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THE DARKNESS RISING [Completed]

Story Hindi 162 pages 7 months ago

(UPDATE-01)
“आबे अरविंद देख के चल, मरवाएगा क्या? एक तो साला यहां इतना अंधेरा है की कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा है…..और तू है की धक्का दे रहा है.” कहते हुए संजय ने कहा….”संजय सर! में खुद अंधेरे की वजह से पत्थर नहीं देख पाया जिसके वजह से मेरा पैर लड़खड़ा गया…सॉरी सर! “ अरविंद ने कहा…”चल जाने दे कोई बात नहीं…..अभी तो फिलहाल उस बंदर पे ध्यान लगाना पड़ेगा, साला पता नहीं कहा भाग गया है…वक्त रहते अगर नहीं ढूँढ पाए तो मुसीबत हो जाएगी और विक्रम सर हमारी जान ले लेंगे वो अलग”.”डोंट वरी सर, पहले भी उस बंदर ने ऐसा कर चुका है…..कितना दूर गया होगा, मिल जाएगा…..” अरविंद ने कहा. “वो तो ठीक है पर मुझे डर लग रहा है की साले पर पता नहीं क्या असर हुआ होगा उस इंजेक्शन का…कहीं कोई साइड एफेक्ट ना हो जाए”….संजय ने कहा…”वो तो है सर. सर! क्या लगता है आपको यह जो एक्सपेरिमेंट है विक्रम सर का क्या कामयाब हो पाएगा?” “अब तो तब पता चलेगा जब बंदर को ढूंढ. लेंगे और उसे पिंजरे में बाँध करेंगे और सुबह तक वेट करेंगे की क्या उस पर उस केमिकल का रिएक्शन हुआ है. फिर उसके बाद विक्रम सर आएँगे और टेस्ट करेंगे की उनका एक्सपेरिमेंट कितना सक्सेस्फुल हुआ है, समझे? लेकिन उससे पहले हमें उस कमबख्त बंदर को ढूंढ़ना होगा वरना कल हमारी खैर नहीं है.” संजय ने कहा…. अरविंद और संजय जो एक साइंटिस्ट विक्रम के यहां पर उनके असिस्टेंट के तोर पर काम करते थे….विक्रम थोड़ा सनकी किस्म का साइंटिस्ट था जो अजीब अजीब तरह के एक्सपेरिमेंट किया करता था. जब उसका कोई प्रयोग कामयाब हो जाता था तो वो उसे ब्लैक मार्केट में बेच देता था . कभी कभी उसेक प्रयोग का असर उल्टा पढ़ जाता. जिसकी वजह से उसे आगे कोई प्रयोग करने पर बन लग चुका था. पर विक्रम रुकने वाला नहीं था वो सब से च्छूपाते अपने फार्म हाउस पर जो की एक जंगल के करीब बना हुआ था अपने दो असिस्टेंट के साथ किसी केमिकल का प्रयोग कर रहा था. और इस बार उसने अपने प्रयोग के लिए एक बंदर पर प्रयोग कर रहा था.उसका कहना था की अगर यह टेस्ट कामयाब हो जाएगा तो ब्लैक मार्केट में इसे हाथों हाथ लिया जाएगा . पर उसे क्या पता था की जो सुनहरे ख्वाब वो देख रहा है क्या वो पूरा भी होगा. क्योंकि जो टेस्ट वो कर रहा था उस बंदर पर उसका असर कुछ उल्टा ही दिखाई दे रहा था. वो एक छोटा सा बंदर था जिस पर ना जाने कितने ही केमिकल टेस्तकिए गये थे अचानक….वो अपने ऊपर किए गये इतने ढेर सारे टेस्ट से कुछ विचलित हो रहा था. वो बार बार अपने पिंजरे में उछल कूद करता और फिर पेट के बाल लेट जाता. उसे अपने अंदर कुछ परिवर्तन सा महसूस होने लगा था. उसे ऐसा लगने लगा था जैसे उसके अंदर एक नयी शक्ति का संचार हो रहा है और फिर वो पिंजरे के दरवाजे को पकड़ पकड़ कर पीट रहा था.

उसे ऐसा लगने लगा था जैसे उसके अंदर उस पिंजरे के दरवाजे को तोड़ने की ताक़त हो और वो उसे तोड़ सकता है….बस वो एक पल भी नहीं रुका और उस पिंजरे का दरवाजा तोड़ कर बाहर कूद पड़ा और यहां वहां देखने लगा. फिर अचानक उसे लब की कीडखी दिखाई दी और वही से नीचे कूद के पेड़ों के सहारे वहां से भाग गया.

जब विक्रम उस रात अपना प्रयोग को खत्म करने के बाद जब सोने गया था तो उसे यह पता नहीं था तो उसकी गैर मौजूदगी में वहां उस लब में क्या घटित हुआ था. संजय और अरविंद की जिम्मेदारी थी लॅप को देखने की…. पर उस दिन दोनों को तलब लगी हुई थी शराब पीने की और….वो दोनों जब शराब के नशे में जब चोद थे तब जिस बंदर पर उन्होंने केमिकल का टेस्ट किया हुआ था जो की एक पिंजरे में कैद था, ना जाने कैसे पिंजरे का दरवाजा तोड़ के भाग गया थाई था.इन दोनों का खबर तब हुई जब संजय शराब के नशे में चोद था, फिर उसे सौचाले जाने की तलब हुई, पर लब के बाथरूम में ना जाकर वो शराब के नशे में चोद होकर वो बाहर इतनी सर्दी में पेशाब करने गया….जब संजय पेशाब कर रहा था तो उसे किसी चीज़ के पेड़ पर किसी के चढ़ने से पत्तो की आवाज़ आई, वैसे तो वो शराब के नशे में चोद था पर उसे इस बात का एहसास था की कोई चीज़ लब की खिड़की से पेड़ पर कूदी है पर वो क्या है यह तो उसे वही जाकर मालूम पड़ेगा…..उसने जल्दी जल्दी अपनी पेशाब खत्म की और फिर भाग कर लब की खिड़की के नीचे जाकर देखने लगा की आख़िर माजरा क्या है, पर उसने जब देखा की उस लब की खिड़की से पेड़ पर जो चीज़ कूदी थी वो कोई और नहीं बल्कि वही बंदर था जिसपर वो लोग केमिकल का टेस्ट कर रहे थे. वो बहुत घबरा गया था और चाहा की झट….

{UPDATE-02}
से जाकर बंदर को पकड़ ले, पर वो ऐसा नहीं कर पाया की क्योंकि उसके वहाँ जाने से पहले ही बंदर वहां से झाड़ियों के बीचो बीच भाग चुका था. संजय ने चाहा की वो भी उन्हीं झाड़ियों में जाकर देखे पर उसे ऐसा करने में खतरा लग रहा था. एक तो इतना घना जंगल, ऊपर से उसके पास इस वक्त ट्रांक्विललाइज़र गुण ( जिससे जानवरो को बेहोश किया जाता है.) नहीं थी जिससे वो बंदर को पकड़ के बेहोश कर सके. वो फौरन लब के अंदर भागा और जाकर अरविंद को सारा घटनाक्रम बताया और उसे अपने साथ चलने को कहा….अरविंद भी संजय के साथ चलने को तैयार हो गया. इस बीच संजय ने टूल्स रूम में ट्रणक़ुल्लिसेर्ट गुण और टॉर्च लेने आ गया .फिर उन्होंने उस बंदर की तलाश में उस घनी झाड़ियों के पीछे भाग लिए

पर उन्हें क्या मालूम था की जिस बंदर की खोज में वो दोनों निकले है, जिसके ऊपर उन लोगों ने ना जाने क्या क्या टेस्ट किए है वो अब एक आम सा दिखने वाला बंदर नहीं रहा था . वो अब एक खूणकार जानवर बन चुका था. अरविंद और संजय उस बंदर को ढूंढ़ते ढूंढ़ते काफी आगे आ चुके थे और इसी वक्त उन्हें एक खूणकार, जहरीली आँखें देख रही थी.

उसे अपने अंदर एक नयी शक्ति प्रतीत हो रही थी, उसे ऐसा लग रहा था की वो अब एक आम सा एक डाल से डाल पर कूदने वाला जानवर नहीं था, बल्कि उसे अपने अंदर एक वहशी दरिंदे जैसे शक्ति का आभास हो रहा था. वो देख रहा थे उन दो व्यक्तियों को जिन्हो ने उस पर ना जाने कितने अत्याचार किए थे अब उसके अंदर एक बदले की भावना के साथ साथ इंसानो का खून पीने भावना भी जगह रही थी. पूरा नरभक्षी बनने को तैयार थे वो जो कभी एक आम सा जानवर हुआ करता था.

इधर अरविंद को अचानक कुछ दिखाई देता है, कुछ लाल लाल जैसा. वो तिथक जाता है और संजय को रोक के कहता है “सर! एक मिनट रुकिये मैंने वहां कुछ देखा है अभी.” क्या? क्या देखा तूने? संजय ने कहा.
“सर मैंने कुछ लाल लाल जैसा देखा जैसे कोई लाल रोशनी हो.” अरविंद ने जवाब दिया.
“लाल रोशनी? तेरा दिमाग खराब है अभी यहां कौन रोशनी जलाएगा? संजय ने उसी तरफ जाते हुए कहा जहां अरविंद ने उसे इशारा किया था.
“सर संभाल कर जाए शायद कही कोई खतरा ना हो.” अरविंद ने फ़िक्रमंद होते हुए कहा.
“अरे देखना तो पड़ेगा ही ना की तूने वहां क्या देखा. लाल रोशनी जैसा क्या हो सकता है? शायद कोई लेज़र लाइट जलाया होगा. पर इतनी रात को और इस घने जंगल में यहां कौन आएगा? वैसे तू अपनी गुण के साथ अलर्ट रहना देखे तो सही वहां क्या है.” संजय ने कहा और उस झाड़ी के झुर्मुट में आगे बढ़ता गया. अचानक उसे कुछ आवाजें आने लगी जैसे कोई बहुत सूखे हुए पत्तो पर चल रहा हो. वो सोच में पढ़ गया की यहां कौन हो सकता है. पर जब वो उस चीज़ को अपने सामने देखता है तो उसके तो पूरे होशो हवास उड़ जाते है. वो देखता है जैसे उसके सामने कोई बालों से भरा हुआ कोई जानवर खड़ा है, दिखने में तो उसकी शक्ल बंदर जैसे ही पर उसका कद बंदारो जैसा नहीं बल्कि उसी के ही कद का या फिर उससे ही बड़ा है.
और उसकी आँखें…आँखें नहीं लग रही थी जैसे वो दहाकता हुआ लावा हो जिसे अरविंद लाल रोशनी समझ रहा था वो उसकी यह भयानक आँखें थी. उसे देख कर उन दोनों के तो होश ही उड़ गये थे फिर भी अरविंद ने हिम्मत कर के बोला “सर यह….कक्ककया…. है? इतना भयानक जीभ मैंने अपने पूरे जिंदगी में भी नहीं देखा .”
“आबे तो मैंने देखा है क्या? पर यह आया कहा से? इसकी शक्ल तो बंदर जैसी लग रही है. यह किस टाइप का बंदर है.” कहते हुए संजय ने कहा. “सर! कही यह वही बंदर तो नहीं जिसकी तलाश में हम भटक रहे है? कही विक्रम सर का एक्सपेरिमेंट की वजह से इसको तो कुछ नहीं हुआ?” डरते हुए अरविंद ने कहा.
“ ओह हां! ऐसा ही है, उसी एक्सपेरिमेंट की वजह से इस पर कुछ उल्टा रिएक्शन हुआ होगा. तू जल्दी से अपनी गुण रेडी रख हमें इसे बेहोश करना है, और जीतने भी डार्ट्स है गुण में सब इस पर झोंक डाल वरना कही लेने के देने ना पड़ जाए.

” पर लेने के देने तो पहले से पड़ ही चुके थे क्योंकि उस वहशी बंदर ने उन दोनों को अपने सामने पकड़ और खूनकर हो चुका था. उन्हें गुण चलाने के नौबत ही नहीं आई क्योंकि उससे पहले ही वो दरिन्दा लंबी लंबी छलांग मारता हुआ उन पर एक झटके में झपट पड़ा और अपने छ्छूरी से भी तेज नाख़ूने से उन दोनों को चियर फाड़ डाला. जब उन दोनों का दम निकल गया तो वो उन दोनों का खून पीने लगा और खून के पीने बाद उसे बहुत सुकून मिला जैसे कितने बरसों का प्यासा था. फिर उसके बाद वो उ

{UPDATE-03}

लाशों का पूरा माँस कहा गया. सिर्फ़ हड्डी ही बची थी. जब उसने अपना भोजन खत्म कर लिया तो एक लंबी दहाड़ उसने लगाई के जैसे अगर वहां कोई शेयर भी आ जाता तो वो भी डर जाता…..फिर वो निकल पड़ा अपने और शिकार के लिए क्योंकि वो खून च्चक चुका था…अब एक आम बंदर नहीं बल्कि एक आदमख़ोर बंदर बन चुका था, एक दरिन्दा, एक हैवान जिसे अगर रोका नहीं गया तो कोहराम मच जाएगा…

सुबह विक्रम की आँख ज़रा देर से खुली, उसने घड़ी पे देखा तो 9 बज रहे थे. उसे बड़ी हैरत हुई वो इतना देर कैसे और इतनी गहरी नींद में कैसे सोता रही गया की उसे टाइम का कुछ होश ही नहीं था, क्योंकि विक्रम टाइम का बहुत पड़ा पाबंद था. हर काम वो टाइम पे करने का आदि था. फिर उसने सोचा की वो पिछले तीन रातों से सोया नहीं था शायद इस वजह से उसे इतनी गहरी नींद आ गयी होगी.
फिर उसने सोचा कोई बात नहीं जब आँख खुले तभी सवेरा और भरपूर नींद लेने की वजह से उसे थकान का एहसास भी नहीं हो रहा था. यही सब सोचते हुए बाथरूम में फ्रेश होने के लिए जाने लगा और अपने नौकर से कहा की जल्दी से उसका नाश्ता लगा दे.

नाश्ता करने के बाद फिर वो अपनी लब के निकल पड़ा. उसका लब उसके बंगलों के पीछे एक बाऔग था, और उस बाऔग को पार करने के बाद एक मंज़िला घर था, उसी में उसने अपना लब बनाया हुआ था. जब विक्रम लब से थोड़े ही दूरी पे था तो उसे कुछ अजीब लगा, क्योंकि उस का मैं दरवाजा खुला हुआ था. ऐसा कभी नहीं होता था क्योंकि विक्रम की सख्त आदेश था अरविंद और संजय को की चाहे कुछ भी हो जाए हम तीनों के अलावा यहां कोई नहीं आना चाहिए. वो नहीं चाहता था की इस बात का किसी को पता चले की वो यहां चोरी चोरी एक लब में किसी प्रकार का प्रयोग कर रहा है और वहां एक बंदारो पे कुछ एक्सपेरिमेंट भी कर रहा है.

जब उसने देखा की लब का मैं दरवाजा खुला हुआ है तो वो घबरा गया और अंदर की तरफ भागा और संजय और अरविंद को आवाजें देने लगा. जब उसे उन दोनों की कोई खबर नहीं मिली तो उसे उन दोनों पर बहुत गुस्सा आया. वो मान ही मान बड़बड़ाने लगा. “साले कहा मर गये दोनों हराम खोर….कुत्तों का कही कुछ पता नहीं है. कही साले फिर से तो नहीं दारू पी के कही पड़े होंगे.” उसने फिर से उन दोनों को आवाजें दी. फिर वो मैं लब की तरफ भागा जहां वो अपना एक्सपेरिमेंट कर रहा था.

पर वहां देख के तो उसके होश ही उड़ गये. उसने देखा की जिस बंदर पर वो किसी केमिकल का टेस्ट कर रहा था वो बंदर अपने पिंजरे से गायब है और उस पिंजरे का दरवाजा भी खुला है. वो एक दम से घबरा गया की यह आख़िर ऐसा कैसे हो गया. उसके दोनों असिस्टेन्स का भी कुछ पता नहीं है, बंदर भी गायब है. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो कहा उन्हें ढूँढे. फिर उसके मान में ख्याल आया की कही उनके साथ कुछ बुरा तो नहीं हुआ है, वो दोनों कितने भी नशेड़ी थे पर यूँ इतनी बड़ी लापरवाही उन्होंने कभी नहीं की थी.

फिर उसने तय किया की वो उन्हें बाहर जाकर ढूंढ़ने की कोशिश करेगा. फिर वो उस इमारत से बाहर आ गया और उस इमारत के पिछवाड़े में उन्हें तलाश करने की कोशिश करने लगा. वहां भी उसे उन दोनों का कुछ भी पता ना चला तो उसने की आख़िर यह दोनों कहा गये होंगे. फिर वो उस इमारत के बाहर आकर उन्हें तलाश करने की कोशिश करने लगा की तभी उसके निगाह इमारत के बाईं और झाड़ियों पर पड़ी. उसके मान में ख्याल आया की वो उन्हें वहां उस झाड़ियों में जाकर तलाश करना चाहिए. पर वहां अकेले जाने में खतरा है इसलिए उसने सोचा कुछ हथियार अपने साथ ले लेता हूँ. और यह सोचकर वो स्टोर रूम की तरफ रुख किया. जब उसने स्टोर रूम के अंदर एंट्री किया तो उसे शॉक लगा के यहां पर दो ट्रांक्विललाइज़र गुण गायब है. “ओह कही ऐसा तो नहीं की वो बंदर वो बंदर अपने पिंजरे से भाग गया होगा तो वो उसे पकड़ने गये होंगे.” विक्रम सोचने लगा. उसने भी तय किया की वो उस जंगल में जाकर देखेगा की आख़िर माजरा क्या है . फिर उसने भी वहां से एक ट्रांक्विललाइज़र गुण उठा ली और लब के बाहर आने के बाद उसका मैं दरवाजा अच्छे से बंद कर लिया और उस जंगल की तरफ रुख कर लिया.
बहुत देर उन्हें ढूँदने के बाद भी उसे उन दोनों का कुछ सुराग नहीं मिला तो उसके मान में अजीब अजीब से ख्याल आने लगे की कही उन दोनों के साथ कूह बुरा तो नहीं हुआ है. और इसी सोच में डूबा हुआ वो जब आगे तरफ रहा था तब अचानक उसके कदम तिटक गये. उसने देखा की कुछ खून की….

UPDATE-04}
बूँदें वहां पड़ी हुई थी . उसने सोचा शायद किसी जंगली जानवर ने किसी जानवर को खाया होगा तो उसका खून होगा, फिर उसने खून के निशान का पीछा करने लगा, फिर उसके कदम जहां थे वही जम गये.” ओह में गोद्ड़द्ड….ययययएह…क्क्कय्या है?. इंसानी हड्डी…विक्रम ने देखा की वहां पर दो इंसानो की हड्डियों के ढाँचे पड़े हुए थे. उस हद्डीो के ढाँचो के देखने के बाद तो विक्रम के तो होश ही उड़ गये थे. वो सोचना लगा की यह किसकी हड्डियों का ढाँचा हो सकता है. वो थोड़ा और पास जाकर देखा तो उसे हैरत हुई की यह हड्डिया ज्यादा पुरानी नहीं बल्कि उसे ऐसा लग रहा था किसी ने बड़ी सफाई उस हड्डियों के ऊपर से उसका सारा माँस निकाल लिया था.

”यह कैसे मुमकिन है? अगर किसी जानवर ने इन्हें खाया होगा तो इनके माँस का कुछ हिस्सा तो बच्चा होगा…पर यहां तो ज़मीन पर पड़े हुए खून के अलावा कुछ नज़र ही नहीं आ रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे कोई बरसों का भूखा हुआ होगा और उसने इनके जिस्म से एक एक माँस बड़ी फुर्सत में भात कर नोंच नोंच के खाया होगा. पर यह कैसे मुमकिन है.” सोचने लगा विक्रम. फिर वो कुछ और आगे जाकर देखा की कुछ उसे समझ में आए आख़िर क्या माजरा है तो उसने देखा की एक झाड़ियो में कुछ कपड़े जैसा पड़ा है. जब विक्रम उस झाड़ी के पास गया तो वो एक शर्ट का टुकड़ा था. अचानक उसे याद आया की “यह शर्ट मैंने कही देखी है..ओह नो…” अचानक उसे याद आया की यह शर्ट तो संजय के बदन में देखा था.” तो …तो इसका मतलब…..यह ढाँचा…संजय का है..ओह नो.” सोचने लगा विक्रम. “अगर यह संजय का ढाँचा है तो दूसरा जरूर …अरविंद का होगा.” वो वही सर पकड़ के भात गया की आख़िर यह सब कैसे हुआ. “आख़िर इन दोनों की ऐसी हालत किसने किया होगा. और वो बंदर कहा गया होगा जिसे ढूंढ़ने यह लोग यहां तक आए थे. उसे डर लग रहा था वो जिस बंदर पर उसने टेस्ट किया था उसका यूँ खुले आम घूमना खतरे से खाली नहीं था. अचानक उसका दिमाग में कुछ खटका…”कहीं…कहीं यह सब उस टेस्ट का नतीजा तो नहीं है. क्योंकि कोई आम जानवर इस तरह और इतनी सफाई से कभी भी अपना शिकार को नहीं खाता. पर…पर उसके साथ ऐसा क्या हुआ होगा जो वो इतना खूनकर हो गया होगा.” जब उसके दिमाग में यह सब बातें घूमने लगी तो उसे भी डर लगने लगा की कहीं वो बंदर उसे भी कुछ नुकसान ना पहुंचा दे. विक्रम वहां से तुरंत भागता हुआ अपने लब पा पहुंच के ही दम लिया..उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वो इस सारी मुसीबतों से वो कैसे निकले. वो सोचने लगा की “ अगर उस बंदर के साथ कुछ हुआ है और वो इतना खूणकार हुआ है तो जरूर वो किसी और को भी अपना शिकार बनाएगा. अफ अगर ऐसा हुआ तो मुसीबत हो जाएगी..”वो सोचने लगा की आख़िर वो जो टेस्ट कर रहा था उसका इतना उल्टा रिएक्शन कैसे हुआ. यही सब सोचते हुए वो अपने मैं लब में गया और देखने लगा की कहाँ से गड़बड़ हुई है.

उस घटना के 4 दिन बाद,

“आह…आह….आह…धीरे करो साहब दर्द हो रहा है.” मजरी ने चिल्लाते हुए कहा.
“चुप मादरोचोड़!! ज्यादा चिल्लाई ना साली तो अपनी बंदूक की सारी गोलियाँ तेरी चुत में डाल दूँगा.”उमेश, मजरी के ऊपर चढ़ा हुआ था और तेजी से अपना लंड उसकी चुत में अंदर बाहर करने लगा.
“साहब सही में बहुत दर्द हो रहा है.” मजरी एकदम रोने सी सूरत बनाते हुए कह रही थी.
“में जब तक नहीं रुकुंगा जब तक मेरा टॉप गर्म गर्म अपना लावा तेरी चुत में नहीं छोढ़ता.”
“में रुकने नहीं बोल रही हूँ साहब बस थोड़ा धीरे करने को बोल रही क्योंकि मुझे बहुत दर्द हो रहा है.” मजरे ने उमेश की बात का जवाब देते हुए कहा.

पर उमेश, मजरी की ना सुनते हुए अपना कार्य करने में लगा रहा. थोड़ा देर वो मजरी की चुत में अपना लंड अंदर बाहर करता रहा फिर वो उसे बाहर निकाल के मजरी को घूमने के लिए कहा.
“अब कुतिया बन” उमेश ने कहा. मजरी ने वैसा ही जैसा उसे उमेश ने कहा था. फिर उमेश ने अपना 8 इंच का लंड मजरी की गान्ड के होल में रखा ही था के उससे पहले मजरी बोल बड़ी
“नहीं साहब ऐसा मत करो मैंने आज तक कभी भी अपने पीछे नहीं डलवाया.” मजरी ने बड़ी विनती करते हुए उमेश को समझाया.
“क्यों? तेरा आदमी तुझे यहां से नहीं छोढ़ता है.?” उमेश ने कहा.
“नहीं साहब उसने ऐसा करने की कई बार कोशिश की पर मैंने उसे ऐसा करने कभी नहीं दिया.” मजरी ने कहा.
“कोई बात नहीं , जो तेरा आदमी नहीं कर सका वो आज में करता हूँ. जिंदगी में बहुत सारे काम पहली बार करवाना पढ़ता है मजरी, तू फिक्र मत में इतनी आराम से डालूँगा की तुझे दर्द नहीं बल्कि मजा आएगा.” उमेश ने कहा. और फिर वो उसके पीचवाड़े में अपने लंड को धीरे धीरे गुसाआनए लगा.

{UPDATE-05}

“अयाया…साहब आरा से.” मजरी ने कहा.
“अरे रुक ना. अभी तो डालना शुरू ही किया हूँ. अभी से दर्द कर रहा है? उमेश ने कहा.
“हां साहब बहुत दर्द हो रहा है.” मजरी ने दर्द में कराहत हुए कहा.
“माकी लोदी आगे डालो तो दर्द करता है पीछे डालो तो दर्द करता है. अब क्या तेरे मुंह में डालु.” उमेश ने चिढ़ते हुए कहा.
“कही भी डालो साहब, पर पीछे मत डालो. वहां में बर्दाश्त नहीं कर पाओँगी.” मजरी ने कहा.
“ऐसा क्या? तब तो पीछे ही डालूँगा क्योंकि तू जितना चिल्लाएगी मुझे उतना ही जोश आएगा. “
“नहीं साहब ऐसा मत करो. रहम खाओ मुझे गरीब पर.” मजरी ने जल्दी से कहा.
“रहम खाने के लिए तुझे पैसे नहीं देता हूँ. बल्कि मजा लेने के लिए पैसे तुझे देता हूँ. में जैसे चाहु तेरे से मजा ले सकता हूँ. अब अगर तूने कुछ नाटक किया ना तो वो बंदूक देख रही है.” उमेश ने टेबल पे रखा हुई गुण दिखाते हुए कहा “उसी से तेरे अंदर इतने छेद करूँगा की कन्फ्यूज़ हो जाएगी की कहा से चुड़वव और कहा से हग्गू. मजरी भी समझ गयी थी के अब इस हैवान को रोक पाना मुश्किल है इसलिए यह जो कह रहा है शांति से करती रहूं. वरना इसका कुछ भरोसा नहीं जो यह कह रहा है कही सही में ना करदे.
“ठीक है साहब में तैयार हूँ पर अगर पीछे ही डालना है तो ज़रा अपने उस चीज़ को तेल से एक बार मालिश कर दीजिए ताकि अंदर जाने में कोई परेशानी ना हो.”
“हां!! अब तूने की ना कोई समझदारी वाली बात. रुक में अभी तेल लेकर आता हूँ.” कहते हुए उमेश वहां से उठा और तेल लेने के लिए चला गया. और थोड़े बाद वापस आकर उसने अपने लंड पर थोड़ी देर तक तेल से मालिश करने लगा.
“अब ठीक है ना?” उमेश ने अपना तेल से चमकता हुआ लंड मजरी को दिखाते हुए कहा.
“जी ठीक है.” मजरी ने बस इतना ही कहा.
“हम. चल वापस से कुतिया बन.

” मजरी ने वैसा ही किया जैसा उसे उमेश ने कहा था. फिर उमेश अपना लंड मजरी की गान्ड के होल पे रखा और उसे धीरे धीरे अंदर लेकर जाने लगा. मजरी को अब भी दर्द हो रहा था पर वो इस बार इस दर्द को सहन कर रही थी की कही यह फिर से गुस्सा ना हो जाए.
“आआयययययीीई……….साआआआआआहाब्ब्बब……..निकालूओ…निकालूओ….इससे . बहुत दर्द हो रहा है में आपसे विनती करती हूँ.” मजरी ने चिल्लाते हुए कहा.
पर उमेश उसकी एक भी नहीं सुन रहा था. क्योंकि मजरी जितना चिल्ला रही थी उसे उतना ही मजा आ रहा था. वो तो बस अपने मजे में अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था. तकरीबन 5 मिनट तक मजरी के पीच्छवाड़े से खेलने के बाद वो रुका और फिर मजरी को सीधा करते हुए फिर अपना लंड उसकी चुत में घुसाने लगा.
“अब बहनचोद तुझे मजा आ रहा है.” उमेश, मजरी के अंदर समाते हुए कह रहा था.
“हां…हां…अब ठीक है .” मजरी ने बस इतना कहा.
“तो बस अब ज्यादा छू छा मत कर और मुझे मजे लेने दे. समझी? “ उमेश ने कहा.
“ठीक है.” मजरी ने कहा. फिर उमेश ने उसकी चुत में अपने लंड को अंदर बाहर करने का कार्य जारी रखा और तब तक नहीं रुका जब तक उसका लंड एक गर्म गर्म लावा मजरी के चुत में नहीं छोडा. इतनी मेहनत के बाद उमेश, मजरी के ऊपर ही ढेर हो गया था.

फिर कुछ देर बाद वो अपने कपड़े पहनने लगा और कपड़ा पहनने के बाद अपने जेब में हाथ डाला और कुछ पैसे निकालता हुआ मजरी की तरफ बढ़ा दिया.
“यह ले तेरा मेहनताना.” उमेश ने उसे पैसे देते हुए कहा. मजरी उसके हाथ से पैसे लेते हुए उस रूम से जाने लगी की तभी उमेश ने उसे रोका.
“कल इसी टाइम पर आ जाना. समझी क्या? और यह ज़रा चिल्लाना कम किया कर.” उमेश ने कहा.
“जी ठीक है.” कहते हुए मजरी वहां से चली गयी.

उमेश चंद्रा तिवारी जो 45 या 50 उमर का एक लंबा चौड़ा तगड़ा व्यक्ति था . वो एक डीविसोइओनल फोरेस्ट ओफीसेर था . अपनी जिस्म की भूख मिटाने के लिए वो पास के ही गाँव की औरतों से संभोग किया करता था. मजरी इस गाँव की पहली औरत नहीं थी जो उमेश की हवस की प्यास भुजाई थी. बल्कि ऐसे कई औरतों को उमेश अपने औहदे और पैसे के बाल पर उनका शोषण करता था. पहले तो वो उन्हें पैसे से खरीदने की कोशिश करता था और अगर कोई तैयार नहीं होता था तो वो उन्हें अपनी ताक़त के बाल पर उनके साथ ज़बरदस्ती करता था. और यह सब काम वो अपने ऑफिस के पीछे बने हुए अपने क्वार्टर में किया करता था.

अपने क्वार्टर से निकल कर फिर उमेश अपने ऑफिस चला गया. उमेश अपने कापबीं में भायते हुए किसी फाइल का निरक्षण कर रहा था की इतने में उसके केबिन में उसका जूनियर उसकी इजाज़त लेते हुए अंदर आया और कहने लगा “ सर! पास के कुछ गाँव वाले आए हुए है, वो आपसे कुछ जरूरी बातें करना चाहते है.”
“उन्हें अभी यहां से भागाओ मुझे कुछ जरूरी काम करने है.

[UPDATE-6]

देना की बाद में आए..” उमेश ने टालने के अंदाज़ में कहा.

“ओके सर!! “ कहते हुए वो ऑफिसर केबिन से बाहर निकल गया. पर उसे अभी निकले हुए कुछ ही देर हुए होंगे की कभीं से बाहर उमेश को किसी की तेज तेज बातें करने की आवाजें आने लगी.
“राम सिंग?? राम सिंग??? उमेश ने चिल्लाते हुए अपने जूनियर ऑफिसर को आवाज़ देने लगा. उसका वो ऑफिसर जदली से केबिन में प्रवेश किया.
“जी सर!”
“यह बाहर इतना हुनगामा क्यों हो रहा है?” उमेश ने उस ऑफिसर से कहा.
“सर, वही गाँव वाले जाने को तैयार नहीं हो रहे है, कह रहे है आपसे मिल करके ही जाएँगे.” वो ऑफिसर ने उमेश को बताया.
“पर क्यों? ऐसी क्या खास बात करनी है?”
“सर उनका कहना है गाँव के पास जंगल में कुछ जानवरों इन के 4 साथियों पर हमला किया है और जिनमें से 3 को वो लोग मौत के घाट उतार दिए है. और उनमें से एक ने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बच्चा के वहां से भाग लिया पर जख्मी हालत में है और उसका एक हाथ काट चुका है “ ऑफिसर ने पूरी जानकारी उमेश को दी.
“हम….” कुछ देर उमेश ने सोचा फिर कहा.
“यह लोग किस गाँव से है?’ उमेश ने पूछा
“सर! यह लोग कालगरह के पास जो छोटा सा गाँव है वही से आए हुए है.” ऑफिसर ने जवाब दिया.,
“कालगरह से? वहां कैसे कोई जानवर आ सकता है क्योंकि वो तो बफर एरिया (जहां जंगली जानवर नहीं आते है) में पढ़ता है और वहां हमारे गार्ड्स भी तैनात रहते है, अगर कोई जंगली जानवर उस और जाने की भी कोशिश करेगा तो वो उसे कोर एरिया (घना जंगल) में भेज देते है.” उमेश ने कहा.
“वो तो ठीक है सर! पर…” कहते हुए वो ऑफिसर थोड़ा रुक गया.
“पर क्या राम सिंग? उमेश ने उसे थोड़ा गंभीर देखा तो पूछा.
“सर! गाँव वालो का यह भी कहना है की वो कोई जानवर नहीं है बल्कि कुछ और ही है. वो लोग कह रहे थे वो शैतान थे जिन्होंने ने उनके साथियों को मौत के घाट उतार दिया था.” इतना कहते ही राम सिंग चुप हो गया.
“शैतान थे? क्या राम सिंग तुम भी इन गाँव वालो की बात में आकर कुछ भी बोल रहे हो.” उमेश थोड़ा चिथड़े हुए कहा.
“अच्छा उनमें से किसी एक या दो को अंदर भेजो में ही उनसे खुद बात करता हूँ.” उमेश का इतना कहना था की राम सिंग केबिन के बाहर गया और दो गाँव वालो को अंदर लेकर आया.फिर उमेश ने भी उन दो गाँव वालो से बात चीत की. उसे भी उन दोनों ने यही बताया जो वो राम सिंग को बताए थे.
“ठीक है एक काम करते है.” उमेश, राम सिंग की तरफ पलट ते हुए कहा.” हम वहां एक बार खुद जाकर उस आदमी से बात करते है जो उस जानवरो से बच गया था. तब शायद हमें बात कुछ समझ में आएगी..
“ठीक है सर! यह ठीक रहेगा. क्या में गाड़ी निकालु.?” राम सिंग, उमेश से इजाज़त लेते हुए कहा.
“ हां ठीक है तुम गाड़ीई निकालो हम अभी चलते है.” कहते हुए उमेश भी अपनी सीट से उठ गया. उमेश कितना भी औरत के जिस्मो का पुजारी हो पर वो अपने काम में कभी भी कोई कमी नहीं रहने देता है.

जब कोई मुश्किल केस उसके सामने आता है तो वो अपने जूनियर ऑफिसर्स के साथ साथ में खुद भी केस को सॉल्व करने में लग जाता है. फिर कुछ देर बाद उमेश ने गाँव वालो से कहा की वो अपने गाँव वापस लौट जाए वो उन्हें कुछ देर बाद वही मिलेगा. यह सुनकर गाँव वहां से चले गये.

उमेश और राम सिंग कालगरह के पास बने हुए उस गाँव में जाते है जहां पर यह वारदात हुई थी. वो दोनों उस आदमी के पास पहुंचते है जो उन जानवरो के हमले में बच गया था. वो 60 से 65 साल का एक भूढ़ा आदमी था. उसके चेहरे पर एक डर, एक खौफ बराबर देखा जा सकता था जो इस वक्त एक चारपाई पर लेता हुआ था और उसके दायें बाजू जो की उस हमले में काट चुका था वहां पर अब पट्टी बँधी हुई थी. उमेश उस भूढ़े के पास रही हुई एक और चारपाई पर भात गया और उससे पूछने लगा.
“कहो? क्या हुआ था तुम्हारे साथ? पहले तो उस भूढ़े ने कोई जवाब नहीं दिया सिर्फ़ कुछ चाँद तक उमेश को घूरता रहा . फिर उसने कहा
“श..शैतान थे वो ….बहुत ही….भयानक…वो किसी को भी नहीं छ्चोड़ेंगे, सबको कहा जाएँगे .” वो भूढ़ा आदमी उमेश की बात का जवाब ना दे कर खौफ के मारे यह बोले जा रहा था.
“देखो तुम कुछ बताऊगे की तुम्हारे साथ में क्या हुआ था?” उमेश उससे फिर पूछा. उस भूढ़े की खौफ के मारे कुछ बोला ही नहीं जा रहा था. तभी पास में भरता हुआ व्यक्ति ने उस भूढ़े से कहा. “देखो चाचा, यह साहब तुमसे पूछने आए है की तुम ने वहां उस जंगल में जो कुछ भी देखा उन्हें सब बता दो ताकि यह अपनी कार्यवाही पूरी करे और उस शैतान को पकड़ सके.” भूढ़े ने कुछ अपने….

(update-07)

पास भैहे हुए व्यक्ति की तरफ देखा फिर उमेश की तरफ घूम कर कहा. “तुम उसे नहीं पकड़ पाओगे, वो बहुत खतरनाक था. शेयर , चीटा और भी कई आहमखोर जानवर से भी खूणकार. वो बहुत भयानक था. उसके शरीर पर बहुत लंबे लंबे बाल थे और बारे बारे दाँत, बारे बारे नाखून, लाल लाल आँखें. उसकी आँखों में हैवानियत साफ नज़र आ रही थी. उनके पास ताक़त भी बहुत थी.वो कोई मामूली जानवर नहीं थे. उन्होंने एक ही झटके में अपने बारे बारे तेज धार वाले नाखूनओ से मेरे तीनों साथियों के सर उनके धड़ से अलग कर दिए थे. जब वो मेरे पीछे लपके तो में अपने बचाओ में अपना दाया हाथ आगे कर दिया था जिसके वजह से उसके एक ही वार से मेरा हाथ मेरे जिस्म से अलग हो गया था. फिर इससे पहले की वो भी मेरी गर्दन अपनी नाखूनओ से उड़ाते की अचानक एक पतहर की वजह से मेरा पैर फिसला और में ढलान के नीचे नदी के पानी में गिर गया. उसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ याद नहीं क्योंकि जब मेरी आँखें खुली तो में इन गाँव वालो के बीच में था.” इतना सब कुछ कहने के बाद वो भूढ़ा चुप भात गया.
“हां साहब! जब हम उधर उस नदी के किनारे जा रहे थे तभी हमें यह वहां बेहोश पड़े मिले थे .” उस भूड़े के पास भरता हुआ व्यक्ति बोला.

उमेश की कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो उस भूढ़े की बात पर विश्वास करे या ना करे. क्योंकि उस भूढ़े ने उन जानवरों का जो वर्णन (डीटेल्स) दिया था उसे कुछ हजम नहीं हो रहा था. क्योंकि उसने अपनी पूरे 25 साल जंगलों में रही कर बिताई थी और आज तक उसने इस तरह का कोई भी प्राणी नहीं देखा था. फिर भी उसने मौकाए वारदात वाली जगह पर एक बार खुद से निरक्षण करने की सोचा.
“अच्छा तुम मुझे बता सकते हो की जो हादसा तुम्हारे साथ में हुआ वो कहा है.?” उमेश ने उस भूड़े से पूछा.
“गाँव से थोड़े ही दूर पर जहाँ से जंगल शुरू होता है उसके कोई आधा घंटा चलने के बाद हमारे साथ यह घटना घाटी थी. भूढ़े ने जवाब दिया. “ह्म्‍म्म्म. …ठीक है तुम लोग डरो नहीं हम जाकर देखते है वहां पर .” उमेश ने कहते हुए चारपाई से उठने लगा.
“साहब! हम सब गाँव वाले बहुत डरे हुए है, हमारे तीन साथी भी मारे जा चुके है. हमारी कुछ समझ में नहीं आ रहा है की हम अपनी सुरक्षा किस तरह करे.” भूढ़े के पास भायते हुए व्यक्ति ने उमेश को खड़ा हुआ देखा तो कहा.
“तुम घबराओ नहीं….में यहां अपने दो गार्ड्स को तैनात कर देता हूँ.” फिर उमेश ने राम सिंग की तरफ घूम कर कहा.
“राम सिंग? यहां पर दो गार्ड्स की ड्यूटी लगा दो. और उनसे पूरी तरह चौकन्ना रहने को कहना .”
“ओके सर! “ कहते हुए राम सिंग ने अपने वाइर्ले से किसी को कुछ आदेश देने लगा.

फिर उसके बाद उमेश और राम सिंग भूड़े के बताए हुई जगह पर पहुंचे. वो उस जंगल काफी दूर निकल आए थे पर उन्हें किसी भी प्रकार का कोई भी ऐसी जगह नहीं दिखी जहां से उन्हें यह पता चलता की वहां क्या हुआ है. फिर कुछ देर यहां वहां घूमने के कुछ देर बाद अचानक राम सिंग ने उमेश से कहा.
“सर! उहदार देखिए!! राम सिंग ने अपने दायें और इशारे करता हुआ कहा. उमेश ने भी वहां देखा तो देखते ही वो चौंक उठा.
“सर! यह किसी का कंकाल पड़ा हुआ है.” राम सिंग ने कहा.
“हां यह तो कंकाल है वो भी किसी इंसान के.” उमेश उस कंकाल के पास जाते हुए कहा

उमेश उन सब कंकाल का मुआएना कर ने लगा. उसे फिर से शॉक लगा की यह सब कंकाल एक दम ताजा है, ऐसा लगता जैसे अभी इसके जिस्म से खाल उतारी गयी हो. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की अगर किसी जानवर ने उन्हें खाया है तो उनके माँस तो होने चाहिए.
“राम सिंग यह सब क्या है? तुम्हें कुछ समझ में आया? “ उमेश ने राम स्नघई से ही पूंछ डाला.
“नहीं सर! मेरी भी कुछ समझ में नहीं आया की यह सब कैसे हुआ है वो दोनों बहुत देर तक उस जगह का हर दृष्टिकोण (एंगल) से निरक्षण करने लगे फिर भी उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था. अंत में उमेश ने तंग आते हुए कहा.
“कुछ समझ में नहीं आ रहा है, ओके! इन सब कंकालो की फोरेन्सिक जाँच करवा. रिपोर्ट के आने के बाद ही कुछ पता चलेगा की आख़िर माजरा क्या है.

और हाँ यह अभी किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए की यहाँ पर इंसानो के कंकाल मिलिए है. वरना साले मीडिया वाले अलग ही दिमाग खराब करेंगे. पहले ही हमारे ऊपर इतना प्रेशर है उन साले पोचर्स को पकड़ने का जो जानवरो का शिकार करके उनके बॉडी पार्ट्स को बेचते है. अब साला यह नया नाटक चालू हो गया है…..और कुछ गार्ड्स को यहां की निगरानी के लिए भी तैनात कर दो.”
“ओके सर!” उसके बाद उमेश भी अपनी जीप में भात के वहां से चला गया.

UPDATE-8)

Aur idhar delhi me,

Nikhil apne ghar pe baithe-2 bear pi rha tha, vo bhit der se kisi ka wait kr rha tha, fir achanak bahar bell baji, nikhil uthke door kholne gaya, fir jab usne darwaja khola to usne dekha ki bahar nisha khadi thi.

"Ab aayi ho?" Nisha ko ghar me dakhil hote huye nikhil ne kaha

" Ohhh i am very sorry!! Par badi muskil se mummy se bahana maar ke aayi hu, aur uske baad thoda traffic me gayi thi". Nisha ne nikhil ko safai dete huye kaha.

Nikhil:-kya? Haha tumhe kahi bhi jaane se pehle apni mummy se permission leni padti hai?

Nikhil nisha ka majak udate huye bola aur ek glass me beer daalne laga

Nisha:- I know it is embarrassing but what shoul i do? Meri mummy thodi si conservative type ki hai, you know wahi old type ki thinking

Nikhil:-bear?
Uski taraf beer badhate huye bola

Nisha:- yeah sure..

Nikhil:- so what next? ( Usey apni god me bithate huye bola)

Nisha:- you know that..

Nikhil:- acha ye batao jo mene tumse kaha tha us kaam ka kya hua

Nisha:- Relax! Itni jaldi kya bol dungi.

Nikhil:-iska matlab abhi tak tumne usse baat bhi nhi ki

Nisha:-okay! Baba keh dungi kal mene shruti ko college aane ko kaha hai, jab wo aayegi to tumhara ye kaam kar dungi..

Nikhil:-okay! Kal se jada late bilkul nhi hona chaiye mujhe us ghamandi ladki ka ghmand jaldi se jaldi todna hai, usne meri bhut insult ki thi aur me usse jaldi se badla lena chata hu
(Nikhil gusse me bola)

Nisha:-Ohh! Don't worry darling tumhara maksad jaroor pura hoga, mein usey apne sath aane pe majboor kar doongi, fir tumhari jo bhi samjh me ho wo karna.

Nisha ne apne haath nikhil ki garden me lapet liye, nikhil ne apna glass table pr rakh diya aur apna chehra nisha ki taraf kiya, aur uske hotho ko ras chusne laga, koi 10 minute tak wo dono ek doosre ko aise hi kiss karne me lage rahe, fir nikhil ne nisha ko sofe pe lita diya, aur uske dono boobs apne hatho se dabane laga

Nisha:- Aaahh aur zor se dabao jaan haa aise hi aise hi.

Nisha fir nikhil ko chumne lagi, nikhil ka hath nisha ke shirt ke buttom kholne laga, pure buttom kholne ke baad usne shirt ko nisha se alag kar diya, ab nisha sirf ek red colour ki bra me thi, nikhil ne jab uske red bra me bade bade chuche dekhe to usse control nhi ho paya, air bhooke sher ki tarah unhe choosne chaatne laga aur kabhi kabhi nipple me daant gada deta.

Nisha :-aaah! Kya kar rahe dard hota hai aaah! Shetan

Nikhil ne nisha ko ghumaya aur uski bra kholne laga, aur fir us bra ko fek diya ab nisha ke dono bade-2 boobs ekdum ajaad ho chuke they, wo unhe dheere dheere chusne laga ek hath se chuche dabata doosre hath se khudke kapde nikalne laga, 10 min tak chuche choosne ke baad wo usey fir se kiss karne laga, ye wali kiss thodi wild thi fir dheere dheere wo niche aane laga. Pehle uski gardan ko chusne laga fir boobs ki nipple ko chusne aur katne laga aur ek hath se uski naabhi ko kuredne laga, fir nabhi me jib daalke usey chusne laga, fir usne apne ek hath niche le jaake nisha ke shorts ko khich ke nikal diya ab wo bas ek red panty me thi aur nikhil bas khali ek shorts me.

Nisha ki ek jaangho ko sehlane laga aur chumne aur chatne laga dheere-2 wo uski chut ki taraf badne laga jo red panty ki piche apna paani baha rahi thi, nikhil ne uski chut pe kiss kiya aur chut se aane wali smell ko sungh ke pagal ho gya aur ek jhatke mein panty ko faad diya aur apne dono hoth uski choot pe rakh diya aur usey chusne aur chaatne laga fir ek ungli se uske daane ko sehlate sehlate ek ungli uski chut me daal di, nisha to do tarfe hamle se pagal huyi jaa rhi thi, aur wo jada der sehan na kar paayi aur siskariya lete huye uske muh me hi jhad gayi,,

Nisha:- aaahahhh nikhil please aur mat tadpao jaldi se apna lund meri chut me daal do aaahhh please!

Nikhil kuch nhi bola bas bhuke bhediye ki tarah apna lund uski chut pe set kiya aur ek jhatke me pura ander pel diya, wo nisha ki dono taang apne kandhe pe rakh ke usey berehmi se uski chut maarne laga aur gaali bakne laga, nisha ko bhi bhut maja aa rha tha wo bhi har dhake ke sath apni gaand hila-2 ke chud rahi thi, aakhirkar nikhil 25 minute ki chudayi ke baad apna maal uski chut me hi bhar diya, is bich nisha 3 baar jhad chuki thi

Nikhil ne apna lund bahar nikal ke nisha ke muh me daal diya aur wo uske lund chaat chaat ke saaf karne lagi, saaf karne ke baad dono bathroom gaye fresh huye aur fir apne apne kapde pehen ke sofe pe baith gaye

Nisha:- ekdum janwar ban jaate ho sex karne ke time

Nikhil:-Kyu? Tumhe mera janwar banna pasand nahi hai .

Nisha:- nhi aisa nhi hai balki mujhe yahi cheez to tumhari pasand hai, par tum kabhi-2 Jada's hi haiwan ban jaate ho, mein dard me tadapti rehti hu aur tum kuch sune bina mujhe chodte rehte ho.

Nikhil:- jab me kisi ke sath sex karta hu to mujhe kuch yaad nhi rehta, agar tumhe bura laga ho to sorry,

Nisha :- No! It's okay. You don't need to be.

Kuch der baad nisha;- nikhil do you really love me.

Nikhil ;- kyu why are u asking that.

Uske baad indono me kuch aur baate hone lagti hai fir nisha apne ghar chali jaati hai aur nikhil shruti se badle ke plan ke baare me sochne lagta hai

Nikhil suru me college mein shrute ke sath flirt karta tha to ek din tang aake usne nikhil ke thappad maar diya usi din se usne soch liya tha ki wo shruti ki jindagi barbaad karke rahega to usne plan banaya aur shruti ki best friend nisha ko apne pyar ke jaal me fasya aur fir usey emotional blackmail karke apne sath mila liya,
Ab usme plan banaya tha ki wo sab group me shruti ko leke manali uska farmhouse hai waha jayenge aur fir shruti ka gangrape karke video banayenge aur uske amir baap se paise wasoolenge aur usey apni randi bana ke rakhenge, pehle to nisha nhi maani fir nikhil ne apne pyar ka wasta deke usey mana hi liya

Ye sab sochte sochte wo so gaya..

To be continued....

(UPDATE-9)

Shruti delhi ke bhut bade business man vijay kapoor ki eklauti beti hai, vo bhut laad pyar se pali-badi hai aur sayad isiliye iske nature me rukhapan hai, usey apni khoobsurti aur paiso pe bhit ghamand hai, vo jaldi se kisi ko bhaav nhi deti hai, isiliye isne college me kuch gine-chune friend hi banaye hai, unme se ek nisha thi jo shruti ke kaafi close hai, shruti isiliye usey apna best friend manti hai, par nikhil ke jhoote pyaar ke behkaave me aake wo uske khilaf nikhil ka sath de rahi hai, kyuki wo nikhil se bhut pyar karti hai, par usey ye nhi maloom tha ki nikhil mehaz usey shruti se badla lene ke liye istemaal kar rha hai.

"Aapko mene kitni baar kaha hai, yu baithe bithaye charity mat diya kare, aapko meri baat samjh me nhi aati kya( breakfast ki table pe baithte huye kaha)

Vijay kapoor:- arey to bhai kya ho gaya, kyu subah naste me itna gussa kar rhi ho, 20 lakh hi to diya hai

Saundrya:-20 lakh ho ya 20 ruppey, yu paisa kisi faaltu institute ko nhi doge tum samjhe? Aaj jo tum itna paisa luta rahe ho na un bhikhmango ko dene ke liye, yaad rakho ye saari dollat tumhe mere uncle ki wajah se mili hai, me isey itni aasani se lutane nhi dungi.

Vijay kapoor:- Thik hai me jo aaj kuch bhi hu wo tumhare uncle ki wajah se hu, par ye mat bhulo ki kapoor industry ko aage mene apni mehnat se badhaya hai, isme apna khoon pasina lagaya hai.

Saundrya:- haa haa par booniyad to mere uncle ki wajah se huyi hai na

Vijay kapoor:-Offoo tumse to behas karna hi bekar hai.(kehte hu wo apni table se uth gya kyuki wo janta tha ki wo apni wife se behes me nhi jit sakta)

Saundrya:-dekho vijay aaj tumhe meri baato ka jawab dena hi hoga, tum paise kaha kaha spend karoge uska faisla tum akele nhi le sakte.

Vijay kapoor:- Thik hai is baare me baad me baat karenge, mujhe abhi office ke liye late ho raha hai( itna kehkar wo waha se chala gya.

Saundrya:- kuch bhi bolo to yahi bahana milta hai. Office ke liye late ho raha hu.( Wo chidte huye boli)

"Kaveri! Kaveri! Ab ye kaha mar gayi"- gusse me saundrya apni naukrani ko awaz dene lagi.

Kaveri:- ji maalkin aapne bulaya mujhe.

Saundrya:-kitni der se tujhe awaj laga rhi hu kaha thi tu?

Kaveri:- jee mein kitchen me thi isliye sunai kam diya.

Saundrya:-Acha thik hai tum ek kaam karo shrute ko jaake utha do, nhi to usey college jaane me late ho jayegi.

Kaveri:- jee malkin me abhi shruti baby ko jaga deti hu . ..

Shruti apne alishan kamre mein duniya janha se bekhabar gehri neend me soyi huyi thi, uska chera dekhke hi maloom chal raha tha ki wo kaoi haseen sapna dekh rhi hai. Nind me bhi uske chere pe halki muskurahat bikhri huyi hai, wo itni gehri neend me hai ki uske aaspass kya ho rha hai uski usey koi khabar nhi hai

Wo sapne me dekh rhi thi ki wo kisi jungle me akele kisi tree ke niche khadi huyi hai, jaise uski najar kisiko talash rahi ho, wo chaaro taraf ko kisi ko dhundne lagti hai, achanak usey dikhta hai ki ek naujawan ek safed ghode pe baitha hua, usi ki taraf dekh rha hai, shruti ko us ghode wale ladke ka chera itni dur se nazar nhi aa rha tha isliye wo sochti hai ki aakhir ye ladka kon hai....

(UPDATE-10)

जो उसे हमेशा अपने पास बुलाता रहता है और वो उसके जीतने भी करीब जाने के कोशिश करती है वो उससे उतना ही दूर चला जाता था. श्रुति ने आज तय किया की वो आज उस नौजवान का चेहरा देख कर ही रहेगी, उससे पूच्ेगी की क्यों वो उसे इतना परेशान करता रहता है और वो क्यों उसके पीछे यूँ दीवानी बन के फिरती रहती है.
श्रुति ने जैसे ही अपने कदम उस नौजवान की तरफ बढ़ने लगी वो नौजवान अपने घोड़े को आगे बढ़ने लगता है और उससे दूर जाने की कोशिश करने लगता है. श्रुति उसे आवाज़ देने लगती है “सुनिए! सुनिए! प्लीज़ ज़रा रुक जाए मुझे आपसे बात करनी है. आप क्यों मुझे इतना परेशान करते है, ज़रा रुक जाए प्लीज़.!!! “ पर वो नौजवान उसकी कोई बात का जवाब दिए बगैर वहां से जाने लगता है. श्रुति भी उसके पीछे पीछे जाने लगती है. फिर पता नहीं कहा वो नौजवान गायब हो जाता है.

श्रुति बावली सी होकर उसे फिर से यहां वहां तलाश करती रहती है. इसी तलाश में वो एक नदी के किनारे पहुंच जाती है तब उसे वो नौजावां एक नौका पे भरता हुआ दिखता है और वो उस नौके को नदी के दूसरी तरफ लेकर जाता है. श्रुति भी भाग कर वहां पर एक और नौके पर भात जाती है और उस नौजवान के पीछे जाने लगती है. श्रुति देखती है की वो नौजवान अब नदी के दूसरी तरफ बने हुए एक आलीशान महल के पास अपनी नौका रोकता है और उस नौके से उतार वो सीधा उस महल में दाखिलहो जाता है. श्रुति यह सब देखते हुए जल्दी जल्दी अपनी नौका को भी उस नदी के दूसरे किनारे रोकती है और उस नौजवान के पीछे चली जाती है. पर जब वो महल के अंदर दाखिल होती है तो देखती है की है तो उसे वहां पर ढेर सारे लड़कियां काम करते हुए दिखती है और सब एक से एक हसीना लड़कियां जैसे वो कोई जैसे वो कोई पारिया हो और वो महल नहीं बल्कि एक परियों का देश हो .तभी उन परियों में से दो पारियाँ श्रुति के करीब आती है और उसे अपने साथ लेकर थोड़े ही दूर पर बने हुए एक चबूतरे पर लेकर जाती है. श्रुति देखती है वहां वही नौजवान जिसे वो तलाश करते करते इतनी दूर आ गयी उसकी और पीठ किए हुए खड़ा है. वो दोनों पारियाँ उसे वही चोद कर चली जाती है. श्रुति की दिल की धड़कनें तेज हो जाती है. वो जल्द से जल्द उस नुआजवान के करीब जाने के लिए मचलने लगती है. वो उसका चेहरा देखने की लिए बेचैन होने लगती है अब उसे और नहीं रुका जा रहा था वो भाग कर उस चबूतरे की सीढ़ियाँ चढ़ने लगती है और उस नौजवान के करीब पहुंच जाती है. फिर वो उस नौजवान का खंडा पकड़ कर अपनी तरफ जैसे ही घूमने लगती है की तभी अचानक…..उसे एक आवाज़ सुनाई देती है “श्रुति बेबी!!! उठिए आपको आपकी मामा बुला रही है. श्रुति बेबी उठिए “ इस शोर से श्रुति की नींद खुल जाती है और वो फिर से और इतने करीब से उस नौजवान का चेहरा देखने से वंचित रही जाती है. वो एक दम से गुस्से में चिल्लाते हुए उत्त् के कहने लगती है “ क्या है!!! “ श्रुति अपनी आँखें खोल कर देखती है की कौन है जो उसके इतने मीठे सपने से जगा दिया है , तो देखती है की नौकरानी कावेरी उसे जगाने आई हुई है. “क्या हुआ कावेरी? तुझे इतनी भी तमीज नहीं है की में सो रही हूँ तो मुझे ना जगाए?” श्रुति कावेरी पर बरस पढ़ते हुए कहती है. कावेरी बेचारी थोड़ा सहम जाती है और अपना थूक निगल के श्रुति से कहती है की
“श्रुति बेबी ….वो मालकिन ने कहा था आपको उठाने के लिए क्योंकि आपका कॉलेज जाने का टाइम हो गया है ना इसलिए”
“कॉलेज जाने के टाइम? वो घड़ी में देखती की वाक़ई में कॉलेज जाने का टाइम हो गया था. उसने सोचा की कोई और दिन होता तो कॉलेज को स्किप करके वापस सो जाती और अपने उस हसीना ख्वाब को पूरा करती.

पर आज उसका जाना जरूरी था क्योंकि उसकी बेस्ट फ़्रेंड निशा ने उसे कॉलेज आने के लिए कहा था क्योंकि उसे कोई खास बात करनी थी. निशा उसकी बेस्ट फ़्रेंड थी , और वो उसका दिल नहीं तोड़ना चाहती थी. इसलिए उसने बेमन से अपना बेड छोडा और बाथरूम जाते हुए सोचने लगी के कब में उस नौजवान को देख पाओँगी? क्या उस नौजवान का मेरा साथ लिखा है की नहीं? आज उसे देखते देखते रही गयी…शीत!!! अगर वो कावेरी ना आती तो में आज जरूर उसे देख लेती . यही सब सोचते सोचते हुए वो बाथरूम में घुस गयी.

कुछ देर के बाद विजय जैसे ही अपने घर से से निकल रहा था ऑफिस जाने के लिए तभी उसे श्रुति के रूम से बहुत जोरों से किसी के ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने की आवाजें आ रही थी. यह सुन के विजय वहां जाकर देखने लगे की आख़िर माजरा क्या….

(Update-11)

“क्या हुआ? कैसा शोर है यह.”कहते हुए विजय ने श्रुति के रूम में प्रवेश किया तो देखता है की श्रुति अपनी नौकरानी कावेरी पर बरस रही थी.
“ तुझे कितनी बार बोलना पड़ेगा मेरी चीज़ों को हाथ मत लगाया कर. तुझे कोई बात समझ नहीं आती है क्या?”
“अरे क्या हुआ श्रुति बेटा? सब ठीक तो है ना?” सौंदर्या ने फिक्र मंदी से श्रुति से कहा.
” देखो ना मामा मैंने इस जाहिल को कितनी बार कहा है की ज़रा अपनी औकात में रहा करे और मेरी चीज़ों को हाथ ना लगाया करे पर इसे कोई बात समझ में ही नहीं आती है और उप्पर से मुझसे जबान चला रही है.” चिल्लाते हुए श्रुति ने कहा.
“क्यों रे कावेरी, जब तुझसे कहा गया है की किसी चीज़ों को हाथ ना लगाया करे तो क्या जरूरत है किसी भी चीज़ों को यहां से वहां करने की.” सौंदर्या ने कावेरी को दांते हुए कहा.
“नहीं मालकिन जब से श्रुति बेबी ने अपनी चीज़ों को छूने से मना किया है मैंने इनकी किसी भी चीज़ों को हाथ तक नहीं लगाया है.” अपनी सफाई देते हुए कावेरी ने कहा.
“ तो मतलब मेरी बेटी झूठ बोल रही है, ऐसे कैसे तुम्हारे ना छूने से इसकी चीज़ खो सकती है.” सौंदर्या ने कावेरी को चिल्लाते हुए कहा. मामला को बिगड़ता हुआ देख के वियाजे ने श्रुति से कहा
“ श्रुति बेटा पहले यह बताओ तुम्हारी कौनसी चीज़ गुम हुई है.”
“मेरा हेयर ड्राइयर पापा.” श्रुति ने जल्दी से कहा.
“ अच्छा तो यह क्या है? “ विजय ने बेड के तकिये को हटते हुए कहा जहां से उन्हें हेयर ड्राइयर का वाइयर दिख रहा था. इस पर जल्दी से सौंदर्या ने कहा
“ जरूर इस कावेरी ने रखा होगा.”
“ नहीं मालकिन मैंने नहीं रखा…..” कावेरी ने और भी कहना चाहा पर विजय ने उसे हाथ के इशारे से रोक दिया और कहा की
“ कावेरी तुम जाओ अपना काम करो.” यह सुन के कावेरी वहां से फौरन चली गयी.

फिर विजय ने श्रुति की तरफ पलटते हुए कहा,
“बेटी अपने बडो से इस तरह से बात नहीं करते, जब तुम छोटी थी और तुम्हारी मां को पार्टी करने से फुर्सत नहीं मिलती थी तो यही कावेरी ही तुम्हारा ख्याल रखती थी. और तुम उससे इस तरह से बात कर रही हो? अगर आज तुम्हारी कोई भी चीज़ खो गयी थी तो उससे अच्छे से पूछती , इतना हाइपर होने की क्या जरूरत है?”
“आप उस दो ताकि की नौकरानी को चिल्लाने की बजाए मुझे और मेरी बेटी को दोष दे रहे हो, उसकी हिम्मत कैसे हुई इतना ज़ाबान चलाने की.” सौंदर्या ने गुस्सा होते विजय से कहा.
“बिगाड़ लो, बिगाड़ लो अपनी बेटी को बाद में खुद ही पछताॉगी.” कहते हुए विजय कमरे से बाहर निकल गया.
“मामा! बजाए उस कावेरी को डाँटने के पापा मुझे ही चिल्ला रहे है, इट’से नोट फेयर, में पापा से बात नहीं करूँगी अब.” श्रुति ने मुंह बनाते हुए कहा.
“नहीं बेटी ऐसा नहीं कहते तुम तो जानती हो ना अपने पापा को…हर जगह उन्हें इंसानियत दिखाने का शौक रहता है. कभी बिना किसी वजह चॅरिटी करते है तो काहबी कुछ और. चोदो उनको, तुम जाओ अपने कॉलेज जाने की तैयारी करो.” सौंदर्या ने अपनी बेटी को समझते हुए कहा.
“ वैसे क्या बात है आज कुछ ज्यादा ही साज धज रही हो, डेट पे जा रही हो क्या?” सौंदर्या ने चोदते हुए श्रुति से कहा.
“ओफफ़ो मामा आप भी ना! में तो रोज़ ऐसे ही जाती हूँ, और रही बात डेट वाते की तो अभी कोई ऐसा मिला नहीं है मुझे जिसके साथ डेट पे जा जाए.” श्रुति ने जल्दी से सफाई दी
.” अच्छा बाबा ठीक है. लेकिन ज़रा कोई ढंग का ढूंढ़ना जो हमारी ही स्टेटस का हो.”
“अरे मामा आप भी ना यह क्या बातें करने भात गयी. ओके मामा मुझे लेट हो रहा है में तैयार होने जा रही हूँ.” कहते हुए श्रुति वही हेयर ड्राइयर से अपने बालों को सेट करने लगी.
“ओके ठीक है!! तुम अपनी तैयारी करो. और कॉलेज जाने से पहले ब्रेकफास्ट करते हुए जाना. “सौंदर्या, श्रुति के रूम से बाहर जाते हुए कहा.
“नो मामा में फ्रेंड्स विल भी वेटिंग फॉर में और ई आम गेटिंग लेट फॉर डेठ.”
“ओके ठीक है. आस यू विश.” कहते हुए सौंदर्या, श्रुति के रूम से बाहर चली गयी.

श्रुति अपनी कार से अपने कॉलेज पहुंचती है. जब वो कॉलेज के अंदर एंट्री करी तो हर किसी की नज़र उसी पर ही टिकी हुई थी. और होती भी क्यों नहीं आज उसने इसी के लिए तो इतनी तैयारी करी थी, वो जानना चाहती थी लोगों की नजारे में उसके लिए क्या अहमियत है. श्रुति एक 20 साल की पड़ी जैसे लगती थी. गोरे गाल, लंबे बाल, नीली आँखें, तीखे नैन नक्श. एकदम मासूम सी लग रही थी. उसने इस वक्त मिनी स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था, लड़के तो लड़के, लड़कियां भी उसे ही निहार रही थी.

पर किसी लड़कों की हिम्मत नहीं होती थी उससे बात करने की या फिर अगर कोई उससे दोस्ती करना भी चाहता था तो ज्यादा देर टिक नहीं पाता था, क्योंकि वो किसी को ज्यादा भाव नहीं देती थी.

(UPDATE-12)

श्रुति एक अमीर बाप की घमंडी लड़की थी, उसे अपने बाप की दौलत का बहुत घमंड था, वो कॉलेज में किसी से ढंग से बात भी नहीं करती थी.

“क्या बात है आज बड़ी चाहक रही हो?” आज तो सभी की निगाएँ तुझ ही पर टिकी हुई है.” छाया ने उसे चोदते हुए कहा.
“वाइ? अरे यू जेलस? श्रुति ने भी एक अदा से कहा.
“नहीं में क्यों जलने लगी, मुझे क्या जरूरत है इनकी नजारे की में जिसे चाहू उसे अपने पीछे घूमाओ.”
“ ई नो तू क्या कर सकती है वो तो बस में तुम लोगों को दिखना चाहती थी की में भी अपने जलवे दिखाओ ना तो मेरे लिए भी आशिको की कमी नहीं है, पर मुझे ऐसे लोग चाहिए भी नहीं, तू ही घुमा इन्हें अपने पीछे. और वैसे भी यह लोग मेरे स्टेटस के नहीं है. जो मुझे चाहेगा उसमें एक अलग ही बात होगी, दीदी यू अंडरस्टॅंड?”
“हां देखते है वो तेरा वो अलग दिखने वाला कब आएगा. पता नहीं किसके ख्वाब देखती रहती है. जैसे कोई सपनों को राज कुमार आएगा और यह मैडम को अपने महल परियों के देश ले जाएगा. शायद इसलिए यह आज तक वर्जिन है.हाहहाहा…..” हंसते हुए छाया ने उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहा. श्रुति ने सोचा की यह बात तो सही है की वो अपने उस सपने के राजकुमार के वेट में रहती है और इसलिए उसने आजतक कोई भी बाय्फ्रेंड नहीं बनाया था. वो चाहती थी के कोई भी उसके दौलत और जिस्म से नहीं बल्कि उसकी दिल की गहराइिओं में उतार कर उसे प्यार करे. पर ऐसा चाहने वाला कोई आज के ज़माने में सिर्फ़ सपने में ही में मिलते है शायद उस भोली लड़की को मालूम नहीं था.
“कामन यार! अब बस भी करो तुम लोग. मुझे भूख लगी है चलो कैंटीन चलते है.” कहते हुए आहना ने कहा. श्रुति, छाया, निशा और आहना यह चारों में बहुत अच्छी फ्रेंडशिप थी. फिर चारों लोग कैंटीन में चले जाते है.

“निशा? कहो तुम्हें मुझसे क्या बात करनी थी ? क्या इसके लिए हम कही प्राइवेट जगह चले? श्रुति ने धीमी आवाज़ में कहा जिसे सिर्फ़ निशा ने ही सुना.
“नहीं हमें कही और जाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि इन्हें भी पता है में तुम्हें क्या कहने वाली हूँ.” निशा ने श्रुति से कहा.
“अच्छा? क्या मालूम है इन्हें?” श्रुति ने पूछा. फिर निशा ने नॉर्मल अंदाज़ में बात करते हुए कहा.
“श्रुति आक्च्युयली तुम्हें यह बताना था की हम सब ने कल फ़ायरवेल्ल पार्टी ऑर्गनाइज़ करने का सोचा है.” निशा ने कहा.
“वाउ!! फ़ायरवेल्ल पार्टी. हम…डेठ’से नाइस..पर किधर होगी यह फ़ायरवेल्ल पार्टी.” श्रुति ने थोड़ा आक्साइड होते हुए कहा.
“आक्च्युयली यू वन’त लाइक इट लेकिन……” कहते हुए निशा थोड़ा रुक गयी.
“लेकिन? वॉट?” श्रुति ने निशा को रुकते हुए देखा तो कहा.

“आक्च्युयली हम सब ने निखिल के नैनीताल के पास वाले फार्महाउस पर पार्टी करने का प्लान बनाया हुआ है.” निशा, श्रुति के चेहरे की तरफ देखते हुए कहा की उसका रिएक्शन क्या होता है निखिल का नाम सुनाने के बाद. पर निखिल के फार्म हाउस पर जाने की बात सुनकर ही श्रुति को गुस्सा आ गया था.
“वॉट???? निखिल के फार्महाउस पर…..अरे यू मद निशा…..तुम सोच भी कैसे सकती हो की में निखिल के फार्म हाउस पर जाओंगी पार्टी एंजाय करने के लिए.?”
“श्रुति, ई न्यू डेठ के तुम निखिल के फार्म हाउस पर जाने पर गुस्सा करोगी. लेकिन बिलीव में निखिल अपने उस हरकत पर शर्मिंदा है . वो तुमसे माफी माँगने के लिए भी तैयार है. इनफॅक्ट वो तो अभी इसी वक्त हमारे साथ आने वाला था पर मैंने ही उसे मना कर दिया था क्योंकि मुझे पता था की तुम उसे देखकर नाराज़ हो जाएगी. श्रुति जो हुआ उसे एक पस्त समझ कर भूल जाओ और मेरे खातिर निखिल को माफ कर दो प्लीज़…..” निशा ने श्रुति को समझाते हुए कहा. श्रुति जानती थी की निशा , निखिल से प्यार करती थी. पर उसने ऐसा कभी नहीं सोचा था की निशा उसकी बेस्ट फ़्रेंड है और वो निखिल से प्यार कैसे कर सकती है. वो बस यही सोचती थी निशा का निखिल से प्यार करना यह उसका पर्सनल मॅटर था और वो किसी के पर्सनल मॅटर में इंटर्फियर क्यों करे. जब निशा उसे अपना वास्ते देकर निखिल को माफ करने को कहा तो उसे निखिल को माफ करना ही पड़ा क्योंकि वो निशा को हर्ट नहीं करना चाहती थी. आख़िर कार वो उसकी बेस्ट फ़्रेंड जो थी. काफी देर सोचने के बाद श्रुति ने कहा.
“ओके!! तुम कहती हो तो मैंने निखिल को माफ कर दिया. पर क्या हम नैनीताल के अलावा कही और फ़ायरवेल्ल पार्टी नहीं कर सकते? “ श्रुति ने कहा.
“ओह श्रुति!! नैनीताल फ़ायरवेल्ल पार्टी के लिए सबसे बेस्ट जगह रहेगी. हम सब ने इसी बात पर अग्री किया है. “ बहुत देर तक दोनों की बातें सुनाने के बाद आहना ने कहा.
“तुम इसलिए घबरा रही हो ना क्योंकि वो निखिल का फार्म हाउस है. लेकिन बिलीव में वो बहुत अच्छी जगह है पार्टी करने के लिए. में भी वहां एक बार जा चुकी हूँ. और में चाहती हूँ की मेरी बेस्ट फ़्रेंड यानि की तुम भी मेरे साथ रहो “ निशा ने कहा.

(UPDATE-13)

“ओके !!! तुम इतना इन्सिस्ट कर रही हो तो में चलूंगी . आफ्टर ऑल , में तुम्हारी बात कैसे टाल सकती हूँ. “ श्रुति ने निशा की तरफ हंसते हुए कहा.
“क्यों हम कहते तो क्या तुम नहीं चलती ? “ छाया ने कहा.
“ह्म्‍म्म्म….” श्रुति थोड़ा सोचने लगी “ शायद नहीं “ कहते हुए श्रुति वहां से उठने लगी.
“ओके बायें!! ई आम गोयिंग नाउ. निशा? कल कितने बजे निकलना होगा मुझे आज फोन करके बता देना में रेडी रहूंगी उस वक्त. ओके? “
“ठीक है. में तुम्हें फोन कर दूँगी . बायें!!!” निशा ने कहा. फिर श्रुति वहां से चली गयी.
“तेवर देखे है इस मैडम के ? बात करने की भी तमीज नहीं है.

कैसे हमें इग्नोर कर रही थी . ब्लडी बिच.” श्रुति के वहां से जाने के बाद छाया ने च्चिधते हुए कहा.
“अब देखते है इसका घमंड कैसे चोद चोद नहीं होता है. पता नहीं अपने आपको क्या समझती है? आहना भी छाया का साथ देते हुए बोली.
“छाया? तुम ने ऋषि को चलने के लिए कहा है ना? “ निशा ने छाया से कहा.
“हां मैंने उसे कल ही कह दिया था. “ छाया ने निशा की बात का जवाब देते हुए कहा.
“और आहना तुम ने प्रतीक को कहा?” निशा इस बार आहना से कहा.
“हां मैंने भी प्रतीक से कह दिया है. आफ्टर ऑल उन्हें ही तो सब में रोल प्ले करना है.

फिर वो तीनों इसी तरह अपने अपने बॉयफ्रेंड्स के साथ मिलकर श्रुति के खिलाफ प्लान करने लगे.

विजय कपूर अपनी फॅमिली के साथ डिनर कर रहा था. अपनी वाइफ सौंदर्य, बेटी श्रुति और उसके फॅमिली फ़्रेंड राजेश के साथ जो उससे मिलना आया था और विजय ने उसे भी अपने साथ डिनर पर इन्वाइट कर लिया था. राजेश भी विजय की बात टाल ना सका था और उन लोगों के साथ में डिनर करने लगा.
तभी श्रुति अपनी मां से कहती है “ मामा? में और मेरे कुछ दोस्त फ़ायरवेल्ल पार्टी के लिए कल नैनीताल जा रहे हे.”
“फ़ायरवेल्ल पार्त्यके लिए नैनीताल? नैनीताल में ऐसी क्या खास बात है?” जवाब में सौंदर्या ने कहा.
“मामा, निशा के एक फ़्रेंड का वहां पर फार्म हाउस है. तो सबने वही फ़ायरवेल्ल पार्टी ऑर्गनाइज़ की हुई है.” श्रुति ने कहा.
“हम…सो यू पीपल अरे गोयिंग तो एंजाय पार्टी अट नैनीताल? गुड.” राजेश ने श्रुति से कहता हुआ कहा. फिर उसने विजय की तरफ देते हुआ कहा. “विजय इतनी सर्दी में नैनीताल में मजा आएगा.” विजय ने राजेश की बात का जवाब दिए बगैर श्रुति की तरफ देखा और पूछा .
“श्रुति? तुम्हें अपनी लाइफ को स्पेंड करने के लिए जो आज़ादी मिली है इससे मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है पर एट लास्ट एक बार कोई भी डिसीजन लेने से पहले
हमें एक बार बता तो देती . तुम सिर्फ़ अभी 20 साल की हो. तुमने अभी दुनिया नहीं देखी है. तुम्हें नहीं पता के बाहर की दुनिया कैसे होती है.”
“विजय? “ सौदरया ने विजय की तरफ देखते हुए कहा.
“यह हमारा ज़माना नहीं है जहाँ हमें कही आने जाने के लिए किसी से पर्मिशन लेनी पढ़े. आज कल के यंग्स्टर्स 20 साल की उमर में बहुत अड्वान्स हो जाते है. “
“तुम्हें तो सिर्फ़ अपनी बेटी की हाँ में हाँ मिलना आता है.” विजय ने गुस्से में आकर कहा.
“पापा? आप हमेशा मेरे खिल्लाफ क्यों रहते हो? क्या में वहां जाकर कोई गलत काम कर रही हूँ? “ श्रुति ने मुंह बनाते हुए कहा.
“नहीं श्रुति बेटी यह बात गलत है की में तुम्हारे खिल्लाफ बातें करता हूँ, यह तुम्हारी गलत फहमी है. में तुम्हें वहां जाने से रोक नहीं रहा हूँ. में बस तुमसे सिर्फ़ इतना एक्सपेक्ट करता हूँ तुम जो भी फैसला करो उसमें मेरी भी रज़ामंदी हो, बस.

