन तुम तो कायरों की तरह हालत से दूर भाग रहे हो ,ऐसा मत करो देव गलती हो जाया करती है ,मैं भी मानती हु की इस गलती को माफ नही किया जा सकता लेकिन फिर भी तुम्हे कोशिस तो करनी ही चाहिए “
उसके चहरे में एक सांत्वना के भाव आये ,कल से मैं मेरे लिए किसी के मन में ये भाव की तलाश में था मैं टूट गया ,मैंने शाबनम को अपने गले से लगा लिया और जोरो से रोने लगा
“मुझसे बड़ी गलती हो गई है शबनम ये क्या हो गया “
वो मेरे बालो पर अपने हाथ फेरने लगी और मुझे सांत्वना देने लगी,मैंने अपने जीवन में शबनम से अच्छी दोस्त नही देखी थी वो मेरे हर बात को समझती थी और मुझे सही सलाह देती थी मैं उसका कृतज्ञ हुए जा रहा था,जबकि सभी ने मेरा साथ छोड़ दिया था वो अब भी मेरे साथ थी …
बहुत देर तक मैं ऐसे ही रहा ,जब मैं उठा तो जैसे मैं कोई संकल्प कर चुका था..
********
मैं वँहा से सीधे घर को निकल गया ,घर में आज निशा और पूर्वी दोनो ही थे ,किसी ने मुझसे के भी शब्द नही कहा ,
“पूर्वी तुमसे कुछ बात करनी है “
निशा जैसे आग बबूला हो गई लेकिन वो कुछ भी नही बोली और वँहा से चली गई वो अपने कमरे में चली गई थी ..
पूर्वी जो की अभी तक चुप ही बैठी थी कुछ और सिकुड़ गई और उसकी आंखों ने फिर से पानी छोड़ना शुरू कर दिया था ..
मैं उसके पास गया,वो सोफे में बैठी थी मैं उसके पाव के पास जमीन में जा बैठा…
“मेरी बहन जो हुआ वो नही होना चाहिए था ,मैं इसे बदल तो नही सकता ,और जानता हु की ये माफ करने लायक नही है लेकिन फिर भी मुझे माफ कर दे ,मैं तुझे ऐसे नही देख सकता मुझे मेरी पुरानी पूर्वी चाहिए “
मैं इतना बोला ही था की पूर्वी ने झुककर मुझे पकड़ लिया और जोरो से रोने लगी ,जिसे सुनकर निशा भी बाहर आ गई ,हम दोनो ही एक दूसरे को पकड़ कर रो रहे थे …
“भइया मैंने रात भर सोचा लेकिन मुझे आपकी गलती से ज्यादा अपनी गलती ही दिखाई दी ,मैं भी ऐसे रियेक्ट कर रही थी की आप नही रुक पाए ,मुझे तो आपको पहले ही रोक लेना था लेकिन मैं भी मजे लेने लगी थी,मुझे नही पता था की आप इतने आगे बढ़ जाएंगे लेकिन मैंने भी तो आपको उकसाया था ,मुझे वँहा से हट जाना था आपको उसे देखने से रोकना था…
लेकिन मैं ही मजे लेने लगी ,आप तो नशे में थे लेकिन मैं तो होशं में थी ,जब मैं ही बहक सकती हु तो आपको क्यो दोष दु ...
मुझे माफ कर दो भइया की मेरे कारण आपको इतनी तकलीफ सहनी पड़ी ,आपको इतने ग्लानि से गुजरना पड़ा सॉरी भइया सॉरी “
मैंने उसे और भी जोरो से जकड़ लिया मैं रो सोच भी नही सकता था की वो ऐसा सोच रही होगी ,मैं तो अपनी गलती को माफी मांगने आया था और वो मुझे ही माफी मांग रही थी ...सच में वो कितनी भोली थी और मैं कितना बड़ा पापी …….
निशा आश्चर्य से हमे देख रही थी ,और हमारी बात सुन रही थी ..
उसके चहरे का गुस्सा अभी भी कम नही हो रहा था ,लेकिन कुछ देर बाद ही हमारे पास आ गई
“एक बार हो गया इसका मतलब ये नही की आपलोग ये रोज करोगे ,भइया पर मेरा अधिकार है समझी “
निशा ने जो कहा उससे पूर्वी तो हँस पड़ी लेकिन मैं शॉक में ही रह गया ,आखिर निशा के दिमाग में ये क्या चल रहा था ,उसे अभी भी अधिकार की पड़ी थी ...वो इतना ही बोलकर हल्के से मुस्कुराते हुए किचन में चली गई ,लेकिन मुझसे उसने कोई भी बात नही की ……………..
अध्याय 57
मैं थका हुआ अपने कमरे में ही लेटा हुआ था ,बहुत ही शुकुन इस बात का था की मेरी बहने मेरे साथ ही थी..
मैं अभी अभी होटल से आया था ,तभी कमरे का दरवाजा खुला और निशा ने पूर्वी को अपने साथ अंदर लाया ,मैं उन्हें ध्यान से देख रहा था,निशा पूर्वी का हाथ पकड़े हुए अंदर ला रही थी,वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी,आखिर इन लड़कियो का इरादा क्या था ..??
वो दोनो पहले की तरह ही मेरे आजू बाजू आकर लेट गई और मुझे अपने बांहो में घेर लिया ...
इतना सुखद अहसास होता है जब आपको प्यार करने वाले आपके पास हो…
मैं भी अपने दोनो हाथो से उनके बालो को सहला रहा था,निशा ने पहला कदम उठाया और मेरे शर्ट को निकाल फेका,मुझे इससे गुदगुदी का अहसास हुआ और मैं खिलखिला उठा,
वो दोनो ही अपने झीनी नाइटी में थे,मैं ऊपर से कपड़ो से विहीन था और मेरे शरीर पर उसके गुद्देदार वक्षो की चुभन को महसूस कर रहा था,
मैं उनके प्यार से भरा जा रहा था,निशा एक्टिव थी लेकिन पूर्वी थोड़ी शर्मा रही थी ,वही पूर्वी जो कभी मुझसे नही शर्माती थी वो आज शर्मा रही थी उसे देखकर मुझे उसके ऊपर बहुत प्यार आ रहा था लेकिन मैं कोई भी जल्दबाजी नही करना चाहता था क्योकि मुझे निशा का भी तो डर था ना जाने वो क्या मीनिंग निकाल लेगी ,
इधर निशा की सांसे तेज होने लगी थी मुझे पता था की उसे क्या चाहिए लेकिन मैं भी पूर्वी के होने के अहसास से भरा हुआ थोड़ा सकुचा रहा था जिसे निशा ने भांप लिया था…
वो प्यार से मेरे गालो को अपने होठो में भरे हुए उन्हें चूसने लगी ,
“अब भी क्यो दीवार हमारे बीच आ रही है क्या भइया,अब तो पूर्वी भी हमारे खेल में शामिल हो सकती है “
निशा ने हम दोनो को ही ऐसे झेड़ा था की हम दोनो ही शर्मा गए और पूर्वी वँहा से भागने को हुई लेकिन निशा ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया
“तू ही तो कह रही थी ना की भाभी को देखकर कुछ कुछ हो रहा था तो रुक जा ना आज अच्छे से उसे कर लेते है “
पूर्वी और भी बुरी तरह से शर्मा गई ,उसका गोरा चहरा लाल हो चुका था,उसके फुले हुए गालो से जैसे खून गिर रहा हो,उसके होठ फड़कने लगे थे ,नजर नीची थी लेकिन होठो पर एक मुस्कान थी …
आज मैंने पहली बार अपनी बहन को ऐसे देखा था जैसे वो अपने प्रेमी के पास खड़ी हो .
मैं भी तो उसका प्रेमी ही था लेकिन रिश्ते अलग थे,मैं उसके प्रेम था लेकिन प्रेम का एक्सप्रेशन ही अलग था…
जो आज बदलने वाला था ,या यू कहे की कुछ दिनों से बदल रहा था…
पूर्वी ना गई ना ही फिर से लेटी ,लेकिन निशा ने उसका हाथ पकड़े हुए ही मेरे कानो में कुछ कहा
“आज इसे भी जन्नत दिखा दो भइया,आप आगे नही बढ़ोगे तो ये कभी आगे नही बढ़ेगी “वो बोल कर मुस्कुराई ,जो लड़की कभी मुझे बांटना नही चाहती थी आज वो मुझे बांट रही थी ‘
मेरी प्रश्न से भरी हुई निगाहों को उसने पहचान लिया था ,
“मैं आपको नही बांट रही हूं ,असल में मुझे ये समझ आ गया है की प्यार को बंटा ही नही जा सकता “
उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा
अब मुझे ही शुरुवात करना था दीवार तो पहले ही गिर चुकी थी और मर्यादाओं से हम कब के बाहर आ चुके थे ..
मैंने पूर्वी का हाथ थमा और उसे अपने ओर जोरो से खिंच लिया ,वो मेरे सीने से आ लगी …
उसका कोमल लेकिन भारी सीना मेरे चौड़ी बालो से भरी हुई छाती में आ धसे थे ,उसके होठ मेरे होठो के पास ही थे ,दोनो ही होठ फड़फड़ा रहे थे,मेरा हाथ उसके कमर को कस रहा था ,वो शर्मा रही थी जैसे नई नई दुल्हन सुहागरात को शर्माती हो ,सच में आज मैंने अहसास किया था की पूर्वी का जिस्म और रूप ऐसा था जिसे कोई भी मर्द पाना चाहे,मासूम से चहरे और मासूम से मन में प्यार और समर्पण की कलियां खिलने लगी थी ,और वो बेसुध सी हो रही थी ,मैं इस अहसास को समझ सकता था लेकिन जैसा समर्पण पूर्वी का मेरे लिए था वो तो भाग्यवानों को ही नसीब होता है और मैं उन्ही भाग्य के धनी लोगो में था ..
वो शरमाई हुई कमसिन सी कली थी उसकी सुर्ख होठो में आखिर मैंने अपने होठो को रख ही दिया ,वो जैसे तड़फ ही गई ,वो कसमसाई और अपने होठो को खोलकर मुझे पूरा आमंत्रित करने लगी ,जैसे जैसे मैं उसके होठो को चूसे जा रहा था उसकी और मेरी जीभ दोनो ही गुथमगुत्थि किये जा रहे थे ,वो दोनो ही मिलकर एक नया अहसास हमारे मन में भरे जा रहे थे जो की हवस तो बिल्कुल भी नही था,
पूर्वी के आंखों से आंसू की कुछ बूंदे निकल गई ये उस समर्पण की बूंदे थी जो एक लड़की अपने प्यार के लिए करती है ,
निशा हमे देखकर बस आंसू ही बहा रही थी,और मुस्कुरा रही थी,
ये सुखद था और साथ ही मन को सुकून देने वाला भी था,निशा ने अपने हाथो को आगे बड़ा कर अपने नाइटी को पूरा खोल दिया ,कोई आश्चर्य नही था की वो अंदर से पूर्ण नग्न ही थी ,उसका शरीर कमरे के माध्यम प्रकाश में जगमगाने लगा था,लेकिन हम दोनो का ही ध्यान उसकी ओर नही था ,वो मेरे और पूर्वी के शरीर से बाकी वस्त्रों को निकालने में व्यस्त हो गई थी,जबकि पूर्वी और मैं बस एक दूजे के होठो के जरिये एक दूजे के दिल में उतर रहे थे..
कुछ ही देर में एक बिस्तर में तीन नग्न शरीर लेटे हुए थे ,मैं सीधे लेटा हुआ था जबकि पूर्वी और निशा मेरे ऊपर थी ,दो जवान कलियों के बीच होने का अहसास क्या होता है जो आपसे इतना प्यार करती है ….??जैसे जन्नत में आ गए हो..
मेरा लिंग अब भी मुरझाया हुआ ही था ,मैं अब भी पूर्वी के होठो से मद का पान कर रहा था वही कभी कभी उसके आंखों से बहते हुए आंसुओ को भी अपने होठो से पी रहा था ,वो भी मेरे आंखों में गालो पर अपने होठो को यदाकदा रख दिया करती थी ,
लेकिन निशा ने मुझे ऐसे रहने नही दिया वो मेरे लिंग को अपने होठो से सहलाने लगी ..
“आह……..”
मेरे मुह से अनायास ही निकल गया ..
उसका मुह मेरे लिंग को भर रहा था और उसके लार से मेरा लिंग और भी चिकना हो रहा था ,उसने ऊपर की त्वचा को नीचे किया और अपने थूक से उसे गीला करके अपने मुह से मुझे सुख की दरिया में डुबो दिया ..
मैं मगन था और मेरी बहने भी अपने अपने जगह में मगन थी ..
पूर्वी अपने जिस्म को मुझसे और भी जोरो से सटा रही थी और सिसकिया ले रही थी ,मैं उसकी उत्तेजना को समझ नही पा रहा था लेकिन मुझे आभास हुआ की निशा पूर्वी के योनि को भी अपने हाथो से मसल रही है ,पूर्वी भी उत्तेजित होकर मेरे होठो को काटने और खाने पर उतारू हो गई थी ,
अब मैंने भी निशा जो की इतनी मेहनत कर रही थी उसे भी थोड़ा सुख पहुचने की सोची ,मैंने अपना हाथ आगे बढ़कर उसके कूल्हों को सहलाया ,उसके कसे हुए भारी और मखमली चूतड़ों को सहलाते हुए मैं उसकी पीछे से ही अपने हाथ को उसके योनि पर लाया ,वो तप रही थी लेकिन फिर भी गीली थी ,उसमे हल्के बाल उग आये थे ,मैं उन बालो पर अपने हाथ फेर रहा था और उसकी गीली योनि को भी ऊपर से ही सहला रहा था ,वो भी उत्तेजित थी ..
अब हम तीनो ही उत्तेजना की अवस्था में आ चुके थे ,तीनो की आंखे बंद थी और एक दूजे के शरीर से सुख ले रहे थे,निशा का मुह मेरे लिंग की मालिस कर रहा था वही निशा का हाथ पूर्वी के योनि की जबकि मेरा हाथ निशा की योनि की मालिस कर रहा था,तीनो ही एक दूसरे पर गुथे जा रहे थे…
मैंने थोड़ी आंखे खोली तो मुझे कमरे के गेट पर कोई खड़ा हुआ दिखा ,मैंने ध्यान दिया वो काजल थी ,
मेरी और काजल की आंखे मिली वो अविश्वास से हमे देख रही थी,हमारी नजर मिलते ही मेरे होठो पर एक मुस्कान आ गई ,
कल मैं उसे देख रहा था और वो ममुस्कुरा रही थी और आज वो मुझे देख रही थी और मैं मुस्कुरा रहा था,मैं कुटिल मुस्कान से उसे देख रहा था,उसका चहरा ये सब देखकर लाल हो चुका था ,उसकी आंखे बड़ी हो गई थी ..
माना वो कैसे भी हो लेकिन फिर भी थी तो मेरी पत्नी,और मैं भले ही बाहर कुछ भी करता हु लेकिन आज ये सब उसके आंखों के सामने ही हो रहा था ,जिसे देखकर वो जल रही थी ,मैं इस अनुभव को कल महसूस कर चुका था ,उसकी मुठ्ठी कसे जा रही थी और मुझे ये देखकर बहुत ही मजा आ रहा था,मेरी निगाहे मानो उसे ये कह रही हो की देख, देख मुझे भी प्यार करने वालो की कमी नही है ,और जो लोग तेरे जिस्म से खेलते है वो बस हवस के लिए खेलते है लेकिन मेरे पास सच में प्यार करने वाले है…
काजल के आंखों में आंसू छलकने वाले थे ,वो इसे देखकर उत्तेजित भी थी लेकिन आंखों में आंसू भी आ रहे थे,जलन से उसका सीना भी जल रहा होगा ,ये मेरे साथ भी हो चुका था और मैं इस स्तिथि को समझ सकता था,वो मेरी आंखों में देखकर जाने को पलटी ,लेकिन मैंने तभी पूर्वी के कूल्हे में एक जोरदार चपात लगा दी ..
“आउच “पूर्वी दर्द और मजे से बोल पड़ी और पूर्वी की आवाज सुनते ही काजल तुरंत ही पलट गई और हमे देखने लगी मेरी मुस्कान और भी गहरा गई थी ,वो गुस्से भरे नयनो से मुझे देखकर चली गई लेकिन मैं जानता था की वो गुस्सा नकली था,उसकी आंखे बता रही थी की वो और भी देखना चाहती थी ,वो उत्तेजित थी और इसलिए वो वँहा से निकलना चाहती थी ..
मैं ये भी जानता था की वो बाहर नही जा पाएगी वो घर में ही रहेगी जब तक हमारा काम खत्म नही हो जाता लेकिन वो बहनों के नजर में भी नही आना चाहेगी…
आखिर मेरा लिंग भी पूरी तरह से गीला हो चुका था और साथ ही मेरी बहनों की योनि भी ,
मैं उनको अपने से अलग किया और निशा को हटा कर पूर्वी को अपने नीचे लिटा लिया ,निशा मेरे ऊपर आ गई और मेरे पीठ को चाटने और काटने लगी ,
मैंने पूर्वी के निगाहों में देखा ,वो शर्मा कर ही सही लेकिन उत्तेजक निगाहों से मुझे देख रही थी और जैसे कह रही थी की अब आगे बढ़ो…
मैं आगे बढ़ा और अपने लिंग को उसकी योनि में सहलाने लगा,वो मुझे पूरी तरह से जकड़ कर मुझसे खुद को सटाने लगी ,
उसकी गीली योनि में मेरा लिंग फिसलने लगा था ,लेकिन अब भी वो बहुत टाइट था,धीरे धीरे ही सही लेकिन मेरे लिंग का ऊपरी भाग उसके योनि में धंस गया ,वो मछली जैसे छटपटाई लेकिन मेरे होठो को अपने होठो से मिलाते हुए थोड़ी शांत हो गई ,मैं हल्के हल्के धक्के से अपना लिंग उसके अंदर पूरी तरह से प्रवेश करवा दिया…
नई नई जवानी में खिली हुई योनि ने लिंग को मजबूती से जकड़ रखा था, ऐसा अहसास मुझे पहली बार हुआ था, हल्के बाल भी लिंग से रगड़ खा जाते थे, मेरा लिंग पूर्वी के योनि रस से पूर्णतः भीग चुका था,और थोड़ी आसानी से उसके अंदर जा रहा था, उसके आंहो से पूरा कमरा गूंजने लगा था ,उसकी योनि हर रगड़ के पहले ढीली हो जाती और जब लिंग पूरी तरह से अंदर जाता तो तो कस जाती थी ,इतना सुखद अहसास मुझे सच में कभी नही हुआ था,वो मुझे मेरी बहन से मिल रहा था,मेरी प्यारी सी छोटी बहन से ,लेकिन सुख तो सुख होता है जंहा से भी मिले…
वही निशा मेरे ऊपर झा गई थी वो अपने जिस्म को मेरे बदन पर रगड़ रही थी और अपने होठो और हाथो से मेरे हर अंगों को नहला रही थी,
उत्तेजना तेज हुई और मैं मैंने जोर जोर से धक्के देना शुरू दिया,
“आह आह आह “
पूर्वी की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगी थी ,उसकी आंखे बंद थी और ओ उस मजे की गहराई में खोई हुई थी ,उसका कमर ऊपर उचक रहा था और मेरा कमर उसके कमर में धंसे जा रहा था,उसका सारा शरीर अकड़ गया और वो जोरो के झड़ी,उसने मेरे कंधे पर अपने दांत गड़ा दिए थे…
अब वो शांत किसी लाश सी गिर गई थी ,शरीर में कोई हलचल नही हो रही थी ,मेरा लिंग इतना पानी पाकर तृप्त महसूस हो रहा था और वो ज्यादा अकड़े जा रहा था,मैं भी अपने चरम के निकट था,लेकिन मैंने अपने लिंग को निकाला नही और अपनी बहन के गर्भ में झड़ने लगा,वो मेरा गर्म लावा अपने अंदर महसूस करके और भी ज्यादा तृप्त होने लगी और मेरे होठो को अपने होठो से चूसने लगी थी ……
मैं थककर जब पूर्वी से हटा तो निशा मेरे ऊपर चढ़ गई अभी तो मुझमें वो हिम्मत नही थी की मैं फिर से कुछ कर पाऊ लेकिन निशा कहा मानने वाली थी ,उसनें मेरे लिंग को अपने होठो में भर लिया,पूर्वी मुझसे सटी हुई मुझे
बांहो में भरकर सो रही थी वही निशा मेरे लिंग को अपने होठो में भरे हुए चूस रही थी ,मैं जब दरवाजे की ओर देखा तो मेरे होठो की मुस्कान फैल गई ,सामने काजल खड़े हुए अपने साड़ी के ऊपर से ही अपने योनि को मसल रही थी ,मुझे मुस्कुराता हुआ देख वो गुस्से से भर गई वो झूठा गुस्सा था और मुझे मारने का इशारा किया ,मैं हल्के से हँस पड़ा,वो अधीर थी जैसे अब तब रो ही डाले लेकिन ये रोना दुख का नही बल्कि उत्तेजना का था,जब उत्तेजना ज्यादा बढ़ जाए तो भी व्यक्ति का रोना निकल जाता है………..
अब मेरा लिंग तैयार था निशा को भरने के लिए ,मैंने सोए हुए ही उसे अपने} ऊपर कर लिया ,निशा ने भी अपने योनि में मेरे लिंग को सटाया और मेरे ऊपर कूदने लगी,मैं फिर से आनद के गहराई में जा रहा था,ये तब तक चलता रहा जब तक की मैंने उसे भर ही नही दिया ,तब तक काजल को भी समझ आ गया था की अब उसका यंहा रुकना ठीक नही है ….
