बहन का नग्नतावाद से परिचय-4
प्रेषक : आसज़
मैंने पूल से जाने का फैसला किया क्योंकि उसके चेहरे पर चमकती उसकी बुरी नज़र मुझे अच्छी नहीं लगी।
करेन जल्द ही सनबाथिंग में मेरे साथ में शामिल हो गई और थोडी देर में हमने खाने के लिए कमरे में वापस जाने का फैसला किया।
जब हमने पूल छोडा कम से कम आधा दर्जन लोगों ने ” बाय करेन !” करके उसे विदा किया।
ऐसा लगता था कि जब मैं शायद सो गया था तो उसने काफ़ी सारे दोस्त बना लिये थे।
अब आगे :
सोमवार की रात
केबिन में वापस आकर मैंने चोप्स और सलाद का एक हल्का भोजन तैयार किया और ब्लैंक की एक बोतल खोली, करेन पास के स्नान ब्लॉक में एक गर्म स्नान के लिए चली गई। मैं मेज पर भोजन लगा ही रहा था कि करेन कुछ सोचते हुए वापस आई, मैंने उसे बाल सुखाते और हिंदेशियन वस्त्र में फिर से लिपटे देखा। जब उसने अपने पोर्च की रेल पर स्नान सूट लटका दिया तब मुझे एहसास हुआ कि वह हिंदेशियन वस्त्र के अंदर नग्न थी। जब वह बैठ गई तो मैं देख सकता था कि उसके स्तन किसी अन्तः वस्त्र के बिना लटक से गए हैं।
“बेहतर लग रहा है?” मैंने पूछा।
“हाँ !” उसने शराब के लिए हाथ बढ़ाते हुए कहा,”गर्म-स्नान जैसा अच्छा और कुछ भी नहीं ! एक गीली, ठण्डी, चिपचिपी बिकिनी को उतारने में जो आनन्द है वो तुम नहीं अनुभव कर सकते..”
“मुझे याद मत दिलाओ !” मैंने कहा,”मुझे लगता है कि यही मुख्य कारण है कि मैं एक नग्नतावादी बन गया !”
“ओह सच में?” वह बनावटी मुस्कुराई,”नहीं, मुझे तो लगता है कि लड़कियों को अपना लिंग दिखाने के लिए तुम ऐसा करते हो?”
“चुप रहो और खाना खाओ !” मैं हंसा।
हमने भोजन शुरू किया और एक दूसरे को छेड़ते रहे।
करेन ने शुरु किया,” हम लिंग के बारे में बात कर रहे थे !”
“नहीं हम नहीं कर रहे थे।”
“मैं कहने जा रही थी कि मैंने जितने लिंग आज देखे, अपने पूरे जीवन में इतने नहीं देखे।”
मैंने कहा,” उन्हें देखने में सब एक जैसे लगते हैं।”
“ना,” उसने मेरे सामने अपने गिलास को लहराया और कहा,”यह सही नहीं है, प्रत्येक अपने आप में अलग है, व्यक्तिगत है मुझे लगता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का नग्न होना ज्यादा आसान है..”
“कैसे?”
“पुरुष कुछ भी छुपा नहीं सकते, दूसरी तरफ महिलाएँ, तब भी जब हम नंगी हैं, हम छुपा सकती हैं !” उसने एक लम्बा घूंट लिया,”जैसे कि उस एशियाई महिला के मामले में आपका व्यव्हार गलत था।”
“मैंने कुछ गलत नहीं किया।” मैंने विरोध किया।
उसने तर्क दिया,”वहाँ वो अपने पैर फैला कर लेटी थी तो आपने उसे देखा लेकिन अपनी नजरें किताब के पीछे छिपा कर धोखे से ! उसके पति ने भी अपने पैर खुले रखे थे, मैंने उसे देखा ! फिर यह देख कर भी नहीं देखने का दिखावा क्यों..”
“ठीक है ! ठीक है ! लेकिन देखना कामुकता नहीं है।