अपनी मां के बहकावे में आकर तुम कोई गलत फैसला मत किया करो.” विजय ने अपनी बेटी को समझाते हुए कहा. यह सुन कर सौंदर्या एक दम अपने आपा खो गयी.
“मिस्टर. विजय कपूर माइंड युवर लॅंग्वेज!!! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे बारे में ऐसा बोलते हुए? में अपनी बेटी को भड़काती हूँ?” सौंदर्या ने चिल्लाते हुए कहा.
“हां हां तुम्हीं हो जो इसे गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रही हो.” विजय भी चिल्लाते हुए कहा
“गलती मेरी थी जो तुम्हें मैंने इतना भदवा दिया जो तुम मुझसे इस तरह बात करती हो . “ विजय चिल्लाते हुए कह रहा था. इससे पहले की दोनों में और झगड़ा बढ़ता राजेश ने विजय को वहां से ले जाकर बालकनी में ले आया. विजय अब भी सौंदर्या पर चिल्ला रहा था.
” समझती क्या है खुद को? उसके बाप की सारी दौलत है यह, मेरा कुछ नहीं है. जैसी है वैसे मेरे बcची को भी बनाएगी यह औरत….” और भी पता नहीं क्या क्या विजय चिल्लाता गया जिसे राजेश ने बड़ी मुश्किल से खामोश किया. “विजय ओके…..चिल्ला डाउन…इतना गुस्सा करना तुम्हारी सेहत के लिए ठीक नहीं है. वाइ डोंट यू अंडरस्टॅंड? सौंदर्या को तो तुम जांतो ही हो. आज पहली बार तो है नहीं की सौंदर्या तुम्हारे से इस तरह से बात की है….तो फिर आज इतना गुस्सा क्यों?” राजेश ने विजय को समझाते हुए कहा.

TO BE CONTINUED ?

(UPDATE-14)

“बात वो नहीं है राजेश. “ विजय थोड़ा ठंडा होते हुए कहा. “बात दरअसल श्रुति की है. वो उसे अपने जैसे ही बना रही है इसलिए मुझे उस पर गुस्सा आ गया था. तुम तो खैर जानते हो, सौंदर्या की आदत, उसके टूर तरीके. ना उस औरत के अंदर किसी के लिए कोई प्यार है और ना ही वो किसी की इज्जत करती है. संस्कार नाम की तो कोई चीज़ ही नहीं है और यही सब चीज़ें वो श्रुति को सीखा रही है. वो उसे अपने जैसा बना रही है. पर श्रुति अभी नादान है, उसे नहीं समझ में आ रहा है जो उसकी मां उसे कहती है वो गलत है या सही. बस यही मेरी फ़िक्रमंद होने की वजह है और कुछ नहीं.” कहते हुए विजय थोड़ी देर के लिए रुका फिर अपनी बात जारी रखते हुए कहा.
“ राजेश? में एक गरीब परिवार से था. मेरे पिताजी एक स्कूल टीचर थे. वो एक बहुत ईमानदार आदमी थे, कभी किसी के बारे में बुरा नहीं सोचते थे. घर में मेरे भाइयों और बहने और बाहर के सभी लोग भी उनसे प्रेम करते थे, बस एक में ही था जो उनके संकारो पर नहीं चला. मुझे शुरू से ही दौलत कमाने की भूख थी इसलिए में दिल्ली चला आया और यहां हाथ पैर मारने लगा. फिर मेरी मुलाकात सौंदर्या से हुई जो एक बहुत अमीर बाप के बेटी थी. में मानता हूँ की मैंने सौंदर्या का इस्तेमाल किया था जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए. दौलत की चाह में अँधा हो गया था. मुझे सही गलत कुछ नज़र नहीं आ रहा था. यहां तक के अपने बाप के संस्कार भी नहीं.

दौलत की चाह में इतना आगे निकल चुका था की मुझे फीचे मुड़कर देखने की फुर्सत भी नहीं मिली. मुझे तो यह भी नहीं पता था की मेरा परिवार कैसा है, मेरा बाप, मेरी मां, मेरे भाई बहन. मुझे कुछ होश नहीं था, बस होश था तो पैसा कमाने का और कुछ नहीं. जब कुछ महीने पहले मेरे छोटे भाई ने जब मुझे फोन किया था यह कहने के लिए के पिताजी का देहांत हो गया है…..उसके बाद…पता नहीं जैसे मुझे अपनी जिंदगी भोज सी लगने लगी. में अपने बाप की आरती भी नहीं दे पाया…कैसा बेटा हूँ में. “ रोते हुए विजय अपना दिल का भोज अपने दोस्त राजेश के सामने निकाल रहा था. “बस फिर मैंने तय किया की जैसा में दौलत के फीचे पागल था और अपने परिवार से दूर था में वैसा अपनी बेटी श्रुति के साथ नहीं होने देना चाहता . में चाहता हूँ की जो संस्कार मेरे पिताजी ने मुझे अपने जीवन में देना चाहा था वो श्रुति को दम. में उसकी आज़ादी के खिलाफ नहीं हूँ पर, में चाहता हूँ वो अपनी जिंदगी में कुछ भी करे एक मर्यादा में रही कर करे. अपने बडो की इज्जत करे, लोगों की इज्जत करे.” विजय भावुक अंदाज़ में कहे जा रहा था
“विजय में तुम्हारे भावनाओं की कदर करता हूँ पर, तुम्हें भी यह बात मना होगा की आज कल का ज़माना ऐसा नहीं है की हम अपने औलादो पर अपना ज़ोर चला सके. खासकर के हमारे सोसाइटी में तो ऐसा नहीं है.” राजेश , विजय को समझाता हुआ बोला
“ई नो राजेश, की यह बहुत मुश्किल काम है पर कोशिश तो की जा सकती है ना? “ विजय ने कहा.
“हां वो तो है. तुम कोशिश और दुआ करो की श्रुति वैसा ही करे और वैसा ही अपना जीवन साथी छूने जैसा तुम चाहते हो” राजेश ने कहा.
“वो कैसा भी जीवन साथी छूने मुझे उससे मतलब नहीं है पर वो उसके प्रति ईमानदार हो . चाहे वो किसी भी कॉस्ट का या अमीर , गरीब कोई भी हो ई डोंट केर.” विजय ने कहा.
फिर वो दोनों ऐसे ही कुछ देर तक बातें करते रहें

“आबे उठ! कमीने! सोया है अभी तक मादरचोद.” रोहन ने एक लात मारी परवेज़ को जो की चादर तन के गहरी नींद में सोया हुआ था, अचानक इस हमले से भॉकलाके उठ गया. “ कौन है भी, तेरी तो.”
“आबे में हूँ भोसदिक्ीईए. “ रोहन उस पर झुकते हुए कहा
“आबे तू आज फिर पी के आया है. आबे जब तू संभाल नहीं पाता तो पीता क्यों है कमीने?”
“कमीने किसको बोला रे माअदरचूड़…आए?…किसको बोला…तेरी बहन की…” रोहन नशे में एक दम धूत जो उसके मुंह में आ रहा था बेक जा रहा था.
“आबे कुत्ते इतनी गालिया क्यों निकाल रहा है, कम से कम मेरी मां बहनों को तो भक्ष दे .”
“चुप बहनचोद तेरी मां को भी पेलुँगा और तेरी रंडी बहनों को भी समझा मादरचूड़.” रोहन ने नशे में कुछ भी कहे जा रहा था. पर अब परवेज़ का ढेरया जवाब दे दिया जब रोहन ने उसकी मां भेनॉ को इतनी गंदी गालिया दी थी.

उसने आव ना देखा ना ताव, झट से रोहन के पेट में एक मुक्का मारा, जिससे रोहन ज़मीन पे गिर गया और उसके बाद परवेज़ उसके ऊपर चढ़ के उसकी पिटाई करने लगा. “ कुत्ते, मादरचोद मेरी मां, भेनॉ को गालिया देगा साले, तेरी यह हिम्मत, ले, “ धन धन पिटाई करने लगा परवेज़

(UPDATE-15)

रोहन और परवेज़ दोनों पोचर्स थे. जंगली जानवरों का शिकार कर के उनके बॉडी के पार्ट्स को सोनू जो एक उनके लिए ग्राहक ढूंढ़ा था के जरिए बेचते थे. जिससे उनकी आमदनी अच्छी हो जाती थी. पर आज कल फोरेस्ट रेंजर ऑफिसर्स इन पोचर्स के खिलाफ तगड़ा अभियान चलाए हुए थे, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से टाइगर्स का शिकार बहुत हुआ था. जिस की वजह से स्टेट गवर्नमेंट की मीडिया ने खूब ताने कसे थे. जिस की वजह से गोवेर्नमेटन के ऊपर बहुत प्रेशर था, इसलिए टाइगर्स या अन्य जानवरों का शिकार बहुत मुश्किल हो गया था.

“क्या भी सोनू? ऐसी क्या आफत आ गयी की फोन कर के यहां बुलाया है, वो भी इस खंडहर में. तू जानता नहीं आज कल पुलिस से ज्यादा पुलिस के खबरियो से खतरा रहता है. यूँ हमारा मिलना जुलना हमें खतरे में डाल सकता है, जब तक मामला ठंडा ना हो जाए उतना दिन रुक नहीं सकता था.” रोहन आते ही सोनू पे टूट पढ़ते हुआ बोला.
“अरे रोहन भाई, इतना नाराज़ क्यों हो रहे हो. मुझे भी पता है यूँ हमारा मिलना जुलना हमें खतरे में डाल सकता है, तभी तो इस जगह पे बुलाया है मैंने आप दोनों को.” सोनू ने जल्दी से सफाई देते हुए कहा.
“अरे पर क्यों? इतना क्या अर्जेंट काम था?” रोहन ने कहा.
“अर्जेंट ही है बॉस. एक तगड़ी पार्टी हाथ लगी है और पैसा भी तगड़ा दे रही है. अगर में इसे हाँ नहीं बोलता ना तो कोई और हाँ बोल देता. आप तो जानते ही हो इस काम में भी कॉंपिटेशन कितना बाद गया है. इसलिए मैंने उन्हें कही और जाने ही नहीं दिया.”
“पर पार्टी है कौन, कही कुछ लाफद तो नहीं है ना? तू जानता है ना यह जाल भी हो सकता है पुलिस वालो का.”
“नहीं बॉस! मैंने सब पता लगाया है, एक चाइनीस पार्टी है यह. जानवरों के बॉडी पार्ट्स की इन्हें जरूरत है, आप तो जानते ही छीना की ब्लैक मार्केट में इनकी कितनी डीमाड है.” सोनू ने बताया. बहुत देर से चुप परवेज़ ने इस बार कहा
“रोहन? जब सोनू इतने कॉन्फिडेन्स से कह रहा है तो करके देखते है ना, और वैसे भी यार बहुत दीनों से कोई काम नहीं मिला है और अपने हाथ एक दम खाली है.”
“मैंने भी यही सोचा, जब मैंने इनके बारे में मुझे पता चला तो, पार्टी अच्छी थी और पैसे भी अच्छे दे रही थी तो. एक बार बड़ा काम हाथ में लेते है तो ज़रा 5 या 6 महीने की फुर्सत.” सोनू ने कहा.
“ठीक है मैं तुझे सोच के जवाब देता हूँ, काम करना है की नहीं.” रोहन ने कहा.
“अरे बॉस इतना मत सोचो पार्टी एक दम करेक्ट है.” सोनू ने जल्दी से कहा.

“नहीं सोनू बात पार्टी के करेक्ट होने की नहीं है, बात है शिकार करने की, क्योंकि तू जानता है आज कल जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में फोरेस्ट रेंजर्स कितने चोकस हुए है. और हमें इस पार्क के अलावा जानवरो का शिकार इतने बड़ी तादाद में नहीं मिलेंगे. क्योंकि वहां हमारी सेट्टिंग बहुत अच्छी है” रोहन ने कहा.
“तू उसकी फिक्र मत कर हम कोई ना कोई जुगाड़ कर ही लेंगे, बस तू खाली हाँ कर दे.” परवेज़ ने कहा.
“तुझे सुबह फोन करता हूँ.” सोनू को कहते हुए रोहन वहां से परवेज़ को लेकर निकल गया.

उसके बाद जब दोनों वापस अपने घर पर आते तो परवेज़ उससे कहता है,
” यार तुझे क्या प्राब्लम है? क्यों इतना नाटक कर रहा है. इससे पहले हम लोगों ने यह काम किया था तब क्या क्या खतरा नहीं था?”
“पर इस बार कुछ ज्यादा ही है खतरा, समझा?” रोहन ने कहा.
“मानता हूँ, पर सोच किये तुझे इस समय पैसे की जरूरत नहीं है. तू यहां दिल्ली, ढेरदून से कमाने के लिए आया था ना अपने परिवार का पेट पालने के लिए. उस पर तेरी मां भी बीमार है, उन्हें भी तो पैसे की जरूरत होगी. वो तो यही आस लगाए भैते होंगे ना की मेरा बेटा हमें कामके पैसा भेजेगा. पर यहां तो दो महीने से कुछ काम ही नहीं हुआ है तो तू कैसे पैसा भेजेगा….बोल? रोहन को चुप भायते देख परवेज़ उससे फिर कहता है “ देख में क्या कहता हूँ, इस बार हम यह काम जान झोकिीम में डाल के करेंगे और उससे जो कुछ कमाएँगे उससे कोई छोटा मोटा धंधा करेंगे और यह काम हमेशा के लिए चोद देंगे. बोल क्या कहता है तू?” रोहन अब भी कुछ नहीं बोला वो बस यही सोचता रहा की वो दिल्ली आया था एक साफ सुथरा काम करने के लिए, क्योंकि उसके बाप के मरने के बाद सारी घर की जिम्मेदारी उसी के खड़े पर आई थी. पर सिर्फ़ इंटर तक पढ़े होने के कारण उसे वो काम नहीं मिला जिससे वो इतना कमा सके की अपना और अपने परिवार को पैसा भेज सके. घर में उसकी एक बीमार मां थी, जिसे हर महीने हॉस्पिटल के चक्कर लगाने पढ़ते थे, एक जवानी की दहलीज पे कदम रखती हुई बहन थी जिसे अच्छा पढ़ा लिखा कर उसकी शादी करनी थी, और एक छोटा भाई था जिसका फ्यूचर भी रोहन को ही बनाना था. पर इन सब कामों के लिए उसे मज़बूत पैसा कमाने​

(UPDATE-16)

रोहन और परवेज़ दोनों पोचर्स थे. जंगली जानवरों का शिकार कर के उनके बॉडी के पार्ट्स को सोनू जो एक उनके लिए ग्राहक ढूंढ़ा था के जरिए बेचते थे. जिससे उनकी आमदनी अच्छी हो जाती थी. पर आज कल फोरेस्ट रेंजर ऑफिसर्स इन पोचर्स के खिलाफ तगड़ा अभियान चलाए हुए थे, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से टाइगर्स का शिकार बहुत हुआ था. जिस की वजह से स्टेट गवर्नमेंट की मीडिया ने खूब ताने कसे थे. जिस की वजह से गोवेर्नमेटन के ऊपर बहुत प्रेशर था, इसलिए टाइगर्स या अन्य जानवरों का शिकार बहुत मुश्किल हो गया था.

“क्या भी सोनू? ऐसी क्या आफत आ गयी की फोन कर के यहां बुलाया है, वो भी इस खंडहर में. तू जानता नहीं आज कल पुलिस से ज्यादा पुलिस के खबरियो से खतरा रहता है. यूँ हमारा मिलना जुलना हमें खतरे में डाल सकता है, जब तक मामला ठंडा ना हो जाए उतना दिन रुक नहीं सकता था.” रोहन आते ही सोनू पे टूट पढ़ते हुआ बोला.
“अरे रोहन भाई, इतना नाराज़ क्यों हो रहे हो. मुझे भी पता है यूँ हमारा मिलना जुलना हमें खतरे में डाल सकता है, तभी तो इस जगह पे बुलाया है मैंने आप दोनों को.” सोनू ने जल्दी से सफाई देते हुए कहा.
“अरे पर क्यों? इतना क्या अर्जेंट काम था?” रोहन ने कहा.
“अर्जेंट ही है बॉस. एक तगड़ी पार्टी हाथ लगी है और पैसा भी तगड़ा दे रही है. अगर में इसे हाँ नहीं बोलता ना तो कोई और हाँ बोल देता. आप तो जानते ही हो इस काम में भी कॉंपिटेशन कितना बाद गया है. इसलिए मैंने उन्हें कही और जाने ही नहीं दिया.”
“पर पार्टी है कौन, कही कुछ लाफद तो नहीं है ना? तू जानता है ना यह जाल भी हो सकता है पुलिस वालो का.”
“नहीं बॉस! मैंने सब पता लगाया है, एक चाइनीस पार्टी है यह. जानवरों के बॉडी पार्ट्स की इन्हें जरूरत है, आप तो जानते ही छीना की ब्लैक मार्केट में इनकी कितनी डीमाड है.” सोनू ने बताया. बहुत देर से चुप परवेज़ ने इस बार कहा
“रोहन? जब सोनू इतने कॉन्फिडेन्स से कह रहा है तो करके देखते है ना, और वैसे भी यार बहुत दीनों से कोई काम नहीं मिला है और अपने हाथ एक दम खाली है.”
“मैंने भी यही सोचा, जब मैंने इनके बारे में मुझे पता चला तो, पार्टी अच्छी थी और पैसे भी अच्छे दे रही थी तो. एक बार बड़ा काम हाथ में लेते है तो ज़रा 5 या 6 महीने की फुर्सत.” सोनू ने कहा.
“ठीक है मैं तुझे सोच के जवाब देता हूँ, काम करना है की नहीं.” रोहन ने कहा.
“अरे बॉस इतना मत सोचो पार्टी एक दम करेक्ट है.” सोनू ने जल्दी से कहा.
“नहीं सोनू बात पार्टी के करेक्ट होने की नहीं है, बात है शिकार करने की, क्योंकि तू जानता है आज कल जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में फोरेस्ट रेंजर्स कितने चोकस हुए है. और हमें इस पार्क के अलावा जानवरो का शिकार इतने बड़ी तादाद में नहीं मिलेंगे. क्योंकि वहां हमारी सेट्टिंग बहुत अच्छी है” रोहन ने कहा.
“तू उसकी फिक्र मत कर हम कोई ना कोई जुगाड़ कर ही लेंगे, बस तू खाली हाँ कर दे.” परवेज़ ने कहा.
“तुझे सुबह फोन करता हूँ.” सोनू को कहते हुए रोहन वहां से परवेज़ को लेकर निकल गया.

उसके बाद जब दोनों वापस अपने घर पर आते तो परवेज़ उससे कहता है,
” यार तुझे क्या प्राब्लम है? क्यों इतना नाटक कर रहा है. इससे पहले हम लोगों ने यह काम किया था तब क्या क्या खतरा नहीं था?”
“पर इस बार कुछ ज्यादा ही है खतरा, समझा?” रोहन ने कहा.
“मानता हूँ, पर सोच किये तुझे इस समय पैसे की जरूरत नहीं है.

तू यहां दिल्ली, ढेरदून से कमाने के लिए आया था ना अपने परिवार का पेट पालने के लिए. उस पर तेरी मां भी बीमार है, उन्हें भी तो पैसे की जरूरत होगी. वो तो यही आस लगाए भैते होंगे ना की मेरा बेटा हमें कामके पैसा भेजेगा. पर यहां तो दो महीने से कुछ काम ही नहीं हुआ है तो तू कैसे पैसा भेजेगा….बोल? रोहन को चुप भायते देख परवेज़ उससे फिर कहता है “ देख में क्या कहता हूँ, इस बार हम यह काम जान झोकिीम में डाल के करेंगे और उससे जो कुछ कमाएँगे उससे कोई छोटा मोटा धंधा करेंगे और यह काम हमेशा के लिए चोद देंगे. बोल क्या कहता है तू?” रोहन अब भी कुछ नहीं बोला वो बस यही सोचता रहा की वो दिल्ली आया था एक साफ सुथरा काम करने के लिए, क्योंकि उसके बाप के मरने के बाद सारी घर की जिम्मेदारी उसी के खड़े पर आई थी. पर सिर्फ़ इंटर तक पढ़े होने के कारण उसे वो काम नहीं मिला जिससे वो इतना कमा सके की अपना और अपने परिवार को पैसा भेज सके. घर में उसकी एक बीमार मां थी, जिसे हर महीने हॉस्पिटल के चक्कर लगाने पढ़ते थे, एक जवानी की दहलीज पे कदम रखती हुई बहन थी जिसे अच्छा पढ़ा लिखा कर उसकी शादी करनी थी, और एक छोटा भाई था जिसका फ्यूचर भी रोहन को ही बनाना था. पर इन सब कामों के लिए उसे मज़बूत पैसा कमाने​

(UPDATE-17)​

की जरूरत थी, और इतना मज़बूत पैसा कमाने के लिए उसे एक मज़बूत काम की जरूरत थी जो एक आम सी नौकरी करके पूरी नहीं होने वाली थी. फिर वो कुछ बारे काम की तलाश में परवेज़ से एक दिन उसकी मुलाकात हो हुई, परवेज़ जो इस काम में पहले भी था पर उसके अंदर वो टॅलेंट नहीं था जो रोहन के पास था. रोहन इस काम में परवेज़ से भी ज्यादा उस्ताद हो गया था. शायद उसकी जरूरत उसे यह सब इतनी जल्दी सीखा दी थी. वो कहते है ना “जरूरत हर ईजाद की मां होती है”. कुछ जरूरत, कुछ बड़ा करने की चाहत और कुछ उसके हौसलों की वजह से वो यह काम कर पाया था. पर अब यह सब काम करने में उसे एक तरह का डर भी लगा रहता था की अगर उसे कुछ हो गया तो उसके घर वालो क्या होगा. इसी सब बातों को लेकर वो एक असमंजस की स्थिति में था वो यह काम अभी करे की नहीं. उसे परवेज़ का यह आइडिया अच्छा लगा था की एक बार बड़ा हाथ मारते है उसके बाद यह धंधा चोर के कोई दूसरा काम करेंगे.
“तू सही कह रहा है परवेज़, हमें रिस्क तो लेना ही पड़ेगा. ठीक है में तैयार हूँ, कल सुबह सोनू को फोन कर के कह देना की हम तैयार हैं और हमें कल ही सामने वाली पार्टी से मिलवा दे. पर हां…एक बात यह हमारा आखिरी बार होगा…इसके बाद में यह काम चोर दूँगा, ठीक है ना?”
“ओये हां यार ठीक है, समझ गया में.” परवेज़ खुश होते हुए बोला.” में कल सुबह सोनू को फोन कर के कह देता हूँ की हम तैयार है. ओये जियो मेरे लाल!!!
“चल चल ठीक अब सो जा, रात बहुत हो गयी कल सुबह जल्दी उतना है.” कहते हुए रोहन सोने के लिए चला गया.

फिर अगले दिन उनकी मीटिंग सोनू ने सामें वाली पार्टी से फिक्स कर दी और उनके बीच पैसे को लेकर और काम किस तरह करना है, किस तरह माल सप्लाइ करना है हर मामले में उनकी बातचीत हो गयी. उन्हें उसी वक्त दोपहर को निकलना था जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के लिए जो की नैनीताल डिस्ट्रिक्ट के रामनगर में है.

“ऋषि गाड़ी ज़रा धीरे चलाओ, कहीं आक्सिडेंट ना हो जाए.” निशा ने ऋषि से कहा जो इस वक्त बहुत तेजी से गाड़ी ड्राइव कर रहा था.
“फिक्र मत करो निशा तुम्हें कुछ नहीं होगा. 7 घंटे का सफ़र 4 या 5 घंटे में करने का इरादा है मेरा.” ऋषि ने झट से कहा.
“अरे इतनी जल्दी पहुंच कर क्या करना है, आराम से गाड़ी चलाओ ऋषि प्लीज़!.” आहना ने रिकवेस्ट करते हुए कहा.
“यह दोनों तो सदा के ही डरपोक रहेंगे , तुम ऐसे ही बढ़ता में गाड़ी चलते रहो ऋषि. मजा आ रहा है…ऊऊओ…” छाया जो आगे की सीट पर ऋषि के बाजू में भाती थी गाड़ी की बढ़ता का मजा लेते हुए कहा.
“तुम भी तो कुछ कहो, चुप क्यों भाती हो.” निखिल ने श्रुति से कहा जो काफी देर से चुप भाती हुई थी.
“यह क्या बोलेगी, मुझे पता है ना इसकी आदत अंदर से इसे भी डर लग रहा है पर अपने मुंह से कभी नहीं कहेगी.” छाया ने श्रुति को चोदते हुए कहा.
“ऐसी कोई बात नहीं है, मुझे बढ़ता से डर वॉर नहीं लगता, आक्च्युयली ई लाइक इट…..वो तो में बस कुछ और सोच रही थी.” श्रुति ने जल्दी से सफाई देते हुए कहा. पर वास्तव में उसे भी डर लग रहा था गाड़ी के इतने बढ़ता में चलने से पर उसकी आदत थी की वो कभी भी अपना डर किसी से जाहिर नहीं करती थी. वो किसी को दिखना नहीं चाहती थी की वो एक कमज़ोर दिल की लड़की है. क्योंकि उसे डर था की अगर वो अपना डर जाहिर करेगी तो छाया जो उसका ऐसे ही हमेशा मज़ाक उड़ाया करती थी उसे एक और मौका मिल जाएगा उसका मज़ाक उड़ाने के लिए..
“सोच रही थी? किसके बारे सोच रही थी…..हम? निखिल के बारे में है नाअ? हाअ….ई नो डेठ.” छाया ने उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहा. छाया को जब भी मौका मिलता वो ऐसे ही निखिल के ऊपर से श्रुति का हमेशा मज़ाक उड़ाया करती थी
“शुतूप छाया! कुछ भी बोलती रहती हो. ज़रा सोच समझ के बोला करो.”श्रुति ने दांते हुए कहा.
“ओह में बेबी नाराज़ हो गयी!!!! सॉरी यार में तो मज़ाक कर रही थी. पर वैसे बुराई क्या है निखिल में? अच्छा ख़ासा हॅंडसम बॉय है. क्यों निखिल? ठीक कहा ना मैंने?” छाया ने कहा. इससे पहले श्रुति कुछ और कहती छाया को निशा, छाया को रोकते हुए कहा.
“छाया प्लीज़!! चुप भायतो.”
“डोंट वरी निशा!! श्रुति ने अब मुझे माफ कर दिया है. उसे अब बुरा नहीं लगेगा…..” निखिल, श्रुति की तरफ मुस्कुराते हुए देखा फिर कहा “ क्यों श्रुति ठीक कहा ना?”
“मैंने तुम्हें माफ कर दिया है इसका मतलब यह नहीं की तुम वापस से वही अपनी पुरानी हरकत रिपीट करो.

और वो भी मैंने तुम्हें इसलिए माफ किया था क्योंकि निशा ने मुझे ऐसा करने को कहा था.” श्रुति, निखिल की तरफ देखते हुए कहा.

(UPDATE-18)​

“ ने कहा था तो तुमने मुझे माफ किया. इसका मतलब तुमने मुझे दिल से अब भी माफ नहीं किया ? ह्म्‍म्म्म…? निखिल, श्रुति की तरफ सांवली नजारे से देखने लगा.
“देखो निखिल मुझे इन सब के बारे में बात नहीं करनी है. प्लीज़ स्टॉप तीस टॉपिक.” कहते हुए श्रुति गाड़ी के विंडो के बाहर देखने लगी
“इट’से नोट फेयर श्रुति!! मैंने तुमसे दिल से माफी माँगी है प्लीज़ भूल जाओ उन सब बातों को.” निखिल, श्रुति को तंग करते हुए कहा.
“निशा प्लीज़ निखिल से कहो की मुझे इस टॉपिक पर और बातें नहीं करनी है सो प्लीज़ अस्क हिं तो स्टॉप.” श्रुति , निशा की तरफ देखते हुए कहा. निखिल और भी कुछ कहना चाहता था पर निशा ने उसे आगे कुछ भी कहने से रोकते हुए और निखिल की आँखों में देखते हुए कहा जैसे इशारो ही इशारो में कुछ समझा रही हो.
“ओह कामन निखिल !! अब बस भी करो ना. जब वो कह रही है तो जाने दो ना.” वो उसे इशारे में समझा रही थी अब इसे ज्यादा मत तड़पा वरना अगर श्रुति का मूंड़ अगर ऑफ हो गया तो सब का प्लान चोपट हो जाएगा. निखिल , निशा की आँखों का इशारा समझ गया था और खामोश हो गया. मगर छाया और निखिल का उसका बार बार मज़ाक उड़ाने से श्रुति का मूंड़ ऑलरेडी ऑफ हो ही चुका था. वो अपने आप को कोसने लगी के वो आ ही क्यों यह लोग के साथ. श्रुति सोचने लगी के कस वो निशा से पहले ही कोई बहाना कर देती . उसे छाया और निखिल का उससे मज़ाक करना बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था..
थोड़ी देर तक ऐसे ही सब के बीच खामोशी च्छाई रही फिर उसे खामोशी को आहना तोड़ते हुए बोली
“हे गाइस!! ई आम फ़ीलिंग हंगरी! आगे कोई अच्छा सा ढाबा या रेस्तरां देखकर गाड़ी रोकना.”
“ओह!! तुम्हें तो हमेशा भूख लगी रहती है. इतना सारा आइटम्स जो अपने बैग में पैक कर के रखी हो उसे ख़ालो ना? ऋषि जो गाड़ी चला रहा था उसने कहा.
“ओह कामन ऋषि!! मुझे भी भूख लगी है. थोड़ा सा कहा पीकर फिर आगे बढ़ते है.” प्रतीक ने भी आहना के हां में हां मिलते हुए कहा.
“हां ऋषि!! मुझे भी थोड़ी भूख लग रही है. ई थिंक थोड़ा रुक कर हम कुछ खा पी लेते है.” छाया ने भी कहा.
“ऑल राइट जब सब ही लोग कह रहे है तो ठीक है. देखता हूँ कोई अच्छा सा ढाबा दीखेगा तो रोकता हूँ.” ऋषि ने कहा.

“हां सुशांत बोलो, क्या बात है? “ सुशांत का फोन आने पर परवेज़ ने कहा.
“ तुम दोनों कहा तक पहुँचे? सुशांत ने फोन पर कहा
“अभी बस आधे घंटे में हम लोग मोरडाबाद पहुंच जाएँगे. क्यों क्या हुआ?”
“ वही से वापस चले जाओ, यहां के हालत बहुत खराब हो गये है” फोन पर दूसरी तरफ सुशांत ने कहा
“अरे ऐसा भी क्या हो गया तुम ने तो कहा था ना की तुम सब संभाल लोगे.

अभी अचानक क्या हो गया? अगर तुम्हें थोड़ा और कट चाहिए हो तो बोलो में रोहन से बात करता हूँ.” परवेज़ ने कहा.
“बात कट की नहीं है परवेज़, बात कुछ और है. यहां पर फोरेस्ट रेंजर्स बहुत चोकस हो गये है. पीछले कुछ दीनों से टाइगर्स और कुछ अन्य जानवरो का शिकार तरफ जाने से यहां पर हर एक दरवाजा पर निगरानी बढ़ा दी गयी है. पीछले कुछ दीनों में जीतने भी पोचर्स को यहां देखा गया है उनके स्केचस और फोटोस भी सब रेंजस में भिजवा दिया गया है और उनमें से तुम दोनों के भी स्केचस जारी किए गये है. अगर तुम दोनों में से कोई जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में आने की कोशिश करेगा तो तुरंत पकड़ा जाएगा. समझे? इसलिए कह रहा हूँ जहाँ हो वही से वापस चले जाओ. तुम लोगों को तो मुश्किल होगी ही अगर में तुम लोगों का साथ दूँगा तो में भी फासूँगा” सुशांत ने कहा.
“क्या बात कर रहे हो सुशांत? सेक्यूरिटी और टाइट हो गयी? “ परवेज़ भी कुछ टेन्शन में आ जाता है. रोहन बड़ी देर से परवेज़ और सुशांत की फोन पर होने वाली बात चित सुन रहा था. उसे यह समझ में आ गया था की कुछ गड़बड़ है. वो परवेज़ से फोन च्ीिन के अपने कान से लगा लिया और गाड़ी एक साइड में रोक दिया.
“सुशांत! रोहन बोल रहा हूँ, कोई प्राब्लम हुई है क्या? फिर सुशांत वही बात दोहराता है जो उसने परवेज़ से की थी.
सुशांत जो एक फोरेस्ट ऑफिसर था. वो रोहन और परवेज़ की जानवरो का शिकार करने और उनके बॉडी पार्ट्स को नेशनल पार्क से बाहर ले जाने के अलावा और भी कई तरीकों से उन दोनों की मदद किया करता था. इन सब कामों के लिए उसे अच्छे पैसे मिल जा करते थे.
“सुशांत….देखो मेरी बात सुनो प्राब्लम तो पहले भी थी और अब भी है…..क्या फर्क पढ़ता है. तुम को तो सारे चोर रास्ते पता है. एक बार अंदर घुस गये तो कोई कुछ नहीं कर सकता है.” रोहन, सुशांत को समझता हुआ बोला.
“पर रोहन इस बार में कुछ नहीं कर सकता. बात को समझने की कोशिश करो. मामला बहुत गंभीर है.

(UPDATE-19)​

” सुशांत भी रोहन को समझाने लगा.
“ओके जब इतना कह ही रहे हो तो जरूर कोई सीरीयस गड़बड़ होगी, ओके ठीक है में तुम्हें बात में कॉल करता हूँ.” इतना कहते ही रोहन ने फोन काट दिया.
“अब क्या करे?” परवेज़, रोहन की तरफ देखता हुआ बोला.
“तुझे तो में पहले ही कह रहा था की मत चल मत चल…..पर तुझे तो पैसा का बुखार था ना”. रोहन, परवेज़ पर बरसते हुए कहा.
“अब तू यार मुझ पर चिल्लाना बंद कर हाँ. मुझे क्या पता था की यह सुशांत अचानक पलटी मारेगा.”
“इसमें सुशांत की कोई गलती नहीं है. उसे क्या पता था की वो लोग अचानक इतनी सेक्यूरिटी बढ़ा देंगे. और हमारे चेहरे जगह जगह बाटेंगे” रोहन ने कहा.
“ठीक है पर अब क्या करेंगे? वापस चले?” परवेज़ ने रोहन से पूछा.
“नहीं वापस तो नहीं जाएँगे इतनी दूर आकर. कुछ और रास्ता निकालते है.

”
“कौनसा रास्ता?” परवेज़ ने बड़ी उत्सुकता से कहा. वो खुश हो गया था की रोहन वापस जाने की बात नहीं कर रहा था.
“रुक ना थोड़ी देर… कुछ सोच कर बताता हूँ. ऐसा लगता है सिर्फ़ में ही दिमाग लेकर पैदा हुआ हूँ और तुझे ऊपर वाले ने खाली दिमाग पैदा किया है.”
“अच्छा ठीक है बाबा पर जल्दी से सोच की क्या करना है.” परवेज़ ने कहा.
“पहले चल के किसी ढाबे पर पेट पूजा करते है फिर कुछ सोचते है की आगे क्या करना है.” रोहन ने कहा.
“हां यह ठीक रहेगा कुछ खाना अंदर जाएगा तो दिमाग कुछ काम भी करेगा.” फिर कुछ दूर चलने पर उन्हें एक ढाबा दिखा और फिर रोहन ने उस ढाबे को देखकर गाड़ी वही रोक दी. यह कोई मामूली ढाबा नहीं लग रहा था. बहुत सजा सजाया हुआ वाले डेकरेटेड ढाबा था. वहां के कस्टमर भी काफी डीसेंट लग रहे थे. “आबे तुझे इसी ढाबे पर गाड़ी रोकना था, बाहर से ही देखने में मालूम पढ़ रहा है की कितना महँगा होगा.” परवेज़ ने उस ढाबे की चमचमाहट को देखते हुए कहा.”
“आबे क्या हर वक्त सस्ते और महेंगे की बात करता रहता है. अब आ ही गये है तो कुछ खा पी लेते है.” कहते हुए रोहन, परवेज़ को अंदर ले गया.
वो दोनों एक टेबल पर भात गये. परवेज़ तो खाने के बारे में सोच रहा था पर रोहन इस वक्त यही सोच रहा था की ऐसा क्या करे की पार्क में एंट्री मिल जाए. इसी बीच परवेज़ ने अपने और रोहन के लिए खाने का आर्डर कर दिया.
“जब तक आर्डर नहीं आ जाता तू यही भात में ज़रा वॉशरूम होकर आकर आता हूँ” रोहन ने कहा और उठकर एक तरफ बने हुए वॉशरूम की तरफ चला गया.

रोहन जब टॉयलेट के अंदर था तभी उसे कुछ लड़कों की आपस में बातें करने की आवाजें आती है. वो लोग उसे नहीं देख पाए थे क्योंकि रोहन अंदर टॉयलेट में था. पहले रोहन उनकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था लेकिन अचानक, उसके कान ने कुछ ऐसा सुना की वो थोड़ा चौंक गया
“निखिल यार!! यह श्रुति तो अभी से ही नखरे दिखाने लगी है. मुझसे कह रही थी उसे वापस जाना है वो हम लोग के साथ आगे और नहीं चल सकती. वो तो अच्छा हुआ की निशा ने उसे समझाया तो मान गयी. “ ऋषि ने कहा.
“फिक्र मत करो यारो!! कैसे भी करके उसे एक बार अपने फार्महाउस पर ले जाओ तो फिर वो जितना भी नाटक करे क्या फर्क पढ़ता है. उसे क्या मालूम हमने उसके लिए क्या बंदोबस्त किया हुआ है. हरमज़ाडी को बहुत घमंड है ना अपने आप पर, सब चोद चोद हो जाएगा जब हम वो एम एम ऐसे उसे दिखाएँगे की कैसे तीन तीन मर्द उसके साथ सेक्स कर रहे है और उसके बाद वो एम एम ऐसे हम इंटरनेट पर उपलोआड कर देंगे.” निखिल ने कहा. उनके बीच में और भी ऐसी बातें चलती रही जिससे रोहन को यह समझ में आ गया था की वो लोग किसी श्रुति नाम की लड़की को नैनीताल ले जाकर उसके साथ सेक्स करेंगे और फिर उसकी सेक्स वीडियो बनकर कर उसे इंटरनेट पर डालेंगे. ” मतलब उस लड़की की तो फुल वात लगेगी” रोहन सोचने लगा.

फिर कुछ देर के बाद जब रोहन टॉयलेट से निकला तो वो तीनों वॉशरूम से जा चुके थे. रोहन सोचने लगा की वो उसने अभी जो कुछ सुना वो जाकर उस लड़की को बता दे. फिर उसके दिल में ख्याल आया की उसे क्या करने है, वो लोग की जो मर्जी में आए करे उस लड़की से साथ .हमें कोई लफड़े में नहीं पढ़ना है और वैसे भी मुझे नेशनल पार्क के अंदर जाने का कोई बंदोबस्त के बारे में सोचना है. जब रोहन, परवेज़ के पास पहुंचा तो उसने देखा की जो आर्डर उन्होंने दिया था वो आ चुका था और परवेज़ बिना रोहन का वेट किए खाना खाने में जुट गया था.

“क्या भी भुक्कड़ मेरा वेट नहीं कर सकता था?” रोहन अपनी सीट पर भत्ते हुए कहा.
“वेट कर रहा था में तेरा पर मैंने देखा की तू बहुत टाइम लगा रहा है तो मैंने सोचा तुझे संडास लगी होगी इसलिए तू टाइम लगा रहा है.

(UPDATE-20)​

फिर मैंने सोचा की तू जब आए तब आए में खाना चालू कर देता हूँ.” खाना अपने मुंह में चबाते हुए परवेज़ बोल रहा था. परवेज़ की बात सुनकर रोहन ने कुछ नहीं कहा, बस अपने प्लेट में खाना डालना लगा. फिर उसे अपने टेबल के पास कुछ लड़कों की बातें करने की आवाजें आने लगी. उसने पलट कर देखा तो वहां पर 3 लड़के और 4 लड़कियाँ हंस हंस कर बातें कर रही थी. उसे अचानक वॉशरूम में हुई उन तीनों लड़कों की बातें याद आने लगी. उसने अपने आस पास देखा की कौन हो सकता है जो अंदर वॉशरूम में बातें कर रहे थे. पर उसे ऐसा कोई नज़र नहीं आया उन तीनों लड़कों के अलावा जो किसी लड़की के खिलाफ कुछ प्लान कर रहे हो. फिर उसने उसी लड़कों और लड़कियों वाले टेबल पर देखा तो वहां पर भी तीन लड़के ही थे. उसने सोचा हो ना हो यही वो तीन लड़के होंगे. फिर उसने देखा उन लड़कों के साथ में चार लड़कियाँ भी थी जिनमें से तीन लड़कियाँ तो काफी हंस बोल रही थी पर उनमें से एक लड़की काफी चुप चाप खामोश भाती हुई थी. वो सोचने लगा की इनमें से कौन श्रुति होगी जिसके खिलाफ वो लोग प्लान कर रहे है.
“आबे तू खाना क्यों नहीं खाता? जब से देख रहा हूँ यहां वहां देख रहा है. प्राब्लम क्या है? “ फिर परवेज़ ने देखा की रोहन उन लड़कों और लड़कियों वाले टेबल की और देख रहा है
“आबे तू कब से लड़कियों में इंटेरेस्ट लेने लगा?” परवेज़ ने कहा.
“में लड़कियों की तरफ नहीं देख रहा हूँ, बल्कि कुछ और देख रहा हूँ.” रोहन, परवेज़ की बात सुनकर पलट ते हुए कहा.
“लड़कियों की तरफ नहीं देख रहा है तो क्या देख रहा है? लड़कों की तरफ देख रहा था?…… आबे तू क्या गे है?….
“आबे तू मुझे कुछ बोलने देगा…..बस जब भी देखो तो छपार छपार करता रहता है” रोहन ने थोड़ा चिढ़ कर कहा.
“अच्छा ठीक है बाबा….सॉरी! बोल क्या देख रहा था? परवेज़ ने कहा.
“में जब वॉशरूम में था तो मैंने वहां भायते हुए उन तीनों लड़कों की बात सुनी.

वो लोग का प्लान है की नैनीताल में उनके फार्महाउस पर वो उन चारों लड़कियों में से किसी एक के साथ जिसका नाम श्रुति है उसे नशे की दवा खिलाकर उसे धोखा देकर उसके साथ सेक्स करेंगे और उसकी वीडियो बनाकर इंटरनेट पे डालेंगे….” कहते हुए रोहन थोड़ा रुका की परवेज़ उसे टोकते हुए कहा.
“ओह अब में समझा!! तभी तू इतना टाइम लगा रहा था. और में समझ रहा था की तुझे…..चल ठीक है जो तू कह रहा है सही है तो हमें क्या करना है इस मामले में……?
“मेरा प्लान यह है की इनको अपने साथ लेकर चलते है नेशनल पार्क में.” रोहन ने कहा.
“अपने साथ? आबे तेरा दिमाग खराब हुआ है क्या?” परवेज़, रोहन की तरफ हैरत से देखते हुए कहा.
“थोड़ा सब्र कर और गौर से सुन में क्या बोलने वाला हूँ” रोहन फिर परवेज़ के ऊपर चिढ़ते हुए कहा.
“जैसा सुशांत ने कहा की हमारा स्केचस फोरेस्ट रेंजर्स वालो के पास है तो हम जैसे ही दरवाजा से एंट्री करेंगे तो पहचान लिए जाएँगे और पकड़े जाएँगे . पर अगर हम इन लोगों को अपने साथ ज़बरदस्ती पिस्तौल के ज़ोर पर डरा धमका कर ले जाएँगे तो वहां के सेकूरतीय वाले यही समझेंगे की यह लोग कॉलेज स्टूडेंट है ंौुझ मस्ती करने आए हुए है तो इन लोगों पर उनका ध्यान नहीं जाएगा और हम इन लोगों के साथ नेशनल पार्क में आसानी से एंट्री कर लेंगे” रोहन ने कहा.
“वो तो ठीक है की हम यह लोग के जरिए आसानी से एंट्री कर लेंगे पर, यह लोग का हम पार्क के अंदर ले जाने के बाद क्या करेंगे…..? बात करते हुए परवेज़ थोड़ा रुका फिर बोला “क्या हम इन्हें यह कर वापस कर देंगे भाई लोग आप लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया जो आपने हमारी इतनी मदद की हम आप लोगों के जिंदगी भर एहसान मंद रहेंगे. और उसके बाद यह लोग ‘इस की कोई जरूरत नहीं है, यह तो हमारा फर्ज था’ कहकर वापस चले जाएँगे. क्या वो लोग हमारी पुलिस में कंप्लेंट नहीं कर देंगे? इस बारे में सोचा है तूने? “
“हां मैंने सोचा है इस बारे में , पर तू मुझे बताने देगा तभी ना में बोलूँगा ना कुछ? “ रोहन, परवेज़ पर थोड़ा चिल्लाते हुए कहा.
“अच्छा तूने सोच के रखा है? तो फिर बताना? परवेज़ ने भी कहा.
“यह लोग हमारी पुलिस में कंप्लेंट ना कर दे उसके लिए हमें इनकी कोई कमज़ोरी का इस्तेमाल करना पड़ेगा. और इनकी कमज़ोरी अभी फिलहाल यही है जो यह लोग उस लड़की के साथ कुछ गलत करने का इरादा कर रहे है. हम इन लोगों को धँकाएँगे की अगर हमारे खिलाफ कोई कंप्लेंट करे तो हम उस लड़की को बता देंगे की तुम लोग उसके साथ क्या करने वाले हो और फिर उसके बाद वो लड़की या उसका परिवार तुम लोगों के खिलाफ जो भी एक्शन लेंगे तो तुम लोगों को उसका बहुत बुरा अंजाम बुघाटना पड़ेगा.” इतना कहने के बाद रोहन, परवेज़ की तरफ देखने….

(UPDATE-21)
​

“हम….आइडिया तो तेरा अच्छा है….

मगर साले अगर हम इन्हें जाने दिए तो यह साले उस लड़की के साथ वास्तव में वो सब करेंगे जो तू बता रहा था.” रोहन को खामोश देखा तो परवेज़ ने कहा.
“हां तो करने देना!! हमें क्या फर्क पढ़ता है? और वैसे भी हमारे पास इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं है. और यह साले राइस जाड़े, यह तो इन लोगों का शौक है. मान भी लो की हम इन्हें आज ऐसा करने से रोकते है तो क्या यह साले कल या किसी और दिन…..उस लड़की को चोद देंगे क्या…..? कहते हुए रोहन थोड़ा रुका फिर कहा “एक और बात बोलू तुझे? मुझे नहीं लगता की यह सब करने से उस लड़की को भी कोई ज्यादा फर्क पड़ेगा……आबे यह लोग पहले से ही खाए पिए रहते है. यह तो इनके लिए आम बात है….अभी यह लोग उसकी सेक्स की वीडियो बनाएँगे फिर उसे इंटरनेट पर डालेंगे फिर थोड़े दिन तक उस लड़की के बारे में लोग चर्चा करेंगे….फिर उसके बाद किसी और लड़की का सेक्स वीडियो इंटरनेट पर आएगा और यह लोग पहले वाले किससे को भूल जाएँगे……मेरा यह कहने का मतलब है की जब इन्हें कुछ ज्यादा फर्क नहीं पढ़ता तो हम क्यों इनके पीछे अपना नुकसान करे.”
“हम…..सही कहा तूने जब उस लड़की को ही ज्यादा फर्क नहीं पढ़ने वाला तो हम क्यों अपना नुकसान करे. ठीक है में समझ गया तेरी बात. तो कैसे राजी करे इन्हें अपने साथ चलने को? “ परवेज़ ने कहा.
“करना क्या है…अभी इन्हें अपनी पिस्तौल के ज़ोर पर लेकर चलते है. फिर वहां पहुंचने के बाद इनमें से किसी एक को अकेले बुलाकर धँकाएँगे की अगर तुम लोगों ने पुलिस में हमारी कंप्लेंट करी तो हम उस लड़की को सब कुछ सच सच बता देंगे जो तुम लोग उसके साथ में करने वाले हो.” रोहन ने कहा.
“पर रोहन!! में क्या कहता हूँ…..उन्हें वहां धमकाने से अच्छा है की हम उन्हें यही से धमका कर लेकर जाते है ताकि हमें अपनी पिस्तौल का ज़ोर ना दिखना पड़े “ परवेज़ ने कहा.
“कहा तो तूने ठीक है पर , में सिर्फ़ उन्हें इस बात पर नहीं धमकाना चाहता की वो लोग उस लड़की के साथ कुछ गलत करने वाले है. बल्कि में चाहता हूँ की उनके दिलों पर हमारा खौफ भी बना रहे , और वो सिर्फ़ हम अपनी पिस्तौल के ज़ोर पर ही कर सकते है.” रोहन ने परवेज़ को समझाते हुए कहा.
“ओके ठीक है!! तू जैसा बोलता है वैसा ही करेंगे. पर प्लान क्या है? “ परवेज़ ने रोहन से कहा.
“हम दोनों जल्दी से अपना खाना खत्म करके बाहर अपनी गाड़ी में वेट करेंगे यह लोग के बाहर आने का. फिर जब यह लोग बाहर आने के बाद जैसे ही अपनी गाड़ी के अंदर भइतने जाएँगे हम चुपके से ताकि और लोगों को पता ना चल जाए इनके पीछे पिस्तौल दिखा के इन्हें धमका के गाड़ी के अंदर भात जाएँगे.” रोहन, परवेज़ को समझाते हुए कहा.
“ओह हां यह ठीक रहेगा. पर अगर लड़कियों की कांपती के ऊपर रखेंगे तो ठीक रहेगा, क्योंकि वो ज्यादा डरती है…हिहिहीही.” परवेस ने कहा.
“तू साले नहीं सुधरेगा.

ठीक है लेकिन ज़रा होशियारी से काम लेना पड़ेगा कहीं उन लड़कों में कोई हीरो गिरी दिखाया तो मुसीबत हो जाएगी या फिर उन लड़कियों में से कोई शोर शराबा ना करे.” रोहन समझने लगा परवेज़ को.
“ओके बॉस!! टेन्शन ना लो में सब संभाल लूँगा. कोई पहली बार तो थोड़े ही हम यह काम कर रहे है. याद हैं ना इससे पहले हम ने उस मेहरा फॅमिली को कैसे हैंडिल किया था?” परवेज़ ने कहा.
“हां याद है लेकिन जो उस वक्त तूने उस मेहरा के लड़के को घायल किया था वो दोबारा नहीं करना, हमें उन का सिर्फ़ इस्तेमाल करना है, उनको चोट नहीं पहुचाना है. समझा?” रोहन ने कहा.
“अगर कही वो सब लोग कोई होशियारी करे तो?”
“वो लोग ऐसा वैसा कुछ नहीं करेंगे क्योंकि मुझे पता है यह साले आमेर बाप के लौंदो की सिर्फ़ जेबें ही भारी रहती है . इनके अंदर दिल गुर्दा नहीं होता है. ज़रा सा इन्हें डराव साले यह वही मूठ देते है…… फिर भी अगर कुछ ज्यादा उछल कूदी करे तो रख के देना एक हाथ. और अगर फिर भी कंट्रोल में ना आए तो एकात के हाथ पैर में गोली दाग देना, पर हां पिस्तौल में साइलेनसर लगाना नहीं भूलना. समझा? “
“अभी तू कह रहा की किसी को चोट मत पहुचना और अब गोली मारने की बात कर रहा है.”
“आबे जब सिचुयेशन आउट ऑफ कंट्रोल हो जाए तब यह काम करना. समझा? फालतू में हीरो मत बनना.” उसके बाद रोहन अपनी सीट से उठने लगा और फिर उसने परवेज़ से कहा “ अब तू जल्दी से बिल पे कर और यहां सी निकल कहीं वो लोग हमसे पहले ना निकल जाए.”
फिर उसके बाद परवेज़ ने जल्दी से खाने का बिल अदा किया और फौरन रोहन के साथ बाहर आ गया.

“श्रुति! तुम भी कुछ आर्डर करो अपने लिए.” प्रतीक ने श्रुति की तरफ देख कर कहा जो काफी देर से खामोश

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(UPDATE-22)

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लगा की अब देखे की अब यह क्या बोलता है.
“हम….आइडिया तो तेरा अच्छा है….मगर साले अगर हम इन्हें जाने दिए तो यह साले उस लड़की के साथ वास्तव में वो सब करेंगे जो तू बता रहा था.” रोहन को खामोश देखा तो परवेज़ ने कहा.
“हां तो करने देना!! हमें क्या फर्क पढ़ता है? और वैसे भी हमारे पास इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं है. और यह साले राइस जाड़े, यह तो इन लोगों का शौक है. मान भी लो की हम इन्हें आज ऐसा करने से रोकते है तो क्या यह साले कल या किसी और दिन…..उस लड़की को चोद देंगे क्या…..? कहते हुए रोहन थोड़ा रुका फिर कहा “एक और बात बोलू तुझे? मुझे नहीं लगता की यह सब करने से उस लड़की को भी कोई ज्यादा फर्क पड़ेगा……आबे यह लोग पहले से ही खाए पिए रहते है. यह तो इनके लिए आम बात है….अभी यह लोग उसकी सेक्स की वीडियो बनाएँगे फिर उसे इंटरनेट पर डालेंगे फिर थोड़े दिन तक उस लड़की के बारे में लोग चर्चा करेंगे….

फिर उसके बाद किसी और लड़की का सेक्स वीडियो इंटरनेट पर आएगा और यह लोग पहले वाले किससे को भूल जाएँगे……मेरा यह कहने का मतलब है की जब इन्हें कुछ ज्यादा फर्क नहीं पढ़ता तो हम क्यों इनके पीछे अपना नुकसान करे.”
“हम…..सही कहा तूने जब उस लड़की को ही ज्यादा फर्क नहीं पढ़ने वाला तो हम क्यों अपना नुकसान करे. ठीक है में समझ गया तेरी बात. तो कैसे राजी करे इन्हें अपने साथ चलने को? “ परवेज़ ने कहा.
“करना क्या है…अभी इन्हें अपनी पिस्तौल के ज़ोर पर लेकर चलते है. फिर वहां पहुंचने के बाद इनमें से किसी एक को अकेले बुलाकर धँकाएँगे की अगर तुम लोगों ने पुलिस में हमारी कंप्लेंट करी तो हम उस लड़की को सब कुछ सच सच बता देंगे जो तुम लोग उसके साथ में करने वाले हो.” रोहन ने कहा.
“पर रोहन!! में क्या कहता हूँ…..उन्हें वहां धमकाने से अच्छा है की हम उन्हें यही से धमका कर लेकर जाते है ताकि हमें अपनी पिस्तौल का ज़ोर ना दिखना पड़े “ परवेज़ ने कहा.
“कहा तो तूने ठीक है पर , में सिर्फ़ उन्हें इस बात पर नहीं धमकाना चाहता की वो लोग उस लड़की के साथ कुछ गलत करने वाले है. बल्कि में चाहता हूँ की उनके दिलों पर हमारा खौफ भी बना रहे , और वो सिर्फ़ हम अपनी पिस्तौल के ज़ोर पर ही कर सकते है.” रोहन ने परवेज़ को समझाते हुए कहा.
“ओके ठीक है!! तू जैसा बोलता है वैसा ही करेंगे. पर प्लान क्या है? “ परवेज़ ने रोहन से कहा.
“हम दोनों जल्दी से अपना खाना खत्म करके बाहर अपनी गाड़ी में वेट करेंगे यह लोग के बाहर आने का. फिर जब यह लोग बाहर आने के बाद जैसे ही अपनी गाड़ी के अंदर भइतने जाएँगे हम चुपके से ताकि और लोगों को पता ना चल जाए इनके पीछे पिस्तौल दिखा के इन्हें धमका के गाड़ी के अंदर भात जाएँगे.” रोहन, परवेज़ को समझाते हुए कहा.
“ओह हां यह ठीक रहेगा. पर अगर लड़कियों की कांपती के ऊपर रखेंगे तो ठीक रहेगा, क्योंकि वो ज्यादा डरती है…हिहिहीही.” परवेस ने कहा.
“तू साले नहीं सुधरेगा. ठीक है लेकिन ज़रा होशियारी से काम लेना पड़ेगा कहीं उन लड़कों में कोई हीरो गिरी दिखाया तो मुसीबत हो जाएगी या फिर उन लड़कियों में से कोई शोर शराबा ना करे.” रोहन समझने लगा परवेज़ को.
“ओके बॉस!! टेन्शन ना लो में सब संभाल लूँगा. कोई पहली बार तो थोड़े ही हम यह काम कर रहे है. याद हैं ना इससे पहले हम ने उस मेहरा फॅमिली को कैसे हैंडिल किया था?” परवेज़ ने कहा.
“हां याद है लेकिन जो उस वक्त तूने उस मेहरा के लड़के को घायल किया था वो दोबारा नहीं करना, हमें उन का सिर्फ़ इस्तेमाल करना है, उनको चोट नहीं पहुचाना है. समझा?” रोहन ने कहा.
“अगर कही वो सब लोग कोई होशियारी करे तो?”
“वो लोग ऐसा वैसा कुछ नहीं करेंगे क्योंकि मुझे पता है यह साले आमेर बाप के लौंदो की सिर्फ़ जेबें ही भारी रहती है . इनके अंदर दिल गुर्दा नहीं होता है.

ज़रा सा इन्हें डराव साले यह वही मूठ देते है…… फिर भी अगर कुछ ज्यादा उछल कूदी करे तो रख के देना एक हाथ. और अगर फिर भी कंट्रोल में ना आए तो एकात के हाथ पैर में गोली दाग देना, पर हां पिस्तौल में साइलेनसर लगाना नहीं भूलना. समझा? “
“अभी तू कह रहा की किसी को चोट मत पहुचना और अब गोली मारने की बात कर रहा है.”
“आबे जब सिचुयेशन आउट ऑफ कंट्रोल हो जाए तब यह काम करना. समझा? फालतू में हीरो मत बनना.” उसके बाद रोहन अपनी सीट से उठने लगा और फिर उसने परवेज़ से कहा “ अब तू जल्दी से बिल पे कर और यहां सी निकल कहीं वो लोग हमसे पहले ना निकल जाए.”
फिर उसके बाद परवेज़ ने जल्दी से खाने का बिल अदा किया और फौरन रोहन के साथ बाहर आ गया.

“श्रुति! तुम भी कुछ आर्डर करो अपने लिए.” प्रतीक ने श्रुति की तरफ देख कर कहा जो काफी देर से खामोश….

(UPDATE-23)

​
भाती हुई थी.
“नहीं मुझे भूख नहीं है.” श्रुति ने बस इतना ही कहा
“यार निशा? तू ही समझा अब इसे, यह सिर्फ़ तुम्हारी ही बात मानती है. ऋषि ने निशा की तरफ देखते हुए कहा.
“क्या हुआ श्रुति? कम ऑन अब चिल्ला भी करो. क्यों इतना मुंह लटकके भाती हो. हम यहां सब एंजाय करने आए है और तुम हो की बलून के जैसा मुंह फूला के भाती हो. “ निशा, श्रुति को समझाते हुए कहा.
“मेरा मूंड़ नहीं है तुम लोग एंजाय करो. और वैसे भी मैंने डिसाइड कर लिया है की में तुम लोगों के साथ नैनीताल नहीं जाओंगी, में यही से कोई प्राइवेट टैक्सी करके दिल्ली के लिए वापस चली जाओंगी” कहते हुए श्रुति अपनी जगह से उठने लगी.
“श्रुति प्लीज़!! अब यह क्या बचपाना है!! कहा जा रही हो? प्लीज़ बैठो. “ श्रुति का हाथ पकड़ते हुए निशा ने उसे बैठा दिया.
“श्रुति अगर तुम्हें निखिल और छाया की बातों का बुरा लगा है तो यह दोनों तुमसे माफी माँग लेंगे, पर यूँ अपना मूंड़ ऑफ मत करो. में इन्हें कह दूँगी तो वो तुमसे अब कोई मज़ाक भी नहीं करेंगे.” निशा ने श्रुति को समझता हुए कहा.
“हां श्रुति!! अगर तुम्हें हमारा मज़ाक करना पसंद नहीं है तो हम तुमसे माफी माँगते है.” निखिल ने भी तुरंत कहा.
“ओह इसे श्रुति!! मुझे भी माफ कर दो. प्लीज़!!!” छाया ने अपने दोनों हाथों को अपने कानों पर रखते हुए कहा. श्रुति पहले दूसरी तरफ देखने लगी फिर कुछ देर बाद उसने कहा.
“ओके!! लेकिन मुझे थोड़े देर के लिए एकांत चाहिए इसलिए में गाड़ी में बैठने जा रही हूँ…” फिर उसने ऋषि की तरफ देखते हुए कहा
“ऋषि प्लीज़ मुझे गाड़ी की चाभी दो.”
“गाड़ी की चाबी??? ऋषि हैरत से श्रुति की तरफ देखते हुए कहा.
“ओह डोंट वरी!! में गाड़ी लेकर कहीं नहीं जाओंगी क्योंकि मैंने इतनी लंबी ड्राइव कभी नहीं की और हाइवे पर तो कभी नहीं” श्रुति ने कहा.
“नहीं वो बात नहीं है…..

” ऋषि, श्रुति को चाबी देते हुए और भी कुछ कहना चाह रहा था पर उससे पहले ही श्रुति ने उसके हाथ से चाबी लेते हुए वहां से निकल गयी.

रोहन और परवेज़ बाहर अपनी गाड़ी में बैठे हुए उन लोगों का वेट कर रहे थे. तभी उन्होंने देखा की उन चार लड़कियों में से एक लड़की ढाबे से बाहर निकली और फिर वहां पर खड़ी एक सुव में में बैठ गयी . उसने सोचा शायद वो लोग बाहर आ रहे है. तभी वो कुछ देख कर तीत्खा. क्योंकि उसकी गाड़ी और वो सुव में ज्यादा फासला नहीं था. उसने देखा की जो लड़की गाड़ी में भाती थी उसका मूंड़ थोड़ा उखड़ा उखड़ा सा था. वो थोड़ी देर के लिए रुक गया.
“रुक एक मिनट.” रोहन ने परवेज़ से कहा. फिर कुछ देर सोचने के बाद वो गाड़ी से उतरा और सीधा उसी सुव के पास जाने लगा.
“आबे क्या हुआ? क्या कर रहा है? “ परवेज़ उसे रोकने की कोशिश करने लगा पर रोहन नहीं रुका. परवेज़ ने देखा की रोहन पहले उस गाड़ी के पास जाकर रुका फिर थोड़ी देर यहां वहां देखा और जल्दी से दरवाजा खोल कर उस लड़की के पास भात गया. “आबे तेरी की!! यह तो डायरेक्ट जाकर उस के भात गया. बड़ी डेरिंग है बंदे में. फिर परवेज़ ने देखा की रोहन उसे हाथ के इशारे से अपने पास बुला रहा है. वो जल्दी से गाड़ी उतरा और रोहन के पास पहुंच गया. उसने देखा की रोहन उस लड़की का मुंह अपने हाथों से दबाया हुआ था और उसकी कांपती पे पिस्तौल रखा हुआ था. और लड़की गूओं ग्गा कर रही थी.
“जल्दी से अपनी गाड़ी कही साइड पे पार्क कर के आ. जल्दी .” रोहन ने उसे आर्डर देते हुए कहा.
“ओके बॉस! में अभी आया.” परवेज़ जल्दी से अपनी गाड़ी में भैइता और उसे कही साइड में पार्क करने लगा.
“देखो!! तुम ज्यादा च्चटपताओ मत, तुम मुझे जानती नहीं हो में कितना बड़ा कमीना आदमी हूँ. अगर तुम इसी तरह च्चटपटती रहोगी तो में तुम्हें यही ठोंक दूँगा. और यह सब मेरे लिए कोई मुश्किल नहीं है. समझी? अपने आँख के इशारे से बताओ की तुमको मेरी बात समझ में आ गयी है???” रोहन ने कहा. श्रुति ने जल्दी से अपनी आँखें ऊपर नीचे करने लगी. फिर रोहन ने आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ श्रुति के मुंह से हटाया और उसे गौर से देखने लगा. उसने देखा की उस लड़की की उमर कोई ज्यादा नहीं थी. यही कोई 20 या 22 साल की होगी. वो समझ गया था की यह लड़की एक दम डरी हुई है. उसकी साँसें ऊपर नीचे हो रही थी .
“तुम्हारे साथी कहा है? अभी तक आए क्यों नहीं.” रोहन ने श्रुति से कहा
“वववव…ओह लोग अंदर ही है…… मेरी तबीयत थोड़ी….. ठीक नहीं है इसलिए में गाड़ी में आकर भात गयी थी.” श्रुति ने डरते हुए कहा. फिर उसके बाद परवेज़ भी वहां पर आ गया. “क्या बॉस! क्या चल रहा है? अकेले अकेले मजे…..हाअ.” परवेज़ ने देखा की रोहन, श्रुति से काफी चिपक कर भरता हुआ था तो उसने ऐसे थोड़ा मज़ाक कर दिया. फिर रोहन उसे थोड़ा घूर के देखने लगा.
“सॉरी यार! बस मज़ाक कर….

(UPDATE-24)

रहा था.

वैसे इसके दोस्त लोग कहा है?” परवेज़ , रोहन से फूचने लगा.
“वो लोग अभी अंदर ही है. यह मैडम की तबीयत ज़रा खराब है इसलिए आराम फरमाने गाड़ी में आकर भात गयी थी.” रोहन ने उसे बताया.
“और हमारा काम आसान कर गयी.” परवेज़ ने जल्दी से कहा.
“तुम लोग को आख़िर क्या चाहिए?” श्रुति ने कहा जो अब थोड़ा नॉर्मल हो चुकी थी.
“तुम्हारे दोस्तों को आने दो पता चल जाएगा. बस तुम इतना समझ लो हम तुम लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुचना चाहते. हमें अपनी मंजिल तक जाना है और इसमें हमें तुम लोगों की जरूरत पड़ेगी.” रोहन ने कहा. फिर रोहन ने देखा की श्रुति के सारे दोस्त ढाबे से बाहर आ रहे थे.
“चुप चाप भायते रहना. ज़रा सा भी हिलने की कोशिश की ना तो यही ठोंक दूँगा और गोली की आवाज़ भी बाहर नहीं जाएगी क्योंकि इस गुण पर साइलेनसर लगा हुआ है.” रोहन ने श्रुति के ऊपर गुण तानते हुए कहा.

श्रुति उस वक्त को कोसने लगी की जब निशा ने उसे अपने साथ इस ट्रिप पर चलने को कहा था और उसके बहुत रिकवेस्ट करने पर वो राजी हो गयी थी उन लोगों के साथ चलने को. वरना उसका मान तो नहीं था इन लोगों के साथ में चलने का. उसके बाद तो और नहीं हुआ जब उसे पता चला की निखिल भी उनके साथ आ रहा है, बल्कि वो लोग निखिल के ही फार्महाउस पर जो नैनीताल में है जा रहे है. पर निशा के काफी समझने पर वो राजी हो गयी थी. फिर उसके बाद उसकी नोक झोंक भी हो गयी थी निखिल और छाया के साथ जिससे उसका मूंड़ अब तक नहीं ठीक हुआ था. अभी वो यह सब चीज़ों के बारे में सोच रही की इतने में यह एक नयी मुसीबत आ गयी. उसने सोचा की आज कल उसका दिन ही उसके लिए बहुत खराब चल रहा है, घर में पापा का अलग टेन्शन है ऊपर से यह नयी मुसीबत गले पढ़ गयी है.

“परवेज़? तू जल्दी से गाड़ी उतार और वो लोग के पीछे पीछे आ. फिर जैसे ही वो लोग गाड़ी के करीब पहुचेंगे तू उन्हें बताना की……..” रोहन परवेज़ की तरफ देखते हुए बोला. “ आगे कुछ और बोलने की जरूरत है तुझे?”
“नहीं बॉस! में समझ गया मुझे क्या करना है. फिक्र मत कर में सब संभाल लूँगा.” कहते हुए परवेज़ गाड़ी से उतार गया.

“चलो देखते है मैडम का क्या हाल है. अकेली भैते भैते शायद उसका दिमाग कुछ ठीक हुआ हो.” छाया ने कहा जो अपने दोस्तों के साथ ढाबे से बाहर आ रही थी.
“छाया प्लीज़, अभी उसे मत च्छेदना और नाहीं उससे कुछ कहना. उसका मूंड़ वैसे ही खराब है और खराब हो जाएगा.” निशा ने छाया को समझाते हुए कहा.
“हां छाया प्लीज़, अभी यह सब मत करना. अभी वॉंट तो एंजाय और उसके खराब मूंड़ से सारा एजॉयंेंट स्पायिल हो जाता है.” आहना भी निशा का साथ देते हुए बोली.
“ओके ठीक है बाबा, कुछ नहीं बोलूँगी उसे . फाइन? “ छाया च्चिदते हुए निशा और आहना की तरफ देखते हुए बोली.

यही सब कहते हुए सभी जैसे ही गाड़ी की तरफ बढ़े, अचानक उन्हें पीछे से एक आवाज़ आई “ सुनो भी ओये लौंदो लोग!! यह आवाज़ सुनकर सभी लोग ने पीछे मुड़कर देखा की एक आदमी अपने हाथ में पिस्तौल कमर के पास छुपा के उनके तरफ तन के खड़ा था. यह देख कर सभी लोग दहशत में आ गये. “अंदर जो तुम्हारी दोस्त है ना? उसके साथ में अपना एक यार भरता है और वो उसके भेजे में गुण रखा हुआ है. तुम लोग बस सिर्फ़ इतना करो की बिना कोई आवाज़ किए गाड़ी में चुप चाप भात जाओ. वरना में और मेरा दोस्त तुम लोग के साथ क्या करेंगे यह तुम लोगों को कहने की जरूरत नहीं है मुझे. समझे??” परवेज़ ने उन्हें भी अपनी गुण दिखाते हुए बोला. उन सभी ने खिड़की के अंदर से देखा की वास्तव में श्रुति के साथ कोई भरता हुआ है और उस पर गुण ताने हुए है. फिर वो लोग ज्यादा कुछ नहीं किए और चुपचाप जाकर गाड़ी में भइतने लगे.
“ओये हीरो! तू इधर आ क्या नाम है तेरा ? परवेज़ ने उनमें से एक को बुला कर पूछा.
“जी निखिल!!!.” निखिल डरते हुए जवाब दिया.
“गाड़ी कौन तेरा बाप चलाएगा??….चुप चाप जाकर ड्राइविंग सीट पर भात और जहाँ चलने बोलू वही चलना और कोई होशियारी मत करना समझा?” निखिल बिना कुछ बोले ड्राइविंग सीट पे भात गया. फिर उसके बाद परवेज़ गाड़ी की एक वाली पीछे की सीट पे भटीह गया. यह एक 7 सीटर वाली सुव थी लेकिन अब बैठने वाले 9 थे.

रोहन और परवेज़ के बैठने के बाद उसमें जगह नहीं हो रही थी मगर फिर भी दोनों एडस पड़स जगह बनाते हुए उन लोगों के बीच बैठ गये थे.. परवेज़, निशा , प्रतीक और ऋषि एक दम पीछे वाली सीट पर भायते हुए थे और रोहन, श्रुति, और छाया बीच वाली सीट पर भायते हुए थे और आहना , निखिल के साथ ड्राइविंग सीट के पास वाली सीट पर भाती हुई थी.
“सुनो भी….​

(UPDATE-25)

तुम सब!! हम लोग का इरादा तुम लोगों को कोई चोट पहुचाने का नहीं है. हमें बस अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए तुम सब लोगों की जरूरत है. इसलिए तुम सब लोग हमारे साथ अच्छे से रहना, अगर ज़रा सी भी कोई होशियारी दिखाने की कोशिश की तो सालों भून के रख दूँगा सभी को. समझे क्या? “ रोहन ने चिल्लाते हुए सभी से कहा. फिर सभी ने बड़ी बड़ी “जी और हां हां” कहते रहे .
“हम….इसी में तुम सबकी भलाई है वरना मुझे किसी को जान से मारने में ज़रा भी देर नहीं लगती. तुम सब को ठोंक कर चला भी जाऊंगा तो भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा क्योंकि यह मेरा रोज़ का काम है. “ अब किसी के अंदर हिम्मत नहीं हो रही थी वो सब उन दोनों की गन्स और उनका मुकाबला कर सके. क्योंकि रोहन ने उन्हें इतना डरा दिया था की वो लोग की हिम्मत ही नहीं हो रही थी कुछ करने की. और वैसे भी उसने उन लोगों से कह दिया था की वो सिर्फ़ उसके मंजिल तक उसे चोद दे बस. इसलिए उन्होंने और ज्यादा कुछ करने का साहस पैदा नहीं हुआ.
“आबे ड्राइवर के बच्चे? क्या नाम है तेरा ? रोहन ने निखिल से कहा.

“निखिल. “ निखिल सिर्फ़ इतना ही कहा.
“सुन? मोरडाबाद बायें पास से जो लेफ्ट टर्न है वहां से लेफ्ट टर्न लेकर रामनगर की और चलना. समझा? रोहन ने उसे आर्डर देते हुए कहा.
“र्र..र्र…रामनगर? हमें रामनगर जाना होगा? तुमने तो कहा था की सिर्फ़ तुम्हारी मंजिल तक पहुंचा दे ? “ निखिल ने ड्राइविंग करते हुए कहा.
“हां तो रामनगर ही हमारी मंजिल है. बल्कि हमें तो उससे भी थोड़ा आगे जाना है. अब तू ज्यादा सवाल पूंछ पूंछ के मेरा भेजा मत खाना चुप चाप गाड़ी ड्राइव करते रही. रोहन ने कहा.
“सुनिए? निशा ने रोहन से कहा. “आपको अगर हमारी गाड़ी की जरूरत है तो गाड़ी ले जाए पर प्लीज़ हमें चोद दीजिए.” निशा ने बहुत गिड गीदा कर कहा.
“हहाहहाहा…” रोहन हंसते हुए कहा. “तुझे क्या लगता है हमारे पास गाड़ी नहीं थी या फिर हमें तेरी गाड़ी के लालच में यह सब कर रहे है? नहीं ऐसा नहीं है. बल्कि हमें तुम लोगों की जरूरत है . “ रोहन ने कहा.
“हमारी जरूरत? मतलब?” छाया ने जल्दी से कहा.
“मतलब भी समझ में आ जाएगा पर फिलहाल अभी चुप भायतो वरना मेरा दिमाग खराब हुआ तो सालों सबको यही ठोंक दूँगा. ….कोई कुछ नहीं बोलेगा अब.” रोहन ने सबको वॉर्निंग देते हुए कहा.

कोई एक डेढ़ घंटे के बाद वो लोग रामनगर पहुंचे तो रोहन ने निखिल से कहा “ आबे ओये ड्राइवर यहां से यह लेफ्ट वाले रोड पे टर्न ले और चल जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क.”
“जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क? हमें वहां तक जाना होगा?” ऋषि ने कहा.
“वहां तक नहीं बल्कि अंदर तक जाना होगा. यही तो सारा खेल है. उसके अंदर पहुँचे का जरिया बनाना चाहता हूँ में तुम लोगों को.” रोहन ने कहा.
“प्लीज़, ऐसा मत करो. अपना कहा था की आपकी मंजिल तक पहुंचा दे. हम आपको वहां तक चोद देंगे. फिर अंदर जाने के क्या मतलब? प्रतीक ने कहा.
“में आखिरी बार सबसे कह रहा हूँ, वरना अभी क्सिी ने कुछ एक लफ़्ज़ भी मुंह से निकाला ना तो सच में साअला यही ठोंक दूँगा भेंचूड़ लोग. मेरी बात किसी की समझ में नहीं आ रही है क्या, मादरोचूड़ो? “ रोहन को अब वास्तव में गुस्सा आने लगा था और जब वो गुस्से में आता है तो ऐसे ही गालिया बकते रहता है. रोहन को चिल्लाते हुए देखकर अब किसी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ बोलने की. सब लोग चुप चाप भाई हुए थे. कुछ 15 मिनट की ड्राइव के बाद रोहन ने निखिल को गाड़ी रोकने के लिए कहा.
“फिर रोहन, प्रतीक की तरफ घूमते हुए कहा “ओये तू? वो जो काउंटर दिख रहा है ना वहां से हम सब के लिए टिकट ले ले. और वो जो भी पूछे उसका जवाब ठीक से देना. हमारे बारे में उन्हें कुछ मत बताना. उन लोगों से कहना की सब तेरे फ्रेंड्स है और हम लोग पार्क में घूमने के लिए आए है , समझा? अगर कोई गड़बड़ किया ना तो तू जानता है में क्या करूँगा.” रोहन, श्रुति के ऊपर गुण तानते हुए कह रहा था.

“तेरे पास तेरा आइडी हैं ना?” रोहन ने प्रतीक से कहा
“ हां हां मेरे पास मेरा आइडी है.” प्रतीक ने जवाब दिया.
“और सुन हम दोनों के नाम विवेक और राजन बताना समझा? रोहन ने उसे फिर कहा.
“ओके ठीक है.” प्रतीक कहता हुआ वहां से टिकट काउंटर पर चला गया.
“अगर वो लोग इधर आए चेकिंग के लिए तो कह देना की हम सब तुम्हारे दोस्त है.” रोहन ने सभी से कहा.

फिर कुछ आधे घंटे तक उनकी पूरी फॉरमॅलिटी हो गयी. उन्होंने भी कुछ ज्यादा चेकिंग नहीं की वो यह ही समझते रहे की यह लोग कॉलेज स्टूडेंट्स है पार्क के अंदर घूमने के लिए आए हुए है. इसलिए उनकी सामानो की भी ज्यादा तलाशी नहीं हुई और फिर उसके बाद उन्हें पार्क के अंदर जाने दिया गया.