अध्याय 58
बहनों के साथ मचे हंगामे के बाद मेरी आंखे कब लगी मुझे पता ही नही चला…
जब आंखे खुली तो कमरे में कुछ हलचल हो रही थी सामने देखा तो काजल थी ,
हमारी आंखे मिली उसने मुझे थोड़े गुस्से में देखा लेकिन वो गुस्सा नकली था,,,
असल में उसके होठो में एक मुस्कान थी ,
जो मुझसे छिप नही सकी,
“तो तुमने पूर्वी को भी बिगड़ ही दिया “उसने शरारती मुसकान से कहा,वो मेरे पास ही खड़ी थी और अभी अपनी नाइटी पहनने वाली थी ,मैंने उसके हाथ को पकड़ उसे बिस्तर में गिरा दिया और उसके ऊपर आ गया…
“सब तुम्हारे कारण हुआ है “
मैं सच में थोड़ा गंभीर था,
“मुझे माफ कर दो देव मैं नही जानती थी की ऐसा कुछ हो जाएगा ,लेकिन फिर भी मुझे पूर्वी के लिए खुसी भी है और दुख भी …….”
काजल भी थोड़ी गंभीर हो गई थी
मैंने प्रश्नवाचक निगाहों से उसे देखा…
“खुसी इसलिए की अब उसकी उम्र हो गई है और तुमने उसे बहकने से तो बचा लिया ,जैसा हमारे घर का माहौल था पता नही वो खुद को कितने दिनों तक सम्हाल पाती,मुझे पता लगा की उसके क्लास की ही लडकिया तुम्हारे होटल में उस धंधे में घुस गई है ….”
मुझे उस दिन की याद आयी जब मैंने अपने ही होटल में पूर्वी के क्लास की लड़की को देखा था..
“लेकिन दुख इसलिए भी है की तुमने जो आग उसे लगा दी ,जैसे शेर को खून का स्वाद दिला दिया है ,मैं नही चाहूंगी की पूर्वी अब ऐसा कुछ कर बैठे की ….तुम्हे अब उसका सहारा बनना होगा ,तुम्हारा ध्यान अगर उससे हटा तो समझो वो बाहर ट्राय करना शुरू कर देगी और दुनिया में उस जैसी खूबसूरत कम उम्र की लड़कियों के कद्रदान बहुत है…”
काजल की बात मुझे समझ में आ रही थी,मैं भी पूर्वी की हालत काजल और निशा की तरह होते नही देखना चाहता था…
हम दोनो ही थोड़ी देर तक चुप रहे ..
“लेकिन एक बात मुझे साफ बताओ की ठाकुर के साथ मुझे देखकर तुमने मजा आया की नही “
उसके होठो में एक कमीनी सी मुस्कान फैल रही थी ,
मैंने उसे जोरो से अपनी बांहो में भर लिया और जोरो से दबाया ..
“तू साली बहुत ही कमीनी है “
“तुमसे ज्यादा नही ,वो तो गैर मर्द था लेकिन तुम तो अपनी ही बहनों के साथ शुरू हो गए हो ,मेरी ही दोस्त के साथ भी सोते हो,साले रिस्तो को तो तुमने खत्म ही कर दिया है ,और तुम्हे नही पता क्या की मुझे भी जलन होती है ,और तुमसे ज्यादा जलन होती है ,तुम किसी और लड़की के साथ रिलेशन में रहते तो शायद मैं ठीक भी रहती लेकिन मेरी ही सहेली ,और अपनी ही बहनों के साथ “
वो मुझे घूर रही थी
“मैं तो सीधा साधा सा इंसान था तेरे ही कारण मैं ऐसा हो गया हु “
हम दोनो ही मुस्कुरा उठे…
“चलो हमारे बीच कम से कम अब इस बात की ग्लानि नही होगी की हम में से एक ही बेवफा है ,असल में तो हम दोनो ही बेवफा हो चुके है “
काजल खिलखिलाई और उसके सफेट मोती से दांत मेरे सामने आ गए ..
“सच कहु काजल ठाकुर के साथ तुम्हे देखकर मुझे लगा जैसे मैं उसे मार ही डालू….”
मेरा शरीर उस दृश्य को यादकर गर्म हो गया था
“फिक्र मत करो ये मौका भी मैं तुम्हे दूंगी,चाहे हो ठाकुर हो या खान …”
काजल किसी ख्वाब में खो रही थी और उसकी आंखों से एक आंसू निकल गए शायद पुराना दर्द था जो बह रहा था..
“लेकिन तुझे भी उसके साथ बहुत मजा आया क्यो??और तुझे वो गिफ्ट भी तो मिल गया “
मैंने बात को बदल दिया ,वो मुस्कुराई लेकिन इस बार उसकी मुस्कुराहट में वो ख़िलापन नही था ,कुछ ठंडा था..
“ह्म्म्म गिफ्ट तो मिल गया है ...और मजा भी आया ,लेकिन ठाकुर के कारण नही बल्कि तुम्हारे कारण “
वो मेरे आंखों में घूर रही थी
“तुम देख रहे हो ये ही सोचकर मैं एक बार झड़ गई थी “
“कमीनी कही की “
उसकी बातो को सुनकर मेरा लिंग ही खड़ा हो गया था और मैंने देर नही करते हुए उसे काजल की योनि में डाल दिया,मैं नंगा ही था और काजल भी सिर्फ नाइटी में थी जो की पूरी तरह से पहनी नही गई थी,
उसकी योनि पहले से ही पनियाई हुई थी और मेरे लिंग को आराम से वो अपने अंदर कर गई…
ऐसे तो ये अहसास बहुत ही सुहाना था लेकिन फिर भी आज मैं कुछ सोच में गहराई से डूबा हुआ विचार कर रहा था…
सबसे बड़ा सवाल तो ये था की क्या सच में काजल चाहती है की मैं उसे उस हाल में देखु,या वो बस वक्त की मजबूरी है???
और एक सवाल मेरे मन को खाये जा रहा था ,क्या काजल मुझसे प्यार करती है ,या वो बस ये रिश्ता निभाये जा रही है???
सवाल तो कई थे और जवाब कोई भी नही था,बस कुछ धारणाएं थी,बस कुछ पुरानी याद और बात जिसके सहारे में कुछ समझ या सोच सकू…………….
सेक्स तो खत्म हो गया और हम दोनो ही एक दूसरे की तरफ पीठ करके सोए थे,लेकिन मेरी और काजल की दोनो की ही आंखे खुली हुई थी,दोनो ही कई सवलो से घिरे हुए थे…
अध्याय 59
“आखिर वो रंडी तुमको देती क्या है ,जो तुम इतने पैसे को ठुकरा रहे हो ,तम्हे लड़की चाहिए मैं वो भी तुम्हें दिला सकती हु “
रश्मि बौखलाई हुई ठाकुर से बोली ..
“जबान सम्हाल कर बात कीजिये मेडम ,आप मेरे कैरेक्टर पर ऐसे कीचड़ नही उछाल सकती “
ठाकुर की बात सुनकर रश्मि का गुस्सा और भी बढ़ गया था ,उसे समझ नही आ रहा था की आखिर ऐसा क्या हो रहा है जो ठाकुर और खान जैसे अय्यास लोग यू काजल की तरफ हो गए है वो भी पूरे दीवानों की तरह …
“तुम कितने दूध के धुले हो ये मैं जानती हु ठाकुर साहब,और काजल के साथ खान के फॉर्म हाउस में क्या क्या रंगरलियां मनाई जा रही है वो भी जानती हु ,आखिर तुम मुझे मेरे ही पति से क्यो नही मिलने देना चाहते जबकि काजल तो कभी भी उससे मिलने पहुच जाती है “
सच में रश्मि का चहरा बौखला गया था साथ ही ऐसा लग रहा था जैसे वो रो डाले लेकिन वो इतनी कमजोर नही दिखना चाहती थी …
“असल में बात ऐसी है की अजीम आपसे खुद ही नही मिलना चाहता ,वो खान से भी नही मिलता ..उसने सख्त हिदायत दे रखी है की उसे बस काजल से ही मिलाया जाए “
रश्मि खुद को रोक नही पाई और उसके आंखों से आंसू के बून्द गिर ही गए …
मैं वही उसके साथ खड़ा हुआ उसे देखता ही रहा ,पहले जब हम यंहा आये तो ठाकुर ने मुझे घूर कर देखा क्योकि वो मुझे पहले काजल के साथ देख चुका था ,पता नही उसे मेरे बारे में पता था या नही लेकिन उसने मुझे या रश्मि को कुछ भी नही कहा था ,उसने रश्मि को अजीम से मिलवाने के लिए साफ साफ माना कर दिया,जबकि रश्मि उसे मुह मांगी कीमत देने को तैयार थी ,काजल उन्हें ऐसा क्या दे रही थी की वो ऐसे ऑफर को भी ठुकरा दे रहे थे ,सिर्फ सेक्स का असर तो नही था ,सेक्स तो उन्हें रश्मि भी दिलवा सकती थी और काजल से ज्यादा खूबसूरत लड़कियों का अंबार उनके सामने लगा सकती थी ,उसने ये आफर भी दे दिया था लेकिन काजल कोई ऐसा प्रलोभन उन्हें दे रही थी जिसके आगे सभी प्रलोभन कम पड़ रहे थे …
रश्मि की हालत देख कर मुझे भी उसपर दया आनी शुरू हो गई थी ,मुझे नही पता था की मेरी बीवी इतनी बड़ी खिलाड़ी निकलेगी की जिनसे सारा शहर डरता है वो उन्हें भी हरा रही थी और रोने पर मजबूर कर दिया था…
मैंने ठाकुर से थोड़े विनम्र स्वर में कहा ..
“सर प्लीज् मेडम को मिलने ना सही लेकिन देखने तो दिया जा सकता है ,”
रश्मि के भीगी हुई आंखों से मेरी ओर देखा ,
“आपलोग समझ क्यो नही रहे हो ,मैं भी मजबूर हु ,अजीम ने साफ साफ मना किया हुआ है “
मैंने रश्मि को बाहर बैठने को कहा,आखिर मैं मैनेजर था सौदे करना मुझे भी आता था..
मैं अकेले में ठाकुर से कुछ बात करना चाहता था ..
“देखिए सर ,मेडम को बस उन्हें देखने दीजिये ,अजीम को तो पता भी नही चलेगा की वो उसे देखकर चली गई है ,और इसके बदले आप को अच्छी खासी कीमत मिल सकती है ,और कुछ चाहिए तो आप मुझसे बेझिझक कहे “
मैंने बहुत ही विनम्र होकर उस आदमी से ये कहा जिसे मैंने अपनी बीवी के साथ गंध मचाते देखा था ,लेकिन क्या करे काम भी ऐसा था मेरा ,और रश्मि के लिए एक सहनुभूति मेरे दिल में आ गई थी …
ठाकुर थोड़ी देर तक कुछ सोचता रहा …
“तुम तो डॉक्टर और काजल के साथ यंहा आये थे ना .डबल गेम तो नही खेल रहे हो ..”
मैंने अपने होठो पर उंगली रखते हुए उसे चुप रहने का इशारा किया ,और हल्की मुसकान के साथ उसकी ओर मुखतलिब हुआ ..
“बा खुदाय सर जी ,मैं तो सीधा साधा इंसान हु ,मुझे नही पता की ये सब क्या चल रहा है,लेकिन मुझे मेडम का दर्द नही देखा जाता ,बस इतना कर दीजिये ,...और मैं तो दोनो ही तरफ का हु लेकिन खेल मैं किसी भी तरफ से नही रहा “
वो थोड़ी देर तक मुझे घूरता रहा फिर उसके होठो में एक शरारती सी मुस्कान आ गई ..
“ठिक है लेकिन तेरी मेडम मुझे देगी क्या ??”
उसने अपने मुठ्ठी बांध कर सेक्स करने के इशारे से कहा ,मैं मजबूरन हंसा ,असल में मुझे तो उस समय ऐसा लगा जैसे साले का गाला ही घोट दु लेकिन क्या करू ,इसकी ट्रेनिग ली थी मैंने की कैसे गुस्सा आने पर भी मुस्कुराया जाता है ..
“वो बड़े घर की लड़की है सर उससे ऐसा पूछा तो आप भी जानते हो की क्या होगा ,लेकिन मैं आपको एक से एक लडकिय दिला सकता हु ,कालेज की ,या शादीशुदा आप जैसा बोले “
वो कमीनी मुस्कान अपने चहरे में लाया …
“ठीक है ,फिलहाल तो **** पैसे पहुचा देना ,लड़कियों का बाद में बताऊंगा ,अपना नंबर दे दो और अजीम को बस देखने ही दूंगा मिलवा नही सकता ,पता नही ये तुम्हारी मेडम क्या कर जाए ,और साथ ही तुम तो समझते ही होंगे की काजल को इसका पता नही चलना चाहिए …”
उसकी बात से मैंने एक गहरी सांस ली ,मुझे भी थोड़ा सुकून हुआ …
*****
अजीम की हालत देखकर रश्मि रो ही पड़ी थी ,वो 6 फुट 2 इंच का जवान और गबरू सा दिखने वाला मर्द अभी किसी कंकाल के ढांचे की तरह सुख गया था ,गाल चिपक गए थे और बहुत ही कमजोर दिख रहा था,उसकी दाढ़ी बढ़ गई थी और आंखे जैसे बाहर को निकल गई थी,चहरे पर कोई तेज नही था ,लग रहा था की वो बहुत ही ज्यादा नशा कर रहा है लेकिन खा कुछ भी नही रहा ,मुझे काजल की बात याद आयी की वो उसे तड़फ़ा तड़फा कर मारेगी,वो उसके पास ड्रग्स भिजवाती थी और उसे अपने काबू में ऐसे कर रखा था जिससे अजीम उसपर पूरी तरह से निर्भर हो गया था …
रश्मि उसके पास जाकर उससे बात करना चाहती थी लेकिन मैंने उसे रोक लिया ..
“नही रश्मि अगर उसे पता चला तो गड़बड़ हो जाएगी ,,,उसे सोने दो..
हम बाहर जाकर कुछ सोचते है “
रश्मि और मैं बाहर आये ,मैं अभी गाड़ी चला रहा था जबकि रश्मि मेरे बाजू में बैठी हुई थी और अपना सर मेरे कंधे पर रखी कुछ गहरी सोच में डूबी हुई थी …
“कितना अंतर है तुम दोनो में …”
वो गहरी सांस लेकर बोलने लगी
“किसमे ??”
मैं उसकी बात को समझ नही पाया था ..
“तुझमे और तुम्हारी पत्नी में …”
मैं हड़बड़ाया ,मुझे पता था की रश्मि जानती है की काजल मेरी पत्नी है लेकिन अभी तक मेरे ही सामने उसने कुछ नही कहा था लेकिन पता नही आज क्या हुआ की वो मेरे सामने ही मेरी पत्नी का जिक्र कर रही थी …
उसने मुझे देखा मेरा चहरा हैरत से भरा हुआ था …
वो हल्के से मुस्कुराई और फिर से मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया
“मुझे पता है देव की काजल तुम्हारी पत्नी है ,हमेशा से पता था अजीम को भी पता है ,लेकिन तुम दोनो ही अपने काम में इतने माहिर और हुनरमंद हो की हमने कभी तुम दोनो के रिलेशन को लेकर कोई बात नही की ,जबकि हम दोनो बिजनेस में एक दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे है ,और आज मुझे लगता है की हम सही थे…..”
वो थोड़ी देर तक रुक कर फिर से बोलने लगी..
“पता नही तुम्हे पता भी है या नही की काजल क्या कर रही है लेकिन सच पुछू देव तो मैं उससे परेशान हो गई हु ,अब मुझे लगता है की मैं हार गई हु ...क्या तुम्हे नही लगता की तुम भी हार गए हो ...तुम्हारी बीवी ना जाने क्या क्या कर रही है और तुम्हे पता भी नही ...इतना सीधापन भी किस काम का देव “
मैं अब भी चुप ही था …
“देव वो तुम्हे धोखा दे रही है ,धोखा खाना क्या होता है ये मुझसे पूछो ,तुम्हारे दिल में कभी ये बात नही आती ,या तुम उसे जानबूझकर ही जानना नही चाहते …”
उसने मुझे ऐसा प्रश्न किया था जिसका जवाब मुझे समझ नही आ रहा था ..
“मेरे लिए बस मेरी बीवी नही है रश्मि मुझे मेरी बहनों को भी देखना है ...पता नही की काजल क्या कर रही है लेकिन इतना जरूर है की अगर मैं इन सबमे पड़ा तो शायद मेरी बहनों पर इसका प्रभाव गलत पड़ सकता है..”
मैंने अपनी परेशानी उसे बता दी …
वो चुप ही थी ……..
“मैं कर भी क्या सकता हु …??”
मेरी बात पर रश्मि थोड़ी सतर्क हुई …
“बहुत कुछ ...अगर तुम मेरा साथ दो तो …”
उसने मेरे हाथो पर अपना हाथ रख दिया था ……….
अध्याय 60
गहरी खामोशी और गहरे सोच में हम दोनो ही गुम थे और रश्मि के कमरे में बैठे हुए थे,
“मैं जानता हु रश्मि की काजल क्या कर रही है “
मैंने बहुत सोच कर कहा था ,रश्मि ने सर उठाकर मुझे देखा ,उसका उदास चहरा अचानक से कोई नूर छोड़ गया था,
“लेकिन मुझे ये नही पता की वो चाहती क्या है ,मैं भी इंसान हु ,मेरी भी कुछ भावनाएं है,जैसे मैं उसके लिए मर ही गया हु ,कई दिनों से हमारे बीच कोई बातचीत ही नही रही है ,लेकिन मैं इतना तो जरूर जानता हु वो मुझे धोखा दे रही है …”
रश्मि का चहरा खिल गया,मैं झूट बोल रहा की काजल और मेरे बीच में कोई भी बातचीत नही हो रही है लेकिन मैं रश्मि पर पूरी तरह से विस्वास भी तो नही कर सकता था …..
“तुम मुझे बताओ की मुझे क्या करना चाहिए,मैं तंग आ चुका हु मैं एक आराम की जिंदगी बसर करना चाहता हु ,मुझे इन झमेलो से निकलना है …”
रश्मि ने मेरे आंखों में देखा उसमें एक चमक दिखाई दी..
“तुम क्या चाहती हो और अगर तुम्हे काजल को रोकना है तो क्यो “
मैंने रश्मि के ऊपर एक प्रश्न दागा …
“पहले तो मुझे खान साहब के प्रोपर्टी में अपने हिस्से की चिंता थी लेकिन अब ...अब तो मुझे बस अजीम की चिंता हो रही है ,अगर उसे बाहर नही निकाला तो वो मर जाएगा “
वो जोरो से रोने लगी थी
मैं उसके पास जाकर उसके कंधे पर अपना हाथ रखा
“जिस आदमी ने तुम्हे इतना सताया तुम उसके लिए क्यो परेशान हो रही हो “
वो सर उठाकर मुझे देखने लगी …
“क्योकि मैं उसे प्यार करती हु ,वो मेरा पति था ...देव एक लड़की के दिल की बात तुम नही समझ पाओगे,कई मजबूरियां होती है लेकिन कुछ भी हो मैंने उससे ही तो प्यार किया था …”
मैं इसी सोच में पड़ गया की हो सकता है की काजल की भी कुछ मजबूरियां हो लेकिन वो मुझसे भी प्यार करती हो …
“मेरे दिमाग में एक प्लान है क्या तुम मुझपर भरोसा कर सकती हो “
मैंने झट से कहा
वो मानो खुस हो गई
“मुझे तुम्हारे ऊपर पूरा भरोसा है देव तुम कहो तो सही..”
मुझे अब अपना मैनेजर वाला दिमाग लगाना था ..
“तुम्हे क्या लगता है की अजीम इतना कमजोर क्यो हो रहा है “
वो आश्चर्य से मुझे देखने लगी
“क्या वो ड्रग्स लेता है ???”
“बहुत ज्यादा लेता था लेकिन अभी उसे ड्रग्स …”
वो कहते कहते रुक गई
“वाओ देव कमाल है ,हा समझ गई ठाकुर और काजल मिलकर उसे ड्रग्स दे रहे है ...ओह माय गॉड इसलिए वो काजल का ऐसा दीवाना बना घूम रहा है “
रश्मि की आंखों की चमक और भी बढ़ गई ,मेरे दिमाग में कई खुरापात एक साथ चलने लगी थी ..
“अब हमे क्या करना चाहिए “
रश्मि ने बड़े ही जल्दबाजी में मुझसे पूछा..
“पहले तो पता करो क्या तूम अपने कांटेक्टस के बारे में मुझे बता सकती हो ..”
वो थोड़ी देर सोचती रही ,इतने अचानक मुझपर वो इतना विस्वास कैसे कर सकती थी ..
लेकिन फिर उसने थोड़े हिम्मत भरे स्वर में कहा
“हा बिल्कुल “
“तो जेल में अपना आदमी कौन है “
“फिलहाल तो कोई भी नही “
“तो बिठाओ या खरीदो किसी को “
वो मुझे देखने लगी
“हो सके तो ऐसा सिपाही जो बिल्कुल ही आम हो ,थोड़े पैसे में ही जिसे खरीदा जा सके “
उसने अपना सर हा में हिलाया
“और खान के पास हमारा कोई आदमी “
“हा है तुम जानते हो उसे मोहनी “
मोहनी का नाम सुनकर मैं जोरो से हँस पड़ा
“वो किसी काम की नही है ,वो बस एक ही काम के लिए ठीक है “
मैं फिर से हँस पड़ा और रश्मि ने मुझे थोड़ी नाराजगी से देखा
“एक आदमी बैठना पड़ेगा ,मेरी नजर में है एक लड़का “
वो शांत ही रही
“तुम्हे जो भी करना है करो तुम्हे जितना पैसा चाहिए मैं तुम्हे दूंगी लेकिन ...लेकिन अजीम को उस काजल से बचाओ मेरे पास बहुत है और मुझे अब उनकी दौलत नही चाहिए,अजीम और खान साहब को तो अपने कर्मो की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी लेकिन मैं अपने पत्नी धर्म का तो पालन कर ही सकती हु ,एक बार उन्हें इस दलदल से निकाल दु बस ,फिर कभी उसने नही मिलूंगी “
रश्मि के चहरे में सच में दर्द टपक रहा था ..
