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मैं अपने मामा के बेटे को दिल दे चुकी हूँ

Story Hindi 2 pages 13 years ago

मैं अपने मामा के बेटे को दिल दे चुकी हूँ
नमस्कार दोस्तो, मैं विशाखा शर्मा.
मैं आप सभी पाठकों से एक राय लेना चाहती हूँ.
हमारा समाज सभी पर कड़ा नियंत्रण रखता है. हम लड़कियों पर तो कुछ ज़्यादा ही ऐसा होता है.
मैं बिहार के एक पिछड़े ज़िले के एक छोटे से गांव की निवासी हूँ.
मेरे माता पिता ग़रीब हैं, पर अपनी हैसियत के अनुसार उन्होंने मुझे और मेरी बहन को पढ़ाया लिखाया है.
मेरा एक नाकारा और शराबी भाई भी है, जिसे घर से कोई मतलब नहीं है.
मैं अभावों में पली बढ़ी हूँ. मगर मेरा जिस्म एक बला की खूबसूरत लड़की के जैसा है.
मेरा जिस्म अब तक काफी भर चुका है.
इसका कारण ये है कि काफी पहले से ही मैंने एक लड़के को अपना दिल दे दिया था. उसने मेरे साथ सेक्स भी किया है … और अभी भी मैं उसके साथ हमबिस्तर होती हूँ.
उसने मेरे जिस्म को अपने प्यार की बूंदों से भपूर सींचा है, मेरे स्तनों को मसला और चूसा है. इससे मेरे स्तन एकदम भरे हुए हैं और मर्द के वीर्य ने मेरी जवानी को सींच कर महका दिया है.
मेरी खिलती जवानी को चूसने के लिए मेरे इर्द-गिर्द भूखी निगाहें मुझे आगाह करती हैं कि मुझे खुद को सलामत रखने के लिए एक ऐसे मर्द की जरूरत है, जो मेरी रक्षा करे.

मेरी जवानी, मोहल्ले के और ऑफिस आते जाते, जवान और बुड्डे लोगों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन गई है.
इस समय मैं खुद को बड़ा असहाय समझ रही हूँ
जब भी मैं उन सभी की वासना से भरी हुई निगाहों को पढ़ती हूँ, तो अन्दर से गर्मा जाती हूँ और अपने प्यार को याद करने लगती हूँ.
दोस्तो, मेरी किस्मत भी ऐसी कि जिससे मुझे प्यार हुआ, वो मेरे मामा का लड़का है. वो शहर में रहकर पढ़ा लिखा और सुंदर लड़का है.
हम दोनों बचपन से ही साथ साथ पले बढ़े … और इस बीच हमारे संबंधों की दूरियां कब मिट गईं, इसका पता ही ना चला.
अठारह साल की उम्र में हम दोनों के शारीरिक संबंध बने और एक बार बने, तो हम दोनों ने बार बार सेक्स का मजा लेना शुरू कर दिया.
वो मुझे बिस्तर पर पूरी तरह से रौंद कर रख देता है.
मुझे लगने लगता है कि मेरा प्यार ही मेरे जीवनसाथी बनने के लिए परफेक्ट है.
हम दोनों सेक्स के लिए जब गर्म हो जाते हैं, तो फोन से एक दूसरे को बुला लेते हैं.
कभी वो मेरे घर आ जाता है, कभी मैं उसके घर चली जाती हूँ.
मिलने पर हम दोनों आपस में सेक्स कर लेते हैं और अपना प्यार साझा कर लेते हैं.
हम दोनों ही ये जानते हैं कि समाज और क़ानून हमारा रिश्ता कभी स्वीकार नहीं करेंगे.
हम इसे कोई नाम देना भी नहीं चाहते.
मैं सोचती हूँ कि मुझे उसके साथ दूर किसी शहर में भाग जाना चाहिए.
हम दोनों को बस एक दूसरे के अलावा और कोई पसंद नहीं आता.
लेकिन अब मेरे घर वाले मुझ पर विवाह का दबाव बना रहे हैं.

आर्थिक रूप से मैं ही अपना घर चला रही हूँ और अगर मेरी जिस्मानी ज़रूरतें भी पूरी हो रही हैं, तो मैं शादी क्यों करूँ.
ये ही मेरी बड़ी दुविधा है.
मगर मैं इस बात को भी जानती हूँ कि एक बार मेरे मामा के लड़के की शादी हो जाने के बाद वो मुझे चोदेगा तो, मगर मेरा मन शायद अपना प्यार बंट जाने को स्वीकार नहीं करेगा और मैं एक रखैल की हैसियत से ज्यादा कुछ नहीं पा सकूंगी.
मैं अपने भाई के साथ सेक्स करके क्या सही कर रही हूँ?
क्या मुझे शादी कर लेना चाहिए?
शादी के बाद क्या मेरे घर का खर्चा चल सकेगा?
क्या शादी के बाद मेरा पति मेरी शारीरिक जरूरतें मेरे भाई के समान पूरी कर सकेगा?
मुझे सलाह दीजिए और मेरा मार्गदर्शन कीजिए. आप अपने मेल मेरी निम् आईडी पर भेज सकते हैं.[email protected]
धन्यवाद.

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