फिर जब पार्क के कुछ अंदर….​

(UPDATE-26)

जाने के बाद हिम्मत करके इस बार श्रुति ने कहा.” प्लीज़!!! अब तो हमें तो जाने दो. अब तो तुम पार्क के अंदर पहुंच गये हो.”
“इतनी जल्दी क्या है अब तो हमारे पास गाड़ी भी नहीं है तो हम वहां तक कैसे पहुचेंगे? जहाँ तक हमें जाना है. थोड़ा सब्र रखो जब हम अपनी मंजिल तक पहुंच जाएंगे तो तुम लोगों को चोद देंगे.” रोहन ने जवाब दिया. फिर रोहन ने घूम कर परवेज़ की तरफ देखा और सिर्फ़ इतना ही कहा “ फोन लगा उसे.” फिर परवेज़ किसी को फोन लगाने लगा “हेलो भीमा! हां हम लोग पहुंच गये है बस कुछ देर में धिकला फोरेस्ट लोंज पहुंच रहे है.” फिर परवेज़ ने फोन काट दिया
“प्लीज़ सर! हमें जाने दो. हम सबने आपका किया बिगाड़ा है प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़.” आहना के आखों में अब आँसू निकालने लग गये थे.
“अरे तू इतना टेन्शन क्यों ले रही है, कुछ नहीं होगा तुम लोगों को. तुम सब यहां से ज़िंदा वापस जाओगे.” रोहन उसे समझाते हुए कहा.
“ लेकिन अगर में तुम सब को चोद दम और तुम लोग बाहर जाकर हमारी शिकायत किसी से कर दिए दो?” रोहन ने कहा.
“नहीं, हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे, प्लीज़ हमारा विश्वास करिए.” प्रतीक ने कहा.
“विश्वास….हहहे. विश्वास तो में अपने बाप पर भी ना करूं , तुम लोग क्या चीज़ हो?” रोहन हंसते हुए कहा.
फिर कुछ देर तक गाड़ी के ऐसे ही चलने के बाद रोहन ने कहा
“ठीक है में तुम लोगों को चोद देता हूँ. वो सामने जो तुम्हें जो पेड़ दिख रहा है ना वहां गाड़ी रोको.” रोहन का बस इतना कहना था की निखिल ने फौरन गाड़ी उस पेड़ के पास रोक दी. रोहन और परवेज़ गाड़ी से उतार गये. “ सुनो जिस रास्ते पर से हम सब आए है उस रास्ते से बाहर मत निकलना बल्कि यहां से आधे घंटे की ड्राइव पर दूसरा दरवाजा है वहां से निकलना, समझे? “ सभी ने हां में अपना सर हिलाया. “और हां कोई अगर कोई पूछे तो किसी को हमारे में किसी को कुछ बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वो लोग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएँगे में यहां से आसानी से निकल जाऊंगा. पर अगर किसी ने अपना मुंह खोला तो….

” इतना कहते ही रोहन ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए निखिल की तरह देखा और उससे कहने लगा.
“तू!! ज़रा एक मिनट के लिए बाहर निकल, मुझे तेरे से कुछ बात करनी है.”
“म्‍म्मेई…..क्क्कय्या बात करनी है???” निखिल थोड़ा डरते हुए कहा.
“आबे तू बाहर तो आ. डर मत कुछ नहीं करूँगा तुझे….अगर कुछ करना होगा तो तुझे यही से थोक सकता हूँ समझा? चल अब जल्दी से आ नहीं तो…..” रोहन, निखिल की तरफ पिस्तौल तानते हुए कहा.
“ऊओककक…..में आ रहा हूँ.” कहते हुए निखिल जल्दी से दरवाजा खोलते हुए उनके पास गया. फिर रोहन, निखिल के कंधे पर हारह रक्त हुआ उसे थोड़ी दूर ले गया.
“उन चारों लड़कियों में से श्रुति कौन है?” रोहन , निखिल की तरफ देखते हुए कहा.
“ष्रृत्तीी….तुम्हें उसका नाम कैसे मालूम?” निखिल हैरत से रोहन की तरफ देखता हुआ बोला.
“आबे ज्यादा सवाल मत पूछा कर मेरे से . जितना बोलता हूँ उतना ही जवाब दिया कर . चल अब जल्दी से बता श्रुति कौन है उन लड़कियों में से?” रोहन, निखिल पर गुस्सा करते हुए कहा.
“वो…जो तुम्हारे बाजू बैठी हुई थी और जिसके ऊपर तुमने अपनी गुण तानी हुई थी ……उसी का नाम श्रुति है.” निखिल ने कहा.
“ह्म्‍म्म्म…..मुझे पहले से ही अंदाज़ा था की वही श्रुति होगी क्योंकि तुम लोग से काफी अलग लग रही थी. अच्छा वो सब चोद, में यह कहना चाहता हूँ की जो कुछ भी तुम सब लोग उस लड़की के साथ में …..उधर नैनीताल में जो करने का इरादा कर रहे हो उसके बारे में मुझे सब पता है.” कहता हुआ रोहन, निखिल की आँखों में देखने लगा.
“में समझा नहीं……आ….आ…आप किस बारे में बात कर रहे है? “ निखिल घबराते हुए कहा की इसे यह सब बातें कैसे मालूम.
“आबे चोद के!!! ज्यादा भोला मत बन……मुझे पता है तुम लोग उस लड़की का गेम बज़ाओगे और फिर उसके बाद उसकी वीडियो बनकर इंटरनेट पर सबको दिहखाओगे.” इतना सुनना था की निखिल की आँखें हैरत से बाहर आने लगी.
“आबे ज्यादा मत सोच की मुझे यह सब कैसे पता चला, वो जब तुम लोग वॉशरूम में बातें कर रहे थे तभी में……किसी टॉयलेट के अंदर था और तुम सब की बातें मैंने सुन लिया था……क्या समझा? फिर रोहन थोड़ा रुक कर निखिल के चेहरे की तरफ देखने लगा और फिर उसके बाद कहने लगा.
“आबे तू फिक्र मत कर!! में तुझे ऐसा करने से रोक नहीं रहा हूँ और ना ही उस लड़की को बताने जा रहा हूँ….मुझे कोई फर्क नहीं पढ़ता की तुम लोग उस लड़की के साथ क्या करोगे…में बस इतना चाहता हूँ की तुम लोग यहां से चुप चाप निकल जाओ और हम दोनों ने तुम लोगों को ज़बरदासित यहां पकड़ के लाए है उसके बारे में किसी से कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है. अगर तुम लोगों ने ऐसा किया तो में उस लड़की और उसके परिवार को तुम लोगों के इरादो के बारे में बता दूँगा…..​

UPDATE-27)

फिर उसके बाद तुम लोगों का जो हाल होगा वो तो होगा…..पर में खुद तुम सब को ढूंढ. ढूंढ.

कर तुम सब की मां चोद दूँगा और यह सब करना मेरे लिए कोई मूसखिल काम नहीं है. समझा?….” रोहन, निखिल की तरफ आँखें दिखाते हुए कहा. निखिल का तो डर के मारे कुछ बोला ही नहीं जा रहा था..
” ज्ज्ज्जिई…में समझ गया….हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे श्रुति के साथ…” डरते हुए निखिल ने कहा.
“तुम लोग की मर्जी है करना है तो करो, मुझे कोई फर्क नहीं पढ़ता पर, अपने दोस्तों को यह बता देना जो मैंने तुझे बताया की अगर मुंह खॉलोगे तो में क्या हाल करूँगा सबका.” रोहन ने कहा.
“टीट…हहीक.. है में सबको समझा दूँगा. आप फिक्र मत करिए.” निखिल ने कहा.
“आबे फिक्र करने की जरूरत मुझे नहीं तुम लोगों को है. समझा?? रोहन ने कहा.
“ठीक है……में समझ गया.” निखिल ने भी कहा.
“चल जा अपनी गाड़ी में बैठ….और जहाँ से कहा है उसी दरवाजा से वापस जाना.” कहते हुए रोहन, परवेज़ के साथ आगे तरफ गया.

“राम सिंग? क्या हुआ फोरेन्सिक की रिपोर्ट आई? “ उमेश, रामसिंघ को अपने केबिन में बुलाकर पूछा.
“हां सर बस अभी अभी आई है. और बहुत शॉकिंग बात कही हुई है इसमें!” राम सिंग ने कहा.
“शॉकिंग बात? कौनसी शॉकिंग बात?” उमेश हैरत में पढ़ कर बोला.
“सर इसमें लिखा है जो कंकाल हमें वहां से मिला था उन सबको किसी जानवर ने खाया है. और इस जानवर ने अपने तेज नुकिले नाखून से उन सब पर हमला किया था . और हमला इस तरह किया के उनके जिस्म से एक भी माँस नहीं मिला” राम सिंग ने कहा.
“क्या कहा जानवरो ने उनपर हुँला किया था और वो भी अपने नाखूनओ से उनको चियर फाड़ डाला? पर ऐसा कौनसा जानवर पैदा हो गया जो इतने भयंकर तरीके से उन लोगों की जान ले ली.” उमेश थोड़े देर सोच में डूबे रहने के बाद फिर कहा.
उन लोगों को मारे हुए कितना टाइम हुआ था ?
“जब हमें हड्डियाँ मिली थी उससे कुछ 5 घंटे पहले.” रामसिंघ ने जवाब दिया.
“किया? 5 घंटे पहले? रामसिंघ तुम क्या कह रहे हो 5 घंटे में इंसान हो या जानवर उसका माँस इतनी जल्दी नहीं गलता और नाहीं दुनिया का कोई भी जानवर इतनी सफाई से किसी की लाश खाएगा. वहां तो माँस का एक लोथड़ा भी नहीं था. ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत फुर्सत से इन सबको खाया है.”
“यही तो है शॉकिंग बात है सर!” रामसिंघ ने कहा.
“समझ में नहीं आ रहा है ऐसा कौनसा जानवर पैदा हो गया जो इतनी जल्दी एक लाश से माँस कहा गया” कहते हुए उमेश फिर किसी सोच में डूब गया. उनके बीच इसी तरह की और भी बातें चल ही रही थी के अचानक, एक फोरेस्ट ऑफिसर भागता हुआ आया और डायरेक्ट उमेश के केबिन में घुस गया.”सर!! बहुत ही बुरी खबर है!!!, अभी अभी खबर आई है की उधर कालगरह के आस पास कुछ हुआ है. अभी हमारा एक ऑफिसर जो वहां तैनाल्ट था उसने यह खबर दिया है की वहां पर कुछ अजीब से दिखने वाले कुछ जानवरो ने हमला कर दिया है, जो बंदारो से थोड़े मिलते जुलते है. उन्होंने काफी टूरिस्ट्स को भी जान से मर डाला है.

”
“क्या कहा तुमने? अजीब से दिखने वाले जानवर?” उमेश ने कहा.
“हां सर !!! बहुत आतंक मचा के चले गये है वो लोग.”
“रामसिंघ? अभी कालगरह इंचार्ज से मेरी बात करवा, फौरन.” उमेश ने रामसिंघ से कहा. रामसिंघ तुरंत कालगरह के इंचार्ज को फोन लगता है और फिर .
“सर? रात्ोड़ सर! फोन पर है.” रामसिंघ , उमेश को फोन देते हुए कहा.
“हेलो! रात्ोड़ वहां क्या हो रहा मुझे सारी सूरत हाल बताओ.” उमेश फोन पर रात्ोड़ से कहता है.
“सर! अभी अभी यहां पर बहुत बुरा हुआ है . कुछ अजीब से 4 या 5 जानवरो ने अचानक हमारे कुछ ऑफिसर्स और टूरिस्ट्स पर हमला कर दिया फिर जूम मौकाए वारदात पर पहुंचे तो हमें सिर्फ़ हड्डियों के कंकाल मिले!! सिर्फ़ कंकाल!!! माँस का एक लूतदा भी नहीं. और यह सब इतनी जल्दी हो गया की हमें कुछ सोचने का मौका भी नहीं मिला. हमारे एक ऑफिसर जो वहां से बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचके भागा था उसने कहा की वो जानवर नहीं थे बल्कि जानवर के भेस में शैतान थे. जिस तरह उन्होंने उन सब पर हमला किया और फिर उन को इस तरह खाया की जैसे कोई चिकन का लग पीस कहा रहा हो….’ कहते हुए रात्ोड़ ने सारी जानकारी उमेश को दे दी
“रात्ोड़? तुम एक काम करो कालगरह के आस पास जीतने टूरिस्ट को वहां से हटा सकते हो हटा दो या फिर उन्हें किसी सुरख़्शिट जगह ये रेस्ट हाउस पर तेहरा दो. पर हर किसी के साथ कोई ना कोई गार्ड होना चाहिए. “ और भी कुछ जरूरी आदेश देते हुए उमेश ने फोन काट दिया.
“रामसिंघ? हर जगह के इंचार्ज को इनफॉर्म कर दो की जंगल का च्चप्प्पा चप्पा शण मारे की वो क्या चीज़ है. और अभी इस वक्त भी पूरे नेशनल पार्क में टूरिस्ट है या टूरिस्ट स्पॉट की सुरक्षा बढ़ा दो.” उमेश ने रामसिंघ को आर्डर देते हुए….​

(UPDATE-28)

कहा.
“ओके सर! में अभी सब चीज़ का बंदोबस्त करता हूँ.” कहते हुए रामसिंघ उमेश के केबिन से निकल गया. रामसिंघ के जाने के बाद उमेश सोच में पढ़ गया की आख़िर यह क्या हो रहा है. पहले वो उन लोगों से परेशान था जो जंगली जानवरों का शिकार करते थे और उनके बॉडी पार्ट्स को बेचते थे , अब यह नयी मुसीबत गले लग गयी थी यह अजीब से दिखने वाले जानवर. आज से इससे पहले तो ऐसी कोई बात नहीं हुई यहां पर अचानक ऐसे कैसे हो गया. कहा से यह जानवर आएँगे होंगे. रात्ोड़ कह रहा था वो बंदर जैसे दिहकते है पर बंदर नहीं थे. और सबसे बड़ी हैरत की बात तो यह है की वो पूरा का पूरा इंसान को एक ही झटके में कहा जाते है वो भी इतनी सफाई से की जिस्म का एक भी माँस नहीं बचता. यही सब सोचते सोचते उमेश ने फैसला किया की वो अभी खुद जाएगा सर्च पार्टी के साथ उन जानवरो की तलाश में.

“थॅंक गोद, आख़िर उन दोनों से च्छुतकारा मिला.” छाया ने कहा.
“में पहले भी नहीं आना चाहती थी तुम लोगों के साथ में और फिर तुम लोगों की वजह से में इस मुसीबत पे पढ़ गयी.

” श्रुति ने एकदम गुस्से में आकर कहा.
“ओह हेलो! कोई किसी को फोर्स नहीं किया है साथ में चलने को, सब अपनी मर्जी से आए है.” च्चाइया ने श्रुति के ऊपर गुस्सा करते हुए कहा.
“मैंने तुमसे नहीं कहा है. यू जस्ट चुत युवर मौत. ओके?” श्रुति ने उंगली दिखाते हुए गुस्से से छाया की तरफ देखते हुए कहा.
“वाइ शुड ई चुत में मौत? यू चुत युवर मौत यू बिच. तुम्हारी वजह से हमारी पूरी जर्नी स्पायिल हुई है.” छाया ने भी गुस्से से कहा.
“चुप भैइतो तुम दोनूऊ!!!! तुम दोनों पागलों की तरह लड़ना बंद करो.”ऋषि ने चिल्लाते हुए दोनों से कहा . “शुक्र मनाओ की हम उस कमीने के चंगुल से आज़ाद हो गये है “ में अभी दरवाजा पर पहुंच कर साले के बारे में बताऊंगा की अंदर साले दो आतंकवादी घुस गये है. उनके पास हथियार भी है.”
“तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे ऋषि!!! उसने हमें वॉर्न किया है की अगर हमने उनके बारे में कुछ कहा तो वो हमें छोड़ेगा नहीं और स्पेशली मुझे क्योंकि वो बस्टर्ड ने मुझे अकेले बुलाकर धमकिया दे रहा था.” कहते हुए निखिल चुप बैठ गया.
“पर निखिल तुम बताते क्यों नहीं की उसने आख़िर तुमसे और क्या क्या कह रहा था क्योंकि उसे धमकिया देना होता तो वो हम सबके सामने तुम्हें धमकिया दे सकता था, यूँ अकेले नहीं बुलाता.” आहना ने निखिल से कहा.
“में अभी उस बारे कुछ नहीं कह सकता. बस इतना समझ लो की अगर हमने उन दोनों के खिलाफ कुछ कदम उठाया तो हमारे साथ बहुत बुरा होगा.” निखिल ने कहा.
इससे पहले की कोई कुछ और कहता उनको कुछ फोरेस्ट रेंजर्स ने उनका रोसता रोका.
“क्या बात है? क्या हुआ? निखिल ने अपने पास आते हुए गार्ड्स से कहा.
“आप लोग कहा जा रहे है.” उस गार्ड ने कहा.
“हम कालगरह जा रहे है फिर वहां से हम इस पार्क से निकल जाएँगे. क्यों क्या हुआ ऑफिसर? “निखिल ने कहा.
“आप को वापस जाना होगा क्योंकि कालगरह का रास्ता किन्हीं जरूरी कारानो की वजह से बंद कर दिया गया है. आप लोगों को झिरना के रास्ते से बाहर जाना पड़ेगा. और आप लोगों के साथ में हमारा एक गार्ड भी होगा.” उस ऑफिसर ने बताया.
“पर क्यों ? रास्ता क्यों बंद है. देखिए हमें जल्दी नैनीताल पहुचना है हमें पहले से ही देर हो रही है और अगर हम झिरना से जाएँगे तो हमें और लेट हो जाएगा.” निखिल ने कहा.
“सॉरी! आप यहां से नहीं जा सकते कुछ खतरा है यहां से. आपको झिरना के रास्ते से ही जाना होगा.
“जाने दो ना हम वही से निकलते है “ आहना ने निखिल को समझते हुए कहा.
“ठीक है हम वही से जाएँगे. ओके थेन्क यू!!! निखिल ने कहा.
“पर आपके साथ हमारा एक गार्ड भी जाएगा.”
“अब गार्ड की क्या जरूरत है में कोई पहली बार नहीं आया हूँ. मुझे वहां का रास्ता पता है.” निखिल ने कहा.
“देखिए हम आपको बिना गार्ड के नहीं भेज सकते क्योंकि अब रात भी होने वाली है . तो इसलिए खतरा बना रहेगा.” उस ऑफिसर ने समझाते हुए कहा.

“खतरा कैसे खतरा? देखो यहां कौनसा जुनगल्ली जानवर आएगा ? यह कोई कोर एरिया तो है नहीं” निखिल ने कहा.
“ हां में जानता हूँ फिर भी आपको गार्ड को अपने साथ लेकर जाने होगा यह सिर्फ़ आपकी प्रोटेक्शन के लिए है.” और इसी तरह की और भी बातचीत होती रही निखिल और उस ऑफिसर में. फिर बाद में तय हुआ की उनके साथ एक गार्ड भी जाएगा. निखिल, आहना को फीचे भीता दिया और उस गार्ड को अपने बाजू में.

“परवेज़? सुशांत को फोन लगा और उसे बोल दे की हम लोग नेशनल पार्क के अंदर पहुंच गये है.” रोहन ने कहा. फिर परवेज़ अपनी जेब से मोबाइल निकाला और सुशांत को फोन लगाने लगा.
“हेलो! सुशांत! मैंने तुम्हें यह कहने के लिए फोन किया है की हम नेशनल पार्क के अंदर पहुंच गये है.”
“तुम लोग अंदर….​

(UPDATE-29)

पहुंच गये हो……? पर कैसे? क्या तुम्हें किसी ने रोका नहीं?” दूसरी तरफ सुशांत ने हैरत से कहा.
“अरे सुशांत कितनी भी सेक्यूरिटी टाइट कर लो तुम लोग परवेज़ जैसे चट्टान को नहीं रोक पाओगे.” परवेज़ अपंदी बधाई करते हुए बोला.
“खैर वो सब थोड़ी. यह बताओ की तुम हमें कहा मिल रहे हो? क्योंकि हम दोनों धिकला फोरेस्ट लोंज पहुंच गये है और थोड़े ही देर में भीमा भी आने वाला है” परवेज़ ने फिर कहा.
“मुझे तो अभी थोड़ा टाइम लगेगा. एक काम करो तुम लोग वही लोंज में मेरा वेट करो में तुम्हें ड्यूटी से छूटने के बाद आकर मिलता हूँ.” सुशाण ने कहा.
“चल ठीक है कोई बात नहीं, हम भी रेस्ट हाउस में अपनी कमर थोड़े सीधी कर लेंगे. तुम आ जाना अपना काम पता कर.” कहते हुए परवेज़ ने फोन काट दिया. फिर वो रोहन की तरफ घूमा और कहने लगा.
“वो कह रहा है की अपना काम पता……..” परवेज़ कुछ और कहता उससे पहले ही रोहन उसे टोकते हुए बोला.
“हां हां पता है मुझे वो अपनी ड्यूटी पूरी करके आएगा और हमें इस लोंज में आकर मिलेगा. मुझे सब समझ में आ गया है.” रोहन ने कहा. फिर उन्हें दूर से भीमा आते हुए दिखा. भीमा जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के आस पास बसे हुए गाँव का निवासी था. वो रोहन और परवेज़ को जानवरो का शिकार करने में और उन्हें यहसे सुरक्षित निकालने में उनकी मदद करता था जिससे उसे अच्छे पैसे मिलते थे.

“हां भीमा क्या हाल है.” रोहन भीमा को देखते हुए कहा..
“सब चंगा है सरकार, आप अपनी सुनाए. “ भीमा अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा.
“हम भी मजे में है दोस्त” रोहन ने जवाब दिया.
. वो तीनों अब थोड़े ही दूर पर बने हुए एक रेस्ट हाउस की तरफ जा रहे थे जहाँ उन्हें रुकना था.
“इधर का माहौल कैसा है भीमा?” रोहन ने चलते हुए कहा
“मुझे भी कुछ ज्यादा पता नहीं है, लेकिन जहाँ तक में समझ रहा हूँ माहौल कुछ ठीक नहीं है. पता नहीं आज कल यह फोरेस्ट रेंजर वाले इतने चौकसी क्यों बढ़ा दी है. जब आपने फोन किया मुझे की आप लोग आने वाले है तो मैंने सोचा की एक बार आप लोगों को मना कर दम.

फिर जब आपने यह कहा की इस बार काम किसी चीनी पार्टी का है और काम बड़ा करना है तो फिर मैंने कुछ कहा नहीं.” भीमा ने रोहन को समझाते हुए कहा.
“पर इतनी टाइट सेक्यूरिटी क्यों बढ़ा दी गयी है? ऐसा क्या गज़ब हुआ है?” परवेज़ ने कहा.
“सरकार! अभी थोड़े ही देर पहले मेरा एक साथी मुझे बता रहा था की कालगरह के आस पास इलाके में कुछ जानवरो ने कुछ फोरेस्ट ऑफिसर्स और तौरसितस पर हमला किए है. वो यह भी बता रहा था की वो आम जंगली जानवर नहीं थे बल्कि कोई विचित्र जानवर थे जिन्हें इससे पहले नाहीं कभी देखा गया है और नाहीं कभी उनके बारे में सुना गया है. वो और भी कुछ बता रहा था की उससे पहले आप लोगों का फोन आ गया तो मैंने बात अधूरी चोद कर आप लोगों से मिलने चला आया.” भीमा ने कहा.
“में समझा नहीं. विचित्र जानवर बोले तो?” रोहन ने भीमा से कहा.
“विचित्र मतलब थोड़े से अजीब जानवर.” भीम ने उसे विचित्र के मतलब बताते हुए कहा.
“अरे भीमा….मैंने विचित्र का मतलब नहीं पूछा है तुमसे , मेरा यह कहने का मतलब है ऐसा कौनसा जानवर है जिसे आज तक किसी ने देखा नहीं और नाहीं उनके बारे में सुना है.” रोहन ने कहा.
“मुझे भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, जैसा के मैंने अभी आप को बताया की आप लोगों का फोन आने पर में यही चला आया.” भीमा ने कहा.
“वो तो खैर ठीक है पर जब चौकसी इतनी तरफ गयी है तो हम शिकार कैसे करेंगे?” इस बार परवेज़ कुछ चिंतित स्वर में भीमा से कहा.
“फिक्र मत करिए परवेज़ बाबू! यह लोग चाहे कितनी भी चौकसी बदहले हम गाँव वाले को थोड़े ही ना रोक पाएँगे. इतने बारे जंगल का मुझे चप्पा चप्पा पता है. अगर हम इन लोगों से डर के भात गये तो हो गया हमारा काम. इन्हें चकमा कैसे देना है वो हम अच्छी तरह से जानते है. आप लोग उसकी फिक्र मत करो.” भीमा ने कहा.
“हां भीमा वो हमें पता है तुम कितने काम के आदमी हो. खैर वो सब चोदो क्या अपने आदमी जमा कर लिए हो ना?” रोहन ने भीमा से कहा.
“हां सरकार जब आप लोगों का फोन आया तभी से में इस जुगाड़ में लग गया था.” भीमा ने कहा.
“सरकार? इस बार कितना माल मिलेगा? क्योंकि क्या है हमारी तो ज़मीन जायदाद तो है नहीं और हमें इस काम के अलावा कोई काम धाम भी नहीं आता तो हमें इसी काम पर निर्भर रहना पढ़ता है और ऊपर से इतने दीनों से कोई काम भी नहीं हुआ है तो हम सब लोग बेरोज़गार भायते हुए है….अगर इस बार ज़रा कुछ ज्यादा मिल जाता तो बड़ी मेहरबानी होगी सरकार….” भीमा बारे
“हां भीमा में भी इस बात को समझता हूँ. तुम फिक्र मत करो इस बार तुम्हें और तुम्हारे साथियों को जितना भी दूँगा….

(UPDATE-30)

उसकी तुम कल्पना भी करोगे.” रोहन ने कहा.
वो तीनों को चलते चलते अब रात हो चुकी थी. चारों तरफ सन्नाटे का माहौल था.

अगर कोई अंजाना व्यक्ति इस तरह के माहौल में चले और वो भी आस पास पहले हुआ जंगल तो निश्चित रूप से डर लगता, पर उन तीनों को इन सब चीज़ों की आदत लग चुकी थी.

वो तीनों अब एक ऊंची जगह पर चल रहे थे जिसके बाए तरफ एक सड़क थी और उस सड़क के पार दूर दूर तक जंगल दिख रहा था और दूसरी तरफ यानि दायें तरफ के ढलान के नीचे से उतरने के थोड़े ही दूर पे उनका रेस्ट हाउस था. जब भी रोहन और परवेज़ इस पार्क में आते थे यही रुकते थे.

अचानक रोहन अपनी बायें और की तरफ देखता है दूर से एक गाड़ी अपनी हेडलाइट्स ऑन रखे हुए वहां से आ रही है. पहले तो उसने कोई ध्यान नहीं पर जैसे ही वो गाड़ी उनके थोड़ा करीब आई तो उसे गाड़ी की साइज देखकर कुछ शक़ुए सा हुआ है और थोड़ी देर रुक कर उस गाड़ी को देखने लगा. पर उसे कुछ ठीक से समझ नहीं आता की कोन से गाड़ी है तो अपना शक़ुए दूर करने के लिए परवेज़ से कहता है.
“परवेज़ वो अपना बाइनाक्युलर दे….”
“अरे क्या हुआ? अचानक बाइनाक्युलर की क्या जरूरत पढ़ गयी ? और तू रुक क्यों गया है? चलना.” परवेज़, रोहन को यूँ अचानक रुकते हुए देखा तो कहा.
“आबे हर टाइम बहस मत किया कर. जल्दी से बाइनाक्युलर दे.” रोहन ने थोड़ा कड़क आवाज़ में कहा. परवेज़ ने जल्दी से बाइनाक्युलर निकाल कर दे दिया क्योंकि वो जानता था अगर थोड़ा भी देर किया तो गुस्सा हो जाएगा और गाली गलोच पे उतार जाएगा और यह परवेज़ चाहता नहीं था.
“ले भाई पकड़ बाइनाक्युलर.” परवेज़, रोहन को बाइनाक्युलर देते हुए कहा. रोहन ने परवेज़ के हाथ से बाइनाक्युलर लिया और उसे अपनी आँखों में लगा लिया और उस रोड की दिशा में देखने लगा. उसकी देखा देखी परवेज़ और भीमा भी उसी दिशा में देखने लगे. रोहन कुछ देर तक बाइनाक्युलर से आने वाली गाड़ी को देखता रहा पर जब वो गाड़ी उस ढलान से कुछ निकट से गुजर कर वहां से आगे बड़ी तो रोहन को थोड़ा झटका लगा. अचानक को वो बाइनाक्युलर अपनी आँखों से हटाया और कुछ अपने मुंह में कुछ बुदबुदाया.
“आबे क्या हुआ? क्या देख लिया गाड़ी ही तो है? और क्या यह बड़बड़ा रहा है? कुछ बताएगा?” परवेज़, रोहन को गंभीर अवस्था में देखा तो कहने लगा. पर रोहन उसकी बात का कोई जवाब दिए बिना भीमा से कहने लगा.
“भीमा?तुम्हारी मोटरसाईकल किधर है?”
“हां….हां सरकार वो वही…रेस्ट हाउस में खड़ी किया है.” भीमा ने कहा.
“ठीक है जल्दी चलो रेस्ट हाउस पर, मुझे उस गाड़ी का पीछा करना है.” रोहन रेस्ट हाउस की तरफ जल्दी जल्दी चलते हुए कहा.
“अरे पर बताएगा की क्या है उस गाड़ी में?” परवेज़ भी रोहन के पीछे दौड़ते हुए कहा.
“वो वही गाड़ी है जिसमें हम आए थे. और उन कामीनो से हमने कहा था की कालगरह के रास्ते से बाहर जाने को पर पता नहीं वो साले वापस क्यों उसी रास्ते पे जा रहे है जहां से हम आए थे.

मुझे तो शक़ुए हो रहा है की कही साले हमारी शिकायत तो नहीं करने जा रहे है? अगर ऐसा हुआ तो बड़ी मूसखिल तरफ जाएगी इसलिए में उनके फीचे जा रहा हूँ उन्हें रोकने.” रोहन लंबे लंबे कदम बढ़ाता हुआ रेस्ट हाउस की तरफ जा रहा था.
“क्या कह रहा है तू? वो साले हरांखोरों की औलादों की गाड़ी थी? वो साले वहाँ क्यों जा रहे है? चल जल्दी उन्हें रोकना होगा.” परवेज़ के इतना कहते ही वो तीनों रेस्ट हाउस पर पहुंच चुके थे.
“सिर्फ़ में अकेला जाऊंगा तू यही रुक. वो मादरचोड़ो की खबर में लेता हूँ.” रोहन ने गुस्से में आकर कहा.
“भीमा कहा है तुम्हारी मोटरसाइकल? “ रोहन भीमा की तरफ पलटते हुए कहा.
“वो उधर खड़ी है.” भीमा रेस्ट हाउस के एक कॉर्नर में खड़ी हुई बाइक की तरफ इशारा करते हुए कहा.
“ठीक है, जल्दी से चाभी दो. और परवेज़ मेरी गुण और खंजर कहा है? जल्दी से दे नहीं तो साले बहुत आगे निकल जाएँगे फिर उन्हें ढूंढ़ना मुश्किल हो जाएगा.” रोहन, परवेज़ से कहा और फिर भीमा से चाबी लेता हुआ बाइक पर भरता और बाइक स्टार्ट कर दी.
“पर तू साले अकेला क्यों जाएगा में भी तेरे साथ में चलूँगा. तेरे गुस्से का कोई भरोसा नहीं पता नहीं क्या कुछ कर डालेगा? “ परवेज़ बाइक की फिचली सीट पर भायते हुए कहा.
“आबे उतार! बहस करने का टाइम नहीं है मेरे पास. तू यही रही और मेरी फिक्र मत कर में अभी उन कुत्तों की खबर लेकर आता हूँ. “ रोहन ने कहा.
“सरकार ज़रा संभाल कर कोई काम करना क्योंकि फोरेस्ट रेंजर हर जगह तैनात है.” भीमा ने इस बार समझाते हुए कहा रोहन को.
“तुम लोग मेरी फिक्र मत करो. में सब संभाल लूँगा.” और इतना कहते ही रोहन , परवेज़ से गुण और खंजर लेते हुए वहां से बाइक लेकर निकल गया. उसने तो पहले एक कच्चा रास्ता पकड़ा फिर उसे पार करने के बाद उसे​

(UPDATE-31)

पक्का रोड मिल गया जहाँ से वो गाड़ी गुज़री थी.
“साले बहुत दूर निकल गये होंगे? मुझे बहुत तेजी से बाइक चलानी होगी.” सोचता हुआ रोहन बाइक और तेजी से भागने लगा. वो बस जल्द से जल्द उन तक पहुचना चाहता था.

गाड़ी में बिलकुल खामोशी थी. उन लोगों के साथ जो गार्ड था वो एक दम चौकस भरता हुआ था और रही रही कर चारों तरफ अपनी निगाएँ यहां वहां फिरा रहा था की कही कुछ गड़बड़ तो नहीं हो रही है. निखिल गाड़ी चलाने में व्यस्त था और बाके के अपने अपने ख़यालो में थे. उन्हें बस यहां से जल्द से जल्द निकलना था. जो उनके साथ आज घटित हुआ उसको भूल कर नैनीताल में खूब मजे करने थे. पर श्रुति कुछ भी नहीं सोच रही थी, वो तो बस उस वक्त को कोस रही थी जब वो इन सब के साथ चलने को तैयार हुई थी. वो इस सब से जल्द से जल्द च्छुतकारा पाना चाहती थी खास कर के निखिल और छाया से. वो सोच रही थी की यहां से निकालने के बाद वो डायरेक्ट दिल्ली के लिए कोई प्राइवेट टैक्सी लेगी और इन सब से च्छुतकारा पा लेगी .

पर उसे और बाकी लोगों को क्या पता था की वो जो सोच रहे है क्या वैसा ही होगा? उन्हें क्या पता था की आगे उनकी मौत उनका वेट कर रही है.

निखिल जो गाड़ी ड्राइव कर रहा था अपने ख़यालो में खोया हुआ था की अचानक एक चीज़ गाड़ी के बोनट पर गिरी जिससे धम्म्म्म करके आवाज़ आई . सब चौंक गये अचानक पालक झपकते हुए यह क्या हो गया. पर जो चीज़ गाड़ी के बोनट पर गिरी थी वो दरअसल गिरी नहीं बल्कि कूदी थी और वो कोई और नहीं वही वहशी दरिंदो में से एक था जिनका खौफ पूरे जंगल में फैला हुआ था.

निखिल की समझ में नहीं आया की अचानक से यह क्या सामना आ गया? और जिसकी वजह से वो अपनी गाड़ी का संतुलन खो भरता जिसकी वजह से गाड़ी अनियंत्रण हो गयी और एक पैएड से जा टकराई. और वो वहशी दरिन्दा अब बोनट पर खड़े होकर गाड़ी की आगे की काँची तोड़ने लगा…वो गार्ड जो एक गुण से लेंस था घबरा गया क्योंकि उसने अपनी आज तक के 5 साल के कैरियर में इतना भयानक जानवर नहीं देखा था…बल्कि उसके ख्याल में वो जानवर नहीं बल्कि एक शैतान था…हां शैतान ही तो था वो . उस वहशी दरिंहे का हमला और गाड़ी का पेड़ टकराना इतना अचानक हुआ था की उस गार्ड को होश ही नहीं था की उसकी गुण कब उसके हाथ से चुत चुकी. और जब उसे अपनी गुण का एहसास हुआ तो वो गुण उठाने के लिए अपनी सीट के नीचे झुंका. पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि वो दरिन्दा गाड़ी के शीशे तोड़ कर पहले उस गार्ड की गर्दन एक ही झटके में अलग कर दिया. यह देखकर गाड़ी में भायते बाके के लोग चीख पुकार करने लगे. उन्हें भी नहीं समझ में आया की यह एकदम से अचानक क्या हो गया. उस गार्ड की गर्दन अलग करने के बाद वो दरिन्दा निखिल की तरफ बढ़ा.

निखिल इससे पहले की दरवाजा खोल के बाहर भागता उस दरिंदे ने उसकी गर्दन भी एक झटके में अलग कर दी. यह सब देख कर गाड़ी में और लोग भायते हुए अपना अपना दरवाजा खोल के बाहर की तरफ भागने लगे. जिसकी जहाँ समझ में आ रहा था वो भाग रहे थे. पर उन्हें क्या पता था जिस दरिंदे से डर कर वो दूर भाग रहे थे वो अकेला थोड़े ही आया था उन्हें मौत के घाट उतारने. उन सबके यहाँ वहाँ भागने पर उन्हें एक नयी मुसीबतों का सामना करना पड़ा क्योंकि उस दरिंदे के अलावा बाहर पहले से तीन दरिंदें और थे और वो उन की तरफ झपट रहे थे.

आहना , छाया, ऋषि, प्रतीक, निशा और श्रुति सब के सब उन दरिंदो का चंगुल में फँस चुके थे. उन सबको कुछ सोचना समझने का मौका मिल पाता उससे पहले ही वो सब हैवान उन पर झपट पड़े. श्रुति ने देखा की आहना और ऋषि को तो उस दरिंदे ने एक झटके में उनका सर उनके धड़ से अलग कर दिया. वो यह सब देखकर उसके मुंह से एक चीख निकल पड़ी जिसकी वजह से वो दरिन्दा श्रुति की और लपकने लगा. अपनी और उस दरिंदे को आता देख श्रुति वहां से भागने लगी, पर उसके भागने की रफ्तार और दरिंदे की भागने की रफ्तार में फर्क था.

पालक झपकते ही वो श्रुति के करीब आ गया और श्रुति को लपकने के लिए अपना हाथ बढ़ाया. श्रुति जो इतनी बदहवासी में भाग रही थी उसे अपने आगे पीछे क्या पड़ा है किसी भी चीज़ का एहसास नहीं हो रहा था. और इसलिए भागते वक्त वो एक पत्तहार से टकरा गयी और नीचे खाई की तरफ गिरने लगी. जब श्रुति अपना सालटुलन खोने के बाद नीचे की और गिर रही थी तो उस दरिंदे ने झट से उसकी और लपका और इस तरह उसके हाथ में श्रुति का जॅकेट आ…

(UPDATE-32)

गया. श्रुति आधी हवा में और आधी ज़मीन पर थी. उसने देखा की उसके आगे एक खाई है और पीछे यह वाहसी दरिन्दा, अगर वो उस खाई के नीचे गिरती है तो शायद वो बच सकती है या फिर मर भी सकती है पर अगर वो इस दरिंदे के हाथ में आ गयी तो वो भी उसकी वही हालत करेगा जो आहना और ऋषि के साथ किया था. उसने बिना कोई शान गवायें अपना जॅकेट जिसका कॉलर उस दरिंदे के हाथ में था उसकी ज़िप खोली और उसे अपने खड़े से आज़ाद कर दिया. उसके बाद वो नीचे की और गिरने लगी,

रोहन जल्द से जल्द उन्हें पकड़ना चाहता था. पूछना चाहता था की सालों आख़िर उस रास्ते को चोद कर वो इस रास्ते क्यों जा रहे है.. उसे पूरा पक्का यकीन था की हो ना हो वो लोग परवेज़ और रोहन की शिकायत करके उन्हें पकड़वाना चाहते है. यही सब सोचते सोचते रोहन गाड़ी भगाए जा रहा था की अचानक उसे वो गाड़ी दिख गयी जिसमें वो भात कर इस पार्क में आया था. वो अपनी बाइक की रफ्तार को और तेज कर दिया और जल्द से जल्द उन तक पहुचना चाह रहा था की तभी, अचानक….वो देखता है की एक अजीब सा दिखने वाला जानवर उनके गाड़ी पे कूड़ा और थोड़े ही देर में वो गाड़ी अपना नियंत्रण खोते खोते एक पेड़ से जा टकराई. रोहन की कुछ समझ में नहीं आ रहा था की यह अचानक से क्या हो गया. वो किस तरह का जानवर था जो गाड़ी की बोनट पे कूड़ा था. फिर रोहन भी उस गाड़ी के थोड़ा ही दूर रहा होगा की उसने देखा की गाड़ी के अंदर भायते हुए सभी लोग दरवाजा खोल कर और चीख पुकार करते हुए बाहर की और भाग रहे थे और उन सब के पीछे तीन और दरिंदे पहुंच गये.

उसने कुछ देर सोचा की वो क्या करे. फिर वो अपनी गुण निकाला और उन दरिंदो पर हमले करने लगा. उन दरिंदो में एक को गोली लगी और वो एकदम दर्द से कराह कर एक भयांक आवाज़ नाकली जैसे किसी शेयर की भी नहीं होती है….पर वो गोली उसका ज्यादा कुछ नहीं बिगाड़ पाई बल्कि वो और हिंसक हो गया और वो रोहन की और दौड़ कर आने लगा. रोहन भी बाइक चलते हुए उसके करीब आ रहा था और उस पर निशाना साधते हुए गोली चला रहा था. पर दरिन्दा वो हर गोली से बचता हुआ एक दम गुस्से में आया और एक हाथ से रोहन पर प्रहार किया. उसके इस प्राहार से रोहन संभाल नहीं सका और वो बाइक समेट उस खाई में गिरने लगा.

आह……आह…..आह. श्रुति उस खाई में गिरने के बाद ऐसे ही कुछ देर गिरने के बाद कराहते हुए उठ कर बैठने की कोशिश करने लगी.

पर उसे ऐसा करने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पढ़ रहा था..क्योंकि वो खाई में गिरने के बाद जैसे तैसे अपने आपको बचाते हुए ज़मीन पर गिरी थी और इसमें वो बुरी तरह जख्मी हो गयी थी. उसके मुंह के अंदर से काफी खून बह रहा था , शायद अंदर से होंठ या जबड़े पर चोट लगी होगी और माथे पर भी काफी मर लगी हुई थी., जिसकी वजह से खून माथे से गिरकर पूरे चेहरे को लहुलहान कर रहा था. उसके हाथों पर भी काफी छोटे आई थी. उसके हाथों पर कितनी ही जगहों से चाँदी च्चिल गयी थी और वहां से भी लहू रिस रहा था. उसके पेट पर भी कई जगहों से चाँदी च्चिल गयी थी. और उसके पैर की तो और भी बुरी हालत थी वो एक पैर तो उठा भी नहीं पा रही थी.

वो घायल इस कदर हो चुकी थी की उसे उठने का मन नहीं कर रहा था, पर उसे उतना ही था क्योंकि आख़िर वो कब तक यूँही यहां पड़ी रहेगी. आख़िर उसे यहां से जल्द से जल्द निकलना भी तो था. खैर जैसे जैसे कर के वो खड़ी हुई और लंगड़ते हुए पेड़ों के सहारे आगे बढ़ने की हिम्मत करने लगी…अब उसे ठंड भी बहुत लग रही थी..क्योंकि उसने जो टी-शर्ट पहना हुआ था वो भी कई जगहों से फॅट चुका था जिसकी वजह से उसके जिस्म का कई हिस्सा भी दिख रहा था और ऊपर से जनवरी के मौसम में उत्तर भारत में और वो भी रातों को ठंड का जो आलम होता है उसे सहना हर किसी के बस की बात नहीं होती है……और श्रुति जैसे नाज़ुक, कमज़ोर और कम उमर की लड़की की तो बिलकुल नहीं

वो जैसे तैसे कर के आगे बाद रही थी तभी उसे एहसास हुआ की उसकी बाईं और काफी झाड़िया थी. वहां से दो लाल आँखें उसे घूर रही है…वो झट से उसे देखने की कोशिश करने लगी. वहां पर थोड़ा अंधेरे की वजह से पहले उसे कुछ ठीक से दिखा नहीं पर जब वो लाल आँखों वाला जब उस झाड़ियों से बाहर निकला तो उसने देखा की यह वैसा ही एक दरिन्दा है जो उस पर और उसके दोस्तों पर हमला किया था….फिर वो अचानक उसके तरफ लपकने लगा. श्रुति उस दरिंदे को…​

(UPDATE-33)

देखकर और चीख मारते हुए घायल अवस्था में लंगड़ते हुए उससे दूर भागने लगी. पर वो दरिन्दा तो उससे कहीं ज्यादा तेज था…..वो झट से श्रुति की और लपका और उसे जैसे ही अपने तेज नाखूनओ की धार से उसकी गर्दन उसके धड़ से अलग करने वाला था की अचानक….उसकी खोपड़ी पर एक गोली से हमला हुआ..वो दरिन्दा इस अचानक हमला से एक दम बौरा गया और ज़ोर ज़ोर से दहाड़ें निकालने लगा. उसकी दहाड़ ऐसी थी मज़बूत कलेजे वाला इंसान भी दहल जाए.

श्रुति जो लंगड़ते हुए भागने किस कोशिश कर रही थी, अचानक उस दरिंदे के इस तरह दहाड़ मारने पर पलटी की आख़िर इसे क्या हुआ…श्रुति ने देखा की एक व्यक्ति उस दरिंदे पर अँधा ढूंढ. अपनी गुण से गोलियां बरसा रहा था ..वो सोचने लगी की अचानक इस घने जंगल में कौन उसका मसीहा आ गया है उसकी जान बचाने को और इस भयानक दरिंदे पर यूँ बहादुरी से हमला कर रहा है.

कुछ देर बाद उसने देखा की उसका मसीहा जो उस दरिंदे पर गोलियाँ बरसा रहा था अचानक रुक गया और उस दरिंदे की तरफ से कोई हलचल नहीं हो रही थी. श्रुति ने सोचा की अब सब शायद ठीक है और वो उस मसीहे की तरफ जाने लगी ताकि उसका शुक्रिया अदा कर सके जिसने इस भयंकर जानवर से उसे बचाया है और फिर सोचने लगी की वो उसे कहेगी वो उसे यहां से निकालने में भी मदद कर दे. पर श्रुति जैसे ही अपने उस मसीहे के करीब पहुँची और वो मसीहा श्रुति की तरफ पलटा उसे 1000 वॉल्ट का झटका लगा . क्योंकि उसका मसीहा कोई और नहीं बल्कि वही व्यक्ति है जो उसे और उसके दोस्तों को अगवा कर के इस जंगल में लाने पर मजबूर किया था और इसी की वजह से उसके दोस्तों को अपनी जान गँवाना पड़ा है और इसी की वजह से उसकी यह हालत हुई है. इसी की वजह से उसे इस तरह के शैतान जैसे दिखने वाले जानवर से अपनी जान बचाने के लिए उस खाई से कूदना पड़ा था और इस कदर चोटिल होना पड़ा था. इसी की वजह से उसे इस खौफनाक जंगल में फाँसी हुई है. जब उसने देखा की वही व्यक्ति उसके सामने खड़ा है तो उसके तंबान में आग लग गयी. वो भूल गयी की अभी कुछ देर पहले इसे ने उसकी इस भयानक जानवर से उसकी जान बचाई थी. उसे एक पल में ऐसा लगा की वो वही गुण उसके हाथ से लेले और उसके सीने पर इतनी गोलियां बरसा दे की गोई उसके ज़ख़्मो को गिनना भी चाहे तो ना गिन पाए. भले ही वो उसका मसीहा था, भले ही वो उसे वहशी दरिंदे से उसकी जान बचाया था, पर इस सब के पीछे यही तो जिम्मेदार था.
“तुम????……..तुम फिर आ गये ?” कहते हुए श्रुति ने अपने दायें पैर से जो बिलकुल त्ीीक था उससे रोहन के अंडकोष पे एक जोरदार लात मार्डी. रोहन को अचानक हुए हमले का अंदेशा नहीं था. उसे नहीं पता था की यह लड़की जिस पर उसने अपनी गुण तानी हुई थी जब उसने उसका और इसके दोस्तों को अगवा किया था तो कैसे थर थर काँप रही थी इतनी भी क्रोदिढ हो जाएगी, उसके बाद तो और नहीं जब उसने इस वहशी दरिंदे से इसकी जान बचाई थी . वो अपना अंकोष पकड़ के भात गया. पर श्रुति ने इस पर भी बस नहीं किया, वो उसके बाद भी उसपर लाटो की बरसात जारी रही हुई थी.
“यू ब्लडी रास्कल!!!!यू ईडियट!!!! यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है…..तुम्हारी वजह से हमें यहां आना पड़ा और तुम्हारी वजह से मेरे दोस्तों ने अपनी जान गँवाई..” श्रुति , रोहन पर लात और मुक्को की बारिश जारी रखे हुए कहे जा रही थी.
“आए लड़की मेरी बात तो सुन. मेरा इरादा….. तुम लोगों को ….चोट पहुंचने का नहीं था.” रोहन कह तो रहा था पर श्रुति उसकी एक भी बात नहीं सुन रही. जब रोहन ने देखा की यह लड़की उसकी कोई बात नहीं सुन रही है तो उसका पारा चढ़ने लगा वो सोचने लगा साले अपनी जान पर खेल कर वो उस वहशी जानवर से उसकी जान बचाया और यह कुतिया उसे ही मारने पर उतारू है.

अब उसने आओ देखा ना तो वो झट से उठा और श्रुति के गाल पर एक कस का तमाचा मारा वो भी एक नहीं कई बार.
“मादरोचोड़!! भेंचोड़दड़ समझती क्या है अपने आपको? कब से समझाने की कोशिश कर रहा हूँ तो मुझे ही मर रही है मादरोचोड़.” रोहन अपने गुस्से में गालया बकता श्रुति को मारे जा रहा था. श्रुति जो पहले से ही घायल थी फिर रोहन के इस तरह हमले से ज़मीन पर गिर गयी. रोहन को इसपर भी शांति नहीं मिली जब श्रुति पेट के बाल ज़मीन पर गिरी तो रोहन एक जोरदार लात श्रुति के फीचवाड़े मारा और वहां से जाते हुए यह कहना लगा.
“मर बहन की लोदी इस जंगल में . जब वो बहनचोद लोग आएँगे तो पता चलेगा, फिर करना उन सब का मुकाबला. “ और फिर रोहन वहां से चला गया.

श्रुति बेचारी….​

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(UPDATE-34)

श्रुति बेचारी जो पहले से ही घायल थी, रोहन की मर खाने के बाद और भी अधमरी हो गयी थी. वो वही ज़मीन पर पड़ी रही और रोती गयी. जब काफी देर से उसका रोना हो गया तो, उसने सोचा की अब वो क्या करेगी, कैसे इस भयानक जंगल से निकलेगी. वो वापस उस खाई के ऊपर चढ़कर तो नहीं जा सकती क्योंकि उसे डर था की कही वो जानवर फिर से ना आ जाए और दूसरा वो इतनी घायल भी हो चुकी थी उसे एक एक कदम बढ़ाना मुश्किल हो रहा था तो ऊपर चदाय कैसे करती. उसे तो दूसरा कोई रास्ते के बारे में भी कुछ पता भी नहीं है और ऊपर से वो इतनी घायल हो चुकी है की उसे एक एक कदम चलना मुश्किल हो रहा था. पर उसने सोचा की अगर वो यहां ऐसे ही भाते रहेग्गी तो वो भयानक दरिन्दा फिर ना आ जाए. इससे पहले वो दो बार उस दरिंदे के हमले से बच चुकी थी पर अब शायद ऐसा ना हो. यही सब सोचते सोचते वो उठने की हिम्मत करने लगी. पर उसे उठने में बहुत कठिनाई हो रही थी. वो अपने बायें पैर को बड़ी मुश्किल से हिला पा रही थी वो उससे चलती कैसे. एक 20 साल की लड़की, जिसने अभी पूरी दुनिया देखना बाकी था, ना जाने उसने अपने लिए क्या क्या सपने संजोए थे, ना जाने कैसे कैसे ख्वाब देखे थे उसने अपने भावष्या के बारे में, मगर आज अपने आपको इस स्थिति में देखकर उसे ऐसा लगने लगा था की वो अब शायद ही यहां से ज़िंदा बचकर जा पाएगी, वो भी तब जब उसने अपनी आख़नों के सामने अपने दोस्तों की उन दरिंदो के हाथों इतनी भयानक मौत देखी थी. फिर उसे अपने मामा और पापा की याद आने लगी खासकर के अपने पापा की. आज उसे एहसास हो रहा था उसके पापा उसके लिए इतने चिंतित क्यों रहते थे, क्यों उसे इतना समझाया करते थे. उसे इस बात का एहसास हो रहा था वो अपने पापा की बातों को अनसुना कर के कितनी बड़ी गलती वो किया करती थी. उसे तो बस अपने मामा की ही बातें समझ में आती थी. उसने कभी यह नहीं सोचा की उसके लिए क्या गलत है और क्या सही. वो तो बस दौलत की चकाचौंध में खो गयी थी. फिर वो सोचने लगी और अपने उस भगवान से प्राठना करने लगी जिससे पहले आज तक उसने कभी भी उसे नहीं मना था.

वो यही दुआ अपने परवर्दीगार से दुआ करने लगी के भगवान मुझे इस आफत से बच्चा ले, अगर में बच गयी तो आज के बाद कभी भी पापा की बातों का बुरा नहीं मानूँगी और मामा के दिखायें हुए रास्तो पर कभी भी नहीं चलूंगी

यही सब बातों को सोचते सोचते उसे आख़िर में हिम्मत मिली. उसके अंदर मानो एक नयी ऊर्जा सी आ गयी और वो फिर हिम्मत करके उठने की कोशिश करने लगी, बल्कि यह कहे की ज़िंदा रहने की कोशिश करने लगी. उसने देखा की कुछ दूरी पर लकड़ी का ताना पड़ा हुआ था. उसने थोड़ा रेंग रेंग वहां पर गयी और उस ताने को अपने हाथ में लिया और उसके सहारे खड़े होने लगी. अब वो उसी ताने के सहारे चलने की कोशिश करने लगी. उसके मान में यही था की वो जल्द जल्द इस जंगल से निकले. और इसके लिए पहले एक रास्ता तलाश करना होगा. वो जानती थी की रोड उस खाई के ऊपर है पर उसके अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी वो उसपर चढ़ कर रोड की तरफ जाए. आख़िर में उसने यही तय किया की वो उस रोड की सीध में जाएगी और जहाँ ढलान थोड़ी कम होगी वहां से ऊपर चढ़ कर वो रोड पर चली जाएगी. वहां से कोई ना कोई गाड़ी जरूर गुज़रेगी तो वो उनसे मदद माँग लेगी.

रोहन को चलते चलते एक घंटा बीत चुका था और उसका दिमाग बहुत खराब था. वो यही सोच रहा था की साला कितनी मुश्किल से उस हैवान से लड़कर मैंने उस रंडी लड़की की जान बचाई थी और मादरचोड़ मेरी ही अंडवे पे लात मर दी. साला अभी तक दुख रहा है. रोहन यही सोच रहा था की वो क्या सोच कर उनके पीछे आया था और क्या वो लोग के साथ हो गया. फिर अचानक उसका ध्यान भीमा की कही हुई बातों पर गया जिसे भीमा ने विचित्र प्राणी कह रहा था कही वो यही दरिंदे तो नहीं थे. वो सोचने लगा की आख़िर यह किस तरह का….​

(UPDATE-35)

जानवर था. वो सोचने लगा की अपने पीछले 8 सालों में उसने जंगलों में शिकार करते करते गुज़ारे थे, जिनमें से तेंदुआ, हाथी ,गेंडा, हिरण और यहां तक की शेयर के भी उसने शिकार किया था पर कभी भी उसने इस तरह का का भयानक जानवर नहीं देखा था. उसने सोचा की खैर वो जो भी हो वो कैसे इस जानवर से निपतेगा…क्योंकि वो देखा था की कैसे वो जानवर उस लड़कियों और लड़कों का शिकार किया था, कैसे वो एक झटके में सबका सर उनके धड़ से अलग किया था .वो यही सोचने लगा की उन सबकी मौत का जिम्मेदार वही है अगर वो उन्हें यहां ज़बरदस्ती नहीं लाता तो आज वो सब के सब ज़िंदा होते और नैनीताल में पार्टी कर रहे होते. पर उसको अपना मकसद पूरा करने के लिए उन सबको उसने चेहरे की तरह इस्तेमाल किया. उसका ज़मीर दिकखारने लगा की वही उन सबकी मौत का जिम्मेदार है….अचानक उसे वही लड़की का ध्यान आया जिसने उसके अंडकोष पर लात मारी थी और जिसकी वजह से वो दर्द से बिलबिला उठा था…सही तो किया था उसने. आख़िर वो इसी के लायक था.

उसका गुस्सा भी जायज था भले ही उसने उसके जान बचाई थी तो क्या हुआ, आख़िर वही जिम्मेदार था उसे उस हालत में लाने का. और उसने क्या किया? उसे वही अकेला उस घने जंगल में भी सहारा चोद आया था. उस लड़की की हालत का भी तो वही जिम्मेदार था. वो सोचने लगा की वो उन लड़के लड़कियों की जान तो ना बच्चा सका पर जो ज़िंदा है उसकी जान बचले…बल्कि उसे तो वो वही अकेला चोद आया है…..”शीत!!शीत!!!शीत!!! वो अपने आपको कोसने लगा की उसे उस लड़की को वहां पर अकेला चोद कर नहीं आना चाहिए था. “अरे क्या हुआ अगर उसने मेरे अंडकोष पर लात मारी तो…में इसी के लायक था…मैंने काम ही ऐसा किया है…में उनसबकी जानो का मुजरिम हूँ…वो मुझे मारेगी नहीं तो क्या मुझे प्यार करेगी? यही सब सोचते हुए उसने आख़िर में फैसला किया की चाहे कुछ भी हो जाए वो उस लड़की को सही सलामत इस जंगल से बाहर ले जाएगा. बस फिर क्या था उसके बाद वो वही पर दोबारा गया जहां वो उसे पीछे चोदा था. हालाँकि उसकी रफ्तार थोड़ी धीमी थी क्योंकि श्रुति की तरह उसे भी चोटें आई थी क्योंकि वो भी उसी खाई से गिरा था जहाँ से श्रुति गिरी थी . पर वो उतना ज्यादा घायल नहीं हुआ था क्योंकि उसे अपने आपको संभालना आता था और इस तरह के ज़कंहो का वो आदि था. खैर जब वो पहुंचा जहां वो श्रुति को रोता हुआ छोड़कर गया था तो देखा की वहां श्रुति का कोई आता पता नहीं था. वो सोचने लगा की आख़िर कहा गयी होगी यह लड़की. कही वो दरिंदे फिर आ गये हो और उसे मर डाले हो. पर अगर ऐसा नहीं हुआ होगा तो वो यहां से ज्यादा दूर नहीं गयी होगी क्योंकि एक तो वो घायल भी है…खैर उसे ढूंढ़ना तो पड़ेगा ही. फिर यही सोचता हुआ वो उसकी तलाश में निकल पड़ा.

तकरीबन 2 घंटे चलने के बाद श्रुति का पैर जवाब दे दिया था, एक तो उसके बायें पैर एक दम जख्मी था ऊपर से ठंड, भूख और प्यास भी लग रही थी. उसका पूरे चेहरे पर जो लहू बह रहा था अब वो ठंड की वजह से पूरा जम चुका था. श्रुति ने सोचा की थोड़ा वो आराम कर लेगी ताकि उसके पैरों को थोड़ी राहत मिले फिर जब थकावट दूर हो जाएगी तो फिर वो अपना सफ़र जारी रखेगी. पर उसे यहां पर इस तरह भइतने पर भी डर लग रहा था की क्या पता यहां पर वो वहशी दरिन्दा या फिर कोई और जंगली जानवर फिर ना आ जाए. पर इसके अलावा उसके पास कोई चारा भी तो नहीं था इसलिए वो वही एक पेड़ से तक लगाकर के भात गयी. फिर उसने अपना सर पेड़ से टीका दिया और फिर उसे नींद भी आने लगी…..अभी वो नींद की आगोश में जा ही रही थी उसे किसी की बातें करने की आवाजें आने लगी…वो सोचने लगी की इस जंगल में उसके अलावा और यहां कौन हो सकता है ? खैर जो भी हो उसने टेयै किया की वो वहां जाएगी शायद कोई मदद करने वाला मिल जाएगा. और वो फिर हिम्मत करके अपनी जगह से उठी और उस आवाज़ की दिशा में चलने लगी.

वो थोड़ा ही दूर गयी थी उसे कुछ रोशनी दिखी जैसे कोई आग लगाया है. जब वो उस आवाज़ और आग के पास पहुँची तो उसने देखा की 5 या 6 आदमियों का एक ग्रुप था, जो आग जलाए भायते थे और उस पर अपना हाथ भी ताप रहे थे और इसके अलावा वो उस आग पर कुछ सेकेंड भी रहे थे शायद कोई परिंदा था. जब श्रुति वहां पहुँची तो उन्होंने देखा की एक लड़की जो तकरीबन 20 से 21 की होगी एक दम फटे हाल में थी, उसके जिस्म पर जो कपड़ा था वो कई जगह से फटा हुआ था, और उस लड़की की छाती….​

(UPDATE-36)

भी थोड़ी दिख रही थी, और वो पूरी लाहुलहान भी थी. यह देख कर उसमें से एक आदमी ने कहा. “राका जी? इधर देखो !

राखा जो शायद उन सब का बॉस था अपने इस आदमी की आवाज़ पर पलट कर देखा “अरे वाह वाह क्या बात है” और श्रुति के पास जाकर बोला.
“क्या रे छोकरी कौन है तू? और इधर क्या कर रही है? और तेरी यह हालत किसने की?” श्रुति ने देखा की वो कोई 45 से 50 साल का आदमी होगा, चेहरे पर बड़ी हुई शेव और वो जब श्रुति के पास आकर बातें कर रहा था तो उसके मुंह से एक बदबूदार हवा भी निकल रही थी जिसे श्रुति ने बड़ी मुश्किल से सहा. “ जी में रास्ता भटक गयी हूँ, मुझे इस जंगल से बाहर जाना है. प्लीज़ मेरी मदद करो.” श्रुति ने उससे राका से रिकवेस्ट करी.
“पर तेरी यह हालत किसने की कुछ बनाएगी.?” राका ने कहा.
“जी ….वो एक…बड़ा ही भयानक जानवर था उसने मेरे सारे दोस्तों को भी मर डाला, में बड़ी मुश्किल से अपनी जान बच्चा कर वहां से भाग आई.” श्रुति ने कहा.
“भयानक जानवर? हहेहहे….” वो अपने साथियों की तरफ मूंड़ कर हँसने लगा.
“अरे उस भयानक जानवर का कुछ नाम तो होगा?” राका ने श्रुति से पूछा.
“मुझे उसका….नाम नहीं मालूम. वो दिखने में एक दम अजीब सा था…एक …एक …शैतान जैसा.” श्रुति ने कहा.
“शैतान जैसा? यह कौन जानवर पैदा हो गया भी हमारे इस जंगल में? हहेहेहेहहे ……वो फिर से हँसने लगा.
“ठीक है छ्होरी हम तेरी मदद जरूर करेंगे…..पर तुझे भी हम सब का एक काम करना पड़ेगा.” राका ने श्रुति से कहा.
“जी कैसा काम?” श्रुति ने बारे मासूमियत से कहा.
“बता देंगे, पहले ज़रा यहां आकर भात जाओ, और हमारे साथ खाना खाओ.” राका ने कहा.
“ नो नो थॅंक्स! आप मुझे जंगल से निकालने का रास्ता बता दे में खुद ही चली जाओंगी” श्रुति ने कहा.

“अरे इतनी भी जल्दी काहे की है. अभी अभी आई हो और अभी जाने की बात ना करो.” राका ने अपने पीले दाँत दिखा कर कहा. फिर उसे ज़बरदस्ती अपने साथ भाइतने लगा.
“प्लीज़ छोधिए , प्लीज़ ऐसा मत करिए प्लीज़ ई आम बेगिंग यू” श्रुति रोते हुए कही जा रही थी
“आए छ्हॉकरिया ! ज्यादा पाटर पाटर अँग्रेज़ी में बातें मत कर. अरे तू जानती है कितने दीनों से हम सबने जिस्म की प्यास नहीं भुजाई है? हम एक दम प्यासे है. हमारी प्यास भुजा दे तो हम तेरी मदद जरूर करेंगे, तू जहाँ बोलेगी हम तुझे वही पर चोद देंगे.

क्यों दोस्तों? राका ने अपने दोस्तों से कहा.
“बिलकुल…..बिलकुल “ सब ने एक साथ कहा.
“नहीं प्लीज़….मुझे जाने दो. मुझे यह सब नहीं करना…..एम्म…में अपना रास्ता खुद ढूंढ. लूँगी ……प्लीज़ लेट में गो..प्लीज़.” श्रुति ने रोते हुए और अपना हाथ राका से चुधते हुए कहा.
“आए लड़की बस बहुत हुआ. इतनी देर से तुझे प्यार से समझा रहे तो तुझे समझ में नहीं आ रहा है. तू चाहे या ना चाहे हम तो तेरी जवानी का रस तो जरूर पिएँगे. अगर तू नाटक करेगी तो यह खंजर देख रही है?” राके ने उसे पास में पड़ा खंजर दिखाते हुए कहा फिर उसे आग में उस खंजर को गर्म करने लगा.
“अगर इज्जत से अपनी जवानी का दीदार नहीं कराएगी तो यह गर्म खंजर तेरे पेट में डाल दूँगा…..उसके बाद तेरी जो अंतड़ियां है वो भी अंदर से जल कर खाक हो जाएगी. इसलिए तेरी भलाई इसी में है जैसा में कह रहा हूँ वैसा कर. राका ने उसे धमकाते हुए कहा.
“नो….प्लीज़ नूऊओ……में ऐसा कुछ नहीं करूँगी….प्लीज़ मुझे जाने दो.” श्रुति ने गिड़गिड़ाते हुए कहा. पर राका ने उसकी एक नहीं सुनी और उसके जिस्म पर जो उसका टी-शर्ट जो उसका पूरी छाती को तो नहीं पर काफी कुछ छुपा रहा था राका ने उसके फटे हुए टी-शर्ट के टुकड़ो को पकड़ा और उसे एक झटका में फाड़ दिया. श्रुति ने अंदर ब्रा पहनने के बावजूद भी अब श्रुति का आधे से ज्यादा उसकी चुचियाँ दिख रही थी . राका ने उसे बड़ी ललचाई हुई निगाहों से देखने लगा. श्रुति हर प्रयास कर रही थी अपना आध नंगा जिस्म छुपाने की पर राका उसे ऐसा करने नहीं दिया और उसे अपने मुंह से चूमने लगा और फिर दांतें भी काटने लगे. श्रुति दर्द से एकदम बिलबिला उठी. आज से पहले किसी मर्द ने उसे इस हालत में नहीं देखा था. राका अब श्रुति पर पूरा झुक गया और उसे दीवाना वार चूमने लगा…..की तभी अचानक उसे किसे के सूखे पत्तो पर चलने की आवाज़ आने लगी. उसने देखा तो उसे हैरत हुई की यह यहां कैसे?
“ओह हूओ आस. देखिए तो कौन आया है? मेहमान साहब आए है…” राके ने अपने दोस्तों से कहा. जब वो यह सब बातें कर रहा तो वो श्रुति के जिस्म से थोड़ा उठ गया था जिससे शरइत को भी थोड़ा मौका मिला यह देखने का की आने वाला कौन था. उसे भी बड़ा शॉक लगा आने वाला कोई और नहीं बल्कि वही व्यक्ति था जो उसे वहां उसे उस दरिंदे से बचनाए के बाद उसी की ही पिटाई की थी और ढेर सारी गालिया भी बाकी थी​

(UPDATE-37)

वो सोचने लगी के वो अब यहां क्या करने आया है और क्या वो यह लोग को जानता है.
“अरे रोहन साहब आपके शुभ कदम यहां कैसे पढ़ गये?” राके ने रोहन को अपनी और आते देखते हुए बोला.
“बोलिए रोहन साहब क्या हाल है आपके, आज कोई शिकार नहीं मिला क्या जो हमारी तरफ आ गये.” राका ने कहा.
“नहीं राका ऐसी कोई बात नहीं है.” रोहन ने बड़ी शांति से जवाब दिया.
“तो फिर यहां आने का कारण?” राका ने रोहन से वजह जानना चाहा.

“देखो में यहां उस लड़की के लिए आया हूँ, वो बेचारी मेरी वजह से उसकी यह हालत हुई है. इसलिए में उसे जल्द से जल्द यहां से निकाल के उसे उसके घर पहुचाना चाहता हूँ. “ रोहन, श्रुति की तरफ इशारा करते हुए बोला.
“हिहिहिहिहीई……जब तुम यहां आए तभी में समझ गया था की तुम्हारा जरूर इस लड़की के साथ कुछ लाफद है….हहेहहे.” राका हंसते हुए कहे जा रहा था. और श्रुति यही सोच रही थी रोहन को देख कर की यह आदमी भी अजीब है, पहले उसे इस खौफनाक जंगल में फँसा दिया उसके बाद उस वहशी दरिंदे से उसकी जान बचाई फिर उसे उस वीराने में अकेला चोद कर चला गया. अब फिर आया है उसे इन इंसानी हैवानो से बचाने के लिए. श्रुति को बहुत अजीब लग रहा था रोहन का नेचर. वो सोचने लगी के अगर यह इन कुत्तों से उसे बच्चा लेगा तो वो उसके बाद इसे कुछ भी नहीं कहेगेई बल्कि इसी के जरिए इस जंगल से निकालने की कोशिश करेगी. फिर जब एक बार निकल जाएगी तब उसके बाद वो इस आदमी की खैर लेगी जिसकी वजह से उसे यह सब झेलना पड़ रहा है.
“देख भी ओये मजनू की औलाद….मुझे नहीं पता की तेरा इस लड़की के साथ क्या लाफद है? तुझे इसे यहां से ला जाना है ना? ठीक है ले जाना पर….उससे पहले में और मेरे तमाम साथी इसकी जवानी का मजा लेना चाहेंगे.” राका, श्रुति के छातियाँ को घूरते हुए कहा.”साली बहुत मस्त माल है, एक दम नर्म और नाज़ुक. ऐसे माल रोज़ रोज़ नहीं मिलती. समझा.? चल तू वहां कोने में जाकर खड़े हो जा. जब हमारा काम हो जाएगा तो हम तुझे बुला लेंगे. फिर ले जाना इसे.” राका वहां से श्रुति की तरफ जाते हुए बोला.
“देखो राका? तुम्हारी दुश्मनी मुझसे है. तुम्हें मुझसे जो करना है कर लो पर इस लड़की को जाने दो.” रोहन ने राका से आग्रह करते हुए कहा.
“आबे क्यों मेरा दिमाग खराब कर रहा है. अभी में अच्छे मूंड़ में हूँ. वरना तुझे देखते ही मुझे फौरन तेरी खोपड़ी में गोली मारने का दिल करता है. पर में आज ऐसा नहीं करूँगा क्योंकि में इस नाज़ुक सी काली से खेलना चाहता हूँ. अगर तू और फिर कुछ छू छू किया ना…..तो साले यही तेरी क़ब्र बना दूँगा. चल भाग यहां से……” राका ने रोहन को धक्का मारते हुए कहा.
“भागाओ रे साले को. फिर भी कुछ उछल कूद किया तो साले का गला ही काट देना.” कहते हुए राका श्रुति की तरफ बढ़ने लगता है. जिसे देखकर श्रुति फिर से रोने लगती है. रोहन देखता है की श्रुति घबराई हुई है और रो भी रही है तो ना जाने उसमें कहा से एकाएक एक नयी ऊर्जा आ जाती है और वो झट से राका के पास जाता है और उसके हाथ में तामहा हुआ खंजर झपट के अपने हाथों में ले लेता है बड़ी फुर्ती दिखाते हुए उस खंजर को राका की गर्दन पर रख देता है.
“रुको भी भेंचोड़ो.” रोहन ने राका के साथियों को अपने करीब आते हुए देखा तो कहा. “अगर किसी ने भी अपनी मां चुदाई तो इस मां के लंड की गर्दन यही इस के धड़ से अलग कर दूँगा.

” राका के साथी जहाँ थे वही रुक गये. बाज़ी अपनी और देखते हुए रोहन जल्दी से श्रुति से कहता है की.
“आए लड़की जल्दी से यहां से जितनी दूर हो सके भाग जा.” रोहन का बस इतना कहना था की श्रुति फौरन खड़ी हो गयी और थोड़ा लड़खड़ाते हुए वहां से जल्दी से निकल गयी पर…..वो जितनी जल्दी वहां से गयी थी उतनी ही तेजी से वापस भागते हुए आई.
“अरे क्या हुआ? वापस क्यों आ गयी? “ रोहन, श्रुति को वापस आते हुए देखा तो बोला. इससे पहले की श्रुति कुछ कह पति रोहन ने बल्कि सभी ने देख लिया था की श्रुति क्यों भाग के वापस आ गयी थी. रोहन ने देखा की वैसे ही दो दरिंदे जिन्होंने इतना उत्पात मचाया हुआ था भागते हुए उन्हीं के पास आ रहे है. राका ने भी पलट कर देखा तो उस के तो होश हवास ही उड़ गये. उसे तो समझ ही नहीं आ रहा था की यह किस प्रकार का जानवर है. उसने आज तक अपनी पूरी जिंदगी में इस तरह की चीज़ नहीं देखी थी. यही हाल उसके साथियों का भी था. वो जहां खड़े थे वही खड़े रहे क्योंकि उनके कदम उनका साथ ही नहीं दे रहे थे. पर रोहन का ऐसा हाल नहीं था क्योंकि उसकी इससे पहले भी इस दरिंदे से मुठभेड़ (फाइटिंग) हो चुकी थी…..​

(UPDATE-38)

उसने फौरन राका को अपने से दूर फेंका और झट से श्रुति का हाथ पकड़ा और वहां से उल्टी दिशा में भागने लगा. श्रुति भी उसके साथ भागने लगी बावजूद इसके के उसका बाया पैर में बिलकुल ताक़त नहीं थी. पर उस वहशी दरिंदे को देखकर तो मुर्दा भी जगह जाए उसका पैर क्या चीज़ है. वो दोनों भागते रहे जितनी दूर हो सके. उन्होंने पलट कर देखने की भी कोशिश नहीं की राका और उसके साथियों का क्या हाल हो रहा होगा वहां पर. बल्कि उन्हें देखने की जरूरत भी नहीं थी क्योंकि उनकी चीखें ही उन्हें वहां का सारा हाल बता रही थी.

आधे घंटे तक भागते भागते अचानक श्रुति के बायें पैर में एकदम से दर्द उठा. और श्रुति कराहते हुए वही ज़मीन पर गिर पड़ी.
“क्या हुआ?” रोहन उसे ज़मीन पर गिरते हुए देखा तो बोला.
“मेरा पैर!!!! अब मुझमें और ताक़त नहीं है दौड़ने की बल्कि में तो अब चल भी नहीं सकती.” दर्द से कराहते हुए श्रुति ने कहा. रोहन ने देखा की श्रुति वास्तव में अपना पैर पकड़ के एक दम रोने सी सूरत बनाई हुई थी. इतनी देर से दोनों के भागने के कारण वो दोनों साँसें भी तेज तेज ले रहे थे जिसकी वजह से श्रुति की दोनों चुचियाँ भी ऊपर नीचे हो रही थी. मगर रोहन का ज़हन इतना ठरकी क़िस्म का नहीं था की वो औरतों के जिस्म को निहारे. पर श्रुति की बड़ी बड़ी च्चातियाँ थी ही ऐसी और उसपर उसका जो टी-शर्ट था वो आगे से पूरा फटा हुआ था. सिर्फ़ नीचे से उसकी नाआभी तक कुछ बच्चा हुआ था. जिसकी वजह से उसकी छ्चातियाँ सिर्फ़ उसके ब्रा में ही दिख रही थी. अब अगर ऐसा नज़ारा होगा तो रोहन क्या अच्छे अच्छे ईमान वालो का ईमान डगमगा जाए.

पीछे मौत भी सर पर सवार थी फिर भी इसके बावजूद रोहन अपने आपको श्रुति की दोनों कोमल छातियाँ को देखे बगैर ना रही सका. वो दो या तीन बार देखता फिर नज़र फेयर लेता. थोड़े देर बाद श्रुति को भी एहसास हुआ की पीछे आती मौत की वजह से और पाई के दर्द की वजह से वो यह भूल गयी थी के उसकी दोनों छाती आधी से ज्यादा नंगी है . क्योंकि उसके ब्रा के कप का साइज इतना भी बड़ा नहीं था की वो उसकी कोमल चुचियों को छुपा सके. श्रुति ने फौरन अपने दोनों हाथों से अपने सीने को ढकने की कोशिश की.

यह देखकर रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ की वो क्या कर रहा था. बेचारी यह लड़की उसी की ही वजह से उसकी यह हालत हुई है और वो उसी ही बदन को निहार रहा था. उसे फौरन अपनी गलती का एहसास हुआ और जल्दी से अपनी जॅकेट उतारते हुए श्रुति की तरफ बढ़ा दिया.
“लो यह जॅकेट पहन लो.” रोहन, श्रुति को जॅकेट देते हुए कहा.
“नहीं चाहिए मुझे यह तुम्हारी गंदी सी जॅकेट.” श्रुति का गुस्सा अभी भी कम नहीं हुआ था. क्योंकि जब भी उसे अपनी तक़लीफ़ का एहसास होता तो इसका जिम्मेदार रोहन को ही मानती थी.
“देखो मुझे पता है के यह जॅकेट तुम अमीरों के लायक नहीं है पर इस वक्त यह तुम्हारा जिस्म ढकने के लिए काफी है.” रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा. फिर श्रुति थोड़ा जीझक कर वो जॅकेट पकड़ ली और उसे पहनने लगी. जब उसने वो जॅकेट पहन लिया तो उसे कुछ राहत मिली. एक तो उसका जिस्म भी नुमाया था दूसरे उसे अब ठंड का एहसास थोड़ा कम लगने लगा.
“अपना पैर दिखा.” रोहन, श्रुति के पास भात ते हुए कहा.
“इसकी कोई जरूरत नहीं है. पहले चोट दो फिर बाद में मरहम भी खुदी लगाने आओ.” श्रुति ने रोहन पर व्यंग करते हुए कहा.
“देखो उसके बारे में बाद में बात करेंगे पहले यहां से हमें निकलना होगा वरना यहां कब और किस मोड़ पे वही दरिन्दा दोबारा आ जाए कुछ कह नहीं सकते…” रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा. श्रुति पहले तो कुछ नहीं बोली . फिर उसे एहसास हुआ की रोहन सही कह रहा है उन्हें अभी इसी वक्त यहां से निकालने के बारे में शोचना होगा वरना वो दरिंदे पता नहीं फिर कहा से आ जाए.
“पर कैसे? मुझे तो मेरा पैर उठाया ही नहीं जा रहा है. में चलूंगी कैसे?” श्रुति ने कहा.
“हां हां में जानता हूँ, इसलिए तो कह रहा हूँ अपना पैर दिखाओ मुझे.” रोहन ने कहा. श्रुति बॉटम से अपनी जीन्स को थोड़ा उठाते हुए दिखाया . रोहन ने देखा की उसकी एडी एक दम सूजी हुई थी. एडी की जो हड्डी होती है वो तो दिख ही नहीं रही थी.
“अरे बाप रे!!! यह तो एकदम सूजा हुआ है.” रोहन, श्रुति की तरफ हैरत से देखते हुए कहा.
“हां मुझे पता है, तभी तो मुझे दर्द हो रहा है. “ श्रुति ने च्चिदते हुए कहा.
“देखो हमें फिलहाल यहां से किसी भी सूरत में निकलना होगा और उसके लिए हमें किसी सुरक्षित जगह पर जाना होगा.