पता नही क्यो मेरी सहानुभूति उसकी ओर बढ़ रही थी ,जैसा मैंने अभी तक उसके बारे में सोचा था वो उससे बिल्कुल ही अलग निकली थी ,वो एक बड़े बाप की बिगड़ी हुई औलाद तो थी लेकिन वक्त ने उसे बहुत कुछ सिखाया था,उसके दिल में आज भी अजीम के लिए गुस्सा था लेकिन फिर भी वो उसे अपना पति ही मानती थी ,मैं तो उसे चालबाज समझता था लेकिन वो बस उतना ही उड़ सकती थी जितना पैसे के दम में एक इंसान उड़ता है,काजल ने उसे असहाय बना दिया था क्योकि काजल के सामने उसके पैसो की बिल्कुल भी नही चल पा रही थी …
“एक अंतिम बात ..काजल के पास ऐसा कोई है जो उसकी खबर तुम तक पहुचाये “
“हा है ना ...शबनम ..
”
उसकी बात सुनकर मेरे होठो की मुस्कान गहरी हो गई ,तो शबनम भी मेरी ही तरह दोनो तरफ से खेल रही थी ,
अध्याय 61
कमरे के बड़े से बिस्तर में मैं शबनम के पहलू में लेटा हुआ था ,रश्मि ने आज मुझे शबनम से नए तरीके से मिलवाया था,
हम दोनो को ही ये पता था की हम किसका साथ दे रहे है,मैं उसे उसी कमरे में ले आया जंहा हम अधिकतर ही मिला करते थे,मैं अभी उसके गोद में सोया था और वो मेरे बालो पर अपनी उंगलियां फेर रही थी ,
उसकी गोद में मुझे एक अलग सा सुकून और शांति का अहसास होता है ,ऐसा लगता है जैसे वो ही मेरी सबसे अच्छी दोस्त है मेरा सहारा है…
“आखिर तुमने भी रश्मि के साथ हाथ मिला लिया “
वो मुस्कुराती हुई बोली
“क्या करू कुछ तो करना ही होगा ,काजल क्या करती है मुझे तो आजतक समझ ही नही आया “
“क्या करती है या क्यो करती है क्या जानने के लिए रश्मि के साथ आये हो”
“दोनो ही चीजे आखिर वो ऐसी क्यो हो गई है…”
शबनम थोड़ी देर तक खामोश ही रही
“उसने तुम्हे नही बतलाया ??”
“बतलाया था अपनी कहानी उसने भी बतलाई थी लेकिन …”
“लेकिन क्या ??”
“यकीन नही होता ..”
“क्यो ??”
“क्योकि मैंने किसी से एक दूसरी ही कहानी सुन रखी है “
शबनम का हाथ अचानक ही रुक गया
“कौन सी कहानी “
“श्रुति की कहानी “
उसके चहरे में हल्की सी मुस्कान उभर कर आ गई
“तो तुम केशरगढ़ में बहुत खोज बिन करके आ गए ...किसने सुनाई कहानी डॉ. चुतिया ने या मलीना मेडम ने “
मैं चौका ..
“तुम इन्हें कैसे जानती हो “
“क्योकि वो कहानी सच है और काजल मुझसे कुछ भी नही छुपाती “
मैं अब उठ बैठा था…
“तो काजल ने मुझे झूट कहा था “
मैं उसे घूरने लगा
“नही काजल ने भी सच ही कहा “
मैं बड़े ही असमंजस में पड़ गया था
“मतलब एक ही कहानी सच हो सकती है दोनो कैसे “
वो मुस्कुराई
“इसके लिए तुम्हे अतीत में झकना होगा देव ...काजल ने मुझे मना किया था की उसके अतीत के बारे में कुछ भी तुम्हे नही बताऊँ लेकिन मुझे लगता है की अब वो समय आ चुका है जब तुम्हे ये जानने का हक है,वरना तुम उससे सिर्फ नफरत ही करते रहोगे …”
शबनम के आंखों से एक आंसू गिर गया ..
मैंने उसका हाथ थाम लिया था ..
उसने कहना शुरू कीया
“बात तब की है जब केशरागड के करीब शहर में होटल आदित्य की मालकिन काजल हुआ करती थी ,काजल की एक और सहेली थी जिसका नाम था नेहा ,काजल के पति का नाम विकास था जो की एक आईएएस ऑफिसर थे ,विकास की एक और बीवी थी जिनसे तुम मिले थे ,मलीना ,उनसे उन्हें एक लड़की थी जिसका नाम रखा गया श्रुति ...
“
मैं ध्यान से उसकी बातो को सुन रहा था…
“काजल की दोस्त नेहा का पति रॉकी था जो की आदित्य इंटरनेशनल का मैनेजर हुआ करता था ,उन दोनो की एक बेटी थी जो की श्रुति की हम उम्र ही थी ,नेहा और काजल का प्यार बहनों की तरह था शायद उससे भी ज्यादा इसलिए नेहा ने अपनी बेटी का नाम भी उसके नाम पर काजल ही रखा ...वही हमारी काजल है देव ….”
उसकी आंखों से आंसू झलक आये थे ,
मैंने उसके गालो पर हाथ फेरा ..
“तो नेहा काजल की मां थी ,तो डॉ ने मुझे मलीना के सामने श्रुति का पति क्यो कहा ???”
मैंने सवाल किया ..
“क्योकि भगवान को कुछ और ही मंजूर था ,काजल और श्रुति ना सिर्फ हम उम्र थे बल्कि उनमे बहुत ज्यादा प्यार भी था,जैसे नेहा और काजल में हुआ करता था ,तभी विकास का ट्रांसफर दिल्ली हो गया ,उसे केंद्र सरकार में काम करने के लिए बुला लिया गया ,काजल भी होटल के काम से तंग आकर उसे बेचने की सोच ली आधा शेयर अपनी बहन की तरह प्यारी दोस्त नेहा के नाम कर दिया और आधा खरीदा खान ने …
फिर काजल विकास के साथ दिल्ली चली गई ,
वक्त ने करवट बदली खान का दिल नेहा पर आया हुआ था ,लेकिन वो कुछ कर नही पा रहा था जबतक की उसे इन सबकी असलियत पता नही चल गई …
नेहा का पति रॉकी पहले काजल का बॉयफ्रेंड हुआ करता था और तब भी उसे काजल से मोहोब्बत थी लेकिन जब काजल और विकास के बीच सब सही हो गया उसने नेहा से शादी कर ली ,वही नेहा हमेशा ही विकास से प्यार किए करती थी पहले उनका शारीरिक संबंध भी रह चुका था ,उसने रॉकी को बतलाया नही था की असल में काजल(नई वाली ) भी विकास के बीज से ही जन्मी थी ,ये बात नेहा ने ना सिर्फ रॉकी से बल्कि काजल और विकास से भी छुपाई थी ,लेकिन खान को जब उन सब के पुराने रिलेशन के बारे में पता चला तो उसने रॉकी के कान भरने शुरू किये ,और रॉकी को ब्लड टेस्ट से ये पता चल गया की जिसे वो अपनी बेटी मानता था असल में वो विकास की बेटी थी ,खान ने उसे चुप रहने के लिया कहा और पहले उसे नेहा से होटल के आधे शेयर हासिल करने की स्किम बनाई ..
रॉकी बदले की आग में जल रहा था ,उसे हमेशा लगता था की काजल नेहा और विकास ने मिलकर उसे चुतिया ही बनाया है,वो पहलवानों की तरह ताकतवर था लेकिन खुद का दिमाग चलाने में उतना महिर नही था जितना की खान ,खान को भी दौलत और नेहा का जिस्म चाहिए था,उसने इंस्पेक्टर ठाकुर को अपने साथ मिला लिया,उसे ये भी पता था की इन सबके बीच विकास जो की एक आईएएस है उससे जितना मुश्किल होगा ,इसलिए उसने उसे भी अपने रास्ते से हटाने की सोच ली ,इन सबमे सिर्फ मलीना ही उनके लिए कोई खतरा पैदा नही कर सकती थी इसलिए उसपर हाथ लगाना उन्होंने ठीक नही समझा …
वो काली रात थी जब काजल(नई) के गले में चाकू रखकर रॉकी और खान ने नेहा से शेयर रॉकी के नाम पर करवा लिए ,उसके बाद बेटी के सामने ही ठाकुर रॉकी और खान ने नेहा का बलात्कार किया ,इन सबके बाद उसको जिंदा छोड़ना मुश्किल था ,उन्होंने दोनो मा बेटी को बांधकर घर समेत जला दिया ……..”
मैं सुन्न रह गया था ,...और शबनम की आंखों से आंसू अनवरत गिरे जा रहा था …
“रॉकी ने विकास से बदला लेने के लिए विकास की दूसरी बेटी श्रुति को भी किडनैप कर लिया ,और वँहा से भाग गया ,ये सभी बाते जब बाहर आयी तो इंस्पेक्टर ठाकुर ने खान को साफ साफ इन सबसे अलग कर दिया और पूरा दोषी रॉकी को बना दिया जो की आज तक फरार है,इन घटना सुनकर विकास और काजल दिल्ली से वापस आये लेकिन रास्ते में उनके गाड़ी का एक्सीडेंट करवा दिया गया ,आगजनी में काजल(नई) निकल गईं थी ,जिसका पता सिर्फ डॉ चुतिया को था,लेकिन उन्होंने उसे पुलिस के सामने ना ले जाने का फैसला किया ,एक्सीडेंट में विकास और काजल गंभीर हो चुके थे ,काजल जब अति गंभीर अवस्था में थी तो उसने अपने जान से प्यारी सहेली के बेटी काजल से मुलाकात की ,जिसे डॉ सबकी नजर से बचा कर उसके पास ले आया था ,उसने काजल के कानो में बस एक बात कही थी ..’अपने मा के कातिलों को तड़फ़ा तदफ़ा कर मारना,उन्हें आसान मौत नही आनी चाहिए ,तोड़ देना उनका दम, गुरुर,जिस्म सब कुछ छीन लेना उनसे जो उन्हें प्यारे हो ,ऐसी स्तिथि में ला देना की वो मौत चाहे लेकिन मर नही पाए , ‘....काजल ने वो बात सीने में बसा लीया...और आज वो अपने बदले के बहुत करीब है …”
मैं सन्न रह गया था लेकिन काजल ने मुझे थोड़ी अलग कहानी सुनाई थी ,शायद वो मुझे कुछ चीजे नही बतलाना चाहती थी ..
“डॉ चुतिया ने काजल की परवरिश की जिम्मेदारी अपने ही एक आदमी को दे दी जिनकी पत्नी का इंतकाल हो चुका था और एक बेटा भी था,जिसे आज तुम काजल के पिता और भाई के रूप में जानते हो,उसे मलीना से मा का प्यार मिला मलीना उसमे ही अपनी खोई हुई बेटी श्रुति को देखती है और उसे ही श्रुति कहा करती है ,जब काजल थोड़ी बड़ी हो गई तो सब उसे श्रुति ही कहा करते थे ,सबको यही लगता था की मलीना ने उसे गोद लिया हुआ है ,क्योकि काजल कभी पहले केशरागड में नही रही थी बल्कि उसकी परवरिश शहर में होटल आदित्य में हुई थी इसलिए केशरगढ़ के लोग उसे कम ही पहचानते थे,इसका फायदा उसे हुआ ,वो हमेशा ही डॉ और मलीना के संरक्षण में रही ,लेकिन वो अपनी उस आग को बुझा नही पाई ना ही उसने कभी काजल मेडम की बात को ही भुलाया ,उसकी बदकिस्मती की उसे कालेज के दौरान तुमसे प्यार हो गया और तुम्हारी बदकिस्मती की तुम्हे वो सब पता चल गया जो तुम्हे नही पता चलना था,काजल तुम्हे नही छोड़ सकती,
लेकिन वो इस मकसद को भी नही छोड़ सकती जिसके कारण ही वो जी रही है ...इसलिए वो ये कोशिस करती है की तुम उसके साथ आ जाओ चाहे,”
वो इतना बोल कर थोड़ी मुस्करा पड़ी मैं समझ रहा था की वो क्यो मुस्कुरा रही थी ,वो भी जानती थी की आजकल काजल मुझे क्या बनाने की कोशिस कर रही है ,लेकिन मैं अब उसकी मजबूरी को समझ सकता था …
“उसका ये सब करना जायज है शबनम लेकिन ...रॉकी का क्या हुआ क्या वो मिला ??”
शबनम ने एक गहरी सांस ली
“वो वँहा से भागने के बाद एक अमीर विधवा को फंसा कर उससे शादी कर ली,जिसकी एक बेटी भी थी ,आजकल रॉकी को लोग कपूर साहब के नाम से जानते है “
मैं बुरी तरह से बौखला गया था ,
“कपूर साहब “मेरी मुठ्ठी बंद होने लगी मैं गुस्से में जल रहा था .,उसने मुझे शांत कराया..
“वक्त आने पर सही वार करना है हमे देव अभी से गुस्सा होने से कुछ नही होगा “
मैं शांत हुआ
“लेकिन शबनम आखिर श्रुति का क्या हुआ ,क्या वो मिली “
शबनम हँस पड़ी
“हा डॉ ने उसे खोज निकाला इसके लिए उनको रॉकी से फिर से दोस्ती भी करनी पड़ी ,लेकिन आजतक उन्होंने उसे सबसे छुपा कर रखा है...
रॉकी ने विकास से बदला लेने के लिए उसे एक कोठे में बेच दिया ,लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी वो बहुत ही खूबसूरत थी तो एक पुराने नवाब ने उसे खरीद कर अपने घर में रख लिया ,वो उनकी सेविका बनकर रहने लगी ,वंही उसे नया नाम दिया गया और साथ ही नया काम भी और साथ ही उसकी शादी एक लड़के से भी करा दी गई “
मैं उसे आश्चर्य से देखा
“तुम इतना कैसे जानती हो”
वो मुस्कुराई ,इस बार उसके होठो की मुस्कान और भी गहरी थी
“क्योकि मैं ही श्रुति हु देव ……”
मैं बस उसके चहरे को देखता रहा उसकी आंखों में मेरे लिए बस प्यार था उसकी हर बात में सच्चाई थी ,अब मुझे समझ आ रहा था की आखिर शबनम और काजल की दोस्ती इतनी गहरी क्यो है ,वो दोनो ही बहने है और उससे भी ज्यादा है ………...
अध्याय 62
शबनम की आँखो में आंसू था और होठो में मुस्कुराहट,ये वो पल होता है जब कोई खुसी में नही आनन्द में हो ,दिल खुशी होठो में चमक रही थी और आंखो से मोती बनकर टपक रही थी,नयनो के अंदर बस प्यार ही प्यार दिखाई दे रहा था,उसका हाथ मेरे सर को सहला रहा था और मैं उसकी गोद में अपना सर टिकाए हुए किसी स्वर्ग की सैर में था,
“शबनम क्या तुम भी मुझसे प्यार करती हो ..”
मैं उसके गोद में कुछ और ही धंस गया था
शायद उसके होठो की मुसकान और भी चौड़ी हो गई हो,
“कोई शक है क्या ???”
“लेकिन मैं तो तुम्हारी बहन का पति हु “
“तो …”
“तो क्या तुम्हे पता नही क्या की मैं क्या कहना चाहता हु ..”
“शायद ये हमारे खून में ही है देव...मेरी और काजल की माए भी तो एक ही लड़के के प्यार में थी जो की उनका पति नही था…”
वो खुलकर हँस पड़ी ,मैंने अपना चहरा ऊपर कर उसकी ओर देखा आज वो कुछ और ही छटा बिखेर रही थी ,चहरा दमक रहा था,उज्जवल काया में कोई दाग ही नही था,आज मैंने उसके त्वचा के उस रंग को गौर किया वो सच में मलीना के गुणों से भरी हुई थी लेकिन थोड़ी यूरोपियन थोड़ी भारतीय,वक्त ने उसके भारतीय गुणों को ज्यादा उजागर किया था,वो शर्माती हंसती हो लाल हो जाया करती थी ,मानो खून उतर आया हो,गोल गोल गालो और भरे हुए जिस्म के कारण वो बहुत मस्तानी लगा करती थी लेकिन आज उसकी मासूमियत भी उसके चहरे से टपक रही थी,उसके कमीज से छलकते हुए उसके दो उजोर अपने पूरे सबाब में मुझे उसका चहरा देखने से रोकते थे,और उसके जांघो में भरा हुआ मुलायम मांस आज मेरा तकिया था ..
उसके हँसने पर एक पंक्ति में जमे हुए उसके चमकदार दांत और किसी ताजा सेब से लाल चमकदार मसूड़े मेरे दिल की गहराइयों में बस गए थे…
मेरी नजर बस उसपर जम ही गई ,वो इससे शर्मा सी गई थी ,
उसके गुलाबी लेकिन भरे हुए होठ ऐसे फड़कने लगे थे जैसे जैसे किसी जाम से मदिरा छलक रही हो ..
मुझसे और सब्र नही हो पाया मैं उठा और उसके होठो के सबाब को अपने होठो में भर ही लिया ,वो दोहरी हुई लेटती गई और आखिर में उसका जिस्म मेरे बांहो में था ,वो चंचल सी शोख हसीना आज किसी समर्पण की देवी सी मेरे बांहो में कैद थी …
मेरा शरीर उसके शरीर के ऊपर था और हमारे होठो एक दूजे के होठो पर शिद्दत से छाए हुए थे,कोई बेताबी कोई बेचैनी कोई भी जल्दबाजी दिल में नही थी ,एक सुकून था उसके इन मय के प्यालों में जिसे मैं शिद्दत से पीना चाहता था ,पूरी तरह से पूरी तृप्ति होने तक ,,...
वो अपना हाथ मेरे बालो में फंसा कर मेरा साथ दे रही थी ,ऐसा लगा जैसे आज मैं किसी और ही शबनम के साथ था ,वो शबनम जो मुझे प्यार करती है ,
और ये प्यार जिस्मनी नही था ,ऐसा लगा जैसे उसके रूह से आती हुई कोई प्यार की लहरे मेरे मन के किसी कोने को भिगो रही थी ,
वो एक अजीब सा सुख दे रही थी ,हर अहसास में वो जिंदा सी लगी ,किसी भी तरह का दिखावा और मुर्दापन नही था,मैं तो बस डूब ही जाना चाहता था और मैं डूब ही गया,ना जाने कितने देर तक हम बस एक दूजे के ही होठो को पीते रहे ,
ना जाने कब हमारी आंखों ने पानी छोड़ दिया,ये भावनाओ का शैलाब सा आ गया था जिसे हम दोनो ही रोकना नही चाहते थे और रोके भी क्यो…
उसके जिस्म की गर्मी और नरमी ने मुझमें हवस की कोई आग नही जलाई थी ,मेरा हाथ उसके पुष्ट जांघो को सहला रहा था लेकिन अभी भी हम बस उसी अज्ञात दरिया में डूबे हुए थे जिसमे से बाहर निकल पाना मुश्किल हो रहा था,उसने मुझे कस रखा था और मैं उसके मखमली जिस्म में हाथ फेर रहा था,
पता नही क्यो ऐसा लगा की अब हमारे जिस्म के बीच कपड़ो की दूरियां भी नही होनी चाहिए,मैंने ही पहल की और उसने साथ दिया ,हम कब नंगे हुए हमे पता ही नही था,
दोनो का बदन तप रहा था,सांसे तेज थी और मेरे लिंग में भी कसावट थी लेकिन दुविधा ,और उतावलापन अब भी नही था ,ना ही मैंने उसके अंदर जाने के लिए कोई मेहनत की ना ही उसने मुझे अपने अंदर लेने के लिए कुछ किया ,
हमारा जिस्म बस एक दूसरे में रगड़ खा रहा था और थोड़ी भी दूरी बेहद ज्यादा लग रही थी ,यू ही उसके होठो गालो को चूमता जा रहा था,वो भी कभी मेरे ऊपर आ कर मेरे शरीर को चूमती थी ,उसके बाल फैल गए थे और वो साक्षात काम की देवी का रूप लग रही थी,मोहक इतनी की आंखे जो जम गई तो फिर नजर किनारे ही नही हो पा रही थी,फैले हुए काले लंबे बाल और गोरे जिस्म में हल्की हल्की पसीने की बूंदे,नंगा जिस्म चमक रहा था और पसीने से थोड़ा भीग कर नरमी का अहसास दे रहा था ,वो मेरे कमर में बैठी थी और उसके गद्देदार कूल्हे का नरम अहसास मैं अपने लिंग पर कर पा रहा था ,
फिर भी कोई उतावला पन नही था..
बस उसके रूप को मोहित होकर देखे जा रहा था,वो झुकी और फिर से हमारे होठ एक दूजे में मिल गए ,कहने को कोई बात नही रह गई थी था तो बस अहसास …
गीले योनि में कब मेरा लिंग फिसल गया इसकी भनक भी नही लगी ,थोड़ी रगड़ होने लगी और रगड़ से उठाने वाले सुखद अहसास ने हमे घेर लिया लेकिन फिर भी दिल में सुकून की एक गहरी छाया थी जो हट नही पाई,लिंग और योनि के संगम ने भी हमारे मन को विचलित नही किया था ,बस एक दूसरे का हो जाने के अहसास में हम डूबे हुए थे ,ना जाने कितनी देर ना जाने कितने घंटे…
बस यू ही रहे ….
अध्याय 63
बार बार की कोशिशें लेकिन हार नही मानने का जस्बा ,पुरानी आदतों ने कितना जकड़ रखा है की उनके चक्कर से छूटना बहुत ही मुश्किल सा हो जाता है.
मेरे हाथो में रखी उस सिगरेट को देखता हुआ मैं सोच रहा था की कैसे कुछ आदतें हमारे जीवन को बर्बाद जो कर देती है और हम उसे क्यो नही छोड़ पाते बस इसलिए क्योकि हममें वो इक्छा शक्ति नही होती,दो दिनों से मैं सिगरेट को हाथ नही लगा रहा था और उसके कारण किसी काम में मन नही जा रहा था ,लेकिन मैं सिख रहा था की आखिर उस खलिपन को कैसे भरे जो की सिगरेट ना पीने की वजह से हो गया था ,
“क्या देख रहे हो भइया पीना है तो पी भी लो हाथ में पकड़े हुए हो आधे घंटे हो गए “
पूर्वी मेरी गोद में आकर बैठ गई ,
“बस सोच रहा हु की ये एक छोटी सी चीज मुझे कितना कमजोर महसूस कराती है ,जब भी मैं सोचता हु की इसे नही पीना है तो मैं मन करता है की एक पी ले क्या होगा ,सोचो मैं अपने को कितना मजबूर पाता हु जब मेरे मन में ये उठता है की मैं इसे नही छोड़ पाऊंगा,नही पूर्वी मैं इतना कमजोर नही हो सकता की एक सिगरेट मुझे खुद को पीने में मजबूर कर दे ,अब तो बिल्कुल भी नही “
मैंने सिगरेट को तोड़कर फेक दिया ,सच में मन में एक मजबूती सी महसूस हुई
जीवन में अगर सबसे बड़ी कामयाबी अगर कुछ है तो वो है खुद पर काबू पा लेना…
अपनी मर्जी का जीवन जीना या ये कहे की अपने सभी कामनाओं को छोड़कर वो जीवन जीना जो की आपके लिए सही हो ,क्योकि कामनाएं तो गलत और सही दोनो की ही हो सकती है ,
पूर्वी खुसी में मेरे गाले से लग गई थी ,
मैं उसके बालो को सहला रहा था,
शबनम से बात करके आने के बाद से मुझे पता नही क्यो लेकिन ये जीवन बहुत ही खूबसूरत सा लग रहा था और मैं बस इसे भरपूर जीना चाहता था और इसके लिए सबसे पहला कदम मैंने सिगरेट और शराब से दूरी बनाकर लिया …
आगर शरीर अच्छा होगा तो ही मन शांत होगा और जब मन शांत होगा तो ही मैं इस जीवन को गहराई से जी पाऊंगा उसे गहराई से समझ सकूंगा ,
मैं जीवन के सबसे अहम चीजों को समझ और जान पाऊंगा ,
यही बात मेरे मन में घूम रही थी ,मैं पूर्वी के कोमल बदन को फील करने लगा,देखने लगा की आखिर मैं इस शरीर को लेकर हवस से क्यो भर गया था ,मैं उस हवस के कारण को जानना चाहता था मैं आंखे बंद किए उस सोर्स
को खोज रहा था जंहा से हवस की काम की उतपत्ति होती है ,एक धार सी शरीर में घूम रही थी जो की मेरे लिंग को कड़ा करने की कोशिस कर रही थी लेकिन मेरे जगे हुए होने के कारण वो उसे छू भी नही पा रही थी,वो मेरे लिंग के पास ही अटकी हुई थी ना ही कही और जा रही थी ना ही लिंग को अकड़ने दे रहा था,
मैं उस धार के साथ साथ ही रहा,वो मेरे पूरे शरीर में बट गया और मैं मेरा मन और शरीर उस कोमल शरीर को स्पर्श करने के बाद भी किसी भी तरह के भावना के आवेग से नही भरा,इसका मतलब ये नही की भावना से नही भरा असल में उसका आवेग नही था भावना तो थी,उसका अहसास भी था,उसकी गर्मी उसकी हल्की शुष्कता और उसका नरम त्वचा का अहसास भी हो रहा था,पसीने से भीगा होने के कारण आने वाली थोड़ी आद्रता का भी आभास था लेकिन आवेग नही था,मैं इस सत्य को समझ पा रहा था मैं इस तकनीक को समझ पा रहा था ,कैसे कोई संवेदना हमारे शरीर में उभरती है और हम बस उसके गुलाम बने हुए उसके पीछे भागने लगते है ,अगर हमे उसका मालिक होना है तो उस संवेदना को आने दो लेकिन बिना किसी प्रतिक्रिया के उसे जाने भी दो बस देखते रहो दृस्टा बने हुए ……..
और जब वो संवेदना खत्म हो जाए तो मन भर जाना है बस एक अजीब से अहसास से एक शांति से ,,,,मन बिल्कुल शांत ,,शरीर शांत ..
बस मैं ही होता हु शांत दृष्टा बना हुआ ……..
अध्याय 64
मैं और शबनम दोनो ही इस ख्याल में थे की आखिर इस कागज में लिखा क्या है ……
ये कोई कोड था जिसे तोड़ने की कोशिस में मेरा एक घण्टा निकल चुका था ..
आखिर थककर मैंने इसे छोड़ने की सोची और अपना लेपटॉप निकाल कर कुछ बिल का काम करने लगा,
मुझे कुछ टाइप करना था ,अचानक मेरा ध्यान फिर से उस कोड पर गया,
मैंने देखा की हर नंबर के आगे u m l लिखा हुआ है ,
u से अगर अपर हो ,m से मिडिल और l से लोवर तो अगर ये kyebord में जमे हुए अक्षरो के बारे में हो तो ..
मैं तुरंत फिर से उस कागज को खोलकर अपने सामने ले आया और उसे मिलाने लगा
l5 u9 m3 m9 u8
l7 m1 m6
u3
530
l5 मतलब अगर शुरू से गिना जाए तो लोवर रो का 5वा अक्षर मतलब b
u9 मतलब अपर रो का 9वा अक्षर मतलब o
मैं सभी को फिर के जमाते गया और मेरे सामने नया वाक्य बन गया जिसे देखकर मेरी आंखे ही चमक गई ,
bodli mhl e 530
बोदली महल मैं इस जगह को जानता था,या ये कहो की मैं यंहा ही पला बढ़ा था ,मैंने तुरंत ही शबनम को इस बारे में बतलाया की मुझे तुरंत ही निकलना होगा,क्योकि ये मेरे गांव से कुछ दूर एक खण्डर पड़े हुए जगह का नाम है ,बोदली महल और e 530 का मतलब हो सकता था की एविनिग के 5 बजकर 30 मिनट में …
शायद इसीलिए काजल अभी निकली थी क्योकि वो 4 बजे तक वँहा पहुच जाएगी …
मेरी धरती में ही कोई उसे कुछ राज बतलाना चाहता था और मुझे इसका आभास अभी हो रहा था,जरूर ये निशा से ही जुड़ा हुआ कोई तार था जिसको जानने के लिए काजल बेताब हो रही थी ,और अब मैं और शबनम भी ……..
मुझे तुरंत ही बोदली महल के लिए निकलना था और मैंने देरी करना जरूरी थी नही समझा,शबनम भी मेरे साथ जाने की जिद करने लगी लेकिन मैं उसे अपने साथ नही ले जाना चाहता था क्या पता की वँहा कौन सा नया खतरा मेरे सामने आ जाए …
मैं अब अपने घर के रास्ते में था ,वो घर जिससे मैंने अपना नाता पूरी तरह से ही तोड़ लिया था ना जाने कौन सी सच्चाई मेरे सामने आने वाली थी मैं बेताबी से गाड़ी चला रहा था ,मैं सालो बाद उस जगह में जा रहा था जंहा मैंने अपना बचपन गुजारा था ,मैं भविष्य की कल्पनाओं में डूबा हुआ बस बोदली महल की ओर गाड़ी को तेजी से भगा रहा था ……...
अध्याय 65
बोदली महल ,बस नाम का ही महल था ,वो किसी जमाने में रौनक हुआ करता था आजकल वँहा बस सन्नाटा पसरा रहता था ,आसपास के लोग तो वँहा जाने से भी डरा करते थे दिन के उजाले में भी लोग उधर फटकते नही थे,मैं यहां आता ही इसलिए था क्योकि मुझे यंहा शांति का आभास होता था,मैं कभी कभी अपनी बहन निशा को भी यंहा लाया करता था,यंहा एक कहानी प्रचलित थी की इसी महल में कभी राजा की बेटी को अपने एक नॉकर से प्यार हो गया था और इसलिए उस राजा ने उस नॉकर को दीवार में चुनवा दिया था,राजकुमारी ने ही यही अपनी जान दे दी,और तब से राजा साहब इस महल को छोड़कर चले गए…
कालांतर में लोगो में ये अफवाह गर्म हो गई की यंहा पर अब भी उन दोनो की आत्मा का राज है ,और इसलिए ये धीरे धीरे खण्डर में तब्दील हो गया ,
लेकिन मैं यंहा अपने पूरे बचपन आता रहा ,मेरा और निशा के लिए ये फेवरेट जगह में से एक थी क्योकि हमे यंहा कोई भी डिस्टर्ब नही करता था और ना ही कोई ढूंढने आता था,हम यंहा घंटो बैठे रहते और बाते करते रहते,मुझे लगता था की मैं ही इस पूरे महल का राजा हु,क्योकि महल भले ही खण्डर हो गया हो लेकिन यंहा के दीवारे अब भी वैभव की गाथा गया करते थे,इतनी नक्काशियां आज भी बड़ी ही मनोरम लगती थी ,
खैर बीती बातो को याद करने से क्या मिलेगा,लेकिन फिर मेरे दिमाग में अचानक से ये बात भी कौंध गई की आखिर बोदली महल ही क्यो???????????
कोई काजल को यंही क्यो बुलाना चाहता है जबकि ये जगह पहुचने में दुर्गम भी थी और साथ ही बहुत ही सुनसान भी ,वो भी शाम के 5 बजे जब की थोड़ी ही देर में सूरज भी ढल जाएगा …
मेरे जिस्म में एक सुरसुरी सी हुई ,आजतक मैं भी कभी वँहा पर देर शाम तक नही रुका था, वो निशा के बारे में जानकारी देना चाहता था,और जगह भी ऐसी ही चुनी थी जो की निशा की सबसे फेवरेट जगह में से एक थी ,मैं तो कालेज की पढ़ाई के लिए शहर आ गया था लेकिन तब भी निशा वँहा जाया करती थी ,फिर मैंने बैचलर कंप्लीट किया और फिर MBA करने लगा जंहा मेरी मुलाकात काजल से हुई ,अगर शबनम की बात सच थी तो काजल और निशा एक दूसरे को मेरे MBA में आने से पहले से ही जानते थे मलतब मेरे ग्रेजुएशन के समय से ,उस समय भी निशा बोदली महल जरूर आती रही होगी
,
मुझे याद है की जब मैं एक बार छुट्टियों में घर आया था तब निशा के साथ बोदली महल गया था और उसने मुझे ऐसे उसे घुमाया था की मुझे लगा की मैं यंहा पहली बार ही आया हु जबकि निशा यही रहती है ,तब उसने मुझे बताया था की उसे जब भी मेरी याद आती है वो वही आ जाया करती है और घंटो यही बिताया करती है ………..
मेरे दिल में वँहा जल्दी से जल्दी पहुचने की बेताबी बढ़ती जा रही थी ,मैं जानता था की आज मुझे कुछ खास सच का पता चलने वाला है ……….
अध्याय 66
वही सन्नाटा पसरा हुआ था जो की हमेशा से ही मुझे बोदली महल में महसूस होता था,जो पहले इतना सुहाना सा लगता था वो आज बहुत ही मनहूस और डरावना लग रहा था,
दिन ढलने को हो रहा था और शाम के 5 बज चुके थे,मैं वँहा से करीब 2 किलोमीटर की दूरी में अपने परिचित जगह में अपनी गाड़ी पार्क करके पैदल ही महल की तरफ निकल पड़ा था,मैं बहुत ही सतर्क था...मुझे पता था की काजल जरूर उस पगडंडी से वँहा पहुची होगी जो की कभी यंहा आने का एक मात्रा मार्ग था,मेरे लिए कोई कठिनाई नही थी लेकिन काजल के लिए जरूर ये कठिनाई पैदा करने वाला रहा होगा..
कुछ ही दूर तक गाड़ी वँहा आ सकती थी काजल ने वही अपनी गाड़ी खड़ी कर इधर का रुख किया होगा,
मैं दीवारों के सहारे से बहुत ही आहिस्ता से अंदर गया,मुझे बाहर ही काजल खड़ी हुई दिखी,मैं चुप चाप ही उसे देख रहा था,उसके चहरे में भी बेचैनी और डर साफ साफ दिखाई पड़ रहे थे,वो बार बार अपनी घड़ी की ओर देखती थी ,तभी किसी मोटरसाइकिल की आवाज आनी शुरू हुई ,वो जैसे जैसे पास आ रही थी वैसे वैसे ही हमारे दिल की धड़कने बढ़ रही थी ……..
कुछ ही देर में मुझे एक बुलेट में एक लंबा चौड़ा सा आदमी आता हुआ दिखा,उसके साथ ही पीछे की सीट में एक लड़की बैठी हुई थी ,दोनो को देखकर काजल के चहरे में थोड़ी शांति दिखाई दी …
लेकिन उस लड़के और लड़की को देखकर मेरा मुह सूखने लगा था ..
मैं दोनो को ही पहचानता था ,लड़की थी मेरी प्यारी बहन निशा और लड़का ..
लड़का था काजल के भाई वरुण का दोस्त सुशांत …
सुशांत के मैं अपनी शादी के दिन ही कोर्ट में मिला था(अपडेट 1) उसके बाद मैंने उसे कभी नही देखा था ,लेकिन मैं उसे पहचान गया …
दोनो के आते ही सुशांत आकर काजल के गले से लगा काजल ने भी हल्के से उसके पीठ को थपथपाया,लेकिन निशा और काजल के बीच कोई भी इंटरेक्शन अभी तक नही हुआ था ...निशा काजल को देखे बिना ही खण्डर के अंदर चली गई ..
“तुमने मुझे यंहा क्यो बुलाया ,इतने दूर हम बात तो वँहा भी कर सकते थे ना “
काजल ने सुशांत की ओर थोड़े गुस्से में देखा
“अरे दीदी,वो पता नही क्यो आपसे पहले से ही नाराज है और जब मैंने निशा से कहा की दीदी तुमसे बात करना चाहती है तो पहले तो वो भड़क गई फिर उसने कहा की ये लेटर उसे दे देना वो समझ जाएगी की कहा और कितने समय आना है ,मुझे भी कहा पता था की वो इतने दूर बुलाएगी …”
काजल ने एक गहरी सांस छोड़ी
“आप दोनो तो एक ही घर में रहते हो फिर भी बात नही कर पाते “
सुशांत ने स्वाभाविक सा सवाल किया
“नही पता ये अब क्यो मुझसे गुस्सा हुई बैठी है ,मेरी तो बात ही नही सुनती इसलिए तुझे कहने को कहा “
“अच्छा चलो ठिक है अब अंदर चलते है “
दोनो अंदर चले गए मैं भी पीछे के रास्ते से अंदर पहुचा,जैसा की मैंने पहले भी कहा था की यंहा मैं सालो से आता रहा हु इसलिए मैं इस जगह के चप्पे चप्पे से परिचित था …
मैं एक कोने में छुपकर सभी को देख पा रहा था ,निशा बड़े ही तल्लीनता से सभी नक्काशियों को देख रही थी जो की वक्त की धुंध से बोझिल हो गए थे ..
वो एक दीवार को फूक मारकर साफ करती है और वँहा पर पत्थर से उकेरा गया एक दिल का निशान साफ हो जाता है ,जिसमे निशा और देव लिखा था …
मैंने उसे पहले भी देखा था लेकिन उस समय मुझे नही पता था की मेरे बहन के दिल में मेरे लिए ऐसा प्यार पल रहा है..
निशा पलटी तो सामने काजल और सुशांत थे …
“तुम बाहर जाओ मुझे इनसे अकेले में बात करनी है “
सुशांत बिना कुछ कहे ही बाहर चला गया ..
“जानती को काजल मैंने तुम्हे यंहा क्यो बुलाया है “
निशा के मुह से काजल सुनकर मुझे अजीब लगा क्योकि मुझे इसकी आदत नही थी मैंने अभी तक निशा के मुह से काजल के लिए बस भाभी ही सुना था ..
“बताओ “काजल ने एक सपाट जवाब दिया
“क्योकि यंहा से मेरी बहुत ही यादे जुड़ी हुई है जो मैं आज तुमसे शेयर करना चाहती हु,माना की तुम मुझसे बात करना चाहती थी लेकिन पहले मेरी बात सुन लो तो बेहतर होगा “
निशा शांत थी और साथ ही काजल भी
“ह्म्म्म “काजल बस इतना ही बोल पाई
“इतना तो तुम्हे पता ही होगा की मैं और भइया यंहा अक्सर आया करते थे ,यही मेरे दिल में भाई के लिए ऐसा प्यार पनपा जो भाई बहन के प्यार से अलग ही कुछ था “
“हम्म्म्म”
“मुझे ये जगह बहुत ही पसंद थी ,क्योकि भइया को ये जगह बहुत पसंद थी ,और इसलिए भी क्योकि यही तो जगह थी जंहा मैं उनके साथ बिल्कुल ही अकेले होती थी,हमारे बीच कोई भी नही आता था,काश मैं उस समय ही भाई से अपने प्यार का इजहार कर लेती तो शायद हमे ये दिन नही देखना पड़ता...
शायद मैं कभी बहकी ही ना होती ,शायद मैं उस रास्ते जाती ही नही जिसने भाई के नजरो में मुझे गिरा दिया …”
निशा ने एक गहरी सांस ली
“वो आज भी तुमसे बहुत प्यार करते है निशा “
निशा के चहरे में एक फीकी सी मुस्कान आ गई
“हा मेरी हर गलतियों के बावजूद वो मुझसे बहुत प्यार करते है ,जैसे तुमसे करते है ,जबकि वो जानते है की हम दोनो ही रंडिया है …”
निशा के मुख से निकली बात ने काजल को चुप करा दिया था…….वो कुछ भी नही बोल पाई
“जब भइया कालेज की पढ़ाई के लिए शहर गए तब मैं बिल्कुल ही अकेली हो गई थी काजल,और यंहा मैं घंटो बैठी रहती थी ,उस समय पूर्वी बिल्कुल ही बच्ची थी की मैं उससे अपने दिल की बात शेयर कर सकू ,उसी समय मेरे स्कूल के कुछ लड़के जो की स्कूल से भाग कर यंहा आकर सिगरेट दारू या गंजा पिया करते थे ,उनसे मेरी दोस्ती हो गई ,वो यंहा आया करते थे लेकिन मैंने कभी किसी से नही कहा की वो यंहा आकर क्या करते है ,वो लोग मेरे अकेलेपन के साथी बने ,लेकिन मुझे इसकी एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ गई ...अपने जिस्म की ..
जवानी के जोश में मैं उन लड़को के साथ इन्वाल्व हो गई लेकिन मुझे नही पता था की ये मेरी आदत बन जाएगी ,मैं नई नई जवान हुई थी और इस शराब गंजे के नशे में गिरफ्त होने लगी थी ,लड़के भी बेचारे आखिर कब तक एक जवान लड़की के साथ रह कर भी चुप रह पाते ,लेकिन फिर भी कोई भी मुझे हाथ लगाने से पहले सोचता जरूर था ,वक्त ने उनकी झिझक खत्म कर दी और मैंने भी अपनी जवानी के मजे उठाने की सोची ..
फिर भी मैं एक रांड नही बनी थी ,जबतक की मैं अजीम से नही मिली जो की उन लड़को में से एक को जानता था ,लड़के उसे अजीम भाईजान कहा करते थे ,वो एक डॉन की तरह था और सभी उससे डरते थे ,उसे भी नई जवानी चखने का शौक था और जब उसने मेरे दोस्तो के साथ मुझे देखा तो बस देखता ही रह गया,मुझे अब नया नशा लगा पॉवर का और मैं अजीम की गर्लफ्रैंड बन गई ,मुझमें इतनी समझ नही थी की मैं क्या कर रही हु ,असल में मुझे मजा आता था जब सभी लड़के जो की मेरे साथ बैठा करते थे अब मुझसे डरकर बात करते थे ,जब तक मैं नही कहती कोई मुझे छूने की हिम्मत भी नही करता था ,मेरे दिन अच्छे चल रहे थे जबतक की मेरी जिंदगी में तुम नही आयी …”
काजल उसके बातो को सुन रही थी ,जैसे उसे सब कुछ पहले से ही पता हो
“याद है तुम उस समय नई नई कालेज खत्म करके भइया के साथ MBA आयी थी और पूरे कालेज तुम अजीम के पास आने की कोशिस करती रही थी लेकिन डरते हुए ,मैं तुम्हे देखा करती थी की तुम उसके आसपास ही उसपर नजर रखे हुए हो लेकिन उससे मिलकर बात नही कर पाती हो “
“हा मुझे याद है मैंने तुम्हारे दोस्तो के गैंग में सुशांत को भी शामिल करवा दिया था ताकि वो अजीम के आसपास ही रहे ,लेकिन तुम्हे पता चल गया था की कुछ गड़बड़ है “
“हा मुझे पता चल गया था और साथ ही लेकिन 3 सालो तक तुम बस वैट ही करती रही किसी सही मौके का,तुम्हे तो ये भी नही पता था काजल की तुम्हे करना क्या है ...लेकिन जब तुम्हे पता चला की मैं देव की बहन हु वो देव जो तुम्हारे साथ पढ़ता है तब तुमने मेरे पास जाने के लिए मेरे भाई से ही दोस्ती कर ली ...वाह “
काजल की नजर नीची हो गई थी मानो वो इस बात से ग्लानि महसूस कर रही हो
“जब मुझे लगा की भइया भी तुम्हारे साथ खुस है और वो तुम्हे पसंद करने लगे है तो मुझे बहुत धक्का लगा ,लेकिन फिर मेरे दिल में भी आया की क्यो ना तुमसे एक डील की जाय ,और मैंने तुमसे बात की ,तुमने क्या कहा था काजल की देव से मुझे प्यार नही है ..ऐसा ही कुछ क्या था वो ..”