अगर तू बुरा ना मानो तो क्या में तुझे सहारा दे सकता हूँ चलने में.” रोहन ने श्रुति से आग्रह करते हुए कहा. श्रुति ने कुछ देर सोचा….​

(UPDATE-39)

की क्या करे क्योंकि उसे प्राब्लम थी की रोहन उसे छ्छूए. पर इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं था क्योंकि उसे भी पता था की यहां से निकलना है.
“ठीक है.” श्रुति ने बस इतना कहा. और फिर रोहन, श्रुति के बायें आकर उसे खड़े से सहारा देने की कोशिश करने लगा. जब श्रुति, रोहन के सहारे पूरी तरह खड़ी हो गयी तो रोहन ने कहा की वो उसके खड़े पर अपना हाथ रख ले ताकि बैलेन्स बना रहे. पहले तो श्रुति ऐसा करने में हिचकिचाई पर फिर और कोई चारा ना देख कर वो रोहन के खड़े पर अपना हाथ रख दिया. रोहन भी उसे पूरी तरह सहारे देने के लिए उसके दायें खड़े को पकड़ लिया. पहली बार उसे कोई मर्द उसके इतनी करीब आया था. रोहन के बदन से उठी हुई महक भी श्रुति को आ रही थी. श्रुति इस सब सिचुयेशन में अपने आपको कंफर्टबल महसूस नहीं कर पा रही थी. भले ही वो एक मल्टी-बिलियनेर की बेटी थी पर वो अपनी जिंदगी में कभी भी मर्दों को इतने करीब नहीं आने दी थी. उसे तो बस वेट था उस व्यक्ति का जो उसके ख्वाबो में आया करता था, वो चाहती थी की उसे वही व्यक्ति पहले छ्छूए जो उसके दिल के करीब हो. इसलिए आज तक वो वर्जिन थी. उसके ग्रुप में ऐसी कोई या शायद पूरे कॉलेज में ऐसी कोई लड़की नहीं होगी जो वर्जिन ना हो. श्रुति के अब तक वर्जिन होने पर उसके दोस्त उसका मज़ाक भी उड़ाया करते थे. उसके सपनों के राजकुमार के नाम से उसे च्चिदाते थे. और यही वजह थी की श्रुति, रोहन को अपने इतने करीब पकड़ असहज महसूस कर रही थी. उसने कभी सपने में भ नहीं सोचा होगा की जिस व्यक्ति से वो इतनी नफरत करती है वही व्यक्ति उसके इतने करीब आना वाला पहला मर्द होगा.

तकरीबन एक घंटे चलने के बाद वो दोनों काफी दूर तक आ गये थे. फिर श्रुति को थकान भी लगने लगी. उसने रोहन से कहा की .”रुको! अब मुझसे और नहीं चला जा रहा है और मुझे लगता है की शायद वो जानवर अब हमारे पीछे नहीं आएँगे तो क्या में थोड़ी देर आराम कर सकती हूँ.” श्रुति ने रोहन से कहा.
“हां हां ठीक है.” रोहन ने कहा. वो भी थोड़ा तक गया था तो उसने सोचा इस बहाने वो भी अपनी थकान मिटा लेगा. फिर उसने श्रुति को एक पत्थर पर भीताया और अपना भी थोड़ी दूर दूसरे पत्थर पर भात गया. तकरीबन 10 मिनट तक उन दोनों के बीह में कोई बात नहीं हुई. फिर रोहन को श्रुति के पैर के बारे में याद आया वो उठा और यहां वहां झाड़ियों में कुछ तलाश करने लगा और तलाश करते करते हुए वो थोड़ा झाड़ियों के अंदर की और चला गया. श्रुति भी देख रही थी की इसे अचानक क्या हुआ है और यह किस चीज़ को इतने जिज्ञासा से ढूंढ. रहा है.

जब रोहन झाड़ियों के अंदर चला गया था तो वो थोड़ी चिंतित होने लगी की आख़िर यह कहा जा रहा है उसे अकेला चोद के. वो सोचने लगी के कही यह वापस से तो नहीं उसे अकेला चोद कर जा रहा है. वो घबरा के अपनी जगह से उठने की कोशिश कर ही रही थी तभी उसे रोहन झाड़ियों से निकलता हुआ दिखाई दिया और उसके हाथ में इस वक्त में पट्टियों जैसा कुछ था. फिर वो उन पट्टियों को लेकर एक छोटे से घड़दे में पानी पड़ा हुआ था , उस पानी से उसने उस पट्टियों को अच्छी तरह से भिगोया और फिर श्रुति ने देखा की रोहन उसी की और वो पत्तियाँ लेकर आ रहा था. वो समझ नहीं पा रही थी की अचानक उसे इस पट्टी की क्या जरूरत पढ़ गयी.
“अपनी जीन्स अपनी घुटनों तक मोड़ लो.” रोहन, श्रुति के सामने घुटनों के बाल भात ते हुए कहा.
“क्या? पर क्यों?” श्रुति ने कहा.
“देख यहां कोई डॉक्टर तो आएगा नहीं तेरे इस सूजे हुए पैर का इलाज करने के लिए, इसलिए अगर अभी कुछ नहीं किया गया तो यह और सूज जाएगा. तो इसलिए जो हो सकता है में वो करने की कोशिश कर रहा हूँ इस सूजन को दूर करने के लिए.” रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा.
“तो क्या इस पट्टियों से मेरे पैर की सूजन कम हो जाएगी?” श्रुति ने पूछा.
“पूरी तरह तो नहीं होगी लेकिन कुछ राहत तो जरूर मिलेगी.” रोहन ने कहा.
“ठीक है.” कहते हुए श्रुति ने अपना जीन्स को बॉटम से उठा कर थोड़ा ऊपर कर दिया.
“देख जब में इस पट्टियों को तेरे पैर में लगाओंगा तो थोड़ा जलेगा पर तू हिलना डुलना बिलकुल नहीं वरना यह निकल जाएँगी. जितना यह जलेगा उतना ही तेरे पैर की सूजन के लिए अच्छा रहेगा” रोहन उसे समझाते हुए कहा जिसके जवाब में श्रुति ने सिर्फ़ सर हिला कर यह कहना चाहा की वो उसकी बात समझ गयी है.
“ जीन्स थोड़ी सी और ऊपर कर.” रोहन ने फिर से श्रुति से कहा. श्रुति थोड़ा झिझकने लगी.
“देख मुझे पत्तियाँ बाँधने के लिए थोड़ी जगा चाहिए और तेरी जीन्स की वजह से मुझे….​

UPDATE-40)

प्राब्लम हो रही है.” रोहन उसकी झिझक दूर करते हुए कहा. फिर श्रुति ने अपनी जीन्स थोड़ी और ऊपर कर ली . उसके जीन्स ऊपर करते ही रोहन को श्रुति की रात के अनहदरे में भी गोरी गोरी पिंदीलिया दिख रही थी . वो थोड़े देर उसकी पिंदीलियों के देखा फिर अपना ध्यान वहां से हटा कर पत्तियाँ बाँधने लगा. जब वो पत्तियाँ बाँध रहा था तो थोड़े ही देर के बाद श्रुति की हल्की हल्की सी दर्द से कराहने की आवाज़ आने लगी. एक तो उसके पैर के सूजन की वजह से उसे दर्द हो रहा था और जैसे के रोहन ने बताया था पत्तियाँ लगाने के बाद थोड़ा जलेगा. पर वो थोड़ा उसके लिए थोड़ा नहीं था. उसको इस कदर पट्टियों से जलन हो रही थी के उसे अपना पैर एक जगह रखना मुश्की हो रहा था पर उसने ऐसा कुछ नहीं क्योंकि वो जानती थी की अगर अपना पैर हिलाएगी तो रोहन को पत्तियाँ लगाने में दिक्कत बढ़ेगी.

वो बस अपना चेहरा आसमान की तरफ करके हल्के हल्के कराहने लगी. जब रोहन पत्तियाँ लगा चुका तो उसे चिपके रहने के लिए उसे कुछ ऐसे चीज़ की जरूरत पढ़ने लगी जिससे वो पत्तियाँ वही श्रुति की टाँग में चिपकी रहें. उसकी समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे . अचानक उसने जेब से खंजर निकाला और अपनी शर्ट की आस्तीन को फाड़ दिया और फिर उस फटे हुए आस्तीन से उसने श्रुति के पैर से चिपके हुए पट्टियों को इस तरह से बाँध दिया की आसानी से ना निकले. श्रुति को बड़ा अजीब लगा जब रोहन उसकी पत्तियाँ उसके पैर में चिपका रहा था और बाद में अपने शर्ट का आस्तीन फाड़ के उस पट्टियों को बांड दिया.
“थॅंक्स.” श्रुति ने बस इतना कहा. पर जवाब में रोहन ने कुछ नहीं कहा बस उससे दूर जाकर भात गया. फिर उन दोनों के दरमियान कुछ देर तक कोई बात नहीं हुई. फिर खामोशी का सिलसिला श्रुति ने ही थोड़ा और उससे कहा.
“तुम्हें कैसे मालूम की इसी पट्टियों से मेरे पैर की सूजन कम हो जाएगी.” रोहन उसकी तरफ देखा फिर गर्दन घुमा कर ज़मीन की और देखने लगा.
“क्योंकि यह पत्तियाँ में अपने ऊपर इस्तेमाल कर चुका हूँ और इससे मुझे काफी राहत मिली थी. तू फिक्र मत कर तुझे भी थोड़ी देर में राहत मिल जाएगी. रोहन उसे बताने लगा. फिर उनके बीच फिर से खामोशी हो गयी. फिर से थोड़े देर के बाद श्रुति ने ही बातों का सिलसिला शुरू करते हुए कहा
“हम इस जंगल से कैसे निकल पाएँगे? क्या तुम्हें कोई रास्ता पता है?”
“उस हैवान से बचके भागने के बाद हम कहा आ गये है यह मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है पर ..तू फिक्र मत कर में तुझे यहां से सही सलामत निकाल दूँगा.” रोहन ने कहा.
“ठीक है पर हम रास्ता कैसे तलाश करेंगे.” श्रुति ने कहा.
“रास्ता तलाश करने के लिए पहले हमें यह समझना होगा की हम इस वक्त जंगल के किस जगह पर है. और वो समझने के लिए हमें वो छोटी तुम्हें दिख रही है..” रोहन ने अपनी उंगली के इशारे से श्रुति के बाईं और इशारा किया.
“हमें उस छोटी पर चढ़कर जाना होगा फिर हमें आइडिया मिलेगा की हम कहा है.” रोहन अपनी बात खत्म करते हुए कहा.
“वो छोटी पर? पर हम वहां कैसे जाएँगे…मेरा मतलब है में कैसे चढ़ पाओँगी क्योंकि मेरे पैर की हालत ऐसे नहीं है की में उतनी ऊंची छोटी चढ़ सुकून.” श्रुति ने हैरत से कहा.
“फिक्र मत कर कुछ नहीं होगा में हूँ ना. में तेरी मदद करूँगा. “ रोहन ने कहा.

काफी देर दोनों के खामोश रहने के बाद रोहन ने कहा. “अगर तेरी थकान और तेरा पैर का दर्द कुछ कम हुआ हो तो हम चले फिर?”
“नहीं में अभी भी बिलकुल नहीं चल सकती….क्योंकि मैंने कल से कुछ भी नहीं खाई हूँ इसी वजह से मुझे बहुत ज़ोर से भूख लगी है और दूसरा ठंड भी बहुत लग रहे है.” श्रुति ने बड़ी मासूमियत से कहा.
“अब तेरे लिए में खाना से कहा से लाओ….

पर मैंने तो तुझे देखा था की तू दोपहर को ढाबे पर खाना कहा रही थी?” रोहन कुछ सोचते हुए कहा.
“मैंने कुछ नहीं खाया था, में बस अपने दोस्तों के साथ वहां पर भाती हुई थी.” श्रुति ने जल्दी से सफाई दी. रोहन थोड़ी देर तो कुछ नहीं कहा. फिर थोड़ी देर वो रुक कर कुछ बोला.
“अच्छा एक बात बताओ मैंने तुम लोगों से उस रास्ते ना जाने के लिए कहा था, तो तुम लोग उसी रास्ते पर से दोबारा क्यों जा रहे थे . हमारी कंप्लेंट करने के लिए?” रोहन ने श्रुति से शिकायती भरे स्वर में कहा.
“नहीं. हमारा इरादा ऐसा कुछ भी नहीं था. हम सब उसी रास्ते से वापस जा रहे थे जहाँ से तुमने हम सब से कहा था. पर जब हम वहां पर पहुंचे तो वहां पर फोरेस्ट गार्ड्स की सेक्यूरिटी कुछ ज्यादा थी . शायद उस रास्ते पर कुछ हुआ था. जिसकी वजह से उन्होंने हमें वहां जाने से मना कर दिया था, और हमें उस रास्ते से जाने के लिए कहा जिस….​

(UPDATE-41)

रास्ते से हमने एंटर किया था बल्कि उन्होंने हमारे साथ में अपना एक गार्ड भी भेजा था हमारी सेफ्टी के लिए. पर अचानक क्या हुआ…..पता नहीं वो अजीब से जानवर कहा से आ गये और फिर……उन्होंने…देखते ही देखते…मेरे सारे दोस्तों को मेरी ही आँखों के सामने जान से मर दिया.” इतना कहते हुए श्रुति की आँखें भर आई थी.
“ओह तो यह बात थी, इसलिए वो वहां से वापस जा रहे थे…और में समझा की….” रोहन सोचने लगा.

फिर रोहन वहां से उठा और कुछ लकड़िया जमा करने लगा . जब ढेर सारी लकड़िया जमा हो गयी तो उसने उन सारी लकड़ियों एक जगह जमा किया और अपने जेब में लाइटर निकालने के लिए हाथ डाला पर उसका लाइटर उसे नहीं मिल रहा था. उसे याद आया की उसने लाइटर अपनी जॅकेट के पॉकेट में रहकी हुई है. और उसका जॅकेट इस वक्त श्रुति पहनी हुई थी .वो श्रुति से कहने लगा.
“वो ज़रा जॅकेट के अंदर वाली पॉकेट में मेरा लाइटर होगा, ज़रा देना मुझे.” श्रुति थोड़ा सा जॅकेट की ज़िप खोलकर और अपने आपको थोड़ा कवर करके अपना हाथ अंदर डाला जॅकेट के अंदर वाले पॉकेट से रोहन का लाइटर निकाला और फिर अपने आपको कवर करके ज़िप को बंद कर दिया और फिर उस लाइटर को रोहन के हवाले कर दिया. रोहन उसके हाथ से लाइटर लेकर जमा की हुई पत्तियाँ और लकड़ियों में अपने लाइटर से आग जलाने की कोशिश करने लगा. पर ठंड होने की वजह से लकड़ियों में बहुत ज्यादा नामी आ गयी थी जिसकी वजह से वह आसानी से नहीं जल रही थी . लेकिन रोहन को इस तरह की नाम लकड़ियों में किस तरह आग लगते है उसे इस बात का ज्ञान था. थोड़ी और कोशिश के बाद अच्छी खासी आग जल गयी थी. फिर वो श्रुति की तरफ देख कर कहा
“यहां आ जा. तुझे ठंड लग रही है ना? इस आग की गर्मी से तुझे थोड़ी राहत मिलेगी.” कहते हुए रोहन, श्रुति का बायन कंधा पकड़ कर उसे उठाने की कोशिश करने लगा.

जब रोहन उसके करीब पहुंचा तो उसने आग की रोशनी में देखा की श्रुति का चेहरा खून से पूरा लाहुलाहन था और वो सुख भी चुका था..
“एक काम कर वो गड्ढे में पानी दिख रहा है ना? उससे अपना चेहरा धो ले . पूरा खून से भरा हुआ है.” श्रुति ने उस गड्ढे की तरफ देखा . फिर सोचने लगी की पता नहीं कितने गंदा पानी होगा उस गड्ढे का.
“क्या सोच रही है? चल अपना चेहरा धो ले. “ रोहन ने उसे फिर टोका. रोहन के दोबारा कहने पर श्रुति, रोहन के साथ उस गड्ढे की और चलने लगी और फिर उस गड्ढे में पड़े हुए मातएलए पानी को देखा और कहने लगी.
“नहीं मुझे नहीं धोना इस गंदे पानी से अपना चेहरा.”
“अरे क्या हुआ? अब तुझे यहां पर बिसलेरी का पानी तो मिलेगा नहीं . जो है उसी से ढोले बहुत आराम मिलेगा. “ रोहन उसे समझाते हुए कहा. रोहन के बार बार आग्रह करने पर श्रुति उस मातएलए पानी से अपना चेहरा ढोने लगी. पर जब उसके चेहरे पर पानी पड़ा तो वास्तव में उसे बड़ी राहत मिली, उसे बड़ा सुकून मिला. उसने कभी सोचा भी नहीं होगा की उसे अपने जीवन में इस तरह के पानी से भी अपना चेहरा भी धोना पड़ेगा. श्रुति ने जब पानी से अपना चेहरा धोया तो रोहन उसे सहारा देते हुए आग के पास भीता दिया और उसके पास में आकर भात गया. उस आग की रोशनी में अचानक रोहन की नज़र श्रुति के चेहरे की और गयी. पहली बार श्रुति के चेहरे की और इतने गौर से देखा. उसने देखा के सूखे हुए खून को ढोने के बाद इस लड़की का चेहरा कितना हसीना लग रहा है. उसने अंदाज़ा लगाया की इस लड़की की उम्र यही कोई मुश्किल से 20 या 21 साल होगी. कितना मासूम सा चेहरा था उसका . पर इतने मासूम चेहरे पर कितना दर्द था. बेचारी को उसी की वजह से कितना दर्द सहना पड़ रहा था. उसे अपने आप पर बहुत गुस्सा आने लगा. वो कुछ देर तक यूँही श्रुति को देखने लगा. जब श्रुति ने अचानक उसकी तरफ देखा तो उसने फौरन अपनी नज़र नीचे कर ली.
“तू थोड़े देर यही भात में अभी आता हूँ.” रोहन , श्रुति से कहते हुए उठने लगा.
“कहा जा रहे हो तुम?” श्रुति ने रोहन को उत्त् ते हुए देखा तो कहा.
“बस अभी आ रहा हूँ.” रोहन ने बस इतना ही कहा.
“पर में यहां अकेली कैसे रहूंगी?” श्रुति ने जल्दी से कहा.
“अरे में ज्यादा दूर नहीं जा रहा हूँ बस अभी आता हूँ, क्योंकि तुझे भूख लगी है ना तो उसका कुछ इंतजाम तो करना पड़ेगा ना?” रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा.
“नहीं नहीं मुझे भूख नहीं है, रहने दो में भूखी रही सकती हूँ पर प्लीज़ तुम मुझे अकेला चोद कर मत जाओ.” श्रुति ने रोहन का हाथ पकड़ के ज़बरदस्ती उसे भरता दिया.
“अरे अजीब बात है, पहले मुझे भगा रही थी अब जाने नहीं दे रही है.” रोहन , श्रुति की तरफ देखते हुए बोला.
“पहले की बात और थी….​

(UPDATE-42)

तब मुझे तुम पर बहुत गुस्सा आ रहा था.” श्रुति ने कहा.
“क्यों? अब गुस्सा नहीं आ रहा है? “ रोहन थोड़ा मुस्कुराकर कहा.

श्रुति, रोहन के इस सवाल पर थोड़ा चौंक गयी . थोड़े देर तक तो उसे कुछ कहते नहीं बना . फिर उसने कहा.
“नहीं ऐसे बात नहीं है, गुस्सा उस वक्त भी था और अब भी है. क्योंकि तुम मेरी मदद कर रहे हो तो इसलिए अभी मेरा गुस्सा थोड़ा कम है. वो तो बस मुझे उन हैवानो से डर लग रहा था इसलिए में तुम्हें कही नहीं जाने दे रही थी. वरना जो तुमने मेरे और मेरे दोस्त के साथ किया है उसके लिए में तुम्हें कभी जिंदगी भर माफ ना करूं.” श्रुति ने कहा.
“दोस्त!! हाहम्म!!! जिसे तू अपना दोस्त कह रही है क्या वो तेरे दोस्ती के लायक थे? में तो समझता हूँ जो वो लोग के साथ हुआ है ठीक ही हुआ है.” रोहन व्यंग करते हुए कहा
“मतलब? में कुछ समझी नहीं.” श्रुति ने थोड़ा हैरत से कहा.
“मतलब यह की तेरे वो सारे दोस्त तुझे धोखा देने का इरादा कर रहे थे” रोहन, श्रुति की तरफ देख कर कहा.
“मेरा साथ धोखा करने का इरादा कर रहे थे…….? तुम क्या कह रहे हो मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है. और वैसे भी वो लोग क्यों मेरे साथ धोखा करेंगे?” श्रुति ने कहा
“अब यह सब मुझे नहीं पता, पर इतना पता है की वो लोग तेरे साथ कुछ गलत करने वाले थे नैनीताल में.
“नैनीताल में? पर तुम्हें यह सब कैसे पता. प्लीज़ मुझे जल्दी से बताओ ….” श्रुति थोड़ा व्याकुल होते हुए पूछने लगी
“जिस ढाबे में तुम सब खाने कहा रहे थे में उसी ढाबे के वॉशरूम में तेरे उन दोस्तों की बातें सुन रहा था. वो लोग तेरे कीहिलाफ कुछ गलत प्लान कर रहे थे.” इतना कह कर रोहन खामोश हो गया.
“वॉट?? मेरे खिलाफ प्लान कर रहे थे? क्या प्लान कर रहे थे, प्लीज़ जल्दी बताओ” श्रुति एक दम शॉक्ड हो गयी थी की उसके दोस्तों ने उसके खिलाफ कुछ गलत प्लान कर रहे थे. वो जाने को एक दम उत्सुक्त थी की आख़िर क्या वो लोग प्लान कर रहे थे.
“उन लोगों का इरादा था की वो लोग तेरे को नैनीताल लेजाकर और फिर तुझे कोई नशीली दवा खिला कर तेरे साथ……..” कहते हुए रोहन थोड़ा रुका.
“मेरे साथ क्या? श्रुति ने जल्दी से कहा.
“आअंह…..तेरे साथ….तेरे साथ वो लोग सेक्स करते और फिर तेरी वीडियो बनाकर उसे इंटरनेट पर डालते.” कहते हुए रोहन खामोश हो गया और श्रुति की तरफ देखने लगा. यह सुन कर श्रुति का मुंह खुला का खुला रही गया.
“वॉट…….?? श्रुति ने एकदम धीमी आवाज़ में कहा. उसे यकीन ही नहीं हो रहा था उसके साथ कुछ ऐसा होने वाला था.
“अरे यू शुरू? वो लोग मेरे बारे में ऐसा ही कह रहे थे?” श्रुति ने फिर रोहन से कहा.
“हां हां….बिलकुल यही प्लान कर रहते थे…जब में तुम लोगों को चोद रहा था तो उससे पहले मैंने जिस लड़के को बुलाया था, तो उसे यही बताने किए बुलाया था की……वो लोग जो तेरे बारे में प्लान कर रहे थे उसके बारे में मुझे पता है. मेरा बस यही इरादा था की में वो लोग को ब्लैकमेल करूं.

अगर वो मेरे खिलाफ कुछ करते है तो में तुझे बता देता की वो सब क्या करने वाले है तेरे साथ.” इतना कह कर रोहन चुप बैठ गया. श्रुति को अब भी यकीन नहीं हो रहा था की उसके साथ कुछ इस तरह होने वाला था.
“सिर्फ़ वही तीन थे….या कोई और भी था उन लड़कियों में से?” उसे पूरा यकीन था की इसमें छाया जरूर शामिल होगी.
“मुझे इतना तो पता नहीं पर जहाँ तक मेरा ख्याल है इसमें सभी शामिल थे खासकर के वो लड़की. क्या नाम था उसका………” रोहन थोड़ा सोचा फिर बोला “हां याद आया!! निशा!! निशा ही नाम था उसका. क्योंकि वो लड़का था ना? जो गाड़ी ड्राइव कर रहा था और जिसे में अकेले में बुलाया था यह उसी की गर्लफ्रेंड थी और उसी के कहने पर उसने तुम्हें साथ चलने को कहा था. शायद उसे तेरे से कोई पुराना हिसाब किताब करना था. उसी का बदला लेने के लिए वो यह सब नाटक खेल रहे थे “ इतना कहने के बाद रोहन, श्रुति की तरफ देखा. पर श्रुति को निशा का नाम सुनकर ही झटका लगा.
“व्हाात???? एक बड़ा सा ‘वॉट’ उसके मुंह से निकला . उसे यकीन ही नहीं हो रहा था की इन सब चीज़ों के पीछे निशा का हाथ है. थोड़े देर तक वो ऐसे ही शॉक में रही. फिर उसे कुछ होश आया तो उसे याद आया की कैसे निशा उसे फ़ायरवेल्ल पार्टी पर चलने के लिए ज़ोर दे रही थी. पहले तो उसने जाने से इनकार कर दिया था जब उसे यह पता चला था की यह पार्टी निखिल ने नैनीताल पर अपने फार्म हाउस पर ऑर्गनाइज़ की है. पर निशा ने उसे कितना फोर्स किया चलने पर. उसे अब समझ में आ रहा था की क्यों निशा उसे अपने साथ ले जाना चाहती थी. क्योंकि निखिल को श्रुति से बदला लेना था जो उसने भरे कॉलेज….​

(UPDATE-43)

में निखिल को थप्पड़ मारा था. और इसी के लिए उसने निशा से कहा होगा की वो श्रुति को अपने साथ नैनीताल चलने के लिए फोर्स करे. उसे विश्वास नहीं हो रहा था की निशा जिसे वो अपना सबसे बेस्ट फ़्रेंड समझती थी वो उसके साथ इतना बड़ा धोखा कर सकती है. निखिल के झूते प्यार में उसने अपनी सबसे फ़्रेंड धोखा कैसे दे सकती है. यही सब सोचते सोचते श्रुति एक दम रूहाँसी हो गयी.

फिर अचानक उसे कुछ याद आया तो रोहन से कहने लगी.
“जब तुम्हें सब पता था फिर भी तुमने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की? और अब आए हो मेरी जान बचाने के लिए? अगर तुम उन्हें वही रोक लेते तो आज मेरी यह हालत ही नहीं होती.” श्रुति व्यंग करते हुए रोहन से कहा. रोहन को पहले कुछ सूझा नहीं की वो क्या बोले. फिर कुछ सोच कर उसने बोला.
“मुझे लगा था की यह तो आम बात है. तुम जैसी सोसाइटी में रहती हो वहां तो ऐसा अक्सर होता है और दूसरे मुझे इस नेशनल पार्क के अंदर आना था क्योंकि में और मेरा वो दोस्त जिसे तूने मेरे साथ देखा था हम पर यहां के फोरेस्ट ऑफिसर्स ने बड़ी निगरानी रखी हुई है. अगर हम ऐसे अंदर आने की कोशिश करते तो आसानी से पढ़कर जा सकते थे.

इसलिए हमने सोचा की अगर हम तुम लोगों के साथ अंदर आएँगे तो वो लोग यही समझेंगे की कॉलेज का ग्रुप है मौज़ मस्ती करने आए होंगे यह सोच कर वो हम पर ज्यादा इस पर ध्यान नहीं देते.” इतना कहकर रोहन चुप बैठ गया.
“अपने फायदे के लिए तुमने मेरा इस्तेमाल किया……तुम्हें शर्म आनी चाहिए.” श्रुति अब भी रोते हुए कह रही थी.फिर अचानक श्रुति को रोहन ने अभी जो कुछ कहा वो बातें याद आई तो उसने कहा.
“तुमने अभी क्या कहा था में जिस सोसाइटी में रहती हूँ वहां पर अक्सर ऐसा होता रहता है? तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो. दुनिया की हर लड़की को एक जैसा समझ रखा है तुमने.” वो रोहन पर अब भी बरसे जा रही थी.
रोहन कुछ नहीं बोला क्योंकि उसे कोई शब्द ही नहीं मिल रहे थे अपनी सफाई में कुछ कहने का. उसे भी लग रहा था की यह लड़की जो बोल रही है बिलकुल सच है. उसने सिर्फ़ अपने फायदे के लिए उसे इस मुसीबत में डाल दिया. फिर भी थोड़ी देर की खामोशी के बाद उसने कहा.
“देखो में मानता हूँ मैंने जो भी कुछ तेरे साथ में किया है गलत किया है. पहली बात तो यह की में तुझे या तेरे दोस्तों को किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहता था. में और मेरा दोस्त बस यही चाह रहे थे की कैसे भी करके इस नेशनल पार्क में एंट्री करले बस. मेरा इरादा था की जब हम इस पार्क में एंट्री कर लेंगे तो में तुम सब को वही से जाने दे देता. इसी वजह से मैंने तुम सबको ज्यादा अंदर नहीं लेकर गया बल्कि वही से चोद दिया जहाँ पर किसी किस्म का कोई भी जुनगल्ली जानवर का खतरा नहीं था. लेकिन मुझे नहीं मालूम था की यहां पर इस तरह के खूनी दरिंदे घूम रहे है और हूँ तुझे और तेरे दोस्तों पर हमला कर देंगे. अगर मुझे पता होता तो में ऐसा हरगिज़ नहीं करता.” फिर रोहन थोड़ा रुक कर फिर से अपनी बात जारी रखते हुए कहा. देख में हालात पहले जैसे तो नहीं कर सकता मगर, में इतना तो कर ही सकता हूँ तुम्हें यहां से सुरखित निकाल दम…..चाहे इसके लिए मुझे अपनी जान ही क्यों नहीं गवानी पढ़े.” बोलते हुए रोहन चुप भात गया और एक तरफ देखने लगा.फिर उनके बीच थोड़ी देर तक कोई भी बात नहीं हुई. फिर थोड़े देर के बाद श्रुति ने जो अब थोड़ा नॉर्मल हो चुकी थी खामोशी को तोड़ते हुए कहा.
“पर तुम दोनों को इस जंगल में आने के लिए हमारे सहारे की क्या जरूरत थी?. वो तो तुम ऐसे भी आ सकते थे. जैसे नॉर्मल लोग आते है.” रोहन उसकी बात सुनकर थोड़ा हँसने लगा..फिर कुछ देर के बाद बोला.
“में और मेरा दोस्त इस जंगल में गैर क़ानूनी काम करते है. और हमारी जगह जगह तलाशी हो रही थी. इस नेशनल पार्क के हर दरवाजा पर हमारी तस्वीर पहुंच चुकी थी. अगर हम ऐसे ही जाते तो पकड़ में आ जाते, इसलिए हम लोगों ने तुम लोगों का सहारा लिया.रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा.

“गैर क़ानूनी काम? कैसा गैर क़ानूनी काम? “ श्रुति ने थोड़ी उत्सुकता से पूच्ची
“क्यों तुझे क्यों जानना जरूरी है? रोहन ने कहा.
“नहीं में तो बस ऐसे ही पूंछ रही थी, अगर तुम्हें नहीं बताना तो कोई बात नहीं.” बोलकर श्रुति खामोश हो गयी. रोहन भी कुछ देर खामोश भरता रहा फिर उसने कहा “ में और मेरा दोस्त परवेज़, जानवरो को मर कर उनके बॉडी पार्ट्स को जंगल से स्मगलिंग करके बाहरी पार्टी को बेच देते है जिससे हमें अच्छे पैसे मिलते है. “ रोहन ने कहा.
“क्या? इसका मतलब तुम जानवरो की पोचिंग करते हो? “ श्रुति ने हैरत से कहा.
“हां तो क्या हुआ? “ इंसान अपना पेट….​

(UPDATE-44)

भरने के लिए कुछ ना कुछ तो करता ही है ना? रोहन ने भी कहा.
“पर किसी को मारकर अपना पेट भरना अच्छी बात है क्या?” श्रुति ने कहा.
“तेरे बाप की तरह मेरे पास पैसों की फॅक्टरी नहीं है जिससे में पैसे बनाओ. मुझे अपना और अपना परिवार का पेट पालना था और इसके लिए मुझे अगर कुछ भी करना पढ़ता तो में वो करता. “ रोहन ने कुछ देर रुक कर कहा.” और तू क्या जानवरों को मारने की बात करती है. अगर हम इन जानवरो को ना मारे तो तुझ जैसे अमीरों के शौक कैसे पूरे होंगे. यह जो तुम लोग महेंगे महेंगे लेदर के समान खरीद ते हो और ना जाने क्या क्या. वो सब कहा से आता है? तुझे पता भी है इस बारे में. बात करती है…..?” इतना लंबा चौड़ा लेक्चर देने के बाद रोहन चुप भात गया. श्रुति के पास अब कहने के लिए कुछ भी नहीं था.
“वॉटेवर….तुम्हें जो करना है करो मुझे क्या. मुझे तो बस इस जंगल से निकालो और यह तुम्हारी मोरल ड्यूटी बनती है.” श्रुति ने कहा.
“कौनसी ड्यूटी बनती है?’ रोहन ना समझते हुए कहा.
“मोरल ड्यूटी. यानि के ….अम्म्म मुझे इतनी शूध हिन्दी नहीं आती है बस इतना समझ लो की मुझे यहां से सही सलामंत निकालने की जिम्मेदारी अब तुम्हारी है.” श्रुति, रोहन को समझते हुए कहा.
“अरे हां ना मुझे पता है . तभी तो तेरे साथ में हूँ वरना में कबका यहां से निकल चुका होता.” रोहन ने कहा.
“अच्छा? वो कैसे? “ श्रुति वजह जाननी चाही.
“इतने सालों से जंगलों में घूम घूम कर झक नहीं मारा रहा हूँ. मुझे आइडिया है ऐसे हालत में किस तरह निकला जाता है.” रोहन ने कहा.
“अच्छा अगर तुम्हें जंगल्स के बारे में इतनी नालेज है तो तुम्हें तो कुछ पता होगा की वो क्या चीज़ थी . जो हम पे तीन बार अटॅक कर चुकी है. क्योंकि मैंने आज तक कभी भी इतने डेंजरस अनिमल नहीं देखा ना ही इनके बारे में कही पढ़ा है और नाहीं सुना है.”श्रुति ने रोहन से उस दरिंदो के बारे में पूछते हुए कहा.
“में खुद हैरान हूँ वो क्या चीज़ है. में भी अपनी पूरी जिंदगी में इस तरह का जानवर नहीं देखा . मैंने शेयर, चीटा, हाथियों और ना जाने कितने खूनकर जानवरों का शिकार किया है पर इतना डर कभी नहीं लगा जब आज उस जानवर को देखते वक्त लगा था.

उसकी वो आँखें जैसे उनमें अंगारें भरे हो, उनके नाखून और दाँत….उफ़फ्फ़ कितने भयानक थे वो सब.” रोहन ने कहा
“ये! यू अरे राइट . में भी कुछ ऐसे ही डर गयी थी उसे देख कर .” श्रुति , जो अब रोहन से काफी घुल मिल कर बातें कर रही थी. उसे अब रोहन पर उस तरह का गुस्सा नहीं आ रहा था जो उसे पहले उस पर आ रहा था.
“अच्छा एक बात और बताओ हूँ जो गुंडे थे वो लोग कौन थे? क्योंकि तुम्हारी और उन लोगों की बातचीत से ऐसा लग रहा था की जैसे तुम लोग एक दूसरे को जानते थे?” श्रुति ने फिर से रोहन से सवाल पूछा.
“वो राका और उसके गान्ड के लोग थे. वो लोग भी वही काम करते थे जो में करता हूँ…….यानि की जानवरो के बॉडी पार्ट्स की स्मगलिंग करना. लेकिन मेरे और राका के बीच दुश्मनी थी और इसकी वजह यह थी में उससे अच्छा कमा रहा था. और वो इसी बात पर जलता था. उसे लगता था में उसके शिकार हथिया लेता हूँ. इसी वजह से वो मेरे से दुश्मनी पर उतार आया था.” इतना कह कर रोहन खामोश हो गया.
“भूख लगी है? “ रोहन ने कुछ देर बाद खोमोशी को तोड़ते हुए कहा.
“नहीं. ई मीन लगी है पर अगर तुम्हें इसके लिए कही जाना पड़ेगा तो में इस भूख को बर्दाश्त कर लूँगी.” श्रुति ने कहा.
“हहहहा….इतना डरी हुई हो. अगर वो लोग अभी आ गये तो में भी क्या कर सकता हूँ? मैंने एक बार उनमें से एक को मर गिराया था तो सिर्फ़ महज़ इत्तफाक था क्योंकि उस वक्त उसका ध्यान मेरे ऊपर नहीं था और मुझे मौका मिल गया था डायरेक्ट उस के दिमाग के ऊपर हमला करने का. इसलिए वो उस वक्त मारा गया था पर अब ऐसा नहीं है. वो लोग अपने शिकार पर इतने तेजी से हमला करते है की शिकार होने वाले को वक्त ही नहीं मिलता संभालने का. “ रोहन, श्रुति को समझाते हुए कहा.
“ई नो डेठ . पर फिर भी तुम साथ रहते हो तो डर नहीं लगता है. “ श्रुति ने कहा. फिर उनके बीच बातों का सिलसिला रुक गया . थोड़ी देर के बाद रोहन ने देखा की श्रुति को नींद आ रही थी और भायते भायते सो रही थी . वो थोड़ा झूमती फिर संभाल जाती . वो थोड़ी देर ऐसे ही करती रही और जब उसे जागे रहना मुश्किल हो गया तो उसका सर अपने आप ही रोहन के कंधे पे आ गया. रोहन ने देखा की श्रुति बहुत गहरी नींद में जा चुकी थी. वो उसे ऐसे ही सोने देना चाहता था ताकि उसे कुछ आराम मिल जाए. इसके लिए उसने….​

(UPDATE -45)

सोचा की श्रुति उसके कंधे पे सर रख सोने की बजाए अगर उसके जांघो में सर रख सोएंगे तो ज्यादा बेहतर रहेगा. उसने धीरे धीरे श्रुति को अपने से थोड़ा दूर किया और उसके सर को अपने जांघो पर रख कर सुला दिया. श्रुति को ज़रा भी होश नहीं था की रोहन उसे अपनी जांघो पर सुलाया हुआ है क्योंकि वो इस वक्त नींद की गहराइयों में चली गयी थी. उस आग की रोशनी में रोहन ने श्रुति को फिर से देखने लगा. वो सोचने लगा “सोई हुई यह लड़की कितनी प्यारी लग रही है, बिलकुल परी जैसी.”.

फिर रोहन जब तक उसी पोज़िशन पे बैठा रहा जब तक की उसे पोज़िशन पर देर तक भायते रहने की वजह से उसे तक़लीफ़ होने लगी. पर हिलना नहीं चाहता था क्योंकि वो अगर ज़रा सा भी हिलेगा तो उसे डर था की कही श्रुति जग ना जाए. वो उसे ऐसे ही सोने देना चाहता था चाहे इसके लिए उसे कितनी ही तक़लीफें बर्दाश्त करनी पड़े. उसने तय कर लिया की अगर उसे सारी रात इसी तरह बैठना पड़े तो ऐसे ही पूरी रात बैठा रहेगा.

परवेज़ बड़ी देर से रेस्ट हाउस के बाहर बने चबूतरे पर बेचैनी से टहल रहा था. उसे रही रही कर रोहन के ऊपर गुस्सा आ रहा था. क्योंकि उसे गये हुए 3 घंटे से ज्यादा हो चुके थे और अभी तक उसका कुछ पता नहीं था. वो अपने ही मान में सोचे जा रहा था.
“साले को कितनी बार कहा की अकेला हीरो गिरी मत किया कर लेकिन साला मेरी बात मानता ही नहीं है. पता नहीं वो हराम खोर कहा मर गया है. अब तक तो साले को आ जाना चाहिए था. मुझे तो डर लग रहा है की कहीं वो उन लोगों से उसकी ज्यादा ही हाथापाई ना हो गयी हो. या फिर कहीं वही लोग उसे अपने क़ब्ज़े में ना कर लिए हो और उसे पकड़ कर फोरेस्ट रेंजर के हवाले कर दिए हो. अगर ऐसा हुआ तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी.” यही सब सोचता सोचता हुआ परवेज़ बड़ा बेचैन हो रहा था. उसने अपनी घड़ी में देखा तो रात का 9 बज रहा था. “ओफफ़ो!!! इतनी रात हो चुकी है और साला पता नहीं कहा मर रहा है. मोबाइल भी अपना यही भूल के गया है की उसे फोन कर सकूँ …एक काम करता हूँ भीमा को साथ लेकर उसकी तलाश में जाता हूँ देखु तो कुत्ता किधर है.

वो वहां से तुरंत भीमा को जगाने के लिए उसके रूम में गया. “भीमा !!!भीमा!!! ओह भीमा!! “
“जी ..जी ..सरकार.”भीमा झट से उठ कर भात ते हुए कहा.
“मेरे साथ चलो हमें रोहन को ढूंढ़ने जाना है.” परवेज़ ने भीमा को उठते हुए देखा तो बोला.
“ओह इसका मतलब रोहन बाबू अभी तक नहीं आए है.” भीमा ने अपनी अपनी आँखों से नींद भागते हुए कहा.
“हां वो अभी तक नहीं आया है. तभी तो तुम्हें जगाया है. अब जल्दी से तैयार हो जाओ और एक गाड़ी का इंतजाम करो.” परवेज़ ने कहा.
“पर सरकार अगर इस वक्त हम गाड़ी से निकलेंगे तो हमें फोरेस्ट रेंजर वाले रोकेंगे.” भीमा ने कहा.
“अरे यार यहां मेरा दोस्त पता नहीं कहा है और तुम फोरेस्ट रेंजर्स की बात कर रहे हो. अरे उन्हें कुछ भी कह देंगे.” परवेज़ थोड़ा च्चिदता हुआ बोला.
“एक मिनट रुको!! में सुशांत को फोन करता हूँ. वो कह रहा था की वो रात के 9 बजे तक आज्एगा.” परवेज़ अपने जेब से मोबाइल निकालते हुए कहा.
“हेलो!! हां सुशांत? कहा हो तुम?” परवेज़ मोबाइल पर सुशांत से बात करता हुआ कहा.
“में रेस्ट हाउस के बाहर ही हूँ. तुम कहा हो?” सुशांत ने दूसरी तरफ फोन पर कहा.
“ओह तुम आ गये. ठीक है तुम बाहर ही रुको . में बाहर ही आ रहा हूँ.” कहते हुए परवेज़ बाहर की और निकल गया.

रेस्ट हाउस के बाहर निकालने के बाद परवेज़ ने देखा की सुशांत एक सादे ड्रेस में उन लोगों का बाहर वेट कर रहा था.
“और परवेज़ भाई क्या हाल चाल है???” सुशांत , परवेज़ से हाथ मिलते हुए कहा.
“बहुत खराब हाल चाल है सुशांत. बहुत बड़ी गड़बड़ हो गयी है” परवेज़ भी सुशांत से हाथ मिलते हुए कहा.
“क्यों क्या हुआ? फोन पर तो तुम कह रहे थे की सब कुछ ठीक है तो फिर अचानक क्या प्राब्लम हो गयी? “ फिर सुशांत यहां वहां देखा फिर परवेज़ से कहा “और यह रोहन किधर है दिख नहीं रहा है?”
“यही तो गड़बड़ है.” फिर परवेज़ ने सुशांत को पूरी बात बता दी के कैसे वो लोग इस नेशनल पार्क में कुछ लड़कों को बंदी बनाकर लाए थे और फिर क्यों रोहन उनके पीछे
भागा और अभी तक वापस नहीं लौटा.
“हम….वास्तव में यह तो बहुत बुरी खबर है.” सुशांत भी चिंतित हो गया परवेज़ की पूरी बात सुनकर.
“इसलिए मुझे लगता है की हमें उसकी तलाश में जाना चाहिए. कही साले के साथ कुछ बुरा तो नहीं हुआ हो.” परवेज़ ने कहा.
“तुम ठीक कह रहे हो. हमें जाने चाहिए रोहन को ढूँदने के लिए.” सुशांत ने कहा. तब तक का भीमा भी वहां पर आ चुका था. वो तीनों ने मिलकर तय किया की वो कुछ….​

​

(UPDATE-46)

हथियारो के साथ में सुशांत की गाड़ी में बैठ कर रोहन की तलाश में जाएँगे. फिर कुछ देर बाद वो लोग निकल पड़े रोहन की तलाश पर उसी रास्ते पर चल दिए जहाँ पर रोहन उस गाड़ी का पीछा कर रहा था

रोहन की तलाश में वो बहुत दूर निकल आए थे पर अभी भी उन्हें कुछ ऐसा नहीं मिला जिससे उन्हें रोहन की उपस्थिति का कुछ पता चल पाता. पर जैसे ही उनकी गाड़ी अभी कुछ ही दूर गयी होगी के उन्हें दूर से एक पेड़ के पास कोई गाड़ी खड़ी हुई मिली.
“सुशांत वो देखो उस पेड़ के पास, कोई गाड़ी खड़ी है ? परवेज़ ने उस गाड़ी को देखते हुए कहा.
“हां सरकार में भी देख रहा हूँ. चलो देखते है की वहां क्या है.” भीमा गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे हुए बोला. फिर उनकी गाड़ी उस पेड़ वाली गाड़ी के पास पहुंच गयी. फिर जब परवेज़ ने गाड़ी को करीब से देखा तो उसे बड़ी हैरत हुई की यह तो वही गाड़ी है जिसके पीछे रोहन भागा था. वो अपनी गाड़ी को वही खड़ी करते है और उतार कर उस गाड़ी के पास जाने लगते है.
“ अरे यह क्या है? YYYYYएह्ह्ह…..तो कंकाल है …. .” परवेज़ ने चौंकते हुए कहा.
“हां सरकार इतनी सारी हड्डियों का ढाँचा ? किसका हो सकता है और इनकी यह ऐसे हालत किसने किए होगा ? कुछ समझ में नहीं आ रहा है.
तब तक सुशांत भी अपनी गाड़ी से उतार कर उन लोगों के साथ में शामिल हो गया.
“अरे यार यह तो उन्हीं लड़की लड़कों की गाड़ी है जिनका हम अगवा करके इस जंगल में आए थे और जिसका पीछा करने के लिए रोहन इनके पीछे भागा था . और फिर शायद यह सारे कंकाल उन्हीं के होंगे.” परवेज़ अपना सर पकड़ते हुए कहा.
“सरकार मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है.

इतनी सारी हड्डियाँ वो भी एक साथ जैसे की यह हद्ढियाँ ना हो बल्कि कोई लाश हो और उन लाशों पर से उनका किसी ने माँस उतार लिया हो .” भीमा ने कहा.
“लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की इन लोगों की इस तरह हत्या किसने की होगी. मुझे तो यह किसी जानवर का काम नहीं लगता है. क्योंकि कोई भी जानवर अपने शिकार को इस तरह और इतनी जल्दी उनका माँस नहीं खाता है. मुझे तो यह कोई और ही चक्कर लग रहा है” सुशांत ने उन सारे कंकालो का मुयएना करते हुए बोला.
“कोई और चक्कर लगता है? मतलब क्या है तुम्हारा?” परवेज़, सुशांत की बात पर चौंकते हुए कहा.
“मतलब यह की यह उन्हीं खूनी बंदारो का काम लग रहा है मुझे. जिनके बारे में मुझे अभी कुछ देर पहले पता चला था की कुछ बंदारो से दिखने वाले भयानक किस्म के जानवरों ने कालगरह के इलाके में कुछ लोगों पर हमला कर दिए है. और वो कोई आम सा होने वाला हमला नहीं था बल्कि उसके बारे में मैंने कुछ ऐसा ही सुना था जैसा में यहां पर देख रहा हूँ…..”थोड़े देर तक सुशांत उन दोनों के चेहरे की तरफ देखा, फिर अपनी बात जारी रखते हुए कहा.
“जैसा उत्पात उन जानवरों ने वहां पर मचाया हुआ था वैसा ही उन्होंने ने इन लोगों के साथ किया हुआ है.”
“ओह मेरे खुदा!!!! परवेज़ एकदम हैरत में पढ़ते हुए बोला.
“तभी में बोलू क्यों आज कल इस पार्क में फोरेस्ट ऑफिसर्स वाले इतनी चौकसी क्यों बढ़ा दिए है?”” भीमा ने कहा.
“लेकिन मेरी समझ में नहीं आ रहा है की यह किस तरह के जानवर है जो इतनी भयानक तरीके से इन सब को मौत के घाट उतार दिए.” परवेज़ ने कहा.
“यह तो तभी पता चलेगा जब हमारा भी उन सब से सामना होगा.” सुशांत ने कहा. लेकिन उससे पहले हमें रोहन को तलाश करना होगा……मुझे तो डर लग रहा है की कही वो भी इन्हीं कंकालो में से एक…….” अभी सुशांत अपनी पूरी बात खत्म भी कर पाया था की परवेज़ उसे टोकते हुए कहा.
“नहीं सुशांत!! इनमें से कोई भी कंकाल रोहन की नहीं हो सकती. वो इतनी आसानी से अपनी जान देने वालो में से नहीं है. बहुत बहादुर है. वो जरूर अपनी जान बचाकर यहां से भाग गया होगा या फिर अभी भी वो कही किसी मुसीबत में होगा. हमें जितनी जल्दी हो सके उसकी हेल्प करनी चाहिए. और उसे जल्द से जल्द ढूंढ़ना चाहिए.”
“आप ठीक कह रहे हो सरकार, हमें जल्दी से रोहन बाबू को ढूंढ़ना चाहिए.” कहते हुए भीमा उस खाई के नीचे से झाँके की कोशिश करने लगा. हालाँकि रात के अंधेरे में उसे कुछ ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था फिर भी भीमा ने देखा की ढलान से थोड़े ही नीचे कोई चीज़ पड़ी है. उसने फौरन परवेज़ और सुशांत को बुलाया.
“सरकार यहां आइये.” भीमा की आवाज़ सुनकर सुशांत और परवेज़ भाग कर वहां गये जहाँ से भीमा ने उसे आवाज़ दी थी.
“हां भीमा कहो क्या बात है?” परवेज़ भीमा के पास आते हुए बोला.
“सरकार आपको वहां कोई चीज़ दिख रही है.

उस झाड़ी से लटकी हुई चीज़ है.” भीमा उसे अपनी उंगली से ढलान की तरफ इशारे करते हुए कहा. परवेज़ ने भी उसी….

WRITER NOTE:-
hmmmm, so guys yaar aap log bilkul bhi support nhi kar rahe ho na review aa rahe na aur kuch ab to story ki starting bhi nhi ki jo lage starting me hota hai.
Story ke 46 update aa chuke aur review bas 2 ya 3 readers ke hi aate hai aage se review do aur update lo. Kyuki mene kayi threads pe dekha hai and i am not comparing myself with others 200 pages me 30 ya 40 update hai bas aur yaha 25 page me 46.
Kyuki mera bhi mann nhi karta jab thread khol ke dekhta hu kuch response hi nhi hai.

TO BE CONTINUED ??

(UPDATE-47)

दिशा में देखा और उसे भी कुछ दिखाई दिया.
“हां हां. कुछ तो लटका हुआ है वहां पर क्या है कुछ ठीक से दिखाई नहीं दे रहा है….रुको” अचानक परवेज़ ने कहा. “वो तो कोई बाइक जैसे चीज़ लग रही है बल्कि वो बाइक ही है और मेरे ख्याल से यह वही बाइक है जो रोहन अपने साथ ले गया था.”
“हां सरकार आप ठीक कह रहे है यह वही मोटरसाइकल है…अगर यह वही मोटर स्टाइल है तो वहां कैसे गिरी पड़ी है और रोहन बाबू कहा है?” भीमा ने कहा.
“यहां जरूर कुछ ना कुछ बहुत बुरा हुआ है भीमा.” परवेज़ ने घूम कर उन हड्डियाओं के ढाँचो को देखते हुआ कहा.
“मुझे लगता है भीमा की जब यहां पर कुछ हो रहा होगा तो तभी रोहन यहां आया होगा और जिसने भी यह तूफान मचाया हुआ होगा वो रोहन को बाइक समेट उस ढलान के नीचे फेंक दिया होगा” परवेज़ ने कहा.
“पर मुझे नहीं लगता की इस खाई में गिरकर रोहन सही सलामत होगा.” सुशांत ने कहा.
“वो तो ठीक है सुशांत पर हमें उम्मीद नहीं छोड़ना चाहिए..” परवेज़ ने कहा.
“आप ठीक कहते हो सरकार, हमें रोहन बाबू को तलाश करना चाहिए.” भीमा ने कहा.
“भीमा तुम एक काम करो अपने सारे आदमियों को इकहत्ता करो और फिर हम सब उस ढलान के नीचे जाकर देखेंगे की रोहन कहा है.” परवे ने कहा. पर भीमा कुछ अजीब सी स्थिति में था इस वक्त . उसे असमंजस की स्थिति में देखकर परवेज़ ने जल्दी से कहा.
“भीमा जो पैसे तुम्हें जानवरो के शिकार के लिए मिला रहा था उतना ही पैसा में तुम्हें रोहन की तलाश करने में दूँगा . तुम बस जल्दी से जाकर अपने आदमियों को इकहट्टा करो.”
“अरे सरकार कैसे बात करते है आप? क्या रोहन के लिए में इतना भी नहीं कर सकता. सरकार बात पैसे की नहीं है बल्कि में यह सोच रहा हूँ इतनी रात को और इतनी जल्दी में इतने सारे आदमियों को कहा से लाओं. अब जो भी मुझे मिलेंगे वो सुबह ही मिलेंगे.” भीमा ने परवेज़ को समझाते हुए कहा.
“सुबह तक हम रुकेंगे तो पता नहीं रोहन के साथ और क्या क्या बुरा हो जाए. नहीं भीमा तुम्हें कैसे भी करके अभी और इसी वक्त अपने आदमियों को जमा करो.” परवेज़ ने कहा.
“सरकार समझा करो, हमें इस वक्त इतने सारे आदमी नहीं मिल सकते. जैसे ही सुबह होगी में फौरन सबको जमा करूँगा और रोहन बाबू की तलाश में हम सब निकल जाएँगे.” भीमा , परवेज़ को समझाते हुए कहा.
“भीमा ठीक कह रहा है परवेज़, इतनी रात को कोई भी आदमी नहीं मिलेगा इस वक्त.

में क्या कहता हूँ क्यों ना हम ही इस खाई के नीचे जाकर देखे की इस वक्त रोहन कहा पर होगा?” सुशांत ने परवेज़ को समझते हुए कहा.
“हम…….शायद तुम ठीक कह रहे हो. लेकिन हम जाएँगे कैसे नीचे?”
“उसकी चिंता तुम मत करो. मुझे दूसरा रास्ता पता है, हम वही से चलेंगे.” सुशांत ने कहा.
“पर सरकार एक दुविधा अभी भी है.” भीमा ने कहा.
“क्या? सुशांत, भीमा की तरफ देख कर सिर्फ़ इतना कहा.
“सरकार अगर रोहन बाबू को ढूंढ़ने नीचे जाते है तो मान लो की हमारा भी सामना उन जानवरो से हो गया जिन्होंने इन लोगों का यह हश्र किया है तो वो हमारा क्या हाल करेंगे. मेरा कहने का मतलब यह है की अगर हम अपने साथ कुछ और हथियार वगैरह ले जाए तो बेहतर होगा.” भीमा ने कहा.
”देखो भीमा हमारे पास इतना टाइम नहीं है की हम कुछ और हथियारो के इंतजाम के लिए रोहन की जान को और खतरे में डाले. हमारे पास जो कुछ है हमें उन्हीं से काम चलना पड़ेगा. फिर परवेज़ थोड़ा रुक कर फिर से बोला “ और दूसरी बात भीमा अगर तुम्हें डर लग रहा है तो तुम वापस जा सकते हो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं होगा .”
”नहीं सरकार आप तो नाराज़ हो गये. ऐसी कोई बात नहीं है की में डर गया. में तो बस इतना कहना चाह रहा था की हमें हमारी हिफ़ाज़त का कुछ अच्छा इंतजाम कर लेना चाहिए. बाकी आप लोगों की मर्जी.”
“नहीं भीमा! तुम फिक्र मत करो. हमारे पास जो भी कुछ है काफी है. फिर भी तुम्हें अगर हमारे साथ नहीं आना है तो तुम जा सकते हो.” सुशांत ने कहा.
“नहीं में वापस नहीं जाऊंगा. में रोहन बाबू को ढूँदने में आप लोगों की मदद जरूर करूँगा. रोहन बाबू का हम पर बहुत बड़ा उपकार है. अगर उन्हें बचाने में मेरी जान भी चली जाए तो कोई घाम नहीं.” भीमा ने कहा.
“ऐसी बात है तो चलो फिर” परवेज़ ने कहा. फिर हूँ तीनों निकल पढ़े रोहन की तलाश में.

श्रुति की नींद सुबह सुबह पख़्शियों के चाहचाने से खुली. थोड़ी देर तक तो उसे समझ में नहीं आया की वो कहा है. फिर जब उसने देखा की उसका सर रोहन के झांग पर है तो हड़बड़ा के उठ गयी. रोहन भी देखा की श्रुति अचानक हड़बड़ा के उठ भाती थी.
“अरे क्या हुआ? नींद हुई तेरी पूरी.” रोहन ने श्रुति की तरफ देखा.
“में कब सोई गयी थी मुझे तो पता ही नहीं चला. और सुबह भी हो गयी . में कितनी देर….​

(UPDATE-48)

तक सोई हुई थी.?” श्रुति ने रोहन का सवाल का जवाब ना देते हुए सब कुछ एक ही झटके में कह डाला.
“यही कोई साथ घंटा.” रोहन ने जवाब दिया.
“साथ घंटा? में साथ घंटे तक सोई थी और मुझे पता भी नहीं चला? और…..तुम साथ घंटे तक ऐसे ही भायते रहे थे.?” श्रुति ने हैरत में पढ़ते हुए कहा. रोहन ने जवाब में कुछ नहीं कहा बस धाम से वही ज़मीन पर लेट गया. उसकी कमर और पीठ सात घंटे तक एक ही पोज़िशन में बैठे रहने से दुखने लगी थी.

श्रुति फिर रोहन से पूछने लगी
“तुम रियली ऐसे ही साथ घंटे तक सोए थे ?”
“तुम्हें क्या लगता है?” रोहन ने कहा.
“ई डोंट बिलीव इट” तुम सात घंटे तक ऐसे ही बैठे थे? मुझे उठा देते यूँ एक ही पोज़िशन में इतना लंबा बैठने की क्या जरूरत थी” श्रुति ने कहा.
“कोई बात नहीं. मैंने कोई बड़ा काम नहीं किया है. मुझे आदत है इतनी तक़लीफ़ उठाने की और वैसे भी तुम ताकि हुई थी और जख्मी भी थी इसलिए मैंने सोचा की अगर तुम थोड़ा सो जाओगी तो तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा.” रोहन, श्रुति से कहने लगा. श्रुति को विश्वास नहीं हो रहा था जिस आदमी की वजह से उसकी यह हालत हुई थी वही आज उसके लिए इतनी तक़लीफ़ उठा रहा था. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो कैसे शुक्रिया अदा करे. फिर भी उसने कहा.
“एनीवे थॅंक्स!! “मुस्कुराते हुए श्रुति, रोहन का शुक्रिया अदा करने लगी. रोहन और श्रुति जब तक साथ में थे यह पहला मौका जब श्रुति ने उसकी तरफ मुस्करा कर देखा था.
“अब यह थेन्क यू वंकयौ रहने दे और यह बता तेरा पैर कैसा है? “
“अब थोड़ा ठीक है” श्रुति अपने पैर की एडी दिखाते हुए कहा जो वास्तव में उसके पैर की सूजन कम हो गयी थी.
“तो तू चल सकती है अभी?” रोहन ने कहा.
“हम…”श्रुति ने बस इतना ही कहा.
“तो ठीक है चलते है फिर.” रोहन अपनी जगह से खड़े होते हुए बोला.
“क्या हमें उसी ढलान पर चलना होगा?” श्रुति ने थोड़ा चिंतित स्वर में कहा.
“हां उसी ढलान पर चलना होगा पर, तू घबरा मत में तेरी मदद करूँगा चढ़ने में.” रोहन ने कहा.
“ओके ठीक है चलो.” श्रुति भी अपनी जगह से खड़े होते हुए बोली. उसके पैर का दर्द तो तदोआ कम हो गया था पर इतना भी कम नहीं हुआ था. उसे अब भी चलने में कठिनाइया हो रही थी. पर इस बार वो कोशिश कर रही थी वो बिना रोहन के सहारे चले. हालाँकि पहले की तरह उसका गुस्सा रोहन पर से थोड़ा कम हो गया था पर भी वो रोहन से थोड़ा दूरी बनाना चाहती थी.
“तुम्हारे अंदाज़े से कितना देर लगेगा हमें वहां तक पहुंचने में?” श्रुति ने रोहन से कहा.
“यही कोई डेढ़ दो घंटा.” रोहन बस इतना कहते हुए आगे बढ़ने लगा. उन्हें चलते हुए कुछ एक घंटा हुआ होगा तभी वो एक नदी के पास पहुंचे तो श्रुति ने रोहन से कहा.
“सुनो!! थोड़े देर यही पर रुक जाते है, मुझे थोड़ी थकान भी लग रही है.” श्रुति ने कहा.
“ठीक है “ कहते हुए रोहन वहां पर एक बारे से पत्थर के ऊपर बैठ गया. वो दोनों अभी एक नदी के किनारे बैठे हुए थे और अपनी थकान मिटा रहे थे. पर वो इस बात से अंजान थे की उनके पीछे नदी के अंदर से एक मौत उनकी तरफ धीरे धीरे तरफ रही है. पहले तो रोहन का ध्यान उस और नहीं गया था पर, जब उसने देखा की नदी के अंदर से कोई चीज़ उनकी तरफ तरफ रही है. उसे उस वक्त समझ में नहीं आ रहा था फिर वो चीज़ ज़रा और करीब आई और श्रुति के करीब पहुँची तो उसे समझ में आ गया था की वो क्या चीज़ है.

उसने देखा की एक मगरमच्छ (क्रॉकडाइल) अपना जबड़ा फाड़े श्रुति की तरफ तरफ रहा था. रोहन फौरन जूते में फँसे हुआ खंजर निकाला और श्रुति की तरफ बढ़ा और उसका हाथ पकड़ उसे उठाया और एक तरफ कर दिया फिर उस मगरमच्छ पर झपट पढ़ा.
श्रुति की तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था की अचानक यह आदमी हाथ में खंजर लिए उसे धकेल कर क्या करने जा रहा था. लेकिन जब उसने देखा की रोहन एक मगरमच्छ पर अपने खंजर से हमला कर रहा है तो यह देख कर उसकी चीख निकल गयी. उसने देखा की रोहन उस मगरमच्छ पर अनगिनत वार किए जा रहा था. वो एक दम घबरा गयी थी और दहशत के मारे थर थर काँप रही थी. एक के बाद एक मुसीबत से वो एक दम निढल हो गयी थी. फिर थोड़ी देर के बाद रोहन उस मगरमच्छ को मौत के घाट उतार कर श्रुति की तरफ पलटा. उसने देखा की श्रुति थर थर काँपे जा रही थी. फिर वो श्रुति के करीब गया और उससे कहने लगा.
“घबरा मत वो अब मर चुका है.” पर रोहन के समझने पर भी श्रुति रोए जा रही थी. क्योंकि इससे पहले उसने अपनी जिंदगी में मौत को अपने इतने करीब कभी नहीं देखा था. मगर कल से उसे ना जाने कितनी…​

UPDATE-49)

बार मौत का सामना करना पढ़ रहा था. फिर भी रोहन ने कैसे कैसे कर के श्रुति को समझाया और उससे कहना लगा.
“देख अभी ज्यादा रोने ढोने से कोई फायदा नहीं होगा. यह जंगल है और इस तरह की चीज़ें यहां पर होती रहती है. और हम उन भयानक जानवरो से भी घिरे हुए है. समझ लो की पल पल हम मौत के साए में जी रहे है. इस तरह रोने से बात नहीं बनेगी बल्कि हमें इस जंगल से जल्द से जल्द निकालने के बारे में सोचना होगा. और इसके लिए तुझे हिम्मत से काम लेना होगा. समझी?” श्रुति को रोहन समझते हुए कहा. श्रुति ने अपने जबान से कुछ नहीं कहा बस अपने सर से हामी भारी.
वो दोनों फिर आगे बढ़ने लगे और इस जंगल से निकालने का रास्ता तलाश करने लगे. पर वो अभी जिस रास्ते से चल रहे वो रास्ते में थोड़ा ढलान था और उसमें थोड़ा कीचड़ भी था जिसकी वजह से दोनों को चलने में दुश्वारी हो रही थी. रोहन पलट के देखना चाहता था की श्रुति कैसे चल रही है इस रास्ते से. वो श्रुति की तरफ अपना हाथ बढ़ने लगा ताकि उसे सहारा दे सके पर, जैसे ही उसने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया था की अचानक उसका दाया पैर कीचड़ की वजह से फिसल गया और रोहन अपना संतुलन खोते हुए वहां पड़े एक पत्थर पे जा गिरा और बेहोश हो गया क्योंकि उसका माता उस पट्तर से टकरा गया था जिसके वजह से वो अपना होश खो बैठा था. रोहन को गिरता देख श्रुति उसके पास गयी और उसे हिलाने लगी.
“तुम ठीक हो?? ओह हेलो……जब रोहन कुछ नहीं बोला तो श्रुति ने उसे फिर से हिलाने लगी.
“आए उठो…..क्या नाम है इसका? श्रुति सोचने लगी की इतनी देर तक दोनों साथ में है और वो दोनों एक दूसरे का नाम भी नहीं जानते है.
“क्या हुआ तुम्हें……तुम ठीक हो….

?” जब इतना हिलाने पर भी रोहन कुछ जवाब नहीं दे रहा तो था श्रुति समझ गयी यह बेहोश हो गया है.
“ऑफ हो अब यह एक नयी मुसीबत. अब में क्या करूं? कैसे इसे उठाओ? श्रुति सोचने लगी. अभी वो ऐसे ही सोच ही रही थी की अचानक बदल गरजने लगे.
“ओह नो!! यह तो बारिश होने वाली है. शीत!!!! अब यही बाकी था. श्रुति आसमान की तरफ देख कर कहने लगी. उसके कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे की तभी एक दम से ज़ोर ज़ोर से बरसात होने लगी. श्रुति भाग कर एक पेड़ के नीचे जाकर अपने आपको बारिश में भीगने से अपने आपको बचाने लगी. फिर उसने देखा की वो तो इस पेड़ के नीचे आकर अपने को जैसे तैसे कर के बच्चा लिया है पर वहां पड़ा हुआ वो बेहोश आदमी भीग रहा है.उसे महसूस हुआ की एक तो ऐसे ही इतनी ठंड है और ऊपर से यह बारिश, अगर यह आदमी ऐसे ही भीगता रहा तो उसे कुछ हो ना जाए या बीमार ना पढ़ जाए. वो कुछ देर तक ऐसे ही सोचते रही फिर जब उसने देखा की रोहन वहां पड़े पड़े भीग रहा है तो वो आगे बढ़ी और उसे खींचने लगी. पहले तो उसने उसका पैर पकड़ कर खींचना चाहा पर ऐसा करने से रोहन के सर पर घसीटने से कही चोट ना लग जाए उसने उसे हाथ से पकड़ कर खींचे लगी. मगर ऐसा करने में उसे काफी खातिनआइओ का सामना करना पढ़ रहा था. एक तो रोहन का लंबा चौड़ा बदन जो 80 से 85 किलो तक होगा उसे खींचना और ऊपर से वो घायल भी थी. फिर भी हिम्मत करके वो उसे उस पेड़ के नीचे ले आई और ऐसा करने में वो भी पूरी तरह भीग चुकी थी. अब बरसात पहले से भी ज्यादा तेज हो गयी थी इसलिए वो पेड़ भी उन्हें बारिश के पानी से बच्चा नहीं पा रहा था. मगर श्रुति के पास वही काढ़े रहने के अलावा कोई चारा नहीं था. मगर उसके लिए प्राब्लम यह थी के अगर वो इसी तरह यहां खड़ी रही तो भीग कर वो और यह जो बेहोश पढ़ा हुआ है कही बीमार ना पढ़ जाए. उसने सोचा की उसे जल्द से जल्द कोई सूखी जगह तलाश करनी होगी . पर उसके लिए प्राब्लम यही थी के ऐसे जंगल में उसे सूखी जगह कहा से मिलेगी. फिर भी कुछ देर ऐसे ही भीगते रहने के बाद उसने यहां वहां नज़र अपनी दौड़ाने लगी, फिर थोड़ा आगे जाकर भी उसने देखा पर उसे ऐसा कुछ नज़र नहीं आ रहा था की तभी अचानक उसे थोड़े ही दूर पर एक कुतिया जैसा कोई घर नज़र आने लगा. वो खुश हो गयी और सोचने लगी की चलो कुछ तो यहां मिला इस जंगल में. वो फौरन रोहन के पास गयी और उसका खंडा पकड़ के उसे घसीटते हुए वो उसे उस घर के पास ले जाने लगी.

परवेज़! इधर देखो…” सुशांत, परवेज़ को कोई चीज़ दिखाते हुआ बोला.
“क्या बात है सुशांत? क्या हुआ? “ परवेज़ भी उसी दिशा में देखता हुआ सुशांत से कहा. सुशाण टॉर्च की रोशनी में परवेज़ को कुछ दिखाते हुए….​

(UPDATE-50)

बोला
“यह देखो खून है किसी का!! और यह खाई का वही हिस्सा है जहाँ से रोहन की बाइक गिरी थी. इसका मतलब अगर रोहन खाई से गिरा होगा तो यही पर होना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं है.

सिर्फ़ उसका खून है जिसका मतलब या तो रोहन यहां से जा चुका है या फिर कही वही जानवर उसे नुकसान ना पहुंचाए हो.” सुशांत ने कहा.
“मुझे नहीं लगता की रोहन बाबू को वो जानवर ने जान से मारा होगा, क्योंकि अगर ऐसा होता तो यहां रोहन बाबू की लाश नहीं बल्कि उनका कंकाल मिलता. जैसा हमें वहां इस खाई के ऊपर मिला था.” भीमा ने कहा.
“हम…..मुझे भी यही लगता है सुहंत. जिस तरह हूँ जानवर अपने शिकार का शिकार करते है उस हिसाब से हमें हड्डियों का ढाँचा मिलना चाहिए था, लेकिन यहां ऐसा नहीं है इसका मतलब रोहन अभी भी ज़िंदा है. और अगर वो ज़िंदा तो इसका मतलब इतनी उँचाई से गिरकर वो जख्मी हालत में होगा. हमें जल्द से जल्द उसे ढूंढ़ना होगा. लेकिन समझ में नहीं आता की उसे ढूंडे कहा.” कहता हुआ परवेज़ खामोश हो गया.
“एक रास्ता है.” कहते हुए सुशांत उस खून वाली जगह पर टॉर्च की रोशनी डालने लगा. “यहां देखो! इन खून की बूँदो को. ऐसा लगता है जब रोहन घायल हुआ होगा तो यही से आगे बढ़ा होगा. तभी तो यह खूनी की बूंदें आगे की और जा रही है. हमें इसी के सहारे आगे चलना चाहिए.”
“तुम ठीक कह रहे हो. चलो देखते है यह खून की भूंडे कहा तक ले जाती है.” परवेज़ ने कहा. फिर वो उसी दिशा में जाने लगे जिधर वो खून की बूँदें उन्हें ले जा रही थी, की तभी भीमा ने उन्हें रोकते हुए कहा.
“सरकार वो देखिए उधर कुछ है.” कहते हुए भीमा उधर ही जाने लगा. भीमा ने देखा की वो किसी जानवर की लाश थी. पहले तो वो थोड़ा घबराया ऐसे भयानक जीभ को देखकर. फिर वो ज़रा संभाला तो उसने देखा की उस जीभ के बारे बारे दाँत, लंबे नाखून, पूरे शरीर पर बाल. शकल से वो एक बंदर लग रहा था. सुशांत और परवेज़ भी उसी जीभ को देख रहे थे. उन्हें भी बड़ी हैरत हो रही थी ऐसे जानवर को देखकर जिसे उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं देखा था.
“यह क्या चीज़ है? कितना भयानक चेहरा है इसका. ऐसा लग रहा है जैसे की यह कोई शैतान हो.” परवेज़ ने कहा.
“यह समझ लो की यह शैतान ही है. जैसा मैंने सुना था और वहां उस खाई के ऊपर जो देखा की इसने कैसे अपने शिकार का शिकार किया है. ऐसा तो कोई शैतान ही कर सकता है.”
“लेकिन इस शैतान को आख़िर किसने मारा होगा. कौन इतनी हिम्मत कर सकता है इसे मारने की?” भीमा ने कहा.
“और कौन करेगा भीमा? मेरा यार रोहन ही कर सकता है. उसी की ही बस की बात है इस भयानक जीभ से पंगा लेने की.” परवेज़ ने कहा.
“अगर इसे रोहन ने मर गिराया है तो इसका मतलब रोहन सौ फीसद अभी ज़िंदा है.”
“में न तो पहले से ही कह रहा था, रोहन इतनी आसानी से अपनी जान देने वालो में से नहीं है. वो जानता है मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों से कैसे निकला जा सकता है. आज मुझे गर्व हो रहा अपने इस दोस्त पर की रोहन मेरा दोस्त है.” रोहन की बहादुरी के कारनामा देख कर मानो परवेज़ का सीना चौड़ा हो गया था.

“हूँ तो ठीक है परवेज़ , लेकिन रोहन होगा किधर इस वक्त. ऐसा तो है नहीं की उसे रेस्ट हाउस का रास्ता पता ना हो. जितना तुम, में और भीमा जानते है इस जंगल के बारे में रोहन भी तो उतना ही जानता है. तो सवाल यह पैदा होता है की अगर उसने इस जानवर को मर गिराने के बाद वापस रेस्ट हाउस पर जाने की बजाए कहा गया. क्योंकि जैसा तुम कह रहे थे की उसे निकले तकरीबन तीन घंटे से ऊपर हो चुका था तो इसका मतलब उसे तब तक वहां रेस्ट हाउस पर पहुंच जाना चाहिए था. लेकिन वो वहां पर नहीं पहुंचा था जब हम वहां पर थे. तो फिर से मतलब यही निकलता है की रोहन अभी भी खतरे से बाहर नहीं गया है. वो अभी भी मुसीबत में है.” सुशांत ने कहा.
“हां सरकार, सुशांत साहिब सही कह रहे है. रोहन बाबू को तो तब तक पहुंच जाना चाहिए थे. कहा होंगे वो इस वक्त.” भीमा ने कहा.
“मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है की उसे कहा तलाश करे. तुम्हीं कुछ बताओ सुशांत कहा ढूंढ़ना चाहिए हमें रोहन को.” परवेज़ ने कहा.
“अब यही तो समस्या की कैसे उसे ढूंढ़ा जाए. एक तो इतना अंधेरा है और ऊपर से खून की बूँदें काफी मद्धम पड़ चुकी है इसलिए हमें आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है.” सुशांत खून की बूँदों पर आस पास टॉर्च की रोशनी से रास्ता तलाश करनी कोशिश कर रहा था.
“लेकिन मेरी समझ में नहीं आ रहा है की रोहन जा कहा सकता है. जब हूँ इस भयानक जानवर को मर गिरा सकता है तो वो इतना सहतमंद तो जरूर होगा की….

(UPDATE-52)

हो गया सुशांत? कैसे जानवर थे वो? इतने भयानक?” परवेज़ अपनी साँसें बेहाल करते हुए सुशांत से कहने लगा.
“मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है. मुझे तो एक पल ऐसा लग रहा था की जैसे मेरे पैरों में जान ही ना हो.” सुशांत ने कहा.
“अब क्या करे सुशांत?” परवेज़ ने कहा.
“रुको यार थोड़ा साँस तो लेने दो.” सुशांत थोड़ी देर तक ऐसे ही खड़े खड़े अपने आपको संभालने लगा. “मुझे तो भीमा की मौत पर अफ़सोस हो रहा है. बेचारा पहले ही हमारे साथ आने से कटरा रहा था. हम ही ने उसे फोर्स करके अपने साथ बुला लिया और देखो, क्या हो गया उसके साथ.” सुशांत ने कहा.
“हम भी क्या कर सकते थे. हमें थोड़े ही पता था की हमारा पाला किससे पढ़ने वाला है. ऐसा खतरनाक जानवर मैंने अपनी पूरी लाइफ में नहीं देखा. पता नहीं क्या चीज़ थी.” परवेज़ ने कहा.
“खैर जो हो गया सो हो गया. अब हमें अपनी जान की फिक्र करनी चाहिए. पता नहीं साले फिर किधर से टपक जाए. जितनी जल्दी हो सके हमें यहां से निकलना होगा और फिर रेस्ट हाउस पहुंच कर मुझे अपने हेडक्वॉर्टर में इत्तिला देनी पड़ेगी की कैसे कैसे खूओकार जानवर यहां घूम रहे है. अगर इन्हें जालीद नहीं रोका गया तो यह कोहराम मचा देंगे.” सुशांत ने कहा.
“लेकिन सुशांत , रोहन का क्या होगा? क्या हम उसे ऐसे ही चोद दे इन हैवनो के हाथों में.” परवेज़ ने कहा.