निशा के चहरे में एक जहरीली सी मुस्कान खिल गई थी ,और काजल जैसे जल रही हो ,पसीने से भीगी हुई सर नीचे किये बस खड़ी रही थी
“मेरे दिमाग में उस समय बस खान से बदला लेने की बात ही थी निशा ,और जब तुमने कहा की तुम्हे तुम्हारे भइया चाहिए बदले में तुम मेरी मदद करोगी अजीम के गढ़ में घुसने में और मेरा बदला पूरा करने में तो इससे अच्छी डील मेरे लिए कुछ नही हो सकती ही ,उस समय मैं देव से प्यार नही करती थी लेकिन …”
“लेकिन क्या ……”
निशा चिल्ला उठी
“मैंने तो सोचा था की ये करने से अजीम को एक नया खिलौना मिल जाएगा और वो मुझे भूल जाएगा,अजीम से पीछा भी छूट जाएगा और मेरे भइया भी मुझे मिल जाएंगे लेकिन तुमने क्या किया ….भइया तुम्हारे प्यार में गिरफ्तार होने लगे और तुमसे शादी भी करने की सोच ली और तुमने मुझे धोखा दे दिया ..
”
“नही निशा मैं सच में देव से प्यार करने लगी थी ,मैं उससे अलग नही रह सकती थी ,”
“अजीम की रंडी बनने के बाद भी भाई से तुम कैसे प्यार कर सकती थी काजल “
निशा की आवाज में बौखलाहट थी
“जैसे तुमने किया है ,तूम भी तो कई मर्दों के साथ सोई हो निशा लेकिन सच बताओ की क्या तुमने देव के अलावा किसी और से प्यार किया है “
दोनो ही चुप थे जैसे कुछ सोच रहे हो…
“तुम्हे अजीम की जिंदगी में मेरी जगह ले ली और साथ ही भइया से भी शादी कर लिया ,तुमने अजीम के जीवन से रश्मि को भी निकाल फेका जो की मैं भी नही कर पाई ,मैं मानती हु की तुम मुझसे कही ज्यादा खूबसूरत हो लेकिन तुम्हे ये सब मैंने ही तो सिखाया था ,मैंने ही तो बतलाया था की तुम्हे क्या करना चाहिए कैसे करना चाहिए …”
काजल चुप थी
“तुम्हे तो सब मिल गया काजल लेकिन मुझे क्या मिला ??”
निशा रो पड़ी थी
“नही निशा मेरी बात सुनो “काजल उसके पास जाने को हुई लेकिन निशा ने तुरंत ही अपने जेब से एक पिस्तौल निकाल ली
“रुक जाओ काजल बहुत हुआ अब और नही अब या तो तुम रहोगी या मैं “
काजल के साथ साथ मेरे भी प्राण मानो उड़ गए थे
“माना मैं थोड़ी बहक गई थी ,माना की मैंने गलतियां की है लेकिन मेरा भाई आज भी मुझे प्यार करता है ,मैंने तो उसके सामने अपनी प्यारी बहन पूर्वी को भी कुछ नही समझा तू क्या चीज है ,तुझे तो पहले ही मार देना था लेकिन ये जगह सबसे सही है ,यही से मेरा प्यार शुरू हुआ था “
निशा के चहरे में आने वाला बदलाव मुझे डरा गया था ,हम दोनो ही जम चुके थे ,उसके चहरे में वो पागलपन फिर से आने लगा था जिसे मैं पहले भी देख चुका था ,,
“अब और नही काजल “
“निशा रुको “
मैं और सुशांत दोनो ही एक साथ काजल को बचने के लिए भागे लेकिन
‘धाय धाय ‘ दो गोलियां निशा की पिस्तौल से चल चुकी थी और सीधे जाकर सुशांत के कंधे में छेद कर गई …
जो की काजल को बचने के लिए कूदा था ,निशा और भी कुछ करती उससे पहले उसने मुझे देख लिया था जो की एक टूटे हुए दीवार से कूदकर वँहा आ गया था ,निशा का मुह बस खुला का खुला रह गया और वो पिस्तौल को वही छोड़ते हुए भागने लगी,
“निशा रुको ...निशा रुको तो सही “
वो भागते हुए झड़ियो में ना जाने कहा गुम हो गई मैं उसके पीछे भागता रहा लेकिन मैं उसे ढूंढ ही नही पाया …
मैं जब वापस आया तो सुशांत की हालत बहुत ही खराब लग रही थी मैं जल्दी से उसे उसकी ही गाड़ी में बैठकर काजल की गाड़ी की तरफ भागा,काजल ने मुझसे एक भी शब्द नही कहा ना ही मैंने उसे कुछ कहा …
हम दोनो ही चुप थे शांत थे …..
काजल ने सुशांत को गाड़ी में बिठाया और पास के ही हॉस्पिटल की तरफ निकल गई …
अध्याय 67
हॉस्पिटल में मैं और काजल दोनो ही शांत बैठे हुए थे ,ना ही मेरे पास कुछ कहने को था ना ही काजल के पास ,सुशांत ठीक था और उसे वही के एम्बुलेंस में बैठा कर शहर भेज दिया गया था ,मेरे और काजल के बीच कोई भी बातचीत नही हुई थी जबकि निशा के ऊपर केस नही किया गया,लेकिन पुलिस से उसे ढूंढने की बात जरूर कह दी गई थी,काजल ने इसके लिए कुछ बड़े अधिकारियों से बात की थी,और मामला वही दब गया था,साथ ही सुशांत ने भी इस मामले में निशा के पक्ष में ही बयान दिया था,
लेकिन काजल और मेरे बीच की बातचीत पूरी तरह से बंद हो चूकी थी ,निशा की तलास जारी थी लेकिन उसका कही कोई आता पता नही चल पा रहा था,काजल भी अब घर नही आती थी ,और मैं भी अब उसे घर आने को नही कहता ,...
सब कुछ अचानक से ही बहुत शांत हो चला था ,ना जाने निशा कहा थी,पोलिस के अलावा मैं भी उसे ढूंढने की भरपूर कोशिस में जुटा हुआ था ,लेकिन दो महीने खत्म हो चुके थे और मैं और पुलिस दोनो ही शांत हो चुके थे …
इन सब में पूर्वी अकेली हो गई थी ,मैं अपने काम में चला जाता और काजल तो घर में थी ही नही ,शाम जब आता तो काम से और जीवन में आये हुए इन झमेलों से परेशान हो चुका होता,पूर्वी बेचारी करती भी क्या,लेकिन फिर भी हम दोनो ही एक दूसरे का सहारा थे..
पूर्वी ने एक दो बार काजल से मिलकर उसे समझने की भी कोशिस की और उसे घर लाने की कोशिस की लेकिन वो अपने को मेरा गुनहगार मानती थी और मेरे सामने नही आना चाहती थी मैं भी उसे वापस लाना नही चाहता था जबकि निशा के साथ ये हादसा हो गया था ,सच कहु तो सबसे दूर होकर ही मैं खुस था और इस जॉब को छोड़कर पूर्वी के साथ दूसरे शहर जाने का प्लान बना लिया था ,मैं चैन का जीवन बिताना चाहता था उससे भी ज्यादा अपनी बहन को एक सुरक्षित जिंदगी देना चाहता था,मैंने शबनम और रश्मि के लाख मना करने के बाद भी अपने जॉब से रिजाइन कर दिया और वँहा से 80 किलो मीटर दूर दूसरे शहर में एक छोटे से होटल में मैनेजर की नॉकरी जॉइन कर ली ,साथ ही अपने घर में ताला लगा कर मैं चुपचाप ही इन सबसे दूर दूसरे शहर में चला गया ………………..
मैंने अपना नंबर भी बदल दिया था ,साथ ही किसी से ये भी नही कहा था की मैं कहा जा रहा हु ...
पूर्वी और मैं बस एक दूसरे के लिए ही रह गए थे ,जीवन में हमारा एक दूसरे के सिवा और कोई नही बचा था,कभी कभी वो रोती तो मैं उसे सहारा दे देता कभी मैं रोता तो वो मुझे सहारा दे देती ,लेकिन फिर भी हम अच्छे थे ,15 दिन और बीत गए ,और सब कुछ बहुत हद तक ठीक होने लगा था लेकिन ……
उस दिन के अखबार में मुझे चौका दिया जब सुबह की न्यूज थी ,...
‘मशहूर कपूर होटल के मालिक मिस्टर कपूर की हत्या ,हत्या का शक उसकी बेटी रश्मि पर ,रश्मि अभी फरार है और पुलिस को उसकी तलास है ,हत्या की वजह ये बताई जा रही है की रश्मि को शक था की मिस्टर कपूर ने ही उनकी माँ की हत्या जायदाद के लालच में आकर की है …
बता दे की रश्मि कपूर साहब की सौतेली बेटी थी ,इसके साथ ही उन्हें लेकर और भी खुलासे हो रहे है,कहा जा रहा है की कपूर साहब का असली नाम रॉकी है जो कभी होटल आदित्य में मैंनेजर हुआ करता था और सालो से अपनी पत्नी नेहा के मर्डर के आरोप में फरार था ,उसने कपूर होटल के मालिक को फंसा कर उनकी बेटी से शादी की थी जिनकी पहले से एक बेटी रश्मि भी थी ……’
खबर पढ़ते ही मैं चौक कर उठा ,पूर्वी मेरे चहरे का भाव समझ चुकी थी,
“पूर्वी तुम्हारा फोन जो की हमने बंद करके रख दिया था जरा देना तो “
पूर्वी के चहरे में थोड़े आश्चर्य के बाद थोड़ी मुस्कान भी आ गई
“क्या हम फिर से वापस जा रहे है “
“पता नही लेकिन मुझे कुछ फोन करने है “
पूर्वी खुसी खुशी अपना फोन लेने चली गई …..
______________________________
आध्याय 68
“हैल्लो मैं बोल रहा हु “
“कहा हो तुम इतने दिनों के बाद याद आयी पता है की सब कितना परेशान थे “
“क्या हो रहा है वँहा ये क्या पढ़ने को मिल रहा है “
“सब निधि का किया कराया है “
निधि का नाम सुनकर ही मैं बेचैन हो गया ,तो वो रश्मि से मिली थी ..
“या किया निधि ने “
मेरी बात पर शबनम थोड़ी देर तक चुप ही रही
“पता नही शायद उसे सच्चाई बता दी ,बस इतना ही काफी था बाकी का काम तो खुद रश्मि ने अपने हाथो से कर दिया “
शबनम की बात सुनकर मैं चौक गया मुझे भी तक यकीन नही हो रहा था की रश्मि ने ही कपूर को मारा है ..
“क्या सच में रश्मि ने ही …”
“हा रश्मि ने ही,अपनी माँ की मौत का बदला उसे अपने हाथो से लेना था लेकिन फिक्र मत करो ,कोर्ट में कुछ भी साबित नही हो पायेगा,वो आसानी से छूट जाएगी “
हा हमारी अदालतों में गवाहों और सबूतों को तोडना मरोड़ना कोई बड़ा काम तो नही था ,रश्मि भी बच ही जाएगी ऐसे भी उसने कौन से मासूम इंसान की हत्या की थी,जिसकी हत्या की गई वो भी एक गुनहगार ही था ,
“लेकिन उसे इतनी आसान मौत मिली शायद काजल को ये पसंद नही आया होगा”
शबनम ने मेरे मुह से काजल का नाम सुनकर थोड़ी हँसी बिखेर दी
“काजल का नशा अब भी तुम्हारे सर चढ़ा हुआ है देव “
“हम्म अब ये नशा है या आदत मुझे नही पता लेकिन हा रोज ही काजल और निशा की याद आया करती है “
थोड़ी देर तक कोई भी कुछ नही कह पाया
“कहा हो तुम “
“सोच रहा हु की वापस आ जाऊ ,निशा सही सलामत है ये सुनकर थोड़ी तसल्ली हुई लेकिन उससे मिलना चाहता हु “
“वो अभी रश्मि के साथ ही गायब है,दोनो का ही कोई अता पता नही चल रहा …”
“ह्म्म्म और काजल कैसी है “
ना चाहते हुए भी मेरे मुह से काजल का नाम निकल ही गया था
“ओह ये प्यार ,इतना ठोकर खाकर भी फिर से सर उसके पैरो में रखना चाहते हो ताकि फिर से तुम्हे ठोकर मार दे “
थोड़ा व्यंग थोड़ा अपनापन और थोड़ी खुसी सभी कुछ तो था शबनम की बात में
“यही समझ लो ,जब सर ओखली में दे ही दिया है तो फिर अंजाम से क्या डरना ,”
मैं थोड़े हल्के मूड में बोला
“ह्म्म्म बात तो सही है ,लेकिन काजल मेडम तो आजकल पूरी तरह से बस अपने काम में ही लगी हुई है ,ना जाने कौन सी रात अजीम ठाकुर और खान की आखिरी रात साबित होगी ,खासकर कपूर के मरने के बाद तो वो और भी देर नही करना चाहती ,क्योकि राज खुलने लगे है और पुलिस कपूर उर्फ रॉकी की हिस्ट्री खोजने में लगी हुई है ,काजल भी अपना काम जल्दी से खत्म कर तुम्हारे तरह ही चैन की जिंदगी बिताना चाहती है “
“चैन की जिंदगी ..
??????
अपनो के बिना कही कोई जिंदगी चैन की होती है शबनम ?/
मेरी बहन मेरे पास नही है ,मेरा प्यार मेरे पास नही है तो ये जिंदगी चैन की कैसे हो गई,मैं अपने दोस्तो से अपने शहर से अलग होकर रह रहा हु ,मैं ये बोलना तो नही चाहता था लकिन हा जबसे आया हु लगता है की पल पल भारी है ,पता नही वो दोनो किस तकलीफ से गुजर रहे होंगे और मैं सब छोड़कर भाग आया हु …”
“ये लड़ाई तुम्हारी थी ही नही देव तुम आखिर कर भी क्या सकते हो ,इस हालात को बनाने वालो को ही इसे भुगतना होगा ,तुम या मैं चाहकर भी कुछ नही कर सकते “
कुछ देर तक हम दोनो में से किसी ने कुछ नही कहा …
“हा शबनम लेकिन मैं अब यंहा नही रहना चाहता “
“तो आ जाओ ,होटल में रहो ,मैं भी तो अकेली हो गई हु ,मुझे और इस होटल को तुम्हारी जरूरत है …”
कहते है ना की नशेड़ी को नशे का बहाना चाहिए…
मुझे भी काजल और निशा के नाम का नशा लगा हुआ था और मुझे बहाना मिल गया था ………
**************
होटल का माहौल बिल्कुल ही बदला हुआ था यंहा कस्टमर कम और पोलिश वाले ज्यादा दिखाई दे रहे थे,मेरे आने के बाद मेरा भी बयान लिया गया ,और मेरे ही कहने पर होटल की निगरानी पर बस कुछ सादे कपड़े में पोलिश वाले नियुक्त किये गए ,ताकि होतल में आने वाले कस्टमर को कोई परेशानी ना हो और पोलिस की तहकीकात में भी कोई बाधा ना पड़े …
शबनम बहुत ही खुश थी और पूर्वी भी लेकिन मेरे मन में कई संशय उमड़ रहे थे …
*****************
मुझे आये एक ही दिन हुआ था और मैं अभी अपने होटल में ही था की मुझे कुछ पोलिश वालो के साथ इंस्पेक्टर ठाकुर भी आता हुआ दिखाई दिया ,मुझे देखकर उसके चहरे की चमक बढ़ गई ,वो मेरे पास आया …
“ओह देव तुम आखिर आ ही गए “
मैंने हल्के से सर हिलाया
“ऐसे काजल कह ही रही थी की तुम ज्यादा दिनों तक यंहा से देर नही रह पाओगे “
उसकी बात से मेरा खून ही जल गया ,उसके होठो में एक चिढ़ाने वाली मुस्कान थी
“चौक क्यो गए मुझे पता चल गया है की तुम काजल के पति देव हो ..वाह देखो ना पति देव जी देव जी ..हा हा हा “
वो इतनी गंदी हँसी हंसा की लगा की उसका जबड़ा ही निकाल लू ,मेरी मुठ्ठियां भिच गई थी ,जिसे देखकर वो फिर से एक कमीनी मुस्कान में मुस्काया
“देव बाबू जब पत्नी ही बेवफाई कर दे तो मुठ्ठी भिच कर क्या करोगे ..
”
वो मेरे कानो के पास आय और फुसफुसाया
“ऐसे सच बताऊँ मखमल है तुम्हारी बीवी ,साली को जितना भी रगड़ो कम ही लगता है “
उसकी बाते जैसे मेरे कानो में पिघले हुए लोहे की तरह उतर रही थी
“मादरचोद “
मैं पलटा और उसके कॉलर को पकड़ कर खड़ा हो गया ,लेकिन तुरंत ही कुछ पोलिश वाले मेरे हरकत को देख वहां आकर हमे घेर कर खड़े हो गए
ठाकुर फिर से कमीनेपन से मुकुराय
“अपना गुस्सा सम्हाल कर रखो देव और मेरे रिश्ते में आने की सोचना ही मत वरना जो दो पैरो पर सही सलामत खड़े हो वो भी नही रह पाओगे “
वो मेरा हाथ अपने कॉलर से झटक कर हटा दिया और वँहा से चले गया ,मैं ठगा सा बस उसे देख रहा था ,गुस्से की आग ने मुझे जला रखा था पर इतनी हिम्मत भी नही रह गई थी की मैं उसका मुह तोड़ दु ………..
अध्याय 68
“हैल्लो साहब कहा हो आप दिखाई ही नही देते “
हरिया की आवाज में एक अजीब सी बात थी जो मैंने कभी नही देखी थी पता नही क्यो मुझे उसे काल करने का मन हुआ था …
“बस शहर में नही था “
“उस दिन तो आप इतने नशे में थे की आप अनब सनब बोले जा रहे थे ,क्या सच में काजल मेडम आपकी बीवी है “
काजल मेडम ,साला जो अभी तक काजल को बस रंडी कहा करता था आज वो काजल मेडम कह रहा था ..
“क्यो पूछ रहे हो “
“अपने ही नशे में बतलाया था ऐसे एक बात बता दु की वो आजकल ठाकुर के साथ यही रहती है ,इसी फॉर्महाउस में “
मैं कुछ भी नही बोला
“कोई हुक्म हो तो बताइए सरकार “
वो फिर से बोल पड़ा
“कुछ नही “
“तो कभी आइए अगर आप कहे तो इंतजाम करदु कुछ अंदर की चीज देखने या सुनने का “
“नही जरूरत नही है “
मैं थोड़ा चिढ़ गया था
“हजूर ये अजीब सा नशा है एक बार लग गया तो फिर जाता नही है ,आ जाइये आप मैं बंदोबस्त कर दूंगा “
इतना बोल कर उसने फोन रख दिया मैं अपने ही सोच में पड़ा हुआ था ,क्या सच में ये नशा ही अपनी बीवी को किसी और के साथ देखने का नशा …………
**********************
शाम रात की शक्ल ले रही थी और मैं गार्डन में हेडफोन लगाए हुए इंतजार कर रहा था,मेरी निगाहे उसी बेडरूम में टिकी हुई थी जंहा उस दिन थी ,काजल अभी अभी अपने काम से आकर कपड़े चेंजे करने बाथरूम में घुसी थी और ठाकुर हाल में शराब की चुस्कियां भर रहा था ,थोड़ी देर में वो भी लड़खड़ाता हुआ अंदर आया ,दोनो किसी पति पत्नी की तरह यंहा रहे थे ,मैं रोना चाहता था लेकिन अपने को अपनी ही नजर में गिरने नही देना चाहता था ,वो अलग बात थी की मैं पहले से ही अपनी नामर्दी के कारण अपनी नजर में गिर चुका था ,
काजल जैसे ही बाहर आयी ठाकुर ने उसे जकड़ लिया और उसके गले को चूमने लगा ,वो हँस रही थी ,और अपने को छुड़ाने की हल्की कोशिस कर रही थी जिसका कोई भी मतलब नही होता ..