“हम कुछ भी नहीं कर सकते परवेज़. हम उनका अकेले मुकाबला नहीं कर सकते. हमें मदद बुलानी होगी तभी हम रोहन की जान बच्चा सकते है. तुम्हीं ने तो कहा था की रोहन इतनी आसानी से हार मानने वालो में से नहीं है. हो सकता है की रोहन अब भी उनका कही मुकाबला कर रहा हो. में पूरी फोर्स लेकर आएँगे और रोहन की तलाअश में लग जाएँगे.” सुशांत ने परवेज़ को समझाया. परवेज़ और भी कुछ कहना चाह रहा था लेकिन उसे भी यही लग रहा था की सुशांत जो बोल रहा है ठीक ही बोल रहा है. वो दोनों अकेले मिल कर उन दरिंदो का मुकाबला करके रोहन को नहीं ढूँढ सकेंगे. आख़िर में दोनों ने यही फैसला किया की हूँ रेस्ट हाउस पहुंच कर और फोर्स माँग कर उनकी मदद से रोहन को तलाश करेंगे. वो चाहते तो वही से अपने अपने मोबाइल फोन से भी मदद मंगवा सकते थे पर उन्हें जंगल होने की वजह से कोई नेटवर्क नहीं मिल रहा था.

श्रुति थोड़ी देर बाद बड़ी मेहनत से रोहन को उस घर में ला पाई. उसका दम फूलने लगा था उसे घसीट कर यहां लाने पर. उसने रोहन को वही घर के अंदर छोडा और अपनी साँसें बेहाल करने लगी.थोड़ी देर वो ऐसे ही खड़ी रही, फिर जब उसकी साँसें बेहाल हुई तो उसने उस घर के मालिक की तलाश में उस घर का मुआईना करने लगी. उसने देखा की वो एक छोटा सा घर था जिसमें दो कमरे थे. पहले वाले कमरे में सब कबाड़ का ही सामान रखा हुआ था. फिर वो अंदर वाले कमरे में गयी तो उसने देखा की वहां पर एक पलंग है जिस पर एक चादर बिकचा हुआ था. उसने करीब जाकर उस पलंग को देखा तो उसपर जो चादर बिछा हुआ था वो एक दम गंदा हुआ था धूल से .उसे ऐसा लगा के जैसे कई दीनों से पलंग के ऊपर बिछा हुआ चादर ऐसे ही पड़ा है. और आस पास भी हर एक सामान पर धूल जमी हुई थी जैसे यहां कोई कई दीनों से आया ही नहीं है और यह घर भी लगता है ऐसे ही टेबल से खाली पढ़ा हुआ है.

तभी उसे रोहन का ख्याल की वो तो उसे वही बाहर वाले कमरे में चोद कर आई है. उसे फौरन ध्यान आया की अगर वो ऐसे ही गीले कपड़े में रहेगा तो यक़ीनन बीमार पढ़ जाएगा लेकिन, फिर अचानक उसे ख्याल आया की वो उसके कपड़े कैसे बदलेगी क्योंकि वो एक मर्द है और वो एक औरत. उसे पहले थोड़ा अटपटा लग रहा था की वो कैसे उसके कपड़े बदले और दूसरे उसे अपना स्टेटस का भी ख्याल आ रहा था की उसने आज तक अपने खुद के गंदे कपड़े को छ्छूवा तक नहीं है तो उसके कीचड़ से साने हुए कपड़े कैसे निकालेगी. उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी ऐसा काम करने को पर उसे ख्याल आया की अगर वो उसके कपड़े नहीं बदलेगी तो वो बीमार पढ़ जाएगा. और अगर वो बीमार हो गया, तो वो अकेली बिना इसकी मदद से इस जंगल से कैसे बाहर निकलेगी.यही सब सोचते हुए वो रोहन के पास गयी और उसे फिर से खड़े से पकड़ कर अंदर वाले कमरे में जहाँ पलंग रखी हुई थी लाने लगी.

फिर उसे ख्याल आया की अगर वो उसके कपड़े ुआटरेगी तो उसे दोबारा क्या पहनाएगी. ऐसे नंगे तो नहीं चोद सकती है उसे. कुछ ना कुछ तो पहनना पड़ेगा इसे. वो यहां वहां देखने लगी की शायद इस घर में जो रही रहा था उसका कोई पुराना कपड़ा पड़ा हो पर उसे ऐसा कोई कपड़ा नहीं दिखा. तभी….

(UPDATE-51)

रेस्ट हाउस तक पहुंच जाए. पर उसने ऐसा ना करने की बजाए कही और चला गया. पर क्यों???” परवेज़ अब भी सवालों के घेरे में घिरा हुआ था.
“हो सकता है सरकार, की इस जानवर को मारने के बाद उन्हें कोई और जानवर दिख गया हो या फिर वो उन्हें मारने की कोशिश कर रहा हो. और वो उसी से बचते बचाते हुए कही दूर निकल गये होंगे.” भीमा ने शंका जाहिर की.
“हम……मुझे भी कुछ ऐसा ही लग रहा है. खैर यहां खड़े रहने से और बातें करने से कोई फायदा नहीं होगा. बल्कि हमें आगे बढ़ना चाहिए. मेरे ख्याल से हमें इस खाई की और आगे बढ़ना चाहिए जहाँ से इसकी ढलान कम होती होगी. हो सकता है रोहन यही सोच कर आगे बढ़ा होगा की ढलान अगर कम हो जाए तो रोड पर जाकर किसी की मदद माँग लेगा.”
“ठीक है जैसा तुम ठीक समझो” परवेज़ ने कहा.
फिर वो तीनों उसी दिशा की और बढ़ने लगे. अभी वो कुछ देर ही आगे तरफ पाए थे की तभी, भीमा को अपने डायन और की झाड़ियों में जैसे कुछ सुरसूराहट सी आवाज़ आने लगी. पहले तो उसने अपना वहाँ समझ कर कोई ध्यान नहीं दिया. लेकिन कुछ दूर और आगे बढ़ने पर उसे फिर वही सुरसूराहट दोबारा सुनाई दी तो हूँ ठिठक कर रुक गया. और उस झाड़ियों की और देखने लगा.
“क्या हुआ भीमा?” भीमा को अपने पीछे ना आता हुआ देख कर परवेज़ ने उससे पूछा.
“स्शह……” भीमा अपनी उंगली से परवेज़ को खँसो रहने के लिए कहा और अपने हाथ के इशारे से बताने लगा की वहां पर कुछ है. सुशांत भी देख लिया था की भीमा रुक गया है और उस झाड़ियों की और देख कर किसी के होने का इशारा कर रहा है. भीमा के इशारा करने पर सुशांत और परवेज़ अपनी अपनी गुण संभाल लिए और उसी झाड़ियों की तरफ बढ़ने लगे. अभी वो तीनों कुछ ही दूर गये थे की तभी उन्हें कुछ लाल सी रोशनी सा दिखा. यह देख कर वो रुके और सोचने लगे की यह क्या चीज़ है. वो अभी कुछ समझ पाते की इससे पहले हूँ लाल रोशनी आगे की और बढ़ने लगी. जब हूँ लाल रोशनी उनके कुछ करीब आई तो उन्हें पता चला की वो कोई लाल रोशनी नहीं थी बल्कि वो लावे से भारी हुई आँखें थी. और उस आँखों का मालिक कोई और नहीं वैसा ही एक दरिन्दा था जिसे उन्होंने वहां पर मारा हुआ पाया था. उन्हें उस वक्त वो दरिन्दा मारा हुआ जितना भयानक लग रहा था उससे कही ज्यादा उन्हें वो वहशी, ज़िंदा रहते हुए लग रहा था. वो दरिन्दा अब उन्हीं की और तरफ रहा था उन्हें अपना अगला शिकार बनाना के लिए. उसे अपनी तरफ बढ़ता देख भीमा की चीख निकल गयी.
“यययययएह….कयययया…हाीइ…हे भगवान. बचाऊओ….

” चिल्लाता हुआ भीमा अपनी उल्टी दिशा में भागने लगा लेकिन, उसे भागने का कोई मौका ही नहीं मिला क्योंकि, वो वहशी दरिन्दा अपने मुंह से एक भयानक दहाड़ निकालते हुए भीमा को अपने तेज नाखूनओ वाले पंजे से पकड़ा और झट से उसकी गर्दन उसके धड़ से आज़ाद कर दिया. भीमा को तो अपनी मौत का मातम करने का भी समय नहीं मिला. परवेज़ और सुशांत तो मानो एकदम सुन्न से हो गये थे, जैसे उनके बदन में कोई खून ही ना हो. अभी वो दरिन्दा भीमा को चियर फाड़ ही रहा था की सुशांत को जैसे होश आ गया की उसने अभी अभी क्या देखा है और भीमा के साथ क्या हुआ है. उसे ख्याल आया की अगर हूँ ऐसे ही खड़ा रहा तो यह हैवान उन्हें भी नीवाला बना देगा. उसने जल्दी से अपनी गुण उस दरिंदे की और तानी और निशाने लेते हुए उस दरिंदे के दिमाग में गोलियाँ दागने लगा. वो जब तक गोलियाँ चलता रहा जब तक वो दरिन्दा मर नहीं गया. कुछ देर जब उसे लगा की यह मर गया है तो वो गोलियाँ चलना बंद कर दिया. दहशत के मारे परवेज़ और सुशांत के मुंह से कोई आवाज़ ही नहीं निकल रही थी. वो दोनों एक दूसरे की और देख रहे थे. मानो पूंछ रहे हो की यह एकदम से क्या हो गया…अभी उन्हें संभालने का वक्त भी नहीं मिला था की तभी परवेज़ ने देखा की सुशांत से थोड़ी दूरी पर दो वही वहशी दरिंदे दहाड़ते हुए आ रहे है. सुशांत भी उनकी दहाड़ सुनकर पलटकर देखने लगा उन हैवानो को. एक पल के लिए वो फिर से वही जम सा गया की तभी….परवेज़ ने चिल्लाकर कहा.
“सुशांत भागो….जल्दी…हम उनका मुकाबला अपनी बंदूक से नहीं कर पाएँगे. जितनी जल्दी हो सके भागो यहां से..” परवेज़ की आवाज़ सुशांत के कानों में पढ़ते ही जैसे उसके पैर में जान आई हो और फिर वो भी परवेज़ के साथ में भागने लगा. वो दोनों इतनी तेजी से भाग रहे थे जैसे वो मॅरतॉन दौड़ रहे हो. जैसे उन्हें अव्वल आना हो. कुछ देर तक ऐसे ही भागते भागते जब उन्हें इस बात का एहसास हुआ की अब वो खूनी दरिंदे उनके पीछे नहीं है तो दोनों रुके और अपनी अपनी साँसें बेहाल करने लगे.
“यह क्या….

(UPDATE-53)

उसकी नज़र उस पलंग की चादर पर पढ़ी. उसने वो चादर पलंग से खींच लिया और उसे देखने लगी. हालाँकि वो थोड़ा गंदा थे पर रोहन का जिस्म ढकने के लिए पर्याप्त (सफिशियेंट) था . फिर उसने रोहन पर निगाह डाली और सोचने लगी इसे आख़िर हुआ क्या है? एक पत्थर पर ही लगने से इतने लंबा बेहोश हो गया की अभी तक इसे होश ही नहीं आया है. अगर इसे होश आ जाता तो वो खुद ही अपने कपड़े बदल लेता, उसे इस तरह भंगी बनकर उसके कपड़े नहीं बदलना पढ़ता. उसने कभी सोचा भी नहीं था की उसे अपनी जिंदगी में यूँ किसी के कपड़े बदलने होंगे और वो भी एक मर्द का. और वो भी वो मर्द जिसकी वजह से उसकी यह हालत हुई थी.

फिर उसने सोचा की अगर वो यहां से निकलना चाहती है तो उसे हर हाल में इसके कपड़े उतारने होंगे नहीं तो यह बीमार पढ़ जाएगा.

फिर श्रुति ने हिम्मत करके रोहन के कपड़े उतारने लगी. पहले उसने शुरूआत उसकी शर्ट से की. उसने रोहन की शर्ट के बटन्स खोलने लगी. जब पूरे बटन्स खुल गये तो उसने रोहन को पेट के बाल घुमाया ताकि उसका शर्ट उसके बदन से निकाल सके. शर्ट निकालने के बाद श्रुति की नज़र रोहन के जीन्स पर गयी. उसके हाथ थोड़े से काँपने लगे की यह सोच कर उसे रोहन की जीन्स उतारना होगा. लेकिन जैसे तैसे उसने हिम्मत करके रोहन की जीन्स के स्तनों को खोलने लगी. फिर स्तनों खोलने के बाद उस जीन्स को उसकी पेंट से निकालना भी तो था. यही सब सोककर उसकी जान आधी हुई जा रही थी. इससे पहले आज तक उसने कभी अपनी लाइफ में किसी भी मर्द को आंडरवेयर में नहीं देखा था. फिर भी कुछ सोच कर उसने रोहन की पेंट को उतारने लगी. लेकिन वो जीन्स बारिश में भीगने से रोहन के बदन से चिपक गयी थी जिसकी वजह से श्रुति को जीन्स निकालने में कठिनाइया हो रही थी. फिर भी जैसे तैसे करके उसने उसकी जीन्स को उसके टांगों से आज़ाद कर दिया. पर इस दौरान जब वो उसकी जीन्स को निकाल रही थी तो उसने अपनी आँखें बंद करके ऊपर की और देख रही थी ताकि उसकी नज़र रोहन के आंडरवेयर पर ना पड़े. आख़िरकार बड़ी मेहनत से उसने रोहन की जीन्स को उसके टांगों से आज़ाद कर दिया. पर अब उसके लिए समस्या यही थी उसी आंडरवेयर को कैसे निकाले क्योंकि वो भी जीन्स की तरह पूरी भीग चुकी थी. श्रुति की हालत खराब होने लगी जब उसने सोचा की उसे यह गंदी सी आंडरवेयर निकालना पड़ेगा. यही सब सोचकर उसे उबकाईयाँ आने लगी. पर फिर भी हिम्मत करके उसने रोहन की आंडरवेयर निकालने का निर्णय किया और जैसे ही… वो उसकी आंडरवेयर को निकालने के लिए आंडरवेयर को ऊपर से छ्छूवा उसे उसी वक्त एक दम ज़ोर की उबकाईयाँ आने लगी और वो भाग कर एक कोने में उल्तियाँ करने लगी. रोहन का शर्ट और जीन्स निकालने में तो ज्यादा हैरानी तो नहीं हुई पर आंडरवेयर निकालने में उसकी हालत खराब होने लगी थी. वो सोचने लगी की वो आंडरवेयर को ऐसे ही पड़े रहने देगी और उसके ऊपर से पलंग की चादर लपेट देगी. मगर उसे ख्याल आया की अगर वो आंडरवेयर निकाले बिना चादर लपेट देगी उससे भी प्राब्लम हो जाएगी. क्योंकि वो आंडरवेयर भी पूरी भीग चुकी थी और भीगी हुई आंडरवेयर पहने रहने से भी प्राब्लम हो सकती है. मगर श्रुति इसी दुविधा में थी की वो कैसे रोहन की आंडरवेयर उतारेगी और फिर उतारने के बाद जो चीज़ उसे नज़र आएगी……..तो फिर…..क्या होगा सोचने लगी श्रुति. इस दुविधा में ना पढ़ना पड़े वो जाकर फिर से रोहन को हिलाकर उठाने की कोशिश करने लगी की अगर यह उठ जाएगा तो अच्छा रहता. पर लाख उठाने के बाद भी रोहन की आँख नहीं खुल रही थी.

रोहन तो खुमबकरण की तरह सोया हुआ था. उठने का नाम ही नहीं ले रहा था. आख़िर तक हार के श्रुति ने तय कर लिया की वो रोहन की आंडरवेयर को उसे उतारना पड़ेगा. श्रुति फिर रोहन के पास बैठ गयी और अपनी आँखें बंद करके ऊपर की और देखने लगी . फिर अपना हाथ से रोहन की आंडरवेयर उतारने लगी. पहले उसने आंडरवेयर के ऊपर के हिस्से को पकड़ा और धीरे धीरे उसे उतारने लगी. जैसे जैसे वो उस आंडरवेयर को उतार रही थी उसे फिर से उबकाईया आनी शुरू हो गयी. मगर इस बार श्रुति झट से रोहन की टांगों से उस भीगी हुई आंडरवेयर को निकाल दिया. फिर उसने जल्दी से उस आंडरवेयर को एक तरफ फेंक दिया. फिर वो जल्दी से पलटी और उस पलंग की चादर को अपने हाथों में ली और अपनी आँखें बंद करके रोहन के ऊपर लपेटने लगी. फिर अचानक उसे ध्यान आया की उसने बजाए रोहन को पलंग में लिटाने के वो उसे वही ज़मीन पर ही छोढ़ी हुई थी. उसने देखा की ज़मीन ठंडी हो रही थी और इस तरह ठंडी ज़मीन पर उसे नहीं लिटाना चाहिए. फिर श्रुति ने रोहन को खड़े….

(UPDATE-54)

से पकड़ा और उसे पलंग पर डालने लगी. मगर जब वो उसे पलंग पर लिटा रही तो उसे में अचानक रोहन के ऊपर लिपटा हुआ वो चादर रोहन के ऊपर से सरक गया और श्रुति को रोहन के पूरे जंगल का नज़ारा दिखा दिया….. यह देख कर श्रुति एक दम चीख मर के रोहन को ऐसे ही पलंग में चोद कर दूसरी तरफ देखने लगी. उसका दिमाग एक दम झांजना गया था रोहन के लंड को देख कर. उसने अपनी जिंदगी में पहली बार किसी मर्द का लंड देखा था. श्रुति ने जल्दी से रोहन के ऊपर वो चादर डाली. वो कुछ देर ऐसे ही बैठी रही. उसके दिमाग में रही रही कर रोहन का लंड का नज़ारा घूम रहा था.

फिर वो अपने दिमाग को झटक कर अपना ध्यान कही और लगाने की कोशिश करने लगी. उसे अचानक ख्याल आया की रोहन की तरह वो भी पूरी तरह भीग चुकी थी. अगर वो भी अपने कपड़े नहीं बदलेगी तो वो बीमार पढ़ जाएगी. वो सोचने लगी के रोहन को ढकने के लिए तो उसे पलंग की चादर मिल गयी थी पर वो अपने कपड़े उतार कर फिर क्या पहनेगी. इसके सामने बिना कपड़े के भी नहीं रही सकती क्या पता इसे कब होश आ जाए. यही सब सोचते सोचते वो फिर से पूरे घर में कोई कपड़ा तलाश करने लगी ताकि उसे अपना टन ढकने के लिए कोई कपड़ा मिल जाए. मगर इतना ढूंढ़ने पर भी उसे कोई कपड़ा नहीं मिला तभी, उसकी नज़र अचानक बाहर वाले कमरे पर पढ़ी. उसने देखा की उस कमरे की खिड़की पर एक छोटा सा परदा लगा हुआ था. वो उस खिड़की की तरफ गयी तो उसने देखा की उस खिड़की पर जो परदा लगा हुआ था वो काफी छोटा था और वो उसका टन ढांकने के लिए नाकाफ़ी था. मगर श्रुति के पास इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं था. उसने आख़िर मान मसोसकर उस खिड़की पर लगा हुआ वो छोटा सा परदा खिच लिया.

वो सोचने लगी के वो अपने कपड़े उतारकर सूखने के लिए डाल देगी और अंदर वाले कमरे के छ्हॉकट पर बैठ जाएगी ताकि अगर कभी रोहन की आँख खुले तो उसे आभास हो जाए और फिर वो उसे बाहर वाले कमरे में आने से रोक देगी ताकि वो उसे इस रूप में ना देख सके. यही सब सोचते हुए श्रुति ने अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया.. कपड़े उतारने के दौरान में श्रुति बार बार उसी कमरे और देख रही थी जहां रोहन बेहोश पढ़ा हुआ था. उसे डर था की कही वो होश में ना आ जाए और उसे कपड़े बदलते हुए ना देख ले. जब श्रुति ने अपने पूरे कपड़े उतार लिए तो उसने वही परदा जो खिड़की पर लगा हुआ था उसे अपने बदन पर लपेटने लगी. मगर वो परदा इतना छोटा था की श्रुति का पूरा बदन उसमें नहीं समा पा रहा था. फिर भी कैसे करके उस पर्दे से अपने बदन को ढँकने लगी, उस पर्दे को अपने बदन से लिपटाने के बाद ऊपर से श्रुति के आधे से ज्यादा चुचियां नुमाया हो रही थी और नीचे से उसकी पूरी झांगे दिख रही थी. वो परदा नीचे से सिर्फ़ उसकी चुत ही ढक पा रहा था. श्रुति ने एक बार सोचा की वो वापस से अपना कपड़ा पहेनले पर, ऐसा करने में उसे कोई समझदारी नहीं लगी क्योंकि उसके कपड़े पूरे गीले हो चुके थे और वापस से गीले कपड़े पहनने का मतलब था बीमार पढ़ना जो वो नहीं चाहती थी. श्रुति ने सोचा क्या फर्क पढ़ता है अगर वो उसका पूरा टन नहीं ढक पा रहा है क्योंकि यहां इस आदमी के अलावा है ही कौन. वो उसे उस कमरे से बाहर आने ही नहीं देगी तो किसे को उसको ऐसी हालत में देखने का सवाल ही नहीं पैदा होता. यही सब सोचने के बाद श्रुति ने अपनी ब्रा, पैंटी, जीन्स और रोहन की वो जॅकेट जो रोहन ने उसे दी थी पहनने लिए उसे भी सूखने के लिए डाल दिया. फिर उसे याद आया की रोहन के कपड़े भी तो गीले है अगर वो उसे सूखने के लिए नहीं डालेंगी तो वो भी गीले रही जाएँगे. मगर उसके लिए दिक्कत यह थी की ऐसी हालत में रोहन के कमरे में जाए कैसे. अगर वो ऐसे हालत में गयी तो कही उसकी आँखें ना खुल जाए.” मगर जाना तो पड़ेगा” सोचते हुए श्रुति अपने हाथ से अपने सीने को ढँकते हुए रोहन के कमरे में गयी और उसकी शर्ट, जीन्स को उठाने लगी की तभी उसकी निगाह रोहन की आंडरवेयर पर पढ़ी, और वो सोचने लगी के इसे उठाए की नहीं. उसने दो सेकेंड तक सोचा फिर उस आंडरवेयर को रोहन की शर्ट से पकड़ते हुए उठा लिया और उस कमरे से बाहर निकल गयी फिर सारे कपड़े सूखने के लिए डाल दिया. फिर श्रुति रोहन के कमरे के बाहर वाले दरवाजे की ओट लेते हुए इस तरह बैठ गयी के अगर रोहन जगह जाए तो उसे आभास हो जाए और वो रोहन को कमरे से बाहर आने पर रोक दे.

(UPDATE-55)

को अभी वहां पर बैठे हुए कुछ ही देर हुए थे की उसकी आँखें नींद से बोझल होने लगी. पर वो सोना नहीं चाहती थी क्योंकि अगर वो सो गयी तो रोहन को रोकेगी कैसे.

यही सब सोचते सोचते… वो फिर भी नींद की आगोश में कब चली गयी उसे पता ही नहीं चला.

रोहन की जब आँख खुली तो उसने अपने आपको एक कमरे में पाया. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो इस वक्त कहा पर है. वो अपने दिमाग पर ज़ोर डालने लगा की वो यहां पर कैसे है. फिर उसे याद आया की वो एक कीचड़ भरे रास्ते से चल रहा था की तभी उसका पैर फिसला था और वो एक पत्थर से जा टकराया था. फिर उसके बाद क्या हुआ उसे कुछ होश नहीं था, मगर वो यहां कैसे आया , मगर सबसे बड़ा सवाल यह है की उसे यहां लाया कौन? फिर रोहन उठ कर बैठने की कोशिश करने लगा तभी उसे एक दम से शॉक लगा क्योंकि उसने देखा की उसके बदन पर उसका एक भी कपड़ा नहीं था. उसके बदन में इस वक्त सिर्फ़ एक मैली चादर थी. उसे बड़ी हैरत हुई उसके कपड़े कहा गये और कौन इन्हें उसके बदन से निकाला. तभी उसे अचानक उस लड़की का ख्याल आया जो उसके साथ में थी जब वो बेहोश हुआ था. वो एक दम झट से पलंग से उतरने लगा पर अभी भी उसके सर के चोट की वजह से वो अपना नियत्रन नहीं कर पाया और लड़खड़ाकर गिर गया.

धम्म की आवाज़ से श्रुति जो एक दम गहरी नींद में चली गयी थी अचानक हुए इस शोर से उठ गयी. उसने देखा की वो आवाज़ अंदर वाले रूम से आई थी. वो समझने की कोशिश करने लगी की यह आवाज़ कैसी थी. उसने देखा की वो व्यक्ति जो बेहोश पलंग पर पड़ा हुआ था वही ज़मीन पर इस वक्त गिरा हुआ था.
“अफ….क्या हुआ तुम्हें? तुम ठीक तो हो?” श्रुति ने रोहन की तरफ देखते हुए कहा जो इस वक्त उठने की कोशिश कर रहा था.
“हां में ठीक हूँ. मगर में यहां पर कैसे आया.” रोहन उठ ते हुए कहा. फिर वो देखने लगा की श्रुति की आवाज़ किधर से आई थी तो वो कमरे के दरवाजे के बाहर की और देखने लगा पर उसे श्रुति कही नज़र नहीं आ रही थी. इसलिए फिर वो कमरे से बाहर जाने के लिए अपने कदम बढ़ने लगा. श्रुति ने भी देख लिया था की रोहन बाहर आ रहा है. उसने फौरन उसे रोकते हुए कहा.
“वही रुको तुम……… बाहर आने की कोशिश मत करो.”
“क्यों क्या हुआ?” रोहन ने श्रुति से कहा.
“कुछ भी नहीं पर तुम बाहर नहीं आओगे.” श्रुति ने जल्दी से कहा.
“अच्छा ठीक है नहीं आओंगा मगर यह बता में यहां पर कैसे आया.?” रोहन ने कहा.
“यहां पर कैसे आए का क्या मतलब. मैंने ही तुम्हें यहां पर लाई हूँ. जब तुम उस पत्थर से टकरा के बेहोश हो गये थे.” श्रुति ने कहा.
“क्या? तू मुझे इधर लेकर आई…..? कैसे?” रोहन हैरत से कहते हुए थोड़ा रुका फिर कहा.
“घसीटते हुए लाई और कैसे…गोद में तो नहीं उठा के ला सकती थी.” श्रुति ने कहा.
“अच्छा ठीक है. पर मेरे कपड़े किधर है?”
“वो गीले हो गये थे. तो मैंने सोचा की अगर तुम गीले कपड़े में रहोगे और ऊपर से इतने ठंड पढ़ रही है तो तुम बीमार पढ़ जाओगे. इसलिए मैंने उन कपड़ों को उतार कर उन्हें सूखने के लिए डाल दिया.” श्रुति ने कहा.
“क्या? तुमने मेरे कपड़े उतारे……? मेरे कपड़े……..

? “ रोहन एक दम हैराअनी से पूछा.
“मेरे पास इसके अलावा कोई चारा नहीं था……मुझे करना पढ़ा.” श्रुति थोड़ा झेपते हुए कहा.
“अच्छा…..” कहते हुए रोहन थोड़ा सोचने लगा फिर कहा.”शुक्रिया तेरा”. मगर श्रुति ने कुछ नहीं कहा. दोनों के बीच ऐसे ही थोड़ी देर तक खामोशी रही. फिर रोहन ने कहा.
“अगर मेरे कपड़े गीले हो गये थे तो तेरे भी कपड़े गीले हुए होंगे तो क्या तूने उन्हें भी……..” कहते हुए रोहन रुक गया. उसे बाद में समझ में आया की क्यों श्रुति उसे कमरे से बाहर आने के लिए रोक रही थी. वो सोचने लगा की शायद उसने भी इसी की तरह कोई चादर लपेट के रखा है. पहले तो श्रुति को कुछ कहते नहीं बना फिर कुछ देर बाद उसने कहा.
“हां मेरे भी कपड़े गीले है और मैंने उन्हें भी सूखने के लिए डाल दिया है.”
“ओह अच्छा…..लेकिन तुझे क्या लगता है यह जो गीले कपड़े है इस तरह टाँगने से सूख जाएँगे?” रोहन ने कहा.
“क्यों क्या हुआ?…… हां मुझे पता है पर में क्या करती, इन्हें और कहा डालती. बाहर तो बारिश हो रही है.” श्रुति ने कहा.
“हम….वो तो है. मगर हम ऐसे कब तक बैठे रहेंगे. इस तरह तो पूरा दिन निकल जाएगा पर कपड़े नहीं सूखेंगे.” रोहन ने कहा.
“तो तुम्हीं बताओ इसके अलावा कोई चारा है?” श्रुति ने कहा.
“हमें उधर उस चिम्नी में आग जलानी पड़ेगी और उसके आस पास कपड़े को टाँग देंगे ताकि उसकी गरमाहट से सारे कपड़े जदली सूख जाए.” रोहन ने कहा.
“वो तो ठीक है पर इसके लिए तुम्हें इधर इस रूम में आना पड़ेगा और….

(UPDATE-56)

मेरी हालत ऐसे है के इस हालत में में तुम्हारे सामने नहीं आ सकती.”
“श…”रोहन ने सिर्फ़ इतना कहा.
“तो एक काम करो तू ही उधर आग जला दे.” रोहन ने कहा.
“
“
“एक बात कहना है तुमसे?” श्रुति वही से कुछ देर के बाद कहा.
“क्या? बोल?” रोहन ने कहा.
“तुम्हें ऐसे कोन से बेहोशी आ छा गयी थी की इतना तुम्हें हिलाने के बावजूद भी तुम्हें होश नहीं आ रहा था?”श्रुति ने कहा.
“पता नहीं मुझे मेरे सर के उस हिस्से पर चोट लगने के बाद क्या हो जाता है की मुझे कुछ होश ही नहीं रहता.” रोहन ने कहा.उनके बीच ऐसे ही कुछ देर तक बातें होती रहती है की तभी अचानक…..श्रुति को अपने पास से कुछ रेंगता हुआ महसूस हुआ. पहले तो श्रुति ने इसे अपना वहाँ समझा. पर वो चीज़ फिर उसके पास से गुज़री तो उसने देखा की वो एक बड़ा सा बारे बारे बालों वाला काला चूहा था. श्रुति ने अपनी जिंदगी में इतना भयानक चूहा नहीं देखा था. उसने एक जोरदार चीख मर के रोहन वाले कमरे में भागी. रोहन भी श्रुति के इस तरह चीख मारने पर एक दम चौंक गया. वो उठ के देखने लगा की क्यों अचानक यह लड़की चीखने लगी है. लेकिन उसने देखा की वो लड़की एक दम बदहवासी में उसकी तरफ भागते हुए आ रही है और इसी बदहवासी में जो पर्दे का कपड़ा उसने अपने टन पर लपेटा हुआ था वो कब का नीचे गिर चुका था.

रोहन की तो साँसें जैसे जम सी गयी हो श्रुति को इस रूप में देख कर. उसके जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था. बिलकुल मादरज़ाद नंगी हालत में थी श्रुति, रोहन से आकर लिपट गयी. श्रुति को अभी होश नहीं था की उसके जिस्म पर इस वक्त कोई कपड़ा नहीं था. वो बस उस चूहे से खौफ के मारे अब भी चिल्ला रही थी जैसे वो कोई बहुत भयानक जानवर देख ली हो. पहले तो रोहन की कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे श्रुति को इस हालत में देखने के बाद मगर जब श्रुति लगातार चिल्लाती रही तो उसका ध्यान बाहर वाले कमरे की और गया. फिर वो श्रुति को अपने से अलग करते हुए बाहर वाले कमरे की तरफ देखने लगा की ऐसा क्या था जिसकी वजह से यह लड़की इतना चिल्ला रही है. उसने देखे की वहां पर एक चूहा अभी भी यहां से वहां भाग रहा था. रोहन समझ गया इसी चूहे को देख कर यह लड़की इतना चिल्ला रही है. रोहन ने पास में पड़ा एक लकड़ी का डंडा अपने हाथ में लिया और चूहे पर अपना सटीक निशाना साधते हुए एक जोरदार प्रहार किया जो उस चूहे के सर पर जा लगा और उस चूहे ने वही पर अपना दम तोड़ दिया.

उसके बाद रोहन पलट कर श्रुति की तरफ देखा तो उसे अब भी होश नहीं था वो अब भी भी लिबास वाली हालत में थी..रोहन ने देखा की वो अब भी उस चूहे के खौफ के सदमे में है तो उसने अपनी नज़र दूसरी और कर के उससे कहा.
“मर गया है वो चूहा. घबराने की कोई जरूरत नहीं है” फिर रोहन वहां पर पढ़ा हुआ वो छोटा सा कपड़ा हाथ में उठाया और श्रुति की तरफ बढ़ा दिया.रोहन का उस कपड़े को अपनी तरफ फेंकते हुए देखकर श्रुति को एहसास हुआ की उसके बदन पर जो परदा लिपटा हुआ था वो कब का उसके बदन से निकल चुका था और वो इस वक्त बिलकुल नंगी हालत में थी. उसने जल्दी से वो परदा अपने चारों तरफ लपेटना चालू किया. फिर वो देखने लगी की रोहन क्या उसकी तरफ देख रहा है. लेकिन उसने पाया की रोहन अब उस चिम्नी में आग जलाने की कोशिश कर रहा था. उसे बड़ी शर्म आ रही थी की वो इतनी बदहवासी में यह देखे बिना की उसके बदन में कुछ है या नहीं वो सीधा जाकर रोहन से लिपट गयी थी. वो सोचने लगी वो क्या करती वो चूहा था ही इतना भयानक की उसे देखने के बाद तो मानो उसके रोंगटे खड़े हो गये हो. फिर उसने रोहन की तरफ देखा तो रोहन उस चिम्नी में आग जला चुका था और इस समय वो सारे गीले कपड़े सूखने के लिए उस आग से थोड़ा दूर सूखाने के लिए डालने लगा.
“अब तू ठीक है?” रोहन अंदर वाले कमरे में बगैर देखे कहा.
“हां…..में अब …..ठीक हूँ.” श्रुति को शर्म के मारे कुछ बोला भी नहीं जा रहा था.
“एक चूहे से इतना डरती है……..खैर मेईने अपने और तेरे कपड़े सूखने के लिए डाल दिए है अब यह धीरे धीरे कर के सूख जाएँगे.” रोहन ने कहा.
“ओके….” श्रुति ने सिर्फ़ इतना ही कहा.
“एक काम कर तू. में अंदर वाले रूम में चला जाता हूँ और तू इस रूम में आकर आग से अपने आपको सेकेंड ले.

तुझे ठंड लग रही होगी”
“नहीं में ठीक हूँ” श्रुति ने कहा.
“ऐसे कैसे ठीक है? जब मुझे इतनी ठंड लग रही है तो तेरा क्या हाल हो रहा होगा. तू इधर आ जा और आग के सामने सेकाई कर ले इससे तुझे थोड़ी राहत मिलेगी…..

(UPDATE-57)

मेरा क्या है में तो इस ठंड का आदि हूँ.” कहते हुए रोहन उस दरवाजे के करीब पहुंच गया. श्रुति को कुछ जवाब देते नहीं बन रहा था मगर उसे वास्तव में ठंड बहुत लग रही थी क्योंकि एक तो जनवरी की सर्दी और ऊपर से बाहर इतनी मूसलाधार बारिश. जिसकी वजह से मौसम का तापमान बहुत गिर गया था. श्रुति के लिए इतनी ठंड बर्दाश्त करना उसके बस से बाहर था. जब रोहन उसे आग के सामने सेकाई करने का ऑफर दिया तो पहले उसने इनकार किया पर रोहन के बार बार आग्रह करने पर वो राजी हो गयी.
“ठीक है में उस रूम में आ रही हूँ, तुम ज़रा अपना मुंह दूसरी और कर लो.” शरई ने कहा.
“हां हां बाबा ……मुझे पता है. में पहले से ही दूसरी और मुंह किया खड़ा हूँ.तू जल्दी से आजा.” रोहन ने श्रुति के सवाल का जवाब देते हुए कहा. फिर श्रुति उठ कर बाहर वाले कमरे की और जाने लगी. उसने देखा की रोहन दूसरी और मुंह किए हुए खड़ा था. लेकिन अभी वो उस चिम्नी की तरफ जा ही रही थी अचानक से ……..एक दम ज़ोर से बिजली कड़की. और फिर बिजली के इस कदर ज़ोर से कड़कने से श्रुति एक दम डर गयी और फिर से रोहन को पीछे से लपेट लिया. इस बार रोहन को कोई हैरत नहीं हुई की क्यों श्रुति चीख मर के उससे लिपट गयी है क्योंकि वो समझ गया था की यह सब की वजह अभी जो इतनी ज़ोर से बिजली कड़की है वो है. अभी वो कुछ कहने ही वाला था की तभी उसे श्रुति के इतन्ने कसके लपेटने का एहसास हुआ. उसे एहसास हो रहा था की श्रुति की चुचियाँ उसकी पीठ में चुभ रही है. एक तो इतना सर्द मौसम और ऊपर से बाहर बरसात माहौल को और भी रोमॅंटिक बना रही थी. उसे महसूस हुआ की जैसे उसके पैंट में कोई हलचल सी हो रही हो. उसे एहसास हुआ की नीचे से उसका लंड एक दम टांट जा रहा है. अब उसे अपनी दिल की धड़कने तेज होने लग रही थी. उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. उसका दिल किया इस लड़की को अपनी तरफ करके उसके बदन से लिपट जाओं और उसे दीवाना वार उसके बदन को चूमते जाओं. मगर वो ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहता था. ऐसा नहीं था की रोहन ने कभी इससे पहले सेक्स नहीं किया था. उसे उसी वक्त याद आया जब वो नया नया बालिग हुआ था तो उसके अंदर ऐसे ही जवानी जोश मारा करती थी. फिर उसे एक लड़की से प्यार हो गया था और उसने उस लड़की के साथ सेक्स भी किया था. रोहन तो उस लड़की के प्रति वफादार था पर उस लड़की ने किसी और लड़के के साथ अपना टांका भिड़ा के उसका दिल तोड़ दिया था. फिर तबसे और आज जब उसकी उमर 30 की हो गयी उसने आज तक किसी भी लड़की की तरफ नज़र उठाकर नहीं देखा.

उसे लड़की ज़ात से ही नफरत हो गयी थी लेकिन आज हालत ऐसे हो गये की उसे अपने आपको संभालना मुश्किल हो रहा था. उसे वो ग्यारह बारह साल पुराना वाक़िया याद आने लगा था. खैर उसने अपने आप पर काभू रखा और श्रुति से कहने लगा.

“घबरा मत…..बिजली ही कड़क रही है इसमें इतना घबराने वाली कौनसी बात है.”
“वो….मुझे बिजली से बहुत डर लगता है” श्रुति अब भी घबराते हुए कह रही थी.
“अपना दिल मजबूत कर कुछ नहीं होता बिजली से……में अंदर जा रहा हूँ तू आग से सेकाई करले.” रोहन कहते हुए अंदर वाले रूम की तरफ बढ़ने लगा की तभी फिर से पहले से भी ज्यादा बिजली कड़की और श्रुति इस बार फिर रोहन से लिपटी तो नहीं लेकिन चीखें जा रही थी जैसे कोई उसकी जान लेने आ रहा हो. रोहन ने देखा की श्रुति एक दम डर के मारे चीखें जा रही है तो उसने तुरंत जाकर श्रुति को अपनी बाहों में ले लिया. बाहर लगातार बिजली का कडकना जारी था और बिजली के कड़कने से जितनी ज़ोर से आवाजें आती उतनी ही ज़ोर से श्रुति, रोहन को अपने से और लिपटा लेती. फिर ऐसे ही कुछ देर तक उसने श्रुति को अपनी बाहों में लिए रहा. उसे तब होश आया जब एक बार फिर श्रुति की चुचियाँ उसके सीने से चिपकी हुई थी और उसका लंड फिर से तनटानने लगा था. उसके अंदर एक बार से फिर से वही उमंगें जगह रही थी जिसे उसने बरसों पहले सुला दिया था.
अब बिजली का कडकना बंद हो गया था. श्रुति भी कुछ देर तक रोहन की बाहों में अपने आपको सुरक्षित महसूस कर रही थी. उसे तो जब होश आया जब उसे एहसास हुआ की उसकी चुचियाँ रोहन के सीने से टकरा रही थी. फिर उसे अपनी नाभि के पास कुछ चुभता हुआ महसूस होने लगा. पहले तो वो समझी नहीं की यह क्या चीज़ है पर उसने थोड़ा दिमाग लगाया तो उसे 1000 वॉल्ट का झटका लगा की यह तो रोहन का …….वो एक दम से रोहन से अपने आपको चुधते हुए अलग हो गयी…

(UPDATE-59)

में उसके सामने खड़ी थी. मगर इस समय हालत कुछ और थे. वो अब रोहन से शर्मा नहीं रही थी बल्कि वो चाह रही थी वो उसकी जिस्म से खेले, जो उसकी मर्जी में आए करे, उसे वो जन्नत की सैर कराए. रोहन से श्रुति को अपने गोद में उठाया और उसे ले जाकर पलंग में लिटा दिया. जब रोहन ने श्रुति को पलंग में लिटाया तो दोनों की आँखें एक दूसरे से मिली. श्रुति उसे देख कर थोड़ा सा मुस्कराई जैसे कह रही हो अब देर किस बात की जल्दी से मेरा काम तमाम कर दो क्योंकि अब मुझे बर्धाष्त नहीं हो रहा है. रोहन भी जैसे उसके जज़्बात समझ गया था. उसने अपने बदन पर पलंग का लिपटा हुआ चादर अपने बदन से हटा दिया . श्रुति ने देखा की रोहन के ऊपर लिपटी हुई चादर के हटने से उसे वो चीज़ दिखी जो उसने रोहन को इस पलंग पर लिटाते हुए देखा था. लेकिन तब वो कितना छोटा और कितना शांत था.. मगर इस वक्त वो ऐसा लग रहा था जैसे दाहाकता हुआ कोयला, एक दम ताना हुआ.

रोहन, श्रुति के ऊपर झुकते हुए उसे फिर से उसके होठों पर चूमने लगा. श्रुति भी इस खेल में उसका भरपूर साथ देने लगी. वो भूल चुकी थी की वो अपनी जवानी किसी और के लिए महफूज़ रखी थी. उसे तो बस इस वक्त अपने अंदर उठ रहे तूफ़ानो को शांत करना था और इसके लिए वो रोहन का साथ दे रही थी. रोहन, श्रुति के होठों पर चूमने के बाद नीचे आता हुआ उसके गले पर चूमने लगा फिर कुछ देर तक ऐसे चूमते रहने के बाद वो और थोड़ा नीचे आया और एक हाथ से श्रुति के चूची को पकड़ा और दूसरी चूची को अपने मुंह लेकर उसके निप्पल को चूसने लगा. श्रुति एक दम पागल हुई जा रही थी. वो रोहन के सर के बालों को पकड़ कर उसे और अपनी तरफ दबा रही थी. जिसका मतलब यह था वो उसे और श्ििडडत से उसके निप्पल को चूज़. रोहन उसका इशारा समझते हुए वैसा ही कर रहा था. वो बड़ी बड़ी दोनों निपल्स को चूसते जा रहा था. जब काफी देर तक उसने उसके निपल्स को चूस लिया तो वो और नीचे आकर उसके पेट को चूमने लगा फिर थोड़ी देर बाद वो श्रुति के नाभि की और गया और उसकी नाभि के अंदर अपनी जबान फेरने लगा. रोहन का ऐसा करना ही था की श्रुति एक दम से अपनी कमर उठाने लगी. वो एक दम जंगली बिल्ली की तरह छटपटाने लगी. वो रोहन के बालों को एक दम तेजी पकड़ कर उसे भींचने लगी. इतना भीचने लगी की रोहन को थोड़ा दर्द भी होने लगा लेकिन उसने अफ नहीं किया और अपने कार्य को करने में लगा रहा. जब काफी देर तक वो उसकी नाभि से खेल चुका तो उसने थोड़ा और नीचे आते हुए श्रुति के ग्राय्न एरिया (दो टांगों के बीच का हिस्सा) के पास आया और वहां पर चूमने लगा. रोहन की इस हरकत से श्रुति एक दम से बिलबिला उठी और एक आवाज़ निकालते हुए आआआआआआआआअहह……………..उसकी चुत ने ढेर सारा पानी छोडा. रोहन ने भी देखा उसकी इस हरकत से श्रुति झाड़ चुकी थी. फिर उसके बाद रोहन रुका नहीं बल्कि अपने कार्य में और तेजी लाता हुआ श्रुति की चुत की चिड़िया को चूमने लगा. फिर उसके बाद उसकी चुत पर अपनी जबान फेरने लगा. श्रुति जो अभी अभी झड़ी थी रोहन की एक और हरकत पर वापस से जोश में आने लगी थी. उसे रोहन का उसकी चुत में इस तरह से चूमना बहुत अच्छा लग रहा था. जब रोहन काफी देर तक उसकी चुत ऐसे ही चाटता रहा तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने आख़िर कार अपने मुंह खोला और कहने लगी.
“प्लीज़……अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा………प्लीज़ जल्दी करो…..प्लीज़!!!!!! रोहन समझ गया था की उसका क्या मतलब है. वो चाहती है की वो उसकी चुत में अपना गर्म लोहा डाल दे. उसने भी सोचा की इसे और तड़पाना अच्छा नहीं है बल्कि वो भी जल्द से जल्द उसकी चुत में समा जाना चाहता था. फिर उसके बाद रोहन अपने घुटने के बाल बैठा और अपने लंड को अपने हाथ में लेते हुए श्रुति की चुत के मूहने पर रख दिया और फिर श्रुति के ऊपर लेट गया.

फिर उसके बाद उसने आहिस्ता आहिस्ता अपना लंड श्रुति की चुत में डालने लगा. लेकिन अभी उसने थोड़ा ही ज़ोर लगाया था की श्रुति एक दम दर्द से चिल्लाने लगी.
“आाआहिसतीए……..दर्द ……हो रहा है.” श्रुति ने एक दम दर्द में आकर कहने लगी. रोहन को थोड़ी हैरत होने लगी उसे क्यों इतना दर्द हो रहा है. इतना दर्द तो उसे होता जो पहली बार किसी का लंड अपनी चुत में लेती है. यानि की वो लड़की जो कुँवारी होती है……तो इसका मतलब यह कुँवारी है……रोहन को विश्वास नहीं हो रहा था की यह लड़की जिस सोसाइटी से ताल्ल्लुक रखती है वहां पर भी कोई ऐसी लड़की होगी जो कुँवारी हो…..खैर उसने इसके आगे कुछ और नहीं सोचा और श्रुति जैसा कह रही थी….

(UPDATE-58)

फिर कुछ देर तक रोहन की आँखों में देखा और उसके बाद अपनी नज़र दूसरी और फेयर ली. इस वक्त श्रुति की भी धधकने बहुत तेजी से चल रही थी. उसे भी रोहन की बाहों में यूँ लिपटे रहना अच्छा लग रहा था. उसका दिल किया की वो एक बार फिर से रोहन से लिपट जाए पर उसने अपने आपको काबू में रखने की कोशिश करने लगी. रोहन भी उसे अपने से दूर जाते हुए देखा. फिर उसने देखा श्रुति एकदम गहरी गहरी साँसें ले रही है जिससे उसकी चुचियाँ ऊपर नीचे हो रही थी. रोहन ललचाई हुई नजारे से उसकी ऊपर नीचे होती चुचियों को देख रहा था . श्रुति की चुचियाँ जितनी ऊपर नीचे हो रहित थी रोहन को उतना अपने ऊपर काबू करना मुश्किल हो रहा था. उसे नहीं मालूम की इस समय यह लड़की क्या महसूस कर रही है, उसके जज़्बात क्या है, क्यों वो भी वैसा ही महसूस कर रही है जैसा वो महसूस कर रहा है. उसे तो बस इस वक्त अपने अंदर एक ज्वालामुखी बनता हुआ महसूस हो रहा था. फिर वो बिना सोचे समझे श्रुति के करीब गया और उसका चेहरा अपने हाथों में लेते हुए अपनी तरफ करके झट से अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए. …
श्रुति अचानक होने वाले रोहन के इस रावय्यए से हक़्क़ा बक़्क़ा हो गयी थी. कुछ देर तक तो उसे समझ ही नहीं आ रहा था की रोहन क्या कर रहा है. जब उसे समझ में आया तो उसने फिर से रोहन को अपने से दूर किया. जब श्रुति ने रोहन को अपने से दूर किया तो रोहन को ऐसा लगा के जैसे उसका कोई अधूरा काम चुत गया हो. उसने देखा की श्रुति अभी भी तेज तेज साँसें ले रही थी और वो उसके इस बर्ताव से कोई ज्यादा खफा नहीं हुई थी जितना वो जानता था.वरना कोई और मौका होता तो वो ना जाने उसके साथ क्या कर देती. मगर इस समय वो इस समय दूसरी और मुंह करके रोहन से आँखें चुराते हुए दूसरी और देख रही थी. रोहन भी इसे एक ग्रीन सिग्नल की तरह लिया और फिर से श्रुति के करीब जाकर उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और फिर से उसके होठों पर चूमने लगा. श्रुति फिर से उसे अपने से दूर करने लगी मगर इस वक्त वो ज्यादा ज़ोर नहीं लगा पा रही थी उससे अलग होने से जिसका मतलब यह था आग उसके अंदर भी लगी थी.

बस वो हिचकिचा रही थी कुछ भी करने से. थोड़ी देर तक तो श्रुति , रोहन को अपने से दूर करने की कोशिश करने लगी लेकिन जब रोहन उसका होठों को चूमना नहीं छ्चोढा तो उसे फिर कोई ज्यादा मज़ामाहट नहीं की. श्रुति भी इस वक्त आहिसा आहिस्ता रोहन का होंठ चूमने में उसका साथ देने लगी. उसे भी धीरे धीरे बहुत मजा आ रहा था. जब वो दोनों ऐसे ही कुछ देर एक दूसरे को चूमते रहे थे की तभी……रोहन ने अपना बाया हाथ श्रुति के डाई चूची पर रख दिया और से दबाने लगा. श्रुति जैसे फिर से नींद से जगह गयी. उसने रोहन का हाथ वहां से हथने की कोशिश करने लगी क्योंकि उसे अचानक ख्याल आया की वो यह क्या कर रही है. वो किसी भी हालत में अपनी जवानी यूँ किसी दूसरे मर्द को नहीं सौंप सकती थी. उसे तो वही उसके सपनों वाला शहज़ादा याद आया जो उसे उसके सपनें में आकर परेशान किया करता था. इस बार ज़ोर लगाकर रोहन को अपने से दूर किया और जाकर अंदर वाले कमरे में चली गयी. रोहन को थोड़ा हैरत हुई इसे अचानक क्या हुआ. अभी तो बराबर वो भी उसका साथ दे रही थी यह अचानक क्या हुआ. रोहन के दिल में अभी भी आग लगी हुई थी. वो अपने दिल में लगी हुई आग को जल्द से जल्द भुजाना चाहता था. वो भी उसी कमरे में गया जहां श्रुति गयी हुई थी. रोहन ने देखा की श्रुति कमरे के एक तरफ उसकी तरफ पीठ किए हुए खड़ी थी. रोहन, श्रुति का करीब जाकर उससे लिपट गया और दीवाना वार उसकी पीठ पर और कान के पीछे चूमने लगा. जब वो उसकी कान और गर्दन के पीछे चूम रहा तो श्रुति एक दम से बेक़ाबू होने लगी. शायद यह एरिया इसकी कमज़ोरी थी. वो पलटी और रोहन का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए उसके होठों पर चूमने लगी. रोहन भी अब बेक़ाबू होकर उसे चूमने लगा. कुछ देर वो दोनों ऐसे ही एक दूसरे को चूमने लगे की श्रुति ने रोहन का बाआया हाथ अपने हाथों में लेकर अपने डाई और की चूची पर रख दी. रोहन उसकी इस हरकत पर थोड़ा चौंक गया. वो भी थोड़ा मुस्कराया और अपने दोनों हाथों से श्रुति की चुचियों को मसलने लगा. श्रुति के मुंह से आआहह……आआहह….आअहह की आवाजें निकालने लगी. श्रुति अब एक दम पागल होने लगी थी. फिर रोहन, श्रुति के जिस्म पर लिपटा हुआ वो कपड़ा एक झटके से अलग करते हुए उसे एक कोने में फेंक दिया. श्रुति अब एक दम नंगी हालत….

UPDATE-60)

वैसा ही करने लगा. पहले पहले उसने धीरे धीरे से डालने शुरू किया. लेकिन जब उसने देखा की श्रुति से दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा है तो उसने सोचा की अगर ऐसा चलता रहा तो यह उसे डालने ही नहीं देगी. फिर उसने श्रुति के दर्द की परवाह ना करते हुए एक झटके में अपना 7 इंच का लंड उसकी चुत में घुसेड़ दिया.
“आआआआआआआआआहह……मममम्मममममममममममाआआआ……..ओह में गोद्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड……………………..” श्रुति एक दम से पगला गयी थी रोहन के इस तरह से लंड उसकी चुत में घुसने से.

रोहन के इस तरह से अपना लंड डालने से श्रुति की हाइमेन झिल्ली थी वो फॅट चुकी थी और ढेर सारा खून उसकी चुत से रिस रहा था. रोहन ने देखा श्रुति को वास्तव बहुत दर्द हुआ था. लेकिन वो भी क्या करता कभी ना कभी तो उसे डालना ही था. फिर उसने सोचा चलो अब चला ही गया है तो क्यों इस कार्य को बंद करूं. उसने फिर से श्रुति की चुत में लंड डाले और उसे धक्के देने लगा. श्रुति को रोहन से ऐसे उम्मीद नहीं थी वो इतना दर्द में छीकेगी और वो उसकी दर्द की परवाह ना करते हुए अपना काम जारी रखेगा. लेकिन जब रोहन के काफी धक्के श्रुति अपनी चुत में सहे तो उसे भी धीरे धीरे अब काफी मजा आने लगा. अब उसके मुंह से आवाजें आने लगी थी. मगर इस बार वो आवाज़ों में फर्क था. इससे पहले इसने जो आवाजें निकाली थी वो दर्द की वजह से निकाली थी और जो इस बार निकाली थी वो उसे बहुत मजा आ रहा था उसकी आवाजें थी. रोहन ऐसे ही श्रुति की चुत में लंड अंदर बाहर करने लगा. और श्रुति को तो अपने ऊपर काबू ही नहीं हो रहा था. वो रोहन की पीठ पर अपने हाथ फिरने लगी, बल्कि उसकी पीठ पर कई जगह अपने तेज नूकिले नाखूनओ से खरोचने भी लगी. श्रुति को ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो इस वक्त जन्नत में सैर कर रही हो. वो अपने आपको सातवें आसमान में उधता हुआ महसूस कर रही थी. उसे नहीं मालूम था की चुदाई में इतना भी मजा आता है. वरना वो कभी का किसी से अब तक चुदाया ली होती. वो चाह रही थी रोहन उसे ऐसे ही चोद था रहे. यही सब वो सोच रही थी की तभी उसके मुंह से आवाजें आने लगी.आहह…..आअहह…..म्‍म्म्मममम……फिर उसके बाद उसकी चुत ने ढेर सारा सफेद पानी छोडने लगी. श्रुति अब शांत होने लगी. लेकिन रोहन अभी भी शांत नहीं हुआ था. वो ऐसे ही श्रुति को छोढ़े जा रहा था. फिर उसके बाद तकरीबन 5 मिनट की चुदाई के बाद श्रुति ने एक बार फिर से अपना पानी छोडा था लेकिन रोहन का अभी बस नहीं हुआ था की तभी रोहन, श्रुति को एक दम कस के पकड़ ते हुए उसकी चुत में अपने गर्म लोहे से कई सारे लावे चोदने लगा. उसके लंड से इतना लावा छूता जैसे वो कई बरसों से उसके अंदर कैद हो. रोहन कुछ देर तक ऐसे ही श्रुति के ऊपर लेता रहा.. जब उसके अंदर थोड़ी ऊर्जा आई तो वो श्रुति के भाई तरफ होकर लेट गया. श्रुति ने भी देखा की रोहन उसके बाजू में लेट गया है. अब वो दोनों तेज तेज साँसें ले रहे थे. मानो ऐसा लग रहा था की कितनी मेहनत करके आए है. अब से कुछ देर पहले जो तूफान उनके अंदर उम्दा था वो अब शांत हो चुका था. फिर शरइत अपनी पीठ रोहन की तरफ करते हुए दूसरी और देखने लगी. फिर वो सोचने लगी उसने यह क्या कर दिया .उसने कैसे कैसे ख्वाब देखे थे . उसने आज तक कभी भी कोई बाय्फ्रेंड नहीं बनाया था. वजह सिर्फ़ वही एक ही थी. वो उसका सपनों का राजकुमार.

वो जानती थी की यह सब फिल्मी बातें है लेकिन ना जाने उसे इतना अपने इस सपने पर इतना विश्वास था की एक ना एक दिन उसके ख्वाबों में आने वाला वो राजकुमार जरूर आएगा. और इसी लिए वो आज तक कुँवारी थी. लेकिन आज, वो सोचने लगी के वो अब और कुँवारी नहीं कहलाएगी . उसे बड़ी हैरत हो रही थी की उसने अपना कुँवारापन तुद्वाया भी तो किसके जरिए. जिससे वो सबसे ज्यादा नफरत करती थी उसके जरिए. वो व्यक्ति जो उसे इस खौफनाक जंगल में और उन खौफनाक जानवरों के चंगुल में फँसाया था. उसे अपने आप पर हैरत हो रही थी. खैर अब क्या कर सकते है जो हो गया सो हो गया. और यही सोचते सोचते उसे कब नींद आ गयी उसे कुछ पता ही नहीं चला.

उमेश चंद्रा तिवारी अपने केबिन में बेचैने से यहां वहां टहल रहा था की तभी सुशांत उस की इजाज़त लेता हुआ अंदर आया. सुशांत को अंदर आता हुआ देख कर उमेश ने कहा.
“कहो सुशांत अब तुम कौनसी मनहूस खबर लाए हो?” उमेश परेशानी भरे लहज़े में कहते हुए कहा.
“मनहूस नहीं सर! बहुत ही खौफनाक खबर कहो. में और मेरा दोस्त वहां पर अपने एक दोस्त की तलाश में गये थे. हम उसको तलाश ही कर रहे थे की तभी हमें एक गाड़ी….

UPDATE-61)

मिली और उसके आस पास मानव कंकाल मिले. पहले तो हमें समझ में नहीं आया की यह सब क्या और कैसे हुआ. हम इसी के बारे में सोच ही रहे थे तभी हमने एक ऐसे हैवान को देखा जिसको देखने के बाद अच्छे अच्छे के होश उड़ जाएँ. वो हैवान एक बंदर की शकल वाला था और उसने देखते ही देखते हमारे साथ पास का एक गाँव वाला और भी था उसको चियर फाड़ के उसको मौत के घाट उतार दिया. में तो उस हैवान को देख कर ही अपने होश खो बैठा था. लेकिन में और मेरा दोस्त जैसे तैसे करके वहां से अपनी जान बचके भाग लिए.” फिर सुशांत थोड़ा रुक कर फिर से कहा “ सर! हमें जल्द से जल्द कुछ करना होगा वरना…..” सुशांत कुछ और कहने ही वाला था की तभी उमेश जो इतनी देर से खामोश बैठा हुआ सुशांत की बातें सुन रहा था कहने लगा.
“तुम जिस जानवर के बारे में बता रहे हो उसके बारे में हमें पता है. लेकिन मुझे यह नहीं मालूम था जो कालगरह में हुआ वो वहां पर भी हो जाएगा.”
“वही तो में भी कह रहा हूँ सर! अगर हम उन जानवरों को जल्दी नहीं रोके तो प्रलय मच जाएगी. हमें जल्दी से कोई एक्शन लेना होगा.” सुशांत ने कहा.
“मैंने अल्लरेअदी तमाम फोरेस्ट रेंजर्स को हर टूरिस्ट स्पॉट पर तैनात किया हुआ. बल्कि अब हमें उन सब टूरिस्ट्स को इस जंगल से जितनी जल्दी हो सके बाहर निकालना होगा. अगर हमने जल्दी कुछ नहीं किया तो पता नहीं क्या हो जाए.” उमेश ने कहा.
“वो तो ठीक है सर! लेकिन इस वक्त मुझे मेरे दोस्त की जान बचना बहुत जरूरी है. पता नहीं उसके साथ क्या गुजर रही हो.”
“वो तुम्हारा कौन दोस्त है? और इस वक्त अकेले उधर क्या कर रहा था.?” उमेश ने सुशांत से सवाल पूछा.

पहले तो सुशांत थोड़ा झिजक की वो क्या जवाब दे इसे. वो कैसे बताता की वो एक पोचर है और वो भी खुद उसके साथ मिला हुआ है. लेकिन फिर वो हिम्मत करके जवाब दिया.
“सर! वो एक नेचर फोटोग्राफर है. वो अक्सर इस नेशनल पार्क में आता जाता रहता है और थोड़ा अद्वेंटरऔस भी है इसलिए कही भी और किसी भी वक्त चला जाता है. “
“तो तुम्हें क्या लगता है उसके साथ में कुछ नहीं हुआ होगा? जैसा तुम बता रहे हो की वो जानवर तुम्हारे ऊपर हमला किया था तो हो सकता है उस पर भी हमला किया होगा. अगर वो ज़िंदा भी होता तो अब तक उसका पता चल जाना था.” उमेश ने कहा.
“वो तो ठीक है सर लेकिन हम उम्मीद तो नहीं चोद सकते. प्लीज़ सर! मुझे अपने साथ गार्ड्स ले जाने की पर्मिशन दे दीजिए.” सुशांत इस बार उससे थोड़ा रिकवेस्ट करने लगा.
“ओके ओके ठीक है! जब तुम इतना कह रहे हो तो ठीक है ले जाओ. लेकिन अगर सुबह तक ना मिले तो वापस चले आना. समझ जाना की वो अब ज़िंदा नहीं है. और इसके अलावा हमें और गार्ड्स की जरूरत भी पड़ेगी पूरा जंगल खाली करने के लिए.”
“ओके सर! में समझ गया. जैसा आप कह रहे है वैसे ही होगा. अब में चलता हूँ.” सुशांत अपनी सीट से उत्ते हुए उमेश की केबिन से निकल गया.

उमेश की ऑफिस से निकालने के बाद सुशांत अपने साथ और गार्ड्स लिया और रेस्ट हाउस पहुंच कर परवेज़ को भी अपने साथ ले लिया. फिर उसके बाद वो सब उसी जगह पर पहुंच गये जहां पर उस गाड़ी के पास वो सारे कंकाल मिले थे. वहां पहुंच कर सुशांत ने अपने सारे गार्ड्स को जरूरी निर्देश दिए और वो सब रोहन की तलाश में निकल पड़े.

इधर दिल्ली में,

रात की खामोशी में अपने अपार्टमेंट में आरती अपने बेडरूम में दो दिन से थके होने के कारण एक दम गहरी नींद में सोई हुई थी. तभी उसके पलंग के पास में रखे हुए टेबल पर रखा हुआ उसका मोबाइल बजने लगा. आरती नींद से बेमन से उत्त्ते हुए फोन में देखे बिना ही फोन काट दिया. अभी उसे फोन काटे हुए थोड़ा ही देर हुआ था की उसका मोबाइल दोबारा बजने लगा. इस बार चिथड़े हुए उसने उत्त्ते हुए अपना मोबाइल उठाया और देखने लगी के किसका फोन है. उसने देखा की उसका एक फोटोग्राफर दोस्त मयंक का फोन था. वो अपने में बड़बड़ाते हुए बोली “ओफफो हो…..अभी इसे क्या काम पढ़ गया. इतनी रात को फोन कर रहा है.”
“क्या बात है मयंक? ऐसा कौनसा जरूरी काम पढ़ गया जो रात के 3 बजे मुझे नींद से जगा के परेशान कर रहे हो?” आधी नींद में डूबते हुए आरती ने दूसरी तरफ मयंक से कहा.
“एक जर्नलिस्ट के लिए क्या रात और क्या दिन. तुम्हें तो हर वक्त तैयार रहना चाहिए की कही कोई खबर तुम्हारा वेट कर रही हो.” मयंक ने कहा.
“आआआहह…..” एक लंबी जमाई लेती हुई आरती ने फिर मयंक से पूछा “ओके ठीक है अब यह लेक्चर देना बंद करो….और कहो किस लिए फोन किए हो.”
“तुम कहा हो इस वक्त अभी?” मयंक ने कहा.
“ओह कामन मयंक….

अब यह क्या सवाल है? ओफ्कोर्स में सो रही हूँ तो अपने घर पर….

(UPDATE-62)

ही रहूंगी.” आरती ने कहा
“नहीं…मुझे लगा की हो सकता है तुम शायद कही अपने किसी मिशन पर हो.” मयंक ने अपनी सफाई देते हुए कहा.
“नो यार आज कल कोई काम नहीं है इसलिए सारे घोड़े बेच के सो रही थी. सोचा था आज जी भर के सो लूँगी, लेकिन अब लगता है तुम फिर कोई घोड़ा लेकर आए हो मेरे लिए.” आरती ने कहा.
“हां तुमने ठीक कहा में तुम्हारे लिए एक बेहतरीन घोड़ा लाया हूँ. जिसे बेच कर तुम मालामाल हो जाओगी.” मयंक ने कहा.
“अब बस भी करो मयंक….में नींद में हूँ जल्दी से बताओ तुम कहना क्या चाहते हो?” आरती ने कहा.
“तुम अभी और इसी वक्त जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के लिए निकल सकती हो?” मयंक ने कहा.
“जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क? और वो भी इस वक्त. तुम क्या वहां उस जंगल में सही में कोई घोड़ा मेरे लिए देखे हो क्या?” आरती ने थोड़ा चौंकते हुए कहा.
“देखो मेरी बात को मज़ाक में मत लो. अगर तुम सुबह तक यहां पर आ सकती तो तुम्हें एक बड़ी धमाकेदार और सेन्सेशनल न्यूज कवर करने को मिलेगी और तुम यह न्यूज सबसे पहले कवर करोगी तो….शायद मुझे तुम्हें बताने की जरूरत नहीं है इससे तुम्हें और तुम्हारी न्यूज चॅनेल वाले को कितना फायदा पहुंचेगा.” मयंक ने कहा.
“ऐसी कौनसी न्यूज है जिससे मुझे और मेरे न्यूज चॅनेल को इतना फायदा होगा और वो भी जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में?” आरती ने कहा.
“यहां इस जंगल में पिछले दो दीनों से कुछ गड़बड़ चल रही है…..पहले तो यहां के फोरेस्ट रेंजर्स वाले तो इस बात को दबा ने की कोशिश में लगे थे. लेकिन आज यह लोग तमाम टूरिस्ट्स को इस नेशनल पार्क से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे है. कहते है जंगल टूरिस्ट्स लोगों के लिए ख़तनाक हो चुका है. अब वो क्यों हुआ है यह तो नहीं बता रहे है ” इतना कह कर मयंक थोड़ा रुका ही था की आरती ने बीच में कह दिया.
“मगर क्यों? ऐसी क्या बात हो गयी की सारे टूरिस्ट्स को वहां से हटाया जा रहा है?”
“वो इसलिए क्योंकि यहां इस जंगल में कुछ दीनों से कुछ अजीब से दिखने वाले जानवर है, मैंने तो अपनी आँखों से तो देखा नहीं लेकिन जितना सुना हूँ उसके मुताबिक़ वो जानवरो की शकल बंदारो से बहुत मिलती जुलती है. लेकिन वो कोई आम से बंदर नहीं है, बल्कि अगर उन्हें हैवान या दरिन्दा कहा जाए तो गलत ना होगा. उन्होंने यहां इतना उत्पात मचाया हुआ है की उनसे पूरा जंगल खौफ खाए बैठा है. उन्होंने तो कितने फोरेस्ट ऑफिसर्स, टूरिस्ट्स और कुछ गाँव वालों को भी अपना निशाना बनाया है. अगर तुम इन लोगों के बारे में अपने न्यूज चॅनेल वालो के जरिए लोगों को बनाएगी तो तहलका मच जाएगा.” मयंक इतना कह कर चुप हो गया.
“हम….

खबर तो काफी इंट्रेस्टिंग है लेकिन मेरी समझ में नहीं आ रहा है जिस जानवरो की तुम बात कर रहे हो वो अचानक कहा से पैदा हो गये?” आरती ने कहा.
“अब यही तो पहेली है आरती . यह तो अभी किसी के समझ में नहीं आ रहा है की वो इतनी तादाद में कहा से आ गये. लेकिन तुम देर ना करते हुए अगर सुबह यहां जल्दी आ गयी तो बेहतर होगा तुम्हारे लिए.” मयंक ने कहा.
“वो तो ठीक है मयंक. लेकिन जैसा तुम कह रहे हो सारे टूरिस्ट्स को वहां से निकाला जा रहा है तो जाहिर सी बात है हमें अंदर भी आने नहीं दिया जाएगा? और मीडिया वालो को तो और भी नहीं” आरती ने कहा.
“तुम इसकी फिक्र मत करो आरती. वो मुझ पर चोद दो. यहां मेरी अच्छी खासी पहचान है. इतने सालों से मैंने यहां खाक नहीं छ्चानि है. तुम कैसे भी करके सुबह तक यहां आ जाओ. “ कहते हुए मयंक थोड़ा रुका फिर कहा “ और ज़रा मेरे बारे में भी ज़रा ख्याल करना.” मयंक का मतलब था की इतनी जरूरी इन्फार्मेशन के लिए भी कमिशन चाहिए था.
“तुम उसकी फिर्क मत करो. तुम्हें तुम्हारा हिस्सा मिल जाएगा. में सुबह तक जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क पहुंच जाओंगी तुम तैयार रहना.” आरती ने कहा.
“ओके ठीक है में तैयार रहूँगा.” उसके बाद दोनों के बीच बातचीत खत्म हो गयी.

सुबह जब श्रुति की आँख खुली तो उसने अपने चारों तरफ देखने लगी. अचानक उसे कल रात में जो घटा था वो सब याद आने लगा. शर्म और पछतावे से उसकी आँखें झुक गयी. फिर उसने अपने बाजू में देखा तो रोहन वहां पर नहीं लेता हुआ था. वो उठ कर बैठने की कोशिश करने लगी. उसने देखा की उसे वही चादर जो उसने रोहन के बदन पर लपेटा था अब उसके बदन पर लिपटा हुआ है. वो समझ गयी थी की रात में उसे ठंड लग रही होगी तो उसने उसे यह चादर ओढ़ा दी होगी. “लेकिन वो है कहा?” सोचते हुए श्रुति उस चादर को अपने बदन पर अच्छी तरह लपेटने के बाद पलंग से उतरने लगी. तभी उसने देखा की पलंग के थोड़े दूर पर लड़की का ढेर पर पढ़ा हुआ है और किसी ने उस पर आग जलाई हुई है ठंड से बचने के लिए. यह देख….

UPDATE-63)

कर श्रुति को बहुत अच्छा लगा की उसने उसका कितना ख्याल रखा है. उसे ठंड से बचाने के लिए उसे चादर ओढ़ाया फिर आग जलाई ताकि कुछ ठंड से और राहत मिले. फिर श्रुति पलंग से उतार कर बाहर वाले कमरे में जाने लगी. लेकिन उसे रोहन वहां नहीं दिखा. वो थोड़ा परेशान हो गयी की यह किधर गया.वो फौरन यहां वहां देखने लगी लेकिन रोहन को ना पकड़ उसने घर के दरवाजे की तरफ जाते हुए बाहर देखने लगी. उसने देखा की बाहर अब बारिश थाम चुकी थी और सारे परिंदे अपनी अपनी आवाजें निकाल रहे थे. उनकी इस आवाज़ों से श्रुति काफी मनोरणजीत हो रही थी. उसे ऐसा लग रहा था जैसे की हूँ सब मिलकर कोई गाना गया रहे हो.

फिर बाहर का इतना हसीना नज़ारा देखने के बाद श्रुति की निगाहें रोहन को ढूंढ़ने लगी की तभी उसे रोहन एक पेड़ के सहारे सिगरेट पीता हुआ मिला. श्रुति की तो जैसे जान में जान आई रोहन को देखकर. उसे तो लगा था की कही वो फिर से ना उसे चोद कर चला गया हो. रोहन भी उसे देख लिया था दरवाजे पर खड़े होते हुए.
“उठ गयी गयी तू……..? तेरे कपड़े सूख गये होंगे, मैंने उन्हें अंदर एक कुर्सी पर तांगा हुआ है. पहन लो उसे.” रोहन ने कहा. जवाब में श्रुति सिर्फ़ अपनी गर्दन थोड़ी हां के अंदाज़ में हिलाई और अंदर जाकर उस कुर्सी पर से अपने कपड़े उठाए और उसे पहन ने लगी.

थोड़ी देर बाद वो अपने कपड़े पहने कर बाहर आई जहां रोहन खड़े हुए अभी भी सिगरेट सुलगा रहा था. रोहन उसकी तरफ देखा फिर बोला.
“चलें?”
“हम….” श्रुति के इतना कहते ही दोनों अपनी मंजिल की और चलने लगे. दोनों कोशिश कर रहे थे एक दूसरे से नज़रे ना मिलने की. शायद वो दोनों कल रात में जो कुछ भी हुआ था उस पर शर्मिंदा थे. खासकर के श्रुति से तो कुछ बोला ही नहीं जा रहा था. वो दोनों ऐसे ही थोड़ी देर तक चलते रहे की तभी

श्रुति ने रोहन से कहा.
“सुनो!!” श्रुति की आवाज़ पर रोहन पलट कर उसे देखने लगा
“मुझे भूख लगी है. मुझसे एक कदम भी आगे नहीं चला जबा रहा है.” कहते हुए श्रुति वही पास के एक पेड़ के पास तक लगा के खड़ी हो गयी. रोहन भी सोचा की उन दोनों ने डेढ़ दिन से कुछ खाया पिया नहीं है. भूख लगना तो लाज़मी है.
“रुको में कुछ इंतजाम करता हूँ.” रोहन ने कहा.
“तुम कहा जाओगे? में भी तुम्हारे साथ चलूंगी.” श्रुति ने कहा.
“रुको तुम….में कोई ज्यादा दूर नहीं जा रहा हूँ….यही पर हूँ.” कहते हुए रोहन आस पास के पेड़ो पर देखने लगा की कोई खाने लायक फल है की नहीं. तभी उसे बाहर और आलू बुखारे का पेड़ दिखा.
“वो देखो बाहर और आलू बकयरा का पेड़. अभी तो फिलहाल हमें इनसे ही अपनी भूख मिटानी होगी.” रोहन, श्रुति से कहते हुआ बाहर के पेड़ के पास गया और उसकी एक टहनी को जो काफी नीचे थी पकड़ के हिलाने लगा. उसके इस तरह थाने हिलाने से ढेर सारा बाहर के फल ज़मीन पर गिरने लगे. जब बहुत सारे बाहर के फल जमा हो गये तो उसने इसी तरह आलू बुखारे के फल भी जमा कर लिया. अब उनके पास इतने तो फल हो चुके थे की वो अपनी भूख को भगा सकते थे. सारे फल को रोहन एक जगह जमा कर के श्रुति को भी वही बुलाया और उससे कहने लगा
“अब यही मिले है मुझे. इसे खाके अपनी भूख मिटा ले.”
“यह क्या है? “ श्रुति आलू बुखारे को उठाते हुए कहा.
“आलू बकयरा. बहुत ही स्वादिष्ट होता है खाने में. खाके तो देखो” रोहन ने कहा. रोहन की बात सुनकर श्रुति उस आलू बुखारे के फल को खाने लगी.
“कैसे लगा?” रोहन ने श्रुति को खाते हुए देखा तो पूछा.
“हम………इट’से गुड….अच्छा है.” कहते हुए श्रुति इस बार बाहर के फल चखने लगी.

वो दोनों कुछ देर तक इसी तरह खामोशी से फलों को कहा रहे थे. फिर थोड़ी देर के बाद श्रुति ने पूछा .
“अब हम क्या करेंगे? मतलब हमें उसी छोटी पर जाना होगा?”
“हां क्यों? तेरा पैर तो पहले से ठीक है ना?” रोहन, श्रुति के पैर की और देख कर कहा.
“हां मेरा पैर पहले से बेहतर है.” श्रुति ने रोहन के सवाल का जवाब दिया.
“हां तो बस अपना पेट भर के हम फिर वही चलेंगे.” रोहन ने कहा. फिर दोनों के बीच थोड़ी देर तक खामोशी च्छाई रही. फिर थोड़ी देर बाद श्रुति उस खोमोशी को तोड़ते हुए कहा.
“तुम्हें कुछ अजीब सा नहीं लगता.” श्रुति ने रोहन से कहा.
“क्या?” रोहन बाहर के फल को अपने मुंह में चबाते हुए कहा.
“हम पिछले दो दिन से साथ ही में है पर एक दूसरे का नाम भी नहीं जानते.” श्रुति, रोहन की आँखों में देखकर कहा.
“क्या करेंगे नाम जानकार. मुझे तुझसे कोई दोस्ती थोड़े ही ना करना है. में तो बस तुझे सही सलामत तेरे घर तक चोद दम, फिर तू अपने रास्ते और में अपने रास्ते.” रोहन ने कहा.
“क्यों नाम जाने के लिए दोस्ती करना जरूरी है क्या? अजनाबीयों के नाम नहीं होते क्या?” श्रुति ने कहा…..

(UPDATE-64)

रोहन थोड़ी देर सोचा की यह लड़की क्या बात लेकर बैठ गयी है. लेकिन कुछ सोचकर उसने कहा.
“रोहन! रोहन नाम है मेरा.”
“अच्छा नाम है.” फिर श्रुति थोड़े देर रुकी की शायद रोहन उससे भी उसका नाम पूछे. लेकिन जब उसने देखा की वो बाहर और आलू बुखारे के फल खाने में व्यस्त है तो उसने पूछा.
“मेरा नाम नहीं पूचोगे?”
“क्या करूँगा जानकार? मैंने कहा ना मुझे तुझसे कोई दोस्ती थोड़े ही ना करनी है.” रोहन सिर्फ़ इतना ही कहा.
“अरे तो मैंने सिर्फ़ दोस्ती करने के लिए ही नाम नहीं पूछा था. में तो बस ऐसे ही पूंछ लिया था.” फिर श्रुति थोड़े देर रुकी फिर कहा.
“और यह तुम क्यों मुझसे तेरे मेरे से बात करते हो. तुम्हें नहीं लगता लड़कियों से इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए.” श्रुति जो रोहन से अब तक सिर्फ़ जरूरत भर की बात किया करती थी अचानक से ना जाने क्यों उससे काफी घुल मिलकर बात करने की कोशिश कर रही थी. श्रुति के इस तरह कहने से रोहन को कोई जवाब देते नहीं बन रहा था. पहले तो वो थोड़ी देर तक चुप बैठा. फिर उसने देखा की श्रुति अब भी उसके जवाब वेट कर रही थी तो उसने आख़िर कह ही दिया .
“में लड़कियों से ऐसे ही बात करता हूँ.”
“क्यों? कोई खास वजह?” श्रुति ने कहा.
“असल में…..देखो बुरा मत मना में तेरे बारे में नहीं कह रहा हूँ. मुझे लगता है लड़कियाँ जो होती है बहुत धोकेबाज़ होती है. वो सिर्फ़ अपने बारे में ही सोचती है.” रोहन ने कहा.
“क्यों तुम ऐसा क्यों सोचते हो? क्या किसी लड़की ने तुम्हें धोखा दिया था क्या?” श्रुति ने फिर से रोहन से सवाल पूछा.

रोहन को थोड़ा अजीब लग रहा था इस लड़की से अपनी पिछली जिंदगी के बारे में बात करना और दूसरी वजह यह भी थी के कल उन दोनों के बीच जो शारीरिक संभंध हुआ था उसकी वजह से वो थोड़ा शर्मिंदा भी था जिसकी वजह से वो बातें करने में थोड़ा झीजक रहा था. लेकिन उसे बड़ी हैरत हो रही थी के इस लड़की को और ज्यादा शरमाते के बजाए यह उससे बिलकुल खुल कर बातें कर रही थी.
“अरे चुप क्यों बैठे हो बताओ? “ श्रुति ने कहा.
“हां….थी एक लड़की” आख़िर रोहन, श्रुति के बार बार आग्रह करने पर अपनी पिछली जिंदगी के बारे में बताने लगा.
“संध्या नाम था उसका. मेरे स्कूल में पढ़ती थी वो. बहुत मासूम, बहुत ही भोली. उसकी अंदर जो चीज़ मुझे सबसे ज्यादा अच्छी लगती थी वो थी उसकी मुस्कान.” रोहन अपनी इस कहानी के बारे में बताते हुए बिलकुल खो सा गया था. जैसे वो सारा दृश्या उसके सामने फिर से चल रहा हो.
“उसकी एक मुस्कान के लिए में सबकी नज़रे बचके घंटों उसे निहारा करता था. एक दिन ऐसे ही में उसे निहार रहा था की उसने भी जैसे समझ लिया था की में चुप चुप के उसे ही देख रहा हूँ. उस दिन तो वो कुछ ना बोली लेकिन जब उसने देखा की मेरा यूँ रोज़ रोज़ उसको निहारना बंद नहीं हो रहा तो एक दिन अपनी सहेलियों से दूर अकेले में उसने मुझे बुलाया. और मुझसे कहने लगी की में क्यों उसे रोज़ रोज़ देखता हूँ.” अचानक रोहन को याद आया की वो कुछ ज्यादा ही डीटेल में उसे कहानी बता रहा है. वो सोचने लगा की कही वो बोर तो नहीं हो रही है.
“अरे में भी तुझे कहा इतनी बातें करके बोर कर रहा हूँ. वो दरअसल बाद में यूँ हुआ की….” रोहन अभी पूरी बात कर भी नहीं पाया था की श्रुति उसे टोकते हुए कहा.
“अरे क्या हुआ? में कहा बोर हो रही हूँ. इनफॅक्ट मुझे तुम्हारी स्टोरी अच्छी लग रही है. तुम मुझे बताओ उसके बाद क्या हुआ जब उसने तुम्हें अकेले में बुलाया था?” श्रुति, रोहन की कहानी में काफी रूचि लेते हुए कह रही थी. रोहन थोड़ा रुका फिर कहना चालू किया.
“जब उसने यह कहा की में उसे क्यों घूर घूर के देखता हूँ तो….पहले तो मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं था. क्योंकि में अंदर से बहुत डरा हुआ था. थोड़े देर तक तो में उस का हसीना चेहरा ही देखता रहा , लेकिन जब उसने मुझे दोबारा टोका तो मैंने भी झट से कह दिया की “जब तुम मुस्कुराती रहती हो तो मुझे बहुत अच्छी लगती हो, और में बस घंटों भर तुम्हारी यही मुस्कुराहट देखने की कोशिश किया करता रहता हूँ. मुझे तो लगा था मेरे ऐसे कहने से वो खफा हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ बल्कि वो मुझे कहने लगी “ तुम्हें सिर्फ़ मेरी मुस्कुराहट अच्छी लगती है और कुछ नहीं?” इतना कहते हुए वो हंसते हुए वहां से चली गयी.

लेकिन जाते हुए अपने साथ में मेरा दिल भी ले गयी थी क्योंकि अब तक तो में दूर से बैठे हुए मुस्कुराते हुए देखा करता था लेकिन उस रोज़ में उसे अपने नज़दीक से हंसते हुए देखा था जैसे कोई मोटी बरस रहे हो. खैर उसका यूँ हंस कर चला जाना यह इस बात का संकेत था की जो मेरे दिल में उसके लिए जज़्बात है वो उसके दिल में भी….

(UPDATE-65)

मेरे लिए वैसे ही जज़्बात है. फिर हम दोनों का प्यार परवान चढ़ता गया. यहां तक की साथ में जीने मरने की कस्में भी खाली. शादी करने का वादा भी एक दूसरे से कर लिया. लेकिन फिर ना जाने…. किसकी नज़र हमारे इस प्यार को लग गयी. जब हम हे स्कूल पास करके कॉलेज में कदम रखे तो वहां की दुनिया स्कूल के माहौल से थोड़ी अलग थी. नये नये दोस्त बनाने का रिवाज़ चालू हो गया. लेकिन यह सब मुझे इतना आकर्षित ना कर सके क्योंकि मेरी दुनिया तो एक ही जगह बस्ती थी, और वो थी संध्या. लेकिन यह मेरी सोच थी की जैसा में सोचता हूँ संध्या भी वैसा ही सोचती है. कॉलेज में आकर उसने बहुत सारे नये नये फ्रेंड्स बनाए थे जिनमें से कुछ लड़कियाँ थी तो कुछ लड़के भी थे. पहले शुरू शुरू में तो उसका ध्यान मुझपर था लेकिन जैसे जैसे कॉलेज का दिन आगे बढ़ता गया संध्या का मुझपर लगाओ भी कम होता गया. पहले तो में इसे अपना वहाँ समझ रहा था लेकिन हकीकत तब पता चली जब मैंने उसे अपने कॉलेज के पास बने हुए गर्दन में उसे ढूँढ रहा तो उसे एक लड़के की बाहों में पाया. उस दिन मेरा दिल किर्छी किर्छी हो गया था. मानो जैसे मेरे ऊपर आसमान टूट पड़ा हो. मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे जिस ज़मीन पर में खड़ा हूँ वो फॅट जाए और में उस में समा जाओं. उस दिन मैंने बहुत रोया, बहुत आँसू बहाया. शायद उसके बाद मैंने आज तक नहीं रोया. फिर उस दिन के बाद तो मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी संध्या से सामना करने की, लेकिन में चाहता था उससे पूछो की उसको क्या हक़ था यूँ मेरे साथ धोखा देने का. अगर में उसे पसंद नहीं था तो मेरे साथ यूँ प्रेम संबंध क्यों बनाए. फिर एक दिन मैंने हिम्मत करके आख़िर संध्या से पूंछ लिया जो उसने मेरे साथ किया था. लेकिन उसने जो जवाब दिया उसे तो सुनकर तो जैसे उस दिन मेरी आत्मा भी जख्मी हो गयी थी. उसने कहा था की हमने जो प्यार किया था वो एक भूल थी, वो कम उमारी में लड़कपन वाला प्यार था. जिसमें ना समझी के अलावा कुछ और नहीं था. उसका कहना था की उसे उस वक्त अक़ल नहीं थी की क्या सही है और क्या गलत. खैर उसके बाद मैंने उससे कुछ और नहीं पूछा, में वहां से सीधा चला गया. में चाहता था की मेरा सामना संध्या से आज के बाद ना हो. अगर वो मेरे सामने आएगी तो मुझे उसकी वही मुस्कुराहट दिखेगी जिसका में दीवाना था. और में नहीं चाहता था की में उसके पीछे दीवाना और मजनू बन के फिरू. इसलिए मैंने वो कॉलेज ही चोद दिया.

बल्कि मैंने उसके बाद कोई और कॉलेज जॉइंट नहीं किया. क्योंकि मेरा मना था इसी कॉलेज की चखचौंड ने मुझसे मेरी संध्या छ्चीनी थी. फिर उसके बाद से ही मुझे लड़की ज़ात से जैसे नफरत सी होने लगी थी. उसके बाद जितना भी मेरे से मुमकिन हो सका मैंने लड़कियों से कम ही वास्ता रखा” अपनी पूरी कहानी सुनाने के बाद रोहन की आँखें थोड़ी नाम हो गयी थी. श्रुति ने भी देख लिया था की रोहन थोड़ा भावक हो गया है.
“ई आम सॉरी!! मैंने तुम्हें फोर्स किया तुम्हारी कहानी सुनाने को. आक्च्युयली मुझे नहीं पता था यह इतनी परेशान स्टोरी होगी. में तो बस यह जानना चाहती थे के तुम लड़कियों से इतनी नफरत क्यों करते हो.” श्रुति ने कहा.
“कोई बात नहीं, क्या फर्क पढ़ता है. और वैसे भी बारे दीनों बाद आज ऐसा लगा है जैसे मेरा मन कुछ हल्का हो गया. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे में कोई भोज अपने दिल में लिए फिरता रहता हूँ. तू ने आज…..सॉरी.” रोहन थोड़ा हंसते हुआ कहा “तुमने आज अगर मेरे से ज़बरदस्ती मेरे अतीत के बारे में ना पूछती तो अभी में जितना बेहतर महसूस कर रहा हूँ शायद ना करता. इसलिए तुम्हारा शुक्रिया” रोहन ने श्रुति की तरफ मुस्कुराते हुए कहा.
“थॅंक गोद तुमने मुझसे ‘तुम’ से बात तो किया. मतलब अब सारी नाराज़गी दूर हो गयी. अगर मुझे पहले से मालूम होता तो की तुम इतना भोज अपने दिल में लिए फिर रहे हो तो में कबका तुमसे तुम्हारा पस्त पूंछ लेती.” श्रुति ने कहा.
“नहीं…तुम ऐसा नहीं करती” रोहन ने कहा.
“वो क्यों? श्रुति थोड़ा हैयरसत से कहा.
“वो इसलिए क्योंकि तेरी…..सॉरी तुम्हारी नजारे में इससे पहले तुम्हारा नो. 1 दुश्मन था में. तुम तो मुझसे ढंग से बात भी नहीं कर रही थी. तो मेरे दिल का हाल क्या खाक पूछती.” रोहन ने कहा. श्रुति, रोहन के इस तरह कहने से थोड़ा मुस्कराई फिर उसने कहा.
“ताकि बात और थी….अगर मेरी जगह कोई और होता तो भी वो वही करता. एनीवे फिर भी ई आम सॉरी” श्रुति बड़ी मासूमियत से अपने दोनों कानों को अपने हाथों से पकड़ते हुए माफी माँगनी लगी. उसके इस तरह से माफी माँगने पर जैसे रोहन के दिल में एक बार वैसी ही घंटी बजने लगी जैसे बरसों पहले बाजी थी. श्रुति का यह भोला….

(UPDATE-66)

भाला चेहरा उसका मान मो रहा था. वो फिर से उसे वैसे एक टुक देखे जा रहा था की तभी श्रुति ने उसे टोका.
“क्या हुआ तुमने मुझे माफ नहीं किया?” रोहन थोड़ा चौंक गया था श्रुति के इस तरह कहने से
“अरे ऐसी बात नहीं है. वो में कुछ और ही सोच रहा था.” रोहन ने कहा.
“तो इसका मतलब तुमने मुझे माफ नहीं किया क्या.? श्रुति ने फिर से बारे भोलेपन से कहा.
“अरे ऐसी बात नहीं है. इसमें माफी माँगने वाली कौनसी बात है. वो हालत ही ऐसे थे. इसमें तुम्हारा थोड़े ही कोई कसूर है.” रोहाना ने कहा.
“ओके ठीक है. अब तो हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं है.

तो क्यों ना हम एक दूसरे के दोस्त बन जाते है.” कहते हुए श्रुति ने रोहन की तरफ अपना दाया हाथ बढ़ा दिया.
“हां हां क्यों नहीं..लेकिन मुझे मालूम तो पढ़े की मेरे दोस्त का नाम क्या है?” रोहन मुस्कुराते हुए श्रुति की तरफ देखकर कहा. श्रुति भी रोहन के इस तरह कहने से थोड़ा मुस्कराने लगी और कहने लगी.
“मेरा नाम श्रुति कपूर है.”
“श्रुति!! जैसी प्यारी तुम हो वैसा ही प्यारा नाम भी है…..” रोहन को कहने के बाद में एहसास हुआ की वो क्या बोल गया. श्रुति भी थोड़ा झेंप सी गयी थी. रोहन ने जल्दी से बात को दूसरी और घुमा लिया.
“अगर तुम्हारा पेट भरा हो चलें आगे की और?”
“हां हां क्यों नहीं.” श्रुति भी कहते हुए उठ के चलने लगी.
“श्रुति? तुम्हारे घर में कौन कौन है?” चलते हुए रोहन ने कहा.
“मेरे घर में मेरे पापा, मामा और में. यानि की सिर्फ़ तीन. और तुम्हारे घर में?” श्रुति भी रोहन से कहने लगी.
“मेरी मां,छोटी बहन और उससे छोटा एक भाई.” रोहन ने जवाब दिया.
“और तुम्हारे पापा?” श्रुति ने पूछा.
“अब इस दुनिया में नहीं है. में ही हूँ जो अपने घर वालो का पेट पालता हूँ.” रोहन थोड़ा रुका फिर श्रुति की और देख कर कहा “इसलिए में यह सब काम करता हूँ. अगर में यह काम ना करूं तो मेरा परिवार भूखा मर जाएगा.”
“ओह ई आम सॉरी!! वो तो ठीक है रोहन, लेकिन तुमने सोचा है अगर तुम्हें यह काम करते हुए कुछ हो गया तो सोचो तब तुम्हारे परिवार का क्या होगा? तब क्या वो भूखे नहीं मरेंगे?” श्रुति ने कहा.
“मुझे पता है श्रुति. यही डर मुझे सब से ज्यादा खाए जाता है. यह जो में इस बार की ट्रिप में आया था मैंने तय किया था की यह मेरी लास्ट ट्रिप होगी. इसके बाद कोई भी ज़ोख़्म वाला काम नहीं करता. लेकिन खैर अब क्या हो सकता है. अभी तो फिलहाल हम अपनी जान ही बचाल ले उन हैवानो से यही बहुत बड़ी बात है.

विजय कपूर तैयार होकर अपने ऑफिस जाने की तैयारी कर रहा था की तभी टीवी में कोई न्यूज चॅनेल चल रहा था. जिसमें कोई ब्रेकिंग न्यूज दिखाई जा रही थी. पहले तो विजय कपूर कोई खास ध्यान नहीं दिया लेकिन उस न्यूज चॅनेल के न्यूज रीडर ने यह कहा की “जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जो की नैनीताल के पास पढ़ता है” यह सुनकर विजय कपूर के कदम थोड़े तित्के. क्योंकि उसे ध्यान आया की श्रुति भी तो दो दिन पहले अपने दोस्तों के साथ नैनीताल जाने की बात कर रही थी. और अभी यह न्यूज में नैनीताल के से रिलेटेड कोई न्यूज दिखाया जा रहा है. वो यही सोचते हुए टीवी का रिमोट अपने हाथ में लेते हुए उसका वॉल्यूम बढ़ने लगा क्योंकि उसे जानना था की सब ठीक तो है ना नैनीताल में. विजय ने देखा की टीवी में एक न्यूज करेस्पॉंडेंट (संवादाता) कुछ कह रही थी.
“आज हमको कुछ ऐसा बताने वाले है जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएँगे. में यहां इस वक्त जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में हूँ.

यहां पर पिछले कुछ दीनों से कुछ अजीब सा हो रहा है. इतना अजीब के यहां पर लोगों की जानें जा रही है. जिनमें यहां आने वाले कुछ टूरिस्ट्स है कुछ यहां के आस पास बसे गाँव के आदिवासी है और कुछ यहां के फोरेस्ट ऑफिसर्स भी है. और यह सब जानें ले रहे है कोई आदमख़ोर जानवर!! यानि मान ईटर्स!.जब भी आपके दिमाग में आदमख़ोर या मान ईटर के शब्द आपको सुनाई देगा तो आप सिर्फ़ एक ही जानवर के बारे में सोचेंगे, और वो है शेयर. लेकिन क्या हकीकत में ऐसा है? नहीं!! क्योंकि यह किसी शेयर या तेंदुए का काम नहीं है. शेयर हो या तेंदुआ या फिर कोई और अन्य जंगली जानवर. अपने शिकार पर इस तरह हमला नहीं करते और हमला करने के बाद उन्हें इस तरह अपना भोजन नहीं बनाते है. क्योंकि, यहां इस जंगल में, पिछले दीनों जो मौतें हो रही है उनके बारे में अगर आप सुनेंगे तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएँगे. में जिस जानवर की बात कर रही हूँ वो अकेले ही दस आदमी पर इस तरह से झपट्टा है की किसी को भी संभालने का मौका नहीं मिलता. और जब उन्हें समझ में आता है की उनपर किसी जानवर ने या किसी हैवान ने हमला किया है तो उससे पहले ही वो जानवर अपने तेज और बारे नुकिले दाँतों और नाखूनओ से उनको….

(UPDATE-67)

चियर फाड़ डालते है. और फिर उन्हें मौत के घाट उतारने के बाद वो उनके शरीर से एक एक बोटी नोंच नोंच के कहा लेता है. यहां तक उनके जिस्म से सारा खून भी पी लेता है. मानो ऐसा लगता है जैसे वो कई जन्मो के भूखे हो. “ फिर आरती अपने माइक को पास में खड़े एक गाँव वाले की तरफ ले जाती है और उससे सवाल पूच्छने लगती है.
“हमारे साथ यहां के कुछ गाँव वाले है वो आपको इन हैवानो के बारे में और खुलासा करके बताएँगे?” फिर विजय ने देखा की वो न्यूज रिपोर्टर एक गाँव वाले का इंटरव्यू ले रही थी.
“आप का नाम क्या है?
“मेरा नाम देव है.” उस गाँव वाले ने बताया
“देव क्या आप हमें बताएँगे की यहां पर जो बुरा घाट रहा है. जो मौते हो रही है उसके पीछे क्या कारण है?” पहले तो उस आदिवासी देव को कुछ समझ नहीं आ रहा था की कैसे बोले लेकिन फिर भी उसने कहना चालू किया.
“वो लोग दरिंदे है…..शैतान है…वो इसनानो का खून पीते है. उनका माँस खाते है. जो भी उन दरिंदों का शिकार होता है उसके जिस्म पर हड्डियों के सिवाय कुछ नहीं बचता….ऐसा लगता है जैसे वह दरिंदे बोटी नोंच नोंच के खाए हुए हो. मानो वो जन्मो के भूखे हो.” इतना कहकर देव चुप हो गया.
“लेकिन यह जानवर जिस की आप बात कर रहे है यह कहा से अचानक आ गये…..? क्या इससे पहले भी किसी ने इनके बारे में सुना या देखा है?” आरती ने पूछा.
“नहीं आज से पहले ना तो इन्हें किसी ने देखा और ना ही इनके बारे में कुछ सुना है. पता नहीं यह जीभ अचानक कहा से आ गये.” देव ने आरती के सवाल का जवाब देते हुए कहा.
“क्या आपने देखा है?”
“जी…..हां मैंने अपनी आखों से देखा है.

में पास के गाँव से गुजर रहा था तो मैंने देखा था कोई चार या पाँच वहशी जानवर यहां के फोरेस्ट गार्ड्स और कुछ टौरिस्टो पर हमला कर रहे थे. मेरे देखे ही देखते वह सब उन लोगों को इस तरह से कहा गये मानो वो कोई इंसान ना कोई मुर्गी हो.. इतना भयानक दहशत भरा माहौल जब मैंने देखा तो मेरे तो होश ही उड़ गये थे. फिर इससे पहले की उन दरिंदो का ध्यान मेरी और जाता मैंने वहां से भाग जाना ही उचीत समझा.” देव ने कहा.
“अच्छा यह बताए जब जंगल के आस पास इतना दहशत का माहौल है तो यहां के प्रशासन क्या कर रही है? क्या गाँव वालो को कोई सुरक्षा प्रदान की जा रही है प्रशासन की तरफ से?” आरती ने कहा.
“नहीं!! ऐसा भी कुछ भी यहां नहीं हो रहा है. हमें किसी भी प्रकार की कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है. हमारे पास के गाँव में कुछ लोगों को वो दरिंदे अपना शिकार बना चुके है. हम सब ने इसकी शिकायत यहां के फोरेस्ट ऑफिसर से भी की. लेकिन ऐसा लगता है जैसे उन्हें हमारी जान की कोई परवाह ही नहीं है. वो तो सिर्फ़ यहां पर जो टूरिस्ट आते है उनकी ही सुरक्षा में लगे हुए है. जितना हो सके अपनी सुरक्षा तो हम खुद से ही करते है. लेकिन वो दरिंदे कोई आम से जानवर नहीं है जिन्हें लाठियों के ज़ोर से हक़ाल दिया जाए, वो तो वहशी है, बारे खतरनाक है. हम अपनी सुरक्षा उन दरिंदो से लाठियों से नहीं कर सकते. “ इतना सब कुछ कहने के बाद देव चुप हो गया.
“तो यह थे देव जो यहां के पास के ही गाँव के राहिवासी है. अभी अभी इन्होंने हमें जो बताया, उसे सुनकर तो मेरे भी रोंगटे खड़े हो गये है….यह जंगल इतना भी भयानक हो सकता है, मुझे पता नहीं था. मुझे तो लग रहा है में यहां पर खड़े हुए यह रिपोर्टिंग कर रही हूँ और फिर शायद ऐसा भी हो की वह दरिंदे यहां पर भी आ जाए. खैर बात करते है यहां के गाँव वालों की जिन्हें अपनी जान उन दरिंदो से बचना अब मुश्किल लग रहा है. लेकिन अभी तक यहां के प्रशासन के द्वारा हमें कोई जवाब नहीं मिला है.” कहते हुए आरती थोड़ा रुकी फिर वो अपने फोटोग्राफर दोस्त मयंक की तरफ मुड़ी जो इतनी देर से उसके साथ में था.
“अभी अभी मैंने आपको यहां के एक गाँव वालो के बारे में बताया की वो क्या खतरा महसूस करते है. लेकिन अभी में आपसे मिलवाओंगी एक फोटोग्राफर से. जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इस जंगल में बिताए है. “ फिर आरती मयंक की तरफ माइक करते हुए कहा.
“जी आपका नाम?”
“मेरा नाम मयंक है. और में एक नेचर फोटोग्राफर हूँ. “ मयंक ने कहा.
“मयंक अभी अभी हमने यहां के गाँव वासी देव से बात की. उन्होंने हमें एक खूणकार जानवर के बारे में बताया, जो इंसानो का खून और उनका माँस कहा जाता है. आप ज़रा इसके ऊपर कुछ रोशनी डाल सकते है?” आरती ने कहा.
“हां बिलकुल….जैसा की देव ने अभी जो बताया वो बिलकुल सच है. में पिछले 10 दीनों से यहां इस जंगल में हूँ.

पहले तो मैंने ऐसा किसी घटना के बारे में नहीं सुना और नाहीं देखा…..

(UPDATE-68)

जंगल पहले की तरह बिलकुल पुरसुकून था. ना कोई हलचल ना कोई शोर शराबा कुछ भी नहीं. लेकिन पिछले 3 दीनों से यहां पर कुछ अजीब सा हो रहा है.यहां पर लोगों की मौतें हो रही है. पहले तो में समझ नहीं पा रहा था की इन सब चीज़ों के पीछे कारण क्या है, लेकिन जब मैंने खुद अपनी आँखों से उन लाशों को देखा……सॉरी!! लाश नहीं कंकाल कहना ठीक रहेगा, मानव कंकाल!! जब मैंने उन कंकालो को देखा तो ऐसा लग रहा था जैसे उन लाशों के ऊपर से किसी ने बड़ी सफाई से उनके ऊपर से सारा माँस निकाल लिया हो. उनके जिस्म से या फिर उन कंकालों के आस पास भी कोई माँस का टुकड़ा तक नहीं मिला. मैंने अपने 15 सालों के कैरियर में ऐसी चीज़ नहीं देखी . क्योंकि मुझे पता है कोई भी जंगली जानवर इस तरह से शिकार नहीं करता, यह तो कोई और ही चक्कर है. फिर उसके बाद मैंने देखा की यहां के तमाम फोरेस्ट अफीशियल्स जैसे अलर्ट हो गये हो जैसे कोई बहुत बड़ी प्रलय आ गयी हो. वो लोग जंगल में हर एक टूरिस्ट्स को यहां से बाहर निकाल रहे है. में तो खैर फिर भी यहां पर किसी तरह दाता हुआ हूँ. लेकिन अगर उन दरिंदो को अभी रोका नहीं गया तो वह जितना उत्पात इस जंगल में मचाए हुए है इस जंगल के बाहर भी कर सकते है. इस जुंलगे के आस पास जीतने भी इलाके है उनसब पर भी खतरा मंडरा सकता है. या फिर यह हो सकता है वो जंगल से निकल कर शहरों में चलें जाए. अगर ऐसा हो गया तो समझो कयामत आ जाएगी. इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द बाहरी मदद बुलानी होगी. “ कहते हुए मयंक चुप हो गया.
“तो आपने सुना यहां इस जंगल में क्या हो रहा है. अगर प्रशासन ने समय रहते हुए कोई ठोस कदम ना उठाए तो हो सकता है बहुत बड़ी प्रलय आ जाए. अगर वह दरिंदे इस जंगल से बाहर निकल गये तो शहरी जीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा. हमारा ख्याल है प्रशासन को जल्द से जल्द मिलिटरी फोर्स बुला लेनी चाहिए ताकि हम जल्द से जल्द उन जानवरों से च्छुतकारा पा लें. आप हमारे साथ बने रहिए क्योंकि हम आपको इस जंगल में और क्या हो रहा है इसकी पल पल की जानकारी देते रहेंगे. कॅमरमन विश्वास के साथ, में आरती सिन्हा ए भी सी दी न्यूज से.” कहते हुए आरती अपनी रिपोर्टिंग खत्म कर दी.
इसी के साथ विजय कपूर ने भी अपनी टीवी बंद कर दिया. फिर वो बड़ी गहरी सोच में डूब गया. वो सोचने लगा के यह क्या माजरा है. यह कैसे जानवर है जो इतना उत्पात मचा रहे है. और तो और जैसा वो गाँव वाला कह रहा था की वो इंसानो को मारने के बाद उन्हें बिलकुल कंकाल में तब्दील कर देते है, और वो भी इतनी जल्दी. यह कैसे मुमकिन है. फिर उसे फोटोग्राफर की बात का ध्यान आया की वो कह रहा था की अगर इन्हें नहीं रोका गया तो वो उस जंगल के बाहर शहरो में भी जा सकते है.

और नैनीताल तो सबसे पास में पढ़ता है जहाँ श्रुति अपने दोस्तों के साथ घूमने गयी है. अपनी बीवी से बातचीत ना होने के कारण उसे श्रुति की भी कोई खबर नहीं मिली थी की क्या वो ठीक है की नहीं नैनीताल में. यही सोचते हुए वो अपने जेब से मोबाइल फोन निकाला और श्रुति को फोन करने लगा. थोड़े देर के बाद आन्सरिंग महसिने से उसे मालूम पड़ा की श्रुति का मोबाइल स्विच ऑफ है. विजय बहुत परेशान हो गया. उसके बाद फिर भी उसने कई बार कोशिश की श्रुति को फोन करने के लेकिन हर बार उसे आन्सरिंग मशीन से वही जवाब मिलता. श्रुति के मोबाइल से कॉंटॅक्ट ना होता देख आख़िरकार विजय अपनी बीवी सौंदर्या के पास गया और उससे कहने लगा.
“श्रुति से तुम्हारे बात आखिरी बार कब हुई थी?” विजय एक दम रूखे स्वर में कहा. पहले तो सौंदर्या ने विजय को थोड़ा घूर कर देखा. वो सोच रही थी की अचानक इसे क्या हुआ जो यह मेरे से बात कर रहा है.
“जब वो अपने दोस्तों के साथ नैनीताल के लिए निकली थी तभी मेरी उससे आखिरी बार बात हुई थी….क्यों क्या हुआ?” सौंदर्या ने विजय से कहा.
“क्या? जबसे वो नैनीताल के लिए गयी है तुमने उसे एक बार भी कॉंटॅक्ट नहीं किया?” आख़िर गैर जिम्मेदारी भी कोई हद होती है.” विजय एक बार फिर सौंदर्या पर बरसते हुए कहा.
“तुम फिर मुझ पर बरसने के लिए आ गये. तुम्हें कोई और काम नहीं है क्या?” सौंदर्या भी तुर्की बीए तुर्की जवाब देने लगी.
“तुम्हारी हरकत ही ऐसी है. तुम्हें चिल्लाओ नहीं तो और क्या करूं. दो दिन से श्रुति घर से बाहर है और तुमने उसकी ख़ैरियत लेने की ज़हमत भी नहीं की?” विजय, सौंदर्या पर बरसते हुए कहा.
“वो अपने दोस्तों के साथ नैनीताल एंजाय करने गयी है. मेरा यूँ उसको फोन करना उसे अच्छा नहीं लगेगा. इसलिए में नहीं चाहती की वो अपने दोस्तों के बीच एंबरस्स्मेंट फील करे.” सौंदर्या ने कहा.
“अजीब….

(UPDATE-69)

औरत हो तुम. अपनी बेटी की ख़ैरियत जानना तुम्हें एंबरस्स्मेंट फील करना लगता है?” विजय ने कहा.
“ओह कम ऑन विजय….में वही कर रही हूँ जो आज कल की जेनरेशन्स को पसंद है.” सौंदर्या ने चिढ़ते हुए कहा. विजय सिर्फ़ मायूसी में अपना सर हिलता रही गया.
“तुम्हें श्रुति के किसी दोस्त का कॉंटॅक्ट नंबर पता है?” विजय ने कहा.
“अब उसके दोस्तों का नंबर तुम्हें क्यों चाहिए?” सौंदर्या ने कहा.
“क्योंकि श्रुति का मोबाइल फोन बंद बता रहा है. और तुम्हें कुछ पता भी है की दुनिया में क्या हो रहा है?” विजय ने कहा.
“क्यों क्या हुआ?” सब कुछ ठीक तो है?”अब सौंदर्या थोड़ा सा घबराते हुए कहा.
“नैनीताल के आस पास के जंगल्स में कोई भयानक जानवर पाए गये है. जो इंसानो को पालक झपकते ही मौत के घाट उतार रहे है.” विजय ने कहा.
“में कुछ समझी नहीं. तुम क्या कह रहे हो?” सौंदर्या ने कहा.

फिर विजय ने उसे वो बताया जो उसने थोड़ी देर पहले टीवी पर देखा था. यह सब सुनकर सौंदर्या भी घबरा गयी. उसके तो हाथ पैर ठंडे होने लग गये. वो जल्दी से श्रुति के मोबाइल पर फोन करने लगी.
“मैंने कोशिश की थी. उसका फोन बंद बता रहा है. इसलिए मैंने तुमसे उसके दोस्तों का नंबर पूछा था.” विजय ने सौंदर्या को अपने मोबाइल से फोन करते हुए देखा तो कहा. पहले तो सौंदर्या ने कुछ नहीं कहा. क्योंकि उसके तो हाथ पैर ठंडे हो रहे थे. एक तो उसने जो खबर विजय से सुनी थी और दूसरे श्रुति का फोन बंद बता रहा था.
“तुम्हें उसके किसी दोस्तों का नंबर पता है?’ एक बार फिर विजय ने कहा.
“हां…..हां….उसके कुछ दोस्तों का नंबर है मेरे पास.” कहते हुए सौंदर्या अपने मोबाइल फोन से श्रुति की सबसे क्लोज़ फ़्रेंड निशा का नंबर लगाने लगी. लेकिन उसका फोन भी बंद बता रहा था. सौंदर्या एक दम घबराने लग गयी. फिर उसके बाद विजय और सौंदर्या ने मिलकर श्रुति के तमाम दोस्तों को कॉंटॅक्ट करने की कोशिश की. लेकिन जब सभी का फोन स्विच ऑफ बता रहा था तो उन्होंने उनके पेरेंट्स को कॉंटॅक्ट करने की कोशिश करने लगे. लेकिन वहां से भी उन्हें यही जवाब मिला की वह भी अपने अपने बाकचों से कॉंटॅक्ट करने की कोशिश कर रहे है लेकिन कोई कॉंटॅक्ट नहीं हो पा रहा है. जब हर जगह से मायूसी हाथ लगी तो सौंदर्या ने रोना धोना मचा दिया. उसे रोता हुआ देख विजय को गुस्सा आ गया और वो उस पर और बरसने लगा.
“अब क्यों रो रही हो. पहले जब में कुछ कहता था तो मेरा मुंह बंद करा देती थी. अब जब अपनी वाली करली हो रो रही हो. यह मगरमच्छ के आँसू बहाना बंद करो.”
“विजय प्लीज़!! क्या कह रहे हो तुम? यह मगरमच्छ के आँसू नहीं है…..” श्रुति थोड़ी देर तक ऐसे ही रोती रही, फिर उसने कहा.
“विजय ई आम सॉरी….अभी यह वक्त इन बातों का नहीं है. जल्दी से कुछ करो. पता लगाओ की श्रुति कहा है. प्लीज़!!!” विजय भी देख रहा था की सौंदर्या वास्तव में एक दम घबरा हुई थी. उसने आगे बढ़कर सौंदर्या को अपने गले लगाया और कहने लगा.
“डोंट वरी कुछ करता हूँ में.”

अभी रोहन और श्रुति को साथ में चलते हुए कुछ ही देर हुआ था की तभी उन्हें अपने भाई और की झाड़ियों में से किन्हीं के कदमों की आवाजें आने लगी. रोहन जल्दी से श्रुति को अपने पीछे कर लिया. श्रुति भी घबराई और डरी हुई रोहन के कंधों पर अपना हाथ रखे हुए आने वाली मुसीबत को देखने लगी. उन दोनों को बस वही दरिंदो का डर था. इससे पहले तो वह जैसे तैसे बच गये थे, लेकिन अब उन्हें अपनी मौत सामने नज़र आने लग रही थी. रोहन एक दम तैयार था अपना चाकू लिए. फिर जब उन्हें झाड़ियों से कुछ आकृति दिखने लगी तो रोहन ने जल्दी से उस आकृति पर हमला करने ही वाला था की कुछ देख कर हूँ रुक गया. उसने देखा की वो जिस दरिंदे की अपेक्षा कर रहा था वो बल्कि एक इंसान था.

उसने देखा की उन झाड़ियों में यकायक तीन इंसान नामूडार हुए. जिनमें से दो मर्द थे और एक औरत. वह दिखने में फिरंगी लग रहे थे. रोहन उन्हें देखकर चौंक तो गया ही था, लेकिन जब उसने उन लोगों के ऊपर से खून के छींटे देखे तो उसे और हैरत हुई. अभी रोहन उन्हें हैरत भारी निगाहों से देख ही रहा था की उनमें से एक ने मिन्मीनाते हुए कहने लगा.
“हेल्प!! हेल्प!! प्लीज़ हेल्प उस……!! थे’ल्ल किल उस. रोहन के तो इतना समझ में आ गया था की वो फिरंगी मदद के लिए बोल रहा है लेकिन उसे वो उसकी जबान में कैसे पूछे की उसे क्या हुआ है तो इसके लिए उसने श्रुति की तरफ देख कर कहा.
“इनसे पूच्छो क्या हुआ है इनके साथ में?” श्रुति भी अपनी मूंदी हिलाते हुए हामी भारी और उन लोगों से पूच्छने लगी.
“वॉट हॅपंड विद यू पीपल? और वॉट अबौट ऑल दीज़ ब्लडस ऑन युवर शर्ट्स?”
“थे बीस्ट…..थे बीस्ट इस गोयिंग तो किल उस!! थे अरे……..वेरी डेंजरस. थे विल नोट स्पेर अन्य ऑफ उस.” जब वो फिरंगी यह

(UPDATE-70)

कह रहा था तो उसकी आँखों में खौफ साफ देखा जा सकता था.
”क्या कहा उसने?” रोहन ने श्रुति से कहा.
“वो कह रहा है की कोई दरिन्दा है जो उन्हें मर डालेगा और वह बहुत खतरनाक है. वह हम में से किसी कोई भी नहीं छोड़ेंगे.” कहते श्रुति खामोश हो गयी. क्योंकि दोनों ही समझ गये थे की वह लोग किसकी बात कर रहे है. फिर तभी रोहन ने श्रुति से कहा.
“इनसे कहो की आख़िर इनके साथ हुआ क्या था.?”
“विल यू तेल उस एग्ज़ॅक्ट्ली वॉट हॅपंड विद यू पीपल अट तेरे?” श्रुति ने उसी फिरंगी से कहा. पहले वो फिरंगी अपनी साँसें थोड़ी दुरुस्त किया फिर कहने लगा.
“अभी अरे हियर फॉर सेम असाइनमेंट्स. सो अभी हॅव तो कम तो तीस जंगल लेकिन, वेन अभी वर डूयिंग और रिसर्च सडन्ली सेम वियर्ड काइंड ऑफ अनिमल्स अटॅक्ड ऑन उस और और अदर टीम मेंबर्स. अभी डिड्न’त अंडरस्टॅंड फर्स्ट वॉट वाज़ गोयिंग ऑन लेकिन, लेटर अभी रियलाइज़्ड आफ्टर सीयिंग तोसे डेंजरस अनिमल्स किल्लिंग और टीम मेंबर्स. अभी हद नो आइडिया वॉट तो दो. विदिन आ मिनट थे किल्ड ऑल और टीम मेंबर्स. अभी सेम हाउ मॅनेज्ड तो एस्केप फ्रॉम तेरे”…….फिर वो फिरंगी साँस लेने की लिए थोड़ा रुका फिर अपनी बात जारी रखी.
“ई थिंक अभी शुड मूव फ्रॉम हियर अदरवाइज़ थे माइट भी हियर इन अन्य टाइम.” जब वो फिरंगी अपनी बात खत्म कर लिया तो रोहन, श्रुति की तरफ सवाली नजारे से देखने लगा. श्रुति भी समझ गयी थी उसके इस तरह देखने से.
“यह कह रहा था की..…यह लोग किसी जरूरी काम से यहां इस जंगल में आए हुए थे. और वह जब अपनी रिसर्च कर रहे थे तभी उन पर उन्हीं दरिंदो ने हमला कर दिया और इनके और साथियों को मर डाला. यह तीनों जैसे तैसे कर के अपनी जान बच्चा कर वहां से भाग लिए.

“इनसे पूच्छो की क्या इन लोगों पर भी वैसे ही जानवरो ने हमला किए थे जैसे वह हमारे साथ में किए थे?” रोहन ने श्रुति से कहा.
“ओह कम ऑन रोहन!! और कौन कर सकता है इतना भयानक हमला. इनकी हालत देख कर ही मालूम पढ़ता है की इन लोगों के साथ में क्या हुआ होगा.” श्रुति ने कहा.
“में भी समझ रहा हूँ. लेकिन में एक बार कन्फर्म करना चाहता हूँ की यह लोग उन्हीं जानवरो की बात कर रहे है जिनकी हम बात कर रहे है.” रोहन ने कहा.
“ओककक!! कहते हुए श्रुति उसी फिरंगी से फिर से पूच्छने लगी.
“वॉट काइंड ऑफ अनिमल्स अटॅक्ड ऑन यू? ई मीन तो से दीदी यू सी थे हॅव लोंग नाइल्स, टीत और हेयर. और थे सम्हाउ लुक लाइक मंकीस?”
“इसे! इसे! यू अरे करेक्ट. हाउ दीदी यू नो अबौट देम? दीदी थे ऑल्सो अटॅक ऑन यू?” उसी फिरंगी ने श्रुति से सवाल किया.
“इसे! अभी ऑल्सो हॅव बिन अटॅक्ड बायें देम लेकिन, फॉर्चुनेट्ली अभी मॅनेज्ड तो शेव और लाइफ. लेकिन हाउ लोंग अभी अरे गोयिंग तो शेव और लाइफ ई डोंट ईवन नो” श्रुति ने कहा.
“सो वॉट अभी शुड दो नाउ?” उस फिरंगी ने कहा. उस फिरंगी का इतना कहना था की श्रुति, रोहन की तरफ देखने लगी. श्रुति को अपनी तरफ सवालिया नजारे से देखते हुए देखा तो रोहन ने कहा.
“क्या हुआ? इस तरह क्यों देख रही हो मुझे? क्या कहा इस फिरंगी ने?”
“यह भी उन्हीं वहशी जानवरों के बारे में बात कर रहा था. और इसके साथ में पूंछ रहा है की हमें अब क्या करना चाहिए?” श्रुति ने कहा.
“करना क्या है, जो हमने अपने बारे में सोच रखा है की कैसे इस जंगल से निकले वैसे ही इन्हें भी अपने साथ में ले लेते है.” रोहन ने कहा.
“ओके फॉलो उस!! में फ़्रेंड नोस हाउ तो गेट आउट फ्रॉम तीस जंगल.” श्रुति ने उस फिरंगी से कहा. श्रुति का इतना कहना ही था की वो खुश होता हुआ अपने बाकी के दो साथिए से कहने लगा की अब हम शायद इस आफत से बच सकते है क्योंकि इसके साथी को पता है जंगल से बाहर निकालने का रास्ता. फिर वह सब चल पढ़े अपनी मंजिल की और. काफी देर बाद जब वह उस ऊँच्चे टीले पर पहुंचे तो रोहन ने यकायक अपने पीछे आते हुए सबको रोका और अपनी उंगली अपने मुंह पर रखते हुए उन्हें खामोश रहने का इशारा किया. श्रुति और बाकी के फिरंगीओ को कुछ समझ में नहीं आया की आख़िर क्या माजरा है. वह देख रहे थे की रोहन टीले के दूसरे ढलान की और चुपके से झाँक रहा था. काफी देर तक झाँके के बाद रोहन उन लोगों की और पलटा और उन्हें हाथ के इशारे से टीले से नीचे की और चलने के कहा. श्रुति के कुछ समझ में नहीं आ रहा था की आख़िर रोहन ने ऐसा क्या देख लिया की हूँ उन्हें नीचे की और जाने बोल रहा है. क्योंकि बड़ी मूसखिल से तो हूँ इस टीले पर चड्डी थी. एक तो वो घायल थी और दूसरे भूखी और प्यासी भी थी. फिर भी इतनी मेहनत से चढ़ने के बाद रोहन उसे नीचे उतरने के लियले कह रहा है.

वो भी रोहन को अपने हाथों के इशारे से पूंछ रही की आख़िर….

(UPDATE-71)

माजरा क्या है, क्यों उन्हें नीचे की और उतरने बोल रहे हो. रोहन फिर उसकी सवाल का जवाब ना देते हुए नीचे की और उतरने के लिलये कहा. जब श्रुति ने देखा की यह अब बताने वाले नहीं है तो उसने ज्यादा बहस करना ठीक नहीं समझा और जैसा रोहन कह रहा है वैसा ही करना ठीक रहेगा. फिर थोड़ी देर के बाद वो सभी उस टीले से नीचे उतार गये. फिर रोहन ने उन्हें कहना चालू किया की क्यों वो उन सबको उस टीले से नीचे ले आया है.
“जब हम उस टीले पर पहुंचे थे, तो मैंने कुछ आवाजें सुनी थी. पहले तो में समझा की यह मेरा वहाँ है. लेकिन जब वो आवाज़ीएईन फिर से आने लगी तो मुझे कुछ शक़ुए सा हुआ . फिर जब मैंने उस टीले के उस पार जो नज़ारा मैंने देखा अगर वो तुम सब देख लेते तो यक़ीनन चीखते और चिल्लाते. क्योंकि वहां उस टीले के ढलान के नीचे वही ढेर सारे जानवर थे. और वह वहां पर जानवरो और इंसानो का शिकार कर रहे थे.” इतना कहकर रोहन खामोश हो गया. जब रोहन को खामोश होता हुआ देख उस फिरंगी ने देखा तो उसने श्रुति से पूच्छने लगा की रोहन क्या कह रहा था. श्रुति ने उसे वही सारी बात बताई जो अभी रोहन ने कहा था. पूरी बात सुनाने के बाद सबके चेहरे मायूसी से घिर गये. अब उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था की अब क्या करे. क्योंकि वही टीला उनकी उम्मीद थी और उसी टीले की दूसरी और यह सारा भयानक मंजर चल रहा था. जब काफी देर तक किसी ने कुछ नहीं कहा तो रोहन फिर से कहने लगा.
“मेरे ख्याल से अब हमें यहां से चलना चाहिए. अगर हम यहां रुके रहे तो हो सकता है वह दरिंदे उस टीले से इस तरफ आ जाए.”
“लेकिन हम जाएँगे कहा?” श्रुति ने कहा जो अब थोड़ी सी रूहाँसी हो गयी थी. रोहन को भी कुछ जवाब नहीं मिल रहा था की वो उसे कैसे दिलासा दे. क्योंकि उसे खुद ही नहीं समझ में आ रहा था की ऐसे हालत में क्या करना चाहिए. वो सोचना लगा की अगर यह आदमख़ोर जानवर नहीं होते तो हूँ कैसे भी कर के इस जंगल में से रास्ता ढूँढ लेता. मगर यहां उसके लिए मुश्किल वही खूनी जानवर थे. वह जहां भी जाते वह दरिंदे काल की तरह उन लोगों पर टूट पढ़ते. खैर काफी सोच विचार करने के बाद उसने कहा.
“मुझे लगता है अब हमें यहां से उल्टी दिशा में जाना होगा. क्योंकि इस तरफ तो मौत हमारा वेट कर रही है. इसलिए बेहतर है की हम यही रास्ता छूने.” रोहन ने टीले की विपरीत दिशा में इशारा करते हुए बोला.
“ठीक है रोहन जैसा तुम ठीक समझो.” श्रुति ने कहा. फिर वह सब उस टीले की विपरीत दिशा में चलने लगे. जब उन्हें चलते चलते काफी देर हो गयी तो उन फिरंगियो में से जो लड़की थी अचानक से उसका सर चकराने लगा. वो गिर ही जाती की रोहन जो उसके पीछे पीछे चल रहा था उसे थाम लीलया. उस लड़की के दोनों दोस्त और श्रुति भी आकर देखने लगे की क्या हुआ था उसके साथ.

फिर थोड़ी देर तक उस लड़की से बातचीत करने पर उन्हें पता चला की वह काफी देर से भूखे थे और उन लोगों के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था इसलिए वो लड़की खाली पेट रहने से भूख बर्दाश्त नहीं कर पाई और चकरा कर गिर गयी. फिर उसके बाद उन्होंने तय किया की थोड़ी देर तक उन दरिंदो से चुप कर झाड़ियों में रेस्ट ले लेते है.

श्रुति देख रही थी रोहन उस फिरंगी को कुछ फल खिला रहा था जो उसने पास के पेड़ो से तोड़ कर लाया था. वो देख रही थी रोहन उस लड़की का सर अपने अपनी गोद में रखा हुआ था. पहले तो श्रुति ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया लेकिन जब उसने देखा की रोहन उसपर कुछ ज्यादा ही मेहरबाानी दिखा रहा है तो उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. उसे अपने आप पर भी हैरत हो रही थी उसे क्यों बुरा लग रहा है अगर रोहन उस लड़की पर अपनी मेहरबानियाँ निच्छवर कर रहा है. वो चाहे जो करे उस लड़की के साथ उसे क्या करना है. वो अपना ध्यान रोहन और उस लड़की से हटाके कही और लगाने लगी. वो देख रही थी जबसे रोहन उस लड़की की तिमारदारी में लगा हुआ था तबसे वो उसकी तरफ एक बार भी नज़र उठा के नहीं देखा था. वो यही सब सोच रही थी लेकिन जब उसे और बर्दाश्त नहीं हुआ तो वो उठ कर वहां से थोड़ी दूर पर चली गयी ताकि उसका ध्यान रोहन और उस गोरी लड़की पर ना जाए. रोहन भी देखा की श्रुति अपनी जगह से उठ कर कही जाने की तैयारी कर रही थी. रोहन उसे टोकते हुए बोला.

“क्या हुआ श्रुति कहा जा रही हो?”
“कही नहीं….बस ऐसे ही थोड़ा टहलना चाहती हूँ.” श्रुति ने थोड़ा रूखे स्वर में कहा.

(UPDATE-72)

है….चुप चाप बैठ जाओ.”रोहन ने कहा. इससे पहले की श्रुति कुछ कह पति उसने अपने सामने की झाड़ियों में कुछ ऐसा देख लिया जिसकी वजह से उसके मुंह से कोई आवाज़ ही नहीं निकल रही थी.

“क्या हुआ….? तुम कुछ कहती क्यों नहीं?” रोहन फिर श्रुति को टोकते हुए कहा. श्रुति ने अचानक रोहन की तरफ देखा. उसके चेहरे पर दहशत साफ देखी जा सकती थी. रोहन ने भी भाँप लिया था की श्रुति ने जरूर कुछ देखा है जिसकी वजह से दहशत से उसकी आँखें फटी हुई थी.

“क्या हुआ….? रोहन, श्रुति की तरफ देखकर कहा.
“वववव…….वहां पर कुछ है.” डरते हुए श्रुति ने रोहन से कहा. रोहन भी श्रुति से कुछ और सवाल ना पूचहते हुए खुद ही उधर जाकर देखने लगा जिधर श्रुति ने इशारा किया था. रोहन ने जो देखा तो उसे समझने में देर नहीं लगी की वो क्या बाला है. उसने देखा की वही लाल आँखें जो वो उन हैवानो में देखा था उन्हीं लोगों की और घूर रही थी. वो सोचने लगा की अब इनके साथ कैसे मुकाबले किया जाए . उसे बस एक चारा समझ में आया और वो यह की जितना हो सके उतनी तेजी से इनसे दूर भागो. उसने तुरंत उन मर्द फिरंगीओ को जो सोए हुए थे उठाया और अपने हाथ से उसी दिशा की और इशारा किया और सिर्फ़ इतना कहा “ऋण!”.

वह दोनों जो एक दम गहरी नींद से जागे थे आँखें फाड़ फाड़ के देखने लगे की रोहन उन्हें वहां पर क्या दिखना चाह रहा था. उन्होंने ने भी देख लिया था रोहन उन्हें क्या दिखा रहा था. उनके चेहरों पर तो जैसे हवाइयाँ उड़ने लगी. दहशत के मारे उनसे उठा ही नहीं जा रहा था मानो उनके कदम वही जम से गये हुए हो. क्योंकि उन्होंने देखा था की कैसे वह दरिंदे उनके साथियों को पालक झपकते ही मौत के घाट उतार दिया था. यही सब सोच कर वह थर थर के काँपने लगे. रोहन ने भी देख लिया था वह एक दम डरे हुए थे. उसने जल्दी से उनसे कहा “हेलो !! ऋण!!” वह दोनों फिर जैसे होश में आ गये. रोहन जल्दी से उस फिरंगी लड़की को उठाने लगा. श्रुति को हैरत होने लगी के इतनी भगदड़ में भी उसे उस लड़की का ही ख्याल आ रहा था. रोहन जल्दी से अपना इकलौता हथियार वो चाकू निकाला और उन सबको वहां से लेकर भागने लगा. वो दरिन्दा भी देखा की उसके शिकार भाग रहे है तो वो फौरन एक जोरदार दहाड़ निकालता हुए उनकी तरफ भागने लगा. रोहन ने देखा की उनकी भागने की रफ्तार और उस दरिंदे की भागने की रफ्तार उनसे तेज थी. वो समझ लिया था की भाग कर नहीं बल्कि मुकाबला करके ही लड़ना पड़ेगा. रोहन पलट कर देखा की वो दरिन्दा उनके एक दम करीब पहुंच गया था और वो श्रुति के एक दम करीब आ गया था. रोहन की तो जैसे सानेसिन ही रुक गयी थी जब उसने देखा की श्रुति उस दरिंदे का शिकार बनने के एक दम करीब है. फिर उसने आव देखा ना ताव, वो फौरन एक लंबी छलांग लगते हुए उस दरिंदे के ऊपर अपने चाकू से उसके सीने पर एक जोरदार हमला कर दिया. उस दरिंदे को भी जैसे इस हमले की उम्मीद नहीं थी. वो अपने ऊपर अचानक हुए इस हमले से एक दम भौक्ला गया और अपने तेज़धार वाले नाखूनओ से एक जोरदार प्रहार रोहन पर किया. रोहन भी देख लिया था चाकू उसके सीने में घोंपने से उस दरिंदे पर कोई खास असर नहीं हुआ था बल्कि वो और खूणकार हो चुका था और उस पर अपने तेज नाखूनओ से उसका सर उसके धड़ से अलग करने के लिए अपना हाथ उस पर चलाया था. लेकिन रोहन एक कुशल शिकारी था और बहुत फुर्तीला भी था. वो फौरन उस दरिंदे का प्रहार बच्चा लिया. उसने अपना सर तो काटने से तो बच्चा लिया था लेकिन अपना सर बचाने के चक्कर में उस दरिंदे का नाखून उसके डाईएइन हाथ के बाजू पर पढ़ गया. रोहन के ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके बाजू में किसी ने तेज धार वाली तलवार से हमला कर दिया. रोहन इस हमले से एक तरफ को लुढ़क गया था, लेकिन वो दरिन्दा अब पहले से भी ज्यादा बौराया हुआ अपने आगे उन दोनों फिरंगीओ को देखा और झट से उनका सर उनके धढ़ से अलग कर दिया. बेचारो को तो चीखने का भी मौका नहीं मिला. इस पर भी उस दरिंदे को चैन नहीं आया वो फिर से श्रुति के ऊपर झपटने की तैयारी करने लगा. श्रुति ने भी उसे देख लिया था अपनी और आते हुए.

वो जल्दी से वहां से भागने की तैयारी करने लगी लेकिन, अंधाधुंड भागने के चक्कर में उसका पैर एक पत्थर से टकरा गया और वो लड़खड़ा कर गिर पढ़ी. उसने पलट कर देखा वही दरिन्दा अब उसको मौत के घाट उतारने के लिए उतावला हो रहा था. श्रुति ने भी देख लिया था की अब उसको मरने से कोई नहीं बच्चा सकता. लेकिन ऊपर वाले को श्रुति के प्राण अभी नहीं हारना….

(UPDATE-73)

था. इससे पहले की वो दरिन्दा उस पर झपट्टा उन फिरंगीओ में से वो लड़की ने एक बारे से पत्थर से उस दरिंदे पर हमला कर दिया. वो दरिन्दा फिर से अपने ऊपर हुए इस हमले से भौक्ला गया और फिर अपनी खूणकार लाल लाल आँखों से उस लड़की को घूर ने लगा और एक खौफनाक दहाड़ मारते हुए उस लड़की की और झपटने लगा. उस फिरंगी लड़की को भी बाद में एहसास हुआ की उसने क्या गलती करी थी. वो दरिन्दा एक लंबी छलांग मारते हुए उस लड़की के पेट में अपने नाखूनओ से प्रहार किया और उसके अंदर की सारी अंतड़िया बाहर निकाल लिया. फिर उसके बाद उसके जिस्म के टुकड़े करते हुए अपना सारा गुस्सा निकालने लगा. वो अभी यही सब करने में व्यस्त था की रोहन अपनी जगह से उठते हुए जल्दी से श्रुति का हाथ पकड़ा और जल्दी से उसे वहां से भागना लगा. फिर वो दोनों जैसे पहले भी अपनी जान उन दरिंदो से बचाने के लिलये दौड़ लगाए थे ठीक उसी तरह इस बार भी वह दोनों पहले से भी ज्यादा दौड़ पढ़े मानो जैसे उनके पैरों में इस बार पहिए लगे हुए हो.

काफी देर तक उस दरिंदे से दूर भागते रहने के बाद वह दोनों एक जगह रुक गये. रोहन ने देखा की अब उन्हें कोई खतरा नहीं है क्योंकि वह बहुत दूर आ गये थे उस दरिंदे के चंगुल से. रोहन ने श्रुति की तरफ देखा, जो अब एक दम निढल सी हुई थी. एक दम बाज़ार, उधस लग रही थी.
“क्या हुआ श्रुति तुम ठीक तो है?” रोहन उसकी तरफ देखकर कहा. श्रुति ने पहले कुछ नहीं कहा फिर अपना सर दूसरी और करके रोने लगी. रोहन, श्रुति को रोता देख रोहन उस के पास आ गया और उससे कहने लगा.
“श्रुति!! श्रुति!! क्या हुआ?” श्रुति अपना सर रोहन की और किया फिर उसके खड़े पर अपना सर रख कर और ज़ोर से रोने लगी.
“अरे क्या हुआ? कुछ बोलो तो सही?” रोहन ने कहा.
“रोहन…..लगता है अब हम नहीं बचेंगे…..” श्रुति ने रोते हुए कहा.
“नहीं श्रुति ऐसा मत कहो…..सब कुछ ठीक हो जाएगा.” रोहन, श्रुति को दिलासा देते हुए कहा.
“नहीं रोहन!! मुझे नहीं लगता की अब हमें मरने से कोई बच्चा सकता है…हमारी किस्मत अच्छी थी की हम इससे पहले 4 बार हम उन दरिंदो से बच चुके है…अगली बार शायद हमारी किस्मत हमारे ऊपर मेहरबान ना हो. तुमने देखा नहीं कैसे उस हैवान ने उन बेचारो को अपना शिकार बनाया. हो सकता है अगली बार हम उनका शिकार बन जाए?” श्रुति एक दम बोझल मान से कह रही थी.
“नहीं श्रुति हिम्मत से काम लो. तुम जरूर इस जंगल से सही सलामत वापस जाओगी. यह मेरा तुमसे वादा है.

मेरी वजह से तुम इस मुसीबत में हो. तुम्हारी जिंदगी मुझ पर कर्ज है. में अपनी जान पर खेल कर तुम्हें यहां से निकालूंगा. भरोसा रखो मुझ पर.” रोहन, श्रुति को दिलासा देता हुए कहा.
“तुम क्या करोगे रोहन? देखा नहीं वो जानवर कितने खूणकार है? उनसे लड़ना इतना आसान नहीं है. तुम अकेले कितना लड़ोगे?” श्रुति ने कहा.

“बात तो सही है तुम्हारी…मगर हम यूँ हिम्मत हार के तो नहीं बैठ सकते ना? हमें ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष तो करना ही पड़ेगा.” रोहन ने कहा.
“लेकिन हम अब क्या करेंगे? क्योंकि मेरे अंदर अब ज़रा भी जान नहीं है. मुझे बहुत कमज़ोरी महसूस हो रही है. मुझसे अब ज़रा भी चला नहीं जा रहा है.” श्रुति ने एक दम थके हुए अंदाज़ में कहा. जैसे कोई इंसान कई दीनों से भूखा हो.

“हां तो ठीक है तो हम यही पर आराम करेंगे….में तुम्हारे लिए कुछ खाने और पीने का बंदोबस्त करता हूँ.” रोहन ने कहा.
“नहीं नहीं!! तुम कही नहीं जाओगे मुझे छोढ़कर…में यहां अकेले नहीं रही सकती.” श्रुति ने जल्दी से कहा.
“श्रुति…में कोई ज्यादा दूर थोड़े ही जा रहा हूँ.” फिर रोहन पास के पेड़ो की तरफ इशारा करते कहा “तुम वो सब पेड़ देख रही हो? मुझे उसमें काफी फल दिख रहे है. में उसमें से फल तोड़ कर लाता हूँ. फिर जब हमारा पेट इन फलो को कहा कर भर जाएगा तो पास ही झरना बह रहा है, हम उस झरने के पानी से अपनी प्यास भी भुजा लेंगे. ठीक है?”

“लेकिन फिर भी तुम्हें वो सारे फल तोड़ने के लिए उतनी ही दूर तो जाना पड़ेगा ना?” श्रुति ने कहा.
“ठीक है…तो तुम भी उधर ही चलो. में पेड़ पर चढ़ता हूँ तुम नीचे खड़े रहना.”
“हम….ठीक है. लेकिन में नीचे खड़ी रहूंगी और तुम ऊपर, और इसी डुआरन में कही वो जानवर आ गया तो?” श्रुति ने कहा.
“तो में वही ऊपर से छलांग लगा दूँगा और उसे एक पप्पी ले लूँगा….ठीक है?” रोहन ने कहा. श्रुति भी थोड़ा हंसते हुए कहा.
“ठीक है.” फिर रोहन के काफी सारे फल तोड़ने के बाद उन्होंने उसे खाया और पास के झरने से पानी पीकर अपनी प्यास भी भूजली. इतना खा पी लेने के बाद अब श्रुति थोड़ा अपने आपको थोड़ा तरो ताजा महसूस कर रही थी. अब उसे अंदर से पहले की तरफ कमज़ोरी नहीं लग रही थी.

“अब हमें क्या करना चाहिए रोहन. कोई प्लान है तुम्हारे पास?”…

(UPDATE-74)

श्रुति ने कहा.
“बस हमें यहां से कोई एक रास्ता पकड़ना है और चलते रहना है जब तक की हमें कोई सड़क नहीं मिल जाती.”
“लेकिन हम कब तक यूँही चलते रहेंगे. क्या पता वो रास्ता कितना लंबा हो?” श्रुति ने कहा.
“अब क्या कर सकते है…हमें कोई ना कोई रास्ता तो चुनना ही पड़ेगा.” रोहन, श्रुति के सवाल का जवाब देते हुए कहा.
“ठीक है….चलें अभी?” श्रुति ने रोहन की तरफ देख कर कहा.
“हां ठीक है….वैसे अगर तुम थोड़ा रुक कर आराम करना चाहो तो रुक सकती हो. और दूसरी बात यह की अभी अंधेरा भी हो रहा है.

पता नहीं क्यों मुझे यह जगह थोड़ी सेफ लग रही है. अगर हम आज की रात यही रुक जाते है और अपना सफ़र कल से शुरू करते है तो मेरे हिसाब से यह बढ़िया रहेगा.” रोहन, श्रुति की तरफ देख कर कहा.
“हम…..शायद तुम कह रहे हो. अगर आज की रात यही रुक जाते है तो हमें थोड़ा रेस्ट भी मिल जाएगा और हम कल फ्रेश भी रहेंगे.” श्रुति ने कहा.
“ह्म्‍म्म्म…तो आज की रात यही काटनी पड़ेगी. तो इसके लिए सोने के लिए बढ़िया सा इंतजाम करना पड़ेगा.” कहते हुए रोहन यहां वहां देखने लगा.
“तुमको अगर सोना हो तो सो जाओ, मुझे नहीं सोना.” श्रुति ने कहा.
“क्यों तुमको नहीं सोना है?” रोहन, श्रुति की तरफ देख कर कहा.
“अगर हम दोनों सो जाएँगे तो क्या पता कब वह जानवर यहां पर आ टपके और हमें अपना शिकार कर ले. इसलिए हम में से किसी एक को जागना जरूरी है.” श्रुति ने कहा.
“अच्छा तो इस के लिलये तुम जागगी. अगर में सोता हूँ और वह जानवर आते है तो तुम जगह कर मेरी रक्षा करोगी और उनसे अकेले लड़ोगी? यही कहना चाहती हो ना तुम?” रोहन थोड़ी से चुटकी लेते हुए कहा.
“रोहन…..!!! मेरा वो मतलब नहीं था. में क्या उनसे लड़ूँगी…उन लोगों को देख कर ही मेरी जान निकल जाती है. मेरा कहने का मतलब यह था अगर वह आएँगे तो में तुम्हें उठा दूँगी अगर में जागती हूँ तो.” श्रुति थोड़ा सा गुस्सा करते हुए कहा.
“ओके बाबा ठीक में समझ गया. अगर ऐसी बात है तो तुम सो जाओ, में रात भर जगह सकता हूँ.” रोहन ने कहा.
“नहीं इस बार तुम सो जाओ. मैंने देखा है तुम दो रातों से सोए नहीं हो. अगर तुम्हें भरपूर नींद नहीं मिलेगी तो शायद तुम बीमार पढ़ जाओगे. और अगर तुम बीमार पढ़ तो मेरे लिए मुसीबत हो जाएगी.” श्रुति ने कहा.
“अच्छा तो इस के लिए मुझे सुलाना चाहती हो ताकि में बीमार ना पढ़ु. और अगर में कही में बीमार पढ़ गया तो तुम्हें इस जंगल से बाहर कौन निकालेगा. हम…..?”
“नहीं..!! ऐसी बात नहीं है. में रियली तुम्हारी फिक्र करते हुए कह रही थी. अब तुम इसका गलत मतलब निकाले तो में क्या कर सकती हूँ.” श्रुति ने जल्दी से सफाई देते हुए कहा.
“अरे हां बाबा….में तो बस ऐसे ही मज़ाक कर रहा था.” फिर रोहन थोड़ा गंभीर होते हुए कहा “ एक काम करो तुम सो जाओ मेरी फिक्र मत करो., क्योंकि यह मेरे लिए कोई नयी बात नहीं है. हमें शिकार करने के लिए कई कई रातों को जागना पढ़ता था. तो मुझे इसकी आदत है. तुम बिना किसी चिंता के भी फिक्र होकर सो जाओ. में यहां तुम्हारी रक्षा के लिए जागा रहूँगा.” रोहन ने कहा.
“ओह रियली!! तुम अगर 3 या 4 रातों को ना सोए तो तुम्हें कुछ फर्क नहीं पढ़ता?” श्रुति ने कहा.
“ह्म्‍म्म्म.” रोहन अपनी गर्दन हिलाते हुए जवाब देते हुए कहा.
“तो फिर में सो जाती हूँ क्योंकि मुझे तुम्हारी तरह उल्लुओ की तरह जागने की आदत नहीं है.” श्रुति ने कहा.
“हां तो सो जाओ ना? कब से कह तो रहा हूँ.” रोहन ने कहा.

फिर श्रुति इधर उधर देखने लगी की कही सोने के लिए कोई पर्याप्त जगह मिल जाए लेकिन उसे ऐसी कोई चीज़ नहीं दिखी. रोहन ने भी देखा उसके सोने के लिए ज़मीन पर ऐसे ही सोना ठीक नहीं रहेगे.
“एक काम करो…में भायते रहता हूँ तुम मेरे पैरों पर अपना सर रख कर सो जाओ.” रोहन ने कहा.
“नहीं नहीं!! इट’से नोट फेयर…में पहले भी इस तरह से सो चुकी हूँ तुम्हारे पैर पर और अभी तक गिल्टी फील हो रहा है उसके लिए. पता नहीं तुम्हें ऐसे ही बैठे रहने से कितना पेन बर्दाश्त करना पड़ा होगा.” श्रुति ने कहा.
“तो अब तुम ही बताओ फिर तुम्हें किधर सोना है?” रोहन ने कहा.
“मेरे ख्याल से में भी आज की रात तुम्हारे साथ उल्लू बनकर जागती हूँ.” श्रुति थोड़ा आक्साइड होते हुए कहा.
“अच्छा क्या करोगी जगह कर?”
“कुछ नहीं बस ऐसे ही बातें करेंगे.” श्रुति ने कहा.
“ह्म्‍म्म्म….ठीक जैसी तुम्हारी मर्जी. कहो क्या बात करना है.” रोहन ने कहा.
“कोई खास नहीं….तुम कुछ कहो अपने बारे में.”
“बताया तो तुमको की घर में मेरे भाई बहन और…..” रोहन और कुछ कहता, श्रुति उसे टोकती हुई कहती है.
“ओफफो बाबा….तुम्हारे फॅमिली बॅकग्राउंड के बारे में नहीं पूछा मैंने.”
“फिर ?” रोहन ना समझते हुए कहा.
“मेरा मतलब है कुछ और बताओ…….” थोड़ा सोचते हुए श्रुति ने फिर से कहा “संध्या के बारे में और बताओ मुझे” संध्या का नाम लेना था की नहीं रोहन का मुंह बिगड़ गया और….

(UPDATE-75)

अपना मुंह दूसरी फेयर के देखने लगा.
“अरे यह क्या हुआ? “ श्रुति ने थोड़ा हैरत से कहा.
“जिसको में याद नहीं करना चाहता उसका नाम लेना जरूरी है.” रोहन थोड़ा गुस्से से कहा.

“तुम भी क्या अभी तक उससे प्यार करते हो जो उसके नाम से तुम्हें गुस्सा आता है?”
“नहीं ऐसी बात नहीं. में और उससे प्यार करता हूँ…हरगिज़ नहीं. वो तो बस जब कोई उसका नाम ले लेता है तो उसका चेहरा मेरी आँखों के सामने घूमने लगता है जिसके वजह से मेरा खून भी खौलने लगता है.” रोहन ने कहा.
“ओके ठीक है..मारो उसे गोली….”
“मेरा बस चलता तो अभी जाकर उसे गोली मर देता. कम से कम दिमागी सुकून तो मिलता मुझे” रोहन ने कहा.
“वो अब भी मिल सकता है. पूच्छो कैसे?” रोहन, श्रुति की यह बात पर थोड़ा हैरान होते हुए उसे देखने लगा.
“कैसे?”
“तुम्हारे दिमाग को संध्या के नाम से और जो उसकी तस्वीर तुम्हारी नजारे में घूमती है दूर हो सकती है, लेकिन गोली से तो नहीं किसी और चीज़ से.”
“अच्छा!! वो कैसे?” रोहन थोड़ा खुश होते हुए कहा.
“हम…..वैसे तो मुझे वो चीज़ पसंद नहीं है, लेकिन तुम्हारे अंदर से संध्या का बहुत भागने के लिए मुझे यह भी बर्दाश्त करना पड़ेगा. आफ्टर ऑल तुम मेरे दोस्त जो तहरे. “श्रुति ने कहा.
“अब बता भी दो तुम कहना क्या चाहती हो.” रोहन व्याकुल हो रहा था जाने के लिए की कैसे वो संध्या से अपना पीछा छुड़ा सकता है.

“वैसे में हंड्रेड परसेंट शुरू तो नहीं हूँ की यह काम करेगा…लेकिन मैंने एक फिल्म में देखा था यह तरीका काम आया था.”
“अच्छा ठीक है वो बाद की बात है पहले तुम तरीका तो बताओ.”रोहन ने कहा.
“वो यह है की मैंने तुम्हें देखा है की तुम गालिया बहुत निकालते हो.” श्रुति ने कहा.
“हां तो. इससे संध्या से क्या ताल्लुक?” रोहन ने कहा.
“पहले तुम मेरी बात तो सुनो….देखो तुम्हें जिस पर भी गुस्सा आता है तुम क्या करते हो …..? गालिया बकते हो ना…? रोहन भी हाँ में सर हिलाता हुआ बोला
“हां तो?”
“हां तो क्या मतलब तुम भी ऐसे ही गालियाँ संध्या के लिए निकालो. देखना वो तुम्हारे दिल से यूँ चुटकी बजाते हुए निकल जाएगी.” श्रुति का इतना कहना ही था की रोहन अपना पेट पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से हँसे लगा.
“हाहहः……तुम भी श्रुति पागल हो…तुम्हें क्या लगता है क्या मैंने आज तक कभी उस हराम खोर संध्या को गालियाँ नहीं दी. जब भी सुबह सोकर उत्त्ता हूँ तो मेरा पहला काम यह ही रहता है. उसे जी भर के गालियाँ देना और जब तक देना जब तक मुझे सुकून नहीं मिल जाता. लेकिन फिर भी वो अगले दिन मेरी आँखों के सामने हाज़िर हो जाती है अपनी मनहूस शकल लेकर. अब तुम बताओ में क्या करूं?” रोहन ने कहा.
“इसमें तो कोई शक़ुए की बात है ही नहीं तुम उसे गाल्यान नहीं दिए होंगे…..लेकिन तब मामला दूसरा था और अब मामला दूसरा है.” श्रुति ने बारे कॉन्फिडेन्स से कहा.
“अच्छा कैसे!! कैसे अभी यह दूसरा मामला है? रोहन ने कहा.
“तुमने आज तक संध्या के बारे में किसी को बताया है? अपने घर वालो को, अपने करीबी को और क्या नाम बताया था तुमने अपने उस दोस्त का……..परवेज़ उसे बताया है?” श्रुति ने कहा. रोहन थोड़ी देर श्रुति को यूँही घूर था रहा, फिर श्रुति के वापस टोकने पर उसने कहा.
“नहीं…मैंने आज तक इस बारे में किसी को नहीं बताया. सिर्फ़ तुम्हारे अलावा.” रोहन ने कहा.
“हां तो बस यही वजह है जो संध्या अभी तक तुम्हारे दिलों दिमाग पर च्छाई हुई है…क्योंकि तुमने यह राज़ अपने सीने में दफ़न किए हुए था, उसे कभी बाहर लाए नहीं. में चाहती हूँ तुम आज अपने सीने से उस संध्या को बाहर निकालो. क्योंकि मुझे अपना यह राज़ बताकर तो तुम पहला कदम चल चुके हो. अब दूसरा कदम चलने के लिए जितना हो सके उतनी गाल्यान निकालो जो भी तुमने आज तक सुनी हो और दी हो. और यह सब तुम्हें मेरे सामने करना है. ओके?” श्रुति ने कहा.
“तुम्हारे सामने? तुम सुन सकती हो?” रोहन, श्रुति की तरफ देख कर कहा.
“मुझे पता है यह बहुत मुश्किल है मेरे लिए, मगर क्या करूं तुम मेरे लिए अपनी जान झोकं में डाल सकते हो तो में तुम्हारी यह गंदी सी गालियाँ सुन ही सकती हूँ.” श्रुति ने कहा.
“सोच लो? कहीं बाद में कही भारी ना पढ़ जाए?” रोहन ने कहा.
“अब क्या आटम बॉम्ब फोड़ोगे?” श्रुति ने कहा.
“हहहे….

आटम बॉम्ब भी मेरी गालियों के आगे कुछ नहीं है.” रोहन थोड़ा फख्र से कहा.
“ओह माइ गॉड…!!!” फिर श्रुति थूक निगलते हुए कहा.
“अन्य वे ई आम रेडी फॉर डेठ. तुम शुरू हो जाओ. में तो अपने कानों पर हाथ भी नहीं रख सकती.”
“तो ठीक है….शुरू करता हूँ में……तेरी….” रोहन कुछ और कहता, श्रुति उसे रोकते हुए कहा.
“ऐसे नहीं…तुम्हें हर गाली के साथ में संध्या का नाम भी लेना होगा क्योंकि इससे और फ़ीलिंग आएगी..”श्रुति ने कहा.
“तुम्हें बड़ा मालूम है इस बारे में? जैसे तुम कोई गुरु हो.” रोहन ने कहा.
“अरे बाबा मैंने कहा ना…मैंने यह सब एक फिल्म में देखा था.” श्रुति ने कहा.
“फिल्मों में गालया भी बकना सिखाते है? क्या बात है. वैसे कौनसी फिल्म थी वो.?” रोहन ने कहा.
“तुम वो….

(UPDATE-76)

सब छ्चोढो ,,, जो मैंने कहा है वो करो.” श्रुति , रोहन को कुछ और बोलते हुए कहा.
“ओके ठीक है….तुम तैयार रहना.” रोहन ने कहा.
“ओके ठीक है में तैयार हूँ…” कहते हुए श्रुति भी अपनी आँखें बंद करने लगी.
“संध्या……तेरी….मां….तेरी…..मां…..मां..” रोहन को अटकता देख श्रुति ने उससे कहा
“अब यह बकरी की तरह में में में क्या कर रहे हो…ऐसा लग रहा है जैसे गाली नहीं जगजीत सिंग की कोई ग़ज़ल पढ़ रहे हो. अगर ऐसे ही गाली दोगे तो संध्या क्या उसके जैसे हज़ार बहुत तुम्हारे ऊपर हमेशा सवार रहेगी…” श्रुति ने कहा.
“अब गाली नहीं निकल रही है तो में क्या करूं..?
“क्यों नहीं निकल रही है….इससे पहले मुझे क्या दुआएं दे रहे थे..जैसे गालिया तुम दे रहे थे मैंने आज तक वैसे गालियाँ अपनी पूरी जिंदगी में नहीं सुनी थी…च्चि च्चि….और अभी देखो कैसे भोले बन रहे हो.”श्रुति, रोहन पर व्यंग करते हुए कहा.
“श्रुति तब की बात कुछ और थी..तब में बहुत गुस्से में था क्योंकि एक तो में तुम्हारी जब बचाना चाह रहा था और ऊपर से तुमने मुझे इतनी ज़ोर से मारा की मेरे अंदर का हर एक खून का कटरा खोलने लगा था और फिर मेरे मुंह से गालिया निकालने लगी थी. में जानबूझ कर अगर गालियाँ निकालना चाहु ना तो भी में यह नहीं कर सकता” रोहन ने कहा.
“तुम्हारा खून खोलेगा तब तुम गाली दोगे….? कहते क्यों नहीं तुम उस चुड़ैल से अब भी प्यार करते हो?” श्रुति अपने दाँत बींचते हुए कहा.
“यार तुम गालियाँ सुनाने के लिए इतनी मारी क्यों जा रही हो?”
“ओफ्फोो…..कैसे तुम्हें समझाओ? “ फिर श्रुति कुछ देर सोचा, फिर रोहन से कहने लगी.
“अच्छा रोहन? तुम्हें नहीं लगता की तुम्हें इस वक्त संध्या पर गुस्सा करना चाहिए क्योंकि उसने तुम्हारे साथ कितना बुरा किया था. याद करो जब तुम अपनी क्लास में बैठ कर घंटों उसे निहारा करते थे. और वो तुम्हें भाव भी नहीं देती थी. फिर भी तुम दोनों के बीच प्यार हो गया, तुम दोनों ने साथ में जीने मरने की क़स्में खाई.. ना जाने तुमने अपने और संध्या के लिए क्या क्या ख्वाब सजाए थे.