उसके बदन में सिर्फ वो टॉवेल थी जो की अब पता नही कब उसके बदन से सरक जाए ,उसका दूध सा गोरा जिस्म उस दूधिया प्रकाश में चमक रहा था ,और शायद ठाकुर को काजल के बदन से वो खुशबू भी आ रही होगी जो की काजल के बदन से नहाने के बाद आया करती है ,उसके बाल फैले हुए थे और टॉवेल के छोरो से उसकी जांघ झांकने लगी थी ,ठाकुर का हाथ उसके जांघो को सहलाता हुआ उसके जांघो के बीच चला गया था और काजल किसी वैश्या की तरह हँस पड़ी थी ,उसके योनि के बाल साफ नजर आ रहे थे जो की छोटे छोटे तराशे गए थे और अभी ठाकुर की उंगलियों में नाच रहे थे ,
कुछ पानी की बूंदे भी योनि के उन बालो में चमक रही थी ,मैं देख रहा की कैसे ठाकुर ने मेरी बीवी के योनि में अपनी एक उंगली घुसा दी और काजल फिर से उचकी उसके मुह से मजे से लिपटी हुई सिसकारी निकली थी …
ठाकुर ,जो की काजल की मा की हत्या का दोषी था ,कैसे काजल उसके साथ भी ऐसे मजे ले सकती थी ,हा अब ये कहते हुए मुझे जरा भी संकोच नही की वो एक रंडी है ,उसने ऐसे ही मजे अजीम और खान के साथ भी लिया होगा..
मेरे लिए इतना ही देखना दिल को तोड़ने के लिए काफी था मैं पलटा और बाहर आने लगा मैंने देखा की हरिया अपना मोबाइल निकाल कर किसी के काल कर रहा है उसकी निगाहे मेरी ओर ही थी ,
वो मुझे देखकर मुस्कुराया था ,
मैं जल्दी से बाहर आने वाला था लेकिन कुछ गार्ड आकर मुझे पकड़ लिए ,
मैं हरिया को आश्चर्य से दिखने लगा उसके होठो की मुस्कान और भी फैल गई थी ..
“आज तो आपको जाने नही दे सकता साहब “
“क्या हुआ हरिया “
“थोड़ी देर में पता चल जाएगा “
तभी बंगले से ठाकुर बाहर आया उसे देखकर मानो मेरा ख़ून ही सुख गया था
उसके चहरे में वही कमीने वाली चमक थी
“तो अपनी बीवी को चुदवाते हुए देखने आया है ,भाग क्यो रहा है पूरा देख ले और हिला ले जैसे उस दिन हिलाया था ,सॉरी आज तेरे लिए तेरी बहन नही है जिसे तू चोद सके “
ठाकुर बोलकर जोरो से हंसा और मैं कांप गया था…
मैंने हरिया की ओर देखा
“साहब बोलो तो अपनी बीवी को भेज दु ,तुम्हारी बहन की जगह उसे चोद लेना “
वँहा खड़े गार्ड के साथ साथ ठाकुर भी हँसने लगा ..
मेरे सामने पूरा मजरा साफ था बस ये पता नही था की इन सबका पता काजल को है की नही …
“तेरी बीवी बहुत कामल की चीज है देव सोचती है की मुझे और खान को तुड़वा देगी ,इतने दिनों की दोस्ती को तुड़वा देगी ,लेकिन उसका प्लान सच में बहुत अच्छा है ,खान की दोस्ती में मुझे ऐसे भी कुछ नही मिला था ,इसलिए मैं उसके साथ हु ,लेकिन उस बेचारी को ये नही पता की मैं उसपर कितनी नजर रखे हुए हु ...और उसकी मखमल चुद को चोदने का नशा भी ऐसा है की छूटता नही …”
वो जोरो से हँसा मैं गुस्से से भर कर उसे मारने को हुआ ही था की मेरे सर पर एक जोर की चोट लगी और मैं बेहोश होता गया …………...
अध्याय 69
मेरी आंख खुली तो मैं एक काल कोठारी की तरह के कमरे में था ,सामने एक बड़ा सा कांच लगा हुआ था जिसके पार वही बेडरूम था जिसे देखने के लिए मैं उस छोटे से झरोखे का इस्तेमाल किया करता था,वो दीवाल नुमा कांच था शायद एक तरफा कांच रहा हो जिससे मैं तो उधर देख पाऊ लेकिन मुझे और इस कमरे को कोई देख नही पाए ,कमरे की छोटी छोटी आवाज भी मेरे कानो में पड़ रही थी लगा की कोई स्पीकर फिट कर दिया गया हो ,मेरे कमरे में बहुत ही अंधेरा था इतना की मुझे मेरा हाथ भी नही दिखाई दे रहा था ,उधर से आने वाला प्रकाश भी छन कर ही आ रहा था जिससे थोड़ी रोशनी समय के साथ मेरे आंखों ने अनुभव की थी ,
मैं जब थोड़ा हिलने को हुआ तब मुझे मालूम हुआ की मेरे हाथ बंधे हुए है और साथ ही मेरा मुह भी मुझे एक कुर्सी में बांध दिया गया था ,मैं इतना बेसहारा था की ठिक से हिल भी नही पा रहा था,
ना जाने मैं कब तक बेहोश रहा था ,जब मैंने आगे देखा तो मुझे बिस्तर में काजल और ठाकुर नंगे लेटे हुए दिखाई दिए थे ,मैं टूट गया और रोने लगा लेकिन यंहा मेरी आवाज सुनने वाला कौन था ,मुह में कपड़ा घुसा दिया गया था मैं ठीक से रो भी तो नही पा रहा था ,
काजल के नंगे जिस्म को ठाकुर जकड़े हुए सो रहा था ,और काजल का हाथ भी ठाकुर के कंधे में थी ,स्वाभाविक है की मेरी बेहोशी में ही उन्होंने हवस का खेल खेल लिया था,
ठाकुर को काजल की मुलायम मखमली चुद पसंद थी …
वो उसके नशे में है …
ये सोचकर ही मुझे काजल और ठाकुर से घृणा आने लगी थी..
ना जाने वो कब तक ऐसे ही सोते रहे ,मेरा जागना और सोना दोनो ही बेमतलब था,
फिर भी मेरे लिए सो जाना ही आराम का एक मात्रा रास्ता बचा था …
**************
मेरी नींद खुली काजल के गुनगुनाने की आवाज काजल मेरे ठीक सामने खड़ी होकर अपने बालो से खेल रही थी,असल में वो उस आदमकद कांच के सामने थी जिसके पीछे मैं था ,उसके चहरे से तो यही लग रहा था की वो इस बात से बेखबर है ,लेकिन मैं उसके नंगे जिस्म को देख पा रहा था ,वो अपने पेट में पड़े हुए उस दांत के निशान को देखती है जिसे शायद आज के हवस के खेल में ठाकुर ने उसे दिया था ,वो अब भी लाल और ताजा था ,वो थोड़ी डर होकर पास ड्रेसिंग से एक क्रीम ले आयी और फिर से उसे मेरे सामने ही लगाने लगी ,
तभी ठाकुर भी आ चुका था ,उसका काला लिंग किसी सांप की तरह उसके जांघो के बीच लटक रहा था और वो आकर काजल को पीछे से पकड़ कर उसकी योनि को सहलाने लगा ,
“रात भर तो इसे रगड़ लिए हो फिर से खेल रहे हो इससे “
काजल ने हल्के से हंसते हुए कहा,
ठाकुर दर्पण से ऐसे देखा जैसे मेरी आंखों में ही देख रहा हो,उसके होठो में एक बहुत ही कमीनी सी मुस्कान थी ,उसने अपनी उंगली उसकी योनि में घुसा दी …
“अरे जानेमन ये तो मख्खन है जितना भी घुसाओ साला फिर से टाइट हो जाता है,इतना नरम और गर्म तो मैंने आजतक किसी का नही देखा “
वो बड़े ही अदा से उसकी योनि को सहला रहा था ,काजल के होठो ने भी सिसकियां छोड़ दी ,उसकी आंखे बंद हो गई थी ,लेकिन ठाकुर मेरे आंखों में देखने लगा और उसके होठो की मुस्कान बहुत ही गहरी थी ..
“पता नही तेरा पति कैसा चुतिया है जो इस मखमली चुद को छोड़कर दुसरो के पीछे पड़ा हुआ है ..”
मैं शर्म से पानी पानी हो रहा था
लेकिन उसकी इस बात से काजल में तुरतं ही फर्क आया
वो उससे अलग हो गई
“कितनी बार कहा की उस चूतिए का नाम लेकर मेरा मूड खराब मत किया करो साले तो अपनी बहन चोदनी है उसे साथ लेकर भाग गया साला नामर्द ,हरिया ने बताया था ना की कैसे मुझे तुम्हारे साथ देखकर साला अपनी बहन के साथ छि ऐसे नामर्द का नाम मेरे सामने फिर कभी मत लेना “
काजल की बात सुनकर मैं बिल्कुल ही स्तब्ध रह गया ,शायद मेरे किसी पुराने कर्मो की ही सजा था ,या शायद उस बेवफा से इतना प्यार करने की सजा …
काजल मेरे बारे में ऐसा सोचती है ये सोच कर ही मैं टूट गया ,रही सही थोड़ी हिम्मत भी टूट ही गई ,अब बस यंहा पड़े हुए मुझे मौत का ही इंतजार था ना जाने वो किस रूप में आएगी …
ठाकुर ने उसका मूड ठीक करने के लिए उसे पुचकारने लगा और फिर मेरे ही सामने फिर से वो दो जिस्म मिल गए ,लेकिन इस बार ठाकुर ने काजल को उसी कांच में टिकाया था ,काजल का हाथ उस कांच को थामे हुए था और ठाकुर उसे पीछे से ही भरे जा रहा था ….
ठाकुर की आंखे मुझपर ही टिकी थी और काजल की आहो से पूरा कमरा गूंज रहा था ,लेकिन मुझे ना ही उनके इस कृत्य में कोई मजा आ रहा था ना ही मैं उसे दिखना चाहता था,मैं तो बस भगवान से अब अपनी मौत की ही दुवा कर रहा था …
***************
ठाकुर और काजल का खेल खत्म हो चुका था और दोनो एक साथ ही बाथरूम में घुस चुके थे ,...
ठाकुर जाने को तैयार हो चुका था ,मैंने कमरे की दीवार में लगी हुई घड़ी देखी,8 बज चुका था अभी तक किसी ने मेरी कोई सुध भी नही ली थी ,काजल अब भी एक नाइटी में ही थी ,ठाकुरर जाने लगा तभी काजल ने उसे रोका और अपने पर्स से एक पुड़िया निकाली
“अजीम को दे देना “
“कितना ख्याल रखती हो तुम उसका ,साले को मर जाने दो नशे के बिना “
काजल खिलखिला पड़ी
“इतना जल्दी मर जाएगा तो जायजाद हमारे नाम कैसे होगा “
काजल की कमीनी मुस्कान के साथ ही ठाकुर भी मुस्कुरा उठा और वो पुड़िया अपने जेब में डाल ली,दोनो एक दूसरे के होठो को किसी प्रेमी की तरह चूसते रहे और वो निकल गया …
उसके जाने के बाद काजल उस कांच तक आयी और अपने को निहारने लगी ,उसने अपनी नाइटी निकाल फेंकी थी और अपने जिस्म को ध्यान से देखने लगी फिर उसने अपनी ही आंखों को देखा ,उसके होठो में एक मुस्कान थी ……..
भयानक डरा देने वाली मुस्कान ……...
अध्याय 70
काजल की आंखे भयावह थी ,लाल आंखे जैसे शैतान हँस रहा हो ,लेकिन फिर कुछ बूंदे पानी की भी उनमे आ गई थी ,
मैं स्तब्ध सा उसे देख रहा था ,उसके चहरे में मुस्कान खिल गई थी लेकिन ये मुस्कान भी बहुत ही डरावनी थी लगा जैसे किसी शैतान का कोई शैतानी मकसद पूरा हो गया हो …
वो जाकर अपने कपड़े पहन रही थी की दरवाजे में दस्तक हुई,जब दरवाजा खोला गया तो सामने अंजू (हरिया की बीवी) थी …
अंजू पसीने से सनी हुई थी ,उसकी सांसे उखड़ी हुई थी ,चहरा पिला था जैसे बहुत डरी हुई हो और हाथ में चाय की प्याली थी..
काजल उसकी हालत देखते ही समझ चुकी थी की डाल में कुछ काला है ..
“क्या बात है अंजू”
उसने बहुत धीरे से कहा था लेकिन मुझे उसकी आवाज सुनाई दी ,
“मेडम वो ..वो “
वो इधर उधर देखने लगी
“अंदर आओ “
उसके अंदर आते ही काजल ने दरवाजा बंद कर लिया..
अंदर आते ही अंजू ने तुरत ही चाय की ट्रे रखी और बोल पड़ी
“मेडम देव साहब कल आये थे,मैंने देखा था ..ठाकुर और हरिया उसे बांध के इस कमरे में बंद कर दिए थे ..”
उसने कांच की तरफ इशारा किया ,काजल अजीब सी निगाहों से कांच की ओर देखने लगी
“पहले क्यो नही बताया “
काजल चीखी
“वो हरिया…”
अंजू कुछ बोल पाती इससे पहले ही काजल कमरे से बाहर जा चुकी थी ,
थोड़ी ही देर में मेरे कमरे का दरवाजा खुला और काजल और अंजू ने मिलकर मुझे खोल दिया ..
रात के मार और मानसिक शारीरिक मानसिक पीड़ा से मैं टूट चुका था ,और बहुत ही थक चुका था,जैसे ही मैं खड़ा हो पाया था मेरे गालो से एक जोर का हाथ पड़ा …
“क्या जरूरत थी तुम्हे यंहा आने की ,हमारे बीच अब बचा ही क्या है जो तुम यंहा आये थे ..”
काजल की चीख से मैं बुरी तरह से झेंपा
“ये क्या कर रही है मेडम साहब को पता चला तो “
हरिया की आवाज आयी ,अबतक सभी कमरे से बाहर आ चुके थे ,
हरिया अंजू को लाल लाल आंखों से देख रहा था
“मैं उसे सम्हाल लुंगी इसे जाने दो “
“मैं इसे नही जाने दे सकता “इस बार हरिया की आवाज में दृढ़ता थी
“जाने दीजिये ना “अंजू ने थोड़ा सहमे आवाज में कहा
“चुप कर रांड साली तुझे तो मैं बाद में देखता हु “
हरिया चिल्लाया और अंजू बिल्कुल ही सहम सी गई ..
लेकिन काजल की आंखों में जैसे आग उतर आया था…
“जब मैंने कह दिया की ये जा रहा है तो तेरे बात समझ में नही आती “
“चुप कर साली ,”
हरिया भी तमतमाया
“दो कौड़ी की रांड मुझे सिखाएगी,जब तक ठाकुर साहब नही कह देते ये कही नही जाएगा “
काजल की आंखों में खून उतर आया था और उसने हरिया को मारने के लिए अपना हाथ उठाया लेकिन हरिया मजबूत आदमी था ,उसने उसका हाथ पकड़ लिया साथ ही उसे एक ओर धक्का देकर मुझे फिर से कमरे के अंदर ले जाने लगा ,
काजल ने पास से एक कुल्हाड़ी उठायी और ……
“नही …..”अंजू की चीख फिजा में गूंज गई ,काजल का चहरा खून से सना हुआ था ,और हरिया के सर के कई टुकड़े बिखर गए थे ,खून से जमीन लाल हो चुकी थी…
काजल ने कुल्हाड़ी एक ओर फेक दी ...और अंजू की ओर देखा जो अभी बिल्कुल किसी मूर्ति सी जमी खड़ी थी …
मैं भी कुछ सोचने समझने की हालत में नही था …
“तू क्यो रो रही है ,यही तो है जो तुझे खान और ठाकुर के सामने नंगी करके नचवाता था,तेरी जैसी गांव की भोली भाली लड़की को साले ने रांड बना दिया,उसके लिए आंसू बहा रही है ……
काजल ने फिर से वो कुल्हाड़ी उठा ली
“ये ले जा अपने उस ससुर की भी लीला आज खत्म कर दे जो ये सब होंते हुए देखने के बाद भी चुप रहा ,और इन सबमे साथ देता रहा,और अपने कपड़े बांध ले ,बच्चों को स्कूल से ही उठा लेंगे ...ये काम तो पहले ही कर देना था,थोड़ी देर हो गई …”
अंजू थोड़ा सम्हल गई थी और कुल्हाड़ी को अपने हाथो में पकड़ लिया ..लेकिन उसके होठ कुछ कहने को फड़फड़ा रहे थे…
“ठाकुर साहब …”
काजल के खून से सजे चहरे पर वो मुस्कान शैतान का भी दिल दहला देती ..
“उसका इंतजाम मैंने कर दिया है ,आज खान और ठाकुर खून के आंसू रोयेंगे ,”
***********************
थोड़ी ही देर में हम फॉर्महाउस से बाहर थे,मुझे मेरी कार तक छोड़कर काजल अंजू को लेकर चली गई थी ,मेरे दिमाग में बार बार काजल के वो शब्द गूंज रहे थे …...
‘क्या जरूरत थी तुम्हे यंहा आने की ,हमारे बीच अब बचा ही क्या है जो तुम यंहा आये थे ..
’
‘उसका इंतजाम मैंने कर दिया है ,आज खान और ठाकुर खून के आंसू रोयेंगे’
हमारे बीच में अब बचा ही क्या है ?????????
ये सवाल मुझे खाये जा रहा था ……
आज खान और ठाकुर खून के आंसू रोयेंगे…..ऐसा क्या कर दिया था काजल ने ???
अध्याय 71
जिस्म की कमजोरी से बड़ी मन की कमजोरी होती है,मैं मन से थक गया था,जैसे ही मैं अपने होटल में पहुचा जो की आजकल मेरा ठिकाना था,शबनम ने मुझे रोक लिया,
“रात भर कहा थे और ये सब क्या है “
उसने मेरे कपड़े में लगे खून के धब्बो को देखकर कहा ..
अब मैं उसे क्या बतलाता की मैं आखिर कहा था,
“जानते हो क्या हुआ है ,??”
उसने फिर से सवाल किया,साला अब क्या हो गया है ???
मैंने ना में सर हिलाया
“अजीम को ठाकुर ने कुछ ऐसा खिला दिया जिससे उसकी तबियत बहुत ही ज्यादा खराब हो गई है ,सारे tv चैनल में ये सबसे बड़ी न्यूज़ बनी हुई है और तुम सबसे अनजान हो “
मैं चौक गया ,क्या वही पुड़िया थी जिसे आज काजल ने ठाकुर को दिया था ..
शबनम मेरा हाथ पकड़ कर खिंचते हुए मुझे केबिन में ले गई और tv ऑन कर दिया …
समाचार देखते देखते मेरी आंखे बड़ी हो गई
‘खान ग्रुप के मालिक मिस्टर खान के बेटे अजीम जो की ड्रग्स और कत्ल के जुर्म में कुछ दिनों से जेल में है को जेल इंचार्ज इंस्पेक्टर ठाकुर द्वारा जेल के अंदर ही ड्रग्स की सप्लाई की जाती थी और आज जहरीला ड्रग्स देकर मारने की कोशिस किया गया ,इससे शासन सकते में आ गया है ,जेल के अंदर इस तरह के भयानक गतिविधियों से पोलिस और जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है ,जेल के सीसीटीवी फुटेज में भी कई गड़बड़ियां पाई गई है ,कई घंटो का फुटेज गायब बताया जा रहा है ,कहा जा रहा है की अवैध तरीके से इंस्पेकटर ठाकुर अजीम को उसके पिता से मिलवाता था ,सारी घटना के बारे में हमने जेल IG से जानने की कोशिस की लेकिन कोई भी जिम्मेदार कुछ भी नही कह रहा है ,हालिया ख़बरो के अनुसार इंस्पेक्टर ठाकुर फरार है ,वही अजीम खान की तबियत गंभीर बताई जा रही है ,उन्हें ** अस्पताल में रखा गया है ….
क्या हमारे देश में भ्रस्टाचार का ऐसा नंगा चलता रहेगा ‘
मैंने tv बंद कर दिया …
“तो काजल ने अपनी चाल चल ही दी “
शबनम ने मुझे देखते हुए कहा ,मैंने हा में सर हिलाया
“लेकिन अब तो उसकी जान को ठाकुर और खान दोनो से ही खतरा होगा आखिर कहा है वो “
“मुझे नही पता “
मैंने सपाट सा जवाब दिया
वो फोन निकाल कर एक काल करती है
“हम्म ओके “
वो एक गहरी सांस लेती है
“वो अभी हॉस्पिटल में ही है ,अजीम के पास ,खान को भरोसा दिलाने की ठाकुर ही उसे मारने का षड्यंत्र कर रहा था ,ठाकुर का कोई पता नही है अभी भी …”
तभी फिर से उसका फोन घनघना उठा
“हैल्लो क्या ??”
उसके चहरे का रंग ही उड़ गया था
“क्या हुआ “
“पता नही ये क्या हो रहा है ,ठाकुर ने खान के फॉर्महाउस में जाकर वँहा के गार्ड और उसके बेटे को कुल्हाड़ी से मार डाला ,उसकी बीवी ही जान बचा कर भाग पाई है …”
वो उलझन में दिख रही थी लेकिन मुझे पता था की ये सब काजल का ही किया धरा है ..अब पुलिस और खान दोनो ही ठाकुर को ढूंढने में लगे हुए थे…
“क्या बोलते हो हॉस्पिटल चले “
शबनम की बात से मैं थोड़ा चौक गया
“क्यो ??”