बहुत ही सुंदर ख्वाब…..लेकिन एक दिन उस हरजाई ने तुम्हारा दिल तोड़ दिया…..वो भी किसी और के लिए ….उसने कभी भी तुम्हारी परवाह नहीं करी थी…वो तो बस उसके के लिए एक खेल था…..उसने तुम्हारे जज़्बातो के साथ खिलवाड़ किया था रोहन….संध्या ने तुम्हारे जज़्बातों के साथ खिलवाड़ किया था…..क्या तुम उस बेवफा को ऐसे ही जाने दोगे…उसे क्या हक था तुम्हारी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने का रोहन??? बताओ रोहन क्या तुम उसे ऐसे छ्चोढ़ दोगे.” श्रुति जो इतने देर से रोहन को उकसाने की कोशिश कर रही थी तो पहले रोहन उसकी कोई बात का इतना ध्यान नहीं दे रहा था, लेकिन जब उसने यह कहा की ‘ उसे क्या हक था रोहन तुम्हारी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने का’ बस यह वाक्य उसके ज़हन में चलने लगे. और यह वाक़ये जैसे जैसे उसके ज़हन में चल रहे थे वैसे वैसे उसकी दिमाग की नसें फूलने लगी, मानो जैसे कोई लावा बाहर आने को आतुर था. श्रुति अभी भी रोहन को उकसाने के लिए तरह तरह के हटखंडे अपना रही थी. लेकिन उसे नहीं मालूम था की रोहन तो कब का चार्ज हो चुका था. श्रुति तो बिना सोचे बेक जा रही थी की अचानक रोहन चीख मारते हुए कहा.
“मां छ्चोढ़ दूँगा उस बहन की लोदी की…….अगर वो मादरचोड़ मेरे सामने आ जाए तो उसके जिस्म के सारे कपड़े फाड़ कर उसकी चुत में डंडा घुसेड़ कर उसे पेल डालूँगा……उस मां की लोदी की पूरी खानदान का नामोनिशान मिटा दूँगा…..उस बहनचोद की मां की भी चुत छ्चील डालूँगा अपने लंड से …….मादरचोड़ अगर बार मेरे सामने आ जाए तो.” रोहन तकरीबन दस मिनट ऐसे ही गंदी गंदी गालिया निकल्लता रहा जब तक की उसके पीटारे से गालियों का एक एक कटरा बाकी था. जब वो काफी सारी गालियाँ दे दिया तो एक तरफ जा कर बैठ गया. श्रुति ने देखा की उसका चेहरा एक दम लाल हो चुका था. पहले तो वो उसके इस तरह गालियाँ देने से एक दम घबरा गयी थी. उसे तो समझ ही नहीं आ रहा था की रोहन किस तरह की गालियाँ बक रहा था.. खैर जब उसने रोहन को गुम सूम होते हुए देखा तो वो हिम्मत कर के उसके पास जाकर बैठ गयी और उसके खड़े पर अपना सर रख कर पूछने लगी.

“रोहन अब तुम्हें कैसा लग रहा है?” श्रुति ने रोहन से कहा जो थोड़ी देर तक ऐसे ही दूसरी और अपना मुंह किए देखता रहा. फिर उसने श्रुति के हाथ पर अपना हाथ रखा और कहा.

“अब मुझे पहले से बेहतर लग रहा है. शुक्रिया तुम्हारा.”
“देखा मैंने कहा था ना, अपने अंदर से यह सब बातें निकालोगे तो तुम्हें बेहतर फील होगा” श्रुति ने कहा जो अभी भी उसके खड़े पर अपना सर रखे हुए थी.

“हम….ठीक कह रही हो तुम.” फिर उनके बीच ऐसे ही थोड़ी देर खामोशी च्छाई रही. फिर उस खामोशी को रोहन तोड़ता हुआ कहा.

“अब यह तो हुई मेरी कहानी…..अब तुम ज़रा अपने बारे में तो बताओ?”

“में क्या बताओ? मेरा तुम्हारी तरह….

(UPDATE-77)

कोई अफेयर वाफ़फयर नहीं रहा आज तक.

तो में तुम्हें क्या बताओ अपने बारे में?” श्रुति ने कहा.

“मुझे बहुत हैरत हो रही है की तुम्हारा कोई अफेयर नहीं हुआ. क्योंकि मैंने देखा है कॉलेजस वगैरह में तो यह सब आम बात है. और जिस तरह की सोसाइटी में तुम रहती हो उसमें तो और भी आम बात है. सही कहा ना मैंने?” रोहन, श्रुति से सवाल पूचहते हुए कहा.

“हां तुम ठीक कह रहे हो. यह सब तो होता रहता है कॉलेजस में. लेकिन मैंने अपने आपको इन सब चीज़ों से हमेशा ही दूर रखा है.” श्रुति, रोहन का जवाब देते हुए कहा.

“लेकिन क्यों? मेरा मतलब है क्या तुम्हें यह सब चीज़ें करने में मजा नहीं आता है? रोहन ने फिर पूछा

“ऐसी बात नहीं है…” श्रुति कुछ सोचती है फिर कहती है “ तुम मेरे अब खास दोस्त बन गये हो तो कह रही हूँ. अपनी खास दोस्त निशा को भी में आज तक नहीं कहा. आक्च्युयली मुझे एक ख्वाब आता है की में किसी जंगल में इधर उधर भटक रही हूँ की तभी मुझे एक सफेद घोड़े पर नौजवान दिखता है. मुझे उसका चेहरा तो ठीक से नहीं दिखता है तो में उसके पीछे पीछे जाती हूँ. लेकिन में जितना उसके पीछे जाती हूँ वो उतना ही मुझसे दूर चला जाता है. फिर उसके बाद में अपने आपको एक परियों के महल में पति हूँ. वहां मुझे फिर वही नौजवान दिखता है. इस बार में उसे बहुत करीब से देख पति हूँ लेकिन फिर भी उसका चेहरा नहीं देख पति क्योंकि वो मेरी तरफ अपनी पीठ किए हुए खड़ा रहता है. में जैसे ही उसे अपनी तरफ उसका चेहरा करती हूँ हर बार यही आकर मेरी नींद खुल जाती है. पता नहीं मुझे क्यों लगता की जब तक मुझे मेरा सच्चा प्यार नहीं मिल जाता, जो मेरी दौलत से नहीं बल्कि मुझसे सच्चा प्यार करेई तब जाकर शायद में उस नौजवान का चेहरा कभी देख पाओँगी. यही वजह है में अपने कॉलेज में अपना कोई भी अफेयर नहाई रखा. “ कहते हुए श्रुति खामोश हो गयी.

“तो तुम्हें क्या लगता है कब मिलेगा तुम्हें तुम्हारा सच्चा प्यार?” रोहन ने कहा.

“मुझे क्या पता. अगर मुझे पता होता तो में अब तक उस नौजवान का चेहरा देख ना लेती?”

“तो क्या ऐसे ही अपने प्यार और ख्वाब के चक्कर में अपनी सारी उमर गँवा डोगी?” रोहन ने कहा.
“शायद……अगर मुझे मेरा सक्चा प्यार नहीं मिला तो में यूँही अपना जीवन उस नौजवान को तलाश करने में गुजार दूँगी.” रोहन काफी देर से महसूस कर रहा था की श्रुति जब से उसके खड़े पर अपना सर रखे हुई थी वो धीरे धीरे नींद में जा रही थी जिसकी वजह से उसको बातें करने में भी परेशानी हो रही थी. यही सब सोचकर रोहन उससे कुछ और पूछना ठीक नहीं समझा. और वेट करने लगा श्रुति के गहरी नींद में जाने का की अगर यह गहरी नींद में चली जाती है तो वो उसे पहले दिन की तरह अपने झांग पर सुला देगा ताकि वो आराम से सो सके.

थोड़ी देर वेट करने के बाद जब रोहन को एहसास हुआ की श्रुति गहरी नींद में चली गयी है तो वो उसे बारे आराम से और प्यार से अपनी झांग पर सुला दिया. श्रुति भी जैसे उसकी झांग पकड़ और मीठी नींद में चली गयी थी. रोहन जो इतनी देर से एक पेड़ से सहारे बैठा हुआ था अब पेड़ का सहारा लेकर वो अपना सर टीका दिया. वो सोना नहीं चाहता था लेकिन दो दिन से ना सो पाने के कारण और दूसरे थकान की वजह से उसे कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला.

इधर श्रुति फिर से अपने ख्वाब में देखती है की वो एक जंगल में इधर उधर भटक रही है. उसे फिर वही सफेद घोड़े वाला नौजवान दिखता है. वो फिर से उस नौजवान के पीछे जाने लगती है. फिर उसका बाद वो फिर से अपने आप को एक बारे से आलीशान परियों के महल में अपने आपको पति है. उसे फिर वही नौजवान उसी चबूतरे पर खड़ा मिलता है. वो दौड़ कर उस नौजवान के करीब जाती है और नौजवान के पीठ अपनी और पति है. वो आज तय कर लेती है की चाहे कुछ भी हो जाए वो इस नौजवान के चेहरा देख कर ही रहेगी जो उसे हर बार ख्वाब में आ आ कर परेशान किया करता रहता है. यही सोचकर श्रुति जल्दी से उस नौजवान के खण्डो को पकड़ती है और उसका रुख अपनी और करती है. उसे लग रहा था जैसे ही वो उस नौजवान का चेहरा अपनी और करेगी उसका यह ख्वाब खत्म हो जाएगा लेकिन,…..उसकी खुशी की कोई इम्तहान नहीं रही जब उसका ख्वाब नहीं खत्म हुआ और नाहीं उसकी नींद टूटी और आख़िरकार श्रुति को जिस का वेट था वो आज उसे मिल गया. क्योंकि उसने उस नौजवान का चेहरा जो देख लिया था. लेकिन उस नौजवान का चेहरा देखने के बाद वो थोड़े देर के लिए हैरत में पढ़ गयी क्योंकि, वो नौजवान कोई और नहीं बल्कि रोहन ही था.

एक झटके से श्रुति ने….

UPDATE-78)

अपनी आँखें खोली. पहले तो वो अपने उसी ख्वाब के खुमार में थी. उसे बड़ी हैरत हो रही थी वो ना जाने कितने दीनों से उस नौजवान का चेहरा देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन, कभी भी कामयाब नहीं हो पाई थी. आज जब उसने उसका चेहरा देख लिया था तो वो कोई और नहीं रोहन ही था. वो अपने उसी ख्वाब के नौजवान को तसवउर करने लगी की वो कितना हॅंडसम गभृू जवान था. उसका चेहरा कितना उजरा था. उसकी लंबी ज़ूलफें, उसकी आँखों में एक अजीब सी कशिश थी जो उसे अपनी और खींच रही थी. वो यही सब सोच रही थी की अचानक उसे ख्याल आया की वो इस वक्त कहा पर है. उसने अपने चारों तरफ देखा तो पाया की वो एक फिर से रोहन की झांगो पर सो रही थी. वो झट से उठ कर बैठ गयी. उसने देखा की अब अंधेरा थोड़ा चाट रहा था और सूरज की हल्की हल्की किराने दिखाई दे रही थी. उसी सूरज की हल्की किरानो में उसने देखा की रोहन पेड़ से तक लगाए हुए एक दम गहरी नींद में सोया हुआ था. मानो कितने दीनों का तक हुआ हो. फिर उसकी नज़र रोहन के चेहरे पर पढ़ी. उसे फिर से वही नौजवान का चेहरा उसकी आँखों में घूमने लगा.

वही ज़ूलफें, चेहरे पर वही कशिश. उसने इससे पहले रोहन को कभी इतने गौर से नहीं देखा था. लेकिन अभी वो उसे हर पहलू से देखने की कोशिश कर रही थी. उसने अंदाज़ा लगाया की उसका कद यही 6 फीट के आस पास होगा. कसरती बदन, चेहरे पर बढ़ी हुई शेव देख कर उसे वो बिलकुल एमरान हाशमी की तरह लगने लगा था. उसने कभी इससे पहले रोहन को इतने गौर से देखा नहीं था की रोहन इतना भी खूबसूरत होगा. और वो उसके सपने का राजकुमार भी होगा. अचानक श्रुति को पता नहीं क्या सूझा वो अपना होंठ सो रहे रोहन के होठों पर रख दिया. फिर वो उसे चूमने लगी और उसे तब तक चूमती रही जब उसे एहसास हुआ की रोहन का दम फूलने से रोहन की नींद खुल रही थी. उसने फौरन अपने होंठ उसके होंठ से अलग किए और झट से दूर जाकर बैठ गयी.

“अरे तुम उठ गयी? और में कब सो गया मुझे पता भी नहीं चला. और यह क्या?सुबह भी हो गयी. में कब तक सोता रहा? “ वो सवालीए नजारे से श्रुति की तरफ देखने लगा. श्रुति जवाब में कुछ नहीं कहा बस उसे देख कर मुस्कराए जा रही थी. रोहन की कुछ समझ में नहीं आ रहा था की श्रुति अचानक इतना क्यों मुस्करा रही है.

“अरे क्या हुआ? कुछ बोलॉगी भी तुम? इतना क्यों मुस्करा रही हो?” श्रुति को ऐसे मुस्तक़िल मुस्कराता देख कर रोहन पूच्छने लगा.

“कुछ नहीं बस ऐसे ही.” रोहन के सवालों को टालते हुए श्रुति अपनी जगह से उठ खड़ी हुई और कहने लगी.

“अभी क्या करना है हमें? क्योंकि मुझे लगता है अब हमें यहां से चलना चाहिए. अब तो हमने भरपूर नींद भी ले ली है. हम….?
“हां ठीक है…” रोहन अभी थोड़ा आधी नींद में ही था. “एक काम करो, पहले ज़रा उस झरने से अपना हाथ मुंह धो लेते है.”

“हम……ठीक है चलो.” श्रुति ने कहा. फिर वह दोनों उस झरने की और चल पढ़े.

रोहन और श्रुति उस झरने की और तरफ ही रहे थे की तभी रोहन ने श्रुति को अचानक रोका
“रुको!!” रोहन ज़मीन पर बड़ी हैरत से कुछ देख रहा था.
“क्या हुआ?” श्रुति ने भी देखा की रोहन ज़मीन पर कुछ देख कर रुका है. लेकिन क्या वो यह नहीं समझ पा रही थी..
“यह देखो निशान.” रोहन, श्रुति को ज़मीन की और इशारा करते हुए कहा. श्रुति ने भी थोड़ा गौर से देखने लगी.
“यह तो किसी जानवर के कदमों के निशान लग रहे है.” श्रुति निशान की और गौर से देखने के बाद कहा.
“हां!! यह जानवर के कदमों के निशान है. जानती हो किस जानवर के निशान है?” रोहन अब श्रुति की तरफ देख कर कहा.
“ओह नहीं!! कही यह उस दरिंदो के निशान तो नहीं?” श्रुति को अब घबराहट होने लगी थी.
“नहीं!! यह उन दरिंदो के निशान नहीं है बल्कि यह निशान एक शेयर का है. और यह निशान अभी ताजा है. इसका मतलब वो शेयर अभी अभी यहां से अभी गुजारा होगा.”
“ओह नहीं!! अब यह नयी मुसीबत. में तो भूल ही गयी थी इन दरिंदो के चक्कर में की जंगल में और भी भयानक जानवर होते है.” श्रुति अब घबराने लगी.
“अब क्या होगा रोहन?”
“कुछ नहीं….

तुम फिक्र मत करो हम जल्दी से उस झरने के पानी से अपना हाथ मुंह धो कर वहां से जल्दी से निकल जाएँगे.”
“लेकिन कही अगर वो टाइगर वहां आ गया तो?”
“वो तो कही भी आ सकता है. लेकिन मेरे हिसाब से यह निशान बताते है की यहां से सीधा गया हुआ है. और हमें उस झरने के लिए अपनी भाई और से जाना है. अगर हम जल्दी से हाथ मुंह धो कर वहां से निकल जाएँगे तो कोई प्राब्लम नहीं होगी.”
“अरे तो हाथ मुंह धोना जरूरी है. यहां जान पर बन आई है और तुम्हें हाथ मुंह ढोने….

UPDATE-79)

की पढ़ी है.” श्रुति थोड़ा गुस्सा करते हुए कहा.
“फिर्क मत करो!! मुझे नहीं लगता वो वापस आएगा. हम जल्दी से जाकर अपना काम निपटा लेंगे.” रोहन, श्रुति को समझते हुए कहा. श्रुति फिर और कुछ नहीं बोल पाई. वो दोनों उस झरने के पार जाने लगे.

जब रोहन ने उस झरने के पानी से अच्छी तरह हाथ मुंह धो लिया तो उसने देखा की श्रुति ऐसे ही खड़ी थी.
“क्यों क्या हुआ? तुम भी अपने हाथ मुंह धो लो.”
“नहीं…मुझे नहीं धोना क्योंकि पानी बहुत ठंडा है. ऐसा लग रहा है जैसे बर्फ हो. अगर तुम्हारा हो गया हो तो प्लीज़ जल्दी करो कही वो शेयर यहां ना आ जाए?”
“अरे तुम फिक्र मत करो, जब हम उन हैवानो का शिकार कर सकते है तो यह तो फिर भी शेयर है….अगर आ भी गया तो देख लेंगे उसे भी. “ रोहन हालात को एक दम हल्का लेते हुए कह रहा था. श्रुति को उसकी बात पर बड़ी हैरत हुई.
“हेन्न्ययी……!!! तुम्हारा दिमाग खराब है? क्या कह रहे हो? तुम तो टाइगर के बारे में ऐसे कह रहे हो जैसे वो कोई मामूली जानवर हो. तुम्हें तो पता होना चाहिए की उसे जुगनले का किंग कहते है. तुम इस तरह बातें करके बेचारी की इन्सल्ट मत करो.”
“बड़ी तरफ़दारी हो रही है…..उसे दोस्त बनाना है क्या?”
“ओफ्फूहो…कुछ भी मत बोलो. और तुम ज़रा जल्दी करो” कहते हुए शरइत इधर उधर देखने लगी. श्रुति के कुछ देर तक ऐसे ही इधर उधर देखने के बाद, जब श्रुति को एहसास हुआ की रोहन काफी टाइम लगा रहा है तो वो मूंड़ कर रोहन की तरफ देखने लगी. उसने देखा की रोहन एक दम मूर्ति की तरह एक ही पोज़िशन में खड़ा ऊपर की और देख रहा था.
“अरे क्या हुआ…..? ऐसे क्यों खड़े हो? अब पानी इतना भी ठंडा नहीं है की बर्फ बन जाओ.” जब रोहन फिर भी कुछ नहीं कहा तो वो रोहन के और करीब गयी और उसको हिलाकर कुछ पूच्छने की कोशिश करने लगी तो रोहन जल्दी से अपने होठों पर उंगली रखते हुए “ष्ह” करते खामोश रहने का इशारा करने लगा.

“क्या हुआ….? चुप क्यों बैठने बोल रहे हो? और यह ऊपर क्या देख रहे हो जबसे…….?” कहने के साथ में श्रुति भी ऊपर की और देख ही रही थी की उसकी आधी बातें उसके हलाक़ में ही रही गयी. क्योंकि उसने देख ही लिया था. वो कोई और नहीं वही शेयर था जिसके पंजों के निशान रोहन को झरने से थोड़ी दूर मिले थे. वो भूखा शेयर अपनी जबान निकाले दोनों को घूरे जा रहा था.

देखने पर ही मालूम पढ़ता था की वो कितने दीनों से भूखा था. जैसे उसे कई दीनों से खाना ना मिला हो. मिलता भी कैसे क्योंकि उसका तमाम शिकार तो वह दरिंदो ने कर दिया था. अब उसके लिए शायद ही कुछ बच्चा होगा इस जंगल में. वो भूखा मारा फिरता रहा था इस जंगल में. अब जब उसने इन दोनों को देख लिया तो उसे अपनी भूख दूर करना का एक जरिया जो मिल चुका था. वो कैसे उन्हें चोद सकता था. वो वही से उन्हें खाने के बारे में सोचने लगा की कैसे अपने शिकार को टारगेट करे..

श्रुति ने देखा की वो वही शेयर था जिसके बारे में वो कब से रोहन से कह रही थी जल्दी चलने को. श्रुति तो उस शेयर को देख कर एक लंबी से चीख निकालने लगी खौफ के मारे. इससे पहले रोहन , श्रुति का मुंह बंद करता, वो शेयर वही से छलांग लगते हुए श्रुति की तरफ लपकने लगा. रोहन ने भी देख लिया था शेयर को छलांग लगते हुए और उसका निशाना श्रुति ही थी. उसने जल्दी से श्रुति को एक तरफ धकेला. श्रुति, रोहन के इस तरह धक्का देने से एक तरफ जा गिरी. अपने शिकार के चूक जाने से वो शेयर और गुस्से में आ गया और दहाड़ते हुए वो अब की बार रोहन की तरफ लपकने लगा. रोहन भी जैसे तैयार था इसके लिए. वो जल्दी से अपने पैर में फँसाए हुए चाकू को तलाश करना लगा. लेकिन यह क्या? वहां तो कोई भी चाकू नहीं था. फिर उसे याद आया की उस दरिंदे से मुठभेड़ के दौरान में जो चाकू उसने उसके सीने में घोंपा था वो वही रही गया था. अपने चाकू को वहां ना पकड़ रोहन की समझ में नहीं आया की वो अब क्या करे. खैर अब उसके पास सोचने का समय भी नहीं था क्योंकि वो शेयर गुर्रटे हुए रोहन पर झपट चुका था. रोहन भी अब तय कर लिया था की चाकू नहीं है तो क्या हुआ वो ऐसे ही उससे मुकाबला करेगा. जब वो शेयर उसपर झपटा तो रोहन पहले काम यह किया की अपने एक हाथ से उस शेयर का गला पकड़ लिया. लेकिन यह इतना आसान नहीं था, क्योंकि उसकी लड़ाई कोई मामूली जानवर से नहीं बल्कि जैसा श्रुति ने कहा था ‘जंगल का राजा’ से थी.
रोहन लाक कोशिश कर रहा था उस शेयर के पैरों के नाखून अपने से दूर करने में. लेकिन वो इसमें सक्षम नहीं हो पा रहा था. उस शेयर के पंजों के नाखून….

(UPDATE-80)

कई जगहों से रोहन को छ्चील दिए थे. रोहन एक भयंकर पीड़ा में अपने आपको महसूस कर रहा था. उसने इतनी देर तक तो उस शेयर के जबड़े को अपने से दूर रखा हुआ था. लेकिन काफी देर तक यूँही मुशाक़्क़त करने के बाद उसकी हिम्मत जवाब देने लगी थी. अब उसके हाथों को कमज़ोरी महसूस हो रही थी. उसे ऐसा लग रहा था की उसका हाथ उस शेयर के जबड़े से कभी भी चुत सकता है. और अगर एक बार उसका जबड़ा चुत गया तो वो उसे पालक झपकते ही अपने नुकिले दाँतों से रोहन के गले पर दबोच लेगा.

रोहन के धक्का देने पर श्रुति दूर एक तरफ जा गिरी थी. उसे हल्की चोटें भी आ गयी थी.

लेकिन उसने अपनी चोटों की परवाह ना करते हुए उठ कर बैठ गयी. उसने देखा की वो शेयर रोहन पर झपटा हुआ है और उस पर अपने नाखूनओ से कई जगह च्चालनी कर दिया है. यह दृश्या देख कर श्रुति की जैसे रूह तक काँप गयी. वो चीखने चिल्लाने लगी, लेकिन इस तरह चिल्लाने से वो शेयर थोड़े ही रोहन को छोड देगा. श्रुति भी जैसे समझ गयी थी यह बात वो फौरन इधर उधर कुछ ढूंढ़ने लगी ताकि रोहन को उस शेयर से आज़ाद कर दे. पहले तो उसे ऐसे कोई चीज़ नहीं दिखी. लेकिन थोड़ा और ढूंढ़ने पर उसे एक बाँस की लकड़ी मिली जिसका दूसरा सीरा नुकिला था. उसकी जैसे आँखें चमक गयी. वो फौरन उस बाँस की लकड़ी को उठाई और जल्दी से जाकर उस शेयर की पीठ पर अपनी पूरी ताक़त से वो बाँस की लकड़ी घोंप दी. वो शेयर इस हमले से एक दम बौरा गया और जल्दी से रोहन को छोड कर एक तरफ हो गया. फिर उस शेयर ने देखा की उसपर हमला करने वाली वही खड़ी है तो बस वो उसी पर झपट पड़ा और श्रुति के ऊपर चढ़ कर उसे अपने नुकिले पंजों से उसकी गर्दन पर वार करने ही जा रहा था की रोहन फिर से खड़ा हुआ और अपने आपको और उस शेयर समेट दूर ले जा गिरा. फिर रोहन, श्रुति को ज़ोर ज़ोर से कहने लगा.
“श्रुति!! श्रुति!! तुम जल्दी से यहां से भाग जाओ…..अपनी जान बचाओ और यहां से भाग जाओ……” लेकिन वो देख रहा था की उसकी बात का श्रुति पर कोई असर नहीं पढ़ रहा था. वो वैसे ही रोए जा रहा था “श्रुति..!!!!!! भागो…..जल्दी से ….!!”
“नहीं रोहन…..!!! में तुम्हें ऐसे नहीं चोद सकती……नूऊ!!”
“मेरी फिक्र मत करो और भागू यहां से!!!” रोहन लगातार च्िला कर उसे वहां भाग जाने के लिए कह रहा था. लेकिन श्रुति अपनी जगह से तस से मास नहीं हुई थी. वो सिर्फ़ रोए जा रही थी. क्योंकि वो रोहन को ऐसे हालत में देख कर ही थी मानो जैसे उसका दिल एक दम च्चालनी च्चालनी सा हो गया था. वो कैसे अपने प्यार को बेसहारा उस शेयर के हवाले छोड सकती थी.

अब रोहन की हिम्मत जवाब देने लगी थी. उसे ऐसा लग रहा था की शायद अब वो उस शेयर का मुकाबला नहीं कर पाएगा. लेकिन वो यह सोच रहा था की अगर वो इस शेयर के हाथों मारा जाएगा तो वो उसके बाद श्रुति को भी नहीं छोड़ेगा. उसे अपनी जान की परवाह नहीं थी. परवाह थी तो सिर्फ़ श्रुति की. इसलिए वो उसे कह रहा था की वो यहां से चली जाए. लेकिन वो जिद्दी लड़की वहां से हिल ही नहीं रही थी. रोहन ने सोच लिया था अब उसे कुछ ना कुछ करना ही पड़ेगा इस शेयर से च्छुतकारा पाने के लिए. तभी उसकी नज़र उसी बाँस की लकड़ी पर जो उसकी पीठ पर अभी भी थी. रोहन ने हिम्मत करके उस शेयर को अपने से दूर फेंका ताकि उसे इतना मौका मिल जाए की दोनों हाथों से उस बाँस की लकड़ी को उसकी पीठ से निकाल सके. खैर रोहन ने जैसे तैसे उस शेयर से गुत्थम गुत्था होकर वो बाँस आख़िरकार निकाल ही लिया. फिर जल्दी से मौका देख कर वो बाँस उस शेयर के गले में घुसाद दिया.

पहले तो वो शेयर फिर भी थोड़ी मज़हमत किया लेकिन थोड़ी ही देर में उसका दम निकल गया. रोहन थोड़ी देर तक अपनी उजलही हुई साँसें बेहाल करने लगा. फिर उसे श्रुति का ख्याल आया वो पलटकर देखा वो अभी भी रोए जा रही थी. उसे ना जाने क्यों इतना गुस्सा आया उसपर की वो उसके पास जाकर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा..

“रोना बंद करो…!! तुम्हारे को समझ में नहीं आता है?? कब से कह रहा था भागो भागो…..अपनी जान बचाओ…..क्या सोच रही थी….हाअ…बोलो?”

“रोहन में तुम्हें अकेले चोद के कैसे जाती, अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो…?” श्रुति रोते हुए कहने लगी

“अरे ज्यादा से ज्यादा क्या होता….!!! में मर ही जाता ना? तुम को इतना फिक्र करने की क्या जरूरत थी?” रोहन अब भी उस पर बरसे जा रहा था.

“मुझे फिक्र करने की जरूरत थी…..!!! श्रुति भी इस बार चिल्लाया कर बोली.

“क्यों….? किस हक से तुम मेरी इतनी फिक्र कर रही थी…….? रोहन का पारा भी एक दम से चढ़ गया था श्रुति के भी चिल्लाने से.

“बिकॉज़ ई….

(UPDATE-81)

लव यू डॅम इट….!!! “ श्रुति, रोहन के आँखों में देखते हुए कह रही थी “क्योंकि में तुमसे प्यार करने लगी हूँ रोहन…..ई लव यू……रोहन ई लव यू…..” कहते हुए श्रुति, रोहन के सीने पर अपना सर रख दी.

रोहन की हालत तो ऐसी थी जैसे की उसे किसी साँप ने डांस लिया हो और वो हिलना भूल गया हो. वो इतनी देर से श्रुति पर गुस्स्से से बरसे जा रहा था. ना जाने उसका वो गुस्सा कहा हवा हो गया था. और हो भी क्यों ना क्योंकि बात ही ऐसी थी.. ऐसी बात नहीं थी की उसे श्रुति पसंद नहीं थी. वो उसे पसंद थी लेकिन वो एक मर्यादा तक सीमित था. उसने भी नोटिस किया था की श्रुति का जो रावय्या था उसके खिलाफ वो पहले से काफी नर्म पड़ गया था खासकर जब वो और श्रुति उस छोटे से घर में दुश्मनों रिश्ता बनाए थे. लेकिन वो यही समझ रहा था की जैसे दो दोस्तों के बीच रिश्ता होता है वैसा ही दोनों के बीच है. लेकिन उसे मालूम नहीं था श्रुति यूँ अचानक उससे अपने प्यार का इजहार कर देगी. श्रुति ऐसे ही रोहन के सीने से लग कर अपने प्यार का इजहार करती रही. लेकिन रोहन की समझ में नहीं आ रहा था की उसकी बात का क्या जवाब दे. जब काफी देर तक रोहन कुछ नहीं बोला तो श्रुति ने अपना चेहरा रोहन के सीने से उठा कर उसके चेहरे की तरफ देखने लगी. उसने पाया की रोहन एक कशमकश की हालत में है. जैसे उसके चेहरे पर कई सवाल उभर रहे हो. जब उसे रहा नहीं गया तो वो रोहन को टोकते हुए बोली.

“क्या हुआ रोहन….? क्या सोच रहे हो?”

“आ…आ…..क्क्क…कुछ…..नहीं…असल में……..मेरी समझ में नहीं आ रहा है की……” रोहन को तो जैसे कुछ जवाब देते बन ही नहीं रहा था.

“क्यों? क्या हुआ रोहन तुम्हें मुझसे प्यार नहीं है?” श्रुति का इतना कहना था की रोहन बिना कुछ सोचे समझे कह दिया.

“ऐसी बात नहीं है………आ…….मेरा मतलब है…….की……..

” उसे अब भी जवाब देते नहीं बन रहा था.

“साफ साफ कहो क्या कहना चाहते हो?” श्रुति भी अब थोड़ी उलझन में आ गयी थी. जब रोहन फिर भी कुछ नहीं बोल रहा था तो श्रुति ने फिर से कहा.

“रोहन…..? रोहन…? मेरी तरफ देखो…मेरी आंखों में देख कर कहो की तुम्हें मुझसे प्यार है या नहीं है.

“नहीं श्रुति ऐसी बात नहीं है.” अब रोहन, श्रुति की आँखों में देखता हुआ कहा. “हां मुझे भी तुमसे प्यार है मगर……”

“मगर? क्या रोहन?” श्रुति ने कहा.

“देखो श्रुति बात को समझो. यह मुमकिन नहीं है”

“साफ साफ कहो ना. तुम्हारा मतलब क्या है?” श्रुति अब बेक़रार होते हुए कहा.
“इसमें बहुत अड़चनें है श्रुति….”

“कैसी अड़चनें रोहन?”

“तुम्हारे स्टेटस और मेरे स्टेटस बिलकुल अलग है श्रुति.”

“स्टेटस? अब इसमें स्टेटस कहा से आ गया. में सिर्फ़ इतना जानती हूँ की में तुमसे प्यार करती हूँ और तुम मुझसे बस, पता है रोहन जिस ख्वाब के बारे में मैंने तुम्हें कल रात बताया था. जिसमें में मैं उस नौजवान का चेहरा कई दीनों से देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन नहीं देख पा रही थी. कल मैंने वो सपना फिर से देखा था और उस सपने में मैंने उस नौजवान का चेहरा भी देख लिया था. और जानते हो वो नौजवान कौन है?” रोहन जवाब में कुछ नहीं कहा बस उसकी तरफ देख रहा था. “ वो नौजवान तुम थे रोहन.. तुम ही हो मेरे वो सपनों के राजकुमार. जिसे पाने के लिए में अपनी पूरी जिंदगी उसके वेट में काटने को तैयार थी. और आज जब वो मुझे मिल गया है तो वो मुझसे बजाए प्यार मोहब्बत की बातें करने की बजाए स्टेटस की बात कर रहा है.” श्रुति, रोहन के चेहरे को अपने हाथों में पकड़ते हुए कहा.

“रोहन? अगर तुम समझते हो मेरी यह दौलत हमारे प्यार में रुकावट बनेगी तो नहीं चाहिए मुझे यह दौलत जो मेरे महबूब को मुझसे दूर रखे. मेरे लिए तो मेरी दौलत तुम ही हो रोहन….तुम हो…” फिर श्रुति , रोहन के गले लग कर रोने लगी.. रोहन बड़ा हैरान हो रहा था उस लड़की को देखकर जो उससे इतना दीवानवार प्यार कर रही थी. उसे अचानक अपना प्यार याद आने लगा जो उसने संध्या से किसी जमाने में किया था. लेकिन उस कमबख्त को रोहन के प्यार की कोई कद्र नहीं थी. इसलिए वो उसके प्यार को ठुकरा दी थी. रोहन ने सोच लिया था वो कभी भी श्रुति का दिल नहीं तोड़ेगा जिस तरह संध्या ने उसका दिल थोड़ा था. वो श्रुति को अपने से अलग किया और उसके आँसू पोच्छने लगा.

“इतना प्यार करती हो मुझसे ……मुझे बड़ी हैरत हो रही कहा इससे पहले मेरी जान की दुशमन बनी थी और कहा मुझ पर जान लूटा रही हो.” रोहन उसे थोड़ा छेड़ता हुआ कहा.

“तुम वापस से शुरू हो गये ताना देना?” श्रुति अपने आँसू पोंछते हुए कहा.

“अरे में तो मज़ाक कर रहा था. लेकिन एक प्राब्लम अभी है.?” श्रुति हैरत से रोहन की तरफ देखकर कहा.

“अब क्या बाकी है?”

“तुम्हारी उमर कितनी है?

“20”

“और में 26 का हूँ. मतलब में तुमसे पूरे दस साल बड़ा हूँ”

(UPDATE-82)

प्यार करने वाले उमर नहीं देखते उन्हें तो बस प्यार हो जाता है…..चाआहए उन दोनों के बीच कितना ही उमर का फासला हो. और वैसे भी हमारे देश में देखा गया है औरतों की उमर मर्दों के मुकाबले में कितनी भी कम क्यों ना हो चलता है लेकिन अगर किसी औरत की उमर मर्द से एक साल से ज्यादा हो तो बवाल मच जाता है. तो इसका मतलब हमारे केस में यह नॉर्मल है. बल्कि तुम दस साल की बात कर रहे हो यहां तो मर्द अपनी बेटी के बराबर की लड़कियों से शादी करता है और उनसे बच्चा भी पैदा करता, तब तो नहीं ज़माना बोलता.”

“अच्छा मेरी मां….मुझे माफ कर दे. अब कुछ नहीं कहूँगा.” रोहन, श्रुति के आगे हाथ जोड़ते हुआ कहने लगा. फिर वो दोनों एक दूसरे को देखकर हँसने लगे. श्रुति जल्दी से रोहन के गले लग गयी और उसे एक दम कस के भीच लिया.
“अयाया.” एक दर्द भारी आवाज़ रोहन के मुंह से निकल जो उसके जख्म के दबने से हुआ था जो उसे उस शेयर के हमले में मिला था. श्रुति, रोहन को कराहते हुए सुना तो घबरा गयी.

“क्या हुआ?” फिर उसे याद आया की रोहन उस शेयर से लड़ाई के दौरान में काफी घायल हो गया था. शायद उसके दबाने से उसके जख्म को चोट लगी थी.

“ई आम सॉरी!!! दिखाओ किधर है वो जख्म??”

“नहीं नहीं रहने दो…..में ठीक हूँ” रोहन उसे रोकते हुए कहा.

“अरे ऐसे कैसे ठीक है…अपना शर्ट उतारो और मुझे वो जख्म दिखाओ. और वैसे भी यह शर्ट तो आधी फॅट भी चुकी है.”

“क्या करोगी जख्म देख कर? तुम्हारे पास……वो है…क्या कहते है उसे जब कोई एमर्जेन्सी में लगते है….”

“फर्स्ट ाईड बॉक्स!!” श्रुति ने कहा.

“हां वही.”

“अब वो कहा से रहेगा इस जंगल में? तुम भी ना रोहन कुछ भी बोलते हो.”

“तब फिर क्या करोगी जख्म देख कर? रहने दो उसे ऐसे ही.”

“अच्छा बाबा मत दिखाओ. लेकिन तुम्हारे पास तो कोई इलाज होगा उसका? जैसा तुमने मेरे पैर का इलाज किया था.”

“हां इलाज तो है. आओ मेरे साथ.” फिर रोहन उसे उन्हीं झाड़ियों में से कोई पट्टी थोड़ा फिर उस सारी पट्टियों को भीगा कर उन सब को एक पत्थर से पीसने लगा. जब सारी पत्तियाँ पीस गयी तो उसका लेप एक थोड़े से गहरे बने हुए पत्थर में जमा करने लगा. फिर अपना शर्ट निकाल कर उस लेप से अपने ज़ख़्मो मर मलने लगा. आगे के हिस्से में उसे जहाँ जहाँ खरोचे आई थी उसने वहां पर लगा लिया लेकिन जब पीछे लगाने की बड़ी आई तो हाथ बराबर ना पहुंच पाने के कारण उसे वो लेप लगाने में दुविधा हो रही थी. श्रुति ने जल्दी से वो लेप अपने हाथ में लेते हुए उसके पीठ के ज़ख़्मो पर मलने लगी. रोहन को थोड़ा अजीब सा लग रहा था किसी लड़की का हाथ उसके बदन पर पढ़ रहा था और वो भी इतनी खूबसूरत लड़की का. उसके मन में जैसे एक बार फिर से उमंगें जागने लगी.

लेकिन अबकी बार वो ऐसे गलती नहीं करना चाहता था इसलिए उसने आपको कंट्रोल करने की कोशिश करने लगा.. जब श्रुति वो सारा लेप उसकी पीठ के ज़ख़्मो पर लगा ली तो उसने आगे आकर आगे के ज़कमो को देखने लगी की कही कोई जख्म चुत तो नहीं गया. लेकिन ऐसा करने में उसे रोहन के एक दम पास आना पड़ा था. पास आने की वजह से रोहन की साँसें और उसकी साँसें एक दूसरे से टकराने लगी थी. अब हवा का रुख कुछ और हो रहा था. श्रुति के अंदर भी कुछ उमंगें जागने लगी थी. लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग था. इससे पहले वो महसूस कर रही थी वो वासना थी लेकिन इस बार कुछ अलग अनुभव कर रही थी. इससे पहले दोनों के सिर्फ़ जिस्म एक दूसरे से मिले थे. लेकिन इस बार वो चाह रही थी की वो रोहन की आत्मा में समा जाए और रोहन उस की आत्मा में.इस बार वो एक अलग बंधन से जुड़ना चाहती थी जिसमें वासना नाम की कोई भी चीज़ ना हो.

यही सब महसूस करते हुए उसने रोहन की आँखों में देखने लगी. रोहन की आनकिएिन भी उसी ही की आँखों में देख रही थी जैसे वह एक दूसरों से यह कह रहे हो की दूर क्यों हो एक दूसरे से जब हम एक दूसरे के लिए बने है. आओ चलो हम एक दूसरे में समा जाते है. फिर उसके बाद दोनों के होंठ एक दूसरे से मिलने लगे. फिर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. श्रुति को ऐसा लग रहा था की जैसे वो बादलो की सैर कर रही हो. वो पूरा खो चुकी थी इस चुंबन में यही हाल रोहन का भी था. वो भी अब इस पल को खोना नहीं चाहता था. जो उसने संध्या से नहीं पाया था वो अब उसे श्रुति से मिल रहा था. एक सच्चा प्यार…….

जब वो दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह से चूम लिए तो श्रुति ने रोहन का दाया हाथ पकड़ते हुए अपनी भाई चूची पर रख दिया. रोहन समझ गया की इसका मतलब वो उसकी चुचियों की मस्सगाए करे. बस फिर क्या….

(UPDATE-83)

था रोहन अपने दोनों हाथों से श्रुति की दोनों चुचियों को कस के दबाने लगा. श्रुति के अंदर तो मानो जैसे तूफान उठने लगा हो. वो और कस रोहन को किस करने लगी. फिर रोहन श्रुति की जॅकेट की ज़िप धीरे धीरे खोलने लगा. जब वो ज़िप पूरी खोल दिया तो उसे उसकी चुचियों के दर्शन हो गये जो बिलकुल नंगे थे. उसने आगे बढ़कर उसकी चुचियों के निपल्स को बड़ी बड़ी चूसने लगा. श्रुति अब रोहन के सर के बालों को सहलाने लगी और रही रही कर उसके सर को दबाती भी ताकि वो उसकी चुचियों को और चूवसे . जब रोहन का चूसना हो गया तो उसने श्रुति के बदन से वो जॅकेट पूरी उतार दी. अब श्रुति ऊपर से पूरी नंगी हालत में हो गयी थी. हालाँके ठंड बहुत ज्यादा थी फिर भी उसे फर्क नहीं पढ़ रहा था क्योंकि उसके बदन के अंदर इतनी गर्मी जो भर गयी थी. फिर रोहन जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारने लगा और कुछ ही देर में वो भी पूरा मादरज़ाद नंगा हो गया. इस वक्त उन्हें किसी भी प्रकार का और किसी भी जानवर का कोई भी खौफ नहीं था.

वो तो बस खोए हुए थे और एक दूसरे में समा जाना चाहे थे. रोहन ने अब श्रुति को वही पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर पहले उसके होठों को चूमने लगा . फिर उसके बाद उसके गले को चूमने लगा. फिर धीरे धीरे नीचे आते हुए उसकी दोनों चुचियों को कस के मसलने के बाद फिर उनको देर तक चूसने के बाद वो नीचे की और आया और श्रुति के पेट को चूमने लगा. जब काफी देर तक वो उसके पेट को चूम लिया तो फिर उसकी नाभि के घधे में अपनी जबान फिरने लगा. रोहन का ऐसा करना था की श्रुति एक दम अपनी जगह से अपनी कमर ऊपर नीचे करनी लगी. उसे बर्दाश्त ही नहीं हो रहा था. उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके अंदर एक नदी चल रही हो और उसका रास्ता किसी बाढ़ ने रोक लिया हो. और वो नदी का पानी उस बाढ़ के पार जाना चाह रहा हो पर जा नहीं पा रहा हो. लेकिन जब रोहन उसकी नाभि में इसी तरह अपनी जबान फेरने लगा तो आख़िर कार उस नदी के पानी को वो बाढ़ भी रोकने में असमर्थ हो गया और झपाक से नदी का पानी बाढ़ को भेदते हुए उसकी चुत से निकालने लगा. श्रुति जो इतनी देर से अपनी कमर ऊपर नीचे कर रही थी अचानक शांत हो गयी और गहरी गहरी साँसें लेने लगी. रोहन समझ गया था उसकी इस हरकत ने श्रुति का काम टमान कर दिया था.

लेकिन अभी मंज़िलें और भी थी. उसे भी तो अपने अपने अंदर का लावे बाहर निकालना था.. श्रुति के नाभि पर जबान फेरने के बाद वो सीधा मतलब की जगह पर जाकर श्रुति की जीन्स को खोलने लगा. फिर उसके बाद एक झटके में श्रुति की जीन्स और उसकी पैंटी भी उसके पैरों से अलग कर दिया. अब श्रुति भी मादरज़ाद पूरी की पूरी नंगी हालत में रोहन के सामने लेती थी. रोहन की आँखों के सामने श्रुति की कोमल सी चुत सामने थी. जिसे वो पहले भी च्चका था अब तो उस चुत पर उसके प्यार की मोहर लगी हुई थी. वो उसे अपनी जायदाद समझने लगा था. उसने और देर ना करते हुए जल्दी से श्रुति की चुत पर अपनी जबान फेरने लगा. वहां पर अभी अभी श्रुति की चुत का छोडा हुआ पानी का टेस्ट मिलने लगा. उसने उसे भी चाट कर श्रुति की चुत को और भी कोमल करने लगा. रोहन की इस हरकत से श्रुति फिर से व्याकुल होने लगी. वो जो अभी थोड़ी देर पहले ठंडी हो गयी थी रोहन की हरकत पर वापस से चार्ज होने लगी. लेकिन इस बार उसे यह चाटम छाती नहीं चाहिए थी. बल्कि इस बार वो चाह रही थी रोहन अपना वो लोहे का डंडा उसकी चुत में डाल कर उसकी चुत पूरी फाड़ डाले. उसने रोहन को बालों से पकड़ा और उससे कहने लगी

“प्लीज़ !! रोहन, अब मत तड़पा जल्दी से अंदर डाल दो मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है. प्लीज़ जल्दी करो!!!”
“ठीक है!!” इतना कहकर रोहन जल्दी से अपने घुटने के बाल बैठ गया और अपना टॉप हाथ में लेते हुए डायरेक्ट श्रुति की चुत में निशाना लगाने लगा. श्रुति की चुत के अंदर इतना गीलापन हो चुका था की उसका लंड बिना किसी रुकावट से एक ही झते में घुस गया.

लेकिन श्रुति को उम्मीद नहीं थी उसका लंड एक झटके में चला जाएगा इसलिए वो तैयार नहीं थी. फिर इस झटके से जैसे उसकी जान निकल गयी थी

“आहह………..क्या कर रहे हो? आहिस्ते करो……” लेकिन रोहन अब अपने होश में नहीं था. वो तो जैसे सुना ही नहीं की श्रुति ने क्या कहा था. वो तो बस अपना भारी भर्कूं लंड श्रुति की कोमल और नाज़ुक चुत में अंदर बाहर करने लगा. और श्रुति दूसरी और दर्द और मजे के मिले जुले रूप में आवाजें निकाल रही थी.

“आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह……….ऊहह….में …..गूऊऊओद्द्द्द्द्दद्ड…….ऊऊऊऊऊऊऊओ…..आआआआआईयईईईईईईईईईईईईई….फिर इसी दौरान….

UPDATE-84)

में श्रुति के अंदर का वो नदी का पानी एक बार उस बाँध को भेदता हुआ बाहर निकालने लगा. वो फिर से गहरी साँसें लेने लगी थी. लेकिन रोहन तो जैसे लगा हुआ था अपनी ड्यूटी पर. जैसे आख़िर मुकाम तक वो लड़कर आएगा. फिर कुछ देर और ऐसे ही श्रुति को छोढ़ते रहने के बाद उसे भी ऐसा लगने लगा के उसके अंदर का लावा अब बाहर आने को आतुर है. बस फिर क्या था रोहन के दो चार शॉट के बाद वो सारे लावे एक साथ इतनी तादाद में निकालने लगे की श्रुति की चुत में उनके लिए जगह नहीं बची और वह बाहर निकालने लगे. इतनी ज्यादा मेहनत करने के बाद रोहन, श्रुति के ऊपर आकर गिर पढ़ा. श्रुति रोहन को अपनी बाज़ुओं के घेरे में ले ली. फिर वो दोनों थोड़ी देर तक प्यार मोहब्बत वाली बातें करने लगे. फिर जब उन्हें ऐसा लगा के उन्हें वापसे एक बार फिर काम क्रीड़ा करना है तो फिर से दोनों सेम रुटीन पर चलने लगे.

विजया और सौंदर्या ने पता लगाया के श्रुति नैनीताल में किस दोस्त के फार्महाउस पर पार्टी एंजाय करने गयी थी. तो उन्हें मालूम पढ़ा की वह सब निखिल की गाड़ी में बैठकर उसके ही फार्महाउस पर गये हुए थे. विजय कपूर ने निखिल के फादर संजीव सान्याल से कॉंटॅक्ट किया.

“संजीव जी!! विजय हियर…”

“हां विजय जी, कहिए?” संजीव एक दम हारे हुए सिपाही की तरह कहा. विजय को संजीव की आवाज़ में दुख साफ नज़र आ रहा था.

“सांजेव जी आपको तो पता ही हमारे बच्चे जो नैनीताल गये हुए थे और उनका अभी तक कोई भी पता नहीं है. में उसी सिलसिले में फोन किया है.”

“में समझ गया था विजय जी जब आपका फोन आया तो. इसमें कहने वाली कौनसी बात है. क्योंकि यह मामला गंभीर है ही इतना की कोई भी बाप इस समय परेशान होगा.”

“शुक्रिया संजीव जी मेरी परेशानी समझ ने के लिए.”

“अरे कैसी बातें कर रहे है..मुझे पता है आप इस वक्त कितने परेशान होंगे क्योंकि में भी उसी दौड़ से गुजर रहा हूँ. मेरा बेटा भी तो लापता है.”

“जी!….

संजीव जी में यही कहना चाह रहा था की आपने कुछ पता लगाया की आपका बेटा निखिल और उसके सारे दोस्त नैनीताल कब पहुंचे थे?”

“यही तो परेशानी वाली बात है विजय जी!! क्योंकि वो लोग जब यहां से नैनीताल के लिए निकले तो वहां पहुंचे ही नहीं है अभी तक. क्योंकि मैंने अपने नैनीताल के फार्महाउस के केर्टेकर से पता लगाया और उसने कहा की निखिल और उसके दोस्त नैनीताल पहुच्छे ही नहीं है.”

“क्या!! वह लोग नैनीताल पहुंचे ही नहीं है…? ऐसे कैसे हो सकता है संजीव जी? मेरी बेटी तो यही बोलकर गयी थी की वो लोग नैनीताल अपने कॉलेज के फेरवेल पार्टी करने जा रहे है. और आप अभी यह शॉकिंग न्यूज दे रहे है की वह लोग नैनीताल पहुंचे ही नहीं है. तो कहा गये हुए होंगे?”

“यही तो समस्या है विजय जी …मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है..मैंने अपने सोर्स से सब पता लगाया लेकिन ंखिल और उस की गाड़ी का जिसमें वह लोग बैठ कर गये थे कुछ भी पता नहीं चला..” संजीव ने बेचारगी से कहा.

“हम…..यह तो बड़ी समस्या हो गयी.. अब तो एक ही चारा है की हमें पुलिस की मदद लेनी होगी. इसलिए में अपने कमिशनर दोस्त की मदद लेता हूँ.”

“यही बढ़िया रहेगा. में भी आपके साथ चलता हूँ …”

“जरूर!! बल्कि में तो कहता हूँ हमें उन सब पेरेंट्स को ले लेना चाहिए जिनके बच्चे हमारे बच्चों के साथ गये हुए थे.”

“सही कहा आपने …में अभी उनसबको खबर करता हूँ.”

फिर कुछ ही देर में विजय कपूर और संजीव सान्याल समेट वो सब पेरेंट्स इस वक्त कमिशनर की ऑफिस में बैठे हुए थे.

“आप घबराए नहीं विजय जी….कुछ नहीं होगा आप सब के बच्चों को..हम उन्हें ढूँढ निका लेंगे.” कमिशनर अतुल चतुर्वेदी ने कहा.

“शुक्रिया अतुल जी….लेकिन आप उन्हें ढूंढ़ेंगे कैसे?” विजय ने कहा.

“वो सब आप हमारे ऊपर छोड दीजिए….” फिर अतुल ने उन सब से रुटीन सवाल पूछना लगा की वह कब घर से निकले थे , कोन से गाड़ी से गये थे और कितने लोग गये थे वगैरह वगैरह….

पूरी बातें सुनाने के बाद अतुल चतुर्वेदी ने कहा.

“आप लोग एक काम करिए पहले अपने अपने बच्चों के मोबाइल नंबर्स और उनके फोटोग्रॅफ्स दीजिए.हम उनके मोबाइल नंबर्स के जरिए उनको ट्रेस करेंगे..फिलहाल आप लोग घर जाए. जैसे ही कुछ पता चलता है में आप लोगों को खबर कर दूँगा.”

घर पहुंचने के बाद विजय और सौंदर्या को जैसे एक पल का भी सुकून नहीं था. वह बेचैनी से यहां वहां टहल रहे थे..उन्हें वेट था अतुल चतुर्वेदी के फोन का की वो कब श्रुति और उसके दोस्तों के मोबाइल नंबर्स ट्रेस करवाता है और उन्हें कब खबर करता है. काफी देर बाद अतुल चतुर्वेदी का फोन विजय कपूर को आता है.

“विजय जी!! हमने तमाम बच्चों का मोबाइल नंबर्स ट्रेस कर लिया है.” यह खबर सुनकर विजय की आँखें चौड़ी हो गयी.

“ओह अच्छा!! जल्दी से बताए कहा है वह लोग इस वक्त?” विजय ने जोश भरे लहज़े में बोला

“इस वक्त वह लोग कहा है इस बारे में तो में अभी…

UPDATE-85)

नहीं कह सकता, लेकिन हां उनका मोबाइल जो आखिरी बार बंद हुआ था वो जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में हुआ था.” अतुल चतुर्वेदी ने बताया.

“जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क?? यह कैसे हो सकता है?? वह लोग तो नैनीताल के लिए निकले थे वहां कैसे पहुंच गये?” विजय कपूर ने हैरत से भरे लहज़े में कहा.

“इसमें इतना शॉकिंग वाली कोई बात नहीं विजय जी. जिम कॉर्बेट नैनीताल जाने के रास्ते में पढ़ता है. बच्चे है वो, हो सकता है अपना मूंड़ चेंज कर लिया होगा उन्होंने. नैनीताल जाने के बजाए वह जिम कॉर्बेट चले गये होंगे. “

“लेकिन यह तो बड़ा गज़ब हो गया…..!! आप तो जानते है में क्या कहना चाह रहा हूँ.”

“हां…..में समझ गया..आपका मतलब क्या है..वो नेशनल पार्क इस वक्त खतरे से खाली नहीं है. किसी जंगली जानवरो ने आतंक मचाया हुआ है वहां पर..”

“तो अब क्या होगा अतुल जी…कही मेरी बेटी श्रुति को कुछ…….”
“घबराइए नहीं विजय जी…बच्चों को कुछ नहीं होगा..में अभी अपनी एक टीम जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के लिए रवाना करता हूँ और में खुद वहां के फोरेस्ट डिपार्टमेंट वालो को फोन करके उन बच्चों के बारे में पता लगाने के लिए कहता हूँ..”

“आपका शुक्रिया अतुल जी….!!

“कैसे बातें कर रहे है विजय जी….इसमें शुक्रिया कहने वाली कोन से बात है. यह तो हमारा काम है.” फिर वह दोनों के कुछ और जरूरी बातें करने के बाद फोन डिसकनेक्ट कर दिए. विजय कपूर बेचैन हो गया था यह सुनकर की श्रुति और उसके दोस्त इस वक्त जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में हैं. कहा वो यह डर रहा था श्रुति के नैनीताल जाने पर की वो जंगल उस शहर के करीब में है, उस वक्त उसे यह डर था की हो सकता है उनमें से कुछ जानवर वहां पर भी चले जायें. लेकिन अब तो उसका डर दुगुना नहीं बल्कि कई गुना तरफ गया था क्योंकि वह उस जंगल के पास नैनीताल में नहीं बल्कि खुद उसी जंगल में थे. अब तो खतरा उन लोगों के ऊपर और तरफ चुका था.

“क्या कहा उस कमिशनर ने?” सौंदर्या ने विजय को फोन रखने के बाद गुमसुम देखा तो कहा. विजय कपोर ने जवाब में कुछ नहीं कहा, सिर्फ़ सौंदर्या को घूर कर देखा. उसे इस वक्त बहुत गुस्सा आ रहा था अपनी बीवी पर. क्योंकि यह सब उसी का किया धारा था. अगर वो पहले ही दिन से श्रुति से कॉंटॅक्ट करने की कोशिश करती तो यह नौबत नहीं आती. वह लोग उस वक्त कोशिश करते तो उसे ढूँढ सकते थे. लेकिन जो न्यूज उसने सुना था उसके बाद तो उसे भी खुद उम्मीद नहीं थी की श्रुति के साथ इस वक्त क्या हुआ होगा.

“क्यों पूंछ रही हो? आख़िर तुम्हारा हक क्या बनता है पूच्छने का? जब सब कुछ बिगाड़ लिया तो अब आई हो अपनी बेटी की ख़ैरियत जाने के लिए.” विजय ज़हर उगलता हुआ सौंदर्या से कहने लगा.

“विजय प्लीज़!!!!! यह सब बातों को अभी यह रहने दो. मुझे जल्दी से बताओ क्या कहा अतुल जी ने?” सौंदर्या ने विजय से विनती करते हुए कहा. विजय का मन कर रहा था की वो सौंदर्या को और खड़ी खोती सुनाए लेकिन वो जानता था की इन सब बातों का कुछ मतलब नहीं है. जो होना था वो तो हो चुका है अब उसे सिर्फ़ यही करना की जल्द से जल्द श्रुति को उस जंगल से निकाल ले. वो कुछ देर तक अपने दिमाग को शांत किया फिर सौंदर्या को वो बताने लगा जो उसे अतुल चतुर्वेदी ने कहा था. फिर उसके बाद सौंदर्या की भी वही हालत हो गयी थी जो विजय की थी इस वक्त.

“विजय !! चलो अभी और इसी वक्त उसी पार्क में. हमें कुछ ना कुछ करना होगा, पता ना हमारी श्रुति इस वक्त किस हाल में होगी.” कहते हुए सौंदर्या रोने लगी. सौंदर्या को रोता देख विजय का दिल भी पिघल गया. वो यही सोचने लगा की सौंदर्या जैसे भी है श्रुति की मां है. आज श्रुति तक़लीफ़ में है तो एक मां का दिल टूट गया है. वो एक मां का दिल नहीं दुखाना चाहता था. यही सब सोचकर उसने आगे बढ़कर सौंदर्या को गले लगा लिया और उसे दिलासा देने लगा. फिर उसके बाद वह लोग जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की और निकल पढ़े. सिर्फ़ वह दोनों ही नहीं बल्कि और पेरेंट्स के यह जाने के बाद की उनके बच्चे आखिरी बार जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में पा गये थे उस और के लिए चल पढ़े.

परवेज़ भूखा प्यासा अकेला चला जा रहा था. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे. वो और सुशांत और उनकी टोली निकले थे ढूंढ़ने रोहन को लेकिन खुद ही एक एक करके उस आदमख़ोर दरिंदो का शिकार हो गये थे. अब उन सबमें अकेला परवेज़ ही बच्चा था. उसकी हालत इस वक्त एक दम खराब थी. भूखा प्यासा वो उस आदमख़ोर दरिंदो से बचता बचाता हुआ अपनी मंजिल तलाश कर रहा था. लेकिन उसके साथ में भी वही परेशानी हो गयी थी जो रोहन और श्रुति के साथ में थी. वो भी रास्ते से भटक गया था. खैर, फिर भी जल्द से जल्द अपनी मंजिल…

(UPDATE-86)

पा लेना चाहता था क्योंकि उसे मालूम था की अगर वो ऐसे ही भटकता रहा तो वो भी सुशांत और उसके साथियों की तरह मारा जाएगा. रही रही कर उसके सामने वही दृश्या घूम रहे थे जब उन हैवानो ने उन सब पर हमला किया था. उसने देखा था वह कुल चार दरिंदे थे और किस तरह अचानक उन लोगों पर हमला करने लगे थे. उन लोगों को तो कुछ समझ ही नहीं आया की यह बाला है. परवेज़ ने अपनी पूरी जिंदगी में इस तरह भयानक जानवर नहीं देखा था. वह उन लोगों को एक एक करके शिकार करके अपना नीवाला बना रहे थे. उनके सारे हथियार किसी काम नहीं आए थे क्योंकि उन्हें उन दरिंदो ने मौका ही नहीं दिया था हथियार इस्तेमाल करने का. लेकिन परवेज़ किसी तरह उन दरिंदो से अपनी जान बच्चा कर वहां से भाग निकला था. लेकिन वो यही सोच रहा था की वो कब तक यूँही भटकता रहेगा ऐसे ही.

उसे 24 घंटे से भी ज्यादा हो गये थे इसी तरह भटकते हुए. भूख के मारे वो एक दम बेहाल हुआ जा रहा था. जब काफी देर तक ऐसे ही चलते रहने के बाद भी उम्मीद की किरण नज़र नहीं आई तो उसने थोड़ा आराम करने का सोच कर एक पेड़ के पास जाकर बैठ गया. तक हारा हुआ परवेज़ इस समय अपने दोस्त रोहन के बारे में सोचने लगा. वो सोच रहा था के पता नहीं रोहन इस समय किधर होगा. ज़िदना भी होगा के नहीं. अगर इन आदमख़ोरो के हटते चढ़ गया होगा तो फिर कुछ भी कहना मुश्किल है. यही सब सोचते सोचते वो नींद की आगोश में जाने लगा. लेकिन उसकी आँख लगे अभी कुछ देर हुआ था की वो खत से अपनी आँखें खोल दिया. कारण था उसे आवाजें आनी लगी जैसे सूखे हुए पत्तो पर जैसे कोई चल रहा हो. खौफ के मारे वो एक दम चौकन्ना हो गया. और इधर उधर देखने की कोशिश करने लगा की आवाजें कहा से आ रही है. थोड़ा गौर करने पर उसे महसूस की वो आवाज़ उसके डायन और से आ रही है. वो एक दम घबराने लगा क्योंकि उसे डर था की कही यह आवाज़ उन दरिंदो के चलने की वजह से तो नहीं आ रही है. अभी वो यही सोच ही रहा था की वो आवाज़ अब उसे साफ साफ सुनाई दे रही थी जैसे अब वो उसके करीब पहुंच गये हो. परवेज़ जल्दी से अपनी जगह से खड़े होकर दूर भागता हुआ एक घनी सी झाड़ियों में चुप कर आने वाले को देखने की कोशिश करने लगा. अभी उसे उस झाड़ियों में बैठे हुए कुछ देर हुआ था की उसे अपने आस पास जैसे कोई चीज़ रेंगती हुई महसूस होने लगी. उसने जल्दी से अपने आस पास देखने की कोशिश करने लगा लेकिन रात हो जाने की वजह से अंधेरा काफी तरफ गया था और उसे ठीक से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. वो अपने हाथों से उस रेंगती हुई चीज़ को छू कर महसूस करने की कोशिश करने लगा. बस उसका इतना करना ही था की उसे जैसे बिजली का झटका जैसा लगा. क्योंकि वो एक शिकारी था इसलिए उसे समझने में देर नहीं लगी की वो रेंगती चीज़ कुछ और नहीं बल्कि एक आज़गार साँप था. परवेज़ की हालत एक दम पतली हो गयी.. पीछे खाई और आगे कुँवा वाली उसकी इस समय हालत हो गयी थी. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे. लेकिन कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा ही वरना बाहर जो कोई भी है वो तो बाद में नुकसान पहुचाएगा उससे पहले यह आज़गार उसे अपना नीवाला बना देगा. यही सोच कर परवेज़ जल्दी से उस झाड़ियों से बाहर की और कूड़ा. लेकिन जैसे ही वो बाहर आया उसने वही दो खूनकर लाल लाल आँखें देखा जिन्होंने सुशांत और उसके साथियों को मौत के घाट उतारा था..परवेज़ ने देखा की उसके बाहर आने से उस दरिन्दा का ध्यान उसकी और आकर्षित हो गया है और वो दौड़ता हुआ उस ही की और तरफ रहा था. परवेज़ की हालत एक दम पतली हो गयी थी उसे अपनी तरफ बढ़ता हुआ देखकर. उसे अपनी मौत साफ नज़र आ रही थी. लेकिन वो इतनी आसानी से नहीं मारना चाहता था. उसने सोचा मारना तो है ही तो क्यों ना मुकाबला करके ही मारा जाए.

इसलिए उसने अपना चाकू निकाला और वो चाकू लेकर एक लंबी छलांग लगाई उस दरिंदे पर. लेकिन वो चूक गया और वो चाकू उस दरिंदे के बाजू को ही जख्मी कर पाया. अपना वार खाली जाता देख वो दरिन्दा और भौक्ला गया और फिर से दोबारा पलट कर तेजी से अपना हाथ पर परवेज़ पर चलाया. उसका यह वार तो परवेज़ बच्चा लिया था लेकिन अपने भाई तरफ के बाजू को जख्मी होने से नहीं बच्चा पाया.. परवेज़ इस हमले से दूर जा गिरा था और उसका चाकू उसके थोड़ी दूर पर गिर गया था. फिर परवेज़ ने देखा की वो दरिन्दा उस पर फिर हमला करने की तैयारी कर रहा था. परवेज़….

(UPDATE-87)

जल्दी से अपना वो चाकू उठाने की कोशिश करने लगा लेकिन अपने बाएँ वाले बाजू के घायल होने की वजह से वो थोड़ा लड़खड़ा रहा था और चाकू की तरफ नहीं पहुंच पा रहा था. फिर परवेज़ ने देखा की वो भयंकर जानवर अपने लंबे लंबे दाँतों और नाखूनओ से उसपर हमला करने के लिए अपने हाथ बढ़ा चुका था. उसे अपनी मौत साफ नज़र आ रही थी. खौफ के मारे उसने अपनी आँखें बंद करली . वो अब मरने के लिए तैयार हो चुका था, लेकिन इससे पहले की वो दरिन्दा उस पर हमला करता उस दरिंदे के मुंह से एक जोरदार चीख निकली जैसे उसे किसी ने बहुत ज्यादा ही दर्द दिया हो. परवेज़ थोड़ा चौका की इसे क्या हुआ अचानक. यह देखने के लिए उसने आँखें खोली तो उसने देखा की उसका वही चाकू से कोई उस दरिंदे के दिमाग पर हमला करे जा रहा था. और फिर जब उस आदमी का हाथ रुका तो वो दरिन्दा छटपटाने लगा और कुछ ही देर में दम तोड़ दिया. परवेज़ को बड़ी हैरत हुई के इस भयंकर जानवर को मारने के लिए कौन इतनी बहादुरी दिखा सकता है. वो जल्दी से खड़े होकर अपने उस मसीहा का चेहरा देखने की कोशिश करने लगा.

वो पास जाकर उस मसीे को अपनी तरफ किया तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना ना रहा क्योंकि वो मसीहा कोई और नहीं बल्कि उसका जिगरी दोस्त रोहन ही था. परवेज़ बहुत खुश हो गया. उसे सिर्फ़ यह खुशी नहीं थी की रोहन ने उसकी जान बचाई बल्कि यह भी थी के उसका प्यारा दोस्त रोहन ज़िंदा था. वो रोहन को अपने सामने देख कर फूला नहीं समा रहा था.

“ओये रोहन तू……??? तू ज़िंदा है मेरे दोस्त???

“क्यों…..तू मेरे मरने की दुआ कर रहा था क्या?

“नहीं यार….कैसे बात कर रहा है?

“अच्छा ठीक है……पहले यह बता तुझे तो रेस्ट हाउस पर होना चाहिए था तो तू यहां क्या कर रहा था?” रोहन, परवेज़ से सवाल पूछते हुए कहा.

“इसका जिम्मेदार तू है खंभाक़त मारे के….!! अकेले निकल पढ़ा था उन लौंदो और लौंदीयों को सबक सिखाने के लिए और जब तू काफी देर तक आया नहीं तो हम सब को फिक्र होने लगी. फिर क्या था में भीमा और सुशांत निकल पढ़े तुझे ढूंढ़ने के लिए लेकिन………” कहते हुए परवेज़ खामोश हो गया.

“लेकिन क्या परवेज़? सुशांत और भीमा अगर तेरे साथ में थे तो कहा है वो दोनों इस वक्त?

“वह दोनों अब ज़िंदा नहीं है.

उन्हें इसी क़िस्म के जानवरो ने मौत के घाट उतार दिया.” दुख भारी आवाज़ में परवेज़ बोला.

“ओह नहीं!!” रोहन भी उन दोनों की मौत के बारे में सुनकर अफ़सोस करने लगा.

“लेकिन तू साले किधर था हराम खोर. लंड के बॅया…..” परवेज़ कुछ और कहता उससे पहले ही रोहन अपने हाथों से परवेज़ का मुंह बंद कर दिया और दूर खड़ी श्रुति की तरफ इशारा किया. जब परवेज़ ने श्रुति की तरफ देखा तो हैरत में पढ़ गया. उस दरिंदे के हाथों मरने से और रोहन के इस तरह अचानक मिल जाने से वो इतना खुश था की उसे अपने पास कौन खड़ा है दिख ही नहीं रहा था. परवेज़ थोड़ा संभला और रोहन के कान में कुछ कहने लगा.

“आबे यह तो उन्हीं लौंदीयों में से एक है ना जिन्हें हमने किडनॅप किया था और जिस पर तू अपनी गुण भी रखा था??

“हां यह वही है.” रोहन भी फुसफुसते हुए परवेज़ के कान में कहा.

“तो यह ज़िंदा है!! जब हमने उधर इन लोगों की गाड़ी के पास मानव कंकाल देखे थे तो मुझे लगा था की सब के सब उस जानवरो का शिकार हो गये है.”

“मुझे यह तो नहीं पता की उन लोगों में से कौन बच्चा कौन नहीं क्योंकि में और श्रुति….मेरा मतलब है यह लड़की उस खाई से नीचे गिर गये थे.” फिर रोहन ने परवेज़ को आगे की घटना के बारे में भी विस्तार से बता दिया. पूरी बात सुनाने के बाद परवेज़, रोहन का चेहरा हैरत से देख रहा था.

“क्यों क्या हुआ? ऐसे आँखें फाड़ फाड़ के क्या देख रहा है?” रोहन, परवेज़ से कहने लगा

“मुझे बड़ी हैरत हो रही है यार…..तू इस लड़की के साथ तीन दीं से है? क्या बात है….? परवेज़ थोड़ा दाँत दिखाते हुए रोहन को छेड़ने लगा.”आबे कुछ मामला सेट किया की नहीं पत्थर दिल आदमी?”

“चुप बैठ तू. ज्यादा फॉककेट मत बोल.” रोहन कहते हुए श्रुति की तरफ देखा जो काफी देर से दो दोस्तों को मिलते हुए देख रही थी.

“श्रुति? यह मेरा दोस्त परवेज़ है…..मैंने बताया था ना तुम्हें?

“हां हां….मुझे याद है. हेलो परवेज़ भाई!! “ श्रुति के मुंह से भाई शब्द सुनकर उसे एक झटका सा लग गया था.

“और परवेज़ यह श्रुति है……” रोहन, परवेज़ को श्रुति का तरफ करते हुए कहा. थोड़े देर तक वह तीनों यूँही एक दूसरे का मुंह देखते रहे क्योंकि उनकी समझ नहीं आ रहा था की आगे क्या कहें. परवेज़ तो श्रुति से नज़रे ही नहीं मिला पा रहा था क्योंकि उसे वही सब बातें याद आ रही जो उन दोनों ने इसके साथ में किया था. फिर भी उसने हिम्मत करके कहा.

“श्रुति जी…….रोहन का तो मुझे पता नहीं…..शायद….

(UPDATE-88)

इसने आपसे माफी माँग भी ली हो…..तो…..इसलिए…..में भी माफी माँगता हूँ आप लोगों के साथ जो मैंने किया…..मेरा मतलब है हम दोनों ने किया…..” कहते हुए परवेज़ अपने हलक़ुए से थूक निगलने लगा. परवेज़ की बात सुनकर पहले श्रुति, रोहन की और देखने लगी की क्या जवाब दे उसका, लेकिन कुछ सोच कर वो खुद ही बोली

“नहीं….नहीं….

परवेज़ भाई इसकी कोई जरूरत नहीं है!!”

“अरे जरूरत क्यों नहीं है. हम दोनों ने वाक़ई में आपके साथ में बहुत बुरा किया था. हमें ऐसा नहीं…….”वो आगे कुछ और कहता रोहन उसे चुप करते हुए कहने लगा.

“बस बस……उसे सब समझ आ गया है….उसे किसी भी बात का बुरा नहीं लगा है. मैंने सब समझ दिया है. तू बस अब बिलकुल खामोश हो जा क्योंकि हमें यहां से निकालने के बारे में भी सोचना है.”

“अच्छा ऐसा है क्या? ठीक है जैसे तू बोलता है. लेकिन हम यहां से जाएँगे कहा? तुझे कोई रास्ता पता है क्योंकि में तो रास्ता भटक गया हूँ” परवेज़ ने कहा.

“अजीब अहमक (बेवक़ूफ़) है तू. अगर मुझे रास्ता पता होता तो अब तक यही भटकता? रोहन उस पर च्चिदते हुए कहा.

“अच्छा बाबा ठीक है. माफ करदे मुझे, लेकिन कुछ तो तूने सोचा होगा तूने क्योंकि दिमाग तो सिर्फ़ तेरे पास है?” परवेज़ भी तंज़िया अंदाज़ में कहा.

“बस सीधा चलते है. कही ना कही से रास्ता मिल ही जाएगा.”

“वो तो ठीक है यार लेकिन एक प्राब्लम है? परवेज़ ने कहा.

“अब क्या हुआ?”

“यार अब मुझसे इतना लंबा चला नहीं जाएगा क्योंकि एक तो बहुत तक चुका हूँ और दूसरे मुझे भूख भी बहुत ज़ोर की लगी है.”

“वो तो में तेरी हालत देख कर ही समझ गया था. लेकिन परवेज़ बात को समझ हम लोग इस तरह एक जगह पर देर तक नहीं रुक सकते. यह खतरे से खाली नहीं होगा. हमें जल्द से जल्द यहां से निकलना होगा वरना फिर से कही वो जानवर आ गये तो मुसीबत हो जाएगी. और रही बात तेरी भूख मिटानी की तो आगे कोई ना कोई पेड़ ऐसा होगा जिसमें खाने लायक फल होंगे तो हम सब उसी से अपना पेट भर लेंगे.” रोहन, परवेज़ को समझते हुए कहा.

“लेकिन रोहन, परवेज़ भाई के बाजू तो पूरी तरह जख्मी है इसका क्या करेंगे?” श्रुति ने कहा. परवेज़ को बड़ी हैरत हो रही थी की श्रुति उसको भाई कहकर पुकार रही थी और रोहन को सिर्फ़ ‘रोहन’. वो सोचने लगा की आख़िर चक्कर क्या है या फिर इनके बीच सही में कोई चक्कर तो नहीं चल गया.

“उसके बारे में भी हम आगे चल कर कोई जड़ी बूटी वाली कोई पट्टी देखकर उसका लेप लगा लेंगे. लेकिन फिलहाल यहां से जितनी जल्दी हो सके निकल होगा.

“हम….शायद तू ठीक कह रहा है.” कहते हुए परवेज़ चलने के लिए तैयार हो गया.” लेकिन एक बात बता यार यह किस तरह के जानवर थे यार तेरी कुछ समझ में आ रहा है? परवेज़ ने कहा.

“नहीं यार अभी तक तो में भी नहीं समझा हूँ की यह क्या चीज़ है. यह इतने खूनकर और भयानक है की इंसानो को संभालने का मौका भी नहीं देते.”

“दिखने में इनकी शकलें तो बंदरों जैसी है……” परवेज़ ने कहा.

“वो तो है. पता नहीं यह बंदरों की कोन से ज़ात है?” रोहन ने कहा. फिर परवेज़ ने श्रुति की तरफ देख कर कहा.

“श्रुति जी अगर बुरा ना मैंने तो आप थोड़ा आगे आगे चलेंगे क्योंकि मुझे मेरे दोस्त से कुछ प्राइवेट बातें करनी है?” इससे पहले की श्रुति कुछ कह पति रोहन, परवेज़ की तरफ देख कर कहा.

“अब क्या बातें करनी है? जो भी कहना है कह दे इनके सामने.”

“ओके ओके नो प्राब्लम! तुम लोग करो अपनी प्राइवेट बातें. में थोड़ा आगे चलती हूँ.” कहते हुए श्रुति उनसे इतने आगे चलने लगी के उसे वो लोग की बातें करने की आवाजें ना आए. श्रुति को आगे जाते देख रोहन घूर के देखना लगा परवेज़ को.

“बोल क्या बकना है?

“मुझे वही सब बता जो तूने मुझे अब तक नहीं बताया है?”

“मतलब?”

“आबे मतलब के बच्चे सब समझ रहा हूँ तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है.”

“आबे तू क्या कह रहा है मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है.” रोहन समझ गया था की परवेज़ क्या पूछना चाहता है.

“ज्यादा भोला मत बन. मुझे उस लड़की की आँखों में साफ दिख रहा है.”

“क्या दिख रहा है?” रोहन फिर अंजान बनते हुए कहा.

“पागल समझ रखा मुझे क्या? में उस लड़की और तेरे बर्ताव से समझ गया था की तुम दोनों के बीच जरूर कोई खिचड़ी पकई हुई है. और यह लड़की जो जॅकेट पहनी हुई है यह मेरी जॅकेट है जो मैंने तुझे दी थी पहनने के लिए. और तूने इसे दी है पहनने के लिए, ऐसा कोई तब करता है जब कोई किसी की ज्यादा परवाह करता है.”