“देखते है ना की आखिर अजीम को उसके पापों की क्या सजा मिली है ,और मुझे खान को रोता हुआ देखकर बहुत ही सुकून होगा “उसके होठो में एक मुस्कान आ गई ……
**************
हम दोनो ही ICU के बाहर खड़े थे ,खान साहब की आंखे र्रो रो कर सूज गई थी ,चहरा मरा हुआ मालूम हो रहा था ,उन्होंने हमे देखा तक नही चारो तरफ पुलिस वाले ही दिख रहे थे ,हमे अंदर जाने की इजाजत नही दी गई, लेकिन कुछ देर बाद काजल आ गई वो भी अंदर जाना चाहती थी , उसने पुलिस से बात करके हमे परमिशन दिलवा दिया ,काजल मेरी ओर देख भी नही रही थी ना ही मैं काजल को देख रहा था ऐसा लग रहा था जैसे हम नितांत अजनबी हो …
हम तीनो ही अंदर गए क्योकि खान की इतनी हिम्मत ही नही थी की वो उसे देख सके…
अजीम की हालत बहुत ही खराब थी ,लग रहा था जैसे उसका पूरा जिस्म ही गल गया हो,केवल आंखे ही सलामत दिख रही थी ,काजल को देख कर उसके आंखों में आंसू आ गए ,और काजल के होठो में मुस्कान ,उसके नाक में ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था और चारो तरफ ही बहुत से मशीन ,उसे बस जिंदा रखा गया था ,
डॉ ने हमे देखते ही कहा
“पता नही ये कौन सा ड्रग्स इसे खिलाया गया है और इतनी मात्रा में इसने इसे ले कैसे लिया ,जरूर ये ठाकुर पर बहुत ही भरोसा करता था ,”
“सच बतलाइए डॉ इसके बचने का कितना चांस है “
काजल ने डॉ की ओर देखा
“सच कहु हो एक दो दिनों तक मशीनों के भरोसे जिंदा रखा जा सकता लेकिन उससे ज्यादा ..., खान साहब से ये बात ना कहे तो ही बेहतर होगा,और कोई अगर इनसे मिलना चाहे कोई करीबी हो तो प्लीज् उन्हें मिलवा दीजिये ,हम 1-2 दिन से ज्यादा इन्हें नही बचा पाएंगे ..
”
डॉ के सामने तो काजल ने अफसोस जाहिर किया लेकिन उसके जाते ही उसके होठो में मुसकान गहरी हो गई वो अजीम के पास पहुची ..
“डॉ को नही पता की ये कौन सी ड्रग्स है ,ये वही ड्रग्स है जो तुमने बनवाई थी ,उन लड़कियों को अपने रास्ते से हटवाने के लिए जो तुम्हारे गले पड़ जाती थी ...बहुत पाप किया है तुमने अब दो दिनों तक उसकी सजा भुगत लो ,मैं तुम्हे आसानी से मरना नही चाहती थी ,मैं यही चाहती थी की तुम अफसोस कर कर के मरो …”
इतना कहकर वो सीधे ही कमरे से बाहर निकल गई और अजीम के आंखों से एक पानी की बून्द नीचे गिर गई ….
अध्याय 72
मैं अभी नींद में ही था की पूर्वी ने मुझे झकझोर दिया ,
“भइया जल्दी से उठो शबनम बुला रही है “
“क्या हुआ अब उसे “
“रश्मि ने सिलेंडर कर दिया है “
मैं चौक कर उठ गया
“क्या “
मैं जल्दी के तैयार होकर नीचे आया तो शबनम मेरा इंतजार कर रही थी ,
“रश्मि ने अभी एक घंटे पहले ही सिलेंडर कर दिया है ,और वो हमसे मिलना चाहती है ,अपने वकील को भी बुलाया है ,अभी थाने में ही है “
बिना कुछ कहे ही हम दोनो उस ओर चल पड़े
*************
“फिक्र की कोई भी जरूरत नही है पुलिस अपना चार्जसीट जमा कर देगी और उनके पास आपके खिलाफ कोई ऐसा सबूत नही है की आपको दोषी माना जाय ,आप गोवा में जिस होटल में ठहरी थी उसका बिल जमा कर देंगे और कह देंगे की आपको अपने पिता की मौत का पता ही नही था क्योकि आप उसके दो दिन पहले ही गोवा के लिए निकल गई थी ,और कोई डिस्टर्ब ना करे इसलिए किसी को बतलाया नही था,और मोबाइल बंद कर दिया था ताकि काम का टेंसन ना हो और आप सकून से छुटिया माना सके ,आप अक्सर ऐसा करती है इसलिए किसी को भी शक नही हुआ की आप कहा है ,जब आप वापस आयी तो पता चला की पिता की हल्या हो गई है और आपको ही इसका दोषी माना जा रहा है ,तो अपने सिलेंडर कर दिया ...और इन्हें भी मैं सबकुछ समझा दूंगा ….बाकी कुछ भी हो जाए आप अपने बयान पर अडिग रहिएगा …”
रश्मि ने वकील की बात पर हा में सर हिलाया,साथ ही वकील ने भी हमे कुछ बाते समझा दी और चला गया …
अब कमरे में मैं रश्मि और शबनम ही बचे थे ,रश्मि मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी ….
“निशा कहा है “
मैंने पहला प्रश्न किया
“तुम्हे बहुत याद करती है ,तुमसे बहुत प्यार जो करती है “
रश्मि ने उसी मुस्कान के साथ जवाब दिया
मैं चुप था
“लेकिन वो काजल से अब भी बहुत नाराज है क्योकि उसे लगता है की उसने अपने बदले की खातिर तुम्हारी जिंदगी को ही बर्बाद कर दिया है …”
“सही तो लगता है उसे ,मैं दोनो को ही बहुत प्यार करता हु और ये भी जानता हु की वो दोनो भी मुझे बहुत प्यार करते है लेकिन ….वक्त को शायद कुछ और ही मंजूर है जो हम साथ नही रह पा रहे है ,मेरी बहन को मुझसे ही मिलने में शर्म महसूस हो रही है और मेरी बीवी ………...पता नही काजल के दिल में मेरे लिए क्या है ,अब तो मैं समझना भी नही चाहता ..
”
रश्मि के चहरे पर गंभीरता थी ..
“पहले मैं भी काजल से नाराज थी लेकिन जब से मैं निशा से मिली मुझे अपने पर ही गुस्सा आया ,मेरे पिता ने मेरी जिंदगी बर्बाद की ,पहले मेरी मा को मार दिया सिर्फ दौलत की खातिर फिर मुझे अपने दोस्त के बेटे के चंगुल में फेक दिया वो भी दौलत की खातिर ...अब मुझे किसी से कोई बदला नही लेना अब जाके मुझे सुकून मिला है ,अब शायद मैं अच्छे से बिना किसी गम के जीवन बिता पाऊंगी ...मन का बोझ क्या होता है बदले की आग क्या होती है ये तुम शायद नही समझोगे देव ,तुम सीधे साधे आदमी हो और शायद तुम्हे यही लगता होगा की काजल ने तुम्हारा यूज़ किया है जैसा की निशा को लगता है ,हा ये बात सही ही है लेकिन मैं ये भी जानती हु की बदले की बोझ में वो भी दबी जा रही है जितना जल्दी ये बोझ खत्म हो वो अपनी जीवन को आराम से जी पाएगी ,ये बात अलग है की इस बदले की कीमत उसने बहुत ज्यादा दी है ..
लेकिन कीमत तो चुकानी ही पड़ती है मैंने भी चुकाई है ,निशा ने भी चुकाई है और काजल भी चुका रही है …”
थोड़ी देर तक कमरे में शांति ही रही
“तुमने इतनी जल्दी सिलेंडर क्यो कर दिया ,पहले से बतलाया होता तो हम जमानत की कागज बनवा कर रखते “
शबनम ने कहा ,जिससे रश्मि के होठो में मुस्कान बिखर गई
“मुझे अजीम का पता चला ,और मैं उससे मिलना चाहती हु ,माना की वो कितना भी बड़ा गुनहगार हो लेकिन मैं एक औरत हु और और वो मेरा पहला प्यार था ,मेरा पति था...उसके अंत समय में मुझे उसके साथ होना चाहिए ,ऐसे जमानत मुझे आज शाम तक मिल जाएगी ,क्योकि कोई सुबूत मेरे खिलाफ है भी नही ,और मुझे अभी पुलिस कस्टडी में अजीम से मिलने की भी इजाजत मिल गई है “
रश्मि के होठो में के फीकी मुस्कान आ गई ,मैं उसके मनोदशा को देखकर सोच में पड़ गया था की आखिर एक औरत सचमे प्यार की देवी होती है ,जो अपने उस पति का भी साथ नही छोड़ना चाहती जिसने कभी उससे प्यार नही किया है ,लेकिन काजल ….???
वो मेरा साथ छोड़ कर चली गई जबकि मैंने तो उसे दिलो जान से चाहा था …
रश्मि ने जैसे मेरे दिल का हाल जान लिया था
“देव वो ही तुमसे बहुत प्यार करती है ,लेकिन अभी उसके सामने प्यार का इन्तहां देने की नौबत नही आयी है,मुझे यकीन है की जब समय पड़ेगा तो वो तुम्हारे नजरो में खरी उतरेगी …”
पता नही रश्मि की बात कितनी सच्ची थी और कितनी झूठी लेकिन ये जरूर सच था की अभी तक मैं ही प्यार का इन्तहां दे रहा हु ...उसके हर गलतियों के बावजूद उससे प्यार कर रहा हु ………….
*********************
अपने होटल में मैं और शबनम साथ साथ बैठे थे ,कोई कुछ भी नही कह पा रहा था …
“क्या तुम्हे नही लगता की हम भी गुनहगार है “
मैंने धीरे से कहा
“क्यो “
शबनम ने मुझे आश्चर्य से देखा
“क्योकी हमारे कारण भी तो कई लडकि इस धंधे में आयी है हमने भी तो कई लड़कियों को रंडी बना दिया है ,हमारे होटल में भी तो ये सब चलता है ,तो हममें और अजीम में फर्क ही क्या है “
शबनम मेरी बात को गौर से सुन रही थी और उसका चहरा थोड़ा गंभीर हो गया था ,उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खिंचते हुए ले गई ,वो होटल का पीछे वाला हिस्सा था जंहा कुछ सर्विस क्वाटर बने हुए थे ,उसने उनमे से एक में दस्तक दी और दरवाजा खुला ,दो लडकिया बैठी हुई थी,एक कुछ 20 साल की लग रही थी वही दूसरी 25-30 की ..
“आज से तुम दोनो को ये काम करने की कोई जरूरत नही है तुम दूसरा काम कर सकती हो या चाहो तो जा सकती हो “
दोनो लड़कियों का चहरा जैसे पिला पड़ गया और वो दौड़ती हुई शबनम के कदमो में आकर गिर गई ..
दोनो ही रोने लगी थी,20 साल की लड़की गिड़गिड़ाने लगी
“दीदी हमसे कोई गलती हो गई है क्या ये आप क्या कह रही है हम कहा जाएंगे ,मेरी माँ का क्या होगा दीद वो बिना इलाज के मर जाएगी दीदी प्लीज् हमे यही रहने दो ….”
दूसरी भी फफक पड़ी थी
“दीदी मेरी बेटी को मैं पढ़ना चाहती हु गांव में मजदूरी करती थी ,वँहा का ठेकेदार ही मुझपर नजर लगाए रखता था ,आज अपनी बेटी को अच्छे स्कूल में पढा पा रही हु ,पति तो दारू के पीछे ही दीवाना है ,मुझे निकाल दोगी तो वो मेरी बेटी को ही धंधे में बैठा देगा दीदी गलती हुई हो तो हमे मार लीजिए लेकिन यंहा से मत निकालिए “
मैं उन दोनो को बस देखता ही रह गया था ,जिस्म का धंधा करने वाली ये औरते किन मुस्किलो से गुजर रही थी इस बात को जानने की कभी मैंने कोशिस ही नही की थी ,
हम तो बस जिस्म का व्यापार करने वाली औरतों को रंडी बोल कर निकल जाते है लेकिन सोचा ही नही की ये रंडी क्यो बनी …
शबनम मेरी ओर देखने लगी
“देव मुझे बस एक चीज बताओ की इन्हें रंडी किसने बनाया है ,हम लोगो ने या उस ठेकेदार ने जो इसके जिस्म को हवस की नजर से देखता था ,या उस पति ने जो दारू के लिए अपनी बीवी और बेटी का भी सौदा कर सकता है ,या फिर उस स्कूल में जो इतना फीस लेते है की अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा के लिए इसे अपना जिस्म बेचना पड़ रहा है ...और देव इसे किसने रंडी बनाया है हमने या उस सरकारी हॉस्पिटल ने जंहा इसकी माँ का अच्छे से इलाज नही हो पाया और उसे प्राइवेट हॉस्पिटल में दाखिला करवाना पड़ा ,और क्या उसे उस प्राइवेट हॉस्पिटल ने रंडी नही बनाया जंहा की फीस भरने के लिए ये अपने जिस्म का सौदा करने को बाध्य हो गई है ….
देव तुमने पूछा था ना की हममें और अजीम में क्या फर्क है ,फर्क बस इतना है की हम किसी को जिस्म बेचने पर मजबूर नही करते लेकिन अजीम लड़कियों को मजबूर और ब्लैकमेल करके उनसे ये धंधा करवाता था…
हा ये धंधा तो एक ही है लेकिन इसे चलाने वाले अलग अलग लोग है एक में लड़कियां अपनी मर्जी से आती है और जाती है ,लेकिन जैसा धंधा अजीम करता है वँहा लड़कियां ना तो मर्जी से आती है ना ही जा सकती है ,बस यही अंतर है ….”
मैं बस उन दोनो लड़कियों को देखता तो कभी शबनम को आज शबनम के लिए मेरा प्यार और बढ़ गया था और साथ ही इस धंधे को लेकर मेरी ग्लानि भी मिट गई थी …………….
अध्याय 73
शबनम मेरी तपती हुई जिंदगी में एक पेड़ की छाया की तरह आयी थी ,मैं से अपने बांहो में लिए लेटा हुआ था ,उसके प्यार भरे दिल ने मुझे जो सुकून दिया था मानो जीवन उठापटक में एक गहरा चैन था ..
उसके पास होने से ही मुझे अजीब सी शांति मिलती थी ,हम दोनो ही अभी अभी प्यार के दरिया में नहा कर निकले थे ,वो अब भी सोई हुई थी और बहुत प्यारी लग रही थी ,मैं उसके चहरे को ही देखे जा रहा था …
उसके मोबाइल में एक मेसेज आया ,
स्क्रीन लॉक था लेकिन वाट्सअप का नोटिफिकेशन दिखा रहा था ,कुछ लाइने साफ दिख रही थी …
मेसेज काजल का था और बस इतना ही दिखा की ..
‘आजा तेरा भी तो दोषी है …”
मैं कुछ समझ नही पाया शायद और भी मेसेज किये होंगे जिसमे एक को मैं पड़ पा रहा था …
शबनम उठाने के बाद मेसेज को देखी और उसके चहरे का रंग बदल गया
“क्या हुआ???”
मैंने सवाल किया
“कुछ नही ..”
उसने चहरे के भाव को छुपाते हुए अपने चहरे में मुस्कान लायी …
स्वाभाविक सी बात थी की वो मुझसे कुछ छुपा रही थी मैंने भी उसे जोर नही दिया ,वो थोड़ी देर में ही तैयार होकर निकल पड़ी लेकिन साला मुझे तो पीछा करने की आदत पड़ी हुई थी ,तो मैं पीछे लग गया …
वो एक गोदाम में पहुची जो की सालो से बंद थी जरूर कुछ कांड होने वाला था ,
मैं लुक छुप कर देखना चाहता था जैसे मेरी आदत बन रही थी ,...
मैं चुप चाप कोई खिड़की देखने लगा ताकि अंदर देख सकू एक छोटा सा दरवाजा मुझे दिख गया जो की पीछे की ओर खुलता था ,मैं हल्के से अंदर आया तो वँहा कबाड़ का ढेर पाया ,अंदर कुछ आवाजे आ रही थी मैं उन बड़े बड़े कबाड़ बन चुके मशीनों में छुपता हुआ आगे बढ़ रहा था …
“बैठ इसमें “
काजल की तेज आवाज ने मेरा ध्यान खिंचा ,मैं उस ओर बढ़ गया..
“ये तुम मेरे और मेरे बेटे के साथ क्यो कर रही हो काजल ..
”
खान की दर्द भरी आवाज मेरे कानो के पड़ी सामने देखा तो दंग ही रह गया क्योकि सामने काजल और शबनम दोनो ही खड़े हुए थे और साथ ही खान बहुत ही गंभीर अवस्था में खड़ा हुआ था ,उसे जिस कुर्सी पर काजल बैठने को कह रही थी उसमे ना मालूम कितनी सुइयां लगी हुई थी ,खान उसे देखकर ही कांप रहा था लेकिन काजल के हाथो में पिस्तौल था ,
“बैठ जा मादरचोद “
इसबार शबनम ने कहा
“तुम लोग ये क्यो कर रहे हो ,मेरे बेटे के जाने के बाद ऐसे भी मेरा जीना व्यर्थ हो चुका है,तुम सारी दौलत ले लो लेकिन मुझे अब मेरी बाकी की जिंदगी शांति से बिताने दो “
काजल जोरो से हँस पड़ी लेकिन साथ ही उसके लाल लाल आंखों में आंसू भी छलक उठा था …
“शांति के साथ ...वाह ...तुम्हारे कारण हमारे जीवन की शांति चली गई और तुम अपनी जिंदगी शांति से बिताने की बात कर रहे हो …”
“आखिर हो कौन तुम .और क्या चाहते हो .”
खान झल्ला गया था
“वो भी पता चल जाएगा “
उसने खान को जोर का धक्का दिया और वो कुर्सी में जा बैठा ,उसके मुह से दिल दहला देने वाली चीख निकली क्योकि सारे सुइयां अब उसके पिछवाड़े में जा गड़े थे,फर्श पर खून फुट पड़ा और तुरंत ही शबनम ने रश्सी उठाकर उसे बांध दिया था ,खान मानो दर्द से मर ही जाने वाला था,
“तू जानना चाहता है ना की हम कौन है तो सुन …..”
काजल कहती चली गई और खान की आंखे बड़ी होती गई …
“तुम मुझे मार ही क्यो नही डालती “
खान रोया
“ऐसे नही तेरे दोस्त को तो बहुत आराम की मौत नसीब हो गई वो तो मेरे हाथो से बच गया लेकिन अब तुझे ही उसका कोटा भी पूरा करना होगा …”
काजल ने एक इंगजेक्शन अपने पर्स से निकाला और खान को दे दिया
“तेरा शरीर 3 दिनों में अब धीरे धीरे गलेगा ,शबनम इसे उठा कर हॉस्पिटल में डाल दो ,जंहा इसका बेटा पड़ा हुआ है ,और हा याद रखना एक घंटे से पहले मत ले जाना..”
दोनो मिलकर उसे गाड़ी में डालने लगे
“रुको ,मेरी पूरी दौलत ले लो लेकिन मुझे छोड़ दो ..”
“तेरे पास है ही क्या ...तेरी पूरी दौलत अब मेरे और शबनम के नाम हो चुकी है ,और जो तेरे नाम पर है भी वो बिजनेस ही पूरी तरह से डूब चुका है ,कर्ज में वो भी बिक ही जाएगा “
उसे डालने के बाद शबनम चली गई और काजल बस अकेले ही एक कोने में बैठ गई ,उसका चहरा बस शांत था कोई भी भाव उसमे दिखाई नही दे रहे थे ,इसी दिन के लिए उसने इतनी मेहनत की थी और ये इतनी जल्दी और इतने आराम से खत्म हो जाएगा उसने सोचा भी नही होगा …
अध्याय 74
काजल शांत बैठी रही और मैं उसे देखता रहा ,जाने वो कौन दी दुनिया में थी और ना जाने मैं किस दुनिया में था…
मैं उसे अकेला छोड़कर जाने को मुड़ा ही था की मेरे पैरो से एक कुछ टकरा गया ,उस शांत वातावरण में वो आवज तेज हो गई थी ,
“कौन है ..
”
काजल जैसे अपने विचारों के भवर से जगी होगी और तेजी से एक्टिव हो गई …
मैं भागने की कोशिस करता उससे पहले ही वो मेरे ऊपर पिस्तौल तान चुकी थी ,
“खबरदार जो एक भी कदम भी बढ़ाया तो ..”
मैं वही रुक गया ..और पीछे पलटा
मुझे देखते ही काजल ने अपने हाथ नीचे किया
“तुम यंहा पर ..”
“हम्म “
“चलो जो होना था हो चुका है ,अब जाओ यंहा से …”
काजल पीछे पटल गई थी
“काजल ,हम दोनो इसतरह दूर क्यो रह रहे है ,क्या तुम्हे पता नही की मैं तुम्हे कितना प्यार करता हु “
“जानती हु इसीलिए दूर हु ,कही तुम्हारा प्यार मेरी कमजोरी ना बन जाए…”
इतना ही बोलकर वो तेजी से वँहा से निकल गई थी …
**************
मैं होटल आया तो पूर्वी बहुत ही खुस दिख रही थी ,
“भइया जानते हो कौन आया है “
“कौन ..??”
“निशा दीदी “
वो उछली मैं भी उछल पड़ा…
मैं पूर्वी के साथ अपने कमरे में गया ,वँहा निशा डॉ चुतिया के साथ बैठी हुई थी ,और मुझे देखते ही मुझसे आकर लिपट गई …
हम दोनो ही रोने लगे थे
“कहा चली गई थी तू ,क्या तुझे मुझपर थोड़ा भी भरोसा नही था “
“जानती थी भइया की आप मुझे माफ कर दोगे लेकिन मैं डर गई थी “
मैं डॉ की ओर देखने लगा
“थैंक्स डॉ साहब इसे वापस लाने के लिए “
डॉ ने बस हा में अपना सर हिलाया
“मुझे शबनम ने बतलाया की ये गोवा में है और इसका एड्रेश दिया ,और मैं इसे समझने पहुच गया ,(ऐसे भी मेरा काम ही क्या रह गया है इस स्टोरी में )”
मैं हल्के से मुस्कुरा गया …
“काजल से भी मिलना था उसके अंतिम शिकार के लिए “
डॉ ने आराम से कहा …….
************
डॉ ने काजल और निशा की मीटिंग फिक्स की थी साथ मैं और पूर्वी थी थे ,साथ ही शबनम और डॉ भी थे लेकिन वो दोनो थोड़ी देर बाद ही चले गए ताकि हम आरम से बात कर सके …
“मैं आपसे माफी मांगना चाहती हु भाभी “
निशा का बदला हुआ रूप देखकर सभी दंग थे …
“मुझे तुमसे कोई भी गीला नही है निशा “
काजल ने भी आराम से कहा
“तो फिर हम फिर से पहले जैसे रह सकते है ,मतलब मैं आप पूर्वी और भइया एक साथ “
अचानक ही मैंने अपने बहन में एक बचपना देखा ..
“नही निशा अभी और कुछ काम करना बाकी है “
“क्या फिर से चुदवाने जाओगी क्या किसी से “
निशा फिर से अचानक ही भड़क उठी ,उसके ऐसा कहने से सभी सकते में आ गए थे
“निशा ये क्या बोल रही हो तुम “
मैंने निशा को धमकाने के अंदाज में कहा
“क्या गलत कहा है भइया इसके बदले के चक्कर में हमारा पूरा परिवार बिखर गया ,आप को इतनी तकलीफ हुई ,पूर्वी का ….
भइया इसे तो मैं जान से मार देती लेकिन क्या करू आप इससे इतना प्यार जो करते हो “
क्या गलत कहा था मेरी बहन ने ,उसकी आंखों में आंसू की बूंदे आ गई थी वही काजल भी फफक पड़ी थी ,और जाने लगी लेकिन पूर्वी ने उसे रोक लिया …
“निशा माफी मांग भाभी से ,ये क्या बतमीजी है ,जो हुआ वो हो चुका है “
पूर्वी की बात ने मानो आग में घी का काम कर दिया
“हा तू तो इस रांड का साथ देगी ही ना ,तुझे ही जो चुदने मिल रहा है मेरे भइया से ,याद रखना तुम दोनो ये मेरे है और जब तक तुम दोनो जिंदा रहोगी तब तक इन्हें खुसी नही मिलने वाली ,तुम दोनो को तो मैं मार कर ही रहूंगी “
मेरे लिए अब सहना मुश्किल था ,मैंने निशा को घुमाया और एक जोर का झापड़ उसके गाल में लगा दिया ..
जैसे एक तूफान शांत हो गया हो ……
निशा के चहरे में एक मुस्कान आ गई
“भइया आप भी इसका ही साथ दोगे,लेकिन इसके कारण ही आपकी जिंदगी बर्बाद हुई है और मैं इसे छोडूंगी नही …”
“वो पुरानी बाते है निशा बहन तुम “
“नही भइया आप इसे माफ कर सकते हो मैं नही “
निशा ने घूरकर फिर के उन दोनो को देखा और वँहा से निकल गई ,मैं उसके पीछे भागा लेकिन वो कार से दूर जा चुकी थी और नजरो से गायब ही हो गई …….
अध्याय 75
मैं नर्वस सा बैठा था की मुझे निशा का काल आया ,
“भैया मैं आपसे मिलना चाहती हु “
“कहा है तू “मैं उठकर खड़ा हो चुका था..
उसने पता बताया साथ ही हिदायत दी की मैं किसी को भी कुछ ना कहु और अकेले ही आऊ ..
मैं बिना किसी से कुछ कहे उसके बतलाए जगह पर पहुच गया था ,वो एक होटल के कमरे में ठहरी हुई थी ,
मेरे जाते ही उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया ..
और रोने लगी ..
“भइया अपको मेरी बात पर यकीन नही होता ना ,की काजल सच में बेवफा है अगर आपको देखना है की वो कितनी बड़ी कमीनी है तो जाओ यंहा “
उसने मेरे सामने एक पता रख दिया ,
“आपको पता लग जाएगा की वो क्या है ,काजल असल में सिर्फ और सिर्फ ठाकुर की रंडी ही है और ये सब कुछ उन दोनो ने ही प्लान करके किया है …”
उसकी बात को सुनकर मुझे विस्वास तो नही हुआ लेकिन मैं उस जगह पर जाने को राजी हो गया…
वो वही जगह थी जंहा पर खान को मारा गया था ,
पिछली बार जंहा मुझे खान की चीख सुनाई दे रही थी वही इस बार हँसी की आवाज सुनाई दी ,
मैं थोड़ा और पास पहुचा तो काजल को ठाकुर की बांहो में देखा ,ठाकुर के पास ही एक पिस्तौल पड़ी थी लेकिन काजल अभी ठाकुर के बांहो में थी ..
“तुमने तो मुझे डरा ही दिया था मुझे लगा जैसे तुम डबल गेम खेल रही हो और मुझे फसाना चाहती हो “
“इतने दिन मेरे साथ रहकर भी तुम मुझे समझ नही पाए ना “
“लेकिन तुमने हरिया को क्या मार दिया “
“ताकि हमारे खिलाफ कोई सबूत ना रह जाए ,उस चुतिये देव को कैद करने की क्या जरूरत थी उसे इसी कारण हरिया की सच्चाई भी पता लग गई ,और मुझे उसे मरना पड़ा,वरना पुलिस उसके जरिये हरिया तक पहुच जाती और फिर तुमतक और मुझतक भी ,मैंने तुमसे कहा था की तुम फिर से फार्महाउस मत जाना तुम क्यो गए “
“अरे मुझे क्या पता था की तुमने उसे मार दिया है ,चलो ठीक ही हुआ क्योकि फिर उसका इल्जाम किसके ऊपर आता,अब कम से कम लोगो को ये लगेगा की उसे भी मैंने ही मारा है और पुलिस मेरी तलास में ही लगे रहेगी और हम दोनो ...फुर्ररर “
दोनो ही जमकर हँस पड़े
“मेरा पासपोर्ट और वीसा कहा है “
काजल ने अपने पर्स से कुछ कागज निकाल कर उसे दिए …
“शेरखान वाह क्या नाम चूस किया है तुमने “
वो जोरो से हँस पड़ा ,साथ ही काजल के होठो में अपने होठ लगाने लगा काजल ने भी बिना किसी संकोच के अपने होठो को उसके होठो में लगा दिया ….
दोनो ही खिलखिला रहे थे लेकिन जैसे मेरा जिस्म आत्मा ही जल रही हो ………..मैं बौखला कर रह गया था ,मन कर रहा था की अभी उस पिस्तौल को जो की ठाकुर के बाजू में रखी हुई है उठाकर उन दोनो को ही सूट कर दु ……..
******************
दोनो ही के होठ एक दूजे से ऐसे चिपके हुए थे जैसे की कभी अलग ही नही होने वाले है ,वो दोनो ही थोड़ा आगे बढ़े और ठाकुर ने उसे उठा कर थोड़ी वही लिटा दिया वो जो खेल खेलने वाले थे उसमे मुझे कोई भी इंटरेस्ट नही था मुझे तो बस उन दोनो को मरना था यही मेरे सामने थी ठाकुर की बंदूख ..
मैं लपक कर आगे आया और बंदूख को अपने हाथो में थाम लिया ,
दोनो ही मेरे इस प्रयास से चौक पड़े थे ..
“देव तूम यंहा “
काजल ने मुझे आंखे फाड़ कर देखा
“हा साली रंडी मैं यंहा,सच कहती थी मेरी बहन की तू है ही रंडी तुझपर बहुत भरोसा कर लिया अब और नही “
“देव शांत हो जाओ और गन मुझे दे दो “
काजल के इतना बोलते ही मैं और भी भड़क गया और एक गोली उसके पैरो के पास चला दी ,
ठाकुर भी खोफ जदा खड़ा हुआ मुझे ही देख रहा था लेकिन वो भी मंझा हुआ खिलाड़ी था ,उसने अपनी चाल चल दी
“तू साले नपुंसक है तो तेरी बीवी क्या करेगी ,तू नामर्द है जो अपनी बीवी को दूसरे से चुदते हुए देखता है ,और हा अपनी बहनों को भी चोदता है ,साले भड़वे...तुझ जैसा पति काजल जैसी मतवली और चालाक लड़की का पति हो ही नही सकता उसे तो मेरी पत्नी होना चाहिए था…उसने ना सिर्फ दो लोगो को आसानी से मार दिया बल्कि उनकी सारी प्रॉपर्टी भी अपने नाम कर लिया ..
”वो जोर से हँसने लगा ,वो बातो ही बातो में मेरे पास आ चुका था और वो घुमा और मेरे हाथो से पिस्तौल छीन ली …
इंस्पेक्टर ठाकुर के बंदूख कि नोक मेरे ही ओर थी ,
“बहुत खेल खेल लिया तुमने अब मेरी बारी है ,”
मैं बेखोफ खड़ा हुआ था,पास ही काजल स्तब्ध सी मुझे देख रही थी,
‘रुको ठाकुर ‘
वो चिल्लाई लेकिन तब तक ठाकुर की गोली चल गई ,काजल ने उसका हाथ उठा दिया था और मैं बचने के लिए थोड़ा दूर जा गिरा था,ठाकुर फिर से बौखला गया और मेरे ऊपर फिर से बंदूक तान दी इस बार उसका निशाना सही था लेकिन उसकी गोली चलती इससे पहले ही काजल बीच में आ गई ..
धाय धाय धाय
ऑटोमेटिक लोडिंग वाली बंदूक ने अपना काम कर दिया था ,लगातार तीन गोली सीधे जाकर काजल के सीने को चीरते हुए निकल गए मैं बौखला गया था ,जैसे कोई सुध ही ना बची हो ,वही ठाकुर भी स्तब्ध सा उसे देख रहा था वो तो मुझे मरना चाहता था ताकि काजल को पा सके लेकिन काजल ने ये गोलियां खाकर ये साबित कर दिया था की वो जिस्म से चाहे जिसकी भी हो लेकिन उसकी रूह सिर्फ मेरी है …..
मैं गुस्से से तिलमिलाया और पास ही पड़े एक पत्थर से ठाकुर पर वॉर कर दिया ,उसका सर जख्मी हो गया था ,मैं उसकी पत्थर से उसका सर फोड़ना शुरू कर दिया ,वो बेसुध हो गया था और मैं तो पहले से ही बेसुध था ,मैं चीख रहा था चिल्ला रहा था ,और पत्थर उसके सर पर मारे जा रहा था..
“नही देव मेरे पास आओ “काजल इस हालत में भी थोड़े होश में थी
मैं जल्दी से काजल के पास पहुचा ,मैंने उसे सीने से लपेट लिया था,मेरा पूरा कपड़ा खून के रंग से रंग चुका था ..
“आई लव यु देव ,हमेशा से तुम मेरे हीरो रहे हो हमेशा से मैंने सिर्फ और सिर्फ तुम्हे प्यार किया है “
काजल इतना ही बोलकर बेसुध हो गई ,मैं चीखा
“काजल ………..नही काजल तुम मुझे छोड़कर नही जा सकती काजल “
तभी
धाय ….
एक गोली मेरे पीठ में आकर धंस गई ,ठाकुर लेटे हुए था और उसके हाथो में बंदूक थी
मैं गुस्से से लाल हो चुका था और उसे जान से मार देना चाहता था .
मैंने पास ही पड़ा हुआ एक रॉड उठाया और उसके पैरो में घुसा दिया ,वो चीखा ही था की मैंने अपने पैरो से उसके मुह पर वॉर किया ,वो बेसुध हो गया मैं फिर से काजल के पास आया ,मैं रो रहा था मेरी काजल मुझे छोड़कर नही जा सकती थी ………
मैं होशं में आया तो मैंने अपने पास डॉ चुतिया को पाया ,
“काजल कहा है “
मेरा पहला सवाल यही था ..
“वो कोमा में है,गोलियां निकाल दी गई है लेकिन होश नही आया है ,खैरियत है की दिल को गोली नही लगी वरना”
मैं रोने लगा था
“ये सब मेरी ही गलती के कारण हुआ है डॉ ना मैं वो कदम उठता और ना ही ये हादसा होता “
डॉ मेरे पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरा ..
“तुम्हारी गलती नही है देव अपने को दोष मत दो जो भी हुआ वो किस्मत का ही तो खेल था ,सब ठीक हो जाएगा “
“निशा कहा है ???”
मुझे अचानक ही निशा की याद आयी
“वो भी ठीक है और अभी जेल में है ,फिक्र मत करो वँहा हमारे लोग है उसे कोई तकलीफ नही होगी ,”
मैं थोड़ा शांत हुआ
“उसके खिलाफ कोई सबूत मिला ??”
मैंने फिर से कहा
“नही अभी तक तो नही ,सिर्फ पूर्वी की ही गवाही है उसके खिलाफ लेकिन उतना काफी नही है ,काजल के गवाही के बिना उसे जेल में ज्यादा दिनों तक नही रख पाएंगे उसके वकील भी बहुत ई स्ट्रांग है ,लेकिन अभी उसका छूटना ठीक नही होगा “
डॉ के चहरे में चिंता साफ झलक रही थी
“उसे बेल दिलवाओ डॉ वो मेरी बात सुनेगी ,मैं बहक गया था जो मैं उसकी बात नही सुना ,लेकिन इस हादसे से मुझे समझ आ चुका है की मुझे उसकी बातो को सिरियसली लेना चाहिए था “
“लेकिन उसके बाहर आने से काजल और पूर्वी दोनो के ही जान को खतरा है ??”
डॉ मेरी बातो से चकित दिख रहे थे ,
“मैं सम्हाल लूंगा ,मैं उसे अच्छे से समझता हूं आप उसे बाहर निकलवाये “
डॉ थोड़ी देर तक तो सोच में ही डूबा रहा लेकिन फिर वो बाहर चला गया ,मैं उठाकर उसके पीछे ही बाहर आया
“आप पागल हो गए हो क्या ये क्या कर रहे हो “
सामने पूर्वी और शबनम खड़ी थी
“मुझे काजल से मिलना है “
“अभी तुम आराम करो शाम को मिल लेना ,ऐसे भी उसे ज्यादा मिलने नही दिया जाता हम तम्हे स्ट्रेचर में ले जाएंगे “
शबनम की आंखों में भी पानी था और पूर्वी के भी ,मुझे शक था की कही काजल को कुछ हुआ तो नही है और ये लोग मुझसे झूट बोल रहे है ,मैंने शंका की नजर से दोनो को देखा ,
पूर्वी रोते हुए मेरे पास आयी और मुझसे लिपट गई ..
“भइया ये क्या हो गया “
“काजल ठीक तो है ना तुमलोग मुझसे कुछ छिपा तो नही रहे “
पास खड़े हुए डॉ के चहरे में मुस्कान गहरा गई
“छुपाने को बचा ही क्या है देव ,अभी आराम करो शाम को मिल लेना,फिक्र मत करो काजल हमे छोड़कर इतनी जल्दी नही जाने वाली “
डॉ के चहरे में दृढ़ता के भाव उभर गए जैसे उन्हें काजल पर बहुत ही ज्यादा यकीन हो
अध्याय 76
काजल मेरी काजल ,आंखे बंद किये ना जाने कीस दुनिया में खो गई थी ,उसे देखकर एक बार तो मूझे चक्कर ही आ गया,मैं वही था जो कुछ दिनों पहले उसे मारने का प्लान कर रहा था ,आज उसकी इस कुर्बानी ने मुझे फिर से याद दिलाया जो वो मुझे बोला करती थी ,
‘मैं तुम्हारी ही रहूंगी देव चाहे शरीर किसी और के पास ही क्यो ना रहे लेकिन रूह तलक बस तुम्हारी ही रहूंगी ‘
मेरी आंखे भीग गई थी और मैं सिसक रहा था ,मेरा हाथ अभी भी काजल के हाथो में था,वो ऑपरेशन थिएटर मुझे काटने को दौड़ रहा था ,
‘कितना पागल था तू देव जो अपनी जान की वफादारी पर उसके प्यार पर शक किया ‘
मैं अपनी अतीत की यादों से तब निकला जब पूर्वी ने मुझे बुलाया ,आज 3 दिनों से काजल को होशं नही आया था वो अब भी कोमा में ही थी ..
“भइया देखो तो कौन आया है “
बाहर निशा खड़ी थी वो मुझे देखते ही मेरे पास आयी और मुझे अपने गले से लगा लिया ,
“सॉरी भइया मेरे कारण भाभी की ये हालत हो गई मुझे नही पता था की भाभी का प्लान क्या है मुझे तो लगा की वो आपको धोखा देना चाहती है “
“कोई बात नही मेरी जान तू मुझसे प्यार ही इतना करती है की तू मेरे आगे कुछ सोच ही नही पाती “
वो थोड़ी देर मुझसे ऐसे ही चिपकी रही ..
“दीदी अब तो मुझे नही मरोगी ना “
पूर्वी ने हंसते हुए कहा
“चुप कर पगली तू मेरी प्यारी वाली बहन है,और काजल भाभी ने तो मेरे भाई के लिए खुद गोली खाई है उनका ये अहसान तो मैं जीवन भर नही भूलूंगी “
“आपका कोई भरोसा थोड़ी है भइया के बारे में थोड़ा भी कोई कुछ कहे तो आप प्यार व्यार सब भूल कर मारने को दौड़ पड़ती हो “
पूर्वी जोरो से हँस पड़ी साथ ही वँहा खड़े सभी लोग भी..
“मेरे भइया का बुरा सोचेगा उसे ये निशा कच्चा चबा जाएगी समझ लेना “
निशा ने ये बात थोड़े मजाकिया अंदाज में कहा था ..
“डॉ अब तो आपको मेरी बहन पर कोई शक नही है ना “
“हा नही तो है लेकिन जिस तरह से उस दिन इसने धमकी दी थी कोई भी डर जाए ,खैर पूर्वी की तरफ से तो केस वापस हो चुका है तो किसी तरह की कोई प्रॉब्लम अब नही होगा ..लेकिन निशा तुम्हे ये क्यो लगा की काजल देव को धोखा देने वाली है “
“क्योकि मुझे पता लगा था की काजल ने ठाकुर का जाली पासपोर्ट बनवाया है ,वो तो बाद में शबनम और पूर्वी ने मुझे बतलाए की वो सब ठाकुर को फसाने के लिए चला गया दाव था,अगर भइया वँहा नही जाते तो उसे भी वो वैसे ही मरती जैसे की खान और अजीम को मारा था लेकिन मेरी गलती की वजह से ..
”
“कोई बात नही निशा शायद जो भी होता है वो अच्छे के लिए ही होता है,मुझे लगता है की ठाकुर को काजल की सच्चाई का पता चल चुका था हो सकता है की अगर देव वँहा नही होता तो ठाकुर ही काजल पर अटैक कर देता,और खान और अजीम की बात अलग थी वो दोनो ही कमजोर थे लेकिन ठाकुर मजबूत और मरने मारने वाला इंसान है ,पता नही काजल उससे अकेले निपट पाती की नही क्योकि हमे वँहा पहुचने में समय लगने वाला था …”
“जो हुआ वो हो गया अब बस काजल जल्दी से ठीक हो जाए …”
मैं गहरी सांस लेकर कहने लगा ..
****************
मलीना मेडम मेरे सर पर हाथ फेर रही थी ..
“मेरी दोनो बेटियो को बहुत प्यार देना देव ये दोनो ही अब तुम्हारे हवाले है ,इन्होंने जीवन भर बस बदले और गुलामी में निकाल दिए अब इनकी जिंदगी शुरू हो रही है ,मैं तुमपर भरोसा कर सकती हु …”
मलीना मेडम की आंखों में पानी था और साथ ही काजल और शबनम की आंखों में भी …
काजल ठीक हो चुकी थी लेकिन उसके फेफड़ो में छेद हो चुका था जो नही भर पाया था,एक महीने बीत चुके थे और आज उसे घर ले जाया जा रहा था ,यंहा सभी मौजूद थे ,डॉ,मलीना,मैं,निशा,पूर्वी ,काजल ,शबनम ,काजल के मुह बोले भाई और पिता साथ ही भाई का दोस्त सुशांत और रश्मि भी …
कुछ दिन पहले ही शबनम ने अपने पति को तलाक दिया था और वो मेरे साथ ही रहने वाली थी ,सुशांत और निशा का टाका भिड़ गया था,जिस लड़की ने उसे गोली मारी थी अब वही उसकी जीवन संगनी बनने वाली थी ,सुशांत को भी निशा का इतिहास पता था लेकिन फिर भी प्यार क्या देखता है ,??
पूर्वी अभी सिंगल थी ,मैंने सोचा था की शायद वो अजीम के भाई को डेट करेगी लेकिन उसने क्यो इंटरेस्ट नही दिखाया ..
मैंने निशा और सुशांत को होटल आदित्य को सम्हालने भेज दिया क्योकि अब वो भी हमारे नाम पर था,अजीम के भाई को जब उसके पिता और भाई की सच्चाई का पता चला वो भी खुशी खुशी होटल छोड़ने को तैयार हो गया,लेकिन उसके बदले हमने उसे एक दूसरी जगह पर होटल खोलकर दे दिया था ,
खान का होटल मैं और शबनम चलाने लगे थे,काजल को आराम की सख्त जरूरत थी ,वो बेहद ही कमजोर हो चुकी थी ,
रश्मि अपने होटल का कारोबार अच्छे से चला रही थी लेकिन अब दोनो होटल में कोई कंपीटिशन नही था बल्कि कई मामलों में एक दूसरे का सहयोग ही करते थे …
और डॉ चुतिया ..???
वो नई स्टोरी लिखने के सोच में लगा हुआ था…….
************* समाप्त *****************