“क्या अनाप शनाप बेक जा रहा है. तेरा दिमाग खराब है? आबे कोई किसी को कुछ पहनने के लिए दे दे तो क्या उसे प्यार करने लगता है इंसानियत नाम की कोई चीज़ नहीं होती?” अब रोहन हल्का सा गुस्सा करते हुए कहा.

“ठीक है बेटा कर नाटक. मत बता मुझे में इसी लौंडिया से पूछता हूँ.” कहते हुए परवेज़,श्रुति की तरफ कदम बढ़ने लगा.

(UPDATE-89)

इज्जत से बात कर.” रोहन उसे रोकते हुए कहा.

“क्यों तुझे क्यों मिर्ची लग रही है?” परवेज़, रोहन की आँखों में झाँकते हुए कहा.

“क्योंकि बाभी है वो तेरी!”

“हाअ…..अब निकला ना मुंह से तेरे सच!! यही बात पहले ढंग से नहीं बता सकता था?”

“क्यों? तू इतना बेक़रार क्यों था जाने के लिए?” अभी परवेज़, रोहन की बात का कुछ जवाब देता उससे पहले श्रुति ने उन दोनों की तरफ घूम कर कहा

“रोहन!! वहां देखो.” श्रुति ने अपनी डायन और कुछ ही दूरी पर बने हुए एक घर की तरफ इशारा किया. रोहन और परवेज़ भी उसी के बताए हुई जगह पर देखने लगे. उन्होंने ने भी देखा की वो एक मंज़िला घर था.

“यह तो किसी का मकान लग रहा है? और वहां पर रोशनी भी है. इसका मतलब वहां जरूर कोई रहता होगा” परवेज़ ने कहा.

“हां….तुम ठीक कह रहे हो. चलो उधर ही चल कर देखते है.” रोहन ने कहा. फिर वह तीनों उसी मकान की और चलने लगे. जब वह मकान के करीब पहुंचे तो उन्होंने पाया की उसका मैं दरवाजा अंदर से लॉक्ड था

“यह तो लॉक्ड है” श्रुति ने कहा.

“अंदर से लॉक है. और घर के अंदर से रोशनी भी आ रही है इसका मतलब अंदर जरूर कोई है.

” रोहन ने कहा.

“वो तो है, लेकिन हम अंदर कैसे जाएँगे और उनसे मदद कैसे माँगेंगे.” परवेज़ ने कहा. रोहन ने जवाब में कुछ नहीं कहा. वो आगे तरफ कर दरवाजा को ज़ोर ज़ोर हिलाने लगा शायद उसके हिलने की आवाज़ से अंदर जो भी है बाहर की और आ जाए.
“अंदर कोई है?” दरवाजा को हिलाने के बाद भी कोई बाहर की और नहीं आया तो रोहन आवाजें देने लगा.

“कमाल है कोई बाहर झाँकने को तैयार ही नहीं है.” परवेज़ ने कहा.

“अब क्या करेंगे?” श्रुति ने कहा.

“करना क्या है अब इस दरवाजा के उप्पर से कूद कर जाना पड़ेगा.” रोहन ने कहा.

“लेकिन यह ठीक रहेगा? ई मीन किसी के घर में इस तरह से घूसना ठीक नहीं लगता मुझे.” श्रुति ने कहा. रोहन उसकी बात पर थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा.

“तुम भी कमाल करती हो शूति,यहां हमारी जान पर बन आई है और तुम हो की……” रोहन पूरी बात बोले बिना ही दरवाजा पर चढ़ने लगा. दरवाजा पर चढ़ने के बाद वो दरवाजा के दूसरी तरफ से उतरने लगा. फिर जब वो दरवाजा के उस पार पहुंच गया तो उसने श्रुति से कहने लगा.

“चलो तुम भी इधर आ जाओ जैसे में इधर आया.” रोहन, श्रुति की तरफ देख कर कहा. फिर पहले श्रुति दरवाजा के उप्पर चढ़ के उस तरफ गयी फिर उसके परवेज़ ने भी वैसा ही किया.

“आओ चलो अंदर चल कर देखते है.” फिर वो परवेज़ की तरफ घूम कर कहा. “ज़रा होशियार रहना अंदर कुछ भी हो सकता है.” परवेज़ ने जवाब अपनी गर्दन हिलाकर अपनी सहमति जताई. श्रुति थोड़ा घबराई हुई थी इसलिए उसने रोहन का बायन हाथ पकड़ कर चल रही थी. परवेज़ भी यह सब देख रहा था की कैसे यह लड़की रोहन से चिपक कर चल रही है. उसे बड़ी हैरत हो रही थी की यह कैसे हो गया रोहन एक लड़की से प्यार करने लगा, क्योंकि वो लड़की के ज़ात से ही नफरत करता था. लेकिन उसने सोचा की यह वक्त इन बातों के सोचने का नहीं है. वो किसी और वक्त रोहन से इस बारे में पुच्छ लेगा की आख़िर उसका पत्थर जैसा दिल कैसे पिघल गया.

उन तीनों ने देखा की उस घर का दरवाजा भी अंदर से लॉक्ड था. काफी खटकटने के बावजूद भी उधर से कोई जवाब नहीं आया .

“अगर यह दरवाजा अंदर से बंद है तो जरूर अंदर कोई होगा, लेकिन कोई खोलता क्यों नहीं दरवाजा.” रोहन ने कहा.

“हो सकता है कोई सो रहा हो.” श्रुति ने कहा.

“अब ऐसी कैसी नींद की इतना दरवाजा पीटने पर भी ना खुले.” परवेज़ ने कहा.

“मुझे तो कुछ गड़बड़ लगती है. ” कहते हुए रोहन उस घर के चारों तरफ घूम कर देखने लगा की तभी उसे एक खिड़की खुली हुई मिल
“परवेज़, श्रुति !! अंदर जाने का रास्ता मिल गया. ” दोनों को खिड़की का रास्ता दिखाते हुए रोहन उस खिड़की से अंदर जाने की
कोशिश करने लगा. फिर उसका देखा देखी वो दोनों भी अंदर घुस गये. जब वह तीनों उस अंदर पहुंचे तो उन्होंने पाया
की वो एक बड़ा सा हॉल था जो तकरीबन खाली खाली सा था. फर्नीचर वगैरह कुछ भी नहीं था. उन्हें थोड़ा अजीब लग
रहा था.

फिर रोहन ने एक सीधी की तरफ इशारा करते हुए कहा

“उधर देखो! वहां ऊपर के किसी कमरे से रोशनी आ रही है. चलो चल कर देखते है.” फिर वह तीनों उस सीढ़ियों से
चढ़ कर उस कमरे के करीब पहुंचे जहां से रोशनी आ रही थी. उन्हें थोड़ा डर भी लग रहा था उस जगह को देख कर
फिर भी रोहन उस कमरे के दरवाजे का करीब पहुंच कर उसे खोलने की कोशिश करने लगा. लेकिन उसे ज्यादा कोशिश नहीं
करनी पढ़ी क्योंकि वो दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था. फिर वह तीनों कदम संभाल संभाल कर अंदर जाने
लगे. लेकिन जब उन्होंने उस कमरे का पूरे दृश्या देखा तो उन्हें एक ज़ोर का झटका लगा. क्योंकि वो एक….

(UPDATE-90)

लॅबोरेटरी थी. उन्हें
अच्ंभा होने लगा की इस वीरने जंगल में यह लॅबोरेटरी किसने खोल कर रखी हुई है.

“यह क्या है?? लॅबोरेटरी?? वो भी इस वीरने जंगल में?” कहते हुए श्रुति लॅबोरेटरी के चारों और देखने लगी.

“मेरी भी समझ में नहीं आ रहा की यह क्या माजरा है.” रोहन ने कहा.

“रोहन!! उधर देख वहां क्या है.” परवेज़ ने कहा.रोहन, परवेज़ की दिखाई हुई दिशा में देखने लगा तो जैसे उसे 100 वॉल्ट
का बिजली का झटका लगा हुआ हो.

“यह तो….यह तो …..बंदर है.” रोहन उस बंदर के पिंजरे के करीब जाते हुए कहा.

“ओह अब में समझी!! इस लॅबोरेटरी में इस बंदर पर जरूर कोई एक्सपेरिमेंट किया जा रहा होगा.” श्रुति ने कहा.

“और शायद वह सब खूनकर दरिंदे इसी एक्सपेरिमेंट का नतीजा है.” रोहन ने कहा.

“हां…ऐसा ही है…तभी में बोलू की यह किस प्रकार के जानवर है जो दिखने में तो बंदर जैसे है पर इतने खूनकर क्यों है.” परवेज़ ने कहा..

“क्या किया गया होगा इस बंदर के साथ जो यह इतना खूनकर हो गया.” श्रुति उस बंदर के पिंजरे के पास जाते हुए कहा जिसके अंदर वो बंदर एक दम से बेसुध पढ़ा हुआ था. श्रुति जिज्ञासा के मारे उस पिंजरे के करीब जाकर उस बंदर का निरक्षण करने लगी की तभी वो बंदर एक दम से एक अजीब सी आवाज़ निकालता हुआ उसी पिंजरे के अंदर से श्रुति को काट खाने लिए झपटा. श्रुति एक दम से चीख मार्टी हुई पीछे हटी और रोहन से जाकर चिपक गयी. रोहन भी उस बंदर के पास जाकर देखा की इसे अचानक क्या हुआ था. लेकिन वो बंदर थोड़ी देर तक तड़प्ता रहा फिर शांत हो गया.
“यह क्या माजरा है? कुछ समझ में नहीं आ रहा है. कौन इन बंदरों पर इतना बुरा एक्सपेरिमेंट कर रहा है जिसकी वजह से यह लोग की यह हालत हो गयी है.” परवेज़ ने कहा. इससे पहले की रोहन कुछ और कहता अचानक उन्हें लब के बाहर से किसी के कदमों की आवाज़ आने लगी. कदमों की आवाज़ सुनकर वह तीनों पहले थोड़ा चौंके फिर एक कोने में जाकर छिप गये. फिर लब में कोई प्रवेश हुआ. उसके चेहरे पर परेशानी के भाव साफ समझ में आ रहे थे. ऐसा लग रहा था मानो उस पर कितना बड़ा पहाड़ टूट पढ़ा हो.

रोहन उस व्यक्ति को देख रहा था की वो उस बंदर के पिंजरे के पास जाकर कुछ मुयएना कर रहा था. फिर कुछ देर बाद उसने पास में रखी हुई एक सरिंज निकाली और फिर उसमें कुछ भरने लगा. फिर उसके बाद वही सरिंज उसने उस बेसुध से पढ़े हुए बंदर को लगाया. उसके कुछ ही पलों बाद वो बंदर एक बार फिर से झपट्टा मारा और उस पिंजरे में इधर उधर तड़प्ता रहा और फिर खामोश हो गया. वो अपनी तसल्ली के लिए एक डंडे से उस बंदर को हिलाने दुलाने लगा. वो यह तय करना चाहता था की उसके अंदर जो दवा उसने डाली है उसका क्या असर हुआ है उस बंदर पर .. उस व्यक्ति के द्वारा जब उस बंदर को हिलाने दुलाने के बाद वो बंदर नहीं हिला तो वो समझ गया की इस बंदर पर वो जो प्रयोग करना चाहता था वो उसमें वो सफल हो गया है. फिर उसके बाद उस व्यक्ति के चेहरे पर एक इत्मीनान सा आ गया मानो उसे ऐसा लग रहा हो जैसे उसके सर पर रखा हुआ भोजा हाथ गया हो. रोहन, परवेज़ और श्रुति यह सब नज़ारा देख रहे थे और समझने की कोशिश कर रहे थे की यह व्यक्ति क्या कर रहा था उस बंदर के साथ और क्यों कर रहा था. लेकिन उनकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था इसलिए रोहन अपनी जगह से खड़ा हुआ और सीधा जाकर उस व्यक्ति को जो अब कुर्सी पर इत्मीनान से बैठा हुआ था एक जोरदार मारी की वो कुर्सी समेट दूर जा गिरा. उस व्यक्ति को कुछ समझ में नहीं आया की अचानक यह क्या हुआ. वो पलट कर अपने हमलवार को देखा जो एक बार फिर से उसकी तुकाई करने के लिए तैयार था.
“के..सीसी…कौन हो तुम? “ उसने कहा.
“पहले तू बता मादरचोड़….तू कौन है और इन बंदरों के साथ तू क्या कर रहा है?” कहते हुए रोहन फिर एक जोरदार लात उसकी पिच्छवाड़े पर मारा. वो व्यक्ति रोहन के इस वार से एक दम भॉकला गया.
“त..तुम….कहा से आ आए हो और तुम्हें क्या चाहिए?”
“आबे भोसड़ी के मुझसे सवाल बाद में पूछना पहले यह बता तू कौन है और इस वीरने जंगल में यह सब क्या कर रहा है?” रोहन उसकी बात का जवाब ना देते हुए अब उसके कॉलर से उसको पकड़ते हुए कहा. अब इतनी देर में श्रुति और परवेज़ भी उसके करीब आ चुके थे.
“बब्ब…बताता हूँ…..मेरा नाम……विक्रम है. में एक साइंटिस्ट हूँ और यहां पर में एक केमिकल का टॉक्सिकॉलजी टेस्ट कर रहा था. जिसके लिए मैंने इन बंदरों को छूना था अपने एक्सपेरिमेंट के लिए…..”
“क्या कर रहा था में समझा नहीं?” परवेज़, विक्रम की बात काटते हुए कहा.
“परवेज़ भाई इसका मतलब है की यह जिस केमिकल का टेस्ट कर रहा उसका क्या असर रहता है इसके लिए इसने इन….

UPDATE-91)

बंदरों को छूना था अपने एक्सपेरिमेंट के लिए.” श्रुति, परवेज़ को समझते हुए कहा.
“वो तो ठीक है. लेकिन तेरे इस एक्सपेरिमेंट से इन बंदरों पर क्या असर पढ़ा है. यह इतने खूनकर क्यों हो गये?” रोहन, विक्रम की और देखते हुए कहा.
“दरसा यह मेरे दो सहायक थे उनकी गलती से हुआ था.

उन्होंने शराब के नशे में एक बंदर पर उस केमिकल का ओवेरडोज़े टेस्ट कर लिया था. जिसकी वजह से उस बंदर पर केमिकल रिएक्शन हुआ और वो खूनकर हो गया.” विक्रम ने कहा.
“तुम लोगों ने कितने बंदरों पर यह एक्सपेरिमेंट किया था?” श्रुति ने विक्रम की तरफ देखते हुए कहा.
“सिर्फ़ एक बंदर था उस वक्त.” विक्रम ने जवाब दिया.
“सिर्फ़ एक! लेकिन बाहर तो कई ऐसे बंदर है जिसपर यह एक्सपेरिमेंट किया हुआ लग रहा है. मेरा मतलब है अगर तूने सिर्फ़ एक बंदर पर यह एक्सपेरिमेंट किया था तो यह लोग की तादाद इतनी कैसे हो गयी?” रोहन ने कहा.
“वाइरस! वाइरस की वजह से. मेरे कहने का मतलब है जो केमिकल रिएक्शन उस बंदर पर हुआ था उसने वही चीज़ अपने साथी बंदर को दे दी और उसके साथी बंदर ने दूसरों को. और इसी तरह एक बंदर दूसरे बंदर को अपनी तरह खूनकर बनाते गये.”
“लेकिन मेरी समझ में यह नहीं आया की यह बीमारी सिर्फ़ बंदरों में क्यों ट्रांसफर हो रही है……इंसानो में या कोई दूसरे जानवर में क्यों नहीं हुई?” इस बार परवेज़ ने कहा.
“वो इसलिए की…उस केमिकल रिएक्शन की वजह से वह सारे बंदर इतने खूनकर हो जाते है और फिर उन्हें हर वक्त खून और माँस की तलाश रहती है. वह अपनी बिरादरी को तो कुछ नहीं करते है लेकिन जैसे ही उन्हें उनकी बिरादरी से कोई बाहर वाला दिखता है तो वो झपट पढ़ते है उसपर और तब तक उस पर झपते रहते है जब तक उसके जिस्म से माँस का एक एक टुकड़ा ना कहा ले. तो ऐसी सूरत में जब कोई बंदरों के अलावा ज़िंदा ही नहीं बचेगा तो वो वाइरस कैसे दूसरों में पहुंचेगा.” इतना कहते हुए विक्रम खामोश हो गया. फिर रोहन, विक्रम का गला पकड़ते हुए कहता है.
“लेकिन तुझे इस जंगल में यह एक्सपेरिमेंट करने की क्या जरूरत पढ़ गयी?” जब थोड़ी देर तक विक्रम, रोहन की बात का कोई जवाब नहीं दिया तो रोहन ने एक तमंचा उसके गाल पे खींच के मारा. रोहन का जोरदार हाथ पढ़ते ही विक्रम बिलबिला उठा और कहने लगा.
“ववओो….में गैर कानोनी तरीके से यह सब एक्सपेरिमेंट करता हूँ और फिर उन्हें ब्लैक मार्केट में बेच देता हूँ. और इसके लिए मुझे ऐसी ही एकांत जगह चाहिए थी.”
“साले मादरचोड़!! तेरे इस एक्सपेरिमेंट की वजह हम सब की मां बहन हुई वो अलग और ना जाने कितनों की जान चली गयी बहनचोद!!!”
“हां बहनचोद बोल!! क्यों किया तूने ऐसा?” इस बार श्रुति ने कहा. रोहन और परवेज़ हैरत से श्रुति की तरफ देखने लगे.
“ययएएः….क्या बक रही हो?” रोहन, श्रुति की तरफ देखते हुए कहा.
“क्यों गाली सिर्फ़ तुम ही बक सकते हो में नहीं?” श्रुति भी जवाब देते हुए कहा.
“अरे लेकिन….तुम पर अच्छा नहीं लगता है.”
“तो तुम्हारे ऊपर भी अच्छा नहीं लगता है. जब तक तुम गाली देना बंद नहीं करोगे में भी तुम्हारी तरह यूँही गालियाँ देती रहूंगी.

तभी तुम्हें एहसास होगा जब तुम गालियाँ बकते हो तो मुझे कितना बुरा लगता है.”
“अच्छा अच्छा ठीक है. नहीं देता में गाल्यान, लेकिन आज के बाद तुम यह सब नहीं कहोगी.”
“वाह बेटा वाह!! इतनी जल्दी पलटी कहा गया. मेरे मना करने पर तो आज तक यह आदत छ्छूती नहीं और आज इनकी एक आवाज़ पर तूने मिंटो में गाली देना छोड दिया.” परवेज़ तंज़ करता हुआ बोला. परवेज़ की बात सुनकर श्रुति थोड़ा सा खिलखिला कर हँसने लगी.
“अच्छा ठीक है . यह वक्त इन बातों का नहीं है. पहले ज़रा हम इस नमूने से तो निपट ले.” रोहन ने कहा.. फिर रोहन विक्रम की तरफ देख कर कहा.
“अब यह बता की जो बीमारी तूने इन जानवरो में फेलाइ है इसका कोई तोड़ है?”
“हां..हां…मैंने अभी अभी एक आंटिडोट तैयार किया है. और अभी मैंने जो इंजेक्शन इस बंदर को दिया है यह वही आंटिडोट है. जिसके कारण यह अपनी पुरानी अवस्था में आ गया है.” विक्रम ने पिंजरे की तरफ इशारा करते हुए कहा जिसमें वो बंदर एक दम बेसुध पढ़ा हुआ गहरी गहरी साँसें ले रहा था.

“अरे वाह!! यह तो बहुत बढ़िया हो गया!! अब हम आसानी से इन दरिंदो को मर कर इस जंगल से निकल सकते है.” परवेज़ ने कहा.
“वो तो ठीक है. लेकिन हम इतने सारे दरिंदो को एक साथ इंजेक्शन तो नहीं दे सकते ना.” रोहन ने कहा.
“हां यार! बात तो तेरी ठीक है. मैंने तो इस बारे में सोचा ही नहीं. अब हम क्या करे?” परवेज़ ने कहा.
“हम एक काम कर सकते है. हम इसे यहां के फोरेस्ट ऑफिसर के हवाले कर देंगे. फिर जब उन्हें इन बंदारो के बारे में मालूम पड़ेगा तो वह कुछ ना कुछ इसका हाल जरूर निकालेंगे.” श्रुति ने कहा.
“यह नहीं हो सकता क्योंकि हम दोनों फोरेस्ट ऑफिसर्स के सामने नहीं जा सकते, इसमें खतरा है.” परवेज़, श्रुति की तरफ देखते हुए कहा.
“परवेज़ ठीक कह रहा….

(UPDATE-92)

है. हमें कुछ और सोचना होगा.” रोहन ने कहा
उन तीनों को बातें करता हुआ देख विक्रम कुछ सोचने लगा और फिर कहने लगा.
“अगर आप लोगों को इस जंगल से निकलना है तो में इसमें आप लोगों की मदद कर सकता हूँ.”
“वो कैसे?” रोहन ने कहा.
“स्टोर रूम में तीन या चार ट्रांक्विललाइज़र गन्स होगी. अगर हम उसके डार्ट्स के अंदर यह आंटिडोट भर देंगे तो शायद हम उनका मुकाबला आसानी से कर सकते है.” विक्रम जवाब में कहा.
“हम” से तुम्हारा क्या मतलब? क्या तुम भी हमारे साथ आना चाहते हो?” श्रुति ने विक्रम की तरफ देखते हुए कहा.
“हां.हां….बिलकुल…मुझे भी यहां से जल्द से जल्द निकलना है. क्योंकि अगर में यहां रहा तो में बेमौत मारा जाऊंगा.” विक्रम ने कहा.
“क्यों? इसके बारे में तुम्हें पहले ख्याल नहीं आया था जब तुम इन जानवरों पर अपना एक्सपेरिमेंट कर रहे थे?” श्रुति ने थोड़ा व्यंग करते हुए कहा.
“देखो में मानता हूँ की मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. में अपने किए पर शर्मिंदा भी हूँ.

” फिर विक्रम थोड़ा रुक कर फिर कहने लगा. ” लेकिन अगर आप लोग मुझे अपने साथ लेकर चलते है तो इसमें आप लोगों का भी भला होगा.”
“इसमें भला हमारा क्या भला है भाई?” परवेज़ ने कहा.
“देखो इन बंदारो में जो बीमारी है इसके बारे में सिर्फ़ मुझे पता है, तो यह संभव है की इसका तोड़ भी मेरे पास है. अगर में आप लोगों के साथ में रहूँगा तो उन सब से निपटने में आप लोगों की सहायता भी कर सकूँगा.” विक्रम ने कहा.
“हां परवेज़!! यह ठीक कह रहा है. इसका हमारा साथ में रहना जरूरी है.” रोहन ने कहा.
“लेकिन रोहन यह गलत है. यह आदमी ना जाने कितने मासूमों का हत्यारा है. इसने जो कांड किया है उसके लिए इसे सजा मिलनी चाहिए.” श्रुति ने कहा.
“श्रुति जी!!! वो सब ठीक है. अगर हम इसे सजा दिलवाने जाएँगे तो हमें भी लेने के देने पढ़ जाएँगे. हमें इस वक्त बस इस जंगल से निकालने के बारे में सोचना चाहिए.” परवेज़ ने कहा.
“ठीक है परवेज़ भाई अगर तुम्हारी बात मान भी लेते है तो भी प्रॉब्लम्स खत्म नहीं होगी क्योंकि इस आदमी के अनुसार जिन बंदारो में यह वाइरस होता है वो एक दूसरे में शामिल करते है. अगर उनका कोई तोड़ नहीं ढूंढ़ा गया तो यह दरिंदे अभी फिलहाल इस जंगल में है, अगर इनकी आबादी तरफ जाएगी तो यह शहरो में भी अपना आतंक मचा देंगे. और हो सकता है और भी कई सारी मासूमू की जाने चली जाए. इन दरिंदो को आतंक मचाने से अगर कोई रोक सकता है तो इस वक्त हम ही है. तो प्लीज़ मेरी मानो तो इसे यहां के अतॉरिटी के हवाले कर दो इसी में सब की भलाई रहेगी.” श्रुति ने कहा.
“अरे लेकिन अगर………” परवेज़ कुछ और कहता रोहन उसे चुप करता हुआ बोला.
“श्रुति ठीक कह रही परवेज़!! हम इतने सारे मासूमों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते. हमें इस कुत्ते को फोरेस्ट ऑफिसर्स के हवाले करना पड़ेगा.” फिर परवेज़, रोहन घसीटता हुआ एक कोने में ले गया और धीमे धीमे कहने लगा.
“आबे तेरा दिमाग खराब हो गया है? फोरेस्ट ऑफिसर्स के पास जाएगा तो जानता है ना क्या होगा?”
“हां जानता हूँ, वह हमें गिरफ्तार कर लेंगे. यही ना? तो ठीक है. एक काम करते तू श्रुति को अपने साथ इस जंगल से बाहर ले जा और में इस कमीने को फोरेस्ट ऑफिसर्स के हवाले कर देता हूँ. बाद में अगर वह लोग मुझे गिरफ्तार करेंगे तो कार्नो दो.”
“आबे तू पागल…..”
“बस मुझे जो कहना है मैंने कह दिया. अब जैसे में कह रहा हूँ तू वैसा कर” कहते हुए रोहन, श्रुति की तरफ बढ़ने लगा.
“श्रुति तुम एक काम करो तुम परवेज़ के साथ चली जाओ में इसे अकेला ही फोरेस्ट ऑफिसर्स के हवाले कर देता हूँ.” रोहन, श्रुति के तरफ देख कर कहा.
“अकेले…? में कुछ समझी नहीं?” श्रुति ने कहा.
“अब इसमें समझना क्या है. परवेज़ तुम्हें यहां से हिफ़ाज़त से बाहर निकाल ले जाएगा.” रोहन ने कहा.
“नहीं रोहन तुम जानते हो में ऐसा नहीं कर सकती.

में भी तुम्हारे साथ चलूंगी.”
“यह नहीं हो सकता श्रुति, अगर हम दोनों वहां गये तो हम दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. इसलिए कह रहा हूँ प्लीज़ इसके साथ में चली जाओ.”
“अगर परवेज़ भाई जाना चाहते है तो वह जा सकते है लेकिन में तुम्हारे साथ ही जाओंगी. और अगर तुम और ज़बरदस्ती करोगे तो में इसी वक्त बाहर चली जाओंगी, फिर चाहे वह दरिंदे मुझे मर डाले या कुछ भी कर डाले.” श्रुति ने कहा.
“श्रुति जी ठीक कह रही है रोहन…तू क्या समझता है मुझे बचाने के लिए तू अकेला जाकर गिरफ्तार हो जाएगा तो क्या मुझे अच्छा लगेगा. आबे दोस्त हूँ में तेरा……तो हर हाल में दोस्ती निभाओंगा अगर गिरफ्तार होना ही है तो हम दोनों गिरफ्तार होंगे. तू अकेला क़ुर्बानी क्यों देगा.” परवेज़ ने कहा. रोहन के पास कहने के लिए अब कुछ भी नहीं बच्चा था. उसे उन दोनों की बात माननी ही पढ़ी.
“ठीक है ठीक है…ज्यादा जज़्बाती मत बन.. चल मेरे साथ. लेकिन हम यहां से जाएँगे कैसे? हमें तो पता भी नहीं है की फोरेस्ट ऑफिसर्स वालो का…

​

(UPDATE-93)

हेडक्वॉर्टर्स कहा होगा?”
“मुझे पता है.” श्रुति का इतना कहना ही था की वह दोनों हैरत से श्रुति की तरफ देखने लगे जो इस वक्त अपने सामने रखे हुए टेबल पर कुछ पेपर्स को पढ़ रही थी..
“तुम्हें पता है? पर कैसे? हम दोनों को नहीं पता और तुम्हें कैसे पता चल गया.?” रोहन हैरत से कहा.
“इस नक्शे की वजह से” श्रुति उन पेपर्स में से कुछ उठाते हुए दिखाई जो एक नक्शा था.
“नक्शा? यह कैसा नक्शा है?” रोहन हैरत से श्रुति के हाथ में नक्शे को देखते हुए कहा.
“यह इस नेशनल पार्क का पूरा नक्शा है. कौनसा रास्ता किस तरफ जाएगा इसके बारे में पूरी इन्फार्मेशन दी हुई है इसमें.”
“रोहन यह तो बहुत अच्छा हुआ अब आसनई से यहां से निकल सकते है. वैसे हम इस वक्त किधर है श्रुति जी?” परवेज़ ने कहा. शरइत ने नक्शे में किसी एक तरफ उंगली रखकर बताया.
“चलो इस नमूने ने कुछ तो अच्छा काम किया है.” परवेज़ ने कहा.
“अब हमें और देर नहीं करना चाहिए और फौरन फोरेस्ट डिपार्टमेंट के हेडक्वॉर्टर जाना चाहिए. जितनी जल्दी हो सके हमें इस आफत को रोकना होगा.” रोहन, श्रुति से वो नक्शा अपने हाथ में लिया और बारे गौर से फोरेस्ट डिपार्टमेंट के हेडक्वॉर्टर के जाने का रास्ता समझने लगा.

इधर फोरेस्ट डिपार्टमेंट के हेडक्वॉर्टर में…
“विजय जी!! आप घबराए नहीं आपकी बेटी के बारे में जल्द ही हमें कुछ ना कुछ खबर जरूर मिल जाएगी.मैंने अपने कुछ ऑफिसर्स को श्रुति और उसके दोस्तों की तलाश के लिए भेजा है” उमेश ने कहा.
“ज़रा जल्दी करिए उमेश जी!! आप तो जानते है जंगल में कितने खूनकर जानवर घूम रहे है. कही मेरी श्रुति को कुछ हो ना जाए.” विजय से पहले सौंदर्या ने रोते हुए उमेश से कहा.

“देखिए मैडम हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे है आप लोग……” अभी वो कुछ और कहते की इतने में उसके केबिन में कोई जूनियर ऑफिसर आकर कहने लगा.
“सर! अभी एक लड़की मिली है. जिसकी हालत इस वक्त बहुत नाज़ुक है और वो बहुत बुरी तरह से जख्मी भी है. हमें जो गुमशुदा बच्चों की रिपोर्ट मिली है यह उन्हीं में से एक लग रही है क्योंकि यह अपना नाम छाया बता रही है.” इतना सुनना था की एक तरफ खड़े छाया के मां बाप चौंक गये और झट से उस ऑफिसर की तरफ बढ़ने लगे.
“कहा है हमारी बच्ची!! हम….हम उसके पेरेंट्स है….प्लीज़ जल्दी से हमें उससे मिलवओ..” इतनी देर उमेश भी उन दोनों के पास आ गया और उस ऑफिसर से कहने लगा.
“इस वक्त वो लड़की किधर है?” उमेश ने कहा
“सर! यही सर उसका ट्रीटमेंट चल रहा है.” उस ऑफिसर ने जवाब दिया.
“ओके चलो देखते है उसे!! आप लोग भी आइये मेरे साथ.” उमेश उन सारे पेरेंट्स से कहता हुआ उधर चला गया जहां छाया का उपचार चल रहा था.
छाया जो इस वक्त एक दम बेहाल हुई थी. जगह जगह से उसके कपड़े पाते हुए थे और उन पाते हुई जगह से उसके गहरे गहरे जख्म साफ नज़र आ रहे थे. दूर से देखने में मालूम पढ़ रहा था की उसपर कितना अत्याचार हुआ होगा.डॉक्टर्स और नर्स उसका जल्दी से उपचार करने लगे. अभी उसकी सारी ड्रेसिंग अभी पूरी हुई थी की उस कमरे में यकायक ढेर सारे लोग प्रवेश कर गये. पहले उमेश आया फिर उसके पीछे पीछे छाया के मां बाप. और आते ही वह छाया से गले लग रख रोते रहे. फिर काफी देर वो भावक शान खत्म हुआ तो उमेश ने छाया से सवाल पूछने लगा.
“छाया? अब तुम कैसा फील कर रही हो?”
“पहले से बेहतर.” छाया ने जवाब दिया
“अच्छा छाया तुम्हारे दोस्त कहा है इस वक्त?” उमेश ने कहा. उमेश का इतना कहना था की छाया फिर से फूट फूट कर रोने लगी.
“क्या हुआ छाया बेटी तुम कुछ बोलती क्यों नहीं? कहा है मेरा बेटा निखिल?” संजीव सान्याल जो निखिल के पिता थे काफी देर से चुप बैठे हुआ था. छाया को रोता देख कर उससे पूछने लगे.
“अंकल…..निखिल इस नो मोर .” रोते रोते छाया ने बताया. इतना सुनना था की संजीव ज़ोर ज़ोर से रोने लगा. और इतना सुनना था की बाकी के और पेरेंट्स भी घबरा गये और सब एक साथ अपने बच्चों के बारे में छाया से सवाल पूछने लगे. यह देखकर छाया और घबरा गयी. उमेश ने उन्हें बड़ी मुश्किल से रोका और फिर से छाया से पूछने लगा.
“छाया? क्या तुम हमें पूरी बात बनाएगी की तुम यहां कैसे पहुँची? क्योंकि तुम लोग का प्लान तो नैनीताल जाने का था तो यहां कैसे तुम सब लोग पहुंच गये?”
“वो दो गुंडों की वजह से.” छाया ने रोते हुए कहा.
“गुंडे? कौन गुंडे और इस वक्त कहा है?” उमेश थोड़ा हैरत से पूछा.
“मुझे नहीं पता वह दोनों इस वक्त कहा है. वह बस हमें अपने साथ में बंदी बनाकर यहां लाए थे और फिर हमें अकेला छोड कर चले गये थे.

”
“एक काम करो छाया तुम हमें शुरू से सारी बताओ की तुम्हारे साथ में क्या क्या हुआ था और यह गुंडे कौन थे जो तुम्हें और तुम्हारे दोस्त से मिले थे.” उमेश ने कहा. फिर उसके बाद छाया ने सारी बात बता दी ढाबे से लेकर और नेशनल पार्क….

(UPDATE-94)

में रोहन और परवेज़ ने उन्हें बंदी बनाकर लाए थे सब बता दिया.
“लेकिन वह तुम लोगों को ज़बरदस्ती अपने साथ क्यों इस नेशनल पार्क में लाए थे जब वह यूँही तुम लोगों को छोड़ दिए.”
“ई डोंट नो……..शायद उन्हें नेशनल पार्क एंट्री करने में किसी चीज़ का डर था….मेरे ख्याल से वह हमें इसलिए अपने साथ लाए थे ताकि अगर हम सब उनके साथ रहेंगे तो उन पर किसी का शक़ुए नहीं जाएगा और वह आसानी से नेशनल पार्क में एंटरयकर लेंगे.”
“सर!! मेरे ख्याल से यह उन्हीं पोचर्स में से कोई होंगे जिनकी हमें तलाश थी. शायद उन्हें कही से मालूम पढ़ गया होगा की हमें उनकी तलाश है तो इन्हें अपनी ढाल बनाकर यहां पर लाए होंगे.” उस जूनियर ओफ्फ्सेर्स ने उमेश से कहा.
“हम….यही हो सकता है. वरना वह इन्हें नेशनल पार्क में एंट्री करने के बाद यूँही नहीं छोड देते.” उमेश थोड़ा घंभी स्वर में कहते हुए कहा.
“ओके छाया फिर उसके बाद क्या हुआ. जब वह दोनों तुम सबको छोड कर चले गये थे?” उमेश ने फिर से छाया से सवालों का सिलसिला चालू कर दिया. उसके बाद छाया ने विस्तार से उन सबको वही बताया जो उसके और उसके दोस्तों के साथ उन बंदारो का हमला हुआ था.
“खैर में कैसे कैसे कर के अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकली. मुझे नहीं लगता शायद मेरे अलावा कोई और बच्चा होगा. वह इतने खूनकर थे की वह शायद ही किसी को बख़्शे होंगे.” छाया ने कहा. छाया का इतना कहना था की बाकी के सारे पेरेंट्स हें हें करने की आवाजें आने लगी वह अपने बच्चों की मौत की खबर जो सुन लिए थे. लेकिन फिर भी विजय को भरोसा नहीं था की उसकी श्रुति इतनी आसानी से उसे छोड कर जा सकती है. वो फिर से छाया से सवाल पूछने लगा.
“छाया बेटा? क्या तुमने श्रुति को भी उन दरिंदो का शिकार बनते ड्यू देखा था?”
“नहीं अंकल मैंने तो नहीं देखा था……..” फिर छाया कुछ सोचते हुए बोली .” हां मुझे याद आया की उन जानवरो में से एक ने श्रुति के पीछे लपका जरूर था लेकिन वो उसे पकड़ नहीं पाया था क्योंकि उससे पहले ही श्रुति उस खाई में गिर गयी थी.” यह सुनकर सौंदर्या एक घबरा गयी.
“क्या!!!! मेरी बेटी खाई में गिर गयी थी. ओह नूऊऊओ…….विजय अब क्या होगा?”
“एक मिनट सौंदर्या रुको….” सौंदर्या को चुप कराकर विजय फिर से छाया से पूछने लगा.

“अच्छा छाया यह बताओ जिस खाई की तुम बात कर रही हो क्या वो बहुत गहरी थी? मेरा मतलब है की अगर वहां से कोई गिरता है तो क्या जरूरी है की वो अपनी जान खो बैठे?”
“ई थिंक……नो………ऐसा कोई जरूरी तो नहीं है क्योंकि वो खाई इतनी डीप भी नहीं मगर इतनी शॅलो (कम गहरी) भी नहीं थी.मेरे ख्याल से हो सकता है श्रुति वहां से गिरकर ज़िंदा भी हो. लेकिन उन जानवारो का कोई भरोसा नहीं अगर वो इतने दीनों तक ज़िंदा भी होगी तो वह जरूर उसे कोई ना कोई नुकसान जरूर पहुंचाए हुए होंगे.”
“हो सकता है जिस तरह तुम अपनी जान बच्चा कर आई हो उसी तरह मेरी श्रुति भी आ जाए.” सौंदर्या ने रोते हुए कहा.
“ हो सकता है और नहीं भी. अगर उसकी किस्मत अच्छी रही तो वो शायद ज़िंदा भी बच जाए.” छाया थोड़ा मुंह बनाते हुए बोली क्योंकि अभी तक उसके दिल में श्रुति के लिए नफरत जो भारी थी.
“जरूर आएगी मेरी बेटी.” कहते हुए विजय, उमेश की तरफ देख कर कहा.
“उमेश जी!! ई होप के मेरी बेटी अभी भी ज़िंदा हो सकती है. हमें एक बार फिर से उसे जगह पर जाकर देखना चाहिए. शायद वो हमें मिल जाए. पता नहीं मेरी बेटी इस वक्त किस हाल में होगी.”
“रिलॅक्स मिस्टर. विजय! हम एक बार फिर जाएँगे श्रुति को ढूँढे. बस मुश्किल यह है की इस वक्त रात के अंधेरे में किसी की तलाश करना मूसखिल है. अब हमें सुबह ही सर्च ऑपरेशन करना पड़ेगा.

उधर सवेरा होते ही रोहन, श्रुति और परवेज़ , विक्रम की गाड़ी लेकर हेडक्वॉर्टर के लिए निकल पढ़े थे. उन्होंने ने विक्रम को भी अपने साथ बंदी बनकर लिया हुआ था और उन दरिंदो से सामना करने के लिए वो डार्ट गन्स भी ली हुई थी अपने साथ. अभी वह आधा ही रास्ता पार किए थे की अचानक जिस गाड़ी पर वह बैठे हुए थे उस पर गोलियाँ चलने लगी और एक गोली जाकर गाड़ी के तैयार पर जा लगी. रोहन जो गाड़ी चला रहा था अचानक हुए इस हमले से अपना नियंत्रण खो बैठा और गाड़ी सीधा जाकर एक पेड़ से जा टकराई. अचानक हुए इस हमले से कोई संभाल नहीं पाया था और अंदर बैठे सभी लोगों को चोटें भी आई थी. श्रुति आगे की सीट पर बैठे होने के कारण बेहोश हो गयी थी और रोहन भी काफी हद तक घायल हो गया था. पीछे बैठे हुए परवेज़ और विक्रम को हल्की सी चोटें आई थी. रोहन को समझ ही नहीं आ रहा था यह अचानक कौन इन पर गोलियाँ बरसाने लगा था. वो अपनी हालत को सुधरते हुए यह सब सोच ही रहा था की तभी उस गाड़ी का….

(UPDATE-95)

दरवाजा खोलते हुए कई सारे फोरेस्ट रेंजर्स अपनी गुण से उसको निशाने बनाने लगे.
“बाहर निकलो!! जल्दी!!” वो फोरेस्ट रेंजर चिल्लाता हुआ रोहन से कहा. रोहन उस फोरेस्ट रेंजर की बातों को नजरअंदाज करते हुए अपनी भाई और देखा जहां श्रुति घायल अवस्था में बेहोश पढ़ी हुई थी.
“श्रुति? शुर्ती? तुम ठीक हो??” रोहन, श्रुति को हिलाते हुए कहा.

रोहन को अपनी बातों पर अमल ना करते हुए उस फोरेस्ट रेंजर ने उसकी तरफ का दरवाजा खोला और उसे जबरन बाहर निकालने लगा. फिर देखते ही देखते उन्होंने सभी को अपने हिरासत में ले लिया. श्रुति को उन्होंने अपनी एक गाड़ी में बारे प्यार से लिटा दिया था. अचानक हुए इस हमले को रोहन समझ ही रहा था की तभी उसने देखा की एक औरत और एक आदमी जिनकी उमर 45 से 50 के आस पास थी और उन दोनों के साथ में एक लड़की भी उसे नज़र आई. लेकिन उस लड़की को देखकर उसे 1000 वॉल्ट का झटका सा लगा क्योंकि यह लड़की कोई और नहीं बल्कि उन्हीं लड़कों और लड़कियों में से एक थी जिन्हें वो और परवेज़ बंदी बनाकर लाए थे. उसे बड़ी हैरत हो रही की यह लड़की उन दरिंदो के हमले में कैसे बच गयी. फिर तभी उसे एहसास हुआ की अचानक उन लोगों पर यह हमला क्यों हुआ था. क्योंकि वो समझ गया था की यह लड़की फोरेस्ट डिपार्टमेंट वालो को उसके और परवेज़ के बारे में सब बता दी होगी और तभी यह लोग उनको ढूँढते हुए यहां तक आ गये.
“यही है सर!! यही दोनों है!! जिन्होंने मुझे और मेरे दोस्तों को किडनॅप करके यहां लाए थे. और उन लोगों को की मौत के जिम्मेदार भी यही दोनों है.” छाया, उमेश को रोहन और परवेज़ के बारे में बताने लगी
“लेकिन मेरी श्रुति किधर है?” सौंदर्या जो एक दम घबराई हुई थी उसने कहा. तभी उन फोरेस्ट रेंजर में एक ने कहा.
“हमें इनके पास से एक लड़की बेहोशी की अवस्था में मिली है, आइये और उसे शिनाकस्ट कीजिए.” कहता हुआ वो ऑफिसर विजय और सौंदर्या को उस गाड़ी की तरफ ले गया जिसमें श्रुति बेहोशी की अवस्था में थी. और फिर जैसे ही उन दोनों ने श्रुति को घायल और बेहोशी की अवस्था में देखा तो बिलक बिलक कर रोने लगे.
“हां यही तो है हमारी श्रुति. ओह माइ गॉड!!! इसकी हालत तो देखो विजय!. क्या किया है इस जालिम ने मेरी बेटी के साथ में.” श्रुति को अपने से गले लगते हुए सौंदर्या ने कहा.
“घबराइए नहीं इसे ज्यादा चोट नहीं आई है. इसे जल्द ही होश आ जाएगा.” उस ऑफिसर ने कहा. सौंदर्या को श्रुति के पास चोद कर विजय एक दम गुस्से की हालत में सीधा जाकर रोहन के गाल पर लगातार थप्पड़ मारने लगा.
“कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी फूल जैसी बेटी के साथ यह सब करने की. में तेरा वो हाल करूँगा की तेरी सात पुश्ते भी तुझे पहचान नहीं पाएगी हरंखोर!!!!!!” फिर बड़ी मुश्किल से उसे च्छुदाया गया. जब विजय को रोहन से अलग किया गया तो रोहन, उमेश की तरफ देखते हुए कहा.
“सर में मानता हूँ मैंने गलत काम किया है. लेकिन यह वक्त इन सब बातों का नहीं है. हमें सबसे पहले उन जानवरो को रोकना पड़ेगा जो इस जंगल में आतंक मचा के रखे हुए है. और उन्हें रोकने के लिए मैंने मेरे पास इसका तोड़ भी है.” रोहन की बात सुनकर उमेश एक दम चौंक सा गया.
“क्या कहा तुमने?? तुम्हारे पास इसका तोड़ है.

कैसे??” फिर रोहन ने उसे सारी बात बता दी. सारी बात जाने के बाद उमेश का तो सर ही घूम गया.
“कुत्ते कमीने तेरी नालयकी की वजह से हमें कितनी बड़ी मुसीबत उतनी पढ़ रही इसका तुझे अंदाज़ा है? उमेश, विक्रम को लताड़ता हुए कहा. फिर उमेश ने अपने जूनियर ऑफिसर को बुलाया और कहने लगा.
“लगता है हमें मिलिटरी की मदद लेनी पड़ेगी इस पूरे ऑपरेशन के लिए. तुम एक काम करो जल्द से कुछ साइंटिस्ट्स की टीम तैयार करो, और इस ससेंटिस्ट ने जो आंटिडोट तैयार किया है उसी फ़ॉर्मूले के बसे पर और आंटिडोट तैयार करो. हमें जल्द से जल्द उन जानवरो को रोकना पड़ेगा वरना प्रलय आ जाएगी.”
फिर कुछ देर बाद्ष्रुति को होश आता है तो वो देखती है की उसके मम्मी और पापा उसके पास खड़े हुए थे. वो उठने की कोशिश करने लगी तो उसके सर में थोड़ा दर्द होने लगा. उसने अपने हाथ को अपने सर पर रखा तो मालूम पड़ा की उसके सर पर पट्टी बँधी हुई है. फिर उसे अचानक याद आया की उसके सर में चोट कैसे लगी थी. फिर वो और शॉक हो गयी की उसके मम्मी और पापा यहां पर कैसे आ गये और रोहन और परवेज़ किधर है.
“मामा, पापा आप दोनों यहां पर कैसे?” लेकिन सौंदर्या उसकी बात का जवाब ना देते हुए सीधे उसके हाल चाल पूछने लगी.
“मेरी बच्ची तुम्हें होश आ गया! अब तुम कैसा फील कर रही हो?”
“ई’में ओके मामा. बस सर में थोड़ा दर्द है. लेकिन आप यह बताए की आप दोनों यहां कैसे पहुंच गये? और रोहन कहा है?”
“रोहन? कौन रोहन?” सौंदर्या, विजय की तरफ सवालिया निगाहों से….

UPDATE-96)

देखने लगी. विजय ने भी खड़े उचकाकर इस बात का इशारा दिया की उसे भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.
“मामा, पापा, रोहन!! अगर में आज आप लोगों के सामने ज़िंदा हूँ तो सिर्फ़ उसी की वजह से.”
“यह तुम क्या कह रही हो श्रुति? जिसने तुम्हारा किडनॅप किया तुम उसी के लिए कह रही हो की उसने तुम्हारी जान बाचाई. यह तो अच्छा हुआ हम सब समय रहते हुए वहां पहुंच गये. वरना वो कमीना तुम्हारा साथ और क्या करता.” विजय ने कहा.
“आपको किसने कहा की उसने मेरा किडनॅप किया था? और वैसे वो है कहा इस वक्त?” श्रुति ने कहा. सौंदर्या और विजय एक दूसरे को अजीब सी नज़रो से देखने लगे. उनको कुछ ना बोलता देख श्रुति थोड़ा चिंचित होते हुए फिर से कहने लगी.
“मामा! पापा! आप लोग कुछ बोलते क्यों नहीं कहा है रोहन…..और उसका दोस्त परवेज़ वो कहा है?” अपनी बेटी को उनके बारे में इतना चिंचित होते हुए देख कर वह भी थोड़े चिंतित हो गये. यह देखकर सौंदर्या , श्रुति से कहने लगी.
“श्रुति? तुम उन दोनों को लेकर इतना क्यों टेन्शन में हो?”
“मामा प्लीज़………..पहले मुझे बताओ रोहन इस वक्त कहा है?” श्रुति एक दम बेक़ारारी से कहने लगी
“वह दोनों इस वक्त पुलिस की गिरफ्त में है.” विजय ने कहा.

“क्या कहा!! पुलिस की गिरफ्त में? पर क्यों??” श्रुति एक दम से व्याकुल होते हुए कहा. अब उन दोनों को श्रुति को संभालना मूसखिल हो रहा था क्योंकि वो अब अपने आपे से बाहर हो रही थी. फिर काफी देर बाद उन दोनों ने बड़ी मुश्किल से उसे काबू में किया और उसके बाद विजय और सौंदर्या ने बारे आराम से उसे बताया की कैसे उन दोनों को पता चला की श्रुति इस जंगल में है और कैसे छाया के जरिए उन्हें यह पता चला की रोहन और परवेज़ उसे और उसके दोस्तों को किडनॅप किया था. जब श्रुति को यह पता चला की छाया ज़िंदा है तो पहले उसे बड़ी हैरत हुई यह की वो कैसे उन दरिंदो से बच गयी. फिर उसे वो बातें याद आने लगी जो रोहन ने उसे बताया था जो छाया और उसके दोस्त उसके साथ मिलकर करने वाले थे. फिर वो यह सोचने लगी के एक तो रोहन और परवेज़ पर पहले से ही फोरेस्ट ऑफिसर्स की नज़र थी और उसके बाद छाया की वजह से उन्हें यह भी पता चल गया की वह दोनों अब किडनॅपिंग में भी शामिल थे. इसका मतलब अब उन दोनों पर अब डबल चरगेशीट लगेगा. एक तो उनके पोचेर्स होने का और दूसरे किडनॅपिंग का. अब वो बजाए जज़्बाती होने वो यही सोच रही थी के उनको बचाया कैसे जाए. सबसे पहले उसने यह काम किया की छाया और उसके दोस्तों का जो प्लान था उसके खिलाफ उस बारे में उसने किसी से उसका जिक्र करना अभी ठीक नहीं समझा. वो चाहती थी की यह बात डायरेक्ट छाया से की जाए. और फिर यही सब सोच कर वो एक प्लान करने लगी.

फिर उसके 4 दीं बाद,
रोहन और परवेज़ जेल की काल खोत्री में कैद थे. जहाँ पर रोहन अपने और श्रुति के रिश्ते के बारे में सोच रहा था. वो सोच रहा था की वो और परवेज़ क्या करने आए थे इस जंगल में और क्या हो गया उनके साथ में. वह दोनों तो यही सोचकर आए थे की की आखिरी बार एक बड़ा हाथ मारेंगे और फिर उसके बाद इस धंधे को चोद वह एक इज्जत की जिंदगी जियेंगे. लेकिन उनके साथ क्या हो गया. पहले वह दोनों फोरेस्ट ऑफिसर्स से च्चिपने के लिए श्रुति और उसके दोस्तों की किडनॅपिंग की , फिर उसके बाद उन भयानक जानवरो से उनका सामना हुआ, फिर उसके बाद उसे प्यार हो गया वो भी उस लड़की के साथ जिसे उसने ही किडनॅप किया था और अब उसकी यह गिरफ्तारी. फिर वो सोचने लगा की यह तो होना ही था. देर सवेर उसे इन लोगों के हाथ तो लगना ही था. लेकिन अब समस्या यह थी अब उसे श्रुति से प्यार हो गया था और वो उसके बिना एक पल भी जिंदगी जीने का तसवउर भी नहीं कर सकता था. फिर उसने यह सोचा की चलो एक तरह से यह अच्छा ही हो गया क्योंकि अगर वो श्रुति के साथ भी रहा तो क्या जिंदगी देगा उसे. क्योंकि वो जानता था की श्रुति ऊंचे महलो वाली लड़की है, वो उसे गरीबी के अलावा कुछ नहीं दे सकता था. वो और भी यह बातें सोचता रहा की तभी अचानक उसकी काल खोत्री का दरवाजा खुला और एक हवलदार अंदर आया और उन्हें बताने लगा.
“बाहर चलो.

तुम दोनों की ज़मानत हो गयी है.” उन दोनों के कानों को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था की वह दोनों अभी अभी क्या सुने है. उन्हें बड़ा आश्चर्य हो रहा था की भला उनकी ज़मानत कौन करा सकता है. फिर वह दोनों जब बाहर निकले तो उन्हें एक महिला दिखी जिसने उन दोनों की ज़मानत करवाई थी.
“तुम दोनों अब जा सकते हो. लेकिन याद रखना आज के बाद यह काम किए तो काफी महँगा पड़ेगा.” उस थाने के इंचार्ज….

(UPDATE-97)

ने कहा.फिर वो महिला उन दोनों के पास आई और उन दोनों से कहा.
“मेरे साथ ज़रा बाहर आओ.” फिर उन दोनों ने वैसा ही किया जैसा उस महिला ने कहा था. बाहर आकर वो महिला फिर उनसे कहने लगी.
“जानते हो में कौन हूँ?” रोहन और परवेज़ पहले एक दूसरे को देखे फिर उस महिला की तरफ देखते हुए कहा.
“नहीं हम नहीं जानते. कौन है आप और हमारी ज़मानत क्यों कराईए आपने.” रोहन ने कहा.
“अपनी बेटी से मजबूर होकर मैंने तुम दोनों की ज़मानत कराई है.”
“में कुछ समझा नहीं.” रोहन ना समझने वाले अंदाज़ में कहा.
“मतलब यह की में श्रुति की मां हूँ. और उसी की वजह से मुझे मजबूर होना पड़ा.” रोहन और परवेज़ को हैरत होने लगी की आख़िर श्रुति की मां उन दोनों की ज़मानत क्यों कराएगी.
“बड़ी बदकिस्मती की बात है मेरी बेटी तुम जैसे लफंगे से प्यार करने लगी है. पता नहीं तुमने उसपर क्या जादू कर दिया है. एनीवे उसी की वजह से तुम दोनों के ऊपर से किडनॅपिंग के चार्जस हटाए गये है. इसलिए तुम दोनों की ज़मानत आराम से हो पाई है. मेरा बस इतना कहना है की अब तुम्हें यह जो
नयी जिंदगी मिली है उसे ढंग से जियो और जितनी जल्दी हो सके श्रुति के दिल से और इस शहर से हमेशा हमेशा के लिए चले जाओ.”
“में एक बार श्रुति से बात करना चाहता हूँ.” रोहन ने कहा.
“कोई जरूरत नहीं है इसकी. और वैसे भी क्या बात करोगे. तुम जाओगे और उससे मीठी मीठी बातें करोगे और वो फिर से पिघल जाएगी. वो तो अभी नादान है, नहीं समझती है इन बातों को की तुम्हारे साथ रहकर वो क्या करेगी. लेकिन तुम तो समझते हो ना. अगर तुम उससे सच्चा प्यार करते हो तो क्या तुम यह बर्दाश्त कर सकोगे की वो महलो से निकल कर तुम्हारे साथ गरीबी की जिंदगी गुजरे. बेहतर यही होगा की तुम अभी और इसी वक्त यहां से निकल जाओ.” कहने के साथ ही सौंदर्या अपनी गाड़ी में बैठ गयी.
“अब क्या करेगा रोहन?” सौंदर्या के जाने के बाद परवेज़ ने रोहन से कहा.
“वो ठीक ही कह रही है परवेज़. मेरे साथ रहकर श्रुति का कोई भाविशया नहीं है. वो जहां है वही उसे रहने देना चाहिए. तू एक काम देहरादून चलने की तैयारी कर वही जाकर अब हम कोई दूसरा काम देखेंगे.” रोहन ने कहा.

श्रुति गुमसुम सी अपने कमरे में बैठे हुई थी. वो इतनी बड़ी मुसीबत से और इतने भयानक जंगल से निकल कर आई थी यह सोचकर उसे खुश होना चाहिए था. लेकिन हो रहा था उसके उलट.

वो सोच रही थी भले ही भी उस भयानक जंगल और उन दरिंदो के बीच घिरी हुई थी, लेकिन उसे फिलहाल वही अच्छा लग रहा था क्योंकि उस वक्त उसके साथ उसका महबूब रोहन था. वो सोच रही थी की भले ही वो कितनी भी बड़ी परेशानी में थी लेकिन वो रोहन से कितनी प्यार बातें किया करती थी. यही वो वक्त था जहाँ अपने सपने वाले शहज़ादे से मिली थी. उसे तो रोहन अब अपने सपने वाले शहज़ादे से भी प्यारा लग रहा था. उसका बहुत मन कर रहा था अपने रोहन से दोबारा मिलने का, लेकिन वो मजबूर थी. क्योंकि उसकी मां सौंदर्या को रोहन पसंद नहीं था और उसने धमकी दी थी की अगर उसने रोहन से कोई रिश्ता नहीं थोड़ा तो वो रोहन और परवेज़ को और बुरी तरह फंस्वाकार उन्हें लंबे समय के लिए जेल की हवा खिलवाएगी. श्रुति ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहती थी की उसका महबूब जेल की सलाखों के पीछे अपनी उमर गुज़ारे. वो यही सोच रही थी की रोहन से दूर होने में ही उसकी भलाई है क्योंकि कम से कम वो भले ही तक़लीफ़ में रहे लेकिन रोहन आज़ाद होकर अपनी जिंदगी दोबारा से शुरू कर सकता है और इसके अलावा उसके ऊपर उसके परिवार की ज़िम्मेदारिया भी है. यही सब सोचकर उसने रोहन से दूर रहना ही बेहतर समझा. फिर काफी देर श्रुति यही सब बातें सोचती रही की तभी उसकी सोच का सिलसिला तब टूटा जब उसके कमरे में प्रवेश होती अपनी मां को उसने देखा. वो झट से अपनी जगह से उठी और अपनी मां के पास जाते हुए कहा.
“क्या हुआ मामा? उन्हें ज़मानत मिली?”
“हां मिली. और मैंने रोहन से कह दिया है की वो तुम्हारे जिंदगी से और इस शहर से दूर चला जाए. और आज के बाद तुम भी उससे कोई कॉंटॅक्ट करने की कोशिश नहीं करोगी. क्योंकि तुमने मुझसे वादा किया था की अगर में उन्हें ज़मानत दिलवती हूँ तो तुम उसे भूल जाओगी. वरना तुम भी अच्हसे से जानती हो की वह दोनों कितनी बड़ी मुश्किल में पढ़ने वाले थे.” सौंदर्या ने कहा.
“ओके……मामा….जैसा आप कहें……वैसा ही होगा.” श्रुति ने रोते हुए कहा. श्रुति को रोता देख सौंदर्या को थोड़ा एहसास हुआ की उसे इतने खातोर् लहज़े में बात नहीं करनी चाहिए थी इसलिए वो थोड़ा नर्म पढ़ते हुए बोली.
“देखो बेटी बुरा मत मना, में तुम्हारे भले की लिए बोल रही हूँ. रोहन के साथ जिंदगी गुजार कर तुम्हारा कोई फ्यूचर नहीं था. खुद रोहन भी इस बात को समझ गया है….

​

(UPDATE-98)

क्योंकि मैंने उसे और उसके दोस्त को रेलवे स्टेशन की तरफ जाते हुए देखा था. क्योंकि वो जानता है की तुम अभी नादान हो. तुम्हारे आगे पूरी जिंदगी पढ़ी है. तुम कहा उसके साथ रहकर गरीबी की जिंदगी गुज़रगी.” लेकिन जवाब में श्रुति ने कुछ नहीं कहा बस जाकर अपने बेड के ताक़िए से अपना मुंह छुपा कर ज़ोर ज़ोर से रोने लगी. यह देख कर सौंदर्या उसके करीब जाकर उसे दिलासा देने लगी.

उसे श्रुति का रोना नहीं देखा जा रहा था आख़िर वो मां जो ठहरी. लेकिन उसे यह नहीं मालूम था की श्रुति और उसके बीच अभी जो बातचीत हुई उसे दरवाजा पर खड़ा विजय ने सुन लिया था.
“सौंदर्या!! यह तुम क्या कर रही हो. फिर से अपनी बेटी की जिंदगी तबाह करने पर तुली हुई हो.” पहले तो विजय को यूँ अचानक देखकर सौंदर्या थोड़ा घबरा गयी, फिर संभालते हुए कहा.
“यह तुम क्या कह रहे हो विजय? में इसकी जिंदगी संवारने की कोशिश कर रही हूँ और तुम कह रहे हो की में तबाह कर रही हूँ?” लेकिन विजय, सौंदर्या की किसी बात का जवाब ना देते हुए श्रुति के करीब जाकर उसका खंडा पकड़ उसे उठाने लगा. फिर उसने देखा की श्रुति का रो रो के बुरा हाल था.
“देखो सौंदर्या इसकी आँखों में देखो. क्या तुम्हें इस पर रहम नहीं आता. तुम्हें क्या लगता है तुम रोहन को इससे दूर करोगी तो क्या यह खुश रही पाएगी. नहीं!! जीते जी यह मर जाएगी क्योंकि यह उससे सच्चा प्यार करने लगी है. और में अपने बेटी के जज़्बात का पूरा सम्मान करता हूँ. मेरी बेटी ने जिंदगी में पहला कोई काम अच्छा किया है. मुझे फख्र है अपनी बेटी पर और मुझे उम्मीद है रोहन पर की वो मेरी श्रुति को जिंदगी भर खुश रखेगा क्योंकि अगर श्रुति हमारे सामने है तो सिर्फ़ रोहन की मेहरबानियो की वजह से.”
“यह तुम क्या कह रहे हो? उसने कोई एहसान नहीं किया है इस पर क्योंकि वो इसी की वजह से उस जंगल में फाँसी थी. यह तो उसका फर्ज था जो उसने इसकी जिंदगी बचाई है.” सौंदर्या ने कहा.
“ सौंदर्या तुम्हें पूरी बात मालूम नहीं है इसलिए तुम ऐसा कह रही हो लेकिन जब तुम बाहर गयी हुई थी तब श्रुति ने मुझे सारी बात बताई. रोहन ने उसे उस उन दरिंदो से ही नहीं बल्कि उसके दरिंदे दोस्तों से भी बचाया है.” विजय ने बताया.
“इसके दोस्तों से!! में कुछ समझी नहीं तुम क्या कह रहे हो विजय.” फिर विजय ने उसे पूरा घटनाक्रम बताया की कैसे उसके दोस्त उसे बहका कर फ़ायरवेल्ल पार्टी के लिए उसके साथ क्या करना चाहते थे फिर कैसे रोहन ने उन लोगों का किडनॅप करके श्रुति को उन लोगों से बच्चा लिया था. पूरी बात सुन कर सौंदर्या का दिमाग एक दम से चकरा गया. वो सोच भी नहीं सकती थी श्रुति के दोस्त इतनी नीच भारी हरकत भी कर सकते थे.
“विजय हमें उनके खिलाफ एक्शन लेना चाहिए. वह ऐसा कैसे कर सकते है हमारी बेटी के खिलाफ.”
“नहीं मामा इसकी कोई जरूरत नहीं है. और वैसे भी किसके खिलाफ एक्शन लेंगे क्योंकि सिर्फ़ छाया के अलावा अब कोई ज़िंदा नहीं बच्चा है. उन सभी को अपने किए की सजा मिल चुकी है.” फिर उसके बाद सौंदर्या ने भी इस बात पर कोई बहस नहीं की.
“चलो बेटी में तुम्हें तुम्हारे रोहन से मिलवा दम, अगर देर हो गयी तो उसके ट्रेन चली जाएगी.” विजय ने श्रुति से कहा.

“लेकिन विजय यह तो सोचो श्रुति उसके साथ कैसे जिंदगी गुज़ारेगी? वो क्या खिलाएगा हमारी फूल जैसी बच्ची को?” सौंदर्या चिंचित होते हुए बोली.
“देखो सौंदर्या अब हमारी श्रुति बड़ी हो गयी है अगर उसे लगता है की वो रोहन के साथ अपनी पूरी जिंदगी बसर कर सकती है चाहे गरीबी में रहे या कैसे भी रहे तो इस बात का फैसला हमें इस पर छोड देना चाहिए.” फिर विजय, श्रुति की तरफ देखकर कहा. “ श्रुति जल्दी चलो, कही देर ना हो जाए!”
अब की बार सौंदर्या ने भी कुछ नहीं कहा और विजय ने श्रुति का हाथ पकड़ अपनी गाड़ी में बिठाया और चल पड़ा रेलवे स्टेशन की और.

रोहन और परवेज़ ट्रेन में बैठ चुके थे. उनकी ट्रेन को छूटने में 10 मिनिट्स बाकी थे. रोहन एक दम उदास सा अपना सर सीट पर टिकाए हुए आँखें बंद कर पता नहीं क्या सोच रहा था और परवेज़ भी अपने दोस्त को गमगीन होते हुए देखकर खुद भी गमगीन होकर खिड़की के बाहर देखे जा रहा था. उसे बड़ा गुस्सा आ रहा था श्रुति की मां पर उसने कैसे दो प्यार करने वालो को जुड़ा कर दिया था और चाह कर भी वो कुछ नहीं कर पा रहा था. अभी वो यही सब सोच ही रहा था की वो एक दम से चौंक गया क्योंकि उसने अपनी खिड़की से कुछ ऐसा देखा की उसे बड़ी हैरत हुई. उसने जल्दी से रोहन को हिलाते हुए खिड़की से बाहर दिखाने लगा.
“क्या हुआ परवेज़? क्या दिखा रहा है तू मुझे?” रोहन यहां वहां देखकर बोला.
“आबे अंधे वो देख कौन है.” परवेज़ अपनी उंगली से एक तरफ इशारा करता हुआ कहने….

(UPDATE-99)

लगा. फिर रोहन भी उसी दिशा में देखने लगा की तभी वो भी एक दम से शॉक्ड हो गया क्योंकि उसने श्रुति को अपने बाप विजय के साथ देख लिया था. लेकिन फिर वो कुछ सोचने लगा. उसको सोच में देखकर परवेज़ ने कहा.
“आबे क्या सोच रहा है. देख वो कितनी बेक़रार है वो भी तेरे साथ जाने के लिए आई है. चल जल्दी से उसे बुलाले इससे पहले की ट्रेन चुत जाए.” कहने के साथ ही परवेज़ अपनी जगह से उठ गया और चलने लगा की तभी रोहन उसका पकड़ कर कहने लगा.
“नहीं परवेज़ रहने दे. यह ठीक नहीं होगा. अगर वो मेरे साथ आएगी तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी. कैसे वो मेरे साथ जिंदगी गुजार पाएगी.” रोहन ने कहा.
“इसका फैसला करने वाला तू कौन होता है. जब उसे कोई फर्क नहीं पढ़ता तो तू क्यों इतना सोच रहा है?” परवेज़ ने कहा.
“अरे यार तू बात को समझना…….वो अभी नादान है नहीं समझती है इन बातों को….” रोहन, परवेज़ को आँख दिखाते हुए कहा.
“मेरे हिसाब से तू नहीं समझता उसके जज़्बातों को. तू यही बैठा रही में जा रहा हूँ उसे लेने के लिए.” कहने के बाद परवेज़ अपना हाथ च्छूदते हुए ट्रेन के बाहर निकल गया. और फिर श्रुति की तरफ हाथ दिखाने लगा.
“श्रुति बाभ…..ओह सॉरी…श्रुति जी……इधर इधर…..” फिर श्रुति ने भी देख लिया था परवेज़ को और वो उसके पास जाने लगी.
“मुझे पता था की तुम जरूर आओगी.

” परवेज़, श्रुति को देखता हुआ बोला
“रोहन कहा है परवेज़ भाई??” श्रुति एक दम रोहँसी और घबराई हुई सी थी.
“वो अंदर ही बैठा है. वो नहीं चाहता है की तुम उसके साथ चलो क्योंकि वो समझता है की तुम उसके साथ गरीबी की जिंदगी नहीं गुजार पाएगी.”
“मुझे उसके पास ले चलो” श्रुति ने कहा.
“तुम चलो में तुम्हारे लिए टिकट का बँदबस्त करके अभी आता हूँ.” कहते हुए विजय टिकट रिज़र्वेशन काउंटर की और जाने लगा.
फिर परवेज़, श्रुति को उधर ले जाता है जहाँ रोहन बैठा हुआ था. श्रुति, रोहन को देखते ही उसके गले लग जाती है.
“मुझे अपने साथ लिए बगैर जा रहे थे. क्यों रोहन??”
“श्रुति समझा करो. में तुम्हारी भलाई के लिए यह सब कर रहा था.”
“मेरी भलाई सिर्फ़ तुम्हारे साथ जिंदगी गुज़ारने में है रोहन. में तुम्हारे बगैर जिंदगी गुज़ारने के बारे में सोच भी नहीं सकती.”
“देखो श्रुति नादान मत बनो. तुम्हें इस तरह की जिंदगी जीने की आदत नहीं है. तुम अगर मेरे साथ रहोगी तो हर वक्त तक़लीफो का सामना करने पड़ेगा तुम्हें.”
“रोहन!! जिस जंगल से हम मौत के मुंह से बच कर निकले है ना अगर तुम मुझे वापस उसी जगह जाकर रहने के लिए कहोगे तो में वहां भी रहने के लिए तैयार हूँ. तो फिर तुम्हारे घर रहने में मुझे क्या प्राब्लम होगी.बस शर्त यह है की तुम मेरे साथ रहो. और वैसे भी मैंने तुमसे प्यार किया है और जो प्यार करते है वह यह नहीं देखते की उन्हें कहा रहना है और कहा नहीं. वह जिस हाल में रहते है उसी हाल में खुश रहते है.” अब रोहन के पास कहने के लिए कुछ भी नहीं बच्चा था क्योंकि श्रुति ने अपनी बातों से उसे कायल कर लिया था.
“ठीक है श्रुति अगर तुम्हें कोई प्राब्लम नहीं है तो मुझे भी कोई प्राब्लम नहीं है.”
“सच!! ओह रोहन ई लव यू!!! कहने के साथ ही श्रुति, रोहन के गालों को किस करने लगी.
“अरे श्रुति यह क्या कर रही हो?”
“ओह सॉरी!!” फिर श्रुति नज़रे झुका कर यहां वहां देखने लगी की सबकी नज़रे उन्हीं दोनों पर थी. इतने लोगों की नज़रे अपने ऊपर देख कर वो थोड़ा शर्मा गयी. रोहन ने भी यह देख लिया था और उसकी झेंप मिटाने के लिए वो श्रुति का हाथ पकड़ कर अपने पास बिता लिया और कहना लगा.
“वो तो सब ठीक है श्रुति. लेकिन तुम्हें और प्रॉब्लम्स भी से गुजरना पड़ेगा.”
“और भी प्रॉब्लम्स से मतलब? में कुछ समझी नहीं.” श्रुति हैरत से रोहन की तरफ देखने लगी.
“तुम्हें मेरे घर पर एक भारतीय नारी की तरह रहना पड़ेगा. मेरा मतलब है तुम्हें अपनी सास यानि के मेरी मां का खूब ख्याल रखना पड़ेगा और सुबह सवेरे उठ कर घर के सारे काम काज़ करने पड़ेंगे. तुम तैयार हो इसके लिए?”
“अगर तुम जिंदगी भर मेरे साथ रहने का वादा करो तो यह सब भी मेरे लिए कोई मुश्किल नहीं है.” मुस्कुराते हुए श्रुति, रोहन के खड़े पर अपना सर रख दी.

फिर उसके बाद रोहन को कुछ याद आता है और फिर वो श्रुति से कुछ पूछने लगता है.
“अच्छा श्रुति एक बताओ? हमारे ऊपर से यह अचानक किडनॅपिंग का इल्जाम कैसे हाथ गया. क्या तुम्हें इस बारे कुछ में पता है?”
“जब मुझे पता चला की छाया ज़िंदा है तो जाहिर सी बात है वो तुम दोनों के खिलाफ कंप्लेंट की होगी हमारी किडनॅपिंग को लेकर. में यही सोच रही थी की कैसे तुम दोनों को इस इल्जाम से बचाओ की तभी मुझे अचानक वो बात याद आई जो तुमने मुझे बताई थी की मेरे सारे दोस्त मेरे खिलाफ क्या प्लान कर रहे थे. तब फिर मैंने सोचा की अगर में छाया को इसी बात पर धमकी दम की अगर वो….

UPDATE-100) FINAL UPDATE

तुम दोनों के ऊपर से लगाया हुआ इल्जाम वापस नहीं लेती है तो में उसकी शिकायत कर दूँगी. बस फिर क्या था मैंने यह बात डायरेक्ट छाया से कहा. मेरी बात सुनकर तो पहले उसे यकीन ही नहीं हुआ लेकिन जब मैंने उसे काफी धमकाया तो वो डर गयी और अपना बयान वापस लेने के लिए राजी हो गयी. फिर हमने फोरेस्ट डिपार्टमेंट वालो के सामने यह बयान दिया की जिन्होंने हमारा किडनॅप किया था वह तुम दोनों नहीं बल्कि कोई और थे. लेकिन फिर भी उन्होंने तुम दोनों को पोचिंग के इल्जाम में गिरफटकार किया. लेकिन सिर्फ़ यही चार्जस होने की वजह से और मेरी मामा की बारे लोगों में कॉंटॅक्ट्स होने की वजह से तुम दोनों की ज़मानत आराम से हो पाई.”
वह और भी इसी तरह की बातें करते रहे फिर उसके बाद विजय ने श्रुति की टिकट उसे पकड़ा दी और अपनी बेटी और दामाद को आशीर्वाद देकर रुखसत कर दिया.

फिर उसके 1 हफ्ते बाद,
रोहन सुबह सुबह अपने घर के बरामदे में बैठा हुआ अख़बार पढ़ रहा था. जिसमें लिखा था पीच्छले कुछ दीनों से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में जिन दरिंदो ने आतंक मचाया हुआ था अब मिलिटरी की मदद से उनको दरिंदो से वापस उनकी पुरानी अवस्था में ला दिया गया है. अब वहां की प्रशासन ने सभी को आश्वासन दे दिया है की अब हालात पहले से बेहतर हो गये है और अब किसी को भी इस जंगल में आने में किसी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होगी. यह खबर पढ़ कर रोहन का ध्यान उस और जाने लगा जो उसके , श्रुति, परवेज़ और ना जाने कितने लोगों को उन दरिंदो से परेशानी उठानी पढ़ी थी और ना जाने कितने ही लोगों ने अपनी जाने भी गँवाए थे और वो भी सिर्फ़ एक साइंटिस्ट की नलायकी की वजह से. वो यही सब सोचे जा रहा था की तभी पीछे से उसे आवाज़ आई.
“चाय!!” रोहन ने देखा की श्रुति सलवार कमीज़ पहने हुए, माथे पर सिंदूर और गले में उसके नाम का मंगलसूत्र पहने हुए और हाथ में चाय का कप लिए हुए एक सच्ची भारतीय नारी लग रही थी. उसे बड़ी हैरत हो रही थी श्रुति जैसी लड़की कैसे अपने आपको उसके माहौल में ढाल ली थी. यह अपने आप में ही बहुत बड़ी बात थी.

वो अपने आपको दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान समझने लगा की उसे श्रुति जैसे खूबसूरत, समझदार और उस पर मर मिटने वाली लड़की मिली थी. वो यूँही उसे एक टुक देखे जा रहा था की तभी श्रुति उसे टोकते हुए कहा.
“कहा खो गये? यह लो अपनी चाय पकड़ो मुझे और भी ढेर सारा काम है.” कहते हुए श्रुति उसे चाय का कप पकड़ा दी और वापस जाने के लिए मुड़ी ही थी के रोहन उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ कर लिया.
“अरे दो मिनट रुको तो. ज़रा कुछ देर मेरे से बात तो करो.” रोहन ने उससे कहा.
“क्या बात कर रहे हो रोहन अभी मुझे मां को दवा देनी है और खाना भी बनाना है और भी ना जाने कितने काम है. अगर में तुम्हारे से बातें ही करूँगी तो यह सब काम कब करूँगी?”
“तो फिर में तुमसे बातें कब करूं?”
“ओफफ़ो रोहन!! तुम्हीं ने तो कहा था मुझे मां का खायल रखना पड़ेगा, खाना बनाना पड़ेगा , घर के और भी काम करने पड़ेंगे. अगर में तुमसे दिन भर बातें ही किया करूँगी तो फिर यह सब काम कौन करेगा.?” फिर रोहन को अपनी तरफ हैरत से देखते हुए श्रुति ने कहा.
“डोंट वरी जब हम रात को अपने कमरे में जाएँगे तो जितनी बातें तुम्हें मुझसे करनी है कर लेना. ओके???” कहने के साथ ही श्रुति रोहन का हाथ च्चूधकर जाने लगी. फिर अचानक कुछ सोच कर रुकी और रोहन की तरफ देखते हुए कहा.
“बायें थे वे…..मुझे तुम्हें एक खुशख़बरी देनी है.”
“क्या?” रोहन ने कहा.
“मुझे आज उल्टिया हो रही थी.”
“उल्टिया हो रही थी!! कैसे? यह खुशख़बरी है? क्यों क्या हुआ तुम्हें? तुम्हारी तबीयत तो ठीक है. चलो में तुम्हें डॉक्टर को दिखा दम.” रोहन एक दम घबराते हुए कहा.
“अरे भूद्धू किसी औरत को उल्टियाँ होती है तो इसका मतलब तुम्हें पता नहीं है क्या?” श्रुति अपना माता ठोनकटे हुए कहा.
“क्यों? क्या मतलब होता है?” रोहन ना समझने वाले अंदाज़ में कहा.
“कुछ मतलब नहीं होता है. भूधहू!!” हंसते हुए श्रुति अंदर की तरफ चली गयी. और रोहन हैरत से उसे जाता हुआ देख रहा था.

बस ऐसे ही हसीं खुशी सब अपनी जिंदगी मे मस्त हो गए और अपने पुराने झकमो को भूल गए जो उन्हें मिले थे।

THE END

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